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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--31

गतान्क से आगे.

उसके नखुनो की चुभन से आहत हो उसने उसके हसीन चेहरे पे हाथ फिराते हुए उसके मुँह मे अपनी ज़ुबान घुसा दी जिसे रंभा ने शिद्दत से चूसा.विजयंत ने कुच्छ देर बाद होंठ अलग किए & वैसे ही लंड उसकी चूत पे घुमाया तो रंभा ने आह भरी.विजयंत के हाथ उसकी चूचियो से लगे तो रंभा ने कंधे दीवार से लगा सीना & आगे कर दिया.विजयंत ने उन्हे दबाया & फिर सीधा खड़ा हो गया.ससुर के जिस्म के नशे मे चूर रंभा दीवार से हटी & उसे बाहो मे भर चूम लिया & फिर उसके होंठो को छ्चोड़ नीचे उसके सीने पे आ गयी & धीरे-2 काटने लगी.

विजयंत ने आँखे बंद कर सर पीछे फेंका & आह भरी & फिर तुरंत रीता को गर्दन घुमा के देखा.बिस्तर उन दोनो से काफ़ी दूर था & शायद यही वजह थी कि वो बीवी की मौजूदगी मे बहू का लुत्फ़ उठाने मे कामयाब हो रहा था.रंभा उसके निपल्स को दांतो से छेड़ने के बाद धीमे-2 काटते हुए नीचे आई & उसकी बालो से ढँकी नाभि मे जीभ फिराई.उस वक़्त विजयंत ने बड़ी मुश्किल से अपने लंड को पिचकारी छ्चोड़ने से रोका.

रंभा नीचे आई & अपने गालो पे उसके प्रेकुं से गीले तगड़े लंड को रगड़ा & फिर अपने मुँह मे भर लिया.विजयंत आँखे बंद कर दीवार पे बाया हाथ टीका के आगे झुकता हुआ खड़ा हो गया & डाए हाथ से रंभा की चिकनी पीठ सहलाने लगा.रंभा की ज़ुबान उसके लंड को पागल किए जा रही थी.काफ़ी देर तक वो लंड & उसके नीचे लटक रहे आंडो को जिनपे से विजयंत ने बाल साफ कर रखे थे,चाटती रही & फिर जब उसने मुँह हटा के हाथ उपर ले जा उसकी छाती के बालो मे फिराए तो विजयंत ने उन्हे पकड़ उसे उपर उठाया & बाहो मे भर चूम लिया.

दीवार से सटी उसकी गर्दन को थामे रंभा ने उसके मुँह को अपनी चूचियो से चिपका लिया तो विजयंत नीचे झुका & उसकी जाँघो को हाथो मे थामते हुए लंड को उसकी चूत मे धकेला.

"आईई..!",रंभा के चेहरे पे दर्द की लकीरें खींची लेकिन वो ससुर से बिल्कुल चिपक गयी.उसके घुटनो के पास से उसकी जाँघो को थाम उसे गोद मे उठा विजयंत उसकी चुदाई करने लगा.रंभा को अब कुच्छ होश नही था.ससुर का तगड़ा लंड उसे वही बेजोड़ जिस्मानी मज़ा दे रहा था जिसकी उसे हमेशा ख्वाहिश रहती थी.विजयंत ने दाया हाथ जाँघ से हटाया & उसकी गंद की बाई फाँक को दबोच लिया & उच्छल-2 के उसे चोदने लगा.रंभा ऐसे कभी नही चुदी थी.उसने शादी के पहले ही जिस्मानी रिश्ते कायम किए थे 1 मर्द के साथ.उसके बाद और मर्द आए,1 साथ 2 मर्दो से भी चुदी लेकिन इस तरह से 1 ही मर्द के साथ उसकी सोती बीवी की मौजूदगी मे उसकी गोद मे खड़े होके चुदाई करना!..इसने तो उसे रोमांच से भर दिया था.

विजयंत का दिल उसके सीने की लुभावनी गोलाईयो को चूमने का हुआ & वॉसर नीचे झुकने लगा लेकिन रंभा को थामे रहने के लिए उसे आगे की ओर झुकना पड़ा.रंभा पीछे झुक गयी थी & विजयंत उसकी चूचियाँ चूस्ते हुए,उसे थामे चोद रहा था.विजयंत को कोई तकलीफ़ होती नही दिख रही थी.रंभा तो उसकी मर्दानगी की मुरीद हो गयी!समीर की गुमशुदगी मे उसका हाथ हो या ना हो लेकिन वो जिस्मो के खेल का कमाल का खिलाड़ी था!

उसे उसी तरह झूलते हुए उसने तब तक चोदा जब तक उसकी चूत ने उसके लंड को जाकड़,सिकुड़ते-फैलते हुए उसके झड़ने का एलन ना कर दिया.विजयंत उसे गोद मे उठाए घुमा & अपने बिस्तर के पास चला गया.विजयंत ने जिस्मो का खेल ना जाने कितनी औरतों के साथ,कितने तरीके से खेला था लेकिन इस तरह से बीवी की मौजूदगी मे किसी और को-वो भी अपनी बहू को चोदना,उसके लिए भी बिल्कुल अनूठा तजुर्बा था!

"उधर कहा जा रहे हैं,डॅडी?",रंभा ससुर से चिपटि उसके गले बाहे कसे,उसके बाए कान मे फुसफुसाई.विजयंत ने कुच्छ जवाब नही दिया & पलंग के उस तरफ आ गया जिधर रीता सो रही थी.रीता करवट पे थी & उसकी नंगी पीठ उनकी तरफ थी.विजयंत ने वही पलंग के बगल मे फर्श पे बिछे गाळीचे पे अपनी बहू को बिना उसकी चूत से लंड निकाले लिटाया & घुटनो पे बैठ उसकी कमर को थाम उसकी गंद को गाळीचे से उठा धक्के लगाने लगा.रंभा कालीन के धागो को नोचती सर दाए-बाए झटकते हुए मस्ती मे झूमने लगी.उसकी निगाह जब उपर पलंग पे सो रही अपनी सास पे पड़ती तो वो & रोमांच से भर उठती.

विजयंत उसके पेट को दबाते हुए & उसकी चूचियो को मसल्ते तब तक उसे चोद्ता रहा जब तक उसने कमर उचकानी नही शुरू कर दी.रंभा ने पीछे सर के उपर गाळीचे पे हाथ टीका के ज़ोरोसे कमर उचकानी शुरू कर दी थी & उसका चेहरा मस्ती की शिद्दत से बिल्कुल सख़्त सा दिख रहा था.विजयंत ने फ़ौरन टाँगे फैलाते हुए उसकी चूत को नीचे गाळीचे पे दबाया & हाथ आगे गाळीचे पे टिका उसके उपर झुक के धक्के लगाने लगा.रंभा की चूत ने फिर से उसके लंड पे अपनी जानी-पहचानी हरकत शुरू कर दी थी.विजयंत उसके उपर लेट गया तो रंभा ने अपनी टाँगे उसकी जाँघो के पिच्छले हिस्सो पे फँसा दी.

विजयंत ज़ोरदार धक्के लगा रहा था & रंभा की कोख पे चोट पे चोट किए जा रहा था.रंभा के लिए अब आहें रोकना नामुमकिन था.जिस्म मे ऐसा मज़ा पैदा हो & उसका इज़हार ना कर पाए,अब हर रोज़ तो ये करना उसके लिए मुश्किल था.विजयंत ने फ़ौरन बिस्तर के किनारे से 1 कुशन खींचा & उसके मुँह पे रख दिया.दोनो अभी भी बीच-2 मे रीता को देख रहे थे जोकि सो रही थी.

रंभा ने कुशन को मुँह पे दबा लिया & आहो का शोर उसमे दफ़्न करने लगी.विजयंत उसके उपर लेट गया था & उसका बालो भरा सीना उसकी चूचियो को पीस रहा था.कुच्छ धक्को के बाद जब उसने महसूस किया कि अब रंभा बहुत शिद्दत के साथ कमर हिला रही है & आहें कुशन के बाब्जूद बाहर आ सकती हैं तो उसने कुच्छ तेज़ धक्के & लगाए & उसकी चूत की कसक को शांत किया.रंभा झड़ी & कुशन मुँह से हटा के फेंका & उचकते हुए अपने ससुर की गर्दन पकड़ के उसके दाए कंधे मे मुँह घुसा के अपना दाँत गढ़ा दिए.विजयंत को उसकी इस हरकत से दर्द हुआ पर साथ ही मज़ा भी आया & उसने उसकी चूत मे अपना रस छ्चोड़ दिया.दोनो 1 दूसरे से लिपटे साथ झाड़ते रहे.

कुच्छ देर बाद जब तूफान पूरी तरह से थम गया तो विजयंत ने अपनी बहू को गोद मे उठाया & उसके कमरे मे ले गया & उसके बिस्तर पे बाहो मे भरके तब तक लेटा रहा,जब तक की वो नींद के आगोश मे नही चली गयी.

विजयंत मेहरा ने रंभा के साथ समीर की तलाश शुरू कर दी थी.डेवाले मे 1 रात बिता दोनो अगली सुबह पंचमहल पहुँचे.जब तक रंभा ने अपना समान पॅक किया विजयंत ने समीर के दफ़तर का जायज़ा लिया.मीडीया वालो के लिए इस खबर मे अब वो मज़ा नही रहा था क्यूकी पहले दिन से लेके अभी तक मे कुच्छ मसालेदार नही घटा था लेकिन फिर भी आख़िर बात इतने बड़े आदमी के बेटे के लापता होने की थी.वो रंभा या विजयंत से बात करने की फिराक़ मे लगे ही रहते थे.

रंभा ने अपना समान पॅक किया & अपनी कार मे डलवाया & सीधा होटेल वाय्लेट पहुँची.विजयंत अपनी प्राडो मे पहले से ही उसका इंतेज़ार कर रहा था.रंभा उसकी कार मे बैठी & दोनो निकल पड़े.

पोलीस अपना काम मुस्तैदी से कर रही थी.1 हाइ-प्रोफाइल केस मे कुच्छ गड़बड़ी ना हो जाए इसलिए वो पूरी सावधानी बरत रहे थे.विजयंत ने 1 बार भी पंचमहल पोलीस महकमे पे अपने रसुख का इस्तेमाल कर कोई दबाव नही डाला था.उसकी पहुँच कितनी उपर तक थी ये सभी जानते थे & इस बात को जताने की उसे कोई ज़रूरत नही थी.उसने पंचमहल के पोलीस कमिशनर से बस 1 बार मुलाकात की थी.उपर से राज्य का होम मिनिस्टर,सीएम यहा तक की सेंट्रल गवर्नमेंट के मंत्रियो,जिनमे से किसी से विजयंत ने 1 बार भी इस सिलिसिले मे बात नही की थी,खुद ही पोलीस से लगभग हर रोज़ केस के बारे मे पुच्छ रहे थे.

विजयंत बेटे के लिए कोई शोर नही मचा रहा था इसका मतलब ये नही था कि वो कुच्छ सोच नही रहा था.उसने इरादा पक्का कर लिया था कि अगर उसके बेटे को कोई तकलीफ़ पहुँचा रहा है तो वो उसे अपने हाथो से सज़ा देगा.

रंभा ने कार चलाते अपने ससुर को देखा.उसने आसमानी रंग की चेक की कमीज़ & काली जीन्स पहनी थी & इस वक़्त अपनी उम्र से बहुत ही ज़्यादा कम दिख रहा था.रंभा ने सफेद शर्ट & गहरी नीली जीन्स पहनी थी & उसके जिस्म के सारे कटाव बड़े क़ातिलाना अंदाज़ मे उभर रहे थे.रंभा ने अपने काले चश्मे के पार अपने ससुर को देखा & दाए हाथ को उसकी दाढ़ी पे फिराया & मुस्कुराइ.विजयंत मुस्कुराया & उसका हाथ चूम लिया.वो जानबूझ के रंभा को अपने साथ इस सफ़र पे लाया था ताकि वो हर पल उसपे नज़र रख सके.2 रातो की ज़बरदस्त चुदाई का मतलब ये नही था कि उसकी बहू उसके शक़ के दायरे से बाहर चली गयी थी.

कार पंचमहल से 50किमी की दूरी पे बने पहले मेहरा फार्म के गेट मे दाखिल हुई.विजयंत ने अपने आने की खबर नही दी थी & वाहा का स्टाफ उसे देख चौंक गया & वाहा अफ़रा-तफ़री मच गयी.विजयंत रंभा के साथ मॅनेजर के कॅबिन मे बैठ गया,"सर,समीर सर के बारे मे सुन हम सब भी बहुत परेशान हैं."

"जी,मिस्टर.नाथ.आप बुरा ना माने तो मैं ज़रा पिच्छले 6 महीने के अकाउंट्स & रेकॉर्ड्स देखना चाहूँगा."

"ज़रूर सर.आप यहा मेरी चेर पे बैठिए,कंप्यूटर ऑपरेट करने मे आसानी होगी.",

"ठीक है लेकिन मैं हार्ड कॉपीस भी देखना चाहूँगा.",विजयंत उसकी कुर्सी पे आके बैठ गया & कंप्यूटर खुलने पे फाइल्स देखने लगा.

"ओके,सर.मैं अभी सारी फाइल्स मँगवाता हू.",मॅनेजर कॅबिन से बाहर गया तो उसके पीछे रंभा भी बाहर आ गयी.उसे देखने से ऐसा लग रहा था कि वो ऊब रही है लेकिन हक़ीक़त ये थी कि वो मॅनेजर & बाकी स्टाफ की 1-1 हरकत देख रही थी.

विजयंत का मानना था कि समीर की गुमशुदगी मे अगर ब्रिज कोठारी का हाथ नही था तो हो सकता है अग्री बिज़्नेस की किसी गड़बड़ी का पता चलना समीर की गुमशुदगी का सबब बना हो.वो किसी भी सिरे को बिना जाँचे छ्चोड़ना नही चाहता था.2 घंटे तक सर खपाने के बावजूद उसे वाहा के काम-काज कोई ऐसी गड़बड़ी नज़र नही आई.

रंभा फार्म घूम वाहा के लोगो से बातचीत के दौरान ये पता लगती रही की वाहा के पुराने मॅनेजर को हटाने की वजह क्या थी लेकिन उसे भी कोई ऐसी बात नही पता चली जिस से की किसी पे कोई शक़ जाता.दोनो ने दोपहर का खाना फार्म के मॅनेजर के साथ ही खाया & उसके बाद वाहा की कॉटेज मे आराम करने चले गये.कॉटेज मे 3 कमरे थे & मॅनेजर ने 2 कमरे सॉफ करवा दिए.उस बेचारे को क्या पता था कि उसने दूसरा कमरा बेकार मे ही ठीक करवाया था!

"यहा तो कुच्छ ऐसा पता नही चला.",ससुर के पहलू मे उसके सीने पे सर रखे रंभा ने उसकी शर्ट के उपर के खुले बटन के अंदर हाथ घुसा के उसके सीने को सहलाया.

"हूँ..अकाउंट्स सब ठीक थे.उस मॅनेजर को समीर ने क्यू हटाया था?",वो रंभा के बालो से खेल रहा था.

"वो चाहता था कि उसका तबादला क्लेवर्त कर दिया जाए.वो वही का रहने वाला था..",रंभा उसके सीने पे दोनो हाथ जमा के उनपे ठुड्डी टीका के ससुर को देखने लगी,"..लेकिन वाहा का फार्म हमारे बाकी फार्म्स से अलग हैं."

"हाँ,वाहा हम ठंडी जगहो मे होने वाली सब्ज़ियाँ & फल & फूल उगते हैं.क्लेवर्त 1 हिल स्टेशन है & वाहा बहुत से बोरडिंग स्चोल्स भी हैं..",विजयंत दाए हाथ कि 1 उंगली से उसका बाया गाल सहला रहा था,"..वही हमारी लगभग 90% पैदावार खप जाती है.उस आदमी को तजुर्बा होगा नही इसीलिए समीर ने उसे वाहा भेजा नही होगा."

"वो यहा के काम मे कोताही बरतने लगा था & समीर की चेतावनियो के बावजूद सुधर नही रहा था इसीलिए समीर ने उसे निकाल दिया.यहा के लोगो की बातो से भी ऐसा नही लगता कि उन्हे समीर का फ़ैसला ग़लत लगा हो.मगर क्या इतनी सी बात के लिए वो समीर को नुकसान पहुँचा सकता है?"

"मैं उपरवाले से मनाता तो हू कि ऐसा नही हुआ हो लेकिन..",वो उठ बैठा,"..सच्चाई ये है रंभा,की लोगो को इस से भी मुख्तसर बातो पे अपनी जान गॅवानी पड़ी है.",रंभा के चेहरे का रंग उड़ गया.दिल के किसी कोने मे 1 डर था की समीर शायद अब इस दुनिया मे हो ही ना लेकिन इस तरह से अपने ससुर के मुँह से इस बात को सुनने का असर ही दूसरा था.समीर से उसे प्यार नही था लेकिन वो उस से नफ़रत भी नही करती थी.वो ससुर की चहेती भी बन गयी थी लेकिन वो जानती थी की मेहरा खानदान मे उसकी इज़्ज़त & पुछ तभी होगी जब समीर ज़िंदा रहेगा.नही तो,उसकी सास & ननद के दबाव मे विजयंत जैसे मज़बूत आदमी को भी उसे पैसे देके घर से अलग करना पड़ सकता था & ये उसे मंज़ूर नही था.उसने तय कर लिया था कि चाहे जो भी हो,अब मेहरा खानदान को उसे भी अपना हिस्सा मानना पड़ेगा & उसे भी वही इज़्ज़त देनी पड़ेगी लेकिन समीर के बिना ये मुमकिन होना मुश्किल ही था.

"चलो,चलें.",विजयंत जूते पहन रहा था.रंभा उठी & शीशे मे देख अपने कपड़े ठीक करने लगी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--31

gataank se aage.

uske nakhuno ki chubhan se aahat ho usne uske haseen chehre pe hath firate hue uske munh me apni zuban ghusa di jise rambha ne shiddat se chusa.vijayant ne kuchh der baad honth alag kiye & vaise hi lund uski chut pe ghumaya to rambha ne aah bhari.vijayant ke hath uski chhatiyo se lage to rambha en kandhe deewar se laga seena & aage kar diya.vijayant ne unhe dabaya & fir seedha khada ho gaya.sasur ke jism ke nashe me chur rambha deewar se hati & use baaho me bhar chum liya & fir uske hotho ko chhod neeche uske seene pe aa gayi & dhire-2 kaatne lagi.

vijayant ne aankhe band kar sar peechhe fenka & aah bhari & fir turant rita ko gardan ghuma ke dekha.bistar un dono se kafi door tha & shayad yehi vajah thi ki vo biwi ki maujoodgi me bahu ka lutf uthane me kamyab ho raha tha.rambha uske nipples ko danto se chhedne ke baad dhime-2 kaatate hue neeche aayi & uski baalo se dhanki nabhi me jibh firayi.us waqt vijayant ne badi mushkil se apne lund ko pichkari chhodne se roka.

rambha neeche aayi & apne gaalo pe uske precum se gile tagde lund ko ragda & fir apne munh me bhar liya.vijayant aankhe band kar deewar pe baya hath tika ke aage jhukta hua khada ho gaya & daye hath se rambha ki chikni pith sehlane laga.rambha ki zuban uske lund ko pagal kiye ja rahi thi.kafi der tak vo lund & uske neeche latak rahe ando ko jinpe se vijayant ne baal saaf kar rakhe the,chaatati rahi & fir jab usne munh hata ke hath upar le ja uski chhati ke baalo me firaye to vijayant ne unhe pakad use upar uthaya & baaho me bhar chum liya.

deewar se sati uski gardan ko thame rambha ne uske munh ko apni choochiyo se chipka liya to vijayant neeche jhuka & uski jangho ko hatho me thamte hue lund ko uski chut me dhakela.

"aaiyee..!",rambha ke chehre pe dard ki lakeeren khinchi lekin vo sasur se bilkul chipak gayi.uske ghutno ke paas se uski jangho ko tham use god me utha vijayant uski chudai karne laga.rambha ko ab kuchh hosh nahi tha.sasur ka tagda lund use vahi bejod jismani maza de raha tha jiski use humesha khwahish rehti thi.vijayant ne daya hath jangh se hataya & uski gand ki bayi fank ko daboch liya & uchhal-2 ke use chodne laga.rambha aise kabhi nahi chudi thi.usne shadi ke pehle hi jismani rishte kayam kiye the 1 mard ke sath.uske abad aur mard aaye,1 sath 2 mardo se bhi chudi lekin is tarah se 1 hi mard ke sath uski soti biwi ki maujoodgi me uski god me kahde hoke chudai karna!..isne to use roamnch se bhar diya tha.

vijayant ka dil uske seene ki lubhawani golaiyo ko chumne ka hua & vosar neeche jhukane laga lekin rambha ko thame rehne ke liye use aage ki or jhukna pada.rambha peechhe jhuk gayi thi & vijayant uski choochiyan chuste hue,use thame chod raha tha.vijayant ko koi taklif hoti nahi dikh rahi thi.rambha to uski mardangi ki murid ho gayi!sameer ki gumshudgi me uska hath ho ya na ho lekin vo jismo ke khel ka kamal ka khiladi tha!

use usi tarah jhulate hue usne tab tak choda jab tak uski chut ne uske lund ko jakad,sikudte-failte hue uske jhadne ka elan na kar diya.vijayant use god me uthaye ghuma & apne bistar ke paas chal agaya.vijayant ne jismo ka khel na jane kitni auraton ke sath,kitne tarike se khela tha lekin is tarah se biwi ki maujoodgi me kisi aur ko-vo bhi apni bahu ko chodna,uske liye bhi bilkul anutha tajurba tha!

"udhar kaha ja rahe hain,daddy?",rambha sasur se chipti uske gale baahe kase,uske baye kaan me phusphusayi.vijayant ne kuchh jawab nahi diya & palang ke us taraf aa gaya jidhar rita so rahi thi.rita karwat pe thi & uski nangi pith unki taraf thi.vijayan ne vahi palang ke bagal me farsh pe bichhe galiche pe apni bahu ko bina uski chut se lund nikale litaya & ghutno pe baith uski kamar ko tham uski gand ko galiche se utha dhakke lagane laga.rambha kaleen ke dhago ko nochti sar daye-baye jhatakte hue masti me jhumne lagi.uski nigah jab upar palang pe sor ahi apni saas pe padti to vo & romanch se bhar uthati.

vijayant uske pet ko dabate hue & uski choochiyo ko masalte tab tak use chodta raha jab tak usne kamar uchkani nahi shuru kar di.rambha ne peechhe sar ke upar galiche pe hath tika ke zoros e kamar uchkani shuru kar di thi & uska chehra masti ki shiddat se bilkul sakt sa dikh raha tha.vijayant ne fauran tange failate hue uski chut ko neeche galiche pe dabaya & hath aage galiche pe tika uske upar jhuk ke dhakke lagane laga.rambha ki chut ne fir se uske lund pe apni jani-pehchani harkat shuru kar di thi.vijayant uske upar let gaya to rambha ne apni tange uski jangho ke pichhle hisso pe fansa di.

vijayant zordar dhakke laga raha tha & rambha ki kokh pe chot pe chot kiye ja raha tha.rambha ke liye ab aahen rokna namumkin tha.jism me aisa maza paida ho & uska izhar na kar paye,ab har roz to ye karna uske liye mushkil tha.vijayant ne fauran bistar ke kinare se 1 cushion khincha & uske munh pe rakh diya.dono abhi bhio beech-2 me rita ko dekh rahe the joki so rahi thi.

rambha ne cushio ko munh pe daba liya & aaho ka shor usme dafn karne lagi.vijayant uske uapr let gaya tha & uska baalo bhara seena uski choochiyo ko pees raha tha.kuchh dhakko ke baad jab usne mehsus kiya ki ab rambha bahut shiddat ke sath kamar hila rahi hai & aahen cushion ke baqvjud bahar aa sakti hain to usne kuchh tez dhakke & lagaye & uski chut ki kasak ko shant kiya.rambha jhadi & cushion munh se hata ke fenka & uchakte hue apne sasur ki gardan pakad ke uske daye kandhe me munh ghusa ke apna dant gada diye.vijayant ko uski is harkat se dard hua par sath hi maza bhi aaya & usne uski chut me apna ras chhod diya.dono 1 dusre se lipte sath jhadte rahe.

kuchh der baad jab toofan puri tarah se tham gaya to vijayant ne apni bahu ko god me uthaya & uske kamre me le gaya & uske bistar pe baaho me bharke tab tak leta raha,jab tak ki vo nind ke agosh me nahi chali gayi.

Vijayant Mehra ne Rambha ke sath Sameer ki talash shuru kar di thi.Devalay me 1 raat bita dono agli subah Panchmahal pahunche.jab tak rambha ne apna saman pack kiya vijayant ne sameer ke dafatr ka jayza liya.media walo ke liye is khabar me ab vo maza nahi raha tha kyuki pehle din se leke abhi tak me kuchh masaledar nahi ghata tha lekin fir bhi aakhir baat itne bade aadmi ke bete ke lapata hone ki thi.vo rambha ya vijayant se baat karne ki firaq me lage hi rehte the.

rambha ne apna saman pack kiya & apni car me dalwaya & seedha Hotel Violet pahunchi.vijayant apni Prado me pehle se hi uska intezar kar raha tha.rambha uski car me baithi & dono nikal pade.

police apna kaam mustaidi se kar rahi thi.1 high-profile case me kuchh gadbadi na ho jaye isliye vo puri savdhani barat rahe the.vijayant ne 1 baar bhi panchmahal police mehakme pe apne rasukh ka istemal kar koi dabav nahi dala tha.uski pahunch kitni upar tak thi ye sabhi jante the & is baat ko jatane ki use koi zarurat nahi thi.usne panchmahal ke police commissioner se bas 1 baar mulakat ki thi.upar se rajya ka home minister,CM yaha tak ki central government ke mantriyo,jinme se kisi se vijayant ne 1 baar bhi is silisile me baat nahi ki thi,khud hi police se lagbhag har roz case ke bare me puchh rahe the.

vijayant bete ke liye koi shor nahi macha raha tha iska matlab ye nahi tha ki vo kuchh soch nahi raha tha.usne irada pakka kar liya tha ki agar uske bete ko koi taklif pahuncha raha hai to vo use apne hatho se saza dega.

rambha ne car chalate apne sasur ko dekha.usne aasmani rang ki check ki kamiz & kali jeans pehni thi & is waqt apni umra se bahut hi zyada kam dikh raha tha.rambha ne safed shirt & gehri nili jeans pehni thi & uske jism ke sare katav bade qatilana andaz me ubhar rahe the.rambha ne apne kale chashme ke paar apne sasur ko dekha & daye hath ko uski dadhi pe firaya & muskurayi.vijayant muskuraya & uska hath chum liya.vo jaanbujh ke rambha ko apne sath is safar pe laya tha taki vo har pal uspe nazar rakh sake.2 raato ki zabardast chudai ka matlab ye nahi tha ki uski bahu uske shaq ke dayre se bahar chali gayi thi.

car panchmahal se 50km ki duri pe bane pehle Mehra Farm ke gate me dakhil hui.vijayant ne apne aane ki khabar nahi di thi & vaha ka staff use dekh chaunk gaya & vaha afra-tafri mach gayi.vijayant rambha ke sath manager ke cabin me baith gaya,"sir,sameer sir ke bare me sun hum sab bhi bahut pareshan hain."

"ji,Mr.Nath.aap bura na mane to main zara pichhle 6 mahine ke accounts & records dekhna chahunga."

"zarur sir.aap yaha meri chair pe baithiye,computer operate karne me aasani hogi.",

"thik hai lekin main hard copies bhi dekhna chahunga.",vijayant uski kursi pe aake baith gaya & computer khulne pe files dekhne laga.

"ok,sir.main abhi sari files mangwata hu.",manager cabin se bahar gaya to uske peechhe rambha bhi abhar aa gayi.use dekhne se aisa lag raha tha ki vo oob rahi hai lekin haqeeqat ye thi ki vo manager & baki staff ki 1-1 harkat dekh rahi thi.

vijayant ka maanana tha ki sameer ki gumshudgi me agar Brij Kothari ka hath nahi tha to ho sakta hai agri business ki kisi gadbadi ka pata chalna sameer ki gumshudgi ka sabab bana ho.vo kisi bhi sire ko bina janche chhodna nahi chahta tha.2 ghante tak sar khapane ke bavjood use vaha ke kaam-kaaj koi aisi gadbadi nazar nahi aayi.

rambha farm ghum vaha ke logo se baatchit ke dauran ye pata lagati rahi ki vaha ke purane manager ko hatane ki vajah kya thi lekin use bhi koi aisi baat nahi pata chali jis se ki kisi pe koi shaq jata.dono ne dopahar ka khana farm ke manager ke sath hi khaya & uske baad vaha ki cottage me aaram karne chale gaye.cottage me 3 kamre the & manager ne 2 kamre saaf karwa diye.us bechare ko kya pata tha ki usne dusra kamra bekar me hi thik karwaya tha!

"yaha to kuchh aisa pata nahi chala.",sasur ke phelu me uske seene pe sar rakhe rambha ne uski shirt ke upar ke khule button ke andar hath ghusa ke uske seene ko sehlaya.

"hun..accounts sab thik the.us manager ko sameer ne kyu hataya tha?",vo rambha ke baalo se khel raha tha.

"vo chahta tha ki uska tabadla Clayworth kar diya jaye.vo vahi ka rehne vala tha..",rambha uske seene pe dono hath jama ke unpe thuddi tika ke sasur ko dekhne lagi,"..lekin vaha ka farm humare baki farms se alag hain."

"haan,vaha hum thandi jagaho me hone vali sabziyan & phal & phool ugate hain.clayworth 1 hill station hai & vaha bahut se boarding schols bhi hain..",vijayant daye hath ki 1 ungli se uska baya gaal sehla raha tha,"..vahi humari lagbhag 90% paidavar khap jati hai.us aaadmi ko tajurba hoga nahi isiliye sameer ne use vaha bheja nahi hoga."

"vo yaha ke kaam me kotahi baratane laga tha & sameer ki chetavaniyo ke bavjood sudhar nahi raha tha isiliye sameer ne use nikal diya.yaha ke logo ki baato se bhi aisa nahi lagta ki unhe sameer ka faisla galat laga ho.magar kya itni si baat ke liye vo sameer ko nuksan pahuncha sakta hai?"

"main uparwale se manaata to hu ki aisa nahi hua ho lekin..",vo uth baitha,"..sachchai ye hai rambha,ki logo ko is se bhi mukhtasar baato pe apni jaan gawani padi hai.",rambha ke chehre ka rang ud gaya.dil ke kisi kone me 1 darr tha ki sameer shayad ab is duniya me ho hi na lekin is tarah se apne sasur ke munh se is baat ko sunane ka asar hi dusra tha.sameer se use pyar nahi tha lekin vo us se nafrat bhi nahi karti thi.vo sasur ki chaheti bhi ban gayi thi lekin vo janti thi ki mehra khandan me uski izzat & puchh tabhi hogi jab sameer zinda rahega.nahi to,uski saas & nanad ke dabav me vijayant jaise mazbut aadmi ko bhi use paise deke ghar se alag karna pad sakta tha & ye use manzur nahi tha.usne tay kar liya tha ki chahe jo bhi ho,ab mehra khandan ko use bhi apna hissa manana padega & use bhi vahi izzat deni padegi lekin sameer ke bina ye mumkin hona mushkil hi tha.

"chalo,chalen.",vijayant jute pehan raha tha.rambha uthi & shishe me dekh apne kapde thik karne lagi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--32

गतान्क से आगे.

"आपने मॅनेजर नाथ से ये क्यू कहा कि हम वापस पंचमहल जा रहे हैं?",विजयंत कार को आवंतिपुर की तरफ भगा रहा था.

"इसलिए ताकि वो आगे के फार्म्स को हमारे आने की खबर ना दे.",रंभा उसके दिमाग़ से प्रभावित हुए बिना नही रह सकी.उसने अपनी सीट बेल्ट खोली & उसके कंधे पे सर रख के सामने रास्ते को देखने लगी.विजयंत ने भी फार्म पे और लोगो से पिच्छले मॅनेजर के निकाले जाने की वजह पुछि थी & उन्होने भी वही कहा था जो रंभा ने कहा था.अब उसे महसूस होने लगा था कि शायद रंभा पे उसका शक़ ग़लत है लेकिन वो शायद अभी भी उसके दिमाग़ मे था & इसका यही मतलब था कि रंभा शक़ के दायरे से बाहर नही निकली थी.

शाम के 5 बज रहे थे & कार तेज़ी से आवंतिपुर की ओर बढ़ रही थी.विजयंत ने बाई बाँह उठाके रंभा को उसके घेरे मे लिया तो रंभा उसके & करीब आ गयी & उसके सीने पे हाथ फ़िराने लगी.दोनो खामोशी मे 1 दूसरे के जिस्मो के मस्ताने एहसास का लुत्फ़ उठाते हुए रास्ता तय कर रहे थे इस बात से अंजान कि 1 कार लगातार उनका पीछा कर रही थी जिसे चलाने वाले के गाल पे 1 निशान था.

उस शख्स ने पिच्छले 2 दिनो मे विजयंत मेहरा & उसके कारोबार & परिवार के बारे मे इंटरनेट से काफ़ी जानकारी जुटाई थी.पंचमहल पहुँचने से पहले उसने सोचा भी नही था कि उसे विजयंत की ज़िंदगी के बारे मे भी जानना पड़ेगा मगर किस्मत ने उसे ऐसा करने पे मजबूर कर दिया था.उसे तो बस रंभा से मतलब था लेकिन समीर की गुमशुदगी ने सब गड़बड़ कर दिया था.

जब विजयंत रंभा के साथ पहले फार्म पे गया तो वो फिर से झल्ला उठा था.फार्म मे घुसने का रास्ता उसे नही सूझा था & उसे फार्म के बाहर के छ्होटे से बाज़ार मे तेज़ मिर्च वाले समोसे & बहुत ज़्यादा मीठी चाइ पी के वक़्त काटना पड़ा.उसने जैसे ही फ़ैसला किया कि अब उसे किसी तरह फार्म मे घुसना ही है,तभी उसे विजयंत की प्राडो बाहर आते दिखी.

इस वक़्त वो शख्स पंचमहल & आवंतिपुर के रास्ते मे पड़ने वाले दूसरे मेहरा फार्म के पास के 1 कस्बे की 1 सराई मे रुका था.उसे ये तो समझ आ गया था कि विजयंत बेटे को ढ़ूनडने निकला है & उसी सिलसिले मे फार्म्स के चक्कर लगा रहा है.उसकी समझ मे ये नही आ रहा था कि वो रंभा को हर जगह अपने साथ लेके क्यू घूम रहा था..कम्बख़्त वो 1 पल को भी अकेली नही रह पा रही थी..उसने सिगरेट वही कमरे के फर्श पे बुझाई & अपनी मच्छरदानी उठाके बिस्तर पे चला गया.रात को विजयंत फार्म छ्चोड़ने वाला नही,इतना उसे यकीन था.उसने चादर पूरे सर तक ओढ़ ली & सोने लगा,आख़िर कल सुबह बहुत सवेरे उठ उसे फिर से रंभा का पीछा करना था.

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रंभा फार्महाउस की कॉटेज मे ससुर के कमरे मे उसके बिस्तर पे 1 नीली डेनिम की मिनी स्कर्ट & स्लेटी रंग का ऑफ-शोल्डर टॉप पहने बैठी थी.पलंग के हेडबोर्ड से टेक लगाके कमर से नीचे के हिस्से को दाई तरफ मोड़ वो किसी मॅगज़ीन के पन्ने पलट रही थी कि विजयंत उसके बगल मे आ बैठा.दोनो रात का खाना खा चुके थे & उसके पहले इस फार्म के भी सारे अकाउंट्स चेक कर चुके थे.यहा भी उन्हे कोई सुराग नही मिला था.

रंभा ने मॅगज़ीन किनारे की & गर्दन बाई तरफ घुमाई & ससुर के लबो से लब सटा दिए.दोनो हौले-2 1 दूसरे को चूमने लगे.विजयंत ने उसके टॉप मे से नुमाया दाए कंधे पे हाथ रखा तो वो खुद ही उसकी ओर घूमी & अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा दी.विजयंत उसकी ज़ुबान चूसने लगा & बया हाथ नीचे उसकी स्कर्ट पे रख दिया & दाए को उसकी गर्दन के नीचे से होते उसके दाए कंधे पे रख दिया & वाहा सहलाते हुए उसकी ज़ुबान की हर्कतो से मस्त होता रहा.

विजयंत का जोश बढ़ा तो वो थोड़ा आगे हुआ & रंभा फिर पहले जैसे ही हेअडबोर्ड से आड़ के बैठ गयी.विजयंत का हाथ उसकी स्कर्ट के नीचे जाँघ के खुले हिस्से पे बहुत हल्के-2 घूम रहा था.रंभा को उसके हाथ की ये हरकत बहुत मस्त कर रही थी.विजयंत उसकी जाँघ को मसल नही रहा था बल्कि बहुत हल्के से सहला रहा था.

अब विजयंत की ज़ुबान रंभा के मुँह मे घूम रही थी & उसका लंड उसकी ट्रॅक पॅंट मे बिल्कुल तन गया था.विजयंत उसे चूमते हुए ही थोड़ा उठा & उसके कंधे पकड़ उसे नीचे करने लगा तो उसका इशारा समझ रंभा खुद ही बिस्तर पे लेट गयी.उसके कमर का नीचे का हिस्सा अभी भी दाई तरफ मुड़ा हुआ था & उसके हाथ ससुर के चेहरे को थामे थे.विजयंत घुटनो पे हो आगे झुका तो उसका लंड बहू की गंद से टकराया.

"यहा भी कोई सुराग हाथ नही लगा ना?",रंभा ने पुछा तो वो उसे उसकी गंद पे दबाते हुए और झुका & रंभा के चेहरे को पकड़ अपने सीने को उसकी छातियो पे दबाते हुए बड़ी शिद्दत से उसे चूमने लगा.लंड के एहसास ने रंभा की चूत को भी कुलबुला दिया.वो भी नाख़ून से ससुर की दाढ़ी खरोंछती मस्ती मे खोने लगी.काफ़ी देर तक दोनो ऐसे ही चूमते रहे.विजयंत को अपने सीने मे रंभा के चुभते निपल्स अब जैसे उसके होंठो को बुलावा देते महसूस हो रहे थे.

"नही लेकिन 1 आदमी मुझे कुच्छ अजीब लगा.",उसने उसके टॉप को उपर किया & उसकी आँखो के सामने ट्रॅन्स्परेंट स्ट्रॅप्स वाली काली ब्रा मे क़ैद मस्ती मे पल-पल फूलते उसके सीने के बेकल उभार चमक उठे.उसने ब्रा के उपर से ही 2 हल्की किस्सस दोनो चूचियो पे ठोनकी तो रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद की & मुस्कुराते हुए ससुर के बालो मे उंगलिया फिराने लगी.विजयंत ने अपने घुटनो से उसकी टाँगो को सीधा कर दिया था & अब उसके उपर लेटा हुआ था.

"उउम्म्म्म..कौन?",विजयंत उसके सीने की वादी मे अपनी गर्म साँसे छ्चोड़ रहा था & रंभा के जिस्म की आग उनकी तपिश से & बढ़ रही थी.वो अब अपनी भारी जंघे आपस मे रगड़ अपनी चूत की बेसब्री जताने लगी थी.विजयंत ने उसके टॉप को फिर नीचे किया & उसके कंधो को चूमने लगा.पतले-2 ट्रॅन्स्परेंट बार स्ट्रॅप्स को उसने दांतो से उठा के कंधो के किनारे पे किया & फिर कंधो पे अपनी जीभ फिराने लगा.रंभा ने जोश मे उसके बॉल खींचे & नीचे से अपनी कमर बहुत धीरे से उचका उसके लंड को मानो जल्दी उसमे समाने का न्योता दिया.

"नाम नही पता उसका लेकिन वो सारे स्टाफ के साथ खड़ा था & थोड़ा घबराया लगा मुझे.",विजयंत की ज़ुबान उसकी गर्दन पे आई तो रंभा ने सर बिस्तर के किनारे से नीचे कर दिया ताकि वो आसानी से उसकी गोरी गर्दन चूम सके.विजयंत उसके दोनो कंधो & गर्दन के साथ-2 उसकी ठुड्डी को भी चूम रहा था & जब मस्ती मे बहाल हो रंभा ने उसके दोनो कान पकड़ उसके चेहरे को अपने गले से उठाया तभी उसने अपने लब उसके जिस्म से हटाए.

"उफफफफफफ्फ़..हालत खराब कर देते हैं आप तो!",रंभा ने प्यार से उसे झिड़का,"..तो उस से कुच्छ पुछा नही आपने?",उसकी आँखो मे अब ससुर के जिस्म के नशे के लाल डोरे दिख रहे थे.

"अभी नही.कल सवेरे उस से अकेले मे पुछुन्गा.",रंभा ने स्टाफ के उस आदमी का नाम जानने की कोई खास कोशिश नही की थी & ना ही उसकी बात से उसकी मस्ती कम हुई थी.विजयंत का शक़ बहू पे और कम हो रहा था मगर अभी भी उसका दिल उसे समीर की गुमशुदगी के मामले मे पूरी तरह से बेकसूर नही मान रहा था.

उसने उसके टॉप को उपर खिचा तो रंभा ने अपने हाथ सर के पीछे कर दिए & अगले ही पल टॉप उसके जिस्म से जुदा हो फर्श पे गिरा हुआ था.विजयंत उठा था तो रंभा ने फिर से दोनो जंघे आपस मे भींच ली थी & दोनो घुटने दाई तरफ मोड़ लिए थे.उसके हाथ ससुर की टी-शर्ट मे घुस गये थे & उसके गथिले जिस्म पे बड़ी हसरत से फिर रहे थे.1 बार फिर विजयंत उसके रसीले होंठो का रस पी रहा था.कुच्छ देर तक रंभा उसकी पीठ & उसके सीने पे अपने नाख़ून फिराती रही & फिर उसने ससुर की शर्ट निकाल दी.

"आहह..!",विजयंत झुका & अपना बाया हाथ रंभा की दाई टांग से होते उसकी जाँघ & फिर उसकी कमर के बगल से होते हुए उसके सीने के बगल मे उसकी ब्रा तक फिराया & फिर वही पे थाम लिया.रंभा ने भी टाँगे सीधी कर ली & फिर से ससुर के सर को थाम लिया & उसकी किस का जवाब देने लगी.विजयंत उसके उपर झुका उसे चूम रहा था & उसका बाया हाथ बहू की पीठ के नीचे घुस रहा था.हाथ नीचे पहुँच ब्रा के हुक्स को ढूंड रहा था.इस सब के दौरान किस जारी थी.हुक्स मिलते ही उन्हे खोल दिया गया & ब्रा को विजयंत ने उसके दाए बाज़ू से निकाला & फिर सीने को नंगा करते हुए उसके बाए कंधे पे अटका दिया & फिर चूमते हुए दोनो हाथो से रंभा के हसीन चेहरे को थाम लिया.

"उउन्न्ह.....हुउऊउन्न्ह..!",रंभा अब बहुत मस्त हो चुकी थी & उसकी पॅंटी उसके रस से भीगने लगी थी.विजयंत ने ब्रा को उसके बाए बाज़ू से निकाला & उसके सर के पीछे फर्श पे गिरा दिया तो रंभा ने अपना दाया हाथ उसकी पीठ पे रख दिया & बाए को अपने सर के बगल मे बिस्तर पे.विजयंत उसकी गर्दन पे बाई तरफ चूम रहा था.

"समझ मे नही आता..",उसने ससुर के बाल पकड़ के उसके सर को कंधे से उठाया & अपनी बाई चूची पे रखा,"..उउन्न्ह..समीर ऐसे कहा गायब हो गया & अभी तक कोई सुराग भी नही मिल रहा है....आन्न्न्नह..!",विजयंत के होंठ अब उसकी दाई चूची पे थे & उसे पूरा का पूरा मुँह मे भरने की कोशिश कर रहे थे.अचानक की गयी इस हरकत से रंभा की चूत की कसक चरम पे पहुँच गयी & उसने बेचैनी मे सर उपर उठाया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.विजयंत अभी भी उसकी चूची को मुँह मे भरने की कोशिश मे जुटा था & वो झाडे जा रही थी.

रंभा के दाए हाथ के नाख़ून विजयंत के बाए कंधे मे धँस गये थे.वो कांप रही थी & विजयंत उसकी चूचियों को चूसे जा रहा था.रंभा का सर वापस बिस्तर के किनारे पे आ गया था & वो आहें भर रही थी.विजयंत ने बाए घुटने को उसकी टांगो के बीच घुसा उन्हे फैलाया & फिर आगे झुकते हुए रंभा के होंठ चूमे.थोड़ी देर बाद वो उठा तो उसके लबो से लब चिपकाए रंभा भी उचकी & अपने हाथ नीचे ले जाके उसकी ट्रॅक पॅंट को सरकाने लगी.

"फ़िक्र मत करो.मैं उसका पता लगा के ही दम लूँगा.",विजयंत ने उसी वक़्त कमर नीचे करते हुए लंड को रंभा की चूत पे दबा दिया.रंभा के हाथ ढीले हो दोनो जिस्मो के बीच फँस गये & उसने सर पीछे झटका.विजयंत झुका & उसकी गोरी गर्दन को चूमने लगा & फिर उसके होठ दोबारा नीचे हो उसकी प्रेमिका की चूचियों से चिपक गये.उसके हाथ रंभा की स्कर्ट के हुक्स खोल रहे थे & अगले ही पल रंभा को स्कर्ट & पॅंटी 1 साथ उसकी मखमली टाँगो से फिसलती उसके जिस्म से अलग होती महसूस हुई.रंभा अब ससुर के बिस्तर मे बिल्कुल नंगी हो चुकी थी.

"ऊहह....आन्न्‍न्णनह..!",विजयंत ने दोनो टाँगे उसकी टाँगो के बीच घुसा अपने घुटनो से उन्हे और फैला दिया & फिर आगे झुका तो रंभा ने खुद उचक के उसके होंठो का अपने होंठो से इसटेक्बल किया.विजयंत ने अपने बदन को थोड़ा सा टेढ़ा किया & बाए हाथ को नीचे कर उसकी चूत के लाल दाने पे गोल-2 उंगली घुमाने लगा.रंभा जोश से काँपने लगी & अपनी ज़ुबान मस्ती मे विजयंत की ज़ुबान से लड़ाने लगी.

"ऊन्नह..!",विजतन घुटनो पे बैठ उसके सीने पे झुक के उसकी चूचियों पे अपना मुँह चलाने लगा.उसकी उंगली ने दाने को रग़ाद-2 के रंभा को मस्ती मे दूसरी बार झड़ने पे मजबूर किया & अभी वो संभली भी नही थी कि उंगली को उसकी कसी चूत मे घुसा अंदर कुच्छ टटोलने लगा.

"आननह..हुन्न्ह..!",रंभा कमर उचका रही थी & वो अब उसके गोल पेट को चूम रहा था.उसकी उंगली अभी भी अंदर कुच्छ टटोल रही थी & रंभा को समझ मे नही आ रहा था कि वो कर क्या रहा है.

"आननह..!",तभी जैसे उसके बदन & ज़हन मे 1 धमाका सा हुआ.उसकी चूत के अंदर की दीवार पे विजयंत की उंगली ने वो जगह ढूंड निकाली थी जो शायद किसी औरत के जिस्म की सबसे नाज़ुक जगह होती है,जिसे जानकार जी-स्पॉट कहते हैं.जिस्म मे जैसे मस्ती सैलाब बन के उमड़ पड़ी थी.इतनी मस्ती कि वो उसे से नही पा रही थी.ये झड़ना था या फिर उस से भी कुच्छ और ज़्यादा.बेसब्री इतनी ज़्यादा थी कि उसने ससुर का हाथ पकड़ अपनी चूत से झटके से अलग किया & अपनी कमर उचकाने लगी.वो अपनी ही दुनिया मे खो गयी थी जहा वो चारो तरफ रंगीन बादलो से भरे आसमान मे उड़ रही थी.खुशी इतनी ज़्यादा थी कि उसका दिल उसे बर्दाश्त नही कर पाया था & वो सुबकने लगी थी.

जब थोड़ी देर बाद वो सायंत हुई & आँखे हल्के से खोली तो बगल मे उसे उसके बॉल सँवारता विजयंत अढ़लेटा नज़र आया.उसके दिल मे उसे उस जन्नत का नज़ारा दिखाने वाले शख्स के लिए बहुत प्यार उमड़ पड़ा & उसने उसके गले मे बाहें डाल बड़ी शिद्दत से चूमा & फिर बिस्तर पे लिटा दिया.वो अब अपने ससुर को अपने प्यार से सराबोर कर देना चाहती थी.

उसने उसे लिटा दिया & उसके सीने पे अपनी चूचियाँ दबाती उसे चूमने लगी.उसके बाद नीचे आई & उसके बालो भरे सीने पे हल्के-2 चूमने लगी.विजयंत उसके जिस्म को धीरे-2 सहला रहा था.रंभा के होंठो की मस्तानी हरकतें उसके जोश को बढ़ा रही थी.रंभा घने बालो के बीचो-बीच चूमती हुई नीचे उसकी नाभि तक आई & वाहा अपनी जीभ फिराई.

"ओह्ह्ह्ह..!",विजयंत ने जोश मे आह भरी.रंभा ने उसकी नाभि के नीचे बहुत धीमे-2 काटना शुरू कर दिया.विजयंत तो जोश से पागल हो उठा.रंभा ने काटते हुए ही उसकी पॅंट नीचे सर्काई & फिर उसकी टाँगो के बीच बैठ पॅंट को निकाल दिया.विजयंत के सफेद अंडरवेर मे उसका लंड बिल्कुल तना दिख रहा था.

रंभा ने अपने बॉल झटके & उन्हे दाए कंधे के उपर से आगे लाई & उनके सिरो को अपने ससुर के सीने पे फिराया.विजयंत तो मस्ती मे बहाल हो गया.बाल सीने से उसके पेट से होते हुए उसके अंडरवेर पे आए तो अपने नाज़ुक अंगो पे बालो के एहसास से वो तड़प उठा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--32

gataank se aage.

"aapne manager nath se ye kyu kaha ki hum vapas panchmahal ja rahe hain?",vijayant car ko Avantipur ki taraf bhaga raha tha.

"isliye taki vo aage ke farms ko huamre aane ki khabar na de.",rambha uske dimagh se prabhavit hue bina nahi reh saki.usne apni seat belt kholi & uske kandhe pe sar rakh ke samne raste ko dekhne lagi.vijayant ne bhi farm pe aur logo se pichhle manager ke nikale jane ki vajah puchhi thi & unhone bhi vahi kahat tha jo rambha ne kaha tha.ab use mehsus hone laga tha ki shayad rambha pe uska shaq galat hai lekin vo shayad abhi bhi uske dimagh me tha & iska yehi matlab tha ki rambha shaq ke dayre se bahar nahi nikli thi.

sham ke 5 baj rahe the & car tezi se avantipur ki or badh rahi thi.vijayant ne bayi banh uthake rambha ko uske ghere me liya to rambha uske & karib aa gayi & uske seene pe hath firane lagi.dono khamoshi me 1 dusre ke jismo ke mastane ehsas ka lutf uthate hue rasta tay kar rahe the is baat se anjan ki 1 car lagatar unka peechha kar rahi thi jise chalane vale ke gaal pe 1 nishan tha.

Us shakhs ne pichhle 2 dino me Vijayant Mehra & uske karobar & parivar ke bare me internet se kafi jankari jutayi thi.Panchmahal pahunchane se pehle usne socha bhi nahi tha ki use vijayant ki zindagi ke bare me bhi jaanana padega magar kismat ne use aisa karne pe majboor kar diya tha.use to bas Rambha se matlab tha lekin Sameer ki gumshudgi ne sab gadbad kar diya tha.

jab vijayant rambha ke sath pehle farm pe gaya to vo fir se jhalla utha tha.farm me ghusne ka rasta use nahi sujha tha & use farm ke bahar ke chhote se bazar me tez mirch vale samose & bahut zyada mithi chai pi ke waqt kaatana pada.usne jaise hi faisla kiya ki ab use kisi tarah farm me ghusna hi hai,tabhi use vijayant ki Prado bahar aate dikhi.

is waqt vo shakhs Panchmahal & Avantipur ke raste me padne vale dusre mehra farm ke paas ke 1 kasbe ki 1 sarai me ruka tha.use ye to samajh aa gaya tha ki vijayant bete ko dhoondane nikla hai & usi silsile me farms ke chakkar laga raha hai.uski samajh me ye nahi aa raha tha ki vo rambha ko har jagah apne sath leke kyu ghum raha tha..kambakht vo 1 pal ko bhi akeli nahi reh pa rahi thi..usne cigarette vahi kamre ke farsh pe bujhai & apni machhardani uthake bistar pe chala gaya.raat ko vijayant farm chhodne vala nahi,itna use yakin tha.usne chadar pure sar tak odh li & sone laga,aakhir kal subah bahut savere uth use fir se rambha ka peechha karna tha.

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rambha farmhouse ki cottage me sasur ke kamre me uske bistar pe 1 nili denim ki mini skirt & slaty rang ka off-shoulder top pehne baithi thi.palang ke headboard se tek lagake kamar se neeche ke hisse ko dayi taraf mod vo kisi magazine ke panne palat rahi thi ki vijayant uske bagal me aa baitha.dono raat ka khana kha chuke the & uske pehle is farm ke bhi sare accounts check kar chuke the.yaha bhi unhe koi surag nahi mila tha.

rambha ne magazine kinare ki & gardan bayi taraf ghumayi & sasur ke labo se lab sata diye.dono haule-2 1 dusre ko chumne lage.vijayant ne uske top me se numaya daye kandhe pe hath rakha to vo khud hi uski or ghumi & apni zuban uske munh me ghusa di.vijayant uski zuban chusne laga & baya hath neeche uski skirt pe rakh diya & daye ko uski gardan ke neeche se hote uske daye kandhe pe rakh diya & vaha sehlate hue uski zuban ki harkato se mast hota raha.

vijayant ka josh badha to vo thoda aage hua & rambha fir pehle jaise hi headbord se ad ke baith gayi.vijayant ka hath uski skirt ke neeche jangh ke khule hisse pe bahut halke-2 ghum raha tha.rambha ko uske hath ki ye harkat bahut mast kar rahi thi.vijayant uski jangh ko masal nahi raha tha balki bahut halke se sehla raha tha.

ab vijayant ki zuban rambha ke munh me ghum rahi thi & uska lund uski track pant me bilkul tan gaya tha.vijayant use chumte hue hi thoda utha & uske kandhe pakad use neeche karne laga to uska ishara samajh rambha khud hi bistar pe let gayi.uske kamar ka neeche ka hissa abhi bhi dayi taraf muda hua tha & uske hath sasur ke chehre ko thame the.vijayant ghutno pe ho aage jhuka to uska lund bahu ki gand se takraya.

"yaha bhi koi surag hath nahi laga na?",rambha ne puchha to vo use uski gand pe dabate hue aur jhuka & rambha ke chehre ko pakad apne seene ko uski chhatiyo pe dabate hue badi shiddat se use chumne laga.lund ke ehsas ne rambha ki chut ko bhi kulbula diya.vo bhi nakhun se sasur ki dadhi kharonchti masti me khone lagi.kafi der tak dono aise hi chumte rahe.vijayant ko apne seene me rambha ke chubhte nipples ab jaise uske hotho ko bulawa dete mehsus ho rahe the.

"nahi lekin 1 aadmi mujhe kuchh ajib laga.",usne uske top ko upar kiya & uski aankho ke samne transparent straps vali kali bra me qaid masti me pal-pal phoolte uske seene ke bekal ubhar chamak uthe.usne bra ke upar se hi 2 halki kisses dono chhatiyo pe thonki to rambha ne masti me aankhe band ki & muskurate hue sasur ke baalo me ungliya firane lagi.vijayant ne apne ghutno se uski tango ko seedha kar diya tha & ab uske upar leta hua tha.

"uummmm..kaun?",vijayant uske seene ki vadi me apni garm sanse chhod raha tha & rambha ke jism ki aag unki tapish se & badh rahi thi.vo ab apni bhari janghe aaps me ragad apni chut ki besabri jatane lagi thi.vijayant ne uske top ko fir neeche kiya & uske kandho ko chumne laga.patle-2 transparent bar straps ko usne danto se utha ke kandho ke kinare pe kiya & fir kandho pe apni jibh firane laga.rambha ne josh me uske baal khinche & neeche se apni kamar bahut dhire se uchka uske lund ko mano jaldi usme samane ka nyota diya.

"naam nahi pata uska lekin vo sare staff ke sath khada tha & thoda ghabraya laga mujhe.",vijayant ki zuban uski gardan pe aayi to rambha ne sar bistar ke kinare se neeche kar diya taki vo aasani se uski gori gardan chum sake.vijayant uske dono kandho & gardan ke sath-2 uski thuddi ko bhi chum raha tha & jab masti me behaal ho rambha ne uske dono kaan pakad uske chehre ko apne gale se uthaya tabhi usne apne lab uske jism se hataye.

"ufffffff..halat kharab kar dete hain aap to!",rambha ne pyar se use jhidka,"..to us se kuchh puchha nahi aapne?",uski aankho me ab sasur ke jism ke nashe ke laal dore dikh rahe the.

"abhi nahi.kal savere us se akele me puchhunga.",rambha ne staff ke us aadmi ka naam jaanane ki koi khas koshish nahi ki thi & na hi uski baat se uski masti kam hui thi.vijayant ka shaq bahu pe aur kam ho raha tha magar abhi bhi uska dil use sameer ki gumshudgi ke mamle me puri tarah se bekasur nahi maan raha tha.

usne uske top ko upar khicnha to rambha ne apne hath sar ke peeche kar diye & agle hi pal top uske jism se juda ho farsh pe gira hua tha.vijayant utha tha to rambha ne fir se dono janghe aapas me bhinch li thi & dono ghutne dayi taraf mod liye the.uske hath sasur ki t-shirt me ghus gaye the & uske gathile jism pe badi hasrat se fir rahe the.1 baar fir vijayant uske rasile hotho ka ras pi raha tha.kuchh der tak rambha uski pith & uske seene pe apne nakhun firati rahi & fir usne sasur ki shirt nikal di.

"aahhhhh..!",vijayant jhuka & apna baya hath rambha ki dayi tang se hote uski jangh & fir uski kamar ke bagal se hote hue uske seene ke bagal me uski bra tak firaya & fir vahi pe tham liya.rambha ne bhi tange seedhi kar li & fir se sasur ke sar ko tham liya & uski kiss ka jawab dene lagi.vijayant uske upar jhuka use chum raha tha & uska baya hath bahu ki pith ke neeche ghus raha tha.hath neeche pahunch bra ke hooks ko dhoond raha tha.is sab ke dauran kiss jari thi.hooks milte hi unhe khol diya gaya & bra ko vijayant ne uske daye bazu se nikala & fir seene ko nanga karte hue uske baye kandhe pe atka diya & fir chumte hue dono hatho se rambha ke haseen chehre ko tham liya.

"uunnhhhhh.....huuuunnhhhh..!",rambha ab bahut mast ho chuki thi & uski panty uske ras se bhigne lagi thi.vijayant ne bra ko uske baye bazu se nikala & uske sar ke peechhe farsh pe gira diya to rambha ne apna daya hath uski pith pe rakh diya & baye ko apne sar ke bagal me bistar pe.vijayant uski gardan pe bayi taraf chum raha tha.

"samajh me nahi aata..",usne sasur ke baal pakad ke uske sar ko kandhe se uthaya & apni bayi choochi pe rakha,"..uunnhhhhh..sameer aise kaha gayab ho gaya & abhi tak koi surag bhi nahi mil raha hai....aannnnhhhhhh..!",vijayant ke honth ab uski dayi choochi pe the & use pura ka pura munh me bharne ki koshish kar rahe the.achanak ki gayi is harkat se rambha ki chut ki kasak charam pe pahunch gayi & usne bechaini me sar upar uthaya & uska jism jhatke khane laga.vijayant abhi bhi uski choochi ko munh me bharne ki koshish me juta tha & vo jhade ja rahi thi.

rambha ke daye hath ke nakhun vijayant ke baye kandhe me dhans gaye the.vo kanp rahi thi & vijayant uski choochiyon ko chuse ja raha tha.rambha ka sar vaps bistar ke kinare pe aa gaya tha & vo aahen bhar rahi thi.vijayant ne baye ghutne ko uski tango ke beech ghusa unhe failaya & fir aage jhukte hue rambha ke honth chume.thodi der baad vo utha to uske labo se lab chiupkaye rambha bhi uchki & apne hath neeche le jake uski track pant ko sarkane lagi.

"fikr mat karo.main uska pata laga ke hi dum lunga.",vijayant ne usi waqt kamar neeche karte hue lund ko rambha ki chut pe daba diya.rambha ke hath dhile ho dono jismo ke beech fans gaye & usne sar peechhe jhatka.vijayant jhuka & uski gori gardan ko chumne laga & fir uske hoth dobara neeche ho uski premika ki choochiyon se chipak gaye.uske hath rambha ki skirt ke hooks khol rahe the & agle hi pal rambha ko skirt & panty 1 sath uski makhmali tango se fisalti uske jism se alag hoti mehsus hui.rambha ab sasur ke bistar me bilkul nangi ho chuki thi.

"oohhhhhhhhhhh....aannnnnhhhhhhhhh..!",vijayant ne dono tange uski tangao ke beech ghusa apne ghutno se unhe aur faila diya & fir aage jhuka to rambha ne khud uchak ke uske hotho ka apne hotho se istekbal kiya.vijayant ne apne badan ko thoda sa tedha kiya & baye hath ko neeche kar uski chut ke laal dane pe gol-2 ungli ghumane laga.rambha josh se kanpne lagi & apni zuban masti me vijayant ki zuban se ladane lagi.

"oonnhhhhhhhh..!",vijatan ghutno pe baith uske seene pe jhuk ke uski chhatiyo pe apna munh chalane laga.uski ungli ne dane ko ragad-2 ke rambha ko masti me dusri baar jhadne pe majbur kiya & abhi vo sambhli bhi nahi thi ki ungli ko uski kasi chut me ghusa andar kuchh tatolne laga.

"aannhhh..hunnhhhh..!",rambha kamar uchka rahi thi & vo ab uske gol pet ko chum raha tha.uski ungli abhi bhi andar kuchh tatol rahi thi & rambha ko samajh me nahi aa raha tha ki vo kar kya raha hai.

"AANNHHHHHHH..!",tabhi jaise uske badan & zehan me 1 dhamaka sa hua.uski chut ke andar ki deewar pe vijayant ki ungli ne vo jagah dhund nikali thi jo shayad kisi aurat ke jism ki sabse nazuk jagah hoti hai,jise jankar g-spot kehte hain.jism me jaise masti sailab ban ke umad padi thi.itni masti ki vo use seh nahi pa rahi thi.ye jhadna tha ya fir us se bhi kuchh aur zyada.besabri itni zyada thi ki usne sasur ka hath pakad apni chut se jhatke se alag kiya & apni kamar uchkane lagi.vo apni hi duniya me kho gayi thi jaha vo charo taraf rangin baadlo se bhare aasman me ud rahi thi.khushi itni zyada thi ki uska dil use bardasht nahi kar paya tha & vo subakne lagi thi.

jab thodi der baad vo sayant hui & aankhe halke se kholi to bagal me use uske baal sanwarta vijayant adhleta nazar aaya.uske dil me use us jannat ka nazara dikhane vale shakhs ke liye bahut pyar umad pada & usne uske gale me baahen daal badi shiddat se chuma & fir bistar pe lita diya.vo ab apne sasur ko apne pyar se sarabor kar dena chahti thi.

usne use lita diya & uske seene pe apni chhatiya dabati use chumne lagi.uske baad neeche aayi & uske baalo bhare seene pe halke-2 chumne lagi.vijayant uske jism ko dhire-2 sehla raha tha.rambha ke hotho ki mastani harkaten uske josh ko badah rahi thi.rambha ghane baalo ke beecho-beech chumti hui neeche uski nabhi tak aayi & vaha apni jibh firayi.

"ohhhh..!",vijayant ne josh me aah bhari.rambha ne uski nabhi ke neeche bahut dhime-2 kaatna shuru kar diya.vijayant to josh se pagal ho utha.rambha ne kaatate hue hi uski pant neeche sarkayi & fir uski tango ke beech baith pant ko nikal diya.vijayant ke safed underwear me uska lund bilkul tana dikh raha tha.

rambha ne apne baal jhatke & unhe daye kandhe ke uapr se aage layi & unke siro ko apne sasur ke seene pe firaya.vijayant to masti me behaal ho gaya.baal seene se uske pet se hote hue uske underwear pe aaye to apne nazuk ango pe baalo ke ehsas se vo tadap utha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--33

गतान्क से आगे.

रंभा उसे देख मुस्कुराइ & अपने बाए हाथ से उसके लंड को अंडरवेर के उपर से ही दबाने लगी.जब उसने विजयंत के आंडो को ज़ोर से दबाया तो उसने कमर उचका के,आँखे बंद कर ज़ोर से आह भरी.रंभा झुकी & अंडरवेर के उपर से ही आंडो को दबाते हुए लंड को काटने लगी.विजयंत का तो हाल बुरा हो गया,उसे लगा की अब वो झाड़ ही जाएगा.

रंभा मुस्कुराइ & सर उसकी गोद से उठा अंडरवेर को निकाल दिया & फिर बालो के सिरो को उसके लंड & आंडो पे फिराया.विजयंत इस बार सूपदे की कोमल त्वचा पे बालो के एहसास से और शिद्दत से तडपा.रंभा झुकी & बाए हाथ की हथेलियो को आंडो पे जमाते हुए उसने लंड के निचले हिस्से पे उंगलियालपेटी & उसके मत्थे को मुँह मे भर लिया.विजयंत तो अब मस्ती मे मदहोश हो गया.रंभा का कोमल मुँह उसके सूपदे से प्रेकुं को चाते जा रहा था.

उसने अपनी सारी इच्छा-शक्ति का ज़ोर लगाके खुद को झड़ने से रोका.रंभा उसके लंड पे मुँह चला रही थी & वो उसके चेहरे पे हाथ.कुच्छ देर बाद रंभा ने लंड को मुँह से निकाला,उसकी चूत मे फिर से कसक उठ रही थी.वो उठी & अपने घुटने ससुर की कमर के दोनो ओर जमाते हुए अपनी चूत को लंड पे झुका दिया.

"ऊहह..!",लंड उसकी चूत मे समाने लगा.उसने 2 इंच लंड बाहर ही रहने दिया & फिर उसपे उच्छलने लगी.अपने ससुर की जाँघो को थामे उसकी नज़रो से नज़रे मिलाती वो उस से चुद रही थी.विजयंत ने उसकी कमर थाम लंड को जड तक घुसाना चाहा तो उसने उसे रोक दिया.

"पूरा लंड तो अंदर जाने दो!",उसने उसकी कमर के मांसल बंगलो को मसला.

"उन्ह..हुंग..बिल्कुल नही..आपका बहुत बड़ा है..ऊव्ववव!",वो उसके सीने पे हाथ जमा आगे झुकी तो विजयंत ने उचक के उसकी बाई चूची मुँह मे भर निपल पे काट लिया.रंभा फ़ौरन पीछे हो गयी & थोड़ा पीछे झुकते हुए जाँघो पे हाथ रख & कभी उन्हे सहलाते हुए कमर हिलाके ससुर से चुदवाने लगी.

"अच्छा भाई ठीक है..तो कम से कम अपनी चूचिया तो पिला दो हमे!",उसने उसकी गंद की फांको को दबोचा.

"उउन्न्ं..ना!आप काटते हैं उन्हे.",विजयंत बिस्तर से उठने लगा तो रंभा ने फ़ौरन बाया घुटना बिस्तर से उठा उसे ससुर के सीने पे रख दिया & उठने से रोक दिया.विजयंत उसकी इस अदा पे मुस्कुरा के उसके पाँव को पकड़ उसकी उंगलकिया चूसने लगा.रंभा ने अपने बालो मे बड़े मादक अंदाज़ मे उंगलिया फिराते हुए आँखे बंद कर आह भरी & अपनी चूचियाँ आगे करते हुए जिस्म को कमान की तरह मोड़ा.उसका जिस्म विजयंत की इस हरकत से मस्ती की कगार पे पहुँच गया था & वो झाड़ गयी थी.

अधखुली आँखो से रंभा ने देखा कि विजयंत फिर उठने वाला है तो उसने फ़ौरन उसके सीने पे रखी टांगको दाई तरफ घुमाया & फिर उसके लंड पे ही बैठे हुए बदन को दाए तरफ घुमाने लगी.ऐसा करने से विजयंत के लंड पे उसकी चूत गोलाई मे घूमी & वो मस्ती मे कराहा.रंभा ने पूरा जिस्म घुमा पीठ विजयंत की ओर कर दी & आगे झुक उसकी मज़बूत टाँगो को पकड़ फिर से कमर हिलाने लगी.विजयंत लेटे-2 ही अपने गर्म हाथ उसकी पीठ से लेके गंद तक फिराने लगा.रंभा अब बहुत मस्त हो गयी थी & बस लंड पे कूदे जा रही थी.

जिस्म की गर्मी जब बहुत बढ़ गयी तो उसका दिल महबूब के होंठो की हसरत करने लगा & वो पीछे होने लगी.उसने अपने तलवे बिस्तर पे जमाए & हाथ पीछे झुक बिस्तर पे & अपनी कमर बहुत तेज़ी से हिलाने लगी.इतना शक्तिशाली मर्द उसके पैर चूमने के बाद उसके नीचे उसके मुताबिक चुदाई कर रहा था,इस ख़याल ने उसकी खुमारी & बढ़ा दी थी & वो अब बस झड़ने ही वाली थी.

"आननह..!",विजयंत ने उसकी गंद की दरार मे उंगली फिराई तो वो & ना सह सकी & चिहुनक के आगे होते हुए झाड़ गयी.विजयंत फ़ौरन उठ बैठा & पीछे से ही उसकी मोटी,कसी चूचियो को दबोचा & फिर बाई बाँह को उसकी कमर मे लपेटे दाई तरफ करवट लेते हुए रंभा को पहले बिस्तर पे करवट से लिटाया & फिर और घूमते हुए उसे पेट के बल लिटाया & फिर उसके उपर सवार हो गया.

बहू की मादक अदाओं ने उसे बहुत मस्त कर दिया था.उसने अपने दोनो घुटने जोकि रंभा की फैली टाँगो के बीच बिस्तर पे टीके थे,को बाहर कर उन्ही से धकेल के उसकी टाँगो को आपस मे बिल्कुल सटा दिया & फिर 1 ज़ोर का धक्का दिया.

"हाईईईईई....माआंन्‍नननणणन्..!",रंभा ने सर उपर झटका.उसकी कसी चूत अब और कस गयी थी & ससुर का लंबा,मोटा,तगड़ा लंड अब चूत की दीवारो को बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.लंड उसकी गंद की मोटी फांको के बावजूद जड तक समा गया था & अगले धक्के पे उसने रंभा की कोख पे चोट की.कमरा क्या पूरी कॉटेज रंभा की मस्त आहो से भर गयी.विजयंत उसके उपर झुका उसकी चूचियों मसलता ज़ोरदार चुदाई कर रहा था.रंभा ने 1 बहुत ज़ोर की आह भारी & फिर झाड़ गयी.

विजयंत ने उसकी टाँगे वापस फैलाई & उनके बीच आ गया & उसकी गंद दबाते हुए चोदने लगा.कुच्छ देर बाद रंभा भी कमर हिला-2 के उसका जवाब देने लगी.विजयंत घुटनो पे बैठ गया & थोड़ा उपर हुआ तो रंभा भी अपने घुटनो & हाथो पे हो गयी & खुद ही कमर आगे-पीछे कर उस से चुदवाने लगी.विजयंत ने उसकी कमर थाम ज़ोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए.रंभा सर झटकते आहे भरे जा रही थी.उसके हाथ बिस्तर की चादर को भिंचे हुए थे.

1 साया कॉटेज की ओर बढ़ रहा था.वो कॉटेज की खिड़की तक आ के ठिठक गया था.वो कुच्छ सोच रहा था.उसने अपनी कलाई पे बँधी घड़ी देखी,11 बज रहे थे.1 घंटे से थोड़ा उपर हो गया था विजयंत को कॉटेज के अंदर गये लेकिन वो जगा था शायद क्यूकी उसके कमरे की बत्ती जाली दिख रही लेकिन क्या इस वक़्त..

"आआहह..!",रंभा चीखी & बिस्तर पे निढाल हो गयी.वो कोख पे अपने ससुर के लंड की & चोटें बर्दाश्त नही कर पाई थी & झाड़ गयी थी & इस बार उसकी चूत की उसी मस्तानी हरकत ने विजयंत के लंड को भी दबोच के झड़ने पे मजबूर कर दिया था.विजयंत उसके उपर गिरा आहे भरता हुआ अपना गाढ़ा वीर्य छ्चोड़े चला जा रहा था जोकि सीधा रंभा की कोख मे जा रहा था.रंभा भी उसके साथ-2 मस्ती के आसमान मे उड़ी जा रही थी.

"ठक-2!",किसी ने दरवाज़ा खाटख़टाया & दोनो चौंक गये & 1 दूसरे को देखने लगे.विजयंत ने लंड बहू की चूत से खींचा & उसे उसके कमरे मे जाने का इशारा किया.रंभा ने उसकी बात मानी & विजयंत कपड़े पहन दरवाज़े की ओर चला गया.

"न-नमस्ते..सर..!",विजयंत मेहरा ने दरवाज़ा खोला तो सामने वही स्टाफ मेंबर खड़ा था जिसके बारे मे थोड़ी देर पहले उसने रंभा को बताया था.वो लगभग 30-35 बरस का आदमी था & घबराया हुआ लग रहा था.

"बोलो,क्या बात है?",विजयंत ने ट्रॅक पॅंट के उपर ड्रेसिंग-गाउन पहन लिया था & उसकी जेबो मे हाथ डाले खड़ा था.उसकी रोबिली आवाज़ ने सामने खड़े शख्स को & घबरा दिया.

"ज-जी..",वो इधर-उधर देख रहा था.

"अंदर आओ.",विजयंत की आवाज़ के रोब से बँधा वो अंदर आ गया,"बैठो.",घबराया सा वो आदमी कॉटेज के ड्रॉयिंग रूम के सोफे के कोने पे बैठ गया,"ये लो.",विजयंत ने पानी का ग्लास उसे दिया तो वो गतगत पी गया,"अब बताओ क्या बात है.",विजयंत उसके सामने बैठ गया.

"स-सर..मेरा नाम मनोज है & मैं यही काम करता हू."

"हूँ.पोल्ट्री विंग तुम्ही देखते हो.मुझे पता है.",विजयंत ने उसपे शुबहे होने पे उसके बारे मे मॅनेजर से पुच्छ लिया था.उसने तो सोचा था कि अगली सुबह वो उसे तलब करेगा लेकिन यहा तो वो खुद ही उसके पास पहुँच गया था.

"सर,समीर सर गायब हुए तो मुझे लगा ये बात आपको बता देनी चाहिए ल-लेकिन मुझे पता नही था कि ऐसा होगा न-नही तो पहले ही सब बता देता."

"आख़िर बात क्या है बताओ तो!",विजयंत अब झल्ला गया था,"..& घबराओ मत तुम्हे कुच्छ नही होगा."

"सर,समीर सर ने कुच्छ दिनो पहले पंचमहल मे सभी स्टाफ मेंबर्ज़ के लिए 1 पार्टी दी थी..नमस्ते,मेडम!..",रंभा भी वाहा आ गयी थी.विजयंत ने उसकी ओर देखा तो उसने सर हिलाके पार्टी होने की बात मानी,"..वाहा फार्म नो.1 का पुराना मॅनेजर हरपाल सिंग भी आया था.वो समीर सर से बार-2 अपना तबादला क्लेवर्त करने को बोल रहा था लेकिन वो मान नही रहे थे क्यूकी उसे वैसे फार्म का तजुर्बा नही था.."

"..पार्टी मे शराब भी थी & हरपाल ने कुच्छ ज़्यादा ही पी ली थी.मैं भी उसी के साथ बैठा था.दरअसल मुझे उसके साथ ही लौटना था.वो नशे मे धुत था & मुझे उसकी कार ड्राइव करनी पड़ी.उस रात मुझे उसके ही फार्म पे रुकना था.रास्ते भर वो यही बोलता रहा कि वो समीर सर को मज़ा चखा देगा.वो उसे उसके परिवार के साथ नही रहने दे रहा तो वो भी उसे उसके परिवार से अलग कर के दम लेगा.."

"..उस वक़्त तो मैने सोचा की वो नशे मे बक रहा है लेकिन समीर सर गायब हुए तो मेरा माथा ठनका & मैने हरपाल को फोन किया लेकिन उसका फोन नही मिला,मैने उसके घर पे फोन किया & उसके घरवालो ने कहा कि वो नौकरी ढूँदने के चक्कर मे बॅंगलुर गया हुआ है तो मैने उनसे उसका मोबाइल नंबर माँगा लेकिन उस नंबर पे भी मैं उस से बात नही कर पाया."

"तुमने ये बातें पोलीस को क्यू नही बताई?"

"सर..वो..",उसने माथे से पसीना पोंच्छा,"..सर..हरपाल की बहन हिना आवंतिपुर मे रहती है &..और.."

"तुम दोनो 1 दूसरे को चाहते हो?",रंभा ने बात पूरी की,"..& तुम्हे लगा कि होने वाले साले को यू फाँसना ठीक नही."

"मेडम..वो..मुझे अभी तक ऐसा लग रहा था कि हरपाल बेकसूर है लेकिन मैने हिना से आज ही बात की & उसने भी अपने भाई से उस रोज़ से बात नही की जिस रोज़ समीर सर पंचमहल से निकले थे.सर,मैं सच कहता हू मेरा & कोई इरादा नही था..मैं तो बस हिना के चलते..-",विजयंत ने हाथ उठाके उसे आगे बोलने से रोक दिया.

"तुम ये बात अब किसी को नही बताओगे,पोलीस को भी नही.मैं नही चाहता कि हरपाल होशियार हो जाए & तुम्हे घबराने की कोई ज़रूरत नही है.तुम अपनी प्रेमिका से भी पहले जैसे ही मिलते रहो,बाते करते रहो लेकिन अगर हरपाल का कोई भी सुराग मिले,तो फ़ौरन हमे बताओगे..",विजयंत ने 1 काग़ज़ पे उसे 1 नंबर लिख के दिया,"..ये हमारा फोन नंबर है जिसपे तुम हमे कॉंटॅक्ट कर सकते हो.अब हमे हरपाल का क्लेवर्त के घर का पता,उसकी बेहन का पता & उसके बारे मे जो भी जानते हो सब बताओ."

30 मिनिट बाद विजयंत & रंभा फिर से 1 दूसरे की बाहो मे समाए थे,"उउम्म्म्म..अब आगे क्या करना है?..आहह..!",कंबल के नीचे विजयंत उसकी गंद को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहा था.

"अब हम कल सवेरे आवंतिपुर जाएँगे & तुम हिना से मिल के ये पता लगाने की कोशिश करोगी की उसके भाई ने इधर उस से कोई कॉंटॅक्ट किया है या नही,उसके बाद देखेंगे क्या करना है.",विजयंत ने उसकी चूचियो को चूसा तो रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली & ससुर के बाल पकड़ उसके सर को सीने पे & दबा दिया.अब उसे भी ये लग रहा था कि समीर की गुमशुदगी मे उसके बाप का हाथ नही है लेकिन ये भी तो हो सकता था कि उसने 1 बहुत बड़ा जाल बुना हो लेकिन फिर वो उसे साथ लिए क्यू घूम रहा था & जैसे उसके दिमाग़ मे बिजली सी कौंधी..विजयंत उसपे शक़ कर रहा है!

"आननह..!",उसने उसकी चूत मे उंगली घुसा दी थी.रंभा अब सब समझ गयी थी..कैसी अजीब बात थी वो विजयंत पे शक़ कर रही थी & वो उसपे!..वो मुस्कुराइ & थोड़ा उचक के उसकी चूचियाँ चूस्ते विजयंत के सर को चूम लिया & मस्ती मे खो गयी.

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बलबीर मोहन ब्रिज कोठारी के रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बारे मे लगभग सब कुच्छ जान गया था मसलन वो कितने बजे दफ़्तर जाता था,उसके मोबाइल का प्राइवेट नंबर क्या था,वग़ैरह-2 लेकिन अभी तक उसे समीर की गुमशुदगी से जोड़ने वाला कोई सिरा नही नज़र आया था.उसे ये भी पता चल गया था कि वो औरतो का शौकीन था & अपनी बीवी सोनिया से लगभग रोज़ ही बेवफ़ाई करता था लेकिन अभी तक उसे उसकी महबूबाओ मे से भी कोई शक़ करने लायक नही दिखी थी.

अभी भी वो 1 रेस्टोरेंट की टेबल पे बैठा ब्रिज को अपने बॅंकर के साथ रात का खाना खाते देख रहा था.बलबीर को अभी तक लगा नही था कि ब्रिज का इस घटना के पीछे कोई हाथ हो सकता है लेकिन उसे पूरी तसल्ली तो करनी ही थी.उसने अपना खाना ख़त्म किया & फिर वेटर 1 सुफ्ले ले आया.उसने उसका 1 नीवाला लिया..बहुत मज़ेदार था.वो दिल ही दिल मे मुस्कुराया..इस खाने का भी बिल विजयंत की फीस मे जुड़ने वाला था..जासूसी मे जितनी भी मुश्किलें हो उसमे कुच्छ फ़ायदे तो थे ही!

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क्रमशः.......

JAAL paart--33

gataank se aage.

rambha use dekh muskurayi & apne baye hath se uske lund ko underwear ke upar se hi dabane lagi.jab usne vijayant ke ando ko zor se dabaya to usne kamar uchka ke,aankhe band kar zor se aah bhari.rambha jhuki & underwear ke uapr se hi ando ko dabate hue lund ko kaatne lagi.vijayant ka to haal bura ho gaya,use laga ki ab vo jhad hi jayega.

rambha muskurayi & sar uski god se utha underwear ko nila diya & fir baalo ke siro ko uske lund & ando pe firaya.vijayant is baar supade ki komal tvacha pe baalo ke ehsas se aur shiddat se tadpa.rambha jhuki & baye hath ki hathelo ko ando pe jamate hue usne lund ke nichle hisse pe ungliyalapeti & uske matthe ko munh me bhar liya.vijayant to ab masti me madhosh ho gaya.rambha ka komal munh uske supade se precum ko chate ja raha tha.

usne apni sari ichha-shakti ka zor lagake khud ko jhadne se roka.rambha uske lund pe munh chala rahi thi & vo uske chehre pe hath.kuchh der baad rambha ne lund ko munh se nikala,uski chut me fir se kasak uth rahi thi.vo uthi & apne ghutne sasur ki kamar ke dono or jamate hue apni chut ko lund pe jhuka diya.

"oohhhhhhh..!",lund uski chut me samane laga.usne 2 inch lund bahar hi rehne diya & fir uspe uchhalne lagi.apne saur ki jangho ko thame uski nazro se nazrren milati vo us se chud rahi thi.vijayant ne uski kamar tham lund ko jud tak ghusana chaha to usne use rok diya.

"pura lund to andar jane do!",usne uski kamar ke mansal banglo ko masla.

"unh..hunh..bilkul nahi..aapka bahut bada hai..oowwww!",vo uske seene pe hath jama aage jhuki to vijayant ne uchak ke uski bayi choochi munh me bhar nipple pe kaat liya.rambha fauran peechhe ho gayi & thoda peechhe jhukte hue jangho pe hath rakh & kabhi unhe sehlate hue kamar hilake sasur se chudne lagi.

"achha bhai thik hai..to kam se kam apni choochiya to pila do humen!",usne uski gand ki fanko ko dabocha.

"uunnn..na!aap kaatate hain unhe.",vijayant bistar se uthne laga to rambha ne fauran baya ghutna bistar se utha use sasur ke seene pe rakh diya & uthne se rok diya.vijayant uski is ada pe muskura ke uske panv ko pakad uski unglkiya chusne laga.rambha ne apne baalo me bade maadak andaz me ungliya firate hue aankhe band kar aah bhari & apni choochiyan aage karte hue jism ko kaman ki tarah moda.uska jism vijayant ki is harkat se masti ki kagar pe pahunch gaya tha & vo jhad gayi thi.

adhkhuli aankho se rambha ne dekha ki vijayant fir uthne vala hai to usne fauran uske seene pe rakhi tangko dayi taraf ghumaya & fir uske lund pe hi baithe hue badan ko daye taraf ghumane lagi.aisa krne se vijayant ke lund pe uski chut golai me gumi & vo masti me karaha.rambha ne pura jism ghuma pith vijayant ki or kar di & aage jhuk uski mazbut tango ko pakad fir se kamar hilane lagi.vijayant lete-2 hi apne garm hath uski pith se leke gand tak firane laga.rambha ab bahut mast ho gayi thi & bas lund pe kude ja rahi thi.

jism ki garmi jab bahut badh gayi to uska dil mehboob ke hotho ki hasrat karne laga & vo peechhe hone lagi.usne apne talve bistar pe jamaye & hath peechhe jhuk bistar pe & apni kamar bahut tezi se hilane lagi.itna shaktishali mard uske pair chumne ke baad uske neeche uske mutabik chudai kar raha tha,is khayal ne uski khumari & badha di thi & vo ab bas jhadne hi wali thi.

"aannhhhhhhh..!",vijayant ne uski gand ki darar me ungli firayi to vo & na seh saki & chihunk ke aage hote hue jhad gayi.vijayant fauran uth baitha & peechhe se hi uski moti,kasi choochiyo ko dabocha & fir bayi banh ko uski kamar me lapte dayi taraf karwat lete hue rambha ko pehle bistar pe karwat se litaya & fir aur ghumte hue use pet ke bal litaya & fir uske upar sawar ho gaya.

bahu ki madak adaon ne use bahut mast kar diya tha.usne apne dono ghutne joki rambha ki faili tango ke beech bistar pe tike the,ko bahar kar unhi se dhakel ke uski tango ko aapas me bilkul sata diya & fir 1 zor ka dhakka diya.

"haiiiiii....maaaannnnnnnn..!",rambha ne sar upar jhatka.uski kasi chut ab aur kas gayi thi & sasur ka lumba,mota,tagda lund ab chut ki deewaro ko bahut buri tarah ragad raha tha.lund uski gand ki moti fanko ke bavjood jud tak sama gaya tha & agle dhakke pe usne rambha ki kokh pe chot ki.kamra kya puri cottage rambha ki mast aaho se bhar gayi.vijayant uske upar jhuka uski chhatiya masalta zordar chudai kar raha tha.rambha ne 1 bahut zor ki aah bhari & fir jhad gayi.

vijayant ne uski tange vapas failayi & unke beech aa gaya & uski gand dabate hue chodne laga.kuchh der baad rambha bhi kamar hilka-2 ke uska jawab dene lagi.vijayant ghutnoe pe baith gaya & thoda upar hua to rambha bhi apne ghutno & hatho pe ho gayi & khud hi kamar aage-peechhe kar us se chudne lagi.vijayant ne uski kamar tham zordar dhakke lagane shuru kar diye.rambha sar jhatakte aahe bhare ja rahi thi.uske hath bistar ki chadar ko bhinche hue the.

1 saya cottage ki or badh raha tha.vo cottage ki idhiyo tak aa ke thithak gaya tha.vo kuchh soch raha tha.usne apni kalai pe bandhi ghadi dekhi,11 baj rahe the.1 ghante se thoda upar ho gaya tha vijayant ko cottage ke andar gaye lekin vo jaga tha shayad kyuki uske kamre ki batti jali dikh rahi lekin kya is waqt..

"aaaahhhhhhhhh..!",rambha chikhi & bistar pe nidhal ho gayi.vo kokh pe apne sasur ke lund ki & choten bardasht nahi kar payi thi & jhad gayi thi & is baar uski chut ki usi mastani harkat ne vijayant ke lund ko bhi daboch ke jhadne pe majboor kar diya tha.vijayant uske upar gira aahe bharta hua apna gadha virya chhode chala ja raha tha joki seedha rambha ki kokh me ja raha tha.rambha bhi uske sath-2 masti ke aasman me udi ja rhi thi.

"thuk-2!",kisi ne darwaza thakthakaya & dono chaunk gaye & 1 dusre ko dekhne lage.vijayant ne lund bahu ki chut se khincha & use uske kamre me jane ka ishara kiya.rambha ne uski baat mani & vijayant kapde pehan darwaze ki ro chala gaya.

"N-namaste..sir..!",Vijayant Mehra ne darwaza khola to samne vahi staff member khada tha jiske bare me thodi der pehle usne Rambha ko bataya tha.vo lagbhag 30-35 baras ka aadmi tha & ghabraya hua lag raha tha.

"bolo,kya baat hai?",vijayant ne track pant ke upar dressing-gown pehan liya tha & uski jebo me hath dale khada tha.uski robili aavaz ne samne khade shakhs ko & ghabra diya.

"j-ji..",vo idhar-udhar dekh raha tha.

"andar aao.",vijayant ki aavaz ke rob se bandha vo andar aa gaya,"baitho.",ghabraya sa vo aadmi cottage ke drawing room ke sofe ke kone pe baith gaya,"ye lo.",vijayant ne pani ka glass use diya to vo gatagat pi gaya,"ab batao kya baat hai.",vijayant uske samne baith gaya.

"s-sir..mera naam Manoj hai & main yehi kaam karta hu."

"hun.poultry wing tumhi dekhte ho.mujhe pata hai.",vijayant ne uspe shubahe hone pe uske bare me manager se puchh liya tha.usne to socha tha ki agli subah vo use talab karega lekin yaha to vo khud hi uske paas pahunch gaya tha.

"sir,sameer sir gayab hue to mujhe laga ye baat aapko bata deni chahiye l-lekin mujhe pata nahi tha ki aisa hoga n-nahi to pehle hi sab bata deta."

"aakhir baat kya hai batao to!",vijayant ab jhalla gaya tha,"..& ghabrao mat tumhe kuchh nahi hoga."

"sir,sameer sir ne kuchh dino pehle Panchmahal me sabhi staff members ke liye 1 party di thi..namaste,madam!..",rambha bhi vaha aa gayi thi.vijayant ne uski or dekha to usne sar hilake party hone ki baat mani,"..vaha farm no.1 ka purana manager Harpal Singh bhi aaya tha.vo sameer sir se baar-2 apna tabadala Clayworth karne ko bol raha tha lekin vo maan nahi rahe the kyuki use vaise farm ka tajurba nahi tha.."

"..party me sharab bhi thi & harpal ne kuchh zyada hi pi li thi.main bhi usi ke sath baitha tha.darasal mujhe uske sath hi lautna tha.vo nashe me dhut tha & mujhe uski car drive karni padi.us raat mujhe uske hi farm pe rukna tha.raste bhar vo yehi bolta raha ki vo sameer sir ko maza chakha dega.vo use uske parivar ke sath nahi rehne de raha to vo bhi use uske parivar se alag kar ke dum lega.."

"..us waqt to maine socha ki vo nashe me bak raha hai lekin sameer sir gayab hue to mera matha thanka & maine harpal ko fone kiya lekin uska fone nahi mila,maine uske ghar pe fone kiya & uske gharwalo ne kaha ki vo naukri dhoondne ke chakkar me Bangalore gaya hua hai to maine unse uska mobile number manga lekin us number pe bhi main us se baat nahi kar paya."

"tumne ye baaten police ko kyu nahi batayi?"

"sir..vo..",usne mathe se paseena ponchha,"..sir..harpal ki bahan Hina Avantipur me rehti hai &..aur.."

"tum dono 1 dusre ko chahte ho?",rambha ne baat puri ki,"..& tumhe laga ki hone vale sale ko yu phansana thik nahi."

"madam..vo..mujhe abhi tak aisa lag raha tha ki harpal bekasur hai lekin maine hina se aaj hi baat ki & usne bhi apne bhai se us roz se baat nahi ki jis roz sameer sir panchmahal se nikle the.sir,main sach kehta hu mera & koi irada nahi tha..main to bas hina ke chalte..-",vijayant ne hath uthake use aage bolne se rok diya.

"tum ye baat ab kisi ko nahi bataoge,police ko bhi nahi.main nahi chahta ki harpal hoshiyar ho jaye & tumhe ghabrane ki koi zarurat nahi hai.tum apni premika se bhi pehle jaise hi milte raho,baate karte raho lekin agar harpal ka koi bhi surag mile,to fauran hume bataoge..",vijayant ne 1 kagaz pe use 1 number likh ke diya,"..ye humara fone number hai jispe tum humse contact kar sakte ho.ab hume harpal ka clayworth ke ghar ka pata,uski behan ka pata & uske bare me jo bhi jante ho sab batao."

30 minute baad vijayant & rambha fir se 1 dusre ki baaho me samaye the,"uummmm..ab aage kya karna hai?..aahhhh..!",kambal ke neeche vijayant uski gand ko maslate hue uski gardan chum raha tha.

"ab hum kal savere avantipur jayenge & tum hina se mil ke ye pata lagane ki koshish karogi ki uske bhai ne idhar us se koi contact kiya hai ya nahi,uske baad dekhenge kya karna hai.",vijayant ne uski chhatiyo ko chusa to rambha ne masti me aankhe band kar li & sasur ke baal pakad uske sar ko seene pe & daba diya.ab use bhi ye lag raha tha ki sameer ki gumshudgi me uske baap ka hath nahi hai lekin ye bhi to ho sakta tha ki usne 1 bahut bada jaal buna ho lekin fir vo use sath liye kyu ghum raha tha & jaise uske dimagh me bijli si kaundhi..vijayant uspe shaq kar raha hai!

"aannhhh..!",usne uski chut me ungli ghusa di thi.rambha ab sab samajh gayi thi..kaisi ajeeb baat thi vo vijayant pe shaq kar rahi thi & vo uspe!..vo muskurayi & thoda uchak ke uski choochiyan chuste vijayant ke sar ko chum liya & masti me kho gayi.

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Balbir Mohan Brij Kothari ke rozmarra ki zindagi ke bare me lagbhag sab kuchh jaan gaya tha maslan vo kitne baje daftar jata tha,uske mobile ka private number kya tha,vagairah-2 lekin abhi tak use sameer ki gumshudgi se jodne vala koi sira nahi nazar aaya tha.use ye bhi pata chal gaya tha ki vo aurato ka shaukeen tha & apni biwi Soniya se lagbhag roz hi bewafai karta tha lekin abhi tak use uski mehboobao me se bhi koi shaq karne layak nahi dikhi thi.

abhi bhi vo 1 restaurant ki table pe baitha brij ko apne banker ke sath raat ka khana khate dekh raha tha.balbir ko abhi tak laga nahi tha ki brij ka is ghatna ke peechhe koi hath ho sakta hai lekin use puri tasalli to karni hi thi.usne apna khana khatm kiya & fir waiter 1 souffle le aaya.usne uska 1 nivala liya..bahut mazedar tha.vo dil hi dil me muskuraya..is khane ka bhi bill vijayant ki fees me judne vala tha..jasusi me jitni bhi mushkilen ho usme kuchh fayde to the hi!

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--34

गतान्क से आगे.

"सर,आपने प्रॉजेक्ट 23 मे 2 फ्लोर्स & बढ़ने के ऑर्डर्स दिए हैं.."

"हां.",प्रणव ने अपने लॅपटॉप को बंद किया & सामने खड़े शख्स को देखा.

"लेकिन सर,उस से तो प्रॉजेक्ट की कीमत बढ़ जाएगी & हमने तो पर्मिशन भी नही ली थी उन मंज़िलो की."

"मिस्टर.शर्मा,आप अपना काम मुस्तैदी से करते हैं,इस बात की कद्र करता हू लेकिन प्लीज़ मेरे फ़ैसलो को लेके ज़्यादा चिंतित ना हों.अर्ज़ी डाल दी गयी है & मैं कल खुद ही कन्सर्न्ड अफ़सर से मिलके उसे अप्रूव करवा दूँगा.वाहा काम रुकना नही चाहिए.प्रॉजेक्ट अपनी पुरानी डेडलाइन से पहले पूरा होना चाहिए."

"वो ठीक है सर,लेकिन ऐसे फ़ैसले तो केवल विजयंत सर ले सकते हैं."

"मिस्टर.शर्मा,अभी बॉस मैं हू & सारे फ़ैसले मैं ही लूँगा एम आइ क्लियर?",उसकी आवज़ तेज़ हो गयी थी.

"यस,सर."

"तो आप जा सकते हैं.",शर्मा गया तो प्रणव मुस्कुराया.ट्रस्ट ग्रूप उसके इशारो पे चल रहा था..कितनी ताक़त थी उसके पास..इस सब का मालिक वो था फिलहाल..फिलहाल..ससुर के आने पे उसे ये कुर्सी छ्चोड़नी पड़ेगी & उसका दिल अब ऐसा करने को तैय्यार नही था.वो कुर्सी से उठा & कुच्छ सोचने लगा.उसका दिमाग़ अब इस कुर्सी पे बरकरार रहने की तरकीब सोच रहा था.

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"तुमलोग कोई काम ढंग से नही कर सकते?..ये फ्लवर आरंगेमेंट कहा था मैने..!..वो पीले फूलो का क्या हुआ..",सोनिया अपने स्टाफ को डाँट रही थी,"..चलो जाओ,सब ठीक करो.",वो 1 कुर्सी पे बैठ गयी.उसे पता था कि उसने अभी कुच्छ ज़्यादा ही डांटा था सबको मगर वो क्या करती वो बहुत चिड़चिड़ी हो गयी थी इधर.कारण वही था,विजयंत से दूरी.

हर रोज़ ब्रिज उसके लिए वक़्त ज़रूर निकालता & हर रात की चुदाई तो पक्की थी ही,उपर से दौलत की कोई कमी थी नही,अपना बिज़्नेस भी उसके मन बहलाने के लिए काफ़ी था लेकिन विजयंत के साथ से मिलने वाला सुख नदारद था अभी.उसने अपना चेहरा हाथो मे च्छूपा लिया..ओह विजयंत कब आओगे वापस तुम!

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सोनम ने महसूस किया था कि प्रणव जैसा दिखता था वैसा सीधा या भला था नही.वो ये सोच रही थी कि कही समीर को गायब करवाने मे उसी का हाथ तो नही था.समीर के गायब होने से हर चीज़ की वारिस अकेली शिप्रा ही बचती थी & उसका पति होने के नाते ये सब प्रणव का ही हो जाता.उसने सोचा कि 1 बार विजयंत को बस इस बात का आभास करा दे लेकिन बात विजयंत के दामाद की थी जिसपे वो इतना भरोसा करता था.बिना सबूत के उंगली उठाने पे उसका निकाला जाना तय था & फिर ब्रिज भी उसे नही पुछ्ता.

नही..वो प्रणव पे निगाह रखेगी & जैसे ही काम की बात पता चली उस से अपना फ़ायदा ज़रूर निकालेगी.

क्लेवर्त के बुंगले के अपने कमरे मे रंभा ने बिस्तर से उतर के खड़ी होके अंगड़ाई ली.उसने 1 पूरे बाजुओ की सफेद टी-शर्ट & कसे,गुलाबी शॉर्ट्स पहने थे जो की बस उसकी गंद को ढके हुए थे.हाथ हवा मे उठे होने की वजह से उसकी शर्ट उपर उठ गयी & उसकी कमर का कुच्छ हिस्सा नुमाया हो गया.

"हुन्न..!",वो चौंक पड़ी.किसी ने उसकी नुमाया कमर को थम उसे पीछे से गर्दन पे चूम लिया.उसने गर्दन घुमाई तो देखा विजयंत मेहरा उस से चिपका खड़ा था.उसने उसे बड़ी ठंडी निगाहो से देखा & उस से अलग हो वापस बिस्तर पे चली गयी.वो उसकी ओर पीठ किए बाई करवट पे लेटी हुई थी.सॉफ ज़ाहिर था की वो अपने ससुर से खफा थी.

विजयंत मुस्कुराया & अपने साथ लाई शिशियो को वही बिस्तर पे रखा & उसके पीछे बैठ उसकी दाई टांग पे हाथ फिराने लगा.रंभा ने टांग खींच उसे ऐसा करने से रोक दिया.विजयंत ने मुस्कुराते हुए 1 शीशी खोली & उसमे से थोड़ा खुश्बुदार तेल हाथ मे धार उसे अपनी बहू की टांग पे मल दिया.रंभा खामोश रही & बस मुँह बिस्तर मे च्छूपाते हुए पेट के बल लेट गयी.

विजयंत सख़्त हाथो से उसकी टाँगो के पिच्छले हिस्से पे तेल की मालिश करने लगा.पिच्छले 2 दिनो से वो दिन भर कार मे बैठी रहती थी & रातें फार्म्स के कॉटेजस पे गुज़री थी.अभी जब विजयंत ने मालिश शुरू की तो उसे एहसास हुआ की उसकी टाँगे कितनी थॅकी हुई थी.विजयंत के मज़बूत हाथ उसके पाँवो से लेके घुटनो के पिच्छले हिस्से तक चल रहे थे.उसे बहुत अच्छा लग रहा था मगर वो वैसे ही चुप मुँह च्छुपाए पड़ी थी.

विजयंत ने उसकी बाई टांग को पकड़ उसे हवा मे उठाया & फिर उसके पाँव को दबाते हुए उसकी उंगलियो के बीच अपने हाथ की उंगलिया घुसा तेल मलने लगा.

"आहह..!",जब उसने उसके पंजो की उंगलियो को 1-1 कर खींचा तो रंभा के मुँह से सुकून भरी आह निकल ही गयी.विजयंत ने उसकी घुटने से उठी टांग को वैसे ही थामे हुए मालिश की & फिर दाई टांग को उठा लिया.वाहा भी उसने वही हरकत दोहराई.रंभा ने महसूस किया कि ना केवल उसकी थकान मिट रही थी बल्कि उसकी मस्ती भी धीमे-2 बढ़ रही थी.

विजयंत ने उसकी टाँगे वापस बिस्तर पे रखी & अब घुटनो से उपर उसकी शॉर्ट्स तक उसकी मांसल जाँघो के पिच्छले हिस्सो पे अपने हाथ चलाने लगा.रंभा की चूत मे कसक उठी.उसके ससुर के हाथ उसके जिस्म को मदहोश कर रहे थे.उसने अपने हाथ अपने सीने के नीचे दबाए हुए थे.उसकी मस्ती की गवाही देते हाथो ने बिस्तर की चादर को भींच लिया था.विजयंत कुच्छ देर तक उसकी कोमल जाँघो पे हाथ फिराता रहा.

"उउन्न्ह..!",रंभा ने बिस्तर से सर उठा के आँखे बंद किए 1 मस्त आ भारी.उसके ससुर के हाथ उसकी शर्ट मे घुस उसकी कमर की मांसल बगलो को मसल रहे थे.विजयंत हाथ ऐसे दबाते हुए उपर से नीचे ला रहा था मानो उसकी मांसपेशियो की थकान को उसके जिस्म से निचोड़ देना चाहता हो.रंभा की चूत गीली होने लगी थी.

विजयंत के हाथ उसकी बगलो पे फिरते हुए सीधे उसके जिस्म के नीचे उसके पेट पे पहुँच गये.रंभा चिहुनकि & उसने महसूस किया की उसका ससुर उसकी शॉर्ट्स के बटन को खोल रहा है.शॉर्ट्स ढीली करने के बाद विजयंत के मज़बूत हाथ वापस पीछे आए & वेयैस्टबंड मे फँस उसकी शॉर्ट्स को नीचे सरकाने लगे.

अगले पल रंभा अपने ससुर के सामने अपनी नंगी गंद किए लेटी थी.विजयंत की आँखे बहू की कसी गंद देख चमक उठी.उसने फिर से उसके घुटनो के उपर से जाँघो के पिच्छले हिस्सो पे हाथ चलाना शुरू किया & इस बार हाथो को गंद की फांको से होता हुआ सीधा उसकी कमर तक ले आया.रंभा अब बहुत हल्की-2 आहें भर रही थी.विजयंत ने 4-5 बार हाथ वैसे ही चलाए & उसके बाद उन्हे रंभा की मोटी गंद से चिपका दिया.हाथ दोनो फांको पे गोलाई मे घूमते हुए वाहा के माँस को गूँध रहा थे.पहले हाथो का बनाया दायरा बड़ा था लेकिन पल-2 वो दायरा छ्होटा होता जो रहा था.जब दायरा बिल्कुल छ्होटा हो गया तो विजयंत ने दोनो फांको के माँस को दोनो हाथ मे भींच के उपर खींचा.

"ऊव्ववव..!",रंभा के चेहरे पे मस्ती भरी शिकन आई & वो सर उठा के चिहुनकि.ससुर की इस हरकत ने चूत की कसक को कुच्छ ज़्यादा बढ़ा दिया था.उसने सर वापस बिस्तर मे धँसाया & विजयंत के हाथो का लुत्फ़ उठाने लगी.विजयंत ने देखा की बहू अब गर्दन को बहुत धीरे-2 उपर उठाके वापस बिस्तर पे दबा रही है.उसकी बेचैनी देख वो मुस्कराया & इस बार हाथो को गंद से फिसलते हुए उसकी कमर से पीठ तक ऐसे ले गया की रंभा की शर्ट उसकी गर्दन तक उठ गयी.

अब उसकी पीठ के पार सफेद ब्रा दिख रहा था जिसके उपर से ही हाथ चलाते हुए वो रंभा की मालिश कर रहा था.उसने अपने दोनो घुटने रंभा की कमर की दोनो ओर जमाए & उसकी गंद पे बैठ गया.

"उउन्न्ह....!",उसका दिल अज़ीज़ विजयंत का तगड़ा लंड जैसे ही उसकी गंद पे दबा रंभा ने फिर से सर उठाके अपनी खुशी & बेचैनी का इज़हार किया.विजयंत उसकी गंद पे लंड दबाए बैठा उसकी पीठ पे बहुत सख़्त हाथो से मालिश कर रहा था.उसके हाथ पहले रंभा के जिस्म की बगलो पे नीचे से उपर जाते & फिर उपर आके वो उसकी रीढ़ के दोनो तरफ हाथ उपर से चलते हुए नीचे उसकी गंद तक लाता.हाथ वापस उपर जाते & फिर उसकी बगलो पे फिसलते हुए वापस नीचे आते.

ससुर के हाथो की मस्ताना हरकते & उसके लंड का नशीला एहसास रंभा को झाड़वाने के लिए काफ़ी था.वो अपनी गंद पे बैठे ससुर को उसकी हर्कतो से झूलते हुए,बिस्तर मे मुँह च्छुपाए सुबक्ते हुए झाड़ गयी.विजयंत मुस्कुराते हुए उसकी गंद से उठा & बिस्तर के 1 किनारे आ गया & फिर रंभा के उपरी बाज़ू पकड़ उसका मुँह अपनी ओर कर लिया.अब रंभा पेट के बल बिस्तर के किनारे पे मुँह टिकाए लेटी हुई थी.

विजयंत वही अपने पंजो पे बैठ गया & रंभा की बाई बाँह को अपने दाए कंधे पे रखा & फिर हाथो मे तेल लेके उस बाँह की मालिश करने लगा.रंभा अधखुली आँखो से उसे देख रही थी.उसकी निगाहो मे विजयंत को अब नाराज़गी की जगह केवल मस्ती दिखाई दे रही थी.वो अपने हाथो मे उसकी कलाई जाकड़ गोल-2 घूमाते हुए उसकी कोहनी तक जाता & वाहा से फिर उसके कंधे था.जब बाई बाँह की मालिश हो गयी तो उसने यही हरकत दाई बाँह के साथ दोहराई.अपने दोनो कंधो पे टिकी रंभा की बाँहो से उसने उसके ब्रा स्ट्रॅप्स को सरकाया & फिर खड़ा होने लगा तो रंभा ने उसका कुर्ता पकड़ उसे रोक लिया.

विजयंत फिर बैठ गया तो रंभा ने उसके कुर्ते को पकड़ उसे उपर खींचा & उसका इशारा समझ विजयंत ने कुर्ता निकाल दिया.रंभा ने वैसे ही लेटे हुए ससुर के सीने के बालो मे अपने हाथ फिराए & फिर उसकी गर्दन मे बाँहे डाल उसकी दाढ़ी पे अपने मुलायम गाल रगडे.विजयंत के होंठो को अपने लबो की गिरफ़्त मे ले उसके मुँह मे अपनी जीभ चलाके उसने अपनी नाराज़गी ख़त्म होने का एलान कर दिया.कुच्छ देर तक दोनो प्रेमी वैसे ही 1 दूसरे को चूमते रहे & फिर विजयंत खड़ा हो गया.

विजयंत ने खड़े होके हाथो मे थोडा सा तेल लिया & आगे झुक के रंभा की नंगी पीठ से लेके कमर तक अपने हाथ फिराने लगा.रंभा के चेहरे के सामने ही उसके ससुर के पाजामे मे क़ैद तना लंड पाजामे पे प्रेकुं का धब्बा छ्चोड़ता दिख रहा था.उसने फ़ौरन पाजामा ढीला किया & ससुर की बालो भरी जाँघो पे नीचे से उपर तक हाथ फिराने लगी & अपना मुँह आगे कर उसके लंड से उपर के बालो मे घुसा दिया.

विजयंत ने मज़े मे आँखे बंद की लेकिन बहू की मालिश वैसे ही जारी रखी.रंभा ने ससुर की मज़बूत,पुष्ट गंद को उंगलियो के नखुनो से खरोंचते हुए मसला & लंड के सूपदे को मुँह मे भर लिया.

"आहह..!",आह भर विजयंत आगे झुका & इस बार उसके हाथ रंभा की गंद तक पहुँच गये & उसकी फांको को फैलाने लगे.रंभा ने ससुर की गंद थाम लंड चूसना शुरू किया तो विजयंत ने बहू की गंद फैला पीछे से उसकी चूत मे उंगली कर दी.रंभा कमर उचकाते हुए ससुर का लंड चूस रही थी.विजयंत उसकी ज़ुबान की हर्कतो का लुत्फ़ उठाता हुआ उसकी चूत मे उंगली तेज़ी से अंदर-बाहर कर रहा था.

रंभा ने लंड मुँह से निकाला & उसपे अपनी नाक & गालो से रगड़ने लगी.वो अब पूरी तरह से मदहोश थी.विजयंत की उंगली उसे मस्ती की कगार पे ले गयी थी & अब वो अपनी ही दुनिया मे खो गयी थी.उसने अभी भी विजयंत की गंद थामी हुई थी लेकिन अब लंड चूस नही रही थी बल्कि अपना मुँह विजयंत की गोद मे धंसाए बस झाडे जा रही थी.विजयंत की उंगली उसकी चूत रगडे जा रही थी & वो उस कगार से गिर मस्ती के सागर मे गोते लगा रही थी.

वो शख्स अपने गाल के निशान को सहलाता बंगल के अहाते मे दाखिल हो गया था.ये बुंगला विजयंत का नही था बल्कि उसके किसी दोस्त का था.गेट के बाहर बैठा दरबान पास के बुंगले के चौकीदार के साथ बीड़ी पीता गप्पे हांक रहा था & उसकी नज़र बचा के वो पिच्छली दीवार के साथ कार लगाके उसपे चढ़ अंदर कूद गया था.फार्म्स विजयंत का इलाक़ा था & वाहा उसके मुसीबत मे फँसने के आसार बहुत थे लेकिन यहा ऐसी कोई बात नही थी बस रंभा उसे अकेली मिल जाए & उसका काम हो गया समझो.

बुंगले के बाहर भी 1 सीढ़ी थी जो उपरी मंज़िल को जा रही थी लेकिन सीढ़ी के अंत मे बना दरवाज़ा बंद था.वो सीढ़ी के उपर पहुँचा & देखा बाई तरफ बनी बाल्कनी तक वो पहुँच सकता था.सीधी के बगल की रैलिंग & उस बाल्कनी के बीच बस 4 फ्ट का फासला था,बस उसे सावधानी से कूदना था.उसने थोड़ी देर पहले इसी बाल्कनी पे विजयंत को खड़े देखा था.बाल्कनी का दरवाज़ा बंद था & कमरे मे अंधेरा था.उसने दरवाज़े को खिचा मगर वो मज़बूती से बंद था.वो अपने निशान को खुजाते आगे जाने का रास्ता सोचने लगा.

विजयंत ने रंभा को पलटा & उसकी छातियो को मसलने लगा.तेल लगी हथेलियो को वो उसकी छातियो पे जमा के उन्हे गोल-2 घुमा रहा था & रंभा मस्ती मे कराहे जा रही थी.उसने अपने हाथ पीच्चे ले जाके ससुर की गंद को फिर से थाम लिया था & नीचे से जीभ निकाल उसके आंडो को छेड़ रही थी.विजयंत थोडा झुका & रंभा ने उसके बाए अंडे को मुँह मे भर लिया.

विजयंत उसके निपल्स को उंगलियो मे पकड़ उपर खींचता & रंभा दर्द & मस्ती के अनूठे मिले-जुले भाव से आहत हो कराह उठती.विजयंत ने उसकी दोनो चूचियो को बाहर से पकड़ आपस मे दबा रहा था.रंभा भी आहे भरती हुई सर बिस्तर के किनारे से नीचे लटका उसके आंडो को चूस रही थी.विजयंत उसकी ज़ुबान से काफ़ी जोश मे आ चुका था.वो आगे झुका & बहू की जंघे फैला उसकी रस बहाती चूत से मुँह चिपका दिया.

रंभा मस्ती मे जंघे आपस मे भींचने-खोलने लगी & कमर उचकाने ल्गी.उसने विजयंत की कमर को जाकड़ लिया & आंडो को पागलो की तरह चूसने लगी.विजयंत ने उसकी नाज़ुक चूत पे बहुत जल्द दोबारा हमला कर दिया था & इस बार उसे झड़ने मे कोई वक़्त नही लगा.उसके झाड़ते ही विजयंत बिस्तर पे उसके पीछे आ गया & उसे बाई करवट पे कर उसकी दाई जाँघ को हवा मे उठा दिया.अपनी बाई कोहनी पे उचकी रंभा दाए हाथ से अपनी चूचिया मसला रही थी.

"ऊव्ववव....हाईईईईई..!",उसने बाया हाथ सीने से हटा पीछे ले जा ससुर के सर को थाम लिया जिसका लंड उसकी चूत मे उतर चुका था.विजयंत अपनी बाई कोहनी पे उचका दाए हाथ से उसके पेट को सहलाते हुए उसकी चूचियो को गिरफ़्त मे ले चुका था & पीछे सर घुमा के उसे चूमती रंभा की किस का भरपूर मज़ा ले रहा था.

उसका लंड चूत को बुरी तरह रगड़ रहा था.रंभा ने ससुर के बाल को पकड़ के खिचा & अपनी कोहनी सीधी करती बिस्तर पे निढाल हो गयी.उसकी आँखे बंद थी & उसके चेहरे पे केवल मस्ती दिख रही थी.विजयंत ने उसकी दाई जाँघ को उपर किया & बिना लंड निकाले सीधा हो गया & उसकी दाई जाँघ को अपने बाए कंधे पे टिका दिया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--34

gataank se aage.

"sir,aapne project 23 me 2 floors & badhane ke orders diye hain.."

"haan.",Pranav ne apne laptop ko band kiya & samne khade shakhs ko dekha.

"lekin sir,us se to project ki keemat badh jayegi & humne to permission bhi nahi li thi un manzilo ki."

"mr.sharma,aap apna kaam mustaidi se karte hain,is baat ki kadr karta hu lekin please mere faislo ko leke zyada chintit na hon.arzi daal di gayi hai & main kal khud hi concerned afsar se milke use approve karwa dunga.vaha kaam rukna nahi chahiye.project apni puraniu deadline se pehle pura hona chahiye."

"vo thik hai sir,lekin aise faisle to keval vijayant sir le sakte hain."

"mr.sharma,abhi boss main hu & sare faisle main hi lunga.am i clear?",uski aavz tez ho gayi thi.

"yes,sir."

"to aap ja sakte hain.",sharma gaya to pranav muskuraya.Trust Group uske isharo pe chal raha tha..kitni taqat thi uske paas..is sab ka malik vo tha filhaal..filhaal..sasur ke aane pe use ye kursi chhodni padegi & uska dil ab aisa karne ko taiyyar nahi tha.vo kursi se utha & kuchh sochne laga.uska dimagh ab is kursi pe barkarar rehne ki tarkeeb soch raha tha.

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"tumlog koi kaam dhang se nahi kar sakte?..ye flower aarangement kaha tha maine..!..vo peele phoolo ka kya hua..",soniya apne staff ko dant rahi thi,"..chalo jao,sab thik karo.",vo 1 kursi pe baith gayi.use pata tha ki usne abhi kuchh zyada hi danta tha sabko magar vo kya karti vo bahut chidchidi ho gayi thi idhar.karan vahi tha,vijayant se duri.

har roz brij uske liye waqt zarur nikalta & har raat ki chudai to pakki thi hi,upar se daulat ki koi kami thi nahi,apna business bhi uske man behlane ke liye kafi tha lekin vijayant ke sath se milne vala sukh nadarad tha abhi.usne apna chehra hatho me chhupa liya..oh vijayant kab aaoge vapas tum!

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Sonam ne mehsus kiya tha ki pranav jaisa dikhta tha vaisa seedha ya bhala tha nahi.vo ye soch rahi thi ki kahi sameer ko gayab karwane me usi ka hath to nahi tha.sameer ke gayab hone se har chiz ki varis akeli Shipra hi bachti thi & uska pati hone ke nate ye sab pranav ka hi ho jata.usne socha ki 1 baar vijayant ko bas is baat ka aabhas kara de lekin baat vijayant ke damad ki thi jispe vo itna bharosa karta tha.bina saboot ke ungli uthane pe uska nikala jana tay tha & fir brij bhi use nahi puchhta.

nahi..vo pranav pe nigah rakhegi & jaise hi kaam ki baat pata chali us se apna fayda zarur nikalegi.

Clayworth ke bungle ke apne kamre me Rambha ne bistar se utar ke khadi hoke angdayi li.usne 1 pure bazuo ki safed t-shirt & kase,gulabi shorts pehne the jo ki bas uski gand ko dhake hue the.hath hawa me uthe hone ki vajah se uski shirt upar uth gayi & uski kamar ka kuchh hissa numaya ho gaya.

"hunn..!",vo chaunk padi.kisi ne uski numaya kamar ko tham use peechhe se gardan pe chum liya.usne gardan ghumayi to dekha Vijayant Mehra us se chipka khada tha.usne use badi thandi nigaho se dekha & us se alag ho vapas bistar pe chali gayi.vo uski or pith kiye bayi karwat pe leti hui thi.saaf zahir tha ki vo apne sasur se khafa thi.

vijayant muskuraya & apne sath layi shishiyo ko vahi bistar pe rakha & uske peechhe baith uski dayi tang pe hath firane laga.rambha ne tang khinch use aisa karne se rok diya.vijayant ne muskurate hue 1 shishi kholi & usme se thoda khushbudar tel hath me dhaar use apni bahu ki tang pe mal diya.rambha khamosh rahi & bas munh bistar me chhupate hue pet ke bal let gayi.

vijayant sakht hatho se uski tango ke pichhle hisse pe tel ki malish karne laga.pichhle 2 dino se vo din bhar car me baithi rehti thi & raaten farms ke cottages pe guzari thi.abhi jab vijayant ne malish shuru ki to use ehsas hua ki uski tange kitni thaki hui thi.vijayant ke mazbut hath uske panvo se leke ghutno ke pichhle hisse tak chal rahe the.use bahut achha lag raha tha magar vo vaise hi chup munh chhupaye padi thi.

vijayant ne uski bayi tang ko pakad use hawa me uthaya & fir uske panv ko dabate hue uski ungliyo ke beech apne hath ki ungliya ghusa tel malne laga.

"aahhhh..!",jab usne uske panjo ki ungliyo ko 1-1 kar khincha to rambha ke munh se sukun bhari aah nikal hi gayi.vijayant ne uski ghutne se uthi tang ko vaise hi thame hue malish ki & fir dayi tang ko utha liya.vaha bhi usne vahi harkat dohrayi.rambha ne mehsus kiya ki na keval uski thakan mit rahi thi balki uski masti bhi dhime-2 badh rahi thi.

vijayant ne uski tange vapas bistar pe rakhi & ab ghutno se upar uski shorts tak uski mansal jangho ke pichhle hisso pe apne hath chalane laga.rambha ki chut me kasak uthi.uske sasur ke hath uske jism ko madhosh akr rahe the.usne apne hath apne seene ke neeche dabaye hue the.uski masti ki gawahi dete hatho ne bistar ki chadar ko bhinch liya tha.vijayant kuchh der tak uski komal jangho pe hath firata raha.

"uunnhhhhh..!",rambha ne bistar se sar utha ke aankhe band kiye 1 mast aah bhari.uske sasur ke hath uski shirt me ghus uski kamar ki mansal baglo ko masal rahe the.vijayant hath aise dabate hue upar se neeche la raha tha mano uski manspeshiyo ki thakan ko uske jism se nichod dena chahta ho.rambha ki chut gili hone lagi thi.

vijayant ke hath uski baglo pe firte hue seedhe uske jism ke neeche uske pet pe pahunch gaye.rambha chihunki & usne mehsus kiya ki uska sasur uski shorts ke button ko khol raha hai.shorts dhili karne ke baad vijayant ke mazbut hath vapas peechhe aaye & waistband me fans uski shorts ko neeche sarkane lage.

agle pal rambha apne sasur ke samne apni nangi gand kiye leti thi.vijayant ki aankhe bahu ki kasi gand dekh chamak uthi.usne fir se uske ghutno ke upar se jangho ke pichhle hisso pe hath chalana shuru kiya & is baar hatho ko gand ki fanko se hota hua seedha uski kamar tak le aaya.rambha ab bahut halki-2 aahen bahr rahi thi.vijayant ne 4-5 baar hath vaise hi chalaye & uske baad unhe rambha ki moti gand se chipka diya.hath dono fanko pe golayi me ghumte hue vaha ke mans ko gundh raha the.pehle hatho ka banaya dayra bada tha lekin pal-2 vo dayra chhota hota jo raha tha.jab dayra bilkul chhota ho gaya to vijayant ne dono fanko ke mans ko dono hath me bhinch ke upar khincha.

"oowwww..!",rambha ke chehre pe masti bhari shikan aayi & vo sar utha ke chihunki.sasur ki is harkat ne chut ki kasak ko kuchh zyada badha diya tha.usne sar vapas bistar me dhansaya & vijayant ke hatho ka lutf uthane lagi.vijayant ne dekha ki bahu ab gadn ko bahut dhire-2 upar uthake vapas bistar pe daba rahi hai.uski bechaini dekh vo muskraya & is baar hatho ko gand se fislate hue uski kamar se pith tak aise le gaya ki rambha ki shirt uski gardan tak uth gayi.

ab uski pith ke paar safed bra dikh raha tha jiske upar se hi hath chalate hue vo rambha ki malish kar raha tha.usne apne dono ghutne rambha ki kamar ki dono or jamaye & uski gand pe baith gaya.

"uunnhhhhh....!",uska dil aziz vijayant ka tagda lund jaise hi uski gand pe daba rambha ne fir se sar uthake apni khushi & bechaini ka izhar kiya.vijayant uski gand pe lund dabaye baitha uski pith pe bahut sakht hatho se malish akr raha tha.uske hath pehle rambha ke jism ki baglo pe neeche se upar jate & fir upar aake vo uski ridh ke dono taraf hath upar se chalate hue neeche uski gand tak lata.hath vapas upar jate & fir uski baglo pe fisalte hue vapas neeche aate.

sasur ke hatho ki mastana harkate & uske lund ka nashila ehsas rambha ko jhadwane ke liye kafi tha.vo apni gand pe baithe sasur ko uski harkato se jhulate hue,bistar me munh chhupaye subakte hue jhad gayi.vijayant muskurate hue uski gand se utha & bistar ke 1 kinare aa gaya & fir rambha ke upri bazu pakad uska munh apni ro akr liya.ab rambha pet ke bal bistar ke kinare pe munh tikaye leti hui thi.

vijayant vahi apne panjo pe baith gaya & rambha ki bayi banh ko apne daye kandhe pe rakha & fir hatho me tel leke us banh ki malish akrne laga.rambha adhkhuli aankho se use dekh rahi thi.uski nigaho me vijayant ko ab narazgi ki jagah keval masti dikahyi de rahi thi.vo apne hatho me uski kalayi jakad gol-2 ghumate hue uski kohni tak jata & vaha se fir uske kandhe tha.jab bayi banh ki malish ho gayi to usne yehi harkat dayi banh ke sath dohrayi.apne dono kandho pe tiki rambha ki banho se usne uske bra straps ko sarkaya & fir khada hone laga to rambha ne uska kurta pakd use rok liya.

vijayant fir baith gaya to rambha ne uske kurte ko pakad use uapr khincha & uska ishara samajh vijayant ne kurta nikal diya.rambha ne vaise hi lete hue sasur ke seene ke baalo me apne hath firaye & fir uski gardan me banhe daal uski dadhi pe apne mulayam gaal ragde.vijayant ke hotho ko apne labo ki giraft me le uske munh me apni jibh chalake usne apni narazgi khatm hone ka elan kar diya.kuchh der tak dono premi vaise hi 1 dusre ko chumte rahe & fir vijayant khada ho gaya.

vijayant ne kahde hoke hatho me thoda sa tel liya & aage jhuk ke rambha ki nangi pith se leke kamar tak apne hath firane laga.rambha ke chehre ke samne hi uske sasur ke pajame me qaid tana lund pajame pe precum ka dhabba chhodta dikh raha tha.usne fauran pajama dhila kiya & sausr ki baalo bhari jangho pe neeche se upar tak hath firane lagi & apna munh aage kar uske lund se upar ke baalo me ghusa diya.

vijayant ne maze me aankhe badn ki lekin bahu ki malish vaise hi jari rakhi.rambha ne sasur ki mazbut,pusht gand ko ungliyo ke nakhuno se kahrochte hue masla & lund ke supade ko munh me bhar liya.

"aahhhh..!",aah bhar vijayant aage jhuka & is baar uske hath rambha ki gand tak pahunch gaye & uski fanko ko failane lage.rambha ne sasur ki gand tham lund chusna shuru kiya to vijayant ne bahu ki gand faila peechhe se uski chut me ungli kar di.rambha kamar uchkate hue sasur ka lund chus rahi thi.vijayant uski zuban ki harkato ka lutf uthata hua uski chut me ungli tezi se andar-bahar kar raha tha.

rambha ne lund munh se nikala & uspe apni naak & galo se ragadne lagi.vo ab puri tarah se madhosh thi.vijayant ki ungli use masti ki kagar pe le gayi thi & ab vo apni hi duniya me kho gayi thi.usne abhi bhi vijayant ki gand thami hui thi lekin ab lund chus nahi rahi thi balki apna munh vijayant ki god me dhansaye bas jhade ja rahi thi.vijayant ki ungli uski chut ragde ja rahi thi & vo us kagar se gir masti ke sagar me gote laga rahi thi.

vo shakhs apne gaal ke nishan ko sehlata bungle ke ahate me dakhil ho gaya tha.ye bungla vijayant ka nahi tha balki uske kisi dost ka tha.gate ke bahar baitha darban paas ke bungle ke chaukidar ke sath bidi pita gappe hank raha tha & uski nazar bacha ke vo pichhli deewar ke sath car lagake uspe chadh andar kud gaya tha.farms vijayant ka ilaka tha & vaha uske musibat me fansane ke aasar bahut the lekin yaha aisi koi baat nahi thi bas rambha use akeli mil jaye & uska kaam ho gaya samjho.

bungle ke bahar bhi 1 seedhi thi jo upri manzil ko ja rahi thi lekin seedhi ke ant me bana darwaza band tha.vo seedhi ke uapr pahuncha & dekha bayi taraf bani balcony tak vo pahunch sakta tha.seedhi ke bagal ki railimg & us balcony ke beech bas 4 ft ka fasla tha,bas use savdhani se kudna tha.usne thodi der pehle isi balcony pe vijayant ko khade dekha tha.balcony ka darwaza band tha & kamre me andhera tha.usne darwaze ko khicnh kde kha magar vo mazbuti se band tha.vo apne nishan ko khujate aage jane ka rasta sochne laga.

vijayant ne rambha ko palta & uski chhatiyo ko maslane laga.tel lagi hatheliyo ko vo uski chhatiyo pe jama ke unhe gol-2 ghuma raha tha & rambha masti me karahe ja rahi thi.usne apne hath peechhe le jake sasur ki gand ko fir se tham liya tha & neeche se jibh nikla uske ando ko chhed rahi thi.vijayant thoda jhuka & rambha ne uske baye ande ko munh me bhar liya.

vijayant uske nipples ko ungliyo me pakad upar khinchta & rambha dard & masti ke anuthe mile-jule bhav se aahat ho karah uthati.vijayant ne uski dono choochiyo ko bahar se pakad aapas me daba raha tha.rambha bhi aahe bharti hui sar bistar ke kinare se neeche latka uske ando ko chus rahu thi.vijayant uski zuban se akfi josh me aa chuka tha.vo aage jhuka & bahu ki janghe faila uski ras bahati chut se munh chipka diya.

rambha masti me janghe aapas me bhinchne-kholne lagi & kamar uchkane lgi.usne vijayant ki kamar ko jakad liya & ando ko paglo ki tarah chusne lagi.vijayant ne uski nazuk chut pe bahut jald dobara humla kar diya tha & is baar use jhadne me koi waqt nahi laga.uske jahdte hi vijayant bistar pe uske peechhe aa gaya & use bayi karwat pe kar uski dayi jangh ko hawa me utha diya.apni bayi kohni pe uchki rambha daye hath se apni choochiya masla rahi thi.

"oowwww....haiiiiii..!",usne baya hath seene se hata peechhe le ja sasur ke sar ko tham liya jiska lund uski chut me utar chuka tha.vijayant apni bayi kohni pe uchka daye hath se uske pet ko sehlate hue uski choochiyo ko giraft me le chuka tha & peechhe sar ghuma ke use chumti rambha ki kiss ka bharpur maza le raha tha.

uska lund chut ko buri tarah ragad raha tha.rambha ne sausr ke baal ko pakad ke khicnha & apni kohni seedhi karti bistar pe nidhal ho gayi.uski aankhe badn thi & uske chehre pe keval masti dikh rahi thi.vijayant ne uski dayi jangh ko upar kiya & bina lund nikale seedha ho gaya & uski dayi jangh ko apne baye kandhe pe tika diya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--35

गतान्क से आगे.

रंभा की गंद बिस्तर से उठ गयी & विजयंत का लंड उसकी चूत को पार कर उसकी कोख को चूमने लगा.कमरा रंभा की मस्त चीखो से गुलज़ार हो गया.विजयंत उसकी उठी जाँघ को सहलाते हुए तंग चूमते धक्के लगाए जा रहा था & उसे खबर नही थी कि कमरे के दरवाज़े के बाहर पर्दे की ओट से देखता वो शख्स हक्का-बक्का खड़ा था.

विजयंत के कमरे की बाल्कनी के बंद दरवाज़े के उपरी फ्रेम मे शीशे लगे थे.उस शख्स ने रुमाल को अपने हाथ पे बाँधा & फिर कोट उतार उसकी बाँह को अपनी दाई बाँह पे इस तरह चढ़ाया कि उसकी मुट्ठी उस से ढँकी रहे & फिर 1 शीशे पे मुक्का मारा.2-3 मुक्को मे शीशा टूट गया.वो कुछ देर सांस रोके खड़ा रहा मगर शायद काँच टूटने की आवाज़ किसी ने सुनी नही थी.उसने उस सुराख से हाथ अंदर डाल के कुण्डी खोली & कमरे मे दाखिल हुआ.

दबे पाँव वो उस कमरे से बाहर निकल बुंगले का मुआयना करने लगा & रंभा की आहो को सुन उस केमर की ओर आ गया.....ये तो ससुर है उसका & उसी से चुद रही है ये!..उसने अपनी आँखे मल दोबारा देखा..कैसी लड़की है ये?..पति गायब है & ये ससुर के साथ मज़े ले-2 के चुदाई कर रही है!..& वो कैसा बाप है जो अपने बेटे की बीवी की चूत मे लंड घुसाए जम के धक्के लगा रहा है..!

उसका दिमाग़ घूम गया था..साली!..जैसी माँ वैसी बेटी!..अब उसे कुच्छ बुरा नही लग रहा था..औलाद को मा-बाप का क़र्ज़ उतारना ही पड़ता है,आज ये भी अपनी माँ का क़र्ज़ उतारेगी..वो दरवाज़े से हट दूसरी तरफ के कमरे मे चला गया.अब उसे इंतेज़ार करना था कि कब वो अकेली मिलती है & उसका इंटेक़ाम पूरा होता है.

"ओईईईईईई.....हाईईईईईईईईईईईईईईईई......उउन्न्ञनह......हाआआआआअन्न्‍नननणणन्..!",विजयंत के गहर्रे धक्को के कमाल से कमर उचकती अपने सर के नीचे के बिस्तर की चादर को बेचैनी से नोचती रंभा झाड़ रही थी & उसकी दाई टांग को उठाए उस से होंठ चिपकाए विजयंत भी झाडे जा रहा था.लंड थोड़ा सिकुदा तो विजयंत ने उसे बाहर खींचा.लंड खींचते ही उसका गाढ़ा वीर्य रंभा की चूत से टपक उसकी गंद के छेद तक गिरने लगा.

विजयंत ने फ़ौरन अपने साथ लाई 1 डिबिया को खोला & उसमे से 1 क्रीम अपनी उंगली पे लगाई & फिर अपने वीर्य & उस क्रीम को रंभा की गंद के छेद मे भरने लगा.झड़ने से मदहोश रंभा कमर उचकते हुए फिर से बेचैन होने लगी.उसका ससुर उसकी गंद मे उंगली कर रहा था & उसे अजीब सा मज़ा आ रहा था.

"ना...मत करिए,डॅड..आननह..!",रंभा ने बाए हाथ से उसकी कलाई थाम उसे रोकने की नाकाम कोशिश की.विजयंत उसके दाई तरफ हो गया & उसके तरफ अपनी गंद कर उसकी जाँघो को फैला उपर से उसकी चूत चाटता उसकी गंद मे उंगली करने लगा.रंभा ने मदहोशी मे सर इधर-उधर घुमाया & पूरा जिस्म घुमा पेट के बल हो गयी.उसने बाई तरफ सर घुमाया तो उसे विजयंत का सिकुदा लंड लटका दिखा जिस से अभी भी वीर्य की कुच्छ बूंदे टपक रही थी.

रंभा ने हाथ बढ़ा के लंड को पकड़ा & थोड़ा उचक के सिकुदे लंड को चूसने लगी.विजयंत अब उसकी गंद की दरार मे जीभ फिराता उसकी गंद की छेद मे क्रीम भरते हुए उंगली किए जा रहा था.वो रंभा की गंद के कसे छेद को थोडा ढीला कर देना चाहता था ताकि उसके मोटे लंड को घुसने मे आसानी हो.जब रंभा बेचैन हो कमर हिलाने लगी & उसकी ज़ुबान ने उसके सिकुदे लंड को फिर से खड़ा कर दिया तो उसने रंभा की गंद से उंगली निकाली & उसकी कमर थाम गंद को हवा मे उठा उसके पीछे आ गया.

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"हेलो.",बलबीर ने देखा कि बॅंकर से बातचीत के बीच ब्रिज कोठारी ने अपने मोबाइल पे 1 कॉल ली & उसके चेहरे का रंग थोड़ा बदल गया.

"एक्सक्यूस मी.",वो अपनी मेज़ से उठा & अंदर बाथरूम की ओर जाने लगा.बलबीर भी उसके पीछे हो लिया.ब्रिज टाय्लेट मे घुसा & 1 क्यूबिकल मे घुसा दरवाज़ा बंद किया.बलबीर उसके साथ वाले क्यूबिकल मे दबे पाँव घुसा.

"तुम पिच्छले 6-7 दिनो से मुझे फोन कर के परेशान रहे हो.आख़िर चाहते क्या हो तुम?",ये शख्स रोज़ ब्रिज को फोन करता था हर बार नंबर बदल के & हर बार 1 ही बात कि क्या उसे अपने दुश्मन को मज़ा चखाना है.

"ब्रिज बाबू,आप क्लेवर्त के पास जो धारदार झरने हैं वाहा पहुँचो & मेरा यकीन मानो की आपको आपकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा तोहफा मिलेगा वाहा.कल सवेरे 4 बजे तक किसी भी हालत मे वाहा पहुँच जाओ मगर बिल्कुल अकेले अगर कोई भी साथ आया तो मुझे पता चल जाएगा & तुम्हारा तोहफा तुम्हे नही मिलेगा."

"मगर..",फोन काट गया था.

बलबीर ने उधर वाले अंजान शख्स की बात तो नही सुनी मगर ये समझ गया कि ब्रिज परेशान है.ब्रिज का दिमाग़ बड़ी तेज़ी से चल रहा था & अपना खाना ख़त्म होने तक उसने फ़ैसला कर लिया था कि वो धारदार फॉल्स ज़रूर जाएगा.खाना ख़त्म होते ही वो अपने दफ़्तर गया & वही से अपनी कार मे अकेला क्लेवर्त के लिए निकल पड़ा.बलबीर उसके पीछे ही था.

"हेलो,सोनिया.मैं क्लेवर्त जा रहा हू किसी काम से लेकिन तुम किसी को ये बात मत बताना मेरे ऑफीस वालो को भी नही.सब ठीक रहा तो कल लौट आऊंगा."

"लेकिन डार्लिंग..-"

"आज कुच्छ मत पुछो जान.कल सब बताउन्गा.बाइ!",ब्रिज ने फोन रखा & कार ड्राइव करने लगा.उधर घर मे अकेली बैठी सोनिया का दिल ना जाने क्यू बहुत ज़ोर से धड़कने लगा,उसे लगा की कुच्छ बुरा होने वाला है.

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"आईईईईईईईययययययययययईईईई...प्लीज़ मत डालिए..बहुत बड़ा है आपका लंड....हाआआआआईयईईईईईईईईईईईई..!",विजयंत के मोटे सूपदे ने रंभा की गंद के छ्होटे से सुराख को बहुत बुरी तरह फैला दिया था & वो चीख रही थी.

"बस हो गया मेरी रानी!....ये लो...चला गया......आहह..!",विजयंत ने सूपदे के पीछे क्रीम & वीर्य से चिकनी गंद मे आधा लंड घुसा दिया.वो जानता था की इसके आगे घुसाना उसकी प्यारी बहू के लिए बहुत तकलीफ़देह हो सकता है.रंभा की गंद ने तो उसके लंड को बिल्कुल जाकड़ लिया था & हर धक्के पे मज़े की वजह से उसकी आह निकल जाती थी.वो उसकी फांको को मसल्ते हुए उसकी गंद मार रहा था & रंभा अब दर्द से कम & जोश से ज़्यादा चीख रही थी.

"उउम्म्म्मममम.....!",वो अपने हाथ को अपने मुँह मे घुसा अपनी ही उंगलिया मस्ती मे चूसे जा रही थी.विजयंत ने दाया हाथ उसकी कमर से आगे उसकी चूत पे सरकया & उसके दाने को छेड़ने लगा & बाए को आगे बढ़ा उसकी भारी-भरकम लेकिन कसी चूचियो को मसल दिया.

"आन्न्‍न्णनह..बहुत ज़ालिम हैं आप डॅड!..ऊऊव्ववववववव..!",विजयंत ने उसके निपल पे चिकोटी काट ली,"..अपनी बहू को कितना दर्द पहुँचा रहे हैं.....आन्न्न्नह......हाआंन्‍नणणनह..!",विजयंत आगे झुका & उसकी पीठ से अपनी छाती सताते हुए उसके बाए कान को काट लिया.

"कहो तो निकाल लू लंड बाहर.",उसकी उंगली दाने पे तेज़ी से गोल-2 घूम रही थी.

"उउन्न्ञन्..नही.....उसने बाई तफा मुँह घुमा के बाए हाथ से उनके बाल पकड़ के खींच के उन्हे बड़ी शिद्दत से चूमा,"..बस तड़पाना है मुझे..है ना?....हाईईईईईईई..!",विजयंत ने धक्के लगते हुए उसे पूरी तरह से बिस्तर पे लिटा दिया था & अब उसके ुआप्र लेट के हल्के-2 आधे लंड के धक्के लगा रहा था.

"हााआअन्न्‍नननणणन्..मारिए......& मारिए अपनी बहू की गंद..आप ही की है ये डॅड......हाआअन्न्‍नननननणणन्......!",रंभा उसके नीचे दबी च्चटपटाने लगी थी & उसकी गंद ने विजयंत के लंड को और कस लिया था.

"आहह.......रंभा..!",विजयंत ने चीख मारी & बहू के झाड़ते ही उसकी गंद मे अपना गाढ़ा वीर्य छ्चोड़ दिया.

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"विजयंत डार्लिंग?"

"सोनिया?",विजयंत अभी भी रंभा के उपर लेटा था & उसका लंड उसकी गंद मे सिकुड रहा था.

"विजयंत,कुछ बताना है तुम्हे."

"हां-2.बोलो."

"अभी-2 ब्रिज क्लेवर्त गया है अकेला."

"तो?"

"विजयंत..",सोनिया रो रही थी.

"रो मत सोनिया..घबराओ मत..मैं तुम्हे कुच्छ नही होने दूँगा.",रंभा गौर से ससुर की बात सुन रही थी,"..ब्रिज क्लेवर्त गया है..किसलिए गया है?",..उसका ससुर ब्रिज कोठारी की बीवी को जानता था..रंभा हैरान हो गयी..,"..सोनिया..जान..प्लीज़ चुप हो जाओ..& सारी बात बताओ."..हैं!..जान..बाप रे!..ये तो बड़ा पहुँचा खिलाड़ी है..दुश्मन की बीवी को फँसा रखा हैयस इसने!

"विजयंत..विजयंत..मुझे लगता है कि..",सोनिया रोने लगी,"..मुझे लगता है की समीर की गुमशुदगी मे ब्रिज का हाथ है.",उसकी रुलाई & तेज़ हो गयी.

"क्या?!"

"हां..बस यही बताना था.बाइ!",उसने फोन काट दिया,"..आइ'म सॉरी,ब्रिज!",साइड-टेबल पे रखी पति की तस्वीर को देख उसकी रुलाई & तेज़ हो गयी.

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विजयंत उसकी गंद से लंड खींच अब हेअडबोर्ड से टेक लगाके पैरा फैलाक़े बैठा हुआ कुच्छ सोच रहा था.रंभा ने अभी उस से कुच्छ पुच्छना ठीक नही समझा.वो उसके दाई तरफ लेट गयी & दाई बाँह उसके जिस्म पे डाल दी & आज दिन के बारे मे सोचने लगी.ससुर के साथ इस मस्ताने रिश्ते की शुरुआत के बाद आज पहली बार दोनो मे थोड़ी कहा-सुनी हुई थी & विजयंत ने उसे डाँट दिया था.

रंभा का मानना था कि हरपाल की बेहन हिना से मिल के कुच्छ हासिल नही होना था उल्टे वो सावधान हो जाता & शायद समीर को कुच्छ नुकसान पहुँचा देता.इसी बात पे बहस हुई & विजयंत ने उसे डाँट दिया.उसका मानना था कि हरपाल जैसे लोग चूहे होते हैं & उन्हे पता चलने मे कोई हर्ज़ नही कि अब उन्हे मारने के लिए लोग मुस्तैद हो चुके हैं & जहा तक समीर का सवाल हो,अगर उसकी किस्मत खराब हुई तो हो सकता है अभी उन्हे उसकी लाश भी ना मिले.

रंभा को समीर से कोई गहरी मोहब्बत नही थी लेकिन समीर तो उस से मोहब्बत करता था.उसके लिए उसने अपनी दौलत,अपना खानदान ठुकरा दिया था & उसके इस जज़्बे की वो कद्र करती थी.उसे अपने ससुर की बात बहुत बुरी लगी थी.वो उसके कहने पे आवंतिपुर मे हिना से मिल आई.हिना ने भी पिच्छले & दिनो से भाई से बात नही की थी & उसने रंभा के सामने उसे फोन लगाया लेकिन फोन नही मिला.हिना उसे निर्दोष लगी थी & उसने उसे भाई की कोई भी खबर मिलने पे उसे बताने को कहा था.

क्लेवर्त तक के सारे रास्ते उसने विजयंत से कोई बात नही की थी & अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर दी थी लेकिन उसका ससुर भी कमाल का मर्द था!रूठी महबूबा को बिना 1 भी लफ्ज़ बोले ना केवल उसने मना लिया था बल्कि उसकी गंद भी मार ली थी!इतना वो समझ रही थी कि समीर के बारे मे कोई सुराग मिला है & शायद सारे मामले के तार ब्रिज से जुड़े हैं.

तभी विजयंत का मोबाइल दोबारा बजा.उसने नंबर देखा & चौंक गया,"समीर!",उसने रंभा की ओर देख के कहा तो वो भी उठ बैठी,"हेलो,समीर?"

"मेहरा,तुम्हारे लिए 1 तोहफा है.बस अभी 4 बजे तक धारदार फॉल्स पे पहुँचो.बिल्कुल अकेले आना वरना तोहफा नुकसान मे पड़ सकता है."

"हेलो..!..हेलो..!",फोन कट गया था.

"क्या हुआ?",रंभा ने ससुर के चेहरे पे हाथ फिराया.

"कोई समीर के मोबाइल से फोन करके मुझे धारदार फॉल्स बुला रहा है सवेरे 4 बजे."

"तो चलिए & पोलीस को भी खबर कर देते हैं."

"नही.मुझे अकेले बुलाया है नही तो समीर को नुकसान पहुँचा सकते हैं वो."

"मगर आप अकेले भी तो ख़तरे मे पड़ सकते हैं,डॅड..प्लीज़ मुझे ले चलिए."

"नही,तुम्हे ख़तरे मे नही डाल सकता & ना ही समीर को.",विजयंत बिस्तर से उठ गया,"..मैं अकेला जाउन्गा & उसे ले आऊंगा.",ससुर की भारी आवाज़ के वजन के आगे रंभा को कुच्छ और बोलने की हिम्मत नही हुई.

विजयंत मेहरा अपने कमरे मे जाके धारदार फॉल्स जाने की तैय्यारि करने लगा.रंभा अपने कमरे मे ही थी & वो शख्स तीसरे कमरे मे छिपा विजयंत के जाने का इंतेज़ार कर रहा था.वो शख्स जिस कमरे मे था उसमे घुप अंधेरा था & इतनी देर हो जाने के बाद भी उसकी आँखे अंधेरे की आदि नही हो पाई थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--35

gataank se aage.

rambha ki gand bistar se uth gayi & vijayant ka lund uski chut ko paar kar uski kokh ko chumne laga.kamra rambha ki mast chikho se gulzar ho gaya.vijayant uski uthi jangh ko sehlate hue tang chumte dhakke laagye ja raha tha & use khabar nahi thi ki kamre ke darvaze ke bahar parde ki ot se dekhta vo shakhs hakka-bakka khada tha.

vijayant ke kamre ki balcony ke band darwaze ke upari frame me shishe lage the.us shakhs ne rumal ko apne hath pe bandha & fir coat utar uski banh ko apni dayi banh pe is tarah chadhaya ki uski mutthi us se dhanki rahe & fir 1 shishe pe mukka mara.2-3 mukko me shisha toot gaya.vo kuch der sans roke khada raha magar shayad kanch tutne ki aavaz kisi ne suni nahi thi.usne us surakh se hath andar daal ke kundi kholi & kamre me dakhil hua.

dabe panv vo us kamre se bahar nikal bungle ka muayana karne laga & rambha ki aaho ko sun us kamer ki ro aa gaya.....ye to sasur hai uska & usi se chud rahi hai ye!..usne apni aankhe mal dobara dekha..kaisi ladki hai ye?..pati gayab hai & ye sasur ke sath maze le-2 ke chudai kar rahi hai!..& vo kaisa baap hai jo apne bete ki biwi ki chut me lund ghusaye jum ke dhakke laga raha hai..!

uska dimagh ghum gaya tha..sali!..jaisi maan vaisi beti!..ab use kuchh bura nahi lag raha tha..aulad ko maa-baap ka karz utarana hi padta hai,aaj ye bhi apni maan ka karz utaregi..vo darwaze se hat dusri taraf ke kamre me chala gaya.ab use intezar karna tha ki kab vo akeli milti hai & uska inteqam pura hota hai.

"ouiiiiiiiii.....haiiiiiiiiiiiiiiiii......uunnnnhhhhhhhhhh......haaaaaaaaaaannnnnnnn..!",vijayant ke gehrre dhakko ke kamal se kamar uchkati apne sar ke neeche ke bistar ki chadar ko bechaini se nochti rambha jhad rahi thi & uski dayi tang ko uthaye us se honth chipkaye vijayant bhi jhade ja raha tha.lund thoda sikuda to vijayant ne use bahar khincha.lund khinchte hi uska gadha virya rambha ki chut se tapak uski gand ke chhed tak girne laga.

vijayant ne fauran apne sath layi 1 dibiya ko khola & usme se 1 cream apni ungli pe lagayi & fir apne virya & us cream ko rambha ki gand ke chhed me bahrne laga.jhadne se madhosh rambha kamar uchkate hue fir se bechain hone lagi.uska sasur uski gand me ungli kar raha tha & use ajib sa maza aa raha tha.

"na...mat kariye,dad..aannhhhh..!",rambha ne baye hath se uski kalai tham use rokne ki nakaam koshish ki.vijayant uske dayi taraf ho gaya & uske taraf apni gand kar uski jangho ko faila upar se uski chut chaatata uski gand me ungli karne laga.rambha ne madhoshi me sar idhar-udhar ghumaya & puar jism ghuma pet ke bal ho gayi.usne bayi taraf sar ghumaya to use vijayant ka sikuda lund latka dikha jis se abhi bhi virya ki kuchh bunde tapak rahi thi.

rambha ne hath badha ke lund ko pakda & thoda uchak ke sikude lund ko chusne lagi.vijayant ab uski gand ki darar me jibh firata uski gand ki chhed me cream bharte hue ungli kiye ja raha tha.vo rambha ki gand ke kase chhed ko thoda dhila kar dena chahta tha taki uske mote lund ko ghusne me aasani ho.jab rambha bechain ho kamar hilane lagi & uski zuban ne uske sikude lund ko fir se khada kar diya to usne rambha ki gand se ungli nikali & uski kamar tham gand ko hawa me utha uske peechhe aa gaya.

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"hello.",Balbir ne dekha ki banker se baatchit ke beech Brij Kothari ne apne mobile pe 1 call li & uske chehre ka rang thoda badal gaya.

"excuse me.",vo apni mez se utha & andar bathroom ki or jane laga.balir bhi uske peechhe ho liya.brij toilet me ghusa & 1 cubicle me ghusa darwaza band kiya.balbir uske sath vale cubicle me dabe panv ghusa.

"tum pichhle 6-7 dino se mujhe fone kar ke pareshan rahe ho.aakhir chahte kya ho tum?",ye shakhs roz brij ko fone karta tha har baar number badal ke & har baar 1 hi baat ki kya use apne dushman ko maza chakhana hai.

"brij babu,aap clayworth ke paas jo Dhardar jharne hain vaha pahuncho & mera yakin mano ki aapko aapki zindagi ka sabse bada tohfa milega vaha.kal savere 4 baje tak kisi bhi haalat me vaha pahunch jao magar bilkul akele agar koi bhi sath aaya to mujhe pata chal jayega & tumhara tohfa tumhe nahi milega."

"magar..",fone kat gaya tha.

balbir ne udhar vale anjan shakhs ki baat to nahi suni magar ye samajh gaya ki brij pareshan hai.brij ka dimagh badi tezi se chal raha tha & apna khana khatm hone tak uusne faisla kar liya tha ki vo Dhardar falls zarur jayega.khana khatm hote hi vo apne daftar gaya & vahi se apni car me akela clayworth ke liye nikal pada.balbir uske peechhe hi tha.

"hello,Soniya.main clayworth ja raha hu kisi kaam se lekin tum kisi ko ye baat mat batana mere office valo ko bhi nahi.sab thik raha to kal laut aaoonga."

"lekin darling..-"

"aaj kuchh mat puchho jaan.kal sab bataunga.bye!",brij ne fone rakha & car drive karne laga.udahr ghar me akeli baithi soniya ka dil na jane kyu bahut zor se dhadakne laga,use laga ki kuchh bura hone wala hai.

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"AAIIIIIIIYYYYYYYYYYEEEEEEEEEE...please mat daliye..bahut bada hai aapka lund....HAAAAAAAAAAIIIIIIIIIIIIIII..!",vijayant ke mote supade ne rambha ki gand ke chhote se surakh ko bahut buri tarah faila diya tha & vo chikh rahi thi.

"bas ho gaya meri rani!....ye lo...chala gaya......aahhhhhhhhhh..!",vijayant ne supade ke peechhe cream & virya se chikni gand me aadha lund ghusa diya.vo janta tha ki iske aage ghusana uski pyari bahu ke liye bahut taklifdeh ho sakta hai.rambha ki gand ne to uske lund ko bilkul jakad liya tha & har dhakke pe maze ki vajah se uski aah nikal jati thi.vo uski fanko ko masalte hue uski gand maar raha tha & rambha ab dard se kam & josh se zyada chikh rahi thi.

"uummmmmmm.....!",vo apne hath ko apne munh me ghusa apni hi ungliya masti me chuse ja rahi thi.vijayant ne daya hath uski kamar se aage uski chut pe sarkaya & uske dane ko chhedne laga & baye ko aage badha uski bhari-bharkam lekin kasi chhatiyo ko masal diya.

"aannnnnhhhhhh..bahut zalim hain aap dad!..oooowwwwwwww..!",vijayant ne uske nipple pe chikoti kaat li,"..apni bahu ko kitna dard pahuncha rahe hain.....aannnnhhhhhhh......haaaannnnnnhhhhhh..!",vijayant aage jhuka & uski pith se apni chhati satate hue uske baye kaan ko kaat liya.

"kaho to nikal lu lund bahar.",uski ungli dane pe tezi se gol-2 ghum rahi thi.

"uunnnn..nahi.....usne bayi tafa munh ghuma ke baye hath se unke baal pakad ke khinch ke unhe badi shiddat se chuma,"..bas tadpana hai mujhe..hai na?....haiiiiiiii..!",vijayant ne dhakke lagate hue use puri tarah se bistar pe lita diya tha & ab uske uapr let ke halke-2 aadhe lund ke dhakke laga raha tha.

"haaaaaaannnnnnnn..mariye......& mariye apni bahu ki gand..aap hi ki hai ye dad......haaaaannnnnnnnnn......!",rambha uske neeche dabi chhatpatane lagi thi & uski gand ne vijayant ke lund ko aur kas liya tha.

"aahhhhhhhh.......rambha..!",vijayant ne chikh mari & bahu ke jhadte hi uski gand me apna gadha virya chhod diya.

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"vijayant darling?"

"soniya?",vijayant abhi bhi rambha ke upar leta tha & uska lund uski gand me sikud raha tha.

"vijayant,kuchhh batana hai tumhe."

"haan-2.bolo."

"abhi-2 brij clayworth gaya hai akela."

"to?"

"vijayant..",soniya ro rahi thi.

"ro mat soniya..ghabrao mat..main tumhe kuchh nahi hone dunga.",rambha gaur se sasur ki baat sun rahi thi,"..brij clayworth gaya hai..kisliye gaya hai?",..uska sasur brij kothari ki biwi ko janta tha..rambha hairan ho gayi..,"..soniya..jaan..please chup ho jao..& sari baat batao."..hain!..jaan..baap re!..ye to bada pahuncha khiladi hai..dushman ki biwi ko phansa rakha hais isne!

"vijayant..vijayant..mujhe lagta hai ki..",soniya rone lagi,"..mujhe lagta hai ki sameer ki gumshudgi me brij ka hath hai.",uski rulayi & tez ho gayi.

"kya?!"

"haan..bas yehi batana tha.bye!",usne fone kaat diya,"..i'm sorry,brij!",side-table pe rakhi pati ki tasvir ko dekh uski rulayi & tez ho gayi.

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vijayant uski gand se lund khinch ab headbord se tek lagake paira faialake baitha hua kuchh soch raha tha.rambha ne abhi us se kuchh puchhna thik nahi samjha.vo uske dayi taraf let gayi & dayi banh uske jism pe daal di & aaj din ke bare me sochne lagi.sasur ke sath is mastane rishte ki shuruat ke baad aaj pehli baar dono me thodi kaha-suni hui thi & vijayant ne use dant diya tha.

rambha ka maanana tha ki Harpal ki behan Hina se mil ke kuchh hasil nahi hona tha ulte vo savdhan ho jata & shayad Sameer ko kuchh nuksan pahuncha deta.isi baat pe behas hui & vijayant ne use dant diya.uska maanana tha ki harpal jaise log chuhe hote hain & unhe pata chalne me koi harz nahi ki ab unhe marne ke liye log mustaid ho chuke hain & jaha tak sameer ka saval ho,agar uski kismat kharab hui to ho sakta hai abhi unhe uski lash bhi na mile.

rambha ko sameer se koi gehri mohabbat nahi thi lekin sameer to us se mohabbat karta tha.uske liye usne apni daulat,apna khandan thukra diya tha & uske is jazbe ki vo kadr karti thi.use apne sasur ki baat bahut buri lagi thi.vo uske kehne pe Avantipur me Hina se mil aayi.hina ne bhi pichhle & dino se bhai se baat nahi ki thi & usne rambha ke samne use fone lagaya lekin fone nahi mila.hina use nirdosh lagi thi & usne use bhai ki koi bhi khabar milne pe use batane ko kaha tha.

clayworth tak ke sare raste usne vijayant se koi baat nahi ki thi & apni narazgi zahir kar di thi lekin uska sasur bhi kamal ka mard tha!ruthi mehbooba ko bina 1 bhi lafz bole na keval usne mana liya tha balki uski gand bhi maar li thi!itna vo samajh rahi thi ki sameer ke bare me koi surag mila hai & shayad sare mamle ke taar brij se jude hain.

tabhi vijayant ka mobile dobara baja.usne number dekha & chaunk gaya,"sameer!",usne rambha ki or dekh ke kaha to vo bhi uth baithi,"hello,sameer?"

"mehra,tumhare liye 1 tohfa hai.bas abhi 4 baje tak dhardar falls pe pahuncho.bilkul akele aana varna tohfa nuksan me pad sakta hai."

"hello..!..hello..!",fone kat gaya tha.

"kya hua?",rambha ne sasur ke chehre pe hath firaya.

"koi sameer ke mobile se fone karke mujhe dhardar falls bula raha hai savere 4 baje."

"to chaliye & police ko bhi khabar kar deta hain."

"nahi.muhe akele bulaya hai nahi to sameer ko nuksan pahuncha sakte hain vo."

"magar aap akele bhi to khatre me pad sakte hain,dad..please mujhe le chaliye."

"nahi,tumhe khatre me nahi daal sakta & na hi sameer ko.",vijayant bistar se uth gaya,"..main akela jaunga & use le aaoonga.",sasur ki bhari aavaz ke vajan ke aage rambha ko kuchh aur bolne ki himmat nahi hui.

Vijayant Mehra apne kamre me jake Dhardar Falls jane ki taiyyari karne laga.Rambha apne kamre me hi thi & vo shakhs teesre kamre me chhipa vijayant ke jane ka intezar kar raha tha.vo shakhs jis kamre me tha usme ghup andhera tha & itni der ho jane ke baad bhi uski aankhe andhere ki adi nahi ho payi thi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--36

गतान्क से आगे.

"मैं जा रहा हू,तुम अंदर से दरवाज़ा बंद रखना.बाहर गार्ड को भी बोल जाउन्गा की मुस्तैद रहे."

"ठीक है.वैसे क्या हमे पोलीस को नही बता देना चाहिए?",रंभा ससुर के कोट के कॉलर पे उंगली फिरा रही थी.

"हां,मैं वाहा पहुँच के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफीसर को खबर दूँगा..-"

"तन्णन्न्..!",विजयंत & रंभा निचली मंज़िल पे बने हाल से बाहर जाने वाले मैं दरवाज़े पे खड़े बातें कर रहे थे कि उपर कुच्छ गिरने की आवाज़ आई.

"कौन है?!",विजयंत चीखा,"..रंभा,सारी बत्तियाँ जलाओ!",वो सीढ़ियाँ फलंगता उपर भागा.

"धात तेरे की!",खामोशी हो जाने की वजह से वो शख्स कमरे से बाहर निकल के वाहा का जायज़ा लेने की सोच ही रहा था की कमरे के बाहर रखे पीतल के बड़े से सजावटी वेस से वो टकरा गया & वो ज़ोर की आवाज़ करता गिरा.रंभा ने बत्तियाँ जलानी शुरू की & वो शख्स उधर ही भागा जिधर से आया था.

"आए!रुक!",विजयंत ने उस शख्स को अपने कमरे मे घुसते हुए,उसकी पीछे से बस 1 झलक देखी.वो शख्स दौड़ता हुआ बाल्कनी मे पहुँचा & जिस दरवाज़े का शीशा तोड़ अंदर घुसा था उसी से बाहर निकला & उसे बाहर से बंद कर भागा.

"साले..!रुक..!",विजयंत ने कंधे से धक्के मार दरवाज़े को खोलना चाहा & 2-3 धक्को मे वो कामयाब हो गया.इधर रंभा ने बाहर भाग के दरबान को आगाह किया तो उसने दिमाग़ लगाते हुए बुंगले के पीछे की ओर दौड़ लगाई.जब तक विजयंत बाल्कनी मे आया & दरबान पीछे पहुँचा,वो शख्स दूसरी तरफ से घूम बंगल के मेन गेट तक पहुँच गया था.

"हेयययी..!",रंभा चीखी,वो अभी तक बंगल के सामने की तरफ ही थी.वो शख्स घुमा & रंभा ने उसके चेहरे पे वही निशान देखा & देखी उसकी नफ़रत से भरी आँखे.वो शख्स घुमा & फुर्ती से गेट पे चढ़ उसे फाँद गया.बगल के बंगल का चौकीदार शोरॉगुल सुन बाहर आ ही रहा था कि उस शख्स ने उसे करारा घूँसा उसके जबड़े पे जमाया & बंगल के पिच्छली तरफ भागा & वही से अपनी कार मे सवार हो निकल भागा.

"@#!$%^&*&..साला..!",वो गालिया बकता गाड़ी को वाहा से भगाए जा रहा था.वो मंज़िल के इतने करीब पहुँच नाकाम होके लौट रहा था.

"ये आदमी अंदर घुसा कैसे?",विजयंत की रोबदार आवाज़ ने दरबान का खून जमा दिया.

"प-पता नही साहब..म-मैं तो जगा था & यहा से तो कोई नही घुसा."

"ये ठीक कह रहा है.जब मैं इसे बुलाने निकली तो ये हंगामा सुन इधर ही आ रहा था.",रंभा को उस बेचारे पे तरस आ गया.वो समझ रही थी कि वो सच कह रहा है.

"आप पोलीस को खबर कर दीजिए प्लीज़."

"हूँ.",विजयंत ने जेब से मोबाइल निकाला & पहले समीर का केस देख रहे अफ़सर की नींद खराब की & फिर क्लेवर्त की पोलीस की,"..अब मैं जा रहा हू.कही देर ना हो जाए."

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ब्रिज कोठारी कोई कच्चा खिलाड़ी तो था नही & बलबीर मोहन की लाख होशियारी के बावजूद उसने भाँप लिया कि वो उसका पीछा कर रहा है.आज उसने सोच ही लिया था कि इस फोन की गुत्थी सुलझा के ही रहेगा.वो रात भर गाड़ी चलाके अब आवंतिपुर से आगे आ गया था & अब मौका था उसका पीछा कर रहे शख्स को चकमा देने का.

उसने कार की रफ़्तार बिना कम किए अचानक उसे बाई तरफ 1 कच्चे रास्ते पे उतार दिया.बलबीर चौंक गया & वो उस रास्ते से आगे बढ़ गया.उसने फ़ौरंम ब्रेक लगाया & वापस आया.उस कच्चे रास्ते पे उतर वो आयेज बढ़ा लेकिन उसे ब्रिज की कार नज़र नही आ रही थी.ब्रिज इस इलाक़े से अच्छी तरह से वाकिफ़ था & उसने फ़ौरन कार को आगे ले जाके वापस मेन रोड की तरफ घुमाया & फिर मैं रोड पार कर दूसरी तरफ के कच्चे रास्ते पे उतार दिया.उस रास्ते से होके वो फिर से थोडा आगे मेन रोड पे आया & फिर कार तेज़ी से क्लेवर्त की ओर भगा दी.जब तक बलबीर मोहन ने उसकी तरकीब समझी तब तक वो बहुत आगे निकल चुका था.

अब बलबीर मोहन को ये तो पता था नही कि ब्रिज जा कहा रहा है.वो आगे बढ़ने लगा लेकिन उसने सोचा की अब विजयंत को इस बारे मे बता देना चाहिए.विजयंत वक़्त से पहले ही झरने पे पहुच जाना चाहता था & वो अपनी कार टेढ़े-मेधे पहाड़ी रास्ते पे चला रहा था जब बलबीर का फोन आया.

"वो क्लेवर्त आ रहा है,बलबीर."

"आपको कैसे पता,मिस्टर.मेहरा?",विजयंत ने उसे फोन & घर मे घुसे आदमी वाली बातें बता दी.

"मिस्टर.मेहरा,आप प्लीज़ अकेले मत जाइए.पोलीस का या मेरे आने का इंतेज़ार कीजिए."

"मेरे बेटे का सवाल है,बलबीर!..मैं कोई ख़तरा नही ले सकता.",उसने फोन काट दिया.

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धारदार फॉल्स सैलानियो के बीच बहुत मशहूर था & वाहा तक पहुँचने के लिए 1 पक्का पैदल रास्ता था.नीचे कार पार्किंग मे गाड़ी लगा लोग उपर जाते थे & झरने के नीचे नहाने या फीओर आस-पास के खूबसूरत नज़ारे का लुत्फ़ उठाते थे.विजयंत वही खड़ा फोन करने वाले का इंतेज़ार कर रहा था कि तभी उसे दूर से कोई आता दिखा.

अभी उजाला होना शुरू नही हुआ था & उस अंधेरे मे उसे उस आदमी की शक्ल नही दिखी.हां,उसने ये ज़रौर भाँप लिया कि कद-काठी उसी के जैसी थी.उसकी चाल उसे जानी-पहचानी लगी.शायद अस आदमी ने भी उसे देख लिया & ठिठक गया.

ब्रिज ने दूर खड़े आदमी को पहचानना चाहा मगर उसे भी कुच्छ सॉफ नही दिखा.वो आगे बढ़ा की तभी उसके पैरो से कोई चीज़ आ टकराई.ऐसा लगता था जैसे किसी ने कुच्छ फेंका था उसके पैरो पे.उसने उसे उठाया तो वो कोई पॅकेट था.उसके हाथ मे कुच्छ गीला महसूस हुआ तो उसने पॅकेट को चेहरे के पास किया & फिर ऐसे दूर फेका जैसे वो कोई बड़ी ख़तरनाक चीज़ है.

ब्रिज ने सामने खड़े इंसान को देखा & सब समझ गया.ये किसी की साज़िश थी उसे फँसाने की & वो भी बेवकूफो की तरह इस जाल मे फँसता चला आया था.वो सामने खड़ा इंसान मेहरा था & उस पॅकेट मे कोई कपड़ा था जिसपे खून लगा था.ब्रिज उल्टे पाँव भागा.

विजयंत ने दूर खड़े इंसान को वो कपड़ा फेंकते देख सोचा की वो वो पॅकेट उसकी ओर फेंका रहा है.वो आगे बढ़ा & उस पॅकेट को उठाया & उसे खोल के देखा.अंदर खून के धब्बो वाली 1 कमीज़ थी.

1 पल को ब्रिज ने सोचा कि मेहरा को सब बता दे लेकिन उसे पता था कि मेहरा उसपे कभी यकीन नही करेगा & फिर ये भी तो हो सकता था की ये मेहरा की ही कोई चाल हो उसे फँसाने की.ब्रिज अपनी कार तक पहुँचा & उसे स्टार्ट कर वाहा से निकल गया.चाहे कुच्छ भी हो उसे आवंतिपुर पहुँचना था अपने होटेल & फिर वाहा से वापस डेवाले.

"कामीने..!",विजयंत बुदबुडाया.उसे समझ आ गया था की उस शख्स की कद-कती,चल-ढाल उसे क्यू जाने-पहचाने लगे थे.वो & कोई नही उसका दुश्मन कोठारी था.उसने पॅकेट को टटोला तो अंदर 1 छ्होटे से प्लास्टिक पॅकेट मे कंप्यूटर पे टाइप किया 1 खत था.

"मेहरा

ये खून तुम्हारे बेटे का है मगर घबराओ मत उसकी जान ख़तरे मे नही है.थोड़ी खरॉच आई थी उसे तो सोचा कि उस खरॉच को & कुरेद कर उसी के खून को सबूत के तौर पे तुम्हे भेजा जाए.ये कमीज़ भी उसी की है ताकि तुम्हे पक्का यकीन हो जाए की ये खत सच्चा है.

मेहरा,तुम कुच्छ दिन कोई नया काम ना करो तो तुम्हारा बेटा सही-सलामत तुम्हारे पास पहुँच जाएगा.ये बात लिख के दे दो की तुम अगले 6 महीनो तक कोई नया टेंडर लेने की कोशिश नही करोगे तो समीर तुम्हे लौटा दिया जाएगा वरना ये हो सकता है कि अगली बार खून के साथ-2 तुम्हारे प्यारे बेटे के जिस्म का कोई टुकड़ा भी तुम्हे भेजना पड़े."

खत पढ़ते ही विजयंत गुस्से से भर उठा.कुच्छ आवाज़ें सुनी तो उसने देखा की पोलिसेवाले वाहा आ रहे हैं.उसने पॅकेट थामा & उनकी ओर बढ़ गया.

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रंभा ने चाइ बनाई & 1 प्याला ले हॉल मे बैठ गयी.उस शख्स की शक्ल उसकी आँखो के सामने से हट नही रही थी & उनकी आँखो मे वो नफ़रत!..था कौन वो & इतनी नफ़रत से क्यू देखा था उसने उसको?..वो समझ नही पा रही थी की आख़िर समीर किस मुसीबत मे & क्यू फँस गया था?

वो शख्स घर मे किस इरादे से घुसा था?..उसने बंगल मे घूम रहे पोलिसेवालो को देखा.उसने उनके लिए भी चाइ बनाके हॉल के डाइनिंग टेबल पे रख दी थी & वो सब अपने-2 प्याले उठा रहे थे.

"मेडम..",थानेदार उसके पास आके बैठ गया,"..आपके ससुर के कमरे के बाल्कनी के दरवाज़े का काँच टूटा हुआ है.वो आदमी वही से घुसा था लेकिन सवाल ये है की उस वक़्त आपके ससुर कहा थे?",रंभा का दिल धड़क उठा..यानी की वो तब घुसा था जब वो विजयंत से चुद रही थी..कही उसने उन दोनो की चुदाई तो नही देख ली थी!

"मेडम..आपने जवाब नही दिया."

"हूँ..हां....देखिए,रात को 10 बजे के करीब हम दोनो अपने-2 कमरो मे सोने चले गये,उसके बाद मेरे ससुर ने मुझे 1 बजे जगाया & उस फोन का बारे मे बताया..",अभी तक थानेदार को पंचमहल पोलीस से समीर के केस के बारे मे भी जानकारी मिल गयी थी,"..हम दोनो मेरे कमरे मे ही बैठ के उस सिलसिले मे बातें करने लगे."

"आपलोगो ने कोई आवाज़ नही सुनी?"

"नही..",सुनते भी कैसे दोनो को फ़ुर्सत कहा थी 1 दूसरे के जिस्मो से खेलने से,"..हम उस फोन के बारे मे सुनके बहुत चिंतित हो गये थे."

"हूँ.",थानेदार उसे देखते हुए चाइ पीता रहा.

जब रात वियजयंत मेहरा & रंभा क्लेवर्त के बुंगले मे 1 दूसरे की बाहो मे समाए थे & ब्रिज कोठारी तेज़ी से धारदार फॉल्स जा रहा था,उस वक़्त रीता अपने कमरे मे अपने बिस्तर पे लेटी हल्के सरदर्द से परेशान अपना माथा सहला रही थी.समीर की गुमशुदगी का राज़ उसे भी समझ नही आ रहा था.पहले तो उसने सोचा था कि वो किसी हादसे का शिकार हो गया लेकिन अब उसे भी लग रहा था कि वो किसी साज़िश का शिकार हुआ है.वो इन्ही ख़यालो मे खोई थी की दरवाज़े पे दस्तक हुई.

"कौन है?"

"मैं,प्रणव."

"आ जाओ,बेटा.",वो उठ के बैठ गयी.

"क्या हुआ,मोम..तबीयत ठीक नही क्या?"

"नही,ठीक है.हल्का सरदर्द है."

"लाइए मैं दबा दू.",प्रणव उसके बाई तरफ बैठ गया & उसका सर दबाने लगा.

"अरे नही बेटा..ठीक है..तुम मत परेशान हो!",उसने उसका हाथ पकड़ हटाने की कोशिश की.

"क्यू?मैं नही दबा सकता क्या?..चलिए दबाने दीजिए.",प्रणव ने उसका हाथ हटाया & उसकी निगाह 1 पल को रीता के पतले स्ट्रॅप्स वाले नाइट्गाउन के गले पे चली गयी.रीता का दूधिया क्लीवेज हाथ उठाने-गिरने से छल्छला रहा था.उसने तुरंत नज़रे फेर ली लेकिन रीता ने उसे देख लिया था.

उसे थोड़ी शर्म आई & उसके गाल लाल हो गये लेकिन साथ ही उसे थोडा अच्छा भी लगा.प्रणव चुप-चाप उसका सर दबा रहा था & रीता भी नही समझ पा रही थी कि क्या बोले.

"शिप्रा कहा है?",उसने सवाल कर वो असहज चुप्पी तोड़ी.

"उसकी किसी सहेली की हें पार्टी थी.मैने उसे वही भेजा है.वो तो जाना नही चाह रही थी.मैने इसरार किया की जाएगी तो दिल बहलेगा."

"अच्छा किया.उसे भी परेशानी से राहत तो मिलनी ही चाहिए."

"& आपको?",प्रणव बिस्तर पे थोड़ा उपर हो गया था & उसका सर दबा रहा था.

"मैं तो ठीक हू."

"प्लीज़ मोम,झूठ मत बोलिए.आप आजकल अकेली बैठी रहती हैं & ना जाने क्या-2 सोचती रहती हैं.",रीता ने फीकी हँसी हँसी & प्रणव के हाथ हटा दिए & बिस्तर से उतरने लगी.उसका गाउन बिस्तर & उसके जिस्म के बीच फँस उसके घुटनो से उपर हो गया & प्रणव ने सास की गोरी टाँगे देखी.उसे पहली बार ये एहसास हुआ कि उसकी सास उम्र से कम दिखती थी & उसका जिस्म अभी बहुत ढीला नही पड़ा था.रीता ने जल्दी से गाउन ठीक किया & जाके कमरे की खिड़की पे खड़ी हो गयी.

"प्लीज़ मोम.संभालिए खुद को.",प्रणव उसके पीछे गया & उसके कंधो पे हाथ रख दिए.उसने ऐसा करने का सोचा नही था पर उसका दिल रीता के रेशमी जिस्म को छुना चाह रहा था.उसके हाथो के एहसास से रीता के जिस्म मे सनसनी दौड़ गयी लेकिन प्रणव का साथ उसे भला लग रहा था.प्रणव उसके कंधो को हल्के-2 दबाने लगा था.रीता ने आँखे बंद कर ली & उस छुअन के एहसास मे खोने लगी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--36

gataank se aage.

"main ja raha hu,tum andar se darwaza band rakhna.bahar guard ko bhi bol jaunga ki mustaid rahe."

"thik hai.vaise kya hume police ko nahi bata dena chahiye?",rambha sasur ke coat ke collar pe ungli fira rahi thi.

"haan,main vaha pahunch ke investigating officer ko khabar dunga..-"

"tannnn..!",vijayant & rambha nichli manzil pe bane hal se bahar jane vale main darwaze pe khade baaten kar rahe the ki upar kuchh girne ki aavaz aayi.

"kaun hai?!",vijayant chikha,"..rambha,sari battiyan jalao!",vo seedhiyan falangta upar bhaga.

"dhat tere ki!",khamoshi ho jane ki vajah se vo shakhs kamre se bahar nikal ke vaha ka jayza lene ki soch hi raha tha ki kamre ke bahar rakhe pital ke bade se sajawati vase se vo takra gaya & vo zor ki aavaz karta gira.rambha ne battioyan jalani shuru ki & vo shakhs udhar hi bhaga jidhar se aaya tha.

"aye!ruk!",vijayant ne us shakhs ko apne kamre me ghuste hue,uski peechhe se bas 1 jhalak dekhi.vo shakhs daudta hua balcony me pahuncha & jis darwaze ka shisha tod andar ghusa tha usi se bahar nikla & use bahar se band kar bhaga.

"sale..!ruk..!",vijayant ne kandhe se dhakke maar darvaze ko kholna chaha & 2-3 dhakko me vo kamyab ho gaya.idhar rambha ne bahar bhag ke darban ko aagah kiya to usne dimagh lagate hue bungle ke peechhe ki or daud lagayi.jab tak vijayant balcony me aaya & darban peechhe pahuncha,vo shakhs dusri taraf se ghum bungle ke main gate tak pahunch gaya tha.

"heyyyy..!",rambha chikhi,vo abhi tak bungle ke samne ki taraf hi thi.vo shakhs ghuma & rambha ne uske chehre pe vahi nishan dekha & dekhi uski nafrat se bhari aankhe.vo shakhs ghuma & furti se gate pe chadh use phand gaya.bagal ke bungle ka chaukidar shorogul sun bahar aa hi raha tha ki us shakhs ne use karara ghunsa uske jabde pe jamaya & bungle ke pichhli taraf bhaga & vahi se apni car me savar ho nikal bhaga.

"@#!$%^&*&..sala..!",vo galiya bakta gadi ko vaha se bhagaye ja raha tha.vo manzil ke itne karib pahunch nakaam hoke laut raha tha.

"ye aadmi andar ghusa kaise?",vijayant ki robdar aavaz ne darban ka khun jama diya.

"p-pata nahi sahab..m-main to jaga tha & yaha se to koi nahi ghusa."

"ye thik keh raha hai.jab main ise bulane nikli to ye hungama sun idhar hi aa raha tha.",rambha ko us bechare pe taras aa gaya.vo samajh rahi thi ki vo sach keh raha hai.

"aap police ko khabar kar dijiye please."

"hun.",vijayant ne jeb se mobile nikala & pehle Sameer ka case dekh rahe afsar ki nind kharab ki & fir Clayworth ki police ki,"..ab main ja raha hu.kahi der na ho jaye."

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Brij Kothari koi kachcha khiladi to tha nahi & Balbir Mohan ki lakh hoshiyaro ke bavjud usne bhanp liya ki vo uska peechha kar raha hai.aaj usne soch hi liya tha ki is fone ki gutthi suljha ke hi rahega.vo raat bhar gadi chalake ab Avantipur se aage aa gaya tha & ab mauka tha uska peechha kar rahe shakhs ko chakma dene ka.

usne car ki raftar bina kam kiye achanak use bayi taraf 1 kachche raste pe utar diya.balbir chaunk gaya & vo us raste se aage badh gaya.usne fauranm brake lagaya & vapas aaya.us kachche raste pe utar vo aage badha lekin use brij ki car nazar nahi aa rahi thi.brij is ialke se achhi tarah se vakif tha & usne fauran car ko aage le jake vapas main road ki taraf ghumaya & fir main road paar kar dusri taraf ke kacche raste pe utar diya.us raste se hoke vo fir se thoda aage main road pe aaya & fir car tezi se clayworth ki or bhaga di.jab tak balbir mohan ne uski tarkib samjhi tab tak vo bahut aage nikal chuka tha.

ab balbir mohan ko ye to pata tha nahi ki brij ja kaha raha hai.vo aage badhne laga lekin usne socha ki ab vijayant ko is bare me bata dena chahiye.vijayant waqt se pehle hi jharne pe pahucnh jana chahta tha & vo apni car tedhe-medhe pahadi raste pe chala raha tha jab balbir ka fone aaya.

"vo clayworth aa raha hai,balbir."

"aapko kaise pata,mr.mehra?",vijayant ne use fone & ghar me ghuse admi vali baaten bata di.

"mr.mehra,aap please akele mat jaiye.police ka ya mere aane ka intezar kijiye."

"mere bete ka sawal hai,balbir!..main koi khatra nahi le sakta.",usne fone kaat diya.

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dhardar falls sailaniyo ke beech bahut mashur tha & vaha tak pahunchne ke liye 1 pakka paidal rasta tha.neeche car parking me gadi laga log upar jate the & jharne ke neeche nahane ya fior aas-paas ke khubsurat nazare ka lutf uthate the.vijayant vahi kahda fone karne vale ka intezar kar raha tha ki tabhi use door se koi aata dikha.

abhi ujala hona shuru nahi hua tha & us andhere me use us aadmi ki shakl nahi dikhi.haan,usne ye zaraur bhanp liya ki kad-kathi usi ke jaisi thi.uski chaal use jani-pehchani lagi.shayad uis aadmi ne bhi use dekh liya & thithak gaya.

brij ne door khade aadmi ko pehchanana chaha magar use bhi kuchh saaf nahi dikha.vo aage badha ki tabhi uske pairo se koi chiz aa takrayi.aisa lagta tha jaise kisi ne kuchh fenka tha uske pairo pe.usne use uthaya to vo koi packet tha.uske hath me kuchh gila mehsus hua to usne packet ko chehre ke paas kiya & fir aise door pehnka jaise vo koi badi khatarnak chiz hai.

brij ne samne khade insan ko dekha & sab samajh gaya.ye kisi ki sazish thi use fansane ki & vo bhi bevkufo ki tarah is jaal me phansta chala aaya tha.vo samne khada insan mehra tha & us packet me koi kapda tha jispe khoon laga tha.brij ulte panv bhaga.

vijayant ne door khade insan ko vo kapda fenklte dekh socha ki vo vo packet uski or fenka raha hai.vo aage badha & us packet ko uthaya & use khol ke dekha.andar khun ke dhabbo vali 1 kamiz thi.

1 pal ko brij ne socha ki mehra ko sab bata de lekin use pata tha ki mehra uspe kabhi yakin nahi karega & fir ye bhi to ho sakta tha ki ye mehra ki hi koi chaal ho use phansane ki.brij apni car tak pahuncha & use start kar vaha se nikal gaya.chahe kuchh bhi ho use avantipur pahunchana tha apne hotel & fir vaha se vapas Devalay.

"kamine..!",vijayant budbudaya.use samajh aa gaya tha ki us shakhs ki kad-kathi,chal-dhal use kyu jane-pehchane lage the.vo & koi nahi uska dushman kothari tha.usne packet ko tatola to andar 1 chhote se plastic packet me computer pe type kiya 1 khat tha.

"mehra

ye khun tumhare bete ka hai magar ghabrao mat uski jaan khatre me nahi hai.thodi kharoch aayi thi use to socha ki us kharoch ko & kured kar usi ke khun ko saboot ke taur pe tumhe bheja jaye.ye kamiz bhi usi ki hai taki tumhae pakka yakin ho jaye ki ye khat sachcha hai.

mehra,tum kuchh din koi naya kaam na karo to tumhara beta sahi-salamat tumhare paas pahunch jayega.ye baat likh ke de do ki tum agle 6 mahino tak koi naya tender lene ki koshish nahi karoge to sameer tumhe lauta diya jayega varna ye ho sakta hai ki agli baar khun ke sath-2 tumhare pyare bete ke jism ka koi tukda bahi tumhe bhejna pade."

khat padhte hi vijayant gusse se bhar utha.kuchh avazen suni to usne dekha ki policevale vaha aa rahe hain.usne packet thama & unki or badh gaya.

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rambha ne chai banayi & 1 pyala le hall me baith gayi.us shakhs ki shakl uski aankho ke samne se hat nahi rahi thi & unki aankho me vo nafrat!..tha kaun vo & itni nafrat se kyu dekha tha usne usko?..vo samajh nahi pa rahi thi ki aakhir sameer kis musibat me & kyu phans gaya tha?

vo shakhs ghar me kis irade se ghusa tha?..usne bungle me ghum rahe policevalo ko dekha.usne unke liye bhi chai banake hall ke dining table pe rakh di thi & vo sab apne-2 pyale utha rahe the.

"madam..",thanedar uske paas aake baith gaya,"..aapke sasur ke kamre ke balcony ke darwaze ka kanch tuta hua hai.vo admi vahi se ghusa tha lekin sawal ye hai ki us waqt aapke sasur kaha the?",rambha ka dil dhadak utha..yani ki vo tab ghusa tha jab vo vijayant se chud rahi thi..kahi usne un dono ki chudai to nahi dekh li thi!

"madam..aapne jawab nahi diya."

"hun..haan....dekhiye,raat ko 10 baje ke karib hum dono apne-2 kamro me sone chale gaye,uske baad mere sasur ne mujhe 1 baje jagaya & us fone ka bare me bataya..",abhi tak thanedar ko Panchmahal police se sameer ke case ke bare me bhi jankari mil gayi thi,"..hum dono mere kamre me hi baith ke us silsile me baaten karne lage."

"aaplogo ne koi aavaz nahi suni?"

"nahi..",sunte bhi kaise dono ko fursat kaha thi 1 dusre ke jismo se khelne se,"..hum us fone ke bare me sunke bahut chintit ho gaye the."

"hun.",thanedar use dekhte hue chai pita raha.

Jab raat Viajyant Mehra & Rambha Clayworth ke bungle me 1 dusre ki baaho me samaye the & Brij Kothari tezi se Dhardar Falls ja raha tha,us waqt Rita apne kamre me apne bistar pe leti halke sardard se pareshan apna matha sehla rahi thi.sameer ki gumshudgi ka raaz use bhi samajh nahi aa raha tha.pehle to usne socha tha ki vo kisi hadse ka shikar ho gaya lekin ab use bhi lag raha tha ki vo kisi sazish ka shikar hua hai.vo inhi khayalo me khoi thi ki darwaze pe dastak hui.

"kaun hai?"

"main,Pranav."

"aa jao,beta.",vo uth ke baith gayi.

"kya hua,mom..tabiyat thik nahi kya?"

"nahi,thik hai.halka sardard hai."

"laiye main daba du.",pranav uske bayi taraf baith gaya & uska sar dabane laga.

"are nahi beta..thik hai..tum mat pareshan ho!",usne uska hath pakad hatane ki koshish ki.

"kyu?main nahi daba sakta kya?..chaliye dabane dijiye.",pranav ne uska hath hataya & uski nigah 1 pal ko rita ke patle straps vale nightgown ke gale pe chali gayi.rita ka doodhiya cleavage hath uthane-girane se chhalchhala raha tha.usne turant nazre fer li lekin rita ne use dekh liya tha.

use thodi sharm aayi & uske gaal laal ho gaye lekin sath hi use thoda achha bhi laga.pranav chup-chap uska sar daba raha tha & rita bhi nahi samajh pa rahi thi ki kya bole.

"Shipra kaha hai?",usne sawal kar vo asahaj chuppi todi.

"uski kisi saheli ki hen party thi.maine use vahi bheja hai.vo to jana nahi chah rahi thi.maine israr kiya ki jayegi to dil bahlega."

"achha kiya.use bhi pareshani se rahat to milni hi chahiye."

"& aapko?",pranav bistar pe thoda upar ho gaya tha & uska sar daba raha tha.

"main to thik hu."

"please mom,jhuth mat boliye.aap aajkal akeli baithi rehti hain & na jane kya-2 sochti rehti hain.",rita ne fiki hansi hansi & pranav ke hath hata diye & bistar se utarne lagi.uska gown bistar & uske jism ke beech fans uske ghutno se upar ho gaya & pranav ne saas ki gori tange dekhi.use pehli baar ye ehsas hua ki uski saas umra se kam dikhti thi & uska jism abhi bahut dhila nahi pada tha.rita ne jaldi se gown thik kiya & jake kamre ki khidki pe khadi ho gayi.

"please mom.sambhaliye khud ko.",pranav uske peechhe gaya & uske kandho pe hath rakh diye.usne aisa karne ka socha nahi tha par uska dil rita ke reshmi jism ko chhuna chah raha tha.uske hatho ke ehsas se rita ke jism me sansani daud gayi lekin pranav ka sath use bhala lag raha tha.pranav uske kandho ko halke-2 dabane laga tha.rita ne aankhe band kar li & us chhuan ke ehsas me khone lagi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--36

गतान्क से आगे.

"मैं जा रहा हू,तुम अंदर से दरवाज़ा बंद रखना.बाहर गार्ड को भी बोल जाउन्गा की मुस्तैद रहे."

"ठीक है.वैसे क्या हमे पोलीस को नही बता देना चाहिए?",रंभा ससुर के कोट के कॉलर पे उंगली फिरा रही थी.

"हां,मैं वाहा पहुँच के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफीसर को खबर दूँगा..-"

"तन्णन्न्..!",विजयंत & रंभा निचली मंज़िल पे बने हाल से बाहर जाने वाले मैं दरवाज़े पे खड़े बातें कर रहे थे कि उपर कुच्छ गिरने की आवाज़ आई.

"कौन है?!",विजयंत चीखा,"..रंभा,सारी बत्तियाँ जलाओ!",वो सीढ़ियाँ फलंगता उपर भागा.

"धात तेरे की!",खामोशी हो जाने की वजह से वो शख्स कमरे से बाहर निकल के वाहा का जायज़ा लेने की सोच ही रहा था की कमरे के बाहर रखे पीतल के बड़े से सजावटी वेस से वो टकरा गया & वो ज़ोर की आवाज़ करता गिरा.रंभा ने बत्तियाँ जलानी शुरू की & वो शख्स उधर ही भागा जिधर से आया था.

"आए!रुक!",विजयंत ने उस शख्स को अपने कमरे मे घुसते हुए,उसकी पीछे से बस 1 झलक देखी.वो शख्स दौड़ता हुआ बाल्कनी मे पहुँचा & जिस दरवाज़े का शीशा तोड़ अंदर घुसा था उसी से बाहर निकला & उसे बाहर से बंद कर भागा.

"साले..!रुक..!",विजयंत ने कंधे से धक्के मार दरवाज़े को खोलना चाहा & 2-3 धक्को मे वो कामयाब हो गया.इधर रंभा ने बाहर भाग के दरबान को आगाह किया तो उसने दिमाग़ लगाते हुए बुंगले के पीछे की ओर दौड़ लगाई.जब तक विजयंत बाल्कनी मे आया & दरबान पीछे पहुँचा,वो शख्स दूसरी तरफ से घूम बंगल के मेन गेट तक पहुँच गया था.

"हेयययी..!",रंभा चीखी,वो अभी तक बंगल के सामने की तरफ ही थी.वो शख्स घुमा & रंभा ने उसके चेहरे पे वही निशान देखा & देखी उसकी नफ़रत से भरी आँखे.वो शख्स घुमा & फुर्ती से गेट पे चढ़ उसे फाँद गया.बगल के बंगल का चौकीदार शोरॉगुल सुन बाहर आ ही रहा था कि उस शख्स ने उसे करारा घूँसा उसके जबड़े पे जमाया & बंगल के पिच्छली तरफ भागा & वही से अपनी कार मे सवार हो निकल भागा.

"@#!$%^&*&..साला..!",वो गालिया बकता गाड़ी को वाहा से भगाए जा रहा था.वो मंज़िल के इतने करीब पहुँच नाकाम होके लौट रहा था.

"ये आदमी अंदर घुसा कैसे?",विजयंत की रोबदार आवाज़ ने दरबान का खून जमा दिया.

"प-पता नही साहब..म-मैं तो जगा था & यहा से तो कोई नही घुसा."

"ये ठीक कह रहा है.जब मैं इसे बुलाने निकली तो ये हंगामा सुन इधर ही आ रहा था.",रंभा को उस बेचारे पे तरस आ गया.वो समझ रही थी कि वो सच कह रहा है.

"आप पोलीस को खबर कर दीजिए प्लीज़."

"हूँ.",विजयंत ने जेब से मोबाइल निकाला & पहले समीर का केस देख रहे अफ़सर की नींद खराब की & फिर क्लेवर्त की पोलीस की,"..अब मैं जा रहा हू.कही देर ना हो जाए."

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ब्रिज कोठारी कोई कच्चा खिलाड़ी तो था नही & बलबीर मोहन की लाख होशियारी के बावजूद उसने भाँप लिया कि वो उसका पीछा कर रहा है.आज उसने सोच ही लिया था कि इस फोन की गुत्थी सुलझा के ही रहेगा.वो रात भर गाड़ी चलाके अब आवंतिपुर से आगे आ गया था & अब मौका था उसका पीछा कर रहे शख्स को चकमा देने का.

उसने कार की रफ़्तार बिना कम किए अचानक उसे बाई तरफ 1 कच्चे रास्ते पे उतार दिया.बलबीर चौंक गया & वो उस रास्ते से आगे बढ़ गया.उसने फ़ौरंम ब्रेक लगाया & वापस आया.उस कच्चे रास्ते पे उतर वो आयेज बढ़ा लेकिन उसे ब्रिज की कार नज़र नही आ रही थी.ब्रिज इस इलाक़े से अच्छी तरह से वाकिफ़ था & उसने फ़ौरन कार को आगे ले जाके वापस मेन रोड की तरफ घुमाया & फिर मैं रोड पार कर दूसरी तरफ के कच्चे रास्ते पे उतार दिया.उस रास्ते से होके वो फिर से थोडा आगे मेन रोड पे आया & फिर कार तेज़ी से क्लेवर्त की ओर भगा दी.जब तक बलबीर मोहन ने उसकी तरकीब समझी तब तक वो बहुत आगे निकल चुका था.

अब बलबीर मोहन को ये तो पता था नही कि ब्रिज जा कहा रहा है.वो आगे बढ़ने लगा लेकिन उसने सोचा की अब विजयंत को इस बारे मे बता देना चाहिए.विजयंत वक़्त से पहले ही झरने पे पहुच जाना चाहता था & वो अपनी कार टेढ़े-मेधे पहाड़ी रास्ते पे चला रहा था जब बलबीर का फोन आया.

"वो क्लेवर्त आ रहा है,बलबीर."

"आपको कैसे पता,मिस्टर.मेहरा?",विजयंत ने उसे फोन & घर मे घुसे आदमी वाली बातें बता दी.

"मिस्टर.मेहरा,आप प्लीज़ अकेले मत जाइए.पोलीस का या मेरे आने का इंतेज़ार कीजिए."

"मेरे बेटे का सवाल है,बलबीर!..मैं कोई ख़तरा नही ले सकता.",उसने फोन काट दिया.

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धारदार फॉल्स सैलानियो के बीच बहुत मशहूर था & वाहा तक पहुँचने के लिए 1 पक्का पैदल रास्ता था.नीचे कार पार्किंग मे गाड़ी लगा लोग उपर जाते थे & झरने के नीचे नहाने या फीओर आस-पास के खूबसूरत नज़ारे का लुत्फ़ उठाते थे.विजयंत वही खड़ा फोन करने वाले का इंतेज़ार कर रहा था कि तभी उसे दूर से कोई आता दिखा.

अभी उजाला होना शुरू नही हुआ था & उस अंधेरे मे उसे उस आदमी की शक्ल नही दिखी.हां,उसने ये ज़रौर भाँप लिया कि कद-काठी उसी के जैसी थी.उसकी चाल उसे जानी-पहचानी लगी.शायद अस आदमी ने भी उसे देख लिया & ठिठक गया.

ब्रिज ने दूर खड़े आदमी को पहचानना चाहा मगर उसे भी कुच्छ सॉफ नही दिखा.वो आगे बढ़ा की तभी उसके पैरो से कोई चीज़ आ टकराई.ऐसा लगता था जैसे किसी ने कुच्छ फेंका था उसके पैरो पे.उसने उसे उठाया तो वो कोई पॅकेट था.उसके हाथ मे कुच्छ गीला महसूस हुआ तो उसने पॅकेट को चेहरे के पास किया & फिर ऐसे दूर फेका जैसे वो कोई बड़ी ख़तरनाक चीज़ है.

ब्रिज ने सामने खड़े इंसान को देखा & सब समझ गया.ये किसी की साज़िश थी उसे फँसाने की & वो भी बेवकूफो की तरह इस जाल मे फँसता चला आया था.वो सामने खड़ा इंसान मेहरा था & उस पॅकेट मे कोई कपड़ा था जिसपे खून लगा था.ब्रिज उल्टे पाँव भागा.

विजयंत ने दूर खड़े इंसान को वो कपड़ा फेंकते देख सोचा की वो वो पॅकेट उसकी ओर फेंका रहा है.वो आगे बढ़ा & उस पॅकेट को उठाया & उसे खोल के देखा.अंदर खून के धब्बो वाली 1 कमीज़ थी.

1 पल को ब्रिज ने सोचा कि मेहरा को सब बता दे लेकिन उसे पता था कि मेहरा उसपे कभी यकीन नही करेगा & फिर ये भी तो हो सकता था की ये मेहरा की ही कोई चाल हो उसे फँसाने की.ब्रिज अपनी कार तक पहुँचा & उसे स्टार्ट कर वाहा से निकल गया.चाहे कुच्छ भी हो उसे आवंतिपुर पहुँचना था अपने होटेल & फिर वाहा से वापस डेवाले.

"कामीने..!",विजयंत बुदबुडाया.उसे समझ आ गया था की उस शख्स की कद-कती,चल-ढाल उसे क्यू जाने-पहचाने लगे थे.वो & कोई नही उसका दुश्मन कोठारी था.उसने पॅकेट को टटोला तो अंदर 1 छ्होटे से प्लास्टिक पॅकेट मे कंप्यूटर पे टाइप किया 1 खत था.

"मेहरा

ये खून तुम्हारे बेटे का है मगर घबराओ मत उसकी जान ख़तरे मे नही है.थोड़ी खरॉच आई थी उसे तो सोचा कि उस खरॉच को & कुरेद कर उसी के खून को सबूत के तौर पे तुम्हे भेजा जाए.ये कमीज़ भी उसी की है ताकि तुम्हे पक्का यकीन हो जाए की ये खत सच्चा है.

मेहरा,तुम कुच्छ दिन कोई नया काम ना करो तो तुम्हारा बेटा सही-सलामत तुम्हारे पास पहुँच जाएगा.ये बात लिख के दे दो की तुम अगले 6 महीनो तक कोई नया टेंडर लेने की कोशिश नही करोगे तो समीर तुम्हे लौटा दिया जाएगा वरना ये हो सकता है कि अगली बार खून के साथ-2 तुम्हारे प्यारे बेटे के जिस्म का कोई टुकड़ा भी तुम्हे भेजना पड़े."

खत पढ़ते ही विजयंत गुस्से से भर उठा.कुच्छ आवाज़ें सुनी तो उसने देखा की पोलिसेवाले वाहा आ रहे हैं.उसने पॅकेट थामा & उनकी ओर बढ़ गया.

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रंभा ने चाइ बनाई & 1 प्याला ले हॉल मे बैठ गयी.उस शख्स की शक्ल उसकी आँखो के सामने से हट नही रही थी & उनकी आँखो मे वो नफ़रत!..था कौन वो & इतनी नफ़रत से क्यू देखा था उसने उसको?..वो समझ नही पा रही थी की आख़िर समीर किस मुसीबत मे & क्यू फँस गया था?

वो शख्स घर मे किस इरादे से घुसा था?..उसने बंगल मे घूम रहे पोलिसेवालो को देखा.उसने उनके लिए भी चाइ बनाके हॉल के डाइनिंग टेबल पे रख दी थी & वो सब अपने-2 प्याले उठा रहे थे.

"मेडम..",थानेदार उसके पास आके बैठ गया,"..आपके ससुर के कमरे के बाल्कनी के दरवाज़े का काँच टूटा हुआ है.वो आदमी वही से घुसा था लेकिन सवाल ये है की उस वक़्त आपके ससुर कहा थे?",रंभा का दिल धड़क उठा..यानी की वो तब घुसा था जब वो विजयंत से चुद रही थी..कही उसने उन दोनो की चुदाई तो नही देख ली थी!

"मेडम..आपने जवाब नही दिया."

"हूँ..हां....देखिए,रात को 10 बजे के करीब हम दोनो अपने-2 कमरो मे सोने चले गये,उसके बाद मेरे ससुर ने मुझे 1 बजे जगाया & उस फोन का बारे मे बताया..",अभी तक थानेदार को पंचमहल पोलीस से समीर के केस के बारे मे भी जानकारी मिल गयी थी,"..हम दोनो मेरे कमरे मे ही बैठ के उस सिलसिले मे बातें करने लगे."

"आपलोगो ने कोई आवाज़ नही सुनी?"

"नही..",सुनते भी कैसे दोनो को फ़ुर्सत कहा थी 1 दूसरे के जिस्मो से खेलने से,"..हम उस फोन के बारे मे सुनके बहुत चिंतित हो गये थे."

"हूँ.",थानेदार उसे देखते हुए चाइ पीता रहा.

जब रात वियजयंत मेहरा & रंभा क्लेवर्त के बुंगले मे 1 दूसरे की बाहो मे समाए थे & ब्रिज कोठारी तेज़ी से धारदार फॉल्स जा रहा था,उस वक़्त रीता अपने कमरे मे अपने बिस्तर पे लेटी हल्के सरदर्द से परेशान अपना माथा सहला रही थी.समीर की गुमशुदगी का राज़ उसे भी समझ नही आ रहा था.पहले तो उसने सोचा था कि वो किसी हादसे का शिकार हो गया लेकिन अब उसे भी लग रहा था कि वो किसी साज़िश का शिकार हुआ है.वो इन्ही ख़यालो मे खोई थी की दरवाज़े पे दस्तक हुई.

"कौन है?"

"मैं,प्रणव."

"आ जाओ,बेटा.",वो उठ के बैठ गयी.

"क्या हुआ,मोम..तबीयत ठीक नही क्या?"

"नही,ठीक है.हल्का सरदर्द है."

"लाइए मैं दबा दू.",प्रणव उसके बाई तरफ बैठ गया & उसका सर दबाने लगा.

"अरे नही बेटा..ठीक है..तुम मत परेशान हो!",उसने उसका हाथ पकड़ हटाने की कोशिश की.

"क्यू?मैं नही दबा सकता क्या?..चलिए दबाने दीजिए.",प्रणव ने उसका हाथ हटाया & उसकी निगाह 1 पल को रीता के पतले स्ट्रॅप्स वाले नाइट्गाउन के गले पे चली गयी.रीता का दूधिया क्लीवेज हाथ उठाने-गिरने से छल्छला रहा था.उसने तुरंत नज़रे फेर ली लेकिन रीता ने उसे देख लिया था.

उसे थोड़ी शर्म आई & उसके गाल लाल हो गये लेकिन साथ ही उसे थोडा अच्छा भी लगा.प्रणव चुप-चाप उसका सर दबा रहा था & रीता भी नही समझ पा रही थी कि क्या बोले.

"शिप्रा कहा है?",उसने सवाल कर वो असहज चुप्पी तोड़ी.

"उसकी किसी सहेली की हें पार्टी थी.मैने उसे वही भेजा है.वो तो जाना नही चाह रही थी.मैने इसरार किया की जाएगी तो दिल बहलेगा."

"अच्छा किया.उसे भी परेशानी से राहत तो मिलनी ही चाहिए."

"& आपको?",प्रणव बिस्तर पे थोड़ा उपर हो गया था & उसका सर दबा रहा था.

"मैं तो ठीक हू."

"प्लीज़ मोम,झूठ मत बोलिए.आप आजकल अकेली बैठी रहती हैं & ना जाने क्या-2 सोचती रहती हैं.",रीता ने फीकी हँसी हँसी & प्रणव के हाथ हटा दिए & बिस्तर से उतरने लगी.उसका गाउन बिस्तर & उसके जिस्म के बीच फँस उसके घुटनो से उपर हो गया & प्रणव ने सास की गोरी टाँगे देखी.उसे पहली बार ये एहसास हुआ कि उसकी सास उम्र से कम दिखती थी & उसका जिस्म अभी बहुत ढीला नही पड़ा था.रीता ने जल्दी से गाउन ठीक किया & जाके कमरे की खिड़की पे खड़ी हो गयी.

"प्लीज़ मोम.संभालिए खुद को.",प्रणव उसके पीछे गया & उसके कंधो पे हाथ रख दिए.उसने ऐसा करने का सोचा नही था पर उसका दिल रीता के रेशमी जिस्म को छुना चाह रहा था.उसके हाथो के एहसास से रीता के जिस्म मे सनसनी दौड़ गयी लेकिन प्रणव का साथ उसे भला लग रहा था.प्रणव उसके कंधो को हल्के-2 दबाने लगा था.रीता ने आँखे बंद कर ली & उस छुअन के एहसास मे खोने लगी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--36

gataank se aage.

"main ja raha hu,tum andar se darwaza band rakhna.bahar guard ko bhi bol jaunga ki mustaid rahe."

"thik hai.vaise kya hume police ko nahi bata dena chahiye?",rambha sasur ke coat ke collar pe ungli fira rahi thi.

"haan,main vaha pahunch ke investigating officer ko khabar dunga..-"

"tannnn..!",vijayant & rambha nichli manzil pe bane hal se bahar jane vale main darwaze pe khade baaten kar rahe the ki upar kuchh girne ki aavaz aayi.

"kaun hai?!",vijayant chikha,"..rambha,sari battiyan jalao!",vo seedhiyan falangta upar bhaga.

"dhat tere ki!",khamoshi ho jane ki vajah se vo shakhs kamre se bahar nikal ke vaha ka jayza lene ki soch hi raha tha ki kamre ke bahar rakhe pital ke bade se sajawati vase se vo takra gaya & vo zor ki aavaz karta gira.rambha ne battioyan jalani shuru ki & vo shakhs udhar hi bhaga jidhar se aaya tha.

"aye!ruk!",vijayant ne us shakhs ko apne kamre me ghuste hue,uski peechhe se bas 1 jhalak dekhi.vo shakhs daudta hua balcony me pahuncha & jis darwaze ka shisha tod andar ghusa tha usi se bahar nikla & use bahar se band kar bhaga.

"sale..!ruk..!",vijayant ne kandhe se dhakke maar darvaze ko kholna chaha & 2-3 dhakko me vo kamyab ho gaya.idhar rambha ne bahar bhag ke darban ko aagah kiya to usne dimagh lagate hue bungle ke peechhe ki or daud lagayi.jab tak vijayant balcony me aaya & darban peechhe pahuncha,vo shakhs dusri taraf se ghum bungle ke main gate tak pahunch gaya tha.

"heyyyy..!",rambha chikhi,vo abhi tak bungle ke samne ki taraf hi thi.vo shakhs ghuma & rambha ne uske chehre pe vahi nishan dekha & dekhi uski nafrat se bhari aankhe.vo shakhs ghuma & furti se gate pe chadh use phand gaya.bagal ke bungle ka chaukidar shorogul sun bahar aa hi raha tha ki us shakhs ne use karara ghunsa uske jabde pe jamaya & bungle ke pichhli taraf bhaga & vahi se apni car me savar ho nikal bhaga.

"@#!$%^&*&..sala..!",vo galiya bakta gadi ko vaha se bhagaye ja raha tha.vo manzil ke itne karib pahunch nakaam hoke laut raha tha.

"ye aadmi andar ghusa kaise?",vijayant ki robdar aavaz ne darban ka khun jama diya.

"p-pata nahi sahab..m-main to jaga tha & yaha se to koi nahi ghusa."

"ye thik keh raha hai.jab main ise bulane nikli to ye hungama sun idhar hi aa raha tha.",rambha ko us bechare pe taras aa gaya.vo samajh rahi thi ki vo sach keh raha hai.

"aap police ko khabar kar dijiye please."

"hun.",vijayant ne jeb se mobile nikala & pehle Sameer ka case dekh rahe afsar ki nind kharab ki & fir Clayworth ki police ki,"..ab main ja raha hu.kahi der na ho jaye."

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Brij Kothari koi kachcha khiladi to tha nahi & Balbir Mohan ki lakh hoshiyaro ke bavjud usne bhanp liya ki vo uska peechha kar raha hai.aaj usne soch hi liya tha ki is fone ki gutthi suljha ke hi rahega.vo raat bhar gadi chalake ab Avantipur se aage aa gaya tha & ab mauka tha uska peechha kar rahe shakhs ko chakma dene ka.

usne car ki raftar bina kam kiye achanak use bayi taraf 1 kachche raste pe utar diya.balbir chaunk gaya & vo us raste se aage badh gaya.usne fauranm brake lagaya & vapas aaya.us kachche raste pe utar vo aage badha lekin use brij ki car nazar nahi aa rahi thi.brij is ialke se achhi tarah se vakif tha & usne fauran car ko aage le jake vapas main road ki taraf ghumaya & fir main road paar kar dusri taraf ke kacche raste pe utar diya.us raste se hoke vo fir se thoda aage main road pe aaya & fir car tezi se clayworth ki or bhaga di.jab tak balbir mohan ne uski tarkib samjhi tab tak vo bahut aage nikal chuka tha.

ab balbir mohan ko ye to pata tha nahi ki brij ja kaha raha hai.vo aage badhne laga lekin usne socha ki ab vijayant ko is bare me bata dena chahiye.vijayant waqt se pehle hi jharne pe pahucnh jana chahta tha & vo apni car tedhe-medhe pahadi raste pe chala raha tha jab balbir ka fone aaya.

"vo clayworth aa raha hai,balbir."

"aapko kaise pata,mr.mehra?",vijayant ne use fone & ghar me ghuse admi vali baaten bata di.

"mr.mehra,aap please akele mat jaiye.police ka ya mere aane ka intezar kijiye."

"mere bete ka sawal hai,balbir!..main koi khatra nahi le sakta.",usne fone kaat diya.

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dhardar falls sailaniyo ke beech bahut mashur tha & vaha tak pahunchne ke liye 1 pakka paidal rasta tha.neeche car parking me gadi laga log upar jate the & jharne ke neeche nahane ya fior aas-paas ke khubsurat nazare ka lutf uthate the.vijayant vahi kahda fone karne vale ka intezar kar raha tha ki tabhi use door se koi aata dikha.

abhi ujala hona shuru nahi hua tha & us andhere me use us aadmi ki shakl nahi dikhi.haan,usne ye zaraur bhanp liya ki kad-kathi usi ke jaisi thi.uski chaal use jani-pehchani lagi.shayad uis aadmi ne bhi use dekh liya & thithak gaya.

brij ne door khade aadmi ko pehchanana chaha magar use bhi kuchh saaf nahi dikha.vo aage badha ki tabhi uske pairo se koi chiz aa takrayi.aisa lagta tha jaise kisi ne kuchh fenka tha uske pairo pe.usne use uthaya to vo koi packet tha.uske hath me kuchh gila mehsus hua to usne packet ko chehre ke paas kiya & fir aise door pehnka jaise vo koi badi khatarnak chiz hai.

brij ne samne khade insan ko dekha & sab samajh gaya.ye kisi ki sazish thi use fansane ki & vo bhi bevkufo ki tarah is jaal me phansta chala aaya tha.vo samne khada insan mehra tha & us packet me koi kapda tha jispe khoon laga tha.brij ulte panv bhaga.

vijayant ne door khade insan ko vo kapda fenklte dekh socha ki vo vo packet uski or fenka raha hai.vo aage badha & us packet ko uthaya & use khol ke dekha.andar khun ke dhabbo vali 1 kamiz thi.

1 pal ko brij ne socha ki mehra ko sab bata de lekin use pata tha ki mehra uspe kabhi yakin nahi karega & fir ye bhi to ho sakta tha ki ye mehra ki hi koi chaal ho use phansane ki.brij apni car tak pahuncha & use start kar vaha se nikal gaya.chahe kuchh bhi ho use avantipur pahunchana tha apne hotel & fir vaha se vapas Devalay.

"kamine..!",vijayant budbudaya.use samajh aa gaya tha ki us shakhs ki kad-kathi,chal-dhal use kyu jane-pehchane lage the.vo & koi nahi uska dushman kothari tha.usne packet ko tatola to andar 1 chhote se plastic packet me computer pe type kiya 1 khat tha.

"mehra

ye khun tumhare bete ka hai magar ghabrao mat uski jaan khatre me nahi hai.thodi kharoch aayi thi use to socha ki us kharoch ko & kured kar usi ke khun ko saboot ke taur pe tumhe bheja jaye.ye kamiz bhi usi ki hai taki tumhae pakka yakin ho jaye ki ye khat sachcha hai.

mehra,tum kuchh din koi naya kaam na karo to tumhara beta sahi-salamat tumhare paas pahunch jayega.ye baat likh ke de do ki tum agle 6 mahino tak koi naya tender lene ki koshish nahi karoge to sameer tumhe lauta diya jayega varna ye ho sakta hai ki agli baar khun ke sath-2 tumhare pyare bete ke jism ka koi tukda bahi tumhe bhejna pade."

khat padhte hi vijayant gusse se bhar utha.kuchh avazen suni to usne dekha ki policevale vaha aa rahe hain.usne packet thama & unki or badh gaya.

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rambha ne chai banayi & 1 pyala le hall me baith gayi.us shakhs ki shakl uski aankho ke samne se hat nahi rahi thi & unki aankho me vo nafrat!..tha kaun vo & itni nafrat se kyu dekha tha usne usko?..vo samajh nahi pa rahi thi ki aakhir sameer kis musibat me & kyu phans gaya tha?

vo shakhs ghar me kis irade se ghusa tha?..usne bungle me ghum rahe policevalo ko dekha.usne unke liye bhi chai banake hall ke dining table pe rakh di thi & vo sab apne-2 pyale utha rahe the.

"madam..",thanedar uske paas aake baith gaya,"..aapke sasur ke kamre ke balcony ke darwaze ka kanch tuta hua hai.vo admi vahi se ghusa tha lekin sawal ye hai ki us waqt aapke sasur kaha the?",rambha ka dil dhadak utha..yani ki vo tab ghusa tha jab vo vijayant se chud rahi thi..kahi usne un dono ki chudai to nahi dekh li thi!

"madam..aapne jawab nahi diya."

"hun..haan....dekhiye,raat ko 10 baje ke karib hum dono apne-2 kamro me sone chale gaye,uske baad mere sasur ne mujhe 1 baje jagaya & us fone ka bare me bataya..",abhi tak thanedar ko Panchmahal police se sameer ke case ke bare me bhi jankari mil gayi thi,"..hum dono mere kamre me hi baith ke us silsile me baaten karne lage."

"aaplogo ne koi aavaz nahi suni?"

"nahi..",sunte bhi kaise dono ko fursat kaha thi 1 dusre ke jismo se khelne se,"..hum us fone ke bare me sunke bahut chintit ho gaye the."

"hun.",thanedar use dekhte hue chai pita raha.

Jab raat Viajyant Mehra & Rambha Clayworth ke bungle me 1 dusre ki baaho me samaye the & Brij Kothari tezi se Dhardar Falls ja raha tha,us waqt Rita apne kamre me apne bistar pe leti halke sardard se pareshan apna matha sehla rahi thi.sameer ki gumshudgi ka raaz use bhi samajh nahi aa raha tha.pehle to usne socha tha ki vo kisi hadse ka shikar ho gaya lekin ab use bhi lag raha tha ki vo kisi sazish ka shikar hua hai.vo inhi khayalo me khoi thi ki darwaze pe dastak hui.

"kaun hai?"

"main,Pranav."

"aa jao,beta.",vo uth ke baith gayi.

"kya hua,mom..tabiyat thik nahi kya?"

"nahi,thik hai.halka sardard hai."

"laiye main daba du.",pranav uske bayi taraf baith gaya & uska sar dabane laga.

"are nahi beta..thik hai..tum mat pareshan ho!",usne uska hath pakad hatane ki koshish ki.

"kyu?main nahi daba sakta kya?..chaliye dabane dijiye.",pranav ne uska hath hataya & uski nigah 1 pal ko rita ke patle straps vale nightgown ke gale pe chali gayi.rita ka doodhiya cleavage hath uthane-girane se chhalchhala raha tha.usne turant nazre fer li lekin rita ne use dekh liya tha.

use thodi sharm aayi & uske gaal laal ho gaye lekin sath hi use thoda achha bhi laga.pranav chup-chap uska sar daba raha tha & rita bhi nahi samajh pa rahi thi ki kya bole.

"Shipra kaha hai?",usne sawal kar vo asahaj chuppi todi.

"uski kisi saheli ki hen party thi.maine use vahi bheja hai.vo to jana nahi chah rahi thi.maine israr kiya ki jayegi to dil bahlega."

"achha kiya.use bhi pareshani se rahat to milni hi chahiye."

"& aapko?",pranav bistar pe thoda upar ho gaya tha & uska sar daba raha tha.

"main to thik hu."

"please mom,jhuth mat boliye.aap aajkal akeli baithi rehti hain & na jane kya-2 sochti rehti hain.",rita ne fiki hansi hansi & pranav ke hath hata diye & bistar se utarne lagi.uska gown bistar & uske jism ke beech fans uske ghutno se upar ho gaya & pranav ne saas ki gori tange dekhi.use pehli baar ye ehsas hua ki uski saas umra se kam dikhti thi & uska jism abhi bahut dhila nahi pada tha.rita ne jaldi se gown thik kiya & jake kamre ki khidki pe khadi ho gayi.

"please mom.sambhaliye khud ko.",pranav uske peechhe gaya & uske kandho pe hath rakh diye.usne aisa karne ka socha nahi tha par uska dil rita ke reshmi jism ko chhuna chah raha tha.uske hatho ke ehsas se rita ke jism me sansani daud gayi lekin pranav ka sath use bhala lag raha tha.pranav uske kandho ko halke-2 dabane laga tha.rita ne aankhe band kar li & us chhuan ke ehsas me khone lagi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--37

गतान्क से आगे.

पता नही कितनी देर दोनो वैसे ही खड़े रहे & प्रणव उसके कंधो को सहलाता रहा.अब दोनो दिल ही दिल मे ये समझ गये थे कि दोनो के दिलो मे क्या चल रहा था.रीता ने आँखे खोली & जैसे नींद से जागी.उसने उसका हाथो को हटाया & वाहा से जाने लगी तो प्रणव ने कंधो पे हाथ वापस जमा दिए & उसे अपनी ओर घुमाया.

"प्रणव..",वो आगे झुका & रीता के गुलाबी होंठ चूम लिए.रीता की भी आँखे बंद हो गयी & उसके होंठ अपनेआप प्रणव के लबो को चूमने की इजाज़त देते हुए खुल गये.प्रणव ने उसके होंठो पे ज़ुबान फिराके उसे अंदर घुसाया & जैसे ही रीता क़ी ज़ुबान से सताया उसे जैसे करेंट लगा & आँखे खोल उसे परे धकेला लेकिन प्रणव ने उसे खुद से अलग नही होने दिया.

ये क्या कर रहे हो,प्रणव?..ये ठीक नही..प्लीज़..!",प्रणव उसे बाँहो मे भर पागलो की तरह चूम रहा था,"..नही..प्रणव..!"

"तड़क्ककक..!",कमरे मे चाँते की आवाज़ गूँजी,"निकलो यहा से!",रीता चीखी.

"नही!..नही जाउन्गा..पहले ये कहिए कि आपको मेरा छुना अच्छा नही लगा.आपके लब मेरे लबो को अपनी लज़्ज़त नही चखने देना चाहते थे..आपका जिस्म मेरे जिस्म के साथ मिलना नही चाहता..!"

"हां.नही अच्छा लगा मुझे & मैं नही चाहती ये करना!",रीता अपने सीने पे बाहे बाँध तेज़ी से साँसे लेते हुए घूम गयी & प्रणव की ओर पीठ कर ली.

"यही बातें मेरी आँखो मे आँखे डाल के कहिए.",उसने रीता की बाई बाँह पकड़ उसे घुमाया & बाए हाथ से उसका चेहरा पकड़ उसे अपनी आँखो मे देखने को मजबूर किया.

"प्लीज़..प्रणव..प्लीज़.",रीता की आँखे छल्छला आई.

"क्यू रोक रही हैं खुद को?..",उसने रीता को फिर से बाहो मे भर लिया.रीता की आँखो से आँसू बह रहे थे,"..कबूल कर लीजिए मुझे!"

"मगर ये ठीक नही..शिप्रा..-",प्रणव ने बाए हाथ की 1 उंगली उसके लबो पे रख उसे खामोश कर दिया.उसकी उंगली की च्छुअन ने रीता को मदहोश कर दिया & उसने आँखे बंद कर ली.चेहरे पे आँसुओ की चिलमन के पीछे उलझन के साथ-2 अब मदहोशी भी दिख रही थी.

"आप मुझे चाहती हैं & मैं आपको..बस..शिप्रा को ये राज़ ना जानने की ज़रूरत है ना हमे उसे बताने की.",उंगली हटा के वो झुका & इस बार जब उसने अपनी सास को चूमा तो उसने भी पुरज़ोर तरीके से उसकी किस का जवाब दिया.प्रणव की बाहें रीता की 32 इंच की कमर पे कस गयी & उसने उसके जिस्म को अपनी बाहो मे बिल्कुल भींच लिया.

कहते हैं कि औरत की मस्ती मर्द की मस्ती से कही ज़्यादा होती है & शायदा इसीलिए उपरवाले ने उसे शर्म नाम के गहने से नवाज़ा है ताकि वो अपनी मर्यादा ना भूले & इंसान उलझानो से बचा रहे लेकिन उसी खुदा ने मर्द को इसरार कर अपनी बात मनवाने का हौसला भी दे दिया है.और मर्द भी तब तक दम नही लेता जब तक उसकी चहेती उसकी बाहो मे ना झूल जाए.यहा भी कुच्छ ऐसा ही हुआ लगता था.

रीता को भी दामाद के जिस्म का एहसास बड़ा नशीला लग रहा था.इस उम्र मे भी 1 जवान मर्द उसकी चाहत अपने दिल मे रखता था,इस ख़याल ने ना केवल उसके दिल मे खुशी की लहर दौड़ा दी थी बल्कि उसकी मस्ती की आग को भी भड़का दिया था.

प्रणव उसे बाहो मे कसे हुए बिस्तर तक ले गया & उसे लिटा उसके उपर सवार हो उसे चूमता रहा.कयि पलो बाद दोनो ने सांस लेने के लिए अपने होंठो को जुदा किया तो प्रणव ने रीता के चेहरे से अपने होंठो से आँसुओ के निशान सॉफ कर दिए.रीता ने उसके बाल पकड़ उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.

प्रणव का बया हाथ नीचे आ रीता के दाए घुटने को उठा रहा था.उसका लंड रीता की चूत के उपर दबा हुआ था & अब उसे दामाद के अंग से निकलती गर्मी पागल कर रही थी.प्रणव ने उसकी बाई जाँघ पे से गाउन सरका उसे नंगा किया तो रीता को शर्म आ गयी & उसने हाथ बढ़ा गाउन को नीचे करने की कोशिश की लेकिन प्रणव ने उसके हाथ को पकड़ उसके सर के पीछे बिस्तर पे रख दिया & उसके लब चूमने लगा.

रीता उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ाती मस्ती मे खो रही थी.प्रणव ने उसके दोनो हाथो को अपनी गिरफ़्त मे ले उसके सर के उपर बिस्तर से लगाए पकड़ा हुआ था & उसकी गर्दन चूम रहा था.उसके जिस्म के नीचे दबी रीता को अपनी बेबसी से बहुत मज़ा आ रहा था.

"ऊहह..प्रणव..नही..!",प्रणव उसके क्लीवेज को चूम रहा था & चूचियाँ नंगी होने के ख़याल से रीता शर्मा गयी थी.प्रणव ने अपनी जीभ उसके सीने की 36सी साइज़ की गोलैयो पे फिराई जोकि जोश मे और बड़ी हो गयी दिख रही थी.रीता अब मस्ती मे अपना सर इधर-उधर झटक रही थी.प्रणव अपनी कमर हिला उसकी गाउन से धकि चूत पे अपने लंड के धक्के लगा रहा था.रीता को अंदाज़ा हो अगया था कि उसके दामाद का लंड अच्छे आकर का है & उसकी चूत भी अब पानी छ्चोड़ रही थी.

"आननह..!",प्रणव ने अपनी नाक से उसके गाउन को थोड़ा नीचे कर उसके दाए निपल को नुमाया किया & जैसे ही उसपे अपनी जीभ फिराई,रीता झाड़ गयी & बिस्तर पे उचकने लगी.प्रणव ने उसके हाथ छ्चोड़े & उसकी नंगी छाती को चूसने लगा तो रीता ने उसका सर पकड़ के अपने सीने से उठाया & उसे चूमने लगी.थोड़ी देर बाद प्रणव ने किस तोड़ी & उसके जिस्म से उठ गया & अपनी शर्ट निकाल दी.

दामाद को नंगा होते देख रीता ने शर्म से आँखे बंद कर ली.जब अपनी जाँघो पे उसने प्रणव के हाथ महसूस किए तो उसने आँखे खोली,"..नही परणाव..आन्न्‍नणणनह..!",प्रणव उसके गाउन को कमर तक उठाके उसकी जाँघो पे चूमे चला जा रहा था.उसने उसकी मोटी जाँघ पे हल्के से काटा तो वो उसे मना करना भूल अपने बालो से बेचैनी से खेलने लगी.

उसकी गुलाबी पॅंटी मे छिपि चूत गीली हो रही थी & प्रणव का लंड भी उसकी पॅंट मे प्रेकुं बहा रहा था.उसने घड़ी की ओर देखा,शिप्रा कभी भी आ सकती थी.उसके पहले ही उसे अपनी सास के साथ शुरू किए इस नये रिश्ते की नीव उसकी चुदाई कर पुख़्ता का देनी थी.

"ऊहह..प्रणव..आहह...आनन्नह..उउन्न्नह..!",उसने रीता की चूत पे पॅंटी के उपर से जी अपना मुँह चिपका दिया था & वो बिस्तर से उठाके उक्से सर के बाल खींचती आहें भर रही थी.प्रणव ने उसकी पॅंटी को उतारा नही बस उसे बाए हाथ से 1 तरफ खींच उसकी चिकनी चूत को अपनी निगाहो के सामने किया.इस उम्र मे भी रीता की चूत ढीली नही हुई थी.उसने जल्दी-2 उसकी चूत से बह रहे रस को चाटना शुरू कर दिया.

रीता वापस बिस्तर पे लेट गयी & अपना जिस्म कमान की मोड़ने लगी.उसके जिस्म मे मस्ती बिजली बन के दौड़ रही थी.वक़्त के साथ-2 विजयंत अपने उपर काबू रखना सीख गया था.रीता को चोद्ते हुए वो उसे मस्ती से भर देता था लेकिन खुद जोश की वजह से आपे से बाहर जाता नही दिखता था.मगर प्रणव अभी जवान था & उसकी हर्कतो का बेसबरापन & कुच्छ हद्द तक का जंगली पन रीता को अपनी जवानी की याद दिलाने लगा.

"ऊन्नह..प्रणव....!",रीता कमर उचकाते झड़ी तो प्रणव ने उसकी पॅंटी खींच दी.रीता अधखुली आँखो से अपने दामाद को खुद को नंगा करते देख रही थी.उसके हाथ अभी भी उसे रोकने की कोशिश कर रहे थे मगर ये साफ ज़ाहिर था कि उसके हाथ केवल रोकने की रस्म निभा भर रहे थे.

प्रणव ने अपनी पॅंट उतारी & उसका 8.5 इंच लंबा लंड तना उसकी सास की आँखो के सामने आ आगाया.रीता के दिल मे खुशी की 1 लहर उठी.प्रणव ने उसकी मोटी जाँघो को फैलाया & उसकी चूत के दाने पे अंगूठे से रगड़ते हुए उसके पेट को दबाया & अपना लंड अंदर घुसा दिया.

"उउन्न्ह....!",रीता ने जिस्म मोडते हुए सर पीछे ले जाके दर्द & मज़े से आँखे बंद कर ली.लंड विजयंत के लंड से बड़ा नही था मगर इतना छ्होटा भी नही था कि उसे मज़ा ना आए.प्रणव ने धक्के लगाके सास की चुदाई शुरू कर दी.रीता से दामाद की वासना से भरी निगाहें बर्दाश्त नही हुई & उसने अपनी आँखे बंद कर ली & अपना चेहरा घुमा लिया.

प्रणव ने उसके गाउन को उसके सर से निकाला & अब उसकी सास पूरी नंगी उसके नीचे उस से चुद रही थी.रीता ने आँखे और ज़ोर से मिंच ली.

"मॉम,आप कितनी हसीन हैं..",जवान मर्द के मुँह से तारीफ सुन के रीता का दिल बल्लियो उच्छलने लगा,"..आपकी चूचिया अभी भी कितनी कसी हुई है..किसी जवान लड़की से ज़्यादा खूबसूरत हैं ये गोलाइयाँ..!",उसने दोनो छातियो को आपस मे मिलके दबाते हुए बाए निपल को इतनी ज़ोर से चूसा की आहत हो रीता ने उसके सर को अपने हाथो मे कस लिया,"..आहह..आपकी चूत तो बहुत कसी है,मोम..बहुत मज़ा आ रहा है मुझे!"

प्रणव की गुस्ताख बातों & उस से भी कही ज़्यादा गुस्ताख हरकतो ने रीता को मुस्कुराते हुए आँखे खोलने पे मजबूर कर ही दिया.दामाद का लंड उसे भी जन्नत की सैर करा रहा था.

"शर्म नही आती अपनी सास से ऐसी बातें करते हुए..आननह..!",प्रणव ने 1 ज़ोर का धक्का लगाया & रीता ने दामाद की पीठ मे अपने नाख़ून गढ़ा दिए.उसकी टाँगे खुद बा खुद उसकी कमर पे कस गयी.

"तारीफ करने मे शर्म कैसी,मों!मैं बेवकूफ़ था जो इतने दिनो आपके हुस्न को देखा नही मगर आज से अपनी ग़लती सुधारना शुरू कर दिया है मैने.",उसने अपना मुँह उसकी मोटी चूचियो मे छुपा लिया.सच कहा था उसने.रीता को अपने पाले मे करना बहुत ज़रूरी था & आज के बाद तो वो उसी की तरफ रहने वाली थी.सास की गोरी चूचियो को भींचते हुए प्रणव ने महसूस किया कि ट्रस्ट ग्रूप पे भी उसकी पकड़ मज़बूत हो रही है.

इस ख़याल ने उसके जोश मे इज़ाफ़ा किया & उसके धक्के और तेज़ हो गये.रीता दामाद की ज़ोरदार चुदाई से मस्ती मे पागल हो गयी थी & उसकी गंद दबोच कमर उचका उसके हर धक्के का जवाब दे रही थी....अब जो भी हो,वो अपनी कुर्सी छ्चोड़ेगा नही!

"आन्न्‍नननणणनह..!",रीता ने ज़ोर से आह भारी & प्रणव के सर को अपने सीने पे बिल्कुल भींच दिया & पागलो की तरह कमर उचकाने लगी.वो अपने दामाद के लंड के धक्को से झाड़ गयी थी.उसने चूत मे कुच्छ गर्म & गीला महसूस किया & उसके होंठो पे सुकून भरी मुस्कान फैल गयी.उसकी चूत मे पहली बार उसके प्यारे दामाद मे अपना गाढ़ा वीर्य छ्चोड़ा था.

"हूँ..इस खत के हिसाब से तो आपका कोई दुश्मन मिस्टर.समीर मेहरा की गुमशुदगी का ज़िम्मेदार है,मिस्टर.विजयंत मेहरा?",केस की छान-बीन कर रहे इन्वेस्टिगेटिंग ऑफीसर अकरम रज़ा ने खून के धब्बो वाले खत को बड़ी हिफ़ाज़त से 1 प्लास्टिक बॅग मे डाल अपने साथ आए 1 सब-इनस्पेक्टर को थमाया,"..इसे फोरेन्सिक लॅब भेजो & पक्का करो कि ये समीर के ही खून के निशान हैं."

"तो मिस्टर.मेहरा..",वो वापस विजयंत से मुखातिब हुआ.उसके साथ बैठी रंभा गहरी सोच मे डूबी थी,"..आपको अभी भी किसी पे शक़ नही?"

"नही ऑफीसर,मुझे अभी भी किसी पे शक़ नही है.",विजयंत ने ना जाने क्यू ब्रिज कोठारी के धारदार फॉल्स पे मौजूद होने वाली बात च्छूपा ली थी.

"हूँ.."रज़ा गौर से ससुर & बहू को देख रहा था,"मिस्टर.मेहरा,क्या मैं आप दोनो के यहा आने की वजह जान सकता हू?"

"हम समीर की तलाश करते यहा पहुँचे हैं,ऑफीसर.मैने सोचा कि क्यू ना मैं उसी रास्ते से उन जगहो पे जाके खुद थोड़ी पुच्छ-ताछ करू,जिनपे समीर ने आख़िरी बार सफ़र किया था.आप तो जानते ही हैं कि पिच्छले 1 महीने से समीर हमसे अलग रह रहा था.मैने अपनी बहू को इसलिए साथ रखा ताकि कोई ऐसी बात जोकि इस दौरान हुई हो जिसके बारे मे मुझे जानकारी ना हो & इन्हे पता हो तो ये मुझे बता दें."

"रंभा जी,आपने मुझसे कही कुच्छ च्छुपाया तो नही है?",रज़ा अब रंभा से मुखातिब था.

"जी नही लेकिन इस सवाल की वजह जान सकती हू?"

"देखिए,मिस्टर.मेहरा को 1 फोन आता है & उन्हे 4 बजे धारदार झरने पे बुलाया जाता है.उसी वक़्त घर मे कोई शख्स घुस के बैठा है..क्या है उसकी यहा आने की वजह?..चोरी या कुच्छ और?..मुझे ये लगता है कि किसी का इरादा विजयंत साहब को घर से बाहर कर आपको अकेला करने का था?"

"क्या?!",विजयंत & रंभा 1 साथ चौंके,"..लेकिन किसलिए?.ऐसा क्यू चाहेगा कोई?",रज़ा दोनो को गहरी निगाहो से देख रहा था.दोनो सच मे चौंकते दिख रहे थे मगर उसे पक्का यकीन तो था नही.

"हो सकता है कोई रंभा जी को नुकसान पहुँचना चाहता हो."

"मुझे?..लेकिन क्यू?"

"अब यही तो पता लगाना है,मेडम!या तो मुजरिम हाथ आ जाए या उसका मक़सद पता चल जाए..केस सुलझ जाएगा..वैसे 1 बात और पुच्छनी है मुझे.मिस्टर.मेहरा,आपके कमरे के दरवाज़े का काँच तोड़ वो शख्स अंदर घुसा था लेकिन आपको काँच टूटने की आवाज़ नही सुनाई दी?"

"नही."

"हूँ..ऐसा कैसे हो सकता है?"

"देखिए.मुझे फोन आया तो मैने फ़ौरन रंभा के कमरे मे जाके उसे जगाया & सारी बात बताई जिसे सुन ये घबरा गयी.धारदार जाने मे काफ़ी वक़्त था & मैने इसे सोने को कहा लेकिन ये अकेली डर रही थी तो मैने इसे सोने को कहा & खुद इसके कमरे की आराम कुर्सी पे बैठ गया & ना जाने कब मेरी आँख लग गयी.ख़ैरियत थी कि मैने अपने मोबाइल पे 2.30 बजे का अलार्म लगा रखा था & उसके बजने से ही मेरी नींद टूटी जिसके बाद मैने कपड़े बदले & यहा से जाने लगा & फिर सारी घटना घटी."

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क्रमशः.......

JAAL paart--37

gataank se aage.

pata nahi kitni der dono vaise hi khade rahe & pranav uske kandho ko sehlata raha.ab dono dil hi dil me ye samajh gaye the ki dono ke dilo me kya chal raha tha.rita ne aankhe kholi & jaise nind se jaagi.usne uska hatho ko hataya & vaha se jane lagi to pranav ne kandho pe hath vapas jama diye & use apni or ghumaya.

"pranav..",vo aage jhuka & rita ke gulabi honth chum liye.rita ki bhi aankhe band ho gayi & uske honth apneaap pranav ke labo ko chumne ki ijazat dete hue khul gaye.pranav ne uske hotho pe zuban firake use andar ghusaya & jaise hi rita ki zuban se sataya use jaise current laga & aankhe khol use pare dhakela lekin pranav ne use khud se alag nahi hone diya.

ye kya kar rahe ho,pranav?..ye thik nahi..please..!",pranav use baahho me bhar pagalo ki tarah chum raha tha,"..nahi..pranav..!"

"tadakkkk..!",kamre me chante ki aavaz gunji,"niklo yaha se!",rita chikhi.

"nahi!..nahi jaunga..pehle ye kahiye ki aapko mera chhuna achha nahi laga.aapke lab mere labo ko apni lazzat nahi chakhne dena chahte the..aapka jism mere jism ke sath milna nahi chahta..!"

"haan.nahi achha laga mujhe & main nahi chahti ye karna!",rita apne seene pe baahe bandh tezi se sanse lete hue ghum gayi & pranav ki or pith kar li.

"yehi baaten meri aankho me aankhe daal ke kahiye.",usne rita ki bayi banh pakad use ghumaya & baye hath se uska chehra pakad use apni aankho me dekhne ko majbur kiya.

"please..pranav..please.",rita ki aankhe chhalchhala aayi.

"kyu rok rahi hain khud ko?..",usne rita ko fir se baaho me bhar liya.rita ki aankho se aansu beh rahe the,"..kabul kar lijiye mujhe!"

"magar ye thik nahi..shipra..-",pranav ne baye hath ki 1 ungli uske labo pe rakh us ekhamosh kar diya.uski ungli ki chhuan ne rita ko madhosh kar diya & usne aankhe band kar li.chehre pe aansuo ki chilman ke peechhe uljhan ke sath-2 ab madhoshi bhi dikh rahi thi.

"aap mujhe chahti hain & main aapko..bas..shipra ko ye raaz na jaanane ki zarurat hai na hume use batane ki.",ungli hatake vo jhuka & is baar jab usne apni saas ko chuma to usne bhi purzor tarike se uski kiss ka jawab diya.pranav ki baahen rita ki 32 inch ki kamar pe kas gayi & usne uske jism ko apni baaho me bilkul bhinch liya.

kehte hain ki aurat ki masti mard ki masti se kahi zyada hoti hai & shayda isiliye uparwale ne use sharm naam ke gehne se navaza hai taki vo apni maryada na bhule & insan uljhano se bacha rahe lekin usi khuda ne mard ko israr kar apni baat manwane ka hausla bhi de diya hai.aur mardf bhi tab tak dum nahi leta jab tak uski chaheti uski baaho me na jhul jaye.yaha bhi kuchh aisa hi hua lagta tha.

rita ko bhi damad ke jism ka ehsas bada nashila lag raha tha.is umra me bhi 1 jawan mard uski chahat apne dil me rakhta tha,is khayal ne na keval uske dil me khushi ki lehar dauda di thi balki uski masti ki aag ko bhi bhadka diya tha.

pranav use baaho me kase hue bistar tak le gaya & use lita uske upar savara ho use chumta raha.kayi palo baad dono ne sans lene ke liye apne hotho ko juda kiya to pranav ne rita ke chehre se apne hotho se aansuo ke nishan saaf kar diye.rita ne uske baal pakad uske chehre pe kisses ki jhadi laga di.

pranav ka baya hath neeche aa rita ke daye ghutne ko utha raha tha.uska lund rita ki chut ke upar daba hua tha & ab use damad ke ang se nikalti garmi pagal kar rahi thi.pranav ne uski bayi jangh pe se gown sarka use nanga kiya to rita ko sharm aa gayi & usne hath badha gown ko neeche karne ki koshish ki lekin pranav ne uske hath ko pakd uske sar ke peechhe bistar pe rakh diya & uske lab chumane laga.

rita uski zuban se apni zuban ladati masti me kho rahi thi.pranav ne uske dono hatho ko apni giraft me le uske sar ke upar bistar se lagaye pakda hua tha & uski garadn chum raha tha.uske jism ke neeche dabi rita ko apni bebasi se bahut maza aa raha tha.

"oohhhhh..pranav..nahi..!",pranav uske cleavage ko chum raha tha & chhatiyan nangi hone ke khayal se rita sharma gayi thi.pranav ne apni jibh uske seene ki 36C size ki golaiyo pe firayi joki josh me aur badi ho gayi dikh rahi thi.rita ab masti me apna sar idhar-udhar jhatak rahi thi.pranav apni kamar hila uski gown se dhaki chut pe apne lund ke dhakke laga raha tha.rita ko andaza ho agya tha ki uske damad ka lund achhe aakar ka hai & uski chut bhi ab pani chhod rahi thi.

"aannhhhhh..!",pranav ne apni naak se uske gown ko thoda neeche kar uske daye nipple ko numaya kiya & jaise hi uspe apni jibh fiaryi,rita jhad gayi & bistar pe uchakne lagi.pranav ne uske hath chhode & uski nangi chhati ko chusne laga to rita ne uska sar pakad ke apne seene se uthaya & use chumne lagi.thodi der baad pranav ne kiss todi & uske jism se uth gaya & apni shirt nikal di.

damad ko nanga hote dekh rita ne sharm se aankhe band kar li.jab apni jangho pe usne pranav ke hath mehsus kiye to usne aankhe kholi,"..nahi parnav..aannnnnnhhhhh..!",pranav uske gown ko kamar tak uthake uski jangho pe chume chala ja raha tha.usne uski moti jangh pe halke se kata to vo use mana karna bhul apne baalo se bechaini se khelne lagi.

uski gulabi panty me chhipi chut gili ho rahi thi & pranav ka lund bhi uski pant me precum baha raha tha.usne ghadi ki or dekha,shipra kabhi bhi aa sakti thi.uske pehle hi use apnio saas ke sath shuru kiye is naye rishte ki neev uski chudai kar pukhta ka deni thi.

"oohhhhhhhh..pranav..aahhhhhhh...aannnhhhhhh..uunnnhhhh..!",usne rita ki chut pe panty ke upar se hji apna munh chipka diya tha & vo bistar se uthke ukse sar ke baal khinchti aahen bhar rahi thi.pranav ne uski panty ko utara nahi bas use baye hath se 1 taraf khinch uski chikni chut ko apni nigaho ke samne kiya.is umra me bhi rita ki chut dhili nahi hui thi.usne jaldi-2 uski chut se beh rahe ras ko chatna shuru kar diya.

rita vapas bistar pe let gayi & apna jism kaman ki modne lagi.uske jism me masti bijli ban ke daud rahi thi.waqt ke sath-2 vijayant apne upar kabu rakhna sikh gaya tha.rita ko chodte hue vo use masti se bhar deta tha lekin khud josh ki vajah se aape se bahar jata nahi dikhta tha.magar pranav abhi jawan tha & uski harkato ka besabrapan & kuchh hadd tak ka junglipan rita ko apni jawani ki yaad dilane laga.

"oonnhhhhhhh..pranav....!",rita kamar uchkate jhadi to pranav ne uski panty khinch di.rita adhkhuli aankho se apne damad ko khud ko nanga krte dekh rahi thi.uske hath abhi bhi use rokne ki koshish kar rahe the magar ye saaf zahir tha ki uske hath keval rokne ki rasm nibha bhar rahe the.

pranav ne apni pant utari & uska 8.5 inch lumba lund tana uski saas ki aankho ke samne a agaya.rita ke dil me khushi ki 1 lehar uthi.pranav ne uski moti jangho ko failaya & uski chut ke dane pe anguthe se ragadte hue uske pet ko dabaya & apna lund andar ghusa diya.

"uunnhhhhh....!",rita ne jism modte hue sar peechhe le jake dard & maze se aankhe band kar li.lund vijayant ke lund se bada nahi tha magar itna chhota bhi nahi tha ki use maza na aaye.pranav ne dhakke lagake saas ki chudai shuru kar di.rita se damad ki vasna se bhari nigahen bardasht nahi hui & usne apni aankhe band kar li & apna chehra ghuma liya.

pranav ne uske gown ko uske sar se nikala & ab uski saas puri nangi uske neeche us se chud rahi thi.rita ne aankhe aur zor se minch li.

"mom,aap kitni haseen hain..",jawan mard ke munh se tairf sun ke rita ka dil balliyo uchhalne laga,"..aapki choochiya abhi bhi kitni kasi hui hai..kisi jawan ladki se zyada khubsurat hain ye golaiyan..!",usne dono chhatiyo ko aapas me milake dabate hue baye nipple ko itni zor se chusa ki aahat ho rita ne uske sar ko apne hatho me kas liya,"..aahhhh..aapki chut to bahut kasi hai,mom..bahut maza aa raha hai mujhe!"

pranav ki gustakh baaton & us se bhi kahi zyada gustakh harkto ne rita ko muskurate hue aankhe kholne pe majboor kar hi diya.damad ka lund use bhi jannat ki sair kara raha tha.

"sharm nahi aati apni saas se aisi baaten karte hue..aannhhhh..!",pranav ne 1 zor ka dhakka lagaya & rita ne damad ki pith me apne nakhun gada diye.uski tange khud ba khud uski kamar pe kas gayi.

"tarif karne me sharm kaisi,mom!main bevkuf tha jo itne dino aapke husn ko dekha nahi magar aaj se apni galti sudharna shuru kar diya hai maine.",usne apna munh uski moti choochiyo me chhupa liya.sach kaha tha usne.rita ko apne pale me karna bahut zaruri tha & aja ke baad to vo usi ki taraf rehne vali thi.saas ki gori chhatiyo ko bhinchte hue pranav ne mehsus kiya ki Trust Group pe bhi uski pakad mazbut ho rahi hai.

is khayal ne uske josh me izafa kiya & uske dhakke aur tez ho gaye.rita damad ki zordar chudai se masti me pagal ho gayi thi & uski gand daboch kamar uchka uske har dhakke ka jawab de rahi thi....ab jo bhi ho,vo apni kursi chhodega nahi!

"aannnnnnnnhhhhhhh..!",rita ne zor se aah bhari & pranav ke sar ko apne seene pe bilkul bhinch diya & paglo ki tarah kamar uchkane lagi.vo apne damad ke lund ke dhakko se jhad gayi thi.usne chut me kuchh garm & gila mehsus kiya & uske hotho pe sukun bhari muskan fail gayi.uski chut me pehli baar uske pyare damad me apna gadha virya chhoda tha.

"Hun..is khat ke hisab se to aapka koi dushman Mr.Sameer Mehra ki gumshudgi ka zimmedar hai,Mr.Vijayant Mehra?",case ki chhan-been kar rahe investigating officer Akram Raza ne khoon ke dhabbo vale khat ko badi hifazat se 1 plastic bag me daal apne sath aaye 1 sub-inspector ko thamaya,"..ise forensic lab bhejo & pakka karo ki ye sameer ke hi khoon ke nishan hain."

"to mr.mehra..",vo vapas vijayant se mukhatib hua.uske sath baithi Rambha gehri soch me doobi thi,"..aapko abhi bhi kisi pe shaq nahi?"

"nahi officer,mujhe abhi bhi kisi pe shaq nahi hai.",vijayant ne na jane kyu Brij Kothari ke Dhardar Falls pe maujood hone wali baat chhupa li thi.

"hun.."raza gaur se sasur & bahu ko dekh raha tha,"mr.mehra,kya main aap dono ke yaha aane ki vajah jaan sakta hu?"

"hum sameer ki talash karte yaha pahunche hain,officer.maine socha ki kyu na main usi raste se un jagaho pe jake khud thodi puchh-tachh karu,jinpe sameer ne aakhiri baar safar kiya tha.aap to jante hi hain ki pichhle 1 mahine se sameer humse alag reh raha tha.maine apni bahu ko isliye sath rakha taki koi aisi baat joki is dauran hui ho jiske bare me mujhe jankari na ho & inhe pata ho to ye mujhe bata den."

"rambha ji,aapne mujhse kahi kuchh chhupaya to nahi hai?",raza ab rambha se mukhatib tha.

"ji nahi lekin is sawal ki vajah jaan sakti hu?"

"dekhiye,mr.mehra ko 1 fone aata hai & unhe 4 baje dhardar jharne pe bulaya jata hai.usi waqt ghar me koi shakhs ghus ke baitha hai..kya hai uski yaha aane ki vajah?..chori ya kuchh aur?..mujhe ye lagta hai ki kisi ka irada vijayant sahab ko ghar se bahar kar aapko akela karne ka tha?"

"kya?!",vijayant & rambha 1 sath chaunke,"..lekin kisliye?.aisa kyu chahega koi?",raza dono ko gehri nigaho se dekh raha tha.dono sach me chaunkte dikh rahe the magar use pakka yakin to tha nahi.

"ho sakta hai koi rambha ji ko nuksan pahunchana chahta ho."

"mujhe?..lekin kyu?"

"ab yehi to pata lagana hai,madam!ya to mujrim hath aa jaye ya uska maqsad pata chal jaye..case sulajh jayega..vaise 1 baat aur puchhni hai mujhe.mr.mehra,aapke kamre ke darwaze ka kanch tod vo shakhs andar ghusa tha lekin aapko kanch tutne ki aavaz nahi sunai di?"

"nahi."

"hun..aisa kaise ho sakta hai?"

"dekhiye.mujhe fone aaya to maine fauran rambha ke kamre me jake use jagaya & sari baat batayi jise sun ye ghabra gayi.dhardar jane me kafi waqt tha & maine ise sone ko kaha lekin ye akeli darr rahi thi to maine ise sone ko kaha & khud iske kamre ki aaram kursi pe baith gaya & na jane kab meri aankh lag gayi.khairiyat thi ki maine apne mobile pe 2.30 baje ka alarm laga rakha tha & uske bajne se hi meri nind tuti jiske baad maine kapde badle & yaha se jane laga & fir sari ghatna ghati."

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--38

गतान्क से आगे.

"हूँ..जब आप कपड़े बदलने गये तो भी आपकी निगाह फर्श पे पड़े शीशे के टुकड़ो पे नही गयी?"

"जी,नही.आपने देखा होगा कि कमरे का कपबोर्ड उस टूटे काँच वाले दरवाज़े से बिल्कुल उल्टी दिशा मे है.मैं बेटे के बारे मे सोचता तैय्यार हुआ & वाहा से निकल गया."

"यानी की जब आप रंभा जी के कमरे की आरामकूर्सी पे सो रहे थे उसी दौरान वो अंदर घुसा होगा..खैर!",वो खड़ा हो गया,"..मैं चलता हू.आप अभी भी यही,इसी बंगल मे रहेंगे?"

"नही,मैं तो अभी अपने होटेल शिफ्ट हो रहा हू & रंभा को मैं कल ही डेवाले भेज रहा हू.मैं नही चाहता की ये ज़रा भी ख़तरे मे पड़े.वैसे ऑफीसर मैं चाहता हू कि आप मीडीया से ये बोल दें की मैं भी वापस पंचमहल जा रहा हू."

"ठीक है..",रज़ा हंसा.सवेरे की घटनाओ की कुच्छ भनक तो मीडीया को लग ही गयी थी & वो खबर सूंघते बस उस बुंगले तक पहुँचने ही वाले थे,"..बढ़िया सोचा है आपने.वैसे कुच्छ भी ध्यान आए तो मुझे ज़रूर बताएँ.ओके!",उसने हाथ मिलाया & निकल गया.

"आपने ये क्यू कहा कि मैं डेवाले जा रही हू?",विजयंत बाहर अपनी प्राडो मे बैठ गया था जिसमे बंगल का डरबन उनका समान चढ़ा रहा था.

"क्यूकी तुम जा रही हो.",रंभा ने बैठ के कार का दरवाज़ा बंद किया तो विजयंत ने डरबन को कुच्छ बखशीश दी & कार वाहा से निकली.

"आप ऐसे मेरा फ़ैसला नही ले सकते.मैं नही जा रही!",गुस्से से रंभा का चेहरा लाल हो रहा था.विजयंत उसे क्या डरपोक समझ रहा था!..वो घबराई ज़रूर थी लेकिन अब तैय्यार भी थी.आगे वो शख्स उसके करीब आके देखे,वो उसका मुँह नोच लेगी!

"बहस मत करो!",विजयंत ने उसे डांटा,"..तुम्हारी समझ मे कुच्छ नही आ रहा.बहुत ख़तरा है यहाँ!"

"मुझे डर नही लगता किसी भी बात से."

"बस!",विजयंत की भारी आवाज़ तेज़ हो गयी & उसने बाया हाथ उठाके बहू को चुप रहने का इशारा किया,"..तुम कल जा रही हो.इस बात का फ़ैसला हो चुका है.",रंभा की आँखो मे पानी आ गया.उसे आजतक ऐसे किसी ने नही डांटा था.वो खामोश हो गयी & खिड़की से बाहर देखने लगी.विजयंत को भी महसूस हुआ कि उसने बहू से कुच्छ ज़्यादा ही सख्ती से बात की है & उसने बाया हाथ बढ़ा के स्लीव्ले ब्लाउस से बाहर झाँक रही उसकी नर्म,गोरी दाई बाँह को च्छुआ तो रंभा ने उसे झटक दिया.विजयंत ने हाथ पीछे खींचा & खामोशी से कार चलाने लगा.

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पंचमहल के अपने होटेल मे ब्रिज कोठारी आराम कर रहा था.सवेरे धारदार झरनो पे विजयंत को देख वो बहुत घबरा गया था लेकिन जब उसकी घबराहट कम हुई तो उसने डेवाले वापस लौटने का ख़याल दिमाग़ से निकाल दिया.उस से अंजाने मे 1 अच्छा काम हुआ था.वो अपने ऑफीस की 1 कार उठाके क्लेवर्त तक चला आया था जोकि उसके नाम पे रिजिस्टर नही थी.उस कार को उसने आवंतिपुर के अपने दफ़्तर की पार्किंग मे लगाया & ऐसा करते उसे किसी ने नही देखा.

उसके बाद 1 प्राइवेट टॅक्सी बुक की & पंचमहल पहुँचा & वाहा से सीधा अपने होटेल.अपने आदमियो से उसने यही कहा की वो होटेल की सर्प्राइज़ चेकिंग पे आया है.वाहा से उसने आवंतिपुर के दफ़्तर फोन कर कहा कि डेवाले ऑफीस की 1 कार वाहा पार्क है जिसे वापस भिजवा दिया जाए.

ब्रिज ने सोच लिया था कि वो इस मामले को सुलझा के ही मानेगा & जो भी उसे ऐसे फँसाने की कोशिश कर रहा था उसे वो मज़ा ज़रूर चखायगा.वो बिस्तर पे लेटा था की उसका मोबाइल बजा,"हेलो."

"हाई,जानेमन!कहा रहते हो आजकल?पिक्चर साइन करवा के तो भूल ही गये मुझे.",कामया की खनकती आवाज़ सुनते ही ब्रिज के होंठो पे मुस्कान फैल गयी.

"मेरी जान!हम तो तुम्हारे दिल मे ही रहते हैं,तुम्ही उसे टटोल के देखती नही कभी."

"उफफफ्फ़!..",कामया बिस्तर मे नंगी लेटी थी.उसने अपनी चूत पे हाथ फिराया जिस से कबीर का वीर्य बह रहा था.बस अभी ही उनकी चुदाई ख़त्म हुई थी & कबीर बाथरूम मे नहा रहा था,"..तुमने तो लाजवाब कर दिया,जान!वैसे कहा हो अभी?"

"जहा इस वक़्त होना चाहिए.",ब्रिज ने जान बुझ के बात घुमा दी,"..& तुम?"

"मैं तो आवंतिपुर मे हू,यार.शूटिंग के लिए आई हूँ."

"अच्छा.कब आई..ई मीन कब गयी वाहा?"

"बस सवेरे की फ्लाइट से पहुँची थी.धारदार पे गाना शूट होना था लेकिन पता नही आज वाहा कुच्छ गड़बड़ थी तो पूरा इलाक़ा सील था.अब देखें कल क्या होता है.आज का पूरा दिन तो खाली बैठे बोर होंगी.",कामया ने कितनी सफाई से झूठ बोल दिया था.शूटिंग कॅन्सल होने की खबर सुन कबीर खुशी से उच्छल पड़ा था & उसे अपने कमरे मे ले आया था & अगली सुबह तक कामया वही रहने वाली थी.

"अच्छा.वैसे क्या गड़बड़ हुई है वहाँ?"

"पता नही.कह रहे हैं कि कोई गुंडा दिखा था वाहा तो पहले पूरे इलाक़े को छान के सेफ डिक्लेर करेंगे फिर पब्लिक को जाने देंगे वाहा."

"ओह.",ब्रिज समझ गया की पोलीस असल बात च्छूपा रही है.सही भी था,आख़िर समीर की जान का सवाल था लेकिन फिर उसे क्यू बुलाया था वाहा उस कॉलर ने?..हो ना हो ये विजयंत की ही घिनोनी साजिश है..कमीना!बेटे को मोहरा बना मुझे फाँसना चाहता है,अपने बिज़्नेस के लिए!

"क्या हुआ,ब्रिज डार्लिंग चुप क्यू हो गये?..कही किसी दिलरुबा के साथ तो मसरूफ़ नही हो?",कामया ने उसे छेड़ा.

"दिलरुबा तो इस वक़्त आवंतिपुर मे बैठी है यहा तो बस नीरस फाइल्स & उबाउ काम है.",ब्रिज ने नाटकिया आह भरी तो कामया हंस पड़ी.

"तो यहा आ जाओ ना!अभी तो शूटिंग चलेगी कुच्छ दिन यहा & फिर यहा का मौसम कितना सुहाना है.ऐसे आलम मे तुम्हारी मज़बूत बाजुओ मे पिस्ने का जी कर रहा है,डार्लिंग!"

"थोड़ा सब्र करो,मेरी जान.हो सकता है बहुत जल्द ही तुम्हारी तमन्ना पूरी हो जाए."

"सच?",कामया ने बहुत खुश होने का नाटक किया.कबीर अपने बॉल पोन्छ्ता बाथरूम से बाहर आ गया था.उसका लंड झड़ने के बाद सिकुड़ने के बावजूद अच्छा-खास लंबा था.कामया ने उसे देख होंठो पे जीभ फिराई & अपनी टाँगे फैला अपनी चूत पे 1 उंगली फिराई.

"सच."

"तो जल्दी आना.ओके,बाइ!",कामया ने फोन किनारे फेंका & अपनी फैली टाँगो के बीच उसकी चूत से अपना वीर्य अपनी ज़ुबान से साफ करते कबीर के बालो को सहलाने लगी.

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"मिस्टर.मेहरा,वो बहुत चालाक आदमी है & उसने भाँप लिया था कि मैं उसका पीछा कर रहा हू & क्या चकमा दिया उसने मुझे.उसी कारण मुझे आने मे देर हो गयी वरना उसे रंगे हाथो पकड़ लेता.",बलबीर मोहन होटेल क्लेवर्त वाय्लेट के बार मे विजयंत के साथ बैठा था & दोनो बियर पी रहे थे.बार अभी खुला नही था & इसीलिए दोनो आराम से बाते कर रहे थे.

"बलबीर,उसे कभी भी कम नही आँकना.बहुत शातिर है वो.",विजयंत ने बियर का 1 घूँट भरा,"..वैसे 1 बात समझ नही आई मुझे?"

"क्या?"

"अगर वो समीर की गुमशुदगी के पीछे है तो वो पीछे ही रहना पसंद करेगा बल्कि ऐसा जाल बुनेगा कि कोई ये समझ ही नये पाए की उस जाल के सिरे उस तक जाते हैं.इस तरह से खुद झरने पे आना कुच्छ समझ नही आया."

"हूँ..झरने पे आपके पीछे-2 पोलीस ने भी पहुँचने मे ज़रा देर कर दी नही तो उसका खेल उसी वक़्त ख़त्म हो जाता."

"अभी तक फिर कोई फोन नही आया बलबीर.मुझे समीर की फ़िक्र हो रही है."

"आप घबराईए मत,मेहरा साहब.समीर की कीमत बहुत ऊँची लगाई है उसे अगवा करने वाले ने.बिना आपका जवाब सुने वो उसे हाथ नही लगाएँगे."

"उसके खून से रंगी कमीज़ भेजी है उन्होने बलबीर!",एंहरा की आँखो मे गुस्सा & डर दोनो थे.

"मेहरा साहब,वो आपको डराना चाहते हैं ताकि आप फ़ौरन उनकी बात मान लें.समीर उनके लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है,उसे मारने की बेवकूफी वो नही कर सकते.उन्होने सरिंज से उसकी बाँह से खून निकाल के उस कमीज़ पे गिरा दिया होगा.किसी भी वालिद के लिए औलाद के खून को देखना कितना खौफनाक तजुर्बा हो सकता है,उसी बात पे खेल रहे हैं वो."

"तो क्या करू मैं?",विजयंत पहली बार इतना बेबस महसूस कर रहा था.

"आप उनकी बात मान लीजिए."

"क्या?!"

"हां,आपको अगला फोन जल्द आएगा & वो आपको फिर से समीर को नुकसान पहुचाने की बात कहेंगे.आप घबरा के उनकी बात मान लीजिए फिर देखिए वो क्या बोलते हैं.किसी भी तरह हमे समीर को अपने पास लाना है.आपको बस बात मानने की बात कहनी है सच मे माननी थोड़े ही है.",बलबीर की बात से विजयंत के होंठो पे मुस्कान आ गयी.

"मैं समझ गया तुम्हारी बात,बलबीर."

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"तुम कहा हो,ब्रिज?",ब्रिज कामया से बात कर तैय्यार हुआ ही था की सोनिया का फोन आ गया.

"मैं पंचमहल मे हू,डार्लिंग."

"तुम तो क्लेवर्त गये थे ना?"

"हां,वाहा का काम निपटा के यहा आ गया."

"इतनी जल्दी?"

"हां,काम जल्दी हो गया."

"ओह.वैसे क्या काम था,जान?",सोनिया की आँखे रात भर रोने से ला हो चुकी थी.अगर ब्रिज देख सकता तो देखता कि उसकी बीवी की आवज़ से बिल्कुल उल्टे भाव उसकी सूरत पे थे.

"अरे,मेरी रानी..अपने लोगो को बीच-2 मे चौंकाने से वो मुस्तैद रहते हैं.बस ऐसे ही चेकिंग कर रहा हू."

"हूँ..तो लोटोगे कब?"

"क्यू?याद आ रही है मेरी?",ब्रिज मुस्कुराया.

"ऐसे अचानक चले जाओगे तो चिंता तो होगी ना."

"ओह,डार्लिंग आइ लव यू!मैं जल्दी ही आ जाऊँगा.ओके?"

"ओके,डार्लिंग.आइ लव यू.बाइ!",सोनिया ने फोन कटा & फिर दूसरा नंबर डाइयल किया.

"हाई सोनिया.",विजयंत ने बलबीर को भी अपने होटेल के मॅनेजर से कहके 1 कमरा दिलवा दिया था.बियर पीने के बाद बलबीर आराम करने चला गया था जबकि विजयंत वही बैठा दूसरी बियर पी रहा था.

"विजयंत,मुझे सब कुच्छ बताओ."

"किस बारे मे,सोनिया?"

"समीर के बारे मे जो भी पता चला है तुम्हे.",विजयंत खामोश हो गया.

"क्या हुआ,विजयंत?"

"छ्चोड़ो ना,सोनिया.क्या करोगी जान के?",विजयंत ने जान बुझ के नाटक किया था.कल रात को सोनिया से हुई बात से उसे इतना तो समझ आ गया था कि वो ब्रिज को इस सब के पीछे का दिमाग़ समझ रही थी & इस बात से पति से दुखी भी थी.यही तो उसे चाहिए था.ब्रिज की बर्बादी तो उसका बहुत पुराना सपना था.

"प्लीज़,विजयंत.तुम्हे मेरी कसम.मुझे सब बताओ."

"ओके.",विजयंत ने 1 लंबी सांस ले उसे सारी बात शुरू से बताना चालू किया,"..लेकिन मैं यकीन से नही कह सकता कि वो ब्रिज ही था.अंधेरा था उस वक़्त."

"मैं तुमसे मिलना चाहती हू,विजयंत."

"प्लीज़,सोनिया यहा मत आओ.ख़तरा है यहा!"

"विजयंत,मैं तुमसे मिलने आ रही हू.",सोनिया ने फोन काट दिया.इतने दिनो से दोनो मर्दो के बीच झूलते हुए उसे कभी-2 बहुत ग्लानि होती थी.उसे लगता था कि वो पति से बेवफ़ाई कर रही है & प्रेमी से खेल रही है मगर अब उसकी उलझन सुलझती दिख रही थी.उसे समझ आ गया था कि उसका पति ग़लत था & प्रेमी सही.अब उसे किसी बात की परवाह भी नही थी.वो जानती थी कि विजयंत उस से कभी शादी नही करेगा लेकिन अब उसे उसकी रखैल बनके रहना भी मंज़ूर था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--38

gataank se aage.

"hun..jab aap kapde badalne gaye to bhi aapki nigah farsh pe pade shishe ke tukdo pe nahi gayi?"

"ji,nahi.aapne dekha hoga ki kamre ka cupboard us tute kanch vale darwaze se bilkul ulti diha me hai.main bete ke bare me sochta taiyyar hua & vaha se nikal gaya."

"yani ki jab aap rambha ji ke kamre ki aaramkursi pe so rahe the usi dauran vo andar ghusa hoga..khair!",vo khada ho gaya,"..main chalta hu.aap abhi bhi yehi,isi bungle me rahenge?"

"nahi,main to abhi apne hotel shift ho raha hu & rambha ko main kal hi Devalay bhej raha hu.main nahi chahta ki ye zara bhi khatre me pade.vaise officer main chahta hu ki aap media se ye bol den ki main bhi vapas Panchmahal ja raha hu."

"thik hai..",raza hansa.savere ki ghatnao ki kuchh bhanak to media ko lag hi gayi thi & vo kahabr sunghte bas us bungle tak pahunchane hi vale the,"..badhiya socha hai aapne.vaise kuchh bhi dhyan aaye to mujhe zarur batayen.ok!",usne hath milaya & nikal gaya.

"aapne ye kyu kaha ki main devalay ja rahi hu?",vijayant bahar apni Prado me baith gaya tha jisme bungle ka darban unka saman chadha raha tha.

"kyuki tum ja rahi ho.",rambha ne baith ke car ka darwaza band kiya to vijayant ne darban ko kuchh bakhshish di & car vaha se nikali.

"aap aise mera faisla nahi le sakte.main nahi ja rahi!",gusse se rambha ka chehra laal ho raha tha.vijayant use kya darpok samajh raha tha!..vo ghabrayi zarur thi lekin ab taiyyar bhi thi.aage vo shakhs uske karib aake dekhe,vo uska munh noch legi!

"bahas mat karo!",vijayant ne use danta,"..tumhari samajh me kuchh nahi aa raha.bahut khatra hai yahan!"

"mujhe darr nahi lagta kisi bhi baat se."

"bas!",vijayant ki bhari aavaz tez ho gayi & usne baya hath uthake bahu ko chup rehne ka ishara kiya,"..tum kal ja rahi ho.is baat ka faisla ho chuka hai.",rambha ki aankho me pani aa gaya.use aajtak aise kisi ne nahi danta tha.vo khamosh ho gayi & khidki se bahar dekhne lagi.vijayant ko bhi mehsus hua ki usne bahu se kuchh zyada hi sakhti se baat ki hai & usne baya hath badha ke sleeveless blouse se bahar jhank rahi uski narm,gori dayi banh ko chhua to rambha ne use jhatak diya.vijayant ne hath peechhe khincha & khamoshi se car chalane laga.

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panchmahal ke apne hotel me Brij Kothari aaram kar raha tha.savere dhardar jharno pe vijayant ko dekh vo bahut ghabra gaya tha lekin jab uski ghabrahat kam hui to usne devalay vapas lautne ka khayal dimagh se nikal diya.us se anjane me 1 achha kaam hua tha.vo apne office ki 1 car uthake Clayworth tak chala aaya tha joki uske naam pe register nahi thi.us car ko usne Avantipur ke apne daftar ki parking me lagaya & iasa karte use kisi ne nahi dekha.

uske baad 1 private taxi book ki & panchmahal pahuncha & vaha se seedha apne hotel.apne aadmiyo se usne yahi kaha ki vo hotel ki surprise checking pe aaya hai.vaha se usne avantipur ke daftar fone kar kaha ki devalay office ki 1 car vaha park hai jise vapas bhijwa diya jaye.

brij ne soch liya tha ki vo is mamle ko suljha ke hi manega & jo bhi use aise phansane ki koshish kar raha tha use vo maza zarur chakhayega.vo bistar pe leta tha ki uska mobile baja,"hello."

"hi,janeman!kaha rehte ho aajkal?picture sign karwa ke to bhul hi gaye mujhe.",kamya ki khanakti aavaz sunte hi brij ke hotho pe muskan fail gayi.

"meri jaan!hum to tumhare dil me hi rehte hain,tumhi use tatol ke dekhti nahi kabhi."

"uffff!..",kamya bistar me nangi leti thi.usne apni chut pe hath firaya jis se kabir ka virya beh raha tha.bas abhi hi unki chudai khatm hui thi & kabir bathroom me naha raha tha,"..tumne to lajawab kar diya,jaan!vaise kaha ho abhi?"

"jaha is waqt hona chahiye.",brij ne jaan bujh ke baat ghuma di,"..& tum?"

"main to avantipur me hu,yaar.shooting ke liye aayi hun."

"achha.kab aayi..i mean kab gayi vaha?"

"bas savere ki flight se pahunchi thi.dhardar pe gana shoot hona tha lekin pata nahi aaj vaha kuchh gadbad thi to pura ilaka seal tha.ab dekhen kal kya hota hai.aaj ka pura din to khali baithe bore houngi.",kamya ne kitni safai se jhuth bol diya tha.shooting cancel hone ki khabar sun kabir khushi se uchhal pada tha & use apne kamre me le aaya tha & agli subah tak kamya vahi rehne vali thi.

"achha.vaise kya gadbad hui hai vahan?"

"pata nahi.keh rahe hain ki koi gunda dikha tha vaha to pehle pure ilake ko chhan ke safe declare karenge fir public ko jane denge vaha."

"oh.",brij samajh gaya ki police asal baat chhupa rahi hai.sahi bhi tha,aakhir sameer ki jaan ka sawal tha lekin fir use kyu bulaya tha vaha us caller ne?..ho na ho ye vijayant ki hi ghinoni sazis hai..kamina!bete ko mohra bana mujhe phansana chahta hai,apne business ke liye!

"kya hua,brij darling chup kyu ho gaye?..kahi kisi dilruba ke sath to masruf nahi ho?",kamya ne use chheda.

"dilruba to is waqt avantipur me baithi hai yaha to bas niras files & ubau kaam hai.",brij ne natkiya aah bhari to kamya hans padi.

"to yaha aa jao na!abhi to shooting chalegi kuchh din yaha & fir yaha ka mausam kitna suhana hai.aise aalam me tumhari mazbut bazuo me pisne ka ji kar raha hai,darling!"

"thoda sabr karo,meri jaan.ho sakta hai bahut jald hi tumhari tamanna puri ho jaye."

"sach?",kamya ne bahut khush hone ka natak kiya.kabir apne baal ponchhta bathroom se bahar aa gaya tha.uska lund jhadne ke baad sikudne ke bavjood achha-khas lumba tha.kamya ne use dekh hotho pe jibh firayi & apni tange faila apni chut pe 1 ungli firayi.

"sach."

"to jaldi aana.ok,bye!",kamya ne fone kinare fenka & apni faili tango ke beech uski chut se apna virya apni zuban se saaf karte kabir ke baalo ko sehlane lagi.

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"mr.mehra,vo bahut chalak aadmi hai & usne bhanp liya tha ki main uska peechha kar raha hu & kya chakma diya usne mujhe.usi karan mujhe aane me der ho gayi varna use range hatho pakad leta.",Balbir Mohan Hotel Clayworth Violet ke bar me vijayant ke sath baitha tha & dono beer pi rahe the.bar abhi khula nahi tha & isiliye dono aaram se baate kar rahe the.

"balbir,use kabhi bhi kam nahi aankna.bahut shatir hai vo.",vijayant ne beer ka 1 ghunt bhara,"..vaise 1 baat samajh nahi aayi mujhe?"

"kya?"

"agar vo sameer ki gumshudgi ke peechhe hai to vo peechhe hi rehna pasand karega balki aisa jaal bunega ki koi ye samajh hi naye paye ki us jaal ke sire us tak jate hain.is tarah se khud jharne pe aana kuchh samajh nahi aaya."

"hun..jharne pe aapke peechhe-2 police ne bhi pahunchane me zara der kar di nahi to uska khel usi waqt khatm ho jata."

"abhi tak fir koi fone nahi aaya balbir.mujhe sameer ki fikr ho rahi hai."

"aap ghabraiye mat,mehra sahab.sameer ki keemat bahut oonchi lagayi hai use agwa karne vale ne.bina aapka jawab sune vo use hath nahi lagayenge."

"uske khoon se rangi kamiz bheji hai unhone balbir!",emhra ki aankho me gussa & darr dono the.

"mehra sahab,vo aapko darana chahte hain taki aap fauran unki baat maan len.sameer unke liye sone ke ande dene vali murgi hai,use marne ki bevkufi vo nahi kar sakte.unhone syringe se uski banh se khun nikal ke us kameez pe gira diya hoga.kisi bhi valid ke liye aulad ke khoon ko dekhna kitna khaufnak tajurba ho sakta hai,usi baat pe khel rahe hain vo."

"to kya karu main?",vijayant pehli baar itna bebas mehsus kar raha tha.

"aap unki baat maan lijiye."

"kya?!"

"haan,aapko agla fone jald ayega & vo aapko fir se sameer ko nuksan pahuchane ki baat kahenge.aap ghabra ke unki baat maan lijiye fir dekhiye vo kya bolte hain.kisi bhi tarah hume sameer ko apne paas lana hai.aapko bas baat maanane ki baat kehni hai sach me maanani thode hi hai.",balbir ki baat se vijayant ke hotho pe muskan aa gayi.

"main samajh gaya tumahri baat,balbir."

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"tum kaha ho,brij?",brij kamya se baat kar taiyyar hua hi tha ki Soniya ka fone aa gaya.

"main panchmahal me hu,darling."

"tum to clayworth gaye the na?"

"haan,vaha ka kaam nipta ke yaha aa gaya."

"itni jaldi?"

"haan,kaam jaldi ho gaya."

"oh.vaise kya kaam tha,jaan?",soniya ki aankhe raat bhar rone se laa ho chuki thi.agar brij dekh sakta to dekhta ki uski biwi ki aavz se bilkul ulte bhav uski surat pe the.

"are,meri rani..apne logo ko beech-2 me chaunkane se vo mustaid rehte hain.bas aise hi checking kar raha hu."

"hun..to lautoge kab?"

"kyu?yaad aa rahi hai meri?",brij muskuraya.

"aise achanak chale jaoge to chinta to hogi na."

"oh,darling i love you!main jaldi hi aa jaoonga.ok?"

"ok,darling.i love you.bye!",soniya ne fone kata & fir dusra number dial kiya.

"hi soniya.",vijayant ne balbir ko bhi apne hotel ke manager se kehke 1 kamra dilwa diya tha.beer pine ke baad balbir aaram karne chala gaya tha jabki vijayant vahi baitha dusri beer pi raha tha.

"vijayant,mujhe sab kuchh batao."

"kis bare me,soniya?"

"sameer ke bare me jo bhi pata chala hai tumhe.",vijayant khamosh ho gaya.

"kya hua,vijayant?"

"chhodo na,soniya.kya karogi jaan ke?",vijayant ne jaan bujh ke natak kiya tha.kal raat ko soniya se hui baat se use itna to samajh aa gaya tha ki vo brij ko is sab ke peechhe ka dimagh samajh rahi thi & is baat se pati se dukhi bhi thi.yehi to use chahiye tha.brij ki barbadi to uska bahut purana sapna tha.

"please,vijayant.tumhe meri kasam.mujhe sab batao."

"ok.",vijayant ne 1 lumbi sans le use sari baat shuru se batana chalu kiya,"..lekin main yakin se nahi keh sakta ki vo brij hi tha.andhera tha us waqt."

"main tumse milna chahti hu,vijayant."

"please,soniya yaha mat aao.khatra hai yaha!"

"vijayant,main tumse milne aa rahi hu.",soniya ne fone kaat diya.itne dino se dono mardo ke beech jhulte hue use kabhi-2 bahut galni hoti thi.use lagta tha ki vo pati se bewafai kar rahi hai & premi se khel rahi hai magar ab uski uljhan sulajhti dikh rahi thi.use samajh aa gaya tha ki uska pati galat tha & premi sahi.ab use kisi baat ki parwah bhi nahi thi.vo janti thi ki vijayant us se kabhi shadi nahi karega lekin ab use uski rakhail banke rehna bhi manzur tha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--39

गतान्क से आगे.

"ओह..प्रणव..ये ठीक नही है..",रीता अपने बिस्तर पे बैठी थी & उसके सामने घुटनो पे बैठा प्रणव उसके ब्लाउस खोल उसके ब्रा को उपर कर उसकी चूचियाँ चूस रहा था,"..छ्चोड़ो ना!..कही शिप्रा ना आ जाए!"

"उसे अभी थोडा वक़्त लगेगा.अभी तो नहाने गयी है.",प्रणव ने अपनी सास को पीछे धकेला & उसके घुटने उपर मोड़ते हुए उसके पाँव बिस्तर पे रखे.ऐसा करने से रीता की सारी अपनेआप उसकी चीनी जाँघो से फिसल उसकी कमर पे हो गयी.प्रणव ने जल्दी से उसकी पॅंटी खींची तो रीता की टाँगे खुद ब खुद थोड़ी फैल गयी.उसे अपने जिस्म की इस हरकत पे शर्म आई & उसने आँखे बंद कर मुँह बाई तरफ फेरा & टाँगे बंद कर ली.

"खोलिए ना,मोम!",प्रणव ने अपनी पॅंट नीचे सर्कायि & अपना तना लंड थामे सास की टाँगे फैलाने लगा.

"प्लीज़,प्रणव.मत करो.",रीता की ज़ुबान इनकार रही थी जबकि उसका जिस्म चीख रहा था प्रणव के लंड को अपने अंदर लेने के लिए.प्रणव ने ज़बरदस्ती उसकी टाँगे फैलाई & झुकते हुए अपनी सास मे सामने लगा.

"आहह..!",रीता कराही & अपने दामाद को अपने बाजुओ मे जाकड़ लिया & चूमने लगी,"..पागल कर दिया है तुमने मुझे..",प्रणव बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था & रीता भी उसकी कमर पे टाँगे कसे कमर उचका रही थी.दोनो ही जानते थे कि शिप्रा के आने से पहले अपने जलते जिस्मो को सकून पहुचाने के लिए वक़्त बहुत कम है,"..कल रात जो हुआ ठीक नही हुआ...हाईईईई..शिप्रा के साथ नाइंसाफी है ये..उउन्न्ञणनह..हान्णन्न्....चूसो उन्हे...आन्न्‍न्णनह.....ऐसे धीरे नही....हाँ ज़ोर से......ऊव्ववववववव..!",1 तरफ बेटी के साथ बेईमानी करने से उसका ज़मीर उसे कचोट रहा था तो दूसरी तरफ दामाद की बेसब्र जवानी उसके जिस्म को मज़े मे डूबा रही थी.

"फिर वही बात!मैं आपको प्यार करता हू & आप भी मुझे चाहती हैं & हम दोनो को 1 साथ खुश रहने का हक़ है..& मैं शिप्रा को छ्चोड़ नही रहा.उसे भी खुश रख रहा हू तो नाइंसाफी कैसी?..ये सब छ्चोड़िए मोम.मैं आपके साथ हर पल को भरपूर जीना चाहता हू.आप भी ऐसा ही चाहती हैं,आपका रोम-2 यही बात कह रहा है लेकिन आप इसे मान नही रही..आहह..!",रीता झाड़ गयी थी & उसने अपने नाख़ून प्रणव के कंधो पे गढ़ा दिए थे.उसने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी.

"ओह..प्रणव..आइ लव यू..आइ लव यू......अब मैं भी जियूंगी हर पल तुम्हारे साथ..तुमने मुझे फिर से जवान कर दिया है..आननह..!",प्रणव ने सास की चूचियाँ मसली & उसे चूम लिया.

"आप तो हमेशा से ही जवान थी बस भूल गयी थी इस बात को..आपका दिल भी जवान है & जिस्म भी..ये हुस्न तो किसी कमसिन लड़की को रश्क़ का एहसास करा दे!",रीता ने दामाद के मुँह से तारीफ सुन शर्म & खुशी से आँखे बंद कर उसे अपनी बाहो मे & कस लिया & उचक के उसके दाए कान मे जीभ फिराने लगी.दोनो 1 दूसरे की बाहो मे गुत्थमगुत्था बहुत जल्द ही अपनी मंज़िल तक फुँछ गये.रीता प्रणव की पीठ को नोचती कांप रही थी & प्रणव का लंड उसकी चूत मे अपना वीर्य गिरा रहा था.

"पर 1 सवाल है मोम.",सास के सुकून & खुमारी से भरे चेहरे पे से बाल हटा के उसने उसका माथा चूमा.

"क्या?",रीता ने उचक के दामाद के लबो पे 1 किस जड़ी.

"जब डॅड लौटेंगे तब हम कैसे मिलेंगे?",रीता के चेहरे पे 1 परच्छाई सी आई & उसने प्रणव के चेहरे को अपनी चूचियो पे दबा दिया.

"हम मिलेंगे,प्रणव.ज़रूर मिलेंगे.",रीता के चेहरे पे जो भाव था वो समझ नही आ रहा था पर हाँ,इतना ज़रूर था कि उसी पल उसने कोई बहुत अहम फ़ैसला अपने दिल मे ही ले लिया था.

"नाराज़ हो?",रंभा होटेल सूयीट के अपने कमरे के बेड पे बैठी थी जब विजयंत मेहरा उसके बाई तरफ आ बैठा.रंभा ने कोई जवाब नही दिया & दूसरी तरफ घूम गयी.विजयंत ने अपने होटेल मॅनेजर को बोल के ये सूयीट अपने लिए ठीक करवाया था जिसमे 2 बेडरूम & 1 छ्होटा सा लाउंज था.मॅनेजर को उसने सख़्त ताकीद की थी कि किसी को भी ये ना बताया जाए कि वो यहा है क्यूकी कल रात के बाद वो अपनी बहू को किसी और ख़तरे मे नही डाल सकता.

"आइ'एम सॉरी!",विजयंत उठ के उसके दाई तरफ बैठा & इस बार जब वो फिर से मुँह फेरने लगी तो उसने उसकी बाई बाँह को थाम उसे रोक दिया,"..रंभा,मेरी बात को समझो.यहा ख़तरा है & मैं तुम्हे मुसीबत मे नही डाल सकता."

"ख़तरा आपके लिए भी तो है!",रंभा की आँखो से शोले बरस रहे थे मगर साथ ही कुच्छ शबनम की बूंदे भी चमक रही थी.

"रज़ा की बात गौर से नही सुनी तुमने..",विजयंत का हाथ उसकी गुदाज़ बाँह पे उपर चढ़ता उसके बाए कंधे पे आ गया था,"..कोई मुझे घर से बाहर भेजना चाहता था ताकि तुम अकेली पड़ जाओ.हो सकता है केवल मुझे डराने के लिए किया हो उसने ऐसा लेकिन उस सूरत मे भी ख़तरे मे तो तुम ही रहती ना!",रंभा ने आँखे बंद कर अपना चेहरा बाई ओर घुमाया तो विजयंत का हाथ उसके कंधे से उठ उसके बाए गाल पे आ गया.

"मैं आपको छ्चोड़ के नही जाना चाहती.",शबनम की बूँदो ने उसकी पॅल्को के नीचे से उसके गालो को चूमने का रास्ता ढूंड ही लिया.विजयंत के दिल मे कुछ भर आया.ऐसा पहले कभी महसूस नही किया था उसने.रंभा के लिए भी ये एहसास नया था.ये प्यार तो नही था ये दोनो जानते थे क्यूकी दोनो ही जितना प्यार अपनेआप से करते थे उतना शायद कभी किसी & इंसान से नही कर सकते थे-1 दूसरे से भी नही लेकिन ये जो भी था उस खूबसूरत एहसास के बहुत करीब था.

"मैं भी तुमसे दूर नही रहना चाहता..",विजयंत की आवाज़ & भारी लगी तो रंभा ने आँखे खोली,"..मगर हालात की यही माँग है.",शबनम उसके बहू के गाल पे रखे हाथ पे ढालाक आई थी.

"ठीक है.आप कहते हैं तो मैं डेवाले चली जाती हू मगर मुझे पल-2 की खबर चाहिए.",रंभा ने अपना बाया हाथ ससुर के अपने गाल पे रखे हाथ के उपर रख दिया.

"थॅंक्स,रंभा.",विजयंत आगे झुका & उसके दाए गाल से चिपकी शबनम की बूंदे चखने लगा.

"एनितिंग फॉर यू,डॅड.",रंभा ने होंठो को ज़रा सा दाई तरफ घुमाया & विजयंत के लबो से लगा दिया.दोनो 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेलने लगे.शाम ढाल रही थी & दोनो के दिलो ने सोच लिया था कि रंभा की रवानगी से पहले-2 जितना हो सके 1 दूसरे की बाहो मे वक़्त गुज़ारेंगे ताकि जुदाई के पॅलो को इन रंगीन यादो के सहारे काट सकें.

दोनो 1 दूसरे के चेहरे को थामे बड़ी शिद्दत से चूम रहे थे.रंभा ने अपनी जीभ विजयंत के मुँह मे घुसा रखी थी & विजयंत भी उसे चूस रहा था.उसके हाथ बहू के चेहरे से नीचे उसकी पीठ पे आए & उसने उसे अपने सीने से लगा लिया.रंभा की भारी छातियो विजयंत के चौड़े सीने से टकराई तो उसका जिस्म खुशी से भर उठा & उसकी चूत लंड की हसरत से कसकने लगी.

"तुमसे 1 बात पुच्छू,बुरा मत मानना.",दोनो ने हाफ्ते हुए किस तोड़ी.विजयंत बहू के चेहरे को थामे था & रंभा भी उसकी दाढ़ी सहला रही थी.

"पुच्हिए,डॅड.",उसने उसकी कंज़ी के 3 बटन्स खोले & नीचे झुक सीने के घने बालो मे नाक घुसा के रगड़ा.

"मुझे तुम्हारी ज़िंदगी के बारे मे जानना है,सबकुच्छ.",रंभा ने सीने से मुँह उठाया & सवालिया नज़रो से ससुर को देखा.

"देखो,रंभा.मैं ये पक्का करना चाहता हू कि कही कोई तुमसे तो बदला नही लेना चाहता."

"मुझसे?",रंभा के हाथ विजयंत की जाँघो पे थे.विजयंत ने उसे अपने & करीब खींचा तो उसकी बैंगनी सारी का पल्लू गिर गया & मॅचिंग स्लीव्ले ब्लाउस के गले मे से उसका गोरा क्लीवेज झलकने लगा.

"देखो,रंभा.जब समीर गायब हुआ था & मैं पंचमहल आया तो मुझे तुमपे ही शक़ था..-"

"-..मुझे पता है.",रंभा के होंठो पे 1 उदास सी मुस्कान तेर गयी.विजयंत ने उसे आगोश मे भींचा & उसके चेहरे को हाथो मे थाम उसकी आँखो मे झाँका.

"इतने दीनो मे मुझे एहसास हो गया है कि मैं ग़लत था.मेरे सवाल का मक़सद सिर्फ़ अपने परिवार को मुसीबत से निकालना है,रंभा!",विजयंत की आँखो मे सच्चाई झलक रही थी.रंभा ने अपनी बाहे उसकी पीठ पे कस दी & उसे चूम लिया.

"मुझे नही पता की मेरे पिता कौन हैं..",उसने अपनी ज़िंदगी की दास्तान सुनानी शुरू कर दी.विजयंत ने उसे बाहो मे कसे हुए बिस्तर पे लिटा दिया.वो उसके चेहरे & गले को चूम रहा था.रंभा भी उसके बालो मे उंगलिया फिराती उसके चेहरे पे बीच-2 मे चूम रही थी.

विजयंत का दाया हाथ उसके चिकने पेट पे घूम रहा था & उसकी गहरी नाभि को कुरेद रहा था.रंभा ने उस से कुच्छ भी नही च्छुपाया,अपने प्रेमियो की बात भी नही.उसने उसे रवि,विनोद & परेश,तीनो के बारे मे बताया.विजयंत का हाथ उसकी कमर मे अटकी सारी के अंदर घुसना चाह रहा था.

"उन तीनो मे से कोई तो नही हो सकता इस सब के पीछे?",वो बहू के चेहरे के उपर झुका हुआ था & वो उसकी कमीज़ उतार रही थी.विजयंत का हाथ अभी उसकी सारी मे घुसा उसकी पॅंटी के ठीक उपर के पेट के हिस्से को सहला रहा था.

"मैं डेवाले पहुँच के परेश & विनोद के बारे मे तो पता लगा लूँगी लेकिन रवि के बारे मे मैं कुच्छ नही कर सकती..उउम्म्म्म..!",वो उचकी & विजयंत को नीचे गिराया & फिर उसे बाहो मे भर उल्टा कर दिया & उसके उपर चढ़ उसके सीने को चूमने लगी,"..वैसे मुझे लगता नही कि वो गधा इतना बड़ा काम कर सकता है.वो तो वही अपने बाप की दुकान संभाल रहा होगा.",उसने विजयंत के निपल को वैसे ही चूसा जैसे वो उसके निपल्स को चूस्ता था.

"आहह..उसके बारे मे तो पता लगवा लूँगा..!",विजयंत ने उसके बालो मे हाथ घुसा दिए.रंभा उसके सीने को चूमती नीचे उसके पेट पे हाथ फिरा रही थी.कुच्छ देर बाद वो उठी तो झुके होने की वजह से उसके ब्लाउस मे से उसकी छलकने & छलकती दिखने लगी.विजयंत उसे बाहो मे भरता उठ बैठा & दोनो प्रेमी 1 बार फिर बड़ी शिद्दत से 1 दूसरे को चूमने लगे.

"लेकिन वो शख्स था कौन जो आज सवेरे बंगल मे घुसा था?",विजयंत बिस्तर से टाँगे लटकाए बैठा था & रंभा उसकी गोद मे थी.विजयंत उसकी सारी खोल रहा था & रंभा उसके बालो को पकड़ उसकी दाढ़ी पे अपने गाल रगड़ रही थी.विजयंत ने कमर मे अटकी सारी को खींचा तो रंभा फर्श पे खड़ी हो गयी & फिर विजयंत ने खड़े होके सारी को उसके बदन से जुदा कर दिया.

"यही तो समझ नही आ रहा..",दोनो खड़े हो फिर से 1 दूसरे की बाहो मे समा गये.विजयंत ब्लाउस के उपर से ही उसकी चूचियाँ मसल रहा था,"..झरने पे जो भी था अगर समीर उसके क़ब्ज़े मे है तो उसकी माँग तो ये है की मैं अपना बिज़्नेस आगे ना बढ़ाऊं लेकिन फिर मेरे घर मे घुस मेरी बहू को क्यू नुकसान पहुचाना चाहता है वो ये समझ मे नही आ रहा मेरी..नुकसान पहुचाना है तो वो डेवाले क्यू नही जाता मेरे बाकी परिवार के पीछे?"

"उउन्न्ह..डेवाले मे घर पे,दफ़्तर मे कड़ी सेक्यूरिटी है.कोई भी ऐसे घुस नही सकता.यहा तो हम आसान निशाना थे....ऊहह..!",विजयंत के हाथ उसकी गंद को मसलते हुए उसके पेटिकोट के हुक्स को खोल रहे थे & उसकी ज़ुबान रंभा के क्लीवेज पे घूम रही थी.

"ये भी सही बात है लेकिन फिर भी उस शख्स का मक़सद क्या था आख़िर?",उस सवाल से जूझते विजयंत ने रंभा को बाहो मे भर लिया & उसकी मांसल कमर को हाथो से दबाते हुए उसके होंठ चूमने लगा.रंभा भी उसके मज़बूत जिस्म को अपने हाथो मे हसरत से भरती उसकी किस का पूरी गर्मजोशी से जवाब देने लगी.पेट पे दबा ससुर का तगड़ा लंड उसके बदन की आग को & भड़का रहा था.वो बेचैनी से कमर हिलाने लगी क्यूकी उसकी चूत की कसक बहुत बढ़ गयी थी.विजयंत ने उसकी गंद को हाथो मे दबोच उसके जिस्म को अपने जिस्म के साथ दबके पीस दिया तो वो उसके लाबो से जुड़े लाबो से आहें भरती काँपते हुए झाड़ गयी & खुद को उसकी मज़बूत बाहों के सहारे छ्चोड़ दिया.विजयंत उसे थामे,उसके बालो को चूमता तब तक खड़ा रहा जब तक की वो खुमारी से बाहर नही आ गयी.

"उसे छ्चोड़िए..",उसने ससुर के होंठो पे बाए हाथ की 1 उंगली फिराई,"..सवेरे झरने पे जो भी आया था उसे आप नही पहचान पाए थे?",विजयंत ने रंभा की आँखो मे झाँका.उसके हाथ रंभा की पीठ पे ब्लाउस के हुक्स को खोल रहे थे.

"नही,पहचान लिया था.",उसने हुक्स खोल रंभा को अपने आगोश से आज़ाद किया & ब्लाउस को आगे खींचा.रंभा ने भी बाहें फैलाक़े ससुर की ब्लाउस उतरने मे मदद की.

"वो ब्रिज कोठारी था.",विजयंत ने दाई बाँह उसकी कमर मे डाली & बाई को उसके सीने के उभारो को दबाते हुए पीछे ले गया & अगले ही पल रंभा की चूचियाँ काले ब्रा की क़ैद से आज़ाद थी.

"क्या?!",विजयंत दाए हाथ से उसकी कमर थाम झुका & उसकी चूचियाँ चूमने & चूसने लगा.उसका बाया हाथ बहू के मुलायम पेट & उसकी कमर के दाई तरफ घूम रहा था,"..आपने ये बात पोलीस को क्यू नही बताई?..& फिर कुच्छ कर क्यू नही रहे?..ऊन्नह..!",ससुर की ज़ुबान उसे मस्त कर रही थी.विजयंत झुक के उसकी बाई चूची चूस रहा था.रंभा ने दाए हाथ मे दाई चूची को थामा & विजयंत के बाल पकड़ उसका सर उठाके उसके मुँह को दाई चूची से लगा दिया.

"कुच्छ बातें है जो मुझे परेशान कर रही हैं.",विजयंत ने जम के उसकी चूचियो को चूसा & जब अपना सर उठाया तो वाहा पहले से ही बने उसके होंठो के निशानो मे इज़ाफ़ा हो गया था & निपल्स बिल्कुल कड़े हो गये थे,"..पहली तो ये की कोठारी इतना बेवकूफ़ नही की ऐसा काम करे & अपना चेहरा भी दिखा दे.वो तो ऐसा जाल बुनने वाला मकड़ा है की किसी को पता भी नही चले कि ये उसकी कारस्तानी है.",रंभा ने उसकी पॅंट खोल दी थी & अंडरवेर के उपर से ही उसके लंड को दबा रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--39

gataank se aage.

"oh..Pranav..ye thik nahi hai..",Rita apne bistar pe baithi thi & uske samne ghutno pe baitha pranav uske blouse khol uske bra ko upar kar uski chhatiyan chus raha tha,"..chhodo na!..kahi shipra na aa jaye!"

"use abhi thoda waqt lagega.abhi to nahane gayi hai.",pranav ne apni saas ko peechhe dhakela & uske ghutne upar modte hue uske panv bistar pe rakhe.aisa karne se rita ki sari apneaap uski chini jangho se fisal uski kamar pe ho gayi.pranav ne jaldi se uski panty khinchi to rita ki tange khud ba khud thodi fail gayi.use apne jism ki is harkat pe sharm aayi & usne aankhe band kar munh bayi taraf fera & tange band kar li.

"kholiye na,mom!",pranav ne apni pant neeche sarkayi & apna tana lund thame saas ki tange failane laga.

"please,pranav.mat karo.",rita ki zuban inkar rahi thi jabki uska jism chikh raha tha pranav ke lund ko apne andar lene ke liye.pranav ne zabardasti uski tange failayi & jhukte hue apni saas me samane laga.

"aahhhhhhhhh..!",rita karahi & apne damad ko apne bazuo me jakad liya & chumne lagi,"..pagal kar diya hai tumne mujhe..",pranav bahut tez dhakke laga raha tha & rita bhi uski kamar pe tange kase kamar uchka rahi thi.dono hi jante the ki shipra ke aane se pehle apne jalte jismo ko ukun pahuchane ke liye waqt bahut kam hai,"..kal raat jo hua thik nahi hua...haiiiii..shipra ke sath nainsafi hai ye..uunnnnnhhhhh..haannnn....chuso unhe...aannnnnhhhhhh.....aise dhire nahi....haan zor se......oowwwwwwww..!",1 taraf beti ke sath beimani karne se uska zameer use kachot raha tha to dusri taraf damad ki besabra jawani uske jism ko maze me duba rahi thi.

"fir vahi baat!main aapko pyar karta hu & aap bhi mujhe chahti hain & hum dono ko 1 sath khush rehne ka haq hai..& main shipra ko chhod nahi raha.use bhi khush rakh raha hu to nainsafi kaisi?..ye sab chhodiye mom.main aapke sath har pal ko bharpur jina chahta hu.aap bhi aisa hi chahti hain,aapka rom-2 yehi bata keh raha hai lekin aap ise maan nahi rahi..aahhhh..!",rita jhad gayi thi & usne apne nakhun pranav ke kandho pe gada diye the.usne dhakko ki raftar badha di.

"oh..pranav..i love you..i love you......ab main bhi jiyungi har pal tumhare sath..tumne mujhe fir se jawan kar diya hai..aannhhhh..!",pranav ne saas ki chhatiya masli & use chum liya.

"aap to humesha se hi jawan thi bas bhul gayi thi is baat ko..aapka dil bhi jawan hai & jism bhi..ye husn to kisi kamsin ladki ko rashq ka ehsas kara de!",rita ne damad ke munh se tarif sun sharm & khushi se aankhe band kar use apni baaho me & kas liya & uchak ke uske daye kaan me jibh firane lagi.dono 1 dusre ki baaho me gutthamguttha bahut jald hi apni manzil tak phunch gaye.rita pranav ki pith ko nochti kanp rahi thi & pranav ka lund uski chut me apna virya gira raha tha.

"par 1 sawal hai mom.",saas ke sukun & khumari se bhare chehre pe se baal hatake usne uska mataha chuma.

"kya?",rita ne uchak ke damad ke labo pe 1 kiss jadi.

"jab dad lautnege tab hum kaise milenge?",rita ke chehre pe 1 parchhai si aayi & usne pranav ke chehre ko apni choochiyo pe daba diya.

"hum milenge,pranav.zarur milenge.",rita ke chehre pe jo bhav tha vo samajh nahi aa raha tha par haan,itna zarur tha ki usi pal usne koi bahut aham faisla apne dil me hi le liya tha.

"Naraz ho?",Rambha hotel suite ke apne kamre ke bed pe baithi thi jab Vijayant Mehra uske bayi taraf aa baitha.rambha ne koi jawab nahi diya & dusri taraf ghum gayi.vijayant ne apne hotel manager ko bol ke ye suite apne liye thik karwaya tha jisme 2 bedroom & 1 chhota sa lounge tha.manager ko usne sakht takeed ki thi ki kisi ko bhi ye na bataya jaye ki vo yaha hai kyuki kal raat ke bad vo apni bahu ko kisi aur khatre me nahi daal sakta.

"i'm sorry!",vijayant uth ke uske dayi taraf baitha & is baar jab vo fir se munh ferne lagi to usne uski bayi banh ko tham use rok diya,"..rambha,meri baat ko samjho.yaha khatra hai & main tumhe musibat me nahi daal sakta."

"khatra aapke liye bhi to hai!",rambha ki aankho se shole baras rahe the magar sath hi kuchh shabnam ki boonde bhi chamak rahi thi.

"Raza ki baat gaur se nahi suni tumne..",vijayant ka hath uski gudaz banh pe upar chadhta uske baye kandhe pe aa gaya tha,"..koi mujhe ghar se bahar bhejna chahta tha taki tum akeli pad jao.ho sakta hai keval mujhe darane ke liye kiya ho usne aisa lekin us surat me bhi khatre me to tum hi rehti na!",rambha ne aankhe band kar apna chehra bayi or ghumaya to vijayant ka hath uske kandhe se uth uske baye gaal pe aa gaya.

"main aapko chhod ke nahi jana chahti.",shabnam ki boondo ne uski palko ke neeche se uske galo ko chumne ka rasta dhoond hi liya.vijayant ke dil me kuch bhar aaya.aisa pehle kabhi mehsus nahi kiya tha usne.rambha ke liye bhi ye ehsas naya tha.ye pyar to nahi tha ye dono jante the kyuki dono hi jitna pyar apneaap se karte the utna shayad kabhi kisi & insan se nahi kar sakte the-1 dusre se bhi nahi lekin ye jo bhi tha us khubsurat ehsas ke bahut karib tha.

"main bhi tumse door nahi rehna chahta..",vijayant ki aavaz & bhari lagi to rambha ne aankhe kholi,"..magar halaat ki yehi maang hai.",shabnam uske bahu ke gaal pe rakhe hath pe dhalak aayi thi.

"thik hai.aap kehte hain to main Devalay chali jati hu magar mujhe pal-2 ki khabar chahiye.",rambha ne apna baya hath sasur ke apne gaal pe rakhe hath ke upar rakh diya.

"thanks,rambha.",vijayant aage jhuka & uske daye gaal se chipki shabnam ki boonde chakhne laga.

"anything for you,dad.",rambha ne hotho ko zara sa dayi taraf ghumaya & vijayant ke labo se laga diya.dono 1 dusre ki zubano se khelne lage.sham dhal rahi thi & dono ke dilo ne soch liya tha ki rambha ki rawangi se phele-2 jitna ho sake 1 dusre ki baaho me waqt guzarenge taki judai ke palo ko in rangeen yaado ke sahare kaat saken.

dono 1 dusre ke chehre ko thame badi shiddat se chum rahe the.rambha ne apni jibh vijayant ke munh me ghusa rakhi thi & vijayant bhi use chus raha tha.uske hath bahu ke chehre se neeche uski pith pe aaye & usne use apne seene se laga liya.rambha ki bhari chhatiyan vijayant ke chaude seene se takrayi to uska jism khushi se bhar utha & uski chut lund ki hasrat se kasakne lagi.

"tumse 1 baat puchhu,bura mat maanana.",dono ne hanfte hue kiss todi.vijayant bahu ke chehre ko thame tha & rambha bhi uski dadhi sehla rahi thi.

"puchhiye,dad.",usne uski kamzi ke 3 buttons khole & neeche jhuk seene ke ghane balo me naak ghusa ke ragda.

"mujhe tumhari zindagi ke bare me jaanana hai,sabkuchh.",rambha ne seene se munh uthaya & sawaliya nazro se sasur ko dekha.

"dekho,rambha.main ye pakka karna chahta hu ki kahi koi tumse to badla nahi lena chahta."

"mujhse?",rambha ke hath vijayant ki jangho pe the.vijayant ne use apne & karib khincha to uski baingani sari ka pallu gir gaya & matching sleeveless blouse ke gale me se uska gora cleavage jhalakne laga.

"dekho,rambha.jab Sameer gayab hua tha & main Panchamhal aaya to mujhe tumpe hi shaq tha..-"

"-..mujhe pata hai.",rambha ke hotho pe 1 udas si muskan tair gayi.vijayant ne use agosh me bhincha & uske chehre ko hatho me tham uski aankho me jhanka.

"itne dino me mujhe ehsas ho gaya hai ki main galat tha.mere sawal ka maqsad sirf apnme parivar ko musibat se nikalna hai,rambha!",vijayant ki aankho me sachchai jhalak rahi thi.rambha ne apni baahe uski pith pe kas di & use chum liya.

"mujhe nahi pata ki mere pita kaun hain..",usne apni zindagi ki dastan sunani shuru kar di.vijayant ne use baaho me kase hue bistar pe lita diya.vo uske chehre & gale ko chum raha tha.rambha bhi uske baalo me ungliya firati uske chehre pe beech-2 me chum rahi thi.

vijayant ka daya hath uske chikne pet pe ghum raha tha & uski gehri nabhi ko kured raha tha.rambha ne us se kuchh bhi nahi chhupaya,apne premiyo ki baat bhi nahi.usne use Ravi,Vinod & Paresh,teeno ke bare me bataya.vijayant ka hath uski kamar me atki sari ke andar ghusna chah raha tha.

"un teeno me se koi to nahi ho sakta is sab ke peechhe?",vo bahu ke chehre ke upar jhuka hua tha & vo uski kamiz utar rahi thi.vijayant ka hath abhi uski sari me ghusa uski panty ke thik upar ke pet ke hisse ko sehla raha tha.

"main devalay pahunch ke paresh & vinod ke bare me to pata laga lungi lekin ravi ke bare me main kuchh nahi kar sakti..uummmm..!",vo uchki & vijayant ko neeche giraya & fir use baaho me bhar ulta kar diya & uske upar chadh uske seene ko chumne lagi,"..vaise mujhe lagta nahi ki vo gadha itna bada kaam kar sakta hai.vo tovahi apne baap ki dukan sambhal raha hoga.",usne vijayant ke nipple ko vaise hi chusa jaise vo uske nipples ko chusta tha.

"aahhhh..uske bare me to pata lagwa lunga..!",vijayant ne uske baalo me hath ghusa diye.rambha uske seene ko chumti neeche uske pet pe hath fira rahi thi.kuchh der baad vo uthi to jhuke hone ki vajah se uske blouse me se uski chhatiyan & chhalakti dikhne lagi.vijayant use baaho me bharta uth baitha & dono premi 1 baar fir badi shiddat se 1 dusre ko chumne lage.

"lekin vo shakhs tha kaun jo aaj savere bungle me ghusa tha?",vijayant bistar se tange latkaye baitha tha & rambha uski god me thi.vijayant uski sari khol raha tha & rambha uske baalo ko pakad uski dadhi pe apne gaal ragad rahi thi.vijayant ne kamar me atki sari ko khincha to rambha farsh pe khadi ho gayi & fir vijayant ne khade hoke sari ko uske badan se juda kar diya.

"yehi to samajh nahi aa raha..",dono khade ho fir se 1 dusre ki baaho me sama gaye.vijayant blouse ke upar se hi uski choochiyan masal raha tha,"..jharne pe jo bhi tha agar sameer uske kabze me hai to uski mang to ye hai ki main apna business aage na badhaoon lekin fir mere ghar me ghus meri bahu ko kyu nuksan pahuchana chahta hai vo ye samajh me nahi aa raha meri..nuksan pahuchana hai to vo devalay kyu nahi jata mere baki parivar ke peechhe?"

"uunnhhhh..devalay me ghar pe,daftar me kadi security hai.koi bhi aise ghus nahi sakta.yaha to hum aasan nishana the....oohhhh..!",vijayant ke hath uski gand ko maslate hue uske petticoat ke hooks ko khol rahe the & uski zuban rambha ke cleavage pe ghum rahi thi.

"ye bhi sahi baat hai lekin fir bhi us shakhs ka maqsad kya tha aakhir?",us sawal se jujhte vijayant ne rambha ko baaho me bhar liya & uski mansal kamar ko hatho se dabate hue uske honth chumne laga.rambha bhi uske mazbut jism ko apne hatho me hasrat se bharti uski kiss ka puri garmjoshi se jawab dene lagi.pet pe daba sasur ka tagda lund uske badan ki aag ko & bhadka raha tha.vo bechaini se kamar hilane lagi kyuki uski chut ki kasak bahut badh gayi thi.vijayant ne uski gand ko hatho me daboch uske jism ko apne jism ke sath dabake pees diya to vo uske labo se jude labo se aahen bharti kanpte hue jhad gayi & khud ko uski mazbut baahon ke sahare chhod diya.vijayant use thame,uske baalo ko chumta tab tak khada raha jab tak ki vo khumari se bahar nahi aa gayi.

"use chhodiye..",usne sasur ke hotho pe baye hath ki 1 ungli fiaryi,"..savere jharne pe jo bhi aaya tha use aap nahi pehchan paye the?",vijayant ne rambha ki aankho me jhanka.uske hath rambha ki pith pe blouse ke hooks ko khol rahe the.

"nahi,pehchan liya tha.",usne hooks khol rambha ko apne agosh se azad kiya & blouse ko aage khincha.rambha ne bhi baahen failake sasur ki blouse utarne me madad ki.

"vo Brij Kothari tha.",vijayant ne dayi banh uski kamar me dali & bayi ko uske seene ke ubharo ko dabate hue peechhe le gaya & agle hi pal rambha ki choochiyan kale bra ki qaid se azad thi.

"kya?!",vijayant daye hath se uski kamar tham jhuka & uski chhatiya chumne & chusne laga.uska baya hath bahu ke mulayam pet & uski kamar ke dayi taraf ghum raha tha,"..aapne ye baat police ko kyu nahi batayi?..& fir kuchh kar kyu nahi rahe?..oonnhhhhh..!",sasur ki zuban use mast kar rahi thi.vijayant jhuk ke uski bayi choochi chus raha tha.rambha ne daye hath me dayi chhati ko thama & vijayant ke baal pakad uska sar uthake uske munh ko dayi choochi se laga diya.

"kuchh baaten hai jo mujhe pareshan kar rahi hain.",vijayant ne jum ke uski choochiyo ko chusa & jab apna sar uthaya to vaha pehle se hi bane uske hotho ke nishano me izafa ho gaya tha & nipples bilkul kade ho gaye the,"..pehli to ye ki kothari itna bevkuf nahi ki aisa kaam kare & apna chehra bhi dikha de.vo to aisa jaal bunane wala makda hai ki kisi ko pata bhi nahi chale ki ye uski karastani hai.",rambha ne uski pant khol di thi & underwear ke upar se hi uske lund ko daba rahi thi.

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kramashah.......

 
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