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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--11

गतान्क से आगे.

"थॅंक्स.",उसने इंटरकॉम बंद किया & ठीक उसी वक़्त उसके दिमाग़ मे उसकी परेशानी का हाल कौंधा.तजुर्बे & क्वालिफिकेशन्स की बिना पे बस सोनम ही उसकी सेक्रेटरी बन सकती थी.आज तक उसने अपने बिज़्नेस के साथ समझौता नही किया था & आज भी नही करेगा.उसने इंटरकम का बटन दबाया,"मिस.सोनम रौत & मिस.रंभा वेर्मा के अलावा बाकी लड़कियो को जाने को कहो & फिर मिस.रौत को मेरे पास भेजो."

"मिस.रौत,कंग्रॅजुलेशन्स!",विजयंत ने उस से हाथ मिलाया तो सोनम के बदन मे झुरजुरी दौड़ गयी.उसके कॅबिन मे घुसने पे विजयंत ने खड़े होके उसका स्वागत किया था,"आप इस पोस्ट के लिए चुन ली गयी हैं."

"थॅंक्स,सर."

"उमीद है हमारे साथ काम करके आपको अच्छा लगेगा.आप बाहर जाएँगी तो आपको मिस्टर.कुमार मिलेंगे जोकि आपको ऑफर लेटर देंगे अगर उसमे लिखी बातें आपको मंज़ूर होंगी तो आपका अपायंटमेंट लेटर आपको थमा दिया जाएगा."

"थॅंक यू,सर.",सोनम बाहर आई & कुमार नाम के शख्स के साथ बैठ अपनी सॅलरी & बाकी बातें समझने लगी.

"आइए मिस.रंभा.",विजयंत खड़ा मुस्कुरा रहा था,अब कॅबिन मे रोशनी भी ज़्यादा थी.उसके लंबे-चौड़े डील-डौल & हॅंडसम चेहरे को देख रंभा के दिल मे 1 कसक उठी.उसका दिल किया कि अपने हाथ से उसकी सुनेहरी दाढ़ी मे हाथ फिरा दे.उसने रंभा को बैठने को इशारा किया तो रंभा डेस्क के सामने की 1 कुर्सी पे बैठ गयी.विजयंत उसके करीब आया & डेस्क पे बैठ गया.1 पल को उसकी निगाहे रंभा की मक्खनी जाँघो पे पड़ी फिर उसने अपनी नज़रे उसकी नज़रो से मिला दी.

"मिस.रंभा,मैं आपको अपनी सेक्रेटरी की जगह नही दे सकता.",मायूस रंभा ने सर झुका लिया,"..लेकिन मैं आपको 1 दूसरी पोस्ट ऑफर कर सकता हू.",रंभा ने हैरत से सर उठाया.

"क्या आप मेरे बेटे की सेक्रेटरी बनाना पसंद करेंगी?"

"सर!",रंभा इस नये ऑफर से चौंक गयी थी.

"जी,देखिए कोई और उमीदवार था जोकि आपसे बेहतर था लेकिन इसका ये मतलब नही कि आप काबिल नही हैं.आप काबिल हैं & इसलिए मैं आपको खोना नही चाहता..",खोना लफ्ज़ पे विजयंत ने ज़ोर दिया था,"..तो क्या आपको ये ऑफर मंज़ूर है?"

"ज़रूर,सर..",रंभा खुशी & रहट से मुस्कुराइ,"..आपके ग्रूप मे काम करने का मौका मैं गँवाने की सोच भी नही सकती."

"तो ठीक है.कंग्रॅजुलेशन्स!",उसने उसकी ओर हाथ बढ़ाया & उसके कोमल,नाज़ुक से हाथ के एहसास से वो फिर पागल हो गया.उसका दिल किया कि उसे खींच बाहो मे भर उसके चेहरे को अपने बेकरार होंठो के निशानो से ढँक दे!

"आप बाहर जाइए,आपको सभी बातें समझा दी जाएँगी.",ना चाहते हुए भी उसने उसका हाथ छ्चोड़ा & उसे विदा किया.रंभा तो हवा मे उड़ रही थी.इतना बड़ा इंसान खुद उसका इंटरव्यू ले & फिर खुद उसे बेटे की सेक्रेटरी बनाने को कहे.ये काम तो वो अपने किसी आदमी से भी करवा सकता था लेकिन उसने खुद उसे बुला के जॉब की ऑफर दी,ये सब उसके बड़प्पन की निशानी थी!

विजयंत के असली मंसूबो से अंजान रंभा खुशी मे चूर बाहर आके अपनी नयी नौकरी के बारे मे जानने-समझने लगी.

जब नयी नौकरी की सारी बातें पक्की कर रंभा ट्रस्ट ग्रूप के ऑफीस से निकली तो उसकी खुशी का ठिकाना नही था.वो बेकरार हो रही थी अपनी खुशी किसी से बाँटने के लिए लेकिन कौन था इस शहर मे जिसके साथ वो अपनी खुशी बाँटती?..& तब उसे विनोद का ख़याल आया जिसकी मदद के बिना ये होना नामुमकिन था.उसने फ़ौरन उसे फोन लगाया.

"हेलो,डार्लिंग!कैसा रहा इंटरव्यू?"

"बढ़िया."

"तो क्या नौकरी मिल गयी तुम्हे?"

"नही & हां."

"क्या पहेलियाँ बुझा रही हो?",रंभा हंस पड़ी.

"आज शाम को मिलो.इस पहेली का हल भी बताउन्गि & ट्रीट भी दूँगी.चलो ना,कही बाहर खाना खाएँगे!"

"आज तो मुश्किल है,जानेमन.बहुत काम है."

"ओह.",रंभा मायूस हो गयी.

"ऐसा क्यू नही करती कि सीधा मेरे घर पहुँचो.वही जश्न मनाते हैं.",रंभा उसके जश्न का मतलब समझ मुस्कुराइ.

"ओके."

"ठीक है,मैं फोन करूँगा & बताउन्गा की कितने बजे तक तुम घर आ जाओ."

"बाइ."

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"हेलो,डार्लिंग.",कामया ने होटेल वाय्लेट मे विजयंत के प्राइवेट सूयीट मे कदम रखा.1 लिफ्ट सीधा सूयीट मे खुलती थी & विजयंत ने उसका 1 कार्ड कामया को दे रखा था.विजयंत केवल 1 ड्रेसिंग गाउन पहने बिस्तर पे अढ़लेटा वाइन पी रहा था.गाउन के गले मे से उसका सुनहरे बालो से भरा सीना & नीचे मज़बूत टांगे नुमाया हो रहे थे.कामया समझ गयी थी की गाउन के नीचे उसका प्रेमी नंगा है & उसने 1 वासना भरी मुस्कान फेंकी.उसने 1 पीले रंग का कसा हुआ स्लीवेलसस टॉप & स्किन टाइट जीन्स पहनी हुई थी.वो विजयंत के करीब आई & उसके सामने बाई बाँह पे अढ़लेटी हो गयी & उसके हाथ से वाइन का ग्लास ले 1 घूँट भरा & फिर उसके होंठ चूम लिए.

अगले ही पल दोनो 1 दूसरे को बाहो मे भरे अपने जिस्मो को आपस मे रगड़ते हुए बड़ी शिद्दत के साथ किस्सिंग कर रहे थे.विजयंत का बाया हाथ कामया की गंद से लेके पीठ को मसल रहा था.कामया ने मस्त हो अपनी दाई टांग उसकी टाँगो के उपर चढ़ा दी.उसके हाथ विजयंत के सर & सीने के बालो मे घूम रहे थे & ज़ुबान विजयंत के मुँह मे.

"तुम्हे मेरा 1 काम करना होगा.",कामया ने विजयंत का गाउन खोल दिया था & उसके सीने को चूमने & उसके निपल्स को चूसने के बाद नीचे जा रही थी.कुच्छ ही लम्हो बाद विजयंत का सख़्त लंड उसके मुँह मे अंदर-बाहर हो रहा था.विजयंत ने हाथ बढ़ा उसकी शर्ट को उपर किया & उसकी गोरी पीठ को सहलाते हुए अपना हाथ नीचे कर उसकी चूचियो को दबाने लगा.

"कैसा काम?",लंड ने हमेशा की तरह कामया को तुरंत मदहोश कर दिया था.वो उठी & 1 ही झटके मे अपना टॉप & ब्रा निकाल दिए & विजयंत को धकेल बिस्तर पे सुला उसके उपर आई & अपनी बाई चूची को पकड़ उसके मुँह मे दे दिया & जैसे ही विजयंत ने उसे चूसने शुरू किया वो च्चटपटाते हुए आहें भरने लगी.

"तुम्हे मुझे सोनिया कोठारी से मिलवाना होगा लेकिन इस तरह की उसे लगे कि ये 1 इत्तेफ़ाक़ है कि हम दोनो 1 ही जगह पे हैं.",उसने कामया को पलटा & फिर उसकी दूधिया चूचियो को चूसने लगा.कामया आहे भरते हुए हाथ नीचे ले जाके उसके लंड से खेलने लगी.

"ओह..विजयंत लेकिन ये कैसे मुमकिन होगा..ऊहह..मेरी पॅंट उतारो..",उसने विजयंत की जीन्स उतारने मे मदद की,"..पहले की बात और थी वो पार्टीस ऑर्गनाइज़ करने का ही काम करती थी तो मुलाकात हो जाती थी लेकिन अब वो कोठारी की बीवी है,मैं किस तरह से उसकी & तुम्हारी मुलाकात कर्वाऊं?!..ओईईईईईईईईईईईईई..!",विजयंत ने उसे नगी कर उसकी चूत मे उंगली करते हुए उसके दाने को चूम लिया था.

"वो सोचना तुम्हारा काम है,डार्लिंग.",विजयंत ने उसकी चूत मे 2 उंगलिया घुसा दी थी,"..मुझे बस सोनिया से मिलना है."

"हूँ.",कामया ने विजयंत का सर पकड़ उसके मुँह को अपनी चूत पे दबा उसे खामोश कर दिया & दोनो जिस्मो का मस्ती भरा खेल खेलने लगे.

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"उउम्म्म्म..विनोद..ऊव्व..!",विनोद के घर मे कदम रखते ही उसने रंभा को दबोच लिया था & उसके चेहरे पे किस्सस की बौछार करते हुए उसकी गंद पे चिकोटी काट ली थी.रंभा ने 1 दिला-ढाला टॉप & लंबी,ढीली स्कर्ट पहनी हुई थी जिसे उठा के विनोद उसकी मोटी गंद को दबाए जा रहा था.

"नयी नौकरी की बधाई कबूल करो जानेमन!",उसने उसे गोद मे उठा लिया & अपने बेडरूम मे ला बिस्तर पे लिटा उसे बाहो मे भर उसके जिस्म के साथ खेलने लगा.

"बड़े बेसब्र हो तुम!....उउम्म्म्मम..!",विनोद ने उसकी स्कर्ट को कमर तक उपर कर दिया था & उसकी जाँघो को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूम रहा था.

"अब बताओ दिन मे क्या पहेली बुझा रही थी.",उसने उसका टॉप उपर किया & उसके चिकने पेट को चूमने लगा.

"उउन्न्ञन्..मुझे ट्रस्ट मे नौकरी मिल गयी मगर वो नही जिसके लिए मैने अर्ज़ी दी थी..आहह..!",विनोद उसकी नाभि चाट रहा था.

"तो फिर कौन सी नौकरी मिली?",रंभा ने उसके बाल पकड़ उसे उपर खींचा & बाहो मे भर उसे पलट के उसके उपर सवार हो गयी & उसकी टी-शर्ट को निकाल उसके सीने को चूमने लगी.उसकी गर्म सांसो के साथ जब उसने विनोद के सीने पे पहले बहुत हल्की किस्सस दी & फिर दांतो से धीरे-2 काटा तो विनोद आहे भरने पे मजबूर हो गया.

"मुझे विजयंत मेहरा के बेटे समीर की सेक्रेटरी की नौकरी मिली है.",रंभा विनोद के जिस्म के दोनो ओर घुटने जमा के उसके उपर बैठी थी & उसके हाफ-पॅंट मे से उसका लंड उसकी गंद मे चुभ रहा था.उसने झट से विनोद की पॅंट सर्काई & उसके तने लंड को पकड़ के अपने मुँह के हवाले किया.

"आहह..ये तो कमाल हो गया!",विनोद ने उसके बाल पकड़ उसके सर को अपने लंड पे दबा दिया.

"हूँ..",उसका मुँह विनोद के लंड से भरा हुआ था जिसके नीचे लटके आंडो को वो दबाए जा रही थी.विनोद को लगा की अगर रंभा इसी तरह उसके लंड को चुस्ती रही तो वो फ़ौरन झाड़ जाएगा.उसने उसके बाल पकड़ उसे उपर खींचा तो वो उसके उपर आ गयी & उसे चूमने लगी.दोनो पागलो की तरह 1 दूसरे को चूम रहे थे.विनोद के हाथ तो उसकी गंद से जैसे चिपक ही गये थे & उसकी पॅंटी की बगलो से अंदर घुस उसकी कसी फांको को दबोचे हुए थे.

"तुम्हारी बीवी अभी भी मयके मे है?",विनोद ने उसे लिटा दिया था & जल्दी-2 उसके कपड़े उतार रहा था.

"हां.",उसने उसकी पॅंटी निकाली & उसकी टाँगे फैला झुक के अपना मुँह उसकी गीली चूत से लगा दिया.

"कब लौटेगी?...ऊऊओह..!"

"कल.",उसने जवाब दिया & वापस उसकी चूत से बहते रस को पीने लगा.

"यही है वो....आन्न्न्नह.....हाआंन्‍णणन्..!",उसने दीवार पे लगी विनोद & उसकी बीवी की तस्वीर की ओर इशारा किया & ठीक उसी वक़्त विनोद ने उसके दाने को मुँह मे भर के उसपे जीभ फिराई & वो झाड़ गयी.

"हां.",विनोद उसकी फैली टाँगे थम घुटनो पे बैठा अपना लंड उसकी चूत मे घुसा रहा था.रंभा ने गौर किया कि विनोद अपनी बीवी के बारे मे बात करने से कतरा रहा था.उसने विनोद को अपने उपर गिराया & बाहो मे भर उसे चूमने लगी.उसका लंड चूत मे उसे बहुत भला लग रहा था & जिस्म मे वोही जाना-पहचाना मज़ेदार एहसास अपनी शिद्दत की ओर पहुँच रहा था.विनोद उसे चूमते,उसकी गर्दन को चूमते हुए बहुत ज़ोरदार धक्के लगा रहा था.रंभा ने अपनी बाहें & टाँगे उसके जिस्म के गिर्द लपेट दी थी & अपनी कमर जोश मे उचका रही थी.

"विनोद,तुम मेरे सवालो से परेशान हो गये थे ना?",उसने उसे पलटा & उसके उपर आ गयी.उसकी मस्त चूचियाँ विनोद के सीने पे दबी हुई थी & उसने उसके चेहरे को हाथो मे थामा हुआ था.विनोद ने जवाब नही दिया & अपना मुँह फेर लिया.

"उउम्म्म्म..डार्लिंग..घबराते क्यू हो?",कमर हिलाते हुए रंभा उसके चेहरे को चूम रही थी,"..तुम्हे क्या लगता है कि मैं तुम्हारे पीछे पड़ जाऊंगी?..तुम शादीशुदा हो इस बात का फयडा उठा तुम्हे धमकाऊँगी..हूँ?",विनोद उसकी आँखो मे देखने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--11

gataank se aage.

"thanx.",usne intrecom band kiya & thik usi waqt uske dimagh me uski pareshani ka hal kaundha.tajurbe & qualifications ki bina pe bas sonam hi uski secretary ban sakti thi.aaj tak usne apne business ke sath samjhauta nahi kiya tha & aaj bhi nahi karega.usne intercom ka button dabaya,"ms.sonam raut & ms.Rambha Verma ke alawa baki ladkiyo ko jane ko kaho & fir ms.raut ko mere paas bhejo."

"ms.raut,congratulations!",vijayant ne us se hath milaya to sonam ke badan me jhurjhuri daud gayi.uske cabin me ghusne pe vijayant ne khade hoke uska swagat kiya tha,"aap is post ke liye chun li gayi hain."

"thanx,sir."

"umeed hai huamre sath kaam karke aapko achha lagega.aap bahar jayengi to aapko Mr.Kumar milenge joki aapko offer letter denge agar usme likhi baaten aapko manzur hongi to aapka appointment letter aapko thama diya jayega."

"thank you,sir.",sonam bahar aayi & kumar naam ke shakhs ke sath baith apni salary & baki baaten samajhne lagi.

"aaiye ms.rambha.",vijayant khada muskura raha tha,ab cabin me roshni bhi zyada thi.uske lambe-chaude deel-daul & handsome chehre ko dekh rambha ke dil me 1 kasak uthi.uska dil kiya ki apne hath se uski sunehri dadhi me hath fira de.usne rambha ko baithne ko ishara kiya to rambha desk ke samne ki 1 kursi pe baith gayi.vijayant uske kareeb aaya & desk pe baith gaya.1 pal ko uski nigahe rambha ki makkhani jangho pe padi fir usne apni nazre uski nazro se mila di.

"ms.rambha,main aapko apni secretary ki jagah nahi de sakta.",mayus rambha ne sar jhuka liya,"..lekin main aapko 1 dusri post offer kar sakta hu.",rambha ne hairat se sar uthaya.

"kya aap mere bete ki secretary banana pasand karengi?"

"sir!",rambha is naye offer se chaunk gayi thi.

"ji,dekhiye koi aur umeedvar tha joki aapse behtar tha lekin iska ye matlab nahi ki aap kabil nahi hain.aap kabil hain & isliye main aapko khona nahi chahta..",khona lafz pe vijayant ne zor diya tha,"..to kya aapko ye offer manzoor hai?"

"zaroor,sir..",rambha khushi & rahat se muskurayi,"..aapke group me kaam karne ka mauka main ganwane ki soch bhi nahi sakti."

"to thik hai.congratulations!",usne uski or hath badhaya & uske komal,nazuk se hath ke ehsas se vo fir pagal ho gaya.uska dil kiya ki use khinch baaho me bhar uske chehre ko apne bekarar hotho ke nishano se dhank de!

"aap bahar jaiye,aapko sabhi baaten samjha di jayengi.",na chhate hue bhi usne uska hath chhoda & use vida kiya.rambha to hawa me ud rahi thi.itna bada insan khud uska interview le & fir khud use bete ki secretary banane ko kahe.ye kaam to vo apne kisi aadmi se bhi karwa sakta tha lekin usne khud use bulake job ki offer di,ye sab uske badappan ki nishani thi!

vijayant ke asli mansoobo se anjan rambha khushi me choor bahar aake apni nayi naukri ke bare me jaanane-samajhne lagi.

Jab nayi naukri ki sari baaten pakki kar Rambha Trust group ke office se nikli to uski khushi ka thikana nahi tha.vo bekarar ho rahi thi apni khushi kisi se baantane ke liye lekin kaun tha is shehar me jiske sath vo apni khushi baantati?..& tab use Vinod ka khayal aaya jiski madad ke bina ye hona namumkin tha.usne fauran use fone lagaya.

"hello,darling!kaisa raha interview?"

"badhiya."

"to kya naukri mil gayi tumhe?"

"nahi & haan."

"kya paheliyan bujha rahi ho?",rambha hans padi.

"aaj sham ko milo.is paheli ka hal bhi bataungi & treat bhi dungi.chalo na,kahi bahar khana khayenge!"

"aaj to mushkil hai,janeman.bahut kaam hai."

"oh.",rambha mayoos ho gayi.

"aisa kyu nahi karti ki seedha mere ghar pahuncho.vahi jsahn manate hain.",rambha uske jashn ka matlab samajh muskurayi.

"ok."

"thik hai,main fone karunga & bataunga ki kitne baje tak tum ghar aa jao."

"bye."

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"hello,darling.",Kamya ne Hotel Violet me Vijayant ke private suite me kadam rakha.1 lift seedha suite me khulti thi & vijayant ne uska 1 card kamya ko de rakha tha.vijayant kewal 1 dressing gown pehne bistar pe adhleta wine pi raha tha.gown ke gale me se uska sunahre baalo se bhara seena & neeche mazbut tabge numaya ho rahe the.kamya samajh gayi thi ki gown ke neeche uska premi nanga hai & usne 1 vasna bhari muskan fenki.usne 1 pile rang ka kasa hua sleevelss top & skin tight jeans pehni hui thi.vo vijayant ke karib aayi & uske samne bayi banh pe adhleti ho gayi & uske hath se wine ka glass le 1 ghunt bhara & fir uske honth chum liye.

agle hi pal dono 1 dusre ko baaho me bhare apne jismo ko aapas me ragadte hue badi shiddat ke sath kissing kar rahe the.vijayant ka baya hath kamya ki gand se leke pith ko masal raha tha.kamya ne mast ho apni dayi tang uski tango ke upar chadha di.uske hath vijayant ke sar & seene ke baalo me ghum rahe the & zuban vijayant ke munh me.

"tumhe mera 1 kaam karna hoga.",kamya ne vijayant ka gown khol diya tha & uske seene ko chumne & uske nipples ko chusne ke baad neeche ja rahi thi.kuchh hi lamho baad vijayant ka sakht lund uske munh me andar-bahar ho raha tha.vijayant ne hath badha uski shirt ko upar kiya & uski gori pith ko sehlate hue apna hath neeche kar uski chhatiyo ko dabane laga.

"kaisa kaam?",lund ne humesha ki tarah kamya ko turant madhosh kar diya tha.vo uthi & 1 hi jhatke me apna top & bra nikal diye & vijayant ko dhakel bistar pe sula uske upar aayi & apni bayi chhati ko pakd uske munh me de diya & jaise hi vijayant ne use chusne shuru kiya vo chhatpatate hue aahen bharne lagi.

"tumhe mujhe Soniya Kothari se milwana hoga lekin is tarah ki use lage ki ye 1 ittefaq hai ki hum dono 1 hi jagah pe hain.",usne kamya ko palta & fir uski doodhiya choochiyo ko chusne laga.kamya aahe bharte hue hath neeche le jake uske lund se khelne lagi.

"ohhhhhhh..vijayant lekin ye kaise mumkin hoga..oohhhhh..meri pant utaro..",usne vijayant ki jeans utarne me madad ki,"..pehle ki baat aur thi vo parties organize karne ka hi kaam karti thi to mulakat ho jati thi lekin ab vo Kothari ki biwi hai,main kis tarah se uski & tumhari mulakat karwaoon?!..ouiiiiiiiiiiiiiiii..!",vijayant ne use nagi kar uski chut me ungli karte hue uske dane ko chum liya tha.

"vo sochna tumhara kaam hai,darling.",vijayant ne uski chut me 2 ungliya ghusa di thi,"..mujhe bas soniya se milna hai."

"hun.",kamya ne vijayant ka sar pakad uske munh ko apni chut pe daba use khamosh kar diya & dono jismo ka masti bhara khel khelne lage.

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"uummmm..vinod..ooww..!",vinod ke ghar me kadam rakhte hi usne rambha ko daboch liya tha & uske chehre pe kisses ki bauchhar karte hue uski gand pe chikoti kaat li thi.rambha ne 1 dila-dhala top & lambi,dhili skirt pehni hui thi jise utha ke vinod uski moti gand ko dabaye ja raha tha.

"nayi naukri ki badhayi kabul karo janeman!",usne use god me utha liya & apne bedroom me la bistar pe lita use baaho me bhar uske jism ke sath kehlen laga.

"bade besabr ho tum!....uummmmm..!",vinod ne uski skirt ko kamar tak upar kar diya tha & uski jangho ko sehlate hue uski gardan chum raha tha.

"ab batao din me kya paheli bujha rahi thi.",usne uska top upar kiya & uske chikne pet ko chumne laga.

"uunnnn..mujhe Trust me naukri mil gayi magar vo nahi jiske liye maine arzi di thi..aahhhh..!",vinod uski nabhi chat raha tha.

"to fir kaun si naukri mili?",rambha ne uske baal pakad use upar khincha & baaho me bhar use palat ke uske upar sawar ho gayi & uski t-shirt ko nikal uske seene ko chumne lagi.uski garm sanso ke sath jab usne vinod ke seene pe pehle bahut halki kisses di & fir danto se dhire-2 kaata to vinod aahe bharne pe majbur ho gaya.

"mujhe Vijayant Mehra ke bete Sameer ki secretary ki naukri mili hai.",rambha vinod ke jism ke dono or ghutne jama ke uske upar baithi thi & uske half-pant me se uska lund uski gand me chubh raha tha.usne jhat se vinod ki pant sarkayi & use tane lund ko pakad ke apne munh ke hawale kiya.

"aahhhh..ye to kamaal ho gaya!",vinod ne uske baal pakad uske sar ko apne lund pe daba diya.

"hun..",uska munh vinod ke lund se bhara hua tha jiske neeche latke ando ko vo dabaye ja rahi thi.vinod ko laga ki agar rambha isi tarah uske lund ko chusti rahi to vo fauran jhad jayega.usne uske baal pakad use upar khincha to vo uske upar aa gayi & use chumne lagi.dono paglo ki tarah 1 dusre ko chum rahe the.vinod ke hath to uski gand se jaise chipak hi gaye the & uski panty ki baglo se andar ghus uski kasi fanko ko daboche hue the.

"tumhari biwi abhi bhi mayke me hai?",vinod ne use lita diya tha & jaldi-2 uske kapde utar raha tha.

"haan.",usne uski panty nikali & uski tange faila jhuk ke apna munh uski gili chut se laga diya.

"kab lautegi?...ooooohhhhhhhhhhh..!"

"kal.",usne jawab diya & vapas uski chut se behte ras ko pine laga.

"yehi hai vo....aannnnhhhhhhhhh.....haaaannnnn..!",usne deewar pe lagi vinod & uski biwi ki tasvir ki or ishara kiya & thik usi waqt vinod ne uske dane ko munh me bhar ke uspe jibh firayi & vo jhad gayi.

"haan.",vinod uski faili tange tham ghutno pe baitha apna lund uski chut me ghusa raha tha.rambha ne gaur kiya ki vinod apni biwi ke bare me baat karne se katra raha tha.usne vinod ko apne upar giraya & baaho me bhar use chumne lagi.uska lund chut me use bahut bhala lag raha tha & jism me vohi jana-pehchana mazedar ehsas apni shiddat ki or pahunch raha tha.vinod use chumte,uski gardan ko chumte hue bahut zordar dhakke laga raha tha.rambha ne apni baahen & tange uske jism ke gird lapet di thi & apni kamar josh me uchka rahi thi.

"vinod,tum mere sawalo se pareshan ho gaye the na?",usne use palta & uske upar aa gayi.uski mast chhatiyan vinod ke seene pe dabi hui thi & usne uske chehre ko hatho me thama hua tha.vinod ne jawab nahi diya & apna munh fer liya.

"uummmm..darling..ghabrate kyu ho?",kamar hilate hue rambha uske chehre ko chum rahi thi,"..tumhe kya lagta hai ki main tumahre peechhe pad jaoongi?..tum shadishuda ho is baat ka fayda utha tumhe dhamkaoongi..hun?",vinod uski aankho me dekhne laga.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--12

गतान्क से आगे.

"विनोद,मुझे कुच्छ चाहिए था.तुमने उसकी कीमत माँगी & मैने वो अदा की..",रंभा अब उसके सीने से उठ गयी थी & उसके सीने से लेके पेट तक हाथ चलाती,अपनी चूचिया उछालती कमर हिला रही थी,"..तुमने अपना वादा निभाया & मुझे मेरी चीज़ दे दी.कल को मेरी शादी हो जाएगी तब क्या मैं तुमसे डरती फिरुन्गि कि कही तुम मेरे पति को कुच्छ ना कह दो?..नही,विनोद..ये जो हो रहा है दो इंसानो की मर्ज़ी से हो रहा है.इसमे तुम्हारी बीवी या मेरा होने वाला बाय्फ्रेंड या पति का क्या काम!"

"..इसलिए मेरी जान,इन बेकार की बातो को दिल से निकालो & ये बताओ कि कल जब तुम्हारी बीवी वापस आ जाएगी तो हम कैसे मिलेंगे?",विनोद अब मुस्कुरा रहा था.रंभा ने जैसे उसके ज़हन को पढ़ लिया था & उसकी सारी उलझन को दूर कर दिया था.उसने उसकी चूचिया थाम ली & उन्हे दबाया.

"जब भी फ़ुर्सत मिलेगी मैं आपकी खिदमत मे हाज़िर हो जाऊँगा,हुज़ूर!",उसकी मटकिया अंदाज़ मे कही बात से रंभा हंस पड़ी.विनोद ने उसकी चूचिया पकड़ उसे नीचे खींचा,"..पर पहले तुम उस हॉस्टिल को छोड़ दो & कोई किराए का घर ले लो.",उसने उसे पलट के खुद के नीचे किया & अब बहुत ही गहरे धक्के लगाने लगा.

"उउन्न्ञणनह..सोच तो मैं भी कुच्छ ऐसा रही थी..हाईईईईईईईई....!",देर से हो रही चुदाई रंग लाई & रंभा झाड़ गयी.

"..लेकिन कैसे मिलेगा घर?",कुच्छ पलो बाद जब खुमारी थोड़ी कम हुई तो उसने अपनी चूचियो से चिपके विनोद का सर उपर उठाया.

"मैं तुम्हे 1 एजेंट का पता बताउन्गा,उस से मिल लेना.",अब उसकी बारी थी.वो उसके सीने से उठा & अपना वज़न अपने हाथो पे रख बहुत ज़ोर से अपनी कमर हिलाने लगा.रंभा अब जोश से चीख रही थी & विनोद भी उसकी चूत की सिकुड़ने-फैलने की मस्तानी हरकत से आहत हो आहें भर रहा था.रंभा ने अपने नाख़ून विनोद की बाहो मे धंसा दिए & कमर उचकाती हुई बदन को मोड़ अपना सर पीछे झटका.वो झाड़ गयी थी & झाड़ते ही उसकी चूत ने विनोद के लंड को और कस लिया.

"आहह..!",विनोद के मुँह से आह निकली & उसका जिस्म झटके खाने लगा.उसका गाढ़ा वीर्य रंभा की चूत मे भर रहा था.वो हांफता उसके सीने पे लेट गया & सुकून से मुस्कुराती रंभा ने उसे बाहो मे भर लिया.

पॅरिस के फोर सीज़न्स जॉर्ज व होटेल के हनिमून सूयीट के बिस्तर पे सोनिया पेट के बल नंगी पड़ी थी.उसके हाथो ने बिस्तर की चादर को ज़ोर से भींच रखा था & होटो पे मस्ती भरी मुस्कान खेल रही थी.उसके पीछे ब्रिज कोठारी उसकी सुडोल दाई तंग के पिच्छले गुदाज़ हिस्से को चूम नही बल्कि धीमे-2 चूस रहा था.सोनिया ने हल्की सी आह भारी & अपना मुँह बिस्तर मे च्छूपा लिया & फिर अपने सीने को देखा,उसके जिस्म पे कयि जगह छ्होटे-2 निशान पड़े हुए थे जोकि सब ब्रिज के होटो की मेहेरबानी थी.

"आन्न्ह्ह्ह्ह..!",सोनिया ने बिस्तर से सर उठा के झटका,ब्रिज उसकी मोटी गंद को मसल्ते हुए उसकी चूत मे अपनी लपलपाति जीभ फिरा रहा था.सोनिया की आँखे मस्ती के नशे से भर गयी & उसने बेसब्री से कमरे मे नज़र घुमाई,चारो तरफ वो तोहफे पड़े थे जो ब्रिज ने हनिमून के पहले दिन से उसके लिए खरीदने शुरू कर दिए थे.अब तो उसे किसी चीज़ की तारीफ करने मे भी डर लगने लगा था.इधर वो तारीफ करती उधर ब्रिज उसकी कीमत अदा करता नज़र आता.सोनिया ज़िंदगी मे इतनी खुश पहले कभी नही थी.

उसके बदन मे बिजली दौड़ रही थी & वो काँप रही थी,ब्रिज की जीभ ने उसकी मस्ती को अंजाम तक पहुँचा ही दिया था.उसने 1 लंबी आह भरी,अब ब्रिज उसकी गंद को हवा मे उठा उसकी चूत मे लंड घुसा रहा था.सोनिया फ़ौरन अपने घुटनो & हाथो पे हो गयी.ब्रिज के साथ चुदाई मे उसे जो मज़ा आया था वो आजतक उसने कभी महसूस नही किया था.ब्रिज धक्के लगाने लगा & वो चादर भिंचे अपने सर को हिलाती,ज़ूलफे झटकाती मदहोश हो आसमान मे उड़ने लगी.

तभी ब्रिज का फोन बजा,बिस्तर पे लेटते हुए अपने सीने को उसपे दबाते हुए उसने फोन उठा के नंबर देखा,"ये सोनम कौन है..ऊन्नह..?",ब्रिज ने लंड पूरा बाहर खींच फिर 1 ही झटके मे ज़ोर से अंदर घुसेड दिया था.

"रानी है."

"क्या?!",जलन,गुस्से,हैरत से भरी आवाज़ के साथ उसने सर घुमा के बाए कंधे के उपर से उसे देखा.ब्रिज बीवी की इस अदा पे हंस दिया.

"अभी समझाता हू.",उसने उसके हाथ से मोबाइल लेके अपने कान से लगाया,"हेलो."

"मुझे विजयंत मेहरा के सेक्रेटरी की नौकरी मिल गयी है."

"वेरी गुड.",ब्रिज ने चुदाई रोक दी तो परेशान हो सोनिया ने खुद ही गंद आगे- पीछे करते हुए खुद ही अपनी चुदाई शुरू कर दी,"..अब तुम अगले 3 महीनो तक मुझे उसके ग्रूप के बारे मे कोई खबर नही दोगि."

"क्या?!"

"हां,मैं चाहता हू कि मेहरा को पूरा यकीन हो जाए कि तुम 1 वफ़ादार इंसान हो.तुम्हारे इस फोन नंबर के बारे मे किसी को भी नही पता चलना चाहिए.इसे हर वक़्त ऑन रखना ताकि मुझे तुमसे कॉंटॅक्ट करने मे कोई परेशानी ना हो लेकिन इसे साइलेंट मोड पे रखना.बस जैसा कहा है करती जाओ तो जीत अपनी ही होगी."

"ओके & आपका हनिमून कैसा चल रहा है?..अपनी बीवी की चूत का तो बॅंड बजा दिया होगा आपने अब तक!",उसने चुहल की.ब्रिज ज़ोर से हंसा & फोन बंद कर दिया.सोनिया अब बहुत ज़ोर से कमर हिलाते हुए आहें भर आयी थी.ब्रिज उसके उपर झुका & उसे बिस्तर & अपने जिस्म के बीच दबा दिया.अपने हाथ उसने सोनिया के जिस्म के नीचे घुसा के उसकी गोल छातियो को दबोच लिया & तेज़ी से उसकी चुदाई करने लगा.

"कौन थी....चुड़ैल?!",ब्रिज ने उसके दाए कंधे के उपर से सर झुकाते हुए उसके होंठ चूमने की कोशिश की तो उसने मुँह फेर लिया.ब्रिज उसकी जलन देख हंसा.

"अरे मेरी जान,वो मेरी बिच्छाई शतरंज की बाज़ी का वो प्यादा है जो दुश्मन के खेमे मे घुस बिसात की आख़िरी पाले तक पहुच अब रानी मे तब्दील हो गयी है & मुझे ये बाज़ी मेरा यही मोहरा जितवायेगा."

"क्या कह रहे हो मेरी कुच्छ समझ नही आ रहा..उउम्म्म्मम..!",पति की बातो से उसका गुस्सा थोड़ा कम तो हुआ था & इस बार उसने उसे अपने लब चूमने की इजाज़त दे दी थी.

"तुम छ्चोड़ो ये बातें,मेरी जान..वो मेरी नौकर है & इस वक़्त मेरे 1 बहुत अहम काम को अंजाम देने मे जुटी है.मेरे दिल की रानी तो सिर्फ़ तुम हो मेरी बेगम सिर्फ़ तुम!",सोनिया थोड़ी देर खफा हो ब्रिज को थोड़ा तड़पाना चाहती थी मगर उसने ऐसे लहजे मे बात कही थी कि वो मुस्कुराए बिना नही रह सकी.ब्रिज ने होंठ उसकी गर्दन के थोड़ा नीचे उसकी पीठ पे चिपका दिए & बड़े गहरे धक्के लगाने लगा.पूरा सूयीट सोनिया की आहो से गुलज़ार हो गया.अपने पति की क़ातिल चुदाई से बहाल वो फ़ौरन झाड़ गयी & उसके पीछे उस से सटा उसका पति भी झटके ख़ाता झाड़ गया.

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अगले 4 दिन रंभा के लिए काफ़ी भाग-दौड़ से भरे थे.नये दफ़्तर मे 3 दिन उसकी ट्रैनिंग हुई & फिर चौथे दिन से उसकी नौकरी शुरू हो गयी.पहली मुलाकात मे ही उसे समीर बड़ा अच्छा लगा था.बाप ही की तरह हॅंडसम & बहुत शालीन इंसान लगा था उसे वो लेकिन जहा विजयंत को देख वो थोड़ा असहज हो जाती थी वही समीर के साथ उसे ज़रा भी घबराहट नही होती थी.

अब इसका कारण क्या था ये उसकी समझ मे नही आया था,उसकी रोबिली शख्सियत,उसका रुतबा या फिर उसकी नज़रें.विजयंत को देख उसके दिल मे 1-2 बार गुस्ताख ख्याल भी आए थे,अब वो क्या करती वो था ही इतना हॅंडसम!

अगले दिन सभी लोग गुजरात जा रहे थे जहा समीर की निगरानी मे पूरे हुए प्रॉजेक्ट का उद्घाटन करने खुद PM आ रहे थे मगर उस से पहले रंभा को 1 बहुत ज़रूरी काम निपटाना था.विनोद के बताए एजेंट ने उसे काई मकान दिखाए थे मगर उसे कोई पसंद नही आया & जो आया उसका मकान मालिक म्यूज़्ज़ मकान देने को तैयार नही था.वो विनोद का जान-पहचान वाला था लेकिन फिर भी वो मकान देने को राज़ी नही हो रहा था.

रंभा को वो घर बहुत पसंद आ गया था & उसने ठान लिया था कि जो भी हो उसे किराए पे यही मकान चाहिए.मकान मालिक विनोद की उम्र का ही था बस थोड़ा मोटा था,वो विदेश मे रहता था डेवाले मे उसका 4 कमरो का फ्लॅट था जिसके 2 कमरे वो किराए पे देना चाहता था.बाकी 2 कमरो को वो अपने समान के साथ बंद अपने क़ब्ज़े मे रखना चाहता था.

रंभा ब्यूटी पार्लर मे थी,गुजरात के फंक्षन के लिए उसने लाल बॉर्डर की सफेद सारी & लाल ब्लाउस लिया था.पार्लर मे वो उस लिबास को ट्राइ करते हुए अपना साज़-सिंगर करवा रही थी.वो फंक्षन के पहले 1 बार खुद को उस लिबास मे देख लेना चाहती थी ताकि उस दिन उसे तैय्यार होने मे ना परेशानी हो ना वक़्त लगे.

वो पार्लर मे बैठी थी कि विनोद का फोन आया की वो फ़ौरन उसके पहचान वाले के मकान पे पहुँचे,दोनो ने तय किया था की 1 आख़िरी बार मकान मालिक से बात करके देखेंगे.रंभा तुरंत पार्लर से निकल गयी & उस बिल्डिंग के नीचे खड़ी हो विनोद का इंतेज़ार करने लगी जिस इमारत मे वो फ्लॅट था.सजी-सँवरी रंभा को आने-जाने वाले घूर रहे थे मगर विनोद का कही पता नही था,उपर से वो फोन भी नही उठा रहा था.रंभा खिज उठी & तय किया कि वो उपर फ्लॅट मे जाके सीधा मकान मालिक से बात कर ले.

"हेलो.",मकान मालिक परेश ने दरवाज़ा खोला,"..विनोद ने कहा था कि आप दोनो आने वाले हैं.",रंभा अंदर आई.जो हॉल & कमरा किराए पे देना था वो खाली था,बाकी 2 कमरो मे परेश का समान था.परेश ने उसे 1 कमरे मे बिस्तर पे बिठाया.

"परेश जी,आप मुझे मकान क्यू नही देना चाहते?",रंभा सीधा मुद्दे पे आई.परेश उसके सजे-सँवरे रूप को देखे जा रहा था.रंभा के सवाल से जैसे वो होश मे आया.

"ज-जी..हां..वो बात ये है कि..",रंभा ने भी उसकी निगाहो की गुस्ताख़ी देख ली थी & उसके दिमाग़ मे ख़याल कौंधा कि शायद उसके जिस्म का जादू यहा भी चल जाए & उसने सारी ठीक करने के बहाने पल्लू थोड़ा किनारे कर अपना गोरा पेट उसकी निगाहो के सामने कर दिया,"..मैं किसी अकेली लड़की को घर देने मे डरता हू.बुरा मत मानीएगा..",उसकी निगाहें रंभा के पेट & चेरे के बीच ही घूम रही थी,"..मगर कल कही कुच्छ उल्टा-सीधा हो जाए तो मेरे घर का तो नाम खराब होगा ना."

"आपको मैं ऐसी-वैसी लड़की लगती हू?",रंभा ने भोलेपन से कहा & अपना बाया हाथ अपने पेट पे फिराया.ऐसा करने से पल्लू थोड़ा सा सरका & परेश को उसका हल्का सा क्लीवेज दिखाई दे गया.

"मेरा वो मतलब नही था..",वो बिस्तर मे उसके बगल मे ही बैठा था,"..लेकिन आप मेरी बात समझने की कोशिश तो कीजिए.आप अकेली रहेंगी यहा &.."

"& क्या?",रंभा थोड़ा सर्की & अपना दाया घुटना उसके बाए से सटाते हुए उसका हाथ पकड़ लिया,"..अब आप जैसा शरीफ इंसान मुझे घर नही देगा तो कौन देगा!..आप मेरे नज़रिए से भी तो देखिए कही मुझे किसी ऐसे-वैसे आदमी ने घर दे दिया तो..&..कही..",रंभा ने उसके हाथ पे हाथ रखे नज़रे नीची कर ली.

"कही ..क्या रंभा जी?",परेश था तो मर्द ही,उसने रंभा का हाथ थाम लिया.अब इतनी खूबसूरत लड़की खुद हाथ पकड़े तो वो मौका क्यू छ्चोड़े!

"कही उसने मेरे साथ कुच्छ कर दिया तो?",रंभा ने सर झुकाए शर्म से कहा.

"कुच्छ क्या?",परेश को ऐसी बात करने मे मज़ा आने लगा था.

"कही मेरे अकेलेपन का फ़ायदा उठा लिया तो."

"मैं समझा नही."

"बानिए मत!",रंभा ने शर्म से मुस्कुराते हुए उसे देखा,"..प्लीज़ परेश जी,दे दीजिए ना..प्लीज़!",वो मचलते हुए उसके & करीब हुई तो परेश थोड़ा पीछे हुआ & लड़खड़ा बिस्तर पे गिर गया.रंभा उसके उपर सवार हो गयी.

"परेश जी,मुझे आपका मकान पसंद है & आप भी.",उसका आँचल खिसक गया था & झुके होने की वजह से सीने को उभर ब्लाउस से बाहर छलक्ने को तैय्यार थे.परेश के माथे पे पसीना च्छच्छला आया,"..मैं अभी सेक्यूरिटी डेपॉज़िट देने को तैयार हू.",अपना चेहरा परेश के बिल्कुल करीब ला अपने होंठ उसके होंठो से बस 2 इंच की दूरी पे रोक लिए.उसकी गर्म साँसे,मदमाती खुसबु से परेश का दिमाग़ घूम गया.

"म-मगर..र-रंभा जी..-"

"-..सिर्फ़ रंभा.",रंभा ने उसके होंठ चूम लिए,"..आप मुझे ही मकान देंगे.",उसने उसका बाया गाल चूमा,"बोलिए?",& फिर दाया गाल चूमा & उसकी आँखो से आँखे मिला दी.

"ल-लेकिन.."

"परेश जी,मुझे किराए पे घर दीजिए & जब भी आप यहा आएँगे,किराए के अलावा किरायेदार भी आपकी बाहो मे होगा.कहिए इतनी बढ़िया डील दे सकता है कोई आपको?"

परेश ने अपने हाथ उसकी नगी पीठ पे जमा दिए & उचक के उसे चूमने को हुआ पर रंभा ने अपना सर पीछे खींच लिया,"ना पहले कहिए कि घर मुझे देंगे."

"तुम्हे ही दूँगा मेरी जान!",परेश ने उसे बाहो मे कस बिस्तर पे पलट दिया & चूमने लगा.वो उस हुसनपरी को बाहो मे पा दीवाना हो गया था.रंभा ने उसे परे धकेला & खड़ी हो गयी.

"मेरी सारी खराब हो जाएगी.",वो शोखी से मुस्कुराइ & अपनी सारी उतारने लगी.परेश की साँसे तेज़ हो गयी & वो भी अपनी कमीज़ के बटन खोलने लगा.मुस्कुराती रंभा ने बेझिझक अपने सारे कपड़े उतार दिए.उसके नंगे,गोरे जिस्म को देख परेश का मुँह हैरत से खुला रह गया.उसकी नज़रे ये तय नही कर पा रही थी कि कहा देखे-रंभा के ऊँचे सीने को,उसके गोल पेट को या फिर सुडोल टाँगो & कसी जाँघो के बीच उसकी गुलाबी चूत को!

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क्रमशः.......

JAAL paart--12

gataank se aage.

"vinod,mujhe kuchh chahiye tha.tumne uski keemat mangi & maine vo ada ki..",rambha ab uske seene se uth gayi thi & uske seene se leke pet tak hath chalaati,apni chhatiya uchhlati kamar hila rahi thi,"..tumne apna vada nibhaya & mujhe meri chiz de di.kal ko meri shadi ho jayegi tab kya main tumse darti firungi ki kahi tum mere pati ko kuchh na keh do?..nahi,vinod..ye jo ho raha hai do insano ki marzi se ho raha hai.isme tumhari biwi ya mera hone wala boyfriend ya pati ka kya kaam!"

"..isliye meri jaan,in bekar ki baato ko dil se nikalo & ye batao ki kal jab tumhari biwi vapas aa jeygi to hum kaise milenge?",vinod ab muskura raha tha.rambha ne jaise uske zehan ko padh liya tha & uski sari uljhan ko door kar diya tha.usne uski choochiya tham li & unhe dabaya.

"jab bhi fursat milegi main aapki khidmat me hazir ho jaoonga,huzur!",uski matkiya andaz me kahi baat se rambha hans padi.vinod ne uski choochiya pakad use neeche khincha,"..par pehle tum us hostel ko chhodod & koi kiraye ka ghar le lo.",usne use palat ke khud ke neeche kiya & ab bahut hi gehre dhakke lagane laga.

"uunnnnnhhhhhhhh..soch to main bhi kuchh aisa rahi thi..haiiiiiiiii....!",der se ho rahi chudai rang layi & rambha jhad gayi.

"..lekin kaise milega ghar?",kuchh palo baad jab khumari thodi kam hui to usne apni choochiyo se chipke vinod ka sar upaar uthaya.

"main tumhe 1 agent ka pata bataunga,us se mil lena.",ab uski bari thi.vo uske seene se utha & apna vazan apne hatho pe rakh bahut zor se apni kamar hilane laga.rambha ab josh se chukh rahi thi & vinod bhi uski chut ki skudne-failne ki mastani harkat se aahat ho aahen bhar raha tha.rambha ne apne nakhun vinod ki baaho me dhansa diye & kamar uchakti hui badan ko mod apna sar peechhe jhatka.vo jhad gayi thi & jhadte hi uski chut ne vinod ke lund ko aur kas liya.

"aahhhhh..!",vinod ke munh se aah nikli & uska jism jhatke khane laga.uska gadha virya rambha ki chut me bhar raha tha.vo hanfta uske seene pe let gaya & sukun se muskurati rambha ne use baaho me bhar liya.

Paris ke Four Seasons George V hotel ke honeymoon suite ke bistar pe Soniya pet ke bal nangi padi thi.uske hatho ne bistar ki chadar ko zor se bhinch rakha tha & hotho pe masti bhari muskan khel rahi thi.uske peechhe Brij Kothari uski sudol dayi tang ke pichhle gudaz hisse ko chum nahi balki dheeme-2 chus raha tha.soniya ne halki si aah bhari & apna munh bistar me chhupa liya & fir apne seene ko dekha,uske jism pe kayi jagah chhote-2 nishan pade hue the joki sab brij ke hotho ki meherbani thi.

"aannhhhh..!",soniya ne bistar se sar utha ke jhatka,brij uski moti gand ko masalte hue uski chut me apni laplapati jibh fira raha tha.soniya ki aankhe masti ke nashe se bhar gayi & usne besabri se kamre me nazar ghumayi,charo taraf vo tohfe pade the jo brij ne honeymoon ke pehle din se uske liye kharidne shuru kar diye the.ab to use kisi chiz ki tarif karne me bhi darr lagne laga tha.idhar vo tarif karti udhar brij uski keemat ada karta nazar aata.soniya zindagi me itni khush pehle kabhi nahi thi.

uske badan me bijli daud rahi thi & vo mkanp rahi thi,brij ki jibh ne uski masti ko anjam tak pahuncha hi diya tha.usne 1 lambi aah bhari,ab brij uski gand ko hawa me utha uski chut me lund ghusa raha tha.soniya fauran apne ghutno & hatho pe ho gayi.brij ke sath chudai me use jo maza aaaya tha vo aajtak usne kabhi nehsus nahi kiya tha.brij dhakke lagane laga & vo chadar bhinche apne sar ko hilati,zulfe jhatakti madhosh ho aasman me udne lagi.

tabhi brij ka fone baja,bistar pe letate hue apne seene ko uspe dabate hue usne fone utha ke number dekha,"ye Sonam kaun hai..oonnhhhhh..?",brij ne lund pura bahar khinch fir 1 hi jhatke me zor se andar ghused diya tha.

"rani hai."

"kya?!",jalan,gusse,hairat se bhari aavaz ke sath usne sar ghumake baye kandhe ke upar se use dekha.brij biwi ki is ada pe hans diya.

"abhi samjhata hu.",usne uske hath se mobile leke apne kaan se lagaya,"hello."

"mujhe Vijayant Mehra ke secretary ki naukri mil gayi hai."

"very good.",brij ne chudai rok di to pareshan ho soniya ne khud hi gand aage- peechhe karte hue khud hi apni chudai shuru kar di,"..ab tum agle 3 mahino tak mujhe uske group ke bare me koi khabar nahi dogi."

"kya?!"

"haan,main chahta hu ki mehra ko pura yakin ho jaye ki tum 1 wafadar insan ho.tumhare is fone number ke bare me kisi ko bhi nahi pata chalna chahiye.ise har waqt on rakhna taki mujhe tumse contact karne me koi pareshani na ho lekin ise silent mode pe rakhna.bas jaisa kaha hai karti jao to jeet apni hi hogi."

"ok & aapka honeymoon kaisa chal raha hai?..apni biwi ki chut ka to band baja diya hoga aapne ab tak!",usne chuhal ki.brij zor se hansa & fone band kar diya.soniya ab bahut zor se kamar hilate hue aahen bhar ahi thi.brij uske upar jhuka & use bistar & apne jism ke beech daba diya.apne hath usne soniya ke jism ke neeche ghusa ke uski gol chhatiyo ko daboch liya & tezi se uski chudai karne laga.

"kaun thi....chudail?!",brij ne uske daye kandhe ke upar se sar jhukate hue uske honth chumne ki koshish ki to usne munh fer liya.brij uski jalan dekh hansa.

"are meri jaan,vo meri bichhayi shatranj ki baazi ka vo pyada hai jo dushman ke kheme me ghus bisat ki aakhiri pale tak pahucnh ab rani me tabdil ho gayi hai & mujhe ye bazi mera yehi mohra jitwayega."

"kya keh rahe ho meri kuchh samajh nahi aa raha..uummmmm..!",pati ki baato se uska gussa thoda kam to hua tha & is baar usne use apne lab chumne ki ijazat de di thi.

"tum chhodo ye baaten,meri jaan..vo meri naukar hai & is waqt mere 1 bahut aham kaam ko anjam dene me juti hai.mere dil ki rani to sirf tum ho meri begum sirf tum!",soniya thodi der khafa ho brij ko thoda tadpana chahti thi magar usne aise lahje me baat kahi thi ki vo muskuraye bina nahi reh saki.brij ne honth uski gardan ke thoda neeche uski pith pe chipka diye & bade gehre dhakke lagane laga.pura suite soniya ki aaho se gulzar ho gaya.apne pati ki qatil chudai se behal vo fauran jhad gayi & uske peechhe us se sata uska pati bhi jhatke khata jhad gaya.

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agle 4 din Rambha ke liye kafi bhag-daud se bhare the.naye daftar me 3 din uski training hui & fir chauthe din se uski naukri shuru ho gayi.pehli mulakat me hi use Sameer bada achha laga tha.baap hi ki tarah handsome & bahut shaleen insan laga tha use vo lekin jaha vijayant ko dekh vo thoda asahaj ho jati thi vahi sameer ke sath use zara bhi ghabrahat nahi hoti thi.

ab iska karan kya tha ye uski samajh me nahi aaya tha,uski robili shakhsiyat,uska rutba ya fir uski nazren.vijayant ko dekh uske dil me 1-2 baar gustakh kahyal bhi aaye the,ab vo kya karti vo tha hi itna handsome!

agle din sabhi log Gujrat ja rahe the jaha sameer ki nigrani me pure hue project ka udghatan karne khud PM aa rahe the magar us se pehle rambha ko 1 bahut zaruri kaam niptana tha.Vinod ke bataye agent ne use kayi makan dikhaye the magar use koi pasand nahi aaya & jo aaya uska makan malik muse makan dene ko taiyyar nahi tha.vo vinod ka jaan-pehchan vala tha lekin fir bhi vo makan dene ko razi nahi ho raha tha.

rambha ko vo ghar bahut pasand aa gaya tha & usne than liya tha ki jo bhi ho use kiraye pe yehi makan chahiye.makan malik vinod ki umra ka hi tha bas thoda mota tha,vo videsh me rehta tha Devalay me uska 4 kamro ka flat tha jiske 2 kamre vo kiraye pe dena chahta tha.baki 2 kamro ko vo apne samn ke sath band apne kabze me rakhna chhata tha.

rambha beauty parlour me thi,gujrat ke function ke liye usne laal border ki safed sari & laal blouse liya tha.parlour me vo us libas ko try karte hue apna saaj-singar karwa rahi thi.vo function ke pehle 1 baar khud ko us libas me dekh lena chahti thi taki us din use taiyyar hone me na pareshani ho na waqt lage.

vo parlour me baithi thi ki vinod ka fone aaya ki vo fauran uske pehchan vale ke makan pe pahunche,dono ne tay kiya tha ki 1 aakhiri baar makan malik se baat karke dekhenge.rambha turant parlour se nikal gayi & us building ke neeche khadi ho vinod ka intezar karne lagi jis imarat me vo flat tha.saji-sanwri rambha ko aane-jane vale ghur rahe the magar vinod ka kahi pata nahi tha,upar se vo fone bhi nahi utha raha tha.rambha khij uthi & tay kiya ki vo upar flat me jake seedha makan malik se baat kar le.

"hello.",makan malik Paresh ne darwaza khola,"..vinod ne kaha tha ki aap dono aane vale hain.",rambha andar aayi.jo hall & kamra kiraye pe dena tha vo khali tha,baki 2 kamro me paresh ka saman tha.paresh ne use 1 kamre me bistar pe bithaya.

"paresh ji,aap mujhe makan kyu nahi dena chahte?",rambha seedha mudde pe aayi.paresh uske saje-sanwre roop ko dekhe ja raha tha.rambha ke sawal se jaise vo hosh me aaya.

"j-ji..haan..vo baat ye hai ki..",rambha ne bhi uski nigaho ki gustakhi dekh li thi & uske dimagh me khayal kaundha ki shayad uske jism ka jadu yaha bhi chal jaye & usne sari thik karne ke bahane pallu thoda kinare kar apna gora pet uski nigaho ke samne kar diya,"..main kisi akeli ladki ko ghar dene me darta hu.bura mat maniyega..",uski nigahen rambha ke pet & chere ke beech hi ghum rahi thi,"..magar kal kahi kuchh ulta-seedha ho jaye to mere ghar ka to naam kharab hoga na."

"aapko main aisi-vaisi ladki lagti hu?",rambha ne bholepan se kaha & apna baya hath apne pet pe firaya.aisa karne se pallu thoda sa sarka & paresh ko uska halka sa cleavage dikhayi de gaya.

"mera vo matlab nahi tha..",vo bistar me uske bagal me hi baitha tha,"..lekin aap meri baat samajhne ki koshish to kijiye.aap akeli rahengi yaha &.."

"& kya?",rambha thoda sarki & apna daya ghutna uske baye se satate hue uska hath pakad liya,"..ab aap jaisa sharif insan mujhe ghar nahi dega to kaun dega!..aap mere nazariye se bhi to dekhiye kahi mujhe kisi aise-vaise aaadmi ne ghar de diya to..&..kahi..",rambha ne uske hath pe hath rakhe nazre neechi kar li.

"kahi ..kya rambha ji?",paresh tha to mard hi,usne rambha ka hath tham liya.ab itni khubsurat ladki khud hath pakde to vo mauka kyu chhode!

"kahi usne mere sath kuchh ka diya to?",rambha ne sar jhukaye sharm se kaha.

"kuchh kya?",paresh ko aisi baat karne me maza aane laga tha.

"kahi mere akelepan ka fayda utha liya to."

"main samjha nahi."

"baniye mat!",rambha ne sharm se muskurate hue use dekha,"..please paresh ji,de dijiye na..please!",vo machalte hue uske & karib hui to paresh thoda peechhe hua & ladkhada bistar pe gir gaya.rambha uske upar sawar ho gayi.

"paresh ji,mujhe aapka makan pasand hai & aap bhi.",uska aanchal khisak gaya tha & jhuke hone ki vajah se seene ko ubhar blouse se bahar chhalakne ko taiyyar the.paresh ke mathe pe paseena chhachhala aaya,"..main abhi security deposit dene ko taiyyar hu.",apna chehra paresh ke bilkul karib la apne honth uske hontho se bas 2 inch ki duri pe rok liye.uski garm sanse,madmati khusbu se paresh ka dimagh ghum gaya.

"m-magar..r-rambha ji..-"

"-..sirf rambha.",rambha ne uske honth chum liye,"..aap mujhe hi makan denge.",usne uska baya gaal chuma,"boliye?",& fir daya gaal chuma & uski aankho se aankhe mila di.

"l-lekin.."

"paresh ji,mujhe kiraye pe ghar dijiye & jab bhi aap yaha aayenge,kiraye ke alawa kirayedar bhi aapki baaho me hoga.kahiye itni badhiya deal de sakta hai koi aapko?"

paresh ne apne hath uski nagi pith pe jama diye & uchak ke use chumne ko hua par rambha ne apna sar peechhe khinch liya,"na pehle kahiye ki ghar mujhe denge."

"tumhe hi dunga meri jaan!",paresh ne use baaho me kas bistar pe palat diya & chumne laga.vo us husnpari ko baaho me paa deewana ho gaya tha.rambha ne use pare dhakela & khadi ho gayi.

"meri sari kharab ho jayegi.",vo shokhi se muskurayi & apni sari utarne lagi.paresh ki sanse tez ho gayi & vo bhi apni kamiz ke button kholne laga.muskurati rambha ne bejhijhak apne sare kapde utar diye.uske nange,gore jism ko dekh paresh ka munh hairat se khula reh gaya.uski nazre ye tay nahi kar pa rahi thi ki kaha dekhe-rambha ke oonche seene ko,uske gol pet ko ya fir sudol tango & kasi jangho ke beech uski gulabi chut ko!

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--13

गतान्क से आगे.

रंभा अपने मेहंदी से सजे हाथो से कान के झुमके उतारने लगी & उन्हे मेज़ पे रखने के लिए घूमी तो परेश के सामने उसकी चौड़ी गंद आ गयी.अब तो परेश से रहा नही गया & उसने उसे पीछे से अपनी बाहो मे जाकड़ लिया & उसके कंधो को चूमने लगा.

"ऊव्व..क्या करते हो?आराम से करो....हाईईईई..!",परेश अपना लंड उसकी गंद की दरार मे फँसाए उसकी मोटी चूचियो को मसलता हुआ उसके होंठ बहुत ज़ोर से चूम रहा था.रंभा को एहसास हो गया था कि परेश का लंड भी उसके दोस्त जितना ही बड़ा है.वो बाए हाथ से उसके बाल & दाए को पीछे ले जा उसकी दाई जाँघ सहलाने लगी.

थोड़ी देर बाद बेसबरे परेश ने उसे बिस्तर पे पटक दिया & उसके उपर चढ़ उसकी मोटी चूचियो को चूमने लगा.बीच-2 मे वो उसकी चूचियो को हौले-2 काट भी लेता था.उसके दीवानेपन ने रंभा को भी मस्त कर दिया था.परेश उसकी जाँघो के बीच अपना दाया हाथ घुसा के उसकी चूत को रगड़ते हुए उसकी चूचिया चूस रहा था.मस्ती मे डूबती रंभा को खुद पे गुमान हो रहा था,आज उसने 1 और मर्द को अपने जिस्म के जादू से अपनी बात मानने पे मजबूर कर दिया था.

परेश बिल्कुल पागल हो चुका था.रंभा का सीना ,उसका पेट,उसकी मोटी जंघें & उसकी नाज़ुक चूत-हर अंग उसके हाथो & होटो से अछूता नही रहा था.उसकी तेज़ी से घूमती जीभ ने रंभा को 1 बार मस्ती की मंज़िल तक पहुँचा दिया था & अब वो बिस्तर पे जिस्म को ढीला छ्चोड़े ऐसी और मंज़िलो की राह देख रही थी.परेश ने उसकी जंघे फैलाई & अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया फिर उसके उपर लेटा & आहे भरता उसकी चुदाई करने लगा.

परेश थोडा मोटा था लेकिन ये बात चुदाई के आड़े नही आ रही थी.रंभा को अब बहुत मज़ा आ रहा था & वो उसका नाम ले लेके मस्त बातें करते हुए उसकी पीठ नोच रही थी,"..उउन्न्ञणणन्..परेश जानेमन..क्या मस्त चोद रहे हो तुम..डार्लिंग..ऊव्ववव....& अंदर घुसाओ ना इसे..!"

"किसे मेरी जान?",परेश ने उसके बाए गुलाबी निपल को काट लिया.

"अपने लंड को,डार्लिंग.",परेश ने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी.रंभा बहुत मस्त हो गयी थी & अपनी कमर उचका रही थी.उसने परेश की उपरी बाहें पकड़ी & उसे पलटने लगी.उसका इशारा समझ परेश ने फ़ौरन खुद को नीचे किया & रंभा को अपने उपर ले लिया.रंभा उठ बैठी & उसके लंड पे उच्छलती हुई अपने बालो से मस्ती मे खेलते हुए आँखे बंद कर आहें भरने लगी.उसके पर्स मे उसका मोबाइल बज रहा था मगर उसे इस वक़्त उसकी कोई परवाह नही थी.

"सॉरी,मुझ देर..-",घर का मेन डोर खुला रह गया था & विनोद सीधा कमरे तक आ पहुँचा था.दोनो उसकी आवाज़ से चौंक गये मगर जहा परेश रंभा के नीचे से निकलने की कोशिश करने लगा वही रंभा ने मुस्कुराते हुए दाई बाँह अपने प्रेमी की तरफ बढ़ा दी.

"परेश जी,मुझे घर देने को राज़ी हो गये हैं..",वो मुस्कुराते हुए कमर हिलाने लगी,"..हम अग्रीमेंट पक्का कर रहे थे!",उसने विनोद की कमीज़ पकड़ उसे खींचा & अपनी जीभ उसके मुँह मे घुसाते हुए 1 लंबी,मस्त किस दी.

"तो अग्रीमेंट पे किसी गवाह की भी ज़रूरत होगी,वो मैं बन जाता हू.",& विनोद ने फटाफट अपने कपड़े उतार दिए & बिस्तर के बगल मे खड़ा हो अपने दोस्त के लंड पे कुद्ति अपनी महबूबा को बाहो मे भर चूमने लगा.दोनो बड़ी देर तक 1 दूसरे को चूमते रहे & विनोद उसकी चूचियाँ & गंद को दबाता रहा.रंभा के नीचे पड़ा परेश आश्चर्य से सब देख रहा था लेकिन उसने महसूस किया कि उसकी मस्ती मे कोई कमी नही हुई थी.जब विनोद रंभा की पीठ सहलाते हुए उसे चूम रहा था तब उसने रंभा की मस्त गंद अपने हाथो के क़ब्ज़े मे ले ली & नीचे से कमर उचकाने लगा.

रंभा ने किस तोड़ी & परेश के सीने पे अपनी चूचियाँ दबाते हुए उसके होंठ चूमने लगी.विनोद झुक के उसकी गोरी,चिकनी पीठ से लेके उसकी गंद को चूमने लगा & अपनी जीभ से रंभा के गंद के छेद को छेड़ने लगा.रंभा उसकी इस हरकत से पागल हो गयी & उसके जिस्म मे 1 बिल्कुल नया,अंजना,अनोखा एहसास पैदा हो गया.पहली बार इस खेल मे उसने खुद को काबू मे नही पाया & झाड़ गयी.

विनोद ने फ़ौरन उसका सर परेश के सीने से उठाया & अपना लंड उसके मुँह मे दे दिया.रंभा आँखे बंद किए मस्ती मे उसके आंडो को दबाती लंड को चूसने लगी.जब लंड पूरा गीला हो गया तो विनोद ने लंड बाहर निकाला & इंतेज़ार कर रहे परेश ने रंभा को फिर से अपने उपर खींच लिया & उसके रसीले होटो का रस पीने लगा.

आईईयईीई..नही...विनोद..वाहा नही..!",विनोद कब उसके पीछे उसकी गंद मे अपना लंड घुसाने लगा था,उसे पता ही नही चला था.वो उस से बचने के लिए परेश के उपर से उठने लगी मगर उसने उसकी कमर को अपनी बाहो मे जाकड़ उसे रोक लिया.

"घबराओ मत मेरी जान,मैं तुम्हे ज़्यादा तकलीफ़ नही पहुचाऊँगा.",रंभा चीखने लगी लेकिन विनोद लंड का सूपड़ा गंद के छेद मे घुसाने के बाद ही रुका फिर वो आगे झुका & रंभा के दर्द की लकीरो से भरे चेहरे को चूमने लगा,"..बस थोड़ी देर ये दर्द सहो फिर जन्नत नज़र आएगी तुम्हे.",रंभा ने गुस्से से मुँह फेरा मगर विनोद ने उसके चेहरे को थाम उसे चूमना जारी रखा.नीचे परेश उसकी चूचियाँ पी रहा था.

थोड़ी देर बाद परेश ने फिर से कमर हिलानी शुरू की & उसी के साथ विनोद ने लंड थोड़ा & अंदर डाल उसकी गंद मारना शुरू किया.रंभा को सच मे इस बार बहुत मज़ा आया.वो अब दूसरी ही दुनिया मे पहुँच चुकी थी.दोनो मर्द बारी-2 से उसकी चूचिया दबाते हुए उसके चेहरे & होंठो को चूमते हुए उसके दोनो छेदो को चोद रहे थे.रंभा बहुत जल्दी-2 2 बार झाड़ गयी & इस बार परेश भी खुद पे काबू नही रख पाया & अपना वीर्य उसकी गीली चूत मे छ्चोड़ दिया.

विनोद ने उसकी कमर पकड़ उसे खींचते हुए बाई करवट ली तो रंभा परेश के जिस्म से उतर अपनी बाई करवट पे आ गयी.अब दोनो कोहनियो पे उच्के थे & विनोद दाए हाथ से उसकी चूत के दाने को रगड़ते हुए उसके सर & चेहरे को चूमता हुआ उसकी गंद मार रहा था.रंभा ने दाई टांग हवा मे उठा रखी थी & बस मस्ती की 1 ऊँची लहर से दूसरी ऊँची लहर पे सवार उस समंदर को पार कर रही थी.

परेश उठा & घुटनो पे बैठ अपना सिकुदा,गीला लंड रंभा के मुँह मे भर दिया.रंभा अपने हाथो से अपनी चूचियो को दबाते हुए वो उसके लंड को चूसने लगी,परेश मस्ती मे आहे भरने लगा,"विनोद भाई,तुमने पहले क्यू नही ऐसे मिलवाया था इस से.अब जब मैं जा रहा हू तब ये सब जो रहा है.कितने दिन बर्बाद कर दिए मैने!इस हसीना के कमाल के जिस्म का कम लुत्फ़ उठा पाउन्गा इस बात का अफ़सोस रहेगा मुझे मगर इसे चोदा इस बात की खुशी उस अफ़सोस की तासीर को कम करती रहेगी!"

अपनी तारीफ सुन रंभा खुशी से मुस्कुराइ & कुच्छ ही पलो मे परेश के लंड को फिर से खड़ा कर दिया.रंभा विनोद की उंगली से इस दौरान 1 बार झाड़ चुकी थी.आहत हो उसने उसे धकेल गंद से लंड को निकाला & बिस्तर पे उल्टी लेट गयी.विनोद ने उसे पलट बाहो मे भरा & उसकी छातियो को चूसने लगा.परेश उसके कदमो मे बैठा उसकी टाँगो को चूमता उसकी चूत की ओर बढ़ रहा था.दो मर्दो के साथ इस तरह से पूरे जिस्म को प्यार करवाने मे रंभा को बहुत मज़ा आ रहा था.

दोनो मर्दो ने अपनी ज़ुबान के कमाल से उसकी चूचियो & चूत को छेड़ते हुए उसे फिर से झाड़वा दिया.अब वो थकान महसूस कर रही थी लेकिन उसके उपर च्छाई खुमारी अभी कम नही हुई थी.इस बार विनोद ने उसे सीधा लिटाया & उसके उपर आ अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.रंभा ने उसे बाहो मे भर लिया & मस्ती मे मुस्कुराती आहे भरती उसकी चुदाई का मज़ा उठाने लगी.उसने बिस्तर के किनारे से सर पीछे लटका कर आह भारी तो विनोद उसकी गर्दन चूमने लगा.

तभी परेश उसके सर के पीछे आ खड़ा हुआ & अपना लंड उसके मुँह मे घुसा दिया.रंभा ने हाथ पीछे ले जा उसकी गंद को पकड़ लिया तो परेश उसका मुँह चोदने लगा.जब उसे लगा कि वो झाड़ जाएगा उसने लंड बाहर खींचा & विनोद ने रंभा को बाहो मे भर करवट ली & उसे अपने उपर कर लिया.रंभा समझ गयी कि अब उसकी गंद परेश के लंड का स्वाद चखेगी.कहा तो अब तक उसकी गंद कुँवारी थी & जब कुँवारापन टूटा तो 1 ही शाम मे 2-2 लंड उसे मार रहे थे!

"ओईईईईईईईई..!",वो दर्द से कराही मगर फिर वही अनोखा मज़ा उसके दिलोदिमाग पे च्छा गया.विनोद सर उठा उसकी दाई चूची को दबोचे उसके गुलाबी निपल को चूस रहा था & परेश उसकी कमर थामे उसके बालो को चूमता उसकी गंद मार रहा था.तीनो अब मस्ती के सफ़र के आख़िरी दौर मे थे.दोनो मर्द रंभा के जिस्म को पकड़े उसके नाज़ुक अंगो को चखते अब बहुत ज़ोर से धक्के लगा रहे थे.

दर्द,मस्ती & ढेर से मज़े की अनगिनत लहरें बदन मे दौड़ती रंभा का दिल अब पूरी तरह से मदहोश था.उसके दोनो छेदो मे 1 अजीब सी कसक हो रही थी & अगले ही पल उसने गंद मे कुच्छ गरम सा महसूस किया,उसके उपर झुका परेश आहे भरता हुआ झटके कहा रहा था.वो झाड़ गया था & उसके गर्म वीर्य के एहसास ने उसके अंदर मस्ती की 1 नयी शदीद लहर दौड़ा दी & उसने भी बहुत ज़ोर से चीख मारी & उसकी चूत ने विनोद के लंड को अपनी क़ातिल जाकड़ मे कस लिया.1 पल को वो उसे छ्चोड़ती & फिर जाकड़ लेती.ये एहसास विनोद के भी सब्र को तोड़ने को काफ़ी था & वो भी बिस्तर से उठने की कोशिश करता झटके ख़ाता हुआ अपनी महबूबा की चूत मे झाड़ गया.

बिस्तर पे तीन थके मगर सुकून & खुशी से भरे जिस्म 1 दूसरे के आगोश मे पड़े अपनी साँसे संभाल रहे थे.

रंभा पहली बार प्लेन मे बैठी थी.इस नयी नौकरी मे आते ही उसे कयि नये तजुर्बे हुए थे.सबसे पहले तो इस नयी नौकरी के चलते उसकी तनख़ाह बढ़ गयी थी & ज़िंदगी मे पहली बार वो थोड़ा बेफिक्री से पैसे खर्च पा रही थी.दूसरे,विनोद के रूप मे उसे 1 ऐसा शख्स मिल गया था जो ना केवल उसकी जिस्मानी ज़रूरतो को पूरा करता था बल्कि कयि & बातो मे उसकी मदद भी करता था.

गुजरात के प्रॉजेक्ट के ईनेग्रेशन के लिए ट्रस्ट ग्रूप के सभी बड़े अफ़सर वाहा जा रहे थे.विजयंत मेहरा ने उनमे से कुच्छ को अपनी सेक्रेटरीस को ले जाने की भी इजाज़त दी थी.सभी 1 चार्टर्ड प्लेन से पहले प्रॉजेक्ट के नज़दीकी एरपोर्ट पहुँचे & वाहा से सड़क के 2 घंटे के सफ़र के बाद उस जगह पहुँचे.

खुद PM इनएग्रेशन करने वाले थे & इस चलते उनके साथ कयि बड़े मिनिस्टर & अफ़सर भी वाहा आए थे.रंभा ने पहली बार इतनी बड़ी-2 हस्तियो को देखा था & ये सब उसके लिए बड़ा रोमांचकारी था.पूरे जलसे के दौरान सोनम के साथ उसकी & बाकी सेक्रेटरीस की ड्यूटी मेहमानो का ख़याल रखने के लिए लगाई गयी थी.इतने से दिनो मे ही उसकी सोनम से अच्छी छनने लगी थी.

"कहा जा रही है?",जलसा ख़त्म होने के बाद सारे मेहमान & ग्रूप के अफ़सर विजयंत & समीर के साथ 1 बड़े से हॉल मे खाने के लिए चले गये थे.PM की हिफ़ाज़त के नज़रिए से सेक्यूरिटी बड़ी कड़ी थी & बाकी लोग 1 दूसरे हॉल मे खाना खा रहे त.रंभा खाना लेने के बजे हॉल से बाहर जाने लगितो सोनम ने उसे टोका.

"बाथरूम से आती हू,यार.इस सेक्यूरिटी के चक्कर मे जा ही नही पा रही थी."

"अच्छा!की अपने बॉस से मिलने जा रही है?दोनो ने बाथरूम मे मिलने का प्लान बनाया हुआ है क्या?",उसने सहेली को छेड़ा.

"चुप!तू मिलती होगी अपने बॉस से बाथरूम मे!"

"अरे,यार!वो बुलाए तो मैं खुली सड़क पे मिल लू!बुड्ढ़ा इस उम्र मे भी 10 जवानो पे भारी पड़ेगा!"

"तू तो ऐसे कह रही है जैसे उसका वजन संभाल चुकी है!",रंभा ने भी चुहल की & हंसते हुए वाहा से चली गयी.सोनम की बातो से उसे ध्यान आया की पूरे जलसे के दौरान उसने कयि बार समीर को खुद को देखते पाया था.जब उनकी नज़र मिलती तो वो अपनी वही नेक्दिल मुस्कान होंठो पे ले आता & जवाब मे वो भी मुस्कुरा देती....क्या उसका बॉस उसपे फिदा हो गया था?..हुंग! हो भी जाए तो क्या?..कुच्छ दिन खेलेगा & फिर किनारे कर देगा..अगर उसका फ़ायदा हुआ तो सब ठीक वरना वो समीर से कभी नज़दीकी नही बढ़ाएगी.

"हेलो,रंभा!खाना खाया तुमने?",दोनो बाथरूम के बाहर हाथ धोने के लिए 1 कामन वाशवेशन था & समीर वाहा हाथ धो रहा था.

"हेलो,सर.बस जा रही हू?",वो साथ वाले बेसिन पे हाथ धोने लगी.

"ये कोई नया मेकप का तरीका है क्या?"

"जी?!",उसने हैरत से समीर को देखा.

"हां,ये बालो मे क्या लगा रखा है?",रंभा ने शीशे मे देखा तो उसकी हँसी छूट गयी.उसके बालो मे 1 लाल रंग का बड़ा सा धागा लगा हुआ था.वो उसे निकालने लगी मगर ना जाने कैसे वो बालो मे उलझ गया था.

"लाओ,मैं निकाल देता हू."

"नही,सर.हो जाएगा.आप बेकार परेशान हो रहे हैं.",मगर समीर ने उसकी अनसुनी करते हुए धागे को निकालना शुरू कर दिया.रंभा को थोड़ी शर्म आने लगी.उसने आँखो के कोने से शीशे मे देखा,सारी मे सजी-धजी वो & बढ़िया सूट मे तैयार हॅंडसम समीर उसके बाल ठीक करता हुआ,1 पल को उसके दिल ने दोनो को 1 जोड़े की निगाह से देखा मगर अगले ही पल उसके दिमाग़ ने उसे ख्वाब के आसमान से हक़ीक़त की ज़मीन पे ला खड़ा किया.

"वैसे आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.",धागा बस अब निकलने ही वाला था.

"थॅंक यू,सर.",रंभा के गाल थोड़े & गुलाबी हो गये.

"वैसे मुझे तुमसे 1 बात कहनी थी.",रंभा का दिल धड़क उठा,"..उस सेमेंट प्राइसिंग वाली बात जो तुमने मुझे बताई थी उसके बाद मुझे लगता है कि तुम मेरी मदद कर सकती हो,रंभा."..ओह!इसे तो काम की बात करनी है..रंभा को थोड़ी मायूसी हुई.

"मैं चाहता हू कि तुम मेरी उस नये मानपुर प्रोज़कट की तैयारी करने मे मदद करो.इसके लिए रोज़ 6 बजे के बाद तुम्हे रुकना होगा लेकिन मेरे कहने का मतलब ये नही है कि तुम्हे हां ही करनी है अगर कोई परेशानी हो तो मना कर दो."

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क्रमशः.......

JAAL paart--13

gataank se aage.

rambha apne mehandi se saje hatho se kaan ke jhumke utarne lagi & unhe mez pe rakhne ke liye ghumi to paresh ke samne uski chaudi gand aa gayi.ab to paresh se raha nahi gaya & usne use peechhe se apni baaho me jakad liya & uske kandho ko chumne laga.

"ooww..kya karte ho?aaram se karo....haiiiii..!",paresh apna lund uski gand ki darar me fansaye uski moti chhatiyo ko masalta hua uske honth bahut zor se chum raha tha.rambha ko ehsas ho gaya tha ki paresh ka lund bhi uske dost jitna hi bada hai.vo baye hath se uske baal & daye ko peechhe le ja uski dayi jangh sehlane lagi.

thodi der baad besabra paresh ne use bistar pe patak diya & uske upar chdh uski moti chhatiyo ko chumne laga.beech-2 me vo uski choochiyo ko haule-2 kaat bhi leta tha.uske deewanepan ne rambha ko bhi mast kar diya tha.paresh uski jangho ke beech apna daya hath ghusa ke uski chut ko ragadte hue uski choochiya chus raha tha.masti me doobti rambha ko khud pe guman ho raha tha,aaj usne 1 aur mard ko apne jism ke jadu se apni baat maanane pe majbur kar diya tha.

paresh bilkul pagal ho chuka tha.rambha ka seena ,uska pet,uski moti janghen & uski nazuk chut-har ang uske hatho & hotho se achhuta nahi raha tha.uski tezi se ghumti jibh ne rambha ko 1 baar masti ki manzil tak pahuncha diya tha & ab vo bistar pe jism ko dhila chhode aisi aur manzilo ki raah dekh rahi thi.paresh ne uski janghe failayi & apna lund uski chut me ghusa diya fir uske uapr leta & aahe bharta uski chudai karne laga.

paresh thoda mota tha lekin ye baat chudai ke aade nahi aa rahi thi.rambha ko ab bahut maza aa raha tha & vo uska naam le leke mast baaten karte hue uski pith noch rahi thi,"..uunnnnnn..paresh janeman..kya mast chod rahe ho tum..darling..oowwww....& andar ghusao na ise..!"

"kise meri jaan?",paresh ne uske baye gulabi nipple ko kaat liya.

"apne lund ko,darling.",paresh ne dhakko ki raftar badha di.rambha bahut mast ho gayi thi & apni kamar uchak rahi thi.usne paresh ki upri baahen pakdi & use palatne lagi.uska ishara samajh paresh ne fauran khud ko neeche kiya & rambha ko apne upar le liya.rambha uth baithi & uske lund pe uchhalti hui apne baalo se masti me khelte hue aankhe band kar aahen bharne lagi.uske purse me uska mobile baj raha tha magar use is waqt uski koi parwah nahi thi.

"sorry,mujh der..-",ghar ka main door khula reh gaya tha & vinod seedha kamre tak aa pahuncha tha.dono uski aavaz se chaunk gaye magar jaha paresh rambha ke neeche se nikalne ki koshih karne laga vahi rambha ne muskurate hue dayi banh apne premi mki taraf badha di.

"paresh ji,mujhe gahr dene ko razi ho gaye hain..",vo muskurate hue kamar hilane lagi,"..hum agreement pakka kar rahe the!",usne vinod ki kamiz pakad use khincha & apni jibh uske munh me ghusate hue 1 lambi,mast kiss di.

"to agreement pe kisi gawah ki bhi zarurat hogi,vo main ban jata hu.",& vinod ne fatafat apne kapde utar diye & bistar ke bgala me khada ho apne dost ke lund pe kudti apni mehbooba ko baaho me bhar chumne laga.dono badi der tak 1 dusre ko chumte rahe & vinod uski choochiyan & gand ko dabata raha.rambha ke neeche pada paresh aashcharya se sab dekh raha tha lekin usne mehsus kiya ki uski masti me koi kami nahi hui thi.jab vinod rambha ki pith sehlate hue use chum raha tha tab usne rambha ki mast gand apne hatho ke kabze me le lie & neeche se kamar uchkane laga.

rambha ne kiss todi & paresh ke seene pe apni choochiyan dabate hue uske honth chumne lagi.vinod jhuk ke uski gori,chikni pith se leke uski gand ko chumne laga & apni jibh se rambha ke gand ke chhed ko chehdne laga.rambha uski is harkat se pagal ho gayi & uske jism me 1 bilkul naya,anjana,anokha ehsas paida ho gaya.pehli baar is khel me usne khud ko kabu me nahi paya & jhad gayi.

vinod ne fauran uska sar paresh ke seene se uthaya & apna lund uske munh me de diya.rambha aankhe band kiye masti me uske ando ko dabati lund ko chusne lagi.jab lund pura gila ho gaya to vinod ne lund bahar nikala & intezar kar rahe paresh ne rambha ko fir se apne upar khinch liya & uske rasile hotho ka ras pine laga.

aaiiyyeeee..nahi...vinod..vaha nahi..!",vinod kab uske peechheaa uski gand me apna lund ghusane laga tha,use pata hi nahi chala tha.vo us se bachne ke liye paresh ke uapr se uthne lagi magar usne uski kamar ko apni baaho me jakad use rok liya.

"ghabrao mat meri jaan,main tumhe zyada taklif nahi pahuchaoonga.",rambha chikhne lagi lekin vinod lund ka supada gand ke chhed me ghusne ke baad hi ruka fir vo aage jhuka & rambha ke dard ki lakiro se bhare chehre ko chumne laga,"..bas thodi der ye dard saho fir jannat nazar aayeggi tumhe.",rambha ne gusse se munh fera magar vinod ne uske chehre ko tham sue chumna jari rakha.neeche paresh uski chhatiya pi raha tha.

thodi der baad paresh ne fir se kamar hilani shuru ki & usi ke sath vinod ne lund thoda & andar daal uski gand marna shuru kiya.rambha ko sach me is baar bahut maza aaya.vo ab dusri hi duniya me pahunch chuki thi.dono mard bari-2 se uski choochiya dabate hue uske chehre & hotho ko chumte hue uske dono chhedo ko chod rahe the.rambha bahut jaldi-2 2 baar jhad gayi & is baar paresh bhi khud pe kabu nahi rakh paya & apna virya uski gili chut me chhod diya.

vinod ne uski kamar pakad use khinchte hue bayi karwat li to rambha paresh ke jism se utar apni bayi karwat pe aa gayi.ab dono kohniyo pe uchke the & vinod daye hath se uski chut ke dane ko ragadte hue uske sar & chehre ko chumta hua uski gand maar raha tha.rambha ne dayi tang hawa me utha rakhi thi & bas masti ki 1 oonchi lehar se dusri oonchi lehar pe sawar us samandar ko paar kar rahi thi.

paresh utha & ghutno pe baith apna sikuda,gila lund rambha ke munh me bhar diya.rambh apne hatho se apni chhatiyo ko dabate hue vo uske lund ko chusne lagi,paresh masti me aahe bharne laga,"vinod bhai,tumne pehle kyu nahi aise milwaya tha is se.ab jab main ja raha hu tab ye sab jho raha hai.kitne din barbad kar diye maine!is haseena ke kamal ke jism ka kam lutf utha poonga is baat ka afsos rahega mujhe magar ise choda is baat ki khushi us afos ki taseer ko kam karti rahegi!"

apni tarif sun rambha khushi se muskurayi & kuchh hi palo me paresh ke lund ko fir se khada kar diya.rambha vinod ki ungli se is dauran 1 baar jhad chuki thi.aahat ho usne use dhakel gand se lund ko nikala & bistar pe ulti let gayi.vinod ne use palat baaho me bhara & uski chhatiyo ko chusne laga.paresh uske kadmo me baitha uski tango ko chumta uski chut ki or badh raha tha.do mardo ke sath is tarah se pure jism ko pyar karwane me rambha ko bahut maza aa raha tha.

dono mardo ne apni zuban ke kamal se uski choochiyo & chut ko chhedte hue use fir se jhadwa diya.ab vo thakan mehsus kar rahi thi lekin uske upar chhayi khumari abhi kam nahi hui thi.is baar vinod ne use seedha litaya & uske uapr aa apna lund uski chut me ghusa diya.rambha ne use baaho me bhar liya & masti me muskurati aahe bharti uski chudai ka maza uthane lagi.usne bistar ke kinare se sar peechhe latka kar aah bhari to vinod uski gardan chumne laga.

tabhi paresh uske sar ke peechhe aa khada hua & apna lund uske munh me ghusa diya.rambha ne hath peechhe le ja uski gand ko pakad liya to apresh uska munh chodne laga.jab use laga ki vo jhad jayega usne lund bahar khincha & vinod ne rambha ko baaho me bhar karwat li & use apne upar kar liya.rambha samajh gayi ki ab uski gand paresh ke lund ka swad chakhegi.kaha to ab tak uski gand kunwari thi & jab kunwarapan toota to 1 hi sham me 2-2 lund use maara rahe the!

"ouiiiiiiiiiii..!",vo dard se karahi magar fir vahi anokha maza uske dilodimagh pe chha gaya.vinod sar utha uski dayi choochi ko daboche uske gulabi nipple ko chus raha tha & paresh uski kamar thame uske baalo ko chumta uski gand maar raha tha.teeno ab masti ke safar ke aakhiri daur me the.dono mard rambha ke jism ko pakde uske nazuk ango ko chakhte ab bahut zor se dhakke laga rahe the.

dard,masti & dher se maze ki anginat lehren badan me daudti rambha ka dil ab puri tarah se madhosh tha.uske dono chhedo me 1 ajib si kasak ho rahi thi & agle hi pal usne gand me kuchh garam sa mehsus kiya,uske upar jhuka paresh aahe bharta hua jhatke kaha raha tha.vo jhad gaya tha & uske garm virya ke ehsas ne uske andar masti ki 1 nayi shadid lehar dauda di & usne bhi bahut zor se chikh mari & uski chut ne vinod ke lund ko apni qatil jakad me kas liya.1 pal ko vo use chhodti & fir jakad leti.ye ehsas vinod ke bhi sabr ko todne ko kafi tha & vo bhi bistar se uthne ki koshish karta jhatke khata hua apni mehbooba ki chut me jhad gaya.

bistar pe teen thake magar sukun & khushi se bhare jism 1 dusre ke agosh me pade apni sanse sambhal rahe the.

Rambha pehli baar plane me baithi thi.is nayi naukri me aate hi use kayi naye tajurbe hue the.sabse pehle to is nayi naukri ke chalte uski tankhah badh gayi thi & zindagi me pehli baar vo thoda befikri se paise kharch pa rahi thi.dusre,Vinod ke roop me use 1 aisa shakhs mil gaya tha jo na keval uski jismani zarurato ko pura karta tha balki kayi & baato me uski madad bhi karta tha.

Gujrat ke project ke inauagaration ke liye Trust group ke sabhi bade afsar vaha ja rahe the.Vijayant Mehra ne unme se kuchh ko apni secretaries ko le jane ki bhi ijazat di thi.sabhi 1 chartered plane se pehle project ke nazdiki airport pahunche & vaha se sadak ke 2 ghante ke safar ke baad us jagah pahunche.

khud PM inaugration karne wale the & is chalte unke sath kayi bade mnti & afsar bhi vaha aaye the.rambha ne pehli baar itni badi-2 hastiyo ko dekha tha & ye sab uske liye bada romanchkari tha.pure jalse ke dauran Sonam ke sath uski & baki secretaries ki duty mehmano ka khayal rakhne ke liye lagayi gayi thi.itne se dino me hi uski sonam se achhi chhanane lagi thi.

"kaha ja rahi hai?",jalsa khatm hone ke baad sare mehman & group ke afsar vijayant & sameer ke sath 1 bade se hall me khane ke liye chale gaye the.PM ki hifazat ke nazariye se security badi kadi thi & baki log 1 dusre hall me khana kha rahe th.rambha khana lene ke bajay hall se bahar jane lagito sonam ne use toka.

"bathroom se aati hu,yaar.is security ke chakkar me ja hi nahi pa rahi thi."

"achha!ki apne boss se milne ja rahi hai?dono ne bathroom me milne ka plan banaya hua hai kya?",usne saheli ko chheda.

"chup!tu milti hogi apne boss se bathroom me!"

"are,yaar!vo bulaye to main khuli sadak pe mil lu!buddha is umra me bhi 10 jawano pe bhari padega!"

"tu to aise keh rahi hai jaise uska vajan sambhal chuki hai!",rambha ne bhi chuhal ki & hanste hue vaha se chali gayi.sonam ki bato se use dhyan aaya ki pure jalse ke dauran usne kayi baar sameer ko khud ko dekhte paya tha.jab unki nazar milti to vo apni vahi nekdil muskan hotho pe le aata & jawab me vo bhi muskura deti....kya uska boss uspe fida ho gaya tha?..hunh! ho bhi jaye to kya?..kuchh din khelega & fir kinare kar dega..agar uska fayda hua to sab thik varna vo sameer se kabhi nazdiki nahi badhayegi.

"hello,rambha!khana khaya tumne?",dono bathroom ke bahar hath dhone ke liye 1 common wshbasin tha & sameer vaha hath dho raha tha.

"hello,sir.bas ja rahi hu?",vo sath vale basin pe hath dhone lagi.

"ye koi naya makeup ka tarika hai kya?"

"ji?!",usne hairat se sameer ko dekha.

"haan,ye baalo me kya laga rakha hai?",rambha ne shishe me dekha to uski hansi chhut gayi.uske balo me 1 laal rang ka bada sa dhaga laga hua tha.vo use nikalne lagi magar na jane kaise vo balo me ulajh gaya tha.

"lao,main nikal deta hu."

"nahi,sir.ho jayega.aap bekar pareshan ho rahe hain.",magar sameer ne uski ansuni karte hue dhage ko nikalna shuru kar diya.rambha ko thodi sharm aane lagi.usne aankho ke kone se shishe me dekha,sari me saji-dhaji vo & badhiya suit me taiyyar handsome sameer uske baal thik karta hua,1 pal ko uske dil ne dono ko 1 jode ki nigah se dekha magar agle hi pal uske dimagh ne use khwab ke aasman se haqiqat ki zamin pe la khada kiya.

"vaise aaj tum bahut khoobsurat lag rahi ho.",dhaga bas ab nikalne hi wala tha.

"thank you,sir.",rambha ke gaal thod & gulabi ho gaye.

"vaise mujhe tumse 1 baat kehni thi.",rambha ka dil dhadak utha,"..us cement pricing vali baat jo tumne mujhe batayi thi uske baad mujhe lagta hai ki tum meri madad kar sakti ho,rambha."..oh!ise to kaam ki baat karni hai..rambha ko thodi mayusi hui.

"main chahta hu ki tum meri us naye Manpur projct ki taiyyari karne me madad karo.iske liye roz 6 baje ke baad tumhe rukna hoga lekin mere kehne ka matlab ye nahi hai ki tumhe haan hi karni hai agar koi pareshani ho to mana kar do."

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--14

गतान्क से आगे.

"नही,सर.परेशानी कैसी लेकिन..मैं आपकी क्या मदद कर सकती हू?"

"वो मैं तुम्हे दफ़्तर मे ही बताउन्गा.ओके!अब जाओ खाना खा लो."

"ओके,सर.",रंभा का काम तो बस डिक्टेशन लेना,लेटर्स लिखना,समीर कहे तो उसकी मेल्स का जवाब देना,उसके सारे अपायंट्मेंट्स का हिसाब रखना यानी कि 1 सेक्रेटरी का सारा काम करना होता था लेकिन नौकरी के दूसरे ही दिन कुच्छ पेपर्स हॅंडल करते हुए उसने सेमेंट का दाम देखा जिसपे ट्रस्ट उसे खरीद रहा था.रंभा इस से पहले जहा काम करती वो भी 1 छ्होटी बिल्डिंग कन्स्ट्रक्षन फर्म थी.वाहा भी वही कंपनी सेमेंट सप्लाइ करती थी जो ट्रस्ट को कर रही थी लेकिन उस छ्होटी फर्म को जहा वो हर सेमेंट की बोरी का दाम बाज़ार से रुपये .20 कम लगा रही थी,ट्रस्ट को वो बस रुपये.10 कम लगा रही थी जबकि ट्रस्ट की सेमेंट की खपत कयि हज़ार बोरियो की थी.

रंभा ने काफ़ी झिझकते हुए ये बात समीर को बताई.ये उसका काम नही था,इसके लिए तो कंपनी ने आदमी रखे थे जिनका काम ही था कंपनी के लिए खरीद-फ़रोख़्त करना.समीर ने फ़ौरन खुद इस बात की जाँच की & रंभा की बात सही साबित हुई.कंपनी को कुच्छ लाख रुपयो का नुकसान हो रहा था & ट्रस्ट जैसे ग्रूप के लिए बहुत ज़्यादा बड़ी बात नही थी लेकिन समीर 1 पक्का बिज़्नेसमॅन था & इस बात के लिए वो रंभा का शुक्रगुज़ार था.

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"मान गये,मेहरा साहब!समय से पहले आपने प्रॉजेक्ट पूरा कर दिया.",1 मंत्री दोनो बाप-बेटे & प्रणव से बात कर रहा था.

"मैने नही,मंत्री जी ये सब समीर ने अकेले किया है."

"मुबारक हो बर्खुरदार!",मंत्री जी आइस क्रीम काफ़ी स्वाद लेके खा रहे थे,"मेहरा साहब ग्रूप अच्छे हाथो मे रहेगा."

"जी,मंत्री जी.मेरे बाद तो सब इसी का है.",पीछे खड़े प्रणव को ये बात थोड़ी पसंद नही आई,"..प्रणव की मदद से समीर कंपनी को मुझसे भी आगे ले जाएगा."

"हां-2 क्यू नही?",मंत्री जी ने आइस क्रीम सॉफ कर दी,"..जमाई बाबू जैसे ससुर की मदद करते हैं वैसे ही साले की करेंगे!",उन्होने ज़ोर का ठहाका लगाया तो विजयंत ने खाली आइस क्रीम कप लेके 1 वेटर को थमाया.

"मंत्री जी,मानपुर वाली ज़मीन का टेंडर निकलने वाला है..",मंत्री जी अब थोड़े संजीदा हो गये,"..हमे मिल जाए ठेका तो आप जानते ही हैं कि कामकितनी तेज़ी से होता है & सभी खुश रहते हैं.",मंत्री जी खुश रहने का मतलब समझ गये थे.

"अरे मेहरा साहब जब निकलेगा तो टेंडर भारिएगा,आपकी रकम कम रही तो आप ही को मिलेगा.",& वो वाहा से आगे बढ़ गये.ये इशारा था कि वो विजयंत से अकेले मे बात करना चाहते हैं & विजयंत भी उनके साथ आगे चला गया.समीर किसी और से बात करने लगा लेकिन प्रणव वही खड़ा रहा.उसका चेहरा सख़्त हो गया था.

"कितनी अच्छी जगह है ना,प्रणव?",कमरे की खड़की पे खड़ी शिप्रा के बाल बाहर से आती ठंडी हवा के झोंके से लहरा रहे थे.पति ने कोई जवाब नही दिया तो शिप्रा ने गर्दन घुमाके उसे देखा,प्रणव थोड़ा परेशान सा लग रहा था.शिप्रा ने खिड़की के पर्दे बराबर किए & अपने पति को देख शोखी से मुस्कुराइ,"क्या परेशानी है जनाब?मुझसे कहिए.",प्रणव अभी भी चुप वैसे ही बिस्तर पे बैठा रहा.

शिप्रा ने घुटनो तक की ढीली नाइटी पहनी थी.उसने पति की तरफ पीठ की & हल्के से बदन को लहराते हुए अपनी नाइटी के स्ट्रॅप्स कंधे से सरकाने लगी.उसने दोनो हाथ अपने कंधो पे ऐसे रखे हुए थे कि देखने से ये धोखा होता था कि किसी ने उसे बाहो मे भर रखा है.स्ट्रॅप सरकते ही बीवी की नंगी पीठ परणव के सामने थी.शिप्रा ने ब्रा नही पहना था & अब उसकी छ्होटी सी गंद 1 गुलाबी पॅंटी मे प्रणव की नज़रो के सामने लहरा रही थी.

अपने सीने पे हाथ बाँधे अपनी चूचिओ को च्छुपाए वो वैसे ही शोखी से मुस्कुराते हुए आगे बढ़ी & घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ गयी.अपने घुटने प्रणव की फैली टाँगो के दोनो तरफ जमाते हुए वो अब बिल्कुल उसके करीब आ गयी,"मैं कौन हू,शिप्रा?"

"मेरी जान हो तुम.",उसके सवाल से शिप्रा चौंकी ज़रूर मगर वैसे ही मुस्कुराते हुए उसने उसके दाए कान मे फुसफुसाया & फिर उसे हल्के से काट लिया.वो उसके चहेरे को चूमने लगी.

"मैं कौन हू,शिपा?",प्रणव के सवाल दोहराने पे शिप्रा संजीदा हो गयी & उसने उसके चेहरे को हाथो मे भर लिया.

"प्रणव,क्या बात है सॉफ-2 कहो?"

"मैं कौन हू,शिप्रा?"

"प्लीज़ डार्लिंग,मुझे डर लग रहा है तुम्हारी बातों से!",वो रूवन्सी हो गयी थी.

"शिप्रा,मेरे सवाल का जवाब दो.",प्रणव के चेहरे के भाव वो समझ नही पा रही थी.

"तुम प्रणव हो मेरे पति,मेरी जान,मेरे सब कुच्छ!",शिप्रा रोक नही पाई खुद को & रोते हुए अपनी बाहें अपने पति के गले मे डाल दी.

"वो तो हू,शिपा लेकिन आज तुम्हारी ये ग़लतफहमी दूर करनी है कि मैं तुम्हारे पिता का दूसरा बेटा हू.",शिपा की रुलाई रुक गयी & उसने उसके कंधे से सर उठाया.

"प्रणव,क्या बात है?"

"तुम कहती थी ना की डॅड मुझे अपना बेटा मानते हैं,तुम ग़लत थी.मैं बस 1 नौकर हू..1 रखवाला..जो अभी उनकी खिदमत कर रहा है &आगे उनके बेटे यानी तुम्हारे भाई खिदमत करेगा!",प्रणव की आवाज़ मे तख़ही थी & दर्द भी & शिप्रा उस से आहत हुए बिना नही रह सकी.

"प्रणव,ये क्या बोल रहे हो?..क्या हुआ है तुम्हे..मुझे सब कुच्छ ठीक से बताओ..चलो.",शिप्र पति के चेहरे को हाथो मे भरे उस से सवाल करने लगी.बात पूरी होने पे उसने प्रणव को समझाया कि उसके पिता का वो मतलब नही रहा होगा & उसे दिलासा दिया.प्रणव भी अपनी प्यारी बीवी के नंगे जिस्म की गर्माहट & उसके प्यार भरे बोल सुन उसके आगोश मे डूब गया.काफ़ी देर बाद दिल की टीस को जिस्म के खेल मे मिलने वाले सुकून से शांत होकर कर वो सो गया लेकिन शिप्रा जागी हुई थी.उसके डॅडी ने उसके पति को ठेस पहुँचाई थी & इस बात का मलाल उसे भी था.वो सोए हुए प्रणव से लिपट गयी & उसके सीने मे मुँह च्छूपा सोने लगी.उस रात विजयंत के सुखी घर की 1 दीवार मे 1 हल्की सी दरार पड़ गयी थी.

सुबह 4 बजे के कुच्छ बाद रंभा धीरे से बिस्तर से उठी,वो साथ के पलंग पे सोई सोनम की नींद नही तोड़ना चाहती थी.जलसे मे आए सभी मेहमान तो जलसे के फ़ौरन बाद ही चले गये थे लेकिन कंपनी के सभी मुलाज़िम & विजयंत मेहरा अपने पूरे परिवार के साथ 1 रात के लिए वही रुके थे.सभी बड़े अफ़सर & विजयंत का पूरा परिवार तो कंपनी के गेस्ट हाउस मे रुके थे लेकिन रंभा & कुच्छ और मुलाज़िमो को कंपनी के कुच्छ खाली पड़े रेसिडेन्षियल क्वॉर्टर्स मे ठहराया गया था.

क्वॉर्टर्स के अहाते की चारदीवारी के पार पेड़ो का झुर्मुट था & फिर सुनहरी,चमकती रेत से भरा समंदर का किनारा.ये जगह अभी तक सैलानियो की निगाहो से अछूती थी & इसलिए बड़ी सॉफ-सुथरी थी.रंभा तो समंदर का पानी देखते ही उसमे नहाने को मचलने लगी थी.बचपन मे उसने तैराकी सीखी थी & स्कूल मे उसने 1-2 मुक़ाबले भी जीते थे लेकिन बड़ी होने पे उसकी मा ने उसके छ्होटे कपड़े पहन तैरने पे पाबंदी लगा दी थी.

वो दबे पाँव कमरे से निकली & कुच्छ ही पॅलो मे पेड़ो के झुर्मुट को पार कर रेत पे खड़ी थी.अभी भी अंधेरा था & पूरा बीच सुनसान था.रंभा ने अपनी टी-शर्ट & ट्रॅक पॅंट उतारी,उसके पास कोई स्विमस्यूट तो था नही तो उसने अपनी सफेद ब्रा-पॅंटी मे ही तैरने का फ़ैसला किया था.उसने अपने कपड़े उतार के साथ लाए 1 पॅकेट जिसमे तौलिया भी था,उसमे डाले & उन्हे 1 झाड़ी के पास रख 1 पत्थर से पॅकेट को दबा दिया,फिर वो भागती हुई पानी मे उतर गयी & तैरने लगी.काफ़ी देर तक वो पानी मे अठखेलिया करती रही.उसे बहुत मज़ा आ रहा था.धीरे-2 अंधेरा छेंट रहा था & आसमान पे लाली च्छा रही थी.अब कोई भी वाहा आ सकता था,वो पानी से निकली & मुस्कुराते हुए अपने कपड़ो की ओर जाने लगी कि सामने खड़े शख्स को देख उसकी मुस्कुराहट गायब हो गयी.

सामने उसका पॅकेट पकड़े विजयंत खड़ा उसे देख रहा था.विजयंत भी सवेरे की ताज़ी हवा का मज़ा लेने वाहा आया था & उसकी निगाह समंदर मे तैरती रंभा पे पड़ी.पानी से निकलती रंभा को देख उसका दिल ज़ोरो से धड़क उठा.पूरा जिस्म नमकीन पानी से गीला चमक रहा था.ब्रा के गले मे से झाँकते बड़े से क्लीवेज पे पानी की बूंदे हीरो सी चमक रही थी.रंभा ने पानी से निकलते ही अपने बाल झटके थे & उस वक़्त उसके सीने के उभार छलाछला उठे थे & लगता था ब्रा की क़ैद तोड़ आज़ाद होना चाहते थे.उसके चिकने पेट से पानी बहता हुआ उसकी भारी जाँघो के रास्ते उसकी टाँगो को चूमता नीचे रेत पे गिर रहा था.

रंभा का शर्म के मारे बुरा हाल था.नज़रे झुकाए उसने अपने बाल आगे कर अपने सीने पे कर अपनी छातियो के नंगे हिस्से को ढँका & धीमे कदमो से आगे जाने लगी.विजयंत का हाल भी बुरा था मगर जोश से.उसका दिल कर रहा था कि इस जलपरी को बाहो मे भर वही चमकीली रेत पे लिटा अपना बना ले.उसके जिस्म के कटाव पूरी तरह से नुमाया थे & ब्रा के कपड़े मे से उसके कड़े निपल्स का उभार भी.गीली पॅंटी भी थोड़ी छ्होटी थी & उसकी मक्खनी जाँघो के बीच जन्नत के रास्ते की कल्पना से ही उसका लंड उसकी हाफ-पॅंट मे कुलबुलाने लगा था.

विजयंत की तेज़ निगाहो ने रंभा के पॅकेट को भी फ़ौरन ही देख लिया था & अब वो उसके तौलिए को उसमे से निकाल खड़ा उसके करीब आने का इंतेज़ार कर रहा था.

"गुड मॉर्निंग!",रंभा के करीब आते ही उसने उसके पीछे जा तौलिया उसके कंधो पे डाला,"उधर कपड़े बदल लो.",उसने झुर्मुट की ओर इशारा किया & उसका पॅकेट उसे थमाया.पीछे आने पे उसकी नज़रे उसकी चिकनी पीठ & कमर पे पड़ी,पॅंटी के ठीक उपर उसकी रीढ़ के दोनो तरफ 2 डिंपल्स उसे लुभाते नज़र आए.उसके नीचे उसकी मोटी गंद उभरी हुई उसके लंड से बस 2-3 इंच की दूरी पे थी.उसने देखा की पॅंटी के बाहर माँस का 1 फालतू टुकड़ा भी नही लटका हुआ है.ऐसी कसी गंद देख उसका लंड तो अब पॅंट से निकलने को उतावला होने लगा मगर विजयंत ने उसे काबू मे रखा.

"आइ'म सॉरी!",रंभा गीले ब्रा & पॅंटी को उतार बदन सूखा रही थी.उसने गर्दन घुमाई तो देखा विजयंत की पीठ उसकी ओर है,"..मुझे शायद इस तरह तुम्हे चौंकाना नही चाहिए था.",रंभा ने जल्दी से शर्ट पहनी & फिर पॅंट चढ़ाने लगी.

विजयंत के दिल मे उसके गीले जिस्म को देख उसे पाने की ख्वाहिश अब और मज़बूत हो गयी थी.कपड़े बदलते वक़्त उसके नंगे जिस्म को देखने का मौका वो कभी नही छ्चोड़ता लेकिन वो रंभा को और नही घबराना चाहता था.वो उस हसीन लड़की को उसकी पूरी मर्ज़ी के साथ अपनी बाहो मे लाना चाहता था क्यूकी वो जानता था कि उसकी मर्ज़ी के साथ हमबिस्तर होने पे मज़ा भी दोगुना होगा.

"प्लीज़,सर.मुझे शर्मिंदा मत कीजिए..",रंभा झुर्मुट से बाहर आई,"..आपको क्या पता था कि मैं यहा हू.",दोनो वापस क्वॉर्टर्स की ओर बढ़ चले.बिना ब्रा के पहनी शर्ट मे से उसके निपल्स के उभार फिर से नुमाया थे & विजयंत ने उन्हे फिर से आँखो से ही च्छुने की कोशिश की.

"मुझे तुम्हारा शुक्रिया अदा भी करना था."

"जी?"

"हां,सेमेंट के दामो वाली बात बता तुमने कंपनी का बहुत फ़ायदा किया है."

"सर,मैं तो बस अपना काम कर रही थी.",रंभा सर झुका के मुस्कुराइ.विजयंत ने उसे उसके क्वॉर्टर तक छ्चोड़ा & फिर चला गया.रंभा अपने कमरे मे आई,सोनम अभी तक सो रही थी.वो बाथरूम मे गयी & नंगी हो शवर के नीचे खड़ी हो गयी & बदन से समंदर के नमक को धोने लगी.उसने आँखे बंद की & उसे विजयंत की आँखे नज़र आई खुद को देखते हुए.उन नज़रो से बीच पे वो घबरा गयी थी,उसका दिल बहुत ज़ोर से धड़कने लगा था मगर साथ ही 1 अजीब सा रोमांच भर गया था उसके जिस्म मे.उसकी चूत मे कसक उठने लगी थी.आजतक ऐसा तभी होता था जब वो किसी मर्द के साथ या तो चुदाई कर रही होती थी या चुदाई के पहले का मस्ताना खेल खेल रही होती थी लेकिन आज विजयंत ने बिना च्छुए उसे मस्त कर दिया था.

उसने पानी की धार के नीचे खड़े-2 बाए हाथ से अपनी छातियाँ दबाई,उसका दिल गुस्ताख ख़यालो से भर गया था,उसका दाया हाथ टाँगो के बीच उसकी चूत से लग गया था & वाहा का गीलापन पल-2 बढ़ रहा था,ख़याल और गुस्ताख हुए & उन ख़यालो मे उसके साथ उसकी कंपनी का मालिक विजयंत मेहरा था.

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"ओह..विजयंत डार्लिंग..उउम्म्म्ममम..!",कामया की पीठ दीवार से लगी थी & उसकी छ्होटी सी ड्रेस मे हाथ डाल बाई जाँघ को थाम अपने पॅंट मे क़ैद लंड को उसकी चूत पे रगड़ता वो उसकी ठुड्डी पे जीभ फिरा रहा था,"..ओह्ह..तुम्हारे लिए मैने ये पार्टी अरेंज करने का काम सोनिया कोठारी को दिया..वाउ!",उसने ज़िप खोल अपने आशिक़ का लंड निकाल लिया था & उसे हिलाने लगी थी.

"कहा है वो?",विजयंत ने उसकी पॅंटी सर्काई तो कामया ने खुद उसका लंड अपनी चूत की दरार पे रख दिया.

"पार्टी जिस हॉल मे हो रही है,उसके साथ 1 कमरा है वाहा वो अकेली बैठी है,उसकी पार्ट्नर नही आई है आज..आहह..!",विजयंत ने उसकी जंघे थाम लंड को अंदर धकेला तो वो उसके कंधो को पकड़ उचकी & दर्द से आहत हो उसके बाए कंधे पे उसकी कमीज़ के उपर से ही काट लिया.

"थॅंक्स,कामया!",विजयंत उसके खूबसूरत चेहरे को चूमते हुए धक्के लगाने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--14

gataank se aage.

"nahi,sir.pareshani kaisi lekin..main aapki kya madad kar sakti hu?"

"vo main tumhe daftar me hi bataunga.ok!ab jao khana kha lo."

"ok,sir.",rambha ka kaam to bas dictation lena,letters likhna,sameeer kahe to uski mails ka jawab dena,uske sare appointments ka hisab rakhna yani ki 1 secretary ka sara kaam karna hota tha lekin naukri ke dusre hi din kuchh papers handle karte hue usne cement ka daam dekha jispe trust use kharid raha tha.rambha is se pehle jaha kaaml karti lhi vo bhi 1 chhoti building construction firm thi.vaha bhi vahi company cement supply karti thi jo trust ko kar rahi thi lekin us chhoti firm ko jaha vo har cement ki bori ka daam bazar se Rs.20 kam laga rahi thi,trust ko vo bas Rs.10 kam laga rahi thi jabki trust ki cement ki khapat kayi hazar boriyo ki thi.

rambha ne kafi jhijhakte hue ye baat sameer ko batayi.ye uska kaam nahi tha,iske liye to comapny ne admi rakhe the jinka kaam hi tha company ke liye kharid-farokht karna.sameer ne fauran khud is baat ki janch ki & rambha ki baat sahi sabit hui.company ko kuchh lakh rupayo ka nuksan ho raha tha & trust jaise group ke liye bahut zyada badi baat nahi thi lekin samir 1 pakka businessman tha & is baat ke liye vo rambha ka shukraguzar tha.

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"maan gaye,mehra sahab!samay se pehle aapne project pura kar diya.",1 mantri dono baap-bete & Pranav se baat kara raha tha.

"maine nahi,mantri ji ye sab sameer ne akele kiya hai."

"mubarak ho barkhurdar!",mantri ji ice cream kafi swad leke kha rahe the,"mehra sahab group achhe hatho me rahega."

"ji,mantri ji.mere baad to sab isi ka hai.",peechhe khade pranav ko ye baat thodi pasand nahi aayi,"..pranav ki madad se sameer company ko mujhse bhi aage le jayega."

"haan-2 kyu nahi?",mantri ji ne ice cream saaf kar di,"..jamai babu jaise sasur ki madad karte hain vaise hi sale ki karenge!",unhone zor ka thahaka lagaya to vijayant ne khali ice cream cup leke 1 waiter ko thamaya.

"mantri ji,manpur vali zamin ka tender nikalne wala hai..",mantri ji ab thode sanjida ho gaye,"..hume mil jaye theka to aap jante hi hain ki kaamkitni tezi se hota hai & sabhi khush rehte hain.",mantri ji khush rehne ka matlab samjh gaye the.

"are mehra sahab jab niklega to tender bhariyega,aapki rakam kam rahi to aap hi ko milega.",& vo vaha se aage badh gaye.ye ishara tha ki vo vijayant se akele me baat karna chahate hain & vijayant bhi unke sath aage chala gaya.sameer kisi aur se baat karne laga lekin pranav vahi khada raha.uska chehra sakht ho gaya tha.

"Kitni achhi jagah hai na,Pranav?",kamre ki khdki pe khadi Shipra ke baal bahr se aati thandi hawa ke jhonke se lehra rahe the.pati ne koi jawab nahi diya to shipra ne gardan ghumake use dekha,pranav thoda pareshan sa lag raha tha.shipra ne khidki ke parde barabar kiye & apne pati ko dekh shokhi se muskurayi,"kya pareshani hai janab?mujhse kahiye.",pranav abhi bhi chup vaise hi bistar pe baitha raha.

shipra ne ghutno tak ki dhili nighty pehni thi.usne pati ki taraf pith ki & halke se badan ko lehrate hue apn nighty ke straps kandhe se sarkane lagi.usne dono hath apne kandho pe aise rakhe hue the ki dekhne se ye dhokha hota tha ki kisi ne use baaho me bhar rakha hai.strap saakte hi biwi ki nangi pith paranav ke samne thi.shipra ne bra nahi pehna tha & ab uski chhoti si gand 1 gulabi panty me pranav ki nazor ke samne lehra rahi thi.

apne seene pe hath bandhe apni chhtiyo ko chhupaye vo vaise hi shokhi se muskurate hue aage badhi & ghutno ke bal bistar pe chadh gayi.apne ghutne pranav ki faili tango ke dono taraf jamate hue vo ab bilkul uske karib aa gayi,"main kaun hu,shipra?"

"meri jaan ho tum.",uske sawal se shipra chaunki zaraur magar vaise hi muskurate hue usne uske daye kaan me fusfusaya & fir use halke se kaat liya.vo uske chehere ko chumne lagi.

"main kaun hu,shipa?",pranav ke sawal dohrane pe shipra sanjida ho gayi & usne uske chehre ko hatho me bhar liya.

"pranav,kya baat hai saaf-2 kaho?"

"main kaun hu,shipra?"

"please darling,mujhe darr lag raha hai tumhari baaton se!",vo ruwansi ho gayi thi.

"shipra,mere sawal ka jawab do.",pranav ke chehre ke bhav vo samajh nahi pa rahi thi.

"tum pranav ho mere pati,meri jaan,mere sab kuchh!",shipra rok nahi payi khud ko & rote hue apni baahen apne pati ke gale me daal di.

"vo to hu,shipa lekin aaj tumhari ye galatfehmi door karni hai ki main tumhare pita ka dusra beta hu.",shipa ki rulayi ruk gayi & usne uske kandhe se sar uthaya.

"pranav,kya baat hai?"

"tum kehti thi na ki dad mujhe apna bet mante hain,tum galat thi.main bas 1 naukar hu..1 rakhwala..jo abhi unki khidmat kar raha hai &aage unke bete yani tumhari bhaiki khidmat karega!",pranav ki aavaz me takhi thi & dard bhi & shipra us se aahat hue bina nahi reh saki.

"pranav,ye kya bol rahe ho?..kya hua hai tumhe..mujhe sab kuchh thik se batao..chalo.",shipr pati ke chehre ko hatho me bhare us se sawal karne lagi.baat puri hone pe usne pranav ko samjhaya ki uske pita ka vo matlab nahi raha hoga & use dilasa diya.pranav bhi apni pyari biwi ke nange jism ki garmahat & uske pyar bhare bol sun uske agosh me doob gaya.kafi der baad dil ki tees ko jism ke khel mel milne vale sukun se shant kar vo so gaya lekin shipra jagi hui thi.uske daddy ne uske pati ko thes pahunchayi thi & is baat ka malal use bhi tha.vo soye hue pranav se lipat gayi & uske seene me munh chhupa sone lagi.us raat vijayant ke sukhi ghar ki 1 deewar me 1 halki si darar pad gayi thi.

asvere 4 baje ke kuchh baad Rambha dhire se bistar se uthi,vo sath ke palang pe soyi Sonam ki nind nahi todna chahti thi.jalse me aaye sabhi mehman to jalse ke fauran baad hi chale gaye the lekin company ke sabhi mulazim & Vijayant Mehra apne pure parivar ke sath 1 raat ke liye vahi ruke the.sabhi bade afsar & vijayant ka pura parivar to company ke guest house me ruke the lekin rambha & kuchh aur mulazimo ko company ke kuchh khali pade residential quarters me thehraya gaya tha.

quarters ke ahate ki chardeewari ke paar pedo ka jhurmut tha & fir sunahri,chamakti ret se bhara samandar ka kinara.ye jagah abhi tak sailaniyo ki nigaaho se achhuti thi & isliye badi saaf-suthri thi.rambha to samandar ka pani dekhte hi usme nahane ko machalne lagi thi.bachpan me usne tairaki sikhi thi & school me usne 1-2 muqable bhi jite the lekin badi hone pe uski maa ne uske chhote kapde pehan tairne pe pabandi laga di thi.

vo dabe panv kamre se nikli & kuchh hi palo me pedo ke jhurmut ko paar kar ret pe khadi thi.abhi bhi andhera tha & pura beach sunsan tha.rambha ne apni t-shirt & track pant utari,uske paas koi swimsuit to tha nahi to usne apni safed bra-panty me hi tairne ka faisla kiya tha.usne apne kapde utar ke sath laye 1 packet jisme tauliya bhi tha,usme dale & unhe 1 jhadi ke paas rakh 1 patthar se packet ko daba diya,fir vo bhagti hui pani me utar gayi & tairne lagi.kafi der tak vo pani me athkheliyan karti rahi.use bahut maza aa raha tha.dhire-2 andhera chhant raha tha & aasmaan pe lali chha rahi thi.ab koi bhi waha aa sakta tha,vo pani se nikli & muskurate hue apne kapdo ki or jane lagi ki samne khade shakhs ko dekh uski muskurahat gayab ho gayi.

samne uska packet pakde vijayant khada use dekh raha tha.vijayant bhi savere ki tazi hawa ka maza lene vaha aaya tha & uski nigah samandar me tairti rambha pe padi.pani se nikalti rambha ko dekh uska dil zoro se dhadak utha.pura jism namkin pani se gila chamak raha tha.bra ke gale me se jhankte bade se cleavage pe pani ki boonde heero si chamak rahi thi.rambha ne pani se nikalte hi pane baal jhatke the & us waqt uske seene ke ubhar chhalchhala uthe the & lagta tha bra ki qaid tod aazad hona chahte the.uske chikne pet se pani behta hua uski bhari jangho ke raste uski tango ko chumta neeche ret pe gir raha tha.

rambha ka sharm ke mare bura haal tha.nazre jhukaye usne apne baal aage kar apne seene pe kar apni chhatiyo ke nange hisse ko dhanka & dheeme kadmo se aage naae lagi.vijayant ka haal bhi bura tha magar josh se.uska dil kar raha tha ki is jalpari ko baaho me bhar vahi chamkili ret pe lita apna bana le.uske jism ke katav puri tarah se numaya the & bra ke kapde me se uske kade nipples ka ubhar bhi.gili panty bhi thodi chhoti thi & uski makkhani jangho ke beech jannat ke raste ki kalpana se hi uska lund uski half-pant me kulbulane laga tha.

vijayant ki tez nigaho ne rambha ke packet ko bhi fauran hi dekh liya tha & ab vo uske tauliye ko usme se nikal khada uske karib aane ka intezar kar raha tha.

"good morning!",rambha ke karib aate hi usne uske peechhe ja tauliya uske kandho pe dala,"udhar kapde badal lo.",usne jhurnmut ki or ishara kiya & uska packet use thamaya.peechhe aane pe uski nazre uski chikni pith & kamar pe padi,panty ke thik upar uski reedh ke dono taraf 2 dimples use lubhate nazar aaye.uske neeche uski moti gand ubhri hui uske lund se bas 2-3 inch ki duri pe thi.usne dekha ki panty ke bahar mans ka 1 faltu tukda bhi nahi latka hua hai.aisi kasi gand dekh uska lund to ab pant se nikalne ko utawla hone laga magar vijayant ne sue kabu me rakha.

"i'm sorry!",rambha gile bra & panty ko utar badan sukha rahi thi.usne gardan ghumayi to dekha vijayant ki pith uski or hai,"..mujhe shayad is tarah tumhe chaunkana nahi chahiye tha.",rambha ne jaldi se shirt pehni & fir pant chadhane lagi.

vijayant ke dil me uske gile jism ko dekh use pani ki khwahish ab aur mazbut ho gayi thi.kapde badalte waqt uske nange jism ko dekhne ka mauka vo kabhi nahi chhodta lekin vo rambha ko aur nahui ghabrana chahta tha.vo us haseen ladki ko uski puri marzi ke sath apni baaho me lana chahta tha kyuki vo janta tha ki uski marzi ke sath humbistar hone pe maza bhi doguna hoga.

"please,sir.mujhe sharminda mat kijiye..",rambha jhurmut se bahar aayi,"..aapko kya pata tha ki main yaha hu.",dono vapas quarters ki or badh chale.bina bra ke pehni shirt me se uske nipples ke ubhar fir se numaya the & vijayant ne unhe fir se aankho se hi chhune ki koshish ki.

"mujhe tumhara shukriya ada bhi karna nahi."

"ji?"

"haan,cement ke damo vali baat bata tumne company ka bahut fayda kiya hai."

"sir,main to bas apna kaam kar rahi thi.",rambha sar jhuka ke muskurayi.vijayant ne use uske quarter tak chhoda & fir chala gaya.rambha apne kamre me aayi,sonam abhi tak so rahi thi.vo bathroom me gayi & nangi ho shower ke neeche khadi ho gayi & badan se samandar ke namak ko dhone lagi.usne aankhe band ki & use vijayant ki aankhe nazar aayi khud ko dekhte hue.un nazro se beach pe vo ghabra gayi thi,uska dil bahut zor se dhadakne laga tha magar sath hi 1 ajib sa romanch bhar gaya tha uske jism me.uski chut me kasak uthne lagi thi.aajtak aisa tabhi hota tha jab vo kisi mard ke sath ya to chudai kar rahi hoti thi ya chudai ke pehle ka mastana khel khel rahi hoti thi lwekin aaj vijayant ne bina chhue use mast kar diya tha.

usne pani ki dhar ke neeche khade-2 baye hath se apni chhatiya dabayi,uska dil gustakh khayalo se bhar gaya tha,uska daya hath tango ke beech uski chut se lag gaya tha & vaha ka gilapan pal-2 badh raha tha,khayal aur gustakh hue & un khayalo me uske sath uski company ka malik vijayant mehra tha.

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"ohhhhh..vijayant darling..uummmmmm..!",Kamya ki pith deewar se lagi thi & uski chhoti si dress me hath daal bayi jangh ko tham apne pant me qaid lund ko uski chut pe ragadta vo uski thuddi pe jibh fira raha tha,"..ohh..tumhare liyemaine ye party arrange karne ka kaam Soniya Kothari ko diya..wow!",usne zip khol apne aashiq ka lund nikal liya tha & use hilane lagi thi.

"kaha hai vo?",vijayant ne uski panty sarkayi to kamya ne khud uska lund apni chut ki darar pe rakh diya.

"party jis hall me ho rahi hai,uske sath 1 kamra hai vaha vo akeli baithi hai,uski partner nahi aayi hai aaj..aahhhhh..!",vijayant ne uski janghe tham lund ko andar dhakela to vo uske kandho ko pakad uchki & dard se aahat ho uske baye kandhe pe uski kamiz ke upar se hi kaat liya.

"thanx,kamya!",vijayant uske khubsurat chehre ko chumte hue dhakke lagane laga.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--15

गतान्क से आगे.

"सर,मैने प्रिंट-आउट्स निकाल के सारे पेपर्स सीरियल मे लगा दिए हैं.",रंभा समीर के कहे मुताबिक ऑफीस अवर्स के बाद उसकी मानपुर वाले प्रॉजेक्ट पे मदद करने लगी थी.

"थॅंक्स,रंभा.",समीर कुच्छ लिख रहा था.

"सर,ये सारी फाइल्स इस कंप्यूटर मे स्टोर्ड है,इनकी कोई बॅक-अप नही रखनी है?"

"वो मैं कर लूँगा.",समीर ने लिखना बंद किया,"9.30 बज गये,अब चलना चाहिए."उसने अपने डेस्क का कंप्यूटर बंद किया.कॅबिन मे लगे सोफे पे बैठी रंभा ने भी लॅपटॉप ऑफ कर उसे बॅग मे डाल दिया.वो लॅपटॉप भी समीर का था.समीर कोट पहन रहा था तो रंभा ने उसकी मदद की & फिर उसका बॅग उसे थमाया & दोनो कॅबिन से निकल गये.

"सर,अभी तक टेंडर निकला भी नही है,ये भी नही मालूम कि कब निकलेगा फिर भी आप इतनी तैयारी कर रहे हैं?"

"रंभा,दुनिया को नही पता मगर डॅड & मुझे पता है कि आज से ठीक 5 महीने बाद टेंडर निकलेगा."

"ओके,सर लेकिन आप मेटीरियल्स का जो कॉस्ट अभी सोच रहे हैं,उस वक़्त वो घट या बढ़ गया तो?"

"वो मैं तुम्हे कल बताउन्गा,मैं दोनो तरफ का मार्जिन लेके चल रहा हू.",दोनो नीचे आ गये थे & समीर का ड्राइवर उसकी कार का दरवाज़ा खोले खड़ा था,"..अब ये सब चिंता छ्चोड़ो & घर जाओ.",उसकी कार के पीछे खड़ी 1 कार का दरवाज़ा उसने खुद खोला & रंभा को बैठने का इशारा किया.जब से उसने देर तक रुकना शुरू किया था,समीर ने उसके घर जाने के लिए ऑफीस की 1 कार का इंतेज़ाम कर दिया था,"..वैसे मुझे तुम्हारे मम्मी-पापा से माफी माँगनी पड़ेगी तुम्हे रोज़ इतनी देर करवा रहा हू."

"वो नाराज़ नही होते हैं,सर.",रंभा फीके ढंग से मुस्कुराते हुए कार की पिच्छली सीट पे बैठ गयी.

"अच्छा!ऐसा कमाल कैसे हो गया?..तुम्हारी मम्मी तो ज़रूर चिंता करती होंगी?"

"जी नही सर.कोई चिंता नही करता क्यूकी वो इस दुनिया मे हैं ही नही."

"क्या?!आइ'म सॉरी,रंभा.मुझे पता नही था नही..-"

"इट'स ओके,सर!मुझे बुरा नही लगा."

"फिर भी मैं माफी चाहता हू,रंभा.",उसने कार की खिड़की मे से बढ़के उसके कंधे पे हाथ रखा तो वो मुस्कुरा दी,"ओके..गुड नाइट!"

"गुड नाइट,सर!",रंभा समीर की शराफ़त की मुरीद हो गयी थी.दोनो बाप-बेटे उसे बड़े भले इंसान लगे थे & ट्रस्ट ग्रूप मे काम करना उसे बहुत भा रहा था.विजयंत के ख़याल से उसे फिर से बीच वाली घटना याद आ गयी & 1 बार फिर उसकी चूत मे कसक उठी.आज उसने पॅंट सूट पहना था.उसने दाई टांग उठा बाई पे चढ़ाई & अपनी जाँघो मे चूत को दबा दिया लेकिन वो जानती थी कि जब तक घर जाके वो अपनी उंगली का सहारा नही लेगी या फिर अगर विनोद को फ़ुर्सत हुई & उसका लंड उसकी चूत मे उतरा, तो ही उसकी कसक शांत होगी.

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"हेलो,मिसेज़.कोठारी!",अपने मुलाज़िमो को कुच्छ हिदायत देती सोनिया चौंकी,उसके सामने विजयंत खड़ा था & उसे सर से पाँव तक देख रहा था.उसने 1 सफेद कमीज़ & क्रीम कलर की पतलून पहनी थी.

"हाई!",अफ..वो आँखें!..क्यू आया था वो यहा?..कितनी मुश्किल से उसने हनिमून पे उसे भूलके खुद को ब्रिज के प्यार मे डूबा दिया था!

विजयंत ने हाथ बढ़ा उसका हाथ थामा & उसकी निगाहो मे झँकते हुए हाथ को चूम लिया.सोनिया के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी & उसने हाथ खींच लिया मगर दिल का कोई कोना उसके हाथ को विजयंत की पकड़ मे ही रहने देना चाहता था,"आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं."

"थॅंक्स!",उसने उसकी तरफ पीठ कर ली & पास की मेज़ पे पढ़ी 1 फाइल उठा पार्टी के शेड्यूल को देखने का नाटक करने लगी.

"सोनिया जी.."

"जी.",उसने बिना घूमे जवाब दिया..ये जाता क्यू नही?..उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था & उसे उसका कारण समझ नही आ रहा था.

"मैं आपको पार्टी जाय्न करने की दावत देने आया था.हम वाहा जश्न मनाएँ & आप यू यहा अकेली बैठी रहें,ये मुझे कुच्छ ठीक नही लगा."

"थॅंक्स पर मैं नही आ सकती.आप एंजाय कीजिए.",वो घूम के हल्के से मुस्कुराइ.

"सोनिया जी..",विजयंत उसके बिल्कुल करीब आ गया & सोनिया की धड़कने और तेज़ हो गयी,"..आपके इनकार की वजह कही आपके पति & मेरे बीच की सो-कॉल्ड दुश्मनी तो नही?"

"आप ग़लत समझ रहे हैं,मिस्टर.मेहरा..",सोनिया ने चेहरे पे दिल की बेकली को आने नही दिया,"..ये मेरे पेशे के उसूलो के खिलाफ है.अपनी ऑर्गनाइज़ की हुई पार्टी मे मैं खुद नही जा सकती."

"मैं कद्र करता हू आपकी बात की.",विजयंत थोड़ा सा झुका & अपने हाथ मे पकड़े 2 वाइन ग्लास मे से 1 सोनिया की ओर बढ़ाया,"..तो ठीक है आप यही 1 जाम कबूल कीजिए.इस तरह आपका उसूल भी बरकरार रहेगा & मुझे कुच्छ देर के लिए आपका साथ भी मिल जाएगा.",अब विजयंत की गुज़ारिश ठुकराना सोनिया को बदतमीज़ी लगा & उसने ग्लास ले लिया.

"मिसेज़.कोठारी,आपको लग रहा होगा कि मैं क्यू आपके करीब आने की कोशिश कर रहा हू?",सोनिया चौंक गयी & ड्रिंक गिरते-2 बची.

"जी,आपको कैसे मालूम?"

"आपकी ये खूबसूरत आँखे आपसे बहुत धोखा करती हैं.आपको खबर भी नही होती & ये आपके दिल का हाल हमे बयान कर देती हैं.",ना चाहते हुए भी सोनिया को हँसी आ गयी.विजयंत भी हंसा,"..सोनिया जी,आप मुझे अच्छी लगी & बस आपसे दोस्ती करने को जी चाहा.अब कोठारी साहब & मैं तो दोस्त बनाने से रहे तो मैने सोचा कि आप ही की दोस्ती से काम चला लू.",उसकी नाटकिया ढंग से कही बात पे उसे फिर से हँसी आ गयी.

"लेकिन मेरे पति को ये बात शायद पसंद ना आए?"

"बिल्कुल,मैं समझ सकता हू.उनकी जगह मैं होता तो मेरी भी भावनाए कुच्छ वैसी ही होती बल्कि उनकी जगह मैं होता तो मुझे तो आपका किसी भी मर्द से बात या दोस्ती नागवार गुज़रती."

"अच्छा!क्यू?",सोनिया की वो अंजानी घबराहट अब दूर हो रही थी & विजयंत से बात करना उसे अच्छा लग रहा था.वो फ्लर्ट करने की कोशिश नही कर रहा था लेकिन उसकी तारीफ का मौका भी नही छ्चोड़ रहा था.

"सोनिया जी,आपके जैसी हसीन बीवी हो तो कोई भी मर्द उसे किसी गैर मर्द से बाते करते देख जलन से मर जाएगा!",दोनो फिर से हँसे.

"अगर आपको ऐतराज़ है तो आइन्दा मैं कभी आपको यू परेशान नही करूँगा."

"प्लीज़,मिस्टर.मेहरा मेरी बात का बुरा मत मानिए लेकिन आप मेरी पोज़िशन समझने की कोशिश कीजिए."

"ज़रूर,सोनिया जी.आप बेफ़िक्र रहें मैं कभी भी आपके पति की मौजूदगी मे आपसे बात नही करूँगा लेकिन उनकी गैर मौजूदगी मे आपसे बात करने का कोई मौका छ्चोड़ूँगा भी नही!"

"ओके,मिस्टर.मेहरा.",सोनिया फिर हँसी.

"ओके तो अबसे मैं विजयंत हू मिस्टर.मेहरा नही.",विजयंत ने हाथ आगे बढ़ाया.सोनिया का दिल फिर से धड़क उठा.उसके गर्म हाथ के एहसास के आभास से फिर वोही घबराहट उसे घेरने लगी.उसका दिल उसे हाथ बढ़ने से रोक रहा था लेकिन दिल के 1 कोने से आती आवाज़ जोकि उसे हाथ थामने को कह रही थी,अब तेज़ हो रही थी.सोनिया ने उसी कोने की आवाज़ सुनी & विजयंत का हाथ थाम लिया.

"ओके,विजयंत.",उसके जिस्म मे फिर से बिजली दौड़ गयी थी & दिल मे घबराहट के साथ बहुत रोमांच होने लगा था.

"ओके.",विजयंत मुस्कुराया & वापस पार्टी मे चला गया.

..........................................

ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी सोनिया बालो मे ब्रश फिरा रही थी & विजयंत मेहरा से हुई मुलाकात के बारे मे सोच रही थी.उसकी बातो को याद करते ही उसके होंठो पे मुस्कुराहट खेलने लगी.

"क्या सोच रही हो?"

"हूँ..!",ब्रिज कोठारी कब उसके पीछे आ खड़ा हुआ था उसे पता ही नही चला था,"..क-कुच्छ नही.",वो ब्रश रख खड़ी हुई तो ब्रिज ने उसे बाहो मे भर लिया,"..आज कितनी देर से लौटे तुम..उउम्म्म्म..!",ब्रिज का उसकी गर्दन चूमना उसे बहुत भला लग रहा था.

"हां,आज बहुत देर हो गयी.तुम्हारी पार्टी कैसी रही?",वो धीरे-2 उसकी नाइटी उपर उठाते हुए उसके क्लीवेज को चूम रहा था.

"ठीक से निपट गयी....उफफफफ्फ़..ज़रा सब्र नही तुम्हे तो!",ब्रिज का दाया हाथ उसकी पॅंटी मे घुस उसकी गंद को दबा रहा था.

"क्या ज़रूरत है सोनिया डार्लिंग तुम्हे अब ये काम करने की?",सोनिया उसकी शर्ट के बटन खोल उसके सीने को चूम रही थी & वो उसकी नाइटी के स्ट्रॅप्स उसके कंधो से सरका रहा था,"..बेकार परेशान होती हो."

"जानू,अपने शौक के लिए करती हू ये काम.नही तो बोरियत से मर ही जाऊंगी..ऊव्ववव..!",ब्रिज ने उसके सीने पे हल्के से काटा & उसकी जाँघो को पकड़ उसे उठाया तो सोनिया ने भी अपनी जंघे उसकी कमर पे & बाहे गर्दन पे लपेट दी & उसकी गोद मे बिस्तर की ओर चली गयी.

"मरे तुम्हारे दुश्मन!",ब्रिज उसे लिए-दिए बिस्तर पे लेट गया & दोनो पति-पत्नी 1 दूसरे से गुत्थम-गुथ्हा 1 दूसरे को शिद्दत से चूमने लगे.दोनो कमर हिलाते हुए अपने नाज़ुक अंगो को आपस मे रगड़ रहे थे.ब्रिज ने सोनिया की नाइटी को नीचे कर उसकी गोरी चूचियाँ नंगी कर दी थी & उन्हे चूस रहा था.सोनिया भी आहे भरते हुए उसकी शर्ट उपर कर उसकी पीठ सहलाते हुए अपनी कमर उचका रही थी.

"जान,आज मेरी मौसी का फोन आया था,बता रही थी कि मम्मी की तबीयत कुच्छ ठीक नही चल रही आजकल.",ब्रिज उठ के अपने कपड़े निकाल रहा था तो सोनिया भी उठ बैठी थी.ब्रिज ने नगे हो उसकी नाइटी को थामा तो उसने हाथ उपर कर दिए ताकि उसके पति को उसे नग्न करने मे ज़्यादा परेशानी ना हो,"..मैं सोच रही थी कि बॅंगलुर जाके उन्हे देख आऊँ.",ब्रिज ने उसे बाहो मे भरा तो दोनो 1 बार फिर पहले की तरह लेट गये & चूमने लगे .

"वो तुम्हारे मा-बाप हैं..",ब्रिज अपने दाए हाथ को उसकी पॅंटी मे घुसा उसकी चूत रग़ाद रहा था,"..उनसे मिलने,ना मिलने का फ़ैसला भी तुम्हारा ही होना चाहिए मगर सोनिया,मुझे तुम्हारी तौहीन बर्दाश्त नही फिर चाहे तौहीन करने वाले तुम्हारे मा-बाप ही क्यू ना हों.",सोनिया की पलके मस्ती मे मूंद गयी थी & वो अब जोश मे कमर उचका रही थी.

"ओह्ह..ब्रिज मेरी जान..",पति के लिए उसके दिल मे बेपनाह मोहब्बत उमड़ आई & उसने उसके बाल पकड़ उसे नीचे खींचा & उसे दीवानगी के साथ चूमने लगी.ब्रिज ने उसके झाड़ते ही उसकी पॅंटी उतारी & सोनिया ने टाँगे फैलाते हुए अपने पति को उपर आ अपनी चुदाई करने का न्योता दिया,"..अब वो मेरे साथ जो सलूक करें,ब्रिज हैं तो वो मेरे मम्मी-पापा ना..ऊउउईईईईईईई.....उफफफफफ्फ़..कितना बड़ा है तुम्हारा..अभी तक दर्द होता है.....हाईईईईईईईईई....!",ब्रिज ने लंड पूरा का पूरा अंदर डाल दिया था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--15

gataank se aage.

"sir,maine print-outs nikal ke sare papers serial me laga diye hain.",rambha Sameer ke kahe mutabik office hours ke baad uski Manpur vale project pe madad karne lagi thi.

"thanx,rambha.",sameer kuchh likh raha tha.

"sir,ye sari files is computer me stored hai,inki koi back-up nahi rakhni hai?"

"vo main kar lunga.",sameer ne likhna band kiya,"9.30 baj gaye,ab chalna chahiye."usne apne desk ka computer band kiya.cabin me lage sofe pe baithi rambha ne bhi laptop off kar use bag me dal diya.vo laptop bhi sameer ka tha.sameer coat pehan raha tha to rambha ne uski madad ki & fir uska bag use thamaya & dono cabin se nikal gaye.

"sir,abhi tak tender nikla bhi nahi hai,ye bhi nahi malum ki kab niklega fir bhi aap itni taiyyari kar rahe hain?"

"rambha,duniya ko nahi pata magar dad & mujhe pata hai ki aaj se thik 5 mahine baad tender niklega."

"ok,sir lekin aap materials ka jo cost abhi soch rahe hain,us waqt vo ghat ya badh gaya to?"

"vo main tumhe kal bataunga,main dono taraf ka margin leke chal raha hu.",dono neeche aa gaye the & sameer ka driver uski car ka darwaza khole khada tha,"..ab ye sab chinta chhodo & ghar jao.",uski car ke peechhe khadi 1 car ka darwaza usne khud khola & rambha ko baithne ka ishara kiya.jab se usne der tak rukna shuru kiya tha,sameer ne uske ghar jane ke liye office ki 1 car ka intezam kar diya tha,"..vaise mujhe tumhare mummy-papa se mafi mangni padegi tumhe roz itni der karwa raha hu."

"vo naraz nahi hote hain,sir.",rambha feeke dhang se muskurate hue car ki pichhli seat pe baith gayi.

"achha!aisa kamal kaise ho gaya?..tumhari mummy to zarur chinta karti hongi?"

"ji nahi sir.koi chinta nahi krta kyuki vo is duniya me hain hi nahi."

"kya?!i'm sorry,rambha.mujhe pata nahi tha nahi..-"

"it's ok,sir!mujhe bura nahi laga."

"fir bhi main mafi chahta hu,rambha.",usne car ki khidki me se badhake uske kandhe pe hath rakha to vo muskura di,"ok..good night!"

"good night,sir!",rambah sameer ki sharafat ki mureed ho gayi thi.dono baap-bete use bade bhale insan lage the & Trust group me kaam karna use bahut bha raha tha.vijayant ke khayal se use fir se beach vali ghatna yaad aa gayi & 1 baar fir uski chut me kasak uthi.aaj usne pant suit pehna tha.usne dayi tang utha bayi pe chadhayi & apni jangho me chut ko daba diya lekin vo janti thi ki jab tak ghar jake vo apni ungli ka sahara nahi legi ya fir agar Vinod ko fursat hui & uska lund uski chut me utra, to hi uski kasak shant hogi.

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"hello,mrs.kothari!",apne mulazimo ko kuchh hidayat deti soniya chaunki,uske samne vijayant khada tha & use sar se panv tak dekh raha tha.usne 1 safed kamiz & cream color ki patlun pehni thi.

"hi!",uff..vo aankhen!..kyu aaya tho vo yaha?..kitni mushkil se usne honeymoon pe use bhulake khud ko Brij ke pyar me duba diya tha!

vijayant ne hath badha uska hath thama & uski nigaho me jhankte hue hath ko chum liya.soniya ke jism me bijli daud gayi & usne hath khinch liya magar dil ka koi kona uske hath ko vijayant ki pakad me hi rehne dena chahta tha,"aap aaj bahut khubsurat lag rahi hain."

"thanx!",usne uski taraf pith kar li & paas ki mez pe padhi 1 file utha party ke schedule ko dekhne ka natak karne lagi.

"soniya ji.."

"ji.",usne bina ghume jawab diya..ye jata kyu nahi?..uska dil bahut zoro se dhadak raha tha & use uska karan samajh nahi aa raha tha.

"main aapko party join karne ki dawat dene aaya tha.hum vaha jashn manayen & aap yu yaha akeli baithi rahen,ye mujhe kuchh thik nahi laga."

"thanx par main nahi aa sakti.aap enjoy kijiye.",vo ghum ke halke se muskurayi.

"soniya ji..",vijayant uske bilkul karib aa gaya & soniya ki dhadkane aur tez ho gayi,"..aapke inkar ki vajah kahi aapke pati & mere beech ki so-called dushmani to nahi?"

"aap galat samajh rahe hain,mr.mehra..",soniya ne chehre pe dil ki bekali ko aane nahi diya,"..ye mere peshe ke usoolo ke khilaf hai.apni organize ki hui party me main khud nahi ja sakti."

"main kadr karta hu aapki baat ki.",vijayant thoda sa jhuka & apne hath me pakde 2 wine glasses me se 1 soniya ki or badhaya,"..to thik hai aap yehi 1 jaam kabul kijiye.is tarah aapka usool bhi barkarar rahega & mujhe kuchh der ke liye aapka sath bhi mil jayega.",ab vijayant ki guzarish thukrana soniya ko badtamizi laga & usne glass le liya.

"mrs.kothari,aapko lag raha hoga ki main kyu aapke karib aane ki koshish kar raha hu?",soniya chaunk gayi & drink girate-2 bachi.

"ji,aapko kaise malum?"

"aapki ye khubsurat aankhe aapse bahut dhokha karti hain.aapko khabar bhi nahi hoti & ye aapke dil ka haal hume bayan kar deti hain.",na chahte hue bhi soniya ko hansi aa gayi.vijayant bhi hansa,"..soniya ji,aap mujhe achhi lagi & bas aapse dosti karne ko ji chaha.ab kothari sahab & main to dost banane se rahe to maine socha ki aap hi ki dosti se kaam chala lu.",uski natkiya dhang se kahi baat pe use fir se hansi aa gayi.

"lekin mere pati ko ye baat shayad pasand na aaye?"

"bilkul,main samajh sakta hu.unki jagah main hota to meri bhi bhavnaye kuchh vaisi hi hoti balki unki jagah main hota to mujhe to aapka kisi bhi mard se baat ya dosti nagawar guzarti."

"achha!kyu?",soniya ki vo anjani ghabrahat ab door ho rahi thi & vijayant se baat karna use achha lag raha tha.vo flirt karne ki koshish nahi kar raha tha lekin uski tarif ka mauka bhi nahi chhod raha tha.

"soniya ji,aapke jaisi haseen biwi ho to koi bhi mard use kisi gair mard se baate karte dekh jalan se mar jayega!",dono fir se hanse.

"agar aapko aitraz hai to aainda main kabhi aapko yu pareshan nahi karunga."

"please,mr.mehra meri baat ka bura mat maniye lekin aap meri position samajhne ki koshish kijiye."

"zaroor,soniya ji.aap befikr rahen main kabhi bhi aapke pati ki maujoodgi me aapse baat nahi karunga lekin unki gair maujoodgi me aapse baat karne ka koi mauka chhodunga bhi nahi!"

"ok,mr.mehra.",soniya fir hansi.

"ok to abse main vijayant hu mr.mehra nahi.",vijayant ne hath aage badhaya.soniya ka dil fir se dhadak utha.uske garm hath ke ehsas ke aabhas se fir vohi ghabrahat use gherne lagi.uska dil use hath badhane se rok raha tha lekin dil ke 1 kone se aati aavaz joki use hath thamne ko keh rahi thi,ab tez ho rahi thi.soniya ne usi kone ki aavaz suni & vijayant ka hath tham liya.

"ok,vijayant.",uske jism me fir se bijli daud gayi thi & dil me ghabrahat ke sath bahut romanch hone laga tha.

"ok.",vijayant muskuraya & vapas party me chala gaya.

Dressing table ke samne baithi Soniya baalo me brush fira rahi thi & Vijayant Mehra se hui mulakat ke bare me soch rahi thi.uski baato ko yaad karte hi uske hotho pe muskurahat khelne lagi.

"kya soch rahi ho?"

"hun..!",Brij Kothari kab uske peechhe aa khada hua tha use pata hi nahi chala tha,"..k-kuchh nahi.",vo brush rakh khadi hui to brij ne use baaho me bhar liya,"..aaj kitni der se laute tum..uummmm..!",brij ka uski gardan chumna use bahut bhala lag raha tha.

"haan,aaj bahut der ho gayi.tumhari party kaisi rahi?",vo dhire-2 uski nighty upar uthate hue uske cleavage ko chum raha tha.

"thik se nipat gayi....ufffff..zara sabr nahi tumhe to!",brij ka daya hath uski panty me ghus uski gand ko daba raha tha.

"kya zarurat hai soniya darling tumhe ab ye kaam karne ki?",soniya uski shirt ke button khol uske seene ko chum rahi thi & vo uski nighty ke straps uske kandho se sarka raha tha,"..bekar pareshan hoti ho."

"janu,apne shauk ke liye karti hu ye kaam.nahi to boriyat se mar hi jaoongi..oowwww..!",brij ne uske seene pe halke se kata & uski jangho ko pakad use uthaya to soniya ne bhi apni janghe uski kamar pe & baahe gardan pe lapet di & uski god me bistar ki or chali gayi.

"mare tumhare dushman!",brij use liye-diye bistar pe let gaya & dono pati-patni 1 dusre se guttham-guthha 1 dusre ko shiddat se chumne lage.dono kamar hilate hue apne nazuk ango ko aapas me ragad rahe the.brij ne soniya ki nighty ko neeche kar uski gori chhatiyan nangi kar di thi & unhe chus raha tha.soniya bhi aahe bharte hue uski shirt upar kar uski pith sehlate hue apni kamar uchka rahi thi.

"jaan,aaj meri mausi ka fone aaya tha,bata rahi thi ki mummy ki tabiyat kuchh thik nahi chal rahi aajkal.",brij uth ke apne kapde nikal raha tha to soniya bhi uth baithi thi.brij ne nage ho uski nighty ko thama to usne hath upar kar diye taki uske pati ko use nanag karne me zyada pareshani na ho,"..main soch rahi thi ki Bangalore jake unhe dekh aaoon.",brij ne use baaho me bhara to dono 1 baar fir pehle ki tarah let gaye & chumne lage .

"vo tumhare maa-baap hain..",brij apne daye hath ko uski panty me ghusa uski chut ragad raha tha,"..unse milne,na milne ka faisla bhi tumhara hi hona chahiye magar soniya,mujhe tumhari tauheen bardasht nahi fir chahe tauheen karne vale tumhare maa-baap hi kyu na hon.",soniya ki palke masti me mund gayi thi & vo ab josh me kamar uchka rahi thi.

"ohh..brij meri jaan..",pati ke liye uske dil me bepanah mohabbat umad aayi & usne uske baal pakad use neeche khincha & use deewangi ke sath chumne lagi.brij ne uske jhadte hi uski panty utari & soniya ne tange failate hue apne pati ko upar aa apni chudai karne ka nyota diya,"..ab vo mere sath jo saluk karen,brij hain to vo mere mummy-papa na..oouuiiiiiiiiiii.....uffffff..kitna bada hai tumhara..abhi tak dard hota hai.....haiiiiiiiiii....!",brij ne lund pura ka pura andar daal diya tha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--16

गतान्क से आगे.

"कब जाना चाहती हो?",अपनी प्यारी बीवी के उपर लेट ब्रिज ने उसके रसीले होंठो को चूमते हुए धक्के लगाना शुरू कर दिया.सोनिया ने अपनी टाँगे उसके घुटनो के पिच्छले हिस्से के उपर फँसाई & उनके सहारे उचकते हुए अपने शदीद जोश की गवाही देने लगी.

"कल..उउन्न्ह..!",उसने ब्रिज की पीठ को खरोंचा & उसके कान पे काटा.

"& लौट के कब आओगी?",ब्रिज ने उसकी छातियो पे सजे कड़े निपल्स को जीभ से छेड़ा तो वो तड़प उठी.

"पता नही..ऊन्नह..उनका रुख़ देखूँगी.....आहह..!",सोनिया झाड़ गयी मगर ब्रिज का काम अभी पूरा नही हुआ था.वो वैसे ही धक्के लगाता रहा.सोनिया मस्ती मे उड़े जा रही थी.उसी वक़्त उसे विजयंत का ख़याल आया.अब इंसान का अपने मन पे तो काबू है नही & उसी वक़्त उसके मन मे भी ख़याल आया कि विजयंत नंगा कैसा दिखता होगा & उसके नीचे दब के उस से चुदवाने मे भी क्या ऐसा ही मज़ा आएगा.सोनिया ने खुद को मन ही मन झिड़का,पति के अलावा वो किसी & मर्द के बारे मे ऐसा सोच भी कैसे सकती थी लेकिन उसके दिल का 1 कोना तो जैसे ऐसी गुस्ताखियों पे आमादा था!

ब्रिज ने अपनी ज़ुबान उसकी ज़ुबान से लड़ाई तो उसने फिर से कल्पना की कि विजयंत की ज़ुबान का स्वाद कैसा होगा!सोनिया ने किस तोड़ी & चेहरा बाई तरफ कर लिया.ब्रिज इसे अपनी बीवी के जोश मे होने की निशानी समझ रहा था & खुशी मे चूर हो उसके गाल पे जीभ फिरा रहा था.जब उसके दिल के उस कोने ये सोचना शुरू किया कि इस वक़्त ब्रिज नही विजयंत उसकी चुदाई कर रहा है तब सोनिया 1 अजीब रोमांच,मज़े के साथ-2 चिढ़ से भर उठी.उसे खुद पे गुस्सा आ रहा था लेकिन इस ख़याल से उसके अंदर 1 नया जोश भर गया था & वो पागलो की तरह कमर उचका रही थी.

ब्रिज उसकी मस्तानी हर्कतो से खुशी से पागल हो गया था & उसका जोश भी दुगुना हो गया था.सोनिया उसकी गंद पे नाख़ून धंसाए मस्ती मे आहे भरती हुई अपना सर पीछे कर अपनी कमर उचकाते हुए बदन को मोड़ रही थी.उसके जिस्म मे चुदाई & विजयंत के ख़याल ने अजीब सा सुरूर पैदा कर दिया था & अब वो बिल्कुल बेक़ाबू हो गयी थी.

विजयंत का 1 धक्का सीधा उसकी कोख पे पड़ा & वो हिल गयी,उसकी चूत ने हथियार डाल दिए & झाड़ते हुए रस बहाने लगी.ब्रिज के लंड ने भी उसी वक़्त अपनी पिचकारी छ्चोड़ी & चूत को अपने गाढ़े वीर्य से भरने लगा.

सोनिया मुँह फेरे आँखे बंद किए पड़ी थी.उसके दिल मे उथल-पुथल मची थी.उसे लग रहा था कि उसने अभी-2 अपने पति से बेवफ़ाई की है लेकिन उसे आज जैसा मज़ा पहले नही आया था & उसके मन का वो कोना हंस रहा था.उसकी बंद पॅल्को के कोने से आँसुओ की 2 बूंदे निकल उसके गुलाबी गालो पे ढालक पड़ी तो ब्रिज ने उन्हे चूम लिया.औरत कभी-2 जब जिस्मानी मस्ती की इंतेहा बर्दाश्त नही कर पाती तो उसकी खुशी कुच्छ इसी तरह उसकी आँखो के रास्ते छलक पड़ती है.ब्रिज ने भी यही समझा.

"आज तो बड़े रंग मे थी तुम!",उसने बीवी का माथा चूमा तो सोनिया ने उसके चेहरे को थाम लिया & उसे पागलो की तरह चूमने लगी.ब्रिज खुश था कि उसकी बीवी उसे इतना चाहती है जबकि सोनिया तो ऐसी हरकत से खुद को ये भरोसा दिला रही थी कि वो केवल ब्रिज से प्यार करती है और किसी से नही.

तभी ब्रिज का मोबाइल बजा.सोनिया ने हाथ बढ़ा के उसे उठाया,सोनम का फोन था,"लो तुम्हारी रानी का फोन है.",उसने उसे फोन दिया & उसे हटा उसकी ओर पीठ कर करवट से लेट गयी.मस्ती का सुरूर उतरने पे उसे खुद पे बहुत गुस्सा आ रहा था..अच्छा था कि कल वो बॅंगलुर चली जाएगी..जगह बदलेगी तो ये परेशानी भी ख़त्म हो जाएगी..तभी ब्रिज ने फोन पे बात करते हुए उसे पीछे से दाई बाँह मे भर लिया.

"मैने तुम्हे अभी फोन करने से मना किया था ना.",ब्रिज सोनिया के पेट को सहला रहा था.

"हां,पता है मगर बात ही कुच्छ ऐसी है.वैसे फोन उठाने मे देर हुई..बीवी की चुदाई कर रहे थे क्या?"

"हां मगर बात क्या है?",ब्रिज अभी मज़ाक के मूड मे नही था.

"मानपुर वाली ज़मीन जिसपे आपकी भी नज़र है,उसके टेंडर के सिलसिले मे मंत्री जी से भी बात हुई है."

"अच्छा."

"मैने बाप-बेटे को लंच मे बात करने सुना था,मुझे बाहर भेज दिया गया था मगर दरवाज़ा बंद करते-2 मैने सुन ही लिया कि मंत्री को टेंडर पास करने के 2 करोड़ मिलेंगे & शायदा उस ज़मीन से होने वाले फ़ायदे का कुच्छ हिस्सा भी."

"हूँ."

"उस ज़मीन पे फिल्म सिटी बनाना चाहते हैं ये लोग."

"ओके.",ब्रिज का हाथ अभी भी सोनिया के पेट पे घूम रहा था.

"बस यही बात थी & अब सबसे ज़रूरी बात."

"वो क्या?"

"अपनी बीवी को तो रोज़ चोद्ते हैनमेरे बारे मे भी कुच्छ सोचा है!जब से यहा आई हू किसी साध्वी का जीवन जी रही हू.पागल हो गयी हू मैं!प्लीज़,1 दिन तो मिल लीजिए & मेरी प्यासी चूत का भी उद्धार कीजिए!",ब्रिज ने प्रेमिका की बात पे ठहाका लगाया.

"तुम्हे तो कहा था कि अपने बॉस से ये काम करवाओ."

"हां,आपने कहा था कि वो ज़रूर मुझपे हाथ डालेगा मगर वो तो मेरी ओर देखता तक नही!"

"तो उसे अपनी ओर देखने पे मजबूर करो.ठीक है?"

"ठीक है.",ब्रिज ने मोबाइल किनारे फेंका & सोनिया का चेहरा अपनी ओर घुमा उसके गुलाबी होंठो से होठ सटा दिए.

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रंभा ने महसूस किया था कि उसका बॉस इधर उसे कुच्छ ज़्यादा ही देखता था.काई बार उसने उसे खुद को देखते हुए पाया था लेकिन जब नज़रे मिलती तो वो सकपका के नज़रे फेरता नही था बस अपनी वही शराफ़त भरी मुस्कान फेंक देता था.उस रोज़ सवेरे दोनो बाप-बेटे उसे लिफ्ट मे मिल गये.विजयंत को देख उसका दिल धड़क उठा क्यूकी उसे बीच वाली बात याद आ गयी थी.

विजयंत ने भी रंभा को देखा तो उसे चोदने के ख़याल से पागल हो उठा.रंभा ने घुटनो से कुच्छ उपर जाँघो का थोडा हिस्सा दिखाती काली स्कर्ट & सफेद शर्ट पे कोट पहना था & पैरो मे हाइ हील वाले जूते थे.विजयंत समीर के साथ लिफ्टे मे उसके पीछे खड़ा था & उसकी निगाह बार-2 उसकी गोरी टाँगो & उभरी गंद पे चली जाती थी.

वो 1 मसरूफ़ इंसान था & इधर जो भी खाली वक़्त मिलता था वो उसे सोनिया को फँसाने मे लगा रहा था.रंभा को अपने बिस्तर तक लाने का वक़्त उसे मिल ही नही रहा था.उसने लिफ्ट से निकलते हुए मन ही मन फ़ैसला किया कि वो जल्द ही इस बारे मे कुच्छ करेगा.

इधर समीर अपने मोबाइल पे बात करते हुए अपने कॅबिन मे घुसा & उसे कुच्छ याद आया तो बिना देखे पीछे मुड़ा & पीछे से आ रही रंभा से टकरा गया.हाइ हील्स की वजह से वो लड़खड़ा गयी & गिरने लगी मगर खाली हाथ आगे बढ़ा समीर ने उसकी कमर थाम ली & उसे खींचा.ऐसा करने से रंभा की मोटी छातिया समीर के सीने से दब गयी.उस लम्हे रंभा ने पहली बार समीर की आँखो मे वही मर्दाना प्यास देखी जोकि किसी लड़की के हुस्न को पाने की ख्वाहिश से पैदा होती है.1 पल बाद ही समीर ने उसकी पतली कमर से अपना हाथ हटा लिया मगर उतनी सी देर मे ही रंभा का हाल बुरा हो गया था.

दोनो 1 दूसरे से नज़रे चुराते काम मे जुट गये मगर लंच तक दोनो पहले की तरह ही बाते करने लगे थे लेकिन लंच के फ़ौरन बाद फिर कुच्छ हुआ जिसने दोनो के जिस्मो को करीब लाया & 1 बार फिर दोनो नज़रे चुराने लगे.समीर के पास 1 फाउंटन पेन था जिसे वो केवल बहुत ज़रूरी काग़ज़ो पे दस्तख़त करने के लिए रखता था.उसकी स्याही ख़त्म हो गयी तो वो खुद ही भरने लगा.तभी रंभा वाहा आई & उसके हाथो से स्याही की बॉटल & पेन ले लिया.

समीर के कॅबिन मे रखे सोफे पे बैठ के उसने स्याही भरने के लिए ज्यो ही बॉटल की कॅप खोली स्याही छलक उसकी जाँघो पे गिर गयी,"अरे ये क्या किया!",समीर फ़ौरन अपना रुमाल लेके उसके पास आया & उसके सामने बैठ उसकी जाँघो से स्याही साफ करने लगा.स्याही बह के उसकी जाँघो के अन्द्रुनि हिस्से को भी गीला कर रही थी & जब समीर का हाथ वाहा गया तो रंभा सिहर उठी.समीर का इरादा शुरू मे तो बस अपनी सेक्रेटरी की मदद करने के था मगर अब उसकी नर्म जाँघो के एहसास से उसके मर्दाना जज़्बात जाग उठे थे.उसने पास रखे ग्लास के पानी मे रुमाल का दूसरा कोना भिगोया & स्याही के दाग को रगड़ा-2 के सॉफ करने लगा.रंभा का अब बुरा हाल था,गाल शर्म से & सुर्ख हो गये थे & जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.समीर ने पोंच्छने के बहाने अपने हाथ को उसकी स्कर्ट के अंदर बस 1 इंच तक घुसाया मगर उसकी ये हरकत दोनो जवान दिलो मे आग भड़काने को काफ़ी थी.दोनो ने उस पल अपने उपर कैसे काबू रखा ये तो वही जानते थे.उसकी जाँघो को साफ करने के बाद समीर उठा & अपने डेस्क पे चला गया.

"थॅंक यू.",रंभा की कोमल आवाज़ उसके कानो मे पड़ी तो उसने बस सर हिला दिया.रंभा बाथरूम मे गयी & जल्दी-2 अपना चेहरा धोने लगी.अपने बॉस की हरकत से वो मस्त हो गयी थी लेकिन बस पानी उसके जिस्म मे लगी आग को थोड़े ही बुझा सकता था.उसने टाय्लेट सीट का कवर गिराया & जल्दी से अपनी स्कर्ट & पॅंटी उतार उसपे बैठ गयी & अपनी उंगली से खुद को शांत करने लगी.उसके दिल मे जज़्बातो का अजब घालमेल चल रहा था.अपनी चूत को उंगली से रगड़ती वो अभी अपनी जाँघो पे हाथ चलाते अपने बॉस का तस्साउर कर रही थी मगर ना जाने कहा से उसके जिस्म से खेलते मर्द की शक्ल बीच-2 मे उसके बॉस के बाप मे तब्दील हो जाती थी.2-3 मिनिट तक लगातार उंगली करने के बाद उसकी चूत शांत हुई तो वो बाहर आई & अपने काम मे लग गयी.उसने तय कर लिया की आज जो भी हो विनोद को रात उसी के साथ गुज़ारनी होगी.इतनी मस्ती केवल उंगली से नही संभाली जा सकती थी.

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"रंभा,मैं चाहता हू कि आज डिन्नर तुम मेरे साथ करो.तुम्हारा कोई पहले से बना प्रोग्राम तो नही?",शाम को अपने लॅपटॉप पे टाइप करते हुए समीर ने रंभा से पुछा.दोनो इस वक़्त हर शाम की तरह मानपुर वाले टेंडर की तैय्यारि मे लगे थे.

"नही,सर लेकिन.."

"लेकिन क्या?"

"सर,ग़लत मत समझिएगा लेकिन अगर ऑफीस मे किसी को पता चला तो सब बेकार मे बातें बनाएँगे &..-"

"-..वो सब छ्चोड़ो.अगर वो बातें ना हो तो तुम्हे मेरे साथ खाना खाने मे कोई ऐतराज़ है?",उसने लॅपटॉप से नज़रे नही हटाई थी.

"नही."

"आज तुम्हारा कोई & प्रोग्राम है?"

"नही."

"तो ठीक है.ये काम ख़त्म कर मेरे साथ चलो."

"ओके.",रंभा दिल ही दिल मे खुश तो बहुत थी कि बॉस उसे डिन्नर पे ले जा रहा है.इतनी जल्दी वो उसकी चहेती बन जाएगी ये उसने सपने मे भी नही सोचा था लेकिन उसे 1 बात का डर भी था.वो इन बातो के चक्कर मे अपना करियर नही बर्बाद कर सकती थी.हां,अगर इस सब से उसकी तरक्की का रास्ता आसान होता था तब ठीक था.उसे कोई फ़िक्र नही थी कि कौन उसके बारे मे क्या बोलता है.वैसे भी इस बात का डर तो तो उसने समीर पे ज़ाहिर किया था ताकि वो ये ना सोचे कि वो असानी से जाल मे फँसने वाली चिड़िया है.

ट्रस्ट ग्रूप ने डेवाले मे 1 नये तरह का शॉपिंग कॉंप्लेक्स बनाया था.ये कॉंप्लेक्स 1 इमारत ना होके 1 खुले इलाक़े मे इस तरह बना था कि लोगो को 1 बाज़ार मे घूमने का आभास होता मगर यहा आम बाज़ार की तरह ट्रॅफिक की चिल-पोन नही थी & ना ही कोई गंदगी.इस कॉंप्लेक्स के 1 किनारे 1 आर्टिफिशियल झील बनी थी.ये झील देखने मे तो बड़ी गहरी थी मगर असल मे उसकी गहराई कुच्छ खास नही थी.उसके फर्श पे ऐसी टाइल्स लगाई गयी थी कि पानी भरने के बाद वो बड़ी गहरी दिखती थी.उस झील की पूरी गोलाई मे रेल्स लगी थी जिनपे नावे चलती थी.

ये नावे आगे,पीछे & दोनो बगलो से बिल्कुल ढँकी हुई थी & बस सामने से खुली थी.विजयंत मेहरा अच्छी तरह से जानता था कि ऐसी जगहो पे सबसे ज़्यादा जवान लोग आते थे.अब जहा जवान होंगे वाहा रोमांस भी होगा & रोमांस होगा तो तन्हाई की हसरत भी होगी.ऐसी नाओ का आइडिया उसी का था.ये नावें 1 कंट्रोल रूम से ऑपरेट होती थी & फिर उन्हे खेने वाले की भी कोई ज़रूरत नही थी.

ये कॉंप्लेक्स बस 2 दिनो बाद खुलने वाला था & यही समीर रंभा को ले आया था.झील के किनारे लगी रेलिंग्स के इस तरफ कॉंप्लेक्स मे उसने खुले आसमान के नीचे 1 मेज़ & 2 कुर्सियाँ लगवाई & उनके बैठते ही 1 वेटर उन्हे खाना परोसने लगा.रंभा समझ गयी थी कि इस खास इंतेज़ाम के पीछे उसके बॉस की उसके करीब आने की हसरत च्छूपी है.खाते हुए समीर ने उस से उसके परिवार के बारे मे & अब तक की ज़िंदगी के बारे मे पुछा,उसने अपने बारे मे भी उसे काफ़ी बताया.

बात-चीत के दौरान उसने घुमा-फिरा के रंभा के किसी बाय्फ्रेंड के होने की बात भी पुछि मगर होशियार रंभा ने ऐसे जताया कि उसे सवाल समझ ही ना आया हो.समीर ने भी सवाल दोहराया नही बस मुस्कुराते हुए खाना ख़ाता रहा.

"थॅंक्स,सर.खाना बहुत अच्छा था."

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क्रमशः.......

JAAL paart--16

gataank se aage.

"kab jana chahti ho?",apni pyari biwi ke upar let brij ne uske rasile hontho ko chumte hue dhakke lagana shuru kar diya.soniya ne apni tange uske ghutno ke pichhle hisse ke upar fansayi & unke sahar uchakte hue apne shadid josh ki gawahi dene lagi.

"kal..uunnhhhhh..!",usne brij ki pith ko kharoncha & uske kaan pe kata.

"& lautogi kab?",brij ne uski chhatiyo pe saje kade nipples ko jibh se chheda to vo tadap uthi.

"pata nahi..oonnhhhh..unka rukh dekhungi.....aahhhhhhhhhhhhhh..!",soniya jhad gayi magar brij ka kaam abhi pura nahi hua tha.vo vaise hi dhakke lagata raha.soniya masti me ude ja rahi thi.usi waqt use vijayant ka khayal aaya.ab insan ka apne man pe to kabu hai nahi & usi waqt uske man me bhi khayal aaya ki vijayant nanga kaisa dikhta hoga & uske neeche dab ke us se chudwane me bhi kya aisa hi maza aayega.soniya ne khud ko man hi man jhidka,pati ke alawa vo kisi & mard ke bare me aisa soch bhi kaise sakti thi lekin uske dil ka 1 kona to jaise aisi gustakhiyon pe aamada tha!

brij ne apni zuban uski zuban se ladai to usne fir se kalpana ki ki vijayant ki zuban ka swad kaisa hoga!soniya ne kiss todi & chehra bayi taraf kar liya.brij ise apni biwi ke josh me hone ki nishani samajh raha tha & khushi me chur ho uske gaal pe jibh fira raha tha.jab uske dil ke us kone ye sochna shuru kiya ki is waqt brij nahi vijayant uski chudai kar raha hai tab soniya 1 ajib romanch,maze ke sath-2 chidh se bhar uthi.use khud pe gussa aa raha tha lekin is khayal se uske andar 1 naya josh bhar gaya tha & vo paglo ki tarah kamar uchka rahi thi.

brij uski mastani harkato se khushi se pagal ho gaya tha & uska josh bhi duguna ho gaya tha.soniya uski gand pe nakhun dhansaye masti me aahe bharti hui apna sar peechhe kar apni kamar uchkate hue badan ko mod rahi thi.uske jism me chudai & vijayant ke khayal ne ajib sa surur paida kar diya tha & ab vo bilkul beqabu ho gayi thi.

vijayant ka 1 dhakka seedha uski kokh pe pada & vo hil gayi,uski chut ne hathyar daal diye & jhadte hue ras bahane lagi.brij ke lund ne bhi usi waqt apni pichkari chhodi & chut ko apne gadhe virya se bharne laga.

soniya munh fere aankhe band kiye padi thi.uske dil me uthal-puthal machi thi.use lag raha tha ki usne abhi-2 apne pati se bewafai ki hai lekin use aaj jaisa maza pehle nahi aaya tha & uske man ka vo kona hans raha tha.uski band palko ke kone se aansuo ki 2 boonde nikal uske gulabi galo pe dhalak padi to brij ne unhe chum liya.aurat kabhi-2 jab jismani masti ki inteha bardasht nahi kar pati ti uski khushi kuchh isi tarah uski aankho ke raste chhalak padti hai.brij ne bhi yehi samjha.

"aaj to bade rang me thi tum!",usne biwi ka matha chuma to soniya ne uske chehre ko tham liya & use paglo ki tarah chumne lagi.brij khush tha ki uski biwi use itna chahti hai jabki soniya to aisi harkat se akhud ko ye bharosa dila rahi thi ki vo kewal brij se pyar karti hai aur kisi se nahi.

tabhi brij ka mobile baja.soniya ne hath badha ke use uthaya,Sonam ka fone tha,"lo tumhari rani ka fone hai.",usne use fone diya & use hata uski or pith kar karwat se let gayi.masti ka surur utarne pe use khud pe bahut gussa aa raha tha..achha tha ki kal vo bangalore chali jayegi..jagah badlegi to ye pareshani bhi khatm ho jayegi..tabhi brij ne fone pe baat karte hue use peechhe se dayi banh me bhar liya.

"maine tumhe abhi fone karne se mana kiya tha na.",brij soniya ke pet ko sehla raha tha.

"haan,pata hai magar baat hi kuchh aisi hai.vaise fone uthane me der hui..biwi ki chudai kar rahe the kya?"

"haan magar baat kya hai?",brij abhi mazak ke mood me nahi tha.

"Manpur vali zamin jispe aapki bhi nazar hai,uske tender ke silsile me mantri ji se bhi baat hui hai."

"achha."

"maine baap-bete ko lunch me baat karne suna tha,mujhe bahar bhej diya gaya tha magar darwaza band karte-2 maine sun hi liya ki mantri ko tender paas karne ke 2 crore milenge & shayda us zamin se hone wale fayde ka kuchh hissa bhi."

"hun."

"us zamin pe film city banana chahte hain ye log."

"ok.",brij ka hath abhi bhi soniya ke pet pe ghum raha tha.

"bas yehi baat thi & ab sabse zaruri baat."

"vo kya?"

"apni biwi ko to roz chodte hainmere bare me bhi kuchh socha hai!jab se yaha aayi hu kisi sadhwi ka jeewan ji rahi hu.pagal ho gayi hu main!please,1 din to mil lijiye & meri pyasi chut ka bhi uddhar kijiye!",brij ne premika ki baat pe thahaka lagaya.

"tumhe to kaha tha ki apne boss se ye kaam karwao."

"haan,aapne kaha tha ki vo zaroor mujhpe hath dalega magar vo to meri or dekhta tak nahi!"

"to use apni or dekhne pe majbur karo.thik hai?"

"thik hai.",brij ne mobile kinare fenka & soniya ka chehra apni or ghuma uske gulabi hotho se hoth sata diye.

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Rambha ne mehsus kiya tha ki uska boss idhar use kuchh zyada hi dekhta tha.kayi baar usne use khud ko dekhte hue paya tha lekin jab nazre milti to vo sakpaka ke nazre ferta nahi tha bas apni vahi sharafat bhari muskan fenk deta tha.us roz savere dono baap-bete use lift me mil gaye.vijayant ko dekh uska dil dhadak utha kyuki use beach vali baat yaad aa gayi thi.

vijayant ne bhi rambha ko dekha to use chodne ke khayal se pagal ho utha.rambha ne ghutno se kuchh upar jangho ka thoda hissa dikhati kali skirt & safed shirt pe coat pehna tha & pairo me high heel vale jute the.vijayant Sameer ke sath lifte me uske peechhe kahda tha & uski nigah baar-2 uski gori tango & ubhri gand pe chali jati thi.

vo 1 masruf insan tha & idhar jo bhi khali waqt milta tha vo use soniya ko phansane me laga raha tha.rambha ko apne bistar tak lane ka waqt use mil hi nahi raha tha.usne lift se nikalte hue man hi man faisla kiya ki vo jald hi is bare me kuchh karega.

idhar sameer apne mobile pe baat karte hue apne cabin me ghusa & use kuchh yaad aaya to bina dekhe peechhe muda & peechhe se aa rahi rambha se takra gaya.high heels ki vajah se vo ladkhada gayi & girne lagi magar khalki hath aage badha sameer ne uski kamar tham li & use khincha.aisa karne se rambha ki moti chhatiya sameer ke seene se dab gayi.us lamhe rambha ne pehli baar sameer ki aankho me vahi mardana pyas dekhi joki kisi ladki ke husn ko paane ki khwahish se paida hoti hai.1 pal baad hi sameer ne uski patli kamar se apna hath hata liya magar utni si der me hi rambha ka haal bura ho gaya tha.

dono 1 dusre se nazre churate kaam me jut gaye magar lunch tak dono pehle ki tarah hi baate karne lage the lekin lunch ke fauran baad fir kuchh hua jisne dono ke jismo ko karib laya & 1 baar fir dono nazre churane lage.sameer ke paas 1 fountain pen tha jise vo keval bahut zaruri kagazo pe dastkhat karne ke liye rakhta tha.uski syahi khatm ho gayi to vo khud hi bharne laga.tabhi rambha vaha aayi & uske hatho se syahi ki bottle & pen le liya.

sameer ke cabin me rakhe sofe pe baith ke usne syahi bharne ke liye jyo hi bottle ki cap kholi syahi chhalak uski jangho pe gir gayi,"are ye kya kiya!",sameer fauran apna rumal leke uske paas aaya & uske samne baith uski jangho se syahi saaf karne laga.syahi beh ke uski jangho ke andruni hisse ko bhi gila kar rahi thi & jab sameer ka hath vaha gaya to rambha sihar uthi.sameer ka irada shuru me to bas apni secretary ki madad karne ke tha magar ab uski narm jangho ke ehsas se uske mardana jazbaat jaag uthe the.usne paas rakhe glass ke pani me rumal ka dusra kona bhigoya & syahi ke daag ko ragada-2 ke saaf karne laga.rambha ka ab bura haal tha,gaal sharm se & surkh ho gaye the & jism me bijli daud rahi thi.sameer ne ponchhne ke bahane apne hath ko uski skirt ke andar bas 1 inch tak ghusaya magar uski yen harkat dono jawan dilo me aag bhadkane ko kafi thi.dono ne us pal apne upar kaise kabu rakha ye to vahi jante the.uski jangho ko saaf karne ke baad sameer utha & apne desk pe chala gaya.

"thank you.",rambha ki komal aavaz uske kano me padi to usne bas sar hila diya.rambha bathroom me gayi & jaldi-2 apna chehra dhone lagi.apne boss ki harkat se vo mast ho gayi thi lekin bas pani uske jism me lagi aag ko thode hi bujha sakta tha.usne toilet seat ka cover giraya & jaldi se apni skirt & panty utar uspe baith gayi & apni ungli se khud ko shant karne lagi.uske dil me jazbato ka ajab ghalmel chal raha tha.apni chut ko ungli se ragadti vo abhi apni jangho pe hath chalate apne boss ka tassavur kar rahi thi magar na jane kaha se uske jism se khelte mard ki shakl beech-2 me uske boss ke baap me tabdil ho jati thi.2-3 minute tak lagatar ungli karne ke baad uski chut shant hui to vo bahar aayi & apne kaam me lag gayi.usne tay kar liya ki aaj jo bhi ho Vinod ko raat usi ke sath guzarni hogi.itni masti keval ungli se nahi sambhali ja sakti thi.

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"rambha,main chahta hu ki aaj dinner tum mere sath karo.tumhara koi pehle se bana program to nahi?",sham ko apne laptop pe type karte hue sameer ne rambha se puchha.dono is waqt har sham ki tarah manpur vale tender ki taiyyari me lage the.

"nahi,sir lekin.."

"lekin kya?"

"sir,galat mat samajhiyega lekin agar office me kisi ko pata chala to sab bekar me baaten banayenge &..-"

"-..vo sab chhodo.agar vo baaten na ho to tumhe mere sath khana khane me koi aitraz hai?",usne laptop se nazre nahi hatayi thi.

"nahi."

"aaj tumhara koi & program hai?"

"nahi."

"to thik hai.ye kaam khatm kar mere sath chalo."

"ok.",rambha diul hi dil me khush to bahut thi ki boss use dinner pe le ja raha hai.itni jaldi vo uski chaheti ban jayegi ye usne sapne me bhi nahi socha tha lekin use 1 baat ka darr bhi tha.vo in baato ke chakkar me apna career nahi barbad kar sakti thi.haan,agar is sab se uski tarakki ka rasta aasan hota tha tab thik tha.use koi fikr nahi thi ki kaun uske bare me kya bolta hai.vaise bhi is baat ka darr to to usne sameer pe zahir kiya tha taki vo ye na soche ki vo assani se jaal me phansne vali chidiya hai.

Trust group ne Devalay me 1 naye tarah ka shopping complex banaya tha.ye complex 1 imarat na hoke 1 khule ilake me is tarah bana tha ki logo ko 1 bazar me ghumne ka aabhas hota magar yaha aam bazar ki tarah traffic ki chill-pon nahi thi & na hi koi gandagi.is complex ke 1 kinare 1 artificial jhil bani thi.ye jhil dekhne me to badi gehri thi magar asal me uski gehrai kuchh khas nahi thi.uske farsh pe aisi tiles lagayi gayi thi ki pani bharne ke baad vo badi gehri dikhti thi.us jhil ki puri golai me rails lagi thi jinpe naave chalti thi.

ye naave aage,peechhe & dono baglo se bilkul dhanki hui thi & bas samne se khuli thi.Vijayant Mehra achhi tarah se janta tha ki aisi jagaho pe sabse zyada jawan log aate the.ab jaha jawan honge vaha romance bhi hoga & romance hoga to tanhai ki hasrat bhi hogi.aisi naavo ka idea usi ka tha.ye naaven 1 control room se operate hoti thi & fir unhe khene vale ki bhi koi zarurat nahi thi.

ye complex bas 2 dino baad khulne vala tha & yehi Sameer Rambha ko le aaya tha.jhil ke kinare lagi railings ke is taraf complex me usne khule aasman ke neeche 1 mez & 2 kursiyan lagwayi & unke baithate hi 1 waiter unhe khana parosne laga.rambha samajh gayi thi ki is khas intezam ke peechhe uske boss ki uske karib aane ki hasrat chhupi hai.khate hue sameer ne us se uske parivar ke bare me & ab tak ki zindagi ke abre me puchha,usne apne bare me bhi use kafi bataya.

baat-chit ke dauran usne ghuma-fira ke rambha ke kisi boyfriend ke hone ki baat bhi puchhi magar hoshiyar rambha ne aise jataya ki use sawal samajh hi na aaya ho.sameer ne bhi sawal dohraya nahi bas muskurate hue khana khata raha.

"thanx,sir.khana bahut achha tha."

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--17

गतान्क से आगे.

"अब इस से भी अच्छी चीज़ दिखाता हू तुम्हे.आओ.",वो रंभा को लेके रेलिंग के साथ आगे बढ़ा.थोड़ा आगे जाने पे 1 टिकेट बूथ था & उसके बाद कुच्छ सीढ़िया जिनसे नीचे जाने पे उन्हे झील मे 1 नाव खड़ी दिखी.विजयंत बहुत पहुँचा हुआ बिज़्नेसमॅन था.ये सभी नावे कोई 20 मिनिट मे पूरी झील का 1 चक्कर लगाती थी & उन 20 मिनिट्स के लिए .100 रुपये देने वाले जोड़ो की कमी तो थी नही!

वाहा खड़े 1 आदमी ने समीर को वॉकी-टॉकी जैसा कुच्छ थमाया & वाहा से चला गया.समीर नाव पे चढ़ गया & रंभा का हाथ थाम उसे भी नाव मे चढ़ने मे मदद की.रंभा हाइ हील्स की वजह से थोड़ा लड़खड़ाई तो समीर ने उसे थाम लिया & उसके साथ सीट पे बैठ गया.नाव की सीट भी प्रेमी जोड़ो को ध्यान मे रख के बनाई गयी थी & इसलिए छ्होटी थी.रंभा समीर से बिल्कुल सॅट के बैठी थी.

वो वॉकी-टॉकी दरअसल उस नाव का एमर्जेन्सी रिमोट था.समीर ने उसे दबाया तो नाव चल पड़ी.सामने झील के पार बहुत दूर शहर की रोशनीया झिलमिला रही थी.कुच्छ दूर जाने के बाद समीर ने नाव रोक दी,"रंभा,आज मैं तुम्हे यहा 1 बहुत ज़रूरी बात कहने के लिए लाया हू.",रंभा जानती थी कि उसका बॉस अब उसके नज़दीक आने की कोशिश करेगा लेकिन उसने मन के भाव चेहरे पे नही आने दिए.

"रंभा,तुम पहली मुलाकात से ही मुझे बहुत अच्छी लगी & तुम्हारे साथ काम करने मे भी मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन इधर कुच्छ दिनो से कुच्छ अजब हाल हो गया है मेरा..शाम को जब दफ़्तर से घर जाने लगता हू तो 1 अजीब सी मायूसी मुझे घेर लेती है & रात भर रहती है पर जब सवेरे उठता हू तो दिल उमंग से भरा रहता है.जानती हो मेरे इस हाल के लिए कौन ज़िम्मेदार है?",रंभा ने इनकार मे सर हिलाया.

"तुम..तुमसे बिच्छाड़ता हू तो मायूसी मे डूब जाता हू & सवेरे तुमसे मिलने के ख़याल से दिल उमंग से भर जाता है.",उसने हाथ से सामने देखने का इशारा किया.झील के किनारे 1 बड़े से बोर्ड पे लेड्स लगे थे.समीर ने अपने मोबाइल को कान से लगाया,"ऑन करो.",& रख दिया.

सामने लेड्स 1-1 करके जल उठे..आइ लव यू.

रंभा को ये तो पता था कि समीर उसके करीब आने की कोशिश करेगा मगर यू मोहब्बत का इज़हार कर देगा ये उसने सोचा भी ना था & वो चौंक गयी & मुँह पे हाथ रख लिया.

"रंभा,बोलो क्या तुम्हे मेरी मोहब्बत कबूल है?",समीर ने उसके दोनो हाथ थाम उसकी काली,गहरी आँखो मे झाँका.रंभा ने मुँह घुमा लिया.उसके चेहरे पे ऐसा भाव था मानो वो बड़े पशोपेश मे हो जबकि उसका दिमाग़ बहुत तेज़ी से दौड़ रहा था..अगर उसने अपने पत्ते सही तरीके से खेले तो वो बहुत फ़ायदे मे रह सकती है लेकिन 1-1 कदम उसे फूँक-2 के उठाना होगा.

"क्या बात है रंभा कोई और है तुम्हारी ज़िंदगी मे?"

"नही.",रंभा ने फ़ौरन सर घुमाया मगर वैसे ही परेशान बनी रही.

"तो फिर मैं पसंद नही तुम्हे?"

"नही ये बात नही है."

"तो फिर क्या बात है रंभा?",वो खामोश रही,"..देखो,रंभा.मुझे तुम्हारी खामोशी की वजह नही पता.मेरी जगह कोई और होता यहा तो कहता कि तुम जितना मर्ज़ी वक़्त लो,मैं पूरी ज़िंदगी तुम्हारा इंतेज़ार करूँगा मगर मैं तुम्हारा पूरी ज़िंदगी इंतेज़ार नही कर सकता..",रंभा ने 1 बार फिर चेहरा उसकी ओर किया & सवालिया निगाहो से उसे देखा,"..क्यूकी मैं तुम्हारे इंतेज़ार मे नही बल्कि तुम्हारे साथ अपनी बाकी ज़िंदगी गुज़ारना चाहता हू.रंभा,तुम सोचती रहोगी & मैं इंतेज़ार करता रहूँगा & ये कीमती वक़्त हम खो देंगे.प्लीज़,रंभा मुझे बताओ कि आख़िर क्या परेशानी है तुम्हे मेरी मोहब्बत कबूल करने मे?"

"देखिए,मैं इस दुनिया मे बिल्कुल अकेली हू लेकिन फिर भी मुझे दुनिया की तकलीफो से ना डर लगता है ना घबराहट होती है लेकिन अगर कल को आपका दिल मुझसे भर गया & आपने मुझे छ्चोड़ दिया तो मैं शायद ये दर्द बर्दाश्त ना कर पाऊँ."

"रंभा,अगर मुझे ज़रा भी शक़ होता कि मैं तुम्हारे साथ अपनी बाकी उम्र नही गुज़ार सकता तो मैं तुमसे आज अपने इश्क़ का इज़हार ही नही करता,इतना भरोसा है मुझे खुद पे.तुम कल को मुझसे भले ही ऊब जाओ लेकिन मैं तुम्हारा साथ कभी नही छ्चोड़ूँगा.",रंभा के नाज़ुक हाथो पे उसकी पकड़ मज़बूत हो गयी थी.

"& हमारे बीच का फासला कैसे दूर करेंगे आप?"

"कैसा फासला?"

"आप सबसे ऊँचे तबके से हैं जबकि मैं 1 आम,मामूली लड़की.आपका परिवार भी तो है..उन्हे ये रिश्ता मंज़ूर ना हुआ तो?"

"रंभा,चाहे कुच्छ भी हो जाए मैं तुम्हारा साथ नही छ्चोड़ूँगा.देखो,तुम घबराती रहोगी & सवाल करती रहोगी.मैं जवाब देता रहूँगा लेकिन तुम्हारी घबराहट सवाल पैदा करना बंद नही करेगी.मैं बस इतना कहूँगा कि मेरा वादा है ये कि मैं आज से लेके मरते दम तक तुम्हारे साथ रहूँगा.बोलो,अब तुम्हे कबूल है मेरी मोहब्बत?",रंभा ने सर झुका लिया & बहुत धीरे से इकरार मे हिलाया.

"ओह्ह..रंभा..आइ लव यू..!..आइ लव यू..!",खुशी से पागलो हो समीर ने उसे बाहो मे भर लिया & दिल ही दिल मे हँसती रंभा ने उसके सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.उसे अपनी किस्मत पे यकीन ही नही हो रहा था..मेहरा खानदान का एकलौता वारिस उसके इश्क़ मे पागल हो गया था!

"रंभा,तुम्हे पता नही कि मेरी मोहब्बत कबूल के तुमने मुझे कितनी खुशी दी है!",उसने रंभा का चेहरा हाथो मे भर लिया,"..इस वक़्त मैं इतना खुस हू..इतना खुश हू कि जी करता है कि चिल्ला-2 के पूरी दुनिया को बताऊं की रंभा मेरी है सिर्फ़ मेरी!"

"पागल हो गये हैं क्या,सर!",रंभा शरमाते हुए हंसते हुए बोली.

"क्या यार!सारे रोमॅंटिक मूड का सत्यानाश कर दिया!..इतना अच्छा नाम दिया है मा-बाप ने मुझे.उस से पुकारो ना!",रंभा ने शरमाने का नाटक करते हुए अपना चेहरा घुमा लिया तो समीर ने उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा अपनी ओर घुमाया,बोलो ना,रंभा!"

"समीर.."रंभा ने आँखे बंद कर बहुत धीमी आवाज़ मे अपने प्रेमी का नाम लिया.

इश्क़ 1 दिली जज़्बात है मगर कब ये जज़्बात जिस्मानी एहसास मे बदल जाता है इसका पता कभी किसी आशिक़ को नही चलता.यही हाल इन दोनो का भी था.रंभा की ठुड्डी पकड़ समीर उसके गुलाबी,रसीले होंठो को चूमना चाह रहा था मगर लजाने का ढोंग करती रंभा उसे उसके इरादे मे नाकाम कर रही थी.थोड़ी मान-मनुहार के बाद उसने उसके होंठो को अपने लबो से मिलवा ही दिया लेकिन जब उसने उनपे जीभ फेरी तो रंभा ने फिर से उन्हे पीछे खींच लिया.मर्द का दिल तो ऐसा ही होता है,महबूबा को बस छुने की ख्वाहिश रखने वाला दिल उसके बाहो मे समाते ही बस उसके जिस्म को अपने जिस्म से जोड़ने के फिराक़ मे लग जाता है.

समीर फिर से उसे बाहो मे भर बस होंठो से उसे चूमने लगा.अब रंभा भी उसका साथ दे रही थी.दिन मे दफ़्तर मे हुई घटना अभी भी उसके ज़हन मे ताज़ा थी & उसका दिल तो कर रहा था कि समीर उसके फूल जैसे जिस्म के हसीन अंगो से भी खिलवाड़ करे लेकिन वो उसे ज़रा भी शक़ नही होने देना चाहती थी कि वो 1 भोली,नादान लड़की नही है"ओहो!कितनी देर हो गयी है.चलिए ना!",समीर के गले मे डाली बाँह की कलाई पे बँधी घड़ी पे उसकी नज़र पड़ गयी तो वो उस से अलग हो गयी.

"अरे हमारा तो इरादा पूरी उम्र यही यू ही तुम्हारी बाहो मे गुज़ारने का था!"

"ओफ्फो!बहुत हो गया रोमॅन्स.अब चलिए!",उसने प्यार से उसे झिड़का.

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"उउम्म्म्मम..समीर...उउन्न्ञनणणन्...प्लीज़......उउन्न्ह..!",ड्राइवर को दफ़ा कर समीर खुद रंभा को छ्चोड़ने आया था & इस वक़्त उसकी बिल्डिंग के नीचे गाड़ी खड़ी कर वो अपनी महबूबा को बाहो मे भर उसे शिद्दत से चूम रहा था,कुच्छ ही पॅलो मे उसने आखिकार रंभा से उसके गुलाबी होंठो के पार जाने की इजाज़त ले ही ली थी & अब उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ा रहा था.रंभा का जोश से बुरा हाल था मगर वो उसे जता नही सकती थी.उसका दिल तो कर रहा था की समीर को चूमते हुए उसके लंड को दबोच ले मगर वो मजबूर थी.

"अब बहुत हो गया..",उसने लंबी साँसे लेते हुए उसे अलग किया,"..अब घर जाइए."

"तुम भी चलो ना वही.",समीर ने उसे फिर से बाहो मे खींचना चाहा.

"धात!खुद भी पागल हैं & मुझे भी बना देंगे.",उसनेशोखी से मुस्कुराते हुए उसे प्यार से झिड़का & गाड़ी से उतर गयी.

अपने फ्लॅट मे घुस खुशी से गुनगुनाते हुए वो कपड़े उतारने लगी.आज उसकी खुशी का ठिकाना नही था..अगर सब कुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द वो मेहरा खानदान की एकलौती बहू बन जाएगी!कपड़े उतारते हुए उसकी निगाह ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे दिख रहे अपने अक्स पे पड़ी तो वो नंगी हो मुस्कुराती हुई शीशे के सामने आ गयी.उसे अपनी खूबसूरती पे गुमान हो आया..आख़िरकार उसका हुस्न ही उसे उसकी मंज़िल की ओर ले जा रहा था.

उसने अपनी भारी-भरकम चूचियाँ अपने दोनो हाथो मे भरके दबाई.उसके बदन मे आग लगी हुई थी & उसे शांत करने के रास्ता उसे नज़र नही आ रहा था.समीर के साथ जाने की वजह से उसने विनोद को भी फोन नही किया था & इस वक़्त तो उसके यहा आने का सवाल हुई नही उठता था.

"ट्र्र्र्रररननगगगगगगगग..!",दरवाज़े की घंटी ने उसके ख्यालो को तोड़ा..इस वक़्त कौन हो सकता है..उसने पास पड़ी चादर जिस्म पे डाली & दरवाज़े पे गयी & इहोल से देखा,सामने परेश खड़ा था.

"अरे आप अभी इस वक़्त!",उसने चैन लगाके दरवाज़े को खोल उसके किनारे से उसे देखा.

"सॉरी,अभी आपको तकलीफ़ दे रहा हू..",परेश की आँखो मे रंभा के जिस्म की भूख सॉफ दिख रही थी,"..मगर कल मुझे जाना है & मैं अपने कुच्छ ज़रूरी काग़ज़ात यही भूल गया हू.",रंभा जानती थी कि ये सब 1 बहाना है.असल मे वो बस उसे चोदना चाहता था लेकिन उसे भी तो अभी 1 मर्दाने जिस्म की ज़रूरत थी.

"अच्छा,मैं ज़रा कपड़े पहन लू."

"अरे,बस 2 मिनिट लगेंगे!",रंभा मन ही मन मुस्कुराइ & चैन खोल दी.परेश अंदर घुसा & रंभा को ललचाई नज़रो से सर से पाँव तक देखने लगा.

"जाइए ले लीजिए.",रंभा घूम के कमरे मे जाने लगी तो परेश ने उसे पकड़ लिया,"अरे क्या कर रहे हैं!छ्चोड़िए!!छ्चोड़िए!!",वो छॅट्पाटेने लगी.

"प्लीज़,रंभा..बस 1 बार मुझे चोद लेने दो..फिर तो मैं जा रहा हू..फिर पता नही कब नसीब हो ये नशीला जिस्म!",परेश चादर के उपर से ही उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसकी गर्दन चूम रहा था.रंभा को बहुता अच्छा लग रहा था लेकिन उसने उसे थोड़ा तड़पाने की सोची.

"प्लीज़..परेश जी..उस रोज़ मैं बहक गयी थी..ऊव्ववव..काटिए मत..दर्द होता है..प्लीज़..मैं वैसी लड़की नही हू..हाईईइ..ना..ना..चादर नही....हटाइए....प्लीज़..!",उसके बाए कान पे काटने के बाद परेश ने उसकी चादर खीच उस नंगा कर दया था.रम्भा ने पहले तो हाथो से अपनी छातिया ढँकने की कोशिश की लेकिन जब देखा कि परेश की निगाह उसकी गुलाबी चूत से चिपक गयी है तो उसने हाथो से चूत को ढँक लिया मगर ऐसा करने से परेश के सामने उसकी चूचिया नुमाया हो गयी.

"रंभा.जानेमन..बस आज की रात फिर तो पता नही किस्मत मे मिलना हो या नही.",परेश उसे बाहो मे भर उसके चेहरे को चूमने लगा तो वो ना-नुकर करती मुँह फेरने लगी.परेश के होंठ उसे फिर से मस्त कर रहे थे.दिन भर का उबलता जोश अब उसके जिस्म से फूटने को तैयार था.परेश उसे बाहो मे भरे उसके कमरे मे ले गया.रंभा वैसे ही ना-नुकर का ढोंग करती रही.

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क्रमशः.......

JAAL paart--17

gataank se aage.

"ab is se bhi achhi chiz dikhata hu tumhe.aao.",vo rambha ko leke railing ke sath aage badha.thoda aage jane pe 1 ticket booth tha & uske abad kuchh seedhiya jinse neeche jane pe unhe jhil me 1 naav khadi dikhi.vijayant bahut pahuncha hua businessman tha.ye sabhi naave koi 20 minute me puri jhil ka 1 chakkar lagati thi & un 20 minutes ke liye Rs.100 dene vale jodo ki kami to thi nahi!

vaha khade 1 aadmi ne sameer ko walkie-talkie jaisa kuchh thamaya & vaha se chala gaya.sameer naav pe chadh gaya & rambha ka hath tham use bhi naav me chadhne me mada ki.rambha high heels ki vajah se thoda ladkhadayi to sameer ne use tham liya & uske sath seat pe baith gaya.naav ki seat bhi premi jodo ko dhyan me rakh ke banayi gayi thi & isliye chhoti thi.rambha sameers e bilkul sat ke baithi thi.

vo walkie-talkie darasla us naav ka emergency remote tha.sameer ne sue dabaya to naav chal padi.samne jhil ke paar bahut door shehar ki roshniya jhilmila rahi thi.kuchh door jane ke baad sameer ne naav rok di,"rambha,aaj main tumhe yaha 1 bahut zaruri baat kehne ke liye laya hu.",rambha janti thi ki uska boss ab uske nazdik aane ki koshish karega lekin usne man ke bhav chehre pe nahi aane diye.

"rambha,tum pehli mulakat se hi mujhe bahut achhi lagi & tumhare sath kaam karne me bhi mujhe bahut achha lagta hai lekin idhar kuchh dino se kuchh ajab haal ho gaya hai mera..sham ko jab daftar se ghar jane lagta hu to 1 ajib si mayusi mujhe gher leti hai & raat bhar rehti hai par jab savere uthata hu to dil umang se bhara rehta hai.janti ho mere is haal ke liye kaun zimmedar hai?",rambha ne inkar me sar hilaya.

"tum..tumse bichhadta hu to mayusi me doob jata hu & savere tumse milne ke khayal se dil umang se bhar jata hai.",usne hath se samne dekhne ka ishara kiya.jhil ke kinare 1 bade se borad pe LEDs lage the.sameer ne apne mobile ko kaan se lagaya,"on karo.",& rakh diya.

samne LEDs 1-1 karke jal uthe..I LOVE YOU.

rambha ko ye to pata tha ki sameer uske karib aane ki koshish karega magar yu mohabbat ka izhar kar dega ye usne socha bhi na tha & vo chaunk gayi & munh pe hath rakh liya.

"rambha,bolo kya tumhe meri mohabbat kabul hai?",sameer ne uske dono hath tham uski kali,gehri aankho me jhanka.rambha ne munh ghuma liya.uske chehre pe aisa bhav tha mano vo bade pashopesh me ho jabki uska dimagh bahut tezi se daud raha tha..agar usne apne patte sahi tarike se khele to vo bahut fayde me reh sakti hai lekin 1-1 kadam use phoonk-2 ke uthana hoga.

"kya baat hai rambha koi aur hai tumhari zindagi me?"

"nahi.",rambha ne fauran sar ghumaya magar vaise hi pareshan bani rahi.

"to fir main pasand nahi tumhe?"

"nahi ye baat nahi hai."

"to fir kya baat hai rambha?",vo khamosh rahi,"..dekho,rambha.mujhe tumhari khamoshi ki vajah nahi pata.meri jagah koi aur hota yaha to kehta ki tum jitna marzi waqt lo,main puri zindagi tumhara intezar karunga magar main tumhara puri zindagi intezar nahi kar sakta..",rambha ne 1 baar fir chehra uski or kiya & sawaliya nigaho se use dekha,"..kyuki main tumahre intezar me nahi balki tumhare sath apni baki zindagi guzarna chahta hu.rambha,tum sochti rahogi & main intezar karta rahunga & ye kimati waqt hum kho denge.please,rambha mujhe batao ki aakhir kya pareshani hai tumhe meri mohabbat kabul karne me?"

"dekhiye,main is duniya me bilkul akeli hu lekin fir bhi mujhe duniya ki taklifo se na darr lagta hai na ghabrahat hoti hai lekin agar kal ko aapka dil mujhse bhar gaya & aapne mujhe chhod diya to main shayad ye dard bardasht na kar paoon."

"rambha,agar mujhe zara bhi shaq hota ki main tumhare sath apni baki umra nahi guzar sakta to main tumse aaj apne ishq ka izhar hi nahi karta,itna bharosa hai mujhe khud pe.tum kal ko mujhse bhale hi oob jao lekin main tumhara sath kabhi nahi chhodunga.",rambha ke nazuk hatho pe uski pakad mazbut ho gayi thi.

"& humare beech ka fasla kaise door karenge aap?"

"kaisa fasla?"

"aap sabse oonche tabke se hain jabki main 1 aam,mamuli ladki.aapka parivar bhi to hai..unhe ye rishta manzur na hua to?"

"rambha,chahe kuchh bhi ho jaye main tumhara sath nahi chhodunga.dekho,tum ghabrati rahogi & sawal karti rahogi.main jawab deta rahunga lekin tumhari ghabrahat sawal paida krna band nahi karegi.main bas itna kahunga ki mera vada hai ye ki main aaj se leke marte dum tak tumahre sath rahunga.bolo,ab tumhe kabul hai meri mohabbat?",rambha ne sar jhuka liya & bahut dhire se ikrar me hilaya.

"ohh..rambha..i love you..!..i love you..!",khushi se pagalo ho sameer ne use baaho me bhar liya & dil hi dil me hansti rambha ne uske seene me chehra chhupa liya.use apni kismat pe yakeen hi nahi ho raha tha..mehra khandan ka eklauta varis uske ishq me pagal ho gaya tha!

"rambha,tumhe pata nahi ki meri mohabbat kabul ke tumne muhje kitni khshi di hai!",usne rambha ka chehra hatho me bhar liya,"..is waqt main itna khus hu..itna khush hu ki ji karta hai ki chilla-2 ke puri duniya ko bataoon ki rambha meri hai sirf meri!"

"pagal ho gaye hain kya,sir!",rambha sharmate hue hanste hue boli.

"kya yaar!sare romantic mood ka satyanash kar diya!..itna achha naam diya hai maa-baap ne mujhe.us se pukaro na!",rambha ne sharmane ka natak karte hue apna chehra ghuma liya to sameer ne uski thuddi pakad uska chehra apni or ghumaya,bolo na,rambha!"

"sameer.."rambha ne aankhe band kar bahut dheemi aavaz me apne premi ka naam liya.

ishq 1 dili jazbat hai magar kab ye jazbat jismani ehsas me badal jata hai iska pata kabhi kisi aashiq ko nahi chalta.yehi haal in dono ka bhi tha.rambha ki thuddi pakad sameer uske gulabi,rasile hotho ko chumna chah raha tha magar lajane ka dhong karti rambha use uske irade me nakam kar rahi thi.thodi maan-manuhar ke bad usne uske hotho ko apne labo se milwa hi diya lekin jab usne unpe jibh feri to rambha ne fir se unhe peechhe khinch liya.mard ka dil to aisa hi hota hai,mehbooba ko bas chhune ki khwahish rakhne vala dil uske baaho me samate hi bas uske jism ko apne jism se jodne ke firaq me lag jata hai.

sameer fir se use baaho me bhar bas hotho se use chumne laga.ab rambha bhi uska sath de rahi thi.din me daftar me hui ghatna abhi bhi uske zehan me taza thi & uska dil to kar raha tha ki sameer uske phool jaise jism ke haseen ango se bhi khilwad kare lekin vo use zara bhi shaq nahi hone dena chati thi ki vo 1 bholi,nadan ladki nahi hai"oho!kitni der ho gayi hai.chaliye na!",sameer ke gale me dali banh ki kalai pe bandhi ghadi pe uski nazar pad gayi to vo us se alag ho gayi.

"are humara to iarad puri umra yehi yu hi tumhari baaho me guzarne ka tha!"

"offoh!bahut ho gaya romance.ab chaliye!",usne pyar se use jhidka.

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"uummmmm..sameer...uunnnnnnn...please......uunnhhhhhhhh..!",driver ko dafa kar sameer khud rambha ko chhodne aaya tha & is waqt uski building ke neeche gadi khadi kar vo apni mehbooba ko baaho me bhar use shiddat se chum raha tha,kuchh hi palo me usne aakhikar rambha se uske gulabi hotho ke par jane ki ijazat le hi li thi & ab uski zuban se apni zuban lada raha tha.rambha ka josh se bura haal tha magar vo use jata nahi sakti thi.uska dil to kar raha tha ki sameer ko chumte hue uske lund ko daboch le magar vo majboor thi.

"ab bahut ho gaya..",usne lambi sanse lete hue use alag kiya,"..ab ghar jaiye."

"tum bhi chalo na vahi.",sameer ne use fir se baaho me khinchna chaha.

"dhat!khud bhi pagal hain & mujhe bhi bana denge.",usneshokhi se muskurate hue use pyar se jhidka & gadi se utar gayi.

apne flat me ghhus khushi se gungunate hue vo kapde utarne lagi.aaj uski khushi ka thikana nahi tha..agar sab kuch thik raha to bahut jald vo mehra khandan ki eklauti bahu ban jayegi!kapde utarte hue uski nigah dressing table ke shishe me dikh rahe apne aks pe padi to vo nangi ho muskurati hui shishe ke samne aa gayi.use apni khubsurti pe guman ho aaya..aakhirkar uska husn hi use uski manzil ki or le ja raha tha.

usne apni bhari-bharkam chhatiya apne dono hatho me bharke dabayi.uske badan me aag lagi hui thi & use shant karne ke rasta use nazar nahi aa raha tha.sameer ke sath jane ki vajah se usne VInod ko bhi fone nahi kiya tha & is waqt to uske yaha aane ka sawal hui nahi uthta tha.

"trrrrrrnngggggggg..!",darwaze ki ghanti ne uske kahyalo ko toda..is waqt kaun ho sakta hai..usne paas padi chadar jism pe dali & darwaze pe gayi & eyehole se dekha,samne Paresh khada tha.

"are aap abhi is waqt!",usne chain lagake darwaze ko khol uske kinare se use dekha.

"sorry,abhi aapko taklif de raha hu..",paresh ki aankho me rambha ke jism ki bhukh saaf dikh rahi thi,"..magar kal mujhe jana hai & main apne kuchh zaruri kagzat yehi bhul gaya hu.",rambha janti thi ki ye sab 1 bahana hai.asal me vo bas use chodna chahta tha lekin use bhi to abhi 1 mardane jism ki zarurat thi.

"achha,main zara kapde pehan lu."

"are,bas 2 minute lagenge!",rambha man hi man muskurayi & chain khol di.paresh andar ghusa & rambha ko lalchayi nazro se sar se panv tak dekhne laga.

"jaiye le lijiye.",rambha ghum ke kamre me jane lagi to paresh ne use pakad liya,"are kya kar rahe hain!chhodiye!!chhodie!!",vo chhatpatane lagi.

"please,rambha..bas 1 baar mujhe chod lene do..fir to main ja raha hu..fir pata nahi kab nseeb ho ye nashila jism!",paresh chadar ke upar se hi uski chhatiya dabate hue uski gardan chum raha tha.rambha ko bahuta achha lag raha tha lekin usne use thoda tadpane ki sochi.

"please..paresh ji..us roz main behak gayi thi..oowwww..katiye mat..dard hota hai..please..main vaisi ladki nahi hu..haiiii..na..na..chadar nahi....hataiye....please..!",uske baye kaan pe katne ke bad paresh ne uski chadar khicnh us enaga kar dya tha.rmbha ne pehle to hatho se apni chatiya dhankne ki koshish ki lekin jab dekha ki paresh ki nigah uski gulabi chut se chiapk gayi hai to usne hatho se chut ko dhank liya magar aisa karne se paresh ke samne uski choochiya numaya ho gayi.

"rambha.janeman..bas aaj ki raat fir to pata nahi kismat me milna ho ya nahi.",paresh use baaho me bhar uske chehre ko chumne laga to vo na-nukar karti munh ferne lagi.paresh ke honth use fir se mast kar rahe the.din bhar ka ubalta josh ab uske jism se phutne ko taiyyar tha.paresh use baaho me bhare uske kamre me le gaya.rambha vaise hi na-nukar ka dhong karti rahi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--18

गतान्क से आगे.

उसे बिस्तर पे लिटा वो उसकी चूचियो से खेलने लगा.उन्हे दबाते हुए उनके निपल्स को चूस्ता फिर उन्हे चूमते हुए निपल्स को उंगलियो मे भर मसल देता.रंभा के जिस्म मे अब मस्ती का सैलाब दौड़ रहा था,"..आन्ह्ह्ह्ह..नही..परेश..जाओ..चोद दो..!"उसकी ये ना-नुकर परेश के जोश को और बढ़ा रही थी.उसने उसकी चूत मे उंगली घुसा दी & उसकी बगल मे लेट उसकी चाहती चूस्ते हुए ज़ोर-2 से रगड़ने लगा.कुछ ही देर मे दिन भर की प्यासी रंभा झाड़ गयी & फिर करवट बदल परेश की ओर पीठ कर तकिये मे मुँह छुपा सुबकने लगी.

परेश ने फ़ौरन कपड़े उतारे & उसे पीछे से बाहो मे भर उसके चेहरे को अपनी ओर किया,"ओफ्फो!क्या बात है?..आज तुम इतनी झिझक क्यू रही हो..जबकि तुम्हारे जिस्म को तो ये सब भा रहा है.",उसने उसकी गीली चूत मे 2 उंगलिया घुसा के बाहर निकाल उनपे लगा बहुत सा रस दिखाया & फिर उसे चाट लिया.

"मैं कोई ऐसी-वैसी लड़की नही हू..उस रोज़ मेरी कमज़ोरी का फयडा. उठाया आपने & आज ज़बरदस्ती कर रहे हैं मेरे साथ.",अब वो मेहरा खानदान की बहू बनने वाली थी & नही चाहती थी कि आगे कभी भी कोई मर्द उसके चरित्र पे उंगली उठा सके.वो ये पक्का कर लेना चाहती थी की आगे कभी भी अगर उसके पुराने आशिक़ो मे से कोई उसकी राह मे रोड़ा अटकाए तो वो ये साबित कर दे कि उन्होने उसके साथ मनमानी की थी,वो अपनी मर्ज़ी से उनके साथ नही सोई थी.

"मेरी जान..तुम्हारे जिस्म को तो ये ज़बरदस्ती नही लग रही..रूको अभी तुम्हारी शिकायत दूर करता हू.",परेश ने उसे सीधा किया & तेज़ी से उसकी जंघे फैला उनके बीच आ उसकी चूत से अपना मुँह लगा दिया.रंभा फिर से हवा मे उड़ने लगी.वो आहे भर रही थी & परेश उसकी चूत से बहते रस को चाते जा रहा था.रंभा उसके बालो को भींचती उसके मुँह को अपनी चूत पे दबाने लगी & अपनी कमर उचकाने लगी.परेश भी उसके दाएँ को उंगली से छेड़ता उसकी चूत मे जीभ घुमा रहा था.

जैसे ही रंभा झड़ी परेश उसके उपर आया & अपना मोटा लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.गीली चूत मे लंड 1 झटके मे ही अंदर सरक गया,"..आहह..नही..प्लीज़..मुझे मत चोदो...आन्न्न्नह..दर्द होता है..निकाल लो उसे..!",रंभा आँखे बंद किए सर को झटक रही थी & परेश के सीने पे हाथ रख उसे धकेल रही थी.परेश ने ऐसी चुदाई पहले कभी नही की थी & उसका जोश अब बहुत बढ़ गया था.उसने अपना भारी-भरकम शरीर रंभा के उपर लिटा दिया & उसके सीने के उभारो को बेदर्दी से मसलता हुआ उसके गाल चाटने लगा.

"जानेमन,क्या निकाल लू मैं?..ज़रा नाम तो लो उसका!",उसने उसके होंठो को चाटते हुए उसकी चूचियो को मसला तो रंभा ने आँहे भरते हुए फिर से मुँह फेरा.

"अपने लंड को निकाल लो..ऊऊव्ववववववव..!",बहुत इसरार के बाद उसने परेश के अंग का नाम लिया.इस बात ने आग मे घी का काम किया & परेश के धक्के और तेज़ हो गये.

"कहा से निकालु?..रंभा डार्लिंग ये भी तो बताओ!",वो उसकी चूचियो को चूस रहा था.

"मेरी चूत से निकालो..मत चोदो मुझे .....आआआआहह..!",रंभा के मुँह से अंगो का नाम सुन वो पागल हो गया था & बहुत शदीद धक्के लगा रहा था.रंभा ने भी उसकी कमर को टाँगो मे जाकड़ लिया था & उसके सीने को नोच रही थी.परेश के मोटे लंड ने उसे कुच्छ ही देर मे जन्नत मे पहुँचा दिया & वो झाड़ गयी.उसके पीछे-2 परेश भी अपनी मंज़िल पे पहुँचा & अपना वीर्य उसकी चूत मे भरने लगा.

"छ्चोड़ो मुझे..!",परेश ने सिकुदा लंड रंभा की चूत से खींच उसे बाहो मे भरना चाहा तो उसने रुवन्सि शक्ल बनाके उसे परे धकेल दिया,"..तुमने ज़बरदस्ती की है मेरे साथ!..कोई काग़ज़-वागज़ लेने नही आए थे तुम बस अपनी हवस मिटानी थी तुम्हे!",चीखती रंभा को देख परेश की हालत ख़स्ता हो गयी.रंभा ने सच कहा था,वो शाम से 3-4 चक्कर लगा चुका था मगर हर बार घर बंद मिलता था.

"न-नही..ऐसा कुच्छ नही है..उस दिन विनोद..-"

"मैं विनोद को बुलाती हू..वही ठीक करेगा तुम्हे!",रंभा चीखी तो परेश गिड़गिदने लगा.

"अरे,रंभा मुझसे ग़लती हो गयी..",रंभा समझ गयी कि वो डरपोक किस्म का इंसान है.कोई और होता तो कभी नही झुकता ऐसे,"..मैं जा रहा हू.अब नही परेशान करूँगा तुम्हे..",परेश सर पे पाँव रख के भागा वाहा से.रंभा ने दरवाज़ा बंद किया & ज़ोर से ठहाका लगाया.ये सब उसने केवल इसीलिए किया था ताकि परेश उसे अपनी जागीर समझने की ग़लती ना करे.रंभा चाहे किसी के साथ भी सोए,कोई मर्द उसे अपने हिसाब से चलाने की सोचे ऐसा उसे बर्दाश्त नही था.

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विजयंत मेहरा सोनिया के करीब आना चाहता था & इसके लिए मौको की तलाश मे रहता था लेकिन जिस रोज़ उसने सोनिया की ज़िंदगी मे तूफान ला दिया उस दिन उसने तो उस से मिलने की सोची भी नही थी.वो बॅंगलुर काम से गया था & वाहा तबीयत थोड़ी नसाज़ हो गयी.ठीक तो वो 1 ही दिन मे हो गया लेकिन डॉक्टर ने उसे चेकप के लिए अगले रोज़ भी बुलाया था.वही हॉस्पिटल मे चेकप करवा के निकलते हुए लिफ्ट मे वो सोनिया से टकरा गया,"अरे सोनिया जी,व्हाट ए प्लेज़ेंट सर्प्राइज़!आप यहा..सब ख़ैरियत तो है?"

"हाई!मिस्टर.मेहरा..मेरी मा बीमार थी,उन्ही की कुच्छ रिपोर्ट्स दिखाने आई थी.",सोनिया ने 1 स्लीव्ले टॉप & ढीला-ढाला लोंग स्कर्ट पहना था.इत्तेफ़ाक़ की बात है कि लिफ्ट मे उनके सिवा कोई नही था.उस तन्हाई से सोनिया असहज हो गयी.उसका दिल उन गुस्ताख ख्यालो को याद करने लगा जो वो हमेशा विजयंत को लेके सोचता था.तभी लिफ्ट रुक गयी & अंदर की बत्ती बुझ गयी,"अरे ये क्या हुआ?लिफ्ट क्यू रुक गयी?",सोनिया घबरा गयी थी.

"डॉन'ट वरी!",विजयंत ने मोबाइल ऑन कर लिफ्ट मे लगा एमर्जेन्सी बटन दबा के स्पीकर मे लिफ्ट रुकने की बात बताई.

"सर,कुच्छ ही देर मे लिफ्ट चालू हो जाएगी.आप घबराईए मत.हमारे आदमी उसे चालू करने चले गये हैं."

"मुझे घुटन हो रही है..कब चालू होगी ये?",सोनिया बेचैन हो रही थी.विजयंत ने बाई बाँह के घेरे मे उसे थाम लिया.

"घबराईए मत..",उसने मोबाइल ऑन किया & उसकी रोशनी मे सोनिया ने उसके चेहरे को देखा.जिस्मो की नज़दीकी,डर का माहौल & तन्हाई,शायद सभी का असर 1 साथ हुआ.सोनिया भी विजयंत को देखे जा रही थी.विजयंत मोबाइल की रोशनी बंद नही होने दे रहा था & सोनिया की आँखो मे आँखे डाले खड़ा था.दोनो को ही पता नही चला कि कब विजयंत के होंठ नीचे झुके & सोनिया के उपर होते हुए खुल गये.

विजयंत ने उसे आगोश मे कस उसके गुलाबी लबो से अपने लब चिपका दिए.सोनिया ने भी खुद को उसकी बाहो मे ढीला छ्चोड़ दिया था.दोनो पूरी शिद्दत से 1 दूसरे को चूम रहे थे & जब विजयंत ने अपनी जीभ उसके मुँह मे घुसाइ तो सोनिया ने उसे नही रोका.

"पिंगगगगग..!",आवाज़ के साथ बत्ती जली & लिफ्ट चल पड़ी.सोनिया होश मे आई & विजयंत से छितक गयी.विजयंत भी अचानक हुई इस बात से थोड़ा असहज हुआ था & चुप-चाप खड़ा था.सोनिया को एहसास हुआ कि उसने अभी-2 क्या किया था & उसकी आँखो से आँसू छलक पड़े.वो दसवे फ्लोर से चले थे & लिफ्ट नवी & आठवी मंज़िल के बीच फँस गयी थी.दोबारा चलने के बाद अगली मंज़िल पे कुच्छ लोग चढ़े & सोनिया ने अपने आँसुओ को छिपाने के लिए अपने बॅग से चश्मा निकाल के पहन लिया.

लोगो की मौजूदगी के चलते विजयंत उस से बात नही कर पा रहा था.ग्राउंड फ्लोर पे पहुँचते ही सोनिया तेज़ी से निकली & आगे बढ़ गयी.विजयंत जानता था कि यहा बात करने से वो लोगो की नज़रो मे आ सकते हैं & उसका खेल शुरू होने से पहले ही बिगड़ सकता था.सोनिया तेज़ी से हॉस्पिटल के मेन गेट से पैदल ही बाहर जा रही थी.विजयंत ने अपने ड्राइवर से कार की चाभी ली & सोनिया के पीछे निकल गया.

"सोनिया,प्लीज़ मेरी बात सुनो!",सोनिया हॉस्पिटल से निकल कुच्छ दूरी पे उसे पैदल जाती दिख गयी थी.

"मुझे अकेला छ्चोड़ दो & मेरा पीछा मत करो!",वो गुस्से से बोल वैसे ही चलती रही.सड़क पे उतना ट्रॅफिक नही थी मगर वो पूरी सुनसान भी नही थी.विजयंत ने सोनिया की बाँह पकड़ी & उसे खीच के गाड़ी मे बिठा दिया & दरवाज़ा लॉक कर दिया,"ये क्या बदतमीज़ी है!",सोनिया ने चश्मा उतारा तो उसके आँसुओ से गीले गाल & लाल आँखे विजयंत को दिखाई दी.उसने बिना कुच्छ बोले कार आगे बधाई & 1थोड़ी देर बाद 1 सुनसान रास्ते पे रोक दी.

सोनिया मुँह फेरे बैठी थी.विजयंत ने उसका चेहरा अपनी ओर घुमाया & उसके आँसुओ को अपने होंठो से साफ करने लगा,"मुझे छ्चोड़ो..हटो..विजयंत..!",वो चीखी लेकिन विजयंत ने उसे बाहो मे कस लिया & उसके बाल पकड़ उसके चेहरे को अपने चेहरे के सामने उसे खुद से नज़रे मिलाने पे मजबूरा कर दिया.

"कब तक भगोगी,सोनिया?..& क्या खुद से भाग सकती हो?..जो भी हुआ क्या उसमे तुम्हारी मर्ज़ी नही थी..?",विजयंत की बात सही थी & सोनिया की आँखो से 1 बार फिर आँसू बह निकले.

"नही..डार्लिंग..",उसने उसके आँसू पी लिए,"..प्लीज़ रोओ मत..क्यू रो रही हो?..",वो उसके चेहरे को चूमे जा रहा था.

"प्लीज़,विजयंत ये सही नही है..!",सोनिया ने महसूस किया कि इस हालत मे भी उसका जिस्म विजयंत की हर्कतो से मस्त हो रहा था.

"क्या सही नही है..कि हम दोनो 1 दूसरे को इतना चाहते हैं कि कायनात भी हमे मिलाना चाहती है?..नही तो आज हम यू क्यू टकराए?..या फिर ये सही नही है कि हम दोनो 1 दूसरे की तरफ पहले दिन से खींचते रहे हैं..नही तो अपने दुश्मन की बीवी से करीबी क्या मेरा शौक है?!",विजयंत ने उसे झींझोड़ा.

"सोनिया,इस हक़ीक़त से मत भागो की हम दोनो 1 दूसरे को चाहते हैं..क्यू..कैसे..ये हमे नही पता & मैं परवाह भी नही करता इन सवालो की!..& क्या ग़लत है कि हम दोनो शादीशुदा हैं & अपने-2 साथियो से बेवफ़ाई कर रहे हैं?..हां,ये सही है..हम कर रहे हैं ग़लती..लेकिन हम उन्हे सब बता के & दर्द ही देंगे ना.अभी वो अंजान हैं & खुश हैं..हम क्यू उन्हे दुखी करें?"

"तो आज के बाद हम नही मिलेंगे,विजयंत..-"

"-..& अंदर ही अंदर घुलते रहेंगे.नही,मुझे मंज़ूर नही ये..मैं नही रह सकता तुम्हारे बिना!मैं तुम्हे ब्रिज को छ्चोड़ने को नही कह रहा ना ही मैं रीता से अलग होऊँगा लेकिन मैं तुमसे दूर भी नही रह सकता.",विजयंत ने अपने होंठ सोनिया के होंठो से सटा दिए & सोनिया भी उसे चूमने लगी.वो किस तोड़ उसे रोकने की कोशिश करती लेकिन विजयंत उसकी अनसुनी कर उसे फिर चूमने लगता & थोड़ी ही देर मे सोनिया मदहोश होने लगी.विजयंत ने मौका देखा उसकी सीट का लीवर खींच सीट को नीचे गिराया & सोनिया को बाहो मे भर उसके उपर चढ़ उसे चूमने लगा.

उसका हाथ उसके टॉप मे घुस उसके चिकने पेट को सहला रहा था.सोनिया और मदहोश जो गयी,"..नही..विजयंत प्लीज़..आहह....!",सोनिया के टॉप मे हाथ घुसा उसकी गर्दन चूमते विजयंत ने उसकी चूचियो को दबोच लिया था.सोनिया के दिल का वो कोना अब खुशी से उसे & बढ़ावा दे रहा था..हां लेने दो उसे चूचियो को अपने हाथो मे..बहुत मज़ा आएगा..जब उसकी दाढ़ी तुम अपने सीने पे महसूस करोगी..तुम्हारे निपल्स उसके मुँह मे होंगे..

& जैसे उसके दिल की आवाज़ विजयंत ने सुन ली.वो अब सच मे उसकी चूचियो से खेल रहा था.टॉप & ब्रा उपर कर वो उन्हे अपने मुँह मे भर चूस रहा था.सोनिया की चूत गीली हो गयी थी.विजयंत का दाया हाथ उसकी स्कर्ट मे घुस उसकी जाँघो को सहलाए जा रहा था.उसके दिल का वो शैतान कोना अब उसे और उकसा रहा था..पाकड़ो उसका लंड..देखो उसकी सख्ती तुम अपने जिस्म पे महसूस कर नही रही क्या?..पॅंट के बावजूद वो तुम्हारे तन को जलाए जा रहा है अपनी गर्मी से..पाकड़ो..पाकड़ो..!

सोनिया ने हाथ नीचे ले जा विजयंत के लंड को दबोचते हुए अपने होंठ उसके सर को उपर कर उसके गर्म लबो से लगा दिए.विजयंत समझ गया कि चिड़िया अब पूरी तरह से उसके जाल मे फँस चुकी है.उसने फ़ौरन ज़िप खोल लंड बाहर निकाल उसके हाथ मे दे दिया & खुद दाए हाथ को उसकी पॅंटी मे घुसा उसकी गीली चूत को & गीला करने मे जुट गया.

कुच्छ ही पॅलो मे कार की सीट पे छट-पटाती सोनिया झाड़ रही थी.विजयंत ने 1 हाथ से ही अपनी पॅंट ढीली की तो सोनिया ने उसे नीचे सरका दिया.विजयंत ने उसकी पॅंटी उतारी & उसके उपर आ गया.विजयंत का लंड ब्रिज के लंड से केवल आधा इंच ही बड़ा था लेकिन उसकी मोटाई उसके मुक़ाबले कही ज़्यादा थी & जब उसने सर उठाके नीचे अपनी चूत मे पहली बार विजयंत के लंड को घुसते देखती सोनिया की चूत मे लंड को अंदर धकेला तो वो दर्द के मारे चीख पड़ी.

विजयनत उसके उपर लेट गया & उसके होंठो को चूमते हुए उसकी आहो को दफ़्न कर धक्के लगाने लगा.सोनिया उसकी पीठ & गंद को बेचैनी से सहलाती,खरोंछती बहुत मज़े का एहसास कर रही थी.ये मज़ा इस तरह सड़क के किनारे खड़ी कार मे चुदने के रोमांच का था, या फिर पति से छुप बेवफ़ाई करने का जिसमे पकड़े जाने का भी डर था,उसका था उसे पता नही था.उसे तो अब बस इस बात से मतलब था कि उसके जिस्म मे भरपूर मस्ती च्छाई थी & उसे अभी ही बहुत सुकून का एहसास हो रहा था.

"आन्न्‍नणणनह..!",उसने अपने होंठ विजयंत के होंठो की गिरफ़्त से छुड़ाते हुए सीट से सर उठा उसे चूमते हुए लंबी आह भरी & झाड़ गयी.विजयंत ने भी मौका देखा अपना वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया.दोनो लंबी-2 साँसे लेते 1 दूसरे को चूमते वैसे ही पड़े रहे.सोनिया के चेहरे पे बहुत सुकून था.खुमारी उतरने के बाद भी उसके दिल का वो कोना उसे लंड को बाहर ना निकालने देने की बात कर रहा था मगर ये मुमकिन तो था नही.

विजयंत ने लंड खींचा & फिर डॅशबोर्ड पे पड़े बॉक्स से नॅपकिन निकाल सोनिया की चूत & जाँघो से उसके & अपने मिले-जुले रस को साफ किया & उसकी पॅंटी उसे पहना दी & सीट उपर कर दी.सोनिया के दिल मे प्यार का सैलाब उमड़ पड़ा & वो सुबक्ते हुए विजयंत से लिपट गयी & उसके चेहरे को चूमने लगी.वो उसे गले से लगाए हुए उसके ब्रा को टॉप को ठीक करने लगा फिर उसे चूम के खुद से लगा किया & अपनी पॅंट बंद कर गाड़ी आगे बढ़ा दी.उसने उसे उसके घर पे इस वादे के साथ छ्चोड़ा कि जब तक वो बॅंगलुर मे है यानी अगले 2 दिनो तक,तब तक सोनिया हर रोज़ कुच्छ वक़्त उसके साथ ज़रूर गुज़ारेगी.

उसके घर से कार आगे बढ़ाते हुए वो बहुत खुश था,उसकी चालाकी भरी बातो के जाल मे ये चिड़िया आख़िर फँस ही गयी थी.अब बस मौका देख वो ब्रिज की शादीशुदा ज़िंदगी मे आग लगा देगा.उसे उमीद थी कि इस बात का असर ब्रिज के बिज़्नेस पे भी ज़रूर पड़ेगा.जहा ब्रिज विजयंत से केवल हर सौदे पे लड़ के जीतना चाहता था वही विजयंत उसके & उसकी कंपनी के वजूद को ही पूरी तरह से मिटा देना चाहता था.

विजयंत 1 चिड़िया को फाँस के तो बहुत खुश था लेकिन उसे पता नही था कि उधर डेवाले मे दूसरी चिड़िया उसके हाथो से निकल चुकी है.

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क्रमशः.......

JAAL paart--18

gataank se aage.

use bistar pe lita vo uski choochiyo se khelne laga.unhe dabate hue unke nipples ko chusta fir unhe chumte hue nipples ko ungliyo me bhar masla deta.rambha ke jism me ab masti ka sailab daud raha tha,"..aanhhhh..nahi..paresh..jao..chood do..!"uski ye na-nukar paresh ke josh ko & badha rahi thi.usne uski chut me ungli ghusa di & uski bagal me let uski chahti chuste hue zor-2 se ragadne laga.kuch hi der me din bhar ki pyasi rambha jhad gayi & fir karwat badal paresh ki or pith kar takiye me munh chhupa subakne lagi.

paresh ne fauran kapde utare & us epeechhe se baaho me bhar uske chehre ko apni or kiya,"offoh!kya baat hai?..aaj tum itni jhijhak kyu rahi ho..jabki tumhare jism ko to ye sab bha raha hai.",usne uski gili chut me 2 unglia ghuas ke bahar nikal unpe laga bahut sa ras dikhaya & fir use chat liya.

"main koi aisi-vaisi ladki nahi hu..us roz meri kamzori ka fayda utahya aapne & aaj zabardasti kar rahe hain meer sath.",ab vo mehra khandan ki bahu banane vali thi & nahi chahti thi ki aage kabhi bhi koi mard uske charitra pe ungli utha sake.vo ye pakka kar lena chati thi ki aage kabhi bhi agar uske purane aashiqo me se koi uski raah me roda atkaye to vo ye sabit kar de ki unhone uske sath manmani ki thi,vo apni marzi se unke sath nahi soyi thi.

"meri jaan..tumhare jism ko to ye zabardasti nahi lag rahi..ruko abhi tumhari shikayat door karta hu.",paresh ne use seedha kiya & tezi se uski janghe faila unke aach aa uski chut se apna munh laga diya.rambha fir se hawa me udne lagi.vo aahe bhar rahi thi & paresh uski chut se behte ras ko chate ja raha tha.rambha uske baalo ko bhinchti uske munh ko apni chut pe dabane lagi & apni kamar uchkane lagi.paresh bhi uske daen ko ungli se chhedta uski chut me jibh ghuma raha tha.

jaise hi rambha jhadi paresh uske upar aaya & apna mota lund uski chut me ghusa diya.gili chut me lund 1 jhatke me hi andar srak gaya,"..aahhhhh..nahi..please..mujhe mat chodo...aannnnhhhhhh..dard hota hai..nikal lo use..!",rambha aankhe badn kiye sar ko jhatak rahi thi & paresh ke seene pe hath rakh use dhakel rahi thi.paersh ne aisi chudai pehle kabhi nahi ki thi & uska josh ab abhut badh gaya tha.usne apna bhari-bharkam sharir rambha ke upar lita diya & uske seene ke ubharo ko beadrdi se masalta hua uske gaal chatne laga.

"janeman,kya nikal lu main?..zara naam to lo uska!",usne uske hotho ko chatate hue uski choochiyo ko masla to rambha neaahe bharte hue fir se munh fera.

"apne lund ko nikal lo..oooowwwwwwww..!",bahut israr ke baad usne paersh ke ang ka naam liya.is baat ne aag me ghee ka kaam kiya & paresh ke dhakke aur tez ho gaye.

"kaha se nikalu?..rambha darling ye bhi to batao!",vo uski choochiyo ko chus raha tha.

"meri chut se nikalo..mat chodo mujhe .....aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh..!",rambha ke munh se ango ka naam sun vo pagal ho gaya tha & bahut shdid dhakke laga raha tha.rambha ne bhi suki kamar ko tango me jakad liya tha & uske seene ko noch rahi thi.paresh ke mote lund ne use kuchh hi der me jannat me pahuncha diya & vo jhad gayi.uske peechhe-2 paresh bhi apni manzil pe pahuncha & apna virya uski chut me bharne laga.

"Chhodo mujhe..!",Paresh ne sikuda lund Rambha ki chut se khinch use baaho me bharna chaha to usne ruwansi shakl banake use pare dhakel diya,"..tumne zabardasti ki hai mere sath!..koi kagaz-vagaz lene nahi aaye the tum bas apni hawas mitani thi tumhe!",chikhti rambha ko dekh paresh ki halat khasta ho gayi.rambha ne sach kaha tha,vo sham se 3-4 chakkar laga chuka tha magar har baar ghar band milta tha.

"n-nahi..aisa kuchh nahi hai..us din Vinod..-"

"main vinod ko bulati hu..vahi thik karega tumhe!",rambha chikhi to paresh gidgidane laga.

"are,rambha mujhse galti ho gayi..",rambha samajh gayi ki vo darpok kism ka insan hai.koi aur hota to kabhi nahi jhukta aise,"..main ja raha hu.ab nahi pareshan karunga tumhe..",paresh sar pe panv rakh ke bhaga vaha se.rambha ne darwaza band kiya & zor se thahaka lagaya.ye sab usne kewal isiliye kiya tha taki paresh use apni jagir samajhne ki galti na kare.rambha chahe kisi ke sath bhi soye,koi mard use apne hisab se chalane ki soche aisa use bardasht nahi tha.

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Vijayant Mehra Soniya ke kareeb aana chahta tha & iske liye mauko ki talash me rehta tha lekin jis roz usne soniya ki zindagi me toofan la diya us din usne to us se milne ki sochi bhi nahi thi.vo Bangalore kaam se gaya tha & vaha tabiyat thodi nasaz ho gayi.thik to vo 1 hi din me ho gaya lekin doctor ne use checkup ke liye agle roz bhi bulaya tha.vahi hospital me checkup karwa ke nikalte hue lift me vo soniya se takra gaya,"are soniya ji,what a pleasant surprise!aap yaha..sab khairiyat to hai?"

"hi!mr.mehra..meri maa bimar thi,unhi ki kuchh reports dikhane aayi thi.",soniya ne 1 sleeveless top & dhila-dhala long skirt pehna tha.ittefaq ki baat hai ki lift me unke siwa koi nahi tha.us tanhayi se soniya asahaj ho gayi.uska dil un gustakh kahaylo ko yaad karne laga jo vo humesha vijayant ko leke sochta tha.tabhi lift ruk gayi & andar ki batti bujh gayi,"are ye kya hua?lift kyu ruk gayi?",soniya ghabra gayi thi.

"don't worry!",vijayant ne mobile on kar lift me laga emergency button daba ke speaker me lift rukne ki baat batayi.

"sir,kuchh hi der me lift chalu ho jayegi.aap ghabraiye mat.humare aadmi use chalu karne chale gaye hain."

"mujhe ghutan ho rahi hai..kab chalu hogi ye?",soniya bechain ho rahi thi.vijayant ne bayi banh ke ghere me use tham liya.

"ghabraiye mat..",usne mobile on kiya & uski roshni me soniya ne uske chehre ko dekha.jismo ki nazdiki,darr ka mahaul & tanhai,shayad sabhi ka asar 1 sath hua.soniya bhi vijayant ko dekhe ja rahi thi.vijayant mobile ki roshni badn nahi hone de raha tha & soniya ki aankho me aankhe dale khada tha.dono ko hi pata nahi chala ki kab vijayant ke honth neeche jhuke & soniya ke upar hote hue khul gaye.

vijayant ne use agosh me kas uske gulabi labo se apne lab chipka diye.soniya ne bhi khud ko uski baaho me dhila chhod diya tha.dono puri shiddat se 1 dusre ko chum rahe the & jab vijayant ne apni jibh uske munh me ghusai to soniya ne use nahi roka.

"pinggggg..!",avaz ke sath batti jali & lift chal padi.soniya hosh me aayi & vijayant se chhitak gayi.vijayant bhi achanak hui is baat se thoda asahaj hua tha & chup-chap khada tha.soniya ko ehsas hua ki usne abhi-2 kya kiya tha & uski aankho se aansu chhalak pade.vo dasve floor se chale the & lift navi & aathvi manzil ke beech fans gayi thi.dobara chalne ke baad agli manzil pe kuchh log chadhe & soniya ne apne aansuo ko chhipane ke liye apne bag se chashma nikal ke pehan liya.

logo ki maujoodgi ke chalte vijayant us se baat nahi kar pa raha tha.ground floor pe pahunchte hi saoniya tezi se nikli & aage badh gayi.vijayant janta tha ki yaha baat karne se vo logo ki nazro me aa sakte hain & uska khel shuru hone se pehle hi bigad sakta tha.soniya tezi se hospital ke main gate se paidal hi bahar ja rahi thi.vijayant ne apne driver se car ki chabhi li & soniya ke peechhe nikal gaya.

"soniya,please meri baat suno!",soniya hospital se nikal kuchh duri pe use paidal jati dikh gayi thi.

"mujhe akela chhod do & mera peechha mat karo!",vo gusse se bol vaise hi chalti rahi.sadak pe utna traffic nahi thi magar vo puri sunsan bhi nahi thi.vijayant ne soniya ki banh pakdi & use khicnh ke gadi me bitha diya & darwaza lock kar diya,"ye kya badtamizi hai!",soniya ne chashma utara to uske aansuo se gile gaal & laal aankhe vijayant ko dikhayi di.usne bina kuchh bole car aage badhayi & 1thodi der baad 1 sunsan raste pe rok di.

soniya munh fere baithi thi.vijayant ne uska chehra apni or ghumaya & uske aansuo ko apne hotho se saaf karne laga,"mujhe chhodo..hato..vijayant..!",vo chikhi lekin vijayant new use baaho me kas liya & uske baal pakad uske chehre ko apne chehre ke samne use khud se nazre milane pe majbura kar diya.

"kab tak bhagogi,soniya?..& kya khud se bhag sakti ho?..jo bhi hua kya usme tumhari marzi nahi thi..?",vijayant ki baat sahi thi & soniya ki aankho se 1 baar fir aansoo beh nikale.

"nahi..darling..",usne uske aansu pi liye,"..please royo mat..kyu ro rahi ho?..",vo uske chehre ko chume ja raha tha.

"please,vijayant ye sahi nahi hai..!",soniya ne mehsus kiya ki is halat me bhi uska jism vijayant ki harkato se mast ho raha tha.

"kya sahi nahi hai..ki hum dono 1 dusre ko itna chahte hain ki kaynat bhi hume milana chahti hai?..nahi to aaj hum yu kyu takraye?..ya fir ye sahi nahi hai ki hum dono 1 dusre ki taraf pehle din se khinchte rahe hain..nahi to apne dushman ki biwi se karibi kya mera shauk hai?!",vijayant ne use jhinjhoda.

"soniya,is haqeeqat se mat bhago ki hum dono 1 dusre ko chahte hain..kyu..kaise..ye hume nahi pata & main parwah bhi nahi karta in sawalo ki!..& kya galat hai ki hum dono shadishuda hain & apne-2 sathiyo se bewafai kar rahe hain?..haan,ye sahi hai..hum kar rahe hain galti..lekin hum unhe sab bata ke & dard hi denge na.abhi vo anjan hain & khush hain..hum kyu unhe dukhi karen?"

"to aaj ke baad hum nahi milenge,vijayant..-"

"-..& andar hi andar ghulte rahenge.nahi,mujhe manzur nahi ye..main nahi reh sakta tumhare bina!main tumhe Brij ko chhodne ko nahi keh raha naa hi main Rita se alag hounga lekin main tumse door bhi nahi reh sakta.",vijayant ne apne honth soniya ke hotho se sata diye & soniya bhi use chumne lagi.vo kiss tod use rokne ki koshish karti lekin vijayant uski ansuni kar use fir chumne lagta & thodi hi der me soniya madhosh hone lagi.vijayant ne mauka dekha uski seat ka lever khinch seat ko neeche giraya & soniya ko baaho me bhar uske upar chadh use chumne laga.

uska hath uske top me ghus uske chikne pet ko sehla raha tha.soniya aur madhosh hjo gayi,"..nahi..vijayant please..aahhhhh....!",soniya ke top me hath ghusa uski gardan chumte vijayant ne uski chhatiyo ko dabcoh liya tha.soniya ke dil ka vo kona ab khushi se use & badhawa de raha tha..haan lene do use chhatiya apone hatho me..bahut maza aayega..jab uski dadhi tum apne seene pe mehsus karogi..yumhare nipples uske munh me honge..

& jaise uske dil ki aavaz vijayant ne sun li.vo ab sach me uski chhatiyo se khel raha tha.top & bra upar kar vo unhe apne munh me bhar chus raha tha.soniya ki chut gili ho gayi thi.vijayant ka daya hath uski skirt me ghus uski jangho ko sehlaye ja raha tha.uske dil ka vo shaitan kona ab use aur uksa raha tha..pakdo uska lund..dekho uski sakhti tuma pane jism pe mehsus kar nahi rahi kya?..pant ke bavjood vo tumahre tan ko jalaye ja raha hai apni garmi se..pakdo..pakdo..!

soniya ne hath neeche le ja vijayant ke lund ko dabochte hue apne honth uske sar ko upar kar uske garm labo se laga diye.vijayant samajh gaya ki chidiya ab puri tarah se uske jaal me phans chuki hai.usne fauran zip khol lund bahar nikal uske hathme de diya & khud daye hath ko uski panty me ghusa uski gili chut ko & gila karne me jut gaya.

kuchh hi palo me car ki seat pe chhatpatati soniya jhad rahi thi.vijayant ne 1 hath se hi apni pant dhili ki to soniya ne use neeche sarka diya.vijayant ne uski panty utari & uske upar aa gaya.vijayant ka lund brij ke lund se keval aadha inch hi bada tha lekin uski motai uske mukable kahi zyada thi & jab usne sar uthake neeche apni chut me pehli baar vijayant ke lund ko ghuste dekhti soniya ki chut me lund ko andar dhakela to vo dard ke mare chikh padi.

vijaynat uske upar let gaya & uske hotho ko chumte hue uski aaho ko dafn kar dhakke lagane laga.soniya uski pith & gand ko bechaini se sehlati,kharonchti bahut maze ka ehsas kar rahi thi.ye maza is tarah sadak ke kinare khadi car me chudne ke romanch ka tha, ya fir pati se chhup bewafai karne ka jisme pakde jane ka bhi darr tha,uska tha use pata nahi tha.use to ab bas is baat se matlab tha ki uske jism me bharpur masti chhayi thi & use abhi hi bahuit sukun ka ehsas ho raha tha.

"aannnnnnhhhhhhhhhhhh..!",usne apne honth vijayant ke hotho ki giraft se chhudate hue seat se sar utha use chumte hue lambi aah bhari & jhad gayi.vijayant ne bhi mauka dekha apna virya uski chut me chhod diya.dono lambi-2 sanse lete 1 dusre ko chumte vaise hi pade rahe.soniya ke chehre pe bahut sukun tha.khumari utarne ke bad bhi uske dil ka vo kona use lund ko bahar na nikalne dene ki baat kar raha tha magar ye mumkin to tha nahi.

vijayant ne lund khincha & fir dashboard pe pade box se napkin nikal soniya ki chut & jangho se uske & apne mile-jule ras ko saaf kiya & uski panty use pehna di & seat upar kar di.soniya ke dil me pyar ka sailab umad pada & vo subakte hue vijayant se lipat gayi & uske chehre ko chumne lagi.vo use gale se lagaye hue uske bra ko top ko thik karne laga fir use chum ke khud se laga kiya & apni pant band kar gadi aage badha di.usne use uske ghar pe is vade ke sath chhoda ki jab tak vo bangalore me hai yani agle 2 dino tak,tab tak soniya har roz kuchh waqt uske sath zarur guzaregi.

uske ghar se car aage badhate hue vo bahut khush tha,uski chalaki bhari baato ke jaal me ye chidiya aakhir fans hi gayi thi.ab bas mauka dekh vo brij ki shadishuda zindagi me aag laga dega.use umeed thi ki is baat ka asar brij ke business pe bhi zarur padega.jaha brij vijayant se keval har saude pe lad ke jeetna chahta tha vahi vijayant uske & uski company ke vajood ko hi puri tarah se mita dena chahta tha.

vijayant 1 chdiya ko phaans ke to bahut khush tha lekin use pata nahi tha ki udhar Devalay me dusri chidiya uske hatho se nikal chuki hai.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--19

गतान्क से आगे.

"क्या बात है!",जैसे ही रंभा सोनम के पास आके बैठी & अपना लंच-बॉक्स खोला,उसने उसे छेड़ा,"..आजकल लंच करने देर से आने लगी है,छ्चोड़ता नही क्या तेरा बॉस?",उसने उसे कोहनी मारी,"..उपर से सुना है कि आजकल शाम को अकेली रहती है उसके साथ.कही आजकल उसके दफ़्तर के साथ-2 उसके दिल का भी ख़याल तो नही रखने लगी?",बात तो सच थी & रंभा के गाल शर्म से लाल भी हो गये.

"चुप कर!",उसने सोनम का डब्बा अपनी ओर खींच लिया & उसकी सब्ज़ी खाने लगी,"..तुझे तो बस यही सूझता रहता है.काम बहुत है आजकल,कोई नये प्रॉजेक्ट की शुरुआत के चलते."

"कौन सा प्रॉजेक्ट है?"

"अभी शुरू नही हो रहा,अभी तो बस उसके टेंडर के फिगर्स तैय्यरी हो रही है."

"अच्छा,तो टेंडर के साथ-2 कही तेरा फिगर तो नही नापने लगता वो?",उसने उसे फिर छेड़ा.बात फिर सही थी.समीर मौका पाते ही उसे दबोच लेता था & प्यार करने लगता था.रंभा का दिल भी मदहोश हो जाता लेकिन उसने बड़ी मुश्किल से खुद को रोका हुआ था.वो अभी समीर को और तड़पाना चाहती थी.

"अच्छा!तेरा बॉस नपता है क्या तेरा फिगर?",उसने सहेली को वापस छेड़ा.

"अरे यार,कहा!हम तो चाहते हैं कि हुज़ूर ऐसा कुच्छ करें लेकिन वो तो साला देखता ही नही मेरी तरफ.अब सोचा की चलो वो नही सोचता तो उसे सोचने पे मजबूर करो तो साला बॅंगलुर भाग गया!वैसे टेंडर की रकम फाइनल हो गयी क्या?"

"नही यार अभी कहा & वैसे भी वो काम तो तेरे बॉस का है.",काम तो विजयंत का था लेकिन सोनम को डर था कि कही विजयंत रकम वाले काग़ज़ को उसकी आँखो तक पहुचने ही ना दे क्यूकी ऐसे मामलो मे वो कुच्छ ज़्यादा ही सावधान रहता था & इसीलिए वो रंभा से ये बात जानना चाह रही थी,"..अच्छा ये बता सोनम,कैसे सोचने पे मजबूर करती उसे?",उसने शरारत से पुछा.

"अरे यार! बस ये 2 बटन खोल के..",उसने अपनी शर्ट की ओर इशारा किया,"..उसके सामने थोड़ा झुक के कॉफी सर्व कर देती बस अपनेआप मेरा फिगर नापने लगता..आँखो से!",दोनो सहेलिया हंसते हुए खाना खाने मे मशगूल हो गयी.

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"उफफफफ्फ़..छ्चोड़ो ना!तुम्हे तो बस हर वक़्त यही सब सूझता रहता है!",शाम का काम ख़त्म हो चुका था & ऑफीस के सोफे पे समीर & रंभा साथ-2 बैठे थे.समीर ने बाई तरफ बैठी रंभा को बाहो मे कसा हुआ था & उसे चूम रहा था.उसका दाया हाथ रंभा की शर्ट के उपर से ही उसकी कमर को सहला रहा था.

"तुम्हे देख & कुच्छ सूझ सकता है भला!",आज रंभा को समीर के इरादे और दिनो से ज़्यादा बुरे लग रहे थे.आज उसके हाथ उसकी कमर & पीठ पे कुच्छ ज़्यादा ही फिसल रहे थे.उसने उसकी कमर को जकड़ा & फिर से चूम लिया.उसके होंठ रंभा के चेहरे से घूमते हुए उसके गालो पे आए & वाहा से उसकी गर्दन पे.रंभा को बहुत अच्छा लग रहा था यू अपने महबूब से प्यार करवाना कि तभी उसने महसूस किया की समेर के होंठ उसकी गर्दन से नीचे पहुँच गये हैं & उसकी शर्ट के बंद बटन के उपर पहुचने वाले ही हैं.ठीक उसी वक़्त समीर का हाथ भी उसकी पीठ से आगे आने लगा.रंभा उसका इरादा समझ गयी & उसे धकेल के उठ खड़ी हुई.

"आइ'म सॉरी,डार्लिंग!",समीर फ़ौरन उसके पास आ गया & उसका चेहरा थाम लिया.

"समीर,मुझे ये सब पसंद नही.",रंभा ने सफाई से झूठ बोला.

"आइ'म सॉरी,रंभा.मैं बहक गया था पर क्या करू प्यार करता हू तुमसे!"

"मैं जानती हू..",रंभा ने मुँह उसकी तरफ किया & उसके चेहरे को अपने कोमल हाथो मे भर लिया,"..मैं भी तुम्हे बहुत चाहती हू..तुमसे दूर जाना मुझे भी अच्छा नही लगता..दिल करता है बस यू ही तुम्हारी बाहो मे बैठी रहू..मगर डर लगता है..",उसने संजीदा शक्ल बना के मुँह 1 तरफ घुमा लिया,"..शादी से पहले मुझे ये सब ठीक नही लगता समीर.तुम्हारे लिए शायद बहुत बड़ी बात नही मगर मैं तो 1 लड़की हू,मुझे तो सोचना पड़ता है.",उसने सर झुका लिया.

"ओके!मेडम..",उसने उसकी कमर मे हाथ थाम आगे खींचा & बाँहो मे भर लिया तो रंभा ने उसके सीने पे सर रख दिया,"..अब इस सब से आगे सुहागरात को ही बढ़ुंगा.तो बोलो कब करनी है शादी?"

"क्या?!",रंभा चौंक पड़ी & अपना सर सीने से उठाया.

"हां..कब करनी है शादी?"

"देखो,मज़ाक मत करो."

"अच्छा भाई!",उसने उसे बाहो से आज़ाद किया & कमरे के 1 कोने मे रखे कोट हॅंगर पे टाँगे अपने कोट की अंदर की जेब से कुच्छ निकाला & रंभा के करीब आया,उसका बाया हाथ अपने हाथ मे लिया & उसकी रिंग फिंगर पे हीरे की 1 बड़ी सी अंगूठी पहना दी,"..अब बोलो कब करनी है शादी?"

"समीर..",रंभा ने चौंक के मुँह पे हाथ रख दिया,"..ये..मैं..मेरी समझ मे नही आता..ये तो बहुत कीमती है.."

"तुमसे ज़्यादा नही मेरी जान..जल्दी जवाब दो कब करनी है शादी?"

"समीर,मैं इसे कैसे लू?"

"ले तो ली..तुम मेरी मगेतर हो अभी से इस वक़्त से समझी & ये अंगूठी तुम्हारा हक़ है..अब जल्दी जवाब दो यार ..कब करनी है शादी?"

"समीर..",रंभा की आँखे भर आई थी.समीर की हरकत से वो हैरान तो सच मे हुई थी लेकिन ये आँसू तो बस उसकी अदाकरी का कमाल थे.समीर ने उसे सीने से लगा लिया & कुच्छ पलो बाद जब उसे लगा कि वो संभाल गयी है तो अपना सवाल दोहराया.

"जब तुम्हारे मम्मी-डॅडी चाहें.",रांभ मुस्कुराइ & अपने होंठ उपर कर दिए.समीर ने अपनी मंगेतर के होंठो को अपने होंठो से भिगोना शुरू किया & दोनो प्रेमी 1 दूसरे के आगोश मे बँधे अपनी दुनिया मे खो गये.

"नही!हरगिज़ नही..तुम्हारा दिमाग़ खराब हो गया है!",विजयंत मेहरा 1 शांत स्वाभाव का इंसान था & शायद ही उसे किसी ने आपा खोते देखा था लेकिन समीर की बात ने आज उसके सब्र को तोड़ दिया था,"..वो 1 मामूली सेक्रेटरी है,उसे इस घर की बहू बनाओगे तुम!"

"प्लीज़,विजयंत.शांत हो जाओ.",रीता उसके कंधे को थाम उसे समझाने लगी,"..हम सब समझाएँगे इसे.",शिप्रा & प्रणव खामोशी से सब देख रहे थे,"समीर बेटा,ये क्या बच्पना है?"

"मोम,मैने सब सोच-समझ के ये फ़ैसला लिया है.",समीर बिल्कुल शांत था.

"कुच्छ सोचा-समझा नही है तुमने!",विजयंत फिर चीखा.उसे यकीन नही हो रहा था कि समीर जैसा समझदार लड़का ऐसा काम कर रहा था मगर क्या उसके गुस्से का कारण सिर्फ़ समीर का 1 मामूली हैसियत की लड़की से शादी करने का फिसला था?..नही.वो बौखला गया था कि जिस लड़की पे उसकी निगाह थी उसे उसका अपना बेटा उड़ा ले जा रहा था.

"डॅड,मुझे समझ नही आ रहा कि आख़िर रंभा मे ऐसी क्या कमी है जो आप इतना नाराज़ हो रहे हैं!"

"समीर,अब मैं और बहस नही करूँगा.हम सब इस शादी के खिलाफ हैं.क्या अब भी तुम्हारा फ़ैसला वही है?",विजयंत अब खुद पे काबू पाता दिख रहा था.

"जी हां."

"तो फिर इस घर मे तुम्हारे लिए कोई जगह नही है."

"ओके."

"और ट्रस्ट के दरवाज़े भी तुम्हारे लिए बंद हो जाते हैं."

"डॅडी,प्लीज़ ये क्या कह रहे हैं आप?",देर से खामोश बैठा प्रणव विजयंत के पास आ गया."

"हां,डॅड.समीर मान जाएगा.प्लीज़ ऐसे मत कहिए!",शिप्रा भी अपने पिता को समझाने लगी.

"प्लीज़ शिप्रा,मेरी वकालत मत करो.मुझे इनका हर फ़ैसला मंज़ूर है."

"पर भाई,तुम..तुम क्या करोगे?..कहा जाओगे?",उसी वक़्त रीता रोने लगी & शिप्रा मा को समझाने चली गयी.

"मुझे आप दादाजी के पंचमहल वाले अग्री बिज़्नेस के काग़ज़ात दे दीजिए,मैं यहा से चला जाऊँगा."

"तो सब सोचा हुआ है तुमने.",विजयंत के अंदर जैसे कुच्छ टूट गया.

"समीर,पागल हो गये हो क्या!",प्रणव ने साले को समझाने की कोशिश की.

"ठीक है.कल सारे काग़ज़ात तुम्हे दे दिए जाएँगे."

"डॅडी,प्लीज़..समीर समझ जाएगा..& अभी ये कैसे जा सकता है..मानपुर वाले टेंडर की तैयारी करनी है इसे..अब वक़्त ही कितना बचा है..प्लीज़ तब तक का वक़्त दीजिए इसे!"

"वो टेंडर अब तुम्हारी ज़िम्मेदारी है,प्रणव.कल मिस्टर.समीर मेहरा ग्रूप को छ्चोड़ेंगे & अब पंचमहल का अग्री बिज़्नेस संभालेंगे.उनकी सारी ज़िम्मेदारिया अब तुम उठाओगे.",विजयंत की भारी आवज़ मे फौलाद की खनक थी & सभी जानते थे की अब उसका फ़ैसला बदलना नामुमकिन है.

"थॅंक्स.",समीर वाहा से चला गया.शिप्रा रोती हुई मा को गले से लगाए खड़ी थी,विजयंत घुमा & अपने कमरे मे चला गया.उस तनाव भरे माहौल मे प्रणव ने अपनी बीवी को देखा & शिप्रा ने प्रणव को & दोनो 1 साथ मुस्कुरा दिए.

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"समीर,ये क्या कर आए हो तुम!",रंभा बहुत परेशान हो गयी,"..इस तरह से घर नही छ्चोड़ सकते तुम!"

"क्यू नही छ्चोड़ सकता?जहा तुम्हारी कद्र नही वो जगह मेरा घर नही है रंभा!",अजीब मुसीबत आ गयी थी रंभा के सर पे.कहा तो वो मेहरा खानदान की बहू बनने के ख्वाब देख रही थी & कहा अब उनका बेटा ही घर छ्चोड़ आया था!

"देखो,समीर.तुम नही समझ सकते मगर मैं समझती हू परिवार की मा-बाप की अहमियत.मुझे जानते हुए तुम्हे बस 4 दिन हुए हैं & 4 दिन के इस रिश्ते के लिए तुम उन्हे छ्चोड़ रहे हो!..नही..मैं तुम्हारे परिवार के टूटने का कारण नही बनना चाहती."

"प्लीज़,रंभा.अब तुम तो मेरा साथ ना छ्चोड़ो.तुम्हारे बिना मैं जी नही सकता.",उसने उसे बाहो मे भर लिया,"..& तुम्हारे लिए ही उन्हे छ्चोड़ आया हू."

"मगर अब करोगे क्या?..हू जाएँगे कहा?"

"पंचमहल. मेमेरे दादाजी का 1 अग्री-बिज़्नेस था जो उन्होने अपनी वसीयत मे मेरे नाम कर दिया था.अब उसी को संभालूँगा.उस धंधे का ट्रस्ट के कारोबार से कोई सरोकार नही है & हम वाहा चैन से रहेंगे.",उसने उसके चेहरे को हाथो मे भरा,"..वादा है मेरा,तुम्हे कोई तकलीफ़ नही होने दूँगा.",इस बात से रंभा को थोड़ा चैन पड़ा,यानी उसके सपने अभी भी पूरे हो सकते थे.

"तकलीफो से नही डरती लेकिन यू तुम्हारा घर छ्चोड़ना..-",समीर ने उसके होंठो पे उंगली रख दी.

"मेरे साथ पंचमहल चलने को तैय्यार हो?",रंभा ने हां मे सर हिलाया.

"तो फ़ैसला हो गया.हम कल ही वाहा चले जाएँगे."

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"ये मीटिंग अचानक बुलाई गयी है क्यूकी मुझे 1 एलान करना है.",विजयंत ट्रस्ट के दफ़्तर के कान्फररन्स हॉल मे ग्रूप के सभी आला अफसरो से मुखातिब था,"..आज से मिस्टर.समीर मेहरा हमारे ग्रूप को छ्चोड़ के जा रहे हैं..",हॉल मे सवालो & हैरत का शोर गूँज उठा.

"वो पंचमहल जा रहे हैं अग्री-बिज़्नेस संभालने.",उसने हाथ उठाके संबको शांत रहने का इशारा किया,"..आप सभी को ये चिंता है कि उनकी जगह लेगा कौन..है कोई इतना काबिल..तो मेरा जवाब है कि है 1 ऐसा इंसान उस से ज़्यादा काबिल जो पिच्छले कुच्छ सालो से हमारे साथ काम कर रहा है.लॅडीस & गेंटल्मन,आज से मिस्टर.मेहरा की जगह मिस्टर.प्रणव कपूर लेंगे.",विजयंत ने ताली बजाई तो इशारा समझ सभी ने उसका साथ दिया.

"मिस्टर.कपूर..",प्रणव खड़ा हुआ & ससुर के पास आया,"..ये सारे प्रॉजेक्ट्स अब आपकी ज़िम्मेदारी हैं..",उसने अपने सामने टेबल पे रखे फाइल्स & पेन ड्राइव्स की ओर इशारा किया,"..& मानपुर के टेंडर की तैय्यारि भी अब आप ही करेंगे."

रंभा ने . को फोन कर सब बता दिया था & कुच्छ ही देर मे पूरे ऑफीस & फिर शहर मे ये बात जंगल की आग की तरह फैल गयी थी कि समीर मेहरा ने 1 सेक्रेटरी के लिए ग्रूप को लात मार दी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--19

gataank se aage.

"kya baat hai!",jaise hi rambha Sonam ke paas aake baithi & apna lunch-box khola,usne use chheda,"..aajkal lunch karne der se aane lagi hai,chhodta nahi kya tera boss?",usne use kohni mari,"..upar se suna hai ki aajkal sham ko akeli rehti hai uske sath.kahi aajkal uske daftar ke sath-2 uske dil ka bhi khayal to nahi rakhne lagi?",baat to sach thi & rambha ke gaal sharm se laal bhi ho gaye.

"chup kar!",usne sonam ka dabba apni or khinch liya & uski sabzi khane lagi,"..tujhe to bas yehi sujhta rehta hai.kaam bahut hai aajkal,koi naye project ki shuruat ke chalte."

"kaun sa project hai?"

"abhi shuru nahi ho raha,abhi to bas uske tender ke figures taiyyari ho rahi hai."

"achha,to tender ke sath-2 kahi tera figure to nahi naapne lagta vo?",usne use fir chheda.baat fir sahi thi.sameer mauka pate hi use daboch leta tha & pyar karne lagta tha.rambha ka dil bhi madhosh ho jata lekin usne badi mushkil se khud ko roka hua tha.vo abhi sameer ko aur tadpana chahti thi.

"achha!tera boss napta hai kya tera figure?",usne saheli ko vapas chheda.

"are yaar,kaha!hum to chahte hain ki huzur aisa kuchh karen lekin vo to sala dekhta hi nahi meri taraf.ab socha ki chalo vo nahi sochta to use sochne pe majbur karo to sala bangalore bhag gaya!vaise tender ki rakam final ho gayi kya?"

"nahi yaar abhi kaha & vaise bhi vo kaam to tere boss ka hai.",kaam to vijayant ka tha lekin sonam ko darr tha ki kahi vijayant rakam vale kagaz ko uski aankho tak pahuchane hi na de kyuki aise mamlo me vo kuchh zyada hi savdhan rehta tha & isiliye vo rambha se ye baat jaanana chah rahi thi,"..achha ye bata sonam,kaise sochne pe majbur karti use?",usne shararat se puchha.

"are yaar! bas ye 2 button khol ke..",usne apni shirt ki or ishara kiya,"..uske samne thoda jhuk ke coffee serve kar deti bas apneaap mera figure naapne lagta..aankho se!",dono saheliya hanste hue khana khane me mashgul ho gayi.

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"ufffff..chhodo na!tumhe to bas har waqt yehi sab sujhta rehta hai!",sham ka kaam khatm ho chuka tha & office ke sofe pe Sameer & rambha sath-2 baithe the.sameer ne bayi taraf baithi rambha ko baaho me kasa hua tha & use chum raha tha.uska daya hath rambha ki shirt ke upar se hi uski kamar ko sehla raha tha.

"tumhe dekh & kuchh sujh sakta hai bhala!",aaj rambha ko sameer ke irade aur dino se zyada bure lag rahe the.aaj uske hath uski kamar & pith pe kuchh zyada hi fisal rahe the.usne uski kamar ko jakda & fir se chum liya.uske honth rambha ke chehre se ghumte hue uske gaalo pe aaye & vaha se uski gardan pe.rambha ko bahut achha lag raha tha yu apne mehboob se pyar karwana ki tabhi usne mehsus kiya ki samer ke honth uski gardan se neeche pahunch gaye hain & uski shirt ke band button ke upar pahuchane vale hi hain.thik usi waqt sameer ka hath bhi uski pith se aage aane laga.rambha uska irada samjh gayi & use dhakel ke uth khadi hui.

"i'm sorry,darling!",sameer fauran uske paas aa gaya & uska chehra tham liya.

"sameer,mujhe ye sab pasand nahi.",rambha ne safai se jhuth bola.

"i'm sorry,rambha.main behak gaya tha par kya karu pyar karta hu tumse!"

"main janti hu..",rambha ne munh uski taraf kiya & uske chehre ko apne komal hatho me bhar liya,"..main bhi tumhe bahut chahti hu..tumse door jana mujhe bhi achha nahi lagta..dil karta hai bas yu hi tumhari baaho me baithi rahu..magar darr lagta hai..",usne sanjida shakl bana ke munh 1 taraf ghuma liya,"..shadi se pehle mujhe ye sab thik nahi lagta sameer.tumhare liye shayad bahut badi baat nahi magar main to 1 ladki hu,mujhe to sochna padta hai.",usne sar jhuka liya.

"ok!madam..",usne uski kamar me hath tham aage khincha & bahao me bhar liya to rambha ne uske seene pe sar rakh diya,"..ab is sab se aage suhagraat ko hi badhunga.to bolo kab karni hai shadi?"

"kya?!",rambha chaunk padi & apna sar seene se uthaya.

"haan..kab karni hai shadi?"

"dekho,mazak mat karo."

"achha bhai!",usne use baaho se aazad kiya & kamre ke 1 kone me rakhe coat hanger pe tange apne coat ki andar ki jeb se kuchh nikala & rambha ke kareeb aaya,uska baya hath apne hath me liya & uski ring finger pe heere ki 1 badi si anguthi pehna di,"..ab bolo kab karni hai shadi?"

"sameer..",rambha ne chaunk ke munh pe hath rakh diya,"..ye..main..meri samajh me nahji aata..ye to bahut keemati hai.."

"tumse zyada nahi meri jaan..jaldi jawab do kab karni hai shadi?"

"sameer,main ise kaise lu?"

"le to li..tum meri magetar ho abhi se is waqt se samjhi & ye anguthi tumhara haq hai..ab jaldi jawab do yaar ..kab karni hai shadi?"

"sameer..",rambha ki aankhe bhar aayi thi.sameer ki harkat se vo hairan to sach me hui thi lekin ye aansu to bas uski adakri ka kamaal the.sameer ne use seene se laga liya & kuchh palo baad jab use laga ki vo sambhal gayi hai to apna sawal dohraya.

"jab tumhare mummy-daddy chahen.",rambh muskurayi & apne honth upar kar diye.sameer ne apni mangetar ke hotho ko apne hotho se bhigona shuru kiya & dono premi 1 dusre ke agosh me bandhe apni duniya me kho gaye.

"Nahi!hargiz nahi..tumhara dimagh kharab ho gaya hai!",Vijayant Mehra 1 shant swabhav ka insan tha & shayad hi use kisi ne aapa khote dekha tha lekin Sameer ki baat ne aaj uske sabr ko tod diya tha,"..vo 1 mamuli secretary hai,use is ghar ki bahu banaoge tum!"

"please,vijayant.shant ho jao.",Rita uske kandhe ko tham use samjhane lagi,"..hum sab samjhayenge ise.",Shipra & Pranav khamoshi se sab dekh rahe the,"sameer beta,ye kya bachpana hai?"

"mom,maine sab soch-samajh ke ye faisla liya hai.",sameer bilkul shant tha.

"kuchh socha-samjha nahi hai tumne!",vijayant fir cheekha.use yakin nahi ho raha tha ki sameer jaisa samajhdar ladka aisa kaam kar raha tha magar kya uske gusse ka karan sirf sameer ka 1 mamuli haisiyat ki ladki se shadi karne ka fisla tha?..nahi.vo baukhla gaya tha ki jis ladki pe uski nigah thi use uska apna beta uda le ja raha tha.

"dad,mujhe samajh nahi aa raha ki aakhir Rambha me aisi kya kami hai jo aap itna naraz ho rahe hain!"

"sameer,ab main aur bahas nahi karunga.hum sab is shadi ke khilaf hain.kya ab bhi tumhara faisla vahi hai?",vijayant ab khud pe kabu pata dikh raha tha.

"ji haan."

"to fir is ghar me tumhare liye koi jagah nahi hai."

"ok."

"aur Trust ke darwaze bhi tumhare liye band ho jate hain."

"daddy,please ye kya keh rahe hain aap?",der se khamosh baitha pranav vijayant ke paas aa gaya."

"haan,dad.sameer maan jayega.please aise mat kahiye!",shipra bhi apne pita ko samjhane lagi.

"please shipra,meri vakalat mat karo.mujhe inka har faisla manzoor hai."

"par bhai,tum..tum kya karoge?..kaha jaoge?",usi waqt rita rone lagi & shipra maa ko samjhane chali gayi.

"mujhe aap dadaji ke Panchmahal vale agri business ke kagzat de dijiye,main yaha se chala jaoonga."

"to sab socha hua hai tumne.",vijayant ke andar jaise kuchh toot gaya.

"sameer,pagal ho gaye ho kya!",pranav ne sale ko samjhane ki koshish ki.

"thik hai.kal sare kagzat tumhe de diye jayenge."

"daddy,please..sameer samajh jayega..& abhi ye kaise ja sakta hai..Manpur vale tender ki taiyyari akrni hai ise..ab waqt hi kitna bacha hai..please tab tak ka waqt dijiye ise!"

"vo tender ab tumhari zimmedari hai,pranav.kal Mr.Sameer Mehra group ko chhodenge & ab panchmahal ka agri business sambhalenge.unki sari zimmedariya ab tum uthaoge.",vijayant ki bhari aavz me faulad ki khanak thi & sabhi jante the ki ab uska faisla badalna namumkin hai.

"thanx.",sameer vaha se chala gaya.shipra roti hui maa ko gale se lagaye khadi thi,vijayant ghuma & apne kamre me chala gaya.us tanav bhare mahaul me pranav ne apni biwi ko dekha & shipra ne pranav ko & dono 1 sath muskura diye.

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"sameer,ye kya kar aaye ho tum!",rambha bahut pareshan ho gayi,"..is tarah se ghar nahi chhod sakte tum!"

"kyu nahi chhod sakta?jaha tumhari kadr nahi vo jagah mera ghar nahi hai rambha!",ajib musibat aa gayi thi rambha ke sar pe.kaha to vo mehra khandan ki bahu banae ke khwab dekh rahi thi & kaha ab unka beta hi ghar chhod aaya tha!

"dekho,sameer.tum nahis amajh sakte magar main samajhti hu parivar ki maa-baap ki ahmiyat.mujhe jante hue tumhe bas 4 din hue hain & 4 din ke is rishte ke liye tum unhe chhod rahe ho!..nahi..main tumhare parivar ke tootne ka karna nahi bana chahti."

"please,rambha.ab tum to mera sath na chhodo.tumahre bina main ji nahi sakta.",usne use baaho me bhar liya,"..& tumhare liye hi unhe chhod aaya hu."

"magar ab karoge kya?..hu jayenge kaha?"

"panchmahal.mere dadaji ka 1 agri-business tha jo unhone apni vasiyat me mere naam kar diya tha.ab usi ko sambhalunga.us dhandhe ka trust ke karobar se koi sarokar nahi hai & hum vaha chain se rahenge.",usne uske chehre ko hatho me bhara,"..vada hai mera,tumhe koi taklif nahi hone dunga.",is baat se rambha ko thoda chain pada,yani uske sapne abhi bhi pure ho sakte the.

"taklifo se nahi darti lekin yu tumhara ghar chhodna..-",sameer ne uske hotho pe ungli rakh di.

"mere sath panchmahal chalne ko taiyyar ho?",rambha ne haan me sar hilaya.

"to faisla ho gaya.hum kal hi vaha chale jayenge."

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"ye meeting achanak bulayi gayi hai kyuki mujhe 1 elan karna hai.",vijayant trust ke daftar ke confernece hall me group ke sabhi ala afsaro se mukhatib tha,"..aaj se mr.sameer mehra humare group ko chhod ke ja rahe hain..",hall me sawalo & hairat ka shor gunj utha.

"vo panchmahal ja rahe hain agri-business sambhalne.",usne hath uthake sambko shant rehne ka ishara kiya,"..aap sabhi ko ye chinta hai ki unki jagah lega kaun..hai koi itna kabil..to mera jawab hai ki hai 1 aisa insan us se zyada kabil jo pichhle kuchh salo se humare sath kaam kar raha hai.ladies & gentleman,aaj se mr.mehra ki jagah Mr.Pranav kapur lenge.",vijayant ne tali bajayi to ishara samjh sabhi ne uska sath diya.

"mr.kapur..",pranav khada hua & sasur ke paas aaya,"..ye sare projects ab aapki zimmedari hain..",usne apne samne table pe rakhe files & pen drives ki or ishara kiya,"..& manpur ke tender ki taiyyari bhi ab aap hi karenge."

rambha ne Sonam ko fone kar sab bata diya tha & kuchh hi der me pure office & fir shehar me ye baat jungli ki aag ki tarah phail gayi thi ki sameer mehra ne 1 secretary ke liye group ko laat maar di.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--20

गतान्क से आगे.

"आख़िरकार..",समीर ने रंभा को बाहो मे भर के चूम लिया.पंचमहल पहुँचते ही समीर ने रंभा से 1 मंदिर मे शादी कर ली थी & उसके बाद कुच्छ करीबी दोस्तो को दावत दी.दावत ख़त्म होते ही वो अपनी नयी-नवेली दुल्हन को ले उसके लिए खास फूलो से सजे होटेल के कमरे मे पहुँच गया था,"..तुम मेरी हो ही गयी."

रंभा ने गुलाबी रंग की नीले बॉर्डर की झीनी सारी & नीला ब्लाउस पहना था.उसके जिस्म पे पति के तोहफे मे दिए गये गहने थे.समीर ने उसकी नंगी कमर को बाहो मे कस लिया & उसे चूमने लगा.

"उम्म्म्म..समीर..कितने उतावले हो रहे हो!..कही भागी जा रही हूँ मैं?",उसने उसे खुद से अलग किया & मुस्कुराइ.

"शादी से पहले भी यही कहती थी & अभी भी यही राग अलाप रही हो!",समीर ने उसे फिर से बाहो मे भर लिया & उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा.रंभा उसकी गिरफ़्त मे कसमसाती फिर से अलग होने के लिए उसके अपने जिस्म पे घूमते गर्म हाथो को पकड़ने लगी तो समीर ने उसकी उंगलयो मे अपनी उंगलिया फँसा दी & कुपोबोर्ड के शीसे से उसकी पीठ लगा दी.कपबोर्ड बहुत बड़ा था & उसपे लगा शीशा भी.

समीर ने उसके हाथो को पकड़ उसके चेहरे के दोनो तरफ शीशे पे जमाते हुए उसे चूमना शुरू कर दिया.कुच्छ देर चूमने के बाद रंभा ने होंठ खींच चेहरा दाई तरफ घूमाते हुए अपना बाया गाल शीशे से सटा सिया तो समीर उसके बाए गाल को चूमने लगा.रंभा उसकी किस्सस से आहत हो अपने सर को दाए-बाए घुमाने लगी & समीर उसके चेहरे & होंठो को चूम उसे मस्त करता रहा.रंभा ने फिर से अलग होने की कोशिस की & अपने हाथ छुड़ाने की भी तो समीर ने अपने होंठो का रुख़ उसके दाए हाथ मे फँसे बाए हाथ की तरफ किया & उसे चूमने लगा.

रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली थी.समीर उसके बाए हाथ से होता हुआ उसकी चूड़ियो भरी कलाई से होता हुआ उसकी गुदाज़ बाँह पे आ गया था.उसके गर्म होंठ रंभा के तन की आग को & भड़का रहे थे.समीर ने उसकी चूड़िया निकाली & वही फर्श के गलिचे पे गिरा दी.उसके होंठ रंभा की मांसल उपरी बाँह से होते उसके कंधे & फिर गोरी गर्दन तक आ पहुँचे थे.रंभा ने सर उपर उठा अपनी गर्दन अपने पति को पेश कर दी.उसकी आतुर किस्सस उसे बहुत भली लग रही थी.समीर उसकी गर्दन को चूमते हुए उसकी ठुड्डी & फिर उसके रसीले होंठो तक आ पहुँचा.इस बार रंभा ने खुद ही अपनी जीभ उसके मुँह मे घुसा दी & वो खुशी से उसे चूसने लगा.

इतनी गर्मजोशी भरी किस ने नये-नवेले शादीशुदा जोड़े को जोश से पागल कर दिया.समीर अब अपने पाजामे मे क़ैद लंड को अपनी दुल्हन की चूत पे दबाने लगा.रंभा को उसकी इस हरकत ने बिल्कुल पागल कर दिया & उसकी चूत तो समीर के लंड के आभास से रस छ्चोड़ने लगी.अफ़रा-तफ़री मे सारी का पल्लू रंभा के सीने से ढालक गया था & ब्लाउस के गले मे से उसका बड़ा क्लीवेज उसकी तेज़ धड़कानो के साथ उपर-नीचे होते दिखाई देने लगा था.समीर अब रंभा के दाए कंधे से होता हुआ उसकी नर्म बाँह से फिसलता उसके दाए हाथ तक आ गया था & उसकी चूड़ियाँ उतार रहा था.रंभा की गोरी,गुदाज़ बाँह को चूमते हुए उसकी निगाह उसके क्लीवेज पे पड़ी & उसके होंठ उसी ओर बढ़ चले.उसके हाथो की पकड़ थोड़ी ढीली हुई & मौका पाते ही रंभा ने उसे परे धकेला & शीशे से हाथ दूसरी तरफ आ गयी.

समीर मुस्कुराता हुआ उसकी ओर बढ़ा तो उसने कदम पीछे बढ़ाए.रंभा का आँचल ढालाक जाने से उसके बड़े क्लीवेज के अलावा उसका सपाट पेट & गोल नाभि भी समीर को सॉफ दिख रहे थे & अपनी हसीन बीवी को इस दिलकश अंदाज़ मे देख उसके पाजामे मे खड़ा उसका लंड प्रेकुं बहाने लगा.उसने 1 कदम & आगे बढ़ाया तो रंभा ने भी 1 कदम & पीछे किया.उसे पता ही ना चला कि पीछे बिस्तर है & वो उस से टकरा गयी & लड़खड़ा गयी.खुद को संभालते हुए वो उसपे बैठ गयी.समीर उसके करीब आया & नीचे बैठ उसके दाए पाँव को हाथ मे पकड़ लिया.रंभा ने पाँव पीछे खींचा & दोनो पाँव बिस्तर पे चढ़ा लिए.समीर ने बाया घुटना बिस्तर पे रखा तो रंभा ने दोनो हाथ पीछे बिस्तर पे जमाए & पीछे खिसकी.दोनो 1 दूसरे को मुस्कुराते हुए देखे जा रहे थे.

समीर उसकी नज़रो से नज़रे मिलाए हुए नीचे झुका & रंभा के दाए पाँव को चूम लिया.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी & उसने पाँव पीछे खींचना चाहे लेकिन समीर ने उसके पाँव को मज़बूती से बिस्तर पे दबा दिया & उसे चूमता रहा.अपने हाथ पीच्चे जमाए आँखे बंद किए रंभा धीमी-2 आहें भरने लगी.उसके घुटने उपर उठे हुए थे & समीर उनपे हाथ रख उसके दोनो पाँवो को बारी-2 चूम रहा था.उसने दोनो हाथ घुटनो से हटाए & उसके पायलो से सजे पाँवो को सहलाते हुए चूमता रहा.

थोड़ी देर बाद रंभा ने महसूस किया कि समीर के हाथ उसके टख़नो के गिर्द घूम रहे हैं & उसके होंठ भी उपर भर रहे हैं.उसे अब बहुत मज़ा आ रहा था.उसकी चूत मे अब कसक उठने लगी थी.समीर के हाथ उसकी सारी मे घुस रहे थे & उसके होंठ उसकी टाँगो पे उपर बढ़ रहे थे.रंभा ने अपनी जंघे आपस मे भींच टाँगो को बिल्कुल सटा रखा था & समीर उनके बीच हाथ घुसा नही पा रहा था लेकिन उसे इस बात से उसे कोई फ़र्क नही पड़ा & उसके हाथ उसकी टाँगो की बाहरी बगलो पे फिरने लगे.अपनी हसीन बीवी की सारी को उपर उठता हुआ वो उसकी गोरी टाँगो को चूमते हुए उसके घुटनो तक आ पहुँचा.

"आननह..!",समीर उसके घुटनो को बड़ी शिद्दत से चूम रहा था & रंभा अब अपनी भारी जंघे आपस मे हौले-2 रगड़ने लगी थी.इस बार समीर ने सारी को उसके घुटनो के पार नीचे उसकी जाँघो पे से हटाना शुरू किया & अपने हाथो से उसकी जाँघो की बगलो को रगड़ने लगा.रंभा के सीने के उभार उसकी तेज़ सांसो के साथ उपर-नीचे हो रहे थे.उसके चेहरे पे अब सिर्फ़ मस्ती दिख रही थी.समीर ने उसके घुटनो से उपर बढ़ते हुए उसकी दाई जाँघ पे 1 जगह इतनी ज़ोर से चूमा कि उसने मस्ती मे अपनी गंद बिस्तर से उठा दी.समीर ने खुश होके उसकी मक्खनी जंगो पे अपने गर्म होंठो के निशान छ्चोड़ने शुरू कर दिए & वो बेसब्री से अपनी कमर हिलाती रही.सारी अब कमर तक आ गयी थी & समीर को अब अपनी प्यारी बीवी की गुलाबी पॅंटी नज़र आ रही थी.समीर के होंठ उसी ओर बढ़ चले.रंभा की आहें & तेज़ हो गयी 7 साथ ही समीर के होंठो की हरकतें भी.वो अब उसकी जाँघो को चूस रहा था.रंभा अब गंद बिस्तर से उठाके & बेचैनी से हिला रही थी.उसकी चूत का बुरा हाल था.समीर उसकी पॅंटी से बस 2 इंच की दूरी पे उसकी कोमल जाँघो को चूमे,चूसे जा रहा था & अब बात बर्दाश्त के बाहर थी.उसने सर पीछे झुकाते हुए अपनी चूचियो को छत की तरफ उठाते हुए बेचैनी से बाल झटके & अपनी गंद बिस्तर से कुच्छ ज़्यादा उठा दी & झाड़ गयी.

समीर ने उसकी जाँघो से मुँह को उठाया & उसके काँपते लबो पे अपने होंठ रख दिए.वो उसकी दाई तरफ से उसपे झुका उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबाए जा रहा था.काफ़ी देर तक उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ाने के बाद वो नीचे झुका & पहली बार अपनी बीवी के क्लीवेज को चूमा.रंभा ने खुशी से आह भारी.समीर के हाथ उसकी कमर की बगल से उपर सरकते हुए उसके ब्लाउस तक पहुँचे & पीछे जाके पीठ पे लगे हुक्स खोल दिए.रंभा ने जोश मे भर उसके सर को चूम लिया तो समीर ने उसके सीने से सर उठा फिर से उसके होंठो को चूमना शुरू कर दिया.उसके हाथ रंभा के ब्लाउस को आगे खींच रहे थे.रंभा ने आगे होते हुए बिस्तर से हाथ उठाए ताकि उसका पति उसके ब्लाउस को आसानी से उतार सके तो समीर झट से किस तोड़ उसके पीछे आ गया & उसकी टाँगो के दोनो तरफ अपनी टाँगे फैलाते हुए उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.

उसने उसकी बाहो से उसके ब्लाउस को सरकाया & गुलाबी लेस ब्रा मे क़ैद रंभा की चूचियाँ अब नुमाया थी.लेस के कपड़े मे से उसके कड़े निपल्स उभरते हुए उसकी मस्ती की दास्तान बयान कर रहे थे.रंभा ने अपनी बाहे पीछे ले जा अपने पति के गले मे डाल दी.समीर ने उसके पेट को सहलाते हुए उसके गालो को चूमना शुरू कर दिया.रंभा अब उसका पूरा साथ दे रही थी.वो जिधर चाहता वो गर्दन घुमा उधर का गाल उसकी तरफ कर उसे चूमने मे पूरी मदद कर रही थी.समीर की 1 उंगली अब उसकी नाभि की गहराई नापने की कोशिश कर रही थी.समीर उसके चिकने पेट से मानो हाथ हटा ही नही पा रहा था.रंभा पीछे अपनी गंद पे उसके लंड को महसूस कर दीवानी हुए जा रही थी.समीर के हाथ उसके पेट से हटे तो फिर उसकी जाँघो से लग गये & इस बार उनके अन्द्रुनी हिस्से को सहलाने लगे.उसकी जाँघो से खलेते हुए समीर उसके कानो को हल्के से काट रहा था.

रंभा अब बहुत मस्त हो गयी थी,उसने अपनी बाहे समीर के गले से निकाली & अपना दाया कंधा उसके सीने से सटा उसकी तरफ घूमी तो समीर ने उसे बाहो मे भर लिया & उसके माथे को चूम लिया.रंभा अपने हाथ उसके कुर्ते पे फिराने लगी तो समीर के दिल मे हसरत पैदा हुई कि वो उस मखमली एहसास को अपने सीने पे महसूस करे.उसने अपनी बीवी को कुर्ता उतारने का इशारा किया तो वो शर्मा गयी & उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया.समीर उसकी इस अदा पे और जोश से भर गया & उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया & अपनी गुज़ारिश दोहराई.इस बार रंभा ने धीरे-2 उसके कुर्ते को निकाल दिया.समीर ने उसे फिर अपने सीने से लगा लिया.

रंभा को अपने पति के सीने को देख थोड़ी सी मायूसी हुई,उसे बालो भरे चौड़े मर्दाने सीने पसंद थे जबकि समीर का सीना बहुत ज़्यादा चौड़ा नही था & बिल्कुल चिकना था लेकिन था तो वो 1 जोशीला मर्द ही.रंभा ने अपने नाज़ुक हाथ जब उसके नंगे सीने पे चलाए तो वो और जोश मे आ गया & उसके सुर्ख गालो पे किस्सस की बौछार कर दी.रंभा भी जवाब मे उसके चेहरे को चूमने लगी.समीर की हसरतें पल-2 बढ़ती जा रही थी & अब उसकी ख्वाहिश अपने सीने पे अपनी नयी-नवेली दुल्हन के होंठो के नर्म एहसास को महसूस करने की थी.उसने रंभा कसर पकड़ के अपने सीने पे झुकाया तो पहले तो रंभा थोड़ी देर बस उसके सीने मे मुँह च्छुपाए बैठी रही फिर बहुत ही हल्की-2 किस्स उसकी छाती पे छ्चोड़नी शुरू की.अब आहें भरने की बारी समीर की थी.रंभा जान के थोड़ी शर्मोहाया मे डूबी होने का नाटक कर रही थी.वो अपने पति को इस बात का ज़रा भी एहसास नही होने देना चाहती थी कि वो जिस्मानी ताल्लुक़ात के मामलो मे कितने अज़ीम तजुर्बे की मालकिन थी!

रंभा की गरम सांसो & नर्म होंठो ने समीर की मदहोशी को बहुत बढ़ा दिया था.वो अब बेचैनी से खुद पे झुकी रंभा की नंगी पीठ पे हाथ चला रहा था.रंभा उसके निपल्स को धीरे-2 चूमते हुए बीच-2 मे चूस भी रही थी.समीर के फिसलते हाथ उसके ब्रा स्ट्रॅप से उलझे & उन्हे ये बता बड़ी नागवार गुज़री & उन्होने उसकी मुलायम पीठ की सैर मे अड़चन बनते ब्रा के हुक्स को खोल दिया.रंभा फ़ौरन उसके सीने से उठ गयी.समीर ने उसकी मरमरी बाहो से ब्रा को खींच के निकाला तो रंभा उसकी पकड़ से निकलने के लिए अपने घुटनो पे हुई मगर समीर भी तेज़ी से अपने घुटनो पे हुआ & उसके उपरी बाज़ू पकड़ उसकी नंगी चूचियाँ निहारने लगा.कड़े गुलाबी निपल्स से सजी तेज़ी से उपर-नीचे होती दूधिया रंग की चूचियों को देख उसका हलक सुख गया था & समीर को उसे तर करने का अब 1 ही रास्ता दिखाई पड़ रहा था-अपनी बीवी की चूचियो को अपने मुँह मे भर लेना.

उसने रंभा को अपनी ओर खींचा & बाहो मे भर उसके सीने को अपने सीने से भींच लिया.दोनो घुटनो पे खड़े 1 दूसरे से लिपटे 1 दूसरे को चूमने लगे.दोनो के हाथ अपने-2 साथी की पीठ & कमर पे चल रहे थे.समीर ने किस तोड़ी & नज़रे नीची की,उसकी छाती से भींची रंभा की गोरी चूचियाँ और फूली दिख रही थी.रंभा की भी अब यही आस थी कि उसका महबूब उसकी छातियो से खेलना शुरू कर दे.समीर नीचे झुका & पहले दोनो चूचियो को 1-1 बार हल्के से चूमा.रंभा आँखे बंद कर सर पीछे झटकते हुए मुस्कुराइ.

तभी समीर ने उसकी बाई चूची को दाए हाथ मे मसल्ते हुए बाई को मुँह मे भर लिया & चूसने लगा.रंभा मस्ती मे आहें भरने लगी.उसका बदन झटके कह रहा था.समीर की हरकत ने उसके जिस्म मे सनसनी फैला दी थी.समीर तो वैसी खूबसूरत चूचियाँ देख पागल हो गया था.काफ़ी देर तक वो उन मस्ताने उभारो से अपने हाथो & अपने होंठो से खेलता रहा.रंभा की चूत तो बावली हो रस पे रस बहाए जा रही थी.जब रंभा की चूचियो से खेलते हुए उसका मन थोड़ा भर गया तो उसने उन्हे छ्चोड़ा & झुक के घुटनो पे खड़ी रंभा के नर्म पेट को चूमते हुए उसकी नाभि को अपनी जीभ से छेड़ने लगा.रंभा मस्ती मे बहाल हो कभी अपने पति के बालो & पीठ को पकड़ती तो कभी अपने ही बालो मे उंगलिया फिराते हुए अपनी बेसब्री से निकलने का रास्ता ढूँढने लगती.

समीर ने उसकी कमर मे अटकी सारी को देखा & अपने हाथ से उसे निकाल दिया.उसका दिल रंभा के दिलकश जिस्म को पूरा नंगा देखना चाहता था.सारी निकलते ही उसने पेटिकोट के हुक को खोला & फिर जोश मे भर उसकी कमर को जकड़ते हुए उसके पेट पे ज़ोर से चूमा & फिर घूमते हुए पीछे उसकी कमर पे आ गया.रंभा अपने बालो मे उंगलिया फँसाए सर उठाए ज़ोर-2 से आहे भरे जा रही थी & समीर उसकी कमर पकड़ के उसकी कमर के मांसल हिस्से को चूमे जा रहा था.रंभा के लिए अब यू खड़ा रहना नामुमकिन था & वो आगे हो लेट गयी.समीर ने उसके घुटनो के पास फँसा उसका पेटिकोट खींचा & उसकी आँखो के सामने लेस पॅंटी मे च्छूपी उसकी मोटी गंद आ गयी.पॅंटी बहुत छ्होटी थी & गंद की बड़ी फांको को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी.

समीर उसकी जाँघो के पिच्छले हिस्सो को चूमते हुए गंद तक पहुँचा & फिर उसकी गंद की दरार मे अटकी पॅंटी की बगलो मे उंगलिया फँसा के नीचे खींचने लगा.पॅंटी उतरते ही रंभा की मोटी गंद उसके पति की नज़रो के सामने चमक उठी.समीर झुक गया & उसपे हसरत से हाथ फिराने लगा.उसके बाद उसने अपने होंठ उस से सटा दिया & वाहा चूमने लगा.पेट के बल लेटी रंभा बिस्तर से मुँह उठा फिर से सर को झटके देने लगी.मस्ती से उसका बुरा हाल था.समीर ने उसकी पॅंटी उच्छाली थी जोकि उसके चेहरे के पास ही पड़ी थी.रंभा ने देखा कि वो रस से बिल्कुल गीली थी.उसे अपने जिस्म की मस्ती का ये सबूत देख और जोश चढ़ आया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--20

gataank se aage.

"aakhirkaar..",sameer ne rambha ko baaho me bhar ke chum liya.panchmahal pahunchte hi sameer ne rambha se 1 mandir me shadi kar li thi & uske baad kuchh karibi dosto ko dawat di.dawat khatm hote hi vo apni nayi-naveli dulhan ko le uske liye khas phoolo se saje hotel ke kamre me pahunch gaya tha,"..tum meri ho hi gayi."

rambha ne gulabi rang ki neele border ki jhini sari & neela blouse pehna tha.uske jism pe pati ke tohfe me diye gaye gehne the.sameer ne uski nangi kamar ko baaho me kas liya & use chumne laga.

"ummmm..sameer..kitne utawle ho rahe ho!..kahi bhagi ja rahi hun main?",usne use khud se alag kiya & muskurayi.

"shadi se pehle bhi yehi kehti thi & abhi bhi yehi raag alap rahi ho!",sameer ne use fir se baaho me bhar liya & uske gulabi honth chumne laga.rambha uski giraft me kasmasati fir se alag hone ke liye uske apne jism pe ghumte garm hatho ko pakadne lagi to sameer ne uski unglyo me apni ungliya fansa di & cupoboard ke sheese se uski pith laga di.cupboard bahut bada tha & uspe laga shisha bhi.

sameer ne uske hatho ko pakad uske chehre ke dono taraf shishe pe jamate hue use chumna shuru kar diya.kuchh der chumne ke baad rambha ne honth khinch chehre dayi taraf ghumate hue apna baaya gaal shishe se sata siya to sameer uske baye gaal ko chumne laga.rambha uski kisses se aahat ho apne sar ko daye-baye ghumane lagi & sameer uske chere & hotnho ko chum use mast karta raha.rambha ne fir se alag hone ki koshsih ki & apne hath chhudane ki bhi to sameer ne apne hotho ka rukh uske daye hath me fanse baye hath ki taraf kiya & use chumne laga.

rambha ne masti me aankhe band kar li thi.sameer uske baye hath se hota hua uski chudiyo bhari kalayi se hota hua uski gudaz banh pe aa gaya tha.uske garm honth rambha ke tan ki aag ko & bhadka rahe the.sameer ne uski chudiya nikali & vahi farsh ke galiche pe gira di.uske honth rambha ki mansal upri banh se hote uske kandhe & fir gori gardan tak aa pahunche the.rambha ne sar upar utha apni gardan apne pati ko pesh kar di.uski aatur kisses use bahut bhali lag rahi thi.sameer uski gardan ko chumte hue uski thuddi & fir uske rasile hotho tak aa pahuncha.is baar rambha ne khud hi apni jibh uske munh me ghusa di & vo khushi se use chusne laga.

itni garmjoshi bhari kiss ne naye-navele shadishuda jode ko josh se pagal kar diya.sameer ab apne pajame me qaid lund ko apni dulhan ki chut pe dabane laga.rambha ko uski is harkat ne bilkul pagal kar diya & uski chut to sameer ke lund ke aabhas se ras chhodne lagi.afra-tafri me sari ka pallu rambha ke seene se dhalak gaya tha & blouse ke gale me se uska bada cleavage uski tez dahdkano ke sath upar-neeche hote dikhayi dene laga tha.sameer ab rambha ke daye kandhe se hota hua uski narm banh se fisalta uske daye hath tak aa gaya tha & uski choodiyan utar raha tha.ram,bha ki gori,gudaz banh ko chumte hue uski nigah uske cleavage pe padi & uske honth usi ro badh chale.uske hatho ki pakad thodi dhili hui & mauka pate hi rambha ne use pare dhakela & shishe se hath dusri taraf aa gayi.

sameer muskurata hua uski or badha to usne kadam peechhe badhaye.rambha ka aanchal dhalak jane se uske bade cleavage ke alawa uska sapat pet & gol nabhi bhi sameer ko saaf dikh rahe the & apni haseen biwi ko is dilkash andaz me dekh uske pajame me khada uska lund precum bahane laga.usne 1 kadam & aage badhaya to rambha ne bhi 1 kadam & peechhe kiya.use pata hi na chala ki peechhe bistar hai & vo us se takra gayi & ladkhada gayi.khud ko sambhalte hue vo uspe baith gayi.sameer uske karib aaya & neeche baith uske daye panv ko hath me pakad liya.rambha ne panv peechhe khincha & dono panv bistar pe chadha liye.sameer ne baya ghutna bistar pe rakha to rambha ne dono hath peechhe bistar pe jamaye & peeche khiski.dono 1 dusre ko muskurate hue dekhe ja rahe the.

sameer uski nazro se nazre milaye hue neeche jhuka & rambha ke daye panv ko chum liya.rambha ke jism me bijli daud gayi & usne panv peechhe khinchna chah lekin smaeer ne uske panv ko mazbuti se bistar pe daba diya & use chumta raha.apne hath peechhe jamaye aankhe band kiye rambha dhimi-2 aahen bharne lagi.uske ghutne upar uthe hue the & sameer unpe hath rakh uske dono panvo ko bari-2 chum raha tha.usne dono hath ghutno se hataye & uske payalo se saje panvo ko sehlate hue chumta raha.

thodi der baad rambha ne mehsus kiya ki sameer ke hath uske takhno ke gird ghum rahe hain & uske honth bhi upar bhar rahe hain.use ab bahut maza aa raha tha.uski chut me ab kasak uthne lagi thi.sameer ke hath uski sari me ghus rahe the & uske honth uski tango pe upar badh rahe the.rambha ne apni janghe aapas me bhinch tango ko bilkul sata rakha tha & sameer unke beech hath ghusa nahi pa raha tha lekin vo is baat se use koi fark nahi pada & uske hath uski tango ki bahri baglo pe firne lage.apni haseen biwi ki sari ko upar uthata hua vo uski gori tango ko chumte hue uske ghutno tak aa pahuncha.

"aannhhhhhh..!",sameer uske ghutno ko badi shiddat se chum raha tha & rambha ab apni bhari janghe aaps me haule-2 ragadne lagi thi.is baar sameer ne sari ko uske ghutno ke paar neeche uski jangho pe se hatana shuru kiya & apne hatho se uski jangho ki baglo ko ragadne laga.rambha ke seene ke ubhar uski tez sanso ke sath upar-neeche ho rahe the.uske chehre pe ab sirf masti dikh rahi thi.sameer ne uske ghutno se upar badhte hue uski dayi jangh pe 1 jagah itni zor se chuma ki usne masti me apni gand bistar se utha di.sameer ne khush hoke uski makkhani jango pe apne garm hotho ke nishan chhodne shuru kar diye & vo besabri se apni kamar hilati rahi.sari ab kamar tak aa gayi thi & sameer ko ab apni pyari biwi ki gulabi panty nazar aa rahi thi.sameer ke honth usi or badh chale.rambha ki aahen & tez ho gayi 7 sath hi sameer ke hotho ki harkaten bhi.vo ab uski jangho ko chus raha tha.rambha ab gand bistar se uthake & bechaini se hila rahi thi.uski chut ka bura haal tha.sameer uski panty se bas 2 inch ki duri pe uski komal jangho ko chume,chuse ja raha tha & ab baat bardasht ke baahar thi.usne sar peechhe jhukate hue apni chhatiyo ko chhat ki taraf uthate hue bechaini se baal jhatke & apni gand bistar se kuchh zyada utha di & jhad gayi.

sameer ne uski jangho se munh ko uthaya & uske kanpte labo pe apne honth rakh diye.vo uski dayi taraf se uspe jhuka uski kamar ke mansal hisso ko dabaye ja raha tha.kafi der tak uski zuban se zuban ladane ke baad vo neeche jhuka & pehli baar apni biwi ke cleavage ko chuma.rambha ne khushi se aah bhari.sameer ke hath uski kamar ki bagal se upar sarakte hue uske blouse tak pahunche & peechhe jake pith pe lage hooks khol diye.rambha ne josh me bhar uske sar ko chum liya to sameer ne uske seene se sar utha fir se uske hotho ko chumna shuru kar diya.uske hath rambha ke blouse ko aage khinch rahe the.rambha ne aage hote hue bistar se hath uthaye taki uska pati uske blouse ko aasani se utar sake to sameer jhat se kiss tod uske peechhe aa gaya & uski tango ke dono taraf apni tange failate hue use peechhe se baaho me bhar liya.

usne uski baaho se uske blouse ko sarkaya & gulabi lace bra me qaid rambha ki chhatiya ab numaya thi.lace ke kapde me se uske kade nipples ubharte hue uski masti ki dastan bayan kar rahe the.rambha ne apni baahe peechhe le ja apne pati ke gale me daal di.sameer ne uske pet ko sehlate hue uske galo ko chumna shuru kar diya.rambha ab uska pura sath de rahi thi.vo jidahr chahta vo gardan ghuma udha ka gaal uski taraf kar use chumne me puri madad kar rahi thi.sameer ki 1 ungli ab uski nabhi ki gehrayi napne ki koshish kar rahi thi.sameer uske chikne pe se mano hath hata hi nahi pa raha tha.rambha peechhe apni gand pe uske lund ko mehsus kar deewani hue ja rahi thi.sameer ke hath uske pet se hate to fir uski jangho se lag gaye & is baar unke nadruni hisse ko sehlane lage.uski jangho se khlete hue sameer uske kaano ko halke se kaat raha tha.

rambha ab bahut mast ho gayi thi,usne apni baahe sameer ke gale se nikali & apna daya kandha uske seene se sata uski taraf ghumi to sameer ne use baaho me bhar liya & uske mathe ko chum liya.rambha apne hath uske kurte pe firane lagi to sameer ke dil me hasrat paida hui ko vo us makhmali ehsas ko apne seene pe mehsus kare.usne apni biwi ko kurta utarne ka ishara kiya to vo sharma gayi & uske seene me munh chhupa liya.sameer uski is ada pe aur josh se bhar gaya & uski thuddi pakad uska chehra upar kiya & apni guzarish dohrayi.is baar rambha ne dhire-2 uske kurte ko nikal diya.sameer ne use fir apne seene se laga liya.

rambha ko apne pati ke seene ko dekh thodi si mayusi hui,use baalo bhare chaude mardane seene pasand the jabki sameer ka seena bahut zyada chauda nahi tha & bilkul chikna tha lekin tha to vo 1 joshila mard hi.rambha ne apne nazuk hath jab uske nange seene pe chalaye to vo aur josh me aa gaya & uske surkh galo pe kisses ki bauchhar kar di.rambha bhi jawab me uske chehre ko chumne lagi.sameer ki hasraten pal-2 badhti ja rahi thi & ab uski khwahish apne seene pe apni nayi-navlei dulhan ke hotho ke narm ehsas ko mehsus karne ki thi.usne rambha kasar pakd ke apne seene pe jhukaya to pehle to rambha thodi der bas uske seene me munh chhupaye baithi rahi fir bahut hi halki-2 kisse uski chhati pe chhodni shuru ki.ab aahen bharne ki bari sameer ki thi.rambha jaan ke thodi sharmohaya me dubi hone ka natak kar rahi thi.vo apne pati ko is baat ka zara bhi ehsas nahi hone dena chahti thi ki vo jismani tallukat ke mamlo me kitne azeem tajurbe ki malkin thi!

rambha ki gram sanso & narm hotho ne sameer ki madhoshi ko bahut badha diya tha.vo ab bechaini se khud pe jhuki rambha ki nangi pith pe hath chala raha tha.rambha uske nipples ko dhire-2 chumte hue beech-2 me chus bhi rahi thi.sameer ke fisalte hath uske bra strap se uljhe & unhe ye bata badi nagawar guzri & unhone uski mulayam pith ki sair me adchan bante bra ke hooks ko khol diya.rambha fauran uske seene se uth gayi.sameer ne uski marmari baaho se bra ko khinch ke nikala to rambha uski pakd se nikalne ke liye apne ghutno pe hui magar sameer bhi tezi se apne ghutno pe hua & uske upri bazu pakad uski nangi chhatiya niharne laga.kade gulabi nipples se saji tezi se upar-neeche hoti doodhiya rang ki chhatiyo ko dekh uska halak sukh gaya tha & sameer ko use tar karne ka ab 1 hi rasta dikhayi pad raha tha-apni biwi ki choochiyo ko apne munh me bhar lena.

usne rambha ko apni or khincha & baaho me bhar uske seene ko apne seene se bhinch liya.dono ghutno pe khade 1 dusre se lipte 1 dusre ko chumne lage.dono ke hath apne-2 sathi ki pith & kamar pe chal rahe the.sameer ne kiss todi & nazre neechi ki,uski chhati se bhinchi rambha ki gori chhatiya aur phooli dikh rahi thi.rambha ki bhi ab yehi aas thi ki uska mehboob uski chhatiyo se khelna shuru kar de.sameer neeche jhuka & pehle dono choochiyo ko 1-1 baar halke se chuma.rambha aankhe band kar sar peechhe jhatakte hue muskurayi.

tabhi sameer ne uski bayi chhati ko daye hath me masalte hue bayi ko munh me bhar liya & chusne laga.rambha masti me aahen bharne lagi.uska badan jhatke kah raha tha.sameer ki harkat ne uske jism me sansani faila di thi.sameer to vaisi khubsurat chhatiya dekh pagal ho gaya tha.kafi der tak vo un mastane ubharo se apne hatho & apne hotho se khelta raha.rambha ki chut to bawli ho ras pe ras bahaye ja rahi thi.jab rambha ki choochiyo se khelte hue uska man thoda bhar gaya to usne unhe chhoda & jhuk ke ghutno pe khadi rambha ke narm pet ko chumte hue uski nabhi ko apni jibh se chhedne laga.rambha masti me behal ho kabhi apne pati ke baalo & pith ko pakadti to kabhi pane hi baalo me ungliya firate hue apni besabri se nikalne ka rasta dhundane lagti.

sameer ne uski kamar me atki sari ko dekha & apne hath se use nikal diya.uska dil rambha ke dilkash jism ko pura nanga dekhna chahta tha.sari nikalte hie usne petticoat ke hook ko khola & fir josh me bhar uski kamar ko jakadte hue uske pet pe zor se chuma & fir ghumte hue peechhe uski kamar pe aa gaya.rambha apne baalo me ungliya phansaye sar uthaye zor-2 se aahe bhare ja rahi thi & sameer uski kamar pakad ke uski kamar ke mansal hisse ko chume ja raha tha.rambha ke liye ab yu khada rehna namumkin tha & vo aage ho let gayi.sameer ne uske ghhutno ke paas phansa uska petticoat khincha & uski aankho ke samne lace panty me chhupi uski moti gand aa gayi.panty bahut chhoti thi & gand ki badi fanko ko dhakne ki nakaam koshish kar rahi thi.

sameer uski jangho ke pichhle hisso ko chumte hue gand tak pahuncha & fir uski gand ki darar me atki panty ki baglo me ungliya fansa ke neeche khinchne laga.panty utarte hi rambha ki moti gand uske pati ki nazro ke samne chamak uthi.sameer jhuk gaya & uspe hasrat se hath firane laga.uske baad usne apne honth us se sata diya & vaha chumne laga.pet ke bal leti rambha bistar se munh utha fir se sar ko jhatke dene lagi.masti se uska bura haal tha.sameer ne uski panty uchhali thi joki uske chehre ke pas hi padi thi.rambha ne dekha ki vo ras se bilkul gili thi.use apne jism ki masti ka ye sabut dekh aur josh chadh aaya.

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kramashah.......

 
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