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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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* अपडेट - 49

रात मे एक बार और मेरी नई रखेल बुआ की चुत की कुटाई की...

फिर हम दौनो थक कर नंगे ही लिपटे हुए सो गये...

सुबह मै पहले उठ गया बिमला बुआ अभी सो रही थी, रात की पंलगतोड़ चुदाई से वो थक गई थी शायद...

मेरे सामने दो मस्त खरबुजे थे मै एक को मुँह मे भरकर चुसने लगा और दुसरे को पंजे से निचोड़ने लगा...

बुआ नींद मे कसमसाने लगी...

मै बुआ के खरबुजे पर रखे अंगूर जैसे मोटे निपल को दांतों से काटने लगा... जिसके दर्द के कारण बुआ जग गई...

बिमला - आआआह.. मममा... राहुल.. पूरी रात मे तुने मुझे तोड़ दिया, तेरा मन नहीं भरा जो उठते ही शुरू हो गया... आआहह.. धीररे...

बुआ मेरे बालो को सहलाने लगी...

मै- मेरी जान तुम चीज ही ऐसी हो की मन ही नहीं भरता, तुम्हारे शरीर का प्रत्येक अंग ऐसा है सबका रसपान करता ही रहू... पूरे दिन तेरी चुत मे लंड डाले रहू और तेरी इन टंकियो को पिता रहू...

बिमला - आआआहह... बाद मे कर लेना पहले मुझे बाथरूम जाने दे...

बुआ उठी और लड़खडाते हुए बाथरूम की तरफ जाने लगी...

मै- क्या हुआ मेरी रानी ऐसे क्यूँ चल रही हो...

बिमला - एक तो खुद ये हालत करता है, और फिर पूछता है...

मै- मैने

बिमला - हा तुने और तेरे इस लंबे और मोटे मुसल ने, अंदर तक मेरी चुत को फाड़ दिया है... तु जितने समय एक बार करता उतने मे तो तेरे फुंफा पता नहीं कितनी बार...

मै- मजा तो आया ना...

बिमला - बहुत, शरीर हल्का सा हो गया है, पूरे बदन मे मीठा -2 दर्द हो रहा है... मै आती हू

मै भी बुआ के पिछे -2 बाथरूम मे चला गया...

वो नीचे बैठकर मुत ही रही थी, मुझे देखकर उसका मूतना बंद हो गया...

मै- क्या हुआ, बंद क्यूँ कर दिया, मुतो ना मुझे देखना...

बुआ- नहीं, तु बाहर जा मुझे शर्म आ रही है

मै- शर्म कैसी, पूरी रात नंगी होकर मेरे लंड से ही चुत चुदा रही थी

बिमला - तु मुझे पूरी बेशर्म बना दे...

मै- मुत ना मेरी रानी...

बिमला बुआ मेरे आगे हार गई, और मुतने लगी...

चुत की दौनो पंखुड़ियों को धकेलते हुए पेशाब शररर्र्... शरर्ररर की आवाज करते हुए बाहर आने लगा...

ये नजारा देखकर मेरा लंड सिर उठाने लगा...

बुआ मुतकर खडी हो गई और अपनी चुत को पोछने लगी तो मैंने दौनो हाथो से बुआ कर कमर को पकड़कर का अपना मुँह बुआ की चुत पर रख दिया और चुत को चुसने लगा...

मैने एक हाथ से शावर चालु कर दिया, हम दौनो भीगने लगे...

बुआ - अमम्मूउउहह...आआहह...म्म्ममाआआ... राहुल्ल्ल थममम ज्जजा... उउउम्म्म्ममम...उउउमम...

बुआ की चुत से पेशाब का नमकीन, खट्टा स्वाद आ रहा था...

बुआ की चुत बहुत ही टेस्टी थी...

बाथरूम मे शावर से गिरते पानी की और बुआ की मादक सिसकियां की आवाज़े आ रही थी...

मै जोर -2 से चुत चुसने लगा, बीच -2 मे चुत को दांतों से काटने लगा...

बुआ जोर -2 से आंहे भरने लगी...

बिमला बुआ - आआहह...म्म्म्माआ... यय्ये कक्याअा कर्ररर दिया... आआआह... ऐसे ही चूस्सता रह...

बोलते -2 ही चुदासी बुआ झड़ने लगी और मेरे मुँह मे चूत रस बहाने लगी...

मैने पूरा चूत रस पि लिया और खड़ा हो गया...

बुआ - आअहह...मज़ा आ गया... पर तुने मेरी गंदी चुत पर मुँह क्यूँ लगाया

मैने बुआ को खुद से चिपका कर बोला - मेरी रानी तुम्हारी चुत तो बहुत अच्छी है, उतना ही तुम्हारा पेशाब

मैने अपने होंठ बुआ के होंठो पर रख दिये और चुसने लगा...

और हाथो से उनके दौनो मम्मो को मसलने लगा...

बुआ नीचे होने लगी और घुटनों पर बैठ गई... बुआ ने मेरे लंड को हाथो मे ले लिया और आगे - पिछे करने लगी...

बुआ ने मेरी तरफ देखा और लंड के टोपे को अपने मुँह मे ले लिया ऑर चूसने लगी...

और धीरे -2 लंड को मुँह मे लेने लगी और लंड को मुंह मे भर कर चुसने लगी...

मैं - आहह…तुम तो एक्सपर्ट हो गई...

बुआ कुछ नहीं बोली वो बस लंड चुसने लगी...

5 मिनट वो पूरे दिल से लंड चूस्ति रही....ऑर झुकी-2 झुकी थक गई...तो मुँह से लंड निकाल कर बोली

बुआ - पता नहीं तुने क्या जादू कर दिया है, जल्दी से मेरी आग को बुझा दे...

मैने उसे खड़ा किया और कमर से खींच कर - अभी तेरी आग बुझाता हूँ...

मैने बुआ को एक तरफ झुका कर...अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया...

बिमला - आऐईयइ...कितना तगड़ा है...आहह

मैने अभी आधा ही लंड डाला था...अभी उसकी चुत सही खुली नहीं थी.

मैने फिर से 1 शॉट लगाया और इस बार पूरा लंड बुआ की चूत मे चला गया

बुआ - आअहह... ममामा...म्माअरर गगाइइई... ऊओ... म्माआ.. आआआह...

मैं - मजा आया रानी

बुआ - आररराम से... आआह...ररूउक्क्कूव...थोड़ा...आहह

पर मै धक्के मारता रहा और अपना लंड बाहर निकाल कर एक ही झटके मे अंदर डाल दिया...

बिमला - ओहह... म्मा... राज्ज्जजा.. अआर्ररामम... म्म्म्मा रररर ग्गगाइइइ

मैने अब एक के बाद एक शॉट लगाने शुरू किये और बीच -2 मे लंड बाहर करके एक बार मे पूरा अंदर डालता...

बिमला - रराहहुल्ल...आअररराम्मा....आआहहह...सस्सिई... म्ममेररी...फफातट...ग्गगाइइई...म्म्माँआ

मैं - मेरी कुतिया...अब तेरी फटेगी ही...

मैने चूत मारने लगा कुछ देर मे ही बुआ की आवाज़ बदल गई

बिमला - आअहह...अहहाअ...आइसे ही... आअहह... ऊऔरर...तेजज...

मैं - मेरी जान फाड़ दूं...

बिमला - आअहह... मेररे राज्ज्जजा...फाड़ दे...पूरा डाल्ल... आहह...हहाअ...

मैं - साली...ये ले

मैने 1 हाथ से उसके चुचे को पकड़ा और दबा दिया

बिमला - आअहह...राअज्जजाअ...आईससीए..ही... फ्फाआदड...दे....

मै 3-4 मिनट तक उसके बोबो को निचोड़ते हुए बुआ की चुदाई करने लगा

 
* अपडेट - 50

मै 3-4 मिनट तक उसके बोबो को निचोड़ते हुए बुआ की चुदाई करने लगा

बिमला - आअहह...मास्साल्ल्लडद...कक्खा... जाअ... अपननी रख्खेल्ल बुआ को...आअहह...ऊररर... ततेएजज आहह...

और उसे साईड से ठीक शॉवर के नीचे खड़ा कर दिया...

और उसकी एक टाँग को हाथ से पकड़ कर उठाया और पूरा लंड उसकी गिली गरम चुत मे डाल दिया...

बुआ दीवार का सहारा लेते हुए सिसकने लगी...

बुआ - ओह्ह्ह...म्म्माहआ... आआअहह...आहह... उउम्म... ऊहह...

पूरे बाथरूम मे चुदाई की आवाज़े आ रही थी...

शावर से पानी की ठंडी बौछार हमे भिगो रही थी और मै बुआ को चोदे जा रहा था...

दमदार चुदाई से कुछ ही देर मे बुआ फिर से झड़ने लगी...

बिमला - आअहह...आह..आआ.आह...अम्मान... आऐईयइ... आ..आआहह...

और बुआ बदन झटके खाने लगा और वो झड़ने लगी,

जिससे चुदाई की आवाज़ बदलने लगी...

वॉशरूम मे बस चुदाई की आवाज़ आ रही थी पानी की आवाज़ भी इसके आगे कम थी- आअहह...स्शहहह.. कत्ततचप्प्प...कचहुप्प्प...फचच...ईएहअ...त्ततहुप्प आआह... कक्चाआप्प्प...फच- फच..

मैने बुआ को गोद मे उठा लिया...बुआ ने मेरी कमर को अपनी जाँघो से जाकड़ लिया और गले मे बाहें लपेट कर मुझे किस करने लगी...

बुआ थोड़ी भारी थी पर मैने उसे थाम लिया...

मैने अपने हाथ से लंड बुआ की चूत मे सेट किया और रगड़ने लगा...

बुआ - आआह क्य्ययू.. तडपा ररहहा.. है अंदर डाल दे...

मैने एक शॉट मारा और अंदर डाल दिया, बुआ के बोबो को चूस्ते हुए उसे गोद मे उछाल-उछाल कर चोदने लगा...मेरा लंड मेरी चुदक्कड़ बुआ की चूत फाड़ने लगा....

बिमला - आआअहह...मम्ममा... ज्जजोर से मेरे र्रराजा... मममै आऐईइ...आह...उउउंम्म...आहह

वो जोर -2 से सिसकियां लेने लगी... मै भी झड़ने के करीब था, मैने बुआ को गोद से उतार कर उसे सामने झुका दिया और चुत मारने लगा...

आहह…

बिमला - आअहह... म्म्मज़्ज़ाअ...ग्गया...आहह... मेरे रर्रााज्जज्जा...अएईइसीईए..ही...आहह...ऊऔरर...त्तेज्ज... आआह.. म्मई... ग्गऐईयईई...

और एक लंबी और हसीन चुदाई मे बुआ फिर से झड़ गई और साथ मे मैंने चूत को अपने लंड रस से भर दिया

मैने उसे छोड़ दिया तो वो पलट कर फर्श पर बैठ गई...

मै- क्या हुआ...

बिमला - पुरा बदन निचोड़ दिया तुने... इतनी तो मै आजतक कभी नहीं झड़ी...

मेरे लंड कुछ पानी लगा हुआ था मैने उसे उसके होंठो से लगा दिया... वो भी अब बेशरम बनने लगा थी उसने मेरे लंड को मुँह मे ले लिया और चूसने लगी...उसने लंड को पूरा चाट कर साफ कर दिया...

मैने उसे खड़ा किया और उसे किस करने लगा... हम दौनो मस्ती करते हुए साथ मे नहाने लगे...

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* अपडेट - 51

मैने उसे खड़ा किया और उसे किस करने लगा... हम दौनो मस्ती करते हुए साथ मे नहाने लगे...

नहा कर हम बाहर आ गये, मै रेडी होने लगा वो भी कपड़े पहन कर ताउजी के घर चली गई.

मै भी कुछ देर मे बाहर आ गया... और बड़े ताउजी के घर की तरफ आ गया...

मैने सोचा थोड़ी देर संगीता भाभी के साथ मस्ती कर लु, शायद वो भी पट जाये...

मै अंदर गया तो मेरे सारे अरमानो पर पानी फिर गया... वहाँ पर ताईजी और रेखा भाभी भी थी...

मै नाश्ता करके वहाँ से आ गया और बुलेट लेकर कुलदीप के घर की तरफ निकल पड़ा...

सुमन चाची आंगन मे झाड़ू निकाल रही थी...

मै- नमस्ते चाची जी...

सुमन(मुस्कुराते हुए )- आओ बेटा... कैसे हो...

मै- ठीक हू चाची जी... कुलदीप कहाँ हैं

सुमन- बेटा वो नहा रहा है, तुम बैठो आ जायेगा वो...

मै चारपाई पर बैठ गया, सुमन चाची झाडू लगाने लगी...

उन्होंने साड़ी का पल्लु अपनी कमर मे दबा रखा था, जिससे उनका गोरा पेट और चिकनी कमर दिख रही थी...

वो मेरी तरफ अपनी गांड करके झाडु़ लगा रही थी, झुकने के कारण उनकी गांड और उभर कर दिख रही थी... जिसे देखकर मेरा लंड सिर उठाने लगा...

सुमन चाची - राहुल, भाभी आ गई क्या

मै- नहीं चाची, मम्मी पापा कुछ दिन नानाजी के पास रहेंगे

वो मेरी तरफ पलट गई... उनका गोरा पेट और गोल नाभि मेरे सामने आ गई...

वो झुकी हुई थी जिससे उनके गोरे -2, ठोस चुचे ब्लाउज मे से सामने आ गये.

सुमन चाची के उभारो को देखकर मेरा मुसल कड़क हो गया.

वो खड़ी हो गई और झाडु निकाल कर मेरे पास आकर बैठ गई.

मै- चाची, चाचा जी कब आये थे...

सुमन- 1 महिना हो गया

मै-अच्छा, बहुत दिन हो गये...

सुमन- हा बेटा, मैने उनको बहुत बार कहा कि 10-15 दिन मे आ जाया करो, घर पर भी ध्यान दो, पर वो मेरी सुनते ही नहीं है. वो तो बस पढा़ने मे लगे रहते है.

हम बात कर ही रहे थे कि कुलदीप आ गया, फिर हम दोनों ग्राउंड की तरफ आ गये...

बहुत देर तक हम लोग खेलते रहे, फिर हम वहाँ से आ गये.

कुलदीप को छोड़कर मै भी घर आ गया.

मैने रूम मे आकर टी वी ऑन करके देखने लगा. करीब 10 मिनट बाद अचानक रूम का दरवाजा खुला.

गेट जितनी जल्दी खुला, उतनी ही जल्दी बंद हो गया.

मै उस शख्स की तरफ देखने लगा ये और कोई नहीं ये पंकज थी...

मै - क्या हुआ... ऐसे अचानक.

मै उसके पास आ गया वो नीचे देखने लगी.

मैने उसके चेहरे को ऊपर किया...

उनकी आँखों मे मुझे प्यार की प्यास और सेक्स की आग दिख रही थी.

वो मेरे गले लग गई... मैने भी उसे अपनी बांहो मे भर लिया.

मैने अपने होंठ उनके होंठो से मिला दिये और किस करने लगा, वो भी पूरा साथ देने लगी,

शायद कल मेरे नहीं जाने से वो तड़प रही है.

जब सांसे साथ छोड़ने लगी तब हम अलग हुए... मैने देखा की उनके होंठ लाल हो गये है.

दिन का समय था तो हमे जल्दी ही सब करना था...

मैने उनके कपड़े निकाल दिये और खुद भी नंगा हो गया...

मै उनको बेड़ पर ले गया...

मै लेट गया और उन्हें मेरे ऊपर लेटा दिया...

मै- जान

पंकज - हहहूं...

मै- आज तुम मोर्चा संभालो. आज तुम मुझे मजे दो...

पंकज - मगर मै कैसे... मुझसे नहीं होगा.

मै- कैसे क्या जैसे मै देता हूँ वैसे तुम दो...

वो कुछ नहीं बोली और

वो अपने होठों से मेरे गले को चूमने लगी और मेरे सीने तक आ गई...

वो मेरी छाती पर अपनी जीभ मेरे नये आ रहे बालों पर फिराने लगी, जिससे मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी...

फिर उन्होंने अपनी गर्म जीभ को मेरे हल्के उभरे निपल से टच किया, और चाटने लगी.जिससे मुझे बहुत आनंद आने लगा और मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी...

जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी... और वो बारी -2 से चाटने लगी...

उतेजना से वो कुच्छ बाहर निकल आए, तो पंकज अपने दाँतों से हल्के-2 उनको काटने -खरोंचने लगी...

मेरा मुसल लगाम तोड़ते सांड की तरह खड़ा होकर फूँकारने लगा...

फिर वो मेरे पेट को चूमती चाटती हुई नीचे की ओर बढ़ गई और मेरी नाभि को जीभ से चाटने लगी...

अब वो नीचे मेरे मुसल के पास आ गई और उसे अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लिया और धीरे से मसल्ने लगी...

फिर उसने लंड की चमड़ी को नीचे खिसका दिया और उसका टोपा चूम लिया...

आनंद में मेरी आहह... निकल गयी, दूसरे हाथ से वो मेरे टट्टों को सहला रही थी.

फिर उन्होने मेरे अधखुले सुपाडे को अपने होठों में क़ैद कर लिया और धीरे-2 उसको धीरे -2 अंदर लेने लगी, क्योंकि उन्हें आदत नहीं थी.

वो अपने मुँह को आगे-पीछे करके उसको चूसने लगी... मेरा हाल बहाल होने लगा, और अपने आप मेरी कमर भी हल्के -2 ऊपर नीचे होने लगी. मेरे हाथ उनके सर पर थे, मै उनके मुँह को चोद रहा था.

हम दौनो से अब रूकना मुश्किल हो रहा था, उतेजना बढ़ गई थीं और समय भी कम था इसलिए लंड को मुँह से बाहर निकाल लिया.

उन्होने अब देर करना उचित नही समझा, मेरे उपर झुके हुए ही उन्होने लंड को अपनी मुट्ठी में लिया और अपनी रस से भरी चुत के मूह पर रख कर अपनी कमर को हल्के से दबा दिया...

और गीली चूत में मेरा आधा लंड समा गया.. चूत ने लंड को कस लिया,

उन्होंने एक और हल्का झटका दिया जिससे लंड 6 इंच तक चुत मे समा गया...जिसकी वजह से उन्हें दर्द हुआ. पंकज के मुँह से दर्द भरी हल्की चीख निकल गई.

वो कुच्छ देर के लिए ऐसे ही अपनी चूत मेरे लंड पर दबाए हुए बैठी रही.

मै उनके एक बोबे को पकड़ कर अपने मूह में लेकर चुसने लगा

पंकज ने हिम्मत करके अपनी गांड को एक बार और दबा दिया...और वो पूरी तरह मेरे उपर बैठ गयी और मेरा पूरा 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा मुसल अपने अंदर घोंट लिया...

उनके मुँह से चीख निकल गई, वो वैसे ही रूक गई.मेरे मुसल ने चुत को अंदर तक भर दिया. जिसे उनकी मुनिया ने अंदर ही अंदर अपने रस से उसे चिकना कर दिया.

पंकज ने मेरी छाती पर अपनी हथेलिया जमाई और अपने घुटने मोड़ कर उन्होने उठना बैठना शुरू कर दिया...

शुरू-2 में वो धीरे-2 आराम से उपर-नीचे होती रही.. फिर अपनी गति को बढ़ा दिया..

अपने विचार जरूर लिखें... और कुछ suggestion हो तो अवश्य दे

 
* अपडेट - 52

पंकज ने मेरी छाती पर अपनी हथेलिया जमाई और अपने घुटने मोड़ कर उन्होने उठना बैठना शुरू कर दिया...

शुरू-2 में वो धीरे-2 आराम से उपर-नीचे होती रही.. फिर अपनी गति को बढ़ा दिया..

अब उन्हें दर्द की जगह मज़ा आने लगा था... और मेैने उसके दोनों चुचे अपनी मुट्ठियों में कस लिए और ज़ोर-ज़ोर से भींचने लगा...मेरा मज़े से बुरा हाल हो रहा था.

वो कमर चलते-2 हाँफने लगी थी और उनकी स्पीड कम पड़ने लगी,

उनकी गति कम होते देख, मै गांड हिलाने लगा और नीचे से अपनी गांद उचका-2 कर धक्के लगाने लगा.

भाभी ने अपने धक्के बंद कर दिए ,मैने उनको घुटनो पर कर दिया और नीचे से धक्कों की कमान अपने हाथ में ले ली और इतनी तेज़ी से धक्के मारने लगा, कि उनके के मूह से कामुक आवाजें निकलने लगी

पंकज - आआहह... हइईहइई...आआहह... म्म्ममाआआ... मार्ररिइ...ऊओह...उउफ... हाहहा एएएऐससे ह्हही...

वो मेरे धक्कों की स्पीड ज़्यादा देर तक नही झेल पाई और झड़ने लगी...

पूरी तरह झड़ने के बाद वो मेरे उपर पसर गयी...

लेकिन मेरा अभी होना बाकी था,मैने उनको पलट दिया और मै अपनी ही धुन में लगा रहा... मै जोर -2 से धक्के मारने लगा...

जिससे वो थोड़ी देर में फिरसे गरम हो गयी.. और फिरसे उनके मूह से ऐसे ही मादक सिसकारियाँ निकलने लगी...

10 मिनट तक मै यूंही धक्के मारने के बाद मै चरम पर पहुँच गया...

मेरे अण्डों से बहता हुआ लावा लंड के रास्ते आने लगा... और मै लंबी -2 पिचकारिया मारते हुए झड़ने लगा.

अपनी बच्चेदानी में गरम लावे को महसूस करते ही उसकी कमर हवा मे ऊठ गई और वो भी उतेजना मे झटके खाते हुए फिर से झड़ने लगी झड़ने लगी...

मै पंकज को ऊपर ही गिर गया, लंड को चुत मे डाले ही मै पलट कर नीचे आ गया और उन्हें अपने ऊपर लेटा दिया उसने मुझे कसकर जकड़ लिया वो मुझसे जोंक की तरह चिपक गई जैसे कोई हमें अलग ना करदे...

स्खलन की खुमारी इतनी तगड़ी थी कि 5-7 मिनट तक वो मेरे उपर पड़ी रही, और मेैने भी उन्हें उठने के लिए नहीं कहा...

अभी तक मेरा लंड उनकी चूत में ही था...जो फिरसे गर्मी पाकर अंदर ही अंदर अकड़ने लगा था, पर अभी टाइम कम था तो दुबारा हो नहीं सकता था इसलिए मै उनको उठाने लगा...

मै(चेहरा हाथ मे लेकर) - क्या हुआ मेरी रानी...

पंकज - कुछ नहीं जी... मै आपके उसको महसूस कर रही हूँ.

मै- कितना बार कहा कि जो बोलना है साफ बोला करो, ये- वो, क्या है ये.

मुझे क्या मानती हो...

पंकज - सबकुछ मानती हूँ.

मै- तो मेरी बात क्यों नहीं मानती हो... मुझसे कैसी शर्म बताओ.

पंकज - माफ कर दीजिये आगे से नहीं करूगी.

वो मै आपके वीर्य को अपने अंदर महसूस कर रही थी...

उनका मासूम चेहरा और उनकी प्यारी बात सुनकर मुझे बड़ा प्यार आया...

मैने उसके होंठो को चुम लिया...

मै- टाइम कम है, जल्दी बाहर चलते है वरना कोई आ जायेगा...

जैसे ही भाभी मेरे उपर से उठी, पच की आवाज़ के साथ लंड चूत से बाहर हो गया.

माल जो मेरे लंड और उनकी चूत से दो बार निकला था उसमे से थोड़ा मेरे उपर गिरने लगा तो उसने अपने हाथ चुत पर लगा दिये.

मै- क्या हुआ

पंकज - मै इसे खराब नहीं होने दे सकती, ये पूरा मुझे अंदर लेना है...

मै बाथरूम मे चला गया और फ्रेश होकर आ गया फिर वो भी फ्रेश होकर आ गई...

मै - रात को अनिल भाई घर पर ही है ना

पंकज - हा...

मै- कोई बात नहीं टाईम मिल जायेगा.

उसके बाद मैने पहले उनको बाहर भेज दिया, कुछ देर बाद मै भी बाहर आ गया...

 
* अपडेट - 53

उसके बाद मैने पहले उनको बाहर भेज दिया, कुछ देर बाद मै भी बाहर आ गया...

सब अपने काम मे लगे हुए थे, मै हमारे खेत की तरफ चला गया संभालने के लिए वैसे तो कोई जरूरत नहीं थी लेकिन मै फिर भी चला गया. और मुझे खजाने वाली जगह को भी देखना था.

कुछ देर तक मै खेत पर ही रहा, फिर मै खजाने वाली जगह पर आ गया, वहाँ पर भी सब ठीक था कोई इस तरफ नहीं आया था... सब चीजें अच्छे से चेक करके मै वहाँ से आ गया.

घर पर आकर मै नहाने चला गया, कुछ देर बाद मै छोटे ताउजी के घर चला गया खाना खाने...

मै जब वहाँ पहुँचा तो सबने खाना शुरू ही किया था, मै भी उनके साथ खाने लगा.

मै - क्या बाते हो रही हैं.

सुमेर सिंह - कुछ नहीं बेटा, तेरी बुआ कल जा रही है तो बस वही बातें कर रहे है.

मै- क्या.. कल...!इतनी जल्दी कैसे?

संतोष - वो क्या है कि बिमला के ससुराल मे किसी की मौत हो गई है, इसलिए कल जा रही है.

सुमेर सिंह - राहुल तु एक काम करना, कल बिमला को बस मे बैठा देना.

मै - ठीक है ताऊजी.

फिर खाना खाके मै जल्दी ही वहाँ से आ गया... मुड़ थोड़ा सा खराब हो गया. मै छत पर चला गया टहलने.

थोड़ी देर बाद मै नीचे आ गया और कमरे मे आकर बेड पर अधलेटा सा होकर मोबाइल चलाने लगा...

कुछ देर बाद कमरे का गेट खुला और बुआ अंदर आ गई. वो गेट बंद करके बेड पर आकर बैठ गई.

वो उदास लग रही थी, कुछ बोल नहीं रही थी...

मै - क्या हुआ मेरी डार्लिंग बुआ, उदास क्यूँ हो.

बिमला - जैसे तुझे नहीं पता, मैने सोचा था कि कुछ दिन साथ रहूँगी पर जाना पड़ेगा.

मै (पास आकर) - तो चिंता क्यो करती हो कुछ दिनो मे फिर से आ जाना और मै भी आ जाऊँगा मिलने.

बिमला - तुने जो मेरे अंदर आग लगाई है उसका क्या करू.

मै- मेरी जान आज रात मै इतना प्यार करूँगा की तेरी आग शांत कर हो जायेगी कुछ दिन तक तु लंड नहीं मांगेगी.

आज की ये रात तुम्हारे लिए यादगार बना दुंगा..

बिमला - कर ले तो

मै- पर मेरा साथ देना..

मैने बुआ को अपनी ओर खींच लिया वो लुढ़क कर मेरे सीने से आ लगी, मै बेड पर लेट गया.

वो सलवार कुर्ता पहने हुए थी और मम्मों पर दुपट्टा पड़ा हुआ थी. मैंने उसका दुपट्टा उससे अलग किया, उसकी गहरी क्लीवेज मेरे सामने आ गई। गोरे गोरे गदराये उरोजों का मिलन स्थल घाटी के जैसा नजारा पेश कर रहा था.

मैंने अपना मुंह वहाँ लगा लिया और दोनों बोबो को चूमने लगा, उन्हें धीरे धीरे दबाने मसलने लगा, भीतर हाथ घुसा कर स्तनों की घुण्डी चुटकी में मसलने लगा.

ऐसे करते ही बिमला की साँसें भारी हो गईं.

फिर बुआ के बदन को बाहों में भर कर मैंने पलट दिया और मै ऊपर आ गया. उसके चेहरे को चुमने लगा.

वो मेरी तरफ बड़े प्यार से देखने लगी, और अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी.

मैने अपने होंठ उनके होंठ से मिला दिए. और होंठो को चुसने लगा वो भी मेरा साथ देने लगी. एक लंबा और रसीला किस करने के बाद हम अलग हुए.

मैने बुआ की कुर्ता पकड़ कर उतार दिया. कुर्ता के उतरते ही मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे भी खींच के एक तरफ फेंक दिया.

बिमला का जिस्म बड़ा ही मादक लग रहा है, मै उसका जिस्म निहारने लगा.

वो अब ब्रा और पैंटी में मेरे सामने लेटी थी. उनका हुस्न कयामत ढाने वाला था.

हल्के गुलाबी रंग की ब्रा पैंटी में बुआ का हुस्न बेमिसाल लग रहा था। ब्रा में छिपे बड़े बड़े बूब्स उसकी साँसों के उतार चढ़ाव के साथ उठ बैठ रहे थे और पैंटी के ऊपर से दिख रहा उसकी चूत का उभरा हुआ भाग जिसमें, चूत की दरार की लाइन दिख रही थी.

बुआ का भरा हुआ जिस्म

अाज मै बिमला रानी को बड़े प्यार और एहतियात से करना चाहता था

फिर मैंने अपने कपड़े भी उतार दिये और पूरा नंगा हो गया, मेरा लंड एकदम कड़क हो गया और फनफनाने लगा. मै बुआ के ऊपर आ गया और उसे चूमने - काटने लगा.

मैंने उनकी पीठ के नीचे हाथ ले जा कर ब्रा का हुक खोलने के लिए उन्हें पलट दिया और नंगी पीठ पर आ गया और उसकी गर्दन चूमने लगा.

नीचे हाथ डाल कर उसके नंगे पेट को मसलने लगा. मेरा लंड उसकी जाँघों के बीच रगड़ रहा था और उसके मांसल, भरे,मोटे कोमल नितम्बों का स्पर्श मुझे बड़ा ही प्यारा लग रहा था.

उसकी गुदाज पीठ को चूमते चूमते मैं नीचे की तरफ उतरने लगा. उसके जिस्म से उठती वो मादक भीनी भीनी सी महक एक अजीब सा नशा दे रही थी.

फिर मैने बिमला को वापिस पलट दिया और उसके कन्धों के ऊपर से स्ट्रेप्स पकड़ कर ब्रा को खींच लिया. और उसके मोटे -2 भरे हुए चुचे बाहर आ गये.

मै दौनो बोबो को मुट्ठी मे लेकर मसलने लगा और उसका एक मम्मा मुंह में लेकर चूसने लगा.

बिमला रानी गहरी गहरी साँसें भरने लगी थी. अब वो चुदास के मारे बेचैन होने लगी थी.

उसकी पैंटी के ऊपर का गीलापन सब बता रहा था कि उसकी चूत अब पनिया गई है.

फिर मै उसके पैरों के पास आ गये और उसकी पिंडलियों को चाटते चाटते चूम चूम के जाँघों को चाटने लगा. ऐसे करने से वो मचलने लगी.

अब पैंटी उतारने का समय आ गया था, मैंने उसकी पैंटी को उतारना शुरू किया बिमला रानी की गीली पैंटी उसकी चूत से चिपटी हुई सी थी उसके उतरते ही उसकी नंगी फुली हुई, रस से भरी चिकनी चूत मेरे सामने आ गई.

और मैने उसकी चूत में उंगली घुसा दी.

बिमला - आआह..उई माँ..उम्म्ह... अहह.. हय... उह..याह..

मैंने अपने होंठ चूत पर रख दिए और उसे ऊपर से ही चाटने लगा. मेरे चाटते ही बिमला के मुंह से कामुक आहें कराहें निकलने लगीं.

मैने चुत को दोनों तरफ से फैला दिया जिससे चूत के भीतर का लाल तरबूज के जैसा रसीला गूदा दिखने लगा. साथ ही उसकी चूत का दाना खूंटे जैसा उभर के लपलपाने लगा.

फिर मैंने उसके दोनों चुचो को कस के पकड़ लिए और जैसे ही मैंने उसकी चूत के दाने पर जीभ रखके चूत को गहराई तक चाटने लगा और उसकी चूत रस बरसाने लगी

उत्तेजना के मारे बिमला रानी ने बेडशीट को अपनी मुट्ठियों में जकड़ लिया और अपनी चूत बार बार ऊपर उछालने का प्रयास करने लगी.

मैंने उसकी चूत चाटना और बोबो को मसलना जारी रखा. आज मै आराम से बुआ की चूत मारना चाहता था.

फिर उसके भगनासे को होठों में लेकर दबाने लगा और उसे चुसने लगा.

बुआ जोर से सिसकारीया भरते हुए झटपटाने लगी और अपने सिर को दायें बायें पटकने लगी. इसके साथ ही वो स्खलित हो गई.

बुआ की चुत ने बहुत कामरस बहाया. मै रस को पिने लगा. साथ ही बिमला की चुत का रसीला खट्टा पानी बेड़ शीट को भिगोने लगा.

बिमला रानी शांत हो गई. मै उठकर बैठ गया. वो मेरी तरफ देखने लगी

मै- मेरी रानी मेरे लंड मुँह मे लेकर चूस दो

मेरा लंड अब 90 डिग्री पर खड़ा था.

वो ऊठी और लंड को हाथ मे लिया और चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी. फिर झुक कर लंड को मुंह में भर लिया चूम चूम कर चाट चाट कर चूसने लगी. वो मेरी और देख देख के सुपारा चाटती कभी मेरे टट्टे सहलाती.

मेरे ऊपर झुकने से उसकी नंगी गोरी पीठ मेरे सामने थी जिस पर उसके रेशमी काले काले बाल बिखरे हुए थे.

मैंने उसकी पीठ को झुक कर चूम लिया और हाथ नीचे ले जा कर उसके मांसल भरे हुए कूल्हों पर थपड़ मारने लगा और मसलने लगा.

मेरे झुकने से लंड उसके गले मे चोट करने लगा जिससे वो गूं गूं करने लगी और उसकी सांस अटकने लगी.

मैं फिर सीधा बैठ गया और लंड मुंह से बाहर निकाल लिया लेकिन उसकी लार के तार अभी भी मेरे लंड से जुड़े हुए थे और उसका मुँह का रस उसके होंठों के किनारों से बह रहा था.

लेकिन उसने फिर से लंड मुंह में ले लिया और मैंने उसका सर अपने लंड पर दबा दिया और नीचे से उसका मुंह चोदने लगा.

***

अपने विचार जरूर लिखें... और कुछ suggestion हो तो अवश्य दे

 
* अपडेट - 54

लेकिन उसने फिर से लंड मुंह में ले लिया और मैंने उसका सर अपने लंड पर दबा दिया और नीचे से उसका मुंह चोदने लगा.

फिर मैने लंड उसके मुँह से बाहर निकल लिया उनकी सांस फूल गई.

मैने बिमला रानी को लिटा दिया...

उसकी चूत की दरार पूरी तरह से नज़र आ रही थी और उसकी चूत का छेद साफ़ साफ़ दिखने लगा था जो कि उत्तेजना वश फड़क सा रहा था।उसके कोई दो आंगल नीचे उसकी गांड का छेद अपनी सिलवटें लिए अलग ही था.

मैने लंड को चुत पर रखा और उस पर मारने लगा जिससे बुआ के मुंह से आह की आवाज आने लगी.

मै लंड को चुत पर घिसने लगा और हल्का सा अंदर बाहर करने लगा

जिससे बुआ तड़पने लगी. अब उनका सब्र जवाब देने लगा.

बिमला - आआह... मेरे राज्जा... अब डाल भी दे... और मत सताओ मुझे, अब नहीं रहा जाता...समा जाओ मुझमें...

ये बात बिमला रानी ने बहुत ही कामुक और अधीर स्वर में बोली

मै- ये ले मेरी रानी

और लंड को उसकी चूत के मुहाने पर लगा दिया

बिमला - राजा जरा आराम से डालना बहुत मोटा है तेरा

मैंने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा और प्यार से धकेल दिया उसकी चूत में.

चूत बहुत ही चिकनी और रसीली हो गई थी, इस कारण4 इंच तक घुस गया. बिमला के मुँह से सिसकारी निकल गई

मैने लंड को पीछे खींच कर एक बार में ही पेल दिया उसकी चूत में

बिमला - हाय राम्मम्.... मर गई. आआहहह मा. कितना निर्दयी ह आआह...

मैंने उसकी परवाह किये बिना लंड को जरा सा खींच कर फिर से पूरी ताकत से पेल दिया.

और फिर दोनों बोबो कस के दबोच के उसके होंठ चूसने लगा.

मैने अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी,और उसकी जीभ को अपने मुँह मे ले आया और उसे चूसने लगा.

मैं उसके निप्पल चुटकी में भर के नीम्बू की तरह निचोड़ने लगा.

मेरे इतने हमलो से उसकी चुदास ओर प्रचण्ड हो गई और वो अपनी कमर हिलाने लगी.

मैं उसके दोनों बोबो को मसलते हुए उसकी ताबड़तोड़ मस्त चुदाई करने लगा और चूत में रगड़ा मारते हुए उसे चोदने लगा.

बिमला के मुंह से कामुक किलकारियाँ निकलने लगीं और वो नीचे से अपनी चूत उठा उठा के मुझे देने लगी. आज वो ज्यादा ही जोश मे थी

पूरे कमरे में उसकी चूत से निकलती फच फच की आवाज और उसकी कामुक कराहें गूंजने लगीं.

बिमला - आआहह... अअा.. उम्म्ह... हय.. अहहह... ह्हहा एऐस्से... ही. अच्छे से आआह...कुचल डालो इस चूत को मेरे राजा. बहुत सताती है ये मुझे. आज जोर की खुजली उठ रही है इसमें उम्म्ह... अाहह...

इतना बोलते ही बिमला की चुत पानी फेंकने लगी, बिमला के हाथ मुझ पर कस गये.

पर मै जोर-2 से उसकी ओखली को अपने मुसल से कुटने - कुचलने लगा और आड़े, तिरछे,सीधे शॉट मारने लगा.

कुछ ही समय मे वो फिर से गरम हो गई और साथ देने लगी.

बिमला - ह्हहा...मेरे राजा... बस ऐसे ही चोदते रहो अपनी रखेल को... हा अआ... याआअ...फाड़ डाल्लो्.... उम्म्ह

मैने उसके खरबुजो को दबोच लिया और जोर-2 से मींजने लगा. मैने झुककर उसके होंठो को मुँह मे भर लिया और चुसने लगा.

मैने धक्को की स्पीड बड़ा दी और जोर -2 से धक्के मारने लगा.

इस 20-25 की चुदाई मे आखिरकार मैं भी झड़ने पे आ गया.

मै- बिमला रानी मेरा निकलने वाला है, कहाँ लोगी इसे.

बिमला - आआह... मैं भी फिर से झड़ने वाली हूँ... मेरी चूत में ही झड़ जा. शांत कर दे इसकी आग को

लगभग आधे मिनट बाद ही बिमला ने मुझे कस के भींच लिया और और कल की ही तरह अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट के कस दीं. और झड़ने लगी.

मेरा भी होने वाला था तो मै लगातार धक्के मारता रहा, आखिरकार मेरे लंड से भी रस की बरसात होने लगी.

चूत की मांसपेशियां लंड को जकड़ने छोड़ने लगीं जिससे मेरे वीर्य की एक एक बूँद उसकी चूत में निचुड़ गई.

बुआ इस तरह मुझे काफी देर तक अपने से लपेटे रही अपने से. जब वो बिलकुल नार्मल हो गई तब जाकर उसने मुझे छोड़ा.

मेरा लंड भी सिकुड़ कर बाहर निकल गया. उसकी चूत से मेरे वीर्य और चूतरस का मिश्रण बहने लगा और बेड शीट को गिला करने लगा.

हम दोनों बाहों में बाहें डाले चिपके लेटे रहे. बुआ के नंगे गर्म और मखमली जिस्म का स्पर्श बड़ा मस्त था.

मै- मेरी रानी कैसा लगा, मजा आया...

बिमला (मुझे चुमते हुए )- बहुत ज्यादा... इस रात को मै हमेशा याद रखुंगी.

मै- अभी तो और भी आयेगा जब मै तुम्हारी ये मोटी मांसल गांड मांरूगा

मै उसकी गांड को भीचने लगा

बिमला - नहीं राहुल... वहाँ मैंने कभी नहीं करवाया... वहाँ तेरा मूसल लुंगी तो मेरी गांड फट जायेगी.

मै- अरे मेरी रानी गांड में भी चूत जैसा ही मस्त मज़ा आता है लंड जाने से. एक बार गांड मरवा के तो देखो मजा आयेगा.

बिमला -बहुत दर्द होगा मुझे वहाँ

मै- तुमने कल मुझसे वादा किया था तुम मेरी हर बात मानोगी, एक बार गांड मे लेके देखो मेरे लिए

बिमला - मेरे राजा तेरे लिए तो कुछ भी कर सकती हू. तुमने मुझे वो सुख दिया है जो मुझे कभी नहीं मिला.

मै- ये हुई ना बात मेरी रानी... एक बार लेने के बाद तु खुद तेरी ये चिकनी गांड देगी.

मै उसे किस करने लगा और उसके चुचो को सहलाने लगा.

बिमला - पर धीरे धीरे करना.

मै- हा मेरी रानी आराम से करूंगा

मै खडा होकर ड्रेसिंग से मैन्स बॉडी लोशन ले आया गांड को चिकना करने के लिए...

मैंने उसे जल्दी से डोगी स्टाइल में कर दिया और उसकी चूत में उंगली करने लगा जिससे वो अच्छे से पनिया गई, फिर लंड को उसकी चूत में डाल दिया और धीरे -2 धक्के मारने लगा.

साथ मे मैने लोशन को उसकी गांड के गुलाबी छेद पर डाल दिया और एक उंगली गांड मे डाल दी और अंदर बाहर करने लगा.

अब मैने एक साथ दो उंगली डाल दी जिससे बुआ के मुँह से आह निकल गई.

मैने धक्के लगाने चालु रखे और गांड मे उंगली करने लगा. अपने दौनो छेदों को भरे हुए महसूस कर बिमला जल्दी ही झड़ गई.

उसके झड़ते ही मैने लंड को बाहर निकाल लिया,

चुत के पानी से लंड एकदम चिकना हो गया, फिर मैने लंड को गांड के छेद पर टिका दिया.

गांड के छेद थोड़ा अौर लॉशन लगाया और बिमला रानी की बड़ी कमर पकड़ कर लंड को उसकी गांड में घुसाने लगा.

थोडे दबाव से मेरा सुपारा टाईट गांड में घुसने में कामयाब हो गया...

बिमला - उई माँ...उम्म्ह...अहह... हय.. याह...

लगातार ही मैने एक धक्का और लगा दिया... जिससे वो तड़पने लगी

बिमला - आआहह...म्ममा...मर गइ्इई... बहुत दर्द हो रहा है आआह...

मगर मैंने उसकी बात को अनसुना करके पूरा लंड डाल दिया और रुक गया

बिमला की गांड से हल्का -2 खून निकलने लगा... वो जोर से कराहने लगी...

बिमला - उऊह.. म्ममा... आआआह... मर्रर्रर गई

बुआ ने अपना मुँह तकिये मे दबा लिया और दर्द को सहने लगी. वो अपनी गांड ढीली कर के लंड को एडजस्ट करने लगी...

बिमला -आआह मम्मा... आज मार ही डाला... बहुत दर्द हो रहा है...

मै - बस मेरी रानी जो होना था वो हो गया. अब देख, कैसे मज़े आते हैं तुझे गांड में.

 
* अपडेट - 55

बिमला -आआह मम्मा... आज मार ही डाला... बहुत दर्द हो रहा है...

मै - बस मेरी रानी जो होना था वो हो गया. अब देख, कैसे मज़े आते हैं तुझे गांड में.

और मै लंड को आहिस्ता आहिस्ता आगे पीछे करने लगा.

बीच-2 में लंड पर लॉशन भी लगाता जाता ताकि उसका लुब्रीकेशन बना रहे.

मैने जल्द ही स्पीड बढ़ा दी और लंड सटासट चलने लगा गांड में

अब बिमला रानी को भी अब मज़ा आने लगा था और वो मस्त आवाजें निकालने लगी.

फिर मैंने उसकी चूत में दो उंगलियाँ घुसा दीं और गांड स्पीड से मारने लगा

इस दोहरे हमले से वो मस्ती के सागर मे गोते लगाने लगी...

बिमला - हाँ मेरे राजा... अब मज़ा आने लगा है... आआहह और तेज ह्हहा आआह...

मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी और गांड मारने लगा...

मैंने बुआ के बाल पकड़ कर हल्के से खींच लिए जिससे उसका मुंह ऊपर उठ गया और इसी तरह बाल खींचते हुए अब मैं जोर से गांड में धक्के मारने लगा.

बुआ की गुदाज गांड मे लंड बडा़ ही मस्त तरीके से जा रहा था, गांड मारने मे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था...वो भी अपनी गांड को मेरे लंड से ताल मिला कर आगे पीछे करने लगी.

एक हाथ से मेरी उंगलियां चुत मे बराबर चल रही थीं, बीच -2 मे मै मखमली चुतडो़ पर थप्पड़ मार देता जिससे बिमला की आह निकल जाती.

आखिर 15-20 मिनट मे इस राउंड का भी अंत हुआ और मैं उसकी गांड में ही झड़ गया और साथ ही उसकी चुत ने भी दम तोड़ दिया और वो झड़ने लगी.

झड़ते ही वो औंधी ही लेट गई बिस्तर पर, मैं भी उसके पास लेट गया और अपनी साँसें काबू करने लगा...

मै- मज़ा आया रखेल रानी...

बिमला- हाँ मेरे राजा बहुत मज़ा आया, शुरू में तो बहुत दर्द हुआ, बाद में चूत जैसा ही मज़ा वहाँ भी आया.

बोलकर वो मेरे सीने पर सिर रखकर लेट गई...

कुछ देर आराम करने के बाद मेरा मुसल फिर ले तैयार हो गया.

सुबह तीन बजे तक मै कभी बिमला की चुत तो कभी गांड मारता रहा. दौनो मुसल की कटाई से लाल हो गई. वो भी मेरा पुरा साथ दे रही थी...

लास्ट मे मेरी रखेल बुआ की हिम्मत खत्म हो गई तब जाकर हम रूके...

वो मुझसे लिपट कर सो गई

आज भी मै जल्दी उठ गया. वो मुझसे लिपट कर ही सो रही थी. वो आराम से सो रही थीं.

उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वो रात मे अपने बेटे के उम्र के लड़के से उछल -2 कर चुदवा रही थी, पर कहते है ना कि - ये जिस्म की आग है...

कुछ दिनो पहले तक वो मुझे बेटे जैसा मानती थी और आज मेरे ही बिस्तर पर मेरे साथ नंगी है.और अब वो बुआ से मेरी रखेल बन गई है.

मै इन सब बातों को छोड़कर फ्रेश होने चला गया... वापिस आया तब भी वो सो ही रही थी...

आज ज्यादा ही लेट हो गई इसलिए मुझे बुआ को उठाना पड़ा.

मै(गाल पर किस करते हुए )- मेरी रानी उठ जाओ सुबह हो गई है.

वो आँख खोलती है...

मै- क्या हुआ, बहुत ज्यादा थक गई?

बिमला - हा... तुने पूरा शरीर निचोड़ डाला...

मै- मैने तो मेरी बुआ रानी को जी भरके प्यार किया है...उसकी रात को यादगार बनाया...

बिमला - हा, सच मे तुने मेरी रात को बहुत यादगार बना दिया, बहुत मजा आया... अभी तक मेरी मुनिया मे हल्का -2 मीठा सा दर्द हो रहा हैं... शुक्रिया मेरे राजा

मै बुआ को किस करते हुए - शुक्रिया कैसा मेरी रानी अब तुम्हारा ख्याल रखना मेरा फर्ज है. चलो फ्रेश हो जाओ लेट हो गई है.

वो खडी होकर बाथरूम मे जाने लगी तो पैर नीचे रखते ही उनके मुँह से आह निकल गई...

मै- क्या हुआ

बिमला - पिछे दर्द हो रहा है.

मै सहारा देकर उनको बाथरूम तक ले जाने लगा. वो हल्का लंगडा़ के चल रही थी

कुछ देर मे वो फ्रेश होकर आ गई... मैने उनको पेन कीलर दी दर्द को कम करने के लिए...

फिर हम दौनो बाहर आ गये...

वहाँ से हम छोटे ताउजी के घर चले गये...

कुछ देर मे वो तैयार हुई और अपना सामान पैक किया. फिर वो सब से मिलने लगी जिसमे बहुत टाईम लग गया.

फिर मै उनको स्टैंड पर छोड़ने चल पड़ा...हम थोड़ा लेट हो गये बस कुछ समय पहले ही निकल गई, जिससे स्टैंड पर कोई सवारी नहीं थी...

अगली बस 10 मिनट मे आने वाली थी तो हम इंतजार करने लगे...

मै- आज बड़ी मस्त लग रही हो...

बिमला - तु भी ना... कुछ भी बोलता है...

मै बिमला बुआ के पास चला गया और उसे पकड़कर साईड मे पेड़ के पास ले आया...

मै- मेरी रानी तुम्हारी और तुम्हारी इस रसीली चुत की याद आ आयेगी...

बिमला - मेरे राजा मुझे भी बहुत आयेगी...

मैने झुक कर अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिये और आराम से उन रसीले होंठो का रस पीने लगा... वो भी पूरा साथ देने लगी...

सांस भारी होने पर हम अलग हुए... उसके खरबुजे ऊपर नीचे हो रहे थे...

अलग होते ही वो मुझसे कस के लिपट गई...मैने भी उन्हें बांहो मे भर लिया...

दो मिनट तक वो मुझसे लिपटी रही फिर हम अलग हुए...

मै- क्या हुआ...

बिमला - कुछ नहीं...

तभी किसी के बोलने की आवाज आई... एक आदमी और एक लड़की थे जो हमारी तरफ आ रहे थे...

ये लड़की तो रोशनी काकी ( मेरी रंडी) की बेटी दीपा थी, आदमी पता नहीं कौन था...

मै- कहाँ जा रही हो दीपा...

दीपा - वो मामाजी के यहाँ जा रही हूँ...ये मेरे मामाजी है...

तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

मै- बुआ को बस मे बैठाने आया हूँ...

तभी बस के हॉर्न की आवाज आई...

मैने बुआ का सामान उठा लिया और बस भी आ गई...

मैने उनको बस मे बैठा के उनको रवाना किया... वहाँ से मै बुलेट लेकर मैदान की तरफ चल पड़ा...

मैदान से थोड़ा पहले मुझे एक गाड़ी दिखी जो रास्ते के साईड़ मे मिट्टी के ढेर पर चढ़ हुई थी...

 
* अपडेट - 56

मैदान से थोड़ा पहले मुझे एक गाड़ी दिखी जो रास्ते के साईड़ मे मिट्टी के ढेर पर चढ़ हुई थी...

गाड़ी लक्जरी और महंगी थी...

मै उतर कर पास गया तो देखा की गाड़ी मे तो ठाकुर का बेटा रणजीत सिंह है...

वो शराब के नशे मे लग रहा था इसलिए शायद गाड़ी अनबैंलेस होकर साईड मे चली गई और मिट्टी के ढेर पर चढ गई...

गाड़ी को आगे से कुछ नुकसान हुआ था, तो वो अब चल नहीं सकती थी,

वो खुद तो हवेली जाने को हालत मे नहीं था और मै रणजीत सिंह को ऐसे छोड़ भी नहीं सकता था...

मैने रणजीत सिंह को गाड़ी से बाहर निकाला...उसने कुछ ज्यादा ही पी रखी थी... उसके पैर ही नहीं टिक रहे थे.

मैने उसे सहारा देकर बुलेट पर बैठाया और हवेली की तरफ चल पड़ा.

मैने बुलेट ले हवेली मे ले जाकर रोक दी...

मेरे साथ रणजीतसिंह को ऐसी हालत मे देखकर दो नौकर मेरे पास आ गये मेरी मदद करने...

वो सहारा देकर उसे अंदर हॉल मे आ गये... मै भी उनके आगे चल पड़ा...

इतने मे ठाकुर और ठकुराइन आ गये...नौकर उसे उसके कमरे मे छोड़ने चले गये...

ठाकुर - राहुल, रणजीत तुम्हारे साथ कैसे...

तो मैने सारी बात ठाकुर ताउजी को बता दी...

ठाकुर(गुस्से और चिंता मे) - पता नहीं ये कब सुधरेगा... हमारी इज्जत मिट्टी मे मिलाकर ही मानेगा...

पता नहीं हमने कौनसे पाप किये थे जो ऐसी औलाद मिली...

ठकुराइन - शांत हो जाइए जी... एक दिन हमारा रणजीत बिल्कुल सुधरेगा...

मै- हा ठाकुर ताउजी आप चिंता मत करिए... रणजीत भाई समय के साथ समझ जायेंगे...

हम बात कर ही रहे थे की ऊपर से पायल आ गई...

ठाकुर - समझ जाये तो अच्छा है... काश रणजीत भी तुम्हारे जैसा होता... उसमें भी तुम्हारे जैसे संस्कार, स्वभाव और गुण होते...

मै - अच्छा ताउजी, ताईजी चलता हूँ

ठकुराइन - बेटा चाय तो पीकर जाओ...

मै- ताईजी मै चाय नहीं पीता हूँ...

फिर मै दौनो के पैर छूकर वहाँ से चल पड़ा... पायल मेरी तरफ ही देख रही थी...

मैने बाहर आकर मुड़कर देखा तो - पायल की नजरे अभी भी मुझ पर ही थी...

मैने उसे हाथ हिलाकर बाय कहा और बुलेट लेकर हवेली के मैन गेट की और चल पड़ा...

हवेली से निकलते ही मुझे रोशनी की याद आयी... कुछ दिनों से मिली नहीं थी तो मै उसके घर की तरफ चल पड़ा...

रोशनी के घर मे पिछे दो कमरे तथा एक रसोई बनी हुई थी और आगे एक बैठक थी...और साईड मे जानवरों का मकान था... आगे लोहे के तारो और लकड़ियों की दिवार बनी हुई है, जैसे अक्सर गावों मे बनी होती हैं.

उसके घर को देखकर लग रहा था कि कई सालों से मकान की मरम्मत नहीं हुई है...

मै बुलेट बाहर खड़ी करके अंदर आ गया... अंदर गया तो अंदर कोई नहीं दिख रहा था...

मैने कमरो और रसोई मे देखा तो वहाँ पर भी रोशनी नहीं थी...

 
* अपडेट - 57

मै बुलेट बाहर खड़ी करके अंदर आ गया... अंदर गया तो अंदर कोई नहीं दिख रहा था...

मैने कमरो और रसोई मे देखा तो वहाँ पर रोशनी नहीं थी...

मै जानवरों के कमरे की तरफ गया तो मुझे कुछ आ आवाज आई...

ये आवाज बाथरूम से आ रही थी... मतलब काकी नहा रही थी... मेरे मन मे एक शैतानी विचार आया... मैने काकी को रगड़ -2 कर नहलाने की सोची...

मैने चारो तरफ देखा की कोई है तो नहीं... काकी का बाथरूम साईड मे था जिससे वहां कोई नहीं देख सकता था.

मैने अपने सारे कपड़े कपड़े उतार दिये और पूरा नंगा हो गया... काकी के बाथरूम मे दिवारे और छत थी पर गेट नहीं था, उसकी जगह पर पर्दा लगा हुआ था...

मै बाथरूम के गेट के पास आ गया और धीरे से पर्दा हटाकर अंदर आ गया...

बाथरूम का नजारा देखकर मेरे मुसल खड़ा होने लगा...

काकी खडी होकर अपने शरीर को साफ कर रही थी वो उपर से नीचे तक पूरी नंगी थी.

मेरे सामने उसके मोटे -2 चुतड़ थे, उन्हें देखकर मुँह मे पानी आ गया.

मै धीरे से काकी के पिछे खड़ा हो गया और उसे पीछे से जकड़ लिया...

मै हाथों से उसके मोटे -2 खरबुजो को मसलने लगा, और अपने होंठो से गर्दन को चुमने लगा...

ऐसे अचानक हमले से वो हडबडा गई और डर गई... वो छुटने के लिए झटपटाने लगी...

रोशनी - कौन है...छोड़ मुझे... मै कहती हूँ छोड़...

रोशनी जोर से आवाज करने लगी... तो मैने उसको पलट दिया और दीवार से लगा दिया... अब वो मेरे सामने थी...

रोशनी(चौकंकर ) - राहुल तु... तु यहाँ कैसे...

वो आगे बोलने वाली थी कि मैने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये और चुमने लगा...

कुछ देर किस करने के बाद मैने उनके होंठो को छोड़ा

रोशनी - तुने तो मेरी जान ही निकाल दी... पता है कितना डर गई थी मै... तु यहाँ पर ?

मै- हा मेरी रानी... वो स्टैंड पर दीपा मिली थी, उससे पता चला की तुम घर पर हो वो भी अकेली... और कई दिन से तुम दिखी नहीं तो आ गया...

मै जोर से उसके चुचे मसलने लगा...

रोशनी - आआह.. हा... वो मेरा भाई आ गया था लेने के लिए तो उसके साथ चली गई थी, उसकी बेटी की शादी है... कल शाम को ही आई हू... आज वो दीपा को ले गया अपने आहह...धीरे दर्द हो रहा है...

मै- चुप... मेरी रखेल है तु

एक हाथ से मै उसकी चुत को मसलने लगा, जिससे वो मचलने लगी... बहुत दिनो से वो भी चुदी नहीं थी जिससे वो भी चुदासी हो रही थी...

मैने उसकी टाँग उठा कर लंड उनकी चूत मे सेट किया जो पहले से रस टपका रही थी...

आज काकी भी जोश मे थी... खुद ही गांड हिलाकर लंड चूत मे लेने की कोशिश करने लगी...

मैने एक तगड़ा झगड़ा झटका मारा और लंड 6 इंच तक घुसा दिया और लगातार ही दुसरा झटका भी मार कर पूरा लंड चूत मे घुसा दिया...

रोशनी - आहह...उउउफफफ्फ़..म्माआ...

मै - बड़ी जल्दी है ना...

मैने ये कहते हुए उनकी गान्ड को पकड़ा और तेज़ी से धक्के मारते हुए उन्हे चोदने लगा...

रोशनी - आअहह... आआहह..ऊहह..माँ.. थथोअ्अडा... ध्ईधीरररे...

मै - मज़ा आया मेरी रखेल काकी

रोशनी - आअहह...बहुत...मोटटा...है…अाहहह...

वो बोल ही रही थी कि मैने लंड बाहर तक निकाल कर एक जोरदार झटका मारा और चूत मारने लगा...

रोशनी - आआहह...म्म्माआरररर ददडाल्ल्ललाआ

मै(उतेजित करते हुए )- मेरी रानी बहुत टाइम हो गया तेरी रसीली चुत का मजा लिए हुए... मेरा लंड तड़प रहा है तेरी चुत को रगडने के लिए...

मैरे हाथ कभी उसके खरबुजो को मींजते तो कभी उसके काले -2 अंगूरों को मसलते...

मेरे होठ उसके चेहरे पर घुमने लगे... मैने उसके गाल को मुँह मे भर लिया और चुसने और काटने लगा...

मेरे ऐसे करने से वो मचलने - तडपने लगी...

रोशनी - अया...आअहह...आहह... अहह... ऊओ... म्म्माुआ... आआहह...अहहाअ...

मैने पूरी स्पीड के साथ काकी को चोद रहा था... मैने काकी का एक बोबा मुँह मे भर लिया और तेज़ी से चोदने लगा... वो अब चरम पर पहुँचने वाली थी...

रोशनी - आहह...अहहा...जजोर्रर स्सऐ..माँ..

मैं - ये ले.. मेरी रंडी काकी...ओर तेज...

कई दिनों से चुदी न होने से जल्दी ही काकी की चुत हार गई और सिसकते हुए झड़ने लगी......

रोशनी - आअहह...म्माआ...आऐईयइससे...इहही रअराजजा...फ़ाआड़दो... आहह...

काकी मुझसे लिपट गई... उसका शरीर जोर से झटके खाने लगा...उसका चुत रस जांघों से होता हुआ नीचे पानी मे मिलने लगा...

झड़ने के बाद वो थक गई थी...तो मैने उसे पकड़ कर नीचे बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया...

मै उसके ऊपर आ गया मैने चुत पर लंड सेट किया और एक झटके मे लंड पेल दिया...

रोशनी - आहह...उउउफफफ्फ़...

मैं- मज़ा आ रहा है ना मेरी रखेल...

रोशनी - आहह...हाँ..राजा...बस ऐसे ही रगड़ डाल मेरी चूत...आहह...

मै बाल्टी से पानी का जग भरकर रोशनी रानी पर डालने लगा... और दोनों को भिगोने लगा... इससे चुदाई का मजा बढ़ गया...

मै लंड को किनारे तक लाता और जोर से डाल देता... जिससे लंड की ठोकर सीधे उसकी बच्चेदानी पर लगती...

इससे उसके मुँह से हल्के दर्द और ज्यादा मजे की सिसकारी निकलती...

मै पूरी स्पीड के साथ रोशनी को चोद रहा था, साथ मे उसको चुम रहा था... उसने मुझे बांहों मे भर लिया...

उसकी गांड भी अब हरकत करने लगी थी...

रोशनी - आहह...अहह... उऊअह्ह..ऊहह..आआह...

मै भी अब लावा उगलने वाला था तो स्पीड फुल कर दी, लंड को अपने अंदर तक महसूस करके वो आनंद मे उड़ने लगी और जोर -2 से सिसकियां लेने लगी...

रोशनी - आआआह... उऊम्मह... ज्जजोर्रर... से मै... फिर से...

इतना बोलते ही वो झड़ने लगी और साथ ही मै भी लावा उगलने लगा... और गरम -2 पिचकारिया चुत मे मारने लगा...

पूरा माल चुत मे डालने के बाद मैं उसके ऊपर से ऊठने लगा, जिससे लंड सिकुड़ कर चुत से बाहर आ गया और साथ मे हम दोनों का माल भी निकलने लगा...

हम दोनों खड़े हो गये...मै दोनों पर पानी डालने लगा... नहाने के बाद हम दोनों अंदर कमरे मे आ गये...

कमरे मे आते ही मैने उसे पिछे से पकड़ लिया और उसके चुचे मसलने लगा...

रोशनी- आआआह.. उऊह... मा... क्या कर रहा है... अभी तो किया है, रूक ना... थका दिया तुने पूरा...

 
* अपडेट - 58

कमरे मे आते ही मैने उसे पिछे से पकड़ लिया और उसके चुचे मसलने लगा...

रोशनी- आआआह.. उऊह... मा... क्या कर रहा है... अभी तो किया है... थका दिया तुने पूरा...

मै- मेरी रानी इतने मे थक गई... अभी तेरी ये करारी गांड भी मारनी है...

मैने उसे पलट पर लेटा दिया... और उसके चुतडो़ के नीचे तकिये रख दिये...

मै उसकी चुत के पास आ गया और उसे चाटने लगा... और दो उंगली उसके गांड के काले छेद मे डाल दी... और आगे पीछे करने लगा... जिससे वो तड़पने लगी...

मै उठा और लंड को चुत और गांड पर मारने लगा...

रोशनी- आआह.. स्ससइईसीसी... पहले इसकी खुजली मिटा दे...

उसके शब्द पूरे होने से पहले ही मैने लंड को चुत मे पेल दिया... और लंबे -2 शॉट लगाने लगा...

रोशनी - आआह. मा..उऊईई... मेरे राजा... मेरे राजा...

थोड़ी देर बाद मैने चोदना बंद किया और उन्हे डॉगी स्टाइल मे कर दिया... काकी को ज्यादा पता नहीं था...

इस बार काकी ज्यादा देर टिक नहीं पायी और झड़ने लगी, मैने लंड को पुरा उसकी चुत मे डाले रखा...

उसके शांत होते ही मैने लंड बाहर निकाल लिया... और उसे पलट कर लिटा दिया...

नीचे तकिये होने से उसकी मोटी गहराई गांड उभरकर मेरे सामने आ गई...

मैने अब देरी नहीं की और गांड के छेद पर पास मे पड़ा तेल डाला और गांड के छेद पर लंड का फुला हुआ सुपाडा़ टिका दिया और एक धक्का लगा दिया... और आधा लंड मेरी रंडी की टाइट गांड मे पेल दिया...

रोशनी - आअहह….म्म्म्मगममाआअ...मर्ररर्ररर... गअइई...

मैं - धीरे मेरी रानी

मै लंड को बाहर तक लाया और पूरी ताकत से पेल दिया और मुसल को जड़ तक ठोक दिया...

रोशनी - आआहह...आआअहह...आह...म्माआ...ध्इईररे...उह... मआर्रर...डाला...आहह..

मैने एक थप्पड़ काकी की गान्ड पर मारा...

मैं - धीरे मेरी रंडी...वरना कोई आ जाएगा...

मैं काकी की गदराई हुई गान्ड पर थप्पड़ मारते हुए उनकी गान्ड मारने लगा और एक हाथ से चूत मसलने लगा...

रोशनी - आअहह...माअर...मेरे सैया...ऐसे ही... आहह... आअहह...राहुल आअहह... ऊहह...

कमरे मे अब त्ततप्प...त्तप्प्प...आअहह...आहह...त्त्थप्प... त्ततप्प..उऊम्मह... फच्च... की आवाजे आने लगी...

मै नीचे झुक गया और गांड मारने लगा... गान्ड मारते हुए मेरी जांघे भी आंटी की मोटी गान्ड पर थपका मार रही थी...

मै स्पीड मे धक्के मार रहा था, वो भी जोर से आंहे भरते हुए गांड मरवा रही थी...

मैने धीरे धीरे चुत को मसलना जारी रखा...

15-20 मिनट तक मै काकी की गांड मारता रहा...

मै अब झड़ने वाला था तो मै लंबे -2 और जोर से धक्के लगाने लगा...

साथ मे चुत मे तीन उंगलियां डालकर चुत चोदने लगा...

वो भी चरम पर पहुँच गई थी...

रोशनी - आअहह...उउउंम्म...ऊहह...ज्जजोर...सीइ आऐईयईईईई...आह...

और मै और काकी साथ साथ झड़ने लगे...

काकी की टांगों मे कंपन होने लगा... इस बार काकी की कचोरी ने कुछ ज्यादा ही रस छोड़ा... वो मेरे हाथ को भिगोते हुए नीचे गिरने लगा...

काकी झड़ते ही नीचे की तरफ गिर गई और वैसे ही पेट के बल लेट गई...

पंलग ज्यादा बड़ा नहीं था तो मै भी उससे सटकर लेट गया...

कुछ देर रूकने के बाद मै वहाँ से आ गया...

घर आकर खाना खा के कुछ देर आराम किया फिर छत पर टहलने लगा...

चारो भाईयों के घर पास ही थे, जिससे छत पर से सभी के घर दिख रहे थे,

तभी छोटे ताऊजी के घर का गेट खुला और उसमें से कोई बाहर आया...

बाहर आने वाली एक औरत थी और वो कोई और नहीं मेरी दादी थी...

दादी ने ब्लाउज और लंहगा पहना हुआ था. जिससे उसके बड़े -2 खरबुजे और मुलायम & थोड़ा सा लटका हुआ गोरा पेट दिख रहे थे...

मैने उन्हें आवाज दी...

मै- दादी...

वो इधर -उधर देखने लगी...

मै - दादी ऊपर देखो छत पर

दादी(मेरी तरफ देखकर )- हा हा बेटा...

मै- दादी घर पर आओ, कुछ काम है...

दादी- आ रही हूँ...

वो मेरे पास आने लगी... मै भी जल्दी से नीचे आ गया और रूम में चला गया...

जल्दी ही दादी ही रूम मे आ गई... रूम मे आते ही मैने जल्दी से गेट बंद कर लिया...

दादी - क्या हुआ राहुल

मैंने दादी को बांहों मे भर लिया और किस करने लगा... साथ मे हाथों से उसके मुलायम चुतडो़ को मसलने लगा...

मुन्नी (दादी) - आआह... क्या कर रहा है राहुल...

मै दादी की बातों को अनसुना करते हुए काम मे लगा रहा...

मुन्नी - आआह मा... छोड़ ना...इसलिए बुलाया था.

मै- हा मेरी रानी...बहुत दिन हो गये तुम्हारी रसीली चुत का मजा लिये हुए...

इतना बोलकर मैने एक हाथ चुत पर रख दिया और मसलने लगा और दूसरे हाथ से चुचो को मसलने लगा... जिससे दादी भी गरम होने लगी...

मुन्नी - आआह... हा..हा.. ऐसे ही..बहुत खुजली हो रही है जब से तेरा गया है...

मेरा भी बहुत मन...आआह... चोद दे अपनी चुदक्कड़ दादी को जल्दी से...

मैने जल्दी से उनको नंगा किया और मै भी नंगा हो गया और दादी को बैड पर ले गया...
 
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