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Incest रुतबा या वारिस

आगे,,

मै-- सीता क्या तुम तैयार हो, अपने पति से चूत मराने के लिये

माँ-- हा राज, आज मेरी सुहागरात है आज मेरा पति मेरी चूत का उद्धघाटन करेगा,

माँ मस्ती मे बोल रही , मै लंड का टोपा को चूत की फांकों के बीच माँ की चूत के छेद पर रगड़ रहा,

माँ--सुनो जी, अब और मत तड़पाओ आपकी पत्नी को, जल्दी डालो ना,

मैने बिना देर किये लंड के टोपे को छेद पर रोक दिया, टोपा छेद से भी मोटा था, मै सोच रहा, आज ये माँ की चूत फाड़ कर रख देगा,

मैने एक हाथ से लंड पकड़ चूत के छेद पर थोड़ा सा जोर दिया, लंड का सुपाडा गिला होने से थोड़ा सा माँ की चूत मे घुसने की कोशिश करने लगा,

माँ भी दर्द से,, उई,, माँ,,, कहती हुई उछल पड़ी, राज. आह,, लेकिन मैने सोच लिया की रुक गया तो माँ काफी देर डर से चोदने नही देगी,

मै माँ के उपर आ गया और माँ को किस करने लगा,

माँ ने भी अपने पेर मेरी कमर पर डाल आपस मे बंद कर लिए,

माँ होठों के किस और मेरे गर्म बदन से मस्ती हो रही, मैने अपनी कमर उपर कर लंड के टोपे को चूत पर रख रखा था,

मुझे पता था माँ को दर्द होने वाला है इसलिए मैने माँ को दोनो हाथो से कसकर मेरी बाहों मे ले मेरे नीचे दबा लिया,

लंड और चूत गिले थे,

मैने धीरे से अपनी कमर नीचे की लंड माँ की चूत पर फस सा गया,,

माँ-- उई माँ,,, राज आराम से, पता नही इतना मोटा कैसे जायेगा,

अगले ही पल मैने अपनी कमर को झटके से थोड़ी नीचे की,

मेरा लंड का सुपाडा माँ की चूत मे फस गया,,

माँ-- उई माँ, मर गयी,, आ.... आ... मर गयी, माँ झटपटा रही लेकिन मेरी बाहों और नीचे दबी होने के कारण हिल नही सकी,

राज, मर गयी,, राज बाहर निकालो,,, आ,, दर्द से,, आ,, हे राम,,,,

माँ की आँखे बाहर सी आ गयी,, और लाल हो गयी,

तभी मैने अपनी कमर को आजाद कर जोर लगाने लगा,

माँ झटपटाने लगी, और मुझे खुद से हटाने लगी, राज बाहर निकालो, माँ की आवाज मे दर्द और रोना था,

माँ-- थोड़ी सी रोती हुई, राज एक बार बाहर निकालो, राज, आ.. आ.. आह..

राज बहुत तेज दर्द हो रहा है, निकालो ना,, आह,

माँ रोने लगी, माँ के आँसू निकलने लगे,

और मेरा लंड माँ की चूत को चिरता हुआ थोड़ा सा गया और वही फस सा गया,

मेरी भी हालत खराब हो रही थी, मुझे रुका नही जा रहा रहा, मैने एक हाथ माँ के मुह पर लगा एक झटका दिया लंड को, लंड माँ की चूत को चिरता हुआ आधा चूत मे घुस गया,

माँ की चूत से खुन की पिचकारी से निकल बेड पर गिरने लगी, माँ का मुंह बंद होने से दबी आवाज मे चीखी

माँ-- आ.............आ.....मर गयी,,

माँ बहुत जोर से रोने लगी और झटपटाने लगी, लेकिन मेरी ताकत के आगे उनकी कुछ भी नही चल रही, मैने भी बिना देर किये लंड पर जोर दिया, जो माँ की चूत को चिरता हुआ सीधा बच्चेदानी से लगा,

माँ की चीख निकल गयी, और माँ के पैर मेरी कमर से नीचे आ सीधे हो गये, माँ ने दर्द से मेरी पीठ पर नाखून से काट लिया, माँ के आँसू से बेड गिला हो रहा था,,

और माँ ने मेरे कंधे को दांतों मे जोर से दबा लिया,

माँ बच्चेदानी पर लंड को पाकर झड़ रही थी, मै भी माँ की चूत की गर्मी सहन नही कर सका, और मेरे लंड ने भी बच्चेदानी पर वीर्य फेकने लगा, मैने माँ की गर्दन को मुह मे लिया और झड़ने की मस्ती मे काट लिया,

आज पहली बार हम दोनो माँ बेटे की चुदाई हुई थी, मेरे वीर्य से पूरी बच्चेदानी भर गयी,

कुछ देर बाद जैसे ही लंड को आराम मिला मैने लंड को बाहर निकाल लिया,

निकलते वक़्त भी माँ दर्द से कराह उठी,

जैसे ही लंड बाहर आया, लंड के साथ खून और वीर्य बाहर आने लगा, मै भी थक गया था, मै माँ के बगल मे लेट गया, माँ की चूत से खून और वीर्य से बेड गिला हो रहा था,

माँ-- राज बहुत दर्द हुआ, तूने तो मुझे मार ही दिया, अब भी तेज दर्द हो रहा है राज,,

मै-- मेरी सीता, दर्द तो होना ही था, आज पहली बार लंड से कई सालों बाद चूत फटी है,

माँ-- हा राज, जब तु पैदा हुआ तब भी इतना ही दर्द हुआ था,

तु निकला तब भी इतना दर्द और आज डाला तब भी उतना ही दर्द है राज,

मै-- सीता मैने वीर्य डाल दिया है अब तु मेरे बच्चे को जन्म देगी,

माँ-- हा राज, तेरा लंड किसी आग के शोले की तरह था, जब चूत फाड़ घुसा मुझे लगा जैसे किसी ने गर्म लोहे का सरिया डाल दिया हो, और उतना गर्म तेरा पानी था, जैसे कोई अंदर लावा डाल दिया हो,

मै राज इस बच्चे को जन्म जरूर दूंगी,

मे-- हा सीता,

सीता बहुत दर्द हो रहा है क्या, एक बार और करे क्या,,

माँ-- नही राज,, अपनी पत्नी को माफ करना,

मै ये दर्द भी दूर नही कर पा रही हु

अब हम जब मे फिर से ठीक हो जाऊंगी तब देखूंगी,

वैसे भी परसो हमे तेरे पापा के साथ घर चलना है, तब तक ठीक हो जाऊ, नही तो घर पर लोग क्या सोचेंगे,

राज हमे समाज का भी ध्यान रखना होगा, नही तो हमारा रुतबा खराब हो जागेया,

राज मै घर पर तुझे बेटा कहूंगी, और तुम माँ कहना,

जब मोका मिलेगा तब हम पति पत्नी की तरह रहेंगे,

मै-- हा सीता,, सही कहा

सीता कोई पूछेगा की या पापा कहे की बच्चा कैसे लगा तब क्या सोचा है

मै आपका रुतबा और इस बच्चे को खोना नही चाहता,

माँ-- हा राज मै भी, तुम ही कोई उपाए बताओ,,

मै-- एक काम करना, परसो घर जाते ही आप पापा को झूठ बोलना की आपको बच्चा चाहिए, इसलिए आप पापा को प्यार का नाटक कर उनका वीर्य किसी डब्बी मे डाल लेना,

पापा पूछे तो बोल देना डॉक्टर से बात हुई ही, वो वीर्य को मशीन से अंदर डाल देंगे,

और आप उस वीर्य को फेंक देना, और हमारे बच्चे को जन्म देना,

कल मे बच्चा चेक करने की मशीन लाऊंगा,

माँ-- ठीक है राज, लेकिन मै उनका वीर्य कैसे निकाल पाऊँगी,

मै-- माँ आप उनकी मुठ मार निकालना,,

माँ-- राज मुझे नही आती मुठ मारनी,

मै-- सीता मै हु ना,... सब सिखा देता हु, एक काम करो मैने लंड को हाथ मे पकड़ लो,

माँ-- नही राज आज अब बिल्कुल हिम्मत नहीं है, कल बताना,,

माँ की चूत बहुत दर्द कर रही थी

मै-- ठीक है सीता, अब आप सो जाओ, हम दोनो के पास पूरा जीवन है, ये सब करने के लिए,,
 
 
माँ--- राज आज बड़ा दर्द भी है और मज़ा भी आया

मै-- सीता,, अभी तो मज़ा बाकी है, आज तो केवल चूत फटी है, मज़ा तो तब आयेगा, जब आपकी चूत की चुदाई होगी,

माँ- राज ये दर्द बहुत मुश्किल है

मै-- अरे नही, दर्द केवल पहली बार ही होता है, जब चूत फटती है, उसके बाद तो लंड का आकार ले लेती है,

देखना कुछ दिनों मे आपको बिल्कुल दर्द नही होगा,

माँ-- राज देखो कितना सारा खून निकल गया है, राज कंबल डाल लो, मुझे सोना है अभी, सुबह सफाई करूँगी यहा,

मै-- ठीक है सीता,

मैने दोनो पर कंबल डाली और दोनो नँगे सो गये,,
 
जैसे ही सुबह हुई माँ लेटी हुई मेरी तरफ देख रही, और सोच रही की इसकी माँ थी आज इसकी पत्नी बन गयी हु,

तभी मेरी आँखे खुल जाती है माँ मुझे देख शर्मा जाती है,

मै-- क्या देख रही हो सीता,

माँ-- अपने पति को देख रही हु,

माँ-- राज तु हमेशा मुझे ऐसे ही प्यार करना, हमे जब भी मोका मिलेगा हम प्यार करेंगे, लेकिन घर पर माँ बेटा बनकर ही रहेंगे,

मै-- हा सीता, ऐसा ही होगा,,

माँ-- राज आज डॉक्टर के पास भी चलना है

मै-- हा अभी तैयार होते है फिर चलते है,

माँ उठी और और अपनी चूत पर हाथ लगा देखा,, हाय राम,, राज अब भी दर्द नही गया,,

देखा राज कितनी फाड़ दी है, माँ ने बेड पर देखा जहा माँ लेती थी,

बेड के फुल बिखर चुके थे, और बहुत सारा खून बेड पर पड़ा था,

माँ--- देखो राज, कितना खून निकला है

मै-- हा सीता ये तो निकलना ही था,

माँ बेड पर झुकी हुई थी, उनकी चुन्चिया और चूत देख मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया,

मै-- आओ सीता देखो तुम्हे नंगा देख लंड खडा हो गया,

माँ ने जल्दी से अपने उपर सोल डाल लिया

माँ-- तुम भी ना राज, जल्दी से खड़े हो जाओ, ये वक़्त प्यार करने का नही है, हमे बच्चे का कुछ सोचना है, जब तक तेरे पापा से वीर्य नही ले लेती, तब तक दिल बेचेन रहेगा, चलो जल्दी तैयार हो जाओ, और माँ बाथरूम मे जाने लगी..

माँ लंगड़ाती हुई चल रही, दोनो जल्दी से तैयार हुए, और होस्पिटल के लिए चल पड़े,

वहा पहुंचे पापा से मिले, माँ को लड़खड़ाता देख पापा,,

पापा--- क्या हुआ ऐसे क्यु चल रही हो, तबियत ठीक है ना,

माँ-- हा वो क्या है ना अभी बाहर मोच लग गयी पेर पर, इसलिए...

पापा-- अच्छा ठीक है ध्यान रखा करो, कुछ हो गया तो कोन संभालेगा

माँ-- मेरी तरफ देखती हुई,

हमारा बेटा है ना, संभालने के लिए, और मुस्करा दी

तभी डॉक्टर आ गये,

डॉक्टर--- आप आज इनको शाम तक ले जा सकते है, अब ये पहले से काफी ठीक है,

मै-- ठीक है डॉक्टर ,

पापा हम थोड़ा सामान ले लेते है तब तक, आज आपको शाम पर घर ले चेलेँगे,

पापा--- ठीक है बेटा,

मै और माँ दोनो होस्पिटल से बाहर आ गये, तभी मैने एक दवाई की दुकान से बच्चा जाँच वाली मशीन लेली,

माँ-- राज ये क्या है,

मै-- सीता ये बच्चा जाँच की मशीन है, इस पर पैसाब करोगी तो इसमे पता चल जायेगा, की बच्चा लगा है या नही,

चलो सीता जल्दी घर चलते है

हम दोनो घर आ गये,,

मै-- सीता जल्दी से बाथरूम जाओ और इस पर पैसाब कर बताओ क्या रिपोर्ट है,

माँ मशीन लेकर बाथरूम मे घुस गयी,

कुछ देर मे मशीन लेकर मेरे पास आई, मैने मशीन को देखा उसमे माँ पेट से हो गयी है दिखा रही थी,

मै-- सीता तुम पेट से हो गयी, Love You सीता

माँ-- शर्मा गयी, राज ये मेरे लिए बहुत खुशी की बात है, तुम्हारे वीर्य ने कमाल कर दिया, एक ही बार मे, मुझे बच्चा लग गया, राज मै बनुगी आपके बच्चे की माँ,,

और मेरे गले लग गयी,

मैने भी माँ को बाहों मे ले लिया, और उनके होठों को चूमने लगा,,

मेरा लंड तो माँ की चूत मारने के लिए तैयार हो गया था, मैने अपनी पेंट को खोल अपना लंड बाहर निकाल लिया

मै-- सीता देखो ना मेरा लंड चूत के लिए खडा हो गया है, जल्दी से चूत मारने दो ना,

माँ-- नही राज, अभी नही जब तक तेरे पापा का वीर्य नही ले लेती, तब तक नही राज,

मै-- ठीक है सीता, चलो इसको हिला कर शांत कर दो, अपने हाथ से

माँ-- राज मैने किया नही कभी, तुम बताओ ना कैसे हिलाउ,

मै-- लाओ अपना हाथ और इसको पकड़ लो, और इस पर हाथ उपर नीचे करो,

माँ ने लंड को पकड़ लिया अपने गर्म हाथ से,

माँ-- राज तुम्हारा लंड बहुत गर्म है, इतना मोटा और लम्बा, मेरी तो कल जान ही निकल गयी थी,

मैने माँ के होठों को चूसने लगा, माँ भी मेरा साथ दे रही थी, और लंड को पकड़ मुठ मार रही थी,

मैने अपने हाथ माँ के चुतडो पर लाकर चुतड को दबाने लगा,

मै और माँ दोनो गर्म हो गये,

माँ-- लंड को जोर जोर से हिलाने लगी, राज बड़ा मज़ा आ रहा है, अब तो चूत का दर्द भी गायब हो गया, राज,,,

मै-- मस्ती से,, आह सीता, सी..... सी ....ई..

तेरे हाथ मे भी जादू है ऐसे ही हिलाती रहो,

माँ-- राज बहुत गर्म और कड़ा हो गया है लंड,

मै-- हा सीता, जल्दी जल्दी हिलाओ, बहुत तरस गया हु चूत को, मेरा पानी निकलने वाला है,

माँ की हाथ की गति तेज हो गयी,

और मेरी आह आह आह.... सीता करता हुआ मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ने लगा,

आह सीता.. आह.. सी...... ह्म्म....

ओह... सीता...

माँ का हाथ अब भी उसी गति से लंड को हिला रही, और मेरा वीर्य काफी दूर तक जाकर गिरने लगा, माँ सब आँखो से देख रही, दोनो की साँसे तेज हो गयी थी,

माँ-- हाय राज कितना पानी निकला है, तभी तो,, पेट से होना ही था,,

मैने माँ को कहा अब रुक जाओ,,

मै-- सीता बड़ा मज़ा आया मुझे आपकी मुठ से

माँ-- अच्छा इसको मुठ कहते है,

मै-- हा सीता, आपको ऐसा ही पापा का मुठ मारनी है और जब उनका वीर्य निकले तब उसको डब्बी मे डाल लेना है,

माँ-- ठीक है राज, अब चलो होस्पिटल चलते है

मै--
 
हम दोनो गाड़ी निकाल होस्पिटल आ गये,

मैने पापा का सामान रखने लगा, माँ को पहले ही समझा दिया था की डॉक्टर से बच्चा करने की बोल देना,

माँ और पापा डॉक्टर के पास थे,

डॉक्टर-- इनको बेड पर रेस्ट ही करना है और बस ऐसे ही आराम से रहना है, तभी,,

माँ-- डॉक्टर वो बच्चा..

डॉक्टर-- हा, बच्चे के लिए आपको इनका वीर्य ले आना है, मै आपको डबी देता हु इसमे वीर्य सुरक्षित रहेगा, इसको आप ले आना, फिर आप मे मशीन से डाल देंगे,,

पापा-- सीता क्या जरूरत है अब इन सब की, हमारा बेटा है ना और क्या करेंगे,

माँ--- नही, मुझे आपसे एक और चाहिए, उसको हम दोनो साथ मिलकर खिलाएंगे,

पापा-- ठीक है जैसा तुम चाहो

ठीक है डॉक्टर अब हम चलते है,

पापा और माँ दोनो गाड़ी मे आ गए, हम घर की और चल पड़े,

शाम हो चुकी थी, जैसे ही घर पहुंचे माया तो माँ का रूप देख चकरा गयी,

माया-- माँ जी, आज ही आप एक औरत का रूप मे लग रही हो, बहुत खुबशूरत लग रही हो,

माँ-- सब मेरे बेटे ने किया है,

माँ-- माया जल्दी से खाना लगा दे, फिर आराम करना है,

मैने और माँ ने पापा को बेड पर ला सुला दिया,

खाना बन चुका था, हम सबने साथ मे खाना खाया,

माँ-- अकेले में, राज आज मै इनके साथ सोऊँगी, ताकि बच्चा लगा हो उसका शक ना हो, मेरे लिए आज अकेला सो जाना, कल से मै तुम्हे साथ सुला लुंगी,

राज हम दोनो को सब राज ही रखना है,

मै-- ठीक है सीता, जैसे तुम चाहो, वैसे माया को भेज देना, हुक्का लगा देगी मुझे..

मै कमरे मे आ गया, तभी माया आई, भैया हुक्का लगा दु,

मैं बेड पर बैठा हुआ, हा लगा दो दीदी

माया हुक्का लगाने लगी, माया झुकी हुई थी मेरी तरफ उसकी गांड थी, मै बेड पर बैठा देख रहा,

बहुत ही प्यारी गांड लिए हुए है इसका स्वाद लेना होगा, मज़ा आ जायेगा,

तभी माया हुक्का मुझे देती हुई लो भैया

मै-- दीदी आप भी लो, बैठ जाओ यहा,

माया मेरे पास बैठ हुक्का का कस लगाने लगी,

माया-- भैया आपने तो माँ को पूरा ही बदल दिया है, क्या थी क्या बना दिया है, मान गये आपको

मै-- अरे दीदी अच्छा है ना, माँ भी अपनी नई ज़िंदगी जी लेगी,

माया को नही पता था मैने माँ को चोद दिया है

माया-- भैया शहर से मेरे लिए कुछ नही लाये,

मै सोचते हुए अब क्या दु इसको

मै-- दीदी आपके लिए पायल लाया हु, वो अभी माँ के पास रखी है, लेकर दे दूंगा,

माया-- ठीक है भैया अब जाऊ क्या मै, घर पर वो इंतज़ार कर रहे है,

मै-- हा जाओ दीदी, हम सुबह मिलते है,

माया उठी चल दी, उधर माँ..

माँ-- सुनो जी, आज से हम नई ज़िंदगी की शुरूआत करेंगे, मुझे एक बेटा देना आप,

पापा लेटे हुए, हा सीता, मै तो कुछ नही कर सकता, पता नही कैसे होगा बेटा,

माँ-- आप लेटे रहो जी, मै आपका मुठ मार दूंगी, और आप वीर्य इस डब्बी मे डाल देना, फिर डॉक्टर से डलवा लुंगी,

पापा-- ठीक है सीता,, पता नही ये खड़ा होगा या नही,

माँ ने पापा की लुंगी खोल अलग कर दी,

पापा का लंड चूहे की तरह पड़ा था, माँ मन ही मन सोचती हुई, ये इतना छोटा सा है और मेरे बेटे का देखो, मेरी इस उम्र मे भी चूत फाड़ कर रख दी,

माँ ने पापा के लंड को हाथ मे ले लिया और पापा को किस करने लगी, पापा भी माँ को लेटे हुए किस कर रहे थे, कुछ देर में पापा का लंड थोड़ा सा खड़ा हुआ,

पापा- सीता आज कई सालों बाद ये हिला है, तु आज भी पहले जैसे जवान ही है,

हाय सीता... आ.. आह...

मज़ा सा आता है तेरे छूने से, माँ चाहती थी की पापा जल्दी से वीर्य छोड़ दे,

पापा-- सीता मेरा निकलने वाला है, जल्दी से डब्बी लो

माँ ने जल्दी से डब्बी खोल दी, और पापा,,

आह.. आह.. आह. .. सीता करते हुए वीर्य छोड़ने लगे, माँ ने सारा वीर्य डब्बी मे डाल लिया,

पापा-- सीता मज़ा दे दिया तूने, लेकिन ये वीर्य खराब नही होगा क्या कल तक

माँ-- नही ये डब्बी डॉक्टर ने दी है, इसमे 24 घण्टे तक खराब नही होता है,

माँ चलो आप सो जाओ, मै बेटे को देख आती हु,

पापा-- अरे वो सो गया होगा, सुबह मिल लेना, तुम भी सो जाओ, अब,

माँ-- ठीक है सुबह, उसको होस्पिटल लेकर भी जाना है,

माँ और पापा दोनो सो गये,

सुबह हुई, माँ मेरे कमरे मे आकर उठ जाओ राज, चाय पिलो,

मैने आँखे खोली सामने माँ चाय लिए हुए खड़ी थी, मै-- सीता तेरी याद मे रात भर नही सो सका, पता नही तुम कब चोदने दोगी,

माँ-- बस आज की बात है राज, जल्दी से तैयार हो जाओ, होस्पिटल चलना है,

मै-- पक्का सीता आज चोदने दोगी ना

माँ-- राज मोका मिला तो,

मै खुद तड़प रही हु तेरे लिए,

लेकिन हमे ऐसे ही रहना होगा,

अब जल्दी से तैयार हो जाओ,
 
मै और माँ दोनो तैयार होकर जल्दी से गाड़ी मे बैठ होस्पिटल के लिए चल पड़े, माँ ने साड़ी पहनी हुई थी उसमे बड़ी मस्त लग रही थी.

थोड़ी दूर गये हि थे की माँ राज गाड़ी रोको मुझे पैसाब लगी है

मै-- नही सीता, गाड़ी सीधी होटल मे रुकेगी, यहाँ नही,,

माँ-- राज जोर से आ रही है रोको ना गाड़ी

मै-- इंतज़ार करो सीता, मै भी किया हु,

होटल मे ही करना,

माँ -- राज तुझे मेरी कसम हैं रोको नही तो निकल जायेगा,,

मै-- ठीक है रुको कसम ही दे दी तो

मैने एक तरफ जंगल में गाड़ी रोक दी, जहा कोई नही था रास्ता था केवल

माँ ने जल्दी से उतर थोड़ी दूर गयी, और अपनी साड़ी उठा पैंटी नीचे कर बैठ गयी, माँ के बड़े बड़े चुतड को देख लंड खडा होने लगा, जैसे कोई तरबूज हो,

माँ की चूत से पैसाब की धार दोनो चुतडो के बीच से दिख रही, दिल किया अभी पीछे से जाकर चोद दु, मै भी गाड़ी से उतर माँ के पीछे खड़ा हो गया चुपचाप,

माँ पैसाब कर जैसे ही खड़ी हो मुड़ी मुझे देख

माँ-- राज, तु मेरे पीछे कब खडा हुआ पता नही चला

मैं-- सीता तेरी मस्त गांड को देख मेरा लंड खडा हो गया है सीता जल्दी से चूत मारने दे,

माँ-- राज यहाँ कैसे, कोई भी आ सकता है, हम शहर मे कमरे मे कर लेंगे,

मै-- सीता शहर मे कोई काम नही है अपना मुझे अभी चूत मारनी है बस, और इंतज़ार नही होता,

माँ-- राज लेकिन यहा ठीक नही है,

मै-- सीता हम थोड़ा अंदर तक जायेंगे जंगल मे, वहा कोई नही आयेगा,

माँ---- ठीक है राज, मै आती हु रुको,

माँ ने गाड़ी मे जाकर वीर्य की डब्बी निकाल और दूर फेंक दी,

माँ-- इसकी कोई जरूरत नही, मेरा राज है अब

मै और माँ जंगल मे जाने लगे,

कुछ दूर गये, माँ खड़ी हो गयी,

आओ राज, दोनो की तड़प दूर करदो

मैने माँ को जल्दी से बाहों मे ले उनके होठो पर टूट पड़ा,,

माँ-- हाय राज खां जा इनको, जब तु होठो को चुसता है मेरी चूत मे पानी आने लगता है

मै माँ के होठो का रस पी रहा, और दोनो हाथो से माँ के चूतड़ को जोर जोर से दबा रहा,

माँ-- हाय राज तेरे हाथो मे जादू है, मेरे चुतड को मस्त कर रहा है,

हम दोनो फुल मस्ती मे आ गये, मैने अपनी पेंट खोल, लंड बाहर निकाल माँ के हाथ मे दे दिया,

माँ-- हाय राज,, कितना तड़प रहा है ये,

मै-- सीता इसकी तड़प दूर करदो, अभी

तभी..

माँ होठो को छोड़ नीचे पत्तो पर लेट गयी, और अपनी साड़ी को कमर तक उठा ली,

माँ-- आजा मेरे राज, मेरी भी तड़प दूर कर दो, माँ अपना ब्लाउस खोलने लगी,

माँ की गोरी गोरी टांगो और चूत पर लगी पैंटी को देख लंड फटा जा रहा था,

और माँ ने ब्लाउस खोल दिया जिससे उनकी ब्रा मे कसे हुए चुन्चै को देख रुका नही जा रहा था, मै जल्दी से माँ के पैरो मे बैठ गया, और माँ की जांघो को पकड़ पैरो को चौड़ा कर दिया,

माँ-- राज जल्दी करो,

मैने माँ की चूत को पैंटी पर से ही चूमने लगा, पैंटी माँ की चूत के पानी से थोड़ी गीली सी हो गयी थी

माँ की चूत का पानी और पैसाब की खुशबू मुझे मद होश कर रही थी,

माँ-- क्या कर रहा है आज,, आह, आह.......

ये गंदी जगह है राज, यहाँ मुह मत लगाओ,

मै-- गंदी नही है सीता, इसी मे तो तड़प आती है, इसको भी प्यार करना है

सी.ई...... राज

मै माँ की चूत को पैंटी पर से ही चूमता रहा, कभी जांघ कभी चूत

माँ-- आह राज, जल्दी करो ना,,, तुम तो पागल ही कर देते हो राज,,

मैने माँ की पैंटी को पकड़ निकालने लगा, माँ भी अपने दोनो चूतडो को उपर कर पैंटी को निकालने मे मदद की,

एक ही पल मे पैंटी अलग हो गयी, मैने अपना चेहरा माँ की चूत के पास ले गया,

माँ की चूत फटी हुई और चिकनी हो रखी थी,

मैने अपना मुह माँ की चूत पर रख दिया,

माँ-- हाय तौबा,, राज हाय,,, आह राज,, मत कर गंदी है-- आह ई ई ई..

मै माँ की चूत की फांकों को चूमने और चूसने लगा,,

माँ की चूत की खुशबू मस्त आ रही थी

अचानक मैने अपनी जीभ निकाल चूत की फांकों के बीच डाल दी, जो सीधी चूत के छेद से लगी,

माँ-- उई.. माँ.... सी.. ई... ई.. ई..

माँ का हाथ मेरे सर पर आ गया,

मैने अपने दोनो हाथ माँ के दोनो चुन्चो को पकड़ दबाने लगा,,

और अपनी जीभ चूत मे चलाने लगा,,

माँ-- आह राज,, मज़ा आ रहा है,, आह,,. आ. आ.... आ.. आह.. राज

मै पूरी मस्ती से माँ की चूत को चाट रहा था, तभी माँ ने अपने दोनो पैरो से मेरे सिर को दबा लिया और मेरे सिर पर जोर देकर चूत पर जोर दे झटके खाने लगी..

माँ-- आह्, आह.. आह.. आह... आह.. राज, मार दिया रे.. राज..

मै माँ की चूत पर कुछ देर पड़ा रहा,

माँ ने अपनी पकड़ ढीली कर दोनो पैरो को खोल मेरे बालो मे हाथ फेरने लगी,

माँ-- राज ऐसा मज़ा कभी नही आया, अब जल्दी डाल दे,,

मै माँ के पैरो मे बैठ माँ के उपर लेट उनके चुन्चो को चूसने लगा, दोनो चुन्चो का बारी बारी से चूम और चूस रहा,

माँ का हाथ फिर से मेरे सर पर आ गया,

आह राज, खा जा इनको कहती हुई अपने पेर मेरी कमर पर डाल दिये, मेरा लंड माँ की चूत पर पड़ा था, जो माँ की चूत पर दब रहा था, चुन्चो को चुसता हुआ मैने अपनी कमर उपर कर लंड का टोपा को चूत पर कर दिया,

माँ-- राज आराम से करना, सुहागरात पर बहुत दर्द हुआ था,

मैने एक हाथ से लंड को पकड़ माँ की चूत के छेद पर लंड को रगड़ने लगा,

माँ-- आह राज,...

लंड का टोपा चूत से गिला हो गया था, मैने छेद पर रुक अपनी कमर को थोड़ी सी नीचे की लंड का सुपाडा फस्ता हुआ चूत मे घुसने लगा,

माँ-- आई,, मा,, मर गयी,, राज धीरे धीरे,, आह राज... आ.. आ.. आ..

लंड अपनी धीमी गति से अंदर जा रहा, लंड का सुपाडा घुसते ही मैने हाथ निकाल माँ के चुन्चै पकड़ लिए और माँ को किस करने लगा, मैने अपनी कमर को ढीला छोड़ दिया,,

लंड धीरे धीरे चूत मे घुसने लगा, तभी मैने एक जोर का झटका लगाया, पूरा लंड चूत में घुसते हुए सीधा माँ की बच्चेदानी से लगा,

माँ-- हाय राम.. आह राज, मर गयी,,

माँ ने भी मुझे बाहों मे कस लिया, दोनो एक दूसरे मे मिल गये, हम दोनो एक दूसरे के होठो को चूसने लगे, तभी मैने अपनी कमर को उठा के चूत की चुदाई शुरू कर दी,

माँ-- आह, राज आराम से आह.. सी.... ई... ई... राज

मेरे लंड की रगड़ चूत पर वार कर रही थी, पूरा लंड माँ की चूत के पानी से गिला हो चुदाई कर रहा था, बच्चेदानी पर लंड की टक्कर माँ सहन नही कर पानी और मेरे होठों को दांतों मे दबाती हुई झटके खाने लगी जो मुझे और मस्त कर रहा था, मै समझ गया माँ झड़ गयी है लेकिन मैने चुदाई जारी रखी, चूत पूरी गीली होने से अब लंड आराम से चूत मे जा रहा था, मै भी अपनी कमर को जोर जोर से झटका मार चूत की चुदाई कर रहा था

माँ-- आह राज ऐसे हि करता रह

मै-- सीता मै क्या कर रहा हु. मस्ती से बोला

माँ-- राज तु चुदाई कर रहा है मेरी माँ भी पूरी मस्ती मे थी

मै-- सीता तेरी चूत की चुदाई कोन कर रहा है और किससे कर रहा है

माँ-- आह.. सी..

मेरी चूत मेरा पति चोद रहा है अपने लंड से

मै-- तू हमेशा ऐसे ही चुदेगी ना सीता मुझसे

माँ -- आह.. हा मेरे पतिदेव जैसे कहोगे वैसे चुदाई करवाउंगी

मै माँ की बातों से और मस्त हो गया और जल्दी जल्दी झटके मारने लगा,

माँ मेरे झटको से पागल हो रही,, हाय राज बड़ा मज़ा आ रहा है, आह....

मैने माँ को जोर से कस लिया और पूरा लंड माँ की चूत पर जोर देकर चूत मे वीर्य गिरने लगा,

बच्चेदानी पर गर्म वीर्य माँ सहन नही कर पाई और माँ फिर से झटके खा कर मेरे साथ झड़ने लगी,

दोनो ने एक दूसरे को जोर से कस लिया,, दोनो की साँसे आसमान पर थी, दोनो झड़ने से आराम मिला कुछ देर माँ के उपर ही लेट गया,

थोड़ी देर बाद मैने अपना गिला लंड चूत से बाहर निकाला साथ मे चूत से वीर्य गिरने लगा,

माँ-- राज आज बहुत मज़ा आया, आज इतना दर्द नही हुआ और मज़ा भी बहुत आया, मैने माँ की पैंटी से लंड को साफ किया, माँ भी खड़ी हुई जिससे वीर्य उनकी चूत से निकल कर जांघो से होता हुआ नीचे गिरने लगा,

माँ-- राज तेरे बहुत पानी आता है बिल्कुल घोड़ा है मेरा पति

माँ पैंटी से अपनी टांग और चूत पर लगा वीर्य साफ करने लगी,

माँ की नंगी चुन्चिया गजब ढा रही थी, माँ ने अपने ब्लाउस को बंद किया और बोली राज अब चले क्या,,

माँ ने पैंटी को फेंक दिया, वो पूरी भीग गयी थी,

मै-- अभी कुछ देर रुको ना चलते है
 
मै-- अभी एक बार ही तो चोदा है एक बार तो और चूत मारूँगा अभी.

माँ-- नही राज, तेरे लंड से मै एक बार मे ही थक जाती हु, अब मेरी हिम्मत नहीं है और वैसे भी मै कहा जा रही हु तेरे पास ही तो हु मौका मिलता रहेगा तो फिर कर लेना, लेकिन अब नही चल अब घर चलते है

मै-- ठीक है यार, लेकिन आज रात को आ जाना, एक बार, तेरी चूत मारने के बाद नींद अच्छी आयेगी, आयेगी ना बोलो

माँ-- ठीक है राज, तेरे पापा को दवाई देकर आ जाऊंगी,

हम दोनो गाड़ी में बैठ घर आ जाते है

पापा-- आ गयी सीता, क्या बोला डॉक्टर ने

माँ-- डॉक्टर ने मशीन से अंदर वीर्य डाल दिया है, अगले हफ्ते जाना है चेक करवाने,

पापा खुश होते हुए,

सीता तुम एक पत्नी का फर्ज़ अच्छे से निभा रही हो,

माँ मेरे बारे मे सोचती हुई,,

हा जी, पत्नी बनी हु तो निभाना ही पड़ेगा,

माँ मुझे अपना पति मानती थी,

धीरे धीरे शाम हो गयी, माया ने खाना बना दिया, हम लोगो ने खाना खा लिया, माँ पापा के कमरे मे जा रही होती है, मैने चुपके से माँ को एक तरफ पकड़ लिया,

मै-- सीता जल्दी आओ ना, अब रुका नही जा रहा है

माँ-- राज अभी रुको ना, माया भी अभी यही है,

मै-- सीता माया अभी बर्तन साफ करेगी, उसे कुछ समय लगेगा तब तक अपना काम हो जायेगा,

माँ-- लेकिन राज

मै-- लेकिन वेकिन कुछ नही चलो मेरे साथ मेरे कमरे मे,

मैने माँ का हाथ पकड़ लिया और कमरे की तरफ चल दिया,

माँ-- राज जल्दी करना, माया नही आ जाये कही

मै -- अरे माया आयेगी तब तक तो अपना पानी निकाल दूंगा,

मै और माँ कमरे के दरवाजे पर गये थे की माँ राज पुरे कपड़े नही खोलुंगी, मै पेटिकोट उपर कर लुंगी, तु जल्दी से कर लेना,

मेरा लंड तो पहले से खडा था,

मैने माँ को धक्का दिया जोर से माँ बेड पर पेट के बल गिर पड़ी

माँ-- क्या कर रहा है राज

मै जल्दी से माँ के उपर लेट उनकी गर्दन को चाटने लगा,

मै-- तु चीज ही ऐसी है, क्या करू, रुका नही जाता,

मैने अपना लंड लुंगी से निकाल पेटिकोट के उपर से ही माँ के बड़े बड़े चुतडो की खाई के बीच फसा दिया और अपनी कमर को हिला हिला कर लंड को रगड़ने लगा, और माँ की गर्दन और पीठ को चाटने लगा,

माँ भी अब गर्म हो गयी,

माँ-- आह राज, तुझमे बहुत मस्ती है राज, मुझे भी मस्त कर देता है,

मै नीचे सरक माँ की कमर पर अपना मुह लगा उनकी कमर को चाटने लगा, और दोनो हाथो से माँ के चुतड पकड़ दबाने लगा

माँ-- हाय राज,, आह..... जल्दी कर राज, माया नही आ जाये कही

माँ पूरी मस्ती मे पेट के बल लेती हुई थी,

मैने भी जल्दी से माँ का पेटिकोट पकड़ कमर तक कर दिया,

मेरे सामने माँ की नंगी गोरी गांड आ गयी जैसे दो पहाड़ों के बीच कोई गहरी खाई हो,

माँ की चूत के बाल दोनो चुतडो के बीच मे दिख रहे थे, मैने जल्दी से अपना मुह माँ के चुतड पर लगा चाटने लगा,

माँ-- ओह,,, राज तु कितना अच्छे से प्यार करता है राज,

मै और माँ दोनो गर्म हो चुके थे मेरी गर्म साँसे माँ अपने चुतड पर महसूस कर रही थी,

माँ-- राज जल्दी करो ना,

माँ की चूत पानी छोड़ने लगी थी,

मैने भी बिना देर करते हुए माँ की कमर पकड़ उपर किया और बेड पर घुटने टिका दिये, और पीठ पर हाथ रख सर को बेड पर टिका दिया,माँ मेरे सामने घोड़ी बनी हुई थी, उनकी चूत अब खुल कर सामने आ गयी, बिल्कुल गोरी और चिकनी चूत जो मेरे लंड से चोड़ी हो चुकी थी, उनकी गांड का छेद बिल्कुल छोटा सा गुलाबी सा था

मै-- सीता आज पैंटी नही पहनी क्या,

माँ-- राज भूल गये क्या, दिन मे पूरी पैंटी तेरे वीर्य से गीली हो गयी तो वही फेंक आ गयी थी,

मै-- हा सीता याद आया,,

माँ -- राज जल्दी कर अब,

मैने अपने दोनो हाथ माँ के चुतडो को पकड़ अपना चेहरा माँ के चुतडो के बीच चूत पर लगा दिया,,

माँ सिहर सी उठी

माँ-- हाय दैया,, आह,,.. राज,, क्या कर रहा है, यहाँ मुह मत लगा रे

मैं-- चुप रहो सीता, तुझे अच्छा नही लगा क्या

माँ-- हा राज अच्छा लगा, आह........

मैने अपनी जीभ निकाल माँ कि चूत का रस चाटने लगा, मेरी नाक माँ की गांड के छेद पर थी, उनकी गांड की खुशबू मुझे और पागल बना रही थी,

माँ--- आह राज,,,,,, मस्ती से पागल होती हुई,, मेरे राज,,,,,, बड़ा अच्छा लग रहा है राज,, आह ,,,........ ऐसे ही करता रह,, आह

मेरी जीभ ने भी रफ्तार पकड़ ली, और लप लप करती हुई माँ की चूत को चाटने लगा,

माँ भी अपना सर बेड पर पागलो की तरह करने लगी, कुछ देर ऐसे ही चूत का पानी चाटता रहा, माँ बिल्कुल होश मे नही रही, मुझे भी माँ की चूत मे बड़ा मज़ा आ रहा था,

तभी माँ ने बेड को कसकर पकड़ लिया और अपनी कमर नीचे कर चूत का दबाव मेरे उपर कर दिया,,

माँ--- हाय राम मर गयी,, आह....... आह... आह.. करती हुई अपनी कमर को झटका देने लगी, मैं समझ गया माँ का पानी निकल रहा है, माँ का गांड का छेद भी कभी खुलता कभी बंद हो रहा था,

माँ-- हाय राज,,, आह् मुझे पागल कर देता है तू राज,

अब और नही रुका जाता, राज जल्दी कर, माया नही आ जाये कही,,

राज जल्दी कर,, मेरा भी रुकना मुश्किल हो रहा था

मै खडा हुआ और हाथ से खड़े लंड को पकड़ लिया,

माँ की चूत जो घोड़ी बनने से बाहर निकली हुई थी,

मै-- सीता आवाज मत करना, अपना मुंह बंद रखना, नही तो सबको आवाज सुनाई देगी,

माँ-- ठीक है राज, अब जल्दी डाल दे ना

मैने अपने लंड को पकड़ लंड को माँ की खुली हुई चिकनी चूत पर रगड़ने लगा,

माँ-- आह,.. सी..... राज,,, कितना गर्म कर रखा है तूने लंड को,, जल्दी ठण्डा कर दोनो को,, सी.. ई....

लंड का सुपाडा चूत के पानी से गिला हो चुका था, मैने चूत के छेद पर रोक जोर दिया, तो खुली चिकनी चूत मे सुपाडा घुस गया,

माँ हिचक पड़ी, हाय,,,, आह..... राज,,

मै भी देर नही करने वाला था, मैने दोनो हाथो से माँ की कमर पकड़ ली, और एक जोर का झटका दिया जोर से, मेरा पूरा लंड अचानक से माँ की चूत मे घुस बच्चेदानी से टकरा गया,

माँ मेरा ये वार झेल नही सकी और आगे से बेड से खड़ी हो गयी, और जोर से उई माँ.....

मर गयी,,

मै-- क्या कर रही हो, बोला था ना आवाज नही करना, चुप रहा कुछ देर

माँ-- तुझे क्या पता आह् राज, कितना दर्द सा हुआ,

मै-- सीता तुम पहले चुदी नही हो ना इसलिए ये सब हो रहा है पहले चुदी होती तो इतना नही होता, आगे देखना तुझे नही होगा,

माँ-- सी.. ई.... ई... राज,, माँ का एक हाथ मेरी छाती पर था जो मुझे रोकने के लिए लगाया था, मैने माँ की पीठ पर हाथ रख

मै-- जल्दी झुक जाओ पूरी, देर मत करो,

माँ भी अपने हाथ आगे कर पूरी आगे से झुक गयी,

मैने माँ की कमर पकड़ अपने लंड को पीछे खींचा, लंड पूरा चूत के पानी से गिला हो बाहर आ गया,

माँ थोड़ा दर्द से आह राज.. ऐसे लगा कि पेट तक कुछ घुस गया हो,,

माँ के चुतडो मे मेरा लंड ऐसे घुसा था जैसे पहाड़ियों के बीच कोई पहाड़ खड़ा हो,

मैने माँ की कमर को पकड़ फिर से धक्का दिया और फिर लंड पीछे कर लिया,

माँ ने अपना मुह बंद कर दर्द और चुदाई दोनो का मज़ा ले रही थी,

हम्म.... अम्म.... अम्म.... आह.... ई... ई.....

लंड पूरा चिकना हो चुका था, मैने अपनी कमर की गति बढ़ा दी, मेरा लंड माँ माँ की चूत की अंदर गहराई तक चुदाई करने लगा,

माँ ने बेड को कसकर पकड़ लिया और अपना चेहरा बेड पर लगा दिया,

और ई... ई.... सी........

माँ मेरे लंड की चुदाई सहन नही कर सकी, और उनकी चूत ने लंड को जकड़ लिया माँ का चेहरा सामने हो गया, माँ के पेर हिलने लगे, कमर झटका खाने लगी, माँ,

ग... घ....... घई............. करती हुई गांड का छेद को खोलने और बंद कर झड़ने लगी,

लेकिन मेरा रुकना मुश्किल हो रहा था, मैने अपना अंगूठा को मुह मे चिकना कर झड़ती हुई माँ की गांड मे डाल दिया, और जोर जोर से झटके मारने लगा,

माँ ये सब बर्दास्त नही कर पा रही थी, अपनी गांड मे पहली बार कोई चीज घुसाई थी, माँ की बंद और खुलती गांड को मेरा अंगूठा चोद रहा था, माँ के सहन से उपर हो चला ये सब, माँ आगे से पूरी खड़ी ही होने वाली थी की मैने अपना अंगूठा गांड से निकाल माँ को दोनो हाथ कमर से पकड़ उपर उठा लिया, अब माँ मेरे हाथो पर थी पूरी तरह से,

मैने अपनी लंड की रफ्तार जारी रखी, माँ

मस्ती से अपने सर के बाल पकड़ लिए दोनो हाथो से, माँ की इतनी मस्त चुदाई पहली बार हो रही थी,

माँ की चूत बहुत ज्यादा गीली हो चुकी थी, अब लंड पचक पचक की आवाज से माँ की चूत मार रहा था,

माँ-- गई रे..... आह... आह.... गई...

राज मार डाला रे..

आह.. आह..

माँ अब चुदाई मे मस्त होने लगी और अपने दोनो हाथ फिर से बेड को पकड़ लिया, मैने भी माँ को नीचे कर बेड पर टिका दिया, और दोनो हाथो से कमर पकड़ चुदाई करने लगा, पचक पचक.... पचक.... पचक.. की आवाज से दोनो मस्ती में चुदाई कर रहे थे,

थोड़ी देर चुदाई करने के बाद माँ फिर से कसने लगी,

मै समझ गया की माँ झड़ने वाली है फिर से,

मैने अपनी रफ्तार और तेज करदी, पचक पचक की आवाज और तेज गति से होने लगी, मुझे लगने लगा की मेरा पानी निकलने वाला है और तभी मैने लंड को पूरा चूत मे घुसा कमर को कसकर पकड़ लिया, मेरे लंड के पानी की धार माँ के बच्चेदानी से टकराने लगी, माँ भी आह.. आह... करती हुई मेरे साथ झड़ने लगी, दोनो मस्ती से कुछ देर झड़ने के बाद दोनो की हिम्मत नही हो हो रही थी, मैने माँ पर जोर देकर माँ पर सो गया,

मै-- हाय सीता, बड़ा मज़ा देती है तेरी चूत

माँ-- राज मज़ा तो तेरा लंड भी देता है, लेकिन मेरी हालत खराब कर देता है,

मै-- सीता बस मौका मिलते ही ऐसे चुदवा लिया कर,,,, अपने पति से..

माँ को मौका सुनते ही याद आया की माया आने वाली होगी हुक्का लगाने

माँ ने मुझे बोला राज जल्दी उपर से हटौ, माया आती होगी,

मै और माँ दोनो एक साथ उपर होकर खड़े हुए, मैने जैसे ही लंड बाहर निकालां चूत से नदी से बाहर निकली और फर्श पर गिरने लगी, कुछ वीर्य माँ की जांघो पर चल रहा, , माँ ने अपना पेटिकोट नीचे किया और मेरे लंड को पकड़ लुंगी में डाल दिया,

माँ-- राज अब मे जाती हु, मुझे तूने रानी बना दिया है राज बहुत मज़ा आता है तेरे साथ,

चल अब तु भी आराम कर तेरे पापा को दवाई भी देनी है कहती हुई मेरे माथे को चूम चल दी, मै भी था सा गया तो मैने भी बेड पर लेट कंबल ओढ़ ली,...

आगे.......
 
मै बेड पर लेटा हुआ आराम कर रहा था तभी माया .. भैया ओ भैया, क्या कर रहे हो, हुक्का लगा दु क्या,

मै-- हा दीदी लगा दो , थकान सी हो रही है वैसे भी

माया दरवाजे के पास पड़ा हुक्का लगा कर जैसे ही बेड पर मेरे पास बैठने लगी,

माया को फर्श पर पड़ा बहुत सारा वीर्य देख

माया-- क्या है भैया यहा पानी किसने डाल दिया,

मै और माँ जल्दबाजी मे फर्श को साफ करना भूल गये थे,

माया की बात सुन मेरे मुह से कुछ नही निकल रहा,

मै-- पता नही दीदी, किसने डाल दिया है झुठ बोलते हुए,

माया ने मुझे हुक्का दे साफ करने के लिए कपड़ा उठाया,

मै-- रहने दो दीदी मै कर दूंगा साफ, आप हुक्का पियो ना, मै माया को रोक रहा था,

माया-- अरे भैया जब तक आपकी दीदी है तो आप क्यु करोगे,

माया ने कपड़ा फर्श पर डाल वीर्य को साफ करने लगी,

माया को अजीब सा लग रहा था, की ये पानी तो नही है ये सफेद रंग का है, पता नही क्या है,

माया ने साफ किये हुए कपड़े को नाक के पास ले जाकर जैसे ही सुंघा,, माया को बात समझने मे देर नही लगी,,

मन ही मन मे ये तो वीर्य है, लेकिन किसका और यहा किसने डाला है, मेरी तरफ देखती हुई, कही भैया ने तो नही,,

नही भैया क्यु ऐसा करेंगे, हा जवान है लेकिन वो यहा नीचे क्यु गिरायेंगे,,

माया-- भैया यहा कोई आया था क्या

मै-- नही दीदी, कोई नहीं आया

माया सोचती हुई फिर किसने किया होगा,

माया मेरे साथ हुक्का पी रही और सोच भी रही, तभी उसकी नज़र मेरी लुंगी पर गयी, जो गिला लंड से थोड़ी सी जगह गीली हो चुकी थी,

माया ये क्या भैया ने यहा ये सब कैसे, कुछ समझ नही आ रहा,

मै भी माया को मेरी तरफ देख दूसरी तरफ देखने लगा,

माया सोचने लगी की इतना सारा वीर्य कैसे, इतना तो घोड़े का आता है,

भैया भी जवान होने लगे है क्या ये सब,,

मुझे सब जानना होगा,, भैया के बारे मे,

तभी माया,,

भैया कल दादा जी की पुण्यतिथि है आप दादी को ले आना,,

मै अचानक से दादी का नाम सुनते ही चोंका,

मै-- हा दीदी मै सुबह जाकर ले आऊंगा,, माया-- ठीक है भैया अब मै चलती हु, सुबह मिलती हु,

मै-- दीदी थोड़ा समय तो हमारे साथ भी रहा करो, बस काम और घर मै लगी रहती हो

माया-- अरे भैया ऐसी बात नही है मै कभी उनको बोल कुछ देर और रह लुंगी,

माया उठ कर चली गयी, मै दादी के ख्यालो मे खो गया,

दादी ने ही मुझे इतना प्यार दिया है, अब दादी को भी मुझे प्यार देना चाहिए,

मै दादी के बारे मे सोचता हुआ सो गया,..
 
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