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' किसका मैसेज है ?'
'पार्टी हाईकमान का।'
'पार्टी हाईकमान का।'
' हां। प्लीज...शीघ्रता करें, यदि आपने देर की तो हाईकमान को मैं जवाब न दे सकूँगा।'
सैक्रेटरी ने देखा।
लिफाफे पर लाल स्याही से अर्जेट लिया था। नीचे दुग्गल का नाम।
पार्टी हाईकमान के नाम पर सैक्रेटरी घबराया हुआ सीढ़ियां चढ़कर मंच पर जा पहुंचा।
दुग्गल का भाषण आरंभ हो चुका था।
फिर भी सैक्रेटरी ने लिफाफा माइकी के पीछे रखे स्टैंड पर रख दिया। जिस पर दोनों हाथ टिकाए
दुग्गल भाषण दे रहा था।
' सर ... हाईकमान का इम्पोर्टेट मैसेज है।' पीछे हटता हुआ वह धीमे स्वर में बोला।'
दुग्गल ने अपना भाषण जारी रखते हुए धीरे-से लिफाफा उठाकर फाड़ाऔर अन्दर रखी स्लिप निकालकर डेस्की पर रख ली वह जल्दबाजी में कोई काम नहीं कर रहा था।
उसके भाषण का सिलसिला बना हुआ था। वह उस सिलसिले को तोड ना नहीं चाहता था।
स्लिप पर उसकी फिसलती हुई-सी नजर पड़ रही थी। उस पर लिखे शब्दों पर उसकी नजर ठहर नहीं पा रही थी।
फिर उसके भाषण के दौरान तालियों की गूंज उमड़ पड़ी।
उसने जनता के लिए किसी सुखद सूचना का ऐलान किया था।
तालियों के लम्बे सिलसिले के दौरान उसने स्लिप में लिखी इबारत पढ़ी ।
लिखा था।
हरामखोर दुग्गल ,
मैंने तुझे वार्मिग दी थी लेकिन तू न माना।
आखिर अपनी मौत के मुंहमें खुद चलकर आ गया है। खैर.. . मरने से पहले मैं तुझे तो खबर दूंगा ही कि तू जिन लोगों की हिटलिस्ट में था-उन लोगों ने तेरी मौत का ऐसा इंतजाम कर दिया है कि अब तू चाहे तो भी अप ने-आपको किसी तरह बचा नहीं सकेगा। अपने भगवान से अपने गुनाह बख श वा ले। तू इस वक्त बारूद के ऐसे देर पर खड़ा है जो पलकी झपकते तेरे जिस्म के टुकड़े-टुकड़े बिखरा देगा। इस मंच के अंदर जिसके ऊपर
तू खड़ा है, बारूद ही बारूद भरी है।
मैं तुझे ये इन्टीमेशन महज इसलिए दे रहा हूं, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि तू अपनी मौत से
नावाकिफ रहे। एक धमाका हो और तेरे चीथड़े
उड .जाएं। मैं तेरे चेहरे को मौत की दहशत
जर्द होता देखना चाहता हूं । मरने के लिए
तैयार
हो जा।
स्लिप पढते-पढ़ते दुग्गल के माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं। चेहरे पर राख जैसी सफेदी फैल गई।
__ मौत के खौफ ने एकाएक ही उसे पागल जैसा बना दिया।
उसके चेहरे पर बौखलाहट बढ़ती ही जा रही थी। वह एकाएक ही घबराया हुआ -सा मंच के आगे आया-। शायद नीचे कूद ही जाता मगर मंच की ऊंचाई ज्यादा थी और उसकी हिम्मत कम।
वहमंच से न कूद सका।
पब्लिकी में तालियों का सिलसिला खत्म हो चुका था वह अचाम्भित-सी अपने नेता को पागल होते देख रही थी। किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
पांच पर मौजूद दोनों कमाण्डोज आगे आ ए । उन्होंने दुग्गल को संभाला।
'बारूद ! बारूद! भागो! भागो!! ' वह चिल्लाता हुआ भागने लगा तो दोनों कमाण्डोज ने
उसे पकड़ लिया।
उन्हें लगने लगा था कि दुग्गल पागल हो चला है। दुग्गल पूरी शक्ति के साथ उनका विरोध करने लगा। ऐसा करते हुए जनता को भी यही मह सूस होने लगा कि उनका नेता पागल हो चला है।
कोलाहल के साथ भागम-भाग। त माम अधिकारी मंच की ओर दौड़ पड़े।
इसी बीच!
कानों के पर्दे फाड़ देने वारना धमाका हुआ और मंच का पेट फाड़कर आग और धुआ एक बवण्डर के रूप में आसमान की तरफ उठता चला गया।
पांच पर मौजूद तमाम लोगों के परखच्चे मलबे के साथ उदगय।
हाहाकार मच गया।
मंत्री श्याम दुग्गल की हत्या की खबर जंगल की आ ग की तरह फैलती चली गई।
जनता इधर से उधर भाग रही थी।
विस्फोट बेहद शक्तिशाली था।
उसके लपेटे में आसपास के लोग भी आ गए थे।
प्रशासन ने वहां जो सुरक्षा व्यवस्था बनाई थी , वह टूट कर बिखर गई थी। कुछ नहीं हो पा रहा था।
10 ………………………….
काली कार मैं विनायकी देश मुख अपने दो आदमियों के साथ था।
विस्फोट के फौरन बाद उसने ड्राइवर को गाड़ी बढ़ाने का आदेश दे दिया ।
अभी ड्राइवर ने कार स्टार्ट ही की थी कि कार के पिछले हिस्से के दोनों दरवाजे खुले और दाएं-बाएं से पिछली सीट पर तन्हा बैठे विनायकी देशमुख को की छ करने का अवसर दिए बिना लाम्बा और दलपत ने दबोच लिया।
आगे बैठा ज्या दा पीछे की हरकत से चौंककर पलटा।
'खबरदार ! ' लाम्बा अपनी पिस्तौल विनायकी के माथे से सटाता हुआ फुफकार चुपचाप सीधा होकर बैठ जा वरना विनायकी की बाप को तू जवाब नहीं दे पाएगा।'
दलपत ने अपना रिवाल्वर विनायकी की पसलियों में लगा रखी था।
दोनों के हाव-भाव खतरनाकी थे।
गाड़ी आगे बढाने का हुक्म दे हरामजादे! ' लाम्बा ने विनायकी को टाइट किया।
___ 'गा.. . गाड़ी आगे बढ़ाओ।' विनायकी देशमुख की म्पि त स्वर में बोला।
उसके आदेश का तुरन्त पालन हुआ।
'सुन! गौर से सु न! अगर तेरे प्यादों ने किसी तरह की हरकत की तो एक ही बार ट्रेगर दबाकर तेरा भेजा खोपड़ी से बाहर निकाल दूंगा !'
'न... न ... नहीं। ' वह कांपकर बोला-'कोई हरकत - करना। जो मिस्टर लाम्बा कहें , उसी का पालन करो।'
लैफ्ट मोड़ लो। ' लाम्बा ने ड्राईवर को आदेश दिया।
ड्राइवर ने आदेश का पालन किया।
दूसरा प्यादा भी पत्थर की मूर्ति बना चुपचाप बैठा रहा।
'स्पीड बढ़ाओ।'
कार की स्पीड पद्गाये । वह ह वा से बातें करने लगी। गाड़ी रोको ! ' एक जगह लाम्बा ने गाड़ी रुकवा दी। वह जगह एकदम वीरान थी। लम्बी सड़की दूर तक चली गई थी।
सड़की पर कोई ट्रैफिकी नहीं था।
'तुम दोनों उत्तर जाओ ! लम्बा ने विनायकी के दोनों आदमियों को आदेश देते हुए कहा यहा से तुम्हें पांच किलो मीटर पैदल चलना पड़ेगा और तब जाकर तुम टेलीफोन सुविधा जुटा सकोगे। फिर तुम अपने बाप माणिकी देशमुख को मेरे कारनामे की खबर कर देना।'
दोनों प्यादे तुरन्त ही कार से उतर गए।
'दलपत ने तुरन्त ड्राइवर की जगह संभाल
ली।
'चल काने , जितनी तेज चल सकी ता हो उतनी तेज चल।'
दलपत ने तुरन्त कार को दौड़ाना आरंभ कर दिया।
'मुझे कहां लिए जा रहे हो ?' विनयकी देशमुख ने डरते-डरते पूछा।
'तुझे अगवा किया जा चुका है बास्टर्ड! अब बेवकूफी भरे सवाल मत कर। ' लम्बा पिस्तौल की नाल उस की पसलियों में चु भाता हुआ गुर्राया।
'देखो ... मैं ..!'
'तू कुछ नहीं। तू मेरे बदले के काम में. इ स्ते माल होगा।'
' मेरे डैड तुम्हे छोड़ गे नहीं। अभी तुम्हें उनके गुस्से की वाकफियत नहीं है।'
__ 'अभी तुझे मेरी वाकफियत नहीं है। ' कहता हुआ लम्बा कार ड्राइव करते हुए दलपत से संबोधित हुआ-रफ्ता र न और बढा काने और तेज चल!'
दलपत ने एक्सीलेटर पर पर का दबाव कुछ और बढ़ा दिया।
कार तूफानी रफ्तार से दौड़ने लगी।
'देखो मुझे छोड़ दो , तुम्हें ढेर सारा रुपया दिलवा दूंगा।' विनायकी देशमुख लम्बा को समझाने
की कोशिश करता हुआ बोला।
बच्चों जैसी बातें मत कर। कहीं मेरा भेजा घूम गया तो तू वक्त से पहले ही इस फानी दुनिया से कूच
कर जाएगा।'
विलायकी देशमुख परेशान था।
उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह जो भी स्कीम लाम्बा के सामने पेश करता , वही फेल हो जाती। उसकी उलझन निरंतर बढ़त चली जा रही थी।
लम्बा को ए काएक ही उसकी तलाशी लेने का विचार आया तो उसने विना यकी की जेबें टटोलनी शुरू कर दी।
_ 'मेरी तलाशी हो चुकी है। ' उसका आशय समझता हुआ विनायकी बीच में ही बोल उठा।
'हो चुकी है ?'
' हां।'
'कब?'
'मैंने ली थी बाप, जब मैं पीछे वाली सीट पर बैठा था।
यह रिवाल्वर निकली थी इस बिंदु के पास। 'कार ड्राइव करता दलपत बीच में बोल उठा।
' रिवाल्वर अपने पास ही रख । '
अंदर वाली जेब से रिवाल्वर निकालने की कोशिश करते दलगत ने रि वा ल्व र बीच में ही छोड़ दी।
कुछ देर बाद लम्बा ने दलपत को दायीं ओर मुड़ने का आदेश दिया।
दलपत ने तुरंत ही आदेश का पालन किया।
फिर वह लम्बा के निर्देशानुसार कार ड्राइव करता रहा।
अन्त में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में जाकर कार रुकी।
बिल्डिंग मे निर्माण कार्य बंद था। शायद किसी कारण वश निर्माण कार्य बीच में ही रोकी दिया गया था ।
लम्बा ने विनायकी देशमुख को कार से बाहर निकाल लिया। फिर वह द लपत की ओर अकृष्ट होता हुआ बोला- इस कार को यहां से ले जा और कहीं दूर
छोड देना।'
'जो हुक्म मालिक।' 'आसपास से सावधान रहना।'
'बरोबर।'
'जल्दी जा और जल्दी लौटकर आ। '
दलपत ने कार वहां से आगे बढ़ा दी।
'पार्टी हाईकमान का।'
'पार्टी हाईकमान का।'
' हां। प्लीज...शीघ्रता करें, यदि आपने देर की तो हाईकमान को मैं जवाब न दे सकूँगा।'
सैक्रेटरी ने देखा।
लिफाफे पर लाल स्याही से अर्जेट लिया था। नीचे दुग्गल का नाम।
पार्टी हाईकमान के नाम पर सैक्रेटरी घबराया हुआ सीढ़ियां चढ़कर मंच पर जा पहुंचा।
दुग्गल का भाषण आरंभ हो चुका था।
फिर भी सैक्रेटरी ने लिफाफा माइकी के पीछे रखे स्टैंड पर रख दिया। जिस पर दोनों हाथ टिकाए
दुग्गल भाषण दे रहा था।
' सर ... हाईकमान का इम्पोर्टेट मैसेज है।' पीछे हटता हुआ वह धीमे स्वर में बोला।'
दुग्गल ने अपना भाषण जारी रखते हुए धीरे-से लिफाफा उठाकर फाड़ाऔर अन्दर रखी स्लिप निकालकर डेस्की पर रख ली वह जल्दबाजी में कोई काम नहीं कर रहा था।
उसके भाषण का सिलसिला बना हुआ था। वह उस सिलसिले को तोड ना नहीं चाहता था।
स्लिप पर उसकी फिसलती हुई-सी नजर पड़ रही थी। उस पर लिखे शब्दों पर उसकी नजर ठहर नहीं पा रही थी।
फिर उसके भाषण के दौरान तालियों की गूंज उमड़ पड़ी।
उसने जनता के लिए किसी सुखद सूचना का ऐलान किया था।
तालियों के लम्बे सिलसिले के दौरान उसने स्लिप में लिखी इबारत पढ़ी ।
लिखा था।
हरामखोर दुग्गल ,
मैंने तुझे वार्मिग दी थी लेकिन तू न माना।
आखिर अपनी मौत के मुंहमें खुद चलकर आ गया है। खैर.. . मरने से पहले मैं तुझे तो खबर दूंगा ही कि तू जिन लोगों की हिटलिस्ट में था-उन लोगों ने तेरी मौत का ऐसा इंतजाम कर दिया है कि अब तू चाहे तो भी अप ने-आपको किसी तरह बचा नहीं सकेगा। अपने भगवान से अपने गुनाह बख श वा ले। तू इस वक्त बारूद के ऐसे देर पर खड़ा है जो पलकी झपकते तेरे जिस्म के टुकड़े-टुकड़े बिखरा देगा। इस मंच के अंदर जिसके ऊपर
तू खड़ा है, बारूद ही बारूद भरी है।
मैं तुझे ये इन्टीमेशन महज इसलिए दे रहा हूं, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि तू अपनी मौत से
नावाकिफ रहे। एक धमाका हो और तेरे चीथड़े
उड .जाएं। मैं तेरे चेहरे को मौत की दहशत
जर्द होता देखना चाहता हूं । मरने के लिए
तैयार
हो जा।
स्लिप पढते-पढ़ते दुग्गल के माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं। चेहरे पर राख जैसी सफेदी फैल गई।
__ मौत के खौफ ने एकाएक ही उसे पागल जैसा बना दिया।
उसके चेहरे पर बौखलाहट बढ़ती ही जा रही थी। वह एकाएक ही घबराया हुआ -सा मंच के आगे आया-। शायद नीचे कूद ही जाता मगर मंच की ऊंचाई ज्यादा थी और उसकी हिम्मत कम।
वहमंच से न कूद सका।
पब्लिकी में तालियों का सिलसिला खत्म हो चुका था वह अचाम्भित-सी अपने नेता को पागल होते देख रही थी। किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
पांच पर मौजूद दोनों कमाण्डोज आगे आ ए । उन्होंने दुग्गल को संभाला।
'बारूद ! बारूद! भागो! भागो!! ' वह चिल्लाता हुआ भागने लगा तो दोनों कमाण्डोज ने
उसे पकड़ लिया।
उन्हें लगने लगा था कि दुग्गल पागल हो चला है। दुग्गल पूरी शक्ति के साथ उनका विरोध करने लगा। ऐसा करते हुए जनता को भी यही मह सूस होने लगा कि उनका नेता पागल हो चला है।
कोलाहल के साथ भागम-भाग। त माम अधिकारी मंच की ओर दौड़ पड़े।
इसी बीच!
कानों के पर्दे फाड़ देने वारना धमाका हुआ और मंच का पेट फाड़कर आग और धुआ एक बवण्डर के रूप में आसमान की तरफ उठता चला गया।
पांच पर मौजूद तमाम लोगों के परखच्चे मलबे के साथ उदगय।
हाहाकार मच गया।
मंत्री श्याम दुग्गल की हत्या की खबर जंगल की आ ग की तरह फैलती चली गई।
जनता इधर से उधर भाग रही थी।
विस्फोट बेहद शक्तिशाली था।
उसके लपेटे में आसपास के लोग भी आ गए थे।
प्रशासन ने वहां जो सुरक्षा व्यवस्था बनाई थी , वह टूट कर बिखर गई थी। कुछ नहीं हो पा रहा था।
10 ………………………….
काली कार मैं विनायकी देश मुख अपने दो आदमियों के साथ था।
विस्फोट के फौरन बाद उसने ड्राइवर को गाड़ी बढ़ाने का आदेश दे दिया ।
अभी ड्राइवर ने कार स्टार्ट ही की थी कि कार के पिछले हिस्से के दोनों दरवाजे खुले और दाएं-बाएं से पिछली सीट पर तन्हा बैठे विनायकी देशमुख को की छ करने का अवसर दिए बिना लाम्बा और दलपत ने दबोच लिया।
आगे बैठा ज्या दा पीछे की हरकत से चौंककर पलटा।
'खबरदार ! ' लाम्बा अपनी पिस्तौल विनायकी के माथे से सटाता हुआ फुफकार चुपचाप सीधा होकर बैठ जा वरना विनायकी की बाप को तू जवाब नहीं दे पाएगा।'
दलपत ने अपना रिवाल्वर विनायकी की पसलियों में लगा रखी था।
दोनों के हाव-भाव खतरनाकी थे।
गाड़ी आगे बढाने का हुक्म दे हरामजादे! ' लाम्बा ने विनायकी को टाइट किया।
___ 'गा.. . गाड़ी आगे बढ़ाओ।' विनायकी देशमुख की म्पि त स्वर में बोला।
उसके आदेश का तुरन्त पालन हुआ।
'सुन! गौर से सु न! अगर तेरे प्यादों ने किसी तरह की हरकत की तो एक ही बार ट्रेगर दबाकर तेरा भेजा खोपड़ी से बाहर निकाल दूंगा !'
'न... न ... नहीं। ' वह कांपकर बोला-'कोई हरकत - करना। जो मिस्टर लाम्बा कहें , उसी का पालन करो।'
लैफ्ट मोड़ लो। ' लाम्बा ने ड्राईवर को आदेश दिया।
ड्राइवर ने आदेश का पालन किया।
दूसरा प्यादा भी पत्थर की मूर्ति बना चुपचाप बैठा रहा।
'स्पीड बढ़ाओ।'
कार की स्पीड पद्गाये । वह ह वा से बातें करने लगी। गाड़ी रोको ! ' एक जगह लाम्बा ने गाड़ी रुकवा दी। वह जगह एकदम वीरान थी। लम्बी सड़की दूर तक चली गई थी।
सड़की पर कोई ट्रैफिकी नहीं था।
'तुम दोनों उत्तर जाओ ! लम्बा ने विनायकी के दोनों आदमियों को आदेश देते हुए कहा यहा से तुम्हें पांच किलो मीटर पैदल चलना पड़ेगा और तब जाकर तुम टेलीफोन सुविधा जुटा सकोगे। फिर तुम अपने बाप माणिकी देशमुख को मेरे कारनामे की खबर कर देना।'
दोनों प्यादे तुरन्त ही कार से उतर गए।
'दलपत ने तुरन्त ड्राइवर की जगह संभाल
ली।
'चल काने , जितनी तेज चल सकी ता हो उतनी तेज चल।'
दलपत ने तुरन्त कार को दौड़ाना आरंभ कर दिया।
'मुझे कहां लिए जा रहे हो ?' विनयकी देशमुख ने डरते-डरते पूछा।
'तुझे अगवा किया जा चुका है बास्टर्ड! अब बेवकूफी भरे सवाल मत कर। ' लम्बा पिस्तौल की नाल उस की पसलियों में चु भाता हुआ गुर्राया।
'देखो ... मैं ..!'
'तू कुछ नहीं। तू मेरे बदले के काम में. इ स्ते माल होगा।'
' मेरे डैड तुम्हे छोड़ गे नहीं। अभी तुम्हें उनके गुस्से की वाकफियत नहीं है।'
__ 'अभी तुझे मेरी वाकफियत नहीं है। ' कहता हुआ लम्बा कार ड्राइव करते हुए दलपत से संबोधित हुआ-रफ्ता र न और बढा काने और तेज चल!'
दलपत ने एक्सीलेटर पर पर का दबाव कुछ और बढ़ा दिया।
कार तूफानी रफ्तार से दौड़ने लगी।
'देखो मुझे छोड़ दो , तुम्हें ढेर सारा रुपया दिलवा दूंगा।' विनायकी देशमुख लम्बा को समझाने
की कोशिश करता हुआ बोला।
बच्चों जैसी बातें मत कर। कहीं मेरा भेजा घूम गया तो तू वक्त से पहले ही इस फानी दुनिया से कूच
कर जाएगा।'
विलायकी देशमुख परेशान था।
उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह जो भी स्कीम लाम्बा के सामने पेश करता , वही फेल हो जाती। उसकी उलझन निरंतर बढ़त चली जा रही थी।
लम्बा को ए काएक ही उसकी तलाशी लेने का विचार आया तो उसने विना यकी की जेबें टटोलनी शुरू कर दी।
_ 'मेरी तलाशी हो चुकी है। ' उसका आशय समझता हुआ विनायकी बीच में ही बोल उठा।
'हो चुकी है ?'
' हां।'
'कब?'
'मैंने ली थी बाप, जब मैं पीछे वाली सीट पर बैठा था।
यह रिवाल्वर निकली थी इस बिंदु के पास। 'कार ड्राइव करता दलपत बीच में बोल उठा।
' रिवाल्वर अपने पास ही रख । '
अंदर वाली जेब से रिवाल्वर निकालने की कोशिश करते दलगत ने रि वा ल्व र बीच में ही छोड़ दी।
कुछ देर बाद लम्बा ने दलपत को दायीं ओर मुड़ने का आदेश दिया।
दलपत ने तुरंत ही आदेश का पालन किया।
फिर वह लम्बा के निर्देशानुसार कार ड्राइव करता रहा।
अन्त में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में जाकर कार रुकी।
बिल्डिंग मे निर्माण कार्य बंद था। शायद किसी कारण वश निर्माण कार्य बीच में ही रोकी दिया गया था ।
लम्बा ने विनायकी देशमुख को कार से बाहर निकाल लिया। फिर वह द लपत की ओर अकृष्ट होता हुआ बोला- इस कार को यहां से ले जा और कहीं दूर
छोड देना।'
'जो हुक्म मालिक।' 'आसपास से सावधान रहना।'
'बरोबर।'
'जल्दी जा और जल्दी लौटकर आ। '
दलपत ने कार वहां से आगे बढ़ा दी।