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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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# अपडेट - 69

आज मै जल्दी ही सो गया,क्योंकि कल कॉलेज जाना था...

सुबह मैं रेडी़ होकर बुलेट लेके कॉलेज के लिए निकल गया.

आज मैं अकेला ही था, कुलदीप कुछ काम होने से अपने नाना नानी के यहाँ गया हुआ था... कुछ दिनों के लिये.

गाँव से 20-22 km दूर शहर मे ही मेरा कॉलेज है... आधे घंटे मे मैं कॉलेज पहुँच गया... कैंपस की पार्किंग मे मैने बाईक खड़ी कर दी...

***

मेरी कॉलेज एक बड़े एजुकेशन इंस्टीट्यूट का हिस्सा थी...

इस एजुकेशन ग्रुप के कई इंस्टीट्यूट थे देश भर मे, तो आप सोच सकते हैं कि मेरी कॉलेज कैसी होगी. ये शहर के सबसे बेस्ट कॉलेजों मे से एक थी.

कॉलेज का कैंपस बहुत बड़ा था.. कॉलेज की बिल्डिंग भी बड़ी थी, अलग - अलग कॉर्सेज के हिसाब से सबकी अलग बिल्डिंग थी.

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कॉलेज की प्रिंसिपल थी - मिसेज़ शालिनी गुप्ता ( उम्र - बाद मे बता दुंगा सब... )

इनके पति मिस्टर गुप्ता हमारी कॉलेज ग्रुप मे पार्टनर थे. ये इस शहर मे रहते थे जिससे इनकी वाईफ हमारी कॉलेज की प्रिंसिपल थी. दुसरा शालिनी गुप्ता एज्युकेटेड थी तो वो कॉलेज को अच्छे से संभाल सके तथा मिस्टर गुप्ता का दबदबा रह सके.

###

***

मैं कॉलेज की बिल्डिंग मे पहुँचा ही था कि सामने मुझे मेरे जिगरी मिल गये - मनीष और विकास

हम सब स्कूल लाईफ से ही दोस्त थे...

मिलते ही हम हम तीनों गले लग गये..

मनीष - कैसा है भाई

मैं - ठीक हूँ, तुम लोग कैसे हो...

मनीष - मै तो मस्त हूँ, इसका पता नहीं...

विकास - मैं भी मस्त हूँ....

मनीष - तुझे एक खास बात बतानी है

मैं - क्या

विकास - इसने आज प्रीति को प्रपोज़ किया...

मैं - क्या कहा उसने...

मनीष - उसने हाँ कर दी

मैं - congrats Bro...

( प्रीति हमारे ही क्लास की लड़की है, लड़की क्या पटाका है साली, पहले मैं उसे पटाना चाहता था, पर मनीष बोला की वो उसे अच्छी लगी तो मैंने छोड़ दिया.

अपने को तो चोदने के लिए चाहिए थी, वो नहीं तो कोई और )

मैं - साले पटायी है या कुछ किया भी है...

मनीष - कुछ नहीं किया यार, कुछ टिप्स दे ना तु तो चैंपियन है इसमें...

मैं - एक काम कर उसे घुमाने ले जा, वहीं पर किस कर लेना, अगर किस कर लिया तो समझ ले काम हो गया..

मनीष - thanku bhai अभी जाता हूँ..

विकास - साले इतनी जल्दी...

मनीष - हां, अच्छे काम मे देरी क्यों...

फिर मनीष चला गया,

विकास - इसने अपने फैमिली के बारे मे सब बता दिया, उसने इसके बाप के पैसे देखकर हां की है

मैं - पता है...

मैं और विकास भी क्लास मे आ गये.

मैं पिछले कुछ दिनों से छुट्टी पर था तो आज पूरी क्लास ली और इतने दिनों के नोट्स लिये...

* वैसे तो कॉलेज अभी स्टार्ट ही हुआ था तो काम का इतना प्रेशर नहीं था, टाईम था बहुत. लेकिन मैंने कई छुट्टी ले ली थी.

क्लास खत्म होने के बाद मैं विकास को उसके घर छोड़ने चल पड़ा

हम सब कई सालों से दोस्त थे, तो बहुत बार इनके घर जा चुका हूँ,

मैं इनकी फैमिली से अच्छे से घुल मिल चुका हूँ, जैसे मैं दौनो की फैमिली का हिस्सा हूँ, दोनों के घरवाले भी मुझे बहुत प्यार करते हैं...

हम दोनों विकास के घर मे पहुँच गये,हम दोनों हॉल मे बैठ गये...

*** विकास की फैमिली -

विकास -

# पापा - श्याम सिंह (47)

इनकी एक शॉप हैं, ज्यादा बड़ी तो नहीं पर ठीक है.

इन्होने अपने बच्चों को अच्छी फ्रीडम दी हैं पर ये कुछ कुछ पुराने टाइप के ख्यालात के हैं.

# मम्मी - मनोरमा (44)

ये बहुत मस्त औरत… पूरा भरा भरा शरीर, मस्त बड़ी बड़ी चूचियाँ जो उसके सीने की शोभा बढ़ाती हैं , हल्का सा उठा हुआ पेट , उसके नीचे मस्त गोल गोल मटकी जैसे बाहर को निकले हुए कुल्हे जो उसकी गांड की खूबसूरती को बढ़ाते हैं.

NOTE - इन्हें ज्यादा सजंने सवरंने का शौक हैं. इन्हें भी अपनी सहेलियों को तरह शॉपिंग करना, ब्यूटी पार्लर जाना अच्छा लगता है लेकिन ये जा नहीं पाती. वजह इनके पति श्याम सिंह. वो ना तो ज्यादा खर्च करते हैं और ना उन्हें पसंद हैं. वो इन्हें कम ही पैसे देते हैं. जिससे कई बार इन्हें सबके सामने (सहेलियों /ग्रुप ) शर्मिंदा होना पड़ता हैं. पर मजबूर है ये...

#विकास की बड़ी बहन - विनीता (22)

विनीता देखने मे गोरी और फिगर पर्फेक्ट हैं 36-24-38. विनिता की गांड़ को देख कर सबका दिल आ जाए ऐसी थी.विनिता के बारे मे जितना कहु उतना कम है.

# छोटी बहन - कल्पना (17½ - 18 के लगभग )

हाईट 5’3-4″, जबरदस्त माल थी, चम्पई गोरा रंग,तीखे नयन-नक्श, उसकी संतरे जितनी कसी, सुडोल चुचिया, उनके घर जाता तो कई बार बगैर ब्रा के उसकी चुचियो की गुलाबी घुन्डी़ टीशर्ट से साफ दिखती, हाय तब क्या लगती वो,

कुल मिला कर उसके बदन में भी कहीं से भी कोई भी कमी नजर नहीं आती थी...

***

हम बात कर रहे थे तभी आंटी आई, और उन्होंने कहा की कुछ काम से बाहर जाना है...

तो विकास बोला - मम्मी मेरी बाईक तो खराब है.

तो मैं - तो मेरी ले जा..

विकास - तुझे लेट नहीं होगा...

मैं - नहीं, तु जा के मैं वेट कर लुंगा...

विकास - ठीक है, मम्मी आप बैठो मैं अभी आया... कपड़े चेंज कर लेता हूँ.

 


# अपडेट - 70

आंटी मेरे पास सोफे पर बैठी गई... मैंने आंटी की तरफ देखा, उन्होंने काले रंग की साड़ी पहन रखी थी, वो साड़ी ब्लाउज में गजब की सुन्दर लग रही थी, उनका ब्लाउज उनके बड़े बड़े चुचों पर कसा हुआ था, उनकी बड़ी-2 चूचियाँ जो गहरे गले के ब्लाउज से बाहर आने के लिए बेकरार थी.

मैं उनके यौवन मे खोया हुआ था तभी किसी ने मेरा हाथ झटका...

मनोरमा आंटी - राहुल... क्या हुआ..

मैं (हड़बडाकर )- क्कुछ.. कुछ नही आंटी...

मनोरमा - कहां खो गये राहुल...

मैं - कहीं नहीं आंटी...

आंटी - गर्लफ्रेंड के ख्याल मे खो गये.. (वो हंसने लगी )

मैं - नहीं आंटी, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है..

मनोरमा - अच्छा, तुम झूठ मत बोलो.

मैं - सच्ची आंटी नहीं है...

मनोरमा - तुम्हारे जैसे हैंडसम लड़के की गर्लफ्रेंड नहीं है, आजकल तो सब की होती हैं.

मैं - आंटी कोई मिली ही नहीं...

मैं - वैसे आज आप बहुत ब्यूटीफुल लग रही हो...

मनोरमा (मुस्कुराते हुए )- हट बदमाश... कुछ भी बोलता है..

अब मुझे तो पता है की औरते तारीफ की भूखी होती हैं, बस तारीफ कर दो फिर तो.....

मैं - आप सच मे ब्यूटीफुल लग रहे हो..

मनोरमा - चल झूठा कुछ भी बोल रहा है, ऐसे ही झूठी तारीफ मत कर

मैं - सच्ची..आप एकदम मस्त लग रहे हो...

मनोरमा आंटी - सच्च मे...

मैं - सच्च मे आंटी...

मेरी तारीफ से वो खुश हो गई और बोली - thanku राहुल, कितने दिनों बाद किसी ने तारीख की है

मैं - क्यों आंटी, अंकल नहीं करते...

मेरी बात सुनकर वो कुछ नहीं बोली...

तभी विकास आ गया और वो लोग जाने लगे तभी बाहर से विनिता दीदी आ गईं.

वो स्कुल होने के बाद कुछ कोर्स (जो *शायद 4 साल का था, ये लास्ट साल है ) करने लगी थी...

आंटी ने उन्हें बता दिया की वो काम से बाहर जा रहे हैं, फिर वो चले गये और विनिता अपने रूम मे...

मैं तब तक टीवी देखने लगा...

थोड़ी देर बाद विनिता टीवी देखने के लिए आ गयी.

विनिता - क्या देख रहे हो

मैं -कुछ खास नही बस ऐसे ही...

(जैसा पहले बताया है मैं सब से घुल मिल चुका हूँ. तो मैं सबसे फ्रीली बात करता हूँ.

और विनिता मुझसे हमेशा फ्रेंडली ही रहती हैं, ऐसा नहीं कि वो दोस्त की बहन हैं.मुझसे फ्रेंड जैसे ही बात करती हैं और मैं भी... )

विनिता - ओर कॉलेज कैसी चल रही हैं...

मैं - बढ़िया चल रही है...

विनिता - एक बात पूछु तुमसे...

मैं - हां...

विनिता - पर तुम ये विकास को मत बताना...

मैं( ऐसा क्या पूछने वाली है दीदी ) - ऐसी क्या बात हैं ...

विनिता - तुम विकास को नहीं बोलोगे...

मैं - ठीक है नहीं बोलुंगा...

विनिता - विकास की कोई गर्लफ्रेंड है..?

मैं - अच्छा, तो ये बात थी, दी उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है...

विनिता - तुम झूठ तो नहीं बोल रहे अपने दोस्त के लिए..

मैं - नहीं, उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है...

विनिता - OK

विनिता - तुम्हारी तो होगी ही गर्लफ्रेंड..

मैं - मेरी भी नहीं हैं...

विनिता - झूठ मत बोलो राहुल, मैं कौनसा किसी को बताने जा रही हूँ, मैं बस फ्रेंडली पूछ रही हूँ...

मैं - मेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है.. अभी तक कोई अच्छी मिली ही नहीं...

विनिता - अच्छा, तो कैसी होनी चाहिए...

मैं - जो एकदम ब्यूटीफुल हो, दिखने मे अच्छी हो

विनिता - ओ हो, क्या बात है, और..

मैं (मैं भी अपने पर आ गया ) - आपके जैसी हो हॉट & सेक्सी...

विनिता (हल्के गुस्से मे ) - अच्छा तो मैं तुझे हॉट & सेक्सी लगती हूँ... आने दे विकास को...

मैं - नहीं.. नहीं.. मैं तो ऐसे ही बोल रहा था, आप उसे कुछ मत बोलना...

(वैसे तो मैं घबाराता नहीं पर मैं घबरा गया, क्योंकि विकास जिगरी है मेरा )

विनिता - ऐसे ही... मतलब मैं सुंदर नहीं हूँ... मैं खराब दिखती हूँ...

मैं - नहीं मेरा वो मतलब नहीं था...

विनिता - तो क्या मतलब है तेरा...

साला मैं बीच मे फंस गया था, समझ नहीं आ रहा ये विनिता दीदी क्या चाहती हैं...

मैं - सॉरी दीदी...

वो चुप रही और मेरी तरफ देखने लगी... फिर अचानक वो जोर जोर से हंसने लगी...

विनिता - देखो तो कैसे डर गया... मैं मजाक कर रही थी..

मैं - क्या...

विनिता - क्या राहुल तु भी, मजाक भी नहीं समझता.

मैं - आप ने तो मुझे टेंशन दे दी... मुझे लगा आप विकास को बोल दोगी.

विनिता - पागल है तु, इसमें क्या बताने वाली बात थी, ये सब तो चलता है यार.. वैसे भी तुने मेरी तारीफ ही तो की हैं.

मैं - मुझे लगा दीदी की आप नाराज हो गई...

विनिता - मैंने तुझे बोला है कि तु मुझे विनिता ही बोला कर ये दीदी क्या हैं, हम दोनों फ्रेंड्स हैं ना, अगर बोलना है तो घर वाले हो बस तब ही...

मैं - ओके...

विनिता - राहुल... मैं सच मे सुंदर दिखती है..

मैं - हां, आप बहुत सुंदर हो दीदी.. सॉरी सॉरी मेरा मतलब विनीता...

विनिता - देख, मजाक मत करना

मैं उनके पास खिसक गया...

मैं - मजाक नहीं कर रहा, आप एकदम हॉट & सेक्सी हो. आपकी बॉडी एकदम परफेक्ट हैं..

बोलकर मैंने आँख मार दी...

 


# अपडेट - 71

विनिता - देख, मजाक मत करना

मैं उनके पास खिसक गया...

मैं - मजाक नहीं कर रहा, आप एकदम हॉट & सेक्सी हो. आपकी बॉडी एकदम परफेक्ट हैं..

बोलकर मैंने आँख मार दी...

आगे...

विनिता हल्का सा शरमा गई.

मैं - एक बात पूछु..

विनिता - हां पूछ.

मैं - तुम्हारा तो कोई बॉयफ्रैंड होगा ना, क्या नाम हैं...

विनिता - नहीं हैं..

मैं - देखो झूठ मत बोलो, हम दोस्त हैं ना सच सच बताओ.

विनिता - अब नहीं है, पहले था. हमारा ब्रेकअप हो गया..

मैं - क्यों, अच्छा नहीं था..

विनिता - उसे हर टाईम बस सेक्स दिखता था, एक बार उसने जबरदस्ती की कोशिश की उसके बाद से मैंने उससे कभी बात नहीं की...

मैं - क्यों तुम्हारा मन नहीं किया करने का...

विनिता ( आँखे निकालकर ) - राहुल...

मैं - अरे.. मैं तो बस मस्ती कर रहा हूँ, दोस्तों मे तो इतना चलता है ना.

वो कुछ नहीं बोली...

मैं - बताओ ना...

विनिता - राहुल यार...

मैं - मुझे तो बता सकती हो..

विनिता - ऐसी बात नहीं थी, मुझे बस थोड़ा टाइम चाहिए था, पर उसे बहुत जल्दी थी...

मैं - बेवकूफ थोड़ा सब्र कर लेता, कितनी हसीन लड़की उसकी गर्लफ्रेंड थी..

विनिता अपने तारीफ सुनकर थोड़ा सा शरमा गई, वैसे तो वो मुझसे बड़ी थी, पर एक्सपीरियंस के मामले मे आप लोग तो जानते ही हैं...

मैं - विनीता...

विनिता - हां..

मैं - तुम्हारा कोई बॉयफ्रैंड नहीं है, मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है, तो क्यूँ ना हम...

विनिता - हम क्या..

उसे पता था मै क्या बोल रहा हूँ, फिर भी वो नाटक करते हुए पूछ रही थी..

मैं भी अब जोश मे आ गया था..

मैं - क्यों ना हम बॉयफ्रैंड गर्लफ्रेंड बन जायें...

विनिता - राहुल ये क्या बोल रहे हो तुम... मैं तुम्हारे दोस्त की बहन हूँ...

मैं - थोड़ी देर पहले तुम्ही ने बोला था कि हम दोस्त हैं.

विनिता - पर राहुल ये...

मैं - प्रॉब्लम क्या है इसमें...

वो कुछ नहीं बोली...

मैं - मैं तुम्हें अच्छा लगता

विनिता - नहीं ऐसी कोई बात नहीं, तुम तो बहुत स्मार्ट हो..

मैं एकदम उससे सट गया..

मैं - तो फिर...

विनिता - तुम तो बच्चों जैसे डर गये थे, बॉयफ्रैंड बन पाओगे...

बोलकर विनीता हंसने लगी...

मैं - मैं बच्चा नहीं हूँ, तब बात कुछ ओर थी..

विनिता - मुझे तो तुम बच्चे लगते हो...

मैं - अभी तुमने देखा नहीं है मुझे, जब पूरा देख लोगी तब पता चलेगा..

विनिता - अच्छा.. कहीं ये पता चले कि तुम सच मुच बच्चे हो..

मैंने उसके हाथ पकड़ लिये - अभी बताता हूँ मैं कितना बड़ा हूँ

वो अपने हाथ छुड़ाने लगी..

पर मैने उसके दोनों हाथ पकड़ लिये, वो मेरी तरफ देखने लगी..

मैं एक हाथ उसकी मखमली पीठ पर ले गया और दबा दिया.

विनिता के मुँह से - आहह.. निकल गई...

मैं उसकी आँखों मे देखने लगा

मैं - दिखांऊ अपना जोर... दिखाऊं कितना बड़ा हूँ मैं..

मेरी बात सुनकर उसने अपना मुँह साईड़ मे कर लिया और मुस्कुराने लगी...

विनिता - नहीं...

मैं - क्यों, क्या हुआ...

मैं - तो बनोगी मेरी गर्लफ्रेंड...

विनिता - बताने की जरूरत है, तुम तो भोले ही हो...

बोलते ही वो खड़ी हो गई और हंसने लगी. मैं उसको पकड़ने लगा लेकिन वो अपने कमरे मे भागने लगी...

लेकिन मैंने उसे पकड़ लिया...

अब मैं पिछे और वो आगे थी, मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और पूरा चिपक गया और अपने हाथ उसके पेट पर रख कर उसे अपने से मिला लिया...

उसके मुँह से कामुक आआहह निकल गई...

मैं - क्या बोल रही थी...

विनिता - कुछ नहीं... सॉरी राहुल, प्लीज छोड़ दो...

पर वो छुटाने के लिए हल्का हल्का ही जोर कर रही थी.

मैं - अब क्या हुआ. गलती की है तो पेनल्टी भरनी होगी..

और मैने अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिये..

विनिता - आआह.. राहुल....

मैं - क्या हुआ..

वो कुछ नहीं बोली...

मेरा लंड टाईट हो गया जो उसकी मखमली गांड मे भरे गोश्त मे दबने लगा...

मेरे लंड का अहसास पाते ही उसके शरीर मे करंट सा दौड़ गया.

क्योंकि ये उसका पहला स्पर्श था...

विनिता - राहुल....

मैंने उसे पलट दिया अब हम आमने सामने थे, मेरे हाथ उसकी पीठ पर थे...

वो आंखें खोलकर मेरी तरफ देखने लगी...

मैं - विनिता..

विनिता - हां..

मैं - अपने बॉयफ्रैंड का मुँह मीठा कराओगी..

विनिता - बिल्कुल करांऊगी, अभी किचन से मिठाई लेके आती हूँ...

मैं( मैं उसके रसीले होंठो को देखने लगा ) - मुझे तो तुमसे ही मुँह मीठा करना है.

विनीता को पता था मैं क्या बोल रहा हूँ...

विनिता - अच्छा, बहुत फास्ट हो तुम तो, अभी बॉयफ्रैंड बने और अभी...

कहीं सारे काम मे ही तो इतनी जल्दी... वो हंसने लगी..

मैं समझ गया कि वो क्या बोल रही हैं...

मैंने उसे कसकर चिपका लिया...

मैं - वो तो जब करूंगा तब पता चल जायेगा. अभी मुँह तो मीठा कर लुं.

विनिता भी चाहती थी...

विनिता - ठीक हैं, तुम भी याद करोगे कि कैसी गर्लफ्रेंड मिली हैं

मैं उसके होंठों की तरफ बढ़ने लगा... हमारे होंठ एक दूसरे का रस पीने के लिए मचल रहे थे...

हमारे होंठ बिल्कुल पास आ गये उसकी गर्म सांसे मेरे चेहरे पर पड़ने लगी..

हमारे होंठ एक दुसरे से टकराने लगे..

 


# अपडेट - 72

हमारे होंठ बिल्कुल पास आ गये उसकी गर्म सांसे मेरे चेहरे पर पड़ने लगी..

हमारे होंठ एक दुसरे से टकराने लगे..

आगे -

मैं उसके रस से भरे नाजुक गुलाबी अधरों को महसूस करने वाला था, तभी बुलेट की आवाज आने लगी. बुलेट की आवाज सुनकर विनीता हडबडा गई, मैं भी थोड़ा सा चौंक गया था..

मैंने अपने हाथ हटा लिये, विनिता जल्दी से अपने रूम मे जाने लगी.

अपने रूम के पास जाकर वो हंसने लगी और जीभ निकालकर मुझे चिडा़ने लगी...

मैं उसकी तरफ बढ़ा, वो जल्दी से अपने रूम मे भाग गई...

मैं भी हाथ मलते हुए सोफे पर बैठ गया और TV देखने का नाटक करने लगा..

2-3 मिनट मे वो दोनों आ गये...

विकास - बैठे बैठे बोर तो नहीं हो गया...

मैं - नहीं यार...

तभी विनीता भी आ गई... हम बाते करने लगे...

विनिता मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी, तो मैंने भी उसकी तरफ आँख मार दी...

फिर मैं वहाँ से आ गया... पूरा मूड ऑफ हो गया. Klpd जो हो गया था.

हाँ पर इस बात कि खुशी थी कि एक नयी चुत मिल गई, वो भी सील पैक. मिली नहीं थी पर जल्द ही मिल जायेगी //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f47f.svg...

मैं वहाँ से सीधा घर आ गया.

घर आकर कपड़े चेंज किये, पर लंड़ तो अभी भी शांत नहीं हो रहा था, उसे चूत की सख्त जरूरत थी.

मैं सुमेर ताऊजी के घर की तरफ चल पड़ा. संतोष (ताईजी ) रानी से मिलने...

ताऊजी के घर पर जाते ही मेरा सारा उत्साह गायब हो गया, सामने राकेश भाई के बच्चे खेल रहे थे. मतलब किस्मत भाभी अपने गाँव से आ गई, पर मेरी किस्मत के लौडे़ लगा दिये...

सभी बैठें हुए थे, मैं भी बैठ गया... राकेश भाई बाहर गये थे और ताऊजी गाँव मे गये हुए थे...

मैंने ताईजी को इशारा करके साईड़ मे बुलाया...

मैं - आप अभी खेत की तरफ चलो कुछ काम है..

संतोष - के काम है, यहाँ ही बोल दे...

मैं - ना, आप भाभी को बोल दो की खेत मे कुछ काम है...

संतोष - अभी...

मैं - हाँ, मैं जा रहा हूँ, जल्दी से आ जाओ....

फिर मैं वहाँ से निकल गया, और ताऊजी के खेत मे बने कमरे पर संतोष रानी का इंतजार करने लगा... ताऊजी रात मे कई बार यहाँ सोते थे तो पंलग वगैरह का अच्छा इंतजाम था.

करीब 10 मिनट बाद इंतजार खत्म हुआ और मेरी रांड गांड मटकाते हुए आ गई...

संतोष - राहुल के काम है जो इतनो जल्दी और यहाँ बुलायो..

मैंने आस पास देखा की कोई है तो नहीं, मैदान बिल्कुल साफ था..

मैंने संतोष को पकड़ा और गोद मे उठाकर कमरे मे ले आया, अंदर आते ही मैने जल्दी से उन्हें नीचे उतारा और कमरे का गेट बंद कर लिया...

वो सब समझ चुकी थी कि मैंने किस लिए बुलाया हैं. वो मेरी तरफ ही देख रही थी...

मैंने अपने होठ उनके लरजते होठों पर रख दिए... और उनके चुतडो़ को अपने हाथों में लेकर कस दिया.. तो वो मुझसे कस के लिपट गई, उनकी जांघे मेरी जांघों से सट गई...

मेरा लंड अकड़ने लगा और संतोष रानी की नाभि में अपना ठिकाना ढूँढने लगा...

ताई ने उसे अपनी मुट्ठी में कस लिया और उसे मसल्ते हुए बोली - ये तुम्हारा मूसल ग़लत रास्ते को ढूंड रहा है.. इसे सम्भालो...

मैं - ये अब तुम्हारे हवाले है मेरी जान , इसे सही रास्ता दिखना तुम्हारा काम है...

वो लंड को मसलने लगी... मैंने संतोष रानी का ब्लाउज खोल दिया, जिससे उसके दोनों खरबुजे आजाद हो गये. मैंने दोनों को दबोच लिया और मसलने लगा...

संतोष - आअहह.... राज्ज्जजा..उफफफफ्फ़..सीईईईई... ऊहह...

मैंने बोबो को मुँह मे भर लिया और चूसने लगा, और एक हाथ से मसलने लगा.. वो मादक सिसकिया लेने लगी...

आज टाईम कम था तो जल्दी ही मुझे काम निपटाना था..

मैंने हाथ से घाघरे का नाडा़ खोल दिया, एक ही सैकंड़ मे मेरी ताई रंडी पूरी नंगी थी, मैंने चूत पर हाथ रखा तो वो पूरी तरह कामरस से भीग चुकी थी... मैंने उसमें दो उंगली डाल दी और हिलाने लगा,

संतोष मजे मे सिसकने लगी, वो मादक आंहे भरने लगी और मेरे मुँह को चुमने लगी...

मैने अपनी उंगली निकाल ली और कपड़े निकाल कर नंगा हो गया, अब देर करना उचित नही था...

मैने संतोष रानी को पंलग पर लिटा दिया और सांवली, चिकनी जांघों के बीच आ गया..

वो जांघों को फैलाकर लेटी थी...

संतोष - राहुल बेटा आराम से, तुम्हारा हथियार बहुत बड़ा है…

मैंने उसके काले अंगूर जैसे निप्पल को उंगलियों मे दबाकर जोर से भींच दिया...

वो दर्द से कराहने लगी...

संतोष - आआहह.. मा...

मैं - कितनी बार बोला है इस समय तु मेरी रखेल है, तु मेरी रंडी और मैं क्या हूँ...

संतोष - आहह... मेरा राजा है तु... बड़ा जालिम है तु...

मैंने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाकर सुपाडा चूत छेद में फिट किया और एक झटका लगा दिया... और आधा डाल दिया.

संतोष - आहह.. राज्ज्जजा...कितना मोटा है, हर बार जान सी निकाल देता है... धीरीए…. सीईईईईईई.. बहुत मोटा है… तुम्हारा...

मैंने उनके होठों को चूमते हुए कहा - बहुत कसी हुई चूत है रानी तेरी.. मेरे लंड को अंदर से कस लेती हैं हर बार..

मैने फिर एक और धक्का मार दिया और लंड़ को जड़ तक पेल दिया, संतोष ताई के मुँह से दर्द भरी आह निकल गई.

 


# अपडेट - 73

मैने फिर एक और धक्का मार दिया और लंड़ को जड़ तक पेल दिया, संतोष ताई के मुँह से दर्द भरी आह निकल गई.

मैं आराम से धक्के लगाने लगा... रखेल ताई की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी..

मैं - क्या बात है आज तुम्हारी चूत बहुत पानी छोड़ रही है...

संतोष - ओह्ह्ह.. मेरे राजा...तेरा मूसल भी तो कितनी जोर से कुटाई कर रहा है. इसे तो देखते ही ये गीली होने लगती हैं...

मेरी रखेल मुझसे अब पहले से ज्यादा खुल चुकी थी... ये तो अच्छा ही था...

मैं लंबे लंबे धक्के मार रहा था, कभी धीरे तो कभी स्पीड मे जिससे हर धक्के पर वो सिसकने लगती...

उसकी रसभरी ज्यादा देर नहीं टिक पाई और जल्दी ही रस छोड़ने लगी...

मैं उनके होंठो को चूसने लगा, मेरा लंड तना हुआ था मैं फिर से धक्के मारने लगा...

संतोष - अह्ह्ह्ह.. थोड़ा तो सबर करो... सांस तो लेने दे..

मैं - मेरी रानी आज टाईम कम है...

मैं उनके बोबो को हाथों मे भरकर मसलने लगा और धक्के मारने लगा, जिससे वो फिरसे गरम होने लगी..

कमरे में ठप-ठप की अावाजे गूँज रही थी.. दोनो ही पसीने से तर-बतर हो चुके थे..

मैं ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा आज मै जल्दी ही चरम पर पहुँच गया...

मुझे लगा कि अब मेरा छूटने वाला है... मेरे हाथ बोबो को मसलने लगे, 20-25 तूफ़ानी धक्के लगा कर उनकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया... साथ मे वो भी फिर झड़ गई

झड़ते ही मैं संतोष रानी के ऊपर लेट गया, 2 मिनट बाद मैं शांत हुआ और साइड़ मे हो गया.

मैं पंलग से उठा और कपड़े पहनने लगा. ताई भी अपने कपड़े इकट्ठे कर पहनने लगी,जैसे ही वो ब्लाउज पहनने लगी तो उनके मुँह से दर्द भरी आंह निकल गई..

मैंने ब्लाउज साइड़ मे कर दिया तो मैंने देखा की चुचे एकदम लाल हो गये हैं और कुछ जगह नाखून लगे हैं...

ये देखकर मुझे खुद पर गुस्सा आया, साला हवस मे मैं पागल हो गया, क्या हालत कर दी मैंने इनकी...

मैं - सॉरी, जोश मे पता नहीं चला मुझे. सॉरी रानी मेरी वजह से तुम्हें दर्द हुआ...

संतोष - पहले दर्द देता है फिर सारी बोलता है... बड़ा जालिम है तू...

मैं - अरे.. मेरी रानी नाराज हो गई, सॉरी माफ करदो मुझे...

संतोष - मैं तेरी रखेल हूँ ना तो तेरा हक है मुझ पर...

मैं(मैंने भी इंमोशनल डायलॉग मार दिये ) - तुम तो मेरी रानी हो, वो तो मैं मजे के लिए बोलता हूँ...

मैने संतोष रानी को बाहों मे भर लिया, उसके बोबे मेरे सीने मे दब गये... तो उनके मुंह से आहह निकल गई...

मैं - क्या हुआ...

संतोष - कुछ नहीं

और उन्होंने अपने हाथ मेरी पीठ पर कस लिये...

संतोष - राहुल बहुत भाग वाली होगी जिससे तेरा ब्याह होगा... तुझे ही है फिक्र जो है वो बाकी किसी को मेरी कुछ नहीं पड़ी है...

मैं - ऐसा क्यूँ, ऐसा नहीं है, घरवाले आपसे प्यार करते है.

संतोष - किसी को मेरी नहीं पड़ी है, तेरी दादी और ताऊ को तो कुछ थी ही नहीं, बेटा और बहू भी ऐसे ही हैं, मैं काम करती हूँ तभी सब पूछते है, वरना कोई ना पूछे..

मैं - तुम चिंता मत करो, मैं हूँ ना तुम्हारी चिंता करने के लिए और इसकी भी - बोलकर मैने चूत को मसल दिया...

संतोष - आआहह.. क्या करता है...

फिर हम दोनों तैयार हुए. पहले मैंने संतोष ताईजी को भेज दिया, कुछ देर बाद मैं भी आ गया...

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# अपडेट - 74

फिर हम दोनों तैयार हुए. पहले मैंने संतोष ताईजी को भेज दिया, कुछ देर बाद मैं भी आ गया...

आगे....

वहां से सीधा अपने रूम मे आ गया और पढने बैठ गया, पढना भी जरूरी है...पता नहीं मैं कितनी देर तक पढ़ता रहा, बाहर आया तो हल्का अंधेरा हो चुका था...

फिर मम्मी का कॉल आ गया, तो उनसे बात करने लगा... उन्होंने बताया की वो एक दो दिन मे आ रहे हैं... ये सुनकर मैं एकदम खुश हो गया.

रात को ताऊजी के घर खाना खाने गया तो उनको भी मम्मी पापा के बारे मे बता दिया...

खाना खाते हुए संगीता भाभी बार बार मेरी तरफ देख रही थी, मन तो मेरा भी था करने का लेकिन आज मैं थक गया था तो मैंने केंसिल कर दिया...

हमेशा की तरफ सुबह जल्दी उठ गया, सब काम करके रेडी होकर कॉलेज चल पड़ा...

( मैं कॉलेज चल तो पड़ा पर आज का दिन मेरी जिंदगी मे बदलाव लाने वाला था. और ये बदलाव शायद मेरे फ्यूचर तक होने वाला था. इससे आगे चलकर एक नया रास्ता, नयी दिशा मिलेगी. )

मैं अपनी धुन मे चला जा रहा था, मैं लगभग आधी दूर आ गया था...

मैं आगे बढ़ रहा था तभी मैंने देखा कि आगे रोड़ पर दो गाडी़ खड़ी हैं, और उनके पास मे ही रोड़ पर दो आदमी डंडे से किसी को मार रहे हैं, वो पड़ा पड़ा उनकी मार खा रहा है. और एक दूसरा आदमी उनको रोक रहा है, उन दोनों मे से एक ने उ दुसरे को डंडा मारा वो रोड़ पर गिर गया.

मैं जैसे जैसे आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे तस्वीर साफ हो रही थी.

मैं उनसे कुछ ही दुरी पर था तो मेरी नजर उस गिरने वाले आदमी पर पड़ी वो खड़ा होने की कोशिश कर रहा था , जैसे ही मैंने उसे देखा मेरे होश उड़ गये, वो आदमी ठाकुर सज्जन सिंह थे . मैंने जल्दी से बुलेट गाड़ी के पीछे रोक दी, क्योंकि गाड़ी के पास मे ही रोड़ पर दो तीन आदमी और पड़े हुए थे .

मैं गाड़ी के पास गया तो मुझे सब अच्छे से दिख गया , गाड़ी के सारे शीशे टूटे हुए थे जिनका कांच रोड़ पर बिखरा पड़ा था, गाड़ी पर जगह जगह स्क्रेचेज है. गाड़ी की हालत एकदम खराब हो चुकी हैं.

मैं जल्दी से ठाकुर ताऊजी के पास गया तो वो मुझे देखकर बोले - बेटा रणजीत को बचाओ.. वो उन गुंडों की तरफ इशारा करने लगे..

मैं जल्दी से खड़ा हुआ और उन डंडे वालो के पास गया, मुझे देखकर वो बोले- कोन है बे साले तु.. मरने आया है यहाँ.

मैं - तुम लोग कौन हो..

गुंडा - साले ज्यादा स्याणा ना बल चल फूट ले वरना तेरा भी यही हाल होगा...

मैं - अच्छा... बोलकर मैं उनकी तरफ बढ़ गया...

एक गुंडे ने जल्दी से मेरी तरफ वार किया, पर मैं साईड़ हो गया और एक जोर से लात मार दी वो रोड़ से नीचे गिर गया..

उसके गिरते ही उसका डंडा मैने उठाया और एक के बाद एक उस दूसरे गुंडे पर वार करने लगा..

मैं जोश मे भरा हुआ उसे मार रहा था तभी मेरा सारा जोश उड़ गया, उस पहले गुंडे ने डंडे से मेरी पीठ पर मारा.

मेरे मुँह से दर्द भरी आह निकल गई, मैं भी इंसान ही था.

पर मैं हूँ बड़ा कमीना, मैं रूका नहीं और उस गुंडे को मारने लगा. तभी एक गोली की आवाज आई.

ये गोली ठाकुर ताऊजी ने चलाई, बिल्कुल मेरे पीछे. मैं पीछे मुड़ा तो देखा की दुसरा गुड़ा रोड़ पर पड़ा है, साले के हाथ मे चाकू था..

अच्छा हुआ जो सही वक्त पर ठाकुर ने गोली चला दी वरना मेरा तो दी एंड हो जाता है.

अपने साथी की हालत देखकर वो एक बच्चा हुआ गुंडा भी भाग गया...

मैं ठाकुर ताऊजी के पास गया, वो तब तक बेहोश हो चुके थे.उनके शरीर पर चोटों के निशान थे, मेरे समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या करूँ.

मैं ड्राइवर को ढूंढने लगा, मेरी नजर ठाकुर की गाड़ी पर पड़ी,

मुझे ड्राइवर सीट पर बैठा दिखा, मैं ड्राइवर के पास गया तो उसे देखकर मेरा दिमाग सुन्न हो गया, उसके सीने से खून बह रहा था, उसे दो गोलियां लगी थी.

मैंने उसकी सांसे चेक की, वो मर चुका था

मेरी समझ मे नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, मैं गाडी़ से साईड़ हो गया और सोचने लगा...

मैं सोच रहा था कि मेरे कानों मे किसी के कराहने की आवाज सुनाई पड़ी,

मैंने आवाज की तरफ देखा तो वो रणजीत सिंह था. रणजीत खून से लथपथ बेसुध हालत मे रोड़ पर पड़ा था. शायद उन गुंडों ने रणजीत को बहुत ज्यादा मारा था, उसकी हालत बहुत खराब थी..

उसे देखकर मुझे और टेंशन हो गई, मैंने आस पास देखा, इस वक्त पास मे कोई नहीं था अब जो करना था वो मुझे ही करना था.

मुझे जल्द से जल्द इनको हॉस्पिटल ले जाना था...

मैं जल्दी से रणजीत के पास आया और उसे गोद मे उठाकर गाड़ी की पिछली सीट पर लेटा दिया, और ठाकुर ताऊजी को भी उठाकर आगे की सीट पर बैठा दिया.

मैं जल्दी से ड्राइवर के पास आया और उसे नीचे उतारकर लिटा दिया, क्योंकि अब उसका कोई काम नहीं था.

मैंने जल्दी से गाड़ी स्टार्ट की और हॉस्पिटल की ओर चल पड़ा.

 


# अपडेट - 75

हम जल्दी ही शहर पहुँच गये, शहर मे एंट्री करते ही एक बड़ा हॉस्पिटल था, मैं गाड़ी वहीं ले गया...

मैंने गाड़ी हॉस्पिटल के गेट के आगे रोक दी और बाहर आकर तीन चार वार्ड बॉय को ले आया, वो जल्दी से दो स्ट्रेचर ले आये और ठाकुर और रणजीत सिंह को उन पर लेटा कर अंदर इमरजेंसी रूम मे ले जाने लगे मैं भी उनके साथ ही था.

वहां पर एक डॉक्टर आया और बोला - क्या हुआ...

मैं - डॉक्टर इनको बहुत ज्यादा चोट लगी है, प्लीज जल्दी से इनका ट्रीटमेंट करिये...

डॉक्टर - कैसे हुआ ये सब...

मैं - कुछ गुंडों ने इन पर हमला कर दिया...

डॉक्टर - तब तो ये पुलिस केस है पुलिस को इन फॉर्म करना होगा.

मैं - पहले आप इनका इलाज करो, वो सब बाद मे देखेंगे.

डॉक्टर - नहीं, पहले पुलिस को तो इन फॉर्म करना होगा...

मैं (गुस्से मे ) - मैंने कहाँ ना पहले इनका इलाज कर...

डॉक्टर - मिस्टर आराम से बात करो...

वो मुझसे बहस करने लगा, मुझे गुस्सा आ गया तो मैंने उसकी कॉलर पकड़ ली...

मैं - ज्यादा बकवास मत कर, जल्दी से इलाज कर इनका..

मैं अपनी बात पूरी कर ही रहा था कि वहाँ एक सीनियर डॉक्टर आ गया... ( जो इस हॉस्पिटल का हेड था )

हेड - क्या हो रहा है यहाँ पर..

डॉक्टर - देखिए सर ये लड़का हमें धमका रहा है.

हेड - क्यों धमका रहा है ये...

डॉक्टर - ये दो लोगों को लेकर आया है जो बुरी तरह से घायल है, ये पुलिस केस हैं...

मैं - तुझे पता ये कौन लोग है..

हेड- कौन हैं...?

मैं - ये ठाकुर सज्जन सिंह और उनका बेटा है..

हेड - क्या.. ठाकुर सज्जन सिंह..

मैं - हाँ..

वो जल्दी से ठाकुर ताउजी के पास आया..

हेड - क्या हुआ ठाकुर साहब को..

मैं - किसी ने हमला कर दिया इन पर

वो डॉक्टर की तरफ देखकर बोला - यहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो जल्दी से इन्हें अंदर लेकर जाओ, और इलाज शुरू करों, पुलिस की कोई जरूरत नहीं है..

अपने बॉस की बात सुनकर वो बेचारा कुछ नहीं बोला और इलाज करने लगा..

मैं - थैंक्यू सर...

हेड - थैंक्यू की कोई बात नहीं है ठाकुर साहब को मैं जानता हूँ, वो हमारे (MD)ऑनर के फ्रेंड हैं.

फिर वो भी अंदर चला गया,

ठाकुर ताउजी और रणजीत सिंह को अलग रूम मे ले जाया गया, दौनो के एक दुसरे से टच ही थे. मैं बाहर वेट करने लगा.

कुछ देर बाद एक नर्स रणजीत सिंह के रूम of बाहर आई और दूसरी तरफ चली गई, वो कुछ जल्दी मे थी, कुछ देर मे वापिस आई उसके हाथ मे एक पैकेट था जो कवर्ड था, वो अंदर चली गई.

मैं बाहर खड़ा खड़ा वैट करने लगा... जल्द ही ठाकुर के रूम से रूम से भी एक नर्स बाहर आई और वो भी उसी तरफ चली गई जिस तरफ पहली गई थी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, मैं बस इंतजार ही कर रहा था.

फिर वो नर्स आ गई, वो जल्दी आ गई थी, उसके पास कुछ नहीं था,वो रूम मे चली गई, हाँ उसके चेहरे पर हल्की चिंता थी.

वहां पर माहौल अजीब सा चिंताजनक था, तभी रणजीत को बाहर लाया गया और उसे दूसरे रूम की तरफ ले जाने लगे.

मैं उनके साथ चल पड़ा...

मैं - क्या हुआ डॉक्टर, इसे कहाँ ले जा रहे हो...

डॉक्टर - पेशेंट की हालत क्रिटिकल है, बॉडी पर जख्म बहुत ज्यादा और गहरे हैं, और ब्लड़ भी बहुत निकल चुका है. हमें इनका ऑपरेशन करना होगा.

डॉक्टर की बात सुनकर मैं टेंशन मे आ गया... फिर वो चला गया...

फिर ठाकुर ताऊजी के कमरे से नर्स और डॉक्टर बाहर आये.. वो दोनों कुछ बात कर रहे थे.

दोनों के हाव भाव से ऐसा लग रहा था कि कुछ टेंशन हैं. मैं उसके नजदीक गया...

डॉक्टर - आज सुबह ही ब्लड बैंक मे B+ ग्रूप ब्लड था.

मैं - क्या हुआ डॉक्टर, कुछ प्रॉब्लम है ?

तभी वहां पर उनका हेड आ गया...

हेड - क्या हुआ..

डॉक्टर - सर पेशेंट का बहुत खून बह चुका है, तो उनको अभी ब्लड़ चढ़ाना होगा...

हेड- तो जल्दी करो, इसमें प्रॉब्लम क्या है.

डॉक्टर - सर.. पेशेंट का जो ब्लड़ ग्रुप हैं वो हमारे पास नहीं हैं...

मैं वहीं पर उनकी बात सुन रहा था...

हेड - तो दूसरे ब्लड़ बैंक से मंगा लो...

डॉक्टर - सर उसमें टाईम लगेगा, हमें अभी अर्जेंट चाहिए...

मैं - कौनसा ग्रुप चाहिए...

डॉक्टर - B+

मैं - B+...

डॉक्टर - हाँ

मैं - मेरा ब्लड़ ग्रुप यही है, आप मेरा खून ले लीजिए...

हेड - बहुत बढ़िया, डॉक्टर जल्दी से इनका ब्लड़ लो.

डॉक्टर - पर सर हमें 2-3 युनिट चाहिए...

मैं - तो क्या हुआ मैं दे दुंगा...

हेड - पर बेटा तुम अकेले...

मैं - कोई बात नहीं सर मैं दे दुंगा...

हेड - ok

फिर मैं ठाकुर ताऊजी के रूम मे आ गया, वहीं पर मेरा खून उनको चढ़ाने लगे ...

वहां पर एक नर्स थी जो मेरा खून निकाल रही थी, वो मेरे पास ही खड़ी थी, कि मुझे कुछ प्रॉब्लम ना हो...

एक नंबर की मस्त आईटम थी, मैं तो उसकी तरफ ही देख रहा था...

खून देने के बाद मुझे दूसरे सामान्य कमरे मे ले जाया गया ताकि मैं कुछ देर आराम कर सकू, क्योंकि मैंने दो यूनिट से भी ज्यादा ब्लड़ दिया था.

 


अपडेट - 76

खून देने के बाद मुझे दूसरे सामान्य कमरे मे ले जाया गया ताकि मैं कुछ देर आराम कर सकू, क्योंकि मैंने दो यूनिट से भी ज्यादा ब्लड़ दिया था.

आगे...

कुछ देर आराम करने के बाद मैं बाहर आया... रणजीत अभी भी ऑपरेशन थिएटर मे था.

मैंने बाहर आकर डॉक्टर से पूछा - अब ताऊजी की तबीयत कैसी हैं...

डॉक्टर - अभी वो खतरे से बाहर हैं, कुछ घंटों मे उनको होश आ जायेगा...

मैं वहीं बैठकर इंतजार करने लगा... कुछ देर बाद ऑपरेशन थियेटर का दरवाजा खुला और डॉक्टर बाहर आये...

मैं - डॉक्टर अब कैसा है रणजीत...

डॉक्टर - देखिए अभी उनकी हालत क्रिटिकल है. उनकी पूरी बॉडी मे गहरे जख्म हैं और ब्लड़ भी बहुत बह गया , उनकी बैक बॉन पर भी चोट लगी हैं. अगला कुछ टाईम बहुत important हैं, अभी हम कुछ नहीं कह सकते.

डॉक्टर की बात सुनकर मैं बहुत टेंशन मे आ गया, पता नहीं क्या होगा...

पर मैं कुछ कर भी तो नहीं सकता था...

मैं वहीं पर बैठा बैठा इंतजार करने लगा, टेंशन मे कब शाम हो गई मुझे पता ही नहीं चला...

तभी एक नर्स मेरे पास आयी और बोली - पेशेंट को होश आ गया हैं..

मैं उसके साथ ठाकुर के रूम मे गया, वहाँ डॉक्टर और वो हेड मौजूद थे, डॉक्टर ठाकुर ताऊजी को चैक कर रहा था...

मैं ठाकुर ताऊजी के पास खड़ा हो गया, डॉक्टर चैक करके बोला - अभी इनकी हालत पहले से ठीक है पर ज्यादा अच्छी नहीं हैं... अभी इन्हें आराम करने दीजिये...

डॉक्टर चले गये और मैं वहीं पर बैठ गया, 10-15 मिनट बाद ठाकुर ताऊजी की बॉडी मे हल्की हलचल हुई, उनकी आँखें थोड़ी थोड़ी खुली... वो धीरे धीरे कुछ बोल रहे थे. पर मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था और ना ही कुछ समझ आ रहा था.

मैं उनके बिल्कुल पास गया...

सज्जन सिंह - बेटा... तुमने किसी को बताया तो नहीं...

उनकी बात सुनकर मुझे याद आया सुबह से मैं यही हूँ मैंने इस बारे मे किसी को नहीं बताया और ठाकुर ताऊजी के घरवालों को भी इस बारे मे नहीं बताया.

मैं - ताऊजी.. टेंशन मे मुझे कुछ याद ही नहीं रहा सॉरी... मैं अभी हवेली कॉल करता हूँ...

मेरी बात सुनकर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया, बोले - नहीं... तुम किसी को कुछ नहीं बताओगे...

मैं - क्यों ठाकुर ताऊजी...

उनकी हालत अभी ठीक नहीं हुई थी, उन्हें बोलने मे बहुत मुश्किल हो रही थी, लेकिन फिर भी वो कोशिश कर रहे थे...

सज्जन सिंह - बेटटटा... मैं जो बोल...

वो बोल रहे थे तभी वहाँ पर नर्स आ गई...

नर्स - आपको डॉक्टर बुला रहे हैं...

मैं - ठीक है चलिए...

मैं खड़ा होकर जाने लगा तो ठाकुर ने मेरा हाथ पकड़ लिया... वो बोलने की कोशिश कर रहे थे...

मैं - मैं आप की बात समझ गया, आप चिंता मत करिए मैं किसी को नहीं बताऊंगा. अभी आप आराम करिये...

फिर मैं डॉक्टर के केबिन मे आ गया... वहां पर दो डॉक्टर और उनका हेड बैठे हुए थे.

मैं भी चेयर पर जाकर बैठ गया...

हेड- बेटा तुम्हारा नाम क्या है...

मैं - मेरा नाम राहुल है..

हेड - राहुल तुमने ठाकुर साहब के घर वालों को इन्फॉर्म कर दिया.

मैं - नहीं सर, वो ठाकुर ताऊजी ने मना कर दिया.

हेड - क्यों..

मैं - वो मुझे भी नहीं पता..

हेड - देखो राहुल अभी सिचुएशन ऐसी है कि उनके घरवालों का होना जरूरी है... रणजीत की हालत अभी बहुत क्रिटिकल है...और ठाकुर साहब को भी बहुत चोटे आई हैं.

मैं - वो मैं समझता हूँ, पर उन्होंने मना किया है किसी को भी बताने से...

हेड - ठीक है तो हम सुबह ठाकुर साहब से बात करते हैं, अभी उन्हें आराम की जरूरत है..

मैं - OK

मैं वहां से आ गया, मुझे बहुत टेंशन हो रही थी. एक तो इन दोनों की हालत ऊपर से ठाकुर ताऊजी ने मुझे किसी को बताने से भी मना किया था. मेरी समझ मे ये नहीं आ रहा था कि उन्होंने मना क्यों किया...

 


अपडेट - 77

मैं सुबह से घर से बाहर था, अब शाम हो गई थी.शाम क्या अंधेरा हो गया था. घरवालों को मेरी टेंशन हो रही होगी, मुझे उनको कुछ झूठ ही बताना पड़ेगा सच मैं बता सकता.

मैंने कॉल करने के लिए मोबाइल अन लॉक किया तो उसमें 10-12 मिस कॉल थे. मेरा फोन हमेशा साइलेंट पर रहता है. और सुबह से मैंने फोन देखा भी नहीं था.

5-6 तो मेरे दोस्तों के थे बाकी बड़े ताऊजी के घर से थे.

मैंने वापिस कॉल किया तो रामानंद भाईजी ने कॉल उठाया... पहले तो उन्होंने दो चार सुनाई की कहा गायब हैं, पर मैंने उनको झूठ बोल दिया की मैं दोस्त के घर आया हूँ, मैं बताना भूल गया. और ये भी बोल दिया की आज यहीं पर रहूँगा, कल कॉलेज के बाद घर आऊंगा...

मेरी बात पर उन्होंने यकीन कर लिया, उन्होंने कहा- ठीक है.

मैंने कॉल कट कर दिया और ठाकुर ताऊजी के रूम मे आ गया. वहां पर एक नर्स मौजूद थी उनके ध्यान के लिए तो मैं वहाँ से बाहर आ गया कुछ देर रिलेक्ल होने के लिए.

कुछ देर तक मैं हॉस्पिटल के पार्क मे घूमता रहा फिर वही एक रेस्टोरेंट मे खाना खाने चला गया, सुबह से कुछ नहीं खाया था जिस कारण भूख बहुत लगी थी.. वहां से सीधे मैं ठाकुर ताऊजी के पास आ गया.

डॉक्टर ने नींद का इंजेक्शन दिया था ताकि बॉडी को आराम मिले जिस कारण वो अभी नींद मे थे.

मैं वहीं उनके पास बैठ गया, अभी नर्स चली गई थी...

कुछ देर बाद मैं भी वहीं दूसरे बेड़ पर लेट गया. कब मेरी आँख लग गयी पता ही नहीं चला, फिर सीधा सुबह पाँच बजे खुली हमेशा के रूटीन पर. मैं उठकर फ्रेश हो गया...

और वेट करने लगा ठाकुर ताऊजी के उठने का.

सात बजे के आसपास वो ऊठने तो मैंने डॉक्टर को बोल दिया, डॉक्टर के साथ मे हेड भी आ गया...

डॉक्टर ने उनको चैक करने लगा... मैं ठाकुर के पास खड़ा हो गया...

हेड - ठाकुर साहब कैसा लग रहा हैं आपको...

ठाकुर - पहले से ठीक... डॉक्टर रणजीत कहाँ पर हैं, कैसा है वो...

हेड - वो अभी ICU मे हैं.

ठाकुर - कैसा है वो, ठीक तो है ना

हेड - अभी तो मैं ये नहीं बता सकता, क्योंकि उसको जब लाया गया तब उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी, अब पहले से कुछ ठीक तो है पर इतनी नहीं...

ठाकुर - आप कुछ भी करिए पर उसे ठीक कर दीजिए,चाहे कितना भी पैसा लगे.. मुझे परवाह नहीं...

हेड - हम पूरी कोशिश कर रहे हैं. ठाकुर साहब आप से एक बात पूछ सकता हूँ...

ठाकुर - हाँ

हेड - आप दोनों कल से यहाँ एडंमिट हैं आपके घर से कोई नहीं आया. राहुल ने बताया कि आप ने मना कर दिया, क्यों ठाकुर साहब...

ठाकुर - डॉक्टर मैं नहीं चाहता इस बारे मे किसी को भी कुछ पता चले.

हेड - पर ठाकुर साहब आप दोनों की कंडिशन अच्छी नहीं हैं, इस समय आपके परिवार के सदस्यों का होना जरूरी है.

ठाकुर - किसने कहाँ कि हमारे परिवार का यहाँ कोई नहीं है, (मेरी तरफ देखकर ) राहुल है ना ये हमारे परिवार का सदस्य हैं(वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगे). और डॉक्टर हम अभी घर पर बताने वाले हैं...

हेड - हा ठाकुर साहब जिस तरह से ये कल से यहाँ पर है आपका अपना ही लगता हैं, अगर कल ये आप दोनों को सही वक्त पर नहीं लाता तो पता नहीं क्या होता, और इसने तो आपको खून भी दिया...

ठाकुर - राहुल ने..

हेड - हा, आपका बहुत ज्यादा खून बह गया था. हमारे पास आपके ग्रुप का ब्लड़ नहीं था, हमें अर्जेंट चाहिए था तो इसने ही 2 यूनिट ब्लड़ दिया.

ठाकुर मेरी तरफ देखने लगे...

ठाकुर - ये हमारा अपना ही है...डॉक्टर मैं चाहता हूँ कि हमारे बारे मे किसी को भी पता ना चले...

हेड - क्यों...

ठाकुर - हमारा नाम बड़ा है अगर लोगों को पता चलेगा की ठाकुर सज्जन सिंह के साथ ऐसा कुछ हुआ है तो वो हमारे नाम के लिए ठीक नहीं हैं. और मैं नहीं चाहता की हमारे दुश्मनों को भी कुछ पता चले. इसलिए ये बात बाहर नहीं जानी चाहिए..

हेड - आप चिंता मत करिए..हमारे स्टाफ से ये बात किसी को भी पता नहीं चलेगी... अभी आप आराम करिये..

फिर वो चले गये..मैं वहीं पर बैठ गया.

ठाकुर - राहुल.. मुझे मुनीम जी से बात करनी हैं...

मेरे पास मुनीम का तो नंबर नहीं था, तो मैंने उनकी हवेली के लैंडलाइन पर कॉल लगा दिया...

ठाकुर - हैलो

सामने से -...

ठाकुर - हम बोल रहे हैं..

सामने से - ...

ठाकुर - हम ठीक हैं, आप कौशल्या और बहू को लेकर अभी ###### हॉस्पिटल आ जाईये...

सामने - ...

ठाकुर - आप पहले यहाँ पर आईये, हम सब बताते हैं. और कौशल्या और बहु को मत बताना, उन्हें सीधे यही ले आईये...

फिर फोन मैंने ले लिया..

मैं - मुनीम जी मैं राहुल बोल रहा हूँ, आपसे एक काम है. वो रास्ते मे मेरी बाईक खड़ी हैं आप उसे भी ले आयेंगे.

मुनीम - ठीक है..

फिर मैंने कॉल कट कर दिया... और वही बैठ गया... ठाकुर ताऊजी ने मुझे अपने पास बुलाया.

 


# अपडेट - 78

फिर मैंने कॉल कट कर दिया... और वही बैठ गया... ठाकुर ताऊजी ने मुझे अपने पास बुलाया...

आगे...

ठाकुर - बेटा.. तुम्हारा ये अहसान हम कैसे उतार पायेंगे. तुमने हमे, हमारे खानदान को बचाया है...

मैं - ठाकुर ताऊजी आप....

मेरी बात पूरी होने से पहले ही वो बोले...

ठाकुर - बेटा तुम मुझे सिर्फ ताऊजी बुलाओ

मैं - ठीक है ताऊजी.. पर आप ये सब मत बोलिए, मैंने कोई अहसान नहीं किया, मैं आपको अपना मानता हूँ... आप अभी बस आराम करिये...

ठाकुर - भाग्यशाली है तुम्हारे माता पिता जो उन्हें तुम जैसी संतान मिली...

मैने उन्हें आराम करने के लिए कहा, तब तक एक नर्स आ गई थी, तो मैं बाहर कैंटीन की तरफ आ गया..

मैंने दो बनाना शेक अॉर्डर किये, और वही बैठकर उनका लुफ्त उठाने लगा. और वहां से पार्क की तरफ आ गया. आज एक्सरसाईज नहीं कर पाया तो टहलने लगा. मैं आधे पौने घंटे तक वहीं रहा...

फिर मैं अंदर रूम मे गया तो वहाँ पर मुनीम जी थे..

मैं - नमस्ते मुनीम जी...

मुनीम - नमस्ते राहुल...

मैं - आप कब आये, अकेले ही आए हैं..?

मुनीम - 10-15 मिनट हो गई.. मालकिन और बहु रानी भी आये हैं. वो छोटे ठाकुर के पास गये हैं...

फिर मैं वहीं बैठ गया...

ठाकुर - मुनीम जी पता करिये वो किसके आदमी थे. कौन है जो हमे मारना चाहता है..

मुनीम - जी मालिक...

फिर रूम का गेट खुलने की आवाज आई तो सब चुप हो गये... ठकुराइन और पायल (रणजीत की पत्नी )अंदर आ गये...

मैं (पैर छूते हुए )- नमस्ते ठकुराइन ताईजी...

मेरे बोलते ही ठाकुर - बेटा हमने तुम्हें कहाँ था तुम ठाकुर नहीं लगाओगे, कौशल्या के भी नहीं...

मैं - जी ताऊजी...

ठकुराइन - बेटा इन्होंने हमें सब बताया,

फिर ठकुराइन मेरे पास आ गई...

ठकुराइन - बेटा हम तुम्हारा ये अहसान हमेशा याद रखेंगे, तुमने हम पर बहुत बड़ा अहसान किया है, तुमने हमारा सुहाग बचाया है, तुमने हमारी कोख को सूनी होने से बचाया है. तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया...

ठकुराइन ने राहुल के आगे हाथ जोड़ लिये.. वो रोने लगी...

राहुल ठकुराइन के हाथों

राहुल - ताईजी मैंने कोई अहसान नहीं किया है. आप प्लीज ऐसे मत बोलिये.. मैने वही किया जो मुझे करना चाहिए था... ठकुराइन के हाथों को नीचे करते हुए आप मुझे शर्मिंदा मत करिये... ये तो मेरा फर्ज था...

मुनीम जी - वाह.. राहुल तुम धन्य हो... बेटा अपनी इस अच्छाई को कभी मत बदलना...

राहुल - अब आप रोईए मत...

मेरी की बात सुनकर ठकुराइन रोते हुए वो मेरे के गले लग जाती हैं,जिससे उनके खरबुजे मेरे सीने मे धँस जाते हैं. मैं भी बड़े प्यार से उन्हें संभालता हूँ, हा इस प्यार मे तब कोई वासना नहीं होती हैं, पर मेरे लंड महाराज को कौन समझाये वो तो ठकुराइन के बदन की गरमी पाकर सिर उठाने लगता हैं...

पर मुझे तो उसे कंट्रोल करना था, वरना मेरी इज्जत का फालुदा हो जायेगा, मैने जल्दी से खुद को संभाला और ठकुराइन से अलग हुआ...

कुछ और देर तक मैं वहीं पर रहा फिर...

मैं - ताऊजी अभी घरवाले आ गये हैं तो मेरी इतनी जरूरत नहीं है, तो मैं घर चला जाऊ. कल से बाहर ही हूँ घर पर भी तो कुछ नहीं बताया..

ठाकुर - हाँ, सही कह रहे हो. कल से परेशान हो रहे हो

मैं - ठीक है, मैं आता हूँ बाद मे मिलने

फिर ताऊजी ने इशारे से मुझे अपने पास बुलाया...

ठाकुर (धीरे से ) - बेटा तुम किसी को मत बताना..

मैं - हाँ ताऊजी आप निश्चिंत रहिये...

फिर मैं मुनीम से बुलेट की चाबी लेकर आ गया... मैं बाहर आया तो किसी ने पिछे से आवाज दी, मैंने मुड़कर देखा तो वो पायल थी..

पायल - राहुल...

मैं - हाँ...

पायल - थैंक्यू...

मैं - इसमें थैंक्यू की कोई बात नहीं है..

पायल - राहुल तुमने जो किया है.. वो...

उसके बोलने से पहले ही मैं बोला - मैंने ऐसा कुछ नहीं किया हैं.. और हम दोस्त हैं ना तो नो सॉरी & नो थैंक्यू...

पायल - पर राहुल..

राहुल - पर वर कुछ नहीं... तुम मुझे अपना दोस्त मानती हो तो कुछ मत कहो...

वो चुप हो गई...

मैं - अच्छा तो अब मैं चलता हूँ, तुम सबका और अपना ध्यान रखना... Bye

पायल कुछ नहीं बोली, वो बस खड़ी हुई मेरी तरफ देखती रही..

मैं बुलेट के पास आया और स्टार्ट करके मुस्कुराता हुआ उसे bye बोलकर चलने लगा , पर वो वहीं खड़ी खड़ी मुझे देखती रही.

मैं हॉस्पिटल से बाहर आ गया और गाँव की तरफ चल पड़ा...

 
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