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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

सब की आँखें चमक गयी,मैने दो लाख रुपया जेब से निकालके उन्हे दिया

और अंदर जाके प्रिया को ढूँढने लगा,एक जगह मुझे प्रिया दिखी,मैं उसके पास गया,उसने काफ़ी पी रखी थी,कपड़े ऐसे पहने हुए थे,मैं प्रिया

को गोद में उठाया और आगे बढ़ने लगा

लेकिन एक लड़के ने मुझे रोक दिया और बोला,इतनी मुश्किल से यह हमारे हाथ आई है,तू इसे कहाँ ले जा रहा है

आज तो हम इस बला की खूबसूरत कली को फूल बनाएँगे...

दिलीप- वैसे आइडिया तो अच्छा है,लेकिन यह मेरी बहेन है

लड़का- ओह तो तुम इसके भाई हो,सॉरी बॉस

प्रिया और मैं फ़्रेंड है,और मुझे मज़ाक करने की आदत है

दिलीप- इट्स ओके

[मैं फार्महाउस से बाहर आया,और प्रिया को कार की पिच्छली सीट पे सुला दिया

कुछ देर बाद सिमिता मौसी के घर पहुँचे

मैं प्रिया को घर के अंदर ले गया

सिमित मौसी प्रिया को बेहोश देखके घबरा गयी

दिलीप- ज़्यादा शराब पीने की वजह से बेहोश है,आप घबराईए मत

[फिर मैने प्रिया को उसके रूम में लिटा दिया

विदू भी मेरे साथ ही थी

दिलीप- आप इसके कपड़े चेंज कर दीजिए

[रात के 10 बज चुके थे

मैं अपने रूम में आया

और वो बॅग खोला जो देव ने मेरी कार में रखवाया था

फिर मैने वो बॅग बंद कर दिया

मैने अपना फोन चेक किया,देव का एसएमएस था

उसका कहना था कि प्रिया और प्रीति पे कोई भी नज़र नही रख रहा है,और ना ही सिमिता मौसी के घर पे

इसका मतलब सिमिता मौसी को कोई भी ब्लॅकमेल नही कर रहा है
 
फिर मैं अपने रूम से बाहर आया

और प्रिया के रूम में गया

वहाँ विदू सिमिता मौसी और प्रीति थी

मैं प्रीति के पास बैठ गया

दिलीप- खाना खा के सो जाओ,कल कॉलेज भी जाना है

प्रीति- मुझे भूख नही है और नींद भी नही आ रही है

दिलीप- पर मुझे तो भूख लगी है,और तुम नही खाओगी तो मैं कैसे खाउन्गा

प्रीति- दी होश में कब आएगी

दिलीप- आजाएगी अब चलो मुझे अपने हाथ से खाना खिलाओ

[मन मारके प्रीति मेरे साथ आई,और मैने एक प्लेट में खाना डाला,और प्रीति को अपने हाथ से खिलाने लगा

खाना खाने के बाद प्रीति अपने रूम में चली गयी

और मैं अपने रूम में आके लेट गया

कुछ देर बाद विदू रूम में आई

और मेरे पास बैठ गयी

विदू- बुआ ने बताया कि आज पहली बार प्रिया ने शराब पी है

दिलीप- वैसे प्रिया का किसी लड़के के साथ

आप समझ रही है ना

विदू- पता नही लेकिन पहले प्रिया ऐसी नही थी

दिलीप- किसी ने जान ने की कोशिश नही की

विदू- बुआ ने एक बार कोशिश की थी,लेकिन प्रिया ने अपने हाथ की नस काट ली

दिलीप- चलिए आज भूखे पेट ही सोना पड़ेगा

अब आभी जाइए मेरी जान

[और विदू मेरे सीने से लग गयी

विदू- हम कितने दिन यहाँ रहेंगे

दिलीप- जब तक मैं सिमिता मौसी की नाराज़गी की वजह नही जान जाता,और उन्हे मना नही लेता

विदू- वानु और एलीना को भी ले आते तो

दिलीप- मुझे खुद नही पता कि कितने दिन लगेंगे

और वँया की पढ़ाई का क्या होता

विदू- पढ़ते तो आप भी हैं

दिलीप- सिर्फ़ तीन महीने पढ़ुंगा तो पास हो जाउन्गा

और क्या सोचा था क्या हो गया
 
दिलीप- जब तक मैं सिमिता मौसी की नाराज़गी की वजह नही जान जाता,और उन्हे मना नही लेता

विदू- वानु और एलीना को भी ले आते तो

दिलीप- मुझे खुद नही पता कि कितने दिन लगेंगे

और वँया की पढ़ाई का क्या होता

विदू- पढ़ते तो आप भी हैं

दिलीप- सिर्फ़ तीन महीने पढ़ुंगा तो पास हो जाउन्गा

और क्या सोचा था क्या हो गया

विदू- क्या सोचा था आपने

दिलीप- बता के क्या फ़ायदा आज तो नही कर सकता ना

विदू- बताइए ना प्लीज़

दिलीप- सोचा था आज

विदू- नही बोलेंगे तो बात नही करूँगी

दिलीप- वो मैने सोचा था कि आज आपको इटॅलियन ट्रडीशनल स्टाइल में चोदुन्गा

[यह. सुनते ही विदू बुरी तरह से शरमा गयी,उसके गाल एक दम लाल हो गये

विदू- ऐसा कुछ नही होता सब एक जैसा प्यार करते हैं

दिलीप- अरे सच कह रहा हूँ,देखिए मैं आप को बताता हूँ

वहाँ कैसे प्यार करते हैं,शायद दूसरा वर्ड यूज़ करने से आप नाराज़ हो

[विदू शरमाते हुए बोली,, मैं नाराज़ नही होउंगी

दिलीप- हां तो सुनिए,

नही रहने दीजिए वरना मैं मजबूर हो जाउन्गा आपके साथ वो सब करने से

विदू- ठीक है

दिलीप- मैं जानता हूँ अब रात भर आप यही सोचेंगी

इसी लिए चुप चाप सो जाइए

[फिर विदू अपने आप मेरे होंठ पे किस की और मुझे अपनी बाहो में लेके सो गयी,सुबह जब मेरी आँख खुली तो,विदू मुझसे एक दम लिपट के सोई हुई थी

मैने विदू के माथे को चूमा,और फिर उसके गुलाबी रस भरे होंठो को चूसने लगा

कुछ ही देर बाद विदू जाग गयी और मेरे होंठ चूसने लगी

तभी मेरा फोन बजने लगा

मैने फोन की तरफ देखा,और झट से फोन उठा लिया

और बातें करने लगा

फिर विदू वँया से बातें करने लगी

मैं अपना नहा धोके तय्यार हो गया

रूम में देखा तो विदू नही थी,शायद नाश्ता बनाने गयी थी

मैं भी रूम से बाहर आया, प्रीति टीवी देख रही थी

मैं प्रीति के बगल में बैठ गया

वो मुझे गुड मॉर्निंग विश की

फिर वो मुझे अजीब नज़रो से देखने लगी

दिलीप- ऐसे क्या देख रही हो

प्रीति- यह आपने क्या पहना हुआ है

दिलीप- कोट और पॅंट

प्रीति- वोही तो आपने 19 साल के हॅंडसम डॅशिंग

दिलीप- बस बस मैं 26 साल का हूँ
 
प्रीति- आपके पास वो कपड़े नही है

जीन्स टीशर्ट और ब्लॅक जॅकेट

दिलीप- मुझे कौनसा किसी लड़की को इंप्रेस करना है

प्रीति- एक बार पहेन कर देखिए विद्या दी का चेहरा खिल उठेगा

दिलीप- सच

प्रीति- हाँ

[फिर मैं विदू के पास गया

दिलीप- आप मेरे स्टाइलिश कपड़े लाई हैं

विदू- हां ब्लॅक बॅग में हैं

[फिर क्या था मैने रूम में आके ब्लॅक बॅग खोला,और एक टीशर्ट जीन्स पहन के एक ब्लॅक जॅकेट पहेन लिया

साथ में अपने शूस भी बदल दिया

और जब मैं रूम से बाहर निकला विदू मुझे देखते ही खो सी गयी

प्रीति- वाउ भैया आप तो पूरे हीरो दिख रहे हो

आज आप मुझे कॉलेज छोड़ने आएँगे

दिलीप- ज़रूर आउन्गा

कल तो इतना दुखी थी

प्रीति- वो दी ने बताया कि किसीने शर्त लगाया था

कौन ज़्यादा पी ता है

और दी को अगर कोई चेलेंज दे,तो वो पीछे नही हट ती

[यही बेवकूफी की सबसे बड़ी पहचान है

क्यूंकी मुझे पूरा यकीन था कि कल वो लड़का प्रिया की इज़्ज़त से खेलना चाहता था...
 
क्यूंकी मुझे पूरा यकीन था कि कल वो लड़का प्रिया की इज़्ज़त से खेलना चाहता था...

यही बेवकूफी की सबसे बड़ी पहचान है

क्यूंकी मुझे पूरा यकीन था कि कल वो लड़का प्रिया की इज़्ज़त से खेलना चाहता था

क्यूंकी जब मैने उस लड़के को बोला कि प्रिया मेरी बहेन है,अगर वो प्रिया का दोस्त होता तो बिना मेरी पूरी सच्चाई जाने,प्रिया को वहाँ से ले जाने नही देता

मैं यह सब सोच ही रहा था,कि प्रीति मुझे ज़ोर से हिला दी

प्रीति- कहाँ खो गये

दिलीप- कही नही

चलो नाश्ता करते हैं

और प्रिया को भी बुला लाओ

प्रीति- वो अपने रूम में ही नाश्ता करती हैं

दिलीप- तुम दोनो एक ही कॉलेज में हो

प्रीति- हां लेकिन मैं अपनी फ़्रेंड के साथ जाती हूँ

दिलीप- तो अपने फ़्रेंड को फोन करो,और उससे कहो कि आज तुम्हारा भाई तुम्हे छोड़ने जाएगा

[प्रीति अपने फ़्रेंड को फोन कर दी,और हम सब नाश्ता करने लगे

उसके बाद प्रीति चेंज करने चली गयी

मैं इशारे से विदू को अपने रूम में बुलाया,जैसे ही विदू रूम में मैने उसे ज़ोर से अपनी बाहो में भींच लिया
 
दिलीप- हां तो आप मुझे कुछ कहना चाहती थी

विदू- आप ऐसे ही कपड़े पहना कीजिए

दिलीप- ठीक है

[और मैं विदू के होंठो को चूमने लगा

फिर प्रीति मुझे आवाज़ देने लगी

[उसके बाद मैं प्रीति को छोड़ने उसके कॉलेज गया

फिर प्रीति बाइ कहके अपनी फ़्रेंड'स के साथ चली गयी

मैने अपना मोबाइल चेक किया

जिसने अपने आप को प्रिया का फ़्रेंड बताया था,उसकी फोटो उसका नाम उसके बाप का नाम उसका मोबाइल नंबर कहाँ पढ़ता है कहाँ जाता है

सब डीटेल्स एसएमएस में था

मैं तो देव का फॅन हो गया

डीटेल के हिसाब से वो लड़का ठीक 1 घंटे बाद किसी लड़की से मिलने जाने वाला था

तो मैं वहीं पहुँच गया जहाँ वो आने वाला था

टाइम बीता और वो लड़का अपनी बाइक पे आया और एक घर के बाहर रुका,और उसने डोरबेल बजाया

जैसे ही गेट खुला मैं शॉक हो गया

यह तो नेहा है विदू की फ़्रेंड जो मुझपे लाइन मार रही थी उस दिन

यह लड़का प्रिया का दोस्त

और नेहा विदू की फ़्रेंड

खैर कुछ देर तक मैं वेट करता रहा

फिर मैं नेहा के घर बाहर खड़ा हो गया,और डोर बेल बजाया

गेट खुला और नेहा के होश उड़ गये

मैं अंदर गया और गेट लॉक कर दिया

तभी वो लड़का रूम से निकला,इन दोनो का तो प्रोग्राम चल रहा था

लेकिन उस लड़के ने मुझे अभी तक नही देखा था

नेहा के मुँह से तो आवाज़ नही निकल रही थी

मैं नेहा के मुँह पे हाथ रखा,और उसके माथे की नस दबाने लगा

कुछ ही देर में नेहा बेहोश हो गयी

फिर मैं उस लड़के के पास गया,और उसके कंधे पे हाथ रखा वो पीछे मुड़ा और इससे पहले वो कुछ कहता,एक पंच उसके जबड़े पे पड़ चुका था

फिर दूसरा फिर तीसरा और फिर चौथा

और वो लड़का बेहोश हो गया

सबसे पहले मैने नेहा का और उसका मोबाइल चेक किया

कुच्छ नही मिला

फिर मैं घर चेक करने लगा

घर में भी कुछ नही था

मैं नेहा को रूम में ले गया

और कबाड़ में से एक साड़ी निकालके उसे बेड से बाँध दिया

दूसरी साड़ी से उस लड़के को भी बाँध दिया
 
कुछ देर बाद नेहा को होश आया.जैसे ही वो मेरे हाथ में चाकू देखी रोने लगी

दिलीप- रोना बंद करो वरना तुम्हारी ज़ुबान काट दूँगा

[नेहा की बोलती बंद हो गयी

दिलीप- अब मुझे सच सुनना है

कॉन हो तुम और क्या चाहती हो

[नेहा रोते हुए बोली,, यह तुम क्या कह रहे हो मेरी तो कुछ समझ नही आरहा है

दिलीप- तुम जिनके लिए काम करती हो,उन्होने तुम्हे यह नही बताया कि मैं किसी से बात करके यह जान जाता हूँ,वो झूठ बोल रहा है या सच अब प्लीज़ सच बताओ

[नेहा फिर रोते हुए बोली,, मैं सच कह रही हूँ,तुम क्या कह रहे हो मुझे कुछ नही पता

दिलीप- अगर तुम्हे पैसे चाहिए तो बोलो,वो तुम्हे जितने दे रहे हैं,उससे कहीं ज़्यादा दूँगा

नेहा- मेरा विश्वास करो

दिलीप- उस लड़के को तुम कैसे जानती हो

नेहा- हम एक महीने पहले ही मिले हैं

दिलीप- लिसन मैं जानता हूँ कि तुम जैसी लड़किया अपनी इज़्ज़त की परवाह नही करती,अगर मैं तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती भी करू तो तुम सच नही बोलॉगी तो मेरे पास एक ही रास्ता है

[और मैने दीवार पर चाकू मार दिया,नेहा चीख उठी

दिलीप- अगली बार दीवार पे नही मारूँगा

नेहा- अगर मैं तुम्हे सच बताउन्गी तो वो मुझे मार डालेंगे

दिलीप- मैं तुम्हे छोड़ दूँगा क्या

बोलना शुरू करो

नेहा- मुझे कहा गया था कि मैं तुम्हे अपनी तरफ अट्रॅक्ट करूँ

लेकिन तुम नही हुए

दिलीप- मुझे अट्रॅक्ट करने का मक़सद

नेहा- तुम अइय्याश हो कि नही,लेकिन तुम नही हो

दिलीप- अरे मैं ठर्की हूँ,लेकिन उनके साथ जो मुझे प्यार करती हैं

अब अपना अगला स्टेप बताओ

नेहा- अगला स्टेप था प्रिया के करीब जाना

उसके लिए चाहिए था एक बकरा

दिलीप- और वो बकरा यह लड़का है

पर यह माना कैसे इसका बाप तो काफ़ी पैसे वाला है

नेहा- मैने इसे अपना जिस्म दिया

दिलीप- अब अगला स्टेप

नेहा- यह प्रिया का बेस्ट फ़्रेंड बन गया

बस अब इसके आगे बढ़ते उससे पहले तुम आ गये

दिलीप- प्रिया की माँ को तुम लोग ब्लॅकमेल नही करते हो

नेहा- नही

दिलीप- तुम यह सब क्यूँ कर रही हो

नेहा- उनके पास कुछ सबूत हैं,जिस से मैं जैल जा सकती हूँ

दिलीप- तुम्हारा बॉस कौन है

नेहा- सुशीला शर्मा

दिलीप- फोन नंबर बताओ

नेहा- प्राइवेट नंबर से फोन करती है

दिलीप- ओके जैसा चल रहा है चलने दो

सुशीला अगर तुम्हे फोन करे तो तुम मुझे बताओगी

और देखो मुझे धोखा मत देना

तुम मेरी अच्छाई को तो देख चुकी हो,मैने तुम्हे आँख उठाके नही देखा

[फिर मैने नेहा को खोल दिया,और वो चाकू अपनी जेब में रखके घर से बाहर आया,कुछ देर बाद मासी के घर पहुँचा...

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[फिर मैं नेहा को खोल दिया,और वो चाकू अपनी जेब में रखके घर से बाहर आया,कुछ देर बाद मासी के घर पहुँचा

दोपेहेर हो चुकी थी

मैं अपने रूम में आके सोचने लगा

कि यह सुशीला कौन है

फिर मैने देव को फोन किया उसने फोन ही नही उठाया लगता है देव बाबू बिज़ी हैं

लेकिन तभी मेरा फोन बजने लगा

[मैं उसे बता दिया कि सुशीला शर्मा बॉस है नेहा की

देव- एक नंबर लिख ले

कुछ दिन बात नही कर पाउन्गा

यह तुझे जैसी भी मदद चाहिए यह लड़का करेगा

[फिर मैने वो नंबर लिख लिया

[कुछ देर बाद प्रीति कॉलेज से वापस अगयि

और मेरे पास आके बैठ गयी

दिलीप- तू मेरा एक काम करेगी

प्रीति- खाना बनाने को मत बोलना

दिलीप- अरे सुन तो

प्रीति- ठीक है बोलिए

दिलीप- तुझे सिर्फ़ एक काम करना है,मासी से पुच्छना है कि यह सुशीला शर्मा कौन है,उसका फोन आया था

प्रीति- आपको क्या काम है सुशीला शर्मा से

दिलीप- प्रीति

प्रीति- गुस्सा मत कीजिए

लेकिन इसके बदले मुझे क्या मिलेगा

दिलीप- क्या चाहिए

प्रीति- मैं चाहती हूँ कि आप मेरे बाय्फ्रेंड बनो

[मेरा तो दिमाग़ घूम गया,अवनी ने भी ऐसा ही किया था

दिलीप- प्रीति लगता है तुम नही चाहती मैं यहाँ रहूं

प्रीति- ऐसा क्यूँ कह रहे हो आप

दिलीप- बाय्फ्रेंड का मतलब पता है क्या होता है

प्रीति- बॉयफ्रेंड और हाँ मैं वो बाय्फ्रेंड बनने की बात नही कर रही हूँ

दिलीप- बाय्फ्रेंड का कुछ और भी मतलब होता है

प्रीति- बेस्ट फ़्रेंड

दिलीप- ओह ऐसा

प्रीति- तो आप बनॉगे मेरे बाय्फ्रेंड

दिलीप- क्यूँ नही

[और प्रीति मेरे गले लग गयी

प्रीति- थॅंक यू भैया

[प्रीति अपने रूम में चली गयी

कुछ देर बाद मेरा फोन बजने लगा

मैं फोन उठाया,कोई लड़का था जो मुझे सुशीला शर्मा के बारे में बताने लगा

सुशीला शर्मा भी बिजनेस मॅन की बीवी निकली

इसका मतलब इसे भी ब्लॅकमेल किया जा रहा है

अब इसके पति से मिलके इस तक पहुँचना पड़ेगा

तो चलते हैं इसके पति से मिलने रेड नाइट क्लब में

[फिर हम सबने खाना खाया

मैं विदू को बोला रात में आ जाउन्गा

और घर से बाहर आके अपनी कार में बैठा,कुछ देर बाद मैं रेड नाइट क्लब के सामने अपनी कार में बैठा वेट कर रहा था

नाम नाइट क्लब लेकिन किसी 5 स्टार होटेल जैसा
 
मैं विदू को बोला रात में आ जाउन्गा

और घर से बाहर आके अपनी कार में बैठा,कुछ देर बाद मैं रेड नाइट क्लब के सामने अपनी कार में बैठा वेट कर रहा था

नाम नाइट क्लब लेकिन किसी 5 स्टार होटेल जैसा

ठीक 10 मिनिट बाद एक आदमी आया और मेरी कार में एक पॅकेट डालके चला गया

मैं वो पॅकेट उठाया और उसे खोला

उसमें रेड नाइट क्लब के मेंबरशिप का पास था

और एक नोट जिसमें क्लब के रूल्स लिखे थे

मैं रूल्स पढ़ लिया

यह पास एक एटीएम कार्ड जैसा था

मैं रेड नाइट क्लब के गेट पे पहुँचा

और सेक्यूरिटी को अपना पास दिया

सेक्यूरिटी ने वो पास गेट के एक होल में डाला,गेट खुल गया

उसने मुझे वेलकम बोला और मेरा पास मुझे वापस कर दिया मैं अंदर चला गया

गेट फिर से बंद हो गया

अंदर का नज़ारा ऐसा था कि आम आदमी बेहोश हो जाए

एक तरफ मर्द बैठे थे

और वेट्रेस उन्हे ड्रिंक सर्व कर रही थी

वेट्रेस इतनी ज़्यादा सेक्सी कपड़े पहने हुई थी

किसी मॉडेल से कम नही थी

और कुछ घटिया लोग उन्हे टच भी कर रहे थे

कुछ के लिए तो यह आम बात थी,लेकिन कुछ ऐसी भी थी,जिन्हे देखके यह सॉफ पता चल रहा था,कि वो यह सब सहने को मजबूर हैं

एक तरफ स्ट्रिपर्स लाइनाये पहने अपना डॅन्स कर रही थी

और वहीं दूसरी तरफ लड़किया औरतें बैठी हुई थी

उन्हे लड़के ड्रिंक सर्व कर रहे थे

और सामने में स्ट्रिपर्स डॅन्स कर रहे थे

सारे साले करोड़ पति थे

लेकिन मेरी नज़र एक ही आदमी को ढूँढ रही थी

सुशीला शर्मा के पति आलोक शर्मा को

और एक जगह मुझे वो दिख गया,लेकिन मैं उससे डाइरेक्ट बात नही कर सकता था

फिर मैं भी एक जगह बैठ गया,जहाँ से मैं आलोक को देख सकता था

तभी एक वेट्रेस मेरे पास आई

दिखने में 22 साल की थी,काफ़ी खूबसूरत

वो- सर

दिलीप- सॉफ्ट ड्रिंक प्लीज़

वो- और कुछ सर

दिलीप- नो

[वो वापस जाने के लिए मूड गयी

दिलीप- अगर मैं तुम्हे यहाँ पे बैठने को कहूँ तो तुम्हे कोई प्राब्लम होगी

वो- नो सर पर आप रूल्स तो जानते हैं ना

दिलीप- यस

[और मैने अपना पास अपनी जेब से निकाला और उसे दिखाया

वो- रीमा

[और वो बार काउंटर के तरफ बढ़ गयी

और वहाँ पे पहुँचके एक दूसरी वेट्रेस के साथ बातें करने लगी

रीमा- उसके पास रेड पास है

[वेट्रेस [वो2- ऐसा नही हो सकता

रीमा- मैं सच कह रही हूँ

वो2- इसका मतलब वो हम में से किसी के साथ जो चाहे कर सकता है

रीमा- जॉब भी नही छोड़ सकती

वो2- डोंट वरी वो तो मुझे सीधा सादा लग रहा है

रीमा- काश ऐसा हो

[अब मैं बताता हूँ कि नोट में क्या लिखा हुआ था
 
जिसके पास भी रेड पास होगा,इस क्लब में जितनी भी लड़की या औरत काम करती हैं,उनके साथ मैं कुछ भी कर सकता हूँ

कुछ भी सिर्फ़ उनकी जान नही ले सकता

और मुझे जो करना है वो इसी नाइट क्लब में करना होगा,रेड पास वालो के लिए स्पेशल रूम्स हैं

रूम्स पे मुझे वो ले जाएँगी जिन्हे मैं अपना रेड पास दूँगा

एक बात और क्लब में हर बात रेकॉर्ड होती है

सिर्फ़ रेड पास रूम्स को छोड़ के

और भी बहुत कुछ था[रीमा मेरे पास आई मैने अपना सॉफ्ट ड्रिंक पिया

और उसे अपना रेड पास दिया

वो मेरा रेड पास लेके आगे बढ़ गयी

मैं उसके पीछे चलने लगा,कुछ देर बाद हम स्पेशल रूम्स पे पहुँचे,रेड पास से रीमा गेट ओपन की

और हम दोनो अंदर चले गये
 
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