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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--40

गतान्क से आगे.

विजयंत ने उसे इशारा किया तो वो घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ गयी & जब तक वो लेटटी विजयंत ने उसे वैसे ही झुका दिया.अब रंभा अपने घुटनो पे झुकी हुई थी & विजयंत बिस्तर पे बैठा उसकी कमर को थाम उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.

"दूसरी ये की अगर उसने खुद ही ये काम करने की बेवकूफी की है तो फिर अपना चेहरा दिखाने से डरता नही.वो तो गधे की तरह खिंसे निपोरटा मेरे सामने खड़ा हो समीर की सलामती का सौदा करता मुझसे.",रंभा की काली,छ्होटी सी पॅंटी उसकी गंद को पूरी तरह से ढँकने मे नाकामयाब थी & जब उसके ससुर ने अपनी दाढ़ी उनपे रगड़ी तो उसे गुदगुदी महसूस हुई & वो जोश & खुशी से मुस्कुरा दी.

"उउन्न्ञन्..तो आपको लगता है कोई और है इस सब के पीछे?",उसने गर्दन घुमा अपनी गंद चाटते ससुर को देखा.

"हूँ..यही तो पता लगाना है अब मुझे.",उसने उसकी गंद मे फाँसी पॅंटी को नीचे सरकाया & फिर उसकी गंद के छेद को चूमते हुए उसे जीभ की नोक से छेड़ा.

"ऊन्नह..नही..",रंभा ने गंद उसके मुँह से हटाते हुए करवट ली & अपनी कोहनियो पे उचक के ससुर को शोखी से मुस्कुराते हुए देखने लगी,"..वाहा नही."

"क्यू?",विजयंत ने मुस्कुराते हुए उसकी घुटनो पे अटकी पॅंटी को नीचे खींच उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया.

"दर्द होता है मुझे.",विजयंत ने उसकी टाँगे पकड़ उसे पलट दिया & इफ्र उसके पेट के नीचे हाथ लगा उसे पहले जैसी हालत मे ही कर दिया.

"मज़ा भी तो आता है जानेमन.",वो पीछे से आके उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से परेशान करने लगा.

"उउन्न्ह..हाईईईईईई..नही..!",रंभा आहें भरती गंद गोल-2 घूमने लगी.

"प्लीज़,डार्लिंग..",विजयंत ने उसकी कमर को पकड़ उसकी चूत मे ज़ोर-2 से जीभ चलाना शुरू कर दिया.रंभा कमर बेसब्री से हिलाते हुए ज़ोर-2 से आहे भरती झड़ने लगी,"..फिर पता नही कभी मौका मिले भी या नही."

"1 बात समझ लीजिए..",रंभा ससुर की बात सुन फ़ौरन पलटी.विजयंत बिस्तर से उतर फर्श पे खड़ा हो गया था.रंभा उसके सामने बैठ बिस्तर से टाँगे लटका के बैठ गयी & उसका अंडरवेर नीचे सरका दिया,"..समीर के वापस आने के बाद भी मुझे आपका साथ ऐसे ही चाहिए.....उउम्म्म्ममम..!",उसने ससुर के लंड को पकड़ उसे मुँह मे भर लिया.उसके सख़्त एहसास,मदमाती खुश्बू & नशीले स्वाद की खुशी से उसने आँखे बंद कर ली & उसे शिद्दत के साथ चूसने लगी.

"लेकिन रंभा?",विजयंत लंड चुस्ती रंभा के बाल सहला रहा था.

"लेकिन-वेकीन कुच्छ नही..",रंभा ने लंड मुँह से निकाला & उसके आंडो को दबाते हुए लंड के आसपास की जगह को चूमने लगी,"..मैं अब आपकी चुदाई के बिना नही रह सकती.",विजयंत ने बाया घुटना बिस्तर पे जमा दिया था & रंभा ने भी बाई टांग पलंग पे रख ली थी.चूत की कसक उसे बहुत तडपा रही थी लेकिन लंड को भी वो जी भर के चूस लेना चाहती थी.वो विजयंत के लंड को जकड़े उसे चूस्ते हुए बेचैनी से अपनी कमर हिला रही थी & अपनी जंघे भी.उसकी चूत तो बस अब लंड के इंतेज़ार मे आँसुओ की धारा बहाए चली जा रही थी.

विजयंत ने नीचे नज़रे झुकाई,ना जाने कितनी लड़किया उसके बिस्तर की रौनक बनी थी लेकिन वो भी अब इस लड़की से दूर रहने की नही सोच पा रहा था.वो उसके बेटे की बीवी थी लेकिन अब वो उसके दिल मे भी 1 खास जगह बना चुकी थी.समीर की वापसी के बाद भी उसे ये रिश्ता बरकरार रखना ही होगा नही तो वो बेचैनी से मर जाएगा.उसने प्यार से रंभा का मुँह अपने लंड से लगा किया & उसे बिस्तर पे लेटने का इशारा किया.

जैसे ही वो बिस्तर पे आया रंभा ने उसे पलट के लिटा दिया & हँसती उसके जिस्म के दोनो तरफ घुटने जमाते हुए बैठ गयी & फिर दाया हाथ पीछे ले जाके लंड को थामा & उसपे बैठ गयी.

"ऊहह..!",लंड उसकी चूत को हमेशा की तरह फैला रहा था.अभी तक लंड घुसने पे उसे हल्का दर्द होता था.वो आँखे बंद कर मज़े से मुस्कुराती ससुर के सीने पे हाथ दबा के अपने नखुनो से उसके बालो को खरोंछती कमर हिला-2 के उस से चुदने लगी.

विजयंत के हाथ उसकी गंद की फांको को तौलने लगी तो वो आगे झुकी & उसके चौड़े सीने पे अपनी चूचिया टीका के उसके चेहरे & होंठो को चूमते हुए उस से चुदने लगी.

"ये रिश्ता तो अब मेरी जान के साथ ही जाएगा.",विजयंत की बात सुन रंभा ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया & बहुत तेज़ी से कमर हिलाने लगी.विजयंत उसकी गंद मसल्ते हुए लेटा था.वो समझ गया था कि रंभा मस्ती मे पागल हो गयी है.

"उउन्न्ञणन्..हााआअन्न्‍ननननननणणन्..!",रंभा ने होंठो को वियजयंत के लबो से जुदा किया & अपना सर उठाके बालो को झटकते हुए ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी & झाड़ गयी.विजयंत ने उसे पलटा & अपने नीचे ले उसकी चूत की आख़िरी गहराइयो मे उसकी कोख तक अपना लंड घुसाते हुए उसकी चुदाई शुरू कर दी.रंभा तो बस मस्ती मे उड़े जा रही थी.अभी वो खुमारी से निकली भी नही थी & विजयंत उसकी चूचियाँ चूस्ता ज़ोर के धक्के लगाता उसे फिर से उसी खुमारी मे वापस ले जा रहा था.

रंभा ने हाथ पीछे बिस्तर पे फैला दिए & अपना जिस्म कमान की तरह मोडते हुए अपना सीना उपर उचकाते हुए ससुर के मुँह मे और घुसाने की कोशिस की & बिस्तर की चादर को नोचते हुए अपनी टाँगे विजयंत की पिच्छली जाँघो पे फँसा के कमर उचकाते हुए उसके धक्को का जवाब देने लगी.

विजयंत ने बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे सरका दी & दाए हाथ से उसकी गंद की बाई फाँक को दबोचते हुए उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी चुदाई को आगे बढ़ाया.रंभा ने जिस्म के मज़े से बेचैन हो सुबक्ते हुए ससुर के बालो को खींचते हुए उसके चेहरे को पागलो की तरह चूमने लगी.

रंभा की चूत की कसक फिर से चरम पे पहुँच रही थी & उसने विजयंत के लंड को भी अपने सिकुड़ने-फैलने की हरकत से बेचैन कर दिया.रंभा 1 बार और झाड़ गयी थी.उसे पूरे जिस्म मे मस्ती की लहर दौड़ती महसूस हो रही थी & उसका दिल इतनी खुशी झेल नही पाया & उसके जज़्बात आँखो के रास्ते फूट पड़े.विजयंत ने उसके चेहरे को तब तक चूमा जब तक वो संभाल नही गयी उसके बाद वो घुटने पे हुआ & रंभा की दाई टांग को उठाके उसे उसकी बाई टांग के उपर कर दिया.

रंभा उसका इशारा समझते हुए घूम के बाई करवट पे हो गयी.विजयंत घुटनो पे बैठा थोड़ी देर तक हल्के धक्को से उसकी चुदाई करता रहा.रंभा नशे से बोझल पल्को से उसे देखते हुए होंठो से चूमने का इशारा करती रही..समीर लौटेगा तो उसे कभी-कभार इस हसीन एहसास का लुत्फ़ नसीब होगा..अफ..कैसे रहेगी वो इस मज़बूत,हसीन मर्द की क़ातिल चुदाई के बिना..उसने आँखे बंद कर उस ख़याल को ज़हन से दफ़ा किया & बेचैनी से अपनी चूचिया अपने हाथो से ही दबा दी.

विजयंत बिना लंड निकाले झुकता हुआ उसके पीछे करवट से लेट गया & उसके पेट को सहलाता उसकी गर्दन & दाए कंधे को चूमता चोदने लगा.रंभा ने सर पीछे घुमाया & उसके बालो को खींचते हुए उसे चूमने लगी..कितना नशीला एहसास था ये..उसकी जीभ से खेलने का..लेकिन पता नही आज की रात के बाद फिर कब मौका मिले..इस ख़याल से उसका जिस्म फिर से मस्ती के उस एहसास को फिर से पाने के लिए मचल उठा.

"आन्न्न्नह......ऊहह...डॅड.....हाआंन्‍णणन्..!",रंभा अब चीख रही थी,विजयंत उसकी चूत के दाने को रगड़ते हुए धक्के लगा रहा था.रंभा का बेचैन जिस्म उसकी गिरफ़्त मे कसमसा रहा था & उसकी चूत फिर से उसके लंड को जकड़ने लगी थी.रंभा से अब ये मज़ा बर्दाश्त नही हुआ & उसने विजयंत के अपने चूत के दाने को रगड़ते दाए हाथ की कलाई को पकड़ लिया & सुबक्ते हुए फिर से झाड़ गयी.

रंभा अपनी साँसे संभाल ही रही थी की विजयंत ने करवट लेते हुए उसे बिस्तरा पे पेट के बल कर दिया & खुद उसके उपर चढ़ गया & हाथ नीचे घुसा उसकी कोमल छातियो को दबाते हुए चोदने लगा.रंभा तो मस्ती & थकान मे चूर हो गयी थी & बस बिस्तर पे बेचैनी से सर हिलाते हुए आहें भरते हुए उसके लंड का लुत्फ़ उठा रही थी.

विजयंत उसकी पीठ & कंधो को चूम रहा था.बहू का रेशमी जिस्म उसे अपना दीवाना बना चुका था.उसका दिल उसकी चुदाई से भरता ही नही था.ऐसे परेशानी भरे माहौल मे भी उसके जैसा पक्का कारोबारी रंभा के हसीन बदन के साथ का कोई मौका भी नही छ्चोड़ना चाहता था.चंद दिनो की चुदाई मे ही रंभा का जिस्म विजयंत के होंठो के निशानो से भर गया था जिन्हे देख वो खुद भी मस्त होती थी & उसका ससुर भी.

विजयंत उसकी मुलायम गर्दन को चूम के उठा & घुटनो पे हो उसकी कमर थाम उसकी गंद को भी उठा लिया.रंभा बिस्तर मे मुँह छुपे अपनी कोहनियो & घुटनो पे झुकी उसकी चुदाई से मस्त होती रही.बिस्तर की चादर अब पूरी तरह से सलवटो से भर चुकी थी.इस पोज़िशन मे लंड फिर से उसकी कोख पे चोट करने लगा & वो फिर से मस्ती भरी आवाज़ें निकलती कमर आगे-पीछे कर विजयंत की ताल से ताल मिलाने लगी.

"ऊन्न्न्नह.....आआन्न्न्नह....हाआअन्न्‍नणणन्.....न्‍न्‍नणन्नाआआहह..!",रंभा ने बिस्तर की चादर को अपने हाथो मे भींच लिया & अपना सर उपर उठाके बाल झटकने लगी.विजयंत ने इस बार बड़ी मुश्किल से खुद को झड़ने से रोका.उसके लंड पे बहू की चूत की पकड़ क़ातिलाना हो गयी थी.रंभा पीछे गंद करते हुए इस बार रोने लगी थी.उसके जिस्म की मस्ती की शिद्दत इस बार सारी हदें पर कर गयी थी.

वियजयंत ने लंड बाहर खींचा & अपने थूक से जल्दी से रंभा की गंद के छेद को गीला किया.उसका लंड तो पहले ही उसके प्रकूं & रंभा की चूत के नशीले रस से गीला था.

"हाआऐययईईईईई..!",रंभा ने चेहरे पे दर्द & मस्ती की मिलीजुली लकीरें खींच गयी.लंड का सूपड़ा उसकी गंद के छेद को बहुत फैलाता हुआ अंदर घुसा था.विजयंत ने भी आह भरते हुए उसकी कमर को ज़ोर से पकड़ा & & लंड को उसकी आधी लंबाई तक घुसा दिया.

होटेल सूयीट के उस कमरे मे ससुर & बहू की मस्ती भरी आवाज़े गूंजने लगी.दोनो को कुच्छ होश नही था सिवाय इसके की 1 दूसरे के जिस्म उन्हे जन्नत की सैर करा रहे थे.विजयंत रंभा की गंद मारने के साथ-2 उसकी चूत मे भी उंगली कर रहा था.रंभा की चूत की कसावट ने उसे पहले दिन से ही हैरान कर रखा था.इस वक़्त भी वो उसकी उंगली को अपनी जाकड़ मे कस चुकी थी & उसकी गंद उसके लंड को.

कुच्छ देर बाद ही कमरे मे 2 आवाज़े गूँजी-1 भारी & 1 पतली,लेकिन दोनो ही मस्ती से भरी हुई & दोनो ही ये एलान कर रही थी की 2 प्यार भरे जिस्मो ने 1 दूसरे के साथ वो सफ़र पूरा कर लिया है जिसे दुनिया चुदाई कहती है & उस मंज़िल पे पहुँच गये हैं जहा सिर्फ़ खुशी ही खुशी होती है.

प्रणव अपने कॅबिन मे बैठा था.शाम के 8 बज रहे थे लेकिन अभी तक वो फोन नही आया था जिसका उसे इंतेज़ार था.सोनम ने उसके कॅबिन का दरवाज़ा बहुत हल्के से खोल के अंदर देखा.उसे ये आदमी अब बिल्कुल भी ठीक नही लग रहा था & उसने तय कर लिया था कि अब उसे उसके बारे मे विजयंत मेहरा को बता देना चाहिए.पहले तो उसने सारे प्रॉजेक्ट्स मे कुच्छ ना कुच्छ बदलाव किए.ऐसा नही था कि ट्रस्ट ग्रूप बिना नियमो को तोड़े-मरोड़े हर काम ईमानदारी से करता था लेकिन विजयंत का 1 ही उसूल था कि ग्राहक के साथ हमेशा ईमानदारी बर्तो.उसके ज़्यादा से ज़्यादा पैसे लेने की कोशिश करो मगर उसे ये महसूस नही होना चाहिए कि वो ठगा गया है.तभी बाज़ार मे ग्रूप की साख बनी रहेगी & ग्राहको की तादाद भी बढ़ेगी मगर प्रणव तो हर प्रॉजेक्ट मे बस फ़ायदा देख रहा था & उसे कंपनी की साख की कोई चिंता नही थी.

"हेलो.",तभी उसका मोबाइल बजा & प्रणव ने झट से फोन कान से लगाया,".गुड ईव्निंग मिस्टर.शाह..जी..ओके...हां..हां..",वो कोई पता नोट कर रहा था,"..ठीक है..मार्केट से राइट..ओक.मैं 9 बजे तक आपके पास पहुँचता हू.",उसने फोन काटा & सोनम फ़ौरन दरवाज़े से हट गयी..ये शाह कौन था?..ये उस से मिलने क्यू जा रहा था?

"सोनम..",प्रणव बाहर आया,"..वो लेटर्स ड्राफ्ट हो गये ना?"

"यस सर."

"गुड & कल की मेरी अपायंट्मेंट्स?"

"सर,आपकी डाइयरी मे लिख दिया है..",उसने 1 डाइयरी 1 ब्रीफकेस मे डाली & उसे बंद किया तो प्रणव ने उसे उठा लिया.

"थॅंक यू.चलो,देर हो गयी है.अब घर जाओ.गुड नाइट!"

"गुड नाइट,सर!",सोनम वाहा से सीधा अपनी किसी सहेली से मिलने 1 नाइटक्लब मे गयी जहा उसकी सहेली के बाय्फ्रेंड का बड़ा हॅंडसम दोस्त भी आया हुआ था.नाइटक्लब से निकलने के बाद ही वो उस जवान मर्द के साथ उसके घर चली गयी थी & उसके मज़बूत बाजुओ मे अपनी जवानी उसे चखाते हुए वो विजयंत को फोन करना भूल गयी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--40

gataank se aage.

vijayant ne use ishara kiya to vo ghutno ke bal bistar pe chadh gayi & jab tak vo letati vijayant ne use vaise hi jhuka diya.ab rambha apne ghutno pe jhuki hui thi & vijayant bistar pe baitha uski kamar ko tham uski panty ke upar se hi uski gand ki fanko ko chumne laga.

"dusri ye ki agar usne khud hi ye kaam karne ki bevkufi ki hai to fir apna chehra dikhane se darta nahi.vo to gadhe ki tarah khinse niporta mere samne khada ho sameer ki salamati ka sauda karta mujhse.",rambha ki kali,chhoti si panty uski gand ko puri tarah se dhankne me nakamyab thi & jab uske sasur ne apni dadhi unpe ragadi to use gudgudi mehsus hui & vo josh & khushi se muskura di.

"uunnnn..to aapko lagta hai koi aur hai is sab ke peechhe?",usne gardan ghuma apni gand chaatate sasur ko dekha.

"hun..yehi to pata lagana hai ab mujhe.",usne uski gand me phansi panty ko neeche sarkaya & fir uski gand ke chhed ko chumte hue use jibh ki nok se chheda.

"oonnhhhhh..nahi..",rambha ne gand uske munh se hatate hue karwat li & apni kohniyo pe uchak ke sasur ko shokhi se muskurate hue dekhne lagi,"..vaha nahi."

"kyu?",vijayant ne muskurate hue uski ghutno pe atki panty ko neeche khinch use puri tarah se nanag kar diya.

"dard hota hai mujhe.",vijayant ne uski tange pakad use palat diya & ifr uske pet ke neeche hath laga use pehle jaisi halat me hi kar diya.

"maza bhi to aata hai janeman.",vo peechhe se aake uski chut ko apni zuban se pareshan akrne laga.

"uunnhhhh..haiiiiiii..nahi..!",rambha aahen bharti gand gol-2 ghumane lagi.

"please,darling..",vijayant ne uski kamar ko pakad uski chut me zor-2 se jibh chalana shuru kar diya.rambha kamar besabri se hilate hue zor-2 se aahe bharti jhadne lagi,"..fir pata nahi kabhi mauka mile bhi ya nahi."

"1 baat samajh lijiye..",rambha sasur ki baat sun fauran palti.vijayant bistar se utar farsh pe khada ho gaya tha.rambha uske samne baith bistar se tange latka ke baith gayi & uska underwear neeche sarka diya,"..sameer ke vapas aane ke baad bhi mujhe aapka satha aise hi chahiye.....uummmmmm..!",usne sasur ke lund ko pakad use munh me bhar liya.uske sakht ehsas,madmati khushbu & nashile swad ki khushi se usne aankhe band kar li & use shiddat ke sath chusne lagi.

"lekin rambha?",vijayant lund chusti rambha ke baal sehla raha tha.

"lekin-vekin kuchh nahi..",rambha ne lund munh se nikala & uske ando ko dabate hue lund ke aaspaas ki jagah ko chumne lagi,"..main ab aapki chudai ke bina nahi reh sakti.",vijayant ne baya ghutna bistar pe jama diya tha & rambha ne bhi bayi tang palang pe rakh li thi.chut ki kasak use bahut tadpa rahi thi lekin lund ko bhi vo ji bhar ke chus lena chahti thi.vo vijayant ke lund ko jakde use chuste hue bechaini se apni kamar hila rahi thi & apni janghe bhi.uski chut to bas ab lund ke intezar me aansuo ki dhara bahaye chali ja rahi thi.

vijayant ne neeche nazre jhukayi,na jane kitni ladkiya uske bistar ki raunak bani thi lekin vo bhi ab is ladki se door rehne ki nahi soch pa raha tha.vo uske bete ki biwi thi lekin ab vo uske dil me bhi 1 khas jagah bana chuki thi.sameer ki vapasi ke baad bhi use ye rishta barkara rakhna hi hoga nahi to vo bechaini se mar jayega.usne pyar se rambha ka munh apne lund se laga kiya & use bistar pe letne ka ishara kiya.

jaise hi vo bistar pe aaya rambha ne use palat ke lita diya & hansti uske jism ke dono taraf ghutne jamate hue baith gayi & fir daya hath peechhe le jake lund ko thama & uspe baith gayi.

"oohhhhhhh..!",lund uski chut ko humesha ki tarah faila raha tha.abhi tak lund ghusne pe use halka dard hota tha.vo aankhe band kar maze se muskurati sasur ke seene pe hath dabake apne nakhuno se uske ballo ko kharonchti kamar hila-2 ke us se chudne lagi.

vijayant ke hath uski gand ki fanko ko taulne lagi to vo aage jhuki & uske chaude seene pe apni choochiya tika ke uske chehre & hotho ko chumte hue us se chudne lagi.

"ye rishta to ab meri jaan ke sath hi jayega.",vijayant ki baat sun rambha ne uske hotho ko apne hotho se band kar diya & bahut tezi se kamar hilane lagi.vijayant uski gand masalte hue leta tha.vo samajh gaya tha ki rambha masti me pagal ho gayi hai.

"uunnnnn..haaaaaaannnnnnnnnnn..!",rambha ne hotho ko viajyant ke labo se juda kiya & apna sar utyhake baalo ko jhatakte hue zor-2 se kamar hilane lagi & jhad gayi.vijayant ne sue palta & apne neeche le uski chut ki aakhiri gehraiyo me uski kokh tak apna lund ghusate hue uski chudai shuru kar di.rambha to bas masti me ude ja rahi thi.abhi vo khumari se nilki bhi nahi thi & vijayant uski chhatiyan chusta zor ke dhakke lagata use fir se usi khumari me vapas le ja raha tha.

rambha ne hath peechhe bsitar pe faila diye & apna jism kaman ki tarah modte hue apna seena upar uchkate hue sasur ke munh me aur ghusane ki koshsih ki & bistar ki chadar ko nochte hue apni tange vijayant ki pichhli jangho pe fansa ke kamar uchakte hue uske dhakko ka jawab dene lagi.

vijayant ne bayi banh uski gardan ke neeche sarka di & daye hath se uski gand ki bayi fank ko dabochte hue uske chehre ko chumte hue uski chudai ko aage badhaya.rambha ne jism ke maze se bechain ho subakte hue sasur ke baalo ko khinchte hue uske chehre ko pagalo ki tarah chumne lagi.

rambha ki chut ki kasak fir se charam pe pahunch rahi thi & usne vijayant ke lund ko bhi apne sikudne-failne ki harkat se bechain kar diya.rambha 1 baar aur jhad gayi thi.use pure jism me masti ki lehar daudti mehsus ho rahi thi & uska dil itni khushi jhel nahi paya & uske jazbat aankho ke raste phoot pade.vijayant ne uske chhere ko tab tak chuma jab tak vo sambhal nahi gayi uske baad vo ghutne pe hua & rambha ki dayi tang ko uthake use uski bayi tang ke upar kar diya.

rambha uska isharta samajhte hue ghum ke bayi karwat pe ho gayi.vijayant ghutno pe baitha thodi der tak halke dhakko se uski chudai karta raha.rambha nashe se bojhal palko se use dekhte hue hotho se chumne ka ishara karti rahi..sameer lautega to use kabhi-kabhar is haseen ehsas ka lutf nasib hoga..uff..kaise rahegi vo is mazbut,haseen mard ki qatil chudai ke bina..usne aankhe band kar us khayal ko zehan se dafa kiya & bechaini se apni choochiya apne hatho se hi daba di.

vijayant bina lund nikale jhukta hua uske peechhe karwat se let gaya & uske pet ko sehlata uski gardan & daye kandhe ko chumta chodne laga.rambha ne sar peechhe ghumaya & uske baalo ko khinchte hue use chumne lagi..kitna nashila ehsas tha ye..uski jibh se khelne ka..lekin pata nahi aaj ki rata ke baad fir kab mauka mile..is khayal se uska jism fir se masti ke us ehsas ko fir se pane ke liye machal utha.

"aannnnhhhh......oohhhhh...dad.....haaaannnnn..!",rambha ab chikh rahi thi,vijayant uski chut ke dane ko ragadte hue dhakke laga raha tha.rambha ka bechain jism uski giraft me kasmasa raha tha & uski chut fir se uske lund ko jakadne lagi thi.rambha se ab ye maza bardasht nahi hua & usne vijayant ke apne chut ke dane ko ragadte daye hath ki kalai ko pakad liya & subakte hue fir se jhad gayi.

rambha apni sane sambhal hi rahi thi ki vijayant ne karwat lete hue use bistra pe pet ke bal kar diya & khud uske upar chad gaya & hath neeche ghusa uski komal chhatiyo ko dabate hue chodne laga.rambha to masti & thakan me chur ho gayi thi & bas bistar pe bechaini se sar hilate hue aahen bharte hue uske lund ka lutf utha rahi thi.

vijayant uski pith & kandho ko chum raha tha.bahu ka reshmi jism use apna deewana bana chuka tha.uska dil uski chudai se bharta hi nahi tha.aise pareshani bhare mahaul me bhi uske jaisa pakka karobari rambha ke haseen badan ke sath ka koi mauka bhi nahi chhodna chahta tha.chand dino ki chudai me hi rambha ka jism vijayant ke hotho ke nishano se bhar gaya tha jinhe dekh vo khud bhi mast hoti thi & uska sasur bhi.

vijayant uski mulayam gardan ko chum ke utha & ghutno pe ho uski kamar tham uski gand ko bhi utha liya.rambha bistar me munh chhupaye apni kohniyo & ghutno pe jhuki uski chudai se mast hoti rahi.bistar ki chadar ab puri tarah se salwato se bhar chuki thi.is position me lund fir se uski kokh pe chot karne laga & vo fir se masti bhari aavazen nikalti kamar aage-peechhe kar vijayant ki taal se taal milane lagi.

"oonnnnhhhhhh.....aaaannnnhhhhhh....haaaaannnnnn.....nnnnnnaaaaaahhhhhh..!",rambha ne bistar ki chadar ko apne hatho me bhinch liya & apna sar upar uthake baal jhatakane lagi.vijayant ne is baar badi mushkil se khud ko jhadne se roka.uske lund pe bahu ki chut ki pakad qatilana ho gayi thi.rambha peechhe gand karte hue is baar rone lagi thi.uske jism ki masti ki shiddat is baar sari haden par kar gayi thi.

viajyant ne lund bahar khincha & apne thuk se jaldi se rambha ki gand ke chhed ko gila kiya.uska lund to pehle hi uske prcum & rambha ki chut ke nashile ras se gila tha.

"HAAAAAIIIIIIII..!",rambha ne chehre pe dard & masti ki milijuli lakiren khinch gayi.lund ka supada uski gand ke chhed ko bahut failata hua andar ghusa tha.vijayant ne bhi aah bharte hue uski kamar ko zor se pakda & & lund ko uski aadhi lambai tak ghusa diya.

hotel suite ke us kamre me sasur & bahu ki masti bhari aavaze gunjane lagi.dono ko kuchh hosh nahi tha siway iske ki 1 dusre ke jism unhe jannat ki sair kara rahe the.vijayant rambha ki gand maarne ke sath-2 uski chut me bhi ungli kar raha tha.rambha ki chut ki kasawat ne use pehle din se hi hairan kar rakha tha.is waqt bhi vo uski ungli ko apni jakad me kas chuki thi & uski gand uske lund ko.

kuchh der baad hi kamre me 2 aawaze gunji-1 bhari & 1 patli,lekin dono hi masti se bhari hui & dono hi ye elan kar rahi thi ki 2 pyar bhare jismo ne 1 dusre ke sath vo safar pura kar liya hai jise dunbiya chudai kehti hai & us manzil pe pahunch gaye hain jaha sirf khushi hi khushi hoti hai.

Pranav apne cabin me baitha tha.sham ke 8 baj rahe the lekin abhi tak vo fone nahi aaya tha jiska use intezar tha.Sonam ne uske cabin ka darwaza bahut halke se khol ke andar dekha.use ye aadmi ab bilkul bhi thik nahi lag raha tha & usne tay kar liya tha ki ab use uske bare me Vijayant Mehra ko bata dena chahiye.pehle to usne sare projects me kuchh na kuchh badlav kiye.aisa nahi tha ki Trust Group bina niyamo ko tode-marode har kaam imandari se karta tha lekin vijayant ka 1 hi usool tha ki grahak ke sath humesha imandari barto.uske zyada se zyada paise lene ki koshish karo magar use ye mehsus nahi hona chahiye ki vo thaga gaya hai.tabhi bazar me group ki saakh bani rahegi & grahako ki tadad bhi badhegi magar pranav to har project me bas fayda dekh raha tha & use company ki sakh ki koi chinta nahi thi.

"hello.",tabhi uska mobile baja & pranav ne jhat se fone kaan se lagay,".good evening Mr.Shah..ji..ok...haan..haan..",vo koi pata note kar raha tha,"..thik hai..market se right..ok.main 9 baje tak aapke paas pahunchta hu.",usne fone kata & sonam fauran darwaze se hat gayi..ye shah kaun tha?..ye us se milne kyu ja raha tha?

"sonam..",pranav bahar aaya,"..vo letters draft ho gaye na?"

"yes sir."

"good & kal ki meri appointments?"

"sir,aapki diary me likh diya hai..",usne 1 diary 1 briefcase me dali & uise band kiya to pranav ne use utha liya.

"thank you.chalo,der ho gayi hai.ab ghar jao.good night!"

"good night,sir!",sonam vaha se seedha apni kisi saheli se milne 1 nightclub me gayi jaha uski saheli ke boyfriend ka bada handsome dost bhi aaya hua tha.nightclub se nikalne ke baad hi vo us jawan mard ke sath uske ghar chali gayi thi & uske mazbut bazuo me apni jawani use chakhate hue vo vijayant ko fone karna bhul gayi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--41

गतान्क से आगे.

"वेलकम,मिस्टर.प्रणव.",प्रणव जब उस शानदार बंगल पे पहुँचा जोकि उसके घर से ज़्यादा दूर नही था तो 1 नौकर उसे बुंगले के सजे हुए हॉल मे ले गया जहा उसने पहली बार महादेव शाह को देखा.शाह 50-55 बरस का शख्स था जिसके सारे बाल सफेद हो चुके थे.देखने मे वो भले ही बूढ़ा लगता हो लेकिन 6 फ्ट का वो मर्द बिल्कुल चुस्त जिस्म का मालिक था.

"हेलो,मिस्टर.शाह."

"आइए..",वो उसे हॉल के कोने मे बने बार पे ले गया,"..क्या लेंगे?"

"स्कॉच."

"ओके.",उसने उम्दा स्कॉच का 1 पेग बनाके अपने मेहमान को दिया & खुद के लिए भी 1 पेग बनाया.

"तो मिस्टर.शाह आप किस सिलसिले मे मुझसे मिलना चाहते थे?"

"कम ऑन,प्रणव जी.",शाह ने शराब का 1 घूँट भरा & मुस्कुराया,"..अब आप जैसे दिमाग़दार शख्स से मुझे ऐसे सवाल की उम्मीद नही थी.",प्रणव हंस दिया.

"मिस्टर.शाह,जब डॅड ने आपका ऑफर ठुकरा दिया था तो मैं क्या कर सकता हू!"

"प्रणव जी,मैं जब 30 बरस का भी नही हुआ था तो ये मुल्क छ्चोड़ त्रिनिडाड चला गया था & 30 बार्स का होते-2 अपने गन्ने के फार्म्स & रूम डिसटिल्लरी का मालिक था.उसके बाद मैने कयि मुल्को मे कयि धंधे कर ये दौलत इकट्ठा की.अब मैं कोई कारोबार नही करना चाहता & उम्र के इस आख़िरी दौर मे अपने मुल्क वापस आ यहा के बिज़्नेसस मे अपना पैसा लगाना चाहता हू.."

"..हर व्यापारी को अपने बिज़्नेस को,चाहे बड़ा हो या छ्होटा,आगे बढ़ाने की ख्वाहिश होती है & उसके लिए पैसे की ज़रूरत होती है.बस इसीलिए मैं आपके ससुर के पास गया था मगर उन्होने मेरा ऑफर ठुकरा दिया.पता नही उन्हे मुझे अपने ग्रूप के चंद शेर्स देने मे क्या ऐतराज़ था?..",शाह थोड़ी देर खामोशी से पीता रहा.

"खैर..प्रणव..आइ होप यू डॉन'ट माइंड इफ़ आइ कॉल यू ओन्ली प्रणव."

"नोट अट ऑल."

"प्रणव,मुझे तुम मे अपना अक्स दिखता है.",शाह की आँखो मे उसकी कही बात मे झलकता विश्वास दिख रहा था,"..मुझे लगता है कि तुम इस सुनहरे मौके का फ़ायदा उठा सकते हो."

"वो ठीक है,मिस्टर.शाह लेकिन मैं कोई फ़ैसला कैसे ले सकता हू?..मैं कंपनी का मालिक नही हू."

"नही.पर शेर्स हैं तुम्हारे पास & ससुर की दी हुई पवर ऑफ अटर्नी भी."

"मगर.."

"मगर क्या?..देखो,प्रणव ये सुनेहरी मौका है & इसमे तुम्हारा भी बहुत फ़ायदा हो सकता है..तुम मेरी बात समझ रहे हो.",शाह का बोलने का लहज़ा थोड़ा बदल गया था.

"ज़रा तफ़सील से कहिए."

"देखो,प्रणव.इस कंपनी का मालिक विजयंत है & उसके बाद कौन?"

"समीर.",प्रणव की आवज़ का ठंडापन शाह से च्छूपा नही.

"& तुम..बस वही चंद शेर्स..कहने को बोर्ड पे हो..हर फ़ैसले के वक़्त तुम्हारी मौजूदगी ज़रूरी है..लेकिन क्या सचमुच तुम्हारी राई के बिना कोई भी फ़ैसला रुकता है नही..क्यूकी फ़ैसला तो केवल मालिक ही लेता है..ये सब तो बस फॉरमॅलिटीस हैं.",प्रणव को उसकी बातें सच लग रही थी..वो भी तो बस 1 नौकर ही था..अपने ससुर का.

"..ये मौका है प्रणव की तुम मालिक बन जाओ.मैं ये नही कह रहा कि विजयंत को हटा दो लेकिन मुझे लगता है की अब उसका वक़्त पूरा हो गया है.उसकी सोच अब पहले जैसी पैनी नही रही ही & उपर से ये समीर का चक्कर.वक़्त रहते अगर किसी जवान,चुस्त शख्स ने ग्रूप की बागडोर नही संभाली तो सब बिखर सकता है & इतने दिन हो गये..मुझे नही लगता समीर वापस आने वाला है...तो 1 तरह से तो तुम ग्रूप की भलाई के लिए ये सब कर रहे हो."

"हूँ..लेकिन फिर भी मुझे क्या फ़ायदा होगा इतना बड़ा रिस्क उठाने से?"

"हूँ..",शाह ने अपनी ड्रिंक ख़त्म की & उसकी पीठ पे धौल जमाया,"..अब की तुमने समझदारी वाली बात!..मैं दुनिया मे काई जगह घुमा हू & खास कर के वो जगहें जिन्हे टॅक्स हेवन्स कहा जाता है.",वो हंसा तो प्रणव भी मुस्कुरा दिया.टॅक्स हेवन्स-ऐसे मुल्क जोकि बस 1 छ्होटा सा जज़ीर-आइलॅंड रहता है & वाहा के टॅक्स के क़ानून बिल्कुल बकवास.थोड़े कागज़ी खेल खेल के आप अपना काला धन वाहा के बाँक्स मे महफूज़ रख सकते हैं.

"..केमन आइलॅंड्स के बॅंक मे तुम्हारे नाम से 1 रकम जमा कर दी जाएगी.बस तुम मेरे पैसे लेके मुझे ट्रस्ट के शेर्स दिलवा दो.",शाह उसके जवाब का इंतेज़ार करता उसे देख रहा था & प्रणव सर झुका के अपनी ड्रिंक पी रहा था.

कुच्छ देर बाद उसने अपना सर उठाया & ग्लास बार पे रखा.उसकी आँखो के भाव को देख के शाह समझ नही पा रहा था की उसकी बात उसे पसंद आई या नही.

"दट'स इट!",कुच्छ देर बाद ही प्रणव के चेहरे का भाव बदला & मुस्कुराते हुए उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया था.शाह ने उसे खुशी से थामा & हिलाने लगा.

"उस शख्स को यहा पे 1 निशान था.",रंभा विजयंत मेहरा के सीने पे अपनी छातियाँ दबाए,उसकी पेड़ के तनो जैसी जाँघो पे अपनी मुलायम,भारी जंघे टिकाए लेटी उसके बाए गाल पे दाए हाथ की उंगली फिरा रही थी.

"तुमने ये बात रज़ा को क्यू नही बताई?",विजयंत ने उसके बालो को उसके कान के पीछे किया & उसकी उंगली उसके गोरे गालो पे घूमने लगी.बहू की चूत के नीचे दबा उसका लंड भी धीरे-2 अपना सर उठा रहा था.

"मेरे दिमाग़ से ये बात बिल्कुल उतर गयी थी.अभी अचानक याद आई.",पिच्छली शाम ही विजयंत के अपनी खफा बहू को मनाने के बाद ही दोनो चुदाई मे जुट गये थे.विजयंत बस 1 बार झाड़ा था लेकिन रंभा को तो होश भी नही था कि वो कितनी बार झड़ी & कब सो गयी.कुच्छ देर पहले उसकी नींद खुली तो उसने देखा की घड़ी मे 3 बज रहे हैं.ससुर के नंगे,मज़बूत मर्दाना जिस्म को जैसे ही उसने छेड़ना शुरू किया तो वो भी फ़ौरन जाग गया.

"1 आइडिया आया है.",रंभा के दिमाग़ मे बिजली सी कौंधी & वो ससुर के सीने से उठ गयी.उसके घुटने ससुर के जिस्म के दोनो तरफ बिस्तर पे जम गये & जैसे ही विजयंत ने उसकी कमर को थामा वो उसका इशारा समझ उपर उठी & फिर उसके लंड पे चूत को झुकाने लगी,"..उउम्म्म्म..!",उसकी आँखे मस्ती मे बंद हो गयी.

"कैसा आइडिया?",विजयंत की आँखे भी लंड के बहू की कसी चूत से जकड़े जाने से मज़े मे मूंद गयी.

"ऊहह..",रंभा ने ससुर के सीने के बालो को मुत्ठियो मे भर हल्के से खींचा & मस्ती मे अपनी कमर हिलाने लगी,"..देखिए,आपने रज़ा को कह दिया है कि मैं डेवाले जा रही हू.आप ये बात लीक भी कर दीजिए..आन्न्न्नह..इतनी ज़ोर से नही..!",विजयत ने जोश मे उसकी गंद की फांको को बहुत ज़ोर से दबोच लिया था.

"मगर क्यू?",उसके हाथ बहू के पेट से उसकी चूचियो तक घूम रहे थे.वो बस अपनी उंगलियो के पोरो से उसके कड़े निपल्स को छुते हुए हाथ उपर-नीचे सरका रहा था.

"ताकि वो शख्स धोखा खा जाए & अगर उसका निशाना मैं हू तो वो यहा से डेवलाया चला जाए & मैं यही कही छुप के रहू..ऊन्नह....उउम्म्म्मम..!",विजयंत ने बहू की चूचियाँ पकड़ उसे नीचे खींचा & फिर उसकी कमर को बाहो मे जाकड़ उसकी गर्दन चूमते हुए नीचे से कमर उच्छाल-2 के उसकी चुदाई करने लगा.

"आन्न्न्नह..निशान पड़ जाएगा,दाद..ऊव्ववववव..प्लीज़..नाआअहह..!",लंड के क़ातिल धक्को ने उसे बहुत मस्त कर दिया & वो ससुर के होंठो को अपनी गर्दन से जुदा करते हुए,उसकी जाकड़ से च्चटपटाते हुए उपर उठ गयी & चीख मारते हुए पीछे उसकी जाँघो पे गिर के झड़ने लगी.विजयंत ने लेटे-2 ही उसकी उसके लंड को कस्ति चूत मे से उसके बिल्कुल लाल हो चुके दाने को अपने बाए हाथ के अंगूठे से छेड़ा.रंभा के मस्ताने जज़्बात विजयंत की इस हरकत से उसके काबू मे ना रहे & उसकी आँखो से छलक पड़े.

"प्लान तो बढ़िया है मगर इसमे ख़तरा भी है.",वो जल्दी से उठा & अपनी बहू को अपनी टाँगो से उठाके बाहो मे भर लिया .रंभा उसके सीने के बालो मे मुँह च्छुपाए सिसक रही थी.विजयंत ने उसकी चूत मे लंड धंसाए हुए उसकी गंद को थामे हुए अपने घुटने मोड & उसे अपनी गोद मे ले लिया.

"आप ख़तरो से कब से डरने लगे?",संभालने के बाद रंभा ने नज़रे उपर की & अपने ससुर की आँखो मे झाँका.विजयंत को उन निगाहो मे सुकून के पीछे च्चिपी मस्ती & 1 चुनौती भी थी.

"मुझे ख़तरो से कब डर लगा है!",विजयंत ने उसके लंबे बालो को पीछे खींचा तो रंभा को थोड़ा दर्द हुआ लेकिन ससुर के इस तरह उसकी बात को दिल से लगाने से उसे थोड़ा मज़ा भी आया-वो मज़ा जो प्रेमी-प्रेमिका 1 दूसरे को छेड़ने मे पाते हैं,"..मुझे तुम्हारी फ़िक्र है बस.",रंभा ने सर पीछे झुकाया था तो उसकी गोरी गर्दन विजयंत के सामने चमक उठी थी & उसके बेसबरे होंठ उसी से चिपक गयी थी.

"थोड़ा ख़तरा तो उठाना ही पड़ेगा ना...आन्न्न्नह.नही..कहा ना दाग पड़ जाएगा!",रंभा ने ससुर के बाल उठा के उसकी गर्दन को शिद्दत से चूमते होंठो को अपनी गर्दन से अलग किया.विजयंत उसकी कमर & गंद को थामे ज़ोर-2 से धक्के लगा रहा था.

"प्लान तो ठीक लगता है.मैं डेवाले मे अपने आदमियो को चौकन्ना कर दूँगा & हो सकता है वो शख्स पकड़ा जाए.",रंभा ससुर के लंड की चुदाई से मस्त हो अपनी कमर हिला के उसके धक्को का जवाब दे रही थी & उसके बालो को पकड़े उसे पागलो की तरह चूम रही थी.विजयंत ने अब उसकी गंद की मोटी फांको को अपने बड़े-2 हाथो मे थाम लिया था & घुटनो पे बैठ ज़ोर-2 से लंड अंदर-बाहर कर रहा था.

"ऊवुयूयियैआइयैआइयीयीयियी......अभी तक कोई फोन नही आया ना?..आन्न्‍न्णनह....हान्न्न्नह..!",वो पीछे झुकी थी & विजयंत उसके निपल्स को दांतो से काट रहा था.

"नही.",विजयंत को भी अब समीर की चिंता हो रही थी.उसने दाए हाथ से रंभा की गंद थामे हुए बाए से उसकी दाई चूची को मसला & बाई चूची को मुँह मे भर चूसने लगा.ससुर की ज़ुबान की गुस्ताख हर्कतो ने रंभा की जिस्म मे बिजलियो की कयि लहरें दौड़ा दी & वो उसके सर को पकड़े च्चटपटाने लगी.दोनो जिस्म 1 दूसरे से चिपके 1 बार फिर मस्ती के आसमान मे घूमने लगे थे.रंभा ने दोनो बाहें विजयंत के कंधो पे टिका के उसके सर को अपनी पकड़ मे जाकड़ लिया था & अपना सर उसके सर के उपर टिकाके पागलो की तरह चीख रही थी.उसका जिस्म झटके खा रहा था & नीचे विजयंत उसकी चूचियो को मुँह मे भरता आहें भर रहा था.दोनो 1 बार फिर 1 साथ झाड़ गये थे.

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वो शख्स बहुत बौखलाया हुआ था.उसने सवेरे ही अपना होटेल छ्चोड़ दिया था & अपनी कार भी.जब से रंभा की तलाश ख़त्म हुई थी सब कुच्छ गड़बड़ हो रहा था.पहले समीर गायब हुआ & विजयंत रंभा के साथ चिपक गया.अब तो दोनो के बीच 1 नाजायज़ रिश्ता भी जुड़ गया था & दोनो का अलग होना और मुश्किल नज़र आ रहा था.उपर से सवेरे रंभा ने उसकी शक्ल भी देख ली थी.

क्लेवर्त की पहाड़ियो मे काई होटेल्स & लॉड्जस थी & ऐसा नही था की सभी बहुत चलती थी.उसने पहले अपने गाल के निशान के उपर 1 बॅंड-एड लगाया & अपनी कार को 1 पार्किंग मे छ्चोड़ क्लेवर्त शहर से थोड़ी दूरी पे 1 पहाड़ी पे बने1 छ्होटी सी लॉड्ज मे 1 कमरा ले लिया था.अब उसे 1 नयी सवारी चाहिए थी लेकिन कैसे ये उसकी समझ मे नही आ रहा था.

उसने सबसे पहले अपना हुलिया पूरा बदला.अभी तक वो कोट & पॅंट मे रहता था.उसने मार्केट जाके सबसे पहले कुच्छ जॅकेट्स,जीन्स & स्वेटर्स खरीदे & 1 जॅकेट & जीन्स 1 पब्लिक टाय्लेट मे बदली.उसके बाद उसने पहले उस बंगल का रुख़ किया जहा सवेरे सब गड़बड़ हुआ था.वाहा अभी भी पोलीस थी.अब उसे ये पता करना था की आख़िर रंभा गयी कहा.

उस पूरे दिन उसने काई जुगाड़ किए लेकिन उसे ये नही पता चला की आख़िर विजयंत & रंभा गये कहा.जिस वक़्त विजयत्न & रंभा 1 दूसरे के आगोश मे समाए चुदाई का लुत्फ़ उठा रहे थे,वो शख्स बेचैनी से करवटें बदल रहा था & जिस वक़्त रंभा ने ससुर को अपने प्लान के बारे मे बताया,उसी वक़्त उसकी आँख लगी इस बात से बेख़बर की उसका शिकार अब उसी के लिए जाल बिच्छा रहा था.

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"ओह..प्रणव डार्लिंग..ऊव्ववव..",शिप्रा बिस्तर पे बुरी तरह कसमसा रही थी.उसके चेहरे पे दर्द & मस्ती से भरी मुस्कान खेल रही थी.उसकी टाँगो के बीच उसका प्यारा पति अपने घुटनो पे बैठा उसके उसकी दाई तंग को थामे उसके पैर के अंगूठे को मुँह मे चूस्ते & बीच-2 मे काटते हुए,उसे चोद रहा था.

"क्या बात है जान?..आन्न्‍न्णनह..आज तो तुम बहुत जोश मे हो..हााआ....!",शिप्रा ने अपने बाए घुटने पे जमे प्रणव के हाथ की उंगलियो मे अपने बाए हाथ की उंगलिया फँसाई तो प्रणव उसकी टांग के गुदाज़ हिस्से को चूसने लगा.

"तुम्हे देख को तो हमेशा ही मेरा ये हाल हो जाता है,डार्लिंग!",प्रणव के आंडो मे अब मीठा दर्द हो रहा था.बहुत देर से वो खुद पे काबू रखे हुए थे.उसने उसकी टांग छ्चोड़ी & शिप्रा के उपर लेट गया & उसकी गर्दन के नीचे बाई बाँह लगा के उसे आगोश मे भर लिया,"..1 बात पुच्छू?"

"पूछो ना जान.",शिप्रा ने पति के चेहरे को हाथो मे भर चूम लिया.

"तुम्हारे पास कंपनी के शेर्स हैं & तुम भी ग्रूप की मालकिन हो,अगर मैं कोई फ़ैसला लू तो क्या तुम मेरा साथ दोगि?",प्रणव के धक्के तेज़ ओ गये थे.वो अब जल्द से जल्द झड़ना चाहता था.शिप्रा की टाँगे उसकी पिच्छली जाँघो पे जम गयी थी & वो नीचे से कमर उचकाने लगी थी.

"क्या बात है प्रणव?",उसने उचक के उसे चूमा तो प्रणव ने भी अपनी ज़ुबान उसकी ज़ुबान से लड़ा दी.

"वक़्त आने पे बताउन्गा.तुम्हे मुझपे यकीन तो है ना,शिप्रा की मैं बस कंपनी के भले के लिए फ़ैसला लूँगा?",पति-पत्नी दोनो 1 दूसरे से बेचैनी से गुत्थमगुत्था थे.

"ओह..हां प्रणव,पूरा भरोसा है डार्लिंग....आन्न्‍न्णनह..!"

"थॅंक्स,जान!..य्ाआअहह..!",दोनो 1 दूसरे को चूम रहे थे & दोनो के बदन झटके खा रहे थे.शिप्रा झाड़ रही थी & प्रणव अपना वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ रहा था.

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विजयंत ने अगली सुबह ये खबर अपने मीडीया के सोर्सस के ज़रिए लीक करा दी कि रंभा वापस डेवाले जा रही है.एरपोर्ट पे तेज़ी से चेक इन काउंटर की ओर जाती रंभा के पीछे उस से सवाल पूछते रिपोर्टर्स की तस्वीरे उस शख्स ने टीवी पे देखी & मुस्कुरा दिया.

उधर रंभा ने टिकेट लिया था पंचमहल & फिर वाहा से डेवाले का लेकिन उसने पंचमहल से आगे की फ्लाइट नही ली.उसकी जगह बलबीर मोहन की कंपनी की 1 लड़की ने रंभा के टिकेट से सफ़र किया.अब कोई भी फ्लाइट रेकॉर्ड्स चेक करता तो यही समझता की रंभा डेवाले पहुँच गयी.

रंभा को बस 1 रात पंचमहल मे अकेले गुज़ारनी थी & फिर वाहा से अगले दिन वो ट्रेन & सड़क के रास्ते वापस क्लेवर्त जाने वाली थी.इन सब बातो से बेख़बर वो शख्स अपना समान बाँध रहा था डेवाले जाने के लिए.

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क्रमशः.......

JAAL paart--41

gataank se aage.

"welcome,mr.pranav.",pranav jab us shandar bungle pe pahuncha joki uske ghar se zyada door nahi tha to 1 naukar use bungle ke saje hue hall me le gaya jaha usne pehli baar Mahadev Shah ko dekha.shah 50-55 baras ka shakhs tha jiske sare baal safed ho chuke the.dekhne me vo bhale hi boodha lagta ho lekin 6 ft ka vo mard bilkul chust jism ka malik tha.

"hello,mr.shah."

"aaiye..",vo use hall ke kone me bane bar pe le gaya,"..kya lenge?"

"scotch."

"ok.",usne umda scotch ka 1 peg banake apne mehman ko diya & khud ke liye bhi 1 peg banaya.

"to mr.shah aap kis silsile me mujhse milna chahte the?"

"come on,pranav ji.",shah ne sharab ka 1 ghunt bhara & muskuraya,"..ab aap jaise dimaghdar shakhs se mujhe aise sawal ki umeed nahi thi.",pranav hans diya.

"mr.shah,jab dad ne aapka offer thukra diya tha to main kya kar sakta hu!"

"pranav ji,main jab 30 baras ka bhi nahi hua tha to ye mulk chhod Trinidad chala gaya tha & 30 bars ka hote-2 apne ganne ke farms & rum distillery ka malik tha.uske baad maine kayi mulko me kayi dhandhe kar ye daulat ikattha ki.ab main koi karobar nahi karna chahta & umra ke is aakhiri daur me apne mulk vapas aa yaha ke businesses me apna paisa lagana chahta hu.."

"..har vyapari ko apne business ko,chahe bada ho ya chhota,aage badhne ki khwahish hoti hai & uske liye paise ki zarurat hoti hai.bas isiliye main aapke sasur ke paas gaya tha magar unhone mera offer thukra diya.pata nahi unhe mujhe apne group ke chand shares dene me kya aitraz tha?..",shah thodi der khamoshi se pita raha.

"khair..pranav..i hope you don't mind if i call you only pranav."

"not at all."

"pranav,mujhe tum me apna aks dikhta hai.",shah ki aankho me uski kahi baat me jhalakta vishwas dikh raha tha,"..mujhe lagta hai ki tum is sunehre mauke ka fyda utha sakte ho."

"vo thik hai,mr.shah lekin main koi faisla kaise le sakta hu?..main company ka malik nahi hu."

"nahi.par shares hain tumhare paas & sasur ki di hui power of attorney bhi."

"magar.."

"magar kya?..dekho,pranav ye sunehri mauka hai & isme tumhara bhi bahut fayda ho sakta hai..tum meri baat samajh rahe ho.",shah ka bolne ka lehja thoda badal gaya tha.

"zara tafsil se kahiye."

"dekho,pranav.is company ka malik vijayant hai & uske baad kaun?"

"Sameer.",pranav ki aavz ka thandapan shah se chhupa nahi.

"& tum..bas vahi chand shares..kehne ko board pe ho..har faisle ke waqt tumhari maujoodgi zaruri hai..lekin kya sachmuch tumhari rai ke bina koi bhi faisla rukta hai nahi..kyuki faisla to keval malik hi leta hai..yte sab to bas formalities hain.",pranav ko uski baaten sach lag rahi thi..vo bhi to bas 1 naukar hi tha..apne sasur ka.

"..ye mauka hai pranav ki tum malik ban jao.main ye nahi keh raha ki vijayant ko hata do lekin mujhe lagta hai ki ab uska waqt pura ho gaya hai.uski soch ab pehle jaisi paini nahi rahi hi & upar se ye sameer ka chakkar.waqt rehte agar kisi jawan,chust shakhs ne group ki bagdor nahi sambhali to sab bikhar sakta hai & itne din ho gaye..mujhe nahi lagta sameer vapas aane vala hai...to 1 tarah se to tum group ki bhalai ke liye ye sab kar rahe ho."

"hun..lekin fir bhi mujhe kya fayda hoga itna bada risk uthane se?"

"hun..",shah ne apni drink khatm ki & uski pith pe dhaul jamaya,"..ab ki tumne samajhdari vali baat!..main duniya me kayi jagah ghuma ho & khas kar ke vo jagahen jinhe tax havens kaha jata hai.",vo hansa to pranav bhi muskura diya.tax havens-aise mulk joki bas 1 chhota sa jazir-island rehta hai & vaha ke tax ke kanoon bilkul bakwas.thode kagzi khel khel ke aap apna kala dhan vaha ke banks me mehfuz rakh sakte hain.

"..Cayman Islands ke bank me tumhare naam se 1 rakam jama kar di jayegi.bas tum mere paise leke mujhe Trust ke shares dilwa do.",shah uske jawab ka intezar karta use dekh raha tha & pranav sar jhuka ke apni drink pi raha tha.

kuchh der baad usne apna sar uthaya & glass bar pe rakha.uski aankho ke bhav ko dekh ke shah samajh nahi pa raha tha ki uski baat use pasand aayi ya nahi.

"that's it!",kuchh der baad hi pranav ke chehre ka bhav badla & juskurate hue usne apna hath aage badha diya tha.shah ne use khushi se thama & hilane laga.

"Us shakhs ko yaha pe 1 nishan tha.",Rambha Vijayant Mehra ke seene pe apni chhatiyan dabaye,uski ped ke tano jaisi jangho pe apni mulayam,bhari janghe tikaye leti uske baye gaal pe daye hath ki ungli fira rahi thi.

"tumne ye baat raza ko kyu nahi batayi?",vijayant ne uske baalo ko uske kaan ke peechhe kiya & uski ungli uske gore galo pe ghumne lagi.bahu ki chut ke neeche daba uska lund bhi dhire-2 apna sar utha raha tha.

"mere dimagh se ye baat bilkul utar gayi thi.abhi achanak yaad aayi.",pichhli sham hi vijayant ke apni khafa bahu ko manane ke baad hi dono chudai me jut gaye the.vijayant bas 1 baar jhada tha lekin rambha ko to hosh bhi nahi tha ki vo kitni baar jhadi & kab so gayi.kuchh der pehle uski nind khuli to usne dekha ki ghadi me 3 baj rahe hain.sasur ke nange,mazbut mardana jism ko jaise hi usne chhedna shuru kiya to vo bhi fauran jag gaya.

"1 idea aaya hai.",rambha ke dimagh me bijli si kaundhi & vo sasur ke seene se uth gayi.uske ghutne sasur ke jism ke dono taraf bistar pe jam gaye & jaise hi vijayant ne uski kamar ko thama vo uska ishara samajh upar uthi & fir uske lund pe chut ko jhukane lagi,"..uummmm..!",uski aankhe masti me band ho gayi.

"kaisa idea?",vijayant ki aankhe bhi lund ke bahu ki kasi chut se jakde jane se maze me mund gayi.

"oohhhh..",rambha ne sasue ke seene ke baalo ko mutthiyo me bhar halke se khincha & masti me apni kamar hilane lagi,"..dekhiye,aapne raza ko keh diya hai ki main Devalay ja rahi hu.aap ye baat leak bhi kar dijiye..aannnnhhhhh..itni zor se nahi..!",vijayat ne josh me uski gand ki fanko ko bahut zor se daboch liya tha.

"magar kyu?",uske hath bahu ke pet se uski chhatiyo tak ghum rahe the.vo bas apni ungliyo ke poro se uske kade nipples ko chhute hue hath upar-neeche sarka raha tha.

"taki vo shakhs dhokha kha jaye & agar uska nishana main hu to vo yaha se devlaya chala jaye & main yahi kahi chhup ke rahu..oonnhhhh....uummmmm..!",vijayant ne bahu ki chhatiyan pakad use neeche khincha & fir uski kamar ko baaho me jakad uski gardan chumte hue neeche se kamar uchhaal-2 ke uski chudai karne laga.

"aannnnhhhhh..nishan pad jayega,dad..oowwwwww..please..naaaaahhhhh..!",lund ke qatil dhakko ne use bahut mast kar diya & vo sasur ke hotho ko apni gardan se juda karte hue,uski jakad se chhatpatate hue upar uth gayi & chikh marte hue peechhe uski jangho pe gir ke jhadne lagi.vijayant ne lete-2 hi uski uske lund ko kasti chut me se uske bilkul laal ho chuke dane ko apne baye hath ke anguthe se chheda.rambha ke mastane jazbat vijayant ki is harkat se uske kabu me na rahe & uski aankho se chhalak pade.

"plan to badhiya hai magar isme khatra bhi hai.",vo jaldi se utha & apni bahu ko apni tango se uthake baaho me bhar liya .rambha uske seene ke baalo me munh chhupaye sisak rahi thi.vijayant ne uski chut me lund dhansaye hue uski gand ko thame hue apne ghutne mode & use apni god me le liya.

"aap khatro se kab se darne lage?",sambhalne ke baad rambha ne nazre upar ki & apne sasur ki aankho me jhanka.vijayant ko un nigaho me sukun ke peechhe chhipi masti & 1 chunauti bhi thi.

"mujhe khatro se kab dar laga hai!",vijayant ne uske lambe baalo ko peechhe khincha to rambha ko thoda dard hua lekin sasur ke is tarah uski baat ko dil se lagaane se use thoda maza bhi aaya-vo maza jo premi-premika 1 dusre ko chhedne me pate hain,"..mujhe tumhari fikr hai bas.",rambha ne sar peechhe jhukaya tha to uski gori gardan vijayant ke samne chamak uthi thi & uske besabre honth usi se chipak gayi thi.

"thoda khatra to uthana hi padega na...aannnnhhhh.nahi..kaha na dagh pad jayega!",rambha ne sasur ke baal utha ke uski gardan ko shiddat se chumte hotho ko apni gardan se alag kiya.vijayant uski kamar & gand ko thame zor-2 se dhakke laga raha tha.

"plan to thik lagta hai.main devalay me apne aadmiyo ko chaukanna kar dunga & ho sakta hai vo shakhs pakda jaye.",rambha sasur ke lund ki chudai se mast ho apni kamar hila ke uske dhakko ka jawab de rahi thi & uske baalo ko pakde use paglo ki tarah chum rahi thi.vijayant ne ab uski gand ki moti fanko ko apne bade-2 hatho me tham liya tha & ghutno pe baith zor-2 se lund andar-bahar kar raha tha.

"oouuuuuiiiiiiiiii......abhi tak koi fone nahi aaya na?..aannnnnhhhh....haannnnhhhh..!",vo peechhe jhuki thi & vijayant uske nipples ko danto se kaat raha tha.

"nahi.",vijayant ko bhi ab Sameer ki chinta ho rahi thi.usne daye hath se rambha ki gand thame hue baye se uski dayi choochi ko masla & bayi choochi ko munh me bhar chusne laga.sasur ki zuban ki gustakh harkato ne rambha ki jism me bijliyo ki kayi lehren dauda di & vo uske sar ko pakde chhatpatane lagi.dono jism 1 dusre se chipke 1 baar fir masti ke aasmaan me dune lage the.rambha ne dono baahen vijayant ke kandho pe tikake uske sar ko apni pakad me jakad liya tha & apna sar uske sar ke upar tikake paglo ki tarah chikh rahi thi.uska jism jhatke kha raha tha & neeche vijayant uski choochiyo ko munh me bharta aahen bhar raha tha.dono 1 baar fir 1 sath jhad gaye the.

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vo shakhs bahut baukhlaya hua tha.usne savere hi apna hotel chhod diya tha & apni car bhi.jab se rambha ki talash khatm hui thi sab kuchh gadbad ho raha tha.pehle sameer gayab hua & vijayant rambha ke sath chipak gaya.ab to dono ke beech 1 najayaz rishta bhi jud gaya tha & dono ka alag hona aur mushkil nazar aa raha tha.upar se savere rambha ne uski shakl bhi dekh li thi.

Clayworth ki pahadiyo me kayi hotels & lodges thi & aisa nahi tha ki sabhi bahut chalti thi.usne pehle apne gaal ke nishan ke upar 1 band-aid lagaya & apni car ko 1 parking me chhod clayworth shehar se thodi doori pe 1 pahadi pe bane1 chhoti si lodge me 1 kamra le liya tha.ab use 1 nayi savari chahiye thi lekin kaise ye uski samajh me nahi aa raha tha.

usne sabse pehle apna huliya pura badla.abhi tak vo coat & pant me rehta tha.usne market jake sabse pehle kuchh jackets,jeans & sweaters kharide & 1 jacket & jeans 1 public toilet me badli.uske baad usne pehle us bungle ka rukh kiya jaha savere sab gadbad hua tha.vaha abhi bhi police thi.ab use ye pata karna tha ki aakhir rambha gayi kaha.

us pure din usne kayi jugad kiye lekin use ye nahi pata chala ki aakhir vijayant & rambha gaye kaha.jis waqt vijayatn & rambha 1 dusre ke agosh me samaye chudai ka lutf utha rahe the,vo shakhs bechaini se karwaten badal raha tha & jis waqt rambha ne sasur ko apne paln ke bare me bataya,usi waqt uski aankh lagi is baat se bekhabar ki uska shikar ab usi ke liye jaal bichha raha tha.

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"ohhhhhh..Pranav darling..oowwww..",Shipra bistar pe buri tarah kasmasa rahi thi.uske chehre pe dard & masti se bhari muskan khel rahi thi.uski tango ke beech uska pyara pati apne ghutno pe baitha uske uski dayi tang ko thame uske pair ke anguthe ko munh me chuste & beech-2 me kaatate hue,use chod raha tha.

"kya baat hai jaan?..aannnnnhhhhhh..aaj to tum bahut josh me ho..haaaaaa....!",shipra ne apne baye ghutne pe jame pranav ke hath ki ungliyo me apne baye hath ki ungliya fansayi to pranav uski tang ke gudaz hisse ko chusne laga.

"tumhe dekh ko to humesha hi mera ye haal ho jata hai,darling!",pranav ke ando me ab mitha dard ho raha tha.bahut der se vo khud pe kabu rakhe hue the.usne uski tang chhodi & shipra ke upar let gaya & uski gardan ke neeche bayi banh laga ke use agosh me bhar liya,"..1 baat puchhu?"

"pucho na jaan.",shipra ne pati ke chehre ko hatho me bhar chum liya.

"tumhare paas company ke shares hain & tum bhi group ki malkin ho,agar main koi faisla lu to kya tum mera sath dogi?",pranav ke dhakke tez o gaye the.vo ab jald se jald jhadna chhata tha.shipra ki tange uski pichhli jangho pe jam gayi thi & vo neeche se kamar uchkane lagi thi.

"kya baat hai pranav?",usne uchak ke use chuma to pranav ne bhi apni zuban uski zuban se lada di.

"waqt aane pe bataunga.tumhe mujhpe yakin to hai na,shipra ki main bas company ke bhale ke liye faisla lunga?",pati-patni dono 1 dusre se bechaini se gutthamguttha the.

"ohhhhhhhhh..haan pranav,pura bharosa hai darling....aannnnnhhhhhh..!"

"thanks,jaan!..yaaaaahhhhhh..!",dono 1 dusre ko chum rahe the & dono ke badan jhatke kha rahe the.shipra jhad rahi thi & pranav apna virya uski chut me chhod raha tha.

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vijayant ne agli subah ye khabar apne media ke sources ke zariye leak kara di ki rambha vapas devalay ja rahi hai.airport pe tezi se check in counter ki or jati rambha ke peechhe us se sawal puchhte reporters ki tasveere us shakhs ne tv pe dekhi & muskura diya.

udhar rambha ne ticket liya tha panchmahal & fir vaha se devalay ka lekin usne panchmahal se aage ki flight nahi li.uski jagah Balbir Mohan ki company ki 1 ladki ne rambha ke ticket se safar kiya.ab koi bhi flight records check karta to yehi samajhta ki rambha devalay pahunch gayi.

rambha ko bas 1 raat panchmahal me akele guzarni thi & fir vaha se agle din vo train & sadak ke raste vapas clayworth jane wali thi.in sab baato se bekhabar vo shakhs apna saman bandh raha tha devalay jane ke liye.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--42

गतान्क से आगे......

सोनिया क्लेवर्त पहुँच चुकी थी & वाहा पहुँचते ही उसने विजयंत मेहरा को फोन किया.

"सोनिया जान..तुम यहा क्यू आई?",वियजयंत सच मे परेशान हो उठा था.सोनिया का वो इस्तेमाल कर रहा था लेकिन वो 1 सीधी लड़की थी & वो नही चाहता था कि वो यहा के ख़तरे मे फँसे.

"मुझे बस तुमसे मिलना है,विजयंत..अभी!",सोनिया की आवाज़ ने विजयंत को खामोश कर दिया.उसकी परेशानी,उसकी उलझन सब झलक रहा था उसकी आवाज़ मे.

"तुम ठहरी कहा हो?"

"होटेल पॅरडाइस मे."

"हूँ..आज शाम 8 बजे तुम होटेल वाय्लेट आओ.रिसेप्षन पे आके बस इतना कहना कि रॉयल सूयीट मे ओनर से मिलना है.ओके.जो मैने कहा है उसे बिल्कुल वैसे ही दोहराना.कुच्छ ही देर मे तुम मेरे साथ होगी."

"ओके,विजयंत."

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"1..2..3..4..",तेज़ म्यूज़िक के साथ गाने की लाइन्स पे कामया & कबीर कॉरियोग्रफर के बताए स्टेप्स कर रहे थे.पीछे धारदार फॉल्स के झरनो का खूबसूरत नज़ारा कॅमरा में अपने कैमरे मे क़ैद कर रहा था.

"कट..!",कॉरियोग्रफर बोला & म्यूज़िक रुक गया & दोनो सितारे अपनी-2 कुर्सियो पे आ के बैठ गये.डाइरेक्टर दोनो के पास आया,"कबीर..कामया..इस गाने की शूटिंग के बाद 3-4 एमोशनल सीन्स भी यहा & आस-पास के इलाक़े मे शूट करने हैं.ये हैं वो सीन्स..",उसने 2 फाइल्स दोनो को थमायी,"..डाइलॉग्स याद कर लेना.हो सके तो कल ही कर लेंगे.ओके."

"ये भी ना!",कबीर ने फाइल अपने स्पोतबॉय को थमायी,"..साला 2-2 पेज के डाइलॉग लिखवा लेता है..शूटिंग के बाद सोचा था की तुम्हारे साथ वक़्त गुज़रुँगा लेकिन नही इसे ये बात पसंद थोड़े ही आएगी!",कामया हँसने लगी.

"कम ऑन,लव!",उसने उसकी टांग पे हाथ मारा & फिर अपना मेक-अप करवाने लगी.पीछे शूटिंग देखने वालो की भीड़ लगी थी & उनमे से कुच्छ लोग दोनो सितारो का नाम पुकार रहे थे.

अगला शॉट ऐसा था की दोनो अदाकारो को 1 क्रॅन,जैसी की बिजली कंपनी वाले बिजली के पोल्स को चेक करने के लिए इस्तेमाल करते हैं,उसपे खड़े होके गाने की लाइन्स पे होंठ हिलाने थे.मेक-अप कर & कॉरियोग्रफर से स्टेप्स समझ के दोनो क्रॅन पे चढ़ गये.अब कॅमरमन को बस उनकी कमर तक के शॉट्स लेने थे ताकि क्रॅन की ट्रॉली शॉट मे ना आए.

क्रॅन ऑपरेटर ने क्रॅन को उपर करना शुरू किया.कबीर कामया के पीछे उसके कंधो पे हाथ रखे खड़ा था.कामया मन ही मन हंस रही थी क्यूकी उसे पता था कि कबीर को ऊँचाई से डर लगता है & इस वक़्त उसकी हालत खराब थी.जब क्रॅन सही ऊँचाई पे पहुँचा गयी तो ऑपरेटर ने उसे रोक दिया.कामया कॉरियोग्रफर के मेगफोन से आक्षन की आवज़ सुनने का इंतेज़ार कर रही थी.

"क्या हुआ,पॉपी?",उसने नीचे खड़े कॉरियोग्रफर को इशारा किया तो पॉपी ने कॅमरमन की ओर इशारा किया जोकि अपने असिस्टेंट्स के साथ कमेरे मे कुच्छ कर रहा था.कामया बोर होके नीचे खड़ी भीड़ को देखने लगी की तभी उसकी निगाह भीड़ से अलग-थलग 1 पेड़ के नीचे बैठ 1 कोल्ड ड्रिंक पीती 1 लड़की पे पड़ी..सोनिया मेहरा यहा..उसने आँखे थोड़ी सिकोड के उस लड़की के चेहरे को गौर से देखने की कोशिश की..कही और कोई तो नही..

"रेडी कबीर..कामया?",पॉपी की आवाज़ पे दोनो तैय्यार हो गये & फिर अगले कुच्छ पॅलो तक शूटिंग होती रही.शूटिंग ख़त्म होते ही क्रॅन नीचे आने लगी & कामया की

निगाहें उस लड़की से छिपा गयी..हां ये सोनिया ही थी..ये यहा क्या कर रही है..& फिर उसके होंठो पे मुस्कान खेलने लगी..विजयंत मेहरा..!

"मैं अभी आई,लव.",कबीर अपने धड़कते दिल को शांत कर रहा था.कामया उसके कंधे थपथपाते हुए अपने स्पॉटबाय से अपना मोबाइल ले अपनी वॅन मे चली गयी.

"हाई!विजयंत,डार्लिंग.कैसे हो?"

"ठीक हू,कामया.तुम सूनाओ?"

"मैं ठीक हू.समीर का कुच्छ पता चला?"

"कोशिश जारी है,कामया देखो क्या होता है."

"हूँ..तुम यही हो क्लेवर्त मे?"

"हां,क्यू तुम भी यही हो क्या?"

"हां,कल शाम ही आई.आना तो दिन मे था पर कल सवेरे फॉल्स बंद थे तो शूटिंग हो नही सकती थी तो शाम को आई."

"अच्छा."

"तो मिलो ना जान.आज शाम कैसा रहेगा?"

"आज..आज नही कामया..आज कुच्छ अपायंटमेंट है."

"अरे मैं तो भूल गयी थी,तुम्हारी बहू भी है ना यहा."

"अरे नही,कामया उसकी वजह से नही.",विजयंत हंसा,"..उसे तो मैने डेवाले भेज दिया.किसी और से मिलना है."

"ओह.तो कल?"

"हां,कल पक्का डार्लिंग.मैं फोन करूँगा."

"ओके,जान.",कामया ने फोन बंद किया & मुस्कुराइ..विजयंत डार्लिंग आज किस से अपायंटमेंट है मुझे पता है..वो हँसी & वॅन से बाहर चली गयी.

सोनम का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.आज प्रणव 9 बजे से भी पहले दफ़्तर आ गया था & अपने लॅपटॉप पे जुटा हुआ था.सोनम से सवेरे से उसने कयि सारी फाइल्स उसके डेस्कटॉप पे सर्च कर उसे फॉर्वर्ड करने को कही थी & कुच्छ की तो हार्ड कॉपीस भी अलग-2 डिपार्ट्मेंट्स से मंगवा के देख रहा था.दोपहर 1 बजे के बाद उसने लॅपटॉप पे बैठे-2 टाइपिंग शुरू कर दी.अच्छी सेक्रेटरी होने का नाटक करते हुए सोनम ने उस से बोला कि वो ये काम कर देगी तो उसने उसे मना कर दिया & बाहर अपनी डेस्क पे बैठने को कहा.

सोनम के कान इस बात से खड़े हो गये थे & उसने तय कर लिया कि वो ज़रूर देखेगी की आख़िर प्रणव कर क्या रहा है.दोफरा लंच मे भी प्रणव कॅबिन से बाहर नही निकला.उस वक़्त सोनम ने अंदर झाँका तो देखा की प्रणव कॅबिन मे ही बने बाथरूम मे चला गया.वो झट से उठी & जाके उसके लॅपटॉप को देखा & उसकी आँखे फॅट गयी.प्रणव महादेव शाह नाम के आदमी को कंपनी मे पैसा लगाने देना चाहता था & इसके लिए वो अपने ब्रोकर्स के ज़रिए कंपनी के शेर्स बाज़ार से खरीद रहा था.तभी फ्लश की आवाज़ आई & वो झट से बाहर भागी.

उसकी समझ मे अभी भी नही आ रहा था कि वो ये बात विजयंत मेहरा या ब्रिज कोठारी को बताए या नही.ना जाने क्यू उसे बड़ी घबराहट हो रही थी.उसने 1 बार फिर इस फ़ैसले को कल पे टाल दिया.उसका मोबाइल बजा तो उसने देखा की रंभा का फोन है,"हेलो."

"हाई सोनम,कैसी है?"

"अच्छी हू,मालकिन!",शादी के बाद वो अपनी सहेली को इसी तरह चिढ़ने लगी थी.

"चुप कर वरना फोन काट दूँगी!"

"अच्छा बाबा..सॉरी!",सोनम हँसी,"..& बता समीर का कुच्छ पता चला कि नही?"

"नही यार.अच्छा सुन मुझे 1 काम था."

"हां,बोल ना."

"तुझे वो प्लेसमेंट एजेन्सी वाला बंदा विनोद याद है?"

"हां."

"बस ये पता कर दे वो आजकल कहा है & 1 आदमी है परेश नाम का..",उसने दोनो के बारे मे उसे बताया & पता करने को कहा.सोनम के दिल मे 1 बार ये ख़याल आया कि वो अपनी सहेली को ही प्रणव के बारे मे बता दे लेकिन फिर उसके घबराए दिल ने उसे रोक दिया.

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"हाई!सोनिया,वॉट ए प्लेज़ेंट सर्प्राइज़!",कामया ने होटेल वाय्लेट की लॉबी मे रिसेप्षन की ओर बढ़ती सोनिया को चौंका दिया.सोनिया के चेहरे का रंग उड़ गया.उसने सोचा भी नही था की इतनी सावधानी बरतने के बावजूद वो किसी जान-पहचान वाले से टकराएगी..लेकीब अब उसे क्या परवाह थी इन बातो की!

"हाई!कामया.कैसी हो?"

"बढ़िया.यहा किसी से मिलने आई हो?",कामया ने गहरी निगाहो से उसे मुस्कुराते हुए देखा.

"हां.",1 पल के बाद उसने जवाब दिया,"..इफ़ यू डॉन'ट माइंड."

"नोट अट ऑल.",कामया ने उसका रास्ता छ्चोड़ दिया & मुस्कुराते हुए उसे लिफ्ट की ओर जाते देखते रही.

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शाम तक रंभा को सोनम ने बता दिया था कि परेश तो अमेरिका चला गया & विनोद वही शहर मे ही है & रोज़ ही दफ़्तर आ रहा है.रंभा के दो पुराने प्रेमी शक़ के दायरे से बाहर हो गये थे.

उसने ससुर को फोन लगाके उन्हे ये बात बताई & उनसे जुदाई का दर्द बयान किया.कुच्छ देर बातें करने के बाद वो फोन रख के टीवी देखने लगी.विजयंत की सख़्त हिदायत थी कि वो होटेल के कमरे से बाहर ना निकले.पंचमहल वाय्लेट मे किसी दूसरे नाम से लॅडीस फ्लोर पे उसके नाम का कमरा बुक था.होटेल के नीचे बलबीर मोहन की सेक्यूरिटी एजेन्सी के 3-4 लोग होटेल पे नज़र रखे थे & रंभा से फोन से कॉंटॅक्ट करते रहते थे.किसी भी गड़बड़ी की सूरत मे रंभा को सबसे पहले उन्ही लोगो को फोन करना था.कल सवेरे भी वो उन्ही लोगो के साथ वापस अपने ससुर के पास जा रही थी.

ससुर के ख़याल ने उसके जिस्म मे आग लगा दी & उसने अपने कपड़े उतार दिए & बाथरूम के बात्ट्च्ब मे जा बैठी.ठंडा पानी भी उसके बदन की अगन नाहही बुझा पा रहा था.रंभा ने अपनी उंगली अपनी चूत से लगा दी & आँखे बंद कर ससुर का तस्साउर करते हुए अपने दाने को रगड़ने लगी.

“ओह..विजयंत!”,सूयीट मे दाखिल होते ही सोनिया की रुलाई छूट गयी & वो विजयंत मेहरा से लिपट गयी.

“बस..बस..!”,विजयंत ने उसे अपनी बाहो मे भर उसकी पीठ सहलाई & उसके बालो को चूमा.

“मैं अब उस आदमी के साथ नही रह सकती.”,सोनिया की आँखे लाल हो गयी थी,”..मुझे नही पता था कि वो चंद रुपयो के फ़ायदे के लिए इतना गिर जाएगा.”

“देखो,सोनिया अभी तुम बहुत जज़्बाती हो रही हो.ऐसे अहम फ़ैसले इस तरह नही लिए जाते जान.”,विजयंत ने उसके गोरे गालो से आँसुओ को पोंच्छा & चूम लिया.

“मैने बहुत सोच समझ के ये फ़ैसला लिया है,विजयंत.मुझे पता है मैं तुम्हारी बीवी कभी नही बन सकती लेकिन मुझे उस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता.मैं तुम्हारी रखैल बन के भी रहने को तैयार हू.”

“सोनिया!”,विजयंत ने उसकी कमर मे बाहे डाल उसे खुद से चिपका लिया,”..यू खुद को बेइज़्ज़त & मुझे शर्मिंदा ना करो.”,उसने अपनी प्रेमिका के होंठ चूमे,”..लेकिन तुम्हे इतना यकीन कैसे है कि ब्रिज कोठारी ही समीर के लापता होने के पीछे है?”

“तुम्हे नही मालूम की पिच्छले 2 दिनो से वो इसी जगह के आस-पास है?”,विजयंत खामोश रहा.मीडीया को ये भनक नही लगने दी गयी थी या फिर विजयंत & पोलीस की गुज़ारिशो को मान उन्होने धारदार फॉल्स वाली खबर च्छूपा ली थी,”तुम मुझसे कुच्छ च्छूपा रहे हो क्या?”,विजयंत ने सर झुका लिया,”मुझे सब कुच्छ बताओ.”,सोनिया की आवाज़ मे कुच्छ ऐसा था की विजयंत उसे मना नही कर पाया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--42

gataank se aage......

Soniya Clayworth pahunch chuki thi & vaha pahunchte hi usne Vijayant Mehra ko fone kiya.

"soniya jaan..tum yaha kyu aayi?",viajyant sach me pareshan ho utha tha.soniya ka vo istemal kar raha tha lekin vo 1 seedhi ladki thi & vo nahi chahta tha ki vo yaha ke khatre me fanse.

"mujhe bas tumse milna hai,vijayant..abhi!",soniya ki aavaz ne vijayant ko khamosh kar diya.uski pareshani,uski uljhan sab jhalak raha tha uski aavaz me.

"tum thehri kaha ho?"

"Hotel Paradise me."

"hun..aaj sham 8 baje tum Hotel Violet aao.reception pe aake bas itna kehna ki Royal Suite me owner se milna hai.ok.jo maine kaha hai use bilkul vaise hi dohrana.kuchh hi der me tum mere sath hogi."

"ok,vijayant."

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"1..2..3..4..",tez music ke sath gane ki lines pe Kamya & Kabir choreographer ke bataye steps kar rahe the.peechhe Dhardar Falls ke jharno ka khubsurat nazara cameraman apne camere me qaid kar raha tha.

"cut..!",choreographer bola & music ruk gaya & dono sitare apni-2 kursiyo pe aa ke baith gaye.director dono ke paas aaya,"kabir..kamya..is gane ki shooting ke baad 3-4 emotional scenes bhi yaha & aas-paas ke ilake me shoot karne hain.ye hain vo scenes..",usne 2 files dono ko thamayi,"..dialogues yaad kar lena.ho sake to kal hi kar lenge.ok."

"ye bhi na!",kabir ne file apne spotboy ko thamayi,"..sala 2-2 page ke dialogue likhwa leta hai..shooting ke baad socha tha ki tumhare sath waqt guzarunga lekin nahi ise ye baat pasand thode hi ayegi!",kamya hansne lagi.

"come on,love!",usne uski tang pe hath mara & fir apna make-up karwane lagi.peechhe shooting dekhne walo ki bheed lagi thi & unme se kuchh log dono sitaro ka naam pukar rahe the.

agla shot aisa tha ki dono adakaro ko 1 crane,jaisi ki bijli company vale bijli ke poles ko check karne ke liye istemal karte hain,uspe khade hoke gane ki lines pe honth hilane the.make-up kar & choreographer se steps samajh ke dono crane pe chadh gaye.ab cameraman ko bas unki kamar tak ke shots lene the taki crane ki trolley shot me na aaye.

crane operator ne crane ko upar karna shuru kiya.kabir kamya ke peechhe uske kandho pe hath rakhe khada tha.kamya man hi man hans rahi thi kyuki use pata tha ki kabir ko oonchai se darr lagta hai & is waqt uski halat kharab thi.jab crane sahi oonchai pe pahuncha gayi to operator ne use rok diya.kamya choreographer ke megaphone se action ki aavz sunane ka intezar kar rahi thi.

"kya hua,Poppy?",usne neeche khade choreographer ko ishara kiya to poppy ne cameraman ki or ishara kiya joki apne assistants ke sath camere me kuchh kar raha tha.kamya bore hoke neeche khad bheed ko dekhne lagi ki tabhi uski nigah bheed se alag-thalag 1 ped ke neeche baith 1 cold drink piti 1 ladki pe padi..Soniya Mehra yaha..usne aankhe thodi sikod ke us ladki ke hehre ko gaur se dekhne ki koshish ki..kahi aur koi to nahi..

"ready kabir..kamya?",poppy ki aavaz pe dono taiyyar ho gaye & fir agle kuchh palo tak shooting hoti rahi.shooting khatm hote hi crane neeche aane lagi & kamya ki

nigahen us ladki se chipa gayi..haan ye soniya hi thi..ye yaha kya kar rahi hai..& fir uske hotho pe muskan khelne lagi..Vijayant Mehra..!

"main abhi aayi,love.",kabir apne dhadakte dil ko shant kar raha tha.kamya uske kandhe thapthapate hue apne spotboy se apna mobile le apni van me chali gayi.

"hi!vijayant,darling.kaise ho?"

"thik hu,kamya.tum sunao?"

"main thik hu.Sameer ka kuchh pata chala?"

"koshish jari hai,kamya dekho kya hota hai."

"hun..tum yehi ho clayworth me?"

"haan,kyu tum bhi yehi ho kya?"

"haan,kal sham hi aayi.aana to din me tha par kal savere falls band the to shooting ho nahi sakti thi to sham ko aayi."

"achha."

"to milo na jaan.aaj sham kaisa rahega?"

"aaj..aaj nahi kamya..aaj kuchh appointment hai."

"are mai to bhul gayi thi,tumhari bahu bhi hai na yaha."

"are nahi,kamya uski vajah se nahi.",vijayant hansa,"..use to maine Devalay bhej diya.kisi aur se milna hai."

"oh.to kal?"

"haan,kal pakka darling.main fone karunga."

"ok,jaan.",kamya ne fone band kiya & muskurayi..vijayant darling aaj kis se appointment hai mujhe pata hai..vo hansi & van se bahar chali gayi.

Sonam ka dil bahut zoro se dhadak raha tha.aaj Pranav 9 baje se bhi pehle daftar aa gaya tha & apne laptop pe juta hua tha.sonam se savere se usne kayi sari files uske desktop pe search kar use forward karne ko kahi thi & kuchh ki to hard copies bhi alag-2 departments se mangwa ke dekh raha tha.dopahar 1 baje ke baad usne laptop pe baithe-2 typing shuru kar di.achhi secretary hone ka natak karte hue sonam ne us se bola ki vo ye kaam kar degi to usne use mana kar diya & bahar apni desk pe baithne ko kaha.

sonam ke kaan is baat se khade ho gaye the & usne tay kar liya ki vo zarur dekhegi ki aakhir pranav kar kya raha hai.dophara lunch me bhi pranav cabin se bahar nahi nikla.us waqt sonam ne andar jhanka to dekha ki pranav cabin me hi bane bathroom me chala gaya.vo jhat se uthi & jake uske laptop ko dekha & uski aankhe phat gayi.pranav Mahadev Shah naam ke aadmi ko company me paisa lagane dena chahta tha & iske liye vo apne brokers ke zariye company ke shares bazar se kharid raha tha.tabhi flush ki aavaz aayi & vo jhat se bahar bhagi.

uski samajh me abhi bhi nahi aa raha tha ki vo ye baat Vijayant mehra ya Brij Kothari ko bataye ya nahi.na jane kyu use badi ghabrahat ho rahi thi.usne 1 baar fir is faisle ko kal pe taal diya.uska mobile baja to usne dekha ki Rambha ka fone hai,"hello."

"hi sonam,kaisi hai?"

"achhi hu,malkin!",shadi ke baad vo apni saheli ko isi tarah chidhane lagi thi.

"chup kar varna fone kaat dungi!"

"achha baba..sorry!",sonam hansi,"..& bata Sameer ka kuchh pata chala ki nahi?"

"nahi yaar.achha sun mujhe 1 kaam tha."

"haan,bol na."

"tujhe vo placement agency vala banda Vinod yaad hai?"

"haan."

"bas ye pata kar de vo aajkal kaha hai & 1 aadmi hai Paresh naam ka..",usne dono ke bare me use bataya & pata karne ko kaha.sonam ke dil me 1 baar ye khayal aaya ki vo apni saheli ko hi pranav ke bare me bata de lekin fir uske ghabraye dil ne use rok diya.

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"hi!Soniya,what a pleasant surprise!",kamya ne Hotel Violet ki lobby me reception ki or badhti soniya ko chaunka diya.soniay ke chehre ka rang ud gaya.usne socha bhi nahi tha ki itni savdhani baratne ke bavjud vo kisi jaan-pehchan vale se takrayegi..lekib ab use kya parwah thi in baato ki!

"hi!kamya.kaisi ho?"

"badhiya.yaha kisi se milne aayi ho?",kamya ne gehri nigaho se use muskurate hue dekha.

"haan.",1 pal ke baad usne jawab diya,"..if you don't mind."

"not at all.",kamya ne uska rasta chhod diya & muskurate hue use lift ki or jate dekhte rahi.

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sham tak rambha ko sonam ne bata diya tha ki paresh to America chala gaya & vinod vahi shehar me hi hai & roz hi daftar aa raha hai.rambha ke do purane premi shaq ke dayre se bahar ho gaye the.

usne sasur ko fone lagake unhe ye baat batayi & unse judai ka dard bayan kiya.kuchh der baaten karne ke baad vo fone rakh ke tv dekhne lagi.vijayant ki sakht hidayat thi ki vo hotel ke kamre se bahar na nikle.Panchmahal Violet me kisi dusre naam se ladies floor pe uske naam ka kamra book tha.hotel ke neeche Balbir Mohan ki security agency ke 3-4 log hotel pe nazar rakhe the & rambha se fone se contact karte rehte the.kisi bhi gadbadi ki surat me rambha ko sabse pehle unhi logo ko fone karna tha.kal savere bhi vo unhi logo ke sath vapas apne sasur ke paas ja rahi thi.

sasur ke khayal ne uske jism me aag l;aga di & usne apne kapde utar diye & bathroom ke bathtub me ja baithi.thanda pani bhi uske badan ki agan nahhi bujha pa raha tha.rambha ne apni ungli apne chut se laga di & aankhe band kar sasur ka tassavur karte hue apne dane ko ragadne lagi.

“Oh..Vijayant!”,suite me dakhil hote hi Soniya ki rulai chhut gayi & vo Vijayant Mehra se lipat gayi.

“bas..bas..!”,vijayant ne use apni baaho me bhar uski pith sehlayi & uske balo ko chuma.

“main ab us aadmi ke sath nahi reh sakti.”,soniya ki aankhe laal ho gayi thi,”..mujhe nahi pata tha ki vo chand rupayo ke fayde ke liye itna gir jayega.”

“dekho,soniya abhi tum bahut jazbati ho rahi ho.aise aham faisle is tarah nahi liye jate jaan.”,vijayant ne uske gore gaalo se aansuo ko ponchha & chum liya.

“maine bahut soch samajh ke ye faisla liya hai,vijayant.mujhe pata hai main tumhari biwi kabhi nahi ban sakti lekin mujhe us baat se koi fark nahi padta.main tumhari rakhail ban ke bhi rehne ko taiyar hu.”

“soniya!”,vijayant ne uski kamar me baahe daal use khud se chipka liya,”..yu khud ko beizzat & mujhe sharminda na karo.”,usne apni premika ke honth chume,”..lekin tumhe itna yakeen kaise hai ki Brij Kothari hi Sameer ke lapata hone ke peechhe hai?”

“tumhe nahi maloom ki pichhle 2 dino se vo isi jagah ke aas-paas hai?”,vijayant khamosh raha.media ko ye bhanak nahi lagne di gayi thi ya fir vijayant & police ki guzarisho ko maan unhone Dhardar falls vali khabar chhupa li thi,”tum mujhse kuchh chhupa rahe ho kya?”,vijayant ne sar jhuka liya,”mujhe sab kuchh batao.”,soniya ki aavaz me kuchh aisa tha ki vijayant use mana nahi kar paya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--43

गतान्क से आगे......

“तो ये थी सारी बात.”,दोनो बिस्तर पे लेटे थे.सोनिया की स्लीव्ले घुटनो तक की सफेद ड्रेस थोड़ा नीचे खिसकी थी & उसकी गोरी जाँघो का कुच्छ हिस्सा नुमाया हो गया था.विजयंत उसकी बाई तरफ लेटा था & उसका बाया हाथ उसके घुटने के उपर ही घूम रहा था.अब सोनिया भी थोड़ी संभाल गयी थी & अपने आशिक़ की नज़दीकी & उसके मर्दाना जिस्म के एहसास ने उसके जज़्बातो का रुख़ भी अब मोड़ दिया था.उसका दाया हाथ भी विजयंत की कमीज़ के खुले बटन्स के पार उसके सीने के बालो मे घूम रहा था.

“& तुम फिर भी मुझसे उस गलिज़ इंसान को छ्चोड़ने से रोक रहे हो?!”,उसकी उंगलियो ने विजयंत के बाए निपल को छेड़ा.

“देखो,सोनिया..”,विजयंत थोड़ा घूम उसके जिस्म पे अपने आधे बदन का भर डालते हुए उसकी जाँघो के बीच घुसे हाथ को उपर उसकी पॅंटी की ओर बढ़ने लगा,”..मुझे नही लगता की कोठारी इतना बेवकूफ़ है कि ऐसा काम करे & उसमे अपने शामिल होना यू इस तरह ज़ाहिर करे.”,उसका हाथ पॅंटी के उपर से ही सोनिया की चूत को सहला रहा था.सोनिया ने मस्ती मे भर उसके बालो को पकड़ उसे नीचे खींचा & उसके मुँह मे अपनी ज़ुबान घुसाते हुए उसे शिद्दत से चूमने लगी.

“उउम्म्म्म..लेकिन ये भी तो हो सकता है कि,ऐसा नाज़ुक काम किसी & के हाथो मे देने का भरोसा ना हो उसे..आननह..”,सोनिया की उंगलिया विजयंत की बाहो पे कस गयी क्यूकी उसके आशिक़ की उंगलिया उसकी पॅंटी के बगल से अंदर घुस उसकी चूत को कुरेदने लगी थी,”..& इसीलिए उसे खुद आना पड़ा & तुमने उसे देख लिया..आननह..!”,सोनिया के नाख़ून कमीज़ के उपर से ही विजयंत के माबूत बाजुओ मे धँस गये & उसके चेहरे पे वोही दर्द & मस्ती का मिला-जुला भाव आ गया जो किसी लड़की के चेहरे पे मस्ती की शिद्दत का एहसास करने पे आता है.

“हो सकता है.",विजयंत ने उसके रसीले होंठो को चूमा & उसके उपर आ अपना हाथ उसकी चूत से खींचा & अपने लंड को उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी गीली चूत पे दबाया & उसे दिखाते हुए उसके रस से भीगी अपनी उंगलिया मुँह मे घुसा उसका रस पी लिया.सोनिया विजयंत की इस हरकत से मस्ती & उसके लिए प्यार से भर उठी & उसने अपने हाथ उसकी कमीज़ के अंदर घुसा उसे ऐसे फैलाया की उसके बटन्स टूट गये & अगले ही पल कमीज़ विजयंत के जिस्म से जुदा थी.दोनो ने 1 दूसरे को बाहो मे भींच लिया & अपने-2 जिस्मो को आपस मे रगड़ते हुए अपने नाज़ुक अंगो को आपस मे दबाते हुए 1 दूसरे को चूमने लगे.

“मुझे प्यार करो,विजयंत..इतना प्यार कि मैं सब भूल जाऊं..सब कुच्छ..!”,सोनिया के आँखो के कोने से आँसुओ की 2 बूंदे उसके गालो पे ढालक गयी.विजयंत के लिए सोनिया बस 1 मोहरा थी लेकिन इस वक़्त उसे अपने आप पे शर्म आई..वो 1 मासूम लड़की के जज़्बातो से खले रहा था..लेकिन इसमे उसकी क्या ग़लती थी?..वो चाहती तो उसे ठुकरा भी सकती थी लेकिन उसने भी पति से बेवफ़ाई करने का फ़ैसला खुद ही लिया था..& फिर कोठारी को हराने के लिए वो कुच्छ भी कर सकता था..कुच्छ भी!

सोनिया के लब थरथरा रहे थे & जिस्म कांप रहा था.उसका दिलज़ीज़ आशिक़ उसके कपड़े उतार रहा था.कैसा अजीब एहसास था ये..हर बार उसके सामने नंगी होने पे उसे ये शर्म,ये झिझक महसूस होती थी & साथ ही दिल भी आने वाली उमँगो की हसरत से & तेज़ी से धड़कने लगता था..वो उसे ब्रिज से भी पहले क्यू नही मिला..फिर ना ये दर्द होता ना तड़प..बस खुशी ही खुशी होती & मस्ती ही मस्ती!

विजयंत खुद भी नंगा हो गया & सोनिया के उपर लेट गया.2 हसरातो से भरे जिस्म 1 दूसरे से लिपट गये & मस्ती का खेल शुरू हो गया.

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वो शख्स अपना समान बाँध चुका था लेकिन अब उसने डेवाले जाने का ख़याल बदल दिया था..वो इतना उतावला क्यू हो रहा था?..जहा इतने बरस इंतेज़ार किया उसने वाहा चंद दिन और सही..कल सवेरे की घटना के बाद विजयंत तो बहुत होशियार हो गया होगा & इसीलिए उसने अपनी बहू को महफूज़ जगह यानी अपने घर भेज दिया.वाहा जाने मे बहुत ख़तरा था.उसे इन्तेक़ाम लेना था लेकिन उसके बाद फिर से हवालात जाने का शौक उसे नही था..बहुत देर सोचने के बाद उसने वो रात वही गुज़ारना तय किया.उसे क्या पता था कि उसका ये फ़ैसला विजयंत मेहरा के लिए कितना अहम होने वाला था.

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“क्या बात है,कोठारी!”,फिर से उसी शख्स का फोन था & इस बार फिर 1 नये नंबर से.ब्रिज पिच्छले 2 दिनो से अपने हिसाब से ही उस अंजन कॉलर के बारे मे पता लगाने की कोशिश कर रहा था लेकिन टेलिकॉम डिपार्टमेंट के उसके आदमी से उसे सिर्फ़ ये पता चला था कि ये सारे नंबर क्लेवर्त के पब्लिक फोन बूत्स के थे,”..उस दिन तो यार तुम तोहफा लेने से पहले ही भाग गये.बड़े डरपोक हो यार!”,उस शख्स ने उसकी खिल्ली उड़ाई.

“कामीने!तू है कौन?चूहो की तरह च्छूप के के मुझे फँसाने की कोशिश कर रहा है.सामने से वार कर.”

“अरे यार,तुम तो मुझे दुश्मन समझते हो!मैं तो दोस्त हू तुम्हारा.उस दिन ज़रा टाइमिंग गड़बड़ हो गयी मगर आज नही होगी.आज भी आ जाओ यार & देखो की तुम्हारी प्यारी बीवी कैसे तुम्हारे दुश्मन की बाहो मे गुलच्छर्रे उड़ा रही है.”

“कुत्ते!मेरी बीवी के बारे मे ऐसी गंदी बात करता है,हराम जादे!..तुझे अपने हाथो से नर्क भेजूँगा मैं!”

“और गलियाँ दे दे यार लेकिन धारदार फॉल्स के पास के कंधार फॉल्स पे 3 बजे सुबह आओ & अपनी आँखो से देखो की तुम्हारी जान तुम्हारे दुश्मन के साथ कैसे चोंच से चोंच & और भी बहुत कुच्छ मिला रही है.”,& फोन कट गया.ब्रिज गुस्से से कांप रहा था.उसे ज़रा भी यकीन नही था उस कामीने की बात पे लेकिन..

तभी उसका मोबाइल बजा,”हेलो.”

“हाई!ब्रिज डार्लिंग.”,कामया की खनकती आवाज़ उसके कानो मे गूँजी,”..क्या जान,अपनी बीवी को लेके इतनी खूबसूरत जगह आ गये हो & मैं यहा तुम्हारे लिए तड़प रही हू!”

“क्या?!”,ब्रिज के कान खड़े हुए.

“अरे सोनिया मिली थी आज मुझे लेकिन उसने तुम्हारे बारे मे कुच्छ नही बताया..1 मिनिट..”,कामया को जैसे कुच्छ याद आया,”..वो तो मुझे वाय्लेट की लॉबी मे मिली थी.”

“क्या बोल रही हो?!”

“यही की सोनिया वाय्लेट होटेल मे क्या कर रही थी?”,ब्रिज ने फोन काट दिया.उसका चेहरा गुस्से & बेइज़्ज़ती से तमतमाया हुआ था..सोनिया..उसकी जान..बल्कि जान से भी ज़्यादा..उसे देखते ही उसके दिल मे शादी का ख़याल आया था जोकि आज तक किसी भी लड़की के लिए नही आया था & उसने इस तरह से उसका भरोसा तोड़ा था & वो भी विजयंत के साथ!

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"आननह..डालो ना अंदर..ऐसे मत तड़पाव..हाईईईईईईईई..!",सोनिया की खुली टाँगो के बीच उसकी गीली चूत की दरार पे अपना लंड रगड़ते विजयंत उसके जोश को देख मुस्कुरा रहा था.इस वक़्त वो अपनी सारी उलझन भूल बस उसके लंड की चाहत मे दीवानी हो रही थी.विजयंत ने उसके घुटने मोडते हुए उन्हे उसकी छातियो पे दबाया & 1 ही झटके मे लंड को अंदर घुसा दिया.सोनिया के चेहरे पे दर्द की लकीरें खींच गयी लेकिन साथ ही 1 मस्ती भरी मुस्कान भी उसके होंठो पे खेलने लगी.विजयंत का लंड उसकी कोख तक जा रहा था & उसका जिस्म अब खुशी से भर गया था.विजयंत घुटनो पे बैठे हुए उसकी चूचियो को मसलता उसे चोद रहा था लेकिन उसके ज़हन मे रंभा का चेहरा घूम रहा था.अपनी बहू जैसी मस्तानी लड़की आजतक उसके करीब नही आई थी & बस 1 रात की दूरी भी उसे खलने लगी थी.

"ऊव्ववव..आननह..!",उसकी बाहो मे नाख़ून धँसती सोनिया चीख रही थी.रंभा के ख़याल ने विजयंत के जोश को बढ़ा दिया था & उसके धक्के & तेज़ हो गये थे.सोनिया के झाड़ते ही उसने उसके कंधे पकड़ उसे उपर उठाया & अपनी गोद मे बिठा के चोदने लगा.सोनिया ने उसके बाए कंधे पे अपनी ठुड्डी जमाई & उसकी गर्दन के गिर्द अपनी बाहें लपेट & उसकी कमर पे अपनी टाँगे कस आँखे बंद कर के उसके धक्को का मज़ा लेने लगी.

विजयंत के हाथो मे उसकी गंद की फांके थी & उसके होंठ सोनिया की गर्दन को तपा रहे थे.सोनिया की कसी चूत मे घुस उसका लंड अब अपनी भी मंज़िल की ओर बढ़ने को बेताब था लेकिन अभी भी विजयंत के दिलोदिमाग मे रंभा का हसीन चेहरा & नशीला जिस्म घूम रहा था.उसके होंठ सोनिया की गर्दन & बाए कंधे के मिलने वाली जगह पे चिपक गये & उसके हाथो ने उसकी गंद को मसल दिया.सोनिया ने बाल पीछे झटकते हुए ज़ोर से चीख मारी & झड़ने लगी.उसी वक़्त विजयंत के लंड ने भी अपना गर्म वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया.

"ट्ररननगज्गग..!",विजयंत ने वैसे ही अपनी महबूबा को अपनी गोद मे थामे हुए बाए हाथ को बढ़ा अपना मोबाइल उठाया-फिर से समीर के मोबाइल से फोन आ रहा था!,"हेलो."

"मेहरा,लगता है तुम्हे अपने बेटे से प्यार नही..",विजयंत को आवाज़ पिच्छली बार की ही तरह थोड़ी अजीब लग रही थी,"..तुम ना केवल पोलीस को साथ लाए बल्कि अपने जासूसी कुत्ते को भी मेरे पीछे लगाया हुआ था.लगता है इस बार तुम्हे तोहफे मे समीर के खून के साथ-2 उसके जिस्म का कोई हिस्सा भी चाहिए."

"नही!",विजयंत चीखा तो सोनिया ने उसके चेहरे को अपने हाथो मे थाम लिया.अभी चुदाई की खुमारी उतरी भी नही थी कि इस फोन ने उसे फिर से उसकी उलझानो की याद दिला दी,"..तुम उसे कोई नुकसान नही पहुचना,प्लीज़!!जो चाहते हो वोही करूँगा मैं."

"ठीक है.तो बस अभी 2.30 बजे कंधार फॉल्स पे 1 सफेद टोयोटा क़ुआलिस लेके जिसका नंबर क्प-0व-5214 होना चाहिए,पहुँचो,बिना पोलीस या बलबीर मोहन के & साथ मे वो काग़ज़ भी लाओ जिसपे ये लिखा होगा कि तुम आने वाले दिनो मे अपने कारोबार को नही बढ़ाओगे & आनेवाले 3 महीनो तक कोई नया टेंडर नही भरोगे."

"लेकिन..-",फोन कट चुका था.

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"डॅम इट!",अकरम रज़ा ने खीजते हुए अपनी बाई हथेली पे दाए से मुक्का मारा,"..बस चंद सेकेंड्स & लाइन पे रहता तो कॉल ट्रेस हो जाती.",वो वही क्लेवर्त मे ही बैठ के विजयंत का फोन टॅप करवा रहा था,"..चलो,कंधार फॉल्स 2.30 बजे,चलते हैं.",उसने अपने मातहत अफ़सर को अपना हेडफॉन थमाया & आगे की करवाई के बारे मे सोचने लगा.

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"विजयंत क्या हुआ डार्लिंग?",विजयंत सोनिया की गंद की बाई फाँक को थामे बाए हाथ मे फोन को पकड़े जैसे बुत बन गया था.

"ह-हुन्न्ञन्..",सोनिया की आवज़ से जैसे वो नींद से जगा,"..सोनिया..",& उसने उसे सारी बात बताई.

"मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी.",सोनिया अभी भी उसकी गोद मे बैठी थी.

"पागल मत बनो,सोनिया.उसने मुझे अकेला आने की सख़्त ताकीद की है."

"नही विजयंत,मैं साथ चलूंगी तुम्हारे क्यूकी मैं उसका चेहरा देखना चाहती हू.कैसा लगेगा उसे उस वक़्त जब वो अपने सबसे बड़े दुश्मन से जीतने की खुशी के बीच उसकी बाहो मे अपनी बीवी को देखेगा.विजयंत,उसने तुम्हे इतनी बड़ी चोट पहुचाई है,अब उसका भी हक़ बनता है,उतनी ही बड़ी चोट खुद खाने का!",विजयंत सोनिया को गौर से देख रहा था..सही कह रही थी वो..अगर कमीना कोठारी इस साज़िश मे शामिल है तब तो इस से करारा तमाचा उसे नही पड़ सकता & अगर नही भी शामिल है तो भी ऐसी चोट उसे पागल करने को काफ़ी है!..उसने सोनिया को बाहो मे भर लिया & उसे चूमने लगा.

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वो शख्स क्लेवर्त बस स्टॅंड की पार्किंग मे पहुँचा & पहले वाहा का जायज़ा लिया.उसकी कार अभी भी वैसे ही खड़ी थी & उसे उसपे नज़र रखता भी कोई नही दिखा.उसे 1 सवारी चाहिए थी & नयी का इंतेज़ाम करने का वक़्त नही था.अब ये ख़तरा तो उठाना ही था.उसने धड़कते दिल के साथ आगे बढ़के उसने अपनी चाभी का बटन दबाया & पिंग की आवाज़ के साथ लॉक खुल गया.ठीक उसी वक़्त उसके कंधे पे किसी ने हाथ रखा.उसकी धड़कन & तेज़ हो गयी & वो बहुत धीरे से घुमा.उसे पूरी उमीद थी कि कयि पोलिसेवाले उसकी तरफ अपनी बंदुके ताने खड़े होंगे.उसे खुद पे खिज भी हुई कि क्यू आया था वो इस जगह वापस!

"भाई साहब,आपके पास .50 के छुत्ते होंगे?",1 चश्मा लगाए भला सा शख्स उसके सामने 50 का नोट लिए खड़ा था.उसने राहत की सांस ली.किसी अंकन शख्स को देख ऐसी खुशी उसे पहले कभी नही हुई थी.

"हां-2.ये लीजिए.",उसने छुत्ते उसे दिए & अपनी पार्किंग स्लिप & दिन भर कार खड़ी करने के पैसे उसने अटेंडेंट को थमाए & वाहा से निकल गया.बाहर निकलते ही 1 थोड़ी सुनसान जगह पे सुने रास्ते के किनारे लगे नाल से पानी ले थोड़ी मिट्टी के साथ कीचड़ बना अपनी कार की बॉडी & उसके नंबर प्लेट्स पे ऐसे रगड़ा की देखने वाले को लगे की कार कीचड़ भरे रास्ते से आई है.उसका असली मक़सद तो कार का नंबर च्छुपाना था.उसने कार आगे बढ़ाई & होटेल वाय्लेट से थोड़ा पहले बने सस्ते होटेल्स के सामने लगा दी & अपनी सीट थोड़ा नीचे कर लेट गया.इस जगह से वाय्लेट का मैं एंट्रेन्स सॉफ दिखता था.उसने घड़ी पे नज़र डाली.अभी 11 बजे थे.बस उसे विजयंत मेहरा पे नज़र रखनी थी.हो ना हो वो अपनी बहू के पास या उसकी बहू उसके पास ज़रूर आएगी & तब वो रंभा से मुलाकात करेगा-अकेले मे.

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रात के 1 बजे विजयंत & सोनिया होटेल की 1 टोयोटा क़ुआलिसजसिके नंबर प्लेट्स बदल दिए गये थे,मे कंधार के लिए निकल पड़े.वो शख्स उंघ रहा था कि सामने से आती विजयंत की कार की हेडलाइट्स की रोशनी उसकी आँखो पे पड़ी .उसने आँखे खोली & बगल से गुज़रती कार के शीशे को दाए हाथ से चढ़ाता & बाए से स्टियरिंग संभाले उसे विजयंत दिखा.उसने फ़ौरन कार स्टार्ट की & उसके पीछे लग गया.1 मारुति आल्टो मे 2 सादी वर्दी के पोलीस वाले दोनो कार्स के पीछे लग गये.2 बजे तीनो गाड़ियाँ अपने पीछे लगी गाड़ी से अंजान कंधार पहुँची की विजयंत का मोबाइल बजा,"हेलो."

"कार वापास लो."

"क्या?"

"कार वापस लो.",फोन काट गया.विजयंत ने कार घुमाई तो वो शख्स & पोलीस वाले दोनो बौखला गये & उन्होने फ़ौरन अपनी-2 कार्स को घुमा के आगे बढ़ाया & तब उस शख्स ने आल्टो को देखा.उसने कार की रफ़्तार बहुत तेज़ की & पहाड़ी रास्ते के बिल्कुल किनारे ले जाते हुए अपनी कार से उस आल्टो को ओवर्टेक किया..हो ना हो ये पोलिसेवाले थे!

"सर,क्या करें अब?वो पीछा करने वाला शख्स भाग रहा है & विजयंत भी अब वापस जा रहा है?",सादी वर्दी वाला अफ़सर रज़ा को पल-2 की खबर दे रहा था.

"क्या?!तुम..तुम अभी मेहरा के पीछे लगे रहो.",तब तक आल्टो को दूसरे अफ़सर ने आगे बढ़े रास्ते के किनारे की झाड़ियो मे घुसा दिया था.2 पल बाद ही विजयंत की क़ुआलिस उनके बगल से उनकी मौजूदगी से अंजान वाहा से निकली,"..टीम सी कम इन.",रज़ा ने कंधार फॉल्स पे खड़ी अपनी टीम को तलब किया,"..मीटिंग वाहा नही हो रही है.तुमलोग जितना हो सके उतनी शांति से वाहा से निकलो आगे मैं बताता हू क्या करना है."

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क्रमशः.......

JAAL paart--43

gataank se aage......

“to ye thi sari baat.”,dono bistar pe lete the.soniya ki sleeveless ghutno tak ki safed dress thoda neeche khiski thi & uski gori jangho ka kuchh hissa numaya ho gaya tha.vijayant uski bayi taraf leta tha & uska baya hath uske ghutne ke upar hi ghum raha tha.ab soniya bhi thodi sambhal gayi thi & apne aashiq ki nazdiki & uske mardana jism ke ehsas ne uske jazbato ka rukh bhi ab mod diya tha.uska daya hath bhi vijayant ki kameez ke khule buttons ke paar uske seene ke balo me ghum raha tha.

“& tum fir bhi mujhse us galiz insan ko chhodne se rok rahe ho?!”,uski ungliyo ne vijayant ke baye nipple ko chheda.

“dekho,soniya..”,vijayant thoda ghum uske jism pe apne aadhe badan ka bhar dalte hue uski jangho ke beech ghuse hath ko upar uski panty ki or badhane laga,”..mujhe nahi lagta ki kothari itna bevkuf hai ki aisa kaam kare & usme apne shamil hone yu is tarah zahir kare.”,uska hath panty ke upar se hi soniya ki chut ko sehla raha tha.soniya ne masti me bhar uske baalo ko pakad use neeche khincha & uske munh me apni zuban ghusaate hue use shiddat se chumne lagi.

“uummmm..lekin ye bhi to ho sakta hai ki,aisa nazuk kaam kisi & ke hatho me dene ka bharosa na ho use..aannhhhh..”,soniya ki ungliya vijayant ki baaho pe kas gayi kyuki uske aashiq ki ungliya uski panty ke bagal se andar ghus uski chut ko kuredne lagi thi,”..& isiliye use khud aana pada & tumne use dekh liya..aannhhhhhhhhhhh..!”,soniya ke nakhun kamiz ke upar se hi vijayant ke mabut bazuo me dhans gaye & uske chehre pe vohi dard & masti ka mila-jula bhav aa gaya jo kisi ladki ke chehre pe masti ki shiddat ka ehsas karne pe aata hai.

“ho sakta hai.",vijayant ne uske rasile hotho ko chuma & uske upar aa apna hath uski chut se khincha & apne lund ko uski panty ke upar se hi uski gili chut pe dabaya & use dikhate hue uske ras se bhigi apni ungliya munh me ghusa uska ras pi liya.soniya vijayant ki is harkat se masti & uske liye pyar se bhar uthi & usne apne hath uski kamiz ke andar ghusa use aise failaya ki uske buttons toot gaye & agle hi pal kamiz vijayant ke jism se juda thi.dono ne 1 dusre ko baaho me bhinch liya & apne-2 jismo ko aapas me ragadte hue apne nazuk ango ko aapas me dabate hue 1 dusre ko chumne lage.

“mujhe pyar karo,vijayant..itna pyar ki main sab bhool jaoon..sab kuchh..!”,soniya ke aankho ke kone se aansuo ki 2 boonde uske galo pe dhalak gayi.vijayant ke liye soniya bas 1 mohra thi lekin is waqt use apne aap pe sharm aayi..vo 1 masoom ladki ke jazbato se khle raha tha..lekin isme uski kya galti thi?..vo chahti to use thukra bhi sakti thi lekin usne bhi pati se bewafai karne ka faisla khud hi liya tha..& fir kothari ko harane ke liye vo kuchh bhi kar sakta tha..kuchh bhi!

Soniya ke lab tharthara the & jism kanp raha tha.uska dilaziz aashiq uske kapde utar raha tha.kaisa ajib ehsas tha ye..har baar uske samne nangi hone pe use ye sharm,ye jhijhak mehsus hoti thi & sath hi dil bhi aane vali umango ki hasrat se & tezi se dhadakne lagta tha..vo use brij se bhi pehle kyu nahi mila..fir na ye dard hota na tadap..bas khushi hi khushi hoti & masti hi masti!

Vijayant khud bhi nanga ho gaya & soniya ke upar let gaya.2 hasrato se bhare jism 1 dusre se lipat gaye & masti ka khel shuru ho gaya.

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Vo shakhs apna saman bandh chuka tha lekin ab usne Devalay jane ka khayal badal diya tha..vo itna utawla kyu ho raha tha?..jaha itne baras intezar kiya usne vaha chand din aur sahi..kal savere ki ghatna ke baad vijayant to bahut hoshiyar ho gaya hoga & isiliye usne apni bahu ko mehfuz jagah yani apne ghar bhej diya.vaha jane me bahut khatra tha.use inteqam lena tha lekin uske baad fir se hawalat jane ka shauk use nahi tha..bahut der sochne ke baad usne vo raat vahi guzarne tay kiya.use kya pata tha ki uska ye faisla vijayant mehra ke liye kitna aham hone wala tha.

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“kya baat hai,kothari!”,fir se usi shakhs ka fone tha & is baar fir 1 naye number se.brij pichhle 2 dino se apne hisab se hi us anjan caller ke bare me pata lagane ki koshish kar raha tha lekin telecom department ke uske aadmi se use sirf ye pata chala tha ki ye sare number Clayworth ke public fone booths ke the,”..us din to yaar tum tohfa lene se pehle hi bhag gaye.bade darpok ho yaar!”,us shakhs ne uski khilli udai.

“kaminey!tu hai kaun?chuho ki tarah chhup ke kay mujhe phansane ki koshish kar raha hai.samne se vaar kar.”

“are yaar,tum to mujhe dushman samajhte ho!main to dost hu tumahra.us din zara timing gadbad ho gayi magar aaj nahi hogi.aaj bhi aa jao yaar & dekho ki tumhari pyari biwi kaise tumhare dushman ki baaho me gulchharre uda rahi hai.”

“kutte!meri biwi ke bare me aisi gandi baat karta hai,haramzade!..tujhe apne hatho se nark bhejunga main!”

“aur galiyaan de de yaar lekin dhardar falls ke paas ke Kamdhar Falls pe 3 baje subah aao & apni aankho se dekho ki tumahri jaan tumhare dushman ke sath kaise chonch se chonch & aur bhi bahut kuchh mila rahi hai.”,& fone kat gaya.brij gusse se kanp raha tha.use zara bhi yakin nahi tha us kaminye ki baat pe lekin..

tabhi uska mobile baja,”hello.”

“hi!brij darling.”,Kamya ki khanakti aavaz uske kano me gunji,”..kya jaan,apni biwi ko leke itni khubsurat jagah aa gaye ho & main yaha tumhare liye tadap rahi hu!”

“kya?!”,brij ke kaan khade hue.

“are soniya mili thi aaj mujhe lekin usne tumhare bare me kuchh nahi bataya..1 minute..”,kamya ko jaise kuchh yaad aaya,”..vo to mujhe Violet ki lobby me mili thi.”

“kya bol rahi ho?!”

“yehi ki soniya violet hotel me kya kar rahi thi?”,brij ne fone kaat diya.uska chehra gusse & beizzati se tamtamaya hua tha..soniya..uski jaan..balki jaan se bhi zyada..use dekhte hi uske dil me shadi ka khayal aaya tha joki aaj tak kisi bhi ladki ke liye nahi aaya tha & usne is tarah se uska bharosa toda tha & vo bhi vijayant ke sath!

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"aannhhhhh..dalo na andar..aise mat tadpao..haiiiiiiiii..!",soniya ki khuli tango ke beech uski gili chut ki darar pe apna lund ragadte vijayant uske josh ko dekh muskura raha tha.is waqt vo apni sari uljhan bhul bas uske lund ki chahat me deewani ho rahi thi.vijayant ne uske ghutne modte hue unhe uski chhatiyo pe dabaya & 1 hi jhatke me lund ko andar ghusa diya.soniya ke chehre pe dard ki lakeeren khinch gayi lekin sath hi 1 masti bhari muskan bhi uske hotho pe khelne lagi.vijayant ka lund uski kokh tak jaraha tha & uska jism ab khushi se bhar gaya tha.vijayant ghutno pe baithe hue uski chhatiyo ko masalta use chod raha tha lekin uske zehan me Rambha ka chehra ghum raha tha.apni bahu jaisi mastani ladki aajtak uske karib nahi aayi thi & bas 1 raat ki duri bhi use khalne lagi thi.

"oowwww..aannhhhhhhhhh..!",uski baaho me nakhun dhansati soniya chikh rahi thi.rambha ke khayal ne vijayant ke josh ko badha diya tha & uske dhakke & tez ho gaye the.soniya ke jhadte hi usne uske kandhe pakad use upar uthaya & apni god me bitha ke chodne laga.soniya ne uske baye kandhe pe apni thuddi jamayi & uski gardan ke gird apni baahen lapet & uski kamar pe apni tange kas aankhe band kar ke uske dhakko ka maza lene lagi.

vijayant ke hatho me uski gand ki fanke thi & uske honth soniya ki gardan ko tapa rahe the.soniya ki kasi chut me ghus uska lund ab apni bhi manzil ki or badhne ko betab tha lekin abhi bhi vijayant ke dilodimagh me rambha ka haseen chehra & nashila jism ghum raha tha.uske honth soniya ki gardan & baye kandhe ke milne vali jagah pe chipak gaye & uske hatho ne uski gand ko masal diya.soniya ne baal peechhe jhatakte hue zor se chikh mari & jhadne lagi.usi waqt vijayant ke lund ne bhi apna garm virya uski chut me chhod diya.

"trrnngggg..!",vijayant ne vaise hi apni mehbooba ko apni god me thame hue baye hath ko badha apna mobile uthaya-fir se sameer ke mobile se fone aa raha tha!,"hello."

"mehra,lagta hai tumhe apne bete se pyar nahi..",vijayant ko aavaz pichhli baar ki hi tarah thodi ajib lag rahi thi,"..tum na keval police ko sath laye balki apne jasoosi kutte ko bhi mere peechhe lagaya hua tha.lagta hai is baar tumhe tohfe me sameer ke khoon ke sath-2 uske jism ka koi hissa bhi chahiye."

"nahi!",vijayant chikha to soniya ne uske chehre ko apne hatho me tham liya.abhi chudai ki khumari utri bhi nahi thi ki is fone ne use fir se uski uljhano ki yaad dila di,"..tum use koi nuksan nahi pahuchana,please!!jo chahte ho vohi karunga main."

"thik hai.to bas abhi 2.30 baje kamdhar falls pe 1 safed toyota Qualis leke jiska number CP-0V-5214 hona chahiye,pahuncho,bina police ya Balbir Mohan ke & sath me vo kagaz bhi lao jispe ye likha hoga ki tum aane vale dino me apne karobar ko nahi badhaoge & aanevale 3 mahino tak koi naya tender nahi bharoge."

"lekin..-",fone kat chuka tha.

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"damn it!",Akram raza ne khijte hue apni bayi hatheli pe daye se mukka mara,"..bas chand seconds & line pe rehta to call trace ho jati.",vo vahi Clayworth me hi baith ke vijayant ka fone tap karwa raha tha,"..chalo,kamdhar falls 2.30 baje,chalte hain.",usne apne mathat afsar ko apna headfone thamaya & aage ki karvai ke bare me sochne laga.

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"vijayant kya hua darling?",vijayant soniya ki gand ki bayi fank ko thame baye hath me fone ko pakde jaise but ban gaya tha.

"h-hunnnn..",soniya ki aavz se jaise vo nind se jaga,"..soniya..",& usne use sari baat batayi.

"main bhi tumhare sath chalungi.",soniya bahi bhi uski god me baithi thi.

"pagal mat bano,soniya.usne mujhe akela aane ki sakht takeed ki hai."

"nahi vijayant,main sath chalungi tumhare kyuki main uska cheehra dekhna chahti hu.kaisa lagega use us waqt jab vo apne sabse bade dushman se jeetne ki khushi ke beech uski baaho me apni biwi ko dekhega.vijayant,usne tumhe itni badi chot pahuchayi hai,ab uska bhi haq banta hai,utni hi badi chot khud khane ka!",vijayant soniya ko gaur se dekh raha tha..sahi keh rahi thi vo..agar kamina kothari is sazish me shamil hai tab to is se karara tamacha use nahi pad sakta & agar nahi bhi shamil hai to bhi aisi chot use pagal karne ko kafi hai!..usne soniya ko baaho me bhar liya & use chumne laga.

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vo shakhs clayworth bus stand ki parking me pahuncha & pehle vaha ka jayza liya.uski car abhi bhi vaise hi khadi thi & use uspe nazar rakhta bhi koi nahi dikha.use 1 savari chahiye thi & nayi ka intezam karne ka waqt nayi tha.ab ye khatra to uthana hi tha.usne dhadakte dil ke sath aage badhke usne apni chabhi ka button dabaya & ping ki aavaz ke sath lock khul gaya.thik usi waqt uske kandhe pe kisi ne hath rakha.uski dhadkan & tez ho gayi & vo bahut dhire se ghuma.use puri umeed thi ki kayi policevale uski taraf apni banduke tane khade honge.use khud pe khij bhi hui ki kyu aaya tha vo is jagah vapas!

"bhai sahab,aapke paas Rs.50 ke chhutte honge?",1 chashma lagaye bhala sa shakhs uske samne 50 ka note liye khada tha.usne rahat ki sans li.kisi ankan shakhs ko dekh aisi khushi use pehle kabhi nahi hui thi.

"haan-2.ye lijiye.",usne chhutte use diye & apni parking slip & din bhar car khadi karne ke paise usne attendant ko thamaye & vaha se nikal gaya.bahar nikalte hie 1 thodi sunsan jagah pe sune raste ke kianre lage nal se pani le thodi mitti ke sath kichad bana apni car ki body & uske number plates pe aise ragda ki dekhne vale ko lage ki car kichad bhare raste se aayi hai.uska asli maqsad to car ka number chhupana tha.usne car aage badhayi & hotel violet se thoda pehle bane saste hotels ke samne laga di & apni seat thoda neeche kar let gaya.is jagah se violet ka main entrance saaf dikhta tha.usne gahdi pe nazar dali.abhi 11 baje the.bas use vijayant mehra pe nazar rakhni thi.ho na ho vo apni bahu ke paas ya uski bahu uske paas zarur ayegi & tab vo rambha se mulakat karega-akele me.

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raat ke 1 baje vijayant & soniya hotel ki 1 Toyota Qualisjsike number plates badal diye gaye the,me kamdhar ke liye nikal pade.vo shakhs ungh raha tha ki samne se aati vijayant ki car ki headlights ki roshni uski aankho pe apdi.usne aankhe kholi & bagal se guzarti car ke shishe ko daye hath se chadhata & bayew se steering sambhale use vijayant dikha.usne fauran car start ki & uske peechhe lag gaya.1 Maruti Alto me 2 sadi vardi ke police vale dono cars ke peechhe lag gaye.2 baje teeno gadiyan apne peechhe lagi gadi se anjan kamdhar pahunchi ki vijayant ka mobile baja,"hello."

"car vapaas lo."

"kya?"

"car vapas lo.",fone kat gaya.vijayant ne car ghumayi to vo shakhs & police vale dono baukhla gaye & unhone fauran apni-2 cars ko ghuma ke aage badhaya & tab us shakhs ne alto ko dekha.usne car ki raftar bahut tez ki & pahadi raste ke bilkul kinare le jate hue apni car se us alto ko overtake kiya..ho na ho ye policevale the!

"sir,kya karen ab?vo peechha karne vala shakhs bhag raha hai & vijayant bhi ab vapas ja raha hai?",sadi vardi vala afsar raza ko pal-2 ki khabar de raha tha.

"kya?!tum..tum abhi mehra ke peechhe lage raho.",tab tak alto ko dusre afsar ne aage badhe raste ke kinare ki jhadiyo me ghusa diya tha.2 pal baad hi vijayant ki qualis unke bagal se unki maujoodgi se anjan vaha se nikli,"..team c come in.",raza ne kamdhar falls pe khadi apni team ko talab kiya,"..meeting vaha nahi ho rahi hai.tumlog jitna ho sake utni shanti se vaha se niko aage main batata hu kya karna hai."

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--44

गतान्क से आगे......

उस शख्स ने अपनी कार तेज़ी से वाहा से निकाली & 1 कच्ची सड़क दिखते ही उसे उसी पे उतार दिया & कुच्छ देर बाद उसे उसी रास्ते के किनारे की झाड़ियो मे तब तक अंदर घुसाया जब तक कि वो पेड़ो के झुर्मुट के बीच नही पहुँच गयी & वाहा से आगे जाना नामुमकिन हो गया.उसने कार को वही छ्चोड़ा & आगे बढ़ने लगा कि तभी उसे 1 साया दिखा & वो वही झाड़ियो मे बैठ गया.

"तुम्हे कच्ची सड़क दिख रही है?",विजयत का मोबाइल दोबारा बजा,"..उसी रास्ते पे आगे बढ़ो & अपनी कार को छ्चोड़ दो.",पोलीस की आल्टो थोड़ी पीछे थी & जब तक वो वाहा पहुँची तब तक उसी कच्चे रास्ते से 1 दूसरी क़ुआलिस जिसका नंबर भी क्प-0व-5214 था,बहुइत तेज़ी से वापस क्लेवर्त की ओर जाती दिखी.

"सर,वो वापस क्लेवर्त जा रहा है."

"ओके,उसके पीछे लगे रहो लेकिन उसे शक़ नही होना चाहिए.",रज़ा ने कंधार वाली टीम को भी उसी रास्ते पे आगे बढ़ने को कहा.विजयंत के मोबाइल पे 2 कॉल्स आई थी लेकिन जब तक उन्हे सुना जाता कॉल्स कट गयी थी.वो बस ये सुन पाया था की उस शख्स ने उसे कंधार से लौटने को कहा था,"जीप निकालो.",उसने तय कर लिया था कि अब उसे भी विजयंत के पीछे लगना था.

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"अपना मोबाइल बंद कर वही ज़मीन पे फेंक दो.",विजयंत & सोनिया कच्चे रास्ते पे पैदल बढ़ रहे थे जब उन्हे 1 आवाज़ सुनाई दी.वो शख्स वही झड़ी मे बैठा बोलने वाले साए को देख रहा था..कहा फँस गया था वो लेकिन अब किया क्या जा सकता था?

"आगे देखो,रास्ते के किनारे की झाड़ियो मे छ्होटा सा गॅप दिखेगा.उसी मे आगे बढ़ते जाओ दोनो.",विजयंत को अजीब लगा की जो भी था उसे सोनिया के आने पे ऐतराज़ नही हुआ था लेकिन वो उसके कहे मुताबिक आगे बढ़ता रहा.कोई 30 मिनिट अंधेरे मे झाड़ियो के बीच चलने के बाद वो दोनो फिर से कंधार पे पहुँच गये थे.कंधार का नाम कंधार इसलिए था क्यूकी वो धरधार जितना तेज़ बहने वाला झरना नही था लेकिन इसका मतलब ये नही था की उसकी रफ़्तार धीमी थी,उसकी रफ़्तार भी अच्छी ख़ासी थी.

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ब्रिज जिस वक़्त कंधार & धारदार जाने वाले रास्ते के शुरू मे पहुँचा ही था कि उसने सामने से तेज़ी से आती 1 क़ुआलिस को देखा.वो जब थोड़ा आगे बढ़ा तो उसे 1 आल्टो दिखी & कुच्छ गड़बड़ी के अंदेशे से उसने अपनी कार धीमी कर ली कि उसे वही 1 ढाबा दिखा.उसने कार झट से उसके सामने लगाई & वाहा सिगरेट खरीदने चला गया.सिगरेट सुलगाते हुए उसने 2 पोलीस जीप्स को उसी आल्टो के पीछे जाते देखा.कुच्छ पल इंतेज़ार करने के बाद वो अपनी कार मे बैठा & कंधार की ओर बढ़ गया.आज उसकी ज़िंदगी का बहुत अहम लम्हा उसके इंतेज़ार मे झरने पे खड़ा था.आज उसे पता चलने वाला था कि औरत भरोसे के लायक चीज़ है या नही.

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"डॅड!",अंधेरे को चीरती 1 दर्द भरी आवाज़ गूँजी.

"समीर!",विजयंत जवाब मे चीखा & आवाज़ की दिशा मे आगे बढ़ा & झाड़ियो से निकलते ही आधे चाँद की हल्की,सफेद रोशनी मे रेलिंग्स के दूसरी तरफ अपने घुटनो पे बैठा उसे समीर दिखा.उसकी आँखो पे पट्टी बँधी थी & हाथ पीछे बँधे थे.विजयंत उसकी तरफ दौड़ा की 1 आवाज़ गूँजी.

"वही रूको,मेहरा.पहले ये बताओ की वो काग़ज़ लाए हो."

"हां.",सोन्या बहुत घबरा गयी थी & विजयंत के दाई तरफ उस से चिपकी खड़ी थी.

"आगे बढ़ो & वाहा बीच मे रखे पत्थर के नीचे उसे दबा दो & फिर वापस जाओ लड़की के पास.",विजयंत ने वैसा ही किया.जब वो काग़ज़ रख के लौटा तो सोनिया उस से बिल्कुल चिपक गयी.

"अब दोनो रेलिंग के पार जाओ & अपने बेटे को ले लो.",विजयंत का माथा ठनका,उसे काग़ज़ नही देखना है क्या?

"तुम्हे वो काग़ज़ नही देखना?",विजयंत मेहरा ने सवाल किया.

"वो मेरी परेशानी है,मेहरा.तुम अपने बेटे को सम्भालो.जाओ दोनो!"

"लड़की यही रहेगी,मैं अकेला जाऊँगा."

"तो फिर बेटे की लाश ले जाना यहा से."

"डॅड,क्या रंभा है आपके साथ?",समीर की कांपति आवाज़ आई.

"नही,तेरे बाप की यार है!"

"कामीने!",विजयंत गुस्से से चीखा.

"मेहरा,थोड़ी और देर करो & फिर सच मे बेटे की लाश ही मिलेगी तुम्हे.",सोनिया काफ़ी घबरा गयी थी.ये आवाज़ ब्रिज की नही थी & उसे अब बहुत डर लग रहा था.विजयंत ने उसकी बाँह थामी & आयेज बढ़ा.पहले विजयंत ने रेलिंग पार की & फिर सोनिया की मदद करने लगा.सोनिया रिलिंग से उतरते हुए लड़खड़ाई & विजयंत ने उसे बाहो मे थाम लिया.सोनिया ने अपनी बाहे उसकी गर्दन मे कस दी.

"मुझे बहुत डर लग रहा है,विजयंत."

"बस सब ठीक हो गया.अब वापस चलते हैं.",विजयंत ने उसकी पीठ थपथपाई & उसी वक़्त ब्रिज कोठारी वाहा पहुँचा & सामने का नज़ारा देख उसकी आँखो से अँगारे बरसने लगे.

"सोनिया!",वो चीखता हुआ उधर दौड़ा.विजयंत & सोनिया 1 दूसरे को थामे हैरत से उसे देख रहे थे.अगले पल ही वो रेलिंग पे था & विजयंत से गुत्थमगुत्था था.सोनिया चीख रही थी & दोनो को अलग करने की कोशिशें करती रो रही थी कि तभी उसके सर पे किसी ने वार किया.

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"उम्म्म्म..हूँ..प्रणव!..तुम यहा?!..आन्न्न्नह..!",प्रणव शिप्रा के सोने के बाद अपनी सास के बुंगले मे घुस आया था.बेख़बर सोती रीता को देखते हुए उसने अपने कपड़े उतारे & उसके पीछे बिस्तर मे घुस अपनी दाई बाँह उसकी कमर पे लपेट उसके दाए कान को काट लिया था.

"पागल हो तुम..उउफफफफ्फ़..",प्रणव का हाथ सास की नाइटी मे घुस गया था & उसके पेट को सहलाने के बाद उसकी चूचियों को दबाने लगा था.उसके होंठ रीता के चेहरे पे हर जगह घूम रहे थे,"..शिप्रा को पता चल गया तो ग़ज़ब हो जाएगा..उउम्म्म्मम..!",उसने दामाद के लबो से अपने लब चिपकाते हुए उसके मुँह मे अपनी ज़ुबान घुसा दी.

"वो गहरी नींद मे सो रही है & उसे यही लग रहा है कि मैं स्टडी मे काम कर रहा हू.",प्रणव उसके निपल्स को मसल रहा था & उसका लंड रीता की गंद की दरार की लंबाई मे फँस गया था.रीता ने नाइटी के नीचे कुच्छ नही पहना था & प्रणव के हाथ उसके नाज़ुक अंगो से पूरी गर्मजोशी के साथ खिलवाड़ कर रहे थे.

"फिर भी..",प्रणव ने उसकी नाइटी को उपर खींचा तो रीता ने हाथ उठा दिए ताकि वो आसानी से निकल जाए,"..ऐसे ख़तरा क्यू मोल लेते हो?..आहह..!",प्रणव उसकी दाए घुटने को आगे मोडते हुए उसकी चूत को नुमाया कर उसमे अपना तगड़ा लंड घुसा रहा था.

"क्यूकी आपसे मोहब्बत हो गयी है मुझे,मोम!",प्रणव उसे शिद्दत से चूमने लगा.रीता उसके आगोश मे क़ैद थी.प्रणव का दाया हाथ उसकी चूत के दाने से लेके चूचियो तक घूम रहा था & बाया हाथ जो उसकी गर्दन के नीचे दबा था उसके चेहरे को अपनी ओर घुमाए हुए था ताकि उसके रसीले लबो का स्वाद वो आसानी से चख सके,"..आहह..!"

"क्या हुआ?",रीता ने थोड़ी चिंता से दामाद को देखा.

"कुछ नही.आपकी चूत तो अभी भी बहुत कसी है,मों..ऊहह..आप तो शिप्रा की बड़ी बेहन से ज़्यादा नही लगती!"

"आन्न्न्नह..झूठे!",रीता का दिल तारीफ से खुशी से झूम उठा था & उसने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए दामाद के बाए गाल पे काटा.

"सच कहता हू,मोम.आपके रूप का दीवाना हो अगया हू मैं.अब तो आपके बिना जीने की सोच भी नही सकता!",उसके धक्को & उसकी उंगली की रगड़ ने उसकी सास को झाड़वा दिया था.

"आन्न्न्नह..मैं भी तुम्हारे बिना नही रह सकती,प्रणव..आइ लव यू,डार्लिंग!",प्रणव ने उठके उसकी बाई जाँघ को उठाया & फिर घुटने हुए उसके उपर आ गया.मस्ती मे चूर रीता ने उसे बाहो मे भर लिया & उसके धक्को का जवाब कमर उचका-2 के देने लगी.

"1 बात पुच्छू,मोम?"

"पुछो ना,प्रणव?",रीता ने बाया हाथ उसके चेहरे पे प्यार से फिराया & दाए से उसकी गंद को टटोला.

"अगर मैं कंपनी के लिए कोई फ़ैसला लेता हू लेकिन डॅड को वो पसंद नही & बात अगर वोटिंग तक पहुँची तो आप क्या करेंगी?",प्रणव ने उसकी चूचिया मसली & गर्दन को चूमने लगा.

"तुम्हारे दिमाग़ मे क्या है प्रणव?",रीता दामाद के सवाल से थोड़ा सोच मे पड़ गयी थी.

"अभी कुच्छ नही लेकिन मैं कंपनी के भले के लिए कुच्छ सोच रहा था?"

"क्या?"

"1 आदमी है महादेव शाह जोकि हमारे ग्रूप मे पैसा लगाने को तैयार है.डॅड उसे मना कर चुके हैं लेकिन मुझे लगता है कि हम उसे अपने ग्रूप मे इनवेस्ट करके बहुत मुनाफ़ा कमा सकते हैं."

"हूँ.....ऊव्वववव..कितने बेसबरे हो?थोड़ा आराम से करो ना!..हाईईईईईई..!",रीता ने दामाद की गंद पे चिकोटी काटी तो उसके धक्के & तेज़ हो गये.

"आप इतनी हसीन,इतनी मस्त क्यू हैं कि मैं खुद पे काबू ही नही रख पाता..आहह..!",धक्को की तेज़ी को रीता बर्दाश्त नही कर पाई & उचक के प्रणव की गर्दन थाम उसे पागलो की तरह चूमने लगी.उसकी कमर भी हिल रही थी & जिस्म थरथरा रहा था.वो झाड़ रही थी & उसकी चूत मे उसे प्रणव के गाढ़े वीर्य की पिचकारियाँ छूटती महसूस हो रही थी.

"आपने मेरे सवाल का जवाब नही दिया.",प्राणवा उसकी चूचियो पे सर रखे लेटा था & वो उसके बाल सहला रही थी.

"मुझे ज़रा तफ़सील से सब बताना,उस शाह के बारे मे भी & उसके प्रपोज़ल के बारे मे भी फिर मैं फ़ैसला करूँगी..इतना यकीन रखो प्रणव की अगर उसका प्रपोज़ल ज़रा भी ठीक लगा & बात वोटिंग तक पहुँची तो मैं तुम्हारे हक़ मे ही अपना वोट दूँगी."

"ओह,मोम.आइ लव यू!",प्रणव उसकी चूत मे पल-2 सिकुड़ता लंड डाले उठके उसके होंठ चूमने लगा तो रीता ने भी उसकी गर्दन मे बाहे डाल दी.तभी उसका मोबाइल बजा.

"हेलो..क्या?",रीता के चेहरे का रंग बात सुनते हुए बदलता जा रहा था,"..लेकिन कैसे..मुझे समझ नही आ रहा..",उसके हाथ से फोन छूट बिस्तर पे गिर गया.

"क्या हुआ मोम?!..बोलिए ना!",प्रणव ने उसे झकझोरा.

"समीर मिल गया,प्रणव..",कुच्छ पल बाद रीता बोली,"..लेकिन.."

"लेकिन क्या?"

"लेकिन..विजयंत..विजयंत..",रीता की आँखे छल्कि & फिर उसकी रुलाई छूट गयी.प्रणव ने फ़ौरन उसके उपर से उठते हुए उसकी बगल मे लेट उसे अपने आगोश मे भर लिया.

"मोम..प्लीज़ चुप हो जाइए..क्या हुआ डॅड को?..कहा है वो?..समीर कहा मिला?",वो उसे बाहो मे भरे उसके बाल & पीठ सहला रहा था.

"प्रणव..प्रणव..",प्रणव ने उसका चेहरा अपने दाए हाथ मे थाम लिया.

"हां मोम बोलिए!"

"प्रणव,विजयंत नही रहा..ही ईज़ डेड!"

पूरे मुल्क मे ये खबर जंगल की आग की तरह फैल गयी थी कि विजयंत मेहरा मारा गया है & उसके साथ ब्रिज कोठारी & उसकी बीवी सोनिया भी.मीडीया वाले गुड के आस-पास भीनभिनती मक्खियो की तरह कंधार फॉल्स,डेवाले मे मेहरा परिवार के बुंगले & ट्रस्ट ग्रूप के दफ़्तर के बाहर & आवंतिपुर के उस हॉस्पिटल जिसमे समीर भरती था,के बाहर जमा थे.

विजयंत ने शायद अपनी ज़िंदगी मे पहली बार अपना फ़ायदा ना सोचते हुए किसी & इंसान की परवाह करते हुए रात को झरने पे जाने से पहले बलबीर मोहन को कुच्छ नही बताया था वरना शायद इस वक़्त वो ब्रिज & सोनिया समेत ज़िंदा होता.बलबीर को इस बात का काफ़ी मलाल था कि जो काम उसने हाथ मे लिया था उसे वो सही तरीके से अंजाम तक ना पहुँचा सका.

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क्रमशः.......

JAAL paart--44

gataank se aage......

us shakhs ne apni car tezi se vaha se nikali & 1 kachchi sadak dikhte hi use usi pe utar diya & kuchh der baad use usi raste ke kinare ki jhadiyo me tab tak andar ghusaya jab tak ki vo pedo ke jhurmut ke beech nahi pahunch gayi & vaha se aage jana namumkin ho gaya.usne car ko vahi chhoda & aage badhen laga ki tabhi use 1 saya dikha & vo vahi jhadiyo me baith gaya.

"tumhe kachchi sadak dikh rahi hai?",vijayat ka mobile dobara baja,"..usi raste pe aage badho & apni car ko chhod do.",police ki alto thodi peechhe thi & jab tak vo vaha pahunchi tab tak usi kachche raste se 1 dusri qualis jiska number bhi CP-0V-5214 tha,bahuit tezi se vapas clayworth ki or jati dikhi.

"sir,vo vapas clayworth ja raha hai."

"ok,uske peechhe lage raho lekin use shaq nahi hona chahiye.",raza ne kamdhar vali team ko bhi usi raste pe aage badhne ko kaha.vijayant ke mobile pe 2 calls aayi thi lekin jab tak unhe suna jata calls kat gayi thi.vo bas ye sun paya tha ki us shakhs ne use kamdhar se lautne ko kaha tha,"jeep nikalo.",usne tay kar liya tha ki ab use bhi vijayant ke peechhe lagna tha.

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"apna mobile band kar vahi zamin pe fenk do.",vijayant & soniya kachche raste pe paidal badh rahe the jab unhe 1 aavaz sunai di.vo shakhs vahi jhadi me baitha bolne vale saye ko dekh raha tha..kaha fans gaya tha vo lekin ab kiya kya ja sakta tha?

"aage dekho,raste ke kinare ki jhadiyo me chhota sa gap dikhega.usi me aage badhte jao dono.",vijayant ko ajib laga ki jo bhi tha use soniya ke aane pe aitraz nahi hua tha lekin vo uske kahe mutabik aage badhta raha.koi 30 minute andhere me jhadiyo ke beech chalne ke baad vo dono fir se kamdhar pe pahunch gaye the.kamdhar ka naam kamdhar isliye tha kyuki vo Dhardhar jotna tez behne vala jharna nahi tha lekin iska matlab ye nahi tha ki uski raftar dhimi thi,uski raftar bhi achhi khasi thi.

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brij jis waqt kamdhar & dhardar jane vale raste ke shuru me pahuncha hi tha ki usne samne se tezi se aati 1 qualis ko dekha.vo jab thoda aage badha to use 1 alto dikhi & kuchh gadbadi ke andeshe se usne apni car dhimi kar li ki use vahi 1 dhaba dikha.usne car jhat se uske samne lagayi & vaha cigarette kharidne chala gaya.cigarette sulgate hue usne 2 police jeeps ko usi alto ke peechhe jate dekha.kuchh pal intezar karne ke baad vo apni car me baitha & kamdhar ki or badh gaya.aaj uski zindagi ka bahut aham lamha uske intezar me jharne pe khada tha.aaj use pata chalne vala tha ki aurat bharose ke layak chiz hai ya nahi.

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"dad!",andhere ko chirti 1 dard bhari aavaz gunji.

"sameer!",vijayant jawab me chikha & aavaz ki disha me aage badha & jhadiyo se nikalte hi aadhe chand ki halki,safed roshni me railings ke dusri taraf apne ghutno pe baitha use sameer dikha.uski aankho pe aptti bandhi thi & hath peechhe bandhe the.vijayant uski taraf dauda ki 1 aavaz gunji.

"vahi ruko,mehra.pehle ye batao ki vo kagaz laye ho."

"haan.",sonya bahut ghabra gayi thi & vijayant ke dayi taraf us se chipki khadi thi.

"aage badho & vaha beech me rakhe patthar ke neeche use daba do & fir vapas jao ladki ke paas.",vijayant ne vaisa hi kiya.jab vo kagaz rakh ke lauta to soniya us se bilkul chipak gayi.

"ab dono railing ke paar jao & apne bete ko le lo.",vijayant ka matah thanka,use kagaz nahi dekhna hai kya?

"Tumhe vo kagaz nahi dekhna?",Vijayant Mehra ne sawal kiya.

"vo meri pareshani hai,mehra.tum apne bete ko sambhalo.jao dono!"

"ladki yehi rahegi,main akela jaoonga."

"to fir bete ki lash le jana yaha se."

"dad,kya Rambha hai aapke sath?",Sameer ki kanpti aavaz aayi.

"nahi,tere baap ki yaar hai!"

"kaminey!",vijayant gusse se chikha.

"mehra,thodi & der karo & fir sach me bete ki lash hi milegi tumhe.",Soniya kafi ghabra gayi thi.ye aavz Brij ki nahi thi & use ab bahut darr lag raha tha.vijayant ne uski banh thami & aage badha.pehle vijayant ne railing paar ki & fir soniya ki madad karne laga.soniya riling se utarte hue ladkhadayi & vijayant ne use baaho me tham liya.soniya ne apni baahe uski gardan me kas di.

"mujhe bahut darr lag raha hai,vijayant."

"ba sab thik ho gaya.ab vapas chalte hain.",vijayant ne uski pith thapthapayi & usi waqt Brij Kothari vaha pahuncha & samne ka nazara dekh uski aankho se angaraye barasne lage.

"soniya!",vo chikhta hua udhar dauda.vijayant & soniya 1 dusre ko thame hairat se use dekh rahe the.agle pal hi vo railing pe tha & vijayant se gutthamguttha tha.soniya chikh rahi thi & dono ko alag karne ki koshishen karti ro rahi thi ki tabhi uske sar pe kisi ne vaar kiya.

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"ummmm..hun..Pranav!..tum yaha?!..aannnnhhhh..!",Pranav Shipra ke sone ke baad apni saas ke bungle me ghus aaya tha.bekhabar soti Rita ko dekhte hue usne pane kapde utare & uske peechhe bistar me ghus apni dayi banh uski kamar pe lapet uske daaye kaan ko kaat liya tha.

"pagal ho tum..uufffff..",pranav ka hath saas ki nighty me ghus gaya tha & uske pet ko sehlane ke baad uski chhatiyo ko dabane laga tha.uske honth rita ke chehre pe har jagah ghum rahe the,"..shipra ko pata chal gaya to gazab ho jayega..uummmmm..!",usne damad ke labo se apne lab chipkate hue uske munh me apni zuban ghusa di.

"vo gehri nind me so rahi hai & use yehi lag raha hai ki mai study me kaam kar raha hu.",pranav uske nipples ko masal raha tha & uska lund rita ki gand ki darar ki lumbai me fans gaya tha.rita ne nighty ke neeche kuchh nahi pehna tha & pranav ke hath uske nazuk ango se puri garmjoshi ke sath khilwad kar rahe the.

"fir bhi..",pranav ne uski nighth ko upar khincha to rita ne hath utha diye taki vo asani se nikal jaye,"..aise khatra kyu mol lete ho?..aahhhhhh..!",pranav uski daye ghutne ko aage modte hue uski chut ko numaya kar usme apna tagda lund ghusa raha tha.

"kyuki aapse mohabbat ho gayi hai mujhe,mom!",pranav use shiddat se chumne laga.rita uske agosh me qaid thi.pranav ka daya hath uski chut ke dane se leke chhatiyo tak ghum raha tha & baya hath jo uski gardan ke neeche daba tha uske chehre ko apni or ghumaye hue tha taki uske rasile labo ka swad vo asani se chakh sake,"..aahhhhh..!"

"kya hua?",rita ne thodi chinta se damad ko dekha.

"kuch nahi.aapki chut to abhi bhi bahut kasi hai,mom..oohhhh..aap to shipra ki badi behan se zyada nahi lagti!"

"aannnnhhhh..jhuthe!",rita ka dil tarif se khushi se jhum utha tha & usne banawati gussa dikhate hue damad ke baye gaal pe kata.

"sach kehta hu,mom.aapke roop ka deewana ho agya hu main.ab to aapke bina jine ki soch bhi nahi sakta!",uske dhakko & uski ungli ki ragad ne uski saas ko jhadwa diya tha.

"aannnnhhhhhhhhhh..main bhi tumhare bina nahi reh sakti,pranav..i love you,darling!",pranav ne uthke uski bayi jangh ko uthaya & fir ghutne hue uske upar aa gaya.masti me chur rita ne use baaho me bahr liya & uske dhakko ka jawab kamar uchka-2 ke dene lagi.

"1 baat puchhu,mom?"

"puchho na,pranav?",rita ne baya hath uske chehre pe pyar se firaya & daye se uski gand ko tatola.

"agar main company ke liye koi faisla leta hu lekin dad ko vo pasand nahi & baat agar voting tak pahunchi to aap kya karengi?",pranav ne uski choochiya masli & gardan ko chumne laga.

"tumhare dimagh me kya hai pranav?",rita damad ke saval se thoda soch me pad gayi thi.

"abhi kuchh nahi lekin main company ke bhale ke liye kuchh soch raha tha?"

"kya?"

"1 aadmi hai Mahadev Shah joki humare group me paisa lagane ko taiyar hai.dad use mana kar chuke hain lekin mujhe lagta hai ki hum use apne group me invest karake bahut munafa kama sakte hain."

"hun.....oowwwww..kitne besabre ho?thoda aaram se karo na!..haiiiiiii..!",rita ne damad ki gand pe chikoti kati to uske dhakke & tez ho gaye.

"aap itni haseen,itni mast kyu hain ki main khud pe kabu hi nahi rakh pata..aahhhh..!",dhakko ki tezi ko rita bardasht nahi kar payi & uchak ke paranv ki gardan tham use paglo ki tarah chumne lagi.uski kamar bhi hil rahi thi & jism tharthara raha tha.vo jhad rahi thi & uski chut me use pranav ke gadhe virya ki pichkariyan chhutati mehsus ho rahi thi.

"aapne mere sawal ka jawab nahi diya.",pranva uski choochiyo pe sar rakhe leta tha & vo uske baal sehla rahi thi.

"mujhe zara tafsil se sab batana,us shah ke bare me bhi & uske proposal ke bare me bhi fir main faisla karungi..itna yakeen rakho pranav ki agar uska proposal zara bhi thik laga & baat voting tak pahunchi to main tumhare haq me hi apna vote dungi."

"oh,mom.i love you!",pranav uski chut me pal-2 sikudata lund dale uthke uske honth chumne laga to rita ne bhi uski gardan me baahe daal di.tabhi uska mobile baja.

"hello..kya?",rita ke chehre ka rang baat sunte hue badalta ja raha tha,"..lekin kaise..mujhe samajh nahi aa raha..",uske hath se fone chhut bistar pe gir gaya.

"kya hua mom?!..boliye na!",pranav ne use jhakjhora.

"Sameer mil gaya,pranav..",kuchh pal baad rita boli,"..lekin.."

"lekin kya?"

"lekin..Vijayant..vijayant..",rita ki aankhe chhalki & fir uski rulayi chhut gayi.pranav ne fauran uske uapr se uthate hue uski bagal me let use apne agosh me bhar liya.

"mom..please chup ho jaiye..kya hua dad ko?..kaha hai vo?..sameer kaha mila?",vo use baaho me bahre uske baal & pith sehla raha tha.

"pranav..pranav..",pranav ne uska chehra apne daye hath me tham liya.

"haan mom boliye!"

"pranav,vijayant nahi raha..he is dead!"

Pure mulk me ye khabar jungle ki aag ki tarah fail gayi thi ki Vijayant Mehra mara gaya hai & uske sath Brij Kothari & uski biwi Soniya bhi.media wale gud ke aas-paas bhinbhinati makkhiyo ki tarah Kamdhar Falls,Devalay me mehra parivar ke bungle & Trust group ke daftar ke bahar & Avantipur ke us hospital jisme Sameer bharti tha,ke bahar jama the.

Vijayant ne shayad apni zindagi me pehli baar apna fayda na sochte hue kisi & insan ki parvah karte hue raat ko jharne pe jane se pehle Balbir Mohan ko kuchh nahi bataya tha varna shayad is waqt vo brij & soniya samet zinda hota.balbir ko is baat ka kafi malal tha ki jo kaam usne hath me liya tha use vo sahi tarike se anjam tak na pahuncha saka.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--45

गतान्क से आगे......

हाथ-पाँव बँधे समीर को अकरम रज़ा ने उसी तरह झरने के पास था.हुआ ये था कि रज़ा कंट्रोल रूम से निकला तो उस सफेद क़ुआलिस का पीछा करने के लिए था लेकिन थोड़ा आगे बढ़ते ही उसका दिमाग़ ठनका & उसने आल्टो & जीप्सी मे बैठे अपने आदमियो को क़ुआलिस को ओवर्टेक कर उसे रोकने को कहा & खुद 5 पोलिसेवालो के साथ कंधार की ओर चल पड़ा.ना जाने क्यू उसे ऐसा लग रहा था कि उसे वही झरने के पास कुच्छ सुराग मिलेगा.जब वो वाहा पहुचा तो मदद के लिए पागलो की तरह चिल्लाता,रोता-बिलखता समीर दिखा.उसने उसके बंधन खोल उस से सवाल किए & जो समीर ने बताया उसे सुनके उसे अपने कानो पे यकीन नही हुआ.

समीर के मुताबिक उसका बाप वाहा सोनिया के साथ आया था जिस देख ब्रिज गुस्से मे पागल हो अपनी छुपने की जगह से वाहा भागता हुआ आया & उसके बाप से भीड़ गया.दोनो मे काफ़ी हाथापाई हुई,सोनिया उन्हे अलग करने की कोशिश कर रही थी लेकिन दोनो को कुच्छ नही सूझ रहा था & उसी सब के बीच पता नही कैसे तीनो किनारे तक पहुँच गये.वो चीख-2 के अपने आप को आगाह कर रहा था लेकिन अगले ही पल तीनो कगार सेकयि फीट नीचे गिर गये थे.समीर के मुताबिक उसे क्लेवर्त से हरपाल ने अगवा किया था.वो गेस्ट हाउस मे सोया हुआ था जब उसने उसकी नाक पे बेहोशी की दवा वाला रुमाल दबा उसे बेहोश किया & फिर उसी की कार मे डाल उसे ले वाहा से फरार हो गया.उसे ये नही पता था कि उसे कहा रखा गया था लेकिन वो जगह किसी गोदाम जैसी लगती थी.

शुरू मे तो उसे लगा कि उसे नौकरी से निकालने की वजह से हरपाल ने ऐसा कदम उठाया है लेकिन बाद मे उसे पता चला की इसके पीछे कोठारी का भी हाथ है.उसने अपने बाज़ू दिखाए जहा पे चीरा लगाके उसका खून निकाल उसकी कमीज़ को उस से भिगो के वो ले गये थे.रज़ा को झरने के पास पत्थर के नीचे दबा वो स्टंप पेपर भी मिला था जिसपे विजयंत के दस्तख़त भी थे.उसने समीर से हरपाल के बारे मे पुछा की जब झरने के पास हाथापाई हो रही थी तो वो कहा था तो समीर ने बताया कि ब्रिज ने उसे वाहा आने से पहले ही उसे पैसे दिए थे.उसने उनकी बातें सुन ली थी & उसी से ये अंदाज़ा लगाया था कि ब्रिज को शायद किसी तरह इस बात का पता चल गया था कि हरपाल समीर से नाराज़ है & उसी बात का फ़ायदा उसने उठाया था.जब हाथापाई हुई तो हरपाल उसे वाहा नही दिखा था जबकि वही था जिसने उसे रेलिंग के पार उस जगह पे वैसे बाँध के बिठाया था.

रज़ा ने हरपाल की खोज के लिए आदमी दौड़ा दिए थे लेकिन उसे पता था कि वो नही मिलने वाला था.1 बात और उसे परेशान कर रही थी.वो ये कि सब कुच्छ उसे बहुत साधारण,बहुत सिंपल लग रहा था.ब्रिज कोठारी जैसा पहुँचा हुआ कारोबारी ऐसा कमज़ोर जाल बुनेगा कि अगर कुच्छ गड़बड़ हो तो उसके खिलाफ सारे सबूत इतनी आसानी से जुट जाएँ.मगर & कौन उसे फँसाने की सोच सकता था?..उसका सबसे बड़ा दुश्मन तो उसके साथ झरने की गोद मे सोया था.समीर भी झूठ बोलता नही दिख रहा था.उसके बाज़ू के निशान,उसकी कमज़ोर हालत & उसकी घबराहट सब उसकी सच्चाई की गवाही दे रहे थे.उसने आवंतिपुर सिविल हॉस्पिटल के साइकाइयेट्री के हेड डॉक्टर से भी बात की थी & उसकी शुरुआती रिपोर्ट भी यही कहती थी कि समीर किडनॅपिंग & बाप की दर्दनाक मौत को इतने करीब से देखने से गहरे सदमे मे है.उसने बलबीर का भी बयान दर्ज किया था & उसने भी उसे यही बताया था कि विजयंत को कोठारी पे शक़ था & उसने उसे इसी बात की तहकीकात के लिए लगाया था.वो क़ुआलिस जो कंधार से निकली थी,उसे पोलीस वालो ने रोक लिया था & उसमे से 1 डर से काँपता ड्राइवर निकला था जिसने उन्हे बताया कि 1 शख्स ने उसे ऐसा करने के लिए रुपये दिए थे.जब उसे हरपाल की तस्वीर दिखाई गयी तो उसने उसे पहचान लिया था.सारे सिरे मिल रहे थे मगर कुच्छ तो था जो अभी भी रज़ा को खटक रहा था.

रीता,प्रणव & शिप्रा आवंतिपुर पहुँच चुके थे मगर उन सब से पहले पहुँची थी रंभा.सभी को रज़ा ने ही खबर दी थी.समीर उसकी बाहो मे फुट-2 के किसी बच्चे की तरह रोया था & उसके साथ उसकी भी आँखे बरस पड़ी थी.उसे बिल्कुल अंदाज़ा नही था कि इस सब का अंजाम ऐसा दर्द भरा होगा.विजयंत & उसका रिश्ता नाजायज़ था,दोनो के रिश्ते की बुनियाद जिस्मानी थी & बस चंद दिन ही तो हुए थे उन्हे साथ मिले लेकिन इन ज़रा से दीनो मे ही 1 अजीब सा नाता जुड़ गया था दोनो के बीच मे.आज कुद्रत ने विजयंत के साथ-2 उस नाते को भी ख़त्म कर दिया था & रंभा के दिल मे टीस उठ रही थी.ये तकलीफ़ उसे समीर के लापता होने पे भी नही महसूस हुई थी लेकिन अब अपने ससुर की मज़बूत बाहो मे फिर कभी ना क़ैद हो पाने का गम उसकी आँखो से आँसुओ की शक्ल मे बरस रहा था.

"मिस्टर.प्रणव,आपके ससुर की बॉडी अभी तक झरने से बरामद नही हुई है.",रज़ा ने प्रणव को कुच्छ फॉरमॅलिटीस पूरी करने के लिए आवंतिपुर पोलीस हेडक्वॉर्टर्स बुलाया था,"..मिस्टर.&म्र्स.कोठारी की लाशें तो मिल गयी हैं लेकिन मिस्टर.मेहरा की लाश हमारे हाथ अभी तक नही लगी है.झरने का पानी बहुत गहरा है & आगे वो पानी तेज़ बहती नदी की शक्ल अख्तियार कर लेता है.ख़तरे के बावजूद गोताखोरो ने पूरी कोशिश की.उसी का नतीजा है कि 2 लाशें हमे मिली."

"तो डॅड की बॉडी का क्या हुआ होगा?"

"देखिए,2 सूरतें है या तो उनकी बॉडी बह के बहुत आगे निकली है.उस बात को मद्देनज़र रखते हुए हमने उस नदी के किनारे बसे सभी गाँवो की पोलीस को होशियार कर दिया है..& दूसरी सूरत है की बॉडी वही झरने के गिरने वाली जगह पे गहरे पानी मे डूब गयी है & उस सूरत मे हम लाचार हैं क्यूकी वाहा जो भी गोता लगाएगा वो सीधा मौत के मुँह मे जाएगा."

"हूँ."

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विजयंत मेहरा की तस्वीर उसके बुंगले के लॉन मे लगे सफेद शामियने के नीचे 1 मेज़ पे रखी थी जो उसकी शोक-सभा मे आए लोगो के लाए फूलो से घिरी हुई थी.परिवार के सभी सदस्य सफेद लिबास मे थे.रीता की आँखो पे काला चश्मा चढ़ा था & वो सभी लोगो के अफ़सोस पे बस हाथ जोड़ रही थी.15 दिन हो गये थे उस हादसे को & अब समीर भी पहले से काफ़ी बेहतर दिख रहा था.

उसने आज का सारा इंतेज़ाम अपनी देख-रेख मे करवाया था.कल सवेरे विजयंत का वकील उसकी वसीयत लेके आनेवाला था & मेहमानो की ख़ैयारियत पुछ्ते प्रणव का दिमाग़ अभी भी उसी के बारे मे सोच रहा था.जब उसने आवंतिपुर मे पहली बार समीर के मिलने के बाद देखा था तो उसे बहुत खुशी हुई थी-इसलिए नही कि उसका अज़ीज़ साला फिर से मिल गया बल्कि इसीलिए की वो उसे कंपनी संभालने या फिर उसके फ़ैसले लेने के काबिल नही लगा था.

मगर समीर ने उसकी सोच को ग़लत साबित करते हुए अपने को बिल्कुल ठीक कर लिया था.विजयंत की लाश नही मिली थी & ना ही उसका अंतिम संस्कार हुआ था,उस सूरत मे किसी की समझ नही आ रहा था कि क्या किया जाए,तब समीर ने ही फ़ैसला लिया था कि ये शोक सभा रखी जाए & उसकी आत्मा की शांति के लिए उपरवाले से दुआ की जाए.

समीर & शिप्रा अपनी मा के आस-पास ही घूमते दिख रहे थे & इन सब से थोड़ा अलग-थलग बैठी थी रंभा.उसने अपने को समीर की तीमारदारी मे डूबा दिया था & उसके ठीक होने का कुच्छ श्रेय उसे भी मिलता था लेकिन उसे समीर अब बदला-2 सा लग रहा था.ऐसा लगता था जैसे अगवा कर उसके समीर को गायब कर उसकी जगह किसी दूसरे समीर को उसके पास भेज दिया गया हो.

उसकी सास & ननद का रुख़ तो अभी भी ठंडा ही था.केवल 1 प्रणव था जो उस से हमदर्दी से बात करता था.शोक-सभा मे आए लोग उस से भी मिल रहे थे & वो भी सभी को हाथ जोड़ उनसे बात कर रही थी.उसने आँखो के कोने से देखा कि कामया वाहा आई & तस्वीर पे माला चढ़ाने के बाद पहले रीता & शिप्रा से मिली & उसके बाद समीर के साथ भीड़ से थोड़ा अलग होके बात करने लगी.बाते करते हुए समीर का बाया हाथ आगे बढ़ा & कामया के दाए हाथ को पकड़ के दबाया लेकिन फिर फ़ौरन ही उसे छ्चोड़ दिया & दोनो इधर-उधर देखने लगे जैसे ये पक्का कर रहे हों कि उनकी चोरी पकड़ी तो नही गयी.रंभा ने फ़ौरन उनकी तरफ से नज़रें हटाई & सामने खड़े मेहमान से बात करने लगी.

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"उउन्न्ह..",समीर ने करवट बदली & पीछे से उसे बाहो मे भर उसके बाए गाल को चूमती रंभा को देखने लगा,"..सोई नही तुम अभी तक?",रंभा ने मुस्कुराते हुए इनकार मे सर हिलाया.वो किसी भी कीमत पे समीर को खुद से दूर नही जाने दे सकती थी.उसने तय कर लिया था कि अपने सारे हथियारो का इस्तेमाल कर अपने पति को खुद से बेरूख़् नही होने देगी.उसने समीर के चेहरे को हाथो मे भर उसके होंठ चूमे लेकिन कुच्छ पलो के बाद समीर ने चेहरा घुमा के किस तोड़ दी.

"क्या बात है?",रंभा खिज उठी थी लेकिन उसकी आवाज़ ने उसके दिल के भाव को ज़ाहिर नही होने दिया.

"कुच्छ नही.बस मन नही है."

"अब अच्छी नही लगती मैं क्या?",मासूमियत से वो पति के उपर इस तरह से झुकी की नाइटी के गले मे से उसकी बिना ब्रा की चूचियाँ अपने पूरे शबाब मे उसे नज़र आएँ.

"ये बात नही है.",समीर की उंगलिया उसके चेहरे पे फिसली & निगाहें उसके सीने पे,"..बस सचमुच मन नही है,जान.",रंभा ने उसकी बात अनसुनी करते हुए दोबारा उसके लबो से लब सताए & अपनी छातियाँ उसके सीने पे दबा दी.समीर के बाज़ू उसकी पीठ पे कसे तो उसे बहुत खुशी हुई..उसका हुस्न अपना असर दिखा रहा था.समीर ने उसे पलटा & उसके उपर चढ़ उसे चूमने लगा.रंभा ने खुद को पति की बाहो मे ढीला छ्चोड़ दिया.समीर के हाथ उसकी नाइटी मे घुस रहे थे & कभी उसकी जाँघो तो कभी पेट पे फिसल रहे थे.

"आननह..उसने उसके निपल्स को उंगलियो मे पकड़ चिकोटी काटी तो उसकी आह निकल गयी & उसने भी समीर के लंड को उसके पाजामे के उपर से पकड़ लिया & लंड पकड़ते ही उसे विजयंत के लंड की याद आ गयी.उसका जिस्म ससुर के मज़बूत जिस्म के लिए तड़प उठा & उसके दिल मे कसक उठी.उसने समीर का लंड बहुत ज़ोर से जाकड़ लिया.वो ये भूल गयी थी की उसके पति को उसका लंड छुना पसंद नही था.समीर ने उसका हाथ लंड से अलग किया & दोनो कलाईयो को उसके सर के दोनो तरफ बिस्तर पे दबा उसके गले को चूमने लगा.रंभा को थोड़ा बुरा लगा था लेकिन अब समीर ही उसका अकेला सहारा था & फिलहाल वो उसे नाराज़ नही कर सकती थी.समीर की गर्म साँसे उसकी मस्ती को बढ़ा रही थी.उसने उसकी पकड़ मे कसमसाते हुए अपनी कमर उचकाई तो समीर उसकी बेचैनी का सबब समझते हुए नीचे आया & उसकी पॅंटी सरका के उसकी चूत चाटने लगा.रंभा भी थोड़ी देर के लिए अपनी उलझने भूल गयी & बस मस्ती मे खोने लगी.

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वो शख्स 1 कार मे विजयंत के बुंगले का बाहर से मुआयना कर अपने होटेल की ओर जा रहा था.उस रात झरने का नज़ारा अभी भी उसके ज़हन मे ताज़ा था.ब्रिज के विजयंत से भिड़ते ही वो समझ गया था कि यहा बहुत गड़बड़ होने वाली है & वो अपने च्चिपने की जगह से उठके झाड़ियो की ओट मे से तेज़ी से अपनी कार की तरफ भागा था.गड़बड़ का मतलब था पोलीस & पोलीस का मतलब था उसका फिर से जैल जाना & ऐसा वो हरगिज़ नही चाहता था.कम से कम तब तक तो नही जब तक की उसका इन्तेक़ाम पूरा ना हो जाए.वो कुच्छ दूर गया था कि उस कच्चे रास्ते पे 1 साया बहुत तेज़ी से भागता दिखा.वो जो भी था वो झरने की तरफ से ही भगा था.उसने क़ोहसिह की लेकिन उसकी शक्ल नही देख पाया.उसने इतना ज़रूर देखा कि वो शख्स कच्चे रास्ते के दूसरे तरफ की झाड़ियो मे कुद्ता हुआ घुस गया था & जब तक वो अपनी कार तक पहुँचा उसने देखा की कच्चे रास्ते से 1 मोटरसाइकल उतरके तेज़ी से वाहा से जा रही है.उसके बाद वो भी अपनी कार मे निकल भागा था लेकिन 3 चीखो की आवज़ सुनाई दी थी उसे,हैरत & घबराहट से भरी हुई चीखो की आवाज़.

वो कार मे झरनो से 2 किमी दूर गया होगा जब उसने पहाड़ी घुमावदार रास्ते पे नीचे की ओर 1 सवारी को उपर बढ़ते देखा.उसने फ़ौरन अपनी कार तेज़ी से आगे बढ़ते हुए कुच्छ पेड़ो के बीच घुसा दी & जैसे ही वो सवारी जोकि रज़ा की जीप थी,उसके पास से गुज़री & उसके कानो मे उसके एंजिन की आवाज़ आना भी बंद हो गयी वो वाहा से निकला & फिर सीधा आवंतिपुर मे ही रुका.उस बाइक को उसने दोबारा नही देखा था.उसके बाद कुच्छ दिन गोआ मे रहने के बाद आज सवेरे ही वो डेवाले आ गया था.अब उसे जल्द से जल्द रंभा से मुलाकात करनी थी.

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"आहह..समीर..हाआंणन्न्..बस..थोड़ी देर और...हाआंणन्न्..!",बिस्तर पे लेटी रंभा के उपर झुका समीर उसकी चूत मे तेज़ी से लंड अंदर-बाहर कर रहा था.कुच्छ देर पहले उसने उसकी चूत को बस थोड़ी देर ही चटा था & वो झाड़ भी नही पाई थी.जब तक वो कुछ समझती उसकी टाँगे फैलाक़े वो अपना लंड अंदर डाल उसकी चुदाई शुरू कर चुका था.उसका लंड उसे उसके सफ़र के अंजाम की ओर ले जा रहा था.वो उसके बाजुओ मे नाख़ून धंसाए अपनी कमर उचकाते हुए उसका पूरा साथ दे रही थी कि तभी समीर ने आह भरी & उसने उसका वीर्य अपनी चूत मे च्छूटता महसूस किया.अगले पल समीर उसकी छातियो पे ढेर था.वो नही झड़ी थी उस अब बहुत खिज हो रही थी.कुच्छ देर तक वैसे ही उसके सीने पे लेटे रहने के बाद समीर ने सर उठाया & उसके होतो को हल्के से चूम उसके बगल मे लेटा & फिर उसकी ओर पीठ घुमा चादर ओढ़ के सोने लगा.रंभा उसे हैरत से देख रही थी.पहले तो उसने ऐसा कभी नही किया था..फिर आज क्या वजह थी?..आख़िर क्यू बदल गया था वो?..& उस कामिनी कामया का क्या लेना-देना था इस सब से?..समीर गहरी नींद मे चला गया था.वो उठी & अपनी नाइटी उठाके बातरूम चली गयी.

उसे थोड़ी घुटन सी महसूस हो रही थी.उसने नाइटी पहन ली थी.उसके उपर उसने अपना गाउन डाला & कमरे से बाहर चली आई.आवंतिपुर से आने के बाद समीर उसे लेके अपने मा-बाप के बगल मे बने अपने बंगल मे रहने लगा था.उनका बेडरूम उपरी मंज़िल पे था.रंभा सीढ़ियो से नीचे उतरी & अपने बंगल के सामने के लॉन मे घूमने लगी.बाहर बहुत उमस थी.उसने आसमान मे देखा तो उसे चाँद का मद्धम अक्स बदलो के पीछे च्छूपा दिखा..लगता था बारिश होने वाली थी.

"नींद नही आ रही?",ख़यालो मे गुम वो चौंक पड़ी & पीछे घूमी तो देखा प्रणव खड़ा था,"..मुझे भी नही आ रही.अगर बुरा ना मानो तो तुमहरे साथ टहल लू."

"ज़रूर.",रंभा मुस्कुराइ.प्रणव उसे बहुत भला & अच्छा इंसान लगता था,"इसमे बुरा मानने वाली क्या बात है."

"1 बात पुच्छू?",कुच्छ देर तक खामोशी से साथ चलने के बाद प्रणव ने उस से पुचछा.

"क्या?"

"तुम्हे नींद क्यू नही आ रही है?",रांभ खामोशी से सर झुका के घूमती रही.

"उसकी वजह कही समीर तो नही?",रंभा ने चौक के उसे देखा..कही उसका चेहरा उसके दिल की उलझने तो बयान नही कर रहा?..& फिर नज़रे नीची कर टहलने लगी,"..मैं ये बात इसीलिए कह रहा हू कि मेरे जागने की वजह भी तुम्हारे जैसी ही है.तुम भाई की वजह से जागी हो & मैं बेहन की वजह से.",रंभा उसे देखने लगी.

"रंभा,दरअसल इसमे इन भाई-बेहन की भी कोई ग़लती नही है.इन्हे पाला-पोसा ही इसी तरह गया है कि इन्हे आजतक कभी किसी चीज़ की कमी नही हुई ये इस कारण कभी ये नही समझ पाते कि दूसरे को कभी कोई ज़रूरत महसूस हो सकती है..",वो लॉन के झूले पे बैठ गया था & रंभा भी उसके बगल मे बैठ गयी.प्रणव की निगाहें 1 पल को उसके खुले गाउन के बीच उसकी नाइटी के गले से दिखते उसके गोरे क्लीवेज पे गयी & फिर वापस उसके चेहरे पे,"..& ये हमारे दर्द से अंजान रहते हैं और उसे कभी मिटा नही पाते."

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क्रमशः.......

JAAL paart--45

gataank se aage......

Hath-panv bandhe Sameer ko Akram Raza ne usi tarah jharne ke paas tha.hua ye tha ki raza control room se nikla to us safed Qualis ka peechha karne ke liye tha lekin thoda aage badhte hi uska dimagh thanka & usne Alto & jeeps me baithe apne aadmiyo ko qualis ko overtake kar use rokne ko kaha & khud 5 policevalo ke sath kamdhar ki or chal pada.na jane kyu use aisa lag raha tha ki use vahi jharne ke paas kuchh surag milega.jab vo vaha phuncha to madad ke liye paglo ki tarah chillata,rota-bilakhta sameer dikha.usne uske bandhan khol us se sawal kiye & jo sameer ne bataya use sunke use apne kano pe yakeen nahi hua.

Sameer ke mutabik uska baap vaha soniya ke sath aaya tha jis dekh brij gusse me pagal ho apni chhupne ki jagah se vaha bhagta hua aaya & uske baap se bhid gaya.dono me kafi hathapai hui,sonia unhe alag karne ki koshish kar rahi thi lekin dono ko kuchh nahi sujh raha tha & usi sab ke beech pata nahi kaise teeno kinare tak pahuncha gaye.vo chikh-2 ke apne aap ko aagah kar raha tha lekin agle hi pal teeno kagar sekayi feet neeche gir gaye the.sameer ke mutabik use Clayworth se Harpal ne agwa kiya tha.vo guest house me soya hua tha jab usne uski nak pe behoshi ki dawa wala rumal daba use behosh kiya & fir usi ki car me daal use le vaha se farar ho gaya.use ye nahi pata tha ki use kaha rakha gaya tha lekin vo jagah kisi godam jaisi lagti thi.

Shuru me to use laga ki use naukri se nikalne ki vajah se harpal ne aisa kadam uthaya hai lekin baad me use pata chala ki iske peechhe kothari ka bhi hath hai.usne apne bazu dikhaye jaha pe chira lagake uska khun nikal uski kamiz ko us se bhigo ke vo le gaye the.raza ko jharne ke paas patthar ke neeche daba vo stamp paper bhi mila tha jispe vijayant ke dastkhat bhi the.usne sameer se harpal ke bare me puchha ki jab jharne ke paas hathapai ho rahi thi to vo kaha tha to sameer ne bataya ki brij ne use vaha aane se pehle hi use paise diye the.usne unki baaten sun li thi & usi se ye andaza lagaya tha ki brij ko shayad kisi tarah is baat ka pata chal gaya tha ki harpal sameer se naraz hai & usi baat ka fayda usne uthaya tha.jab hathapai hui to harpal use vaha nahi dikha tha jabki vahi tha jisne use railing ke paar us jagah pe vaise bandh ke bithaya tha.

Raza ne harpal ki khoj ke liye aadmi dauda diye the lekin use pata tha ki vo nahi milne vala tha.1 baat aur use pareshan kar rahi thi.vo ye ki sab kuchh use bahut sadharan,bahut simple lag raha tha.brij kothari jaisa pahuncha hua karobari aisa kamzor jaal bunega ki agar kuchh gadbad ho to uske khilaf sare saboot itni asani se jut jayen.magar & kaun use phansane ki soch sakta tha?..uska sabse bada dushman to uske satha jharne ki god me soya tha.sameer bhi jhuth bolta nahi dikh raha tha.uske bazu ke nishan,uski kamzor halat & uski ghabrahat sab uski sachchai ki gavahi de rahe the.usne avantipur civil hospital ke psychiatry ke head doctor se bhi baat ki thi & uski shuruati report bhi yehi kehti thi ki sameer kidnapping & baap ki dardnak maut ko itne karib se dekhne se gehre sadme me hai.usne balbir ka bhi bayan darj kiya tha & usne bhi use yehi bataya tha ki vijayant ko kothari pe shaq tha & usne use isi baat ki tehkikat ke liye lagaya tha.vo qualis jo kamdhar se nikli thi,use police valo ne rok liya tha & usme se 1 darr se kanpta driver nikla tha jisne unhe bataya ki 1 shakhs ne use aisa karne ke liye rupaye diye the.jab use harpal ki tasveer dikhayi gayi to usne use pehchan liya tha.sare sire mil rahe the magar kuchh to tha jo abhi bhi raza ko khatak raha tha.

Rita,Pranav & Shipra avantipur pahunch chuke the magar un sab se pehle pahunchi thi Rambha.sabhi ko raza ne hi khabar di thi.sameer uski baaho me phut-2 ke kisi bachche ki tarah roya tha & uske sath uski bhi aankhe baras padi thi.use bilkul andaza nahi tha ki is sab ka anjam aisa dard bhara hoga.vijayant & uska rishta najayaz tha,dono ke rishte ki buniyad jismani thi & bas chand din hi to hue the unhe sath mile lekin in zara se dino me hi 1 ajib sa nata jud gaya tha dono ke beech me.aaj kudrat ne vijayant ke sath-2 us nate ko bhi khatm kar diya tha & rambha ke dil me tees uth rahi thi.ye taklif use sameer ke lapata hone pe bhi nahi mehsus hui thi lekin ab apne sasur ki mazbut baaho me fir kabhi na qaid ho pane ka ghum uski aankho se aansuo ki shakl me baras raha tha.

"mr.pranav,aapke sasur ki body abhi tak jharne se baramad nahi hui hai.",raza ne pranav ko kuchh formalities puri karne ke liye avantipur police headquarters bulaya tha,"..mr.&mrs.kothari ki lashen to mil gayi hain lekin mr.mehra ki lash humare hath abhi tak nahi lagi hai.jharne ka pani bahut gehra hai & aage vo pani tez behti nadi ki shakl akhtiyar kar leta hai.khatre ke bavjud gotakhoro ne puri koshish ki.usi ka natija hai ki 2 lashen hume mili."

"to dad ki body ka kya hua hoga?"

"dekhiye,2 suraten hai ya to unki body beh ke bahut aage nikli hai.us baat ko maddenazar rakhte hue humne us nadi ke kinare base sabhi ganvo ki police ko hoshiyar kar diya hai..& dusri surat hai ki body vahi jharne ke girne vali jagah pe gehre pani me doob gayi hai & us surat me hum lachahr hain kyuki vaha jo bhi gota lagayega vo seedha maut ke munh me jayega."

"hun."

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vijayant mehra ki tasveer uske bungle ke lawn me lage safed shamiyane ke neeche 1 mez pe rakhi thi jo uski shok-sabha me aaye logo ke laye phoolo se ghiri hui thi.parivar ke sabhi sadasya safed libas me the.rita ki aankho pe kala chashma chadha tha & vo sabhi logo ke afsos pe bas hath jod rahi thi.15 din ho agye the us hadse ko & ab sameer bhi pehle se kafi behtar dikh raha tha.

usne aaj ka sara intezam apni dekh-rekh me karwaya tha.kal savere vijayant ka vakil uski vasiyat leke aanevala tha & mehmano ki khaiariyat puchhte pranav ka dimagh abhi bhi usi ke bare me soch raha tha.jab usne avantipur me pehli baar sameer ke milne ke baad dekha tha to use bahut khushi hui thi-isliye nahi ki uska aziz sala fir se mil gaya balki isiliye ki vo use company sambhalne ya fir uske faisle lene ke kabil nahi laga tha.

magar sameer ne uski soch ko galat sabit karte hue apne ko bilkul thik kar liya tha.vijayant ki lash nahi mili thi & naa hi uska antim sanskar hua tha,us surat me kisi ki samajh nahi aa raha tha ki kya kiya jaye,tab sameer ne hi faisla liya tha ki ye shok sabha rakhi jaye & uski aatma ki shanti ke liye uparwale se dua ki jaye.

sameer & shipra apni maa ke aas-paas hi ghumte dikh rahe the & in sab se thoda alag-thalag baihti thi rambha.usne apne ko sameer ki teemardari me duba diya tha & uske thik hone ka kuchh shrey use bhi milta tha lekin use sameer ab badla-2 sa lag raha tha.aisa lagta tha jaise agwa kar uske sameer ko gayab kar uski jagah kisi dusre sameer ko uske paas bhej diya gaya ho.

uski saas & nanad ka rukh to abhi bhi thanda hi tha.keval 1 pranav tha jo us se humdardi se baat karta tha.shok-sabha me aaye log us se bhi mil rahe the & vo bhi sabhi ko hath jod unse baat kar rahi thi.usne aankho ke kone se dekha ki Kamya vaha aayi & tasveer pe mala chadhane ke baad pehle rita & shipra se mili & uske baad sameer ke sath bheed se thoda alag hoke baat karne lagi.baate karte hue sameer ka baya hath aage badha & kamya ke daye hath ko pakad ke dabaya lekin fir fauran hi use chhod diya & dono idhar-udhar dekhne lage jaise ye pakka kar rahe hon ki unki chori pakdi to nahi gayi.rambha ne fauran unki taraf se nazren hatayi & samne khade mehman se baat karne lagi.

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"uunnhh..",sameer ne karwat badli & peechhe se use baaho me bhar uske baye gaal ko chumti rambha ko dekhne laga,"..soyi nahi tum abhi tak?",rambha ne muskurate hue inkar me sar hilaya.vo kisi bhi keemat pe sameer ko khud se door nahi jane de sakti thi.usne tay kar liya tha ki apne sare hathyaro ka istemal kar apne pati ko khud se berukh nahi hone degi.usne sameer ke chehre ko hatho me bhar uske honth chume lekin kuchh palo ke baad sameer ne chehra ghuma ke kiss tod di.

"kya baat hai?",rambha khij uthi thi lekin uski aavaz ne uske dil ke bhav ko zahir nahi hone diya.

"kuchh nahi.bas man nahi hai."

"ab achhi nahi lagti main kya?",masumiyat se vo pati ke upar is tarah se jhuki ki nighty ke gale me se uski bina bra ki chhatiya apne pure shabab me use nazar aayen.

"ye baat nahi hai.",sameer ki ungliya uske chehre pe fisli & nigahen uske seene pe,"..bas sachmuch man nahi hai,jaan.",rambha ne uski baat ansuni karte hue dobara uske labo se lab sataye & apni chhatiya uske seene pe daba di.sameer ke bazu uski pith pe kase to use bahut khushi hui..uska husn apna asar dikha raha tha.sameer ne use palta & uske upar chadh use chumne laga.rambha ne khud ko pati ki baaho me dhila chhod diya.sameer ke hath uski nighty me ghus rahe the & kabhi uski jangho to kabhi pet pe fisal rahe the.

"aannhhhh..usne uske nipples ko ungliyo me pakad chikoti kati to uski aah nikal gayi & usne bhi sameer ke lund ko uske pajame ke uapr se pakad liya & lund pakadte hi use vijayant ke lund ki yaad aa gayi.uska jism sasur ke mazbut jism ke liye tadap utha & uske dil me kasak uthi.usne sameer ka lund bahut zor se jakad liya.vo ye bhul gayi thi ki uske pati ko uska lund chhuna pasand nahi tha.sameer ne uska hath lund se alag kiya & dono kalaiyo ko uske sar ke dono taraf bistar pe daba uske gale ko chumne laga.rambha ko thoda bura laga tha lekin ab sameer hi uska akela sahara tha & filhal vo use naraz nahi kar sakti thi.sameer ki garm sanse uski masti ko badha rahi thi.usne uski pakad me kasmasate hue apni kamar uchkayi to sameer uski bechaini ka sabab samajhte hue neeche aaya & uski panty sarka ke uski chut chaatne laga.rambha bhi thodi der ke liye apni uljhane bhul gayi & bas masti me khone lagi.

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vo shakhs 1 car me vijayant ke bungle ka bahar se muayana kar apne hotel ki or ja raha tha.us raat jharne ka nazara abhi bhi uske zehan me taza tha.brij ke vijayant se bhidte hi vo samajh gaya tha ki yaha bahut gadbad hone vali hai & vo apne chhipne ki jagah se uthke jhadiyo ki ot me se tezi se apni car ki taraf bhaga tha.gadbad ka matlab tha police & police ka matlab tha uska fir se jail jana & aisa vo hargiz nahi chahta tha.kam se kam tab tak to nahi jab tak ki uska inteqam pura na ho jaye.vo kuchh der gaya tha ki us kachche raste pe 1 saya bahut tezi se bhagta dikha.vo jo bhi tha vo jharne ki taraf se hi bhaga tha.usne kohsih ki lekin uski shakl nahi dekh paya.usne itna zarur dekha ki vo shakhs kachche raste ke dusre taraf ki jhadiyo me kudta hua ghus gaya tha & jab tak vo apni car tak pahuncha usne dekha ki kachche raste se 1 motorcycle utarke tezi se vaha se ja rahi hai.uske baad vo bhi apni car me nikal bhaga tha lekin 3 chikho ki aavz sunayi di thi use,hairat & ghabrahat se bhari hui chikho ki aavaz.

vo car me jharno se 2 km door gaya hoga jab usne pahadi ghumavdar raste pe neeche ki or 1 savari ko upar badhte dekha.usne fauran apni car tezi se aage badhate hue kuchh pedo ke beech ghusa di & jaise hi vo savari joki raza ki jeep thi,uske paas se guzri & uske kano me uske engine ki aavaz aana bhi band ho gayi vo vaha se nikla & fir seedha avantipur me hi ruka.us bike ko usne dobara nahi dekha tha.uske baad kuchh din Goa me rehne ke baad aaj savere hi vo devalay aa gaya tha.ab use jald se jald rambha se mulakat karni thi.

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"aahhhh..sameer..haaaannnn..bas..thodi der aur...haaaannnn..!",bistar pe leti rambha ke upar jhuka sameer uski chut me tezi se lund andar-bahar kar raha tha.kuchh der pehle usne uski chut ko bas thodid er hi chata tha & vo jhad bhi nahi payi thi.jab tak vo kuch samajhti uski tange failake vo apna lund andar daal uski chudai shuru kar chuka tha.uska lund use uske safar ke anjam ki or le ja raha tha.vo uske bazuo me nakhun dhansaye apni kamar uchkate hue uska pura sath de rahi thi ki tabhi sameer ne aah bhari & usne uska virya apni chut me chhutata mehsus kiya.agle pal sameer uski chhatiyo pe dher tha.vo nahi jhadi thi us eba bahut khij ho rahi thi.kuchh der tak vaise hi uske seen pe lete rehne ke baad sameer ne sar uthaya & uske hotho ko halke se chum uske bagal me leta & fir uski or pith ghuma chadar odh ke sone laga.rambha use hairat se dekh rahi thi.pehle to usne aisa kabhi nahi kiya tha..fir aaj kya vajah thi?..aakhir kyu badal gaya tha vo?..& us kamini kamya ka kya lena-dena tha is sab se?..sameer gehri nind me chala gaya tha.vo uthi & apni nighty uthake bathroom chali gayi.

use thodi ghutan si mehsus ho rahi thi.usne nighty pehan li thi.uske upar usne apna gown dala & kamre se bahar chali aayi.avantipur se aane ke baad sameer use leke apne maa-baap ke bagal me bane apne bungle me rehne laga tha.unka bedroom upri manzil pe tha.rambha sidhiyo se neeche utri & apne bungle ke samne ke lawn me ghumne lagi.bahar bahut umas thi.usne aasmaan me dekha to use chand ka maddham aks badlo ke peechhe chhupa dikha..lagta tha barish hone wali thi.

"nind nahi aa rahi?",khayalo me gum vo chaunk padi & peechhe ghumi to dekha pranav khada tha,"..mujhe bhi nahi aa rahi.agar bura na mano to tumahre sath tehal lu."

"zarur.",rambha muskurayi.pranav use bahut bhala & achha insan lagta tha,"isme bura manane vali kya baat hai."

"1 baat puchhu?",kuchh der tak khamoshi se sath chalne ke baad pranav ne us se puchha.

"kya?"

"tumhe nind kyu nahi aa rahi hai?",rambh khamoshi se sar jhuka ke ghumti rahi.

"uski vajah kahi sameer to nahi?",rambha ne chauk ke use dekha..kahi uska chehra uske dil ki uljhnae to bayan nahi kar raha?..& fir nazre neechi kar tehalne lagi,"..main ye baat isiliye keh raha hu ki mere jagne ki vajah bhi tumahre jaisi hi hai.tum bhai ki vajah se jagi ho & main behan ki vajah se.",rambha use dekhne lagi.

"rambha,darasla isme in bhai-behan ki bhi koi galti nahi hai.inhe pala-posa hi isi tarah gaya hai ki inhe aajtak kabhi kisi chiz ki kami nahi hui ye is karan kabhi ye nahi samajh pate ki dusre ko kabhi koi zarurat mehsus ho sakti hai..",vo lawn ke jhule pe baith gaya tha & rambha bhi uske bagal me baith gayi.pranav ki nigahen 1 pal ko uske khule gown ke beech uski nighty ke gale se dikhte uske gore cleavage pe gayi & fir vapas uske chehre pe,"..& ye huamre dard se anjan rehte hain & use kabhi mita nahi pate."

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--46

गतान्क से आगे......

"लेकिन समीर तो पहले ऐसा नही था.",रंभा अपनी उंगलियो से खेल रही थी.

"शिप्रा भी पहले ऐसी नही थी लेकिन अब देखो..माना की मॉम का गम बहुत ज़्यादा है लेकिन मुझे तो वो भूल ही गयी है जैसे!"

"परेशान होगी वो भी."

"नही,हमेशा से ही ऐसे होता आया है.अभी मोम का बहाना है तो पहले कभी उसकी कोई पार्टी या फिर सहेली..हुंग!..मैं कब तक बर्दाश्त करू..आख़िर पति हू उसका मेरी भी उस से कुच्छ उमीदें हैं..",वो खामोश हो गया & फिर सामने देखते हुए बोला,"..कुच्छ ज़रूरतें है मेरी भी.",रंभा उसकी बात का मतलब समझ रही थी..यानी दोनो का गम 1 जैसा ही था.वो भी प्यासी थी & प्रणव भी.उसने थोड़ा सा चेहरा दाई तरफ घुमाया..प्रणव सजीला नौजवान था & जिस्म भी सुडोल था..अब विजयंत जैसी बात नही थी लेकिन अब उसके जैसा मर्द दूसरा मिलना शायद नामुमकिन था..ठीक उसी वक़्त प्रणव ने चेहरा घुमाया & दोनो की आँखे लड़ गयी & उसने शायदा रंभा की निगाहो को पढ़ भी लिया.रंभा ने झट से चेहरा घुमा लिया & उसी पल आसमान से बूंदे बरसने लगी.

"अरे..बारिश आ गयी!",रंभा उठके तेज़ी से बंगल की तरफ जाने लगी & प्रणव भी की उसका पैर फिसला.प्रणव उसके दाई तरफ ही था,उसने झट से बाई बाँह उसकी कमर मे डाल उसे थामा & दाए हाथ मे उसका दाया हाथ थाम उसे सहारा देके बंगल के दरवाज़े तक ले आया.तेज़ी से चलने & प्रणव के हाथो के एहसास ने रंभा की धड़कने तेज़ कर दी थी.उसके हसीन चेहरे & उपर-नीचे होते क्लीवेज पे बारिश के मोती चमक रहे थे.अब दोनो बारिश से भीग नही रहे थे लेकिन फिर भी प्रणव ने अपने हाथ उसके जिस्म से हटाए नही थे & रंभा को देखे जा रहा था.रंभा बेबाक लड़की थी लेकिन थी तो लड़की ही & प्रणव की निगाहो,जिनमे उसके साथ की हसरत सॉफ झलक रही थी,की तपिश से उसके गुलाबी गाल & सुर्ख होने लगे थे.

"मैं जाऊं..",थरथरते लबो से वो बस इतना ही कह पाई थी.

"क्यू?",रंभा ने बस उसकी निगाहो मे अपनी सवालिया निगाहो से देखा.

"मेरा साथ पसंद नही तुम्हे?",प्राणवा का हाथ उसकी कमर पे और कस गया था & उसका चेहरा रंभा के दाए गाल के & नज़दीक आ गया था.आसमान मे बिजली काड्की & उसकी चमक मे रंभा ने प्रणव के चेहरे को देखा.ये वो पल था जब उसे फ़ैसला लेना था.1 कदम आगे बढ़ाके बंगल की दहलीज़ के अंदर होती & दोनो का रिश्ता शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो जाता & अगर वही खड़े हुए बस अपना सर उसके सीने पे झुका देती तो..तो उसे इस परिवार मे अपने ससुर के जाने के बाद 1 और सहारा मिल जाता.समीर की बदली रंगत देख अब उसे प्रणव को अपना साथी बना लेना ठीक लगा & उसने अपना सर दाई तरफ झुका उसके सीने पे रख दिया.

प्रणव ने रंभा के दाए हाथ को थामे हुए ही अपने दाए हाथ से उसकी ठुड्डी उपर की & उसके उपर झुकने लगा.रंभा की साँसे और तेज़ हो गयी.प्रणव की गर्म साँसे वो अपने चेहरे पे महसूस कर रही थी & उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.प्रणव & झुका & उसके नर्म लबो पे सटी पानी की बूँदो को अपने होंठो से हौले से सॉफ किया.रंभा सिहर उठी उस नाज़ुक च्छुअन से.प्रणव के होंठ उसके लबो को सहला रहे थे,उसकी आँखे बंद हो गयी थी & वो बस उस रोमानी लम्हे मे खोए जा रही थी.

प्रणव अब बहुत धीमे से उसके होंठो को चूम रहा था.उसके लब उसकी हर्कतो से कांप रहे थे & जब प्रणव ने किस की शिद्दत बढ़ते हुए उसके होंठो को अपने होंठो की गिरफ़्त मे लिया तो सिले लबो से भी उसकी आह निकल गयी & वो थोड़ा सा उसकी तरफ़ा घूम गयी.प्रणव ने उसके दाए हाथ को छ्चोड़ा & अपने दाए हाथ को भी उसकी कमर मे डाल उसे अपने आगोश मे भर लिया.रंभा के हाथ भी उसके सीने से आ लगे & जब प्रणव के लबो ने उसके लेबो के पार जाने की इजाज़त माँगी तो उसने शरमाते हुए अपने लब बहुत थोड़े से खोल दिए.

प्रणव की ज़ुबान उस ज़रा सी दरार से उसके मुँह मे घुसी & उसकी बेसबरा ज़ुबान से टकराई & उसके बाद रंभा की सारी झिझक ख़त्म हो गयी.उसने अपने इस नये प्रेमी के गले मे बाहें डाल दी & पूरी शिद्दत एक्स आठ उसकी किस का जवाब देने लगी.प्रणव ने उसकी कमर को कसते हुए उसे खुद से ऐसे चिपका लिया की उसकी छातियाँ प्रणव के सीने से पिस गयी & उसका लंड उसके पेट पे दब गया.रंभा उन एहसासो से & मस्त हो गयी & प्रणव के बालो को खींचते हुए उसकी ज़ुबान को चूसने लगी.

प्रणव ने उसे पीछे धकेल के बंगल दरवाज़े की बगल की दीवार से लगा दिया & अपने जिस्म को उसके जिस्म पे दबाते हुए बहुत ज़ोर से चूमने लगा.उसके हाथ रंभा की कमर & पीठ को अपनी बेताबी से जला रहे थे.प्रणव का दाया हाथ नीचे गया & उसने रंभा की जाँघ पकड़ के उपर उठाई & ठीक उसी वक़्त ज़ोर से बिजली काड्की.

"नही!",रंभा उस आवाज़ & रोशनी से जैसे होश मे आई & प्रणव को परे धकेल दिया.दीवार से लगी वो बहुत ज़ोर से साँसे ले रही थी,"..ये ठीक नही!"

"क्या ठीक नही?",प्रणव उसके करीब आया & उसके चेहरे को दाए हाथ मे थामा & बाए हाथ की उंगली उसके दाए चेहरे पे बाई तरफ माथे से लेके बाए गाल से होते हुए ठुड्डी तक फिराई,"..कि हम दोनो ज़ख़्मी दिल 1 दूसरे को मरहम लगा रहे हैं..जब हमारे हमसफ़र हमारे दर्द की परवाह नही कर रहे तो हमे हक़ नही खुद उस दर्द को दूर करने का?!",समीर की आँखो मे चाहत के शोले चमक रहे थे.उसकी उंगली रंभा के लाबो से जा लगी थी & रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली थी,"..जवाब दो,रंभा क्या ठीक नही है?"

"ओह!प्रणव..",रंभा ने उसे बाहो मे खींचा & चूमने लगी,"..लेकिन किसी को पता चल गया तो?",सवाल पुच्छ वो दोबारा उसे बाहो मे बार चूमने लगी.

"मैंहू ना!किसी को कभी कुच्छ पता नही चलेगा!",उसने उसे आगोश मे भरते हुए उसकी गर्दन पे चूमा,"आइ लव यू,रंभा!"

"आइ लव यू टू,प्रणव!",काफ़ी देर तक दोनो 1 दूसरे से लिपटे अपने प्यार का इज़हार अपने हाथो & लबो से करते रहे,"..अब जाओ."

"प्लीज़!",समीर ने बाहो से छिटकी रंभा को रोकना चाहा.

"नही,अभी नही.यहा बहुत ख़तरा है.प्लीज़,प्रणव जाओ!",वो आगे हुई & 1 आख़िरी बार अपने इस नये-नवेले प्रेमी के लब चूमे और उसे जाने को कहा.

"ओके.",प्रणव ने उसके माथे को चूमा & वाहा से चल गया.उसकी पीठ रंभा की तरफ थी & वो उसकी मुस्कान नही देख सकती थी.कल वसीयत पढ़ी जानी थी & उसे पूरा यकीन था कि विजयंत मेहरा ने अपने शेर्स अपने बेटे के नाम छ्चोड़े होंगे लेकिन बेटे की बीवी अब उसके जाल मे थी.उसे कंपनी पे हुकूमत का चस्का लग गया था & वो उस स्वाद को अब थोड़ा महसूस करना चाहता था.

रंभा ने दरवाजा बंद किया & सीढ़ियाँ चढ़ उपर अपने कमरे मे गयी.समीर वैसे ही बेख़बर सो रहा था.रंभा ने अपने कपड़े उतरे & बाथरूम मे घुस गयी.प्रणव की हर्कतो ने उसके जिस्म की आग को और भड़का दिया था.वो बाथरूम के ठंडे फर्श पे लेट गयी & अपने हाथो से अपने जिस्म को समझाने लगी.

"मिस्टर.विजयंत मेहरा के ट्रस्ट ग्रूप के सारे शेर्स उनके बेटे समीर मेहरा को जाते हैं..",सवेरे वसीयत पढ़ते वकील के यही लफ्ज़ अभी रात तक प्रणव के दिमाग़ मे गूँज रहे थे.

"ये लो..",महादेव शाह ने स्कॉच का ग्लास प्रणव की ओर बढ़ाया,"..हमारी पार्ट्नरशिप के नाम,जो शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो गयी.",उसने जाम उपर उठाया.प्रणव की आँखें गुस्से & दर्द से लाल थी.उसने ग्लास उठाया & कुच्छ पल शराब को देखता रहा फिर उसे सामने की दीवार पे दे मारा.

"काँच के ग्लास पे गुस्सा उतारने से क्या हासिल होगा बर्खुरदार?",शाह वैसे ही बैठा पी रहा था.

"फ़िक्र मत करिए शाह साहब.हमारी पार्ट्नरशिप ज़रूर होगी."

"लेकिन कैसे?अभी-2 तुम ही ने कहा कि समीर भी बाप के जैसे ही सोच रहा है & उसे भी किसी बाहर के शख्स पे कंपनी मे इनवेस्टमेंट के लिए भरोसा नही!",शाह तल्खी से बोला.

"ये समीर कह रहा है लेकिन अगर समीर की जगह कंपनी का मालिक कोई & हो जाए तो?"

"कोई &..",शाह ने सोचते हुए अपनी ठुड्डी खुज़ाई,"..मसलन?"

"मसलन कोई भी..रीता मेहरा,शिप्रा मेहरा या फिर रंभा मेहरा.",शाह कुच्छ पल उसे देखता रहा & फिर दोनो के ठहाको से शाह का ड्रॉयिंग हॉल गूँज उठा.

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सोनम ने कयि दिनो बाद राहत की सांस ली थी.क्लेवर्त मे हुए हादसे के बाद उसके तो होश ही उड़ गये थे & वो बहुत घबरा गयी थी कि कही पोलीस की तहकीकात से ब्रिज & उसके ताल्लुक का राज़ ना खुल जाए.उसने सबसे पहले उस फोन को,जो उसे ब्रिज ने दिया था & जिसे वो बस उस से बात करने के लिए इस्तेमाल करती थी,उसे तोड़ा & उसके सिम कार्ड को भी तोड़ शहर के बड़े नाले मे डाल आई.ब्रिज ने उसे अभी तक कोई पैसे तो दिए नही थे तो उस बात की चिंता उसे थी नही.

अगले कुच्छ दिन तो उसका फोन बजता तो उसे यही लगता कि पोलीस का होगा लेकिन जैसे-2 दिन बीते उसका डर कम होता गया & सबसे अच्छी बात तो ये हुई कि प्रणव की जगह ग्रूप की कमान अब समीर के हाथो मे थी.उसने इस बीच रंभा से 1 बार मुलाकात की थी लेकिन उसे प्रणव के इरादो के बारे मे बताने की हिम्मत उसे तब भी नही हुई.अब समीर के लौटने के बाद उसने उस बात के बारे मे सोचना छ्चोड़ भी दिया था.

अब तो उसे लगने लगा था कि ब्रिज का मारना 1 तरह से उसके लिए अच्छी ही बात थी.अब उसे किसीसे तरह का कोई डर नही था & उसे 1 सीख भी मिली थी कि आगे से वो अपने फ़ायदे के लिए ऐसे खेल ना खेले जो ख़तरो से भरे होते थे.

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"कल दोपहर 12 बजे मिलना मुझे इस पते पे.",रंभा अपने बंगल की दीवार से सटी थी & प्रणव उसकी कमर सहलाते हुए उसे चूम रहा था.उसने 1 काग़ज़ का टुकड़ा & 1 चाभी अपने कुर्ते की जेब से निकाले & उसकी ब्रा मे अटका दिए.समीर अगले ही दिन पूरे मुल्क मे फैले अपने दफ़्तरो & प्रॉजेक्ट्स के दौरे पे निकल रहा था & दोनो प्रेमियो को मिलने का मौका मिल गया था.

"ठीक है.अब जाओ.",रंभा ने उसे परे धकेला & अपने बंगल के अंदर घुस गयी.

"रंभा!",प्रणव फुसफुसाया.

"कल.",रंभा ने दरवाज़ा बंद करते हुए उसे मुस्कुरा के देखा & फिर उपर अपने कमरे मे चली गयी.समीर बेख़बर सो रहा था,रंभा ने सोचा कि उसे जगाए मगर फिर उसे पिच्छली 2 रातो की कहानी याद आई & उसने अपना इरादा बदल दिया & बिस्तर पे लेट अपने हाथो से अपने जिस्म से खेलने लगी.

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1 अपार्टमेंट बिल्डिंग के 11वे माले के फ्लॅट मे उसे प्रणव ने बुलाया था.रंभा तय वक़्त से थोड़ा पहले ही पहुँच गयी थी.प्रणव को दफ़्तर & बीवी से झूठ बोल कर उस से मिलना था लेकिन उसे ऐसी कोई उलझन नही थी.सास & ननद ने उस से रिश्ता ना के बराबर ही रखा था & पति अभी शहर मे था नही.

रंभा ने आसमानी रंग की सारी & ब्लाउस पहना था लेकिन अपने इस नये प्रेमी को रिझाने मे वो कोई कसर नही छ्चोड़ना चाहती थी.उसने फ्लॅट के बेडरूम मे रखे ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे देखते हुए अपना आँचल अपने सीने से गिराया & अपने ब्लाउस को उतार दिया.आसमानी रंग के स्ट्रेप्लेस्स ब्रा मे क़ैद उसकी चूचियाँ शीशे मे चमक उठी.हाथ पीछे ले जाके उसने ब्रा को खोला & उसकी चूचिया खुली हवा मे सांस लेने लगी.

रंभा ने बिस्तर से साथ लाया 1 पॅकेट उठाया & उसमे से चाँदी के रंग का चमकता ब्लाउस निकाला जोकि स्ट्रेप्लेस्स ट्यूब टॉप की शक्ल मे था & उसे पहन लिया.अब उसके गोरे कंधे & सीने के उपर का हिस्सा खुला हुआ था.उसने आँचल को वापस सीने पे डाला & अपने खुले बालो को सामने अपनी बाई चूची के उपर कर लिया.

"ज़्यादा देखोगी तो कही शीशे मे जान ना आ जाए & वो तुम्हे बाहो मे ना भर ले.",रंभा चौंक के मूडी तो देखा प्रणव कमरे की दहलीज पे खड़ा था.कुच्छ शर्म,कुच्छ तारीफ की खुशी से आई मुस्कान उसके होंठो पे खेलने लगी.प्रणव आगे बढ़ा & उसकी गुदाज़ उपरी बाहें थाम उसे अपनी ओर खींचा तो रंभा ने उसे हंसते हुए परे धकेला.

"किस लिए बुलाया है मुझे यहा?",वो शोखी से उसे देख रही थी.

"तुम्हारी इबादत करने के लिए.",प्रणव ने दोबारा वही हरकते दोहराई & रंभा के बाए गाल पे चूम लिया.

"ये इबादत है!",रंभा अपने चेहरे को घुमा उसे अपने सुर्ख लबो से महरूम रखा,"..तुम तो काफिरो जैसी हरकतें कर रहे हो..उउम्म्म्म..!",प्रणव ने उसके लब चूमने मे कामयाबी हासिल कर ही ली थी.

"आशिक़ तो ऐसे ही अपने महबूब को पूजते हैं.",1 पल को होंठ जुदा कर उसने रंभा की काली आँखो मे झाँका & इस बार जब उसके होंठ झुके तो रंभा ने अपने होंठ खोल उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ा दी & अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी.

"छ्चोड़ो..",रंभा ने कुच्छ देर बाद किस तोड़ी & उदास सी सूरत बना प्रणव की तरफ पीठ कर ली,"..शुरू मे सब ऐसी ही बाते करते हैं फिर किसी वीरान जंगल मे पड़ी पत्थर मूरत की तरह छ्चोड़ देते हैं जिसकी इबादत तो दूर किसी को उसका ख़याल भी नही रहता.",रंभा प्रणव को ये कतई नही पता चलने देना चाहती थी कि वो चुदाई कि दीवानी 1 गर्मजोशी से भरी लड़की है जोकि अपने फ़ायदे के लिए किसी भी मर्द के साथ सोने से नही झिझकति थी.उसके सामने तो उसे 1 बेबस बीवी की तस्वीर पेश करनी थी जिसका पति उस से बेरूख़् हो गया है.

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क्रमशः.......

JAAL paart--46

gataank se aage......

"lekin sameer to pehle aisa nahi tha.",rambha apni ungliyo se khel rahi thi.

"shipra bhi pehle aisi nahi thi lekin ab dekho..mana ki mom ka ghum bahut zyada hai lekin mujhe to vo bhul hi gayi hai jaise!"

"pareshan hogi vo bhi."

"nahi,humesha se hi aise hota aaya hai.abhi mom ka bahana hai to pehle kabhi uski koi party ya fir saheli..hunh!..main kab tak bardasht karu..aakhir pati hu uska meri bhi us se kuchh umeeden hain..",vo khamosh ho gaya & fir samne dekhte hue bola,"..kuchh zaruraten hai meri bhi.",rambha uski baat ka matlab samajh rahi thi..yani dono ka ghum 1 jaisa hi tha.vo bhi pyasi thi & pranav bhi.usne thoda sa chehra dayi taraf ghumaya..pranav sajila naujawan tha & jism bhi sudol tha..ab vijayant jaisi baat nahi thi lekin ab uske jaisa mard dusra milna shayad namumkin tha..thik usi waqt pranav ne chehra ghumaya & dono ki aankhe lad gayi & usne shayda rambha ki nigaho ko padh bhi liya.rambha ne jhat se chehra ghuma liya & usi pal aasmaan se boonde barsne lagi.

"are..barish aa gayi!",rambha uthke tezi se bungle ki taraf jane lagi & pranav bhi ki uska pair fisla.pranav uske dayi taraf hi tha,usne jhat se bayi banh uski kamar me daal use thama & daye hath me uska daya hath tham use sahara deke bungle ke darwaze tak le aaya.tezi se chalne & pranav ke hatho ke ehsas ne rambha ki dhadkane tez kar di thi.uske haseen chehre & upar-neeche hote cleavage pe barish ke moti chamak rahe the.ab dono barish se bhig nahi rahe the lekin fir bhi pranav ne apne hath uske jism se hataye nahi the & rambha ko dekhe ja raha tha.rambha bebak ladki thi lekin thi to ladki hi & pranav ki nigaho,jinme uske sath ki hasrat saaf jhalak rahi thi,ki tapish se uske gulabi gaal & surkh hone lage the.

"main jaoon..",thartharate labo se vo bas itna hi keh payi thi.

"kyu?",rambha ne bas uski nigaho me apni sawaliya nigaho se dekha.

"mera sath pasand nahi tumhe?",pranva ka hath uski kamar pe aur kas gaya tha & uska chehra rambha ke daye gaal ke & nazdik aa gaya tha.aasman me bijli kadki & uski chamak me rambha ne pranav ke chehre ko dekha.ye vo pal tha jab use faisla lena tha.1 kadam aage badhake bungle ki dehleez ke andar hoti & dono ka rishta shuru hone se pehle hi khatm ho jata & agar vahi khade hue bas apna sar uske seene pe jhuka deti to..to use is parivar me apne sasur ke jane ke baad 1 aur sahara mil jata.sameer ki badli rangat dekh ab use pranav ko apna sathi bana lena thik laga & usne apna sar dayi taraf jhuka uske seene pe rakh diya.

Pranav ne Rambha ke daye hath ko tahme hue hi apne daye hath se uski thuddi upar ki & uske upar jhukne laga.rambha kisanse & tez ho gayi.pranav ki garm sanse vo apne chehre pe mehsus kar rahi thi & uska dil bahut zoro se dhadak raha tha.pranav & jhuka & uske narm labo pe sati pani ki boondo ko apne hotho se haule se saaf kiya.rambha sihar uthi us nazuk chhuan se.pranav ke honth uske labo ko sehla rahe the,uski aankhe band ho gayi thi & vo bas us romani lamhe me khoye ja rahi thi.

pranav ab bahut dhime se uske hotho ko chum raha tha.uske lab uski harkato se kanp rahe the & jab pranav ne kiss ki shiddat badhate hue uske hotho ko apne hotho ki giraft me liya to sile labo se bhi uski aah nikal gayi & vo thoda sa uski tarfa ghum gayi.pranav ne uske daye hath ko chhoda & apne daye hath ko bhi uski kamar me daal use apne agosh me bhar liya.rambha ke hath bhi uske seene se aa lage & jab pranav ke labo ne uske labo ke paar jane ki ijazat mangi to usne sharmate hue apne lab bahut thode se khol diye.

pranav ki zuban us zara si darar se uske munh me ghusi & uski besabra zuban se takrayi & uske baad rambha ki sari jhijhak khatm ho gayi.usne apne is naye premi ke gale me baahen daal di & puri shiddat eks ath uski kiss ka jawab dena lagi.pranav ne uski kamar ko kaste hue use khud se aise chipka liya ki uski chhatiyan pranav ke seene se pis gayi & uska lund uske pet pe dab gaya.rambha un ehsaso se & mast ho gayi & pranav ke baalo ko khinchte hue uski zuban ko chusne lagi.

pranav ne use peechhe dhakel ke bungle darwaze ki bgaal ki deewar se laga diya & apne jism ko uske jism pe dabate hue bahut zor se chumne laga.uske hath rambha ki kamar & pith ko apni betabi se jala rahe the.pranav ka daya hath neeche gaya & usne rambha ki jangh pakad ke upar uthayi & thik usi waqt zor se bijli kadki.

"nahi!",rambha us aavz & roshni se jaise hosh me aayi & pranav ko pare dhakel diya.deewar se lagi vo bahut zor se sanse le rahi thi,"..ye thik nahi!"

"kya thik nahi?",pranav uske karib aaya & uske chehre ko daye hath me thama & baye hath ki ungli uske daye chehre pe bayi taraf mathe se leke baye gaal se hote hue thuddi tak firayi,"..ki hum dono zakhmi dil 1 dusre ko marham laga rahe hain..jab humare humsafar huamre dard ki parvah nahi kar rahe to hume haq nahi khud us dard ko door karne ka?!",sameer ki aankho me chahat ke shole chamak rahe the.uski ungli rambha ke labo se ja lagi thi & rambha ne amsti me aankhe band kar li thi,"..jawab do,rambha kya thik nahi hai?"

"oh!pranav..",rambha ne use baaho me khincha & chumne lagi,"..lekin kisi ko pata chal gaya to?",sawal puchh vo dobara use baaho me bar chumne lagi.

"mainhu na!kisi ko kabhi kuchh pata nahi chalega!",usne sue agosh me bharte hue uski gardan pe chuma,"i love you,rambha!"

"i love you too,pranav!",kafi der tak dono 1 dusre s elipte apne pyar ka izhar apne hatho & labo se karte rahe,"..ab jao."

"please!",sameer ne baaho se chhitakti rambha ko rokna chaha.

"nahi,abhi nahi.yaha bahut khatra hai.please,pranav jao!",vo aage hui & 1 aakhiri baar apne is naye-navele premi ke lab chume & use jane ko kaha.

"ok.",pranav ne uske mathe ko chuma & vaha se chal gaya.uski pith rambha ki taraf thi & vo uski muskan nahi dekh sakti thi.kal vasiyat padhi jani thi & use pura yakin tha ki Vijayant Mehra ne apne shares apne bete ke naam chhode honge lekin bete ki biwi ab uske jaal me thi.use company pe hukumat ka chaska lag gaya tha & vo us swad ko ab taumra mehsus karna chahta tha.

rambha ned arwaza band kiya & seedhiyan chadh upar apne kamre me gayi.sameer vaise hi bekhabar so raha tha.rambha ne apne kapde utare & bathroom me ghus gayi.pranav ki harkaot ne uske jism ki aag ko aur bhdka diya tha.vo bathroom ke thande farsh pe let gayi & apne hatho se apne jism ko samjhane lagi.

"Mr.Vijayant Mehra ke Trust Group ke sare shares unke bete Sameer Mehra ko jate hain..",savere vasiyat padhte vakil ke yehi lafz abhi raat tak Pranav ke dimagh me goonj rahe the.

"ye lo..",Mahadev Shah ne scotch ka glass pranav ki or badhaya,"..humari partnership ke naam,jo shuru hone se pehle hi khatm ho gayi.",usne jaam upar uthaya.pranav ki aankhen gusse & dard se laal thi.usne glass uthaya & kuchh pal sharab ko dekhta raha fir use samne ki deewar pe de mara.

"kanch ke glass pe gussa utarne se kya hasil hoga barkhurdar?",shah vaise hi baitha pi raha tha.

"fikr mat kariye shah sahab.humari partnership zarur hogi."

"lekin kaise?abhi-2 tum hi ne kaha ki sameer bhi baap ke jaise hi soch raha hai & use bhi kisi bahar ke shakhs pe company me investment ke liye bharosa nahi!",shah talkhi se bola.

"ye sameer keh raha hai lekin agar sameer ki jagah company ka malik koi & ho jaye to?"

"koi &..",shah ne sochte hue apni thuddi khujai,"..maslan?"

"maslan koi bhi..Rita Mehra,Shipra Mehra ya fir Rambha Mehra.",shah kuchh pal use dekhta raha & fir dono ke thahako se shah ka drawing hall goonj utha.

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Sonam ne kayi dino baad rahat ki sans li thi.Clayworth me hue hadse ke baad uske to hosh hi ud gaye the & vo bahut ghabra gayi thi ki kahi police ki tehkikat se Brij & uske talluk ka raaz na khul jaye.usne sabse pehle us fone ko,jo use brij ne diya tha & jise vo bas us se baat karne ke liye istemal karti thi,use toda & uske sim card ko bhi tod shehar ke bade nale me daal aayi.brij ne use abhi tak koi paise to diye nahi the to us baat ki chinta use thi nahi.

agle kuchh din to uska fone bajta to use yehi lagta ki police ka hoga lekin jaise-2 din beete uska darr kam hota gaya & sabse achhi baat to ye hui ki pranav ki jagah group ki kaman ab sameer ke hatho me thi.usne is beech rambha se 1 baar mulakat ki thi lekin use pranav ke irado ke barre me batane ki himmat use tab bhi nahi hui.ab sameer ke lautne ke baad usne us baat ke bare me sochna chhod bhi diya tha.

ab to use lagne laga tha ki brij ka marna 1 tarah se uske liye achhi hi baat thi.ab use kisis tarah ka koi darr nahi tha & use 1 seekh bhi mili thi ki aage se vo apne fayde ke liye aise khel na khele jo khatro se bhare hote the.

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"kal dopahar 12 baje milna mujhe is pate pe.",rambha apne bungle ki deewar se sati thi & pranav uski kamar sehlate hue use chum raha tha.usne 1 kagaz ka tukda & 1 chabhi apne kurte ki jeb se nikale & uski bra me atka diye.sameer agle hi din pure mulk me phaile apne daftaro & projects ke daure pe nikal raha tha & dono premiyo ko milne ka mauka mil gaya tha.

"thik hai.ab jao.",rambha ne use pare dhakela & apne bungle ke andar ghus gayi.

"rambha!",pranav phusphusaya.

"kal.",rambha ne darwaza band karte hue use muskura ke dekha & fir upar apne kamre me chali gayi.sameer bekhabar so raha tha,rambha ne socha ki use jagaye magar fir use pichhli 2 raato ki kahani yaad aayi & usne apna irada badal diya & bistar pe let apne hatho se apne jsim se khelne lagi.

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1 apartment building ke 11ve male ke flat me use pranav ne bulaya tha.rambha tay waqt se thoda pehle hi pahuncha gayi thi.pranav ko daftar & biwi se jhuth bol kar us se milna tha lekin use aisi koi uljhan nahi thi.saas & nanad ne us se rishta na ke barabar hi rakha tha & pati abhi shehar me tha nahi.

rambha ne aasmani rang ki sari & blouse pehna tha lekin apne is naye premi ko rijhane me vo koi kasar nahi chhodna chahti thi.usne flat ke bedroom me rakhe dressing table ke shishe me dekhte hue apna aanchal apne seene se giraya & apne blouse ko utar diya.aasmani rang ke strapless bra me qaid uski chhatiya shishe me chamak uthi.hath peechhe le jake usne bra ko khola & uski chhatiyan khuli hawa me sans lene lagi.

rambha ne bistar se sath laya 1 packet uthaya & usme se chandi ke rang ka chamakta blouse nikala joki strapless tube top ki shakl me tha & use pehan liya.ab uske gore kandhe & seene ke upar ka hissa khula hua tha.usne aanchal ko vapas seene pe dala & apne khule baalo ko samne apni bayi chhati ke upar kar liya.

"zyada dekhogi to kahi shishe me jaan na aa jaye & vo tumhe baaho me na bhar le.",rambha chaunk ke mudi to dekha pranav kamre ki dheleez pe khada tha.kuchh sharm,kuchh tareef ki khushi se aayi muskan uske hotho pe khelne lagi.pranav aage badha & uski gudaz upri baahen tham use apni or khincha to rambha ne use hanste hue pare dhakela.

"kis liye bulaya hai mujhe yaha?",vo shokhi se use dekh rahi thi.

"tumhari ibadat karne ke liye.",pranav ne dobara vahi harkate dohrayi & rambha ke baye gaal pe chum liya.

"ye ibadat hai!",rambha apne chehre ko ghuma use apne surkh labo se mehrum rakha,"..tum to kafiro jaisi harkaten kar rahe ho..uummmm..!",pranav ne uske lab chumne me kamyabi hasil kar hi li thi.

"aashiq tyo aise hi apne mehboob ko pujte hain.",1 pal ko honth juda kar usne rambha ki kali aankho me jhanka & is baar jab uske honth jhuke to rambha ne apne honth khol uski zuban se apnmi zuban lada di & apni baahe uske gale me daal di.

"chhodo..",rambha ne kuchh der baad kiss todi & udas si surat bana pranav ki taraf pith kar li,"..shuru me sab aisi hi baatne karte hain fir kisi veeran jungle me padi patthar murat ki tarah chhod dete hain jiski ibadat to door kisi ko uska khayal bhi nahi rehta.",rambha pranav ko ye katai nahi pata chalne dena chahti thi ki vo chudai ki deewani 1 garmjoshi se bhari ladki hai joki apne fayde ke liye kisi bhi mard ke sath sone se nahi jhijhakti thi.uske samne to use 1 bebas biwi ki tasveer pesh karni thi jiska pati us se berukh ho gaya hai.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--47

गतान्क से आगे......

"ये पुजारी अपनी इस हुस्न & इश्क़ की देवी की मरते दम तक पूजा करेगा & जिस दिन अपने इस वादे को तोड़े वो उसका इस धरती पे आख़िरी दिन होगा.",पीछे से आ उसके बाए कंधे पे बाया हाथ रख & दाए से उसके चेहरे को अपनी ओर घुमा के प्रणव ने उसकी आँखो मे झाँका तो रंभा तेज़ी से घूमी & उसकी कमर मे बाहे डाल,उसके गले से लग गयी.दोनो के हाथ 1 दूसरे की पीठ पे घूम रहे थे.प्रणव का लंड तो रंभा की नंगी कमर की चिकनाई महसूस करते ही खड़ा हो गया था.दोनो का कद लगभग बराबर था & उसका लंड सीधा रंभा की चूत पे दबा था.

रंभा की चूत भी लंड को महसूस करते ही कसमसाने लगी थी.प्रणव ने अपना सर रंभा के बाए कंधे से उठाया तो उसने भी चेहरा उसके सामने कर दिया & दोनो 1 बार फिर पूरी शिद्दत के साथ 1 दूसरे को चूमने लगे.प्रणव के हाथ उसकी कमर से लेके कंधो तक घूम रहे थे & रंभा अब मस्त हो रही थी.वो भी प्रणव के जिस्म की बगलो पे अपने हाथ हसरत से फिरा रही थी.

दोनो काफ़ी देर तक 1 दूसरे की ज़ुबानो को चूस्ते हुए उनसे खेलते रहे.प्रणव का जोश और बढ़ा तो उसने रंभा की गंद हल्के से दबा दी तो वो चिहुनक उठी & उसे बनावटी गुस्से से देखते हुए किस तोड़ दी.प्रणव की नज़रो मे अब वासना के लाल डोरे तैरने लगे थे.उसने डाए हाथ से रंभा के बाए कंधे से उसका पल्लू सरका दिया.रंभा ने उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन तब तक पल्लू फर्श को चूम रहा था.उसने बनावटी हया से अपना चेहरा बाई तरफ घुमा लिया.

मस्ती से उसकी साँसे तेज़ हो गयी थी & तेज़ साँसे उसके सीने मे जो हुलचूल मचा रही थी,उसे देख प्रणव का हलक सूख गया & उसने थूक गटकते हुए अपने होंठो पे ज़ुबान फिराई.ऐसी हसीन-ओ-दिलकश लड़की आजतक उसने नही देखी थी.उसने दाए हाथ को उसके कंधे से सरकते हुए उसके बाए गाल पे किया & उसका चेहरा फिर से अपनी ओर घुमाया तो रंभा ने आँखे बंद कर ली.मस्ती से तमतमाए गाल & बंद आँखे हया की तस्वीर पेश कर रहे थे & प्रणव के जोश को & बढ़ा रहे थे.

प्रणव ने अपना हाथ उसके बाए गाल से सटा दिया तो रंभा आँखे बंद किए हुए ही,उस तरफ चेहरे को थोड़ा झुका के उसके हाथ पे अपने गाल को हौले-2 रगड़ने लगी.प्रणव की निगाहें उसके चेहरे से लेके उसके सीने & पेट से नीचे उसके पाँवो तक गयी & फिर उपर आई.वो आगे बढ़ा & अपने होंठ रंभा की गर्दन पे दाई तरफ लगा दिए.उसके होंठ उसके ब्लाउस के उपर के नुमाया हिस्से पे घूमने लगे.

रंभा ने उसके अपने गाल पे रखे हाथ कि हथेली से अपने होंठ सटा दिए & चूमने लगी.प्रणव का बाया हाथ उसकी कमर से आ लगा & उसे सहलाने लगा.रंभा अब हल्की-2 आहे भर रही थी.प्रणव ने उसकी कमर को बाई बाँह मे कसते हुए उसके चेहरे को थामा & उसकी गर्दन चूमते हुए उसे घुमा के बिस्तर पे गिरा दिया.

रंभा की टाँगे लटकी थी & उसके उपर चढ़ा प्रणव उसके चेहरे को चूमे जा रहा था.कुच्छ देर बाद वो उठा & उसने उसकी टाँगे पकड़ के बिस्तर के उपर कर दी.ऐसा करने से रंभा की सारी थोड़ा उठ गयी & उसकी गोरी टाँगे दिखने लगी.प्रणव ने उन्हे देखा तो उन्हे पकड़ के उसके पैर चूमने लगा.रंभा बिस्तर पे घूम के पेट के बल लेट गयी & तकिये को पकड़ के प्रणव के होंठो का लुत्फ़ उठाने लगी.

प्रणव के हाथ उसकी सारी को घुटने तक करने के बाद उसकी टाँगो को सहला रहे थे & उसके होंठ उसके हाथो के बताए रास्ते पे घूम रहे थे.रंभा ने खुशी & मस्ती से मुस्कुराते हुए तकिये मे मुँह च्छूपा लिया क्यूकी प्रणव का हाथ उसकी सारी मे & उपर घुस उसकी जाँघो के पिच्छले मांसल हिस्से को दबा रहा था.कुच्छ पल बाद उसकी सारी उसकी कमर तक थी & उसकी आसमानी रंग की पॅंटी नुमाया हो गयी जिसके बीचोबीच 1 गीला धब्बा उसकी चूत की कसक की दास्तान कहता दिख रहा था.

"उउन्न्ह..आन्न्न्नह..!",प्रणव उसकी जाँघो को चूम & चूस रहा था & रंभा की आहें धीरे-2 तेज़ हो रही थी.उसकी जाँघो को चूमते हुए प्रणव उसकी कमर पे आया & उसे भी अपने होंठो से तपाने के बाद उसकी पीठ से होता उसके चेहरे तक पहुँच गया.रंभा के रसीले लबो से उसका जी भर ही नही रहा था.उसने उसके दाए कंधे को पकड़ थोड़ा घुमाया & उसके होंठ चूमने लगा तो रंभा ने भी दाए हाथ को पीछे ले जाके उसके बालो को पकड़ लिया & अपने होंठो से जवाब देने लगी.

प्रणव का दाया हाथ उसके पेट पे चला गया था & उसे सहला रहा था.उसकी उंगलिया उसकी गहरी नाभि की गहराई से बाहर आना ही नही चाह रही थी.उसके होंठ 1 बार फिर से रंभा की गोरी गर्दन पे घूम रहे थे.चूत की कसक & बढ़ी तो रंभा ने गंद पीछे कर अपने प्रेमी के लंड से उसे सटा दिया.प्रणव समझ गया कि उसकी महबूबा अब पूरी तरह से मस्त हो चुकी है.उसने फ़ौरन उसके कंधे पकड़ उसे सीधा किया & उसके हाथो को अपनी कमीज़ पे रख दिया.उसका इशारा समझ रंभा ने उसके बटन्स खोले & उसकी कमीज़ उतार दी.

प्रणव के बालो भरे सीने को देख उसका दिल खुशी से झूम उठा & उसने अपने हसरत भरे बेसब्र हाथ उन बालो मे फिराए & फिर अपनी इस थोड़ी बेबाक हरकत पे शरमाने का नाटक करते हुए हाथ पीछे खींच अपने चेहरे को उनमे च्छूपा लिया.प्रणव उसकी इस अदा पे और खुशी & जीश से भर गया & उसने उसके पेट पे उंगली फिरानी शुरू कर दी.

"ऊन्नह..नही करो..गुदगुदी होती है..!",हाथो के पीछे से ही रंभा बोली तो प्रणव ने हंसते हुए उँघली को उसकी सारी मे घुसा उसे कमर से खींच दिया,"..नही..!",हाथ चेहरे से हटा उसपे फैली मस्ती अपने प्रेमी को दिखाते हुए रंभा ने उसका हाथ पकड़ लिया लेकिन प्रणव ने उसकी अनसुनी करते हुए उसकी सारी खोल दी & फिर पेटिकोट भी.उसने अपनी दाई बाँह रंभा की जाँघो के नीचे लगा के उन्हे उपर उठाया & फिर अपने गर्म होंठ उनसे चिपका दिए.जोश से कसमसाती रंभा कभी उसके बॉल खींच तो कभी उसके हाथो को पकड़ उसे अपने जिस्म से अलग करने की कोशिस कर रही थी लेकिन प्रणव वैसे ही उसकी जाँघो से चिपका हुआ था.

"ओईईईईई..माआाआअन्न्‍नणणन्..!",रंभा का जिस्म झटके खाने लगा & वो मस्ती मे सर दाए-बाए हिलाने लगी.प्रणव ने पॅंटी के उपर से ही उसकी चूत को चूमना शुरू कर दिया था & वो उसकी इस हरकत को बर्दाश्त नही कर पाई थी & झाड़ गयी थी.प्रणव ने फ़ौरन उसकी पॅंटी नीचे खींची & उसकी चूत से बहते रस को पीने लगा.रंभा उसके बाल नोचती वैसे ही कांपति पड़ी थी.

जब प्रणव ने अपना चेहरा उसकी चूत से उठाया तो वो करवट ले फिर से तकिये मे मुँह च्छूपाते हुए पेट के बल हो गयी.प्रणव की हालत जोश से और बुरी हो गई क्यूकी अब उसकी आँखो के सामने रंभा की पुष्ट,क़ातिल गंद थी.उसने उसकी फांको को बड़े हौल्के से च्छुआ.रंभा के जिस्म मे थरथराहट सी हुई & वो फिर से घूमने की कोशिश करने लगी मगर तब तक उसका प्रेमी उसके पिच्छले उभारो पे झुक,उनके बीच की डरा मे अपनी नाक घुसा के अपना चेहरा वाहा दफ़्न करने की कोशिश कर रहा था.

रंभा ने तकिये को खीच अपने सीने के नीचे किया & अपनी चूचियाँ उसपे दबाते हुए सर उठाके ज़ोर-2 से आहें लेने लगी.प्रणव ने उसकी फांको को भींचा & उन्हे काटने लगा.रंभा दर्द & मस्ती के मिले-जुले एहसास से मुस्कुरा उठी & उसकी आहें & तेज़ हो गयी.

"नाआआअ..हाईईईईईईईईईईईईईईई..!",प्रणव की ज़ुबान उसके गंद के छेद को छेड़ने लगी थी & रंभा की हालत बुरी हो गयी थी.उसने दाया हाथ पीछे ले जाते हुए प्रणव के बॉल पकड़ उसके सर को उपर खींचा & करवट ले सीधी हो गयी.प्रणव ने वासना भरी मुस्कान उसकी तरफ फेंकी & बिस्तर पे खड़े हो पॅंट उतार नंगा हो गया.उसके 8.5 इंच के लंड को देख रंभा का दिल खुशी से नाच उठा लेकिन उसने मस्ती से बोझल पॅल्को को बंद कर उसे अपने शर्म मे डूबे होने का एहसास कराया.

नंगा प्रणव उसके दाई तरफ लेटा & उसे बाई करवट पे अपनी तरफ घुमा उसकी कमर सहलाते हुए चूमने लगा.उसका लंड भी उसकी चूत को चूम रहा था.रांभे ने अब अपने को पूरी तरह से अपने आशिक़ के हाथो मे सौंप दिया था.उसके सीने के बालो मे हाथ फिराते हुए उसने भी उसे बाहो मे भर लिया था.प्रणव ने उसके बाए कंधे के उपर से देखते हुए उसके ब्लाउस को खोला & जैसे ही उसकी चूचियाँ नुमाया हुई वो उनपे टूट पड़ा.उन मस्त गोलाईयों को अपने मुँह मे भर के वो उन्हे चूसने लगा.हाथो मे उन्हे भर वो उन्हे ज़ोर से दबाता & जब रंभा आहे भरते हुए जिस्म को उपर मोडती तो वो उसके निपल्स को चूसने लगता. छातियों को चाटते हुए जब उसने उसके निपल्स को उंगलियो मे मसला तो रंभा ज़ोर से चीखते हुए दोबारा झाड़ गयी.

अब वक़्त आ गया था दोनो जिस्मो के 1 होने का & उनके रिश्ते को जिस्मानी बंधन मे बाँधने का.प्रणव ने उसकी टाँगे फैलाई & उनके बीच घुटने पे बैठके अपना लंड अंदर घुसाया,"ऊव्ववव..दर्द हो रहा है..थोड़ा धीरे करो ना..आन्न्न्नह..!",सच्चाई तो ये थी कि विजयंत के बाद उसे अब कोई भी लंड दर्द पहुचने वाला नही लगता था लेकिन ऐसी हरकत कर वो प्रणव के मर्दाना अहम को सहला उसे और जोश मे भर देना चाहती थी.

"बस हो गया,मेरी जान..आहह..!",चूत की कसावट ने तो प्रणव को हैरत मे डाल दिया.ऐसा लग रहा था मानो वो कोई कुँवारी चूत चोद के उसका कुँवारापन लूट रहा हो.मस्ती मे भर उसने ज़ोर का धक्का लगाया.

"हाईईईईईईईई..रामम्म्मममममममम..कितने ज़ल्म हो..ऊन्न्‍न्णनह..!",प्रणव उसके उपर लेट आ गया था & उसके चेहरे को चूमते हुए उसे चोद रहा था.कुच्छ देर बाद रंभा के हाथ भी उसकी पीठ पे फिरने लगे & जब उसने उसकी गंद को दबाया तो उसके धक्के & तेज़ हो गये. दोनो अब 1 दूसरे को पूरी शिद्दत से चूमते हुए चुदाई कर रहे थे.रंभा कयि दिनो बाद ऐसे मस्त तरीके से चुद रही थी.विजयंत के जाने के बाद ये पहला मौका था जब कोई मर्द उसे इस तरह से मस्ती के आसमान मे उड़ा रहा था.प्रणव के पास विजयंत जैसा लंड नही था ना ही वैसी मर्दाना खूबसूरती लेकिन था वो चुदाई मे माहिर.

पहले तो उसने बहुत गहरे धक्के लगाए जिनमे वो लंड को सूपदे तक खींच फिर जड तक अंदर धकेल्ता & उसके बाद जब रंभा झड़ने लगी तो उसने चुदाई की रफ़्तार अचानक बहुत बढ़ा दी जिसमे लंड बस आधा ही बाहर आता था लेकिन चूत की दीवारो पे उसकी तेज़ रगड़ रंभा के जोश को & बढ़ा देती थी.

रंभा ने प्रणव की पीठ को अपने नखुनो से छल्नी कर दिया था लेकिन वो था कि झड़ने का नाम ही नही ले रहा था.प्रणव के लिए ये बहुत मुश्किल काम था.रंभा की कसी चूत झाड़ते वक़्त जब उसके लंड के गिर्द सिकुड़ने-फैलने लगती तो वो अपना काबू लगभग खो ही देता लेकिन वो इस पहली चुदाई मे ही अपनी इस नयी-नवेली महबूबा पे अपनी मर्दानगी की मज़बूत छाप छ्चोड़ना चाहता था.

"हाईईईईईईईई..राम............प्रणव......ज़ाआआअन्न्‍ननननणणन्..ऐसे कभी नही चुदी मैं........ऊहह..आन्न्‍नणणनह..चोदो मुझे.....हाआाआअन्न्‍ननणणन्..!",1 ज़ोर की चीख मारते हुए,उसके कंधो मे नाख़ून धँसाते हुएँ उसकी कमर पे टाँगे फँसा उचकते हुए वो जिस्म को कमान की तरह मोडते झाड़ गयी.उसके चेहरे को देख लगता था जैसे वो बहुत दर्द मे हो जबकि हक़ीक़त ये थी कि वो झड़ने की खुशी को पूरी शिद्दत से महसूस का रही थी.

फिर उसके चेहरे पे हल्की सी मुस्कान खेलने लगी-उसकी चूत मे उसके नये प्रेमी का लंड गर्म वीर्य छ्चोड़ रहा था & वो आहे भरता उसका उसके उपर लेट रहा था.रंभा ने उसे बाहो मे भरा & अपने बाए कंधे के उपर अपना चेहरा रखे प्रणव के सर को चूम लिया.

“मेरी मोहब्बत कबूल कर के तुमने मुझपे कितना बड़ा एहसान किया है,ये तुम्हे पता नही,रंभा.”,चुदाई के बाद प्रणव रंभा के दाई तरफ लेटा दाए हाथ से उसके बाए गाल को सहला रहा था.रंभा भी उसके सीने पे अपनी उंगलिया धीमे-2 घुमा रही थी.

“एहसान तो तुमने मुझपे किया है,प्रणव.सोचती हू तो सिहर जाती हू कि अगर तुम ना मिलते तो क्या करती..मैं तो पागल ही हो जाती!”,अजीब बात थी.दोनो ही 1 दूसरे को अपनी मोहब्बत के सच्ची होने का यकीन दिलाने के लिए झूठ बोल रहे थे.जहा प्रणव रंभा को अपने कंपनी के मालिक बनाने के मक़सद को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करना चाहता था वही रंभा उसे अपनी जिस्मानी ज़रूरतो को पूरा करने का ज़रिया बना के मेहरा परिवार मे अपने 1 साथी के तौर पे इस्तेमाल करना चाहती थी.

प्रणव झुका & उसके होंठ चूमे तो रंभा ने भी उसके होंठो पे अपनी जीभ फिरा दी.प्रणव ने उसके बाए हाथ को थाम उसे अपने सिकुदे लंड पे दबाया तो रंभा ने फिर से शरमाने का नाटक करते हुए हाथ पीछे खींचा & अपना चेहरा थोड़ा आगे हो उसके सीने मे छुपा लिया.प्रणव मुस्कुराया & उसके जिस्म की बगल मे हाथ फेर दोबारा उसका हाथ थाम उसे अपने लंड पे दबाया.इस बार रंभा ने उसका लंड थाम लिया & उसे मसलने लगी.प्रणव जोश मे भर उसके बालो & गर्दन को चूमते हुए उसके जिस्म पे हाथ फेरने लगा.रंभा के हाथ उसके लंड को हिलाते हुए फिर से जगाने लगे.

“तुमने अपनी ज़िंदगी के बारे मे क्या सोचा है,रंभा?”,प्रणव ने लंड उसके हाथ से खींचा & उसे लिटा के अपने घुटनो पे हो लंड को उसके होंठो से सताया.रंभा ने उसके लंड को पकड़ के हिलाया लेकिन जब प्रणव ने लंड को उसके होंठो पे सताए तो उसने शर्मा के मुँह फेर लिया.प्रणव ने उसके चेहरे को अपनी ओर घुमाया & 1 बार फिर लंड को उसके होंठो पे रगड़ा.रंभा ने थोड़ी ना-नुकर की लेकिन फिर अपने गुलाबी होंठो मे उसके लंड को क़ैद कर लिया.उसके ज़हन मे विजयंत मेहरा के तगड़े लंड की तस्वीर कौंधा गयी & उसके दिल मे 1 हुक सी उठी.उसका ससुर लौटने वाला नही था & अब शायद ज़िंदगी भर ये कसक उसका पीछा नही छ्चोड़ने वाली थी.उसके जिस्म मे विजयंत के बदन & उसके प्यार करने के अंदाज़ की याद ने आग लगा दी & उसके होंठ प्रणव के लंड पे & कस गये.

“मैं समझी नही.”,उसने लंड मुँह से निकाला & उठ बैठी.प्रणव अपने घुटनो पे खड़ा हो गया तो वो उसकी झांतो मे & निचले पेट पे अपने चेहरे को रगड़ते हुए अपनी मस्ती का इज़हार करने लगी.

“मेरा मतलब है कि क्या तुम यूही बस अपनी उलझन का रोना रोती रहोगी या कुच्छ करोगी भी?..आहह..!”,रंभा ने उसके 1 अंडे को मुँह मे भर ज़ोर से चूसा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--47

gataank se aage......

"ye pujari apni is husn & ishq ki devi ki marte dum tak puja karega & jis din apne is vade ko tode vo uska is dharti pe aakhiri din hoga.",peechhe se aa uske baye kandhe pe baya hath rakh & daye se uske chehre ko apni or ghuma ke pranav ne uski aankho me jhanka to rambha tezi se ghumi & uski kamar me baahe daal,uske gale se lag gayi.dono ke hath 1 dusre ki pith pe ghum rahe the.pranav ka lund to rambha ki nangi kamar ki chiknai mehsus karte hi khada ho gaya tha.dono ka kad lagbhag barabar tha & uska lund seedha rambha ki chut pe daba tha.

rambha ki chut bhi lund ko mehsus karte hi kasmasane lagi thi.pranav ne apna sar rambah ke baye kandhe se uthaya to usne bhi chehra uske samne kar diya & dono 1 baar fir puri shiddat ke sath 1 dusre ko chumne lage.pranav ke hath uski kamar se leke kandho tak ghum rahe the & rambha ab mast ho rahi thi.vo bhi pranav ke jism ki baglo pe apne hath hasrat se fira rahi thi.

dono kafi der tak 1 dusre ki zubano ko chuste hue unse khelte rahe.pranav ka josh aur badha to usne rambha ki gand halke se daba di to vo chihunk uthi & use banawati gusse se dekhte hue kiss tod di.pranav ki nazro me ab vasna ke laal dore tairne lage the.usne daye hath se rambha ke baye kandhe se uska pallu sarka diya.rambha ne use pakadne ki koshish ki lekin tab tak pallu farsh ko chum raha tha.usne banawati haya se apna chehra bayi taraf ghuma liya.

masti se uski sanse tez ho gayi thi & tez sanse uske seene me jo hulchul macha rahi thi,use dekh pranav ka halak sukh gaya & usne thuk gatakte hue apne hotho pe zuban firayi.aisi haseen-o-dilkash ladki aajtak usne nahi dekhi thi.usne daye hath ko uske kandhe se sarkate hue uske baye gaal pe kiya & uska chehra fir se apni or ghumaya to rambha ne aankhe band ka li.masti se tamtamaye gaal & band aankhe haya ki tasvir pesh kar rahe the & pranav ke josh ko & badha rahe the.

pranav ne apna hath uske baye gaal se sata diya to rambha aankhe band kiye hue hi,us taraf chehre ko thoda jhuka ke uske hath pe apne gaal ko haule-2 ragadne lagi.pranav ki nigahen uske chehre se leke uske seene & pet se neeche uske panvo tak gayi & fir upar aayi.vo aage badha & apne honth rambha ki gardan pe dayi taraf laga diye.uske honth uske blouse ke upar ke numaya hisse pe ghumne lage.

rambha ne uske apne gaal pe rakhe hath ki hatheli se apne honth sata diye & chumne lagi.pranav ka baya hath uski kamar se aa laga & use sehlane laga.rambha ab halki-2 aahe bhar rahi thi.pranav ne uski kamar ko bayi banh me kaste hue uske chehre ko thama & uski gardan chumte hue use ghuma ke bistar pe gira diya.

rambha ki tange latki thi & uske upar chadha pranav uske chehre ko chume ja raha tha.kuchh der baad vo utha & usne uski tange pakad ke bistar ke upar kar di.aisa karne se rambha ki sari thoda uth gayi & uski gori tange dikhne lagi.pranav ne unhe dekha to unhe pakad ke uske pair chumne laga.rambha bistar pe ghum ke pet ke bal let gayi & takiye ko pakad ke pranav ke hotho ka lutf uthane lagi.

pranav ke hath uski sari ko ghutne tak karne ke baad uski tango ko sehla rahe the & uske honth uske hatho ke bataye raste pe ghum rahe the.rambha ne khushi & masti se muskurate hue takiye me munh chhupa liya kyuki pranav ka hath uski sari me & upar ghus uski jangho ke pichhle mansal hisse ko daba raha tha.kuchh pal baad uski sari uski kamar tak thi & uski aasmani rang ki panty numaya ho gayi jiske beechobeech 1 gila dhabba uski chut ki kasak ki dastan kehta dikh raha tha.

"uunnhhhh..aannnnhhhhh..!",pranav uski jangho ko chum & chus raha tha & rambha ki aahen dhire-2 tez ho rahi thi.uski jangho ko chumte hue pranav uski kamar pe aaya & use bhi apne hothos e tapane ke baad uski pith se hota uske chehre tak pahunch gaya.rambha ke rasile labo se uska ji bhar hi nahi raha tha.usne uske daye kandhe ko pakad thoda ghumaya & uske honth chumne laga to rambha ne bhi daye hath ko peechhe le jake uske baalo ko pakad liya & apne hotho se jawab dene lagi.

pranav ka daya hath uske pet pe chala gaya tha & use sehla raha tha.uski ungliya uski gehri nabhi ki gehrayi se bahar aana hi nahi chah rahi thi.uske honth 1 baar fir se rambha ki gori gardan pe ghum rahe the.chut ki kasak & badhi to rambha ne gand peechhe kar apne premi ke lund se use sata diya.pranav samajh gaya ki uski mehbooba ab puri tarah se mast ho chuki hai.usne fauran uske kandhe pakad use seedha kiya & uske hatho ko apni kamiz pe rakh diya.uska ishara samajh rambha ne uske buttons khole & uski kamzi utar di.

pranav ke balo bhare seene ko dekh uska dil khushi se jhum utha & usne apne hasrat bhare besabr hath un balo me firaye & fir apni is thodi bebak harkat pe sharmane ka natak karte hue hath peechhe khinch apne chehre ko unme chhupa liya.pranav uski is ada pe aur khushi & jish se bhar gaya & usne uske pet pe ungli firani shuru kar di.

"oonnhhhh..nahi karo..gudgudi hoti hai..!",hatho ke peechhe se hi rambha boli to pranav ne hanste hue unghli ko uski sari me ghusa use kamar se khinch diya,"..nahi..!",hath chhere se hata uspe faili masti apne premi ko dikhate hue rambha ne uska hath pakad liya lekin pranav ne suki ansuni karte hue uski sari khol di & fir petticoat bhi.usne apni dayi banh rambha ki jangho ke neeche laga ke unhe upar uthaya & fir apne garm honth unse chipka diya.josh se kasmasati rambha kabhi uske baal khinch to kabhi uske hatho ko pakad use apne jism se alag karne ki koshsih kar rahi thi lekin pranav vaise hi uski jangho se chipka hua tha.

"ouiiiiiiii..maaaaaaaaannnnnn..!",rambha ka jism jhatke khane laga & vo masti me sar daye-baye hilane lagi.pranav ne panty ke upar se hi uski chut ko chumna shuru kar diya tha & vo uski is harkat ko bardasht nahi kar payi thi & jhad gayi thi.pranav ne fauran uski panty neeche khinchi & uski chut se behte ras ko pine laga.rambha uske baal nochti vaise hi kanpti padi thi.

jab pranav ne apna chehra uski chut se uthaya to vo karwat le fir se takiye me munh chhupate hue pet ke bal ho gayi.pranav ki halat josh se & buri ho gauyi kyuki ab uski aankho ke samne rambha ki pusht,qatil gand thi.usne uski fanko ko bade haulke se chhua.rambha ke jism me thartharahat si hui & vo fir se ghumne ki koshish karne lagi magar tab tak uska premi uske pichhle ubharo pe jhuk,unke beech ki dara me apni naak ghusa ke apna chehra vaha dafn karne ki koshish kar raha tha.

rambha ne takiye ko khicnh apne seene ke neeche kiya & apni chhatiya uspe dabate hue sar uthake zor-2 se aahen lene lagi.pranav ne uski fanko ko bhincha & unhe katne laga.rambha dard & masti ke mile-jule ehsas se muskura uthi & uski aahen & tez ho gayi.

"naaaaaaa..haiiiiiiiiiiiiiiii..!",pranav ki zuban uske gand ke chhed ko chhedne lagi thi & rambha ki halat buri ho gayi thi.usne daya hath peechhe le jate hue pranav ke baal pakad uske sar ko upar khincha & karwat le seedhi ho gayi.pranav ne vasna bhari muskan uski taraf fenki & bistar pe khade ho pant utar nanga ho gaya.uske 8.5 inch ke lund ko dekh rambha ka dil khushi se nach utha lekin usne masti se bojhal palko ko badn kar use apne sharm me dube hone ka ehsas karaya.

nanga parnava uske dayi taraf leta & use bayi karwat pe apni taraf ghuma uski kamar sehlate hue chumne laga.uska lund bhi uski chut ko chum raha tha.rambhe ne ab apne ko puri tarah se apne aashiq ke hatho me saunp diya tha.uske seene ke baalo me hath firate hue usne bhi use baaho me bhar liya tha.pranav ne uske baye kandhe ke uapr se dekhte hue uske blouse ko khola & jaise hi uski chhatiyan numaya hui vo unpe toot pada.un mast golaiyo ko apne munh me bhar ke vo unhe chusne laga.hatho me unhe bhar vo unhe zor se dabata & jab rambha aahe bharte hue jism ko upar modti to vo uske nipples ko chusne lagta.chhtaiyo ko chatat hue jab usne uske nipples ko ungliyo me masla to rambha zor se chikhte hue dobara jhad gayi.

ab waqt aa gaya tha dono jismo ke 1 hone ka & unke rishte ko jismani bandhan me baandhane ka.pranav ne uski tange failayi & unke beech ghutne pe baithke apna lund andar ghusaya,"oowwww..dard ho raha hai..thoda dhire karo na..aannnnhhhhh..!",sachchai to ye thi ki vijayant ke baad use ab koi bhi lund dard pahuchane vala nahi lagta tha lekin aisi harkat kar vo pranav ke mardana aham ko sehla use & josh me bhar dena chahti thi.

"bas ho gaya,meri jaan..aahhhhh..!",chut ki kasavat ne to pranav ko hairat me daal diya.aisa lag raha tha mano vo koi kunwari chut chod ke uska kunwarapan loot raha ho.masti me bhar usne zor ka dhakka lagaya.

"haiiiiiiiii..raammmmmmmmmmm..kitne zailm ho..oonnnnnhhhhh..!",pranav uske upar let agya tha & uske chehre ko chumte hue use chod raha tha.kuchh der baad rambha ke hath bhi uski pith pe firne lage & jab usne uski gand ko dabaya to uske dhakke & tez ho gaye. dono ab 1 dusre ko puri shiddat se chumte hue chudai kar rahe the.rambha kayi dino baad aise mast tarike se chud rahi thi.vijayant ke jane ke baad ye pehla mauka tha jab koi mard use is tarah se masti ke aasmaan me uda raha tha.pranav ke paas vijayant jaisa lund nahi tha na hi vaisi mardana khubsurti lekin tha vo chudai me mahir.

pehle to usne bahuty gehre dhakke lagaye jinme vo lund ko supade tak khinch fir jud tak andar dhakelta & uske baad jab rambha jhadne lagi to usne chudai ki rafta achanak bahut badha di jisme lund bas aadha hi bahar aata tha lekin chut ki deewaro pe uski tez ragad rambha ke josh ko & badha deti thi.

rambha ne pranav ki pith ko apne nakhuno se chhalni kar diya tha lekin vo tha ki jhadne ka naam hi nahi le raha tha.pranav ke liye ye bahut mushkil kaam tha.rambha ki kasi chut jhadte waqt jub uske lund ke gird sikudne-failne lagti to vo apna kabu lagbhag kho hi deta lekin vo is pehli chudai me hi apni is nayi-naveli mehbuba pe apni mardangi ki mazbut chhap chhodna chahta tha.

"haiiiiiiiii..raam............pranav......jaaaaaaannnnnnnnn..aise kabhi nahi chudi main........oohhhhhhhh..aannnnnnhhhhh..chodo mujhe.....haaaaaaaaannnnnnn..!",1 zor ki chikh marte hue,uske kandho me nakhun dhansate huen uski kamar pe tange fansa uchakte hue vo jism ko kaman ki tarah modte jhad gayi.uske chehre ko dekh lagta tha jaise vo bahut dard me ho jabki haqeeqat ye thi ki vo jhadne ki khushi ko puri shiddat se mehsus ka rahi thi.

fir uske chehre pe halki si muskan khelne lagi-uski chut me uske naye premi ka lund garm virya chhod raha tha & vo aahe bharta uska uske upar let raha tha.rambha ne use baaho me bhara & apne baye kandhe ke upar apna chehra rakhe pranav ke sar ko chum liya.

“Meri mohabbat kabool kar ke tumne mujhpe kitna bada ehsan kiya hai,ye tumhe pata nahi,Rambha.”,chudai ke baad Pranav rambha ke dayi taraf leta daye hath se uske baye gaal ko sehla raha tha.rambha bhi uske seene pe apni ungliya dhime-2 ghuma rahi thi.

“ehsan to tumne mujhpe kiya hai,pranav.sochti hu to sihar jati hu ki agar tum na milte to kya karti..main to pagal hi ho jati!”,ajib baat thi.dono hi 1 dusre ko apni mohabbat ke sachchi hone ka yakeen dilane ke liye jhuth bol rahe the.jaha pranav rambha ko apne company ke malik banane ke maqsad ko pura karne ke liye istemal karna chahta tha vahi rambha use apni jismani zarurato ko pura karne ka zariya bana ke Mehra parivar me apne 1 sathi ke taur pe istemal karna chahti thi.

Pranav jhuka & uske honth chume to rambha ne bhi uske hotho pe apni jibh fira di.pranav ne uske baye hath ko tham use apne sikude lund pe dabaya to rambha ne fir se sharmane ka natak karte hue hath peechhe khincha & apna chehra thoda aage ho uske seene me chhupa liya.pranav muskuraya & uske jism ki bagal me hath fer dobara uska hath tham use apne lund pe dabaya.is baar rambha ne uska lund tham liya & use maslane lagi.pranav josh me bhar uske baalo & gardan ko chumte hue uske jism pe hath ferne laga.rambha ke hath uske lund ko hilate hue fir se jagane lage.

“tumne apni zindagi ke bare me kya socha hai,rambha?”,pranav ne lund uske hath se khincha & use lita ke apne ghutno pe ho lund ko uske hotho se sataya.rambha ne uske lund ko pakad ke hilaya lekin jab pranav ne lund ko uske hotho pe sataya to usne sharma ke munh fer liya.pranav ne uske chehre ko apni or ghumaya & 1 baar fir lund ko uske hotho pe ragda.rambha ne thodi na-nukar ki lekin fir apne gulabi hotho me uske lund ko qaid kar liya.uske zehan me Vijayant Mehra ke tagde lund ki tasvir kaundha gayi & uske dil me 1 hook si uthi.uska sasur lautne vala nahi tha & ab shayad zindagi bhar ye kasak uska peechha nahi chhodne vali thi.uske jism me vijayant ke badan & uske pyar karne ke andaz ki yaad ne aag laga di & uske honth pranav ke lund pe & kas gaye.

“main samjhi nahi.”,usne lund munh se nikala & uth baithi.pranav apne ghutno pe khada ho gaya to vo uski jhanto me & nichle pet pe apne chehre ko ragadte hue apni masti ka izhar karne lagi.

“mera matlab hai ki kya tum yuhi bas apni uljhan ka rona roti rahogi ya kuchh karogi bhi?..aahhhh..!”,rambha ne uske 1 ande ko munh me bhar zor se chusa.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--48

गतान्क से आगे......

“पर मैं करू क्या?!”,रंभा के कान अब खड़े हो गये थे..आख़िर प्रणव के मन मे क्या चल रहा था?..उसने उसकी गंद को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया था & उसके लंड को अपने मुँह मे हलक तक भर सर आगे-पीछे कर रही थी & प्रणव को ये एहसास हो रहा था कि वो अपनी महबूबा का मुँह चोद रहा है.आहें भरते हुए उसने उसके सर को थाम लिया था.

“तुम पढ़ी-लिखी,काबिल लड़की हो.शादी से पहले तुम नौकरी करती थी तो अब क्यू नही काम करती?”,उसने रंभा का सर अपने लंड से खींचा.रंभा को ये अच्छा तो नही लगा लेकिन अगले ही पल वो फिर से खुश हो गयी क्यूकी प्रणव ने उसे लिटा के अपना लंड दोबारा उसके मुँह मे दे दिया था & खुद 69 पोज़िशन मे आते हुए उसकी चूत चाटने मे जुट गया था.उसकी भारी जाँघो को थाम के उसने फैलाया & अपनी आतुर ज़ुबान उसकी गुलाबी चूत मे उतार उसके रस को चाटने लगा.

“उउम्म्म्म..”,रंभा ने अपनी नाक उसकी झांतो मे रगडी.प्रणव की ज़ुबान उसकी चूत को पागल कर रही थी,”..पर कैसा काम करू मैं?..आन्न्‍णणन्..!”,प्रणव उसके दाने को उंगली से ज़ोर-2 से रगड़ रहा था & उसकी कमर अपनेआप उचकने लगी थी.

“ग्रूप को जाय्न कर लो.समीर को बोलो कि वो तुम्हे कोई भी काम दे दफ़्तर मे.कितना भी मामूली क्यू ना हो मगर काम हो ताकि तुम घर मे बैठी मायूस ना हो & तुम्हारा दिल बहला रहे.”,प्रणव उसके दाने को रगड़ते हुए उसकी चूत से बहते रस को पी रहा था.

“आन्न्‍न्णनह..हाआआन्न्‍ननननननणणन्.....!”,प्रणव की झांतो मे मुँह बेचैनी से रगड़ते हुए उसके आंडो को नाक से छेड़ती रंभा झाड़ गयी थी,”..क्यू जानेमन..तुम तो हो ही मेरा दिल बहलाने के लिए फिर मुझे दफ़्तर मे नीरस फाइल्स मे सर खपाने की बात क्यू कर रहे हो?..उउन्न्ञणन्..!”,रंभा मस्ती की खुमारी मे भी प्रणव के दिल को टटोल रही थी.प्रणव उसके उपर से उतरा तो वो बाई करवट पे हो गयी & वो उसके पीछे आ गया & उसकी जाँघ उठाके अपने लंड को दोबारा उसकी चूत मे घुसाने लगा.

“पर तुम भी अच्छी तरह से जानती हो की लाख चाहने के बावजूद..आहह..कितनी कसी है तुम्हारी चूत,जान!..समीर तुम्हे चोद्ता नही क्या,मेरी रानी?”,उसने लंड पूरा अंदर घुसाया & उसकी जाँघ को थामे हुए उसकी चुदाई मे जुट गया.

“चोद्ता है मगर उसके पास तुम्हारे जैसा अंदाज़ कहा!”,रंभा ने दाए हाथ को टाँगो के बीचे ले जा उसके अंडे दबा दिए तो वो जॉश मे पागल हो उसकी चूचियो को दबाने लगा & उसे चूमने लगा.

“हां तो मैं कह रहा था कि मैं हर पल तुम्हारे साथ नही हो सकता और जुदाई के उन लम्हो मे तुम अकेलेपन & अपने दर्द को & शिद्दत से महसूस करोगी.तो ज़रूरी है कि तुम अपना ध्यान कही और भी लगाओ.फिर तुम समीर की बीवी होने के नाते कंपनी की कुच्छ हद्द तक मालकिन भी हो.तुम्हारा भी हक़ बनता है ग्रूप पे.”,प्रणव धक्के लगाता हुआ उसके दाने को भी रगड़ रहा था & रंभा का जिस्म झटके खाने लगा था.चूत पे दोहरी मार वो बर्दाश्त नही कर पाई थी & झाड़ गयी थी,”..& सबसे ज़रूरी बात..”,उसने रंभा की चूत सेबिना लंड निकाले उसे पीठ के बल लिटाया & फिर उसकी जाँघ को थामे हुए उसकी टाँगो के बीच आ गया & उसके उपर लेट गया.रंभा ने उसे बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे & होंठो को चूमने लगी.

“..इन भाई-बेहन के लिए हम खिलोने हैं रंभा..”,वो उसकी गर्दन चूम रहा था.उसके धक्के रंभा को मस्ती से बहाल कर रहे थे.रंभा के पैर उसकी पिच्छली जाँघो पे लग गये थे & वो कमर उचका रही थी,”..इन्हे हम पसंद आ गये तो ये हमे शादी कर अपने घर ले आए..”,रंभा ने उसे बाहो मे भींच लिया था.उसके जिस्म का दबाव उसे बहुत भला लग रहा था.उसके दिल मे फिर से विज़ायंत के जिस्म के भार के मीठे एहसास की खुमारी जागी & उसकी चूत की कसक दोगुनी हो गयी & वो आहें भरते हुए तेज़ी से कमर उचकाने लगी,”..कल को ये हम से ऊब जाएँगे और हमे अपनी ज़िंदगी से ऐसे निकाल फेंकेगे जैसे दूध मे पड़ी मक्खी इसीलिए ज़रूरी है कि हम अगर इनकी ज़ाति ज़िंदगी मे इनके काम के ना रहें तो इनकी कारोबारी ज़िंदगी मे हम इनकी ज़रूरत बने रहें..आहह..!”,रंभा की चूत की कसक चरम पे पहुँची & उसने अपने नाख़ून प्रणव की पीठ मे धंसा दिए & उचक के उसे चूमने लगी.उसकी चूत ने झड़ते ही अपनी मस्तानी हरकतें शुरू कर दी & प्रणव का लंड उस मस्ती से बहाल हो वीर्य की पिचकारियाँ छ्चोड़ने लगा.

सुकून से भरी रंभा अपनी च्चातियो पे पड़े हान्फ्ते प्रणव के बॉल सहला रही थी & ये सोच रही थी कि उसके नंदोई की बातो मे ईमानदारी है या फिर उसका मक़सद कुच्छ और है..जो भी हो..उसकी चुदाई ज़बरदस्त थी & उसे तो उसी से मतलब था..& फिर उसकी ईमानदारी जानने के लिए उसे अपने बिस्तर मे रखने से ज़्यादा अच्छी तरकीब और क्या हो सकती है.

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वो शख्स सिगरेट का 1 पूरा पॅकेट ख़त्म कर चुका था.रंभा को अपार्टमेंट के अंदर गये 3 घंटे हो गये थे लेकिन वो अभी तक बाहर नही आई थी.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर वो अंदर कर क्या रही थी.वो यहा तक कार खुद चला के आई थी & अगर वो यहा से सीधा अपने बंगल गयी तो वाहा तक के रास्ते मे बीच मे 1 सुनसान हिस्सा पड़ता था जहा उसका काम हो सकता था.उसने सिगरेट का 1 नया पॅकेट डॅशबोर्ड से निकाला & खोल के 1 नयी सिगरेट सुलगाई.आज तो वो रंभा से मुलाकात करके ही रहेगा,उसने पक्का इरादा किया & काश खींचने लगा.

“दफ़्तर नही जाना क्या?..छ्चोड़ो ना..& कितना करोगे..ऊव्ववव..!”,रंभा बिस्तर पे बैठी थी & प्रणव उसे पीछे से बाहो मे भरे उसकी छातियो को मसलते हुए उसे वापस लिटाने की कोशिश कर रहा था.

“अभी तो पूरा दिन पड़ा है,जानेमन!”,उसने उसके निपल्स को उंगलियो मे दबाया & उसके दाए कान पे काटा.

“नही.अब हो गया.अब ऑफीस जाओ & मैं भी घर जाती हू वरना किसी को शक़ ना हो जाए.”,रंभा उसकी गिरफ़्त से निकली & बिस्तर से उतर अपने कपड़े उठा बाथरूम मे घुस गयी.प्रणव ने भी ठंडी आह भरी & अपने कपड़े पहनने लगा.रंभा ने बात तो ठीक कही थी लेकिन वो भी मजबूर था.वो हसीन थी ये तो उसे पता था लेकिन उसके नंगी होने पे & साथ हमबिस्तर होने पे उसे पता चला कि उसका हुस्न कितना नशीला,कितना दिलकश है & उसकी अदाएँ कितनी क़ातिल हैं.वो तो उसे अपने पहलू से निकलने ही नही देना चाहता था मगर किया क्या जा सकता था!

रंभा बाथरूम से निकली तो उसने वही ब्लाउस पहना था जिसे पहन वो फ्लॅट मे आई थी.प्रणव ने उसे सवालिया निगाहो से देखा तो रंभा दूसरे ब्लाउस को पॅकेट मे रखते हुए मुस्कुराइ,”ये ब्लाउस पहन के निकलती तो लोग सोचते नही कि पति शहर से बाहर है & किसी पार्टी मे भी नही जा रही तो ऐसे लिबास मे किसे रिझाने जा रही है.”

प्रणव मुस्कुरा. हुए उसके करीब आया & उसे बाहो मे भर चूमते हुए कमरे से निकल फ्लॅट के मेन दरवाज़े की ओर बढ़ा. रंभा हसीन थी,दिलकश थी & काफ़ी होशियार भी.प्रणव को इस बात की खुशी हुई की उसे ज़्यादा कुच्छ समझाना नही पड़ेगा लेकिन साथ ही ये डर भी लगा कि कही उसकी चालाकी उसकी राह मे कोई रोड़ा ना अटकाए.फिलहाल तो ये हुसनपरी उसकी बाहो मे थी & अभी उसे खुद से जुदा करने का उसका कोई इरादा नही था,”तुम 15 मिनिट बाद निकलना.ओके?”,प्रणव ने 1 आख़िर बार उसके लब चूमे & निकल गया & उसके कहे मुताबिक 15 मिनिट बाद रंभा भी.

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रंभा ड्राइव करते हुए प्रणव के बारे मे सोच रही थी.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर वो उसे ग्रूप जाय्न करने को क्यू उकसा रहा था..जो भी हो बात तो ठीक लगती थी..लेकिन वो करेगी क्या?..उसने कार उसी सुनसान स्ट्रेच पे मोदी.मोड़ पे 1 सिनिमा का पोस्टर लगा था जिस पर कामया की तस्वीर बनी थी.उसे देखते ही रंभा के दिल मे गुस्सा,नफ़रत & जलन भर गये लेकिन दिमाग़ मे 1 ख़याल कौंधा..हां!..यही ठीक रहेगा..वो ट्रस्ट ग्रूप की फिल्म प्रोडक्षन कंपनी को जाय्न करेगी & इस चुड़ैल पे नज़र रखेगी..नज़र क्या,कामिनी का करियर ही चौपट कर देगी!....स्कककककककरररर्रररीईईककचह..!

ख़यालो मे डूबी रंभा ने अचानक 1 इंसान को गश खाते हुए रास्ते के बगल से उसकी कार के सामने आ गिरते देखा & उसने फ़ौरन ब्रेक लगाया.बस ज़रा सी देर करती और वो इंसान उसकी कार के पहियो के नीचे आ जाता.वो जल्दी से कार से उतरी & उस आदमी को देखने गयी जो औंधे मुँह बेहोश पड़ा था.

“सुनिए..सुनिए..!”,रंभा ने उसके कंधे पे हाथ रख के हिलाया ही था कि वो शख्स बिजली की फुर्ती से उठा & अपनी बाए हाथ मे पकड़ी पिस्टल रंभा की ओर तान दी.रंभा डर से कांप उठी..गाल पे वो निशान!..ये तो वही शख्स था जो क्लेवर्त के बुंगले मे घुसा था!

“ चुपचाप अपनी कार मे बैठो.”,उस शख्स ने पिस्टल को अपने कोट की बाई जेब मे घुसा उसे अंदर से रंभा पे तान दिया था ताकि बगल से गुज़र रही इक्का-दुक्का गाडियो को वो ना दिखे,”..भागने की कोशिस या ज़रा भी चूं-चॅपॅड की तो गोली भेजे के पार होगी.बैठो!”

“इधर नही ड्राइविंग सीट पे.”,रंभा कार की पिच्छली सीट पे बैठने लगी तो उसने उसे टोका,”..अब कार आगे बढ़ा & जिधर मैं कहु वाहा ले चलो.”,वो रंभा के बगल मे बैठ गया था & उसकी पिस्टल अभी भी कोट की बाई जेब मे च्छूपी रंभा पे तनी थी.वो शख्स बहुत चालाक था.रंभा की शुरुआती घबराहट कम हुई तो उसने सोचा था की रास्ते के किसी ट्रॅफिक सिग्नल पे कार रुकी तो वो ख़तरा मोल ले शोर मचा देगी लेकिन उस शख्स ने ऐसे रास्ते चुने जिनपे सिग्नल था ही नही & जो 1-2 मिले भी उनपे कोई खास भीड़ थी ही नही.उपर से सिग्नल्स पे वो शख्स पिस्टल को जेब से निकाल उसकी खोपड़ी से सटा देता था.

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थोड़ी देर बाद कार शहर के बाहर 1 नयी बस्ती कॉलोनी के 1 खाली मकान के बाहर रुकी.उस शख्स ने शहर आने के बाद सबसे पहले-रंभा पे नज़र रखने से भी पहले-इस जगह को ढूँढा था.उस मकान के मालिक विदेश मे थे & उनका जो रिश्तेदार बीच-2 मे उसे देखने आता था वो भी 2 महीनो से बाहर था.उसने उसका ताला तोड़ा & उसपे अपना ताला लगा दिया.

“कार से उतर के गेट के अंदर चलो & याद रहे कोई चालाकी मत दिखाना वरना यही ढेर कर दी जाओगी.”,रंभा जानती थी की वो बुरी तरह फँस गयी है & उस शख्स की बातें मानने की अलावा उसके पास & कोई चारा नही.मकान के अंदर घुसते ही उस शख्स ने उसे 1 कुर्सी पे बैठने को कहा & फिर उसे उस से बाँध दिया.

“तुम चाहते क्या हो?कौन हो तुम?..आख़िर मुझे यहा बंद क्यू किया है?”,वो शख्स सिगरेट सुलगाते हुए मुस्कुरा रहा था.

“तुमहरा नाम रंभा है?”

“हां,लेकिन..-“,उसने हाथ उठा उसे खामोश रहने का इशारा किया.

“तुम्हारी मा का नाम सुमित्रा था?”

“हां.”

“तुम उसके साथ गोपालपुर नाम के कस्बे मे रहती थी?”

“हां.”,कयि दिनो मे पहली बार उस शख्स को सुकून मिला था.उसकी तलश अंजाम तक पहुँच गयी थी.यही थी उस कमिनि की बेटी!उसने सिगरेट फेंकी,उसकी आँखो मे खून उतर आया था & इतने दिनो से अंदर उबाल रहा गुस्सा अब बस फूट पड़ना चाहता था.वो तेज़ी से आगे बढ़ा & रंभा का गला दबाने लगा.

“उउन्नगज्गघह..छ्चोड़ो..!”,रंभा के गले से आवाज़ भी नही निकल रही थी.

“ग़लती तुम्हारी नही है..ग़लती तो तुम्हारी कमीनी माँ की है..लेकिन क्या करें मुझे इन्तेक़ाम लेना है & वो मक्कार तो मर गयी.अब मा-बाप के क़र्ज़ औलाद नही उतरेगी तो & कौन उतरेगा!”,वो शैतानी हँसी हंसा & रंभा का गला छ्चोड़ दिया.रंभा बुरी तरह खांसने लगी,”..लेकिन घबराओ मत.तुम्हारी मौत इतनी जल्दी & इतनी आसान नही होगी.14 बरस गुज़ारे हैं जैल मे & उसके बाद भी बहुत धूल फंकी है.उस सब की कीमत तो तुम्हे ही चुकानी है.”

“लेकिन तुम हो कौन?..& मेरी माँ ने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा?..वो बहुत भली औरत थी..तुम्हे कोई ग़लतफहमी हुई है..!”,रंभा का गला दुख रहा था.

“चुप!वो मक्कार थी.अपने रूप & बातो के जाल मे मुझे फँसा के मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी & खुद ऐश करने लगी दयाल के साथ!”

“बकवास मत कर,कामीने!मेरी मा के बारे मे अनाप-शनाप मत बोल,हराम जादे!”,मा के बारे मे उल्टी-सीधी बातें सुन रंभा को गुस्सा आ गया.

“तड़क्कककक..!”,उसने 1 करारा तमाचा रंभा के गाल पे रसीद किया,”..तू भी उस हराम की कमाई पे ही पली-बढ़ी है ना..तुझे तो अब सज़ा ज़रूर मिलेगी.”,वो दोबारा उसका गला घोंटने लगा,”..मेरे पैसे चुरा के भागी थी वो दयाल के साथ.मैं उस से प्यार करता था & शादी करना चाहता था लेकिन वो कमीनी मेरे पैसे लेके भाग गयी मेरे ही दोस्त के साथ!

“तब तो ज़रूर मारो मुझे….उउन्न्नननगज्गघह…..पैसे चुराने के बाद भी जिसे तंगहाली मे ज़िंदगी गुज़ारनी पड़ी..ऐसी औरत की बेटी का तो मर जाना ही अच्छा है..!”,रंभा की आवाज़ मे कुच्छ ऐसा था कि वो शख्स रुक गया,”..रुक क्यू गये..!दबाओ मेरा गला..”,रंभा खाँसने लगी,”..मार दो मुझे जान से ताकि उपर जाके अपनी मा से ये सवाल कर सकु कि अगर उसने इतने पैसे लूटे थे तो फिर वो बेचारी पूरे साल मे बस 1 सारी क्यू ख़रीदती थी?..क्यू वो मुझे कोई कमी महसूस ना हो इसके लिए वो 12-12 घंटे काम करती रही उस 2 टके के की जगह मे?..& उसका कोई यार था तो क्यू सारी उम्र उसने तन्हा गुज़ार दी?..रातो को मुझसे च्छूप वो क्यू रोती रहती थी?. .”,रंभा कितनी भी मतलबी लड़की थी लेकिन अपनी मा से उसे बहुत प्यार था & उसकी याद आते ही उसकी आँखे छलक पड़ी.,वो शख्स कुच्छ देर उसे देखता रहा.वो उस लड़की को भाँपने की कोशिश कर रहा था..उसके आँसू सच्चे लग रहे थे.बातो से भी ईमानदारी की महक आ रही थी.लड़की हिम्मतवाली भी थी..अभी भी घबरा नही रही थी & शायद उसे बातों मे फाँसना चाह रही हो..लेकिन हो सकता है बात सही कह रही हो..दयाल तो था भी कमीना!..& जब सब हुआ था तो ये बमुश्किल 3-4 बरस की होगी..अब इसे क्या पता?..उपर से ना जाने उसने इसे क्या कहानी सुनाई हो..वैसे बताने मे कोई हर्ज भी नही..पता तो चले सुमित्रा ने बेटी को क्या बताया था अपनी ज़िंदगी के बारे मे!..मगर इस लड़की से होशियार रहना पड़ेगा.थी ये भी मा के ही जैसी..साली ससुर के साथ सोती थी!

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क्रमशः.......

JAAL paart--48

gataank se aage......

“par main karu kya?!”,rambha ke kaan ab khade ho gaye the..aakhir pranav ke man me kya chal raha tha?..usne uski gand ko apni giraft me le liya tha & uske lund ko apne munh me halak tak bhar sar aage-peechhe kar rahi thi & pranav ko ye ehsas ho raha tha ki vo apni mehbooba ka munh chod raha hai.aahen bharte hue usne uske sar ko tham liya tha.

“tum padhi-likhi,kabil ladki ho.shadi se pehle tum naukri karti thi to ab kyu nahi kaam karti?”,usne rambha ka sar apne lund se khincha.rambha ko ye achha to nahi laga lekin agle hi pal vo fir se khush ho gayi kyuki pranav ne use lita ke apna lund dobara uske munh me de diya tha & khud 69 position me aate hue uski chut chaatne me jut gaya tha.uski bhari jangho ko tham ke usne failaya & apni aatur zuban uski gulabi chut me utar uske ras ko chatne laga.

“uummmm..”,rambha ne apni naak uski jhnato me ragdi.pranav ki zuban uski chut ko pagal kar rahi thi,”..par kaisa kaam karu main?..aannnnn..!”,pranav uske dane ko ungli se zor-2 se ragad raha tha & uski kamar apneaap uchakne lagi thi.

“group ko join kar lo.Sameer ko bolo ki vo tumhe koi bhi kaam de daftar me.kitna bhi mamuli kyu na ho magar kaam ho taki tum ghar me baithi mayus na ho & tumhara dil behla rahe.”,pranav uske dane ko ragadte hue uski chut se behte ras ko pi raha tha.

“aannnnnhhhhhhhh..haaaaaannnnnnnnnnn.....!”,pranav ki jhanto me munh bechaini se ragadte hue uske ando ko naak se chhedti rambha jhad gayi thi,”..kyu janeman..tum to ho hi mera dil behlane ke liye fir mujhe daftar me niras files me sar khapane ki baat kyu kar rahe ho?..uunnnnn..!”,rambha masti ki khumari me bhi pranav ke dil ko tatol rahi thi.pranav uske upar se utra to vo bayi karwat pe ho gayi & vo uske peechhe aa gaya & uski jangh uthake apne lund ko dobara uski chut me ghusane laga.

“par tum bhi achhi tarah se janti ho ki lakh chahne ke bavjud..aahhh..kitni kasi hai tumhari chut,jaan!..sameer tumhe chodta nahi kya,meri rani?”,usne lund pura andar ghusaya & uski jangh ko thame hue uski chudai me jut gaya.

“chodta hai magar uske paas tumhare jaisa andaz kaha!”,rambha ne daye hath ko tango ke beeche le ja uske ande daba diye to vo joish me pagal ho uski chhatiyo ko dabane laga & use chumne laga.

“haan to main keh raha tha ki main har pal tumhare sath nahi ho sakta & judai ke un lamho me tum akelepan & apne dard ko & shiddat se mehsus karogi.to zaruri hai ki tum apne dhyan kahi & bhi lagao.fir tum sameer ki biwi hone ke nate company ki kuchh hadd tak malkin bhi ho.tumhara bhi haq banta hai group pe.”,pranav dhakke lagata hua uske dane ko bhi ragad raha tha & rambha ka jism jhatke khane laga tha.chut pe dohri maar vo bardasht nahi kar payi thi & jhad gayi thi,”..& sabse zaruri baat..”,usne rambha ki chut sebina lund nikale use pith ke bal litaya & fir uski jangh ko thame hue uski tango ke beech aa gaya & uske upar let gaya.rambha ne use baaho me bhar liya & uske chehre & hontho ko chumne lagi.

“..in bhai-behan ke liyen hum khilone hain rambha..”,vo uski gardan chum raha tha.uske dhakke rambha ko masti se behaal kar rahe the.rambha ke pair uski pichhli jangho pe lag gaye the & vo kamar uchka rahi thi,”..inhe hum pasand aa gaye to ye hume shadi kar apne ghar le aaye..”,rambha ne use baaho me bhinch liya tha.uske jism ka dabav use bahut bhala lag raha tha.uske dil me fir se vijaaynt ke jism ke bhar ke mithe ehsas ki khumari jagi & uski chut ki kasak doguni ho gayi & vo aahen bharte hue tezi se kamar uchkane lagi,”..kal ko ye hum se oob jayenge & hume apni zindagi se aise nikal fenkege jaise doodh me padi makkhi isiliye zaruri hai ki hum agar inki zati zindagi me inke kaam ke na rahen to inki karobari zindagi me hum inki zarurat bane rahen..aahhhhhh..!”,rambha ki chut ki kasak charam pe pahunchi & usne apne nakhun pranav ki pith me dhansa diye & uchak ke use chumne lagi.uski chut ne jhadte hi apni mastani harkaten shuru kar di & pranav ka lund us masti se behaal ho virya ki pichkariyaan chhodne laga.

Sukun se bhari rambha apni chhatiyo pe pade hanfte pranav ke baal sehla rahi thi & ye soch rahi thi ki uske nandoi ki baato me imandari hai ya fir uska maqsad kuchh aur hai..jo bhi ho..uski chudai zabardast thi & use to usi se matlab tha..& fir uski imandari jaanane ke liye use apne bistar me rakhne se zyada achhi tarkib & kya ho sakti hai.

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Vo shakhs cigarette ka 1 pura packet khatm kar chuka tha.Rambha ko apartment ke andar gaye 3 ghante ho gaye the lekin vo abhi tak bahar nahi aayi thi.uski samajh me nahi aa raha tha ki aakhir vo anadr kar kya rahi thi.vo yaha tak car khud chala ke aayi thi & agar vo yaha se seedha apne bungle gayi to vaha tak ke raste me beech me 1 sunsan hissa padta tha jaha uska kaam ho sakta tha.usne cigarette ka 1 naya packet dashboard se nikala & khol ke 1 nayi cigarette sulgai.aaj to vo rambha se mulakat karke hi rahega,usne pakka irada kiya & kash khinchne laga.

“daftar nahi jana kya?..chhodo na..& kitna karoge..oowwww..!”,rambha bistar pe baithi thi & Pranav use poeechhe se baaho me bhare uski chhatiyo ko maslate hue use vapas litnae ki koshish kar raha tha.

“abhi to pura din pada hai,janeman!”,usne uske nipples ko ungliyo me dabaya & uske daye kaan pe kata.

“nahi.ab ho gaya.ab office jao & main bhi ghar jati hu varna kisi ko shaq na ho jaye.”,rambha uski giraft se nikli & bsitar se utar apne kapde utha bathroom me ghus gayi.pranav ne bhi thandi aah bhari & apne kapde pehanane laga.rambha ne baat to thik kahi thi lekin vo bhi majboor tha.vo haseen thi ye to use pata tha lekin uske nangi hone pe & sath humbistar hone pe use pata chala ki uska husn kitna nashila,kitna dilkash hai & uski adayen kitni qatil hain.vo to use apne pehlu se nikalne hi nahi dena chahta tha magar kiya kya ja sakta tha!

Rambha bathroom se nikli to usne vahi blouse pehna tha jise pehan vo flat me aayi thi.pranav ne use sawaliya nigaho se dekha to rambha dusre blouse ko packet me rakhte hue muskurayi,”ye blouse pehan ke nikalti to log sochte nahi ki pati shehar se bahar hai & kisi party me bhi nahi ja rahi to aise libas me kise rijhane ja rahi hai.”

Pranav muskuarte hue uske karib aaya & use baaho me bhar chumte hue kamre se nikal flat ke main darwaze ki or badha.ambha haseen thi,dilkash thi & kafi hoshiyar bhi.pranav ko is baat ki khushi hui ki use zyada kuchh samjhana nahi padega lekin sath hi ye darr bhi laga ki kahi uski chalaki uski raah me koi roda na atkaye.filhal to ye husnpari uski baaho me thi & abhi use khud se juda karne ka uska koi irada nahi tha,”tum 15 minute baad nikalna.ok?”,pranav ne 1 aakhir baar uske lab chume & nikal gaya & uske kahe mutabik 15 minute baad rambha bhi.

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Rambha drive karte hue pranav ke bare me soch rahi thi.uskis amajh me nahi aa raha tha kia akhir vo use group join karne ko kyu uksa raha tha..jo bhi ho baat to thik lagti thi..lekin vo karegi kya?..usne car usi sunsan stretch pe modi.mod pe 1 cinema ka poster laga tha jsipe Kamya ki tasvir bani thi.use dekhte hi rambha ke dil me gussa,nafrat & jalan bhar gaye lekin dimagh me 1 khayal kaundha..haan!..yehi thik rahega..vo Trust group ki film production company ko join karegi & is chudail pe nazar rakhegi..nazar kya,kamini ka career hi chaupat kar degi!....skkkkkkkrrrrrrreeeeeeeccchhhhhhhh..!

Khayalo me dubi rambha ne achanak 1 insan ko gash khate hue raste ke bagal se uski car ke samne aa girte dekha & usne fauran brake lagaya.bas zara si der karti & vo insane uski car ke pahiyo ke neeche aa jata.vo jaldi se car se utri & us aadmi ko dekhne gayi jo aundhe munh behosh pada tha.

“suniye..suniye..!”,rambah ne uske kandhe pe hath rakh ke hilaya hi tha ki vo shakhs bijli ki furti se utha & apni baye hath me pakdi pistol rambha ki or taan di.rambha darr se kanp uthi..gaal pe vo nishan!..ye to vahi shakhs tha jo Clayworth ke bungle me ghusa tha!

“ chupchap apni car me baitho.”,us shakhs ne pistol ko apne coat ki bayi jeb me ghusa use andar se rambha pe taan diya tha taki bagal se guzar rahi ikka-dukka gadiyo ko von a dikhe,”..bhagne ki koshi ya zara bhi chun-chapad ki to goli bheje ke paar hogi.baitho!”

“idhar nahi driving seat pe.”,rambha car ki pichhli seat pe baithne lagi to usne use toka,”..ab car aage badhao & jidhar main kahu vaha le chalo.”,vo rambah ke bagal me baith gaya tha & uski pistol abhi bhi coat ki bayi jeb me chhupi rambha pe tani thi.vo shakhs bahut chalak tha.rambha ki shuruati ghabrahat kam hui to usen socha tha ki raste ke kisi traffic signal pe car ruki to vo khatra mol le shor macha degi lekin us shakhs ne aise raste chune jinpe signal tha hi nahi & jo 1-2 mile bhi unpe koi khas bheed thi hi nahi.upar se signals pe vo shakhs pistol ko jeb se nikal uski khopdi se sata deta tha.

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Thodi der baad car shehar ke bahar 1 nayi basti colony ke 1 khali makan ke bahar ruki.us shakhs ne shehar aane ke baad sabse pehle-rambha pe nazar rakhne se bhi pehle-is jagah ko dhoonda tha.us makan ke malik videsh me the & unka jo rishtedar beech-2 me use dekhne aata tha vo bhi 2 mahino se bahar tha.usne uska tala toda & uspe apna tala laga diya.

“car se utar ke gate ke andar chalo & yaad rahe koi chalaki mat dikhana varna yehi dher kar di jaogi.”,rambha janti thi ki vo buri tarah fans gayi hai & us shakhs ki baaten maanane kea lava uske paas & koi chara nahi.makan ke nadir ghuste hi us shakhs ne use 1 kursi pe baithne ko kaha & fir use us se bandh diya.

“tum chahte kya ho?kaun ho tum?..aakhir mujhe yaha band kyu kiya hai?”,vo shakhs cigarette sulgate hue muskura raha tha.

“tumahra naam rambha hai?”

“haan,lekin..-“,usne hath utha use khamosh rehne ka ishara kiya.

“tumhari maa ka naam sumitra tha?”

“haan.”

“tum uske sath Gopalpur naam ke kasbe me rehti thi?”

“haan.”,kayi dino me pehli baar us shakhs ko sukun mila tha.uski talsh anjam tak pahunch gayi thi.yehi thi us kamini ki beti!usne cigarette fenki,uski aankho me khoon utar aaya tha & itne dino se andar ubal raha gussa ab bas photo panda chhata tha.vo tezi se aage badha & rambha ka gala dabane laga.

“uunngggghhhh..chhodo..!”,rambha ke gale se aavaz bhi nahi nikla rahi thi.

“galti tumahri nahi hai..galti to tumahri kamini maan ki hai..lekin kya Karen mujhe inteqam lena hai & vo makkar to mar gayi.ab maa-baap ke karz auald nahi utaregi to & kaun utarega!”,vo shaitani hansi hansa & rambha ka gala chhod diya.rambha buri tarah khansne lagi,”..lekin ghabrao mat.tumhari maurt itni jadli & itni aasan nahi hogi.14 baras guzare hain jail me & uske baad bhi bahut dhool phanki hai.us sab ki keemat to tumhe hi chukani hai.”

“lekin tum ho kaun?..& meri maan ne kya bigada tha tumhara?..vo bahut bhali aurat thi..tumhe koi galatfehmi hui hai..!”,rambha ka gala dukh raha tha.

“chup!vo makkar thi.apne roop & baato ke jaal me mujhe phansa ke meri zindagi barbad kar di & khud aish karne lagi Dayal ke sath!”

“bakwas mat kar,kaminey!meri maa ke bare me anap-shanap mat bol,haramzade!”,maa ke bare me ulti-seedhi baaten sun rambha ko gussa aa gaya.

“tadakkkkk..!”,usne 1 karara tamacha rambha ke gaal pe rasid kiya,”..tu bhi us haram ki kamayi pe hi pali-badhi hai na..tujhe to ab saza zarur milegi.”,vo dobara uska gala ghontne laga,”..mere paise chura ke bhagi thi vo dayal ke sath.main us se pyar karta tha & shadi karma chahta tha lekin vo kamini mere paise leke bhag gayi mere hi dost ke sath!

“tab to zarur maro mujhe….uunnnnngggghhhhh…..paise churane ke baad bhi jise tanghali me zinadgi guzarni padi..aisi aurat ki beti ka to mar jana hi achha hai..!”,rambha ki aavaz me kuchh aisa tha ki vo shakhs ruk gaya,”..ruk kyu gaye..!dabao mera gala..”,rambhakhansne lagi,”..maar do mujhe jaan se taki upar jake apni maa se ye sawal kar saku ki agar usne itne paise loote the to fir vo bechari pure saal me bas 1 sari kyu kharidti thi?..kyu vo mujhe koi kami mehsus na ho iske liye vo 12-12 ghante kaam karti rahi us 2 take ke ki jagah me?..& uska koi yaar tha to kyu sari umra usne tanha guzar di?..raato ko mujhse chhup vo kyu roti rehti thi?. .”,rambha kitni bhi matlabi ladki thi lekin apni maa se use bahut pyar tha & uski yaad aate hi uski aankhe chhalak padi.,vo shakhs kuchh der use dekhta raha.vo us ladki ko bhanpne ki koshish kar raha tha..uske aansu sachche lag arhe the.baato se bhi imandari ki mehak aa rahi thi.ladki himmatwali bhi thi..abhi bhi ghabra nahi rahi thi & shayad use baton me phansana chah rahi ho..lekin ho sakta hai baat sahi keh rahi ho..dayal to tha bhi kameena!..& jab sab hua tha to ye bamushkil 3-4 baras ki hogi..ab ise kya pata?..upar se na jane usne ise kya kahani sunai ho..vaise batane me koi harj bhi nahi..pata to chale sumitra ne beti ko kya bataya tha apni zindagi ke bare me!..magar is ladki se hoshiyar rehna padega.thi ye bhi maa ke hi jaisi..Sali sasur ke sath soti thi!

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--49

गतान्क से आगे......

“तुम्हे पता है तुम्हारा बाप कौन है?”

“नही.जो भी था 1 डरपोक,बुज़दिल &घटिया किस्म का इंसान था जो मेरी मा के पेट मे मुझे डालने की हिम्मत तो रखता था लेकिन उसे & मुझे अपनाने की नही.”,रंभा की रुलाई अब धीमी हो गयी थी..तो सुमित्रा ने उसे ये बात तो सही बताई थी.

“मेरा नाम देवेन सिन्हा है.तुम्हारी मा को मैने पहली बार गोपालपुर के पोस्ट ऑफीस मे देखा था..”,उसने 1 कुर्सी खींची & बैठ गया & 1 नयी सिगरेट सुलगाई,”..& उसे देखता ही रह गया था.उस वक़्त तुम भी उसकी गोद मे थी.हल्की गुलाबी सारी मे लिपटी तुम्हे गोद मे लिए सुमित्रा को देख पहली बार मेरे दिल मे शादी का ख़याल आया था..मैने सोचा कि काश मेरी भी ऐसी 1 बीवी & बच्ची हो तो ज़िंदगी कितनी सुहानी हो जाए..”

“..उसके बाद इत्तेफ़ाक़ कहो या कुच्छ और मैं उस से कयि बार टकराया और हमारी जान-पहचान हो गयी.चंद मुलाक़ातो मे ही मैने इरादा कर लिया कि सुमित्रा को मैं अपनी बनाउन्गा & 1 दिन अपने दिल की बात मैने तुम्हारी मा से कह दी.उसने कोई जवाब नही दिया & मुझसे मिलना छ्चोड़ दिया.मेरी हालत तो दीवानो जैसी हो गयी & तब मैने दयाल का सहारा लिया..”,रंभा ने देखा कि उसकी मा के बारे मे बात करते हुए उस शख्स की आँखो मे नर्मी आ गयी थी लेकिन दयाल नाम को लेते ही वो फिर से अपने पुराने अंदाज़ मे आ गया था.

“..दयाल मेरा दोस्त था.सब कहते थे कि वो चलता पुर्ज़ा & निहायत शातिर आदमी है लेकिन मेरे साथ उसने कभी कोई धोखाधड़ी नही की थी & हमेशा मदद ही करता था.तुम्हारी मा से भी मेरी दोबारा बात करवाने मे उसने बहुत मदद की थी.मैने सुमित्रा से उसकी बेरूख़ी की वजह पुछि तो उसने कहा कि मैं अपनी ज़िंदगी बर्बाद ना करू और उसने उस रोज़ मुझे तुम्हारे पैदा होने की सही कहानी बताई.उस से पहले तो सब यही समझते थे कि तुम्हारे पिता तुम्हारे जनम होने के पहले ही मर गये.उस रोज़ मेरे दिल मे सुमित्रा के लिए प्यार & गहरा हो गया & मैने अपनी बात दोहराई लेकिन उसे तुम्हारी फ़िक्र थी.उसे डर था कि जब वो मेरे बच्चे की मा बनेगी तो मैं तुम्हे वैसा प्यार नही दे पाऊँगा.मैने उसे बहुत समझाया & आख़िर मे वो मान ही गयी.मैं खुशी से नाच उठा & उसे चूम लिया..”,रंभा ने नज़रे नीची कर ली.मा के बारे मे रोमानी बातें सुनने से उसे शर्म आ गयी थी.

“..वो शाम & उसके बाद की कयि शामे मेरी ज़िंदगी की सबसे हसीन शामे थी.मैं उतावला था & सुमित्रा का दीवाना & बहक के केयी बार कोशिश की उसे शादी के पहले ही अपना बना लू लेकिन वो मुझे हमेशा ही मना कर देती थी.बात सही भी थी.उस छ्होटे से कस्बे मे हमारी चाहत की खबर आम नही हुई थी यही बड़ी कमाल की बात थी & कही मैं हदें पार कर जाता तो वो तो बदनाम हो ही जाती..”

“..मेरी माली हालत बहुत अच्छी तो थी नही & मैं नही चाहता था की शादी के बाद तुम्हारी मा काम करे लेकिन उसके लिए मुझे पैसो की ज़रूरत थी.तब दयाल ने मुझे रास्ता दिखाया जो उस वक़्त तो मुझे लगा कि मेरी खुशली की ओर जाता है पर बाद मे मुझे पता चला कि वो रास्ता तो मेरी बर्बादी की तरफ जाता है और उसे बताने वाला शख्स मेरा दोस्त नही बल्कि दोस्ती का नक़ाब पहने 1 दुश्मन है.”,उसने सिगरेट फर्श पे फेंक के उसके तोटे को जूते से मसला & रंभा को देखने लगा.

“अब मैं तुम्हे बताने जा रहा हू कि कैसे मेरे दोस्त & मेरी महबूबा ने मुझे धोखा दिया & उसकी सज़ा आज तुम्हे भुगतनी पड़ रही है..-“

“-..1 मिनिट.मेरी मा दोषी नही है.”

“ये तुम कैसे कह सकती हो?तुम्हे तो उस वक़्त कोई होश भी नही था?”

“पहले तो आजतक मैने किसी दयाल नाम के शख्स के बारे मे ना तो सुना ना ही देखा & फिर वही बात कि अगर मेरी मा ने आपको धोखा दिया तो फिर हम दोनो को अपनी ज़िंदगी उस ग़रीबी मे क्यू गुज़ारनी पड़ी.”,अब वो शख्स सचमुच सोच मे पड़ गया.जब वो कयि बरसो बाद गोपालपुर गया था & पता किया था तो पाया था कि सुमित्रा 1 छ्होटे से मकान मे ही रहती थी & वो भी किराए पे.उसके बारे मे उसने बहुत जानकारी जुटाई थी & यही पता चला था कि वो निहायत शरीफ औरत थी & उसके चाल-चलन पे कभी कोई 1 उंगली भी नही उठा सका था लेकिन उसके इन्तेक़ाम की आग से झुलस रहे दिलोदिमाग ने उस बात को मानने से इनकार कर दिया था.

“हो सकता है दयाल ने बाद मे उसे भी धोखा दिया हो & उसके हिस्से का रुपया उसे ना दिया हो?”,इस बार उसके सवाल मे वो शिद्दत नही थी.रंभा की बातो ने उसकी सोच को हिला दिया था.

“मान ली तुम्हारी बात लेकिन अगर मेरी मा की फ़ितरत ऐसी थी तो उसने फिर किसी & मर्द से यारी क्यू नही गाँठि या फिर किसी और के पैसे क्यू नही हड़पे?”,रंभा उसकी आँखो मे बेबाकी से देख रही थी.देवेन को वाहा ज़रा भी झूठ नज़र नही आ रहा था मगर..

“तुम्हे पता नही होगा और फिर तुम भी तो अपने ससुर के साथ..-“,रंभा चौंक पड़ी..यानी क्लेवर्त मे उस रात उसने उसे विजयंत मेहरा की बाहो मे देख लिया था.

“मैं 1 बहुत मतलबी लड़की हू जो अपनी खुशी के लिए किसी भी हद्द तक गिर सकती है मगर मेरी मा 1 देवी थी.आपने शुरू मे उसे बिल्कुल सही समझा था..आप चाहे तो मुझे मार दीजिए लेकिन मेरा यकीन मानिए..उस औरत को पूरी ज़िंदगी मे कोई खुशी नही मिली और मुझे मलाल है इस बात का कि आज जब मैं जोकि बहुत बुरी हू..जोकि अपने ससुर के साथ सो चुकी है..इस काबिल हू कि जो चाहू वो मेरे पास आ जाए..तो वो औरत ज़िंदा नही है कि मैं उसे चंद खुशिया दे सकु.”,रंभा की निगाहो की ईमानदारी पे उसे अब शक़ नही था लेकिन फिर भी 1 सवाल तो था..

“..तो आख़िर सच क्या है & दयाल आख़िर गया कहा?”

“हुआ क्या था जिसने आपकी ज़िंदगी तबाह कर दी?”

“बताता हू.”

“दयाल छ्होटे-मोटे ग़लत काम करता था,ये मुझे पता था लेकिन वो इतने संगीन जुरमो से वास्ता रखता होगा ये मुझे बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था.जब मैने उसे अपनी पैसो की मुश्किल की बारे मे बताया तो उसने मुझे 1 काम बताया.काम बहुत आसान था,बस मुझे 1 सील बंद पॅकेट लेके गोपालपुर से कोलकाता जाना था & उसके बताए पते पे दे देना था.इस काम के लिए मुझे वो .25,000 दे रहा था.मैने उस से पुछा की आख़िर ऐसा क्या है उस पॅकेट मे जो वो मुझे उसे बस 1 जगह से दूसरी जगह ले जाने के इतने पैसे दे रहा है तो उसने कहा कि उसमे कीमती पत्थर हैं जोकि मुझे कोलकाता मे 1 ज़ोहरी के यहा पहुचाने हैं & इसीलिए मुझे इतने पैसे मिल रहे हैं.”,वो उठा & कमरे के बाहर गया & जब लौटा तो उसके हाथ मे पानी की 1 बॉटल थी.

“मैने वो पॅकेट कोलकाता पहुचाया & मुझे पैसे मिल गये.मैं बड़ा खुश हुआ.ये दूसरी बात थी की गोपालपुर से कोलकाता तक रैल्गाड़ी मे डर के मारे मेरी हालत खराब रही,आख़िर सवाल जवाहरतो का था.”,उसने पानी के घूँट भरे & फिर 1 पल को सोच बॉटल रंभा की ओर बढ़ाई तो उसने हां मे सर हिलाया.वो अपनी कुर्सी से उठा & बाए हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ उसे पानी पिलाया.

“इसके बाद मैं खुद दयाल से आगे भी ऐसे काम मुझे देने को कहने लगा.पहले तो उसने मना किया लेकिन मेरे इसरार पे उसने फिर से मुझे कोलकाता ले जाने को 1 पॅकेट दिया.इस बार भी मुझे उतने ही पैसे दिए गये.मैने उस से पुछा की आख़िर कौन है वो जो उसे ये पत्थर देता है लेकिन वो बात टाल गया.मैने सुमित्रा को भी सब बताया था.उसने मुझे उस काम को करने से मना किया लेकिन मुझे पैसो का लालच तो था ही.”,उसने थोड़ा पानी & पिया,”..जैल जाने के बाद मुझे एहसास हुआ कि दोनो नाटक कर रहे थे.

“दयाल के बारे मे जो मर्ज़ी कहो लेकिन मेरी मा के बारे मे नही.”

“2 बार पॅकेट ले जाने के बाद मेरा हौसला भी बढ़ गया था & मैं तीसरी बार भी पॅकेट ले जाने को तैय्यार हो गया मगर इस बार सब गड़बड़ हो गया.ट्रेन मे मैने गौर किया कि 1 शख्स मुझपे नज़र रखे हुए है.मैं डर गया कि कही वो मेरे पॅकेट के जवाहरतो को लूटने के चक्कर मे ना हो.उसे चकमा देने के लिए मैं हॉवरह के बजाय सेअलदाह स्टेशन पे उतर गया और वाहा से 1 टॅक्सी कर दयाल के दिए पते पे जाने लगा.रास्ते मे मैने देखा कि 1 कार मेरा पीछा कर रही है.मैने टॅक्सी आधे रास्ते मे छ्चोड़ी & फिर 1 फेरी पकड़ के कुच्छ दूर गया & वाहा से फिर टॅक्सी ली लेकिन हर जगह मुझे लगा कि मुझपे नज़र रखी जा रही है.पहले मैने सोचा कि मेरी घबराहट की वजह से मुझे वहाँ हो रहा है लेकिन उस पते पे पहुँच पॅकेट थमाते ही मुझे पता चल गया कि मुझे जो लगा था सही था.वो शख्स चोर नही बल्कि पोलीस का आदमी था & उसने स्मगल किए हुए सोने के बिस्किट्स के साथ पकड़ा था.”

“..जैसे ही मुझे पकड़ा गया मैं बौखला गया & वाहा से भागने की कोशिश करने लगा.उस पोलिसेवाले ने,जो मेरा ट्रेन मे पीछा कर रहा था,मुझे पकड़ लिया तो मैने उसे मारा और भागा लेकिन वो मेरे पीछे आया & मुझपे वार किया & उसकी अंगूठी मेरे गाल पे बुरी तरह से रगडी और ये निशान पड़ गया.मैने भी वही पड़ा 1 भारी गुल्दान उसके सर पे दे मारा.मेरी फूटी किस्मत की उसका सर फॅट गया &और २४ घंटे अस्पताल मे रहने के बाद वो मार गया

“तो इसमे मेरी मा का क्या दोष है?”

“उसी ने मेरा नाम पोलीस को बताया था और इनाम की रकम ली थी.पॅकेट के बारे मे बस दयाल,वो और मैं जानते थे तो मुझे धोखा देने वाले भी वही दोनो थे ना.जब मैने पोलीस को दोनो से कॉंटॅक्ट करने को कहा तो दोनो मे से किसी ने भी मुझे जानने से इनकार कर दिया.अब बताओ आख़िर क्या वजह थी दोनो के ऐसा करने की?”

“ये भी तो हो सकता है कि मेरी मा तक तुम्हारी बात कभी पहुँची ही ना हो & फिर तुम्हारी बातो से तो यही लगता है की ये दयाल बहुत शातिर था & अपनी साज़िश को च्छुपाने केलिए इसने या तो मा से झूठ बोला होगा या फिर उस तक बात पहुचने ही नही दी होगी.”,अब देवेन सोच मे पड़ गया..जैल मे उसने 1 हवलदार को पैसे खिलाके सुमित्रा तक अपना संदेश पहुचने को कहा था.उसने अपने साथी क़ैदी से क़र्ज़ ले उसे पैसे दिए थे & उसी हवलदार ने उसे बताया था कि सुमित्रा ने उसे पकड़वाने का इनाम लिया है और इनाम लेने वो जिस शख्स के साथ आई थी उसका हुलिया दयाल जैसा ही था.मगर रंभा की बातो ने उसे दूसरे पहलू पे भी सोचने को मजबूर कर दिया था.

“मैं फिर कहती हू कि तुम्हे ग़लतफहमी हुई है.मुझे मारने से तुम्हे शांति मिलती है तो मार दो लेकिन ये सच नही बदलेगा कि मेरी मा का तुम्हारी बर्बादी से कोई लेना-देना नही.”,2 घंटे पहले उसका इरादा पक्का था कि वो इस लड़की को मार के अपना बदला पूरा करेगा लेकिन अब उसका विस्वास डिग गया था.

“तो क्या दयाल & तुम्हारी मा साथ नही थे?”

“नही!..& कौन है ये दयाल आख़िर?..मैने तो उसे कभी नही देखा!”

“ये है दयाल.”,उसने जेब से 1 तस्वीर निकाल उसे दिखाई,”..ये सुमित्रा,मेरी गोद मे ये तुम & ये है दयाल.”,1 गोरा-चिटा शख्स था जो शक्ल से तो भला दिखता था लेकिन उसकी आँखो मे 1 अजीब सी चमक थी जिसे तस्वीर मे भी देख रंभा थोड़ी असहज हो गयी.

“मैने इस आदमी को कभी नही देखा ना ही मा ने कभी इसका कोई ज़िक्र किया.”,अब देवेन को कोई शक़ नही था कि रंभा को सच मे कुच्छ नही मालूम था और शायद सुमित्रा भी निर्दोष थी.वो निढाल हो कुर्सी पे बैठ गया.रंभा को अचानक वो बहुत बूढ़ा लगा.कुच्छ पल बाद वो उठा और उसके बंधन खोल दिए.रंभा अपनी कलाईयो को सहलाती कुर्सी से उठी & उसके सामने खड़ी हो गयी.

“देखिए,मैं आपको नही जानती लेकिन आप मेरी मा को चाहते थे,उसे अपनाना चाहते थे,ये बात मेरे लिए बहुत मायने रखती है.मैं जानती हू,मेरी मा के साथ-2 इस दयाल की भी तलाश होगी आपको ..-“

“-..हां,लेकिन वो तो ऐसे गायब हो गया है जैसे गधे के सर से सींग!”

“उस सींग को ढूँढने मे मैं भी आपकी मदद करूँगी.मेरी मा का नाम बदनाम करने वाले को मैं छ्चोड़ूँगी नही.”,वो हैरत से रंभा को देखने लगा.

“मुझे माफ़ कर सकोगी..मैं अपने इन्तेक़ाम की हवस मे अँधा हो गया था..बुरा मत मानना लेकिन पिच्छले कयि बरसो से मैं सुमित्रा को दोषी मानता आ रहा हू & अभी भी अपनी सोच बदलने मे मुझे परेशानी हो रही है..मेरा दिल तुम्हारी बातो पे यकीन कर रहा है लेकिन दिमाग़ बार-2 मुझे सवाल करने पे मजबूर कर रहा है!”

“ये उलझन सिर्फ़ दयाल के मिलने से ही दूर हो सकती है.आप यकीन कीजिए अब से मैं भी आपके साथ हू.”

“शुक्रिया,चलो तुम्हे तुम्हारे घर तक छ्चोड़ आऊँ.”

“हूँ.”

“ये घर आपका है?”,रंभा कार मे बैठी & एंजिन स्टार्ट किया तो वो हंस दिया & बस इनकार मे सर हिलाया.

“आप जैल से निकला गोपालपुर क्यू नही आए?”

“क्यूकी वाहा से निकलते ही जैल का मेरा 1 साथी मुझे तमिल नाडु ले गया.मैने वाहा हर तरह का काम किया.मुझे इन्तेक़ाम तो लेना था लेकिन अब मैं दोबारा जैल भी नही जाना चाहता था,मेरे उसी साथी ने मुझे पहले पैसे जमा करने की सलाह दी & फिर इन्तेक़ाम लेने की.कुच्छ किस्मत ने भी मेरा साथ नही दिया.मैने वाहा जाने की कोशिश की थी लेकिन हर बार कुच्छ ना कुच्छ अड़ंगा लग जाता था.जब कामयाब हुआ तो पता चला कि सुमित्रा अब इस दुनिया मे है नही & दयाल गायब है.”

“आप अभी भी तमिल नाडु मे ही हैं?..वाहा काम क्या करते हैं आप?”

“नही.अब तो मैं गोआ मे रहता हू & वही बिज़्नेस है मेरा.”

“अब आप क्या करेंगे?”,रंभा का बुंगला नज़दीक आ रहा था & देवेन ने उसे कार रोकने का इशारा किया.

“अभी तो गोआ जाऊँगा..रंभा..मुझे तुम्हे कुच्छ बताना है.”

“क्या?”,देवेन ने उसे कंधार फॉल्स पे देखी सारी बात बता दी.

“वो हरपाल होगा. ”

“पता नही.मुझे उसकी शक्ल नही दिखी थी & दिखती भी तो मैं उसे पहचानता तो हू नही.”

“&सोनिया..वो लड़की मेरे ससुर के साथ आई थी..आपको पक्का यकीन है?”

“बिल्कुल.मैने दोनो को होटेल वाय्लेट से 1 साथ कार मे निकलते देखा था & झरने तक उनका पीछा किया था.”

“अच्छा.”,रंभा सोच मे पड़ गयी.कुच्छ गड़बड़ लग रही थी लेकिन क्या ये वो समझ नही पा रही थी.परेशानी ये थी कि ये बात वो पोलीस को भी नही बता सकती थी क्यूकी ऐसा करने से देवेन बिना बात के इस चक्कर मे फँस जाता.

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क्रमशः.......

JAAL paart--49

gataank se aage......

“tumhe pata hai tumhara baap kaun hai?”

“nahi.jo bhi tha 1 darpok,buzdil &ghatiya kism ka insan tha jo meri maa ke pet me mujhe daalne ki himmat to rakhta tha lekin use & mujhe apnanae ki nahi.”,rambha ki rulayi ab dhimi ho gayi thi..to sumitra ne use ye baat to sahi batayi thi.

“mera naam Deven Sinha hai.tumhari maa ko maine pehli baar gopalpur ke post office me dekha tha..”,usne 1 kursi khinchi & baith gaya & 1 nayi cigarette sulgai,”..& use dekhta hi reh gaya tha.us waqt tum bhi uski god me thi.halki gulabi sari me lipti tumhe god me li sumitra ko dekh pehli baar mere dil me shadi ka khayal aaya tha..maine socha ki kash meri bhi aisi 1 biwi & bachchi ho to zindagi kitni suhani ho jaye..”

“..uske baad ittefaq kaho ya kuchh aur main us se kayi baar takraya & huamri jaan-pehchan ho gayi.chand mulakato me hi maine irada kar liya ki sumitra ko main apni banaunga & 1 din apne dil ki baat maine tumhari maa se keh di.usne koi jawab nahi diya & mujhse milna chhod diya.meri halat to deewano jaisi ho gayi & tab maine dayal ka sahara liya..”,rambha ne dekha ki uski maa ke bare me baat karte hue us shakhs ki aankho me narmi aa gayi thi lekin dayal naam ko lete hi vo fir se apne purane andaz me aa gaya tha.

“..dayal mera dost tha.sab kehte the ki vo chalta purza & nihayat shatir aadmi hai lekin mere sath usne kabhi koi dhokhadhadi nahi ki thi & humesha madad hi karta tha.tumhari maa se bhi meri dobara baat karwane me usne bahuty madad kit hi.maine sumitra se uski berukhi ki vajah puchhi to usne kaha ki main apni zindagi barbad na karu & usne us roz mujhe tumhare paida hone ki sahi kahaniu batayi.us se pehle to sab yehi samajhte the ki tumahre pita tumahre janam hone ke pehle hi mar gaye.us roz mere dil me sumitra ke liye pyar & gehra ho gaya & maine apni baat dohrayi lekin use tumhari fikr thi.use darr tha ki jab vo mere bachche ki maa banegi to main tumhe vaisa pyar nahi de paoonga.maine use bahut samjhaya & aakhir me vo maan hi gayi.main khushi se nach utha & use chum liya..”,rambha ne nazre neechi kar li.maa ke bare me romani baaten sunane se use sharm aa gayi thi.

“..vo sham & uske baad ki kayi shamen meri zindagi ki sabse haseen shamen thi.main utawla tha & sumitra ka deewana & behak ke kayi baar koshish ki use shadi ke pehle hi apna bana lu lekin vo mujhe humesha hi mana kar deti thi.baat sahib hi thi.us chhote se kasbe me humari chahat ki khabra aam nahi hui thi yehi badi kamal ki baat thi & kahi main haden paar kar jata to vo to badnam ho hi jati..”

“..meri mali halat bahut achhi to thi nahi & main nahi chahta tha ki shadi ke bad tumhari maa kaam kare lekin uske liye mujhe paiso ki zarurat thi.tab dayal ne mujhe rasta dikhaya jo us waqt to mujhe laga ki meri khushali ki or jata hai par baad me mujhe pata chala ki vo rasta to meri barbadi ki taraf jata hai & use batane wala shakhs mera dost nahi balki dosti ka naqab pehne 1 dushman hai.”,usne cigarette farsh pe fenk ke uske tote ko jute se masla & rambha ko dekhne laga.

“ab main tumhe batane jar aha hu ki kaise mere dost & meri mehbooba ne mujhe dhokha diya & uski saza aaj tumhe bhugatni pad rahi hai..-“

“-..1 minute.meri maa doshi nahi hai.”

“ye tum kaise keh sakti ho?tumhe to us waqt koi hosh bhi nahi tha?”

“pehle to aajtak maine kisi dayal naam ke shakhs ke bare me na to suna na hi dekha & fir vahi baat ki agar meri maa ne aapko dhokha diya to fir hum dono ko apni zindagi us garibi me kyu guzarni padi.”,ab vo shakhs sachmuch soch me pad gaya.jab vo kayi barso baad gopalpur gaya tha & pata kiya tha to paya tha ki sumitra 1 chhote se makan me hi rehti thi & vo bhi kiraye pe.uske bare me usne bahut jankari jutai thi & yehi pata chala tha ki vo nihayat sharif aurat thi & uske chal-chalan pe kabhi koi 1 ungli bhi nahi utha saka tha lekin uske inteqam ki aag se jhulas rahe dilodimagh ne us baat ko maanane se inkar kar diya tha.

“ho sakta hai dayal ne baad me use bhi dhokha diya ho & uske hisse ka rupaya use na diya ho?”,is baar uske sawal me vo shiddat nahi thi.rambha ki baato ne uski soch ko hila diya tha.

“maan li tumhari baat lekin agar meri maa ki fitrat aisi thi to usne fir kisi & mard se yari kyu nahi ganthi ya fir kisi aur ke paise kyu nahi hadpe?”,rambha uski aankho me bebaki se dekh rahi thi.deven ko vaha zara bhi jhuth nazar nahi aa raha tha magar..

“tumhe pata nahi hoga & fir tum bhi to apne sasur ke sath..-“,rambha chaunk padi..yani clayworth me us raat usne use Vijayant Mehra ki baaho me dekh liya tha.

“main 1 bahut matlabi ladki hu jo apni khushi ke liye kisi bhi hadd tak gir sakti hai magar meri maa 1 devi thi.aapne shuru me use bilkul sahi samjha tha..aap chahe to mujhe maar dijiye lekin mera yakin maniye..us aurat ko puri zindagi me koi khushi nahi mili & mujhe malal hai is baat ka ki aaj jab main joki bahut buri hu..joki apne sasur ke sath so chuki hai..is kabil hu ki jo chahu vo mere paas aa jaye..to vo aurat zinda nahi hai ki main use chand khushiya de saku.”,rambha ki nigaho ki imandari pe use ab shaq nahi tha lekin fir bhi 1 sawal to tha..

“..to aakhir sach kya hai & dayal aakhir gaya kaha?”

“hua kya tha jisne aapki zindagi tabah kar di?”

“batata hu.”

“Dayal chhote-mote galat kaam karta tha,ye mujhe pata tha lekin vo itne sangin jurmo se vasta rakhta hoga ye mujhe bilkul bhi andaza nahi tha.jab maine use apni paiso ki mushkil ki bare me bataya to usne mujhe 1 kaam bataya.kaam bahut aasan tha,bas mujhe 1 seal band packet leke Gopalpur se Kolkata jana tha & uske bataye pate pe de dena tha.is kaam ke liye mujhe vo Rs.25,000 de raha tha.maine us se puchha ki aakhir aisa kya hai us packet me jo vo mujhe use bas 1 jagah se dusri jagah le jane ke itne paise de raha hai to usne kaha ki usme keemati patthar hain joki mujhe kolkata me 1 johri ke yaha pahuchane hain & isiliye mujhe itne paise mil rahe hain.”,vo utha & kamre ke bahar gaya & jab lauta to uske hath me pani ki 1 bottle thi.

“maine vo packet kolkata pahuchaya & mujhe paise mil gaye.main bada khush hua.ye dusri baat thi ki gopalpur se kolkata tak railgadi me darr ke mare meri halat kharab rahi,aakhir sawal jawaharato ka tha.”,usne pani ke ghunt bhare & fir 1 pal ko soch bottle Rambha ki or badhayi to usne haan me sar hilaya.vo apni kursi se utha & baye hath se uski thuddi pakad use pani pilaya.

“iske baad main khud dayal se aage bhi aise kaam mujhe dene ko kehne laga.pehle to usne mana kiya lekin mere israr pe usne fir se mujhe kolkata le jane ko 1 packet diya.is baar bhi mujhe utne hi paise diye gaye.maine us se puchha ki aakhir kaun hai vo jo use ye patthar deta hai lekin vo baat taal gaya.maine Sumitra ko bhi sab bataya tha.usne mujhe us kaam ko karne se mana kiya lekim mujhe paiso ka lalacha to tha hi.”,usne thoda pani & piya,”..jail jane ke baad mujhe ehsas hua ki dono natak kar rahe the.

“dayal ke bare me jo marzi kaho lekim meri maa ke bare me nahi.”

“2 baar packet le jane ke baad mera hausla bhi badh gaya tha & main teesri baar bhi packet le jane ko taiyyar ho gaya magar is baar sab gadbad ho gaya.train me maine gaur kiya ki 1 shakhs mujhpe nazar rakhe hue hai.main darr gaya ki kahi vo mere packet ke jawaharato ko lootne ke chakkar me na ho.use chakma dene ke liye main Howrah ke bajay Sealdah station pe utar gaya & vaha se 1 taxi kar dayal ke diye pate pe jane laga.raste me maine dekha ki 1 car mera peechha kar rahi hai.maine taxi aadhe raste me chhodi & fir 1 ferry pakad ke kuchh door gaya & vaha se fir taxi li lekin har jagah mujhe laga ki mujhpe nazar rakhi ja rahi hai.pehle maine socha ki meri ghabrahat ki vajah se mujhe vaham ho raha hai lekin us pate pe pahunch packte thamate hi mujhe pata chal gaya ki mujhe jo laga tha sahi tha.vo shakhs chor nahi balki police ka aadmi tha & usne smuggle kiye hue sone ke biscuits ke sath pakda tha.”

“..jaise hi mujhe pakda gaya main baukhla gaya & vaha se bhagne ki koshish karne laga.us policevale ne,jo mera train me peechha kar raha tha,mujhe pakad liya to maine use mara & bhaga lekin vo mere peechhe aaya & mujhpe vaar kiya & uski anguthi mere gaal pe buri tarah se ragdi & ye nishan pad gaya.maine bhi vahi pada 1 bhari guldan uske sar pe de mara.meri phuti kismat ki uska sar phat gaya & aisi jagah chot lagi ki vo usi din hospital me 4 ghante baad mar gaya & mujhe 14 saal ki saza ho gayi.”

“to isme meri maa ka kya dosh hai?”

“usi ne mera naam police ko bataya tha & inam ki rakam li thi.packet ke bare me bas dayal,vo & main jante the to mujhe dhokha dene vale bhi vahi dono the na.jab maine police ko dono se contact karne ko kaha to dono me se kisi ne bhi mujhe jaanane se inkar kar diya.ab batao aakhir kya vajah thi dono ke aisa karne ki?”

“ye bhi to ho sakta hai ki meri maa tak tumhari baat kabhi pahunchi hi na ho & fir tumhari baato se to yehi lagta hai ki ye dayal bahut shatir tha & apni sazish ko chhupane keliye isne ya to maa se jhuth bola hoga ya fir us tak baat pahuchane hi nahi di hogi.”,ab Deven soch me pad gaya..jail me usne 1 hawaldar ko paise khilake sumitra tak apna sandesh pahuchane ko kaha tha.usne apne sathi qaidi se karz le use paise diye the & usi hawaldar ne use bataya tha ki sumitra ne use pakadwane ka inam liya hai & inam lene vo jis shakhs ke sath aayi thi uska huliya dayal jaisa hi tha.magar rambha ki baato ne use dusre pahlu pe bhi sochne ko majboor kar diya tha.

“main fir kehti hu ki tumhe galatfehmi hui hai.mujhe marne se tumhe shanti milti hai to maar do lekin ye sach nahi badlega ki meri maa ka tumhari barbadi se koi lena-dena nahi.”,2 ghante pehle uska irada pakka tha ki vo is ladki ko maar ke apna badla pura karega lekin ab uska vihwas dig gaya tha.

“to kya dayal & tumhari maa sath nahi the?”

“nahi!..& kaun hai ye dayal aakhir?..maine to use kabhi nahi dekha!”

“ye hai dayal.”,usne jeb se 1 tasvir nikal use dikhayi,”..ye sumitra,meri god me ye tum & ye hai dayal.”,1 gora-chitta shakhs tha jo shakl se to bahla dikhta tha lekin uski aankho me 1 ajib si chamak thi jise tasvir me bhi dekh rambha thodi asahaj ho gayi.

“maine is aadmi ko kabhi nahi dekha na hi maa ne kabhi iska koi zikr kiya.”,ab deven ko koi shaq nahi tha ki rambha ko sach me kuchh nahi malum tha & shayad sumitra bhi nirdosh thi.vo nidhal ho kursi pe baith gaya.rambha ko achanak vo bahut boodha laga.kuchh pal baad vo utha & uske bandhan khol diye.rambha apni kalaiyo ko sehlati kursi se uthi & uske samne khadi ho gayi.

“dekhiye,main aapko nahi janti lekin aap meri maa ko chahate the,use apnana chahte the,ye baat mere liye bahut mayne rakhti hai.main janti hu,meri maa ke sath-2 is dayal ki bhi talash hogi aapko ..-“

“-..haan,lekin vo to aise gayab ho gaya hai jaise gadhe ke sar se seeng!”

“us seeng ko dhoondane me main bhi aapki madad karungi.meri maa ka naam badnam karne vale ko main chhodungi nahi.”,vo hairat se rambha ko dekhne laga.

“mujhe maaf kar sakogi..main apne inteqam ki hawas me andha ho gaya tha..bura mat maanana lekin pichhle kayi barso se main sumitra ko doshi manta aa raha hu & abhi bhi apni soch badalne me mujhe pareshani ho rahi hai..mera dil tumhari baato pe yakin kar raha hai lekin dimagh baar-2 mujhe sawal karne pe majboor kar raha hai!”

“ye uljhan sirf dayal ke milne se hi door ho sakti hai.aap yakeen kijiye ab se main bhi aapke sath hu.”

“shukriya,chalo tumhe tumhare ghar tak chhod aaoon.”

“hun.”

“ye ghar aapka hai?”,rambha car me baithi & engine start kiya to vo hasn diya & bas inkar me sar hilaya.

“aap jail se nikla gopalpur kyu nahi aaye?”

“kyuki vaha se nikalte hi jail ka mera 1 sathi mujhe Tamil Nadu le gaya.maine vaha har tarah ka kaam kiya.mujhe inteqam to lena tha lekin ab main dobara jail bhi nahi jana chahta tha,mere usi sathi ne mujhe pehle paise jama karne ki salah di & fir inteqam lene ki.kuchh kismat ne bhi mera sath nahi diya.maine vaha jane ki koshish ki thi lekin har baar kuchh na kuchh adanga lag jata tha.jab kamyab hua to pata chala ki sumitra ab is duniya me hai nahi & dayal gayab hai.”

“aap abhi bhi tamil nadu me hi hain?..vaha kaam kya karte hain aap?”

“nahi.ab to main Goa me rehta hu & vahi business hai mera.”

“ab aap kya karenge?”,rambha ka bungla nazdik aa raha tha & deven ne use car rokne ka ishara kiya.

“abhi to goa jaoonga..rambha..mujhe tumhe kuchh batana hai.”

“kya?”,deven ne use Kamdhar Falls pe dekhi sari baat bata di.

“vo Harpal hoga. ”

“pata nahi.mujhe uski shakl nahi dikhi thi & dikhti bhi to main use pehchanta to hu nahi.”

“&Soniya..vo ladki mere sasur ke sath aayi thi..aapko pakka yakeen hai?”

“bilkul.maine dono ko Hotel Violet se 1 sath car me nikalte dekha tha & jharne tak unka peechha kiya tha.”

“achha.”,rambha soch me pad gayi.kuchh gadbad lag rahi thi lekin kya ye vo samajh nahi pa rahi thi.pareshani ye thi ki ye baat vo police ko bhi nahi bata sakti thi kyuki aisa karne se deven bina baat ke is chakkar me phans jata.

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kramashah.......

 
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