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अगले दिन पुलिस चौकी मेहमानों से पूरी भरी हुई थी। वहाँ सुरक्षा का तगड़ा इंतजाम था। कोई भी घटना घटे, उस पर हर तरह से काबू पाया जा सके, पुलिस पूरी तरह तैयार थी। एक कमरे में कुर्सियाँ ऐसे सजाई गयी थी, कि सबका ध्यान एक तरफ रहे। तीन कुर्सियाँ आगे रखी हुई थी। धीरे-धीरे सारी कुर्सियाँ भरने लगी। सामने तीन कुर्सियों में से एक पर नेता सुन्दर लाल अवस्थी, एक पर कमिश्नर साहब और एक पर दैनिक अखबार का मालिक बैठा थे। सब तरफ पत्रकार बैठे थे, जो पूरी तैयारी के साथ कवरेज के लिये आये हुए थे। एक कुर्सी सामने इनके विपरीत दिशा में रखी थी, जिसका मुख इनकी तरफ था, उस पर भाटी आकर बैठ गया।
केस से जुड़े सारे सज्जन वहाँ उपस्थित थे। मसलन राहुल मकरानी, नकली वंशिका, सागर, चंद्रेश मल्होत्रा, सुन्दर लाल अवस्थी, कमिश्नर साहब, निशा औबरॉय, अमन औबरॉय, होटल मैनेजर। टोल नाके पर काम करने वाले कर्मचारी, होटल के कर्मचारी को अलग कमरे में बिठाया गया था। उन लोगों को इन के बारे में जानकारी नहीं थी। इन्हें सब के सामने नहीं लाया गया था। कांस्टेबल शंकर दयाल और राम सेवक बाहर दरवाजे के पास पूरी वर्दी के साथ मौजूद थे।
सब लोग शांति से होने वाली कार्यवाही देख रहे थे। भाटी ने सब लोगों की तरफ देखा, फिर सन्तुष्टि भरे ढंग से कमिश्नर साहब की ओर देखा। कमिश्नर ने आँखों के इशारे से इजाजत दे दी। भाटी उठ खड़ा हुआ। तभी निरंजन कमरे के अन्दर आया और एक कुर्सी पर बैठ गया और भाटी को देखने लगा। कमरे में इतनी शान्ति थी कि सुई गिरे, तो वह भी लगे, सुनाई दे जाये।
भाटी गला खंखारते हुए खड़ा हुआ, “दोस्तो, मैं आज आपको जो कहानी सुना रहा हूँ, उसमें आपको केवल एक ही चीज मिलेगी। और वह है- फरेब। फरेब यानि धोखा। इस कहानी में हर किरदार कहीं न कहीं अपने पार्टनर के साथ फरेब कर रहा है और इसी फरेब के चक्कर मैं एक नहीं दो-दो मर्डर हो गये। पहला मर्डर जैसाकि आप सब जानते हैं, सुमित अवस्थी का और दूसरा मर्डर हुआ, चंद्रेश मल्होत्रा की वाईफ वंशिका मल्होत्रा का।”
यह शब्द सुनते ही चंद्रेश मल्होत्रा कुर्सी से उठ कर खड़ा हो गया और जोर से बोला, “क्या बकवास कर रहे हैं भाटी सर? वंशिका मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती।” चंद्रेश के स्वर में गुस्से और गम के मिश्रित भाव थे।
“यह सच है मिस्टर चंद्रेश, मुझे दुख है कि यह खबर आपको सुनानी पड़ी।” भाटी के स्वर में दर्द उभरा उसने चंद्रेश की तरफ देखा, जिसे इस बात गम था, कि वंशिका नहीं रही, चंद्रेश की आखों से आँसू निकल पड़े।
भाटी ने अपने स्वर को थोड़ा विराम दिया। थोड़ी देर बाद उसने दोबारा बोलना शुरु किया, “इस कहानी में यहाँ बैठे कई लोगों को शॉक लगेगा। कई राजफाश होंगे।” भाटी सब की तरफ देख कर बोला।
“जब वंशिका का मर्डर हो गया, तो यह कौन हैं?” विमल ने उठते हुए कहा।
भाटी ने उसे बैठने का इशारा किया।
“मैं आप सब लोगों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये ही यहाँ उपस्थित हुआ हूँ।” भाटी ने कहा।
सबकी तरफ देख कर वह पुनः बोला, “आप लोग यह जानने के लिये बेचैन होंगे कि यह कौन है?”
भाटी ने नकली वंशिका की तरफ इशारा कर के कहा।
लोगों की गर्दन सहमति में हिली।
वंशिका ऐसी सिचुवेशन में भी मंद-मंद मुस्करा रही थी। चंद्रेश मल्होत्रा गुस्से भरी नजरों से उसे घूर रहा था। उसका जी चाह रहा था कि उसकी गर्दन पकड़ ले, लेकिन इस सिचुवेशन में भी उसकी हँसी देख कर आश्चर्य में था। उसकी हँसी देख कर वह मन ही मन जल भुन रहा था, लेकिन इतने लोगों के बीच कुछ नहीं कह सकता था, इसलिये खामोश था।
“आपकी जानकारी के लिये बता दूँ कि वंशिका मल्होत्रा का असली नाम कोमल श्रीवास्तव है और यह अपने नाम के हिसाब से कोमल नहीं, बल्कि मजबूत किरदार की महिला हैं और यह मिस्टर सागर श्रीवास्तव की धर्मपत्नी हैं। मिस्टर सागर और वंशिका दोनों ही मेरे डिपार्टमेंट के काबिल ऑफिसर हैं। कोमल श्रीवास्तव को अभिनय का भी शौक है, जिसका शानदार नमूना मिस्टर चंद्रेश मल्होत्रा देख चुके हैं।” भाटी ने दोनों की तरफ इशारा कर के कहा।
दोनों ने खड़े होकर सबका अभिवादन किया। कमिश्नर का सिर हौले से सहमति में हिला। यह शब्द सुनते ही चंद्रेश को जोरदार झटका लगा। वह सीधे अर्श से फर्श पर आ गया।
उसे विश्वास नहीं हो रहा था, भाटी जो कह रहा है वह सच है। वह हड़बड़ा कर खड़ा हो गया, “क्या कह रहे हो भाटी साहब? ये दोनों पुलिस में हैं और पति पत्नी हैं?”
“बैठ जाओ मिस्टर चंद्रेश मल्होत्रा, अभी तो आप लोगों को इसी तरह कई बड़े झटके लगने वालें हैं।” भाटी ने शांत स्वर में कहा।
चंद्रेश अविश्वास से दोनों को देख कर बैठ गया। उसने बेचैनी से कुर्सी पर पहलू बदला। यह उसके लिये बहुत बड़ा झटका था। या यूँ कहो सदमा था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि भाटी ने जो बात की, वह सच हैं। (अब हम जान चुके हैं कि वंशिका का नाम कोमल श्रीवास्तव है। तो हम उन्हें कोमल के नाम से ही संबोधित करेंगे।) कोमल का ध्यान चंद्रेश की तरफ नहीं था। वह बस भाटी की तरफ देखे जा रही थी। सब का ध्यान वापस भाटी की तरफ आकर्षित हो गया। भाटी ने अपनी बात आगे बढ़ाई, “दोस्तो, जब सुमित अवस्थी का मर्डर हुआ, उसके दो दिन बाद ही वंशिका अपने घर से गायब हो गयी। हमें उस समय उन लोगों पर शक था, जो उस समय गायब हुए या उस समय शहर छोड़कर गये। ऐसे दस नाम हमारे जहन में थे। सबके बारे में छानबीन कराई, तो हमारी नजर वंशिका मल्होत्रा और चंद्रेश मल्होत्रा पर टिकी। दूसरा हमारा ध्यान एक और कारण से इस और गया क्योंकि चंद्रेश मल्होत्रा ने अपनी वाईफ के गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में नहीं लिखवाई जो कि किसी भी तरह जायज नहीं था, क्योंकि हमें पूछ्ताछ में पता चला यह अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते थे। हमें शक हुआ कि चंद्रेश ने अपनी पत्नी का मर्डर कर लाश ठिकाने लगा दी है, तो मैंने एक प्लान बनाया, जिसमें मुझे दो जांबाज साथियों की जरूरत थी, जो हर परिस्थिति से मुकाबला कर सके, जिसमें एक लड़की की जरुरत पड़ी, जो निडर और एक्टिंग में माहिर हो, जिसे जासूसी में थोड़ा नालेज हो। मुझे दूर तक ऐसा कोई नहीं दिखायी दिया, क्योंकि मैं लोकल को लेकर प्लान लीक नहीं करना चाहता था। मैंने कमिश्नर साहब से बात की तो इन्होंने दो नायाब नगीने मुझे सौपें। दोनों सब-इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुए, दोनों बहुत ही समझदार थे, जल्द ही पूरी बात समझ गये, तो ड्रामा शुरू हो गया। यह बात मुझे मेरे जूनियर निरंजन से भी छुपानी पड़ी ताकि नाटक रियल लगे। इसलिये पहली बार जब चंद्रेश मल्होत्रा मेरे पास आया, तो मैंने निरंजन को भेजा, ताकि नाटक कामयाब लगे। दूसरी बात, हमें सुमित अवस्थी के पास जो भी सबूत मिले, वह चंद्रेश को ही कातिल साबित कर रहे थे। यानि एक ड्रामे से दो मर्डर केस का पर्दाफाश होना था।” यह कह कर भाटी थोड़ा रुका।
टेबल में रखे जग में से पानी गिलास में डाला और पीने लगा। सब चुपचाप कहानी सुन रहे थे। निरंजन का चेहरा देखने लायक था, उसका मुँह खुला का खुला था। वह सोच भी नहीं सकता था कि वह किसी ड्रामे का हिस्सा रहा, अपनी मर्जी के खिलाफ।
भाटी उसको देख कर मुस्कुराया, “मैंने किसी का खून नहीं किया?” चंद्रेश चिल्लाया।
“शांत रहिये आप। कहानी तो अब शुरु हो रही है मिस्टर चंद्रेश।” भाटी ने शान्त स्वर में कहा। चंद्रेश वापस कुर्सी पर बैठ गया, लेकिन उसकी हालत किसी भी तरह सही नहीं थी।
भाटी सबको देख कर बोला, “मैं आज आप लोगों को एक कहानी सुनाता हूँ। इस कहानी मैं आपको प्यार, नफरत, फरेब, धोखा सब कुछ मिलेगा। इस कहानी में कदम कदम पर लोग एक-दूसरे को फरेब दे रहे हैं। कहानी शुरू होती हैं। कॉलेज से, जहाँ एक जोड़ा आपस में बहुत प्यार करता था। उस जोड़े का नाम था वंशिका और चंद्रेश मल्होत्रा। इन लोगों का प्यार फल फूल रहा था, तो कई लोगों की बुरी नजरों में भी वह प्यार था। इस प्यार को ग्रहण तब लगा, जब सुमित अवस्थी की नजर वंशिका पर पड़ी। वह वंशिका पर फिदा हो गया। वह वंशिका को मन ही मन चाहने लगा, क्योंकि वंशिका चंद्रेश से प्यार करती थी और सुमित अवस्थी की कॉलेज में स्थिति अच्छी नहीं थी। लोगों की नजरों में उसकी छवि एक अय्याश व्यक्ति की थी तो वंशिका ने उसे घास नहीं डाली। वैसे इलेक्शन हारने के बाद सुमित अवस्थी ने अपने आपको बदला। कॉलेज में उसकी गुन्डागर्दी बन्द हो गयी। वह चंद्रेश मल्होत्रा के करीब आ गया, लेकिन फिर भी उसकी सारी कोशिशें वंशिका को इम्प्रेस करने की बेकार गयी। दूसरी तरफ निशा कोठारी, जो मन ही मन चंद्रेश को चाहती थी और वह चाहती थी, कि वंशिका और चंद्रेश की जोड़ी टूट जाये, जिसकी उसने बहुत कोशिश की, परन्तु कामयाब नहीं हो पायी। यहाँ तक इलेक्शन के समय में वो चंद्रेश और वंशिका का साथ दे रही थी पर अन्दर ही अन्दर वह चंद्रेश का वोट बैंक तोड़ रही थी। अन्दर ही अन्दर वो चंद्रेश के खिलाफ थी, क्योंकि चंद्रेश की कॉलेज में रेप्यूटेशन सुमित के मुकाबले अच्छी थी, तो चंद्रेश इलेक्शन जीत गया। इसी बीच सुमित अवस्थी और निशा के बीच की दूरियाँ खत्म हुई। निशा पर भेद खुला कि सुमित अवस्थी और चंद्रेश की नहीं बनती हैं, तो उसने सुमित अवस्थी पर डोरे डालने शुरू किये। उसे अपने रंग-रुप के जाल में फँसाया और एक प्लान बनाया, जिसमें वंशिका की नजरों में यह साबित हो जाये कि चंद्रेश आवारा किस्म का लड़का है और उसके कई और लड़कियों से भी संबंध हैं। इस ड्रामे को रंग देने के लिये निशा ने सुमित अवस्थी के सामने शर्त रखी कि यदि वंशिका और चंद्रेश अलग हो जाते हैं तो मैं तुमकों हासिल हो जाऊँगी। निशा नहीं जानती थी कि सुमित अवस्थी भी मन ही मन वंशिका को चाहता है। सुमित अवस्थी के लिये यह प्लान दोनों हाथों में लड्डू जाने जैसा था। एक तरफ निशा की खूबसुरत जवानी उसे हासिल थी ,तो दूसरी तरफ उसके रास्ते का रोड़ा चंद्रेश उसके रास्ते से हट रहा था। उसने प्लान में हामी भर दी। निशा और सुमित नहीं जानते थे कि उनके इस प्लान का राजदार एक व्यक्ति और हो गया था। मिस्टर विमल, जिसने सुमित और निशा के प्लान का एक-एक हिस्सा सुना। पूरा प्लान शानदार ढंग से कामयाब हो गया, पर उस प्लान में दूध में में मक्खी की तरह गिरा विमल, उसने वंशिका को सारी हकीकत से रू-ब-रु करा दिया। विमल की वजह से वंशिका और चंद्रेश की जोड़ी टूटते-टूटते बची। वंशिका और चंद्रेश को जब यह अहसास हुआ कि इनके पीछे कई लोगों की नजरें है, तो चंद्रेश ने तुरन्त वंशिका से शादी कर ली। उस शादी में सुमित और निशा शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने गिफ्ट भेज कर मॉफी माँग ली। साल भर तक कॉलेज में सब नॉर्मल रहा। कॉलेज खत्म होने के बाद सब अपनी अपनी राह पर लग गये। दोस्तो, यह कहानी का एक पड़ाव था।” कहकर भाटी रुका।
उसकी नजरें सब तरफ थी। कई लोग बेचैनी से उसे देख रहे थे, तो कई लोगों में सामान्य भाव था। कोई गुस्से को दबा रहा था। भाटी ने वापस गिलास भरा और पानी से अपना गला तर किया। फिर आगे बोला, “अब कहानी का दूसरा पढ़ाव। चंद्रेश और वंशिका की लाईफ अच्छी चल रही थी। साल दो साल दोनों में बहुत प्यार रहा। फिर धीरे-धीरे चंद्रेश अपने व्यापार में रम गया। अब उसका ध्यान पैसा कमाने में ज्यादा लग गया। उसका घर आने का कोई टाइम टेबल न रहा। अधिकतर वह लेट घर आता और थका हुआ होता, तो आकर सो जाता। उसका वंशिका की तरफ ध्यान कुछ कम हो गया। दूसरी तरफ वंशिका चाहती थी कि चंद्रेश उसे उसी तरह प्यार करे। धीरे-धीरे दोनों के मध्य तकरार होने लगी। कई बार यह झगड़ा गंभीर रुप ले लेता। घर में वंशिका अकेली होती, तो घर उसे काटने को दौड़ता। जब उसने देखा कि चंद्रेश का ध्यान उसकी और नहीं रहता, तो उसने अपना ध्यान घूमने में लगा दिया। एक दिन इत्तेफाक से उसे मार्केट में एक कॉलेज का साथी मिल गया। दोनों की धीरे-धीरे मुलाकात होने लगी। वंशिका का धीरे-धीरे उससे झुकाव हो गया। दोनों होटलों में मिलने लगे। उनके बीच की सब दीवारें टूट गयी। आखिर यह बात भी कहाँ छुपती हैं। एक दिन दोनों को होटल में निशा ओबरॉय ने देख लिया। उसके आला दिमाग में चंद्रेश को फिर से पाने की योजना बनने लगी। इस काम को वह अकेले अन्जाम नहीं दे सकती थी, तो उसने तलाश शुरू की, कि कौन उसका साथ दे सकता हैं? उसकी तलाश एक दिन अचानक खत्म हुई। उसके कॉलेज के साथी- सुमित अवस्थी पर, चूंकि सुमित खुद एक अमीर आदमी था, उसे पैसे की कमी नहीं थी और निशा के पास भी पैसे की कमी नहीं थी, तो उसने अपना कामयाब हथियार, अपने रूप और यौवन का सहारा लिया। चूँकि सुमित अवस्थी अय्याश था, साथ ही उसने पहले ही निशा के यौवन का स्वाद चख लिया था और वह वंशिका को भी चाहता था, तो वापस पुरानी कहानी दोहराई गयी। इस बार उन के बीच में विमल नहीं था, जो उनकी योजना खराब कर देता। सुमित अवस्थी ने अपने पैसे के बल पर जिस होटल में वंशिका और उसका मित्र जाते थे, वहाँ पर गुप्त कैमरे लगाकर उनकी अंतरंग वीडियो और तस्वीर कैद कर ली। वंशिका और उसके मित्र इस बात से अन्जान थे। सुमित और निशा का प्लान पूरी तरह कामयाब रहा। अब जरुरत थी प्लान को आगे बढ़ाने की। सुमित ने उस तस्वीरों और वीडियो के डर से वंशिका को ब्लैकमेंल करना शुरु किया। वंशिका को डर था कि यह बात चंद्रेश तक नहीं पहुँच जाये कि उसकी बीवी उसके साथ फरेब कर रही है। सो उसने सुमित के सामने पैसे की डिमांड रखी। जितना उसे चाहिये वह ले ले। लेकिन सुमित को पैसे की कमी नहीं थी। वह तो केवल वंशिका के रूप का दीवाना था। उसने वंशिका के सामने ऐसी शर्त रखी कि वंशिका ने उसे गुस्से में इनकार कर दिया, क्योंकि वह कोई बाजारू औरत नहीं थी, जो किसी के सामने यूँ ही बिछ जाती। बाजी सुमित के हाथ में थी, सो वह बेबस थी। निशा ने अभी तक अपने आपको इस मामले से दूर रख रखा था। उसका कार्य सुमित कर रहा था। वह सुमित का साथ दे रही थी। दूसरी तरफ सुमित जो चाहता था, वह निशा से ले चुका था और वंशिका से वह चाहता था। उसने अपनी बात मानने के लिये वंशिका को तीन दिन का समय दिया। मजबूरी में वंशिका ने यह बात अपने मित्र को बताई। उसका मित्र क्रोध से पागल हो गया। उसने सुमित को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। प्लान के मुताबिक वंशिका को सुमित की बात मान कर उसे खूब शराब पिलानी है। फिर जब वह ज्यादा नशे में हो जाये, तो उसका काम तमाम का बन्दोबस्त करना था। वंशिका और उसके प्रेमी का प्लान कामयाब हो गया। वंशिका ने उसके साथ रात गुजारने की हाँ कर दी। सुमित हद से ज्यादा खुश हो गया। उसी खुशी में उसने उस रात खूब जश्न मनाया। वंशिका ने सुमित को खूब छ्क कर शराब पिलाई और खुद भी पीने का नाटक किया। जब सुमित हद से ज्यादा नशे में हो गया, तो वंशिका उसे उसी की कार में बैठा कर होटल से बाहर लेकर आयी। यह सारी फुटेज सी.सी. टी.वी. के कैमरे में कैद हो गयी थी। वंशिका ने नशे में चूर सुमित को पीछे बैठाया और गाड़ी आगे बढ़ा दी। वह इस काम को अकेले अन्जाम नहीं दे सकती थी। उसने अपने मित्र को फोन कर के पहले ही प्लान बता दिया था। उसका मित्र थोड़ी देर में उनके साथ हो गया। दोनों गाड़ी लेकर सात घूम वाले रास्तें पर पहुँचे, जहाँ उन्हें इस सारी साजिश को अन्जाम देना था। सात घूम पर पहुँच कर इन्होंने ऐसा साबित करने की कोशिश की, कि अत्याधिक नशे में होने के कारण सुमित अवस्थी ने कार पेड़ से भिड़ा दी और उछल कर जीप से बाहर गिरा और पत्थर से टकरा कर उसकी मौत हो गयी। तभी वंशिका के दिमाग में एक फितुर आया कि इस एक्सीडेन्ट को मर्डर साबित किया जाये और उसका इल्जाम चंद्रेश मल्होत्रा पर आ जाये, जिससे उनके रास्ते का काँटा हमेशा के लिये दूर हो जाये। चंद्रेश मल्होत्रा के फाँसी पर चढ़ने या जेल जाने के कुछ समय बाद इनका आपस में शादी का प्लान था।
केस से जुड़े सारे सज्जन वहाँ उपस्थित थे। मसलन राहुल मकरानी, नकली वंशिका, सागर, चंद्रेश मल्होत्रा, सुन्दर लाल अवस्थी, कमिश्नर साहब, निशा औबरॉय, अमन औबरॉय, होटल मैनेजर। टोल नाके पर काम करने वाले कर्मचारी, होटल के कर्मचारी को अलग कमरे में बिठाया गया था। उन लोगों को इन के बारे में जानकारी नहीं थी। इन्हें सब के सामने नहीं लाया गया था। कांस्टेबल शंकर दयाल और राम सेवक बाहर दरवाजे के पास पूरी वर्दी के साथ मौजूद थे।
सब लोग शांति से होने वाली कार्यवाही देख रहे थे। भाटी ने सब लोगों की तरफ देखा, फिर सन्तुष्टि भरे ढंग से कमिश्नर साहब की ओर देखा। कमिश्नर ने आँखों के इशारे से इजाजत दे दी। भाटी उठ खड़ा हुआ। तभी निरंजन कमरे के अन्दर आया और एक कुर्सी पर बैठ गया और भाटी को देखने लगा। कमरे में इतनी शान्ति थी कि सुई गिरे, तो वह भी लगे, सुनाई दे जाये।
भाटी गला खंखारते हुए खड़ा हुआ, “दोस्तो, मैं आज आपको जो कहानी सुना रहा हूँ, उसमें आपको केवल एक ही चीज मिलेगी। और वह है- फरेब। फरेब यानि धोखा। इस कहानी में हर किरदार कहीं न कहीं अपने पार्टनर के साथ फरेब कर रहा है और इसी फरेब के चक्कर मैं एक नहीं दो-दो मर्डर हो गये। पहला मर्डर जैसाकि आप सब जानते हैं, सुमित अवस्थी का और दूसरा मर्डर हुआ, चंद्रेश मल्होत्रा की वाईफ वंशिका मल्होत्रा का।”
यह शब्द सुनते ही चंद्रेश मल्होत्रा कुर्सी से उठ कर खड़ा हो गया और जोर से बोला, “क्या बकवास कर रहे हैं भाटी सर? वंशिका मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती।” चंद्रेश के स्वर में गुस्से और गम के मिश्रित भाव थे।
“यह सच है मिस्टर चंद्रेश, मुझे दुख है कि यह खबर आपको सुनानी पड़ी।” भाटी के स्वर में दर्द उभरा उसने चंद्रेश की तरफ देखा, जिसे इस बात गम था, कि वंशिका नहीं रही, चंद्रेश की आखों से आँसू निकल पड़े।
भाटी ने अपने स्वर को थोड़ा विराम दिया। थोड़ी देर बाद उसने दोबारा बोलना शुरु किया, “इस कहानी में यहाँ बैठे कई लोगों को शॉक लगेगा। कई राजफाश होंगे।” भाटी सब की तरफ देख कर बोला।
“जब वंशिका का मर्डर हो गया, तो यह कौन हैं?” विमल ने उठते हुए कहा।
भाटी ने उसे बैठने का इशारा किया।
“मैं आप सब लोगों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये ही यहाँ उपस्थित हुआ हूँ।” भाटी ने कहा।
सबकी तरफ देख कर वह पुनः बोला, “आप लोग यह जानने के लिये बेचैन होंगे कि यह कौन है?”
भाटी ने नकली वंशिका की तरफ इशारा कर के कहा।
लोगों की गर्दन सहमति में हिली।
वंशिका ऐसी सिचुवेशन में भी मंद-मंद मुस्करा रही थी। चंद्रेश मल्होत्रा गुस्से भरी नजरों से उसे घूर रहा था। उसका जी चाह रहा था कि उसकी गर्दन पकड़ ले, लेकिन इस सिचुवेशन में भी उसकी हँसी देख कर आश्चर्य में था। उसकी हँसी देख कर वह मन ही मन जल भुन रहा था, लेकिन इतने लोगों के बीच कुछ नहीं कह सकता था, इसलिये खामोश था।
“आपकी जानकारी के लिये बता दूँ कि वंशिका मल्होत्रा का असली नाम कोमल श्रीवास्तव है और यह अपने नाम के हिसाब से कोमल नहीं, बल्कि मजबूत किरदार की महिला हैं और यह मिस्टर सागर श्रीवास्तव की धर्मपत्नी हैं। मिस्टर सागर और वंशिका दोनों ही मेरे डिपार्टमेंट के काबिल ऑफिसर हैं। कोमल श्रीवास्तव को अभिनय का भी शौक है, जिसका शानदार नमूना मिस्टर चंद्रेश मल्होत्रा देख चुके हैं।” भाटी ने दोनों की तरफ इशारा कर के कहा।
दोनों ने खड़े होकर सबका अभिवादन किया। कमिश्नर का सिर हौले से सहमति में हिला। यह शब्द सुनते ही चंद्रेश को जोरदार झटका लगा। वह सीधे अर्श से फर्श पर आ गया।
उसे विश्वास नहीं हो रहा था, भाटी जो कह रहा है वह सच है। वह हड़बड़ा कर खड़ा हो गया, “क्या कह रहे हो भाटी साहब? ये दोनों पुलिस में हैं और पति पत्नी हैं?”
“बैठ जाओ मिस्टर चंद्रेश मल्होत्रा, अभी तो आप लोगों को इसी तरह कई बड़े झटके लगने वालें हैं।” भाटी ने शांत स्वर में कहा।
चंद्रेश अविश्वास से दोनों को देख कर बैठ गया। उसने बेचैनी से कुर्सी पर पहलू बदला। यह उसके लिये बहुत बड़ा झटका था। या यूँ कहो सदमा था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि भाटी ने जो बात की, वह सच हैं। (अब हम जान चुके हैं कि वंशिका का नाम कोमल श्रीवास्तव है। तो हम उन्हें कोमल के नाम से ही संबोधित करेंगे।) कोमल का ध्यान चंद्रेश की तरफ नहीं था। वह बस भाटी की तरफ देखे जा रही थी। सब का ध्यान वापस भाटी की तरफ आकर्षित हो गया। भाटी ने अपनी बात आगे बढ़ाई, “दोस्तो, जब सुमित अवस्थी का मर्डर हुआ, उसके दो दिन बाद ही वंशिका अपने घर से गायब हो गयी। हमें उस समय उन लोगों पर शक था, जो उस समय गायब हुए या उस समय शहर छोड़कर गये। ऐसे दस नाम हमारे जहन में थे। सबके बारे में छानबीन कराई, तो हमारी नजर वंशिका मल्होत्रा और चंद्रेश मल्होत्रा पर टिकी। दूसरा हमारा ध्यान एक और कारण से इस और गया क्योंकि चंद्रेश मल्होत्रा ने अपनी वाईफ के गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में नहीं लिखवाई जो कि किसी भी तरह जायज नहीं था, क्योंकि हमें पूछ्ताछ में पता चला यह अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते थे। हमें शक हुआ कि चंद्रेश ने अपनी पत्नी का मर्डर कर लाश ठिकाने लगा दी है, तो मैंने एक प्लान बनाया, जिसमें मुझे दो जांबाज साथियों की जरूरत थी, जो हर परिस्थिति से मुकाबला कर सके, जिसमें एक लड़की की जरुरत पड़ी, जो निडर और एक्टिंग में माहिर हो, जिसे जासूसी में थोड़ा नालेज हो। मुझे दूर तक ऐसा कोई नहीं दिखायी दिया, क्योंकि मैं लोकल को लेकर प्लान लीक नहीं करना चाहता था। मैंने कमिश्नर साहब से बात की तो इन्होंने दो नायाब नगीने मुझे सौपें। दोनों सब-इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुए, दोनों बहुत ही समझदार थे, जल्द ही पूरी बात समझ गये, तो ड्रामा शुरू हो गया। यह बात मुझे मेरे जूनियर निरंजन से भी छुपानी पड़ी ताकि नाटक रियल लगे। इसलिये पहली बार जब चंद्रेश मल्होत्रा मेरे पास आया, तो मैंने निरंजन को भेजा, ताकि नाटक कामयाब लगे। दूसरी बात, हमें सुमित अवस्थी के पास जो भी सबूत मिले, वह चंद्रेश को ही कातिल साबित कर रहे थे। यानि एक ड्रामे से दो मर्डर केस का पर्दाफाश होना था।” यह कह कर भाटी थोड़ा रुका।
टेबल में रखे जग में से पानी गिलास में डाला और पीने लगा। सब चुपचाप कहानी सुन रहे थे। निरंजन का चेहरा देखने लायक था, उसका मुँह खुला का खुला था। वह सोच भी नहीं सकता था कि वह किसी ड्रामे का हिस्सा रहा, अपनी मर्जी के खिलाफ।
भाटी उसको देख कर मुस्कुराया, “मैंने किसी का खून नहीं किया?” चंद्रेश चिल्लाया।
“शांत रहिये आप। कहानी तो अब शुरु हो रही है मिस्टर चंद्रेश।” भाटी ने शान्त स्वर में कहा। चंद्रेश वापस कुर्सी पर बैठ गया, लेकिन उसकी हालत किसी भी तरह सही नहीं थी।
भाटी सबको देख कर बोला, “मैं आज आप लोगों को एक कहानी सुनाता हूँ। इस कहानी मैं आपको प्यार, नफरत, फरेब, धोखा सब कुछ मिलेगा। इस कहानी में कदम कदम पर लोग एक-दूसरे को फरेब दे रहे हैं। कहानी शुरू होती हैं। कॉलेज से, जहाँ एक जोड़ा आपस में बहुत प्यार करता था। उस जोड़े का नाम था वंशिका और चंद्रेश मल्होत्रा। इन लोगों का प्यार फल फूल रहा था, तो कई लोगों की बुरी नजरों में भी वह प्यार था। इस प्यार को ग्रहण तब लगा, जब सुमित अवस्थी की नजर वंशिका पर पड़ी। वह वंशिका पर फिदा हो गया। वह वंशिका को मन ही मन चाहने लगा, क्योंकि वंशिका चंद्रेश से प्यार करती थी और सुमित अवस्थी की कॉलेज में स्थिति अच्छी नहीं थी। लोगों की नजरों में उसकी छवि एक अय्याश व्यक्ति की थी तो वंशिका ने उसे घास नहीं डाली। वैसे इलेक्शन हारने के बाद सुमित अवस्थी ने अपने आपको बदला। कॉलेज में उसकी गुन्डागर्दी बन्द हो गयी। वह चंद्रेश मल्होत्रा के करीब आ गया, लेकिन फिर भी उसकी सारी कोशिशें वंशिका को इम्प्रेस करने की बेकार गयी। दूसरी तरफ निशा कोठारी, जो मन ही मन चंद्रेश को चाहती थी और वह चाहती थी, कि वंशिका और चंद्रेश की जोड़ी टूट जाये, जिसकी उसने बहुत कोशिश की, परन्तु कामयाब नहीं हो पायी। यहाँ तक इलेक्शन के समय में वो चंद्रेश और वंशिका का साथ दे रही थी पर अन्दर ही अन्दर वह चंद्रेश का वोट बैंक तोड़ रही थी। अन्दर ही अन्दर वो चंद्रेश के खिलाफ थी, क्योंकि चंद्रेश की कॉलेज में रेप्यूटेशन सुमित के मुकाबले अच्छी थी, तो चंद्रेश इलेक्शन जीत गया। इसी बीच सुमित अवस्थी और निशा के बीच की दूरियाँ खत्म हुई। निशा पर भेद खुला कि सुमित अवस्थी और चंद्रेश की नहीं बनती हैं, तो उसने सुमित अवस्थी पर डोरे डालने शुरू किये। उसे अपने रंग-रुप के जाल में फँसाया और एक प्लान बनाया, जिसमें वंशिका की नजरों में यह साबित हो जाये कि चंद्रेश आवारा किस्म का लड़का है और उसके कई और लड़कियों से भी संबंध हैं। इस ड्रामे को रंग देने के लिये निशा ने सुमित अवस्थी के सामने शर्त रखी कि यदि वंशिका और चंद्रेश अलग हो जाते हैं तो मैं तुमकों हासिल हो जाऊँगी। निशा नहीं जानती थी कि सुमित अवस्थी भी मन ही मन वंशिका को चाहता है। सुमित अवस्थी के लिये यह प्लान दोनों हाथों में लड्डू जाने जैसा था। एक तरफ निशा की खूबसुरत जवानी उसे हासिल थी ,तो दूसरी तरफ उसके रास्ते का रोड़ा चंद्रेश उसके रास्ते से हट रहा था। उसने प्लान में हामी भर दी। निशा और सुमित नहीं जानते थे कि उनके इस प्लान का राजदार एक व्यक्ति और हो गया था। मिस्टर विमल, जिसने सुमित और निशा के प्लान का एक-एक हिस्सा सुना। पूरा प्लान शानदार ढंग से कामयाब हो गया, पर उस प्लान में दूध में में मक्खी की तरह गिरा विमल, उसने वंशिका को सारी हकीकत से रू-ब-रु करा दिया। विमल की वजह से वंशिका और चंद्रेश की जोड़ी टूटते-टूटते बची। वंशिका और चंद्रेश को जब यह अहसास हुआ कि इनके पीछे कई लोगों की नजरें है, तो चंद्रेश ने तुरन्त वंशिका से शादी कर ली। उस शादी में सुमित और निशा शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने गिफ्ट भेज कर मॉफी माँग ली। साल भर तक कॉलेज में सब नॉर्मल रहा। कॉलेज खत्म होने के बाद सब अपनी अपनी राह पर लग गये। दोस्तो, यह कहानी का एक पड़ाव था।” कहकर भाटी रुका।
उसकी नजरें सब तरफ थी। कई लोग बेचैनी से उसे देख रहे थे, तो कई लोगों में सामान्य भाव था। कोई गुस्से को दबा रहा था। भाटी ने वापस गिलास भरा और पानी से अपना गला तर किया। फिर आगे बोला, “अब कहानी का दूसरा पढ़ाव। चंद्रेश और वंशिका की लाईफ अच्छी चल रही थी। साल दो साल दोनों में बहुत प्यार रहा। फिर धीरे-धीरे चंद्रेश अपने व्यापार में रम गया। अब उसका ध्यान पैसा कमाने में ज्यादा लग गया। उसका घर आने का कोई टाइम टेबल न रहा। अधिकतर वह लेट घर आता और थका हुआ होता, तो आकर सो जाता। उसका वंशिका की तरफ ध्यान कुछ कम हो गया। दूसरी तरफ वंशिका चाहती थी कि चंद्रेश उसे उसी तरह प्यार करे। धीरे-धीरे दोनों के मध्य तकरार होने लगी। कई बार यह झगड़ा गंभीर रुप ले लेता। घर में वंशिका अकेली होती, तो घर उसे काटने को दौड़ता। जब उसने देखा कि चंद्रेश का ध्यान उसकी और नहीं रहता, तो उसने अपना ध्यान घूमने में लगा दिया। एक दिन इत्तेफाक से उसे मार्केट में एक कॉलेज का साथी मिल गया। दोनों की धीरे-धीरे मुलाकात होने लगी। वंशिका का धीरे-धीरे उससे झुकाव हो गया। दोनों होटलों में मिलने लगे। उनके बीच की सब दीवारें टूट गयी। आखिर यह बात भी कहाँ छुपती हैं। एक दिन दोनों को होटल में निशा ओबरॉय ने देख लिया। उसके आला दिमाग में चंद्रेश को फिर से पाने की योजना बनने लगी। इस काम को वह अकेले अन्जाम नहीं दे सकती थी, तो उसने तलाश शुरू की, कि कौन उसका साथ दे सकता हैं? उसकी तलाश एक दिन अचानक खत्म हुई। उसके कॉलेज के साथी- सुमित अवस्थी पर, चूंकि सुमित खुद एक अमीर आदमी था, उसे पैसे की कमी नहीं थी और निशा के पास भी पैसे की कमी नहीं थी, तो उसने अपना कामयाब हथियार, अपने रूप और यौवन का सहारा लिया। चूँकि सुमित अवस्थी अय्याश था, साथ ही उसने पहले ही निशा के यौवन का स्वाद चख लिया था और वह वंशिका को भी चाहता था, तो वापस पुरानी कहानी दोहराई गयी। इस बार उन के बीच में विमल नहीं था, जो उनकी योजना खराब कर देता। सुमित अवस्थी ने अपने पैसे के बल पर जिस होटल में वंशिका और उसका मित्र जाते थे, वहाँ पर गुप्त कैमरे लगाकर उनकी अंतरंग वीडियो और तस्वीर कैद कर ली। वंशिका और उसके मित्र इस बात से अन्जान थे। सुमित और निशा का प्लान पूरी तरह कामयाब रहा। अब जरुरत थी प्लान को आगे बढ़ाने की। सुमित ने उस तस्वीरों और वीडियो के डर से वंशिका को ब्लैकमेंल करना शुरु किया। वंशिका को डर था कि यह बात चंद्रेश तक नहीं पहुँच जाये कि उसकी बीवी उसके साथ फरेब कर रही है। सो उसने सुमित के सामने पैसे की डिमांड रखी। जितना उसे चाहिये वह ले ले। लेकिन सुमित को पैसे की कमी नहीं थी। वह तो केवल वंशिका के रूप का दीवाना था। उसने वंशिका के सामने ऐसी शर्त रखी कि वंशिका ने उसे गुस्से में इनकार कर दिया, क्योंकि वह कोई बाजारू औरत नहीं थी, जो किसी के सामने यूँ ही बिछ जाती। बाजी सुमित के हाथ में थी, सो वह बेबस थी। निशा ने अभी तक अपने आपको इस मामले से दूर रख रखा था। उसका कार्य सुमित कर रहा था। वह सुमित का साथ दे रही थी। दूसरी तरफ सुमित जो चाहता था, वह निशा से ले चुका था और वंशिका से वह चाहता था। उसने अपनी बात मानने के लिये वंशिका को तीन दिन का समय दिया। मजबूरी में वंशिका ने यह बात अपने मित्र को बताई। उसका मित्र क्रोध से पागल हो गया। उसने सुमित को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। प्लान के मुताबिक वंशिका को सुमित की बात मान कर उसे खूब शराब पिलानी है। फिर जब वह ज्यादा नशे में हो जाये, तो उसका काम तमाम का बन्दोबस्त करना था। वंशिका और उसके प्रेमी का प्लान कामयाब हो गया। वंशिका ने उसके साथ रात गुजारने की हाँ कर दी। सुमित हद से ज्यादा खुश हो गया। उसी खुशी में उसने उस रात खूब जश्न मनाया। वंशिका ने सुमित को खूब छ्क कर शराब पिलाई और खुद भी पीने का नाटक किया। जब सुमित हद से ज्यादा नशे में हो गया, तो वंशिका उसे उसी की कार में बैठा कर होटल से बाहर लेकर आयी। यह सारी फुटेज सी.सी. टी.वी. के कैमरे में कैद हो गयी थी। वंशिका ने नशे में चूर सुमित को पीछे बैठाया और गाड़ी आगे बढ़ा दी। वह इस काम को अकेले अन्जाम नहीं दे सकती थी। उसने अपने मित्र को फोन कर के पहले ही प्लान बता दिया था। उसका मित्र थोड़ी देर में उनके साथ हो गया। दोनों गाड़ी लेकर सात घूम वाले रास्तें पर पहुँचे, जहाँ उन्हें इस सारी साजिश को अन्जाम देना था। सात घूम पर पहुँच कर इन्होंने ऐसा साबित करने की कोशिश की, कि अत्याधिक नशे में होने के कारण सुमित अवस्थी ने कार पेड़ से भिड़ा दी और उछल कर जीप से बाहर गिरा और पत्थर से टकरा कर उसकी मौत हो गयी। तभी वंशिका के दिमाग में एक फितुर आया कि इस एक्सीडेन्ट को मर्डर साबित किया जाये और उसका इल्जाम चंद्रेश मल्होत्रा पर आ जाये, जिससे उनके रास्ते का काँटा हमेशा के लिये दूर हो जाये। चंद्रेश मल्होत्रा के फाँसी पर चढ़ने या जेल जाने के कुछ समय बाद इनका आपस में शादी का प्लान था।