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Guest
तुम आग हो तो मैं सर्द पानी की बारिश हूँ कहा मैंने
पिस्ता- अच्छा जी ये बात हैं ,
मैं- नहीं बात तो कुछ और हैं पर मैं कह नहीं पाउँगा
पिस्ता- अक्सर होटो तक आ गयी बात को कह देना चाहिए वर्ना दिल पर बोझ कुछ ज्यादा बढ़ जाता हैं
मैं- तुम्हे बड़ा पता हैं दिल की बातो का
पिस्ता- बस पता हैं , अब कमसेकम मेरी कलाई तो छोड़ दो दुखने लगी है कबसे पकडे हो इसको
मैं- पहले वादा करो को यही रुकोगी जाओगी नहीं
पिस्ता- रे बुद्धू, जाना होता तो आती ही क्यों मैं तो तुम्हे परख रही थी
मैं- तो क्या परखा तुमने
पिस्ता- वो सब जाने दो , और ये बताओ की क्यों करता हैं मुझे ऐसे ही देखने का मन
मैं- सच कहू तो वो कल की मुलाकात जो हूँई, थोड़ी बहुत देर जो हम लोग साथ बैठे थे मन में बस सा गया हैं, पूरा दिन और तुम्हारे जाने के बाद रात बस अगर मन में कोई ख्याल था तो बस तुम्हारा ही था , अब तुम कहोगी की तुम हो ही ऐसी की हर कोई हसरत करता हैं तुम्हारी पर मैं उन लोगो में से नहीं हूँ पर तुम न जाने क्यों मुझे औरो से थोड़ी अलग सी लगी शायद वो बात बस तुम्हारे अन्दर ही हैं
पिस्ता- अपनी आँखों को गोल गोल घुमाते हूँए , अच्छा जी लड़की पटाने का बड़ा निराला तरीका हैं तुम्हारा पर मैं ठहरी आजाद चिड़िया अपनी मर्ज़ी की मालिक हाथ नहीं आउंगी तुम्हारे
रात धीरे धीरे चढ़ रही थी चाँद का नूर बरसा पड़ा था चारो और पर आज गर्मी नहीं थी थोड़ी ठंडी हवा चल रही थी , दूर दूर तक अगर कुछ था तो बस चारो तरफ फैला हूँआ सन्नाटा पर मेरे दिल की रफ़्तार कुछ तेज सी हो गयी थी धड़कने बेकाबू सी मेरी पकड़ से भाग रही थी ऊपर से पिस्ता जैसी शोख लड़की मेरे साथ उस खुले आसमान के तले साथ थी तो पता नहीं क्यों बड़ा अच्छा लग रहा था, उसकी हर बात उसकी वो बेतकल्लुफी भा सी गयी थी मन को
अब कुछ बोलोगे भी तुम या बस ऐसे ही बैठे रहोगे कहा उसने
मैं- पिस्ता, इतनी बेफिक्र कैसे हो तुम
वो- फ़ालतू के इंसान हो तुम भी , कल मुझे मजा आया था तुमसे बाते करके पर आज पता नहीं क्यों कुछ बेचैन से लगते हो तुम कैसे कैसे सवाल पूछ रहे हो अगर में मन में कोई बात है तो कहो बे झिजक
मैं-चाय पिओगी
ये सुनते ही उसकी हंसी छुट गयी और वो हसने लगी उसने अपना पेट पकड़ा और काफ़ी देर तक हस्ती ही रही उसको इस तरह देख कर मुस्कुरा पड़ा मैं बिना किसी बात के ही, फिर हो रुकी और बोली इस टाइम मैंने कहा टाइम से क्या है तुम्हे पीनी हैं तो बताओ
वो- हां तुम बनाओगे तो जरुर पियूंगी वैसे भी मैंने आजतक किसी लड़के को चाय बनाते नहीं देखा हैं
हम बाते कर ही रहे थे की बल्ब बुझ गया बिजली चली गयी थी मैं कमरे में गया और लालटेन जलाई और स्टोव पर चाय चढ़ा दी पता नहीं कब वो चुलबुली लड़की दबे पाँव कमरे के अन्दर आ गयी उस पर नजर जो पड़ी तो पूछने लगा मैं अरे तुम यहाँ क्यों आ गयी बस दो मिनट में चाय बन रही हैं
वो- कोई बात नहीं मैं यही ठीक हूँ
दो कपो में चाय डाली और एक कप उसको पकडाया हम दरवाजे पर ही खड़े खड़े चाय की चुसकिया लेते हूँवे एक दुसरे को बड़ी गहरी नजर से देख रहे थे नजरे जैसे उलझ सी गयी थी एक दुसरे से पसीना कुछ ज्यादा ही आने लगा था मुझे
चाय मस्त बनायीं हैं तुमने कहा उसने
सर झुका कर उसका इस्तकबाल किया मैंने
लालटेन की मद्धम रौशनी में बड़ी प्यारी लग रही थी उसकी सूरत पता नहीं क्या हूँवा उसको अपने गले लगा लिया मैंने ५-7 मिनट उसको सीने से लगाये रखा मैंने पर जब कुछ ज्यादा ही देर हो गयी तो धक्का देकर परे को हो गयी वो
वो-क्या कर रहे हो
मैं- सॉरी , बस अपने आप हो गया
वो- कोई बात नहीं पर काबू रखो खुद पर
हम वापिस से चारपाई पर आ गए और बातो का सिलसिला शुरू हो गया
मैं- बताओ न कुछ अपने बारे में
वो- क्या बताऊ, खाली किताब हैं ज़िन्दगी मेरी हर पन्ना कोरा हैं बस इतनी सी बात हैं
मैं- अगर कोई खाली पन्नो को रंगना चाहे तो
वो- बड़ा महंगा है वो रंग उसका मोल न चूका पायेगा कोई
मैं- अनमोल चीज़ का कोई मोल नहीं पर रंग होते हैं महकने के लिए तो फिर तुम कोरी क्यों
वो- बातो में न उलझाओ तुम बस इतना समझ लो ऐसा कोई रंग अभी नहीं जिसमे मैं रंग जाऊ, ऐसा कोई फाग नहीं जो बरस जाए बरसात की तरह और भिगो दे मुझे इस कदर की फिर लाख कोशिश करू वो रंग छुटे ही ना
मैं- कहो तो रंग दू तुम्हे अपने रंग में
वो- बस मुस्कुरा पड़ी
आओ जरा थोडा आगे तक चलते हैं कहा मैंने और वो साथ साथ चल पड़ी , एक गोल चक्कर लिया और उसके खेत के परली तरफ तक पहूँच गए हवा जैसे रुक सी गयी थी वक़्त की गति जैसे थम सी गयी थी चांदनी रात का रंग आज इस तरफ से बरसने वाला था की फिर बस कभी वो उतरा ही नहीं, थोड़ी और चले हम फिर मेरे कदम रुक गए
उसने देखा मेरीओर
दोस्ती करोगी मुझसे पुछा मैंने
वो- मुझमे क्या देख लिया जो दोस्ती तक पहूँच गए कल को कहोगे प्यार हो गया हैं मैं दुनिया दरी खूब समझती हूँ थोड़े दिन ये नाटक चलेगा पर आखिर तुम्हारी मंजिल भी इस जिस्म पर आकर खड़ी हो जाएगी एक बार जो काम निकला फिर मन भरा और फिर सब ख़तम इतनी सी बात हैं तो दोस्ती को इसमें मत लाओ दोस्ती बहुत अलग चीज़ होती हैं
मैं – मैंने बस इतना कहा दोस्ती करोगी क्या जरा एक बार मेरी आँखों में देखो क्या दिखता हैं तुम्हे
वो- मुझे जो देखना था कल रात ही देख लिया था मैंने , वर्ना आज इस रात यु तुम्हारे साथ इधर न होती , पर देखो मेरे बारे में तुमने गाँव-बस्ती में बहुत सी बाते सुनी होंगी, लोगो ने नमक-मिर्च लगा कर किस्से गढ़े है अगर आज मैं तुम्हारी दोस्ती कबूल करती हूँ तो कल तुम्हारे ऊपर हैं की इस बात को तुम किस तरह लेते हो, ज़िन्दगी में कुछ बाते ऐसी होती हैं जो हम लोग चाह कर भी नहीं बदल सकते है, और ये जो तुम दोस्ती बोल रहे हो तुम मेरा साथ करोगे तो बात कभी न कभी खुलेगी हर किसी को पता चलेगा तब तुम क्या करोगे मैं जैसी हूँ वैसे ही रहूंगी दोस्ती का मतलब हैं एक दुसरे को समझना जानना देख लो मैं जैसी हूँ वैसे तुम्हे चलेगी तो ठीक हैं
मैं- देखो तुम्हे इन सब बातो का जवाब अपने आप मिल जायेगा आजतक कभी कोई दोस्त था नहीं मेरा पर तुमसे जो कल मुलाकात हूँई तुम अपना एक हिस्सा छोड़ गयी थी मेरे पास मैं कभी घुमा फिर करके बात नहीं करता अब तुम जानो
वो- ठीक हैं तो करलो दोस्ती पर इतना ही कहूँगी कभी मेरी आजमाइश न करना
मैं- एक बार गले तो लगालो
वो आई और मेरे सीने से लग गयी करार आ गया बेचैन दिल को उसकी पीठ पर अपने हाथो की पकड़ कस दी मैंने उसकी साँसे मेरे सीने से टकरा रही थी
अब छोड़ो भी मुझे कहा उसने
न जी ना कहा मैंने
पिस्ता- अच्छा जी ये बात हैं ,
मैं- नहीं बात तो कुछ और हैं पर मैं कह नहीं पाउँगा
पिस्ता- अक्सर होटो तक आ गयी बात को कह देना चाहिए वर्ना दिल पर बोझ कुछ ज्यादा बढ़ जाता हैं
मैं- तुम्हे बड़ा पता हैं दिल की बातो का
पिस्ता- बस पता हैं , अब कमसेकम मेरी कलाई तो छोड़ दो दुखने लगी है कबसे पकडे हो इसको
मैं- पहले वादा करो को यही रुकोगी जाओगी नहीं
पिस्ता- रे बुद्धू, जाना होता तो आती ही क्यों मैं तो तुम्हे परख रही थी
मैं- तो क्या परखा तुमने
पिस्ता- वो सब जाने दो , और ये बताओ की क्यों करता हैं मुझे ऐसे ही देखने का मन
मैं- सच कहू तो वो कल की मुलाकात जो हूँई, थोड़ी बहुत देर जो हम लोग साथ बैठे थे मन में बस सा गया हैं, पूरा दिन और तुम्हारे जाने के बाद रात बस अगर मन में कोई ख्याल था तो बस तुम्हारा ही था , अब तुम कहोगी की तुम हो ही ऐसी की हर कोई हसरत करता हैं तुम्हारी पर मैं उन लोगो में से नहीं हूँ पर तुम न जाने क्यों मुझे औरो से थोड़ी अलग सी लगी शायद वो बात बस तुम्हारे अन्दर ही हैं
पिस्ता- अपनी आँखों को गोल गोल घुमाते हूँए , अच्छा जी लड़की पटाने का बड़ा निराला तरीका हैं तुम्हारा पर मैं ठहरी आजाद चिड़िया अपनी मर्ज़ी की मालिक हाथ नहीं आउंगी तुम्हारे
रात धीरे धीरे चढ़ रही थी चाँद का नूर बरसा पड़ा था चारो और पर आज गर्मी नहीं थी थोड़ी ठंडी हवा चल रही थी , दूर दूर तक अगर कुछ था तो बस चारो तरफ फैला हूँआ सन्नाटा पर मेरे दिल की रफ़्तार कुछ तेज सी हो गयी थी धड़कने बेकाबू सी मेरी पकड़ से भाग रही थी ऊपर से पिस्ता जैसी शोख लड़की मेरे साथ उस खुले आसमान के तले साथ थी तो पता नहीं क्यों बड़ा अच्छा लग रहा था, उसकी हर बात उसकी वो बेतकल्लुफी भा सी गयी थी मन को
अब कुछ बोलोगे भी तुम या बस ऐसे ही बैठे रहोगे कहा उसने
मैं- पिस्ता, इतनी बेफिक्र कैसे हो तुम
वो- फ़ालतू के इंसान हो तुम भी , कल मुझे मजा आया था तुमसे बाते करके पर आज पता नहीं क्यों कुछ बेचैन से लगते हो तुम कैसे कैसे सवाल पूछ रहे हो अगर में मन में कोई बात है तो कहो बे झिजक
मैं-चाय पिओगी
ये सुनते ही उसकी हंसी छुट गयी और वो हसने लगी उसने अपना पेट पकड़ा और काफ़ी देर तक हस्ती ही रही उसको इस तरह देख कर मुस्कुरा पड़ा मैं बिना किसी बात के ही, फिर हो रुकी और बोली इस टाइम मैंने कहा टाइम से क्या है तुम्हे पीनी हैं तो बताओ
वो- हां तुम बनाओगे तो जरुर पियूंगी वैसे भी मैंने आजतक किसी लड़के को चाय बनाते नहीं देखा हैं
हम बाते कर ही रहे थे की बल्ब बुझ गया बिजली चली गयी थी मैं कमरे में गया और लालटेन जलाई और स्टोव पर चाय चढ़ा दी पता नहीं कब वो चुलबुली लड़की दबे पाँव कमरे के अन्दर आ गयी उस पर नजर जो पड़ी तो पूछने लगा मैं अरे तुम यहाँ क्यों आ गयी बस दो मिनट में चाय बन रही हैं
वो- कोई बात नहीं मैं यही ठीक हूँ
दो कपो में चाय डाली और एक कप उसको पकडाया हम दरवाजे पर ही खड़े खड़े चाय की चुसकिया लेते हूँवे एक दुसरे को बड़ी गहरी नजर से देख रहे थे नजरे जैसे उलझ सी गयी थी एक दुसरे से पसीना कुछ ज्यादा ही आने लगा था मुझे
चाय मस्त बनायीं हैं तुमने कहा उसने
सर झुका कर उसका इस्तकबाल किया मैंने
लालटेन की मद्धम रौशनी में बड़ी प्यारी लग रही थी उसकी सूरत पता नहीं क्या हूँवा उसको अपने गले लगा लिया मैंने ५-7 मिनट उसको सीने से लगाये रखा मैंने पर जब कुछ ज्यादा ही देर हो गयी तो धक्का देकर परे को हो गयी वो
वो-क्या कर रहे हो
मैं- सॉरी , बस अपने आप हो गया
वो- कोई बात नहीं पर काबू रखो खुद पर
हम वापिस से चारपाई पर आ गए और बातो का सिलसिला शुरू हो गया
मैं- बताओ न कुछ अपने बारे में
वो- क्या बताऊ, खाली किताब हैं ज़िन्दगी मेरी हर पन्ना कोरा हैं बस इतनी सी बात हैं
मैं- अगर कोई खाली पन्नो को रंगना चाहे तो
वो- बड़ा महंगा है वो रंग उसका मोल न चूका पायेगा कोई
मैं- अनमोल चीज़ का कोई मोल नहीं पर रंग होते हैं महकने के लिए तो फिर तुम कोरी क्यों
वो- बातो में न उलझाओ तुम बस इतना समझ लो ऐसा कोई रंग अभी नहीं जिसमे मैं रंग जाऊ, ऐसा कोई फाग नहीं जो बरस जाए बरसात की तरह और भिगो दे मुझे इस कदर की फिर लाख कोशिश करू वो रंग छुटे ही ना
मैं- कहो तो रंग दू तुम्हे अपने रंग में
वो- बस मुस्कुरा पड़ी
आओ जरा थोडा आगे तक चलते हैं कहा मैंने और वो साथ साथ चल पड़ी , एक गोल चक्कर लिया और उसके खेत के परली तरफ तक पहूँच गए हवा जैसे रुक सी गयी थी वक़्त की गति जैसे थम सी गयी थी चांदनी रात का रंग आज इस तरफ से बरसने वाला था की फिर बस कभी वो उतरा ही नहीं, थोड़ी और चले हम फिर मेरे कदम रुक गए
उसने देखा मेरीओर
दोस्ती करोगी मुझसे पुछा मैंने
वो- मुझमे क्या देख लिया जो दोस्ती तक पहूँच गए कल को कहोगे प्यार हो गया हैं मैं दुनिया दरी खूब समझती हूँ थोड़े दिन ये नाटक चलेगा पर आखिर तुम्हारी मंजिल भी इस जिस्म पर आकर खड़ी हो जाएगी एक बार जो काम निकला फिर मन भरा और फिर सब ख़तम इतनी सी बात हैं तो दोस्ती को इसमें मत लाओ दोस्ती बहुत अलग चीज़ होती हैं
मैं – मैंने बस इतना कहा दोस्ती करोगी क्या जरा एक बार मेरी आँखों में देखो क्या दिखता हैं तुम्हे
वो- मुझे जो देखना था कल रात ही देख लिया था मैंने , वर्ना आज इस रात यु तुम्हारे साथ इधर न होती , पर देखो मेरे बारे में तुमने गाँव-बस्ती में बहुत सी बाते सुनी होंगी, लोगो ने नमक-मिर्च लगा कर किस्से गढ़े है अगर आज मैं तुम्हारी दोस्ती कबूल करती हूँ तो कल तुम्हारे ऊपर हैं की इस बात को तुम किस तरह लेते हो, ज़िन्दगी में कुछ बाते ऐसी होती हैं जो हम लोग चाह कर भी नहीं बदल सकते है, और ये जो तुम दोस्ती बोल रहे हो तुम मेरा साथ करोगे तो बात कभी न कभी खुलेगी हर किसी को पता चलेगा तब तुम क्या करोगे मैं जैसी हूँ वैसे ही रहूंगी दोस्ती का मतलब हैं एक दुसरे को समझना जानना देख लो मैं जैसी हूँ वैसे तुम्हे चलेगी तो ठीक हैं
मैं- देखो तुम्हे इन सब बातो का जवाब अपने आप मिल जायेगा आजतक कभी कोई दोस्त था नहीं मेरा पर तुमसे जो कल मुलाकात हूँई तुम अपना एक हिस्सा छोड़ गयी थी मेरे पास मैं कभी घुमा फिर करके बात नहीं करता अब तुम जानो
वो- ठीक हैं तो करलो दोस्ती पर इतना ही कहूँगी कभी मेरी आजमाइश न करना
मैं- एक बार गले तो लगालो
वो आई और मेरे सीने से लग गयी करार आ गया बेचैन दिल को उसकी पीठ पर अपने हाथो की पकड़ कस दी मैंने उसकी साँसे मेरे सीने से टकरा रही थी
अब छोड़ो भी मुझे कहा उसने
न जी ना कहा मैंने