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Kamvasna Story - जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी)

अध्याय 11
शहर के कमरे के का र्रूम अजय आज अपनी सोच में डूबा था और खाना खा कर सीधे रूम में आ गया ,निधि और रानी अपने कमरे में ख़रीदे हुए कपड़ो में बीजी थे वही सोनल विजय के साथ हाल के एक कोने में रखे सोफे पर लेती थी ,वो विजय के गोद में अपना सर रख कर लेटी हुई थी और विजय उसके बालो को सहला रहा था ,

"यार आज डॉ चुतिया के पास गए थे ने क्या हुआ वहा,"
क्लिनिक की बारे में सोचकर उसे मेरी की याद आ जाती है,और उसके चहरे पर एक मुस्कान खिल जाती है,जिसे सोनल भाप जाती है,क्या हुआ मेरे हीरो क्यों मुस्कुरा रहा है ,
"अरे यार क्या बताऊ,उसकी सेकेटरी मेरी वाह "सोनल ने उसे आश्चर्य से देखा
"क्या वाह कर रहा है,तेरे जैसे कमीने सिर्फ एक चीज के लिए लडकियों को देखते है,"विजय सोनल को घुर के देखता है जो हलके हलके मुस्कुरा रही थी,

"बहुत बात करने लगी है तू,(थोड़ी देर रूककर )ऐसे सच भी है,लेकीन आज तो मजा ही आ गया ,"विजय एक अगड़ाई लेते हुए कहा ,सोनल को समझ तो आ गया था की उसका कमीना भाई क्यों कुछ तो कर के आया होगा ,उसने आँखों से इशारा किया क्या हुआ
विजय हसता हुआ उसे सारी बाते बताता गया और सोनल मुह खोल के उसकी करतूत सुनती रही ,जब उसे पता चला की विजय के साथ KLPD हो गया तो वो जोर जोर से हसने लगी की उसका पेट दुखने लगा,वो सोफे एस गिरते गिरते बची वही विजय बुरा सा मुह बनाया हुआ था ,जब सोनल का हसना थोडा कम हुआ तो उसने विजय के मुह को अपने हाथो से दबाया ,
"कोई बात नहीं भाई उसकी भी ले लेना ,ऐसे उसने तुझसे वादा किया है तो निभाएगी ही ना,ऐसे उसका नाम सुनकर तेरा शेरखान बिलकुल तन गया है ,"सोनल फिर से हसने लगी ,विजय का डंडा खड़ा होकर सोनल के सर को चुभ रहा था,विजय थोडा असहज हो गया पर सोनल के हसने पर उसे थोड़ी रहत मिली ,उसने सोनल के गालो पर एक चपत मारी
"अपने भाई से ऐसा मजाक करती है,"सोनल उसे घूरती है
"भाई ,वाह रे मेरे भाई,तुझे बताने में और करने में तो शर्म नहीं आई अब तू भाई बन रहा है साले"विजय और सोनल दोनों मुस्कुरा पड़े ,विजय सोनल को धयन से देखता है,माथे पर लगा छोटा सा टिका जो उसके गोरे मुखड़े को प्यारा बना रहा था,वो एक ढ़ीले से टी शर्ट और बोक्सर में थी जो उसके घुटनों के ऊपर था ,कपड़ो के ढीले पण के बावजूद उसके कटाव साफ़ दिख रहे थे,उसके छातिके उन्नत पहाड़ विजय की कोहनी से हलके रगड़ खा रहे थे ,जिसका आभास दोनों को ही नहीं था ,वासना का कोई नामो निशान उनके बीच नहीं था ,पर विजय उसकी सुन्दरता में खो गया था और सोनल भी अपने भाई की मर्दाना छाती में उगे बालो को अपने हाथो से सहला रही थी ,उसे तो सिर्फ उसके भाई ही मर्द लगते थे बाकी लडको में वो ,वो वाली बात ही नहीं पाती थी ,
"क्या देख रहा है भाई,"सोनल धीरे से कह पायी
"बस देख रहा हु मेरी बहन कितनी सुन्दर है,"
"झुटा कही का ,तेरी itams से जादा सुंदर थोड़ी होंगी तेरी बहने "विजय उसे अपने बाजुओ में भरकर अपने सर को निचे उसके चहरे के पास लाता है ,
"दुनिया में कोई ऐसी लड़की नहीं है जो मेरी बहनों से सुंदर हो ," विजय सोनल के गालो पर अपने होठो को रख देता है ,लेकिन हटाता नहीं और अपनी थूक से उसे गिला कर देता है,सोनल के चहरे पर एक मुस्कान खिल जाती है और वो अपनी बाजुओ को विजय के गले में डाल लेती है और अपनी ओर खिचती है ,विजय उठाकर उसे देखता है ,सोनल की प्यारी मुस्कराहट में वो खो जाता है ,
"भाई आई रेली लव यु ,तू हमेशा मुझे ऐसे ही प्यार करेगा ना ,"विजय सोनल के नाक से अपनी नाक रगड़ता है ,

"कोई शक"सोनल हस पड़ती है और उसे अपनी बांहों में भर लेती है ,थोड़ी देर में दोनों उठकर अपने रूम में जाते है वह निधि और रानी अब भी कपड़ो को लेकर ही बाते कर रही होती है निधि अभी भी वही सुबह वाला स्कर्ट पहने बैठी थी ,विजय पीछे से जाकर उसे कस कर पकड़ लेता है,
"क्या मेरी खरगोश तुझे सोना नहीं है क्या,"सब उसे प्यार से खरगोश बुलाया करते थे ,निधि उसकी बांहों में मचल कर अपना सर उठा कर उसके गले को किस कर लेती है,ये देख कर रानी की आँखों में आंसू आ जाता है ,
"क्या हुआ दीदी "
"मुझे किशन की बहुत याद आ रही है ,हम सब यहाँ साथ है और वो वहा अकेला ,"
"कोई बात नहीं दीदी कल तो जा ही रहे है ना ,"
"हा और तू फिकर मत कर वहा उसका ख्याल रखने के लिए लाली है ना,"सोनल की बात से रानी रोना बंद कर उसे मार देती है वही सोनल और विजय हसने लगते है ,लाली किशन की पर्मनेट वाली जुगाड़ थी ,(जुगाड़ ही कहूँगा क्योकि गर्ल फ्रेंड कहना गलत होगा ),निधि सब को हस्ते हुए देखकर सबका मुह देखने लगी उसे ये बात समझ नहीं आया की लाली दीदी किशन भईया का धयान कैसे रखेंगी ,आखिर उसने विजय से पूछ ही लिया ,,विजय मुस्कुरा कर उसके गालो में किस कर लिया

"कुछ नहीं मेरी खरगोश चल रात हो चुकी है तू सो जा ,कहा सोएगी "
"अरे ये तो भईया की चमची है वही सोयेगी उनके साथ "
"मुझे भईया बिना नींद नहीं आती समझी "निधि ने अपना बुरा सा चाहरा बनाते हुए कहा ,जिसपर सभी हस पड़े
"तो शादी के बाद क्या करेगी जब अपने पति के साथ सोना पड़ेगा "
"भाग जाओ मुझे नहीं करना शादी वादी आप कर लेना ,मैं नहीं छोड़ने वाली अपने भाइयो को"निधि की प्यारी बातो ने सभी के चहरे पर फिर से एक मुस्कान खिला दिया और वो सभी के गालो में किस करके वह से अजय के रूम चली गयी ...
 
अध्याय 12
सुबह ही सब तैयार होकर चलने को हुए ,सुबह से सुमन भी अपना समान पकड़कर आ चुकी थी,आ उसने एक हलके रंग का सलवार कमीज पहने था,उसके कपड़ो से ही उसके असली आर्थिक हालत का पता चल रहा था,लेकिन निधि को वो बिलकुल भी पसंद नहीं आया उसने तुरंत उसे अपने कमरे में ले जाकर अपने कपडे पहनने को दे दिया ,एक जीन्स और कमीज में अब उसका रूप कुछ खिलने लगा था,सब गाव के लिए निकल पड़े,गाव में उनका स्वागत करने को पूरा घर मौजूद था ,सिवाय उनके चंपा चाची के,निधि में सबको सुमन से मिलवाया ,रानी दौड़कर किशन के गले लग गयी वही सोनल सीधे बाली चाचा के तरफ भागी,अपनी बच्चियों को देखकर बाली भी बहुत खुस था,किशन को रानी छोड़ ही नहीं रही थी,सोनल उसके पास पहुच कर उसके गले से लग गयी,रानी ने भी अपने आशु पोछे और और किशन ने भी ,सोनल ने धीरे से पूछा ,
"और मेरे भाई ,लाली भाभी कैसी है,"किशन का चहरा लाल हो गया,

"क्या दीदी आप भी ना सबके सामने ,वो तो खड़ी है देख लो ना,"रानी और सोनल खिलखिला पड़े और सीता मौसी की तरफ बढे,मौसी ने बड़े ही प्यार से दोनों को दुलारा,और अजय को देखते हुई बोली
"रेणुका की तो शादी कर दिया तूने अब तेरी दोनों जवान बहनों का भी कुछ सोच ,इनके भी हाथ पीले कर दे अगले साल "रानी और सोनल ने बुरा सा मुह बनाया वही मौसी और अजय हस पड़े.
"मौसी इन्हें पड़ने दो जितना पड़ना चाहे फिर तो शादी करना ही है ,हम तो नहीं पढ़ पाए पर अपनी बहनों को तो खूब पढ़ाउंगा ,"दोनों लडकिय अजय से आकर चिपक गयी ,
"देख कही जादा पड़कर वही शादी ना कर ले "मौसी ने दोनों को चिढाते हुए कहा
"इनका भाई अभी मारा नहीं है ,जो इन्हें भाग के शादी करना पड़े ,मेरी बहने जिसे पसंद करेगी इनकी शादी उनसे ही करूँगा,अपने आप को बेच दूंगा पर अपनी बहनों के लिए हर खुसी ला के दूंगा,"अजय जैसे खुद से बात कर रहा था,दोनों उसके चहरे को देखने लगे वही मौसी के चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान घिर गयी ,और रानी और सोनल की आँखों में अपने भाई का प्यार देखकर पानी आ गया ,उन्होंने अपनी एडी उची की और एक प्यार भरी पप्पी अजय के गालो में दि .

"चढ़ा ले इन्हें भी ,एक तेरी छोटी है ,इतना चढ़ा के रखा है,"मौसी ने प्यार से अजय को देखते हुए कहा ,अजय ने निधि की और देखा वो सुमन को घर दिखा रही थी और नौकरों को उसके रूम तैयार करने को कह रही थी ,सुमन बेचारी को अपने भाग्य पर जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था,जो लड़की उसे गलिया देकर मार रही थी उसके कारन उसकी जिन्दगी सवर गयी ,वो निधि को बड़े ही प्यार और सम्मान से देख रही थी,जिसे वो उसके लिए भगवन हो,वही किशन की नजरो को विजय ने पढ़ लिया जो सुमन को देखे जा रहा था,विजय उसके पास जाकर बोला,
"सोचना भी मत साले ,निधि और भईया का हाथ है उसपर,"किशन के चहरे पर एक कातिल मुस्कान खिल गयी ,
"अच्छा इसलिए आप अभी तक पीछे हो "विजय भी हस पड़ा
"अरे यार इतनी तो लडकिय छानी है हमने ,एक नहीं सही ,"
"ह्म्म्म बात तो सही है भईया पर इस लड़की में कुछ तो बात है ,"विजय उसे घूरता है
"क्या बात है बे हवसी ,लाली से जादा खुबसूरत है क्या,बेचारी सवाली सी दुबली पतली है "
"भईया ये थोड़ी तैयार हो जाए और आँखों में काजल लगा ले ना तो देखना आप भी दीवाने हो जाओगे"विजय हँसाने लगा
"तुझे ही मुबारक हो ऐसी कलि मैं तो खिले हुए फूलो को भी रुला देता हु ये तो मर जायेगी ,"किशन विजय की ओर देखता है ,
"ह्म्म्म तो मैं इसे खाऊंगा ,लेकिन थोडा आराम से रिस्क जादा है निधि को पता चला तो मार डालेगी .."दोनों हसने लगे..
रानी किशन के पास पहुचती है ,

"भाई माँ कहा है ,"
"होगी अपने कोपभवन में ,इस घर में कुछ ख़ुशी हो तो उन्हें ही सबसे जादा तकलीफ होती है ना "किशन छिड़ते हुए कहता है,रानी के आँखों में आंसू आ जाता है ,
"भाई ऐसा मत बोल ,आपके और मेरे सिवा उनका है ही कोण इस दुनिया में ,"सोनल भी पास आ जाती है ,वो समझ चुकी थी की रानी क्यों दुखी है .
"चल रानी चाची से मिलकर आते है ,"सोनल ने उसके कंधे पर हाथ रखा ,रानी उसके सीने से लग के रोने लगी विजय भी ये सब देख कर उनके पास पहुचता है ,वो रानी के कंधे पर हाथ रखता है ,
"देखो भले ही चची हमारे बारे में जो भी सोचे पर हमारे लिए तो वो माँ जैसी है है ना ,"विजय बोलता चला गया
"पहले इस घर में जो हुआ वो हुआ पर अब हम सबको मिलकर उन्हें फिर से हसना होगा ,हम सब यहाँ खुसिया मनाये और हमारी माँ वह अकेली बैठी रहे ये कैसे हो सकता है,"
"पर भईया आप तो जानते हो माँ की आदत वो इस घर की खुशियों में कभी सरिक नहीं होती ,पापा तो उनसे बात भी नहीं करते वो अकेले ,"किशन बोलते हुए थोडा उदास सा हो गया,
"अब नहीं मेरे भाई हम सब की मिलकर उन्हें मनाना चाहिए ,चाचा उन्हें नहीं माफ कर पाए पर अजय भईया ने उन्हें हमेशा ही अपनी माँ माना है ,और अब चाची को हम फिर से अपने परिवार का हिस्सा बनायेंगे,"सोनल ने चहकते हुए कहा की सभी को उम्मीद की एक किरण दिखने लगी सभी चंपा के कमरे की तरफ जाने लगे ,
रानी और किशन कमरे में जाते है वही सोनल और विजय बाहर ही रुक जाते है ,दोनों को देखकर चंपा उछल पड़ी और दौड़कर रानी को अपने सीने से लगाकर रोने लगी ,
"मेरी बच्ची तू आ गयी "
"हा माँ और आप निचे क्यों नहीं आई सब लोग थे बस आप नहीं थी "चंपा के आँखों में पानी आ गया और उसका गला भर सा गया था,वो थोड़ी देर तक बस चुप ही रही ,फिर बड़ी मेहनत करके कुछ बोल पायी ,

"बेटी मैं वहा आकर सबकी ख़ुशी ख़राब नहीं करना चाहती थी ,"सोनल और किशन कमरे में आते है ,जिसे देख कर चंपा थोड़ी असहज सी हो जाती है ,
"आपको किसने कहा की आपके आने से किसी को तकलीफ होगी ,बल्कि आपके आने से तो हमें ख़ुशी होती ,आप भी तो हमारी माँ है ना "अब तक सोनल के आँखों में भी पानी आ चूका था,चंपा अपना सर निचे किये थी और कोई भी जवाब नहीं दे रही थी,विजय ने आगे बड़ते हुए चंपा के हाथो को थाम लिया ,
"चाची हम बचपन से ही माँ के प्यार के लिए तरसे है ,बाप का प्यार तो हमें बाली चाचा और अजय भईया ने दिया है ,पर क्या हम आपके बच्चे नहीं है ,सालो पहले जो हुआ वो बस हादसा था,उसकी अपने आपको और हमें इतनी बड़ी सजा मत दीजिये ,आप हमारी माँ है चाची ,"चंपा नज़ारे निचे किये हुए रो रही थी ,जिस परिवार को उसने आजतक इतनी नफरत दि थी वही उसे इतना प्यार करता है चंपा ने कभी सोचा ही नहीं था,जब से अजय ने उसकी जान बचायी थी वो अंदर से पश्चाताप में जल रही थी ,लेकिन वो कभी भी ये किसी से नहीं कह पायी थी ,,बाली आज भी उससे उतनी ही नफरत करता था जीतनी वो पहले किया करता था,इधर सोनल और विजय भी रोने लगे थे किसे पता था की इस विशाल देह में भी एक मासूम सा धडकता दिल है ,चंपा से अब रहा नहीं गया वो मुड़ी और जाने को हुई लेकिन उसी समय किसी ने उसके पैरो को जकड लिया एक सुबकी सी उसके कानो को सुनाई दि ..उसने बिना निचे देखे ही खुद को आगे धकेला पर वो मजबूत हाथ थे जिसके कारन वो हिल भी नहीं पा रही थी ,उसने मजबूर होकर निचे देखा तो उसका मुह खुला का खुला रह गया .अजय उसके पैरो को पकड़ा र्रो रहा था ,चंपा ने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी ,हुआ ये की अजय ने जब सबको जाते देखा तो वो भी धीरे से उनके पीछे चल दिया उनकी बाते सुनकर उससे रहा नहीं गया और वो अंदर आकर चंपा के पैरो को पकड़ लिया,

"चाची क्या हमसे कोई गलती हुई है जिसके वजह से आप हमसे दूर रहती है ,क्या हमें आपके प्यार पाने का कोई हक़ नहीं है ,"ये चंपा के लिए बहुत ही जादा था उसके सब्र का बांध अब टूट ही गया वो फफक कर रो पड़ी और अजय को उठा कर उसे अपने सीने से लगा लिया ,
"नहीं अजय मैं तुम्हारी गुनाहगार हु,मेरी वजह से ही भईया भाभी की मौत हुई है ,मैंने ही तुम्हारे चाचा को उनके भाई से अलग किया ,पूरी गलती मेरी है मेरे बेटे ,मैं माफ़ी के काबिल नहीं हु,वीर भईया तो भगवान थे जिन्होंने मुझ जैसी लड़की को इस घर की बहु बनाया पर मैंने क्या किया इस घर को तोड़ने की कोशिश की ,अगर मैं ना होती तो शायद भईया भाभी जिन्दा होते और इसपर भी तुमने मेरी जान बचाई ,तुम भी वीर भईया जैसे हो मेरे बेटे और मैं अब तुम्हारी खुशियों में नहीं आना चाहती ,"चंपा अजय को ऐसे गले लगायी थी जैसे जन्म की प्यासी को ,जैसे कई जन्मो से इसी पल का इन्तजार था ,आज वो अपने गुनाहों की माफ़ी मांग रही थी जो वो हमेशा मांगना चाहती थी ,अजय उससे अलग हुआ और उसके चहरे को अपने हाथो में थाम लिया उसने बड़े प्यार से उसे देखा,
"चाची जो भी हुआ वो तो हो चूका है ,अब हम नयी सुरुवात करते है ,आप हमारी माँ है और हमारे खुशियों और दुःख में सरिक कोने का आपको पूरा हक़ है ,हम सब यही चाहते है की आपके चहरे में फिर से एक मुस्कान आ जाय,"चंपा के चहरे में एक मुस्कान फैली वो कोई सामान्य मुस्कान नहीं थी ,बहुत ही दर्द के बाद जेहन से आई थी ,उसमे ममता भी था और पश्चाताप भी ,उसमे दर्द भी थी और खुसी भी ,चंपा ने अजय के माथे को चूम लिया ,उसके नयना अब भी धार बहा रहे थे..बाकि सभी बच्चे भी आकर उनसे लिपट गए ,थोड़े इमोशनल ड्रामे के बाद सब अलग हुए और अपने कमरों में गए ,.
 
अध्याय 13
सुबह ही सब तैयार होकर चलने को हुए ,सुबह से सुमन भी अपना समान पकड़कर आ चुकी थी,आ उसने एक हलके रंग का सलवार कमीज पहने था,उसके कपड़ो से ही उसके असली आर्थिक हालत का पता चल रहा था,लेकिन निधि को वो बिलकुल भी पसंद नहीं आया उसने तुरंत उसे अपने कमरे में ले जाकर अपने कपडे पहनने को दे दिया ,एक जीन्स और कमीज में अब उसका रूप कुछ खिलने लगा था,सब गाव के लिए निकल पड़े,गाव में उनका स्वागत करने को पूरा घर मौजूद था ,सिवाय उनके चंपा चाची के,निधि में सबको सुमन से मिलवाया ,रानी दौड़कर किशन के गले लग गयी वही सोनल सीधे बाली चाचा के तरफ भागी,अपनी बच्चियों को देखकर बाली भी बहुत खुस था,किशन को रानी छोड़ ही नहीं रही थी,सोनल उसके पास पहुच कर उसके गले से लग गयी,रानी ने भी अपने आशु पोछे और और किशन ने भी ,सोनल ने धीरे से पूछा ,
"और मेरे भाई ,लाली भाभी कैसी है,"किशन का चहरा लाल हो गया,
"क्या दीदी आप भी ना सबके सामने ,वो तो खड़ी है देख लो ना,"रानी और सोनल खिलखिला पड़े और सीता मौसी की तरफ बढे,मौसी ने बड़े ही प्यार से दोनों को दुलारा,और अजय को देखते हुई बोली

"रेणुका की तो शादी कर दिया तूने अब तेरी दोनों जवान बहनों का भी कुछ सोच ,इनके भी हाथ पीले कर दे अगले साल "रानी और सोनल ने बुरा सा मुह बनाया वही मौसी और अजय हस पड़े.
"मौसी इन्हें पड़ने दो जितना पड़ना चाहे फिर तो शादी करना ही है ,हम तो नहीं पढ़ पाए पर अपनी बहनों को तो खूब पढ़ाउंगा ,"दोनों लडकिय अजय से आकर चिपक गयी ,
"देख कही जादा पड़कर वही शादी ना कर ले "मौसी ने दोनों को चिढाते हुए कहा
"इनका भाई अभी मारा नहीं है ,जो इन्हें भाग के शादी करना पड़े ,मेरी बहने जिसे पसंद करेगी इनकी शादी उनसे ही करूँगा,अपने आप को बेच दूंगा पर अपनी बहनों के लिए हर खुसी ला के दूंगा,"अजय जैसे खुद से बात कर रहा था,दोनों उसके चहरे को देखने लगे वही मौसी के चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान घिर गयी ,और रानी और सोनल की आँखों में अपने भाई का प्यार देखकर पानी आ गया ,उन्होंने अपनी एडी उची की और एक प्यार भरी पप्पी अजय के गालो में दि .

"चढ़ा ले इन्हें भी ,एक तेरी छोटी है ,इतना चढ़ा के रखा है,"मौसी ने प्यार से अजय को देखते हुए कहा ,अजय ने निधि की और देखा वो सुमन को घर दिखा रही थी और नौकरों को उसके रूम तैयार करने को कह रही थी ,सुमन बेचारी को अपने भाग्य पर जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था,जो लड़की उसे गलिया देकर मार रही थी उसके कारन उसकी जिन्दगी सवर गयी ,वो निधि को बड़े ही प्यार और सम्मान से देख रही थी,जिसे वो उसके लिए भगवन हो,वही किशन की नजरो को विजय ने पढ़ लिया जो सुमन को देखे जा रहा था,विजय उसके पास जाकर बोला,
"सोचना भी मत साले ,निधि और भईया का हाथ है उसपर,"किशन के चहरे पर एक कातिल मुस्कान खिल गयी ,
"अच्छा इसलिए आप अभी तक पीछे हो "विजय भी हस पड़ा
"अरे यार इतनी तो लडकिय छानी है हमने एक नहीं सही ,"

"ह्म्म्म बात तो सही है भईया पर इस लड़की में कुछ तो बात है ,"विजय उसे घूरता है
"क्या बात है बे हवसी ,लाली से जादा खुबसूरत है क्या,बेचारी सवाली सी दुबली पतली है "
"भईया ये थोड़ी तैयार हो जाए और आँखों में काजल लगा ले ना तो देखना आप भी दीवाने हो जाओगे"विजय हँसाने लगा
"तुझे ही मुबारक हो ऐसी कलि मैं तो खिले हुए फूलो को भी रुला देता हु ये तो मर जायेगी ,"किशन विजय की ओर देखता है ,
"ह्म्म्म तो मैं इसे खाऊंगा ,लेकिन थोडा आराम से रिस्क जादा है निधि को पता चला तो मार डालेगी .."दोनों हसने लगे..
रानी किशन के पास पहुचती है ,
"भाई माँ कहा है ,"
"होगी अपने कोपभवन में ,इस घर में कुछ ख़ुशी हो तो उन्हें ही सबसे जादा तकलीफ होती है ना "किशन छिड़ते हुए कहता है,रानी के आँखों में आंसू आ जाता है ,
"भाई ऐसा मत बोल ,आपके और मेरे सिवा उनका है ही कोण इस दुनिया में ,"सोनल भी पास आ जाती है ,वो समझ चुकी थी की रानी क्यों दुखी है .
"चल रानी चाची से मिलकर आते है ,"सोनल ने उसके कंधे पर हाथ रखा ,रानी उसके सीने से लग के रोने लगी विजय भी ये सब देख कर उनके पास पहुचता है ,वो रानी के कंधे पर हाथ रखता है ,

"देखो भले ही चची हमारे बारे में जो भी सोचे पर हमारे लिए तो वो माँ जैसी है है ना ,"विजय बोलता चला गया
"पहले इस घर में जो हुआ वो हुआ पर अब हम सबको मिलकर उन्हें फिर से हसना होगा ,हम सब यहाँ खुसिया मनाये और हमारी माँ वह अकेली बैठी रहे ये कैसे हो सकता है,"
"पर भईया आप तो जानते हो माँ की आदत वो इस घर की खुशियों में कभी सरिक नहीं होती ,पापा तो उनसे बात भी नहीं करते वो अकेले ,"किशन बोलते हुए थोडा उदास सा हो गया,
"अब नहीं मेरे भाई हम सब की मिलकर उन्हें मनाना चाहिए ,चाचा उन्हें नहीं माफ कर पाए पर अजय भईया ने उन्हें हमेशा ही अपनी माँ माना है ,और अब चाची को हम फिर से अपने परिवार का हिस्सा बनायेंगे,"सोनल ने चहकते हुए कहा की सभी को उम्मीद की एक किरण दिखने लगी सभी चंपा के कमरे की तरफ जाने लगे ,
रानी और किशन कमरे में जाते है वही सोनल और विजय बाहर ही रुक जाते है ,दोनों को देखकर चंपा उछल पड़ी और दौड़कर रानी को अपने सीने से लगाकर रोने लगी ,
"मेरी बच्ची तू आ गयी "
"हा माँ और आप निचे क्यों नहीं आई सब लोग थे बस आप नहीं थी "चंपा के आँखों में पानी आ गया और उसका गला भर सा गया था,वो थोड़ी देर तक बस चुप ही रही ,फिर बड़ी मेहनत करके कुछ बोल पायी ,
"बेटी मैं वहा आकर सबकी ख़ुशी ख़राब नहीं करना चाहती थी ,"सोनल और किशन कमरे में आते है ,जिसे देख कर चंपा थोड़ी असहज सी हो जाती है ,
"आपको किसने कहा की आपके आने से किसी को तकलीफ होगी ,बल्कि आपके आने से तो हमें ख़ुशी होती ,आप भी तो हमारी माँ है ना "अब तक सोनल के आँखों में भी पानी आ चूका था,चंपा अपना सर निचे किये थी और कोई भी जवाब नहीं दे रही थी,विजय ने आगे बड़ते हुए चंपा के हाथो को थाम लिया ,

"चाची हम बचपन से ही माँ के प्यार के लिए तरसे है ,बाप का प्यार तो हमें बाली चाचा और अजय भईया ने दिया है ,पर क्या हम आपके बच्चे नहीं है ,सालो पहले जो हुआ वो बस हादसा था,उसकी अपने आपको और हमें इतनी बड़ी सजा मत दीजिये ,आप हमारी माँ है चाची ,"चंपा नज़ारे निचे किये हुए रो रही थी ,जिस परिवार को उसने आजतक इतनी नफरत दि थी वही उसे इतना प्यार करता है चंपा ने कभी सोचा ही नहीं था,जब से अजय ने उसकी जान बचायी थी वो अंदर से पश्चाताप में जल रही थी ,लेकिन वो कभी भी ये किसी से नहीं कह पायी थी ,,बाली आज भी उससे उतनी ही नफरत करता था जीतनी वो पहले किया करता था,इधर सोनल और विजय भी रोने लगे थे किसे पता था की इस विशाल देह में भी एक मासूम सा धडकता दिल है ,चंपा से अब रहा नहीं गया वो मुड़ी और जाने को हुई लेकिन उसी समय किसी ने उसके पैरो को जकड लिया एक सुबकी सी उसके कानो को सुनाई दि ..उसने बिना निचे देखे ही खुद को आगे धकेला पर वो मजबूत हाथ थे जिसके कारन वो हिल भी नहीं पा रही थी ,उसने मजबूर होकर निचे देखा तो उसका मुह खुला का खुला रह गया .अजय उसके पैरो को पकड़ा र्रो रहा था ,चंपा ने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी ,हुआ ये की अजय ने जब सबको जाते देखा तो वो भी धीरे से उनके पीछे चल दिया उनकी बाते सुनकर उससे रहा नहीं गया और वो अंदर आकर चंपा के पैरो को पकड़ लिया,
"चाची क्या हमसे कोई गलती हुई है जिसके वजह से आप हमसे दूर रहती है ,क्या हमें आपके प्यार पाने का कोई हक़ नहीं है ,"ये चंपा के लिए बहुत ही जादा था उसके सब्र का बांध अब टूट ही गया वो फफक कर रो पड़ी और अजय को उठा कर उसे अपने सीने से लगा लिया ,
"नहीं अजय मैं तुम्हारी गुनाहगार हु,मेरी वजह से ही भईया भाभी की मौत हुई है ,मैंने ही तुम्हारे चाचा को उनके भाई से अलग किया ,पूरी गलती मेरी है मेरे बेटे ,मैं माफ़ी के काबिल नहीं हु,वीर भईया तो भगवान थे जिन्होंने मुझ जैसी लड़की को इस घर की बहु बनाया पर मैंने क्या किया इस घर को तोड़ने की कोशिश की ,अगर मैं ना होती तो शायद भईया भाभी जिन्दा होते और इसपर भी तुमने मेरी जान बचाई ,तुम भी वीर भईया जैसे हो मेरे बेटे और मैं अब तुम्हारी खुशियों में नहीं आना चाहती ,"चंपा अजय को ऐसे गले लगायी थी जैसे जन्म की प्यासी को ,जैसे कई जन्मो से इसी पल का इन्तजार था ,आज वो अपने गुनाहों की माफ़ी मांग रही थी जो वो हमेशा मांगना चाहती थी ,अजय उससे अलग हुआ और उसके चहरे को अपने हाथो में थाम लिया उसने बड़े प्यार से उसे देखा,

"चाची जो भी हुआ वो तो हो चूका है ,अब हम नयी सुरुवात करते है ,आप हमारी माँ है और हमारे खुशियों और दुःख में सरिक कोने का आपको पूरा हक़ है ,हम सब यही चाहते है की आपके चहरे में फिर से एक मुस्कान आ जाय,"चंपा के चहरे में एक मुस्कान फैली वो कोई सामान्य मुस्कान नहीं थी ,बहुत ही दर्द के बाद जेहन से आई थी ,उसमे ममता भी था और पश्चाताप भी ,उसमे दर्द भी थी और खुसी भी ,चंपा ने अजय के माथे को चूम लिया ,उसके नयना अब भी धार बहा रहे थे..बाकि सभी बच्चे भी आकर उनसे लिपट गए ,थोड़े इमोशनल ड्रामे के बाद सब अलग हुए और अपने कमरों में गए ,.
 
अध्याय 14
सभी लोग बस शादी की तैयारियों में व्यस्त थे ,लडकिया सजने सवारने की तैयारिया कर रही थी ,ऐसा लग ही नहीं रहा था की किसी नौकरानी के बेटी की शादी है ,सभी उसे घर का सदस्य ही मान कर जुटे हुए थे ,घर को सिंपल सा सजाया गया था,और पूरा परिवार बहुत खुस नजर आ रहा था,सुमन भी अब घर में घुल मिल गयी थी वो हर वक्त ही निधि के साथ रहती और जो निधि कहती बस वही करती ,निधि को तो जैसे एक प्यारी सहेली मिल गयी थी,सुमन भी कुछ ही दिनों में खिलने लगी थी ,निधि उसे किसी गुडिया जैसे सजाती थी ,उसने उसे नए नए कपडे दे रखे थे ,लगता ही नहीं था की वो कोई आश्रित है ऐसा ही लगता था की वो परिवार की कोई सदस्य है,सभी भाई बहन मिलने की खुसिया मना रहे थे और अब चंपा भी पूरी तरह साथ थी ,अजय बाली को मना चूका था बाली चंपा से बात तो नहीं करता पर उसके वहा होने से कोई समस्या भी नहीं थी,इधर बारात के एक दिन पहले निधि की जिद थी की हल्दी के कार्यक्रम के साथ महंदी और डांस का भी कार्यक्रम करे,ऐसे अजय को ये सब आफत सा लग रहा था ,पर बहनों की खुशियों को नजरंदाज भी नहीं कर पा रहा था,उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था ,सभी घर के लोग हल्दी खेलने में बिजी थे सब एक दुसरे को दौड़ दौड़ कर हल्दी लगा रहे थे ,बस सबकी हसी ठहाको से पूरा घर गूंज रहा था,काम करने वाले नौकरों और मजदूरों को भी नहीं छोड़ा जा रहा था,वो बेचारे थोड़े नर्वस भी थे ,इतने बड़े घर की लडकिय उन्हें हल्दी लगा रही थी ,कुछ की आँखों में पानी था तो कोई उन्हें दुवाए दे रहा था,ठाकुरों की यही बात उन्हें सबसे अलग और लोकप्रिय बनाती थी की वो इंसानों का सम्मान करते थे और उनसे इंसानों जैसे ही बर्ताव करते थे,,,

किशन की नजरे सुमन पर थी,पर वो निधि से अलग ही नहीं होती थी,आज अच्छा मौका मिला था ,वो अपने हाथो में हल्दी लिए निधि को पीछे से पकड़ता है और उसके गालो में हल्दी रगड़ने लगता है ,निधि जब सम्हालती है तो वो और सोनल किशन के हाथो को पकड़ लेते है और निधि सुमन को उसे हल्दी लगाने का इशारा करती है ,सुमन थोड़ी डरी डरी सी उसके पास जाती है और उसे हल्दी लगाने लगती है,किशन जब अपने को छुड़ाता है वो सीधे सुमन के तरफ ही बढता है वो उसे पीछे से पकड लेता है और उसके गालो के साथ साथ उसके उभरे उजोरो पर भी हाथ मल देता है,सुमन चुह्क सी जाती है ,किशन उसे हस्ते हुए देखकर वहा से चला जाता है ,सुमन ने बहुत दुनिया देखि थी और उसे समझ आ चूका था की किशन के इरादे क्या है,वो काप सी गयी उसका ध्यान निधि की ओर गया जो अपनी मस्ती में मस्त थी ,और अजय से चिपके हुए उसके गालो से खेल रही थी,सुमन नज़रे निचे किये वहा से जाने लगी ,किशन दूर खड़ा उसकी प्रतिक्रिया देख रहा था,सुमन के आँखों में आंसू थे वो दौड़ते हुए अपने कमरे की ओर्र जाने लगी ,किशन उसका पीछा करता हुआ उसके कमरे में पंहुचा ,वो कमरे में जा कर रो रही थी की उसके कमरे में दस्तक हुई ,उसे लगा की निधि उसे बुलाने आ गयी होगी ,उसने अपने आँखों से पानी पोछते हुए दरवाजे के पास पहुचती है,लेकिन दरवाजा खोलते ही उसके होश उड़ गए वह किशन खड़ा मुस्कुरा रहा था ,सुमन ने एक सलवार कमीज पहने हुई थी वो पूरी तरह से रंगा हुआ था ,वो कुछ कह या कर पाती किशन उसे धक्का के कर अंदर कर देता है और कमरे का दरवाजा लगा देता है ,सुमन उसके चहरे को देखती है ,उसे शराब की गंध महसूस होती है ,किशन देरी ना करते हुए हुए उसे अपने बांहों में भर लेता है और उसे चूमना शुरू कर देता है ,सुमन धीरे से चिल्लाती है और उससे छूटने की कोशिस करने लगती है ,
"नहीं नहीं भईया ये आप क्या कर रहे है ,"किशन उसके चहरे को देखता है

"मदेरचोद मैं तेरा भईया नहीं हु ,समझी "वो उसके गालो पर एक जोर का तमाचा जड़ देता है ,सुमन की रोने की आवाज और भी तेज हो जाती है ,जिससे किशन को और हिम्मत मिलती है ,
"चुपचाप जो करता हु करने दे,मुह मत खोलना नहीं तो तुझे और तेरे परिवार को गायब करा दूंगा ,तेरा भाई और तेरी माँ *** कॉलोनी में रहते है ना ,"सुमन उसकी बात सुनकर दंग रह जाती है,उनका रुतबा तो वो देख ही चुकी थी ,
"अगर किसी को बताई या चिल्लाई तो सोच लेना मैं तेरे परिवार की क्या हालत करता हु,"साफ़ था ये उससे दारू का नशा ही बुलवा रहा था वरना किशन तो उसे पटाने की सोच रखा था,बलात्कार की नहीं,सुमन उसकी बातो से लाचार सी हो चुकी थी ,उसके लिए उसका भाई और माँ ही तो थे ,उसे वो खतरे में नहीं डाल सकती थी ,सुमन ने ना चाहते हुए भी अपने को किशन के हवाले कर दिया किशन अब अपनी मनमानियो में उतर आया और उसके जिस्म के हर हिस्से हो दबोचने लगा ,सुमन बस आंसू बहाती हुई किसी लाश सी खड़ी थी,किशन ने अपने हाथो से उसके कोमल और अनछुए उरोजो को निचोड़ने लगा,सुमन का रोना बढता गया वो हलके हलके से चिल्ला रही थी,पर उसने अपना हाथ पीछे बांध कर रखा था ,
किशन ने अपने हाथो को आजाद किया और पुरे शारीर पर बेफिक्री से चलने लगा उसे ये तो समझ आ चूका था की अब ये लड़की कोई भी विरोध नहीं करेगी ,आज तो उसकी चांदी हो गयी थी ,उसने सुमन के कमीज के पीछे की चैन खोल दि उसके हाथ उसके पीठ पर चलने लगे ,सुमन एक मूर्ति सी खड़ी अपने इज्जत को जो उसने इतने दिनों से सम्हाल के रखा था लुटते देख रही थी ,जिस आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उसने और उसकी माँ ने इतने दुःख उठाये थे वो आज लुटाने वाला था वो बेचारी बस खड़े होकर इसका तमाशा ही देख सकती थी कोई भी विरोध उसके परिवार के लिए जानलेवा हो सकता था,वो एक बुत सी खड़ी बस आंसू बहा रही थी,किशन ने उसके पीठ पर हाथ चलते हुए उसके ब्रा के हुक को खोल दिया ,उसके नग्गे सवाले पीठ पर उसके हाथ चलने लगे ,किशन ने उसे अपने तरफ खीचा और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया ,लेकिन सुमन ने अपना सर दुसरे तरफ कर लिआ ,किशन को गुस्सा आया और एक तेज झापड़ फिर सुमन के गालो में पड़ा वो बेचारी वही गिर गयी,किशन उसके बालो को पकड़ता हुआ उसे उठता है और फिर उसके होठो को अपने होठो में भरता है ,सुमन उसका साथ तो नहीं देती पर उसका विरोध भी नहीं करती ,वो उसके पतले से कोमल होठो की पंखुडियो को अपने दातो से कटता हुआ अपनी जीभ उसके मुह में घुसा देता है वो बेचारी बस उसे होता महसूस कर रही होती है,किशन उसकी कमीज उतर कर जमीन में फेक देता है उसके उजोरो की चोटी अब निखरकर किशन के सामने थी ,जिन्हें वो अपने मजबूत हाथो से दबाता हुआ मसलने लगता है ,
"आह्ह्ह नहीं ना भईया नहीं ना "दर्द के कारन सुमन के मुह से निकल पड़ा ,किशन ने उसके निप्पल को अपने दांतों से कटा की वो दर्द से उछल पड़ी ,उसके दांतों के निशान उसके निप्पल पर पड़ चुके थे ,

"मादरचोद बोला था ना की भईया मत बोल ,आज तो तुझे चोद कर अपनी रंडी बनाऊंगा,हा हा हा ,और अभी दर्द शुरू कहा हुआ है अभी तो असली दर्द देना बाकि है तुझे ,"किशन किसी दानव सा हसता हुआ कह गया की सुमन की आत्मा भी सिहर उठी,
किशन उसके उजोरो को अपने मुह में भरकर चूसने लगा ,जो कृत्य किसी भी लड़की को उत्तेजित कर सकता था ,वो ही बिना मर्जी से करने पर लडकियों के लिए सबसे जलील करने वाले और यातना देने वाले होते है ,जो उनकी आत्मा को मार देते है,किशन अपने मन के भरने तक उन्हें चूसता रहा और फिर उसके सलवार के नाड़े को खीच कर सलवार को निकल दिया,अपने नग्न होने के अहसास से सुमन का जमीर मर सा गया था ,किसी ऐसे आदमी के सामने नग्न होना जिसे वो प्यार नहीं करती ,अभी तक तो उसे वो अपना भाई ही मान रही थी ,किशन ने उसके शारीर पर पड़ा आखरी वस्त्र भी निकल दिया उसके बालो से भरे हुए योनी में एक उंगली घुसा दि ,उसकी पूरी तरह से सुखी योनी में वो उंगली किसी दर्दनाक हादसे से कम नहीं थी ,वो चिल्ला पड़ी ,
"नहीं नहीं मुझे बक्स दो ,मैं आपके बहन जैसी हु ,मैं मैं नहीं नहीं "सुमन जैसे खुद से ही बाते कर रही थी किशन का तो इसका कोई भी असर नहीं हो रहा था ,वो निचे बैठ कर अपने होठो को उसकी योनी तक ले जाता है और जीभ निकल कर उसे चाटने लगता है ,किशन ये क्यों कर रहा था ??????शायद इसी लिए क्योकि उसने कभी किसी का बलात्कार नहीं किया था ,उसने हमेशा ही लडकियों की सहमती से ही उनको भोगा था,पर आज वो बलात्कार कर रहा था पर उसे भी इसका आभास नहीं हो पा रहा था ,वो अपने शराब के नशे में ही डूबा सा अपने कृत्य को अंजाम दे रहा था,वही सुमन का वो अंग अब किशन के क़ब्से में था जो कोई औरत या लड़की उसे देना पसंद करती है जिसे वो प्यार करती है ,लेकिन समाज ने लडकियों को वो स्थान दिया है की वो बेचारी कभी भी किसी को अपनी मर्जी से अपनी इज्जत सौप नहीं पाती ,कोई एक खुसनसीब ही होती है जिन्हें ये सौभाग्य मिलता है की वो अपनी इज्जत अपने प्रियतम को सौपे वरना यहाँ तो शादी भी बलात्कार करने का ही लायसेंस हो जाता है ,एक लड़की के लिए जीना कितना मुस्किल होता है ये सुमन अच्छे से जानती थी पर उसे भी यही करना पड़ेगा उसने शायद सोचा भी नहीं था,वो अपने खयालो में खो जाती है जबकि किशन उसके योनी को अपने थूक से भिगो चूका होता है..

किशन ने उसे पास ही बिस्तर पर पटक दिया जैसे ही वो बिस्तर में गिरी उसके आँखों से आंसू गायब हो गए और चहरे पर एक मुस्कान तैर गयी ,किशन के लिए ये मुस्कान बहुत ही रहस्यमयी हो गयी की ये क्या हो रहा है,उसने घुर के सुमन को देखा ,और सुमन ने मुस्कुराते हुए कहा ,
"जैसे मैं एक लड़की हु ,तुम्हारी बहने भी तो लडकिय है ना "बस इतना ही बोल के वो मुस्कुराती हुई किशन को देखने लगी ,किशन के दिल में उसकी बात तीर सी लगी ,उसके चहरे पर गुस्सा आने ही वाला था की,
"कोई ऐसे ही तुम्हारी बहनों के साथ भी करेगा ,या क्या पता करता होगा,"सुमन के चहरे पर एक व्यंग भरी मुस्कान थी जो किशन के दिल को छीर कर रख देती है वो गहरे सोच में पड़ जाता है ,सुमन के जगह उसे कभी रानी दिखाई देती है तो कभी निधि का हसता हुआ चहरा ,वो अपना सर झटकता है ,
"ठाकुर साहब मैं भी किसी की बहन हु ,ये याद रखना और आपकी भी बहने है ये भी,"किशन की उत्तेजना पूरी तरह से कम हो जाती है उसके दिमाग में कई खलबलिया मच जाती है ,वो उसे मरना चाहता है पर सुमन के दिल से ये बात निकली थी जो सीधे किशन के दिल को जाकर लगी थी वो ,अपने हाथ वापस खीच लेता है और वहा से निकल जाता है और सुमन की मुस्कान अब फिर एक उदासी में बदल जाती है ........
 
अध्याय 15

बारात आने को थी सभी तैयार बैठे थे ,घर की सभी लडकियों में डिजाइनर लहंगा पहना था,सभी बहुत ही सुंदर दिख रहे थे ,वही सुमन और लाली ने साड़ी पहने हुई थी,विजय और किशन तीन चार पेग लगाकर काम में बिजी थे ,वही अजय और बाली बड़े आराम से बैठे बाते कर रहे थे ,महमानों के नाम पर गाव के ही कुछ लोग थे,विजय रेणुका के कमरे में पहुचता है,वह रेणुका दुल्हन के लिबाज में तैयार बैठी थी,साथ में ही सुमन,रानी और सोनल भी थे ,विजय को आया देख सोनल के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,
"क्यों भाई क्या हुआ "सोनल ने पूछा,
"कुछ नहीं बस कुछ काम था यहाँ पर ,"रानी भी हसने लगी ,तभी निधि आकर सुमन को अपने साथ बुला लिया ,उसके जाते ही सोनल और रानी उठने लगे,
"चलो जानती हु क्यों आये हो यहाँ ,चलो जल्दी जो बात करना है कर लो पर जल्दी ना हम लोग बस आधे घंटे में आ रहे है ,"सोनल ने जाते हुए हसकर कहा ,उनके जाते ही विजय ने दरवाजा लगाया और रेणुका को पकड़ कर किस करने लगा ,
"अरे ठाकुर साहब ये क्या कर रहे हो ,पूरा मेकअप ख़राब हो जाएगा,"रेणुका हस्ते हुए कह गयी,
"अरे मेरी जान आज के बाद पता नहीं कब मौका मिले तुझसे प्यार करने का ,"विजय ने उसके बड़े बड़े उजोरो को दबाते हुए कहा ,
"हाय क्या कर रहे हो ,और मैं कहा भाग रही हु आपसे दूर यही तो रहने वाली हु ना ,और क्या प्यार प्यार कह रहे हो आप,प्यार करते हो या अपनी आग बुझाते हो ,"रेणुका की बात विजय को चुभ गयी थी ,उसने झटके से उसे छोड़ दिया ,उसका चहरा उतर गया था जो रेणुका को समझते देर ना लगी ,

"अरे ठाकुर साहब आप तो बुरा मान गए ,हमारा रिश्ता कभी ऐसा नहीं था की हम एक दुसरे को प्यार करे पर मुझे एक बात तो पता है की आपने मुझे कभी धोखा नहीं दिया ,आप ने मुझे जितना सम्मान और मजा दिया है उतना मुझे कोई नहीं दे सकता,"रेणुका उसके पास आई और अपने होठो को उसके होठो पर लगा दिया ,पर विजय उन्हें चुसना ही भूल गया था,रेणुका ने उसके सर को उठाते हुए उसकी नजरो को देखा
"विजय मुझे देखो ,"विजय ने रेणुका के चहरे को देखा,
"हम बचपन से साथ है ,हमारे बीच में जो भी हुआ वो बस जिस्म की जरुरत थी पर क्या सचमे ऐसा था ,मैंने हमेशा तुम्हे अपना पति ही माना ,पर हम अलग है हम अब भी सबकुछ कर सकते है पर हम कभी उस रिश्ते में नहीं बंध सकते जिसे शादी कहते है ,"पता नहीं आज विजय को क्या हो रहा था ,उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उससे उसकी सबसे बड़ी सम्पत्ति छीन रहा हो ,वो भावुक हो गया था,उस लड़की के लिए जिसे उसने हमेशा ही बस एक जिस्म ही समझा था,उसने रेणुका के चहरे को देखा उसके आँखों में आंसू थे और उसका काजल बहने को हो रहा था वो आगे बढकर उसके आँखों का पानी अपने हाथो से साफ करता है,
"रेणुका मैं नहीं कह सकता की मैं तुम्हे प्यार करता हु ,पर तुम मेरे लिए हमेशा ही बहुत इम्पोर्टेंट रहोगी ,तुम्हे मेरे कारन कभी भी कोई तकलीफ नहीं होगी,ये मेरा वादा है तुमसे और तुम्हारी सभी तकलीफों में मैं तुम्हारे साथ रहूँगा,अगर तुम चाहो तो शादी के बाद कभी तुम्हारे रस्ते में नहीं आऊंगा,"विजय ने रेणुका के माथे को चूम लिया ,इसपर वो हस पड़ी ,
"क्या ठाकुर साहब आप से दूर जाउंगी ये तो मैं सोच भी नहीं सकती ,और होने वाला तो नाम का पति होगा असली पति तो आप ही होंगे ,और मुझे माँ भी तो आपको ही बनाना है ना "रेणुका ने अपनी शोखिया दिखाई की विजय दीवाना हो गया और उसने रेणुका के होठो को चुसना सुरु किया ,अपनी जीभ रेणुका के होठो में डालकर वो उन्हें चूसने लगा ,वैसे तो दोनों के लिए कोई नयी बात नहीं थी पर आज बात कुछ अलग थी ,दोनों बहुत ही शिद्दत से एक दुसरे से लिपटे हुए थे ,रेणुका एक चमकीले लाल रंग की साड़ी पहने थी,हाथ लाल रंग की चूडियो से भरा था और गले में कुछ जेवर थे ,विजय का हाथ उसके खुले कमर में गया वो उसे मसलने लगा ,रेणुका के मुह से एक आह निकली और उसने विजय के होठो को काट लिया ,विजय ने एक मुस्कान देकर उसकी साड़ी को ऊपर उठाना सुरु किया ,साड़ी कमर से ऊपर हो चुकी थी की गाजे बजे की आवाजे होनी शुरू हो गयी ,बारात आ चुकी थी और उनके पास जादा समय नहीं थी ,विजय ने जल्दी से अपने पेंट को निचे किया और अपने मुसल को निकल कर रेणुका के जन्घो के बीच लाया उसके अन्तःवस्त उसे रोक रहे थे उसने उसे उतरा नहीं बस साईड किया,उसकी बालो से भरी हुई चूत पहले से ही गीली थी ,विजय ने उसे थोडा सा सहलाया और अपने मुसल को निशाने पर लाकर उसके अंदर करने लगा ,
रेणुका ने उसे अपने बांहों में खीच लिया और अपने जिसमे को उसके हवाले करते हुए उसके बांहों में समां गयी ,विजय उसे पास के दिवार पर टिका दिया और पहले बड़ा झटका मारा ,रेणुका के हाथ विजय के सर के चारो तरफ थे और दोनों के होठ आपस में मिले हुए बस चूस रहे थे ,दोनों आनद के सागर में गोते लगा रहे थे,पहला झटका पड़ते ही रेणुका के चूडियो की आवाज सुनाई दि जिससे विजय का मुसल और भी फुल गया,और उसने अपने सांसो को रोककर तेज झटके लगाने शुरू किये ,एक तूफान सा उस कमरे में आया और दोनों अपनी इज्जत,दर्द ,थकान भूलकर बस एक दुसरे में खोने लगे

"आह आह आह आह ठाकुर साहब आह विजय मेरी जान आह मैं तुम्हारी हु आह आह आह "
"हां हां हां हा मेरी रांड ,हा मेरी जान ,हा मैं तुझे माँ बनाऊंगा हां हा हा ,आह आह आह ,"
"हा बनाओ मुझे माँ ,आह हम्म हूम "विजय अपनी पूरी ताकत लगा रहा था और पुरे कमरे में उनकी कहारे गूंज रही थी,दोनों में अपने में मस्त थे चूडियो की आवाज से पूरा कमरा गूंज गया था ,और अब दोनों के काम रस ने छप छप की आवाजे करनी शुरू कर दि ,विजय ने उसे उठाकर दीवाल के तरफ उसका मुह किया रेणुका अपने हाथो से दिवार का सहारा लिए खड़ी हो गयी ,विजय में पीछे से उसके बालो को पकड़ा और उसके योनी में अपना मुसल पेल दिया ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी घोड़ी की सवारी कर रहा हो ,उसके जन्घो से टकराते रेणुका के निताम्भो की आवाज एक लयबद्ध रूप से थाप पैदा कर रही थी ,रेणुका के नाजुक निताम्भो से ठकराने पर विजय और भी उत्तेजित हो जाता था ,
"मदरचोद रांड ,तुझे तो मैं जिंदगी भर ऐसे ही चोदुंगा ,आह आह आह "
"हा हा हा मेरे राजा ऐसे ही ,ऐसे ही ऐसे ही आह आह ऊऊऊ ओओ ओ ओ ओ "विजय उसके मुह में अपनी उंगलिया घुसा देता है जिसे वो चूसने लगती है ,विजय अपनी पूरी ताकत हर एक धक्के में लगा रहा था ,
इधर कमरे के बहार सोनल और रानी रेणुका को बुलाने आने वाले थे ,जैसे ही वो कमरे के दरवाजे में दस्तक देने वाले होते है ,उन्हें रेणुका की आहे सुनाई देती है ,दोनों को समझ आ चूका था की अंदर क्या हो रहा है ,उनके चहरे पर एक मुसकान फैली और वो कमरे से अलग हो इन्तजार करने लगे ,कुछ ही देर में रेणुका और विजय की एक जोरदार चीख फैलती है की सोनल और रानी आसपास देखने लगते है की कोई पास तो नहीं है ,सोनल जल्दी से दरवाजा खटखटाती है ,यहाँ विजय अपनी मर्दानगी का गढ़ा पानी रेणुका के अंदर छोड़ रहा था ,की दरवाजे में हुई दस्तक से दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराते है और अलग होकर अपने कपडे सम्हालते है ,और दरवाजा खुलते ही सोनल आकर विजय के कानो को पकड़ कर खीच लेती है ,
"अरे ये क्या कर रही है ,"

"सालो तुमको यहाँ बात करने के लिए छोड़ा था की रासलीला करने "
"अरे बात ही तो कर रहे थे ,"
"हा सालो बात कर रहे थे ,बहार तक आवाज जा रही थी तुम्हारे बात की और अगर निचे वो नगाड़े नहीं बज रहे होते ना तो निचे भी पहुच जाती ,और तुझे शर्म नहीं आती रे ,बाहर तेरा शौहर बारात लेकर खड़ा है और यहाँ तू ,.छि "सोनल ने छि तो कहा पर उसके चहरे पर मुसकान साफ थी अगर रेणुका अपना सर उठाकर देखती तो शायद उसे समझ आ जाता
"अब सर क्या झुका के खड़ी है जा जाकर बाथरूम से हो आ फिर तुझे निचे भी जाना होगा ,चल "रेणुका भागती बाथरूम में घुस जाती है वही विजय सोनल के कमर को पकड़कर अपने पास खिचता है और उसके गालो में एक चुम्मन ले लेता है ,
"थैंक्स यार तूने मेरी एक मन्नत पूरी कर दि ,"सोनल अपने को छुड़ाती है ,
"चल भाग साले तेरी मन्नत नहीं ये तेरी हवस है और जल्दी से निचे जा भईया तुझे ढूंढ रहे है "
विजय जल्दी से सोनल को एक किस करता है
"मेरी बहन ग्रेट है "और वहा से निचे चला जाता है ,
 
अध्याय 16

इधर किशन अपने किये पर पछता रहा होता है ,उसने कभी किसी से माफ़ी नहीं मांगी थी,पर आज ना जाने उसका दिल ये क्यों कर रहा था की वो जाय और सुमन से माफ़ी माग ले ,लेकिन वो उससे नजरे चुरा रहा था जिसका आभास सुमन को हो चूका था,ऐसे तो किशन आज भी नशे में था,पर उसके तेवर बदले से थे ,निधि और सुमन बैठे इधर उधर की बाते कर रहे थे,तभी निधि ने सुमन से कुछ लाने को कहा ,सुमन उठ कर निधि के रूम की और बढ़ी रास्ते में उसे किशन आता हुआ दिखा,किशन का धयान उसपर नहीं था ,की अचानक उसने सुमन को देखा और नजरे झुकाए थोडा अलग जा कर खड़ा हो गया ,इस बात को सुमन ने नोटिस कर लिया और उसके पास से गुजरती हुई वो रुक गयी ,किशन अपनी नजरे दूसरी तरफ किये हुए था,उसे जैसे ही आभास हुआ की सुमन उसके पीछे ही खड़ी है वो झट से पीछे मुड़ा,
"तुम "किशन की आवाज भी भारी हो चली थी ,वही सुमन उसे घूरे जा रही थी ,
"कुछ कहना है तो कह दीजिये ठाकुर साहब क्यों खुद को जला रहे है ,हम तो गरीब लोग है हमारे इज्जत की कोई कीमत नहीं होती ,फिर आप क्यों यु अपना चहरा उतारे घूम रहे है "सुमन अभी भी उसे घुर रही थी,

"मैं वो मैं "किशन के लिए कहना मुस्किल था क्योकि उसे खुद ही नहीं पता था की उसे क्या कहना है ,उसके शब्द बड़ी मुस्किल से निकल पाए,
"मुझे माफ़ कर दो ,मुझसे गलती हो गयी ,मैंने आज तक कभी भी किसी के साथ यु जबरदस्ती नहीं की है ,पर कल शायद नशे में .."किशन आगे कुछ नहीं कह पाया उसकी नजरे अभी भी निचे थी ,वही सुमन के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी,
"आप एक नौकर से माफ़ी मांग रहे है ठाकुर साहब ये तो आपको शोभा नहीं देता ,आप तो मेरी माँ और मेरे भाई को मरने वाले थे ,आप कल जो भी करते मैं आपको ना नहीं कह पाती पर क्या हुआ की आप मुझ अभागन को बक्स दिए "किशन शर्म से पानी पानी हो रहा था,ना जाने कितनी लडकियों की इज्जत से खेलने वाला शख्स आज खुद शर्मिंदा खड़ा था,

"मुझे अपनी बहने याद आ गयी ,तुम्हारी बाते मुझे दिल से दहला गयी ,मैं तुम्हारी जगह अपनी बहनों को रखा और मेरी रूह काप उठी,मैंने कितनी ही लडकियों के साथ,,,,,,पर आज तक मैंने किसी से जबर्दस्ती नहीं की है ,मुझे माफ़ कर दो और पता नहीं तुममे ऐसा क्या है की मैं अपने को रोक नहीं पाया ,तुम मुझे अच्छी लगती हो पर वो ,,,..ओओह सॉरी मुझे ...यानी मेरा मतलब है की मैं ..मैं जबर्दस्ती नहीं करना चाहता था,लेकिन वो ." किशन को कहने को शब्द नहीं मिल रहे थे वही किशन का मतलब समझ सुमन की दिल की धड़कने बदने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था की वो कैसा रियेक्ट करे ,जो आदमी कल उसकी इज्जत लुटने वाला था वो आज उससे डर रहा है यही नहीं वो कह रहा है की वो मुझे पसंद करता है ,सुमन बड़े ही उलझन में फस चुकी थी ,वो ये भी जानती थी की किशन झूट नहीं कह रहा है और ना ही एक्टिंग ही कर रहा है ,उसने छोटी सी उम्र में बहुत दुनिया देखि थी ,उसे अच्छे बुरे का ज्ञान तो था ,ना जाने कितने लोग उसे बुरे नजरो से देखते थे ,और ना जाने कितनो ने उसे खरीदने की और पटाने की कोसिस की थी पर उसने कभी आपने आत्मसम्मान से समझोता नहीं किया था ,लेकिन आज जो शख्श उसके सामने था वो झूट नहीं कह रहा था ,उसे तो पता ही नहीं था की वो कुछ कह गया वो बात उसके दिल के किसी कोने से अनजाने में निकल गयी थी जिसे वो रोकना चाहता था,पर किशन की बातो में कितनी भी सच्चाई क्यों ना हो सुमन को ये पता था की किशन उससे दिल से प्यार नहीं कर सकता ,और कर भी लिया तो कभी उसे अपना नहीं बनाएगा ,कहा किशन कई करोडो का मालिक और कहा वो एक नौकरानी,..उसने अपने होठो में आती मुस्कान को सम्हाला और इस बात के आभास ने उसके होठो में मुस्कान की जगह एक दर्द भरी उदासी ला दि ,वो अपने मुफलिसी के दर्द का अहसास कर मुस्कुरा पड़ी ,
"हम नौकर है साहब ,हमें पसंद कीजिये ,हमारा इस्तमाल कीजिये लेकिन दिल से ना लगाइए,"सुमन के होठो की दर्द भरी मुस्कान ने किशन के दिल को छल्ली छल्ली कर दिया ,सुमन वहा से चली गयी और किशन ..वो बस उसकी बातो की गहराई और दर्द के आभास को महसूस करता खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा....
इधर
अजय और बाली बैठे बाते कर रहे थे की एक नौकर भागता हुआ उनके पास आया ,
"ठाकुर साहब वो कोई मेहमान आये है साथ में कोई मेमसाहब भी है ,"अजय ने बड़े ही आश्चर्य से उसे देखा वो बाली के साथ बहार गया ,एक बड़ी सी कार खड़ी थी और एक औरत काले कलर की साड़ी पहने उस कार के पास खड़ी थी ,उसके गोर रंग और मादक जिस्म पर वो साड़ी कमाल की लग रही थी ,कहा जाय तो जैसे सनी लिओन काले साड़ी पहन कर खड़ी हो ,अजय उसे पहचानने की कोसिस कर ही रहा था की बाली के मुह से निकला ,
"अरे मेरी तुम लोग आ गए ,"अजय को याद आया की ये तो मेडम मेरी है ,डॉ चुतिया की सेकेटरी ,उसने नजरे घुमाई उसे डॉ कार से थोड़ी दूर अजय के गार्डन में एक पौधे को बड़े गौर से देखते हुए दिखाई दिए ,मेरी आगे बढकर बाली के गले लगती है और फिर अजय के इससे अजय थोडा गबरा जाता है जिसे देखकर बाली और मेरी दोनों हस पड़ते है ,
अजय और बाली फिर डॉ के पास जाते है ,

"अरे डॉ साहब क्या देख रहे हो ,"बाली उसके पास जाता है डॉ उठकर उससे गले मिलता है ,और अजय उसके पैर छूता है पर डॉ उसे भी अपने गले लगा लेता है ,
"कुछ नहीं यार बस इस पौधे को देख रहा हु ,ये बूट जोलोकिया है ना ,"सब उन्हें आश्चर्य से देखते है ,
"ये तो मिर्ची का पौधा है डॉ साहब ,अभी इसमें मिर्च नहीं आये है पर हमरे एक दोस्त ने इसे गिफ्ट दिया था ये इसे असम से लाये थे ,बस एक ही पौधा है ,"
"हम्म सायद तुम्हे नहीं पता इसका नाम है बूट जोलोकिया ये विश्व की सबसे तीखी मिर्चियो में एक है ,इसे नागा चिली भी कहते है और बहुत से नाम है इसके ,इसे अलग ही रखना और कभी नग्गे हाथो से नहीं छूना ,अगर इसमें मिर्च लग जाय तो बढ़िया है वरना ऐसे मौसम में ये सायद ही होगा ,"डॉ बड़े गंभीरता से बता रहे थे की मेरी ने कहा ,
"विजय कही दिखाई नहीं दे रहा है "उसकी बातो से जहा अजय घबरा जाता है वही डॉ के चहरे में मुस्कान आ जाती है ,
"आप लोग अंदर आइये ना "अजय बड़े requast के भाव से कहता है ,
 
अध्याय 17

विजय जब निचे आया तो उसे मेरी और डॉ दिखाई दिए ,मेरी को देखकर उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी,मेरी से उसकी नजरे मिली तो दोनों के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,

"आज तो ये माल ही लग रही है इसे तो मैं घोड़ी बनाकर चोदुंगा,"विजय ने मन में कहा ,वही किशन भी मेरी को देखता ही रहा ,और विजय से उसके बारे में पूछा ,विजय ने उसे सिर्फ फॉर्मल इनफार्मेशन दे डी ,दोनों जाकर डॉ और मेरी से मिले ,और फिर अपने कामो में बिजी हो गए ,
बारात आ चुकी थी ,कार्यक्रम अपने सबाब पर था,दुल्हे की तरफ से भी जादा लोग नहीं थे ,अजय को शादी जल्द से जल्द निपटाने की जल्दी थी इस शादी के कारन वो कई दिनों से अपने काम में धयान नहीं दे पा रहा था,उसे शहर के माल की डील भी पूरी करनी थी ,वो डॉ और बाली के साथ बैठा हुआ था वही मेरी निधि और सुमन के साथ बाते कर रही थी ,सोनल और रानी दुल्हन को तैयार करने में बिजी थे और विजय और किशन बरातियो को खिलाने पिलाने में ,डॉ और बाली बात कर रहे होते है ,
"अरे बाली इस लड़के के घर में कौन कौन है ,"
"बस डॉ साहब बाप, सौतेली माँ और 3 भाई और है इसके वो दूसरी माँ से ही है ,"
"और इसकी माँ "
"उसका देहांत हो गया है ,काफी पहले इसकी माँ के देहांत के बाद इसके बाप ने दूसरी शादी की और फिर पास के ही गाव में आकर रहने लगे ,पहले इसका बाप शहर में रहता था,वही काम करता था ,वो रहा उसका बाप किशोरीलाल "डॉ उसे ध्यान से देखता है ,एक दुबला पतला सा आदमी लेकिन चहरे पर एक तेज झलक रहा था,और व्यक्तित्व में एक तेज दिखाई पड़ रहा था,
"दिखने में तो ये अच्छे घर का लगता है ,और इसका बेटा तो इसके जैसे बिलकुल नहीं दिखता देखो ना ,"डॉ की बात सुनकर बाली हसने लगा ,डॉ भी हसने लगा ,
"अरे डॉ साहब आप भी ना ,हमेशा चीजो को शक की निगाह से देखते है ,मैं इसके बाप को कई सालो से जानता हु ,जब से वो शहर छोड़ कर इधर बसा ,अच्चा आदमी है सीधा साधा सा मेहनती है ,बेचारा "
"सीधा साधा ,ह्म्म्म चहरे से तो लगता नहीं "डॉ ने हलके से कहा ,
"मिलवाओगे नहीं "डॉ ने बाली से कहा ,

"हा हा क्यों नहीं ,अरे अजय जरा किशोरीलाल को बुला तो ."अजय जाकर उसे बुलाता है वो आकर हाथ जोड़े खड़ा हो जाता है ,
"ये डॉ साहब है ,हमारे खास दोस्त है शहर से आये है ,"किशोरीलाल हाथ जोड़कर नमस्कार करता है,
डॉ पास पड़े एक कुर्सी को दिखाते हुए कहते है "अरे बैठो बैठो "
किशोरीलाल हाथ जोड़ता हुआ "अरे साहब आप लोगो के साथ बैठे ये हमारी औकात कहा ,"डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ,
"अरे आज तो तुम दुल्हे के बाप हो बैठो ना यार "डॉ जिद करके कहता है ,वो बाली की ओर देखता है ,बाली भी उसे बैठने का इशारा करता है,वो डरते हुए वहा बैठ जाता है,
"तो तुम शहर में काम करते थे ,"डॉ ने सवाल किया ,
"जी साहब "
"कहा "
"जी वो ...वो शारदा काटन मिल में ,मिल बंद हुआ तो काम की तलाश में इधर आ गया ,"
"ह्म्म्म कहा के रहने वाले हो ,"
"जी बिहार का "
"लहजे से तो बिहारी नहीं लगते ,"
"वो ..वो बचपन से ही मिल में काम कर रहा हु ना ,बचपन में घर से भाग गया था और यहाँ आकर काम करने लगा फिर कभी वापस ही नहीं गया ,"

"हम्मम्मम्म पहली पत्नी कहा की थी तुम्हारी "थोड़ी देर एक सन्नाटा सा हो जाता है,किशोरीलाल के आँखों में आंसू आ जाता है ,बाली को लगता है की डॉ कुछ जादा ही सवाल जवाब कर रहे है ,वो इशारे में डॉ को रुकने को कहते है वही डॉ बाली को बस चुप रहने को कहता है ,
"पता नहीं कहा की थी मिल में मजदूरी करती थी ,उसका भी कोई नहीं था और मेरा भी कोई नहीं था तो मैंने उससे शादी कर ली ,पर मिल में लगी आग से वो ,"वो फफक कर रो पड़ा ,डॉ को याद आया सालो पहले मिल में आग लगी थी ,आग छोटी थी और एक औरत के जलने की खबर आई थी जिससे बहुत बवाल भी मचा था ,
"लगता है बहुत ही जादा प्यार करते थे अपनी बीवी से ,"
"जी हा ,मुझे माफ़ कर दीजिये की मैं इस तरह ,"
"नहीं नहीं मुझे माफ़ करो की मैंने तुम्हारे जख्मो को कुरेद दिया ,"डॉ उसके कंधे पर अपना हाथ रखते है और उसे शांत करने लगते है ,
 
अध्याय 18

आज विजय बहुत ही बेचैन था ,बेचैनी थी की आज हमेशा उसके साथ रहने वाली उसकी आईटम किसी और का बिस्तर गर्म करेगी ,ये सोचकर भी उसका शारीर सिहर उठता था,वो रेणुका से प्यार तो नहीं करता था पर ,,,,पर ये क्या था,आज मेरी भी उसे बहुत भाव दे रही थी पर उसे उसके तरफ भी कोई आकर्षण नहीं हो रहा था ,लगभग 12 बजे ही शादी का कार्यक्रम खत्म हुआ था और लड़की की बिदाई कर दि गयी थी ,एक दो दिन रेणुका को अपने ससुराल में रहना था फिर वो वापस हवेली पर आ जाती,विजय बिदाई के बाद ही किशन के साथ पिने चला गया ,थोड़ी देर में ही किशन भी वहा से चला गया और विजय ने कुछ जादा ही पि ली थी ,वो घर के बहार बने गेरेज में बैठा पि रहा था की उसे किसी के पायलो की आवाज सुनाई दि,सामने देखा तो सोनल और किशन खड़े थे किशन ने उसकी हालत देखकर सोनल को बुला लिया क्योकि वही थी जो उसे कुछ समझा सकती थी जबकि किशन तो उसे समझाकर थक चूका था,सोनल को देखते ही उसने अपना ग्लास छिपाने की नाकाम कोसिस की और किशन को घुर के देखा ,किशन ने हसकर उसे देखा ,
"लो दीदी अब आप ही सम्हालो मैं चला बहुत नीद आ रही है मुझे ,"सोनल ने विजय को गुस्से से घुर की विजय का आधा नशा तो जाता ही रहा ,सोनल अभी भी अपने लहंगा चोली में ही थी वो विजय के पास आकर खड़ी हो गयी,
"क्या देवदास बनकर बैठा है यहाँ पर चल उठ "उसने विजय का हाथ पकड़कर उठाने की कोसिस की ,
"तू भी बैठ ना यहाँ ,या चले जा मुझे पिने दे आज "विजय को उठाना इतना आसान तो नहीं था,
"क्या बैठ जाऊ,चल ना भाई,चल एक काम कर यहाँ से चल,ओफ्फ कितने मच्छर है यहाँ पर कितनी गन्दगी है यहाँ बैठा पि रहा है ,चल तेरे कमरे में चलते है ठीक वहा बैठकर पि लेना जितना पीना है ,और मैं रात भर तेरे साथ बैठ जाउंगी,"
"आज की रात तो बैठ जाएगी बाकि रातो का क्या होगा,"विजय अपना सर उठाकर हसता है ,सोनल को गुस्सा तो आता है पर इस हालत में उसे कुछ कहना भी उसे उचित नहीं लगता,
"तू चल रहा है की नहीं ,भाई को बुलाऊ क्या "सोनल झूठा गुस्सा दिखाकर अपना तुरुप का इक्का फेकती है ,विजय भईया का नाम सुनकर ही सहम जाता है ,और बड़ी मज़बूरी सा उठता है ,सोनल उसे अपना सहारा देकर उठती है ,उसका वजन इतना था की बेचारी फुल सी सोनल दब सी जा रही थी ,विजय अपने को सम्हालता है और सोनल को अपने बांहों में कस लेता है ,और पास रखी बोतल को पकड़कर सोनल को दे देता है,
"तेरा भाई इतना भी कमजोर नहीं है की उसे सहारे की जरुरत पड़े मेरी जान ,तू बस ये बोतल सम्हाल "सोनल मुस्कुराते हुए वो बोतल पकड़ लेती है और विजय उसे अपने बांहों में उठा लेता है ,
"आउच भाई क्या कर रहा है ,नशे में है खुद भी गिरेगा और मुझे भी गिरा देगा,"सोनल एक मुस्कान लाकर विजय के सर को सहलाती है ,
"तेरा भाई तुझे कुछ नहीं होने देगा मेरी जान ,नशे में हु लेकिन इतना भी नहीं की अपनी फुल सी गुडिया को नहीं सम्हाल पाऊ "सोनल बस हस देती है ,विजय ने शायद पहली बार उसे गुडिया कहा था,
"ओह तो मैं आपके लिए गुडिया हो गयी ,"सोनल हस्ते हुए कहती है ,
"चल बे मुझे और पीना है ,कहा चले तेरे रूम या मेरे रूम "
"तुम्हारे ही रूम चलो ,मेरा रूम तो बिखरा होगा अभी "विजय उसे उठाकर अपने रूम ले जाता है और बिस्तर पर डाल देता है ,उसके हाथो से शराब की बोतल लेकर वो एक घुट सीधे ही लगाता है ,सोनल अपने भाई के इस रूप को देखकर उदास हो जाती है और उसके आँखों में आंसू की कुछ बुँदे तैर जाती है ,जिसका आभास विजय को भी हो जाता है ,वो अपने चहरे को सोनल के चहरे के पास लाता है ,सोनल को उसके मुह से आते शराब की गंध से उबाई आती है पर अपने भाई के चहरे को देखकर वो उसी में खो सी जाती है ,विजय अपने होठो से उसके आंसुओ को पि लेता है और शराब को सोनल के मुह में लगार्ता है,सोनल उठकर बैठ जाती है ,और अपने आंसुओ को पोछकर उसे घूरती है विजय ना जाने क्या कर रहा था उसे भी इसका इल्म नहीं था,

"पागल हो गया है क्या कभी देखा है मुझे शराब पीते हुए,"विजय उसे नशीली आँखों से देखता है और
"ओह मुझे लगा की रेणुका है ,"सोनल के चहरे में झूठा गुस्सा आ जाता है क्योकी वो जानती है की विजय मजाक कर रहा है ,विजय के चहरे में भी एक मुस्कान आ जाती है ,वो उसे पलटा कर उसके कमर के ऊपर बैठ जाती है,
"तुझे आज बहुत कुछ लग रहा है अब बताती हु तुझे ,"सोनल अपने उंगलियों को विजय के कमर के पास लाकर उसे गुदगुदाती है वो जानती थी की ये विजय की कमजोरी था ,विजय हसने लगत्ता और छूटने के लिए छटपटाने लगता है ,
"हा हा हा हा माफ़ कर दे बहन अब नहीं बोलूँगा कुछ हा अह प्लीज् ना ओह प्लीज् ना हा हा अह "सोनल उसे बड़े मजबूती से पकडे हुई थी और गुदगुदा रही थी ,विजय को जब बर्दास्त नहीं होता तो वो शराब की बोतल को छोड़कर सोनल के कमर को पकड़ता है और उसे पलटा कर अपने निचे ला देता है सोनल को समझ आ चूका होता की अब बाजी विजय के हाथो में है और उसकी ताकत के सामने उसकी कुछ भी नहीं चलेगी,वो मुस्कुराती हुई अपने को उसके हवाले कर देती है ,विजय उसके प्यारे से चहरे को देखता है उसने उसे पलटाया था की वो उसे गुदगुदाए और अपना बदला ले पर सोनल के प्यारे से चहरे को देखकर वो सबकुछ भूलकर बस उसे ही देखने लगा ,सोनल के मुस्कुराते हुए फडफडाते हुए होठ ,और उसकी लालिमा उसके माथे का टिका ,उसका गोरा चहरा और बड़ी बड़ी मासूम सी आँखे ,काले पलक नैनों के निचे का वो काजल ,वाह ,........
"कितनी प्यारी है तू मेरी जान ,"विजय ने अपने नशीले बोझिल आँखों से अपने जान की खूबसूरती का दीदार किया ,सोनल भी मुस्कुरा उठी उसने अपने हाथो को विजय के सर पर रख दिया और उसे अपने ओर खीचा ,विजय उससे गले लग कर उसे अपनी बांहों में भर लिया और सर उठाकर उसके गालो में एक भीगा सा किस दे दिया ,सोनल उसका चहरा सहलाने लगी ,विजय ने उसके नाक से अपनी नाक रगड़ी और उसके होठो पर भी एक किस कर लिया ,सोनल के होठो पर मुसकान गहरी हो गयी ,लेकिन विजय ने अब उसके निचले होठो को अपने होठो पर ले लिया और उसे चूसने लगा ,सोनल की आँखे बंद हो गयी और मुस्कान ने एक बेचैनी का रूप ले लिया ,उसके मुख से एक आह निकली और उसने अपने हाथो पर जोर देकर विजय को अपने से अलग किया .

"आअह्ह्ह्ह भाई ये क्या कर रहे हो,"जैसे विजय को होश आया वो जल्दी से उसे छोड़ा और उठाने को हुआ पर सोनल ने अपने हाथो से उसके सर को दबा दिया ,
"सॉरी बहन वो .."सोनल फिर मुस्कुरा पड़ी
"सॉरी की क्या बात है ऐसे बहुत अच्छा था,मुझे तो पसंद आया ,"विजय भी मुस्कुरा दिया
"तो मुझे हटाई क्यों "
"तो क्या करती तू भाई है मेरा समझे कमीने कही के "उसने प्यार से कहा
"जब तक तू है तब तक तो मुझे सम्हाल लेगी फिर मैं क्या करूँगा ,रेणुका के जाने का पता नहीं क्यों बहुत दुःख हो रहा है "विजय में अपना मुह बनाकर कहा की सोनल को हसी आ गयी,
"तुझे दुःख नहीं हो रहा बेटा तेरी जल रही है की अब तेरे आईटम की कोई और लेगा ,"सोनल हसने लगी ,विजय ने उसकी कमर कसकर दबाया और अपनी ओर खीचा
"तेरी तो "
"आह हा हा हा ,"सोनल ने अपना हाथ उसके सर पर दबाया ,
"मुझे किस कर ना भाई जैसा कर रहा था ,"
"क्यों तू तो मेरी बहन है ना "सोनल फिर हस पड़ी
"तो क्या हुआ जब बहन बोले तो करना चाहिए समझे "सोनल इतराते हुए बोली
"भाग जा तू ,,नहीं करूँगा किस तुझे अब "सोनल ने आँखे चौड़ी की वही विजय झूठे गुस्से में भी हस पड़ा ,सोनल ने उसे अपनी और खीचा
"साले देखती हु कैसे नहीं करेगा "सोनल उसका चहरा अपने ओर खीचने लगी और विजय हसता हुआ अपने सर को इधर उधर करने लगा ,सोनल को भी हसी आ रही थी,और वो हस्ते हुए उसके होठो को अपने होठो तक लाने की कोसिस करने लगी पर वो जल्द ही थक गयी और रोनी सी सूरत बनाकर उसे छोड़ लेट गयी ,विजय को अपनी प्यारी बहन की ये सूरत पसंद नहीं आई और उसने अपने होठो को उसके होठो के पास लाकर रोक दिया सोनल मुस्कुरा उठी और उसके गले में अपनी बांहे डाल दि ,पर ना ही विजय ने ना ही सोनल ने होठो को मिलाया वो बस एक दुसरे के होठो की गर्मी को अपने होठो से महसूस करने लगे ,विजय थोडा और निचे हुआ तो उसके होठ सोनल के होठो पर टकरा गए ,पर जुड़े नहीं ,
"जनाब अब छू भी लीजिये ,या हमें ही पहले करना पड़ेगा ,"सोनल ने मुस्कुराते हुए कहा ,
"कुछ करना नहीं है जान बस होने दे ना ,तू बहन है मेरी तुझे प्यार कर सकता हु जितना तू चाहे जैसा तू चाहे पर बस प्यार हो तभी और प्यार होता है किया नहीं जाता ,ये तू ही कहती थी ना ,"

"हा मेरे समझदार भाई ,"सोनल उसके सर को दबाती है और अपने होठो से उसके निचले होठो को चूसने लगती है ,विजय अब भी कुछ नहीं कर रहा था,सोनल ने आखे बंद कर दि ,विजय ने बस कुछ देर तक अपनी बहन के होठो को फिल किया और जब उससे रहा नहीं गया तो उसने अपने हाथो को उसके सर के पीछे किया और उसके होठो पर अपने होठो को भर दिया सोनल के मुह से एक गहरी सांस निकली और उसने भी अपने बांहों का घेरा जकड लिया और विजय को जोर से अपनी ओर खीच लिया ,विजय ने अपने होठो को उसके होठो में घुसा दिया और दोनों की आँखे बंद हो गयी दोनों ही बस एक दुसरे की नाजुकता और अपने लिए प्रेम को महसूस कर रहे थे ,.दो होठ ही नहीं बल्कि दो जाने मिल गयी थी,दो सांसे मिल गयी थी ,दो धड़कने मिल गयी थी,दो जस्बात मिल चुके थे,करने को कुछ भी नहीं था बस जो था वो प्यार था ,बस एक दूजे में खो जाने की आशा और एक ही चाह..वो बहुत ही धीरे धीरे एक दुसरे के होठो को चूम रहे थे ,जब वो अलग हुए तो दोनों के ही आँखों में आसू की बुँदे थी,दोनों नाम आँखों से एक दूजे को देखते है,आँखे नाम थी और चहरे पर मुस्कान एक अजीब सी चमक चहरे में था एक संतुष्टि का भाव उन्हें घेरे हुए था,
दोनों फिर एक दुसरे को देखते है और विजय अपने होठो को उसके पास लाता है और उसके होठो पर हलके से किस कर उसे अपने बांहों में समां कर अपनी ओर खिचता है सोनल भी अपने भाई से लिपट कर उसके चहरे को देखते हुए उसके सांसो से अपनी सांसे मिलाती हुई निढल सी उसकी बांहों में सो जाती है ,,,,,.....
 
अध्याय 19

इधर अजय के कमरे में ,
निधि चम् चम् करती हुई कमरे में आती है तब तक अजय नहीं आया हुआ होता ,वो बचे खुचे काम निपटा कर कमरे में प्रवेश करता है कमरे में निधि को देखकर उसके चहरे में एक मुस्कान आ जाती है ,वो बहुत ही थका हुआ होता है और निधि दर्पण के सामने खड़ी हुई अपने को निहार रही थी ,अजय भी अपने कपडे निकल कर एक निकर पहन लेता है निधि को देखता हुआ हसता है ,
"अभी तक अपने को देख रही है मेरी बहन "निधि उसे देखकर एक हलकी सी हसी में हस्ती है और उसके पास जाती है अजय अपने कपडे उतर रहा होता है ,

"भाई बहुत थक गयी हु आज तो मैं ,मैं नहाने जा रही हु आप भी चलोगे क्या ,"
"नहीं अभी थोड़ी एक्सेरसयिस कर लेता हु फिर नहाऊंगा,"
"ओके तो जल्दी से करो फिर दोनों साथ नहायेंगे,"अजय उसकी बात सुनकर हलके से मुस्कुराता है ,लेकिन कुछ कहता नहीं क्योकि उसे पता था की अगर निधि ने कह दिया तो कह दिया ,अजय जाकर थोड़ी मोड़ी एकसरसाइज करता है ,जब पसीने से लथपथ हो जाता है तब थोड़ी देर के लिए हवा में बैठ कर अपने पसीने को सुखा रहा होता है ,की निधि भी उसके पास आकार बैठ जाती है ,और उससे लिपट जाती है ,
"अरे तू कपडे तो चेंज कर ले ,अभी तक इतने भरी कपड़ो में घूम रही है ,"निधि हसते हुए वहा से उठ कर अपने कमरे में चली जाती है वापस आने पर वो एक काली nighty पहने थी ,अजय को पता नहीं कुछ दिनों से क्या हो जा रहा था की वो अपने बहन के जिस्म से नजरे ही नहीं हटा पता था ,उसका निधि के लिए प्यार तो सबको ही -पता था पर यु जो उसे एक आकर्षण की अनुभूति हो रही थी वो उसके समझ में नहीं आ रही थी,निधि मुस्कुराती हुई उसके पास जाती है ,अजय भी नहाने को तैयार हो जाता है ,अजय बाथरूम में जाकर एक टब में लेट जाते है ,हलके गर्म पानी में उसे बहुत सुकून मिल रहा था ,वो निधि को देखकर पास आने का इशारा किया निधि ने अपनी nighty वही उतर कर रख दिया और नग्गे है आकर अजय के ऊपर लेट गयी ,निधि का ऐसा करना अजय के लिए कोई नयी बात तो नहीं थी पर उसे निधि के अंगो का जो अनुभव हो रहा था वो उसके लिए बहुत ही आश्चर्य जनक था ,क्योकि वो निधि के नग्गे और गुप्त अंगो को छूने से बच रहा था ,आज तक उसकी कोई भी लड़की से दोस्ती या महोब्बत नहीं रही ,उसने नारी को जाना ही नहीं था ,जो उसे पता था वो अपनी बहनों से या मौसी से पर वो केवल और केवल प्यार ही था ,

अजय की उम्र तो अब शादी की हो चली थी उसके भाइयो का सम्बन्ध कई लडकियों से था ,उसे भी वासना का पता था ,और उस क्रिया का भी जो एक मर्द और ओरत के बीच होता है पर वो निधि को एक बच्ची ही मानता था ,पर ना जाने क्यों उसे लगने लगा था की अब समय आ गया है की निधि से दुरी बनायीं जाय ,वो पगली शर्म से अनजान थी ,लेकिन अजय के लिए ये भी आसान नहीं था,निधि से दुरी वो बना भी ले लेकिन निधि ,निधि उससे दूर नहीं हो सकती ...
निधि अपने भाई की विशाल छाती पर सर रखे अपने शारीर को बस उसके हवाले कर लेटी थी ,उसके स्तनों की नुकीली गोलाईया अजय के सीने में दब रही थी वही पानी से भीगा उसका चिकना बदन अजय के बालो से भरे शारीर पर रगड़ खा रहा था ,ऐसे तो ना ही अजय को ना ही निधि को इससे कोई भी आपत्ति थी ,ना ही उनके बीच वासना की कोई झलकी भी थी पर अजय ने ठान लिया था की इस बारे में वो निधि से बात करेगा ,
"निधि ,...निधि सो गयी क्या ,"
"नहीं भाई ,बस इतना अच्छा लगा रहा है की कुछ बोलने का मन नहीं कर रहा ,"निधि ने अचानक हलचल की और अजय से अपने को रगडा,अजय उसे अपनी मजबूत बांहों में घेरा हुआ उसके सर को सहला रहा था वही निधि अपने स्तनों को उसके बालो से भरे छाती पर रगड़ रही थी ,इसमें तनिक भर भी वासना नहीं थी पर एक अजीब सा सुकून दोनों को मिल रहा था ,
"सुन ना मेरी जान ,तू अब बड़ी हो गयी है ,अब इस तरह से हमारा रहना ठीक नहीं है ,"अजय ने डरते हुए कहा क्योकि उसे निधि का गुस्सा नहीं झेलना था ,निधि भी सर उठाकर उसे देखती है ,

"क्या ऐसे रहना मतलब "
"मतलब की नंगे रहना ,मैं तेरा भाई हु ,"
निधि ने हलके से सर उठाकर उसे देखा
"तो ,तो क्या हुआ की आप मेरे भाई हो "
"अब तू बड़ी हो गयी है बहन "
"तो ,"निधि ने रूखे हुए स्वर में कहा
"तो अब तुझे और मुझे ऐसे नहीं रहना चाहिए और क्या ,"
"क्यों "निधि के सवाल थे बड़े ही आसान पर आसान से सवालो के उत्तर देना कभी कभी बहुत मुस्किल हो जाते है ,
"क्यों क्या बोला तो बड़े हो गए है ,"
"तो "निधि ने मुस्कुराते हुए कहा
"तो ऐसे नहीं रहना चाहिए ,"अजय ने प्यार से उसके सर को सहलाते हुए कहा ,
"क्यों "निधि की मुस्कान और बड गयी थी ,
"अरे क्यों क्या यार बोल तो रहा हु की अब हम लोग बड़े हो गए है ,अब तू भी बच्ची नहीं रही बड़ी हो गयी है "अजय ने हलके से झल्लाते हुए कहा
"तो ......."एक शांति सी छा गयी और अजय ने निधि को घुर के देखा और निधि खिलखिला कर हस पड़ी ,अपनी गुडिया को हसते हुए देखकर फिर अजय सब भूल गया
"खरगोस कही की "अजय ने उसके बालो को पकड़कर उसका सर उठाया और उसके गालो में किस करने लगा ,निधि भी हसते हुए अपने भाई के प्यार का मजा लेने लगी ,दोनों के शारीर गिले होने के कारण आपस में बखूबी फिसल रहे थे अजय के हाथ उसके कुल्हो पर चले गए और वो उसे सहलाने लगा ,उसका हाथ अपने निताम्भो पर महसूस कर निधि को भी बहुत अच्छा लगने लगा और वो ऊपर उठाकर अजय के होठो को अपने दांतों से काट लिया ,अजय के चहरे पर एक मुस्कान ने घर कर लिया वो उसके बालो को पकड़कर अपनी ओर खीचा और उसके होठो पर अपने दांत लगाने लगा निधि ने अपने चहरे को हस्ते हुए हटा लिया और पलट गयी अजय का हाथ फिसलता हुआ उसके योनी के ऊपर आ गया वो उसके योनी के बालो को सहला रहा था वो की पानी से भीगे होने के बाद भी शायद घने होने के कारण पूरी तरह से भीगे नहीं थे ,अजय ने अपना हाथ ऊपर लाया जो सीधे उसके पेट से होता हुआ उसकी स्तनों के पहाड़ो पर आकर रुक गया उसके हाथ बिना किसी प्रयास के ही चल रहे थे वही निधि भी अपने भाई के प्यार में डूबी हुई उसके चहरे हो अपने बांहों में समायी अजय के गालो पर अपने चुम्मानो की बारिश कर रही थी ,

निधि के होठ फिसल कर अजय के होठो के पास आता है और दोनों के गिले होठ आपस में मिल जाते है ,थोड़ी देर तो यु ही दोनों आपस में अपने होठो को रगड़ते है पर अजय के हाथो के स्तनों तक पहुचने और उसके स्तनों को हलके हाथो से सहलाने से निधि को इतना मजा आता है की उसके होठ अनायास ही खुल जाते है और अजय की जीभ मानो इसी क्षण की प्रतीक्षा में था वो उसके होठो के अंदर चला जाता है निधि बस आँखे बंद किये पहली बार घट रहे इस सुखद आभास को महसूस कर रही थी वही अजय भी अपनी सबसे प्यारी बहन के होठो को चूस रहा था ,दोनों की आँखे बंद थे और दोनों ही प्यार के सागर की लगारो में झूम रहे थे उन्हें समाज के बंदिशों का नहीं पता था ना ही वो जानना भी चाहते थे ,सही गलत के उनके लिए कुछ भी मायने नहीं रह गए थे ,वो तो बस एक ही भाष को समझने लगे थे वो थी प्यार की भाषा ..निधि ने भी अपने भाई के जीभ का स्वागत किया और अपने होठो से उसके जीभ को जकड कर चूसने लगी,पता नहीं इस खेल में एक बात और हुई की अजय ने निधि के स्तनों को हलके हाथो की जगह थोड़ी जोर से दबाया ये भी अजय ने जानबूझ के नहीं किया था पर निधि और अजय के ऊपर इसका सीधा प्रभाव हुआ और निधि ने अजय के सर को जोर से जकड लिया वही अजय के लिंग में भी एक हलचल सी हो गयी ,वो पूरी तरह से अकड़े इससे पहले ही दोनों का चुम्मन समाप्त हुआ और दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराने लगे ,निधि ने नजर उठा कर जैसे ही अजय के मुस्कुराते हुए चहरे को देखा तो निधि शर्मा गयी और अजय के सीने में जा लगी ,थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे ,
"भईया ये क्या था ,बहुत अच्छा था "

अजय क्या कहता की ये क्या था उसे तो खुद भी इसका पता नहीं था की ये क्या था ,
"ये किस था बहन और क्या था ,और चल अब सोते है बहुत रात हो गयी है ,"निधि ने अजय को और जोरो से पकड़ लिया
"नहीं मुझे नहीं सोना यही अच्छा लग रहा है मुझे आपकी बांहों में "
अजय उसके सर को सहलाता है और प्यार से उसकी ओर देखता है वो एक मासूम से बच्चे की तरह उससे लिपटे हुए सो रही थी ,अजय उसकी इस ख़ुशी में खलल नहीं डालना चाह रहा था ,इसलिए वो उसे ऐसे ही छोड़ देता है और उसके बालो को सहलाता हुआ अपनी भी आँखे बंद कर लेता है ,उसकी आँखे कब लगती है उसे भी पता नहीं चलता ,जब उसकी नींद खुलती है तो वो उठकर निधि को पोछता है और उसे उठाकर अपने बिस्तर पर लिटाता है ,.....
 
अध्याय 20

आज सुबह कुछ अजीब थी ,ना जाने कल रात क्या हुआ था की एक मदहोशी ने विजय और अजय का अपने बहनों से सम्बन्ध की परिभाषा ही बदल दि थी ,वो आज भी उन्हें उतना ही प्यार करते थे जितना की पहले किया करते थे पर बस प्यार करने का तरीका बदल गया था,वो अब और जादा अपने प्यार की गहराईयो ने जा सकते थे ,
शादी के खत्म होने से घर में एक तूफान के बाद आया सन्नाटा था वही अजय को आज डॉ और मेरी की मेहमान नवाजी करनी थी ,नाश्ते के टेबल पर आज सभी मौजूद थे जो कभी कभी ही होता था,मेरी विजय को देख देख कर मुस्कुरा रही थी ,वही किशन सुमन से आँखे ही नहीं मिला पा रहा था पर सुमन जरुर उसे चुपके चुपके देख लिया कर रही थी,सीता मौसी घर के मुखिया के खुर्सी में बैठी थी उसके बाजु में बाली फिर डॉ और मेरी बाली के सामने अजय और विजय ,चंपा समेत घर की सभी लडकिय उन्हें नाश्ता दे रही थी और पास ही खड़ी थी ,निधि अभी तक वहा नहीं पहुची थी,सीता मौसी का स्थान इस घर में बहुत जादा था माना की वो ठाकुर नहीं थी पर उसको इतना महत्व आखिर कारन क्या था ,कारन तो सभी को पता था ,की उनके बेटे ने वीर की जान बचाने के लिए अपने सीने में गोली खायी थी ,सीता को वीर और बाली भी अपनी माँ जैसा मानते थे ,

डॉ ने आखिर वो पुरानी बात छेड़ ही दि ,वो बाली की तरफ देखते हुए बोले ,
"क्यों बाली कलवा कही दिखाई नहीं दे रहा है ,"कलवा का नाम सुनते ही सभी थोड़ी देर के लिए चुप हो गए ,अजय ने सीता के तरफ देखा जिसकी आँखों में पानी आ चूका था ,बाली भी थोडा उदास सा हो गया आखिर उसने भी तो हमेशा ही कलावा को अपने छोटे भाई की तरह ही माना था,
"डॉ साहब वो यहाँ नहीं रहता कुछ सालो से पता नहीं उसे क्या हुआ है ,घर की तरफ आता ही नहीं यही पास में जो जंगल है वहा एक पहाड़ पर छोटी सी कुटिया बना कर रहता है ,कहता है सब कुछ माया है ,और मुझे इसमें नहीं पड़ना है ,सन्यासी बन गया है ,साला "बाली ने साला तो कह दिया पर अचानक उसे अहसास हुआ की सीता भी वही बैठी है और वो उसे देखकर झेप गया ,सीता ने बाली को देखकर हलके से मुस्कुरा दि ,पर उसके चहरे का वो दर्द जो एक माँ के अपने बेटे से बिछड़ने पर होता है उसके चहरे पर साफ़ दिखाई दे रहे थे ,अजय ने अपने हाथो को बड़ा कर सीता के कंधे पर रख दिया ,जिसे सीता ने चूम लिया ,उसके आँखों में अतीत की सारी बाते एकाएक ही तैर गयी ,

बात तब की थी जब जब 9 अगस्त 1942 को भारत छोडो आन्दोलन चलाया गया ,सीता के पिता ने उसमे बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया जोकि तब बच्चे ही थे ,,देश आजाद हुआ और सीता ने भी एक नए भारत को बनते देखा ,उसकी शादी जमीदार तिवारियो के खानदान के ही एक व्यक्ति से हुई जोकि खुद भी तिवारी था और जमीदारो का वफादार था ,सीता के पिता एक समाज सेवक थे और हमेशा से गरीबो और पिछडो की मदद को तैयार रहते थे ,उन्ही के गाव में ठाकुरों का परिवार था जोकी गरीबो की मदद को हमेशा तैयार रहता ,वीर और बाली के पिता सीता के पिता के सहयोगी बन चुके थे ,बात कुछ खासी जादा नहीं बढही थी जब तक की 1967 में नक्सलबाड़ी की घटना नहीं हुई ,सीता अपने पिता के आदर्शो और पति की वफादारी के बीच पिसती रही थी ,वीर और बाली जब 5-6 साल के थे तब सीता ने भी दो बच्चो को जन्म दिया जिनका नाम कलवा और बजरंगी रखा गया ,1967 में नक्सलबाड़ी की घटना हुई जहाँ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 मे सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की। मजूमदार चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से थे और उनका मानना था कि भारतीय मज़दूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तंत्र और फलस्वरुप कृषितंत्र पर वर्चस्व स्थापित हो गया है। इस न्यायहीन दमनकारी वर्चस्व को केवल सशस्त्र क्रांति से ही समाप्त किया जा सकता है।(विकिपीडिया से लिया गया है)

इस घटना का प्रभाव ठाकुरों पर भी दिखाई देने लगा और उन्होंने भी जमीदारो के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत कर दि ,बात बढ़ने लगी और जमीदारो ने आन्दोलन को कुचलने में अपनी पूरी ताकत झोक दि ,सबसे पहले उन्होंने इसके नेता की हत्या की जो की बाली और वीर के माता पिता थे ,इससे सीता के पिता को दुःख तो हुआ पर वो अहिंसा का रास्ता अपनाने वालो में से थे उन्होंने ठाकुरों को रोका भी था पर कोई फायदा नहीं हुआ ,आखिरकार वही हुआ जिसका डर था ,भयानक नरसंहार कई मासूम और निर्दोष लोगो मारे गए ,जिसका पूरा जिम्मा सीता के पति पर था ,सीता उसके इस दानवी स्वरुप को देख उससे नफरत करने लगी लेकिन लेकिन फिर भी वो वहा से जा नहीं पायी,उसके पिता ने उसे लाने की कोसिस की और आख़िरकार 18 साल की सीता अपने एक बच्चे कलवा के साथ अपने पिता के पास चली आई लेकिन बजरंगी को उसका पति छोड़ने को तैयार नहीं हुआ ,बजरंगी बिना माँ के और फिर बिना बाप के बड़ा हुआ और तिवारियो का सबसे बड़ा वफादार साबित हुआ वही सीता के पिता के रहते और उनके मौत के बाद भी सीता ने ही वीर बाली और कलवा को शेरो की तरह बड़ा किया ,वीर और बाली की जोड़ी ने जहा जमीदारो का वर्चस्व खत्म कर दिया वही कलवा उनका सबसे बड़ा वफादार दोस्त भाई और लगभग सेनापति बनकर उभरा ,जिसने एक बार वीर को बचने के लिए गोली तक खायी और ना जाने कितनी चोटे खायी ,आज बजरंगी तो तिवारियो के यहाँ उनकी सेवा में था पर कलवा शांति की तलाश में ,,,,,,,,,,,,,....डॉ की आवाज से सीता अपने सपने से बहार आई ,
"ह्म्म्म चलो आज कलवा से मिल कर आते है ,क्यों अजय चलोगे हमारे साथ "अजय भी उसी खयालो में डूबा था जिसमे सीता ,वो अचानक हुए प्रश्नों से हडबडा गया ,और वो कुछ बोल पाता उससे पहले ही निधि की आवाज आई ,
"वाओ कलवा चाचा के पास मैं भी जाउंगी "निधि एक हाफ निकर और टी-शर्ट में जो की घर में उसका परिधान ही था ,में निचे आई चहरे से लग रहा था अभी अभी जगी हो ,वो आकर सीधे अजय के पीछे खड़ी हो चुकी थी ,जब डॉ ने सवाल किया था ,और जवाब देते हुए उसने अजय के गले में अपना हाथ डाल दिया ,अजय ने मुस्कुराते हुए देखा वो आकार अजय की गोदी में बैठ गयी और उसके ही प्लेट से नाश्ता करने लगी ,उसकी इस बचकाना हरकत को देख कर सभी के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,

"कब बड़ी होगी रे मेरी ये गुडिया ,"सीता मौसी ने अपने हाथ को निधि के सर पर फेरते हुए कहा ,....
कालवा से मिलने जाने सभी तैयार हो चुके थे ,लेकिन विजय और किशन को कुछ काम आ गया था ,वही मेरी ने तबियत ख़राब होने का बहाना बनाया और सुमन को मेरी की देखभाल के लिए छोड़ दिया गया ,निधि ,डॉ,अजय ,सोनल रानी और बाली तैयार होकर कलवा से मिलने चल दिए ......
 
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