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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना
अपडेट 52
दिलीप- चलो और बहने है पहले उनको मनाता हूँ
मैं विद्या दी के रूम पहुँचा
तो देखा विद्या दी और अरुणा दी बाते कर रहे थे
मैं गेट पे ही खड़ा रहा
अरुणा दी ने मुझे देखा
और मेरे पास आई
अरुणा- बाहर क्यूँ खड़ा अंदर आना
[अरुणा दी मेरा हाथ पकड़ के अंदर ले गयी और बेड पे बैठा दिया]
दिलीप- मुझे लगा आप सब मुझसे नाराज़ होंगी
विद्या- हम क्यूँ नाराज़ होंगे तुझसे
पापा ने हमें बता दिया है कि तूने कुछ ग़लत नही किया है
दिलीप- मैं अवन्तिका दी से मिलके आउ
अरुणा- तू हमारे पास बैठता क्यूँ नही है
दिलीप- अभी सोया हुआ हूँ
क्या
अरुणा- वेरी फन्नी
[मैं जैसे ही उठ रहा था कि विद्या दी ने मेरा सर अपनी गोद में रख लिया
और मेरे सर में उंगलिया फिराने लगी]
अरुणा- दी दिलीप को मुझे दीजिए ना
विद्या- अरे यह क्या बच्चा है कि तुझे दे दूं
कितना थका हुआ है सोने दे
अरुणा- तो मैं क्या करूँ
विद्या- पैर दबा
दिलीप- यह आप क्या कह रही हैं
अरुणा- तू चुप रह वरना दाँत तोड़ दूँगी
दिलीप- मैने जल्दी से आँखें बंद करली
[मुझे विद्या दी की गोद में इतना सुकून मिल रहा था कि
तभी मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे कानो में आके ढोल पीट रहा है]
विद्या- दिलीप बाबू पापा बुला रहे हैं
[बी मामा का नाम सुनके सारा सुकून भाग गया]
[मैं जल्दी से उठा और भागा भी मामा की तरफ]
दिलीप- जी मामा जी
बड़े मामा- जतिन तुम्हे बुला रहा है
[मैं गया छोटे मामा के रूम पे गेट नॉक किया]
[ छोटी मामी ने गेट खोला]
छोटे मामा- अंदर आ जाओ
[मैं अंदर गया]
छोटे मामा- ज़्यादा दर्द तो नही हो रहा है
दिलीप- मैं ठीक हूँ
छोटे मामा- डॉक्टर रंजन कहाँ है उनकी पत्नी उनकेलिए परेशान हो रही हैं
दिलीप- कुछ दिन के लिए बाहर गये है एसपी सर ने भेजा है
मैं उनकी वाइफ से बात कर लेता हूँ
[ छोटी मामी ने मेरे सर पे हाथ फेरा
मैं रूम से बाहर आया
और अपने रूम में गया
और डॉक्टर को फोन लगाया
डॉक्टर को समझा दिया
कि क्या कहना है उसे अपनी फॅमिली से
और उसे अड्रेस भी सेंड कर दिया]
मैं गया डॉक्टर की बीबी के रूम
डॉक्टर की बीबी ने गेट खोला
दिलीप- अभी फोन आएगा डॉक्टर का बात कर लीजिएगा
[तभी रिंग बजने लगी
डॉक्टर की बीबी ने फोन उठाया और बात करने लगी
डॉक्टर की बीबी मुझे घूर रही थी]
मैं वहाँ से सीधा मेघा दी के रूम की तरफ गया
गेट खोलते ही मेघा दी मेरे गले लग्के रोने लगी
मैं उनको अंदर ले गया
अंदर सुनीता दी भी थी
दिलीप- मेरी प्यारी दी क्यूँ रो रही है
मेघा- मेरी वजह से तुझे इतनी तकलीफ़ हुई
मुझे माफ़ कर दे
दिलीप- तब आप मुझे दो थप्पड़ मारिए
मेघा- क्यूँ
दिलीप- क्यूंकी मैं आपका भाई हूँ
और बहेन की वजह से कभी भाई को तकलीफ़ नही होती
सुनीता दी क्या हुआ आप भी रो रही हैं
सुनीता- तू तो कभी मुझसे बात ही नही करता
हमेश मेघा से या वँया से बात करता रहता है
जैसे मैं तेरी कोई नही हूँ
मेघा- ऐसी कोई बात नही है यह तो मेरी वजह से रो रही है
जब भी मैं दुखी होती हूँ यह उदास हो जाती है
दिलीप-[मैं वहाँ से अवन्तिका दी के रूम गया]
अवनतिका दी ने गेट खोला
मैं अंदर गया
कहना तो नही चाहिए पर अवन्तिका दी की नज़र हमेशा मुझे अजीब ही लगती है]
अवन्तिका- तुझसे एक बात करनी है
दिलीप- जी कहिए
अवन्तिका- तुम्हारी कोई गिर्ल्फ्रेंड है
दिलीप- यह कैसा सवाल है
अवन्तिका- बताओ ना
दिलीप- नही है
अवन्तिका- मेरे बॉयफ्रेंड बनोगे
दिलीप- [यह सुनके मेरी जिंदगी के हर एक तार में करेंट दौड़ गया
यह तो एक ही झटका था
दूसरा झटका तो यह है कि अवन्तिका दी ने मुझे किस किया वो भी लिप्स पे
मुझे तो कुछ होश ही नही रहा
मैं बिना कुछ कहे अवन्तिका दी के रूम से बाहर आगया......
अपडेट 53
मैं सीधा अपने रूम में गया
और बेड पे बैठ गया
थोड़ी देर बाद किसीने गेट नॉक किया
मैने गेट खोला
बड़ी नानी- क्या हुआ मेरे बेटे को
दिलीप- कुछ नही आइए अंदर
बड़ी नानी- पहले खाना खा ले
सारे बड़े खाना खा चुके है अब तुम बच्चे भी खा लो
दिलीप- गेस्ट सब
बड़े नानी- गेस्ट का खाना उनके रूम में पहुँचा दिया गया है
दिलीप- वो अखिल कल ही जाना चाहता है
अरषि कॉलेज भी जाती है
बड़ी नानी- ठीक है अब चल
[मैं वहाँ से सीधा डाइनिंग टेबल पे गया
सब बहनें खाना खा रही थी]
वँया कहाँ है
बड़ी नानी- उसकी तबीयत ठीक नही है
दिलीप- आप सब खाओ मेरे सर में दर्द है
[सब बहने उठ गयी और मेरा सर दबाने लगी]
अरे मैं ठीक हूँ थोड़ी देर आराम करूँगा फिर ठीक हो जौंगा
[यह कहके मैं अपने रूम में आगया]
2 घंटे बाद
मैं अपने रूम से किचन गया और खाना गरम किया
और वँया के रूम पहुँचा]
वँया मैने कल से कुछ नही खाया है
और अब खाउन्गा तो तुम्हारे हाथो से
प्लेट टेबल पे रख दिया आगे तुम्हारी मर्ज़ी
[मैं अपने रूम में आगया]
गेट खुला ही था
इंतेज़ार करते-2 नींद आ गई
तभी मुझे किसीने जगाया
मैं आँख खोल के देखा तो यह वँया थी
वँया- खाना ख़ालो
दिलीप- मैं उठके बैठ गया वँया मुझे अपने हाथ से खाना खिलाने लगी
[मेरी आँखो से आँसू बहने लगे]
वँया- क्या हुआ
दिलीप- आज तुम्हारी वजह से मेरे पास इतनी बहने हैं
और मैने तुम्हे थॅंक्स भी नही कहा
वँया- इसमे थॅंक्स कहने की क्या बात है
तुमने मेघा के लिए जो किया
दिलीप- वो मेरा फ़र्ज़ था
वँया- तो यह मेरा फ़र्ज़ था
दिलीप- [मैने भी वँया को अपने हाथ से खाना खिलाया
फिर वँया चली गयी
मैने गेट लॉक किया कपड़े बदल के सो गया
अगली सुबह
मैं उठा नहाया तय्यार हुआ
बाहर आया तो देखा सब जाने के लिए तय्यार है
मैं अखिल के पास गया]
अपना और भाभी का ख्याल रखना
अखिल- तू भी अपना ख्याल रखना
और भाभी अगर इसने आपको कभी परेशान किया
तो मुझे फोन करदेना
[आइजी आंड फॅमिली एसपी की फॅमिली अखिल अरषि और डॉक्टर की फॅमिली सब चले गये]
बड़ी नानी मैं गाओं घूम के आता हूँ
[फिर मैं बाइक पे बैठा और विनय के घर गया]
विनय मुझे देखते ही मेरे गले लग गया]
अरे बस हो गया
[मैं विनय के घर में गया
विनय की माँ ओर बहेन चूल्हेे के पास बैठी थी मैं उनको नमस्ते किया
विनय- चलो माँ हमे खेत भी जाना है
[विनय और उसकी माँ चले गये]
मैं विनय की माँ के पास गया
तो आपने जीजाजी को मना ही लिया
विनय की दीदी- हाँ पर आगे क्या करना है
मुझे तो लगा आप भूल गये
दिलीप- चिंता मत कीजिए 2 दिन बाद डॉक्टर के यहाँ जाएँगे
अब मैं चलता हूँ
फिर मैं वहाँ से सीधा बिम्ला के घर गया
मैने गेट नॉक किया
बिम्ला की बेटी ने गेट खोला और मुझे देखके डर गयी
कौन है
[अंदर से बिम्ला की आवाज़ आई]
दिलीप- मैं अंदर गया
बिंला- छोटे मालिक आप यहाँ बैठिए
तू खड़ी क्या देख रही है
जा स्कूल
[बिम्ला की बेटी तो वैसे भी डरी हुई थी बिम्ला के कहते ही वो बाहर निकल गयी]
बिम्ला- छोटे मालिक कुछ काम था क्या
दिलीप- क्यूँ ऐसे नही आसकता
बिम्ला- आप ही का घर है
कुछ लेंगे आप
दिलीप- दूध[मैं बिम्ला के दूध को घुरके कहा]
बिंला- अभी लाती हूँ
दिलीप- रहने दीजिए आप नही समझेंगी
पहले आप यह देखिए
[मैने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो प्ले कर दिया
कहना तो नही चाहिए पर वीडियो देखके बिम्ला की फॅट गयी....
अपडेट 54
दिलीप- कुछ कहना है
बिम्ला- यह कहाँ से मिला आपको
दिलीप- मैने खुद बनाया है
और जब भी देखता हूँ मज़ा आजाता है
[ऐसा लग रहा था कि बिम्ला कुछ सोच रही है]
आप सोच रही हैं कि मैं आपको ब्लॅकमेल करूँगा
बिम्ला- अगर ऐसा नही होता तो आप यह वीडियो कभी नही बनाते
दिलीप- सच में
[अच्छा यह लीजिए मैने वीडियो डेलीट कर दिया]
अब तो मैं आपको ब्लॅकमेल नही कर पाउगा
बिम्ला- हो सकता है आपके पास और भी हो
दिलीप- अच्छा है अभी तो मुझे सच जानना है
कि आपके घर में एक जवान बेटी है फिर भी आप यह सब कर रही हैं
बिम्ला- मेरा मरद 2 साल पहले मर गया वो एक नंबर का शराबी था
उसने सरपंच से 50000 रुपया उधर लिया था
सरपंच ने मुझे बोला कि या तो 50000 देदो या अपना खेत
अगर मैं खेत देदेति तो भूखी मर जाती
और नही मेरे पास 50000 था
सरपंच ने मुझे तीसरा रास्ता बताया जिससे मेरी उधारी भी माफ़ हो जाएगी और उसका भी काम हो जाएगा
दिलीप- मेरे माथे पे चूतिया लिखा हुआ है
यह चलुपन किसी और के साथ चल जाएगा मेरे साथ नही
सच बताती हो या सरपंच से जाके पुच्छू
बिम्ला- बात यह है कि
मैं यह सब अपनी मर्ज़ी से कर रही हूँ
मेरी कोई मजबूरी नही है
मेरे मरद के मरने के बाद मैं 1साल तक बर्दाश्त करती रही पर
दिलीप- सरपंच अभी भी आता है
बिम्ला- कहाँ जिस दिन से उसके
दिलीप- उसकी गान्ड पे मैने पत्थर मारा है
बिम्ला- आपने पत्थर मारा था
दिलीप- वैसे अभी तक आपने दूध नही पिलाया
[मेरा ध्यान खिड़की की तरफ गया
बिंला- पिलाऊं
[बिम्ला ने एक क़ातिल मुस्कान देते हुए कहा]
दिलीप- नही रहने दो
मुझे नही लगता आपके पास दूध होगा
[यह कहके मैं बाहर आया घर के पीछे गया और देखा बिम्ला की लड़की खिड़की से देख रही थी
मैं धीरे से गया और बिंला की लड़की की गान्ड पे एक थप्पड़ मारा
[बिम्ला की लड़की चीखने ही वाली थी कि मैं उसके मुँह पे हाथ रख दिया]
स्कूल जा हर वक़्त अपनी माँ की जासूसी करती है
उसके बाद मैं बाइक पे बैठा और घर की तरफ बाइक दौड़ा दिया
थोड़ी देर में पहुँचा हवेली
पूरी महिला मंडल हॉल में बैठके बाते कर रहे थे
[मैं भी साथ में बैठ गया यही मेरी सबसे बड़ी ग़लती थी]
विद्या- दिलीप कहाँ गया था
दिलीप- दोस्त से मिलने
अरुणा- तू तो हर वक़्त बाहर घूमता है
हमारे साथ बैठने में तुझे अच्छा नही लगता क्या
अवन्तिका- हाँ दी आज मैं इसको कहाँ कि हम बगीचे में घूमने जाएँगे
तो यह बोला कि नही मुझे आप सबके साथ बोर नही होना है
विद्या- हम तुझे बोर करते हैं
[पीछे से किसी ने मेरी गर्दन पकड़ के हिला दिया]
विद्या- कितना बेशरम है
झूठ ही बोल देता हमारा दिल रखने के लिए
[मैं पीछे मुड़ा तो देखा सुनीता दी हँस रही थी]
विद्या- अभी से कोई दिलीप से बात नही करेगा
[मैं बड़ी नानी की तरफ देखा]
बड़ी नानी- मुझे क्या देख रहा है तेरी बहने है तू ही मना
[बड़ी नानी और दोनो मामी वहाँ से उठके किचन में चली गयी]
दिलीप- मैं सोचने लगा एक तो यह दिमाग़ किसी की बजाना हो तो 4जी की स्पीड में दौड़ता है
और अब ज़रूरत है तो 2जी की स्पीड भी नही दे रहा है
मेघा- भैया दी मज़ाक कर रही है
अरुणा- तू थोड़ी देर चुप नही रह सकती थी
[यह सुनके मैं दूसरी तरफ मुँह फूला कर बैठ गया]
सब बहने हँसने लगी....
अपडेट 55
विद्या- अले मेला बाबू गुस्सा हो गया
अच्छा सुनना हम तुझसे मज़ाक भी नही कर सकते
दिलीप- आप ने मज़ाक नही किया
आप ने कहा कि कोई मुझसे बात नही करेगा
अरुणा- दीदी इसका मतलब हमे दिलीप को गिफ्ट देना चाहिए
[सब बहने खुसुर फुसुर करने लगी
मुझे कुछ ठीक नही लगा
मैं जैसे ही उठने वाला था कि अवन्तिका दी और अरुणा दी ने मेरे दोनो हाथ पकड़ लिए
दिलीप- दी छोड़िए मुझे
[तभी सुनतदि और अरुणा दी ने मेरा पैर पकड़ लिया]
विद्या दी मेरे पास आई और मुझे गुदगुदी करने लगी]
विद्या- हम से कभी नाराज़ होगा
दिलीप- नही कभी नही
अरुणा- हमारी हर बात मानेगा
दिलीप- हाँ
अब और नही पेट दर्द कर रहा है
[सब बहनो ने मुझे छोड़ दिया]
[मैं ज़ोर से हाँफने लगा]
[आज एक बड़ी सीख मिली कभी बड़ी बहनों से नाराज़ नही होना चाहिए]
दिलीप- चलिए बगीचे में चलते हैं
विद्या- पहले पापा से पूछ ले
दिलीप- मैं बड़ी नानी से पूछ लेता हूँ
[मैं किचन में बड़ी नानी के पास गया]
बड़ी नानी हम बगीचे में जा रहे हैं
आप मामा जी से बात कर लेना
बड़ी नानी- ठीक है दोपहर के खाने से पहले आ जाना
दिलीप- मेरी प्यारी बड़ी नानी
[मैं फिर हॉल में गया]
आप सब चलिए मैं आता हूँ
विद्या- ठीक है
[मैं अपने रूम में आया बाथरूम गया]
मैं बाथरूम से निकला तो देखा अवन्तिका दी बेड पे बैठी थी]
क्या हुआ दी
अवन्तिका- कुछ नही
इधर बैठ तुझसे बात करनी है
[मैं बैठ गया]
दिलीप- जी कहिए
अवन्तिका- तूने जवाब नही दिया
दिलीप- मुझे कुछ समझ नही आरहा है
अवन्तिका- मुझसे पूछ
शायद मैं तेरी कुछ मदद कर सकूँ
दिलीप- मैं ही क्यूँ
अवन्तिका- क्यूंकी तू मेरा हीरो है
तू मुझे अच्छा लगता है
तू अगर मेरा बॉयफ्रेंड बनेगा तो मुझे कोई डर नही होगा
दिलीप- [मैं कुछ सोच रहा था कि तभी
अवन्तिका दी मुझे किस करने लगी
मुझे तो कुछ समझ ही नही आरहा था
10 मिनिट तक अवन्तिका दी मेरे होंठ चुस्ती रही]
[हम दोनो लंबी-2 साँसे लेने लगे]
अवन्तिका- अब बता तेरी बहेन अगर शादी से पहले ऐसा किसी और के साथ करे तो तुझे अच्छा लगेगा
[मैं अपनी गर्दन ना में हिला दिया]
इसका मतलब तू आज से मेरा बॉयफ्रेंड है
और मैं तेरी गर्लफ्रेंड
दिलीप- हाँ
[यह सुनके अवन्तिका दी खुशी से उछलने कूदने लगी]
दिलीप- चलिए सब इंतज़ार में होंगे
अवन्तिका- 1 मिनिट रुक
[अवन्तिका दी मेरे पास आई और मेरे सर पे हाथ चलाने लगी]
अब ठीक है चल
[फिर हम दोनो बगीचे की तरफ चल दिए
20मिनिट तक चलने के बाद हम बगीचे में पहुँचे
मैं देखा सब बहने आम तोड़ने के लिए पत्थर मार रही हैं
विद्या- कहाँ रह गये थे
इतनी देर कोई लगाता है
दिलीप- आप यह क्या कर रही हैं
अरुणा- आम तोड़ने की कोशिश
दिलीप- यहाँ के नौकर सब कहाँ हैं
विद्या- हमने सबको 3 घंटे की लिए छुट्टी दे दी
वँया- दीदी दिलीप पेड़ पे आसानी से चढ़ जाता है
अरुणा- खड़ा-2 देख क्या रहा है
दिलीप- [मैं पेड़ पे चढ़ गया]
विद्या- मीठे आम ही तोड़ना
दिलीप- मैं आम तोड़के नीचे गिराने लगा
विद्या- बस अब नीचे आजा
[मैं पेड़ से नीचे उतर गया]
दिलीप- मैं चटाई लेके आता हूँ
[मैं जल्दी से गया और चटाई और पानी लेके आया]
मैं चटाई बिच्छा दिया
हम चटाई पे बैठ गये और आम चूसने लगे
दिलीप- आपको पता है आज मैं पहली बार इस बगीचे का आम खा रहा हूँ
अरुणा- हम तो आज 10 साल बाद खा रहे हैं
दिलीप- मेरा ध्यान अवन्तिका दी की तरफ गया
अवन्तिका दी के होंठ पे आम रस लगा हुआ था
[बहुत परेशान किया है आपने]
दीदी वो देखिए
[सब बहने दूसरी तरफ देखने लगी
मैं जल्दी आगे बढ़ा और अवन्तिका दी के होंठ पे अपना होंठ रखके आमरस चुसलिया
अवन्तिका दी- दिलीप
विद्या- क्या हुआ
दिलीप- दी क्या हुआ आपको
अवन्तिका दी- चींटी ने काट लिया
[यह सुनके सब बहने उछलके खड़ी हो गयी]....
railwayplatform wrote: ↑ 29 Sep 2017 21:39
AAJ SAHI ME BHAR-PET MILA.
CARRY ON.............
अपडेट 56
[विद्या दी मॅट उठा के झाड़ने लगी यह सब देख मुझे हँसने का मन हो रहा था]
दिलीप- अवन्तिका दी आपको वहम हुआ होगा
अरुणा- और नही तो क्या
[फिर हम सब बैठ के आम चूसने लगे
इस बार अवन्तिका दी मेरे सामने बैठी थी
दिलीप- बस और नही खा सकता
आप लोग खाओ
मैं और अवन्तिका दी मुँह धोके आते हैं
[अवन्तिका दी कुछ बोल पाती उससे पहले ही मैं उनका हाथ पकड़ के बगीचे वाले घर में ले गया
अवन्तिका- कितना बेशरम है अगर कोई देख लेता तो
[मैं अवन्तिका दी के होन्ट पे अपने होन्ट रखके चूसने लगा
अवन्तिका दी दी भी मेरे होन्ट चूसने लगी
कुछ देर बाद
ह्यूम किसी आने की आहट सुनाई दी
मैं जल्दी से बाथरूम में घुस गया
मुँह धोके बाहर आया
तो कोई नही था
मैं फिर बगीचे में गया
सब बहने मॅट पे बैठी थी
मैं भी जाके बैठ गया
वँया- दी चलो ना कुछ खेलते है
दिलीप- कबड्डी खेले
विद्या- तू अकेले खेल कबड्डी
हम तो हाइड आंड सीक खेलेंगे
दिलीप- ज़रा आप इसका देसी रूपांतरण करेंगी
वँया- छुपम छुपाइ
दिलीप- आप सब छुपो मैं ढूंढूंगा
[मैं अवन्तिका दी की तरफ देखके कहा]
मैने अपनी आँखें बंद कर ली और 1 से 20 तक गिना
मुझे तो सिर्फ़ अवन्तिका दी को ढूंडना था
मैं इधर उधर देखने लगा
मुझे पेड़ के पीछे कोई दिखा
मैं धीरे से गया तो यह मेघा दी थी
मैं दूसरी तरफ देखा वहाँ पे अरुणा दी थी
[मैं सोचा ऐसे नही होगा
मैं एक पेड़ पे चढ़ गया
और वहाँ से मैं सब को देख लिया
बड़े से पेड़ के कोने में अवन्तिका दी छुपि थी
मैं धीरे कदमो से उस तरफ जाने लगा
वहाँ पे पहुँच के मैने अवन्तिका दी को पीछे से गले लगा लिया
अवन्तिका दी ने पीछे मूड कर देखा
अवन्तिका- दिलीप कोई देख लेगा
[मैं अपने होन्ट अवन्तिका दी की गर्दन पे रखके सहलाने लगा]
अवन्तिका- बाबू प्लीज़ घर चलके जो करना हो कर्लेना यहाँ नही कोई देख लेगा
दिलीप- वादा
अवन्तिका- पक्का वादा
[फिर मैं वहाँ पर से आगे गया विद्या दी के पास
फिर मेघा दी सुनीता दी अरुणा दी
लास्ट में मैं वँया के पास गया]
कितनी देर से ढूँढ रहा हूँ
वँया- सबको ढूँढ लिया
दिलीप- हाँ अब चलो खाना खाने का समय हो गया है
फिर हम वहाँ से हँसी मज़ाक करते हुए घर पहुँचे
बड़ी नानी- आगया मेरा बेटा चल बैठ खाना खाले
हम बैठ गये बड़ी मामी और सी मामी खाना सर्फ करने लगी
मेरे बगल में बड़ी नानी बैठ गयी
मैं पहला नीवाला बड़ी नानी को खिलाया
विद्या- मुझे नही खिलाएगा
दिलीप- मैं विद्या दी को भी खिलाया
उसके बाद तो सबने भूख हड़ताल करदी
मैने सब बहनो को खिलाया
विद्या- मम्मी आप भी खाओ ना
भैया के हाथ से
[मैने बड़ी मामी को खिलाया
लास्ट में मैं अपने प्लेट में देखा तो आखरी नीवाला बचा था
मैं वो उठाके खुद खा लिया
जैसे ही मैं उठने वाला था कि सब बहनो ने मेरे प्लेट एक-2 नीवाला रख दिया
फिर हम सबने खाना खाया
और मैं अपने रूम में आगया
तभी मेरा फोन बजा
हेलो
अरविंद बोल रहा हूँ
दिलीप- जी एसपी सर
एसपी- तुम्हे जान के खुशी होगी कि एमएलए ने जितनी भी लड़किया विदेश में बेची थी
वो सब कल वापस अजाएँगी
दिलीप- यह तो बहुत अच्छी बात है
एसपी- एक और बात एमएलए की इल्लीगल प्रॉपर्टीस की कीमत 14000करोड़ है
उसमें से गवर्नमेंट ने 10 पर्सेंट तुम्हे देने को कहा है
दिलीप- इतने पैसे का मैं क्या करूँगा
एसपी- वो तुम जानो
तुम्हे जब भी अपने पैसे लेने हो
मुझे बता देना
फोन कट
मैं अपने रूम से बाहर आया और अवन्तिका दी के रूम पहुँचा
मैं धीरे से गेट खोला
उसके बाद जो मैने देखा
वो देखके मेरा दिमाग़ सुन्न हो गया...
अपडेट 57
दिलीप- हुआ यह कि जब मैने गेट खोलके अंदर देखा
तो अवन्तिका दी अपने कान में हेडफोनर लगाए अपनी गान्ड पीछे किए हुए गोल-2 घुमा रही थी
दी बहुत टाइट कपड़े पहने हुए थी
मुझे कुछ सूझ ही नही रहा था
थोड़ी देर बाद अवन्तिका दी ने अपनी गान्ड घुमाना बंद कर दिया
और अवन्तिका दी पीछे मूड गयी
मैं होश में आया
अवन्तिका दी मेरे पास आई
अवन्तिका- तू कब आया
दिलीप- अभी आप क्या कर रही थी
अवन्तिका- क्या
दिलीप- वही जो अभी आप कर रही थी
अवन्तिका- सीधा बताना
दिलीप- अभी आप अपनी गांद गोल-2 क्यूँ घुमा रही थी
अवन्तिका- छ्ही कितनी गंदी बाते करता है तू
दिलीप- इसमें क्या गंदा है
अवन्तिका- चुप बेशरम
दिलीप- मैने दी को गले लगा लिया
दी की आह निकल गयी
मैं अपने होन्ट दी के होन्ट पे रखके किस करने लगा
दी भी मेरे साथ देने लगी
मैं दी के उपरी होन्ट को चूसने लगा
दी भी मेरे निचले होन्ट चूसने लगी
अब मैं दी की ज़ुबान अपने मुँह में लेके चूसने लगा
दी मेरे पीठ सहला रही थी
मैने अपनी ज़ुबान दी के मुँह में डाल दिया
दी मेरी ज़ुबान अपने मुँह में भरके चूसने लगी
अब हमे 10 मिनिट हो गये थे किस करते हुए
मेरी साँस फूल रही थी
दी किस तोड़ने को तय्यार ही नही थी
मैने किस तोड़ दिया
और लंबी-2 साँस लेने लगा
दी का भी यही हाल था]
अब बताइए आप क्या कर रही थी
अवन्तिका- एरोबिक्स
दिलीप- इससे क्या होता है
अवन्तिका- इससे हिप्स शेप में रहता है
दिलीप- अच्छा यह करने से गांद बड़ा नही होती
अवन्तिका- नही यह करने से हिप्स पे चर्बी जमा नही होती
दिलीप- [मैं फिर किस करने वाला था कि दी ने मुझे चपत लगा दी]
अवन्तिका- तू हर वक़्त किस क्यूँ करने लगता है
दिलीप- इसमें भी आपकी ग़लती है
अवन्तिका- मैने क्या किया
दिलीप- आपने मुझे जबसे किस किया है
मन करता है हर वक़्त आपको किस करता रहूँ
अवन्तिका- तेरी कोई गिर्ल्फ्रेंड थी क्या
दिलीप- नही
अवन्तिका- तो फिर तू इतना अच्छे से किस कैसे कर लेता है
दिलीप- [अब क्या कहूँ दी ने तो बॉम्ब फोड़ दिया]
वो स्कूल में एक लड़की के साथ किस किया था
अवन्तिका- सिर्फ़ किस या कुछ और भी किया था
दिलीप- उसको तो सिर्फ़ किस किया था पर आपके साथ कुछ और ज़रूर करूँगा
[मैने मुस्कुरा के कहा]
अवन्तिका- अच्छा मैं भी तो देखु मेरा बाबू मेरे साथ क्या करता है
दिलीप- सोच लीजिए एक बार शुरू कर दिया तो रुकुंगा नही चाहे कुछ भी हो जाए
अवन्तिका- अगर कोई आगया तो
दिलीप- तब भी नही रुकुंगा
अवन्तिका- अगर बड़े पापा आगाये तो
दिलीप- कौन बड़े पापा
अवन्तिका- वँया के पिताजी तेरे बड़े मामा और मेरे चाचा जी
दिलीप- [बड़े मामा का नाम सुनके मेरी फट गयी]
मुझे घबराया हुआ देखके दी मेरे पास आई
अवन्तिका- सॉरी बाबू अपनी दी को माफ़ कर्दे
दिलीप- नही दी आपको सॉरी बोलने की ज़रूरत नही है
मुझे पता है कि आप मज़ाक कर रही थी
[यह कहके मैने दी को किस किया और बाहर आगया]
मैने टाइम देखा अब स्कूल की छुट्टी हो गयी होगी
मैं बड़ी नानी का रूम नॉक किया
बड़ी नानी ने गेट खोला]
बड़ी नानी मैं बाजार जा रहा हूँ
आपको कुछ मंगाना है
बड़ी नानी- तुझे जाने की क्या ज़रूरत है
किसी नौकर को बोल दे वो चला जाएगा
दिलीप- विनय भी मेरे साथ जाएगा बाजार
बड़ी नानी- ठीक है पर जल्दी आ जाना
दिलीप- मेरी प्यारी बड़ी नानी
[यह कहके मैं बाहर आया अपनी बाइक पे बैठा और रीना मेडम के घर की तरफ चल दिया..
अपडेट 58
थोड़ी देर बाद मैं [रीना मेडम ] के घर पहुँचा
यह डोर बेल को भी आज ही खराब होना था
मैं घर के पीछे वाले हिस्से में बाइक लेके गया
शूकर है खिड़की खुली थी
मैं खिड़की से अंदर गया
रीना के घर में 2 रूम्स थे
अब मैं पहले रूम से बाहर निकला और दूसरे रूम की तरफ गया
दूसरा रूम भी बंद था
मैं एक टेबल लिया उसपे चढ़ गया
जैसे ही मैं अंदर झाँका अंदर वही प्रिन्सिपल और रीना की चुदाई चल रही थी थी
मैं मोबाइल निकाला और लगा रेकॉर्डिंग करने
10 मिनिट तक चुदाई प्रोग्राम चलता रहा
मैं टेबल से नीचे उतरा
टेबल साइड में किया और एक कोने में छिप गया
थोड़ी देर बाद प्रिन्सिपल रूम से बाहर निकला और घर से बाहर चला गया
रीना ने मैनगेट लॉक किया और अपने रूम के बाथरूम में चली गयी
मैं रूम में गया और बेड पे बैठ गया
थोड़ी देर बाद रीना अपने जिस्म पे टवल लपेटे हुए बाथरूम से बाहर निकली
रीना ने जब मुझे देखा तो चौंक गयी
रीना- दिलीप तुम यहाँ क्यूँ आए हो
दिलीप- आपसे मिलने और क्या
रीना- पर क्यूँ
दिलीप- आपको दो ऑप्षन देता हूँ
आप प्रिन्सिपल से पीछा छुड़ाना चाहती है
या उसे बर्बाद करना चाहती हैं
रीना- मुझे प्रिन्सिपल को बर्बाद करना है
दिलीप- तो ठीक है अब मेरी बात ध्यान से सुनिए
मैने रीना को अपना प्लान बताया
रीना- अगर मुझे कुछ होगया तो मेरे पति का क्या होगा
दिलीप- तो फिर आप ऑप्षन आ चुन लीजिए
रीना- अगर मैं बच भी गयी तो प्रिन्सिपल किसी और की जिंदगी बर्बाद कर देगा
इसीलिए अब जो होगा देखा जाएगा
दिलीप- ठीक है कल मैं 8 बजे सुबह आ जाउन्गा आप प्रिन्सिपल को 9बजे बुला लेना
[यह कहके मैं बाहर आया
अपनी बाइक उठाई और चल दिया मार्केट मार्केट में जलेबी की दुकान पे गया
जलेबी पॅक करवाया और पहुँचा हवेली
जैसे ही मैने अंदर पावं रखा सब लड़किया एक साथ हॉल में बैठी थी
सब बहने मुझे देखके मेरे पास आगयि
विद्या- इसमें क्या लाया है
दिलीप- जलेबी
अरुणा- वाउ जलेबी ला मुझे दे मैं प्लेट में रखके लाती हूँ
[अरुणा दी जलेबी लेके चली गयी]
वँया ने मुझे पानी लाके दिया
मैं पानी पिया और सोफे पे बैठ गया
अवन्तिका- इतनी गर्मी में तुझे बाहर जाने की क्या ज़रूरत थी
दिलीप- अपने दोस्त के साथ गया था
मेघा- ला मैं तेरे पैर दबा देती हूँ
दिलीप- अरे मैं बाइक से गया था कोई पैदल थोड़ी गया था
सुनीता- मैं भी पैर दबाउन्गी
दिलीप- आप का भी जवाब नही मैं मेघा दी को समझाने की कोशिश कर रहा हूँ
[मेरे बोलने का कुछ फ़ायदा नही हुआ
दोनो जुड़वा बहने मेरे दोनो पैर दबाने लगी]
[मैं तो सोचने लगा कि यह कोई सपना तो नही है]
अरुणा दी जलेबी लेके आगयि
दिलीप- बड़ी नानी को तो बुलाए
विद्या- माँ चाची और बड़ी दादी बात कर रहे हैं
दिलीप- बड़े मामा छ्होटे मामा अभी तक नही आए
विद्या- नही
अब कोई सवाल नही
दिलीप- अच्छा ठीक है
मैने सब बहनों को जलेबी खिलाई
मौका देखके मैने एक जलेबी अपने जेब में डाल ली
ऐसे ही हम सबने जलेबी खा ली]
फिर हम सब टीवी देखने लगे
दिलीप- दी मैं अपने रूम में जा रहा हूँ
विद्या- हम सब भी अपने रूम में जा रहे हैं
दिलीप- मैं अपने रूम में आगया
टाइम पास करने के लिए मैं मोबाइल पे गेम खेलने लगा
थोड़ी देर बाद कंधे में दर्द होने लगा
मैं ऐसे ही बेड पे लेट गया
थोड़ी देर बाद नींद अ गई
सपने में मैं देखा कि अवन्तिका दी मेरे रूम में आई
और मुझे किस करने लगी
मैने दी को ज़ोर से अपनी बाहो में भीच लिया
तभी अवन्तिका दी ने मेरे गाल पे थप्पड़ मार दिया
मेरी आँख खुल गयी
मैने देखा मेरे सामने गुस्से में लाल पीली हुई विद्या दी खड़ी थी.,....,.,
अपडेट 59
दिलीप- दी आप यहाँ कुछ काम था क्या
[विद्या दी ने कुछ नही बोला]
मैने देखा विद्या दी के होंठो पे लिपस्टिक फैली हुई है
मैने अपनी उंगली अपने होन्ट पे लेजाके पोछा
यह क्या मेरी उंगली पे लिपस्टिक लगा हुआ है
मैने विद्या दी के पास जाने के लिए अपना पैर बढ़ाया ही था
कि मेरे कंधे में दर्द होने लगा
मैं अपना कंधा पकड़के वही पे बैठ गया
विद्या दी दौड़के मेरे पास आई
विद्या- क्या हुआ बाबू
दिलीप- कुछ नही बस कंधे में दर्द हो रहा है
मुझे माफ़ कर दीजिए मैने आपको
विद्या- माफी तो मुझे माँगनी चाहिए
मैने बिना सोचे तुझे थप्पड़ मार दिया
तू तो नींद में था
[विद्या दी मुझे सहारा देके बेड पे ले गई और मेरा सर अपनी गोद में रखके बैठ गई]
दिलीप- दी आपने सच में मुझे माफ़ कर दिया
विद्या- हाँ बाबू
दिलीप- लेकिन यह हुआ कैसे
विद्या- मैं तुझे बताने आई थी कि पापा ने कहा है कि तुझे और वँया को कल से स्कूल जाना है
जैसे मैं तेरे पास पहुँची तूने मुझे गले लगा लिया और
दिलीप- अब आप जाओ
मैं आता हूँ थोड़ी देर में
विद्या दी चली गयी
मैं अपनी जेब से जलेबी निकालके अलमारी में रखके बाथरूम गया
जब मैं बाथरूम से बाहर आया तो देखा बड़ी नानी बड़े मामा और डॉक्टर बेड पे बैठे थे]
मैं बड़ी नानी के पास गया
बड़ी नानी- इधर आके बैठ
[मैं बैठ गया]
दिलीप- [डॉक्टर मुझे चेक करने लगा]
डॉक्टर- अपनी शर्ट उतार दो
[मैने अपनी शर्ट उतार दिया]
[फिर डॉक्टर ने मेरा चेक अप किया दवाई दिया उपर से बॅंडेज भी लगाके चला गया
बड़ी मामा भी चले गये]
बड़ी नानी- अब अपना ख्याल रखना
वरना मैं तुझसे बात नही करूँगी
[यह सुनके मैं हँसने लगा]
दिलीप- आप और मुझसे बात नही करेंगी
बड़ी नानी मेरे गले लग गयी
बड़ी नानी- अब तू आराम कर
[फिर बड़ी नानी बाहर चली गयी]
मैं लेटने ही वाला था कि वँया गेट खोलके अंदर आगयि
वँया- ज़्यादा दर्द है
दिलीप- कोई दर्द नही है और तुम्हारी आँखों में आँसू
[वँया मेरे गले लग्के रोने लगी]
मैने वँया को रोने दिया
थोड़ी देर बाद वँया चुप हो गई
वँया- मैं तुम्हारे लिए खाना लेके आती हूँ
[वँया खाना लेके आ गई
और मुझे अपने हाथ से खिलाने लगी]
वँया- और लेके आऊँ
दिलीप- नही अब तुम भी जाके खाना ख़ालो
मैने 2 एएम का अलार्म लगाके थोड़ी देर बाद मैं सो गया
ठीक 2 एम मैं उठा अलमारी से जलेबी निकाला
मास्टर के जेब में रखा
और पहुँचा अवन्तिका दी के रूम पे
मेरे हाथ लगते ही गेट खुल गया
मैं अंदर आया गेट लॉक किया
धीरे से मैं अवन्तिका दी के पास पहुँचा
दी सोते हुए बहुत प्यारी लग रही थी
मैं दी के साथ लेट गया और दी की गरम सांसो को महसूस करने लगा
मैं अपने होंठ दी की गर्दन पे रखके चूमने लगा
दी नींद में ही सिसकने लगी
अचानक दी की आँख खुल गयी
दी चीखने ही वाली थी कि मैं अपने होंठ दी के होंठो पे रखके चूसने लगा
मैने किस तोड़ दिया
दिलीप- मेरी प्यारी दी
अवन्तिका- बाबू अभी टाइम क्या हुआ है
दिलीप- अभी मुझे आपको प्यार करने का टाइम है
अवन्तिका- अच्छा जी कैसे
[दी उठके बैठ गयी
दिलीप-[मैने जलेबी अपने मुँह मे लगा ली]
अवन्तिका- तू यह सब सोच कैसे लेता है
[मैं जलेबी दी के होंठो पे लगा दी
दी ने मुस्कुरा के अपना मुँह खोला और जलेबी अपने मुँह मे ले लिया
जैसे-2 जलेबी ख़तम हो रही थी वैसे-2 हमारे होंठ एक दूसरे के करीब आरहे थे
शुकर है जलेबी ख़तम हुई और हम एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे
मैं दी कि पीठ सहला रहा था
और दी मेरे सर में अपनी उंगली फिरा रही थी
जलेबी की मिठास किस करते हुए हम दोनो के मुँह में घुल रही थी
मैने किस तोड़ दिया
और हाँफने लगा
दी का भी यही हाल था
मैं फिर दी को किस करने लगा
दी भी पूरे जोश के साथ मेरे होंठो को चूस रही थी
मैं दी की ज़ुबान अपने मुँह में लेके चूसने लगा
दी के होंठ चूस्ते हुए मैने दी को खींचके अपनी गोद में बिठा लिया
और पूरे जोश के साथ दी की ज़ुबान चूसने लगा
अब मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था
तो दी की क्या हालत होगी
मैने किस तोड़ दिया
और हाँफने लगा
मैं बेड से उठ गया
दी मुझे प्यासी नज़रो से देख रही थी
मैं दी के गाल पे किस किया
और रूम से बाहर निकलके अपने रूम में आया
बाथरूम गया अपनी पैंट उतारके अपने लंड पे ठंडा पानी डाला
फिर मैं अलमारी से निक्कर निकालके पहेन लिया
बेड पे लेटते ही मुझे नींद आ गयी..,.,.'