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Guest
अपडेट 175
दिलीप- मैं अपने बड़े मामा को जान से मारना चाहता हूँ
सॉरी मैं नही शक्ति
ऐसे ही पूरा दिन बीत गया
मैं बिस्तर पे पड़ा यही सोच रहा था
कि कब मैं अपने पैरो पे खड़ा हो पाउन्गा
क्यूंकी मुझे भी पता था कि मुझे 3 गोली लगी थी
एक तो दिल से 2 इंच दूर
उपर से पेशाब भी लग गया
मैं प्लेट जो टेबल पे पड़ा था वो नीचे गिरा दिया
जब मुझे यकीन हो गया कि कोई देख नही रहा है
मैं अपने दोनो हाथ बिस्तर से नीचे ज़मीन पे रक्खा और धीरे से अपने दोनो हाथो पे खड़ा हो गया
दर्द की तो नदी बहने लगी मेरे शरीर में
फिर मैं धीरे से रूम से बाहर आया लेकिन यह क्या बाथरूम ही नही था
अब मैं इतना मजबूर तो था नही कि पैंट में ही खाली कर लेता
फिर मुझे खिड़की दिखी
मैं खिड़की के पास गया एक हाथ पे खड़ा हो गया
अपनी पैंट खोला और अपनी टंकी खाली करने लगा
फिर मैं अपनी पैंट पहन्के वापस आने लगा
तभी मुझे ख्याल आया कि यहाँ तो अपने ही सबसे बड़े दुश्मन हैं
मैं अपने हाथो पे चलते हुए रसोई में आया और एक चाकू अपनी पैंट में घुसा कर बेड पे आके लेट गया
मेरे पैर और हाथ एक जैसे हैं
मतलब मैं जितनी देर पैरो पे चल सकता हूँ
उतनी ही देर अपने हाथो पे
भी चल सकता हूँ
थोड़ी देर बाद श्याम जी आ गए मुझे देखने
मैने श्याम जी को नमस्ते किया फिर वो बाहर चले गये
[ठीक 1 घंटे बाद मुखिया और वैद श्याम के घर पहुँचे
वैद के हाथो में मीठाई का डब्बा था
जो वो श्याम को दे दिया
थोड़ी देर बाद श्याम की बीवी खाना परोस दी
वैद- अरे श्याम भाई क्या मुझसे ग़लती हुई है
श्याम- ऐसा क्यूँ बोलते है वैद जी
वैद- मैं तुम्हारे लिए इतने प्यार से मीठा लेके आया
और तुमने खाया है नही
श्याम- ऐसी बात नही है वैदजी
[श्याम अपनी बीवी को देखने लगा
श्याम की बीबी रसोई में गयी और एक प्लेट में मीठा परोसके ले आई
श्याम- वैदजी आज कोई बड़ा दिन है जो आप मीठा लेके आए हैं
वैद- मेरी बहू पेट से है
श्याम- बधाई हो वैद जी बधाई
मुखिया- बिटिया नही दिख रही है
श्याम- अपने मामा के घर गई है
[यह सुनके दोनो का दिल टूट गया]
[श्याम अपनी बीवी को लेके रूम में गया
मुखिया- अबे यह क्या हो गया
वैद- तू इतना क्यूँ बेचैन हो रहा है
आज श्याम की बीवी से काम चला लेंगे
मुखिया- ठीक है यार
[श्याम और उसकी बीवी रूम से बाहर आ गए
श्याम की बीबी के हाथ में चाँदी का कंगन था
श्याम की बीबी वैद को वो कंगन दे दी
श्याम- यह आपकी बहू के लिए
[वैद वो कंगन ले लिया फिर सब खाना खाने लगे
खाना खाने के बाद आई मीठाई की बारी
वैद- श्याम पहले तुम और भाभी मुँह मीठा करो
[श्याम और उसकी बीवी एक मीठाई खा ली
थोड़ी देर बाद दोनो की आँखे भारी होने लगी और थोड़ी ही देर में दोनो बेहोश हो गये
मुखिया और वैद दोनो नंगे हो गये
और श्याम की बीबी को भी नंगा कर दिए
श्याम की बीबी को देख कर दोनो की आँखें चमक गयी
दोनो जैसे आगे बढ़े
मीता गेट खोलके अंदर आ गई
मीता अपनी माँ की हालत देख कर चीख पड़ी
[मीता की चीख सुनके मैं तेज़ी से अपने दोनो हाथो पे चलके बाहर आ गया
बाहर का नज़ारा देख कर मैं दंग रह गया
श्याम की बीबी नंगी खाट पे पड़ी थी और वैद और मुखिया नंगे मीता को पकड़े हुए थे
वैद पीछे से मीता का मुँह बंद किए हुए था
और मुखिया मीता के कपड़े फाड़ने की कोशिश कर रहा था
मैं अपनी पॅंट से चाकू निकाला और एक हाथ पे खड़ा होके दूसरे हाथ से चाकू फेंक दिया
चाकू सीधा मुखिया के सर के पिछछले हिस्से में घुस गया मुखिया तड़प्ते हुए वहीं पे ढेर हो गया मतलब मर गया
यह सब देख कर वैद की फॅट गयी
वैद मीता को छोड़ कर जैसे ही मेरी तरफ बढ़ा मैने अपने दोनो हाथो पर ज़ोर लगाया और हवा में उड़के सीधा वैदके उपर उच्छल गया
वैद कुछ कर पाता उससे पहले ही मैं वैद की गर्दन अपने दोनो पैरो में फँसा कर तोड़ चुका था
वैद भी वहीं पे ढेर हो गया
वैद के मरते ही मैं भी ज़मीन पे लेट गया
और लंबी लंबी साँसे लेने लगा
मेरे सीने और मेरे पेट से खून बहने लगा
दिलीप- वहाँ पे खड़ी क्या रो रही हो जाके अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डालो और गाओं वालो को लेके आओ
[मीता मेरी बात जैसे सुनी ही नही
दिलीप- [चीखके] मीता अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डालो और गाओं वालो को लेके आओ
[मेरी बात सुनके मीता अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डाल दी और जल्दी से बाहर भाग गयी
और मैं बेहोश हो गया,,
दिलीप- मैं अपने बड़े मामा को जान से मारना चाहता हूँ
सॉरी मैं नही शक्ति
ऐसे ही पूरा दिन बीत गया
मैं बिस्तर पे पड़ा यही सोच रहा था
कि कब मैं अपने पैरो पे खड़ा हो पाउन्गा
क्यूंकी मुझे भी पता था कि मुझे 3 गोली लगी थी
एक तो दिल से 2 इंच दूर
उपर से पेशाब भी लग गया
मैं प्लेट जो टेबल पे पड़ा था वो नीचे गिरा दिया
जब मुझे यकीन हो गया कि कोई देख नही रहा है
मैं अपने दोनो हाथ बिस्तर से नीचे ज़मीन पे रक्खा और धीरे से अपने दोनो हाथो पे खड़ा हो गया
दर्द की तो नदी बहने लगी मेरे शरीर में
फिर मैं धीरे से रूम से बाहर आया लेकिन यह क्या बाथरूम ही नही था
अब मैं इतना मजबूर तो था नही कि पैंट में ही खाली कर लेता
फिर मुझे खिड़की दिखी
मैं खिड़की के पास गया एक हाथ पे खड़ा हो गया
अपनी पैंट खोला और अपनी टंकी खाली करने लगा
फिर मैं अपनी पैंट पहन्के वापस आने लगा
तभी मुझे ख्याल आया कि यहाँ तो अपने ही सबसे बड़े दुश्मन हैं
मैं अपने हाथो पे चलते हुए रसोई में आया और एक चाकू अपनी पैंट में घुसा कर बेड पे आके लेट गया
मेरे पैर और हाथ एक जैसे हैं
मतलब मैं जितनी देर पैरो पे चल सकता हूँ
उतनी ही देर अपने हाथो पे
भी चल सकता हूँ
थोड़ी देर बाद श्याम जी आ गए मुझे देखने
मैने श्याम जी को नमस्ते किया फिर वो बाहर चले गये
[ठीक 1 घंटे बाद मुखिया और वैद श्याम के घर पहुँचे
वैद के हाथो में मीठाई का डब्बा था
जो वो श्याम को दे दिया
थोड़ी देर बाद श्याम की बीवी खाना परोस दी
वैद- अरे श्याम भाई क्या मुझसे ग़लती हुई है
श्याम- ऐसा क्यूँ बोलते है वैद जी
वैद- मैं तुम्हारे लिए इतने प्यार से मीठा लेके आया
और तुमने खाया है नही
श्याम- ऐसी बात नही है वैदजी
[श्याम अपनी बीवी को देखने लगा
श्याम की बीबी रसोई में गयी और एक प्लेट में मीठा परोसके ले आई
श्याम- वैदजी आज कोई बड़ा दिन है जो आप मीठा लेके आए हैं
वैद- मेरी बहू पेट से है
श्याम- बधाई हो वैद जी बधाई
मुखिया- बिटिया नही दिख रही है
श्याम- अपने मामा के घर गई है
[यह सुनके दोनो का दिल टूट गया]
[श्याम अपनी बीवी को लेके रूम में गया
मुखिया- अबे यह क्या हो गया
वैद- तू इतना क्यूँ बेचैन हो रहा है
आज श्याम की बीवी से काम चला लेंगे
मुखिया- ठीक है यार
[श्याम और उसकी बीवी रूम से बाहर आ गए
श्याम की बीबी के हाथ में चाँदी का कंगन था
श्याम की बीबी वैद को वो कंगन दे दी
श्याम- यह आपकी बहू के लिए
[वैद वो कंगन ले लिया फिर सब खाना खाने लगे
खाना खाने के बाद आई मीठाई की बारी
वैद- श्याम पहले तुम और भाभी मुँह मीठा करो
[श्याम और उसकी बीवी एक मीठाई खा ली
थोड़ी देर बाद दोनो की आँखे भारी होने लगी और थोड़ी ही देर में दोनो बेहोश हो गये
मुखिया और वैद दोनो नंगे हो गये
और श्याम की बीबी को भी नंगा कर दिए
श्याम की बीबी को देख कर दोनो की आँखें चमक गयी
दोनो जैसे आगे बढ़े
मीता गेट खोलके अंदर आ गई
मीता अपनी माँ की हालत देख कर चीख पड़ी
[मीता की चीख सुनके मैं तेज़ी से अपने दोनो हाथो पे चलके बाहर आ गया
बाहर का नज़ारा देख कर मैं दंग रह गया
श्याम की बीबी नंगी खाट पे पड़ी थी और वैद और मुखिया नंगे मीता को पकड़े हुए थे
वैद पीछे से मीता का मुँह बंद किए हुए था
और मुखिया मीता के कपड़े फाड़ने की कोशिश कर रहा था
मैं अपनी पॅंट से चाकू निकाला और एक हाथ पे खड़ा होके दूसरे हाथ से चाकू फेंक दिया
चाकू सीधा मुखिया के सर के पिछछले हिस्से में घुस गया मुखिया तड़प्ते हुए वहीं पे ढेर हो गया मतलब मर गया
यह सब देख कर वैद की फॅट गयी
वैद मीता को छोड़ कर जैसे ही मेरी तरफ बढ़ा मैने अपने दोनो हाथो पर ज़ोर लगाया और हवा में उड़के सीधा वैदके उपर उच्छल गया
वैद कुछ कर पाता उससे पहले ही मैं वैद की गर्दन अपने दोनो पैरो में फँसा कर तोड़ चुका था
वैद भी वहीं पे ढेर हो गया
वैद के मरते ही मैं भी ज़मीन पे लेट गया
और लंबी लंबी साँसे लेने लगा
मेरे सीने और मेरे पेट से खून बहने लगा
दिलीप- वहाँ पे खड़ी क्या रो रही हो जाके अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डालो और गाओं वालो को लेके आओ
[मीता मेरी बात जैसे सुनी ही नही
दिलीप- [चीखके] मीता अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डालो और गाओं वालो को लेके आओ
[मेरी बात सुनके मीता अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डाल दी और जल्दी से बाहर भाग गयी
और मैं बेहोश हो गया,,