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राज झिझका फिर फीकी मुस्कान के साथ बोला- “ज़िन्दगी में कुछ दर्द हमारे भी हैं।”
“कभी शेयर करने का मन करे तो ज़रूर बताना।”
राज ने सहमति में सिर हिलाया।
“गुड नाईट!”
कहकर वो पलटी फिर दरवाजा खोलकर तेजी से बाहर निकल गई।
राज ने दरवाजा बंद किया फिर चटाई पर ही कम्बल ओढ़कर लेट गया और दो तकिया लगाकर फिर वह किताब पढ़ने लगा। किताब किसी अमीर बिजनसमैन के ऊपर लिखी गई थी जो कि अपना सबकुछ त्यागकर एक साधू बन गया था। राज उसे खुद से रिलेट करने लगा।
ठीक ही है! आखिर क्या रखा है दुनियादारी में। माँ का साया तो बचपन में ही सर से उठ गया और उसके बाद पापा ने दूसरी शादी कर ली, नया परिवार बना लिया जिसका मैं हिस्सा रहा हूँ, ऐसा कभी लगा ही नहीं। सौतेली माँ के चेहरे पर हमेशा एक बनावटी मुस्कान देखी, पर उसके मन में तो हमेशा एक बोझ रहा इसलिये दसवीं क्लास से ही मैंने बोर्डिंग में जाकर पढ़ने की इच्छा पापा से जताई। भले ही ऊपरी तौर पर अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिये मैं आतुरता दिखा रहा था पर उन्हें पता था कि मेरा मन था कि उस परिवार से कहीं दूर रहूँ जो कभी मेरा नहीं हो सकता था। एक बार जो घर से निकला कभी वापस नहीं आया। स्कूल से निकलकर कॉलेज के हॉस्टल और फिर कॉलेज से जॉब में आने पर किराए के घर और फिर खुद के घर में। आखिरी बार पापा से कब मिला था ? याद ही नहीं आ रहा... हाँ तीन साल पहले जब सौतेली बहन की शादी में पापा और उनकी वाइफ के बहुत आग्रह करने के बाद जाना पड़ा था। जनरली लाइफ अकेले ही कटी है – मनपसंद नौकरी के सहारे, सुरेश और ज़ाहिद जैसे कुछ दोस्तों के सहारे, कुछ लड़कियों के साथ लापरवाह रिलेशन के सहारे... फिर मंदिरा आई, एक स्टेडी गर्लफ्रेंड! पर मेरे जीवन में सोलमेट तो कोई और लिखी थी, जिसके साथ इत्मिनान के दो पल भी ठीक से नहीं गुज़ार सका। और जब वो गई तो लाइफ में कितना बड़ा वोयड छोड़ गई जो कुछ भी कर के भर नहीं पा रहा बल्कि हर दिन और बड़ा होता जा रहा है।
सोचते हुए राज का मन भारी हो गया। उसे आरती के शब्द याद आये।
इस आश्रम की शरण में आकर उसे भी तो दुखों को सहने की ताकत मिली थी। तो...तो मुझे भी मिल सकती है। ये वाकई कमाल है जो मेरे जैसा अधर्मी ऐसी बातें सोच रहा है। पर शायद इंसान तभी धर्म या स्प्रिचुअलिटी की तरफ बढ़ता है जब लाइफ उसे कोई बड़ा दुःख देती है। मैं भी कोशिश करूँगा। बस एक बार खुद को सही साबित कर दूँ।
☐☐☐
राज की नींद बेचैनी के साथ खुली। उठते ही उसकी नज़र खिड़की पर गई। बाहर अभी भी चांदनी बिखरी हुई थी।
उसने घड़ी देखी– चार बजकर बीस मिनट हुआ था।
न जाने क्या सपने देखता रहा था वह। मन काफी उद्वेलित महसूस हो रहा था।
वह उठकर खिड़की के पास आ गया और बाहर देखने लगा।
अचानक ही उसके मन मे विचार कौंधा-
सीनो और खलीली ने संयुक्त रूप से मास्टरमाइंड प्लान बनाया था।
कितना बड़ा रहस्योद्घाटन है ये। विश्व स्तर पर प्रकट होने पर कितने बड़े परिणाम हो सकते हैं इसकी वजह से! खैर, विश्व स्तर पर कोई भी देश बिना सबूत के कभी कोई बात नहीं मानेगा और यहाँ तो अभी तक ये भी साबित नहीं किया जा पा रहा है कि रमन आहूजा एक आतंकवादी था। पर फिर भी इससे भारत और सीनो के बीच तनाव बढ़ सकता है। सीमा पर गरमा-गरमी हो सकती है, आर्थिक गठबंधन टूट सकते हैं।
फिलहाल उसे रमन आहूजा के खिलाफ सबूत जुटाने थे। पार्श्वनाथ और निरंजन सिर्फ दो नाम मिले थे, जिन में से एक यानि पार्श्वनाथ मर चुका था और निरंजन का फोटो उसे हासिल था।
अभी उसे ढूंढने का काम करना है। साथ ही इस बात की तस्दीक भी करनी है कि निक और सुज़ुकी वाकई सीनो के जासूस हैं।
राज का हाथ मेज की दराज में मौजूद सिगरेट के पैकेट की तरफ बढ़ा। उसने एक सिगरेट निकाली और खिड़की के पास खड़े होकर उसे लाइटर से सुलगाने लगा।
इसका मतलब सीनो अपनी विस्तारवादी नीति के चलते भारत पर बड़ा अटैक करना चाहता है ताकि भारत उसमे उलझ जाये और वह अपने मित्र देश के साथ भारत पर हमला करके अपने मंसूबे पूरा कर सके। एक तरफ कश्मीर दूसरी तरफ अरुणाचल... क्या नहीं सोच सकता वह। पर क्या वर्तमान अन्तराष्ट्रीय नितियों के तहत वह ऐसा रिस्क लेगा ? मुश्किल है! बाकि देश उसकी निंदा करेंगे, उस पर हमला कर सकते हैं, आर्थिक पाबंदियां लगा सकते हैं। फिर... ? इतने बड़े लेवल पर ये प्लान चल रहा है तो कुछ तो उन्होंने ऐसा सोच रखा होगा कि कैसे खुद पर कोई अंगुली उठवाये बिना उसे एग्झीक्यूट कर सके।
राज दरवाजा खोलकर पीछे राहदारी में आ गया। उसका मन बुरी तरह से बेचैन हो उठा था। देश पर छाये संकट को देखकर वह अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को एक तरह से भूल गया था। वह वहाँ टहलने लगा।
अब तेजी से काम करना होगा। मास्टरमाइंड प्लान तो फेल हो गया पर सीनो चुप नहीं बैठा होगा। प्लान बी, प्लान सी तैयार होगा।
अगले दो घंटे राज ने बेहद बेचैनी से गुज़ारे। अपने मन को एकाग्रित करने के लिये वह कुछ देर कसरत व ध्यान करता रहा। छह बजे आश्रम में पूरी तरह से जाग हो गई थी। सुबह की पूजा करने के लिए करीब सात बजे सभी उस बड़े हॉलनुमा पूजाघर में एकत्रित हुए। एक घंटे तक पूजा चली। राज आरती को ढूंढ रहा था। पूजा समाप्त होने पर वह हॉल के बाहर खड़ा हो गया। जब आरती उसे बाहर निकलती दिखी तो उसने उसे इशारा किया और बाहर की तरफ चल दिया। वह उसके पीछे-पीछे बाहर पहुंची।
बाहर बगीचे में पहुँचकर राज पौधों में पानी देने लगा। आरती ने भी उसका अनुसरण किया।
काम करते-करते राज बोला-
“मुझे ये बताओ– ये निरंजन के बारे में और क्या पता है तुम्हें ?”
“वो मुझे मंडी में मिला था। उसने भी पार्श्वनाथ की तरह मुझे कभी फोन नहीं किया। शायद उनके काम करने का तरीका ही कुछ ऐसा था कि वो फोन से कॉन्टेक्ट करना रिस्क मानते थे।”
“पूरी बात बताओ।”
“कभी शेयर करने का मन करे तो ज़रूर बताना।”
राज ने सहमति में सिर हिलाया।
“गुड नाईट!”
कहकर वो पलटी फिर दरवाजा खोलकर तेजी से बाहर निकल गई।
राज ने दरवाजा बंद किया फिर चटाई पर ही कम्बल ओढ़कर लेट गया और दो तकिया लगाकर फिर वह किताब पढ़ने लगा। किताब किसी अमीर बिजनसमैन के ऊपर लिखी गई थी जो कि अपना सबकुछ त्यागकर एक साधू बन गया था। राज उसे खुद से रिलेट करने लगा।
ठीक ही है! आखिर क्या रखा है दुनियादारी में। माँ का साया तो बचपन में ही सर से उठ गया और उसके बाद पापा ने दूसरी शादी कर ली, नया परिवार बना लिया जिसका मैं हिस्सा रहा हूँ, ऐसा कभी लगा ही नहीं। सौतेली माँ के चेहरे पर हमेशा एक बनावटी मुस्कान देखी, पर उसके मन में तो हमेशा एक बोझ रहा इसलिये दसवीं क्लास से ही मैंने बोर्डिंग में जाकर पढ़ने की इच्छा पापा से जताई। भले ही ऊपरी तौर पर अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिये मैं आतुरता दिखा रहा था पर उन्हें पता था कि मेरा मन था कि उस परिवार से कहीं दूर रहूँ जो कभी मेरा नहीं हो सकता था। एक बार जो घर से निकला कभी वापस नहीं आया। स्कूल से निकलकर कॉलेज के हॉस्टल और फिर कॉलेज से जॉब में आने पर किराए के घर और फिर खुद के घर में। आखिरी बार पापा से कब मिला था ? याद ही नहीं आ रहा... हाँ तीन साल पहले जब सौतेली बहन की शादी में पापा और उनकी वाइफ के बहुत आग्रह करने के बाद जाना पड़ा था। जनरली लाइफ अकेले ही कटी है – मनपसंद नौकरी के सहारे, सुरेश और ज़ाहिद जैसे कुछ दोस्तों के सहारे, कुछ लड़कियों के साथ लापरवाह रिलेशन के सहारे... फिर मंदिरा आई, एक स्टेडी गर्लफ्रेंड! पर मेरे जीवन में सोलमेट तो कोई और लिखी थी, जिसके साथ इत्मिनान के दो पल भी ठीक से नहीं गुज़ार सका। और जब वो गई तो लाइफ में कितना बड़ा वोयड छोड़ गई जो कुछ भी कर के भर नहीं पा रहा बल्कि हर दिन और बड़ा होता जा रहा है।
सोचते हुए राज का मन भारी हो गया। उसे आरती के शब्द याद आये।
इस आश्रम की शरण में आकर उसे भी तो दुखों को सहने की ताकत मिली थी। तो...तो मुझे भी मिल सकती है। ये वाकई कमाल है जो मेरे जैसा अधर्मी ऐसी बातें सोच रहा है। पर शायद इंसान तभी धर्म या स्प्रिचुअलिटी की तरफ बढ़ता है जब लाइफ उसे कोई बड़ा दुःख देती है। मैं भी कोशिश करूँगा। बस एक बार खुद को सही साबित कर दूँ।
☐☐☐
राज की नींद बेचैनी के साथ खुली। उठते ही उसकी नज़र खिड़की पर गई। बाहर अभी भी चांदनी बिखरी हुई थी।
उसने घड़ी देखी– चार बजकर बीस मिनट हुआ था।
न जाने क्या सपने देखता रहा था वह। मन काफी उद्वेलित महसूस हो रहा था।
वह उठकर खिड़की के पास आ गया और बाहर देखने लगा।
अचानक ही उसके मन मे विचार कौंधा-
सीनो और खलीली ने संयुक्त रूप से मास्टरमाइंड प्लान बनाया था।
कितना बड़ा रहस्योद्घाटन है ये। विश्व स्तर पर प्रकट होने पर कितने बड़े परिणाम हो सकते हैं इसकी वजह से! खैर, विश्व स्तर पर कोई भी देश बिना सबूत के कभी कोई बात नहीं मानेगा और यहाँ तो अभी तक ये भी साबित नहीं किया जा पा रहा है कि रमन आहूजा एक आतंकवादी था। पर फिर भी इससे भारत और सीनो के बीच तनाव बढ़ सकता है। सीमा पर गरमा-गरमी हो सकती है, आर्थिक गठबंधन टूट सकते हैं।
फिलहाल उसे रमन आहूजा के खिलाफ सबूत जुटाने थे। पार्श्वनाथ और निरंजन सिर्फ दो नाम मिले थे, जिन में से एक यानि पार्श्वनाथ मर चुका था और निरंजन का फोटो उसे हासिल था।
अभी उसे ढूंढने का काम करना है। साथ ही इस बात की तस्दीक भी करनी है कि निक और सुज़ुकी वाकई सीनो के जासूस हैं।
राज का हाथ मेज की दराज में मौजूद सिगरेट के पैकेट की तरफ बढ़ा। उसने एक सिगरेट निकाली और खिड़की के पास खड़े होकर उसे लाइटर से सुलगाने लगा।
इसका मतलब सीनो अपनी विस्तारवादी नीति के चलते भारत पर बड़ा अटैक करना चाहता है ताकि भारत उसमे उलझ जाये और वह अपने मित्र देश के साथ भारत पर हमला करके अपने मंसूबे पूरा कर सके। एक तरफ कश्मीर दूसरी तरफ अरुणाचल... क्या नहीं सोच सकता वह। पर क्या वर्तमान अन्तराष्ट्रीय नितियों के तहत वह ऐसा रिस्क लेगा ? मुश्किल है! बाकि देश उसकी निंदा करेंगे, उस पर हमला कर सकते हैं, आर्थिक पाबंदियां लगा सकते हैं। फिर... ? इतने बड़े लेवल पर ये प्लान चल रहा है तो कुछ तो उन्होंने ऐसा सोच रखा होगा कि कैसे खुद पर कोई अंगुली उठवाये बिना उसे एग्झीक्यूट कर सके।
राज दरवाजा खोलकर पीछे राहदारी में आ गया। उसका मन बुरी तरह से बेचैन हो उठा था। देश पर छाये संकट को देखकर वह अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को एक तरह से भूल गया था। वह वहाँ टहलने लगा।
अब तेजी से काम करना होगा। मास्टरमाइंड प्लान तो फेल हो गया पर सीनो चुप नहीं बैठा होगा। प्लान बी, प्लान सी तैयार होगा।
अगले दो घंटे राज ने बेहद बेचैनी से गुज़ारे। अपने मन को एकाग्रित करने के लिये वह कुछ देर कसरत व ध्यान करता रहा। छह बजे आश्रम में पूरी तरह से जाग हो गई थी। सुबह की पूजा करने के लिए करीब सात बजे सभी उस बड़े हॉलनुमा पूजाघर में एकत्रित हुए। एक घंटे तक पूजा चली। राज आरती को ढूंढ रहा था। पूजा समाप्त होने पर वह हॉल के बाहर खड़ा हो गया। जब आरती उसे बाहर निकलती दिखी तो उसने उसे इशारा किया और बाहर की तरफ चल दिया। वह उसके पीछे-पीछे बाहर पहुंची।
बाहर बगीचे में पहुँचकर राज पौधों में पानी देने लगा। आरती ने भी उसका अनुसरण किया।
काम करते-करते राज बोला-
“मुझे ये बताओ– ये निरंजन के बारे में और क्या पता है तुम्हें ?”
“वो मुझे मंडी में मिला था। उसने भी पार्श्वनाथ की तरह मुझे कभी फोन नहीं किया। शायद उनके काम करने का तरीका ही कुछ ऐसा था कि वो फोन से कॉन्टेक्ट करना रिस्क मानते थे।”
“पूरी बात बताओ।”