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Incest सपना-या-हकीकत

Update 26

अब तक

बुआ - मै नही पीछे हटून्गी,,, और अगर मै जीती तो राखी पर मन चाहा इनाम लुंगी आपसे हीहीहि

पापा - ठीक है फिर देखते है

बुआ - एक बात और भाभी का माप मै लुंगी पक्का न ,,,नही तो आप शर्त जितने के लिए बेईमानी कर लोगे

पापा- जरुर जरुर जीजी आप ही लेना लेकिन अभी चलिये ऊपर चलते बातो ही बातो मे रात हो गयी हाहाहह

अब आगे

रात के 8 बजे हम लोग एक साथ खाना खाने बैठे

मा और दीदी ने सबके लिये खाना लगाया फिर सभी खाना खाने लगे ।

पापा - मै क्या कह रहा हूँ रागिनी तुम कल जीजी को जंगी के यहा लिवा के जाओ और कुछ साड़ियां दिला दो चार नये मॉडल की जैसा जीजी को पसंद हो ।

मा - हा फिर लेकिन माप भी देना पडेगा ना और जीजी बता रही थी कि वो कोई साड़ी नही लाई है इस बार

पापा - अरे उसकी चिन्ता नही है मैने आज नाप ले लिया जीजी का

पापा के ये बोलते ही मा और दीदी बस एक नजर पापा को देखने लगी फिर दीदी ने एक नजर मेरी तरफ देखा तो मै मुस्करा रहा था

तो दीदी ने कोहनी से मेरे हाथ पर मारा और इशारे से पुछा की क्या माजरा है ,,, मैने उनको चिल्ल्ल करने का इशारा किया और बोला जाने दो

इससे पहले लोग अनुज और दीदी अपने मन मे कुछ और बाते बनाते तभी

बुआ - हा भाभी वो नाप मैने ले ली है वो भईया ने मेरी मदद की ,,,, फिर बुआ पापा को एक कातिल मुस्कान देती है

मा - अच्छा तब तो ठीक है नही तो बिना माप सिलाने दिक्कत आती

फिर सभी लोग खाना खा कर छत पर टहलने चले जाते हैं और मा दीदी किचेन मे काम करने लगते ।

थोडी देर बाद मा ऊपर आती है

बुआ - अरे सोनल नही आई ऊपर

मा - नही वो काम खतम करके निचे ही सो जायेगी

मा - अनुज बेटा तू भी जा सो जा

अनुज - जी मा

फिर अनुज भी निचे चला जाता है

अब छत पर मै मा बुआ और पापा थे

मै - पापा मुझे कुछ पैसे चाहिये थे

पापा - क्या हुआ बेटा कोई दिक्कत तो नही न

मा - हा बेटा बोल क्या जरुरत है तुझे

मै - पापा मै सोच रहा हूँ इस बार रक्षा बंधन पर दीदी को मोबाईल गिफ्ट देदू

बुआ - अरे वाह बहुत खूब बेटा

पापा - अरे लेकिन उसको मोबाइल का क्या काम ,, लडकी है वो

बुआ - क्या भईया आप भी अगर मै होती तो क्या आप तब भी ऐसा सोचते ,,, अरे जवान लडकी है अभी पढ रही कुछ नये चीजे सिख लेगी कल को ससुराल मे काम ही आयेगा

पापा - अरे नही जीजी ऐसा नही है

मा - क्या आप भी दे दो न पैसे ,, वैसे 2 3 साल तक ही रहेगी मेरी बेटी मेरे साथ ,, मा थोडी रुआसी हो गई

पापा - अच्छा ठीक है बाबा दे दूँगा मैं,, राज कल सुबह तू ले लेना

मै खुश होते हुए- थैंक्स पापा

फिर पापा निचे जाने लगे - चलो रागिनी मै नीचे जा रहा हू तुम और राज भी आजाना

मा - हा ठीक है आप चलिये हम आते है फिर पापा निचे चले गये

फिर बुआ और मा चताई पर बैठ कर बाते करने लगे

मै भी मा की गोद में सर रख कर लेट गया

मा - अरे ये राज भी ना पता नही कब बड़ा होगा

बुआ - अरे भाभी बड़ा तो हो ही गया है और कोई लडकी भी पटा लिया होगा अब तक क्यो हीरो

मै - नही बुआ क्या आप भी

बुआ - देखो कैसे शर्मा रहा है लडकी के नाम से हीहीहि अरे शादी होगी तब क्या होगा इसका

मै - आप कर लो बुआ मुझसे शादी फिर नही शर्माउँगा हिहिहिही और मा भी हसने लगी

बुआ - बदमाश अपनी बुआ से शादी करेगा अब तो मै बुड्ढी हो गई हू बेटा

मै - क्या बुआ अभी भी,, अगर आप टीशर्ट और घाघरा पहन लो एकदम भोजपूरी फ़िल्मों की रानी चटर्जी ल्गोगी

मा - हा जीजी राज एकदम सही कह रहा है आपका और रानी चटर्जी का फिगर सेम ही है ,,मै तो कहती हू कल एक टीशर्ट और घाघरा भी लेलो आप आपके भईया भी देख के खुश हो जायेगे हाहहाहहा

बुआ - क्या भाभी जी आप भी धत्त

मै नही पहनने वाली

मै - बुआ प्लीज लेलो ना आप पर बहुत अच्छी लगेगी

बुआ - लुंगी लेकिन एक शर्त पर तेरी मा को भी लेना पडेगा हिहिहिहिही

मा - नही नही नही रहने दो तब मै नही पहनती ऐसे कपडे जीजी ,,, आपकी तो आदत है मॉर्डन कपड़े पहनने की

मै - बुआ अब बहाने न बनाओ मा को लेके ,, आपको लेना है कल बस चलना मै भी चलूंगा

बुआ - अच्छा ठीक है बाबा ले लुंगी खुश

मै मा की गोद से उठ कर बुआ की गद्देदार जांघो मे लेट कर उनके मैक्सि के ऊपर से पेट मे हग करते हुए उनके पेट मे अपना चेहरा घुमाने लगा ,, आह्हह कितना सोफ्ती मह्सूस हो रहा था

बुआ - हिहिहिहिही अरे बेटा छोड मुझे गुदगुदी लग रही है हा हह हीहीह ब्स कर राज

फिर मै वापस बुआ की गोद मे सीधा लेट गया और बुआ मेरे चेहरे पर हाथ फेरते हुए - अभी भी नटखत है बचपन की तरह हा ,,,फिर वो मुझे छोटे बच्चे की तरह दुलारने लगी

मै ऊपर देखा तो बुआ की पपीते जैसी मोटी चूचिया मेरे चेहरे से कुछ इन्च ऊपर ही मैक्सि मे लटकी हुई थी ,,, मन तो कर रहा था की अभी चुस लू

इसी बीच बुआ - लेकिन भाभी जंगी के यहा तो सिर्फ साड़ियां ही मिलेगी ना तो वो कपडा कहा लेंगे

मै - अरे बुआ आप चिन्ता ना करो मार्केट मे अब नये नये दुकान खुल गये है और एक नया शॉपिंग कॉमप्लेक्स भी खुल गया है

मा - हा जीजी ,, मै तो कहती हू कल हम सब लोग चलते है त्योहार के लिए खरीदारी भी हो जायेगी सारी फिर अनुज और सोनल को भी नये कपडे चाहिये ना

मै थोड़ा उदास सा मुह बना कर - और मेरे कपड़े

बुआ हस्ती हुई - मै दिलाउंगी ना मेरे राजा बेटा को जो चाहिये

मै थोडा बुआ को छेडते हुए - हा बुआ ,, आपको ही मेरी मम्मी होना चाहिए था ,,,मा तो कुछ दिलाती ही नही

मा - हा हा बना ले मम्मी इनको भी वैसे भी तुने इनका भी दूध पिया है

मै - क्या सच मे बुआ ,, मै उत्साही मे बोला

बुआ - अरे नही बेटा मै बताती हू बात क्या ,,,वो क्या है छोटे पर तू इतना शरारती था और प्यारा कि कोई भी औरत तुझे गोद मे ले लेती खिलाने के लिये लेकिन थोडी ही देर मे तू दूध पीने के लिए रोने लगता था। तो तुझे चुप कराने के लिए हम लोग अपने दूध पर तेरा मुह लगा देते थे ,, अब उसमे दूध आये या ना आये लेकिन वही चुस कर तू चुप हो जाता था ।

हहाहहहा देखो भाभी कैसे शर्मा रहा है अब

मै - क्या बुआ आप भी

मा - हा बेटा तेरी बुआ सही कह रही है मै तो परेशान हो जाती थी तेरे रोने से तो किसी न किसी को बुला के दे देती थी ।

मै - उह्ह्ह्हउउहुहुहहह उह्ह्ह्झ दुधूअअउऊउऊ,,, मम्मीईईईई दुधुऊउऊऊऊऊ झूठ मूठ का रोने का नाटक करने लगा और बुआ की गोद मे उछल कूद करने लगा

मा हस्ते हुए - लगता हैं जीजी इसको चुप करवाना पडेगा पडेगा पहले की तरह ,,,

बुआ - मेरा सर किसी छोटे बच्चे की तरह दुलारते हुए मेरे गाल सहलाते हुए - दुधू चाहिये मेरे लल्ला को आजा मेरा बेटा और फिर बुआ ने एक हाथ से अपनी मैक्सि का चैन खोला फिर बाया तरफ का बाजू निचे किया और बाई तरफ की चुची निकाल के बाहर की फिर मेरा चेहरा उठा कर अपने चुची के पास ले जाकर - ले पी ले मेरा ल्ल्ला

मैने तो मजाक मे शुरू किया था मुझे नही पता था कि ये सब इतना आगे बढ़ जायेगा और फिर इतना बड़ा मौका मै कैसे जाने देता

मैने भी लपक कर बुआ के बडे बडे निप्प्ल को पर मुह लगा कर चूसने लगा

बुआ - अह्ह्ह्ह आराम से लल्ला

मा हस्ते हुए - अरे वाह देखो तो कितना प्यार है अपने भतीजे को रोता नही देख सकती

बुआ -उम्म्ंम आह्हह और क्या मेरा दुलारा बेटा है ऐसे कैसे उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह आराम से चुस बेटा ,,,रुक मै लेट जाती हू

इतना कह कर बुआ निचे लेट गई और मै उन्के ऊपर आकर उनकी चुचि को वापस चूसने लगा

बुआ की शरारत अब उन पर भारी पड़ रही थी क्योकि मै धीरे धीरे उनकी चूचियो को दबा कर उन्के निप्प्ल को अपने जीभ से खेल रहा था

अब बुआ को मदहोशि होने लगी और उनकी सांसे भी तेज़ी से ऊपर निचे होने लगी थी ,,,,

बुआ - अह्ह्ह्ह आह्हह बेटा उम्म्ं

मा - चलो जीजी मै निचे जा रही हू और आप भी राज को दूध पिला कर भेज देना इसे भी निचे

बुआ - आह्हह हा भाभी चलो आप मै भेजती हू इसको

मा फिर निचे चली गई और मै अपना पोजिसन बदला और सीधा सीधा बुआ के ऊपर आ गया

अब तक मेरा लण्ड क्छ्छे मे पुरा कडक हो चूका था और बुआ को गदरायी जान्गो मे चुब्ने लगा

बुआ मेरे सर पकड़ अपनी चुची पर दबाते - आह्हह बेटा सिर्फ वही चुसेगा दुसरा भी है न मेरे लाल

फिर मुझे जैसे आमंत्रण मिल गया हो बुआ का कि आओ और मेरा भोग करो

मै बुआ की दुसरी चुची भी बाहर निकाली और निप्प्ल पर जीभ फिराते हुए उनको भी चूसने लगा साथ मे दुसरे हाथ से बुआ की दुसरी चुची को पकड के मिजने लगा

बुआ पागल होने लगी उन्हे इस बात का कोई ख्याल नही था कि कौन है क्या है वो अब अपनी 2 दिनो से अपनी प्यास बुझाने के लिए तडप रही थी और आज वो मौका उन्हे भी मिल गया था

मै भी उनकी चुचियो को मसलते चुस्ते हुए अपना लण्ड उनकी दोनो जांघो के बीच कमर हिला कर रगड़ने लगा

जिससे बुआ ने अपनी जान्घे खोलने लगी लेकिन मैक्सि मे सिमित जगह थी तो मैने उनकी मैक्सि को थोड़ा घुटनो तक खीचा जिससे तेज़ी से से बुआ की जान्घे फैल गयी और मेरे लण्ड कच्छे मे ही सीधा बुआ की चुत पर मैक्सि के उपर ही टकरा गया

मेरे खड़े लन्द का स्पर्श अपनी चुत पर पाते ही

बुआ - आह लल्ला

मै अपने लण्ड को बुआ की चुत पर क्छ्छे से रगद्ते हुए पुछा - क्या हुआ

बुआ - उम्म्ं वो तेरा हथियार मेरी मुनिया को लगा ना इसिलिए

मै हस्ते हुए - क्या बुआ आप भी वो तो नुन्नु है मेरा हीहीहि

बुआ - आह्हह लगता तो नही अबतक नुन्नु ही होगा

मै - अगर विश्वास नहीं तो खुद देख लो

बुआ - अच्छा ला तो मेरे पास देखू मै भी

फिर मै भी उठ कर बुआ के सर के पास अपने घुटने के बल खड़ा हो गया

फिर बुआ ने मेरे क्छ्छे पर हाथ फेरते हुए मेरे लण्ड के सुपाडे की गोलाई माप्ते हुए बोली - जरा अपनी कच्छी निचे करना लल्ला देखू तो अच्छे से

चुकी मै जानबुझ कर बुआ के सामने नादान बनने का नाटक कर रहा था तो बुआ भी मुझे अबोध समझ कर मेरे से अपना फायदा लेना चाहती थी और वो मुझे बच्चे की तरह ही पेश आ रही थी

फिर मै भी अपना कच्छा धीरे धीरे करते हुए निकाला और मेरा 7" का मोटा लाल सुपाडे वाला लण्ड घन्टे के जैसे टनटनाते हुए सीधा खड़ा हो गया

मेरी पोजिसन ऐसी थी की मै बुआ के दायी तरफ बिलकुल उनके कंधे से सट कर घुटनो के बल खड़ा था और मेरा लण्ड अपने नुकीले सुपाडे के साथ तीर के जैसे मौसी के चेहरे के ठीक समान्तर मे एक फिट के ऊपर तन कर खड़ा था

उस हल्की चांदनी रात मे मेरे लण्ड की छाया मौसी के चेहरे पर एक विकराल रूप ले चुकी थी और बुआ फटी आखो से इतने पास से मेरे फुकार मारते लण्ड को निहारे जा रही थी

बुआ - बेटा देखा मै ना कहती थी की ये एक हथीयार है और फिर अपने एक हाथ से मेरे सख्त लण्ड के उभरे नसो पर अपनी नाखूनो के खरोच लगाते हुए मुथ्थी मे भर लिया

बुआ - बेटा ये कितना तप रहा है तेरा हथियार

मै भी नादान होने नाटक करते हुए - हा बुआ और दर्द भी कर रहा,,, कही मेरे नुन्नु को बुखार तो नही न हो गया

बुआ को मेरी नादानी पर हसी आई फिर वो बोली - रुक जा बेटा मै इसको ठंडा कर दे रही हू

मै - हा बुआ कर दो न प्लीज

फिर बुआ ने थोडी करवट ली और अपनी दाहिने कोहनी के बल पर होकर बाये हाथ से मेरे लंड को थामा फिर अपना मुह खोला ,,, मुझे बुआ की गर्म सांसे अपने लण्ड पर मह्सूस होने लगी और देखते ही देखते बुआ ने आधा लण्ड को मुह में ले लिया और मेरे सूपाड़े पर मुह के अंदर ही जीभ फेरने लगी ।

मै - आह्हह बुआ कितना आराम मिल रहा है ,,, कितनी अच्छी हो आप ऐसे ही रहो ना

बुआ ने बिना कुछ बोले मुझे नासमझ लडके की तरह मेरे कमर पर हाथ रखा और धीरे धीरे पुरा लण्ड मुह लेने लगी

बुआ के मोटे मोटे और नरम होटो का मेरे सम्वेदनशील सुपाडे पर घर्षण मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था ,,, धीरे धीरे तकरीबन 5 6 मिनट मे मेरे लण्ड की नसे पुर्ण रूप से अपनी अन्त सिमा तक फैलाव ले चुकी थी ,,, मेरे सुपाडे मे मानो मेरी दोनो जांघो का खून एक साथ भरने लगा हो ,,, अब बुआ की गीली जीभ का मेरे सुपाडे पर चन्द स्पर्श भी मुझे झड़ा देने वाले थे , ऐसे मे मैने बुआ के सर को पकड़ा और ना चाहते हुए भी अपने बेरहम धक्को से उनकी मुहपेलाई शुरू कर दी ,,, मुह मे अंदर जाते वक़्त बुआ की जीभ मेरे सुपाडे और लण्ड की निचली नसो मे घर्षण करती,, ऐसे ही 20 22 जोरदार धक्को से अब मेरा लण्ड बुआ की लार से लिप्त हो चूका था और मेरी गति धीमी थी और अगले 8 से 10 धक्के मै उनके मुह मे झड़ते हुए मारने लगा ,,, फिर मैने अपने लण्ड बाहर निकाल कर बेधाल होकर बैठ कर हाफने लगा ,,,मुझे बुआ की स्थिति का कोई ध्यान नही था कुछ पलो मे सास बराबर होने पर मैने बैठे बैठे बुआ पर एक नजर मारी ,, वो अपने चेहरे पर लगे मेरे सोमरस को उंगली से साफ कर चाट रही थी और फिर लेटे लेटे ही मेरे तरफ मुस्कुरा कर देखा

अब आगे के अपडेट मे देखते है कि क्या होने वाला है
 
Update 27

अब तक

मै उनके मुह मे झड़ते हुए मारने लगा ,,, फिर मैने अपने लण्ड बाहर निकाल कर बेधाल होकर बैठ कर हाफने लगा ,,,मुझे बुआ की स्थिति का कोई ध्यान नही था कुछ पलो मे सास बराबर होने पर मैने बैठे बैठे बुआ पर एक नजर मारी ,, वो अपने चेहरे पर लगे मेरे सोमरस को उंगली से साफ कर चाट रही थी और फिर लेटे लेटे ही मेरे तरफ मुस्कुरा कर देखा

अब आगे

हम दोनो की सासें जब सामान्य हुई तो मै बुआ का मन टटोलने के लिए बोला

मै - थैंक्स बुआ , आपने मेरी मदद की ,,, चलो अब सोने चलते है

एकपल को बुआ का चेहरा मुरझा गया ,,, क्योकि मेरे द्वारा उनके चुचीयो के रसपान और दमदार मुहपेलाई से उनकी चुत बुरी तरह से पनिया चुकी थी और वो मैक्सि के ऊपर से चुत सहलाते हुए - आह्हह लल्ला

मै चौकने का नाटक करते हुए - क्या हुआ बुआ

बुआ - पता नही बेटा निचे मेरे कुछ काटा है देख जरा ,, और बुआ तेज़ी से मैक्सि के ऊपर से चुत को मले जा रही थी ,,,

मैने तुरन्त जेब से मोबाइल निकाला और टॉर्च ऑन किया और फोक्स बुआ की चुत पर किया तो देखा की बुआ का बाया हाथ उनकी फुली हुई चुत को मैक्सि के ऊपर से खुजाये जा रहा है ,,,,

फिर मैने टॉर्च को अच्छे से करीब जाकर उनकी कमर से जांघो तक अच्छे से घुमाया ,,, उनकी गोरी चमड़ी वाली गुदाज गदरायी जांघ देख कर मेरा लण्ड फिर से टनाटनाने ल्गा और मैने अपना दाहिना हाथ बुआ की दाई जांघ पर रखते हुए उसे सहलाते हुए और उस्की मुलायम मांस को मह्सूस करते हुए बोला - बुआ यहा तो कुछ नही दिख रहा है

बुआ - आह्ह बेटा मैक्सि ऊपर कर दे फिर देख

फिर मैने अपने हाथ को बुआ की जांघो पर कमर की तरफ सरकाते हुए उनकी मैक्सि को कमर तक चढा दिया और टॉर्च का फोक्स सीधा बुआ की पनियाती चुत पर कर दिया

उफ्फ्फ क्या नजारा था बुआ की नाभि से कुछ इन्च निचे तक हल्के बालो वाली नरम पाव जैसी फुली चुत का उपरी भाग ,, और फिर गोरी गोरी जांघो के बिच वी आकार की घाटी बनाये चुत के किनारे के मख्खन से मुलायम दिखते भागो के बीचो-बीच एक सोमरस से लिप्त चमडीयो से बनी दरार जिसकी निचली शिराओ से बुआ का सोमरस टपक रहा था और उनके भारी चुतडो के बीच रीस रहा था ।

मै थोड़ा आगे झुका और अपने मुह मे आ रहे पानी की गटकते हुए करिब से बुआ की चुत पर टॉर्च जला कर देखने लगा ,,, उनकी पानीयाई चुत की महक मेरे नाक में आ चुकी और धीरे धीरे मेरे अंदर हवस हावी होने लगा और सब कुछ भूल कर मैने एक बार फिर से अपने हाथ की उंगलीयो को उल्टा कर अपने नाखूनों को बुआ के टखने से उनकी नाजुक मुलायम जांघो पर घुमाते हुए उनकी चुत की घाटी तक लेकर आने लगा ,,, जैसे जैसे मेरी ऊँगलिया बुआ के चुत की तरफ बढ़ रही थी उनके चुत की चमडी अब सिकुना सुरु कर दी जिससे उनका सोमरस एक पतली धार लेकर निचे से बहने लगा ,,, बुआ एकदम चुप थी और मै भी , हम दोनो के बिच कोई बात चित नही हो रही थी

लेकिन हम दोनो की सांसे तेज़ी से ऊपर निचे होने लगी थी और मै धीरे धीरे बुआ की चुत के और करीब झुकने लगा जिससे मेरे सांसो की गर्मी बुआ की चुत से टकराने लगी और बुआ भी समझ गयी मै क्या करना चाहता हू ,, फिर बुआ ने हल्का सा अपना गांड ऊपर किया और मेरा चेहरा अब बुआ की जांघ और चुत के बिच के जॉइंट वाले नरम हिस्से को छू गया ,,,फिर मैने भी अपने बाये गाल को बुआ की दाई जांघ पर अच्छे से घुमाया फिर जीभ निकाल कर चुत और जांघ के बिच गांड की तरफ नरम चमडी पर फिराते हुये चाटने लगा ,,, धीरे धीरे मै जीभ को चुत के सबसे निचले भाग तक ले आया और जैसे पिघलती कुल्फी की मलाई को नीचे से ऊपर तक चाटते है ठीक उसी तरह मै भी उनकी बहती चुत को जीभ से निचे से ऊपर तक चुत मे घुसाते हुए चाट लिया

बुआ तडप उठी और गांड पटकने लगी

बुआ - अह्ह्ह्ह्ह लल्ल्ला ,,उफ्फ्फ्फ

मैने वापस से उनकी जांघो को थामा और एक फिर जीभ को नुकीला करके चुत मे डुबोते हुए निचे से ऊपर ले आया

बुआ जल बिन मच्छी की तरह फड़फड़ा रही थी और मै लगातार नीचे से ऊपर एक क्रम मे उनकी चुत को चाटने लगा ,, ऐसे ही करीब 8 से 10 बार चाटने के बाद मैने जीभ को अंदर किया और मुह खोलते हुए एक साथ चुत की चमडी को मुह मे भर कर चुबलाने लगा

जिससे बुआ की तडप और बढ़ गयी उन्होने अपनी जन्घे और चौडी की साथ ही मेरा सर पकड कर अपनी चुत मे दबाने लगी - आह्हह उम्म्ंम्ं हा बेटा खा जा ,,,उह्ह्ह्ज मम्मंंंं हा लल्ला और चुस और चुऊऊसससस्स्स अहममंम्ं उफ्फ़फ्फ्फ ऐसे ही अपने गांड को पटकते हुए आहे भरने लगी

मेरा लण्ड अब फिर तैयार हो गया था फिर मैने अपना सर पिछे किया और घुटनो के बल बुआ की जांघो के बीच आ गया फिर एक हाथ मे लण्ड को थामा और दुसरे हाथ से उनकी जांघ को सहलाते झुका और अंगूठे से उनकी चुत के दाने से ऊपर की तरफ उथाने लगा ,,,

बुआ की आग और तेज़ हो गयी थी वो आहे भरे क्या बोले जा रही थी मुझे नही पता ,,,लेकिन मै पूरी तरह से चोदने के मूड मे था ,,, फिर मैने अपना लण्ड बुआ की चुत के उपर रख दिया और कमर को आगे पीछे करते हुए उनकी चुत पर रगडने लगा

मगर बुआ को चैन कहा उहोने मेरा लण्ड पकड़ा और गांड उठा कर खुद आगे हो गयी जिससे मेरा लण्ड सरसरा कर उस तपती गीली चुत मे आधा समा गया,,,,,

बुआ - अह्ह्ह्ह बेटा कितना तप रहा है तेरा लण्ड,,,अब चोद दे मुझे लल्ला रहम कर मै पागल हो जाऊंगी अझ्ह्ह उम्म्ंम और खुद ही गांड पटकर मेरे आधे लण्ड से चुद्ने लगी

मैने फिर बुआ की जांघो को थामा और एक करारा धक्का लगाते हुए बुआ के ऊपर आ गया

बुआ - अह्ह्ह्ह लल्ल्ला मै उम्म्ंम्ं कितना गर्म लण्ड है बेटा अब तो चोद दे

मै बुआ के उपर आकर उनकी चुचियो को नोचते हुए बोला - सच मे बुआ आप अपने भतीजे से चुद्ना चाहती हो क्या ,,, इसके साथ ही मैने एक और तेज़ धक्का बुआ की चुत मे मारा

बुआ - अह्ह्ह्ह हा बेटा मै अब जान गयी हू तुझे सब पता है कैसे करना है ,,, लेकिन अच्छी नौटंकी की तुने बेटा उम्म्ंम्म्ं उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह

मैने धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और बोला- नाटक नही करता तो ऐसा ही मेरे सामने अपना चुत परोस देती आप बुआ ,, उनकी चुची को चुस्ते हुए बोला

बुआ - मुझे पता होता मेरा लल्ला का नुन्नु अब लण्ड हो चूका है तो पहले ही परोस देती बेटा अह्ह्ह्ह थोड़ा तेज़ कर ना उम्म्ंम्ं ऐसे ही अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्मह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह्ह हा हा हाह्ह्ह्ह्ह उम्म्ंमममं लल्लाआआआआ और तेज़ मार

मैने धक्को की गति बढ़ा दी और बौला - आह्हह क्यू बुआ लण्ड को पापा और चाचा का भी है ये तो पता था ,,, उनलोगो से ही चुदवा लेती हहहह

बुआ - आआआ उह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उम्म्ंम जंगी तो मुझे देखता ही नही बेटा

मैने तेज़ रफ़्तार से चोदते हुए कहा - अरे पापा तो है वो तो आपको देखते ही लण्ड सहलाने लगते है , उनसे चुदवा लेती

बुआ - अह्ह्ह्ह हा बेटा देख रही हू इस बार जबसे आई हूँ तेरे पापा की नियत ठीक नही लग रही है अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

मै - तो बुझवा लो बुआ अपनी प्यास उनसे ही ,,, फिर राखी के दिन मा और मै जायेंगे ना नाना के यहा ,,,, उस दिन मौका रहेगा हिहिहिहो

बुआ - अह्ह्ह्ह उम्म्ंम लल्ल्ला बहुत शरारती हो गया है उम्म्ंम आह्हह मम्मं तेज़ी से चोद दे ना बेटा ,,, निकाल दे मेरी गरमी बाद मे तेरे पापा का देखूंगी ,,अभी बस तूउउउउऊ अह्ह्ह्ह्ह्ब हाआ अह्ह्ह्ह्ह उम्म्ंम हा ऐसे ही और तेज़ बेटा और तेज़ ,,,, चटनी बना दे मेरे चुत की बाबू अह्ह्ह्ज्ज उम्म्ंम्म्ं अह्युउउऊ। आअह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह उनम्मंम्म्ं हाआआआआआ मै आने वाली हू अह्ह्ह्ह रुकना मत प्लीज पलीज्ज्ज्ज्ज अझ्ह्ह्ह्ह

मैने भी धक्को की स्पीड तेज़ कर दी और थप थप थप थप थप थप थप थप थपप्च प्चप्च थप की तेज़ आवाज आने लगी अब मै भी चरम सिमा तक आ चूका था मेरा लावा कभी भी फुट सकता था - इह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मेरा भी होने वाला है बुआ

बुआ - अंदर ही डाल दे बेटा ,,,फिर बुआ मेरे लण्ड को अपनी चुत से निचोडने लगी

एक बार फिर बुआ की चुत मेरे लण्ड पर कसाव लेने लगी और मेरे लण्ड की नसो पर घर्षण तेजी से मह्सूस होने लगा मेरे लण्ड मे खून भरने लगा अचानक से मेरे लण्ड के चमडी पर गरमी बढने लगी ,,,, क्योकि बुआ की चुत पिघल चुकी थी उनका गरम माल मेरे लण्ड को और तपाने लगा , नतिजन कुछ ही धक्को मे मेरा सबर का लावा टुट गया और भलभला कर मै भी बुआ चुत मे आखिरी धक्को के साथ झडने लगा

कुछ ही पलो मे मै वापस बुआ के ऊपर निढ़ाल हो गया,,, हम दोनो की धड़कने तेज़ थी और सांस फुल रहे थे फिर भी हमारे चेहरे उस चरम सुख के मुस्कान से खुश थे जिसे हम दोनो ने एक साथ मिलकर हालिस किया था ,,,,

कुछ देर ऊपर पडे रहने के बाद मै भी उनके बगल मे सीधा लेट गया और ऊपर आस्माँ मे देखते हुए सांसे बराबर करने ल्गा

हम दोनो चटाई पर लेटे लेटे ऊपर खुले आसमान मे देख रहे थे और फिर हमने कपड़े ठीक किये

थोडी देर बाद बुआ ने मेरी तरफ करवट ली

बुआ - लल्ला क्या ये तेरा पहली बार था हा

मै झुट बोलते हुए - जी बुआ

बुआ - चल झुठा जैसे मुझे पता नही चलेगा कि कौन पहली बार कर रहा है कौन नही

मै हस्ते हुए - नही बुआ मेरा पहला ही था ,,वो मैने बहुत बार मम्मी पापा को देखा था ना करते हुए तो

बुआ - अरे वाह तब तो मुझे एक और कुवारे लण्ड से चुदने को मिला

मै - एक और मतलब ,,,, और किसके लण्ड से चुदी हो बुआ

बुआ - क्या पागल तु भी ,,, अरे मेरी सुहागरात पे तेरे फूफा जी भी कुवारे ही थे ना ,,,हिहिहिहिही

मै - अच्छा लेकिन मुझे तो नही लगता कि सिर्फ फूफा जी की मेहनत से ही आपकी गान्द इतनी बड़ी हुई है ,जरुर इसमे 3 4 लण्ड जा चुके है

बुआ - धत्त बदमाश ,,, तुझे क्या तेरी बुआ सड़क छाप लगती है क्या ,,

मै - अरे अरे नही बुआ मै तो बस पूछ रहा हू ,,,क्योकि आपके यहा आये अभी दो दिन हुए इतने मे मेरे और पापा के लण्ड का बुरा हाल हो गया

सोचो आपके यहा रोज लोग आपको देख कर क्या आहे नही भरते होगे जैसे क्या हिहिहिही

बुआ मेरे गाल खीचते हुए - बहुत शरारती हो गया है तू अब हा

मै - बताओ ना बुआ कितने लोगो के लण्ड लिये है अब तक

बुआ - धत्त बदमाश ऐसे कोई बात करता है अपनी बुआ से

फिर मुझे ल्गा ऐसे बात नही बनेगी

मै - अच्छा बुआ वो सब छोडो की कितनो से चुदी हो या नही,,, लेकिन ये बताओ घर मे तो सारे मर्द आपकी जवानी को आँखो से तो जरुर भोग्ते होगे

बुआ - घर मे कौन घुरेगा पागल ,,, हा बाहर के लोग तो ऐसे ताकते है मानो खड़े खड़े आँखो से चोद दे हिहिहिही

मै - अच्छा क्यू घर मे छोटे फूफा भी तो है ना

बुआ - धत्त पागल चल बहुत बाते हो गई अब निचे चल सोना नही ह क्या

मैने करवट ली और बाये हाथ से बुआ की चुचियो को मिजते हुए - आप कहो तो एक बार और हो जाये बुआ

बुआ - अच्छा इतना दम है क्या

मै - और क्या ,,, बोलो तो अभी फिर से ,....

बुआ - ना बाबा ना ,,, बेटा 3 बार झडी हू मै फिर बाद मे ना अब,,,और चल टाईम आने दे देखूंगी कितना दम है तेरे मे लेकिन अभी निचे चल सोना है मुझे बहुत थक गई हू

फिर मैने बुआ के होटो को चुमा - हा चलो बुआ

फिर हम नीचे आये और बुआ दीदी के कमरे मे चली गई लेकिन मुझे तो सबसे निचे जाना था सोने

साला बुआ के चक्कर मे तो मा को मै भूल ही गया ,,, लेकिन इतनी रसिली चुत भी तो मिली ना ,,,सोच के फिर से लण्ड टनटना गया

मैने लण्ड को ऐडजस्ट किया और चल दिया पापा के रूम की तरफ ,,,,

मै निचे पहुचा तो देखा पापा और मा दोनों सो रहे थे ,, फिर मैने मोबाईल चेक किया तो 11 बज रहे थे ,,, फिर मै भी आराम से कमरे मे घुसा तो देखा पापा मा के एक तरफ जघिये मे सोये है और मा भी पेतिकोट ब्लाऊज मे पापा के सीने पर हाथ रख करवट लिये सोयी है ।

मै धीरे से बिस्तर पर चढा और लेट गया ,,मेरी खुड़वड़ाहत मे मा की आंखे खुल गयी या वो मेरा ही इन्तेजार कर रही थी

जैसे ही मैं लेता मा मेरी तरफ घूम गई और मै मा को देख कर स्माइल किया

मा ने आहिस्ता से बोला - कहा रह गया था तू मै इन्तेजार कर रही थी ना

मै - अरे मा वो बुआ के साथ था तो बातो बातो मे टाईम निकल गया

मा मुस्कुराते हुए - अच्छा इतना देर तक क्या बात कर रहा था , तू तो बुआ का दूध पी रहा था

मै - हा मा और पता नही कब सो भी गया वही ,,, वो तो बुआ ने उथाया तब आया हू

मा - अचछा चल ठीक है तब सो जा अब

मै मायुस सा मुह बनाते हुए - और वो जो आप सिखाने वाली थी वो

मा - अब तु था नही तो हम लोगो ने कर ना ,,, मुस्कुरा कर बोली

मै - क्या कर लिया मा

मा मुस्कुराते हुए - सब जानता है फिर भी मेरे मुह से सुनना है तुझे,,,सब समझती हू मै

मै - क्या मा ,,अच्छा सुनो ना मा एक बात पुछ्नी थी बुरा ना मानो तो

मा - अरे पूछ ले ना बेटा ,,,वैसे भी तेरे पापा सो गये है

मै - पक्का ना गुस्सा नही होगी न आप

मा - नही मेरा राजा बेटा ,फिर मा ने अपना हाथ मेरे गाल पर फेरा

मै हिम्मत की और मा से बोला - अच्छा मा क्या आप भी पापा के अलावा किसी और से

मा - धत्त पागल ,, क्या मै तुझे ऐसी लगती हू ,,, सच कहू बेटा तो मुझे कभी तेरे पापा के प्यार मे कभी कोई कमी मह्सूस ही नही हुई ,,, भले ही वो मेरी दीदी को भोगे हो या अपनी बहन को भोगना चाहते हो ,, लेकिन मेरे लिए उनका प्यार आज भी वैसा ही है ।

मै खुश होकर उनकी बाते सुनने लगा

मा - हा लेकिन मेरे मायके मेरे बहुत आशिक रहे है हिहिहिही

मै थोड़ा मुस्कुरा कर - अच्छा सच मे ,,,तो क्या शादी से पहले आपका कोई बॉयफ्रेड भी था

मा मुस्कुराते हुए - नही रे कोई नही था , हा लेकिन मेरे और दीदी के पास प्रोपोजल बहुत आये थे ,,, लेकिन हम लोग अचछे से जानते थे की वो सब हमारे जिस्म के लिए भाग रहे हैं ।

मै - अच्छा सच मे हहहहह ,,,, और मौसी का कोई था क्या शादी से पहले

मा - हम्म्म लेकिन वो लोग पकडे गये फिर बाऊ जी ने दीदी की शादी करवा दी अपने ही दोस्त के बेटे से

मै - क्या मा पुरा पुरा बताओ ना कैसे हुआ था

दोस्तो अब देखते है आगे के अपडेट मे रागिनी अपने मायके के कौन कौन राज खोलती है और खुद हमारा हीरो कैसे अपनी मा से सब उगलवायेगा
 
Update 28

अब तक

मै थोड़ा मुस्कुरा कर - अच्छा सच मे ,,,तो क्या शादी से पहले आपका कोई बॉयफ्रेड भी था

मा मुस्कुराते हुए - नही रे कोई नही था , हा लेकिन मेरे और दीदी के पास प्रोपोजल बहुत आये थे ,,, लेकिन हम लोग अचछे से जानते थे की वो सब हमारे जिस्म के लिए भाग रहे हैं ।

मै - अच्छा सच मे हहहहह ,,,, और मौसी का कोई था क्या शादी से पहले

मा - हम्म्म, लेकिन वो लोग पकडे गये फिर बाऊ जी ने दीदी की शादी करवा दी अपने ही दोस्त के बेटे से

मै - क्या मा पुरा पुरा बताओ ना कैसे हुआ था

अब आगे

दोस्तो कहानी अब राज के मामा के घर की तरफ घूमेगी इसिलिये कुछ नये परिचय देना चाहूँगा

नया परिचय

नाना - बनवारी सेठ , उम्र 68 साल , पेशे से किसान है लेकिन खेती ज्यादा होने से अब जमीदार का काम करने लगे है ,,, खेतों मे काम करने की वजह से आज भी उनका शरीर हृष्ठ पुष्ट है ।

नानी - अब नही है इस दुनिया में काफी समय बीत चूका है तो उनका कोई रोल नही है अब

मामा - राजेश , उम्र 44 साल , नाना के इकलौटे बेटे होने की वजह से हमेशा ऐयाशी की है ,,, यहा तक की घर मे और खेत मे काम करने वाली औरतो को भी नही छोड़ा

मामी - सुनीता , उम्र 42 साल ,,, रसभरी जवानी से भरपुर 38 34 38 का गजब का फिगर ,,, लगता नही की दो बच्चो की मा है

गीता और बबिता - मामा की जुड़वा बेटीया अभी 10वी मे है दोनो ,,, एक तरफ गीता जहा गदराई जिस्म वाली है वही बबिता थोडी सामान्य जिस्म वाली लेकिन बला की खुबसुरत एकदम अपने मा जैसी ।

ये वो पात्र है जिनको मै जानता हू ,, चुकि मेरा ज्यादा आना जाना होता नही है कही तो अभी फिलहाल मे मामा के यहा की यही जानकारी है ।

वापस कहानी पर

मै मा को जिद करते हुए बोला - मा बताओ ना कैसे क्या क्या हुआ

मा मुस्कुराकर अच्छा अच्छा ठीक है बताती हू ।

मा - तो सुन ,,, मेरे घर मे हम तब 5 जन रहते थे ,,, मै , तेरी मौसी , तेरे मामा और तेरे नाना नानी ।

बात तब की है जब हम लोग उस समय 10वी पास कर चुके थे और जवानी से थोड़ा थोड़ा वाकिफ होने लगे थे ,, चुकि रज्जो दीदी हम भाई बहनों मे सबसे बड़ी थी तो वो मुझसे ज्यादा समझदार थी और बहुत जानकारी भी थी उनको, लेकिन हम दोनो बहने एक सहेली जैसी थी कोई भी बात हो हम आपस मे कभी नही छिपाती थी ,,,यहा तक कौन लड़का हमे कैसे देख रहा है किसने प्रोपोज किया ,, रास्ते मे कौन क्या क्या गंदे कमेंट किया सब कुछ ,,, और तो और सेक्स की बाते फिर शादी को लेकर अपनी fantesy भी एक दुसरे से शेयर करते थे ।

मै - वाह्ह मा और फिर आगे बताओ ना

मा - हा सुन ,,, मै और दीदी एक ही कमरे मे सोते थे जबकि मा और पापा अपने रूम मे और राजेश का अपना रूम था ।

एक रात ऐसे ही मै और दीदी शादी को लेकर अपनी अपनी बाते रख रहे थे तो मैने उन्से पुछा

रागिनी - दीदी मुझे शादी करने का बहुत मन होता है खुब तैयार होने का भी मन करता है लेकिन उसके बाद के काम से मुझे बहुत डर लगता है

रज्जो - अरे उसमे डर कैसा छोटी शादी के बाद ही तो खुल कर चुद्ने को मिल्ता है और तू डर रही है ।

रागिनी - क्या दीदी ,, वही तो डर है ,,, मेरी सहेली कहती है कि पहली बार मे बहुत दर्द होता है

रज्जो - क्या छोटी चल उठ

रागिनी - अभी कहा

रज्जो - चल उठ मै बताती हू

फिर दीदी मुझे खिच कर पापा के कमरे की तरफ ले गयी ,,, जहा मा और बाऊ जी के चुदाई की आवाजे उनके दरवाजे के बाहर सुनाई दे रही थी ।

मै - हीहीहि क्या मा सच मे आप लोग नाना नानी को वो सब करते देखते थे

मा - नही रे वो पहला दिन था ,,,तू बिच मे ना बोल मै बता रही हू न

मै - अच्छा सॉरी आप बताओ

मा - हा सुन ,, फिर दीदी मुझे खिडकी के पास ले गयी और कमरे के अंदर का नजारा दिखाया ,,, अंदर बाऊजी मा को घोड़ी बनाये धकाधक पेले जा रहे थे और मा मुस्कुराते हुए बाऊजी को और उकसा कर चुदवा रही थी

उस दिन बेटा मैने पहली बार किसी को चुदाई करते देखा था और फिर दिदी बोली

रज्जो- देखा कितना मजा है शादी के बाद और तू डर रही है

रागिनी - हा दीदी लेकिन अभी तो हमारी शादी नही होगी ना

रज्जो - मैने तो इसका इन्तेजाम कर लिया शादी के पहले ही

रागिनी - क्या दीदी आपका कोई बॉयफ्रेड भी है और आपने मुझे बताया नही

रज्जो - नही रे बॉयफ्रेंड थोडी है वो बस मजे लेने के लिए है ।

रागिनी - नही दीदी ये गलत होगा और बाऊजी को पता चला तो वो बहुत नाराज होगे

रज्जो - तु किसी को मत बोलना चल अब कमरे मे

फिर हम लोग कमरे मे चले गये,, उस दिन से दीदी हमेशा उस लडके के बारे मे बाते करने लगी और पहली बार उससे मिलने के लिए एक दिन भी चुन लिया

वो सोमवार का दिन था और उस दिन हम दोनो बहने स्कूल गयी दोपहर मे लंच के समय दीदी मेरे पास आई और बोली बैग लेले चल चलते है ।

रागिनी - कहा जाना है दीदी अभी तो क्लास बाकी है

रज्जो - अरे तू चल मैने छूटी लेली है

फिर हम दोनो स्कूल से बाहर चले गये और दीदी मुझे खेतों की तरफ लिवा के जाने लगी

रागिनी - क्या दीदी कहा लेके जा रही है आप मुझे बताओ तो

रज्जो - वो आज हरीश आयेगा टयूबवेल पर ,,,वो शर्माते हुए बोली

रागिनी - क्या दीदी आप मरवाओगी आप ऐसे खुले मे मिल्ने जा रही हो ,,, मेरी मानो वापस घर चलते है किसी ने देख लिया तो दिक्कत हो जायेगी

रज्जो - कोई दिक्कत नही होगी छोटी ,, इसिलिए तो तुझे यहा बुलाया है और तू साथ रहेगी तो कोई शक भी नही करेगा ,,वैसे भी ये अपना टयूबवल है

फिर हम दोनो लोग धीरे धीरे पहुचे टयूबवेल पर

और वही एक छोटा सा कमरा था स्टोर रूम जैसा जिसमे खेती के लिए फावड़ा पाइप , इंजन और बाकी सामान थे चुकि बाऊजी एक जमीदार थे तो हमारी खेती बहुत ज्यादा थी कमरे एक तरफ एक चौकी और बिस्तर थे जहा सोने बैठने का इंतजार भी था

फिर हम लोग जैसे ही ट्यूबवेल पर पहुचे वहा एक हमारी की क्लास का लड़का पहले से ही मौजुद था उसका नाम हरीश था ।

हम दोनो को देख कर वो मुस्कुराया और फिर वो कमरे मे चला गया फिर दीदी भी इधर उधर देखी और वो भी कमरे मे चली गयी ,, लेकिन मै बाहर ही थी , फिर मैने बोला - दीदी आप दरवाजा बंद कर लो कोई आयेगा तो मै आवाज दूँगी

रज्जो - नही छोटी दरवाजा खुला रहने दे किसी को ज्यादा शक नही होगा समझी

मैने सर हिलाया और मुस्कराकर टयूबवेल की तरफ चली गई और मन मे डर था लेकिन एक अजीब सा रोमांच शरीर में दौड़ने लगा कि अंदर दीदी क्या करवा रही होगी ।

5 मिंट बाद ही हरीश बाहर आया और मुझे देख कर मुस्कुराते हुए निकल गया दुसरी तरफ ,,, मै तुरंत कमरे मे गई तो देखा की दीदी अपना शर्त के बटन बंद कर रही थी ,,,

रागिनी - अरे दीदी हो गया क्या

रज्जो - हा और क्या ,,,वो मुस्कराते हुए बोली

रागिनी - लेकिन इतना जल्दी कैसे

रज्जो - क्यू तुने देखा नही क्या, वो क्या किया इतना जल्दी

रगिनी - धत्त दीदी ,,, मै थोडी न देखूंगी ,,,वैसे उसने किया क्या

रज्जो - कुछ नही हम लोगो ने किस्स किया और उसने ,,,वो शर्माने लगी

रागिनी - क्या दीदी बताओ ना

रज्जो - मेरे दूधो मे मसला

रागिनी - बस इतना ही ,,,

रज्जो - हा इतना ही क्यू तू क्या सोच रही थी कि मै चुदने आई हू ,हिहिहिही

रागिनी - हा मुझे तो ऐसा ही लगा ,,और वैसे भी इतना ही करवाना था तो मुझसे बोल देती मै ही ,,,, हीहीहि

रज्जो - चल बदमाश एक लडके का स्पर्श अलग होता है छोटी ,,, तू नही सम्झेगी

उस दिन के बाद भी दिदी हरीश से कई बार मिली लेकिन बस चुम्मा चाटी और अपने दूध मिज्वा लेती ,,, कुछ ही महीने मे दीदी के दूध बडे होने लगे ,,, और दिदी पहले से ज्यादा आकर्षक दिखने लगी थी ।

फिर कुछ समय बाद हरीश गाव मे किसी और लडकी को चोदते हुए पकड़ा गया ,, और फिर हम लोग बहुत डर गये की हमारी बाते ना खुल जाये ।

मै - लेकिन मा आपने तो बोला था कि मौसी का बॉयफ्रेंड था और वो लोग पकडे गये थे

मा - अरे नही रे वो पहले हरिश पकड़ा गया ,, फिर तो काफी समय बाद दीदी पकड़ी गई ना ,,, तू चुपचप सुन बस बीच मे बोलेगा तो नही बताने वाली मै

मै - सॉरी मा अब नही बोलूंगा अब आगे बताओ जब हरीश पकड़ा गया तब

मा - फिर सुन ,, उस दिन से हम लोग काफी डर कर रहने लगे कि कही हरिश किसी से कोई बात ना खोल दे ,,लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ और मामला शांत हो गया ,, मगर दीदी को धीरे धीरे उनके जिस्म को एक लगातर मिलने वाले हवसी प्यार की आदत हो चुकी थी ,,, वो एक रात मुझसे बोली

रज्जो - यार छोटी हरीश के वजह से मुझे एक जिस्म की लत सी लग गई है मेरे छातियो मे रोज खुजली होती है कि कोई इनको मले और मसले कोई मेरे निप्प्ल को लेके चूसे

रागिनी - आपने देखा ना दीदी हरीश के साथ क्या हुआ अब भी आप चाहती हो हम लोग भी पकडे जाये ,,,,

रज्जो - मै जानती हू छोटी लेकिन तू ही बता मै अपनी इस तडप का क्या करू

मुझे दीदी की बात सुन के थोड़ा उनपर रहम आया तो

रागिनी - आप कहो तो मै कुछ मदद करू

रज्जो - तु भी तो एक लडकी है ना

रागिनी - हा दीदी लेकिन मेरी एक सहेली बता रही थी चुचिया चुसवाने मे ही मज़ा आता है ,, लडके के कडक हाथ में चाहे लडकी की नाजुक स्पर्श मे ही

रज्जो - धत्त पागल तू मेरी बहन है

रागिनी - क्या दीदी उससे बढ़कर हम लोग एक दोस्त भी है ,,, और सबसे बड़ी बात है कि हम लोग यहा बंद कमरे मे क्या कर रहे हैं वो किसी को पता नही चलेगा और आपको तडपना नही पडेगा ।

रज्जो - बात तो तेरी सही है लेकिन क्या ये सही होगा

रागिनी - क्या दीदी मान जाओ न और मै भी मह्सूस करना चाहती हू वो स्पर्श,,,

मा कि बाते सुन कर मै उत्तेजित हो रहा था और उनकी तरफ सरक कर पास भी चला गया फिर लोवर मे अपना लण्ड ऐडजस्ट करने लगा । मा ने भी मुझे लण्ड को एद्जेस्त करते हुए देखा तो मुस्करा दी और आगे बताने लगी ।

मा - फिर मैने दीदी के सूत के ऊपर से ही उनकी छातियो को सह्लाया वो सीधे लेटे लेटे सीसकने लगी और बहुत दिनो की तडप से वो मेरे हाथ को पकड कर अपने चुचियो पर दबाने लगी ,,, ये मेरा पहला स्पर्श था मुझे काफी मुलायम लगा ,,, मैने नहाते समय या बाऊजी और मा की चुदाई के समय कई बार अपनी चुचियो को मसला था लेकिन दीदी की चुचियो की बात ही अलग थी वो एकदम मुलायम और मेरे दुगने के बराबर थे उस समय ।

फिर उस दिन मैने दीदी को वो खुश किया ,,हम दोनो ने किस्स किया और मैने उनके चुचे पूरी रात चूसे ।

ऐसे ही हमारे दिन कटने लगे और धीरे धीरे मै भी दीदी के खेल मे शामिल हो गई,,कभी हम अपने कमरे मे ये चूचियो को चूसने का खेल खेलते तो कभी मा बाऊजी की चुदाई देखते हुए ।

लेकिन एक रात हम दोनो पकडे गये उस रात मै बाऊजी के कमरे के बाहर दीदी को खड़ी करके अन्दर की चुदाई देखते हूए उनकी चुचिया चुस रही थी और उस रात राजेश उठा था पेसाब करने के लिए,, और उसकी नजर हम दोनो पर पड गयी फिर वो उसी समय हम दोनो के पास आया और बोल

राजेश - क्या कर रहे हो आप दोनो ये

उस समय राजेश बड़ा हो चुका 9वी मे पढ्ता भी था। उसे भी सेक्स के बारे मे सब पता था ,,, उसके आने से हम लोग बहुत डर गये थे लेकिन जब मैने देखा कि राजेश एक टक दिदी की नंगी चुचिया देखे जा रहा है तो मै समझ गई इसको भी अपने खेल मे मिलाना पडेगा नही तो ये कल को कुछ कह ना दे ।

फिर मैने थोडी सोचा फिर दीदी और राजेश को लेकर कमरे मे चली गई

अब देखते है आगे के अपडेट मे क्या होगा ।
 
Update 29

अब तक :

लेकिन एक रात हम दोनो पकडे गये उस रात मै बाऊजी के कमरे के बाहर दीदी को खड़ी करके अन्दर की चुदाई देखते हूए उनकी चुचिया चुस रही थी और उस रात राजेश उठा था पेसाब करने के लिए,, और उसकी नजर हम दोनो पर पड गयी फिर वो उसी समय हम दोनो के पास आया और

राजेश - क्या कर रहे हो आप दोनो ये

उस समय राजेश बड़ा हो चुका 9वी मे पढ्ता भी था। उसे भी सेक्स के बारे मे सब पता था ,,, उसके आने से हम लोग बहुत डर गये थे लेकिन जब मैने देखा कि राजेश एक टक दिदी की नंगी चुचिया देखे जा रहा है तो मै समझ गई इसको भी अपने खेल मे मिलाना पडेगा नही तो ये कल को कुछ कह ना दे ।

फिर मैने थोडी सोचा फिर दीदी और राजेश को पकड कर कमरे मे ले गई ।

अब आगे

राजेश - दीदी आप लोग ये क्या कर रहे थे ,,, घर मे कोई देख लेता तो

रगिनी - देख राजेश तू ये बात किसी को नही कहेगा ठीक है नही तो हमारे ही घर की बदनामी होगी और तू चाहता है कि ऐसा हो

राजेश - मै क्यू चाहूंगा दीदी ,,, लेकिन मेरा क्या फायदा आप लोग तो फिर भी मज़े लोगे ना

मै समझ गई कि राजेश भी हमारे साथ मज़े करना चाहता है तो मैने दीदी के पास गई और उनके कान मे

रागिनी - दिदी क्यू ना इसको भी शामिल कर ले ,, आपको भी तो एक लडके की तलाश थी और घर की बात घर मे रह जायेगी

रज्जो - तु पागल है क्या वो हमारा छोटा भाई है रे ,,, मै कैसे करूंगी ,,,तेरे साथ फिर भी ठीक था लेकिन

रागिनी - आपके लेकिन लेकिन के चक्कर मे हम दोनो पिटे जायेगे दीदी,,,

रज्जो - तू समझ नहीं रही है रागिनी ,, लड़को को उंगली पकडओ तो वो हाथ पकड लेते है ,,,अगर मै राजेश के साथ मज़े लुन्गी तो वो आगे भी बढ़ेगा और ऐसे मे हम लोग उसे मना नही कर पायेंगे तू समझ इस बात को

रागिनी - दीदी आप बहुत दूर सोच रही हो अभी का देखीये बाद मे कोई ना कोई जुगाड किया जायेगा ।

रज्जो - ठीक है लेकिन पहल कौन करेगा तू बात कर ना

रागिनी - अच्छा तो राजेश तू क्या चाहता है हमसे

राजेश - दीदी मुझे भी आप लोगो की तरह मज़े करना है ,,क्या आप लोग मुझे सिखाओगे

उस दिन राजेश की बातो से लगा कि अभी वो नादान है और हल्के फुल्के मज़े लेना चाहता है लेकिन वही हम दोनो की गलती थी ।

उस रात के बाद रोज रात मे सबके सोने के बाद राजेश हमारे कमरे मे आता और हमारे दूधो से खेलता था ,,, धीरे धीरे वो दिन मे अकेले के समय मे भी दीदी या मुझे किसी कमरे मे ले जाकर मज़े लिया करता था । मगर राजेश को हम दोनो मे से किसी की भी चुत नही मिली हफ्तो तक ,,,जिससे वो हस्तमैथुन करने लगा और एक दिन दिदी ने उसे पकड़ा ,,, फिर ये तय हुआ कि उसकी सेहत का ध्यान दीदी रखेंगी और पता नही कब से दीदी ने मुझसे छिप कर दिन में कभी कभी राजेश का लण्ड चुस कर शांत किया करती थी ।

अब समय बीतने ल्गा और हम तीनो भाई बहन मे हवस समय के साथ और हावी होने लगा ,,,, एक तरफ जहां हम तीनो भाई बहन रोज रात मे एक साथ मजे करते तो दिन में चोरी छिपे दीदी राजेश के लण्ड चुस्ती थी रोज रोज चुचियो के मसलवाने के साथ राजेश की फरमाइशे भी बढ़ती और कभी कभी क्या लगभग रोज ही वो हम दोनो बहनो के चुतदो को भी मसलने ल्गा लेकिन चुत छूने के मामले को लेकर मै बहुत ही सतर्क थी और कभी कभी डांट भी देती थी ।

धीरे धीरे दीदी के बातो मे भी बदलाव आने लगा और वो अक्सर बाऊजी और राजेश के लण्ड को लेकर बाते करने लगी और ऐसे ही एक दिन

रज्जो - छोटी अब मुझे बहुत मन की जल्दी से शादी करने का है । अब और मै ऐसे ही उपरी मज़े ले कर तडपना नही चाहती

मैने भी मौका देख कर दीदी को ताना मारते हुए कहा - क्यू दीदी राजेश का लण्ड काफी नही है क्या जो अब दुसरे लण्ड की जरूरत पड़ गई । मै हमेशा से आपके बताने का इन्तेजार कर रही थी लेकिन आपने तो ब्ताया ही नही और अकेले ही मज़े लेने लगी । क्या इतनी पराई हो गई मै ।

रज्जो - सॉरी छोटी मुझे डर था कि कहीं तू नाराज ना हो जाये ,, मै राजेश की सेहत को लेकर परेशान थी और फिर धीरे धीरे मुझे भी उसके लण्ड की आदत हो गई और अब तो और भी ये इच्छाएं बढ़ती जा रही है । अब तो हाल ये है छोटी की कोई भी लण्ड देखती हूँ तो मुह मे पानी आ जाता है ,,,

रागिनी - इसिलिए इस समय आपको बाऊजी के लण्ड की बात करती रहती है ,,,

रज्जो - हा छोटी सच कहू तो मै बाऊजी के चोदने का अंदाज बहुत पसंद है ,,,,और

रागिनी - और क्या दीदी

रज्जो - मै चाहती हू कि मेरी सील हमारे बाऊजी ही तोड़े

रागिनी - क्या दीदी आप पागल हो ,,बाऊजी कभी नही मानेगे ,,, देखा नही वो मा को इतना चाहते है कि घर मे या खेत में काम करने वाली महिलाओं को एक नजर देखते तक नहीं और तो और सबको ढंग से कपड़े पहनने को भी डांट देते है ।

रज्जो - हा लेकिन समय आने दो मै कोसिश करूंगी और शादी से पहले ही अपनी चुत बाऊजी को दूँगी ।

समय बीता ,, साल भर बाद हमारी मा की खेतो मे सांप काटने से मौत हो गई और हम सब गहरे दुख मे डूब गये हमारे घर सभी नात रिस्तेदार आये और कुछ दिनो मे चले गये लेकिन हमारी सुलोचना बुआ रुक गई ।

बाऊजी के देख रेख के लिए ऐसे ही हफ्ता दो हफ्ता भर बीता तो मा की यादो का बोझ कम हुआ और वापस दीदी का हवस हावी होने ल्गा ,,, और हम तीनो भाई बहन फिर से कामक्रीड़ा मे लग गये क्योकि हमे यही एक मात्र साधन लग रहा था उन दुख भरे पलो को दूर करने का ,,, एक तरफ जहा हम लोग अपनी मस्ती मे थे दुसरी तरफ बुआ बाऊजी की सेवा मे लगी थी दिनरात उन्ही का ध्यान देती थी ।

ऐसे ही एक रात मै और दीदी अपने कमरे मे थे ,,,

रज्जो - छोटी चल ना एक बार पापा के कमरे की तरफ चले बहुत दिन हो गये उनका मोटा लण्ड देखे

रागिनी - क्या दिदी आपको लगता है कि मा के जाने के वो इनसब चीज़ो के लिए सोचेंगे

रज्जो - देख छोटी सेक्स ऐसी लत है अगर रोज की जाय तो वो इतनी जल्दी नही पीछा छोड देगी और तू चल ना क्या पता मा की याद मे लण्ड ही हिला रहे हो ।

रागिनी - क्या दीदी चलो ,, लेकिन वहा हम लोग कुछ करेंगे नही ब्स देख कर चले आयेंगे क्योकि बुआ आई है तो वो कही बाहर ना निकले

रज्जो - हा मेरी बहन अब चल

फिर मै और दीदी चुपके चुपके कमरे से बाहर निकले और धीरे धीरे पापा हम लोग पापा के कमरे की तरफ गये तो अंदर रोशनी थी ,,, मुझे कुछ अजीब लगा और हल्की हल्की सिस्कियो की आवाज आने लगी ,,, मेरे और दीदी के धड़कन बढ़ गई फिर अंदर कमरे मे खिडकी से देखा तो बाऊजी निचे लेटे हुए थे और सुलोचना बुआ उनके लण्ड पर कूद रही थी ।

जो सपने मेरे दीदी देख रही थी वो आज मुझे उससे दूर जाता दिख रहा था

रगिनी - दीदी ये तो बुआ ,, अब बाऊजी से कैसे आप

रज्जो - ये अच्छा है ना छोटी की बाऊजी बुआ को चोद रहे है इसका मतलब वो मुझे भी चोद सकते है ,,,वो मुस्कुराते हुए बोली ।

रागिनी - वो कैसे बुआ के रहते वो आपको क्यू चोदन्गे भला

रज्जो - देख छोटी बुआ वैसे भी ज्यादा समय नही रहने वाली है और एक बार नये चुत की तलब लग जाये तो आदमी को इससे पीछा छुड़ा पाना मुश्किल होता है

रागिनी - दीदी जो आपको सही लगे करो लेकिन मुझे इससे दूर रखना ,,

फिर समय बीता और एक महीने बाद बुआ चली गई और बाऊजी फिर से अकेले पड़ गये और कुछ ही दिनो मे उनकी तबियत बिगड़ने लगी ।

फिर दीदी ने उनका ख्याल रखना शुरू किया और दवाइया देना खाना पीना ,,,,, एक शाम ऐसे ही बाऊजी खेत से वापस आये और दीदी को बोला

बाऊ जी - रज्जो सुन बेटा आज मेरे पैरो मे बहुत दर्द है किसी नौकर को तेल लेकर भेज देना कमरे मे मालिश करने के लिए

उस शाम रज्जो दीदी किसी को ना बोल कर खुद तेल कर गई और करीब डेढ़ घन्टे बाद आई कमरे मे , रात हो चुकी थी । वो बिस्तर पर बहुत आराम से बैठि और उनके चेहरे पर अलग ही भाव थे ।

रागिनी - क्या हुआ दीदी आपकी तबीयत ठीक है ना

रज्जो मुस्कुराए हुए - अब तो एकदम ठीक है छोटी

रागिनी - लेकिन आप ऐसे पैर उठाए क्यू ,,,कही बाऊजी से तो ,,,नही नही नही ,,

रज्जो - हम्म्म्म, और फिर दीदी मेरे गले लग गई ।

रागिनी - लेकिन आप तो मालिश के गई थी ती ये सब कब हुआ और बाऊजी तैयार हो गये

अब आगे कि कहानी रज्जो की जुबानी

रज्जो - वो मै अन्दर गई तो बाऊ जी कुर्सी पर बैठे थे और पैर उठा कर बेड पर रखा था

मुझे देखते ही बोले

बाऊजी - अरे बेटी तुने क्यू तकलीफ की किसी को भेज देती ,,,

रज्जो - क्यू बाऊ जी मै नही कर सकती आपकी सेवा ,,, मै भी तो आपकी अपनी हू

फिर बाऊजी कुछ बोलते उससे पहले मै अपना चुनरि निकाल कर बेड पर रख दिया और बाऊ जी के पैर के पास बैठ गई

मगर जब मैने ऊपर देखा तो बाऊजी एक टक मेरे सूट के दिखते मेरी छातियो के घाटी को निहारे जा रहे थे ,,,मुझे हसी आई और मैने उनको बोला - बाऊ जी थोड़ा धोती ऊपर किजीये

फिर बाऊ जी ने चौके बोले - कुछ कहा बेटी

रज्जो - अपनी धोती ऊपर किजीये आप हिहिहिही

बाउजी ने फिर धोती अपनी जांघो तक चढाई और मैने हल्का सा तेल लिया और पैरो की मालिश करने लगी ।

एक तरफ जहां मेरी नजर बराबर बाऊजी के लंड पर थी जो धोती मे कैद थी वही बाऊजी मेरे रसिले चुचे देख कर उत्तेजित होने लगे ।

बाऊ जी - लगता है अब मेरी बिटिया बड़ी हो गई है क्यू

रज्जो - अच्छा वो क्यू बाऊजी

बाऊजी - अरे बेटी जब बाप के जुते बेटे के पैर मे और मा की चोली बेटी को होने लगे तो समझो बच्चे बडे हो गये हैं ।

मुझे थोडी शरम आई लेकिन फिर भी मैने बाऊजी से पुछा - लेकिन बाऊजी मुझे मा की चोली कहा से होगी

बाउजि - अरे एक बार पहन तो सही बेटी ,,, और फिर मेरे चुचो को घुरने लगे ।

मै चुप रही और मुस्कुराते हुए पैर की मालिश करने लगी फिर एक नजर उनकी धोती पर गया जो उनके मोटे लण्ड की अकडन से ऊपर होने लगी

बाऊ जी ने भी देखा की मेरी नजर कहा है

फिर मैने बोला - बाऊजी हो गया यहा ऊपर का भी कर दू

बाऊजी - बेटा दर्द तो है लेकिन ,,, रहने दे तू आराम कर

रज्जो - अरे क्या लेकिन पैर निचे करिये दोनो मै कर देती हू आपके जांघो की भी मालिश ,,, फिर बाऊजी ने दोनो पैर नीचे किये और मै ऊनके पैरो के बिच बैठ गई

रज्जो - बाऊजी आप धोती थोड़ा और ऊपर कर को नही तो तेल लग जायेगा

बाऊ जी ने दोनो साइड से धोती को चढा लिया और एक वी शेप क्छ्छे का आकार दे दिया जिससे उनका लण्ड उभर का और बड़ा दिखने लगा ।

मैने तेल लिया और बाऊजी के जांघो की मालिश करने लगी ,,, मुझे बहुत इच्छा होने लगी की काश इतना पास आ गयी हू तो एक बार बाऊजी लण्ड देखने को मिल जाये

मेरी नजर बराबर उनके लण्ड के ऊभारो पर थी जिसे बाऊजी भी देख रहे थे और मेरे चुचो को घुरे जा रहे थे ।

मैने सोचा जब बाऊजी भी यही चाहते है तो मै क्यू पीछे हटू

रज्जो - बाऊजी आप धोती निकाल दिजीये ,,, देखीये तेल लग जा रहा है

बाऊ जी - लेकिन बेटा मैने कुछ पहना नही है अन्दर,,, मुझे कोई दिक्कत नही है लेकिन तुझे अनुचित ना मह्सूस हो ।

रज्जो - बाऊजी आपकी तबियत मेरे लिए ज्यादा जरुरी है और वैसे भी वो भी एक शरीर का हिस्सा ही है ना तो मुझे कोई आपत्ति नही है बाऊजी

फिर बाऊजी मेरे सामने खड़े हुए और फिर धोती निकाल दी ,,, 6" का आधा खड़ा मोटा झूलता हुआ लण्ड आड़ो के साथ मेरे सामने आ गया ।

फिर बाऊजी वापस कुर्सी पर बैठ गये ,, मेरे सामने उन्का मोटा काला लण्ड आधे खड़े होने के साथ कुर्सी से लटक रह था मैने थूक गटक और वापस से तेल उनकी जांघो पर लगाने लगी और बार बार लण्ड को निहारने लगी ,,, खड़ा लण्ड अपने सामने देख कैसे अपने आप को रोके रखा था मै ही जानती थी ,,,

फिर मैने धीरे धीरे मालिश करते हुए बाऊजी के आड़ो को उल्टे हाथ या कलाई से छूना सुरु किया ,,, नतिजन बाऊजी का लण्ड खड़ा होने ल्गा ,,,जो कभी मेरे कान पर तो कभी मेरे ललाट पर टच होने ल्गा ,,,जब भी उनका लण्ड मेरे चेहरे के पास छुता तो मै बाऊजी को देखती वो मुसकरा रहे होते ।

मैने भी मौके को फायदा उठाया और एक हाथ से कटोरी से तेल निकाला और दोनो हाथों मे अच्छे से लगाया और धीरे से बाऊजी के आड़ो पर हाथ फेरते हुए तेल लगाने लगी ,,

बाऊजी मेरे द्वारा ऐसा कुछ करने की उम्मीद नही थी और मेरे नाजुक हाथो का स्पर्श अपने आड़ो पर पाकर उनका लण्ड और सख्त हो गया उन्होने एक गहरी आह भरी और बोले - इस्स्स्स्स बेटी क्या कर रही है तू ,,,वहा क्यू लगा रही है

रज्जो - अरे बाऊजी दोनो पैर पर मालिश कर दी हू ये हिस्सा बाकी था नही करंगी तो रात मे आपको खुजली होगी

बाऊजी ने मेरे सर पर हाथ फेरा और बोले - अच्छा ठीक है बेटी कर ले जैसा तुझे सही लगे

फिर मैने तेल लिया और बाऊजी लण्ड की जड़ो मे तेल लगाते हुए अच्छे से उन्के आड़ो मे मलिश करने लगी लेकिन मैने खुद को समान्य रखा और जरा भी कोई भाव अपने चेहरे पर नही आने दिये

वही बाऊ जी लण्ड मेरे स्पर्श से खड़ा होने लगा था और सल्लामी देने ल्गा था लेकिन जिस खजाने को देखने की चाह मेरी थी वो अभी उस आधी खुली चमडी के अंदर था ,,वो था मेरे बाऊजी का लाल सुपाड़ा,,,

करीब दो मिंट बाद मैने फिर तेल लिया और इस बार बाऊ जी के लण्ड को दोनो हाथो मे लेके तेल से लीपने लगी और इसी दौरान मैने उनकी चमडी नीचे की और उनका लाल सुपाडा नसो के साथ दिखने लगा ,,,, मै अब अपना सन्तुलैन खोने लगी और मेरी सांसे तेज़ होने लगी थी जिसे बाऊ जी को भी आभास हो चूका था ,,,,मै कभी भी अपना सबर खो सकती थी ,,,लेकिन मेरे लागातार निचे बैठ कर मालिश करने से बाऊजी के लण्ड की नशे फटने को आ गयी थी ना जाने कैसे उन्होने मेरे मन की तडप को समझ गये फिर वो थोड़ा निचे की तरफ सरके साथ ही मेरे सर पर हाथ रखा और लण्ड की तरफ झुका दिया ,,,मेरे लिए तो सबसे अमृत सामान मौका मिला,,, और मैने भी अपना मुह खोल कर उनका सुपाडा मुह मे ले लिया और धीरे-धीरे अपने होठो को उनके लण्ड की गोलाई मे निचे की तरफ चली गयी और फिर मैने बाऊजी लण्ड चूसना सुरु कर दिया मै लगातार 10मिनटो तक बाऊजी का मोटा लण्ड चुसती रही और इस दौरान ना ही मैने बाऊजी की तरफ देखा और ना ही एक बार भी बाऊजी ने मुझ्से कुछ कहा बस मेरे सर पर हाथ फेरते रहे

फिर 10 मिंट बाद उन्होने मेरे कन्धों को पकड़ा और हल्का आ ऊपर किया ,,, मै समझ गयी कि बाऊज जी उठने को कह रहे हैं फिर मैने पीछे हट गयी और बाऊजी भी खड़े हो गये ,,, मुझे लगा बाऊजी अब बाहर चले जायेंगे ,,, और मानो मेरा प्रिय खिलौना मुझसे छीन जायेगा

लेकिन बाऊ जी ऐसा कुछ नही और वापस मुझे पकड़ा और उठाए ,,,मै नजरे निचे किये खड़ी हुई

फिर बाऊ जी ने मुझे घुमा दिया और मेरा सूट पकड कर ऊपर करने लगे ,,,,मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी लेकिन फिर भी मै शांत रही और बिना कुछ बोले बाऊजी की हरकतो मे शामिल होते रही

चुकी मैने सूत के अंदर कुछ नही पहना था तो सूट के निकालते ही मेरा आधा जिस्म नंगा हो गया और मैने तुरंत अपनी चुचियो पर हाथ रख लिये

फिर बाऊ जी ने अपना बकि का कपडा भी निकाल दिया और मेरे तरफ आगे आये । उनकी चौडी छाती जैसे ही मेरे नंगे कोमल पीठ को छुई मेरी धडकनें तेज हो गयी और मन मे एक खुशनुमा सा डर भी होने ल्गा ,,,डर इस बात का कि क्या मै आने वाले उन हरकतों को सह पाऊंगी जो बाऊजी मेरे साथ करने वाले थे ,,,क्योकि मै खुल कर बाऊजी के सामने आ कर खुद को रन्डी नही बनवाना चाहती थी

फिर बाऊजी ने मेरे नरम कंधो को दोनो तरफ से पकड कर अपनी तरफ खीचा और उनका गरम मोटा लण्ड और गर्म सीना मेरे कमर और पीठ से स्पर्श करने लगा ,,,जिससे मेरे पैर कापने लगे फिर बाऊजी ने मेरे हाथो को मेरी चुचियो से हटाया फिर नीचे से मेरे चुचो को पकड़ लिया और हल्के हाथो से सहलाने लगे

एक तरफ जहा बाऊजी हल्के हल्के मेरी चुचियो को मिजे जा रहे थे वही मेरी चुत लागातार पानी बहाये जा रही थी और मेरी सिसकियाँ भी तेज होने लगी थी

हम दोनो मे कोई बात नहीं हो रही थी ,,,,

कुछ समय बाद बाऊ जी ने मुझे छोडा और खुद बिस्तर पर बैठ गये और मुझे भी अपनी दाहिनी जांघ पर बिठा ,,,, अब तक हुए इस घटना मे मैने एक बार भी बाऊजी से नजर नही मिलाई थी ।

फिर उन्होने मुझे अपनी जांघ पर बिठा दिया जहा उनका लण्ड मेरे जांघ पर छुए जा रहा था और मेरी सासें फुले जा रही थी ,,उसी समय बाऊजी ने मुझे अपने दाहिने हाथ में मजबूती से पकड़ा और बाये हाथ से मेरी दाई तरफ की चुची को पकड़ा और झुक कर अपने मुह मे ले लिया और चूसने लगे ,,,,मै तडप उठी और सिसकिया लेटे हुए पहली बार बाऊजी की नंगी पीठ पर हाथ रख दिया एक बार बाऊ जी के चेहरे पर देखा तो वो अपनी मोटी मोटी खुरदरी जीभ को मेरे नाजुक गुलाबी रंग वाले किसमिस के दाने जैसे निप्प्ल को गिला कर कर के अपने मोटे होठो से चूसे जा रहे थे ,,, बाऊजी की मूछ का नुकीला हिस्सा मेरे चुचो ने नरम हिस्सो मे चुब्ने से मेरी सिसकी मे मीठा दर्द भी शामिल होने ल्गा । थोडी देर बाद बाऊ जी मुझे वापस अपने सामने खड़ा किया और मेरे दोनो हाथ उनके कंधो पर आ गये

फिर उन्होंने ने बिना कुछ बोले मेरे कमर से नाडे को बाहर की तरफ खीचा और मेरा खुला सलवार निचे जमीन पर गिर गया,,,, अब मै सिर्फ एक पैंटी मे थी वाप्स बाऊ जी ने मुझे पकड़ा और इस बार बाई जांघ पर एकदम घुटने के पास बिठाया और मुझे अपने कन्धे पर ले लिया ,,,, एक हाथ से उन्होने मेरी पीठ की तरफ से बाई तरफ ले जाकर मेरी चुची को पकड़ा और दुसरा हाथ मेरे जांघो मे घुमाने लगे ,,,मेने अपनी आंखे बंद की और बाऊजी के हाथो को अपने नाजुक जिस्म पर मह्सूस करने लगी

बाऊ जी मेरे चुची को मसलते हुए अपनी एक हाथ को मेरे पैंटी के ऊपर ले आये ,, मेरी पैंटी निचे की तरफ पूरी चिपचिपी हो चुकी थी ,,,, बाऊ जी ने मेरे नाभि के निचे के भागो पर पैंटी के ऊपर से ही सहलाना शुरू किया और फिर मेरे चुत के ऊपर ले आये ,,, मेरे अन्दर एक अलग ही तुफान मचा हुआ था ,,,मै अपने कमर हिलाने लगी थी और सिसिक्ने भी लगी ,,,, फिर जब बाऊजी ने उंगली को मेरी पैंटी की रबड़ मे फसा कर फैला और कमर की तरफ ले जाकर निचे करने लगे तो मैने भी अपने मोटे चुतडो को उठा कर अपनी पैंटी निकलवाने मे मदद की फिर जब मेरी पैंटी मेरे जांघो के बराबर मे आ गई तो बाऊ जी ने वापस मुझे खड़ा किया और मेरी पैंटी निचे कर दी अब हम दोनो नंगे हो चूके थे फिर बाऊ जी भी खड़े हुए और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया ,,, मैने तुरंत अपनी जांघो को जोडते हुए चुत को और अपनी चुचियो को अपने हाथ से छिपा लिया और एक तरफ सर को घुमा कर आंखे बन्द कर ली

फिर मुझे मह्सूस हुआ कि बाऊजी ने मेरे जांघो को छुआ और खोल दिया । मैने भी बिना कोई प्रतिकिया के उनका साथ दिया और फिर मुझे बिस्तर पर बाऊ जी का भार भी मह्सूस हुआ तो मैने तिरछी नजर से देखा तो बाऊ जी मेरे जांघो के बिच आ गए थे और मेरी टपकती चुत देखे जा रहे थे फिर उन्होने मुझे एक नजर देखा तो झट से मैने अपनी आँखे भीच ली ।

फिर मुझे अपनी चुत की ऊपरी चमडी पर एक खुरदरी सी घर्षण का अह्सास हुआ जिससे मेरा रोम रोम मे खून की दौड़ तेज हो गयी ।

अब मुझे बाऊजी के होटों और उनकी जीभ का खेल मेरे चुत पर मह्सूस होने ल्गा ये मेरे लिए पहला अह्सास था कि कोई मेरी चुत चाट रहा था और बाऊजी की जीभ की कलाबाजी के आगे मै चंद मिंट भी नही टिका सकी खुद को और झडने लगी इसी दौरान बाऊजी ने कभी एक तो कभी दो दो उंगलिया मेरी चुत मे डाली ,,,, उनकी मोटी उन्गलिया मेरे लिये किसी लण्ड से कम नही थी ,,,,

करीब 10 मिंट बाद बाऊजी उथे और अपना लण्ड मेरी चुत पर रखा ,,, उनके लण्ड का भार मेरी नाजुक चुत पर पडते ही मै समझ गई कि अब वो चोदन्गे

फिर उन्होने अपनी कमर को आगे पीछे किया और सुपाडे को मेरी मुलायम चुत पर रगड़ा

तो मैने भी बहुत हिम्मत की और बोली - बाऊ जी तेल ....

मै ब्स इतना ही बोल पाई इत्ने मे बाऊ जी उतरे और जमीन से तेल की कटोरी लेने चले मै उनको देखने के लिए वापस बिस्तर पर बैठ गयी तो मेरी नंगी चुचिया लटक कर सामने आ गयी ,, फिर बाऊजी ने मुझे देखा और मेरे पास आये ,,,, उनका लण्ड अभी भी वैसे का वैसे खड़ा और सख्त था मेरे मुह मे फिर से पानी भरने लगा तो मैने खुद पहल की और जमीन पर बैठ गयी जिससे बाऊजी समझ गये और मेरे चेहरे की तरफ आकर मेरे सर पर हाथ फेरा ,, मैने एक बार फिर से बाऊजी के लण्ड को मुह में भरना शुरू कर दिया और अच्छे से गिला कर वापस बिस्तर पर बैठ गयी ,,, बाउजि मेरे करीब आये और मेरे चेहरे को हाथो मे भरा ,,,, जिससे मेरे रोम रोम मे एक अलग ही उत्तेजना दौड़ने लगी और मैने आंखे बंद कर ली ,,,फिर वो झुके और मेरे माथे को चूमा और मुझे लिटा दिया ,,,,,एक बार फिर मेरी जन्घे खुल गयी

अब बाऊजी एक हाथ मे ढेर सारा तेल लिया और अच्छे से अपने लंड के सुपाड़े पर लगाया और फिर थोड़ा सा तेल लेकर मेरी चुत पर मल्ने लगे और ,,,, फिर वो बिस्तर पर चढ़ गये और मेरी जांघो के बिच अपने घुटनो के बल बैठ गये ,,, एक बार फिर उनहोंने अपने हाथो से चुत को सह्लाया और अपना गर्म तपता मोटा लण्ड मेरी चुत पर रख कर रगड़ने लगे ,,, फिर उन्होने मेरी जांघो को चौड़ा किया और अपना सुपाडा मेरी नाजुक सी चुत पर रखा और हल्का सा दबाया

मेरे अन्दर एक डर सा होने ल्गा तो मैने बोला - बाऊजी धीरे .... और इन सब मे पहली बार मैने बाऊजी की आँखो मे देखा वो हल्के मुस्कान के साथ एक हाथ मेरे गाल पर फेरा और थोड़ा सा जोर लगा कर मेरी कसी चुत मे अपना सुपाडा घुसेड़ा

रज्जो - अह्ह्ह्ह बाऊजी दर्द अह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह धीरे अह्ह्ह्ह्ंंंं

बाऊजी बिना कुछ बोले फिर से थोड़ा पीछे हुए और एक तेज धक्के से मेरी चुत के नाजुक दिवारो को चिरते हुए अन्दर घुस गये ,,,,, उनका तपता मोटा लण्ड मेरी चुत मे हुए दर्द मे मल्हम जैसा था ,,,फिर दो चार धक्को मे बाऊजी ने मेरे चुत का रास्ता खोल दिया और कुछ ही समय मे मै दर्द से दूर जननत मे सैर करने लगी ,,,, अब बाऊजी के हर धक्के मे मुझे सुकून मिलने ल्गा और करीब 10 मिंट तक मेरी कसी चुत मे अपना लण्ड रगड़ने के बाद पहली बार बाऊजी बोले - आह्ह्ह्ह रज्जो मेरा होने वाला है बेटी

मुझे भी अपनी चुत मे लण्ड का कसाव से पता चल रहा था कि उनका आखिरी धक्का चल रहा है

रज्जो - अंदर नही बाऊ जी ,,,, मै ,,,

फिर तुरंत बाऊ जी ने मेरी चुत से लण्ड निकाला और मेरे चेहरे के पास आ गये और लण्ड को हिलाने लगे ,, कुछ ही पलो मे उनका गर्म पानी मेरे मुह मे गिरने लगा और मैने बाऊजी का लण्ड मुह मे लेके अच्छे से चुस कर वापस छोड दिया और सीधा लेट गयी

फिर बाऊजी भी मेरे बगल मे लेट गये फिर 5 मिंट बाद

बाऊ जी - बेटी तुझे बुरा नही ना लगा ,,,

रज्जो - जी नही बाऊजी मै शादी से पहले आपकी ही अमानत हू ,,, मेरे से ज्यादा आपका मुझ पर हक है

बाऊ जी - सुक्रिया बेटी , मुझे तेरी मा के जाने के बाद से आज सुकून मिला है ,,,,

रज्जो - कोई बात नही बाऊ जी जब भी आपको मा की याद आये मुझे बुला सकते है आप

बाऊजी - बेटा याद तो उसकी हर रोज आती आती है न तो क्या तू रोज मेरे लिए ये बलिदान देगी

रज्जो - मैने कहा ना बाऊजी शादी तक मै आपकी ही अमानत हू ,,,,

बाऊ जी - सुक्रिया बेटा अब जा तू आराम कर ,,, दो दिन तक थोडी सेकाई कर लेना

वापस कमरे मे जहा मा और मौसी बाते कर रहे थे

रागिनी - अरे वाह दीदी आपने जो सोचा वो आज आपको मिल ही गया आखिर ,,, मै बहुत खुस हू आपके लिए

रज्जो - थैंक्स छोटी ,,, अगर तू कहे तो तेरे लिए भी बाऊजी से बात करू हीहीहि

रागिनी - नही नही ,,,

रज्जो - फिर क्या वो अपने पति से ही खुलवयेगी

रागिनी - हा दिदी मेरी इच्छा यही है की पहला लण्ड मेरे पति का ही रहेगा

फिर धीरे धीरे समय बीता और दीदी ने मामा को भी मौका दिया ,,, फिर दीदी ने मेरी मजबुरी समझी और खुद राजेश के कमरे मे जाकर चूदती थी ताकि मै अपने वादे पर बनी रहू ।

इसी दौरान मैने कयी नई चीजे सीखी ,,, जो मुझे दीदी ने सिखायी फिर 2 3 साल बाद बाऊ जी ने दीदी की सादी एक अचचे घर मे करवा दी फिर मेरी भी सादी हो गयी और फिर राजेश की भी

मै - अरे वाह मा क्या गजब की कहानी थी । लेकिन क्या सच मे आपने शादी के बाद भी नही सोचा नाना जी या मामा के बारे मे

मा - दीदी ने तो बहुत जोर दिया की आ साथ मे मज़े करते है लेकिन तेरे पापा का प्यार मुझे रोज मिलता था ,,, लेकिन अब देख रही हू कि ये भी दुसरी औरतो मे खोये रह रहे है

मै - तो क्या आप भी अब नाना या मामा से

मा - बेटा मन तो मेरा भी था की एक बार बाऊजी से लेकिन अब बहुत लेट हो गया है ,,,अब उनकी उम्र भी हो चुकी है और पता नही वो पहले जैसे

मैने मा को भावुक देखा तो उनकी तरफ घूम कर बोला - कोई नही मा मै हू ना हिहिहिही

मा - धत्त पागल,,,चल अब बहुत देर हो गई है सो जा ,,, कल शॉपिंग करना है ना

मै भी बुआ की चुदाई से थक गया था रात के 1 बजे थे तो मै भी मा से लिप्त कर सो गया ।

अब देखते है दोस्तो राज की अगली सुबह उसके जीवन मे कौन से नये रंग लेके आती है ।
 
Update 30

अब तक

मै - तो क्या आप भी अब नाना या मामा से

मा - बेटा मन तो मेरा भी था की एक बार बाऊजी से लेकिन अब बहुत लेट हो गया है ,,,अब उनकी उम्र भी हो चुकी है और पता नही वो पहले जैसे

मैने मा को भावुक देखा तो उनकी तरफ घूम कर बोला - कोई नही मा मै हू ना हिहिहिही

मा - धत्त पागल,,,चल अब बहुत देर हो गई है सो जा ,,, कल शॉपिंग करना है ना

मै भी बुआ की चुदाई से थक गया था रात के 1 बजे थे तो मै भी मा से लिप्त कर सो गया ।

अब आगे

अगली सुबह मेरी निद खुली तो 8बजे थे । रात की थकान से मै देर से उठा था तो देखा मा और पापा उठ चुके है और ऊपर भी चले गए हैं ।

मै रात की बातो को लेकर थोड़ा खुश था और उठकर ऊपर गया तो पापा, अनुज नास्ता कर रहे थे और मा दीदी कीचेन मे थी ।

मैने एक नजर बेडरूम मे डाली तो देखा बुआ कमरे मे भी नही ,,मतलब वो छत पर गयी होगी नहाने के लिए,,,,, बुआ का ख्याल आते ही लण्ड अंगड़ाई लेने लगा । मैंने तुंरत तौलिया लिया और ऊपर च्ला गया नहाने

मै छत पर पहुचा तो देखा बुआ बाथरूम के दरवाजे पर अन्दर की तरफ पैर रखे हुए कपड़े धुल रही थी ।

उस समय बुआ सिर्फ पेतिकोट मे थी और पेतिकोट को अपने भारी चुचो के ऊपर चढा कर बाँधा हुआ था ।

उफ्फ्फ पीछे से उनकी मोटी गाड़ पेतिकोट मे और फैल गई थी । मेरा तो लण्ड खड़ा हो गया था ,,, मैने तुरंत सारे कपडे निकाल कर अंडरवियर मे आ गया और धीरे से बुआ के पीछे बैठ गया और उनकी गरदन मे हाथ डाल कर एक चुची को पकड कर ऊपर खीचते हूए मिजने लगा

बुआ मेरे हुए अचानाक हमले से चौक गयी थी हुचुक कर उठ गई फिर मुड कर देखा तो मै था

बुआ - अरे लल्ला तुने तो डरा ही दिया ,,, और ये क्या कर रहा है तू खुली छत पर

मै - सॉरी बुआ वो आपको ऐसे ओपेन देख कर उत्तेजित हो गया था,,,, और देखो यहा कोई नही देख सकता

बुआ - य्हा कोई नही है लेकिन निचे तो सरे लोग है ना अगर कोई आ जाता तो

मै भी अन्दर बाथरूम मे घुस गया बुआ को हग कर लिया आह्हह कितना मुलायम जिस्म था

मैने उन्के कंधे पर सर रखा और उनकी चुचि के निप्प्ल जो पेतिकोट मे साफ दिख रहे थे उनको सहलाते हुए बोला - बुआ मुझे भी नहाना है आपके साथ

फिर उन्के गरदन को चूमने ल्गा जिसका असर बुआ पर होने लगा

बुआ - अह्ह्ह्ह लल्ला मान जा सब निचे है

मै - पापा दुकान गये , अनुज खेलने चला गया , मा और दीदी कीचेन मे है ,,प्लीज ना बुआ मान जाओ ,,,,

फिर से बुआ की चुचियो को मस्लना सुरु किया और फिर उनका पेतिकोट का नादा खोल दिया जिससे वो सरक कर निचे गिर गया ,,,, दिन के उजाले मे बुआ का गदराया जिस्म और कामुक लग रहा था

मैने बाथरूम का दरवाजा बंद किया और बुआ की कमर मे हाथ डाल कर उनके होटो को चूसना सुरु कर दिया और एक हाथ से उनकी चूचियो को म्सल्ने ल्गा ,,, बुआ जैसी गर्म औरत कैसे पीछे रहती वो भी मेरा साथ देने लगी ।

फिर कुछ देर बाद मैने अपना हाथ उनकी नंगी चुतडो पर घुमाने ल्गा साथ ही झुक कर उनकी चूचि के बड़े बड़े मून्क्के वाले निप्प्ल को चूसने लगा ,,,लेकिन बुआ को चैन कहा उन्होने ने भी मेरे अंडरवियर के ऊपर से मेरे खड़े लन्ड को सहलाना शुरू कर दिया

फिर मै बुआ के काम आसान करते हुए अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और वाप्स बुआ की जवानी से खेलने लगा

अब स्थिति यू थी कि मेरे और बुआ के होठ जुड़े हुए थे और मेरा बाया हाथ बुआ की पहाड़ जैसी ऊँची और रबर सी लचीली गान्द पर रेग था जबकि दाये हाथो से बुआ की रसिली मोटी चुचियो की मिजायि हो रही थी ,,वही बुआ का एक हाथ मेरे गरदन पर और दुसरा हाथ से मेरे कडक लण्ड की चमडी को आगे पीछे कर रही थी

फिर हमदोनो ने अपनी पोजिसन बदली और बुआ अपने घुटनो पर आ गयी । चंद पलो मे ही मेरे लण्ड को थोड़ी ठण्डक मिलने लगी ,,,क्योकि बुआ ने मेरे खड़े लण्ड को चूसना सुरु कर दिया था ।

उनके नरम होठ मेरे सख्त लण्ड को लार से लीपने लगे और मुह के अंदर बुआ की जीभ मेरे सुपाडे पर लोटने लगी । इस आनन्द को पाकर मेरे अंदर एक तुफान सा उठने लगा , मेरे लण्ड की नशे और अकड गई,,, क्योकि मुझे बुआ को चोद्ना था तो मै अभी झड़ना नही चाहता था ,,,तो मैने बुआ को उठाया और बोला

मै - बुआ चलो ना नहाते है

बुआ - अरे हा तेरे खड़े लण्ड के चक्कर मे मै तो भूल ही गई,,,हा चल जल्दी आजा

बैठ पहले मै तुझे नहला देती ही

मै खुश हो गया और

फिर मैने निचे बैठ गया और बुआ बाल्टी से पानी निकाल कर मेरे ऊपर डालने लगी ,,, फिर साबुन लेकर पहले बालो मे फिर बॉडी पर साबुन लगाने लगी ,,,कमर तक लगाने के बाद बुआ ने मुझे खड़ा होने हो कहा और फिर मै खड़ा हुआ तो बुआ ने मेरे पैर के साथ साथ मेरे खड़े लण्ड पर भी अच्छे से साबुन लगाया फिर उन्होने पानी डाल कर अच्छे से बदन को साफ किया ,,, शरीर के साथ मेरा लण्ड भी खिल उठा ,

बुआ - बेटा तू चल मै नहा के आती हू ,,आज बाजार जाना है ना हमे

मै - क्या बुआ आपने मुझे नहला दिया अब मै भी तो नहलाउँगा ना आपको

बुआ - हिहिहिह ,, अच्छा लेकिन मुझे बहुत गुदगुदी होगी न

मै - अरे बुआ प्यार से नहलाउन्गा ना

चलो बैठ जाओ आप ।

फिर मैने एक मग्गे मे पानी लिया और थोड़ा थोड़ा करके पानी उनके बालो मे गिराने लगा जिससे पानी एक पतली धार लेके उनकी चिकनी पीठ से होते हुए उनकी मोटी मोटी चुतड की दरारो से होकर बाथरूम के फर्श पर गिरने लगी ,,,, मुझे ऐसे बुआ को छेदने मे मज़ा आने लगा और हल्का हल्का पानी उनके पीठ पर गिरने से वो सिहर जा रही थी ,,,

बुआ - क्या कर रहा है बेटा जल्दी कर कोई आ जायेगा

मैने भी मौके की नजाकत को समझा और अच्छे से पानी डाला । फिर शैम्पू से बुआ के बालो को साफ करने ल्गा ,,,एक बार फिर शैम्पू की गाज बुआ की नंगी पीठ से उनके चुतडो पर जाने लगी जिससे बुआ को उन्के गांड मे खुजली मह्सूस हुई और वो हाथ पीछे ले जाकर चुतडो की दरारो मे खुजली करने लगी जिससे उन्के मोटे मोटे गांड हिलने लगे

फिर मैने बुआ को खड़ा किया और अच्छे उन्की पीठ के साबुन लगाया और पीछे से ही हाथो को आगे कर उनके चुचो पर साबुन लगाकर मसलने लगा थोडी देर बाद मै निचे बैठ कर बुआ की जांघो मे साबुन लगाया और पीछे से ही उनकी गान्द के निचे से हाथ ले जाकर चुत के ऊपर साबुन लगाने ल्गा जिससे बुआ थोड़ा झुक कर अपनी जांघो को खोला तो मैने भी एक हाथ आगे लेजाकर उन्के चुचो को वापस मसलने लगा । फिर मैने बुआ की गान्द को अपने सामने करते हुए उन्हे दीवाल से लगा दिया ,,, मेरे लगातर मसलने से वो नशे मे थी खुद से सिसिकिया लेटे हुए अपनी चुचिया मसल रही थी

फिर मैने साबुन लिया और बुआ की भारी मोटी लचीली गान्द के पाटो पर खुब सारा साबुन लगाने ल्गा और फिर उनकी चुत से लेकर उनके गान्द के उपरी सिरे तक दरारो मे साबुन भर दिया । इधर मेरा लण्ड भी उफान पर था तो मै थोडा साबुन वापस अपने खड़े लण्ड पर लगाया और बुआ की कमर को दोनो हाथो से पकड कर अपने लण्ड को बुआ की साबुन से भीगी हुई गांड की दरारो के ऊपर रगड़ने ल्गा लेकिन मेरे साबुन लगाने से बुआ की गान्द पर फिसलन बहुत ज्यादा थी जिससे मेरा लण्ड बार बार बुआ की जांघो मे उनकी चुत पर टकरा जा रहा था ऐसे मे मुझे एक विचार आया और मैने बुआ को थोड़ा पीछे खीच कर उनको आगे की तरफ झुका दिया जिससे उनकी मोटी गान्ड़ और ज्यादा फैल कर मेरे सामने आ गई । मैने भी मोर्चा सम्भाला और अपना लण्ड को मसल कर साबुन की गाज को ज्यादा किया और दोनो हाथो से उनके लचीले गांड के मोटे पाटो को फैलाया और अपना लण्ड उनकी उभरी गान्ड की दरारो मे डाल दिया और कमर पर हाथ रख कर लंड को गान्ड की गहरी लकीर मे आगे पीछे करने लगा,, कुछ की धक्को मे बुआ के मोटी गान्ड की दरारो ने मेरा आधा लण्ड निगल लिया ,,, साबुन की फिसलन से जल्द ही बुआ की दरारे मेरे मोटे सुपाड़े से चौडी होने लगी,,,ऐसे ही थोडी मस्ती के बाद मैने बुआ की पानी डाल के साफ किया क्योकि उनके बदन का साबुन सूखने लगा था ,,, फिर मैने बुआ को पानी से अच्छे से मल मल कर साफ किया और वापस खड़ा किया ,,, फिर खुद को भी पानी डाल कर साफ किया। मैने उन्के नरम भिगे चुचो पर नजर डाली तो मुह मे पानी आ गया तो वापस से एक बार फिर बुआ की रसिली चुची को पीने लगा ।

सच मे नहाने के बाद बुआ के चुचे और भी ज्यादा नरम और मीठे लग रहे थे । एक बार फिर से मैने बुआ के हाथ मे अपना लंड थमा दिया और वो भी मेरे दिये काम को बखुबी करने के लिए बैठ गई और मेरे लण्ड को निगलना शुरू कर दिया ,,, इसी बिच मेरी नजर बाथरूम के दरख्त पर रखी तेल की शिसी पर गई और मेरे चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ गई ।

करीब 5 मिंट हो चुके थे बुआ को मेरे लण्ड चुस्ते और हमारे बदन का पानी निचड़ चूका था ।

फिर मैने बुआ को घुमा कर उन्हे फर्श पर ही घोडी बना दिया और तेल की शीशी को हाथ मे लेकर उनकी दोनो जान्घो मे बीच घुटनो के बल आ गया । नहाने के बाद से बुआ की गोरी और मोटी गान्ड और ज्यादा मुलायम और चिकनी हो गयी थी।

फिर मैने एक हाथ बुआ की चुत पर रखा जो अभी भी पनियायी थी । फिर मैने उनकी चुत को सहलाते हुए चार उंगलिया उनकी चुत पर और अंगूठा उन्की गान्द की हल्की भूरि छेद पर रखकर सहलाने लगा । मैने तेल की शिशि को अपने मुह से खोला और टप टप टप करके उनकी गाड़ की दरारो मे गिराने लगा ,,,धीरे धीरे तेल रिस कर मेरे अंगूठे तक आई तो मैने उसे बुआ की गाड़ की छेद पर अच्छे से मलने लगा

बुआ - अह्ह्ह्ह लल्ला क्या कर रहा तू

मै - आपके गान्ड मे लण्ड डालने की तैयारी बुआ

बुआ - उम्म्ंम तो जल्दी कर ना। अब रहा नही जा रहा है

मैने भी अच्छे से तेल बुआ की गान्ड मे लिप कर थोड़ा तेल अपने लंड के सुपाडे पे भी लगाया और झुक कर लण्ड को बुआ की गान्द की छेद पर रख कर सुपाडे को जोर देते हुए अंदर ठेल दिया और कुछ ही सैकेण्ड मे बुआ ने अपनी गान्ड को सिकोड़ कर मेरा आधा लण्ड अपनी गान्द मे समा लिया मैने वापस से तेल की शीशी उठाई और बाकी बचे लण्ड के हिस्से और बुआ की फैली हुई गान्ड की छेद की गोलाई पर तेल गिराने लगा और तेल गिराने के साथ ही मैने लण्ड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया ।

बुआ - आह्ह बेत कितना तेल गिरायेगा ,,, मेरी गान्ड पहले से ही खुली है ,,बस तू फाड इसको उम्म्ंम्म्ं हा ऐसे ही पुरा जड़ तक लण्ड को डाल अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं,,, उफ्फ्फ बेटा अह्ह्ह्ह जैसे लग रहा है कितने दिनो बाद लण्ड को गान्ड मे लिया है अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह आह्हह उउह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं हा बेटा चोद और चोद और तेज्ज़्ज़्ज़ अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

मै भी बुआ को उत्तेजित देख तेज़ी से उनकी गान्ड मे लण्ड डालने लगा ,,, हर धक्के के साथ उनकी लचीली मोटी गान्ड मेरे लण्ड को वापस आधा बाहर की तरफ धकेल देती थी जिससे मुझे कम ताकत मे भी जोरदार चुदाई का आनन्द मिल रहा था । मेरी जान्घे उनकी मोटी चुतडो से लगातर टकरा कर थप थ्प्प्प्प थ्प्प्प थ्प्प्प की आवाजे देने लगी ।,,,,

मै - बुआ बहुत ही मस्त गांड है तुम्हारी ,,,, आप तो लण्ड लेने मे माहिर लगती हो आह्हह क्या मुलायम गान्ड

बुआ - हा बेटा 30 साल हो गये लण्ड लेते हुए तो माआअहिर होओ हीइ जाआऊंगी नाआह्ह्जह्ह्ह्ज उम्म्ंम और तेजह्ह्ह्ज अह्ह्ह्ह मै झडने वाली हू बेटा एक बार चुत मे डाल देगा ,,, बहुत मन है चुत मे लेने का अह्ह्ज डाल दे ना

मै भी बुआ पर तरस खा कर एक झटके मे गान्ड से लण्ड को निकाला और गप्प से उनकी रसिली चुत मे बोर दिया

मै - लो बुआआअह्ह्ह डाआआअललल्ल दियाअह्ह् ,,, लगता है आपको एक साथ दो लण्ड लेने की आदत है तभी इतनाहहहह तड़प रही हो ।

बुआ - अह्ह्ह्ज्ज हम्म्म्मममं उफ्फ्फ्फ उम्म्ंम्ं हहहह अह्ह्ह्ह्ह तेज्ज्ज्ज औउउउउरररर तेजजजजज अह्ह्ह्ह

मै - बोलो ना बुआ कभी लिया है एक साथ दो लण्ड,,,,

बुआ - हा बेटा घर पर तो रोज रात मे दो लण्ड लेती हू तभी तो ऐसी फैल गई हू ना ,,,,, मेरे दोनो पति मिल के चोद्ते है मुझे अह्ह्ह्ह्ह आह्हह फाड दे मेरे चुत को चटनी बना दे मेरे लाल उह्ंम्ंंम उफ्फ्फ्फ अह्ह्ह्ह

मै एक पल को रुक गया दो पति ,, बुआ ने दुसरी शादी भी की है लेकिन किस्से क्यू

बुआ - क्यू रुक गया बेटा अभी पेल दे ना मै बाद मे सब बता दूँगी ,,,आह्हह आह्हह हा ऐसे ही ऐसे ही बेटा ओह्ह्ह्ह्ह्माआआ माआआ उम्म्ंम्ं हा बेटा निकलेगा मेरा अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं और तेज

बुआ एकदम झडने के करीब तो उन्होंने अपनी चुत को मेरे लण्ड पर कसना सुरु कर दिया जिससे मेरे तेज धक्को ने मेरे लण्ड की नशो को बुआ की चुत मे रगड़ना सुरु कर दिया ,, धीरे धीरे बुआ की चूत ने मेरे लंड को निचोडने लगी और मेरे लण्ड का आकार और बढने लगा ,,, मेरा सुपाडा अब पूरी तरह से तपने लगा और लंड की नशे मेरे वीर्य से भरने लगी,,, लेकिन मेरे धक्के की गति कम नही हुई कुछ ही पलो मे ,,,, बुआ ने अपनी चूत ढीली कर ली और उन्का गर्म लावा मेरे लण्ड की चमडी की जलाने लगा जिससे मेरा सुपाडा ज्यादा देर तक वीर्य को नशो मे नही रोक सका और भलाभल तेज़ी से धक्को के साथ बुआ की चुत मे वीर्य उगलने लगा और कुछ आखिरी धक्को के साथ ही मै बुआ की पीठ पर ढह गया और हाफ्ने लगा ,,,,साथ ही बुआ की तेज सांसे भी मुझे महसूस हो रही थी । थोडी देर बाद जब सांसे नॉर्मल हुई तो मै उनके ऊपर से उठा । बुआ से उठा भी नही जा रहा था आखिरकार 20 मिनटो से एक ही पोजिसन मे चुद जो रही थी ...फिर मैने बुआ की मदद की और हम दोनो ने फिर से नहाया और बुआ ने लाया हुआ सूत सलवार पहन लिया

मै - चलो बुआ अब नीचे चलते है ।

बुआ - नही पहले मुझे जाने दे 5मिंट बाद आना तू

मै - और वो दो पति वाली बात समझ नही आई मुझे

बुआ मुस्कराई और बोली - वो बाद मे अभी लेट हो रहा है बेटा ,

फिर मैने बुआ को एक किस्स किया और उन्हे जाने दिया । करीब 5मिंट बाद मै भी निचे गया और नास्ता करने लगा ।

मा - बेटा सुन आज दोपहर तक ही दुकान खोलना , फिर दोपहर बाद हम लोग साथ मे बाजार चलेंगे , मैने तेरे पापा को बोल दीया है ।

मै - ठीक है मा चलो मै दुकान खोल दू ।

फिर मैने बुआ को देखा और एक स्माइल की फिर मै दुकान पर चला आया ।

एक घन्टे बाद मा और बुआ निचे आई

मा - बेटा मै और तेरी बुआ , तेरे चचा के यहा जा रहे हैं साड़ी लेने के लिए,,, कुछ चाहिये होगा तो सोनल को आवाज दे देना

मै - ठीक है मा , जल्दी आईएगा

बुआ - हा बेटा जल्दी ही आएगे कौन सा तेरी मा तेरे चाचा के साथ रहने जा रही है हाहाहाअहा

मा - क्या दीदी आप भी चलिये अब

फिर मा और बुआ निकल गये चाचा के यहा । मै वापस दुकान पर काम करने लगा करीब आधे घण्टे बाद दीदी ऊपर से आई और बोली

दिदी - भाई वो तेरा मोबाईल मिलेगा वो मुझे कुछ ड्रेस देखना था

मै - अरे आओ ना दीदी साथ मे देखते है

दीदी - नही भाई मुझे और भी थोडा काम है ना

मै - जैसे कि

दीदी - तू देगा कि नही

मै - अरे मै कब मना कर रहा हू ये लो

फिर दिदी मोबाईल लेकर ऊपर चली गई मैने इस बात के लिए कोई ध्यान नही दिया और दुकान मे लग गया ।

करीब 11 बजे तक मा और बुआ वापस आ गए ।

मै - क्या मा इतनी देर यही कर दी तो हम लोग बाजार कब जायेंगे

मा - अरे बेटा वो त्योहार की वजह से दुकान पर भीड़ थी और फिर हम दोनो ने वो करीम के यहा ब्लाऊज पेतिकोट सिलने को भी दे दिया ना कल शाम तक मिल जायेगा ।

मै - अच्छा ठीक है तो अब दूकान बंद कर दू , क्योकि अभी चाचा और पापा दोनो को खाना देने जाना पडेगा ना फिर हम लोगो को तैयार भी होना है

मा - हा बेटा तू दुकान बंद कर दे और ऊपर आजा ।

करीब 20 मिंट बाद मै ऊपर गया।

मा - बेटा एक काम कर ये तू अपने पापा का खाना देके आजा और चाचा का खाना अनुज लेके चला जायेगा ।

मै - ठीक है मा लाओ ।

फिर मै खाना लेके पापा के दुकान पर गया और पापा मे मुझे कुछ पैसे दिये शॉपिंग के लिए और मै भी खुश होकर वापस आ गया घर ,, फिर हम लोगो ने साथ मे खाना खाया और सब तैयार होने लगे ।

दीदी ने आज एक बहुत ही खुबसुरत नेवी ब्लू रंग का सूट सल्वार पहना था ।

वही मा ने पिंक कलर की बहुत ही सुन्दर साडी पहनी थी ।

बुआ तो पहले की तरह एक ब्लू रंग की कुर्ती और क्रीम कलर की लेगी मे बहुत सेक्सी दिख रही थी ।

मैने और अनुज ने भी जीन्स टीशर्ट पहना था ।

फिर एक बजे से हम लोग घर बंद करके निकल गए शॉपिंग के लिए ।

देखते है दोस्तो नये शॉपिंग मॉल मे क्या क्या नयी घटनाये होने वाली है ।
 
Update 31

दोस्तो पिछ्ले अपडेट मे आप सभी ने पढा कि राज की चांदी ही चांदी हो रही है और आज वो फुल फैमिली के साथ बाजार मे खुले नये शॉपिंग कॉमप्लेक्स के लिए निकल चूका है अब आगे ।

अब आगे

हम सभी लोग मेन मार्केट की तरफ निकले । त्योहार की वजह से काफी भीड़ थी और बाजार कमसिन लड़कीयो से लेकर गदरायी औरतो से भरी थी । मै खुद भी 3 जबरदस्त मालो के साथ बाजार मे घूम रहा था । काफी लड़को और मर्दो की नजरे मेरे बुआ दीदी और मा की तरफ थी । खासकर बुआ की तरफ ,,, उनकी कसी लेगी मे उभरी गान्ड के जब मेरे पापा ही दीवाने हो गये तो गैर लोगो की क्या बात थी । मुझे धीरे धीरे मह्सूस होने लगा कि जैसे जैसे लोग मा दीदी और बुआ को घुर रहे थे ,, वैसे ही उनके हाव भाव और चलने के अन्दाज मे बदलाव साफ नजर आने लगा था । मै खुद पीछे चल कर अपनी तीनो घरेलू हसिनाओ की चाल पर खास नजार गडाये हुए था । सबसे आगे दीदी और अनुज चल रहे थे । एकतरफ जहा अनुज लड़को द्वारा दीदी को ताडने से मुह बना रहा था वही दीदी मुह पर दुपट्टा लगा कर मुस्कुरा रही थी क्योंकि मार्किट मे कुछ लडके हमारे कोचिंग स्कूल और दूसरें मुहल्ले के भी थे । उन सबकी नजरे मेरी कमसिन बहन पर थी ।

दीदी और अनुज के पीछे मा और बुआ चल रहे थे । आहहा उन दोनो का मै खुद दीवाना था । एक तरफ जहां मा की मदमस्त साडी मे कैद जवानी वही दुसरी तरफ कुर्ती लेगी मे कसी भरी बदन वाली बुआ ।

दोनो गान्द चलते हुए बहुत मटक रहे थे जिनको देख कर कुछ लडके और मर्द एक तक बुआ की कसी जांघो और मा के ब्लाऊज के उबारो को अन्त तक देखते ही रह जाते थे ।

मै भी इनसब का मज़ा लेते हुए जा रहा था साथ ही मा और बुआ की चटपटी बाते भी सुन रहा था ।

बुआ - देख रही हो भाभी ,, मर्द तो मर्द ये कच्ची उम्र के लडके भी कम नही है ,,, एकटक नजरे हमारे माल पर टीकाए ही जा रहे हैं

मा - हा जब ऐसे ही गान्ड मटकाओगी तो लोग तो देखेंगे ही ना

बुआ - आहा मेरे गान्द की बड़ी फ़िकर है आपको अरे अपने उभरे हुए चुचो को देखो भाभी सबकी नजारे वही है

मा - अब मालदार हो गयी हू तो दिखेगा ही न माल हीहीहि

बुआ - देखो कोई लुट ना ले जाये हमारे माल को

मा - अरे आपके भईया के रहते किसकी मजाल जो आपके माल को हाथ लगाये हीहीहि

बुआ - क्या भाभी आप ,,,

मा - हहहहह

मै दोनो की चटपटी बाते सुन कर खुश हो रहा था

बातो ही बातो मे हम लोग सरोजा कॉमप्लेक्स आ गये थे ।

क्या शानदार बिल्डिंग थी तीन मंजिला ।

ग्राउंड फ्लोर पर जेन्स के लिए, फ़र्स्ट फ्लोर पर लेडीज के साथ बच्चो के लिए और सबसे उपरी फ्लोर सिनेमा रेस्तराँ के लिए था ।

हम सब लोग एक साथ एन्ट्री ली और अंदर का माहौल एकदम खुसनुमा था हर तरफ चहल पहल थी । अनुज तो अन्दर घुसते ही सबसे पहले जीन्स वाले सेक्शन मे भाग गया ,, वही मा और बुआ ऊपर वाले फ्लोर पर जाने लगी ,,,तभी दीदी ने मुझसे मेरा मोबाइल मागा और बोली उसे कुछ तस्वीरे निकालनी है फिर वो भी मोबाईल लेकर मा और बुआ के साथ ऊपर चली गयी । मै भी बहुत खुश था सोचा चलो अपने छोटे भाई के साथ टाईम पास करते हुए खरीदारि करु ।

मै भी अनुज की तरफ जीन्स वाले सेक्शन मे चला गया ,,, जहा अनुज बडे खुश होकर बस देखे जा रहा था लेकिन कोई भी ट्राई या माप नहो रहा था मै उसके पास गया

मै - क्या हुआ भाई तूझे पसंद नही आ रही है क्या इतने सब मे से

अनुज - भैया दाम देख रहे हो कोई भी जीन्स हजार रुपये से निचे की नही है कैसे लू

मै - बक्क पगलेट पैसे की चिन्ता क्यू कर रहा है जो चाहिये लेले मेरे भाई मै हू ना

अनुज खुश होते हुए - सच मे भैया

मैने उसके कंधे पर हाथ रख कर हिलते हुए बोला हा भाई सच ,, अब बता कौन सा पसन्द किया

अनुज - अभी कहा भैया मै तो दाम देख के परेसान था अभी देख ले रहा हू।

फिर मैने और अनुज ने दो दो जीन्स और एक एक शर्त और टीशर्त लिये ।

मै - चल अब तो शॉपिंग हो गयी है तू रेस्टरूम मे इन्तेजार कर मै ऊपर देखकर आता हू।

फिर मुझे याद आया कि दीदी के लिए मोबाइल भी लेना और एक गिफ्ट भी

फिर मैने मोबाईल शोरूम की तरफ गया जो ग्राउंड फ्लोर पर ही था ,, वहा से मैने एक ब्राण्ड न्यू मोबाईल लिया जो कि 12 हजार का था , फिर मैने वो मोबाईल को गिफ्ट रैप करवा कर अनुज को दे दिया और बोला कि राखी पर दीदी के लिए गिफ्ट है खोल्ना मत ,,,अनुज अपनी खरीदारी से खुश था तो कोई सवाल नही किया । फिर मै फ़र्स्ट फ्लोर के लिए ऊपर जाने वाला था कि मुझे अमन दिखा जो मोबाईल कान मे लगाये सीढ़ी से छत पर जा रहा था ,,मै एक पल को सोचा ये अकेला यहा क्यू आया है और लेडिज फ्लोर पर क्यू जा रहा है कही दीदी से तो .....

मै इतना सोचते ही जल्दी से अमन के पीछे भागा और आहिस्ता आहिस्ता उसका पिछा करने लगा ,,, इसबिच अमन लगातार किसी से फोन पर बात किये जा रहा था और फ़र्स्ट फ्लोर पर जाकर अमन लिफ्ट की तरफ रखे ट्रॉली सेट्स के पास हो गया । तभी वो एक तरफ देखते हुए मुस्कुराने लगा और ठीक उसके सामने मेरी दीदी चल आ गयी और वो दोनो बाते किये जा रहे थे । समझ गया कि दीदी मे मोबाईल क्यू मागा और अमन यहा क्यू आया था । मुझे एक बार फिर से गुस्सा आने लगा ।इसी बीच दोनो लेडिज सेक्शन मे ट्रॉली लेके साथ मे ही निकल गए और गलियारे मे घूम घूम कर छिपते छिपाते एक दुसरे की उंगलिया पकड रहे थे । मै बहुत गुस्से मे था मन तो कर रहा था कि अभी जाकर अमन को पिट दू लेकिन मै मजबुर था। इसीलिये मै सही मौके का इंतजार करने लगा और फिर वो लोग लेडिज सेक्शन मे सबसे किनारे वाले हिस्से मे गये और वहा पर कुछ राजस्थानी चनिया चोली के इटेम थे जिससे उधर कोई था नही । ये लोग भी उसी कम्पाउंड के पास बैठ कर एक दुसरे को लिप टू लिप किस्स करने लगे ,, मेरे लिए यही सही मौका था और मै भी तपाक से उनके सामने आया

मै - ये सब क्या है दिदी

अमन - देख भाई तू गलत मत समझ मै सोनल से प्य.....

मै - मैने तुझसे कुछ पुछा क्या

दीदी - देख भाई जो भी बात करनी होगी घर पर करेंगे प्लीज अभी मान जा ,,

अमन - हा भाई प्लीज

मै - अब क्या बात करोगी आप दीदी मुझे नही करनी कोई बात आपसे

और मै तैस मे निकल आया ।

फिर मै मा और बुआ को खोजने निकला तो वो लोग मुझे साड़ीयो के सेल मे खड़ी दिखी

मै - क्या मा अभी तो चाचा के यहा से साडी ली हो अब फिर से

मा - अरे बेटा यहा साड़ियो पर भारी डिसकाउंट चल रहा था तो मैने और तेरी बुआ ने एक एक लेली हीहीहि

मै मा और बुआ को खुश देख कर सुकून मे था

मै - अरे बुआ आपने वो टीशर्त और घाघरा लिया की नही

बुआ - क्या बेटा तू सच मे मुझे पहनायेगा वही

मै - अरे लेलो ना बुआ प्लीज अच्छा लगेगा आप पर ,,,

बुआ - अच्छा चल ठीक है

फिर मै मा और बुआ हम लोग टीशर्ट वाले compartment मे गये वहा से बुआ की नाप की एक XXXL साइज़ की ब्लैक रंग की एक टीशर्ट लेली । फिर हम लोग स्कर्ट वाले सेक्शन मे गये और घूतने से थोडी निचे वाली बुआ के नाप की हल्के आसमानी रंग की स्कर्ट पसंद की

बुआ - अरे लल्ल्ला ये स्कर्ट तो छोटी है घुटनो से थोडी ही निचे रहेगी

मा - क्या हुआ दीदी वैसे भी घर मे ही पहनोगी ना कोई बात नहीं,, आप पर ये रंग खुब खिलेगा और प्रिंट भी प्यारा है इसका

इधर हम लोग शॉपिंग कर रहे थे कि दीदी आ गई और मै एकदम से चुप हो गया

मै - अगर सब लोगो की खरीदी हो गई हो तो चले बिल बनवा ले

मा - हा बेटा,,लेकिन अनुज कहा है दिख नही रहा

मै- मा वो ग्राउंड फ्लोर पर है

मा - अच्छा ठीक है

बुआ - और बेटी तेरा हो गया न खरीदी

दीदी - नही बुआ मुझे कुछ पन्सद नही आया , चलो घर चलते है

मै समझ गया दीदी मेरी वजह से परेशान थी इसीलिये कोई चीज़ नही ली

मै - ऐसा है आप लोग दीदी के लिए कुछ खरीद लो मै ऊपर जा रहा हू फ्रेश होने

दीदी - रुक भाई मै भी चलुंगी ,,, मा और बुआ आप लोग रुको मै आती हू

फिर मै और दीदी ऊपर जाने लगे ,,इस बिच ना मै दीदी को देख रहा था ना कुछ बोल रहा था । मुझे बखुबी पता था कि वो मेरे से बात करने ही आई हैं

दीदी - सॉरी भाई ,, प्लीज गुस्सा ना हो ,,

मै - क्यू ना होऊ दीदी ,,आप हमारे साथ समय बिताने निकले थे कि उसके , अभी तो मै था देखा , गलती से मा या बुआ या मुहल्ले के कोई लोग देख लेटे तो

दीदी चुप थी और उनकी आँखो मे आंसू ,, मै उनकी नम आँखों में देख कर पसीज गया ,,

मै - देखो एक ही बात पर मेरा गुस्सा कम होगा ,,, अगर आप कपडे लोगे तो हिहिहिही

दीदी मुस्कुराकर आँखे पोछने लगी और बोली - हम्म्म ठीक है लेकिन पसंद तू ही करना ठीक

मै - ठीक ,,चलो अब फ्रेश हो लो , मै भी आता हू होकर

फिर हम दोनो अलग अलग वॉशरूम मे गये और फ्रेश होकर बाहर आये तो खुसी मन से मा और बुआ के पास आये

फिर दीदी को प्ता चला कि बुआ ने टीशर्त और स्कर्ट लिया है तो वो बोली की मै एक सेट लुंगी गर्मी मे पहन्ने के लिये ,, लेकिन दीदी ने लॉन्ग स्कर्ट लिया था । फिर मैने दीदी के लिए एक प्यारा सा प्लाजो सूट पसंद किया जो सबको पसंद आया । फिर हम लोग निचे गये बिल्लिंग करवाया और घर के लिए निकल गये ।

रास्ते मे बुआ - अरे भाभी भईया की नयी वाली दुकान कहा है

मा - वो तो यही से थोड़ी दूर आगे वाली गली मे है ,, चलिये चलते है उधर के समोसे चाट बहुत टेस्टि होते है ,,,हीहीहि

अनुज - हा मा भूख लगी है मुझे भी

सब हसने लगे और फिर हम लोग पापा की दुकान पर पहुच गये जहा पापा बैठे थे और हमे एक साथ देख कर बहुत खुश हो गये और जब उनकी नजर गदरायी बुआ की कसी हुई जांघो पर गयी तो आगे आये तो बोले

पापा - अरे जीजी आप लोग यहा

बुआ - हा भईया सोचा घर जाते हुए आपसे मिल के ही चलू हिहिहिही

पापा - ऐसी बात है तो जाना क्यू है यही रहिये शाम को हम लोग साथ मे घर चला जाएगा हाहाहाहा

मा - क्या जी आप हमे बाहर ही खड़े किये रहोगे

पापा - अरें नही नही नही ,,, आओ चलो अंदर रेस्टरूम मे चलते है ।

फिर हम सब लोग रेस्टरूम मे आ गये और बैठ कर बाते करने लगे । फिर पापा ने हम सब के लिए ठंडा मगवाया और समोसा चाट भी । जहा हम लोग समोसा चाट का मज़ा ले रहे थे वही पापा एक टक बस बुआ की गदरायी जवानी को ताडे जा रहे थे ।

दिदी - पापा नल कहा है हाथ धुलना था

अनुज - चलो दीदी पीछे की तरफ है

मै - हा चलो मै भी चलता हू फिर वो लोग गोदाम के आखिरी में लगे नलके के पास जाने ल्गे

लेकिन मुझे तो पापा मा और बुआ के बीच की बात सुननी थी ,,लेकिन देखा वो लोग भी खड़े होकर हाथ धूल्ने आ रहे हैं तो मै भी अंदर की तरफ जाने को हुआ कि

पापा - अरे जीजी आपको शर्त याद है ना , चलो अभी मौका है नाप लो

बुआ - उसकी जरुरत नही है आप जीत गये भईया ,, वो आज करीम दर्जी के यहा मैने देखा था भाभी के ब्लाऊज का माप हिहिहिही

मा - अरे वाह तो आपको वो देना पडेगा जो ये कहेंगे

बुआ - हा भाभी ,,,वैसे क्या चाहिये आपको भैया

पापा - अभी समय ठीक नही है टाईम आने पर मै माग लुन्गा बस आप मत मुकर जाना

बुआ - मै नही मुकरंगी भैया आप ब्स याद से माग लेना हिहिजी चलो मै हाथ धुल के आती हू ,,,

फिर मै भी अंदर चला गया और हाथ धुले फिर हम लोग वापस घर आ गये । घर पहुचे तो 5 बज गए और आज का क्लास भी छूट गया था । फिर मैने दुकान खोली और 2 घन्टे बाद पापा भी आ गये । फिर थोडी देर बाद हमने दुकान बन्द की और ऊपर चले गये ।

जहा किचन मे मा और बुआ लगी थी । वही दीदी और अनुज अपने कपड़े देख रहे थे । मैने दीदी का मोबाइल पहले ही निकाल कर अपने बैग मे रख लिया था ।

पापा - अरे वाह बच्चो ल्गा रहा है आज बहुत ज्यादा शॉपिंग की गई है ।

फिर मा और बुआ भी कमरे मे आ गये ।

दिदी - पता है पापा आज बुआ ने एक मॉर्डन टीशर्ट और स्कर्त लिया और मैने भी ।

पापा तो खुशी से फुले नही समाए

पापा - अरे वाह जीजी आपने बताया नही की आपने ये ड्रेस भी लिया है

मा - अरे वो तो आपको कल पहन कर दिखाने वाली थी

पापा - ये तो बहुत अच्छी बात है , और तुमने अपने लिये नही लिया रागिनी टीशर्ट स्कर्ट

मा - धत्त ,,क्या जी आप भी मैने कभी पहना थोडी है

पापा - मै तो हमेशा कहता हू तुम भी जीजी की तरह थोडा फैशन वाले कपडे पहने करो

मै - मैने तो बोला कितनी बार लेकिन मा ने मना कर दिया

मा - तू चुप कर ,,, चलो बाते बहुत हो गयी अब खाना खा लो बहुत थक गई हू मै

फिर सब लोगो ने खाना खाया और छत पर चले गए टहलने । आज मै बहुत ज्यादा थक गया था तो सबको बोलकर निचे चला गया सोने क्योकि मुझे ल्गा आज मा भी थकी है तो कुछ होगा नहीं तो क्या फाय्दा जाग कर ,,, और बिस्तर पर आते ही मुझे निद लग गयी और मै एक गहरी नींद मे चला गया ।

रात के किसी पहर मे मुझे कोई आवाज सुनाई दी जो चुदाई की सिस्कियो और बेड के हिलने की थी । मेरी आंखे नींद मे जकड़ी थी तो मैने सर घुमा कर दाई तरफ देखा तो दो लोगो के बीच चुदाई चलने की एक धूमिल तस्वीर सामने आ रही थी। फिर मैने आँखो की पलको मे थोडा खिचाव किया लेकिन कोई फायदा नही था , मेरी आंखे जलने लगी थी भरसक । मेरी बहुत ही थोडी खुली आँखो से दो नंगे लोगो के बिस्तर पर ऊपर निचे होने की धुध्ली छवियां दिख रही थी । मै सोचने लगा लगता है कि पापा और मा दोनों चुदाई कर रहे हैं ,,, मेरे मन में ये विचार आया कि मा चुद रही है तो मेरा लण्ड अकडने लगा । मगर मै बेबस था चाह कर भी वो नजारा नही देख पा रहा था । एक तरफ मेरी आँखो को निद की जरुरत थी वही मेरे लण्ड को चुत की जरुरत मह्सूस होने लगी । ऐसे ही कसमकस के बीच मुझे पापा की आवाज सुनाई दी जिससे मै पूरी तरह से हिल गया और मेरी धद्कने भी तेज होने लगी ,,,मुझ उस चीज़ की मेरे सामने होने की उम्मीद नही की

और वो बात थी

पापा - अह्ह्ह्ह दीदी क्या गरम चुत है तुम्हारी

दोस्तो ये क्या हो रहा है , राज जब छत पर से सोने निचे आया तो इस बीच ऐसा क्या हुआ की उसके पापा बुआ को चोद पा रहे थे । देखते है अगले अपडेट मे
 
Update 32

अब तक

एक तरफ मेरी आँखो को निद की जरुरत थी वही मेरे लण्ड को चुत की जरुरत मह्सूस होने लगी । ऐसे ही कसमकस के बीच मुझे पापा की आवाज सुनाई दी जिससे मै पूरी तरह से हिल गया और मेरी धद्कने भी तेज होने लगी ,,,मुझ उस चीज़ की मेरे सामने होने की उम्मीद नही की

और वो बात थी

पापा - अह्ह्ह्ह दीदी क्या गरम चुत है तुम्हारी

अब आगे

जैसे ही मेरे कानो मे पापा की ये आवाज आई ,,, मै सन्न रह गया कि ये कब हुआ कैसे हुआ । आखिर बुआ कैसे मान गई कही शर्त के बदले तो राजी नही ना हुई है ,, और मैने सारी रसभरी पलो को खो दिया जो बुआ और पापा के चुदाई से पहले हुई होगी । मै अपने आप को कोसने लगा कि साला क्यू मै सो गया और एक नये मज़े को किरकिरा कर दिया खुद ही । एक तरफ जहां मै बंद आँखो से मन ये सब सोच रहा था वही मेरे बगल मे पापा बुआ को घपाघप चोदे जा रहे थे और बुआ सिस्के जा रही थी । पापा लगातर बुआ के जिस्मो के बारे मे तारिफ करते हुए उन्हे चोदे जा रहे थे । धिरे धीरे मेरा मन थोडा शांत हुआ और इस बात के उत्तेजित होने लगा की पापा मेरे बगल मे ही बुआ को चोद रहे हैं । इसी बीच मुझे मा की आवाज सुनाई दी

मा - हा राज के पापा चोदिये अपनी जीजी को ,,,और तेज हा

पापा - हा जान आज तो सच मे बहुत मज़ा आ रहा है अह्ह्ह्ह मेरी शिला जीजी आह्हह आपके चुचे अह्ह्ह्ह

मै मा आवाज सुन कर और शौक मे था कि मा भी शामिल है इस चुदाई मे ,,, लेकिन अगर ऐसी बात थी तो ये लोग छत पर भी तो कर सकते थे फिर यहा क्यू रिस्क ले रहे है ,,, अब तक मेरी सबर का बान्ध टुट चूका था ,,, मेरे मन मे था कि अगर ये लोग बेशर्म होकर बिना मेरी फिक्र किये मज़े ले रहे हैं ।

फिर मैने धीरे से गरदन को बाई तरफ किया और अपने बाए हाथ से दोनो आँखो मे जमे कीचड़ की रगड़ कर साफ किया ,, लेकिन ऐसा करने से मेरी आँखों मे और जलन होने लगा लेकिन मेरे लण्ड की जलन के आगे ये कुछ भी नही था फिर थोडी कोसिस करके मैने धीरे धीरे आंखे खोली तो अब कुछ कुछ दिखने लगा इस दौरान मुझे एक धुआंधार चुदाई की रसिली आवाजे सुनाई दे रही थी और फिर मैने जैसे ही मुंडी दाई तरफ घुमायी मेरी आखों मे चमक वापस आ गई और मेरे चेहरे खिल गये ,,

दरअसल बात ये थी पापा मा को बुआ बना कर उन्हे चोद रहे थे और मा पापा के लण्ड को उत्तेजित करने के लिये बार बार बुआ का नामसे उनको चढा रही थी ,,, जैसे ही मैने देखा पापा बुआ को नही बल्कि मा को चोद रहे है खुश हो गया था ,,, तभी मेरी नजरे पापा और मा पर गयी जहा मा मेरे पैर के साइड सर करके लेती थी वही पापा मा की जन्घे उठाए हुए घपाघप मा की चुत मे लण्ड डुबोये जा रहे थे। मै अब खुश था क्योकि मै चाहता था जब पापा बुआ को पहली बार चोदे तो उस समय मै भी वो नजारा देख सकु ।

फिर ऐसे ही विचारो मे खोया खोया वापस से आंखे बंद कर लिया ,,,क्योकि मा और पापा की चुदाई की आवाजे मुझे लोरी सी लगने लगी ,,अखिर बचपन से सुनता देखता आया जो था । रात मे ऐसे ही कब मै सो गया पता नही चला । सुबह मेरी आंख खुली तो 7 बज रहे थे । मा और पापा ऊपर चले गए थे , मै भी उठा और छत पर चला गया । जहा पापा और अनुज बैठ कर नास्ता कर रहे थे वही दीदी और बुआ किचन मे थी । लेकिन मा कही दिख नही रही थी । मैने किचन मे देखा तो दीदी नहा चुकी थी क्योकि उनके कपड़े बदले हुए थे वही बुआ ने कल वाले ही कपडे पहने थे मतबल वो नहाई नही थी ।

फिर मै ऊपर जाने लगा तो पापा- अरे बेटा कहा जा रहा है

मै - नहाने और फ्रेश होने पापा

पापा- अरे लेकिन अभी तो तेरी मा गई है ऊपर नहाने

मै- तो क्या हुआ मुझे पहले टॉयलेट जाना है न

अनुज हस्ता हुआ - क्यो भईया रात मे ज्यादा खा लिये थे क्या

और उसकी बात सुन कर सब हसने लगे

मै - आप लोग करो बहस मुझे बहुत तेज लगी है

इस पर भी सब हसने लगे ।

मै भी जल्दी से ऊपर गया और खाली करने ल्गा फिर मै निकला तो मुझे हाथ धुलना था लेकिन बाथरूम अन्दर से बंद था और अंदर मा नहा रही थी क्योकि अंदर से पानी की आवाज सुनाई दे रही थी ।

मै सोचने लगा मा अंदर क्या सारे कपडे खोल कर नहा रही होगी और कैसे अपने चुचो मे साबुन मल रही होगी , कैसे चुत को हथेली से भर कर रगड़ रगड़ कर साबुन लगा रही होगी । ये सोचते ही मेरा लण्ड हाफ चढ़ढे मे खड़ा होने ल्गा मैने उसको ऐडजस्ट करते हुए सोचा क्यू ना मा से दरवाजा खुलवा कर सुबह सुबह उनके अनमोल रत्नो के दर्शन किये जाये और साथ मा के साथ थोड़े मज़े भी कर लूं । यही सोच कर अपने टीशर्ट और हाफ चढ़ढे को बाहर ही निकाल दिया और एक बनियान अंडरवियर मे मैने दरवाजा खटखटाया

मा - कौन है बाहर अभी मै नहा रही हू ,,,

मै - मै हू मा राज ,,, मुझे हाथ धुल्ना था दरवाजा खोलिये

मा - अरे रुक जा बेटा बस 5 मिंट

मै - क्या मा तब तक मै ऐसे गंदे हाथो क साथ रहूँगा क्या

मा को मेरी फ़िकर हुई और बोली - अच्छा और कौन है बाहर

मै - कोई नही है मा सब निचे है

मा - अच्छा ठीक है रुक एक मिंट मै खोल रही हू

मै काफी खुश हो गया और जानबुझ कर लण्ड को उठा कर अपने अंडरवियर मे एक नुकिला टेन्ट बना लिया हालाँकि ऐसा करने से मुझे थोडा दर्द हो रहा था लेकिन मा को थोडा रिझाने के लिए इतना जरुरी लग रहा था ।

फिर ने दरवाजा खोला और खुद दरवाजे के पीछे थी

मा - चल जल्दी अन्दर आ जा और धुल के हाथ ,,

सबसे पहले मेरी नजर मा के दरवाजे से झाकते हुए चेहरे और एक नंगी बाह पर गई तो मेरी आंखे चमक गई और मुझे लगा की मा अन्दर पूरी नंगी होगी ,,, मुझे एक शानदार मौका दिखने लगा , मै खुश होकर अंदर गया तो झट से मा ने दरवाजा बंद कर दिया ,, जब मेरी नजर मा पर गयी तो मा सिर्फ पेतिकोट मे थी और उसके रसिले चुचे पुरे तरह से नंगे थे । जो नहाने के बाद और भी ज्यादा मुलायम लग रहे थे और उनकी गहरे भूरे रंग के मुनक्के वाली निप्प्ल पर कुछ पानी के अंश ऐसे चमक रहे थे जैसे मानो मा की चुची को सजाया गया हो ।

मा की नजर जब मेरे पर गयी तो पाया की मै उनकी नंगी चुचियो को घुरे जा रहा हू और उसी से मेरा लण्ड तन कर खड़ा है

मा मुस्कुराते हुए - अब नही जल्दी हो रही है तुझे हा

मै हड़बड़ा गया और टोटी खोल कर अच्छे से हाथ धुला और वापस घुमा तो मा ने ब्लाऊज डाल लिया था बस बटन बंद कर रही थी

मै - अरे मा ये क्या कर रही हो

मा - क्यू अब नहा ली हू तो कपडे भी ना पहनू

मै - अरे मा लेकिन बिना ब्रा के

मा ह्स्ते हुए - हीहीहि तेरे चक्कर मे मै तो भूल ही गई,, जरा वो ब्रा उतार के दे

मा मे वापस ब्लाउज निकाल दिया। मैने भी ब्रा उतारा और उस पर लगी स्टीकर को पढने लगा

मा - क्या कर रहा है बेटा ला जल्दी

मै - मा इसपे तो 40 का साइज़ लिखा है लेकिन आप तो 38 का पहनते हो ना

मा - हा वो इस महीने मेरे साइज़ बढ़ गये है बेटा

मै - वो कैसे

मा मुस्कुराते हुए - क्या बताऊ अब तुझे कैसे ,,,

मै - बताओ ना मा

मा - धत्त पागल,, कैसे बढ़ता तुझे नही पता क्या

मै - कहा पता है आप तो मुझे सिखाने वाली थी ना ,,,बताओ ना कैसे

मा - बेटा वो तेरे पापा ने पिछ्ले कुछ दिनो ने तेरी मौसी और बुआ के चक्कर मे इतना मसला है इसिलिए,,,,अब समझ गया ना सब कुछ मेरे मुह से निकलवाना चाहता है ये लड़का

मै - अरे तो आप मा हो ना आप नही ब्तओगे तो कौन बतायेगा ये सब

मा हस्ते हुए - हमम ये भी है

मै मा के चुचो को घुरते हुए एक छोटे बच्चे की तरह -- मा मुझे दूध पिला दो मन कर रहा है

मा ने एक बार अपने नंगे चुचो को देखा फिर मेरे तरफ नजर मेरे ऊपर नजर मारी फिर मेरे खड़े लण्ड को देखा ,,,

मा - नही बेटा निचे जाना है सब राह देख रहे होते है ना ,,, और कल रात मे तेरे पापा ने मुझे तेरी बुआ बना कर कुछ ज्यादा तेज मसल दिया है मेरे दूध को इस टाईम दर्द है ,,,,

मेरा चेहरा उतर गया ,,,इतना हसिन खजाना मेरे सामने था लेकिन मै बेबस था कुछ न कर पाने को जिससे मेरा लण्ड भी बैठने लगा कि अब कुछ नही होने वाला है

मा ने मेरा लटका चेहरा देख कर बोली - तू चिन्ता ना कर दोपहर मे दुकान मे आऊंगी तब कर लेना

मै खुश हो गया और मा के गाल पर पप्पी दी और बोला - थैंक्स मा ,,,

फिर मा ने ब्रा पहनी और ब्लाऊज पहना फिर बाकी कपडे छत पर डाल कर ब्लाउज पेतिकोट मे ही निचे चली गई । मै भी जल्दी से नहा लिया और नीचे चला गया तब तक पापा भी चले गये थे दुकान मै भी नास्ता किया और चला गया दुकान पर अपने ।

कारिब 10 बजे मै दुकान मे मोबाइल चला रहा था तो उसी समय बुआ निचे आई ,,, ओहोहो कसम से कयामत लग रही थी बुआ उस ब्लैक टीशर्ट और हल्के आसमानी स्कर्ट मे ,,,, बुआ के चुचे पुरे टीशर्ट मे कस कर फैले थे और उनके मोटे दाने वाले निप्प्ल मानो छेद कर बाहर आ जायेगे ,,, और बुआ की मस्त गदरायी गाड़ इतनी उभरी हुई थी कि उनका स्कर्ट पीछे से घुटनो के एक बीते तक ऊपर हवा मे लहरा रहा था ,,, सच मे आज बुआ एकदम भोजपुरी फिल्मों की रानी चटर्जी लग रही थी ,,, उनके चुचो का उभार उन्के सीने से 5 से 6 इन्च तक का लग रहा था ।

मै बुआ को देखते ही मस्त हो गया और मेरा तुरंत लोवर मे खड़ा हो कर बुआ की रसदार गदरायी जिस्म को अपनी सलामी देने लगा ।

मै बुआ मे खोया हुआ था तभी

बुआ - बेटा जरा अपनी कम्मो बुआ के पास फोन लगाना ,, कल रक्षा बंधन है तो वो कब तक आ रही है यहा

मै खुश होते हुए - अच्छा हा ,,, वैसे बुआ आप सच मे हेरोइन लग रही हो एक दम भोजपुरी फिल्मों वाली ,,, वैसे ही मोटे मोटे उभार और पीछे

बुआ मुस्कुराते हुए - चुप बदमाश पहले कम्मो को फोन ल्गा ।

मै भी ह्स्ते हुए कम्मो बुआ को फोन लगा कर बुआ को दे दिया और फिर 2 मिंट बाद बुआ ने मेरे फोन वापस कर दिये ।

मै - क्या हुआ बुआ क्या बोली कम्मो बुआ

बुआ - अरे बेटा घर पर भी रिस्तेदार बहुत ज्यादा आये है न तो वो कल दिन मे आयेगी और कल ही चली जायेगी राखी बाँध कर

मै - क्या ,,, हम लोगो से बिना मिले ही

बुआ - हा बेटा वो मेरी दोनो नंद और मेरे ससुर की छोटी बहन आई है तो वो कैसे उन लोगो को छोड कर आयेगी

मै - हा ये भी सही बात है चलो कोई नही आप हो ना मेरे लिए

बुआ - अच्छा क्यू क्म्मो बुआ आती तो क्या उनके साथ भी वही सब करता क्या

मै - इतनी अच्छी किस्मत कहा बुआ ,,,जो आपके साथ कम्मो बुआ भी

बुआ - किस्मत का क्या भरोसा बेटा , कल को तेरा ये भी सपना पूरा हो जाये हीहीहि

मै खुश होते हुए - अरे वाह बुआ आपने तो मुझे खुश कर दिया

बुआ - हमम तब मेरे लिए कोई तोहफा लाओ

मै - रात मे लोगी या अभी हिहुहिही

बुआ - चल बदमाश बहुत शरारती हो गया है । चल मै अब उपर जा रही हू अभी छोटे को खाना देने जाना है

मै - यही पहन के जाओगे क्या बुआ

बुआ - हा अब यही पहना है आज तो यही पहन के जाउंगी ना

मै - ध्यान देना बुआ कही चाचा भी ना पापा की तरह ,,,हाहाहाहाहाहा

बुआ - तू ना ,,,वैसे भी छोटे को उसकी बीवी के अलावा कोई नहीं दिखता ,,, वो तो मेरे तरफ देखता ही नही ।

मै - हा लेकिन आज बात कुछ अलग है ना

बुआ शर्माने लगी - धत्त ऐसा कुछ नही है तू भी ना ,,,अब जाने दे मुझे

मै ह्स्ते हुए - मैने कब पकड़ा आपको ,,कहो तो तो पकड़ लू चलो कमरे मे हिहिहिहिह

बुआ - अरे वैसे नही अपनी बातो से छोड मुझे पागल हीहीहि

फिर बुआ ह्स्ते हुए ऊपर जाने लगी ।

फिर थोड़े समय बाद बुआ के साथ मा भी निचे है दो बैग लेकर ।

मा - बेटा ये ले जा पापा को टिफ़िन देते आ और तेरी बुआ चाचा को दे देंगी

मै टिफ़िन लेकर निकल गया और पापा को देकर 25 मिंट मे वापस आया ।

तो देखा मा मेरी ही राह देख रही थी

मा - बेटा ये ले खीर वाली टिफ़िन और चाचा के यहा दे आ ,,, जलदी जल्दी मे मै भूल गयी

मै - अरे मा इतना टाईम हो गया अब तो चाचा खा भी लिये होगे

मा - अरे तो क्या हुआ तू लेके जा खा लेंगे वो ना

मै - अच्छा ठीक है मा लाओ

फिर मैने वो टिफ़िन लिया और चाचा के यहा चला गया तो देखा की शटर आधा गिरा है ,,,मुझे ल्गा शायद खाना खाने बैठे होगे अन्दर इसिलिए आधा शटर निचे है । मै भी झुक कर अंदर गया तो दुकान मे कोई नही था ,,,, मुझे लगा कि अंन्दर हॉल मे बैठ कर खा रहे होगे क्योकि चाचा का घर बड़ा था ना ।

तो मै गलियारे से होते हुए जैसे जी हॉल वाले कमरे के पास पहुचने वाला था की मुझे अंदर से टीवी की आवाजे आने लगी थी ,,,तो मै भी नोर्मली बुआ को आवाज लगाते हुए हाल मे घुसने वाला था कि

मै - बु...... मेरे शब्द मुह मे रह गये और आँखे बड़ी हो गयी क्योकि अंदर का नजारा ही ऐसा था ।

हाल मे चाचा एक सोफे पर बैथे थे और उनका च्ढ़्ढा निचे पैरो मे था और बुआ अपनी स्कर्ट को उठाए घपाघप चाचा के लण्ड पर अपनी गान्ड पटके जा रही थी ,,, लेकिन हॉल मे टीवी के आवाज मे इनकी आवाज खो गयी थी । और खाना वैसे का वैसे बैग मे सोफे के सामने टेबल पर रखा था

मेरा माथा ठनका सोचने ल्गा कि साली ये बुआ कितनी बड़ी रन्डी है अभी बोल रही थी कि चाचा उसको देखते नही और यहां कूद कूद लण्ड लिये जा रही है । मैने तुरंत जेब से मोबाईल निकाला और रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया और अभी एक मिंट की रिकॉर्डिंग हुई ही थी की चाचा झड़ गये थे । मुझे हसी आई साला ताकत है नही और इतनी रन्डी माल चोदने चला था ,,, चुदाई खत्म हो गयी थी लेकिन मेरे काम लायक की क्लिप मैने मोबाइल मे रिकॉर्ड कर ली थी ।

अभी मुझे चाचा की आवाज सुनाई दी

चाचा - थैंक यू दीदी आज आपने मेरे लिए जो किया वो जिन्दगी भर नही भूलूंगा

मै सोच मे पड़ गया कि चुत ही तो दी है ऐसा और क्या किया बुआ ने

बुआ - अरे छोटे तू मेरा भाई है और अपने ही अपनो के काम आते है ना ,,, अब तु इतने दिन से अकेला था तो तेरी तकलीफ समझ सकती हू मै ।

चाचा - लेकिन फिर भी कोई बहन अपने भाई के लिए ये त्याग नही करेगी

बुआ - एक तो बहन बोलता है और ऊपर से कहता है कौन करेगा त्याग ,,, देख छोटे तु कितना भी बड़ा हो जाये लेकिन मेरे लिए वही छोटे ही रहेगा ,,,, मेरे लिए अपने बहन भाईयो के लिए प्यार कभी कम नही होगा ,,

बुआ - आज तू 4 दिन से शालिनी ( चाची) के बिना परेसान था और अभी दुकान मे थोडी देर पहले उस औरत ने तुझे भला बुरा कहा जब तू उसके दूध को घुर रहा था वो तेरी परेशानी नहीं समझ सकती ना इसीलिये तुझे उल्टा सीधा कह कर चली गई,,

चाचा - हा दिदी ,,, सही कह रही है आप लेकिन आपको कैसे पता चला कि मै शालिनी ( चाची) के बिना परेसान हू ।

बुआ मुस्कुराते हुए - अरे छोटे मै एक औरत हू और मर्दो के हाव भाव बखुबी समझती हू ,,, और मेरा अपना भाई तकलीफ मे हो तो मै कैसे देख सकती हू इसिलिए मैने तेरे साथ साथ किया ।

चाचा - लेकिन अभी तो शलिनी एक हफ्ते बाद आयेगी ना

बुआ मुस्कुरा कर - हा जब वो आयेगी तभी मै जाउंगी ना घर हीहीहि इस बिच जब भी तुझे शालिनी की जरुरत मह्सूस हो मुझे बुला लेना

चाचा ने बुआ का हाथ पकड़ा और उनके होटों को चूम लिया और बोले - दीदी मुझे तो रोज दिन रात शलिनी की जरुरत मह्सूस होती है तो क्या

बुआ - रात मे तो भईया के यहा ही रुकूंगी और अब ऐसे अचानक से तेरे यहा कैसे रुक सकती हू ,,हा रोज दोपहर मे खाना लेके मै आती हू ना

चाचा खुश होते हुए - ठीक है दीदी मै मैनेज कर लूंगा

बुआ - ठीक है चल अब खाना खा ले देख कबसे पडी है

चाचा - नही दीदी अभी नही खाना है मुझे

बुआ - फिर कब

चाचा - वो मुझे शलिनी की थोडी कमी और मह्सूस हो रही हैं ऐसा बोल के चाचा ने बुआ के सामने अपना लण्ड मुस्कुराते हुए सह्लाया

बुआ - धत्त पगलू ,,,, इतना होने के बाद भी शर्मा रहा है ,,, सीधा बोल ना कि दीदी को एक बार और चोद्ना है हिहिहिही

चाचा - हा दिदी ,, और आज आप बहुत मस्त लग रही हो ,,, मै कितना पागल था जो इतनी मस्त माल के रहते हुए भी लण्ड हिला रहा था ,,, चलो ना दीदी एक बार और करते है ।

मै ये सब देख सुन कर सारा माजरा समझ गया कि कैसे 30 मिंट मे बुआ जैसी रन्डी औरत ने नये लण्ड के लिए चाचा का फायदा उठा लिया और साथ मे उत्तेजित भी होने लगा लेकिन मुझे आये 20 मिंट हो चुके थे और मै ज्यादा देर नही रुक सकता था नही तो मा सवाल करती

इसिलिए मै वापस दुकान मे आया और चाचा को आवाज दी । फिर चाचा भी अंदर से आवाज देते दुकान मे आये

चाचा - अरे राज बेटा तू कब आया ,,

मै - अरे चाचा मै तो कबसे आया हू और आवाज दे रहा हू ,,, क्या कर रहे थे आप अंदर और बुआ कहा है

मेरी तीखी सवाल जवाब से चचा झेप गये और उनके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था

मै हस्ते हुए - हाहहाहाहाहा क्या चाचा आप भी ,,,ये लिजीये खीर वाली टिफ़िन ,, बुआ घर पर ही भूल गयी थी

चचा - ओ ये टिफ़िन

मै - ठीक है चाचा आप ये शटर पुरा निचे कर लो मै आया तो एक कुत्ता यहा घुसा हुआ था ,,

चाचा- हा हा बेटा मै बंद कर लेता हू तू जा

मै भी वापस घर की तरफ हस्ते हुए निकल गया हहहहहहा

घर आया तो मा की डांट भी मिली

मा - कहा रह गया था तू इतनी देर खाना नही खाना क्या

मै - हा मा खाऊंगा वो रास्ते मे एक दोस्त मिल गया था तो वही बात करने लगा

मा - ठीक है जल्दी जा ऊपर तेरी दीदी से बोल कर खाना खा ले

मै ऊपर चला गया ।

अब देखते है दोस्तो आगे क्या होने वाला है ।

चुकि राखी को एक दिन ही रह गये है तो क्या राज की मा उसके पापा के लिए बुआ को फसा पायेगी या कोई नया धमाल होगा ।
 
Update 33

अब तक

घर आया तो मा की डांट भी मिली

मा - कहा रह गया था तू इतनी देर खाना नही खाना क्या

मै - हा मा खाऊंगा वो रास्ते मे एक दोस्त मिल गया था तो वही बात करने लगा

मा - ठीक है जल्दी जा ऊपर तेरी दीदी से बोल कर खाना खा ले

मै ऊपर चला गया

अब आगे

मै ऊपर आया और दीदी को आवाज दी तो बेडरूम मे बाहर आई

मै - दीदी खाना लगा दो

दीदी - ठीक है बैठ मै लगा देती हूँ

फिर दीदी खाना लेके आई, टेबल पर खाना रखा और मेरे बगल वाली कुर्सी पर बैठ गई

मै मुस्कुराते हुए - आप भी खओगे क्या दीदी मेरे साथ

दीदी - अरे नही नही तू खा ले ,,मुझे तेरे से कुछ बात करनी है कल को लेकर

मै चुप हो गया और खाना खाना शुरू कर दिया

दिदी - भाई वो कल अमन आये थे ना तो वो जो हुआ मॉल मे उसके लिये सॉरी

मै खाना खाते हुए दीदी की तरफ एकदम फोकस नही किया और नजर प्लेट में रखे हुए ही बोला - हम्म्म ठीक है

दीदी को लगा मै अब भी नाराज हू तो वो फिर से बोली - भाई प्लीज नाराज ना हो वो मैने बस उनको मिलने को बुलाया था लेकिन वो ही जिद करने लगे कि करना करना है ।

मुझे दीदी को लपेटने का मौका मिल गया

मै - हा तो आप उसे भी डांट सकती थी जैसे मुझे उस दिन छत पर डाँटा था ,,,

दीदी - तू मेरा भाई है राज और वो

मै - तो क्या मुझसे बढ़ कर है वो

दीदी - तू क्या बात कर रहा है राज ,,, समझ मै अमन को प्यार करती हू और तुने उस दिन छत पर जो किया वो गलत बात है

मै - अच्छा मतलब आप मुझसे प्यार नही करते हो ना

दीदी - नही भाई मै तुझसे भी उतना ही प्यार करती हू ना

मै - तो उस दिन मुझे डाटा क्यू ,,, ऐसा भी तो नही है कि अमन ने आपको उस नजर से नही देखा होगा

दीदी को लगा मै अभी नादान हू और भोला भी

दिदी - भाई तू बहुत भोला है रे ,,, मै तेरे साथ वो सब नही कर सकती हूँ वो हक सिर्फ पति का होता है

मै - तो क्या वो आपका पति है अब

दीदी - अभी नही लेकिन शादी के बाद तो होगा ना

मै - लेकिन अभी तो नही ना हुई है आपकी शादी फिर वो गैर हुआ ना ,,, और मै आपका सगा भाई हू फिर भी मुझे डाटा और वो अभी कोई नही है फीर भी उसको .....

दीदी को लगा मै तो एक ही बात को पकड कर बैठा हू । एक बॉयफ्रेंड और भाई का रिश्ता के क्या क्या मायने होता है वो मै नही समझ पा रहा हू ।

दीदी मुझे बार बार समझाती लेकिन मै जानबुझ कर उनको एमोशनली भाई बहन के रिश्ते को लेकर बात को घुमा देता था.... आखिरकार दीदी को लगा कि मै ऐसे नही मानने वाला,,, और वो उठी और मुझे किचन मे ले गयी

दीदी - चल हाथ धुल और कुल्ला कर ले ,

दिदि का मूड बदला लग रहा था कि कहीं वो गुससे मे वापस ना मा को बताने की जिद कर ले ,,,, लेकिन हुआ वो जो मेरे अनुमान और मेरे सोचे हुए विचारो के बिलकुल उलट हुआ

जैसे ही मैने कुल्ल कर के हाथ धुल कर फ्रेश हुआ तो दीदी ने मुझे एक रुमाल दिया

दीदी - ये ले और मुह साफ कर

फिर मैने मुह साफ किया और रुमाल दे दिया

दीदी - चल अब अपनी आंखे बंद कर और जब तक मै ना बोलू खोलना मत

मै चौकते हुए - क्यू

दीदी - जितना बोल रही हू कर तू पहले

मै चुपचाप आंखे बन्द किया - अब कितनी देर तक बंद रखना है दीदी

मेरे सवाल का जवाब जो दीदी ने दिया वो मेरे लिए एक अनमोल पल बन गया क्योकि जवाब मे दीदी ने अपने नाजुक होठ मेरे होठो से जोड दिये थे और मेरे निचले होठ को अपने दोनो होठो से खिच कर चूसने लगी ,,,, पहले तो मै चौका लेकिन फिर लगा दीदी ने खुद पहल की है तो उन्के चेहरे को पकड कर मै भी उनका साथ देते हुए उन्के उपरी मुलायम रसिले होठो को चूसने लगा । करीब दो मिंट बाद दिदी मुझ्से अलग हुई और अपने गीले होठ को अपने एक हाथ से साफ किया ।

इस दौरान मै यही दिखा रहा था कि मै शौक मे हू

दीदी - यही चाह्ता था ना तू भी ,,इसी बात की जलन थी ना वो मुझे किस्स किया और तुझे कुछ नही मिला ,,, अब तो समझ मै तुझे भी प्यार करती हू ।

मै - हा लेकिन जब पकड़ी गयी तभी ना की हो आप,,, नही तो कभी जताते ही नही कि आप हमसे प्यार करते हो ,,, हमेशा डाटा ही है आपने मुझे

दीदी - कुछ भी किया हो लेकिन तू अमन से अब भी एक कदम आगे है समझा हिहिहिही

मै - वो कैसे

दीदी - कुछ नही छोड अब निचे जा मा को भी खाना खाने भेज

मै जिद करते हुए - बताओ ना दीदी प्लीज

दीदी - तुने तो बिना कपड़ो के मुझे देखा है और अमन ने सिरफ किस्स किया ,,,ये बोल के दीदी शर्मा गयी और पीठ मेरी तरफ कर ली

मैं भी मौके का फायदा उठाकर उन्के पास गया और उन्के एक कंधे पर हाथ रख कर बोला - तो आपको नही लगता की अमन से ज्यादा मेरा हक है आप पर ,,

दीदी - हा भाई ये सही है लेकिन

मै - दिदी हम दोनो बचपन से एक दुसरे के साथ है , हमने चीज़ हर बात सब कुछ एक दुसरे से साझा किया है तो क्या वो प्यार किसी के आने से कम कर दोगे आप

दीदी - नही भाई मै ऐसा नही चाहती हू ,, लेकिन मै अमन से बहुत प्यार करती हू और उसी से शादी करना है मुझे

मै - मैने तो ये नही कहा ना कि आप उससे प्यार करना बन्द कर दो ,, लेकिन क्या आप उसके लिये मेरे हिस्से का प्यार नही दोगे मुझे ।

इस वक़्त मै सच मे इमोसनल हो गया था ,,, मेरा हवस अब धीरे धीरे दीदी के एक प्यार का रूप लेने लगा ,,, मुझे इस बात का दिल से दुख होने लगा कि दीदी अमन से प्यार करती है ।लेकिन तभी दीदी ने मेरे अंदर एक उम्मीद की किरण दिखा दी ।

दीदी - भाई मै नही जानती थी कि तू मेरे से इतना प्यार करता है ,,लेकिन अब मै अपने दिल के हाथो मजबुर हू ,,मै अमन को छोड नही सकती ,, लेकिन

मै - क्या दीदी बोलो न

दीदी - लेकिन मै तेरे हिस्से का प्यार तुझे हमेशा दूँगी भाई ,,

मै खुश हो गया और दीदी को पीछे से उनकी कमर मे हाथ डाल कर पेट को कसा और उन्के कन्धे पर सर रखा और बोला - थैंक्स दीदी ,, आई लव यू

दीदी ने भी एक हाथ मेरे जुड़े हुए हाथो पर रखा और दुसरे हाथ से मेरे गाल को छुते बोली - आई लव यू टू भाई

दीदी - चल अब जा निचे

मै - नही रहने दो न दीदी कितना अच्छा लग रहा है ।

दीदी मुझसे छूटने की कोशिस मे हसे जा रही थी क्योकि जब भी वो मेरे हाथ हटाती मै उनकी मुलायम पेट मे गुदगुदी करने लगता

दीदी - छोड दे भाई अब ना ,,, देख कही अनुज ना आ जाये

मै चौक गया और उनको छोड दिया । वो मौका पाते ही बेडरूम मे भाग कर दरवाजा बंद कर ली ।

कमरे के अंदर से ही

दीदी - चल चल अब जा ,,बड़ा आया था दीदी का अशिक़ बनने ,,,हहिहिहिही

मै - कब तक बच के रहोगी दीदी देखता हू

फिर मै हस्ते हुए निचे आ गया फिर मा ऊपर चली गई और मै खुश था कि दीदी अब मेरे हाथ मे जल्द आने वाली थी।

करीब 2 बजे तक बुआ आई ,,, जैसे ही मेरी नजर बुआ पर गयी तो मुझे चाचा और बुआ की चुदाई याद आ गयी । मैने सोचा रात मे कुछ होगा नही और कल रक्षा बंधन पर मुझे नाना के यहा जाना है मा को लिवा के तो क्यू ना अभी दिन मे कुछ मज़ा ले लू

बुआ छत पर जाने लगी

तो मै उनको रोकते हुए

मै - बुआ रुको ना कहा जा रही हो

बुआ - बेटा ये खाने का डब्बा धुलने के लिए ले जाना है ना

तभी मा निचे आ गई और बोली - अरे दीदी रख दो यही अभी चला जायेगा ,,,,

आओ बैठो बात करते है वैसे भी कल मै चली जाऊंगी दो दिन के लिए मायके

बुआ - दो ही दिन क्यू भाभी आराम से रहो न एक हफ्ते मै हू ना यहा

मा - अरे दीदी घर का ख्याल तो रख लोगी लेकिन इसके पापा का क्या हिहिहिही

बुआ - क्यू मै अपने भईया का ख्याल नही रख सकती क्या

मा - हा लेकिन कैसे रखोगी बताओ जरा

बुआ - अब भईया रहते तो ना दिखा के बताती मै

मा - अरे तो क्या हुआ राज है ना

मा ने जैसे मेरी पहल की मै खुश हो गया और बोला - हा मा मुझे भी सिखना है ,,प्लीज

मा - लो अब तो ये भी तैयार है ,तो क्या कहती हो दीदी

बुआ मुस्कुराते हुए - अरे भाभी अभी तो ये बच्चा है

मा - हा तो इसको सिखाना भी पडेगा ना कि कैसे कैसे क्या होता है ,,,, इसी बहाने ये सिख भी लेगा और मै भी देख लुन्गी की मेरे गैर हजिरि मे मेरे पति खुश रह पायेंगे या नही

बुआ - चल लल्ला कमरे मे ,,,

फिर मै और बुआ कमरे मे गये , मा कमरे के दरवाजे के बाहर स्टूल लगा कर बैठ गयी ताकि कमरे के साथ दुकान मे भी नजरे बनी रहे ।

मै बहुत खुश था कि मुझे मा के सामने अपना जलवा दिखाने का मौका मिलेगा । मा के सामने मै बुआ को चोदन्गा ये सोच कर ही मेरा लण्ड पुरा का पुरा अकड गया था ।

मा - तो शुरू करो दीदी अब

बुआ और मेरे बिच सब कुछ हो गया था पहले ही लेकिन हम लोग भी जानबुझ कर नाटक कर रहे थे ।

मै - बुआ पहले क्या करते है ,, मै दूध पियुन्गा पहले

मा हसने लगी - क्या तू भी बच्चो की तरह दूध पीने को बोल रहा ,,,

मा बुआ को - दीदी जरा इसके नुन्नु को अपने जीभ की कलाबाजी से वाकिफ तो कराओ तब ये समझेगा औरत का सुख हीहीहि

बुआ - हा भाभी देख रही हू बहुत नादान है ये ,, और मेरे तरफ देख कर मुस्कुराने लगी ।

मै भी बुआ की नाटक मे शामिल होते हुए - मा क्या करने को बोल रहे हो आप

बुआ - रुक बेटा मै बताती हू

फिर बुआ घुटनो के बल बैठ गई और लोवर मे बने टेन्ट पर मेरे लण्ड को सह्लाया

मा - जरा बाहर निकाल के देखो तो राज बड़ा हो गया है कि नही

मै - मा बड़ा हो गया हू चाहो तो देख लो , ये कह कर मैने अपना टीशर्ट ऊपर चढा लिया

बुआ - वो तो अभी पता चल जायेगा

फिर बुआ ने मेरे अंडरवियर सहित मेरे लोवर को निचे मेरे जांघो तक कर दिया

बुआ के ऐसा करते ही मेरा 7" का मोटा लण्ड उछल कर उपर निचे होने ल्गा जैसे रबर की दण्डि हो ।

मा ने जैसे मेरे लण्ड को देखा उसकी आंखे चमक गयी और वो एक नजर दुकान मे देखी फिर उठ कर मेरे पास आ गई । इस वक़्त बुआ और मेरी दोनो की नजरे मा पर थी जो एक टक मेरे खड़े फन्फ्नाते लण्ड को देखे जा रही थी ।

बुआ - भाभी देख रही हो ये तो सच मे बड़ा हो गया है

मा - हा दीदी सच कह रही हो जरा खसकना दिदी मै भी देखू तो

फिर मा भी बुआ के बगल मे घुटनो के बल बैठ गई और एक हाथ से मेरे लन्ड़ की मोटाई मापते हुए चमडी को आगे पीछे करने लगी ।

मा का स्पर्श अपने लण्ड पर पाते ही मेरे लण्ड की नशे और कसने लगी ,,, सुपादा और कडक होकर लाल होने लगा ,,,,

मा - दीदी इसका लण्ड कितना तप रहा है देखो ,,,,

फिर बुआ ने भी अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया ।

आह्हह क्या आनन्द था मेरी घर की दो गदरायी माले मेरे लण्ड को थामे हुए उनका तापमान मापे जा रही थी ।

मै - आह्हह मा दर्द हो रहा है कुछ करो ना

मा - हा बेटा रुक ,,,

मा बुआ से - दीदी जरा इसके लण्ड को मुह मे लेके ठंडा कर दो मै बाहर दुकान मे हू ,,,बेचारे के लिए पहली बार है ना तो ज्यादा तकलीफ लग रही है ।

मा की बातो मे फिकर थी,, इधर मुझे लग रहा था कि अब बुआ और मा दोनो मेरा लण्ड एक साथ चुसेगी लेकिन मा तो किनारा कर रही थीं, तभी बुआ ने ऐसा कुछ बोला कि मै गदगद हो गया ।

बुआ - भाभी ये आपका बेटा है आपका इसपे ज्यादा हक भी है और आज इसका पहली बार है तो क्यू ना मा होने के नाते आप ही इसके लण्ड को ठण्डा करो ,, दुकान मे मै बैठ जाती हू

फिर बुआ उठ कर जहा मा बैठि थी उसी स्टूल पर बैठ गई ।

मा ने एक नजर मेरी तरफ देखा और फिर मेरे लण्ड को देखते हुए सहलाने लगी

बुआ - क्या भाभी जल्दी करो ना बेचारा कितना परेशान है

बुआ के बोल्ते ही मा ने गप्प से लण्ड को मुह मे ले लिया और चूसने लगी ।

मा की कोमल होटों का अपने सख्त लण्ड पे घिसाव मुझे और उत्तेजीत करने लगा ,,, तीन चार बार लण्ड चूसने के बाद मा ने मेरे लण्ड को उपर की तरफ एक दम सीधा किया और मेरे लण्ड की निचली नसो को जड़ से लेकर सुपाडे के छोर तक अपने गीली जीभ से चाटने लगी और फिर मेरे सुपाडे को अपनी मुलायम जीभ के निचले हिस्से से घुमा घुमा कर गिला करने लगी ।

अब तक मैने जितनो से भी लण्ड चुस्वाया था उसमे सबसे ज्यादा मज़ा मा के साथ आ रहा था और मुझे समझ आ रहा था कि क्यू पापा को मा लण्ड चूसना इतना पसंद था और क्यो वो मा की गुरू मेरी रज्जो मौसी से लण्ड चुसवाना चाह्ते थे ।

मा ने मेरे लण्ड को सीधा कर उस्की चमडी उपर निचे करके मेरे आड़ो को मुह मे भरने लगी थी,,, और मेरा लण्ड मा की लार से पूरी तरह से गिला हो चूका था ,,, लेकिन ये सब मा की कलाओ के तर्कस का एक ही तीर था ,,, उनका हर नया स्टेप मेरे लण्ड की नसो मे और कसाव ला रहा था ।

फिर मा ने वापस लण्ड को मुह मे लेकर जड़ तक लिया और एक हाथ से मेरे आड़ो को दबाने लगी । मेरे सुपाड़े पर मा के गाले की घाटी चुब रही थी । मा वापस से लण्ड को आगे पीछे कर लण्ड की चुस्ती रही और मुह के अन्दर मेरे सुपाडे पर अपनी जीभ की कलाबाजी दिखाती रही । करीब 10 मिनटो की चुसाई के बाद मेरे सबर का बान्ध टुट गया,, अब मै और ज्यादा देर तक खुद को सम्भाल नही सकता था ,,, मा के लण्ड चूसने की कला के आगे मै नतमस्तक हो गया था ,,, मेरे लण्ड के कडक बढ़ गई और नसे फूलने लगी , सुपाडे मे खुन ज्यादा होने से उसमे दर्द होने लगा था ,,,मेरे पैर कापने लगे सांसे तेज़ी से फूलने लगी और मै लदखदती आवाज मे

मै - अह्ह्ह्ह माआअह्ह मेराआअह्ह हो ने वा ...

बुआ - बेटा रोकना मत उसको बह जाने दे तभी दर्द कम होगा

फिर मैने मा की तरफ देखा तो वो मुह मे लण्ड लिये हा का इशारा करती है और तेज़ी से मेरे सुपाडे को सुरकने लगती है ,,,, फिर चंद पलो मे मैने अपने सुपाडे को ढिला छोड दिया और मेरी नशो मे भरा वीर्य तेज़ी से मा के मुह मे भरने लगा और मा ने अच्छी तरह से चाट कर और मेरे सुपाड़े को सुरक कर सारा वीर्य साफ किया और मै वही बिस्तर पर धडाम हो गया ।

मा भी उठी और अपने चेहरे साफ किया और वही बगल मे बैठ गई

बुआ ह्स्ते हुए - वाह भाभी आप सच मे खिलाडी है लण्ड चूसने मे ,,,

मा - तभी तो कह रही हू ना कि इसके पापा को खुश रख लोगी न आप

बुआ - कोसिस करंगी मै भाभी लेकिन शुरुआत तो होनी चाहिए ना

मा - तो आज रात मे कर लो शुरूवात ,,,वैसे भ आज आपको इस रूप मे देख कर उनका कण्ट्रोल नही रहने वाला है

बुआ - लेकिन कैसे भाभी आप ही उनको लेके सोते हो ना कभी मेरे पास छोड़ते ही नही हिहिहिहिही

मा - ठीक है फिर आज रात हम लोग छत पर ही सोया जायेगा ,,, और देखते है तब आप क्या करती है

बुआ - सोच लो भाभी अगर मेरे जाल मे फस गये भईया तो निकल पाना मुस्किल है

मा - अरे वो तो खुद आना चाहते है आपके जाल मे और मेरी चिन्ता ना करिये ,, क्योकि वो आपके लिये 4 दिनो से तरस रहे है कही आप ही ना भाग जाओ हिहिहिही

बुआ - चलिये देख्ते है ,,, मेरी जवानी के आगे अच्छे अच्छे पानी भरे है तो एक बार भईया भी सही

मा - एक बार ले के देखो अपने भैया का ,, जिजा जी को भी भूल जाओगी हीहीहि

इधर मै उन लोगो की बाते और रात मे छत पर होने वाले रोमांच से बहुत उत्तेजित होने लगा था और मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा ।

देखते है दोस्तो आगे क्या होने वाला है
 
Update 34

अब तक

बुआ - चलिये देख्ते है ,,, मेरी जवानी के आगे अच्छे अच्छे पानी भरे है तो एक बार भईया भी सही

मा - एक बार ले के देखो अपने भैया का ,, जिजा जी को भी भूल जाओगी हीहीहि

इधर मै उन लोगो की बाते और रात मे छत पर होने वाले रोमांच से बहुत उत्तेजित होने लगा था और मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा

अब आगे

बुआ की नजर मेरे खड़े हुए लण्ड पर गयी तो बोली

बुआ - अरे भाभी लगता है कि अभी भी राज को आराम नही मिला है

मा ने घूम कर मुझे देखा और फिर मेरे खड़े लण्ड पर घुमाई

मा - आईये दीदी एक बार आप ही कोसिस कर लिजीये हीहीहि

बुआ - नही भाभी मुझसे रहा नही जायेगा अगर मैने राज का लण्ड छू लिया तो बिना चुत मे लिये मै रह नही पाऊंगी

मा - तो चुत मे ही लेलो ना दीदी वो तो आपका भी बेटा है ना ,,,,

बुआ - सच भाभी तो क्या मै

मा - हा दीदी मै समझ रही हू कैसे आपने 4 दिनो से खुद को रोका हुआ है मै भी एक औरत हू

मा की बाते सुन कर मै और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था ,,,कि मेरी मा मेरे लिये खुद चुत लेके आ रही है

बुआ उठी और मेरे दुसरे साइड बैठ गई

बुआ - भाभी आप भी आओ ना मिल कर करते है

मा - नही दिदी आप करिये मै देखूँगी वहा बैठ कर ,, कही कोई आ गया अचानक से तो

बुआ - ठीक है भाभी

फिर मा उठ कर स्टूल पर बैठ गई और बुआ ने मेरे लण्ड को मुथ्थी मे कस लिया

मै गरदन उपर करके देखा तो बुआ मेरे बगल मे बैठि मेरे लण्ड को पकडे सहला रही थी।

मै - बुआ जल्दी करो ना

बुआ मुस्कुराने लगी और झुक कर मेरे तरफ देखते हूए मुह मे लण्ड भर लिया

एक बार फिर मै आनन्द के सागर मे डूब गया ,,, बुआ भी मा के जैसे भर भर लण्ड को गले तक लेने लगी कारिब दो मिंट बाद बुआ उठी और बिस्तर पर चढ़ गई और घाघरे को उठा लिया ,,,अंदर बुआ ने कुछ नही पहना था और झुक कर मेरे लण्ड को अपनी चुत के होटों मे सेट करने लगी , जैसे ही मेरा सुपाड़ा बुआ की चुत के छेद पर सेट हुआ तो बुआ घ्प्प से मेरे खड़े लण्ड पर बैठ गयी और कूदने लगी

बुआ - आह्हह भाभी कित्ना गर्म लण्ड है राज का

मा - लेलो मज़ा ननद रानी ,, मायके का लण्ड नसिब वालो को ही मिलता है

बुआ - हा भाभी आह्हह आह्हह बहुत मज़ा आ रहा है आह्हह

बुआ तेज़ी से घ्प्प घ्प्प करके मेरे लण्ड पर उपर निचे हो रही थी ,जिससे बिना ब्रा के उनकी चुचिया टीशर्ट मे बहुत उछल रही थी ।

मा - अरे अब तो दर्शन करा दो अपने भतीजे को उसके मनपसंद चुचो के हीहीहि

बुआ - हा भाभी क्यू नही ,,,अह्ह्जहहह उम्म्ंम्ं क्यू लल्ल्ल्लाआअह्ह्ह देखेगा मेरे चुचो को

मै - हा बुआ मै तो कबसे चूसना चाहता हूँ आपके चुचे

फिर बुआ ने अपने टीशर्ट निकाल दिया जिससे उनके 42 साइज़ के मोटे चुचे हवा मे उछ्ल्ने लगे । फीर बुआ मे दोनो हाथों मे अपने चुचो को पकड़ा और वापस से मेरे लण्ड पर कूदने लगी ।

मुझसे बुआ की झुल्ती चुचिया देखी नही गई और मै बार बार हाथ उपर कर उनके चुचो को पकड़ने की कोसिस करने ल्गा लेकिन बुआ लगातर मेरे लण्ड पर उछले जा रही थी जिससे मेरे हाथ उनकी चुचे तक नही जा पा रहे थे ।

जब बुआ ने देखा की मै उनकी चुचे के लिए तडप रहा हू तो वो खुद अपने हाथो के बल मेरे उपर झुक गई और मैने लपक कर बुआ के चूचे पकड लिया और मुह मे भर कर चूसने ल्गा

बुआ - आह्ह्ह्ह लल्ला आराम से चुस अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं

मै भाग थोडी रही हू

मा - रहम मत करना राज थोड़ा भी ,,, आज दिखा दे अपने लण्ड का जलवा ,,,, फाड देना अपनी बुआ की चुत को

मै - हा मा ,,, अभी देखो क्या कर रहा हू ,,,आप तैयार हो ना बुआ चुद्ने के लिए

बुआ - हा बेटा अब चोद दे जल्दी से ,,,, अह्ह्ह्ह उम्म्ंम बहुत जोर से चुस्ता है रे तू ,,, लाल कर दी तुने

मा - अभी इसके पापा भी चुसेगे आपको मेरी शिला रानी ,,,वो तो इससे भी तेज मरोडते है निप्प्ल को ,,,

बुआ - अह्ह्ह्ह उम्म्ंम खा जा बेटा और चुस ,ये ले हाआ अह्ह्ज्ज उम्मममंं अह्ह्ह्ह्ह

अब मैने अपनी पोजिसन बदली और बुआ को थोडा आगे कर उनको घुटनो के बल अपनी तरफ झुका लिया और अपने जांघो को खोल के बुआ के चुतडो को पकड़ा और निचे से चोद्ना शुरू कर दिया ।

बुआ - अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह मज़ा आ गया मेरे लाल अह्ह्ज्ज उन्मममंं हा बेटा चोद और तेज और तेज अह्ह्ह्ह्ह औह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं और तेज आह्हह आह्हह

रुकना मत बेटा बस फाड मेरी चुत को

मै बीना कुछ बोले बुआ की चूची को मुह मे भरे उनकी मोटी गान्द को फैलाये निचे से कमर उठा कर घपाघप चोदे जा रहा था औ थप थप थप थप के साथ बुआ की सिसकियाँ की आवाजो से कमरा भर गया ।

करीब 5 मिंट तक ऐसे ही लगातार चोद्ने के बाद बुआ मेरे उपर अकड़ने लगी ,,, और तेज़ी मेरे लण्ड पर झडने लगी और उनकी चुत का पानी मेरे आड़ो से होकर बेडशिट पर गिरने लगा । बुआ के झडने से फच्च फच्च की आवाजे आने लगी क्योकि मै अभी झड़ा नही था और लागातार उसी पोजिसन मे चोदे जा रहा था

बुआ - अह्ह्ह्ह बेटा रुक जा मै झड़ गयी हू थोदा सा रुक जा ना

मा - क्या हुआ दीदी अभी तो राज ने शुरु बस किया था ,,,लगता है 4 दिन बाद लण्ड मिलने से जल्दी झड़ गई ।

अब मा को क्या पता कि बुआ क्यू थक गई थी ,,, अभी तो बुआ 2 बार चाचा से चुदी फिर मुझसे तो कहा से ताकत बचती ।

मै - मा आप आजाओ ना मेरा ब्स निकलने वाला है

मा - बेटा मै अभी नही आ सकती कोई आ जायेगा ऐसा कर तू खड़ा हो कर हिला ले मै चुस कर साफ कर दूँगी ।

फिर मै जल्दी से बिस्तर से उतर कर खड़ा हुआ और तब तक मा मेरे कदमो मे लण्ड के निचे आ गयी और मैने भी उनके चेहरे के उपर लण्ड हिलाने लगा

मा - जल्दी आओ दीदी अपनी मेहनत का फल तो लेलो

बुआ भी झटके मे उठी और मा के बगल मे मेरे लण्ड के निचे आ गई।

मै लण्ड हिलाते हुए - अह्ह्ह्ज्ज माआआ आह्ह्ह्ह निकलने वाला है

तभी मा और बुआ ने अपने गाल आपसे मे सटा लिये और जीभ को बाहर निकाल लिया माल लेने के लिए, मै भी आगे बढ़ कर लण्ड को उनकी जीभ पर रख कर हिलाने ल्गा और कुछ झटको मे मै दोनो के जीभ पर झडने ल्गा ,,, जब मेरा लण्ड झटका देना बन्द कर दिया तब बुआ और मा अपनी जीभ अंदर कर माल पी गयी और बुआ ने लपक कर मेर लण्ड मुह मे लेकर बचा कुचा माल भी साफ कर दी ।

फिर वो दोनो उठी और मा दुकान मे चली गयी ,, 10 मिंट बाद मै और बुआ भी अपने कपडे ठीक कर बाहर आये ।

मा - क्यू दिदी अब तो खुश हो ना आप ,,, और तू राज तू भी सिख गया ना

मै - हा मा थैंक यू

बुआ - थैंक्स भाभी आप बहुत अच्छी है मेरा कितना ख्याल रखती है ।

मा - अरे दीदी अब घर के लोग नही ख्याल रखेंगे तो कौन रखेगा ।

मा - वैसे मज़ा आया ना

मै - हा मा बहुत ज्यादा

बुआ - बेटा चुदाई का मज़ा होता ही अलग है हिहिहिही

ऐसे ही हम लोगो मे बाते हुई शाम को मा ने मुझे करीम के यहा से कपडे लेने को भेज दिया ,, मै भी वो कपडे लेते आया । शाम को 5 बजे ही पापा भी एक बैग मे मिठाई और कुछ सामान लेके आ गये ।

उस समय मा उपर थी और मै दुकान मे बैठा था,,, और बुआ बहुत थकी थी तो पापा के कमरे मे कुलर चला के सो गयी थी ।

मै - अरे पापा आज इतना जल्दी

पापा - हा बेटा वो कल के लिए मिठाई है और तेरी दोनो बुआ के लिए तोहफा भी है ,,, बाकि लोग कहा है

मै - मा और दीदी उपर है , अनुज बाहर खेलने गया है और बुआ अन्दर सोयी है ,

बुआ के बारे मे सुन्ते ही पापा के चेहरे खिल उठे ।

पापा - ये सामान रख दे मै जरा दिदी से मिल लू

मै समझ गया पापा बुआ को नये ड्रेस मे सोया हुआ पाकर मस्ती जरुर करेंगे ,,,

इसी लिये पापा के अन्दर जाते ही मै भी खिडकी के पास गया और पर्दे के कोने से देखने ल्गा ।

अन्दर बुआ बिंदास सोयी हुई थी । उनकी जान्घे फ़ोल्ड थी जिससे बुआ का घाघरा घुटनो तक उठा था अगर कोई झुक कर देखता तो उसको बुआ की चुत दिख जाती । बुआ की चूचिया बिना ब्रा के वजह से टीशर्ट मे दोनो तरफ फैली हुई थी और उनका नाभि दिख रहा था ।

और बुआ को देख के पापा चढ़ढे के उपर से लण्ड सहलाने लगे थे

मै पापा के आगे बढने के इंतज़ार मे था ,, और पापा आगे बढ़े और झुक कर जमीन पर बैठ और बुआ के स्कर्ट मे झाका ,,,, और उनको बुआ की चुत साफ नजर आने लगी ।

पापा के चेहरे के भाव से साफ पता चल रहा था की वो कितने खुश है ।

फिर पापा उठे और बुआ के पैर को चुमा और बाहर आने लगे मै जल्दी से अपनी जगह पर आकर पापा का लाया झोला देखने ल्गा कि क्या क्या सामान है ,,, इतने मे अनुज आया बाहर से और मुझे झोले से मिठाई निकालते देख चिल्लाता हुआ मेरे पास आ गया

अनुज - भैया मुझे भी चाहिये ,,क्या क्या लाये हो पापा ,,,

पापा - अरे बेटा सब तुम्ही लोगो के लिए है आराम से खाओ

अनुज तेज आवाज मे खुसी से बोला - अरे वाआअह मेरे लिए गिफ्ट ,,,थैंक्स पापा

पापा - नही बेटा वो तेरा नही है तेरी बुआ के लिए है

तभी बुआ कमरे से बाहर आती हुई - मेरे लिये क्या भैया

शायद अनुज के शोर गुल से जग गयी होगी

बुआ की आवाज सुनते ही सबकी नजर बुआ पर गयी ,,,,

फिर पापा ने वो गिफ्ट उठा कर बुआ को दे दिया

पापा - हा आपके लिये दीदी ये लिजीये ,,, और अनुज बेटा ये सारा सामान छत पर लेके चले जाओ ।

बुआ - इसकी क्या जरुरत थी भैया ,, वैसे इसमे है क्या

पापा - खुद खोल के देख लिजीये

बुआ जल्दी जल्दी खोलने लगी

पापा - अरे यहा नही कमरे में चलिये

फिर वो दोनो कमरे मे चले और थोडी देर बाद बुआ की आवाज आई । मै वही दुकान मे बैठा रहा

बुआ - भईया ये क्या है

पापा - क्यू पसंद नही आया क्या मेरा गिफ्ट

बुआ - धत्त अपनी बहन को कोई ये सब देता है

मै सोचने ल्गा कि ऐसा क्या दे दिया पापा ने

पापा - परसो आपके पास थे नही तो सोचा क्यू ना मै खुद एक अपनी पसन्द का लेलू और नाप था मेरे पास तो कोई दिक्कत नही हुई ।

बुआ - हा लेकिन क्या फायदा आप देख ही नही पाओगे हीहीहि

पापा - आप चाहोगे तो वो भी हो सकता है।

बुआ - कैसे

पापा - यही पर ट्राई कर लो और दिखा दो

बुआ - धत्त आपके सामने

पापा - हा तो मुझे ही तो देखना है ना

बुआ - ऐसे कैसे,, राज बाहर है और मैने अन्दर कुछ पहना भी नही है

पापा - राज नही अयेगा दीदी और वैसे भी इसको पहनने के लिए आप जो पहनी होती उसे भी निकालन पड़ता ना

मै सारी बाते सुने जा रहा था मेरे ख्याल मे लग रहा था कि पापा बुआ के लिए कोई अंडरगार्मेंट्स लाये थे ।

बुआ - भईया कल पहन लुंगी ना ,,, वैसे भी अभी शाम हो गयी है ।

पापा - अच्छा ठीक है लेकिन दिखाना पडेगा

बुआ - हिहिहिही ठीक है बाबा दिखा दूँगी अब खुश

पापा - हम्म्म ठीक

पापा - वैसे सच मे आपने कुच नही पहना

बुआ - क्यू अब क्या बिना कपड़ो के देखना है क्या हिहिहिही

पापा - कहा ऐसी किस्मत दीदी जो आपको

बुआ - धत्त भईया आप भी ना , चलो मै जा रही हू छत पर कुछ काम कर लू भाभी को भी कल के लिए पैकिंग करनी है ना

पापा - ठीक है दीदी चलो मै भी छत पर टहलने जा रहा हू ।

फिर पापा और बुआ बात करते हुए निकले और दोनो छत पर चले गये ।

इसी बीच मुझे चंदू का फोन आया और मै उससे बात करने लगा ।

फोन पर

मै - अबे साले कहा था तू ,,,

चंदू - यार मै मामा के यहा आया हू

मै - तो भोस्डी के बता के नही जा सकता था

चंदू - सॉरी यार वो अचानक से प्लान बन गया मामा का पैर की एड़ी मे फैकचर हुआ था बहुत पहले ही वो फिर से उभर गया ,, और बता मैने जो बोला था वो ट्राई किया की नही ,,,

मै - क्या बोला था क्लियर बोल न

चंदू - अबे वो जो स्टोरी दी थी और बोला था कि फॉलो करना वैसे ,,,

मै - मै कैसे मान लू कि सही बोल रहा था तू ,,, वीडियो भेजने वाला था ना ,,,,साले एक नम्बर का झुठा है

चंदू - अरे भाई मैने तो भेजा था उसी दिन ,, उसमे मेरी बहन के साथ वाला ही था ,,,

मै - अबे साले आया होता तो मै देखता नही ,,, फिर से भेज अब

चंदू - रुक अभी भेज रहा हू

मै - ठीक है वैसे वहा भी तेरी मौज ही होगी

चंदू - साले घन्टा मौज जबसे आया हूँ मा मुझे छूने नही देती हैं और हमेशा मामा की सेवा मे लगी रहती हैं,,, और तो और दिन मे रोज उसी से चुदवा लेती हैं सालि रन्डी

मै - लेकिन तेरे मामा के पैर मे फैकचर है ना

चंदू - अबे पैर मे है उसके लौडे मे थोडी है ,, सालि मुझे बोलती है कि यहा किसी को हमारे बारे मे पता ना चले और खुद उछल उछल के लण्ड लेती हैं ।

मै - और मामी नही है क्या

चंदू - भाई मामी पेट से है 7वा महिना हो गया है ना

मै - फिर उसकी कोई बेटी को फसा ले

चंदू - हा यही करना पडेगा तभी मै मामा से बदला ले पाऊन्गा ,,, बहन्चोद ने मेरी मा को दूर किया मुझसे

मै चंदू के जज्बाती बातो से बहुत हस रहा था और फिर थोडी देर बाद मैने उसको विदियो भेजने का बोल कर कॉल कट कर दिया ।

रात मे 8 बजे तक मै भी दुकान बंद करके उपर गया और मोबाइल दिदी को देके बोला चार्ज मे लगा दो ,,, फिर हम लोग खाना खाने बैठ गए ।

देखते है आने वाली रात क्या नया रोमांच लेकर आती है । आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा ।
 
Update 35

अब तक

मै चंदू के जज्बाती बातो से बहुत हस रहा था और फिर थोडी देर बाद मैने उसको विदियो भेजने का बोल कर कॉल कट कर दिया ।

रात मे 8 बजे तक मै भी दुकान बंद करके उपर गया और मोबाइल दिदी को देके बोला चार्ज मे लगा दो ,,, फिर हम लोग खाना खाने बैठ गए ।

अब आगे

हम सब लोग एक साथ खाना खाने बैठ गये 6 चेयर वाले टेबल पर । पापा बुआ के बगल मे , बुआ के बगल मे अनुज , अनुज के बगल वाली सीट खाली थी , उसके बाद मै और फिर मेरे बाद मा बैठि थी जो पापा के दुसरे साइड बैठी थी ।

फिर दिदी ने सारा खाना पानी टेबल पर रखा फिर मेरे और अनुज के बीच बैठने के लिए चेयर खीचा दीदी ने तो मैने अपना हाथ उल्टा कर चेयर पर रख दिया ,,, और दीदी को तिरछी आँखो से इशारा करते हुए मेरे हाथ पर बैठने को कहा ,, बदले मे दीदी मुसकुराते हुए एक मुक्का मेरे कन्धे पे मारा और मेरा हाथ हटते ही तुरंत बैठ गयी ,,, और मुस्कुराते हुए खुद की प्लेट मे खाना निकालने लगी ।

दीदी ने इस समय एक काटन का पटियाला सूट सलवार पहना था। वो ज्यादतर सिम्पल ड्रेस ही पहना करती थी ।

मै भी खाना निकाला और खाना शुरू कर दिया। मैने एक नजर मा की तरफ देखा तो वो पापा से कुछ इशारे कर रही थी और खाना भी खा रही थी ।

इसी बीच मैने अपना पैर चप्पल से निकाला और चुपचाप दीदी के पैर के उपर रख दिया,,,, और तिरछी नजर से दीदी को देखा तो उनकी आंखे बड़ी हो गई थी और मुह मे निवाला रुक गया था ।

मै भी मज़े लेटे हुए

मै - अरे दीदी क्या सोच रही हो खाओ ना

दीदी हड़बड़ा जाती है और मुझे हसी आ जाती

पापा - क्या हुआ सोनल कोई दीक्कत तो नही है न बेटा

दीदी - नही पापा खा तो रही हू और मेरी जान्ध पर चींटी काटती है

मै -उह्ह्ह्ह्ह क्या कर रही हो दीदी ,,,मै उनकी तरफ झुक कर फुसफुसाया

दीदी ने अपने पैर पर रखे मेरे पैर को दिखाया

मैने वापस अपना पैर हटा लिया और दीदी मुस्कुराने लगी ।

फिर ऐसे ही मस्ती मे हमलोगो ने खाना खाया और छत पर चले गए ।

छत पर

एक बड़ी चटाई बिछायी गयी ,, जिसपे एक साइड मे पापा लेट गये ,, उनके बगल मे मा बैठी और अनुज मा क गोद मे लेट गया, बुआ मा के बगल मे थी और मै दीदी छत पर चार दिवारी से दुसरी तरफ देख रहे थे । एकदम हल्की चांदनी रात थी ,,,, आसमान मे जुगनु और तारे थे ।

पापा - तब कल के लिए पैकिंग हो गई रगिनी

मा - हा जी हो गई है

पापा - तब कब से निकलना है

मा - सुबह 9 बजे तक

मै की बात सुनते ही दीदी का हाथ पकड लिया

दिदी धिमी आवाज मे - क्या कर रहा राज सब यही है

मै - दीदी कल मै चला जाऊंगा दो दिन के लिए

दीदी - तो वापस तो आयेगा ना

मै - लेकिन आपकी याद आयेगी ना और मै तड़पुँगा आपके लिए

दीदी - अच्छा जी तो क्या करूं कि आप ना तडपो ,मै भी चलू

मै - नही उसकी जरुरत नहीं है,, एक चुम्मे से भी काम चल जायेगा ,,,

दीदी - पागल है क्या देख नही रहा यही सब है ।

मै - इधर नही वो जीने के दुसरी तरफ चलो टहलते हूए ,,बस एक किस्स और वापस आ जायेंगे

दीदी - क्या कह रहा है तू कोई देख लेगा तो आज ही शुरू हुई लव स्टोरी का the end हो जायेगा

मै - प्लीज ना प्लीज ,,,मै जा रहा हूं अगर मेरे से प्यार करते हो तो जीने की तरफ आ जाना

फिर मै धीरे धीरे जीने की तरफ पीछे चला गया ।

इधर मा पापा और बुआ आपस मे बाते किये जा रहे थे नॉर्मल ही ।

मैं बेचैनी से दीदी का इन्तजार कर रहा था और करीब 2 मिंट बाद दीदी मेरी तरफ आने लगी ,,मै खुश हो गया

दीदी - ये क्या पागलपन है राज , कब तक तू ऐसे मेरे प्यार की परीक्षा लेगा भाई ,,,आखिर कब तू ये सम.....

इससे पहले दीदी कुछ और ज्ञान देती मैने लपक कर दीदी के होटो को अपने होटों से जोड लिया और चूसने लगा और फिर दीदी ने भी मेरा साथ देने लगी,,,मैने उनकी मुलायम कमर मे हाथ डाला और अपने करीब लाकर अपने जीभ को उन्के मुह डाल दिया और दीदी मेरे जीभ को चूसने लगी । फिर मै उनके होठो से हट कर उनको खुद से चिपकाये हुए उनके मुलायम चिकनी गालो को चूमने लगा और धीरे धीरे उनके कान को जीभ से स्पर्श करने ल्गा , जिससे दीदी की सांसे नशीली होने लगी और उनके हाथ मेरे पीठ और कमर पर रेगने लगे ,,, कान से होते हुए मैने उनकी सुराहिदार गले की खुस्बू को सूंघते हुए उनके कंधे पर अपनी नाक और होठ रगड़ने लगा ,, दीदी पुरे जोर से मुझे अपने आप से चिपकाये हुए बहुत ही हल्की और बेहद नशीली आहे भरते हुए सिसक रही थी । फिर मैने उनको एक जोरदार किस्स्स करके छोड दिया और वापस टहलने लगा जबकि दीदी वही जिने की दीवाल के सहारे सांसे बराबर रही थी । मै एक नजर पापा की तरफ डाली और वापस टहलते हुए दीदी के पास गया और देखा दीदी दीवाल से टिक कर आंखे बन्द किये सांसे ले रही है तो मै वापस से झुक कर दीदी के होठो को चूसने लगा । मेरे होठ जैसे ही दीदी के नरम होठो को छुते है दीदी लपक कर मेरे उपरी होठ को दबा लेती है और चूसने लगती है । मैने दिदी के दोनो हाथों को पकड कर दीवाल पर उपर टिका के जोरदार और गहरी किस्सिंग करने ल्गा ,,,हम दोनो एक दुसरे की होठो को चुस्ते हुए एक दूसरे की जीभ को चूसना चाह रहे थे । थोडी देर बाद मै फिर अलग हुआ तो दीदी मेरे सीने से लिप्त कर मुझे गले लगा लिया

दिदी - आई लव यू सो मच भाई ,,, आई लव यू

मै - आई लव यू टू दीदी ,,,

दीदी - भाई मै भी चलू कल मामा के यहा ,,,मेरा मन नही लगेगा यहा अकेले तो

मै - नही दीदी मै दो दिन मे आ जाऊंगा ना ,,, थोडा तडपना भी चाहिये प्यार मे

दीदी - मुझे बहुत याद आयेगी तेरी

मै - मै जलदी आ जाऊंगा

फिर हम लोग अलग हुए और टहलते हुए मा पापा की तरफ चले गये ।मै दीदी को अपनी तरफ पूरी तरह से लुभा चूका था और वो धीरे धीरे मेरे जिस्मानी हरकतो के लिए पागल होने लगी ।

मा - सोनल अनुज को लिवा जा ये सो रहा है यहा

दीदी - ठीक है मा ,, चल अनुज निचे चलते हैं

मा - राज तू कहा सोयेगा बेटा

मै - जहा आप लोग सोवोगे

मा - मै तो यही सोऊंगी आज

मै - तो मै भी यही सो जाता हू

फिर मै बुआ के बगल मे लेट गया और दिदी अनुज को लिवा के निचे चली गई ।

बुआ - चलो भाभी लेट जाओ ऐसे ही बाते करनी ही है ना

मा - हा दीदी सही कह रही है

फिर बुआ मेरे बगल मे और मा बुआ और पापा के बीच मे लेट गयी ।

बुआ - अरे भाभी आपको गर्मी नही लग रही है क्या आप साडी पहनी हो

मा - गर्मी तो है दीदी

पापा - अरे तो साडी निकाल दो ना रागिनी ,,,

मा - हा ठीक है रुकिये

फिर मा खड़ी होती है और अपनी साडी निकाल लेती है साथ मे ब्लाउज भी क्योकि मा ने ब्रा पहन रखा था ।

मा अब पेतिकोट ब्रा मे आ गई थी उनकी कसी चुचियो को देखकर लण्ड अंगड़ाई लेने ल्गा । फिर मा लेट गई और मै बुआ की तरफ करवट लेके घूम गया ताकि होने वाली घटनाओ पर नजर डालें रखु ।

इधर पापा मेरे सोने का इन्तेजार कर रहे थे और मैने धीरे धीरे बुआ की चुचिया टीशर्त मे हाथ डाल के सहलाए जा रहा था जिससे हल्का हल्का बुआ नशे में जाने लगी थी ।

बिच मे पापा और बुआ अपने बचपन की बाते मा को बता रहे थे । कारिब 20 मिंट बाद पापा - राज सो गया दीदी

बुआ जानती थी कि मै जाग रहा हू और उनकी चुचे को सहला रहा हू ।

बुआ - हा भैया सो गया है ये तो

पापा - रगिनी जानती हो बचपन मे मै जंगी और क्म्मो, दीदी के उपर ही सो जाते थे

मा - अच्छा सच मे क्या दीदी

बुआ - हा भाईया और आप वो क्यू नही बताते की आप मुझे भैस बोल कर क्यू चिदाते थे ,,वो भी बताओ ना अपनी शरारते कौन ब्तायेगा

मा - क्या जी आप भी ऐसे कोई बोल्ता है अपनी दीदी को

पापा - वो मैने नही रखा था नाम ,, वो तो ह्मारे मामा का लड़का लखना ने रखा था

मा - अरे लेकिन क्यू

पापा - वो कहता था कि दीदी का पिछ्वाडा चलने पर भैस जैसा हिलता है और दूध भी भैस की थन जैसी है

मा - हा वैसे बात तो ठीक बोला था वो

बुआ - क्या भाभी आप भी

मा - क्यू कौन सा गलत बोला था वो एकदम सही बोला हिहिहिही

पापा - अरे दीदी मै तो भूल ही गया

बुआ - क्या भैया

पापा - वो शर्त जो जीत था मै

बुआ - अरे हा ,,मागो भैया क्या चाहिये आपको

पापा - वो मुझे आज फिर से बचपन की तरह आपके उपर सोना है

मा - क्या जी आप भी ,,राज यही है कुछ तो लिहाज करो

बुआ - कोई बात नहीं भाभी वो सो गया ,, वैसे भी भईया शर्त जीते है तो

इस समय मै बुआ के नंगे पेट को सहला रहा था

पापा - तो क्या मै आ जाऊ दीदी

बुआ - हा भैया आ जाओ ना ,,बचपन की यादे ताज़ा हो जायेगी ,,,

अब पापा मा और बुआ के बिच आ गये ।

मै अब और ज्यादा उत्तेजीत होने ल्गा कि अब जल्द ही पापा बुआ की गर्म चुत में लण्ड डालेंगे ।

बुआ ने मेरा हाथ अपने पेट से हटा दिया क्योकि वो नही चाहती थी कि किसी को पता चले मै जाग रहा हूँ ।

मा - तो जी कैसे सोते थे आप दीदी के उपर

पापा - दीदी को पहले पेट के बल सोने की आदत पड़ गई थी और मै जब दीदी को सोते देखता तो इनके पीठ पर सोकर हाथ आगे ले जाकर कस कर पकड लेता था ।

मा - क्या सच मे दीदी

बुआ - हा भाभी और कभी कभी तो सिर्फ अंडरवियर मे ही उपर चढ़ जाता था

मा - सच मे आप आज भी वैसे ही हो शरारती

बुआ - वो कैसे भाभी

मा - अरे आपके जाने के बाद अब मेरे ऊपर पीछे से चढ़ कर सोते हुए हाथ आगे ले जाकर मुझे परेशान करते है ।

बुआ - हीहीहि सच मे क्या भाभी

मा - अरे उतना करते तो ठीक था

बुआ - अच्छा ऐसा क्या करते है

फिर मा उठ कर बैठ गई

मा - रुकिये मै इन्ही से करवा के बताती हू आप जरा पेट के बल एक पैर फ़ोल्ड करके सोईए और दोनो हाथो को सर के निचे कर लिजीये ।

मा के बताये अनुसार बुआ ने करवट लेकर गान्ड उथाये वैसे ही लेट गयी और मा की तरफ चेहरा कर जिससे उनकी एक चुची भी उसी तरफ चटाई पर फैल गये जिस तरफ बुआ का चेहरा था ।

मा - चलिये जी अब आप दिदी के उपर आ जाईये ।

फिर पापा उठे इस समय वो एक जांघिये बनियान मे थे और दोनो पैर बुआ की कमर के दोनो तरफ रखा और धीरे-धीरे बुआ की उठी गाड़ पर लण्ड को रख के बुआ के उपर आ गये और बुआ के चेहरे पर अपना चेहरा रखा

मा - हा ठीक है अब अपना हाथ से दीदी का एक दूध पकड़ीये

पापा - ये क्या कह रही हो रागिनी

बुआ - अरे कोई बात नहीं भैया आप पकड लो मै कह रही हू ,,,वैसे भी आप कोई गैर थोडी हो

मा - अब चलो पकड़ो

फिर पापा ने बुआ की चूचि को थामा

मा - हा अब अपनी कमर को हिलाते हुए दीदी के दूध को दबाओ

पापा का लण्ड तो कबसे ही बुआ की गान्द पे रेग रहा था और पापा ने मा के कहे अनुसार बुआ की चुची को दबाना शुरू किया ।
 
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