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Raj sharma stories-एक और घरेलू चुदाई

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करीब 5 मिनिट तक दोनो भाई बहन जम कर एक दूसरे को किस करते रहे प्रेम के लंड का बुरा हाल हो रहा था इस से पहले दोनो कुछ आगे बढ़ते नीचे से माँ की आवाज़ आई तो उषा ने खुद को प्रेम की बाहों से आज़ाद किया और अपनी चुनरिया को संभालते हुए नीचे को भाग गयी प्रेम भी उसके पीछे पीछे नीचे आ गया और फिर से दोनो की आँख मिचोली शुरू हो गयी

सुधा- प्रेम, पता नही आजकल तेरा ध्यान कहाँ पर रहता है खेतो का कुछ भी काम तू करता ही नही

प्रेम- माँ, बताओ क्या करना हैं

सुधा- बेटा वो जो नदी की तरफ वाले खेतो मे जो सब्ज़िया उगाई हुई थी उसकी एक साइड की बाढ़ कमजोर हो गयी है आवारा पशु घुस आते है बहुत नुकसान हो रहा हैं तू एक काम करना कल मेरे साथ चलना उधर

प्रेम- जी माँ

सुधा- उषा, कई दिन हो गये हैं तू कॉलेज भी नही जा रही कुछ दिक्कत है क्या

उषा- नही माँ, वो कॉलेज मे स्टूडेंट्स की हड़ताल चल रही हैं इसलिए

सुधा- दोनो कान खुलकर सुन लो अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दो दो चार काम और पड़े है पर वो तुम्हारे मामा के बेटे की शादी के बाद ही करेंगे अभी तुम लोग खाना खा लो फिर मुझे विनीता के घर भी जाना है खाना लेकर

अगले आधे घंटे का समय बस खामोशी मे ही कटा सभी लोग खाना खाने मे व्यस्त थे

उधर सौरभ बाम लेकर आ चुका था उसने विनीता के पाँव को अपनी गोदी मे रखा और उसकी साड़ी को घुटने तक उठा दिया उसने ये सब एक नॉर्मल वे मे ही किया था पर उसे क्या पता था कि कयामत का नज़ारा उसका ही इंतज़ार कर रहा था जैसे ही विनीता के पैर थोड़े से चौड़े हुए उसकी चूत की फांके अलग अलग दिशाओ मे खुल गयी और सौरभ को अंदर का गुलाबी हिस्सा दिखने लगा उसका सोया हुआ लंड एक झटके मे ही तन गया शरम के मारे विनीता के गाल और भी गुलाबी हो गये पर वो भी तो मजबूर थी कमरे मे एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी दोनो माँ बेटे को साँसे बड़ी तेज़ी से दौड़ रही थी मालिश करते हुए सौरभ कभी कभी अपनी मम्मी की सुडोल चिकनी जाँघो पर भी हाथ फेर देता था बेटे की इन हरकतों की वजह से मम्मी की अधूरी कामवासना अपना रंग दिखाने लगी थी

उसकी चूत मे गीला पन कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया था उसकी नज़र बराबर अपने बेटे का तने हुए लंड पर जमी थी जिसे वो बिल्कुल भी छुपाने की कोशिश नही कर रहा था मन ही मन उसने सोचा कि सौरभ का हथियार भी तगड़ा है उफ़फ्फ़ ये तो कितना मोटा लग रहा हैं उसे पता ही नही चला की कब वो अपने इन हवस से भरे ख़यालो मे डूब गयी उधर सौरभ अपने दोनो हाथो को घुटनो से हटा कर अपनी मम्मी की चिकनी जाँघो पर चला रहा था अपनी मम्मी की नमकीन चूत को चाटने की हसरत मन मे लिया वो बस उन टाँगो को ही मसल रहा था विनीता को बड़ा मस्ती भरा सुकून मिल रहा था पर तभी उसकी आँख एक आवाज़ सुनकर खुल गयी

बाहर दरवाजे पर सुधा चिल्ला रही थी दोनो माँ बेटे हड़बड़ा गये सौरभ ने मम्मी की साड़ी को सही किया और फिर तेज़ी से दरवाजे की तरफ चल दिया विनीता अपनी उखड़ी सांसो को संभालते हुए चुपचाप बिस्तर पर लेट गयी सौरभ ने ताई की ओर देखते हुए मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला और वही दरवाजे के पास ही सुधा को दीवार से सटा दिया और उसके होंठो को खुद से चिपका लिया उसका पहले से ही तना हुआ लंड ताई के पेट के निचले तरफ रगड़ खाने लगा सुधा उसको अपने से दूर करते हुए बोली क्या करता है ऐसे कोई शरारत करता है क्या तो सौरभ अपने लंड को सहलाते हुए बोला- तो आप ही बता दो ना कि कैसे शांत रहूं, अभी आपने ही किया है जो अब इलाज भी आप ही करोगी मुझे कुछ नही पता

सुधा- जब सही समय आएगा तो इलाज भी हो जाएगा अभी तुम फटा फट से खाना खा लो मैं विनीता को खाना देने जाती हूँ

सौरभ ने बुरा सा मूह बनाया और खाने की थाली लेकर बैठ गया सुधा विनीता के पास चली गयी दूसरी तरफ माँ के जाते ही उन दोनो भाई बहन को पूरा मोका मिल गया उषा ने अपने कपड़े उतारे और मात्र ब्रा- पैंटी मे ही भाई के कमरे की तरफ चल पड़ी आज की रात फिर से गुलाबी होने वाली थी

उषा को इस तरह सेक्सी ब्रा- पैंटी मे देख कर प्रेम के होश ही उड़ गये दीदी के गोरे बदन पर सजे उस काले लिंगेरी सेट ने उषा की खूबसूरती मे चार चाँद लगा दिए थे प्रेम कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और फॉरन ही अपने कच्छे और बनियान को उतार दिया और नंगा हो गया सुधा ने भी अपनी ब्रा के हुको को खोल दिया आज़ाद होते ही उसकी चूचिया मस्ती से फड़फड़ाने लगी प्रेम अपने लौडे को हिलाने लगा उषा अपने बोबो को अपने हाथो से मसल्ने लगी दोनो भाई बहन एक दूसरे को ऐसी हरकते कर कर के रिझा रहे थे प्रेम के लौडे को देखते ही उषा की मुनिया मे जैसे आग लग गयी थी

अब उस से रहा नही जा रहा था कुछ ऐसा ही हाल प्रेम का भी था उषा ने उसको और तडपाते हुए अपनी पैंटी को खीच कर उतार दिया और उस से अपनी चूत को सॉफ करते हुए प्रेम की तरह उछाल दिया प्रेम ने दीदी की कामरस से सनी हुई कच्छी को सूँघा मस्त कर देने वाली खुश्बू उसकी नाक मे उतरती चली गयी उसने चूत के उस रस को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया उषा भी अब और मस्तानी हुई उसने दरवाजे पर खड़े खड़े ही अपनी टाँगों को चौड़ा किया और अपनी दो उंगलियो को एक साथ चूत मे उतार लिया और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगी

दोनो भाई बहन बुरी तरह से उत्तेजित हो चुके थे अब प्रेम खड़ा हुआ और बढ़ चला दरवाजे की तरफ उसने उषा को अपनी बाहो ने भर लिया और बिना कुछ बोले अपने होटो को बहन के होटो से जोड़ दिया दोनो की दहक्ति साँसे एक होने लगी उषा के मूह मे बहते लार को प्रेम अपनी जीभ से चाटने लगा उषा ने हाथ को नीचे की तरफ किया और प्रेम के टट्टो को अपनी मुट्ठी मे भर लिया एक मर्द के जोशीले टट्टो को अपने हाथ मे पकड़ उषा मदमस्त हो गयी वो धीरे धीरे से उनको मसल्ने लगी जिस से प्रेम और उत्तेजित होने लगा दोनो की जीभ एक दूसरे से जैसे जंग लड़ रही थी दोनो मे एक होड़ सी मच गयी

सुधा वही पर बैठ गयी और प्रेम उसके पीछे आकर खड़ा हो गया सुधा ने चाल खेलते हुए अपने आँचल को पूरा सरका दिया जिस से प्रेम को उसके बोबो का पूरा नज़ारा दिख सके सुधा की सुडोल भारी भरकम छातियाँ जो कि उस टाइट ब्लाउज मे से आधे से ज़्यादा बाहर को निकल ही रही थी, माँ की छातियो की गहराई को देख कर प्रेम का लंड फिर से हरकत करने लगा

उषा की धड़कने बढ़ने लगी थी उसकी रगों मे बहता खून बहुत तेज़ी से दौड़ रहा था उत्तेजना की हद तक वो गरम हो चुकी थी भाई के लंड को अपने हाथ मे थामे वो किसी जंगली शेरनी की तरह हो चुकी थी बड़ी तेज़ी से वो अपने हाथ को प्रेम के लंड पर उपर नीचे कर रही थी प्रेम भी बेसबरा हो रहा था उसने अपने मूह को उषा के चेहरे से हटाया और उसको पलट कर खड़ी कर दिया उषा की पीठ अब प्रेम की तरफ थी बहन के मचलते, बल खाए चूतड़ देख कर प्रेम के खड़े लंड ने लहरा कर सलामी दी और उसने उषा के दोनो हाथो को दरवाजे की चोखट पर रखा और उसकी पतली कमर को पकड़ कर उसको वही दरवाजे के बीचो बीच झुका दिया

प्रेम ने अपने लंड के सुपाडे पर अच्छी तरह से थूक लगाया और उसको उषा की जाँघो के बीच दे दिया चूत के मुहाने पर लंड को महसूस करते ही उषा मंद मंद मुस्कुरा पड़ी उसने अपने आप को थोड़ा सा और झुकाया उसके कूल्हे अपने आप खुलते चले गये प्रेम ने बहन की कमर को कस कर पकड़ा और अपने कुल्हो को आगे को किया चूत के मुलायम होंटो को अलग अलग करते हुए लंड उस मक्खन सी चिकनी चूत मे धंसता चला गया उषा की चूत का दरवाजा बिना किसी आवाज़ के खुलता चला गया उषा को हल्का सा दर्द हुआ पर उसे पता भी था कि बस थोड़ी देर मे मज़ा ही मज़ा हैं

 


उफफफफफफफफफफ्फ़ उफफफफफफफफफफ्फ़ उषा के मूह से निकला अपनी बहन की कामुक आवाज़ सुनकर प्रेम को जोश आया उसने खीच कर एक धक्का और लगाया और पूरा का पूरा लंड दीदी की मस्तानी चूत मे उतार दिया उषा के मखमली कुल्हो से जगह बनाते हुए प्रेम का चिकना लंड लपा लॅप दीदी की चुदाई करने लगा उषा भी जल्दी ही अपनी गान्ड को बार बार आगे पीछे करके भाई का भरपूर साथ देने लगी बाहर चलती ठंडी हवा उनके जिस्मो से टकरा कर राहत दे रही थी उषा ने अब अपने दोनो हाथो को अपने घुटनो पर रख लिया और अपनी गान्ड को और भी प्रेम की तरफ उभार लिया चूत का छेद थोड़ा सा और खुल गया और दोनो पूरे मज़े से एक दूसरे के जिस्मो का मज़ा लूटने लगे

उषा की चूत के होंठ बारी बारी से खुल और बंद हो रहे थे उनकी मजबूत पकड़ प्रेम के लंड पर पूरा दवाब डाले हुए थी और फिर वैसे भी उषा की चूत थी भी कितनी पुरानी जुम्मा झुम्मा चार पाँच दिन सारे हुए थे उसको अपनी सील तुडवाए हुए पर प्रेम के मूसल जैस लंड से चुदने के कारण अब साइज़ थोड़ा तो खुलना ही था प्रेम ने दीदी के मजबूत उभारों को अपनी क़ैद मे कर लिया था और पूरी ताक़त से उनको मसल्ते हुए दीदी को चोदे जा रहा था करीब दस मिनिट तक उसने दीदी को अपने घुटनो पर झुकाए रखा पर अब उषा की कमर और पैरो मे दर्द होने लगा था तो वो सीधी खड़ी हो गयी लंड चूत से बाहर निकल कर हवा मे गुस्से से झूलने लगा

प्रेम ने उषा को अपनी तरफ खीचा और उसको अपनी मजबूत बाहों मे उठा लिया उषा अब उसकी गोदी मे थी उसने प्रेम के लंड को अपने हाथ से चूत पर स्ट्रीट किया और उस पर बैठ गयी लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से जा टकराया कई बार तो उसे यकीन ही नही होता था कि वो इतने लंबे लंड को इतनी आसानी से अपनी चूत मे उतार लेती है पर चुदाई का नशा ही कुछ ऐसा होता हैं जितनी चुदाई हो उतनी ही कम लगती हैं और फिर चुदाई अगर अपने भाई से ही हो तो कहने ही क्या अपने भाई की गोदी मे चढ़ि हुई दीदी अपनी पूरी गान्ड तक का ज़ोर लगाते हुए भाई के खड़े लंड पर कूदे जा रही थी दोनो के बदन पसीने से भर गये थे जबकि बाहर ठंडी हवा चल रही थी

चुदाई के आलम मे बेख़बर दोनो भाई बहन अपनी अपनी सीमाओ को तोड़ते हुए अपने अंत की तरफ बढ़ रहे थे उषा का बदन बुरी तरह से थर थरा रहा था पल पल वो झड़ने के करीब हो रही थी प्रेम के लंड को उषा की चूत ने बुरी तरह से जाकड़ रखा था पर लंड कहाँ कभी चूत के रोकने से रुका करता है प्रेम के टट्टो मे भरा वीर्य भहर निकलने को बेताब हो रहा था तभी उषा ने कस कर प्रेम को थाम लिया और अपनी जाँघो को उसकी कमर पर गोल लपेट ते हुए झड़ने लगी उसकी चूत से रिस्ता पानी प्रेम के लंड को भिगोते हुए उसके टट्टो को गीला करने लगा और उसी समय प्रेम के घुटने भी काँप गये और उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकल कर बहन की चूत को भिगोने लगी …………

जिस्मो की आग जो जल रही थी बेसबरो मे वो कुछ पॅलो के लिए ठंडी हो गयी थी उषा प्रेम की बाहो से अलग हुई और अपने कपड़ो को समेट कर बाथरूम मे चली गयी आज प्रेम ने कस कर उसकी चूत मारी थी उषा का बदन बुरी तरह से थक गया था बाथरूम मे जाकर उसने अपने शरीर को सॉफ करना शुरू किया ठंडा पानी जैसे ही उसके बदन पर पड़ा उसे बहुत सुकून मिला उसको कल सुबह सुबह ही कॉलेज के लिए निकलना था उपर से चुदाई की थकान तो उसने सोचा कि नहा धोकर ही सो जाती हूँ और नहाने लगी जबकि प्रेम सोच रहा था कि दीदी को एक बार और चोद कर आराम से सोउंगा

उसने सोचा कि दीदी पेशाब वग़ैरा करके आती ही होगी पर करीब 15 मिनिट बीत गये उषा आई नही तो प्रेम भी नंगे बदन ही बाथरूम की तरफ हो लिया दरवाजा खुला पड़ा था अंदर जलते बल्ब की रोशनी मे उषा का सुडोल बदन पानी की बारिश की चादर मे लिपटा हुआ किसी कयामत से कम नही लग रहा था प्रेम भी बाथरूम मे घुस गया और उषा को अपनी बाहों मे भर लिया पर उषा का अब बिल्कुल मूड नही था उसने प्रेम को मना कर दिया अब प्रेम भी दीदी से ज़बरदस्ती तो कर नही सकता था तो थोड़ी देर बाद भाई बहन अपने अपने कमरे मे सो गये

इधर सौरभ के घर पर रोज की ही तरह सुधा और सौरभ बेड पर सो रहे थे विनीता का बिस्तर दरवाजे के पास वाले पलंग पर लगा हुआ था कमरा गहरे अंधेरे मे डूबा हुआ था विनीता गहरी नींद मे मगन सपनो की दुनिया मे खोई पड़ी थी दूसरी तरफ एक ही बिस्तर पर लेटे हुए सुधा और सौरभ दोनो ही जागे हुए थे नींद दोनो की आँखो से कोसो दूर थी पिछले दो दिनो मे ही उनके रिश्ते ने ना जाने कैसे कैसे मोड़ ले लिए थे जिस ताई जी को वो इतना शरीफ समझता था वो ताई जी ही उसके लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए मचल रही थी इधर सुधा की चूत भी सौरभ का ख़याल कर कर के गीली हो रही थी

 


दोनो अपनी अपनी उधेड़बुन मे फसे पड़े थे दोनो के जिस्म एक दूसरे से पास पास ही सटे हुए थे पर दोनो मे से कोई भी पहल नही कर रहा था जबकि हसरते दोनो को पागल करे जा रही थी सौरभ का लंड उसे एक पल के लिए भी चैन नही लेने दे रहा था आख़िर जब उस से बिल्कुल भी काबू नही रहा तो वो आहिस्ता से ताई जी की तरफ सरका सुधा के जिस्म से सट गया वो, सुधा समझ गयी कि सौरभ भी जाग रहा है पर वो चाहती थी कि सौरभ ही पहल करे साथ ही उसे ये भी डर था की कहीं विनीता ना जाग जाए तो वो चुपचाप लेटी ही रही , सौरभ ने अपने पयज़ामे को नीचे सरकाया और अपने लंड को कपड़ो की क़ैद से आज़ाद कर दिया

फनफनाता हुआ लंड खुली हवा को महसूस करते ही और भी गर्म हो गया सौरभ ने आहिस्ता से सुधा के हाथ को अपने गरम लंड पर रख दिया लंड को अपने हाथ पर महसूस करते ही सुधा रोमांचित हो गयी पर उसको विनीता का डर भी था तो वो कोई रिस्क नही लेना चाहती थी तो उसने अपना हाथ सौरभ के लंड से हटा लिया पर सौरभ की रगों मे चढ़ती जवानी ज़ोर मार रही थी वो कहाँ मान ने वाला था उसने फिर से अपने लंड को ताइजी के हाथ मे दे दिया और अपने हाथ से सुधा के हाथ को दबाते हुए मूठ मरवाने लगा उधर सुधा सौरभ के सिग्नल को समझ गयी उसने सोचा कि चलो जल्दी से हाथ से हिला कर ही इसको शांत कर देती हूँ और उसके लंड को हिलाने लगी

जल्दी ही सुधा का हाथ पूरी रफ़्तार से सौरभ के लंड पर चलने लगा मज़े के सागर मे डूबा सौरभ यही नही रुकने वाला था उसने अपना हाथ सुधा की मस्त चूचियो पर रख दिया और उनको दबाने लगा सुधा की हालत टाइट होने लगी उसकी चूत तो पहले ही रस छोड़ रही थी उपर से सौरभ की ये गर्म छेड़खानी सुधा का कंट्रोल अपने आप से छूटने लगा सौरभ ने उसके ब्लाउज के हुको को खोल दिया और उसकी नंगी छातियो से खेलने लगा सुधा ने भी उसको रोकना मुनासिब नही समझा और चुपचाप लेटी रही उसके लंड को हिलाते हुए पर सौरभ ने धीमे से उसके कान मे कहा कि ताई जी इसको चूसो ना और सुधा के गोरे गालो पर किस करने लगा सुधा मस्त होने लगी

सौरभ के मूह से लंड चूसने की बात सुनकर उसके प्यासे होंठ फड्फाडा उठे, उसने कंबल से अपना मूह बाहर निकाला और चारो तरफ देखा कमरे मे घुप्प अंधेरा छाया हुआ था सौरभ ने कस कर उसकी छातियो को भींचा तो ना चाहते हुए भी उसके मूह से हल्की सी आह निकल गयी तो सुधा ने भी सौरभ की गोटियो को कस कर भींच दिया सौरभ ने ताई जी के रसीले होंटो को अपने होंटो से लगा लिया और उनके रस को निचोड़ने लगा करीब 4-5 मिनिट तक दबा के सुधा के होंठो का रस पीता रहा वो सुधा भी अब गरम हो चुकी थी

वो उल्टी हुई और अपने मूह को सौरभ की टाँगो की तरह ले आई और बिना देर किए चुप चाप अपने मूह को उसके लंड पर झुका दिया जबकि उसके चूतड़ अब सौरभ के मूह की तरफ हो गये थे सुधा ने अपने होंठो पर जीब फिरा कर उनको गीला किया और गप्प से सौरभ के लाल सुपाडे को अपने मूह मे भर लिया और अपनी लंबी जीभ से उसको चूसने लगी सौरभ के सारे तार हिल गये ताई जी की जीभ की रागड़ाई की वजह से वो अपने दोनो हाथो से ताई जी के चुतड़ों को सहलाने लगा और धीरे से साड़ी को उपर कमर तक उठा दिया

सुधा की गदराई गान्ड पर हाथ फिराने लगा तो सुधा भी पूरी मस्ती से उसके लंड को चाटने लगी सौरभ ने ताई जी की चूत की फांको को फैलाया और उस मस्त खुसबू को जो चूत से आ रही थी सूंघ ने लगा सुधा उसके लंड को चूस्ते चूस्ते उसके टट्टो पर भी जीभ फिरा रही थी सोरभ ने अगले ही पल सुधा की चूत को अपने मूह मे भर लिया ब्रेड की तरह फूली हुई चूत को गपा गप चाटने लगा किसी गोलगप्पे को मूह मे भर लिया हो जैसे उसने सुधा अपनी आँखे बंद किए लंड चूस रही थी चूत का नमकीन पानी पीकर सौरभ को बहुत मज़ा आ रहा था दोनो ताई बेटे की जीभ अपनी अपनी जगह पर कमाल कर रहे थे

सुधा अब पूरी तरह से सौरभ के उपर चढ़ बैठी थी दोनो जने अपनी उफनती सांसो को समेटे हुए चुपचाप लगे हुए थे सुधा के चूतड़ अब बुरी तरह से सौरभ के मूह पर उछल रहे थे करीब10 मिनिट तक ऐसे ही चलता रहा और फिर अबकी बार जैसे ही सुधा ने अपनी जीभ को गोल गोल सुपाडे पर रगड़ा सौरभ का लंड हार गया और उस से गाढ़ा सफेद लावा फुट पड़ा , स्वादिष्ट नमकीन पानी सुधा के मूह मे पिचकारियो के रूप मे गिरने लगा जिसे सुधा गटा गट पी गयी उसने सौरभ के लंड से वीर्य की छोटी से छोटी बूँद भी निचोड़ ली

 


पर अभी सुधा का काम नही हुआ था सौरभ ने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत मे उतार दी और अंदर वाले हिस्से को चाटने लगा कुरेदने लगा सुधा ही जानती थी कि कैसे उसने अपनी मचलती हुई आहो को रोके रखा था वरना वो इस हद तक गरम हो चुकी थी कि सारे कमरे को अपने सर पर उठा लेती पर हर शुरुआत का अंत भी होता हैं दो चार मिनिट बात सुधा ने सौरभ के मूह को कस लिया अपनी जाँघो मे और अपनी चूत से टपकते पानी से उसके पूरे चेहरे को तर कर दिया बड़ी ही खामोशी से दोनो ताई बेटा ने अपना काम कर लिया था रात अपनी खामोशी से कट रही थी हसरते शांत पड़ गयी थी

सौरभ की आँख जब सुबह खुली तो उसने देखा कि कमरे मे कोई नही है उसने बिस्तर को देखा जहाँ रात को उसने ताई जी के साथ शरारत की थी बिस्तर की सिलवटों से भरी चादर रात की कहानी बता रही थी वो उठा और कमरे से बाहर आया तो देखा कि विनीता धूप मे बैठी हुई थी,

सौरभ- मम्मी, माफ़ करना आज थोड़ा लेट आँख खुली , मैं अभी आपके लिए पानी रखता हूँ आप नहा लेना फिर

विनीता-नही बेटा , तुम्हारी ताई जी ने नहला दिया था मुझे तू एक काम कर सहर जा और मछलियो की पेमेंट जो बकाया पड़ी है वो ले आ

सौरभ- जी, मैं अभी चला जाता हूँ

उषा कॉलेज जाने के लिए घर से बाहर निकली ही थी कि उसको सौरभ मिल गया

सौरभ- दीदी कहाँ जा रहे हो

उषा- कॉलेज और कहाँ जाना है मुझे

सौरभ- मैं भी सहर जा रहा हूँ चलो साथ ही चलते है

उषा- ठीक है भाई

सौरभ ने स्कूटर स्टार्ट किया और उषा लपक कर बैठ गयी दोनो चल पड़े सहर के रास्ते की तरफ

दूसरी ओर प्रेम सुबह सवेरे ही खेतो की तरफ निकल गया था सुधा ने घर का काम निपटाया और नहाने का सोचने लगी बाथरूम मे गयी और कपड़े उतारे ही थे कि उसको रात को सौरभ के साथ किए खेल की याद आ गयी सुधा खुद चूत मरवाने के लिए बेताब थी आख़िर इतने सालो से दबा के रखी गयी कामवासना ने अब उसका कहना मान ने से मना जो कर दिया बाथरूम मे पूरी नंगी खड़ी सुधा सौरभ के ख़याल से रोमचित होकर गरम होने लगी उसने अपने दोनो बोबो को हाथ से मसलना शुरू किया दो दो किलो की चूचियो मे हवा भरने लगी कामुकता से वो ऐंठने लगी

सुधा की चूत जो कि आज कल 24 घंटे ही पनियाई हुई रहा करती थी फिर से गीली होने लगी उसने थोड़ी देर उसको उंगली की सहयता से सहलाया पर उसको ज़रूरत थी एक तगड़े लंड की , लगडे लंड का ख़याल आते ही उसके जेहन मे प्रेम का ख्याल आया सुधा जो की सारी उमर एक पतिव्रता और संस्कार शील औरत रही थी 40 की उम्र मे आते ही उसको जाने क्या हुआ सारी शरम जैसे घर की खूँटि पर टाँग के रख दी थी उसने कामुकता मे अंधी होकर वो अपने बेटों से ही चुदवाने से भी नही शरमा रही थी प्रेम के लंड का ख्याल आते ही वो अपनी सुध बुध खोने लगी

 


पर वो भी करे तो क्या करे ये चूत की आग भी ना कमाल थी उसका पूरा जिस्म सुलग रहा था उसने सोचा कि प्रेम पर थोड़े और डोरे डाले जाए काश उसको पता होता कि प्रेम तो पहले से ही अपनी माँ को चोदने के लिए तैयार बैठा है बस सुधा के साड़ी उपर उठाने की देर थी बाकी काम तो वो खुद ही कर देता हाई रे मजबूरी सुधा ने वापिस अपने कपड़े पहन लिए और खाना लेकर प्रेम के पास खेत मे पहुच गयी सुधा ने आज बस एक पतली सी साड़ी पहनी थी अंदर ब्रा-पैंटी कुछ नही थे पतला सा ब्लाउज उसके मस्त उभारों का बोझ संभालने मे असमर्थ था आज एक माँ अपने बेटे को रिझाने की पूरी तैयारी करके आई थी खेत मे काम करते हुए प्रेम ने दूर से ही सुधा को देख लिया था अपनी भारी गान्ड को मटकाते हुए कुछ ज़्यादा ही इठला कर चलती हुई उसकी तरफ ही आ रही थी वो

माँ को आया देख कर प्रेम ने काम को बंद किया और सुधा के पास आ गया सुधा कुँए की मुंडेर पर बैठ गयी थी उसने अपनी साड़ी को घुटनों तक उपर कर लिया था जिस से उसकी सुडोल गोरी गोरी पिंडलिया प्रेम को ललचा रही थी प्रेम का लंड जो की सदा खड़ा ही रहता था माँ की चिकनी टाँगो को देख कर फिर से अपना सर उठा ने लगा

सुधा बोली- बेटे तेरे लिए गरमा गरम खाना लाई हूँ खा ले सुधा जब प्रेम से बात कर रही थी तो उसकी साड़ी का पल्लू साइड मे सरक गया और उस पतले ब्लाउज से बाहर को उसकी छातिया छलक आई सुधा के मनमोहक निप्पल्स ब्लाउज मे से साफ साफ दिखाई दे रहे थे प्रेम का गला माँ के बोबो को देख कर खुश्क हो गया उसका दिल तो कर रहा था कि अभी साली को पटक कर चोद दे पर वो ऐसा कर नही सकता था प्रेम खाना खाने बैठ गया सुधा वहाँ से उठी और उसी कच्चे बने हुए बाथरूम मे पहुच गयी और पानी की मोटर चला दी उसका आज भी वही इरादा था जो सौरभ को रिझाने के टाइम पे था

सुधा ने आहिस्ता से अपनी साड़ी को उतारी और नंगी होकर पानी के पाइप के नीचे आ गयी उसका भीगा हुआ बदन अगर कोई देख ले तो बेहोश ही हो जाए ऐसी गजब लग रही थी वो खाना खाते खाते प्रेम को ध्यान आया कि उसने बिजली की लाइन से तारों को चेंज नही किया था आज उसको खेत मे पानी छोड़ना था तो वो खाना बीच मे ही छोड़कर छत पर पहुच गया और तारों को सही करने लगा और तभी उसकी नज़र उस कच्चे बाथरूम पर पड़ी जिसकी छत नही थी तो उसने सुधा को वहाँ पर नहाते हुए देखा तो उसके होश उड़ गये उसे ये तो पता था कि माँ मस्त है पर ये नही पता था कि वो तो कयामत है प्रेम के कदम वही पर ठिठक गये और वो सुधा के नंगे बदन को देख कर अपनी आँखे सेकने लगा पर उसको ये ध्यान नही रहा कि उपर खड़े होने के कारण उसकी परछाई नीचे ज़मीन पर पड़ रही है

सुधा मस्ती से अपने अंग अंग को मसल्ते हुए नहाने का आनंद ले रही थी कि उसकी नज़र उपर से पड़ती छाया पर पड़ी तो उसने तिरछी निगहो से उपर की ओर देखा तो प्रेम खड़ा नज़र आया सुधा मंद मंद मुस्कुराइ और , और भी खुल कर अपने अंगो का प्रदर्शन करने लगी

अपनी माँ को नहाते देख कर प्रेम का हाल बुरा होने लगा था उसका हाथ अपने आप नीचे लंड पर चला गया और उसने उसको बाहर निकाल लिया और तेज़ी से हिलाने लगा सुधा आज बेटे के दिल मे अपने हुश्न की आग बुरी तरह से लगा देना चाहती थी उसे पता तो था ही कि प्रेम उसे नहाते हुए देख रहा हैं सुधा अब बिल्कुल बीच मे आकर खड़ी हो गयी और अपनी टाँगो को फैला कर झान्टो से भरी हुई फूली हुई चूत को सहलाने लगी सुधा की गुलाबी चूत को देख कर प्रेम ने अपने होंटो पर जीभ फेरी और तेज़ी से मूठ मारने लगा

सुधा ने अपनी चूत को सहलाया और अपनी बीच वाली उंगली को चूत मे डाल कर अंदर बाहर करने लगी प्रेम का हाल हुआ और बुरा उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि करे तो क्या क्या माँ उस से चुदना चाहती है इतने पे प्रेम का पानी चूत गया और फिर वो तारों को सही करके नीचे उतर गया और अपना खाना खाने लगा तब तक सुधा भी नहा कर आ गयी थी खाना खा लिया बेटा उसने पूछा प्रेम से

जी, माँ खा लिया प्रेम सुधा के पास आकर खड़ा हो गया

सुधा के गीले बदन से आती मनमोहक खुश्बू से प्रेम को नशा चढ़ने लगा था

 


सुधा बोली- बेटा, मेरे बालो मे ज़रा तेल मालिश करदेना बहुत दिन हुए मालिश नही करवाई है ,

प्रेम- जी माँ अभी कर देता हूँ उसमे क्या है

सुधा वही पर बैठ गयी और प्रेम उसके पीछे आकर खड़ा हो गया सुधा ने चाल खेलते हुए अपने आँचल को पूरा सरका दिया जिस से प्रेम को उसके बोबो का पूरा नज़ारा दिख सके सुधा की सुडोल भारी भरकम छातियाँ जो कि उस टाइट ब्लाउज मे से आधे से ज़्यादा बाहर को निकल ही रही थी, माँ की छातियो की गहराई को देख कर प्रेम का लंड फिर से हरकत करने लगा

प्रेम ललचाई नज़रो से माँ के बोबो को निहारते हुए बालो मे तेल मालिश करने लगा सुधा ने अपनी आँखे मूंद ली पर उसके दिल मे भी हलचल मची हुई थी अपने बेटे से चुदने ख्याल से उसका रोम रोम मचल रहा था , काफ़ी देर तक प्रेम बालों मे मालिश करता रहा तभी उस के हाथो से तेल की शीशी छूट गयी और सुधा के ब्लाउज पर गिर गयी पूरा ब्लाउज तेल से सन गया दोनो बोबे तेल से भीग गये सुधा बोली- नलायक ये तूने क्या कर दिया

प्रेम माफी माँगते हुए बोला- माँ वो शीशी हाथ से छूट गयी ,

सुधा- हाँ पर अभी इधर दूसरा ब्लाउज है भी नही तो मैं क्या पहनुँगी

प्रेम- माँ इसको जल्दी से मुझे दे दो अभी धोकर सूखा देता हूँ थोड़ी देर मे सूख जाएगा फिर पहन लेना

सुधा- पर, तबतक मैं कैसे रहूंगी , आधी नंगी तेरे सामने

प्रेम मन ही मन सुधा को गाली बकते हुए, साली रंडी थोड़ी देर पहले तो गान्ड मटका कर अपनी जवानी मुझे दिखा रही थी अब चूतिया बना रही है

प्रेम- माँ, देखो तेल के दाग पड़ जाएँगे फिर ना कहना और फिर कोई चारा भी तो नही है

सुधा ने सोचा मुझे पागल बना रहा है साले को चूचिया देखन की कुछ ज़्यादा ही जल्दी है लो, आज इसको दिखा ही देती हूँ कि इसकी माँ चीज़ क्या है और सुधा ने अपना ब्लाउज बेटे के सामने ही उतार दिया ब्रा उसने पहनी नही थी ऐसा गजब नज़ारा देख कर प्रेम हक्का बक्का रह गया , दो दो किलो की चूचिया बिल्कुल नंगी उसकी आँखो के सामने पड़ी थी , उसने काँपते हुए हाथो से माँ का ब्लाउज लिया और उसको धोकर जल्दी से सूखा दिया और वापिस कमरे मे आ गया सुधा ने अपनी नंगी छातियो को छुपाने की कोई ज़रूरत नही समझी

सुधा प्रेम की तरफ देखते हुए- क्या देख रहा है बेटे इतनी गोर से

प्रेम- वो माँ , वो माँ

सुधा-बताना बेटे कहा सुधा ने

प्रेम- कुछ नही माँ

सुधा- मुझे मालूम है तू मेरे बोबे देख रहा हैं, बचपन मे इनका ही दूध पीकर आज तू इतना मुस्टंडा हुआ हैं

प्रेम- पर अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ

सुधा- उसके पयज़ामे मे बने तंबू की ओर देखते हुए, हाँ बेटा वाकई तू अब बड़ा हो गया है

बचपन मे तो बहुत ज़िद करता था दूध पीने की , काट काट कर मेरे बोबो का बुरा हाल कर दिया था तूने

प्रेम- माँ वो बचपन की बाते थी

सुधा- हाँ पर दूध आज भी है बेटे

ये सुधा का प्रेम की तरफ खुला निमंत्रण था सुधा प्रेम के पास आई और अपने बोबो को सहलाते हुए बोली- बेटा मेरी पीठ मे आजकल बहुत खुजली खारिश सी रहती है अब जब थोड़ा टाइम हैं तो लगे हाथ थोड़ा तेल उधर भी लगा दे प्रेम की तो जैस निकल पड़ी उसने हाथो पर थोड़ा सा तेल लगाया और सुधा की पीठ को मसल्ने लगा अपने बदन पर बेटे के हाथो का स्पर्श पाकर सुधा बहकने लगी

प्रेम उसके कंधो की मालिश करते करते उसकी बगल तक हाथ ले जा रहा था उसका मन चूचियो पर था, धीरे धीरे बगलो को सहलाते सहलाते वो चूचियो तक पहुच ही गया और अपने मजबूत हाथो मे सुधा के बोबो को थाम लिया और कस कर दबा दिया

सुधा अयाया बेटे ये क्या कर रहा है

प्रेम- माँ मालिश कर रहा हूँ

सुदाह – पर बेटे ,

प्रेम- माँ इनको भी मालिश की ज़रूरत है देख कैसे मुरझा सी गयी है अब मालिश करने लगा हूँ तो पूरी ही करूँगा रोक ना मुझे और अपनी माँ के बोबो को मसल्ने लगा

 


इधर.........

दोनो भाई बहन स्कूटर पर सहर की तरफ चल पड़े थे सौरभ आज बहुत खुश था उषा दीदी जैसी हॉट लड़की उसके साथ सवारी कर रही थी , खटारा स्कूटर उबड़-खाबड़ रास्तों पर हौले हौले से सहर की तरफ बढ़ रहा था सौरभ बार बार स्कूटर के शीशे से उषा की तरफ चोर नज़रो से देखे जा रहा था टूटे-फूटे रास्ते पर जब भी स्कूटर डाँवाडोल होता उषा थोड़ा सा उसकी तरफ हो जाती उषा ने अपने हाथ को सौरभ के कंधे पर रखा हुआ था पर जब कभी वो ब्रेक लगाता तो उषा का पूरा बोझ सौरभ की पीठ पर आ जाता तो उसकी चूचियो को फील करके पूरे रास्ते वो मज़ा लेता रहा उषा और सौरभ दोनो सहर आ गये थे , सौरभ ने उषा को कॉलेज के गेट पे ड्रॉप किया तो उषा बोली, मेरी क्लास तीन बजे तक ख़तम हो जाएगी फिर मुझे पिक कर लेना बाजार मे थोड़ा समान खरीदना है फिर साथ घर चलेंगे

उसने हाँ मे सर हिलाया और अपनी पेमेंट लेने चल दिया आज कई देनदारों से वसूली करनी थी तो उन सब मे ही करीब करीब दो बज गये थे फिर उसने थोड़ा बहुत कुछ खाया पिया और उषा के कॉलेज की तरफ चल पड़ा पर रास्ते मे उसे एक किताबो की फेरी दिखी , अब सौरभ की ये आदत थी कि वो अक्सर सहर से सेक्सी कहानियो की बुक्स खरीदता रहता था तो उस दिन भी उसने दो चार किताबें खरीद ली और रख लिया , वो फिर सीधा कॉलेज कॅंटीन मे गया जहाँ उषा उसे मिल गयी

वो अपनी सहेलियो के साथ बैठी थी सौरभ को देख कर उसकी एक सहेली चुटकी लेते हुए बोली- उषा , कभी तूने बताया नही तेरा बाय्फ्रेंड भी है

ये बात सुनकर सौरभ और उषा दोनो ही बुरी तरह से झेंप गये

उषा बोली- नही, ये मेरा भाई है, सुबह मेरे साथ ही आया था और अब साथ ही घर जाएँगे उषा ने सौरभ का परिचय करवाया अपनी दोस्तो से और फिर करीब साढ़े तीन बजे वो कॉलेज से निकल लिए

उषा- मैन चौक वाली मार्केट चलना मुझे कुछ कपड़े खरीदने है तो उसने स्कूटर उधर मोड़ दिया

वो लॅडीस समान की एक बहुत बड़ी दुकान थी जिसमे औरतो की ज़रूरत का हर समान उपलब्ध था सौरभ काउंटर के पास रखे सोफे पर बैठ गया उषा खरीदारी करने लगी सौरभ ने देखा कि दुकान मे कई जगह डिसप्ले मे ब्रा-पैंटी के सेक्सी सेक्सी कलेक्षन रखे थे उसने देखा कई औरते उन्हे देख रही थी तो वो सेक्सी सा फील करने लगा तभी उसकी निगाह उषा पर पड़ी , वो भी अपने लिए कुछ सेट्स देख रही थी तो उसने मन ही मन सोचा उषा दीदी ऐसे सेक्सी ब्रा-पैंटी पहनती है तभी तो खुद भी एक नंबर माल है

करीब आधे घंटे बाद दोनो गाँव के लिए चल पड़े, सौरभ ने उषा का समान और अपनी बुक्स आगे जाली मे रख दी थी ताकि उषा आराम से सफ़र कर सके उसके मन मे प्रबल इच्छा हो रही थी कि उषा दीदी को अभी चोद दे पर उसका बस भी तो नही चलता था रोड के खद्डो के कारण उषा की चूचिया बार बार उसकी पीठ पर दवाब डाल रही थी तो उषा भी थोड़ी हॉर्नी सी होने लगी थी अब जवान जिस्म गरम भी कुछ जल्दी ही हो जाया करते है तो उसने भी सोचा थोड़ा टाइम पास कर लेती हूँ वो अपनी चूचियो का और दवाब सौरभ की पीठ पर डालते हुए बोली- तेरी कोई गर्लफ्रेंड हैं क्या

सौरभ- क्या दीदी, मेरी गर्लफ्रेंड कॉन बनेगी

उषा- ओह बॅड्लेक तेरा, हॅंडसम है ट्राइ कर

सौरभ-इतना टाइम नही है मेरे पास

उषा- हुम्म

ऐसे ही बाते कर रहे थे गाँव करीब 20किमी दूर रह गया था कि सौरभ ने कहा दीदी मेरे पास ना करीब 30 हज़ार रुपये है आगे का रास्ता थोड़ा ठीक नही है पिछले दिनो भी एक आदमी को लूट लिया था किसी ने तो इधर पास से एक शॉर्टकट जाता है आप कहो तो उधर से ले लूँ टाइम भी बच जाएगा और पैसो की सेफ्टी भी हो जाएगी उषा ने सोचा कि बात तो सही है और फिर क्या फरक पड़ता है कच्चे रास्ते से नहर किनारे किनारे चले जाएँगे तो घर भी थोड़ा जल्दी पहुच जाएँगे तो उसने कहा ठीक है भाई

जल्दी ही कच्चा रास्ता शुरू हो गया बार बार वो ब्रेक लगाता उषा बार बार अपनी ठोस छातियो को संभालती वो स्कूटर भी एक नंबर का खटारा था उषा भी समझ रही थी सौरभ को फुल अड्वॅंटेज मिल रहा है पर वो भी करे तो क्या उसका खुद का बॅलेन्स भी बिगड़ रहा था उस स्कूटर मे पीछे स्टॅंड सा भी नही था जिसे वो पकड़ सके तो फिर कुछ सोच कर उसने सौरभ की कमर मे हाथ डाल दिया और पकड़ लिया सौरभ थोड़ा सा और पीछे को सरक गया उषा का हाथ अंजाने मे सौरभ की जाँघो तक फिसल आया

तो सौरभ का हथियार जाग गया और पॅंट मे ही उछल कूद मचाने लगा उषा अपने ख़यालो मे थी तो उसका हाथ एक दम से सौरभ के लंड पर टच हो गया दोनो भाई बहन के बदन मे करेंट डॉड गया उसने तुरंत अपना हाथ हटा लिया और सही से बैठ गयी पर अभी मुसीबत आनी तो बाकी थी गाँव अभी भी करीब 10-12 किमी दूर था की तभी स्कूटर का टाइयर पंक्चर हो गया अब हुई परेशानी

उषा- क्या हुआ भाई

सौरभ- दीदी टाइयर पंक्चर हो गया

उषा- क्य्ाआआआअ अब कैसे जाएँगे घर

सौरभ- दीदी इस रास्ते पर तो कोई पंक्चर की दुकान भी नही है अब तो गाँव तक पैदल ही जाना होगा

 


उषा ने अपना माथा पीट लिया और गुस्से से बोली- तुम जाहिल हो , कुछ बस का नही है तुम्हारे, इस से अच्छा होता कि मैं बस मे ही धक्के खा लेती इस खटारे के चक्कर मे आ गयी किराया बचाने चली थी लग गयी मेरी तो अब कब पहुँचुँगी घर पर

सौरभ- दीदी शांत हो जाओ अब मुझे क्या पता था कि ऐसा कुछ हो जाएगा अब गुस्सा मत करो और फिर घर तो चलना ही है ना और आपको कॉन सा इसे घसीटना है

उषा बोली चुप रह और फिर दोनो जने पैदल पैदल चलने लगे

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खेत से आने के बाद सुधा घर के कामो मे व्यस्त हो गयी थी प्रेम मोका पाकर विनीता के पास पहुच गया वो बिस्तर पर लेटी थी वो भी उसके बगल मे लेट गया और उसकी चूची को दबाने लगा

विनता ने उसके लंड को बाहर निकाला और उसको अपनी मुट्ठी मे लेकर मसल्ने लगी

प्रेम बोबो को दबाते हुए- ओह चाची कितने दिन हुए कब ठीक होगा तुम्हारा पाँव देखो तुम्हारे बिना मेरा बुरा हाल हुए जा रहा हैं

विनीता आह भरते हुए- मेरे राजा मेरा हाल भी कुछ हैं जब से तेरे लंड को चूत मे लिया है बस ये निगोडी दिन रात तेरे लंड को ही पुकारती रहती है ज़रा देख तो सही इस बेचारी की हालत क्या हुई है

प्रेम ने चाची की साड़ी को उपर तक उठाया और अपना हाथ अंदर घुसा दिया विनीता की टाँगो को थोड़ा सा चौड़ा किया और उस प्यारी सी छोटी सी चूत को अपनी मुट्ठी मे भर के मसल्ने लगा विनीता एक सेकेंड मे ही काम वासना से भर गयी उसने अपनी बीच वाली उंगली चाची की चूत मे सरका दी और अपने होंटो को विनीता के होटो से जोड़ दिया उफ़फ्फ़ ये जिस्मो के मचलते अरमान दोनो चाची बेटा बड़े गरम हो रहे थे प्रेम ने चाची के ब्लाउज के हुको को खोला और बोबो को बाहर खीच लिया बारी बारी से उन पर किस करने लगा वो विनीता आहे भरने लगी आज उसको कुछ भी करके ये तगड़ा लंड अपनी चूत मे चाहिए ही था

वो बोली- मेरे राजा , आज चोद मुझे खूब कस कस के देखी जाएगी जो हो गा पर इस चूत की आग को आज बुझा मेरे बेटे

प्रेम- पर चाची कही पैर को कोई दिक्कत ना हो जाए

चाची- माँ चुदाये पैर, जो होगा देखा जाएगा मुझ से ये आग अब नही सही जाती और वैसे भी पैर काफ़ी हद तक ठीक हो गया हैं तू बस चोद मुझे

प्रेम को और क्या चाहिए था उसने अपना सिर विनीता की जाँघो मे घुसा दिया और उस रस से भरी कटोरी को चाटने लगा , विनीता की बदन मे जैसे सैकड़ो सुईया चुभने लगी उसे लगा कि जैसे चींटिया काट रही हो उसके बदन को प्रेम की लपलपाति जीभ चाची की वासना को भड़काने लगी थी अपनी चाची की लंबी स्प्नीली चूत का रस चाट कर प्रेम को बहुत ही मज़ा आ रहा था अब उसने अपनी दो उंगलिया चूत मे सरका दी और अपने मूह मे चूत के भग्नासे को जाकड़ दिया और उंगलियो को तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा विनीता की आँखे मज़े से बोझिल होने लगी मस्ती के सागर मे डूबने लगी पूरे कमरे मे बस उसकी तेज सांसो की ही आवाज़ गूँज रही थी

विनीता- अया अया आहा बस मेरे राआाआआआअज़ाआाआआआआआ मारीईईईईईईई मैं तूऊऊऊऊऊऊ

प्रेम- डालु चाची ,

विनीता- मैं तो कब से इंतज़ार कर रही हूँ बेटे जल्दी कर ना

प्रेम ने चाची के पैरो सा सावधानी से फैलाया जिस पाँव मे तकलीफ़ थी उसके नीचे तकिया लगाया और फिर अपने मस्ताने लंड को विनीता की चूत पर सटा दिया कई दिनो बाद चूत पर गरम लंड के अहसास से विनीता के बदन मे चीसे चलनी शुरू होगयि प्रेम ने अपनी पकड़ बनाई और उसके धक्का लगाते हुए लंड चाची की चूत मे जाने लगा

अया, निकाला विनीता के मूह से और प्रेम उस पर झुकता चला गया एक और धक्का और उसके अंडकोष विनीता की चूत से जा टकराया विनीता ने अपने होतो को खोला और प्रेम ने उनको अपने मूह मे क़ैद कर लिया चाची की गरम चूत की चुदाई शुरू हो गयी प्रेम थोड़ी आहिस्ता से धक्के लगा रहा था विनीता पागलो की तरह प्रेम के पूरे चेहरे को चूमे जा रही थी

 


इधर दोनो भाई बहन नोक झोंक करते हुए स्कूटर को घसीट ते हुए गाँव की तरफ चल रहे थे गाँव बस थोड़ी सी दूर रहा था पर ऐसा लगता था कि जैसे कि कितनी दूर हो, उषा को मूतने का मन हो रहा था बहुत देर से पर चारो तरफ खुला ही इलाक़ा था तो वो कर नही पा रही थी पर अब उसको लगने लगा था कि अब वो ज़्यादा देर तक रोक नही पाएगी पर छोटा भाई साथ था तो वो थोड़ा सा शरमा भी रही थी उसके लिए एक एक कदम बढ़ाना मुश्किल हो रहा था

उसकी टांगे काँपने लगी थी , अब क्या करूँ मैं यही सोचते सोचते वो रुक गयी उसे लग रहा था कि बस मूत निकलने ही वाला है आज तो तगड़ी मुसीबत हुई

सौरभ- क्या हुआ दीदी क्यो रुक गयी

उषा- भाई मुझे ना वो वो

सौरभ- वो क्या दीदी

उषा= मुझे ना सुसू आई है बहुत तेज

ये सुनते ही सौरभ के कान गरम हो गये वो तो पहले ही उषा पे फिदा था उसने सोचा इसी बहाने से दीदी की गान्ड देखने का तगड़ा मोका मिला है आज तो

सौरभ- दीदी, इधर तो कोई जगह भी नही है सब तरफ खुला ही पड़ा है

उषा- मुझे भी दिख रहा है पर मैं अब और कंट्रोल नही कर सकती कुछ करो

सौरभ- दीदी, आप फिर इधर ही कर लो और क्या

उषा- पर खुले मे कैसे

सौरभ-दीदी इधर हम दोनो के सिवा और कोई है नही मैं इधर मूह करके खड़ा हो जाता हूँ आप जल्दी से कर लो

उषा ने सोचा बात तो ठीक है उसने हाँ कर दी

सौरभ न अपना मूह दूसरी तरफ कर लिया उषा ने जल्दी से अपने सलवार को नीचे सरकया और बैठ गयी , सुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर की तेज आवाज़ से पेशाब चूत की दीवारो को चीरता हुआ धरती पर गिरने लगा सौरभ ने ज़रा सी गर्दन घुमा कर देखा तो उषा के चुतड़ों पर नज़र गयी उफ़फ्फ़ क्या गजब माल थी वो उषा को काफ़ी देर तक प्रेशर आता रहा उसे आज से पहले मूतने मे इतना मज़ा कभी नही आया था

उषा उठने ही वाली थी कि उसे लगा कि सौरभ चोर नज़रो से उसकी गान्ड को देख रहा है पर उसको गुस्सा नही आया उसने सोचा जब प्रेम भाई को दे चुकी हूँ तो इस कम्बख़्त के लिए भी थोड़ा नज़ारा तो बनता ही है उसने सौरभ के मज़े लेने की सोची और बिना अपनी सलवार को सरकाए ही खड़ी हो गयी ताकि सौरभ उसकी मांसल जाँघो और चुतड़ों को अच्छे से निहार सके फिर धीरे से उसने अपनी सलवार उपर की सौरभ के मूह का थूक ही सूख गया उसके दिल मे दीदी को चोदने की ख्वाहिश और भी बलवान हो गयी

इधर प्रेम और विनीता दोनो एक दूसरे की बाहों मे काम सुख को चख रहे थे प्रेम का लंड सरपट सरपट करता हुआ चाची की चूत मे अंदर बाहर हो रहा था दोनो की साँसे एक दूसरे से उलझी पड़ी थी चूत पर थप थप धक्को की बरसात हो रही थी दो जिस्म एक दूसरे मे समाए हुए अपनी मंज़िल की तलाश कर रहे थे पर आज उनकी किस्मत मे मंज़िल को पकड़ना था ही नही दोनो बस कुछ ही कदम की दूरी पर थे कि तभी नीचे से किसी की आवाज़ आई तो दोनो घबरा गये प्रेम फुर्ती से उसके उपर से उतरा और दीवार कूद कर अपने चॉबारे मे पहुच गया विनीता ने भी साड़ी को सही किया और ब्लाउज के हुको को बंद किया और आँखे बंद करके लेट गयी जैसे गहरी नींद मे हो मन ही मन गलियाँ देते हुए कि कॉन निगोडा आ मरा इस वक़्त

जल्दी ही उसे पता चल गया कि उसका पति आज घर आ गया था , जो कि एक नंबर का शराबी इंसान था पर अब था तो उसका पति ही , उसने विनीता को जगाया तो वो आँखे मलते हुए बोली- आप कब आए

पति- बस अभी भी, तबीयत कैसी है तुम्हारी

विनीता- जी बस ठीक हो रही हूँ डॉक्टर ने बताया कि कुछ दिनो मे चलने फिरने लगूंगी पहले की तरह

पति- बस तुम जल्दी से ठीक हो जाओ तो घर फिर से महकने लगेगा

विनीता को लगा कि आज उसका पति कैसी बाते कर रहा हैं

विनीता- काफ़ी दिनो बाद छुट्टी मिली

पति- हां वो क्या हैं ना कि काम बहुत रहता है आजकल मैने पीनी भी छोड़ दी हैं और मन लगाकर काम करता हूँ तो मेरा सेठ बहुत खुश हैं मेरे से और मेरी तनख़्वाह भी बढ़ा दी है

विनीता को यकीन ही नही होता कि उसके पति ने दारू छोड़ दी है उसकी आँखो मे खुशी के आँसू आ जाते है , उसका पति उसे गले से लगा लेता है और कहता है

मेरे सेठ ने देहरादून मे नया धंधा खोला है ट्रांसपोर्ट का और मुझे मुनीम बना दिया है तनख़्वाह भी पूरे 20000 रुपये देगा

विनीता- सच कह रहे है आप

पति- हाँ , मैं कल ही वहाँ के लिए निकल जाउन्गा , फिर कम से कम महीने डेढ़ महीने मे ही आउन्गा , देखो आज तक तुमने ही घर संभाला है तो अब तुमसे क्या छिपाना पर अब मैं भी ज़िम्मेदारी लूँगा ये लो मेरी पिछले कई दिनो की कमाई उसने नोटो की गद्दी विनीता के हाथो मे रख दी विनीता की आँखो से खुशी के आँसू झरने लगे पति पत्नी एक दूसरे के गले लगे हुए अपने आप को समेट रहे थे जहाँ कुछ देर पहले विनीता हवस की आग मे डूबी हुई पराए लड़के से चुद रही थी अब वो अपने पति की बाहों मे कुछ बेहद खास पलों को जी रही थी

 
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