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* अपडेट -22
मै - आप मुझे यहाँ पर क्यूँ लाई है.
दादी - पहले एक कस्सी (खोदने का फावडा़ ) लेके आ..
ये जगह हमारे खेत से नजदीक ही है तो मै जाके वहां से एक कस्सी ले आया...
मैने कहा इसका क्या करोगी...
फिर दादी मुझे मंदिर के पास ले गई, मंदिर बडा नहीं था, जैस खेतों मे होता है वैसा छोटा था.
फिर मुझे मंदिर के एक साईड मे खोदने के लिए कहाँ.
मै - यहाँ पर क्यो खरवा रही हो..
दादी - खोद ते सही..
मै वहाँ पर खोदने लगा...
3-4फुट तक खोदने पर मेरी रस्सी किसी चीज से टकराई... ये एक बॉक्स था.
मैने उसे बाहर निकाल लिया,बक्सा बहुत बड़ा और भारी भी था.
उस पर ताला लगा हुआ था...
मुझे दादी से पूछा इसमे क्या है..
दादी - सब बताती हू, पहले तु दुसरी तरफ चल उस तरफ भी खोद...
मै दूसरी तरफ खोदने लगा...
उस तरफ भी एक बक्सा निकला, ये बक्सा पहले वाले से अलग था, ये उससे छोटा था...
मैने उसको भी बाहर निकाल लिया...
दादी उनके ताले खोलने लगी लेकिन वो खुल नहीं रहे थे... शायद लंबे समय से बंद थे इस कारण जाम हो गये थे...
दादी ने मुझे खोलने के लिए कहा... मैने अपना पूरा जोर लगाकर तालो को खोल दिया....
दादी ने दोनो बक्सो को खोल दिया...
बक्सो मे जो था उसे देखकर मै चौंक गया.. मुझे समझ नहीं आ रहा था कुछ....
बडे वाले बक्सा सोने का भरा हुआ था, बस थोड़ा सा ही खाली था... दुसरा बॉक्स मे रूपये थे.
दादी - मुझे पता है बेटा तुम सोच रहे होगे की ये इतना सारा सोने और पैसे कहाँ से आये...
मै- हा... कहा से आये ये इतना सोना और पैसे, ये सब यहाँ पर गढे हुए क्या कर रहे है...
दादी- मै तेरे सभी सवालों का जवाब दुंगी....
मै - जल्दी बताओ.
दादी - ये तेरे दादा के है.
मै- उनके पास कहाँ से आये...
दादी - बात बहुत पुरानी है, तेरे दादा के एक दोस्त थे उनका नाम रा़यसिंह था.. तेरे दादा और वो बहुत अच्छे, घनिष्ठ दोस्त थे.
रायसिंह बहुत बडे व्यापारी थे... बहुत पैसा था उनके पास.
एक बार वे अपने पूरे परिवार के साथ हमारे घर आये... उनके बीबी, बच्चे उनके साथ थे, और साथ मे ये बक्से भी थे...
वे उस दिन यहीं पर रूकने वाले थे...
रात मे उन्होंने तेरे दादा को बताया की -
रायसिंह - मेरा छोटा भाई दीप चंद मेरे पैसों और जायदाद के लिए मुझे और मेरे परिवार को मारना चाहता है. इसलिए मै छिपकर तेरे पास आया हूँ...
एक तु ही है जिस पर मै विश्वास कर सकता हू..
तुझे मेरी एक मदद करनी होगी....
दादा- मुझसे जो भी होगा मै तेरे लिए करूँगा, बता मै तेरी क्या मदद कर सकता हूँ
रायसिंह - मुझे पता है मेरा भाई मुझे यहाँ ढूंढ लेगा... मै आज रात को ही यहाँ से परिवार के साथ किसी ऐसी जगह चला जाऊँगा जहाँ वो मुझे ढूंढ नहीं सकता.
लेकिन मै इतने सामान के साथ नहीं जा सकता.
ये सामान तु तेरे पास रखले
फिर रायसिंह दादा को उन बक्सो के पास ले गये, और उनको खोल दिया...
रायसिंह - इस बक्से मे सोना है..और दुसरे मे परिवार के सभी गहने है.
अभी ये तेरे पास रखले मै कुछ समय बाद मे ले जाऊँगा... ये अब तेरे है.
दादा -ठीक है, इनकी पूरी हिफाजत करूंगा...
रायसिंह - अभी हमें चलना होगा,
रायसिंह ने दादा को कहाँ दोस्त अगर मै वापिस नहीं आया या कुछ हो गया तो ये तु रख लेना, मेरे बाद इस पर तेरा हक है.
फिर रायसिंह और और उनका परिवार बैलगाड़ीयो मै बैठकर चला गया...
तेरे दादा ने ये बक्से छिपा दिये...
बहुत दिनों तक रायसिंह नहीं आये, तेरे दादा ने पता लगाया पर उनका पता नहीं चला... एक दिन उन्हें खबर मिली की बहुत पहले ही रायसिंह और उनका परिवार पुल टूटने से नदी मे गिर गये,और सब की मौत हो गई...
तेरे दादा को ये बात सुनकर बहुत दुख हुआ.
हमे पैसों की जरूरत नहीं थी तो इनको काम मे नहीं लिया...
मौत से कुछ दिन पहले तेरे दादा ने थोड़ा सा सोना बेच दिया और वो पैसे इस गहने के बक्से मे रख दिये, गहनों को सोने के साथ रख दिया.
तेरे दादा ने मरने से पहले मुझे ये चांबिया देते हुए कहा कि - मुन्नी अब ये तेरी अमानत है, तु इसे जिसे देना चाहे दे सकती है...
दादी- मेरे लिए तु ही अब सब कुछ है, जो मेरा है वो सब तेरा है...
मै कुछ नहीं बोला..
दादी - क्या हुआ, क्या सोच रहा है.
मै- ये मेरा है..
दादी - ये अब तेरी अमानत है,
मै- तुने मुझे जो दिया है बता नहीं सकता मुझे कैसा लग रहा है मेरी प्यारी दादी मेरी रखेल मेरी जान बीबी...
मैने दादी को कसके पकड़ लिया और उसके होठों को चुसने लगाा और उसके बोबो को मसल दिया गया.
दादी- आआआह... हा बेटा....ये तेरी दादी तेरी रखेल,तेरी रंडी, तेरी बीवी सबकुछ है... मै सिर्फ तुम्हारी हू.
वो भी मुझे चुमने लगी...
दादी- चल जल्दी से से इनको वापिस रख दो.
मैने कुछ रूपये निकाल लिये...
दादी - इनका क्या करेगा..
मै- मेरे है जो चाहे वो करू.
दादी- हा तेरे ही है, जो मर्जी आये वो कर.
मै - आप मुझे यहाँ पर क्यूँ लाई है.
दादी - पहले एक कस्सी (खोदने का फावडा़ ) लेके आ..
ये जगह हमारे खेत से नजदीक ही है तो मै जाके वहां से एक कस्सी ले आया...
मैने कहा इसका क्या करोगी...
फिर दादी मुझे मंदिर के पास ले गई, मंदिर बडा नहीं था, जैस खेतों मे होता है वैसा छोटा था.
फिर मुझे मंदिर के एक साईड मे खोदने के लिए कहाँ.
मै - यहाँ पर क्यो खरवा रही हो..
दादी - खोद ते सही..
मै वहाँ पर खोदने लगा...
3-4फुट तक खोदने पर मेरी रस्सी किसी चीज से टकराई... ये एक बॉक्स था.
मैने उसे बाहर निकाल लिया,बक्सा बहुत बड़ा और भारी भी था.
उस पर ताला लगा हुआ था...
मुझे दादी से पूछा इसमे क्या है..
दादी - सब बताती हू, पहले तु दुसरी तरफ चल उस तरफ भी खोद...
मै दूसरी तरफ खोदने लगा...
उस तरफ भी एक बक्सा निकला, ये बक्सा पहले वाले से अलग था, ये उससे छोटा था...
मैने उसको भी बाहर निकाल लिया...
दादी उनके ताले खोलने लगी लेकिन वो खुल नहीं रहे थे... शायद लंबे समय से बंद थे इस कारण जाम हो गये थे...
दादी ने मुझे खोलने के लिए कहा... मैने अपना पूरा जोर लगाकर तालो को खोल दिया....
दादी ने दोनो बक्सो को खोल दिया...
बक्सो मे जो था उसे देखकर मै चौंक गया.. मुझे समझ नहीं आ रहा था कुछ....
बडे वाले बक्सा सोने का भरा हुआ था, बस थोड़ा सा ही खाली था... दुसरा बॉक्स मे रूपये थे.
दादी - मुझे पता है बेटा तुम सोच रहे होगे की ये इतना सारा सोने और पैसे कहाँ से आये...
मै- हा... कहा से आये ये इतना सोना और पैसे, ये सब यहाँ पर गढे हुए क्या कर रहे है...
दादी- मै तेरे सभी सवालों का जवाब दुंगी....
मै - जल्दी बताओ.
दादी - ये तेरे दादा के है.
मै- उनके पास कहाँ से आये...
दादी - बात बहुत पुरानी है, तेरे दादा के एक दोस्त थे उनका नाम रा़यसिंह था.. तेरे दादा और वो बहुत अच्छे, घनिष्ठ दोस्त थे.
रायसिंह बहुत बडे व्यापारी थे... बहुत पैसा था उनके पास.
एक बार वे अपने पूरे परिवार के साथ हमारे घर आये... उनके बीबी, बच्चे उनके साथ थे, और साथ मे ये बक्से भी थे...
वे उस दिन यहीं पर रूकने वाले थे...
रात मे उन्होंने तेरे दादा को बताया की -
रायसिंह - मेरा छोटा भाई दीप चंद मेरे पैसों और जायदाद के लिए मुझे और मेरे परिवार को मारना चाहता है. इसलिए मै छिपकर तेरे पास आया हूँ...
एक तु ही है जिस पर मै विश्वास कर सकता हू..
तुझे मेरी एक मदद करनी होगी....
दादा- मुझसे जो भी होगा मै तेरे लिए करूँगा, बता मै तेरी क्या मदद कर सकता हूँ
रायसिंह - मुझे पता है मेरा भाई मुझे यहाँ ढूंढ लेगा... मै आज रात को ही यहाँ से परिवार के साथ किसी ऐसी जगह चला जाऊँगा जहाँ वो मुझे ढूंढ नहीं सकता.
लेकिन मै इतने सामान के साथ नहीं जा सकता.
ये सामान तु तेरे पास रखले
फिर रायसिंह दादा को उन बक्सो के पास ले गये, और उनको खोल दिया...
रायसिंह - इस बक्से मे सोना है..और दुसरे मे परिवार के सभी गहने है.
अभी ये तेरे पास रखले मै कुछ समय बाद मे ले जाऊँगा... ये अब तेरे है.
दादा -ठीक है, इनकी पूरी हिफाजत करूंगा...
रायसिंह - अभी हमें चलना होगा,
रायसिंह ने दादा को कहाँ दोस्त अगर मै वापिस नहीं आया या कुछ हो गया तो ये तु रख लेना, मेरे बाद इस पर तेरा हक है.
फिर रायसिंह और और उनका परिवार बैलगाड़ीयो मै बैठकर चला गया...
तेरे दादा ने ये बक्से छिपा दिये...
बहुत दिनों तक रायसिंह नहीं आये, तेरे दादा ने पता लगाया पर उनका पता नहीं चला... एक दिन उन्हें खबर मिली की बहुत पहले ही रायसिंह और उनका परिवार पुल टूटने से नदी मे गिर गये,और सब की मौत हो गई...
तेरे दादा को ये बात सुनकर बहुत दुख हुआ.
हमे पैसों की जरूरत नहीं थी तो इनको काम मे नहीं लिया...
मौत से कुछ दिन पहले तेरे दादा ने थोड़ा सा सोना बेच दिया और वो पैसे इस गहने के बक्से मे रख दिये, गहनों को सोने के साथ रख दिया.
तेरे दादा ने मरने से पहले मुझे ये चांबिया देते हुए कहा कि - मुन्नी अब ये तेरी अमानत है, तु इसे जिसे देना चाहे दे सकती है...
दादी- मेरे लिए तु ही अब सब कुछ है, जो मेरा है वो सब तेरा है...
मै कुछ नहीं बोला..
दादी - क्या हुआ, क्या सोच रहा है.
मै- ये मेरा है..
दादी - ये अब तेरी अमानत है,
मै- तुने मुझे जो दिया है बता नहीं सकता मुझे कैसा लग रहा है मेरी प्यारी दादी मेरी रखेल मेरी जान बीबी...
मैने दादी को कसके पकड़ लिया और उसके होठों को चुसने लगाा और उसके बोबो को मसल दिया गया.
दादी- आआआह... हा बेटा....ये तेरी दादी तेरी रखेल,तेरी रंडी, तेरी बीवी सबकुछ है... मै सिर्फ तुम्हारी हू.
वो भी मुझे चुमने लगी...
दादी- चल जल्दी से से इनको वापिस रख दो.
मैने कुछ रूपये निकाल लिये...
दादी - इनका क्या करेगा..
मै- मेरे है जो चाहे वो करू.
दादी- हा तेरे ही है, जो मर्जी आये वो कर.