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दलपत काना जहां छिपा हुआ था, आखिरकार वहां तक जार्ज पीटर की पहुंच हो ही गई। दल पत काना घनी बस्ती में एक खण्डित मकान में अपने-आपको छुपाए हुए था। मकान के
अंदर तब वह सोया पड़ा था। जब दरवाजे पर हल्की-सी दस्तकी हई।
दस्तकी पुन: उभरी तो उसकी आंख खुल गई!
दस्तकी के अंदाजे से वह समझा कि उसके लिए खाना लाने वाला छोकरा आया है।
उसने दरवाजा खोल दिया।
दरवाजा खुलते ही उसे गर्दन से पकड़कर बाहर खींच लिया गया। वह संभलता , उसके पहले ही उसके पेट में ताबड़तोड़ चार-छ: चूंसे उतार दिए गए।
अन्त में घन जैसा भारी ऐसा उसका जबड़ा लटका गया।
वह बरामदे की टूटी दीवार की ईंटें गिराता हुआ दूसरी ओर उलट पड़ा । उलटकर सीधा होने के बाद उसने जब अपने सामने यमदूत से खड़े चार
आदमि यों को देखा , तब भी असलियत को समझ न सका । लेकिन जब उन चारों के पीछे से पीटर का चेहरा निकला तब वह समझ गया, उसकी मौत आपहुंची है।
__'क्यों रे काने , यहां छिपकर तूने यह समझा था कि अब तू मेरे हाथों कभी नहीं पड़ सकेगा.. .है ना ?' पीटर ने विषाक्त मुस्कान के साथ कहा।
'न... न ... नहीं। ' द लपत कांपकर
अपने-आपमें सिमट गया। तब तू लम्बा के साथ
था और तूने यह समझ लिया था कि लाम्बा की छत्रछाया में हमेशा बचा र हेगा है ना?'
उसने बौखलाकर इंकार में गर्दन हिलाई।
'तुझे मौत के रास्ते पर पहुंचना जरूरी था। अब तू मरने के लिए तैयार हो जा ' नहीं।'
'नहीं मत बोल कुत्ते। हां बोल हां , क्योंकि हां बोलने में ही तेरी भलाई है।'
' मुझे माफ कर दो पीटर साहब...माफी।'
पीटर हंसा। 'माफ की र दो साहब...माफ।'
'माफी के लायकी तू रह नहीं गया है काने। याद है मैंने तुझे बोला था कि गुलाम तो मैं तुझे बनाऊंगा लेकिन चिड़ी का , हुक्म का नहीं। याद है ?'
दलपत ने अपने सूखे होंठों पर जुबान फेरी। पीटर ने अपने एक प्यादे को इशारा किया।
प्यादे ने तुरन्त रिवाल्वर दलपत की ओर तान दी।
अपनी ओर तनी रिवाल्वर देख दलपत की सांसें रुकी गई।
वह समझ गया , उसका आखिरी वक्त आपहुंचा है। उसने आँखें बंद कर ली।
तभी !
एक फायर हुआ।
फायर के साथ ही चीख उभरी।
उसने घबराकी र आंख खोलीं, देखा वह प्यादा सामने पड़ा तड़परहा था।
उसके पीछे भय से देखता पीटर अपने बाकी प्यादों के साथ पीछे हटता जा रहा था।
वह समझ गया कि उसके पीछे कोई है।
उसने मुड़कर देखा।
लम्बा था।
रंजीत लाम्बा।
पेशेवर हत्यारा। उसके दो नों हाथों में पिस्तौल थे। पिस्तूल पीटर की ओर तने हुए थे। हालांकि खुद पीटर निहत्था था , लेकिन उसके प्यादे हथियारबंद थे। फिर भी पीटर वहां ठहर पाने का दुस्साहस नहीं कर पा रहा था।
पीछे हटता हुआ वह एकाएक ही वहां से निकल भागा। दलपत बीच में थी अन्यथा लम्बा का निशाना चूकने वाला नहीं था।
' हट जा काने ! हट जा! ' जब तक लाम्बा चिल्लाया और जब तक दलपत बी च से हटा तब
तक पीटर गायब हो चुका था।
उसका ए की प्यादा निशाने पर था मगर लम्बा ने उस पर अपने पिस्तौल का कार्टेज बेकार बरबाद करना उचित नहीं समझा।
उसी समय एक हैंडग्रेनेड वहां आकर गिरा।
भाग्यवश वह तुरन्त ही नहीं फटा।
'भाग काने ...भाग।' चिल्लाता हुआ लाम्बा उस तरफ ही भागा जिधर से वह आया था। ,
दलपत भागा।
लाम्बा ने गिरी हुई दीवार की ओट में लम्बी छलांग लगाई।
उसके ठीकी पीछे दलपत उड़ा।
उसी समय दिल दहला देने वाला विस्फोट हुआ। ढेर साला मलबा और दुवां किसी बवंडर की तरह हवा में उड़ता चला गया।
बारूद की तीखी गंध वहां फैल गई।
विस्फोट के तुरन्त बाद लाम्बा वहीं से बाहर निकला। दलपत उसके पीछे-पीछे चिपका चला आ रहा था। पिछ ली गली में भीड़ जमा थी।
वहां दलपत के पहचान वाले थे।
दलपत उनके सवालों के जवाब देता लम्बा के साथ चलता रहा।
शीघ्र ही सड़की आ गई।
टैक्सी भी भाग्यवश तुरन्त ही मिल गई।
टैक्सी में बैठने के बाद दलपत बोला-मालिकी ... तुमने मेरी जान बचाकर मुझ पर जो एहसान किया है, उसे मैं अपनी चमड़ी के जूते आपके लिए बनवा कर भी उतार नहीं सकता।'
' फिजूल बकवास मत कर। ' लम्बा दबे हुए स्वर में गुर्राया।
__ 'ये फिजूल बकवास नहीं है। में- तुम्हारी जान लेने की कोशिश कर चुका हूं। अगर कामयाब हो गया होता तो अभी तक तुम मरूर -चुके होते। अपने हत्यारे की जान बचाना बड़े दिल गुर्दे की बात है। हर कोई इस तरह का कदम नहीं उठा सकता।'
'तू पागल हो गया है।'
' मालिकी जो कहेंगे, मानूंगा। लेकिन यह बात समझ में नहीं आई कि ऐन वक्त पर आप कहां से आ गए?'
'तेरी ही तलाश में आया था। एक चेले से पता चला- कि तू यहां छिपकर रह रहा है और फिर अचानकी ही मुझे पीटर अपने चमचों के साथ वहां दिखाई दे गया। उसे देखते ही मैं छिप गया । मेरी तैयारी कम थी। उसके पास आदमी ज्यादा थे। मैं घिरकर फंस सकता था इसीलिए उसे नहीं ललकारा वरना उस हरामजादे को ललकार कर मारता। उसने मेरी प नम को मौत के दर तक पहुंचाया है , मैं उसे छोडूंगा नहीं। किसी भी कीमत पर नहीं।'
अंदर तब वह सोया पड़ा था। जब दरवाजे पर हल्की-सी दस्तकी हई।
दस्तकी पुन: उभरी तो उसकी आंख खुल गई!
दस्तकी के अंदाजे से वह समझा कि उसके लिए खाना लाने वाला छोकरा आया है।
उसने दरवाजा खोल दिया।
दरवाजा खुलते ही उसे गर्दन से पकड़कर बाहर खींच लिया गया। वह संभलता , उसके पहले ही उसके पेट में ताबड़तोड़ चार-छ: चूंसे उतार दिए गए।
अन्त में घन जैसा भारी ऐसा उसका जबड़ा लटका गया।
वह बरामदे की टूटी दीवार की ईंटें गिराता हुआ दूसरी ओर उलट पड़ा । उलटकर सीधा होने के बाद उसने जब अपने सामने यमदूत से खड़े चार
आदमि यों को देखा , तब भी असलियत को समझ न सका । लेकिन जब उन चारों के पीछे से पीटर का चेहरा निकला तब वह समझ गया, उसकी मौत आपहुंची है।
__'क्यों रे काने , यहां छिपकर तूने यह समझा था कि अब तू मेरे हाथों कभी नहीं पड़ सकेगा.. .है ना ?' पीटर ने विषाक्त मुस्कान के साथ कहा।
'न... न ... नहीं। ' द लपत कांपकर
अपने-आपमें सिमट गया। तब तू लम्बा के साथ
था और तूने यह समझ लिया था कि लाम्बा की छत्रछाया में हमेशा बचा र हेगा है ना?'
उसने बौखलाकर इंकार में गर्दन हिलाई।
'तुझे मौत के रास्ते पर पहुंचना जरूरी था। अब तू मरने के लिए तैयार हो जा ' नहीं।'
'नहीं मत बोल कुत्ते। हां बोल हां , क्योंकि हां बोलने में ही तेरी भलाई है।'
' मुझे माफ कर दो पीटर साहब...माफी।'
पीटर हंसा। 'माफ की र दो साहब...माफ।'
'माफी के लायकी तू रह नहीं गया है काने। याद है मैंने तुझे बोला था कि गुलाम तो मैं तुझे बनाऊंगा लेकिन चिड़ी का , हुक्म का नहीं। याद है ?'
दलपत ने अपने सूखे होंठों पर जुबान फेरी। पीटर ने अपने एक प्यादे को इशारा किया।
प्यादे ने तुरन्त रिवाल्वर दलपत की ओर तान दी।
अपनी ओर तनी रिवाल्वर देख दलपत की सांसें रुकी गई।
वह समझ गया , उसका आखिरी वक्त आपहुंचा है। उसने आँखें बंद कर ली।
तभी !
एक फायर हुआ।
फायर के साथ ही चीख उभरी।
उसने घबराकी र आंख खोलीं, देखा वह प्यादा सामने पड़ा तड़परहा था।
उसके पीछे भय से देखता पीटर अपने बाकी प्यादों के साथ पीछे हटता जा रहा था।
वह समझ गया कि उसके पीछे कोई है।
उसने मुड़कर देखा।
लम्बा था।
रंजीत लाम्बा।
पेशेवर हत्यारा। उसके दो नों हाथों में पिस्तौल थे। पिस्तूल पीटर की ओर तने हुए थे। हालांकि खुद पीटर निहत्था था , लेकिन उसके प्यादे हथियारबंद थे। फिर भी पीटर वहां ठहर पाने का दुस्साहस नहीं कर पा रहा था।
पीछे हटता हुआ वह एकाएक ही वहां से निकल भागा। दलपत बीच में थी अन्यथा लम्बा का निशाना चूकने वाला नहीं था।
' हट जा काने ! हट जा! ' जब तक लाम्बा चिल्लाया और जब तक दलपत बी च से हटा तब
तक पीटर गायब हो चुका था।
उसका ए की प्यादा निशाने पर था मगर लम्बा ने उस पर अपने पिस्तौल का कार्टेज बेकार बरबाद करना उचित नहीं समझा।
उसी समय एक हैंडग्रेनेड वहां आकर गिरा।
भाग्यवश वह तुरन्त ही नहीं फटा।
'भाग काने ...भाग।' चिल्लाता हुआ लाम्बा उस तरफ ही भागा जिधर से वह आया था। ,
दलपत भागा।
लाम्बा ने गिरी हुई दीवार की ओट में लम्बी छलांग लगाई।
उसके ठीकी पीछे दलपत उड़ा।
उसी समय दिल दहला देने वाला विस्फोट हुआ। ढेर साला मलबा और दुवां किसी बवंडर की तरह हवा में उड़ता चला गया।
बारूद की तीखी गंध वहां फैल गई।
विस्फोट के तुरन्त बाद लाम्बा वहीं से बाहर निकला। दलपत उसके पीछे-पीछे चिपका चला आ रहा था। पिछ ली गली में भीड़ जमा थी।
वहां दलपत के पहचान वाले थे।
दलपत उनके सवालों के जवाब देता लम्बा के साथ चलता रहा।
शीघ्र ही सड़की आ गई।
टैक्सी भी भाग्यवश तुरन्त ही मिल गई।
टैक्सी में बैठने के बाद दलपत बोला-मालिकी ... तुमने मेरी जान बचाकर मुझ पर जो एहसान किया है, उसे मैं अपनी चमड़ी के जूते आपके लिए बनवा कर भी उतार नहीं सकता।'
' फिजूल बकवास मत कर। ' लम्बा दबे हुए स्वर में गुर्राया।
__ 'ये फिजूल बकवास नहीं है। में- तुम्हारी जान लेने की कोशिश कर चुका हूं। अगर कामयाब हो गया होता तो अभी तक तुम मरूर -चुके होते। अपने हत्यारे की जान बचाना बड़े दिल गुर्दे की बात है। हर कोई इस तरह का कदम नहीं उठा सकता।'
'तू पागल हो गया है।'
' मालिकी जो कहेंगे, मानूंगा। लेकिन यह बात समझ में नहीं आई कि ऐन वक्त पर आप कहां से आ गए?'
'तेरी ही तलाश में आया था। एक चेले से पता चला- कि तू यहां छिपकर रह रहा है और फिर अचानकी ही मुझे पीटर अपने चमचों के साथ वहां दिखाई दे गया। उसे देखते ही मैं छिप गया । मेरी तैयारी कम थी। उसके पास आदमी ज्यादा थे। मैं घिरकर फंस सकता था इसीलिए उसे नहीं ललकारा वरना उस हरामजादे को ललकार कर मारता। उसने मेरी प नम को मौत के दर तक पहुंचाया है , मैं उसे छोडूंगा नहीं। किसी भी कीमत पर नहीं।'