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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना
वीर की आँखो से आँसू बहने लगते हैं
वीर- तुम्हारी माँ बहुत खुशनसीब है जो वो सुहागन मारी
धर्मेश- पिताजी माँ क्या कहके गयी
वीर- किरण और मीता एक ही दिन पैदा हुई थी
आशा ने जिस बच्ची को जन्म दिया था वो बच्ची मरी हुई थी
तुम्हारी माँ को जुड़वा लड़की हुई थी
तुम्हारी माँ ने ही कहा कि एक बच्ची मैं आशा की गोद में डाल दूं
मीता तुम्हारी सग़ी बहेन है
धर्मेश मैं तुम्हारी आँखो में जो नफ़रत देख रहा हूँ
उस पनपने मत देना
इस सब में उसकी कोई ग़लती नही है
[और वियर भी दम तोड़ देते हैं
सीढ़ियो पे खड़ी वीर की दोनो बेटी और उसकी दोनो बहू भी रो रही थी
[यही वो दिन था जब सब मीता से नफ़रत करते हैं और यह नफ़रत आगे चलके दिलीप को झेलनी पड़ती है]
धर्मेश खड़ा हो जाता है और जतिन के पास जाता है उसे अपने गले लगाके रोने लगता है
[जब धर्मेश अपने माता पिता के साथ था तब राज जतिन के जिस्म से गोली निकालके हवेली से चला जाता है]
पता नही कितनी देर तक धर्मेश जतिन को गले लगाए रोता है
जब धर्मेश की नज़र आशा पे पड़ती है तो वो उनके पास जाता है
धर्मेश अपनी बड़ी माँ को पुकारता है
लेकिन उसकी बड़ी माँ तो जिंदा लाश बन गयी थी
फिर वीर और संगीता का अंतिम संस्कार हो गया
जतिन अभी तक बेहोश था
जब उसे होश आता है तो वो बहुत रोता है
उस दिन जतिन समझदार और धर्मेश कठोर बन जाता है
[दूसरी तरफ मीता यह मान ही नही रही थी
कि उसके पिताजी अब इस दुनिया में नही रहे
जब सूरज मीता के पास उसे समझाने जाता है तब मीता सूरज को थप्पड़ मार देती है
मीता- तुम जानते थे कि मेरी शादी हो या ना हो हमला ज़रूर होगा
फिर भी तुम चुप रहे
क्यूँ क्यूँ
सूरज- मैं जब तुम्हे यहाँ ले आया तब मुझे खबर मिली
मेरा यकीन करो मैं तुमसे झूठ नही बोल रहा हूँ
मेरा इस दुनिया में तुम्हारे सिवा है ही कौन
मीता- मुझे घर जाना है
सूरज- नही जा सकती
रंजीत के आदमी चारो तरफ फैले हैं
वो मुझसे अपनी एक चीज़ चाहते हैं
जो मैं उन्हे नही दे सकता
मीता- क्या है तुम्हारे पास
सूरज- रंजीत ने जितने भी जुर्म किए हैं उन सब का सबूत है मेरे पास
मीता- दे दो उसे और मुझे घर पहुँचा दो
सूरज- रंजीत यह भी जानता है कि मैं उसे सबूत तभी दूँगा जब तुम उसके क़ब्ज़े में होगी
सबूत मिलने के बाद वो मुझे और तुम्हे ख़तम कर देगा
और जब तक मेरे पास सबूत है
तब तक वो तुम्हारे परिवार से दूर रहेगा...
मीता- सूरज झूठ बोलना तो कोई तुमसे सीखे
अगर वो मेरे परिवार से दूर रहता तो मेरी छोटी माँ और पिताजी की मौत नही होती
सूरज- मीता यह दो दिन पहले की बात है
मैने उसे एक लेटर लिखा था
कि अगर उसने अब तुम्हारे परिवार की तरफ उंगली भी उठाई तो मैं सारे सबूत पोलीस को दे दूँगा
मीता- सूरज तुम यह सब सिर्फ़ इस लिए कह रहे हो कि मैं तुमपे विश्वास करू और तुम मेरे जिस्म से खेल सको
सूरज- मीता तुम चाहे कुछ भी कह लो
लेकिन मैं तुम्हे कहीं जाने नही दूँगा
[इसी तरह एक महीना बीत जाता है
आशा की हालत में कोई सुधार नही आता
डॉक्टर्स का कहना था कि इन्हे बहुत गहरा सदमा लगा है
यह अब ऐसे ही रहेंगी
मीता रोज दिन सूरज को ऐसी बाते बोलती जिससे सूरज को बहुत तकलीफ़ होती
1 महीने से मीता रूम में बंद थी
सूरज मीता के पास जाता है
सूरज- चलो तुम्हे आज बाहर घुमाने ले जाता हूँ
मीता- तुम मुझे घुमाने ले जाओगे और मैं तुम्हे अपना जिस्म सौंप दूँगी
सूरज- शायद ऐसा ही हो
फिर भी एक बार चलके देख लो
[मीता तय्यार हो जाती है सूरज उसे बाहर ले जाता है
यह कोई पहाड़ी इलाक़ा था
घूमने के बाद दोनो वापस घर आजाते हैं
मीता- यह कौन सी जगह है
सूरज- नेपाल है
बस कुछ ही दिन की बात है
मैं रंजीत को ख़तम करके तुम्हे वापस तुम्हारे घर छोड़ आउन्गा
मेरी किस्मत में अगर अकेला रहना लिखा है तो यही सही
[फिर सूरज कमरे से बाहर चला गया
मीता की आँखो से आँसू छलक गये
अगले दिन सूरज कमरे में आया
सूरज- मैं रात में देर से आउन्गा अपना ख्याल रखना
[फिर सूरज चला जाता है
थॅंक्स मित्रो यूँ ही साथ बने रहने के लिए
रात में जब मीता के रूम का गेट खुलता है तो मीता की चीख निकल जाती है
क्यूंकी सूरज का चेहरा खून में लिपटा हुआ था
सूरज धीमे कदमो से मीता के पास पहुँचता है
अपनी शर्ट उतार देता है
मीता एक बार फिर चीख पड़ी
क्यूंकी सूरज की पीठ में गोली लगी थी
सूरज- वहाँ पे चाकू रखा है उसे गरम करो गोली निकालो
मीता- यह सब कैसे हुआ
सूरज- जल्दी करो नही तो मर जाउन्गा
मीता- तुम डॉक्टर के पास क्यूँ नही गये यहाँ क्यूँ आगये
सूरज- तुमने खाना जो नही खाया था
[और सूरज धम्म से ज़मीन पे गिर पड़ा
मीता जल्दी से चाकू इधर उधर ढूँढने लगी
चाकू ढूँढने के बाद वो उसे आग पे तपाने लगी
साथ साथ हिचकिया लेके रो भी रही थी
चाकू गरम करने के बाद वो सूरज की पीठ पे
चाकू रखती है
सूरज कर्राहने लगता है
किसी भी तरह मीता सूरज की पीठ से गोली निकालती है
सुबह में जब सूरज की आँख खुलती है
तो उसे यकीन नही होता उसका सिर मीता की गोद में था
मीता सूरज को परी लग रही थी
सूरज जैसे ही उठने की कोशिश करता है उसकी आह निकल जाती है
मीता की आँख खुलती है
सूरज- अगर मैं मर जाता तो तुम क्या करती
मीता- मुझे माफ़ करदो सूरज मैं तुम्हारे बिना नही जी सकती
पिताजी के मरने सुनके मैं सोची तुम अगर मुझे लेके नही आते तो शायद वो नही मरते
लेकिन मैं यह भूल गयी कि तुम तो हमेशा अकेले ही रहे हो
तुम मेरे बिना कैसे जीओगे
सूरज- मेरे पास कोई और रास्ता भी नही था
किरण मुझे आके बोली कि शादी के बाद तुम अपनी जान दे दोगि
वो मुझे यह भी बताई कि तुम मेरे लिए एक लेटर दी थी
लेकिन वो लेटर उससे खो गया...
मीता सूरज की बात सुनके सोच में पड़ जाती है
कि अगर किरण से उसका लेटर खो गया था
तो उसे कैसे पता चला कि मैं शादी के बाद
सूरज- मीता मुझे खबर मिली है कि तुम्हारे माता पिता की मौत का ज़िम्मेदार तुम्हारे घर वाले तुम्हे मानते हैं
धर्मेश मुझे मारना चाहता है
मीता- तुम झूठ बोल रहे हो
कह दो कि तुम झूठ बोल रहे हो
सूरज- नही मीता मैं झूठ नही बोल रहा हूँ
लेकिन तुम चिंता मत करो
मैं जल्द ही रंजीत को मार दूँगा
मीता- तुम्हे गोली कैसे लगी
सूरज- वो मैं दूसरे शहर गया था वहाँ मुझे रंजीत के आदमी मिल गये
उन्होने मुझपे हमला कर दिया
उन्ही में से एक ने मुझे गोली मार दी
मीता- सूरज क्या मैं अपने परिवार से हुमेशा दूर रहूंगी
सूरज- कह तो रहा हूँ कि जल्द ही रंजीत को मार डालूँगा
मीता- सूरज मैं एक अभिमानी इंसान की अभिमानी बेटी हूँ
अगर मेरी किस्मत में तुम्हारे साथ रहना लिखा है
तो तुम मुझसे शादी कर लो
सूरज- लेकिन
मीता- यही ना कि तुम्हे यकीन नही है कि तुम रंजीत को मार पाओगे
उपर से अगर तुम मुझे अगर मेरे घर ले जाओगे तो रंजीत मुझे और मेरे परिवार वालो को मार डालेगा
तुम्हारे साथ रहूंगी तो मेरा परिवार जिंदा रहेगा
अपनी परिवार के लिए दुखी रहने से अच्छा है कि मैं तुमसे शादी करके खुश रहूं
[अगले दिन सूरज और मीता की शादी हो जाती है
दूसरी तरफ धर्मेश एक दम कठोर बन गया था
और अपनी ताक़त भी बढ़ा रहा था
मतलब वीर लोगो की मदद इस लिए करते थे
ताकि वो उनकी इज़्ज़त करे
धर्मेश कमजोरो की मदद करता था लेकिन वो अमीरो को तोड़ रहा था
उसके बराबर के जितने भी ठाकुर थे
वो उन सब का ठाकुर बन गया
धर्मेश की ताक़त दिन बा दिन बढ़ती जा रही थी
धर्मेश के आदमी हर शहर में रंजीत को ढूँढ रहे थे
साथ में सूरज और मीता को भी
धर्मेश मीता को माफ़ कर चुका था
लेकिन गुस्सा अभी भी था
[सूरज और मीता की शादी को अब दो साल हो चुके थे
मीता माँ बन ने वाली थी
मीता को एक लड़का पैदा होता है
मीता और सूरज एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे
सूरज अपनी मीता की खुशियो को देखके रंजीत की तलाश बंद कर देता है
लेकिन एक दिन ऐसा सैलाब आता है जो मीता और सूरज की खुशियो को बहा ले जाता है
किसी तरह रंजीत को सूरज और मीता के बारे में पता चल जाता है
वो अपने आदमियो को भेजता है
उसी दिन मीता की तबीयत खराब हो जाती है
सूरज के पड़ोसी बहुत अच्छे इंसान थे पति पत्नी
वो सूरज के बेटे की देखभाल करने को तय्यार हो जाते हैं
जब तक सूरज और मीता हॉस्पिटल से नही आजाते
इधर रंजीत का हुक्म था कि सूरज के परिवार को ख़तम करना है
[ रंजीत के आदमी सूरज के घर पे पेट्रोल डालने लगते हैं
और थोड़ी देर बाद घर में आग लग जाती है
तभी कोई रंजीत के आदमियो पे हमला कर देता है एक एक को ख़तम कर देता है
लेकिन तबतक सूरज के पड़ोसी मर जाते हैं
वो आदमी आग में कूदके सूरज के बेटे को बाहर निकालता है
जब उसकी नज़र लड़की की जली हुई लाश पे पड़ती है
वो रो देता है तभी रंजीत के कुछ और आदमी आजाते हैं
वो आदमी रंजीत के एक एक आदमी को मार देता है
और सूरज के 2 साल के बेटे को लेके भाग जाता है
आस पास के लोग यह सब नज़ारा देख रहे थे
जब सूरज और मीता हॉस्पिटल से वापस आए तो वो अपने घर की हालत देखके दंग रह गये
मीता दौड़ती हुई अपने जले हुए घर में जाती है....
मीता दौड़ती हुई अपने जले हुए घर में जाती है
पीछे सूरज भी पहुँचता है
सूरज को उसके पड़ोसी की जली हुई लाश मिलती है
मीता और सूरज पूरा घर छान मार देते है
लेकिन उन्हे उनका बेटा नही मिलता
पोलीस वालो से सूरज को पता चलता है कि आस पास के लोग कह रहे हैं
कि आप के घर में आग लगाई गयी
फिर किसी आदमी ने आग लगाने वालो को मार डाला
और आपके बेटे को अपने साथ लेके चला गया
फिर पोलीस वाले छान बीन करने के बाद चले जाते हैं
मीता बिलख बिलख के रोती है
सूरज उसे समझाता है
इधर रंजीत के आदमियो को एक एक करके धर्मेश के आदमी मार रहे थे
मीता दिमागी रूप से कमज़ोर होती जा रही थी
सूरज सब कुछ भूलके मीता की देखभाल करने में लग जाता है
1 साल तक मीता की देख भाल करने के बाद मीता ठीक होती है
लेकिन अब वो सूरज से दूर रहने लगती है
सूरज- मीता मैं जानता हूँ की तुम हमारे बेटे की वजह से मुझसे दूर रहती हो
लेकिन यकीन मानो मुझे भी उतना ही दुख है जितना की तुम्हे
मीता- सूरज मुझे तुमसे कोई शिकायत नही है मैं बस यह सोचती हूँ कि मेरा बेटा किस हाल में होगा
[मीता की बात सुनके सूरज उससे दूर रहने लगता है और रंजीत की तलाश एक बार फिर शुरू कर देता है
इधर धर्मेश को एक बेटी पैदा होती है
लेकिन वो ज़्यादा खुश नही था
सूरज अब कयि दिनो तक लापता रहने लगा था
मीता अपने अकेले पन को एक डाइयरी अपनी जिंदगी में हर सुख दुख को लिखके दूर करती
ऐसे ही दो साल बीत जाते हैं
1 साल बाद जतिन को एक बेटी पैदा होती है
और 1 साल बाद किरण की शादी हो जाती है
धर्मेश की दूसरी बेटी भी पैदा होती है
सूरज को अभी तक रंजीत नही मिला था
एक दिन फिर देर रात को सूरज घर वापस लौट ता है
आज फिर उसके जिस्म पे गोली लगी थी
पहले तो मीता कुछ ध्यान नही देती है
लेकिन जब उसकी नज़र सूरज के बाजू पे पड़ती है
तो वो दौड़के उसके पास जाती है
मीता- क्यूँ मेरी जान के दुश्मन बने हुए हो क्या ज़रूरत है तुम्हे रंजीत को ढूँडने की
बेटा तो खो ही चुकी हूँ अब तुम्हे खोके कैसे जीयुन्गि
सूरज- मैं सिर्फ़ अपना वादा निभा रहा हूँ रंजीत को मारके मैं तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ आउन्गा
[मीता सूरज को एक थप्पड़ मार देती है
मीता- तुमसे शादी करने के बाद यही मेरा घर है
तुम कहाँ छोड़ोगे मुझे
सूरज- क्या फरक पड़ता है तुम तो अब मुझसे प्यार भी नही करती हो
[सूरज की बात सुनके मीता सूरज को प्यार करने लगती है )
एक बार फिर मीता और सूरज अपनी जिंदगी में खुश थे
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जतिन को भी एक बेटी ही हुई थी
रंजीत के पीछे धर्मेश पड़ा हुआ था
इसी लिए रंजीत कुछ दिनो के लिए छिप जाता है
एक दिन सूरज देर रात से आता है तो मीता सोई हुई थी
सूरज की नज़र एक डाइयरी पे पड़ती है
वो डाइयरी पढ़ने लगता है
सूरज जब मीता को बेहोश करके लाया था तब से लेके आज की डेट तक मीता सबकुछ उस डाइयरी में लिखे हुई थी
सूरज रात में ही उस डाइयरी के साथ एक लेटर धर्मेश के नाम पे भेज देता है
2 दिन बाद वो डाइयरी ऑर लेटर धर्मेश के घर पहुँचता है
धर्मेश उस डाइयरी को पढ़ता है
और इतने सालो बाद उसकी आँखो से आँसू बहते हैं
जब उसे पता चलता है कि उसकी बहेन का बेटा अब उसके पास नही है
और उसकी बहेन इतनी तकलीफ़ में है...
जब उसे पता चलता है कि उसकी बहेन का बेटा अब उसके पास नही है
और उसकी बहेन इतनी तकलीफ़ में है
फिर धर्मेश वो लेटर पढ़ता है
सूरज- धर्मेश वैसे तो मेरा पहला रिश्ता तुमसे यह है कि मैं तुम्हारे चाचा का बेटा हूँ
तुम जान ही गये होगे अगर मैं तुम्हारी बहेन को लेके नही जाता तब भी तुम्हारे घर पे हमला होता
यह भी जान गये होगे कि रंजीत को मारने के बाद तुम अपनी बहेन को देख पाओगे
हमारे पड़ोसी हमारे ही घर में जल्के मर गये
और हमारे बेटे को जिसने बचाया था वो शायद इस लिए उसे ले गया कि उसने सोचा कि वो जली हुई लाश हमारी थी
अब फिर हम दोनो बहुत खुश हैं
तुम मीता की माँ से सिर्फ़ इतना कह दो
कि मीता ने अगर उनका दिल दुखाया है तो वो अपनी बेटी को माफ़ कर्दे
हो सकता है माँ की ही बद दुआ लगी हो मीता को
मेरी पत्नी मीता रात में बिलखके रोती है
अपने परिवार के होते मुझ अनाथ के साथ अपनी जिंदगी जी रही है
[धर्मेश वो लेटर लेके अपनी बड़ी माँ के रूम में जाता है
और उन्हे पूरी डाइयरी पढ़के सुनाता है
फिर वो लेटर भी पढ़के सुनाता है
लेकिन धर्मेश की बड़ी माँ ने तो कसम खा ली थी कि वो ज़िंदा लाश बनके रहेगी
[दूसरी तरफ मीता और सूरज एक बार फिर खुश थे
उनकी खुशी इस लिए थी कि मीता आज 2 सालो बाद माँ बन ने वाली थी
सूरज रंजीत को यहाँ से वहाँ ढूँढ रहा था
मीता एक बार फिर एक बेटे को जन्म देती है
मीता की जिंदगी खुशियो से भर गयी थी
दूसरी तरफ जतिन की पत्नी को भी जुड़वा बेटी पैदा होती है
[लेकिन मीता की किस्मत में खुशी रहती ही नही थी
2 हफ्ते बाद जब मीता को हॉस्पिटल से डिस चार्ज मिला
तो मीता और सूरज अपने बच्चे के साथ हॉस्पिटल से बाहर निकलते हैं
सूरज- तुम टॅक्सी में जाके बैठो मैं आता हूँ
[मीता टॅक्सी में अपने बच्चे के साथ बैठ जाती है
[सूरज एक दुकान में जाता है तभी उसे मीता की चीख सुनाई देती है