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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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* अपडेट - 31

संगीता- तो आपने हमे क्यो नहीं बताया..

मै- मुझे भी वहाँ जाकर पता चला...

दौनो बच्चिया भी कपड़े देखकर खुश हो गई, मुझे गले लगा लिया...

मैने सब बच्चों को चॉकलेट दी, सभी खुश हो गये...

फिर मै बाहर चला गया घुमने, कुछ देर बाद वापिस आया फिर बनाकर फ्रेश हुआ, और बड़े ताऊजी के घर चला गया...

वहां पर पंकज भाभी नहीं दिख रही थीं,

मैने खाना खाया और मेरे रूम मे आ गया, मैने कपड़े निकाल दिये, मै सिर्फ अंडरवीयर मे था, मै लैपटॉप लेके बैठ गया.

तभी बाहर का गेट खुलने की आवाज आई, दो मिनट बाद पंकज भाभी अंदर आई...

मै- भाभी आप यहाँ पर, कुछ काम था...

पंकज भाभी- आपके लिए हलवा बनाया था, मै तो वो देने आई हूँ,

आप खाना खा कर जल्दी आ गये, मै थी मुझे पता ही नहीं चला

मै - हलवा! मेरे लिए क्यूँ

पंकज भाभी- आपने मेरे लिए इतना किया है, मै आपके लिए इतना तो कर सकती हूँ.

मै- तो आप अहसान ऊतारा रही है... मैने आप पर कोई अहसान नहीं किया है,

पंकज भाभी - नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मेरा मन किया आपके लिए बनाने का तो बना दिया.

भाभी ने हलवा मुझे दे दिया, मै हलवा खाने लगा, हलवे मे भाभी ने बहुत ज्यादा ड्राई फ्रूट डाल रखे थे...

मै- भाभी हलवा बहुत अच्छा बना है, बहुत स्वादिष्ट है...

मुझे मेरी खरीदी हुई साड़ी की याद आई मै बेड से खड़ा हुआ और वो साड़ी का पैकेट ले आया.

पंकज भाभी - ये क्या है

मै- ये मेरी तरफ से आपके लिए

पंकज भाभी - क्या है इसमे.

मै- साड़ी

भाभी- इतने तो कपड़े दिलाये आपने, फिर ये क्यों.

मै- ये मेरी पसंद की है.

भाभी साड़ी देखने लगी और मै हलवा खाने लगा.

मै- कैसी है साड़ी भाभी.

पंकज भाभी - बहुत ही ज्यादा अच्छी और सुंदर है.

मंहगी भी ज्यादा लग रही है.

मै- आपसे ज्यादा कीमती थोड़ी है.

भाभी मेरी तरफ देखने लगी.. भाभी को मेरी तरफ देखता पाकर मै भाभी से बोला क्या देख रही हो भाभी

पंकज भाभी - आप कितने अच्छे है, आपको मेरी कितनी फिक्र है. उनको तो बिल्कुल नहीं है

मै- आप सब बातें छोड़ो और लो हलवा खाओ.

मैने भाभी को हलवा खिला दिया.

भाभी मेरे गले लग गई, उनकी चुचीया मेरे नंगे सीने मे चुभने लगी... आआह.. मजा आ गया.

मैने भी भाभी को गले लगा लिया, फिर भाभी चली गई.

कुछ देर तक मै लैपटॉप पर लगा रहा, हलवा खाने से पेट थोड़ा भारी हो गया था तो टहलने के लिए छत पर चला गया... मै सिर्फ अंडरवीयर मे ही ऊपर आ गया...

मै टहल रहा था कि अनिल भाईजी की आवाज आई. वहां पर बल्ब की रोशनी कम थी जिससे मुझे ठीक से दिखा नहीं...

मै उस तरफ गया, तो देखा कि वो पंकज भाभी को पिट रहे थे.

भाभी नीचे गिरी हुई थीं और वो उन्हें हाथों से मार रहे थे...

अंधेरा होने से मेरा शरीर उन्हें सही दिखा नहीं...

मैने अनिल भाई का हाथ पकड़ लिया...

मै- ये आप क्या कर रहे है, आज फिर से इनको क्यो मार रहें हो...

अब क्या हुआ...

अनिल - कितने कपड़े लेके आयी है,2500 मे इतने कपड़े कैसे आये...

मै- इतनी सी बात के लिए आप इनको मार रहे हो...

मैने उनको भी वही बता दिया जो भाभियो को बताया था...

अनिल - अच्छा तो ये बात है, मुझे बता नहीं सकती थी.

पंकज भाभी - अापने सुना ही नहीं.

अनिल - तु चुप कर लो उनको मारने लगे, मैने उनका हाथ पकड़ लिया

मै- ये आपकी पत्नी है भाईजी कोई जानवर नहीं जो ऐसे पीट रहे हो. गलत किया आपने...

वो नीचे जाने लगे...

मै- कहाँ जा रहे हो भाई..

अनिल - खेत मे जा रह हू, आज रात मे 2 बजे से पानी है तो वही रहना होगा, कल सुबह आऊंगा 9-10 बजे तक आऊंगा. मै- ठीक है मै भी सोने जा रहा हू

फिर वो चले गये और मै भाभी के पास आया, वो रो रही थी

मै भाभी के पास नीचे बैठ गया.

मै- भाभी चुप हो जाईये रोईए मत, चलिए रूम मे चलिए.

मैने उनको दौनो हाथों से पकड़ा...

भाभी मेरे गले लग गई और रोने लगी...

आआह... मेरे शरीर मे झुरझुरी सी दौड़ गई... मै उनको चुप कराने की कोशिश करने लगा...

पंकज भाभी - वो मेरे साथ ऐसा क्यों करते है...

उन्होंने मुझे कसके गले लगा लिया, मैने भी उनको बांहों मे भर लिया.

मै- चलिए रूम मे चलते है

मै उनको गले लगाए ही खड़े होने लगा.. उनके पैर मे दर्द हो रहा था वो खड़ी नही हो पाई. उनके हाथो ने मुझे कस लिया.

मै नीचे बैठ गया और अपने हाथ उनके दौनो चुतडो पर रख दिये और उनको उठाकर अपनी गोदी मे बैठा लिया.

उनके पैर अपने आप मेरी कमर पर लिपट गये...

मै खडा हुआ तो उन्होंने मुझे कस लिया,वो ऐसे लिपटी हुई थी जैसे एक बच्चा लिपटा हो...

हमारे बीच मे हवा गुजरने जितनी भी जगह नहीं थी, मै उनके रूम की तरफ आ गया. और उनको बैड पर बैठाने लगा, पर वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थीं..

मै उनको बैठाने लगा तो उन्होंने जोर से मुझे पकड़ लिया, हार मानकर मै बैड पर बैठ गया...

वो मुझसे लिपटी हुई थी, वो अब धीरे -2 रो रही थी...

मैने उनका सिर अपने हाथों मे लिया... उनको आंसुओ को अपनी उंगलियों से पोछा...

मै- भाभी रोईए मत प्लीज चुप हो जाईए...

अगर आराम कर लीजिए...

लेकिन वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी...

मै उनको अपने से लिपटाए हुए ही बेड के ऊपर आ गया... मैने उनको लेटा दिया अब मै उनके ऊपर था... कुछ देर मै ऐसे रहा फिर मैने धीरे -2 उनके हाथ अपने कंधो से हटाए और पैरो को भी अलग किया...

मैने उनको बेड पर लेटा दिया...

मै खडा होकर बाहर अपने रूम मे जाने लगा... तो पीछे से भाभी की रुआंसी सी आवाज़ आई - आप तो मुझे छोडकर मत जाईये, आपको मेरी कसम है...

 
* अपडेट - 32

मै खडा होकर बाहर अपने रूम मे जाने लगा... तो पीछे से भाभी की रुआंसी सी आवाज़ आई - आप तो मुझे छोडकर मत जाईये, आपको मेरी कसम है...

मै वही पर रूक गया...

भाभी आई और मुझे पीछे से अपनी बाहों में कस लिया…

भाभी - मुझे यूँ छोड़ कर मत जाईये… मुझे अपनी बांहों का बाहों का सहारा दे दीजिए.... उनकी मुलायम लेकिन ठोस चुचियाँ मेरी पीठ पर दबी हुई थी...

मै- भाभी आप ये क्या बोल रही है...

भाभी - मै सही बोल रही हूँ, मत जाओ मुझे इस हालत में अकेला छोड़ कर…

कई मौके ऐसे आए जिनमें मुझे लगा कि आप मेरी भावनाओं को समझने लगे हो...

इतना बोल कर वो फफक-फफक कर रो पड़ी...

मै उनकी तरफ पलट गया, वो मुझसे लिपट गई...

मेैने उनकी ठोड़ी के नीचे उंगली लगा कर उनका चेहरा उपर किया और आँसू पोन्छ्ते हुए कहा - प्लीज़ अब आप रोइए नही.. मे आपकी आँखों में आँसू नही देख सकता...

इतना कहा कर मेैने अपने होठ उनके लरजते होठों पर रख दिए…

भाभी मुझसे कसकर लिपट गयी… मेने उनके नितंबों को अपने हाथों में लेकर कस दिया..

मैने उनको ऊठी लिया और बेड के पास आ गया...

मै बेड पर लेट गया, अब मै नीचे था और वो मेरे ऊपर लेटी थी...

उनकी चुत की गर्मी पाकर मेरा लंड खड़ा होने लगा...

मैने भाभी के चेहरे को हाथों मे लिया और उनके होठों को चुसने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी...

मैने अपने हाथ उनके चुतडो़ पर रख दिये और उनको मसलने लगा, जिससे भाभी उतेजित होने लगी और वो मेरे होठों को जोर -2 से चुसने लगी...

मै भाभी के घाघरे को ऊपर खिसका दिया...

मैने भाभी को पलट दिया, इस भाभी मेरे नीचे थी...

मैने भाभी का ब्लाउज निकाल कर अलग कर दिया... और उनके चुचे मेरी आंखों के सामने आ गये...

मुझे इतने चुचो को घुरते देखकर भाभी शरमा गई और अपनी आँखें बंद कर ली.....

मेरा मन भी उन्हें पिने के लिए मचलने लगा…

मैने भाभी के चुचो पर हाथ रख दिये और धीरे -2 मसलने लगा...

भाभी के चुचो के अंगूर के दाने जैसे निपल कड़क होकर मुझे निमंत्रण दे रहे थे...

मेरी चटोरी जीभ कहाँ मानने वाली थी.. और उसके एक अंगूर को बड़े प्यार से बड़ी शालीनता से चाट लिया...

भाभी - ईईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्श…आआआहह…..

मै भाभी को तड़पाना चाहता था… इसलिए उसी तरह धीरे से दूसरे अंगूर को भी अपनी जीभ की नोक से जस्ट टच कर दिया…….

भाभी की सिसकारीया बढ गई...

मैने अपना मुँह चुचियो पर रख दिया और हारी -2 दौनो को चुसने लगा...

भाभी मस्ती मे सिसकारीया लेने लगी... वो मेरे सिर को अपने सिर पर दबाने लगी है...

भाभी की चुत मे सनसनाहट होने लगी और उनकी चुत पानी छोडने लगी...

मै नीचे जाने लगा, मैने भाभी के पेट पर अपनी जीभ फिरने लगा, भाभी जोर -2 से सिसकारी लेने लगी...

मैने भाभी के घाघरे का नाडा़ खोल दिया... और घाघरे को नीचे खिसकाने लगा तो भाभी ने अपने चुतड़ ऊपर कर लिए, मैने घाघरा भाभी को शरीर से अलग कर दिया...

मैने पहली बार भाभी की प्यारी मुनिया के दर्शन किए.. भाभी की चुत पर छोटे -2 बाल थे, शायद कुछ दिन पहले ही साफ किये थे...

भाभी की उभरी हुई उसकी चुत को देखते हुए चूम लिया.. और उसके होठों को खोलकर, अंदरूनी हिस्से को चाटने लगा…

पंकज भाभी - आह ह... आप ये क्या कर रहे है... छी... वो गंदी जगहह... है.. आआह...

मैने भाभी की बात पर ध्यान नहीं दिया... और मैने जीभ निकाल कर उनकी रस से भरी क्लिट के उपर फिराई…

भाभी जोर से सिसकारीयां लेने लगी - आआह...सस्सस्सिईई.. आआअहह…..आआनन्नह……सीए…हाईए…रीई.. आहह.. आईसीई…हिी…उईई…माआअ….हांननगज्गग…..

आज तक इतननना... आह.. मजा नहीं आया..

वो अब अपनी आँखें बंद किए मेरे बालों को अपनी उंगलियों से सहला रही थी

मैने भाभी की चुत की फांकों को खोल कर उसकी अन्द्रुनि दीवार से जीभ लगा कर रगड़ दी…

मेरी खुरदूरी जीभ के घर्षण से वो बिल-बिला उठी… और उन्होंने मेरा सर कसकर अपनी चुत के मूह से सटा दिया..

मैने भाभी की क्लिट को जीभ से चाट कर अपने होठों से दबा लिया…और अपनी एक उंगली चुत के अंदर -बाहर करने लगा...

पंकज भाभी - उफफफफफफफफ्फ़….कचूततुउउ…म्मेरीए…देवर जी….मईए….आअहह….गाइिईईई…

और किल्कारी मारते हुई वो झड़ने लगी…मेै उनकी रसीली चुत का सारा पानी पी गया, जो किसी अमृत से कम नही था…

भाभी हांफ रही थी, की टाँगें काँपने लगी थी…

मैने अपना अंडरवीयर निकाल दिया, मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया...

भाभी मेरे लंड को ध्यान से देखने लगी...

मै- ऐसे क्या देख रही हो भाभी

पंकज भाभी - आपका लंड कितना बड़ा, और मोटा है...

मै- भाभी, आप भी इसे थोड़ा प्यार करो ना...

मैने अपना लंड भाभी के हाथ मे दे दिया... भाभी के हाथ काँपने लगे...

भाभी लंड को धीरे धीरे सहलाने लगी... मेरे लंड से एक प्रिंकम की बूंद निकल आई... भाभी उसे अपनी उंगली पर लगाकर देखने लगी…

मै- जैसे मेने आपके रस को पीया है, वैसे ही आप भी इसे चख कर देखो…

भाभी ने पहले ऐसे कभी नहीं किया था...

भाभी - मै इसे मुँह मे कैसे ले सकती हूँ... मुझसे नहीं होगा...

मै- मेरे लिए नहीं कर सकती...

भाभी कुछ नहीं बोली और अाँखे बंद किये हुए ऊँगली को अपनी जीभ से टच किया.. और उसका स्वाद लेने की कोशिश करती रही… फिर उसने अपनी पूरी उंगली को मूह में ले लिया..

मै - कैसा है भाभी..

तो उन्होंने आँखों के इशारे से ही हामी भरी...

मैने कहा भाभी इसे मूह में लेकर प्यार करो… चूसो इसे..

मेरी बात मान सुनकर भाभी ने मेरे गरम सुपाडे को अपने होठों में क़ैद कर लिया और चूसने लगी.. और फिर धीरे-2 उन्होंने आधी लंबाई तक अपने मूह में ले लिया..

वो धीरे -2 चुसने लगी, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी…

मैने उनका मूह अपने लंड से अलग किया...

मैने उनको लेटा दिया, और उनके पैरो को चौड़ा करके मै उनके बीच मे आ गया,

अपना मोटा सुपाडा़ जो फुलर टमाटर जैसा हो गया था उसे चुत पर लगा दिया...

मैने हल्का सा धक्का लगाया मेरा सुपाडा़ भाभी को चुत के अंदर चला गया... भाभी को हल्का दर्द हुआ...

मैने एक जोरदार धक्का लगाया...

भाभी - आआयआईईईई...माआआआ…थोड़ा धीरररे.. आआह... मररर्र्र्ररर...गाइिईईईईई... आआह...

मै भाभी को होठों को चुसने लगा और उनकी चुचियों को सहलाने लगा...

मैने एक और भरपूर धक्का मार दिया और पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया...

भाभी - ऊ…माआ…आआआह... मररर्र्र्ररर गई... कितना बड़ा है आपक्क्का..... आआह.. मेरे पेट तक पहुँच गया...

मैं - बस भाभी हो गया, पूरा अंदर चला गया...

मैने उनकी चुचियों को मसल्ते हुए उनके होठों को चूम लिया…

मैने धीरे-2 धक्के लगाना शुरू कर दिया.. कुछ देर बाद ही भाभी भी नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी और मेरे धक्कों का साथ देना शुरू कर दिया…

भाभी- आहह…देवर जी बहुत मज़ाअ.. आरहाआ.. है..सस्सिईईईई…हान्न्न…और ज़ॉर्सईए….हाईए…रीए…कितनाअ…मज़ाअ..आट्टाअ…उफफफ्फ़.. मे..गाइिईईईई…

और भाभी जोर से मेरी कमर में अपने पैर लपेट कर चिपक गयी.. और झड़ने लगी, वो इतनी ज़ोर से झड़ी… कि.. तमाम गाढ़ा-गाढ़ा रस मेरे लंड की साइड से बहने लगा…

मेैरे धक्कों की गति धीमी पड़ गयी थी क्योंकि उन्होंने मुझे ज़ोर से कस रखा था...मेै धक्के लगाता रहा...

मैने धक्को की रफ्तार तेज कर दी, कुछ समय मे भाभी फिरसे गर्म होने लगी और मेरा साथ देने लगी...

और जोर -2 से सिसकारीयां लेने लगी...आज मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था...

मै जोर -2 से धक्के मारने लगा 10 मिनट के बाद हम दोैनो एक साथ झड़ने लगे.

मै बैड पर लेट गया... भाभी की आखे बंद थी, उनके चेहरे पर आनंद और संतुष्टि के भाव दिख रहे थे...

मैने भाभी को अपने ऊपर लेटा लिया... वो मेरे सीने से ऐसी चिपक गयी, जैसे कि कभी अलग ही ना होना हो…

स्खलन की खुमारी इतनी तगड़ी थी कि आधे घंटे तक वो मेरे उपर पड़ी रही, और मेने भी उनको बाहों मे भर लिया...

मै- आपको मजा आया

भाभी - ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया, ऐसा लग रहा है जैसे हवा मे उड़ रही हू, आप बहुत अच्छे है मेरे राजा

मै- कितना अच्छा हू और राजा ?

भाभी - बहुत.. बहुत अच्छे, आज आपने मुझे असली सुख दिया है...

हा राजा, आप मेरे राजा, मेरे सबकुछ हो और मै आपकी दासी हूँ.

मै - आप दासी नहीं आप तो मेरी रानी हो

मै भाभी को किस करने लगा, हम दौनो फिर से गर्म होने लगे...

मेरा लंड खडा होने लगा

मैने रात मे भाभी को दो बार और चोदा, भाभी एकदम थक गई थी वो मेरी बाहों मे लिपट कर सो गई, मै भी थक गया था तो मैं भी उनको बांहों मे भर कर सो गया...

सुबह भाभी ने जगाया तब मेरी आँख खुली... वो मेरे ऊपर झुक कर जगा रही थी,

मैने उनको पकड़ लिया और किस करने लगा...

पंकज भाभी - छोडिए ना आप भी सुबह -2 शुरू हो गये, खडे हो जाईये सभी ऊठने वाले है...

मै- आप हो ही इतनी अच्छी की आपको छोड़ने का मन नहीं होता...

फिर मै खड़ा हो गया और कपडे पहनने लगा... कपड़े पहन कर मै बाहर जाने लगा तो भाभी ने मुझे रोक लिया...

भाभी के हाथ मे एक डब्बी था...

पंकज भाभी - मैने आपको अपना सबकुछ मान लिया है, आप मुझे अपना लीजिए...

मै - मतलब

भाभी - आप मेरी माँग भरकर मुझे पूरी तरह से अपना बना लीजिए

मै कैसे...

भाभी - अब आप ही मेरे पति, मेरे सबकुछ हो...

मुझ पर ये अहसान कीजिए...

 
* अपडेट - 33

भाभी - अब आप ही मेरे पति, मेरे सबकुछ हो...

मुझ पर ये अहसान कीजिए...

मैने अपनी उंगलियों मे सिंदूर लिया और भाभी की माँग भर दी..

वो पूरे पैर छुने लगी...

मै- ये आप क्या कर रही है भाभी...

पंकज भाभी - अपने पति के पैर छू रही हू, और आप मुझे भाभी मत बोलिए, आप मुझे मेरे नाम से बुलाईए.

मै- ठीक है अकेले मे नाम से बुला लुंगा मेरी जान...

फिर मै रूम आ गया और फ्रेश होने चला गया, फ्रेश होकर नाश्ता किया...

मै नाश्ता करके छोटी ताईजी के घर पर गया तो वहा पर राकेश भाई और ताऊजी भी थे तो मै कुछ देर रूक कर वापिस आ गया...

फिर खेत मे चला गया रोशनी काकी से मिलने, पर वो वहाँ पर नहीं मिली, तो मै घर पर आ गया..

कुछ देर बाद खाना खाया...

बाकी सब लोग जो शादी थी, उसमे चले गये... मेरा मन नहीं था जाने का मैने मना कर दिया.. सब शाम को थोडा लेट आने वाले थे...

और मै अपने रूम मे आ गया, मै बेड पर लेटा गया...

कुछ देर बाद मेरी लाडली खुशी आ गई..

मै- तु यहाँ पर, शादी मे नहीं गई...

खुशी - नहीं गई वो कल मेरा एग्जाम है.

एक सवाल समझ मे नहीं आ रहा है आप मेरी मदद करो ना

मै - इधर ला मेरी गुड़िया,

मैने उसे वो सवाल समझा दिया और वैसा ही सवाल उसे हल करने के लिए दिया... वो हल करने लगी...

खुशी ने टी शर्ट और स्कर्ट पहना हुआ था...

मुझे खुशी की गोरी चिकनी जांघे दिख रही थी, जिन्हें देखकर मेरा मन ललचा गया...

मेरे मन मे कुछ होने लगा... मेरा लंड टाईट होने लगा था...

मैने अपना ध्यान वहाँ से हटा लिया...

फिर खुशी ने मुझे सवाल हल करके दिखाया जो एकदम सही था...

खुशी मेरे लगे लग गई और मेरे गाल पर किस करने लगी

खुशी - Thanku चाचा...

इससे खुशी मेरी गोद मे आ गई... मैने भी उसे कस के गले लगा लिया, जिससे उसके संतरे मेरे सीने से दब गये...

खुशी के मुंह से सिसकी निकल गई...

मैने भी उसके गाल पर किस कर लिया...

उसकी अनचुदी चुत मेरे लंड पर टिक गई, उसकी गर्मी पाकर वो भी खड़ा हो गया, जिससे वो खुशी की चुत और गांड पर चुभने लगा...

इसका असर खुशी की सील पैक चुत पर होने लगा, उसे पता नहीं चला की क्या हो रहा है पर उसे अजीब सा आनंद छाने लगा...

खुशी - चाचा ये क्या चुभ रहा मेरे नीचे...

खुशी ने मेरे लंड पर हाथ रख दिया, आपकी ये नुनी इतनी बड़ी क्यों है...

मै- ये बडो़ की बड़ी ही होती है...

खुशी - मुझे देखनी है

मै- क्यो देखनी है..

खुशी - मुझे देखनी है ये इतनी बड़ी क्यों हैं,

उसने मेरा पजामा और अंडरवीयर नीचे कर दिया, मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया...

मेरा लंड एकदम टाईट होकर सीधा खड़ा था...

खुशी - इतना बड़ा और मोटा...

चाचा मै इसे छू कर देखु...

मै- मेरी रानी तुझे पुछने की क्या जरूरत है...

खुशी ने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ लिया...

खुशी - चाचा ये गर्म क्यों है.

मै- ये गर्म ही होता है... इसे ऊपर नीचे करो

खुशी मेरे लंड को ऊपर नीचे करने लगी, मेरा लंड हल्के -2 झटके देने लगा.

खुशी - ये ऐसे क्यों कर रहा है..

मै- इसे अच्छा लग रहा है इसलिए...

मै खुशी के गाल पर किस करते हुए - मेरी गुड़िया भी बड़ी हो गई है,

खुशी - क्या चाचा आप भी, अभी तो मैं बहुत छोटी हूँ.

मै- पर मुझे तो लगता है कि तू बड़ी हो गयी है, मुझे तो तेरी सब चीजें बड़ी लग रही है...

खुशी - मुझे तो नहीं लगता...

और खुशी खड़ी हो गई

खुशी - ये देखिए...

मै- तुझे पता नहीं चल रहा है..

खुशी - सच्ची मे

मै- हा

खुशी - मेरा क्या -2 बड़ा हो रहा है...

मैने खुशी के संतरो पर हाथ रख दिया... खुशी को करंट सा लगा...

मै- ये देख बड़े हो गए है...

खुशी शरमाने लगी-क्या चाचा आप भी... और क्या बड़ा हुआ है.

मै- तु अपने कपड़े निकाल दे फिर मै तुझे सब दिखा दुंगा...

खुशी को हल्की -2 खुमारी छाने लगी थी तो उसने कहा...

खुशी - ठीक है, पर मेरी एक शर्त है, आप भी अपने कपड़े उतारो साथ मै...

मैने कहा ठीक है...

खुशी ने अपनी टी शर्ट ऊतारी दी उसके संतरे मेरे सामने आ गये... उसके चुचे एकदम तने हुए थे, उन पर हल्के-2 उभरते हुए पिंक निप्पल मेरी जान ले रहे थे..

उसने अपनी स्कर्ट उतार दी... उसकी चुत बिल्कुल एक दम छोटी पाव रोटी की तरह खूब फूली हुई थी…..चुत मे उपर से नीचे तक धागे के जैसी एक बारीक लकीर बनी हुई थी जो कि उसके अब तक बिना चुदि होने की गवाही दे रही थी.

खुशी - आप भी कपड़े ऊतारो

मैने भी अपनी टी शर्ट उतार दी...

खुशी - वाह.. चाचा आपकी बॉडी तो बहुत अच्छी है, हीरो की तरह...

मै- तु भी किसी हिरोइन से कम नहीं है.

खुशी मेरी बात सुनकर शरमा गई और खुश हो गई...

मैने खुशी को अपनी गोद मे बैठा लिया, उसका मुँह मेरे मुँह के बिल्कुल पास था...

मेरा लंड उसकी चुत पर रगड़ खा रहा था, खुशी के मुँह से सिसकी निकल गई, उसे एक अलग ही मजा आ रहा था

मै- देख तेरे गाल कितने बड़े हो गए है, और मै उसके गालो को चुसने लगा...

तेरे होठं भी बड़े हो गए है और मैने अपने होठ उसके होठों पर रख दिये, उसने हटने की बिल्कुल कोशिश नहीं की, तो मै उसके होठों को अपने होठों मे लेके चुसने लगा, इससे खुशी को कंरट सा लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी...

हम 2 मिनट तक किस करते रहे...

मै- कैसा लगा मेरी जान...

खुशी - मेरे पूरे शरीर मे गुदगुदी सी होने लगी, बहुत अच्छा लगा.

मै- अब तुम लेट जाओ...

खुशी के चुचे एकदम गोरे थे….अभी उसकी चूचियो पर निप्पल अभी ठीक से बाहर नहीं आए थे लेकिन दोैनो चुचे बड़े ज़रूर हो गये थे...

और मैने झुक कर खुशी की एक चूची को अपने मूह मे भर लिया और दूसरी को अपनी मुट्ठी मे लेकर दबाने लगा...

आज जिंदगी मे पहली बार किसी ने खुशी की चूचियो को दबाया था….जिससे वो उन्माद मे वो बावरी सी हो गयी.

उसके शरीर मे करंट सा दौड़ने लगा...

मैने उसके अर्ध विकसित निपल्स को मूह मे लेकर चुभालना शुरू कर दिया और दूसरी चूची को थोड़ा तेज़ी से दबाना चालू कर दिया...

जिससे खुशी के आनंद की सीमा बढ़ती गयी... और उसकी चुत गीली होने लगी, ऐसा खुशी के साथ पहली बार हुआ...

खुशी - आआआअहह….चाचा….बहुत गुदगुदी हो रही है, जब आप मेरा दूध चूस्ते हो तो...

मै- अच्छा नहीं लग रहा?

खुशी - बहुत अच्छा लग रहा है.. ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया...

मैने खुशी की दोनो जाँघो को फैला कर उसकी चुत को देखने लगा...

तो खुशी - चाचा ऐसे मत देखो मुझे शरम आ रही है...

मै अपना मुँह नीचे ले जाने लगा...

तो खुशी बोली - चाचा ये गंदी जगह है, मैं यहां से मुतती हूँ...

आप यहाँ पर मुँह मत लगाईए...

मै- अरे!मेरी भोली गुड़िया रानी ये गंदी जगह नहीं ये तो बहुत अच्छी जगह है...

मैने अपना मूह खुशी की चुत पर लगा दिया... इस सुखद हमले से खुशी सीत्कार उठी...उसकी चुत पूरी गिली हो गई...

खुशी के शरीर मे कंरट सा दौड़ने लगा...

खुशी - आआअहह…..ऊऊहह…माआ…….हाआआं चाचा ये आपने क्या किया... बहुत अच्छा लग रहहा है...

मैं खुशी की पाव रोटी के जैसे फूली चुत को चूसे जा रहा था... मै उसकी चुत मे अपनी जीभ डालने लगा... खुशी के हाथ मेरे सिर पर आ गये...

खुशी अब झड़ने के करीब थी... वो मेरे सिर को हटाने लगी....

खुशी - आआह.. चाचा हटाए मुझे पेशाब आने वाला है

मै अब खुशी की चुत को जोर -2 से चुसने लगा...

उसने बेड शीट को कसके मुट्ठी मे भींच लिया, उसकी कमर हवा मे ऊठ गई और वो चलाते हुए झड़ने लगी...

मैने उसका सारा पानी पी लिया...

उसका पानी हल्का खट्टा था, आज तक जितने पानी पिया थे उनमें सबसे मस्त था...

खुशी आँख बंद किये हुए लेटी थी, मैने उससे पूछा क्या हुआ मेरी रानी...

खुशी - सॉरी चाचा मैने आपके मुंह मे पेशाब कर दिया...

मै- मेरी भोली तुने पेशाब नहीं किया, वो तो तेरा पानी था इसका मैने चुत कि तरफ इशारा किया...

खुशी - इसका पानी, कैसा पानी

मै- जब हम बडे होते है तब ऐसा पानी आता है...

मै- इसका नाम क्या है,

खुशी - वैजाइना

मै- और

खुशी - और पता नहीं

मै- इसे चुत कहते है, तु ये नाम किसी को बताना मत

ये बता मजा आया...

खुशी - बहुत ज्यादा, आखिर मे सबसे ज्यादा मजा आया... ऐसा लगा जैसे मै हवा मे उड़ रही हू...

आप बहोत अच्छे है चाचा

वैसे चाचा आपके इसमे से पानी आता है...

मै- हा आता है ना, ये लंड है , तु चुसेगी मेरे लंड को...

खुशी का मन था पर वो शरम से कुछ नहीं बोली

 
* अपडेट - 34

खुशी का मन था पर वो शरम से कुछ नहीं बोली

मैने उसका हाथ लंड पर रख दिया,

ले तु भी इसे पकड, सहला और इसे लॉलिपॉप की तरह चुसो...

खुशी धीरे -2 लंड को सहलाने लगी, उसके नरम -2 हाथ लगते ही लंड उछलने लगा...

उसने मुस्कुराते हुए मैरे गरम सुपाडे़ को अपने होठों मे कैद कर लिया... और लॉलिपॉप की तरह चुसने लगी,

वो लंड को धीरे -2 मुँह मे लेने लगी...मेरा मुसल उसके मुँह मे बड़ी मुश्किल से जा रहा था... पर उसने 3इंच तक मुँह मे कर लिया...

मै- अब इसे ऊपर नीचे करते हुए चुसो...

वो धीरे -2 चुसने लगी... जिससे मेरी जान निकलने लगी... इतना पहले नहीं आया था...

वो लगातार चुसती जा रहीं थी, अब मेरा सब्र जवाब दे रहा था,मैने अपने हाथ उसके सिर पर रख दिया और धीरे -2 धक्के मारने लगा...

मेरा लंड उसके मुँह की गर्मी पाकर झड़ने ही वाला था... मैने उसके सिर को हल्का सा मेरे लंड पर दबा दिया जिससे उसे परेशानी ना हो...

मेरा लंड उसके मुँह मे पिचकारीया मारने लगा, आज ज्यादा मात्रा मे मेरा वीर्य निकल रहा था,

पिचकारिया सीधे उसके गले से टकरा रही थी, जिससे मेरा माल उसके पेट मे जाने लगा

आज ज्यादा मात्रा मे मेरा वीर्य निकल रहा था, उसका मुँह पुरा भर गया और वीर्य बाहर निकलने लगा...

मैने आखरी पिचकारी उसके मुँह मे मारी और लंड को बाहर निकाल लिया...

वो वीर्य को बाहर निकालने वाली थी तो मै बोला... इसे बाहर मत गिरा इसे पूरा पीले...

ये बहुत अच्छा होता है... और वो पी गई...

मै- कैसा लगा मेरी रानी...

खुशी - आपका ये जिसके मजा आया लेकिन ये आपके मेरे मुँह मे क्यों गिराया..

मै- ये मेरा वीर्य था, ये बहुत अच्छा होता है... तुझे इसका टेस्ट कैसा लगा...

खुशी - पहले तो उल्टी जैसा हुआ, पर बाद मे अच्छा लगा...

मेरे लंड पर कुछ वीर्य लगा रह गया था...

मैं - वहाँ से एक कपड़ा ला इसे साफ कर लेता हू...

खुशी - मै हू ना..

और वो मेरे लंड को चाटने लगी और सुपाडे़ को चुसने लगी...

उसने पूरा माल चाट लिया और मेरे लंड को पूरा साफ कर दिया...

मै- मेरी रानी तो बहुत समझदार है,

खुशी - चाचा आज बहुत मजा आया

मै- जब मेरा लंड तेरी चुत मे जायेगा तो और भी मजा आयेगा...

खुशी - सच..

मै - हा..

खुशी - पर वहां पर जाने पर तो बहुत दर्द होता है ना...

मै- तुझे कैसे पता...

खुशी ने अपनी गर्दन झुका ली...

मै- बोल तुझे ये सब कैसे पता चला...

खुशी - वो.. वो चाचा मेरी एक फ्रेंड है उसने बताया था की जब ये घुसता है तो बहुत दर्द होता है...

मै- अच्छा!उसे कहाँ से पता चला...

खुशी - वो उसका एक बॉयफ्रेंड है, वो उसके साथ ये सब कर.......

मै- और क्या बताया उसने..

खुशी - उसने कहा की वहाँ से खून निकलता है...

मै- ये नहीं बताया की बाद मे मजा भी आता है...

खुशी - हा बताया कि बाद मे बहुत मजा आता है... लेकिन मुझे बहुत डर लगता है...

मै- तेरा भी कोई बॉयफ्रैंड है...

वो मेरी तरफ देखने लगी...

खुशी - नहीं है...

मै- क्यो, बनाया नहीं या कोई पसंद नहीं आया...

खुशी कुछ नहीं बोली...

मै- बता तो...

खुशी - वो बनाया नहीं...

मै- कोई पंसद नहीं आया क्या...

खुशी गर्दन नीचे किये हुए ही - वो पंसद तो है पर...

मै-पर क्या.. कौन है वो, नाम क्या है...

खुशी - आप है...

और खुशी ने आँखे बंद कर ली...मैरे चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई...

मै- क्या बोली फिर से बोल...

खुशी - वो..वो... मुझे आप पसंद हो...

मैने उसका चेहरा अपने हाथों मे ले लिया...

मै- तो चाचा को अपना बॉयफ्रैंड बनाना चाहती है...

खुशी - वो.. वो..

मै- वो.. वो.. क्या, ठीक से बोल..

खुशी - हहहहा...

मै- पर मुझे ऐसी गर्लफ्रेंड नहीं चाहिए जो अपनी आंखें बंद करले और मेरी तरफ देखे नहीं...

खुशी ने झट से अपनी आँखें खोल ली...

खुशी - लो खोल ली, आप मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनायेगे..

मै- हा मेरी रानी...

और मैने उसके होठों पर एक किस कर दिया...

खुशी - आप बहुत अच्छे हो...

मै- कितना अच्छा हू...

खुशी - बहुत.. बहुत.. ज्यादा अच्छे

उसने मेरे होठों पर किस कर लिया...

मैने उसे बांहों मे भर लिया और लेट गया, वो मेरे ऊपर भी...

वो मेरे सीने पर अपना सिर रखकर कर लेट गई, कुछ देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे,

वो अपनी चुत को मेरे लंड पर घिसने लगी...

मै- क्या कर रही है, खुशी...

खुशी - बहुत अच्छा लग रहा है, आपका ये कितना गर्म है...

मुझे ये अपनी इसमें लेना है...

मै- क्या लेना है किसमे, सही से बोल

खुशी - मुझे शरम आ रही है...

मै- अभी हम अकेले हैं, अब हम बॉयफ्रैंड - गर्लफ्रेंड है...

खुशी - सच हा...

मै- हा, लेकिन मेरी कुछ शर्तें है, तु वो मानेगी तभी मै बॉयफ्रैंड रहूँगा वरना नहीं

खुशी- क्या शर्तें...

मै- पहली शर्त ये कि - तु सबके सबके सामने पहले जैसी ही रहेगी, ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे दिक्कत हो.

दूसरी ये की - तु ये बात किसी भी नहीं बतायेगी..

ऐर तीसरी शर्त ये कि - तु मेरी हर बात मानेगी, मै जो कहूंगा वो करेगी तु...

खुशी - मुझे आपकी तीनों शर्तें मंजूर है... मै हमेशा आपकी बात मानुंगी... पक्का प्रोमिस...

अब तो आप बनेंगे ना मेरे बॉयफ्रैंड

मै- हा मेरी जान...

खुशी - थैंक्यू मैरे सोना...

मै- क्या बोली...

खुशी - अभी तो मै आपकी गर्लफ्रेंड हू ना आपको कुछ भी बुला सकती हू... मेरे राजा मेरे सोना

मै- सिर्फ अकेले मे, किसी के सामने नहीं...

खुशी - सोना, मुझे आपका लंड मेरी चुत मे लेना है...

मै- तुझे तो डर लगता है ना..

खुशी - मुझे तो फिर भी लेना है चाहे कितना भी दर्द हो...

और आपने बोला ना की दर्द एक बार होता है बाद मे बहुत मजा आता है...

मै- हा मेरी रानी मजा तो आता है, पर तुम ये अभी नहीं ले सकती...

खुशी - क्यो नही ले सकती, मुझे तो अभी लेना है...

मै- मैने बोला ना, नहीं...

खुशी - क्यो तो...

मै- मैने क्या कहा था कि तु मेरी हर बात मानेगी...

 
* अपडेट - 35

मै- मैने क्या कहा था कि तु मेरी हर बात मानेगी...तुने प्रोमिस किया था ना...

खुशी - ठीक है जैसा आप कहे...

वो उदास हो गई...

मै- मेरी जान ऐसे उदास मत हो... मेरी बात समझ अभी तु थोड़ी सी और बड़ी हो जा फिर ले लेना, थोड़े समय रूक जा...

खुशी - कितने समय..

मै- कुछ महिने रूक जा, फिर मै खुद तेरी इस चुत मे लंड डालकर चोदुंगा...

और इतने टाइम मे मै तुझे ऐसे मजे देते रहुगा तेरी चुत को चुसकर

अब मुस्कुरा दे ऐसी अच्छी नहीं लगती...

खुशी - मेरे सोना मेरी चुत मे खुजली हो रही है...

मै- अच्छा अभी इसका ईलाज करता हू...

मुझे एक आइडिया आया और मै दो डेयरी मिल्क चॉकलेट ले आया... और खुशी को लेटा दिया...

खुशी - आप क्या कर रहे है..

मै- मेरी जान तु बस देखती जा...

मैने चॉकलेट को उसके होठों पर, उसके गोरे -2 चुचों पर, उसके पतले कमसिन पेट पर, उसकी छोटी सी नाभि पर और उसकी चुत पर लगा दी...

थोड़ी चॉकलेट मैने मुंह मे ली...

मै उसके होठों पर किस करने लगा, वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी... वो मेरे बालों को सहलाने लगी...

मै उसके दांतों पर जीभ घिसने लगा जिससे उसका मुँह थोड़ा खुल गया, मैने उसके मुँह मे जीभ डाल दी मेरी लार उसके मुँह मे घुलने लगी.. मैने चॉकलेट भी उसके मुँह मे डाल दी.. वो भी अब अपनी जीभ हिलाने लगी... हम दोनों की जीभ एक दुसरे से उलझ रही थीं...

मैने उसकी जीभ को पकड़ लिया और मुंह मे लेकर चुसने लगा, जिससे खुशी के शरीर मे एक तरंग दौड़ गई, वे मेरे सिर को अपने होठों पर दबाने लगी और मेरे बालों को जोर से सहलाने लगी...

चॉकलेट हम दौनो के मुंह मे ही घुलकर खत्म हो गई...

मैने अपनी जीभ उसके मुँह मे डाल दी तो वे समझ गई और मेरी जीभ को जोर -2 से चुसने लगी..

अब हमारी सांसे भरने लगी थी, मैने खुशी के होठों को छोड़ दिया.. वो जोर -2 से हांफ रही थी.. मै उसके ऊपर ही था...

खुशी - आप हर बार एक अलग मजा देते हो, कितने अच्छे हो मेरे सोना...

मै- आगे तो और भी बहुत मजे आंयेगे, तुम बस मजे लेती जाओ...

मैने अपना मुँह उसकी चॉकलेटी चुचियों पर लगा दिया... और बारी -2 दोनों को चुसने लगा, चुचीयो की चॉकलेट तो साफ हो गई पर वो अब वो लाल हो गये...

फिर मैने अपना मुँह उसकी चुत पर रख दिया और उसे चाटने लगा, वो मजे मे तडपने लगी...

जल्दी ही उसका शरीर झटके खाने लगा और झटको के साथ उसकी चुत ने दम तोड़ दिया...

चॉकलेट के साथ उसका पानी अलग ही टेस्ट दे रहा था...

मैने उसे अपनी बाहों मे उठाया और बाथरूम मे ले गया...

मैने शावर चालु कर दिया, हम दौनो उसमे भीगने लगे... वो इस समय एकदम हॉट लग रही थी...

क्योंकि सके होंठ, उसके चुचे लाल और उसकी चुत हल्की गुलाबी हो गई थी... जिससे वो एकदम किसी पॉर्न स्टार की तरह लग रही थी...

मै उसे किस करने लगा... किस करने के बाद वो मेरे सीने को चुमने लगी और धीरे धीरे नीचे झुकने लगी.

वो अपने पैरो पर बैठ गई और उसने मेरे लंड को पकड़ लिया, और उसे धीरे धीरे आगे पिछे करने लगी...

कुछ देर बाद उसने मेरे लंड के सुपाडे़ को मुंह मे भर लिया...

और किसी रंडी की तरह उसे चुसने लगी... उसे देखकर लग रहा था कि उसे इसमें बहुत मजा आ रहा है...

वो अपनी पूरी ताकत लगा रही थी, मेरा लंड उसके साममे हार गया..

वो ज्यादा देर तक उसके मुँह की गरमी सहन नहीं कर पाया और उसके मुँह मे लावा उगलने लगा...

वो सारा माल पी गई, और लंड को चाट -2 कर साफ कर दिया...

कुछ देर तक हम नहाते रहे.. मै उसके मस्ती और यौवन रस से भरे हुए शरीर के साथ खेलने लगा...

कुछ देर बाद हम बाहर आ गये... फिर हम दौनो बिस्तर पर नंगे ही एक - दुसरे की बांहों मे सो गये...

 
देरी के लिए आप सभी से माफी चाहता हू.

लाईफ मे कुछ हलचल चल रही है जिस कारण देरी हो गई.

अब लगातार अपडेट देने की जी जान से कोशिश होगी

Sorry
 
* अपडेट - 36

कुछ देर तक हम नहाने के बाद बाहर आ गये... फिर हम दौनो बिस्तर पर नंगे ही एक - दुसरे की बांहों मे सो गये...

दो घंटे तक हम सोते रहे, फिर मै उठ गया, खुशी मेरे ऊपर ही लेटी थी,

उसका गोरे रेशमी बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था, उसकी हर चीज परफेक्ट थी, कुछ तो परफेक्ट से भी ज़्यादा.

उसके जिस्म को देखकर मेरा मुसल सर उठाने लगा पर मैंने उस पर काबू किया और अपने कपड़े पहनने लगा और खुशी को भी उठा दिया...

बाहर कुछ आवाज आ रही थी, शायद घर वाले आ गये थे...

मै बाहर आ गया, खुशी भी कपड़े पहन कर मेरे पीछे -2 बाहर आ गई...

बाहर आकर पता चला की सब वापिस आये है, घर का और गाय - भैंसों का काम करने रात को वापिस जायेंगे...

मै बुलेट लेके बाहर चला गया... कुछ देर दोस्तों के साथ मजे किये फिर घर आ गया...

सभी शादी मे जाने के लिए तैयार हो रहे थे...

बड़े ताऊजी बोले तु तैयार नहीं हुआ अभी तक...

मै- ताउजी मेरा मन नहीं है जाने का.

बड़ी ताऊजी - क्यों नहीं है, बेटा वो हमारे दोस्त है और दुसरा अपने गाँव के है हमें जाना चाहिए...

तु तैयार हो जा...

थोड़ी देर मे मै तैयार होकर आ गया... पर औरते अभी भी तैयार हो रही थी...

मै पंकज भाभी के पास चला गया ऊपर...

उन्होंने कल जो हम लाये थे उसमे से एक साड़ी पहनी थी, साड़ी उन पर खूब जच्च रही थी...

मैने उनको जाकर बाहों मे भर लिया...

वो चौंक गई...

पंकज - आप भी ना, मुझे तो डरा ही दिया...

मै- इस साड़ी मे आप बहुत सुंदर और एक दम हॉट लग रही है भाभी...

उन्होंने मुंह फेर लिया...

मै- क्या हुआ

पंकज - मुझे आपसे बात नहीं करनी...

मै- क्यों

पंकज - आपने मुझे क्या बुलाया... मैने जो कल बात कही थी वो मजाक मे नहीं कही थी... मैने तन,मन से आपको अपना पति मान लिया है.

मै आपकी पत्नी हूँ...

मै - गलती हो गई मेरी जान माफ करदो

पंकज - आगे से ऐसे मत करिएगा...

मै उसे किस करने लगा...

मै - तुम बहुत रसीली हो पंकज.

वो शरमा जाती है, और मेरे सीने मे अपना मुँह छुपा लेती है...

नीचे से ताईजी की आवाज आती है...

फिर हम दौनो नीचे आ जाते है...

सभी एक गाड़ी मे और ट्रैक्टर मे जा रहे होते है...

मै पंकज को अपनी बुलेट पर बैठा लेता हूँ... सब के निकलने के बाद हम निकलते है...

बाईक पर बैठते ही पंकज मुझसे चिपक जाती है...

हम भी शादी मे पहुँच जाते है, पंकज अंदर चली जाती है...मै ऐसे ही घूमने लगा.

गाँव मे लोगों मे फैशन का इतना चलन नहीं है, सभी नॉर्मल कपड़े ही पहनते है...

पर मुझे फैशनेबल रहने का शौक है, मुझे ब्रेंड की समझ है और मै ब्रांडेड चीजें ही यूज करता हू... आज भी मै सबसे अलग और स्मार्ट लग रहा हूँ...

गाँव मे सभी एक दुसरे की मदद करते है, तो मै भी काम मे मदद करने लगा...

अंदर सभी औरतें बैठी हुई थी, मै काम से अंदर गया तो औरते मेरी तरफ देखने लगी... और आपस मे बात करने लगी- की ये कौन है...

तभी बड़ी ताईजी बोल पड़ी - ये तो मेरे देवर मुन्ना का लड़का है...

औरत 1- ये तो बड़ा हो गया है...

औरत 2- हा, देख तो कितना लंबा है और शरीर भी अच्छा खासा तगडा़ है...

औरत 3- और सुंदर भी बहुत है...

औरत 1- तो ब्याह कर ले ना इससे...

सभी औरते हंसने लगती है...

औरत 3- कर तो लु पर मै बुढी़ हो गई हूँ, ये तो मेरे बेटे से छोटा है...

मैने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और काम करने लगा...

थोड़ी देर मे मैंने खाना खाया.. बाकि सब घर वाले लेट आने वाले थे पर मै अभी घर जा रहा था...

मै ताऊजी को बोलकर बाहर आ गया,, मै बाईक स्टार्ट कर ही रहा था कि बड़ी ताईजी आई उनके साथ वो तीसरी औरत भी थी...

बड़ी ताईजी - बेटा ये तेरी लाली ताई है, इसे इसके घर तक छोड़ देना, अभी अंधेरा बहुत हो गया है...

मै- ठीक है ताईजी छोड़ दुंगा..

परिचय -

लाली (50)- भरा हुआ बदन, बडे -2 चुचो के साथ मे भारी भरकम गांड, हल्का निकला हुआ पेट...

पति - राम सुख (54)- ये मरियल सा है, शराब का आदी..

ये गाँव मे ही चौकीदारी करता है...

लाली के 1 लड़का & 2 लड़की है...

बेटियों की शादी हो गई है...

बेटा - अमित (22)

ये अपने मामा के पास रहकर काम करता है...

 
* अपडेट - 37

लाली इस समय लाल साड़ी मे थी, साड़ी ज्यादा खास तो नहीं थी...

मै लाली को बैठाकर चल पड़ा...

लाली- बेटा तु तो बड़ा हो गया है...

मै- काकी उम्र हो गयी तो बड़ा भी होंऊगा ना

लाली- मैने तुझे बहुत दिनो बाद देखा है, तु हमारे घर को तरफ आता ही नहीं है..

मै- आप बुलाते ही नहीं हो तो कैसे आऊ...

लाली को बाईक पर बैठने से डर लग रहा था, वो मुझ से चिपकी हुई थी... जिससे उसके चुचे मेरी पीठ से रगड़ खा रहे थे...

मै काकी पर लाईन मारने लगा - मैने भी आपको बड़े दिनों बाद देखा, आप तो वैसी ही हो जवान और सुंदर...

धत... कुछ भी बोलता है बेटा, मै और जवान अब तो उम्र हो गई है... देख बाल सारे सफेद हो गए है...

मै- काकी मेरी नजर से देखो, आप जवान हो अभी भी...

हम काकी के घर आ गये, मैने उनको उतारा...

ठीक है तो काकी मै चलता हूँ...

लाली- बेटा अंदर तो आ, ऐसे तो कभी नहीं आता है...

मै- काकी अभी...

लाली- हा अभी आजा...

हम दोनों अंदर आ गये... काकी के घर मे तीन कमरे और रसोई है, और साईड़ मे पशुओं के लिए एक -दो कच्चे मकान है...

काकी मुझे कमरे मे ले गई, मै पंलग पर बैठ गया और काकी मेरे पास बैठ गई...

मै- काकी काका कहाँ पर है...

लाली- वो तो चौकीदारी करते है तो आजकल रात मे करते है...

बेटा एक बात बता सच्ची मै तुझे जवान दिखती हूँ...

मै- हा काकी आप जवान भी हो और सुंदर भी

मै काकी के पास खिसक गया, मैने काकी के गालो पर हाथ रख दिये

ये देखिए आपके गाल, आपका चेहरा कितने सुंदर है,मेरा तो मन करता है इनको चुम लुं.

कारी एक बार चुम लु...

लाली- हाय राम!बेटा तु कैसी बात कर रहा है, कोई सुन लेगा तो क्या सोचेगा...

मै-सही ही तो बोल रहा हू, और कौन है यहाँ पर देखने वाला...

लाली- नहीं बेटा,

मै- काकी बस एक बार...

मैने काकी के चेहरे को पकड़ लिया और अपने होंठ उसके नरम गालों पर रख दिये...

मै उसकी गाल को मुँह मे लेकर चुसने लगा, मै करीब दो मिनट तक बारी -2 दौनो गालो को चुसता रहा...

फिर मै अलग हो गया, काकी को गाल हल्के लाल हो गये...

काकी का ब्लाउज थोड़ा फटा हुआ था...

काकी ये तेरा ब्लाउज फटा हुआ है, तुम ये पहन के गई शादी मे...

लाली- हा बेटा, मेरा पास जो है बस ये ही है... घर की हालत थोड़ी खराब है, तेरे काका को तो कोई परवाह ही नहीं है...

काकी फिर चुप हो गई...

मैने काकी के चेहरे को हाथों मे ले लिया - काकी काका तो पागल है जो इतनी खुबसूरत पत्नी पर ध्यान नहीं देता, मै होता तो...

लाली- तो क्या बेटा

मै- अगर मै होता तो मै बहुत ख्याल रखता...

लेकिन आप चिंता मत करो मै आपका ध्यान रखुंगा...

काकी मेरी तरफ देखने लगी...

मैने काकी को अपनी तरफ खींच लिया, काकी कुछ नहीं बोली...

मै- काकी आपके होठ कितने अच्छे है, एक बार चुम लु...

काकी अभी भी चुप थी....

मैने अपने होंठ काकी के होंठों से मिला दिये...

मै अब उनका रस पिने लगा, काकी शांत थी, ना तो वो हट रही थी और ना ही साथ दे रही थी...

मैने अपने हाथ काकी के मोटे खरबुजो पर रख दिये औऱ उनको मसलने लगा, जिससे काकी के बदन मे हलचल होने लगी...

मैने काकी के होंठों को चुसते हुए ब्लाउज के बटन खोल दिये, अब काकी के चुचे बिल्कुल नंगे थे...

फिर अचानक से काकी अलग हो गई...

लाली- नहीं बेटा ये तु क्या कर रहा है, ये गलत है... मै तेरी मा की उम्र की हूँ...

मै- पर माँ तो नहीं हो ना...काकी मुझे पता है तुम्हें जरूरत है, तुम दुसरो के बारे मे मत सोचो,वैसे भी किसी को पता कैसे चलेगा...

काकी कुछ नहीं बोली...

मै- मै किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करता... अगर तुम नहीं चाहती तो ठीक है...

और मै खड़ा होकर बाहर जाने लगा, पर तभी काकी ने मेरा हाथ पकड़ लिया...

लाली- बेटा ऐसे छोड़कर मत जा, मेरी आग को शांत कर दे...

मैने काकी को पकड़ लिया और उसे होंठ चुसने लगा, उसे आता नहीं था लेकिन वो भी कोशिश कर रही थी...

मैने उसका ब्लाउज निकाल दिया और उसकी साड़ी और पेटीकोट निकालने लगा...

लाली - बेटा ये सही तो है ना, अगर किसी को पता चल गया तो...?

मैने काकी को अपनी तरफ खींचते हुए बोला - कुछ गलत नहीं है, तुम बहुत डरती हो...

इतना कहकर मेने उनकी कमर में अपने हाथ लपेट कर उन्हें अपने से सटा लिया…

मैने उसकी गान्ड मसल्ते हुए मेने कहा – आअहह…. काकी क्या सेक्सी माल हो आप..

वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बोली - धत्त्! कुछ भी बोलता है...

उनके शरीर की बनावट देख कर मेरा लंड ठुमके मारने लगा…

मेने अपने लंड को काकी की गान्ड की दरार में फंसकर एक जोरदार रगड़ा लगाते हुए उनके गले को चूम लिया….

सस्सिईईईईईईईईई...आआअहह....मेरे बेटा... कितना गरम और मोटा मूसल है तुम्हारा…

मेै - आहह…क्या मस्त गान्ड और चुचियाँ हैं आपकी… जी करता है…खा जाउ इन्हें…

वो सिसकते हुए बोली- सीईईईई… तो खाओ ना… मना किसने किया है…तेरे लिए ही है अब से आआहहह...

काकी की गान्ड और मस्त बड़ी-2 चुचियों को देख कर मेरा लॉडा टन टॅना कर पेंडुलम की तरह ऊपर नीचे होने लगा…

मेने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए… मेरा लंड देख कर काकी अपनी पलकें झपकाना भूल गयीं…

मैने पूछा - क्या देख रही हो काकी... पसंद आया…

लाली- आहह….क्या मस्त लंड है तुम्हारा… इसे तो हमेशा अपनी चूत में ही डाले रहूंगी...

मे उनकी गान्ड और चुचियों को मसलने लगा…

 
* अपडेट - 38

लाली- आहह….क्या मस्त लंड है तुम्हारा… इसे तो हमेशा अपनी चूत में ही डाले रहूंगी...

मे उनकी गान्ड और चुचियों को मसलने लगा…

जल्दी ही मैने काकी को पंलग पर लिटा दिया और उनकी टाँगों को चौड़ा कर के मेने अपना सोट जैसा मूसल उनकी हल्की झांतों वाली गरम चूत में पेल दिया…

ससिईईईई….आआहह….. लल्लाअ… क्या मस्त लंड है तुम्हारा….थोड़ा आराम से…उफफफ्फ़… दर्द हो रहा है...

मैने एक जोर का झटका दिया और मेरा लंड पुरा चुत मे था...

जिससे काकी को दर्द होने लगा, उसकी हल्की चीख निकल गई...

लाली- आआआआह.... बेटटा मारररररर... डाला रररररे... तेरे इसने मेरी चूत को पूरी तरह कस दिया है….इसने… हाईए… रामम्म….मज़ा आ गया… कसम सी….

मै काकी के चुचो को मसलने लगा और जोर -2 से धक्के मारने लगा

अब तक काकी दो बार अपना पानी छोड़ चुकी थी, तब जाकर मेने अपना गाढ़ा गाढ़ा मक्खन उनकी रसीली चूत में भरा…

थोड़ी देर एक दुसरे से चिपके पड़े रहने के बाद, मेरा लंड काकी की गान्ड की गर्मी पाकर फिरसे अंगड़ाई लेने लगा…

मै- काकी मेरे लंड को चुस ना एकबार

लाली- नहीं, ये बहुत गंदा होता है...

मै- कुछ गंदा नहीं है है, मुंह मे ले तो सही मजा आएगा...

उठके मैने अपना लंड काकी के मुँह में डाल दिया,

पहले तो उसे अच्छा नहीं लगा पर धीरे धीरे वो मुँह मे लेते लगी, और वो बड़े तन-मन से चूसने लगी...

फिर मेने उनसे उनकी गान्ड मारने को कहा...

लाली - बेचा नहीं, मैने वहाँ पर कभी नहीं लिखा है... तेरे मुसल ने मेरी चुत की क्या हालत कर दी तो ये मेरी गांड को तो फाड़ देगा...

मै- काकी धीरे धीरे करूँगा...

कुछ ना नुकुर के बाद वो मान गयी…

उनकी गान्ड थी ही ऐसी की वो अगर नही भी मानती, तो मेै आज उसे जबर्जस्ती फाड़ देता…

पास में ही तेल था, सो अच्छे से काकी को चौड़ी गान्ड की मालिश कर के, थोड़ा धार बनाकर उनके छेद में डाला...

फिर अच्छे से दो उंगलियों से गान्ड को अंदर तक चिकनाया, और अपना लंड उनकी कसी हुई गान्ड के छेद में पेल दिया…

वो कराह कर अपनी टाँगें सिकोड़ने लगी… मेरा पूरा सुपाडा उसकी गान्ड में घुस चुका था…

फिर मेने अपनी टाँगों को उसकी जांघों के आगे से अड़ा दिया और कंधों पर दोनो हाथों को जमा कर एक करारा सा धक्का दे मारा…

वो कराहने लगी - अररररईईई.... मैयायाआआआ.... माआआआअरर्ररर... डलल्ललाआाआअ……….रीईई

पर जल्दी ही उन्होने अपने होंठ कसकर भींच लिए...

मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी गांड मे था... मैने एक जबरजस्त झटका मारा… डंडे जैसा मेरा सख़्त लंड, काकी की कोमल गान्ड को चीरता हुआ जड़ तक फिट हो गया….

काकी की आँखों मे आंसू आ गये....

मै काकी की चुचियों को मसलने लगा... फिर मैने अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले जाकर सहलाने लगा..

वो अब ठीक थी.... मेने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी…

मेै पूरी लंबाई के स्ट्रोक के साथ उनकी गान्ड फाड़ने में लगा हुआ था...

कभी मै उंगलियों को अंदर पेल देता , तो कभी बाहर निकाल कर उनकी चूत को थपथपाने लगता...

अब वो फूल मस्ती में अपनी गान्ड को पलंग से अधर उठाकर चुदाई का मज़ा ले रही थी…ज़ोर ज़ोर से मादक आवाज़ें निकालते हुए,

मेरी जाँघो की थप उनकी गान्ड के टेबल पर ताबड तोड़ तरीक़े से पड़ रही थी…

हम दोनो ही अपने चरम की तरफ तेज़ी से बढ़ते जा रहे थे…

मै काकी की चुत मे तीन उंगलियां डालकर चोदने लगा...

काकी का पूरा शरीर बुरी तरह अकड़ने लगा, और वो झड़ने लगी...

इधर मैने भी अपना नल उनकी गान्ड में खोल दिया… और उसने मदमस्त गान्ड के छेद को अपनी मलाई से भर दिया…

अपनी गान्ड का आज पहली बार उद्घाटन करवा कर काकी को बहुत मज़ा आया, मुझे भी काकी जैसी चौड़ी गान्ड वाली जोबन से भरपूर औरत को चोदने में,

मेने देखा की काकी की गांड का छेद हल्का लाल हो गया था...वो पहले से ज्यादा खुल गया, उस पर कुछ खून के धब्बे से लगे हुए थे.. जो उसकी गान्ड की अन्द्रुनि दीवार के फटने से लग गये थे…

उनकी टाइट गान्ड के होल की दीवारों से मेरे लंड में भी दर्द सा होने लगा था…

मै काकी को चुमने लगा - काकी कैसा लगा...

लाली- बेचा तुने तो जान ही निकाल दी थी, पर बाद मे मजा आने लगा...

मै- अब हमेशा तेरी गांड मारूंगा मेरी चुदक्कड़ रानी...

लाली- और मेरी चुत...?

मै- उसे भी जमकर मांरूगा, मेरी रानी...

लाली- हाय राम ये क्या बोल रहा है...

मै- तो क्या बोलु तुम्हें अब... अब से तु मेरी चुदेल रानी है...

मै उसे किस करने लगा...

मै- ठीक है तो मै अब चलता हूँ, देर हो गई है...

लाली- फिर कब आओगे...

मै- जल्दी ही आऊंगा मेरी रानी...

मैने उसे पाँच हजार रूपये दिये..

मै- यह रखलो मेरी तरफ से... काम आंयेगे...

लाली- इतने पैसे, मै कैसे ले सकती हू...

मै- रखलो, काम आंयेगे तुम्हारे... अब मेरा कुछ फर्ज है, क्यो मेरी रानी...

मैने उसे रूपये दिये और बुलेट लेकर घर आ गया... अभी तक घरवाले आये नहीं थे... मै अपने कमरे मे आकर सो गया...

 
* अपडेट - 39

मैने उसे रूपये दिये और बुलेट लेकर घर आ गया... अभी तक घरवाले आये नहीं थे... मै अपने कमरे मे आकर सो गया...

अगले दिन मै थोड़ा लेट उठा... पुरे दिन मे कुछ खास नहीं किया...

शाम को मै ऐसे ही घूम रहा था तो मुझे पंकज दिखी, उसने मुझे इशारा करके अपने पास बुलाया. इस समय वो अकेली थी...

मै उसके पास गया और बोला की क्या हुआ... तो वो बोली की आज आप शादी के प्रोग्राम मे मत जाना...

मै- क्यों

पंकज - बस मत जाना मै बोल रही हू ना... मै भी नहीं जाउंगी

पंकज की बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई...

मैने पंकज को खिंच कर सीने से लगा लिया...

मै- क्या बात है मेरी जान

पंकज - वो रात मे बताऊगी, आप बस आज घर पर ही रहना...

ठीक है मेरी जान और मै पंकज को किस करने लगा... फिर मै वहाँ से आ गया...

दिन भर कुछ खास नहीं हुआ... शाम को सब जा रहे थे तो मैने सर दर्द का बहाना बना कर मना कर दिया...

सब के जाने के थोड़ी देर बाद मै बड़े ताउजी के घर की तरफ गया... वहाँ पर कोई नहीं था...

मैने पंकज को आवाज लगाई तो ऊपर रूम से उसकी आवाज आई - मै ऊपर हू आप 5 मिनट बाद रूम मे आ जाना...

5 मिनट बाद मै कमरे मे गया, तो वहाँ पर पंकज साड़ी मे बेड पर बैठी हुई थीं, ये वही साड़ी थी जो मैने उनको गिफ्ट की थी... वो दुल्हन को तरह बैठी हुई थी...

मै उनके पास जाकर बैठ गया और उनका घूंघट हटा दिया...

क्या लग रही थी वो, इतनी सुंदर आज तक नहीं लगी थी... उन्हें देखकर लग नहीं रहा था कि वो माँ बन चुकी है.. आज तो वो बिलकुल 24-25 साल की लग रही थीं....

मै- ये सब क्या है...

पंकज - उस दिन सब अचानक से हुआ था... पर मै आज खुद को सही रूप से आपको सौंपना चाहती हूं...

मै- तुम तो मेरी हो, मेरी जान...

मै उनकी तरफ देखने लगा...

पंकज - ऐसे क्या देख रहे हो, अच्छी नहीं लग रही हूँ?

मै- मेरी जान को देख रहा हूँ.आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो....

मैने अपने होंठ उनके होठों पर रख दिये और धीरे -2 चुमने लगा, वो भी साथ देने लगी...

मैं धीरे -2 किस कर रहा था, इस शानदार पल का आनंद ले रहा था...

मैने अपनी जीभ उनके मुँह मे डाल दी, और उसकी जीभ को चुसने लगा, पंकज ने अपने हाथ मेरे सर पर कस दिये...

जब सांस फुलने लगी तब हम अलग हुए...

मैने पंकज की साड़ी को खोल दिया.. और उसके ब्लाउज और पेटीकोट को भी खोल दिया, अब वो सिर्फ ब्रा और पेंटी मे थी...

मै पंकज से खूबसूरत जिस्म को निहारने लगा, जिससे वो शरमाने लगी...

मैने उनको बैड पर लेटा दिया...

मै पंकज के पैर पर किस करने लगा, मैं धीरे धीरे उपर किस करने लगा.अब मेरे होंठ जाँघो पर किस करने लगे . मेरे सामने पंकज की पैंटी थी जिस के अंदर खजाना छुपा हुआ था.

मैं ने एक बार पंकज के चेहरे की तरफ देखा उनकी आँखों बंद थी और फिर चूत को पैंटी के उपर से किस करने लगा. पैंटी पर मूह लगते ही चूत के रस की स्मेल मेरे दिमाग़ मे चली गयी.

मैं जीभ से पैंटी के उपर से चूत को चाटने लगा, फिर मैने पेंटी निकाल दी.

उसकी चूत मेरे सामने खुल गयी. आज चूत पर बाल नही थे. चुत एकदम चिकनी और गोरी थी.

मैने चूत पर किस किया, और चूत पर किस की बरसात कर दी. मेरे किस की बरसात से चूत गीली हो गयी , भाभी की चूत पानी पानी हो गयी.

फिर मैं जीभ से चूत को चाटने लगा. चूत का पानी नमकीन था. मैं ने जीभ को चूत के अंदर डाल दिया और जीभ से चूत मारने लगा.

थोड़ी देर चूत चाटने के बाद चूत से पानी निकल गया. पानी निकलते ही बेड हिलने लगा. मैं ने पानी पीने के बाद पंकज की तरफ देखा वो मेरी तरफ प्यार से देख रही थी.

मैने उनकी ब्रा को निकाल दिया, और मै भी नंगा हो गया.

मै बैड लेट गया और वे भी मेरे सिने पर सिर रखकर लेट गई...

पंकज मेरे ऊपर आ गई और मेरी तरफ देखते हुए बोली - मै आपसे कुछ मांगना चाहती हू, आप मुझे दोगे...

मै- मेरी जान बिलकुल दुंगा, बताओ क्या चाहिए.

पंकज - मै आपके बच्चे को जन्म देना चाहती हू, आपके बच्चे की मा बनना चाहती हू, आप मुझे अपना अंश दोगे.

मै- ये आप क्या बोल रही हो, मै कैसे?

पंकज - आप क्यों नहीं, पति हो आप मेरे. मुझे हमारे प्यार की निशानी चाहिए.

मै- पर ऐसे कैसे, घर मे सब लोग...

पंकज - मुझे किसी की परवाह नहीं है, और मै सब संभाल लुंगी. मुझ पर अहसान कीजिये...

मै- ठीक है मेरी जान, तुम खुश रहो...

वो मेरे गले लग गई और मेरे चेहरे को चुमने लगी...

मैने पंकज को बेड पर लेटा दिया और मै उसके चुचो को बारी -2 से चुसने लगा, और साथ-2 मसलने लगा. भाभी के शरीर मचलने लगा, वो मेरे बालो को जोर -2 से सहलाने लगी.

फिर मैने अपने लंड को चूत पर रख दिया. और लंड को चूत पर रगड़ने लगा.

पंकज - थोड़ा आराम से डालना .आपका बहुत बड़ा है

मैने लंड पे ज़ोर डाला , लंड का टोपा चूत के अंदर चला गया.

पंकज को दर्द नही हुआ. फिर एक जोरदार झटका मारा कि 4 इंच तक लंड अंदर चला गया
 
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