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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना



अपडेट 195अ

सूरज को सोच में डूबा हुआ देख वीर उसे आवाज़ देते हैं

सूरज- ठाकुर साहब मुझे आपसे कुछ बात करनी है

वीर- कहो क्या बात है

सूरज- मुझे पता है कि मैं इस लायक नही हूँ फिर भी मैं

मैं मीता से प्यार करता हूँ और उससे शादी करना चाहता हूँ

[ सूरज के इतना बोलते ही सूरज के हाथ को छुके एक गोली लगती है

सूरज तिलमिला के गिर जाता है

गोली चलाने वाला कोई और नही धर्मेश था

धर्मेश- पिताजी इस नीच की हिम्मत कैसे हुई यहाँ आके आप ऐसी बात करने की

[गोली की आवाज़ सुनके सब लोग बाहर आजाते हैं मीता भी

जब वो सूरज की हालत देखती है

तो उसकी साँस ही अटक जाती है

लेकिन वो वहीं पे खड़ी रहती है

वीर- धर्मेश अपनी बंदूक नीचे करो

[सूरज उठके खड़ा हो जाता है सामने रखे कपड़े को अपने हाथ पे बाँध लेता है]

वीर- हमे माफ़ कर देना सूरज

लेकिन मीता की शादी तय हो चुकी है

तुम एक अच्छे लड़के हो अगर तुम हमसे पहले आके पूछते तो हमे कोई ऐतराज़ नही होता

लेकिन अब हम कुछ नही कर सकते

अब तुम जा सकते हो

सूरज- मीता मुझसे प्रेम करती है

वीर- आशा अपनी बेटी से पूछो क्या यह सच है

आशा- यह सब झूठ है मीता ऐसा कुछ नही सोचती है

वीर- अपनी बेटी से पूछो

[आशा मीता के पास जाती है

आशा- मीता क्या यह सच है

मीता- नही माँ यह झूठ बोल रहा है

मैं तो इससे कभी बात भी नही की

धर्मेश- सुन लिया अब निकलो यहाँ से

सूरज- जा रहा हूँ लेकिन एक बात याद रखना

मुझे पता है कि मीता किसी डर की वजह से झूठ बोल रही है

अगर मेरी मीता को कुछ हुआ तो सबसे पहले जो लाश गिरेगी इस हवेली में वो तुम्हारी धर्मेश वीर प्रताप सिंग की होगी

यह एक फ़ौजी का वादा है

[फिर सूरज हवेली से बाहर चला जाता है

मीता भी उल्टे पाँव अपने कमरे में चली जाती है

बेचारी रोने के सिवा कर भी क्या सकती थी

वो एक ऐसे रास्ते पे खड़ी थी

जहाँ उसे अपनी माँ का सम्मान चुनना था या अपना प्यार

किरण मीता के रूम में आती है

किरण- मैं जानती हूँ कि सूरज सच कह रहा था

मीता- हमारी किस्मत यही है

किरण- क्यूँ

वो तुझसे इतना प्यार करता है कि तेरे दिल की बात जान गया

और इस घर से चुप चाप चला गया

मीता- भैया तो बहुत नर्म दिल थे फिर वो इतने कठोर कैसे हो गये

किरण- क्यूंकी वो नफ़रत करते हैं प्यार से और प्यार करने वालो से

उन्हे एक लड़की से प्यार हो गया था

लेकिन वो लड़की किसी और से प्यार करती थी

थोड़े दिन बाद भैया को खबर मिली कि वो लड़की अब इस दुनिया में नही है

भैया उस लड़की के घर गये

लड़की की माँ ने बताया कि जिस लड़के से वो प्यार करती थी उसी लड़के ने मेरी बेटी को बे आबरू करके मार डाला

भैया ने उस लड़के को ढूँढा उसे जान से मारके इंडिया वापस आ गए

यह सब बात भैया की डाइयरी में लिखी थी

भैया ने अपनी डाइयरी में यह भी लिखा है

उनकी नज़र में अगर कोई लड़का किसी लड़की से प्यार करेगा

तो वो उस लड़की को माफ़ कर देंगे

लेकिन उस लड़के को वो जान से मार देंगे

[मीता कुछ नही बोलती

जतिन की शादी हो जाती है

मीता की शादी को अब दो दिन बचे थे

जतिन अपनी बहेन मीता की तकलीफ़ से बेख़बर था

धर्मेश जब भी मीता को देखता तो उसे बहुत तकलीफ़ होती

सबसे छोटी बहेन थी मीता

अंजाना डर था धर्मेश को

उसके प्यार के साथ जो हुआ था

उसके बाद वो कैसे मीता को सूरज के साथ जाने देता...

 
अपडेट 196

मीता कल अपने साजन से दूर होने वाली थी

कल उसका उसके भाई के दोस्त के साथ विवाह था

किरण से अपनी बहेन का दुख बर्दाश्त नही हो रहा था

ऐसा क्या था किरण और मीता के बीच जो किरण को तकलीफ़ बर्दाश्त नही हो रही थी

मीता एक लेटर सूरज को लिखती है

और उसे किरण को देती है

मीता- तुझे मेरी कसम तू यह चिट्ठि कल मेरी शादी होने के बाद सूरज को देगी

और तू इस पढ़ेगी नही

किरण- ठीक है

मैं इसे नही पढ़ूंगी

[अगले दिन किरण वो लेटर अपने हाथो में लिए सोच ही रही थी कि क्या लिखा होगा मीता ने इसमें

शादी का महुरत शाम का था

किरण लेटर अपने हाथो में लिए सीढ़ियो से उतर रही थी

तभी वो किसी से टकरा जाती है

यह किरण की माँ संगीता थी

किरण के हाथो से लेटर छूट जाता है

संगीता जो अपने हाथ में थाल लिए हुई थी उसमें

संगीता दो चार बाते'न किरण को सुनाके अपने कमरे में चली जाती है

जैसे ही वो थाल नीचे रखती है

शाम हो जाती है पर वो लेटर उसी थाल में पड़ा रहता है

इधर सूरज छिप्ते छिपाते मीता के कमरे में पहुँचता है

मीता सूरज को देखती है और इससे पहले कि वो कुछ कहती

सूरज मीता को बेहोश कर देता है और उसे उठाके ले जाता है

दूसरी तरफ संगीता की नज़र लेटर पे पड़ती है

संगीता उस लेटर को खोलती है

सूरज मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ

जब मैने माँ से कही कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ

मेरी माँ पिताजी के भाई की विधवा थी

पिताजी ने उनसे शादी की और उन्हे छोटी माँ से ज़्यादा सम्मान और प्यार दिया

इसी लिए मैं यह शादी कर रही हूँ

 
तुम मुझे ग़लत मत समझना और हमेशा खुश रहना

तुम सोचोगे कि मैं तुमसे प्यार करती थी

तो किसी और को अपने शरीर को छूने कैसे दी

मेरी डोली और मेरी अरथी एक साथ उठेगी

मेरी शादी के बाद तुम्हे मेरा लेटर मिलेगा

तब तक मैं मर चुकी हूँगी मुझे माफ़ करदेना

संगीता के हाथ से लेटर छूट जाता है

संगीता का चेहरा आँसू से भीग चुका था

संगीता लेटर उठा ती है और दौड़ती हुई धर्मेश के रूम में पहुँचती है

धर्मेश अपनी माँ को हान्फ्ते हुए देख उनके पास जाता है

धर्मेश- क्या हुआ माँ आप इतनी घबराई हुई क्यूँ है

संगीता- अपनी बहेन मीता को बचा लो धर्मेश

धर्मेश- क्या हुआ मीता को

संगीता- आज उसकी शादी होते ही वो अपनी जान दे देगी

धर्मेश- लड़कियो का दिमाग़ खराब हो जाता है जब उन्हे किसी से प्यार होता है

मरने दीजिए मीता को

संगीता- बहेन है वो तुम्हारी

धर्मेश- सौतेली है

संगीता- यह कैसी बात कर रहे हो तुम

धर्मेश- आपको पता है सूरज कौन है

सूरज जिस से आपकी मीता प्यार करती है

वो सूरज यहाँ अपने बाप की मौत का बदला लेने आया है

वो पिताजी के बड़े भाई धुरेन्द्र सिंग का बेटा है

संगीता- यह कैसी बाते कर रहे हो

सूरज मुनीम जी का भतीजा है

धर्मेश- एक लड़की पिताजी से प्यार करती थी

उस लड़की का भाई रंजीत

पिताजी से अपनी बहेन के रिश्ते के लिए बात करने आता है

लेकिन उसे चाचा जी मिल जाते हैं

वो चाचा जी को पूरी बात बताता है

क्यूंकी पिताजी और चाचा जी की शादी उनके माता पिता ही तय करके गये थे

तो चाचा जी उसे मना कर देते हैं

वो चाचा जी के हाथ पावं पड़ता है

चाचा जी फिर भी नही मानते...

 
अपडेट 196आ

क्यूंकी पिताजी और चाचा जी की शादी उनके माता पिता ही तय करके गये थे

तो चाचा जी उसे मना कर देते हैं

वो चाचा के हाथ पावं पड़ता है

चाचा फिर भी नही मानते

वो आदमी जब अपने घर पहुँचके अपनी बहेन को यह बात बताता है

और कुछ देर के लिए बाहर चला जाता है

जब वो अपने घर वापस आता है तो उसे उसकी बहेन की लाश मिलती है

इधर पिताजी और चाचा जी की शादी हो जाती है

वो आदमी बदले की आग में जलने लगता है

वो पिताजी और चाचा को बर्बाद करने की कसम ख़ाता है

वो चाचा के पीछे पड़ जाता है

और जब उसे पता चलता है चाचा की दो बीविया है

तो वो चाचा की गाड़ी का ब्रेक फैल कर देता है

चाचा का देहांत हो जाता है

फिर वो चाचा की पहली बीवी को खबर देता है कि उनके पति नही रहे

तो वो अपनी जान दे देती है

फिर वो सूरज को अपने साथ ले जाता है

उसके मन में ज़हर भरता है

जब सूरज जवान होता है

मुनीम के खून होने के बाद

क्यूंकी मुनींजी ही थे घर के भेदी

रंजीत मुनीम को पैसे देके खरीद लेता है

फिर मुनीम ज़्यादा पैसे माँगता है

इसी लिए रंजीत उसे भी मार देता है

लेकिन मुनीम मरने से पहले एक कागज पे सब कुछ लिख देता है

मुनीम के मरने बाद मुनीम के बड़े भाई को वो खत मिलता है

मुनीम के बड़े भाई वो खत लेके हमारे घर ही आरहे थे कि एक आदमी मुनीम के बड़े भाई को एक खत देता है

खत में लिखा है तुम्हारी बेटी हमारे पास है

तुम्हे तुम्हारी बेटी तभी मिलेगी जब

वो सूरज को अपना बेटा बनाके पिताजी से मिलवाएँगे

सूरज आता है पिताजी खुश होके उसे पढ़ने के लिए बाहर भेज देते हैं

लेकिन मुनीम की भतीजी घर वापस नही आती

अभी थोड़े दिन पहले मुनीम के भाई को पता चलता है कि उनकी बेटी कब की मर चुकी है

वो मुझे आके सब सच बता देते हैं

मैं रंजीत को ही ढूँढ रहा हूँ

सूरज को तो मैं कब का ख़तम कर देता लेकिन क्या करूँ उसकी कोई ग़लती भी तो नही है

उपर से मैं उसे ढूँढ भी रहा हूँ ताकि वो सच्चाई जान सके

संगीता- लेकिन इसमें मीता की क्या ग़लती है

धर्मेश- आप क्या चाहती हैं कि मैं मीता की शादी सूरज से करा दूं

संगीता- नही मैं यह चाहती हूँ कि तुम मीता को सारी सच्चाई बता दो

[धर्मेश मीता के रूम की तरफ जाता है

और जब वो मीता के रूम में पहुँचता है तो मीता उसे नही मिलती है

वो पूरी हवेली छान मारता है

लेकिन मीता उसे कही नही मिलती है

फिर वो बड़ी हवेली जाता है

जहाँ पिताजी उसके दोस्त के साथ थे

धर्मेश पिताजी को सारी बात बता देता है

रणजी से लेके सूरज तक और मीता गायब है

पिताजी धम्म से ज़मीन पे गिर जाते हैं

फिर पता नही उन्हे क्या होता है

वो खड़े होते हैं

और हवेली पहुँचते हैं

साथ में धर्मेश भी

पिताजी सारे मेहमानो को समझा बुझा के हवेली से बाहर भेज देते हैं

पूरा घर एक साथ था

 
आशा को जब पता चलता है तो वो वीर के पैर पकड़ लेती है

वीर- तुम यह क्या कर रही हो तुम्हारी इसमें क्या ग़लती है

जो होना था वो हो गया

धर्मेश- पिताजी अब क्या करेंगे

वीर- कुछ नही बस अपनी बहेन को ढुंढ़ो इससे पहले कि कोई अनर्थ हो जाए

जतिन- पिताजी आप अभी शांत हैं

वीर- बेटा एक दिन मैने गुस्से में अपना आपा खोया था

उस दिन सूरज ने अपने माता पिता को खोया था...

सूरज मीता को लेके शहर चला गया

मीता 2 दिन तक बेहोश थी

या फिर बेहोश की गयी थी

जब मीता को होश आया तो वो इधर उधर देखने लगी

गेट के पास जाके गेट खोलने लगी

थक हार के वो वापस बेड पे बैठ गयी

थोड़ी देर बाद गेट खुलता है और सूरज अंदर आता है

सूरज को देखके मीता खड़ी हो जाती है

और उसे देखने लगती

जैसे पूछ रही हो तुमने ऐसा क्यूँ किया

सूरज मीता के पास पहुँचता है

मीता- तुमने यह क्या किया

सूरज- पहले कुछ खा लो

मीता- नही तुम मुझे बताओ कि तुमने यह सब क्यूँ किया

सूरज- मैं तुम्हे सच बताता हूँ

मैं तुम्हारे पिता के बड़े भाई धुरेन्द्र सिंग का बेटा हूँ

मीता- सूरज मुझे सच बताओ

मुझे मजबूर मत करो यह सोचने पे कि मैने तुमसे प्यार करके बहुत बड़ी ग़लती की हूँ

सूरज- [ सूरज मीता को सब बता देता है कि उसके पिता की मौत कैसे हुई

उसकी माँ ने जान दे दी

रंजीत उसे उठाके ले गया

उसके दिल में वीर के लिए नफ़रत भरा

फिर तुमसे तालाब पे मिलना

तुमसे प्यार हो जाना

और तुम्हे बेहोश करके अपने साथ ले आना

मीता- तुम मुझे सिर्फ़ एक बात बताओ कि तुम क्या सच मे मुझसे प्यार करते हो

सूरज- तुमसे प्यार करता हूँ इसी लिए रंजीत के पास ना ले जाके मैं तुम्हे दूसरी जगह लाया हूँ

मीता- एक बात बताओ रंजीत मेरे जिस्म को कब और कैसे नोचेगा

क्यूंकी तुम और रंजीत मेरे पिता से बदला तभी ले सकते हो जब मेरे जिस्म के हर एक हिस्से को नोचा जाए

[मीता की बात सुनके सूरज मीता को थप्पड़ मार देता है

सूरज- तुम सिर्फ़ मेरी हो

तुम्हे अगर कोई हाथ लगाएगा तो उसे जान से मार दूँगा

मीता- इसका मतलब तुम अकेले ही मुझे नोचोगे

सूरज-मीता

[सूरज इतनी ज़ोर से चीखता है कि मीता सहम जाती है]

देखो मैं जानता हूँ कि तुम मुझपे विश्वास नही करती

तुम्हे पता है मैं शहर क्यूँ गया था

क्यूंकी जिस मुनीम के बड़े भाई का बेटा बनके मैं रहा वो मेरे पैरो पे गिर गया

और मुझसे अपनी बेटी माँगने लगा

मुझे कुछ समझ ही नही आया

फिर उसने मुझे एक लेटर दिया

जब मैं उस लेटर को पढ़ा तो मैं सब समझ गया

मुझे रंजीत ने कहा था कि जिस घर में मैं जा रहा हूँ

 
उस घर के मुखिया को बहुत सारे रुपये मिले हैं

ताकि वो हमारा साथ दे सके

लेकिन रंजीत ने उस की बेटी को अगवा कर रखा था

इसी लिए मैं शहेर गया और रंजीत के घर की छान बीन किया मुझे एक लड़की की लाश मिली

मैने उस आदमी को यह सब बता दिया

और तुम्हे लेके यहाँ आगया

मीता- लेकिन तुम मुझे यहाँ लेके क्यूँ आए

सूरज- क्यूंकी तुम्हारी शादी जिस इंसान से हो रही है वो कोई और नही रंजीत चौहान का बेटा शिवराज चौहान है

मुझे आख़िर में पता चला कि मैं मोहरा बना

ताकि रंजीत के बेटे की शादी तुमसे हो जाए

उसके बाद वो लोग मुझे मार डालते

लेकिन रंजीत का बेटा भी मेरी तरह निकला

उसे भी तुमसे प्यार हो गया

और वो तुमसे शादी करने के बाद इटली भागना चाहता था

रंजीत अपने बेटे को भी मार डालेगा अगर उसे पता चल गया कि उसके बेटे ने भी उसे धोखा दिया है

मीता- अगर तुम सच कह रहे हो तो अभी चलो पिताजी के पास

सूरज- धर्मेश की माँ और तुम्हारे पिताजी अब इस दुनिया में नही हैं

[सूरज के इतना बोलते ही मीता उसे थप्पड़ मार देती है

मीता- तुम झूठे हो मुझे अपने घर जाना है मुझे तुम्हारे साथ नही रहना

मुझे पिताजी के पास ले चलो

[मीता फुट फुट के रोने लगती है],..

2 दिन पहले जब सूरज मीता को उठाके ले गया

और सब लोग हवेली में एक साथ बैठे थे

धर्मेश शिवराज के पास जाता है

धर्मेश- मुझे माफ़ कर दो राज

मेरी बहेन ने तुम्हारे साथ बहुत ग़लत किया

राज- कोई बात नही धर्मेश मुझसे ज़्यादा दुखी तो तुम लोग हो

धर्मेश- तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो

अचानक ...............................................

 
अचानक बाहर गोलिया चलने लगी

वीर को समझते देर नही लगी कि दुश्मन ने हमला कर दिया है

वो कुछ कर पाता इससे पहले ही दुश्मन घर के अंदर आजाते हैं

लेकिन राज अपनी जेब से एक स्मोक बॉम्ब निकालता है और उसे फेंक देता है

स्मोक बॉम्ब के फुट ते ही धुआ फैल जाता है

राज एक चश्मा पेहेन्के वीर के पास जाता है

और उसके कान में कहता है

राज- ठाकुर साहब 10 मिनिट तक ही धुआ रहेगा तब तक आप सभी औरतो को किसी महफूज जगह ले जाइए

यह लीजिए इसे पहेन लीजिए

[वीर चश्मा पहेन लेता है उसे धुए में सब सॉफ दिखाई देता है

वो सिमिता किरण संगीता और अपनी दोनो बहू को अपने रूम में ले जाता है

ख़ुफ़िया रास्ता खोलके अंदर चला जाता है

तब तक धुए का असर ख़तम हो चुका था वीर

धर्मेश राज और जतिन तीनो बंदुको के साथ छिपे थे

दुश्मन 20 थे और इधर सिर्फ़ 4

राज- ठाकुर साहब आप यही पे रुकिये

हम तीनो इन्हे देखते हैं

यह लो

[राज धर्मेश और जतिन को 2 गन्स देता है]

[फिर थोड़ा आगे बढ़ने के बाद राज जतिन और धर्मेश के पीठ पे गन तान देता है

राज- धर्मेश और जतिन चलते रहो जब तक रुकने को ना बोलू

[धर्मेश और जतिन दोनो अपने हाथ पीछे कर लेते हैं

दुश्मनो का जो सरदार लग रहा था

राज- राणा सबको कहो कि बंदूके नीची करे

राणा- तुम सब ने सुना नही छोटे मालिक क्या कह रहे हैं

धर्मेश- राज तुम यह ठीक नही कर रहे हो

राणा- यह शिवराज हैं हमारे मालिक रंजीत चौहान के बेटे

[तभी राज 5 आदमियो के सर पे गोली मार देता है

बाकी सब लोग भी अपने बंदूके उठा लेते हैं

जतिन और धर्मेश भी अपनी गन्स निकालते हैं और जितने को मार सकते थे उतने को मार देते हैं

तभी दो आदमी आशा के सिर पे बंदूक ताने हुए एक कमरे से बाहर निकलते हैं

अपनी बड़ी माँ की जान ख़तरे में देखके धर्मेश और जतिन अपनी गन्स फेंक देते हैं

राणा- बड़े मालिक ने कहा था

कि आप को एक मौका दे

और अगर आप गद्दारी करे तो आपको जान से मार दे

[राणा इससे आगे कुछ बोलता वीर की बंदूक से निकली गोली राणा के सीने में लगती है

 
गन्स उठाके जतिन और धर्मेश दोनो आदमियो को गोली मार देते हैं

आशा वीर के पास दौड़ती है

तभी एक आदमी लगातार गोलियाँ चलाने लगता है

सब छिप जाते हैं

राज जतिन और वीर तीनो को गोली लगती है

जतिन बेहोश हो जाता है

वो आदमी वीर की तरफ गन कर देता है

आशा अपने सुहाग के आगे आजाती है

लेकिन आशा के आगे संगीता आजाती है

कयि गोलिया लगती है संगीता को

जब संगीता गिरती है तो वो आदमी फिर से गोलिया चलाता है इससे पहले गोलिया आशा को लगती

वीर आशा को अपने गले लगाता है

और अपनी पीठ उस आदमी की तरफ कर देता है

वीर की पीठ गोलियो से छलनी हो जाती है

धर्मेश जब अपने माता पिता की हालत देखता है तो एक झटके में खड़ा हो जाता है और उस आदमी की तरफ छलान्ग लगा देता है

और उसकी बंदूक छीन्के सारी गोलिया उसके सीने में उतार देता है.,.

धर्मेश उस आदमी को मार देता है

यह उसके घर के नौकर में से एक था

धर्मेश की नज़र उसके माता पिता पे पड़ती है

जो खून से लहू लाहान पड़े थे

वीर को भी गोलिया लगी थी

लेकिन वो संगीता का सर अपनी गोद में रखके बैठे थे

वीर- संगीता मुझे माफ़ कर दो आज एक बार फिर तुम मेरी वजह से तकलीफ़ में हो

बस अपनी आँखें बंद मत करना

[धर्मेश दौड़ता हुआ अपनी माँ के पास पहुँचता है

धर्मेश- माँ अगर आप मुझे छोड़ कर गयी तो जान से मार दूँगा सूरज और मीता को

उन्दोनो के प्यार की कीमत मेरी माँ नही चुकाएगी

प्लीज़ माँ मुझे छोड़ कर मत जाइए

अभी कितने दिन ही हुए हैं मेरी शादी को

संगीता- बेटा मैं जा रही हूँ

लेकिन वादा कर कि तू मीता को माफ़ कर देगा

उससे कभी नफ़रत नही करेगा

धर्मेश- माँ आप मुझे छोड़ कर मत जाओ

मैं उसे माफ़ कर दूँगा

संगीता- मीता किरण की जुड़वा और तेरी सग़ी बहेन है

[और संगीता दम तोड़ देती है

 
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