• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest सपना-या-हकीकत

Update 36

अब तक

मा - हा ठीक है अब अपना हाथ से दीदी का एक दूध पकड़ीये

पापा - ये क्या कह रही हो रागिनी

बुआ - अरे कोई बात नहीं भैया आप पकड लो मै कह रही हू ,,,वैसे भी आप कोई गैर थोडी हो

मा - अब चलो पकड़ो

फिर पापा ने बुआ की चूचि को थामा

मा - हा अब अपनी कमर को हिलाते हुए दीदी के दूध को दबाओ

पापा का लण्ड तो कबसे ही बुआ की गान्द पे रेग रहा था और पापा ने मा के कहे अनुसार बुआ की चुची को दबाना शुरू किया ।

अब आगे

मै कनअखियों से लगातार मा पापा और बुआ के हरकतो और उनकी बातो पर नजर बनाये थे ।

चुकि बुआ तो जानती थी कि मै जग रहा हू और मा को मेरे जागने या सोने से कोई दिक्कत नही थी क्योकि वो जानती थी कि आज रात के प्लान के बारे मे मुझे पता है और रही बात पापा की तो वो बुआ की मुलायम गदरयी गान्ड पर लण्ड रगडने मे इतना आनन्द मे थे कि मेरी बात ही नही थी उनके जुबान पर ,,,,वो लोग बेफिकर एक दुसरे की हवस को भडकाये जा रहे थे ।

इधर पापा ने मा के कहे अनुसार बुआ की गाड़ पर अपना लण्ड रगड़ना शुरू कर दिया और एक हाथ से बुआ की चूचि भी मसलने लगे,, नतिजन कुछ ही समय मे मेरी रन्डी चुद्क्क्ड बुआ को खुमार चढ़ने लगा,,, दोनो भाई बहन एक दुसरे के लिए प्यासे मर रहे थे लेकिन कोई खुल कर पहल नही कर रहा था ।

मा बीच मे एक इनडायरेक्ट तरीके से कुछ कुछ बातो से बुआ और पापा को करीब ला रही थी ,,लेकिन मै तो उस पल के इंतजार मे था जब पापा खुलकर बुआ को गाली देते हुए कुतिया बना कर उनकी गाड़ मारे ।

करीब 2 3 मिंट बाद माहौल गरम होने लगा और बुआ की आहे अब सिसकियाँ लेटे हुए बाहर आने लगी जिसका फायदा उठाकर पापा और अच्छे से कमर उपर निचे करके बुआ की मोटी गाड़ की दरारो मे लण्ड रगड़ना शुरू कर दिया ।

मा - क्यू दीदी परेशान हो गई ना

बुआ को ल्गा अब मा पापा को हटने को ना बोल दे इसिलिए बात को बदल कर

बुआ - अरे नही भाभी ,,, वो बचपन मे ऐसे ही कयी बार भईया ने मेरे उपर सोते हुए दूध दबाए है।

मा - क्या सच मे तब आपके दूध बडे थे दीदी

बुआ - हा मेरे उमर की लड़कियो के हिसाब से बडे ही थे ,,,आह्हह हम्म्म्म आह्हह

पापा लगातार बुआ को गरम किये जा रहे थे

मा - उस हिसाब से आपका कोई शादी से पहले दोस्त रहा होगा जरुर

बुआ -आह्हह उम्म्ंम्ं इश्स्स्स क्या पुछ रही हो भाभी ये ,,,आप ये कहना चाहती हो कि शादी से पहले से ही मैने अह्ह्ह्ह इश्ह्ह आराम से भैया दर्द हो रहा है

पापा बुआ की बातो मे एक सहमती सी नजर आई और वो बुआ के कान के पास जाकर एक नशीली मादक आवाज मे

पापा - बताओ ना दीदी क्या सच मे शादी से पहले वो किया था ,,, बोलो न दीदी

मा - अब बता भी दीदी ,,, अब तो आपके भईया भी पुछ रहे है

बुआ - हा मैने किया था ,अह्ह्ह्ह इश्ह्ह अम्म्म्ंम्ं उफ्फ्फ लेकिन मेरे वो शादी से पहले करने का मुख्य कारण भईया ही थे ।

पापा के साथ मा और मै सब चौक गये और

पापा ने बुआ को छोड दिया और बगल मे लेट गये

पापा - मै ,,, लेकिन कैसे दीदी

मा - हा दीदी ,,,उस चीज़ के लिए ये कैसे जिम्मेदार है

बुआ - वो भईया अक्सर मेरे उपर सो कर नादानी मे मेरे साथ खेलते थे , मेरे उपर सोते थे , मेरे दूध दबा दिया करते थे तो मै बहुत गरम हो जाती थी और ऐसे ही एक दिन मेरा सबर टुट गया और मै बहक गयी

ये बोल कर बुआ सीधि लेट गयी जैसे उनको इस बात का बहुत पचतावा हो । पापा को इशारे से मा को बुआ बगल मे जाने को बोलते है तो मा मेरे और बुआ मे बिच मे जगह बनाते हुए लेट जाती है और बुआ के कन्धे को पकड कर उन्हे मानो तसल्ली दे रही हो ।

तीनो लोग हवस मे भरे हुए थे लेकिन सबने अभी तक शराफत का नकाब लिया हुआ था।

मा - देखिये दिदी उस बात का आप अफसोस ना करिये ,,मुझे पता है आप उस समय अपने हलातो से मजबुर थी,, क्यो जी

पापा - हा दीदी ,, देखिये मुझे कोई गिला नहीं, बल्कि मै आपसे माफी मांगता हू कि मेरी वजह से ऐसा हुआ

बुआ - नही भईया उसकी जरुरत नहीं है उसमे मेरा ही स्वार्थ था

मा - लेकिन आपने किसके साथ किया था

बुआ - वो हमारे मामा के लडके लखना के साथ ,,उसी ने मेरी ...

पापा - लेकिन वही क्यू दीदी , आप अपनी तकलीफ मेरे से भी बता सकती थी

बुआ - कैसे बताती भईया उस समय आप नादानी मे कर रहे थे वो सब और आप लखन की सारी बाते मुझसे बताते थे कि वो मेरे बदन के बारे मे क्या क्या कहता है ,,,बस यही सब मुझे भा गया और मै एक दिन मामा के यहा मौका देख कर उसको मेरे नाम का मूठ करते हुए पकड लिया गोशाला में, और पहली बार मैने किसी का लिंग देखा था , उस दिन मुझे सामने पाकर लखन ने मेरे सामने प्रस्ताव रख दिया और मै काफी दिन से गर्म थी तो मना नही कर पाई और वो सब हो गया ।

पापा- कोई बात नहीं दीदी आपने जो भी किया अपनी जरुरत के लिए किया , लेकिन एक बात मुझे समझ नही आई हम लोग साल मे एक बार ही मामा के यहा जाते थे फिर भी आपके दूध इतने बडे कैसे

बुआ - अब आपसे क्या छिपाना भैया , पहली बार करने के बाद मुझे उस चीज़ की लत लग गई और एक दिन भी गुजारना भारी होने लगा

मा - और क्या दीदी

बुआ - और मै अपने स्कूल के ही अन्ग्रेजी के मास्टर से आकर्षित हो गयी और दो साल तक उनहोंने ही ....

पापा - अच्छा तभी आप और कम्मो स्कूल के बाद भी अन्ग्रेजी वाले मास्टर जी के यहा जाते थे पढने

बुआ - हा भईया मै खुद के शरीर के आगे मजबुर थी

मा - तो क्या कम्मो भी इन सब मे शामिल थी ।

मा के इस सवाल से मै भी चौक गया और साथ मे पापा भी

पापा - क्या ये सच है दिदी

बुआ - अरे नही नही ,, कम्मो बहुत ही नियंत्रण वाली लड्की थी ,,,मै उससे एक दोस्त की तरह ही बाते शेयर करती लेकिन हमेशा से वो अपने मर्यादा मे रही है । लेकिन मेरे साथ रहने की सजा उसे भी मिली , क्योकि मेरे भरे बदन का जिक्र अक्सर मुहल्ले मे होने लगे थे ,, लोग कोई और सवाल ना उठाए इसिलिए एक अच्छा घर देख कर बाऊजी हम दोनो की शादी एक ही घर मे दो भाईयो पर करवा दी ।

पापा - तो क्या कम्मो और आप वहा खुश नही है क्या

बुआ - अरे नही भईया जो भी होता है अच्छे के लिए होता है हम दोनो के पति बहुत अच्छे है और परिवार भी अच्छा है ।

पापा - मै खुश हू दीदी आपके लिए,,लेकिन इस बात का हमेशा गिला रहेगा कि जिसने आपको जीवन का असली सुख से रुबरू करवाया उसे आपने समय आने पर भी मौका नही दिया

बुआ - मै समझी नही भैया खुल कर बताओ न

मा - अरे दीदी आपके भईया के कहने का मतलब है कि उनकी वजह से ही आपको शादी से पहले दो दो लंड से चुदने को मिल गया और आप उनही को भूल गये ।

बुआ - धत्त भाभी आप भी सीईई आह्हह क्या कररही हो मेरे दूध क्यू पी रही हो भाभी आप अह्ह्ह्ह

मै बुआ की ये बात सुन कर काफी उत्तेजित हो गया कि मेरे बगल मे करवट लेकर ब्रा और पेतिकोट मे मेरे तरफ अपनी गाड़ फैलाये लेती मेरी मा बुआ के चुचे पी रही है

पापा - क्या सच मे रागिनी कैसा है दिदी के दुध का स्वाद

मा - खुद चख लो जी आप ही

पापा - मै ,, दिदी क्या मै भी थोडा सा स्वाद ले लू

बुआ इस समय मा के द्वारा चुची चुस्वा कर मधोश हो गई थी और वो तो कबसे मचल रही थी पापा के लण्ड के लिए तो मना कैसे करती

बुआ - आह्हह हा भईया क्यो नही आप ने ही तो मुझे जीवन के मज़े से जुड़ने की राह दिखाई थी ,,, देखो कैसा है मेरे दूध का स्वाद

फिर पापा भी बुआ के दुसरे चुचे को टीशर्ट से निकाल कर हाथो मे भर कर चूसने लगे ।

बुआ के दोनो चुचे उन्के अपने सगे भईया और भाभी मिल कर चुस रहे थे और बुआ दोनो के सर सहलाते हुए आहे भररही थी ।

हल्की चाद्नी रात मे मुझे मा की पीठ ही दिख रही थी बाकी सारी कहानी बुआ की सिसकियाँ और तीनो की बाते बया कर रही थी । इस सेक्सी रोमाच मे मेरा लण्ड पिस रहा था ,,,ना मै उसे बाहर निकाल कर शांत कर सकता था ना ही उत्तेजना से भरे इस माहौल से कही दूर जाने का मन था ।

उधर बुआ मदहोसी मे लगातार आहे भरते हुए अपनी भावनाये खोल कर पापा मम्मी से सामने रखने लगी थी ।

बुआ - अह्ह्ह्ह भैया उम्म्ंम भाभी अह्ह्ह्ह आह्हह उफ्फ्फ्फ हम्म्मं बहुत मज़ा आ रहा है भैया आह्हह ऐसे ही चुसो मेरे दूध आह्हह उम्म्ंम्ं हा भाभी ऐसे ही चाटो आह्हह उम्म्ंम

मा - लग रहा है इन चार दिनों मे दीदी आप बहुत ज्यादा गरम हो गयी है

बुआ - हा भाभी मै तो यहा तरस गयी हू लण्ड के लिए आह्हह भईया आह्हह आराम से आह्हह

मा - तो बोलो ना अपने भैया को कि आपकी प्यास बुझाने के लिए

बुआ - नहीईईई येहहह क्याह्हह कह रहीई होओओओ भाभी आह्हह उम्म्ंम मै कैसे

पापा - मै तैयार हू दीदी अगर आप हा करो तो ,, मुझे आपकी ये तडप देखी नही जाती और मै फिर से बचपन की तरह आपको प्यासा नही छोड़ना चाहता

बुआ - लेकिन आप मेरे भाई हो मै आपके साथ कैसे

पापा - दीदी क्या मेरा ये फर्ज नही है कि मै आपको खुश रखु और बचपन मे हुई गलती सुधारने का मौका दिजिये आप प्लीज दीदी

बुआ चुप रही और धीरे धीरे उनकी दबी हुई सिसकिया वापस आने लगी क्योकि पापा बुआ की जांघो मे अपना सर घुसा चुके थे और मा अपना ब्रा निकाल कर अपना एक चूचा बुआ के मुह मे भर कर उनकी चुचे को सहला रही थी । मा के सोने के पोजिसन बदलने से उनकी भारी मोटी गाड़ मेरे और करीब आ गई सबको बिज़ी देख कर मैने गरदन को थोडा उपर करके देखा तो निचे पापा बुआ की चुत लपाल्प चाटे जा रहे थे ।

इसी बीच मैने भी लोवर मे से लण्ड को थोडा सा बाहर करके उसे आराम दिया और वापस अंदर डाल लिया क्योकि मै इस थ्रीसम मे कोई बाधा नही बनना चाहता था बल्कि सही मौके के इंतजार मे था ।

एक तरफ पापा बुआ की गान्द से लेकर उनकी पानीयायि चुत को चाट रहे थे जिस्से बुआ मा के निप्प्ल को और तेज चुस रही थी

मा - अह्ह्ह्ह दीदी आराम से चुसो ना बदला ले रही हो क्या

बुआ मा की चुची को निकाल कर - नही भाभी वो आह्हह उम्म्ंम्म्ं भईया निचेअह्ह्ह्ह उम्म्ंम आह्हह भैया खा जाओगे क्या आप आह्हह आह्हह ऐसे ही चातो और्हाह आह्हह आह्हह उम्म्ं उफ्फ्फ्फ भईया आप पागल कर अह्ह्ह्ह आह्हह

बुआ तेज़ी से गाड़ पटकने लगी शायद वो पापा के मुह पर ही झड़ रही थी । थोडी ही देर मे बुआ की भारी आहे मादक सिसकियो मे बदल गयी और पापा उठ कर खड़े हो गए,,,

फिर पापा ने अपना कच्छा निकाल दिया और चान्द्नी रात मे उन्का लन्द झुल्ने ल्गा ,,, और वो थोडा चल बुआ के चेहरे के उपर और मा के चेहरे के सामने खड़े हो गये ।

मा ने देरी ना करते हुए पापा का लण्ड मुह मे लेकर चूसना शुरू कर दिया और बुआ निचे से लेटे लेटे ही पापा के झूलते आड़ो को देख कर अपनी चुचिया मिजने लगी।

मै इस बेहद कामुक दृश्य को देख कर उत्तेजित होकर बस अपने लण्ड को सजा ए दर्द दिये जा रहा था ।

उधर बुआ को खड़े लण्ड को मा के मुह अंदर बाहर होते देख वो एक हाथ उपर करके पापा के झूलते आड़ो को सहलाने लगी और दुसरे हाथ से वापस चुची को मिज रही थी ।

पापा - आह्हह दीदी आजाओ ना आप भी उम्म्ं आह्हह रागिनी के साथ

मा - हा दिदी उठो ना आप भी लो अपने भईया का लण्ड

फिर पापा ने खुद घूतने के बल आ कर बुआ का काम आसान करते हुए अपना लण्ड उनके होटों पर रगडने लगे ,,, बुआ ने भी जीभ निकाल कर पापा के लण्ड को गिला करना शुरू कर दिया और थोडा सा खुद को करवट लेकर लण्ड को मुह मे भर लिया । पापा ने बुआ के सर को थामा और खुद ही उत्तेजीत होकर बुआ के मुह मे पेलने लगे ।

मा - हा दीदी लेलो अपने भैया का लन्ड़,,, देखो जी कैसे रन्डी की तरह आपकी दीदी लण्ड की भुखी लग रही है

पापा - आखिर मेरी वजह से ही तो दीदी रन्डी बनी ,,क्यू दीदी

बुआ ने लण्ड निकाल कर - हा भईया आपकी वजह से ही तो मैने लण्ड का मज़ा ले पाई और आज आपकी रन्डी दीदी बन गई हू ,,,,

पापा - सच मे दीदी मै हमेशा से आपको भोगना चाहता था एक रन्डी की तरह लगता था मुझे आपका जिस्म

और पापा ने बुआ के चुचे मसल दिये

बुआ - आह्हह भैया तो भोग लो अपनी दीदी को रन्डी समझ कर ,,, मै तो लंड की प्यासी हू भईया चोद दो मुझे अह्ह्ह्ह मत तडपाओ

मा - हा जी अब मुझे भी दीदी की तडप नही देखी जाती बना लो अपनी दीदी को अपनी रन्डी और चोद दो

मै उन तीनो के चुदाई और गाली गलोज की बातो से बहुत ही उतेजीत हुए जा रहा था । सोच रहा था कैसे आखिर मै मेरे लण्ड को शांत करू ,,, अगर उन लोगो की तरफ पीठ करू तो कोई नजारा नही देख पाऊन्गा । ऐसे मुझे एक विचार आया क्यू ना मा को अह्सास दिलाऊ की मै भी जाग रहा हू और मुझे भी उनकी जरुरत है ,, वो कुछ ना कुछ जुगाड जरुर करेगी ।

मै इसी प्लानिंग मे था की अचानक से बुआ की तेज कामुक अह्हे सुनाई देने लगती है । मैने नजर घुमायि तो पापा बुआ के उपर चढ़ कर घपाघप बुआ की चुत में पेले जा रहे थे और मा बगल मे लेटे पापा के कमर और पीठ पर सहलाए जा रही थी ।

बुआ - आह्हह भईया अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं और चोदो और चोदो अपनी बहन को ,,, रन्डी बना लो भैया अपनी अह्ह्ह्ह ऐसे ही हा हा जा ऐसे ही चोदो अह्ह्ह्ज मज़ा आ रहा है भैया अह्ह्ज बहुतहहहह अह्ह्ह्ह भैयाआआआहहह

पापा - ले ना मेरी चुद्क्क्ड दीदी आह्हह और ले तू तो पहले से ही रन्डी है मेरी जान हहहह अह्ह्ह्ह और ले ये ले और ले ,,येईह्ह्ह्ह येह्ज्ज्ज हम्म्म्म्म्ं ले साली रन्डी ,,मै तो हमेशा से जानता था कि मेरी दिदी ने बहुत लण्ड खाये है लेकिन तू बड़ी थी तो कुछ बोला नही,,, लेकिन अब ,

बुआ - अब क्या भैया आह्हह आह्हह

पापा - अब तो तेरे भोस्दे और गाड़ का कचूमर निकाल कर ही जाने दूँगा तुझे सालि कुतीया ,,, एक न की चुद्क्क्ड है तू मेरी रान्ड बहन और किस किस के लण्ड लिये है तुने बता ना मेरी जान आह्हह

बुआ - अह्ह्ह्ह भैया और चोदो और चोदो फाड दो आज सब कुछ रहम मत करो आह्हह

पापा - सब फादुगा मेरी रान्ड बता ना ससुराल मे भी किसी का लण्ड लिया है क्या ,, क्योकि मेरे जीजा के बस का तो नही लग रहा है कि वो अकेले तेरे गान्ड और चूचे इतने बडे कर पाये,,,येह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बताआअहहह नाआह्ह मेरीईई जाआन्ं आह्हह

बुआ - आह्हह नहीईईई भैयाआआआह्ह्ह मैने शादी के बाद घर के बाहर कही मुह काला नही किया कभी अह्ह्ह्ह आह्हह ऐसे ही चोदो हा ऐसे ही बहुत मज़ा आ रहा आपके लण्ड से आह्हह उम्म्ंम्ं आह्हह बहुत ही मज़ा है आह्हह ,,,

पापा - लेलो दीदी अपने भैया का लण्ड अह्हे ये लो ये लो

इधर पापा और बुआ चूदाई मे लगे थे तो मा उन्के देख्ते हुए अपने चुचे मसले जा रही थी ,,,मैने भी मा को तडपते देखा और मौके का फायदा उठाकर जल्दी से लोवर को निचे कर लण्ड को बाहर निकाल लिया और मा की गान्द से चिपक गया ।

मा को पहले लगा कि मै शायद निद मे हू तो पहले ध्यान नही दी फिर जब मैने उनकी गाड़ मे लंड को चुबोना शुरू किया तब वो समझ गई और हाथ पीछे लेजाकर मेरे खड़े लण्ड को थामा और मुझे थोडा सा पीछे कर सीधे लेट गई,,, अभी भी मेरा उनके हाथ मे ही था ,,,मुझे मा का स्पर्श मिलते ही लण्ड मे और जोश आने लगा मेरा लण्ड मा की मुथ्थी मे और कसने लगा जिससे मा थोडी परेशान होने लगी और वो एक नजर बुआ और पापा पर मारा और फिर मेरे तरफ गर्द्न किया तो मै मुस्कुरा रहा था ।

चुकि पापा और बुआ दोनो फुल मोड मे होर्नी होकर चुदाई मे मस्त थे तो

मा बहुत ही धीमी आवाज मे मुझ्से बोली - तू कबसे जाग रहा है

मै - मै सोया ही कब था

मा - तो सो जा अभी कुछ नही हो सकता

मै - मा प्लीज बहुत दर्द हो रहा है इसमे ,,,ये बोल कर मैने लण्ड को हल्का सा मा की मुथ्थी मे धक्का लगा दिया

मा ने वापस एक नजर पापा बुआ को देखा और बोली - अच्छा रुक बताती हू । तू इसको अंदर कर अभी और चुप रहना

मा ने वापस से करवत ली

मा - अरे मेरे बारे मे सोच लो मेरी जान या सारी रात अपनी रन्डी बहन को ही पेलोगे

पापा - मेरी जान आज बहुत दिनो बाद मुझे दीदी को भोगने का मौका मिला है तो आज रात तुम मुझे दीदी के साथ मज़े लेने दो ना

मा - क्या जी मै भी कल चली जाऊंगी मायके और तडप कर रह जाऊंगी ,,, मा ने नाटक करते हुए कहा

पापा - हा ये भी तो तुम ही बताओ क्या दीदी को ऐसे ही छोड दू

बुआ - नही भैया रुकना मत आज पूरी रात मुझे चोदो आप आह्हह अहज्ज्ज अह्ह्ज

पापा - लेकिन दीदी रागिनी का क्या

बुआ - बगल मे राज सोया है ना भाभी आप उसका लण्ड लेलो ना

पापा - हा जान देखो उसका भी लण्ड लोवर मे तना है लग रहा है कि मेरा बेटा सपने मे किसी हसिना को चोद रहा है ।

पापा ने टॉर्च मेरे उपर जला कर बोला

मा - क्या जी आप लोग क्या बात कर रहे हो वो मेरा बेटा है और कही जग गया तो

पापा - अरे हम लोग कबसे इत्नी तेज आवाज मे चुदाई कर रहे हैं वो नही जगा तो अभी तो वो सपने मे मज़े ले रहा है ,,, यही मौका है रागिनी लेलो राज का लन्द

मा - क्या आप मुझे भी अपनी दीदी की तरह रन्डी बनवाना चाहते हो

पापा - हा मेरी जान मै भी देखना चाहता हू कोई तुम्हे चोदे और तुम मेरे नाम की आहे भरो । पापा बुआ की चुत मे हल्के धक्के लगाते हुए बोल रहे है ।

इधर मै बहुत ही उत्तेजना से भर गया था , मन तो था कि अभी खुलकर सबके सामने आ जाऊ और चुदाई के जुड़ जाऊ । लेकिन मेरे इस फैसले से मा के बात से मुकरना पडता ,,,क्योकि मुझे पूरी उम्मीद थी कि मा ने जो कहा वो करेगी ।

बुआ - आह्हह भाभी सोचो मत लेलो आखिर कब तक तदपोगी ,,, देखो वो गहरी निद मे है ,,,और मै भईया को नही छोडने वाली

पापा बुआ की जांघो को अपने कन्धे पर रख कर लण्ड को बुआ की चुत मे रगड़कर पेलते हुए बोले - आह्हह जान कल जाने से पहले मै तुम्हे जरुर चोदन्गा ,,,, अभी मत तद्पो तुम ,,,, इससे पहले राज का लन्ड़ बैठ जाये उसे डाल लो अपनी चुत मे

ये बोल कर पापा थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप करके बुआ की चुत में चोदने लगे ।

बुआ - अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह हा भईया आह्हह और तेज अज्ज्ज पूरी रात चोदो और तेज अज्ज्ज उम्म्ंम्ं आआ हा ऐसे ही अय्से ही अह्ज्ज अजज

मै मन ही मन बहुत उत्तेजित कि पापा खुद मा को मेरे लण्ड पर बैठने को बोल रहे हैं,,, और मा के नाटक से भी मै बहुत ही उत्तेजना से भर गया ।

मा - देखो मै आखिरी बार पुछ रही हू क्या मै सच मे राज के साथ

पापा - हा मेरी जान मेरी इजाजत है अब निकालो उसका लण्ड ,,बुआ की चुत की गहरायी मे लण्ड डुबोते हुए पापा बोले

मा फिर मेरे पैर के लेफ्ट की तरफ बैठ गई क्योकि राइट की तरफ पापा बुआ की चुत मे लण्ड डाले हुए चोद रहे थे ।

मै बहुत ही उत्तेजित हो गया और आने वाले रोमांच के लिए खुद को तैयार करने लगा ,,,क्योकि मेरी मा खुद पापा के कहने पर मेरे लण्ड को अपने चुत मे लेने वाली थी ।

आगे की कहानी अगले अपडेट मे । आप सभी के प्यार भरे टिप्पणियों का इंतजार रहेगा ।
 
Update 37

अब तक

मा फिर मेरे पैर के लेफ्ट की तरफ बैठ गई क्योकि राइट की तरफ पापा बुआ की चुत मे लण्ड डाले हुए चोद रहे थे ।

मै बहुत ही उत्तेजित हो गया और आने वाले रोमांच के लिए खुद को तैयार करने लगा ,,,क्योकि मेरी मा खुद पापा के कहने पर मेरे लण्ड को अपने चुत मे लेने वाली थी ।

अब आगे

मेरे अंदर एक अलग ही तुफान मचा था और मै चाह कर भी सामने नही आ सकता था ।

वही मा को मेरे बगल मे बैठा देख पापा बोले - जान जरा मेरे बेटे का लण्ड को निकालो बाहर ,, देखे तो कैसा है

मा मुस्कुराते हुए मेरे लोवर को खीच कर नीचे कर दिया और मेरा लण्ड फनफना कर खड़ा हो गया

पापा बुआ को चोदते हुए - अरे वाह्ह्ह रागिनी अभी से राज का लण्ड इतना बड़ा हो गया तो आगे भी और बड़ा होगा ।

बुआ - अरे चुसो भाभी ना उसका लण्ड शायद और बड़ा हो जाये हिहिहिही ,,, आप ना रुको भईया

पापा - दीदी अब आप मेरे उपर आ जाईये

बुआ - क्यू थक गए अभी से

पापा - अरे मेरी जान अभी कहा बस मेरे चोदने के तरीके देखो और पूरी रात चुदो

पापा - देख क्या रही हो रागिनी पकड़ो राज का लण्ड,,, लग रहा है जैसे सपने मे कोई जबरजस्ट माल को चोद रहा है मेरा बेटा

मा ने बिना कुछ बोले मेरे लण्ड को एक बार फिर से थाम लिया

मा - ये जी ये बहुत ज्यादा तप रहा है

पापा - तो चुस कर थोडा ठण्डा कर दो जान

इसी बीच पापा निचे लेट गये और बुआ भी पापा के दाई तरफ होकर मा की तरफ मुह करके पापा के लण्ड के बगल ने बैठ कर उनका लण्ड हिलाने लगी ।

बुआ मा को छेद्ते हुए - आह्हह भाभी कित्ना मस्त लण्ड है मै आऊ क्या लेने उसको ,,, चुद्ते हुए लण्ड चूसने का मज़ा मिल जायेगा

मा को लगा वुआ मेरे लण्ड को भी कब्जा लेन्गी इसलिये वो झुक कर गप्प से मेरे लण्ड के सुपाडे को मुह मे भर लिया और चूसने लगी

मा की इस हरकत से मेरी दबी हुई आह्हह भी निकली

इधर बुआ और पापा भी मज़े से मा को मेरा लण्ड चुस्ते देख रहे थे ।

पापा - दीदी आप भी चुसो ना मेरा लण्ड आह्हह हा ऐसे ही और अंदर लेलो आह्हह उम्म्ंम्ं मै भी पापा की सिस्कियो के साथ मीठी आहे भर कर खुद को नियंत्रित करने मे ल्गा था लेकिन मा जिस अदा से मेरे लण्ड को चुस रही थी वो बेहद ही रोमाचक था ,,,,उन्के नाजुक होठ मेरे लण्ड की गोलाई मे जड़ तक जाते और गले मे मेरा सुपाडा फड़क जाया करता ।

एक तो मा के मुह मे लण्ड चुसवाना उपर से बगल मे लेता हुए बाप खुद बोले की चुद लो मेरे बेटे से ,,, आह्हह ये अह्सास को शब्दों में बाँध नही सकता था ये अह्सास ती सिर्फ मेरा फडफ्ड़ाता लण्ड और मेरी दबी हुई सिसकिया ही समझ सकती थी । मे तो खुल कर एक बार आहे भरना चाहता था ,,, मा की जीभ का मेरे सुपाडे पर हर स्पर्श मेरे अंदर एक नया जोश ला देता ,,मेरी सांसे भारी हो जाती थी ,,,,लेकिन मा ने तो मुझ पर रहम ना खाने की कसम खाई थी , उसे कोई डर नही था बल्कि वो तो अपने पति के सामने अपने बेटे का लण्ड चूसने के अह्सास से गर्म थी ।

मै बेचैन हो कर गरदन घूमाता,, गान्द पटकता लेकिन एक बार भी खुल कर आह्ह्ह्ह नही कर सकता था ।

फिर मुझे थप थप थप थप थप थप थप की आवाजे आने लगी साथ मे बुआ की तेज चिखे भी

बुआ - आह्हह आह्हह हह उम्म्ंम आह्हह आह्ह आह्ह और तेआजजजजज आह्ह आउर तेअह्ह्ज्ज्ज आह्हह हा भईया

पापा लगातर निचे से बुआ की गाड़ को थामे सर ससर पेले जा रहे थे ।

बुआ की तेज आवाज की सिस्कियो मे मैने सोचा क्यू ना मै भी थोदा खुद की संसो को आराम देदू ,,, पर जैसे ही मैने अह्ह्ह्ह्ह माआह्ह्ह किया ,,,मा ने तुरंत मेरे कन्धे पर हाथ मार कर चुप रहने का इशारा किया ,,,,मै समझ गया कि अगर मै कुछ बोला तो मा के साथ मुझे भी ऐसे ही बिना चुदाई के सोना पड़ सकता है ।

पापा - जान अब तुम भी बैठ जाओ ना ,,,

मा बिना कुछ बोले उठी और पेतिकोट को कमर तक उठा कर दोनो हाथों से पकड लिया और दोनो पैर मेरे कमर के दोनो तरफ रख कर झुक कर एक हाथ से मेरे लण्ड को थामा और चुत पर सेट करते हुए बैठती चली गयी ,,, धीरे धीरे मेरा लण्ड पूरी तरह से मा की चुत मे समा गया ।

मै मा की चुत मे अपना लण्ड पाते ही जैसे पिघलने लगा और मा की चुत की दीवारे इतनी ज्यादा गर्म थी मानो मेरा लण्ड जल जायेगा और बेसब्र से तडप रहा था ,,, मै खुल कर अपने जज्बात नही बाहर रख सकता था ,,, मै अब पहले से ज्यादा अपने सासो को कन्ट्रोल करने लगा ,,,

वही मा मेरे खड़े लण्ड को पुरा निगल लेने के बाद हल्का हल्का उपर निचे उकूडु होकर बैठी बैठी ही चुद्ने लगी

मा - अह्ह्ह्ह राज के पापा देखो ना मैने मेरे चुत मे आखिर अपने बेटे का लण्ड ले ही लिया

पापा बुआ को चोद्ते हुए - वाह्ह्ह मेरी जान थप थप थप थप थप थप थप मै तो ऐसे ही तुझे अपने सामने चुद्ते हुए देखना चाहता था येह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह

बुआ - आह्हह भईया तेज़ी से और तेज़ी से अह्ज्ज्ज आह्हह रुको मत मै झडने वाली हू अह्ह्ह्ह

पापा - अब मज़े लो मेरी जान तुम अपने बेटे के लण्ड का मै जरा दिदी की खिदमत कर दू

मा - हा राज के पापा नये लण्ड लेने मे का मज़ा ही अलग है ,,,आह्हह इसका तपता लण्ड का सुपाडा मेरी बच्चेदानी को छू रहा है आह्हह मा उफ्फ़फ्फ राज के पापा बहुत मज़ा आ रहा आह्हह मेरे राजा

एक तो मा मेरे लण्ड पर उछल रही थी साथ मे बार बार पापा को जता रही थी कि कैसे मेरा लण्ड उनकी चुत मे फसा हुआ है ,,,कस्म मैने खुद को कैसे रोका हुआ था मै ही जानता था ,, वही पापा बुआ की चुत मे निचे से कमर उठा कर ये लम्बे लम्बे शॉट लगा रहे थे और बुआ उनके लण्ड पर झडे जा रही थी ,,

बुआ - आह्हह भईया आह्हह मै झड़ रही हू आह्हह आह्हह उफ्फ्फ्फ उम्म्ंम्ं अह्ह्ज्झ

पापा - ये लो दीदी येएहेह्ह एह्ह्ह आह्हह और लो मेरी चुद्क्क्ड दीदी और लो ,,,,मेरा भी निकलेगा दीदी ।

बुआ - मुझे आपका माल चखना है भईया रुको और बुआ जल्दी से उठी और लपक कर मुह मे लण्ड लेते हुए चूसने लगी कुछ ही पलो मे बुआ का मुह पापा के माल से भरने ल्गा

पापा - आह्हह दीदी पुरा चाट जा मेरी रान्ड अच्छे से साफ कर दे मेरे लण्ड को सालि रन्डी

इधर मा ने मेरे सीने पर हाथ रख कर झुक कर लागातार मेरे लण्ड पर अपनी गाड़ ऐसे पटक रही थी जैसे मानो कपडे पीट रही हो जिससे मै भी धीरे धीरे चरम सीमा तक पहूच गया और सांसे बेकाबू होने लगी थी और मै छटपटाने लगा,,मेरा चेहरा तपने लगा

पापा - लग रहा है मेरा बेटा झडने वाला है रागिनी जल्दी करो और झड़ जाओ

मा - मै तो क्ब्से झडी हू इसके लण्ड पर लेकिन इसका लण्ड बैठ ही नही रहा

पापा - तो अपने मुह का जादू चलाओ ना मेरी जान चुस लो अपने बेटे का माल

मा जल्दी से उठी और झुक कर मेरे लण्ड को वापस लेके चूसने लगी मै पहले ही चरम सीमा के करीब था और मा ने तो जैसे मेरे सुपाडे के छेद को सुरकना सुरु कर दिया ,,,,अन्त मे मेरा भी सबर टुट गया और मै निद मे बड़बड़ाने का नाटक करते हुए मुह मे दबी हुए आहे भरते हुए मा के मुह मे झडने लगा । मा ने अच्छे से मेरे लण्ड को साफ किया फिर पापा और मेरे बिच लेट गयी वही बुआ पापा के दुसरी तरफ लेट गयी ।

मेरी आँखो मे एक गजब सा नशा हो रहा था और चेहरे पर मा के मुह मे झडने की खुसी ।

हम सब अपनी अपनी सासे बराबर कररहे थे ।

पापा - आह्हह दीदी मज़ा आ गया आज तो ,,सच मे आप एक नम्बर की चुद्क्क्ड हो

बुआ - रिस्तो मे चुदाई का अपना ही मज़ा है भईया

मा - सच कह रही हो दीदी ,,,मै आज जितना कभी भी खुद को इतना उतेजित नही मह्सूस किया था और ना ही आज जितना कभी झडी थी

पापा - हा जान देखा मैने कैसे तुम्हे अपने ही बेटे का नशा हो रहा था ।

मा - हा लेकिन अभी उसको इस बारे मे पता नही है तो हम सब के राज भी बचे है ।

बुआ - अरे राज की बात से याद आया भईया ,,, आपने नही बताया कि आपने अपनी पहली चुदाई कब की थी और किस्से और भाभी आप भी बताओ ना

मा - मेरी पहली चुदाई मेरे सुहागरात पर ही हुई थी लेकिन इनकी तो हिहिहिही

बुआ - अरे बताओ ना भईया कब की थी आपने

पापा - एक हो तो ना दीदी ,,, ना जाने कितने चुत मे मैने अपने लण्ड को डुबोया है ।

बुआ - क्या सच मे भईया

मा - हा दीदी ,,,लेकिन शुरूवात बहुत ही मज़ेदार थी ।

बुआ - बताओ ना भईया किसके साथ किया था

पापा - बात तब की है उस समय मै 9वी मे था और मै उस समय आपके बदन पर बहुत ही ज्यादा आकर्षित था ,, मै हमेशा से एक ऐसी लड्की की तालाश मे था जिसका बदन आपके जैसे भरा हुआ हो , जिसकी चुचिया आपकी तरह मोटी हो और गान्ड बड़े बड़े हो । लेकिन मेरी तालाश में और पहुच मे ऐसी लड़की नही मिल रही थी और मै आपके लिहाज मे आपसे कभी कूछ कह नही पाया । फिर मै काफी लोगो से सुना की आप शादीशुदा औरतो सी लगती हो ,,, कूछ दिन बाहरी शादीशुदा औरत की तलाश की लेकिन कोई भी हाथ नही आती थी । उसी साल गर्मी मे मेरी लुधियाना वाली चाची आई और उनके गदरायी जवानी पर मै फीदा हो गया । वो मॉर्डन कपडे पहना करती थी और शहर मे रहने की वजह से बहुत खुले विचारो वाली थी ।मै लागातार चाची के साथ समय बिताने लगा और वो पढी लिखी और काफी खेली खाई औरत थी तो जल्द ही मेरे जज्बातो को समझ भी गयी और मुझसे दोहरी मतलब से बात करती थी एक दिन घर पर कोई नही था , मा बाऊजी खेत गये थे दीदी और कम्मो कोचींग गये थे,,, जंगी बाहर खेल रहा था और मै हमेशा की तरह चाची के करीब आना चाह रहा था ,,, उस दिन चाची नहाने गयी और मुझे अपनी पीठ पर साबुन लगाने को बोला ,,, फिर कब साबुन पीठ से सरक कर चाची की पेतिकोट मे चला गया और उसे खोजने मेने उनकी गाड़ की दारारो मे हाथ डाल दिया,,,, मेरा हाथ का स्पर्श उनके गुपतांगो मे होते ही चाची की मीठी सिसकी आई और काफी समय समय तक मैने उनकी पेतिकोट मे हाथ डाले रहा ,,, लेकिन जब हाथ बाहर निकाला तो ओ आंखे बंद किये आहे भर रही थी तो मैने भी मौका देखा और खड़ा लन्ड़ उनके मुह मे डाल दिया , और उस दिन आंगन में ही चाची को जम कर चोदा । फिर मुझे बड़ी चूची और गाड़ वाली महिलाओं की लत लग गई और कभी रिस्ते मे तो कभी बाहर कयी रन्दीयो को चोदा मैने ।

बुआ - बाप रे आप खुद एक नो. चोदू हो और मुझे चुदक्क्ड बुला रहे हीहीहि

पापा - मै तो हू ही बड़ी गाड़ और चुचियो का दिवाना ,,, लेकिन मुझे अब भी शक है कि आप ससुराल मे सिर्फ जिजा का ही लण्ड लेती हो ।

बुआ - नही भैया शादी के बाद से मैने कभी भी बाहर का लण्ड नही लिया

मा बुआ की छेडते हुए - मतलब घर मे ही कोई भेदी है जो इस भोसदे को और गहरा किये जा रहा है क्यू दीदी ,,,

बुआ - नही भाभी आपकी कसम और भईया आपकी कसम खाकर कह रही हू मैने शादी के बाद ससुराल मे सिर्फ अपने पति का ही लण्ड लिया है ।

बुआ की बाते सुन कर मै शौक था यहा बुआ कसम खाकर कह रही थी कि वो फूफा के अलावा किसी से नही चुदती जबकि उस रात मुझ्से साफ बोला था कि मै दो लोगो से चुद्ती हू साथ मे । अब मेरे मन की व्यथा और बढ़ गयी ।

पापा - अरे नही दिदी मुझे आप पर भरोसा है । बस कोई भी आपकी गदरायी गाड़ देख कर यही कहेगा कि ना जाने कितने लांडो से रोज चुदती होगी ।

ऐसे ही रात मे और भी जोरदार चुदाई हुई पापा और बुआ के बीच में,,, और मा मे एक बार फिर से मेरे लण्ड को अपने चुत मे डाल कर चुदवाया । पता नही रात के किस पहर मे मै सो गया ।

अगली सुबह

आज रक्षा बंधन का दिन था और सुबह सुबह 6 बजे ही मेरी निद भीगने से शुरू हुई क्योकि मेरी नटखट दीदी ने मुझ पर पानी डाल कर बाथरूम मे घुस गई थी ।

लेकिन छत पर अनुज भी था और मा भी तो मै कोई खास रियक्ट नही किया। बस बड़बडाते हुए उठ कर टॉयलेट चला वही अनुज और मा हस रहेथे ।

मा - सोनल बहुत शरारती हो गयी है तू चलो सब लोग जल्दी जल्दी आज तैयार हो लो 8 बजे तक । फिर मुझे भी मायके जाना है ना ।

करीब 8 बजे तक सब लोग नहा धोकर तैयार थे । सबने आज अपने नये कपडे पहने थे ।

मा और बुआ ने अपनी नयी साडी पहनी थी । बुआ के पहल करने पर मा ने भी बुआ के जैसे ही डिप कट का गला और पीछे डोरी वाली बलाऊज सिल्वायि थी और उपर से एक सिफान की हल्की साडी जो मरून रंग की थी जबकि बुआ ने अंगूरी रंग की सेम पैटर्न की साडी पहनी थी ।

वही दीदी ने एक खुबसुरत सा बिना दुप्प्ते का क्रॉप टॉप जो नाभि से उपर था और लहगा पहना था । पापा ने कर्ता पजामा , मै और अनुज अपने नये जीन्स शर्त मे थे ।

आज घर मे सब लोग एक दुसरे को देखकर अलग ही मुस्कराहट पास कर रहे थे सिवाय अनुज के । दीदी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी , पापा मा और बुआ एक दुसरे मे इशारे पास कर रहे थे ।

तभी मा ने सबको बेडरूम मे चलने को बोला

फिर हम सब लोग कमरे मे गये । एक सोफे पर पापा और अनुज बैठ गये और बगल वाली सिंगल सोफे पर मै ।

मा मेरे बगल मे खड़ी थी जो आज बहुत ही ज्यादा खुबसुरत लग रही थी । तभी कमरे मे बुआ और मेरी दीदी आरती की थाली लिये आई मेरी दीदी तो मानो चांद से उतरी हो अप्सरा लग रही थी मै तो उसी मे खोया हुआ उसको आँखो से इशारे किये जा रहा था । वही पापा भी बुआ को छेड़ने मे कोई कसर नही छोड रहे थे । लग तो ऐसे रहा था मानो दोनो बहाने राखी लेके नही बल्कि शादी के लिए वरमाला लेकर आ रही हो हमे अपना बनाने ।

फिर बुआ पापा के पास गयी और उन्के सामने बैठ गई

पापा बस एक नजर डालें बुआ को ताड़ रहे थे और उस हल्के पारदर्शक सिफान साडी से बुआ के गहरे गले वाली ब्लाउज के झाकति चुचियो लो घुर रहे थे और इधर दिदी भी इतराते हमारी तरफ आ रही थी क्रॉप टॉप मे दीदी की खुली कमर और आधे नंगे पेट पर एक लम्बी और गहरी नाभि साफ दिखाते हुए आई और अनुज के बगल मे स्टूल रख कर बैठ गयी और फिर उसने अनुज को राखी बांधती है और आरती लेती है बदले मे अनुज दीदी के पैर छुता है ,,,,

उधर बुआ भी पापा को राखी बाँध कर मुस्कुराये जा रही थी । फिर बुआ - चालिये भईया अब जेब ढीली करिये और मेरा तोहफा लाईये ।

पापा - अरे हा वो तो मै नीचे कमरे मे रखा है चलिये मै दिये देता हू ।

बुआ - हा भाभी चलिये आप भी फिर मेरे साथ छोटे के यहा चलना है ना

मा - अरे मुझे भी तो जाना है मायके लेट हो जायेगा

बुआ - अरे भाभी ज्यादा टाईम नही लगेगा आओ

फिर मा पापा और बुआ निचे चले गये मै जानता था नीचे पापा बुआ को क्या तोहफा देते ,,, उनके मुह मे अपना लण्ड और पापा भी रात का वादा निभाने वाले थे मा को चोद कर तो ये सब उन लोगो का हम बच्चो के सामने ड्रामा था बस । लेकिन मै इनसब से बिलकुल भी अंजान नही था ।

फिर इधर अनुज ने दीदी को एक गिफ्ट दिया और बोला मै मेरे दोस्त के यहा जा रहा हू उसकी दिदी ने मुझे बुलाया है राखी बाँधने के लिए ।

दीदी - हा भाई आराम से जाना और टाईम से खाना खाने आ जाना ठीक है

अनुज - ठीक है दीदी

अनुज चला गया साथ ही पापा मा और बुआ भी निचे चले गये थे बचे तो मै और दीदी । मै दीदी को अकेला पाकर खड़ा हुआ तो दीदी पीछे होते हुए मुसकुराते हुए सतर्क होने लगी ।

दीदी - देख राज अभी नही पहले राखी बंधवा ले फिर कुछ,,,

मै वापस मुस्कुरा कर बडे सोफे पर बैठ गया और दीदी भी मेरे सामने बैठ गयी । फिर उसने मेरी कलाई पर राखी बांधी और मेरी आरती ली । मै भी उसके पैर छूने को जानबुझ कर झुका तो दीदी ने मुझे रोका

दीदी - तेरी जगह वहा नही भाई मेरी बाहो मे है ।

मै उथा और दीदी को हग कर लिया ,, आह्हह उनके नाजुक बदन की खुस्बू आह्हह और कितना मुलायम बदन ,,,

मै - आई लव यू दीदी ,, ये लो आपका गिफ्ट फिर मैने दीदी को मोबाईल वाला पैकेट दिया ।

दीदी - अरे वाह तू सच मे मेरे लिए मोबाईल लाया ,,थैंक्स भाई आई लव यू सो मच ।

दीदी - लेकिन मुझे एक गिफ्ट और चाहिये क्या वो तू मुझे देगा

मै - माग लो ना दीदी जो चाहे ,, ना नही कहूंगा

दीदी - भाई मै अमन से शादी करना चाहती हू क्या तू मा से बात करेगा मेरे लिए ।

मै - आप सच मे अमन को चाहती हो दीदी , मै खुश हू आपके लिये और मेरा वादा है आपकी शादी अमन से ही होगी ।

दीदी ने वापस खुश होते हुए गले लगा लिया ,,

मै - दीदी लेकिन फिर मेरा क्या होगा क्या आप मुझे छोड दोगे ।

दीदी - धत्त पागल,,,नही रे ,,, तेरे लिए मेरा प्यार अलग है और अमन के लिए अलग

मै थोडा कन्फुज होते हुए बोला - मै समझा नही दीदी आपका मतलब

दीदी - मै बताती हू ,, मै अमन को अपने पति के रूप मे चाहती हूँ और उसके पास जाने पर एक सुकून सा महसूस करती हू । वही तू मेरा भाई जब मै तेरे करीब होती हू तो मेरी तडप और बढ़ जाती है । तेरा टच मुझे एक अलग ही रोमांच देता है। और

मै - और क्या दीदी बोलो ना

दीदी - और मै जानती हू तू मुझसे क्या चाहता है

मै चौकते हुए - क्या

दीदी मुस्कुराते हुए - मैने भी तेरे मोबाईल पर वो कहानिया पढी है जो तू खोल कर रखा था और चंदू की भेजी वीडियो भी देखी है

मै थोडा सा निराश मन से दीदी के सामने अफसोस का नाटक बना कर - सॉरी दीदी ,,,

दिदी - कोई बात नही मुझे बुरा नहीं लगा क्योकि मुझे वो कहानिया पसंद आई और मै तेरे प्यार मे खीच गयी ।

मै - तो क्या आपने ही पहले मेरे मोबाईल से चंदू की वीडियो डिलीट की थी ।

दीदी मुस्कुराते हुए - हा लेकिन उस दिन मुझे बहुत गुस्सा आया इसिलिए उस दिन छत पर तुझे डाटा लेकिन जब मैने वो परिवारिक सम्बन्ध की कहानिया पढने लगी और मुझे भी उसमे रुचि होने लगी तब मुझे लगा कि मैने गलत किया था ।

मै - कोई बात नही दीदी आई लव यू ना

दीदी मेरे सीने से लगते हुए - आई लव यू मेरे भाई

मै - तो क्या आपको कोई आपति नही है मै आगे बढू तो ,,,जैसे अभी लहगा के उपर से आपके ये गोल गोल उभारो को दबा दू और

दीदी हस्ते हुए मुझसे अलग हुई - छीईई गन्दा ,,,, इतना जल्दी भी नही ,,, मुझे थोडा समय चाहिये भाई उसके लिए,,मै कोई जल्दीबाजी नही चाहती हू ,, मै चाहती तू मेरे अंग अंग को इत्मीनान से भोगे और मै भी उस वक्त का भरपूर मज़ा लू जैसा उन कहानियों मे पढा था ।

मै दीदी के करीब आ गया और उनको वापस से अपनी बाहो मे भर कर - सच दीदी ,,,मुझे भी उस दिन का बेसबरी से इन्तेजार रहेगा ,,,थैंक्स मेरी जानू आई लव यू और दीदी के लिपस को चूसने लगा ,, दीदी तो इसी ताक मे थी और वो भी मेरे साथ मेरे होठो को चूमने लगी । करीब तीन मिंट बाद दिदी मुझ्से अलग हुई

दीदी - भाई प्लीज जल्दी आना ,, यहा अकेले मन नही लगेगा

मै - अरे दिदी अब तो मोबाइल दिला दिया है और सिम भी चालू है तो जब मन करे कॉल कर लेना ।

दीदी - थैंक्स भाई

मै - दीदी वो पूछना था कि क्या आपने चंदू का वो कल वाला वीडियो भी डिलीट कर दिये

दीदी मुस्कुराते हुए नही भाई वो तो मोबाइल मे है ,,, वैसे मुझे नही लगा था कि चम्पा भी अपने भाई से

मै - वो तो बचपन से ही उन दोनो का चल रहा था और अब तो रजनी दीदी भी शामिल हो गयी है

दीदी चौकते हुए - क्या ,,, चंदू अपनी खुद की मा को भी

मै - हा दीदी ,,

दीदी - तो क्या तू भी मा के लिए वही सोचता है

मै - क्या दीदी आप भी ,,,मै तो ब्स आपका दिवाना हू हिहिहिही

दीदी - मै खुब समझती हू तुझे भाई ,,,, अगर मौका मिला तो तू मा को भी नही छोदेगा हिहिहि क्यू सही है न

मै - धत्त दीदी ,,, चलो थोडा सा मुझे प्यार देदो कोई है नही अभी और

तभी बुआ आवाज देते हुए उपर आने लगी

बुआ - राज बेटा कहा है तू

बुआ की आवाज सुनते ही दीदी चहक उठी और कमरे से बाहर आ गई ।

मै - हा बुआ बोलो ना

बुआ - वो बेटा ये कहना था कि तू जल्दी से कुछ खा ले निचे तेरी मा इन्तेजार कर रही है ,, तुम लोगो को जाना भी तो है ।

मै - हा लेकिन मा को तो बुलाओ

बुआ - अरे वो बिना राखी बान्धे कुछ नही खायेगी तू खा ले फिर जल्दी से निचे आ हम वही इन्तज़ार कर रहे है ।

फिर मै भी जलदी से खाना खाया और निचे चला गया ।

निचे मा पापा और बुआ बैठे हुए थे कमरे मे मेरा इंतजार करते हुए कुछ बात कर रहे थे ।

मा - बेटा चल अब चल्ते है और अभी बस पकडना बाकी है ।

पापा - राज रुको बेटा ,, ये तो 10 हजार रुपये रखो

मै - पापा इतने रुपये का मै क्या करूगा

पापा - अरे बेटा वहा तेरी दो छोटी छोटी बहने भी वो भी तेरे आने का इन्तेजार कर रही है तो उनको 2 2 हजार दे देना ,, बाकी अपनी जरुरत से खर्च कर लेना ।

फिर मै और मा निकल गये बस स्टैंड की तरफ मामा के घर के लिए ।

अब देखते है कि आने वाला सफ़र कौन से नये रोमांच राज की दुनिया मे लाने वाला है ।
 
अब तक आपने पढा राज अपनी मा के साथ मामा के यहा जाने के लिए बस स्टैंड की तरफ निकल गया है

अब आगे

मै घर से मा के साथ अपने एक बडे बैग को लेकर निकल गया

रास्ते मे

मै - मा आज आप बहुत खुबसूरत लग रही हो

मा मुस्कुराते हुए एक बार मेरी तरफ देखा और सामने चलते हुए - वो क्यू बेटा

मै - बुआ की साडी आप पर बहुत अच्छी लग रही है और आप तो एकदम भोजपुरी फिल्मों की आम्रपाली लग रही हो ,,जैसे वो साडी मे दिखती है वैसे ही आप

मा ह्स्ते हुए - अच्छा बेटा,,, बुआ रानी चटर्जी और मा आम्र्पाली को बना कर मै जानती हू तू क्या गुल खिलाना चाह रहा है ।

मै - अरे सच मे मा आज वैसे ही लग रहे हो और

मा - और क्या बोल

मै - और मै आपको गुल मंजन क्यू खिलाउँगा हिहिहिहिही

मा - चल बदमाश मा से मज़ाक करता है

मै - क्यू मा से मज़ाक नही कर सकते क्या

मा मुस्कुराते हुए - नही

मै - हा मा से चाहो सेक्स कर लो लेकिन मज़ाक ना करो ,,,है न मा

मा बीच सड़क पर सेक्स के बात पर शर्मा गयी और बोली - चुप कर पागल हम लोग रास्ते मे है और तू क्या बाते कर रहा है बिच मे

मै - अरे मा कोई नहीं सुनेगा ,,, देखो पुरा मार्केट बन्द है एक्का दुक्का लोग है ।

मै - मा सुनो ना

मा - हा बोल

मै - कल रात के थैंक यू

मा मुस्कुराते हुए- थैंक यू किस लिये बेटा

मै - वो कल रात मे आपने पापा के सामने ही मेरी तकलीफ दूर की और उन लोगो को पता भी नही चला

मा - कोई बात नही मा हू ना तेरी तुझे कैसे तकलीफ मे देख सकती हू।

मै सोचा क्यू ना थोडा पब्लिक मे मज़ा लू मा से

मै - मा मुझे फिर तकलीफ हो रही है

मा मुस्कुराते हुए लेकिन अचरज के भाव मे - क्या ,,, तू पागल है क्या राज यहा बीच सड़क पर ऐसी बात कर रहा है

मै हस्ते हुए - मा सड़क पर थोडी मै तो चंदू के उस मकान मे जाकर करने की बात कर रहा था ,हिहिहिही

इस समय हम लोग चौराहे तक आ चुके थे और मा को ल्गा मेरे पास चंदू के चौराहे वाले घर की चाभी होगी ही क्योकि हम दोनो पक्के यार जो थे ।

मा ने निराश शब्दो मे कहा - बेटा मै तूझे मना नही करती लेकिन आज सुबह से मैने पानी तक नही पिया है और उपर से तेरे पापा ने घर से निकलने से पहले एक बार ... तू समझ रहा है ना

मै जान गया मा क्या कहना चाहती थी और सही भी था क्योकि एक बार पापा ने सुबह ही मा को चोद दिया था

मै - कोई बात नही मा देखो बस स्टैंड आ गया

मा - हा लेकिन बस नही लगा है कोई

मै - अरे मा आज त्योहार है तो सारे बस जल्दी जल्दी भर कर निकल रहे है ,,

हम बस के इंतजार मे खड़े बाते कर ही रहे थे कि दो चंचल हसीनाये हमारे पास चल आने लगी । एक साडी मे तो एक चुस्त सूट और पटियाला सलवार मे ,,, दोंनो के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान थी ,, और उनकी मटकती कमर तो बस ,,

मा - अरे विमला तू यहा

ये है विमला मौसी ,,, कमाल का मस्त गदरायी बदन वाकी है और लण्ड खड़ा ना हो जिसका इनको देख कर वो चुतिया ही होगा ,,, 40 36 40 का गजब का भूगोल और सबसे ज्यादा प्रभावित इनके लम्बे बाल की चोटी है जो इनकी गान्ड की छेद तक जाती है ,,, अब ऐसे मे किसी का ध्यान इनके बालो से होते हुए इनकी मोटी फैली हुए गाड़ पर ना जाये ऐसा हो ही नही सकता ।

वैसे तो मेरे मा के बचपन की सहेली है और इनकी भी शादी हमारे चमन पुरा मे हूई है

विमला - क्यू मै यहा नही आ सकती क्या

इतने साथ वाली हसिना ने मा के पैर छुए

मा ने उसको दुलारते हुए - खुश रह कोमल ,,

ये थी कोमल , विमला की बेटी ,, एकदम कातिल हसिना 34 साइज़ की चुची और 36 की गाड़ ,,,सपाट पेट । मेरे क्लास में ही पढ़ती है ।

मा विमला से - अरे तो फोन कर देती इसके पापा एक गाड़ी बुक करवा देते तो हम लोग साथ मे चलते ना ,, अब यहा कबसे खड़ी हू बस ही नही आ रहा है ,,,

इधर मा और विमला बाते किये जा रहे थे तो मुझे कोमल का सामना करने मे थोदी हिचक मह्सूस हो रही थी ।

तो मैने मोबाईल निकाल लिया और खड़े खड़े उसे चलाने लगा ।

कोमल - तुम कालेज क्यू नही आते हो राज

मै थोडा मुस्कुरा कर - नही वो दुकान खुल गयी है ना तो मुझे टाईम नही मिल पाता है और वैसे भी कालेज मे पधाई कहा वहा सब साले ....

मैने अपने जुबान पर रोक लगा दी कही मेरा पहला इम्प्रेशन ही ना खराब हो जाये

कोमल ह्स्ते हुए - क्यू पढाई नही होती तो क्या होती है

मैने एक नजर मा और विमला मौसी की तरफ देखा तो वो लोग बाते करते हुए बस स्टैंड की चेयर पर जा बैठे ,,वैसे भी औरते ही बाते ही अलग है

फिर मैने कोमल की बातो का जवाब बडे इत्मीनान से उसको एक कपल की तरफ इशारे से बताया जो बाहो मे बाहे डाले एक पेड़ के चबूतरे पर बैठे मोबाईल मे कूछ देख रहे थे ।

मै - ये होता है देखी

कोमल मुह पर हाथ रख ह्स्ते हुए - अरे पागल सब थोडी ना ऐसे होते है कालेज मे ,,, और तुम तो ऐसे रियक्ट कर रहे जैसे तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड ही ना हो

मै ह्स्ते हुए - मै इस झमेले नही पड़ता क्योकि मुझे अभी पढ्ना है तो मै शाम को कोचीन्ग कर लेता हू और बाकी समय मा के साथ दुकान पर बिताता हू ,,मुझे अभी पापा का नाम और ऊचा करना है

मैने जानबुझ कर कोमल के सामने खुद को साफ सरिफ बनाया जिसका प्रभाव उस पडा

कोमल - अरे तो तुम तो नाराज हो गये ,, और लड़कियो से दोस्ती करना थोडी ना गलत होता है ।

मै - तो क्या तुम्हारे भी कई लडके दोस्त है

कोमल - नही यार ,, कोई नही है इसिलिए तो तुमसे चुना लगा रही हो की कर को मुझसे दोस्ती हिहिहिहिह

मै समझ गया कोमल मेरे बातो से प्रभावित होकर ही मुझसे जुड़ना चाहती थी ।

मै मुस्कुराकर - हा लेकिन तुम मेरे से दोस्ती क्यू करोगी ,,, मै तो हर समय व्यस्त रहता हू अपने carrier और फैमिली के अलावा कोई टाईम नही है मेरे पास ,,,

इससे पहले कोमल मेरे बातो का जवाब देती कि बस आ गई और मा जल्दी से मेरे पास आई

मा - जल्दी चल बेटा नही तो सीट नही मिलेगी अन्दर

मै ह्स्ते हुए - मा यहा हम सिर्फ चार लोग ही है ,,, फिर मेरी नजर पेड़ के निचे बैठे हुए उन कपल्स पर गयी ,,, चार नही 6 है अब

फिर हम लोग अंदर चले गये

अन्दर दो सीट के दो लाईन खाली थे और एक तीन सीट वाली लाईन खाली थी ।

तो आगे वाली दो सीट पर मा और विमला मौसी बैठ गये उसी के पीछे मै विंडो सीट लेटे हुए कोमल के साथ बैठ गया । और हमारी ही लाईन मे खाली 3 सीट वाली सेट पर वो दोनो कपल बैठ गये ,, चुकी वो दोनो शादीशुदा भी थे ।

फिर 5 मिंट बाद बस निकल पडी अब आने वाले एक घन्टे मे मै मामा के यहा पहुच जाता क्योकि दुरी कम ही सही लेकिन रास्ता खराब ही था ,,, जिससे बस हिचकोले लेटे हुए जाने लगी और मै इसीलिये विण्डो सीट लिया ताकि हिच्कोले मे कोई दिक्कत नही हो । लेकिन कोमल के लिए बहुत दिक्कत होने वाली थी क्योकि उसके सामने वाली सिट के पीछे जो हैण्डल होता है हचका लगने पर पकडने के लिए वो टूटा हुआ था जबकि मेरी सीट के सामने वाला हैण्डल एक दम ठीक था ।

कोमल बड़ी मुस्किल से सामने की सीट पकडे बैठी हुई थी ।

आगे मा और विमला की तो बाते ही खतम नही हो रही थी । यहा हम दोनो शांत थे और बीच बीच में एक दुसरे को देख कर स्माइल पास कर रहे थे । मुझे कोमल के uncomfortable होने का ज्ञान था लेकिन मै उसके बदले अपना सफ़र बेकार नही करना चाहता था ,,,मै तो मामा के यहा होने वाले रोमांच से ही खुश होकर बाहर के नजारे देख रहा था ।

इसी बीच बस एक जोर का झटका दिया तो कोमल मेरे कंधो पर आ गयी और उन्का हाथ मेरी जान्धो को पकड लिया ,,,, फिर उसे इस बात का अह्सास हुआ और वो वापस से मुझे सॉरी बोलते हुए अपनी जगह पर बैठ गई ।

मै अब और ज्यादा कोमल के प्रति सतर्क हो गया और मुझे लगा कि उसे अपनी सीट दे दू । मै कुछ करता इससे पहले बस एक बार और तेज हिचकोले लिया और कोमल हाथ सामने की सीट से छूट गया और वो दुसरी तरफ गिरने को हुई की मैने लपक कर बाये हाथ से उसके पेट के उपर से उस्की कमर को थामा और अपनी तरफ खीच लिया ,,, मेरा हाथ अब भी उसकी कमर पर था ,,,और कोमल की आंखे बड़ी हो गयी वो मेरे हाथो का स्पर्श अपनी नाजुक कमर पर पाकर तेज सांसे लेने लगी ,,जिसका अह्सास मुझे तब हुआ जब मेरी नजर कोमल की उपर निचे होती चुचियो पर गई । मैने तुरंत अपना हाथ हटा लिया और सॉरी बोला
 
कोमल - अरे कोई बात नही तुमने मुझे पकड़ा ना होता तो मेरा सर फत ही जाता आज हिहिहिही थैंक यू राज

मै - ऐसा करो तुम यहा आजाओ ,,, मेने कोमल को अपनी सीट पर आने का इशारा करते हुए कहा

कोमल थैंक्स बोलते हुए अपने सामने की सीट पर खड़ी हुई और मुझे उसकी सीट पर ख्सक्ने का इशारा किया जैसे ही मै कोमल की सीट पर आया तभी बस मे एक और झटका लगा और कोमल मेरे उपर गिर कर मेरी गोद मे ही बैठ गई उसके दोनो हाथ अभी भी सिट पर थे ,,लेकिन मेरे दोनो हाथा उसको सम्भालने के चक्कर मे उसके मुलायम चुचो को पकड चुके थे और कोमल की गाड़ मेरे आधे खड़े लण्ड पर आ गई थी ,,,, एक दो सैकेण्ड के इस घटना मे मेरा लण्ड उत्तेजित होकर फड़फड़ाने लगा जिसका अह्सास कोमल हो चुका था,,लेकिन हम लोग तब तक हस रहे थे कि आज हो क्या रहा है

कोमल मेरे उपर बैठी और मेरे हाथ अभी भी उसके चुची को थामे थे ऐसे मे वो गरदन घुमा कर ह्सते हुए बोली - लग रहा है आज झटके खाते हुए ही जाना पडेगा हीहीहि

मुझे कोमल की बाते डबल मिनिंग की लगी जिससे मेरा लण्ड फिर से फुदक पडा ,,

मै भी हस्ते हुए - ऐसे ही बैठो तुम मै गिरने नही दूँगा

मेरे बोल्ते ही कोमल को पता चला कि वो किस पोजिसन मे हो गयी है और तुरन्त उठ गई जिससे मेरा हाथ उसकी चुची से सरक कर कमर पर आ गय और मेरे सामने कोमल की मोटी गाड़ अपने उभार के साथ सामने आ गई ।

ये सीन देख कर मेरा बचा हुआ उत्तेजित लण्ड अब पुरा खड़ा हो गया , कोमल अब विण्डो सीट पर बैठ गई ।

हम दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये जा रहे थे । लेकिन मेरे हाथ अब मेरे जीन्स के उपर निकले लण्ड के उभार को छिपाने मे लगे थे।

इस दौरान मुझे बस के झटके से बहुत दिक्कत हो रही थी तभी कोमल ने कहा- राज ऐसा करो तुम मेरे सीट के सामने वाला हैण्डल पकड लो,,, कोमल ने ये बात विण्डो की तरफ खसककर अपनी तरफ आने का इशारा करते हुए बोली । जिसका मतलब मै समझ और कोमल के करीब जा कर बाये हाथ से हैण्डल पकड लिया ,,,, लेकिन होनी को कौन टाल सकता था हम दोनो लाख कोशिस करते कि हमारे शरीर आपस मे टच ना जो लेकिन हर झटके के साथ मेरा कन्धा कोमल से टकराता साथ मे मेरे हाथ की कोहनी कोमल के दाहिने चुची के उभार को छू जाती । सफ़र बहुत ही उत्तेजना से गुजर रहा था ,,अब तक आधा घंटा बीत चूका ,,, कुछ सवारिया नीचे भी उतर चुकी थी।

इसी बीच मैने कोमल से पुछा - तुमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया कोमल

कोमल अचरज से - कौन सा सवाल

मै - यही कि तुम मुझसे दोस्ती क्यू करना चाहती हो ,,जबकि मै खुद के लिए समय नही निकाल पाता

कोमल मुस्कुराते हुए - तुम एक अच्छे लडके हो राज ,, इतनी कम उम्र में जब बाकी लडके लड़कियो के पीछे भागते हैं और अपनी स्वार्थ के लिए उनका यूज़ करते हैं लेकिन तुम अप्नी जिम्मेदारी समझ कर पापा का नाम आगे बढ़ाना चाहते हो और दुकान चलाते हो, और तुमको सबकी फ़िकर भी है ,,, तो कोई भी अच्छी नियत की लड्की क्यू नही चाहेगी कि उसका तुम्हारे जैसा अच्छा दोस्त हो ।

मै समझ गया कि कोमल मन में मुझे एक आदर्श और सिद्धांतवादी लड़का समझ रही है जिसमे कोई बुराई नही है । मगर उसे क्या पता था मै कल रात से ही मादरचोद बन गया हू हिहिहिहिह ।

फिर मैने उसकी भावनाओ को सराहटे हुए कहा- वो सब ठीक है लेकिन तुम तो जानती हो कि ये समाज एक लड़का और लड़की की दोस्ती को किस नजर से देखता है

कोमल - धत्त पागल मै सिर्फ दोस्ती की बात कर रही हू और तुम कहा गर्लफ्रैंड की बात सोचने लगे हिहिहिही

मै थोदा मज़ाक में - अरे अगर दोस्त एक लड्की हो तो गर्लफ्रैंड ही हुई ना हाहहहाह

कोमल - हा ये बात भी सही है लेकिन हमारी दोस्ती में वो सब कुछ नही होगा हम सब एक अच्छे सीधे साधे दोस्त रहेंगे ठीक है

मै जानबुझ कर - वो सब नही होगा मतलब

कोमल - भक्क तुम तो बुध्दु हो ,,,वो सब मतलब प्रेमी प्रेमिका वाला रिलेशन नही होगा ,, सिर्फ दोस्ती वाला

मै- ओह्ह्ह ये बात ठीक है फिर फ्रेंड्स,,,, मैने हाथ उसकी तरफ करते हुए बोला

कोमल भी मेरे हाथ में हाथ मिलाते हुए खुशी से बोली - हा फ्रेंड्स

मैने भी मौके का फायदा उठाकर अप्नी बाहे खोल कर बोला - हग

कोमल - छीईईई गंदे ,,, मै नही करने वाली हग

मै ह्स्ते हुए - तुम ही बोली ना हम लोग दोस्त है तो दोस्त मे हग करना तो आम बात है

कोमल - हा लेकिन यहा बस मे सब कोई है

मै - तो क्या तुम मुझे अपना लवर समझ रही हो जो शर्मा रही हो ,, हम तो दोस्त है ना

कोमल हस्ते हुए - हा बाबा हम दोस्त ही है ,,ठीक है आजाओ हग्ग्ग

फिर मै कोमल की तरफ झुका और उसके मुझे अपने गरदन्ं और सीने के बीच रख कर हग कर लिया और फिर मैं वाप्स आ गया ।

कोमल के बदन की खुस्बु और उसके जिस्मो का स्पर्श से मेरा लण्ड का उभार और ज्यादा जीन्स पर होने लगा ,,,मै इस बात से अंजान होकर कोमल से बाते किये जा रहा था ,, मगर बार बार कोमल की नजर नीचे होती और फिर दुसरी तरफ देखती थी ।

फिर जब मैने उसकी आँखों का पिछा किया तो पाया कि मेरा लण्ड का सख्त उभार साफ दिख रहा है,,, मुझे शर्म आ गई और मैने तुरन्त अपना हाथ उसपर रख दिया,,, जिसे देख कर कोमल खिडकी की तरफ मुह करके मुस्कुरा रही थी और मै भी बेबस शर्मिदा होकर मुस्कुराता रहा ,,,मगर मेरा लण्ड बैठने वाला कहा था ,,, मै बार घुमा कर कोसिस करने लगा की थोडा शांत हो लेकिन अब मेरे लागातार स्पर्श से वो और ज्यदा कड़ा होने लगा साथ मे दर्द भी ,,जिसका असर मेरे चेहरे के भाव से पता चलने लगा ,,,कोमल ने जब पलट कर मुझे देखा तो उसे मेरा परेसान दर्द से भरा चेहरा दिख रहा था और वो मेरे हाथ को बार बार लण्ड एद्जेस्त करते हुए देख रही थी लेकिन टाइट जीन्स मे वो मुमकिन नही था ।

ऐसे मे कोमल ने वो किया जिसकी उम्मीद कोई भी लड़का पहली मुलाकत मे मिली लड्की से नही कर सकता था ।

कोमल मे अपना दुपट्टा का एक सिरा उठाकर मेरी जांघो पर रख दिया और इशारे के साथ हल्के आवाज मे बोली - दुपट्टे के नीचे खोल कर सही कर लो,, वो वापस मुस्कुराकर खिडकी पर देखने लगी ।

चुकी ज्यादतर सवारी उतर चुकी थी यहा तक की मेरे अगल बगल और वो couple भी उतर गये थे ,,तो मुझे लगा कि मुझे सेट कर लेना चाहिए अब ।

मैने एक नजर कोमल को देखा तो वो कनअखियों से मेरे तरफ देख रही थी मगर से नजर मिलते ही वापस मुस्कुराते हुए खिडकी से बाहर देखने लगी ।

मैने भी दुपट्टे को अपने कमर तक करके अपने जीन्स का बटन खोला और चैन खोल दिया ,,,मा कसम वो राहत मै बयां नही कर सकता था । फिर मैने अंदर हाथ डाला तो पता चला कि मेरा लण्ड अंडरवियर के पेसाब वाले छेद से बाहर आ गया था तभी मुझे उसको सेट करने मे दिक्कत आ रही थी,,,

फिर मैने सोचा ये लण्ड तो इतना जल्दी बैठने वाला है नही क्यू ना थोदा बाहर निकाल कर आराम दे दू ,,, और मैने मोटा फन्फ्नाता लण्ड को जीन्स से बाहर निकाला जो कि कोमल के दुप्प्ते से ढका था । फिर मैने एक नजर कोमल की तरफ देखा तो वो गरदन घुमाये मेरेपुरे क्रिया कलाप पर नजर डालें हुए थी ,,,जैसी ही उसने देखा की मै उसे अपना लण्ड निहारते देख रहा हू वो सॉरी बोल कर वापस खिडकी की तरफ घुम गई ।

मेरे चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ गयी क्योकि कोमल का इंटरेस्ट मुझे बहुत सारे सपने दिखाने लगा ,,,और मैने इधर उधर देखा और खुद की अपने लण्ड के उपर से दुपट्टा उसकी तरफ उड़ा दिया जिससे मेरा लण्ड तन कर सुपाडे के साथ खड़ा हो गया ।

जैसे ही मैने दुपट्टा उसकी तरफ फेका तो उसके साथ एक छोटी सी आवाज भी दे दी

मै - अरेरेररे ...

मेरे इतना कहने की देरी थी कि कोमल पलट चुकी थी औए उसके सामने मेरा मोटा फुकार मारता लण्ड हिलने लगा । कोमल एक टक मेरे लण्ड को देख्ने लगी ,,,और मै भी इस रोमांच से इत्ना भर गया की मेरे माल की कुछ बुन्दे मेरे सुपाडे पर आ गई । जिसे देख कर मैने वापस कोमल को दुपट्टे के लिए इशारा करते हुए साथ मे लण्ड के आगे हाथ लगा कर छिपाने की कोसिस करते हुए बोला

मै - कोमल सॉरी वो हवा से उधर चला गया दुपट्टा ,, जल्दी दो ना मै बंद कर लू ,,

कोमल झेप गयी और मुस्करा कर बोली - नही वो दाग लग जायेगा इसमे ,

फिर मेरी नजर सुपाड़े पर आये माल की बूद पर गयी ,,

मै - ओह्ह्ह सॉरी ,,, लेकिन मै बंद कैसे करू ।

कोमल इस बीच पुरे ध्यान मेरे लण्ड को देख रही थी

कोमल मुस्करा कर - अब क्या छिपाना है बुधु कही के,, खड़े हो जाओ बन्द कर लो

मै थोडा शर्मया और कोमल की तरफ होकर खड़ा हो गया ,,जिससे मेरा लण्ड कोमल के सामने झूलने लगा ,,,कोमल ने खुद को पीछे की तरफ खीचा ताकि मेरा लण्ड उसको छुए नही ।फिर मैने जीन्स निचे किया और अंडरवियर के छेद को लण्ड के उपर से निकालने की कोसिस करने ल्गा एक दो बार लास्टीक छूत जाने से मेरे कमर मे चोट लगी जिसकी सिसकी और मेरे चहरे के भाव से कोमल को पता चलने लगा । तभी कोमल ने दुपट्टे को हाथ मे लेकर मेरे लण्ड को पकड़ा और उपर की तरफ किया और बेहद बुरा सा मुंह बना कर मानो वो किसी गंदी चीज़ को पकड़ा हो ऐसे

कोमल - हम्म्म्म अब अंदर करो इसको ,,,मैने भी कोसिस करके लण्ड को अन्दर रख दिया और फटाक से जीन्स पहन लिया । और वापस अपनी जगह पर बैठ गया कुछ पल हम दोनो शांत बैठे रहे ।

मै - सॉरी कोमल , और मै चुप हो गया और कोमल को देखने लगा

कोमल खिडकी से बाहर झाकते हुए मुस्कुरारही थी ।

मै - क्या हुआ हस क्यू रही हो

कोमल हस्ते हुए - यार तुम कितनी छोटी अंडरवियर पहनते हो हिहिहिही

मै झेप गया - क्या यार तुम भी मेरी मजबुरी थी कि वो बड़ा हो गया था तो क्या करता ।

कोमल - फिर भी अपनी साइज़ के हिसाब से तो पहनना ही चाहिये ना राज हिहिहिही

मै - हम्म्म्म सॉरी आगे से ध्यान दूँगा हा नही तो

कोमल सारे रास्ते हस्ती रही और ना जाने क्यू उसकी ये दोस्ती मुझे भा गयी । बस से उतरने से पहले हमने सेल्फी भी ली और नम्बर भी एक्सचेंज किये । हालाकि हमे एक ही गाव जाना था लेकिन बस से उतर कर हम दोनो शांत थे मा और विमला मौसी के सामने ।

बस मेरे नाना के गाव के बाहर एक प्राथमिक स्कूल पर रुक गयी । ये गाव था प्रतापपुर । काफी बड़ा गाव था और इस गाव के सबसे बड़े सेठ थे मेरे नाना जी जो कि बहुत बडे जमीदार थे । सैकडों बीघे की खेती और दो दूध की डेयरी , 3 पक्के ट्यूबवेल और एक आलीसान घर जिसमे कयी नौकर और सुख सुविदा की सारी चीजे थी । नाना जी गाव की भलाई के सरकारी स्कूल , सरकारी हस्पताल , पानी की व्य्व्सथा के लिए कयी सारे काम सरकारी कार्यालयों से अपने दम पर करवा लिये थे ।

( नाना के यहा का परिचय पेज 47 पर अपडेट 28 मे दिया गया है )

फिर हम लोग चारो बैग लेकर निकल पड़े गाव मे अन्दर की तरफ ,,, कड़ी धूप भी थी और प्यास से गला भी सुखने लगा था लेकिन उससे भी ज्यादा मै जल्दी से जल्दी नाना के घर जाकर अपने लण्ड को आराम देना चाहता था । लेकिन मा तो ऐसे गाव को देख रही थी कि मानो कितने सालो से ना देखा हो जबकि हर साल वो एक दिन यहा राखी बांधने आती थी ।

मै गाव के अंदर प्रवेश कर चुका था ,,, गाव मे छोटे बच्चो की चहल पहल ,, एक गाड़ी पर 4 5 बच्चे एक साथ बैठ कर चिल्ल्लते हुए घूम रहे थे उनको देखने के लिए गली मुहल्ले की औरते बाहर निकली थी कोई दरवाजे पर था तो कोई किवाड़ की आड़ मे । अहहा कोई कोई औरते बेढंग से साडी लपेटे थी और उनमे चुचे नाभि पेट किसी किसी के दिख भी रहे थे ।

गाव में जो औरते मा को पहचानती थी वो उनको नमस्ते भी कर रही थी ।

तभी सामने से कुछ औरते गोबर की खाची सर पर लिये गाव से बाहर की तरफ जाने लगी । उनमे से भी कुछ ने मा को नमस्ते किया क्योकि वो हमारे डेयरी और खेतो मे काम करने वाली थी । कुछ की कसी हुई कमर चुचे थे कुछ बुढ़ी भी थी ।

मै - जल्दी चलो ना धूप हो गया प्यास लग रही हैं

मा - हा बेटा चल रही हू ज्यादा दूर नही है बस आने ही वाला है ।

इधर विमला का मायके वाली गली आ गई , वो मा से विदा होने लगी और मा बोली की शाम तक आओ मिलने घर पर । मै कोमल को देख कर एक मुस्कान दिया और हम लोग आगे निकल गए,, मैने एक नजर पलट कर देखा तो कोमल की मस्तानी चाल ने फिर से मुझे कायल कर दिया । उसके भी लम्बे बाल कमर तक आते थे ।तभी मैने उसके मोबाइल पर मैसेज किया

मै - तुम ऐसे क्यू चलती हो ,, सीधा सीधा नही चल सकती

कोमल ने मैसेज पढा और मुड कर देखा तो मै उसे ही देखते हुए जा रहा था ,,

फिर वो मोबाईल मे कुछ टाइप करने लगी

फिर मुझे मैसेज की बिप आई तो मैने मोबाइल खोला

कोमल - तुम मुझे पीछे से ताड़ तो नही रहे ना , हसने वाली इमोजी के साथ जमाए

मैने तुरंत मुस्कुरा कर मोबाइल मे sms कर दिया

मै - मै तो बस तुम्हारे बालो को देख रहा था कितने लम्बे है ।

कोमल - बदमाश , मै तुमसे बाद मे निपटूंगी । अभी मेरे मामा का घर आ गया ।
 
मै भी उसको बाय लिख कर चलने ल्गा ,

और कुछ ही दुरी पर एक बड़ा सा मकान सामने आया जो मेरे नाना का घर था और हम लोग मेंन गेट से अंदर चले गए ,,, एक बडे गेट के बाद अंदर बहुत ही बड़ा आंगन और उसी आँगन के तीनो तरफ कमरे बने थे ,, गेट के ही सीध मे अंदर की तरफ एक दरवाजा था जो पीछे टोइलेट बाथरूम और स्टोररूम की तरफ जाता था । जहा से एक सीढ़ी छत पर भी जाती थी ।

घर एक मंजिला ही थी लेकिन कुल 8 कमरे थे जिसमे कीचेन भी शामिल था । तीन गेट के दाई तरफ , तीन बाई तरफ और दो अंदर जाने वाले दरवजे के अगल बगल थे । उसमे दाई तरफ वाला कमरा कीचेन के लिए यूज़ होता था ।

और सारे कमरे के सामने बरामदे भी थे जिसमे चौकी , राशन की बोरिया , दूध के बडे बर्तन रखे जाते थे । मेन गेट के बाई तरफ से ही एक और सीढ़ी छत पर जाने के लिए थी और उसी के जीने के बगल वाले कमरे के सामने एक चौकी थी जिसपे एक पुराना गल्ले का बक्सा और कुछ रजिस्टर रखे हुए थे । मै समझ गया कि ये कमरा नाना का ही है । और भी नौकर चाकर थे जो काम मे लगे थे ।

मै इस सब चीज़ो को देख रहा था कि तभी सामने से रज्जो मौसी किचन से चलती हुई आई ,,, मै मौसी के हिलते चुचे देख कर मस्त हो गया और उन्के साथ बिताये पल याद करने लगा ।

यहा मौसी आई और मा के गले लगी ,, आह्ह दो बडे बडे थन टकरा गये थे ,,, फिर मैने उन काम करने वाले नौकरो के सामने खुद को सभ्य जता कर मौसी के पैर छुने के लिए झुका तो मौसी ने मुझे रोक लिया

मौसी - अरे लल्ल्ला मेरे सीने से लग मेरे लाल ,,,आजा

मेरे मुह मे पानी आया और मौसी ने मुझे सीने से लगा लिया , मै भी मौसी के मुलायाम चुचो के उपर अपने गाल को लगा कर सफ़र की थकान मिटा लेना चाहता था ।

पर ज्यादा देर ये मुमकिन नही था ।

मा - चलो हो गया बहुत मेल मिलाप अंदर चल अब धूप नही लग रही है

मौसी - अरे मेरा लल्ल्ला कितना परेशान हो गया है । चल बेटा हाथ मुह धुल ले चल मै कमरा दिखा देती हू

मै - पहले मुझे ये जीन्स निकालना है फिर कुछ,,

मौसी हस्ते हुए - अरे तो कमरे मे चल कप्डे बदल ले और मन हो तो पीछे जाकर नहा ले ।

फिर मौसी ने मुझे और मा को किचन के दाई तरफ वाला ही कमरा दिया जो किनारे पर था ।

मै जलदी से अंदर गया और जल्दी से जींस निकाल दिया,,,मेरे लण्ड को बहुत राहत हुई ,,सोचा क्यू ना नहा भी लू इसी बहाने लण्ड भी बैठ जायेगा। तो मैने एक लोवर टीशर्ट लिया और तौलिया लपेटे हुए,, किचन के बाई तरफ से दरवाजे से होते हुए पीछे हाते मे चला गया ।

यहा 3 4 पाखाने और 3 4 नहानघर थे ,,, और पाखाने के एक तरफ किनारे पर कपडे धुलने के लिए मोटर भी लगा था ,,, मैने सोचा आँगन खाली है क्यू ना मै मोटर चालू करके ही नहा लू ।

मैने तौलिया उतार कर अपना शर्त निकाल दिया और बनियान भी । जैसे ही मै मोटर चालू करने अंडरवियर मे पाखाने की तरफ लगे स्विच के पास गया कि सामने से एक दरवाजा खुला जिसने से एक खुबसूरत लड्की अपने सलवार का नाड़ा बंधते हुए बाहर निकली ,,,जैसी ही उसकी नजर मुझसे मिली और उसने मुझे अधनंगा अंडरवियर मे पाया वो चिल्ला कर वापस पाखाने मे चली गयी ।

देखते है दोस्तो आगे क्या होता है । आप सभी के सुझाव और प्यार भरे टिप्पणियों का इंतजार रहेगा ।

Update 39

अब तक

मैने तौलिया उतार कर अपना शर्त निकाल दिया और बनियान भी । जैसे ही मै मोटर चालू करने अंडरवियर मे पाखाने की तरफ लगे स्विच के पास गया कि सामने से एक दरवाजा खुला जिसने से एक खुबसूरत लड्की अपने सलवार का नाड़ा बंधते हुए बाहर निकली ,,,जैसी ही उसकी नजर मुझसे मिली और उसने मुझे अधनंगा अंडरवियर मे पाया वो चिल्ला कर वापस पाखाने मे चली गयी ।

अब आगे

मुझे बड़ा अजीब लगा कि कौन थी जो ऐसे ही बिना बात के अंदर वापस भाग गयी। तभी मुझे अंदर से उसकी आवाज आई ।

लड्की - कौन हो तुम और अंदर कैसे आये

मै - दरवाजे से आया हू और कैसे ,,, और यहा नहाने आया हू तुमको कोई दिक्कत है ,,,

मै इससे पहले कि और कुछ बोल्ता कि रज्जो मौसी आ गई मुझे खोजते लेकिन मुझे बड़बड़ाते हुए देख कर हस्ते हुए बोली

मौसी - अरे राज बेटा यहा किससे बात कर रहा है,,,जल्दी से नहा के आ तेरे नाना इंतजार कर रहे हैं ।

मौसी की बात खत्म हुई ही थी कि फटाक से दरवाजा खुला और वो लड्की चहकते हुए बोली - अरे राज भईया आप हो मुझे लगा कि कोई बाहर का है ।

मै अचरज से - हा मै ही राज हू लेकिन तुम कौन हो

मौसी - धत्त पागल ये बबिता है तेरे मामा की बेटी भूल गया क्या

मै खुश होकर - सच मे ,,अरे वाह्ह्ह मेरी गुडिया तो बड़ी हो गई है अब ,,

बबिता - हा और आप अपनी इस गुडिया को पहचाना ही नही ,,, बस यही प्यार है ना आपका

मै बबिता के सवालो से झेप गया क्योकि गलती मेरी थी कि मै उसे पहचान नही सका लेकिन वो भी तो नही पहचानी

मै - हा तो तू कौन सा अपने राजा भईया को पहचान ली

बबिता - सॉरी भईया वो आप बहुत साल बाद आये है ना पुरे 4 साल हो गए तो कैसे पहचानती

मौसी - अरे तुम लोग बाद मे बाते करना ,,राज तू जल्दी से नहा ले और बबिता तू मेरे साथ चल छोटी ( मा ) खोज रही है तुझे

बबिता चहकते हुए - क्या छोटी बुआ भी आई है ,,चलो बुआ चलते है ,,और भईया आप जल्दी से आजाओ नहा कर हिहिहिही

फिर मै जल्दी से नहा लिया और अपना कच्छी बनियान लेके पीछे वाली सीढ़ी से तौलिया लपेटे छत पर चला गया ।

मै जैसे ही पीछे के सीढ़ी से उपर आया मुझे एक लड्की शर्ट स्कर्ट पहने खड़ी दिखी जो हाथ मे मिठाई का डब्बा लिये बाहर वाले जिने की तरफ ताक झाक करते हुए मिठाई खा रही थी । मुझे तुरंत पता चल गया कि ये गीता ही होगी , क्योकि उसकी बचपन की आदत थी मीठाई खाने की इसिलिए मै उसे प्यार से मीठी बुलाता था ,,, इस वक़्त मै गीता के पीछे था तो दूर से वो एक साधरण लड्की ही लग रही थी । मैने सोचा क्यू ना उसको सरप्राइज दू चुपके से

इसी लिये मै कपडे डाल कर दबे पांव गीता के पीछे पहुचा ,, अन्त तक मेरी आंखे सिर्फ गीता की नजरो पर थी लेकिन जैसे ही मैने उसको पीछे से अपनी बाहो मे भरा उसकी गदरायी उभरती जवानी का अंदाजा मुझे हो गया था और उसके उभरे गाड़ मेरे जांघ पर लग गये मेरे नंगे सीने से उसकी मुलायम पीठ ,, मेरे हाथो मे उसका नरम पेट ,, लेकिन मेरे ऐसे पकडते ही वो अपनी कोहनी से मेरे पेट पर एक जोर का वार करती है और मै मीठीईईई मै हूउउउऊ कहते हुए वही बैठ गया

जब गीता मेरे मुह से मीठी शब्द सुनती है तो वो समझ जाती है कि ये उसका राज भईया था

गीता दुखी होकर मेरे कन्धे पकडे हुए उठाती हुई - सॉरी सॉरी भईया मुझे नही पता था आप हो

तब मेरी नजर मेरी मासूम छोटी बहन पर जाती है उसको सामने से देखता हू तो उम्र के हिसाब से उसकी चुचिया बबिता के मुकाबले ज्यदा थी । एक तरफ बबिता के मम्मे छोटे मौसमी जैसे थे वही गीता भरी बदन वाली थी और उसके दूध हापुस आम जैसे शर्त के उपर से दिख रहे थे ।

गीता - प्लीज माफ कर भईया ना प्लीज

मै मुस्कुराते हुए- अरे मेरी मीठी मै तुझसे गुस्सा थोदी ना हूगा ,,, अगर तुम अपने भैया को मीठी मीठी पप्पी दोगी तो हाहहाहहा

गीता शर्माते हुए - क्या भईया आप भी अब मै बड़ी हो गई हू ना

मै - तू और बबिता मेरे लिये हमेशा मेरी गुडिया रानी ही रहोगी ,,, बुढ़ढी हो जाओगी और दाँत गिर जायेन्गे तब भी

हिहिहिहिही

गीता खिझते हुए - भैयाआआ भक्क्क चिडाओ मत हा नही तो

मै - तो लाओ मेरा मीठी,, ये बोल कर अपना एक गाल उसके आगे किया और वो गीता ने भी बचपन की तरह मेरे चेहरे को पकड़ा और गालो को चूम लिया

मै- थैंक्स मेरी मीठी ,,चल अब निचे चले

गीता - हा चलो

फिर हम दोनो निचे आये और मै अपने कमरे मे गया

मैने मेरे बैग से एक टीशर्ट और लोवर निकाला । उसे पहन कर बाहर आया और सबको खोजने ल्गा कि कहा है सब ,, चारो तरफ नजर डाली तो नाना के बगल वाले रूम में कुछ चहल पहल नजर आई तो मै घूम कर बरामदे से होते हुए उसी कमरे के बाहर पहुचा तो कमरा पुरा भरा था । चुकी ये गेस्टरूम जैसा था जिसके एक किनारे एक बेड लगा और ढेर सारे सोफे लगे थे । नाना अक्सर मेहमानों को यही रोका करते थे ।

मै दरवाजे पर पहुचा की मा बोली - कहा रह गया था जल्दी अंदर आ तेरे चक्कर मे सब रुके है ।

मै कमरे मे गया तो नाना बेड पर लेते हुए थे । एक बडे सोफे पर राजेश मामा बैठे थे उन्के बगल मे मेरी दोनो नटखट बहने खड़ी थी ,, मौसी आरती की थाली लिये खडी थी ।

फिर मै जाकर नाना के पैर छुए

नाना - जुग जुग जियो मेरे लाल ,,जरा यहा मेरा शेर ,,अपने नाना के गले नहीं लगेगा

फिर मै मुस्कुरा कर नाना के पास गया और उन्के पेट सोकर उनसे लिप्त गया ,बदले मे नाना ने मेरी पीठ थपथपाइ । फिर मै मामा से मिला

फिर मा ने मुझे मामा के बगल मे ही बिठा दिया और पहले मा और मौसी ने मामा को राखी बांधी,,, फिर मामा ने मा और मौसी को गिफ्ट दिया ।

फिर गीता बबिता आई और मुझे बारी बारी से राखी बांधी ,, फिर मैने उन्हे पापा के कहे अनुसार दो दो हजार रुपये दिये । वो खुशी से मेरे दोनो गालो पर पप्पी देते हुए अपने कमरे मे चली गयी । और हम सारे लोग आपस मे बात करने ल्गे ।

मै - मामा मामी कहा है

मामा - बेटा वो भी अपने मायके गयी है राखी के लिए परसो आयेगी ।

मौसी - चलो सारे लोग खाना खा लो ।

नाना - रज्जो बेटा ,,मेरा खाना तू सबके खाने के बाद मेरे कमरे मे लेटे आना आह्हह थोडी थकान सी है मै पहले आराम करूँगा ।

मा और मौसी मुस्कुरा रहे थे और मै भी जानता था कि वो दोनो क्यू मुस्कुरा रहे थे ।

चुकी नाना का कमरा और गेस्टरूम अगल बगल ही था तो उन कमरे के बीच एक कामन दरवाजा भी था कमरे के अंदर से जिससे एक कमरे से दुसरे कमरे मे जा सकते थे । नाना भी उठे और उसी दरवाजे से अपने कमरे में चले गये और हम लोग खाना खाने किचन मे चले गये । क्योकि काफी बड़ा किचन था और डायनिन्ग टेबल भी वही लगा था । फिर मौसी ने सबके लिए खाना लगाया और हम सब खाना खाने लगे ।

खाने के बाद मामा सबको बोल कर खेत के लिए निकल गये और गीता बबिता भी किचन के काम मे लग गई । वही मै और मा अपने कमरे मे चले गये और मौसी नाना के लिए थाली लगाकर खाना देने चली गयी ।

कमरे मे जाते ही मैने दरवाजा बंद किया और मा को पीछे से हग कर लिया

मा - क्या कर रहा बेटा तू ,,छोड कितनी गर्मी लग रही है दिखता नहीं

मै - तो मै आपके कपडे निकाल दू मा ,, आपको आराम मिल जायेगा हिहिहिह

मा - खुब समझ रही हू कि तू क्यू मेरे कपडे निकालेगा , बदमाश कही का

मैने मा को पीछे से ही उनकी गरदन को चूमते हुए

मै - मा सुनो ना

मा मुस्कुराकर - हा बोल ना मेरा लल्ला

मै - मा क्या अभी नाना मौसी को चोदने वाले हैं,

मा - धत्त पागल वो तो खाना देने गयी है ना

मै - हा तो फिर आप दोनो मुस्कुरा क्यू रहे थे जब नाना ने मौसी को खाना लेकर आने को कहा

मा - तू बहुत ध्यान देने लगा है कि कौन क्या कर रहा

मै - मा बताओ ना क्या सच मे अभी नाना मौसी को चोदेगे

मा हस्ते हुए मुझसे अलग हुई - मुझे क्या पता

मै - तो मै जाऊ पता करने

मा चौकते हुए - तू पागल है ,,कही नही जाना है चल थक गया होगा अब सो जा थोडी देर

मै हस्ते हुए - मतलब मै सही हू मौसी नाना से चूदने ही गयी है ।

मा - हा गयी होगी तुझे क्या चल सो जा अब बहुत कुछ जानने ल्गा है।

फिर मा ने साडी निकाल दी और बिस्तर पर लेट गई ।

मै समझ गया कि मा ऐसे नही मानेगी कुछ सेक्सी सा नाटक करना पडेगा । इसिलिए मै मा के बगल ने लेट कर उनको बगल से हग करते हुए उन्के मुलायम गालो को चूमते हुए

मै - मा सुनो ना

मा आंखे बंद किये मुस्कुरा कर - बोल बेटा सुन रही हू

मै - मा आप कब चुदोगी नाना से ,,,,मा के चुचे ब्लाउज के उपर से सहलाते हुए बोला

मा थोडी झिझ्की फिर बोली - इत्ना आसान नही है बेटा , मै कोई रन्डी नही हू जो चुत खोले उनका लण्ड लेलू ।

मै - मा आप मौसी से बात करके कुछ प्लान करो ना

मा - हम्म्म्म ठीक है बेटा आज रात मे दीदी से बात करती हू

मै - तो मै भी सोउँगा आप दोनो के साथ मा

मा - नही बेटा तू कैसे आयेगा ,, वो रात मे तो राजेश रहेगा ना

मै खुश होते हुए - क्या सच मे आप मौसी और मामा बचपन की तरह आज रात मे मस्ती करने वाले हो ।

मा - हा बेटा दीदी ने कहा है कि आज बहुत दिनों बाद एक साथ हुए हैं तो क्यू ना

मै - वॉव मा ,,, फिर तो मज़ा आयेगा ,,, मा प्लीज मुझे भी देखना है

मा - लेकिन कैसे बेटा,, मुझे शर्म आयेगी ,, और हम लोग कमरे के अंदर रहेंगे, दरवाजा भी बन्द रहेगा ,,

मै - अच्छा तो क्या मौसी और मामा के कमरे के बीच कॉमन दरवाजा नही है

मा - अरे हा वो है ही

मै खुश होते हुए - ठीक है मा फिर आपलोग मामा के कमरे मे ही जाना और मौसी का दरवाजा खुला रखना

मा - हमम ठीक है चल अब सो जा

मै कैसे सोता एक तो मेरी सेक्सी मा मेरे बगल मे बंद कमरे मे अकेली सोयी है और रात मे होने वाले रोमांच की बाते हो रही है ,,, मै सो जाता अगर मेरा लण्ड नही जागता तो ,,वो तो मा के नंगे पेट और डिप गले वाले ब्लाउज से आधी बाहर निकली चुचियो को देख कर लार टपका रहा था ।

फिर मैने थोदा मा के उपर आकर उनकी बाहर निकली चुचियो को जीभ से गिला करने लगा

मा - इस्स्स क्या कर रहा है बेटा ,,,मै बहुत थक गई हू प्लीज मान जा ,,मै तुझे मना करती हू क्या

मै बुरा सा मुह बना कर - सॉरी मा ,आप सो जाओ

मुझे देखकर मा ने मुझे मुस्कराते हुए सीने से चिपका लिया ,,मेरा चेहरा मेरा नाक मेरे होठ आंखे सब मा की मुलायम गद्देदार चुचो मे समा गयी । मै वापस सर उठा कर अपने होठो से मा के मोटे रसिले होठो को चूसने लगा । फिर अलग होकर मा के माथे को चुमा और उन्के बगल मे लेट गया ।

मा - मेरा बच्चा आजा सो जा

फिर मै वापस से मा को हग करके लेट गया । लेकिन मेरी आँखो मे निद कहा मेरा लण्ड बार बार मुझे नाना के कमरे की तरफ जाने को बोल रहा था क्योकि मा तो कुछ करने देती नही ।
 
मै सोच ही रहा था ,,, कि मेरा मोबाइल रिंग हुआ और मेंने मोबाईल देखा तो दीदी ने काल किया था ,,तो मै मा को फ्रेश होने का बोल कर निकल गया बाहर और पीछे की सीढ़ी से उपर जीने तक चला गया ।

वहा जाकर मैने दीदी को फोन किया

फोन पर

दीदी - क्या हीरो वहा जाते ही भूल गया मुझे

मै - नही दीदी अभी 3 घन्टे ही तो हुए है घर से यहा आये

दीदी - हा लेकिन मेरे लिए 3 घन्टे भी भारी है ,,तेरी याद तेरे जाने के बाद आ रही है,, घर एकदम काटने को दौड़ रहा है

मै - अच्छा बड़ा प्यार आ रहा है जब घर होता हू तब नही आती याद आपको, तब तो आप दूर भागते हो

दीदी - वो तो बस मेरी जान को परेशान करने का तरीका है

मै - हा तो देखो मुझसे दूर भागने का नतिजा , कैसे तडप रहे हो आप

दीदी - हा भाई अब जल्दी से आजा मै तुझे अपनी बाहो मे भर लू

मै - हा दीदी परसो आ जाउन्गा मै ,,,आई लव यू

दीदी - आई लव यू टू भाई मुआआह्ह्ह्ह

मै - चलो ठीक है मै बाद मे बात करता हु ।

फिर मैने फोन रखा और टहलते हुए सामने छत की रेलिंग पर आ गया ,,, गाव मे सबसे बड़ी छत हमारी ही थी वहा से नजारा हर तरफ कितना मज़ेदार और सुकून भरा था ,, तेज धूप मे मस्त हवा चल रही थी तो कोई दिक्कत नहीं थी खड़े होने मे ,, गाव के बाहर आखिरी छोर पर एक बड़ा सा दो मंजिला मकान था , जहा काफी गाडिया ट्रक लगे थे अनाज लादे मै समझ गया कि वो भी नाना का ही होगा क्योकि और कोई तो है भी उन्के टक्कर का यहा ।

गाव की हरियाली यहा की खुस्बु एक गजब की ताजगी का अहसास दे रही थी और मै ऐसे ही नजारे देखते हुए मेन गेट के बगल की सीढ़ी से निचे उतरने लगा आगन मे काफी काम करने वाले मजदूर थे । मै नाना के यहा की चका चौंध से बहुत प्रभावित था ,,, मै आखिरी सीढ़ी से निचे उतरा तभी मुझे ध्यान आया कि अरे मौसी तो नाना के कमरे मे गयी है कही इन लोगों का कुछ रोमन्च तो नही ना चल रहा है

मै भी एक लम्बी सास भरते हुए इधर उधर देखा और नाना के रूम की तरफ जाने लगा और रूम के दरवाजे के बगल मे लगी चौकी पर बैठ गया जहा गल्ला और रजिस्टर रखा हुआ था ,,और दीवाल से टेक लगा कर बैठ कर मोबाईल निकाल लिया और सारा ध्यान नाना के कमरे में लगा दिया कोई आवाज या कोई सेक्सी सी आह्हह सुनाई दे जाये ,, मगर कारिब दो मिंट तक ऐसा नही हुआ कुछ,,मैने सोचा क्यू ना गेस्ट रूम मे जाकर कुछ जुगाड लगाऊ

मै एक बार इधर उधर देखा और झट से गेस्ट रूम मे घुस गया ,,,, अंदर कूलर चालू था तो मुझे मज़ा ही आ गया थोदा सा खुद को रिलैक्स किया और उस कॉमन दरवाजे के पास चला गया । मैने दरवाजे को बिना छुए उसमे छेद या की-हॉल खोजा कुछ नही मिला । मुझे लगा किस्मत ही खराब है सालि आज एक तो सुबह से खड़े लण्ड ने परेसान किया , और बस मे झटके खाये , फिर मा ने भी कुछ करने नही दिया और अब यहा भी कुछ नही मिलेगा देखने को ।

मै भी सोचा छोडो जाने दो और वही गेस्ट रूम मे मोबाईल चलाते हुए सो गया ।

देखते हैं दोस्तो आने वाले अपडेट मे क्या बाते सामने आने वाली है ।
 
Update 40

शाम को 5 बजे मेरी नीद गीता बबिता के शोर मचाने के खुली । आंखे खुलते ही वो दोनो मेरे अगल बगल बैठी दिखी और मुह पर हाथ रखे हस रही थी ।

मुझे अजीब लगा कि इन लोगो को क्या हुआ जो ये ऐसे ह्स रहे है ।

मै थोडा सा झिजक कर - क्या हुआ गुडिया क्यू हस रही हो ।

बबिता हस्ते हुए - भईया अपना चेहरा तो देखो

मैने तुरंत हडबडी मे मोबाइल निकाला और उसमे कैमरा खोला तो देखा कि मेरे माथे पर बिन्दी , मेरे दोनो गाल पे बिन्दी और तो और मेरे ठुडी पर 3 बिन्दी लगी थी । मुझे मेरा चेहरा देख कर खुद हसी आ गई ।

गीता बबिता भी खुब तेज तेज हस रही थी ।मैने जल्दी जल्दी सारे बिन्दी उतार दी ।

गीता - हिहिहिह भैया सिर्फ इतना ही नही और भी है खोजो खोजो ।

मै अचरज से - और कहा है दिख नही रहा

बबिता - वो आप खोजो भईया

मै - ठीक है रहने दो मै खोज लूंगा अब जाने दो मुझे फ्रेश होना

गीता - हा हा जाओ जाओ बाहर बुआ लोग नाना सब देख कर आप पर हसेन्गे हिहिहिहिह

मै गीता तो पकड़ा और लिटा कर उसके पेट मे गुदगुदी करने लगा और वो छटपटाने लगती है जिससे दो तीन बार मेरी उंगलिया उसके मुलायम चुचियो को छू जाती है ।

मै उसे गुदगुदाते हुए - अब बताओ कहा कहा लगाया है तभी छोड़ूंगा तुझे

गीता - हा हा हा हा हा हा हा हा हा अरे भईया रुको तब हिहिहिहिही ना बता हहहहहहाहह ऊंगी हाह्हाहाहाहाहाह्हा

मैने उसे छोड दिया

गीता हाफ्ते हुए - ह्य्य्य्य मै तो मर ही जाती

मै - जल्दी बता नही तो तेरा गला दबा दूगा और सारा प्यार बस गुडिया को मिलेगा ,,,,ये बात मैने उसके गले को दोनो हाथो मे हलका सा पकड कर की

गीता उस्मे भी हस्ने लगी और बोली - भईया प्लीज छोडो ना हिहिहिही बहुत गुदगुदी लग रही है ,, मै बता रही हू ना

मै उसे छोड़ते हुए - हा चल बता

गीता - अपना टीशर्ट उठाओ

मै अपना टीशर्ट उपर किया तो मेरे नाभि के चारो तरफ 5 6 बिंदीया चिपकी

मै गिता को घुरते हुए सारे निकाल दिये

बबिता हसे जा रही है थी ।

मै - अब हो गया ना चलो अब जाने दो

बबिता - अभी कहा भईया अभी भी बाकी है हहहहहहा

मैने तुरंत बबिता की कमर को पकड़ा और चींटी काट लिया

बबिता - अह्ह्ह्ह भैया क्या करते हो दर्द होता है न

मै - चल बता और कहा है नही तो इस बार दाँत लगा कर काटूंगा ।

बबिता थोदा शर्माते हुए - भक्क भैया मै नही ब्ताऊगी आप जाओ बाथरूम मे देख लेना

गीता - मैने बोला था ना वहा मत लगा ,,, अब बता ना क्यू हिहिहिही

बबिता - तू चुप कर सब तेरी वजह से शुरू हुआ

गीता - मै तो बस शुरू किया ना जगह तो सारी तुने चुनी ना

मै उन दोनो को झगड़ते देख बोला

मै - अरे तुम दोनो शांत रहो और ब्तओगी की कहा लगाया है आखिरी बिन्दी

बबिता - भईया आप प्लीज बाथरूम मे जाकर देख लो ना मिल जायेगा

मै - नही तुम लोगो ने बहुत शरारत कर ली अब तुम ही बताओगी की कहा लगायी हो

गीता चहकते हुए - भईया मै बताऊ

बबिता - नही गीता ,, नही तो जान ले मै भी वो ब्ता दूँगी जो तुने किया था ।

गीता झेपते हुए - सॉरी भैया फिर मै नही बताने वाली हिहिहिही

मैने सोचा ये लोग ऐसे नही मानने वाले मुझे ही कुछ ड्रामा करना पडेगा ।

मै ठीक है मत बताओ मै खुद ही जाकर बाथरूम मे सीसे मे देख लूंगा,, लेकिन अब तुम लोग अब मुझसे बात मत करना कभी ,, मैने झुटमुट का गुस्सा करते हुए उठा और बिस्तर से उतरने लगा ।

तभी गीता बबिता एक साथ बोली - नही भैया प्लीज ऐसा मत करो हम बताते है ना

मै एक कातिल मुस्कान से घुमा और उन्के सामने फिर अपना चेहरा सीरियस कर लिया और बिस्तर एक बगल मे खड़ा हो गया जबकि वो दोनो बैठी ही थी ।

मै - ठीक है बताओ लेकिन एक शर्त है उसे तुम लोग ही निकालोगे

बबिता - क्या , नही नही नही भैया हम बता देते हैं आप निकाल लेना जैसे बाकी सब निकाले

मै - लगाया तुम दोनो ने ही था ना तो निकालोगे भी तुम ही

गीता - मैने नही सिर्फ़ बबिता ने भैया

बबिता - और तुने जो किया वो

मै - ठीक है फिर बबिता बिन्दी निकालेगी और गीता ने जो किया वो मेरे सामने फिर से करेगी , हिसाब बराबर

गीता चौकते हुए - नही नही भईया प्लीज

बबिता हस्ते हुए - अब मज़ा आयेगा बहुत हसी आ रही थी ना तुझे ।

मै थोडा कडक होकर - वो सब छोडो और जल्दी से बताओ कहा है और उसे निकालो

गीता बबिता मेरे बातो से सहम गयी और डर हिचकिचाहत उन्के चेहरे पर साफ दिख रहा था ।

मै अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था कि ये लोग डर गयी है। हालांकि मै होने वाले रोमांच से अंजान था । मेरे लिए वो बचपन की दो छोटी छोटी गुडिया जैसी ही थी , लेकिन आने वाले पल मे मुझे उनके बडे होने और जवानी में कदम रखने का आभास होने वाला था ।

मैने वापस से बबिता को बोला - गुडिया जल्दी करो मुझे फ्रेश होने जाना है

वाकई उस समय मे मुझे पेशाब ल्गा था लेकिन इत्ना भी तेज नही की कण्ट्रोल ना हो ।

बबिता सहमे हुए मेरे पास आई और घुटने के बल बिस्तर पर बैठ गयी और कान पकड कर बोली - भैया आप प्लीज गुस्सा ना होना

मै थोदा सा नाटक करते हुए तेज आवाज मे - हा ठीक है पहले निकालो कहा लगाया है

बबिता - वो आप अपना लोवर निचे करो

मै चौकते हुए सोचने ल्गा कही इसने मेरे ... नही नही ऐसा नही होगा ये लोग बदमाश है लेकिन ऐसी शरारत नही ,,, ये सब सोच कर मेरे लण्ड मे उभार उठने लगा

मै - लोवर क्यू

बबिता - आप निकालो ना

फिर मैंने लोवर को जांघो तक किया और मेरा अंडरवियर दिखने लगा साथ मे मेरे लण्ड की मोटाई का उभार भी ।

बबिता - अब ये भी निचे करो

मै समझ गया कि जरुर बबिता ने शरारत मे मेरे लण्ड पर बिन्दी लगा दी है

मै - ये तू क्या कह रही है और कहा पे लगा दी है बिन्दी ,, मुझे नँगू पँगू करोगी क्या हिहिहिही

बबिता मुझे हस्ता देख थोड़ी नॉर्मल हुई

बबिता - वो बिन्दी निकालने के लिए आपको नँगू पँगू होना पडेगा ,,इसिलिए तो बोली ना मै कि आप बाथरूम मे जाकर देख लो

मै - ठीक है कोई बात नही अब जान गया हू तो खुद ही निकालो

ये सोच कर की बबिता ने मेरे लण्ड पर बिन्दी लगायी है और वो उसे मेरे सामने निकालेगी ,,मेरा लण्ड और टनटना गया

बबिता शर्माते हुए - हा लेकिन आप पहले ये नीचे करो ,,मेरे अंडरवियर की तरफ इशारा करते हुए बोली

मै भी एक नजर गीता और बबिता को देखा वो अब मुझे बचपन की कोई गुडिया नही दो जवान होती माल नजर आने लगी थी ।

फिर मैने अपना अंडरवियर भी निचे घुटनो तक कर दिया जिससे मेरा लण्ड फुदक कर एक सीध मे बबिता के सामने कडक होकर खड़ा हो गया ।

गीता और बबिता आन्खे फाडे मेरे लण्ड को निहारे जा रही थी ।

गीता - इतना बड़ा ,,,,

जैसे ही मैने गीता की आवाज सुनी मुझे थोदा खुद पर गर्व हुआ और उसकी तरफ देखा तो वो मुझे देख कर शर्मा गयी ।

फिर मै - कहा है बिन्दी गुडिया यहा भी नही दिख रहा है

बबिता - भईया वो आप अपना ये उपर उठाओ ,, उसके निचे चिपकाई हू ताकि आप खोज ना पाओ

मुझे खुशी हो रही और थोडा सा नशा भी की मेरी दो जवान होती बहनों ने खेल खेल में ही बहुत आगे आ चुकी थी

मै - नही मै नही कुछ करने वाला ,तुमने लगाया है तुम्हारी सजा है कि तुम खुद निकालोगी

बबिता सहमी सी थी और मै नाराज ना हो जाऊ इसिलिए उसने अपने नाजुक हाथो से मेरे लण्ड को थामा और उपर की तरफ उठा दिया ,,, बबिता के कोमल हाथो का स्पर्श अपने लण्ड पर पाते ही मेरे लण्ड का बचा कुछ हिस्सा भी पुरे जोश मे फड़कने लगा ,,,फिर बबिता ने मेरे लण्ड और आड़ो के बीच से एक छोटी से बिन्दी को निकाला और खुश होते हुए बोली - हो गया भईया ये रहा हिहिहिही , और मेरे लन्ड़ को छोड दिया जो काफी समय तक हिलता रहा ,,इस दौरान गीता लगातर मेरे खड़े लण्ड पर नजरे बनाये हुई थी ।

मै - हम्म्म चलो ठीक है हो गया ,,अब आगे से ऐसी बदमाशि मत करना ठीक है ,अब मै जा रहा हू फ्रेश होने

बबिता - अरे भईया ऐसे कैसे ,, मुझे सजा दी और गीता को क्यू नही ।

मै - अब उसने क्या किया था

बबिता - उसने तो .... आप इसी से पुछो हिहिहिही

मै - मीठी चलो बताओ अब तुमने क्या किया था

गीता तो मानो मेरे खड़े लण्ड मे खोयी हुई थी और मेरे पूछने का इन्तेजार कर रही थी ।

गीता - भईया वो मै कैसे बताऊ

मै - बता नही सकती तो कर के दिखा दो और तुम्हारी सजा भी पूरी हो जायेगी ,क्यू गुडिया

बबिता ह्स्ते हुए - हा भैया सही कह रहे हो आप इहिहिहिही

मै - चलो मीठी

मेरे इतना कहते ही मीठी घोड़ी बनकर बिस्तर पर से चलते हुए मेरे खड़े लण्ड के सामने आई और अपने मुलायम होठो को सिकोड़ कर मेरे लण्ड सुपाडे को चूम लिया ।

मै शौक मे आ गया कि मै जिन्हे नादान समझ रहा था वो दोनो कीतनी आगे निकली ।

गीता के मुलायम चुम्मी का अह्सास से मुझे बहुत शुकून मिला लेकिन साथ मे नशा भी होने लगा । मैने सोचा अगर ये लोग ऐसी है तो क्यू न थोडा बहुत इनसे मज़ा लू , लेकिन यहा नही बाहर टयूबवेल जहा कोई ना हो ।

मै थोडा नाराज होते हुए अपना अंडरवियर और लोवर उपर कर लिया और बोला - मीठी ये सब क्या है तुम दोनो बहुत बिगड़ गयी हो

गीता मायूस सा मुह बना कर - सॉरी भैया वो आप सो रहे थे तो ये भी सो रहा था और जब बबिता ने आपके वहा पे बिन्दी लगायी तो ये बहुत प्यारा दिख रहा था तो मैने उसे छोटा बाबू समझ कर किस्सी कर लिया ।

बबिता - हा भैयया प्लीज नाराज ना हो

मै - तुम लोगो ने जो किया उसकी सजा अभी और मिलेगी ,

गीता बबिता - क्या अभी और लेकिन क्या

मै - वो तो बाद मे दूँगा लेकिन अभी मेरा गुस्सा कम करना है तो मुझे कही घुमाने ले चलो ।

गीता बबिता एक साथ खुश होते हुए कहा- ठीक है भैया

गीता - चलो आज हम आपको हमारे फेवरिट ट्यूबवेल पर ले जायेंगे इहिहिहिही

बबिता - हा भैया बहुत मज़ा आयेगा ।

मै - ठीक है मै जा रहा हू फ्रेश होने तब तक तुम दोनो तैयार हो लो

गीता - हा ठीक है हमे 20 मिंट लगेगा

मै -20 मिंट क्यू

बबिता - अरे भैया वो हम कपडे लेके जाते है ना वहा हीहीहि

मै - ठीक है जल्दी आओ तुम सब

फिर वो दोनो फुदकते हूए बाहर निकल गयी और मै भी मन मे इन दोनों से मज़े लेने का प्लान बनाते हुए बाथरूम मे गया और फ्रेश हुआ और अपने कमरे मे गया , जहा मा और मौसी दोनो साथ मे सोये थे । मा मौसी की तरफ पीठ करके सोयी थी ।

मै मौसी को देख कर उत्तेजित हो गया और धीरे से दरवाजा बंद करके मौसी के पास लेट गया ।

फिर मैने मौसी की तरफ करवट ली और सारी का पल्लू उनके उपर से हटा दिया ,और ब्लाउज मे कसी हुई चुचिया देख कर मेरे मुह और लण्ड दोनो मे पानी आ गया ।

फिर मैने मुह खोला और ब्लाऊज के उपर से एक चुचि को मुह मे भर कर हल्के दाँत से काटने लगा और ब्लाऊज पर से ही जीभ लगा कर ब्लाउज गिला करने लगा ।

इतने से मेरा मन कैसे भरता

और मै मौसी के कन्धे के बगल मे घुटने के बल आया और लोवर अंडरवियर साथ मे निचे कर लण्ड को मौसी के मुह के सामने हिलाकर खड़ा करने लगा ,,,कुछ ही पलो मेरा लण्ड टनटना गया और मैने लण्ड को खोल्कर सुपाडे को मौसी के नाक के ठीक नीचे रखी जिससे मौसी को मेरे लण्ड की खुस्बु मिले और वो उत्तेजित हो जाये ,,और हुआ भी यही कुछ ही सेकण्ड मे मौसी के चहरे के भाव बदलने लगे और सांसे भारी होने लगी , ज्यादा सांस लेने के लिए अब वो हल्का हल्का मुह खोलकर सांसे भर रही थी ,, मै इसी मौके की तालाश मे थे और लण्ड को उथा कर अब मौसी के मुलायम होठो पर रगड़ने लगा ,, मेरा सुप्पडा अब मौसी के दोनो होठो के बिच मे था और मौसी के मुह की गरम सासे उसे पिघलाने लगी। ऐसे मे जब मौसी से बरदास्त मा हो सका तो उनकी आंखे खुल गयी और मुझे मेरा लण्ड उन्के मुह पर रगडता देख कुछ बोलती उससे पहले मैने अपने मुह पर उंगली रख मा की तरफ इशारा किया जो मौसी की तरफ पीठ किये करवट ले कर सोयी थी ।

फिर मैने लण्ड को उन्के मुह से हटाया और एक जोरदार किस्स मौसी के होठो पर किया जिसमे मौसी ने भी मेरा साथ दिया । फिर मै उठा और वाप्स उसी पोजीशन मे आकर लण्ड को मौसी के मुह के उपर रख दिया और मौसी ने बिना कुछ बोले मेरी आँखो मे देख्ते हुए मुह खोलकर जीभ निकाली और मेरे सुपाडे को चाट लिया ,,,

अह्ह्ज्ज पुरे बदन मे सिहरन सी दौड़ गयी

मैने अपना कमर आगे किया जिससे मेरा लण्ड एक सिरे से मौसी के होठो के बिच से होता हुआ आड़ो तक गया ,,, और मौसी ने एक हाथ से मेरे लण्ड को थामकर उसकी चमडी आगे पीछे करने लगी और जीभ निकाल कर मेरे आड़ो को चाटने लगी।

अब मेरे चेहरे के भाव बदलने लगे थे, मै आखे बंद किये मौसी की कलाबाजी का आनन्द लेने ल्गा ,,,हल्की सिस्किया आने लगी ,,, जिसका पता मौसी को भी था क्योकि मै मेरे लण्ड पर पडने वाले हर अह्सास से सिस्क पडता और मेरे एक हाथ मे कैद मौसी की चूचि दब जाती ,,,जिससे मौसी उत्तेजित होकर मेरे आड़ो को मुह मे भर कर और जोर से चुस्ती

अब ये recycle बन गया था कि जब जब मौसी मेरे आड़ो पर जोर डालती तब तब मै उसकी चुची मिज देता और वो वापस से मेरे सुपाडे पर चमडी आगे पीछे किये मेरे आड़ो को चुस्ती रहती ।

फिर मै खुद पीछे हुआ और लण्ड को उन्के होठो पर वापस ले गया और इस बार मौसी खुद एक कोहनी के सहारे करवट लेकर मेरे लण्ड को चूसने लगी । अब मेरे दोनो हाथ उन्के बालो पर आ गये और मै खुद उनका सर लण्ड पर हल्का दबाता जिससे वो गले तक मेरे लण्ड को ले जाती । बिच बिच मे मौसी मेरे लण्ड को थाम कर उसके सुपाडे पर जीभ नचाती जिससे मेरा रोम रोम में सिहरन होने लगती और मेरी सारी पकड कमजोर होने लगती थी ,,,ऐसे ही 10 मिंट की जोरदार चुसायि के बाद मेरा आखिरी पड़ाव आ चूका था और मौसी के मुह लण्ड कसने लगा ,,, 10 मिंट की लागातार मुह पेलाई से मौसी के मुह की लार गाढी हो गयी थी और मेरा पुरा लण्ड उससे लिपट गया था । आखिरी समय मे मैने मौसी का सर पकड़ा और तेज़ी से उन्के मुह में पेलने लगा जिससे मेरे हर धक्के के साथ मुह से गुउउउक्क्क गुउउउक्क्क्क की आवाज आने लगी और 12 15 झटको मे मै मौसी के मुह मे झड़ने लगा ,,, लेकिन मौसी तो मानो इसी के इंतेजार मे थी जैसे ही मेरा झड़ना शुरू हुआ वो मेरी कमर को खिच कर पुरा का पुरा लण्ड मुह मे भर लिया और मेरा सारा माल मौसी के गले मे गिरने लगा फिर मौसी ने मेरे लण्ड को बाहर निकाल कर अच्छे से साफ करके छोड दिया और सीढ़ी लेट गयी।

मै भी थक कर टेक लिये वही बैठ गया । फिर एक नजर मा की तरफ देखा तो वो वैसे ही करवट लिये सोयी हुई थी ,, फिर मेरी नजर मौसी पर गयी तो वो अपने मुह पर लगे मेरे माल की उंगली से साफ कर चाट रही थी । मुझे मौसी को देख कर बहुत प्यार आया और मैने उन्के सर पर बहुत प्यार से हल्के हाथो से हाथ फेरते मुस्कुरा कर उनको देखने लगा ,,, बदले मे मौसी मे नजर उपर की और मुझे उनको दुलारता देख वो वाप्स से मेरी गोदी मे आकर मेरे लण्ड को चूम लिया और वापस से वही लेट गयी ।

मै भी थोडी देर आराम किया और तभी गीता बबिता दरवाजे पर आकर मुझे आवाज देने लगी । फिर हमने जल्दी जल्दी अपने कपड़े ठीक किये और फिर मै उठ कर दरवाजा खोल्ने गया ,,फिर वो दोनो तेज आवाज मे बोल्ने लगी - चलो ना भैया देर हो जयेगा नही तो

मा - कहा जा रहे हो तुम लोग अभी

मै मा की आवाज से थोडा चौका शायद गीता बबिता की शोर गुल से उठ गयी हो

गीता - बुआ हम लोग जा रहे भैया को घुमाने आप भी चलो ना और आप भी बड़ी बुआ

मौसी - अरे नही नही बेटा तुम लोग जाओ अभी तुम्हारे बबा की तबियत नही ठीक है कोई तो होना चाहिए ना देख्ने के

अब चौकने की बारी मेरी और मा की थी

मा थोड़े फ़िकर मे - क्या हुआ दीदी बाऊजी

मौसी मुस्करा कर लेकिन आँखो से इशारे करते - अरे डरने की बात नही छोटी सब ठीक है ,,तुम लोग जाओ बच्चो कोई टेनशन ना लेना और राज इन दोनो का ख्याल रखना

बबिता - ठीक है बुआ हम दोनो भैया का ख्याल रखेंन्गे हिहिहिही

मा - बदमाश अब जाओ और जल्दी घर आजाना

गिता बबिता - जी बुआ ,,,चलो भैया

फिर मैं उन लोगो के साथ निकल गया खेतो की तरफ

अब देख्ते है आने वाला पल क्या नये रोमांच लाने वाला है राज के लिए ..
 
Update 41

मै गीता बबिता के साथ पीछे के रास्ते खेतो की तरफ निकल पडा । धान की खेती से चारो तरफ हरियाली छायी थी और काफी खुशनुमा माहौल था ।

मेरे आगे गीता बबिता चल रहा थी । बबिता ने एक झोला लिया था । दोनो ने कपडे बदल लिये थे वो दोनो अब हाफ टीशर्त और कैफ्री मे थी ।

सबसे आगे बबिता हाथ मे झोला लिये चल रही थी उसके पीछे गीता ।

कैफ्री मे गीता की गाड़ उभर कर सामने दिख रही थी और चल्ते हुए पानी से भरे गुब्बारे के जैसे हिल रही थी । गीता की गाड़ देख कर उत्तेजित हो गया था और मन कर रहा था कि कैसे करके गीता की नरम ताज़ी जवानी को मसल पाऊ । इसी की प्लानिग मे मै चुप था इस दौरान गीता बबिता ने काफी कुछ बताया जो मै अनसुना करते हुए सारा ध्यान गीता की हिलते गाड़ मे लगाये हुए उसके पीछे चल रहा था ।

मै गीता के करीब गया और उसके कन्धे को दोनो हाथो से पीछे से पकदते हुए चलने लगा

मै - मीठी कहा ले जा रही हो मुझे

गीता - एक खास जगह भैया वहा आपको बहुत मज़ा आयेगा

मै - लेकिन कहा

गीता ने उंगलि से इशारा करते हुए बताया वहा

मेने देखा करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर एक पक्का ट्यूबवेल है जिसके बगल मे एक मंजिला मकान भी ब्ना है । फिर मैने वापस मुड कर गाव की तरफ देखा तो हम गाव से काफी दुर आ गये थे ,, इत्ना की आंखे बारीक करने पर दिखे

मै - इत्ना दूर,,क्या खास है यहा गुडिया

बबिता - वो तो चल कर पता चलेगा ना ,, बाबा ने ये खास हम दोनो के लिए बनवाया है और यहा कोई नही आता हिहिहिही

मै खुस हो गया चलो कुछ अच्छा तो हुआ इतना दूर आने का लेकिन इन दोनो को एक साथ कैसे फसाऊ । चलो वहा जाकर कोई जुगाड देखता हू ।

फिर हम तीनो कुछ देर बाद ट्यूबवेल पर आ गये ।

बहुत ही बड़ा हातेदार ट्यूबवेल था । जिसमे पानी एक्थ्था होता था । उसमे सीने बराबर पानी था और चौड़ाई इत्नी की बडे आराम से दस लोग अंदर नहा ले ।

बबिता ने झोले से चाभी निकाली और ट्यूबवेल खोल कर मोटर चालू कर दिया,,,, कुछ ही देर मे हाता भरने लगा ।

गीता - है ना भैया मज़ेदार जगह ,,,

मै खुश होते हुए - हा मीठी ये तो स्विमिंग पूल जैसा है ।

बबिता - हा ये हम लोगो ने बाबा से कह कर बनवाया है हम रोज यहा नहाने आते हैं ।हिहिहिहिह

मै खुश होते हुए चलो फिर नहाते है अजाओ

फिर मै जलदी से अपने कपडे निकाले और अंडरवियर मे आ गया और छपाक से पानी से भरे हाते मे कूद गया

गीता बबिता मुझे उतावला देख हसने लगी

फिर मै थोडा सा तैर कर उन्के सामने आया और पानी के छीटे मारने लगा वो दोनो चिल्लाए हुए पीछे हो गयी।

मै - अरे आजओ ना गुडिया मीठी जल्दी से

फिर बबिता ने झोला टांग दिया और सीढ़ी से उपर आने लगी

मै - अरे कपड़े तो निकालो

बबिता - हम तो ऐसे ही नहाते है और फिर मैने कपडे लाये है ना

मै - धत्त कपड़ो मे नहाने का क्या मज़ा

गीता - वही तो मै भी कहती हू लेकिन यही बोलती है कि कोई आ जायेगा कोई आ जायेगा

मै - अरे कोई नही आयेगा यहा ,,, देखो दूर दूर तक कोई नही है और कोई आता दिखा तो तुरंत घर मे चले जाना

बबीता - हा लेकिन बिना कप्डो के कैसे भैया मुझे शर्म आयेगी ।

गीता - हे भगवान,,, पगली भैया अंडरगार्मेंट्स मे बोल रहे है नँगू पँगू होने को थोडी कह रहे हैं,,,,क्यू भैया

मै तो चाहता था कि नंगे हो जाये लेकिन भूखे पेट को सुखी दाल ही सही ।

मै - हा और क्या देखो मै भी तो अंडरवियर मे हू ।

बबिता -ठीक है भैया आप नहाओ हम कपडे निकाल कर आते है चल गीता

फिर वो दोनो ट्यूबवेल के कमरे मे गयी

यहा मै पानी के खड़े खड़े ये सोच कर मस्त हो रहा था भीगने के बाद गीता बबिता की चुचिया देखने को मिलेगी और यही सोच कर मेरा लण्ड और खड़ा हो गया था । मै सोच ही था कि दोनो बहने अंडर गार्मेंट्स मे मेरे सामने आ गई । दोनो फुल वाली पैंटी और फुल टेप पहना था

सफेद सूती चौडे पटटे वाली टेप मे गीता के डार्क निप्प्ल साफ पता चल रहे थे और रसिली आम जैसी उसकी चुचिया टेप के अन्दर पुरा कसाव लिये थी ,,,गीता की मखमली जान्घे देख कर पानी मे मेरा लण्ड फुकार मारने लगा । वही बबिता ने मरून रंग का polyster वाली पतली पट्टी का टेप पहना था जो उसके बदन से पुरा चिपका था ,,, गुलाबी पैंटी मे बबिता की चिकनी टाँगे कहर बरपाया जा रही थी ।

मुझे खुद को घूरता देख दोनो शर्मा रही थी ।

मै - चलो चलो अजओ जल्दी

गीता - भैया आप किनारे हो जाओ मै दौड़ कर कुदुंगी

फिर मै थोडा किनारे ही गया

गिता कुछ दूर पीछे हट कर दौड़ते हुए मेरी तरफ आने लगी ,,, दौड़ते वक़्त उसकी मोटी चुचिया उपर निचे हो रही थी और वो छपाक से पानी मे कूद गयी जिससे उसका पुरा जिस्म भीग गया ,,,,और उसके बचे चुचे भी अब साफ दिख कर रहे थे ,,,उसके ब्राउन निप्प्ल साफ साफ टेप के उपर नजर आ रहे थे , मै गीता मे मगन था कि तभी छपाक हुई और बबिता भी पानी मे आ गई ।

दोनो ने तेज़ी से मेरी तरफ पानी मारना शुरू कर दिया और मै भी जवाब मे उनकी तरफ पानी मारने लगा । जब वो थक गई तो मै धीरे धीरे तैरते हुए बबिता के पीछे आया और उसको पानी मे से अपनी बाहो मे उठा कर वापस पटक दिया जिससे उसकी टेप उपर चढ़ गयी और उनकी अनछुई नाभि दिख्ने लगी । बबिता ने तुरंत अपने कपडे सही किये ।

बबिता - आह्हह भैया क्या कर रहे हो मुझे ही क्यू परेशान करते हो गिता को क्यू नही

मै मुस्कुराया और गीता को देखा और उसकी तरफ तैरने लगा,,मुझे अपनी तरफ आता देख

गीता चिल्लाते हुए - न्हीईईईईई भैयाआआ प्लीज नही

फिर मैंने उसे किनारे पर घेर लिया और उसकी गुदाज गाड़ के निचे से उसको थामा और उसकी पीठ को थामा और पानी मे वापस पटक दिया ।

फिर हम लोग खुब हसे और थोडा तैर कर हाते की बाऊन्दरी पर बैठ गए ।

तभी गीता - भैया मुझे एक नम्बर जाना है ,,,वो छोटी उंगली से इशारा करते हुए बोली

बबिता - मुझे भी

मै - तो यही हाते के बगल मे कर लो

बबिता - भ्क्क्क यहा कैसे

मै - तो ऐसे कप्डे मे कहा जाओगी

गीता - हा सही कह रहे हैं भैया बबिता

मै - तुम दोनो कर लो मै देख रहा हू कोई आये ना

फिर वो दोनो मेरे पीछे उतर गये , दीवाल से लग कर ही बैठ गये और मुझे उन्के मूतने की मधुर धुन आने लगी

मै - गुदिया सिटी क्यू मार रही हो सही से करो कोई देख लेगा आवाज करोगी

गीता - भैया वो हम नही मार रहे

मै जानबुझ कर उन्के सामने आ गया और इधर उधर देखते हुए नाटक करते हुए बोला - कौन है जो सिटी मार रहा है कौन है ।

गीता हस्ती हुई बोली - कोई नही था भैया

जब मै उन दोनो की तरफ देखा तो वो कर चुकी थी पेसाब

मै - फिर कौन था

बबिता - वो भैया जब हम लोग करते है ना सुसु , तो सुसु वाली जगह से आती है सिटी

मै अचरज का भाव बना कर - अच्छा , लेकिन मै करता हू तो नही आती

गीता - भ्क्क्क भैया आप लड्की थोडी हो हीहीहिही

बबिता - चलो भैया फिर से मसती करते है

मै - अरे रुको मुझे भी सुसु करना है

फिर मै उन्के सामने ही खड़े लण्ड को निकाल कर मुतना शुरू कर दिया और वो दोनो आंखे फादे मेरे खड़े लन्द को देख रही थी और जब मैने पेसाब कर लिया तो आखिरी की कुछ बुन्दे अंडरवियर पर गिरा दी

मै - अरे अरे अरे

गीता - क्या हुआ भैया

मै - वो मेरा सुसु अंडरवियर पर गिर गया अब इसको पहन कर कैसे पानी मे जाऊ ,,, ऐसा करो तुम दोनो नहा लो

गीता - क्या भैया आपके बिना मज़ा नही आयेगा ,कोई बात नही भैया आप उसे निकाल दो ,,, वैसे भी आप नँगू पँगू अच्छे लगते हो हिहिहिजी

जहा एक तरफ गीता थोडी फ्रैंक थी वही बबिता शर्मिली

फिर मैने अपना अंडरवियर निकाला और वही किनारे रखा और वापस दोनो के पास आ गया,,, दोनो अब भी कनअखियो से मेरे लण्ड को निहारे जा रही थी ।फिर मैने बबिता को उठा कर वापस पानी मे फेक दिया

और गीता को उठाने गया तो वो छतकने लगी जिससे जल्दी जल्दी में मैने उसे आपने हाथ से थाम लिया और मेरे एक हाथ मे उसकी मुलायम चुचीया आ गई वही दुसरी हाथ मे सिरफ एक जांघ

और उसे भी उठा कर पानी मे डाल दिया जिससे बबिता बहुत खुश हुई

फिर मै भी नंगा पानी मे कूद गया

मैने सोचा कुछ जुगाड लगाऊ कैसे इन लोगो से मज़ा लू । कुछ देर हमने पानी मे और मस्ती की ,,मै खेल खेल मे गीता बबिता को पकड लेता और मेरा लण्ड उनकी गाड़ को छू जाता ,,,लेकिन उनहोंने कोई खास रियक्ट नही किया ,, थोडी देर ऐसे ही समय बिताने के बाद

गीता - भैया आपका मोबाइल कहा है

मै - मेरे लोवर मे होगा क्यू

गीता - चलो ना हम लोग बैठ कर पानी मे पैर डाल कर फील्म देखते है

तभी मानो मेरे प्लान को नही दिशा मिल गयी हो

मै - गुडिया जाओ मोबाइल निकाल कर लाओ

फिर बबिता बाहर निकली और मेरा मोबाईल लाकर दिया

फिर हम तीनो ट्यूबवेल के बड़ी दीवाल की तरफ टेक लगा कर पानी मे पैर डाले बैठ गये । मेरे दाई तरफ गीता और बाई तरफ बबिता बैठ गयी ,,,

गीता - कौन सा फिल्म दिखाओगे बताओ भैया

मै - जो तुम लोग बोलो ,, कहो तो शहर वाले स्विम्मिग पूल वाला लागाऊ जिसमे कैसे विदेश मे लोग नहाते है

बबिता- हा भैया वही लगाओ

गीता - हा भैया लगाओ

मै उन दोनो के भोले पन पर मुस्करा कर जलदी से गूगल पर threesome in pool सर्च किया और एक साइट खुली जिसमे एक स्विमिंग पूल में थ्रीसोम सेक्स का सीन था ।

और मैने वो वीडियो चालू कर दी । वीडियो के शुरू मे एक आदमी पूल मे तैर रहा होता है । इसी बीच पूल मे दो पोर्न स्टार आती है और अप्ने कपड़े निकाल कर पानी मे कूद जाती है और वो भी अलग अलग तैरने लगती है ।

गीता - भैया क्या विदेश मे ऐसे छोटे छोटे कपड़े पहन कर सब लडकिया खुले मे तैरती है

मै - हा मीठी ,,कभी कभी तो वो बिना कपडे के भी तैरती है

बबिता इस बात पर ह्स देती है और वापस वो लोग वीडियो देखने लगती है ।

गीता और बबिता दोनो के एक एक हाथ मेरे कन्धे पर और एक एक हाथ मेरी दोनो जांघो पर थे । और मेरा लण्ड तो क्ब्से खड़ा खड़ा दर्द भी करने लगा था ।

तभी वीडियो मे वो आदमी पुल के किनारे आधे पानी मे खड़ा हो जाता है और इधर दोनो पोर्नस्टार ह्स्ते हुए आपस मे कुछ बाते करती है फिर एक साथ पानी के अन्दर तैरते हुए उस आदमी के पास चली जाती और उनमे से एक लड्की उस आदमी का अंडरवियर निचे कर देती और दुसरी उसके लण्ड को चूम कर पानी मे तैर कर दुसरी तरफ उससे दुर चले जाते है और उस आदमी को उसका अंडरवियर हवा मे दिखा कर चिल्लाते है ।

ये सीन देख कर गीता और बबिता खुब हस्ती है ।

मै - देखा ये दोनो तुम लोगो जैसी ही शरारती है ।

दोनो वापस से हस्ती है और वीडियो देखने लगती है । वीडियो मे वो दोनो लड़किया एक दुसरे को किस्स करती है और उस अदमी को उंगली से अपनी तरफ बुलाती है ।

ये सीन देख कर गीता - हिहिही भैया ये देखो दोनो लड़किया किस्स कर रही है

मै वीडियो को रोक कर - हा वो तो होता है विदेशो मे ऐसे ही

बबिता - हा लेकिन लड्की लड्की मे भी क्या भैया

मै - हा कोई भी किस्स कर सकता है ,,,, अच्छा जब तुम लोग छोटे थे तो क्या मामी प्यार से तुम दोनो को चुम्मी नही देती थी होठो पर गालो पर

गीता - हा भैया देती थी

मै - फिर वही है ,,,हो सकता हो ये दोनो बहने हो और आप मे प्यार जता रही हो

बबिता - हा भैया सही कह रहे हो आप

मै मुस्करा कर तो बताओ क्या तुम दोनो भी आप मे प्यार करते हो

बबिता - मै तो करती हू भैया लेकिन यही हमेशा लड़ती रहती है

गिता - नही भैया हमेशा यही लड़ती है

मै - ठीक है ठीक है , अब कोई झगड़ा नही होगा , और आज से तुम दोनो कोई नही लडेगा ठीक है

दोनो ने हा मे सर हिलाया

मै - ठीक है चलो एक दूसरे को किस्स करो और बताओ कितना प्यार करते हो

बबिता थोडा अजीब सा मुह बना कर - क्या सच मे भैया जरुरी है ये करना

मै - हा , अगर तुम लोग आपस मे प्यार से नही रहोगे तो मै कभी नही आऊँगा तुम दोनो से मिल्ने

गीता - देखा तेरी वजह से फिर भैया नाराज हो गये

बबिता - मै तो तैयार हू तु बता

मै - शांत हो जाओ और एक दुसरे को किस्स करो

फिर गीता और बबिता ने मेरे सामने मेरे कंधो को थामे एक दुसरे की तरफ झुक कर हल्का सा एक दुसरे के होठो को चुमा और वाप्स आ गई ।

मै - अरे ऐसे नही भाई,,, देखा ना वो दोनो लडकिया कैसे की है

गीता - उसके लिए तो हमे खड़ा होना पडेगा

मै - तो उतर जाओ पानी मे

फिर वो दोनो पानी मे उतर गये

मै - हा अब करो किस्स

फिर वो दोनो सामने आई और थोडा शर्मा रही थी फिर गिता ने पहल की और बबिता के चेहरे को थामा और उसके निचले होठो को चुस लिया ।नरम होठो को चूसना किसे नही भाता वही गीता के साथ हुआ आज वो पहली बार किसी के होठो को चुस रही थी और उसे मज़ा मिलना ही था इसलिये वो जोश मे आ गई और बबिता के होठो को चुसने लगी , बबिता भी पहले झिझ्की फिर उसे भी अपने होठ खीचने से एक नया अह्सास मिला और वो भी गीता के होठो को चूसने लगी। दोनो उस नये रोमांच मे आंखे बंद खो गये और तब तक नहीं रुके जब तक उनकी सांसे भारी नही हो गयी । इस दौरान मैने उनदोनो को देखकर थोडा बहुत लण्ड को हिला कर आराम देता रहा

फिर दोनो हस्ते हुए अलग हो गए ।
 
गीता - अरे वाह इसमे तो बहुत अचछा लग रहा था

मै - प्यार करने मे खुसी मिलती ही है गुडिया

बबिता - देखा भैया हम दोनो कितना प्यार करते हैं आपस मे हिहिहिही

मै - हा देखा हिहिहिही चलो आजाओ

फिर वो दोनो मेरे अगल बगल वापस उसी पोजीशन मे बैठ गयी । और गीता ने अपने हाथ बढ़ा कर बबिता के गालो को छू कर एक पप्पी लेली । फिर वो दोनो और मै खुब हसे ।

बबिता - भैया लगाओ ना फिल्म देखते है ।

फिर मैने वापस से वीडियो प्ले कर दिया । वीडियो मे वो आदमी उनके इशारा करने पर तैर कर उनके पास जाता है और अपने अंडरवियर निकालने के लिए उनसे झगड़ा करता है

जिसे देख कर वापस से दोनो हसने लगती है ।

इसी बीच वीडियो मे वो आदमी कहता है - If you want some mercy then blow my cock both of you.

बबिता - भैया ये कह रहा है उन लड़कियो को ,,

मै वीडियो को रोका और बोला - अरे उन दोनो ने उस आदमी का अंडरवियर निकाला उसे परेसान किया तो वो भी उन लोगो को सजा दे रहा है

गीता - हा लेकिन वो दोनो तो कैसे खुश हो रही है देखो हिहिहिही पागल है ना सब

मै - अरे सजा इतना मज़ेदार है तो खुश होगी ना

बबिता - मतलब क्या सजा हुई है भैया इन दोनों को

मै वीडियो चालू कर दिया - खुद देखो तुम लोग

फिर वीडियो मे वो आदमी पूल के एक किनारे पानी मे पैर डाले लेट गया और वो दोनो लडकिया उसके दोनो तरफ पानी मे खड़े हो गए और उसके खडे लण्ड को देख कर एक दुसरे से इशारे कर कर हस रही थी । तभी दोनो ने एक एक हाथ से उसके खडे लण्ड को पकड़ा और सहलाने लगी । उपर से निचे की तरफ ,, और मै ये सब सीन देख कर उत्तेजित हो गया था और मेरा लण्ड भी पानी की सतह पर खड़ा हुआ था ।

गीता - हिहिहिही भैया ये दोनो तो बहुत खुश है ,, देखो कैसे उसके बाबू को पकड़ा हुआ है ।

बबिता - हा भैया कितना जोर से खिच रही है उसको दर्द नही हो रहा होगा

मै - अरे नही गुडिया इसमे दर्द नही मज़ा आता है

बबिता - भ्क्क्क इसमे क्या मज़ा हिहिहिही

मै - अरे अभी देखो उसे कितना मज़ा आयेगा

तभी वीडियो मे एक लड्की ने उपर आकर उसका लण्ड मुह मे भर लिया और चूसने लगी और वो आदमी उस लड्की के सर पर हाथ फेरते हुए मज़े मे आहे भर रहा था।

बबिता - आआ भैया देखो वो तो खा गयी उसका बाबू

मै - अरे खा नही रही है उसे चुस रही है ,जैसे हमे कुल्फ़ी चूसने मे मज़ा आता है ना वैसे इसे चुसने मे भी मज़ा आता है

गीता - हा भैया देखो कैसे वो मज़े से चुस रही है ।

बबिता - तभी वो दोनो खुश हो रही थी ना भैया

मै - हा अब समझी ,,, यहा ये दोनो मासूम बाते कर रही थी वहा मेरा लण्ड कडक और कडक हुए जा रहा था ।

इधर वीडियो मे दोनो लद्किया मिलकर उस आदमी का लण्ड बारी बारी से चूसे जा रही थी और ये दोनो बडे ध्यान से देख रही थी ।

मैने वीडियो रोका

गीता - क्या हुआ भैया वीडियो क्यू रोक दिया

मै - क्या सिर्फ़ देखोगी अपने भैया को खुश नही करोगी

बबिता - मतलब भैया

गिता - अरे बुधु भैया कहना चाहते है कि हम लोग भी उनके बाबू को चूसे हिहिहिह क्यू भैया

मै - हा कितनी समझदार है मेरी मीठी और उसके गालो को चूम लिया

बबिता - क्या सच मे उससे आपको मज़ा आयेगा

मै - मुझे ही नही तुम दोनो को भी आयेगा

फिर गीता फटाक से पानी मे उतर गयी और मैने मोबाईल को दीवाल मे एक मोके मे रख दिया । फिर बबिता भी उतर गयी ।

मै - हा मेरी दोनो प्यारी प्यारी बहनो चुसो अपने भैया का लण्ड

गीता और बबिता एक साथ - लण्ड, ये क्या है अब

मै - अरे जिसे तुम लोग बाबू कह रही हो उसे लण्ड कहते है ।

गीता ह्स्ते हुए - हा भैया सही कहा इसका यही नाम होना चाहिए,, लम्बा डण्डा यानी कि लण्ड हिहिहिहिही

बबिता - हा सही कह रही है तू

मै हस्ते हुए - चलो चलो जल्दी करो ना अब

तभी गीता और बबिता दोनो ने उस वीडियो के जैसे एक एक हाथ से मेरे लण्ड को थामा और चमडी को उपर निचे करने ल्गे ।

बबिता - भैया ये कितना गर्म है और मुलायम भी है

गिता - और बहुत टाइट भी है

मै - तो बताओ सबसे पहले कौन चूसेगा

गीता - मै मै ,,,मै बड़ी हू ना

बबिता - नही मै पहले ,मै बड़ी हू

गीता - तू कैसे बड़ी हो गयी

बबिता - देख मै तुझसे लम्बी हू

गीता - हा तो मै मै

बाबीता हस्ते हुए - हा हा अब बोल ना क्या हुआ हीहीहि

गीता - मेरे दूध तुझसे बडे है तो मै हुई ना बड़ी

गीता की बात सुनकर मुझे एक आइडिया आया सोचा लण्ड तो ये चूसेगी ही लेकिन उससे पहले मै इन्के दूध चुस लू ।

मै - अरे अरे तुम दोनो तो फिर से लड़ने लगी

गीता - भैया आप ही बताओ क्या मै इससे बड़ी नही हू क्या

मै दोनो को देखा

मै - हा लग तो रहा है

बबिता - क्या भैया आपको नही लगता मेरी हाईट इससे ज्यादा है

गीता - उससे थोडी होता है मेरे दूध तुझसे बडे है

बबिता - हा तो मेरे भी बडे है , मै लम्बी हू ना तो मेरा नही पता चलता समझी

मै - अरे तुम दोनो शांत रहोगी तो मै कुछ कहू

गिता बबिता - हा भाईया बोलो

मै - मै बारी बारी से तुम दोनो के दूध को पियुन्गा जिसका टेस्टि लगेगा वो बड़ी होगी

गीता - हाहह्ह्हहा क्या भैया आप भी इसमे अभी दूध थोदी ना निकलता है हीहीहि

बबिता - हा भैया आप भी बुधु हो हीहीहि

मै - अरे मै जानता हू कि अभी नही निकलता है ,,लेकिन मै ये कह रहा हू मुझे जिसका भी दूध चूसने मे ज्यादा मज़ा आयेगा वो बड़ी होगी

गीता - हा भैया ठीक है

बबिता - हा मै भी देखती हू

फिर मै भी पानी मे उतर गया और दोनो को पीछे से अपने आगे किया

मै - पहले मै तुम दोनो के दूध दबाउँगा की किसका ज्यादा मुलायम है

गीता - ठीक है भैया

अब मैने अपने दोनो हाथो को आगे की तरफ ले गया । गीता मेरे दाई तरफ थी जबकि बबिता बाई तरफ खड़ी थी । मैने गीता को उसके दाये तरफ से कमर मे डाला और बबिता की बाई तरफ से कमर मे हाथ डाल कर अपने से चिपका लिया और मेरा खड़ा लण्ड अब दोनो की कमर के बीच से झाक रहा था ।

जब मैने दोनो को पकड कर खीचा तो दोनो हसने लगी।

गीता - हीहीहि भैया गुदगुदी लग रही है आराम से प्लीज

फिर मैने बिना कुछ बोले अपने दोनो हाथ उपर ले आया और गीता के दाई चुची और बबिता की बाई चुची को हाथो मे भर लिया ।

बबिता अपने जगह पर सही थी उसके भी दूध बाकई मे बडे थे बस शेप अलग था वो थोड़े चपटे थे ,,वही गीता से दूध गोल होने से उभर कर सामने दिखते थे । दोनो के दूध मेरे मुथ्थी मे आसानी से समा नही रहे थे लेकिन उन दोनो कच्ची कलियो के अनछुए चुचो को दबाने मे एक अलग ही उत्तेजना हो रही थी । मैने भर भर कर उनकी चुचे को मसलना शुरू कर दिया ।

बबिता - अह्ह्ह्ह भैया बहुत मज़ा आ रहा ऐसे ही करो

गीता - हा भैया मुझे भी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह , , आप जितना दबा रहे हो और खुजली हो रही है आह्हह आह्हह

एक तरफ मै उनकी एक एक चुचिया दबा ही रहा था ,,साथ वो भी अपने अपने बचे एक एक चुची को खुद से दबाते हुए मेरे उपर रेगने लगी ।

मैने सोचा ये कुवारी नादान जवानी है इसे बहुत सम्भाल कर भोग्ना होगा । अभी कुछ मजे लेलू फिर रात तो बाकी ही है ।

फिर मैने उन दोनो के चुचे छोड दिये

बबिता ने वापस मेरे हाथ उठा कर अपनी चुची पर रख दिया और बोली - भैया करो ना बहुत खुजली हो रही है अह्ह्ह्ह्ह प्लीज भैया प्लीज

और खुद मेरे हाथ अपनी चुची पर रख कर मसलने लगी। उसका देख कर गीता ने भी वही किया और मेरे हाथ से खुद को चुची रगड़ने लगी।

फिर मैने गीता को पकड़ा और उपर दीवाल पर बिठा दिया और उसके टेप को उपर कर दिया

उसकी हापुस आम जैसी रसिली चुचिया सामने आ गई और मैने लपक एक चुची को मुह मे भर लिया और उसके हल्के भूरे दानेदार निप्प्ल को जीभ से चाटने लगा । गीता तडप उठी ।

गीता - अह्ह्ह्ह आह्हह भैया आह्हह बहुत मज़ा आ रहा है और चुसो मेरे दूध और आह्हह हा भैया और आह्हह

गीता को उतेजीत देख बबिता भी दीवाल पर चढ़ कर बैठ गयी और अपने टेप को उपर किया और उसके चुचे भी बाहर आ गये ।

मैने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी एक चुची को मुथ्थी में भर कर दबाने लगा

बबिता - भैया मेरा भी चुसो ना मुझे भी मज़ा करना है ।

फिर मै मुस्कुराया और हाथ मे पकड़ी हुई बबिता की चुची के निप्प्ल को अपने होठो मे भर कर न्चाने लगा वो सिहर गयी और पानी मे पैर मारने लगी ।

बबिता - आह्हह आह्हह भैया उह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है आह्हह उम्म्ंम्ं और चुसो मेरे दूध और चुसो मेरे प्यारे भैया अह्ह्ज्ज

फिर मै दोनो से थोदा अलग हुआ और वो दोनो वही अपनी नंगी चुचियो पर अपने टेप चढाये बैठी थी मसले जा रही थीं ।

गीता - क्या हुआ भैया और करो ना प्लीज

बबिता - हा भाईया कितना अच्छा लग रहा था ।

मै -हा तुम्हे तो मज़ा आ रहा था ना लेकिन मेरा क्या मुझे भी करना है मज़ा

गीता - भैया लाओ मै तुम्हारे लण्ड को चुस देती हूँ फिर आप मेरा दूध खुब चूसना ना भैया प्लीज

बबिता - क्यू सिर्फ़ तू ही चुसवयेगी क्या मै नही हू

मै - अरे चुप रहो तुम दोनो पहले ये इस घर की चाभी लाई हो गुडिया

बबिता - हा भैया है झोले मे

मै - चलो ठीक है जलदी से कप्डे ठीक करो हम अन्दर जाकर मज़े करेंगे आराम से बिस्तर पर

गीता - अरे भैया यहा क्या दिक्कत है

मै - पगलू यहा कोई देख लेगा तो

गीता - तो क्या हुआ हम लोग तो खेल रहे है ना

मेरा माथा ठनक गया और सोचने लगा साला इन लोगों को कुछ भी नहीं पता है कि क्या सामने करना चाहिए क्या नही , अब कुछ भी करने से पहले इनको समझाना जरुरी हो गया था । नही तो कही घर पर सबके सामने बोल दी ये लोग कि भैया चलो ना मेरे दूध चुसने तो बैंड बज जायेगा ।

मै - नही मेरी मीठी ऐसा नही है । हम जो खेल खेल रहे थे वो यहा कोई नही है इसलिये खेल रहे थे। ये सब बंद कमरे मे या अकेले मे करते है ताकि कोई देखे नही

बबिता - अगर कोई देख ले तो क्या होता है भैया

मै - हीहीहि पगली अगर कोई तुमको ऐसे नँगू देख लेगा तो सबको बताएगा और चिढायेगा ना ,,,क्या तुम दोनो चाहती हो की कोई तुम लोगो चिदाये परेसान करे

गीता - नही नही भैया बिलकुल नही

बबिता - मै तो गीता को चुम्मी भी अकेले मे ही दूँगी अब हा

मै - शाबाश ,जो भी करना अकेले मे मज़ा करना , अगर घर मे किसी को पता चला कि तुम लोग अभी से ये सब कर रहे हो तो मामा मामी नाना सब मारेन्गे आपको ।

गीता - तो क्या हम सब से छिप कर करेंगे सब काम

मै - हा मीठी क्योकि ये सब बडे लोग करते है जिनकी शादी हो गई हो ,,, छोटे बच्चे नही करते है , देखा नही फिल्म मे दोनो लडकिया बड़ी बड़ी थी । वो तो तुम मेरी जान से प्यारी बहने हो इसिलिए तुम दोनो को सिखा रहा हू ।

बबिता और गीता ने मेरे गालो पर चुम्मी दिया और बोली - थैंक्स भैया आप बहुत अच्छे हो हिहिहिही

मै - हा अब जल्दी से घर खोलो और अन्दर चलो मज़े करते है ।

फिर गीता बबिता ने वापस अपनी चुचिया ढक ली और पानी से बाहर जाने लगी दोनो भीगी पैंटी मे उनकी गदरायी गाडो पर चिपकी हुई थी ,,,मन तो कर रहा था कि अभी जाऊ और मुह डाल कर चाट लू ,,,लेकिन मै जल्दीबाजी से नही आराम से सारे काम करना चाहता था ।

फिर बबिता ने झोले से चाभी निकाला और हम लोग अपने कपडे लेकर जो जिस हालात मे था घर मे घुस गया ।

घर मे घुसते ही हमने मेन गेट लॉक किया और बबिता मुझे एक बडे से कमरे मे ले गयी जहा पर बिस्तर रखा हुआ था

फिर हमने जल्दी जल्दी बिस्तर लगाया

अब तक तो हमारे बदन से पानी रिस चुका था

लेकिन गीता बबिता के अंडरगार्मेंट भिगे थे ।

वो दोनो बिस्तर पर जाने को हुई तो

मै - अरे अरे ऐसे चढोगी तो बिस्तर भी गिला हो जायेगा ना

गीता - तो

बबिता - अरे तो कपडे निकाल दे पागल

गीता चौकते हुए - कच्छी भी

मै - क्यू मै नँगू पँगू हू तो तुम लोग क्यू नही ,,,

गीता - भक्क भैया मुझे शर्म आयेगी

मै - तो रुको मै निकाल देता हू

गीता - ब्क्क्क तब तो और आयेगी

मै गीता के करीब गया और उसको पीछे से पकड कर उसके दोनो चुचे को मिजते हुए कहा - और मज़ा भी तो आयेगा ना मीठी

गीता - अह्ह्ह्ह हा भैया

मै - तो मै निकालू

गीता - इस्स्स्स्स अह्ह्ह्ह हा भैया निकाल दो अह्ह्ह्ह

फिर मैने गीता की भीगी टेप पकड़ी और उपर करते हुए निकाल दी । कितना चर्बीदार बदन था उसका ,,, वापस से अपने सीने से सटा कर गीता के चुचे मिजने लगा

गिता - आह्हह भैया और तेज मसलो आह्हह इस्स्स्स्स उम्म्ंम अह्ज्ज मम्मी आह्हह भैया

फिर मैने उसको छोडा और घुटनो के बल बैठ गया अब गीता को मोटी मुलायम फुली हुई रबर सी लचीली गाड़ आसमानी रंग की पैंटी मे चिपकी हुई मेरे साम्ने थी ।

मैने बैठे बैठे ही गीता के कमर से उसकी पैंटी को निचे करना शुरू किया ,,, उसको गुदाज गाड़ का उपरी सिरा और एक लकीर दिखने लगी ,,,कुछ ही पल मे उसकी गाड़ भी नंगी हो गयी

आह्हह उसकी फुली हुई मुलायम सी दिख रही गाड़ पानी से अभी भी भीगी हुई थी ।

फिर मैने उसके मोटे गाड़ को निहारते हुए पूरी पैंटी निचे कर दी और जब गीता ने पैंटी निकालने के लिए पैर उपर किया तो हल्के झाटो वाली पानी से भीगी हुई चुत की लकीर मुझे दिखी ।

फिर मैने बबिता से तौलिया लिया और गीता के एक एक जांघ को अच्छे से पोछा । फिर एक हाथ तौलिया लेकर उसके दोनो जांघो के बीच हाथ डाल कर उसकी चुत से लेकर उसके गाड़ की दरारो मे रगड़ते हुए दो बार तौलिये से साफ किया ,,इस दौरान गीता हल्की सी सिस्क पडी फिर मैने उसके पीठ और पेट ,,और फिर उसके दोनो चुचो अच्छे से तौलिये मे मसल कर साफ किया । जिससे गीता हस रही थी ।

फिर मैने उसे बिस्तर पर जाने को कहा और वो झुक कर घोड़ी बनकर चलती हुई बेड पर चढ़ गयी ।

फिर मेरी नजर बबिता पर गयी जो अब मुझे देख कर शर्मा रही थी ।

मै उसके पास भी गया और टेप निकाल दिया फिर उसके नंगे चुचो को तौलिया से मसल कर पोछा ।फिर उसके सामने बैठ कर उसकी पैंटी को निचे किया,, बबिता की चुत पर गीता के मुकाबले ज्यादा बाल थे । फिर भी उसकी चुत की पतली लकीर और सपाट पेट देख कर मुझे ना रहा गया और मेने उसके नाभि के निचे किस्स कर दिया ।और फिर उसकी पैंटी को पुरा निकाल कर एक एक पैर को अच्छे से पोछा फिर उसकी भी जांघो के बिच हाथ डाल कर पहले सामने से चुत को साफ किया फिर घूमा कर उसकी मुलायम गाड़ के पाटो को फैला कर दरारो को साफ किया । फिर उसे भी पीठ पर हाथ लगा कर बिस्तर पर जाने को बोला

बबिता भी घोड़ी बन कर चढ़ गयी बेड पर और फिर मैने तौलिया लेकर अपने बदन को साफ किया और लण्ड को अच्छे से साफ कर छोड़ दिया ,,जिससे वापस से मेरा लण्ड झुलने लगा ।

जिसे दोनो अपनी रसीली चुचिया मलते हुए देखे जा रही थी ।

देखते हैं दोस्तो आने वाला अपडेट क्या नये रंग लाने वाला है ।
 
Update 42

अब तक

बबिता भी घोड़ी बन कर चढ़ गयी बेड पर और फिर मैने तौलिया लेकर अपने बदन को साफ किया और लण्ड को अच्छे से साफ कर दिया ,,जिससे वापस से मेरा लण्ड झुलने लगा । जिसे दोनो अपनी नंगी चुचियो को मसलते हुए निहारे जा रही थी ।

अब आगे

फिर मै दो कदम चल कर बिस्तर तक गया और अपना लण्ड हाथ मे थामे उसको सहलाते हुए बबिता को इशारा किया की मेरी तरफ आये और बबिता घोड़ी बन कर चलती हुई आई और मेरे लण्ड को थाम लिया और आगे पीछे करने लगी। आह्ह उसके नरम हाथो का अह्सास बहुत मज़ेदार था कुछ ही देर मे मेरा लण्ड उसकी मुथ्थी मे भरने ल्गा ।

बबिता - भैया ये तो और बड़ा हो रहा है

मै - जब इसको चुसोगी तो और बड़ा होगा गुडिया ,,चलो चुसो अब

और मैने मीठी को इशारे से अपने पास बुलाया जो ना जाने क्ब्से ललछायी नजरो से मेरे लण्ड को निहारे जा रही थी वो भी घोड़ी बन कर मेरे पास आई तो मैने उसे अपने सामने खड़ा होने को कहा और वो खदी हो गयी ।

मै - गुडिया चुसो ना अब देखो मत

तभी गुडिया ने मेरे मोटे सुपाडे को मुह मे लिया आह्हह उसके गर्म ससो की तपन से मेरे लण्ड मे एक नयी हलचल आ गई और मेने गीता को कमर से अपनी तरफ खीचते हुर उसके एक चुचे को मुह मे भर लिया

निचे बबिता अब तक मेरे आधे लण्ड को निगल चुकी थी

फिर मैने उसके सर पर हाथ रख कर खुद की कमर को हिलाना शुरू कर दिया । जिससे मेरा आधा लण्ड बबिता के मुह मे अन्दर बाहर होने लगा और यहा मेरे लगातर जीभ घुमाने से गीता अह्हे भर रही थी ।

गीता - आह्हह भैया और चुसो मेरे दूध ,,आह्ह

गीता की तेज आह सुन कर बबिता ने उपर देखते हुए लण्ड को चुस्ने लगी । वो बस मुह खोले लण्ड को अंदर बाहर कर रही थी फिर थोडी ही देर मे उसे अफनाहत होने लगी और उसने मेरे लण्ड को बाहर निकाल दिया ,,बबिता का लार मेरे सुपाडे से होते हुए मेरे आड़ो तक रिसने ल्गा था ।

बबिता के अलग होते ही मैने गीता की चुची छोड उसे निचे बिठा दिया और वो मेरे दोनो पैरो के दोनो तरफ अपने पैर कर मुझे बान्ध लिया और मेरे लण्ड को थामा गप्प से आधा लण्ड मुह मे भर लिया और चूसने लगी वो बबिता के मुकाबले ज्यादा से ज्यादा मेरे लण्ड को मुह मे भर रही थी और मै भी उत्तेजित होकर उसके सर को पकड कर लण्ड पर दबाता था । इसी बीच बबिता गीता के पीछे खड़ी होकर मेरी तरफ झुकी ,और मेने भी लपक कर उसकी मौसमी जैसी चुची को मुह मे भर लिया ।

गीता बबिता के मुकाबले बहुत ही अच्छे से लण्ड को चुस रही थी जिससे मै और ज्यादा उत्तेजित था ,,,वही मेरे चुची चूसने से बबिता खुब चिखे जा रही थी

बबिता - इस्स्स भैया खा जाओ मेरे दूध ,,नोच लो अह्ह्ज आह्ह इश्ह्ह और चुसो अझ ,,

बबिता - आह्हह भैया मेरे सुसु निकलेगा लग रहा है आह्हह

मै अब बहुत उत्तेजित था

मैने बबिता को अलग किया और गिता का सर थाम कर उसे भी अलग किया ,,,दोनो का मानो कोई कीमती सामान छीन गया हो ऐसे वो मुह बना रही थी

मै तुरंत बिस्तर लेट गया और गिता को बोला - मीठी तुम लण्ड चुसो अब ,, और वो तुरंत पल्ती ग्प्प्प से मुह मे लण्ड को भर लिया ।

बबिता - और मै भैया मुझे प्यार नही करोगे ,,,देखो यहा क्यू खुजली हो रही है ।

बबिता अपनी चुत को फैल कर मुझे दिखाती हुई बोली

मै - उसी खुजली को तो दुर करने वला हू ,, आजाओ और अपनी चुत मेरे मुह पर रख तुम भी गीता के साथ लण्ड चुसो

बबिता - ये चुत क्या है भैया वो तो मै नही लाई हूँ

मै - अच्छा अपनी गाड़ को मेरे मुह मे रखो तब अभी जहा खुजली हो रही है ना उसे चुत कहते है उसे चाट कर साफ कर दूँगा तो नही होगी

बबिता - सच भैया ,, और वो घूम कर मेरे लण्ड की तरफ मुह करके मेरे मुह पर अप्नी चुत को रख कर लेट गयी ।

बबिता के चुत की भीनी खुशबू पाकर मेरा लण्ड और भी ज्यादा उत्तेजित हो चुका था। मैने जीभ आगे करते हुए बबिता के गादो को थामा और उसकी चुत के बालो मे जीभ से उसके दाने को खोजने लगा ।

मेरे जीभ के खुरदूरे स्पर्श को अपनी नाजुक चुत पर पाकर बबिता सिस्क उठी

बबिता - आह्हह भैया आप तो खुजली बढ़ा रहे हो , लेकिन मज़ा आ रहा है

बबिता की उत्तेजना देख मैने उसकी गाड़ को और निचे के उसकी चुत के दाने से गाड़ की छेद तक अपनी लार को जीभ से लीपने लगा । बबिता और भी ज्यदा तडप उठी

मैने जीभ को उसकी कसी गाड़ की छेद पर न्चाने लगा और वो छटपटाने लगी ,,फिर मैने जीभ को नुकीला करते हुए बबिता की कमर को और खीचा और उसकी गर्म गीली चुत मे जीभी डाल के मुह हिलाने ल्गा ,,कुछ ही पलो मे बबिता मेरे जीभ पर ही एठने लगी

बबिता - आह्हह भैया आह्हह मेरा सुसु निकल रहा है अझ्ज्ज आह्हह बहुत दर्द हो रहा कमर मे आह्हह आह्हह

और बबिता ने अपनी जांघो मे मेरे सर को जकड़ लिया भलाभल मेरे मुह में झडटी रही ।उसके चुत के नमकीन पानी का स्वाद पाकर मेरा लन्द और उबाल लेने गया जिसे गीता बडे मन से सब कुछ भूल कर चूसे जा रही थी और इधर बबिता निधाल होकर मेरे पेट पर गिर चुकी थी ।

फिर थोडी पलो मे मैने बबिता को खुद से किनारे बाये तरफ किया और गीता को बोला

मै - मीठी जरा उपर आ

गीता मे बड़ी मासूमियत से मेरा लण्ड मुह से निकाला और मेरे पास आ गई

हालाकि गीता और बबिता को लण्ड चूसने का तजुर्बा नही था , नही तो अब मेरी मा या मौसी मुझे दो बार झाड़ देती

गीता को पास बुला कर अपने दाये लिटा लिया और उसके मम्मो को मुह मे भर कर चूसने लगा और एक मम्मे को दबाने लगा ,,एक बार फिर से कमरा गीता से कामुक सिसकियो से गुजने ल्गा

इसीबिच मैने गीता के बाये मम्मे को चुस्ते हुए अपने बाये हाथ से गीता की चुत को सहलाना शुर कर दिया जिससे गीता और भी ज्यादा तडप उठी ये उसकी चुत पर पहला किसी लडके का स्पर्श था ,,,गीता ने चुत पर मेरे हथेली को रेगता पाकर अपनी जांघो को खोल दिया और मै अच्छे से उसकी चुत को मलने लगा और वो पहले से ज्यादा अपनी गाड़ पटकते हुए सीसक्ने लगी

गीता - आह्हह भैया बहुत खुजली हो रही है वहा

मै - हा मिथी अभी चुस कर साफ कर दूँगा तेरा भी

गीता - अह्ह्ज भैया जल्दी चुसो ना मेरी चुत आह्ह

मैने भी मौका देखा और सरक कर निचे गया और गीता की जांघो को चौड़ा करके लपालप उसकी चुत चाटने ल्गा और वही गीता मेरे सर को दबाते हुए गाड़ पटक्ने लगी और चिलाने लगी

इधर मैने गीता को उसकी जांघो के बिच की खुजली को मिटा रहा था और इसी बिच बबिता ना जाने कब उठ कर मेरी ही गाड़ में हमला कर दिया

उसकी नुकीली जीभ ने मेरे गाड़ की जीभ को कुरेदना शुरू कर दिया और मेरे होठो की पकड गीता के चुत पर बढती जा रही थी । बबिता ने अनजाने में ही सही पहली बार मेरे गाड़ के छेद को चाट कर मेरी बची कुची वासना को और भडका दिया , नतीजन मैने गीता के जांघो को और ऊचा कर अप्नी जीभ को उसकी चुत मे घुसा लिया और सीधा सीधा अंदर की तरफ खोदने ल्गा ,,,जिस्से गिता और ज्यादा सीसकने लगी

वही बबिता ने अपनी पोजीशन को बद्ला और मेरे जांघो के बिच अपना सर डाल दिया और मेरे झूलते लण्ड को मुह मे भर कर चूसने लगी ।अब मेरी तडप बढने लगी मैने तेज़ी से गिता की चुत को चुस्ते हुए उसकी चुची को मिजने लगा ,,,वही बबिता निचे लेटे लेटे मेरे सुपाडे को चुस रही थी

गीता - अह्ह्ह्हा ह्ह्ह्हा हहह आह्हह भैयहा आह्हह दर्द हो रहा आह्ह मेरा सुसु आने वाला है ,आह्हह मम्मी आह्हह ,,,,गीता ने मेरे सर को जांघो को कस लिया और गाड़ उचका कर झडने लगी ,, उसकी चुत का गर्म पानी मेरे मुह और जीभ पर फैलने लगा और मैने उसकी जांघो से लेकर गानड़ की छेद तक सब कुछ जीभ से चाट कर साफ किया ।

वही बबिता मेरे आड़ो को पकडे हुए मेरे सुपाडे को चुस रही थी और मेरे लिये अब सबर करना मुस्किल हो गया

और मेरा लण्ड और मोटा हो गया साथ ही मैने अपने सुपाडे को ढील दी जिससे मेरा सारा पानी बबिता के मुह मे भरने लगा और वो ढ्चकने लगी

मैने जल्दी से लण्ड बाहर निकाला और तब तक उसका मुह मेरे माल से भर गया था जिसे वो घूट घूट करके पिए जा रही थीं जैसे ही उसके मुह का माल खतम हुआ उसकी नजर मेरे भिगे लण्ड पर गयी और उठ कर तेज़ी से मेरे लण्ड को जीभ निकालकर मलाई के जैसे चाटने लगी और अच्छे से मेरे लण्ड को साफ करके मुह पोछ लिया और हसने लगी ।

मैं भी उसको खुश देख कर मुस्कुरा पडा वही गीता झडने के बाद खुद की सासे बराबर कर चुकी थी और बबिता को मेरा लण्ड चुस्ते देख रही थी ।

गीता - वाह्ह भैया आज तो म्ज़ा आ गया इस खेल मे

बबिता - हा भैया इतना मजेदार और टेस्टि खेल हमने नही खेला था कभी

मै - अभी यही नही और भी बहुत कुछ मज़े कराउँगा तुम दोनो को मेरी गुडिया मीठी

गीता बबिता - सच भैया

मै - हा लेकिन किसी को ये सब मत बताना और बस तुम दोनो आपस मे मज़े करना ठीक है

गीता बबिता खुश होते हुए - हा ठीक है भैया म्ज़ा आयेगा

मै - आज रात मे मै तुम लोगो को फिल्म दूँगा देखने के लिए,,जिससे तुम लोग अच्छे से लण्ड चूसना सिख सकते हो और जब मै घर चला जाऊंगा तो तुम दोनो अकेले मे मज़े कर सकते हो ।

गीता - सच मे भैया क्या मै भी बबिता के दुध और चुत को चुस सकती हू

मै - हा बिलकुल लेकिन किसी को पता ना चले सब अकेले मे करना

बबिता - जी भैया

मै - हा चलो अब कपड़े पहन लो और घर चलते है ।

गीता - भैया मन नही भरा है चलो ना एक बार और

मै - नही पागल लेट हो जायेगा , देख अभी 7 बजने को हो गये है और कल फिर आएगे ना

फिर वो दोनो खुश हुई और मेरे उपर झोल गयी जिससे मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मै गिर पड़ा वो दोनो भी नंगी मेरे उपर आ गई और एक साथ मेरे गालो को काट लिया ,,,उन्के नंगे बदन का स्पर्श मुझे फिर से उत्तेजित करने ल्गा लेकिन फिर मैने खुद को सम्भाल और उनको उठने को बोला

हमने कपडे पहने फिर घर और ट्यूबवेल मे ताला लगाकर चल दिये गाव की तरफ।

शाम होते होते हम लोग रास्ते मे बात करते हुए घर जाने लगे । इस दौरान मैने कुछ पोर्न वीडियो डाउनलोड किये और गीता बबिता को सावधान किया की घर में गाव मे कोई गलती ना करे ।

घर पहुच कर हम लोगो ने चाय नास्ता किया । और यहा मा और मौसी ने साडी उतार कर मैक्सि पहन ली थी । लेकिन मा कुछ परेशान लग रही थी और उसका चेहरा साफ बता रहा था की कुछ बात जरुर है ।

मै सही टाईम का इंतजार किया और जब मा कमरे मे गयी तो मै भी झट से उसके पीछे चला गया और वो मुझे देखते ही बोली

मा - नही राज अभी नही मेरा मन नही है ,,, उसे लगा मै मज़े करने आया था

मै मा को पकड कर बिस्तर पर बिठाते हुए - अरे मा मै उसके लिए नही आया हू , मै तो इस बात से परेशान हू कि मेरी प्यारी मा इतनी परेसान क्यू है ।

मा - सॉरी बेटे मै खाम्का तुझे डाट रही थी , लेकिन तुझे कैसे पता मै परेशान हू

मै - अरे मै भी तो आपका ही अंश हू ना मा ,, आपको तकलीफ होगी तो मुझे भी बेचैनी होती है

मा मुस्कुरा कर मुझे अपने सीने से लगाते हुए - धत्त बदमाश ,,कितना प्यारा है रे तू और कितना ख्याल रखता है मेरी ।

मै मा के कमर मे हाथ डाल कर उन्के चुचो मे अपने चेहरे को फेरा और बोला - वो सब छोडो ये बताओ आखिर क्या बात है जो आपको परेसान किये है

मा - क्या बताऊ बेटा , काफी समय से बाऊजी की तबियत ठीक नहीं चल रही थी और आज बहुत दिन बाद दीदी आई थी तो बाऊ जी का मन हुआ दीदी के साथ ,,, मज़े तो किये लेकिन जोश जोश मे उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी है ,,,

मै - फिर

मा - अभी थोडी देर पहले डॉक्टर आये था,,, चेक करने के लिए पता चला कि बाऊ जी का बीपी बहुत ज्यादा है और इनको ज्यादा मेहनत का काम या थकावट देने वाले काम नही करने है । साथ ही बोले है कि सेक्सुअल ऐक्टिविटी भी नही करनी है कोई अब नही तो आगे जाकर ऐडमिट भी करना पडेगा ।

मै समझ गया कि मा का दुख का असली कारण क्या था ,, नाना की तबियत खराब होने से वो अब चाह कर भी उनका मोटा उछलता लण्ड नही ले सकती थी ।

मैने मा के कन्धे पर हाथ रखा और बोला - आप चिंता ना करो मा ,, नाना जल्द ही ठीक हो जायेगे

मा भरी हुई आँखो से - हा फिर भी मै खुद के मनोइच्छा के लिए उनके जान का रिस्क नही ले सकती हू ।

मै मा को चिल कराते हुए - अरे मा मै हू ना आपके लिए

मा - चल बड़ा आया मेरे लिये,, क्या करेगा तू बता जरा

मै - मै अपनी मा को इतना प्यार दूँगा की वो सारे गम भूल जायेगी और

मा - और क्या

मै - घर जब दो दो लण्ड मिलेंगे रोज तो काहे का गम हाहाह्हाहा

मा मेरे कान खीचते हुए - बहुत बोलने ल्गा है हा

मै - अरे मा नाना नही तो मामा है ना

मा - नही राज मै उसका लण्ड नही ले सकती

मै - क्यू मा वो भी तो आपके भाई है ना

मा - मेरी इच्छा थी कि मेरे चुत मे सिरफ मेरे अपनो का लण्ड जाये ,,, जिनसे मेरा खुन का रिस्ता हो

मै - तो क्या मामा आपके अपने नही है

मा - नही बेटा वो गोद लिया हुआ है ।

मै चौक कर - क्या कह रही हो मा

मा - हा राज ,,, बाऊजी के हम दो ही बेटीया थी ,,काफी समय से मा को कोई बेटा ना हुआ तो बाऊजी ने अपने एक दोस्त के बेटे को गोद ले लिया ।

मै - अच्छा तो क्या ये बात मामा को पता है

मा - नही बेटा और उसे पता भी न चले ,, हमने कभी उसे अपने से पराया नही किया है ।

मै- तो फिर क्यू आप मौसी के साथ मज़े करती थी ।

मा - राजेश ने मेरे चुचो को चुसने और मसलने के अलावा कोई काम नही कर पाया है मेरे साथ । मैने उसे अपने बदन का एक भी हिस्सा नही छूने देती थी ,,, क्योकि मै दीदी के साथ ही खुश थी । वो बस दीदी को जम कर भोग्ता और कभी कभी मेरे दूध पिता था । लेकिन काफी सालो से वो मुझ्से दुर है अब

मै - तो क्या आज रात मे आप मामा और मौसी मज़े करोगे की नही

मा - बेटा मन तो थोदा बहुत था मेरा दीदी के साथ लेकिन बाऊजी की तबीयत से मेरा सारा मूड खराब कर दिया और आज शाम को ही राजेश तेरी मामी के यहा चला गया है

मै खुश हो गया और बोला - इसका मतलब आज रात मे हम लोग मज़े कर सकते है ना

मा - हा लेकिन कैसे दीदी तो मेरे साथ ही सोयेगी

मै - ठीक है फिर मै मौसी को भी

मा - आहाहा इतना आसान थोडी है

मै - मा मै जानता हू मौसी लण्ड की भुखी औरत है आप सब मुझ पर छोड दो मै कुछ ना कुछ जुगाड लगा लूंगा

मा - हा लेकिन कैसे

फिर मैने मा को अपना प्लान ब्ताया

मै - देखो मा तुम मौसी को पूरी नंगी करके मज़े करना और मै दरवाजे से अंदर अपनी मोबाइल ने झुट मुट का वीडियो बनाते हुए अपना खड़ा लण्ड हिलाते आप दोनो के सामने आ जाऊंगा और मै आपके सामने शर्त रखन्गा की मुझे भी मौसी के साथ मज़े करने दो नही तो ये वीडियो मै मौसा पापा सबको दिखा दूँगा ।

मा - अरे फिर तो वो खुद बोलेगी दिखा दो हिहिही

मै - मा इसिलिए तो मै अपना खड़ा लण्ड लेके जाऊंगा उन्के सामने ताकि वो मेरे ऑफ़र को चाह के भी नही मना करेगी ।

मा - अरे वाह तुने तो बड़ी कमजोर नस पकड़ी

मै - बेटा किसका हू मा ,,, मा की चुचियो को मसलते हुए बोला ।

देखते है दोस्तो ये रात राज के लिए क्या नये रोमांच लाने वाली है
 
Back
Top