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Guest
पति-पत्नी का इतना गहरा प्यार मैंने आज तक नहीं देखा था. जो एक दुसरे से चुदाई के समय इस तरह की बात कर रहे थे, शायद इससे उनके अन्दर सेक्स करने के लिए उत्तेजना की भावना कुछ ज्यादा ही आ जाती थी..जिससे दोनों को ही मजा मिलने वाला था..
आंटी ने अपने फटे हुए कपडे उतार डाले और ऊपर से नंगी हो गयी...उन्होंने अंकल की पेंट और शर्ट को उतारा और उन्हें बेड पर लिटा दिया..
उन्होंने अपनी फटी हुई ब्रा उठाई और उसके स्ट्रेप से अंकल के हाथ बाँधने लगी बेड की रोड के साथ सर के ऊपर की तरफ...अंकल के साथ-२ मैं भी नहीं समझ पाया की आंटी ऐसा क्यों कर रही है..फिर सोचा शायद इसी तरह के खेल खेलने में इन्हें ज्यादा मजा आता होगा.. और फिर उन्होंने अंकल के पैर भी बाँध दिए..अंकल भी अपने हाथ पैर बंधवाकर मजे ले रहे थे..
आज तक शायद आंटी ने उन्हें इस तरह से मजे नहीं दिए थे, कुछ नया करने से सेक्स करने का मजा दोगुना हो जाता है..शायद यही वो भी कर रहे थे उस समय.
अंकल अब बेड पर नंगे बंधे लेटे थे और भूखी निगाहों से आंटी की तरफ देख रहे थे..आंटी ने अपनी सलवार उतारी..अन्दर उन्होंने चड्डी नहीं पहनी थी..और आज उनकी चूत देखकर लग रहा था की जैसे वहां किसी ने तेल से मालिश की हो, इतनी चमक रही थी, अपने ही रस में नहाकर वो.
आंटी उछल कर बेड पर चढ़ गयी..उन्होंने अंकल के पैरों को चूमना शुरू किया और धीरे-२ ऊपर आते हुए उनके लंड तक आई...पर उसे चूमा या चूसा नहीं..और फिर उनके पेट, छाती, निप्पलस और गर्दन को चूसते और चुमते हुए उनके होंठों के ऊपर अपनी जीभ फेरने लगी...
अंकल : "साली..कुतिया...क्यों तडपा रही है... तेरी चूत से भी पानी निकल रहा है...भेन की लोडी...बैठ जा मेरे लंड पर....जल्दी कर..."
"अभी नहीं मेरे राजा....जल्दी किस बात की है...पहले मेरी चूत के पानी को तो चखो..." और ये कहकर वो खड़ी हो गयी..और उनके सर के दोनों तरफ पैर रखकर धीरे-२ नीचे आने लगी...
उनकी फैली हुई गांड पीछे से देखकर मेरा मन कर रहा था की अभी जाऊं और साली आंटी की गांड में लंड ठूस दू.. आंटी की चूत से इतना रस निकल रहा था की जब तक आंटी की चूत अंकल के मुंह से टकराई, अंकल के मुंह में करीब तीन-चार बूंदे पहले ही गिर चुकी थी...उनके गाड़े रस की. और जैसे ही अंकल की लालायित सी जीभ ने आंटी की चूत को छुआ...आंटी की चीख ही निकल गयी...
"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह मेरे राजा........अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.......मजा आ गया......ओफ्फ्फ्फ़......" और उन्होंने अपनी चूत के किवाड़ अपने हाथों से खोले और अंकल की जीभ को अन्दर का रसीला रास्ता दिखाया ..अंकल बड़े मजे से उनकी चूत को सुखाने में लग गए.
पर ये औरत की चूत भी बड़ी अजीब सी चीज है...जितना चुसो उतना ही रस निकालती है...इतना पानी आता कहाँ से है औरतों की चूत में. खेर...उनकी चुदाई देखकर मेरा लंड फटने को तैयार हो गया...
आंटी ने अपनी चूत को बड़ी ही बेदर्दी से अंकल के मुंह पर खुरचना शुरू कर दिया..उन्होंने बेड की रेलिंग पकड़ी हुई थी और अपनी चूत की रेलगाड़ी, अंकल की जीभ वाली पटरी पर दौड़ा रही थी...और उनके मुंह से आँहों का धुआं निकल रहा था..
"ओह्ह्ह्हह ...फक्क......मेरे राजा.....तुमसे अच्छा कोई भी इस दुनिया में चूत नहीं चाटता.....अह्ह्ह्ह और चुसो....सारा रस पी जाओ....और अन्दर डालो....अपनी जीभ ...हाँ यहाँ....काटो इसे...हां हाआआन हाआआअ...ओफ्फ्फ्फ़ फुचक्क्क्क अह्ह्हह्ह्ह्ह....." और ये कहते हुए उन्होंने अपने पेट के अन्दर का सारा रस निकाल कर अंकल के मुंह को धो दिया.. और नीचे लेटकर हांफने लगी.
अंकल का लंड अभी तक खड़ा हुआ था.
आंटी ने अपना फटा हुआ सूट उठाया और उसकी पट्टी बनाकर अंकल की आँखों पर बाँध दी...
"साली...ये क्या कर रही है....जल्दी से मेरे लंड पर बैठ जा....मुझे तेरी चूत मारते हुए तुझे देखना है...खोलो इस पट्टी को..." पर आंटी ने कुछ जवाब नहीं दिया और बेड से उतर गयी...और जल्दी से दरवाजे के पास पहुँच कर उसे खोल दिया.. मैं हैरान रह गया....बाहर मम्मी खड़ी थी..
आंटी ने उन्हें आराम से अन्दर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया...वो जल्दी से अन्दर आई और उन्होंने अपने कपडे एक झटके में उतार फेंके. मैं हैरान था की ये हो क्या रहा है..पर फिर समझा की शायद इसी बात की योजना बना रही थी ये दोनों बहने खाने के बाद...
अंकल : "साली...हरामजादी....कहाँ है तू.....जल्दी से आ और बैठ जा मेरे लंड पर....जल्दी कर..."
वो बेड पर लेटे हुए , बंधे हुए, तड़प रहे थे, आंटी को चोदने के लिए...पर उन्हें क्या मालुम था की उनकी किस्मत में आज उनकी बड़ी साली की चूत भी लिखी है...
वो दोनों नंगी बहने पलंग के पास आई और ऊपर चढ़ गयी...मम्मी ने जैसे ही अंकल के खड़े हुए लंड को देखा तो उनके मुंह में पानी आ गया वो झुकी और उन्होंने अंकल के लंड को अपने मुंह में ले लिया...
अंकल के मुंह से ठंडी सिसकारी निकल गयी...."स्स्सस्स्स्सस्स्स अह्ह्हह्ह्ह्ह ....साली.....कुतिया.....और जोर से चूस इसे....
ऐसे चूस जैसे अपने जीजे का लंड चूस रही हो....मैं भी अपने लंड पर तेरी दीदी के होंठों को महसूस करना चाहता हूँ.....चूस मेरे लंड को...भेन चोद...तुम साली दोनों बहनों को एक साथ नंगा करके....चोदुंगा किसी दिन....चीखे मारोगी...देखना.." उनकी जुबान पर ********** बैठी थी शायद...सच निकल रहा था, पर ऐसा सच जो उन्हें अभी मालुम नहीं था.
आंटी आगे आई और उन्होंने अंकल की आँखों की पट्टी खोल दी..
आंटी ने अपने फटे हुए कपडे उतार डाले और ऊपर से नंगी हो गयी...उन्होंने अंकल की पेंट और शर्ट को उतारा और उन्हें बेड पर लिटा दिया..
उन्होंने अपनी फटी हुई ब्रा उठाई और उसके स्ट्रेप से अंकल के हाथ बाँधने लगी बेड की रोड के साथ सर के ऊपर की तरफ...अंकल के साथ-२ मैं भी नहीं समझ पाया की आंटी ऐसा क्यों कर रही है..फिर सोचा शायद इसी तरह के खेल खेलने में इन्हें ज्यादा मजा आता होगा.. और फिर उन्होंने अंकल के पैर भी बाँध दिए..अंकल भी अपने हाथ पैर बंधवाकर मजे ले रहे थे..
आज तक शायद आंटी ने उन्हें इस तरह से मजे नहीं दिए थे, कुछ नया करने से सेक्स करने का मजा दोगुना हो जाता है..शायद यही वो भी कर रहे थे उस समय.
अंकल अब बेड पर नंगे बंधे लेटे थे और भूखी निगाहों से आंटी की तरफ देख रहे थे..आंटी ने अपनी सलवार उतारी..अन्दर उन्होंने चड्डी नहीं पहनी थी..और आज उनकी चूत देखकर लग रहा था की जैसे वहां किसी ने तेल से मालिश की हो, इतनी चमक रही थी, अपने ही रस में नहाकर वो.
आंटी उछल कर बेड पर चढ़ गयी..उन्होंने अंकल के पैरों को चूमना शुरू किया और धीरे-२ ऊपर आते हुए उनके लंड तक आई...पर उसे चूमा या चूसा नहीं..और फिर उनके पेट, छाती, निप्पलस और गर्दन को चूसते और चुमते हुए उनके होंठों के ऊपर अपनी जीभ फेरने लगी...
अंकल : "साली..कुतिया...क्यों तडपा रही है... तेरी चूत से भी पानी निकल रहा है...भेन की लोडी...बैठ जा मेरे लंड पर....जल्दी कर..."
"अभी नहीं मेरे राजा....जल्दी किस बात की है...पहले मेरी चूत के पानी को तो चखो..." और ये कहकर वो खड़ी हो गयी..और उनके सर के दोनों तरफ पैर रखकर धीरे-२ नीचे आने लगी...
उनकी फैली हुई गांड पीछे से देखकर मेरा मन कर रहा था की अभी जाऊं और साली आंटी की गांड में लंड ठूस दू.. आंटी की चूत से इतना रस निकल रहा था की जब तक आंटी की चूत अंकल के मुंह से टकराई, अंकल के मुंह में करीब तीन-चार बूंदे पहले ही गिर चुकी थी...उनके गाड़े रस की. और जैसे ही अंकल की लालायित सी जीभ ने आंटी की चूत को छुआ...आंटी की चीख ही निकल गयी...
"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह मेरे राजा........अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.......मजा आ गया......ओफ्फ्फ्फ़......" और उन्होंने अपनी चूत के किवाड़ अपने हाथों से खोले और अंकल की जीभ को अन्दर का रसीला रास्ता दिखाया ..अंकल बड़े मजे से उनकी चूत को सुखाने में लग गए.
पर ये औरत की चूत भी बड़ी अजीब सी चीज है...जितना चुसो उतना ही रस निकालती है...इतना पानी आता कहाँ से है औरतों की चूत में. खेर...उनकी चुदाई देखकर मेरा लंड फटने को तैयार हो गया...
आंटी ने अपनी चूत को बड़ी ही बेदर्दी से अंकल के मुंह पर खुरचना शुरू कर दिया..उन्होंने बेड की रेलिंग पकड़ी हुई थी और अपनी चूत की रेलगाड़ी, अंकल की जीभ वाली पटरी पर दौड़ा रही थी...और उनके मुंह से आँहों का धुआं निकल रहा था..
"ओह्ह्ह्हह ...फक्क......मेरे राजा.....तुमसे अच्छा कोई भी इस दुनिया में चूत नहीं चाटता.....अह्ह्ह्ह और चुसो....सारा रस पी जाओ....और अन्दर डालो....अपनी जीभ ...हाँ यहाँ....काटो इसे...हां हाआआन हाआआअ...ओफ्फ्फ्फ़ फुचक्क्क्क अह्ह्हह्ह्ह्ह....." और ये कहते हुए उन्होंने अपने पेट के अन्दर का सारा रस निकाल कर अंकल के मुंह को धो दिया.. और नीचे लेटकर हांफने लगी.
अंकल का लंड अभी तक खड़ा हुआ था.
आंटी ने अपना फटा हुआ सूट उठाया और उसकी पट्टी बनाकर अंकल की आँखों पर बाँध दी...
"साली...ये क्या कर रही है....जल्दी से मेरे लंड पर बैठ जा....मुझे तेरी चूत मारते हुए तुझे देखना है...खोलो इस पट्टी को..." पर आंटी ने कुछ जवाब नहीं दिया और बेड से उतर गयी...और जल्दी से दरवाजे के पास पहुँच कर उसे खोल दिया.. मैं हैरान रह गया....बाहर मम्मी खड़ी थी..
आंटी ने उन्हें आराम से अन्दर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया...वो जल्दी से अन्दर आई और उन्होंने अपने कपडे एक झटके में उतार फेंके. मैं हैरान था की ये हो क्या रहा है..पर फिर समझा की शायद इसी बात की योजना बना रही थी ये दोनों बहने खाने के बाद...
अंकल : "साली...हरामजादी....कहाँ है तू.....जल्दी से आ और बैठ जा मेरे लंड पर....जल्दी कर..."
वो बेड पर लेटे हुए , बंधे हुए, तड़प रहे थे, आंटी को चोदने के लिए...पर उन्हें क्या मालुम था की उनकी किस्मत में आज उनकी बड़ी साली की चूत भी लिखी है...
वो दोनों नंगी बहने पलंग के पास आई और ऊपर चढ़ गयी...मम्मी ने जैसे ही अंकल के खड़े हुए लंड को देखा तो उनके मुंह में पानी आ गया वो झुकी और उन्होंने अंकल के लंड को अपने मुंह में ले लिया...
अंकल के मुंह से ठंडी सिसकारी निकल गयी...."स्स्सस्स्स्सस्स्स अह्ह्हह्ह्ह्ह ....साली.....कुतिया.....और जोर से चूस इसे....
ऐसे चूस जैसे अपने जीजे का लंड चूस रही हो....मैं भी अपने लंड पर तेरी दीदी के होंठों को महसूस करना चाहता हूँ.....चूस मेरे लंड को...भेन चोद...तुम साली दोनों बहनों को एक साथ नंगा करके....चोदुंगा किसी दिन....चीखे मारोगी...देखना.." उनकी जुबान पर ********** बैठी थी शायद...सच निकल रहा था, पर ऐसा सच जो उन्हें अभी मालुम नहीं था.
आंटी आगे आई और उन्होंने अंकल की आँखों की पट्टी खोल दी..