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Guest
सूरज मूड कर देखता है जिस टॅक्सी में मीता बैठी थी वो टॅक्सी अपनी पूरी रफ़्तार के साथ चले जा रही थी
सूरज दौड़ लगा देता है लेकिन तब तक वो टॅक्सी उसकी नज़रो से ओझल हो चुकी थी
सूरज घुटनो के बल बैठ जाता है
तभी एक बच्चा सूरज को आके एक लेटर देता है
और भाग जाता है
सूरज जब उस लेटर को पढ़ता है तो उसकी आँखो से अंगार बरसने लगते हैं
वो हॉस्पिटल में वापस जाता है
किसी को टेलिफोन करता है
दूसरी तरफ धर्मेश था
सूरज- धर्मेश मैं सूरज बोल रहा हूँ
तुम्हारी बहेन और तुम्हारे भानजे को रंजीत ने अगवा कर लिया है
मैं जा रहा हूँ अपनी बीवी और बेटे को बचाने
हो सके तो अपनी बहेन और उसके जिगर के टुकड़े को बचा लो
क्यूंकी इस बार तुम्हारी बहेन अपने बच्चे को खोके जी नही पाएगी
[फिर सूरज शहेर का पता बताके फोन रख देता है
निकल पड़ता है सूरज अपनी जिंदगी की आखरी जंग लड़ने
धर्मेश भी निकल पड़ता है 500 आदमियो को लेके
साथ में देसी बॉम्ब भी ले लेता है
सूरज शहर में दाखिल होता है और एक बंद पड़ी फॅक्टरी में जाता है
कम से कम 100 आदमी थे
वो सूरज के सिर पे गन तान देते हैं
सूरज अपने दोनो हाथ उपर कर लेता है
और आगे आगे चलने लगता है
सूरज की नज़र अपनी बीवी मीता पे पड़ती है जो एक कुर्सी पे बैठी थी उसकी गोद में उसका बेटा भी था...
सूरज की नज़र अपनी बीवी मीता पे पड़ती है जो एक कुर्सी पे बैठी थी उसकी गोद में उसका बेटा भी था
साथ ही कुर्सी पे बॉक्स भी लगे थे
मीता सूरज को देखके रो पड़ती है
तभी एक लंबा चौड़ा आदमी उपर से सूरज को आवाज़ देता है
सूरज- रंजीत मेरी बीवी और बच्चे का इस सबसे कोई वास्ता नही है
रंजीत- बाबा कहना तुम शायद भूल गये सूरज
सूरज- मेरे मासूम बच्चे के जिस्म पे बॉम्ब लगाने वाला मेरा बाबा नही हो सकता
सूरज दौड़ लगा देता है लेकिन तब तक वो टॅक्सी उसकी नज़रो से ओझल हो चुकी थी
सूरज घुटनो के बल बैठ जाता है
तभी एक बच्चा सूरज को आके एक लेटर देता है
और भाग जाता है
सूरज जब उस लेटर को पढ़ता है तो उसकी आँखो से अंगार बरसने लगते हैं
वो हॉस्पिटल में वापस जाता है
किसी को टेलिफोन करता है
दूसरी तरफ धर्मेश था
सूरज- धर्मेश मैं सूरज बोल रहा हूँ
तुम्हारी बहेन और तुम्हारे भानजे को रंजीत ने अगवा कर लिया है
मैं जा रहा हूँ अपनी बीवी और बेटे को बचाने
हो सके तो अपनी बहेन और उसके जिगर के टुकड़े को बचा लो
क्यूंकी इस बार तुम्हारी बहेन अपने बच्चे को खोके जी नही पाएगी
[फिर सूरज शहेर का पता बताके फोन रख देता है
निकल पड़ता है सूरज अपनी जिंदगी की आखरी जंग लड़ने
धर्मेश भी निकल पड़ता है 500 आदमियो को लेके
साथ में देसी बॉम्ब भी ले लेता है
सूरज शहर में दाखिल होता है और एक बंद पड़ी फॅक्टरी में जाता है
कम से कम 100 आदमी थे
वो सूरज के सिर पे गन तान देते हैं
सूरज अपने दोनो हाथ उपर कर लेता है
और आगे आगे चलने लगता है
सूरज की नज़र अपनी बीवी मीता पे पड़ती है जो एक कुर्सी पे बैठी थी उसकी गोद में उसका बेटा भी था...
सूरज की नज़र अपनी बीवी मीता पे पड़ती है जो एक कुर्सी पे बैठी थी उसकी गोद में उसका बेटा भी था
साथ ही कुर्सी पे बॉक्स भी लगे थे
मीता सूरज को देखके रो पड़ती है
तभी एक लंबा चौड़ा आदमी उपर से सूरज को आवाज़ देता है
सूरज- रंजीत मेरी बीवी और बच्चे का इस सबसे कोई वास्ता नही है
रंजीत- बाबा कहना तुम शायद भूल गये सूरज
सूरज- मेरे मासूम बच्चे के जिस्म पे बॉम्ब लगाने वाला मेरा बाबा नही हो सकता