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Incest रुतबा या वारिस

आगे।।

सुबह मै और दादी उठ गये ओर जल्दी से गाँव की तरफ निकल पड़े...

जल्दी ही घर पहुँच गये माँ पापा माया सबसे बाते की, माया घर के काम मे लग गई, तभी माँ बोली की आप बाते करो, मै नहा कर आती हु, माँ वहा से निकल गयी, मै दादी और पापा बाते करने लगे,

थोड़ी ही देर बाद मै पैसाब के बहाने वहा से उठा,,

माँ बाथरूम मे घुसी ही थी की मे भी चुपके से दरवाजा खोल अंदर घुस गया,

माँ ने अचानक मुझे बाथरूम मे देख चोंक गयी, राज तुम यहा, पागल हो क्या, जाओ बाहर जाओ अभी,

माँ साडी खोल चुकी थी, केवल ब्लाउस और पेटीकोट मे मस्ती भरा बदन से मेरे लंड मे तनाव आने लगा,

मै- सीता मै तुम्हारे बिना पागल सा हो गया हु, मुझे तुझे प्यार करना है आजाओ मेरी बाहों मे।

माँ-- राज आप अभी के अभी बाहर जाओ, किसी ने देख लिया तो, बोला ना जाओ, अभी

मै- सीता लेकिन यहा कोई नही देखेगा, एक बार चूत का पानी पीने दो ना,

माँ-- राज अभी कुछ नही, बोला ना अभी जाओ,

मै-- नही मै नही जा रहा, मुझे चूत चाहिए,

माँ-- राज देखो मैने पहले भी कहा था, जब मौका होगा तभी हम चुदाई करेंगे, वरना नही, मुझे मौका मिलेगा तो मै खुद आ जाऊंगी, ठीक है अब जाओ,

और वैसे भी राज मै तेरे बच्चे की माँ बनने वाली हु, जब तक बच्चा नही हो जाता हमे अब नही करना चाहिए,

मै-- सीता ऐसा मत कहो मेरी हालत खराब हो जायेगी ऐसे तो,

माँ-- तुम अभी जाओ हम बाद में बात कर लेंगे,

मै-- नही, मै आज रात आपकी चुदाई करूँगा, चाहे कुछ भी हो जाए,

माँ-- वो सब देखेंगे बाद में अभी तुम जाओ,

मै वहा से बाहर आ गया, दादी पापा बाते कर रही,

माया दीदी काम कर रही थी,

दोपहर हुई सबने खाना खाया, मै अपनी लुंगी पहन बाहर आया

मै-- माया दीदी आप ने बताये नही आपके कैसे हालचाल है

माया-- भैया आपको कहा समय है अपनी बहन के लिए,

मै-- दीदी ऐसा ना कहो, आपके लिए तो जान हाजिर है,

माया-- नही भैया ऐसा मत कहो, आप

मै-- दीदी चलो ना आपके घर पर ही हुक्का पीते है,

माया-- हा भैया जरूर, क्यु नही, चलो

मैने शर्ट और लुंगी पहन रखी थी केवल

माया मेरे आगे चल रही, मै पीछे

माया की पतली कमर, मटकति चाल उसकी जवानी को दिखा रही थी,

माया ने हुक्का लगा दिया, मैं माया और उसका पति तीनो साथ मे बैठ कर हुक्का पीने लगे, थोड़ी देर तक हुक्का पीते रहे, माया उठ कर घर के काम मे लग गयी,

इतने मे दादी आ गयी,

दादी--- माया तुम यहा हो वहा देखो घोड़ी कब से बोल रही है उसको घोड़ा दिखाया या नही,

माया-- नही दादी , मै अकेली कैसे करती अब आप आ गयी हो, चलो अब दिखा देती हु,

दादी-- अरे नही माया मुझे गाँव मे कुछ काम है, मुझे वहा जाना है, एक काम करो तुम राज को लेकर जाओ, और अभी दिखा दो,

माया-- सोचती हुई, ठीक है दादी, आप जाओ मै भैया के साथ अभी जाके उनका करवा देती हु,

दादी वहा से चली गयी, माया का पति चारपाई पर लेट गया,

माया-- चलो भैया, पहले वो काम करते है

मै-- हा चलो,

हम दोनो तबेले मे आते है, माया मुझे घोड़े की रस्सी पकडा, खुद घोड़ी की रस्सी पकड़ एक पेड़ के पास पकड़ खड़ी हो गयी,

घोड़ा बहुत मस्ती मे था, वो मुझसे सही से पकड़ नही आ रहा था,

माया-- थोड़ी हस्ती हुई, अरे भैया जल्दी यहा ले आओ इसे, ऐसे ये नही रुकने वाला,

इतने मे रि घोड़ा घोड़ी की तरफ भाग पड़ा, मै भी रस्सी पकडे साथ भागा, जैसे ही घोड़ा घोड़ी के पीछे जाके उपर चढ़कर अपना लंड घोड़ी की चूत मे डाला, मै लडखडा गया और मेरी लुंगी एक झटके मे खुल कर नीचे गिर गयी,

जैसे ही माया की नज़र मेरे लंड पर गयी माया का मुंह खुला का खुला रह गया, माया और घोड़ी का मुंह एक साथ खुला हुआ था,

मै अंजान बनते हुए जैसे मुझे पता नही की मेरी लुंगी खुल चुकी हैं,

घोड़ा अपना पानी घोड़ी की चूत मे छोड़कर अपना लंड बाहर निकाल कर नीचे आ गया,

मै-- अब जाके बस मे आया हैं,

माया की नज़र अब भी मेरे लंड पर थी, क्यु की घोड़े और मेरे लंड मे कोई अंतर नही था, ऐसा लंड माया ने पहली बार देखा था,

मै-- दीदी अब बांध दो इनको,

माया चुपचाप सुन सी रस्सी पकड़े खड़ी थी,

मै--दीदी कहा खो गयी, दीदी

माया चोंकती हुई,

अ,,, वो भैया, और चुप हो गयी,

मै-- दीदी बाँध दो इनको

माया-- हा भैया, लेकिन आप भी लुंगी बांध लो,

मै जैसे चोंकते हुए नीचे देखा, और नाटक करते हुए, अरी ये कब खुल गयी, और जल्दी से रस्सी छोड़ अपनी लुंगी को उठा फिर से बांध ली,

मै-- दीदी माफ करना, मुझे पता नही चला कब खुल गयी,

माया-- मुस्कुराती हुई, कोई बात नही भैया,

माया अपनी मस्ती मे आ गयी थी थी ऐसा लंड देखकर, वो समझ गयी की जो कमरे मे इतना वीर्य देखा, वो तो ऐसे लंड से आना ही था, लेकिन माया सोच भी रही की इंसान का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है, क्या

माया-- कोई बात नही भैया, मै समझ गयी थी आपको नही पता चला की आपकी लुंगी खुल गयी है,

हम दोनो फिर से माया के घर पर आ गए,

आज माया मस्ती से मस्त हो गयी थी, वो बस आज मुस्करा ही मुस्करा रही थी, इतने मे माया का पति उठ गया, और माया से करवा दिया क्या माया उनका,

माया-- जी, करवा दिया, घोड़ा बहुत तगड़ा हो गया है, सही से हो गया है, माया मेरी तरफ देख मुस्करा रही,

मै-- ठीक है दीदी, मै शाम को आता हु, अभी कुछ काम है,

(मै भी माया की चूत का पानी का मज़ा लेना चाहता हु, बस कुछ ही दिनों की बात है)

मै वहा से अपने घर पर आ गया
 
आगे,,,

मै घर पर आ गया, माँ बाहर धूप मे बैठी थी, पास मे पापा भी थे,

मै पास मे गया, पापा बेटा तु अब बड़ा हो गया है, घर के सारे काम अच्छे से देख लिया करो,

मै-- माँ की तरफ देखते हुए, हा पापा मै घर की सब चीज़ो का बहुत ध्यान रखता हु,

माँ अपनी नज़र दूसरी तरफ कर ली,

पापा आप लोग बाते करो, मे तो चला अब आराम करने,

पापा को मैने वहा से उठाया और बेडरूम मे लेकर आ गया, और वापिस माँ के पास चला गया,

मै-- माँ नाराज हो क्या, मुझसे

माँ-- गुस्से से, हा, नाराज हु, तुम पागल हो गए क्या, कोई एक साथ दोनो को देख लेता तो बाथरूम मे,

मै-- माँ माफ करना, लेकिन कई दिन हो गए मुझसे रुका नही जा रहा था,

माँ-- राज, देखो अब तीन महीने की होने को हु मै, मै जब तक आपके बच्चे की माँ नही बन जाती तब तक मै नही करूँगी,

मै-- नही माँ ऐसा मत कहो, मेरा क्या होगा,

माँ-- राज क्या तुझे अपना बच्चा नही चाहिए क्या,

मै- माँ ऐसी बात क्यु कर रही हो, ये तो हम दोनो के प्यार की निशानी है,

माँ-- तो फिर ठीक है राज, अब हम बच्चा होने के बाद ही मिलेंगे,

मै-- माँ एक काम करो आज अंतिम बार चोदने दो, फिर मै कभी आपको नही कहूंगा, वादा रहा

माँ-- ठीक है राज, मै मौका देखूंगी, वैसे भी होली आने वाली है अब, घर की सफाई मे हाथ बताना माया का,

मै- हा माँ, जरूर, लेकिन आज आना जरूर

माँ-- रात को नही, शाम को देखती हु,,

मै-- हा माँ, लेकिन आज जरूर,,

माँ- ठीक है बेटा, अब तु भी आराम कर लो,

,,,,,,,शाम होने को आई,,,,,,

माया भी आ गयी, मै अपने कमरे मे बैठ कर लंड पर तेल की मालिश कर रहा था, लंड को एकदम खड़ा कर चिकना कर रहा था, इतने मे माँ कमरे मे घुस गयी,

माँ ने देखा की मैं लंड को चिकना कर रखा है

माँ-- बेटा, ये क्या कर रहा है,

मै--माँ आपके लिए ही चिकना कर रहा हु, आपको परेशानी नही हो, कहता हुआ, माँ के दोनो हाथ अपने हाथ मे ले लिए, मेरा लंड माँ की नाभि से टकरा रहा था,

माँ-- राज जो भी करना है जल्दी करलो, माया अभी खाना बना रही है,

मै-- हा माँ, जरूर,

माँ ने मुझसे हाथ छुड़ाती ही अपनी साडी और पेटीकोट को नीचे से पकड़ कर उपर किया, और एक ही झटके मे पैंटी को नीचे कर बेड पर झुक कर घोड़ी बन गयी,

माँ की चूत और फैले हुए चूतड़ और गांड का छेद देख मे पागल सा हो गया,

मैं-- हाय माँ, क्या ही हो आप, कहता हुआ, माँ की चूत पर अपना मुंह लगा दिया,

माँ-- आह,, राज, आ।........

मै-- माँ आपकी चूत को गीली हो रखी है पहले से ही,

माँ-- हा राज, आज दिन मे तुझसे चुदने की बात से मे भी गर्म थी, अब देर मत कर जल्दी से चोद लो, ना

मै- माँ आपकी चूत का पानी का तो मज़ा लेने दो ना,

माँ-- आह, राज,, आ, मान जाओ ना, जल्दी से चोद दो ना,

मै-- ठीक है माँ, आप परेशान मत हो,

मै कहता हुआ खड़ा हुआ, और अपना तना हुआ लंड को पकड़ माँ की गीली चूत पर रख धका दिया, चिकना लंड चूत से घिसता हुआ एक साथ ही पूरा लंड माँ की चूत मे समा गया,

माँ---- उई, माँ,,, आ, मर गयी, आह, राज बड़ा मज़ेदार है लंड,

मै माँ की कमर को पकड़ माँ की चूत मे लंड से चुदाई करने लगा, माँ की आँखे बंद और मस्ती मे हो गयी

माँ-- आह राज, आह, आ, आ,,

माँ की चुदाई अच्छे से कर रहा था, तभी मैने मैने अपने एक हाथ का अंगूठा माँ की गांड मे डाल दिया,

माँ उचक पड़ी, आउ,, आ,,..... राज, क्या कर दिया

माँ की चूत और गांड दोनो की चुदाई हो रही थी,

मै-- माँ आपकी गांड भी मज़ेदार है, बच्चा होने के बाद इसकी भी चुदाई करूँगा,

माँ-- आउ,, आ,, पागल हु क्या, मरना थोड़ी है मुझे, आह, आह

माँ पूरी तरह से मस्ती से चुद रही थी, तभी माँ बोली राज जोर जोर से चोदो, आह राज चोदो, जोर से चोदो

मैने भी अपने झटके तेज कर दिये, माँ पागलो की तरह मचल रही थी, मेरा उबाल जोर पर आ गया,

और मैने माँ की कमर पकड़ ली और जोर का झटका लगा कर चूत चोदने लगा, तभी माँ-- आई, ई...... ई... गयी...

कहती हुई माँ झड़ने लगी, और माँ की झड़ती चूत के पानी से मेरे लंड से वीर्य की धार निकल कर माँ की चूत मे समाने लगा, कुछ देर मे दोनो शांत हुए, मैने अपना लंड चूत से बाहर निकाला, बहुत सारा वीर्य फर्श पर गिरने लगा,, माँ ने जल्दी से पैंटी उठाई और चूत को साफ कर,

माँ-- राज मैने अपना वादा पूरा किया, अब तुम भी वादा निभाना, जब तक हमे प्यार की निशानी नही मिल जाती,

मै-- हा माँ जरूर, मै आपके साथ हु,

माँ जल्दी से मुझे किस किया और जल्दी से बाहर चली गयी,,

माँ बाहर निकली ही थी की माया की आवाज आई, भैया खाना खा लो,,

मैने झट से कपड़े पहने, और खाना खाने चला गया,

हम सबने साथ मे खाना खाया, और मै अपने कमरे मे आ गया, क्यु की आज दादी भी नही थी, कुछ देर मैं बेड पर लेट गया,

तभी माया आती हुई अरे भैया हुक्का लगा दु क्या,

मै- है दीदी, जरूर,

माया जैसे हुक्का भर कर बेड के पास आती है, वहा मेरा माँ की चुदाई से निकला वीर्य बहुत सारा पड़ा हुआ था,

माया वीर्य की तरफ देखती हुई, सोचने लगी,

मैने अपनी नज़र अलग कर ली, और बहाना बनाता हुआ, दीदी बैठो ना, हुक्का पीते है

माया समझ गयी थी की ये वीर्य है, लेकिन इस वक़्त यहा कैसे, क्या भैया ने शाम को मुठ मारी, अगर मारी तो साफ क्यु नही किया,

माया मेरे पास बैठ हुक्का पीने बैठ गयी, माया-- भैया, ये क्या है, और यहा किसने डाला है,

मै-- पता नही दीदी क्या है, भोला बनता हुआ बोला

माया-- पता नही, मुझे कई बार आपके कमरे मे ये सब देखा है, कही भैया आप गलत काम तो नही कर रहे ना,

मै समझ गया माया सब जानती है बस वो बात लेना चाहती है

मै-- न.... नही दीदी, भला मै ऐसा वैसा क्या करूँगा,

माया-- भैया, मुझे आप पर पूरा भरोशा है आप गलत काम मत करना, आपको सही रास्ता मै दिखाने के लिए हु, कोई भी बात हो अपनी दीदी से पूछ लेना, मै अपने भैया के साथ हमेशा तैयार हु,

मै समझ गया, माया आज मेरे लंड को देख मस्ती मे है

हम दोनो ने हुक्का पिया, माया ठीक है भैया आप सो जाओ, मै सुबह आती हु, कहती हुई चली गयी,

आज मै अकेला था, मुझे कहा नींद आने वाली थी,,

पूरी रात करवट बदल बदल कर काटी,

सुबह देर से उठा तो देखा घर मे आज पकवान बन रहे है, तभी दादी दिखाई दी,

मै--- दादी आ गई आप

दादी-- हा बेटा, वो मंदिर मे जागरण था तो वही रुकना पड़ा,

मै-- अच्छा है दादी, लेकिन आज इतनी रोनक कैसे है घर पर

दादी--बेटा आज फागुन माह लग गया है, ये महिना खुशियो भरा होता है, इसलिए आज इतनी खुशिया है घर पर,

और हा इस मौसम मे मस्ती बहुत ज्यादा चढ़ती है, इसलिए अपनी दादी का ध्यान रखना, ठीक है

मै-- हा दादी आपका तो रखूँगा ही, लेकिन वो बुआ वाला मामला ठीक करो ना,

दादी-- चिंता मत करो, बेटा, मैने सब सोच लिया है, अभी तुम नहा धो लो, फिर बताती हु,
 
आगे,,,

दादी -- बेटा जल्दी तैयार हो जाओ, तेरी बुआ के पास चलना है,

माँ-- माँ जी कुछ दिन रुक लो, बाद मे चले जाना,

दादी-- अरे बहू, वो तेरी ननद के लिए मंदिर से कुछ पूछ कर आई थी, तो पुजारी जी ने अभी करने को कहा है, इसलिए जाना है, तु भी अपना ध्यान रखना,

माँ-- ठीक है माँ जी,

इतने मे मैने गाड़ी स्टार्ट की और बुआ के घर की तरफ चल पड़े,

मै-- दादी बताओ ना आपने क्या सोच रखा है बुआ के बारे मे, मेरा और बुआ का काम बनेगे क्या,

दादी-- बेटा, तु घर तो चल, जैसा मै कहु वैसा करना, लेकिन मुझे नानी जरूर बनाना,

मै-- हा दादी जैसा आप चाहो वैसा ही होगा,

मै दादी कुछ देर बाद घर पहुँच गये, बुआ और फूफा दोनो बाते कर रहे,

मेरे दिमाग मे तो बुआ तो चोदने के सपने आने लगे थे, जैसे ही बुआ ने मुझे गले लगाया, दिल किया की उनको जोर से दबा लू,

बुआ चाय बनाने के लिए चल पड़ी, हम बैठकर बाते करने लगे, पूरा दिन युही बीत गया, शाम को खाना खाया सभी ने साथ मे, तभी....

दादी-- रमा बाद मे हुक्का लगाने आना, कुछ बात भी करनी है तुझसे,

बुआ-- ठीक है माँ कुछ देर मे आती हु,

मै और दादी कमरे मे चले गये,

मै--दादी प्लान तैयार है ना, बुआ को पटाने का,

दादी-- हा बेटा, तु देखता जा, मै क्या करती हु,

कुछ देर मे बुआ हुक्का लेती हुई कमरे मे आ गयी,

बुआ-- लो हुक्का पिलो, माँ

दादी और बुआ और मै तीनो हुक्के का कस लगाने लगे,

बुआ-- माँ, आप क्या जरूरी बात करना चाहती थी, बोलो अब

दादी-- बेटी तेरे पेट होने की कोई बात है

बुआ-- खुश होती हुई, माँ जल्दी बताओ ना, ऐसी खुशी की बात,

दादी-- बेटी बात तो खुशी की है लेकिन पता नही तुझसे होगा या नही वो काम

बुआ--उत्तावली सी होती हुई, माँ आप जल्दी बताओ, मै माँ बनने के लिए कुछ भी कर सकती हु,

मै उन दोनो की बात सुन रहा था, और हुक्के का मज़ा ले रहा था,

दादी-- पंडित जी से बात हुई थी मेरी, उन्होंने कोई दोष बताया है वो दूर होगा तभी बच्चा होगा वरना नही होगा

बुआ-- माँ आप बताओ दोष कैसे दूर होगा, मै सब कुछ करूँगी,

दादी-- नही बेटी शायद तुझसे नही होगा, बहुत ही बुरा काम है

बुआ-- माँ मै सब कर लुंगी बताओ तो सही,

दादी-- पता नही तुझसे कैसे कहु

बुआ--- माँ बताओ ना, अब

दादी- बेटी, पंडित जी ने बताया है की...

बुआ--- की..... आगे तो बोलो

दादी-- बेटा तुम्हे तीन दिन किसी कुवारें लड़के का वीर्य निकाल कर पीना होगा,

बुआ--ऐसा सुनकर बुआ एकदम से चुप हो गयी, ये क्या कह रही हो माँ

दादी- बेटी मै नही ऐसा पंडित जी ने बताया है,

बुआ--मेरी तरफ देखती हुई बेटा राज तुम कुछ देर बाहर जाओ, ऐसी बात तुम ना सुनो,

दादी- नही रहने दो इसे यही पर, यही हमारी सहायता कर सकता है,

बुआ-- माँ राज कैसी सहायता करेगा

दादी-- बेटी अगर तुम ये सब कर सकोगी तो राज ही हो सकता है वो लड़का, अपने घर का है, बात घर मे रहेगी और तुम पेट से भी हो जाओगी,

बुआ-- गुस्से से माँ, पता है आप क्या कह रही हो, राज मेरे बेटे जैसे ही है मै ऐसा सोच भी नही सकती,

दादी-- मैने पहले ही कहा था, तुम्हारे बस का नही है ऐसा करना

लेकिन हमे बाहर कोई कुवारा लड़का कहा मिलेगा और मिल भी गया और बात फैल गयी तो बदनामी हो जायेगी, इसलिए राज ही ठीक रहेगा, वरना ऐसे ही रहो बिना बच्चे के,

बुआ-- सोचती हुई, माँ लेकिन ये सब कैसे, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा,

दादी-- अब समझना क्या है मुझे जो सही लगा बता दिया, अब तुम जानो

बुआ-- लेकिन माँ, कोई और उपाय नही बताया क्या पंडित जी ने,

दादी-- नही और नही, यही बताया,

बुआ-- माँ राज बेटा है मेरा और मै इसके साथ ऐसा, माँ मेरा तो दिमाग ने काम करना बन्द् कर दिया है,

दादी-- मेरी तरफ आँखे मारती हुई, बेटा क्या तु ये सब कर पायेगा, अपनी बुआ के लिए,

मै-- भोला बनता हुआ, दादी ऐसा कैसे हो सकता,

दादी-- बेटा तेरी बुआ की ज़िंदगी मे खुसियो के लिए क्या तुम ये नही कर सकते,

मै-- दादी बात तो सही है है अगर मेरे कारण बुआ की ज़िंदगी मे खुशिया आती हैं तो मेरा जीवन धन्य है, मै तो तैयार हु,

बुआ-- माँ, मै सोच कर बता पाऊँगी,

दादी-- बेटी अब सोचना क्या है तुमने तो वैसे भी राज को नंगा देखा है, बस मुठ मार के पानी निकालो और पी जाओ, और वैसे भी तीन दिन की तो बात है, और किसी को कुछ पता भी नही चलेगा,

बस तीन दिन सबकुछ भूल कर ये काम करदो, हम सबकी खुशी के लिए, ये काम हम कल से शुरू करेंगे,

अब तुम जाओ और खुद को दिल से तैयार करलो,...

.........
 
आगे..

बुआ वहा से उठकर अपने कमरे मे चली गयी, बुआ के जाते ही दादी कमरे का दरवाजा बन्द कर बेड पर आ गयी,..

मै--दादी आपके प्लान तो कमाल का है, बुआ को बच्चे और जवानी दोनो का मज़ा दे दूंगा,

दादी-- हा बेटा, उसे खुश कर देना, लेकिन आराम से, तेरा लंड तो मेरी जान निकाल देता हैं, वो तो फिर भी कई दिन से नही चुदी हुई है, तेरा लंड तो उसकी सब इच्छा पूरी कर देगा,

मै-- दादी को बाहों मे लेते हुए, ठीक है दादी बुआ को खुश कर दूंगा लेकिन अब आप मुझे खुश करदो, कहता हुआ दादी की चुन्चियो को ब्लाउस के उपर से पकड़ लिया,

दादी-- नही बेटा आज नही, अब तो तेरा पानी बेटी की चूत मे ही डालना पहले, मै तो कही नही जा रही,

मै-- ऐसा मत कहो दादी, आप दोनो को खुश रखूँगा, कहता हुआ दादी के ब्लाउस को एक ही झटके में खोल दिया, दादी की बड़ी बड़ी मस्त चुन्चियो ब्रा मे भरी पड़ी थी,

दादी-- नही बेटा बोला ना आज नही, जब तक तेरी बुआ को चोद के खुश नही कर देता तब तक अपना पानी बचा कर रखो, उसको इस पानी की ज्यादा जरूरत है

अब ऐसा कहती हुई अपना ब्लाउस को बन्द करने लगी,

मै--ठीक है दादी, लेकिन बुआ को तो आपने पानी पीने को कहा है, वो चूत कब मरायेगी,

और हा आज नही चोदुगा आपको लेकिन आपको मेरी एक बात माननी होगी..

दादी--कया बात बेटा

मै--अभी नही दादी बाद मे बताऊंगा जब बुआ को खुश कर दूंगा, तब माननी पड़ेगी बात,

दादी-- ठीक है बेटा, अब सोजा तेरे लिए कल का प्लान सोचना है, कहती हुई दादी आँखे बन्द कर सोचने लगी और सोने लगी,

मै भी कल का सोच जल्दी सो गया....

सुबह हुई, बुआ दोनो के लिए चाय लेकर आ गयी...

हम दोनो ने चाय लेकर पीनी शुरू कर दी, तभी दादी--- बेटी क्या सोचा है तूने

बुआ-- माँ पता नही ये सब कैसे होगा, मैने पहले ऐसा कभी नही पिया,मुझे घिन आती हैं

दादी-- बेटी हिम्मत रख, सब कर सकती है तू,

तब तक चाय पूरी हुई, दादी टॉयलेट के लिए चली गयी, बुआ भी अपने काम मे लग गयी,

मै आज खुश था, क्यु की मालदार बुआ चोदने को मिलेगी, उसका बदन सोचके की लंड खड़ा होने लगा है,

धीरे धीरे शाम होने को चली, शाम का खाना बन गया मै बुआ दादी साथ खाना खा रहे थे, मेरी नज़र में सिर्फ बुआ का बदन आ रहा था, भरा हुआ कसा हुआ, बड़ी बड़ी चुन्चिया, मोटी गांड, चिकना पेट, माँ सीता की तरह मस्त लग रही थी,

दादी-- बेटी एक काम करना, तुम दोनो एक कमरे मे सो जाना, ताकि आपका काम सही से हो जाए,

बुआ--- उनको बोल देना की तू मेरे साथ बाते करेगी इसलिए आज मेरे पास ही सो सकती है

लेकिन माँ इसमे तो वैसे भी ज्यादा समय नही लगेगा,

दादी-- बेटी, बात समय की नही है, आप दोनो के पास पूरी रात होगी तो, जितना हो सके उतना कर लेना, कोई जरूरी थोड़ी है की एक बार ही करो,

चलो एक काम करो दोनो नहा धो लो, अच्छा काम की तरह नहाना जरूरी है पहले,

बुआ-- माँ आप कुछ देर मेरे साथ रहना, वरना मै राज के साथ ऐसा नही कर पाऊँगी,

दादी--- नही बेटी, ये तुम दोनो आराम और प्यार और खुलकर करना, तभी ठीक रहेगा

बुआ-- ठीक है माँ मै तैयार हो आती हु, पता नही कैसे होगा

मै और बुआ दोनो नहाने के लिए चले गये, दादी दूसरे कमरे मे चली गयी,

बुआ अपने कमरे मे फूफा से....

बुआ-- सुनो जी राज बेटा और माँ साथ सोने को बोल रहे है इसलिए मै वहा सोऊँगी, आपके लिए पानी रख दिया है रात को पी लेना,

होली का महिना मस्ती लिए हुए खिल रहा है बुआ का बदन का रोम रोम मस्ती मे डूबा हुआ था
 
आगे....

मै अपने कमरे में बैठा सोच रहा था की आज बुआ को मेरा तगडा लंड दिखा कर आग लगा दूंगा, बुआ खुद फिर मुझसे चुदने को आयेगी.. ये सोच कर मेरा लंड खड़ा हो रहा था,, तभी दरवाजे पर बुआ,,

बुआ-- राज बेटा, ( धीरे से).....

मैने जल्दी से कपड़े ठीक कर दरवाजे पर गया, और जैसे ही दरवाजा खोला, सामने बुआ का रूप देख सन् रह गया,

एकदम हसीना की तरह खूबसूरत बला,एक दुल्हन जैसे कयामत का कहर ढहा रही थी,

बुआ ने मेरी तरफ देखा मै मुस्करा रहा था,

मै-- आओ बुआ, अंदर आओ

मै और बुआ अंदर आये और मैने दरवाजा बंद कर दिया,

बुआ मुड़ी और मेरी तरफ देखती हुई राज बेटा मुझे माफ करना, मुझे गलत मत समझना की मै ये सब करने को कैसे तैयार हो गयी, बेटा मेरी मजबूरी है अगर तुझे सही नही लग रहा है तो मै चली जाती हु

मै-- अरे बुआ कैसी बात कर रही है आप, ये सब मै आपकी खुशी के लिए ही करने को राजी हुआ हु, अगर आपको कोई दिक्कत है तो आप जा सकती है,

बुआ-- बेटा बात दिक्कत की नही है लेकिन ये पाप है,

मै-- देखो बुआ, मानता हूँ सही नही है लेकिन अगर आप चाहो तो कोई और दूसरा लड़का देख लो, बस मुझे आपकी खुशी देखनी है बुआ

बुआ-- मेरी तरफ देखती हुई, नही राज कैसी बात कर रहे हो, मैने आजतक तेरे फूफा जी के अलावा किसी और को छुआ तक नही, मै ऐसे कैसे कर सकती हु किसी और के साथ, ये तो माँ ने बोला तब मैने आपके साथ हाँ कर दी, पता नही ये सब कैसे होगा..

मै-- देखो बुआ, मुझ पर विश्वास करो, सबकुछ यही तक सीमित है, अगर ऐसा करने से आप माँ बनती है तो कोनसी बुराई है,

बुआ-- हा बेटा बात तो सही है लेकिन मै कैसे कर पाऊँगी,

मै-- बुआ हम दोनो को मिलकर करना होगा, तभी सही से हो पायेगा, क्या आप तैयार है

बुआ-- ठीक है बेटा लेकिन लाइट बन्द कर दो, मै ऐसे नही कर पाऊँगी,

मैने जल्दी से लाइट बन्द कर दी, अंधेरे में मै और बुआ दोनो खड़े हुए...
 
 
आगे.....

दोस्तों इस कहानी पर अभी तक कोई रिस्पांस नहीं आए इसलिए कहानी बंद कर दी थी अगर इस गाने पर रिस्पांस अच्छा आते हैं तो कहानी जारी रहेगी।

धन्यवाद
 
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