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Guest
मैं उठ के अपने कमरे में चला गया और दरवाजा कर लिया बंद रोने को जी कर रहा था तो कुछ आंसू बहा लिए अब हम कोई उस टाइप के मर्द तो थे नहीं जिसे दर्द नहीं होता , थोड़ी देर रोने से जी कुछ हल्का सा हो गया पर करार नहीं आया , रात को एक आधी रोटी ही खायी मैंने , फिर ध्यान आया की रागनी प्रोग्राम है तो नहा धोकर नयी शर्ट पहनी आधी बाजु वाली और आँखों पर लगाया चश्मा थोडा पोंड्स का पाउडर लगाया खुशबु के लिये और चल दिए प्रोग्राम में
स्टेज के पास ही दोनों साइड में सोफे लगाये गए थे अब दोनों पार्टी को निमंत्रण था तो उधर से भी कोई तो आना ही था , मैं गया तो देखा की बिमला , ताई और चाचा पहले से ही मौजूद थे , अब इन सालो को कही चैन नहीं मिलता , चाचा भोसड़ी का एक नुम्बर का चोदु लाल, मैं हाथ जोड़ कर लोगो का अभिवादन करते हुए स्टेज पर चढ़ा तो बिमला की गांड बुरी तरह से सुलग गयी , आँखों पर चश्मा लगाये मैं खुद को अजय देवगन से कम नहीं समझ रहा था
तभी मेरी नजर दूसरी तरफ पड़ी तो मैंने देखा लादेन, जो भाभी खड़ी थी उसका देवर, उसका पति और फिर जिस चेहरे पर नजर पड़ी दिल मचल गया , ये तो वो ही औरत थी जो उस दिन पानीभर रही थी , मतलब ये ही थी जो बिमला की टक्कर में खड़ी थी , मेरे तो सारे अरमान दिल में ही दम तोड़ गए कहा तो गीता ताई की मदद से इसको चोदने का सोच रहा था और कहा ये सिचुएशन पर हम भी चाय कम पानी थे, खुराफात करनी पूरी
मैं आगे बढ़ा और जाके दूसरी पार्टी वालो से हाथ मिला लिया , नमस्कार किया उनको और साथ ही भाभी जी को बड़ी गहरी निगाहों से देखा मैंने उसको , उसने भी हस कर मेरे प्रणाम का जवाब दिया फिर मैं आके बिमला के पास बैठ गया और प्रोग्राम देखने लगा , पर निगाहे बार बार भाभी जी की तरफ ही जा रही थी उन्होंने भी गौर किया की मेरी नज़रो की मंजिल किस तरफ है , पर चुनावी रंग आ ही गया प्रोग्राम में लादेन ने कलाकारों पर पैसे वारने शुरू कर दिए तो चाचा ने भी अपना बैग खोल दिया
और होड़ मच गयी पर मेरा ध्यान इन फ़ालतू बातो के हट कर उस हुस्न के प्याले पर जमा हुआ था जिसकी बेताकलुफ्फी मेरी हसरतो में आग लगा रही थी ,पता नहीं क्यों नजरे उसकी नजरो से ही जाके टकरा रही थी , हम तो बस दीदार कर रहे थे उनका की तभी चाय- नाश्ता आ गया तो मैं स्टेज से उतर का अपने दोस्तों के पास चला गया और व्यवस्था के बारे में पूछने लगा सब काम एक दम सही था पर चूँकि मुझे पिताजी का सख्त आदेश था की ज्यादा देर उधर नहीं रहना है तो मेरी मज़बूरी थी घर जाने की
पर जाने से पहले अपना रंग तो छोड़ना जरुरी था,मैं स्टेज पर गया और जेब से नोटों की गड्डी निकाल ली तो भाभी जी की नजर मिली मैंने नजरो नजरो में इशारा कर दिया की ये वारना आपके नाम , उन्होंने भी मुस्कुरा कर शुक्रिया काहा फिर मैं घर आ गया
सुबह मुझे चाची ने जगाया तो मैंने देखा मेरा लंड खड़ा था तो मैंने चाची का हाथ अपने लंड पर रख दिया वो उसे मसलने लगी ,
मैं- सारी दुनिया मेरी तरफ देखती है पर आप को ही मेरी परवाह नहीं है
वो- मैंने तुझसे कहा ना,
ठंडा कर दू क्या
मैं- नहीं इसको तो बस आपके होंठो की प्यास हो रही है अभी तो
तो चाची बोली- ठीक है चल तू भी क्या याद करेगा
चाची ने मेरी निक्कर को निचे किया और अपने मुह को मेरे लंड पर झुका लिया सुबह सुबह अपने लंड पर चाची की गरम साँसे पाकर मैं तो मदहोश हो गया चाची ने मेरे सुपाडे की खाल को खीच कर निचे किया और फिर अपने होंठो में मेरे सुपाडे को दबा लिया उफ्फ्फ जिस अंदाज से वो मेरे लंड को चूस रही थी बदन का हर तार लरज गया उफ्फ्फ चाची कितना अच्छे से चुस्ती हो आप , शाबाश मेरी प्यारी चाची चाची ने मेरे लंड को पूरा अपने मुह में लिया ही था की तभी निचे से मम्मी फिर इतना उतावला पण कैसे
मैं- मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता
चाची- तो क्या करू, इसको हाथ से की आवाज आई तो वो तुरंत निचे चली गयी हाय रे मेरी फूटी किस्मत तो मैंने भी अपने अरमानो पर काबू पाया और बाथरूम में घुस गया
वापिस आया तैयार होके खाना खा ही रहा था की मंजू और उसका भाई भी आ गए ताऊ के साथ तो उनको भी खाना परोस दिया गया , तो बातो बातो में पता चला की रतिया काका की हालात में सुधार हो रहा है आज एक बड़ा डॉक्टर आएगा देखने फिर वो भी बताएगा की छुट्टी कब तक मिलेगी उनको
मैं- छुट्टी मिल जाए तो ठीक रहे, घर आ जायेंगे, ठीक होने में तो टाइम लगेगा पर घर के माहौल से फरक तो पड़ेगा
फिर मैंने मंजू से चुपके से कहा की आज देगी क्या
मंजू- नहीं यार, आज भाई बोल रहा था देने के लिए तो तू समझ सकता है ना
मैं- चल कोई नहीं तुम लोग ऐश करो , वैसे भी हॉस्पिटल में रह कर बोर हो गए होंगे मंजू तुम दोनों आज इधर ही रुक जाना रात को मैं जाता हु हॉस्पिटल काकी काका के पास
तो मंजू बात मान गयी और उसने वादा किया की वो जल्दी ही मुझे भी खुश कर देगी आसमान में सुबह से ही बादल छाए हुए थे मोसम रोमांटिक सा हो रहा था तो मैं घर से बाहर निकल कर गीता ताई के घर की तरफ चल पड़ा सोचा उसका भी हाल चाल पूछ लिया जाये जा रहा था की पानी की टंकी पर पिस्ता से मुलाकात हो गयी कोई आस पास था नहीं तो मैं रुक गया
पिस्ता- कहा जा रहे हो
मैं- कुवे पर जा रहा हु
वो- ठीक है मैं उधर ही मिलती हु आधे घंटे में
मैं- तेरी मर्ज़ी है
वो- दुखी क्यों है तू
मैं- कौन दुखी है
वो- अच्छा , अब मुझसे भी झूठ बोलेगा
मैं- कुवे पर आजा , जल्दी से
मैं फिर गीता ताई के घर गया तो ताला लगा था दरवाजे पर तो मैंने सोचा की शायद घास लेने या किसी काम से गयी होगी आज का दिन ही पनौती था जिधर भी जा रहा था हर रास्ता बंद ही मिल रहा था तो मैं कुवे पर आ गया कमरे को खोला मोटर चलाके थोडा पानी का छिडकाव किया और पिस्ता का इंतज़ार करने लगा , कुछ देर बाद वो भी आ गयी हाथो में एक डिब्बा लिए
मैं- इसमें क्या है
वो- इसमें मिठाई है तेरे लिए
मैं- जले पर नमक छिड़कने के लिए
वो- तू समझता क्यों नहीं बात को
मैं- कहा कुछ कह रहा हु , चल ला क्या लायी है वैसे भी तेरे हाथ का बना कुछ खाया नहीं काफी वक़्त से तेरे हाथ का नहीं तो तेरी सगाई की मिठाई ही सही