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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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* अपडेट - 7

मैने अपना लंड धीरे से काकी की फुली हुई चुत पर सेट किया... काकी को जब तक पता चलता मैने जोर से एक धक्का लगा दिया... जिससे मेरा लंड काकी की गरम गरम चुत मे 3 इंच तक चला गया.

इससे काकी की जोर से चीख निकल गयी और वो चिलाने लगी.

रोशनी - आआहह.....उूउउइइइममाआआ......माआर गायययययईए........आआहह.......फॅट...गइई.... मेरी बुर्र्र्र्र्ररर......पूरीईइ फत्त्त्ट गइईए....रे......कोई बचऊूओ.. आआआह.. बेटा ये क्या कर रहा है..

और काकी छुटने की कोशिश करने लगी

मैने काकी को दबोच लिया... और एक तगडा झटका मारा... जिससे मेरा लंड काकी की काली चुत में जड तक घुस गया

काकी की सांस गले मे अटक गई और वो रोने लगी

रोशनी - निकाल ले.....अपना लंड....आआहह......बहुत दर्द हो.....रहा है........मेरा.....पेट तक फटा जा रहा है.....निकाल...मदर्चोद....जल्दी से............जा अपनी माँ...की बुर मे घुसा...... आअहह....सच मे बहुत दर्द हो रहा है..आआआआ

छोड़ मुझे, जाने दे मुझे वरना मै शोर मचा दुंगी

मैने देखा काकी की बुर से खून निकल रहा था......मैं उनकी चुचियो को बारी बारी से पीने लगा.....साथ मे उन्हे दबाता भी रहा....

साथ साथ मे मैने धक्के लगाने चालु रखे...

अब मेरा लंड काकी की कई महीनों से अनचुदी चुत मे सेट हो गया था...

काकी को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी गान्ड उपर उठाने लगी

मै- साली रंडी तुझे चुदना था तो इतने नारे क्यूँ कर रही थी

रोशनी - बेटा बहुत समय से चुदी नहीं हूँ और अचानक से ये तेरा गधे जैसा लंड गया तो मेरी जान निकल गई...

देख तेरे लंड ने मेरी बूर की क्या हालत कर दी.... पूरी की पूरी फाड़ दी....

मै- काकी तु चुदना चाहती है मुझसे...

काकी कुछ नहीं बोली... मैने काकी के चुचो को जोर से भींच दिया और एक करारा धक्का लगाया...

रोशनी - आहहह.... बेटटा... थोड़ा धीरे...

मै - बोल ना काकी चोद दु तुझे...

रोशनी- तो अब क्या कर रहा है...

मैने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये.... मैने काकी के चुचो को मसल मसल कर लाला कर दिये

मै - तु अपने मुँह से बोल ना

रोशनी -आआहह....धीरे धीरे.....चोद्द्द्द.....ज़ोर से नही.....हाआ....अब ठीक लग....रहा है....ऐसे ही....पेल मेरी बुर......ले ले मेरी बुर राहुल बेटा.......पेल ले अपनी काकी की बुर को आज...आआआ.....अब कुछ मज़ा आ रहा है.....सच मे तेरे लंड मे तो जादू है...राहहुल....

काकी को जोश मे आते देख मैने धक्के थोड़ा ज़ोर ज़ोर से लगाने लगा......मेरा लंड काकी की बुर मे पूरा कसा कसा जा रहा था...जिससे मुझे

भी उनकी बुर चोदने मे मज़ा आ रहा था

काकी —आआअहह.....ऐसे ही.....बहुत मज़ा आ रहा है......खूब हचक हचक कर चोद मुझे राहहहुल......खूब पेल मेरी बुर को........चोद डाल

राहुल.....चोद डाल.....हाा.....ऐसे ही....ज़ोर ज़ोर से पेलता जा......खूब मज़ा आआ...रहा है.....एयाया

मै—काकी मुझे आपकी गान्ड भी चाहिए......मेरा बहुत मन है आपकी गान्ड मारने का...

रोशनी—आआआआ.......मार लेना.....अब तो सब....कुछ तेरा है........मैं तो आज से तेरी.....रखैल बन गयी..रे...राहहुल.....आआआ.... मार लेना मेरी गान्ड भी......पहले मेरी बुर तो अच्छे से ले ले...और ज़ोर से...पेल.....मुझे आज पता चला की बुर कैसे चोदि जाती है

मै —आपकी बुर भी तो बहुत टाइट लग रही है.....काका मादरचोद चोदता नही है तुम्हे काकी

काकी —पाँच छ: महिनों मे कभी एक दो बार......उसका लंड भी तो तेरी उंगली बराबर ही है.....वो भी पतला......टाइट है तो तू ढीली कर दे ना

अब……….ढीली कर दे ….अपनी काकी की बुर को बेटा….रोज चोद चोद के....बोल चोदेगा ना रोज अपनी रोशनी काकी की बुर को...

मै—हाअ....काकी....आपको रोज नंगी कर के चोदुन्गा

रोशनी —मुझे हर रोज नंगी करके चोदना बेटा......मुझे खूब गंदा गंदा बोला करना....आआआअ.....मैं तो तेरी दीवानी हो गयी...

मै- देख रंडी तेरी चुत कितना पानी छोड़ रही है...

मै जोर जोर से धक्के लगाने लगा... काकी एक बार झड चुकी थीं

उसका दुसरी बार होने वाला था....

रोशनी -एयाया….ज़ोर से मेरा होने वाला है

राहुल —बस काकी…….मेरा भी होने वाला है…….

मैने अपने धक्को की स्पीड डबल कर दी.....काकी ज़्यादा देर तक मैदान मे नही टिक सकी और भल भला कर झड़ने लगी... और मेरा भी फव्वारा फुट पड़ा....

काकी ने मुझे कस के पकड़ लिया... काकी की आँखे मजे मे बंद हो गई...

मेरा गर्म वीर्य अपनी चुत मे महसूस करते ही काकी मुझे चुमने लगी...

.....
 
* अपडेट -8

मै काकी के ऊपर से खड़ा हो गया.... काकी उठकर अपने कपड़े पहनने लगी... मैने भी पहन लिये....

मैने काकी को पकड़ कर दिवार से लगा दिया और उसके होठों को पिने लगा..

रोशनी - आआआह... बेटा क्या कर रहा है.... मन नहीं भरा तेरा अभी भी.... मेरी बुर को चोद चोद कर सुजा दिया है.... आआआह.... छोड़ ना राहुल ओर.. बाद मे चोद लेना आआआई...

काकी मुझसे अलग हो गई....

मै - काकी तु वो रस है जिसे उतना पिओ वो कम है....

बता अब तेरी गांड कब देगी....

काकी शरमा जाती है....

रोशनी -. बेटा अब तो मै तेरी ही हू... जब तेरा मन करे मेरी ले लेना... मेरा सब कुछ तेरा है....

आज से मै तेरी रखेल हूँ....

मै काकी के चुचे और गांड भींचने लगा...

मै - ठिक है मेरी रंडी आज से तु मेरी रखेल है.... मेरा जब, जहाँ मन करेगा तेरी चुत और बडी गांड मांरूगा

रोशनी - ठीक है बेटा..... अब मै जाती हू बहुत देर हो गई है, दीपा घर पर इंतज़ार कर रही होगी...

मै- ठीक है जा मेरी रंडी... मै भी जाता हू....

काकी जाने लगी तो मैने उसे रोका

रोशनी - हा बेटा....

मैने अपनी जेब से 500 रूपये निकाले और उसे देने लगा...

रोशनी - ये क्या है बेटा...

मै - पैसे है रख ले तेरे काम आयेंगे...

रोशनी नहीं बेटा इसकी कोई जरूरत नहीं है.

मै - काकी तु रखले.... मुझे पता है तुझे जरूरत है...

काकी इंमोशनल हो गई..... उसने वो पैसे ले लिये...

फिर मै घर की तरफ चल पड़ा.... काकी की करारी चुत मारने के बाद अब मेरा लंड शांत था...

घर पर आकर मै अपने कमरे मे आराम करने लगा... हमारे घर मे बस मै ही था....

कुछ समय बाद मुझे लगा की कोई मुझे उठा रहा है...

ये कोई और नही मेरी प्यारी भतीजी खुशी थी...

खुशी अभी 11th क्लास में है.. कुछ ही महीनों मे 17 की होने वाली है... उसके नींबू अब संतरे बनने लगे है... अपनी मा की तरह ही एकदम गोरी चिटी पटाका माल है.... खुशी सिर्फ पढाई मे ध्यान देती है.. उसे कुछ भी समस्या आती है तो वो मुझसे पूछती है... उसे और बातों का अभी पता नहीं है.

खुशी ने टी शर्ट और स्कर्ट पहना हुआ है.. वो मेरे ऊपर बैठे हुए मुझे उठा रही है... जिससे उसकी नई नवेली छोटी गांड मेरे लंड पर टीकी हुई है

उसकी गांड की गर्मी पाकर मेरे लंड मे हलचल होने लगती है..

खुशी - चाचा उठो ना... देखो शाम हो गई है...

मै - ऊठ रहा हू ना खुशी.... तु मेरे ऊपर क्यो बैठी हुई है...

खुशी - मेरा मन किया बैठने का तो बैठ गई (हँसने लगती है)

मै- अच्छा बच्ची अभी बताता हू..

मै उसे गुदगुदी करने लगता हू... जिससे वो मेरे ऊपर गिरने लगती है.. और उसे पकडने की कोशिश मे मेरे हाथ उसकी चुचीयो को पकड़ लेते है(आहहह.. क्या आनन्द आता है...)

खुशी की चुचिया एकदम ठोस थी तनी हुई..

खुशी -आहह.. चाचचा..

मै- क्या हुआ खुशी

खुशी - कुछ नहीं चाचा....

खुशी को पता नहीं चला उसके साथ क्या लेकिन उसे अच्छा सा एक अलग एहसास हुआ..

खुशी मेरे सीने पर सर रखकर कर लेट जाती है...

मै- मुझे उठाने आयी थी और खुद सो गई...

खुशी -उठ रही हू.... चाचा मुझे आपके साथ बहुत अच्छा लगता है..

मै - मेरी प्यारी गुड़िया..

मै खुशी को पकडकर उसके दोनों गाल चुमने लगता हू... खुशी को अच्छा लगता है...

2 मिनट बाद..

खुशी -चाचा छोड़ो ना कितना चुमोगे.. बाकि बाद मे चुम लेना..... अभी बाहर चलो....

फिर हम बाहर आ जाते है....

 
Thanks for Supporting

सभी का धन्यवाद
 
*अपडेट - 9

फिर हम बाहर आ जाते है...

कुछ समय बाद मेरे मोबाइल पर मम्मी का फोन आया...

मम्मी - हैलो बेटा...

मै- हा मम्मी...

मम्मी -बेटा तेरे नाना की तबियत थोड़ी ज्यादा खराब है, इसलिए उनको दुसरे शहर मे दिखाने ले जा रहे है..... इस कारण मुझे कुछ दिन यही पर रहना पड़ेगा, और तेरे पापा को भी ... क्योकि तेरे मामा भी यहाँ नहीं है(मामा फोज मे हैं ), तो उनकी जरूरत पड़ेगी...

मै- ठीक है मम्मी...

मम्मी - बेटा अपना ख्याल रखना..... और मे तेरी ताइजिओ को बोल दुगी खाने के लिए...

मै-ठीक है मम्मी...

मम्मी फोन रख देती है......

फिर कुछ समय ऐसे ही बिताया...

रात को जब खाने के लिए बडे ताउजी की तरफ गया तो वहा सभी बैठे हुए थे....

वहाँ पता चला की देवीलाल भाई को एक शहर के बड़े कॉलेज मे टीचर की नौकरी मिल गई है, सब खुश थे...

( देवीलाल भाई अच्छे पढे लिखे हैं. सरकारी नौकरी मे भी कोशिश की पर नंबर नहीं आया... खेत का काम कम ही होता है उनसे, थोड़े मोटे है वो.... )

जिस शहर मे कॉलेज है वो गाँव से 55 km दूर है..

मै- भाई जी रोज आना जाना करोगे..

देवीलाल - नही भाई रोज तो आना जाना कैसे होगा... हफ्ते, दो हफ्ते मे आऊंगा... कॉलेज मे टीचरो के रहने के लिए व्यवस्था है तो वही रहूँगा... खाना भी हॉस्टल मे खा लुंगा...

खाना खाकर मै मेरे कमरे मे आ गया

(गाँव मे लोग जल्दी खा कर जल्दी सो जाते है, लेकिन मुझे लेट सोने की आदत है)

नोट:-

!!!*** गाँव मे हमारा परिवार प्रतिष्ठित और सम्पन्न परिवारों मे है.. चारो भाइयों के पास अच्छी जमीन है... हमारे परिवार मे दो ट्रैक्टर है, बडे ताऊजी और छोटे ताऊजी के पास..

### बडे ताऊजी का ट्रैक्टर रामानंद भाई और छोटे ताऊजी का उनका बेटा राकेश चलाते है. ##

बडे ताऊजी की खेती की अधिक देखभाल छोटा बेटा अनिल ही करता है....

और छोटे ताऊजी (सुमेर सिंह ) की खेती की देखभाल खुद ताऊजी करते है (जैसा पहले बताया है वे खेतों मे ज्यादा ध्यान देते है)

***!!!

नया सवेरा नया दिन.....

आज मै सुबह अपने आप ऊठ गया.... नहा धोकर मै मीनाक्षी भाभी की तरफ चल पड़ा....

मेने उनको आवाज दी भाभी कहाँ हो आप...

मीनाक्षी -यहा रसोई मे हूँ...

मै रसोई मे चला गया...भाभी गैस के पास खडी काम रही थीं... मेरी नजर भाभी की गांड पर पड़ी...

मै भाभी के ठीक पीछे जा के खड़ा हो गया और भाभी की तरफ आगे झुकने से पहले मैने अपना लंड बाहर निकाल लिया और भाभी के चुत्तड़ के बीच में निशाना लगा के अपने आठ इंच के खड़े लंड को सीधा उसके सेक्सी चुत्तड़ के ठीक बीचो बीच में घूसा दिया. मैने अपना पूरा वज़न आगे की तरफ किया जिस से मेरा खड़ा लंड भाभी के चुत्तड़ में और अंदर घूसने लगा.

मै -भाभी क्या रही हो

और मै आगे पीछे होने लगा, मेरे आठ इंच के लंड को अपने चुत्तड़ पे मेहसुस करके मीनाक्षी मस्ती में सिसकार उठि.

शशश आह..... मम...... ओह.....

मीनाक्षी - आआआह... कुछ..नहही..

मीनाक्षी (मन मे) हाय राम क्या लंड है, इसने तो जान ही निकाल दी... कल से मेरी चुत इसे याद करके पानी छोड़े जा रही है

वो मेरे लंड के साइज और कड़कपन को मेहसुस करने लगी....

वो कुछ कह नहीं पा रही थी बस मस्ती में खोयी हुई थी.

मैने अपना लंड भाभी के चुत्तड़ आगे पीछे करते हुए कहा भाभी मै कल की तरह आपके बोबो को छु लु... और मै भाभी के मोटे मोटे चुचो को मसलने लगा...

मीनाक्षी मस्ती में इतना खोई हुई है की उसे कुछ होश ही नहीं है. वो चाह कर भी अपने देवर को रोक नहीं पा रही है. वो तो बस मस्ती में आहें भर रही है आह... मम.... ओह..... उसकी चुत से बेतहाशा वीर्य बह रहा है जो उसकी सलवार को गिला कर रही है...

मै भाभी के चुचो को मसलने लगा... मैने उनके कुर्ते मे हाथ डाल लिये....

मेरे हाथ भाभी के मोटे मोटे मांस से भरे हुए चुचो पर पडे... मै दोनो हाथों से उनको मसलने लगा... इससे भाभी की हालत खराब होने लगी....

मीनाक्षी - आआआह... राहुल.. नहहही... आआह.. मममां...

मै -क्या हुआ

मीनाक्षी - आआह.. कुछ नहही बसस.. ऐससे.. ही करते.. रहहहो..

मेने अपने होठ भाभी की गर्दन पर लगा दिये और चुसने लगा...

भाभी तडपने लगी...

मुझे लगा भाभी झड़ने वाली है तो मै पिछे हट गया...भाभी लाल आंखों से मुझे घुरके देखने लगी... मैने उनकी तरफ़ देखा तो उन्होने अपनी नजरे झुका ली....

मैने यही ये सब करना ठीक नही समझा लेकिन मैं अब भाभी को चोदे बिना भी नही रह सकता था….क्या पता बाद मे उनकी औरत जाग उठे और उन्हे पछतावा होने लगे उसके पहले ही मैं उन्हे चोद लेना चाहता था….

मैने उनको रूम मे चलने का इशारा किया.....

 
* अपडेट - 10

मैने उनको रूम मे चलने का इशारा किया...

मै - भाभी रूम मे चलते हैं….

भाभी(धीरे से नशीली आवाज़ मे)—क्यययो …..?

मै - मुझे आपकी चुत लेनी है.....आप दोगि ना अपनी चुत मुझे.... ?

भाभी शरमा जाती है कुछ नहीं बोलती है...

मैने उनका हाथ पकड़ के उठा दिया और उनके कमरे मे ले जाने लगा....वो मेरे साथ बिना किसी विरोध के चल दी..कमरे मे आते ही मैने जल्दी से दरवाजा लॉक कर के भाभी से लिपट कर उनके होंठो को चूमने लगा...

मैं मीनाक्षी भाभी से लिपट कर उनके होंठो को चूमने चाटने लगा.....भाभी भी पूरी चुदासी होकर मेरा साथ दे रही थी....होंठो को चूस्ते हुए मै एक हाथ उनके कुर्ते पर ले गया और उसके उपर से ही भाभी की चुचियो को कस कस के दबाने लगा

मीनाक्षी - आअहह.....राहुल्ल्ल...आआअ

मै - क्या हुआ भाभी..... ?

मीनाक्षी - इतनी ज़ोर....से.....आआअ.....मत दबाओ....थोडा...धीरे..

मै- चुचि दबाने का मज़ा तो ज़ोर ज़ोर से ही है भाभी.......ये तो दबाने के लिए ही बनी है

मीनाक्षी - बाद मे दबा लेना…अभी घर वाले आते ही होंगे……जल्दी से कर लो...

मैं भाभी की चुचियो को बारी बारी से वैसे कस के मसलता रहा....और मैने उनकी सलवार का नाडा़ खोलकर उनकी सलवार मे एक हाथ घुसा दिया....मुझे मालूम था कि गाओं की

ज़्यादातर औरते अंदर चड्डी नही पहनती हैं

मेरा हाथ सीधे भाभी की झांटो से जा टकराया…..झान्टो मे हाथ फेरते हुए मैं उनकी चुत की दरार मे उंगली उपर से नीचे चलाने लगा…चुत पूरी गीली होकर लसलसा रही थी

मीनाक्षी - आआआहह........अभी ज़्यादा टाइम नही है....जल्दी से कर लो

मै - (चुत मे उंगली करके)—क्या कर लूँ भाभी...... ?

भाभी- आआआआ.....वोही जो आप करना चाहते हो...जल्दी से ले लो.... नही तो कोई आ जाएगा

मै- (दाने को मसल कर)—क्या ले लुं भाभी....

मीनाक्षी -आआआहह....ऐसे...ही...आआआ.....

मै - (दाने को खिचते हुए)— बोलो ना भाभी..... ?

मीनाक्षी - आआआअहह....मर गयी.....आआआ....इतनी ज़ोर से मत खींचो........मुझे शरम आती है बोलने मे...

मै (उंगली घुसेड कर)- साफ साफ बताओ ना

मीनाक्षी - आआआअहह…..ऐसे ही…..आआअ…..अच्छा लग रहा है…..वोही जहाँ आप उंगली अंदर बाहर कर रहे है

मै जोर जोर से अपनी अंगुली चुत मे अंदर बाहर करता हू... जिससे भाभी की हालत खराब हो जाती है

मीनाक्षी - आआआहह……बहुत मज़ा आ रहा है….आआआ….ऐसे ही…..और ज़ोर से….आआअहह…..मेरी चुत्त्त्त्त लेना चाहत्त्ते...हो अब्ब्ब्ब... खुश...आआआहह….और ज़ोर से …आआआ

मै- ये हुई ना बात……आप अपनी चुत दोगि मुझे भाभी…..?

मीनाक्षी - मैं तो कल से अपनी चुत देना चाहती थी….लेकिन आप ही नही लेना चाहते मेरी बुर

मै- सच आप मुझे सच मे अपनी बुर देना चाहती हो

भाभी - आआआ…… बहुत पहले से आप मुझे अच्छे लगते हो...मै हमेशा से आपको पसंद करती हूँ और कल जब आपने मेरी तारीफ की, मेरे साथ वो सब किया तब से….मैं और भी आप से अपनी चुत चुदाना चाहती थी…..अब

जल्दी से ले लो मेरी चुत….नही तो मैं आज भी चुदासी रह जाउन्गी

मै - नही भाभी अब आप कभी चुदासी नही रहोगी……मैं हूँ ना आपकी चुत चोदने के लिए

मीनाक्षी - मेरा बहुत मन करता है देवर जी आपको अपनी चुत दिखाने का……मै जब भी आपके कसरती बदन को देखती हू मेरा जी मेल जाता है... मैं रोज यही सोचती थी कि काश आप मुझे कही पटक कर चोद डाले ज़बरदस्ती……मुझ से खूब गंदी गंदी बाते करे…….. दिन भर मुझे खूब गंदा गंदा बोले …..मेरे दूध दबा दिया करे कभी भी…..कभी भी मेरी चुत देख लिया करे……कभी भी मेरी चुत मे लंड घुसेड दिया करे….मुझे रोज पूरी नंगी किया करे

मै - आप ये सब सोचती थी…….?

मीनाक्षी - आआअहह….हाँ राहुल …..ये मेरा सपना है जो मैं सच करना चाहती थी तुम्हारे साथ…….तुम करोगे ना मेरा ये सपना सच देवर जी…? ये सब करेगे मेरे साथ रोज…..?

मै - पहले आपको नंगी करके चुत तो देख लूँ…फिर बताता हूँ

मीनाक्षी - अभी नंगी मत करो….घरवाले आने वाले हैं…..अभी सलवार नीचे कर के देख लो मेरी चुत…….सब के जाने के बाद जी भर के पूरी नंगी कर के

देख लेना अपनी भाभी को……अभी सलवार नीचे करके जल्दी से चुत को चोद दो...

मैने भी उनकी बात को सही मानते हुए उन्हे बिस्तर मे लिटा कर सलवार को घुटनों तक नीचे कर दिया…..सलवार नीचे होते ही भाभी की गोरी मांसल जांघे और दोनो जाँघो के बीच मे छुपि हुई झान्टो वाली चुत पूरी नंगी होकर मेरे सामने आ गयी…..बुर एकदम कचौरी की तरह खूब फूली हुई थी

मीनाक्षी - देख लो देवर जी……यही है तुम्हारी भाभी की चुत…..

कोई आ जाए उसके पहले जल्दी से ले लो

मैने भाभी के कुर्ते और ब्रा को उपर कर दिया और उनकी नंगी चुचियो को चूसने और मरोड़ने लगा....अभी ज़्यादा टाइम नही था इसलिए मैने भी वक़्त खराब करना ठीक नही समझा

भाभी के दोनो पैर फैला कर मैने लंड बाहर निकाल कर उनकी चुत के मुहाने पर टिका दिया….और चुचि पकड़ के ज़ोर का धक्का पेल दिया

चुत मे….लंड फिसल गया जिससे भाभी की सिसकारी निकल गयी

मीनाक्षी - आअहह.....आराम से ...आपका बहुत मोटा है.....

मैने फिर से बुर के छेद मे लंड को टिका कर ज़ोर दार

प्रहार किया तो इस बार लंड का टोपा कच्च की आवाज़ के साथ चुत मे फच्च से घुस गया...मीनाक्षी भाभी की इतने मे ही जान निकल गयी

मीनाक्षी - उूउउइइमाआअ.......मर गयी.......आआअहह......कितना मोटा है ...आपका........जल्दी से एक ही बार मे घुसा दो.....बार बार दर्द सहने से तो अच्छा है एक बार ही जितना दर्द होना है हो जाए......आप जोर से पेल दो....चाहे मेरी चुत फट के छितरा ही क्यो ना जाए आप पेल दो पूरा

मेरी चुत मे......पेल दो देवर जी.....आपकी भाभी की की चुत बहुत चुदासी है .......चोद डालो इस चुत को...मेरे सैंया ....अपने मोटे लंबे लंड से फाड़ दो

आज...अपनी इस दासी की चुत को.... और बनो लो मुझे अपनी रखेल

मैने दोनो चुचियो को खूब ज़ोर ज़ोर से मसल्ते हुए जल्दी जल्दी चार पाँच ज़ोर ज़ोर से धक्का मार कर पूरा लंड उनकी बच्चेदानी तक मे घुसेड दिया

 
[* अपडेट -11

मीनाक्षी - आ............मां..........मर गयी.........नीकाललो इ.......से........मुझे नही लेनां......मेरी......चुत।

मेरी नजर भाभी की चुत पर पड़ती है... मेरा लंड उसकी चुत को फैला चुका था, और उसकी चुत से हल्का सा खून निकल रहा था।

भाभी का बुरा हाल हो गया था, पुरे कमरे में उसकी चिखे गुंज रही थी, और मै उनको बेरहमी से उसे चोदे जा रहा था।

मीनाक्षी - हाय रे...........देव.....र जी मुझे......मार.......डाल्ल्ला.... अपने आह बे.........रहम देवर.... जी रहम्म्म्म...... करो बेटे से.....

मै - छटपटा मत मादरचोद कुतीया रही। तु रखेल है मेरी आज से

भाभी को दर्द हो रहा था, और वो बस चील्लाये जा रही थी,मै धक्के लगाता रहा साथ साथ मे भाभी के चुचो को मसलता और पिता रहा..... अब भाभी की चुत गिली होने लगी थी...

आखीर वो समय आया जब दर्द का मजंर थमा और भाभी की पुरी खुल चुकी चुत मेरे लंड को पच्च पच्च की आवाजो के साथ अपनी चुत में ले रही थी।

अब भाभी की आवाजे सीसकीयो में बदल चुकी थी। उसकी सीसकीया ये बंया कर रहीं थी की अब उसे मजा आ रहा है।

मीनाक्षी - आह देवर जी ...मजा आ रहा है...अपनी भाभी को आ....ह बेरहमी से क्यूं चोदा...

मै - चुप कर साली और मेरा लंड ले।

मै - आह.... तुम्हारा ये लंड आह मुझे ब....हुत मजा दे रहा है। चोदो आह.... , आज से मै आपकी रखैल हू, बे....रहम देवर...

मै जोर जोर से धक्के लगाता हू... भाभी भी अब अपनी गांड उचकाने लगती है...

वो मजे मे मेरी पीठ पर नाखून चुभाने लगती है...

मीनाक्षी - आआह... ओहहह... देवररर.. जी जोर से और जोर से..

और भाभी झडने लगती है...

मै भी झड़ने वाला था, मैने भाभी के बोबो पर जोर का थप्पड़ मारा, और खाट पर चढ़ भाभी की कमर पकड़ हवा मे उठा कर जोर जोर से पेलने लगा।

भाभी को इससे ज्यादा मजा आ रहा था... पर इससे उसको दर्द भी हो रहा था... उसके मुँह से दर्द और मजे की मिलिजुली आवाज आ रही थीं

भाभी भारी थी फिर भी मै उसकी कमर पकड़े हवा में उठाये बस चोदे जा रहा था।

मै- आह ले साली कुतीया, मेरा पानी अपनी चुत में और एक जोर का धक्का मार अपना लंड सीधा उसके चुत की गहराई में उतार दिया.

भाभी का मुँह आनंद और मजे मे खुल गया... वो मेरे लंड का पानी अपनी बच्चेदानी के मुह पर गिरता साफ महसुस कर रही थी... भाभी ने मुझे जोर से कस लिया. उसके चेहरे पर आनंद और संतुष्टि के भाव थे!

दो मिनट तक मै उसके ऊपर ही लेटा रहा... फिर खडा हो गया भाभी अभी भी आंख बंद किये लेटी थी.

मैने उसको जोर से बोलकर जगाया.. उसने आंखें खोली ओर खड़ी होकर मेरे गले लग गई .भाभी की आंखों मे आंसू थे.

मीनाक्षी - देवर जी आज आपने मुझे वो सुख दिया जो मुझे कभी नहीं मिला... इतना मजा मुझे आज तक नहीं आया...

आज से मै आपकी हुई... मुझे अपना लो.

अब से मुझ पर पहला हक आपका है...

मै- हा मेरी रंडी भाभी... आज से तु मेरी है .

मेरी रखेल है तु मीनाक्षी ...

फिर मैने उसकी मोटी मखमली गांड को भींच दिया...

मीनाक्षी - आहह... हा मेरे राजा.. आज से मै आपकी रखेल हू.

हम दोनो अलग हुए और कपड़े पहनने लगे, क्योकि अब कोई भी आ सकता था..

मैने एक बार भाभी के होठों को कस के चुसा... फिर मै बाहर आ गया.
 


दोस्तों अगर कहानी मे कुछ गलती हो या लिखने मे कुछ प्रोब्लम हो तो बताना अपनी प्रतिक्रिया देना...

 
* अपडे़ट - 12

फिर मै बाहर आ गया...

भाभी को चोदने मे बहुत टाइम निकल गया पता ही नहीं चला...

मुझे जोर से प्रेशर आने लगा तो मै पशुओं के बाड़े की तरफ चल पड़ा हल्का होने के लिए.. मै मुत ही रहा था कि मुझे झगड़े की आवाज सुनाई दी..

ये आवाज बाड़े से आ रही थीं..

मै बाड़े मे गया तो देखा की अनिल भाई पंकज भाभी के साथ झगड़ रहे है... फिर अनिल भाई ने भाभी को जोर से थप्पड़ मारा और वो चिलाने लगे... मै उनके पास गया, वो भाभी को फिर से थप्पड़ मारने ही वाले थे कि मैंने उनको रोक दिया...

क्या हुआ अनिल भाई भाभी को क्यों मार रहे हो..

अनिल - राहुल तु यहाँ क्या कर रहा है.

मै - आपकी आवाज सुनी तो यंहा आ गया...

क्या हुआ अनिल भाई भाभी को क्यों मार रहे हो..

अनिल - कुछ नहीं भाई..

मै - बताओ ना..

पंकज भाभी(रोते हुए )- मै बताती हू..

मैने इनको बच्चियों और मेरे लिए नये कपड़े दिलाने के लिए ही बोला... कपड़े पुराने हो गए है इसलिए...

अनिल - तु चुप कर..

मै- भाई जी ईप इस बात के लिए भाभी को मार रहे हो.. ये तो गलत बात है..

अनिल - मेरा पास टाइम नहीं है फालतु कामों के लिए

मै - भाई वो आपकी पत्नी है और बेटियाँ है..

भाई कुछ नहीं बोले..

मै - ठीक है तो मै दिला लाउंगा भाभी को कपड़े, ठीक है...

अनिल -ठीक है भाई

* (परिवार मे सब मुझे लाड और प्यार करते है)

और वो चले गये...

भाभी नीचे बैठकर रोने लगी.. मै उनके पास गया...

मै - भाभी रोईए मत, चुप हो जाईए...

मैने भाभी को पकड़ के खड़ा किया खडे़ होते ही वो जोर से मेरे गले लग गई... उनकी संतरे जैसी नरम चुचिया मेरे सीने मे चुभने लगी...

मैने भाभी के चेहरे को अपने हाथों मे लिया तो मैने देखा की उनकी गाल लाल हो चुकी है.. मैने उनके आंसुओ को साफ किया..

मै - भाभी मै ना आपके साथ

मै उनकी पीठ को सहलाने लगा...

पंकज - मेरी कोई गलती नहीं थी

मै - पता है भाभी मुझे, आप चुप हो जाओ और घर पर चलो.

इस समय ताईजी और भाभी खेत से घास लेके आई नहीं थी... बच्चे बाहर खेल रहे थे.

मै भाभी को मेरे कमरे मे ले गया..

उनको बेड पर बैठाया और पानी दिया.. फिर मै दर्द की क्रीम ले आया जो उनकी मुलायम गाल पर लगाने लगा.

भाभी मेरी तरफ प्यार से देखने लगी..

मै- ऐसे क्या देख रही हो भाभी...

भाभी - आपको..

मै - क्यो

भाभी - आप कितने अच्छे हो देवर जी, आपको मेरी कितनी फिक्र है. आप कितना ख्याल रखते है मेरा.. और एक वो है जो मुझे...... (भाभी चुप हो गई )

मै - क्या भाभी आप भी, आप भी तो मेरे अपने हो.

भाभी मेरी तरफ ही देख रही थी

मै - आप ये सब छोडो

मेरे रूम मे ज्यूस रहता है मैने वो ज्यूस भाभी को दिया.

भाभी ये ज्यूस पी लो.

भाभी - नही, इसकी जरूरत नहीं है.

मै - भाभी आप मेरी बात नहीं मानोगी, मेरे लिए पी लो... प्लीज

भाभी - ठीक है पीती हू.

भाभी ने ज्यूस पी लिया

मै - मेरी प्यारी भाभी, और मैने भाभी के गाल पर किस कर लिया और उनको गले लगा लिया

भाभी ने कुछ नहीं कहा, वो बस खुश थी..

तभी बाहर से बच्चो की आवाज आने लगी... मै और भाभी भी बाहर आ गये...

थोड़ी देर मे बाकी सब भी आ गये..

** आज देर हो गई थी खेत मे नहीं जा पाया, रोशनी काकी भी चली गई थीं शायद **

फिर हमने खाना खाया... फिर मैने कुछ देर आराम किया..

फिर मै छोटे ताऊजी के घर की तरफ चला गया.

वहां पर राकेश भाई के बच्चे खेल रहे थे, और दादी, ताई भी वहीं पर बैठी थीं.

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* अपडेट - 13

वहां पर राकेश भाई के बच्चे खेल रहे थे, और दादी, ताई भी वहीं पर बैठी थीं

वहाँ पर कुछ औरते भी बैठी थीं...

ताऊजी हमेशा की तरह खेत मे और राकेश भाई ट्रैक्टर लेके बाहर गये थे.

मै थोड़ी देर वहाँ पर बैठा फिर घर की तरफ आ गया

फिर कुछ खास नहीं हुआ.. रात खाना खाया. फिर मम्मी को फोन आ गया उनसे कुछ बाते की... थोडी देर मोबाइल पर टाईमपास किया और सो गया.

अगले दिन मै सुबह जल्दी ही ऊठ गया...

बाहर गयी तो राजू भाई मिल गया वो खुश लग रहे थे... मैने पूछा क्या हुआ भाई खुश लग रहे हो आज

राजु - खुशी की बात है राहुल.

देवीलाल का फोन आया था उसने कहा की उसकी कॉलेज मे अकाउंट विभाग मे एक जगह खाली है, तो उसने मेरी बात कर ली है... आज अपने शहर जाकर मेरे कागजात भेजके आ रहा हू. देवीलाल ने कहा की मेरी नौकरी पक्की है.

मै- बधाई हो भाई साहब

***

( राजु भाई ने ग्रेजुएशन किया हुआ है.

मैने बताया धा ना कि वे थोडे कमजोर से है खेत का काम तो करते है, लेकिन अधिकतर काम मेरे शराबी ताऊ ही करते है नशे मे.. )

राजु भाई अपनी बाईं पर शहर चले गये.

ताऊ और ताई खेत मे थे और निंशात रोनक और वंशिका के साथ खेल रहा था..

मै जल्दी से मीनाक्षी भाभी के कमरे मे गया... वे कमरे मेँ काम कर रही थी.

मैने अंदर जाते ही दरवाजा बंद कर लिया...

भाभी ने मेरी तरफ देखा... मेरी नज़रों का स्पर्श अपने शरीर पर फील करके उनकी नज़रें शर्म से झुक गयी और वो अपने निचले होठ को दाँतों से काटती हुई फर्श की ओर देखने लगी...

मे हौले से उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया, और उनकी कमर में अपने बाहें लपेट कर अपने से सटा लिया, मेरा लंड उनकी कमर पर ठोकर मारने लगा.

उनके कंधे को चूमते हुए माने कहा – आप मेरी हो.. !

वो – हहहहहा.... मेररे.. सैंया मै आपकी ही हूँ...

आप हमेशा मुझसे ऐसे ही प्यार करेंगे ना...?

मै बोला - हा... मै ऐसे ही प्यार करता रहूँगा....

मेरी बात सुन वो पलट गयी, और किसी दीवानी की तरह मेरे पूरे चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी…

मे भी उनका भरपूर साथ देने लगा, उन्होने मेरे हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिए जिन्हें मेने हौले से सहला दिया..

अहह…. देवर्जी….. इन्हें मूह में लेकर चूसो मेरे रजाअजीीीइ…. ये आपके तुम्हारे लिए है…

भाभी की बात सुन मेने अपना मूह उनके एक निपल से अड़ा दिया और चूसने लगा… बड़े ही टेस्टी और मीठे चुचे थे… वो मेरे सर को अपने हाथ से सहला रही थी अपनी आँखें बंद किए हुए…

एक हाथ से मे उनके दूसरे स्तन को सहला रहा था, कभी-2 उनके कड़क हो चुके निपल को दबा देता.. जिसके कारण उनके मूह से सिसकी… ईीीइसस्स्स्शह…. निकल जाती..

कुच्छ देर बाद मे दूसरे स्तन को चूसने लगा, और पहले वाले को हाथ से सहलाता रहा.... मेने चूस-चूस कर, मसल-मसल कर उनके दोनो स्तनों को लाल कर दिया..

भाभी के हाथ का दबाब अपने सर पर पाकर मे नीचे की ओर बढ़ा और उनके पेट और नाभि को चाटता हुआ, उनके रस कलश पर पहुँचा…

मे अपने घुटनों पर बैठकर उनके यौनी प्रदेश को निहारने लगा.. और अपने दोनो हाथों से उनकी मोटी-मोटी जांघों को सहलाते हुए अंदर की ओर लाया,

मेरे हाथों का स्पर्श अपनी जांघों के अंदुरूनी भाग पर पाकर उनकी जांघे अपने आप चौड़ी हो गयी..

अब उनकी चुत और अच्छे से दिख रहा थी… उनकी चुत से बूँद-2 करके रस टपक रहा था, जिसे मेने अपनी उंगली पर रख कर चखा,

एक खट्टा-मीठा सा स्वाद मेरी जीभ को अच्छा लगा,

भाभी ने कहाँ छी : देवर जी ये क्या कर रहे हो गंदी जगह है ये...

मेने एक बार अपने हाथ से चुत को सहला कर अपने होठ उनकी चुत पर रख दिए…

मेरे होठों का स्पर्श अपनी चुत पर पाकर भाभी के मूह से एक मीठी सी सिसकी निकल गयी…..ईीीइसस्स्स्शह……उफफफफफ्फ़………आअहह….. द.द.ए.व.ए.रजीीइईई….

भाभी - आप क्यो गंदी जगह पर मुंह लगा रहे है...

मै - ये तो दुनिया की सबसे अच्छी जगह है.. ( शायद भाई ने कभी इनकी चुत को नही चाटा )

मैने उनकी चुत की दोनो पुट्टियों समेत पूरी चुत को अपने मूह में भर लिया और चूसने लगा…

भाभी - आआआह.... मेरे राज्ज्जजा... चातूओ…ईससीईई…..प्लेआस्ीई….

भाभी के दोनो हाथ मेरे बालों को सहला रहे थे, उनके मूह से लगातार कुच्छ ना कुच्छ निकल रहा था..

आअहह….हान्न्न…ऐसी..हिी…हइईए…माआ…उफफफ्फ़…. और जोर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर….स.ईईईईई…..हाइईईईईईईईईईईईई…….उसस्सुउुउऊहह….खा जाऊ…हरंजड़ीइइ..कूऊ…

फिर मैने चुत की क्लिट जो ऊठी हुई थी उसको मुँह मे दबा कर चुसने लगा... और दो उँगलियां अंदर बाहर करने लगा....

भाभी जोर से चिलाने लगी... और फलफालकर झड़ने लगी… ढेर सारा… गाढ़ा-गाढ़ा.. मट्ठा सा.. उनकी चूत से निकलने लगा…

उसने मेरा मूह हटाना चाहा…

लेकिन मैने मुँह वही पर लगाये रखा... मैं उनका सारा चूतरस पी गया… भाभी की टाँगें काँप रही थी, अब उनसे खड़े रहना मुश्किल होता जा रहा था…

 
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