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“ह..हां।” कोमल का स्वर उसके कानों में पड़ा। वह बोली "लेकिन तुमने अपने इस हालात के बारे में मुझे तो कभी नहीं बताया?"
“कैसे बताता कोमल । हमारी नई-नई शादी हुई थी और हर नई दुल्हन बहुत सारे अरमान लेकर अपने पिया के घर आती है। मैं कैसे तुम्हारे अरमानों को कुचल सकता था। मैं यह हौसला चाहकर भी अपने अंदर नहीं जुटा सका था।"
“और मुझे अपनी उसी नई दुल्हन को तलाक देने का हौसला जुटा लिया?"
“मैंने कहा न, मैं बहुत मजबूर था। मैंने अपने दिल पर पत्थर रखकर यह फैसला लिया था।"
“तुम गलत थे संदीप और तुम्हारा वह फैसला भी गलत था। तुम एक बार मुझे सच बताकर तो देखते। बहुत मुमकिन है कि मैं तुम्हारी मदद कर पाती। दौलत मेरे पास भी थी।"
“मुझे तुम पर पूरा विश्वास था कोमल। लेकिन शायद तुम्हारी दौलत मेरी जरूरत पूरी नहीं कर पाती।"
“रीनी की दौलत भी कहां तुम्हारी जरूरत पूरी कर पाई?”
“अब मेरी सारी जरूरतें पूरी हो चुकी हैं कोमल । मेरे तमाम मकसद पूरे हो चुके हैं। अब तो बस एक ही मकसद बचा
"और वह मकसद क्या है?"
“वह मकसद तुम हो कोमल ।”
"व्हॉट!"
“जी चाहे तो यकीन कर लो कोमल, मैं आज भी तुम्हें उतना ही प्यार करता हूं जितना दो साल पहले करता था। वह तो बेबसी की जंजीरों ने मेरे कदमों को जकड़ रखा था मगर अब मैं आजाद हूं और तुम्हारे पास वापस आना चाहता हूं। क्या तुम मुझे कबूल कर पाओगी?"
“स...संदीप।” कोमल का स्वर बेसाख्ता कंपकंपा उठा “यह तुम क्या कह रहे हो?"
“यही सच है कोमल । क्या मेरे लिए तुम्हारे पास कोई जगह अभी बाकी है?"
“त...तुम्हारी जगह खत्म ही कब हुई थी संदीप।”
“यानि कि बाकी है?" संदीप के चेहरे पर खुशियां नाच उठीं। "म...मगर यह आखिर कैसे हो सकता है संदीप?"
“क्यों कोमल, यह क्यों नहीं हो सकता?"
"रीनी अपने जीते-जी यह कभी नहीं होने देगी।"
“मैं जानता हूं। इसीलिए तो मैंने रीनी की जिंदगी छीन लेने का फैसला किया है।"
“क्या?” कोमल बुरी तरह से चौंकी थी। और अविश्वास से बोली “यह तुम क्या कह रहे हो संदीप। रीनी...।"
"अभी खुद तुम्हीं ने तो कहा है कि रीनी अपने जीते जी हमें नहीं मिलने देगी। फिर इसके अलावा मेरे पास और रास्ता भी
क्या है? मैंने तो उसकी सुपारी दे भी दी है।"
"हे भगवान।” कोमल के स्वर में निश्चित रूप से खौफ भर गया था। वह जैसे भौंचक्की सी होकर बोली थी “यह सब मैं क्या सुन रही हूं।"
"वही जो सच है। रीनी अब कुछ ही दिनों की मेहमान है।"
“र..रीनी के कत्ल की सुपारी तुमने किसे दी है?” कोमल ने पूछा।
“गोपाल को।"
“ग...गोपाल?"
"हां। जिसने उसके बाप का काम तमाम किया है। अब उसकी बेटी भी उसी के हाथों जन्नतनशीन होने वाली है और अकेले रीनी ही क्यों, एक और बदनसीब भी तो है जो रीनी के साथ ही बहुत जल्द दुनिया छोड़ने वाला है।"
“व...वह कौन हुआ?"
“सुमेश सहगल हमारे रास्ते का आखिरी कांटा। इसके बाद सब ठीक हो जाएगा। यह मेरा तुमसे वादा है।"
“मेरा भी तुझसे एक वादा है गंदी नाली के कीड़े।” सहसा एक नई धधकती आवाज फिजां में गूंजी “इस घड़ी के बाद तू दुनिया में दूसरी सांस नहीं ले पाएगा। तेरा इंसाफ मैं खुद अपने हाथों से करूंगी।"
संदीप एकाएक इस तरह चौंका, जैसे कि उसे बिच्छू ने डंक चुभो दिया हो। फिर वह फुर्ती से आवाज की दिशा में पलटा।
सामने कमरे के प्रवेशद्वार के बीचोबीच रीनी खड़ी थी। उसके हाथों में रिवॉल्वर था, जिसकी नाल पर साइलेंसर लगा था। साइलेंसर युक्त रिवाल्वर की लम्बी नाल संदीप की छाती को घूर रही थी।
संदीप के हाथों से मोबाइल छूटकर नीचे जा गिरा। वह सन्नाटे में आ गया।
“कैसे बताता कोमल । हमारी नई-नई शादी हुई थी और हर नई दुल्हन बहुत सारे अरमान लेकर अपने पिया के घर आती है। मैं कैसे तुम्हारे अरमानों को कुचल सकता था। मैं यह हौसला चाहकर भी अपने अंदर नहीं जुटा सका था।"
“और मुझे अपनी उसी नई दुल्हन को तलाक देने का हौसला जुटा लिया?"
“मैंने कहा न, मैं बहुत मजबूर था। मैंने अपने दिल पर पत्थर रखकर यह फैसला लिया था।"
“तुम गलत थे संदीप और तुम्हारा वह फैसला भी गलत था। तुम एक बार मुझे सच बताकर तो देखते। बहुत मुमकिन है कि मैं तुम्हारी मदद कर पाती। दौलत मेरे पास भी थी।"
“मुझे तुम पर पूरा विश्वास था कोमल। लेकिन शायद तुम्हारी दौलत मेरी जरूरत पूरी नहीं कर पाती।"
“रीनी की दौलत भी कहां तुम्हारी जरूरत पूरी कर पाई?”
“अब मेरी सारी जरूरतें पूरी हो चुकी हैं कोमल । मेरे तमाम मकसद पूरे हो चुके हैं। अब तो बस एक ही मकसद बचा
"और वह मकसद क्या है?"
“वह मकसद तुम हो कोमल ।”
"व्हॉट!"
“जी चाहे तो यकीन कर लो कोमल, मैं आज भी तुम्हें उतना ही प्यार करता हूं जितना दो साल पहले करता था। वह तो बेबसी की जंजीरों ने मेरे कदमों को जकड़ रखा था मगर अब मैं आजाद हूं और तुम्हारे पास वापस आना चाहता हूं। क्या तुम मुझे कबूल कर पाओगी?"
“स...संदीप।” कोमल का स्वर बेसाख्ता कंपकंपा उठा “यह तुम क्या कह रहे हो?"
“यही सच है कोमल । क्या मेरे लिए तुम्हारे पास कोई जगह अभी बाकी है?"
“त...तुम्हारी जगह खत्म ही कब हुई थी संदीप।”
“यानि कि बाकी है?" संदीप के चेहरे पर खुशियां नाच उठीं। "म...मगर यह आखिर कैसे हो सकता है संदीप?"
“क्यों कोमल, यह क्यों नहीं हो सकता?"
"रीनी अपने जीते-जी यह कभी नहीं होने देगी।"
“मैं जानता हूं। इसीलिए तो मैंने रीनी की जिंदगी छीन लेने का फैसला किया है।"
“क्या?” कोमल बुरी तरह से चौंकी थी। और अविश्वास से बोली “यह तुम क्या कह रहे हो संदीप। रीनी...।"
"अभी खुद तुम्हीं ने तो कहा है कि रीनी अपने जीते जी हमें नहीं मिलने देगी। फिर इसके अलावा मेरे पास और रास्ता भी
क्या है? मैंने तो उसकी सुपारी दे भी दी है।"
"हे भगवान।” कोमल के स्वर में निश्चित रूप से खौफ भर गया था। वह जैसे भौंचक्की सी होकर बोली थी “यह सब मैं क्या सुन रही हूं।"
"वही जो सच है। रीनी अब कुछ ही दिनों की मेहमान है।"
“र..रीनी के कत्ल की सुपारी तुमने किसे दी है?” कोमल ने पूछा।
“गोपाल को।"
“ग...गोपाल?"
"हां। जिसने उसके बाप का काम तमाम किया है। अब उसकी बेटी भी उसी के हाथों जन्नतनशीन होने वाली है और अकेले रीनी ही क्यों, एक और बदनसीब भी तो है जो रीनी के साथ ही बहुत जल्द दुनिया छोड़ने वाला है।"
“व...वह कौन हुआ?"
“सुमेश सहगल हमारे रास्ते का आखिरी कांटा। इसके बाद सब ठीक हो जाएगा। यह मेरा तुमसे वादा है।"
“मेरा भी तुझसे एक वादा है गंदी नाली के कीड़े।” सहसा एक नई धधकती आवाज फिजां में गूंजी “इस घड़ी के बाद तू दुनिया में दूसरी सांस नहीं ले पाएगा। तेरा इंसाफ मैं खुद अपने हाथों से करूंगी।"
संदीप एकाएक इस तरह चौंका, जैसे कि उसे बिच्छू ने डंक चुभो दिया हो। फिर वह फुर्ती से आवाज की दिशा में पलटा।
सामने कमरे के प्रवेशद्वार के बीचोबीच रीनी खड़ी थी। उसके हाथों में रिवॉल्वर था, जिसकी नाल पर साइलेंसर लगा था। साइलेंसर युक्त रिवाल्वर की लम्बी नाल संदीप की छाती को घूर रही थी।
संदीप के हाथों से मोबाइल छूटकर नीचे जा गिरा। वह सन्नाटे में आ गया।