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Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग compleet

" उनके एक हाथ की उंगलियों ने मेरे निपल को पकड़ के फ्लिक करना शुरू कर

दिया. और दूसरा हाथ, मेरी जांघे अब पूरी तरह खुल चुकी थी, वह 'उसके' अगल

बगल सहला रहे थे, मैं जोश के मारे पागल हो रही थी, मेरा मन कह रहा

था वह मुझे 'वहाँ' छुए, पर जैसे उन्हे मुझे तड़पाने मे मज़ा आ रहा था.

उनकी उंगली ने जब बहोत देर तड़पाने के बाद मेरे नीचे वाले बाहरी लिप्स

छुए ना, मुझे लगा जैसे मुझे 440 वॉल्ट का झटका लगा हो पर उन्होने हाथ

हटा लिया. मैं अब खुद कमर हिला रही थी उन्होने दूसरा लिप्स छुआ और अबकी बार

वह अपनी उंगलियों मे ले दोनो भगोश्ठ सहलाने लगे. कुछ देर बाद

उन्होने अपनी उंगली का टिप थोड़ा सा अंदर डाला, मैने अपनी दोनो जंघे पूरी

तरह फैला रखी थी इत्ता अच्छा लग रहा था कि बस बता नही सकती, मेरी आँखे

मज़े मे बंद हो गयी फिर अचानक उन्होने, अपनी अंगुली और अंदर कर दी और उसे

गोल घुमाने लगे. थोड़ी देर इस तरह तंग करने के बाद, निकाल कर मूह मे डाल

लिया और उसे मुझे दिखा कर चाटने लगे"

" चाटने लगे" गुड्डी बोली. जोश के मारे उसकी हालत खराब थी.

" अच्छा ये बता, वहाँ बाल तूने सॉफ किए था या" मैने मुस्करा कर अल्पी से पूछा.

" हां दीदी आपने मुझे जीजू की पसंद बता दी थी कि उन्हे चिकनी, सॉफ सुथरी

अच्छी लगती है तो घर जाके मैने फ्रेंच की पूरी बतल वहाँ एक रोम भी

नही बचा था, और पीछे भी, अच्छा गुड्डी तू बता तेरी कैसी है.

" मेरी तो ट्रिम ही है, मेरे जीजू को तो ट्रिम झान्टे ही पसंद है." झटके मे वो बोल

उठी.

" अच्छा तो अब बन्नो को ये भी पता चल गया कि उनके जीजू को कैसी झान्टे

पसंद है" मैने उसे चिढ़ाया, पर वो शरमा कर अल्पी से बोली ,

" हे बताओ ना, क्या हुआ आगे" अल्पना ने बात आगे बढ़ाई.

" जीजू ने थोड़ी देर वहाँ उंगली करने के बाद, तकिये के नीचे से वैसलीन की शीशी

निकाली और अपनी उंगली मे लेके अच्छी तरह लथेड के अंदर डाल दी , और धीरे

धीरे कर के उन्होने आधी शीशी वैसलीन मेरे वहाँ अंदर लगा दी. और अब उनका

अंगूठा मेरे क्लिट को टच कर रहा था, कभी वह हल्के से दबाते कभी कस के

मसल देते, उधर उन का दूसरा हाथ अब मेरे सीने को कस कस के मसल रहा था.

उनकी वैसलीन मे सनी उंगली रगड़ती हुई तेज़ी से अंदर बाहर हो रही थी, लग

रहा था कि मैं अब गयी अब गयी तीन चार बार ऐसे होने के बाद"

" तो क्या तुम्हारा हुआ" मस्ती से गुड्डी की हालत खराब थी. अल्पी ने बात जारी रखी,

" कहा, जीजू मुझे कगार तक ले जाते फिर रुक जाते और थोड़ी देर मे उनके होंठ

चालू हो गये, कभी मेरे बूब्स चुसते कभी निपल, और फिर जब नीचे जाके

मेरे लव लिप्स,"

 
" unake ek haath ki ungaliyom ne mere nipple ko pakad ke flik karana shuru kar

diya. aur dusara hath, meri jaanghe ab puri tarah khul chuki thi, vah 'usake' agal

bagal sahalaa rahe the, mai josh ke maare paagal ho rahi thi, mera man kah raha

tha vah muje 'vahaa' chuye, par jaise unhe muje tadapane me maja a raha tha.

unaki ungali ne jab bahot der tadapane ke baad mere niche vaale baahari lips

chuye naa, mujhe laga jaise mujhe 440 volt ka jataka laga ho par unhone haath

hataa liyaa. mai ab khud kamar hila rahi thi unhone dusara lips chua aur abaki

vah apani ungaliyom me le dono bhagoshth sahalaane lage. kuch der baad

unhone apani ungali ka tip thoda sa andar daala, maine apani dono janghe puri

tarah faila rakhi thi itta achcha lag raha tha ki bas bata nahi sakati, meri aankhe

maje me band ho gayi fir achaanak unhone, apani anguli aur andar kar di aur use

gol ghumaane lage. thodi der is tarah tang karane ke baad, nikal kar muh me daal

liya aur use mujhe dikha kar chaatane lage"

" chatane lage" guddi boli. josh ke mare usaki halat karab thi.

" achcha ye bata, vaha bal tune saaf kiye tha ya" maine muskarakar alpi se pucha.

" haa didi aapane mujhe jiju ki pasand bata di thi ki unhe chikani, saaf suf

achachi lagati hai to ghar jaake maine en french ki puri batal vaha ek roam bi

nahi bacha tha, aur piche bhi, achcha guddi tu bata teri kaisi hai.

" meri to trim hi hai, mere jiju ko to trim jhante hi pasand hai." jatke me vo bol

uthi.

" achcha to ab banno ko ye bhi pata chal gaya ki unake jiju ko kaisi jhante

pasand hai" maine use chidhaya, par vo sharma kar alpi se boli ,

" he batao na, kya hua aage" alpana ne baat aage badhayi.

" jiju ne thodi der vaha ungali karane ke baad, takiye ke niche se vaisalin ki batal

nikali aur apani ungali me leke achchi tarah lathed ke andar daal di , aur dhire

dhire kar ke unhone aadhi shishi vaisalin mere vaha andar laga di. aur ab unaka

angutha mere clit ko touch kar raha tha, kabhi vah halke se dabate kabi kas ke

masal dete, udhar un ka dusara haath ab mere sine ko kas kas ke masal raha tha.

unaki vaisalin me sani ungali ragadati huyi teji se andar bahar ho rahi thi, lag

raha tha ki mai ab gayi ab gayi tin char bar aise hone ke bad"

" to kya tumhara hua" masti se guddi ki halat karab thi. alpi ne baat jaari rakhi,

" kaha, jiju mujhe kagaar tak le jaate fir ruk jaate aur thodi der me unake honth

chaalu ho gaye, kabhi mere boobs chusate kabhi nipal, aur fir jab niche jaake

mere love lips,"

 


" अरे साफ साफ बोलो ना चुसवाने मे शरम नही यहाँ कभी 'वह' बोल रही हो कभी लव लिप्स"

" हाँ ठीक ही तो कह रही है गुड्डी जब चुदवाने चुसवाने मे शर्म नही तो चूत बुर बोलने मे क्या शरम और आज रात मे गाने मे तो यही सब बोलना होगा," मैं भी गुड्डी का साथ देती बोली.

" थोड़ी देर तक तो वो मेरी चूत किस करते रहे फिर जम कर चूसने लगे, और जब उन्होने अपनी जीब मेरे क्लिट पे चलाई, मैं तो मस्ती मे पागल हो गयी और चूतड़ उछालने लगी, हल्के हल्के उसे वो चूसने लगे और जब मैं झड़ने के कगार

पे पहुँची तो वो रुक गये, ऐसा उन्होने फिर तीन चार बार किया फिर उन्होने एक जेल्ली की एक ट्यूब निकाली और उसकी नोज्ज्ल मेरी चूत मे लगा कर, दबा कर, ऑलमोस्ट खाली कर दी और बाकी अपने उत्तेजित शिश्न पे लगा ली.

" फिर" उत्तेजित गुड्डी की जांघे अपने आप फैल गयी थी, उसके खड़े निपल सॉफ दिख रहे थे.

" फिर उन्होने मेरे चूतड़ के नीचे दो तीन मोटे मोटे कुशन लगा दिए, और मेरी टाँगे अपने कंधे पे रख ली. दीदी जैसा अपने कहा था ना, मैने टांगे खूब अच्छी तरह फैला रखी थी और एकदम उपर कर रखी थी. उनके लंड का सुपाडा इत्ता मोटा लग रहा था जैसे पहाड़ी आलू, उन्होने मेरी कलाई पकड़ के, कस के मेरा चुंबन लिया और थोड़ी देर मे अपनी जीब मेरे मूह मे घुसेड दी. उनका खुला सुपाडा मेरी चूत क्लिट रगड़ रहा था और मैं फिर नशे मे पागल हो रही थी, मेरी चूत मे जैसे हज़ार चीन्टिया दौड़ रही थी और अचानक उन्होने पूरी ताक़त से लंड अंदर धकेल दिया. मेरी तो चीख निकल गयी पर उनकी जीब मेरे मूह में थी और मैं खाली गों गों की आवाज़ निकाल पा रही थी. दो तीन धक्कों मे उनका पूरा सुपाडा अंदर था. अब वो थोड़ा रुक गये. मैं कस के अपना चूतड़ पटक रही थी, गान्ड उछाल रही थी पर सुपाडा अंदर तक धंसा था और लंड बाहर नही निकल सकता था. धीरे धीरे दर्द थोड़ा कम हो गया पर मुझे क्या मालूम था कि असली दर्द अभी बाकी है. मेरे गाल, माथा, बाल प्यार से सहलाने के बाद एक बार फिर उन्होने कस के मेरी कलाई पकड़ी. उनकी जीब और होंठों ने तो मेरे मूह को बंद कर ही रखा था. सुपाडा थोड़ा सा बाहर निकाल के मेरी कलाई को कस के पकड़ के उन्होने अबकी बार इतनी ज़ोर का धक्का मारा कि मेरी आँखों के आगे सितारे नाचने लगे मुझे लगा कि मैं दर्द से बेहोश हो जाउन्गि मेरा मूह बंद होने के बाद भी ज़ोर से गों गों की आवाज़ निकली तभी उन्होने दूसरा धक्का मारा और मेरी फॅट गयी. मेरी सारी चूड़िया टूट गयी मेरी सील टूट गयी थी. मेरी आँखे बंद थी बस ये अहसास था कि कोई मोटा सा पिस्टन मेरी चूत मे जबरन ठेल रहा है. लेकिन वो पाँच छः धक्के मारने के बाद ही रुके. थोड़ी देर मे मेरी साँस मे साँस आई. फिर उन्होने जब मेरे मूह से जीब निकाली तो मैने आँखे खोली. उनके चेहरे की खुशी देख कर ही मेरा आधा दर्द ख़तम हो गया. और जब उन्होने छोटी चुम्मि मेरे गालों, आँखों और निप्पल्स पर ली तो रहा सहा दर्द भी ख़तम हो गया. 45 मिनट मे मैं खुद ही अपने चूतड़ उचकाने लगी. मुस्कराते हुए अब उन्होने मेरी कलाई छोड़ दोनो किशोर जोबन पकड़ लिए और उसे मसल्ते, रगड़ते हल्के हल्के धक्का लगाने लगे. अब मुझे भी मज़ा मिल रहा था और थोड़ी देर मे मैं भी उनके धक्के का जवाब धक्के से देने लगी. जीजू अब पूरी तरह से चालू हो गये थे. उनके होंठ कभी मेरे गाल चुसते, कभी निपल. उनके हाथ कभी कस के, मेरी चूंचिया मसलते कभी मेरी क्लिट छेड़ते और जब उनका मोटा मूसल जैसा लंड बाहर निकाल कर मेरी कसी चूत मे रगड़ते हुए घुसता ना तो ऐसा मज़ा आ रहा था ना गुड्डी कि पूछो मत."

गुड्डी तो रस मे ऐसी डूबी थी क़ि वह बोलने के काबिल नही थी, ऐसी चुदासी लग रही थी कि उस समय तो अगर कोई भी उसे मिलता तो चुदवाये बिना छोड़ती नही.

अल्पी ने बात जारी रखी" ".थोड़ी देर ऐसे चोदने के बाद, उन्होने मुझे ऑलमोस्ट दुहरा कर दिया मेरी टाँगों को मोड़ कर और फिर लंड एकदम बाहर निकाल के एक झटके मे पूरा पेल दिया. दर्द तो हुआ पर मज़ा भी खूब आ रहा था,कच्चकच्चसतसट लंड अंदर जा रहा था, गपगाप मेरी चूत मोटे केले की तरह अंदर घोन्ट रही थी.

तभी जीजू ने मुझसे कहा, अरे अल्पी ज़रा उधर तो देख. और मैने देखा कि ड्रेसिंग टेबल मे सॉफ दिख रहा था कि उनका इत्ता मोटा लंड कैसे मेरी चूत मूह फैलाकर गपगाप लील रही थी. कुछ बाहर भी था पर आधे से ज़्यादा अंदर था. मुझे पता नही मैं कितनी बार झड़ी पर जीजू 40-45 मिनट चोदने के बाद झड़े और उनके झड़ते ही मैने एक बार फिर झड़ना शुरूकर दिया और मेरे चूतड़ अपने आप उछल रहे थे. मैं रुकती और फिर चालू हो जाती.

उन्होने मेरे चूतड़ उपर उठा रखे थे कि जिससे वीर्य की एक भी बूँद मेरी बुर के बाहर ना आए तब भी कुछ छलक कर मेरी गोरी जांघों पे आ गयी बहुत देर तक उन्होने लंड अंदर रखा. और बाहर निकालने के बाद उन्होने मुझे अपनी गोद मे बिठा लिया और एक इंपोर्टेड लंबी सी चॉकलेट मेरे गुलाबी होंठों के बीच गप्प से डाल दी."

 


" तो क्या उसके बाद उन्होने तुझे छोड़ दिया" गुड्डी की तो हालत खराब थी.

" अरे, इतने सस्ते मे छोड़ने वाले थे वो?, पर गुड्डी मज़ा बहुत आया, दर्द तो थोड़ा हुआ, एक मिनट के लिए तो जान ही निकल गयी पर उसके बाद जब चूत के अंदर लंड रगड़ कर जाता था ना, इत्ता मज़ा आता है बस तू भी फडवा ले अपनी."

"हाँ, आगे बताओ," मेरा मन ही मन कर रहा कि राजीव ने फिर क्या किया.

" जीजू ने मूह से कहा कि मैं अपनी चूत कस के भीचे रहू जिससे उनका वीर्य मेरी बुर मे ही रहे. वो मेरी चुम्मि लेने लगे और चुम्मि लेते लेते उन्होने अपनी जीब मेरे मुँह में डाल दी. अब मुझे भी मज़ा आ रहा था और मैं कस कस के उनकी जीब चूस रही थी. जीजू खूब मज़े से मेरे जोबन का रस भी ले रहे थे.. जीब चुसते चुसते, मैने भी अपनी जीब और मेरा खाया बचा हुआ चॉकलेट भी उनके मूह मे डाल दिया और उसे वो खूब स्वाद ले के चूसने लगे. मेरा निप्पल चुसते हुए बोले, अल्पी इसे क्या कहते है, और जब मैने कहा सीना तो उन्होने कस के काट लिया और कहा जब तक तुम खुलकेनहीबोलोगि मैं कस के तुम्हे काटुंगा.

मैने बोला बूब्स तो फिर कचक से काट कर वो बोले नही अपनी ज़ुबान मे और जब मैने कहा मम्मे तो वो खुश हो के बोले हाँ और मुझसे उन्होने चूंची कहलवा के ही दम लिया. और उसके बाद उन्होने कस के नीचे पकड़ के मुझ से ज़ोर से फिर, बुर चूत, चूतड़ गान्ड सब कहलवाया. और जब उन्होने मुझसे अपना मोटा हथियार पकड़वाया, तो बिना किसी शर्म के मैं खुद खुलकर बोली, जीजू आपका लंड बड़ा मस्त है.

गुड्डी इत्ता बड़ा था, कम से कम मेरे बित्ते के बराबर तो होगा ही और मोटा इतना कि मेरी मुट्ठी मे नही समा पा रहा था. वो बोले साली जी मेरी साली को बस ऐसे ही भाषा बोलनी चाहिए, जिसने की शरम उसके फूटे करम. जीजा ने मुझसे

कस के पकड़ के आगे पीछे करने को कहा, और तुरंत जैसे बटन दबाते ही कोई चाकू निकल जाए, वैसे ही वो कड़ा हो गया. मैं भी मज़े मे आगे पीछे कर रही थी, छूने मे इत्ता अच्छा लग रहा था इत्ता कड़ा, एकदम लोहे की तरह. जीजू ने

मुझसे कहा कि मैं उनका चमड़ा खोलू और खोलते ही मोटा, लाल पहाड़ी आलू जैसा बड़ा सुपाडा बाहर निकल आया. अभी भी उसमे उनका वीर्य लिथड़ा था. जीजू का भी एक हाथ, मेरी नारंगियों को खूब कस कस के मसल रहा था और दूसरा मेरी चूत को उपर से प्यार से सहला रहा था. जीजू ने मेरे गुलाबी गाल को काटते हुए कहा, जानती हो साली बुर के लिए सबसे अच्छा लूब्रिकॅंट कौन सा होता है. मैने भोलेपन से पूछा कौन सा?, तो मेरी क्लिट को पिंच करते बोले, जो तुम्हारी बुर मे है, जीजा का वीर्य और इसलिए मैने तुम्हे अपनी चूत भीच कर रखने को कहा था. मैं बेवकूफ़ मैने उनसे पूछ लिया और जीजू नंबर दो, तो वो हंस कर बोले साली के मूह का थूक, तुम्हारा सलाइवा, मेरे लंड के लिए. इतना सुनना था कि मैने झुक कर उनका लंड अपने मूह मे ले लिया. बड़ी मुश्किल से मैने पूरा मूह फैलाया तो खाली सुपाडा बड़ी मुश्किल से अंदर घुस सका. उनके वीर्य का स्वाद मैं महसूस कर रही थी. लेकिन मैं कस कस के चाटती रही चुसती रही. नीचे से मेरी ज़ुबान रगड़ रही थी और चारों ओर से मेरे कोमल लिप्स.

" फिर तो तुमने उनका अपने मूह मे" गुड्डी ने बड़ी मुश्किल से थूक घोंटा और पूछा.

" और क्या अरे एक बार चूस के तो देखो क्या मज़ा आता है, मैं तो अपने जीजू के लिए कुछ भी कर सकती हू. जीजू ने थोड़ी देर बाद लंड निकाल कर मुझे बिस्तर पे लिटा दिया और पूछा," " चाहिए"

" हाँ लेकिन पूरा." मैने देखा था कि पिछली बार जीजा ने आधे से थोड़ा ज़्यादा लंड डाला था.

" लेकिन तुम्हे बहोत दर्द होगा, अल्पी" प्यार से वो बोले. मुझे मालूम था कि मन तो उनका कर रहा था, पर मेरे दर्द के डर से.

" होने दीजिए ना लेकिन पूरा" मैने उनको अपनी बाहों मे भरकर खूब नखरे से कहा, " जीजू मेरी एक शर्त है"

" क्या?, बोलो साली जी, साली की तो हज़ार शर्ते मंजूर है एक क्या"

 


" चाहे मेरी चिथड़े, चिथड़े हो जाय, चाहे खून खच्चर हो जाय, चाहे मैं दर्द से बेहोश क्यों ना हो जाऊ. पर आज मेरी चूत मे पूरा लंड डाल कर चोदेन्गे अगर आप अपनी साली को ज़रा भी प्यार करते है तो."

" अभी लो साली जी" और मेरी दोनो टांगे कंधे पर रखकर उन्होने ऐसी जबरदस्त चुदाई की कि पूछो मत. आसन बदल बदल कर. और अबकी बार मैं शीशे मे हर बार जब लंड को घुसते देखती तो उसी तरह चूतड़ उठा कर उनके धक्के का जवाब देती. मेरी चूंचिया तो उन्होने मसल कर रखा दी. अगर मैं ये कहूँ कि दर्द नही हो रहा था तो झूठ होगा पर, गुड्डी मज़ा इत्ता आ रहा था कि उस समय दर्द का कुछ पता नही था बस मन कर रहा था, जीजू चोदते रहे चोदते रहे. जब

उन्होने मुझे दुहरा कर मेरे कंधे पकड़ अपना पूरा मूसल घुसेड़ा, मेरी तो जान निकल गयी, दर्द के मारे मैने अपने होंठ काट लिए पर जब उनके लंड के बेस ने मेरी क्लिट पर घिस्सा देना शुरू किया तो मेरी फिर एक बार जान निकल गयी अबकी बार मज़े से और फिर मैं ऐसा झड़ी, ऐसा झड़ी कि बस झड़ती ही रही जीजू थोड़ी देर रुक कर फिर चालू हो गये और अबकी बार तो कम से कम घंटे भर चोदा होगा उन्होने मुझे. और उनके वीर्य की धार चूत मे पड़ते ही मैं फिर झड़ने

लगी. मैं एक दम लथ फत थी. उन्होने सहारा देकर उठाया. उनका गाढ़ा गाढ़ा सफेद वीर्य मेरी चूत मे भरा था और निकल कर मेरी जांघों पर बह रहा था. उन्होने थोड़ा सा वीर्य अपनी उंगली मे लेकर मेरी चूंचियों पर मसल दिया और हँसकर बोले, उठती चूंचियों के लिए ये सबसे अच्छा टॉनिक है. और मुस्करा कर मेरी बुर मे उंगली डाल फिर ढेर सारा अपना वीर्य निकाल कर मेरे गालों पर खूब मसल दिया और बोले हे, देखो कैसे ग्लो कर रही है, सबसे अच्छी फेशियल क्रीम है ये. और जब मैने साफ करने की कोशिश की तो अपनी कसम दे के मना कर दिया. इसीलिए मेरे गाल ग्लो कर रहे है.

गुड्डी झेंप गयी लेकिन वह अपने को रोक नही पाई और बोली, " सच बताओ, दर्द बहोत हुआ?."

अल्पना ने मुस्करा कर उसके भरे भरे गालों पर चिकोटी काट ली और बोली, " हाँ, मैं ये तो नही कहूँगी कि दर्द नही हुआ, बहोत हुआ , लेकिन बस थोड़ी देर और उसके बाद तो इतना मज़ा आया, इतना मज़ा आया, मैं बता नही सकती. तू भी

जल्दी से ले ले ये असली मज़ा. मैं तो कहती हू लड़किया झूठे नखड़े दिखाती है. मैं तो कहती हू हमे लड़कों के पीछे घूमना चाहिए, इत्ता मज़ा लंड मे है, अगर तुम्हारे जीजा न कर रहे हो न तो मैं अपने जीजू से बात करू, क्यों "

गुड्डी शरमा गयी और बोली, "धत्त" लेकिन अल्पी कहाँ छोड़ने वाली थी वो बोली. " अरे इसमे धत्त की क्या बात है, अरे तुम मेरी सबसे पक्की सहेली हो ना "

" हाँ वो तो हू" गुड्डी बोली

" तो फिर मेरे जीजू तेरे जीजू हुए कि नही, तो फिर चुदा ले मेरे जीजू से." वो बेचारी बुरी तरह झेंप गयी.

मैं उसकी बचत मे आते हुए बोली, " अरे अल्पी इसका मतलब है कि ये पहले अपने जीजा से चुदवायेगि उसके बाद तुम्हारे जीजा से, तो गुड्डी कब प्रोग्राम है तुम्हारा चुदवाने का अपने जीजा से,"

" वो जब चाहें" गुड्डी ने बोल तो दिया पर अपना जवाब सुनकर खुद शरमा गयी.

तब तक दुलारी उन दोनों को ढूंढते हुए वहाँ आई, " अरे तुम यहाँ बैठी हो तुम्हारे जीजा नीचे तुम्हे तलाश कर रहे है.

मैं बोली, " लगता है, तेरा नंबर आ गया और हाँ ज़रा जैसे सिखाया है, चूतड़ मटका के तो जाना."

 


" are saaf saaf bolo na chusavane me sharam nahi yaha kabhi 'vah' bol rahi ho

kabhi love lips"

" haa thik hi to kah rahi hai guddi jab chudavane chusavane me sharm nahi to

choot bur bolane me kyaa sharam aur aaj raat me gaane me to yahi sab bolana

hoga," mai bhi guddi ka sath deti boli.

" thodi der tak to vo meri choot kis karate rahe fir jam kar chusane lage, aur jab

unhone apani jeeb mere clit pe chalayi, mai to masti me paagal ho gayi aur

chutad uchalane lagi, halke halke use vo chusane lage aur jab mai jhadane ke

kagar

pe pahunchi to vo ruk gaye, aisa unhone fir teen char baar kiya fir unhone

ek k.y jelly ki ek tube nikali aur usaki nojjle meri choot me laga kar, daba kar,

almost khali kar di aur baaki apane uttejit shishn pe laga li.

" fir" uttejit guddi ki jaanghe apane aap fail gayi thi, usake khade nipal saaf dikh

rahe the.

" fir unhone mere chutad ke niche do teen mote mote kushan laga diye, aur meri

tange apane kandhe pe rakh li. didi jaisa apane kaha tha na, maine taange khub

achchi tarah faila rakhi thi aur ekdam upar kar rakhi thi. unake lund ka supada

itta mota lag raha tha jaise pahadi aalu, unhone meri kalayi pakad ke, kas ke

mera chumban liya aur thodi der me apani jeeb mere muh me ghused di. unaka

khula supada meri choot clit ragad raha tha aur mai fir nashe me paagal ho rahi

thi, meri choot me jaise hajar chintiyaa daud rahi thi aur achanak unhone puri

takat se lund andar dhakel diya. meri to chik nikal gayi par unaki jeeb mere muh

mem thi aur mai khaali gom gom ki aavaj nikal pa rahi thi. do teen dhakkom me

unaka pura supada andar tha. ab vo thoda ruk gaye. mai kas ke apana chutad

patak rahi thi, gaand uchal rahi thi par supada andar tak dhansa tha aur lund

baahar nahi nikal sakata tha. dhire dhire dard thoda kam ho gaya par mujhe kya

maalum tha ki asali dard abi baki hai. mere gaal, matha, baal pyar se sahalane ke

bad ek baar fir unhone kas ke ke meri kalayi pakadi. unaki jeeb aur honthom ne

to mere muh ko band kar hi rakha tha. supada thoda sa baahar nikal ke meri

kalayi ko kas ke pakad ke unhone abaki itani jor ka dhakka mara ki meri ankhom

ke aage sitaare naachane lage mujhe laga ki mai dard se behosh ho jaaumgi mera

muh band hone ke baad bi jor se gom gom ki aavaj nikali tabhi unhone dusara

dhakka mara aur meri phat gayi. meri saari chudiyaa tut gayi meri seal tut gayi

thi. meri aankhe band thi bas ye ahassas tha ki koyi mota sa pistan meri choot me

jabaran thel raha hai. lekin vo paanch chah dhakke marane ke baad hi ruke.

thodi der me meri saans me saans aayi. fir unhone jab mere muh se jeeb nikala to

maine aankhe kholi. unake chehare ki kushi dekh kar hi mera aadha dard katam

ho gaya. aur jab unhone choti chummi mere gaalom, aankhom aur nippals par li

to raha saha dard bhi khatam ho gaya. 45

minat me mai khud hi apane chutad

uchakane lagi. muskarate hue ab unhone meri kalaayi chod dono kishor joban

pakad liye aur use masalte, ragadate halke halke dhakka lagane lage. ab mujhe

bhi maja mil raha tha aur thodi der me maim bhi unake dhakke ka javab dhakke

se dene lagi. jiju ab puri tarah se chalu ho gaye the. unke honth kabhi mere gaal

chusate, kabi nipal. unake haath kabhi kas ke, meri chunchiya masalate kabi meri

clit chedate aur jab unaka mota musal aisa lund bahar nikal kar meri kasi choot

me ragadate huye ghusata na to aisa maja aa raha tha na guddi ki pucho mat."

guddi to ras me aisi dubi thi ki vah bolane ke kaabil nahi thi, aisi chudavasi lag

rahi thi ki us samay to agar koyi bi use milata to chudavaye bina chodati nahi.

alpi ne baat jaari rakhi"

".thodi der aise chodane ke baad, unhone mujhe almost duhara kar diya meri

taangom ko mod kar aur fir lund ekdam baahar nikaal ke ek jatake me pura pel

diya. dard to hua par maja bhi khub aa raha tha, kachchakachch

satasat

lund

andar ja raha tha, gapagap

meri choot mote kele ki tarah andar gomt rahi thi.

tabi jiju ne mujase kaha, are alpi jara udhar to dekh. aur maine dekha ki dressing

teble me saaf dikh raha tha ki unaka itta mota lund kaise meri choot muh

failaakar gapagap

lil rahi thi. kuch bahar bhi tha par aadhe se jyada andar tha.

mujhe pata nahi mai kitti baar jadi par jiju 4045

minat chodane ke baad jade aur

unake jadate hi maine ek baar fir jadana shuru kar diya aur mere chutad apane

aap uchal rahe the. mai rukati aur fir chalu ho jaati. unhone mere chutad upar

utha rakhe the ki jisase veerya ki ek bhi boond meri bur ke baahar na aaye tab

bhi kuch chalak kar meri gori jaanghom pe aa gayi bahut der tak unhone lund

andar rakha. aur bahar nikalne ke baad unhone mujhe apani god me bitha liya aur

ek imported lambi si choclete mere gulabi honthom ke beech gapp se daal di."

" to kya usake baad unhone tujhe chod diya" guddi ki to haalat kharab thi.

" are, itane saste me chodane vaale the vo?, par guddi maja bahut aaya, dard to

thoda hua, ek minat ke liye to jaan hi nikal gayi par usake baad jab choot ke

andar lund ragad kar jata tha na, itta maja aata hai bas tu bi phadava le apani."

"haa, age bataao," mera man hi man kar raha ki rajiv ne fir kya kiya.

" jiju ne mujase kaha ki mai apani choot kas ke binche rahu jisase unaka veerya

meri bur me hi rahe. vo meri chummi lene lage aur chummi lete lete unhone

apani jeeb mere mum mem daal di. ab muje bi maja a raha tha aur mai kas kas ke

unaki jeeb choos rahi thi. jiju khub maje se mere joban ka ras bi le rahe the.. jeeb

chusate chusate, maine bhi apani jeeb aur mera khaya bacha hua choclete bhi

unake muh me daal diya aur use vo khub swad le ke chusane lage. mera nippal

chusate hue bole, alpi ise kya kahate hai, aur jab maine kaha seena to unhone kas

ke kaat liya aur kaha jab tak tum khul ke nahi bologi mai kas ke tumhe kaatunga.

maine bola boobs to fir kachak se kaat kar vo bole nahi apani jubaan me aur jab

maine kaha mamme to vo kush ho ke bole haa aur mujhase unhone chunchi

kahalava ke hi dam liya. aur usake baad unhone kas ke niche pakad ke mujase jor

se fu, bur choot, chutad gaand sab kahalavaya. aur jab unhone mujhase apana

mota hathiyar pakadavaya, to bina kisi sharm ke mai khud kulakar boli, jiju

apaka lund bada mast hai.

guddi itta bada tha, kam se kam mere bitte ke baraabar to hoga hi aur mota itana

ki meri mutthi me nahi sama paa raha tha. vo bole saali ji meri saali ko bas aise

hi bhasha bolani chahiye, jisane ki sharam usake phute karam. jija ne mujhase

kas ke pakad ke aage piche karane ko kaha, aur turant jaise batan dabaate hi koyi

chaku nikal jaye, vaise hi vo kada ho gaya. mai bhi maje me aage peeche kar rahi

thi, chune me itta achcha lag raha tha itta kada, ekdam lohe ki tarah. jiju ne

mujhase kaha ki mai unaka chamada kolu aur kholate hi mota, laal pahadi aalu

jaisa bada supada baahar nikal aaya. abhi bhi usame unaka veerya lithada tha.

jiju ka bi ek hath, meri naarmgiyom ko khoob kas kas ke masal raha tha aur

dusara meri choot ko upar se pyar se sahala raha tha. jiju ne mere gulabi gaal ko

kaatate hue kaha, jaanati ho saali bur ke liye sabase achcha lubricant kaun sa

hota hai. maine bolepan se pucha kaun sa?, to meri clit ko pinch karate bole, jo

tumhari bur me hai, jija ka veerya aur isaliye maine tumhe apani choot beench

kar rakhane ko kaha tha. mai bevakuf maine unase puch liya aur jiju numbar do,

to vo hans kar bole saali ke muh ka thuk, tumhara saliva, mere lund ke liye. itana

sunana tha ki maine jhuk kar unaka lund apane muh me le liya. badi mushkil se

maine pura muh phailaya to khali supada badi mushkil se andar ghus saka. usake

veerya ka swad mai mahasus kar rahi thi. lekin mai kas kas ke chaatati rahi

chusati rahi. neeche se meri jubaan ragad rahi thi aur chaarom or se mere komal

lips.

" phir to tumane unaka apane muh me" guddi ne badi mushkil se thuk ghomta

aur pucha.

" aur kya are ek bar choos ke to dekho kya maja aata hai, mai to apane jiju ke

liye kuch bhi kar sakati hu. jiju ne thodi der baad lund nikaal kar mujhe bistar pe

lita diya aur pucha,"

" chahiye"

" haa lekin pura." maine dekha tha ki pichali baar jija ne aadhe se thoda jyada

lund dala tha.

" lekin tumhe bahot dard hoga, alpi" pyar se vo bole. mujhe maalum tha ki man

to unaka kar raha tha, par mere dard ke dar se.

" hone dijiye na lekin pura" maine unko apani baahom me bharkar khoob nakare

se kaha,

" jiju meri ek shart hai"

" kya?, bolo saali ji, saalli ki to hajaar sharte manjur hai ek kya"

" chahe meri chithade, chithade ho jaay, chahe khoon kachchar ho jaay, chahe

mai dard se behosh kyom na ho jaaum. par aaj meri choot me pura lund daal kar

chodenge

agar aap apani saali ko jara bhi pyar karate hai to."

" abhi lo saali ji" aur meri dono taange kandhe par rakhkar unhone aisi jabardast

chudayi ki ki pucho mat. aasan badal badal kar. aur abaki mai shishe me har baar

jab lund ko ghusate dekati to usi tarah chutad utha kar unake dhakke ka jawab

deti. meri chunchiya to unhone masal kar rakhadi. agar mai ye kahum ki dard

nahi ho raha tha to juth hoga par, guddi maja itta a raha tha ki us samay dard ka

kuch pata nahi tha bas man kar raha tha, jiju chodate rahe chodate rahe. jab

unhone mujhe duhara kar mere kandhe pakad apana pura musal ghuseda, meri to

jaan nikal gayi, dard ke maare maine apane honth kaat liye par jab unake lund ke

base ne meri clit par ghissa dena suru kiya to meri phir ek baar jaan nikal gayi

abaki maje se aur phir mai aisa jhadi, aisa jhadi ki bas jhadati hi rahi jiju thodi

der ruk kar phir chalu ho gaye aur abaki to kam se kam gante bhar choda hoga

unhone mujhe. aur unake veerya ki dhaar choot me padate hi mai phir jhadane

lagi. mai ek dam lath phat thi. unhone sahara dekar uthaya. unaka gadha gadha

saphed veerya meri choot me bhara tha aur nikal kar meri jaanghom par bah raha

tha. unhone thoda sa veerya apani ungali me le mere chunchiyom par masal diya

aur hansakar bole, uthati chunchiyom ke liye ye sabase achcha tonic hai. aur

muskara kar meri bur me ungali daal phir dher saara apana veerya nikaal kar

mere gaalom par khoob masal diya aur bola he, deko kaise glow kar rahi hai,

sabase achchi facial cream hai ye. aur jab maine saaph karane ki koshish ki to

apani kasam de ke mana kar diya. isiliye mere gaal glow kar rahe hai.

guddi jemp gayi lekin vah apane ko rok nahi paayi aur boli,

" sach bataao, dard bahot hua?." alpana ne muskara kar usake bhare bhare

gaalom par chikoti kaat li aur boli,

 
" haam, mai ye to nahi kahungi ki dard nahi hua, bahot hua , lekin bas thodi der

aur usake baad to itana maja aaya, itana maja aaya, mai bata nahi sakati. tu bhi

jaldi se le le ye asali maja. mai to kahti hu ladakiya jhuthe nakade dikati hai. mai

to kahati hu hame ladakom ke piche ghumana chahiye, itta maja lund me hai,

agar tumhare jija n kar rahe ho n to mai apane jiju se baat karu, kyom "guddi

sharama gayi aur boli,

"dhatt" lekin alpi kaha chodane vali thi vo boli.

" are isame dhatt ki kya baat hai, are tum meri sabase pakki saheli ho na "

" haa vo to hu" guddi boli

" to fir mere jiju tere jiju hue ki nahi, to phir chuda le mere jiju se." vo bechari

buri tarah jemp gayi. mai usaki bachat me aate huye boli,

" are alpi isaka matalab hai ki ye pahale apane jija se chudavayegi usake baad

tumhare jija se, to guddi kab program hai tumhara chudavane ka apane jija se,"

" vo jab chahem" guddi ne bol to diya par apana jawab sunakar khud sharma

gayi. tab tak dulaari un donom ko dhundhate hue vaha aayi,

" are tum yaha baithi ho tumhare jija niche tumhe talash kar rahe hai. mai boli,

" lagata hai, tera number aa gaya aur haa jara jaise sikaaya hai, chutad mataka ke

to jana."

 


गुड्डी हँसते हुए उठी और रीमिक्स गर्ल्स की तरह कस के मटकते हुए चली गयी.

दुलारी ने अल्पना से कहा, अरे तुम्हारी भी खोज हो रही है, भैया ढूँढ रहे है. जब वो जाने लगी तो दुलारी ने छेड़ा,

" अरे तुम भी तो ज़रा अपने ये मोटे मोटे चूतड़ मटका के दिखाओ."

अल्पी पीछे रहने वाली नही थी. उसने अपनी पतली कमर और टाइट जीन्स से छलकते बड़े बड़े चूतड़ यों मटकाए की बस,

" हाई क्या मस्त चूतड़ है आज रात को ज़रूर गाने के समय, तुम्हारी गांद बिना मारे छोड़ूँगी नही"

" और क्या तुम्हारी बच जाएगी " मूड कर अपने जोबन उभार कर बड़ी अदा से अल्पी ने जवाब दिया और खिलखिलाते हुए राजीव से मिलने चली गयी.

शाम होते ही मेहमानों का आने का सिलसिला बढ़ गया. मेरे ननदोइ जीत की बहन हेमा भी अपने माता पिता के साथ आ गयी थी. खूब चहल पहल थी. आज गाने के लिए बरामदे मे परदा लगाने का इंतज़ाम था, जिससे मर्दों को कम से कम दिखाई तो ना पड़े कि अंदर औरतें क्या कर रही है. जितनी प्राउड औरते थी या काम करने वालिया थी वो और खुल कर सिर्फ़ गाली मे मज़ाक कर रही थी और दुलारी और गुलाबो सबसे आगे थी. काम भी बहोत था. मेरी सास ने मुझे बुलाकर कहा की उपर छत पे मर्दों के खाने का इंतज़ाम करवा दू और हाँ सबसे पहले ननदोइ और लाली के ससुराल वालों को खिला दू.

सब इंतज़ाम हो गया और मैने गुड्डी और अल्पी को भी बुला लिया, खाना परोसने के लिए. दोनों ने अपने दुपट्टे कमर मे बाँध लिए. जीत चिढ़ा कर बोल रहे थे, अरे ज़रा ठीक से झुक के दो.

मैं उनके द्विअर्थि बात का मतलब तो समझ गयी और ये भी कि झुकने से उभार और क्लीवेज़ उनको सॉफ दिखते, और

चिढ़कर बोली," अरे ठीक से डालो, ना नंदोई जी की कटोरी मे पूरा भर के हाँ और बगल मे उनकी बहन को." मेरा इशारा काफ़ी था,

गुड्डी ने कुल्हड़ मे पानी डालते हुए, सीधे, हेमा की जांघों के बीच गिरा दिया और दोनो हंस के बोली, " अरे आप को इत्ति ज़ोर से आ रही थी तो बाथ रूम मे चली जाती, यही अपने भैया के सामने खाना कही भागा तो जा नही रहा था."

अल्पी ने हंस के बोला, अरे गुड्डी इनके यहाँ भाई बहन के बीच सब कुछ खोल के होता है, कोई परदा नही और हेमा को तौलिया देने के लिए उसके साथ नीचे चली गयी.

तभी मेरी सास उपर आई और बोली, "अरे बहू, तुम्हारे नंदोई खाना खा रहे है और वो भी सूखे सूखे ज़रा कुछ गाली वाली तो सूनाओ"

मैने चारो ओर देखा, मेरी जेठानी, गुलाबो, दुलारी मेरा साथ देने के लिए कोई नही था. सिर्फ़ मैं और मेरी ननद गुड्डी थे.

मौका देख कर मेरे नंदोई जी भी चहके, " अरे, आपकी बहू को कुछ आता वाता तो है नही?. गाली क्या सुनाएँगी, नये

जमाने की बहुएँ"

मुझे भी जोश आ गया. मैने गुड्डी से कहा, " आजा, चल सुनाते है तुम्हारे जीजा को उनका और उनकी बहनों का हाल."

जीत ने फिर छेड़ा, " अरे फिल्मी गाने की बात नही हो रही...गाली की बात हो रही है"

 


" अरे नंदोई जी अपना कान या जो कुछ भी खोलना हो खोल के रखिए अब सलहज और साली की बारी है, गाली भी जबरदस्त दूँगी और गाली का नेग भी जबरदस्त लूँगी." और हम दोनो चालू हो गये,


" अरे हमारे नंदोई जी अरे जीत जी खाने को बैठे, अरे कोने मे बैठे, अरे कोने मे लगे ततैया"

" अरे जीत जी की नंदोई जी की अम्मा की बिल मे अरग समाए, सरगसमाए,घोड़ागाड़ी को पहिया"

" अरे नंदोई जी की बहाना की बिल मे अरग समाए, सरगसमाए,घोड़ागाड़ी को पहिया",

" अरे हेमा जी की बुर मे, बैल को सींग, भैंस को चूतर, लंबा बाँस मोटा कोल्हू घोड़ागाड़ी को पहिया",




तब तक खाने मे बेंडे की सब्जी और खाने के खाने के अंत मे खरिका परोसा गया, और हमने अगला गाना शुरू कर दिया,


" अरे नंदोई साले, अरे उनकी बहना छिनार खाने को बैठे, खाने मे मिल गया बेंडा",

" अरे जीत बन्धुए की बहानी को अरे हेमा छिनार को चोदे सारे, गुंडा",

" अरे नंदोई साले, अरे उनकी बहना छिनार खाने को बैठे, खाने मे मिल गया खरिका",

" अरे जीत गंडुए की बहनि को, अरे हेमा छिनार की बुर चोदे सब गुंडा".


तब तक गुलाबो हमारे साथ आ गयी. गुड्डी खुल कर अपने जीजा और उनकी बहनो को गाली दे रही थी. उसने हंस कर गुलाबो से कहा, अरे गुलाबो भौजी, ज़रा कस के जीजा को एक असली वाली सुना दो. वो हंस के बोली एकदम ननद रानी लेकिन तुमको भी उसी तरह खुल के साथ देना होगा. एकदम वो बोली और फिर हम तीनों शुरू हो गये,

" गंगा जी तुम्हारा भला करे गंगा जी

अरे नंदोई साले तुम्हारी बहनि की बुरिया मे, हेमा साली की बुरिया तालों ऐसी पोखरिया ऐसी,

उसमे 900 चैले नहाया करे, अरे 900 गुंडे नहाया करे, बुर चोदा करे मज़ा लूटा करे,

अरे नंदोई साले तुम्हारी अम्मा की बुरिया अरे उनका भोसडा, बटुलिया ऐसी पतीलिया ऐसी,

जिसमे 9 मन चावल पका करे, बंधुए खाया करे, मज़ा लूटा करे, गंगा जी तुम्हारा भला करे गंगा जी,"


तब तक सब लोग खाना खा कर उठ कर खड़े होगये. नीचे से किसी ने गुहार लगाई कि गाने के लिए सब लोग बुला रहे है, गुलाबो, हेमा और कुछ औरतें नीचे चली गयी. मैने गुड्डी से कहा अरे, अपने जीजा जी को पान तो खिला दो. जब उसने पान बढ़ाया तो मैने फिर टोका, अरे एक नही दो, जोड़ा पान खिलाओ. हँसते हुए उसने फिर एक जोड़ा पान अपने कोमल हाथों से, जीजा जी के होंठों मे पकड़ा दिया.

मैनें चिढ़ाया, अरे जोड़ा बना रहे, जीजा साली का.

हंस कर, पान चूबाते हुए, उन्होने अपने हाथ से जोड़ा पान गुड्डी को खिलाने की कोशिश की तो वो पीछे हट गयी, और बोली,

" नही जीजू, मुझे पान अच्छा नही लगता, मैने कभी नही खाया"
 


मैं जीत का चेहरा देख रही थी. एक पल के लिए वहाँ नाराज़गी झलक गयी. मौके को संभालते हुए मैं बोली, अरे नंदोई जी आप हमेशा साली के चक्कर मे पड़े रहते है, सलहज को लिफ्ट ही नही देते. लाइए ये पान, और मैने सीधे अपने होंठों मे उनके हाथ से पान ले लिया और मज़ाक मे उनकी उंगली भी हल्के से काट ली.

वो बोले, "सलहज जी आप बहोत कस के काटती है"

तो गुड्डी ने हंस के जवाब दिया, " तो क्या आप समझते है आप ही काट सकते है?. " और माहॉल एक बार फिर हल्का होगया.

मैने नंदोई जी के कान मे एक बात कही और उनका चेहरा चमक गया.

गुड्डी ने हंस कर कहा, " भाभी इनसे गाली का नेग तो माँग लीजिए."

मैने हंस कर उनसे बोला, " साली कुछ माँग रही है और हाँ मेरे हिस्से का नेग भी उसे ही दे दीजिएगा."

" हाँ आज आप लोगों ने वास्तव मे जबरदस्त गाली गाइ और खास कर तुमने." पान चूबाते हुए उन्होने गुड्डी की तारीफ की.

" जीजा जी, खाली तारीफ से काम नही चलेगा नेग निकालिए." वो हंस कर बोली.

नीचे से गानों की आवाज़े और तेज हो रही थी.

"क्यों सलहज जी दे दिया जाय, नेग?" हँसकर उन्होने पूछा.

" एकदम" मैं बोली.

और उन्होने गुड्डी को पकड़ कर उसका सर झुकाकर अपने पाने से लिपटे होंठ उसके किशोर होंठों से कस के सटा दिए और एक जोरदार चुम्मि ले ली. इतना ही नही, उनकी जीब उसके मूह मे घुस गयी और देर तक पान के रस मे लसी लिपटी

ज़ुबान उसे चूसाने के बाद उन्होने अपना अधखाया, चुबाया पान उसके मूह मे दे दिया. वह पीछे की ओर मूडी थी, और उन्होने एक हाथ से उसका सर और दूसरे से कमर इतनी कस के पकड़ रखी थी कि बिचारी हिल ही नही सकती थी. वह सर हिलाते हुए गों गों करती रही पर उन्होने पूरा जोड़ा पान, उनके थूक से लिथड़ा, कुछ घुला, कूचा कुचाया, अधखाया, उसके मूह मे ठेल कर ही दम लिया. पान के रस की एक बूँद निकल कर गुड्डी की ठुड्डी के पास के जहाँ काला तिल था, टपक गयी. उसके बाद भी वह उसी तरह उसके गुलाबी होंठों का रस लेते रहे, जब तक गुड्डी ने उनका अधकाया पान, चुबलाना नही शुरू किया.

मैने उसे मुस्कराते हुए, चिढ़ाया, " क्यों ननद रानी, अब आया, जीजा के रस के साथ पान का मज़ा."

 
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