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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 171ए

दिलीप- [अजीत पाँचो लड़को को थप्पड़ मार चुका था

लड़का- भाई आप हमे क्यूँ मार रहे हो

लड़का1- हम तो इसे सबक सिखा रहे हैं

अजीत- चुप रहो कुत्तो

वरना एक एक की गान्ड मार लूँगा

[अजीत मेरी तरफ घूम गया और मेरे हाथ पैर खोलने लगा

मेरे हाथ पैर खोलके वो मेरे पैरो पे गिर गया

मैं लड़का और लड़का1 को थप्पड़ मार दिया

दिलीप- पहले जान लेना कि सामने वाला कौन है

अजीत- अब मुझे वो वीडियो दे दो

दिलीप- इतनी जल्दी भी क्या है

पहले तुम इस कॉलेज की हर लड़की से माफी माँगो

और राखी भी बँधवाओ

[मेरी बात सुनके अजीत ऐसे भागा और 2 घंटे बाद वापस आ गया

अजीत- अब मुझे वीडियो दे दो

दिलीप- अपने दोनो हाथ जला लो दे दूँगा

[अजीत दौड़के गया और अपने हाथ जला कर आ गया

दिलीप- कॅंटीन के किसी चेयर के नीचे सीडी लगी हुई है उसी में वीडियो है

अजीत- हराम के जनो चलो

[अजीत और उसके कुत्ते कॅंटीन की तरफ भागे पर यह तो शुरुआत थी

मैं टाइम देखा तो जब मैं बेहोश हुआ था उस वक़्त से अभी 8 घंटे हो चुके थे

मैं भी कॉलेज कॅंटीन में आ गया

अजीत मुझे देख कर मुस्कुराने लगा

अजीत- बेटा अब तो तू गया अब तो तेरी लाश ही यहाँ से जाएगी

दिलीप- पहले पकड़ तो ले

[और मैं भागने लगा अजीत के कुत्ते मुझे पकड़ने मेरे पीछे भागने लगे

लेकिन मैं इनके जैसा हराम का ख़ाके थोड़ी बड़ा हुआ था

साले थोड़ी देर में ही थक गये

मैं भी एक जगह रूक्के सुसताने लगा

तभी लड़को की भीड़ मेरी तरफ बढ़ने लगी

कम्से कम 50 लड़के थे

अजीत मेरे सामने आ गया

अजीत- तुझे पता है मैं कौन हूँ मेरा बाप कौन है

दिलीप- पता का तो मुझे पता नही

लेकिन यह ज़मीन जिस जगह पे तू खड़ा है वो मेरी माँ के भाई की है

तुझे क्या लगा तू होम मिनिस्टर का बेटा है तो तू मेरी विदू का हाथ पकड़ेगा

अजीत- यह विदू कौन है

दिलीप- तू ससपेन्स में ही रह

हाँ तो भाई लोग अपना मोबाइल खोलो और उसमें एक वीडियो है उसको देखो सच कहता हूँ मज़ा आजाएगा

अजीत- कौनसा वीडियो

दिलीप- वोही तुम्हारा वाला

[यह सुनके अजीत की फट गई]

अजीत- इसका मतलब

दिलीप- तुम्हे मैं इतना बेवकूफ़ दिखता हूँ

तुम जैसे कुत्तो को अच्छी तरह जानता हूँ

अजीत- प्लीज़ ऐसा मत करो मैं बर्बाद हो जाउन्गा

दिलीप- तुमने किसी लड़की का रेप किया है

अजीत- हाँ

दिलीप- तुम्हारी वजह से कोई लड़का स्यूयिसाइड किया है

अजीत- हाँ

दिलीप- मैं उस लड़की का कोई नही हूँ

लेकिन आज तुम्हारी वजह से मेरी विदू को तकलीफ़ पहुँची है

अरे हमे क्यूँ देख रहे हो वीडियो देखो वीडियो

[मेरी बात सुनके सब जैसे ही अपना मोबाइल निकाले

अजीत- यार मैं बर्बाद हो जाउन्गा प्लीज़ ऐसा मत कर मैं हर लड़की को इज़्ज़त से देखूँगा

दिलीप- एक बात बता तेरी भी एक बहेन है मैं उसका रेप कर लूँ और तुझसे माफी माँग लूँ तो

अजीत- मैं तुझे माफ़ कर देता बस

दिलीप- [स्टूडेंट्स से ] अगर मदर्चोद नही हो तो देखो वीडियो

[यह सुनके सब स्टूडेंट्स वीडियो देखने लगे वीडियो देखते वक़्त स्टूडेंट्स कभी वीडियो देखते तो कभी अजीत जैसे ही वीडियो पूरा हुआ सब स्टूडेंट हँसने लगे लॉट पोटके

अजीत अपनी जेब से गन निकाल लिया और हवा में 1 फाइयर किया सन्नाटा छा गया

अजीत- अब तो तुझे मारके रहूँगा मैं बर्बाद हो गया लेकिन तुझे

दिलीप- भौंक मत गोली नकली है ------ समझा अब तू जैल जा

[मैं सीटी बजाया पोलीस वाले अजीत को गाड़ी में डालके ले गये

बताइए पोलीस वाले होम मिनिस्टर के बेटे को उठाके ले गये

काम ही ऐसा किया था

डीआइजी अरविंद राणा की सर्विस गन चुराके ले आया

यह कोई छोटा जुर्म थोड़े ही है

अब तो 1 हफ्ते तक ज़मानत नही होगी

उपर से पोलीस वालो के फॅट के

और तो और अजीत का बाप एक सच्चा नेता है जनता की नज़र में

मुँह खोलेगा तो मिनिस्ट्री चली जाएगी...

 
अपडेट 172

दिलीप- अजीत को पोलीस वाले उठाके ले गये

पोलीस अजीत की ठुकाई कर रही थी तबतक अजीत का बाप पोलीस स्टेशन में भौंक रहा था

मैं पहुँचा डॉक्टर के पास

वोही डॉक्टर जो सुधर गया था

डॉक्टर मुझे देख कर शॉक हो गया

फिर मैने उससे अपना इलाज करवाया

मतलब चोट का निशान मिटवाया

अखिल को फोन करके सब पता किया

और पहुँचा अरविंद के घर

अरविंद- तुम जब भी इस शहेर में आते हो कोई ना कोई ज़रूर मरता है

दिलीप- आप नाराज़ तो नही हैं

अरविंद- मैं तुम्हे अपना दोस्त मानता हूँ

[फ्लश बॅक 8 घंटे पहले]

मैने अरविंद जी को फोन किया और कहा कि मुझे आप की सर्विस गन चाहिए

अरविंद जी मुझसे बिना कोई सवाल किए मान गये

फिर मैने अपने लुक्खे को फोन किया

अखिल- बोल

दिलीप- मैं इस कॉलेज में हूँ अभी मेरे पीछे दो लड़के लगा

अखिल- अब क्या हो गया

दिलीप- तू करेगा कि नही

अखिल- कर रहा हूँ पूरी बात तो बताएगा नही

दिलीप- मुझे एक आइटम चाहिए

जिसे देख कर कोई भी अपना आपा खो दे

अखिल- अबे मैं दल्ला हूँ क्या

दिलीप- देख अब अगर फालतू बात किया है तो दोस्ती ख़तम

अखिल- माफ़ कर दे

दिलीप- पूरी तरह से रंडी होनी चाहिए

जिसकी गान्ड और बूब्स देख कर नामर्द का भी लंड खड़ा हो जाए

उसको बोल कि इस कॉलेज में अजीत नाम का लड़का है

उसको सिड्यूस करके उसके साथ सोए और जब वो पूरा थक जाए

तो उसे वो इंजेक्षन दे दे

अखिल- कॉन्सा इंजेक्षन

दिलीप- अरे वोही जिससे आदमी औरत की तरह रिएक्ट करने लगता है

अखिल- हार्मोंस

दिलीप- हाँ और सेक्स का इंजेक्षन भी वो उसे लगा दे

और रूम में एचडी कॅमरा होना चाहिए

बाकी तो तू समझ ही गया होगा

अखिल- तो तेरा मतलब है कि वो उसको इंजेक्षन लगाके

रूम लॉक कर देगी और जब वो ऐसी वैसी हरकते करेगा वो कॅमरा में रेकॉर्ड हो जाएगा

दिलीप- हाँ और वो रेकॉर्ड करके एक सीडी कॅंटीन में किसी टेबल के नीचे रखवा देना

और एक वीडियो अजीत के फोन में रख देना

और सुन एक और काम है

अखिल- अब क्या है

दिलीप- अरविंद जी के यहाँ जा और उनकी सर्विस गन लेके अजीत की गन से बदल दे

और गोली नकली डाल देना

अखिल- [हकलाते हुए] कौन अरविंद जी

दिलीप- डीआइजी अरविंद राणा

अखिल- तू दुश्मन है मेरा

दिलीप- मैं कब बोला कि मैं तेरा दोस्त हूँ

और बाकी तू खुद देख लेना

[फिर मैं उस लड़के से बात करने लगा

थोड़ी देर बाद मेरा किडनॅप हो गया

मेरा किडनॅप होते ही दोनो लड़के जो मेरा पीछा कर रहे थे

वो अखिल को फोन किए

अखिल- तुम दोनो सिर्फ़ नज़र रक्खो

[उधर आइटम अजीत के लंड को अपने मुँह अपनी चूत और अपनी गान्ड से ठंडा कर चुकी थी

साथ ही उसे इंजेक्षन देके रूम लॉक कर दी

थोड़ी देर में ही अजीत लड़कियो जैसा रिएक्ट करने लगा

मतलब अपनी निपल मसल्ने लगा

अपनी गान्ड में उंगली करने लगा

मतलब पूरी तरह से लड़की बन गया

उधर अखिल अरविंद जी की गन लेके अजीत जहाँ पे था वहाँ गया आइटम पहले ही अजीत का गन ले चुकी थी

थोड़ी देर बाद अजीत होश में आया

और वो अपनी हालत देख कर शॉक हो गया

तभी उसका फोन बजने लगा

अखिल- तेरे फोन में एक वीडियो है

उसे देख और अगर तू चाहता है कि यह वीडियो कोई ना देखे

तो तेरे कुत्तो ने इस जगह मेरे दोस्त को किडनॅप करके रक्खा है

मेरा दोस्त जो बोलेगा वो तुझे करना पड़ेगा

[फिर फोन कट गया]

अजीत की तो वैसे ही फटी पड़ी थी

वीडियो देख कर

अब बताइए एक संपूर्ण मर्द अपनी गान्ड में उंगली अंदर बाहर करे

दूसरा अपने निपल मसले और तीसरा लड़कियो जैसी आहे भरे तो उसकी तो फॅट ही जाएगी ना

अजीत कपड़े पहन्के गन पिछवाड़े में डालके पहुँचा वहाँ जहा पे मैं था

[प्रेज़ेंट]

अरविंद- तुम यह सब क्यूँ करते हो

क्या फ़ायदा यह सब करके

दिलीप- आपकी होने वाली बीवी का कोई हाथ पकड़ ले तो

अरविंद- [मुस्कुरा कर] मैं तो यह सोच रहा हूँ कि अजीत जिंदा कैसे बच गया

दिलीप- अब चलता हूँ

[मैं बाइक पे बैठा और चल दिया अपनी विदू के पास....

 
अपडेट 172आ

[होम मिनिस्टर हाउस]

होम मिनिस्टर- मदर्चोद पता लगाया कि नही वो लड़का कौन है

आदमी- वो ठाकुर जतिन वीर प्रताप सिंग का भांजा है

होम मिनिस्टर- जिसका यह शहेर है

उस पिल्ले की इतनी हिम्मत कि वो मुझसे टकराएगा

अगर मेरा बेटा जैल से बाहर नही निकला तो

[तभी फोन बजने लगा[होम मिनिस्टर का पीए फोन उठाता है

ऐसी खबर सुनके उसकी फॅट जाती है

होम मिनिस्टर- हरामखोर क्या हुआ ऐसा मुँह क्यूँ बना रहा है

तेरी बहेन का रेप तो नही हो गया

पीए- सर सर

होम मिनिस्टर- बोलेगा भी

पीए- सर अजीत बाबा अब इस दुनिया में नही रहे

[यह सुनके होम मिनिस्टर पीए को थप्पड़ मार देता है

होम मिनिस्टर- क्या बकवास कर रहा है

पीए- सर मैं सच कह रहा हूँ

उनकी जेब में एक इंजेक्षन था

और एक लेटर भी

लेटर में लिखा हुआ था अब तो तू लूट चुका है

इससे अच्छा तू मर जा

उस इंजेक्षन में पोइजन था

होम मिनिस्टर- फिर क्या हुआ

पीए- अजीत बाबा अब इस दुनिया में नही रहे

[यह सुनके होम मिनिस्टर ज़मीन पे बैठके रोने लगता है

होम मिनिस्टर- मेरा बेटा मर गया मुझे आग देने वाला कोई नही बचा

मेरा वारिस अब इस दुनिया में नही रहा

यह सब अब किस काम का

[होम मिनिस्टर की आँखो में खून उतर आया

होम मिनिस्टर- अभी कहाँ है वो पिल्ला

पीए- हाइवे नंबर 3 पे उसके आगे एक ब्रिड्ज आता है

होम मिनिस्टर- उस पिल्ले को ख़तम कर दो वरना तुझे ख़तम कर दूँगा

और एक बात याद रखना अगर वो पिल्ला नही मरा तो तुम सब मर जाओगे

पीए- सर लेकिन ठाकुर

होम मिनिस्टर- ठाकुर को जो करना हो करेगा

उस पिल्ले की लाश भी नही मिलनी चाहिए[तभी पीए अपने सबसे ख़ास आदमी को फोन करता है]

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दिलीप- मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था

आज मैं अपनी विदू का हंसता हुआ चेहरा जी भरके देखना चाहता था

मैने बाज़ार से विदू के लिए गजरा ले लिया

मेन रोड पे नॉर्मल स्पीड पे बाइक चला रहा था

फिर मैं हाइवे पे फुल स्पीड में चलाने लगा

तभी सामने से ट्रक आने लगा

मैं जल्दी से बाइक टर्न किया लेकिन बाइक टर्न करते ही एक और ट्रक सामने आ गया

मैं फिर से बाइक टर्न किया

मैं समझ चुका था कि यह सब मुझे मारने आए हैं

तभी मुझपे गोलियाँ चलने लगी

इससे पहले मैं कोई हरकत करता पीछे से एक और ट्रक आके मेरी बाइक को ठोक दी मैं और मेरी बाइक दोनो हवा में उड़

गये इससे पहले कि मैं बाइक से कूद पाता मेरे सर में तेज़ दर्द होने लगा और मैं बेहोश होने लगा

मैं और मेरी बाइक नदी में गिर रहे थे

इससे पहले मेरी आँखें बंद होती मेरी आँखो के सामने बड़ी नानी विद्या और वँया का चेहरा दिखाई दिया

और मैं बेहोश हो गया

साथ में मुझपर गोलिया चलने लगी ऐसा लगा कि मेरे पैर और मेरे सीने में गोली लगी है

लेकिन मैं तो बेहोश था

साथ ही मैं नदी में बहता चला गया

बहता चला गया

[वोही दो लड़के मेरा पीछा कर रहे थे

वो अखिल को फोन किए

अखिल- क्या हुआ

लड़का- वो आपके दोस्त पे हमला हुआ है

गोलियाँ भी लगी है और साथ में नदी में गिर गया है

अखिल- तुम को गान्ड मराने के लिए भेजा था उसके पीछे

सालो अगर मेरे दोस्त को कुछ हो गया तो तुम दोनो[तभी तीनो ट्रक में धमाका हुआ और तीनो ट्रक के परखच्चे उड़ गये]

अखिल- यह कैसी आवाज़ थी

लड़का- वो तीनो ट्रक्स में ब्लास्ट हो गया

अखिल- [चीखके] सालो जल्दी भागो वहाँ से वो ब्रिड्ज भी उड़ने वाला है

तुम दोनो की लाश भी नही मिलेगी

[अखिल की बात सुनके दोनो लड़के ब्रिड्ज से बहुत दूर आ गए

तभी ब्रिड्ज में धमाका हुआ और जब धुआ हटा तो लगा ही नही कि यहाँ कोई ब्रिड्ज था]

अखिल- अंडरग्राउंड हो जाओ समझे

[ अखिल घर पहुँचके आरषि की गोद में सर रखके फुट फुटके रोने लगा

[आरषि थोड़ी देर तक अखिल को रोने दी]

आरषि- क्या हुआ आप रो क्यूँ रहे हैं

अखिल- ऐसे ही डर लग रहा है

आरषि- आप चिंता मत कीजिए सब ठीक हो जाएगा

अखिल- [मन में] तू ठीक कहती है सब ठीक हो जाएगा

मेरा दोस्त दिलीप मौत की भी माँ चोद कर वापस आएगा....

 


अपडेट 173

दिलीप- जब मैं नदी में बह रहा था तब मेरे बड़े मामा को खबर हो चुकी थी

कि मुझपे हमला हुआ है

बड़े मामा तुरंत गाओं से शहेर के लिए निकले

इधर छोटे मामा बॅंकाक में एक मीटिंग कर रहे थे मेरी खबर सुनके वो भी वहाँ से निकले

[पोलीस हेडक्वॉर्टर फ़ोन]

डीजीपी- अरविंद यह क्या हो गया

तुम्हे पता है अगर ठाकुर धर्मेश को भनक भी लग गयी तो इस शहेर को तबाह होने से कोई नही बचा सकेगा

इसी लिए जो कर सकते हो करो ठाकुर को रोकने के लिए

और कुछ भी करके उस लड़के को ढुंढ़ो

अरविंद- सर हम होममिनिस्टर को अरेस्ट क्यूँ नही कर रहे हैं

डीजीपी- क्यूंकी वो कोमा में चला गया है अपने बेटे की मौत की खबर सुनके

उस लड़के को क्या ज़रूरत थी उसकी जेब में पोइजन वाला इंजेक्षन डालने की

अरविंद- [दिलीप ऐसा नही कर सकता] पर सर हम भी जानते हैं कि यह हमला होममिनिस्टर के कहने पर हुआ है

डीजीपी- कोई सबूत है

यह तुम भी जानते हो कि होममिनिस्टर कितना घटिया आदमी है वो कुछ भी कर सकता है

एमएलए और चला गया उसी का फ़ायदा उठाके राइवल पार्टी सत्ता में आ गई

[अरविंद पैर पटकते हुए पूलिस हेडक्वार्टेर से बाहर आ गया

क्यूंकी जब मुझपे हमला हुआ तब होममिनिस्टर कोमा में चला गया]

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उधर विद्या बड़ी बेसब्री से मेरा इंतेज़ार कर रही थी

मेरे लिए मेरी पसंद का खाना बना रही थी

मेरी बहने मेरे लिए शॉपिंग कर रही थी

उधर कामिनी किरण मौसी को बता चुकी थी कि मैं विदू से मिलने गया हूँ

मैं इधर नदी में बह रहा था

नदी का बहाव बहुत तेज़ था

मुझे 1 घंटा हो चुका था नदी में बहते हुए

तभी मैं किसी जाल में फँस गया

[इधर बड़े मामा उस हॉस्पिटल के सामने पहुँच चुके थे जहाँ पे होममिनिस्टर कोमा में रहने का नाटक कर रहा था

बड़े मामा के दोनो हाथो में बंदूक थी

उनके साथ करीब 1000 लोग थे

उनका चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था

जैसे ही इंस्पेक्तेर आगे बढ़ा उनसे बात करने के लिए लखन एक गोली इंस्पेक्टर के पैर में मार दिया

तभी अरविंद जी और छोटे मामा दोनो हॉस्पिटल में पहुँच गये

छोटे मामा जाके सीधा बड़े मामा के गले लग गये

अरविंद- सर मैं जानता हूँ कि आप बहुत गुस्से में हैं लेकिन यह इस स्टेट का होममिनिस्टर है आज अगर आप इसे मार भी देते हैं तो क़ानून आपको कभी माफ़ नही करेगा

[बड़े मामा छोटे मामा को अपने से अलग करते हैं

बड़े मामा- सामने से हट जाइए

छोटे मामा- आप शांत रहिए और चलिए घर

बड़े मामा- हम आपको एक ही बार कहेंगे सामने से हट जाइए

छोटे मामा- आप दिलीप से बहुत प्यार करते हैं तो उसके लिए चलिए घर आपको दिलीप की कसम

बड़े मामा- दुआ कीजिए कि दिलीप मिल जाए वरना

[बड़े मामा गाड़ी में बैठके पहुँचे छोटे मामा के घर]

बड़े मामा को देखते ही मेरी सब बहने उनके पैर छुई

विद्या जैसे ही सुनी कि उसके पिताजी आए हैं वो दौड़के उनके गले लग गयी

विद्या- पिताजी आप यहाँ

बड़े मामा- कुछ दिन हम आपके साथ रहेंगे

विद्या- माँ और वँया भी आई हैं

बड़े मामा- वो कुछ दिन बाद आएँगी आप जाके आराम कीजिए

[फिर विद्या अपने रूम में चली गयी

और अपने साजन यानी कि मेरा इंतेज़ार करने लगी

वो बहुत शरमा भी रही थी कि वो पिताजी के रहते दिलीप के साथ प्यार भरी बाते कैसे करेगी

[नीचे बड़े मामा लखन से कुछ बात कर रहे थे]

बड़े मामा- लखन अभी के अभी अपने हर आदमी को बोल दो कि जो दिलीप को ढूंढेगा उसे 1करोड़ रुपया मिलेगा

चारो तरफ दिलीप के पोस्टर लगा दो

और हां आज से विद्या घर से बाहर नही जाए

[लखन सर झुकाके चला गया]

विदू अरुणा दी के रूम में गयी

अरुणा- दीदी आप आज कुछ ज़्यादा ही बेसबरी नही हो रही हैं

विदू- यह अभी तक आए क्यूँ नही

अरुणा- आप टीवी देखो तब तक आपके यह आजाएँगे...

 


अपडेट 173ए

[अरुणा जैसे ही टीवी ऑन कि न्यूज़ चॅनेल ही लग गया

न्यूज़ देख कर तो विदू का हार्टफेल होगया और विदू बेहोश हो गयी

अरुणा की भी चीख निकल गयी

[जिस वक़्त से ब्रिड्ज उड़ा था उस वक़्त से न्यूज़ वाले दिखा रहे थे शहेर के सबसे बड़े बिज्निसमेन ठाकुर जतिन वीर प्रताप

सिंग के भानजे पे जानलेवा हमला

ब्रिज के उड़ने में कई लोग मारे गये

लेकिन जतिन वीर प्रताप सिंग के भानजे दिलीप की लाश नही मिली

चश्मदीदो का कहना है कि दिलीप और उसकी बाइक दोनो नदी में जा गिरे

[अरुणा की चीख सुनके सब उपर आ गए

विदू को ज़मीन पे पड़ा देख कर बड़े मामा उसके पास गये

सब बहने टीवी देख कर रोने लगी

बड़े मामा सबको घूर्ने लगे

[डॉक्टर को बुलाया गया और डॉक्टर विदू का चेकप किया

डॉक्टर- इन्हे कोई सदमा पहुँचा है थोड़ी देर में भी होश आ सकता है थोड़े दिन में भी

[बड़े मामा डॉक्टर को जाने का इशारा किए

डॉक्टर चला गया

बड़े मामा बाहर आ गए रूम से

...............................................

[इधर मैं जाल में फँसा हुआ था तभी कोई जाल खींचने लगा

यह कोई गाँव था जिसके लोग मुझे आँखें फाड़ फाड़ के देख रहे थे

यह खबर पूरे गाओं में फैल गयी कि जाल में कोई लड़का अधमरी हालत में पड़ा है

यह एक बहुत छोटा गाँव था करीब 50 घर का

सब गाओं वाले इकट्ठा हो गये

वैद जी मेरी नब्ज़ चेक करने लगे

वाइड- जिंदा है लेकिन तीन गोली लगी है

एक पेट में एक पैर में और एक सीने में

आदमी- पर वैद जी इसे रखेंगे कहाँ

हमारा तो खुद गुज़ारा बड़ी मुश्किल से होता है

उपर से इसकी दवाई के पैसे

[तभी गाओं वाले बोले कि इसका खर्च पूरा गाओं उठाएगा

आदमी- लेकिन यह रहेगा कहाँ

मुखिया- श्याम यह तुम्हारे जाल में फँसा है यह तुम्हारे घर पे ही रहेगा

तुम्हे इसकी वजह से कोई तकलीफ़ नही होगी

[श्याम के घर में उसकी बीवी और बेटी थी]

[फिर सब लोग मुझे उठाके श्याम के घर ले गये

मुझे एक बिस्तर पे लेटाके वैद जी मेरे कपड़े उतारके मेरे जिस्म से गोली निकालने लगे

जब वैदजी मेरे जिस्म से गोली निकाल रहे थे उस वक़्त उनकी पत्नी भी उनके साथ थी

मुझे बहुत दर्द हो रहा था

फिर सब गाओं वाले चले गये

वैद जी मुझे कपड़े पहनाके रूम से बाहर आ गए

और वैद और उनकी पत्नी चली गयी

श्याम की पत्नी- मैं कहती हूँ तुम्हे क्या ज़रूरत थी इसे अपने घर लाने की

श्याम- कैसी बात करती हो मुखिया जी का हुक्म था

और तुम्हे तो पता है हमारी सारी ज़मीन गिरवी है मुखिया के यहाँ

श्याम की पत्नी- तुमसे शादी करके मेरी जिंदगी बर्बाद हो गयी

श्याम- फिर से शुरू मत होना खाना लगा दो

श्याम की पत्नी- तू कहाँ अंदर मरी हुई है बाहर आके खाना दे अपने बाप को

[अंदर से श्याम की बेटी बाहर आई और श्याम के लिए खाना लगा दी

श्याम खाना ख़ाके फिर से मछली मारने चला गया

वो एक मछुआरा था

वैद की पत्नी चटाई मॅट बिछा कर सो गयी

वाइड जी की बेटी छुपके से मुझे देख रही थी

तभी मुझे दर्द होने लगा

मैं दर्द से कराहने लगा

वैद जी की बेटी का नाम मीता था

मीता मुझे कर्राहते देख मेरे पास आ गई

उसे कुछ समझ ही नही आ रहा था कि वो क्या करे

फिर वो मेरे पैर के पास आके मेरा तलवा सहलाने लगी

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उधर विदू को होश अचुका था

लेकिन वो एक जिंदा लाश बन चुकी थी

ना कुछ खाती थी ना कुछ पीती थी

बस मेरे फोटो को सीने से लगाके रोती रहती थी

[बड़ी नानी कहती की मुझे दिलीप से बात कराओ तो छोटे मामा टाल देते

ऐसे ही एक हफ़्ता बीत गया

मैं एक हफ्ते से बेहोश था...

 


अपडेट 174

दिलीप- एक हफ्ते से बड़ी नानी मुझसे बात करना चाहती थी

लेकिन छोटे मामा उनको टाल रहे थे

बड़ी नानी से जब बर्दाश्त नही हुआ तो बड़ी नानी शहेर के लिए निकल पड़ी

बड़ी नानी के साथ वँया और बड़ी मामी भी थी

इधर एक हफ्ते तक वैदजी रोज मुझे देखने आते

मेरे कपड़े बदलते मेरी मलम पट्टी करते

श्याम तो दिन भर बाहर रहता जब वो शाम में आता

तो उसकी पत्नी उससे कहती कब तक इस बोझ को ढोते रहोगे

मीता चुपके चुपके दोनो की बात सुनती

और अपनी माँ को गुस्से से देखती

क्यूँ क्यूंकी श्याम दिन भर बाहर रहता श्याम की पत्नी दिन भर गाओं घूमती

और घर में रहते मेरा अधमरा जिस्म और मीता

मैं जब भी दर्द से तड़प्ता तो वो मेरे पास रहती

मुझे अपनी भीगी आँखो से देखती रहती

पता नही क्या था उसके मन में

इधर मेरी विदू 1 हफ्ते से ना कुछ खा रही थी ना कुछ पी रही थी

मेरी फोटो को सीने से लगाए गेट को देखती रहती कि कब मैं आउन्गा

बड़ी नानी की गाड़ी जैसे ही छोटे मामा के घर में एंटर हुई

छोटे मामा को साँप सूंघ गया

छोटे मामा और बड़े मामा एक रूम में जाके छिप गये

छिप्ते भी क्यूँ ना बड़ी नानी दोनो की बड़ी माँ थी

बड़ी नानी बड़ी मामी और वँया सीधा विदू की रूम की तरफ जाने लगे

जहाँ पे मेरी सब बहने विदू के साथ बैठी थी

बड़ी मामी अपनी बेटी का हाल देख कर दंग रह गई

बड़ी मामी और वँया दौड़के विदू के पास गई

बड़ी मामी- विद्या विद्या विद्या यह क्या हो गया है तुम्हे

वँया- दीदी दीदी

[बड़ी मामी और वँया विदू को आवाज़ देके थक गयी

लेकिन विदू को नही कुछ सुनाई दिया ना कुछ दिखाई दिया

बड़ी मामी सवाल भरी नज़रो से अरुणा को देखने लगी

[छोटी मामी अपने मायके गयी थी]

अरुणा भी सोच में पड़ गई लेकिन वो करती भी क्या

अरुणा शुरू से हुई सारी बात बड़ी मामी को बता दी

बड़ी नानी यह सुनते ही वही पे गिर गयी

बड़ी मामी का रो रो के बुरा हाल हो गया

वँया वो तो रो भी नही सकती थी उसकी आँखो से आँसू की एक बूँद भी गरती तो वो अपना सारा गम एक ही बार रोके निकाल देती

और कोई वँया की आँखें देख कर बता देता कि यह प्यार है

वँया अपनी माँ को चुप कराने लगी

वँया- माँ आप ही ऐसा करोगी तो विद्या दी को कॉन संभालेगा

प्लीज़ मत रोइए

बड़ी मामी- क्यूँ तुम्हारे पिता नही है

यहाँ मेरी बेटी इस हाल में है

और वो हम सबसे यह च्छुपके बहुत महान काम कर रहे है

बड़ी बड़ी बाते करेंगे कि हम 150 गाओं के ठाकुर हैं तो क्यूँ नही ढूँढ पाए वो दिलीप को

हैं कहाँ वो ज़रा देखु तो उन्हे

[तभी बड़े मामा रूम में एंटर हुए

और बड़ी नानी को उठाके बेड पे लिटा दिए

बड़ी मामी बड़े मामा को देखते ही चुप हो गई

क्यूंकी बड़े मामा को देख कर कोई भी रो देता

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[इधर मुझे होश आने लगा था एक लड़की की ढूंडली तस्वीर मुझे दिख रही था तभी मेरी आँख खुल गई

मैं इधर उधर अपनी नज़र दौड़ाने लगा

जिस्म के हर हिस्से में दर्द हो रहा था

मैं उठने की कोशिश कर रहा था लेकिन उठ नही पा रहा था

तभी मेरी नज़र एक लड़की पे पड़ी जो मेरे पैरो के पास सोई हुई थी

उसका हाथ मेरे पैरो पे था

मैने अपने पैर को ज़ोर से हिलाया

उसकी आँख खुल गई और वो मुझे देख कर सकपका गयी

और रूम से बाहर भाग गयी

थोड़ी देर बाद बहुत सारे लोग रूम में आ गए

उनमें से एक आदमी मेरे पास आया और मेरी नब्ज़ चेक करने लगा

वैद- बेटा अब तबीयत कैसी है

दिलीप- ठीक है लेकिन आप हैं कौन

वैद- तुम नदी में बहते हुए हमारे गाओं में आ गए

वैसे तुम्हारा नाम क्या है

दिलीप- मेरा नाम मेरा नाम हां मेरा नाम शक्ति है....

 


अपडेट 174आ

दिलीप- शक्ति

वैद- तुम कहाँ के रहने वाले हो

दिलीप- पता नही

वैद- तुम्हे कुछ और याद नही है

दिलीप- नही मैं कितने दिन में ठीक हो जाउन्गा

वैद- ज़ख़्म तो भर गया है

बस एक हफ़्ता और

[एक हफ़्ता और][फिर सब लोग चले गए

वैसे तो मुझे पता नही कि मैं जिस के घर हूँ कौन है

पर उसकी बेटी मुझे ही घुरती रहती थी

[मुखिया और वैदजी वैदजी के घर

मुखिया- वैद जी आपको पता है कि इस लड़के के उपर 1करोड़ का इनाम है

वैदजी- मुखिया जी कही यह कोई अपराधी तो नही है

मुखिया- नही यह ठाकुर धर्मेश वीर प्रताप सिंग का भांजा है

एक काम कीजिए आप इसे बेहोश कीजिए

हम इसे शहर ले जाएँगे

और इसे ठाकुर साब को दे देंगे

वैदजी- पर मुखिया जी हम ठाकुर को खबर भी तो दे सकते हैं

मुखिया- ठाकुर को खबर देंगे तो वो यहाँ आएँगे

और जब उन्हे यह पता चलेगा कि इस लड़के की जान श्याम ने बचाई है

[थोड़ी देर तक वैद मुखिया को देखता रहा

वैद- मुखिया आज भी तू उतना ही हरामी है जितना कल था

मुखिया- तू भी कुछ कम हरामी नही है

अपनी बीवी के पास तो जाता नही है

दूसरे की बीवी को देखने के बहाने उनको दवाई खिला कर चोदने लगता है

वैद- मैं तो दूसरो की बीवी को चोदता हूँ तू तो दूसरो की बेटी को चोदता है

शायद ही कोई लड़की होगी जो तेरे लंड के वार से बची होगी

मुखिया- है ना श्याम की बेटी

वैद- उसकी बीवी भी तो है

मुखिया- साथ में हरामी श्याम भी तो है

अगर उसे पता चल गया कि तू उसकी बीवी को और मैं उसकी बेटी ताड़ता हूँ तो वो हमारी हड्डियो का चूरा बना देगा

साला एक नंबर का गुंडा था जवानी में

तेरी बीवी को पूरे गाओं में नंगा नचा देगा

और हमारी गान्ड मार लेगा

वैद- बात तो तेरी सही है

जल्द से जल्द उस लड़के को उसके मामा के पास पहुँचाते हैं

और यहाँ से बहुत दूर चले जाएँगे

मुखिया- बिना श्याम की बीवी और बेटी को मसले

वैद- नही रे आज रात मैं श्याम के घर खाने पे जा रहा हूँ

एक दबा मीठाई में बेहोशी की दवा डालके श्याम उसकी बीवी और उसकी बेटी को खिला दूँगा

फिर हम दोनो उसकी बीवी और बेटी को मसलेंगे

मुखिया- वो लड़का

वैद- वो क्या उखाड़ लेगा वो तो एक हफ्ते तक बिस्तर से उठ ही नही पाएगा

मुखिया- लेकिन हम लड़के को ठाकुर के पास कल ले जाएँगे

वैद( अरे हम श्याम को जान से मार देंगे और उसकी बीवी और बेटी को मसल्ने के बाद उन्हे भी ख़तम कर देंगे

तू गाओं वालो को कहेगा कि यह सब मैं यानी वैद करके भाग गया

और हां मुझे धोखा मत देना 50 लाख तेरा और 50 लाख मेरा

वरना तेरी बीवी को तूने कैसे मारा उसका सबूत है मेरे पास

मुखिया- मैं इतना भी हरामी नही हूँ

[फिर वैद की बीवी नंगी मुखिया की गोद में जाके बैठ गयी

बाकी जो समझदार हैं वो समझ ही गये होंगे

[फिर दोनो कुत्ते की तरह हँसने लगे]

इधर मैं बेड पे लेटा हुआ सोच रहा था

कि मैं यहाँ आया कैसे

तभी वो लड़की मेरे लिए खाना लेके आ गई

मीता- अब कैसी तबीयत है

दिलीप- ठीक है

शुक्रिया मेरी जान बचाने के लिए

मीता- मेरे बाबा ने आपकी जान बचाई है

आपका कोई दुश्मन है क्या

दिलीप- मेरे दुश्मन अब इस दुनिया में नही हैं

[मेरी बात सुनके वो मुझे अपने हाथो से खिलाने ही वाली थी कि मैने उसका हाथ झटक दिया

दिलीप- जितना हो सके मुझसे दूर रहो

[मेरी बात सुनके वो रोते हुए चली गयी

मैं यह बर्दाश्त ही नही कर सकता कि कोई लड़की मुझे छुए

मुझे नफ़रत है प्यार से

मुझे नफ़रत है उनसे जो हमदर्दी करते हैं और बाद में पीठ चीर देते हैं

अब मुझे याद आ रहा था कि मैं कौन हूँ

क्या बताता मैं गाओं वालो को

मेरा नाम शक्ति है

मेरी एज 22 साल

मेरा पेशा लोगो को जान से मारना

आइ एम आ ब्लडी असेसिन

और मेरा मक़सद

ठाकुर धर्मेश वीर प्रताप सिंग को जान से मारना

मैं अपनी माँ की मौत का बदला लेके रहूँगा....

 
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