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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 175

दिलीप- मैं अपने बड़े मामा को जान से मारना चाहता हूँ

सॉरी मैं नही शक्ति

ऐसे ही पूरा दिन बीत गया

मैं बिस्तर पे पड़ा यही सोच रहा था

कि कब मैं अपने पैरो पे खड़ा हो पाउन्गा

क्यूंकी मुझे भी पता था कि मुझे 3 गोली लगी थी

एक तो दिल से 2 इंच दूर

उपर से पेशाब भी लग गया

मैं प्लेट जो टेबल पे पड़ा था वो नीचे गिरा दिया

जब मुझे यकीन हो गया कि कोई देख नही रहा है

मैं अपने दोनो हाथ बिस्तर से नीचे ज़मीन पे रक्खा और धीरे से अपने दोनो हाथो पे खड़ा हो गया

दर्द की तो नदी बहने लगी मेरे शरीर में

फिर मैं धीरे से रूम से बाहर आया लेकिन यह क्या बाथरूम ही नही था

अब मैं इतना मजबूर तो था नही कि पैंट में ही खाली कर लेता

फिर मुझे खिड़की दिखी

मैं खिड़की के पास गया एक हाथ पे खड़ा हो गया

अपनी पैंट खोला और अपनी टंकी खाली करने लगा

फिर मैं अपनी पैंट पहन्के वापस आने लगा

तभी मुझे ख्याल आया कि यहाँ तो अपने ही सबसे बड़े दुश्मन हैं

मैं अपने हाथो पे चलते हुए रसोई में आया और एक चाकू अपनी पैंट में घुसा कर बेड पे आके लेट गया

मेरे पैर और हाथ एक जैसे हैं

मतलब मैं जितनी देर पैरो पे चल सकता हूँ

उतनी ही देर अपने हाथो पे

भी चल सकता हूँ

थोड़ी देर बाद श्याम जी आ गए मुझे देखने

मैने श्याम जी को नमस्ते किया फिर वो बाहर चले गये

[ठीक 1 घंटे बाद मुखिया और वैद श्याम के घर पहुँचे

वैद के हाथो में मीठाई का डब्बा था

जो वो श्याम को दे दिया

थोड़ी देर बाद श्याम की बीवी खाना परोस दी

वैद- अरे श्याम भाई क्या मुझसे ग़लती हुई है

श्याम- ऐसा क्यूँ बोलते है वैद जी

वैद- मैं तुम्हारे लिए इतने प्यार से मीठा लेके आया

और तुमने खाया है नही

श्याम- ऐसी बात नही है वैदजी

[श्याम अपनी बीवी को देखने लगा

श्याम की बीबी रसोई में गयी और एक प्लेट में मीठा परोसके ले आई

श्याम- वैदजी आज कोई बड़ा दिन है जो आप मीठा लेके आए हैं

वैद- मेरी बहू पेट से है

श्याम- बधाई हो वैद जी बधाई

मुखिया- बिटिया नही दिख रही है

श्याम- अपने मामा के घर गई है

[यह सुनके दोनो का दिल टूट गया]

[श्याम अपनी बीवी को लेके रूम में गया

मुखिया- अबे यह क्या हो गया

वैद- तू इतना क्यूँ बेचैन हो रहा है

आज श्याम की बीवी से काम चला लेंगे

मुखिया- ठीक है यार

[श्याम और उसकी बीवी रूम से बाहर आ गए

श्याम की बीबी के हाथ में चाँदी का कंगन था

श्याम की बीबी वैद को वो कंगन दे दी

श्याम- यह आपकी बहू के लिए

[वैद वो कंगन ले लिया फिर सब खाना खाने लगे

खाना खाने के बाद आई मीठाई की बारी

वैद- श्याम पहले तुम और भाभी मुँह मीठा करो

[श्याम और उसकी बीवी एक मीठाई खा ली

थोड़ी देर बाद दोनो की आँखे भारी होने लगी और थोड़ी ही देर में दोनो बेहोश हो गये

मुखिया और वैद दोनो नंगे हो गये

और श्याम की बीबी को भी नंगा कर दिए

श्याम की बीबी को देख कर दोनो की आँखें चमक गयी

दोनो जैसे आगे बढ़े

मीता गेट खोलके अंदर आ गई

मीता अपनी माँ की हालत देख कर चीख पड़ी

[मीता की चीख सुनके मैं तेज़ी से अपने दोनो हाथो पे चलके बाहर आ गया

बाहर का नज़ारा देख कर मैं दंग रह गया

श्याम की बीबी नंगी खाट पे पड़ी थी और वैद और मुखिया नंगे मीता को पकड़े हुए थे

वैद पीछे से मीता का मुँह बंद किए हुए था

और मुखिया मीता के कपड़े फाड़ने की कोशिश कर रहा था

मैं अपनी पॅंट से चाकू निकाला और एक हाथ पे खड़ा होके दूसरे हाथ से चाकू फेंक दिया

चाकू सीधा मुखिया के सर के पिछछले हिस्से में घुस गया मुखिया तड़प्ते हुए वहीं पे ढेर हो गया मतलब मर गया

यह सब देख कर वैद की फॅट गयी

वैद मीता को छोड़ कर जैसे ही मेरी तरफ बढ़ा मैने अपने दोनो हाथो पर ज़ोर लगाया और हवा में उड़के सीधा वैदके उपर उच्छल गया

वैद कुछ कर पाता उससे पहले ही मैं वैद की गर्दन अपने दोनो पैरो में फँसा कर तोड़ चुका था

वैद भी वहीं पे ढेर हो गया

वैद के मरते ही मैं भी ज़मीन पे लेट गया

और लंबी लंबी साँसे लेने लगा

मेरे सीने और मेरे पेट से खून बहने लगा

दिलीप- वहाँ पे खड़ी क्या रो रही हो जाके अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डालो और गाओं वालो को लेके आओ

[मीता मेरी बात जैसे सुनी ही नही

दिलीप- [चीखके] मीता अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डालो और गाओं वालो को लेके आओ

[मेरी बात सुनके मीता अपनी माँ के जिस्म पे कपड़ा डाल दी और जल्दी से बाहर भाग गयी

और मैं बेहोश हो गया,,

 


अपडेट 175ए

दिलीप- जब मुझे होश आया तो बहुत से लोग मेरे पास खड़े थे

मैं बेड पे पड़ा था

वैसे कुछ लोग मुझे घूर भी रहे थे

श्याम जी मेरे पैरो के पास बैठे थे

श्याम- शक्ति बाबू अगर आज तुम नही होते तो

दिलीप- यह सब किसी को मत बताना और दोनो की लाश नदी में फिकवादो कहना कि बोट से गिर गये

और कोई गाओं वाला इसके खिलाफ हो तो वो यह याद रखे कि श्याम जी की जगह वो और उसकी बीवी भी हो सकते थे

और हां मुझे एक मोबाइल चाहिए

1 घंटे में

[ मेरी बात सुनके सब चले गये

और मैं वेट करने लगा एक फोन का

श्याम जी एक घंटे के अंदर ही मेरे लिए फोन लेके आ गया

मैं नंबर डाइयल किया

आदमी- पासवर्ड

दिलीप- तिरंगा

आदमी- नेम

दिलीप- कमॅंडो शक्ति शिवराज चौहान

आदमी- होल्ड प्लीज़

शिवराज- हेलो

[पापा कितने दिन बाद आपकी आवाज़ सुन रहा हूँ]

दिलीप- कमॅंडो शक्ति शिवराज चौहान रिपोर्टिंग सर

शिवराज- 2 साल के बाद तुम्हारी आवाज़ सुन रहा हूँ

लगता है तुमने अपना काम कर दिया

दिलीप- अभी नही

शिवराज- तुम्हारी लोकेशन ट्रेस हो गयी है

दिलीप- 1 करोड़ रुपया और एक आंब्युलेन्स

शिवराज- 2 घंटे

आंड सॉरी

दिलीप- पापा

शिवराज- मैं आज भी तुम्हारा चेहरा देखने के लिए तड़प रहा हूँ

काश मैं अपनी नफ़रत को दबा देता

काश मैं धर्मेश को माफ़ कर पाता

दिलीप- उसको माफ़ नही उसको सॉफ करूँगा वो भी इस दुनिया से

शिवराज- 2 साल तक तुम कहाँ थे

दिलीप- पता नही कुछ याद ही नही है

मैं बाद में आपको पूरी बात बताउन्गा

[फिर मैने फोन कट कर दिया]

और सो गया

2 घंटे बाद आंब्युलेन्स मुझे लेने आने वाली थी

...............................

[उधर वँया बहुत कोशिश कर रही थी कि विदू कुछ खा ले

वँया को कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे तभी उसे एक आइडिया आया

बेचारी खुद भी जी भरके रोना चाहती थी

लेकिन रो भी नही पा रही थी

वँया विदू के पास गयी

वँया- दीदी कुछ खा लो ना

विदू- वो आ गए

वँया- नही उनका फोन आया था वो कह रहे थे कि मेरी विदू को कहना कि जब तक मैं ना आ जाऊ वो वँया के हाथो से खाना खा ले

विदू- तू झूठ बोल रही है

वँया- आपकी कसम

विदू- [रोते हुए] मैं जानती हूँ तू झूठ बोल रही है

फिर भी मैं तेरी बात मान रही हूँ

वँया- [दीदी आप तो सबके सामने रो लेती हैं

लेकिन मैं क्या मेरा दुख किसी को नही दिखता है]

फिर वँया विदू को अपने हाथो से खाना खिलाने लगी

[बड़े मामा लखन पे चीख रहे थे लखन बेचारा चुप चाप सुन रहा था

बड़ी मामी बड़ी नानी से बात कर रही थी लेकिन बड़ी नानी कुछ बोलती ही नही थी

किरण मौसी को अभी तक पता नही चला था

[इधर मेरे लिए आंब्युलेन्स और 1 करोड़ रुपया आचुका था

सब गाओं वाले परेशान थे कि उनके गाओं में गाड़ी किस लिए आई है

आंब्युलेन्स में से मेरा एक दोस्त निकला रॉकी

मेरा पुराना साथी

रॉकी मुझे देख कर मेरे गले लग गया और रोने लगा

दिलीप- क्या अभी भी बच्चो की तरह रोता है मैं मरा नही हूँ

[मेरी बात सुनके रॉकी मेरे गाल पे थप्पड़ मार दिया

रॉकी- 2 साल से तुझे ढूँढ रहा हूँ

एक तो सबको बताके गया कि तेरा लास्ट लोकेशन इटली में कहीं है

दिलीप- अब मिल गया ना जल्दी ले चल यार बहुत दर्द हो रहा है

[तभी श्याम जी मेरे पास आ गए

श्याम- शक्ति बाबू यह तुम किस भाषा में बात कर रहे हो

और यह लोग कौन हैं

दिलीप- [दरअसल मैं और रॉकी इटॅलियन लॅंग्वेज में बात कर रहे थे]

यह मुझे ले जाने आए हैं

[मैने रॉकी को इशारा किया]

रॉकी बॅग लेके आ गया

और श्याम जी को दे दिया

श्याम- इसमें क्या है शक्ति बाबू

दिलीप- 1 करोड़ रुपया और ना मत कहिएगा

क्यूंकी अगर मेरे पापा मेरी जगह होते तो वो आपको 100 करोड़ देते

इसी लिए रख लीजिए और कल मेरा एक आदमी आपके पास आएगा और यह पैसे आपके नाम पे बॅंक में रख देगा

जब जितना चाहो निकाल लेना

श्याम की पत्नी मुझे हाथ जोड़के थॅंक्स कहने लगी

फिर रॉकी मुझे एक इंजेक्षन लगा दिया मैं फिर से बेहोश हो गया

उसके बाद मुझे आंब्युलेन्स में डाला गया आंब्युलेन्स चल पड़ी

मीता भीगी आँखो से मुझे जाते हुए देखती रह गई...

 


अपडेट 176

दिलीप- जब मुझे होश आया तो मैं वहाँ था जहाँ मेरा सीक्रेट सेंटर था

वैसे यह मेरे पापा का सीक्रेट सेंटर है

वो क्या है कोई कमॅंडो बन जाए यही उसके लिए काफ़ी होता है

लेकिन मैं किसी भी तरह दूसरो का ऑर्डर नही लेता

मुझे मिशन दिया जाता है

बाकी मेरे सब कुछ बाइक्स कार्स बड़ी से बड़ी गाड़िया और छोटी से छोटी गाड़िया

और बॉंब्स का तो मैं दीवाना हूँ

हर तरह के से एक गॅडजेट्स और डॉक्टर के एक्सप्लोसिव्स की 10 स्पेशल टीम्स जो हर स्तिथि में अपना काम पूरा करती है

जैसे मेरा कर चुकी थी

इलाज

डॉक्टर्स का कहना था कि दो दिन में मैं पूरी तरह से ठीक हो जाउन्गा

दो दिन भी बीत गया और मैं रेडी था

रॉकी मेरे पास आ गया

रॉकी- यार तू मुझे एक बात बता अगर तू इटली मिशन कंप्लीट कर चुका था

तो फिर तू इटली से गायब कहाँ हो गया

दिलीप- 2 साल पहले तक की हर बात याद है

लेकिन उसके बाद की कोई बात याद नही है

वैसे तेरी बीवी कहाँ है

रॉकी- पहले तू यह बता कि तुझे कुछ याद क्यूँ नही है

दिलीप- देख जब मैं इटली से वापस तो मेरे पापा ने मुझे वो बात बताई जिससे कि मैं गुस्से की आग में जलने लगा

यहीं मुझसे ग़लती हो गई

तुझे तो पता है मैं अपने एमोशन कंट्रोल कर सकता हूँ

मैं जब उस आदमी से बदला लेने गया तो मुझपे हमला हो गया

मुझे इतना ही याद है कि मेरे दिल में गोली लगी थी

रॉकी- तेरे दिल में गोली लगी थी फिर भी तू जिंदा है

[तभी रॉकी किसी सोच में पड़ गया

उसके चेहरे को मैं पढ़ रहा था

रॉकी रूम से बाहर चला गया

मैं समझ गया कि रॉकी बहुत परेशान है

थोड़ी देर बाद रॉकी वापस मेरे रूम में आ गया

उसके हाथ में दो फाइल्स थी

वो दोनो फाइल्स रॉकी मेरे हाथ में रख दिया

रॉकी- साला तेरे साथ ज़रूर बहुत बुरा हुआ यह तेरी 2 साल पहले की मेडिकल रिपोर्ट और यह अभी की

दोनो को पढ़ और देख

मैं दोनो फाइल्स को पढ़ने लगा जैसे ही मैं अपनी मेडिकल रिपोर्ट पढ़ा मेरा दिमाग़ घूम गया

मैं रॉकी को आँखें फाड़ फाड़के देखने लगा

रॉकी- देखा तेरी हार्ट सर्जरी नही हुई है

तेरे सीने में जो दिल था उसे निकालके किसी और का दिल तेरे सीने में फिट किया गया है

दिलीप- यह हो ही नही सकता

मेरे सीने में किसी और का दिल

रॉकी- और एक बात तेरे चेहरे की सर्जरी भी हुई है

तू 18 19 साल की उमर में जैसा दिखता था वैसा ही तू अभी दिखता है

दिलीप- मतलब मैं हूँ 24 साल का

लेकिन मैं दिखता हूँ 18 19 साल का

रॉकी- कोई तेरे साथ बहुत बड़ा गेम खेल रहा है

दिलीप- वो मुझे भी पता है

पहले तू पता लगा कि ठाकुर धर्मेश वीर प्रताप सिंग कहाँ है

[रॉकी चला गया मैं सोच में डूब गया

कि यह मेरे साथ क्या हो रहा है 2 साल पहले की बात मुझे याद ही नही आती है

उपर से मेरे सीने में किसी और का दिल

यह कैसे हो सकता है

थोड़ी देर बाद रॉकी आ गया

रॉकी- तेरे लिए एक गुड न्यूज़ है

दिलीप- क्या

रॉकी- यही कि तू ठाकुर धर्मेश का भांजा है

जो 10 दिन पहले होममिनिस्टर की तरफ से करवाए गये हमले में खो गया था

दिलीप- [रॉकी की बात सुनके मैं उसकी गर्दन पकड़ा और झटक दिया

दूसरा कोई रहता तो उसकी गर्दन टूट चुकी होती

पर रॉकी भी एक कमॅंडो ही था

रॉकी- आराम से भाई अगर मुझे कुछ हो गया तो

दिलीप- ठाकुर मेरा मामा नही है वो मेरी माँ का भाई था

रॉकी- एक काम क्यूँ नही करता तू ठाकुर के घर उसका भांजा बनके चला जा

हो ना हो पिछले 2 सालो में क्या हुआ वो तुझे ठाकुर से ही पता चलेगा

इसके आगे क्या करना है वो तू खुद जानता है

दिलीप- उस इंसान का चेहरा देख कर मेरा खून खौल जाता है और तू बोल रहा है कि मैं उसके घर उसका भांजा बनके जाउ

एक मिनट एक मिनट यह ठाकुर का कौनसा भांजा है जो मेरी तरह दिखता है

रॉकी- तेरा भाई होगा

दिलीप- रॉकी

रॉकी- इसी लिए तो कह रहा हूँ तू ठाकुर के घर जा

दिलीप- मैं उसके घर नही जाउन्गा

रॉकी- तू कोई बच्चा नही है तू इंडिया का यंगेस्ट कमॅंडो है

और तू डर रहा है

दिलीप- बात डर की नही है

बात यह है कि मैं जिस इंसान को मारना चाहता हूँ

उसी इंसान के साथ रहूँगा

इससे अच्छा तो मैं ठाकुर को ऐसे ही मार दूं

रॉकी- तू कोई क्रिमिनल नही है

तू अगर किसी की जान लेता है तो तेरे पास कोई वजह होनी चाहिए

इसी लिए तू अपनी पर्सनल रीजन को साइड कर

ठाकुर के घर जा उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा कर

और उसे मार दे

याद रख हम जब कमॅंडो बनते है उससे पहले हम कसम खाते हैं

कि हमारे हाथो किसी बेगुनाह की जान नही जाएगी

तू मुखिया और वैद को इसलिए मारा ताकि तू श्याम जी की बीवी और उसकी बेटी की इज़्ज़त बचाना चाहता था

अब अगर तू ठाकुर को मारता है और अगर वो निर्दोष हुआ

तो हमारी धरती माँ की इज़्ज़त का क्या होगा

[यह बोलके रॉकी चला गया

मैं बहुत सोचा

और तय्यार हो गया

ठाकुर के घर जाने के लिए

रॉकी मुझे ठाकुर के घर लेके जाएगा

मैं अपनी याददाश्त खो चुका हूँ

मुझे कुछ याद नही है

मैं रॉकी के पास गया

दिलीप- चल एक बूढ़े का गेट अप कर और मुझे ठाकुर के घर ले चल

[रॉकी बिना कुछ कहे एक बूढ़े के गेटप में आ गया

मैं कार की पिच्छली सीट पे सो गया

और रॉकी ठाकुर के घर की तरफ जाने लगा

ठाकुर के घर से जाने से पहले ही मैं दस कमॅंडो को अपने पिछे लगा चुका था

मेरे नीचे 20 कमॅंडो काम करते हैं कुछ वो मुझसे सीखते हैं

कुछ मैं उनसे सीखता हूँ...

 
aakashwani007 wrote: ↑ 24 Oct 2018 17:25
bhai par orignal dilip ka kya hua?

kuch samaz ni aaya.
 


अपडेट 176ए

दिलीप- थोड़ी देर बाद हमारी कार छोटे मामा के घर के बाहर पहुँची

रॉकी कार से उतर के सेक्यूरिटी गार्ड के पास गया

फिर उन दोनो में कुछ बातें होने लगी

फिर सेक्यूरिटी गार्ड अंदर गया

लखन के पास

सेक्यूरिटी गार्ड की बात सुनके लखन दौड़ते हुए बाहर आया

कार का गेट खोलके मुझे देखा

फिर हमारी कार घर में एंटर हुई

लखन घर में गया बड़े मामा किसी से बात कर रहे थे

लखन- मालिक

[बड़े मामा लखन को घुरके देखे

लखन- छोटे मालिक

[यह सुनते ही बड़े मामा के हाथ से मोबाइल नीचे गिर गया

बड़े मामा- लखन

लखन- छोटे मालिक गाड़ी में बेहोश पड़े हैं एक आदमी उन्हे लेके आया है

[बड़े मामा दौड़के कार के पास पहुँचे मुझे गोद में उठाए और हॉल में पहुँचके मुझे सोफे पे लेटा दिए

[मेरा यानी शक्ति का खून खौल रहा था कि वो अपने दुश्मन की गोद में है

बड़े मामा- लखन इन्हे[रॉकी को] गेस्ट रूम में बैठाओ

[लखन रॉकी को अपने साथ ले गया]

[सीढ़ियो से बड़ी मामी उतर रही थी वो मुझे सोफे पे देख कर दौड़ के उपर बड़ी नानी के रूम में गयी

बड़ी नानी बैठके कुछ सोच रही थी

बड़ी मामी- [हान्फते हुए] बड़ी माँ

बड़ी नानी- बहू इतना हाँफ क्यूँ रही हो

बड़ी मामी- दिलीप नीचे हॉल में है

[बड़ी मामी आगे कुछ बोल पाती उससे पहले ही बड़ी नानी दौड़ते हुए नीचे हॉल में आ गई

बड़ी नानी को देख कर बड़े मामा वहाँ से उठ गये

और गेस्ट रूम में गये

बड़ी नानी मेरा सर अपनी गोद में रखके रोने लगी

[शक्ति को तो कुछ समझ ही नही आ रहा था की यह क्या हो रहा है]

बड़े मामा रॉकी से कुछ बात कर रहे थे

बड़े मामा- आपका बहुत बहुत शुक्रिया भाई साहब हम आपका यह अहसान ज़िंदगी भर नही भूलेंगे

रॉकी- इसकी कोई ज़रूरत नही है

बड़े मामा- आपको दिलीप कहाँ मिला

रॉकी- दिलीप

यह नदी में बहते हुए एक जाल में फँस गया जब मछुआरे ने इसे निकाला तो यह बेहोश था

मछुआरे ने इसका इलाज किया

जब इसे होश आया तो इसे अपनी पिच्छली जिंदगी के बारे में कुछ याद नही था

यह अपनी याददाश् खो चुका था

मैं इसी शहर का हूँ

मेरा बेटा किसी काम से गाओं गया था

मेरा बेटा इसकी फोटो पोस्टर में देखा था

इसी लिए मेरा बेटा इसे हमारे घर ले आया

और मैं इसे आपके पास

[रॉकी की बात सुनके बड़े मामा को तो यकीन ही नही हुआ]

बड़े मामा- लखन इन्हे इनका इनाम दे दो

[लखन 1करोड़ रुपया से भरा बॅग रॉकी को दे दिया

रॉकी वो बॅग अपनी गाड़ी में डाला और चलता बना

बड़े मामा- याददाश्त चली गयी आई कब थी

[इधर मैं यानी शक्ति बहुत बड़ी दुविधा में फँसा था

हाँ मैं ठाकुर को मारना चाहता था

लेकिन किसी के एमोशन के साथ कैसे खेलु

मैं अपनी आँखें खोल दिया

4 या 5 लड़किया मुझे देख कर रो रही थी

[इससे पहले कि कोई कुछ बोल पाता बड़े मामा आके सबको अपने साथ ले गये

बड़े मामा को देख कर मेरा यानी शक्ति का खून खौल उठा

[विदू और वँया को पता नही था कि दिलीप वापस आ गया है]

इधर मुझे यानी शक्ति को पायल की छन छन सुनाई देने लगी

मैं सोचा अब यह क्या हो रहा है

अपने आप मेरी गर्दन दूसरी तरफ घूम गयी

जिस तरफ सीढ़िया थी

मेरी नज़र उपर को उठने लगी

मैं बार बार अपने आपको समझा रहा था

लेकिन पता नही किसका दिल फिट था मेरे सीने में मान ही नही रहा था

मेरे उपर उठते हुए एक जगह ठहर गयी

जहाँ पे एक लड़की खड़ी थी

उस लड़की को देख कर मेरी साँसे थम गयी

मैं कमॅंडो शक्ति शिवराज चौहान को लगा कि आज इस लड़की के चाँद से मुखड़े को देखते हुए मैं मर भी जाउ तो कोई गुम नही होगा

मैं अपनी नज़र हटाना चाहता था कि लेकिन यह दिल,,,,,,,,,,

तभी एक लड़की जो ठाकुर के साथ गयी थी [अरुणा दी]बोली- वँया वहाँ सीढ़ियो पे क्या कर रही है

[मुझे यानी शक्ति को वँया सुनके ऐसा लगा जैसे किसीने मेरे दोनो कान में शहद घोल दिया है

मैं यानी शक्ति लगातार वँया को देखे जा रहा था

जब मैने देखा कि उसकी आँखो से आँसू बह रहे हैं

मुझे ऐसा लगा कि मैं भी रो दूँगा,..

 
अपडेट 177

दिलीप- [मैं यानी शक्ति वँया की आँखो में आँसू देख कर खड़ा हो गया

[उधर बड़े मामा सबको बता रहे थे कि दिलीप की याददाश्त जा चुकी है उसे कुछ भी याद नही है

यह सुनके बड़ी नानी टूट सी गयी

और मेरी बहनो का भी यही हाल था

सब रूम से बाहर आके मुझे देखने लगी]

इधर मैं खड़ा हो गया और सीढ़ियो पे चढ़ते हुए वँया के पास पहुँचा

आज मेरा दिल मेरे काबू में नही था मैं बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन पता नही मुझे क्या हो गया

तभी वँया मेरा हाथ पकड़ ली और मुझे अपने साथ ले जाने लगी

मुझे तो बहुत शरम आ रही थी

आज तक मैं किसी लड़की को टच नही किया था

[यह शक्ति का मानना था दिलीप का नही]

वँया मुझे अपने साथ ले गयी और एक रूम में छोड़के बाहर से गेट लॉक कर दी

मेरी तो कुछ समझ में ही नही आ रहा था

मैने देखा एक लड़की बेड पे बैठी रो रही है

रो रो के उसकी आँखें सूज गयी है

मैं उसके पास गया

मुझे देख कर वो मेरे गले लग गयी और रोने लगी

मैं तो कुछ समझ ही नही पाया

एक तरफ मैं ठाकुर को मारना चाहता था

दूसरी तरफ उसी के घर की एक लड़की से मैं

तीसरी तरफ एक लड़की मेरे गले लग्के फुट फुट के रो रही थी

मैं कोशिश कर रहा था कि मैं इस लड़की को खुद से अलग करूँ लेकिन मेरा हाथ उठ ही नही रहा था

लेकिन हद तो तब पार हो गयी जब वो लड़की मेरे पूरे चेहरे को चूमने लगी

मैं उस लड़की को धकिया दिया वो लड़की बेड पे गिर गयी

और मुझे देखने लगी

तभी गेट [और बड़े मामा अंदर आए

और मेरा यानी शक्ति का हाथ पकड़ कर अपने साथ ले गये एक रूम में गेट लॉक करके मुझे देखने लगे

मेरा यानी शक्ति का तो खून खौल गया

बड़े मामा- तुम यहाँ क्यूँ आए हो

दिलीप- मैं कहाँ आया हूँ मुझे तो वो अंकल लेके आए हैं

[मेरी बात सुनके बड़े मामा मेरे यानी शक्ति के पास आए

और मेरी आँखो में देखने लगे

बड़े मामा- मॅन तो मॅन फेस टू फेस

हम जानते हैं कि तुम्हारी कोई याददाश्त नही गयी है

[यह सुनके मुझे यानी शक्ति को यकीन ही नही हुआ क्यूंकी मैं अपने एक्सप्रेशन को पूरी तरह छिपा सकता हूँ

कोई मेरा चेहरा नही पढ़ सकता है]

दिलीप- आप क्या बोल रहे हैं मेरी कुछ समझ में नही आ रहा है

बड़े मामा- [मुस्कुरा कर] भानजे तुम हमे क्या बेवकूफ़ समझते हो

हम ह्यूमन साइकॉलजी में पीएचडी कर चुके हैं

तो अब हमे यह बताओ कि तुम यह सब क्यूँ कर रहे हो

दिलीप- सबसे पहली बात मैं तुम्हारा भांजा नही हूँ

दूसरी बात मेरी कोई याददाश्त वापस नही गयी है

मैं सच बताता हूँ

मैं आपको मारना चाहता हूँ

लेकिन मेरा एक दोस्त है जिसके लिए मैं जानना चाहता हूँ

कि सच क्या है

वैसे आपको पता कैसे चला कि मैं नाटक कर रहा हूँ

बड़े मामा- वो इस लिए कि एक ही इंसान की याददाश्त दो बार नही जा सकती

एक बात बताओ तुम हमे मारना क्यूँ चाहते हो

दिलीप- मेरे पापा कहते हैं कि मेरी माँ की मौत के ज़िम्मेदार आप हैं

बड़े मामा- तुम्हारे पापा का नाम

दिलीप- राजवीर चौहान

बड़े मामा- तुम्हे पता है ना कि तुम्हारे असली पिता मर चुके हैं

दिलीप- असली पिता का क्या मतलब हुआ

राजवीर चौहान ही मेरे असली पिता हैं

बड़े मामा- तुम कुछ नही जानते

दिलीप- आपको क्या लगता है आप बोलेंगे और मैं मान जाउन्गा

सच कह रहा हूँ पता नही क्यूँ आपको देख कर तरस आता है

बड़े मामा- मुझपे यकीन नही करना है मत करो

लेकिन एक ऐसा इंसान है जिसपे तुम यकीन करोगे

दिलीप- इस दुनिया में मेरा मेरे पापा के सिवा कोई नही है

बड़े मामा- 2 दिन के लिए अपनी नफ़रत ख़तम कर लो

2 दिन बाद तुम्हारे हर सवाल का जवाब तुम्हे मिल जाएगा

हम ठाकुर धर्मेश वीर प्रताप सिंग तुम्हे वचन देते हैं

कि तुम सच्चाई जानने के बाद भी अगर हमे मारना चाहोगे तुम हमारा गला दबा देना हम उफ्फ तक नही करेंगे

लेकिन एक बात याद रखना अगर तुम बिना सच्चाई जाने कुछ ग़लत कदम उठाओगे तो तुम्हारी माँ की रूह को बहुत तकलीफ़ होगी

[यह सुनकर मैं यानी शक्ति सोच में पड़ गया

[उधर बड़ी मामी विदू से कुछ बाते कर रही थी

बड़ी मामी- दिलीप को जबसे होश आया है तबसे वो दिमागी रूप से कमज़ोर हो गया है

अगर तू उसपे ज़ोर डालेगी तो वो और कमज़ोर हो जाएगा

विदू- [रोते हुए] माँ यह ठीक तो हो जाएँगे ना

बड़ी मामी- बेटी तू सब्र रख और अपने आपको संभाल

विदू- माँ मैं क्या करूँ जब भी वो मेरे सामने आते हैं मैं कमजोर हो जाती हूँ

बड़ी मामी- अगर उसे कुछ हो गया तो

विदू- माँ

बड़ी मामी- बस यही सोचके अपने आपको संभाल

[इधर मैं सोच लिया कि सिर्फ़ दो दिन की बात है मेरा क्या जाता है

मैं रूम से बाहर आ गया और सीढ़ियो पे बैठ गया...

 


अपडेट 178

दिलीप- मैं सीढ़ियो पे बैठा हुआ था तभी कोई मेरे कंधे पे हाथ रख दिया

मैं मूड कर देखा तो यह वँया थी

वँया को देखते ही मैं सब कुछ भूल गया

मैं सोच लिया कि मैं 2 दिन तक सबके साथ नॉर्मल रहूँगा

सिर्फ़ वँया के लिए

वँया- क्या हुआ यहाँ पे क्यूँ बैठे हो

[एक बार फिर वँया की मीठी आवाज़ सुनके मैं खो गया

वँया- दिलीप

दिलीप- आप कौन हैं

वँया- तुम्हारी बेस्ट फ़्रेंड

दिलीप- अच्छा

वँया- क्या हो गया

दिलीप- कुछ नही

वँया- चलो खाना खाने

[मैं खड़ा हो गया और वँया के साथ हॉल में गया वहाँ सब डाइनिंगटेबल पे बैठे थे

मैं भी बैठ गया मुझे वो लड़की नही दिखी जो थोड़ी पागल थी

[मैं जब खा रहा था तो सब लड़किया मेरे पास अपनी प्लेट के साथ आ गई

और मुझे एक एक नीवाला खिलाने लगी

मुझे खाना ही पड़ा

मैं सोचने लगा कि क्या ड्रामा है ठाकुर का कोई भांजा नही है क्यूंकी मेरा कोई भाई नही है

मैं खाना ख़ाके वहीं पे बैठा रहा

फिर मैं उठके एक रूम में चला गया

[विदू एक कोने से मुझे छिप छिप्के देख रही थी रो भी रही थी लेकिन वो आँसू खुशी के थे इतने दिनो बाद अपने प्यार को देखने की खुशी]

मेरे पास वँया आई

और मेरे पास बैठ गयी

मैं वँया को देखने लगा

वँया भी मुझे देखने लगी

तभी वँया की आँखो से आँसू बहने लगे

एक बार मैं तड़प उठा

क्या करूँ मैं समझ ही नही पा रहा था की यह क्या हो रहा है मेरे साथ

वँया मेरे सामने आती तो मैं सब कुछ भूल जाता हूँ

मैने अपनी जेब से रुमाल निकालके वँया को दिया

[क्या करूँ अगर खुद से आँसू पोछता तो वो मेरे बारे में कुछ ग़लत सोच बैठती

वँया मेरे हाथ से रुमाल लेके अपने आँसू पोछने लगी

फिर वो मुस्कुरा कर मेरे रूम से बाहर चली गयी

मैं बेड पे लेट गया पता नही ठाकुर किस लिए मुझे दो दिन रुकने के लिए बोल रहे थे

क्या करूँ पीछे में आदमी कितनी भी नफ़रत कर ले सामने में हालात कुछ और होते हैं

[उधर वँया अपने रूम में गुम सूम सी होके मेरी फोटो को देख रही थी

और कुछ बात भी कर रही थी

वँया- कितनी ग़लत बात है ना मैं तुम्हारे प्यार में मर भी जाउ तो तुम्हे पता भी नही चलेगा

लेकिन इससे भी ग़लत यह है कि तुम मेरी दीदी को भूल गये

वो तुमसे इतना प्यार करती हैं

वो तुम्हे सबसे उपर समझती हैं

लेकिन तुम किसी का नही सोचते जिससे चाहते हो लड़ते हो

जब देखो अपने आपको तकलीफ़ देते हो

एक बार तुम्हारी यादाश्त वापस आजाए फिर तुमसे बात भी नही करूँगी

पता है आज तुम जैसे मुझे देख रहे थे

मैं हमेशा चाहती थी तुम मुझे इतने ही प्यार से देखो

[फिर वँया फुट फुटके रोने लगी]

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[दूसरी तरफ रॉकी अपने बॉस से कुछ बात कर रहा था

रॉकी- सर मुझे नही लगता कि वो ठाकुर को मारेगा

शिवराज- तुम्हे लगता है कि मैं ठाकुर को मारना चाहता हूँ

नो माइ बॉय मैं सिर्फ़ सच्चाई पता करना चाहता हूँ

तुम्हे और शक्ति को मैं अपनी जान से बढ़के प्यार करता हूँ

रॉकी- कैसी सच्चाई सर

शिवराज- शक्ति की माँ अपने आखरी वक़्त में एक लेटर लिखी थी

और उस लेटर में शक्ति की माँ कुछ लिखी थी

रॉकी- बट सर आप तो कहते हैं

कि शक्ति की माँ की मौत ठाकुर की वजह से हुई थी

शिवराज- कुछ बाते ऐसी होती हैं जो बताई नही जाती

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[इधर मेरी यानी शक्ति की आँख लग गयी

मैं सोया हुआ था तभी एक लड़की के हँसने की आवाज़ मुझे सुनाई देने लगी

मैं एक झटके में उठ गया

और इधर उधर देखने लगा

लेकिन कोई नही था

अभी शाम ही हुई थी मैं उठके बैठ गया

और सोचने लगा कि क्या करूँ

मैं सोचा बाहर घूम लेता हूँ

लेकिन ऐसे तो जा नही सकता

खिड़की खोला 20 फीट नीचे ज़मीन थी

मैं एक झटके में कूद गया

शूकर है पैर नही टूटा वरना मुझे तीन गोलियाँ लगी थी

मैं सेक्यूरिटी से छिप्ते हुए घर से बाहर आ गया

थोड़ी दूर आके

मैं एक बाइक मँगवाया और उसी पे घूमने लगा

मैं सोचा घूमने से अच्छा अपने बच्चो से मिल लूँ

मैं बहुत सारी चॉक्लेट लिया और मैं पहुँचा अपने बच्चो के पास

पहले तो मुझे सब घूर्ने लगे

फिर सब मेरे गले लग गये

मैं सबको चॉक्लेट दिया

और सबके साथ खेलने लगा

खेलते हुए मिसेज़ वर्मा मेरे पास आ गई

मिसेज़ वर्मा- सर आप दो साल बाद इनसे मिलने आए हैं

और आपके चेहरे को क्या हुआ

दिलीप- मेरा चेहरा जल गया था इसीलिए मेरी प्लास्टिक सर्जरी हुई है

मिसेज़ वर्मा- सर आप इतने यंग लग रहे हैं

दिलीप- आप आज भी नही बदली

मिसेज़ वर्मा- सर मैं आपका एहसान कभी नही चुका सकती

आपकी वजह से मेरी बेटी जिंदा है

अगर आप मेरी बेटी और इन बच्चो को नही बचाते तो जाने क्या होता

दिलीप- अब मैं चलता हूँ

[2 साल पहले बच्चो की तस्करी हुई थी

मेरा काम उनसब बच्चो को बचाना था

उन्ही बच्चो में से एक मिसेज़ वर्मा की बेटी थी

सब बच्चो को तो मैने बचा लिया

लेकिन इनके माँ बाप नही मिले

सिर्फ़ मिसेज़ वर्मा मिली

मेरे पापा ने एक एनजीओ शुरू किया और उसकी हेड मिसेज़ वर्मा बन गयी

2 साल पहले 400 बच्चे थे अब सिर्फ़ 100 हैं

मैं वापस ठाकुर के घर की तरफ आने लगा...

 
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