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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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अपडेट - 99

मेरे हाथ अब भी पंकज रानी के चुतडो़ पर ही थे. इसलिए मैंने भी जोश मे चुतडो़ को अब जोरों से पकड़ लिया और नीचे से धक्के लगाते हुए उसके कूल्हों को‌ पकड़कर उसे जल्दी जल्दी आगे पीछे करने‌ लगा.

अब तो मानो‌ पंकज पर कहर बरस पड़ा और वो और भी जोरों से‌ कूदने‌ लगी.‌ क्योंकि मेरा लंड चुत में अन्दर बाहर होने के साथ चुत के पास की चमड़ी पर भी लंड की रगड़ लगने लगी थी.‌ जिससे पंकज के मुँह से अलग सी आवाजें निकलना शुरू हो गईं.

हम दोनों की ही सांसें अब फूल गयी थीं. शायद पंकज अब अपने चरमोत्कर्ष के करीब पहुंच गयी‌ थी. उसके बदन मे जोश आ गया और उसकी चुत में भी संकुचन सा हो रहा था.इसलिए मैंने अब फिर तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए‌.‌

हमारे होंठ आपस मे जुड़े हुए थे,मेरे होंठों को जोर से चुमने लगी, उन्हें जोरों से चूसते हुए काटने लगी.

हम एक दुसरे के होंठों को जोरों से चूसते हुए, अपनी कमर को अपनी पूरी तेजी से हिलाने लगे.

बस कुछ देर ही हमने ऐसे ही तेजी से धक्के लगाये थे कि अचानक से पंकज मुझसे किसी बेल‌ की तरह लिपट गयी और उसका बदन अकड़ सा गया. उसकी चुत की दीवारें मेरे लंड पर कस गईं.

और उसने मुँह से -उऊऊऊ...ओहहह.. आहहहहहहह... की आवाजें निकालते हुए रह रह कर अपनी चुत के अन्दर ही अन्दर मेरे लंड को प्रेमरस से नहलाना शुरू कर दिया.

मैं सच बता रहा हूँ, उस दिन पंकज की चुत ने जो प्रेमरस उगला था वो लावा जैसा गरम था. मेरा लंड उसकी चुत‌ में घुसा हुआ होने के बावजूद भी किनारों से उसकी चुत ने प्रेमरस की इतनी पिचकारियां मारी थीं कि उससे मेरे पेट के साथ साथ मेरी दोनों जांघें भी भीग गयी थीं.

पंकज के गरम लावे को महसूस करते ही मेरे लंड ने भी समर्पण कर दिया. मैंने पंकज को अपनी बांहों में जोरों से भींच लिया और चार पांच किस्तों में उसकी चुत को अपने वीर्य से पूरा भरकर निढाल होकर गिर गया.

वो भी मेरे से लिपटी हुई, मेरे सीने पर लेटी रही...

वो देर से सांसे ले रही थी, वो अपनी आँखों को बंद किये हुए अपनी सांसों को नियंत्रित कर रही थी. उसकी गरम सांसे मेरे सीने को गरम कर रही थी.

कुछ देर तक वो ऐसे ही आनंद के सागर मे लेटी रही...

फिर उसने अपनी आँखें खोली और अपनी उंगली को मेरे सीने पर फिराने लगी. उसने मेरे सीने को अपने होंठों से चुमते हुए कहा - कैसा लगा...

मैं - बहुत मजा आया..मुझे मेरा गिफ्ट मिल गया.

मैंने पंकज को हल्का सा ऊपर खिसका लिया और उसके अधरों को चुम लिया

मैं - मैं बहुत खुश हूँ...

पंकज - आप ने जो मुझे दिया है, उसके आगे तो ये कुछ नहीं हैं.

मुझे - मेरी रानी मैंने कुछ लेने के लिये तुम्हें ये ( मैं पंकज के पेट पर हाथ रखकर ) नहीं दिया है समझी...

ये तो सबसे बेस्ट चुदाई थी...

मुझे - रानी...

पंकज - हूँ...

मैं - अगर मैं किसी और के साथ ये सब करू तो..?

वो मेरी तरफ देखने लगी और बोली - ये सब..?

मैं - मैं किसी और के साथ सेक्स करूं, किसी और को चोदु तो...

पंकज कुछ नहीं बोली, पंकज का का चेहरा नीचे हो गया...

मैं - क्या हुआ रानी, बोलो तो...

पंकज - मेरा आप पर इतना हक नहीं है कि मैं आपको रोकु, मैं रोकना भी नहीं चाहती. मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से आपको कुछ दिक्कत हो. किसी के साथ भी करो मुझे कोई दिक्कत नहीं है...

मैं - अच्छा...!

पंकज - आपने मुझे बहुत प्यार दिया हैं. ऐसा प्यार मुझे पहले कभी मिला ही नहीं था. आपने मुझे जो ये खुशी दी है, ये सबसे बड़ी खुशी है.

पर मैं आपसे एक वादा चाहती हूँ...

मैं - क्या वादा..?

पंकज - आप हमेशा मुझे प्यार करना, कभी अपने से दूर मत करना. मेरा हक मुझसे कभी नहीं छिनोगे...

मैं - रानी मैं तुम्हें हमेशा प्यार करूंगा. तुम्हारा हक मुझ पर हमेशा रहेगा...

मेरी बात सुनकर पंकज ने मुझे बांहों मे कस लिया...

फिर उसने मेरे गालों को चूमते हुए कहा - चलो अब उठो... चाचा,चाची भी आने वाली होंगे.

मैं - थोड़ी देर रूको ना... मुझे तुम्हारी बांहों मे रहने दो...

पंकज भी मेरे सीने से लिपट गई. कुछ देर(5-7 मिनट) तक हम एक - दूसरे की बांहो मे लेटे रहे...

फिर हम दोनों खड़े हुए, वो कपड़े पहन कर बाहर चली गई और मैं फ्रेश होने चला गया...

मैं नहा के रेडी होकर हॉल मे आ गया और न्यूज पेपर पढ़ने लगा. कुछ देर मे मम्मी पापा भी आ गये...

***

कहानी अच्छी लगे तो अपने विचार जरूर दीजिये... Thanks For Reading...

 


Hello दोस्तो...

आप सभी से माफी चाहता हूँ.बहुत दिनों तक आपसे दूर रहा.आपको पता है की कोविड चल रहा है, इसमे सभी की life अस्त व्यस्त हो रखी हैं.

बहुत दिनों से अपडेट नहीं दे पा रहा हूं. जिससे आप नाराज होंगे,पर मैं भी कहानी को आगे बढ़ाना चाहता हूँ.

अब पूरी कोशिश करूँगा की टाइम पर और continue अपडेट दूँ

# अपडेट - 100

अब तक आपने पढ़ा की मैं नानी के घर से आ गया.आते ही मुझे एक खबर मिली कि मैं बाप बनने वाला हूँ.. उस खुशी मे सुबह सुबह मैंने और पंकज ने रंगरलीया मनाई...

आगे...

कुछ गेर तक हम लेटे रहे,फिर हम दोनों खड़े हुए, वो कपड़े पहन कर बाहर चली गई और मैं फ्रेश होने चला गया...

मैं नहा के रेडी होकर हॉल मे आ गया और न्यूज पेपर पढ़ने लगा. कुछ देर मे मम्मी भी आ गये...

मम्मी - ऊठ गया तु...

मैं - हां मम्मी... और मैंने अनजान बनते हुए पूछा - आप कहाँ पर थे

मम्मी - मैं और तेरे पापा मंदिर गये थे...

मैं - पापा कहाँ हैं..?

मम्मी - वो खेत मे गये हैं, फसल देखने... चल आजा नाश्ता कर ले...

मैंने हलवा खा लिया था तो बोला - मैंने नाश्ता कर लिया है..

फिर मैं बोला - मम्मी मैं हवेली जाकर आता हूँ...

मम्मी - राहुल.. बेटा सच्च सच्च बता कोई बात तो नहीं है ना.

मैं - मम्मी ऐसा कुछ नहीं है.

मम्मी - राहुल.. हमारे और ठाकुर परिवार के बीच संबंध बरसों पुराने हैं. दोनों परिवारों मे बहुत अच्छा मेलजोल हैं. मैं नहीं चाहती कि कुछ प्रॉब्लम हो. दोनों परिवार हमेशा निकट रहे हैं...

मैं - मम्मी आप टेंशन मत लीजिए. ऐसी कोई बात नहीं है. अगर कुछ होती तो मैं आपको बता देता...

मम्मी - ठीक हैं, आराम से जाना...

मैं मम्मी को बाय बोलकर हवेली चला गया. बाहर किसी ने मुझे नहीं रोका, सब जानते थे...

मैं अंदर गया तो बैठक मे मुनीम जी थे. उन्होंने बताया कि ठाकुर अपने कमरे मे आराम कर रहे हैं. तो मैं सीधा अंदर चला गया..

घर मे नौकर चाकर काम कर रहे थे. मुझे कमरे का पता नहीं था तो, मैंने उनसे कमरा पूछा और कमरे की तरफ चला गया.

मैंने रूम के पास जाकर गेट नॉक किया... तो अंदर से ठकुराइन की आवाज आई - कौन हैं..?

मैं - मैं हूँ राहुल...

फिर ठकुराइन की आवाज आई - अंदर आ जाओ...

मैं रूम का गेट खोलकर अंदर चला गया... ठाकुर बैड पर लेटे हुए थे.

मैंने उनको नमस्ते किया और आशीर्वाद लिया...

ठाकुर, ठकुराइन - जीते रहो बेटा...

ठकुराइन - बैठो राहुल...

मैं चेयर पर बैठ गया.

मैं - कैसे है ताऊजी आप...

ठाकुर - पहले से अब ठीक हूँ.

मैं - और रणजीत कैसा है... कहाँ है वो...

ठकुराइन - रणजीत की हालत मे भी कुछ सुधार हुआ है. अभी वो हॉस्पिटल मे ही हैं...

फिर ठाकुर बोले - कौशल्या राहुल के लिए कुछ खाने का इंतजाम करो...

मैं - नहीं.. नहीं ताईजी आप चिंता मत करिये. मैं नाश्ता कर के आया हूँ...

ठकुराइन - राहुल तुम चुप रहो. हम नाश्ता लेकर आते हैं..

ठकुराइन बाहर चली गई...

ठाकुर - बेटा रणजीत की हालत मे सुधार तो है पर..

मैं - पर क्या ताऊजी...

ठाकुर - डॉक्टर कह रहे हैं कि अब वो शायद पहले जैसा नहीं हो पायेगा...

मैं - मतलब...?

ठाकुर - उसकी रीढ़ की हड्डी मे चोट आई हैं, जिस कारण उसका शरीर पूरी तरह काम नहीं कर पायेगा. अभी वो हॉस्पिटल मे ही हैं. कुछ टाइम उसे वहीं रखना होगा...

मैं - पर ताऊजी, कोई इलाज होगा.

ठाकुर - हमने उसकी रिपोर्ट्स देश के बड़े बड़े डॉक्टर को दिखाई सबका ये ही कहना है कि वो अब पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता...

बोलते बोलते ताऊजी की आँखों मे आँसू आ गये... मैं उनके आंसू पूछते हुए बोला - ताऊजी आप चिंता मत करिये सब ठीक होगा... अगर आप हिम्मत हारेंगे तो सबका क्या होगा...

ठाकुर - हम और कितना ये सब संभालेगे, हमारी उम्र होने वाली हैं. हमने सोचा की हमारी खानदानी विरासत, हमारे बिजनेस को रणजीत संभलेगा पर...

मैं - ताऊजी आप चिंता मत करिये कोई ना कोई तो रास्ता निकलेगा...

ठाकुर - हम उन हरामजादो को ढूंढ रहे हैं. जिसने ये सब किया. जिस दिन वो मिला, वो उसका आखिरी दिन होगा... बेटा तुमने ये बात किसी को बताई तो नहीं है ना..

मैं - मैंने आप से वादा किया था, कि मैं किसी को कुछ नहीं बतांऊगा... मैंने किसी को नहीं बताया...

ठाकुर - थैंक्यू बेटा. हमने सबको बता रखा है कि रणजीत बाहर गया है काम से.......

फिर ताईजी आ गई तो हम चुप हो गये... ताईजी दो कप चाय और नाश्ता ले आई.

मैं चाय तो पीता नहीं हूँ तो मैंने कहा - ताईजी मैं चाय नहीं पीता हूं...

ठाकुर - राहुल के लिये दूध ले आओ...

ठकुराइन मेरे लिये दूध लेने चली गई... हम बात कर रहे थे तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आया... कॉल मनीष का था. मैं कॉल ऊठा नहीं रहा था तो ताऊजी बोले कि बात कर लो...

मैं - हाँ, भाई...

मनीष - कहाँ हैं भाई तु...

मैं - घर पर हूं...

मनीष - यार एक प्रॉब्लम हो गई हैं...

मैं - क्या...?

मनीष - यार वो आज क्लास मे सर आये थे वो तेरे बारे मे पूछ रहे थे, कि तेरी इतनी अबशेंट क्यों हैं. साला बोल रहा था कि तुझे निकाल देगा...

मैं - अच्छा.. ये तो टेंशन हो गई. मैं कल आता हूँ कॉलेज..

मनीष - ओके... Bye...

मैंने कॉल कट कर दिया...

मेरी बात सुनकर ताऊजी बोले - क्या हुआ राहुल.. क्या बात है.

मैंने उनको सारी बात बता दी.

 


# अपडेट - 101

मेरी बात सुनकर ताऊजी बोले - क्या हुआ राहुल.. क्या बात है.

मैंने उनको सारी बात बता दी.

मेरी बात सुनकर वो बोले - तुम्हारी प्रिंसिपल के ऑफिस मे कॉल करो...

मैं - क्यों ताऊजी...

ताऊजी - तुम कॉल करो...

मेरे पास नंबर था तो मैंने कॉल लगाकर ताऊजी को दे दिया...

ठाकुर - हैलो...

सामने से - ...

ठाकुर - हम ठाकुर सज्जन सिंह बोल रहे हैं...

सामने -

ठाकुर - हां... ये मेरा फोन नहीं हैं...

फिर ताऊजी ने प्रिंसिपल को सारी बात बताई कि. मेरा नाम, क्लास, और जो मनीष ने बताई वो सब... फिर वो बोले - राहुल हमारे परिवार का सदस्य हैं, इसको कुछ प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए...

वो ऐसे बात कर रहे थे कि वो प्रिंसिपल को जानते हैं.

सामने से - ...

ठाकुर - ओके... थैंक्यू...

फिर ताऊजी ने कॉल कट कर दिया... मुझे फोन देते हुए बोले - तुम्हारी प्रॉब्लम सॉल्व...

मैं - ताऊजी आप प्रिंसिपल को जानते हैं...

ठाकुर - हां, जानता हूँ...

मैं - अच्छा...तभी वो मान गई..

ठाकुर - तुम्हें पता है तुम्हारी कॉलेज का बोर्ड हैं..

मैं - हाँ ताऊजी... उसमें 4-5 लोग हैं. हमारी प्रिंसिपल और उनके हंस्बेंड भी हैं...

ठाकुर - हाँ.. तुम्हारी कॉलेज का मालिक कौन हैं तुम्हें पता है.

मैं - नहीं ताऊजी. अभी एडमिशन लिया है. मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं है. हाँ हमारी कॉलेज पुरानी कॉलेज जो आजादी के टाईम से हैं

ठाकुर - राहुल वो कॉलेज हमारी हैं...

( मैं ठाकुर की बात सुनकर चौंक गया. मैंने सुना जरूर था कि इनकी कॉलेज वगैरह हैं. पर ये नहीं पता था कि हमारी कॉलेज इनकी हैं. हमारी कॉलेज बहुत बड़ी और फेमस कॉलेज हैं जयपुर कि....... )

मैं - आपकी...?

ठाकुर - हां हमारी... वो कॉलेज हमारे पिताजी की शुरू की हुई हैं...

मैं - पर उसे तो ****** एज्युकेशन ग्रूप चलाता है ना...

ठाकुर - हां, वो हमारे दोस्त का ही हैं,वो और 1-2 लोग है. तो हमने हमारी कॉलेज उनको चलाने के लिए दे रखी हैं. हम तो कॉलेज चला नहीं सकते. और बिजनेस से टाइम ही नहीं मिलता.

हम उनसे कुछ प्रॉफिट लेते हैं...

फिर ठकुराइन मेरे लिये दूध ले आई. कुछ देर रूक कर मैं वहां से वापिस घर आ गया...

घर पर आते ही मम्मी ने पूछा की क्या हुआ तो मैंने ऐसे ही कुछ बोल दिया.

मैं बड़े ताऊजी की तरफ आ गया, सोचा की कोई से भाई मिलेंगे तो थोड़ी देर बैठकर टाइम करूँगा. लेकिन वहां जाकर पता चला कि रामानंद भाई तो शहर गये हैं और अनिल भाई गाँव मे ही गये हैं.

तो मैं वापिस आने लगा तो छत पर संगीता भाभी दिखाई दी. वो मुझे इशारा कर रही थी. वो मुझे छत पर बुला रही थी. मैं खाली ही था तो ऊपर छत पर चला गया.

ताऊजी की छत पर कमरे बने हुए थे, भाभी उनकी सफाई कर रही थी.

मैं जब कमरे मे गया तो वो मुझ पर झपट पड़ी और मुझे चुमने लगी...

मैंने भाभी के चेहरे को पकड़ा और उसके होंठों पर किस करने लगा. 2 मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चुसते रहे...

फिर वो बोली - जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो, नीचे बहुत आग लगी हैं...

मैं - जल्दी से कपड़े उतारो..

हम दोनों कुछ ही पलो मे नंगे हो गये... मैंने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और उसे दबोच लिया और उसकी चूचियों को दबाने लगे.

वो तो कामुकता भरी वासना की अग्नि में झुलसने लगी थी और बड़ी बेकरारी अपने साथ होने वाली कामक्रीड़ा का आनंद लेने को लालायित हो उठी थी.

संगीता - जल्दी... जो आग लगाई है उसे बुझा दो मेरे राजा.

मैंने उसे अपनी बांहों में दबोच कर बिस्तर पर गिरा दिया और बेहताशा चुम्बनों की बौछार करने लगा..

मैं अपनी जीभ उसके मुंह घुसा कर चुभलाने लगा और उसकी चूचियों को बेरहमी से मसलने लगा.

उसकी सिसकारियां मेरे मुंह मे बंद थीं.

संगीता - हाय... इतनी बेसब्री किस बात की, आराम से करो ना...

मैं - अब क्या आराम से, तुम्हारी आग को बुझा रहा हूं

इतना बोलकर मैंने दो उंगली चूत में भच्च से पेल दी . इस आकस्मिक हमले से वो चिहुंक उठी.

संगीता - आआह.. ओओओह्ह्ह्.. उफ़फ्फ़..

मैं उससे अलग हुआ और बोला जल्दी से मेरे लंड को चुस... वो तो तैयार थी..

 


# अपडेट - 102

मैं उससे अलग हुआ और बोला जल्दी से मेरे लंड को चुस... वो तो तैयार थी..

वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे कड़क मूसल को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी और बोली- राहुल बहुत जानदार हैं हैं लंड तुम्हारा.बहुत कम का होता है ऐसा...

और वो मेरे लंड को चुमने लगी...

मैंने उसके निपल को जोर से मसलते हुए कहा - चुस रानी, देख क्या रही है रंडी जल्दी कर...

मेरी बात सुनकर वो कुछ नहीं बोली और मेरे छोटे टमाटर जैसे सुपाडे को अपने होंठों में क़ैद कर लिया, और पूरी लगान से मन लगाकर उसे चूसने लगी.

मेरा लंड उसकी जीभ की मालिश और मुँह की गरम-गरम साँसों से और ज़्यादा फूल गया था.

बीच बीच में वो मेरे सुपाडे पर दाँत गढ़ाकर रगड़ देती, जिससे मेरे लंड में और ज़्यादा सुरसूराहट होने लगती...

जिससे मेरे मुंह सै सिसकियां निकल जाती - आयईयी... आआहह....

कुछ देर लंड चूसने के बाद उसका मुँह दुखने लगा, तो वो चूसना बंद कर के खड़ी हो गयी.

फिर वो पंलग पर अपनी टाँगें चौड़ी कर के लेट गई, और लंड को पकड़कर अपनी चूत के मुँह पर रगड़ने लगी…

संगीता भाभी - आअहह...राजा...अब जल्दी से इसे मेरी चूत में डालकर मेरी खुजली मिटा दे. अब नही रहा जा रहा मुझसे...

वो अपनी चूत को थप-थपाकर बोली...डाल दो अब इसमें जल्दी से...

फिर उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़कर अपनी गीली चूत के मुँह पर रखकर अपनी टाँगों को मेरी कमर पर लपेट लिया...

उसका उतवलापन देख कर मैं मन ही मन मुस्करा उठा... ऐसे आजतक किसी ने नहीं किया था.

मैंने उसकी चुचियों को लगाम की तरह पकड़ लिया.. फिर उसकी टाँग चौड़ी कर के एक करारा सा धक्का उसकी चूत में मार दिया.

संगीता भाभी - अआययाईईईईई... आआहह... मर्ररर्ररर... गई...

मैं - चिलाती क्यों हो, नीचे किसी ने सुन लिया तो. कब से तो इसे लेने के लिए इतनी उतावली हो रही थी...

वो कराहते हुए बोली - आअहह... तुम्हारा लंड थोड़ी है ये तो मुसल हैं, इतनी बेदर्दी से कोई पेलता है क्या.

फिर मैंने एक धक्का और लगा दिया, और लंड को जड़ तक पेल दिया...

संगीता भाभी - आआआह.. मम्अआ...मेरी चूत अंदर तक चीर दी इसने...उफफफफ्फ़... अब आराम आराम से करना..मेरे.. रजाअ..जीइई...

मैंने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. वो ट सिसकियाँ भरती हुई चुदाई का मज़ा लूटने लगी...

वो अपनी गान्ड उठा उठाकर मेरे मूसल जैसे लंड को जड़ तक लेने लगी…मैं उसके बड़े बड़े बोबो को मसलने लगा...

10 मिनिट की धुआधार चुदाई के बाद वो चीख मारकर झड़ने लगी...और फिर सुस्त पड़ गयी...

मेरे धक्के बदस्तूर जारी थे...वो कराहते हुए बोली - थोड़ा रुको ना , चूत सूख गयी है मेरी, जलन होने लगी है.

मैंने धक्कों को रोक कर उसे घुटनों के बल कर के घोड़ी बना दिया, और अपने थूक से उसकी चूत को गीला करने लगा...

और मैंने अपना मूसल फिर से उसकी चूत में पेल दिया...

वो आअहह...सस्स्सिईईईईई...करती हुई पूरा निगल गई..

मैं उसकी गान्ड पर थप्पड़ बरसाते हुए दनादन धक्के लगाने लगा. वो भी अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटक-पटक कर चुदाई का मज़ा ले रही थी..

उसके चुतड़ों पर मेरी जाँघ की थप-थप की आवाज़ कमरे मे गूँज रही थी...

मुझे अभी मज़ा आना शुरू ही हुआ था, मैं पीछे से उन्हें अपनी बाहों में लपेट लिया..

धक्कों के साथ साथ हमारा बदन आपस मे रगडे खा रहा था…

मैंने भाभी के मोटे-मोटे आम को मसलने लगा और उसके कड़क निपल्स को उंगलियों के बीच भींचने लगा..

जिससे वो सिसकने लगी - आआहह..उऊऊहह... हा मेरे रआज्जजा... ऐसे ही

5 मिनट तक मैं उसकी चुत को ऐसे ही रगड़ता रहा...

फिर वो - आआहह हाईए...आहह…आईईई…मैं तो फिर गाइिईई.. राजा...उउउऊओह...करती हुई संगीता झड़ने लगी...

मैं झड़ने वाला ही था तो पूरा दम लगाकर दो-तीन धक्के मारे.. और उसकी चूत में पूरा जड़ तक लंड पेलकर धार मार दी...

मैंने अपना टैंक खाली कर के लंड को चुत से बाहर खींचा... फुकच्छ… की आवाज़ के साथ मेरा लंड संगीता भाभी की चूत से बाहर आया, जिस पर हम दोनों का कामरस लगा हुआ था.

दो मिनट बाद हम दोनों खड़े हो गये. मैंने उसे बाहों मे भर लिया...

और बोला - अभी तो तुम्हारी गांड भी तो मारनी है...

मेरी बात सुनकर वो बोली - नहीं..नहीं... गांड मे नहीं... मैंने कभी वहां नहीं लिया है...

 


# अपडेट - 103

दो मिनट बाद हम दोनों खड़े हो गये. मैंने उसे बाहों मे भर लिया...

और बोला - अभी तो तुम्हारी गांड भी तो मारनी है...

मेरी बात सुनकर वो बोली - नहीं..नहीं... गांड मे नहीं... मैंने कभी वहां नहीं लिया है...

# आगे -

मैं - तो अब ले लो, बहुत मजा आता हैं..

मैंने अपना हाथ उसकी गांड पर रख दिया और उसे मसलने लगा...

संगीता - आआहह... सुना है गांड मे बहुत दर्द होता हैं. और तुम्हारा लंड तो मेरी फाड़ ही देगा...

मैं - ऐसा कुछ नहीं होगा...

संगीता - तुम मेरी चुत मार लो पर गांड़ मे नहीं...

मैं - रानी चुत तो मांरूगा ही पर गांड़ भी मारूंगा...

संगीता - मैंने कभी नहीं किया है...

वो कुछ ज्यादा नाटक कर रही थी तो मैं बोला - अगर चुत में चाहिए तो गांड तो मरवानी पड़ेगी...अगर अपनी चूत को मेवा खिलाना है तो फिर थोड़ी सेवा तो करनी पड़ेगी इसकी.

संगीता - मेरी गांड फाड़कर ही मानोगी. तो ठीक हैं... पर अभी नहीं...

मैं - ठीक हैं तो रात मे छत पर रहना...

फिर मैं किस करके नीचे आ गया... कोई भाई था नहीं तो मैं घर आ गया...

दोपहर हो गई थी तो हमने खाना खाया. खाना खाकर मैं अपने रूम मे आ गया... और टीवी देखने लगा...

कुछ देर बाद मुझे बाहर किसी की आवाज सुनाई दी... वो आवाज खुशी कि थी...

वो मम्मी से पूछ रही थी की - दादी चाचा कहां पर हैं...

मम्मी - अपने कमरे मे है...

खुशी मेरे कमरे मे आ गई, आते ही उसने रूम का डोर बंद कर दिया... मेरे पास आकर खड़ी हो गई. उसकी नजरे नीचे की तरफ थी...

मैंने उसका हाथ पकड़ा और पूछा - क्या हुआ...

पर वो कुछ नहीं बोली, मैंने उसके हाथ को अपनी तरफ खींच लिया. और उसे बेड पर ले आया. उसका आधा शरीर मेरे ऊपर और आधा बेड पर था.

मैंने उसके चेहरे को हाथों मे लेकर पूछा - क्या हुआ मेरी गर्लफ्रेंड को, नाराज है मुझसे...

तो वो बोली - आपके पास तो मेरे लिए टाइम ही नहीं है...

मैं - ऐसा किसने कहाँ... जिसकी गर्लफ्रेंड इतनी हॉट और सेक्सी हो वो उससे दूर थोड़ी रह सकता हैं.

मेरी बात सुनकर खुशी शरमा गई और खुश हो गई...

मैं - मैंने कहा था ना अभी वो सब करने मे बहुत टाइम हैं, अभी तुम थोड़ी सी छोटी हो...

खुशी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और उसे सहलाते हुए बोली - हमेशा करते हैं उतना तो कर सकते हैं ना... बहुत दिन हो गये हैं..

( अभी थोड़ी देर पहले माँ को रगड़ के आया था,अब बेटी आ गई..साली दोनों रंंडिया हैं एक नंबर की..दोनों को मेरा ही लंड़ चाहिए...

पर अपने को क्या अपणे को तो पाणी निकालना है...)

मैं - बिल्कुल कर सकते हैं......और

मैंने उसके कोमल, नाजुक से गुलाबी होंठों को अपने होंठों मे भर लिया, और चुमने लगा. वो तो इसी के इंतजार मे थी, वो भी मेरे होंठो को चुसने लगी......

कुछ देर रस चुसकर मैंने उसके होंठों को छोड़ा, उसका चेहरा लाल हो गया था...

मैंने उसका टॉप और उसकी समीज को निकाल दिया, वो तो तैयार ही थी इसके लिए...

टॉप के निकलते ही उसके संतरे मेरे सामने आ गये.

बिलकुल सफेद दूध की तरह और उन पर किसमिस जैसे गुलाबी दाने.. आह्हा... मेरा तो दिल ही ले गये...

दोनों चुचे एकदम सुडोल और तने हुए थे, मैंने जितनी भी रंडी़यो को चोदा था ऐसे चुचे अभी तक तो किसी के नहीं थे. बस अभी ये कच्चे थे, इनको और बड़ा और रसीला होना था.

खुशी के चुचे उसकी मम्मी संगीता से भी बड़े होने वाले थे...

मैंने दोनों संतरो को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और मसलने लगा...

खुशी - आआह.. सस्स्सिईईई... जानू... आराम से....

जब भी हम अकेले होते थे तो वो मुझे जानू, राजा,बेबी पता नहीं क्या क्या ही बुलाती थी...

मैंने एक चुचे को मुंह मे भर लिया और बड़े आराम से चुसने लगा...

खुशी जोर से सिसकने लगी, वो हाथों से मेरे सिर को दबाने लगी...

मैं 5 मिनट तक उसके दोनों बोबो को चुसता रहा. दोनों चुचे लाल हो गये, उन सफेद आमों पर जगह जगह मसलने निशान पड़ गये.....

उसके हाथ मेरी पेंट को खोलने लगे तो मैंने उसे रोक दिया. मैं अब झड़ना नहीं चाहता था. सुबह से दो बार तो चुत मार चुका था, और रात मे फिर से खुशी की मां यानी मेरी रंडी संगीता की गांड भी तो फाड़नी थी. अगर अब झड़ गया तो रात मे मुश्किल होगी...

मेरे उसे रोकने पर वो मेरी तरफ देखने लगी... तो मैं उसे बोला - आज ये नहीं करेंगे...

खुशी - पर क्यों, मुझे तो ये चुसना हैं... प्लीज जानू मुझे चुसने मे बहुत मजा आता है...

मैं - सॉरी रानी... आज मैं थोड़ा थक गया हूं. अगली तु चुस लेना, जितना तेरा मन करे. आज मैं तुम्हें मजा दुंगा.....

फिर मैंने उसे लेटा दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया... उसका गोरा और चिकना मादक बदन मेरे सामने आ गया..इस उम्र मे ही वो अच्छी अच्छी औरतों को पछाड़ दे पता नहीं आगे जाकर क्या होगा... जो भी हो इस चुत और गांड को तो मेरा लंड ही फाडे़गा //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f609.svg...

मैं उसकी चुत के पास गया. उसकी चुत पर हल्के हल्के रोये जैसे बाल थे. उसकी चुत तो पहले से ही भीगी पड़ी थी...

मैं - अरे... मेरी रानी तुम्हारी चुत तो पहले ही पानी बहा रही है...

मेरी बात सुनकर खुशी शरमा गई और बोली - जानू आपके पास आते ही ये गीली होने लग जाती हैं...

मैंने अपने होंठ उसकी रसभरी पर रख दिये. आहा... क्या गरमी थी उसमें... उसकी चुत ऐसे लग रही थी कि कोई गरम पानी का तालाब हो...

मैं उसमें मेरी जीभ को नहलाने लगा...

खुशी को चुत एकदम चिपकी हुई थी... मैं उसकी दरार पर अपनी जीभ रगड़ने लगा...

खुशी अब कसमसाने लगी, वो हिलने लगी, उसका बदन तड़पने लगा...

खुशी - आआहहह... उम्ह्हह... मेरे जानू.. आआहह... मउऊझ्झे..कुछ हो रहा है...

मैंने उसके हल्के उभरे हुए होंठों को मुंह मे भर लिया और चुसने लगा.. मेरे ऐसे करते ही, खुशी के शरीर मे कंपन होने लगा..

वो मेरे बालों को भींचने लगी और उसकी गांड हवा मे उठ गई...

और उसकी चुत गरम गरम देशी दारू जैसा नशीला सोमरस बहाने लगी. मैंने अपने होंठों को कस दिया और इस देशी दारू की एक एक बूंद पी गया...

झड़ते ही खुशी की गांड बेड पर गिर गई. वो ऐसे लेट गई जैसे उसकी सारी ताकत निचोड़ ली हो... मैं उसके पास लेट गया.

दो मिनट बाद उसने आँखें खोली और मुझसे लिपट गई और बोली - love u jaanu... और मुझे चुमने लगी...

मैंने भी उसके गरम गरम गुलाबी लबो को होंठो मे भर लिया और चुसने लगा......

फिर उसने कपड़े पहन लिये, कुछ देर वो मेरे पास बैठी फिर मैंने उसे पढ़ाई करने के लिए भेज दिया... मैं पढ़ने बैठ गया, 2-3 घंटे तक मैं पढ़ता रहा.

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# अपडेट - 104

फिर उसने कपड़े पहन लिये, कुछ देर वो मेरे पास बैठी फिर मैंने उसे पढ़ाई करने के लिए भेज दिया... मैं पढ़ने बैठ गया, 2-3 घंटे तक मैं पढ़ता रहा.

# आगे -

मैं रात का इंतजार कर रहा था, संगीता की गांड जो मारनी थी. पर मेेरे सारे उत्साह पर पानी फिर गया... शाम को मैं बाहर आया तो पता चला कि देवीलाल भाई आये हुए हैं... अब मैं क्या कर सकता था... ऐसे ही सो गया...

अगले दिन सुबह मैं तैयार होकर कॉलेज चला गया... वहां पर मनीष और विकास मिल गये. हम तीनों क्लास मे चले गये...

तीसरे पीरियड मे एक पीयून आया, और मेरे नाम लेते हुए बोला की प्रिंसिपल मैम ने बुलाया है...

मैं उसके साथ चला गया...

मैं प्रिंसिपल ऑफिस मे चला गया...

मैं - गुड़ मॉर्निंग मैम...

प्रिंसिपल ( शालिनी अग्रवाल ) - गुड़ मॉर्निंग... तुम हो राहुल जिसके लिए ठाकुर साहब ने कॉल किया...

मैं - यश मैम...

प्रिंसिपल - इतने दिन क्लासेस कैसे मिस की...

वो बहुत प्यार से बात कर रही थी... क्योंकि कल ठाकुर ने कहा था कि मैं उनके परिवार का सदस्य हूं

मैं - मैम वो नानाजी की तबियत खराब थी , तो उनके पास जाना पड़ा...

प्रिंसिपल - ठीक हैं. आगे से ध्यान रखना. कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना क्लास मे

मैं - नहीं मैम कोई प्रॉब्लम नहीं है...

प्रिंसिपल - कोई भी प्रॉब्लम हो तो मुझे बताना. Ok

मैं - OK मैम

प्रिंसिपल - मैंने तुम्हारी मार्कशीट्स देखी हैं. तुम इंटेलिजेंट स्टूडेंट हो, तुम यहां भी अच्छे से पढाई करो और अच्छे मार्क्स लाओ...

मैं - यश मैम

फिर मैं वहां से आ गया... क्लास मे मनीष और विकास ने पूछा की क्या हुआ, तो मैंने बोल दिया कि - कुछ नहीं बस ऐसे ही बुलाया था.

ब्रेक मे मनीष ने बताया कि वो अपनी गर्लफ्रेंड (प्रीति ) के साथ बाहर जा रहा है. वो चला गया...

फिर विकास बोला कि वो भी अपनी बहनों के साथ मूवी देखने जा रहा है...

तो मैं बोला - तो मैं क्या करूगा यहां...

विकास - तु भी चल हमारे साथ मूवी देखने...

मेरा भी मन नहीं था और क्लास लेने का तो मैंने हां कर दी. आज वो अपनी बाईक लाया था. हम दोनों अपनी अपनी बाईक पर विकास के घर चले गये...

वहां जाते ही विकास ने विनिता और कल्पना को बोला - चलो, चलते हैं...

तो विनिता बोली - मैं तैयार होके आती हूं...

विकास - जल्दी तैयार हो, कल्पना को भी बोल दे.

तभी मैंने विनिता कान मे कहा - पैंटी मत पहनना..

वो मेरी तरफ देखने लगी, उसने कुछ नहीं कहा. वो कमरे मे चली गई.

थोड़ी देर बाद विनिता और कल्पना, विकास और मैं मूवी देखने के लिए जाने लगे, तो कल्पना बोली मुझे बुलेट पर बैठना हैं और वो मेरी बाइक पर बैठ गयी.

मैंने सोचा था कि रास्ते मे विनिता के साथ कुछ मस्ती करूंगा, पर मैं अब कुछ बोल भी नही सकता था.

हम थियेटर मे आ गये. विकास ने टिकट पहले ही बुक कर दी थी. हम अपनी सीट पर बैठ गये. पहले विनिता फिर मैं ,मेरे पास मे कल्पना फिर विकास बैठ गया.

मूवी चालू हो गयी. विकास और कल्पना का ध्यान मूवी मे था. मैं भी मूवी देख रहा था. विनिता कभी मूवी तो कभी मेरी तरफ देख रही थी.

20-25 मिनट बाद मैंने विकास और कल्पना की तरफ देखा. वो दोनों मूवी देख रहे थे.

मैंने अपना हाथ विनिता की जांघ पर रख दिया. मेरे हाथ रखते ही उसके पैरों मे कंपन हुआ.

मैं अपना हाथ विनिता की चुत के पास ले गया और चूत पर रख दिया.

वो मेरी तरफ देखने लगी. मैं अपने हाथ से उसकी जींस का बटन खोलने लगा, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. वो डर रही थी. पर मैं तो नहीं डर रहा था.

मैंने जोर लगाकर उसका बटन खोल दिया तो उसने मेरा हाथ अपने टॉप ये ढक दिया, ताकि किसी को कुछ पता ना चले, और वैसे भी हॉल मे अंधेरा था.

मैं जींस के उपर से विनिता की चूत के साथ खेलने लगा. विनिता की आँखे बंद हो वे चूत को मसलने का मज़ा लेने लगी.

मैंने विनिता की पेंट को थोड़ा नीचे कर दिया. और अपना हाथ पेंट के अंदर डाल दिया. और चूत के पास ले गया.

विनिता ने पैंटी नही पहनी थी. उसने मेरी बात मान ली.

मैं विनिता की चूत पर धीरे धीरे उंगली घुमाने लगा.उसकी चूत पर बाल नही थे, वो बिल्कुल चिकनी थी. उसकी चूत टाइट थी. मतलब विनिता सही बोल रही थी कि वो वर्जिन है.

मैं धीरे धीरे चूत के साथ खेलने लगा. उसकी की चूत टाइट थी. मेरी उंगली बड़ी मुश्किल से अंदर जा रही थी. मैने सोचा अगर उंगली अंदर डाल दी तो विनिता की चीख निकल सकती है.

तो मैं उपर से ही उसकी चूत के साथ खेलने लगा.

 


# अपडेट - 105

तो मैं उपर से ही उसकी चूत के साथ खेलने लगा.

मूवी पूरी होने तक मेरा हाथ उसकी पेंट मे ही था. बस इंटरवेल मे मुझे हाथ निकालना पड़ा. इस दौरान मैंने दो बार उसका पानी निकाल दिया...

फिर उसने मेरा हाथ निकाल दिया, और धीरे से बोली - पूरा गीला गीला कर दिया तुमने, मेरी जींस भी खराब हो गई हैं. घर कैसे जाउंगी...

मैं बोला - गीला मैंने थोड़ी किया है तो तुमने ही किया है..

वे मुझे घुरने लगी. उसने अपने कपड़े ठीक किए. फिर कुछ नहीं हुआ.

मूवी देखने के बाद हम बाहर आ गये. मैंने विनिता को बीच मे कर लिया और उसके पीछे हो गया ताकि उसकी जींस किसी ना दिखे...

हम वहां से विकास के घर आ गये. अब भी मेरे साथ कल्पना ही थी. वो मुझसे चिपक कर बैठी थी. जिससे उसके छोटे छोटे चुचे मेरी पीठ पर टच हो रहे थे. जिसका असर मेरे लंड पर हो रहा था.

किसी तरह मैंने खुद को शांत किया...

हम विकास के घर आ गये. विनिता जल्दी से अपने रूम मे चली गई. थोड़ी देर रूक कर मैं घर चला गया.

घर आकर मैंने खाना खाया. फिर मैं अपने कमरे मे जाकर बेड पर बैठ कर कॉलेज के बचे हुए नोट्स कॉपी करने लगा.

एक डेढ़ घंटे नोट्स बनाने के बाद मैं बाहर हॉल मे आ गया. मैं मम्मी के पास बैठकर बातें करने लगा.बातों बातों मे उन्होंने बताया कि आज मीनाक्षी भाभी आ गई हैं. उनके भाई सुबह ही उनको छोड़कर गये हैं

ये बात सुनकर मैं खुश हो गया, मेरी एक रांड जो वापिस आ गई थी...

हम कई देर तक बातें करते रहे, शाम होने वाली थी तो मैं बाहर आ गया...

मैं राजू भाई के घर आ गया, मैं अब गया तो चौक मे ताऊजी, मेरी प्यारी रंडी़ दादी, ताईजी और राजू भाई सब बैठे हुए थे. मीनाक्षी नहीं दिखी. मैं उनके पास बैठ गया..

राजू - कैसा है राहुल...

मैं - ठीक हूँ. आप कैसे हैं काम कैसा चल रहा हैं.

राजू - काम अच्छा चल रहा हैं. ऑफिस मे अकाउंट ही देखने होते हैं.

मेरा नाम सुनकर मीनाक्षी जो किचन मे काम कर रही थी वो किचन की खिड़की के पास आ गई... मैंने उसे देख लिया, वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी... मैं भी मुस्कुरा दिया...

कुछ देर बाद कर्ण सिंह ताऊजी बाहर चले गये गाँव मे, ताईजी और दादी वही बातें कर रहे थीं. मैं राजू भाई के साथ बाहर आ गया...

कुछ देर बैठने के बाद मैं घर आ गया, और एक कागज पर लिखने लगा. मैंने लिखकर वो कागज जेब मे डाला और बाहर आ गया.

बाहर सब बच्चे खेल रहे थे, वहां पर निंशात भी था. मैंने उसे अपने पास बुलाया.

और उसे वो कागज देते हुए कहा - निशांत, ये कागज अपनी मम्मी को दे आ...

निंशात - चाचा क्या हैं, इसमें...

मैं - कुछ काम की चीज है. जा जल्दी जा और दे आ...

निंशात चुपचाप चला गया, दो चार मिनट बाद वापिस आ गया...

मैं - दे दिया...

निंशात - हां चाचा...

मैं - ये ले चॉकलेट....

चॉकलेट देखकर निंशात खुश हो गया.... चॉकलेट लेकर वो खेलने चला गया.

मैंने कागज मे सुबह जल्दी पशुओं के बाडे़ मे मिलने को लिये बोला था. आपको तो पता है कि गाँव मे सुबह जल्दी उठकर काम के लग जाते हैं. बाडे़ की तरफ औरतें 5:30 बजे तक आती हैं पशुओं के पास...

मैंने मीनाक्षी को 4:45 बजे बाड़े मे आने को कहा ताकि उसकी चुत रगड़ सकु....

 


# अपडेट - 106

मैंने मीनाक्षी को 4:45 बजे बाड़े मे आने को कहा ताकि उसकी चुत रगड़ सकु....

रात को खाना खाया और रूम मे आ गया. रोज मैं 4:50 - 5 बजे तक उठता हूँ. सुबह जल्दी उठना था तो घड़ी मे 4.30 का अलार्म लगाया और सो गया.

सुबह अलार्म बजते ही मैं उठ गया. जल्दी से फ्रेश हुआ और चुपचाप बाहर आ गया.

मैं बाड़े मे चला गया. मीनाक्षी तो वही पर पहले से थी. जैसे ही उसने मुझे देखा वो दौड़ते हुए मेरे सीने से आ लगी और मुझसे लिपट गयी और मुझे चूमने लगी. मैने भी पूरा साथ देते हुए उसके रसभरे अधरो को चूसना शुरू किया...

क्या बताऊ उनके सुर्ख मीठे थे. वो तो ऐसे चुम रही थी जैसे जन्मो की प्यासी हो. वो रूक ही नहीं रही थी, मैंने जबरदस्ती अलग किया...

उसकी आँखें वासना मे लाल थी, वो अपनी सांसों को संभाल रही थी. वो फिर से मुझसे चिपक गई...

मीनाक्षी - मेरे राजा पता है मुझे कितनी याद आई.

मैने अपना हाथ उसके घाघरे मे डाला और उनकी गरमा गरम चूत पे रख दिया, और बोला - तुम्हें या फिर इसे...

मीनाक्षी - आआह... हम दोनों ही... राजा आपकी याद मैं हम दोनों ही बहुत तड़पे हैं... हमारी तड़प को शांत कर दो.

उसने पेंटी नही पहनी थी वो पूरी तैयारी कर के आई थी. मैने चूत के दाने को सहलाना शुरू कर दिया.

मीनाक्षी भाभी ने अपनी टाँगो को कस लिया. थोड़ी देर दाने को रगड़ने के बाद मैने दो उंगलिया एक साथ उनकी चूत मे घुसा दी तो वो चिहुकते हुए बोली - आअहह... धीरररे...

और धीरे से कहा - अब ना तड़पाओ, जल्दी से मेरी आग बुझा दो.

मैने अपना ट्रेक पेंट नीचे सरकाया और अपने लंड को चूसने को कहा..

वो नीचे बैठ गयी और लंड को अपने मूह मे भर कर गपागप चूसने लगी. मैने उनका सर पकड़ लिया और मज़े से लंड को चुसवाने लगा.

2-4 मिनिट बाद उसने लंड को बाहर निकाला और घास के ढेर पे लेट गयी और बोलने लगी - अब जल्दी से चोद दो मेरे राजा...

मैं उपर आ गया और लंड को चूत पर सेट किया और धक्का लगा दिया... आधा लंड रसभरी मे घुस गया.... मीनाक्षी के मुंह से आआहह निकल गई.

मैंने एक और धक्का लगाकर पूरा लंड़ चुत मे ठोक दिया.

मीनाक्षी - आआहह.. उऊऊहह.... करते हुए मुझसे चिपक गई.

मीनाक्षी की चूत बहुत ही कुलबुला रही थी. वो भी ऐसे चुद रही थी जैसे ये उनकी अंतिम चुदाई हो और हल्के हल्के मेरे कान को अपने दांतो से काट रही थी. उसके नाख़ून मेरी पीठ पे रगड़ रहे थे.

मैं भी दे दनादन लगा हुआ था चूत और लंड अपनी लड़ाई करने मे लगे हुवे थे.

पांच मिनट मे ही मीनाक्षी ने मुझे अपने से कस लिया और स्खलित हो गयी.

मैं वैसे ही धक्के लगाता रहा. मैंने टाइम देखा तो 5:10 हो गये थे. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

मीनाक्षी फिर से गरम हो गई. अब वो अपनी गांड हिलाने लगी और लंड को अंदर तक लेने लगी.

उसके मुंह से आंहे निकल रही थी. वो जोर जोर सिसकारीयां ले रही थी. उसकी गरम सांसे मुझे और उतेजित करने लगी.

करीब 10 मिनट बाद मेरा लंड भी अपनी रांड की चुत मे माल उगलने लगा . वो चूत मे घसा घस पानी छोड़ने लगा उनकी चूत की दीवारे मेरे पानी से भीग रही थी. मेरे माल की गरमी पाकर मीनाक्षी भी पानी छोड़ने लगी.

फिर मैं खड़ा हुआ और ट्रैक पेंट पहनने लगा, वो भी अपने कपड़े सही करने लगी...

कपड़े पहन कर मैं मीनाक्षी को होंठों को चुसने लगा. दो मिनट बाद मैंने उन्हें अलग किया. फिर मैं वहां से बाहर आ गया.

मैं सीधा घर आ गया, पसीने से भर गया था तो नहाने चला गया..

नहाकर हमेशा की तरह अपना ब्रेकफास्ट किया. फिर मैं कॉलेज चला गया. आज कुलदीप भी साथ चल रहा था.

ऐसे ही चार पाँच दिन निकल गये. रोज कॉलेज जाना, पढाई करना. बीच मे किसी रंडी़ को चोदना.

पंकज माँ बनने वाली थी तो सब खुश थे. हां पर अनिल भाई ज्यादा खुश नहीं थे. अब क्या कर सकते थे.

आज संडे था तो आज मैं घर पर ही था. सुबह मैं नहा धोकर जल्दी तैयार हो गया. मैं ग्राउंड की तरफ चल पड़ा. मैं घर से निकला तो ठाकुर का कॉल आया. वो मुझे हवेली बुला रहे थे.

तो मैं ग्राउंड जाना कैंसल कर हवेली चला गया.

 


# अपडेट - 107

आज संडे था तो आज मैं घर पर ही था. सुबह मैं नहा धोकर जल्दी तैयार हो गया. मैं ग्राउंड की तरफ चल पड़ा. मैं घर से निकला तो ठाकुर का कॉल आया. वो मुझे हवेली बुला रहे थे.

तो मैं ग्राउंड जाना कैंसल कर हवेली चला गया.

आगे -

मैं हवेली के अंदर चला गया.

ठाकुर और ठकुराइन हॉल मे बैठ कर कर मेरा इंतज़ार कर रहे थे.पायल वहीं पर खड़ी थी...

मैं भी उनके पास जाकर सोफे पर बैठ कर गया.

ठाकुर - राहुल तुम तो गायब ही हो गये.

मैं - वो ताऊजी कॉलेज जाना शुरू किया है.

ठकुराइन - हम से मिलने तो आ जाते

मैं - आने वाला था , पर आपने पहले बुला लिया. वैसे अब तबियत कैसी है आपकी...

ठाकुर - अब तो ठीक हूँ. कौशल्या और बहू पूरा ख़याल जो रख रहे है.

मैं - रणजीत कैसा है...

ठाकुर - पहले से थोड़ा सुधार हुआ है. अभी और हॉस्पिटल मे रहना होगा...

मैं - चिंता मत करिये वो भी ठीक हो जायेगा...

ठकुराइन - आज तुम्हें दावत के लिए बुलाया है...

ठाकुर - और तुम्हारे लिए एक तोहफा है.

मैं - मेरे लिए ये सब, इसकी क्या ज़रूरत थी.

ठकुराइन - इसकी तो बहुत ज़रूरत थी. तुम ने हमारे परिवार के लिए जो किया उसके बदले मे हम तुम्हें कुछ देना चाहते है.

ठाकुर - बेटा तुमने हमारे परिवार की बहुत बार मदद की हैं, तुमने हमारी और रणजीत की जान बचा कर हमारे ऊपर जो अहसान किया है, उसके सामने हम जो भी करें वो सब कम हैं,फिर भी हम तुम्हें कुछ देना चाहते है.

मैं - मुझे कुछ नहीं चाहिए, मैं आप सब को अपना मानता हूं . मैने आपकी जान इसलिए नहीं बचाई की मुझे कुछ चाहिए...

ठाकुर - मुझे पता था तुम ऐसा ही कहोगे. राहुल तुम्हारे जैसे इंसान बहुत कम होते हैं. लेकिन हम जो तुम्हें दे रहे हैं वो तुम्हें लेना होगा....

फिर ठाकुर ने वहां टेबल पर रखे पेपर को उठाया.

ठाकुर - राहुल हमने कुछ डिसाइड किया हैं . हमने तुम्हारे नाम कुछ किया है. और हमने ये फैसला तुम्हारी ताईजी ( ठकुराइन ) और बहू सबने मिलकर लिया है...

फिर ठाकुर ने वो पेपर मुझे दिये और बोले - हमने हमारी एक फैक्टरी मे तुम्हें 60% का पार्टनर बनाया है. और कंपनी मे कुछ शेयर ( मतलब कुछ हिस्सा ) तुम्हारे नाम किये हैं. तुम इन पर साइन कर दो...

मैं - ताऊजी इसकी क्या ज़रूरत थी.

ठाकुर - बेटा ज़रूरत थी. आज हम जो हैँ तुम्हारी वजह से हैं. इस घर मैं जो खुशी है वो तुम्हारी वजह से ही हैं...

ठकुराइन - मना मत करना ये हम सब की तरफ से हैं.

तभी पायल बोली - प्लीज मना मत करो.. रख लो. पापा जी प्यार से दे रहे हैं.

मैं - मैं इन सब का क्या करूँगा. मुझे बिजनेस के बारे मे कुछ पता नही है...

ठाकुर - तुम चिंता मत करो. धीरे धीरे तुम सीख जाओगे... चलो इन पर साइन कर दो...

मैंने उन पेपर्स पर साइन कर दिया...

फिर ठाकुर ने मुनीम को बुलाया जो बाहर बैठक मे थे.

ठाकुर - मुनीम जी ये लीजिये पेपर्स, सारी फोर्मेलिटीज पूरी कर दीजिये...

राहुल तुम अपनी बैंक डिटेल्स दे दो ताकि तुम्हारा अकाउंट कनेक्ट हो जाये...

मैं - ताऊजी कल परसो तक दे दूँ. वो क्या है कि मेरे पास जो अकाउंट हैं अगर उसमें रूपये आये तो मम्मी पापा को पता चल जायेगा. मैं अभी नहीं चाहता कि उनको अभी पता चले...

ठाकुर - ठीक है दे देना...

मैं - ताऊजी आप भी प्लीज मम्मी पापा को कुछ नही बताएँगे.

ठाकुर - ठीक है जैसा तुम कहोगे वैसा ही होगा.

पायल वहां से चली गई. कुछ देर तक हम बातें करते रहे फिर पायल आई और बोली चलिए खाना खा लीजिये...

हम डाइनिंग टेबल पर आ गये, डाइनिंग टेबल बहुत आलीशान थी...

नौकर खाना लगाने लगे, खाना क्या ये तो शाही भोज था. तरह तरह के पकवान बने हुए थे.

मैं, ताऊजी और ताईजी खाना खाने लगे. खाना बहुत ही लजीज था.

मैं - ताईजी, खाना बहुत टेस्टी है...

ठकुराइन - हां... खाना पायल ने खुद बनाया है...

मैंने पायल की तरफ देखा और अपने अंगूठे और उंगली को मिलाकर इशारा कर दिया. वो हल्का सा मुस्कुरा दी.

खाना खाने के बाद ताउजी बोले - राहुल हमे हमारे कमरे मे ले चलो.

वैसे तो वो ठीक हो गये थे, पर चलने मे थोड़ी प्रॉब्लम होती थी. मैं उनको लेकर उनके रूम मे आ गया.

वो बेड पर सहारा लेकर बैठ गये. और बोले - हमारे पास बैठो. हमे तुमसे कुछ बात करनी हैं.

मैं उनके पास बैठ गया...

 


अपडेट - 108

वो बेड पर सहारा लेकर बैठ गये. और बोले - हमारे पास बैठो. हमे तुमसे कुछ बात करनी हैं.

मैं उनके पास बैठ गया...

आगे -

मैं - हाँ ताउजी कहिए...

ठाकुर - हम जो तुम्हें कहने वाले हैं वो सुनकर तुम हमे गलत मत समझना. पहले हमारी पूरी बात सुनना..

मैं - ऐसी क्या बात है...

ठाकुर - कुछ ऐसी ही बात हैं. हमने कभी सोचा भी नहीं था लेकिन परिस्थिति और हालात कुछ ऐसे हैं.

मैं - ताउजी बताइए तो क्या बात हैं...

ठाकुर - राहुल.. बेटा हम तुमसे कुछ मांगना चाहते हैं.

मैं - मुझसे..! मैं आपको क्या दे सकता हूँ ताऊजी...

ठाकुर - राहुल तुम दे सकते हो. तुम इस खानदान को एक उम्मीद एक नई आशा दे सकते हो...

मैं - मैं समझा नहीं, ताउजी प्लीज आप साफ साफ बताइए...

ठाकुर - हम चाहते हैं कि तुम हमें हमारा वारिस, इस खानदान का कुल दीपक दो...

( उनकी बात सुनकर मैं चौंक गया. मुझे कुछ समझ नहीं आया. मुझे लगा कि मैंने गलत सुना )

मैं - क्ययया...

ठाकुर - राहुल तुम...

मैं - ये आप क्या बोल रहे हैं ताउजी... रणजीत......

ठाकुर - हम सही बोल रहे हैं राहुल. हम मजबूर हैं...

मैं - मजबूर..! क्यों...?

ठाकुर - तुम्हें पता है कि हमले मे रणजीत बुरी तरह घायल हुआ है. उसकी रीढ़ की हड्डी मे चोट लगी हैं...

मैं - हाँ, ताऊजी पता है पर...

ठाकुर - हमारी बात सुनो पहले...

मैं चुप हो गया...

ठाकुर - उसकी रीढ़ की हड्डी बुरी तरह डैमेज हो गई हैं वो अब पहले जैसा नहीं हो सकता,और रणजीत के गुप्त अंग भी बुरी तरह जख्मी हो गये हैं. जिस कारण वो कभी पिता नहीं बन सकता...

मैं - क्या.....

ठाकुर - हां राहुल वो कभी.....

मैं - पर ताउजी...

ठाकुर - बेटा तुम बहुत अच्छे और नेकदील इंसान हो. तुम ही हो जो हमारी मदद कर सकते हो... तुम जो चाहो वो हम दे सकते हैं...

मैं - अच्छा.. मतलब वो सब जो आपने मुझे दिया वो सब इसलिए... ताउजी मैं ऐसा इंसान नहीं हूं कि पैसे के लिए कुछ भी...

बात को पूरी किये बिना ही मैं खड़ा हो गया...

तभी ठकुराइन की आवाज आई - राहुल ऐसी बात नहीं हैं..

और वो अंदर आ गई, जिस तरह वो आई ऐसा लगा कि वो गेट के पास खड़ी थी और हमारी बातें सुन रही थी...

मैं - तो ताईजी कैसी बात है...

मुझे खड़ा देखकर ताऊजी भी खड़े होने लगे, जिससे उनको तकलीफ होने लगी तो मैंने उन्हें रोक दिया और कहा - आप ऐसे ही बैठे रहिये...

ठाकुर - तुम हमारे पास बैठो...

मैं वापिस बैठ गया...

फिर ठकुराइन बोली - राहुल ऐसी कोई बात नहीं हैं. वो गिफ्ट तो इन्होंने तुम्हें प्यार से दिया हैं. इस बात से कोई संबंध नहीं हैं...

मैं - ताईजी आप भी...

ठकुराइन - पहले इनकी तो बात सुन लो...

मैं ठाकुर की बात सुनने लगा...

ठाकुर - राहुल पीढियों से हमारे खानदान का बहुत नाम हैं. हमारी बहुत इज्जत, मान सम्मान है. पर अब ये सब आगे नहीं बढ़ पायेगा. हमारे खानदान का नाम खत्म हो जायेगा.

जब हमें रणजीत के बारे मे पता चला तब हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब हम क्या करें. हमने कोशिश की कई डॉक्टरों से बातचीत की पर सबने एक ही बात कही कि कुछ नहीं हो सकता.

तब हमें लगा कि आगे सब खत्म हो जायेगा.

पर जिस दिन तुम हमसे मिलने आये थे, उसके बाद हमें ये ही ख्याल आ रहा था कि काश तुम हमारे बेटे होते. पर ये तो मुमकिन नहीं हैं लेकिन तुम हमें वारिस दे सकते हो...

मैं - ताऊजी मैं आपकी बात समझ रहा हूं. मुझे पता है आप पर क्या बीत रही हैं. लेकिन मैं कैसे...

ठाकुर - बेटा आजतक ठाकुर सज्जन सिंह किसी के आगे नहीं झुका पर आज हम तुमसे हाथ जोड़कर विनती करते हैं... हम सिर्फ तुम पर विश्वास कर सकते हैं. और किसी पर भी नहीं...

वो मेरे आगे हाथ जोड़ने लगे, उनकी आँखों मे आंसू थे... मैंने उनके हाथों को पकड़कर बोला - ताऊजी प्लीज ऐसा मत करिये...

ठाकुर - हम बहुत लाचार और बेबस हैं, हम पर एक और अहसान कर दो...

अब मेरी समझ मे कुछ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ. आज मैंने ठाकुर ताऊजी को पहली बार ऐसे देखा था. जिस इंसान के रोब से पूरा जिला डरता था आज वो मेरे आगे हाथ जोड़ रहा है.

मैंने दो मिनट तक सोचा,फिर मैंने कहा - ठीक है ताऊजी मैं आपकी बात मानने के लिए तैयार हूँ

( अब मैंने क्या सोचा,और मैं क्यों तैयार हो गया.ये सब थोड़ी देर बाद बतांऊगा )

मैं - पर ये सब कैसे होगा......

ठकुराइन - तुम और बहू इस परिवार को आगे बढ़ाओगे...

ताईजी की बात सुनकर बता नहीं सकता मुझे कितनी खुशी हुई. पर मैं जाहिर तो नहीं कर सकता था.

मैं बोला - पर ताईजी...

 
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