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Raj sharma stories चूतो का मेला compleet

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मैंने फावड़ा लिया और अब जमीन को खोदने लगा मुझ पर जैसे जूनून सा छा गया था करीब तीन फीट खोद चुके थे पर कुछ नहीं नीनू घर चलने के लिए बोल रही थी मैंने कहा बस थोडा सा और मैं खोदे जा रहा था पर अब मेरा भी होंसला टूटने लगा था और फिर करीब 5 फीट के बाद मेरी कस्सी किसी चीज़ से टकराई मैंने नीनू को बैटरी इधर दिखाने को कहा और जैसे ही रौशनी गड्ढे में पड़ी मेरी रूह खुश्क हो गयी गला सूख गया भय के मारे बदन में कम्पन सा होने लगा

दरअसल वहा एक कंकाल था जिस से मेरी कस्सी जा टकराई थी नीनू तो जैसे चीख ही पड़ी थी मैं ऊपर आया और जमीन पर ही बैठ गया नेनू मेरे पास खड़ी हो गयी मैंने बैग से पानी की बोतल निकाली और कुछ ही घूँट में उसको खाली कर दिया

नीनू-ये कंकाल यहाँ

मैं- नीनू , ये कंकाल कंवर का है ये कहते हुए मैं रो पडा

कारण साफ़ था कंवर घर से तो चला था पर दुबई नहीं पंहुचा था उसका पासपोर्ट और और सामान भी हमे मिल चूका था मतलब साफ था की किसी ने उसे मार कर यहाँ गाड दिया था

नीनू- देखो, अभी अनुमान मत लगाओ अब ये बरसो से खाली जमीन पड़ी है कोई भी किसी को मारके गाड सकता है और देखो इसे जमीन के इतनी अन्दर दफनाया गया है कातिल चाहता तो बस दफना के चला जाता किसी को कुछ पता नहीं चलता उसने यहाँ ऊपर चबूतरा क्यों बनवाया

मैं – शायद सुराग

वो- किसलिए छोड़ेगा सुराग, की आओ मैंने यहाँ लाश दबाई है

बात में बहुत ज्यादा दम था लोग बातो को छुपाते है अब सर जैसे फटने को हो गया था कुछ सोच के मैंने वापिस गड्ढे को भरना चालू किया नीनू भी मेरी मदद करने लगी

मैं- कल कुछ मजदुर भेज कर इस चबूतरे को फिर से बनवा देना

वो- ठीक है

मैंने गड्ढे को अच्छे से भर दिया था मेरा दिल कह रहा था की ये कंकाल कंवर का ही है शायद ये अपनों के लिए अपनों की आवाज थी मैंने घडी देखि टाइम ढाई से ऊपर हो रहा था अब यहाँ कुछ नहीं करना था तो हम चलने को हुए मैं औजार वगैरा इकठ्ठा कर अरह तह की नीनू बोली वो अभी आई सुसु करके

करीब पांच मिनट बाद वो आई और बोली- देखो देव, मुझे क्या मिला है

मैंने बैटरी की रौशनी में देखा पार्ले जी बिस्कुट के जैसा लगा मुझे मैंने उल्ट पुलट के देखा और तभी मेरे दिमाग में चाचा की कही बात आई मैंने बैग से पानी निकाला और उसको धोने लगा और थोड़ी देर बाद मुझे जो मिला यकीन नहीं हुआ वो एक सोने का बिस्कुट था निखालिस सोने का चाचा ने भी यही बात बताई थी की उनको उस मटकी में बिस्कुट मिले थे मतलब इस जगह में कुछ तो बात थी कुछ तो लेना देना था बस क्या था वो ही पता चलाना था

नीनू की आँखे फटी पड़ी थी मैं- ये तुमको कहा मिला

वो- उधर झाड़ियो के पीछे जब मैं गयी तो मैंने ऐसे ही पत्थर उठा लिया पर ये अजीब सा था मेरा मतलब पत्थर ऐसे नहीं होते ना तो थोडा सा मैंने ऐसे ही अटखेली करते हुए इसको कुरेदा तो चाँद की रौशनी में अलग सा लगा तभी मैं इसे लेके आई

मैं- नीनू तुमने अनजाने में ही बहुत बड़ी मदद कर दी है

भावनाओ में आकर मैंने नीनू को चूम लिया तो वो शर्मा कर मुझसे अलग हो गयी इस सोने के बिस्कुट का यहाँ मिलना ये साबित करता था की कुछ तो जुड़ा है इस जगह से पर इस घनघोर अँधेरे में कुछ भी तलाश करना ना मुमकिन सा ही था तो ये तय हुआ की दिन के उजाले में ही खोज की जाए फिर मैं और नीनू वापिस हुए, थोड़ी बहुत नींद ली आज पंचायत बैठनी थी तय समय पर हम लोग गाँव की चौपाल की तरफ चले

जिस गाँव में कभी हम फैसला सुनाया करते थे उसी गाँव में आज हमारा फैसला होना था वाह रे ऊपर वाले तेरे अजीब खेल खैर, जब हम पहुचे तो लगभग पूरा गाँव वहा पर था अवंतिका भी थी , बिमला एक कुर्सी पर बैठी थी हमारे आते ही कार्यवाई शुरू हुई

बिमला- आदरनीय, पंचो और समस्त गाँव वालो मैं एक बात कहना चाहती हु की देव मेरा देवर है पंचायत का जो भी फैसला हो अगर वो देव के पक्ष में जाये तो आप लोगो को लगेगा की सरपंच तो इसकी भाभी है इसलिए इसके पक्ष में फैसला दिया इसलिए मैं खुद को इस कार्यवाई से अलग कर रही हु और पंचो पर मामला छोडती हु, जो भी उनका फैसला होगा वो ही मेरा फैसला होगा

वैसे देखा जाए तो बिमला का वैसला अपनी जगह एक दम सही था तो पंचायत शुरू हुई

पंच- देव, तुमने गाँव की लड़की से ब्याह करके गाँव के भाई चारे को खराब किया है गाँव में हर लड़की को अपनी बहन बराबर मान दिया जाता है तो तुमने पिस्ता से क्यों ब्याह रचाया

पिस्ता- ओये, पंच तू अपना काम कर दिमाग मत सटका ये मेरी मर्ज़ी है मैं जिस से चाहू उसके साथ रहू तेरी के दिक्कत है

मैंने पिस्ता को चुप रहने के लिए कहा पर वो गुस्से में आ गयी थी वो नहीं मानी

पिस्ता- के कहा तुमने, की गाँव की हर लड़की भाई बहन होवे है अगर मैं अब भी नाडा खोल दू तो जो लोग ये संत बनने का नाटक कर रहे है ये भी चढ़ने को तैयार हो जायेंगे बस आग लग गयी इनके पिछवाड़े में , अरे काहे की पंचायत और कहे के ये दो कौड़ी के पंच ये रोहताश आज पंच बना फिर रहा है अरे इसने तो अपनी भाभी को नहीं छोड़ा, जो अपने घर में ऐसे काम कर सकता है वो बाहर की औरतो लडकियों के बारे में क्या सोचता हो गा, मुझे न झांट बराबर फरक नहीं पड़ता इस पंचायत से

और सुनो रही बात फैसले की तो उसकी ना बत्ती बनाके अपनी गांड में डाल लो क्या कहा तुमने की गाँव की हर बेटी को अपनी बहन समझना चाहिए ये ताऊ हरचंद याद है इसने एक बार मुझे अपने छप्पर में आने को कहा था तब ना थी मैं बेटी

मैं- पिस्ता चुप होजा

वो- ना देव, इन दो कौड़ी के लोगो को आज इनकी औकात दिखानी है साले ठेकेदार बने फिरते है अरे सोचो हमारे क्या हालत है किस परेशानी से जूझ रहे है हम वो तो किसी ने न पूची आ गए पंचायत करने

पंच- देव, इसको समझाओ

मैं- पंच साहिब, मेरी बात सुनिए

उसके बाद मैंने पूरी बात सबको बताई की कैसे क्या हालात थे और साथ ही ये भी बता दिया की अब मेरी दो पत्नि है नीनू का इशारा करके

मेरी बात सुनके सब चुप हो गए ,

मैं- मैंने अपना पक्ष रख दिया है

पंच- देव, तुम्हारे बाप दादा ने सदा इस गाँव की मदद की है हमारी तुमसे भी कोई परेशानी नहीं पर देखो समाज की भी बात है तुम्हारी देखा देखि कल गाँव में और लड़के लड़की ने ऐसा कदम उठाया तो .....

मैं- पंच साहिब, अब भविष में क्या हो किसको पता है

पंच- पर समाज के कुछ नियम होते है अब तुम ही बताओ इस लड़की को हम बेटी कहेंगे या बहु सोचो जरा

पिस्ता- तू माँ कह दिए , चलो हो ली तुम्हारी पंचायत ख़तम तमाशा हम लोग तो इधर ही रहेंगे इसी गाँव में किसी में दम हो तो हाथ लगा के दिखाए

मैंने कहा था उसको चुप रहने को पर उसने बात बिगड़ दी थी अब संभालना मुस्किल हो रहा था गाँव से टक्कर ली ही नहीं जा सकती थी मैंने नीनू को कहा तो उसने पिस्ता को शांत किया और अपने पास बिठा लिया

पंच- देव, अबकी बार ये लड़की बोली तो हुक्का पानी बंद

मैं- कौन करेगा

वो- पंचायत की ना सुनोगे

मैं- आप लोग मेरी नहीं सुन रहे है मैं कहना नहीं चाहता था पर कहना पड़ रहा है मैं पुलिस में sp , मेरी घरवाली नीनू dsp अगर मैं बिगड़ा ना तो पांच मिनट में ना पंच रहेंगे न पंचायत पर मैं इसलिए चुप हु की मैं गाँव का सम्मान करता हु आखिर ये गाँव घर है मेरा और आप सब मेरे घरवाले मैं बहुत भटका हु अब घर आया हु आपसे हाथ जोड़ के विनती है की हमे अपनाइए रहने को तो हम कही भी रह लेंगे आज से पहले भी रह रहे थे ना पर यहाँ मेरे लोग है इसलीये तो आया हु , पिस्ता को ब्याहना कोई गलती नहीं है बल्कि आप जरा सोचो हमारी हालात की बारे में की कैसे लम्हे गुजारे है हमने

पंची भी शाम को अपने घर आते है जानवर भी अपने बच्चो को प्प्यर करते है तो आप लोग अपने बच्चो के प्रति कठोरता मत दिखाइए मेरे बाप दादा ने अपना खून पसीना लगाया गाँव के लिए बीते समय में मेरे साथ जो भी हुआ अब मेरा ये कहना है की मैं तो इस गाँव में ही रहूँगा

मैंने अपने बाद रख दी थी अब पंचो के फैसले की बारी थी मैंने तो सोच लिया था की अगर कोई यहाँ पंगा करेगा तो फिर देख लेंगे काफ़ि देर तक पंचो ने आपस में बात की फिर बिमला को अपनी बात चित में शामिल किया अब आयी फैसले की घडी

बिमला- तो गाँव वालो पंचो ने निर्णय ले लिया है उनका निर्णय मैं आपको सुना रही हु, देव के साथ जो भी हुआ और उन सभी हालातो को मद्देनजर रखते हुए की कैसे उसे पिस्ता का साथ करना पड़ा और साथ ये भी देखते हुए की उन्होंने गाँव के भाई चारे के नियम को भी तोडा है तो पंचायत ने फैसला किया है की चूँकि अब वो पिस्ता को छोड़ नहीं सकता क्योंकि हालात ही ऐसे है देव अपनी दोनों पत्नियों के साथ गाँव में रह सकेगा और उसका हुक्का पानी भी बंद नहीं किया जाता पर चूँकि गलती की है तो उसका प्रायश्चित भी करना होगा

बिमला- और उनकी सजा ये है की गाँव में बन रहे बाबा के मंदिर का आधा खर्चा देव को देना होगा और साथ ही पिस्ता को ये हिदायत दी जाती है की वो अपनी भाषा पे कण्ट्रोल करे बहुत गन्दा बोलती है वो अपने से बड़ो का सम्मान करे और इसी के साथ ही ये पंचायत ख़तम होती है

मैंने उनका फैसला मान लिया था बिमला मुझे मेरी तरफ आते हुए दिखी पर वो पास से गुजर गयी और मुझे ऐसा लगा की जैसे उसकी आँखों में आंसू हो खैर, चलो एक तो टेंशन ख़तम हुई उसके बाद मैंने पंचो से खर्चे का पुछा और हम फिर घर आ गए खाना वाना खाया सब लोगो की आराम की इच्छा थी तो मैंने डिस्टर्ब नहीं किया मैं घर से बाहर आया और रतिया काका के घर की तरफ चल दिया मैंने आवाज लगाई पर कोई दिखा नहीं तो मैं वापिस मुड़ा ही था की किसी ने आवाज लगायी

मैंने देखा राहुल की पत्नी ममता थी – घर पे कोई नहीं है जेठजी

मैं- कोई बात नहीं काका आये तो कहना देव आया था वैसे मंजू कहा गयी है

ममता- मुम्मी जी के साथ खेत में

मैं- अच्छा मैं चलता हु

वो- रुकिए कम से कम चाय तो पीके जाइए

मैं बैठ गया थोड़ी देर में ममता चाय ले आई मैंने उसे शुक्रिया कहा और चाय पिने लगा

वो- घर में सब आपकी ही बाते करते रहते है

मैं- क्यों

वो- अप इतने दिन बाद जो आये

मैं- हाँ कई समय हुआ अब तो हर चीज़ ही बदल गयी है

वो- हां, दीदी ने काफी कुछ बताया आपके बारे में

मैं- क्या बताया

वो- यही की आप कभी जिंदादिल हुआ करते थे

मैं- अच्छा

वो – हां बस आपके ही चर्चे है घर में

मैं- चाय के लिए शुक्रिया अच्छी बनायीं है

 


ममता कप उठाने के लिए थोडा सा झुकी तो उसका पल्लू सरक गया और मेरी नजर उसकी ब्लाउज से बाहर आने को बेक़रार छातियो पर पड़ गयी मैंने जल्दी से नजर बदल ली और तभी तभी मुझे उसके हाथ के पिछले हिस्से पर कुछ दिखा जिसे देख कर मेरी आँखे फ़ैल गयी अगले ही पल मैंने उसको पकड कर दीवार से सटा दिया और बोला- तो उस दिन झाड़ियो में तुम ही थी ना

वो- छोडिये हमे ,

मैं- तू ही थी ना जो मुझे और मंजू को देख रही थी

वो- हाँ मैं ही थी पर अभी हम आपको कुछ नहीं बता सकते कल आप हमे हमारे खेत पर मिलना

मैंने उसे छोड़ा उसने मुझे टाइम बताया और फिर मैं वहा से आ गया अब ये साली ममता वहा क्या गांड मरवा रहि थी और उसको क्या पता क्या वो रतिया काका की तरफ से जासूसी कर रही थी साला एक नयी मुसीबत और तैयार हो गयी थी टाइम पास करने को मैं गीता ताई के घर चला गया अन्दर गया तो ताई हाथ में तौलिया लिए खड़ी थी

मैं- नहाने जा रही हो क्या

वो- हाँ पर अब तू आ गया बाद में ही नहा लुंगी

मैं- चलो साथ नहाते है

ताई मुस्कुराई, मैंने घर का दरवाजा बंद किया और अपने कपडे उतार के नंगा हो गया ताई ने अपना ब्लाउज खोला और फिर घागरे को भी उतार दिया एक मस्त माल बिलकुल नंगा मेरी आँखों के सामने खड़ा था जैसे ही मैं गीता की तरफ बाधा वो बाथरूम में घुस गयी मैं भी उसके पीछे पीछे अन्दर जाते ही ताई ने फव्वारा चला दिया और पानी उसके बदन को भिगोने लगा मैंने ताई को अपने आगोश में ले लिया और ताई के गुलाबी होंठो को चाटने लगा ताई ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उस से खेलने लगी

ताई- मैं सोच ही रही थी की आया नहीं

मैं- उलझा था कुछ कामो में बाद में बताऊंगा पहले जरा आपको थोडा प्यार कर लू

ताई- तुझे पता नहीं मैं क्या अच्छी लगती हु जो हमेशा मेरी लेने के पीछे पड़ा रहता है

मैं- ओह मेरी प्यारी ताई, मेरी जानेमन, तू चीज़ ही इतनी गरम है तेरे आगे तो साली जवान लड़की भी पानी भरे ये तो मेरी बदनसीबी है जो मैं तुझे पहले प्यार नहीं कर पाया पर तू सच में ही जबर्दश्त है तेरी चूत इतनी टाइट है की कुंवारी लड़की को टक्कर देती है

ताई अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गयी मैंने उसकी चूची पर मुह लगा दिया और ताई के बोबो को चूसने लगा ताई मस्ताने लगी उनका हाथ मरे लंड पर और टाइट हो गया ऊपर से हमारे जिस्मो पर पड़ता पानी जिस्मो की आग को और भड़काने लगा था चूचियो के गहरे काले निप्पल पर मेरी जीभ गोल गोल घूम रही थी ताई की सांसे भारी होने लगी थी और फिर ताई अपने घुटनों के बल बैठ गयी और मेरे लंड को अपने गुलाबी होंठो पर रगड़ने लगी

और जैसे ही उनकी जीभ ने मेरे सुपाडे को टच किया मेरे पैरो में कम्पन होने लगा ताई ने जल्दी ही अपनी जीभ से मेरे सुपाडे को ढक लिया और उस पर अपनी जीभ का असर दिखाने लगी मैंने ताई के सर को पकड़ लिया वो अहिस्ता अहिस्ता से मेरे लंड को चूसने लगी साथ ही अपने हाथ से मेरी गोलियों से खेलने लगी ताई की बात ही निराली थी जैसे जैसे उत्तेजना बढती जा रही थी और इसी उतेजना से वशिभुष मेरा लंड जल्दी ही ताई के गले तक जा रहा था

ताई तो गजब औरत भी एक हाथ से अपनि चूत में ऊँगली कर कर रही थी और ऊपर मेरा लंड चूस रही थी मैंने देखा ताई ने तीन उंगलिया चूत में घुसेड रक्खी थी और मजे से मेरा लंड चूस रही थी पर अब जरुरत थी चूत की तो मैंने ताई के मुह से लंड निकाल लिया वो अपने पंजो पर झुक गयी ताई की 44 इंची कुल्हे मेरी आखो के सामने थे मैंने उनको थपथपाया और फिर अपने नड को चूत के द्वार से लगा दिया एक जोर का धक्का मारा और ताई आगे को सरक गयी पर जल्दी ही वापिस पोजीशन में आ गयी

जल्दी ही ताई अपनी भारी गांड को आगे पीछे करने लगी ताई की आहो का शोर फव्वारे के शोर में दबने लगा पर चूत पूरी तरह गरम थी ताई की चूत के चिकने रस में सना मेरा लंड ताई की चूत को फैलाये हुए था मेरा लंड ताई की बच्चेदानी तक टक्कर दे रहा था उसी तरह मैंने ताई को करीब पंद्रह बीस मिनट तक चोदा फिर हम साथ साथ ही झड गए

उसके बाद हम लोग नहाये फिर मैंने ताई को अपनी गोद में उठा कर अन्दर कमरे में ले आया

ताई- पानी तो पोंछने दे

मैं- तू कितनी रसीली है मेरी रानी

ताई- मस्का मत लगा

मैं- मस्का क्या लगाना माल तो तू अपना ही है चल जल्दी से तैयार होजा एक बार और करते है

ताई- बूढी हो गयी हु अब इतना दम नहीं रहा

मैं- देनी नहीं तो सीधे सीधे बोल ना

वो- मना करुँगी तब भी कौनसा मानेगा जब तुझे लेनी है तो देनी ही पड़ेगी ना

मैं- ताई ये तूने अच्छा किया झांट कट कर लिए

वो- कुछ दिनों से खुजली ज्यादा हो रही थी तो

मैं- देख तेरी चूत कितनी प्यारी लग रही है

ताई बुरी तरह से शर्मा गयी मैंने अपने लंड को सहलाने लगा ताई पलंग पर लेट गयी और अपने मांसल टांगो को फैला लिया ताई जितनी गोरी थी उसकी चूत उतनी ही काली थी इसलिए वो मुझे पसंद थी मैंने बिना देर किये अपना मुह ताई की टांगो के बीच घुसा दिया और अपने होंठो को ताई की फूल सी नाजुक चूत पर रख दिए और उस रस से भरी कटोरी का रसस्वादन करने लगा ताई के होंठो से सिस्कारिया निकालते हुए छत से जा टकराने लगी

उसकी टाँगे अपने आप ऊपर को उठने लगी और ताई क दोनों हाथ मेरे सर पर पहुच गए ताई मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी मैंने अपनी सपनीली जीभ निकाली और ताई की चूत के भाग्नसे पर रगड़ने लगा मेरी इस अदा से ताई जैसे आसमान में पहुच गयी और उसकी आँखे मस्ती के मारे बंद होने लगी जैसे किसी स्प्रिंकलर से पानी की ड्राप पड़ती है ऐसे ताई की चूत से रस छूट रहा था मैंने अपनी उंगलियों से ताई की चूत को फैलाया और और अन्दर के लाल हिस्से पर अपनी जीभ रगड़ने लगा

ताई हुई मस्तानी जिस्म अकड़ने लगा और तभी ताई ने मुझे अपने ऊपर से परे धकेल दिया मैंने तुरंत ताई को अपनी और खीचा और ताई की जांघो को अपनी जांघो पर चढ़ा लिया और ताई की चूत पर अपने हथियार को रख दिया ,ताई ने अपने चुतड ऊपर को उठाये और तभी मेरा सुपाडा चूत को चीरते हुए अन्दर को जाने लगा ताई की चूत एक बार फिर से मेर लंड के अनुपात में फैलने लगी और फिर शुरू हुई हमारी धक्कमपेल ताई अपनी गांड उठा उठा कर चुद रही थी

अब मैंने गीता की छाती को मसलना शुरू किया अपने संवदेनशील अंगो पर मेरा स्पर्श पाकर ताई और बहकने लगी ताबड़तोड़ चुदाई चालू थी थोड़ी देर बाद मैंने ताई को घोड़ी बना दिया दरअसल इस तरह जब ताई के चूतडो को मैं देखता था तो मुझे एक सुकून सा पहुचता था ताई की गीली चूत में मेरा लंड अन्दर बाहर हो रहा था ताई भी अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए पूरा मजा ले रही थी करीब 20-२५ मिनट तक हमने बिस्तर पर खूब घमासान मचाया

थक हार कर मैं बिस्तर पर पड़ा था ताई ने मुझे गरम दूध पिलाया फिर मैं घर के लिए चल पड़ा घर पंहुचा तो मैंने देखा सब लोग उस बिस्कुट को ही निहार रहे थे

मैं- और क्या चल रहा है

नेनू- मैंने चाचा से तस्दीक कर लिया है पिताजी ने जो बिस्कुट उनको दिए थे वो बिलकुल ऐसे ही थे उसके आलावा कल इन दोनों को घर में कुल नब्बे लाख नकद और करीब 5 किलो सोना मिला है

मेरी आँखे हैरत से फटी रह गयी

मैं- जरा फिर से कहना

नीनू ने अपनी बात को दोहराया

मैं- दिखाओ

पिस्ता वो सामान ले आई कुछ गहने थे काफी अलग से मतलब वजन काफी था उसके आलावा बहुत से बिस्कुट और कुछ बर्तन भी

मैंने सारा सामान उल्ट पुलट के देखा और फिर पिस्ता को कहा की इसको हिफाजत से रख दे ,

मैं- देखो, इक बात सामने आ गयी है की परिवार के साथ जो भी हुआ वो इसलीये हुआ है असली पंगा इस सोने का और इन रुपयों का है

माधुरी- भाई पर बात वही आकर रुक गयी है की ये सब आया कहा से

मैं- वो ही तो नहीं पता एक काम करो नब्बे के हिसाब से तुम अपना तीस तीस ले लेना

नीनू- आजकल हमे पैसे से बहुत तोलने लगे हो तुम और वैसे भी ये अब तुमहरा है

मैं- नहीं रे पगली, ये मेरा नहीं है और बस तुम तीस तीस रखलो ऐसा समझ लो की मैं अपनी तरफ से दे रहा हु पर एक बात बताओ ये मिला कहा से

पिस्ता- पिताजी के कमरे में बेड के निचे से , मैं पूरी तरह से चेक कर रही थी मैंने बेड सरकाया उसके बाद मैं झाड़ू निकाल रही थी एक जगह मेरा पर पड़ा तो मुझे थोथ सी लगी तो मैंने थोडा तोड़ फोड़ किया और ये मिला

मैंने उसके बाद वो पूरा फर्श देखा पर कही भी खोखला नहीं लगा मतलब बस यहाँ ही था जो भी उसके आलावा मम्मी की अलमारी के लाकर से पिस्ता को जमीनों की सारी रजिस्ट्री भी मिल गयी थी शाम हो गयी थी बातो बातो में मैं घर से बाहर टहलने लगा की मंजू आ गयी उसकी शकल देख कर ही लग रहा था की वो थोड़ी परेशान टाइप है

 


मैं- क्या हुआ चेहरे पे हवाइया क्यों उडी हुई है

वो- देव, बात ही कुछ ऐसी है

मैं- क्या हुआ

वो- तू सुनेगा तो तू विश्वास नहीं करेगा देख तुझे बता रही हु पर बात तेरे मेरे बीच रहनी चाहिए

मैं- आजतक तेरी कोई बात फैली क्या

उसके बाद मंजू ने मुझे बताना शुरू किया तो उसकी हर बात जैसे मुझे और परेशान करने लगी

मैं- जरा फिर से बता

वो- थोड़ी देर पहले घर पर कोई नहीं था तो मैंने पिताजी की तिजोरी खोली, तुझे तो पता ही है कभी कभी मैं हाथ साफ कर लिया करती हु, तो मैंने तिजोरी खोली कुछ रूपये निकाले तो मैंने देखा की वहा पर एक एक चाबियों का गुच्छा रखा हुआ था जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था तो मैंने उसे देखा कुछ तो खास बात होगी पर वो किस चीज़ की चाबिया हो सकती है फिर मुझे ध्यान आया की पिताजी ने अपने कमरे में भी अंडरग्राउंड तिजोरी बनवा राखी है

तो मैं वहा गयी और किस्मत से एक चाबी लग गयी और देव जैसे ही मैंने तिजोरी खोली मेरी तो आँख और गांड दोनों ही फट गयी देव तू विश्वास नहीं करेगा उस तिजोरी में एक रुपया नहीं था अगर कुछ था तो बस सोना हो सोना गहने, बर्तन सोने के बिस्कुट पारले जी जैसे और हाँ सोने की इट भी थी देव कम से कम तीस किलो का माल तो होगा ही तिजोरी ठसा ठस भरी थी मुझे तो चक्कर से आ गए देख के बड़ी मुस्किल से होश संभाले बस सीधा तेरे पास आयी हु

मंजू हमेशा से मुर्ख टाइप थी और उसने अपनी उसी मुर्खता में आज मेरे लिए एक बहुत बड़ा काम कर दिया था

मैं- मंजू इस बात का जिक्र किसी से मत करना और मेरे साथ आ

घर जाते ही मैंने पिस्ता से वो सामान लाने को कहा मंजू ने देखते ही कहा की देव बिलकुल ऐसा ही है वहा

मैंने अपना माथा पीट लिया ये साला हो क्या रहा था दिमाग में हज़ार तरह की बाते थी पर मंजू के आगे करना उचित नहीं था थोड़ी बात चित के बाद वो चली गयी

नेनू- तो देव,मामला साफ़ है पिताजी और काका के हाथ कही से ये खजाना ही लग गया दोनों ने आधा आधा किया होगा फिर रतिया काका को आया लालच और बाकि के सोने को हडपने के लिए उन्होंने ये काण्ड कर डाला हमे काका को धरना होगा

मैं- ना काका का इस मामले से कुछ लेना देना नहीं है

वो- कैसे

मैं- क्योंकि जब परिवार के साथ वो हादसा हुआ तब काका तो खुद बिस्तर पर पड़े थे थोड़े दिन पहले ही तो उनका एक्सीडेंट हुआ था

नीनू काका की जान बच गयी बहुत बड़ी बात थी मान लो काका ने रिस्क लिया तो ये बहुत बड़ा रिस्क था उस टाइम मैं खुद हॉस्पिटल में ही था काका की जान बहुत मुश्किल से बची थी

तो कहानी एक बार फिर से उलझ गयी थी इस बार तो हद से ज्यादा पर इतना तो जरुर साफ था की पिताजी और काका को कही से वो सोना मिल गया था और ढेर सारे रूपये भी पर कैसे मिला काका को जरुर कुछ तो पता था और वो आज मुझे जानना था मैंने काका को फ़ोन मिलाया और कहा की मुझे अभी आपको मिलना है कुछ भी हो तुरंत मिलना है काका ने काका ही मैं फर्म में हु तुम वही आ जाओ दोनों औरते साथ चलना चाहती थी पर मैंने मना किया और गाडी को दौड़ा दिया फर्म की तरफ आधे घंटे में पंहुचा

काका ने मुझे देखा और फिर आने का इशारा किया हम दोनों पैअल चलते हुए फर्म से काफी दूर आ गये थे फिर काका एक पत्थर पर बैठ गए और बोले- बताओ बेटा क्या बात है

मैंने जेब से वो बिस्कुट निकाला उनके हाथ पे रख दिया काका ने एक गहरी सांस ली फिर बोले- तो तुम्हे पता चल गया

मैं- हां, पर बस इतना ही की कोई खजाना है

काका- मुझे मालूम था तुम ढूंढ लोगे

मैं- ये सब क्या है काका

वो- बेटे कुछ गलतिया उम्मीद है तुम अपने इस बूढ़े काका को समझ पाओगे हमे माफ़ कर पाओगे

मैं- काका कुछ तो बताओ मेरा सर फटने को है

वो- बेटा, जैसे की तुम्हारे पिता और मैं बचपन के लंगोटिया यार थे एक दुसरे के बिना एक मिनट भी नहीं रहते थे बचपन से ही हमारी दोस्ती पुरे गाँव में मशहूर थी समय बीता अपने अपने परिवार हो गए पर दोस्ती उतनी ही मजबूत होती गयी तुम्हे तो याद होगा की अक्सर मैं और तुम्हारे पिताजी दूर दूर तक घुमने चले जाया करते थे बचपन से ही हमारी ऐसी आदत थी उस दिन भी हम लोग घूमते घूमते गाँव से बहुत दूर पहाड़ के पीछे जो जंगल सा बना है उधर चले गए

मैं- फिर

काका- नीम दोपहर का समय था हम लोग भटक रहे थे ऐसे ही यहाँ से वहा जंगल में काफी आगे निकल आये थे हम लोग मुझे बड़ी प्यास लगी हुई थी और किस्मत की बात हमे वहा पर एक पानी का धोर्रा मिल गया

बिलकुल सही था, पानी मुझे भी मिला था

काका- पानी पिने की बादहम बाते करते हुए और आगे बढ़ गए और फिर करीब कोस भर बाद हमे एक कोटडा सा दिखा अब इस उजाड़ बियाबान में वो कमरा सा अजीब बात थी और ऊपर से वो चारो तरफ कीकर से घिरा हुआ था अब हम लोग जिज्ञासु तो थे ही हमने उस कमरे की खोज बिन करी तो पता चला की वो देवी का मंदिर था कोई पुराना हमने माफ़ी मांगी और वहा से निकल लिए

बस चले ही थे की तुम्हारे पिताजी का पाँव जमीन में फस गया जैसे जमीन खिसक गयी हो , हमने देखा तो कोई पट्टी टूटी थी शायद कोई कुवा सा था तुम्हारे पिताजी ने अपने पाँव को जैसे तैसे करके निकाला

और जैसे ही अब उस जगह धुप पड़ी हमारी आँखों में एक चमक सी पड़ी निचे कुछ तो था हम दोनों ने उस जगह को साफ किया मेहनत से पट्टी को खिसकाया तो देखा की एक छोटा कुवा सा था जो की पूरी तरह से सोने से भरा हुआ था ढेरो क्या हजारो जेवर, अशरफिया और सोने की बिस्कुट उस उजाड़ बियाबान जंगल में जहा इंसान तो क्या दूर दूर तक जानवरों का भी नमो निशान नहीं था वहा पर हम दोनों पसीने से भीगे हुए खड़े थे डर सा चढ़ आया था काफी देर सोच विचार किया हम समझ तो गए थे की ये माता का खजाना है पर जिस तरह से वो हमे मिल गया था हमने माता की हाथ जोड़ कर समझ लिया की शायद उनका ही आशीर्वाद है

अब बेटे बस किस्से कहानियो में ही खजाने के बारे में पढ़ा सुना था उस दिन आँखों के सामने था हमारे अब हम ठहरे नींच इन्सान लालच आ गया लालच को माता के आशीर्वाद का नाम दे दिया जबकि होना ये चाहिए था की पराई अमानत को हाथ नहीं लगाना था हमने थोडा बहुत वहा से लिया और जमीन को पहले जैसे की तरह कर दिया और वापिस घर आ गये

अब रात को नींद आये न दिन को करार आँखों में बस कुछ था तो वो खजाना , कुछ दिन बीते और फिर मैंने और तुम्हारे पिता ने ये सोचा को हो ना हो वो खजाना हमारे लिए ही है तो हम लोगो ने करीब आधा वहा से निकाल लिया और आधा आधा कर लिया अब हमारा तो भाइयो जैसा प्यार था तो धोके या औरकोई बात तो थी ही नहीं

मैं- फिर

काका- बेटा उसके बाद कुछ दिन बीते हमने पता किया की वो जमीन किसकी है कोई पुराना जमींदार था उसकी औलाद सहर में बस गयी थी तो अब जमीन बस खाली थी तो लोगो से उनका पता लिया और हम गए शहर तुम्हारे पिताजी ने वो जमीन खरीद ली तारबंदी करवाई कब्ज़ा ले लिया पैसा आया तो फिर हमारे पाँव जमीन पर टिक नहीं रहे थे और कुछ दिनों में तुम्हारे घर में उठा पटक शुरू हो गयी

मैं समझ गया वो किस बारे में बात कर रहे थे

काका-उसके बाद तुम्हारे पिता थोड़ी टेंशन में रहने लगे थे कुछ दिनों बाद मैंने जिक्र किया की बाकि खजाना भी वहा से निकाल लिया जाये मुझे डर था की कही किसी को पता चल गया तो कोई हाथ साफ़ न कर दे, पर तुम्हारे पिताजी ने कहा की वो एक बार घर के हालात सुलझा ले उसके बाद वो काम करेंगे तो बात आई गयी हो गयी पर हमे पैसा पच नहीं रहा था अब देव, हम भी इंसान ही थे कुछ गलत कामो में हमने प खर्च किया सब ठीक ही चल रहा था पर कुछ चीजों को लेकर हमारी परेशानिया बढ़ने लगी थी

ऊपर से चुनाव आ गया तुम्हारे पिता ने सोचा की बिमला अगर सरपंच बन जाये तो उसका दिमाग बाहर उलझा रहे गा और घर की समाश्या कुछ हद तक काबू में आएगी तो बिमला हमारी कैंडिडेट हो गयी उसके बाद सब ठीक ही था पर एक दिन मेरा एक्सीडेंट हो गया तुम्हे तो पता ही है बड़ी मुस्किल से जान बची ,कुछ समय बाद तुम्हारे परिवार का भी एक्सीडेंट हो गया और फिर तुम भी गायब हो गए सब तबाह हो गया था मैं बेबस बिस्तर पर पड़ा था तुम्हारे पिता के जाने के बाद जैसे मेरा तो एक बाजु ही टूट गया था

जैसे तैसे करके मैं खड़ा हुआ पर मुझे पल तुम्हारा ख्याल था आखिर मेरे दोस्त की बची निशानी तुम ही तो थे मैंने पूरा जोर लगाया पर तुम्हारा कुछ नहीं पता चला तो मैंने किस्मत से समझौता कर लिया इस बीच मुझे खजाने का ध्यान आया तो मैं वहा गया पर जो देखा मैं तो बेहोश हो गया था जब होश आया तो रोने लगा मैं जैसे लुट गया हु कुवा खाली पड़ा था कोई हाथ साफ़ कर गया था अब क्या किआ जा सकता था किसी ने ठग लिया था पर फिर जो था उस से ही सब्र कर लिया

मैं- काका आपको किसी पे शक

काका- कोई नहीं बेटा

मैं- काका आपकी या पिताजी की किसी से कोई दुश्मनी

वो- नहीं

मैं- काका ऐसी कोई बात जो शायद आप छुपा रहे हो

काका- बेटा, मैंने कहा न अक्सर लोगो से गलति हो जाती है मुझे लगता है जितना भी मुझे पता था तुम्हे बता चूका हु

मैं- काका क्या आपको वहा पर नोट भी मिले थे

काका- नहीं, खाजाना बहुत पुराने समय का होगा तो नोट कैसे होते

अब एक सवाल ये भी खड़ा हो गया था की पिताजी ने चाचा को नोट दिए थे अब कैश कहा से आया मैंने अपनी तरफ से पूरा जोर दिया पर काका ने उसके बाद सख्ती से उस बारे में बात करने को मन कर दिया तो हार के मुझे वापिस आना पड़ा तभी मुझे ख्याल

आया और मैंने गाड़ी को बिमला की कोठी की तरफ मोड़ थी अन्दर गया घर शानदार बनाया था मुझे देखते ही वो खुश हो गयी

मैंने वो बिस्कुट उसको दिया और पुछा क्या जानती हो इसके बारे में

वो- बस इतना की चाचा जी ने मुझे रकम और काफी सोना दिया था

मैं- कितनी रकम

वो- करीब दो करोड़

बिमला- देव, जो भी मेरे पास है उसका आधा तुम्हारा है तुम कभी भी अपना हिस्सा ले सकते हो

मैं- मुझे नहीं चाहिए जब पिताजी ने आपको दिया तो आप ही रखो मैं बस ये चाहता हु की अगर इसके बारे में कुछ पता है तो बता दो

वो- बस इतनाही पता है

अब सोचने वाली बात ये थी की जब पिताजी ने सबका बंटवारा उस खजाने से किया थातो मेरा हिस्सा भी कही रखा होगा

मैं- रतिया काका क बारे में क्या ख्याल है

वो- घटिया इंसान है एक नंबर का लुम्पत हरामी है अपनी जमीन दबा राखी है उसने , उसके आलावा एक नंबर का रसिया है गाँव की कई औरतो का शोषण कर चूका है पैसे के जोर पे देव, वो मीठी छुरी है उस से दूर रहो

मैं- मैं किसी पर विस्वास नहीं करता किसी पर नहीं तुम पर भी नहीं

वो- मत करो पर तुम मेरा परिवार हो मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करुँगी

उसके बाद मैं वहा से आ गया दिमाग का धी हुआ पड़ा था पर इन सब के बीच एक बात ठीक हुई थी की कम से कम ये तो पता चल गया था की सोने का राज़ क्या है पर एक बात और थी की सोने के आलावा पिताजी ने बिमला और चाचा को मोटी रकम दी थी अब वो कहा से आई अब यहाँ से दो बाते थी या तो पिताजी ने सोना बेचा था या फिर ऐसे ही कहीं से पैसो का भी कुछ लोचा था , सोना बेचना वो भी मेरे छोटे से सहर में उन दिनों वो भी करोडो का बात हजम होने वाली थी नहीं बाकि होने को तो कुछ भी हो सकता था

 


घर आके मैंने सबको पूरा वाकया सुनाया सब को एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ की ऐसे किस्मत से खजाना मिल सकता है पर मेरे देश में ना जाने ऐसे कितने खजाने दबे पड़े है सदियों से ,सब लोग अपने अपने ख्यालो में डूब से गए थे कहानी थोड़ी फ़िल्मी टाइप हो चली थी पर सच तो ये ही था की उनको खजाना मिला था या फिर उन्होंने माता के खजाने को चुराया था खैर मैंने अगले दिन उस मंदिर को देखने का निर्णय लिया थोड़ी उत्सुकता सी हो चली थी साथ ही वो चबूतरा भी फिर से बनवाना था

बस इंतज़ार था उस रात के बीतने का जब हम उस जगह को देखंगे जहा पर खजाना था पिताजी के व्यक्तित्व का एक अलग ही पहलु देखने को मिला था आज पर वो लालची नहीं थ अगर लालच होता तो अपनों में बंटवारा नहीं करते उस सोने का , पर फिर उस सोने से नफरत सी होने लगी क्योंकि उसकी वजह से आज मेरा परिवार मेरे साथ नहीं था क्या होता जो हमारे पास इतना धन नहीं होता कम से कम माँ की गोद तो होती जब प्यार से वो मेरे सर को चूमती तो मेरी हर परेशानी पल में दूर हो जाती , मेरे सर पर मेरे पिता के प्यार की छत होती जब कभी मैं कमजोर पड़ता तो वो मुझे हौंसला देते

अगले दिन कुछ मजदूरो को लेके हम लोग चल पड़े पहुचे वहा पर उनको चबूतरा बाकायदा इज्जत के साथ बनाने को कहा आखिर मेरा भाई सो रहा था वहा पर मन थोडा भावुक था पर अब कुछ चीजों पर कहा किसका जोर चलता है , उसके बाद हम आगे तो चल पड़े नीनू को ही पता था रस्ते का घनी झाड़ियो पेड़ो से होते हुए करीब दो कोस बाद हम उस मंदिर तक पहुचे पहली नजर में ही पता चलता था की वो शायद अपने अंतिम समय में है मैंने माता को प्रणाम किया बस एक कमरा सा ही था

कमरा क्या एक कोटडा सा था तो मैंने ये अनुमान लगाया की शायद ये खजाना किसी ज़माने में लूटा गया होगा

और फिर यहाँ छुपाया गया होगा लूटने वाले लोग किसी कारण से यहाँ से ना निकाल पाए और ये धरती में दबा रह गया मंदिर को खूब देखा बस साधारण ही था सब वहा पर उसके बाद जैसे रतिया काका ने बताया था पास मेही वो कुआ भी मिल गया हमे अब उसमे मिटटी ही थी बस

मैं- देखो यहाँ था वो सब सोना

उसके बाद हमने आस पास खुदाई की छान बीन की कुछ नहीं मिला सिवाय कुछ सोने के टुकडो के जो शायद निकालते समय इधर ही रह गया होगा कुछ भी हो पर थोडा रोमांच हो रहा था उसके बाद हम लोग वापिस आ गए मैंने मजदूरो से पुछा तो पता चला की दो दिन तो लग ही जायेंगे उसके बाद उनको वही छोड़ के हम वापिस हुए

पिस्ता को शहर जाना था किसी काम से तो वो चली गयी नीनू और माधुरी घर रह गयी मुझे आज ममता से मिलना था उसने कहा था की दोपहर को वो खेत पर मिलेगी तो मैं वहा चल दिया दोपहर का समय था खेतो में दूर तक कोई नहीं दिख रहा था करीब आधे घंटे बाद मैं रतिया काका के खेतो की तरफ पहुच गया ये खेत हमारी तरफ ना होकर गाँव की परली तरफ थे ममता मुझे कुवे पर ही मिल गयी उसने मुझे इशारा किया तो मैं उसके पीछे कमरे में पहुच गया

मैं- यहाँ क्यों बुलाया

वो- बैठिये तो सही जेठ जी

मैं बैठ गया

ममता- जेठ जी मुझे ना बात घुमा फिरा के कहने की आदत नहीं है मैं जान गयी हु की आपके और आपके परिवार के साथ क्या हुआ और आपको आपके गुनेह्गारो की तलास्श है और इस काम में मैं आपकी मदद कर सकती हु

मैं- और इसमें तुम्हारा क्या फायदा है

वो- अब कुछ तो मेरा भी भला होगा ही

मैं- मुद्दे की बात करो

मेरा ऐसे कहते ही ममता मेरे पास आके बैठ गयी और बोली- जेठजी अब आपके किस्से तो पुरे गाँव में मशहूर है और आपको तो पता ही होगा की मेरे पति और ननद का रिश्ता भाई बहन से बढ़ कर कुछ और ही है

ओह तो इसको राहुल और मंजू के बारे में पता था ,

ममता- जेठजी, कुछ दिन पहले मैंने उन दोनों को हमबिस्तर देखा जाहिर है खून तो मेरा बहुत खौला मेरा पति अपनी ही बहन के साथ वो सब कर रहा था जो उसे मेरे साथ करना चाहिए था उसके बाद वो आपकी बाती करने लगे मंजू कह रही थी की वो आपसे सेक्स करेगी क्योंकि उसको आपके साथ बहुत मजा आता है और उसने राहुल को बताया की ..........की

मैं- की क्या

वो- की आपका हथियार भी बहुत लम्बा और मोटा है

मैं- ममता देखो तुम्हे ऐसा नहीं बोलना चाहिए तुम्हारा और मेरा नाता ऐसा नहीं है

वो- जेठ जी, आप के मुह से ऐसी बाते सुनके लगता है कोई आतंकवादी शांति की बात करने लगा हो

रिस्ते नातो की बात आप मत करो , और फिर आपका भी तो फायदा होगा आपको एक और जिस्म चखने को मिलेगा जेठ जी मैं सच में आपके बहुत काम आ सकती हु

मैं- देखो ममता जब तुम इतना खुल ही रही हो तो मैं आपको बता दू की चूत और दारू मैं अपनी मर्ज़ी से यूज़ करता हु वैसे मुझे तुम्हारा बिंदास अंदाज पसंद आया पर पहले तुम मुझे बताओ की तुम्हे इस मामले में क्या पता है

ममता- जेठ जी, मैं आपको सलाह दूंगी की ये जो आपके अपने बने फिरते हैं ना इनसे थोडा दूर रहना ये कब छुरा मार देंगे पता नहीं चलेगा

मैं- तुम्हे ऐसा क्यों लगता है

वो- आपको कुछ बातो का पता नहीं है जेठ जी, मेरे ससुर बहुत ही तेज खोपड़ी है जितना उन्होंने शराफत का नकाब ओढ़ रखा है अन्दर से वो उतने ही नीच है , गाँव की कई औरतो से उनके तालुकात है अब सोचो जो इंसान बुढ़ापे में भी अपनी बहु और बेटी को रगड़ सकता है तो वो जवानी में कैसा रहा होगा

मैं- तो क्या तुम्हे भी

वो- हां जेठ जी , ब्याह के कुछ दिनों बाद ही उसने मेरे साथ, खैर अब तो आदत सी हो गयी है , मैं जानती हु उन्होंने आपको खजाने की बात बता दी है पर इसलिए नहीं की क्योंकि आधा हिस्सा आपके पिता का था बल्कि इसलिए की आपके जरिये वो उस खोये हुए आधे हिस्से को पाना चाहते है

मैं- तुम्हे खजाने की बात की पता और साथ ही ये की उन्होंने वो बात मुझे बता दी है

वो- कल रात मैं दूध लेके उनके कमरे में गयी थी वो फ़ोन पर किसी को बता रह थे तो मेरे कानो में पड़ी मुझे देख कर वो चुप हो गए पर मैंने दरवाजे पर कान लगा दिए ऐसा लग रहा था की वो किसी बहुत ही खास इंसान से बात कर रहे थे पर वो जो भी था ससुर जी का खास था

मैं- वो खास कौन है क्या तुम पता कर सकोगी

वो- मैं पूरी कोशिश करुँगी

मैं- ममता, बात खाली ये नहीं है की जिस तरह से तुम मेरी मदद करना चाहती हो बात ये भी नहीं है की तुम अपना जिस्म परोसना चाहती हो बात ये है की ये कोई ट्रैप भी तो हो सकता है कोई साजिश क्योंकि एक बार पहले भी मुझे एक हुस्न्वाली ने मारने की कोशिस की थी हो सकता है की जो बात तुमने मुझे बताई हो वो सच हो , और काका एक रंगीन आदमी है ये भी मुझे पता चल चूका है

ममता- जेठ जी मैं जानती हु की आप ऐसे ही मेरा विश्वास नहीं कर लोगे आप पर जो हमला हुआ वो ससुर जी ने ही करवाया था और एक खास बात आपके चाचा और मेरे ससुर मिले हुए है वो काफी समय से खजाने को ढूंढ रहे है

मैं- तो क्या हुआ हमारे घरलू सम्बन्ध है दोनों व्यापारी है साथ है तो क्या गुनाह हुआ

ममता- तो फिर जाके अपनी भाभी से पूछो की क्यों चाचा ने उसको दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंका क्यों उस औरत का साथ छोड़ दिया जिसके लिए पुरे परिवार से नाराजगी हो गयी थी आखिर ऐसा क्यों हुआ की बिमला और वो अलग हो गए

 
मैं- चाचा ने बताया था की बिमला ने विधायक का साथ कर लिया था वो उस बात से खुश नहीं थे तो इसलिए वो अलग हो गए

ममता- जेठ, जी ज़माने को देखे तो आप बहुत भोले रह गए आप आज भी पिछले ज़माने में जी रहे है कभी बिमला से पूछ लेना शायद वो बता दे आपको

मैं- मेरा उस से कोई लेना देना नहीं है

वो- चलो मैं बताती हु की मेरे ससुर और चाचा की घनिष्टता बढ़ने लगी थी दोनों साथ रंडीबाजी करते कुछ और उलटे सीधे काम करते और फिर एक दिन ससुर जी ने बिमला को भोगने की अपनी मंशा चाचा को बताई, पर चाचा ने बदले में मेरी सास मांगी तो बात तय हो गयी पर बिमला को जब पता चला तो वो काफी आग बबूला हुई और उसका और चाचा का झगडा हो गया उसके कुछ दिनों के बाद कंवर सिंह बड़े जेठ जी आ गए तो उनको अब पता चल गया तह इधर बिमला और चाचा का उनसे काफी झगडा हुआ उस बात को लेके और फिर वो यहाँ से चले गए

चाचा चाहता था की बिमला मेरे ससुर से सम्बन्ध बनाये पर बिमला को वो बात चुभ गयी थी इसलिए वो दोनों अलग हो गए और तबसे अलग ही है

मैंने एक गहरी साँस ली थी साला हरामखोर चाचा जी तो चाह रहा था की उसकी गांड पे लात दू

मैं- ममता एक बात कहू

वो- क्या

मैं- हरिया काका की मौत के बारे में क्या जानती हो

वो- कुछ नहीं , हमारा उनसे कुछ लेना देना नहीं ससुर जी का गीता से पंगा है किसी बात को लेकर तो आना जाना है है बस इतना पता है की गीता ने बिमला पर उसकी मौत का इल्जाम लगाया था

मैं- वैसे पंगा क्या है

वो- पता नहीं पर शायद कोई उसी समय की बात है जब ये सब शुरू हुआ था मतलब आपके परिवार की मुसीबते

ये कहकर वो खड़ी हुई और बाहर दरवाजे की तरफ चली मेरी नजर उसकी मध्यम साइज़ की गांड पर अटक गयी वो दरवाजे पर इस तरह से खड़ी थी की मेरी नजर उसकी गांड पर पड़े ही पड़े ममता कोई पच्चीस की पटाखा औरत थी उसकी पतली कमर रूप रंग भी मस्त था मैं खड़ा हुआ और उसको पीछे से अपनी बाहों में जकड लिया उसने बिलकुल भी प्रतिकार नहीं किया करती भी कैसे वो तो खुद चुदना चाहती थी मैंने आने हाथो को उसकी छाती पर ले आया उर उसकी गोल मटोल चूचियो को दबाने लगा

“आह!जेठ जी धीरे ओह जेठ जी ”

“धीरे नहीं ममता , अब तो जोर आजमाइश होगी पर मेरी भी शर्त है ”

“क्या जेठजी ”

“तुझे दिखाना होगा की की तू कितनी गरम है जितना तेरी बातो में नखरा है उतना नखरा तेरे जिस्म में भी है ”

मैंने उसके ब्लाउज को खोलना चालू किया वो अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगी उसके बदन से आती भीनी भीनी खुशबु मुझे उत्तेजित करने लगी और अगले ही पल उसका ब्लाउज उतर गया था मैंने ब्रा भी उतार दिया उसकी नंगी पीठ पर चूमा मैंने

“आह ”वो सिसक उठी उसका हाथ मेरी पेंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर पहुच गया वो सहलाने लगी मैंने उसकी पीठ और नंगे कंधो को चूमने लगा कुछ देर उसके उभारो से खेलता रहा वो मेरी बाँहों में पिघलने लगी थी और फिर अब मैंने उसको अणि तरफ घुमाया और उसके होंठो को अपने मुह में भर लिया हमारे होंठ आपस में टकराए मुझे ऐसा लगा की जैसे गुलाब की पंखुड़िया चख रहा हु मैं ममता ने अपनी आँखे बंद कर ली और अपनी जीभ को मेरे मुह में डाल दिया मी हाथ उसकी गांड तक पहुच चुके थे

करीब दस मिनट तक बस हम एक दुसरे को चूमते रहे फिर ममता ने मेरी पेंट खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और जैसे ही वो उसकी आँखों के सामने आया बोली- सच कहती थी दीदी,

अगले ही पल वो अपने घुटनों पे बैठ गयी और बिना कुछ सोचे समझे मेरे लंड को अपने मुह में भर लिया उसकी गीली जीभ जैसे ही मेरे सुपाडे से टकराई बदन में चिनगारिया सी उडी उसकी और मेरी नजर एक बार मिली और फिर वो तेजी से उसे चुसने लगी उसके मुह का थूक उसकी चूचियो पर गिरने लगा मस्ती में चूर ममता पुरे उन्माद से भरी मेरे लंड को चूस रही थी उसके सुपाडे को चूम रही थी कुछ देर में उसने मेरे लंड को अपने मुह से निकाल दिया

उसने अपनी साडी और पेटीकोट उतार दिया गुलाबी कच्छी ही शेष थी उसके बदन पर जो उसकी उन्नत योनी का भार संभाल नहीं पा रही थी मैंने भी अपने कपडे उतार दिये और ममता जो अपनी गोदी में बिठा लिया और एक बार फिर से उसकी चूचियो से खेलने लगा वो अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगी वो अपने चहरे को मेरे चेहरे पर पटकने लगी और फिर उसने अपनी गांड को थोडा सा ऊपर किया और अपनी कच्छी को उतार दिया मेरा लंड उसकी गांड की दरार में फंस गया वो आहे भरने लगी

“क्यों तडपा रहे हो जेठ जी रौंद क्यों नहीं देते मुझे , बादल बन कर मुझ धरती पर बरस क्यों नहीं जाते ”

मैं- अभी तो खेल शुरू भी नहीं हुआ तुम तड़पने लगी

वो खड़ी हुई मैंने देखा उसकी चूत बुरी तरह से गीली हो गयी थी यहाँ तक की जन्घो का कुछ हिस्सा भी उसके रस से सन गया था मैंने उसे खाट पर लिटाया औरउसके ऊपर लेट गया उसके बदन को चूमने लगा मेरा लंड उसकी चूत को छूने लगा ममता मेरी बाहों में तड़प रही थी उसकी तेज साँसे बता रही थी की उसका हाल क्या है बारी से मैं उसकी चूचियो को चूसने लगा वो आहे भरते हुए तड़पने लगी थी

“जेठ जी, क्या कर रहे हो ये मुझे क्या हो रहा है ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ओह जेठ जी आउच ”

मैंने उसके बोबो को निचोड़ना चालू किया वो जल बिन मछली की तरह तदपने लगी अपने पैरो को पटकने लगी और अबकी बार मैंने जैसे ही ममता की चूची को मुह में लिया वो झड़ने लगी उसका बदन अकाद गया और आह भरते हुए उसकी चूत से कामरस टपकने लगा , और जैसे ही वो झड़ी मैंने उसकी टांगो को फैला दिया और उसके कामरस को अपनी जीभ से चाटने लगा ममता झर झर झड़ने लगी उसकी टाँगे ऊपर को उठने लगी

मैंने ऊसका पूरा कामरस चाट लिया वो दो पल को शांत हुई और मैंने उसकी चूत को अपने मुह में भर लिया किसी गोलगप्पे की तरह बिना बालो की उसकी हलकी फूली हुई चूत फिर से गरम होने लगी और दो मिनट में ही वो फिर से गर्म आहे भरने लगी

“जेठ ही बस भी कीजिये क्या ऐसे ही मार डालने का इरादा है ऊफ्फ्फ आह काटो मत प्लीज ”

“ऐसे ही नहीं मरूँगा ममता रानी, अभी तो मजा बाकी है ”

ममता की टाँगे विपरीत दिशाओ में फैइ हुई थी वो अपने हाथो से मेरे मुह को अपने योनी द्वार पर दबा रही थी उसकी चूत का गीलापन फिर से बढ़ने लगा था उत्तेजना का सागर अपनी लहरों पर उसको सवार करके घुमाने लगा था कभी वो अपने पैर पटके कभी अपने बाल नोचे तो कभी अपनी गांड उठा के पूरी चूत मेरे मुह में धकेले मस्ती में चूर वो अपने जेठ को अपनी चूत का रसपान करवा रही थी

पांच सात मिनट और बीते उसका पूरा शरीर पसीने से सं चूका था पर मैं उसकी योनी को चुसे ही जा रहा था फलसवरूप वो एक बार और झड गयी थी बिना चोदे ही मैंने उसको दो बाद ढीली कर दिया था

 


अब मैंने तकिये को उसकी गांड के निचे रख दिया और उसकी टांगो को अपनी टांगो पर चढ़ाया ममता ममता ने अपनी आँखों को हल्का सा खोला मैंने अपने लंड को उसकी चूत की दरार पर रगडा

“जेठ जी क्यों तडपा रहे हो बर्दाश्त करनी की भी हद होती है मुझे अपना बना क्यों नहीं लेते आप ”

उसके ऐसा कहते ही मैंने जोर लगाया और अपना लंड चूत में डालने लगा और ममता का बदन अकड़ने लगा

“आह!सच में बहुत मोटा है आराम से ”

मैं- बस एक मिनट की बात है फिर तुम ही चाहोगी की मैं इसको अन्दर ही रखु

अगले कुछ धक्को के बाद मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में पंहुचा दिया और हलके हलके धक्के लगाने लगा ममता ने मेरी पीठ पर अपनी बाहे कस दी

“आह, आह उफफ्फ्फ्फ़ आई सीईईइ ”

उसके होंठो से गर्म आहे निकलने लगी ममता के पसीने की मादक गंध मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी जिस से मैं अब तेज तेज धक्के लगाने लगा था वो मेरी बाहों में पिघल रही थी

मैं- थोडा दम दिखा रानी बड़ा उछल रही थी अब जेठ को ठंडा नहीं करोगी

वो- क्या दम दिखाऊ दो बार तो पहले ही निचोड़ दी

मैं- मेरी रानी, तेरी चूत आज ऐसे मरूँगा की रात को बिस्तर पर करवातो में ही रात गुजरेगी

वो- चोद डालो, जेठ जी मुझे इस तरह रौंद डालो की इस निगोड़ी की सारी खाज मिट जाये अपनी बाहों में पीस डालो मुझे आह शाबाश और तेज और तेज तेज करो चोदो मुझे

मैंने ममता को चूमना चालू कर दिया होंठो से होंठ जुड़ गए थे उसके बाकि के शब्द मुह में ही घुल गए जल्दी ही वो अपनी गांड उठा उठा के मेरी ताल से ताल मिलाने लगी उसके सच में ही काफी स्टैमिना था कामुकता की चाशनी में डूबा हुआ उसका हुस्न मेरे आगोश में पल पल वो पिस रही थी उसकी छतिया किसी धोंकनी की तरह ऊपर निचे हो रही थी पर मेरी रफ़्तार बढती जा रही थी सांसे मुह में ही घुल गयी थी जीभ आपस में तलवार की तरह टकरा रही थी

मेरा लंड उसकी चूत के गाढे पानी से सना हुआ था चिकना हुआ द्रुत गति से दौड़ते हुए उसकी चूत के छल्ले को चौड़ा किये हुए था ममता का बदन अकड़ने लगा था वो मुझे कसने लगी अपनी बाहों ने सांसे फूल गयी थी उसका जिस्म ऐंठ और फिर एक बार से वो झड़ने लगी थी अब हुई वो पस्त और खाट पर किसी बेजान लाश की तरह पड़ गयी मैंने धक्के रोक दिए , कुछ देर बाद उसने अपनी सांसो को संयंत किया और मैंने उसे घोड़ी बना दी उसने मेरी और देखा पर मेरा हुआ नहीं था तो मैं क्या करता

उसने अपने अगले हिस्से को पूरी तरह से झुका दिया और पिछले हिस्से को ऊपर उठा लिया मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और अपने लंड को चूत से भिड़ा चूत पूरी तरह से लाल हो रखी थी एक जोर का शॉट लगाया और फिर से उसको चोदने लगा ममता की हालात बुरी हुई पड़ी थी बस वो हाय हाय कर रही थी धीरे धीरे वो भी गरम होने लगी चूत का गीला पण बढ़ते ही मेरा हथियार और खूंखार होने लगा अपना पूरा जोर लगते हुए मैं उसकी चूत मार रहा था

“आह!जेठ जी सुसु आ रहा है बहुत तेज ”

“यही कर दो ”

“दो पल छोड़ो मुझे आः मैं रोक नहीं पाऊँगी ”

मैंने जैसे ही उसको ढील दी वो खाट से निचे उतरी और मूतने बैठ गयी सुर्र्र्रर सुर्र्र करके उसकी चूत से पेशाब की धर धरती पर गिरने लगी जैसे ही उसका मूत बंद हुआ मैंने उसको बिस्तर भी खीच लिया और फिर से हमारी चुदाई शुरू हो गयी ममता की सुध बुध खो चुकी थी बस वो मेरे धक्को को झेल रही थी करीब दस मिनट और मैंने उसकी ली फिर मैंने उसकी चूत में अपना गरमा गर्म वीर्य छोड़ दिया

एक के बाद एक वीर्य की पिचकारिया निकल कर उसकी चूत में गिरती रही और साथ ही वो भी झड़ गयी आज से पहले मेरा इतना पानी कभी नहीं निकला था ऐसा लग रहा था की जैसे किसी ने मेरी सारी शक्ति निचोड़ ली हो मैं उसकी बगल में ही पड़ गया

थोड़ी देर हम लोग लेटे रहे फिर ममता लड़खड़ाते कदमो से उठी और अपने कपड़ो को पहनने लगी

मैं- क्या हुआ और नहीं करना

वो- मुझसे गलती हो गयी जेठ जी मुझे माफ़ कीजिये

मैं- क्या हुआ मजा नहीं आया क्या

वो- मजा तो आया पर आपने तो मुझे निचोड़ दिया सर घूम रहा है पता नहीं घर तक पहुच भी पाऊँगी या नही

मैंने भी अपने कपडे पहने उसके बाद मैंने उस से वादा लिया की वो मेरा पूरा साथ देगी और कुछ भी पता चलते ही मुझे बताएगी उसने वादा किया की मैं उसको ऐसे ही पेलूँगा तो वो मेरी बन के रहेगी उसके बाद हमने अपना अपना रास्ता ले लिया

अब समस्या ये थी की हर एक के तार दुसरे से जुड़े थे और सारे ही ही मेरे अपने होने का दम भर रहे थे एक तरफ चाचा और बिमला थे जिन्होंने सब रिश्ते नाते ताक पर रख दिए थे अपने चोदुप्न के कारण, दूसरी तरफ प्यारी मामी थी जिसने चूत देके मेरी गांड मार ली थी मार ही डाला था मुझे और तीसरी तरफ रतिया काका था ममता के अनुसार उसने हमला करवाया था और लोचा भी उसका ही था अब साला जाये तो कहा जाये दिमाग में कुछ नहीं आ रहा था

दुनिया के केस सुलझाये थे पर खुद की गांड में पड़ा बम्बू नहीं निकल रहा था सब दरवाजे पीट लिए पर कुछ हासिल ना हो रहा था जी कर रहा था की उसी दिन मर जाते तो ठीक रहता ना हम रहते न ये सवाल होता ऊपर से ममता ने बुरी तरह थका दिया था तो मैं जाते ही सो गया फिर जब आँख खुली तो चारो तरफ अँधेरा था शायद बिजली चली गयी थी मैं उठ के अन्दर गया मोमबत्ती जलाई भूख सी लग आई थी अब इस समय किसी को जगाना ठीक नहीं था तो रसोई में गया कुछ खाया पिया नींद अब आनी थी नहीं मैंने देखा नीनू बैठक ने सोयी हुई है मैं उसके पास ही लेट गया

उस से चिपक गया उसको अपने से लगा लिया वो कसमसाई और मेरी बाहों में ढीली हो गयी मैंने एक हाथ उसकी कमर पर लपेट लिया

नीनू- सोने दो ना क्यों तंग करते हो

मैं- मैं कब जगा रहा हु अब क्या तुम्हे थोडा सा प्यार भी नहीं कर सकता मैं

वो- टाइम तो देखो

मैं- प्यार करने वाले टाइम नहीं देखते

वो- सोने दो ना बहुत नींद आ रही है

मैं- ठीक है , पर मैं इधर ही सो रहा हु

वो हां, वो मुझसे चिपक गयी और हम सो गए

सुबह जरा देर से आँखे खुली बदन जैसे टूट सा रहा था मैंने फ़ोन देखा तो मंजू की कई मिस काल आई हुई थी मैंने फ़ोन मिलाया डॉट इन घंटी के बाद उसने फ़ोन उठाया

मंजू-कब से फ़ोन कर रही हु तू है कहा

मैं- अभी उठा हु बस

वो- देव, मिलना है तुझसे

मैं- घर आजा

वो- नही उधर नहीं बात कुछ अर्जेंट है

मैं- ठीक है तू हमारे कुवे पर आजा मैं आधे घंटे में वहा मिलता हु

मैं करीब आधे घंटे में वहा पंहुचा तो मंजू वही बैठी थी

मैं- क्यों बुलाया

वो- देव, तूने सच कहा था तेरे साथ हुए हादसे में मेरे परिवार का कुछ तो लेना देना है

मैं- तुझे कैसे पता

वो- देव,मेरे बापू कल भाभी को चोद रहे थे मैंने देख लिया वो आपस में कुछ बात कर रहे थे तुम्हारे बारे में

मैं- क्या बात कर रहे थे

वो- देव, बात खजाने को लेकर थी

खजाना , तो जान का जंजाल बन गया था

मैं-बता जरा

वो- बापू भाभी से बोल रहे थे की उनको पूरा विश्वास है की देव बाकि का सोना ढूंढ ही लेगा तो भाभी बोली हां पर अगर वो ढूंढ लेगा तो हमे क्या मिलेगा फिर बापू बोला एक बार सोना मिलने तो दे उसके बाद देखेंगे उस सोने के लिए बड़े पापड़ बेले है

मैं- आगे

वो- बस इतना ही सुना

मैं- मंजू, अगर तेरे बापू ने गद्दारी की होगी तो तू किसका साथ देगी

वो- देव, मैं तेरा साथ दूंगी क्योंकि जब अपने ही दुश्मन हो जाये तो आदमी क्या कर सकता है देव तेरा मेरा बचपन से साथ रहा है मेरे बापू ने जो कलंक लगाया है उसे धोने के लिए मैं कुछ भी करुँगी

मैं- मुझे तेरा विश्वास है मंजू पर ये बात बता तूने अपने बापू से भी गांड मरवा ली

वो- देव, तुझे किसने

मैं- बस पता चला गया

वो- देव, एक दिन बापू ने मुझे और भाई को करते हुए पकड़ लिया था अब मैं क्या करती मज़बूरी हो गयी थी मेरी

मैं- जाने दे , तू मेरी बात सुन तू तेरे बापू से जाके चुदा और उस टाइम उस से इस बारे में पूछना और ये बोलना की देव को बाकि का खजाना मिल गया है मैंने तुझे बताया है

वो- समझ गयी आज ही तेरा ये काम कर दूंगी

 
उसके बाद मैंने उसे एक काम और करने को कहा फिर हमने अपना रास्ता पकड़ा अब कहानी ये थी की रतिया काका को चाह थी उस बाकि हिस्से की जो ना जाने कहा था और ममता को वो शायद ये कहना चाह रहे थे की सोना मिलने के बाद देव को रस्ते से हटा देंगे घर आके मैंने एक मैप बनाया ज्सिमे सबको लिखा, चाचा, बिमला, रतियाकाका, मामी, चारो ही मेरे लिए बहुत खास थे मेरे अपने थे पर चारो ही शक के घेरे में थे अब इनमे से तीन एक साथ थे और बिमला अलग थी सोना दो लोगो को मिला था

पिताजी के मन में कोई लालच नहीं था उन्होंने सबको हिस्सा दिया था चाहे वो नगद हो या सोना अगर ऐसा था तो उन्होंने मेरे लिए भी मेरा हिस्सा छोड़ा होगा ये बात पक्की थी क्योंकि जब वो उन नालायको पर दया कर सकते थे तो मैं तो उनका बेटा था इसका मतलब उन्होंने चाची को भी दिया होगा हां, पक्का पर आज चाची जिंदा थी नहीं तो कैसे मालूमात करू

मैंने अतीत के पन्ने खंगालने शुरू किये और मेरे दिमाग में एक बात आई चाची ने उन दिनों एक नया बैंक अकाउंट खुलवाया था तो शायद उन्होंने अपना सोना बैंक मे रखा हो मुझे याद था उन्होंने उस अकाउंट के बारे में चाचा को बताने से मना किया है मैंने तलाश किया तो उस अकाउंट की डिटेल्स मिल गयी मैंने पिस्ता को साथ लिया और बैंक पंहुचा

मेनेजर को अपनी और चाची की डिटेल्स बताई और आनी का मकसद भी अब वारिस तो मैं ही था तो करीब घंटे भर की कागजी कार्यवाई के बाद चाची के खाते में जितना भी कैश था वो और उनके लाकर की चाबी मेरे हाथ में थी जैसे ही मैंने लाकर खोला मेरी आँखे फट गयी वो पूरा सोने के गहनों से भरा था वो ही गहने जो और लोगो के पास थे पिस्ता ने वो सब बैग में भर लिया करीब पांच किलो क आस पास वजन था वो

आके हम गाड़ी में बैठे

पिस्ता- देव, एक बात तो है पिताजी ने तुम्हारे लिए भी कुछ तो छोड़ा है

मैं- हां, पर कहा वो नहीं पता

वो- शायद उन्हें पता हो की तुम उस तक पहुच जाओगे

मैं- काश वो साथ होते

वो- वो हमेशा तुम्हारे साथ है वो अपने आशीर्वाद के रूप में हमारी मदद कर रहे है देव जल्दी ही हम इस उलझन को सुलझा के तुम्हारे गुनेहगार को पकड लेंगे

मेरे दिमाग को इन नए समीकरणों ने उलझा दिया था किसी पर भी भरोसा करना मेरे लिए वापिस मौत के दरवाजे खोल सकता था मैंने एक चाल तो चली थी पर देखो उसका क्या असर होना था मंजू पर मुझे भरोसा था क्योंकि मैं जानता था वो मेरी मदद करेगी बिमला की बाकि सब से पट रही थी नहीं तो क्या दुश्मन का दुश्मन दोस्त हो सकता है क्या वो मेरी मदद कर सकती है जबकि गुजरे ज़माने में उसने मुझे बर्बाद करने की ठान ली थी असल में देखा जाये तो इस सब के लिए मैं ही जिम्मेदार था अगर मैं अपनी हवस में अपनी भाभी को फंसाता तो क्या पता आज मेरे सब अपने मेरे साथ होते

आखिर कुछ सोच कर मैंने गाड़ी बिमला की कोठी की तरफ मोड़ दी , पिस्ता- देव हम यहाँ क्यों आये है

मैं- मुझे लगता है बिमला को बता देना चाहिए कंवर के बारे में

पिस्ता-देव, वो टूट जाएगी

मैं- जो औरत अपनी जिद में सबको खा गयी उसको अब क्या फरक पड़ना है

पिस्ता- देव,मेरी बात मानो, कुछ बातो को छुपा लेना ही बेहतर है तुम समझ रहे हो ना

मैं- ठीक है पिस्ता पर कुछ और बाते तो कर सकते है है

वो- हाँ

हम लोग अन्दर गए कुछ इंतजार के बाद बिमला आई , हमारी बात शुरू हुई

मैं- देखो मैं उम्मीद करता हु की तुम सब सच बताओगी

वो- क्या जानना चाहते हो तुम

मैं- सोने के बारे में किस किस को पता है

वो- सबको जिन को होना चाहिये

मैं- मतलब

वो- मुझे , तुम्हे, तुम्हारे चाचा और रतिया काका को

मैं- तो तुम्हारा क्या पंगा है रतिया काका से और चाचा से

वो- चाचा ने साथ कर लिया था रतिया का दोनों कुछ खुराफात कर रहे थे मैंने कई बार कहा भी था की वो उस से दूर रही पर एक दिन चाह्चा ने मुझे कहा की मुझे सोना होगा रतिया के साथ तो मेरा दिमाग घूम गया उस दिन हमारा कलेश हुआ कुछ दिन बाद हम अलग हो गए रतिया ने जो फर्म बनायीं है वो हमारी जमीन है आज के हिसाब से उसकी करोडो में कीमत है वो कहता है की चाचा जी ने उसको वो जमीन दी है पर मैं नहीं मानती

मैं-ऐसा क्यों

वो- क्योंकि वो जमीन अपनी पुश्तैनी नहीं है जब घर का बंटवारा हुआ उसके बाद चाचाजी ने वो जमीन तुम्हारे लिए खरीदी थी

ये साला एक और बम फूट गया था

मैं- एक बात तो सा है ये सारा खेल खजाने के लिए हुआ है और इसके पीछे जो भी है मैं उसको माफ़ नहीं करूँगा

वो- मैं खुद इतने दिन से इसी काम में जुटी हु पर जो भी है वो बहुत शातिर है कोई सबूत नहीं कुछ सुराग नहीं मिल पाया है

मैं- गीता ताई से तुम्हारा क्या झगडा है

वो- जाने दो देव, तुम इस मामले में नहीं पडो कुछ बाते दबी ही रहे तो ठीक रहता है

मैं- बताओ ना

वो कहा न नहीं

मैं- उसने बताया की तुमने उसके पति को मरवाया

वो- पागल है साली, मैंने उसे कितनी बार कहा की रतिया का काम है पर वो साली मानती ही नहीं खामखा दुश्मनी पाल राखी है उसने

मैं- पर रतिया काका ने उसको क्यों मरवाया

वो- वो तो मुझे नहीं पता बस उडती उडती खबर आई थी और वैसे भी गीता और रतिया के सम्बन्ध ठीक नहीं है सबको पता है

मैं- तुम मुझे पूरी बात क्यों नहीं बताती हो

वो-क्योंकि सच बहुत कडवा है देव और मैं नहीं चाहती की तुम टूट कर बिखरो

“ये दुनिया वैसे नहीं होती जैसा हम समझते है यहाँ पर कोई किसी का अपना नहीं होता सब रिश्ते नाते मोह माया है सब आँखों का फरेब है यहाँ कोई किसी का सगा नहीं कोई किसी का पराया नहीं अगर कुछ सच है तो ये भूख, जिस्मो की भूख लालच की भूख इसके आलावा कुछ नहीं , मैं जानती हु की तुम सच को आज नै तो कल तलाश कर ही लोगे पर देव कम से कम मैं तुम्हे कुछ बाते नहीं बता सकती “

और हां, तुम्हे वो गाँव में मंदिर में कुछ देने की जरुरत नहीं तुम्हारे नाम से मैंने पैसे दे दिए है ”

मैं कुछ कहने ही वाला था की पिस्ता ने मेरा हाथ पकड लिया और चलने का इशारा किया हम वापिस आ गए बिमला से मदद मांगने गए थे ढेर सारी और उलझाने ले आये थे सब लोग अपना सब कुछ मुझे देने को तैयार थे सबका प्यार उमड़ आया था मुझ पर और इस प्यार के निचे था क्या सिर्फ नफरत और सिर्फ लालच

घर आके मैंने चाय नाश्ता किया सब लोग साथ ही बैठे थे मैं- एक बात ये भी है की बाकि का आधा खजाना जो था वो चोरी नहीं हुआ

नीनू- कैसे

मैं- क्योंकि गाँव में इन लोगो के आलावा कोई भी इतना अमीर नहीं हुआ है और बाहर का कोई खजाना ले जा सकता नहीं क्योंकि पिताजी ने वो जमीन खरीदते ही तार बंदी करवा दी थी और उस ज़माने में कोई ऐसे भी किसी की जमीन में नहीं जाया करता था वैसे भी वो उजाड़ जंगली इलाका है उस राज़ को बस दो आदमी ही जानते थे या तो रतिया काका या पिताजी रतिया काका उस समय हॉस्पिटल में थे तो पिताजी ने इतनी नजर तो राखी ही होगी की खजाने की सलामती रहे

 


माधुरी- भाई मेरा ये अनुमान है की की जो बाकि का आधा खजाना था वो ही आपका हिस्सा है बस जरुरत है उसको खोजने की

माधुरी ने जैसे विस्फोट किया था ऐसा हो सकता था की शायद पिताजी को डर हो की कही कोई उस खजाने को चुरा न ले तो उन्होंने उसे किसी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया होगा और इस से पहले की वो रतिया काका को बता पाते उनकी मौत हो गयी

मैं- होभी सकता है

पिस्ता- तो फिर कोई तो सुराग, कोई रास्ता जुरूर छोड़ा होगा

मैं- वो ही रास्ता तो नहीं है मेरे पास

नीनू ने एक गहरी नजर मेरे बनाये मैप पर डाली और बोली- हम लगता है की हमे इनमे से एक को उठाना होगा और अपने तरीके से पूछना होगा वैसे भी जो गुंडे उस मुठभेड़ में बच गये थे मैंने उनके बयां ले लिए है पर ताज्जुब ये की उनको किसी औरत ने भेजा था ना की रतिया काका ने तो बात उलझ गयी है अब औरत दो है या तो बिमला या फिर मामी

बिमला बाहुबली है उसके लिए गुंडे भेजना मुश्किल नहीं जबकि मामी भी ये काम करवा सकती है पैसो के दम पे

 
मैं- तो बात घूम फिर के जहा से चली है वहा पर आ जाती है देखो घूमफिर कर हम लोग हर बार इसी पॉइंट पर आ जाते है मतलब की हम लोग गलत तरीके से सोच रहे है कई बार ऐसा भी होता है की कोई और फायदा ले जाता है जबकि शक किसी और पर होता है

नेनू- पर तुम्हारे मामले में ये थ्योरी गलत है क्योंकि गाँव में तुम्हारे परिवार की किसी से दुश्मनी थी नहीं ये सब जब हुआ जब तुमने चुनाव में बिमला से धोखा किया ये जो भी पंगा है ये फॅमिली का है अब दुश्मनी वाला एंगल ले भी तो कैसे जब किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी और वैसे भी अपने ही सबसे बड़े दुश्मन होते है अगर वो ठान ले तो

मैं- तो क्या करू

पिस्ता- हमे मामी को उठना चाहिए जब मैं सेवा करुँगी उसकी तो बताएगी वो

मैं- नहीं रे पगली, सीधा सीधा उठा लेंगे तो कही काम बिगड़ ना जायेगा

नीनू- क्यों न हम उस पूरी जमीन की खुदाई करवाए

मैं- पागल हुई हो क्या कितनी जमीन है वो और सीधी बात है अगर पिताजी ने भी वहा से सोना निकाल लिया था तो वो उसे वही जमीन में बिलकुल नहीं छुपायेंगे

माधुरी –भाई आप इन सब चीज़ के बीच ये क्यों भूल रहे है की कंवर को किसने मारा अगर उस एंगल से सोचेंगे तो शायद कोई बात बने

वाह रे छुटकी, क्या बात पकड़ी थी जबसे इस खजाने की बात आई थी ये बात सूझी ही नहीं थी अब उस रात गाँव में किसी ने तो कंवर को देखा होगा अब जुगाड़ करके किसी न किसी से तो कुछ उगलवाना था पर मेरे दिमाग में उसके आलावा हरिया काका की भी मौत का कारण था हो ना हो दोनों की मौत तकरीबन उसी टाइम पीरियड में हुई थी मतलब साफ़ था की कुछ तो गड़बड़ है मतलब ऐसा भी हो सकता था की कंवर को भी सोने वाली बात पता चल गयी हो ,

ये फिर चाचा ने उसका पत्ता काट दिया ताकि वो उसके और बिमला के बीच ना सके या फिर इसलिए की कोई नहीं चाहता था की घर का वारिस आये आज मेरा दिमाग पूरी तरह से घुमा हुआ था तो मैंने ठेके पे जाने का सोचा हल्का हल्का अँधेरा हो रहा था करीब आधे घंटे में मैं वहा पर पंहुचा अपना ऑर्डर लिया और वही बैठ गया गाँव के कई लोग वहा पर बैठे थे एक बुद्धे को मैं पहचान गया उसे राम राम की तो वो मेरे पास आ गया

मैं- ताऊ, लोगे

वो- नहीं बेटा, मेरा कोटा हो गया है

मैं- कोई ना ताऊ एक तो ले लो मैंने आवाज मारके ताऊ के लिए गिलास मंगाया वो बैठ गया

मैं- ताऊ, और बताओ गाँव के क्या हाल चाल है

वो- बस बेटा जी रहे है ज्यादा गुजर गयी अब तो थोड़ी बची

मैं- वो तो है ताऊ

मैंने पेग बना के उसको दिया

हमारी बाते होने लगी

मैं- ताऊ क्या करते हो

वो- बेटा शहर में pwd में माली हु तुम्हारे चाचा की मेहर है उन्होंने ही जुगाड़ करवा दिया

मैं- ताऊ उधर तो वो हरिया काका भी लगा हुआ था न

वो- अरे बेटा , उसको मरे कई साल हुए पर आदमी बढ़िया था

मैंने एक पेग और सरकाया

मैं- ताऊ वो आपका दोस्त था ना

वो- दोस्त ही कह लो उम्र में तो काफी छोटा था पर दोनों साथ काम करते थे तो दोस्ती सी ही थी

मैं- दारू का रसिया था वो भी

वो- ना रे बेटा, उसने छोड़ दी थी बस अपने काम में ही मस्त, कहता था बहुत पी ली अब खोयी इज्जत कमानी है अब एक ही लड़की थी ब्याह दी थी उसकी औरत भी बहुत ही नेक थी कई बार मैं जाता था उसके घर दारू छोड़ने से फिर से रोनक हो गयी थी उसके घर

मैं- पर वो मारा कैसे ताऊ

वो- बेटा बुरा मत मानना सब समझते है की उसको तुम्हारी भाभी ने मरवाया है पर मुझे ऐसा नहीं लगता

मैं- क्यों ताऊ , ये बोलके मैंने उसे एक पेग और दिया

वो- बेटा, उसकी मौत से कुछ दिन पहले वो बहुत बुझा बुझा सा था तो मैंने पूछ लिया उसने बताया की उसे वो बानिया है ना रतिया

मैं- हां

वो- वो उसे परेशान कर रहा था अब बात क्या थी ये तो उसने नहीं बताई पर वो बहुत मुसीबत में लगता था उसके बाद वो दो तीन दिन काम पे भी नहीं आया फिर उसकी लाश ही मिली थी

मैं- ताऊ, कहा मिली लाश

वो- बेटा वो जो परली पार खेत है ना तुम्हारे चाचा के उधर ही मरा मिला था वो

ओह! तो उसके बाद ही चाचा ने खेतो की तरफ जाना छोड़ दिया था अब सबूत तो कुछ मिलना था नहीं वहा पर पर एक नजर देखना तो बनता था

मैं- ताऊ, घनी हो गई चले अब

वो- हा, बेटा

मैं- बैठ ले गाडी में

उसके बाद रस्ते भर मैंने ताऊ से बात की पर कुछ खास ना पता चला बात घूम फिर कर वही आ गयी थी अब ये पता करना था की रतिया काका से उसका क्या पंगा हुआ था जहाँ मैं रतिया काका को बेहद शरीफ समझता था वहा उसका नया चेहरा ही समझ आ रहा था झोल पे झोल हुए जा रहा था हर तरफ बस शक ही शक कोई राह नहीं बस भटकते रहो अँधेरे में

अब इन हत्याओ को हो भी तो बहुत समय गया था सबूत कहा से ढूंढ कर लाऊ चारो तरफ भुस सवाल थे और जवाब दने वाला कोई नहीं था कौन करे मेरी मदद खैर, घर आया बैठक में सब घर वालो की तस्वीर लगी थी आखिर ये लोग मुझे क्यों छोड़ कर चले गए मैं बहुत देर वहा बडबडाता रहा फिर मैं पिताजी के कमरे में चला गया मैं समझ रहा था की पिताजी ने जरुर कोई सुराग छोड़ा होगा सब कुछ किस्मत के हवाले तो नहीं कर सकता था मैं मैंने पिताजी की हर चीज़ की बारीकी से तलाशी ली पर कुछ नहीं मिला फिर नींद कब आई कुछ पता नहीं

अगले दिन मैं और नीनू निकल गए घूमने मंदिर की तरफ चले गए दर्शन किये बाबा के नए मंदिर का काम चल रहा थोडा देखा कुछ बाते पुजारी जी से हुई हम चलने को ही थे की बिमला आ गयी अब सरपंच होने के नाते वो मंदिर का निर्माण देखने आती रहती थी तो हमसे भी बात हो गयी हम लोग एक पेड़ के निचे बैठ गए ऐसे भी नार्मल बात हो रही थी मेरे मन में एक दो बात थी पर मैंने टाल दी फिर बिमला चली गयी हम बैठे रहे

 


नीनू-क्या लगता है

मैं- किस बारे में

वो – हम अभी तक सोने के बारे में ही सोच रहे है इतना कैश निकला है उसका क्या वो कैश ही है सोनी को बेच कर नहीं कमाया गया है वैसे भी करोडो के सोने को बेचना कोई आसान तो है नहीं

मैं- क्या कहना चाहती हो

वो –यही की नगद रकम का मामला अलग है

मैं- भाड़ में जाए , सोना हो या रकम मुझे कोई वास्ता नहीं मुझे मेरा चैन सुकून वापिस मिल जाये और कुछ नहीं चाहिए मुझे दो पल जिंदगी आराम से जी लू वही बहुत है

वो- उसी जिंदगी के लिए तो हम सब कर रहे है ना

मैं- वो दिन भी क्या दिन थे ना कोई चिंता थी ना कोई फ़िक्र

वो- तुम तब भी आवारा थे आज भी हो , याद है मैं तुम्हरे ही गाँव में तो पढने आती थी वो साइकिल चलाना कई बार रस्ते में गीत गुनगुना अब तो मोबाइल हो गए वो इशारो वाले ज़माने गए

मैं- सही कहती हो अपने टाइम की बात ही अलग थी

कई बार मैं जा रहा होता था तुम साइड से घंटी बजा के निकल जाया करती थी अब वो बात कहा काश कोई लौटा दे मेरे बीते दिन , वो जब तुम टिफिन में मेरे लिए आधा खाना छोड़ दिया करती थी आचार कितना अच्छा बनाती थी तुम

वो- हां, माँ आचार सबसे बढ़िया बनाती थी मैं उंगलिया चाटने लग जाती थी पर अब कहा वो स्वाद, अब तो बात ही गयी

मैं- बात कैसे गयी और हाँ वैसे भी इन सब टेंशन के बीच हम तुम्हरे घर जाना तो भूल ही गए एक काम करो हम भी तुम्हारे गाँव चल रहे है

नीनू- नहीं देव, अब जो पीछे छूट गया उसका क्या फायदा उस घर के दरवाजे बरसो पहले मेरे लिए बंद हो चुके है वहाँ जाके कुछ हासिल नहीं होना सिवाय दर्द के

मैं- नीनू, दर्द पर मरहम भी लगता है हम बस चल रहे है अभी इसी वक़्त

वैसे भी कौन सा दूर था मेरे गाँव से अगला गाँव तो था ही करीब पन्द्रह मिनट बाद हम लोग नीनू के घर के लिए जो मोड़ जाता तह वहा थे तर्रक्की को गयी थी पक्की सड़के बन गयी थी पहले इधर बस नीनू का ही घर था पर अब तो अच्छा खासा मोहल्ला बन गया था

नीनू- देव, गाडी वापिस मोड़ लो वहा काफी रोना पीटना होगा शायद तुम्हे भी कुछ बोल दे और वो बेइज्जती मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी

मैं- रे पगली, तेरे घरवाले मेरे भी घरवाले है कुछ बोल देंगे तो क्या आफत आ जानी है हम किसी गैर के घर नहीं आये है हम अपनों के घर आये है

मैंने गाडी आगे बढाई नीनू थोड़ी नर्वस होने लगी थी पर अब जाना तो जाना ही था पांच मिनट बाद मैंने गाड़ी नीनू के आँगन में रोक दी उसके पिता वही बैठे थे हुक्का पी रहे थे हम गाड़ी से उतरे नीनू को देख कर एक पल उनकी चेहरे के भाव बदले पर वो उठे नहीं बस बैठे ही रहे हम लोग वहा गए मैंने उनके चरण स्पर्श किये तो वो कुछ नहीं बोले

तभी नीनू की माँ भी आ गयी वो हमारी तरफ आने लगी पर फिर देहलीज पर ही रुक गयी

मैं- नीनू बात करो

नीनू- पापा बोली वो भराए गले से

पापा- जब तुम चली ही गयी थी तो क्या लेने आई हो अब

मैं- पापा, हमारी बात सुनो एक पल

वो- तुम कौन हो

मैं- इसका पति

वो- अच्छा तो तू है जिसने मेरी बेटी की जिन्दगी बर्बाद कर दी

मैं- आप हमारी बात सुनिए बेटी बरसो बाद घर आई है कम से कम झूठा ही सही मुस्कुरा तो दीजिये

मैंने मांजी की तरफ देखा और बोला- ये तो आना नही चाहती थी पर वो क्या है ना मैंने सुना की मांजी आचार बहुत अच्छा बनाती है तो मैं खुद को रोक ना सका और दौड़ा आया

मांजी ये सुनते ही मुस्कुरा पड़ी मैं समझ गया काम बन जायेगा

पापा- बात तो बहुत मीठी करता है तभी मेरी बेटी को फांस लिया

मैं- पापा आपके मन में जी इतने दिनों से नीनू की प्रति गलतफहमी है वो दूर करने आया हु ये ना तब गलत थी ना अब गलत है पर पहले थोडा पानी वानी तो पिला दो

पापा उठे और हमे अन्दर आने का कहा नीनू की धडकनों को महसूस कर लिया मैंने , बरसो बाद वो अपने कदम रखने जा रही थी अपने घर में पानी पिया उसके बाद मैंने सारी बात बता दी उनको और साथ ही ये भी की मैं किस गाँव का हु और किस परिवार का हु

पिताजी का नाम सुनते ही नीनू के पिताजी की आँखे चमक उठी बोले- बस बेटे और कुछ कहने की जरुरत नहीं तुम्हारे परिवार से तो बरसो से उठना बैठना था हमारा अरे तुम्हारे ताऊ और मैं फौज में साथ ही नौकरी करते थे वो थोडा पहले रिटायर हो गया था मैं थोडा बाद में पर फिर पता लगा की पूरा परिवार ही ख़तम हो गया तो बड़ा दुःख हुआ

और ये भी पगली, इसने अगर साफ़ साफ़ बता दिया होता तो मैं खुद आगे चल कर तुम दोनों का ब्याह करवा देता इसको बता देना चाहिए था इतने दिन से चिंता थी की बेटी कैसी है किस हाल में होगी पर अब चिंता दूर , शायद इसे ही कहते है विधि का विधान अब मैं लोगो को गर्व से बताऊंगा की मेरी बेटी भाग के नहीं गयी थी बल्कि किस खानदान की बहु है

पापा की आँखों से आंसू निकलने लगी नीनू अपने पिता के गले लग गयी फिर मा के थोडा भावुक सा माहौल हो गया था उसके घरवाले सज्जन लोग थे पल में ही सब गिले शिकवे ख़तम हो गए थे अपने को और क्या चाहिए था घरवाली खुश हो गयी थी तो अपन भी खुश थे बातो बातो में शाम हो गयी थी अब चलने का समय हो गया था पर नीनू के पापा की जिद थी की रात का खाना खाकर ही जाए तो फिर और देर हो गयी उसकी मा चाहती थी की नीनू कुछ दिन और रहे तो मैंने कहा जल्दी ही वो आ जाएगी

उसके बाद हम अपने घर के लिए चले गाँव से बाहर आते ही नीनु ने मेरे हाथ को कस के पकड लिया मैंने गाड़ी रोक दी साइड में उसकी आँखों में आंसू थे दो पल उसने मेरी तरफ देखा और फिर अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए

बहुत देर तक वो मुझे चूमती रहे दीवानों की तरह जब तक की सांसे जिस्म से बगावत ना करने लगी बस उसने बिना कहे ही सब कुछ कह दिया था उसने मेरे कंधे पर सर रख दिया मैं गाडी धीरे धीरे चलाने लगा बस जीना चाहता था उन लम्हों को दिल दिल से बाते कर रहा था हवा अचानक से खुशगवार लगने लगी थी घर कब आ गया पता ही नहीं चला बेशक उसने लफ्जों में कुछ नहीं कहा था पर फिर भी मैंने समझ लिया था की उसके दिल में क्या है घर आने के बाद वो अपने कमरे में चली गयी

मैं बाहर ही चारपाई पर लेट गया मैं सोच रहा था अपने बारे में नीनू के बारे में हम सब के बारे में पहले सब कितना सही था पर अब हर पल पल पल जिंदगी में बस दुःख ही था अजीब सी लाइफ हो गयी थी सोने का पता दो लोगो को था फिर लोग जुड़ते गए आधा निकाला गया बाकि कोई और ले गया अब रतिया काका का चरित्र जिस तरह से निकला था उस से ये भी अंदेसा था की वो मुझसे झूठ बोल रहे हो ऐसा भी हो सकता था की उन्होंने पिताजी से पहले ही वो खजाना वहा से साफ़ कर दिया हो

और फिर अपना वो ही शराफत का नकाब ओढ़ लिया हो ऐसा हो भी सकता था पर उनका वो एक्सीडेंट बहुत ही मुस्किल से बचे थे वो तो फिर वो ऐसा जानलेवा रिस्क नहीं लेंगे, बात यहाँ पर आके अटक गयी थी और फिर कंवर को किसने मारा वो भी तो बात उलझी हुई थी अब उसके बारे में दो बात थी या तो उसको बिमला या चाचा ने मार दिया या फिर उसकी जान भी खजाने के चक्कर में गयी दूसरी बात की सम्भावना ज्यादा थी क्यंकि उसकी लाश भी तो उसी जमीन में मिली थी दूसरी तरफ हरिया काका उसकी मौत भी शायद इसलिए हुई थी की उसको भी कुछ मालूम था पर क्या ?

बस इसी सवाल का जवाब नहीं था मेरे पास माधुरी ने सही कहा था एक बार कंवर की मौत कैसे हुई इस कड़ी को भी देखना चाहिय था पर पंगा ये था की टाइम बहुत बीत गया था तो हर कड़ी जैसे खो सी गयी थी उसकी मौत के बारे में हमे या फिर कातिल को ही पता था बिमला चाहे लाख नीच थी पर मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी की उसको बता सकू की वो जो सिन्दूर अपनी मांग में लगाती है पोंछ दे उसे तोड़ दे उन चूडियो को जो उसकी कलाई में सजी है

पर जो भी था इनसब के पीछे वो बहुत ही शातिर खेल खेल रहा था बिलकुल चुप था मैंने मंजू के रस्ते खजाने वाला दांव खेला तो था पर क्या होना था ये देखने वाली बात थी पैसे में बहुत शक्ति होती है और तभी मुझे याद आया की उन नकद रुपयों का क्या लेना देना है काका के अनुसार बस सोना ही था पर पिताजी के पास नकदी थी तो वो कहा से आई इस छोटे शहर में करोडो का सोना बेचना मुमकिन ही नहीं था शायद ये ऐसी ही बात थी की पिताजी ही जानते थे पर कैसे कोई तो सुराग कोई को बात होगी जिस से मुझे कुछ तो पता चले

कंवर बिमला की कोठी से निकला पर यहाँ नहीं पंहुचा उसकी लाश मिलती है अलग जगह पर , ओह तभी मुझे ध्यान आया वो रास्ता ममता जिस से भागी थी उस चोराहे से दो रस्ते जाते थे एक बिमला की तरफ और एक रतिया काका की फर्म पर तो शायद हुआ ऐसा होगा की बिमला से झगडे के बाद कंवर घर से निकला और रास्ते में उसके साथ कुछ हुआ पर वो सीधा गाँव के रस्ते को छोड़ कर उस रस्ते क्यों गया शायद वो कातिल को जानता था पर ऐसा क्या हुआ होगा की इंसान अपना सीधा रास्ता छोड़ कर उजाड़ का रास्ता लेगा सोचने वाली बात थी

 
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