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जाल पार्ट--40
गतान्क से आगे.
विजयंत ने उसे इशारा किया तो वो घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ गयी & जब तक वो लेटटी विजयंत ने उसे वैसे ही झुका दिया.अब रंभा अपने घुटनो पे झुकी हुई थी & विजयंत बिस्तर पे बैठा उसकी कमर को थाम उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.
"दूसरी ये की अगर उसने खुद ही ये काम करने की बेवकूफी की है तो फिर अपना चेहरा दिखाने से डरता नही.वो तो गधे की तरह खिंसे निपोरटा मेरे सामने खड़ा हो समीर की सलामती का सौदा करता मुझसे.",रंभा की काली,छ्होटी सी पॅंटी उसकी गंद को पूरी तरह से ढँकने मे नाकामयाब थी & जब उसके ससुर ने अपनी दाढ़ी उनपे रगड़ी तो उसे गुदगुदी महसूस हुई & वो जोश & खुशी से मुस्कुरा दी.
"उउन्न्ञन्..तो आपको लगता है कोई और है इस सब के पीछे?",उसने गर्दन घुमा अपनी गंद चाटते ससुर को देखा.
"हूँ..यही तो पता लगाना है अब मुझे.",उसने उसकी गंद मे फाँसी पॅंटी को नीचे सरकाया & फिर उसकी गंद के छेद को चूमते हुए उसे जीभ की नोक से छेड़ा.
"ऊन्नह..नही..",रंभा ने गंद उसके मुँह से हटाते हुए करवट ली & अपनी कोहनियो पे उचक के ससुर को शोखी से मुस्कुराते हुए देखने लगी,"..वाहा नही."
"क्यू?",विजयंत ने मुस्कुराते हुए उसकी घुटनो पे अटकी पॅंटी को नीचे खींच उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया.
"दर्द होता है मुझे.",विजयंत ने उसकी टाँगे पकड़ उसे पलट दिया & इफ्र उसके पेट के नीचे हाथ लगा उसे पहले जैसी हालत मे ही कर दिया.
"मज़ा भी तो आता है जानेमन.",वो पीछे से आके उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से परेशान करने लगा.
"उउन्न्ह..हाईईईईईई..नही..!",रंभा आहें भरती गंद गोल-2 घूमने लगी.
"प्लीज़,डार्लिंग..",विजयंत ने उसकी कमर को पकड़ उसकी चूत मे ज़ोर-2 से जीभ चलाना शुरू कर दिया.रंभा कमर बेसब्री से हिलाते हुए ज़ोर-2 से आहे भरती झड़ने लगी,"..फिर पता नही कभी मौका मिले भी या नही."
"1 बात समझ लीजिए..",रंभा ससुर की बात सुन फ़ौरन पलटी.विजयंत बिस्तर से उतर फर्श पे खड़ा हो गया था.रंभा उसके सामने बैठ बिस्तर से टाँगे लटका के बैठ गयी & उसका अंडरवेर नीचे सरका दिया,"..समीर के वापस आने के बाद भी मुझे आपका साथ ऐसे ही चाहिए.....उउम्म्म्ममम..!",उसने ससुर के लंड को पकड़ उसे मुँह मे भर लिया.उसके सख़्त एहसास,मदमाती खुश्बू & नशीले स्वाद की खुशी से उसने आँखे बंद कर ली & उसे शिद्दत के साथ चूसने लगी.
"लेकिन रंभा?",विजयंत लंड चुस्ती रंभा के बाल सहला रहा था.
"लेकिन-वेकीन कुच्छ नही..",रंभा ने लंड मुँह से निकाला & उसके आंडो को दबाते हुए लंड के आसपास की जगह को चूमने लगी,"..मैं अब आपकी चुदाई के बिना नही रह सकती.",विजयंत ने बाया घुटना बिस्तर पे जमा दिया था & रंभा ने भी बाई टांग पलंग पे रख ली थी.चूत की कसक उसे बहुत तडपा रही थी लेकिन लंड को भी वो जी भर के चूस लेना चाहती थी.वो विजयंत के लंड को जकड़े उसे चूस्ते हुए बेचैनी से अपनी कमर हिला रही थी & अपनी जंघे भी.उसकी चूत तो बस अब लंड के इंतेज़ार मे आँसुओ की धारा बहाए चली जा रही थी.
विजयंत ने नीचे नज़रे झुकाई,ना जाने कितनी लड़किया उसके बिस्तर की रौनक बनी थी लेकिन वो भी अब इस लड़की से दूर रहने की नही सोच पा रहा था.वो उसके बेटे की बीवी थी लेकिन अब वो उसके दिल मे भी 1 खास जगह बना चुकी थी.समीर की वापसी के बाद भी उसे ये रिश्ता बरकरार रखना ही होगा नही तो वो बेचैनी से मर जाएगा.उसने प्यार से रंभा का मुँह अपने लंड से लगा किया & उसे बिस्तर पे लेटने का इशारा किया.
जैसे ही वो बिस्तर पे आया रंभा ने उसे पलट के लिटा दिया & हँसती उसके जिस्म के दोनो तरफ घुटने जमाते हुए बैठ गयी & फिर दाया हाथ पीछे ले जाके लंड को थामा & उसपे बैठ गयी.
"ऊहह..!",लंड उसकी चूत को हमेशा की तरह फैला रहा था.अभी तक लंड घुसने पे उसे हल्का दर्द होता था.वो आँखे बंद कर मज़े से मुस्कुराती ससुर के सीने पे हाथ दबा के अपने नखुनो से उसके बालो को खरोंछती कमर हिला-2 के उस से चुदने लगी.
विजयंत के हाथ उसकी गंद की फांको को तौलने लगी तो वो आगे झुकी & उसके चौड़े सीने पे अपनी चूचिया टीका के उसके चेहरे & होंठो को चूमते हुए उस से चुदने लगी.
"ये रिश्ता तो अब मेरी जान के साथ ही जाएगा.",विजयंत की बात सुन रंभा ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया & बहुत तेज़ी से कमर हिलाने लगी.विजयंत उसकी गंद मसल्ते हुए लेटा था.वो समझ गया था कि रंभा मस्ती मे पागल हो गयी है.
"उउन्न्ञणन्..हााआअन्न्ननननननणणन्..!",रंभा ने होंठो को वियजयंत के लबो से जुदा किया & अपना सर उठाके बालो को झटकते हुए ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी & झाड़ गयी.विजयंत ने उसे पलटा & अपने नीचे ले उसकी चूत की आख़िरी गहराइयो मे उसकी कोख तक अपना लंड घुसाते हुए उसकी चुदाई शुरू कर दी.रंभा तो बस मस्ती मे उड़े जा रही थी.अभी वो खुमारी से निकली भी नही थी & विजयंत उसकी चूचियाँ चूस्ता ज़ोर के धक्के लगाता उसे फिर से उसी खुमारी मे वापस ले जा रहा था.
रंभा ने हाथ पीछे बिस्तर पे फैला दिए & अपना जिस्म कमान की तरह मोडते हुए अपना सीना उपर उचकाते हुए ससुर के मुँह मे और घुसाने की कोशिस की & बिस्तर की चादर को नोचते हुए अपनी टाँगे विजयंत की पिच्छली जाँघो पे फँसा के कमर उचकाते हुए उसके धक्को का जवाब देने लगी.
विजयंत ने बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे सरका दी & दाए हाथ से उसकी गंद की बाई फाँक को दबोचते हुए उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी चुदाई को आगे बढ़ाया.रंभा ने जिस्म के मज़े से बेचैन हो सुबक्ते हुए ससुर के बालो को खींचते हुए उसके चेहरे को पागलो की तरह चूमने लगी.
रंभा की चूत की कसक फिर से चरम पे पहुँच रही थी & उसने विजयंत के लंड को भी अपने सिकुड़ने-फैलने की हरकत से बेचैन कर दिया.रंभा 1 बार और झाड़ गयी थी.उसे पूरे जिस्म मे मस्ती की लहर दौड़ती महसूस हो रही थी & उसका दिल इतनी खुशी झेल नही पाया & उसके जज़्बात आँखो के रास्ते फूट पड़े.विजयंत ने उसके चेहरे को तब तक चूमा जब तक वो संभाल नही गयी उसके बाद वो घुटने पे हुआ & रंभा की दाई टांग को उठाके उसे उसकी बाई टांग के उपर कर दिया.
रंभा उसका इशारा समझते हुए घूम के बाई करवट पे हो गयी.विजयंत घुटनो पे बैठा थोड़ी देर तक हल्के धक्को से उसकी चुदाई करता रहा.रंभा नशे से बोझल पल्को से उसे देखते हुए होंठो से चूमने का इशारा करती रही..समीर लौटेगा तो उसे कभी-कभार इस हसीन एहसास का लुत्फ़ नसीब होगा..अफ..कैसे रहेगी वो इस मज़बूत,हसीन मर्द की क़ातिल चुदाई के बिना..उसने आँखे बंद कर उस ख़याल को ज़हन से दफ़ा किया & बेचैनी से अपनी चूचिया अपने हाथो से ही दबा दी.
विजयंत बिना लंड निकाले झुकता हुआ उसके पीछे करवट से लेट गया & उसके पेट को सहलाता उसकी गर्दन & दाए कंधे को चूमता चोदने लगा.रंभा ने सर पीछे घुमाया & उसके बालो को खींचते हुए उसे चूमने लगी..कितना नशीला एहसास था ये..उसकी जीभ से खेलने का..लेकिन पता नही आज की रात के बाद फिर कब मौका मिले..इस ख़याल से उसका जिस्म फिर से मस्ती के उस एहसास को फिर से पाने के लिए मचल उठा.
"आन्न्न्नह......ऊहह...डॅड.....हाआंन्णणन्..!",रंभा अब चीख रही थी,विजयंत उसकी चूत के दाने को रगड़ते हुए धक्के लगा रहा था.रंभा का बेचैन जिस्म उसकी गिरफ़्त मे कसमसा रहा था & उसकी चूत फिर से उसके लंड को जकड़ने लगी थी.रंभा से अब ये मज़ा बर्दाश्त नही हुआ & उसने विजयंत के अपने चूत के दाने को रगड़ते दाए हाथ की कलाई को पकड़ लिया & सुबक्ते हुए फिर से झाड़ गयी.
रंभा अपनी साँसे संभाल ही रही थी की विजयंत ने करवट लेते हुए उसे बिस्तरा पे पेट के बल कर दिया & खुद उसके उपर चढ़ गया & हाथ नीचे घुसा उसकी कोमल छातियो को दबाते हुए चोदने लगा.रंभा तो मस्ती & थकान मे चूर हो गयी थी & बस बिस्तर पे बेचैनी से सर हिलाते हुए आहें भरते हुए उसके लंड का लुत्फ़ उठा रही थी.
विजयंत उसकी पीठ & कंधो को चूम रहा था.बहू का रेशमी जिस्म उसे अपना दीवाना बना चुका था.उसका दिल उसकी चुदाई से भरता ही नही था.ऐसे परेशानी भरे माहौल मे भी उसके जैसा पक्का कारोबारी रंभा के हसीन बदन के साथ का कोई मौका भी नही छ्चोड़ना चाहता था.चंद दिनो की चुदाई मे ही रंभा का जिस्म विजयंत के होंठो के निशानो से भर गया था जिन्हे देख वो खुद भी मस्त होती थी & उसका ससुर भी.
विजयंत उसकी मुलायम गर्दन को चूम के उठा & घुटनो पे हो उसकी कमर थाम उसकी गंद को भी उठा लिया.रंभा बिस्तर मे मुँह छुपे अपनी कोहनियो & घुटनो पे झुकी उसकी चुदाई से मस्त होती रही.बिस्तर की चादर अब पूरी तरह से सलवटो से भर चुकी थी.इस पोज़िशन मे लंड फिर से उसकी कोख पे चोट करने लगा & वो फिर से मस्ती भरी आवाज़ें निकलती कमर आगे-पीछे कर विजयंत की ताल से ताल मिलाने लगी.
"ऊन्न्न्नह.....आआन्न्न्नह....हाआअन्न्नणणन्.....न्न्नणन्नाआआहह..!",रंभा ने बिस्तर की चादर को अपने हाथो मे भींच लिया & अपना सर उपर उठाके बाल झटकने लगी.विजयंत ने इस बार बड़ी मुश्किल से खुद को झड़ने से रोका.उसके लंड पे बहू की चूत की पकड़ क़ातिलाना हो गयी थी.रंभा पीछे गंद करते हुए इस बार रोने लगी थी.उसके जिस्म की मस्ती की शिद्दत इस बार सारी हदें पर कर गयी थी.
वियजयंत ने लंड बाहर खींचा & अपने थूक से जल्दी से रंभा की गंद के छेद को गीला किया.उसका लंड तो पहले ही उसके प्रकूं & रंभा की चूत के नशीले रस से गीला था.
"हाआऐययईईईईई..!",रंभा ने चेहरे पे दर्द & मस्ती की मिलीजुली लकीरें खींच गयी.लंड का सूपड़ा उसकी गंद के छेद को बहुत फैलाता हुआ अंदर घुसा था.विजयंत ने भी आह भरते हुए उसकी कमर को ज़ोर से पकड़ा & & लंड को उसकी आधी लंबाई तक घुसा दिया.
होटेल सूयीट के उस कमरे मे ससुर & बहू की मस्ती भरी आवाज़े गूंजने लगी.दोनो को कुच्छ होश नही था सिवाय इसके की 1 दूसरे के जिस्म उन्हे जन्नत की सैर करा रहे थे.विजयंत रंभा की गंद मारने के साथ-2 उसकी चूत मे भी उंगली कर रहा था.रंभा की चूत की कसावट ने उसे पहले दिन से ही हैरान कर रखा था.इस वक़्त भी वो उसकी उंगली को अपनी जाकड़ मे कस चुकी थी & उसकी गंद उसके लंड को.
कुच्छ देर बाद ही कमरे मे 2 आवाज़े गूँजी-1 भारी & 1 पतली,लेकिन दोनो ही मस्ती से भरी हुई & दोनो ही ये एलान कर रही थी की 2 प्यार भरे जिस्मो ने 1 दूसरे के साथ वो सफ़र पूरा कर लिया है जिसे दुनिया चुदाई कहती है & उस मंज़िल पे पहुँच गये हैं जहा सिर्फ़ खुशी ही खुशी होती है.
प्रणव अपने कॅबिन मे बैठा था.शाम के 8 बज रहे थे लेकिन अभी तक वो फोन नही आया था जिसका उसे इंतेज़ार था.सोनम ने उसके कॅबिन का दरवाज़ा बहुत हल्के से खोल के अंदर देखा.उसे ये आदमी अब बिल्कुल भी ठीक नही लग रहा था & उसने तय कर लिया था कि अब उसे उसके बारे मे विजयंत मेहरा को बता देना चाहिए.पहले तो उसने सारे प्रॉजेक्ट्स मे कुच्छ ना कुच्छ बदलाव किए.ऐसा नही था कि ट्रस्ट ग्रूप बिना नियमो को तोड़े-मरोड़े हर काम ईमानदारी से करता था लेकिन विजयंत का 1 ही उसूल था कि ग्राहक के साथ हमेशा ईमानदारी बर्तो.उसके ज़्यादा से ज़्यादा पैसे लेने की कोशिश करो मगर उसे ये महसूस नही होना चाहिए कि वो ठगा गया है.तभी बाज़ार मे ग्रूप की साख बनी रहेगी & ग्राहको की तादाद भी बढ़ेगी मगर प्रणव तो हर प्रॉजेक्ट मे बस फ़ायदा देख रहा था & उसे कंपनी की साख की कोई चिंता नही थी.
"हेलो.",तभी उसका मोबाइल बजा & प्रणव ने झट से फोन कान से लगाया,".गुड ईव्निंग मिस्टर.शाह..जी..ओके...हां..हां..",वो कोई पता नोट कर रहा था,"..ठीक है..मार्केट से राइट..ओक.मैं 9 बजे तक आपके पास पहुँचता हू.",उसने फोन काटा & सोनम फ़ौरन दरवाज़े से हट गयी..ये शाह कौन था?..ये उस से मिलने क्यू जा रहा था?
"सोनम..",प्रणव बाहर आया,"..वो लेटर्स ड्राफ्ट हो गये ना?"
"यस सर."
"गुड & कल की मेरी अपायंट्मेंट्स?"
"सर,आपकी डाइयरी मे लिख दिया है..",उसने 1 डाइयरी 1 ब्रीफकेस मे डाली & उसे बंद किया तो प्रणव ने उसे उठा लिया.
"थॅंक यू.चलो,देर हो गयी है.अब घर जाओ.गुड नाइट!"
"गुड नाइट,सर!",सोनम वाहा से सीधा अपनी किसी सहेली से मिलने 1 नाइटक्लब मे गयी जहा उसकी सहेली के बाय्फ्रेंड का बड़ा हॅंडसम दोस्त भी आया हुआ था.नाइटक्लब से निकलने के बाद ही वो उस जवान मर्द के साथ उसके घर चली गयी थी & उसके मज़बूत बाजुओ मे अपनी जवानी उसे चखाते हुए वो विजयंत को फोन करना भूल गयी.
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क्रमशः.......
JAAL paart--40
gataank se aage.
vijayant ne use ishara kiya to vo ghutno ke bal bistar pe chadh gayi & jab tak vo letati vijayant ne use vaise hi jhuka diya.ab rambha apne ghutno pe jhuki hui thi & vijayant bistar pe baitha uski kamar ko tham uski panty ke upar se hi uski gand ki fanko ko chumne laga.
"dusri ye ki agar usne khud hi ye kaam karne ki bevkufi ki hai to fir apna chehra dikhane se darta nahi.vo to gadhe ki tarah khinse niporta mere samne khada ho sameer ki salamati ka sauda karta mujhse.",rambha ki kali,chhoti si panty uski gand ko puri tarah se dhankne me nakamyab thi & jab uske sasur ne apni dadhi unpe ragadi to use gudgudi mehsus hui & vo josh & khushi se muskura di.
"uunnnn..to aapko lagta hai koi aur hai is sab ke peechhe?",usne gardan ghuma apni gand chaatate sasur ko dekha.
"hun..yehi to pata lagana hai ab mujhe.",usne uski gand me phansi panty ko neeche sarkaya & fir uski gand ke chhed ko chumte hue use jibh ki nok se chheda.
"oonnhhhhh..nahi..",rambha ne gand uske munh se hatate hue karwat li & apni kohniyo pe uchak ke sasur ko shokhi se muskurate hue dekhne lagi,"..vaha nahi."
"kyu?",vijayant ne muskurate hue uski ghutno pe atki panty ko neeche khinch use puri tarah se nanag kar diya.
"dard hota hai mujhe.",vijayant ne uski tange pakad use palat diya & ifr uske pet ke neeche hath laga use pehle jaisi halat me hi kar diya.
"maza bhi to aata hai janeman.",vo peechhe se aake uski chut ko apni zuban se pareshan akrne laga.
"uunnhhhh..haiiiiiii..nahi..!",rambha aahen bharti gand gol-2 ghumane lagi.
"please,darling..",vijayant ne uski kamar ko pakad uski chut me zor-2 se jibh chalana shuru kar diya.rambha kamar besabri se hilate hue zor-2 se aahe bharti jhadne lagi,"..fir pata nahi kabhi mauka mile bhi ya nahi."
"1 baat samajh lijiye..",rambha sasur ki baat sun fauran palti.vijayant bistar se utar farsh pe khada ho gaya tha.rambha uske samne baith bistar se tange latka ke baith gayi & uska underwear neeche sarka diya,"..sameer ke vapas aane ke baad bhi mujhe aapka satha aise hi chahiye.....uummmmmm..!",usne sasur ke lund ko pakad use munh me bhar liya.uske sakht ehsas,madmati khushbu & nashile swad ki khushi se usne aankhe band kar li & use shiddat ke sath chusne lagi.
"lekin rambha?",vijayant lund chusti rambha ke baal sehla raha tha.
"lekin-vekin kuchh nahi..",rambha ne lund munh se nikala & uske ando ko dabate hue lund ke aaspaas ki jagah ko chumne lagi,"..main ab aapki chudai ke bina nahi reh sakti.",vijayant ne baya ghutna bistar pe jama diya tha & rambha ne bhi bayi tang palang pe rakh li thi.chut ki kasak use bahut tadpa rahi thi lekin lund ko bhi vo ji bhar ke chus lena chahti thi.vo vijayant ke lund ko jakde use chuste hue bechaini se apni kamar hila rahi thi & apni janghe bhi.uski chut to bas ab lund ke intezar me aansuo ki dhara bahaye chali ja rahi thi.
vijayant ne neeche nazre jhukayi,na jane kitni ladkiya uske bistar ki raunak bani thi lekin vo bhi ab is ladki se door rehne ki nahi soch pa raha tha.vo uske bete ki biwi thi lekin ab vo uske dil me bhi 1 khas jagah bana chuki thi.sameer ki vapasi ke baad bhi use ye rishta barkara rakhna hi hoga nahi to vo bechaini se mar jayega.usne pyar se rambha ka munh apne lund se laga kiya & use bistar pe letne ka ishara kiya.
jaise hi vo bistar pe aaya rambha ne use palat ke lita diya & hansti uske jism ke dono taraf ghutne jamate hue baith gayi & fir daya hath peechhe le jake lund ko thama & uspe baith gayi.
"oohhhhhhh..!",lund uski chut ko humesha ki tarah faila raha tha.abhi tak lund ghusne pe use halka dard hota tha.vo aankhe band kar maze se muskurati sasur ke seene pe hath dabake apne nakhuno se uske ballo ko kharonchti kamar hila-2 ke us se chudne lagi.
vijayant ke hath uski gand ki fanko ko taulne lagi to vo aage jhuki & uske chaude seene pe apni choochiya tika ke uske chehre & hotho ko chumte hue us se chudne lagi.
"ye rishta to ab meri jaan ke sath hi jayega.",vijayant ki baat sun rambha ne uske hotho ko apne hotho se band kar diya & bahut tezi se kamar hilane lagi.vijayant uski gand masalte hue leta tha.vo samajh gaya tha ki rambha masti me pagal ho gayi hai.
"uunnnnn..haaaaaaannnnnnnnnnn..!",rambha ne hotho ko viajyant ke labo se juda kiya & apna sar utyhake baalo ko jhatakte hue zor-2 se kamar hilane lagi & jhad gayi.vijayant ne sue palta & apne neeche le uski chut ki aakhiri gehraiyo me uski kokh tak apna lund ghusate hue uski chudai shuru kar di.rambha to bas masti me ude ja rahi thi.abhi vo khumari se nilki bhi nahi thi & vijayant uski chhatiyan chusta zor ke dhakke lagata use fir se usi khumari me vapas le ja raha tha.
rambha ne hath peechhe bsitar pe faila diye & apna jism kaman ki tarah modte hue apna seena upar uchkate hue sasur ke munh me aur ghusane ki koshsih ki & bistar ki chadar ko nochte hue apni tange vijayant ki pichhli jangho pe fansa ke kamar uchakte hue uske dhakko ka jawab dene lagi.
vijayant ne bayi banh uski gardan ke neeche sarka di & daye hath se uski gand ki bayi fank ko dabochte hue uske chehre ko chumte hue uski chudai ko aage badhaya.rambha ne jism ke maze se bechain ho subakte hue sasur ke baalo ko khinchte hue uske chehre ko pagalo ki tarah chumne lagi.
rambha ki chut ki kasak fir se charam pe pahunch rahi thi & usne vijayant ke lund ko bhi apne sikudne-failne ki harkat se bechain kar diya.rambha 1 baar aur jhad gayi thi.use pure jism me masti ki lehar daudti mehsus ho rahi thi & uska dil itni khushi jhel nahi paya & uske jazbat aankho ke raste phoot pade.vijayant ne uske chhere ko tab tak chuma jab tak vo sambhal nahi gayi uske baad vo ghutne pe hua & rambha ki dayi tang ko uthake use uski bayi tang ke upar kar diya.
rambha uska isharta samajhte hue ghum ke bayi karwat pe ho gayi.vijayant ghutno pe baitha thodi der tak halke dhakko se uski chudai karta raha.rambha nashe se bojhal palko se use dekhte hue hotho se chumne ka ishara karti rahi..sameer lautega to use kabhi-kabhar is haseen ehsas ka lutf nasib hoga..uff..kaise rahegi vo is mazbut,haseen mard ki qatil chudai ke bina..usne aankhe band kar us khayal ko zehan se dafa kiya & bechaini se apni choochiya apne hatho se hi daba di.
vijayant bina lund nikale jhukta hua uske peechhe karwat se let gaya & uske pet ko sehlata uski gardan & daye kandhe ko chumta chodne laga.rambha ne sar peechhe ghumaya & uske baalo ko khinchte hue use chumne lagi..kitna nashila ehsas tha ye..uski jibh se khelne ka..lekin pata nahi aaj ki rata ke baad fir kab mauka mile..is khayal se uska jism fir se masti ke us ehsas ko fir se pane ke liye machal utha.
"aannnnhhhh......oohhhhh...dad.....haaaannnnn..!",rambha ab chikh rahi thi,vijayant uski chut ke dane ko ragadte hue dhakke laga raha tha.rambha ka bechain jism uski giraft me kasmasa raha tha & uski chut fir se uske lund ko jakadne lagi thi.rambha se ab ye maza bardasht nahi hua & usne vijayant ke apne chut ke dane ko ragadte daye hath ki kalai ko pakad liya & subakte hue fir se jhad gayi.
rambha apni sane sambhal hi rahi thi ki vijayant ne karwat lete hue use bistra pe pet ke bal kar diya & khud uske upar chad gaya & hath neeche ghusa uski komal chhatiyo ko dabate hue chodne laga.rambha to masti & thakan me chur ho gayi thi & bas bistar pe bechaini se sar hilate hue aahen bharte hue uske lund ka lutf utha rahi thi.
vijayant uski pith & kandho ko chum raha tha.bahu ka reshmi jism use apna deewana bana chuka tha.uska dil uski chudai se bharta hi nahi tha.aise pareshani bhare mahaul me bhi uske jaisa pakka karobari rambha ke haseen badan ke sath ka koi mauka bhi nahi chhodna chahta tha.chand dino ki chudai me hi rambha ka jism vijayant ke hotho ke nishano se bhar gaya tha jinhe dekh vo khud bhi mast hoti thi & uska sasur bhi.
vijayant uski mulayam gardan ko chum ke utha & ghutno pe ho uski kamar tham uski gand ko bhi utha liya.rambha bistar me munh chhupaye apni kohniyo & ghutno pe jhuki uski chudai se mast hoti rahi.bistar ki chadar ab puri tarah se salwato se bhar chuki thi.is position me lund fir se uski kokh pe chot karne laga & vo fir se masti bhari aavazen nikalti kamar aage-peechhe kar vijayant ki taal se taal milane lagi.
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viajyant ne lund bahar khincha & apne thuk se jaldi se rambha ki gand ke chhed ko gila kiya.uska lund to pehle hi uske prcum & rambha ki chut ke nashile ras se gila tha.
"HAAAAAIIIIIIII..!",rambha ne chehre pe dard & masti ki milijuli lakiren khinch gayi.lund ka supada uski gand ke chhed ko bahut failata hua andar ghusa tha.vijayant ne bhi aah bharte hue uski kamar ko zor se pakda & & lund ko uski aadhi lambai tak ghusa diya.
hotel suite ke us kamre me sasur & bahu ki masti bhari aavaze gunjane lagi.dono ko kuchh hosh nahi tha siway iske ki 1 dusre ke jism unhe jannat ki sair kara rahe the.vijayant rambha ki gand maarne ke sath-2 uski chut me bhi ungli kar raha tha.rambha ki chut ki kasawat ne use pehle din se hi hairan kar rakha tha.is waqt bhi vo uski ungli ko apni jakad me kas chuki thi & uski gand uske lund ko.
kuchh der baad hi kamre me 2 aawaze gunji-1 bhari & 1 patli,lekin dono hi masti se bhari hui & dono hi ye elan kar rahi thi ki 2 pyar bhare jismo ne 1 dusre ke sath vo safar pura kar liya hai jise dunbiya chudai kehti hai & us manzil pe pahunch gaye hain jaha sirf khushi hi khushi hoti hai.
Pranav apne cabin me baitha tha.sham ke 8 baj rahe the lekin abhi tak vo fone nahi aaya tha jiska use intezar tha.Sonam ne uske cabin ka darwaza bahut halke se khol ke andar dekha.use ye aadmi ab bilkul bhi thik nahi lag raha tha & usne tay kar liya tha ki ab use uske bare me Vijayant Mehra ko bata dena chahiye.pehle to usne sare projects me kuchh na kuchh badlav kiye.aisa nahi tha ki Trust Group bina niyamo ko tode-marode har kaam imandari se karta tha lekin vijayant ka 1 hi usool tha ki grahak ke sath humesha imandari barto.uske zyada se zyada paise lene ki koshish karo magar use ye mehsus nahi hona chahiye ki vo thaga gaya hai.tabhi bazar me group ki saakh bani rahegi & grahako ki tadad bhi badhegi magar pranav to har project me bas fayda dekh raha tha & use company ki sakh ki koi chinta nahi thi.
"hello.",tabhi uska mobile baja & pranav ne jhat se fone kaan se lagay,".good evening Mr.Shah..ji..ok...haan..haan..",vo koi pata note kar raha tha,"..thik hai..market se right..ok.main 9 baje tak aapke paas pahunchta hu.",usne fone kata & sonam fauran darwaze se hat gayi..ye shah kaun tha?..ye us se milne kyu ja raha tha?
"sonam..",pranav bahar aaya,"..vo letters draft ho gaye na?"
"yes sir."
"good & kal ki meri appointments?"
"sir,aapki diary me likh diya hai..",usne 1 diary 1 briefcase me dali & uise band kiya to pranav ne use utha liya.
"thank you.chalo,der ho gayi hai.ab ghar jao.good night!"
"good night,sir!",sonam vaha se seedha apni kisi saheli se milne 1 nightclub me gayi jaha uski saheli ke boyfriend ka bada handsome dost bhi aaya hua tha.nightclub se nikalne ke baad hi vo us jawan mard ke sath uske ghar chali gayi thi & uske mazbut bazuo me apni jawani use chakhate hue vo vijayant ko fone karna bhul gayi.
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kramashah.......
गतान्क से आगे.
विजयंत ने उसे इशारा किया तो वो घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ गयी & जब तक वो लेटटी विजयंत ने उसे वैसे ही झुका दिया.अब रंभा अपने घुटनो पे झुकी हुई थी & विजयंत बिस्तर पे बैठा उसकी कमर को थाम उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.
"दूसरी ये की अगर उसने खुद ही ये काम करने की बेवकूफी की है तो फिर अपना चेहरा दिखाने से डरता नही.वो तो गधे की तरह खिंसे निपोरटा मेरे सामने खड़ा हो समीर की सलामती का सौदा करता मुझसे.",रंभा की काली,छ्होटी सी पॅंटी उसकी गंद को पूरी तरह से ढँकने मे नाकामयाब थी & जब उसके ससुर ने अपनी दाढ़ी उनपे रगड़ी तो उसे गुदगुदी महसूस हुई & वो जोश & खुशी से मुस्कुरा दी.
"उउन्न्ञन्..तो आपको लगता है कोई और है इस सब के पीछे?",उसने गर्दन घुमा अपनी गंद चाटते ससुर को देखा.
"हूँ..यही तो पता लगाना है अब मुझे.",उसने उसकी गंद मे फाँसी पॅंटी को नीचे सरकाया & फिर उसकी गंद के छेद को चूमते हुए उसे जीभ की नोक से छेड़ा.
"ऊन्नह..नही..",रंभा ने गंद उसके मुँह से हटाते हुए करवट ली & अपनी कोहनियो पे उचक के ससुर को शोखी से मुस्कुराते हुए देखने लगी,"..वाहा नही."
"क्यू?",विजयंत ने मुस्कुराते हुए उसकी घुटनो पे अटकी पॅंटी को नीचे खींच उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया.
"दर्द होता है मुझे.",विजयंत ने उसकी टाँगे पकड़ उसे पलट दिया & इफ्र उसके पेट के नीचे हाथ लगा उसे पहले जैसी हालत मे ही कर दिया.
"मज़ा भी तो आता है जानेमन.",वो पीछे से आके उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से परेशान करने लगा.
"उउन्न्ह..हाईईईईईई..नही..!",रंभा आहें भरती गंद गोल-2 घूमने लगी.
"प्लीज़,डार्लिंग..",विजयंत ने उसकी कमर को पकड़ उसकी चूत मे ज़ोर-2 से जीभ चलाना शुरू कर दिया.रंभा कमर बेसब्री से हिलाते हुए ज़ोर-2 से आहे भरती झड़ने लगी,"..फिर पता नही कभी मौका मिले भी या नही."
"1 बात समझ लीजिए..",रंभा ससुर की बात सुन फ़ौरन पलटी.विजयंत बिस्तर से उतर फर्श पे खड़ा हो गया था.रंभा उसके सामने बैठ बिस्तर से टाँगे लटका के बैठ गयी & उसका अंडरवेर नीचे सरका दिया,"..समीर के वापस आने के बाद भी मुझे आपका साथ ऐसे ही चाहिए.....उउम्म्म्ममम..!",उसने ससुर के लंड को पकड़ उसे मुँह मे भर लिया.उसके सख़्त एहसास,मदमाती खुश्बू & नशीले स्वाद की खुशी से उसने आँखे बंद कर ली & उसे शिद्दत के साथ चूसने लगी.
"लेकिन रंभा?",विजयंत लंड चुस्ती रंभा के बाल सहला रहा था.
"लेकिन-वेकीन कुच्छ नही..",रंभा ने लंड मुँह से निकाला & उसके आंडो को दबाते हुए लंड के आसपास की जगह को चूमने लगी,"..मैं अब आपकी चुदाई के बिना नही रह सकती.",विजयंत ने बाया घुटना बिस्तर पे जमा दिया था & रंभा ने भी बाई टांग पलंग पे रख ली थी.चूत की कसक उसे बहुत तडपा रही थी लेकिन लंड को भी वो जी भर के चूस लेना चाहती थी.वो विजयंत के लंड को जकड़े उसे चूस्ते हुए बेचैनी से अपनी कमर हिला रही थी & अपनी जंघे भी.उसकी चूत तो बस अब लंड के इंतेज़ार मे आँसुओ की धारा बहाए चली जा रही थी.
विजयंत ने नीचे नज़रे झुकाई,ना जाने कितनी लड़किया उसके बिस्तर की रौनक बनी थी लेकिन वो भी अब इस लड़की से दूर रहने की नही सोच पा रहा था.वो उसके बेटे की बीवी थी लेकिन अब वो उसके दिल मे भी 1 खास जगह बना चुकी थी.समीर की वापसी के बाद भी उसे ये रिश्ता बरकरार रखना ही होगा नही तो वो बेचैनी से मर जाएगा.उसने प्यार से रंभा का मुँह अपने लंड से लगा किया & उसे बिस्तर पे लेटने का इशारा किया.
जैसे ही वो बिस्तर पे आया रंभा ने उसे पलट के लिटा दिया & हँसती उसके जिस्म के दोनो तरफ घुटने जमाते हुए बैठ गयी & फिर दाया हाथ पीछे ले जाके लंड को थामा & उसपे बैठ गयी.
"ऊहह..!",लंड उसकी चूत को हमेशा की तरह फैला रहा था.अभी तक लंड घुसने पे उसे हल्का दर्द होता था.वो आँखे बंद कर मज़े से मुस्कुराती ससुर के सीने पे हाथ दबा के अपने नखुनो से उसके बालो को खरोंछती कमर हिला-2 के उस से चुदने लगी.
विजयंत के हाथ उसकी गंद की फांको को तौलने लगी तो वो आगे झुकी & उसके चौड़े सीने पे अपनी चूचिया टीका के उसके चेहरे & होंठो को चूमते हुए उस से चुदने लगी.
"ये रिश्ता तो अब मेरी जान के साथ ही जाएगा.",विजयंत की बात सुन रंभा ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया & बहुत तेज़ी से कमर हिलाने लगी.विजयंत उसकी गंद मसल्ते हुए लेटा था.वो समझ गया था कि रंभा मस्ती मे पागल हो गयी है.
"उउन्न्ञणन्..हााआअन्न्ननननननणणन्..!",रंभा ने होंठो को वियजयंत के लबो से जुदा किया & अपना सर उठाके बालो को झटकते हुए ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी & झाड़ गयी.विजयंत ने उसे पलटा & अपने नीचे ले उसकी चूत की आख़िरी गहराइयो मे उसकी कोख तक अपना लंड घुसाते हुए उसकी चुदाई शुरू कर दी.रंभा तो बस मस्ती मे उड़े जा रही थी.अभी वो खुमारी से निकली भी नही थी & विजयंत उसकी चूचियाँ चूस्ता ज़ोर के धक्के लगाता उसे फिर से उसी खुमारी मे वापस ले जा रहा था.
रंभा ने हाथ पीछे बिस्तर पे फैला दिए & अपना जिस्म कमान की तरह मोडते हुए अपना सीना उपर उचकाते हुए ससुर के मुँह मे और घुसाने की कोशिस की & बिस्तर की चादर को नोचते हुए अपनी टाँगे विजयंत की पिच्छली जाँघो पे फँसा के कमर उचकाते हुए उसके धक्को का जवाब देने लगी.
विजयंत ने बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे सरका दी & दाए हाथ से उसकी गंद की बाई फाँक को दबोचते हुए उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी चुदाई को आगे बढ़ाया.रंभा ने जिस्म के मज़े से बेचैन हो सुबक्ते हुए ससुर के बालो को खींचते हुए उसके चेहरे को पागलो की तरह चूमने लगी.
रंभा की चूत की कसक फिर से चरम पे पहुँच रही थी & उसने विजयंत के लंड को भी अपने सिकुड़ने-फैलने की हरकत से बेचैन कर दिया.रंभा 1 बार और झाड़ गयी थी.उसे पूरे जिस्म मे मस्ती की लहर दौड़ती महसूस हो रही थी & उसका दिल इतनी खुशी झेल नही पाया & उसके जज़्बात आँखो के रास्ते फूट पड़े.विजयंत ने उसके चेहरे को तब तक चूमा जब तक वो संभाल नही गयी उसके बाद वो घुटने पे हुआ & रंभा की दाई टांग को उठाके उसे उसकी बाई टांग के उपर कर दिया.
रंभा उसका इशारा समझते हुए घूम के बाई करवट पे हो गयी.विजयंत घुटनो पे बैठा थोड़ी देर तक हल्के धक्को से उसकी चुदाई करता रहा.रंभा नशे से बोझल पल्को से उसे देखते हुए होंठो से चूमने का इशारा करती रही..समीर लौटेगा तो उसे कभी-कभार इस हसीन एहसास का लुत्फ़ नसीब होगा..अफ..कैसे रहेगी वो इस मज़बूत,हसीन मर्द की क़ातिल चुदाई के बिना..उसने आँखे बंद कर उस ख़याल को ज़हन से दफ़ा किया & बेचैनी से अपनी चूचिया अपने हाथो से ही दबा दी.
विजयंत बिना लंड निकाले झुकता हुआ उसके पीछे करवट से लेट गया & उसके पेट को सहलाता उसकी गर्दन & दाए कंधे को चूमता चोदने लगा.रंभा ने सर पीछे घुमाया & उसके बालो को खींचते हुए उसे चूमने लगी..कितना नशीला एहसास था ये..उसकी जीभ से खेलने का..लेकिन पता नही आज की रात के बाद फिर कब मौका मिले..इस ख़याल से उसका जिस्म फिर से मस्ती के उस एहसास को फिर से पाने के लिए मचल उठा.
"आन्न्न्नह......ऊहह...डॅड.....हाआंन्णणन्..!",रंभा अब चीख रही थी,विजयंत उसकी चूत के दाने को रगड़ते हुए धक्के लगा रहा था.रंभा का बेचैन जिस्म उसकी गिरफ़्त मे कसमसा रहा था & उसकी चूत फिर से उसके लंड को जकड़ने लगी थी.रंभा से अब ये मज़ा बर्दाश्त नही हुआ & उसने विजयंत के अपने चूत के दाने को रगड़ते दाए हाथ की कलाई को पकड़ लिया & सुबक्ते हुए फिर से झाड़ गयी.
रंभा अपनी साँसे संभाल ही रही थी की विजयंत ने करवट लेते हुए उसे बिस्तरा पे पेट के बल कर दिया & खुद उसके उपर चढ़ गया & हाथ नीचे घुसा उसकी कोमल छातियो को दबाते हुए चोदने लगा.रंभा तो मस्ती & थकान मे चूर हो गयी थी & बस बिस्तर पे बेचैनी से सर हिलाते हुए आहें भरते हुए उसके लंड का लुत्फ़ उठा रही थी.
विजयंत उसकी पीठ & कंधो को चूम रहा था.बहू का रेशमी जिस्म उसे अपना दीवाना बना चुका था.उसका दिल उसकी चुदाई से भरता ही नही था.ऐसे परेशानी भरे माहौल मे भी उसके जैसा पक्का कारोबारी रंभा के हसीन बदन के साथ का कोई मौका भी नही छ्चोड़ना चाहता था.चंद दिनो की चुदाई मे ही रंभा का जिस्म विजयंत के होंठो के निशानो से भर गया था जिन्हे देख वो खुद भी मस्त होती थी & उसका ससुर भी.
विजयंत उसकी मुलायम गर्दन को चूम के उठा & घुटनो पे हो उसकी कमर थाम उसकी गंद को भी उठा लिया.रंभा बिस्तर मे मुँह छुपे अपनी कोहनियो & घुटनो पे झुकी उसकी चुदाई से मस्त होती रही.बिस्तर की चादर अब पूरी तरह से सलवटो से भर चुकी थी.इस पोज़िशन मे लंड फिर से उसकी कोख पे चोट करने लगा & वो फिर से मस्ती भरी आवाज़ें निकलती कमर आगे-पीछे कर विजयंत की ताल से ताल मिलाने लगी.
"ऊन्न्न्नह.....आआन्न्न्नह....हाआअन्न्नणणन्.....न्न्नणन्नाआआहह..!",रंभा ने बिस्तर की चादर को अपने हाथो मे भींच लिया & अपना सर उपर उठाके बाल झटकने लगी.विजयंत ने इस बार बड़ी मुश्किल से खुद को झड़ने से रोका.उसके लंड पे बहू की चूत की पकड़ क़ातिलाना हो गयी थी.रंभा पीछे गंद करते हुए इस बार रोने लगी थी.उसके जिस्म की मस्ती की शिद्दत इस बार सारी हदें पर कर गयी थी.
वियजयंत ने लंड बाहर खींचा & अपने थूक से जल्दी से रंभा की गंद के छेद को गीला किया.उसका लंड तो पहले ही उसके प्रकूं & रंभा की चूत के नशीले रस से गीला था.
"हाआऐययईईईईई..!",रंभा ने चेहरे पे दर्द & मस्ती की मिलीजुली लकीरें खींच गयी.लंड का सूपड़ा उसकी गंद के छेद को बहुत फैलाता हुआ अंदर घुसा था.विजयंत ने भी आह भरते हुए उसकी कमर को ज़ोर से पकड़ा & & लंड को उसकी आधी लंबाई तक घुसा दिया.
होटेल सूयीट के उस कमरे मे ससुर & बहू की मस्ती भरी आवाज़े गूंजने लगी.दोनो को कुच्छ होश नही था सिवाय इसके की 1 दूसरे के जिस्म उन्हे जन्नत की सैर करा रहे थे.विजयंत रंभा की गंद मारने के साथ-2 उसकी चूत मे भी उंगली कर रहा था.रंभा की चूत की कसावट ने उसे पहले दिन से ही हैरान कर रखा था.इस वक़्त भी वो उसकी उंगली को अपनी जाकड़ मे कस चुकी थी & उसकी गंद उसके लंड को.
कुच्छ देर बाद ही कमरे मे 2 आवाज़े गूँजी-1 भारी & 1 पतली,लेकिन दोनो ही मस्ती से भरी हुई & दोनो ही ये एलान कर रही थी की 2 प्यार भरे जिस्मो ने 1 दूसरे के साथ वो सफ़र पूरा कर लिया है जिसे दुनिया चुदाई कहती है & उस मंज़िल पे पहुँच गये हैं जहा सिर्फ़ खुशी ही खुशी होती है.
प्रणव अपने कॅबिन मे बैठा था.शाम के 8 बज रहे थे लेकिन अभी तक वो फोन नही आया था जिसका उसे इंतेज़ार था.सोनम ने उसके कॅबिन का दरवाज़ा बहुत हल्के से खोल के अंदर देखा.उसे ये आदमी अब बिल्कुल भी ठीक नही लग रहा था & उसने तय कर लिया था कि अब उसे उसके बारे मे विजयंत मेहरा को बता देना चाहिए.पहले तो उसने सारे प्रॉजेक्ट्स मे कुच्छ ना कुच्छ बदलाव किए.ऐसा नही था कि ट्रस्ट ग्रूप बिना नियमो को तोड़े-मरोड़े हर काम ईमानदारी से करता था लेकिन विजयंत का 1 ही उसूल था कि ग्राहक के साथ हमेशा ईमानदारी बर्तो.उसके ज़्यादा से ज़्यादा पैसे लेने की कोशिश करो मगर उसे ये महसूस नही होना चाहिए कि वो ठगा गया है.तभी बाज़ार मे ग्रूप की साख बनी रहेगी & ग्राहको की तादाद भी बढ़ेगी मगर प्रणव तो हर प्रॉजेक्ट मे बस फ़ायदा देख रहा था & उसे कंपनी की साख की कोई चिंता नही थी.
"हेलो.",तभी उसका मोबाइल बजा & प्रणव ने झट से फोन कान से लगाया,".गुड ईव्निंग मिस्टर.शाह..जी..ओके...हां..हां..",वो कोई पता नोट कर रहा था,"..ठीक है..मार्केट से राइट..ओक.मैं 9 बजे तक आपके पास पहुँचता हू.",उसने फोन काटा & सोनम फ़ौरन दरवाज़े से हट गयी..ये शाह कौन था?..ये उस से मिलने क्यू जा रहा था?
"सोनम..",प्रणव बाहर आया,"..वो लेटर्स ड्राफ्ट हो गये ना?"
"यस सर."
"गुड & कल की मेरी अपायंट्मेंट्स?"
"सर,आपकी डाइयरी मे लिख दिया है..",उसने 1 डाइयरी 1 ब्रीफकेस मे डाली & उसे बंद किया तो प्रणव ने उसे उठा लिया.
"थॅंक यू.चलो,देर हो गयी है.अब घर जाओ.गुड नाइट!"
"गुड नाइट,सर!",सोनम वाहा से सीधा अपनी किसी सहेली से मिलने 1 नाइटक्लब मे गयी जहा उसकी सहेली के बाय्फ्रेंड का बड़ा हॅंडसम दोस्त भी आया हुआ था.नाइटक्लब से निकलने के बाद ही वो उस जवान मर्द के साथ उसके घर चली गयी थी & उसके मज़बूत बाजुओ मे अपनी जवानी उसे चखाते हुए वो विजयंत को फोन करना भूल गयी.
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क्रमशः.......
JAAL paart--40
gataank se aage.
vijayant ne use ishara kiya to vo ghutno ke bal bistar pe chadh gayi & jab tak vo letati vijayant ne use vaise hi jhuka diya.ab rambha apne ghutno pe jhuki hui thi & vijayant bistar pe baitha uski kamar ko tham uski panty ke upar se hi uski gand ki fanko ko chumne laga.
"dusri ye ki agar usne khud hi ye kaam karne ki bevkufi ki hai to fir apna chehra dikhane se darta nahi.vo to gadhe ki tarah khinse niporta mere samne khada ho sameer ki salamati ka sauda karta mujhse.",rambha ki kali,chhoti si panty uski gand ko puri tarah se dhankne me nakamyab thi & jab uske sasur ne apni dadhi unpe ragadi to use gudgudi mehsus hui & vo josh & khushi se muskura di.
"uunnnn..to aapko lagta hai koi aur hai is sab ke peechhe?",usne gardan ghuma apni gand chaatate sasur ko dekha.
"hun..yehi to pata lagana hai ab mujhe.",usne uski gand me phansi panty ko neeche sarkaya & fir uski gand ke chhed ko chumte hue use jibh ki nok se chheda.
"oonnhhhhh..nahi..",rambha ne gand uske munh se hatate hue karwat li & apni kohniyo pe uchak ke sasur ko shokhi se muskurate hue dekhne lagi,"..vaha nahi."
"kyu?",vijayant ne muskurate hue uski ghutno pe atki panty ko neeche khinch use puri tarah se nanag kar diya.
"dard hota hai mujhe.",vijayant ne uski tange pakad use palat diya & ifr uske pet ke neeche hath laga use pehle jaisi halat me hi kar diya.
"maza bhi to aata hai janeman.",vo peechhe se aake uski chut ko apni zuban se pareshan akrne laga.
"uunnhhhh..haiiiiiii..nahi..!",rambha aahen bharti gand gol-2 ghumane lagi.
"please,darling..",vijayant ne uski kamar ko pakad uski chut me zor-2 se jibh chalana shuru kar diya.rambha kamar besabri se hilate hue zor-2 se aahe bharti jhadne lagi,"..fir pata nahi kabhi mauka mile bhi ya nahi."
"1 baat samajh lijiye..",rambha sasur ki baat sun fauran palti.vijayant bistar se utar farsh pe khada ho gaya tha.rambha uske samne baith bistar se tange latka ke baith gayi & uska underwear neeche sarka diya,"..sameer ke vapas aane ke baad bhi mujhe aapka satha aise hi chahiye.....uummmmmm..!",usne sasur ke lund ko pakad use munh me bhar liya.uske sakht ehsas,madmati khushbu & nashile swad ki khushi se usne aankhe band kar li & use shiddat ke sath chusne lagi.
"lekin rambha?",vijayant lund chusti rambha ke baal sehla raha tha.
"lekin-vekin kuchh nahi..",rambha ne lund munh se nikala & uske ando ko dabate hue lund ke aaspaas ki jagah ko chumne lagi,"..main ab aapki chudai ke bina nahi reh sakti.",vijayant ne baya ghutna bistar pe jama diya tha & rambha ne bhi bayi tang palang pe rakh li thi.chut ki kasak use bahut tadpa rahi thi lekin lund ko bhi vo ji bhar ke chus lena chahti thi.vo vijayant ke lund ko jakde use chuste hue bechaini se apni kamar hila rahi thi & apni janghe bhi.uski chut to bas ab lund ke intezar me aansuo ki dhara bahaye chali ja rahi thi.
vijayant ne neeche nazre jhukayi,na jane kitni ladkiya uske bistar ki raunak bani thi lekin vo bhi ab is ladki se door rehne ki nahi soch pa raha tha.vo uske bete ki biwi thi lekin ab vo uske dil me bhi 1 khas jagah bana chuki thi.sameer ki vapasi ke baad bhi use ye rishta barkara rakhna hi hoga nahi to vo bechaini se mar jayega.usne pyar se rambha ka munh apne lund se laga kiya & use bistar pe letne ka ishara kiya.
jaise hi vo bistar pe aaya rambha ne use palat ke lita diya & hansti uske jism ke dono taraf ghutne jamate hue baith gayi & fir daya hath peechhe le jake lund ko thama & uspe baith gayi.
"oohhhhhhh..!",lund uski chut ko humesha ki tarah faila raha tha.abhi tak lund ghusne pe use halka dard hota tha.vo aankhe band kar maze se muskurati sasur ke seene pe hath dabake apne nakhuno se uske ballo ko kharonchti kamar hila-2 ke us se chudne lagi.
vijayant ke hath uski gand ki fanko ko taulne lagi to vo aage jhuki & uske chaude seene pe apni choochiya tika ke uske chehre & hotho ko chumte hue us se chudne lagi.
"ye rishta to ab meri jaan ke sath hi jayega.",vijayant ki baat sun rambha ne uske hotho ko apne hotho se band kar diya & bahut tezi se kamar hilane lagi.vijayant uski gand masalte hue leta tha.vo samajh gaya tha ki rambha masti me pagal ho gayi hai.
"uunnnnn..haaaaaaannnnnnnnnnn..!",rambha ne hotho ko viajyant ke labo se juda kiya & apna sar utyhake baalo ko jhatakte hue zor-2 se kamar hilane lagi & jhad gayi.vijayant ne sue palta & apne neeche le uski chut ki aakhiri gehraiyo me uski kokh tak apna lund ghusate hue uski chudai shuru kar di.rambha to bas masti me ude ja rahi thi.abhi vo khumari se nilki bhi nahi thi & vijayant uski chhatiyan chusta zor ke dhakke lagata use fir se usi khumari me vapas le ja raha tha.
rambha ne hath peechhe bsitar pe faila diye & apna jism kaman ki tarah modte hue apna seena upar uchkate hue sasur ke munh me aur ghusane ki koshsih ki & bistar ki chadar ko nochte hue apni tange vijayant ki pichhli jangho pe fansa ke kamar uchakte hue uske dhakko ka jawab dene lagi.
vijayant ne bayi banh uski gardan ke neeche sarka di & daye hath se uski gand ki bayi fank ko dabochte hue uske chehre ko chumte hue uski chudai ko aage badhaya.rambha ne jism ke maze se bechain ho subakte hue sasur ke baalo ko khinchte hue uske chehre ko pagalo ki tarah chumne lagi.
rambha ki chut ki kasak fir se charam pe pahunch rahi thi & usne vijayant ke lund ko bhi apne sikudne-failne ki harkat se bechain kar diya.rambha 1 baar aur jhad gayi thi.use pure jism me masti ki lehar daudti mehsus ho rahi thi & uska dil itni khushi jhel nahi paya & uske jazbat aankho ke raste phoot pade.vijayant ne uske chhere ko tab tak chuma jab tak vo sambhal nahi gayi uske baad vo ghutne pe hua & rambha ki dayi tang ko uthake use uski bayi tang ke upar kar diya.
rambha uska isharta samajhte hue ghum ke bayi karwat pe ho gayi.vijayant ghutno pe baitha thodi der tak halke dhakko se uski chudai karta raha.rambha nashe se bojhal palko se use dekhte hue hotho se chumne ka ishara karti rahi..sameer lautega to use kabhi-kabhar is haseen ehsas ka lutf nasib hoga..uff..kaise rahegi vo is mazbut,haseen mard ki qatil chudai ke bina..usne aankhe band kar us khayal ko zehan se dafa kiya & bechaini se apni choochiya apne hatho se hi daba di.
vijayant bina lund nikale jhukta hua uske peechhe karwat se let gaya & uske pet ko sehlata uski gardan & daye kandhe ko chumta chodne laga.rambha ne sar peechhe ghumaya & uske baalo ko khinchte hue use chumne lagi..kitna nashila ehsas tha ye..uski jibh se khelne ka..lekin pata nahi aaj ki rata ke baad fir kab mauka mile..is khayal se uska jism fir se masti ke us ehsas ko fir se pane ke liye machal utha.
"aannnnhhhh......oohhhhh...dad.....haaaannnnn..!",rambha ab chikh rahi thi,vijayant uski chut ke dane ko ragadte hue dhakke laga raha tha.rambha ka bechain jism uski giraft me kasmasa raha tha & uski chut fir se uske lund ko jakadne lagi thi.rambha se ab ye maza bardasht nahi hua & usne vijayant ke apne chut ke dane ko ragadte daye hath ki kalai ko pakad liya & subakte hue fir se jhad gayi.
rambha apni sane sambhal hi rahi thi ki vijayant ne karwat lete hue use bistra pe pet ke bal kar diya & khud uske upar chad gaya & hath neeche ghusa uski komal chhatiyo ko dabate hue chodne laga.rambha to masti & thakan me chur ho gayi thi & bas bistar pe bechaini se sar hilate hue aahen bharte hue uske lund ka lutf utha rahi thi.
vijayant uski pith & kandho ko chum raha tha.bahu ka reshmi jism use apna deewana bana chuka tha.uska dil uski chudai se bharta hi nahi tha.aise pareshani bhare mahaul me bhi uske jaisa pakka karobari rambha ke haseen badan ke sath ka koi mauka bhi nahi chhodna chahta tha.chand dino ki chudai me hi rambha ka jism vijayant ke hotho ke nishano se bhar gaya tha jinhe dekh vo khud bhi mast hoti thi & uska sasur bhi.
vijayant uski mulayam gardan ko chum ke utha & ghutno pe ho uski kamar tham uski gand ko bhi utha liya.rambha bistar me munh chhupaye apni kohniyo & ghutno pe jhuki uski chudai se mast hoti rahi.bistar ki chadar ab puri tarah se salwato se bhar chuki thi.is position me lund fir se uski kokh pe chot karne laga & vo fir se masti bhari aavazen nikalti kamar aage-peechhe kar vijayant ki taal se taal milane lagi.
"oonnnnhhhhhh.....aaaannnnhhhhhh....haaaaannnnnn.....nnnnnnaaaaaahhhhhh..!",rambha ne bistar ki chadar ko apne hatho me bhinch liya & apna sar upar uthake baal jhatakane lagi.vijayant ne is baar badi mushkil se khud ko jhadne se roka.uske lund pe bahu ki chut ki pakad qatilana ho gayi thi.rambha peechhe gand karte hue is baar rone lagi thi.uske jism ki masti ki shiddat is baar sari haden par kar gayi thi.
viajyant ne lund bahar khincha & apne thuk se jaldi se rambha ki gand ke chhed ko gila kiya.uska lund to pehle hi uske prcum & rambha ki chut ke nashile ras se gila tha.
"HAAAAAIIIIIIII..!",rambha ne chehre pe dard & masti ki milijuli lakiren khinch gayi.lund ka supada uski gand ke chhed ko bahut failata hua andar ghusa tha.vijayant ne bhi aah bharte hue uski kamar ko zor se pakda & & lund ko uski aadhi lambai tak ghusa diya.
hotel suite ke us kamre me sasur & bahu ki masti bhari aavaze gunjane lagi.dono ko kuchh hosh nahi tha siway iske ki 1 dusre ke jism unhe jannat ki sair kara rahe the.vijayant rambha ki gand maarne ke sath-2 uski chut me bhi ungli kar raha tha.rambha ki chut ki kasawat ne use pehle din se hi hairan kar rakha tha.is waqt bhi vo uski ungli ko apni jakad me kas chuki thi & uski gand uske lund ko.
kuchh der baad hi kamre me 2 aawaze gunji-1 bhari & 1 patli,lekin dono hi masti se bhari hui & dono hi ye elan kar rahi thi ki 2 pyar bhare jismo ne 1 dusre ke sath vo safar pura kar liya hai jise dunbiya chudai kehti hai & us manzil pe pahunch gaye hain jaha sirf khushi hi khushi hoti hai.
Pranav apne cabin me baitha tha.sham ke 8 baj rahe the lekin abhi tak vo fone nahi aaya tha jiska use intezar tha.Sonam ne uske cabin ka darwaza bahut halke se khol ke andar dekha.use ye aadmi ab bilkul bhi thik nahi lag raha tha & usne tay kar liya tha ki ab use uske bare me Vijayant Mehra ko bata dena chahiye.pehle to usne sare projects me kuchh na kuchh badlav kiye.aisa nahi tha ki Trust Group bina niyamo ko tode-marode har kaam imandari se karta tha lekin vijayant ka 1 hi usool tha ki grahak ke sath humesha imandari barto.uske zyada se zyada paise lene ki koshish karo magar use ye mehsus nahi hona chahiye ki vo thaga gaya hai.tabhi bazar me group ki saakh bani rahegi & grahako ki tadad bhi badhegi magar pranav to har project me bas fayda dekh raha tha & use company ki sakh ki koi chinta nahi thi.
"hello.",tabhi uska mobile baja & pranav ne jhat se fone kaan se lagay,".good evening Mr.Shah..ji..ok...haan..haan..",vo koi pata note kar raha tha,"..thik hai..market se right..ok.main 9 baje tak aapke paas pahunchta hu.",usne fone kata & sonam fauran darwaze se hat gayi..ye shah kaun tha?..ye us se milne kyu ja raha tha?
"sonam..",pranav bahar aaya,"..vo letters draft ho gaye na?"
"yes sir."
"good & kal ki meri appointments?"
"sir,aapki diary me likh diya hai..",usne 1 diary 1 briefcase me dali & uise band kiya to pranav ne use utha liya.
"thank you.chalo,der ho gayi hai.ab ghar jao.good night!"
"good night,sir!",sonam vaha se seedha apni kisi saheli se milne 1 nightclub me gayi jaha uski saheli ke boyfriend ka bada handsome dost bhi aaya hua tha.nightclub se nikalne ke baad hi vo us jawan mard ke sath uske ghar chali gayi thi & uske mazbut bazuo me apni jawani use chakhate hue vo vijayant ko fone karna bhul gayi.
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kramashah.......