[color=rgb(255,]अंतिम भाग।।[/color]
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बहुत ही बेहतरीन और शानदार।।
कहानी तो समाप्त हो गई लेकिन इसके पीछे ही बहुत सारे अनसुलझे रहस्य छोड़कर गई है, जो पाठकों के मन में हजारों सवाल उठाते हैं।
अब जबकि विक्रम को पूरी सच्चाई पता चल चुकी थी अपने माँ बाप की तो उसके मन में झंझावात चल रहा था, क्योंकि उसने अपने माँ बाप और उनके दोस्तों का असली चेहरा और असली मकसद देख और सुन लिया था। शारीरिक भूंख होती ही ऐसी है जो अच्छे से अच्छे इंसान की नीयत खराब कर देती है, विक्रम का तो मान लेते हैं कि उसकी उम्र इस समय ऐसी थी कि उसके मन मे इन सब की जिज्ञासा थी और जब उसे ये मौका मिला तो उसने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया।
लेकिन उसके मां बाप और उनके दोस्त को क्या हो गया था। वो किस मानसिकता के शिकार हो गए थे जो उन्होंने संस्था जॉइन की। जॉइन करने की बात तो छोड़िए सभी की माँएं अपने ही बेटों के साथ सेक्स करने की गंदी मानसिकता पाले बैठी थी। यही सब सोचते हुए विक्रम अपने होशो हवस खोने लगा। उसने अपने सवालों के जवाब जानने के लिए अपने माता पिता से ही बात करना सही लगा। जो कि उसका सही निर्णय है, क्योंकि अब इतना तो उसके मां बाप भी समझ चुके यह कि विक्रम को सब पता है।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट और मोड़ तब आया जब विक्रम घर आया अपने माता पिता से बात करने के लिए। लेकिन यहां तो उसके माता पिता खूब से लथपत मिले, जो भी गुनाह करता है उसे उसकी सजा जरूर मिलती है और विक्रम के माता पिता को भी उसकी सजा मिली। जैसा कि विक्रम को ही उसके मां बाप का हत्यारा ठहराकर सज़ा दी गई थी, लेकिन वास्तव में उसने अपने माँ बाप का कत्ल नहीं किया बल्कि उसे फंसाया गया है।। उसके मां बाप के दोस्तों में से ही या संस्था के किसी अन्य सदस्य ने विक्रम के माँ बाप की हत्या की है, और विक्रम को फंसा दिया। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो उसके पापा के दोस्त विक्रम से मिलने जेल में जरूर जाते।।
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[color=rgb(255,]बहरहाल कहानी तो यहां पर समाप्त हो गई है, लेकिन कुछ सवालों के जवाब शायद इस कहानी के दूसरे अध्याय में मिल जाए। शिद्दत से इंतजार रहेगा दूसरे अध्याय का।[/color]
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बहुत ही बेहतरीन और शानदार।।
कहानी तो समाप्त हो गई लेकिन इसके पीछे ही बहुत सारे अनसुलझे रहस्य छोड़कर गई है, जो पाठकों के मन में हजारों सवाल उठाते हैं।
अब जबकि विक्रम को पूरी सच्चाई पता चल चुकी थी अपने माँ बाप की तो उसके मन में झंझावात चल रहा था, क्योंकि उसने अपने माँ बाप और उनके दोस्तों का असली चेहरा और असली मकसद देख और सुन लिया था। शारीरिक भूंख होती ही ऐसी है जो अच्छे से अच्छे इंसान की नीयत खराब कर देती है, विक्रम का तो मान लेते हैं कि उसकी उम्र इस समय ऐसी थी कि उसके मन मे इन सब की जिज्ञासा थी और जब उसे ये मौका मिला तो उसने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया।
लेकिन उसके मां बाप और उनके दोस्त को क्या हो गया था। वो किस मानसिकता के शिकार हो गए थे जो उन्होंने संस्था जॉइन की। जॉइन करने की बात तो छोड़िए सभी की माँएं अपने ही बेटों के साथ सेक्स करने की गंदी मानसिकता पाले बैठी थी। यही सब सोचते हुए विक्रम अपने होशो हवस खोने लगा। उसने अपने सवालों के जवाब जानने के लिए अपने माता पिता से ही बात करना सही लगा। जो कि उसका सही निर्णय है, क्योंकि अब इतना तो उसके मां बाप भी समझ चुके यह कि विक्रम को सब पता है।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट और मोड़ तब आया जब विक्रम घर आया अपने माता पिता से बात करने के लिए। लेकिन यहां तो उसके माता पिता खूब से लथपत मिले, जो भी गुनाह करता है उसे उसकी सजा जरूर मिलती है और विक्रम के माता पिता को भी उसकी सजा मिली। जैसा कि विक्रम को ही उसके मां बाप का हत्यारा ठहराकर सज़ा दी गई थी, लेकिन वास्तव में उसने अपने माँ बाप का कत्ल नहीं किया बल्कि उसे फंसाया गया है।। उसके मां बाप के दोस्तों में से ही या संस्था के किसी अन्य सदस्य ने विक्रम के माँ बाप की हत्या की है, और विक्रम को फंसा दिया। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो उसके पापा के दोस्त विक्रम से मिलने जेल में जरूर जाते।।
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[color=rgb(255,]बहरहाल कहानी तो यहां पर समाप्त हो गई है, लेकिन कुछ सवालों के जवाब शायद इस कहानी के दूसरे अध्याय में मिल जाए। शिद्दत से इंतजार रहेगा दूसरे अध्याय का।[/color]