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“लेकिन...।” नैना ने एक उड़ती निगाह उसके फैशन मॉडल जैसे हसीन चेहरे पर डाली, फिर कुछ उलझकर बोली “तुम्हारा चेहरा तो एकदम ठीक है।”
“हां। क्योंकि यह मेरा असली चेहरा नहीं है। मेरी यह सुंदरता तो कास्मेटिक सर्जरी का कमाल है, जो प्राची का चेहरा है। आलोका का चेहरा तो उस एक्सीडेंट ने मुझसे हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया।”
“समझ गई।” नैना के मुंह से बेसाख्ता निकला ।वह निःश्वास भरती हुई बोली “तो यह है तुम्हारे चेहरे की सर्जरी की हकीकत?"
“ज...जी मैडम।" आलोका का चेहरा झुक गया “ऑय एम वैरी सॉरी। म...मैंने इस मामले में भी आपको गुमराह किया था। असल में मुझे वैसी कोई चेहरे की बीमारी नहीं हुई थी, जिसकी वजह से मैंने अपने चेहरे की यह सर्जरी बताई थी।"
“डोंट माइंड बेबी। लेकिन तुम्हारे इलाज और तुम्हारे चेहरे की इस सर्जरी का यह भारी भरकम खर्च किसने उठाया था?"
“उ...उसी ने मैडम, जिसकी कार ने मेरी वह हालत की थी।" “और वह कौन था?"
आलोका हिचकिचाई।
"ओह कम ऑन आलोका। मेरे सवाल का जवाब दो।"
“अ...अजीब इत्तेफाक है मैडम.." आलोक ने कहा “वह शख्स भी मेरे पापा का बहुत बड़ा मुरीद था और उसने भी पापा की एडवाइज पर बहुत पैसा कमाया था।"
“और इस तरह उसे तुम्हारे पापा के अहसानों का बदला चुकाने का मौका हासिल हुआ था? राइट?"
“नहीं। वह सचमुच नेक इंसान था मैडम, जो मेरे पापा की
आपबीती सुनकर अंदर तक हिल गया था। म...मैं अगर आज जिंदा हूं तो इसका श्रेय उसी इंसान को जाता है।"
“वह तो है। आखिर उसने तुम्हारा इतना बेहतर इलाज कराया। तुम्हारे असली चेहरे में न सही, लेकिन तुम्हारी
खूबसूरती उसने तुम्हें फिर से वापस लौटा दी।”
“खुदकुशी के तमन्नाई इंसान को इन चीजों की जरूरत नहीं होती मैडम। उसने इससे कहीं ज्यादा बड़ा काम किया था।"
“ऐसा क्या काम किया था उसने?” नैना ने उत्सुकता जताई। “उसने मुझे खुदकुशी के अवसाद से उबारकर मुझमें जीने का हौसला जगाया था। उ...उसने मुझे जीने का मकसद दिया था।"
“क...क्या मकसद दिया था उसने तुम्हें ?"
“जेंटलमैन।” आलोका का स्वर हौले से लरजा। लेकिन उसने फिर से खुद को संभाल लिया और उसका आत्मविश्वास लौटने लगा था “मेरा जेंटलमैन। जिसकी जॉन उस वक्त खतरे में थी।"
“क...क्या वह शख्स तुम्हारे जेंटलमैन को जानता था?"
"हां। और वह एक मिशन पर निकला हुआ था, जिसमें अगर वह कामयाब हो जाता तो अकेले मेरे जेंटलमैन की ही नहीं,
और भी कई लोगों की जिंदगी बच जाने वाली थी।"
“और तुमने उसकी बात मान ली?"
“क्यों न मानती! मुझे आखिर मेरे जीने का मकसद जो मिल गया था।"
“और तुम्हें मेरे पास भेजने वाला भी वही है? है न
आलोका?" आलोका कसमसाई। फिर वह बेचैनी से पहलू बदलती हुई
बोली “ज..जी हां मैडम। यह सच है, मैं यहां उसी के कहने पर आयी हूं।" साथ ही आलोका ने अपना चेहरा झुका लिया।
“इसमें तुम्हारा कोई कसूर नहीं है आलोका, क्योंकि कम से कम तुम्हारी वजह से मुझे कोई नुकसान नहीं हुआ।” नैना ने कहा “इसलिए तुम्हें अपना चेहरा झुकाने की जरूरत नहीं है।"
आलोका ने सकुचाते हुए अपना चेहरा ऊपर उठाया और नैना को देखा।
“तुमने अभी तक उस आदमी का नाम नहीं बताया।” नैना ने सवालिया निगाहों से उसे देखा “उसका नाम क्या है?"
“उ..उसका नाम...।" आलोका हिचकिचाई,? फिर उसने बता दिया “उसका नाम है जानकी लाल।"
"व्हाट?" नैना सकते में आ गई।
“श्री...श्री...।" मदारी के होठों से बेअख्तियार निकला और वह भौंचक्का सा होकर आंखें फाड़-फाड़कर जानकी लाल को देखने लगा “आप?"
उसके चेहरे के जर्रे-जर्रे पर आश्चर्य और अविश्वास के असंख्य भाव आ गए थे।
वह, जो कि सचमुच जानकी लाल था, उसके होठों पर एक रहस्यमय मुस्कराहट उभरी।
“तुमने ठीक पहचाना इंस्पेक्टर ।” जानकी लाल मंद-मंद मुस्कराता हुआ बोला “मैं सचमुच हूं और मुझे जीवित देखकर किसी की
भी यह हालत हो सकती है। लेकिन तुम्हारा इस तरह से चौंकना मेरी समझ से बाहर है।"
"लेकिन क्यों भगवान । मैं क्या इंसानों की श्रेणी में नहीं आता?" मदारी ने पूछा।
“यकीनन आते हो। लेकिन तुम्हारी लिए यह कोई राज नहीं है।” “वह क्यों श्रीमान?"
"क्योंकि तुम इस सच से बखूबी वाकिफ हो।"
___ “कौन से सच से?"
“मेरे जिंदा होने के सच से।" “य...यह आप कैसे कह सकते हैं जजमान?"
"क्योंकि जिस लाश को सारी दुनिया ने मेरी लाश समझा था, वह केवल तुम ही थे जिसने उस पर विश्वास नहीं किया था। इसीलिए तुमने बाद में उस लाश का डीएनए परीक्षण कराया था।"
“आ..आपको यह मालूम है?" मदारी की पहले से फैली आंखें
और ज्यादा फैल गई थीं।
“खेल जब खून का हो तो नजरों को बहुत पैना रखना पड़ता है। और जब सामने तुम्हारे जैसा तनख्वाह की पाई-पाई हलाल करने वाला इंस्पेक्टर हो तो और ज्यादा चौकन्ना रहना पड़ता है। पुलिस की फारेंसिक टीम के उस डॉक्टर गौतम को मेरा डीएनए सैम्पल भी तुम्हीं ने ही उपलब्ध कराया था और तुम्हारी इस कोशिश का रिजल्ट पॉजिटिव आया था।”
“आ..आप तो मेरी सोच से ज्यादा पहुंचे हुए निकले श्री-श्री।" “लिहाजा तुम्हें कबूल करना ही पड़ेगा इंस्पेक्टर कि तुम इस सच से वाकिफ थे कि मैं मरा नहीं जिंदा हूं, और अकेले तुम ही नहीं, मेरा डीएनए टेस्ट करने वाला डॉक्टर गौतम भी इस सच से बाखबर था। यह अलग बात है कि उसने किसी को भी यह नहीं बताया।”
"कैसे बताता श्री-श्री। वह भी आखिर पुलिस के महकमे का आदमी था और फिर वह इंस्पेक्टर मदारी से बाहर नहीं जा सकता था।"
“तब तो तुम्हें यह भी मालूम होगा इंस्पेक्टर कि संजना, संदीप और गोपाल के कत्ल में मेरा ही हाथ था?"
“सरासर मालूम था श्रीमान।" मदारी ने स्वीकार किया “बस जो नहीं मालूम था, वह ये कि उन भद्रजनों के कत्ल आप क्यों कर रहे थे?"
“ओह। लेकिन अब तो तुम्हें मालूम हो गया होगा?"
“सब आपकी रहमत है भगवान।” मदारी नाटकीय स्वर में बोला “लेकिन उसके लिए मुझे बड़ी भयंकर मेहनत करनी पड़ी और आपके साथ-साथ उन तमाम लोगों के अतीत को छलनी से छानकर निकालना पड़ा, जो कि आसान नहीं था। पच्चीस-तीस साल पुराने अतीत को खंगालना आसान कहां होता है? लेकिन खैर, सब बेहतर ढंग से निकल गया और मेरी मुराद पूरी हो गई।"
"लेकिन तुमने यह उजागर क्यों नहीं किया।"
“आपका मतलब है कि आपके जिंदा होने का राज मैंने उजागर क्यों नहीं किया?"
"हां। मेरा यही मतलब था।"
“वह मैंने जानबूझकर नहीं किया था श्रीमान। दरअसल मैं यह उजागर करके आपको चौकन्ना नहीं करना चाहता था। मैं चाहता था कि आप इसी गफलत में बने रहते कि आप इंस्पेक्टर मदारी को गच्चा देने में कामयाब हो गए थे। और फिर लापरवाही में आप कोई ऐसी गलती कर जाते जो मेरे हाथ आपकी गरदन तक पहुंचा देते।"
“तुम्हारा प्लान तो अच्छा था इंस्पेक्टर।” जानकी लाल की मुस्कराहट गहरी हो गई “लेकिन ऐसा हुआ तो नहीं। तुम्हारे हाथ मेरी गरदन तक पहुंच तो न पाए?"
“पुलिस के काम में देर सवेर का होना लाजिमी है श्री-श्री, क्योंकि पुलिस के पास कोई भी वन प्वाइंट प्रोग्राम नहीं होता। वैसे आप चाहें तो यकीन कर लें, आपकी गिरफ्तारी महज वक्त की बात थी। लेकिन...” उसने ठंडी सांस भरी “शुक्र है कि आप खुद ही सामने आ गए और मेरी जहमत कम हो गई।"
"तुम शायद ठीक कह रहे हो इंस्पेक्टर। चोर-सिपाही के खेल में जीत हमेशा सिपाही की ही होती है।"
“अब तो मुझे पूरा विश्वास हो गया श्रीमान कि आप अजर अमर, अविनाशी हैं और अमृत पीकर दुनिया में आए हैं।" मदारी बोला “और आपके दुश्मनों में वह ताकत नहीं है जो आपका बाल भी बांका कर सकें।" सहसा वह ठिठका, फिर वह जानकी लाल को देखता हुआ बोला “लेकिन इस बार आपके दुश्मनों का दांव बहुत जबरदस्त था, इसके बावजूद आप बच निकले. यह करिश्मा आपने आखिर कैसे किया?"
“तुम्हारा सवाल मुनासिब है इंस्पेक्टर।” जानकी लाल ने कहा "और यह सवाल हर जेहन में चीख रहा है। लेकिन शायद तुम यकीन नहीं करोगे, इस बार करिश्मा हुआ था और उसे मैंने अंजाम नहीं दिया था।"
“तो फिर उसे किसने अंजाम दिया था?"
"इत्तेफाक ने।”
"बात कुछ समझ में नहीं आयी जजमान। वह अधजली लाश आखिर किसकी थी, जो मौकाए वारदात पर आपकी कार के करीब मिली थी, और जिसे हर किसी ने आपकी लाश समझा था और जिसका आपकी लाश के तौर पर अन्तिम संस्कार भी किया गया था।
"मुझे नहीं पता।” जानकी लाल सपाट स्वर में बोला “और विश्वास करो, मैंने उसे वहां नहीं पहुंचाया था।"
"तो फिर?"
“मैंने कहा न इंस्पेक्टर, एक बहुत बड़ा इत्तेफाक था। यह सच है कि उस किलर गोपाल का वार निर्णायक था और मेरी कार दुर्घटनाग्रस्त होकर नीचे यमुना में जा गिरी थी। और यहीं से इत्तेफाक का दखल शुरू होता था, जो कि दोहरा इत्तेफाक था।"
"दोहरा इत्तेफाक?” इंस्पेक्टर मदारी के चेहरे पर सस्पेंस के भाव गहरे हो गए थे।
"नैना को तुम क्यों भूल रहे हो इंस्पेक्टर। वह भी तो आखिर उस वक्त मौकाए वारदात पर मौजूद थी और गोपाल की स्कार्पियो के बाद मेरी कार असंतुलित होकर उसकी कार से जा टकराई थी। उसके बाद ही मेरा ड्राइवर कार से अपना संतुलन खो बैठा था और वह हादसा पेश आया था।”
"मुझे याद है।” मदारी ने सहमति में सिर हिलाया “और मेरी तफ्तीश से भी यही साबित हुआ था कि नैना कजरारे का उस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। ऐन उसी समय उनका आपके बराबर से गुजर रहा होना महज एक इत्तेफाक था। मगर दूसरा इत्तेफाक क्या था?"
“वह लाश, जो एक्सीडेंट के बाद मेरी कार के बाहर अधजली हालत में पाई गई। मुझे नहीं पता इंस्पेक्टर कि लगभग मेरे ही उम्र के शख्स की और मेरी ही कद-काठी से मिलती जुलती वह लाश अचानक वहां कैसे आ गई थी और मेरी दुर्घटनाग्रस्त कार से उलझ गई थी, जिसके बाद हालात के मद्देनजर सबने उसे मेरी ही लाश समझा था। लेकिन इस बारे में मेरी अपनी सोच यही है कि वह लाश यमुना में बहती हुई वहां आयी थी और वह उस वक्त वहां किनारे से या तो गुजर रही थी या फिर पहले से अटकी पड़ी थी। जबकि मेरी कार एक्सीडेंट होकर वहां जा गिरी और उसमें आग लग गई।"
“ओहो।” मदारी का सिर समझने वाले भाव से हिला “मगर आप...?”
“मैं पहले ही अपनी साइट के खुले दरवाजे से निकलकर पानी में जा गिरा था। वहां पानी का बहाव बहुत तेज था, जो पलक झपकते मुझे आगे पुल की तरफ बहा ले गया था। और क्योंकि उस वक्त प्रत्यक्षदर्शियों का सारा ध्यान दुर्घटनाग्रस्त कार की तरफ था इसलिए किसी की नजर मुझ पर नहीं पड़ सकी थी और मैं बहता हुआ वहां से दूर निकल गया था।"
“हां। क्योंकि यह मेरा असली चेहरा नहीं है। मेरी यह सुंदरता तो कास्मेटिक सर्जरी का कमाल है, जो प्राची का चेहरा है। आलोका का चेहरा तो उस एक्सीडेंट ने मुझसे हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया।”
“समझ गई।” नैना के मुंह से बेसाख्ता निकला ।वह निःश्वास भरती हुई बोली “तो यह है तुम्हारे चेहरे की सर्जरी की हकीकत?"
“ज...जी मैडम।" आलोका का चेहरा झुक गया “ऑय एम वैरी सॉरी। म...मैंने इस मामले में भी आपको गुमराह किया था। असल में मुझे वैसी कोई चेहरे की बीमारी नहीं हुई थी, जिसकी वजह से मैंने अपने चेहरे की यह सर्जरी बताई थी।"
“डोंट माइंड बेबी। लेकिन तुम्हारे इलाज और तुम्हारे चेहरे की इस सर्जरी का यह भारी भरकम खर्च किसने उठाया था?"
“उ...उसी ने मैडम, जिसकी कार ने मेरी वह हालत की थी।" “और वह कौन था?"
आलोका हिचकिचाई।
"ओह कम ऑन आलोका। मेरे सवाल का जवाब दो।"
“अ...अजीब इत्तेफाक है मैडम.." आलोक ने कहा “वह शख्स भी मेरे पापा का बहुत बड़ा मुरीद था और उसने भी पापा की एडवाइज पर बहुत पैसा कमाया था।"
“और इस तरह उसे तुम्हारे पापा के अहसानों का बदला चुकाने का मौका हासिल हुआ था? राइट?"
“नहीं। वह सचमुच नेक इंसान था मैडम, जो मेरे पापा की
आपबीती सुनकर अंदर तक हिल गया था। म...मैं अगर आज जिंदा हूं तो इसका श्रेय उसी इंसान को जाता है।"
“वह तो है। आखिर उसने तुम्हारा इतना बेहतर इलाज कराया। तुम्हारे असली चेहरे में न सही, लेकिन तुम्हारी
खूबसूरती उसने तुम्हें फिर से वापस लौटा दी।”
“खुदकुशी के तमन्नाई इंसान को इन चीजों की जरूरत नहीं होती मैडम। उसने इससे कहीं ज्यादा बड़ा काम किया था।"
“ऐसा क्या काम किया था उसने?” नैना ने उत्सुकता जताई। “उसने मुझे खुदकुशी के अवसाद से उबारकर मुझमें जीने का हौसला जगाया था। उ...उसने मुझे जीने का मकसद दिया था।"
“क...क्या मकसद दिया था उसने तुम्हें ?"
“जेंटलमैन।” आलोका का स्वर हौले से लरजा। लेकिन उसने फिर से खुद को संभाल लिया और उसका आत्मविश्वास लौटने लगा था “मेरा जेंटलमैन। जिसकी जॉन उस वक्त खतरे में थी।"
“क...क्या वह शख्स तुम्हारे जेंटलमैन को जानता था?"
"हां। और वह एक मिशन पर निकला हुआ था, जिसमें अगर वह कामयाब हो जाता तो अकेले मेरे जेंटलमैन की ही नहीं,
और भी कई लोगों की जिंदगी बच जाने वाली थी।"
“और तुमने उसकी बात मान ली?"
“क्यों न मानती! मुझे आखिर मेरे जीने का मकसद जो मिल गया था।"
“और तुम्हें मेरे पास भेजने वाला भी वही है? है न
आलोका?" आलोका कसमसाई। फिर वह बेचैनी से पहलू बदलती हुई
बोली “ज..जी हां मैडम। यह सच है, मैं यहां उसी के कहने पर आयी हूं।" साथ ही आलोका ने अपना चेहरा झुका लिया।
“इसमें तुम्हारा कोई कसूर नहीं है आलोका, क्योंकि कम से कम तुम्हारी वजह से मुझे कोई नुकसान नहीं हुआ।” नैना ने कहा “इसलिए तुम्हें अपना चेहरा झुकाने की जरूरत नहीं है।"
आलोका ने सकुचाते हुए अपना चेहरा ऊपर उठाया और नैना को देखा।
“तुमने अभी तक उस आदमी का नाम नहीं बताया।” नैना ने सवालिया निगाहों से उसे देखा “उसका नाम क्या है?"
“उ..उसका नाम...।" आलोका हिचकिचाई,? फिर उसने बता दिया “उसका नाम है जानकी लाल।"
"व्हाट?" नैना सकते में आ गई।
“श्री...श्री...।" मदारी के होठों से बेअख्तियार निकला और वह भौंचक्का सा होकर आंखें फाड़-फाड़कर जानकी लाल को देखने लगा “आप?"
उसके चेहरे के जर्रे-जर्रे पर आश्चर्य और अविश्वास के असंख्य भाव आ गए थे।
वह, जो कि सचमुच जानकी लाल था, उसके होठों पर एक रहस्यमय मुस्कराहट उभरी।
“तुमने ठीक पहचाना इंस्पेक्टर ।” जानकी लाल मंद-मंद मुस्कराता हुआ बोला “मैं सचमुच हूं और मुझे जीवित देखकर किसी की
भी यह हालत हो सकती है। लेकिन तुम्हारा इस तरह से चौंकना मेरी समझ से बाहर है।"
"लेकिन क्यों भगवान । मैं क्या इंसानों की श्रेणी में नहीं आता?" मदारी ने पूछा।
“यकीनन आते हो। लेकिन तुम्हारी लिए यह कोई राज नहीं है।” “वह क्यों श्रीमान?"
"क्योंकि तुम इस सच से बखूबी वाकिफ हो।"
___ “कौन से सच से?"
“मेरे जिंदा होने के सच से।" “य...यह आप कैसे कह सकते हैं जजमान?"
"क्योंकि जिस लाश को सारी दुनिया ने मेरी लाश समझा था, वह केवल तुम ही थे जिसने उस पर विश्वास नहीं किया था। इसीलिए तुमने बाद में उस लाश का डीएनए परीक्षण कराया था।"
“आ..आपको यह मालूम है?" मदारी की पहले से फैली आंखें
और ज्यादा फैल गई थीं।
“खेल जब खून का हो तो नजरों को बहुत पैना रखना पड़ता है। और जब सामने तुम्हारे जैसा तनख्वाह की पाई-पाई हलाल करने वाला इंस्पेक्टर हो तो और ज्यादा चौकन्ना रहना पड़ता है। पुलिस की फारेंसिक टीम के उस डॉक्टर गौतम को मेरा डीएनए सैम्पल भी तुम्हीं ने ही उपलब्ध कराया था और तुम्हारी इस कोशिश का रिजल्ट पॉजिटिव आया था।”
“आ..आप तो मेरी सोच से ज्यादा पहुंचे हुए निकले श्री-श्री।" “लिहाजा तुम्हें कबूल करना ही पड़ेगा इंस्पेक्टर कि तुम इस सच से वाकिफ थे कि मैं मरा नहीं जिंदा हूं, और अकेले तुम ही नहीं, मेरा डीएनए टेस्ट करने वाला डॉक्टर गौतम भी इस सच से बाखबर था। यह अलग बात है कि उसने किसी को भी यह नहीं बताया।”
"कैसे बताता श्री-श्री। वह भी आखिर पुलिस के महकमे का आदमी था और फिर वह इंस्पेक्टर मदारी से बाहर नहीं जा सकता था।"
“तब तो तुम्हें यह भी मालूम होगा इंस्पेक्टर कि संजना, संदीप और गोपाल के कत्ल में मेरा ही हाथ था?"
“सरासर मालूम था श्रीमान।" मदारी ने स्वीकार किया “बस जो नहीं मालूम था, वह ये कि उन भद्रजनों के कत्ल आप क्यों कर रहे थे?"
“ओह। लेकिन अब तो तुम्हें मालूम हो गया होगा?"
“सब आपकी रहमत है भगवान।” मदारी नाटकीय स्वर में बोला “लेकिन उसके लिए मुझे बड़ी भयंकर मेहनत करनी पड़ी और आपके साथ-साथ उन तमाम लोगों के अतीत को छलनी से छानकर निकालना पड़ा, जो कि आसान नहीं था। पच्चीस-तीस साल पुराने अतीत को खंगालना आसान कहां होता है? लेकिन खैर, सब बेहतर ढंग से निकल गया और मेरी मुराद पूरी हो गई।"
"लेकिन तुमने यह उजागर क्यों नहीं किया।"
“आपका मतलब है कि आपके जिंदा होने का राज मैंने उजागर क्यों नहीं किया?"
"हां। मेरा यही मतलब था।"
“वह मैंने जानबूझकर नहीं किया था श्रीमान। दरअसल मैं यह उजागर करके आपको चौकन्ना नहीं करना चाहता था। मैं चाहता था कि आप इसी गफलत में बने रहते कि आप इंस्पेक्टर मदारी को गच्चा देने में कामयाब हो गए थे। और फिर लापरवाही में आप कोई ऐसी गलती कर जाते जो मेरे हाथ आपकी गरदन तक पहुंचा देते।"
“तुम्हारा प्लान तो अच्छा था इंस्पेक्टर।” जानकी लाल की मुस्कराहट गहरी हो गई “लेकिन ऐसा हुआ तो नहीं। तुम्हारे हाथ मेरी गरदन तक पहुंच तो न पाए?"
“पुलिस के काम में देर सवेर का होना लाजिमी है श्री-श्री, क्योंकि पुलिस के पास कोई भी वन प्वाइंट प्रोग्राम नहीं होता। वैसे आप चाहें तो यकीन कर लें, आपकी गिरफ्तारी महज वक्त की बात थी। लेकिन...” उसने ठंडी सांस भरी “शुक्र है कि आप खुद ही सामने आ गए और मेरी जहमत कम हो गई।"
"तुम शायद ठीक कह रहे हो इंस्पेक्टर। चोर-सिपाही के खेल में जीत हमेशा सिपाही की ही होती है।"
“अब तो मुझे पूरा विश्वास हो गया श्रीमान कि आप अजर अमर, अविनाशी हैं और अमृत पीकर दुनिया में आए हैं।" मदारी बोला “और आपके दुश्मनों में वह ताकत नहीं है जो आपका बाल भी बांका कर सकें।" सहसा वह ठिठका, फिर वह जानकी लाल को देखता हुआ बोला “लेकिन इस बार आपके दुश्मनों का दांव बहुत जबरदस्त था, इसके बावजूद आप बच निकले. यह करिश्मा आपने आखिर कैसे किया?"
“तुम्हारा सवाल मुनासिब है इंस्पेक्टर।” जानकी लाल ने कहा "और यह सवाल हर जेहन में चीख रहा है। लेकिन शायद तुम यकीन नहीं करोगे, इस बार करिश्मा हुआ था और उसे मैंने अंजाम नहीं दिया था।"
“तो फिर उसे किसने अंजाम दिया था?"
"इत्तेफाक ने।”
"बात कुछ समझ में नहीं आयी जजमान। वह अधजली लाश आखिर किसकी थी, जो मौकाए वारदात पर आपकी कार के करीब मिली थी, और जिसे हर किसी ने आपकी लाश समझा था और जिसका आपकी लाश के तौर पर अन्तिम संस्कार भी किया गया था।
"मुझे नहीं पता।” जानकी लाल सपाट स्वर में बोला “और विश्वास करो, मैंने उसे वहां नहीं पहुंचाया था।"
"तो फिर?"
“मैंने कहा न इंस्पेक्टर, एक बहुत बड़ा इत्तेफाक था। यह सच है कि उस किलर गोपाल का वार निर्णायक था और मेरी कार दुर्घटनाग्रस्त होकर नीचे यमुना में जा गिरी थी। और यहीं से इत्तेफाक का दखल शुरू होता था, जो कि दोहरा इत्तेफाक था।"
"दोहरा इत्तेफाक?” इंस्पेक्टर मदारी के चेहरे पर सस्पेंस के भाव गहरे हो गए थे।
"नैना को तुम क्यों भूल रहे हो इंस्पेक्टर। वह भी तो आखिर उस वक्त मौकाए वारदात पर मौजूद थी और गोपाल की स्कार्पियो के बाद मेरी कार असंतुलित होकर उसकी कार से जा टकराई थी। उसके बाद ही मेरा ड्राइवर कार से अपना संतुलन खो बैठा था और वह हादसा पेश आया था।”
"मुझे याद है।” मदारी ने सहमति में सिर हिलाया “और मेरी तफ्तीश से भी यही साबित हुआ था कि नैना कजरारे का उस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। ऐन उसी समय उनका आपके बराबर से गुजर रहा होना महज एक इत्तेफाक था। मगर दूसरा इत्तेफाक क्या था?"
“वह लाश, जो एक्सीडेंट के बाद मेरी कार के बाहर अधजली हालत में पाई गई। मुझे नहीं पता इंस्पेक्टर कि लगभग मेरे ही उम्र के शख्स की और मेरी ही कद-काठी से मिलती जुलती वह लाश अचानक वहां कैसे आ गई थी और मेरी दुर्घटनाग्रस्त कार से उलझ गई थी, जिसके बाद हालात के मद्देनजर सबने उसे मेरी ही लाश समझा था। लेकिन इस बारे में मेरी अपनी सोच यही है कि वह लाश यमुना में बहती हुई वहां आयी थी और वह उस वक्त वहां किनारे से या तो गुजर रही थी या फिर पहले से अटकी पड़ी थी। जबकि मेरी कार एक्सीडेंट होकर वहां जा गिरी और उसमें आग लग गई।"
“ओहो।” मदारी का सिर समझने वाले भाव से हिला “मगर आप...?”
“मैं पहले ही अपनी साइट के खुले दरवाजे से निकलकर पानी में जा गिरा था। वहां पानी का बहाव बहुत तेज था, जो पलक झपकते मुझे आगे पुल की तरफ बहा ले गया था। और क्योंकि उस वक्त प्रत्यक्षदर्शियों का सारा ध्यान दुर्घटनाग्रस्त कार की तरफ था इसलिए किसी की नजर मुझ पर नहीं पड़ सकी थी और मैं बहता हुआ वहां से दूर निकल गया था।"