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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--70

गतान्क से आगे......

"म्र्स.मेहरा मुझे सिर्फ़ आपको ढूँदने का काम दिया गया था.आप दोनो के ज़ाति मामलो मे पड़ने का मेरा ना इरादा है ना ही ख्वाहिश."

"मिस्टर.मोहन,शायद समीर ने आपको बताया नही कि मैने उस से साफ-2 कहा था कि वो मुझे ढूँढने की कोशिश ना करे वरना वही होगा जो मैने अभी पहले कहा था & आपने जिस दिन मुझे ढूँढने का काम अपने हाथ मे लिया,चाहते या ना चाहते हुए आप भी हमारे ज़ाति मामले का हिस्सा बन गये.अब ये बात समीर को बताइए & मुझे चंद दिन यहा सुकून से गुज़रने दीजिए.गुडबाइ!",बलबीर अपने मोबाइल को देख कर सर हिला रहा था.

रंभा ने मोबाइल किनारे रखा & सामने समंदर की लहरो को देख उसका दिल उनसे खेलने को मचल उठा.उसने पिच्छली शाम ही देवेन की पसंद के कुच्छ स्विमस्यूट्स खरीदे थे.आज वक़्त था उनमे से 1 को ट्राइ करने का.वो मुस्कुराती हुई अपने कमरे मे गयी & जब लौटी तो उसके गोरे जिस्म पे 1 सफेद 2-पीस बिकिनी थी.रंभा घर के पिच्छले हिस्से मे बने लॉन के आख़िर मे बनी सीढ़ियो से नीची उतरी & 1 गेट खोल बीच पे आ गयी.यहा काफ़ी दूरी पे घर बने थे & बीच भी लगभग खाली ही था.उसे बस इक्का-दुक्का लोग या तो सुन्बाथ लेते या फिर कही आते-जाते दिख रहे थे.रेत पे चलते हुए वो समंदर के पानी मे उतर गयी & लहरो से खेलने लगी.उसे बड़ा मज़ा आ रहा था तैरने मे.लहरे उसके जिस्म को अपनी बाहो मे भर उच्छलती तो उसका दिल रोमांच से भर जाता.देर तक वो किसी जलपरी की तरह पानी मे अठखेलिया करती रही.

जी भर के तैरने के बाद वह पानी से निकली & घर की तरफ बढ़ी.घर की ओर देखते ही वो चौंक गयी.जिस जगह खड़ी हो वो बलबीर से बात कर रही थी वाहा पे अब विजयंत मेहरा खड़ा उसे देख रहा था.रंभा को गुजरात के समंदर के किनारे की वो सवेरे की मुलाकात याद आ गयी & उसका दिल धड़क उठा.वो धीमे कदमो से गेट तक पहुँची,उसे खोला & अंदर गयी.विजयंत उसे देखे जा रहा था & उसकी आँखो मे वही कुच्छ समझने का सा भाव था.

रंभा सीढ़िया चढ़ उसके करीब पहुँची.उसका गीला जिस्म धूप मे चमचमा रहा था.विजयंत की निगाहें उसके चेहरे पे जमी थी जिसे भीगे गेसुओ से टपकती बूंदे चूम रही थी.उसने अपना हाथ आगे बढ़ा के रंभा को तौलिया थमाया & उसकी निगाहें उसके चेहरे से नीचे उसके गीले चमचमते बदन को चूमने लगी.रंभा का धड़कता दिल मस्ती से भर उठा था.उसके बिकिनी के ब्रा मे 2 नुकीले उभार उभर आए थे..क्या इसे याद है वो सुबह जब मैने इसकी मौजूदगी मे झुर्मुट की आड़ मे कपड़े बदले थे?

"थॅंक्स.",उसने तौलिया लिया & अपने बाई तरफ के 2 बड़े पौधों के पीछे चली गयी.उनके बड़े-2 पत्तो की आड़ मे अपने प्रेमी को देखते हुए वो तौलिए से अपने गाल सुखाने लगी.

"रंभा.",वो अपने सीने पे तौलिए को दबा रही थी जब उसके ससुर ने उसका नाम पुकारा.

"हूँ.",विजयंत ने पत्तो को नीचे किया.उसकी निगाहें बहू के सीने पे रखे तौलिए पे थी.

"तुमने कोई अच्छा काम किया है.",रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी..ये कैसा सवाल था?,"..तुमने कुच्छ अच्छा किया है.",..अब वो समझी..गुजरात मे उसने उसकी सेमेंट के दाम वाली बात बताने पे तारीफ की थी..उसे वही याद आ रहा था.विजयंत के हाथ उसके सीने पे रखे तौलिए को थामे हाथो पे आ गये थे.

"हां,बताइए क्या अच्छा किया है?",विजयंत ने तौलिया नीचे गिरा दिया & उसके हाथ पकड़ के सीने से हटा दिए & उसके क्लीवेज को देखने लगा.

"कुच्छ अच्छा किया है..",वो झुका & उसकी गर्दन चूमने लगा.

"उउन्न्ञन्..याद कीजिए डॅड,क्या अच्छा किया था?",वो उसके क्लीवेज पे लगी बूँदो को अपनी ज़ुबान से चख रहा था.उसकी ज़ुबान & गर्म साँसे रंभा के सीने को तपते हुए उसे मस्त कर रही थी.उसके हाथ ससुर के मज़बूत जिस्म को महसूस करने को मचल रहे थे.उसने अपनी उंगलिया विजयंत की उंगलियो से अलग की & उसके कंधे थाम लिए & उसके सर को चूमने लगी.

"आपने मुझे ऐसे देखा है कभी..ऊहह..?",विजयंत उसके क्लेवगे को चूस रहा था.उसने उसके बाल पकड़ सर को उपर किया & उसकी आँखो मे देखा,"..बोलिए देखा है आपने मुझे कभी ऐसे?"

"शायद..नही..कुच्छ..धुँधला सा....है..!",उसके माथे पे शिकन गहरी हो रही थी.रंभा ने उसके सीने पे हाथ रख उसे पीछे रेलिंग पे बिठा दिया & उसके कंधो पे बाहे जमा उसके चेहरे को हाथो मे भर लिया & चूम कर उसके माथे की सलवटो को दूर करने लगी.

"कोई बात नही..परेशान मत होइए.सब याद आ जाएगा..ऊव्ववव..!",विजयंत के हाथ उसकी मोटी गंद को दबाने लगे थे & वो चिहुनक के आगे हो गयी थी.विजयंत का चेहरा उसके सीने मे घुस गया था & 1 बार फिर उसके क्लीवेज पे उसके गर्म होंठ अपने निशान छ्चोड़ने लगे थे.रंभा ने उसके सर को बाहो मे पकड़ सीने पे ज़ोर से दबाया & और आगे हो गयी.विजयंत के हाथ उसकी पॅंटी मे घुस उसकी गंद की कसी फांको को मसल रहे थे.

"आपको समीर याद है डॅड..शिप्रा..रीता..बोलिए?..आननह..!",उसकी पॅंटी को नीचे कर वो उसकी गंद को दबोचते हुए उसके क्लावेज को काट रहा था.रंभा ने उसके बाल पकड़ उसके सर को अपने सीने से अलग किया & उसकी टी-शर्ट को उपर खींचा.विजयंत ने उसकी बिकिनी टॉप के कप्स से उसकी मोटी छातियो बाहर निकली & उन्हे मसलने लगा.रंभा ने अपने नाख़ून उसकी नाभि से लेके निपल्स तक चलते हुए उसे झुक के चूमा तो वो बहुत ज़ोर से उसकी ज़ुबान चूसने लगा.

"नही.",वो उसकी चूचिया चूस रहा था & उसकी कमर को जकड़े हुए उसकी गीली पीठ & गंद को अपने हाथो से मसल रहा था.

"ट्रस्ट..डेवाले..पंचमहल..क्लेवर्त..होटेल वाय्लेट....ये नाम जानते हैं आप?..ओईईईईई..!",विजयंत ने उसकी पॅंटी उपर की & फिर उसकी टाँगे फैला के उसे अपनी गोद मे बिठा लिया था & उसे बाहो मे भींच उसके निपल्स काट रहा था,"..दाँत मत लगाइए..दर्द होता है..हान्न्न्न्न..ऐसे ही..वी माआआ..ऐसे ही चुसिये..हाईईईईईईईईई..!",नीचे हाफ-पॅंट मे क़ैद विजयंत का लंड उसकी बिकिनी बॉटम के गीले कपड़े से ढँकी उसकी उतनी ही गीली चूत को चूम रहा था & उपर उसका ससुर उसकी चूचियो को अपने मुँह मे पूरा भरने की कोशिश करता हुआ चूस रहा था.रंभा तो मस्ती मे पागल हो गयी & पीछे झुक के अपने बाल पकड़ उनमे बेचैनी से हाथ फिराते हुए झड़ने लगी.विजयंत की मज़बूत बाहे उसे पीछे गिरने से रोके हुई थी.

"कुच्छ नही याद आ रहा आपको?",रंभा संभली तो सीधी हुई & उसकी पीठ को नोचते हुए उसे चूमने लगी.गंद आगे-पीछे कर वो ससुर के लंड को छेद रही थी.

"नही.",विजयंत ने उसकी कमर पकड़ उसे उठाया & उसे घुमा के चौड़ी रेलिंग पे लिटा दिया & अपनी पॅंट उतार दी.रंभा ने उसका लंड पकड़ उसे अपनी ओर खींचा & लेटे-2 ही उसे मुँह मे भर लिया & चूसने लगी.

"ये याद है आपको डॅड?",रंभा ने लंड मुँह से निकाल उपर कर उसके आंडो को अपने सामने किया & 1 को मुँह मे भर लिया.

"हान्न्न्न्न्न..आहह..!",रंभा हैरान हो गयी.

"सच ये याद है आपको?",वो आंडो के उपर की त्वचा को अपने दन्तो मे बहुत हल्के से पकड़ के खींच रही थी.

"हां..याद है..",रंभा ने लंड को ज़ोर से हिलाया & फिर उसके सूपदे को चूसा.

"& क्या याद है आपको?",वो उठ बैठी & ससुर की कमर को बाहो मे भर उसकी गंद को दबोचते हुए उसके पेट के बालो मे अपने गालो & नाक को रगड़ने लगी.

"बस यही..आहह..!",वो उसके बालो मे बेचैनी से हाथ फिराते हुए उसके सर को अपने पेट मे दबा रहा था.रंभा ने दाए हाथ से उसके लंड को पकड़ अपनी चूचियो के बीच की वादी मे दबाया & फिर उसकी नाभि मे जीभ घुसाते हुए अपनी दोनो छातियो को बाहर से थाम लंड को उनके बीच क़ैद कर उसे हिलाने लगी.

"यही की आप ये सब करते थे मेरे साथ?"

"हान्न्न्न्न..ओह..!",विजयनत्न की आँखे बंद थी & उसके चेहरे पे लकीरे खीच गयी थी..मज़े की या उलझन की-ये रंभा की समझ मे नही आ रहा था.

"कहा करते थे ये सब मेरे साथ आप?",वो बदस्तूर लंड को अपनी मखमली चूचियो के बीच दबा हिलाए जा रही थी.

"कमरे मे.",विजयंत के माथे की शिकने फिर गहरी हो रही थी.

"कैसे कमरे मे?..किसके कमरे मे?..किसी घर के कमरे मे या फिर कही & के?",उसने लंड को ज़ोर से हिलाते हुए & सवाल किए.

"नही याद मुझे..बिल्कुल नही..आहह..!",विजयंत चीखा.उसके माथे की शिकने अब बहुत गहरी हो गयी.आँखे बिल्कुल मीची हुई थी & वो रंभा के बालो को अब इतनी ज़ोर से खींच रहा था की उसे दर्द होने लगा था.

"कोई बात नही.छ्चोड़ दीजिए याद करना.",रंभा समझ गयी कि अब & सवाल करना विजयंत के लिए नुकसानदेह हो सकता था.उसने लंड को चूचियो की क़ैद से आज़ाद किया & लेट गयी,"..आइए अब वो कीजिए जो आपको याद है डॅड.इस जिस्म को प्यार कीजिए..",नशीली निगाहो से देखते हुए उसने अपने हाथो से अपनी चूचियाँ आपस मे ज़ोर से दबाई,"..जी भर के खेलिए इस से..",उसके हाथ सीने के उभरो से फिसलते हुए उसके पेट से होते हुए उसकी पॅंटी पे आए.उसने अपने घुटने मोडते हुए अपनी टाँगे फैलाई & अपने हाथ चूत पे दबा दिए,"..& अपनी & मेरी,दोनो की प्यास बुझा दीजिए जैसे आप हमेशा बुझाते हैं!"

बहू की बातो ने विजयंत के माथे की शिकनो को दूर कर दिया था.उसकी ज़हनी परेशानिया दूर हो गयी थी & उसे अब बस जिस्मानी चाहत का होश था.उसने रंभा के हाथ उसकी पॅंटी से अलग किए & उसे उतार दिया.रंभा ने पनती उतरते ही फिर से अपने हाथो से अपनी चूत को च्छूपा लिया.विजयंत ने उसके चेहरे को देखा.रंभा के अधखुले होंठ & नशे से बोझल पलके चीख-2 के उसके मस्ताने हाल को बयान कर रही थी.विजयंत बहुत जोश से भर गया था.

"उउम्म्म्म.....आन्न्न्नह..हान्ंनणणन्..उउन्न्ह..!",वो झुका & रंभा के हाथो को चूमने लगा & उसकी उंगलियो के बीच ऐसे ज़ुबान फिराने लगा मानो वो उंगलिया चूत की फांके हों & उनके बीच की जगह चूत की दरार.रंभा मस्ती मे सर दाए-बाए झटकते हुए आहे भरने लगी.विजयंत की ज़ुबान ने उसकी उंगलियो को इतना छेड़ा की वो मस्ती से आहत हो उन्हे मोड़ने लगी & अपनी चूत को नुमाया कर दिया.ऐसा करते ही विजयंत की ज़ुबान ने उसकी कोमल उंगलियो को छ्चोड़ उसकी नाज़ुक,गुलाबी चूत को अपना निशाना बनाया & कुच्छ ही देर मे रेलिंग पे खुले आसमान के नीचे कमर हिलाती रंभा झाड़ रही थी.

"आननह..!",विजयंत फ़ौरन उठा & रैलैन्ग पे दाया घुटना जमाते हुए अपना लंड रंभा की रस बहाती चूत मे घुसा दिया.रंभा ने दर्द & मस्ती से जिस्म को कमान की तरह मोड़ा & अपनी चूचियो को अपने ही हाथो से दबाने लगी.विजयंत रैलैन्ग पे घुटना जमा उसे चोदने मे जुट गया.रंभा अपनी छातियो से खेलती मस्ती भरी आँखो से उसके चेहरे को देख रही थी..क्या उसे बस उसका & अपना रिश्ता याद था?..& कुच्छ भी नही..हां,तभी तो कल भी उसने उसका आँचल थाम उस रोका था & फिर..,"..ऊव्ववव..!",वो करही.उसके ससुर के धक्के अब बहुत गहरे हो गये थे & उसकी चूत की दीवारो को उसका लंड बुरी तरह रगड़ रहा था.

विजयंत ने उसके हाथ उसकी छातियो से अलग किए & उन्हे बुरी तरह दबाने लगा..बस यही बात रंभा की समझ मे नही आ रही थी..पहले का बड़ी गर्मजोशी मगर उतनी ही कोमलता से उसे छुने वाला विजयंत अब इस जूंगलिपने के साथ उस से क्यू पेश आ रहा था?..हां..ड्र.पोपव..इस सवाल का जवाब दे सकते थे..उसका दिमाग़ थोड़ी देर को इन सवालो से जूझने के बाद फिर से वापस जिस्म की मस्ती के ख़यालो से भर गया था.

उसने अपने सीने को रौन्दते हाथो को थाम विजयंत को आगे खींचा तो वो उसके उपर गिर गया.रंभा ने अपने नाख़ून उसकी गंद मे धंसा दिए & उसके बाए कान मे जीभ फिराते हुए कमर उचकाने लगी.विजयंत अपने दाँत पीसते हुए बस धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था.बेचैनी मे वो कभी रंभा के चेहरे तो कभी चूचियो को चूमता या बस सर उठाये आहे भरने लगता.

"आननह..दद्द्द्द्द्द्दद्ड..!",रंभा ने ज़ोर से आह भरी & विजयंत की कंधो मे नाख़ून धँसाते हुए अपनी चूचियाँ उपर उचकाई & सर पीछे कर लिया.उसकी आँखे बंद थी & चेहरे पे झड़ने की खुमारी के भाव.

गंद मे नाख़ून धंसते ही विजयंत के धक्के अपनेआप तेज़ हो गये & उसका बदन झटके खाने लगा.रंभा की चूत की मस्तानी हर्कतो से विवश हो वो भी झाड़ गया था.आँखे बंद किए सर उपर उठाए वो उसकी चूत की कसावट से बहाल हो आहे भर रहा था.

कुच्छ पलो बाद दोनो प्रेमियो ने 1 साथ आँखे खोली & 1 दूसरे को देखा.विजयंत की नज़रे रंभा के बाई ओर रेलिंग के नीचे गयी & रंभा को उनका रंग बदलता दिखा.वो समझ गयी कि कुच्छ गड़बड़ होने वाली थी.उसना फ़ौरन गर्दन घुमा रेलिंग के नीचे देखा.वाहा कुच्छ भी नही था बल्कि दूर-2 तक बीच खाली पड़ा था,"डॅड..क्या हुआ?"

मगर विजयंत ने जैसे उसका सवाल सुना ही नही था.उसके चेहरे को देख ऐसा लग रहज़ा था मानो वो बहुत तकलीफ़ मे हो,बहुत दर्द हो रहा हो उसे,"नही..सोनियाआआ..!",वो चीखा & उसकी आँखे उलट गयी & वो रंभा के सीने पे गिर गया.

"डॅड!..क्या हुआ?!..उठिए..!",रंभा ने उसके भारी-भरकम जिस्म को धकेला तो वो कटे पेड़ की तरह लॉन की घास पे गिर गया.वो बहुत घबरा गयी.उसने फ़ौरन उसकी धड़कन & सांस चेक की..दोनो ठीक थे.वो बेहोश हो गया था.तभी 1 कार के रुकने की आवाज़ आई.वो भागती हुई घर के सामने की ओर गयी.देवेन अपनी चाभी से मेन गेट खोल कार अंदर लगा रहा था,"..देवेन..जल्दी आइए..जल्दी!",देवेन ने जल्दी से गेट लॉक किया & उसके पीछे-2 अंदर आया.

"क्या हुआ?",दोनो की नंगी हालत देख उसे समझने मे देर नही लगी कि कुच्छ देर पहले दोनो कर क्या रहे थे.

"डॅड..बेहोश हो गये.",रंभा की आवाज़ कांप रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--70

gataank se aage......

"mrs.mehra mujhe sirf aapko dhoondne ka kaam diya gaya tha.aap dono ke zati mamlo me padne ka mera na irada hai na hi khwahish."

"mr.mohan,shayad sameer ne aapko bataya nahi ki maine us se saaf-2 kaha tha ki vo mujhe dhoondane ki koshish na kare varna vahi hoga jo maine abhi pehle kaha tha & aapne jis din mujhe dhoondne ka kaam apne hath me liya,chahte ya na chahte hue aap bhi humare zati mamle ka hissa ban gaye.ab ye baat sameer ko bataiye & mujhe chand din yaha sukun se guzarne dijiye.goodbye!",balbir apne mobile ko dekh kar sar hila raha tha.

rambha ne mobile kinare rakha & samne samandar ki lehro ko dekh uska dil unse khelne ko machal utha.usne pichhli sham hi deven ki pasnad ke kuchh swimsuits kharide the.aaj waqt tha unme se 1 ko try karne ka.vo muskurati hui apne kamre me gayi & jab lauti to uske gore jism pe 1 safed 2-piece bikini thi.rambha ghar ke pichhle hisse me bane lawn ke aakhir me bani seedhiyo se nichi utri & 1 gate khol beach pe aa gayi.yaha kafi doori pe ghar bane the & beach bhi lagbhag khali hi tha.use bas ikka-dukka log ya to sunbath lete ya fir kahi aate-jate dikh rahe the.ret pe chalte hue vo samandar ke pani me utar gayi & lehro se khelne lagi.use bada maza aa raha tha tairne me.lehre uske jism ko apni baaho me bhar uchhalti to uska dil romanch se bhar jata.der tak vo kisi jalpari ki tarah pani me athkheliya karti rahi.

ji bhar ke tairne ke baad vp pani se nikli & ghar ki taraf badhi.ghar ki or dekhte hi vo chaunk gayi.jis jagah khadi ho vo balbir se baat kar rahi thi vaha pe ab Vijayant Mehra khada use dekh raha tha.rambha ko Gujrat ke samandar ke kinare ki vo savere ki mulakat yaad aa gayi & uska dil dhadak utha.vo dhime kadmo se gate tak pahunchi,use khola & andar gayi.vijayant use dekhe ja raha tha & uski aankho me vahi kuchh samajhne ka sa bhav tha.

rambha seedhiya chadh uske karib pahunchi.uska gila jism dhoop me chamchama raha tha.vijayant ki nigahen uske chehre pe jami thi jise bhige gesuo se tapakti boonde chum rahi thi.usne apna hath aage badha ke rambha ko tauliya thamaya & uski nigahen uske chehre se neeche uske gile chamchamate badan ko chumne lagi.rambha ka dhadakta dil masti se bhar utha tha.uske bikini ke bra me 2 nukile ubhaar ubhar aaye the..kya ise yaad hai vo subah jab maine iski maujudgi me jhurmut ki aad me kapde badle the?

"thanks.",usne tauliya liya & apne bayi taraf ke 2 bade paudhon ke peechhe chali gayi.unke bade-2 patto ki aad me apne premi ko dekhte hue vo tauliye se apne gaal sukhane lagi.

"rambha.",vo apne seene pe tauliye ko daba rahi thi jab uske sasur ne uska naam pukara.

"hun.",vijayant ne patto ko neeche kiya.uski nigahen bahu ke seene pe rakhe tauliye pe thi.

"tumne koi achha kaam kiya hai.",rambha ke mathe pe shikan pad gayi..ye kaisa sawal tha?,"..tumne kuchh achha kiya hai.",..ab vo samjhi..gujrat me usne uski cement ke daam vali baat batane pe tarif ki thi..use vahi yaad aa raha tha.vijayant ke hath uske seene pe rakhe tauliye ko thame hatho pe aa gaye the.

"haan,bataiye kya achha kiya hai?",vijayant ne tauliya neeche gira diya & uske hath pakad ke seene se hata diye & uske cleavage ko dekhne laga.

"kuchh achha kiya hai..",vo jhuka & uski gardan chumne laga.

"uunnnn..yaad kijiye dad,kya achha kiya tha?",vo uske cleavage pe lagi boondo ko apni zuban se chakh raha tha.uski zuban & garm sanse rambha ke seene ko tapate hue use mast kar rahi thi.uske hath sasur ke mazbut jism ko mehsus karne ko machal rahe the.usne apni ungliya vijayant ki ungliyo se alag ki & uske kandhe tham liye & uske sar ko chumne lagi.

"aapne mujhe aise dekha hai kabhi..oohhhh..?",vijayant uske clevage ko chus raha tha.usne uske baal pakad sar ko upar kiya & uski aankho me dekha,"..boliye dekha hai aapne mujhe kabhi aise?"

"shayad..nahi..kuchh..dhundhla sa....hai..!",uske mathe pe shikan gehri ho rahi thi.rambha ne uske seene pe hath rakh use peechhe railing pe bitha diya & uske kandho pe baahe jama uske chehre ko hatho me bhar liya & chum kar uske mathe ki salwato ko door karne lagi.

"koi baat nahi..pareshan mat hoiye.sab yaad aa jayega..oowwww..!",vijayant ke hath uski moti gand ko dabane lage the & vo chihunk ke aage ho gayi thi.vijayant ka chehra uske seene me ghus gaya tha & 1 baar fir uske cleavage pe uske garm honth apne nishan chhodne lage the.rambha ne uske sar ko baaho me pakad seene pe zor se dabaya & aur aage ho gayi.vijayant ke hath uski panty me ghus uski gand ki kasi fanko ko masal rahe the.

"aapko sameer yaad hai dada..Shipra..Rita..boliye?..aannhhhhh..!",uski panty ko neeche kar vo uski gand ko dabochte hue uske clavage ko kaat raha tha.rambha ne uske baal pakad uske sar ko apne seene se alag kiya & uski t-shirt ko upar khincha.vijayant ne uski bikini top ke cups se uski moti chhatiyan bahar nikali & unhe maslane laga.rambha ne apne nakhun uski nabhi se leke nipples tak chalate hue use jhuk ke chuma to vo bahut zor se uski zuban chusne laga.

"nahi.",vo uski choochiya chus raha tha & uski kamar ko jakde hue uski gili ptih & gand ko apne hatho se masal raha tha.

"Trust..Devalay..Panchmahal..Clayworth..Hotel Violet....ye naam jante hain aap?..ouiiiiiiii..!",vijayant ne uski panty upar ki & fir uski tange faila ke use apni god me bitha liya tha & use baaho me bhinch uske nipples kaat raha tha,"..dant mat lagaiye..dard hota hai..haannnnn..aise hi..oui maaaaaa..aise hi chusiye..haiiiiiiiiii..!",neeche half-pant me qaid vijayant ka lund uski bikini bottom ke gile kapde se dhanki uski utni hi gili chut ko chum raha tha & upar uska sasur uski chhatiyo ko apne munh me pura bharne ki koshish karta hua chus raha tha.rambha to masti me pagal ho gayi & peechhe jhuk ke apne baal pakad unme bechaini se hath firate hue jhadne lagi.vijayant ki mazbut baahe use peechhe girne se roke hui thi.

"kuchh nahi yaad aa raha aapko?",rambha sambhli to seedhi hui & uski pith ko nochte hue use chumne lagi.gand aage-peechhe kar vo sasur ke lund ko chhed rahi thi.

"nahi.",vijayant ne uski kamar pakad use utahya & use ghuma ke chaudi railing pe lita diya & apni pant utar di.rambha ne uska lund pakad use apni or khincha & lete-2 hi use munh me bhar liya & chusne lagi.

"ye yaad hai aapko dad?",rambha ne lund munh se nikal upar kar uske ando ko apne samne kiya & 1 ko munh me bhar liya.

"haannnnnn..aahhhhh..!",rambha hairan ho gayi.

"sach ye yaad hai aapko?",vo ando ke upar ki tvacha ko apne danto me bahut halke se pakad ke khinch rahi thi.

"haan..yaad hai..",rambha ne lund ko zor se hilaya & fir uske supade ko chusa.

"& kya yaad hai aapko?",vo uth baithi & sasur ki kamar ko baaho me bhar uski gand ko dabochte hue uske pet ke balo me apne galo & naak ko ragadne lagi.

"bas yehi..aahhhh..!",vo uske baalo me bechaini se hath firate hue uske sar ko apne pet me daba raha tha.rambha ne daye hath se uske lund ko pakad apni choochiyo ke beech ki vadi me dabaya & fir uski nabhi me jibh ghusate hue apni dono chhatiyo ko bahar se tham lund ko unke beech qaid kar use hilane lagi.

"yehi ki aap ye sab karte the mere sath?"

"haannnnn..ohhhhhh..!",vijayantn ki aankhe band thi & uske chehre pe lakire khicnh gayi thi..maze ki ya uljhan ki-ye rambha ki samajh me nahi aa raha tha.

"kaha karte the ye sab mere sath aap?",vo badastur lund ko apni makhmali choochiyo ke beech daba hilaye ja rahi thi.

"kamre me.",vijayant ke mathe ki shikane fir gehri ho rahi thi.

"kaise kamre me?..kiske kamre me?..kisi ghar ke kamre me ya fir kahi & ke?",usne lund ko zor se hilate hue & sawal kiye.

"nahi yaad mujhe..bilkul nahi..aahhhhhhhhh..!",vijayant chika.uske mathe ki shikane ab bahut gehri ho gayi.aankhe bilkul meechi hui thi & vo rambha ke baalo ko ab itni zor se khinch raha tha ki use dard hone laga tha.

"koi baat nahi.chhod dijiye yaad karna.",rambha samajh gayi ki ab & sawal karna vijayant ke liye nuksandeh ho sakta tha.usne lund ko choochiyo ki qaid se azad kiya & let gayi,"..aaiye ab vo kijiye jo aapko yaad hai dad.is jism ko pyar kijiye..",mashili nigaho se dekhte hue usne apne hatho se apni chhatiya aapas me zor se dabayi,"..ji bhar ke kheliye is se..",uske hath seene ke ubharo se fisalte hue uske pet se hote hue uski panty pe aaye.usne apne ghutne modte hue apni tange failayi & apne hath chut pe daba diye,"..& apni & meri,dono ki pyas bujha dijiye jaise aap humesha bujhate hain!"

bahu ki baato ne vijayant ke mathe ki shikano ko door kar diya tha.uski zehani pareshaniya door ho gayi thi & use ab bas jismani chahat ka hosh tha.usne rambha ke hath uski panty se alag kiye & use utar diya.rambha ne panty utarte hi fir se apne hatho se apni chut ko chhupa liya.vijayant ne uske chehre ko dekha.rambha ke adhkhule honth & nashe se bojhal palke chikh-2 ke uske mastane haal ko bayan kar rahi thi.vijayant bahut josh se bhar gaya tha.

"uummmm.....aannnnhhhhhh..haannnnnn..uunnhhhhhh..!",vo jhuka & rambha ke hatho ko chumne laga & uski ungliyo ke beech aise zuban firane laga mano vo ungliya chut ki fanke hon & unke beech ki jagah chut ki darar.rambha masti me sar daye-baye jhatakte hue aahe bharne lagi.vijayant ki zuban ne uski ungliyo ko itna chheda ki vo masti se aahat ho unhe modne lagi & apni chut ko numaya kar diya.aisa karte hi vijayant ki zuban ne uski komal ungliyo ko chhod uski nazuk,gulabi chut ko apna nishana banaya & kuchh hi der me railing pe khule aasman ke neeche kamar hilati rambha jhad rahi thi.

"aannhhhhh..!",vijayant fauran utha & railaing pe daya ghutna jamate hue apna lund rambha ki ras bahati chut me ghusa diya.rambha ne dard & masti se jism ko kaman ki tarah moda & apni chhatiya apne hi hatho se dabane lagi.vijayant railaing pe ghutna jama use chodne me jut gaya.rambha apni chhatiyo se khelti masti bhari aankho se uske chehre ko dekh rahi thi..kya use bas uska & apna rishta yaad tha?..& kuchh bhi nahi..haan,tabhi to kal bhi usne uska aanchal tham us roka tha & fir..,"..oowwww..!",vo karahi.uske sasur ke dhakke ab bahut gehre ho gaye the & uski chut ki deewaro ko uska lund buri tarah ragad raha tha.

vijayant ne uske hath uski chhatiyo se alag kiye & unhe buri tarah dabane laga..bas yehi baat rambha ki samajh me nahi aa rahi thi..pehle ka badi garmjoshi magar utni hi komalta se use chhune vala vijayant ab is junglipane ke sath us se kyu pesh aa raha tha?..haan..Dr.Popov..is sawal ka jawab de sakte the..uska dimagh thodi der ko in sawalo se jujhne ke baad fir se vapas jism ki masti ke khayalo se bhar gaya tha.

usne apne seene ko raundate hatho ko tham vijayant ko aage khincha to vo uske upar gir gaya.rambha ne apne nakhun uski gand me dhansa diye & uske baye kaan me jibh firate hue kamar uchkane lagi.vijayant apne dant peeste hue bas dhakke pe dhakke lagaye ja raha tha.bechaini me vo kabhi rambha ke chehre to akbhi chhatiyo ko chumta ya bas sar utahye aahe bharne lagta.

"aannhhhhhhhhh..daddddddddd..!",rambha ne zor se aah bhari & vijayant ki kandho me nakhun dhansate hue apni chhatiyan upar uchkayi & sar peechhe kar liya.uski aankhe band thi & chehre pe jhadnhe ki khumari ke bhav.

gand me nakhun dhanste hi vijayant ke dhakke apneaap tez ho gaye & uska badan jhatke kahne laga.rambha ki chut ki mastani harkato se vivash ho vo bhi jhad gaya tha.aankhe band kiye sar upar uthaye vo uski chut ki kasawat se behaal ho aahe bhar raha tha.

kuchh palo baad dono premiyo ne 1 sath aankhe kholi & 1 dusre ko dekha.vijayant ki nazre rambha ke bayi or railing ke neeche gayi & rambha ko unka rang badalta dikha.vo samajh gayi ki kuchh gadbad hone wali thi.usna fauran gardan ghuma railing ke neeche dekha.vaha kuchh bhi nahi tha balki door-2 tak beach khali pada tha,"dad..kya hua?"

magar vijayant ne jaise uska sawal suna hi nahi tha.uske chehre ko dekh aisa lag rahja tha mano vo bahut taklif me ho,bahut dard ho raha ho use,"nahi..Soniyaaaaaa..!",vo chikha & uski aankhe ulat gayi & vo rambha ke seene pe gir gaya.

"dad!..kya hua?!..uthiye..!",rambha ne uske bhari-bharkam jism ko dhakela to vo kate ped ki tarah lawn ki ghas pe gir gaya.vo bahut ghabra gayi.usne fauran uski dhadkan & sans check ki..dono thik the.vo behosh ho gaya tha.tabhi 1 car ke rukne ki aavaz aayi.vo bhagti hui ghar ke samne ki ro gayi.deven apni chabhi se main gate khol car andar laga raha tha,"..deven..jaldi aaiye..jaldi!",deven ne jaldi se gate lock kiya & uske peechhe-2 andar aaya.

"kya hua?",dono ki nangi halat dekh use samajhne me der nahi lagi ki kuchh der pehle dono kar kya rahe the.

"dad..behosh ho gaye.",rambha ki aavaz kanp rahi thi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--71

गतान्क से आगे......

..& बस उस दिन की याद ताज़ा करने के इरादे से मैने इनका साथ दिया और फिर हम दोनो..-“

“-..रंभा,मुझे यू शर्मिंदा ना करो!”,देवेन झल्ला गया था.रंभा उसे उसकी गैरमोजूदगी मे हुई विजयंत मेहरा & उसकी चुदाई की पूरी कहानी सुना रही थी,”..तुम मुझे इस तरह सफाई मत दिया करो,प्लीज़!..प्यार का दूसरा नाम भरोसा होता है & वो मुझे तुमपे है.”,वो उसके करीब आ गया.रंभा ने झीनी हरी सारी & मॅचिंग स्ट्रिंग बिकिनी का टॉप पहना था जिसकी पतली डोर उसके गले मे माला की तरह से लटकी थी & पीछे पीठ पे बँधी उसकी छातियो को ढँके थी.देवेन को वो बहुत प्यारी लग रही थी & उसने उसके खुले बालो को उसके कानो के पीछे कर उसके चेहरे को हाथो मे थामा,”..बेकार की बातो मे दिमाग़ को मत उलझाया करो,वैसे ही कम उलझने नही हैं हमारी ज़िंदगी मे.”,उसने उसका माथा चूमा,”चलो अब मुस्कुरओ.”,तभी बाहर गेट पे किसी कार के हॉर्न की आवाज़ आई,”..लगता है यूरी आ गया.”,वो बाहर गया तो रंभा विजयंत के कमरे की ओर चली गयी.

लॉन मे बेहोश पड़े विजयंत को वही पौधो को पानी देने वाले फुआहरे से पानी डाल के देवेन होश मे लाया था मगर कुच्छ देर बाद वो फिर से बेहोश हो गया था.देवेन ने उसे उठाके उसके कमरे मे पहुचेया & फिर यूरी को बुलाया था.

अमोल बपत कोई कच्ची गोलिया खेला इंसान तो था नही.उसने उसी रोज़ देवेन के बारे मे पता करना शुरू कर दिया मगर साथ ही उसने बीसेसर गोबिंद के बारे मे भी पता करने का फ़ैसला लिया.अपनी अफीशियल आइड से लोजीन कर उसने महकमे के डेटाबेस मे गोबिंद को ढूँढना शुरू किया & कोई 30-35 मिनिट बाद उसे वो मिल गया.जैसा देवेन ने उसे बताया था,गोबिंद मारिटियस के पासपोर्ट से सेच्लेस से फ्लाइट पकड़ के मुंबई एरपोर्ट से घुसा था.उसने यहा आने का कारण सैर-सपाटा & यहा के ऐतिहासिक जगहो को देखने की हसरत बताई थी.उसके साथ उसने अड्वेंचर स्पोर्ट्स का शौकीन होने की बात भी कही थी.सामने तस्वीर मे 1 भूरे बालो वाला बुज़ुर्ग सा शख्स दिख रहा था..ये उम्र & अड्वेंचर स्पोर्ट्स..बपत को बात कुच्छ हाज़ाम नही हो रही थी.उसने प्रिंटर ऑन किया & कमॅंड देके उस से निकलते पन्नो को देखने लगा.

“रंभा कहा है?”,होश मे आते ही विजयंत ने ड्र.पोपव से सवाल किया.

“यही है.मैं अभी उसे बुलाता हुआ..”,वो उसकी आँखे देखने लगा & फिर उसकी नब्ज़ चेक की & फिर उस से कुच्छ सवाल करने लगा,”..कैसे बेहोश हुए थे याद है तुम्हे?”

“हाँ,मैं & रंभा बाहर..-“,वो चुप हो गया.उसे इस आदमी को अपनी चुदाई के बारे मे बताना कुच्छ ठीक नही लग रहा था.

“देखो,तुम्हारी ज़ुबान मे 1 सेयिंग है..आइ मीन हां!..कहावत है कि डॉक्टर & वकील से कुच्छ नही च्छुपाना चाहिए.वैसे भी मुझे देवेन & रंभा ने सारी बात बता दी है.मैं तो बस तुम्हे चेक करने के लिए ये सवाल कर रहा हू.”

“हम चुदाई कर रहे थे.”,विजयंत ने चेहरा दूसरी तरफ कर लिया था,”..रेलिंग पे..& तभी मैने नीचे देखा & मेरे दिमाग़ मे जैसे धमाका सा हुआ..रोशनी कौंधी..बहुत सी तस्वीरे 1 साथ उभरी..बहुत तेज़ी से..& फिर अंधेरा च्छा गया..”

“वो तस्वीरे याद हैं अभी?”

“नही.पर रंभा कहा है?”

“अभी बुलाता हुआ उसे.पर रंभा के बारे मे सब याद है तुम्हे?”

“वो मेरी महबूबा है.मैं उस से बहुत प्यार करता हू.”

“अच्छा,कब मिले थे उस से पहली बार?”

“ये तो याद नही पर हमेशा मेरे दिमाग़ मे उसके साथ अकेले मे बिताए..खूबसूरत लम्हो की सॉफ तस्वीरे मेरे ज़हन मे घूमती हैं.”

“अच्छा,अभी तक तुम ठीक से बोलते क्यू नही थे?..बस 1-2 लफ्ज़ कहते थे..ऐसा क्यू?..कुच्छ बता सकते हो?”

“पता नही.”,विजयंत ने कंधे उचका दिए.

“हूँ.”,डॉक्टर उठ खड़ा हुआ,”रंभा को भेजता हू.”,वो मुस्कुराता हुआ कमरे से बाहर चला गया.

कुच्छ पल बाद रंभा कमरे मे आई तो विजयंत बिस्तर से तेज़ी से उतरा & मुस्कुराता हुआ उसके पास आ गया & उसके कंधे थाम लिए,”रंभा!”

“डॅड,आप ठीक हैं?”,वो भी मुस्कुराइ.यूरी ने उसे सब बताया था.

“डॅड..”,विजयंत के माथे पे शिकन पड़ गयी,”..मुझे डॅड क्यू कह रही हो,रंभा?”

“आप यहा बैठिए.”,रंभा ने उसे बिस्तर पे बिठाया,”..मेरी बात ध्यान से सुनिए.मैं आपको आपकी ज़िंदगी की दास्तान सुनाने वाली हू.”

“देवेन..”,यूरी & देवेन ड्रॉयिंग हॉल के 1 कोने मे बने बार पे बैठ के जिन पी रहे थे,”..मैं समझ सकता हू,तुम्हारे लिए ये बहुत मुश्किल होगा पर विजयंत को ठीक करने का इस वक़्त इस से बेहतर रास्ता कोई & नही दिखता.वो रंभा को अपनी लवर समझता है & मैं चाहता हू कि फिलहाल उसे रंभा के करीब रहने दिया जाए.”

“यूरी,रंभा अभी अंदर उसे उसकी ज़िंदगी के बारे मे सब बता रही है तो उसके बाद क्या ज़रूरत है इस सबकी?”,यूरी हंसा.वो समझ सकता था कि कितना मुश्किल था अपनी महबूबा को 1 दूसरे मर्द के साथ बाँटना.

“माइ डियर फ्रेंड,थे ह्यूमन ब्रायन इस आर्ग्यूवब्ली दा मोस्ट इंट्रीगिंग थिंग एवर क्रियेटेड बाइ दा ऑल्माइटी..खुदा ने इंसानी दिमाग़ से ज़्यादा पेचिड़ी चीज़ शायद ही कोई और बनाई हो!..रंभा उसे कहानी सुनाएगी मगर उसे उस पे यकीन भी तो होना चाहिए.इसका मतलब ये नही कि उसे रंभा पे भरोसा नही मगर जब तक उसे खुद सारी बात याद नही आ जाती वो उसकी सुनाई कहानी को पूरे दिल से नही मानेगा.”,उसने जिन ख़त्म कर ग्लास बार पे रखा,”प्रोग्रेस अच्छी है & अगर मेरा कहा मनोगे तो शायद बहुत जल्द वो बिल्कुल ठीक हो जाए..ये मेडिसिन्स मंगवा लेना..”,उसने अपना ब्रीफकेस खोल 1 पॅड पे कुच्छ दवाओ के नाम लिखे & फिर पन्ना फाड़ देवेन को दिया,”..पुरानी मेडिसिन्स बंद कर इन्हे शुरू कर दो.ओके,अब चलता हू.”

“हॅव डिन्नर विथ उस,यूरी.”

“थॅंक्स ,देवेन पर आज वेरा आने वाली है.”यूरी मुस्कुराया & ब्रीफकेस बंद कर उस से हाथ मिलाया & 1 बार रंभा & विजयंत से बात की & फिर वाहा से चला गया.देवेन उसे बाहर तक छ्चोड़ने गया & वापस आ अपनी जिन ख़त्म कर बार से टिक के खड़ा हो गया.

“देवेन..”,विजयंत & रंभा वाहा आ गये थे,”..थॅंक्स,तुमने मेरे लिए इतना सब किया.”,विजयंत उसके करीब आ उसका हाथ थाम के हिला रहा था,”..& मैं माफी चाहता हू अगर..”

“नही कोई बात नही.”,देवेन ने 1 सॉफ्ट ड्रिंक की बॉटल खोल उसे दी & बार के दूसरे कोने पे जा अपने लिए फिर से जिन भरा.अब रंभा दोनो के बीच खड़ी थी.

“ड्र.पोपव चाहते हैं कि..”,रंभा की अधूरी बात का मतलब देवेन जानता था.

“हूँ.”,उसने जिन का घूँट भरा.विजयंत दोनो को देख रहा था.वो भी जानता था कि रंभा किस बात के बारे मे कह रही थी,”..अभी तो तुम्हे समझाया था,रंभा.कम ऑन रिलॅक्स!”,देवेन मुस्कुराया & अपना ग्लास खाली करने लगा.

रंभा बार से पीठ लगाए उसपे दोनो हाथ रखे खड़ी थी.विजयंत मेहरा उसके दाई तरफ उसी के जैसे खड़ा था.उसका बाया हाथ शेल्फ पे आगे सरका & रंभा की उंगलियो के पोरो को छुने लगा.रंभा ने उसके हाथ को देखा,उसके दिल की धड़कने तेज़ हो गयी थी.विजयंत की उंगलिया आगे सर्की & उसकी उंगलियो के बीच घुस गयी.रंभा के जिस्म मे वही जानी-पहचानी सिहरन दौड़ गयी.विजयंत ने देखा सारी के झीने आँचल के पार उसके दिल का हाल कहता उसका सीना उपर-नीचे हो रहा था.विजयंत का हाथ अब उसके पूरे हाथ को ढँक चुका था & सहला रहा था.रंभा ने आँखे बंद कर ली & अपनी ठुड्डी को 1 बार अपने दाए कंधे पे यू रगड़ा मानो कह रही हो कि उसके गुलाबी गाल,उसका हसीन चेहरा अब बस किसी के गर्म होंठो का साथ चाहते थे.

तभी उसके जिस्म मे बिजली की 1 & लहर दौड़ गयी.शेल्फ के दूसरी तरफ रखे उसके बाए हाथ पे देवेन ने अपनी 1 उंगली रख दी थी & उसे बहुत धीमे-2 उसके हाथ पे उपर बढ़ा रहा था.रंभा ने गर्देन घुमाके उसे देखा.देवेन को उसकी निगाहो मे केवल नशा दिखा,जिस्म की चाहत का नशा.विजयंत अपने पूरे हाथ को उसकी गोरी कलाई पे चलता हुआ उपर बढ़ा रहा था.उसका सख़्त हाथ रंभा की अन्द्रुनि बाँह को सहलाते हुए उपर के गुदाज़ हिस्से पे पहुँच रहा था.उधर देवेन की उंगली भी उसकी दूसरी बाँह के उपरी हिस्से पे पहुँच गयी थी & दायरे बना रही थी.

उसकी दाई,नर्म बाँह को विजयंत ने अपनी तरफ खींचा तो रंभा ने उसकी ओर देखा.विजयंत का चेहरा उसके चेहरे की तरफ झुक रहा था.रंभा के होंठ आने वाली किस के लिए खुद बा खुद ही खुल गये.विजयंत के होंठ रंभा के लरजते होंठो से मिले & अगले ही पल दोनो की ज़ुबाने गुत्थमगुत्था हो गयी.रंभा का जिस्म मस्ती से कांप रहा था.विजयंत का हाथ उसकी बाँह से उतर उसकी लगभग नंगी पीठ पे घूम रहा था.दोनो शिद्दत से काफ़ी देर तक 1 दूसरे को चूमते रहे.

जब सांस लेने की ज़रूरत महसूस हुई तो दोनो के होंठ अलग हुए & तब देवेन की उंगली उसकी बाँह से आगे उसके बाए कंधे पे आई & उसकी गर्देन से होते हुए उसकी ठुड्डी पे आई & उसके चेहरे को अपनी ओर घुमाया.अपने प्रेमी से नज़रे मिलते ही रंभा उसकी ओर झुकी & देवेन की खिदमत मे अपने होंठ पेश कर दिए.देवेन ने उसकी पेशकश बड़ी गर्मजोशी से कबूल की & उसके गुलाबी होंठो का रस चूस्ते हुए उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा दी.विजयंत दोनो को चूमते हुए देख रहा था & रंभा की चिकनी पीठ सहला रहा था.

देवेन ने रंभा को चूमते हुए उसके बाए कंधे से उसके सारी के आँचल को सरका दिया.रंभा अब बहुत मस्त हो गयी थी & आह भरते हुए उसने किस तोड़ दी.इस तरह से 2 मर्दो के साथ दूसरी बार उनकी गर्म हर्कतो का निशाना बनाना उसे बहुत मदहोश कर रहा था.तभी विजयंत ने उसकी कमर मे अपना हाथ डाला & उसे अपनी ओर खींचा & खुद से चिपका लिया.रंभा तेज़ साँसे लेती हुई उसके कंधे पे हाथ रख उसकी आँखो मे देखने लगी.उस शख्स को कुच्छ भी याद नही था सिवाय इसके की वो उसकी महबूबा थी..उसकी बीवी थी,बच्चे थे..इतना बड़ा कारोबार & ना जाने कितनी माशुकाएँ थी..पर उसे केवल वो याद थी,केवल रंभा!वो अपने पंजो पे उचकी & उसके बालो को नोचती उसे चूमने लगी.

विजयंत को चूमते हुए उसकी आह निकल गयी.देवेन की 1 उंगली अब उसकी गर्देन के नीचे से उसकी पीठ पे घूम रही थी & उसके ब्लाउस की डोर तक आ गयी थी & उसकी पीठ की चौड़ाई पे उस डोर के साथ-2 घूम रही थी.रंभा जानती थी कि बस अब उसके ब्लाउस की वो पतली सी डोर खुलने ही वाली है..कुच्छ ही पलो मे वो नंगी होगी & इन दोनो के जिस्मो के बीच उसका नंगा जिस्म मस्ती की नयी ऊचईयाँ च्छुएगा!..इस ख़याल ने आग मे घी का काम किया & उसकी चूत मे कसक उठी जिसकी वजह से उसने अपनी मोटी जंघे बेचैनी से आपस मे रगडी.देवेन ने उसकी इस हरकत के कारण उसकी गंद मे होने वाली थिरकन को देखा & उसका लंड उसकी पॅंट मे छॅट्पाटेने लगा.उसने अपनी उंगली & अंगूठे को मिला ब्लाउस की डोर को खींचा & फिर रंभा की नंगी पीठ के बीचोबीच अपने होंठ रख बहुत ज़ोर से चूमा.

“आहह..!”,रंभा ने आह भरते हुए किस तोड़ी & पीछे सर झटका.देवेन ने उसकी कमर मे हाथ डाल उसके पेट को दबाते हुए अपनी ओर खींचा & उसके दाए कंधे को चूमते हुए उसके हसीन चेहरे तक अपने होंठ ले आया.रंभा ने दोनो हाथ पीछे ले जा अपने आशिक़ के गले मे डाले & उसके बॉल खींचते हुए उसके होंठो को तलब किया & उन्हे चूमने लगी.विजयंत को अजीब लग रहा था रंभा को इस तरह देवेन की बाहो मे देखना..वो उसकी थी..इतना तो याद था उसे..मगर उसने खुद उसे थोड़ी देर पहले जो बातें बताई थी,उस हिसाब से वो उसकी बहू लगती थी & उनका रिश्ता दुनिया की नज़रो मे नाजायज़ होता..पर फिर उसे ये बात क्यू याद नही?..याद तो उसे बहुत कुच्छ नही..दोनो के होंठ अलग हो चुके थे & दोनो 1 दूसरे को देख रहे थे.विजयंत को देवेन से जलन हुई..कुच्छ ऐसा था रंभा की निगाहो मे जोकि जब वो उसे देखती थी तो नही होता था..जब वो उसे देखती थी तो वासना होती थी,चाहत होती थी मगर वो बात..वो लगाव..वो मोहब्बत की शिद्दत नही होती थी जो इस वक़्त उसकी आँखो मे देवेन को देखते हुए थी..पर ये हक़ीक़त थी & चाहे जैसी भी हो उसे इसी के साथ जीना था.

उसका दिल तो नही किया दोनो को अलग करने का मगर उसका जिस्म रंभा की नज़दीकी के लिए तड़प रहा था.वो झुका & फर्श पे बैठते हुए रंभा का दाया पाँव अपने हाथ मे ले लिया & उस से सॅंडल उतारा.रंभा ने नीचे देखा विजयंत उसके पैरो की उंगलियो को 1-1 करके चूम रहा था.उसने आह भरी & पीछे देवेन के सीने से सर टीका के आँखे बंद कर ली.बहुत मज़ा आ रहा था उसे मगर साथ ही थोड़ा ग्लानि भी हो रही थी..उसे क्यू अच्छा लग रहा था विजयंत का साथ?..वो तो देवेन को दिलोजान से चाहती थी..उसके लिए अपनी जान देने से भी नही झिझकति वो फिर क्यू विजयंत को वो रोकती नही थी बल्कि उसका पूरा साथ देती थी वो!..जिस्म को इन बातो से क्या मतलब!..उसे तो बस अपनी भूख मिटानी होती है..& उसे जब कोई पसंद आ जाए तो वो रिश्ते-नाते-वफ़ा,किसी की परवाह नही करता..रंभा को अपनी इस उलझन,इस बेबसी पे गुस्सा आया & उसने अपने हाथ पीछे ले जाके देवेन के बाल बहुत ज़ोर से खींचे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--71

gataank se aage......

..& Bas us din ki yaad taza karne ke irade se maine inka sath diya & fir hum dono..-“

“-..Rambha,mujhe yu sharminda na karo!”,Deven jhalla gaya tha.rambha use uski garimuajudgi me hui Vijayant Mehra & uski chudai ki puri kahani suna rahi thi,”..tum mujhe is tarah safai mat diya karo,please!..pyar ka dusra naam bharosa hota hai & vo mujhe tumpe hai.”,vo uske karib aa gaya.rambha ne jhini hari sari & matching string bikini ka top pehna tha jiski patli dor uske gale me mala ki tarah se latki thi & peechhe pith pe bandhi uski chhatiyo ko dhanke thi.deven ko vo bahut pyari lag rahi thi & usne uske khule baalo ko uske kano ke peechhe kar uske chehre ko hatho me thama,”..bekar ki baato me dimagh ko mat uljhaya karo,vaise hi kam uljhane nahi hain humari zindagi me.”,usne uska matha chuma,”chalo ab muskurao.”,tabhi bahar gate pe kisi car ke horn ki aavaz aayi,”..lagta hai Yuri aa gaya.”,vo bahar gaya to rambha vijayant ke kamre ki or chali gayi.

Lawn me behsoh pade vijayant ko vahi paudho ko pani dene vale phuahre se pani daal ke deven hosh me laya tha magar kuchh der baad vo fir se behosh ho gaya tha.deven ne use uthake uske kamre me pahuchaya & fir yuri ko bulaya tha.

Amol Bapat koi kachchi goliya khela insane to tha nahi.usne usi roz deven ke bare me pata karna shuru kar diya magar sath hi usne Bisesar Gobind ke bare me bhi pata karne ka faisla liya.apni official id se login kar usne mehakme ke databse me gobind ko dhoondana shuru kiya & koi 30-35 minute baad use vo mil gaya.jaisa deven ne use bataya tha,gobind Mauritius ke passport se Seychheles se flight pakad ke Mumbai airport se ghusa tha.usne yaha aane ka karan sair-sapata & yaha ke aitihasik jagaho ko dekhne ki hasrat batayi thi.uske sath usne adventure sports ka shaukin hone ki baat bhi kahi thi.samne tasvir me 1 bhure balo vala buzurg sa shakhs dikh raha tha..ye umra & adventure sports..bapat ko baat kuchh hazam nahi ho rahi thi.usne printer on kiya & command deke us se nikalte panno ko dekhne laga.

“rambha kaha hai?”,hosh me aate hi vijayant ne Dr.Popov se saval kiya.

“yehi hai.main abhi use bulata hua..”,vo uski aankhe dekhne laga & fir uski nabz check ki & fir us se kuchh sawal karne laga,”..kaise behosh hue the yaad hai tumhe?”

“haan,main & rambha bahar..-“,vo chup ho gaya.use is aadmi ko apni chudai ke bare me batana kuchh thik nahi lag raha tha.

“dekho,tumhari zuban me 1 saying hai..i mean haan!..kahavat hai ki doctor & vakil se kuchh nahi chhupana chahiye.vaise bhi mujhe deven & rambha ne sari baat bata di hai.main to bas tumhe check karne ke liye ye sawal kar raha hu.”

“hum chudai kar rahe the.”,vijayant ne chehra dusri taraf kar liya tha,”..railing pe..& tabhi maine neeche dekha & mere dimagh me jaise dhamaka sa hua..roshni kaundhi..bahut si tasveere 1 sath ubhri..bahut tezi se..& fir andhera chha gaya..”

“vo tasveere yaad hain abhi?”

“nahi.par rambha kaha hai?”

“abhi bulata hua use.par rambha ke bare me sab yaad hai tumhe?”

“vo meri mehbooba hai.main us se bahut pyar karta hu.”

“achha,kab mile the us se pehli baar?”

“ye to yaad nahi par humesha mere dimagh me uske sath akele me bitaye..khubsurat lamho ki saaf tasveere mere zehan me ghumti hain.”

“achha,abhi tak tum thik se bolte kyu nahi the?..bas 1-2 lafz kehte the..aisa kyu?..kuchh bata sakte ho?”

“pata nahi.”,vijayant ne kandhe uchka diye.

“hun.”,doctor uth khada hua,”rambha ko bhejta hu.”,vo muskurata hua kamre se bahar chala gaya.

Kuchh pal baad rambha kamre me aayi to vijayant bistar se tezi se utra & muskurata hua uske paas aa gaya & uske kandhe tham liye,”rambha!”

“dad,aap thik hain?”,vo bhi muskurayi.yuri ne use sab bataya tha.

“dad..”,vijayant ke mathe pe shikan pad gayi,”..mujhe dad kyu keh rahi ho,rambha?”

“aap yaha baithiye.”,rambha ne use bistar pe bithaya,”..meri baat dhyan se suniye.main aapko aapki zindagi ki dastan sunane wali hu.”

“deven..”,yuri & deven drawing hall ke 1 kone me bane bar pe baith ke gin pi rahe the,”..main samajh sakta hu,tumhare liye ye bahut mushkil hoga par vijayant ko thik karne ka is waqt is se behtar rasta koi & nahi dikhta.vo rambha ko apni lover samajhta hai & main chahta hu ki filhal use rambha ke karib rehne diya jaye.”

“yuri,rambha abhi andar use uski zindagi ke bare me sab bata rahi hai to uske baad kya zarurat hai is sabki?”,yuri hansa.vo samajh sakta tha ki kitna mushkil tha apni mehbooba ko 1 dusre mard ke sath baantna.

“my dear friend,the human brain is arguably the most intriguing thing ever created by the almighty..khuda ne insane dimagh se zyada pechidi chiz shayad hi koi & banayi ho!..rambha use kahani sunayegi magar use us pe yakin bhi to hona chahiye.iska matlab ye nahi ki use rambha pe bharosa nahi magar jab tak use khud sari baat yaad nahi aa jati vo uski sunai kahani ko pure dil se nahi manega.”,usne gin khatm kar glass bar pe rakha,”progress achhi hai & agar mera kaha manoge to shayad bahut jald vo bilkul thik ho jaye..ye medicines mangwa lena..”,usne apna briefcase khol 1 pad pe kuchh dawao ke naam likhe & fir panna phaad deven ko diya,”..purani medicines band kar inhe shuru kar do.ok,ab chalta hu.”

“have dinner with us,yuri.”

“thanks ,deven par aaj Vera aane vali hai.”yuri muskuraya & briefcase band kar us se hath milaya & 1 baar rambha & vijayant se baat ki & fir vaha se chala gaya.deven use bahar tak chhodne gaya & vapas aa apni gin khatm kar bar se tik ke khada ho gaya.

“deven..”,vijayant & rambha vaha aa gaye the,”..thanks,tumne mere liye itna sab kiya.”,vijayant uske karib aa uska hath tham ke hila raha tha,”..& main mafi chahta hu agar..”

“nahi koi baat nahi.”,deven ne 1 soft drink ki bottle khol use di & bar ke dusre kone pe ja apne liye fir se gin dhara.ab rambah dono ke beech khadi thi.

“dr.popov chahte hain ki..”,rambha ki adhuri baat ka matlab deven janta tha.

“hun.”,usne gin ka ghunt bhara.vijayant dono ko dekh raha tha.vo bhi janta tha ki rambha kis baat ke bare me keh rahi thi,”..abhi to tumhe samjhaya tha,rambha.come on relax!”,deven muskuraya & apna glass khali karne laga.

Rambha bar se pith lagaye uspe dono hath rakhe khadi thi.Vijayant Mehra uske dayi taraf usi ke jaise khada tha.uska baya hath shelf pe aage sarka & rambha ki ungliyo ke poro ko chhune laga.rambha ne uske hath ko dekha,uske dil ki dhadkane tez ho gayi thi.vijayant ki ungliya aage sarki & uski ungliyo ke beech ghus gayi.rambha ke jism me vahi jani-pehchani sihran daud gayi.vijayant ne dekha sari ke jhine aanchal ke paar uske dil ka haal kehta uska seena upar-neeche ho raha tha.vijayant ka hath ab uske pure hath ko dhank chuka tha & sehla raha tha.rambha ne aankhe band kar li & apni thuddi ko 1 baar apne daye kandhe pe yu ragda mano keh rahi ho ki uske gulabi gaal,uska haseen chehra ab bas kisi ke garm hotho ka sath chahte the.

Tabhi uske jism me bijli ki 1 & lehar daud gayi.shelf ke dusri taraf rakhe uske baye hath pe Dven ne apni 1 ungli rakh di thi & use bahut dhime-2 uske hath pe upar badha raha tha.rambha ne garden ghumake use dekha.deven ko uski nigaho me keval nasha dikha,jism ki chahat ka nasha.vijayant apne pure hath ko uski gori kalai pe chalata hua upar badha raha tha.uska sakht hath rambha ki andruni banh ko sehlate hue upar ke gudaz hisse pe pahunch raha tha.udhar deven ki ungli bhi uski dusri banh ke upri hisse pe pahunch gayi thi & dayre bana rahi thi.

Uski dayi,narm banh ko vijayant ne apni taraf khincha to rambha ne uski or dekha.vijayant ka chehra uske chehre ki taraf jhuk raha tha.rambha ke honth aane vali kiss ke liye khud ba khud hi khul gaye.vijayant ke honth rambha ke larajte hontho se mile & agle hi pal dono ki zubane gutthamguttha ho gayi.rambha ka jism masti se kanp raha tha.vijayant ka hath uski banh se utar uski lagbhag nangi pith pe ghum raha tha.dono shiddat se kafi der tak 1 dusre ko chumte rahe.

Jab sans lene ki zarurat mehsus hui to dono ke honth alag hue & tab deven ki ungli uski banh se aage uske baye kandhe pe aayi & uski garden se hote hue uski thuddi pe aayi & uske chehre ko apni or ghumaya.apne premi se nazre milte hi rambha uski or jhuki & deven ki khidmat me apne honth pesh kar diye.deven ne uski peshkash badi garmjoshi se kabool ki & uske gulabi hotho ka ras oite hue uske munh me apni jibh ghusa di.vijayant dono ko chumte hue dekh raha tha & rambha ki chikni pith sehla raha tha.

Deven ne rambha ko chumte hue uske baye kandhe se uske sari ke aanchal ko sarka diya.rambha ab bahut mast ho gayi thi & aah bharte hue usne kiss tod di.is tarah se 2 mardo ke sath dusri baar unki garm harkato ka nishana banana use bahut madhosh kar raha tha.tabhi vijayant ne uski kamar me apna hath dala & use apni or khincha & khud se chipka liya.rambha tez sanse leti hui uske kandhe pe hath rakh uski aankho me dekhne lagi.us shakhs ko kuchh bhi yaad nahi tha siway iske ki vo uski mehbooba thi..uski biwi thi,bachche the..itna bada karobar & na jane kitni mashukayen thi..par use kewal vo yaad thi,kewal rambha!vo apne panjo pe uchki & uske baalo ko nochti use chumne lagi.

Vijayant ko chumte hue uski aah nikal gayi.deven ki 1 ungli ab uski garden ke neeche se uski pith peg hum rahi thi & uske blouse ki dor taka a gayi thi & uski pith ki chaudai pe us dor ke sath-2 ghum rahi thi.rambha janti thi ki bas ab uske blouse ki vo patli si dor khulne hi vali hai..kuchh hi palo me vo nangi hogi & in dono ke jismo ke beech uska nanga jism masti ki nayi oochaiyan chhuega!..is khayal ne aag me ghee ka kaam kiya & uski chut me kasak uthi jiski vajah se usne apni moti janghe bechaini se aapas me ragdi.deven ne uski is harkat ke karan uski gand me hone vali thirkan ko dekha & uska lund uski pant me chhatpatane laga.usne apni ungli & anguthe ko mila blouse kid or ko khincha & fir rambha ki nangi pith ke beechobeech apne honth rakh bahut zor se chuma.

“aahhhhhh..!”,rambha ne aah bharte hue kiss todi & peechhe sar jhatka.deven ne uski kamar me hath daal uske pet ko dabate hue apni or khincha & uske daye kandhe ko chumte hue uske haseen chehre tak apne honth le aaya.rambha ne dono hath peechhe le ja apne aashiq ke gale me dale & uske baal khinchte hue uske hotho ko talab kiya & unhe chumne lagi.vijayant ko ajib lag raha tha rambha ko is tarah deven ki baaho me dekhna..vo uski thi..itna to yaad tha use..magar usne khud use thodi der pehle jo baaten batayi thi,us hisab se vo uski bahu lagti thi & unka rishta duniya ki nazro me najayaz hota..par fir use ye baat kyu yaad nahi?..yaad to use bahut kuchh nahi..dono ke honth alag ho chuke the & dono 1 dusre ko dekh rahe the.vijayant ko deven se jalan hui..kuchh aisa tha rambha ki nigaho me joki jab vo use dekhti thi to nahi hota tha..jab vo use dkehti thi to vasna hoti thi,chahat hoti thi magar vo baat..vo lagav..vo mohabbat ki shiddat nahi hoti thi jo is waqt uski aankho me deven ko dekhte hue thi..par ye haqeeqat thi & chahe jaisi bhi ho use isi ke sath jeena tha.

Uska dil to nahi kiya dono ko alag karne ka magar uska jism rambha ki nazdiki ke liye tadap raha tha.vo jhuka & farsh pe baithatehue rambha ka daya panv apne hath me le liya & us se sandal utara.rambha ne neeche dekha vijayant uske pairo ki ungliyo ko 1-1 karke chum raha tha.usne aah bhari & peechhe deven ke seene se sar tika ke aankhe badn kar li.bahut maza aa raha tha use magar sath hi thoda glani bhi ho rahi thi..use kyu achha lag raha tha vijayant ka sath?..vo to deven ko dilojaan se chahti thi..uske liye apni jaan dene se bhi nahi jhijhakti vo fir kyu vijayant ko vo rokti nahi thi balki uska pura sath deti thi vo!..jism ko in baato se kya matlab!..use to bas apni bhukh mitani hoti hai..& use jab koi pasand aa jaye to vo rishte-nate-wafa,kisi ki parvah nahi karta..rambha ko apni is uljhan,is bebasi pe gussa aaya & usne apne hath peechhe le jake deven ke baal bahut zor se khinche.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--72

गतान्क से आगे......

देवेन को भी विजयंत का अपनी महबूबा के साथ ये मस्ताना खेल खेलना ज़रा भी पसंद नही था मगर ना जाने क्या बात थी इस खेल मे कि दोनो को 1 साथ देख उसके दिल मे नफ़रत की जगह 1 अजीब सा रोमांच भर जाता था..उसे भी विजयंत से जलन होती थी मगर साथ ही वो खींचता था उनकी तरफ,उस खेल मे शामिल होने के लिए..फिर यूरी ने भी कहा था की बहुत मुमकिन था की रंभा के साथ चुदाई की वजह से विजयंत पूरा का पूरा ठीक हो जाए..फिर सारी गुत्थिया सुलझ जाती & वो दयाल को ढूँढने मे अपना सारा वक़्त & सारी ताक़त लगा सकता था.

“उउम्म्म्म..आहह..!”,रंभा की आहो & उसके बॉल खींचने से वो अपने ख़यालो से बाहर आया.विजयंत का हाथ रंभा की सारी मे घुस उसकी टाँगे सहला रहा था & वो अभी भी उसके दाए पैर को चूमे जा रहा था.देवेन ने उसके पेट पे अपने हाथ दायरे की शक्ल मे घुमाए तो रंभा मस्ती मे और ज़ोर से आहे भरने लगी.विजयंत का हाथ उसकी जाँघ के नीचे सहला रहा था & उसके होंठ उसके पैरो की उंगलिया चूसे जा रहे थे.जिस्म मे वो मीठा तनाव बहुत बढ़ गया था & चूत की कसक भी.देवेन ने उसकी नाभि मे अपनी उंगली उतार ज़ोर से कुरेदते हुए उसके दाए कान पे काटा & उसी वक़्त विजयंत ने उसके पाँव की सबसे छ्होटी उंगली को चूस उसके & उस से पहले वाली उंगली के बीच की जगह को जीभ से छेड़ा & उसकी जाँघ के निचले हिस्से को बहुत ज़ोर से दबाया.रंभा ने ज़ोर से आह भरी & देवेन की बाहो मे कसमसने लगी.दोनो मर्द समझ गये की वो झाड़ गयी है.

विजयंत ने उसके पैर को ज़मीन पे रखा & दोनो हाथ उसकी सारी मे घुसा उसकी टाँगो & जाँघो को सहलाते हुए उसके गोल पेट को चूमने लगा.देवेन के हाथ उसके खुले ब्लाउस के नीचे से उसकी चूचियो के निचले हिस्से को 2-2 उंगलियो से सहला रहे थे.रंभा के हाथ अब देवेन के गले से उतर विजयंत के सर से लग चुके थे & उसके बालो मे को बेचैनी से खींच रहे थे.विजयंत की लपलपाति ज़ुबान उसकी नाभि को चाते जा रही थी.देवेन के हाथ तो जैसे उसकी चूचियो को च्छू के भी नही च्छू रहे थे.वो उन्हे अपनी हथेलियो मे भर के दबा नही रहा था,ना ही उनके निपल्स को छेड़ रहा था बस उनके नीचे के हिस्से को अपनी उंगलियो से सहला रहा था & रंभा को मस्त किए जा रहा था.रंभा की मस्ती इतनी बढ़ गयी की उसे अब दोनो का च्छुना भी सहन नही हो रहा था & वो दोनो को अपने जिस्म से परे धकेल उनसे छिटक के अलग हो गयी.

उसकी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी,उसका आँचल फर्श पे था & ढीले ब्लाउस के किनारो से उसकी उपर-नीचे होती चूचियो की झलकिया दिख रही थी.बॉल बिखर के चेहरे पे आ गये थे & होंठ कांप रहे थे.देवेन उसे देख मुस्कुराते हुए अपनी शर्ट के बटन्स खोलने लगा तो रंभा ने अपना दाया हाथ बालो मे घुमाया & उसे अपने चेहरे पे बेचैनी से चलाया.विजयंत ने देवेन की देखा-देखी अपनी कमीज़ भी उतार दी.दोनो के बालो भरे चौड़े सीनो को देख रंभा की चूत मे फिर से कसक उठने लगी.उसने बाए हाथ को अपनी सारी पे रख अपनी चूत पे दबा उसे शांत करने की नाकाम कोशिश करते हुए दाए हाथ को होंठो पे भींचते हुए अपनी आह को रोका.

देवेन उसके बिल्कुल करीब आ खड़ा हुआ था & उसके गले से ब्लाउस को निकाल रहा था,विजयंत के हाथ उसकी कमर मे घुस उसके नर्म पेट को छुते हुए उसकी सारी को निकाल रहे थे.रंभा बस ज़ोर-2 से साँसे लेती हुई दोनो मर्दो के हाथो नंगी हो रही थी.सारी के उतरते ही देवेन ने उसके पीछे जा उसकी कमर सहलाते हुए उसके पेटिकट को उसकी कमर से सरकया & फिर उसकी गंद की दरार मे फँसे उसके हरे तोंग को विजयंत ने नीचे सरकया.

देवेन पीछे से उसे बाहो मे भर उसके गालो को चूमते हुए अभी भी वैसे ही उसकी चूचियो के निचले हिस्सो को दोनो हाथो की 2-2 उंगलियो से सहला रहा था & नीचे बैठा विजयंत मेहरा उसकी कमर को पकड़े उसकी गंद को धीमे-2 सहलाते हुए उसकी कमर के दाई तरफ के मांसल हिस्से को चूम रहा था.रंभा मस्ती मे चूर थी & दोनो की ज़ुबानो का भरपूर लुत्फ़ उठा रही थी.देवेन ने नीचे से उसकी चूचियो को अपने हाथो मे भर दबाया तो वो आह भरते हुए सिहर उठी.विजयंत उसकी चूत के ठीक उपर पेट पे चूम रहा था & उसकी गर्म साँसे भी उस हिस्से को च्छू रही थी.

“उउन्नग्घह..!”,देवेन ने उसकी चूचियो को दोनो हाथो मे भर आपस मे दबाया & विजयंत की ज़ुबान ने चूत की दरार को सहलाते हुए उसके दाने को छेड़ा.रंभा ने दाए हाथ से उसके बाल पकड़ उसके सर को अपनी चूत पे दबाया & विजयंत ने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया.देवेन उसके पूरे चेहरे को अपने तपते होंठो से चूम रहा था,उसके हाथ महबूबा की चूचियो को हर तरीके से दबा रहे थे-कभी बहुत हल्के-2 उनकी नज़ाकत की इज़्ज़त करते हुए तो कभी उनकी कोमलता से बेपरवाह काफ़ी ज़ोर से.विजयंत उसकी चूत के गीलेपान को पीते हुए जीभ चट मे बहुत अंदर तक घुसा रहा था.रंभा कसमसा रही थी.उसकी कमर हिलने लगी थी & वो देवेन के मुँह पे चूत रगड़ने लगी थी.जिस्म मे बेचैनी & मदहोशी इतनी भर गयी थी की वो परेशान हो सर इधर-उधर घूमाते हुए कभी इस प्रेमी तो कभी उस प्रेमी के बालो को नोचते हुए आहे भर रही थी.देवेन ने उसकी चूचियो को आपस मे सटा के दबाते हुए दोनो हाथो की 2-2 उंगलियो से उसके किशमिश के दानो सरीखे निपल्स को मसला & उसी वक़्त विजयंत की ज़ुबान ने भी उसके दाने को ज़ोर से छेड़ा.रंभा ने च्चटपटाते हुए आह भरी & झाड़ गयी.वो दोनो की गिरफ़्त से निकल बार के सहारे खड़ी हो सिसकने लगी.

दोनो मर्द उसके करीब आए & उसके जिस्म पे हाथ रखा तो वो घूमी & दोनो के सर को 1-1 हाथ मे थाम लिया & पहले अपने दाए तरफ खड़े देवेन & फिर बाए तरफ खड़े विजयंत को चूमा & फिर अपने नखुनो से उनके सीने से पेट तक खरोंछते हुए उनके पॅंट खोल दिए.दोनो मर्दो के लिए ये इशारा काफ़ी था & दोनो ने अपनी -2 पॅंट्स उतार दी & अपने तगड़े लंड उसकी खिदमत मे पेश करते खड़े हो गये.रंभा ने दोनो की आँखो मे आँखे डालते हुए दोनो हाथो मे दोनो लुंडो को भर के दबाया.विजयंत के जिस्म के साथ ज़हन मे भी जैसे बिजली दौड़ गयी.ये एहसास उसे याद था!..उसे याद था कि वो उसके लंड से जिस मस्ताने अंदाज़ मे खेलती थी वैसे कभी किसी ने नही खेला था मगर वो बाकी लोग कौन थे जिनकी तुलना वो रंभा से कर रहा था?..कौन थी वो लड़कियाँ?..उसकी बीवी..क्या नाम बताया था रंभा ने उसका..हां..रीता..क्या वो उसे ऐसे नही प्यार करती थी?..आख़िर क्यू..वो सब भूल गया था..उस झरने पे क्या हुआ था उस रात?..,”आहह..!”,उसने कुच्छ बेबसी & काफ़ी मज़े मे वो आँखे बंद कर आह भरी.देवेन रंभा की तुलना किसी & औरत से नही कर रहा था..ऐसा करना उस हुसनपरी,जिसे वो बेइंतहा प्यार करने लग था.की तौहीन होती..शुरू मे उसे सुमित्रा का दर्जा देते हुए उसे ग्लानि हुई थी,लगा था वो अपनी सुमित्रा से बेवफ़ाई कर रहा था मगर उसका दिल हुमेशा उस से कहता रहता था कि ये सही था..सुमित्रा की बेटी उसे वो दे रही थी जिसका वो हक़दार था लेकिन जिस से वो अभी तक महरूम था.उसने रंभा के दाए गाल पे अपनी हथेली जमाई तो उसने नशीली आँखो से उसे देखते हुए हथेली पे अपना गाल रगड़ा.विजयंत ने अपना दाया हाथ उसके बाए गाल पे रखा & रंभा ने उसके साथ भी वही हरकत दोहराई.दोनो मर्द आगे झुके & उसके 1-1 गाल और गर्देन से लेके कंधो तक चूमने लगे.रंभा वैसे ही उनके लंड हिलाती रही.

डेवाले मे मेहरा परिवार के 1 बुंगले मे भी वासना का खेल चल रहा था.कामया समीर की बाहो मे उसके बिस्तर पे पड़ी थी.समीर के हाथो मे उसकी नर्म चूचिया कसने लगी थी & उसके जिस्म मे बेचैनी भरने लगी थी,”समीर..सब ठीक रहेगा ना?..ऊव्वववव..!..कितनी ज़ोर से दबाते हो!..दुख़्ता है..आननह..!”,समीर बेरेहमी से उसकी चूचिया मसल रहा था.वो जानता था की कामया कुच्छ भी बोले,उसे पसंद था इस तरह से चूचियाँ मसलावाना.उसने उसकी बाई छाती को मुट्ठी मे पकड़ के भींचा & दाई के निपल को दन्तो मे पकड़ उपर खींचा,”..औचह..!”कामया ने उसके बाल खींचे & उसकी गर्देन के नीचे अपने नाख़ून जमा दिए.

“सब ठीक रहेगा.तुम घबराओ मत.”,समीर ने उसकी छाती को छ्चोड़ उसे उल्टा किया & उसकी गंद से हाथ लगा दिए.

“फिर उसे इस तरह क्यू ढूंड रहे हो?..उउम्म्म्मम..!”,समीर जिस बेरेहमी से उसकी चूचियो को मसल रहा था,अब उतनी ही कोमलता से उसकी गंद सहला रहा था,”..जलन हो रही है सोच के कि वो वाहा किसी & की बाहो मे तो नही?”,गर्देन घुमा के वो शोखी से मुस्कुराइ तो समीर ने उसकी गंद पे चिकोटी काट ली,”..औचह..गंदे..!”,उसने प्यार से अपने प्रेमी को झिड़का.

“नही.”,समीर उसकी पीठ पे लेट गया & अपना लंड उसकी गंद पे दबाया तो कामया ने टाँगे फैला दी.समीर ने हाथ नीचे ले जाके अपने लंड को उसकी चूत पे रखा तो कामया थोडा उठ गयी & लंड को चूत मे घुसाने मे मदद की,”..तुम उसे जानती नही.वो बहुत होशियार है.पता नही क्यू मुझे लग रहा है कि वो गोआ कुच्छ ऐसा करने गयी है जोकि हमारे लिए बहुत मुश्किले पैदा कर सकता है.”,वो अपने हाथो को उसके जिस्म के नीचे ले जा उसकी चूचियो को वैसे ही बेरेहमी से मसल्ते हुए धक्के लगा रहा था.

“ऊन्नह..मगर क्या?..& मुझे नही लगता ऐसा डार्लिंग..नही तो वो बताती ही क्यू कि वो गोआ मे है?”,कामया ने अपने बाए कंधे के उपर से अपने आशिक़ के सर को थाम अपनी तरफ किया & उसे चूम लिया.

“क्यूकी होशियार होने के साथ-2 वो काफ़ी हिम्मतवाली भी है & फिर मैने उस से बेवफ़ाई भी की है & चोट खाई औरत से ख़तरनाक चीज़ कोई नही होती. ”

“तो फिर जल्दी से ढूँड़ो उसे & अपने शुबहे दूर कर लो.कही सब कुच्छ बर्बाद ना हो जाए!”

“नही जानेमन,मैं ऐसी अनहोनी नही होने दूँगा.”,समीर झुका & महबूबा के रसीले होंठो को चूमते हुए उसे चोदने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--72

gataank se aage......

Deven ko bhi vijayant ka apni mehbooba ke sath ye mastana khel khelna zara bhi pasand nahi tha magar na jane kya baat thi is khel me ki dono ko 1 sath dekh uske dil me nafrat ki jagah 1 ajib sa romanch bhar jata tha..use bhi vijayant se jalan hoti thi magar sath hi vo khinchta tha unki taraf,us khel me shamil hone ke liye..fir Yuri ne bhi kaha tha ki bahut mumkin tha ki rambha ke sath chudai ki vajah se vijayant pura ka pura thik ho jaye..fir sari gutthiya sulajh jati & vo Dayal ko dhoondane me apna sara waqt & sari taqat laga sakta tha.

“uummmm..aahhhhhhh..!”,rambha ki aaho & uske baal khinchne se vo apne khayalo se bahar aaya.vijayant ka hath rambha ki sari me ghus uski tange sehla raha tha & vo abhi bhi uske daye pair ko chume ja raha tha.deven ne uske pet pe apne hath dayre ki shakl me ghumaye to rambha masti me & zor se aahe bharne lagi.vijayant ka hath uski jangh ke neeche sehla raha tha & uske honth uske pairo ki ungliya chuse ja rahe the.jism me vo mitha tanav bahut badh gaya tha & chut ki kasak bhi.deven ne uski nabhi me apni ungli utar zor se kuredte hue uske daye kaan pe kata & usi waqt vijayant ne uske panv ki sabse chhoti ungli ko chus uske & us se pehle vali ungli ke beech ki jagah ko jibh se chheda & uski jangh ke nichle hisse ko bahut zor se dabaya.rambha ne zor se aah bhari & deven ki baaho me kasmasane lagi.dono mard samajh gaye ki vo jhad gayi hai.

Vijayant ne uske pair ko zamin pe rakha & dono hath uski sari me ghusa uski tango & jangho ko sehlate hue uske gol pet ko chumne laga.deven ke hath uske khule blouse ke neeche se uski chhatiyo ke nichle hisse ko 2-2 ungliyo se sehla rahe the.rambha ke hath ab deven ke gale se utar vijayant ke sar se lag chuke the & uske baalo me ko bechaini se khinch rahe the.vijayant ki laplapati zuban uski nabhi ko chate ja rahi thi.deven ke hath to jaise uski chhatiyo ko chhu ke bhi nahi chhu rahe the.vo unhe apni hatheliyo me bhar ke daba nahi raha tha,na hi unke nipples ko chhed raha tha bas unke neeche ke hisse ko apni ungliyo se sehla raha tha & rambha ko mast kiye ja raha tha.rambha ki masti itni badh gayi ki use ab dono ka chhuna bhi sahan nahi ho raha tha & vo dono ko apne jism se pare dhakel unse chhitak kea lag ho gayi.

uski sanse bahut tez chal rahi thi,uska aanchal farsh pet ha & dhile blouse ke kinaro se uski upar-neeche hoti choochiyo ki jhalkiya dikh rahi thi.baal bikhar ke chehre pe aa gaye the & honth kanp rahe the.deven use dekh muskurate hue apni shirt ke buttons kholne laga to rambha ne apna daya hath balo me ghumaye & use apne chehre pe bechaini se chalaya.vijayant ne deven ki dekha-dekhiapni kamiz bhi utar di.dono ke baalo bhare chaude seeno ko dekh rambha ki chut me fir se kasak uthne lagi.usne baye hath ko apni sari pe rakh apni chut pe daba use shant karne ki nakaam koshish karte hue daye hath ko hotho pe bhinchte hue apni aah ko roka.

Deven uske bilkul karib aa khada hua tha & uske gale se blouse ko nikal raha tha,vijayant ke hath uski kamar me ghus uske narm pet ko chhute hue uski sari ko nikal rahe the.rambha bas zor-2 se sanse leti hui dono mardo ke hatho nangi ho rahi thi.sari ke utarte hi deven ne uske peechhe ja uski kamar sehlate hue uske pettiocaot ko uski kamar se sarkaya & fir uski gand ki darar me phanse uske hare thong ko vijayant ne neeche sarkaya.

Deven peechhe se use baaho me bhar uske galo ko chumte hue abhi bhi vaise hi uski chhatiyo ke nichle hisso ko dono hatho ki 2-2 ungliyo se sehla raha tha & neeche baitha Vijayant Mehra uski kamar ko pakde uski gand ko dhime-2 sehlate hue uski kamar ke dayi taraf ke mansal hisse ko chum raha tha.Rambha masti me chur thi & dono ki zubano ka bharpur lutf utha rahi thi.deven ne neeche se uski chhatiyo ko apne hatho me bhar dabaya to vo aah bharte hue sihar uthi.vijayant uski chut ke thik upar pet pe chum raha tha & uski garm sanse bhi us hisse ko chhu rahi thi.

“uunngghhhhhh..!”,deven ne uski chhatiyo ko dono hatho me bhar aapas me dabaya & vijayant ki zuban ne chut ki darar ko sehlate hue uske dane ko chheda.rambha ne daye hath se uske baal pakad uske sar ko apni chut pe dabaya & vijayant ne uski chut chatna shuru kar diya.deven uske pure chehre ko apne tapte hotho se chum raha tha,uske hath mehbooba ki choochiyo ko har tarike se daba rahe the-kabhi bahut halke-2 unki nazakat ki izzat karte hue to kabhi unki komalta se beparvah kafi zor se.vijayant uski chut ke gilepan ko pite hue jibh chut me bahut andar tak ghuas raha tha.rambha kasmasa rahi thi.uski kamar hilne lagi thi & vo deven ke munh pe chut ragadne lagi thi.jism me bechaini & madhoshi itni bhar gayi thi ki vo pareshan ho sar idhar-udhar ghumate hue kabhi is premi to akbhi us premi ke baalo ko nochte hue aahe bhar rahi thi.deven ne uski choochiyo ko aapas me sata ke dabate hue dono hatho ki 2-2 ungliyo se uske kishmish ke dano sarikhe nipples ko masla & usi waqt vijayant ki zuban ne bhi uske dane ko zor se chheda.rambha ne chhatpatate hue aah bhari & jhad gayi.vo dono ki giraft se nikal bar ke sahare khadi ho sisakne lagi.

Dono mard uske karib aaye & uske jism pe hath rakha to vo ghumi & dono ke sar ko 1-1 hath me tham liya & pehle apne daye taraf khade deven & fir baye taraf khade vijayant ko chuma & fir apne nakhuno se unke seene se pet tak kharonchte hue unke pant khol diye.dono mardo ke liye ye ishara kafi tha & dono ne apni -2 pants utar di & apne tagde lund uski khidmat me pesh karte khade ho gaye.rambha ne dono ki aankho me aankhe dalte hue dono hatho me dono lundo ko bhar ke dabaya.vijayant ke jism ke sath zehan me bhi jaise bijli daud gayi.ye ehsas use yaad tha!..use yaad tha ki vo uske lund se jis mastane andaz me khelti thi vaise kabhi kisi ne nahi khela tha magar vo baki log kaun the jinki tulna vo rambha se kar raha tha?..kaun thi vo ladkiyan?..uski biwi..kya naam batay tha rambha ne uska..haan..Rita..kya vo use aise nahi pyar karti thi?..aakhir kyu..vo sab bhool gaya tha..us jharne pe kya hua tha us raat?..,”aahhhhhhhhh..!”,usne kuchh bebasi & kafi maze me vo aankhe band kar aah bhari.deven rambha ki tulna kisi & aurat se nahi kar raha tha..aisa karna us husnpari,jise vo beintaha pyar karne lag tha.ki tauheen hoti..shuru me use Sumitra ka darja dete hue use glani hui thi,laga tha vo apni sumitra se bewafai kar raha tha magar uska dil humesha us se kehta rehta tha ki ye sahi tha..sumitra ki beti use vo de rahi thi jiska vo haqdar tha lekin jis se vo abhi tak mehrum tha.usne rambha ked aye gaal pe apni hatheli jamayi to usne nashili aankho se use dkehte hue hatheli pe apna gaal ragda.vijayant ne apna daya hath uske baye gaal pe rakha & rambha ne uske sath bhi vahi harkat dohrayi.dono mard aage jhuke & uske 1-1 gaal & garden se leke kandho tak chumne lage.rambha vaise hi unke lund hilati rahi.

Devalay me Mehra parivar ke 1 bungle me bhi vasna ka khel chal raha tha.Kamya Sameer ki baaho me uske bistar pe padi thi.sameer ke hatho me uski narm choochiya kasne lagi thi & uske jism me bechaini bharne lagi thi,”sameer..sab thik rahega na?..oowwwww..!..kitni zor se dabate ho!..dukhta hai..aannhhhhh..!”,sameer berehmi se uski choochiya masal raha tha.vo janta tha ki kamya kuchh bhi bole,use pasand tha is tarah se chhatiyan maslawana.usne uski bayi chhati ko mutthi me pakad ke bhincha & dayi ke nipple ko danto me pakad upar khincha,”..ouchhhhh..!”kamya ne uske baal khinche & uski garden ke neeche apne nakhun jama diye.

“sab thik rahega.tum ghabrao mat.”,sameer ne uski chhatiyo ko chhod use ulta kiya & uski gand se hath laga diye.

“fir use is tarah kyu dhoond rahe ho?..uummmmm..!”,sameer jis berehmi se uski choochiyo ko masal raha tha,ab utni hi komalta se uski gand sehla raha tha,”..jalan ho rahi hai soch ke ki vo vaha kisi & ki baaho me to nahi?”,garden ghuma ke vo shokhi se muskurayi to sameer ne uski gand pe chikoti kaat li,”..ouchhhh..gande..!”,usne pyar se apne premi ko jhidka.

“nahi.”,sameer uski pith pe let gaya & apna lund uski gand pe dabaya to kamya ne tange phaila di.sameer ne hath neeche le jake apne lund ko uski chut pe rakha to kamya thoda uth gayi & lund ko chut me ghusne me madad ki,”..tum use janti nahi.vo bahut hoshiyar hai.pata nahi kyu mujhe lag raha hai ki vo Goa kuchh aisa karne gayi hai joki humare liye bahut mushkile paida kar sakta hai.”,vo apne hatho ko uske jism ke neeche le ja uski choochiyo ko vaise hi berehmi se masalte hue dhakke laga raha tha.

“oonnhhhh..magar kya?..& mujhe nahi lagta aisa darling..nahi to vo batati hi kyu ki vo goa me hai?”,kamya ne apne baye kandhe ke upar se apne aashiq ke sar ko tham apni taraf kiya & use chum liya.

“kyuki hoshiyar hone ke sath-2 vo kafi himmatvali bhi hai & fir maine us se bewafai bhi ki hai & chot khayi aurat se khatarnak chiz koi nahi hoti. ”

“to fir jaldi se dhoondo use & apne shubahe door kar lo.kahi sab kuchh barbad na ho jaye!”

“nahi janeman,main aisi anhoni nahi hone dunga.”,sameer jhuka & mehbooba ke rasile hotho ko chumte hue use chodne laga.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--73

गतान्क से आगे......

रंभा ने विजयंत को धकेल 1 बार स्टूल पे बिठा दिया & फिर झुक के उसके लंड को मुँह मे भर चूसने लगी.अपने नखुनो से वो उसके आंडो को खरोंच उसके मज़े को और बढ़ा रही थी.विजयंत आँखे बंद किए उसके बालो को पकड़ मस्ती मे आहे भर रहा था मगर उसके ज़हन मे वो सवाल की रंभा के अलावा और कौन-2 सी औरतें उसकी ज़िंदगी मे आई थी,अभी भी घूमड़ रहा था..वो सोनिया कौन थी जिसका नाम ले वो दोपहर को बेहोश हो गया था?..कौन थी वो?..उसने सवालो को थोड़ी देर शांत रहने को कहा & अपना ध्यान रंभा पे लगाया.वो दीवानो की तरह उसके लंड के सूपदे को चूस्ते हुए उसे हिला रही थी.

“उउम्म्म्मम..!”,लंड मुँह मे भरे हुए वो मस्ती मे करा ही.पीछे से देवेन झुक के उसकी चूत चाटने मे जुट गया था.रंभा अब कमर हिलाती,च्चटपटती हुई अपने ससुर का लंड चूस रही थी.देवेन 1 उंगली को उसकी गंद मे घुसा के अंदर-बाहर करते हुए उसकी चूत चाट रहा था.रंभा के जिस्म मे फिर वोही बेचैनी भर गयी & उसे शांत करने की गरज से वो अपने ससुर के लंड & आंडो को बुरी तरह दबाते हुए चूसने लगी.विजयंत के लिए अब खुद पे काबू रखना मुश्किल था & उसने बहू के बाल पकड़ उसके मुँह को लंड से अलग किया.रंभा के चेहरे पे अपने मनपसंद खिलोने के छिनने से नाखुशी के भाव थे.विजयंत ने उसकी बाई जाँघ पकड़ उसे अपनी गोद मे बीताया तो रंभा खुद ही उसके लंड को थाम चूत पे रखा & फिर उसके कंधे थाम बैठने लगी.

“आहह..!”,रंभा चीखी.वो लंड को चूत मे ले विजयंत की गोद मे बैठी ही थी कि पीछे से उसके प्रेमी ने उसकी गंद की फांको को फैलाते हुए उसके छेद मे अपना लंड उतार दिया था.विजयंत उसकी चूचियो को दबाते हुए चूस रहा था & देवेन उसकी गंद मार रहा था.रंभा मस्ती मे विजयंत के लंड पे उच्छलते हुए सर पीछे झुका बालो को झटकती मस्ती मे चीखे जा रही थी.देवेन आज लंड को आधी लंबाई से आगे घुसा रहा था.रंभा को प्यार से चूमते ,उसके कानो मे प्यार भरे बोल बोलते हुए,वो अपने लंड को उसकी गंद की अनच्छुई गहराइयो मे उतार रहा था.गंद मे होती हुलचूल की वजह से रंभा का पूरा जिस्म सिहर उठा था & उसकी चूत बुरी तरह कसमसा रही थी.विजयंत का लंड उसकी कसमसाहट से पागल हो गया था & अब विजयंत भी नीचे से कमर उचका के उसे तेज़ी से चोद रहा था.

देवेन उसकी गंद की कसावट से पागल हो गया था.बड़ी मुश्किल से वो खुद को तेज़ धक्के लगाने से रोक रहा था.वो अपने हाथो से कभी उसकी मांसल कमर तो कभी उसकी मोटी चूचियाँ दबा रहा था.उसका दिल किया कि वो अकेला ही रंभा की जवानी का लुत्फ़ उठाए & उसने आगे झुकते हुए उसकी मूडी टाँगो को दोनो हाथो मे थामा & उसे विजयंत के लंड से उठा हॉल मे रखे बड़े सोफे पे ले गया.विजयंत इस तरह से चुदाई मे खलल पड़ने से झल्ला गया था लेकिन देवेन रंभा का प्रेमी था & वो उसे चाह के भी मना नही कर सकता था.

रंभा सोफे पे घुटनो & हाथो पे थी & देवेन बाए हाथ को उसकी कमर की बगल से ले जाते हुए उसके दाने को रगड़ते हुए उसकी गंद मार रहा था.कुच्छ ही पॅलो मे रंभा झाड़ गयी & सोफे पे निढाल हो गयी.देवेन ने लंड उसकी गंद से बाहर खींचा & उसके चेहरे के पास बैठ के उसपे किस्सस की झड़ी लगा दी.अब विजयंत भी सोफे पे आ गया था & रंभा की गंद सहला रहा था.

वो झुका & उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.रंभा ने देवेन को चूमा & उसे खड़े होने का इशारा किया & फिर उठते हुए उसके पेट मे अपना मुँह घुसा चूमने लगी.देवेन उसके बालो मे प्यार से हाथ फिराने लगा & उसने उसके लंड को मुँह मे भर लिया.

"उउन्नग्घह..!",वो घुटनो & हाथो पे हो देवेन के लंड को पकड़ के हिलाते हुए चूस ही रही थी कि पीछे से अपने घुटनो पे बैठ विअजय्न्त ने उसकी चूत मे लंड उतार दिया था.रंभा अब पूरी तरह से मदहोश थी.दोनो मर्द उसके जिस्म से पूरे जोश के साथ खेल रहे थे & वो भी उनकी हर्कतो से जोश मे पागल हो रही थी.विजयंत का तगड़ा लंड उसकी चूत को बुरी तरह फैलाता हुआ रगड़ रहा था & हर धक्के पे जब विजयंत का जिस्म उसकी गंद से टकराता तो वो सिहर उठती & देवेन के लंड को मुँह मे भरे हुए आह भरती.विजयंत उसकी गंद की फांको पे चपत मारता उसकी चूत चोद रहा था & देवेन उसके सर को थामे,बीच-2 मे उसकी छातिया दबाता उसका मुँह.कुच्छ देर बाद रंभा 1 बार फिर झाड़ गयी & देवेन के लंड को छ्चोड़ सोफे पे गिर गयी.

विजयंत ने उसकी कमर थाम उसे उठाया & उसे पकड़ते हुए सोफे से नीचे पैर लटका के बैठ गया.अब रंभा उसके सीने से पेट लगाए ,उसके लंड को चूत मे लिए बैठी थी.विजयंत ने उसकी कमर पकड़ उसे उपर उठाया & लंड को चूत से निकाला & फिर गोद मे बिठा के आगे झुकाया.रंभा समझ नही पा रही थी कि वो कर क्या रहा है मगर देवेन समझ गया था.वो सामने आया & रंभा के सामने बैठ के उसके होंठ चूमने लगा.

"ऊन्न्‍न्णनह..!",रंभा ने दर्द & मस्ती मे बहाल हो देवेन के कानो को पकड़ते हुए उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा दी थी.विजयंत ने उसकी कमर थाम उसकी गंद मे अपना लंड डाल दिया था.देवेन चूमते हुए उठा & उसे विजयंत के सीने पे गिरा दिया & उसकी टाँगे फैला दी & घुटने मोड़ दिए.रंभा ने अपने घुटने अपने हाथो मे पकड़ अपनी चूत अपने महबूब के लिए खोलो दी.देवेन आगे झुका & लंड को उसकी चूत मे घसा दिया.रंभा अभी भी उसके मोटे लंड के घुसने पे थोड़ा दर्द महसूस करती थी,उसका लंड था ही इतना मोटा!

देवेन आगे झुका & उसे चूमते हुए उसकी चूचियाँ मसल्ते हुए धक्के लगाने लगा.विजयंत उसकी कमर को जकड़े उसके कंधो & गर्दन को चूमता हुआ उसकी गंद मार रहा था.रंभा अब बिल्कुल बहाल हो गयी.2 ताक़तवर मर्दो से इस तरह अपने जिस्म को ऐसे भोगा जाना उसे मदहोशी के उस आलम मे ले गया था,जिसके बारे मे उसने कभी सपने मे भी नही सोचा था.दोनो उसके जिस्म को अपने हाथो मे भरते हुए,उसके चेहरे & बाकी जिस्म पे चूमते हुए उसके दोनो सुराखो मे अपने क़ातिल अंगो को इस गर्मजोशी से अंदर-बाहर कर रहे थे की वो बस झड़ती चली जा रही थी.उसका अपने जिस्म पे कोई इकतियार नही रह गया था.उसे होश भी नही था कि वो चीख रही थी & उसका जिस्म कांप रहा था.वो तो बस मज़े मे डूबी हुई थी.तीनो ने 1 साथ ज़ोर से आह भरी & रंभा ने 1 साथ अपनी चूत & गंद मे गर्म,गाढ़े वीर्य की बौच्चरें महसूस की & उसकी चूत भी उनके जवाब मे पानी बहाने लगी.खेल अपने अंजाम तक पहुँच गया था & तीनो अब सुकून ओर खुशी से भरे हुए थे.

हॉलिडे इन्न गोआ मे रॉकी को वो मिल गया जिसकी उसे तलाश थी-रंभा मेहरा का नाम.कितनी मुश्किल हुई थी उसे ये काम करने मे ये वोही जानता था.उसके क्लाइंट ने उसे रंभा के डेवाले से गोआ आने की तारीख & फ्लाइट के बारे मे बताया था & केवल उसी के सहारे वो इस होटेल तक पहुँच गया था.इसके पहले उसने 10 5 स्तर होटेल्स मे छन्बिन की थी मगर हर जगह से उसे खाली हाथ लौटना पड़ा था.उसे लगने लगा था कि रंभा ज़रूर किसी छ्होटे-मोटे होटेल या फिर किसी जान-पहचान वाले के घर चली गयी होगी मगर हॉलिडे इन्न के फ्लोर मॅनेजर से मिलने के बाद उसकी तलाश ख़त्म हो गयी थी या कहिए की शुरू हो गयी थी.

"पूरा कमरा तहस-नहस था मानो अंदर कोई तूफान आया हो."

"अंदर हाथापाई हुई थी क्या?",रॉकी ने 1 मोटा पॅकेट मॅनेजर को थमाया.

"हां..",वो हंसा,"..मगर वो हाथापाई जो मर्द & औरत करते हैं.",उसने पॅकेट को खोल अंदर देखा & फिर उसे अपने कोट की अंदर की जेब मे रख लिया.रॉकी उसकी बात समझ मुस्कुराने लगा.

"कैसा दिखता था वो मर्द?"

"बुड्ढ़ा था 50 बरस से उपर का,खिचड़ी मगर करीने से बने बाल & हां..",उसने अपने बाए गाल पे अपना हाथ रखा,"..यहा 1 निशान था."

"हूँ..",रॉकी कुच्छ सोच रहा था,"..1 काम & कर सकते हो?"

"क्या?"

"तुम्हारे होटेल के सेक्यूरिटी कॅमरास के फुटेज से मुझे उसकी तस्वीर दे सकते हो?"

"ये तो बहुत ख़तरे का काम है.पता चल गया तो मेरी नौकरी तो जाएगी ही आगे नौकरी मिलना भी नामुमकिन हो जाएगा."

"अच्छा,1 काम करो.तुम उस फुटेज तक पहुँच बस उस आदमी की शक्ल मुझे 1 बार दिखा दो."

"मगर कैसे?..मैं फुटेज आक्सेस नही कर सकता क्यूकी वो मेरा डिपार्टमेंट नही है."

"हां..मगर तुम फ्लोर मॅनेजर हो,वो शख्स तुम्हारे फ्लोर के 1 कमरे मे 1 पूरी रात रहा.तुम किसी भी बहाने से उस वीडियो को देख सकते हो & मुझे बस उसकी 1 फाइल किसी तरह दे दो."

"हूँ..मैं पक्का नही कह सकता पर कोशिश कर सकता हू."

"ओके.कल मिलूँगा,यही इसी वक़्त."

"ओके और पैसे?"

"उसकी फ़िक्र मत करो.",रॉकी ने उसकी तरफ का कार का दरवाज़ा खोला जिसमे वो बैठे थे.वो मॅनेजर उतर गया & दरवाज़ा बंद कर दिया तो रॉकी ने कार स्टार्ट की & होटेल की बेसमेंट पार्किंग से निकल गया.पार्किंग से निकलते हुए उसने आँखो पे काला चश्मा & सर पे बेसबॉल कॅप लगा ली ताकि पार्किंग के एंट्रेन्स,एग्ज़िट & अंदर लगे कॅमरास मे उसकी शक्ल सॉफ ना आए.उसे जिस काम को अंजाम देना था,उसके कामयाब होने पे बहुत मुमकिन था कि पोलीस सिरो को जोड़ने के इरादे से इस होटेल तक आ पहुँचे & वो किसी भी कीमत पे पोलीस की नज़र मे नही आना चाहता था.

रॉकी 6'4" का लंबा-चौड़ा,ताक़तवर जवान था.उसके गर्दन तक लंबे बाल & चेहरे की घनी दाढ़ी & उसका गथिला जिस्म लड़कियो को उसकी ओर खिचने मे हमेशा कामयाब होते थे.वो भी इसका खूब फयडा उठता था मगर अपने काम के आगे वो अपने इस शौक को कभी तवज्जो नही देता था.उसने अपनी कार 1 पब्लिक पार्किंग मे लगाई & 1 बीच शॅक मे बने बार मे गया जो इस वक़्त शाम को खचाखच भरा था.

वो बार तक गया & 1 बियर ऑर्डर की.पास बैठी 1 लड़की उस से फ्लर्ट करने की कोशिश कर रही थी & वो भी मुस्कुराते हुए उसका साथ दे रहा था.लड़की के बिकिनी के टॉप & सरॉंग मे कसा अधनंगा जिस्म काफ़ी दिलकश था लेकिन इस वक़्त रॉकी अपने काम के सिलसिले मे इस बार मे आया था & अभी उस लड़की का हुस्न उसके लिए कोई मायने नही रखता था.रॉकी उस लड़की से बाते करते हुए किसी को ढूंड रहा था.लड़की उसके दाए तरफ बैठी थी & बाते करते हुए बार-2 उसकी जाँघो पे हाथ रख रही थी.रॉकी जानता था कि बस उसे अपनी बातो से उसके बातो मे च्छूपे बुलावे को कबूल करना था & उसकी आज की रात को वो नशीली बनाने मे कोई कसर नही छ्चोड़ती मगर आज उसे उस लड़की की जवानी से महरूम रहना होगा क्यूकी वो जिसे ढूंड रहा था,उसे वो शख्स दिख गया था,"एक्सक्यूस मी पर मैं यहा अपनी ग्रिल्फ्रेंड का इंतेज़ार कर रहा हू.",लड़की बुरा सा मुँह बनाती चली गयी.

"शालोम,यहेल.",तगड़े फिरंगी बारटेंडर के पीछे आए 1 5'9' कद का चुस्त जवान उसकी आवाज़ सुन ठिठक गया.

"शालोम.",वो नज़रो से रॉकी को तोल रहा था.रॉकी ने देखा की बारटेंडर का दाया हाथ उसके एप्रन के पीछे चला गया था.रॉकी जानता था कि उसने ज़रा भी गॅडबॅड की & बारटेंडर का छिपा हत्यार उसकी ओर आग उगलने लगेगा.

"वॉट ईज़ दा मीनिंग ऑफ शालोम,यहेल?..शालोम का मतलब क्या होता है?",उसने अपनी आँखे यहेल की आँखो से मिला दी.

"पीस..अमन.",यहेल का बाया हाथ बार काउंटर के नीचे था & दाया काउंटर के उपर.अपने जवाब से उसने ये भी जता दिया था कि उसे भी यहा की ज़ुबान आती थी.

"तो मैं शांति से यहा बिज़्नेस की बात करने आया हू कोई गड़बड़ करने नही..",रॉकी ने दोनो हाथ काउंटर पे रख दिए थे,"..मेरे पास कोई हत्यार नही है.चाहो तो मेरी तलाशी ले लेना."

"वॉट सॉर्ट ऑफ बिज़्नेस?"

"मुझे फ़ारूख़ ने तुम्हारा पता दिया था.",उस नाम को सुनते ही यहेल के चेहरा थोड़ा नर्म पड़ा मगर वो & उसका बारटेंडर साथी अभी भी चौक्काने थे,"..मुझे 1 शख्स को ढूँढना है & फिर..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ दी लेकिन यहेल समझ गया.

"हूँ..कम.",रॉकी जिस बार मे आया था ये इज़्रेली माफिया के गुर्गो का था.इसका पता उसे डेवाले के अंडरवर्ल्ड के अपने 1 कॉंटॅक्ट से मिला था.यहेल उसे शॅक के पीछे ले गया.यहेल आगे चल रहा था,उसके पीछे रॉकी & सबसे पीछे वो बारटेंडर.1 कमरे मे जा यहेल 1 कुर्सी पे बैठा & अपनी शर्ट के नीच्चे से पॅंट मे अटकी ऑटोमॅटिक पिस्टल निकाल के अपने हाथ मे ले ली & रॉकी को बैठने का इशारा किया.रॉकी के बैठते ही बारटेंडर ने दरवाज़ा बंद किया & उसपे खड़ा हो अपने पेरो के पीछे च्छूपी पिस्टल निकाल के हाथ मे ले ली.यहेल ने अपना मोबाइल निकाला & नंबर मिलाया.

"हूँ..ओके..राइट..बाइ..!",उसने फोन काटा & मोबाइल अपनी जेब मे डाला,"..तुम्हारा नाम क्या है?"

"रॉकी."

"कहा से आया हो?",हिन्दुस्तानी ज़ुबान पे उसकी पकड़ अभी उतनी मज़बूत नही हुई थी.

"डेवाले."

"हूँ..क्या चाहिए..ऑटोमॅटिक..सेमी-ऑटोमॅटिक..उस से हेवी वेपन..प्लीज़ नो बारगिनिंग..प्राइस पे..",वो अच्छे हिन्दुस्तानी लफ्ज़ सोचने की कोशिस कर रहा था.

"हुज्जत करना तुम्हे पसंद नही.",रॉकी ने मुस्कुराते हुए उसकी मदद की.

"यस."

"पर मुझे हत्यार से ज़्यादा कुच्छ और मदद चाहिए."

"ओके..वॉट?"

"मुझे 1 शख्स की तलाश है..आइ मीन 2 लोगो की तलाश है..",उसने जेब से रंभा की तस्वीर निकाली,"..1 तो ये लड़की ."

"ओके..",यहेल ने तस्वीर को देखा & फिर रॉकी को वापस किया,"..& दूसरा?"

"उसकी तस्वीर मेरे पास नही है अभी..",उसने वही हुलिया बताया जो हॉलिडे इन्न के फ्लोर मॅनेजर ने उसे बताया था,"..& अगर लक अच्छा रहा तो कल शायद तस्वीर भी मिल जाए."

"आफ्टर फाइंडिंग देम..क्या?"

"वो मुझे करना है.मेरे क्लाइंट की सख़्त ताकीद है कि उसके बाद का काम मैं अकेले ही करू."

"& युवर क्लाइंट इस वेरी राइट क्यूकी उसके बाद का काम..आइ नो वॉट तट'स गोन्न बी& उसमे हम इन्वॉल्व नही होंगे.",रॉकी जानता था.उसकी तरह ये लोग पोलीस से डरते नही मगर उसी की तरह ये लोग उनकी नज़रो मे आना या अपने रास्ते मे उन्हे आने देना नही चाहते थे.

"ओके."

"नाउ दा फीस."

बोलो क्या चाहिए.",यहेल के कहने के बावजूद रॉकी ने दाम पे हुज्जत की & थोड़ी देर बाद सब तय हो गया था.यहेल आज से ही उसके बताए हुलिए वाले शख्स & रंभा की खोज मे अपने आदमियो को लगाने वाला था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--73

gataank se aage......

Rambha ne vijayant ko dhakel 1 bar stool pe bitha diya & fir jhuk ke uske lund ko munh me bhar chusne lagi.apne nakhuno se vo uske ando ko kharonch uske maze ko & badha rahi thi.vijayant aankhe band kiye uske baalo ko pakad masti me aahe bhar raha tha magar uske zehan me vo sawal ki rambha ke alawa & kaun-2 si auraten uski zindagi me aayi thi,abhi bhi ghumad raha tha..vo Soniya kaun thi jiska naam le vo dopahar ko behosh ho gaya tha?..kaun thi vo?..usne sawalo ko thodi der shant rehne ko kaha & apna dhyan rambha pe lagaya.vo deewano ki tarah uske lund ke supade ko chuste hue use hila rahi thi.

“uummmmm..!”,lund munh me bhare hue vo masti me karahi.peechhe se deven jhuk ke uski chut chatne me jut gaya tha.rambha ab kamar hilati,chhatpatati hui apne sasur ka lund chus rahi thi.deven 1 ungli ko uski gand me ghusa ke andar-bahar karte hue uski chut chaat raha tha.rambha ke jism me fir vohi bechaini bhar gayi & use shant karne ki garaj se vo apne sasur ke lund & ando ko buri tarah dabate hue chusne lagi.vijayant ke liye ab khud pe kabu rakhna mushkil tha & usne bahu ke baal pakad uske munh ko lund se alag kiya.rambah ke chehre pe apne manpasand khilone ke chhinane se nakhushi ke bhav the.vijayant ne uski bayi jangh pakad use apni god me bithaya to rambha khud hi uske lund ko tham chut pe rakha & fir uske kandhe tham baithne lagi.

“AAHHHHHHHHHHH..!”,rambha chikhi.vo lund ko chut me le vijayant ki god me baithi hi thi ki peechhe se uske premi ne uski gand ki fanko ko failate hue uske chhed me apna lund utar diya tha.vijayant uski choochiyo ko dabate hue chus raha tha & deven uski gand maar raha tha.rambha masti me vijayant ke lund pe uchhalte hue sar peechhe jhuka baalo ko jhatakti masti me chikhe ja rahi thi.deven aaj lund ko aadhi lumbai se aage ghusa raha tha.rambha ko pyar se chumte ,uske kano me pyar bhare bol bolte hue,vo apne lund ko uski gand ki anchhui gehraiyo me utar raha tha.gand me hoti hulchul ki vajah se rambha ka pura jism sihar utha tha & uski chut buri tarah kasmasa rahi thi.vijayant ka lund uski kasmasahat se pagal ho gaya tha & ab vijayant bhi neeche se kamar uchka ke use tezi se chod raha tha.

Deven uski gand ki kasavat se pagal ho gaya tha.badi mushkil se vo khud ko tez dhakke lagane se rok raha tha.vo apne hatho se kabhi uski mansal kamar to kabhi uski moti chhatitya daba raha tha.uska dil kiya ki vo akela hi Rambha ki jawani ka lutf uthaye & usne aage jhukte hue uski mudi tango ko dono hatho me thama & use Vijayant ke lund se utha hall me rakhe bade sofe pe le gaya.Vijayant is tarah se chudai me khalal padne se jhalla gaya tha lekin deven rambha ka premi tha & vo use chah ke bhi mana nahi kar sakta tha.

rambha sofe pe ghutno & hatho pe thi & deven baye hath ko uski kamar ki bagal se le jate hue uske dane ko ragadte hue uski gand maar raha tha.kuchh hi palo me rambha jhad gayi & sofe pe nidhal ho gayi.deven ne lund uski gand se bahar khincha & uske chehre ke paas baith ke uspe kisses ki jhadi laga di.ab vijayant bhi sofe pe aa gaya tha & rambha ki gand sehla raha tha.

vo jhuka & uski gand ki fanko ko chumne laga.rambha ne deven ko chuma & use khade hone ka ishara kiya & fir uthate hue uske pet me apna munh ghusa chumne lagi.deven uske baalo me pyar se hath firane laga & usne uske lund ko munh me bhar liya.

"uunngghhhhhh..!",vo ghutno & hatho pe ho deven ke lund ko pakad ke hilate hue chus hi rahi thi ki peechhe se apne ghutno pe baith viajaynat ne uski chut me lund utar diya tha.rambha ab puri tarah se madhosh thi.dono mard uske jism se pure josh ke sath kehl rahe the & vo bhi unki harkato se josh me pagal ho rahi thi.vijayant ka tagda lund uski chut ko buri tarah failata hua ragad raha tha & har dhakke pe jab vijayant ka jism uski gand se takrata to vo sihar uthati & deven ke lund ko munh me bhare hue aah bharti.vijayant uski gand ki fanko pe chapat marta uski chut chod raha tha & deven uske sar ko thame,beech-2 me uski chhatiya dabata uska munh.kuchh der baad rambha 1 baar fir jhad gayi & deven ke lund ko chhod sofe pe gir gayi.

vijayant ne uski kamar tham use uthaya & use pakadte hue sofe se neeche pair latka ke baith gaya.ab rambha uske seene se pth lagaye ,uske lund ko chut me liye baithi thi.vijayant ne uski kamar pakad use upar uthaya & lund ko chut se nikala & fir god me bithake aage jhukaya.rambha samjh nahi pa rahi thi ki ov kar kya raha hai magar deven samajh gaya tha.vo samne aaya & rambha ke samne baith ke uske honth chumne laga.

"OONNNNNHHHHHHHH..!",rambha ne dard & masti me behal ho deven ke kaano ko pakadte hue uske munh me apni jibh ghusa di thi.vijayant ne uski kamar tham uski gand me apna lund daal diya tha.deven chumte hue utha & use vijayant ke seene pe gira diya & uski tange faila di & ghutne mod diye.rambha ne apne ghutne apne hatho me pakad apni chut apne mehboob ke liye kholo di.deven aage jhuka & lund ko uski chut me ghsua diya.rambha abhi bhi uske mote lund ke ghusne pe thoda dard mehsus karti thi,uska lund tha hi itna mota!

deven aage jhuka & use chumte hue uski choochiyan masalte hue dhakke lagane laga.vijayant uski kamar ko jakde uske kandho & gardan ko chumta hua uski gand maar raha tha.rambha ab bilkul behaal ho gayi.2 taqatwar mardo se is tarah apne jism ka aise bhoga jana use madhoshi ke us alam me le gaya tha,jiske bare me usne kabhi sapne me bhi nahi socha tha.dono uske jism ko apne hatho me bharte hue,uske chehre & baki jism pe chumte hue uske dono surakho me apne qatil ango ko is garmjoshi se anadr-bahar kar rahe the ki vo bas jhadti chali ja rahi thi.uska apne jism pe koi ikhtiyar nahi reh gaya tha.use hosh bhi nahi tha ki vo chikh rahi thi & uska jism kanp raha tha.vo to bas maze me dubi hui thi.teeno ne 1 sath zor se aah bhari & rambha ne 1 sath apni chut & gand me garm,gahde virya ki bauchharen mehsus ki & uski chut bhi unke jawab me pani bahane lagi.khel apne anjam tak pahunch gaya tha & teeno ab sukun or khushi se bhare hue the.

Holiday Inn Goa me Rocky ko vo mil gaya jiski use talsh thi-Ramba Mehra ka naam.kitni mushkil hui thi use ye kaam karne me ye vohi janta tha.uske client ne use rambha ke Devalay se Goa aane ki tarikh & flight ke bare me bataya tha & kevayl usi ke sahare vo is hotel tak pahunch gaya tha.iske pehle usne 10 5 star hotels me chhanbin ki thi magar har jagah se use khali hath lautna pada tha.use lagne laga tha ki rambha zaroor kisi chhote-mote hotel ya fir kisi jaan-pehchan vale ke ghar chali gayi hogi magar holiday inn ke floor manager se milne ke baad uski talash khatm ho gayi thi ya kahiye ki shuru ho gayi thi.

"pura kamra tahas-nahas tha mano andar koi toofan aaya ho."

"andar hathapai hui thi kya?",rocky ne 1 mota packet manager ko thamaya.

"haan..",vo hansa,"..magar vo hathapai jo mard & aurat karte hain.",usne packet ko khol andar dekha & fir use apne coat ki andar ki jeb me rakh liya.rocky uski baat samajh muskurane laga.

"kaisa dikhta tha vo mard?"

"buddha tha 50 baras se upar ka,khichdi magar karine se bane baal & haan..",usn4e apne baye gaal pe apna hath rakha,"..yaha 1 nishan tha."

"hun..",rocky kuchh soch raha tha,"..1 kaam & kar sakte ho?"

"kya?"

"tumhare hotel ke security cameras ke footage se mujhe uski tasvir de sakte ho?"

"ye to bahut khatre ka kaam hai.pata chal gaya to meri naukri to jayegi hi aage naukri milna bhi namumkin ho jayega."

"achha,1 kaam karo.tum us footage tak pahunch bas us aadmi ki shakl mujhe 1 baar dikha do."

"magar kaise?..main footage access nahi kar sakta kyuki vo mera department nahi hai."

"haan..magar tum floor manager ho,vo shakhs tumhare floor ke 1 kamre me 1 puri raat raha.tum kisi bhi bahane se us video ko dekh sakte ho & mujhe bas uski 1 file kisi tarah de do."

"hun..main pakka nahi keh sakta par koshish kar sakta hu."

"ok.kal milunga,yehi isi waqt."

"ok & paise?"

"uski fikr mat karo.",rocky ne uski taraf ka car ka darvaza khola jisme vo baithe the.vo manager utar gaya & darwaza band kar diya to rocky ne car start ki & hotel ki basement parking se nikal gaya.parking se nikalte hue usne aankho pe kala chashma & sar pe baseball cap laga li taki parking ke entrance,exit & andar lage cameras me uski shakl saaf na aaye.use jis kaam ko anjam dena tha,uske kamyab hone pe bahut mumkin tha ki police siro ko jodne ke irade se is hotel tak aa pahunche & vo kisi bhi keemat pe police ki nazar me nahi aana chahta tha.

rocky 6'4" ka lamba-chauda,taqatvar jawan tha.uske gardan tak lambe baal & chehre ki ghani dadhi & uska gathila jism ladkiyo ko uski or khichne me humesha kamyab hote the.vo bhi iska khub fayda uthata tha magar apne kaam ke aage vo apne is shauk ko kabhi tavajjoh nai deta tha.usne apni var 1 public parking me lagayi & 1 beach shack me bane bar me gaya jo is waqt sham ko khachakhach bhara tha.

vo bar tak gaya & 1 beer order ki.paas baithi 1 ladki us se flirt karne ki koshish kar rahi thi & vo bhi muskuarte hue uska sath de raha tha.ladki ke bikini ke top & sarong me kasa adhnanga jism kafi dilkash tha lekin is waqt rocky apne kaam ke silsile me is bar me aaya tha & abhi us ladki ka husn uske liye koi mayne nahi rakhta tha.rocky us ladki se baate karte hue kisi ko dhoond raha tha.ladki uske daye taraf baithi thi & baate karte hue baar-2 uski jangho pe hath rakh rahi thi.rocky janta tha ki bas use apni baato se uske baato me chhupe bulave ko kabul karna tha & uski aaj ki raat ko vo mashili banane me koi kasar nahi chhodti magar aaj use us lakdi ki jawani se mehrum rehna hoga kyuki vo jise dhoond raha tha,use vo shakhs dikh gaya tha,"excuse me par main yaha apni grilfriend ka intezar kar raha hu.",ladki bura sa munh banati chali gayi.

"Shalom,Yahel.",tagde firangi bartender ke peechhe aaye 1 5'9' kad ka chust jawan uski aavaz sun thithak gaya.

"shalom.",vo nazro se rocky ko tol raha tha.rocky ne dekha ki bartender ka daya hath uske apron ke peechhe chala gaya tha.rocky janta tha ki usne zara bhi gadbaad ki & bartender ka chhipa hathyar uski or aag ugalne lagega.

"what is the meaning of shalom,yahel?..shalom ka matlab kya hota hai?",usne apni aankhe yahel ki aankho se mila di.

"peace..aman.",yahel ka baya hath bar counter ke neeche tha & daya counter ke upar.apne jawab se usne ye bhi jata diya tha ki use bhi yaha ki zuban aati thi.

"to main shanti se yaha business ki baat karne aaya hu koi gadbad karne nahi..",rocky ne dono hath counter pe rakh diye the,"..mere paas koi hathyar nahi hai.chaho to meri talashi le lena."

"what sort of business?"

"mujhe Farukh ne tumhara pata diya tha.",us naam ko sunte hi yahel ke chehra thoda narm pada magar vo & uska bartender sathi abhi bhi chaukkane the,"..mujhe 1 shakhs ko dhoondana hai & fir..",usne baat adhuri chhod di lekin yahel samajh gaya.

"hun..come.",rocky jis bar me aaya tha ye Israeli mafia ke gurgo ka tha.iska pata use devalay ke underworld ke apne 1 contact se mila tha.yahel use shack ke peechhe le gaya.yahel aage chal raha tha,uske peechhe rocky & sabse peechhe vo bartender.1 kamre me ja yahel 1 kursi pe baitha & apni shirt ke neechhe se pant me atki automatic pistol nikal ke apne hath me le li & rocky ko baithne ka ishara kiya.rocky ke baithate hi bartender ne darwaza band kiya & uspe khada ho apne paron ke peechhe chhupi pistol nikal ke hath me le li.yahel ne apna mobile nikala & number milaya.

"hun..ok..right..bye..!",usne fone kaata & mobile apni jeb me dala,"..tumhara naam kya hai?"

"rocky."

"kaha se aaya ho?",hindustani zuban pe uski pakad abhi utni mazbut nahi hui thi.

"devalay."

"hun..kya chahiye..automatic..semi-automatic..us se heavy weapon..please no bargaining..price pe..",vo ashi hindustani lafz sochne ki koshsih kar raha tha.

"hujjat karna tumhe pasand nahi.",rocky ne muskuarte hue uski madad ki.

"yes."

"par mujhe hathyar se zyada kuchh aur madad chahiye."

"ok..what?"

"mujhe 1 shakhs ki talash hai..i mean 2 logo ki talash hai..",usne jeb se rambha ki tasvir nikali,"..1 to ye ladki ."

"ok..",yahel ne tasvir ko dekha & fir rocky ko vapas kiya,"..& dusra?"

"uski tasvir mere paas nahi hai abhi..",usne vahi huliya bataya jo holiday inn ke floor manager ne use bataya tha,"..& agar luck achha raha to kal shayad tasvir bhi mil jaye."

"after finding them..kya?"

"vo mujhe karna hai.mere client ki sakht takeed hai ki uske baad ka kaam main akele hi karu."

"& your client is very right kyuki uske baad ka kaam..i know what that's gonna be& usme hum involve nahi honge.",rocky janta tha.uski tarah ye log police se darte nahi magar usi ki tarah ye log unki nazro me aana ya apne raste me unhe aane dena nahi chahte the.

"ok."

"now the fees."

bolo kya chahiye.",yahel ke kehne ke bavjud rocky ne daam pe hujjat ki & thodi der baad sab tay ho gaya tha.yahel aaj se hi uske bataye huliye vale shakhs & rambha ki khoj me apne aadmiyo ko lagane vala tha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--74

गतान्क से आगे......

"क्या?!",देवेन बिस्तर मे उठ बैठा.वो बिल्कुल नंगा था & रंभा केवल ब्रा और पॅंटी मे.वो उसके क्लेवगे को चूमते हुए उसके पेट को सहला रहा था जब उसके दिमाग़ मे समीर के बलबीर मोहन को रंभा को खोजने के काम पे लगाने & रंभा के उस से निपटने वाली बात आई & उसने उस बारे मे उस से पुछा,"..और तुमने उसे बता दिया कि तुम यहा हो गोआ मे?!"

"हां..",रंभा उठ बैठी,"..अब वो हमे ढूँढने नही आएगा.मैं जानती हू उसे.वो समीर को ये बात बता और फिर इस काम को करने से इनकार देगा."

"ओह..रंभा..तुम इतनी बड़ी ग़लती कैसे कर सकती हो?!",देवेन परेशान सा बिस्तर से उतर कमरे मे चहलकदमी करने लगा.

"मगर हुआ क्या?..बताइए तो?"

"रंभा,समीर बलबीर को नही तो किसी और को भेजेगा तुम्हे ढूँढने और कही उन्हे तुम्हारे साथ-2 विजयंत मेहरा के बारे मे पता चल गया तो?",रंभा उसकी बात समझ चिंतित हो गयी.

"रंभा,मेहरा परिवार मे कोई भी शक़ के दायरे से बाहर नही है और मान लो समीर अपने पिता के इस हाल का ज़िम्मेदार नही है तो भी..वो जब ये देखेगा कि तुम 1 सज़ायाफ़्ता मुजरिम के साथ उसके पिता को यहा च्छुपाए बैठी हो तो फिर क्या होगा?"

"अब क्या करें?",रंभा घबरा गयी थी.

"सोचने दो मुझे.",वो कमरे मे नंगा ही चहलकदमी करने लगा.कोई 10 मिनिट के बाद वो रुका,"अपना समान समेटो और फिर विजयंत को भी चलने को तैय्यार करो.",वो अपने कपड़े पहनाने लगा और 1 बॅग मे अपना समान डालने लगा.रंभा बिस्तर से उतरी & उसके कहे मुताबिक करने लगी.

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"अब यहा रहना है हमे..",उसने अपने घर से दूरी पे बने अगले बंगल के अंदर कार घुसाई,"..पर ध्यान रहे,दुनिया के लिए सिर्फ़ मैं यहा हू.तुम दोनो मे से कोई भी बाहर नही दिखना चाहिए.ये लो चाभी..",उसने रंभा को चाभियो का 1 गुच्छा दिया & जल्दी से अंदर जाओ.विजयंत,प्लीज़ ये समान उठाओ,मैं मेन गेट लॉक कर के आता हू.",कुच्छ देर बाद विजयंत अपने कमरे मे सो रहा था & देवेन & रंभा अपने कमरे मे थे.रात के अंधेरे का फयडा उठाके वो सब को छुपा के यहा ले आया था & अब उसका तनाव थोडा कम हुआ था.

"आइ'एम सॉरी.",रंभा उसके पहलू मे उस से सॅट गयी & उसके सीने पे सर रख दिया.

"इसमे सॉरी की क्या बात है?..हो जाती है ग़लती."

"अच्छा,1 बात पुच्छू?",रंभा उसके सीने पे उंगली चला रही थी.

"कैसा बेवकुफ़ाना सवाल है!",देवेन ने उसके गाल पे प्यार से चपत लगाई,"..पुछो क्या पुच्छना है."

"आप काम क्या करते हैं?"

"तुम सोचती हो कि मैं कोई ग़लत काम करता हू..हूँ?",उसने महबूबा के चेहरे को सीने से उपर उठाया ताकि वो उसकी आँखो मे देख सके.रंभा ने धीरे से नज़रे झुकाते हुए सर हां मे हिलाया.

"देखो,रंभा.मैने तुम्हे बताया था ना कि जैल से निकलने के बाद मैने हर तरह का धंधा किया,कुच्छ सही कुच्छ ग़लत मगर अब मैं कोई ग़लत काम नही करता.हां,अपने इन्टेक़ाम के लिए और फिर मेरी जान-पहचान तो शुरू से ही ऐसे लोगो से रही है,मैं ग़लत लोगो से मिलता रहता हू.उनसे कॉम्न्टेक्ट मे भी रहता हू मगर अब मैं खुद कोई ग़लत काम नही करता बालम सिंग जैसे लोगो को मारने के सिवा.",रंभा ने उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फिराया,"..मैने तमिल नाडु मे और फिर यहा जो भी पैसे कमाए उनसे यहा 5-6 प्रॉपर्टीस कहरीदी हैं & इन 2 को छ्चोड़ के..",उसका इशारा अभी-2 छ्चोड़े मकान और उस बुंगले मे था जिसके कमरे मे वो लेटे थे,"..सभी को किराए पे लगा रखा है.1 छ्होटा सा फिशरी का भी धंधा है.इसी से खर्चा चलता है मेरा."

"आप ये तो नही सोच रहे क़ी मैं आप पे शक़ कर रही थी या फिर आपको ग;लत समझ रही थी?",

"नही,मैं जानता हू की तुम्हारे दिल मे बस सवाल उठ रहे थे & ये कुद्रती बात है."

"आइ लव यू,देवेन!",रंभा उसके गले से लग गयी तो देवेन ने भी उसे बाँहो मे कस लिया,"..मेरी ग़लती से कोई बड़ी परेशानी तो नही खड़ी होगी ना?",वो देवेन के दाए कंधे के उपर अपना चहरा उसकी गर्दन मे च्छुपाए थी.

"नही,रंभा..",देवेन ने उसकी पीठ थपथपाई,"..और हुई भी तो मैं उसे डोर कर दूँगा."

"हूँ.",रंभा उस से & ज़ोर से चिपक गयी तो देवेन ने भी अपनी बाहो की कसावट को बढ़ा दिया.

"मैं शहर का चक्कर लगा के आता हू..",देवेन ने जूते के फीटे बाँधे & खड़ा हो गया,"..विजयंत,इधर आओ.",विजयंत मेहरा उसके पीछे-2 बंगल के उस कमरे मे गया जिसकी खिड़की से उनका पुराना घर दिखता था.रंभा भी उनके पीछे-2 वाहा आ गयी.देवेन दिन मे भी बाहर गया था & कुच्छ समान ले कर आया था जोकि कुच्छ कारटन्स मे कमरे मे ही रखे थे.अभी तैय्यार होने से पहले उसने इस बंगल के चारो तरफ सीक्ट्व कॅमरास लगाए थे.देवेन ने पहले कमरे की बड़ी खिड़की के पर्दे बराबर किए,फिर बत्ती जलाई & फिर कारटन्स को खोलना शुरू किया.

"देखो विजयंत,मेरा सोचना है कि समीर अभी भी रंभा को ढूँदने की कोशिश करेगा.कंधार वाले हादसे मे भी वो शक़ के दायरे मे है.मैं कोई भी बात चान्स पे छ्चोड़ना नही चाहता..",उसने कारटन्स खोल के मोटे पाइप सी चीज़ें & 1 स्टॅंड निकाल लिया था.कमरे मे मौजूद बाकी 2 लोग उसके निकाले समान को देख समझने की कोशिश कर रहे थे कि वो कर क्या रहा था,"..ये लो.",जब उसने स्टॅंड पे पाइप्स जैसी चीज़ो को जोड़ के लगाया तब दोनो की समझ मे आया कि वो हाइ पवर की दूरबीन थी,"..मैं चाहता हू कि तुम इस की मदद से हमारे पुराने घर पे नज़र रखो."

उसने 1 मेज़ खींच के उसी खिड़की के बगल की दीवार से लगाई & उसपे 1 लॅपटॉप रख के ऑन किया,"..इस लॅपटॉप के ज़रिए तुम घर के चारो तरफ लगे सीक्ट्व कॅमरास की फुटेज देख सकते हो."

"ध्यान रहे कमरे मे बिल्कुल अंधेरा होना चाहिए.इन 2 भारी पर्दो के बीच से बस दोर्बीन का लेंस निकला रहे & कंप्यूटर हमेशा इसी जगह पे रहे ताकि इस खिड़की की तरफ देखने वाले को बिल्कुल भी ये अंदाज़ा ना हो की इस कमरे मे कोई है भी.",विजयंत को उसने 1 कुर्सी पे बैठाके दूरबीन को उसके हिसाब से अड्जस्ट किया & फिर रंभा से मुखातिब हुआ,"..तुम्हे इसकी मदद करनी है & इस लॅपटॉप की फुटेज को चेक करती रहना..",1 एक्सटर्नल हार्ड डिस्क उस लॅपटॉप से जुड़ी थी,"..इस डिस्क मे सारी फुटेज रेकॉर्ड होती रहेगी बस तुम्हे इस बात का ख़याल रखना है कि तुम इसे बहकाओ ना.",देवेन मुस्कुराया & कमरे से बाहर चला गया.रंभा भी शोखी से मुस्कुराते उसके पीछे आई.

"इतने ताम-झाम की क्या ज़रूरत है?",उसने देवेन के सीने पे दोनो हाथ जमाए,"..हमने तो घर भी बदल लिया है.अब अगर कोई आएगा भी तो वो नाकाम हो के चला जाएगा."

"तुम्हारी बात ठीक है मगर मुझे उस इंसान की शक्ल देखनी है जो तुम्हे ढूँढने यहा आ सकता है.",उसने उसके गुलाबी गाल थपथपाए & उनके उपर झुक गया.1 लंबी किस के बाद बंगल के दरवाजे से देवेन के बाहर जाने के बाद उसने दरवाज़ा बंद कर लिया.

देवेन ने कार निकली & बंगल के मेन गेट पे ताला लगाया & वाहा से चला गया.आज उसका इरादा गोआ के सुनहरे बीचस पे बने शॅक्स & बार्स थे मगर वो वाहा शराब पीने या ऐश करने नही बल्कि 1 बहुत अहम काम से जा रहा था.आज सवेरे ही उसे अपने रशियन दोस्तो से पता चला था कि इज़्रेली माफिया 1 गाल पे निशान वाले बुड्ढे को ढूंड रहे हैं.उसे लग रहा था कि हो ना हो ये काम अमोल बपत का था & अब वो इस मामले से निपट बपत को हद्द रहने की चेतावनी देना चाहता था.मगर उसे रंभा & विजयंत की फ़िक्र थी & इसीलिए उसने घर के चारो तरफ कमेरे लगाए थे.

मगर केवल बपत ही नही था जो उसके पीछे इसरालियो को लगा सकता था,ये काम उस ड्रग सिंडिकेट का भी हो सकता था जिसका बालम सिंग हिस्सा था.अगर ऐसा था तब तो बड़ी अच्छी बात थी.उसे यकीन था कि दयाल किसी ना किसी तरह से अभी भी ड्रग्स के धंधे से जुड़ा था & इस तरह से भी वो उस तक पहुँच सकता था.दयाल की तलाश अब 2 रस्तो से हो रही थी.1 उसके ड्रग्स के धंधे के लिंक्स के रास्ते से & दूसरे बीसेसर गोबिंद नाम के 1 मौरीतियाँ के तलाश के रास्ते से.

"उउन्न्ञनह..!",वो लड़की आँखे बंद किए यू पड़ी थी जैसे बेहोश हो मगर उसी च्चटपटाहत उसके होश मे होने की गवाही दे रही थी.हक़ीक़त तो ये थी कि वो अपने जिस्म के रोम-2 से फुट रही मस्ती ने उसे बेसूध कर दिया था.वो बस 2 दिन पहले ही 19 बरस की हुई थी.6 महीने पहले ही उसका कुँवारापन टूटा था और आज जैसा तजुर्बा उसके लिए ना केवल नया था बल्कि बहुत नशीला & मदहोश करने वाला भी.रॉकी जैसा गतिला,जवान मर्द जोकि चुदाई का माहिर खिलाड़ी था उसे नंगी करने के बाद ना जाने कितनी देर तक उसके पूरे जिस्म की तारीफ करने के साथ उसे चूमता,सहलाता रहा था.कब उसके सख़्त हाथो की च्छुअन से हँसती,उस से च्छेदखानी करती वो इस हालत मे पहुँच गयी थी उसे पता ही नही चला था.

रॉकी उस लड़की से दोपहर को 1 बीच शॅक मे हो रही पार्टी मे मिला था.वो यहा अपनी सहेलियो के साथ छुट्टियाँ मना रही थी.2-3 मोकक्थाइल्स & 2 घंटो के बाद ही दोनो बीच के होटेल के 1 कमरे मे आ गये थे & इस खेल मे जुट गये थे.

1 लंबे अरसे तक उसकी चूत चाटने के बाद रॉकी उठा तो उस लड़की ने अड़खुली आँखो से उसे देखा.उसकी आँखो मे रॉकी से आगे बढ़ने की इल्टीजा थी.उसके लंड को चूस्ते वक़्त ही वो लड़की उसकी दीवानी हो गयी थी & अब रॉकी की हर्कतो के बाद उसके 8 इंच के लंबे & मोटे लंड को अपने अंदर लेने मे उसे कोई हिचक नही थी.उसका दिल लंड के आकार को देख घबरा तो गया था मगर अब उसे अपनी चूत मे लिए बिना उसे चैन भी तो नही पड़ने वाला था.

"आईियययययई..नहियीईईईईई....!",रॉकी अब तक उस से बड़ी नज़ाकत से पेश आ रहा था मगर अब जान-बुझ के उसने बेरेहमी से अपना लंड 1 ही झटके मे उसकी चूत मे जड तक घुसा दिया था.लड़की दर्द से चीखी,बेइंतहा गीलेपान के बावजूद उसे चूत मे बहुत ज़ोर का दर्द हुआ था.रॉकी के लंड ने उसकी चूत को पूरा फैला दिया था.उसे ऐसा लगा जैसे की कोई दूसरी बार उसका कुँवारापन तोड़ रहा हो मगर साथ ही उसे 1 अजीब सा,बड़ा अच्छा,भरा-2 एहसास हो रहा था.उसके जिस्म मे अजीब सी बेचैनी भर गयी & वो कसमसाने लगी & दर्द के कम होते ही अपनी कमर हिलाने लगी.

रॉकी अब तक लंड घुसाए बिल्कुल शांत बस अपनी कोहनियो पे उचका लड़की को देख रहा था.जैसे ही लड़की ने कमर हिलाई रॉकी ने उसकी चुदाई शुरू कर दी.लड़की के मज़े का तो कोई ठिकाना नही था.बस 2 धक्को मे वो झाड़ गयी & मस्ती मे सुबक्ती हुई,आहे भरती हुई कभी रॉकी के बाल तो कभी उसकी पीठ नोचते हुए उसकी कमर & टाँगो पे अपनी टाँगे चढ़ाते हुए उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

"हेलो..",रॉकी का मोबाइल बजा तो उसने उसे कान से लगाया,"..गुड..ओके,मैं आता हू.!",होटेल के फ्लोर मॅनेजर का फोन थे जिसने सीक्ट्व फुटेज से उस बुड्ढे की तस्वीर निकाल ली थी.रॉकी ने फोन किनारे रखा & लड़की के उपर लेट गया & उसकी छ्होटी मगर गोल & मुलायम चूचियो को मसल्ते हुए उसके पतले-2 होंठ चूस्ते हुए उसे चोदने लगा.

तो ये है वो शख्स जिसके साथ रंभा होटेल से गयी थी..रॉकी फ्लोर मॅनेजर की दी गयी सीडी को अपने लॅपटॉप मे देख रहा था.क्लिप कोई 60-65 सेकेंड की ही थी & 2-3 अलग-2 कॅमरास से ली गयी फुटेज को जोड़ के बनाई गयी थी.क्लिप मे रंभा जिस अंदाज़ मे उस बुड्ढे की कही किसी बात पेउस्की बाँह पकड़ के हंस रही थी,उस से तो सॉफ ज़ाहिर था की दोनो के बीच काफ़ी नज़दीकी ताल्लुक़ात थे.उसने सीडी को कवर मे डाल अपनी जेब के हवाले किया & यहेल से मिलने चल दिया.

देवेन अब तक इजराइलियो के कंट्रोल वाले 3 बार्स का चक्कर लाघा चुका था मगर तीनो मे से किसी मे उसने अपनी मौजूदगी से कोई सुगबुगाहट होते नही देखी.गोआ आने के बाद उसने 1 ही जुर्म किया था-अगर उसे जुर्म कहा जा सकता हो तो-& वो था बालम सिंग का क़त्ल..उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर इसरएलियो को उसमे इतनी दिलचस्पी क्यू हो गयी?..पहाड़ो के ड्रग्स के धंधे मे भी ये गैर मुल्की घुसे हुए थे मगर क्या वाहा का सिंडिकेट & यहा का सिंडिकेट मिल के काम करते थे & फिर उन्हे ये पता कैसे चला कि वो ही बालम सिंग की मौत का ज़िम्मेदार था..फेणी की बू से वो अपनी सोच से बाहर आया.गोआ मे रहते उसे इतने बरस हो गये थे मगर उसे वाहा की शराब कभी रास नही आई थी.उसने बियर की छ्होटी बॉटल से 1 घूँट भरा..शॅक के 1 कोने मे बने डॅन्स फ्लोर पे काई लोग नाच रहे थे.वो पीते हुए उन्हे देख रहा था.उसने बालम सिंग वाले नज़रिए पे बहुत सोचा था & अब उसे लगने लगा था कि ये काम समीर का था..वो रंभा के साथ होटेल के कमरे मे 1 पूरी रात रहा था & उस कमरे का दोनो ने जो हाल किया था,उसके बाद तो दोनो की शकलें वाहा कयि लोगो को अच्छे से याद हो गयी होगी.ये 1 कमाल ही था कि कोई मीडीया वाला अभी तक रंभा मेहरा की ज़िंदगी से जुड़ी इस मसालेदार खबर सुन्घ्ता उसके घर तक नही पहुँचा था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--74

gataank se aage......

"kya?!",deven bistar me uth baitha.vo bilkul nanga tha & rambha keval bra & panty me.vo uske clevage ko chumte hue uske pet ko sehla raha tha jab uske dimagh me Sameer ke Balbir Mohan ko rambha ko khojne ke kaam pe lagane & rambha ke us se nipatne vali baat aayi & usne us bare me us se puchha,"..& tumne use bata diya ki tum yaha ho goa me?!"

"haan..",rambha uth baithi,"..ab vo hume dhoondane nahi ayega.main janti hu use.vo sameer ko ye baat bata dega & fir is kaam ko karne se inkar dega."

"oh..rambha..tum itni badi galti kaise kar sakti ho?!",deven pareshan sa bistar se utar kamre me chehalkadmi karne laga.

"magar hua kya?..bataiye to?"

"rambha,sameer balbir ko nahi to kisi & ko bhejega tumhe dhoondane & kahi unhe tumhare sath-2 Vijayant Mehra ke bare me pata chal gaya to?",rambha uski bata samajh chintit ho gayi.

"rambha,mehra parivar me koi bhi shaq ke dayre se bahar nahi hai & maan lo sameer apne pita ke is haal ka zimmedar nahi hai to bhi..vo jab ye dekhega ki tum 1 sazayafta mujrim ke sath uske pita ko yaha chhupaye baithi ho to fir kya hoga?"

"ab kya karen?",rambha ghabra gayi thi.

"sochne do mujhe.",vo kamre me nanga hi chehalkadmi karne laga.koi 10 minute ke baad vo ruka,"apna saman sameto & fir vijayant ko bhi chalne ko taiyyar karo.",vo apne kapde pehanane laga & 1 bag me apnsa man daalne laga.rambha bistar se utri & uske kahe mutabik karne lagi.

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"ab yaha rehna hai hume..",usne apne ghar se doori pe bane agle bungle ke andar car ghusayi,"..par dhyan rahe,duniya ke liye sirf main yaha hu.tum dono me se koi bhi bahar nahi dikhna chahiye.ye lo chabhi..",usne rambha ko chabhiyo ka 1 guchha diya & jaldi se andar jao.vijayant,please ye saman uthao,main main gate lock kar ke aata hu.",kuchh der baad vijayant apne kamre me so raha tha & deven & rambha apne kamre me the.raat ke andhere ka fayda uthake vo sab ko chhupa ke yaha le aaya tha & ab uska tanav thoda kam hua tha.

"i'm sorry.",rambha uske pehlu me us se sat gayi & uske seene pe sar rakh diya.

"isme sorry ki kya baat hai?..ho jati hai galti."

"achha,1 baat puchhu?",rambha uske seene pe ungli chala rahi thi.

"kaisa bevkufana sawal hai!",deven ne uske gaal pe pyar se chapat lagayi,"..puchho kya puchhna hai."

"aap kaam kya karte hain?"

"tum sochti ho ki main koi galat kaam karta hu..hun?",usne mehbooba ke chehre ko seene se upar uthaya taki vo uski anakho me dekh sake.rambha ne dhire se nazre jhukate hue sar haan me hilaya.

"dekho,rambha.maine tumhe bataya tha na ki jail se nikalne ke baad maine har tarah ka dhandha kiya,kuchh sahi kuchh galat magar ab main koi galat kaam nahi karta.haan,apne inteqam ke liye & fir meri jana-pehchan to shuru se hi aise logo se rahi hai,main galat logo se milta rehta hu.unse comntact me bhi rehta hu magar ab main khud koi galat kaam nahi karta Baalam Singh jaise logo ko marne ke siwa.",rambha ne uske chehre pe pyar se hath firaya,"..maine Tamil Nadu me & fir yaha jo bhi paise kamaye unse yaha 5-6 properties kahridi hain & in 2 ko chhod ke..",uska ishara abhi-2 chhode makan & us bungle me tha jiske kamre me vo lete the,"..sabhi ko kiraye pe laga rakha hai.1 chhota sa fishery ka bhi dhandha hai.isi se kharcha chalta hai mera."

"aap ye to nahi soch rahe ki main aap pe shaq kar rahi thi ya fir aapko ga;lat samajh rahi thi?",

"nahi,main janta hu ki tumhare dil me bas sawal uth rahe the & ye kudrati baat hai."

"i love you,deven!",rambha uske gale se lag gayi to deven ne bhi use bahao me kas liya,"..meri galti se koi badi pareshani to nahi khadi hogi na?",vo deven ke daye kandhe ke upar apna chahra uski gardan me chhupaye thi.

"nahi,rambha..",deven ne uski pith thapthapayi,"..& hui bhi to main use door kar dunga."

"hun.",rambha us se & zor se chipak gayi to deven ne bhi apni baaho ki kasavat ko badha diya.

"Main shehar ka chakkar laga ke aata hu..",Deven ne jute ke phite bandhe & khada ho gaya,"..Vijayant,idhar aao.",Vijayant Mehra uske peechhe-2 bungle ke us kamre me gaya jiski khidki se unka purana ghar dikhta tha.Rambha bhi unke peechhe-2 vaha aa gayi.deven din me bhi bahar gaya tha & kuchh saman le kar aaya tha joki kuchh cartons me kamre me hi rakhe the.abhi taiyyar hone se pehle usne is bungle ke charo taraf cctv cameras lagaye the.deven ne pehle kamre ki badi khidki ke parde barabar kiye,fir batti jalayi & fir cartons ko kholna shuru kiya.

"dekho vijayant,mera sochna hai ki Sameer abhi bhi rambha ko dhoondne ki koshish karega.Kamdhar vale hadse me bhi vo shaq ke dayre me hai.main koi bhi baat chance pe chhodna nahi chahta..",usne cartons khol ke mote pipe si chizen & 1 stand nikal liya tha.kamre me maujood baki 2 log uske nikale saman ko dekh samajhne ki koshish kar rahe the ki vo kar kya raha tha,"..ye lo.",jab usne stand pe pipes jaisi chizo ko jod ke lagaya tab dono ki samajh me aaya ki vo high power ki doorbin thi,"..main chahta hu ki tum is ki madad se humare purane ghar pe nazar rakho."

usne 1 mez khinch ke usi khidki ke bagal ki deewar se lagayi & uspe 1 laptop rakh ke on kiya,"..is laptop ke zariye tum ghar ke charo taraf lage cctv cameras ki footage dekh sakte ho."

"dhyan rahe kamre me bilkul nadhera hona chahiye.in 2 bhari pardo ke beech se bas dorbin ka lens nikla rahe & computer humesha isi jagah pe rahe taki is khidki ki taraf dekhne vale ko bilkul bhi ye andaza na ho ki is kamre me koi hai bhi.",vijayant ko usne 1 kursi pe bithake doorbin ko uske hisab se adjust kiya & fir rambha se mukhatib hua,"..tumhe iski madad karni hai & is laptop ki footage ko check karti rehna..",1 external hard disk us laptop se judi thi,"..is disk me sari footage record hoti rahegi bas tumhe is baat ka khayal rakhna hai ki tum ise behkao na.",deven muskuraya & kamre se bahar chala gaya.rambha bhi shokhi se muskurate uske peechhe aayi.

"itne taam-jham ki kya zarurat hai?",usne deven ke seene pe dono hath jamaye,"..humne to ghar bhi badal liya hai.ab agar koi ayega bhi to vo nakaam ho ke chala jayega."

"tumhari baat thik hai magar mujhe us insan ki shakl dekhni hai jo tumhe dhoondne yaha aa sakta hai.",usne uske gulabi gaal thapthapaye & unke upar jhuk gaya.1 lambi kiss ke baad bungle ke darwze se deven ke bahar jane ke baad usne darwaza band kar liya.

deven ne car nikali & bungle ke main gate pe tala lagaya & vaha se chala gaya.aaj uska irada Goa ke sunehre beaches pe bane shacks & bars the magar vo vaha sharab pine ya aish karne nahi balki 1 bahut aham kaam se ja raha tha.aaj savere hi use apne russian dosto se pata chala tha ki israeli mafia 1 gaal pe nishan vale buddhe ko dhund rahe hain.use lag raha tha ki ho na ho ye kaam Amol Bapat ka tha & ab vo is mamle se nipat bapat ko haddme rehne ki chetavani dena chahta tha.magar use rambha & vijayant ki fikr thi & isiliye usne ghar ke charo taraf camere lagaye the.

magar keval bapat hi nahi tha jo uske peechhe israeliyo ko laga sakta tha,ye kaam us drug syndicate ka bhi ho sakta tha jiska Baalam Singh hissa tha.agar aisa tha tab to badi achhi baat thi.use yakin tha ki Dayal kisi na kisi tarah se abhi bhi drugs ke dhandhe se juda tha & is tarah se bhi vo us tak pahunch sakta tha.dayal ki talash ab 2 rasto se ho rahi thi.1 uske drugs ke dhandhe ke links ke raste se & dusre Bisesar Gobind naam ke 1 mauritian ke talash ke raste se.

"uunnnnhhhhhhhh..!",vo ladki aankhe band kiye yu padi thi jaise behosh ho magar usi chhatpatahat uske hosh me hone ki gawahi de rahi thi.haqeeqat to ye thi ki vo apne jism ke rom-2 se phut rahi masti ne use besudh kar diya tha.vo bas 2 din pehle hi 19 baras ki hui thi.6 mahine pehle hi uska kunwarapan tuta tha & aaj jaisa tajurba uske liye na keval naya tha balki bahut nashila & madhosh karne wala bhi.Rocky jaisa gathila,jawan mard joki chudai ka mahir khiladi tha use nangi karne ke baad na jane kitni der tak uske pure jism ki tarif karne ke sath use chumta,sehlata raha tha.kab uske sakht hatho ki chhuan se hansti,us se chhedkhani karti vo is halat me pahunch gayi thi use pata hi nahi chala tha.

rocky us ladki se dopahar ko 1 beach shack me ho rahi party me mila tha.vo yaha apni saheliyo ke sath chhuttiyan mana rahi thi.2-3 mocktails & 2 ghanto ke baad hi dono beach ke hotel ke 1 kamre me aa gaye the & is khel me jut gaye the.

1 lambe arse tak uski chut chatne ke baad rocky utha to us ladki ne adkhuli aankho se use dekha.uski aankho me rocky se aage badhne ki iltija thi.uske lund ko chuste waqt hi vo ladki uski deewani ho gayi thi & ab rocky ki harkato ke bad uske 8 inch ke lumbe & mote lund ko apne andar lene me use koi hichak nahi thi.uska dil lund ke aakar ko dekh ghabra to gaya tha magar ab use apni chut me liye bina use chain bhi to nahi padne wala tha.

"AAIIYYYYYEEEE..NAHIIIIIIIII....!",rocky ab tak us se badi nazakat se pesh aa raha tha magar ab jaan-bujh ke usne berehmi se apna lund 1 hi jhatke me uski chut me jud tak ghusa diya tha.ladki dard se chikhi,beintaha gilepan ke bavjud use chut me bahut zor ka dard hua tha.rocky ke lund ne uski chut ko pura faila diya tha.use aisa laga jaise ki koi dusri baar uska kunwarapan tod raha ho magar sath hi use 1 ajib sa,bada achha,bhara-2 ehsas ho raha tha.uske jism me ajib si bechiani bhar gayi & vo kasmasane lagi & dard ke kam hote hi apni kamar hilane lagi.

rocky ab tak lund ghusaye bilkul shant bas apni kohniyo pe uchka ladki ko dekh raha tha.jaise hi ladki ne kamar hilayi rocky ne uski chudai shuru kar di.ladki ke maze ka to koi thikana nahi tha.bas 2 dhakko me vo jhad gayi & masti me subakti hui,aahe bharti hui kabhi orcky ke baal to kabhi uski pith nochte hue uski kamar & tango pe apni tange chadhate hue uski chudai ka lutf uthane lagi.

"hello..",rocky ka mobile baja to usne use kaan se lagaya,"..good..ok,main aata hu.!",hotel ke floor manager ka fone the jisne cctv footage se us buddhe ki tasvir nikal li thi.rocky ne fone kinare rakha & ladki ke upar let gaya & uski chhoti magar gol & mulayam chhatiyo ko masalte hue uske patle-2 honth chuste hue use chodne laga.

To ye hai vo shakhs jiske sath Rambha hotel se gayi thi..Rocky floor manager ki di gayi cd ko apne laptop me dekh raha tha.clip koi 60-65 second ki hi thi & 2-3 alag-2 cameras se li gayi footage ko jod ke banayi gayi thi.clip me rambha jis andaz me us buddhe ki kahi kisi baat peuski banh pakad ke hans rahi thi,us se to saaf zahir tha ki dono ke beech kafi nazdiki tallukat the.usne cd ko cover me daal apni jeb ke havale kiya & Yahel se milne chal diya.

Deven ab tak israeliyo ke control vale 3 bars ka chakkar lagha chuka tha magar teeno me se kisi me usne apni maujudgi se koi sugbugahat hote nahi dekhi.Goa aane ke baad usne 1 hi jurm kiya tha-agar use jurm kaha ja sakta ho to-& vo tha Baalam Singh ka qatl..uski samajh me nahi aa raha tha ki aakhir israeliyo ko usme itni dilchaspi kyu ho gayi?..pahado ke drugs ke dhandhe me bhi ye gair mulki ghuse hue the magar kya vaha ka syndicate & yaha ka syndicate mil ke kaam karte the & fir unhe ye pata kaise chala ki vo hi baalam singh ki maut ka zimmedar tha..feni ki bu se vo apni soch se bahar aaya.goa me rehte use itne baras ho gaye the magar use vaha ki sharab kabhi raas nahi aayi thi.usne beer ki chhoti bottle se 1 ghunt bhara..shack ke 1 kone me bane dance floor pe kayi log nach rahe the.vo pite hue unhe dekh raha tha.usne baalam singh vale nazariye pe bahut socha tha & ab use lagne laga tha ki ye kaam Sameer ka tha..vo rambha ke sath hotel ke kamre me 1 puri raat raha tha & us kamre ka dono ne jo haal kiya tha,uske baad to dono ki shaklen vaha kayi logo ko achhe se yaad ho gayi hogi.ye 1 kamal hi tha ki koi media wala abhi tak Rambha Mehra ki zindagi se judi is masaledar khabar sunghta uske ghar tak nahi pahuncha tha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--75

गतान्क से आगे......

उसने बार काउंटर पे पैसे रखे & वाहा से जाने लगा की अपने बाई तरफ आँखो के कोने से कुच्छ दिखा जोकि उस शॅक की गहमागहमी से बिल्कुल अलग था.देवेन ने फ़ौरन अपनी पीठ उस तरफ की और सामने खड़ी चिलम से गांजे के कश लगाती 1 फिरंगी लड़की के गले मे लटके बड़े से लॉकेट को उठाके देखने लगा,”नाइस लॉकेट.”,लॉकेट कोई 2इन्चX2इंच का था & देखने मे छ्होटा सा फोटो फ्रेम लगता था.देवेन उसके शीशे को घुमा के 1 आईने की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था.

“यू ट्राइयिन टू पिक मी अप?”,लड़की गांजे के नशे मे चूर थी.

“वॉट डू यू थिंक?”,उसका आइडिया काम नही कर रहा था.उसने लड़की के हाथ से चिलम ली & उसके बाई तरफ दीवार से टिक के उसके साथ खड़ा हो गया & चिलम का 1 कश लिया & लेते हुए सामने 2-3 इसरएलियो को खुद की ओर देखते पाया.

“आइ थिंक यू आर नोट यूज़्ड टू दिस स्टफ.”,देवेन की आँखो से पानी आ गया था.लड़की ने उस से चिल्लूम ली & फिर 1 लंबा कश लिया.

“सो वाइ डॉन’ट यू हेल्प मी इन गेटिंग यूज़्ड टू इट.”,देवेन का दिमाग़ तेज़ी से काम कर रहा था.

“ओके.”,लड़की ने उसका हाथ थाम लिया तो देवेन ने दाया हाथ उसके गले मे डाला & बाए हाथ मे उसका बाया हाथ ले चूमते हुए बाहर निकल गया.उसे ये देखना था कि वो लोग आगे क्या करते हैं.वो लड़की को लेके बीच के 1 खाली पड़े हिस्से की तरफ बैठ गया & रेत पे बैठ गया.

देवेन चिल्लूम से बहुत हल्के काश खीच रहा था मगर जता ऐसे रहा था जैसे बहुत लंबे कश लगा रहा हो.वो & लड़की बारी-2 से गांजा पी रहे थे.देवेन का सारा ध्यान उन तीनो इसरएलियो पे ही था.उसकी समझ नही आ रहा था कि आख़िर वो बस उसपे नज़र क्यू रख रहे हैं,कोई कदम क्यू नही उठाते?..ज़रूर वो अपने बॉस का इंतेज़ार कर रहे हैं..मगर कौन है इनका बॉस?..फ़ौरन ही देवेन को अपने सवाल का जवाब मिल गया..यहेल!..तो वो इसके आदमी हैं..मगर इसका तो पहाड़ो के ड्रग सिंडिकेट से कोई लेना-देना नही है..तो क्या इसे समीर ने रंभा की तलाश मे लगाया है..मगर समीर इस तक कैसे पहुँचा?..देवेन का गोआ की जुर्म की दुनिया के ज़्यादातर पहलुओ से वाकिफ़ होना आज काम आ रहा था.

"हेलो,तुम्हारा आदमी मिल गया है,कोकाउंट ग्रोव शॅक.",यहेल ने रॉकी से बस इतना कह के फोन काट दिया & फिर शॅक के अंदर चला गया.1 बार फिर उसके तीनो आदमी चोरी से देवेन पे नज़र रखने लगे.देवेन अब & सोच मे पड़ गया था..आख़िर यहेल ने फोन किसे किया था?..कोई 20 मिनिट बाद इस सवाल का जवाब भी उसे मिल गया.1 लंबा-चौड़ा दाढ़ी वाला नौजवान वाहा आया & उसे देखा & फिर शॅक की ओर बढ़ गया.रॉकी को ज़रा भी शक़ नही था कि ये वही सीडी वाला बुड्ढ़ा था.अब बस यहेल को उसकी फीस देके वो इस से निबट लेगा.

देवेन ने भी रॉकी को देख के उसकी तस्वीर अपने दिमाग़ मे उतार ली थी.उसका काम हो गया था & अब जाने का वक़्त हो गया था.कुच्छ गड़बड़ होने पे वो इन इसरएलियो से यहा उनके इलाक़े मे नही भिड़ना चाहता था.इसराइल दुनिया के उन मुल्को मे से है जहा की बालिग होने पे फौज मे कुच्छ दिन काम करना & ट्रैनिंग लेना ज़रूरी है.देवेन मे अभी भी दम-खाँ था लेकिन 1 साथ बहुत उम्दा फ़ौजी ट्रैनिंग वाले इज़्रेली नौजवानो से भिड़ना तो अपनी मौत को आप बुलावा देने जैसा था.वो तेज़ी से कार की ओर बढ़ा तो 1 इज़्रेली तेज़ी से शॅक के अंदर गया.

"ये तुम्हारी फीस,यहेल.",रॉकी ने 1 पॅकेट मेज़ पे रखा जिसे यहेल के साथी बारटेंडर ने उठा के चेक किया & फिर अपने साथी की ओर देख के सर हिलाया,"..थॅंक्स फॉर एवेरितिंग."

"ओके,जाओ.",यहेल के चेहरे पे इतने आसान काम के इतने पैसे मिलने की खुशी की झलक भी नही थी.तभी 1 इज़्रेली भागता हुआ अंदर आया & हिब्र्यू मे कुच्छ कहा,"..तुम्हारा आदमी जा रहा है.",रॉकी सुनते ही खड़ा हो गया & बाहर भागा.

देवेन कार सड़क पे उतार रहा था जब उसने उस दाढ़ी वाले शख्स को दौड़ते हुए बाहर आते देखा.देवेन ने गियर बदले & तेज़ी से कार को सड़क पे दौड़ाने लगा.ठीक 2 मिनिट बाद रॉकी अपनी कार मे उसके पीछे था.

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"बाहर तो सब शांत है.",रंभा कंप्यूटर के सामने से उठ गयी.देवेन को गये हुए 1 घंटे से उपर हो गया था & अब वो बहुत उब चुकी थी.वो विजयंत मेहरा के पीछे आ खड़ी हुई & उसके कंधे दबाने लगी.अपनी तरफ आती रंभा के लाल & काले रंग के चौखानो वाले मिनी स्कर्ट से बाहर निकलती दूधिया जंघे & सुडोल टाँगे उसे ललचा रही थी.उपर से उसके नाज़ुक हाथो के दबाव ने उसकी हसरत को जगा दिया था मगर अभी वो लाचार था.

"हां,पर नज़र तो रखनी ही है.देवेन ने कहा है तो बात ज़रूर संगीन होगी.",रंभा की नज़दीकी अब उसे मदहोश कर रही थी.उसने बात बदलने की गरज से उस से सवाल किया,"रंभा,1 बात बताओ,क्या समीर ऐसा शख्स है?"

"कैसा?",रंभा जानती थी कि उसके ससुर का इशारा किस तरफ था मगर फिर भी उसने पुचछा.

"यही जो मेरे इस हाल का ज़िम्मेदार है.",विजयंत जब भी बाहर कोई हुलचूल देखता तो दूरबीन से उसे ध्यान से देखने लगता.

"जिस समीर से मैने शादी की थी & जो समीर गायब होने के बाद वापस लौटा था-उन दोनो मे इतना फ़र्क था कि लगता था कि दोनो 2 बिल्कुल अलहदा इंसान हैं.",रंभा के कोमल हाथ अब आगे विजयंत के सीने पे चले आए थे & वो अपनी ठुड्डी उसके दाए कंधे पे टीका चुकी थी.रंभा की नज़र गयी & उसे ससुर की कार्गो पॅंट मे तंबू बना दिखा.वो मन ही मन मुस्कुराइ & उसके दाए गाल को चूम लिया.

"अभी नही.",उसने ना चाहते हुए भी उसके सर को अपने चेहरे से दूर किया.रंभा को उसकी ये बात पसंद तो नही आई मगर वो किनारे हो गयी,"..क्या वजह हो सकती है उसके बदले रवैयययए की?",उसने समीर के बारे मे बात जारी रखी.

"ये तो मुझे भी समझ नही आता.अगर उसे कामया पसंद थी तो आपको & बाकी घरवालो को नाराज़ कर मुझसे शादी क्यू की उसने?",रंभा ने 1 काली वेस्ट पहनी थी.अपनी गोरी,गुदाज़ बाहे उपर ले जा उसने उस वेस्ट को निकाल दिया & अपनी मोटी जंघे विजयंत के चेहरे के सामने से ले जाते हुए उसकी दोनो टाँगो के बीच खड़ी हो गयी.विजयंत के सामने उसका गोल पेट & लाल ब्रा मे क़ैद बाहर निकलने को बेताब चूचियाँ छल्छला रही थी,"खैर छ्चोड़िए.देखते हैं आगे क्या होता है.",रंभा झुक के उसकी टांगो के बीच बैठ गयी.विजयंत भी झुक के उसे देखने लगा.

"अब बाहर क्यू नही देखते?",रंभा ने शोखी से मुस्कुराते हुए ससुर को प्यार से झिड़का & उसकी पॅंट की ज़िप खोल उसके लंड को बाहर निकाल लिया,फिर अपने ब्रा कप्स के बीच लगे बटन को खोल अपनी चूचियाँ आज़ाद कर दी & उन्हे अपने हाथो मे भर लंड को उनके बीच दबा लिया.विजयंत ने बड़ी मुश्किल से अपनी आह रोकी & खिड़की के बाहर देखा,1 बाइक सवार रास्ते पे आगे चला गया.रंभा उसके लंड को चूचियो के बीच दबा के हिला रही थी & वो जोश से भर रहा था.

वो चाह के भी रंभा के जिस्म को नही च्छू रहा था क्यूकी उसे पता था कि 1 बार उसने उसके रेशमी बालो या नर्म चूचियो को च्छुआ तो उसके सब्र का बाँध टूट जाएगा & फिर दोनो को 1 दूसरे के जिस्मो मे खोते देर नही लगेगी.उसे देवेन पे पूरा भरोसा था & इतने दिनो मे वो समझ गया था कि वो बिना बात के नही घबराता था.अगर उसने कहा था तो उसे बाहर दूसरे घर पे नज़र रखनी ही थी.उसने सर नीचे झुकाया.रंभा चूचियो के बीच लंड को हिलाते हुए उसके सूपदे को अपने गुलाबी होंठो से बार-2 चूम रही थी.विजयंत के आंडो मे 1 अजीब सा मीठा दर्द शुरू ही गया था.

रंभा ने कुच्छ देर बाद अपनी चूचियो मे से लंड को निकाल के दाए हाथ मे जकड़ा & हिलाते हुए उसके सूपदे को अपने मुँह मे भर चूसने लगी.विजयंत की हालत अब और खराब हो गयी.रंभा लंड चूस्ते हुए उसे देख रही थी.उसकी आँखो मे ससुर के लिए बुलावा सॉफ दिख रहा था मगर वो भी जानती थी कि विजयंत अभी उसकी हसरत पूरी करने वाला नही.उसने बाए हाथ को नीचे अपनी पॅंटी के किनारे से अपनी चूत पे लगाया,इस वक़्त तो उसे खुद ही दोनो की प्यास बुझानी पड़ेगी.

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देवेन गोआ के चप्पे-2 से वाकिफ़ था & वो रॉकी को बुरी तरह से उलझा रहा था.कभी कार बिल्कुल भीड़ भरे इलाक़े मे घुस जाती तो कभी बिल्कुल सुनसान.देवेन उसे अपने पीछे से हटाना नही चाहता था.वो तो चाहता था कि वो उसके पीछे आए मगर उस से पहले वो उस अंजान शख्स को पूरी तरह से भटका देना चाहता था की ताकि उसे पता ही ना चले कि वो गोआ के किस हिस्से मे है.कुच्छ देर के बाद उसने कार को अपने घर की तरफ मोड़ा.रॉकी भी उसके पीछे हो लिया.देवेन ने शीशे मे देखा & मुस्कुराया,बस ये पंछी उसके जाल मे फँसने को पूरी तरह से तैय्यार था.

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"डॅड,आपको याद है कि मैं आपके साथ इसी तरह खेलती थी?",रंभा लंड पे पूरे जोशोखरोश के साथ जुटी थी.उसने उसे उठा के अपनी जीभ की नोक उसकी लंबाई पे चलाई & फिर उसके नीचे लटके आंडो को जीभ से छेड़ने लगी.

"कुच्छ-2..ओह्ह..!",विजयंत ने आह भरी.उसके ज़हन मे तस्वीर घूमने लगी थी.रंभा & उसके हुमबईस्तर होने की मगर वो कभी भी उस जगह को ठीक से नही देख पाता था जहा वो चुदाई कर रहे होते थे.

"आपको ये भी याद नही कि मेरे अलावा & किस-2 लड़की ने आपके लंड से ऐसे खेला है?",रंभा ने अपनी चूत कुरेदते हुए उसके आंडो को दबाया & फिर लंड को दाए हाथ मे पकड़ बहुत ज़ोर से हिलाने लगी.

"नही.",उसने आँखे बंद कर ली.1 धुंधली सी शक्ल आ रही थी उसके ज़हन मे और वो रंभा नही थी.....कौन थी वो?..वो उसकी छातियों पी रहा था & वो उसके बालो से खेल रही थी..वो खुश नही थी मगर..कौन थी वो?

"आँखे खोलिए & बाहर देखिए,डॅड.",रंभा उसका चेहरा देखते समझ गयी थी कि वो दिमाग़ पे ज़ोर डाल रहा था.वो अपनी मंज़िल के बहुत करीब थी & जानती थी कि विजयंत का भी कुच्छ ऐसा ही हाल था.

"रंभा..",विजयंत उसे देख रहा था,"..वो सोनिया कौन थी तुम्हे पता है?"

"बताया तो था आपको की आपके दुश्मन ब्रिज कोठारी की बीवी थी वो."

"और किसी तरह नही जानते थे क्या हम उन दोनो को?",उसके अंडे अब बिल्कुल कस चुके थे & वो मीठा दर्द अब अपने चरम पे पहुँच रहा था.रंभा की चूत की कसक भी अब बिल्कुल उपर पहुँच चुकी थी.

"नही,डॅड.",& उसी वक़्त रंभा ने मुँह मे लंड को भर विजयंत के ज़हन से उसके जिस्मानी जोश के अलावा & सारे ख़यालो को बाहर निकाल दिया.वो अपनी चूत तेज़ी से कुरेदते हुए उसके लंड को चूसने लगी.अगले ही पल उसके मुँह मे 1 गर्म फव्वारा च्छुटा & उसी वक़्त उसकी उंगली के कमाल से उसकी चूत मे भी हुलचूईल मच गयी.ससुर के उसके मुँह को अपने वीर्य से भरते ही वो भी जहड़ गयी थी & तभी रंभा के दिमाग़ मे 1 ख़याल कौंधा..कही सोनिया से भी इनके ताल्लुक़ात तो नही थे?..वो अपने ख़याल से खुद हैरत मे भर गयी & लंड से वीर्य की सारी बूँदो को चाट कर पीने लगी.

विजयंत ने उसके सर को पकड़ उपर उठाया & उसके होंठो को बड़ी शिद्दत से चूमने लगा.रंभा भी घुटनो पे खड़ी हो उसे बाहो मे भर उसकी किस का जवाब देने लगी की विजयंत को सामने कोई रोशनी सी दिखी.उसने फ़ौरन रंभा के होंठो को छ्चोड़ा & दूरबीन से अपनी आँख चिपका दी,"..ये तो देवेन की कार है मगर वो पुराने घर मे क्यू जा रहा है?"

"क्या?!",रंभा भी हैरत से घूमी & पर्दे को ज़रा सा हटा बाहर देखने लगी की उसका मोबाइल बजा.वो फ़ौरन विजयंत की टाँगो के बीच से निकली & फोन उठाया,"देवेन.क्या बात है?..क्या हुआ?"

"फोन विजयंत को दो,रंभा.जल्दी!",रंभा ने वैसा ही किया.

"बोलो देवेन क्या बात है?..हूँ..अच्छा!..",वो दूरबीन से देखते बात कर रहा था,"ओके.",उसने फोन बंद कर रंभा को दिया & दूरबीन से बाहर देखने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--75

gataank se aage......

Usne bar counter pe paise rakhe & vaha se jane laga ki apne bayi taraf aankho ke kone se kuchh dikha joki us shack ki gehmagehmi se bilkul alag tha.deven ne fauran apni pith us taraf ki & samne khadi chilam se ganje ke kash lagati 1 firangi ladki ke gale me latke bade se locket ko uthake dekhne laga,”nice locket.”,locket koi 2inchX2inch ka tha & dekhne me chhota sa foto frame lagta tha.deven uske shishe ko ghuma ke 1 aaine ki tarah istemal karne ki koshish kar raha tha.

“you tryin to pick me up?”,ladki ganje ke nashe me chur thi.

“what do you think?”,uska idea kaam nahi kar raha tha.usne ladki ke hath se chilam li & uske bayi taraf deewar se tik ke uske sath khada ho gaya & chilam ka 1 kash liya & lete hue samne 2-3 israeliyo ko khud ki or dekhte paya.

“i think you are not used to this stuff.”,deven ki aankho se pani aa gaya tha.ladki ne us se chillum li & fir 1 lamba kash liya.

“so why don’t you help me in getting used to it.”,deven ka dimagh tezi se kaam kar raha tha.

“ok.”,ladki ne uska hath tham liya to deven ne daya hath uske gale me dala & baye hath me uska baya hath le chumte hue bahar nikal gaya.use ye dekhna tha ki vo log aage kya karte hain.vo ladki ko leke beach ke 1 khali pade hisse ki taraf baith gaya & ret pe baith gaya.

Deven chillum se bahut halke kash khicnh raha tha magar jata aise raha tha jaise bahut lambe kash laga raha ho.vo & ladki bari-2 se ganja pi rahe the.deven ka sara dhyan un teeno israeliyo pe hi tha.uski samajh nahi aa raha tha ki aakhir vo bas uspe nazar kyu rakh rahe hain,koi kadam kyu nahi uthate?..zarur vo apne boss ka intezar kar rahe hain..magar kaun hai inka boss?..fauran hi deven ko apne sawal ka jawab mil gaya..Yahel!..to vo iske aadmi hain..magar iska to pahado ke drug syndicate se koi lena-dena nahi hai..to kya ise Sameer ne Rambha ki talash me lagaya hai..magar sameer is tak kaise pahuncha?..deven ka Goa ki jurm ki duniya ke zyadatar pehluo se vakif hona aaj kaam aa raha tha.

"hello,tumhara aadmi mil gaya hai,Cocount grove shack.",yahel ne Rocky se bas itna keh ke fone kaat diya & fir shack ke andar chala gaya.1 baar fir uske teeno aadmi chori se deven pe nazar rakhne lage.deven ab & soch me pad gaya tha..aakhir yahel ne fone kise kiya tha?..koi 20 minute baad is sawal ka jawab bhi use mil gaya.1 lamba-chauda dadhi vala naujawan vaha aaya & use dekha & fir shack ki or badh gaya.rocky ko zara bhi shaq nahi tha ki ye vahi cd vala buddha tha.ab bas yahel ko uski fees deke vo is se nibat lega.

deven ne bhi rocky ko dekh ke uski tasvir apne dimagh me utar li thi.uska kaam ho gaya tha & ab jane ka waqt ho gaya tha.kuchh gadbad hone pe vo in israeliyo se yaha unke ilake me nahi bhidna chahta tha.Israel duniya ke un mulko me se hai jaha ki balig hone pe fauj me kuchh din kaam karna & training lena zaruri hai.deven me abhi bhi dum-khum tha lekin 1 sath bahut umda fauji training vale israeli naujawano se bhidna to apni maut ko aap bulawa dene jaisa tha.vo tezi se car ki or badha to 1 israeli tezi se shack ke andar gaya.

"ye tumhari fees,yahel.",rocky ne 1 packet mez pe rakha jise yahel ke sathi bartender ne utha ke check kiya & fir apne sathi ki or dekh ke sar hilaya,"..thanks for everything."

"ok,jao.",yahel ke chehre pe itne aasan kaam ke itne paise milne ki khushi ki jhalak bhi nahi thi.tabhi 1 israeli bhagta hua andar aaya & hebrew me kuchh kaha,"..tumhara aadmi ja raha hai.",rocky sunte hi khada ho gaya & bahar bhaga.

deven car sadak pe utar raha tha jab usne us dadhi vale shakhs ko daudte hue bahar aate dekha.deven ne gear badle & tezi se car ko sadak pe daudane laga.thik 2 minute baad rocky apni car me uske peechhe tha.

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"bahar to sab shant hai.",rambha computer ke samne se uth gayi.deven ko gaye hue 1 ghante se upar ho gaya tha & ab vo bahut ub chuki thi.vo Vijayant Mehra ke peechhe aa khadi hui & uske kandhe dabane lagi.apni taraf aati rambha ke laal & kale rang ke chaukhano vale mini skirt se bahar niklati doodhiya janghe & sudol tange use lalcha rahi thi.upar se uske nazuk hatho ke dabav ne uski hasrat ko jaga diya tha magar abhi vo lachar tha.

"haan,par nazar to rakhni hi hai.deven ne kaha hai to baat zarur sangin hogi.",rambha ki nazdiki ab use madhosh kar rahi thi.usne baat badalne ki garaj se us se sawal kiya,"rambha,1 baat batao,kya Sameer aisa shakhs hai?"

"kaisa?",rambha janti thi ki uske sasur ka ishara kis taraf tha magar fir bhi usne puchha.

"yehi jo mere is haal ka zimmedar hai.",vijayant jab bhi bahar koi hulchul dekhta to durbin se use dhyan se dekhne lagta.

"jis sameer se maine shadi ki thi & jo sameer gayab hone ke baad vapas lauta tha-un dono me itna fark tha ki lagta tha ki dono 2 bilkul alhada insan hain.",rambha ke komal hath ab aage vijayant ke seene pe chale aaye the & vo apni thuddi uske daye kandhe pe tika chuki thi.rambha ki nazar gayi & use sasur ki cargo pant me tambu bana dikha.vo man hi man muskurayi & uske daaye gaal ko chum liya.

"abhi nahi.",usne na chahte hue bhi uske sar ko apne chehre se door kiya.rambha ko uski ye baat pasand to nahi aayi magar vo kinare ho gayi,"..kya vajah ho sakti hai uske badle ravaiyye ki?",usne sameer ke bare me baat jari rakhi.

"ye to mujhe bhi samajh nahi aata.agar use Kamya pasand thi to aapko & baki gharwalo ko naraz kar mujhse shadi kyu ki usne?",rambha ne 1 kali vest pehni thi.apni gori,gudaz baahe upar le ja usne us vest ko nikal diya & apni moti janghe vijayant ke chehre ke samne se le jate hue uski dono tango ke beech khadi ho gayi.vijayant ke samne uska gol pet & laal bra me qaid bahar nikalne ko betab chhatiya chhalchhala rahi thi,"khair chhodiye.dekhte hain aage kya hota hai.",rambha jhuk ke uski tango ke beech baith gayi.vijayant bhi jhuk ke use dekhne laga.

"ab bahar kyu nahi dekhte?",rambha ne shokhi se muskurate hue sasur ko pyar se jhidka & uski pant ki zip khol uske lund ko bahar nikal liya,fir apne bra cups ke beech lage button ko khol apni chhatiya azad kar di & unhe apne hatho me bhar lund ko unke beech daba liya.vijayant ne badi mushkil se apni aah roki & khidki ke bahar dekha,1 bike savar raste pe aage chala gaya.rambha uske lund ko chhatiyo ke beech daba ke hila rahi thi & vo josh se bhar raha tha.

vo chah ke bhi rambha ke jism ko nahi chhu raha tha kyuki use pata tha ki 1 baar usne uske reshmi baalo ya narm chhatiyo ko chhua to uske sabr ka bandh tut hayega & fir dono ko 1 dusre ke jismo me khote der nahi lagegi.use deven pe pura bharosa tha & itne dino me vo samajh gaya tha ki vo bina baat ke nahi ghabrata tha.agar usne kaha tha to use bahar dusre ghar pe nazar rakhni hi thi.usne sar neeche jhukaya.rambha chhatiyo ke beech lund ko hilate hue uske supade ko apne gulabi hotho se baar-2 chum rahi thi.vijayant ke ando me 1 ajib sa mitha dard shuru hi gaya tha.

rambha ne kuchh der baad apni choochiyo me se lund ko nikal ke daye hath me jakda & hilate hue uske supade ko apne munh me bhar chusne lagi.vijayant ki halat ab & kharab ho gayi.rambha lund chuste hue use dekh rahi thi.uski aankho me sasur ke liye bulawa saaf dikh raha tha magar vo bhi janti thi ki vijayant abhi uski hasrat puri karne vala nahi.usne baye hath ko neeche apni panty ke kinare se apni chut pe lagaya,is waqt to use khud hi dono ki pyas bujhani padegi.

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deven goa ke chappe-2 se vakif tha & vo rocky ko buri tarah se uljha raha tha.kabhi car bilkul bhid bhare ilake me ghus jati to kabhi bilkul sunsan.deven use apne peechhe se hatana nahi chahta tha.vo to chahta tha ki vo uske peechhe aaye magar us se pehle vo us anjan shakhs ko puri tarah se bhatka dena chahta tha ki taki use pata hi na chale ki vo goa ke kis hisse me hai.kuchh der ke baad usne car ko apne ghar ki taraf moda.rocky bhi uske peechhe ho liya.deven ne shishe me dekha & muskuraya,bas ye panchhi uske jaal me phasne ko puri tarah se taiyyar tha.

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"dad,aapko yaad hai ki main aapke sath isi tarah khelti thi?",rambha lund pe pure joshokharosh ke sath juti thi.usne use utha ke apni jibh ki nok uski lambai pe chalai & fir uske neeche latke ando ko jibh se chhedne lagi.

"kuchh-2..ohh..!",vijayant ne aah bhari.uske zehan me tasveer ghumne lagi thi.rambha & uske humbistar hone ki magar vo kabhi bhi us jagah ko thik se nahi dekh pata tha jaha vo chudai kar rahe hote the.

"aapko ye bhi yaad nahi ki mere alawa & kis-2 ladki ne aapke lund se aise khela hai?",rambha ne apni chut kuredte hue uske ando ko dabaya & fir lund ko daye hath me pakad bahut zor se hilane lagi.

"nahi.",usne aankeh band kar li.1 dhundhli si shakl aa rahi thi uske zehan me & vo rambha nahi thi.....kaun thi vo?..vo uski chhatiya pi raha tha & vo uske baalo se khel rahi thi..vo khush nahi thi magar..kaun thi vo?

"aankhe kholiye & bahar dekhiye,dad.",rambha uska chehra dekhte samajh gayi thi ki vo dimagh pe zor daal raha tha.vo apni manzil ke bahut karib thi & janti thi ki vijayant ka bhi kuchh aisa hi haal tha.

"rambha..",vijayant use dekh raha tha,"..vo Soniya kaun thi tumhe pata hai?"

"bataya to tha aapko ki aapke dushman Brij Kothari ki biwi thi vo."

"& kisi tarah nahi jante the kya hum un dono ko?",uske ande ab bilkul kas chuke the & vo mitha dard ab apne charam pe pahunch raha tha.rambha ki chut ki kasak bhi ab bilkul upar pahunch chuki thi.

"nahi,dad.",& usi waqt rambha ne munh me lund ko bhar vijayant ke zehan se uske jismani josh ke alawa & sare khayalo ko bahar nikal diya.vo apni chut tezi se kuredte hue uske lund ko chusne lagi.agle hi pal uske munh me 1 garm phavvara chhuta & usi waqt uski ungli ke kamal se uski chut me bhi hulchuil mach gayi.sasur ke uske munh ko apne virya se bharte hi vo bhi jahd gayi thi & tabhi rambha ke dimagh me 1 khayal kaundha..kahi soniya se bhi inke tallukat to nahi the?..vo apne khayal se khud hairat me bahr gayi & lund se virya ki sari boondo ko chat kar pine lagi.

vijayant ne uske sar ko pakad upar uthaya & uske hotho ko badi shiddat se chumne laga.rambha bhi ghutno pe khadi ho use baaho me bhar uski kiss ka jawab dene lagi ki vijayant ko samne koi roshni si dikhi.usne fauran rambha ke hotho ko chhoda & doorbin se apnio aankh chipka di,"..ye to deven ki car hai magar vo purane ghar me kyu ja raha hai?"

"kya?!",rambha bhi hairat se ghumi & parde ko zara sa hata bahar dekhne lagi ki uska mobile baja.vo fauran vijayant ki tango ke beech se nikli & fone uthaya,"deven.kya baat hai?..kya hua?"

"phone vijayant ko do,rambha.jaldi!",rambha ne vaisa hi kiya.

"bolo deven kya baat hai?..hun..achha!..",vo doorbin se dekhte baat kar raha tha,"ok.",usne phone band kar rambha ko diya & doorbin se bahard ekhne laga.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--76

गतान्क से आगे......

"रंभा,तुम फ़ौरन अपना मोबाइल का हंडसफ़री किट मुझे दो.",विजयंत मेहरा की आँख दूरबीन से ही चिपकी हुई थी,"..& फ़ौरन दूसरे घर पे जाओ मगर यहा के पीछे के गेट से.",सामने के गेट को तो देवेन ताला लगाके गया था.रंभा ने अपने कपड़े ठीक किए & फ़ौरन विजयंत के कान पे इयरफोन लगाया,"..अभी 1 कार आएगी & देवेन चाहता है कि उसका ड्राइवर तुम्हे देख ले.",रंभा बाहर की तरफ भागी,"..उसके देखते ही घर के अंदर चली जाना.बाकी देवेन संभाल लेगा.",2 मिनिट बाद रंभा दूसरे घर के गेट को बंद कर रही थी.उसके सामने 1 कार धीमी हो रही थी जिसमे बैठे रॉकी की बाछे उसे देखते ही खिल गयी थी.

तभी रंभा और रॉकी दोनो चौंक पड़े.अंदर से देवेन नशे मे बुरी तरह धुत इंसान की तरह ज़ोर-2 से गाना गा रहा था.रंभा मूडी और घर के अंदर चली गयी.देवेन गाना गाते हुए 1 काग़ज़ पे कुच्छ लिख रहा था & उसे दिखा रहा था,"तुम मुझे डांटो और नशे मे होने के लिए झिड़कती रहो फिर मुझे सुलाने का नाटक करना."

रंभा ने वैसा ही करना शुरू किया.रॉकी घर के चारो तरफ घूम के जायज़ा ले रहा था इस बात से अंजान की विजयंत सब देख रहा था & देवेन अपने कान पे लगे इयरफोन से उसके ज़रिए बाहर का सारा हाल सुन रहा था.रॉकी अंदर देख तो नही पा रहा था बस सुन पा रहा था & इस वक़्त उसके कानो मे 1 जोड़े की नोक-झोंक आ रही थी.

"अब सो जाओ..नशेड़ी इंसान!"

"देवेन,वो घर के अहाते मे घुस चुका है.तुम्हारे बेडरूम की खिड़की के बाहर है अभी.",देवेन ने रंभा को इशारा किया & दोनो उसके कमरे मे गये.देवेन ने बिस्तर पे गिरने का नाटक किया & फिर फ़ौरन उठ गया & रंभा को बोलते रहने का इशारा किया.

"रंभा डार्लिंग..आ जाओ मेरी जान..!",देवेन नशे मे होने का नाटक करते हुए बाहर की तरफ गया.रॉकी ने उसके मुँह से रंभा का नाम सुना तो उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा.वो आज रात ही काम निपटा के वापस जा सकता था.रंभा गुस्से मे बड़बड़ा रही थी & लाइट बंद कर रही थी.देवेन उसे लेके घर के ड्रॉयिंग रूम मे आया & उसे टीवी चलाने का इशारा किया.वो उसके करीब आया & कान मे फुसफुसाया,"जो भी हो इस सोफे से ना हिलना ना पीछे घूम के देखना."

"सो गया नशेड़ी..हुंग!",रंभा ने बड़बड़ाते हुए टीवी ओन किया & देवेन स्टोर रूम मे घुस गया.उसे बस 2 चीज़ें चाहिए थी जोकि वही मौजूद थी-1 3फिट का लोहे का पाइप & 1 कपड़ा.देवेन ने पाइप के 1 सिरे पे कपड़े को लपेट के बाँधा & उस कमरे मे आ गया जहा विजयंत रहता था.उस कमरे के दरवाज़े की ओट मे खड़े हो वो बाहर खड़े रॉकी के अंदर आने का इंतेज़ार करने लगा.

रॉकी कुच्छ देर तो बाहर खड़ा रह के इंतेज़ार करता रहा.उसके बाद उसने घर के खिड़की दरवाज़ो को टटोल के कम से कम आवाज़ कर अंदर घुसने का रास्ता ढूँडने लगा.विजयंत ने ये बात देवेन को बताई तो वो धीरे से किचन मे गया & वाहा की खिड़की की चिताकनी खोल दी & वापस अपने छुप्ने की जगह पे आ गया.टीवी के चॅनेल्स रिमोट से बदलती रंभा का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था..आख़िर कौन था वो कार मे बैठा शख्स?..समीर ने उसे क्यू भेजा था यहा?

रॉकी रसोई की खिड़की तक आ गया था & उसे टटोलते ही उसे अपनी किस्मत पे भरोसा नही हुआ.सब कुच्छ उसके हक़ मे जा रहा था.उसने खिड़की खोली तो थोड़ी आवाज़ हुई.वो झुक के खिड़की ने नीचे बैठ गया & इंतेज़ार करने लगा कि कही रंभा को आहट तो नही हो गयी.रंभा को आहट हुई थी मगर देवेन के कहे मुताबिक उसने अपनी गर्दन तक नही हिलाई.रॉकी घड़ी देख के 5 मिनिट बाद उठा & फुर्ती से खिड़की के रास्ते रसोई मे घुस गया.

उसने अपनी शर्ट के कॉलर के नीचे गले मे बँधा बड़ा सा रुमाल निकाल के अपने मुँह पे बाँधा & फिर जीन्स की हिप पॉकेट से सर्जिकल रब्बर ग्लव्स निकाले & पहन लिए.दवा की दुकान से खरीदे ये दस्ताने वो हमेशा अपने पास रखता था.उसने बाई टांग उठा के जीन्स को उपर किया & जूते के उपर टांग पे बँधी शीत मे रखा खंजर निकाल के हाथ मे ले लिया.वो किचन से निकला & पहले उसने देवेन के कमरे को चेक करने का फ़ैसला किया.

देवेन जानता था कि वो ऐसा ही करेगा इसीलिए वो स्टोर मे च्छूपा था.रसोई से निकलते ही उसका कमरा दाई तरफ पड़ता था जबकि विजयंत का कमरा था रसोई के बाई तरफ.जैसे ही रॉकी उसके कमरे की दहलीज़ तक पहुँचा देवेन दरवाज़े की ओट से बाहर आया & दबे पाँव मगर फुर्ती से रॉकी के पीछे गया & पाइप से वार किया.

"ठुड्द..!..खन्णन्न्....!",1 थोड़ी भारी मगर दबी सी आवाज़ & फिर कोई मेटल फर्श पे गिरने की खनकती आवाज़ रंभा के कान मे पड़ी मगर उसने अपने महबूब के कहे मुताबिक ना ही गर्दन घुमाई ना ही सोफे से उठी.

देवेन रॉकी को बस बेहोश करना चाहता था,उसका सर फोड़ना उसका मक़सद नही था इसीलिए उसने पीपे पे कपड़ा बाँधा था.ये तरकीब और ऐसी काई बातें उसने जैल मे या फिर जैल से निकलने के बाद सीखी थी.अचानक हुए साधे हाथ के ज़ोर के वार से रॉकी पल मे बेहोश हो गया था & उसके हाथ का खंजर फर्श पे गिर गया था.

"रंभा,इधर आना.",जहा देवेन ने रॉकी को चित किया था उस जगह से थोड़ा हटके 1 गलियारे के बाद ड्रॉयिंग रूम था.रंभा फ़ौरन वाहा आई,"सब ठीक है,विजयंत.मैने उसे काबू मे कर लिया है मगर तुम अभी नज़र रखे रहो.सब ठीक रहा तो हम बस 15 मिनिट मे वाहा पहुचते हैं."

"ओके,देवेन."

देवेन ने रॉकी को नंगा किया & उसकी कपड़ो की तलशी ली.रॉकी के पास से उस खंजर के अलावा 1 बहुत छ्होटी सी पिस्टल मिली थी जोकि उसके शर्ट के नीचे की बनियान मे बने 1 खास पॉकेट मे छिपि थी.उसके पर्स मे जो ड्राइविंग लाइसेन्स & आइडी मिले उसमे उसका नाम अनिल कुमार लिखा था.देवेन जानता था कि वो फ़र्ज़ी हैं.

"इसे नंगा क्यू कर रहे हैं?",रंभा देवेन के बगल मे बैठी तो देवेन ने उसे घूम के देखा.रंभा पसीने से भीगी थी जबकि मौसम खुशनुमा था.उसने अपनी माशूक़ा को बाँहो मे भर लिया.

"घबरा गयी क्या?",रंभा ने उसकी गर्दन मे मुँह च्छूपा लिया & हां मे सर हिलाया,उसकी नज़र वाहा आते ही फर्श पे पड़े खंजर पे पड़ी थी & उसे समझते देर नही लगी थी कि वो अजनबी किस इरादे से वाहा आया था,"..मेरे होते भी घबराती हो!",वो उसकी पीठ सहला रहा था,"..अब सब ठीक है.हूँ.",काफ़ी देर तक वो उसे बाहो मे भरे चुपचाप बैठा रहा & उसकी पीठ सहलाता रहा & उसके बाल & माथे को चूमता रहा,"अब ठीक हो?",रंभा ने कंधे से सर उठाया तो विजयंत ने उस से पुछा.

"हूँ."

"पानी पियोगी?..अभी लाता हू."

"आप रहने दीजिए.मैं लाती हू.",रंभा उठ खड़ी हुई.

"स्टोर मे जितनी रस्सिया पड़ी होंगी सब लेती आना & थोड़े पुराने कपड़े भी."

"अच्छा.",10 मिनिट बाद नंगा,बेहोश रॉकी फर्श पे बँधा पड़ा थे.देवेन ने उसे ऐसे बाँधा था कि वो बस लेटा रह सकता था & ज़रा भी हिलडुल नही सकता था.देवेन ने पुराने कपड़ो से उसका मुँह बाँधा.वैसे अभी तो वो बेहोश था मगर वो कोई रिस्क नही ले रहा था.

रंभा के पानी लाने का बाद दोनो ने पानी पिया उसके बाद देवेन ने रंभा की मदद से रॉकी को घर के बाहर खींचा & फिर कार की पिच्छली सीट पे डाल दिया.उसके बाद घर बंद किया & तीनो बुंगले पे आ गये.

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"इसकी पहरेदारी की ज़रूरत नही क्या?",देवेन ने बंगल पे पहुँच रॉकी के मुँह से कपड़ा हटाया & मोटा डक्ट टेप लपेट दिया & फिर 1 पेन से होंठो के उपर 1 सुराख किया ताकि उसे थोड़ी कम तकलीफ़ हो.दोनो ने उसे बुंगले के स्टोर रूम मे डाला & फिर उसके पैरो मे 1 रस्सी बाँध के दूसरा सिरा पास पड़ी 1 टूटी कुर्सी से बंद दिया.अब रॉकी जब भी उठता & ज़रा भी हिलता तो कुर्सी की टूटी टांग जिस से रस्सी बँधी थी,गिर जाती & उसके बाद कुर्सी भी & उस आवाज़ से उन्हे उसके होश मे आने का पता चल जाता.

"खाना तैय्यार है.",रंभा वाहा आई तो दोनो स्टोर पे ताला लगा रहे थे.

"चलो,विजयंत खाना खाते हैं.",देवेन ने उसके कंधे पे हाथ रखा,"..आज तुम बहुत थके हुए हो.खा के सो जाना.यूरी के हिसाब से तुम्हे अभी ज़्यादा स्ट्रेन नही लेना चाहिए.",विजयंत ने पीछे घूम स्टोर के दरवाज़े को देखा.

"उसकी फ़िक्र मत करो,दोस्त.",देवेन हंसा,"..वो 5-6 घंटो से पहले जागने वाला नही & हां चाहे कुच्छ हो जाए तुम उसके सामने मत जाना,दोस्त.",तीनो खाने की मेज़ के पास आ कुर्सिया खीच बैठ गये & रंभा सबको खाना परोसने लगी.

खाना खाने के बाद देवेन ने विजयंत मेहरा को सोने भेज दिया.वो नही चाहता था कि उसकी सेहत पे कोई भी बुरा असर पड़े & फिर उसे अपनी माशुका के साथ तन्हाई के लम्हे भी गुज़ारने थे.रंभा बचा खाना फ्रिड्ज मे रख रही थी जब देवेन ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.रंभा ने फ्रिड्ज बंद किया & पलट के उसके आगोश मे समा गयी.देवेन उसे बाहो मे भरते ही समझ गया कि वो अभी तक थोड़े तनाव मे है.उसने बड़े प्यार से उसकी पीठ सहलाते हुए झुक के उसके गाल चूमे,”अभी तक घबरा रही हो?”

रंभा ने बिना जवाब दिए चेहरा झुका लिया.खंजर गिरने की आवाज़ अभी तक उसके कानो मे गूँज रही थी,”वो आदमी..क़त्ल के इरादे से आया था..”

“हां,पर नाकाम रहा और यही अहम बात है.”,देवेन ने उसके बाल उसके चेहरे से हटके उसकी आँखो मे झाँका,”..रंभा,शायद आज से पहले तुम्हे उस ख़तरे का एहसास नही था जो हमारे चाहते ना चाहते हुए भी हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है.ये घबराहट होना भी लाज़मी है मगर रंभा,मुझे लगता है कि बहुत जल्द ये सारा मामला अपने अंजाम तक पहुचने वाला है..”,उसके हाथ प्रेमिका के गालो से हाथ उसकी कमर पे आ गये थे,”..अब वो अंजाम हुमारे हक़ मे होगा या नही ये बस उसे पता है..”,देवेन ने नज़रे उपर कर दुनिया के मालिक की ओर इशारा किया,”..& उस अंजाम की फ़िक्र मे डर-2 के जीना मुझे ठीक नही लगता.तुम्हे क्या लगता है?”,उसकी निगाहे अभी भी रंभा की निगाहो मे झाँक रही थी.

रंभा भी उसकी आँखो मे देख रही थी.देवेन की बातो से उसे हौसला मिला था..सही कह रहा था वो..यू घुट-2 के वो क्यू जिए?..उसकी क्या ग़लती थी बल्कि उसे तो उस शख्स का जीना हराम कर देना चाहिए जिसने उसके इन खुशियो भरे पलो को बर्बाद करने की सोची..रंभा के हाथ देवेन के सीने पे थे.उसने उन्हे वाहा से उपर उसकी गर्देन मे डाला & उचक के मुस्कुराते हुए उसके लबो से अपने लब सटा दिए.देवेन ने उसकी कमर को कस लिया & दोनो प्रेमी 1 दूसरे को शिद्दत से चूमने लगे.

किचन मे रखी खाने की मेज़ की कुर्सी पे देवेन बैठा तो रंभा खुद ही उसकी गोद मे बैठ गयी.दोनो अभी भी 1 दूसरे को चूमे जा रहे थे.देवेन का दाया हाथ रंभा की पीठ पे था & बाया उसकी वेस्ट को उठा उसकी कमर के मांसल भाग को सहला रहा था.रंभा देवेन की बातो & अब उसकी हर्कतो से थोड़ी देर पहले की घटना की वजह से पैदा हुई घबराहट को भूल रही थी.दोनो प्रेमियो ने अपनी ज़ुबाने अपने-2 मुँह से बाहर निकाल ली थी & उन्हे लड़ा रहे थे.रंभा अपने महबूब की ज़ुबान चाटते हुए मुस्कुरा रही थी & जब देवेन ने उसकी वेस्ट उपर कर उसके पेट को दबाया तो वो खुशी से चिहुनकि & अपनी बाहे उपर कर दी.

देवेन ने उसकी वेस्ट निकाली & 1 बार फिर उसकी पतली कमर को अपनी बाहो मे कसा & उसके चेहरे & होंठो को अपने गर्म होंठो से ढँकने लगा.रंभा के हाथ भी अपने आशिक़ की टी-शर्ट मे जा घुसे थे & उसकी मज़बूत पीठ पे घूम रहे थे.देवेन उसके चेहरे से नीचे उसकी गर्देन को चूम रहा था & रंभा अब अपने हाथ आगे ले आके उसके सीने के बालो मे घूमाते हुए उसके निपल्स खरोंच रही थी.देवेन का बाया हाथ उसकी स्कर्ट मे घुस गया था & उसकी जंघे भी उसके हाथ की आहट पाते ही अपने आप खुल गयी ताकि उनके बीच छुपि उसकी चूत को वो हाथ आसानी से च्छू सके.रंभा अब मस्त होने लगी थी.पॅंटी के उपर से ही देवेन उसकी चूत सहला रहा था & अब उसकी हसरतें भी बढ़ रही थी.उसने देवेन का मुँह अपने गले से उठाया & उसकी शर्ट निकाल दी & फिर झुक के उसके सीने को चूमने लगी.उसका दाया हाथ देवेन के मज़बूत सीने को सहलाता हुआ नीचे उसकी जीन्स के उपर से ही उसके लंड को दबा रहा था.देवेन भी उसकी इस हरकत से जोश मे आ गया & उसने रंभा की कमर थाम उसे अपने सामने खड़ा किया & फिर उसकी कमर के बगल मे लगे हुक्स खोल उसकी स्कर्ट को नीचे सरका दिया.लाल ब्रा & पॅंटी मे सज़ा रंभा का गोरा जिस्म बड़ा ही नशीला लग रहा था.देवेन कुच्छ पॅलो तक अपने सामने खड़ी उस हुस्न की मल्लिका को निहारता रहा.

“ऐसे क्या देख रहे हैं?”,रंभा के गालो के गोरे रंग मे हया की सुर्ख लाली घुल गयी थी.उपरवाले ने लड़कियो का दिल भी अजीब अदा से बनाया है.जिस मर्द के साथ हर रात सोती हैं,जिस से उन्हे कोई परदा मंज़ूर नही,उसकी निगाहो से भी शर्मा जाती हैं!पर शायद यही बात है जोकि मर्दो को लुभाती है!

“ये बेपनाह हुस्न देख रहा हू.”,देवेन भी खड़ा हो गया था.

“रोज़ ही तो देखते हैं.”

“पर हर रोज़ नयी लगती हो.”,1 बार फिर दोनो आगोश मे समा गये & 1 दूसरे को चूमने लगे.देवेन के हाथ रंभा के लगभग नंगे जिस्म पे बड़ी बेचैनी से फिसल रहे थे.उसके हाथो की गर्मी रंभा की मस्ती भी बढ़ा रही थी.देवेन उसे चूमते हुए थोड़ा आगे हुआ तो रंभा पीछे खाने की मेज़ पे बैठ गयी.उसने अपनी टाँगे खोल देवेन को आगे खींचा & उसके लंड को अपनी चूत पे दबाते हुए चूमने लगी.रंभा के हाथ देवेन की सख़्त पीठ से फिसलते हुए नीचे आए & जीन्स के उपर से ही उसकी गंद को दबाते हुए आगे आए & उसके बेल्ट को खोल ज़िप को नीचे सरकया & अंडरवेर के उपर से ही उसके सख़्त लंड को दबाने लगे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--76

gataank se aage......

"Rambha,tum fauran apna mobile ka handsfree kit mujhe do.",Vijayant Mehra ki aankh doorbin se hi chipki hui thi,"..& fauran dusre ghar pe jao magar yaha ke peechhe ke gate se.",samne ke gate ko to Deven tala lagake gaya tha.rambha ne apne kapde thik kiye & fauran vijayant ke kaan pe earphone lagaya,"..abhi 1 car aayegi & deven chahta hai ki uska driver tumhe dekh le.",rambha bahar ki taraf bhagi,"..uske dekhte hi ghar ke andar chali jana.baki deven sambhal lega.",2 minute baad rambha dusre ghar ke gate ko band kar rahi thi.uske samne 1 car dhimi ho rahi thi jisme baithe Rocky ki baachhen use dekhte hi khil gayi thi.

tabhi rambha & rocky dono chaunk pade.andar se deven nashe me buri tarah dhut insan ki tarah zor-2 se gana ga raha tha.rambha mudi & ghar ke andar chali gayi.deven gana gate hue 1 kagaz pe kuchh likh raha tha & use dikha raha tha,"TUM MUJHE DANTO & NASHE ME HONE KE LIYE JHIDAKTI RAHO FIR MUJHE SULANE KA NATAK KARNA."

rambha ne vaisa hi karna shuru kiya.rocky ghar ke charo taraf ghum ke jayza le raha tha is baat se anjan ki vijayant sab dekh raha tha & deven apne kaan pe lage earphone se uske zariye bahar ka sara haal sun raha tha.rocky andar dekh to nahi pa raha tha bas sun pa raha tha & is waqt uske kano me 1 jode ki nok-jhonk aa rahi thi.

"ab so jao..nashedi insan!"

"deven,vo ghar ke ahate me ghus chuka hai.tumhare bedroom ki khidki ke bahar hai abhi.",deven ne rambha ko ishara kiya & dono uske kamre me gaye.deven ne bistar pe girne ka natak kiya & fir fauran uth gaya & rambha ko bolte rehne ka ishara kiya.

"rambha darling..aa jao meri jaan..!",deven nashe me hone ka natak karte hue bahar ki taraf gaya.rocky ne uske munh se rambha ka naam suna to uski khushi ka thikana nahi raha.vo aaj raat hi kaam nipta ke vapas ja sakta tha.rambha gusse me badbada rahi thi & light band kar rahi thi.deven use leke ghar ke drawing room me aaya & use tv chalane ka ishara kiya.vo uske karib aaya & kaan me phusphusaya,"jo bhi ho is sofe se na hilna na peechhe ghum ke dekhna."

"so gaya nashedi..hunh!",rambha ne badbadate hue tv on kiya & deven store room me ghus gaya.use bas 2 chizen chahiye thi joki vahi maujood thi-1 3ft ka lohe ka pipe & 1 kapda.deven ne pipe ke 1 sire pe kapde ko lapet ke bandha & us kamre me aa gaya jaha vijayant rehta tha.us kamre ke darwaze ki ot me khade ho vo bahar khade rocky ke andar aane ka intezar karne laga.

rocky kuchh der to bahar khada reh ke intezar karta raha.uske baad usne ghar ke khidki darwazo ko tatol ke kam se kam aavaz kar andar ghusne ka rasta dhundne laga.vijayant ne ye baat deven ko batayi to vo dhire se kitchen me gaya & vaha ki khidki ki chhitkani khol di & vapas apne chhupne ki jagah pe aa gaya.tv ke channels remote se badalti rambha ka dil zoro se dhadak raha tha..aakhir kaun tha vo car me baitha shakhs?..sameer ne use kyu bheja tha yaha?

rocky rasoi ki khidki tak aa gaya tha & use tatolte hi use apni kismat pe bharosa nahi hua.sab kuchh uske haq me ja raha tha.usne khidki kholi to thodi aavaz hui.vo jhuk ke khidki ne neeche baith gaya & intezar karne laga ki kahi rambha ko aahat to nahi ho gayi.rambha ko aahat hui thi magar deven ke kahe mutabik usne apni gardan tak nahi hilayi.rocky ghadi dekh ke 5 minute baad utha & furti se khidki ke raste rasoi me ghus gaya.

usne apni shirt ke collar ke neeche gale me bandha bada sa rumal nikal ke apne munh pe bandha & fir jeans ki hip pocket se surgical rubber gloves nikale & pehan liye.dawa ki dukan se kharide ye dastane vo humesha apne paas rakhta tha.usne bayi tang utha ke jeans ko upar kiya & jute ke upar tang pe bandhi sheath me rakha khanjar nikal ke hath me le liya.vo kitchen se nikla & pehle usne deven ke kamre ko check karne ka faisla kiya.

deven janta tha ki vo aisa hi karega isiliye vo store me chhupa tha.rasoi se nikalte hi uska kamra dayi taraf padta tha jabki vijayant ka kamra tha rasoi ke bayi taraf.jaise hi rocky uske kamre ki dehleez tak pahuncha deven darwaze ki ot se bahar aaya & dabe panv magar furti se rocky ke peechhe gaya & pipe se vaar kiya.

"thudd..!..khannnn....!",1 thodi bhari magar dabi si aavaz & fir koi metal farsh pe girne ki khanakti aavaz rambha ke kaan me padi magar usne apne mehboob ke kahe mutabik na hi gardan ghumayi na hi sofe se uthi.

deven rocky ko bas behosh karna chahta tha,uska sar phodna uska maqsad nahi tha isiliye usne pipe pe kapda bandha tha.ye tarkeeb & aisi kayi baaten usne jail me ya fir jail se nikalne ke baad sikhi thi.achanak hue sadhe hath ke zor ke vaar se rocky pal me behosh ho gaya tha & uske hath ka khanjar farsh pe gir gaya tha.

"rambha,idhar aana.",jaha deven ne rocky ko chit kiya tha us jagah se thoda hatke 1 galiyare ke baad drawing room tha.rambha fauran vaha aayi,"sab thik hai,vijayant.maine use kabu me kar liya hai magar tum abhi nazar rakhe raho.sab thik raha to hum bas 15 minute me vaha pahuchate hain."

"ok,deven."

deven ne rocky ko nanga kiya & uski kapdo ki talshi li.rocky ke paas se us khanjar ke alava 1 bahut chhoti si pistol mili thi joki uske shirt ke neeche ki banyan me bane 1 khas pocket me chhipi thi.uske purse me jo driving license & id mile usme uska naam Anil Kumar likha tha.deven janta tha ki vo farzi hain.

"ise nanga kyu kar rahe hain?",rambha deven ke bagal me baithi to deven ne use ghum ke dekha.rambha paseene se bhigi thi jabki mausam khushnuma tha.usne apni mashooqa ko bahao me bhar liya.

"ghabra gayi kya?",rambha ne uski gardan me munh chhupa liya & haan me sar hilaya,uski nazar vaha aate hi farsh pe pade khanjar pe padi thi & use samjahte der nahi lagi thi ki vo ajnabi kis irade se vaha aaya tha,"..mere hote bhi ghabrati ho!",vo uski pith sehla raha tha,"..ab sab thik hai.hun.",kafi der tak vo use baaho me bhare chupchap baitha raha & uski pith sehlata raha & uske baal & mathe ko chumta raha,"ab thik ho?",rambha ne kandhe se sar uthaya to vijayant ne us se puchha.

"hun."

"pani piyogi?..abhi lata hu."

"aap rehne dijiye.main lati hu.",rambha uth khadi hui.

"store me jitni rassiya padi hongi sab leti aana & thode purane kapde bhi."

"achha.",10 minute baad nanga,behosh rocky farsh pe bandha pada the.deven ne use aise bandha tha ki vo bas leta reh sakta tha & zara bhi hildul nahi sakta tha.deven ne purane kapdo se uska munh bandha.vaise abhi to vo behosh tha magar vo koi risk nahi le raha tha.

rambha ke pani lane ka baad dono ne pani piya uske baad deven ne rambha ki madad se rocky ko ghar ke bahar khincha & fir car ki pichhli seat pe daal diya.uske baad ghar band kiya & teeno bungle pe aa gaye.

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"iski pehredari ki zarurat nahi kya?",deven ne bungle pe pahunch rocky ke munh se kapda hataya & mota duct tape lapet diya & fir 1 pen se hotho ke upar 1 surakh kiya taki use thodi kam taklif ho.dono ne use bungle ke store room me dala & fir uske pairo me 1 rassi bandh ke dusra sira paas padi 1 tuti kursi se band diya.ab rocky jab bhi uthata & zara bhi hilta to kursi ki tuti tang jis se rassi bandhi thi,gir jati & uske baad kursi bhi & us aavaz se unhe uske hosh me aane ka pata chal jata.

"khana taiyyar hai.",rambha vaha aayi to dono store pe tala laga rahe the.

"chalo,vijayant khana khate hain.",deven ne uske kandhe pe hath rakha,"..aaj tum bahut thake ho.kha ke so jana.Yuri ke hisab se tumhe abhi zyada strain nahi lena chahiye.",vijayant ne peechhe ghum store ke darwaze ko dekha.

"uski fikr mat karo,dost.",deven hansa,"..vo 5-6 ghanto se pehle jagne vala nahi & haan chahe kuchh ho jaye tum uske samne mat jana,dost.",teeno khane ki mez ke paas aa kursiya khicnh baith gaye & rambha sabko khana parosne lagi.

Khana khane ke baad Deven ne Vijayant Mehra ko sone bhej diya.vo nahi chahta tha ki uski sehat pe koi bhi bura asar pade & fir use apni mashuka ke sath tanhai ke lamhe bhi guzarne the.Rambha bacha khana fridge me rakh rahi thi jab deven ne use peechhe se baaho me bhar liya.rambha ne fridge band kiya & palat ke uske agosh me sama gayi.deven use baaho me bharte hi samajh gaya ki vo abhi tak thode tanav me hai.usne bade pyar se uski pith sehlate hue jhuk ke uske gaal chume,”abhi tak ghabra rahi ho?”

Rambha ne bina jawab diye chehra jhuka liya.khanjar girne ki aavaz abhi tak uske kano me gunj rahi thi,”vo aadmi..qatl ke irade se aaya tha..”

“haan,par nakaam raha & yehi aham baat hai.”,deven ne uske baal uske chehre se hatake uski aankho me jhanka,”..rambha,shayad aaj se pehle tumhe us khatre ka ehsas nahi tha jo humare chahte na chahte hue bhi humari zindagi ka hissa ban gaya hai.ye ghabrahat hona bhi lazmi hai magar rambha,mujhe lagta hai ki bahut jald ye sara mamla apne anjam tak pahuchane wala hai..”,uske hath premika ke galo se hath uski kamar pe aa gaye the,”..ab vo anjam huamre haq me hoga ya nahi ye bas use pata hai..”,deven ne nazre upar kar duniya ke malik ki or ishara kiya,”..& us anjam ki fikr me darr-2 ke jina mujhe thik nahi lagta.tumhe kya lagta hai?”,uski nigahe abhi bhi rambha ki nigaho me jhank rahi thi.

Rambha bhi uski aankho me dekh rahi thi.deven ki baato se use hausla mila tha..sahi keh raha tha vo..yu ghut-2 ke vo kyu jiye?..uski kya galti thi balki use to us shakhs ka jina haram kar dena chahiye jisne uske in khushiyo bhare palo ko barbad karne ki sochi..rambha ke hath deven ke seene pe the.usne unhe vaha se upar uski garden me dala & uchak ke muskurate hue uske labo se apne lab sata diye.deven ne uski kamar ko kas liya & dono premi 1 dusre ko shiddat se chumne lage.

Kitchen me rakhi khane ki mez ki kursi pe deven baitha to rambha khud hi uski god me baith gayi.dono abhi bhi 1 dusre ko chume ja rahe the.deven ka daya hath rambha ki pith pe tha & baya uski vest ko utha uski kamar ke mansal bhag ko sehla raha tha.rambha deven ki baato & ab uski harkato se thodi der pehle ki ghatna ki vajah se paida hui ghabrahat ko bhul rahi thi.dono premiyo ne apni zubane apne-2 munh se bahar nikal lit hi & unhe lada rahe the.rambha apne mehboob ki zuban chaatate hue muskura rahi thi & jab deven ne uski vest upar kar uske pet ko dabaya to vo khushi se chihunki & apni baahe upar kar di.

Deven ne uski vest nikali & 1 baar fir uski patli kamar ko apni baaho me kasa & uske chehre & hotho ko apne garm hotho se dhankne laga.rambha ke hath bhi apne aashiq ki t-shirt me ja ghuse the & uski mazbut pith pe ghum rahe the.deven uske chehre se neeche uski garden ko chum raha tha & rambha ab apne hath aage le aake uske seene ke balo me ghumate hue uske nipples kharonch rahi thi.deven ka baya hath uski skirt me ghus gaya tha & uski janghe bhi uske hath ki aahat pate hi apne aap khul gayi taki unke beech chhupi uski chut ko vo hath aasani se chhu sake.rambha ab mast hone lagi thi.panty ke upar se hi deven uski chut sehla raha tha & ab uski hasraten bhi badh rahi thi.usne deven ka munh apne gale se uthaya & uski shirt nikal di & fir jhuk ke uske seene ko chumne lagi.uska daya hath deven ke mazbut seene ko sehlata hua neeche uski jeans ke upar se hi uske lund ko daba raha tha.deven bhi uski is harkat se josh me aa gaya & usne rambha ki kamar tham use apne samne khada kiya & fir uski kamar ke bagal me lage hooks khol uski skirt ko neeche sarka diya.laal bra & panty me saja rambha ka gora jism bada hi nashila lag raha tha.deven kuchh palo tak apne samne khadi us husn ki mallika ko niharta raha.

“aise kya dekh rahe hain?”,rambha ke gaalo ke gore rang me haya ki surkh lali ghul gayi thi.uparwale ne ladkiyo ka dil bhi ajib ada se banaya hai.jis mard ke sath har raat soti hain,jis se unhe koi parda manzur nahi,uski nigaho se bhi Sharma jati hain!par shayad yehi baat hai joki mardo ko lubhati hai!

“ye bepanah husn dekh raha hu.”,deven bhi khada ho gaya tha.

“roz hi to dekhte hain.”

“par har roz nayi lagti ho.”,1 baar fir dono agosh me sama gaye & 1 dusre ko chumne lage.deven ke hath rambha ke lagbhag nange jism pe badi bechaini se fisal rahe the.uske hatho ki garmi rambha ki masti bhi badha rahi thi.deven use chumte hue thoda aage hua to rambha peechhe khane ki mez pe baith gayi.usne apni tange khol deven ko aage khincha & uske lund ko apni chut pe dabate hue chumne lagi.rambha ke hath deven ki sakht pith se fisalte hue neeche aaye & jeans ke upar se hi uski gand ko dabate hue aage aaye & uske belt ko khol zip ko neeche sarkaya & underwear ke upar se hi uske sakht lund ko dabane lage.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--77

गतान्क से आगे......

देवेन उसकी इस हरकत से बहुत जोश मे भर गया और आगे हो चूमने लगा.रंभा मेज़ पे पीछे झुक के अपनी कोहनियो पे उचक गयी & उसकी किस का जवाब देने लगी.देवेन के होंठ नीचे उसकी गर्देन पे आए & फिर उसके धड़कते क्लीवेज पे.उसकी आँखो ने ब्रा कप्स के बीच लगे बटन को भाँप लिया & उसे फ़ौरन खोल उसकी छातियो को अपनी निगाहो के सामने किया.रंभा मस्ती मे देवेन की कमर को टांगो मे कस उसके लंड पे चूत को दबा रही थी.देवेन उसकी छातियो को चूम रहा था.

रंभा के जिस्म मे अब सनसनी फैल गयी थी.देवेन का लंड उसकी चूत की कसक भी बढ़ाए जा रहा था.देवेन ने उसके कंधो से ब्रा को सरकाया तो रंभा फ़ौरन कोहनियो पे से उठी & ब्रा को जिस्म से अलग किया & उसके बाद प्रेमी के सर को बाहो मे भरे उसे अपने सीने से चिपकाए लेट गयी.देवेन उसकी भारी-भरकम चूचियो का लुत्फ़ उठाने मे जुट गया.मेज़ से किचन का काउंटर बस थोड़ी ही दूर था & रंभा ने बेचैनी मे टाँगे फैलाई तो वो उसी से जा लगी.रंभा ने काउंटर पे पैर जमा देवेन के लंड पे चूत को रगड़ अपनी बेचैनी जताई मगर उसका आशिक़ तो उसके सीने के उभरो की खूबसूरती मे जैसे उसके बाकी जिस्म को भूल ही गया था.देवेन उसकी चूचियो को अपने सख़्त हाथो मे दबा रहा था,मसल रहा था.उसकी ज़ुबान उसके निपल्स को छेड़ती & फिर वो उसकी चूचियो को मुँह मे भर ज़ोर से चूस लेता.रंभा आहे भर रही थी.उसका जिस्म देवेन की 1-1 हरकत से मज़े के समुंदर मे और गहरे डूबा जा रहा था.उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.लंड की इतनी नज़दीकी के बावजूद चूत अभी तक खाली थी & शायद ये बात उस से बर्दाश्त नही हो रही थी.उपर से देवेन की ज़ुबान की मस्ताना हरकतें जो खेल तो रंभा की चूचियो से रही थी मगर उनके छुने से पैदा हुई बिजलिया उसके पूरे जिस्म मे दौड़ती हुई मानो उसकी चूत मे ही आ के रुक रही थी.देवेन ने उसकी दोनो चूचियो को पकड़ के आपस मे मिलाते हुए दबाया & फिर उसकी दाई चूची को बहुत ज़ोर से दबोचते हुए बाई को मुँह मे पूरा भरने की कोशिश की.रंभा ने ज़ोर से आह भरते हुए अपना सीना और उपर उचकाया & देवेन की कमर को टांगो मे कस ज़ोर से कमर हिलाई-वो झाड़ चुकी थी.

वो काँपते हुए सूबक रही थी & देवेन उसके सीन के उभारो को चूमे जा रहा था.कुच्छ देर बाद वो नीचे उसके पेट तक पहुँचा & उसकी नाभि के अंदर जीभ घुमाने लगा.रंभा के चेहरे पे मस्ती भरी मुस्कान खेलने लगी & उसने प्रेमी के बालो को पकड़ उसे पेट पे दबा दिया.देवेन उसके जिस्म की बगलो मे हाथ चलाते हुए उसकी नाभि सहित पूरे पेट को चूमने लगा.चिकने पेट पे उसकी फिसलती ज़ुबान का गुदगुदाता एहसास रंभा के जिस्म को रोमांच से भर रहा था & बीच-2 मे वो हल्के से हंस भी देती.देवेन उसके पेट के बाद उसकी पॅंटी को चूमने लगा तो उसने अपनी दोनो टाँगो-जिन्हे उसने झड़ने के बाद मेज़ पे रख किया था,को घुटने से मोड़ा & अपने प्रेमी के पेट पे रख उसे परे धकेला.

देवेन ने उसे हैरत से देखा तो वो शोखी से मुस्कुराती उठ बैठी & फिर दाए हाथ से देवेन की जीन्स को पकड़ उसे अपनी ओर खींचा & फिर उसके अंडरवेर पे उपर से नीचे तक हाथ चलाने लगी.उसने देवेन की जीन्स को नीचे सरकाया & जब वो उसके घुटनो मे फँस गयी तो उसने अपने पाँवो से उसे & नीचे कर दिया.देवेन ने भी मुस्कुराते हुए जीन्स को अपने जिस्म से जुदा कर दिया तो रंभा ने उसे अपनी बाहो मे फिर से वैसे ही भर लिया.देवेन उसकी मखमली पीठ को सहलाते हुए उसकी टाँगो मे क़ैद हो चूत पे अपना लंड दबाते हुए उसे चूमने लगा.

देवेन ने उसे चूमते हुए उसकी गंद के नीचे हाथ लगाके गोद मे लेते हुए मेज़ से उठाके सामने के काउंटर पे रख दिया.रंभा भी उसकी दीवार से टिक के बैठ गयी & अपनी चूचिया आगे कर दी ताकि देवेन उन्हे आसानी से चूस सके.देवेन भी उन्हे अपने हाथो मे कस के दबाते हुए चूसने लगा मगर इस बार उसने उनपे ज़्यादा वक़्त नही लगाया.इस बार वो जल्द ही रंभा की मोटी चूचियो से नीचे उसके पेट को चूमते हुए अपने पंजो पे बैठ गया.रंभा ने भी अपनी जंघे फैला दी थी & जब देवेन ने उसकी पॅंटी खींची तो उसने काउंटर से अपनी गंद उचका देवेन की पॅंटी निकालने मे मदद की.रंभा अब पूरी तरह नंगी बैठी थी & घुटने मोड़ पाँव काउंटर पे जमा अपने आशिक़ को अपनी चूत पेश कर रही थी.

देवेन ने उसकी आँखो मे देखा & फिर उसकी निगाह रंभा के पूरे जिस्म को चूमती हुई उसकी चूत पे आके रुक गयी.रंभा का कुँवारापन तो बहुत पहले ख़त्म हो गया था,उस पर से उसके चुदाई के शौक ने उसकी चूत को कभी भी बहुत ज़्यादा दिनो के लिए लंड से महरूम नही रखा था मगर फिर भी इस वक़्त देवेन के सामने उसकी चूत गुलाब की बंद काली की तरह दिख रही थी जिसपे सवेरे की ओस की बूंदे चमक रही थी.

देवेन ने उसकी दाई अन्द्रुनि जाँघ को चूमा तो रंभा ने सर दीवार से लगाके आह भरी.जब देवेन ने दूसरी जाँघ के अन्द्रुनि हिस्से पे भी अपने गर्म चलाए तो रंभा ने बेचैनी से उसके बाल नोचे.देवेन बहुत धीमे-2 अपने होंठ उसकी चूत की ओर ले जा रहा था.रंभा को बहुत मज़ा आ रहा था.उसका दिल देवेन के लबो के उसकी चूत से सटने की हसरत से बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था और वो मस्ती मे काँपने लगी थी.

विजयंत की आँखो मे नींद नही थी.वो बार-2 यही सोच रहा था कि वो शख्स जो स्टोर रूम मे बेहोश पड़ा था,आख़िर किसके क़त्ल के मंसूबे से यहा आया था.देवेन ने उसे अपनी ज़िंदगी के बारे मे कुच्छ खास नही बताया था ना ही उसे उसके ज़ाति मामले मे दखल देना ठीक लगा था मगर 1 बात तो तय थी कि वो कोई बहुत गहरी चोट खाया था..विजयंत कमरे से बाहर आया तो उसके कानो मे कुच्छ आवाज़ें आई..तो क्या देवेन की ज़िंदगी लेने आया था वो अजनबी?..विजयंत समझ गया कि आवाज़ें किचन से आ रही थी & वो उधर ही चला गया.किचन की दहलीज़ पे कदम रखते ही उसकी आँखे सामने के गर्म नज़ारे से टकराई & उसके दिल मे भी जोश भर गया.

पंजो पे बैठा देवेन नंगी रंभा की चूत चाट रहा था और वो काउंटर पे कसमसा रही थी.उसके चेहरे पे शिकने थी मगर साथ ही मुस्कान भी.वो मस्ती मे पूरी डूबी थी & ना उसे ना ही उसके प्रेमी को विजयंत की मौजूदगी का एहसास था.विजयंत ने अंदर जाने के लिए कदम उठाया मगर फिर रुक गया.वो जानता था कि उसके जाने पे दोनो को कोई ऐतराज़ नही होगा मगर अभी उसे दोनो के बीच दखल देना ठीक नही लगा.वो जानता था कि देवेन रंभा को बहुत चाहता था & उसे उसका भी रंभा को चोदना बहुत पसंद नही था.शायद उसकी ये हालत ना होती तो वो उसे रंभा के पास फटकने भी नही देता.

“आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..!”,रंभा दोनो हाथो से देवेन के सर को पकड़े अपनी चूत पे दबाते हुए अपनी दोनो टाँगे उसके कंधो के उपर से उसकी पीठ पे दबा मानो उसे अपनी चूत मे घुसा लेने की कोशिस कर रही थी.उसके चेहरे की शिकाने और गहरी हो गयी थी & उसकी कसमसाहट & बढ़ गयी थी.विजयंत समझ गया कि वो झाड़ गयी है.तभी देवेन खड़ा हुआ और रंभा को बाहो मे भर लिया & फिर दोनो 1 दूसरे को पागलो की तरह चूमने लगे.रंभा बड़ी बेचैनी से बया हाथ देवेन के पूरे जिस्म पे फिरा रही थी & डाए से उतनी ही बेचैनी से उसके लंड को दबा रही थी.

विजयंत ने 1 पल & उन्हे देखा & फिर वाहा से चला गया.उसे थोड़ी मायूसी थी मगर आज उसे दोनो के बीच घुसना बिल्कुल भी ठीक नही लग रहा था.उसके दिल मे एहसासो का बवंडर घूम रहा था.रंभा को देवेन की बाहो मे देख उसे बहुत जलन होती थी..ऐसा लगता था जैसे कि वो उसी की हो & देवेन ने उसे छ्चीन लिया हो!..मगर कही दिल के किसी कोने मे ये भी एहसास था कि उसका और रंभा का रिश्ता कुच्छ ठीक नही था..वो किसी और की थी.अब उसे ये तो पता था कि रंभा उसकी बहू है मगर नही,ये एहसास तो इस जानकारी के ना होने पे भी उसे होता,इतना उसे पता था..आख़िर इतना गहरा रिश्ता कैसे बन गया था उसका अपनी बहू से?..& उसकी बीवी से कैसा रिश्ता था उसका जिसकी 1 भी बात याद नही उसे?..2 बच्चे पैदा किए थे उसने उसके और फिर भी उसे वो याद नही & चंद महीनो पहले उसके बेटे से शादी करने वाली लड़की के तस्साउर से ही उसका दिल धड़कने लगता था?..& वो सोनिया..जिसके नाम से ही 1 टीस उठती थी दिल मे..वो कौन थी?..ड्रॉयिंग रूम के बगल मे 1 कमरा & था जिसमे वो अभी तक नही गया था.वो उसी कमरे मे चला गया & बत्ती जलाई.वाहा 1 कॅबिनेट था जिसे खोलने पे उसे कुच्छ किताबें & मॅगज़ीन्स दिखाई दी.किताबें तो जासूसी उपन्यास थे.उसने वो सारी किताबें उठा ली.वक़्त काटने मे ये उसके काम आने वाली थी,फिर उसने मॅगज़ीन्स उठाई & उसके ज़हन मे वही धमाका सा हुआ..’हू विल विन दिस वॉर?’,1 मॅगज़ीन पे उसकी और ब्रिज कोठारी की तस्वीर के साथ यही लिखा था.उसके दिल मे उस शख्स की तस्वीर देखने पे कुच्छ गुस्से सा भाव आया था.विजयंत ने देखा सारी की सारी बिज़्नेस मॅगज़ीन्स थी.उसने सभी मॅगज़ीन्स उठाई & उपन्यास वही छ्चोड़ अपने कमरे मे चला गया.

रंभा सुबक्ती हुई देवेन के मुँह मे अपनी जीभ & उसके अंडरवेर मे अपना हाथ घुसा अपने जिस्म की मदहोशी की दास्तान बयान कर रही थी.देवेन ने भी उसकी ज़ुबान चूस्ते हुए अपना अंडरवेर नीचे किया तो रंभा ने अपने पाँवो से उसे उसके जिस्म से अलग कर दिया.देवेन ने उसके घुटने पकड़ के उसकी छातियों से लगा दिए & उसकी चूत को पूरा खोल अपने लंड को आगे धकेला.

“ऊव्ववव..हाआंन्‍नणणन्..!”,रंभा के चेहरे पे शिकने पड़ी,उसकी आँखे बंद हो गयी मगर साथ ही वो मुस्कुराइ & लंड के चूत के अंदर घुसते ही कमर उचकाते हुए सर पीछे झटका.देवेन ने 1 ही धक्के मे लंड को उसकी चूत मे जड तक उतार दिया & उसे बाहो मे भर चूमने लगा.रंभा ने अपना जिस्म उस से पूरी तरह चिपका दिया & उसके कंधे & पीठ से लेके उसकी पुष्ट गंद तक अपने नाख़ून चलाते हुए कमर हिलाके अपनी टाँगे उसकी कमर के उपर बाँध दी & काउंटर पे बैठे-2 अपनी कमर हिलाके उसके हर धक्के का जवाब देने लगी.देवेन अपने सीने मे उसके नुकीले निपल्स की चुभन से & उसकी चूत की कसावट से पागल हो बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था.उसके हाथ रंभा की छातियो को दबाने के बाद पीछे गये & उसने उसकी गंद के नीचे हाथ लगाके उसे उठाके 1 बार फिर मेज़ पे बिठा दिया.

देवेन उसकी छातियों को इतनी ज़ोर से दबा रहा था कि रंभा ने आहत हो किस तोड़ दी & जिस्म पीछे झुका के हाथ पीछे मेज़ पे रख दिए & ज़ोर-2 से आहे भरने लगी.देवेन खड़ा होके धक्के लगा रहा था & जब वो आगे झुका & रंभा की चूचियो को दबाते हुए चूसने लगा तो रंभा मेज़ पे लेट गयी & उसे बाहो मे भर उसके सर को सीने पे भींच दिया.उसकी गोरी,मोटी छातियो को चूस्ता देवेन उसकी चूत मे बहुत तेज़ी से लंड अंदर-बाहर कर रहा था.रंभा ने उसके सर को अपनी छातियो के बीच बहुत ज़ोर से दबाया & खुद जैसे मेज़ से उठने की कोशिस करती हुई उसके सर को चूमने लगी.उसकी कमर भी बहुत तेज़ी से हिल रही थी.देवेन ने उसी वक़्त अपने लंड पे उसकी चूत की मस्तानी सिकुड़ने-फैलने की हरकत महसूस की & समझ गया की उसकी महबूबा झाड़ गयी है.

देवेन उसकी छातियो को चूमते,चूस्ते हुए वैसे ही धक्के लगाता रहा.कुच्छ देर बाद रंभा भी झड़ने की खुमारी से बाहर आई & देवेन के बाल पकड़ उसके सर को अपने सीने से उठाया & उसके होंठ चूमने लगी.देवेन ने उसे चूमते हुए फिर से उठाया & रंभा अब उसकी गंद को दबाते हुए उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाते हुए उसकी किस का जवाब देने लगी.दोनो के हाथ 1 दूसरे की गंदो से चिपके हुए थे.देवेन उसकी मुलायम फांको को दबा-2 के मस्ती मे बहाल हो रहा था.रंभा के गुदाज़ जिस्म को हाथो मे भरते ही उसके जिस्म मे अजीब सी सनसनी,1 अजीब सा नशा भर जाता था.उसके धक्के अब बहुत तेज़ हो गये थे.रंभा भी चूत की दीवारो उसके लंड की रगड़ को महसूस कर जोश मे भर सर पीछे झटक रही थी.देवेन के लंड की मोटाई उसकी चूत की दीवारो को हर बार बुरी तरह फैला देती थी & वो हल्के दर्द & ढेर सारे मज़े मे बिल्कुल मदहोश हो जाती थी.उपर से लंड की लंबाई इतनी ज़्यादा थी कि हर बार उसका सूपड़ा उसकी कोख से आ टकराता था & उसके जिस्म मे मस्ती बिजली जैसे दौड़ने लगती थी.रंभा ने अपने आशिक़ की गंद मे नाख़ून धंसा दिए थे & देवेन भी उसकी गंद को मसलते हुए उसकी चूचिया पी रहा था.1 बार फिर रंभा की चूत ने उसके लंड को अपने शिकंजे मे उसी जानी-पहचानी हरकत से तड़पाना शुरू किया & इस बार देवेन का भी सब्र टूट गया.

उसने अपने मुँह मे रंभा की बाई चूची को पूरा भर लिया & पागलो की तरह चूस्ते हुए उसकी गंद दबाते हुए धक्के लगाने लगा.रंभा भी उसकी कमर को टाँगो मे कस मेज़ से लगभग उठती हुई,कमर उचकाती,ज़ोर-2 से चीखती,उसकी गंद को अपने नखुनो से छल्नी करती उस से चुद रही थी.तभी रंभा ने ज़ोर से चीख मारी & जिस्म पीछे की तरफ मोड़ दिया & देवेन का जिस्म भी काँपने लगा.रंभा झाड़ चुकी थी & देवेन का लंड उसकी कोख को अपने वीर्य से भर रहा था.रंभा मस्ती मे कांप रही थी,उसके होंठ थरथरा रहे थे,देवेन लंबी-2 साँसे ले रहा था & अपनी प्रेमिका से चिपका हुआ था.दोनो ही के चेहरे पे झड़ने का सुकून था.

थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही लिपटे बस अपनी खुश,सुकुनी & 1 दूसरे के साथ के एहसास को बस महसूस करते रहे फिर रंभा ने देवेन के कंधे से सर उठाया & मुस्कुराते हुए उसके चेहरे को सहलाने लगी.देवेन भी मुस्कुराता उसकी ज़ुल्फो से खेल रहा था..इस इंसान की नेक्दिलि,उसकी मा के लिए बेपनाह मोहब्बत,उसकी मर्दानगी..आख़िर क्या कारण था जो वो अब उसका सब कुच्छ बन गया था?..रंभा अपने आशिक़ की आँखो मे देखते हुए सोचे जा रही थी..उसके लिए तो अब देवेन ही सबकुच्छ था..वो तो उसे अपना खुदा मानने लगी थी & बस हर वक़्त उसकी इबादत मे मशगूल रहना रहती थी.

रंभा ने नीचे देखा,सिकुड़ने के बावजूद लंड अभी भी चूत मे था.रंभा ने देवेन को थोडा पीछे धकेला & लंड को चूत से बाहर कर दिया और मेज़ से सरक के फर्श पे घुटनो पे बैठ गयी.अब उसे अपने देवता की इबादत करनी थी.अपना जिस्म तो उसने उसे सौंप ही दिया था मगर अब उसके जिस्म की खिदमत कर उसे और खुशी देने की हसरत हो रही थी उसे.उसने अपनी हथेलियो को आंडो के नीचे लगाया और लंड के सूपदे को चूमा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--77

gataank se aage......

Deven uski is harkat se bahut josh me bhar gaya & aura age ho chumne laga.rambha mez pe peechhe jhuk ke apni kohniyo pe uchak gayi & uski kiss ka jawab dene lagi.deven ke honth neeche uski garden pea aye & fir uske dhadakte cleavage pe.uski aankho ne bra cups ke beech lage button ko bhanp liya & use fauran khol uski chhatiyo ko apni nigaho ke samne kiya.rambha masti me deven ki kamar ko tango me kas uske lund pe chut ko daba rahi thi.deven uski chhatiyo ko chum raha tha.

Rambha ke jism me ab sansani phail gayi thi.deven ka lund uski chut ki kasak bhi badhaye ja raha tha.deven ne uske kandho se bra ko sarkaya to rambha fauran kohniyo pe se uthi & bra ko jism se alag kiya & uske baad premi ke sar ko baaho me bhare use apne seene se chipkaye let gayi.deven uski bhari-bharkam choochiyo ka lutf uthane me jut gaya.mez se kitchen ka counter bas thodi hi door tha & rambha ne bechaini me tange phailayi to vo usi se ja lagi.rambha ne counter pe pair jama deven ke lund pe chut ko ragad apni bechaini jatayi magar uska aashiq to uske seene ke ubharo ki khubsurti me jaise uske baki jism ko bhul hi gaya tha.deven uski choochiyo ko apne sakht hatho me daba raha tha,masal raha tha.uski zuban uske nipples ko chhedti & fir vo uski choochiyo ko munh me bhar zor se chus leta.rambha aahe bhar rahi thi.uska jism deven ki 1-1 harkat se maze ke samnadar me & gehre dooba ja raha tha.uski chut ki kasak bahut zyada badh gayi thi.lund ki itni nazdiki ke bavjud chut abhi tak khali thi & shayad ye baat us se bardasht nahi ho rahi thi.upar se deven ki zuban ki mastana harkaten jo khel to rambha ki chhatiyo se rahi thi magar unke chhune se paida hui bijliya uske pure jism me daudti hui mano uski chut me hi aa ke ruk rahi thi.deven ne uski dono choochiyo ko pakad ke aapas me milate hue dabaya & fir uski dayi chhati ko bahut zor se dabochte hue bayi ko munh me pura bharne ki koshish ki.rambha ne zor se aah bharte hue apna seena & upar uchkaya & deven ki kamar ko tango me kas zor se kamar hilayi-vo jhad chuki thi.

Vo kanpte hue subak rahi thi & deven uske seen eke ubharo ko chume ja raha tha.kuchh der baad vo neeche uske pet tak pahuncha & uski nabhi ke andar jibh ghumane laga.rambha ke chehre pe masti bhari muskan khelne lagi & usne premi ke balo ko pakad use pet pe daba diya.deven uske jism ki baglo me hath chalate hue uski nabhi sahit pure pet ko chumne laga.chikne pet pe uski fisalti zuban ka gudgudata ehsas rambha ke jism ko romanch se bhar raha tha & beech-2 me vo halke se hans bhi deti.deven uske pet ke baad uski panty ko chumne laga to usne apni dono tango-jinhe usne jhadne ke baad mez pe rakh kiya tha,ko ghutne se moda & apne premi ke pet pe rakh use pare dhakela.

Deven ne use hairat se dekha to vo shokhi se muskurati uth baithi & fir daye hath se deven ki jeans ko pakad use apni or khincha & fir uske underwear pe upar se neeche tak hath chalane lagi.usne deven ki jeans ko neeche sarkaya & jab vo uske ghutno me phans gayi to usne apne panvo se use & neeche kar diya.deven ne bhi muskurte hue jeans ko apne jism se juda kar diya to rambha ne use apni baaho me fir se vaise hi bhar liya.deven uski makhmali pith ko sehlate hue uski tango me qaid ho chut pe apna lund dabate hue use chumne laga.

Deven ne use chumte hue uski gand ke neeche hath lagake god me lete hue mez se uthake samne ke counter pe rakh diya.rambha bhi uski deewar se tik ke baith gayi & apni choochiya aage kar di taki deven unhe aasani se chus sake.deven bhi unhe apne hatho me kas ked abate hue chusne laga magar is baar usne unpe zyada waqt nahi lagaya.is baar vo jald hi rambha ki moti choochiyo se neeche uske pet ko chumte hue apne panjo pe baith gaya.rambha ne bhi apni janghe phaila di thi & jab deven ne uski panty khinchi to usne counter se apni gand uchka deven ki panty nikalne me madad ki.rambha ab puri tarah nangi baithi thi & ghutne mod panv counter pe jama apne aashiq ko apni chut pesh kar rahi thi.

Deven ne uski aankho me dekha & fir uski nigah rambha ke pure jism ko chumti hui uski chut pe aake ruk gayi.rambha ka kunwarapan to bahut pehle khatm ho gaya tha,us par se uske chudai ke shauk ne uski chut ko kabhi bhi bahut zyada dino ke liye lund se mehrum nahi rakha tha magar fir bhi is waqt deven ke samne uski chut gulab ki band kali ki tarah dikh rahi thi jispe savere ki os ki boonde chamak rahi thi.

Deven ne uski dayi andruni jangh ko chuma to rambha ne sar deewar se lagake aah bhari.jab deven ne dusri jangh ke andruni hisse pe bhi apne garm chalaye to rambha ne bechaini se uske baal noche.deven bahut dhime-2 apne honth uski chut ki or le ja raha tha.rambha ko bahut maza aa raha tha.uska dil deven ke labo ke uski chut se satne ki hasrat se bahut zoro se dhadak raha tha & vo masti me kanpne lagi thi.

Vijayant ki aankho me nind nahi thi.vo baar-2 yehi soch raha tha ki vo shakhs jo store room me behosh pada tha,aakhir kiske qatl ke mansube se yaha aaya tha.deven ne use apni zindagi ke bare me kuchh khas nahi bataya than a hi use uske zati mamle me dakhal dena thik laga tha magar 1 baat to tay thi ki vo koi bahut gehri chot khaya tha..vijayant kamre se bahar aaya to uske kano me kuchh aavazen aayi..to kya deven ki zindagi lene aaya tha vo ajnabi?..vijayant samajh gaya ki aavazen kitchen se aa rahi thi & vo udhar hi chala gaya.kitchen ki dehleez pe kadam rakhte hi uski aankhe samne keg arm nazare se takrayi & uske dil me bhi josh bhar gaya.

Panjo pe baitha deven nangi rambha ki chut chat raha tha & vo counter pe kasmasa rahi thi.uske chehre pe shikane thi magar sath hi muskan bhi.vo masti me puri dubi thi & na use na hi uske premi ko vijayant ki maujudgi ka ehsas tha.vijayant ne andar jane ke liye kadam uthaya magar fir ruk gaya.vo janta tha ki uske jane pe dono ko koi aitraz nahi hoga magar abhi use dono ke beech dakhal dena thik nahi laga.vo janta tha ki deven rambha ko bahut chahta tha & use uska bhi rambha ko chodna bahut pasand nahi tha.shayad uski ye halat na hoti to vo use rambha ke paas phatakne bhi nahi deta.

“aanngghhhhhhhh..!”,rambha dono hatho se deven ke sar ko pakde apni chut pe dabate hue apni dono tange uske kandho ke upar se uski pith pe daba mano use apni chut me ghusa lene ki koshsih kar rahi thi.uske chehre ki shikane & gehri ho gayi thi & uski kasmasahat & bad gayi thi.vijayant samajh gaya ki vo jhad gayi hai.tabhi deven khada hua & rambha ko baaho me bhar liya & fir dono 1 dusre ko paglo ki tarah chumne lage.rambha badi bechaini se baya hath deven ke pure jism pe fira rahi thi & daye se utni hi bechaini se uske lund ko daba rahi thi.

Vijayant ne 1 pal & unhe dekha & fir vaha se chala gaya.use thodi mayusi thi magar aaj use dono ke beech ghusna bilkul bhi thik nahi lag raha tha.uske dil me ehsaso ka bawandar ghum raha tha.rambha ko deven ki baaho me dekh use bahut jalan hoti thi..aisa lagta tha jaise ki vo usi ki ho & deven ne use chheen liya ho!..magar kahi dil ke kisi kone me ye bhi ehsas tha ki uska & rambha ka rishta kuchh thik nahi tha..vo kisi & kit hi.ab use ye to paat tha ki rambha uski bahu hai magar nahi,ye ehsas to is jankari ken a hone pe bhi use hota,itna use pata tha..aakhir itna gehra rishta kaise ban gaya tha uska apni bahu se?..& uski biwi se kaisa rishta tha uska jiski 1 bhi baat yaad nahi use?..2 bachche paida kiye the usne uske & fir bhi use vo yaad nahi & chand mahino pehle uske bête se shadi karne vali ladki ke tassavur se hi uska dil dhadakne lagta tha?..& vo Soniya..jiske naam se hi 1 tees uthati thi dil me..vo kaun thi?..drawing room ke bagal me 1 kamra & tha jisme vo abhi tak nahi gaya tha.vo usi kamre me chala gaya & batti jalayi.vaha 1 cabinet tha jise kholne pe use kuchh kitaben & magazines dikhayi di.kitaben to jasusi upanyas the.usne vo sari kitaben utha li.waqt kaatne me ye uske kaam aane vali thi,fir usne magazines uthayi & uske zehan me vahi dhamaka sa hua..’WHO WILL WIN THIS WAR?’,1 magazine pe uski & Brij Kothari ki tasvir ke sath yehi likha tha.uske dil me us shakhs ki tasvir dekhne pe kuchh gusse sa bhav aaya tha.vijayant ne dekha sari ki sari business magazines thi.usne sabhi magazines uthayi & upanyas vahi chhod apne kamre me chala gaya.

Rambha subakti hui deven ke munh me apni jibh & uske underwear me apna hath ghusa apne jism ki madhoshi ki dastan bayan kar rahi thi.deven ne bhi uski zuban chuste hue apna underwear neeche kiya to rambha ne apne panvo se use uske jism se alag kar diya.deven ne uske ghutne pakad ke uski chhatiyo se laga diye & uski chut ko pura khol apne lund ko aage dhakela.

“oowwww..haaaannnnnn..!”,rambha ke chehre pe shikane padi,uski aankhe band ho gayi magar sath hi vo muskurayi & lund ke chut ke andar ghuste hi kamar uchkate hue sar peechhe jhatka.deven ne 1 hi dhakke me lund ko uski chut me jud tak utar diya & use baaho me bhar chumne laga.rambha ne apna jism us se puri tarah chipka diya & uske kandhe & pith se leke uski pusht gand tak apne nakhun chalate hue kamar hilake apni tange uski kamar ke upar bandh di & counter pe baithe-2 apni kamar hilake uske har dhakke ka jawab dene lagi.deven apne seene me uske nukile nipples ki chubhan se & uski chut ki kasavat se pagal ho bahut tez dhakke laga raha tha.uske hath rambha ki chhatiyo ko dabane ke baad peechhe gaye & usne uski gand ke neeche hath lagake use uthake 1 baar fir mez pe bitha diya.

Deven uski chhatiyo ko itni zor se daba raha tha ki rambha ne ahat ho kiss tod di & jism peechhe jhuka ke hath peechhe mez pe rakh diye & zor-2 se aahe bharne lagi.deven khada hoke dhakke laga raha tha & jab vo aage jhuka & rambha ki choochiyo ko dabate hue chusne laga to rambha mez pe let gayi & use baaho me bahr uske sar ko seene pe bhinch diya.uski gori,moti chhatiyo ko chusta deven uski chut me bahut tezi se lund andar-bahar kar raha tha.rambha ne uske sar ko apni chhatiyo ke beech bahut zor se dabaya & khud jaise mez se uthne ki koshiosh karti hui uske sar ko chumne lagi.uski kamar bhi bahut tezi se hil rahi thi.deven ne usi waqt apne lund pe uski chut ki mastani sikudne-phailne ki harkat mehsus ki & samajh gaya ki uski mehbooba jhad gayi hai.

Deven uski chhatiyo ko chumte,chuste hue vaise hi dhakke lagata raha.kuchh der baad rambha bhi jhadne ki khumari se bahar aayi & deven ke baal pakad uske sar ko apne seene se uthaya & uske honth chumne lagi.deven ne use chumte hue fir se uthaya & rambha ab uski gand ko dabate hue uski chudai ka lutf uthate hue uski kiss ka jawab dene lagi.dono ke hath 1 dusre ki gando se chipke hue the.deven uski mulayam fanko ko daba-2 ke masti me behal ho raha tha.rambha ke gudaz jism ko hatho me bharte hi uske jism me ajib si sansani,1 ajib sa nasha bhar jata tha.uske dhakke ab bahut tez ho gaye the.rambha bhi chut ki deewaro uske lund ki ragad ko mehsus kar josh me bhar sar peechhe jhatak rahi thi.deven ke lund ki motai uski chut ki deewaro ko har baar buri tarah phaila deti thi & vo halke dard & dher sare maze me bilkul madhosh ho jati thi.upar se lund ki lambai itni zyada thi ki har baar uska supada uski kokh se aa takrata tha & uske jism me masti bijli jaise daudne lagti thi.rambha ne apne aashiq ki gand me nakhun dhansa diye the & deven bhi uski gand ko maslate hue uski choochiya pi raha tha.1 baar fir rambha ki chut ne uske lund ko apne shikanje me usi jani-pehchani harkat se tadpana shuru kiya & is baar deven ka bhi sabr toot gaya.

Usne apne munh me rambha ki bayi choochi ko pura bhar liya & paglo ki tarah chuste hue uski gand dabate hue dhakke lagane laga.rambha bhi uski kamar ko tango me kas mez se lagbhag uthati hui,kamar uchkati,zor-2 se chikhti,uski gand ko apne nakhuno se chhalni karti us se chud rahi thi.tabhi rambha ne zor se chikh mari & jism peechhe ki taraf mod diya & deven ka jism bhi kanpne laga.rambha jhad chuki thi & deven ka lund uski kokh ko apne virya se bhar raha tha.rambha masti me kanp rahi thi,uske honth tharthara rahe the,deven lambi-2 sanse le raha tha & apni premika se chipka hua tha.dono hi ke chehre pe jhadne ka sukun tha.

Thodi der tak dono vaise hi lipte bas apni khush,sukuni & 1 dusre ke sath ke ehsas ko bas mehsus karte rahe fir rambha ne deven ke kandhe se sar uthaya & muskurate hue uske chehre ko sehlane lagi.deven bhi muskurata uski zulfo se khel raha tha..is insan ki nekdili,uski maa ke liye bepanah mohabbat,uski mardangi..aakhir kya karan tha jo vo ab uska sab kuchh ban gaya tha?..rambha apne aashiq ki aankho me dekhte hue soche ja rahi thi..uske liye to ab deven hi sabkuchh tha..vo to use apna khuda maanane lagi thi & bas har waqt uski ibadat me mashgul rehna rehti thi.

Rambha ne neeche dekha,sikudne ke bavjud lund abhi bhi chut me tha.rambha ne deven ko thoda peechhe dhakela & lund ko chut se bahar kar diya & mez se sarak ke farsh pe ghutno pe baith gayi.ab use apne devta ki ibadat karni thi.apna jism to usne use saunp hi diya tha magar ab uske jism ki khidmat kar use & khushi dene ki hasrat ho rahi thi use.usne apni hatheliyo ko ando ke neeche lagaya & lund ke supade ko chuma.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--78

गतान्क से आगे......

विजयंत मेहरा बिस्तर पे अढ़लेटा खुद के बारे मे सोच रहा था.उसके पास वो सारी मॅगज़ीन्स पड़ी थी जिनमे से हर 1 मे उसके बारे मे कुच्छ ना कुच्छ लिखा था..तो वो सच मे इतने बड़ी मिल्कियत का मैल्क था!..पर उन मॅगज़ीन्स मे 1 ऐसे शख्स की तस्वीर उभर रही थी जिसने बेशाक़ ट्रस्ट ग्रूप को आसमान तक पहुचा दिया था मगर वो खुद 1 मतलबी & केवल अपने फ़ायदे को सोचने वाला इंसान था..पर क्या सच मे वो ऐसा है?..अभी कुच्छ देर पहले उसने अपना मन मार कर खुद को रंभा और देवेन की चुदाई मे शरीक होने से रोका था..नही,वो ऐसा तो नही है..पर फिर सारी मॅगज़ीन्स मे उसके बारे मे ऐसे क्यू लिखा था?..ओफफ्फ़!..कब याद आएगा मुझे सब कुच्छ कब?!!..उसने साइड-टेबल पे रखा लॅंप बंद किया & सोने की कोशिश करने लगा लेकिन उसके ख़याल उसे सोने नही दे रहे थे.1 धुंधली सी तस्वीर उभर रही थी उसके दिमाग़ मे..ऊँचाई से कुच्छ या कोई गिर रहा था & उसे दुख हो रहा था..वो भी उस चीज़/इंसान के साथ-2 गिर रहा था मगर ना तो उस चीज़/इंसान की तस्वीर साफ थी ना ही उस जगह की जहा ये हो रहा था..विजयंत ने करवट बदल तकिये मे मुँह च्छूपा लिया..अब उस से ये उलझन,ये परेशानी & बर्दाश्त नही हो रही थी.

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रंभा घुटनो पे बैठी देवेन के आंडो को हथेलियो मे भर हौले-2 दबा रही थी & उसके सिकुदे लंड के गीले सूपदे को चूस रही थी.देवेन उसके हाथो & होंठो की छुअन से मस्त हो गया था.उसने रंभा के बालो मे हाथ फिराए मगर रंभा को तो उस लंड के सिवा मानो & कुच्छ दिख ही नही रहा था.उसने फॉरेस्किन पीछे धकेली & पूरे सूपदे पे जीभ चला उसके गीलेपन को चाटने लगी.इस गीलेपान मे केवल देवेन का वीर्य ही नही,रंभा का रस भी मिला था & उसका स्वाद चखना उसे रोमांच से भर रहा था.रंभा ने लंड को पकड़ अपने मुँह मे घुसाया & उसे चूसने लगी.देवेन के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी.उसने रंभा के बालो से लगे अपने हाथो मे उसकी ज़ूलफे पकड़ ली & उसके सर को अपनी गोद मे हल्के से दबाया.रंभा सिकुदे लंड को हलक तक उतर चुकी थी & उसे चूस रही थी.देवेन आँखे बंद किए उसकी ज़ुबान का लुत्फ़ उठा रहा था.

रंभा ने कुच्छ देर बाद लंड को मुँह से निकाला & फिर आंडो को चूसा.उसने अपना मुँह देवेन की झांतो मे घुसा के रगड़ा तो देवेन उस गुदगूदे एहसास से और रोमांच से भर गया.उसका लंड 1 बार फिर तन के खड़ा था.रंभा ने उसे हिलाया & देवेन के निचले पेट को चूमने लगी.उसका बाया हाथ देवेन की मज़बूत जाँघो को सहला रहा था.देवेन महबूबा के कोमल हाथो के अपने नाज़ुक अंगो से खेलने से अब बिल्कुल जोश मे भर चुका था & 1 बार फिर उसके जिस्म के साथ अपने जिस्म को मिलना चाहता था.रंभा के हाथ उसकी जाँघो को बगलो मे उपर-नीचे चलाते हुए उसकी गंद को भी सहला रहे थे & उसका मुँह लगातार उसके लंड को चूस रहा था.देवेन के आंडो मे अब मीठा दर्द शुरू हो गया था.ये उसके जिस्म का इशारा था,इस बात का की अगर उसकी माशुका ने कुच्छ देर & अपने होंठो का इसी तरह इस्तेमाल किया तो वो उसके मुँह मे ही अपना रस छ्चोड़ देगा.देवेन ने आहिस्ता से रंभा के बालो को पकड़ उसका सर पीछे कर लंड को बाहर खींचा.रंभा उसका इशारा समझ गयी & उसके पेट को चूमते हुएऊपर उठने लगी.उसके हसरत भरे हाथ अपने आशिक़ के सीने के बालो मे घूमते हुए उसके निपल्स को छेड़ रहे थे & वो उसके सीने को केवल चूम ही नही बल्कि हल्के-2 काट भी रही थी.

देवेन ने उसे बाहो मे भरा & उसकी पीठ से लेके गंद तक अपने बेसब्र हाथ चलाते हुए उसके चेहरे,होंठो और सीने को अपनी किस्सस से ढँक दिया.रंभा मस्ती मे मुस्कुरा रही थी.देवेन उसकी गंद की फांको को दबोचे था & उसके दिल मे अपनी प्रेमिका की गंद मारने की ख्वाहिश पैदा हुई.उसने रंभा को बाहो मे भरे हुए घुमा दिया & अब पीछे से उसके पेट को पकड़ उसकी छातियाँ दबाते हुए उसकी गर्देन & कंधे चूमने लगा.रंभा भी गंद के उपर उसके गर्म लंड के एहसास से मस्त हो गयी & अपनी गंद पीछे कर उसके लंड को दबा अपनी मस्ती का इज़हार किया.देवेन ने उसकी छातियो को ज़ोर से दबोचा तो वो थोड़े दर्द & बहुत से मज़े से बहाल हो आगे काउंटर पे झुकी.देवेन ने उसी वक़्त उसकी बाई जाँघ को घुटने से उठा के काउंटर पे रख दिया.रंभा थोड़ा और आगे झुकी & अपनी गंद अपने महबूब के लिए और निकाल के खड़ी हो गयी.देवेन अपने पंजो पे बैठ गया & उसकी गंद की पुष्ट फांको को अलग कर उसकी चूत & गंद के गुलाबी छेद को अपनी जीभ से छेड़ते लगा.रंभा आहे भरती च्चटपटाने लगी.देवेन की ज़ुबान ने उसकी चूत की प्यास फिर से जगा दी थी मगर उसे पता था कि अभी वो उसकी गंद को अपने लंड से भरने वाला है.

देवेन खड़ा हुआ & दाए हाथ मे लंड को पकड़ बाए से उसकी गंद की बाई फाँक को पकड़ उसके छेद को थोड़ा खोलते हुए उसमे घुसने लगा.रंभा की आहे चीखो मे तब्दील हो गयी.वो झटके खाती,च्चटपताई जिस्म के उस छ्होटे से सुराख मे अपने आशिक़ के मोटे तगड़े लंड की 1-1 हरकत पूरी शिद्दत से महसूस कर रही थी.देवेन को लंड अंदर घुसने मे थोड़ी परेशानी हुई तो उसने लंड बाहर खींचा & फिर 1 उंगली चूत मे डाल गीला किया & फिर उस गीलेपान से रंभा की गंद को गीला किया मगर अभी भी बात नही बनी थी.उसकी निगाह पास पड़े मक्खन के पॅकेट पे गयी.उसने फ़ौरन मक्खन का 1 टुकड़ा हाथ मे लिया & रंभा की गंद पे मलने लगा.टुकड़ा पिघलने लगा & देवेन पिघले मक्खन को माशुका की गंद के छेद मे भरने लगा.थोड़ी ही देर मे गंद गीली थी & देवेन अपना लंड उसमे उतार रहा था.

“ऊव्ववववववववव..पूरा अंदर डाल दिया आपने प..हााईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.....!”,वो चीखी मगर उसके जिस्म मे मज़े की फुलझड़िया छूट रही थी.देवेन उसकी कमर थामे धक्के लगा उसकी गंद मारने लगा.गंद का पतला सुराख & लंड के घुसने पे उसके सिकुड़ने से वो जोश मे पागल हो गया था.रंभा को शुरू मे तो दर्द हुआ मगर अब उसे भी मज़ा आ रहा था.देवेन दोनो हाथो से उसकी गंद की फांको को मसलते हुए धक्के लगा रहा था & वो बस काउंटर के सहारे खड़ी आहे भर रही थी.देवेन ने बाई बाँह उसकी कमर पे लपेटी & दाई सीने के पार ले जा उसकी छातियो को भींच उसे खुद से चिपका लिया.रंभा ने भी दाए हाथ को पीछे ले जा देवेन के सर को आगे किया & उसके लबो से अपने लब सटा दिए.देवेन का बाया हाथ उसकी चूत से आ लगा था & उसके दाने पे दायरे की शक्ल मे घूम रहा था.रंभा अब जोश मे पागल हो गयी.1 साथ उसके सभी नाज़ुक अंगो के साथ देवेन के खिलवाड़ ने उसे बिल्कुल मदहोश कर दिया & वो देवेन को पागलो की तरह चूमते हुए आहे भरने लगी.वो उसका नाम लेके उसके प्यार की कसमे खा रही थी,अपने जिस्म मे पैदा हुए बेशुमार मज़े की बात कह रही थी..उसका पूरा जिस्म मस्ती मे भर गया था & देवेन उसकी बातो का जवाब देता,उसके बदन को अपने आगोश मे कसे हुए उसकी चूत & चूचियो को हाथो से छेड़ते हुए,उसकी गंद मारे चला जा रहा था.

“आननह..!”,तभी रंभा ने देवेन के गले से हाथ खींचा & आगे काउंटर पे झुक अपना सर पीछे झटकते हुए सुबकने लगी.वो झाड़ गयी थी & उसकी कमर थामे उसकी चूत रगड़ता देवेन भी उसकी गंद मे अपना वीर्य छ्चोड़ रहा था.

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“कब आएगी ये रंभा वापस?”,महादेव शाह थोड़ा झल्ला गया था.

“कुच्छ पता नही.”,प्रणव उसके साथ बैठा 1 ग्लास की रिम पे अपनी उंगली चला रहा था.रीता उसकी जेब मे थी & समीर को तो वो किनारे करने ही वाला था मगर उसकी चाल का सबसे अहम मोहरा,रंभा ही ना जाने कहा गायब हो गयी थी.उपर से समीर भी उसे ढूँढने की कोशिश करता नही दिख रहा था.

“लगता है,अब इंतेज़ार करने के अलावा & कोई चारा नही.”,शाह ने ठंडी आह भरी.

“हूँ.”

“पर ध्यान रहे,प्रणव.जैसे ही रंभा वापस आए,समीर..”,उसने गर्देन काटने का इशारा किया तो प्रणव हल्के से मुस्कुराया.

“हूँ.ओके,अब चलता हू.”,प्रणव वाहा से निकल आया..रंभा,कहा हो?..जल्दी से आओ & मुझे ट्रस्ट का राजा बनाओ!

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समीर अपने दफ़्तर मे गहरी सोच मे डूबा था.ग्रूप बिल्कुल सही तरीके से चल रहा था.आने वाले दीनो के जो प्रोजेक्षन्स थे,वो भी बहुत बढ़िया थे.अभी-2 पिच्छले क्वॉर्टर्स के नतीजे भी बहुत अच्छे थे.कारोबार इतना बढ़िया चल रहा था मगर उसकी ज़ाति ज़िंदगी मे सब गड़बड़ हो गया था..रंभा ने सब गड़बड़ कर दिया था & अब गोआ मे बैठी थी.2 पार्टीस मे वो उसके बिना शरीक हुआ था मगर अब वो उसके बिना किसी जलसे मे जाने का ख़तरा नही उठा सकता था..बस किसी 1 बंदे को हल्की सी भी भनक लगी तो फिर इस खबर के टीवी & अख़बारो की सुर्खिया बनते देर नही लगेगी...& फिर उसका असर पड़ेगा कारोबार पे..& ये उसे मंज़ूर नही था..कुच्छ तो करना ही था..किसी भी तरह रंभा को वापस तो लाना ही था!

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“गुड मॉर्निंग.”,देवेन 1 स्टूल पे रॉकी के सामने बैठा था,”..कैसी नींद आई?”,वो हंसा.मुँह पे टेप लगाया रॉकी बस उसे देखता रहा.देवेन आगे झुका & 1 झटके मे उसके मुँह से टेप खींच दिया,”अब भाई,ये बताओ की खंजर लेके मेरे घर मे किस लिए घुसे थे?”,रॉकी खामोश रहा.

“हूँ..तुम अभी तो कोई जवाब नही दोगे.”,देवेन ने लंबी सांस ली,”..चलो,मत दो.घर मे घुसे तो तुम मेरे क़त्ल के इरादे से थे..”,तो इसे नही पता कि वो रंभा को मारने के लिए वाहा आया था,रॉकी सोच रहा था,”..इसराइली तुम्हारे साथ थे मगर वो तुम्हारे साथ या पीछे यहा तक नही आए.इसका मतलब तो ये है की तुम उनके लिए नही बल्कि शायद वो तुम्हारे लिए काम कर रहे थे..नही..नही..तुमने उनकी मदद ली थी..& उन्होने उसके लिए पैसे लिए तुमसे.”

“अब जल्दी ये बताओ कि किसने भेजा तुम्हे यहा मेरे पीछे वरना ये तो तुम जानते ही हो कि मैं तुम्हे तकलीफ़ पहुन्चाउन्गा.हूँ?”,रॉकी बुरी तरह फँसा था.उसके धंधे का उसूल था कि अपने क्लाइंट का नाम कभी ना बताओ मगर यहा से निकलने के लिए वो इस शख्स से कुच्छ सौदा कर सकता था मगर उसकी परेशानी ये थी कि उसे पता ही नही था कि रंभा को मारने का कांट्रॅक्ट उसे किसने दिया था.1 फोन आया जिसे उसने टाल दिया मगर अगले ही दिन 10 लाख रुपये से भरा बॅग उसके दरवाज़े पे रखा था.बॅग उठाते ही दूसरी बार फोन आया & इस बार लंबी बात के बाद उसने काम के लिए हां कर दी.रॉकी जानता था कि जिसने भी रंभा की सुपारी दी है वो शख्स चाहता तो उसे भी ख़त्म कर सकता था & इसीलिए उसे धोखा देने का उसे कोई इरादा नही था मगर इस वक़्त उसकी ज़िंदगी का सवाल था.सामने बैठा शख्स जो भी था,उसकी आँखो मे उसे सॉफ दिख रहा था कि उसे मारने मे वो ज़रा भी नही हिचकेगा.

“मुझे नही पता.”

“अच्छा.तो तुम्हे ख्वाब आया & तुम मुझे मारने आ गये?”,रॉकी खामोश रहा.देवेन ने तो अंधेरे मे तीर चलाया था.उसे अभी तक ये नही पता था कि रॉकी आख़िर किसके क़त्ल के इरादे से आया था-रंभा के या उसके,मगर उसे लग रहा था कि ड्रग सिंडिकेट से उलझने की वजह से वो ही उसका निशाना हो.रंभा को मारने की कोई ठोस वजह उसे दिख नही रही थी.कोई 30 मिनिट तक देवेन रॉकी से पुच्छ-ताछ करता रहा मगर उसने कुच्छ भी काम की बात नही बताई.देवेन ने उसके मुँह पे टेप लगाया & कमरे से बाहर आ गया.

"रंभा,अपना & विजयंत का समान बांधो.जल्द से जल्द हमे डेवाले वापस जाना होगा."

"मगर क्यू?",रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी,"..क्या कहा उसने?"

"उसने कुच्छ नही कहा मगर मुझे लगता है कि तुम्हे अब वापस समीर के पास जाना होगा.अब वक़्त आ गया है कि पहले विजयंत के इस हाल की गुत्थी सुलझाई जाए.मेरा इंटेक़ाम अभी इंतेज़ार कर सकता है.",असल बात ये थी कि रंभा को और ख़तरे मे डालना उसे अब ठीक नही लग रहा था मगर ये बात उसे बता के वो रंभा को घबराना नही चाहता था.

"ठीक है.",रंभा अपने कमरे मे जाने लगी तो देवेन ने उसे रोका.

"मैं अभी ज़रा 2-3 घंटो के लिए बाहर जाऊँगा.तुम होशियार रहना."

"हूँ."

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क्रमशः.......

JAAL paart--78

gataank se aage......

Vijayant Mehra bistar pe adhleta khud ke bare me soch raha tha.uske paas vo sari magazines padi thi jinme se har 1 me uske bare me kuchh na kuchh likha tha..to vo sach me itne badi milkiyat ka mailk tha!..par un magazines me 1 aise shakhs ki tasvir ubhar rahi thi jisne beshaq Trust Group ko aasman tak pahucha diya tha magar vo khud 1 matlabi & keval apne fayde ko sochne vala insan tha..par kya sach me vo aisa hai?..abhi kuchh der pehle usne apna man maar kar khud ko Rambha & Deven ki chudai me sharik hone se roka tha..nahi,vo aisa to nahi hai..par fir sari magazines me uske bare me aise kyu likha tha?..offf!..kab yaad ayega mujhe sab kuchh kab?!!..usne side-table pe rakha lamp band kiya & sone ki koshish karne laga lekin uske khayal use sone nahi de rahe the.1 dhundhli si tasvir ubhar rahi thi uske dimagh me..oonchai se kuchh ya koi gir raha tha & use dukh ho raha tha..vo bhi us chiz/insan ke sath-2 gir raha tha magar na to us chiz/insan ki tasvir saaf thin a hi us jagah ki jaha ye ho raha tha..vijayant ne karwat badal takiye me munh chhupa liya..ab us se ye uljhan,ye pareshani & bardasht nahi ho rahi thi.

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Rambha ghutno pe baithi deven ke ando ko hatheliyo me bhar haule-2 daba rahi thi & uske sikude lund ke gile supade ko chus rahi thi.deven uske hatho & hotho ki chhuan se mast ho gaya tha.usne rambha ke balo me hath firaye magar rambha ko to us lund ke siwa mano & kuchh dikh hi nahi raha tha.usne foreskin peechhe dhakeli & pure supade pe jibh chala uske gilepan ko chaatne lagi.is gilepan me keval deven ka virya hi nahi,rambha ka ras bhi mila tha & uska swad chakhna use romanch se bhar raha tha.rambha ne lund ko pakad apne munh me ghusaya & use chusne lagi.deven ke jism me bijli daud gayi.usne rambha ke balo se lage apne hatho me uski zulfe pakad li & uske sar ko apni god me halke se dabaya.rambha sikude lund ko halak tak utar chuki thi & use chus rahi thi.deven aankhe band kiye uski zuban ka lutf utha raha tha.

Rambha ne kuchh der baad lund ko munh se nikala & fir ando ko chusa.usne apna munh deven ki jhanto me ghusa ke ragda to deven us gudgude ehsas se & romanch se bhar gaya.uska lund 1 baar fir tan ke khada tha.rambha ne use hilaya & deven ke nichle pet ko chumne lagi.uska baya hath deven ki mazbut jangho ko sehla raha tha.deven mehbooba ke komal hatho ke apne nazuk ango se khelne se ab bilkul josh me bhar chuka tha & 1 baar fir uske jism ke sath apne jism ko milana chahta tha.rambha ke hath uski jangho ko baglo me uapr-neeche chalet hue uski gand ko bhi sehla rahe the & uska munh lagatar uske lund ko chus raha tha.deven ke ando me ab mitha dard shuru ho gaya tha.ye uske jism ka ishara tha,is baat ka ki agar uski mashuka ne kuchh der & apne hotho ka isi tarah istemal kiya to vo uske munh me hi apna ras chhod dega.deven ne ahista se rambha ke balo ko pakad uska sar peechhe kar lund ko bahar khincha.rambha uska ishara samajh gayi & uske pet ko chumte hueupar uthne lagi.uske hasrat bhare hath apne aashiq ke seen eke balo me ghumte hue uske nipples ko chhed rahe the & vo uske seene ko keval chum hi nahi balki halke-2 kaat bhi rahi thi.

Deven ne use baaho me bhara & uski pith se leke gand tak apne besabr hath chalate hue uske chehre,hotho & seene ko apni kisses se dhank diya.rambha masti me muskura rahi thi.deven uski gand ki fanko ko daboche tha & uske dil me apni premika ki gand marne ki khwahish paida hui.usne rambha ko baaho me bhare hue ghuma diya & ab peechhe se uske pet ko pakad uski chhatiyan dabate hue uski garden & kandhe chumne laga.rambha bhi gand ke upar uske garm lund ke ehsas se mast ho gayi & apni gand peechhe kar uske lund ko daba apni masti ka izhar kiya.deven ne uski chhatiyo ko zor se dabocha to vo thode dard & bahut se maze se behaal ho aage counter pe jhuki.deven ne usi waqt uski bayi jangh ko ghutne se utha ke counter pe rakh diya.rambha thoda & aage jhuki & apni gand apne mehboob ke liye & nikaal ke khadi ho gayi.deven apne panjo pe baith gaya & uski gand ki pusht fanko ko alag kar uski chut & gand ke gulabi chhed ko apni jibh se chhedne laga.rambha aahe bharti chhatpatane lagi.deven ki zuban ne uski chut ki pyas fir se jaga di thi magar use pata tha ki abhi vo uski gand ko apne lund se bharne vala hai.

Deven khada hua & daye hath me lund ko pakad baye se uski gand ki bayi fank ko pakad uske chhed ko thoda kholte hue usme ghusane laga.rambha ki aahe chikho me tabdil ho gayi.vo jhatke khati,chhatpatai jism ke us chhote se surakh me apne aashiq ke motge tagde lund ki 1-1 harkat puri shiddat se mehsus kar rahi thi.deven ko lund anadr ghusane me thodi pareshani hui to usne lund bahar khincha & fir 1 ungli chut me daal gila kiya & fir us gilepan se rambha ki gand ko gila kiya magar abhi bhi baat nahi bani thi.uski nigah paas pade makkhan ke packet pe gayi.usne fauran makkhan ka 1 tukda hath me liya & rambha ki gand pe malne laga.tukda pighalne laga & deven pighle makkhan ko mashuka ki gand ke chhed me bharne laga.thodi hi der me gand gili thi & deven apna lund usme utar raha tha.

“OOWWWWWWWWWW..pura andar daal diya aapne tp..HAAAAIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIII.....!”,vo chikhi magar uske jism me maze ki phuljhadiya chhut rahi thi.deven uski kamar thame dhakke laga uski gand marne laga.gand ka patla surakh & lund ke ghusne pe uske sikudne se vo josh me pagal ho gaya tha.rambha ko shuru me to dard hua magar ab use bhi maza aa raha tha.deven dono hatho se uski gand ki fanko ko maslate hue dhakke laga raha tha & vo bas counter ke sahare khadi aahe bhar rahi thi.deven ne bayi banh uski kamar pe lapeti & dayi seene ke paar le ja uski chhatiyo ko bhinch use khud se chipka liya.rambha ne bhi daye hath ko peechhe le ja deven ke sar ko aage kiya & uske labo se apne lab sata diye.deven ka baya hath uski chut se aa laga tha & uske dane pe dayre ki shakl me ghum raha tha.rambha ab josh me pagal ho gayi.1 sath uske sabhi nazuk ango ke sath deven ke khilwad ne use bilkul madhosh kar diya & vo deven ko paglo ki tarah chumte hue aahe bharne lagi.vo uska naam leke uske pyar ki kasme kha rahi thi,apne jism me paida hue beshumar maze ki baat keh rahi thi..uska pura jism masti me bhar gaya tha & deven uski baato ka jawab deta,uske badan ko apne agosh me kase hue uski chut & choochiyo ko hatho se chhedte hue,uski gand mare chala ja raha tha.

“AANNHHHHHHHHHHHHH..!”,tabhi rambha ne deven ke gale se hath khincha & aage counter pe jhuk apna sar peechhe jhatakte hue subakne lagi.vo jhad gayi thi & uski kamar thame uski chut ragadta deven bhi uski gand me apna virya chhod raha tha.

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“kab aayegi ye rambha vapas?”,Mahadev Shah thoda jhalla gaya tha.

“kuchh pata nahi.”,Pranav uske sath baitha 1 glass ki rim pe apni ungli chala raha tha.Rita uski jeb me thi & Sameer ko to vo kinare karne hi vala tha magar uski chaal ka sabse aham mohra,rambha hi na jane kaha gayab ho gayi thi.upar se sameer bhi use dhoondane ki koshish karta nahi dikh raha tha.

“lagta hai,ab intezar karne ke alawa & koi chara nahi.”,shah ne thandi aah bhari.

“hun.”

“par dhyan rahe,pranav.jaise hi rambha vapas aaye,sameer..”,usne garden kaatne ka ishara kiya to pranav halke se muskuraya.

“hun.ok,ab chalta hu.”,pranav vaha se nikal aaya..rambha,kaha ho?..jaldi se aao & mujhe trsut ka raja banao!

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Sameer apne daftar me gehri soch me duba tha.group bilkul sahi tarike se chal raha tha.aane vale dino ke jo projections the,vo bhi bahut badhiya the.abhi-2 pichhle quarters ke natije bhi bahut achhe the.karobar itna badhiya chal raha tha magar uski zati zindagi me sab gadbad ho gaya tha..rambha ne sab gadbad kar diya tha & ab Goa me baithi thi.2 parties me vo uske bina sharik hua tha magar ab vo uske bina kisi jalse me jane ka khatra nahi utha sakta tha..bas kisi 1 bande ko halki si bhi bhanak lagi to fir is khabar ke tv & akhbaro ki surkhiya bante der nahi lagegi...& fir uska asar padega karobar pe..& ye use manzur nahi tha..kuchh to karna hi tha..kisi bhi tarah rambha ko vapas to lana hi tha!

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“good morning.”,deven 1 stool pe rocky ke samne baitha tha,”..kaisi nind aayi?”,vo hansa.munh pe tape lagaya rocky bas use dekhta raha.deven aage jhuka & 1 jhatke me uske munh se tape khinch diya,”ab bhai,ye batao ki khanjar leke mere ghar me kis liye ghuse the?”,rocky khamosh raha.

“hun..tum abhi to koi jawab nahi doge.”,deven ne lambi sans li,”..chalo,mat do.ghar me ghuse to tum mere qatl ke irade se the..”,to ise nahi pata ki vo rambha ko marne ke liye vaha aaya tha,rocky soch raha tha,”..israeli tumhare sath the magar vo tumhare sath ya peechhe yaha tak nahi aaye.iska matlab to ye hai ki tum unke liye nahi balki shayad vo tumhare liye kaam kar rahe the..nahi..nahi..tumne unki madad lit hi..& unhone uske liye paise liye tumse.”

“ab jaldi ye batao ki kisne bheja tumhe yaha mere peechhe varna ye to tum jante hi ho ki main tumhe taklif pahunchaunga.hun?”,rocky buri tarah phansa tha.uske dhandhe ka usul tha ki apne client ka naam kabhi na batao magar yaha se nikalne ke liye vo is shakhs se kuchh sauda kar sakta tha magar uski pareshani ye thi ki use pata hi nahi tha ki rambha ko marne ka contract use kisne diya tha.1 fone aaya jise usne taal diya magar agle hi din 10 lakh rupaye se bhara bag uske darwaze pe rakha tha.bag uthate hi dusri baar fone aaya & is baar lambi baat ke baad usne kaam ke liye haan kar di.rocky janta tha ki jisne bhi rambha ki supari di hai vo shakhs chahta to use bhi khatm kar sakta tha & isiliye use dhokha dene ka use koi irada nahi tha magar is waqt uski zindagi ka sawal tha.samne baitha shakhs jo bhi tha,uski aankho me use saaf dikh raha tha ki use marne me vo zara bhi nahi hichkega.

“mujhe nahi pata.”

“achha.to tumhe khwab aaya & tum mujhe marne aa gaye?”,rocky khamosh raha.deven ne to andhere me teer chalaya tha.use abhi tak ye nahi pata tha ki rocky aakhir kiske qatl ke irade se aaya tha-rambha ke ya uske,magar use lag raha tha ki drug syndicate se ulajhne ki vajah se vo hi uska nishana ho.rambha ko marne ki koi thos vajah use dikh nahi rahi thi.koi 30 minute tak deven rocky se puchh-tachh karta raha magar usne kuchh bhi kaam ki baat nahi batayi.deven ne uske munh pe tape lagaya & kamre se bahar aa gaya.

"rambha,apna & vijayant ka saman bandho.jald se jald hume Devalay vapas jana hoga."

"magar kyu?",rambha ke mathe pe shikan pad gayi,"..kya kaha usne?"

"usne kuchh nahi kaha magar mujhe lagta hai ki tumhe ab vapas sameer ke paas jana hoga.ab waqt aa gaya hai ki pehle vijayant ke is haal ki gutthi suljhai jaye.mera inteqam abhi intezar kar sakta hai.",asal baat ye thi ki rambha ko & khatre me dalna use ab thik nahi lag raha tha magar ye baat use bata ke vo rambha ko ghabrana nahi chahta tha.

"thik hai.",rambha apne kamre me jane lagi to deven ne use roka.

"main abhi zara 2-3 ghanto ke liye bahar jaoonga.tum hoshiyar rehna."

"hun."

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--79

गतान्क से आगे......

"बपत साहब,लगता है आपको अपनी इज़्ज़त प्यारी नही!"

"अरे ये क्या बदतमीज़ी है!",अमोल बपत गुस्से और हैरानी से देवेन को देख रहा था जो धड़ाधड़ाता उसके घर मे घुस आया था.

"और जो आपने मेरे साथ किया वो क्या था?",देवेन गुस्से मे था.बपत की बीवी & 12 बरस का बेटा वाहा आ गये थे और उसे सवालिया निगाहो से देख रहे थे.

"अरे,मेरे जान-पहचान के हैं,कुच्छ परेशान हैं..",उसने देवेन की बाँह पकड़ बाहर का रुख़ किया,"..मैं अभी आता हू.दरवाज़ा लगा लो.",वो उसे ले बाहर निकल गया,"..ये क्या बदतमीज़ी है भाई?मैं तुम्हारा काम कर रहा हू & तुम मेरी बीवी के सामने ये सब बकवास कर रहे थे."

"बपत साहब,प्लीज़ ज़्यादा बाते मत बनाइए.ये बताइए कि मुझे मारने की सुपारी क्यू दी आपने?आपको भरोसा नही मुझपे?..अरे मेरा काम कर दीजिए और अपनी और उस फिरंगिन की तस्वीरे ले लीजिए.उपर से आपका फ़ायदा हो रहा है & आप मेरी ही जान लेना चाहते हैं!"

"क्या बक रहे हो!..मैं तुम्हे मरवाना क्यू चाहूँगा?..अरे अगर मुझे तुम्हारे साथ ऐसी-वैसी हरकत करनी होती तो पोलीस का इस्तेमाल करता ये सुपारी-उपारी का ख़तरा क्यू मोल लेता?!",उसकी बातो मे सच्चाई थी..तो फिर घर पे बँधा वो शख्स किसके कहने पे वाहा आया था & यानी कि उसका निशाना रंभा ही थी!..हे भगवान!..उसे फ़ौरन घर जाना होगा.

"आइ'म सॉरी,बपत साहब पर कुच्छ ऐसी बात हुई कि मैं बौखला गया था."

"अरे भाई,कोई ख़तरे वाली बात है तो अभी बता दो.बपत को पैसे,ऐशोअराम सब चाहिए मगर जान से ज़्यादा ये सब प्यारे नही मुझे!"

"अरे नही..",देवेन हंसा,"..आप बेफ़िक्र रहिए.कुच्छ पता चला बीसेसर गोबिंद के बारे मे?"

"हां.तुम्हारी बात मुझे सही लगती है.ये बहुत शातिर शख्स है मगर इस से 1 ग़लती हो गयी."

"कैसी ग़लती?"

"देखो,वो 1 बूढ़ा इंसान है.मारिटियस के पासपोर्ट से सेशेल्स से यहा आने का मक़सद घूमना-फिरना बताया है.हमारे मुल्क के बारे मे जानना चाहता है वग़ैरह-2 मगर्स आठ ही लिखता है की उसे अड्वेंचर स्पोर्ट्स का भी शौक है."

"हूँ..फिर?"

"तो ये आदमी कोई 6 महीने पहले मुल्क मे आता है & फिर किसी आम सैलानी की तरह 2 महीनो तक पूरे मुल्क मे घूमता रहता है.जब ज़रूरत पड़ती है तो फ्ररो मे बिल्कुल वक़्त से पहुँच जाता लेकिन यही शख्स उसके बाद गंगोत्री जाता है रिवर रफ्टिंग के लिए & फिर गायब हो जाता है."

"क्या?!"

"हां.वो लापता है.सबका मानना है कि वो पानी मे गिर गया और बह गया."

"पर ऐसा हुआ नही है."

"बिल्कुल.ये शख्स अब पक्का हमारे मुल्क का नागरिक बनके रह रहा है."

"कोई सबूत है इसका आपके पास?"

"नही पर मेरा तजुर्बा यही कह रहा है कि उसके साथ कोई हादसा नही हुआ,वो सही सलामत नाम बदल के यहा रह रहा है & पोलीस और बाकी महकमे ये सोच के निश्चिंत बैठे हैं कि 1 बुड्ढ़ा मर गया है & जब कभी उसकी लाश मिली तो केस बंद कर देंगे."

"तो अब कैसे मिलेगा वो?"

"1 मिनिट रूको,मैं पहले तुम्हे उसकी तस्वीर तो दिखाऊँ जो मैने निकाली थी.",दोनो देवेन की कार मे बैठे बाते कर रहे थे.बपत कार से उतरा & 5 मिनिट बाद तस्वीर लेके वापस आ गया जिसे देखते ही देवेन खुशी से भर उठा.ये दयाल ही था!हुलिया बहुत बदला था उसने मगर वो शातिर आँखे वैसी की वैसी थी.

"ये वही है.",देवन ने बस इतना कहा & अपनी जेब से मोबाइल निकाल के बपत को दे दिया,"..ये लीजिए आपकी अमानत.अब आप भी इसे ढूंढीए & मैं भी & जिस दिन मुझे ये मिल गया मैं आपको खबर करूँगा."

"ठीक है.",बपत ने उतर के कार का दरवाज़ा बंद किया तो देवेन ने तेज़ी से कार वापस घर की ओर मोड़ दी.ड्राइव करते हुए वो रंभा को फोन लगा रहा था मगर वो फोन नही उठा रही थी.देवेन का दिल अनहोनी की आशंका से धड़कने लगा था.उसने कार की रफ़्तार बढ़ा दी & साथ ही फोन ट्राइ करता रहा मगर फोन नही मिला.

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रॉकी जितना ही तगड़ा था उतना ही फुर्तीला भी.अपने जिस्म को उसने बहुत लचीला बना रखा था & अभी इसी बात का वो फायडा उठा रहा था.देवेन ने उसके दोनो हाथ उसके बदन के पीछे 1 साथ बाँध दिए थे.रॉकी फर्श पे बाई करवट लेट गया & अपने घुटने मोड़ अपने सीने से सटा लिए & हाथो को अपनी गंद से नीचे अपने पैरो की तरफ ले जाने लगा.घुटने उसने और उपर मोदे,उसे बहुत तकलीफ़ हो रही थी मगर यही अकेला रास्ता था जिसके ज़रिए वो इस क़ैद से छूट सकता था.बँधे हाथो को नीचे ले जा उसने पैरो के नीचे से आगे किया & फिर उठ बैठा.अब उसके बँधे हाथ सामने की तरफ आ गये थे.

बँधे हाथो से उसने मुँह का टेप हटाया & फिर पैरो के बंधन खोले.दन्तो से को हाथो की रस्सियाँ नोचने लगा.रस्सिया बहुत मज़बूत थी & उसके होंठ & मसूड़े छिल गये.उनसे खून आने लगा मगर रॉकी रुका नही.40 मिनिट की मशक्कत के बाद गाँठ खुली & कुच्छ ही देर मे वो आज़ाद था.उसके कपड़े उस कमरे मे नही थे & दरवाज़ा भी बंद था.अब उसे दरवाज़ा खुलवाने की जुगत भिड़ानी थी.

रंभा फोन उठा ही नही रही थी & देवेन अब पूरी तरह से घबरा चुका था.उसने कार की रफ़्तार बहुत बढ़ा दी थी मगर रास्ता था की ख़त्म होने का नाम ही नही ले रहा था.

"य्ाआहह..!",रॉकी बहुत ज़ोर से चिल्लाया.विजयंत मेहरा चौंक गया & दरवाज़े के पास आया,"..साँप..साँप..बचाओ..बचाओ..!!!!!",रॉकी पागलो की तरह चीख रहा था.

विजयंत 1 पल को सोचता रहा & फिर उसने दरवाज़ा खोल दिया..अंदर साँप घुस आया था & उस शख्स की जान ख़तरे मे थी.,.अभी तो देवेन को उस से बाते उगलवानी थी!..धड़क..!!!!..दरवाज़ा खोलते ही 1 ज़ोरदार मुक्का विजयंत के जबड़े पे पड़ा & वो फर्श पे चित हो गया.बिल्कुल नंगा रॉकी कमरे से बाहर आया & विजयंत के जबड़े पे 1 लात मारी & फिर चौंक गया.

विजयंत मेहरा!..उसकी हैरानी का ठिकाना ही नही रहा..वो पलके झपका भूल 1 टाल उस शख्स को देख रहा था जो फर्श पे पड़ा दर्द से अपने जबड़े को सहला रहा था..ये ज़िंदा है..!

"आए..!",रॉकी चौंका & गर्दन घुमाई.टवल मे लिपटी रंभा उसे देख के चिल्ला पड़ी थी.रॉकी ने उसकी ओर कदम बढ़ाए..इसका काम तो अब तमाम हो के ही रहेगा.रंभा घबरा गयी और पीछे हुई & कमरे के बाहर रखे शेल्फ से टकराई.उसने उधर देखा & वाहा पड़ा भारी गुल्दान उठाके रॉकी की ओर फेंका.रॉकी जब तक झुकता तब तक गुल्दान उसके सर से आ लगा.

दर्द की लहर उसके सर मे दौड़ गयी.वो गुस्से से आगे बढ़ा मगर तभी बाहर के गेट पे किसी कार के ब्रेक्स की आवाज़ आई & फिर उसके दरवाज़े के खुलने & बंद होने के.रॉकी ने 1 पल रंभा को देखा & सोचा..अगर इसे मारने रुकता है तो वो निशान वाला शख्स यहा आ सकता है & फिर वो दोबारा फँस सकता है..नही,अभी भागना ही ठीक होगा..फिर आके वो इन सबसे निबतेगा.रॉकी तेज़ी से बाहर भागा.सामने से देवेन दौड़ता आ रहा था.रॉकी बाई तरफ भागा & लॉन पार कर तेज़ी से बंगल की दीवार पे चढ़ने लगा.उसका नंगा जिस्म दीवार से रगड़ के छिल रहा था मगर उसे उसकी कोई परवाह नही थी.अपने लंबे कद की वजह से वो जल्दी से दीवार के उपर चढ़ा

& बाहर सड़क पे कूद गया.उसकी कार उसे अभी भी दूसरे मकान के सामने खड़ी दिख रही थी.वो उसी की ओर भागा.उसी वक़्त देवेन बंगल के मेन गेट से बाहर आया & उसकी तरफ दौड़ा.

रॉकी तेज़ी से आगे भागा & अपनी कार मे बैठ गया मगर उसमे चाभी तो थी ही नही.उसने गुस्से से स्टियरिंग पे हाथ मारा & कार से उतर के पीछे देखा,देवेन भागता आ रहा था.वो कार से उतरा & तेज़ी से भागा.सामने रास्ता मूड रहा था & रॉकी पीछे देखते हुए भाग रहा था.

देवेन को सामने से आती वॅन दिखी मगर रॉकी उसे देख रहा था & जब तक उसने सामने देखा मोड़ की वजह से उसे देर से देख पाने वाले वॅन के ड्राइवर ने उसे पूरी रफ़्तार के साथ टक्कर मार दी थी.देवेन फ़ौरन सड़क के किनारे के 1 नारियल के पेड़ के ओट मे हो गया.वॅन मे कयि फिरंगी भरे थे और शायद किसी पार्टी मे जा रहे थे.वो उतरे और रॉकी के जिस्म को घेर लिया.थोड़ी देर बाद देवेन वाहा पहुँचा और उनकी भीड़ मे से रॉकी तक गया-सामने रॉकी की लाश पड़ी थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--79

gataank se aage......

"Bapat sahab,lagta hai aapko apni izzat pyari nahi!"

"are ye kya badtamizi hai!",Amol Bapat gusse & hairani se deven ko dekh raha tha jo dhadadata uske ghar me ghus aaya tha.

"& jo aapne mere sath kiya vo kya tha?",deven gusse me tha.bapat ki biwi & 12 baras ka beta vaha aa gaye the & use sawaliya nigaho se dekh rahe the.

"are,mere jaan-pehchan ke hain,kuchh pareshan hain..",usne deven ki banh pakad bahar ka rukh kiya,"..main abhi aata hu.darwaza laga lo.",vo use le bahar nikal gaya,"..ye kya badtamizi hai bhai?main tumhara kaam kar raha hu & tum meri biwi ke samne ye sab bakwas kar rahe the."

"bapat sahab,please zyada baate mat banaiye.ye bataiye ki mujhe marne ki supari kyu di aapne?aapko bharosa nahi mujhpe?..are mera kaam kar dijiye & apni & us firanangan ki tasveere le lijiye.upar se aapka fayda ho raha hai & aap meri hi jaan lena chahte hain!"

"kya bak rahe ho!..main tumhe marwana kyu chahunga?..are agar mujhe tumhare sath aisi-vaisi harkat karni hoti to police ka istemal karta ye supari-vupari ka khatra kyu mol leta?!",uski baato me sachchai thi..to fir ghar pe bandha vo shakhs kiske kehne pe vaha aaya tha & yani ki uska nishana rambha hi thi!..hey bhagwan!..use fauran ghar jana hoga.

"i'm sorry,bapat sahab par kuchh aisi baat hui ki main baukhla gaya tha."

"are bhai,koi khatre vali baat hai to abhi bata do.bapat ko paise,aishoaram sab chahiye magar jaan se zyada ye sab pyare nahi mujhe!"

"are nahi..",deven hansa,"..aap befikr rahiye.kuchh pata chala Bisesar Gobind ke bare me?"

"haan.tumhari baat mujhe sahi lagti hai.ye bahut shatir shakhs hai magar is se 1 galti ho gayi."

"kaisi galti?"

"dekho,vo 1 boodha insan hai.Mauritius ke passport se Seychelles se yaha aane ka maqsad ghumna-firna bataya hai.humare mulk ke bare me jaanana chahta hai vagairah-2 magars ath hi likhta hai ki use adventure sports ka bhi shauk hai."

"hun..fir?"

"To ye aadmi koi 6 mahine pehle mulk me aata hai & fir kisi aam sailani ki tarah 2 mahino tak pure mulk me ghumta rehta hai.jab zarurat padti hai to FRRO me bilkul waqt se pahunch jata lekin yehi shakhs uske baad gangotri jata hai river rafting ke liye & fir gayab ho jata hai."

"kya?!"

"haan.vo lapata hai.sabka maanana hai ki vo pani me gir gaya & beh gaya."

"par aisa hua nahi hai."

"bilkul.ye shakhs ab pakka humare mulk ka nagrik banke reh raha hai."

"koi saboot hai iska aapke paas?"

"nahi par mera tajurba yehi keh raha hai ki uske sath koi hadsa nahi hua,vo sahi salamat naam badal ke yaha reh raha hai & police & baki mehakme ye soch ke nishchint baithe hain ki 1 buddha mar gaya hai & jab kabhi uski lash mili to case band kar denge."

"to ab kaise milega vo?"

"1 minute ruko,main pehle tumhe uski tasvir to dikhaoon jo maine nikali thi.",dono Deven ki car me baithe baate kar rahe the.Bapat car se utra & 5 minute baad tasvir leke vapas aa gaya jise dekhte hi deven khushi se bhar utha.ye Dayal hi tha!huliya bahut badla tha usne magar vo shatir aankhe vaisi ki vaisi thi.

"ye vahi hai.",devn ne bas itna kaha & apni jeb se mobile nikal ke bapat ko de diya,"..ye lijiye aapki amanat.ab aap bhi ise dhoondiye & main bhi & jis din mujhe ye mil gaya main aapko khabar karunga."

"thik hai.",bapat ne utar ke car ka darwaza band kiya to deven ne tezi se car vapas ghar ki or mod di.drive karte hue vo Rambha ko fone laga raha tha magar vo fone nahi utha rahi thi.deven ka dil anhoni ki aashanka se dhadakne laga tha.usne car ki raftar badha di & sath hi fone try karta raha magar fone nahi nila.

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Rocky jitna hi tagda tha utna hi furtila bhi.apne jism ko usne bahut lachila bana rakha tha & abhi isi baat ka vo fayda utha raha tha.deven ne uske dono hath uske badan ke peechhe 1 sath bandh diye the.rocky farsh pe bayi karwat let gaya & apne ghutne mod apne seene se sata liye & hatho ko apni gand se neeche apne pairo ki taraf le jane laga.ghutne usne & upar mode,use bahut taklif ho rahi thi magar yehi akela rasta tha jiske zariye vo is qaid se chhut sakta tha.bandhe hatho ko neeche le ja usne pairo ke neeche se aage kiya & fir uth baitha.ab uske bandhe hath samne ki taraf aa gaye the.

bandhe hatho se usne munh ka tape hataya & fir pairo ke bandhan khole.danto se co hatho ki rassiyan nochne laga.rassiya bahut mazbut thi & uske honth & masude chhil gaye.unse khun aane laga magar rocky ruka nahi.40 minute ki mashakkat ke baad ganth khuli & kuchh hi der me vo azad tha.uske kapde us kamre me nahi the & darwaza bhi band tha.ab use darwaza khulwane ki jugat bhidani thi.

rambha fone utha hi nahi rahi thi & deven ab puri tarah se ghabra chuka tha.usne car ki raftar bahut badha di thi magar rasta tha ki khatm hone ka naam hi nahi le raha tha.

"YAAAAHHHHHHH..!",rocky bahut zor se chillaya.Vijayant Mehra chaunk gaya & darwaze ke paas aaya,"..sanp..sanp..bachao..BACHAO..!!!!!",rocky paglo ki tarah chikh raha tha.

vijayant 1 pal ko sochta raha & fir usne darwaza khol diya..andar sanp ghus aaya tha & us shakhs ki jaan khatre me thi.,.abhi to deven ko us se baate ugalwani thi!..DHADAK..!!!!..darwaza kholte hi 1 zordar mukka vijayant ke jabde pe pada & vo farsh pe chit ho gaya.bilkul nanga rocky kamre se bahar aaya & vijayant ke jabde pe 1 laat mari & fir chaunk gaya.

vijayant mehra!..uski hairani ka thikana hi nahi raha..vo palke jhapka bhul 1 tal us shakhs ko dekh raha tha jo farsh pe pada dard se apne jabde ko sehla raha tha..ye zinda hai..!

"AYE..!",rocky chaunka & gardan ghumai.towel me lipti rambha use dekh ke chilla padi thi.rocky ne uski or kadam badhaye..iska kaam to ab tamam ho ke hi rahega.rambha ghabra gayi & peechhe hui & kamre ke bahar rakhe shelf se takrayi.usne udhar dekha & vaha pada bhari guldan uthake rocky ki or fenka.rocky jab tak jhukta tab tak guldan uske sar se aa laga.

dard ki lehar uske sar me daud gayi.vo gusse se aage badha magar tabhi bahar ke gate pe kisi car ke brakes ki aavaz aayi & fir uske darwaze ke khulne & band hone ke.rocky ne 1 pal rambha ko dekha & socha..agar ise marne rukta hai to vo nishan vala shakhs yaha aa sakta hai & fir vo dobara phans sakta hai..nahi,abhi bhagna hi thik hoga..fir aake vo in sabse nibtega.rocky tezi se bahar bhaga.samne se deven daudta aa raha tha.rocky bayi taraf bhaga & lawn paar kar tezi se bungle ki deewar pe chadhne laga.uska nanga jism deewar se ragad ke chhil raha tha magar use uski koi parwah nahi thi.apne lambe kad ki mada se vo jaldi se deewar ke upar chadha

& bahar sadak pe kud gaya.uski car use abhi bhi dusre makan ke samne khadi dikh rahi thi.vo usi ki or bhaga.usi waqt deven bungle ke main gate se bahar aaya & uski taraf dauda.

rocky tezi se aage bhaga & apni car me baith gaya magar usme chabhi to thi hi nahi.usne gusse se steering pe hath mara & car se utar ke peechhe dekha,deven bhagta aa raha tha.vo car se utra & tezi se bhaga.samne rasta mud raha tha & rocky peechhe dekhte hue bhag raha tha.

deven ko samne se aati van dikhi magar rocky use dekh raha tha & jab tak usne samne dekha mod ki vajah se use der se dekh pane vale van ke driver ne use puri raftar ke sath takkar maar di thi.deven fauran sadak ke kinare ke 1 nariyal ke ped ke ot me ho gaya.van me kayi firangi bhare the & shayad kisi party me ja rahe the.vo utre & rocky ke jism ko gher liya.thodi der baad deven vaha pahuncha & unki bhid me se rocky tak gaya-samne rocky ki lash padi thi.

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kramashah.......

 
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