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Guest
* अपडेट -14
अब उनसे खड़े रहना मुश्किल होता जा रहा था…
देवरररजी मुझे पलंग पर ले चलो…प्लेआसीए…
मेने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया, उन्होने अपनी बाहें मेरे गले में लपेट दी.. और मैने मेरे मूह पर लगे उनके कामरस को उन्हें भी चाट दिया...
मै - कैसा था स्वाद आपके रस का..?
भाभी कुछ नहीं बोली.. वो मेरे से और चिपक गयी और मेरे गाल पर ज़ोर से काट लिया..
मेरी चीख निकल गयी और उनके दाँतों के निशान मेरे गाल पर छप गये, जिसे वो अपनी जीभ से चाटने लगी…
मेने भाभी को पलग पर लिटा दिया और खुद भी उनकी बगल में लेटकर उनके बदन पर अपना हाथ फिराने लगा.
मैने भाभी से कहाँ अब तुम भी मेरे लंड को अपने मुँह मे लेकर उसे चाटो, चुसो...
भाभी - नहीं... मै ऐसा नहीं कर सकती... मै इसे मुँह मे नहीं ले सकती...
मै - ये बहुत अच्छा है एक बार चुस के देखो फिर बताना... रोज चुसोगी फिर.... और मैने भी तुम्हारी चुत को चाटा है ना...
भाभी नही... मुझसे नहीं होगा....
मै- साली रंडी तु मेरी रखेल है, मै जो बोलुगा वो तु करेगी.... कल तो बडी बडी बाते कर रही थी(मै आपकी दासी हू, आपका ही हक है......... )
भाभी - नाराज ना होवो मेरे राजा.. आपकी खुशी के लिए मै सब कुछ करूँगी...
आप सीधे लेट जाओ... मै आपको सारे सुख दुंगी
मे सीधा लेट गया, तो भाभी अपनी गोल-मटोल 38 इंची गांड लेकर, पैरों के पास बैठ गयी..
उन्होने उसे अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लिया और धीरे से मसल्ने लगी.. फिर हल्का सा उसका टोपा खोलकर उन्होने उसे चूम लिया…
मज़े में मेरी आहह… निकल गयी, दूसरे हाथ से वो मेरे टट्टों को सहला रही थी, फिर उन्होने लंड को उपर करके उन दोनो को अपने मुँह में भर लिया…
कुच्छ देर मेरे आंडों को चूसने के बाद उन्होने मेरे अधखुले सुपाडे को अपने होठों में क़ैद कर लिया और धीरे-2 उसको अंदर और अंदर लेने लगी....
(पहली बार मे ही भाभी बहुत अच्छे से लंड चूस रही थी )
भाभी अपने मुँह को आगे-पीछे करके उसको चूसने लगी.. मेरा हाल बहाल होने लगा, और अपने-आप मेरी कमर भी आगे पीछे होने लगी, एक तरह से में उनके मुँह को चोद रहा था……
मेरे हाथ उनके सर पर थे, वो मेरी आँखों में देख रही थी और चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी…
मे अपने चरम पर पहुँचने ही वाला था कि उन्होने लंड चूसना बंद कर दिया… मेरे चेहरे पर असीम आश्चर्य के भाव आ गये..
मैने पुच्छा…रुक क्यों गयी भाभी… और करो ना… ! मेरा निकलने वाला था…!
तो वो बोली सैयांजी जी ! आज इसकी पहली धार मुझे अपने अंदर लेनी है, ये कह कर वो पलट गयी, और अपनी पीठ और मदमस्त गांड मेरे से सटा दी…
मेरा लंड चुत को देखकर खुशी से ठुमके लगाने लगा..
उसके झटके देखकर भाभी को हँसी आ गयी और बोली – देखा मेरे बालम जी.. आपका ये शेर अपनी सहेली को देखकर कैसे ठुमके लगा रहा है…
फिर मैने भाभी को अपने नीचे लिया... और अपने हाथ भाभी के चुचो पर टिका दिए, और उनको सहलाते हुए मै उनके उपर झुकता चला गया… उनके होठों को अपने मूह में लेकर चूसने लगा…
उनके निपल मेरे सीने से रब कर रहे थे, जिसके कारण मेरे पूरे शरीर में सुर-सुराहट सी होने लगी…..
भाभी आगे-पीछे होकर अपनी चुचियों को मेरे सीने से घिस रही थी, जिस के कारण उनकी रसभरी चुत भी मेरे लंड से गले मिलने लगी,
और अपने गीले होठों की मसाज देते हुए मानो कह रही ही.. आजा मेरे प्यारे समा जा मुझमें…
अब उनसे रहा नही जा रहा था, सो बोल पड़ी – आहह… देवरररजी… कुच्छ करो अब… जल्दी से…
मैने भी अब देर करना उचित नही समझा, उनके उपर झुके हुए ही मैने लंड को अपनी मुट्ठी में लिया और उनकी रस से भरी गागर के छोटे से मूह पर रख कर अपनी कमर को हल्के से दबा दिया…
गीली चूत में मेरा तिहाई लंड समा गया..
लेकिन भाभी कसी हुई चुत मे मेरा तगडे मोटे लंड की वजह से उनके अंदर एक तेज दर्द की लहर दौड़ गयी.. और मेरे उनके मुँह से चीख निकल गयी…
आईईईई……माआ….! देवरररजी…जरा..रूको… मेरी चुत मे जलन हो रही है आहह…
लेकिन मुझे पता था कि ऐसा कुच्छ देर के लिए होगा.. सो मै लंड को उनकी चुत पर दबाए हुए बैठा रहा और एक चुचि पकड़ कर चुसने लगा…
मैने उनकी चुची को मुँह मे लिए ही लंड को एक बार और दबा दिया…
अब आधे से ज़्यादा लंड उनकी चूत में सरक चुका था… लेकिन फिर से हल्का दर्द हुआ...
कुच्छ देर बाद उन्हें राहत सी हुई.. तो मैने जोर से एक झटका मारा और मेरा पूरा आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड अंदर घोंट दिया..
अब दर्द पहले से कम था, शायद उनकी रामप्यारी ने अंदर ही अंदर अपने रस रूपी क्रीम से उसे चिकना दिया था..
अब मैने भाभी की छाती पर अपनी हथेलियों रखी और धक्के लगाने लगा....
शुरू-2 में मै धीरे-2 आराम से धक्के लगाता रहा.. फिर अपनी गति को बढ़ा दिया..
अब उन्हें दर्द की जगह मज़ा आने लगा था..
अब उनसे खड़े रहना मुश्किल होता जा रहा था…
देवरररजी मुझे पलंग पर ले चलो…प्लेआसीए…
मेने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया, उन्होने अपनी बाहें मेरे गले में लपेट दी.. और मैने मेरे मूह पर लगे उनके कामरस को उन्हें भी चाट दिया...
मै - कैसा था स्वाद आपके रस का..?
भाभी कुछ नहीं बोली.. वो मेरे से और चिपक गयी और मेरे गाल पर ज़ोर से काट लिया..
मेरी चीख निकल गयी और उनके दाँतों के निशान मेरे गाल पर छप गये, जिसे वो अपनी जीभ से चाटने लगी…
मेने भाभी को पलग पर लिटा दिया और खुद भी उनकी बगल में लेटकर उनके बदन पर अपना हाथ फिराने लगा.
मैने भाभी से कहाँ अब तुम भी मेरे लंड को अपने मुँह मे लेकर उसे चाटो, चुसो...
भाभी - नहीं... मै ऐसा नहीं कर सकती... मै इसे मुँह मे नहीं ले सकती...
मै - ये बहुत अच्छा है एक बार चुस के देखो फिर बताना... रोज चुसोगी फिर.... और मैने भी तुम्हारी चुत को चाटा है ना...
भाभी नही... मुझसे नहीं होगा....
मै- साली रंडी तु मेरी रखेल है, मै जो बोलुगा वो तु करेगी.... कल तो बडी बडी बाते कर रही थी(मै आपकी दासी हू, आपका ही हक है......... )
भाभी - नाराज ना होवो मेरे राजा.. आपकी खुशी के लिए मै सब कुछ करूँगी...
आप सीधे लेट जाओ... मै आपको सारे सुख दुंगी
मे सीधा लेट गया, तो भाभी अपनी गोल-मटोल 38 इंची गांड लेकर, पैरों के पास बैठ गयी..
उन्होने उसे अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लिया और धीरे से मसल्ने लगी.. फिर हल्का सा उसका टोपा खोलकर उन्होने उसे चूम लिया…
मज़े में मेरी आहह… निकल गयी, दूसरे हाथ से वो मेरे टट्टों को सहला रही थी, फिर उन्होने लंड को उपर करके उन दोनो को अपने मुँह में भर लिया…
कुच्छ देर मेरे आंडों को चूसने के बाद उन्होने मेरे अधखुले सुपाडे को अपने होठों में क़ैद कर लिया और धीरे-2 उसको अंदर और अंदर लेने लगी....
(पहली बार मे ही भाभी बहुत अच्छे से लंड चूस रही थी )
भाभी अपने मुँह को आगे-पीछे करके उसको चूसने लगी.. मेरा हाल बहाल होने लगा, और अपने-आप मेरी कमर भी आगे पीछे होने लगी, एक तरह से में उनके मुँह को चोद रहा था……
मेरे हाथ उनके सर पर थे, वो मेरी आँखों में देख रही थी और चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी…
मे अपने चरम पर पहुँचने ही वाला था कि उन्होने लंड चूसना बंद कर दिया… मेरे चेहरे पर असीम आश्चर्य के भाव आ गये..
मैने पुच्छा…रुक क्यों गयी भाभी… और करो ना… ! मेरा निकलने वाला था…!
तो वो बोली सैयांजी जी ! आज इसकी पहली धार मुझे अपने अंदर लेनी है, ये कह कर वो पलट गयी, और अपनी पीठ और मदमस्त गांड मेरे से सटा दी…
मेरा लंड चुत को देखकर खुशी से ठुमके लगाने लगा..
उसके झटके देखकर भाभी को हँसी आ गयी और बोली – देखा मेरे बालम जी.. आपका ये शेर अपनी सहेली को देखकर कैसे ठुमके लगा रहा है…
फिर मैने भाभी को अपने नीचे लिया... और अपने हाथ भाभी के चुचो पर टिका दिए, और उनको सहलाते हुए मै उनके उपर झुकता चला गया… उनके होठों को अपने मूह में लेकर चूसने लगा…
उनके निपल मेरे सीने से रब कर रहे थे, जिसके कारण मेरे पूरे शरीर में सुर-सुराहट सी होने लगी…..
भाभी आगे-पीछे होकर अपनी चुचियों को मेरे सीने से घिस रही थी, जिस के कारण उनकी रसभरी चुत भी मेरे लंड से गले मिलने लगी,
और अपने गीले होठों की मसाज देते हुए मानो कह रही ही.. आजा मेरे प्यारे समा जा मुझमें…
अब उनसे रहा नही जा रहा था, सो बोल पड़ी – आहह… देवरररजी… कुच्छ करो अब… जल्दी से…
मैने भी अब देर करना उचित नही समझा, उनके उपर झुके हुए ही मैने लंड को अपनी मुट्ठी में लिया और उनकी रस से भरी गागर के छोटे से मूह पर रख कर अपनी कमर को हल्के से दबा दिया…
गीली चूत में मेरा तिहाई लंड समा गया..
लेकिन भाभी कसी हुई चुत मे मेरा तगडे मोटे लंड की वजह से उनके अंदर एक तेज दर्द की लहर दौड़ गयी.. और मेरे उनके मुँह से चीख निकल गयी…
आईईईई……माआ….! देवरररजी…जरा..रूको… मेरी चुत मे जलन हो रही है आहह…
लेकिन मुझे पता था कि ऐसा कुच्छ देर के लिए होगा.. सो मै लंड को उनकी चुत पर दबाए हुए बैठा रहा और एक चुचि पकड़ कर चुसने लगा…
मैने उनकी चुची को मुँह मे लिए ही लंड को एक बार और दबा दिया…
अब आधे से ज़्यादा लंड उनकी चूत में सरक चुका था… लेकिन फिर से हल्का दर्द हुआ...
कुच्छ देर बाद उन्हें राहत सी हुई.. तो मैने जोर से एक झटका मारा और मेरा पूरा आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड अंदर घोंट दिया..
अब दर्द पहले से कम था, शायद उनकी रामप्यारी ने अंदर ही अंदर अपने रस रूपी क्रीम से उसे चिकना दिया था..
अब मैने भाभी की छाती पर अपनी हथेलियों रखी और धक्के लगाने लगा....
शुरू-2 में मै धीरे-2 आराम से धक्के लगाता रहा.. फिर अपनी गति को बढ़ा दिया..
अब उन्हें दर्द की जगह मज़ा आने लगा था..