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Guest
* अपडेट - 59
मैने जल्दी से उनको नंगा किया और मै भी नंगा हो गया और दादी को बैड पर ले गया...
मै दादी ऊपर आ गया और उनके दोनो खरबूजों को ज़ोर से मसलने लगा...
मुन्नी - आअहह...लल्ला अहयाया... इतने ज़ोर से नही... रज्जाआ...प्यार से सहलाते रहो... सीईईई...ऊहह...
मैने अपने होंठ बोबो पर रख दिये और बारी -2 से चुसने लगा...
मुन्नी - आआहह...सस्स्सिईईईईईईईईईई...रज्जआ...मुझे खूब सारा प्यार दो हहुऊन्न्ं...
चुचो को चुसने के बाद मै नीचे आया... मैने देखा की दादी की चुत पनिया गई है, उससे हल्का -2 रस टपक रहा है...
मैने देर ना करते हुए मुसल दादी की बुढी़ चुत पर सेट किया और एक झटका लगा दिया...
मुन्नी - आहह... धीरीईए...सीईईईईईई... बहुत मोटा है ऊह्ह...
मैंने फिर एक और धक्का मार दिया और मेरा 3/4 लंड उनकी कसी हुई चूत में पेल दिया , इस बार वो कराहने लगी... मै धीरे-2 लंड को अंदर बाहर करने लगा...
दादी की चूत पानी छोड़ रही थी.. मैंने धक्के तेज कर दिए...
मै- आहह... मेरी रानी क्या चुत हैं तेरी... बुढी़ हो गई फिर भी बहुत मजा देती हैं... देख कैसे गीली हो गई हैं...
वो मुझसे पूरी तरह से खुल चुकी थीं तो वो भी पूरा साथ दे रही थी...
वो आह..ससिईहह..आआहह... करके मज़े लेने लगी...
लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया.
मुन्नी (दादी) - ओह्ह्ह... मेरे राजा... तेरा मूसल है ही इतना तगड़ा... देख कितनी ज़ोर से कुटाई कर रहा है...
मै दादी के ऊपर झुक गया और उसके चुचो को चुसने लगा...
दादी के हाथ मेरे सिर पर आ गये... वो जोर -जोर से सिसकियां लेते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी...
मै वैसे ही धक्के मारते रहा... मेरे डंडे की मार उनकी रामप्यारी ज़्यादा देर नही झेल पाई और जल्दी ही पानी फेंकने लगी...
मै पलट कर नीचे आ गया... और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया...
और होंठ चूसने लगा , और चुचों को मसलने लगा...
मुन्नी - अह्ह्ह्ह.. थोड़ा तो सबर कर... थोड़ा रूक...थक गई हूँ... उम्र हो गई हैं मेरी...
मै - मेरी रानी सब्र नहीं होता हैं... उम्र हो गई पर चुदवाने की इच्छा कम नहीं हुई...
मेरी बात सुनकर वो धीरे से मुस्कुराने लगी...
मैने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को मुट्ठी में जकड़ कर उसे गीली चूत के होठों पर रगड़ने लगा, जिससे वो फिरसे गरम होने लगी...
मै - वाह... क्या चुत हैं मेरी रानी... तेरी बेटियों कि चुत भी ऐसी ही रसीली होगी...
मेरी बात सुनकर दादी मेरी तरफ देखने लगी...
मै बोलते -2 ही लंड डालने लगा... जैसे जैसे लंड अंदर होता जा रहा था...साथ साथ दादी के मूह से हल्की -2 आह, कराहने निकलने लगी... आँखें मूंद गयी थी उनकी...
पूरा लंड अंदर लेने के बाद वो हाँफने सी लगी...
मै - बोल ना मेरी रखेल तेरी बेटियों की भी ऐसी रसीली होगी ना...
मुन्नी - हाइईए...आआहह...कितना बड़ा लंड है तुम्हारा...
उफफफफ्फ़...कितना अंदर तक जाता हैं आआह... वो दोनों तेरी बुआ है...
मै - तो क्या हुआ चुत चुत होती हैं, वैसे तुम भी तो मेरी दादी हो...
मैने उन्हें अपने पर झुका लिया और चुमने लगा... साथ - साथ मैं नीचे से धक्के मारने लगा...
वो जोर -2 से सिसकने लगी... मै कभी उनके चुचो को मसलता तो कभी होंठो को चुसता...
धीरे - धीरे वो फिर से चरम की तरफ बढ़ने लगी... उनकी सिसकियां तेज होने लगी...
मै थोड़ा तेज धक्के मारने लगा... कुछ ही देर मैं मेरी रखेल दादी की चुत पानी बहाने लगी
मै पलट गया और फिर से ऊपर आ गया... और जोर से धक्के लगाने लगा.
कमरे में ठप-ठप की अवजें गूँज रही थी... मै पसीने से भर चुका था...
मैं - आआह मेरी रानी तेरी बेटियों को भी ऐसे ही चोदुंगा... बोल चुदवायेगी ना अपने इस आशिक पोते से अपनी बेटियों को...
मुन्नी - आआहह... ध्ईधीरररे... हा... अगर तु चोदना चाहता है तो चोदना दौनो को उम्म्ह...
मै - आआह... मेरी जान तेरी बहुओं को भी चोदुंगा...
मुन्नी - आआह.. मेरे राजा सब को चोद देना... इस घर की सभी चुतो को फाड़ देना... सब को चोदकर अपनी रखेल बना लेना उऊम्मह..आआहह...
मेरा भी होने वाला था, मैने 20-25 तूफ़ानी धक्के लगा कर उनकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया...
और बेड़ पर लेट गया वो झड़ कर आँखें बंद किये हुए लेटी थी...
मै दादी से चिपक गया और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया...
मै - कैसा लगा मेरी रानी..मजा आया...
मुन्नी - हर बार पूरा बदन तोड़ के रख देता हैं, मै तेरी तरह जवान थोड़ी हूँ.. बुढी़ हो गई हूँ... दादी हूँ तेरी...
मै - मेरी रानी कंट्रोल ही नहीं होता... बिस्तर पर तुम मेरी दादी नहीं तुम तो मेरी रखेल मेरी रानी हो...दादी तो सबके सामने हो
मुन्नी - हा... यहाँ मै तेरी रखेल हूँ...
वो मेरे बालों को सहलाने लगी...
मुन्नी (माथे को चुमकर ) - तु जादूगर हैं...
मेै उनके आमों को सहलाने लगा...
मुन्नी - सच बोलु तो इता सकुन मुझे और कहीं नही मिलता हैं और ना ही कभी मिला है... जितना तेरे साथ में मिलता है… अब तु ही मेरे लिए सब कुछ है.
मै- दादी
मेरे आगे बोलने से पहले ही - मुन्नी - अभी तो बोल रहा था कि मै यहाँ तेरी रखेल हूँ, अब दादी बोल रहा है... तु मुझे रानी, रखेल ही बोल, तेरे मुँह से सुनना अच्छा लगता हैं...
मै- ठीक है मेरी रानी. ये बताओ तुम अपनी बेटियों, बहुओं को चुदवाओगी मुझसे,
मुन्नी - हा... तु उनको चोदना चाहता है तो चोद दे...
मै - कोई दिक्कत नही है ?
मुन्नी (दादी)- मुझे कोई दिक्कत ना है.
मै- तो तुम मदद करोगी मेरी...
मुन्नी - मेरी तुझे कोई जरूरत नहीं हैं, तेरा ये मुसल है ना... और जो तु कहेगा वो मै कर दुंगी...
मै(चुमते हुए ) - वाह मेरी रखेल रानी...
मैने उन्हें बांहो मे भर लिया, वो भी मेरे सीने पर सिर रखकर मेरे ऊपर लेट गई...
कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे... फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और पहले दादी को बाहर भेज दिया.
वो थोड़ी थक गई थी.
उनके जाने के कुछ देर बाद मै भी बाहर आ गया...
मैने जल्दी से उनको नंगा किया और मै भी नंगा हो गया और दादी को बैड पर ले गया...
मै दादी ऊपर आ गया और उनके दोनो खरबूजों को ज़ोर से मसलने लगा...
मुन्नी - आअहह...लल्ला अहयाया... इतने ज़ोर से नही... रज्जाआ...प्यार से सहलाते रहो... सीईईई...ऊहह...
मैने अपने होंठ बोबो पर रख दिये और बारी -2 से चुसने लगा...
मुन्नी - आआहह...सस्स्सिईईईईईईईईईई...रज्जआ...मुझे खूब सारा प्यार दो हहुऊन्न्ं...
चुचो को चुसने के बाद मै नीचे आया... मैने देखा की दादी की चुत पनिया गई है, उससे हल्का -2 रस टपक रहा है...
मैने देर ना करते हुए मुसल दादी की बुढी़ चुत पर सेट किया और एक झटका लगा दिया...
मुन्नी - आहह... धीरीईए...सीईईईईईई... बहुत मोटा है ऊह्ह...
मैंने फिर एक और धक्का मार दिया और मेरा 3/4 लंड उनकी कसी हुई चूत में पेल दिया , इस बार वो कराहने लगी... मै धीरे-2 लंड को अंदर बाहर करने लगा...
दादी की चूत पानी छोड़ रही थी.. मैंने धक्के तेज कर दिए...
मै- आहह... मेरी रानी क्या चुत हैं तेरी... बुढी़ हो गई फिर भी बहुत मजा देती हैं... देख कैसे गीली हो गई हैं...
वो मुझसे पूरी तरह से खुल चुकी थीं तो वो भी पूरा साथ दे रही थी...
वो आह..ससिईहह..आआहह... करके मज़े लेने लगी...
लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया.
मुन्नी (दादी) - ओह्ह्ह... मेरे राजा... तेरा मूसल है ही इतना तगड़ा... देख कितनी ज़ोर से कुटाई कर रहा है...
मै दादी के ऊपर झुक गया और उसके चुचो को चुसने लगा...
दादी के हाथ मेरे सिर पर आ गये... वो जोर -जोर से सिसकियां लेते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी...
मै वैसे ही धक्के मारते रहा... मेरे डंडे की मार उनकी रामप्यारी ज़्यादा देर नही झेल पाई और जल्दी ही पानी फेंकने लगी...
मै पलट कर नीचे आ गया... और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया...
और होंठ चूसने लगा , और चुचों को मसलने लगा...
मुन्नी - अह्ह्ह्ह.. थोड़ा तो सबर कर... थोड़ा रूक...थक गई हूँ... उम्र हो गई हैं मेरी...
मै - मेरी रानी सब्र नहीं होता हैं... उम्र हो गई पर चुदवाने की इच्छा कम नहीं हुई...
मेरी बात सुनकर वो धीरे से मुस्कुराने लगी...
मैने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को मुट्ठी में जकड़ कर उसे गीली चूत के होठों पर रगड़ने लगा, जिससे वो फिरसे गरम होने लगी...
मै - वाह... क्या चुत हैं मेरी रानी... तेरी बेटियों कि चुत भी ऐसी ही रसीली होगी...
मेरी बात सुनकर दादी मेरी तरफ देखने लगी...
मै बोलते -2 ही लंड डालने लगा... जैसे जैसे लंड अंदर होता जा रहा था...साथ साथ दादी के मूह से हल्की -2 आह, कराहने निकलने लगी... आँखें मूंद गयी थी उनकी...
पूरा लंड अंदर लेने के बाद वो हाँफने सी लगी...
मै - बोल ना मेरी रखेल तेरी बेटियों की भी ऐसी रसीली होगी ना...
मुन्नी - हाइईए...आआहह...कितना बड़ा लंड है तुम्हारा...
उफफफफ्फ़...कितना अंदर तक जाता हैं आआह... वो दोनों तेरी बुआ है...
मै - तो क्या हुआ चुत चुत होती हैं, वैसे तुम भी तो मेरी दादी हो...
मैने उन्हें अपने पर झुका लिया और चुमने लगा... साथ - साथ मैं नीचे से धक्के मारने लगा...
वो जोर -2 से सिसकने लगी... मै कभी उनके चुचो को मसलता तो कभी होंठो को चुसता...
धीरे - धीरे वो फिर से चरम की तरफ बढ़ने लगी... उनकी सिसकियां तेज होने लगी...
मै थोड़ा तेज धक्के मारने लगा... कुछ ही देर मैं मेरी रखेल दादी की चुत पानी बहाने लगी
मै पलट गया और फिर से ऊपर आ गया... और जोर से धक्के लगाने लगा.
कमरे में ठप-ठप की अवजें गूँज रही थी... मै पसीने से भर चुका था...
मैं - आआह मेरी रानी तेरी बेटियों को भी ऐसे ही चोदुंगा... बोल चुदवायेगी ना अपने इस आशिक पोते से अपनी बेटियों को...
मुन्नी - आआहह... ध्ईधीरररे... हा... अगर तु चोदना चाहता है तो चोदना दौनो को उम्म्ह...
मै - आआह... मेरी जान तेरी बहुओं को भी चोदुंगा...
मुन्नी - आआह.. मेरे राजा सब को चोद देना... इस घर की सभी चुतो को फाड़ देना... सब को चोदकर अपनी रखेल बना लेना उऊम्मह..आआहह...
मेरा भी होने वाला था, मैने 20-25 तूफ़ानी धक्के लगा कर उनकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया...
और बेड़ पर लेट गया वो झड़ कर आँखें बंद किये हुए लेटी थी...
मै दादी से चिपक गया और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया...
मै - कैसा लगा मेरी रानी..मजा आया...
मुन्नी - हर बार पूरा बदन तोड़ के रख देता हैं, मै तेरी तरह जवान थोड़ी हूँ.. बुढी़ हो गई हूँ... दादी हूँ तेरी...
मै - मेरी रानी कंट्रोल ही नहीं होता... बिस्तर पर तुम मेरी दादी नहीं तुम तो मेरी रखेल मेरी रानी हो...दादी तो सबके सामने हो
मुन्नी - हा... यहाँ मै तेरी रखेल हूँ...
वो मेरे बालों को सहलाने लगी...
मुन्नी (माथे को चुमकर ) - तु जादूगर हैं...
मेै उनके आमों को सहलाने लगा...
मुन्नी - सच बोलु तो इता सकुन मुझे और कहीं नही मिलता हैं और ना ही कभी मिला है... जितना तेरे साथ में मिलता है… अब तु ही मेरे लिए सब कुछ है.
मै- दादी
मेरे आगे बोलने से पहले ही - मुन्नी - अभी तो बोल रहा था कि मै यहाँ तेरी रखेल हूँ, अब दादी बोल रहा है... तु मुझे रानी, रखेल ही बोल, तेरे मुँह से सुनना अच्छा लगता हैं...
मै- ठीक है मेरी रानी. ये बताओ तुम अपनी बेटियों, बहुओं को चुदवाओगी मुझसे,
मुन्नी - हा... तु उनको चोदना चाहता है तो चोद दे...
मै - कोई दिक्कत नही है ?
मुन्नी (दादी)- मुझे कोई दिक्कत ना है.
मै- तो तुम मदद करोगी मेरी...
मुन्नी - मेरी तुझे कोई जरूरत नहीं हैं, तेरा ये मुसल है ना... और जो तु कहेगा वो मै कर दुंगी...
मै(चुमते हुए ) - वाह मेरी रखेल रानी...
मैने उन्हें बांहो मे भर लिया, वो भी मेरे सीने पर सिर रखकर मेरे ऊपर लेट गई...
कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे... फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और पहले दादी को बाहर भेज दिया.
वो थोड़ी थक गई थी.
उनके जाने के कुछ देर बाद मै भी बाहर आ गया...