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Kamvasna Story - जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी)

अध्याय 61

किशन की शादी को कुछ ही दिन बचे थे,सभी लोग पूरे जोश से इसकी तैयारी में लगे थे,खुसबू अब अक्सर ही इनके हवेली में आया करती थी,कभी कभी रात भी सोनल के साथ ही बिताया करती थी,अजय के करीब जाने का कोई भी मौका वो नही छोड़ती,अजय के दिल में उसके लिए प्यार तो था लेकिन वो अब भी बहुत असमंजस में था,वो सोनल और नितिन के रिस्ते को लेकर भी बहुत असमंजस की स्थिति में पड़ा हुआ था ,आखिर उसने सोनल से बात करने का फैसला किया...

रात होने को थी और अजय ने सोनल को अपने कमरे में बुलाया था,खुसबू उसे बता चुकी थी की उसने अजय को सब सच सच बता दिया है,

सोनल के मन में भी थोड़ा डर जरूर था,

"आओ सोनल "

अजय अभी एक्सरसाइज कर रहा था,सोनल आकर उसके पास ही खड़ी हो गई,उसने उसके बदन पर एक नजर डाली ,बालो से भरा उसका चौड़ा सीना पसीने से चमक रहा था,भुजाए अभी अभी भार उठाने की वजह से फड़क रही थी,नशों में खून तेजी से दौड़ रहा था,जिससे उसकी नशे फूल सी गई थी,चौड़ा मस्तक तेज से दमक रहा था,सोनल उसे मोहित सी देख रही थी,अजय बस एक छोटी सी निकर डाले हुआ था,उसका पूरा गठीला जिस्म सोनल के सामने था,

'वाओ " उसके मुह से निकला

अजय भी उसकी तरह देखकर मुकुराय ,वो पास ही खड़ी थी ,तभी निधि भी कमरे में आ गई वो अपनी आदत के अनुसार एक झीनी सी नाइटी में थी अंदर कुछ भी नही पहनने के कारण उसके मदमस्त भरे पूरे जिस्म का हर भाग उस पारदर्शी नाइटी से झांक रहा था,

सोनल उसे देखकर और भी हैरान रह गई

"ये क्या पहन कर घूम रही है ,इतनी बड़ी हो गई है पर अकल बिल्कुल नही आयी है "

सोनल ने निधि को डांटा

"मैं कौन सा बाहर घूम रही हु और मैं तो रोज यही पहनती हु ,आप भी तो अपने रूम में यही पहन के रहती हो ,"

वो अपनी चिरपरिचित मासूमियत से बोली .अजय के चहरे में एक मुस्कान आ गया ,

"अरे तो भी भइया के सामने ???"

वो हल्के से बोली

"अच्छा आप विजय भइया के साथ ऐसे ही सोती हो तो ."

निधि झँझला गई ,सोनल को भी होश आया की ये क्या बोल गई ,अजय ने उसे एक भरी निगाह से देखा लेकिन वो उसे क्या बोलता,वो खुद भी तो निधि के साथ जिस्म के रिस्ते में उतर गया था..

निधि आगे बढ़कर अजय के गले से लग गई,उसकी पूरी नाइटी अजय के पसीने से गीली हो गई थी,लेकिन वो उसे नही छोड़ रही थी ,सोनल बस उसे देखे जा रही थी,वो दोनो के लिए तो ये नार्मल बात थी लेकिन सोनल जो उसे देख रही थी उसे इसमें एक मादकता दिखी ,दो जिस्म लगभग नंगे एक दूसरे से लिपटे थे ,निधि ने अपने होठो को अजय के होठो के पास किया और अजय ने उसे अपने होठो में भर लिया,थोड़ी देर तक वो एक दूसरे को यू ही चूमते रहे ,सोनल को आभास हुआ की वो भी विजय के साथ यही करती है,आज उसे लगा की शायद भाई बहन के रिस्ते में वो बहुत आगे निकल गए जितना नही निकलना चाहिए था,ये अहसास उसे भी अभी हुआ,खुद को अहसास कभी भी नही होता लेकिन दूसरे को देखने से लगता था की ये तो कुछ ज्यादा हो रहा है,अजय ने उसके चहरे के भाव पड़े और उसे अपनी ओर बुलाया,वो काँपती हुई अजय के पास आई ,आज उसे इन क्रियाओं में भाई बहन का प्यार नही दो देह का मिलान दिख रहा था,

अजय ने उसे उसके कमर से पकड़ा और उसे अपनी ओर खिंच लिया,वो उससे सट गई,उसकी सांसे एक अनजाने डर से तेज हो गई थी,अजय ने अपनी गर्दन नीचे किया और उसके होठो को भी अपने होठो से लगा लिया ,सोनल के लिए ये थोड़ा मुश्किल था,वो अभी प्यार की उस संवेदना में नही थी जंहा से उसे ये सब अच्छा लगता लेकिन वो अजय को ना भी नही कह पा रही थी,दोनो के होठ मिले निधि उनसे थोड़ी अलग हुई और बिस्तर में जाकर लेट गई ,यहां अजय का हाथ सोनल की कमर में गया और वो उसे और भी करीब खिंच लिया,अजय को ना जाने क्यो सोनल पर बहुत प्यार आ रहा था,उसे नितिन की वजह से ऐसा लग रहा था की वो उससे अलग हो रही है ,अजय को सोनल के लिए ऐसे ख्याल कभी भी नही आये थे,वो सोनल की आंखों में देखता है,

सोनल भी डरी हुई सी उसके आंखों में देखने लगी,लेकिन जैसे ही उनकी आंखे मिली उसका सारा डर जाता रहा,अजय की आंखों में उसके लिए अथाह प्यार था,सोनल को अपनी गलती का अहसास हुआ ,उसका भाई उसे बेहद प्यार करता था,उसके मन में कोई भी पाप उसके लिए आ ही नही सकते थे,सोनल की आंखे नम हो गई थी ,अजय उसकी आंखों के पानी को अपने होठो से पी गया ,

"i love you भइया,मुझे माफ कर दो "सोनल रोती हुई अजय से लिपट गई ,अजय को समझ नही आया की आखिर वो ऐसा क्यो बोल रही है,

वो उसके बालो को सहलाने लगा,

"क्या हुआ मेरी जान "

"कुछ नही भइया आज पहली बात मेरे दिल में आपके लिए गलत ख्याल आया "अजय फिर से कंफ्यूज हो गया था,सोनल उसके छाती के बालो में अपने हाथ फेरने लगी

"सोनल मैंने तुम्हे कुछ बात करने बुलाया था,"

"जी भइया "

"तुम बैठो मैं नहाकर आता हु "

वो बाथरूम में घुसा साथ ही निधि भी दौड़कर उसके साथ घुस गई,सोनल को ये देखकर हँसी आ गई ,वो अपनी आंसुओ को पोछते हुए बिस्तर में बैठ गई,कुछ देर बाद अजय और निधि बाहर आये,निधि एक नए नाइटी में थी शायद वो उसे पहले से बाथरूम में रख रखा था,अजय भी एक टॉवेल में बाहर आया और एक निकर उठाकर उसे पहनने लगा,ये सब वो अपनी दोनो जवान बहनों के सामने कर रहा था,लेकिन ना तो उसके मन में कोई बात आयी ना ही उन दोनो के दिमाग में ,

वो फिर से बिस्तर में बैठा,

"सोनल मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु और मुझे तुम्हारे और नितिन के बारे में पता चला ,मुझे इससे कोई भी परेशानी नही है लेकिन क्या तुम दोनो किसको लेकर स्योर हो .."

"भइया इसका क्या मतलब हुआ हम एक दूसरे से प्यार करते है ,और एक दूसरे से शादी भी करना चाहते है,"

"लेकिन तुम दोनो भाई बहन हो ये जानते हुए भी "इस बार अजय थोड़ा गंभीर था,और सोनल भी ,सोनल के आंखों में कुछ आंसू आ गए थे,उसने अपना मन दृढ़ किया जैसे वो कुछ निश्चय कर ली हो ,अजय निधि और सोनल के बीच में लेटा था वही निधि उससे लिपटी हुई लेटी थी जबकि सोनल उसके दूसरी ओर बैठी थी,वो उसके और पास गई उसके सीने में अपनी हथेलि रखी ,और उसे सहलाने लगी

"भइया हम सगे भाई बहन तो नही है ना,और अपने ही तो कहा था की मैं जिससे भी कहु आप उससे मेरी शादी करोगे,मुझे आपपर पूरा भरोसा है भइया की आप मेरा साथ दोगो,और अगर आप ये सोच रहे हो की .....

सोनल थोड़ी देर को चुप हो गई ,अजय अब भी उसके चहरे को देख रहा था वही निधि को जैसे कुछ मतलब ही नही था वो बस आंखे बन्द किए सोई थी,

"कि भाई बहन है तो हमारे बीच सेक्स कैसे होगा,तो भइया दिल में अगर प्यार हो तो जिस्म का मिलान पाप नही होता,"

वो एक ही सांस में बोल गई,"

सोनल इतना बोलकर उसके सीने में अपने सर को टिका दिया

"मैं जानती हु भइया,समाज की मुझे कोई भी चिंता नही है ,आप सबसे लड़ जाओगे मेरे लिए "वो सुबकने लगी अजय ने उसे उठाया और अपने ऊपर खिंच कर उसे गले से लगा लिया ,वो अब भी सुबक रही थी ,अजय उसके बालो को सहला रहा था,

"नही मेरी जान मुझे समाज की नही तुम्हारी चिंता है,और चिंता है इन दो परिवारों को जो इतने सालो की दुश्मनी के बाद आज जाकर मिले है,

"मैं जानती हु भइया ,लेकिन अगर आप साथ हो गए तो कोई भी कुछ नही कहेगा,मुझे लगता है सभी मान जाएंगे"

"ह्म्म्म,तो तेरी भी शादी किशन के साथ ही कर दे "

सोनल का सुबकना अचानक ही बन्द हो गया,वो उठी अजय के चहरे में एक मुस्कान थी ,उसे देखकर उसके होठो में मुस्कान और चहरे में शर्म आयी वो उसे एक मुक्का अजय की छाती में लगाई ,और फिर से उससे लिपट गई,

"भइया एक चीज बोलू ,"

"हम्म "

"आप बुरा मत मानना लेकिन मेरे और विजय के बीच भी सेक्स हो गया,हम पता नही कैसे ये कर बैठे,आज जब आपको और निधि को यू किस करते देखा तो लगा की हमने शायद बहुत बड़ी गलती कर दी ,भाई बहन के प्यार का ये मतलब तो नही की जिस्म की आग बुझाई जाए,"सोनल फिर से रो रही थी और वो अब उठकर बैठ गई थी,वो अजय के चहरे को देख रही थी वो बोलते रही ..

"भइया आपकी कसम की हमारा ये इरादा बिल्कुल भी नही था,हम तो बस एक दूसरे को प्यार करते है जैसे की आप और निधि ,लेकिन ना जाने ऐसा क्या हुआ की हमे समझ ही नही आया की क्या हुआ और हमारे जिस्म मिल गए ."

अब अजय क्या बोलता वो खुद भी शॉक था,उसे भी समझ नही आ रहा था की जो वो निधि के साथ प्यार बोलकर करता है क्या वो गलत है या सही ,इसी गलत सही के फेर में सालो तक वो निधि से अलग रहने की कोसीसे करता रहा था,लेकिन वक्त के सामने किसीकी चलती है जो अजय की चलती ,वो चुप ही था ,उसे समझ नही आ रहा था की क्या कहे गुस्सा हो जाय या और कुछ ,हा उसके दिल में एक अजीब सा दर्द जरूर था,जो की एक बेचैनी थी या कोई तमन्ना या की कोई सपना क्या था ...??????

"अरे पागल उसे सेक्स नही प्यार करते है समझी आप भी ना दीदी,और ये मैं और भैया रोज ही करते है.. "

निधि मचलते हुए कह गई ,वो अजय के बांहो में मचली ,उसके आंख अब भी बन्द ही थे..लेकिन ये सुनकर सोनल का रोना बिल्कुल ही बन्द हो गया,अब वो और अजय दोनो ही शॉक थे ,दोनो कभी एक दूजे को देखते तो कभी निधि को ,शायद ये निधि को भी समझ आ गया था वो ऐसे कूदकर उठी जैसे कभी सोई ही नही हो ,

"सच्ची तो कह रही हु"उसने फिर से कहा ,और दोनो को देखने लगी,अजय बिल्कुल ही नर्वस हो गया था,लेकिन सोनल के होठो में एक मुस्कान आ गई

"ओह भइया ऐसी बात है तभी आप खुसबू से दूर भगते हो ,अपनी सगी बहन के साथ तो सबकुछ कर सकते हो और मामा की लड़की आपकी बहन हो गई उससे दूर रहना चाहते हो "सोनल के चहरे में अभी भी मुस्कान थी

"मेरे भैया को कुछ भी मत बोलो दीदी ,उन्होंने जो भी किया मेरे कहने पर किया और जो भी ये गलत हो तो वही सही मैं अपने भइया का साथ कभी नही छोड़ने वाली और दुनिया के नियमो की तो मा की .. "निशि इतना बोलकर ही रुक गई

अजय अब भी कुछ नही बोल पा रहा था,

"सोनल मुझे माफ कर दे ,लेकिन पता ही नही चला की ये कब हो गया,और तुझे पता है की मैं अपनी बहनों से कितना प्यार करता हु मैं उनके बारे में बुरा सोच भी नही सकता .."

अजय की आंखों में भी पानी आ गया था ,वो जानता था की जिस परिस्थिति में ये सब हुआ था वो गलत नही थे लेकिन समाज की बनाई रिवाजो के सामने उसे अपने द्वारा किया काम गलत लगने लगा था,

सोनल उसके माथे में अपना हाथ फेरती है,

"मैं समझ सकती हु भइया ,प्यार की क्यो सिमा नही होती सीमा तो रिश्तों की होती है,जब प्यार रिश्तों के आगे निकल जाय तो वो मर्यादा का बंधन लांघ सकती है,मेरे और विजय के साथ भी यही हुआ जो आपके साथ हुआ ,अब ये गलत है या सही मुझे नही पता लेकिन जो है वो बस है.."

अजय ने बड़े प्यार से सोनल को देखा ,

"तो निधि आज हम दोनो मिलकर भइया से प्यार करेंगे "सोनल की बात से निधि खुस हो गई लेकिन अजय को जैसे ही ये बात समझ आयी

"नही पागल हो क्या "

"भइया हम तो प्यार करने की बात कर रहे है आप तो गलत समझ लिए "

सोनल ने मुस्कुराकर शरारत से कहा और दोनो बहन अजय के ऊपर कूद गए ,अजय भी हँसता हुआ उनसे खेलने लगा,लेकिन आज कोई भी सेक्स के मूड में नही था वो बस मस्ती कर रहे थे......
 
अध्याय 62

पूरा घर सजा था,चारो ओर खुशियो की बारिस हो रही थी,किशन की शादी की रस्मे शुरू हो चुकी थी ,किशन की बारात ठाकुरो के हवेली से निकल कर ततिवारियो के हवेली में जानी थी,गाजे बाजे से बारात निकली ,पूरा परिवार झूम रहा था,

बारात का स्वागत और हँसी ठिठोली में समय बीत रहा था,शादी की रस्मे जोरो पर थी ,अजय ने एक नजर खुसबू को देखा,सचमे ऐसा लग रहा था जैसेकि स्वर्ग से कोई अप्सरा उतर आयी हो ,घाघरे चोली में लिपटी हुई वो हुस्न की मलिका सुमन के साथ जब बाहर निकली तो अजय बस उसे ही देखता रह गया,खुसबू की नजर जब अजय पर पड़ी तो वो भी शर्मा गई ,आज पहली बार था जब अजय खुसबू को इतने प्यार से देख रहा था,

मेहमानों में कुछ खास लोग भी आने शुरू हो गए थे,मुख्यमंत्रि जी डॉ चुतिया के साथ बाते कर रहे थे,विपक्ष के नेता भी साथ ही थे,तभी अजय उनको जॉइन करता है ,

"बधाई हो अजय अब तो तुम भी राजनीति के दंगल में आ गए "

अजय के चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आयी उसे इन सीनियर नेताओ से बहुत कुछ सीखना था ,वो जंहा बाहर एक दूसरे को काटने में लगे होते है वही जब दूसरे वो फुरसत में एक दूसरे से मिलते है तो हँसी ठिठोली में समय बिताते है,इन्हें देखकर कौन कह सकता था की जो दो लोग सामने खड़े थे वो एक दूसरे के राजनीतिक रूप से कट्टर दुश्मन थे ,और अब इनके दुश्मनों में एक नाम अजय का भी था,

"बस आप लोगो की कृपा है अंकल ,आप लोग अगर समाज के लिए कुछ बुनियादी काम करते तो शायद हम जैसे लोगो को राजनीति में आने की जरूरत ही नही पड़ती "

अजय की बात सुनकर डॉ हँसने लगा ,

"मंत्री साहब अब इससे बच कर रहिए गा,कम समय में ही बहुत कुछ सिख लिया इसने "

सभी हँसने लगे .

"अरे भई राजनीति तो इसके खून में है,राजाओं के वंसज है ,और इसके दादा जी, वाह कमाल के राजनेता थे ,ऐसे सच कहा डॉ इसने तो हम दोनो पार्टीयो को डरा ही दिया है ,लेकिन बेटा राजनीति में सिर्फ चुनाव जितना ही काफी नही होता बल्कि सत्ता में आकर ही समझ आएगा की असली मुश्किलें कहा है "

मुख्यमंत्रि बंसल साहब मुस्कुराते हुए बोले ,

"अंकल आप कुर्सी खाली तो कीजिये फिर आप तो है ना हमे मार्गदर्शन देने के लिए ,हम भी सत्ता चला ही लेंगे ."

अजय ने ये बात हस्ते हुए कही और सभी फिर से हँस पड़े

"अब ये पक्का राजनेता बन गया है "

बंसल साहब ने टिप्पणी की ,

तभी बाकी के बुजुर्गों ने दोनो नेताओ को अपने पास बुला लिया ,अब डॉ और अजय ही रह गए थे,

"यार अजय इस बार लगता है की तुम्हारी पार्टी कुछ सीटे तो जीत ही जाएगी लेकिन तुम्हे गठबंधन करना पड़ेगा ,क्यो ना तुम बंसल की पार्टी से ही गठबंधन कर लो ,और साथ ही चुनाव लडो"

"नही डॉ साहब गठबंधन का मतलब होगा की हमे उनके सामने झुकना पड़ेगा ,चुनाव तो हम अकेले ही लड़ेंगे कम से कम हमे हमारी ताकत का अंदाजा तो लग ही जाएगा ,और चुनाव आयोग को पार्टी की रूपरेखा भी भेज दी है कुछ ही दिनों में चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम भी डिसाइड हो जाएगा ,2-4 सीट ही मिले लेकिन अपने दम पर मिले तभी काम की है ,उसके बाद देखेंगे अगर गठबंधन का मौका मिला तो दोनो पार्टीयो में जो हमारे एजेंडे पर काम करने को तैयार होगा उसका ही साथ देंगे "

डॉ अजय की समझ से बहुत खुस दिख रहे थे,

"लेकिन अगर तुम बंसल की पार्टी से अभी गठबंधन करोगे तो 10 से 12 सीटे तुम्हे मिल सकती है "

"लेकिन बंसल अंकल इतनी सीटे हमे क्यो देंगे ,मेरे ख्याल से 4-5 सीट देने को ही तैयार होंगे "

"बंसल अक्लमंद आदमी है वो अगर 10 सीट भी तुम्हे दे देगा तो उसका कोई नुकसान नही होगा ,तुम्हारे इलाके से तो उसका जितना अभी लगभग नामुमकिन है ,4 सीटे तो तुम्हे आराम से केशरगढ़ क्षेत्र से मिल ही जाएंगी ,लेकिन बाकियों ने मुकाबला तो बंसल और तुम्हारे बीच का ही होगा ,इससे उसकी 20-25 सीटो पर बुरा असर पड़ सकता है ,यहाँ सिर्फ जितना ही इम्पोर्टेन्ट नही होता ,बहुमत भी तो चाहिए और अगर उन सीटो में तुम्हारे झगड़े से अगर दूसरी पार्टी को फायदा पहुचा तो सीधे से बंसल के बहुमत को नुकसान होगा ,ऐसे भी 10 सालो से ये मुख्यमंत्रि है इसका इसबार जितना बड़ा ही मुश्किल लग रहा है ,जनता भी इससे पक चुकी है ऐसे में कोई नई पार्टी जिसके समर्थक उसके ही लोग हो ,बंसल के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है ,वो तो चाहेगा की तुम उसके साथ आकर चुनाव लड़ो ,और निधि या धनुष को कोई मंत्रालय भी दे dega ...

अजय सोच में पड़ गया लेकिन उसने बहुत ही जल्दी फैसला भी कर लिया ,

"नही डॉ कम सीट ही मिले लेकिन चुनाव तो अकेले ही लड़ेंगे ,उसके बाद अगर सरकार को गठबंधन की जरूरत पड़ी तो डील कर लेंगे ,4 सीट के साथ भी मैं अपने भाई बहन को मंत्री बना सकता हु ,क्योकि आखरी बहुमत तो हमारे होने से ही होगा ,मुझे ये असंका है की इस बार बहुतमत किसी को नही मिलेगा ,और हम गेम चेंजर हो जाएंगे "

डॉ अजय की बात सुनकर हँसने लगता है ,

"ठीक है ठीक है लेकिन जेम चेंजर बनने के लिए कम से कम 10 सीटे होनी चाहिए ,मेहनत शुरू कर दो 20 सीटे चुन लो जिनमे तुम्हारे जितने की संभावना सबसे ज्यादा हो ,जंहा तुम्हारा रुतबा हो या तुम्हारा व्यपार फैला हो ,इनमें से 10 भी तुम्हारे हाथ लगे तो तुम जेम चेंजर हो जाओगे ,फिर तुम्हारे बिना कोई भी सरकार नही बना पायेगा ."

अजय डॉ एक दूसरे की बातो से सहमत होते है,तभी कोई डॉ को बुलाने आ जाता है ......
 
अध्याय 63

सभी शादी की रश्मो में बिजी हो गए थे,अजय अकेले में छत में जाकर बैठा था,पंडित जी के मंत्रोच्चार की ध्वनियाँ वातावरण में गूंज रही थी,तभी उसे किसी के पायल की आवाज आयी,वो चौका क्योकि वो खुद सबसे छिपकर छत में जाकर बैठा था,और ऊपर से नीचे गार्डन में हो रहे फंक्शन को देख रहा था,वो पलटा

"अरे तुम यहां ??"

"आप भी तो यहां है "खुसबू मुस्कुराई साथ में अजय भी

"मेरा पीछा कर रही हो "

"वही समझ लीजिये "

अजय ने फिर से उसे ऊपर से नीचे तक देखा ,जिससे खुसबू के दिल की धड़कन बढ़ गई वो शर्म से नजर नीचे किये अजय के पास आकर खड़ी हो गई ,अजय ने उसका हाथ पकड़ा और पास ही बिठा लिया ,दोनो ही अब छत की बाउंड्री से पीठ सटाए बैठे थे,अजय के हाथ के स्पर्श ने खुसबू के शरीर में एक झुनझुनी सी दौड़ा दी ,

"ह्म्म्म अब बोलो क्यो पीछा कर रही हो मेरा "

"आप यहां अकेले क्यो बैठे है "

"पहला प्रश्न तो मैंने पूछा था ना "

"तो पहला उत्तर भी आप ही दे दो "खुसबू हल्के से हँसी,उसकी ये हँसी अजय के दिल के गहराइयों तक पहुच गई ,वो दिल से खुसबू को पसंद करता था,बस कुछ दीवारे थी जो सोनल से मिलने के बाद बहुत ही कमजोर हो चुकी थी ,

अजय ने खुसबू के हाथो को हल्के से सहलाया ,और फिर उसे अपनी ओर जोर से खिंचा ,खुसबू को इसकी अपेक्षा ही नही थी,वो सीधे अजय के ऊपर जाकर गिर गई,

"आउच क्या कर रहे है आप "

अजय ने उसे अपने बांहो के घेरे में भर लिया

"कुछ नही बस तुम पर हक जताने की कोसिस "

खुसबू के तो आनंद की सिमा ही नही थी ,जिसे वो इतने दिनों से चाहती थी ,और जो उसे मिलना लगभग नामुमकिन लग रहा था आज वो हो रहा है,अजय उसपर हक जताना चाहता है,

खुसबू की खुसी का बयान उसकी आंखों ने किया,वो बहने लगे,वो अपने सर को अजय की छाती में गड़ा कर सुबकने लगी ,अजय का हाथ उसके सर पर गया और वो उसे सहलाने लगा ,खुसबू ने अपनी बांहो फैलाई और अजय को जकड़ लिया,

अजय उसके गालो में अपनी उंगलिया फिराने लगा

"ए देखो मुझे "

खुसबू ने अपना सर ना में हिलाया

"अरे देखो तो सही "

फिर से ना में सर हिलाया

"क्यो ,क्या हुआ ?"

"ऊऊऊ न हु "

"बताओगी क्या हुआ "अजय अपने होठो को उसके कानो के पास ले जाकर हल्के से फूक मारी,खुसबू मचल गई वो सुबकते हुए भी हल्के से हँस पड़ी ,

"मत कीजिये ना "खुसबू मचलते हुए बोली

"अच्छा तो मैं जाता हु "

अजय उसे अपने से हटाने लगा ,

खुसबू ने सर उठाकर उसे देखा ,उसकी आंखे अब भी गीली थी

"रुक जाइये मत जाइये .."वो उसे छोड़ने को तैयार नही थी

"अच्छा कर लीजिये जो करना है "इतना बोलकर वो फिर से अजय को जकड़ ली

"अच्छा क्या करू "

"जो अपना दिल चाहे ."खुसबू की आवाज थोड़ी धीरे थी ,वो तो बस अपने को अजय के सामने सौपना चाहती थी,वो अपना सर तक उसके सीने से हटाने को राजी नही थी ,होती भी कैसे जिसे इतने शिद्दत से चाहा था वो आज मिला था,

"अच्छा कुछ भी कर लू "अजय उसके कानो के पास जाकर कहता है

"ह्म्म्म मैं तो आपकी ही हु,बहुत पहले से मैंने खुद को आपको सौप चुकी हु ,आप ही मुझे अपनाने से इनकार कर रहे थे ."वो अजय के सीने में खुद को और भी जोरो से दबाती है,

"मैं आपकी हु और जीवन भर आपकी ही बनकर रहना चाहती हु ,मुझे अपना लीजिये "

खुसबू अब लगभग रोने लगी थी ,अजय उसका चहरा ऊपर उठता है जो वो उठाने नही दे रही थी वो अपना सर उसके सीने से अलग नही होने दे रही थी,जब उसका चहरा अजय के चहरे के पास आता है वो अजय उसके होठो में प्यार से एक किस कर लेता है

"मुझे माफ कर दो खुसबू ,मुझे समझ ही नही आ रहा था की आखिर मैं क्या करू,आई लव यु खुसबू .."

खुसबू अपने आँखों में पानी लिए अजय को प्यार से देखती है वो उसे बहुत कुछ कहना चाहती थी ,अपना दिल उसके सामने चिर कर रख देना चाहती थी लेकिन कैसे ,मजबूरी में बस उसके होठ कांप रहे थे,और आंखों से आंसू बह रहे थे

........

"कुछ बोलो ना"अजय अब भी उसके बालो को सहला रहा था,

"उ हु ,मैं कुछ भी नही बोलूंगी बस ऐसे ही रहो ,सारी जिंदगी बस अब ऐसे ही बीत जाय,और मुझे कुछ भी नही चाहिए "

अजय ने उसे प्यार से देखा लेकिन उसका चहरा अजय के सीने में गड़ा हुआ था,वो उसके सर पर ही एक किस करता है,

"अच्छा चलो अब देर हो रही है सभी हमे ही ढूंढ रहे होंगे "

खुसबू फिर से ना में सर हिला देती है ,वो बिना कुछ बोले यू ही एक दूजे के चिपके हुए ना जाने कितने देर तक बैठे रहे,समय थम चुका था,बस धड़कने थी कोई जिस्म कही नही था,फ़क़त कुछ सांसे थी,और था वो अहसास एक दूजे के होने का,एक दूजे में खो जाने का ...

तभी किसी के पायलों की आवाज आने लगी दोनो अपनी दुनिया से बाहर निकले ,ही थे की सोनल ने दूर से उन्हें देख लिया,वो जल्दी से अलग हुए .

"ओहो ओहो अब चिपके ही रहो मुझे देख के अलग क्यो हो रहे हो "

खुसबू बुरी तरह से शर्मा गई थी वही अजय भी थोड़ा नर्वस हो रहा था,दोनो ही खड़े हो गए

"हम इन्हें कहा कहा ढूंढ रहे है और ये है की यहां प्रेम की पींगे हांक रहे है,ओहो क्यो मेरी खुसबू रानी "

सोनल जाकर खुसबू को छेड़ने लगी खुसबू घबराकर वहां से भागी,लेकिन खुसबू ने उसे पकड़ लिया और उसके चहरे पर एक किस कर दिया ,अजय ये सब देखकर सोनल के लिए प्यार से भर गया वो अपनी बांहे फैलाकर सोनल को उसमे आने का निमंत्रण देता है और सोनल दौड़ते हुए उसके सीने से लग गई ,खुसबू तो दौड़ कर बाहर चली गई ,और सोनल अजय के बांहो में थी,

"क्यो भइया आखिर हमे भाभी मिल ही गई "

"हम्म मेरी जान ,"

"तो लव यु वगेरह बोला की नही "

"जब दिल में ही प्यार हो तो क्या बोलना "

"अरे भइया बोलना भी जरूरी होता है बस प्यार करना ही नही बल्कि उसे जताना भी जरूरी होता है "

"ठीक है मेरी मा वो भी कर देंगे लेकिन अब नीचे चल सब ढूंढ रहे होंगे "

"हा भइया जल्दी चलिए "

नए नए प्यार का नशा ,वो खुमार वो खुसबू ,कुछ अलग ही फिलिंग होती थी ,अजय खुसबू के प्यार की खुसबू में खोया हुआ था ,और ये बात हवा में बह रही खुसबू जैसे चारो ओर फैलाने लगी थी,लगभग सभी बच्चों तक ये बात पहुच गयी और सभी इससे बहुत खुस थे ,दोनो ही एक दुसरो को रह रह कर देखते और खुसबू इससे शर्मा जाती और सोनल उसे छेड़ने का कोई भी मौका नही छोड़ रही थी,सुमन की बिदाई का समय आ गया था ,रोने वाला कोई था ही नही ,क्योकि सभी इस रिश्ते से बेहद खुस थे ,लेकिन उसकी मां की आंखों में आंसू आ ही गया ,

ठाकुरो की हवेली में किशन का कमरा फूलो से सजाया गया था,ऐसे तो किशन ने अब तक ना जाने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया था लेकिन आज उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,ये बात भी स्वाभाविक थी क्योकि सुमन उसका प्यार था,और ये पहली बार था ...

तो धक धक करते जिया के साथ वो छत में टहल रहा था,उसकी इतनी हिम्मत नही हो रही ही की वो अपने कमरे में जाय

तभी उसे किसी के आने की आहट हुई अजय उसके पास आया था ,

उसे देखते ही वो उसके पास चला गया ,अजय ने अपने चहरे में एक मुस्कुराहट लाते हुए उससे आंखों से ही पूछ लिया की क्या हुआ ,

"पता नही भैया बहुत घबराहट हो रही है"

अजय की मुस्कान चौड़ी हो गई

"ये तेरे साथ पहली बार तो नही है "

"नही भइया वो बात नही है पर ना जाने क्यो बहुत ही घबराहट हो रही है,ऐसा लग रहा है जैसे की ये पहली बात हो ,पहले कभी ऐसे दिल नही धड़का था,सांसो ने तो जैसे आंदोलन कर रखा है,समझ नही आ रहा की ये क्या हो रहा है "

अजय उसके कंधे पर प्यार से अपना हाथ रखकर कहता है,

"अरे पगले तेरा ये हाल है ओ जरा सोच की उसका क्या हाल होगा,ये स्वाभाविक है होता है ,और अगर तू ऐसे डरेगा तो उसे कैसे समझयेगा ,अब तेरी शादी हो चुकी है मतलब की वो अब तेरी जिम्मेदारी है ,उसका सुख दुख अब सब तुझसे ही होगा ,अब चल गहरी सांसे ले और नीचे चल ,सब ठीक होगा "

अजय के पास होने के अहसास से ही किशन के दिल में हिम्मत आ गई वो 2-4 गहरी सांसे लेकर

"चलो भइया किला फतह करते है "

अजय की हँसी छूट गई

"किला मुझे नही तुझे फतह करनी है ,चल अब नीचे "
 
अध्याय 64

किशन कमरे में आया तो चौक गया ,सभी औरते वही जमावड़ा डाले बैठी थी,उसका पूरा जोश ही ठंडा होने लगा ,सभी उसे देखते ही मजाक उड़ाने लगी वो बेचारा पसीने से भीग चुका था,लेकिन सभी उसकी हालत देखकर उसपर थोड़ा तरस खाकर वहां से जाने लगे लेकिन रानी और निधि अब भी वही थी ,किशन ने दोनो को सवालिया निशान से देखा ,

"ऐसे कैसे चले जाएंगे भइया,हमारे रश्म के पैसे कहा है "

रानी के चहरे पर मुस्कान थी उसे पता था की किशन ने ऐसा कभी सोचा भी नही होगा,वो सच में घबरा गया .

"ये ये कैसा रस्म है मुझे तो किसी ने कुछ बताया है नही "

"ओहो देखा भाभीजी आपका पाला किस बुद्धू से पड़ गया ,अरे मेरे प्यारे भइया जी आज जब तक आप हमे हमारे मुह मांगे पैसे नही दे देते हम इस कमरे से नही जाएंगे "

किशन थोड़ी देर सोचा लेकिन उसके चहरे में एक मुस्कान आ गई

"अरे मेरी बहनों तुम्हारे लिए पैसा क्या मैं अपनी जान भी दे दु "

"अभी के लिये तो पैसे ही काफी है ,भइया जल्दी दो मुझे बहुत नींद आ रही है "इस बार निधि के अपने मासूमियत वाले अंदाज में कहा ,

"तो अपनी भाभी के साथ सो जा ना ,ऐसे भी तुम्हारे यंहा रहने से मुझे कोई परेशानी नही है "

"अच्छा तो मैं तो यंही सो रही हु गुड नाइट "निधि बिस्तर में मुह गड़ाकर सो गई ,

"अरे ये क्या कर रही है ,तुझे कहा था ना की जब तक भाई पैसे ना दे यही रहना और तू यहां सोने लगी आज इनकी सुहागरात है पगली ,और अब ये कमरा भाभी जी का है हमारा नही "रानी निधि को हिलाते हुए बोली ,किशन उसके पास आकर बैठ गया ,वो सुमन के बाजू में ही बैठी थी ,सुमन अभी दुल्हन के जोड़े में सिकुचाई हुई पैर मोड़कर बैठी हुई थी उसे देखकर लगता ही नही था की ये इस घर में इतने दिनों से रह रही थी,किशन रानी के बाजू में बैठ गया ,निधि अपनी आंखे खोले उन्हें देख रही थी ,किशन ने रानी के बालो को अपने हाथो से सहलाया ..और उसे गौर से देखने लगा ,पता नही क्यो लेकिन रानी की आंखों में उसका स्पर्श पड़ते ही आंसू आ गए ,वो अपने भाई की खुसी से बहुत ही खुश थी पर उसे व्यक्त नही कर पा रही थी ,कभी किशन एक आवारा सा लड़का हुआ करता था इस लड़की के प्यार ने उसे क्या से क्या बना दिया,

"मेरे पास जो भी है वो तेरा ही तो है पगली ,क्या चाहिए तुम दोनो को अगर तुम्हारे भाई के बस का रहा तो जरूर दूंगा ,लेकिन ये मत कहना की ये कमरा अब तुम्हारा नही रहा,या मैं तुम्हारा नही रहा तुम्हे यंहा रहना है तो यही रहो ,और मैं तो जीवन भर तुमलोगो का रहूंगा,मुझे मेरी बहनों से दुनिया की कोई भी ताकत अलग नही कर सकती "

रानी के मुह से कोई बोल ही नही निकल रहे थे ,वो बस आंसू लिए अपने भाई को देख रही थी वो किशन से लिपट गई ..

"लव यू भाई,मुझे तुमसे कुछ भी नही चाहिए और मुझे पता है मेरा भाई मुझसे कितना प्यार करता है मैं आज बहुत खुश हु भाई ,मेरे भाई को उसका प्यार मिल गया ."

वो दोनो थोड़ी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे ,तभी निधि बोल पड़ी

"भइया मुझे तो चाहिए "

"तू बोल तो सही मेरी प्यारी गुड़िया को क्या चाहिये "किशन उसके बालो में हाथ फेरने लगा

"जल्दी से एक प्यारा सा भतीजा ..और इसमें देरी नही होनी चाहिए "रानी और निधि हँसने लगे वही सुमन बेचारी थोड़ी सकुचा गई ,वो जरूर घूंघट के नीचे मुस्कुराई होगी .

"अरे बहन अब इन्हें छोड़ देते है नही तो भतीजा आने में देरी हो जाएगी "रानी और निधि फिर से हँसे और किशन और सुमन को किस करके कमरे से निकल गए....

आज वस्ल की रात थी ,और किशन के साथ सुमन की दिल की धड़कने भी बढ़ी हुई थी ,किशन बड़ी मुश्किल से उसके पास जाकर बैठा था,सुमन अब भी घूंघट में ही बैठी मुस्कुरा रही थी ,वो कभी अपने पैरो को एक दूसरे पर मसलती कभी किशन के पहल का इंतजार करती ....

"सुमन ..."

"हम्म्म्म "

"अरे कुछ तो बोलो "

कुछ देर तक कोई भी आवाज नही आयी ,किशन उसके पास जाकर उसका घूंघट उठा लेता है ,सुमन बड़ी मुश्किल से ही सही लेकिन अपनी नजर नीचे ही गड़ाए रखती है,

"सुमन ..."

"हम्म "

"ऐसे कैसे चलेगा,मुझे भी बहुत डर लग रहा है "

सुमन हल्के से हस्ती है ,वो हँसी हल्की ही थी लेकिन किशन के कानो तक पहुच ही गई

"अरे तुम्हे मजाक लग रहा है ,ये देखो "

वो सुमन के हाथो को पकड़कर उसे अपने दिल के पास लाकर रख देता है जो की तेजी से धड़क रहा था,सुमन उसे नजर उठाकर देखने पर मजबूर हो जाती है ,जो लड़का कभी उसका रेप करने वाला था जो ना जाने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स कर चुका था आज वो एक लड़की के सामने बैठा ये कह रहा है ,पहले तो सुमन को यकीन नही हुआ था लेकिन उसके धड़कते दिल ने उसे सच बता दिया था,

दोनो की नजर मिली और सुमन ने तुरंत ही अपनी नजर झुका ली ,सुमन की नजर का प्रेम देखकर किशन को कुछ राहत मिली और साथ ही थोड़ी हिम्मत भी मिली वो उसके और पास गया .

"सुनो ना "

"ह्म्म्म "

"तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो मन करता है की ....."

सुमन ने कुछ भी नही कहा बस उसके बांहो को जो की सुमन के बाजू में था हल्के से मरती है ,

"अरे मैं तो किस की बात कर रहा हु "

सुमन कुछ भी नही कह पाती .

"अच्छा लगता है तुम्हारा मन नही है मैं जाता हु "

किशन को भी पता था की वो उसे रोकेगी लेकिन उसने अपने आवाज में एक झूठा गुस्सा लाया ,एक हल्का सा गुस्सा ,

सुमन तुरंत ही उसकी प्रतिक्रिया देती है और जैसे ही किशन पलटने को होता है वो उसका हाथ पकड़कर रोक लेती है ,

"मत जाओ "सुमन उसे देखते हुए बोलती है ,इससे किशन के चहरे में एक मुस्कान आ जाती है लेकिन सुमन शर्मा जाती है,और फिर से अपनी नजर नीचे कर लेती है ,

"तुम तो कुछ बोल ही नही रही हो "

"क्या बोलू "

"मेरी बात का जवाब दोगी "वो हा में सर हिलती है .

"हम तो इतने दिनों से साथ है ना फिर आज इतना क्यो शर्मा रही हो "

वो फिर से नजर उठाकर उसे देखती है लेकिन फिर से नजर झुका लेती है,

"क्योकि अब आप मेरे पति हो "

"अच्छा तो अपने पति के पैर तो तुमने छुवे ही नही "किशन के चहरे में एक मुस्कुराहट तैर जाती है वही सुमन जैसे कुछ भूल गई हो वो हड़बड़ाई और तुरंत किशन के पैर ढूंढने लगी किशन जोरो से हँसा और इसी हलचल में उसने सुमन को अपने ऊपर गिरा लिया ,अब किशन बिस्तर में पड़ा था वही सुमन उसके ऊपर पड़ी थी ,सुमन का घूंघट पूरी तरह से निकल चुका था ,हलचल में बाल भी थोड़े बिखर गए थे,लेकिन फिर भी सलीके से सवांरे गए थे ,एक आउच के साथ वो किशन की बांहो में थी ,किशन ने आराम से एक तकिया अपने सर में रख लिया और स्तिथि का भान होने पर सुमन बिल्कुल शर्मा कर पहले तो छूटने की कोसिस करने लगी लेकिन किशन की बांहो ने उसे मजबूती से कस रखा था ,वो हारकर अपना सर उसके सीने से लगा के लेट गई उसका विरोध कम होने पर किशन ने उसके मुखड़े को उठाकर देखा ,वो कठपुतली सी उठ गई ,सजी सवारी सवाली सलोनी सी सुमन ,एक तेज से भरा हुआ रूप जो की उसकी परिस्थितियों से और भी उज्वल हो गया था,वो आंखे बंद किये हुए किशन को अपना सब सौपने को तैयार थी ,ऐसे तो किशन ने बहुत ही हूर परिया देखी थी लेकिन सुमन के प्यार के आगे सब ही फीके थे ,वो अपने सर को उठाकर उसके होठो पर एक चुम्मन लेता है जिससे सुमन फिर से हरकत में आती है और अपना सर उसकी छाती में गड़ा देती है ,

"सुमन मेरी जान ,कितनी मुद्दत से तुम्हे पाना चाहा था और आज मिली तो यू बेरुखी दिखा रही हो "

सुमन बस हँस कर रह गई ,किशन उसके बालो को सहलाता रहा ,वो भी एक सुकून में खो गया था जंहा करने को कुछ भी नही था,जो भी था वो होने को था,वो जब हो जाय परवाह किसे थी,अब तो सुमन उसकी थी और वो उसका ..

वो उसके बालो को सहलाता रहा ,सुमन भी आंखे बंद किये अपने पति के अहसास को अपने अंदर भरती रही ,लेकिन ना वो ही आगे बढ़ रहा था ना ही सुमन .

आधे घंटे यू ही बीत गए ,किशन का हाथ भी अब उसके सर पर ही रखा था लेकिन कोई भी हलचल नही कर रहा था,सुमन को लगा जैसे की किशन सो ही गया हो ,वो उठाकर उसे देखने लगी सचमे किशन आंखे बंद किये हुए लेटा था,उसे उसे देखकर हँसी आयी और वो उठाकर उसके होठो के पास जाकर रुकी वो देखना चाहती थी की वो सोया है या नही ,कोई भी हलचल नही होने पर वो उसके होठो पर एक प्यारी सी किस करती है ,और उठाकर फिर से उसे देखती है वो अब भी आंखे बंद किये हुए सोया था ,वो फिर से उसके होठो के पास पहुचती है और जैसे ही वो उसके होठो पर किस करती है किशन अपने हाथो को उसके सर पर लाकर रख देता है और अपने होठो को खोलता हुआ उसके होठो को चूसना शुरू कर देता है ,इससे सुमन पहले तो चौक जाती है लेकिन जैसे ही उसे ये आभास होता है की किशन पहले से जग रहा था वो अपने हाथो से उसे मारती है लेकिन अब उसका सर किशन के कब्जे में था ,वो उसके होठो को बेपनाह चूमे जा रहा था ,आखिर सुमन भी अपने लाज के पहरे को कब तक सम्हाल पाती ,वो भी अपने होठो को खोलकर उसका स्वागत करती है और दोनो के जीभ आपस में टकरा जाते है ,एक पल को जैसे सब रुक जाता है लेकिन अगले ही पल दोनो ही दुनिया की हर फिक्र को छोडकर अपने महबूब की बांहो में समा जाते है ,दोनो ही एक दूसरे के होठो की गहराइयों को नाप रहे थे और एक दूसरे के सर को पकड़े हुए उसे अपनी ओर खिंचने की कोशिस कर रहे थे,ये तब तक चला जब तक की उनकी सांसे इतनी नही भर गई की वो अलग होने पर मजबूर ना हो जाय ,जैसे ही वो अलग हुए सुमन जल्दी से उसे छोड़ कर फिर से शर्माती हुई दूसरे तरफ मुह कर सो गई ,और किशन उसके पीछे से उसे जकड़ लिया ,वासना की कोई भी लहर अभी दोनो के मन में नही उठी थी ,ना ही मन में ना ही शरीर में ,वो बस एक दूसरे को अहसास करना चाहते थे ,किशन उससे जितना सट सकता था सट गया ,और उसके गले को चूमने लगा ,उसके होठो में जो भी आता वो उसे ही बड़ी शिद्दत से चूमता चूसता जा रहा था वो उसके गले से बालो तक पूरा सर से लेकर उसके माथे से होता हुआ उसके गालो तक ,उसकी आंखों को नाक को होठो को गालो को गले से आगे के हिस्से से होता हुआ उसके छातियों के उस हिस्से को जो की उसके ब्लाउज़ के बाहर से झांक रहे थे ,उसने उसकी साड़ी के पल्लू को दूर फेक दिया सुमन ऊपर बस ब्लाउज़ में थी जिससे किशन को उसके उन्नत स्तनों की झलकियां मिल रही थी ,किशन ने अपने जीभ को उस दोनो स्तनों की खाई में घुसाने की कोशिस की लेकिन नाकाम ही रहा लेकिन जितना उसके जीभ और होठो के दायरे में आया वो उसे पूरी शिद्दत से चूसा चाटा और चूमा ,सुमन किशन के सर को पकडकर उसे कभी रोकती तो कभी अपने पास धकेलती ,उसकी सांसे भी तेज हो गई थी वही किशन की उत्तेजना भी बढ़ गई थी ,सुमन अब अपने पीठ के बल आ चुकी थी और किशन उसके ऊपर लगभग चढ़ ही गया था,वो अपने हाथो को ऊपर कर उसके स्तनों पर दबाव बनाया जो की सुमन के सहन के बाहर था ,

"आह जान "

वो उसके सर को पकड़कर उसे अपने ऊपर खिंची और उसके होठो पर अपने होठो को मिला दिया ,दोनो फिर हवस के एक झोंके से बाहर आकर प्यार के सागर में डूबने लगे ,पहले तो वो जोरो से चूसने लगे थे लेकिन फिर वो आराम से और इत्मीनान से एक दूसरे के होठो में खोने लगे,किशन ने आगे बढ़ने की सोची और अपना हाथ उसके पेट से ले जाकर उसके साड़ी के अंदर घुसने की कोसीसे करने लगा ,सुमन ने उसका हाथ रोका और उसके कानो ने धीरे से कहा

"आज नही ना "

किशन को कभी किसी समझदार आदमी की वो बात याद आ गई जिसने कहा था की सुहागरात की पहली रात सिर्फ प्यार नो सेक्स ..

किशन मुस्कुराता हुआ अपना हाथ वहां से हटा लिया और फिर से उसके होठो में घुस गया ,सुमन अपने पति के द्वारा अपने लिए किये सम्मान और आदर को देख कर उसके प्रति प्यार से और भी भर गई और उसे जिंदगी भर पूरा प्यार देने का वचन मन में लेती हुई ,उसके होठो में अपने होठो को समर्पित कर दिया .....

अध्याय 65

"तो बताओ ना भाभी जी की क्या क्या हुआ "रानी और निधि ने सुबह से ही सुमन को पकड़ लिया था,

"कुछ भी नही "

"ऐसा कैसे हो सकता है ,की किशन भाई कुछ भी ना करे "

सोनल कमरे में आते हुए बोली

"सच्ची दीदी कुछ नही हुआ बस किस "

"अरे वाह मेरे भाई को एक ही रात में सुधार दिया तुमने "सोनल हँस पड़ी साथ में बाकी सभी .

इधर

अजय और नितिन बैठे बाते कर रहे थे,साथ ही विजय धनुष और अभिषेक भी थे

"भइया हमे बहुत ही सोच समझकर काम करना पड़ेगा "

"हम्म अभिषेक तूम कालेज के अध्यक्ष हो कितने लड़के है हमारे साथ "

जब से इन भाइयो ने अभिषेक को उल्टा लटकाया था वो बेचारा भीगी बिल्ली की तरह रहता था और साथ ही उनकी हर बात माना करता था,अजय को पता था की इसे बस में रखना बहुत जरूरी है क्योकि उसके अंदर प्रतिभा थी जिसका उपयोग जिसका उपयोग अजय को अपनी पार्टी के लिए करना था ,

"भइया लगभग सभी "

"लगभग का क्या मतलब होता है "विजय की दमदार आवाज से अभी थोड़ा घबराया ,अजय ने उसे शांत रहने को कहा ,

"भइया कुछ लोग पहले से पुरानी पार्टी के मेम्बर है ,और वो कुछ ना कुछ पदों में भी है उन्हें तोडना मुश्किल है "

"हम्म कोई बात नही दूसरी पार्टीयो में भी तो कोई होना ही चाहिए ,अभी अगर हम उन्हें अपने साथ लाने की कोशिस करेंगे तो वो नाजायज मांगे करेंगे उससे अच्छा है की उन्हें हम ऐसे हराये की वो हारकर हमारे साथ आने पर मजबूर हो जाय ,इस साल पहला इलेक्शन विधानसभा का होगा,फिर लोकसभा अगले साल से शुरू होने वाला है ,उसके बाद पंचायत चुनाव और निगमो के चुनाव होंगे ,हमे अपना बेस इतना मजबूत रखना है की पहले 2 इलेक्शन में भले ही हमे कम सीटे मिले लेकिन स्थानीय चुनाव तक हमारा परचम लहराए,एक एक गांव के एक एक बूथ तक हमारी पहुच होनी चाहिए ,हर जगह से जितने भी लोग है सभी को इकट्ठे करो ,सभी कार्यकर्ता को से जो भी वोट ला सकता है अपनी शक्ति दिखाने को कहो हम सबसे पर्सनली मिलेंगे,जो भी योग्य होगा उसे सीट दी जाएगी ,और पद भी ,निर्वाचन आयोग में पार्टी की मान्यता के लिए दरखास्त दे दी आई है ,कुछ ही दिनों में हमे हमारा नाम और चुनाव चिन्ह भी मिल जाएगा ,हमे तुरंत शक्ति प्रदर्शन के लिए रेलिया निकालनी शुरू करनी होगी ,बहुत काम है दोस्तो भीड़ जाओ पूरे प्रदेश में फैल जाओ और चुन चुन कर उम्मीदवार लाओ जो अपने इलाको का नेतृत्व करे ,,,,

उसी शाम फिर से एक मीटिंग होती है जिसमे करीब 100 लोग शामिल थे अधिकतर लोग युवा ही थे ,ठाकुर-तिवारी परिवार के सभी बच्चे वहां मौजूद थे और अजय के नेतृत्व में सभी को उनकी जिम्मेदारी बांटी जा रही थी ,सबसे ज्यादा काम अजय , निधि धनुष के पास था ,बाकियों को बस अपने ही क्षेत्रो में जाने का काम दिया गया था ,जिसका जैसा समर्थ था वैसा काम उन्हें मिल गया था ,निधि को पार्टी का प्रेजिडेंट बनाया गया,वही धनुष को मुख्यमंत्रि का उमीदवार घोषित कर दिया गया ,अभिषेक पार्टी का महासचिव था ,साथ ही हर इलाके में गांव और ब्लाक लेवल तक और शहरों में जिला से वार्डो तक के प्रतिनिधियो की लिस्ट भी जारी कर दी ,ये काम कई दिनों का था लेकिन अजय ने होशियारी दिखाई थी और पहले से ही लिस्ट तैयार रखी थी ,जैसे सालो से वो उसी काम में भिड़ा हुआ हो ,एक एक प्रतिनिधि हैरत में था की अजय उन्हें पर्सनली जानता है,उनके इलाको की समस्याओं को जानता है ,

असल में अजय ने इसकी प्लानिंग सालो में ही की थी ,वो पूरे इलाके में घूमता रहता था और कई लोगो से मिलता जो की सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक्टिव थे ,वो अलग अलग पार्टी के या स्वतंत्र काम करने वाले थे ,अजय सभी को लिस्टेड करता रहता था और उनके काम पर नजर भी रखता था ,उसने अपनी पार्टी का इतना बड़ा खांचा बना दिया था की विरोधी पार्टीयो के पसीने आने वाले थे ,जो उन्हें बच्चा समझ कर मजाक में ले रहे थे .....

ये बात दूसरे दिन के अखबारों की हेडलाइन होने वाली थी ,अखबार से बहुत से लोग भी वँहा शामिल थे और उन्हें खूब पिलाया गया ,और खूब खातिरदारी की गई ,ये सभी काम विजय और नितिन के सुपुर्द था ,अजय विजय और नितिन पर्दे के पीछे से काम करने वालो में थे,धनुष और निधि के चहरा सामने होना था,और किशन राकेश और बाकियों को इससे दूर ही रखा गया था ,ज्यादा से ज्यादा अपने क्षेत्र में कुछ प्रचार के लिए उनका उपयोग होता ..

अब बस देर थी पार्टी के नाम के आने की और चुनाव चिन्ह के मिलने की ...

वही हवेली पहुचने के बाद सबको इंतजार था सुमन के गुड न्यूज़ की जो शायद आज रात होने वाला था ,......
 
अध्याय 66

जिन हसीन पलो का इंतजार किशन और सुमन को था वो आ ही गया था ,सुमन ने दुनिया से लड़कर अपना कौमार्य अपने पति के लिये बचाया था वही किशन भी अपने हवसी और चंचल स्वभाव को त्यागकर बस सुमन का ही हो गया था,दोनो के लिए ये रात बहुत ही खास थी ,उनकी सुहागरात तो मन चुकी थी लेकिन अब भी सुमन का जिस्म पूरी तरह से किशन का नही हुआ था,समर्पण की एक इंतहान अभी भी बाकी था,

सुमन भी जानती थी की आज कुछ हो सकता है और वो इस बात से थोड़ी डरी डरी सी थी ,

वो काम में व्यस्त थी,चम्पा के साथ घर के काम कर रही थी ,ऐसे यही काम वो रोज किया करती थी ,सीता मौसी अपनी पोती को साड़ी में देखकर गदगद हो रही थी वही चम्पा अपनी बहु और अपनी सौतेली बेटी के ऊपर पूरा प्यार लुटा रही थी ,ये बात तो सुमन को भी पता थी ,लेकिन सुमन अब इस बारे में सोचना नही चाहती थी ,लेकिन मन है ...

मन तो मन ही है ,वो बातो को घुमा फिरा कर सामने ले ही आता है ,सुमन बार बार ये बात भुलाने की कोसीसे करती थी की वो और किशन एक ही खून है ,खून के रिस्ते से वो भाई बहन ही है ,लेकिन फिर भी वो दिल के किसी कोने में इस बात को भूल नही पा रही थी ,

'क्या मुझे किशन जी को ये बता देना चाहिए '

उसके मन ने खुद से ही ये सवाल किया

'नही नही पागल हो गई हो क्या ,अगर ऐसा हुआ तो अनर्थ हो जाएगा,घर में बवाल हो सकता है,उस समय चम्पा मा की क्या मजबूरियां थी इसपर किसी का भी ध्यान नही जाएगा ,किशन शायद खुद भी डिप्रेशन में आ जाए '

उसने मन ही मन इस बात को ना खोलने की सोची लेकिन वो अपने भाई से ही कैसे जिस्म का रिस्ता बना सकती थी....????

वो बड़ी उधेबुन में बैठी रही ,काम खत्म होने पर चम्पा ने उसे कमरे में जाने को कहा वो हा बोलकर वहां से तो निकल गई लेकिन कमरे में जा ना सकी,वो छत में जाकर बैठ गई वो अपने इसी खयालो में पागल हुए जा रही थी ,उसे समझ नही आ रहा था की आखिर वो करे तो क्या करे ..

वो रोये जा रही थी ,

रानी ने उसे गुमसुम देखा था,जब वो छत में जा रही थी तो उसके चाल से ही उसे समझ आ गया था की कुछ गड़बड़ है वो उसका पीछा करने लगी ,आखिर वो सुमन के जाने के थोड़ी देर के बाद धीरे धीरे ऊपर जाने लगी ,उसने जब सुमन को रोते हुए पाया तो उसे समझ ही ना आया की आखिर ऐसा क्या हो गया की वो ऐसे रो रही है ,क्या मा ने कुछ कहा,नही वो इसे क्यो कुछ कहेगी ,तो भाई ने ? हा ये हो सकता है ,

थोड़ी देर हु ही उसे देखती रही फिर जाकर सुमन के पास ही खड़ी हो गई ,उसे देखकर सुमन हड़बड़ाई और उठी ,वो अपने आंसू पोछने लगी ,

"क्या हुआ भाभी "

"कुछ भी तो नही "

"तो बिना कारण के आप रो रही है ??"

"वो वो मा की याद आ गई "

रानी के चहरे में हँसी आ गई

"भाभी आप को जब झूट बोलना नही आता तो क्यो बोलती हो ,बताओ ना क्या हो गया "

सुमन चुप थी उसे समझ ही नही आ रहा था की आखिर वो उसे क्या जवाब दे ,रानी उसके पास जाकर उसकी बांहे पकड़ती है ,

"आज जो होने वाला है उसके लिए रो रही हो क्या "

सुमन को याद आया की आज क्या होने वाला है ,

"नही नही ..नही तो "

रानी फिर से मुस्कुराई

"या मेरा भाई आपको पसंद नही है ,जबरदस्ती शादी तो नही की ना आपने,...हर मर्द की तमन्ना होती है की वो सुहागरात में अपनी पत्नी को अपना बना ले लेकिन आपने वो करने नही दिया ,आज आप यहां बैठी हो ,जबकि भाई वहां बेसब्री से इंतजार कर रहा है, मुझे तो लगता है की तुम्हारे दिल में कभी भाई के लिए प्यार था ही नही "

रानी एक ही सांस में सब कुछ बोल जाती है वही सुमन बस उसे देखते रह जाती है,उसके मुह से कोई भी बात निकल ही नही रही थी,उसे समझ ही नही आता की रानी को कैसे समझाए

"ऐसा नही है रानी "वो बड़ी ही मुश्किल से ये बोल पाई

"तो कैसा है ,अगर ये सच नही है तो बताओ की क्या सच है,"

रानी इस बार ने थोड़ी जोर से कहा ,और बदले में सुमन भी जोरो से रोने लगी ,वो वँहा से जाने लगी लेकिन रानी ने उसका हाथ जकड़ लिया

"तुम ऐसे नही जा सकती "

"नही रानी मुझे छोड़ दो सच इतना कड़वा है की तुम उसे सह नही पाओगी इसे मुझतक ही रहने दो ,वो मेरा इंतजार कर रहे होंगे मुझे जाने दो "

रानी के चहरे में फिर से एक मुस्कुराहट आ गई लेकिन ये मुस्कुराहट भी बहुत कड़वी थी

"नही भाभी "

इस बार उसकी आवाज नरम थी ,उसने जानबूझ कर ये सोच कर ही उसे कड़वे वचन कहे थे की वो टूटकर सच बता दे लेकिन रानी को भी इसका आभास हो गया था की सुमन इतनी जल्दी नही टूटने वाली

"भाभी जी ,अगर आपके दिल में भाई के लिए प्यार नही हो तो शायद आप कभी खुस नही रह पाएंगी और ना ही भाई खुस रह पायेगा ,आपके हाथो में दो जिंदगियां है "

"मैं उनसे बेपनाह प्यार करती हु रानी ,मेरी जान भी उनकी एक हँसी के सामने कुर्बान है "

रानी उसका हाथ छोड़ देती है और सुमन भी जल्दी से वहां से निकल जाती है ,लेकिन रानी के दिमाग में ये बात घर कर गई के आखिर ऐसा कौन सा सच है जो सुमन उससे छुपा रही है ,खैर उसे जो जानना था उसे समझ आ गया था की सुमन की ओर से कोई भी देरी नही है वो तो अपने को किशन के नाम ही कर बैठी है...

इधर

किशन अपने कमरे में अधीर इधर उधर घूम रहा था ,तभी उसे सुमन की आहट मिली उसका दिल धक कर रह गया ,सुमन की सांसे फूली हुई थी वो छत से दौड़ाते हुए सीधे वहां आयी थी ,दोनो की नजर मिली ,सुमन अभी भी उसी खयालो में थी लेकिन उसे अब अपनी गृहस्थी सम्हालना था और इन सब बातो का कोई अर्थ अब नही रह गया था ,सोचने के लिए बहुत देर हो चुकी थी ,वो अपने होठो में मुस्कुराहट लाती है ,किशन उसे देखकर मुस्कुराता है ,वो उससे बिना कुछ कहे ही अपने कपड़े पकड़कर बाथरूम में घुस जाती है वो फ्रेश होकर एक नाइटी पहन लेती है जिसे किशन की बहनों ने उसके लिए शादी के तोहफे के रूप में लिया था ,वो सफेद रंग की झीनी सी नाइटी थी ,जो काफी हद तक पारदर्शी थी ,उसके जांघ उसमे साफ दिख रहे थे,ऐसी ही नाइटी इस घर की सभी लडकिया पहनती थी लेकिन सुमन के लिए ये पहली बार था,वो सवाली सी थी ,निधि या सोनल की तरह उसके जांघो का भराव भी उतना नही था लेकिन फिर भी उसके आत्मविस्वास में कोई कमी नही आयी ,वो एक बार फिर से अपने को दर्पण में देखती है ,थोड़ा घूम घूम कर उसके कूल्हों का वजन अभी उतना ज्यादा नही था लेकिन फिर भी वो साफ साफ भरे हुए देख रहे थे,वो खुद ही शर्मा जाती है,उसके स्तनों की बीच की घाटी साफ और उत्तेजक प्रतीत हो रही थी ,लेकिन अब भी उसे लगा की कुछ कमी है उसे अपने मांग के सिंदूर की याद आयी ,चहरा धोने से उसके मांग का सिंदूर थोड़ा सा फीका पड़ गया था,वो बाहर आयी ,किशन अपना मुह फाडे उसे निहार रहा था ,लेकिन सुमन ने उसकी ओर देखा भी नही वो अपने ड्रेसिंग के पास पहुची और अपनी मांग में गढ़ा सिंदूर लगाया,नए दुल्हन जैसे उसके हाथ अब भी चूड़ियों से सजे हुए थे ,उसने अपने बालो को पूरा खोला और कंघी से थोड़ा सीधा किया ,वो उसे खुला ही रहने दी ,अपने माथे की पुरानी बिंदिया निकल कर उसने नई बिंदिया लगाई ,अब फिर से उसने अपने को देखा लेकिन वो इतनी हसीन लग रही थी की वो खुद को भी नही देख पा रही थी ,वो शर्म से मरी जा रही थी ,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो किशन के पास कैसे जाए ,

उसकी हालत और सुंदरता देख किशन को अपने किश्मत पर गुमान हुआ वो उठा और सुमन के पास गया ,सुमन अब भी सर नीचे किये खड़ी थी ,उसने उसे पीछे से जकड़ लिया ,दोनो के ही अंग अंग में एक झुनझुनाहट सी दौड़ गई ,दोनो ही सिहर गए .

किशन ने उसके गले पर अपने होठो को टिकाया ,उसके कोमल होठ के स्पर्श से ही सुमन का बदन अकड़ गया ,

"आह "वो धीरे से आह लेने लगी ,इतने देर के मानसिक तनाव से उस एक स्पर्श ने मुक्ति दिला दी वो समझ गई की यही उसकी नियति है और किशन को प्यार देना और उससे प्यार पाना ही उसके लिए सौभाग्य की बात है,उसने अपने को पूरी तरह से किशन के लिये समर्पित करने की कसम खाई और पलट कर किशन के होठो में अपने होठों को मिला लिया ,ये किशन के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि अभी तक वो इतना शर्मा चुकी थी की किशन उससे पहल की उम्मीद ही नही कर रहा था ,लेकिन वो खुश था बहुत खुस ,दोनो के होठ मिले और सिलसिला शुरू हो गया,किशन ने उसे ले जाकर बिस्तर में पटक दिया और उसके ऊपर आकर उसके होठों की गहराइयों में अपने जीभ को ले गया ,दोनो ही मस्ती में डूबे हुए थे ,दोनो ही दुनिया के अहसास को भूल कर बस एक दूजे में खोये हुए थे,जब दोनो ही थक गए तो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए

"तो आज क्या प्लान है "किशन ने सुमन के कानो में कहा और जवाब में सुमन ने उसे अपनी ओर खिंच लिया और उसके होठो को फिर से चूमने लगी ,किशन के लिए इतना इशारा ही काफी था,वो धीरे से अपने हाथो को उसके जांघो पर सहलाता है और सुमन के होठो से सिसकारियां निकलने लगती है ,उसके लिए ये सब पहला अहसास था,उसके योनि से धार छूटनी शुरू हो चुकी थी ,किशन ने देर नही करते हुए अपने कपड़े निकाल फेके लेकिन सुमन अब भी वैसे ही थी किशन का लिंग सुनम के पेंटी को भेदता हुआ सीधे उसके योनि पर वार कर रहा था,जो अब सुमन के लिए भी सहना मुश्किल ही रहा था ,वो बेचैनी में छटपटाई और आखिर में खुद ही अपने हाथो को नीचे कर किशन के लिंग को पकड़कर अपने योनि में जोरो से रगड़ने लगी ,किशन उसके इस व्यव्हार से हक्का बक्का रह गया ,वो जोरो जोरो से सिसकिया लेते हुई झड़ गई ,वो हफते हुए थोड़ी शान्त हुई तो उसकी नजर किशन पर गई,उसे अपने किये की याद आयी और वो बुरी तरह से शर्मा कर अपने मुह को छुपाने लगी लेकिन इससे पहले ही किशन उसके ऊपर कब्ज़ा जमा चुका था और इस बार वो सुमन के हर एक अंग को चुम रहा था ,उसके होठ सुनम के एक एक अंगों को नाप रहे थे और गीला कर रहे थे ,सुमन फिर से गर्म होने लगी थी ,वो किशन के बालो को पकड़े हुए बस आहे ले रही थी ,किशन उसके कपड़ो को अभी तक नही निकाला था वो उसके जांघो तक आ गया और ऊपर जाने लगा ,वो उसके पेंटी के किनारे पर था ,दोनो जांघो के बीच कसे हुए पेंटी को ही चाट रहा था ,और उसे इधर सुमन उसके बालो को और भी जोरो से कसे जा रही थी ,अंत में फिर से उससे नही रहा गया और वो किशन के सर को अपने योनि में दबाने लगी ,किशन के चहरे में एक मुस्कान आ गई और वो जोर लगा कर उठ खड़ा हुआ ,सुमन उसे अजीब से खा जाने वाली निगाह से देख रही थी ,किशन उसके ऊपर आकर उसकी पेंटी को निकालने लगा ,उसे पता था की सुमन वर्जिन है और यही सही मौका है जब वो बेहद गर्म है वो उसे झरने नही देना चाहता था ,किशन ने अपनी एक उंगली उसके योनि के अंदर डाली वो अंदर से बेहद गर्म थी लेकिन गीली भी थी ,सुमन ने एक जोरो की आह ली और किशन के बालो को पकड़कर झूल गई ,किशन ने अपने होठो को उसके होठो से मिलाया और उसके योनि में अपने उंगली को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा ,वो पास से ही एक क्रीम पकड़ लाया और उसे अपनी उंगली में लगा कर उसे अपने लिंग के लिए तैयार करने लगा ,वो फिर थोड़ी थोड़ी देर में ही रुक जाता जिससे सुमन का ओर्गास्म ना हो ,सुमन बेहद ही चिढ़ गई थी जिससे किशन को हँसी आ रही थी ,वो अब तैयार थी वो फिर से उसके होठो को चूसने लगा और अपने लिंग की ऊपरी चमड़ी को पीछे कर उसके योनि में रगड़ने लगा ,सुमन बस सिसकिया ले रही थी ,क्रीम का प्रभाव ,योनि का गीलापन और सुमन के तन में फैली सेक्स की गर्मी ने किशन का काम आसान कर दिया था ,वो पहली बार में अपना आधा लिंग उसके अंदर डाल दिया ,सुमन जोरो से चीखी लेकिन उसकी चीख किशन के होठो में ही घुट गई ,थोड़ी देर के किस ने उसे फिर से राहत दी और किशन धीरे धीरे धक्के मरता हुआ सुमन के योनि में अपना स्थान बनाने लगा ,थोड़ी ही देर में किशन का लिंग पूरी तरह से सुमन के योनि के अंदर था ,एक ही झटके के साथ सुमन फिर से अपने चरम सुख पर पहुच गई और ढेर हो गई ,किशन भी हालात को समझता हुआ रुक गया और उसे अपने ऊपर लेकर उसे सुस्ताने का मौका देने लगा ,सुमन के घने बाल पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुके थे ,उसका सिंदूर फैल गया था और वो बेहद ही सेक्सी लग रही थी ,उसकी कुछ चूड़ियां टूट गई थी जिसे किशन ने बाजू में ही फेक दिया था ,किशन का लिंग अब भी उसके अंदर था,सुमन इन एक मदहोश आंखों से उसे देखा ,वो इतने मजे से गुजरी थी की पूरी दुनिया ही भूल गई थी ,किशन पर उसे इतना प्यार आ रहा था की उसका दिल किया की अभी उसके लिये अपनी जान दे दे ,वो झुककर उसके होठो पर अपने होठो को रखती है और चूसने लगती है ,दोनो की आंखे अभी आधी खुली और आधी बंद थी ,दोनो ही मदहोशी के आलम में गुम थे,सुमन ने अपने कमर को थोड़ा हिलाया उसे अपने भरे होने का अहसास हुआ ,वो किशन के लिए और भी प्यार से भर गई ,किशन का लिंग उसकी योनि में मजबूती से समाया हुआ था और सुमन की योनि भी उसे मजबूती से कसे हुए थी ,वो इतनी गीली थी लिंग आराम से अंदर बाहर हो रही था,लेकिन अब किसी को कोई भी जल्द बाजी नही थी ,सुमन आराम से कभी कभी अपने कमर को हिला कर उसे अपने अंदर खिंचती या बाहर निकलती वही कभी कभी किशन धक्के देता लेकिन वो अभी एक दूजे के होठो का रस पान कर रहे थे,वो एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे,अब सेक्स गौण हो गया था और अहसास ही सब कुछ रह गया था,पता नही कितने देर तक ये ही चलता रहा ,किशन का वीर्य कब निकल कर सुमन को भर गया उन्हें पता ही नही चला ,लिंग अब भी नही मुरझाया था और अब भी वो खेल जाती था ,वीर्य योनि से निकलकर बिस्तर को गीला कर रहा था ,लेकिन परवाह किसे थी वो ऐसे ही घंटो तक एक दूसरे के बांहो में पड़े रहे और नीद के आगोश में समा गए .
 
अध्याय 68

अजय बेचैनी से मेरी की तरफ देखता है जो की विजय को घूर रही थी ,अजय फिर अपनी घड़ी की ओर देखता है फिर वो विजय की ओर देखता है जो की मेरी को घूर रहा था,अजय फिर घड़ी के तरफ देखता है,

"आखिर डॉ है कहा कितना समय लगेगा उन्हें "

अजय के इंतजार की सीमा खत्म हो रही थी ,

"आप 8 बजे सुबह से यहां आकर बैठे है ,क्लिनिक 10 बजे खुलता है,"

मेरी के दो टूक जवाब से अजय झल्ला जाता है ,

"मैंने उन्हें कहा था और उन्होंने कहा था की वो आ रहे है "

"हा तो आ ही रहे होंगे आप इतने परेशान क्यो हो रहे हो "

"उन्हें फोन लगाओ अभी "

अजय टेबल में जोर से हाथ मरता है ,वहां रखा पानी का ग्लास भी उछल पड़ता है ,मेरी उसे गुस्से से देखते हुए कमरे से बाहर निकल जाती है ,थोड़ी ही देर में डॉ वहां आ जाते है ,

"अरे यार अजय क्या हुआ इतने बेताब हो रहे हो "

"मुझे लगा था की आप हमेशा किसी भी समय मेरी सहायता के लिए उपस्थित रहेंगे "

"तो हु तो ना यहां बताओ "

"मुझे आपसे अकेले में कुछ बात करनी है "

इतना सुनकर ही मेरी और विजय के चहरे में चमक आ जाती है जिसे डॉ समझ जाता है

"मेरी "

"जी सर विजय को क्लिनिक दिखा कर आती हु "

विजय भी डरता हुआ उठता है

"अब बताओ क्या बात हो गई है "

"मेरे परिवार पर हमले की साजिस हो रही है और आप ऐसे अनजान बन रहे है जैसे कोई बड़ी बात ही नही हुई "

डॉ के चहरे में एक मुस्कुराहट आ जाती है

"ये कोई नही बात तो नही है ,तुम्हारे परिवार पर खतरा हमेशा से ही रहा है "

"लेकिन अब हम दुश्मन को जानते भी तो नही है "

"तुम्हे इसके बारे में किसने बताया "

"कुछ लोग है जो जंगलो में रहते है लेकिन मुझे बहुत मानते है खासकर जबसे मैं राजा घोषित हुआ हु "

"हम्म राजा के वफादार आदिवासी ,तो पकड़ो उन लोगो को जो साजिस रच रहे है "

"वो कौन है ये तो पुख्ता उन्हें भी नही पता लेकिन वो फैली हुई खबर मुझे बता रहे है ,"

"देखो अजय अब तुम राजा घोषित हो चुके हो और साथ ही अब तुम राजनीति में भी आ गए हो ,तुम्हारे जितने वफादार है उतने ही तुम्हारे दुश्मन भी हो चुके है ,"

"लेकिन मेरे परिवार पर खतरा हो तो मैं कैसे चैन से रह सकता हु,रातो की नींद भी हराम हो रही है मेरी"

"मेरी बात मानो तुम्हे थोड़ा रेस्ट और शांति की जरूरत है "

"शांति नही डॉ मुझे ताकत चाहिए ,ताकत से ही मैं उन्हें हरा सकता हु "

डॉ जोरो से हँसता है जिससे पूरा कमरा गूंज जाता है .

"ताकत ,और हराना....तुम किसके भाषा में बात कर रहे हो अजय ,ताकत से तुम कुछ भी नही कर पाओगे,ताकत सिर्फ बेचैनी पैदा करती है और शांति ,,,,,शांति ही तुम्हे असली रास्ता दिखा सकती है,मेरी मानो तो पहाड़ी वाले बाबा के पास जाओ और एक दो दिन वहां बिता के आओ ,मन थोड़ा शांत होगा तो कुछ रास्ता जरूर निकलेगा .."

अजय कुर्सी से टिक जाता है और अपनी आंखे बंद कर लेता है ,वही डॉ उसके चहरे में आये हुए परिवर्तन को देखने लगते है

"अजय तुन्हें पता है,तुम्हारे पिता जी को मैंने कभी इतना बेचैन नही देखा जीतना की तुम हो ,और इसलिए वो कभी कोई भी बाजी हारे नही ,जब तुम्हारे मन में शांति होती है तो तुम मुझे वीर की याद दिला देते हो ,"

अजय के चहरे में एक मुस्कुराहट आ जाती है ,

"लेकिन डॉ ये कौन लोग हो सकते है जो हामरे पीछे इतनी शिद्दत से पड़े हुए है ."

"ये तो मुझे नही पता लेकिन उसमे कोई तो ऐसा है जो तुम्हारे बहुत करीब रह रहा है ,किशन की शादी में तुम्हे और निधि को मारने की जो साजिस हुई थी उससे तो यही लगता है ,और फिर तुम्हारे पार्टी के मीटिंग के दिन वाली बात "

अजय एक गहरी सांस लेता है

"तुम्हारे और मेरे अलावा और किसी को ये बाते पता तो नही है"

"नही बस मैं,निधि और आप ,विजय को भी अभी तक इन सबके बारे में नही बताया हु ,"

"हम्म्म्म बताना भी मत पता नही वो जोश में आकर क्या कर बैठे "

इन दोनों ही घटनाओं ने अजय को सोचने पर मजबूर कर दिया था,लेकिन फिर भी वो बात अपने तक ही रखा ताकि चुपचाप ही कोई ऐसा काम किया जा सके जिसकी भनक उनके दुश्मनों तक ना पहुचे ,

"लेकिन डॉ कोई तो कदम लेना ही पड़ेगा ,ऐसे बैठे रहे तो उनके होशले और भी मजबूत हो जाएंगे "

"कदम तो लेना है लेकिन इतने सफाई से और इतने खामोशी से की किसी को भनक भी ना लगे,और उनके हौसले और भी ज्यादा मजबूत होने दो ,इसी में वो कोई बड़ी गलती करेंगे,अभी तक वो लोग बड़ी ही खामोशी से अपनी तैयारी कर रहे थे अब उन्हें सामने आने का मौका देना होगा,दोनो ही घटनाओं में एक बात तो तुमने भी नोटिस की होगी की वो किसी को मरना नही चाहते थे,बस निधि और खुसबू को पकड़ने की साजिश थी उनकी ,"

निधि और खुसबू का नाम सुनकर ही अजय की आंखे फिर से लाल हो गई ,

"वो लड़का जिसे शादी में अपने पकड़ा था वो कुछ बोला ,ओ उन्हें पानी में बेहोशी की दवाई मिला कर पिलाने वाला था "

"नही असल में वो भी नशेड़ी किस्म का लड़का है जिसकी खबर उन केटर्स को भी नही थी जिनके साथ वो आया था,वो लोग बड़ी पार्टी होने के कारण कुछ लोगो को रोजी के हिसाब से काम कराने के लिए लाये थे,ये भी शहर में रोजी में काम करता है,दिन के 300 और नशा करके पड़ा रहता है ,इस काम के लिए उसे 10 हजार मिलने वाले थे ,उसे बस दवाई पानी में मिला कर निधि और खुसबू को पिलाना था उसके आगे का काम उसे नही करना था ,वो काम दूसरे लोगो का था ,जिसका उसे पता भी नही था,वो तो अच्छा हुआ की मेरे बंदे की नजर उस पर चली गई और वो निशि के अजीब हरकत को परख कर मुझे खबर दे दिया ,जिससे हमे उस लड़के का पता लग गया साथ ही खुसबू भी बच गई,लेकिन हमने एक गलती कर दी ,हमे निधि के किडनैप होने तक वेट करना था अगर हम थोड़ी और धीरज से काम लेते तो शायद कोई ऐसा आदमी पकड़ में आ ही जाता जो की तुम्हारे ही घर में रहकर तुम्हारे ही खिलाफ साजिश कर रहा है...."

डॉ की बात सुनकर अजय ने फिर से एक गहरी सांस छोड़ी .

"मेरी बात मानो कुछ दिन रेस्ट करो जाकर बाबा जी के पास रहो साथ ही खुसबू और निधि को भी ले जाओ ,वहां पर सुरक्षा का पूरा इंतजाम हो जाएगा ,और वहां आकर अगर किसी ने भी अगर कुछ करने की कोशिश की तो वो आसानी से पकड़ा जाएगा ,तुम्हे थोड़ी बेफिक्री दिखानी होगी ताकि वो लोग फिर से जल्दी ही कोई कांड करे और धरे जाए ,चुनाव से पहले ही ये निपट जाए तो अच्छा होगा क्योकि चुनाव के दौरान फिर से सभी को खुले में जाकर प्रचार करना है और उसमे खतरा और भी बढ़ जाएगा ."

तभी बाहर से मेरी के चिल्लाने की आवाज आती है ,अजय और डॉ एक दूसरे को देखते है ,अजय का सर झुक जाता है लेकिन आज उसे इन बातो की ज्यादा परवाह नही थी ,

"मेरी बात मानो अजय कुछ दिन आराम करो ,मैं यहां से अपने बंदे तुम्हारे पीछे लगा देता हु जो की 24 घंटे तुम्हारी और तुम्हारे परिवार की सुरक्षा में तैनात रहेंगे उनकी डिटेल मैं तुम्हे भेज देता हु ,उन्हें कहा कहा रखना है ये भी बता दूंगा ,किसी भी बहाने से अपने आस पास ही रखो ,"

"हम्म ओके डॉ ,और आप कुछ IAS,IPS अधिकारियों से मेरी मुलाकात करवाने वाले थे ,"

"हम्म मेरा एक पुराना दोस्त है जो की पहले फारेस्ट में अधिकारी था वो अब आईएएस है ,विकास ,वो तुम्हरी बैठक अरेंज करने की कोशिस कर रहा है ,"

"विकास ..नाम सुना सुना सा लगता है "

"बिल्कुल सुना होगा ,केशरगड़ में ..तुम्हरे चाचा और तुम्हारे पिता जी उसी अच्छे से जानते थे,खैर तुम अभी आराम करो बाकी सब देखा जाएगा ,हमे अपनी कोशिश करनी है बाकी की बाते भगवान पर छोड़ दो .."

डॉ का लहजा और बात दोनो ही सर्द थे,
 
अध्याय 69

इधर

रात में एक गांव में कुछ लोग ख़ौफ़ से कांप रहे थे,

"तूने सचमे उसे देखा "

"हा बड़े बडे बिखरे हुए बाल थे,पूरा नंगा और मारे हुए हिरण के मांस को कच्चा ऐसे खा रहा था जैसे की कोई जंगली जानवर ,मुझे देखकर चिल्लाया कि मैं आ रहा हु तुम लोगो के जीवन में अंधेरा भरने ...मैं तो कांप ही गया,मेरी तो सांसे ही नही चल रही थी ऐसे भागा हु वहां से की पीछे मुड़कर भी नही देखा "

सभी लोग उसकी बातो को ध्यान से सुन रहे थे,तभी एक बुजुर्ग बोल उठा

"जबसे पहाड़ी वाले बाबा ने उस तांत्रिक को भगाया था तब से अब तक वो कभी यहां के किसी व्यक्ति को नही सताया ,लेकिन अब कुछ दिनों से वो फिर से अपना ख़ौफ़ फैला रहा है,हमे बाबा के पास जाना होगा नही तो इसके आतंक और भी बढ़ जाएगा ,वो हमारे गांव से लोगो को उठाना शुरू कर देगा ,हमारी बहु बेटियों की इज्जत से खेलने लगेगा और हम कुछ भी नही कर पाएंगे ,अभी देर नही हुई है कल ही चलो बाबा जी के पास ,आखिर पिछले 100 सालो से उन्हों ने ही तो हमे बचा कर रखा है .."

बुजुर्ग की बातो से सभी सहमत थे ,उसके सिवा किसी के पास कोई चारा भी तो नही था ,

इधर

उसी दिन गांव की बैठक के थोड़ी देर बाद ,अंधेरे जंगल में 3 व्यक्ति खड़े थे ,

"वो लोग पहाड़ी वाले बाबा के पास जाने वाले है"

बाकी के दोनो व्यक्ति जोरो से हँसने लगे

"जाने दो जाने दो देखते है की वो क्या बिगड़ता है हमारे अघोरी तांत्रिक का "

"नही वो बहुत ही शक्तिशाली है ,पहले भी जब तांत्रिक ने गांव वालो को सताया था तो उसी बाबा ने उनकी मदद की थी ,"

इस बार उनमे से एक के चहरे पर थोड़ी शिकन आयी

"अच्छा वो पहाड़ी वाले बाबा जो है उन्होंने कैसे बचाया था गांव वालो को "

"कहते है आज से कुछ 100 साल पहले की बात है जब हमारे तांत्रिक महाराज खुले गांवो में घुमा करते थे और हर अमावस की रात को एक कुवारी लड़की की भेंट गांव वाले उन्हें चढ़ाते थे ,जिसके साथ वो संभोग करते और उसकी बलि देते थे,गांव वाले उनसे इतना डरते थे की कोई भी इसके खिलाफ नही बोलता था,जो बोलता वो दूसरे दिन का सूरज ही नही देख पता ,सभी को पता है की वो नरभक्षी है ,लेकिन उसी समय हमारे गांव का कोई व्यक्ति पहाड़ी वाले बाबा से मिला और उन्हें यहां लाकर पहाड़ी में उनके लिए सबने मिलकर मंदिर बनवा दिया ,उन्होंने ही तांत्रिक महाराज को गांव से भगाया ,उसके बाद भी कभी कभी कुछ लोग गांव से गायब हो जाया करते थे,लोग उस गुफा के आसपास भी नही जाते थे,उस कुछ सालो बाद ये घटनाएं होना बंद हो गई और लोगो को लगा की तांत्रिक महाराज का देहांत हो गया लोग फिर से गुफा के आसपास जाने लगे लेकिन फिर से वही कहर ,और इतने सालो बाद फिर से महाराज को देखकर सभी फिर से घबरा गए .."

"ये पहाड़ी वाले बाबा की उम्र कितनी है "

"क्या पता जैसे हमारे तांत्रिक महाराज अमर है वैसे ही बाबा भी अमर है वो हमेशा ही 50-60 के ही दिखते है ,"

उस व्यक्ति ने थोड़े आश्चर्य से कहा

"हम्म्म्म तुम क्यो तांत्रिक की पूजा करते हो तुम भी अपने पहाड़ी वाले बाबा की पूजा किया करो "

"मुझे भी ताकत चाहिए "

"अच्छा "

उस शख्स के चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आ गई

"क्या तुम लोगो ने उन्हें देखा है"

"हा मैंने उन्हें देखा है,तुम्हे भी मिलवा दे क्या "

गांव का आदमी सिहर उठा

"डरो नही बस दारू की एक बोतल और 2 किलो बकरे का कच्चा मांस ,लेकर अमावस की रात को आ जाना ,साथ ही अगर कोई कुवारी लड़की ले आओ तो तुम्हारी तो सिद्धि पक्की "

वो थोड़ा खुस हुआ लेकिन फिर से डर गया

"नही नही जो भी उस गुफा में गया वो बाहर नही आया है ,कई लोग वँहा दारू और मांस लेकर गए लेकिन कोई भी बाहर नही आया "

"हम तो आये ना "

वो सोच में पड़ जाता है ,

"देखो अभी समय है इससे पहले की तांत्रिक बाबा की ताकत और बड़े और वो गांव में आकर घूमने लगे जो जो उनकी शरण में आ जाएगा वो ही बचेगा ,सोचलो और अब पहाड़ी वाले बाबा कुछ भी नही कर पाएंगे क्योकि अब हमारे तांत्रिक बाबा इतने ताकतवर हो चुके है की उनके सामने कोई भी नही टिक सकता .जय शैतान की ,"

एक शख्स ने जोरो से कहा ,वो जग्गू था जो की खुद ही तांत्रिक बाबा के भेष बना चुका था ,

उसके साथ ही उसका दोस्त पुनिया था दोनो मिलकर बाबा के नाम पर कुछ लोगो को अपने तरफ करने में कामियाब हो चुके थे जिनसे सिद्धि और डर के नाम पर कुछ काम करा लिया करते थे ..

उसकी बात सुनकर वो शख्स और भी काँपने लगा

"जय शैतान की ...जय शैतान की .."

"ठीक है अभी तू जा और कल फिर से शराब और मांस लेकर आना "

उसके जाते ही जग्गू मांस पर झपटा जिसे पुनिया ने रोका

"अबे इसे भून तो ले "

"अरे मेरे भाई सालो से कच्चा ही खा रहा हु अब आदत मत बिगड़ मेरी वरना इन लोगो को डराएंगे कैसे ,तू अपने लिए इसे भून ले "

"हम्म ठीक है लेकिन पहले गुफा के अंदर चल "

दोनो ही गुफा के अंदर चले जाते है .

"मुझे एक बात समझ नही आयी की आखिर ये पहाड़ी वाले बाबा अभी तक 50-60 के कैसे लगते है जबकि गांव वाले उन्हें 100 सालो से जानते है "

"अरे ये लोग तो मुझे भी वही तांत्रिक मानते है ,मेरा गुरु 70-75 साल में ही मर गया था ,हो सकता है की उसका भी कोई गुरु रहा हो जिसे ये लोग आदमखोर तांत्रिक मानते रहे हो ,इन्हें तो ये ही लगता है की ना तांत्रिक मरता है ना ही पहाड़ी वाले बाबा ,तो जैसे तांत्रिक का रहस्य है वही रहस्य बाबा का भी होगा "

"ह्म्म्म "पुनिया ने एक गहरी सांस ली और अपने शराब को अपने हलक से उतारा...
 
अध्याय 70

धाय धाय धाय

हवा में गोलियो की आवाज और बारूद की बदबू फैल गई थी ,अजय के कंधे को छूते हुए वो बुलेट गुजरी थी लेकिन अजय की आंखों में खून उतर गया ,जो बुलेट उसे बस छू के निकली थी वो सीधे निधि के कंधे पर जा घुसी थी ,अजय बौखलाया उसने इतनी तेज ब्रेक मारी उसकी मोटरसाइकिल कई मीटर तक यू ही घसीटती चली गयी ...जंगल में घोर सन्नाटा छा गया गाड़ी रुकी ही थी की फिर कुछ नकाबपोश शख्सियत जंगल से प्रगट हुए वो जानते थे की इस समय अजय और निधि अकेले ही छिपकर बाइक से पहाड़ी वाले बाबा के आश्रम के लिए निकले है ,दूर दूर तक कोई नही था ना ही किसी से मदद की ही कोई उम्मीद थी ,निधि के कंधे से बहता हुआ खून अजय को पागल बना रहा था वही उन्हें इस अवस्था में देखकर नकाबपोशों के हौसले और भी बढ़ गए थे .,...वो तेजी से अजय की तरफ बड़े और फायर करने लगे ,उनकी संख्या लगभग 10 थी सबके ही हाथो में अत्याधुनिक हथियार थे और अजय बिल्कुल ही खाली हाथ वो झट से बाइक के पीछे छुपा उसे पता था की ये छुपने की सही जगह नही है लेकिन वो कर भी क्या सकता था ,वो निधि को अपनी बांहो में भरे हुए था और गोलियां उसके शरीर के पास से गुजर कर जा रही थी ,की अचानक बाजुओ में कोई नुकीली सी चीज आकर गड़ी,वो उसे आश्चर्य से देखने लगा वो तो जानवरो को बेहोश करने वाला इंगजेक्शन था ,वो घबराया हुआ निधि को देखने लगा और उसकी आंखे बंद होने लगी वो चाहकर भी सम्हाल नही पा रहा था अब वो नकाबपोश उसके आसपास ही खड़े दिख रहे थे और वो निधि को उठा रहे थे ,अजय ने पूरी कोशिश की लेकिन वो अपना हाथ भी नही उठा पा रहा था ,वो बस निधि की चीख और नकाबपोशों के हँसने की आवाज को ही सुन पा रहा था....धीरे धीरे उसके आंख बंद हो गए ...

इधर

खबर आंधी सी फैलाने लगी पूरा राज्य ही इस घटना से स्तब्ध था,घरके लोगो की नींद ही हराम हो गई थी ,उन्हें बस अजय की बाइक ही मिल पाई थी अजय और निधि का कोई भी सुराग हाथ नही लग रहा था ,पूरे 5 घंटे बीत गए थे ,प्रदेश के बड़े बड़े नेता और आफिसर भी इस बात से घबराए और हड़बड़ाये हुए थे,चुनाव सर पर था और अगर ऐसे में अजय और निधि का पता नही चल पता या कोई अनहोनी घटना घट जाती तो पूरा ठीकरा सत्तारूढ़ पार्टी के सर में फुट सकता था ,लेकिन चाहे विजय और बाली हो या तिवारी खानदान के लोग वो जानते थे की ये हमला राजनीतिक नही हो सकता ,कोई भी इतना बड़ा रिस्क नही उठाएगा,ये जानते हुए की उंनके परिवार की पहुच क्या है ,वो पूरे राज्य में हाहाकार मचा देंगे,.....

डॉ को अपने दिए गए सुझाव पर पछतावा हो रहा था ,आखिर उसने क्यो उन्हें अकेले ही जाने को कहा था,लेकिन अब देर हो चुकी थी किसी घर के भेदी ने ही कुछ ऐसी जानकारी लीक कर दी थी जिससे ये हादसा हो गया ,खोज चरम पर था जब डॉ ,बाली,कलवा और जिले का SP अजय और निधि को तलाश करते हुए पहाड़ी वाले बाबा के पास पहुच गए ,

"बड़ा ही गंभीर विषय है,आखिर कौन हो सकता है जो इस सहज और प्रेम से भरे हुए इंसान के लिए अपने दिल में नफरत रखता है."

उस तेजमयी विशालकाय और मनमोहक व्यक्तित्व की गहरी आवाज गुंजी

"बाबा जी पूरा इलाका छान मारा लेकिन कही कोई सुराग नही मिला "

इस बार बाली ने रोते हुए कहा ,

"बाबाजी जो गोलियां अजय और निधि के किडनैप किये जाने वाले जगह से मिली थी उससे पता लगता है की इसमें नक्सलियों का भी हाथ हो सकता है."SP कहा

तभी एक शख्स जो मैले कपड़ो में लिपटा हुआ था वँहा पहुच गया ,

"बाबाजी हमारी समस्या पर अपने गौर किया ,वो तांत्रिक तो अपनी हद से बाहर जा रहा है ,उसने फरमान भिजवाया है की हमारे गांव के सरपंच की कुवारी बेटी को जल्द से जल्द उसके पास भेज दे वरना वो हाहाकार मचा देगा ,"उस शख्स की आंखों में भी आंसू थे,डॉ ने बाबा जी को ध्यान से देखा ,

"क्या आप भी वही सोच रहे हो जो मैं सोच रहा हु "

डॉ ने बड़े ही गंभीर स्वर में कहा

"मुझे भी यही लगता है "बाबा जी की सहमति पर सभी लोग उन दोनो को ही देखने लगे

"हमे पहले गांव की समस्या सुलझानी चाहिए "

"आप पागल हो गए हो ,मेरा भतीजा और भतीजी की आपको कोई फिक्र नही है "बाली चीखा

"है.लेकिन तुमने नही सुना उसे कुँवारी लड़की चाहिए ,अगर उन्हें मरना ही था तो वो उन्हें मार ही देते शायद यहां बात और भी गहरी है जो हमारे समझ में नही आ रही है ,हो सकता है की गांव वालो की समस्या सुलझाते हुए हमे हमारी समस्या का समाधान भी मिल जाय,तुम लोगो के पास सब कुछ है जिससे हम उस तांत्रिक को पकड़ सके और उसके कहर से गांव वालो को बचा सके ,असल में मैंने अजय को इसी लिए यहां बुलवाया था ताकि वो मेरी जगह पर ये काम हाथ में ले सके ,हो ना हो भगवान हमे कुछ संकेत दे रहा है ."

6फिट 2 इंच का बाबा जी का शरीर उठ खड़ा हुआ ,एक गेहुये रंग की धोती बस उन्होंने लपेट रखी थी ,चौड़ी भुजाए और चौड़ी छाती देखकर कोई पहलवान भी उनसे डर जाय लेकिन मुख मंडल का तेज और सौम्यता उनके बारे में अलग ही जानकारी देती थी ..पास रखा त्रिशूल उठा लिया लगा की साक्षात शिव प्रगट हो गए हो ,वहां बैठे हुए उनके भक्त जानो की आंखों में अश्रु की धारा बह गई ,एक भक्त ने शंखनाद किया ,बाकियों के रोंगटे ही खड़े हो गए थे ,

"हमे जाना कहा है "

वहां खड़े हुए SP ने टूटते हुए आवाज में कहा

"उस गुफा में चलो जंहा जाने से ये लोग घबराते है और जिसे तांत्रिक का निवास कहा जाता है "
 
अध्याय 71

इधर

अजय को बेहोश हुए ना जाने कितना समय बीत चुका था ,उसे हल्की हल्की सी आवाज आते सुनाई दे रही थी ,हा वो जिंदा था ,शायद उसे यकीन ही नही था लेकिन उसे जैसे ही निधि की याद आई वो पूरे होशं से भर गया ,उसने हल्के से अपनी आंखे खोली ,वो सीलन भरी जगह थी जंहा पर नमी का अहसास हो रहा था साथ ही मांस के सड़ने की हल्की बदबू फ़ैली थी ,सामने एक काले पत्थर की बड़ी सी मूर्ति दिखाई दी साथ ही जो दृश्य उसे दिखाई दिया उससे उसकी रूह तक कांप गई ,मूर्ति के नीचे एक लड़की नग्न अवस्था में बैठी थी उसके बाल बिखरे हुए थे ,वो अजीब सी मचल रही थी जब उस लड़की ने सर उठाया वो अजय के प्राण कांप गए वो निधि थी ,माथे पर बड़ा सा तिलक था और उसके चारो ओर फूल बिछाए गए थे ,उसका दूधिया शरीर दूर से ही साफ दिखाई पड़ता था ,वो मानो बहुत ही नशे में थी ,पास ही उसने 2 लोगो को खड़े हुए देखा ,एक नकाबपोश था जबकि दूसरा किसी तांत्रिक की तरह दिख रहा था ,पूर्ण नग्न उस शख्स के शरीर पर राख लिपटे हुए थी ,बालो के नाम पर जटाएं थी जो बिखरी हुई थी वो लगड़ा कर चल रहा था पास ही एक बलशाली सा आदमी नकाब में था ,अजय ने अपने हाथ चलाने की कोशिस की वो बंधा हुआ था ,उसने रुकने का फैसला किया ,वो उत्तेजना में कोई ऐसा कदम नही उठाना चाहता था जिससे निधि को कोई खतरा हो ,जब तक वो जिंदा था निधि के बचने की उम्मीद थी .

"आखिर ये कैसे हो सकता है "

नकाबपोश शख्स बौखलाया

"मुझे क्या पता लेकिन ये लड़की कुँवारी नही है "

लंगड़ा तांत्रिक बुदबुदाया

"आखिर कैसे मैं इसपर सालो से नजर रखा हुआ हु ,इसका कोई बॉयफ्रेंड भी नही है ,किसी लड़के की छाया भी इसपर नही पड़ी और ये ...और तुम ये कैसे कह सकते हो ,इतना बड़ा रिस्क उठाया है मैंने इसके लिए और तुम ."

वो और भी बौखलाया

"हमे लड़कियों के कौमार्य की परीक्षा करना सिखाया जाता है ,अगर इसकी बलि दे दिया तो शैतान नाराज हो जाएगा और इसकी सजा हमे मिलेगी ,"वो हड़बड़ाया हुआ बोला

"तेरे शैतान की तो मैं.."

उसने अपनी बंदूख उठाई और उस मूर्ति के सामने तान दिया

"पुनिया "जग्गू जोरो से चिल्लाया ,पुनिया ने तुरंत ही उसे चुप करा दिया

"पागल हो गया है क्या ,हमारे नाम किसी को भी पता नही चलने चाहिए "पुनिया हड़बड़ाया

"तो तू शैतान के बारे में ये कैसे बोल सकता है ,ये लड़की अब शैतान की भेंट तो चढ़ चुकी है ,लेकिन इससे हमे कोई भी लाभ नही हो सकता,अगर हमने इसे छुवा तो उसका कहर हमपर बरसेगा ,अगर हम शैतान को इसे भोगने के लिए आमंत्रित करे तो ये कुँवारी नही है शैतान हम पर ही बरसेगा "

जग्गू बड़े ही गंभीर होते हुए कहा

"तू पागल है ये सब दुसरो को डराने के लिए ही ठीक है ,तू भी इन सब पर विस्वास करता है "

जग्गू जोरो से हंसा

"अपनी आधी जिंदगी मैंने ये सब देखते हुए बिताया है और तू मुझे विस्वास की बात करता है ,हा लोगो को डराने के लिए कुछ पैतरे अपनाने पड़ते है लेकिन ये कोई पैतरा नही है,सच में शैतान को कुँवारी लड़की का भोग लगाने से वो खुस होता है और इससे हमारी शक्ति बढ़ती है,सालो से मैं ये करना चाहता था ,उस सरपंच की बेटी ही मिल जाती तो अच्छा था कहा हम इसे कली समझ कर इसके पीछे पड़ गए ,अगर हमारा ये प्रयास सफल हो जाता तो हमे हराना किसी भी के लिए नामुमकिन हो जाता ,"जग्गू मायूस था

"लेकिन अगर हम इससे संभोग भी नही कर पाए तो इस लड़की के जिंदा रहने का मतलब भी क्या हुआ "पुनिया अब बेचैन हो गया था

"क्योकि हमने इसे शैतान को सौप दिया है ,मैंने सभी विधि विधान तो कर दिए है लेकिन शैतान को बुलाने से पहले मुझे इसके कौमार्य के भंग होने की जानकारी मिल गई ,जब मैं इसके योनि को छुवा ,हम बच तो गए लेकिन अब फंस भी गए ,अब इसे ना ही मार सकते है क्योकि इसे मारने का अधिकार अब शैतान का ही है ,"

कुछ देर की खामोशी के बाद पुनिया के चहरे में एक शैतानी मुस्कुराहट ने जन्म लिया

"अगर शैतान को इसके भाई के अंदर बुलाया जाय तो "पुनिया की बात से जग्गू का चहरा खिल गया

"ये हुई ना बात ,अब भाई ही अपनी बहन को मारेगा और इसके अंदर का शैतान उस आदमी को मार डालेगा जिसने उसे एक पहले से इस्तेमाल की हुई लड़की का भोग लगाया ,मतलब इसका भाई ही मरेगा ,हम बस तमाशा देखेंगे दोनो ही मौत का "

"मुझे तो ये देखना है की कैसे एक भाई ही अपनी बहन को हमारे सामने चोदेगा ,वो भी जब उसके अंदर शैतान का वास हो ."

पुनिया की ख़ौफ़नाक हँसी पूरे गुफा में गूंज गई वही उनकी बाते सुनकर अजय की रूह कांप गयी ..

अध्याय 72

निधि के नंगे जिस्म को घूरती हुई दो आंखे थोड़ी चौड़ी हो चुकी थी ,गुलाल फैल कर उसके जिस्म के कुछ हिस्सो में लग चुका था ,माथे का गुलाल फैल चुका था और वो झूम रही थी दुनिया की कोई भी खबर उसे नही थी ,जैसे वो किसी गहरे नशे में हो ,उफनती हुई जवानी पुनिया और जग्गू के मुह में पानी तो ला रहा था लेकिन उन्हें पता था की इससे छूना यानी अपनी ही मौत को दावत देना था,पास ही अजय बंधा हुआ था उसके कपड़े उतारे जा चुके थे उसे कुछ ऐसा पिलाया गया था की उसके आगे सबकुछ नाचता हुआ सा दिख रहा था ,वो बैचैन था उसे पता था की उसके साथ क्या किया जा रहा है लेकिन इतना मजबूर भी था की कोई सहारा उसे दिखाई नही दे रहा था,उसके हाथ अभी भी बंधे हुए थे और वो छूटने की पूरी कोशिस भी कर रहा था लेकिन वो लोग जानते थे की इसे छोड़ना मतलब अपनी ही मौत को दावत देना था,जग्गू अपने विधि विधान में लगा हुआ था उसने एक बड़ा सा चाकू निकाला और अजय के हथेली को बड़े ही प्यार से काट दिया ,खून की फुहार बरस गई थी ,उसकी हथेली को जग्गू ने निधि के सर के ऊपर रख दिया ,उसका खून निधि के बालो में सनता चला गया,निधि किसी जंगली जानवर की तरह गुर्राई जिसे देख दोनो के चहरे में एक मुस्कान खिल गई वही अजय सहम सा गया,उसकी आंखों में अपनी बहन की ये हालत देख कर आंसू आ गए थे,वो भी नशे में था लेकिन अपने को सम्हाले हुए किसी एक छोटे से चांस के इंतजार में था लेकिन जग्गू भी साधा हुआ खिलाड़ी था वो ऐसी कोई भी गलती नही करना चाहता था जिससे की सालो की मेहनत पर पानी फिर जाय ..

पास ही जलती हुई आग से निधि का जिस्म गर्म होने लगा था और वो पसीने से नहा चुकी थी ,जग्गू एक खोपड़ी में कुछ खून अजय का भरा और अपने मंत्र पड़ने लगा,उसने कुछ और भी उसमे मिलाया ,वो अजीब अजीब सी हरकते करता हुआ उस काले शैतान की मूर्ति के पास आया और उसके चरणों में उसे रख दिया फिर उसे उठाकर पुनिया को इशारा किया जो अब भी नकाब के पीछे ही था ,पता नही उसे अब भी यही डर था की कोई उसे पहचान ना ले ,पुनिया ने अजय का मुह पकड़ा और नाक बंद कर दी अजय को बहुत ही कस कर बंधा गया था लेकिन फिर भी उससे कुछ करवाना मुश्किल हो रहा था,पुनिया जैसे तैसे उसे सम्हाल रहा था अजय को जब सांस लेने में तकलीफ होने लगी वो मुह खोला जग्गू ने उसके मुह को पकड़ लिया और खोपड़ी में रखा हुआ द्रब्य उसके मुह में डाल दिया ,अजय मजबूरी में ही उसे पीना पड़ा ,,जैसे ही उसने वो द्रब्य पूरा खत्म किया दोनो उसे छोड़कर दूर खड़े हो गए ,और अजय को डरे सहमे से देखने लगे ,वो ऐसे छटपटा रहा था जैसे की करेंट लगा दिया गया हो ,वो छटपटाते हुए गिर गया,थोड़ी देर को शांति सी छा गई तभी अजय के शरीर में हलचल हुई उसकी बांहे फसफड़ाई और मज़बूती से बांधे गए बंधन किसी पतली डोर की तरह टूटते चले गए ,

"आआआआआहहहहहहह "अजय उठ खड़ा हुआ था वो ऐसे गरजा जैसे की कोई शेर हो ,पुनिया और जग्गू डर से काँपने लगे थे ,अजय का चहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था मानो खून उतर आया हो ,भुजाए फड़क रही थी और सांसे तेज थी,आंखों पूरी तरह से लाल ,उसके अंदर शैतान आ चुका था ,दोनो ही अपने घुटनो पर बैठ गए और अपना सर जमीन से टिका दिया,अजय फिर से दहाड़ा ये दहाड़ इतनी डरावनी थी की दोनो के प्राण कांप गए वही इसकी आवाज बाहर खड़े उन लड़ाकों तक भी पहुच गई जो गुफा की रक्षा में तैनात किये गए थे ,वो इतना डरावना था की वो सब छोड़ वँहा से भागे,जैसे की कोई शेर उनके पीछे पड़ा हो ,

अजय रूपी शैतान निधि की ओर घुमा निधि अभी भी पागलो की तरह बस झूम रही थी ,इधर अजय अपने ही शरीर पर किसी और के कब्जे से छटपटाने लगा था लेकिन उसकी छटपटाहट किसी को भी दिखाई नही दे रही थी ,वो अपने शरीर पर फिर से अधिकार चाहता था ,वो बाहर का नजारा देख सकता था लेकिन जैसे लकवा मार दिया गया हो उसका कोई भी अधिकार अपने शरीर पर नही था ,शैतान निधि के करीब आया और उसे किसी फूल सा उठा लिया उसके हाथ निधि के नितम्भो पर थे और वो उसे मसलने लगा था ,वो उसके सामने किसी गुड़िया की तरह लग रही थी ,वो अजय का शरीर था जिसे उसने सालो की मेहनत से इतना भारी और ताकती बनाया था ,शायद शैतान भी इस शरीर से बहुत खुस रहा होगा,वो निधि को उठाकर बिछे हुए गुलाल पर पटक देता है ,

"आआआ "निधि को पहली बार दर्द का अहसास हूं और उसका होशं धीरे धीरे वापस आने लगा ,उसने देखा की अजय पूरी तरह से नंगा उसके सामने खड़ा है ,उसे जो पिलाया गया था उसका ही असर था की इतने जोरो से गिरने पर भी उसके शरीर में वो दर्द नही हो रहा था जो होना चाहिए ,वो थोड़े होश में थी और थोड़ी बेहोशी में ,अजय का शरीर उसके ऊपर लेट जाता है ,और जो होता है उसे देखकर पुनिया और जग्गू का दिमाग ही चकरा गया ,उन्हें लगा था की जैसे ही निधि को थोड़ा होशं आयेगा और वो अजय के शरीर को अपने ऊपर चढ़ते देखेगी वो चिल्लाने और छटपटाने लगेगी ,और शैतान उसके साथ जमकर बलात्कार करेगा लेकिन ....?????

लेकिन यहां तो माजरा उल्टा ही हो गया,निधि ने अजय के शरीर को ना सिर्फ सहर्ष अपने ऊपर लेटने दिया बल्कि वो उसके उसके गले में अपना हाथ भी डाल दी ,और उसे अपने ऊपर और भी जोरो से खिंचने लगी ,दोनो ही एक दूसरे के चहरे को देखने लगे ,वो खुद के ही जाल में ऐसे फंस चुके थे की उनकी बोलती ही बंद थी ,उन्हें बस एक ही आशा थी की जैसे ही शैतान को पता चलेगा की निधि का कौमार्य भंग हो चुका है वो अजय के शरीर को तड़फएगा और निधि को जबरदस्त तरीके से रौंदेगा,जिससे दोनो ही जान ही चली जाएगी ,वो लाचार से बस देखने लगे ,कितने ख्वाब देखे थे उन्होंने की निधि की जवानी का मजा लूटेंगे,लेकिन यहां तो सब कुछ ही उल्टा पड़ता नजर आ रहा था ,

अजय के शरीर में उपस्थित शैतान भी निधि के इस हरकत से घबरा गया था ,वह तो बुराई के वजूद में ही पल सकता था प्यार के नही ,इधर अजय के शरीर में बसा हुआ अजय निधि के हरकत को देखकर मुस्कुरा दिया ,वो अपनी बहन को प्यार करने के लिए जोर लगाने लगा,निधि और अजय का प्यार तो शैतान पर भी भारी पड़ने लगा था ,शैतान उसे तड़फना चाहता था लेकिन अजय अपनी ताकत उसे प्यार करने में लगाना चाहता था ,निधि ने अजय के शरीर का सर पकड़ा और उसे अपनी ओर खिंचते हुए उसके होठो को अपने होठो में मिला लिया ,अजय ने पूरी कोशिस की कि वो उसे महसूस कर सके और एक सेकंड के 10 वे हिस्से में ही सही उसने उसे महसूस किया ,अजय को key मिल गई थी ,उसे वो चाबी मिल गया था जिससे वो अपने शरीर पर फिर से अधिकार पा सकता था ,वही होठो के मिलने पर शैतान बुरी तरह से झल्ला गया था वो अपने सर को हटाने लगा लेकिन उसे लगा की शरीर का मलिक शरीर पर फिर से उपस्थित हो गया है वो कुछ देर के लिए असहाय हो गया ,उसे समझ आ चुका था की क्या हो रहा है ,वो फिर से गरजा ,वो उठ खड़ा हुआ और निधि को एक तमाचा जड़ दिया},तमाचा इतने जोरो का था की अगर निधि सामान्य हालत में होती तो शायद वो बेहोश ही हो जाती लेकिन भला हो उस द्रव्य का जिसे उन दोनो ने निधि को इसलिए ही पिलाया था की वो इतने नशे में रहे की शैतान की मार को सके और मर ना जाय,लेकिन इतने होश में भी रहे की अपने साथ होने वाली घटना को जान सके ,अब यही अजय और निधि के पक्ष में हो गया था ,निधि थोड़ी मचली और उस मार को अजय का प्यार समझ कर थोड़ा ऊपर उठकर उसे अपने गले से लगा लिया ,

"आह भईया "उसका नंगा जिस्म जब अजय के शरीर से पड़ा तो अजय उसे महसूस करने की पूरी तमन्ना से भर उठा वो निधि को जोरो से पकड़ा और अपने होठो से उसके होठो को मिलाकर चूमने लगा ,इसी दौरान अजय ने अपने लिंग को निधि के योनि ने प्रवेश करा दिया ,ये वो संवेदना थी जो इतनी मजबूत थी की अजय को अपने शरीर में बंधे रख सकती थी ,इससे उसके मन में निधि के लिए प्यार कई गुना बढ़ जाता था ,और वही हुआ ,अजय हल्के हल्के से अपनी कमर हिलाने लगा ,निधि उसके गोद में मचलने लगी और शैतान ...उसकी हालत ऐसी हो गई थी जैसे पहले अजय की थी वो अपने को लकवा ग्रस्त महसूस कर रहा था ,वो कभी कभी अजय के शरीर में पुनः कब्ज़ा कर भी लेता तो उस प्यार का अहसास उसे कमजोर कर देता और अजय फिर से अपने शरीर को कब्जे में कर लेता ,इस बार शैतान ने पूरी ताकत लगा कर शरीर को अपने कब्जे में किया और उठ खड़ा हुआ उसे कुछ ऐसा करना था जिससे उसकी शैतानियत जिंदा रहे ,वो उठा और उसकी नजर उन दोनो खड़े शख्सों पर गई ,वो क्रोध से चिल्लाया ,दोनो ही दहल गए ,शैतान को हमेशा ही कुवारी लड़कियो का भोग लगाया जाता था ,आज उसे ना तो कुवारी लड़की दी गई बल्कि ऐसे लड़के के जिस्म में प्रवेश करा दिया गया जो की उस लड़की का प्रेमी था और उनका प्रेम इतना मजबूत था की उसकी शैतानियत उस प्यार के सामने फीकी पड़ रही थी ,वो दोनो की तरफ बड़ा दोनो ही काँपने लगे ,अजय को तो चाबी मिल ही गई थी वो अंदर बैठा खुस होता हुआ तमाशा देख रहा था ,वो अपने को ढीला छोड़ा वो जानता था की जैसे ही शैतान निधि के करीब भी पहुचे उसे क्या करना है से बस निधि को महसूस करने की अपनी तडफ को बढ़ानी है और वो अपने शरीर का मालिक हो जाएगा फिर उसे निधि के साथ शाररिक संबंध बनाना है ,

इधर

दोनो ही वहां से भागने की कोशिस करने लगे लेकिन शैतान ने दोनो को गले से पकड़ कर उठा दिया

"हे शैतान मैं तो आपका भक्त हु आप मुझे छोड़ दीजिये दया करे दया करे "

जग्गू चिल्लाने लगा

"तुमने मुझे ऐसे आदमी के शरीर में बुलाया जो की इस लड़की का प्रेमी है और वो लड़की भी कुवारी नही है ,ये दोनो पहले ही संभोग कर चुके है "एक भारी और डरावनी आवाज से पूरी गुफा गूंज उठी

"नही नही हमने नही इस शरीर के मालिक ने जानबूझकर आपको अपने शरीर में बुलाया है ,इसे दंड दे और इसकी प्रेमिका को भी "जग्गू ने काँपती आवाज में कहा

"आआआ मैं इसे नही छोडूंगा "शैतान चिल्लाया और दोनो को किसी गेंद की तरह दूर फेक दिया ,दोनो की ही जैसे हड्डियां ही टूट गई थी शैतान फिर से निधि की ओर पलटा

"यहां रहना खतरे से खाली नही है भागो यहां से "जग्गू ने पुनिया को इशारे से एक दूसरे गेट की तरफ इशारा किया जो सीधे ही जंगल की ओर खुलता था ,इसका पता बस जग्गू और पुनिया को ही था ,

"लेकिन मेरी सालो की मेहनत ,मैं इन दोनो को ही गोली मार देता हु "

पुनिया चिल्लाया

"साले पागल हो गया है क्या ,तू अजय को नही शैतान को गोली मरेगा और तुझे क्या लगता है इसके बाद हम दोनो बचेंगे,वो जिंदा खा जाएगा हम दोनो को ,भला इसी में है की भाग और अगली बार जब कोई लड़की लाये तो उसका अगला पिछले सब देख कर लाना "पुनिया की आंखों में खून उतर आया था उसे तो यकीन ही नही हो रहा था की आखिर ये हो क्या गया ..निधि और अजय जो एक दूसरे को इतने शिद्दत से चाहते है ...उसने तो जन्म में भी नही सोचा था की ये हो सकता है लेकिन अब उसके लिए सोचने का कोई भी वक्त नही था वो दोनो वहां से निकल गए ...

इधर शैतान निधि के ऊपर चढ़ने ही वाला था की निधि ने अपनी बांहे उसके स्वागत के लिए फैला दी ,वो फिर से झल्लाया और चिल्लाया लेकिन इसका कोई भी असर निधि पर पड़ा ही नही वो बस मुस्कुराए जा रही थी और इसी प्यार के पल में शैतान कमजोर हुआ और अजय अपने शरीर पर हावी वो गया ,वो जल्दी से अपने होठो को निधि के होठो से मिला लिया और अपने लिंग को उसके योनि के हवाले किया वो बड़े ही प्यार और इत्मीनान से उसके साथ संभोग करने लगा था,उसे पता था की जितना वो प्यार से भरेगा शैतान उतना ही कमजोर होता जाएगा ,कभी कभी जब शैतान बहुत कोशिस के बाद शरीर को अपने काबू में ला लेता तो वो जोरो से धक्के देता था लेकिन इससे निधि डरती या दर्द से छटपटाती नही बल्कि आह भरती हुई उसे और अपनी ओर खिंच लेती और उसके चहरे में एक मुस्कान आ जाती उसे लगता था की उसके भइया उसके साथ शरारत कर रहे है कभी बहुत ही हल्के हल्के तो कभी जोरो से उसे प्यार कर रहे है ,बेचारा शैतान ..फिर से कमजोर पड़ जाता और अजय फिर से अपनी बहन के प्यार में डूब कर हल्के हल्के धक्के देने लगता ,जब शैतान आकर जोरो से धक्के देता था और निधि आहे भरती हुई मुस्कुराती तो अजय के होठो में मुस्कुराहट खिल जाती ,जो की उसके चहरे पर नही आ पाती क्योकि उस समय शरीर तो शैतान के कब्जे में होता लेकिन जैसे ही वो कमजोर पड़ता और अजय शरीर पर हावी होता वो रुकी हुई मुस्कान उसके चहरे में आ जाती ,निधि को भी ये खेल पसंद आ रहा था,सच तो ये था की कभी निधि और अजय को इससे ज्यादा मजा संभोग में आया ही नही था,एक व्यक्ति ने दोनो पक्ष यहां उपस्थित थे शैतान भी और प्यार करने वाला इंसान भी निधि की गदराई जवानी ने अपने काम का रस छोड़ दिया लेकिन इधर से तो कोई उम्मीद ही नही थी क्योकि यंहा एक नही दो शक्तियों एक साथ काम कर रही थी ,निधि बेतहासा अजय के गालो और होठो को चूमने लगी और अजय गहरे और धीरे धीरे धक्के उसकी योनि में लगाने लगा ,उसके मुह से भी आहे निकल रही थी ,शैतान इतना कमजोर पड़ चुका था की कुछ सेकंड को भी हावी नही हो पा रहा था,कभी हो भी जाता तो दो तीन धक्कों में फिर से वापस जाना पड़ता जो की निधि के लिया बहुत ही मजे का सबब बन जाते थे ,अगर उसे अभी कोई शरीर मिल जाता तो वो फुट फुट कर रो पड़ता वो कभी अपने को इतना कमजोर और असहाय महसूस नही किया था...अजय अपने ये खेल चलता ही रहा जब तक की अजय को किसी के आने की आवाजे नही आने लगी वो शैतान को हावी नही होने देना चाहता था इसलिए वो बस उधर ध्यान ना देकर निधि से खेल रहा था निधि भी अपने भाई के प्यार के पूरी तरह डूबी हुई दुनिया को भूली थी ,,

तभी वँहा डॉ बाली पहाड़ी वाले बाबा और साथ में ही विजय नितिन और उनके कुछ और भी साथी प्रवेश किये बाबा ने माजरा देखते ही सब कुछ समझ लिया वो बाकियों को बाहर ही रोक कर खुद डॉ,विजय और बाली,कलवा के साथ उनके पास गए जंहा दोनो संभोग में रत थे सभी मुह फाडे ये देख रहे थे की कैसे एक भाई अपनी जान से प्यारी बहन के साथ संभोग में इतना व्यस्त है की उसे किसी का भी ख्याल नही .

"इसके शरीर में शैतान है ,सभी पीछे हट जाय "बाबा का हुक्म सुनते ही सभी पीछे हट गए ,विजय और बाली के आंखों में आंसू थे उनसे दोनो की हालत देखी नही जा रही थी ,बाबा ने कुछ मंत्र फुके अजय को समझ आ चुका था की उसकी सहायता को कोई आ चुका है वो धक्के में तेजी करने लगा ,वो जितने जोर जोर से हो सके धक्के देने लगा ,इससे शैतान को ऐसा लगा की उसे मौका मिल गया वो अजय के शरीर पर हावी हो गया और पूरे ताकत से धक्के देने लगा शैतान अब अपने पूरे शबाब पर आ चुका था ,निधि भी कई बार झड़कर थक चुकी थी इस तरह ताकतवर झटकों से छटपटाई और दर्द से चिल्लाने और उसे रोकने लगी ,शैतान तो खुसी से झूम उठा उसे लगा की अब वो आराम से इस शरीर को अपने कब्जे में रख सकता है लेकिन असल में अजय ने जानबूझकर अब उस शरीर में कब्जा करने से बच रहा था ,...

इधर बाबाजी ने मंत्र पढ़कर जो जल अजय के शरीर पर डाला उससे शैतान की चीख ही निकल गई ,अजय का शरीर भी जल उठा था उसके पीठ पर छाले पड़ने लगे वो निधि से दूर होकर छटपटाने लगा ,आंखे लाल हो चुकी थी वो गुस्से और पीड़ा से ऐसे भरा हुआ दिख रहा था जैसे किसी ने उसके साथ बहुत बड़ा धोका किया हो, अजय का शरीर थोड़ी ही देर में शांत होकर पड़ा रहा ...बाबाजी ने निधि के ऊपर भी मंत्र पड़कर पानी छिड़का जिससे वो बेहोश होकर गिर पड़ी,.........
 
अध्याय 73

अजय को होश आया तो वो अपने बिस्तर में पड़ा हुआ था,वो तेजी से उठकर खड़ा हुआ, पास खड़ी नर्स ने उसे रोका लेकिन

"निधि निधि कहा "

"आप शांत हो जाइए वो बाजू वाले कमरे में है और अच्छी है"

अजय को बहुत ही थकान महसूस हो रही थी लेकिन वो बेचैन था ,उसने हाथ मे लगी ड्रिप को निकाल फेका,

"अरे रुकिए "

नर्स उसके पीछे चलने लगी कमरे के बाहर परिवार का हर सदस्य मौजूद था,मुख्यमंत्री बंसल भी वहां आये हुए थे,सभी अजय को देखकर खड़े हो जाते है,लेकिन उसे इन सबकी फिक्र कहा थी,वो निधि के कमरे में गया, वो अभी भी आंखे बंद कर सोई हुई थी, पास ही उसकी बहने खड़ी थी,

"निधि निधि "

वो धीरे से आंखे खोलती है और बहुत ही प्यार से अजय को देखती है,

"आप कैसे हो ,"वो बहुत कमजोर लग रही थी, अजय के आंखों में आँसू था लेकिन निधि के चहरे में मुस्कुराहट ,

"आप फिक्र मत करो मैं अच्छी हु"

वो हल्के से मुस्कुराते हुए बोली

"जिसने भी ये किया है उसे मैं जिंदा नही छोडूंगा "

अजय की आवाज कांपने लगी थी

वो उठ कर बाहर आ चुका था,

"अगर पेशेंट को होश आ रही हो तो हमे बयान लेना होगा"

बाहर खड़ा sp डरते हुए बोला

"कोई बयान बाजी नही होगी,बस किडनैप किया गया और मिल गए इतना ही लिखो रिपोर्ट में "अजय की आंखे देखकर sp थोड़ा सहमा

"लेकिन सर"

"गुनहगारों को ढूंढने और सजा देने की जहमत तुम मत उठाओ sp , वो मैं कर लूंगा ,तुम बस फार्मेलटी पूरी करो और मेरी बहन का कोई बयान नही लिया जायेगा उसे आराम करने दो"

पास ही खड़े बंसल ने sp को इशारा किया और वो चलता बना

"अजय मेरा या मेरी पार्टी का इस सबसे कोई भी ताल्लुक नहीं है जैसा की ये मीडिया वाले कह रहे हैं,"

बंसल ने अपनी सफाई दी

"मुझे पता है अंकल और आप फिक्र मत करे मैं मीडिया के सामने आ कर सब कुछ क्लियर कर दूंगा,"सामने खड़ा हुआ विजय की आंखों लाल सूर्य जैसे धधक रही थी,

"वो तांत्रिक बचकर नही जा पायेगा भैया हम हर जगह उसे ढूंढ रहे हैं,"

"वो एक नही दो थे ,पुनिया हा यही नाम था उस दूसरे व्यक्ति का "

विजय थोड़ी भी देर लगाए बिना वँहा से निकला.

इधर

"मादरचोद तेरे इस शैतान के चक्कर में जिंदगी झंड हो जाएगी ,सभी तुझे कुत्तों की तरह ढूंढ रहे हैं,"

"मैंने कहा था, तूने ही तो जल्दबाजी की थी ,"

दोनो ही घने जंगल के बीच किसी अज्ञात स्थान पर छुपे हुए थे,

"खैर मरने मारने का फैसला तो कर ही चुके है,तो अब डरना कैसा "

पुनिया का चेहरा लाल हो चुका था..

इधर

अजय अब भी बहुत कमजोर महसूस कर रहा था, उसे सबने समझा कर उसके कमरे में सुला दिया था ,

एक सुबकने की आवाज ने उसकी नींद तोड़ी,

"तुम???"

खुसबू की आंखों में बस आंसू थे वो कुछ भी ना बोली वो उसके पैरों के पास बैठी हुई थी,

"अब कुछ बोलोगी भी"

लेकिन खुसबू की नजर अभी भी नीचे ही थी,अजय उठा और उसके हाथो को पकड़ कर अपने ऊपर खिंच लिया,खुसबू अब उसके ऊपर सोई हुई थी आंखों से आंसू बह रहे थे ,लेकिन वो अजय की छाती से चिपके हुए थी ,वो अपने सर को उठाने की थोड़ी भी जहमत नही उठा रही थी,

"मुझे पता चला कि उस तांत्रिक ने आपके और निधि के साथ क्या किया "वो और भी थोड़े जोर से अजय के सीने से लग गई,

अजय थोड़ी देर के लिए तो गम सा हो गया लेकिन फिर उसे निधि के चहरे के भाव दिखाई दिए और उसके चहरे में एक मुस्कान खिल गई ,लेकिन उसे भी ये डर लगा की कही खुसबू को ये भाव ना दिख जाय ,उसे उन दो लोगो पर बहुत ही हँसी आ रही थी जो की चाहते थे की भाई बहन का बलात्कार करे वही निधि को इतने मजे में उसने कभी नही देखा था साथ ही उसे भी इतने गहराई का अहसास कभी भी नही हुआ था,वो खुसबू को अपने से और भी सटा लेता है और उसे कसकर पकड़ता है ,उन यादो का असर उसके पेंट के नीचे के हिस्से में हो रहा था,उसे थोड़ा आश्चर्य हुआ की जिस चीज को लेकर वो इतना अपसेट था,और अपना खून जला रहा था जो की उसके और उसके परिवार के लिए सुरक्षा का विषय था ,उस बात में भी उसका लिंग अंगड़ाई मार रहा है,कहते है ना की शैतान बाहर ही नही एक शैतान अंदर भी होता है ,अजय को अपनी ही सोच पर हँसी आयी लेकिन फिर उसे याद आया की खुसबू ने आखिर कहा क्या है ,उसे पता चल गया मतलब की पूरे घर को इस बात का पता होगा,शायद कोई भी उसे कुछ कहे नही लेकिन ,,....ओह ये मौत सी खामोशी का कारण यही था.

वो खुसबू के बालो ने हाथ फेरता है ..

"तो तुम अब हमारे रिस्ते के बारे में क्या सोचती हो."

अजय के बात से खुसबू उससे अलग हो गई और उसे बड़े ही दर्द भरे नजरो से देखने लगी ,

"आपको क्या लगता है "

अजय बिना कुछ बोले ही उसे देख रहा था,

"मैं आपकी हो चुकी हु और जो भी हुआ वो सब तो एक साजिश की तहत कराया गया था ,इसमें आप दोनो की गलती ही क्या है ,वो एक हादसा था जिसे भूल ही जाना चाहिए "

वो अजय की आंखों में देखती है

"कोई भी लड़की कभी ये सहन नही कर पाएगी की उसके प्यार के शरीर के साथ कोई और ."

अजय के बोलने से पहले ह खुसबू ने अपने उंगलियों को उसके होठो पर रख दिया

"बस अब चुप ,मैं जानती हु की आप क्या हो .."

उसके होठो में एक मुस्कान तैरने लगी

"अच्छा क्या हु मैं "

"मेरे भगवान .."खुसबू अपने होठो को अजय के होठो के पास ले जाने लगी थी लेकिन अजय ने उसे वही रोक दिया ,

"ये मेरा निधि के साथ पहला सेक्स नही था खुसबू ,मुझे भगवान की उपाधि देने से पहले ये सोच लो ,की मेरे शाररिक संबंध मेरे बहन के साथ भी रहे है और ऐसा किसी गलती से एक बार नही हुआ है ये सोच समझ कर कई बार हमारे बीच हुआ है ,और इसका कोई भी गिला कभी भी मेरे दिल में नही रहा ना ही रहेगा ,मैं अपनी बहन से बेतहासा प्यार करता था करता हु और करता रहूंगा,मैं जानता हु की ये सब सुनने के बाद तुम मेरा यकीन नही करोगी लेकिन यकीन मानो मैं तुमसे भ बहुत प्यार करता हु "

अजय की बातो का खुसबू के कानो को विस्वास ही नही हो रहा था ,वो झटके से उठी और उठते ही लड़खड़ा गई ,वो थोड़ा सम्भली और अपने आंसू पोछकर अजय को अजीब से निगाहों से देखने लगी जैसे पूछ रही हो की क्यो ,आखिर क्या हुआ ये ...खुसबू बस देखती ही रही लेकिन अचानक जैसे उसे झटका लगा की आखिर हुआ क्या है वो झट से उठी और सीधे ही कमरे के गेट की तरफ अपने कदम बड़ा दिए ...
 
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