• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Thriller RISKI LOVE

रिस्की लव - 21

अंजन ने लंदन में रहने वाले अपने दोस्त सागर खत्री को फोन किया। सागर को बताया कि उस पर हुए हमले में दो लोगों पर शक है। हमला करने वाला लंदन से आया था। उसने अपना नाम नीतीश सक्सेना बताया था। उसके साथ एक औरत भी थी।
उसने उन दोनों का हुलिया बताने के बाद कहा कि उसके पास उन दोनों का सीसीटीवी फुटेज है। ‌वह फुटेज उसे ईमेल पर भेज रहा है। अपने आदमियों को काम पर लगा दो। जो भी खर्च हो वह देने को तैयार है। लेकिन इन दोनों का पता जितनी जल्दी हो सके लगाकर उसे बताए।
सागर खत्री ने आश्वासन दिया कि वह अंजन पर हमला करने वालों को ढूंढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। जितनी जल्दी हो सके वह सारी डिटेल्स भेज दे।
अंजन ने सारे डीटेल्स सागर खत्री को ईमेल पर भेज दिए।

अंजन ने डीटेल्स सागर खत्री को भेज दिए थे। लेकिन अब उसका मन भारत में नहीं लग रहा था। वह चाहता था कि खुद लंदन जाकर मानवी और निर्भय को खोजे। उन्हें उनके किए की सज़ा दे। इसके अलावा उसका मन मीरा से मिलने के लिए भी तड़प रहा था। वह उसे मनाना चाहता था।
उसका घाव पूरी तरह भर चुका था। अब लंदन जाने में कोई दिक्कत नहीं थी। उसने अपने ट्रैवल एजेंट से लंदन के लिए टिकट करवाने को कहा।
लंदन जाने से पहले उसने एंथनी को अपने बंगले पर बुलवाया। उसने एंथनी से कहा कि हमलावरों की पहचान सामने लाने में उसने बहुत मदद की है। उसका काम हर बार की तरह लाजवाब है। अभी उसे उसकी सेवाओं की ज़रूरत नहीं है। इसलिए अब तक उसने जो भी किया उसका हिसाब कर ले। भविष्य में जब भी उसकी ज़रूरत होगी अंजन उससे संपर्क कर लेगा।
अंजन ने एंथनी का हिसाब पूरा कर दिया।

विनोद नफीस का उसके घर के पास वाले रेस्टोरेंट में इंतज़ार कर रहा था। नफीस को आने में कुछ देर हो गई थी। करीब पंद्रह मिनट से विनोद उसकी राह देख रहा था। नफीस की बिल्डिंग से इस रेस्टोरेंट तक का रास्ता बमुश्किल पाँच मिनट का था। विनोद ने तो अपने घर से निकलते समय नफीस को फोन कर दिया था। उसे लगा था कि जब वह रेस्टोरेंट में पहुँचेगा तो नफीस पहले से ही मौजूद होगा। लेकिन उसके आने के पंद्रह मिनट बाद भी नफीस नहीं आया था।
उसने सोचा कि पाँच मिनट और इंतज़ार कर ले उसके बाद फोन करके पूँछेगा। इंतज़ार करते हुए पांँच की जगह दस मिनट बीत गए। लेकिन नफीस का कोई पता नहीं था। विनोद ने अपना फोन उठाया और नफीस का नंबर मिलाया। दो बार पूरी घंटी जाने के बाद भी नफीस ने फोन नहीं उठाया। इस पर विनोद को बहुत चिंता होने लगी।
वह रेस्टोरेंट से निकलकर नफीस की बिल्डिंग की तरफ चल दिया। नफीस के घर पहुँचने पर पड़ोसी से पता चला कि शाहीन का ऑफिस से लौटते हुए एक्सीडेंट हो गया था। उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। नफीस वहीं गया है। विनोद हॉस्पिटल का नाम पूँछकर वहीं चला गया।
वह हॉस्पिटल पहुँचा ही था कि नफीस का फोन आया। उसने बता दिया कि उसे सब पता चल गया है। वह शाहीन को देखने हॉस्पिटल आया है।
अंदर जाकर वह नफीस से मिला। शाहीन का हालचाल पूँछा। नफीस ने बताया कि सर पर कोई चोट नहीं है। डॉक्टर एक्सरे के लिए ले गए हैं। शायद बाएं पैर में फ्रैक्चर है।
वेटिंग एरिया में बैठे हुए नफीस ने विनोद से पूँछा,
"क्या बात थी जो बताने के लिए तुमने मुझे रेस्टोरेंट में बुलाया था ?"
"सर दो बातें हैं। एक तो उस आदमी के बारे में पता चल गया जो एंथनी के साथ अंजन के बंगले पर गया था। वह होटल का सिक्योरिटी इंचार्ज दर्शन वशिष्ठ है।"
नफीस कुछ सोचकर बोला,
"फिर तो ज़रूर उसके पास हमला करने वाले का कोई सुराग रहा होगा।"
"बिल्कुल सर तभी एंथनी उसको अंजन के पास ले गया होगा।"
"दूसरी क्या बात है ?"
"सर यह बात कुछ अजीब और चौंकाने वाली है।"
नफीस ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। विनोद बोला,
"अंजन लंदन चला गया है।"
यह सुनकर नफीस को सचमुच आश्चर्य हुआ। उसने कहा,
"लंदन ? सचमुच यह बड़ी अजीब बात है। कुछ समय पहले उस पर जानलेवा हमला हुआ था। वह उसकी तहकीकात करवा रहा था। अब अचानक लंदन चला गया।"
"सर मुझे तो लगता है कि उस पर हमला करने वाले का संबंध लंदन से है। यही जानकारी पाने के बाद वह लंदन चला गया।"
नफीस ने खुश होकर कहा,
"वाह विनोद.... बात तो पते की करी है तुमने। यही बात होगी। इसलिए तो वह इतनी जल्दी लंदन चला गया।"
तभी नर्स ने आकर कहा कि डॉक्टर नफीस को बुला रहे हैैं। विनोद ने उससे कहा कि वह शाहीन का ध्यान रखे। अगर कोई और सूचना मिलेगी तो वह बता देगा। विनोद वहाँ से चला गया।
डॉक्टर ने नफीस को बताया कि शाहीन के बाएं पैर में फ्रैक्चर है। उसे प्लास्टर चढ़ाया जाएगा। आज रात शाहीन अस्पताल में ही रहेगी। कल सुबह उसका प्लास्टर होने के बाद डिस्चार्ज मिल जाएगा।

नफीस शीरीन के पास गया। वह दर्द में थी। उसने नफीस से कहा,
"इतने दिनों के बाद तो दोबारा जॉब शुरू किया था। अब यह हो गया। फिर घर में बंद रहना पड़ेगा।"
"शीरीन ऐसी बातें मत करो। ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते ही रहते हैं।"
शीरीन की मनोदशा अच्छी नहीं थी। नफीस की बात सुनकर गुस्से से बोली,
"मेरी जिंदगी में तो सिर्फ उतार ही उतार है। अच्छा वक्त तो बस झलक दिखाकर चला जाता है।"
नफीस उसे परेशान नहीं करना चाहता था। वह चुप हो गया। उसके सर पर प्यार से हाथ फेरने लगा। तभी शाहीन के अम्मी, अब्बा और उसकी छोटी बहन नाज़नीन आ गए। अपने घरवालों को देखकर शाहीन भावुक हो गई।‌ नफीस बाहर चला गया ताकी वह अपने अम्मी और अब्बू से बात कर सके।
वह शाहीन की मानसिक स्थिति को समझ रहा था। अपने बच्चे को खो देने का दुख वह भूल नहीं पाई थी। वही कहाँ उस दर्द को भूला था। बस अपने दर्द को सीने में छिपा लिया था। वह कमज़ोर पड़ता तो शाहीन और भी अधिक टूट जाती।
अभी भी उसे अपने बच्चे की नन्हीं उंगलियों का स्पर्श महसूस होता था। वह बोलना सीख रहा था। शाहीन ने उसे अम्मी अब्बा बोलना सिखाया था। उसे देखकर अपनी तोतली जुबान से अब्बा अब्बा कहकर उसकी गोद में आकर बैठ जाता था। ठुमक ठुमक कर चलता था और खिलखिला कर हंसता था।
अपने बच्चे को याद करके उसकी आँखों में आंसू आ गए।
नाज़नीन उसके बगल में आकर बैठ गई।‌ नफीस ने अपने आप को काबू कर लिया।‌ नाज़नीन ने पूँछा,
"आपा का एक्सीडेंट कैसे हुआ ?"
"ऑफिस से निकल कर ऑटो स्टैंड की तरफ बढ़ रही थी। एक बाइक तेज़ी से आकर टकरा गई।‌ शाहीन गिर पड़ी। सर पर तो चोट नहीं आई है। पर बाएं पैर में फ्रैक्चर है। कल प्लास्टर चढ़ेगा। फिर छुट्टी मिल जाएगी।"
"अम्मी कह रही थीं कि आपा को अपने साथ ले जाएंगी।"
"क्यों ? मैं उसकी देखभाल कर लूँगा।"
नाज़नीन ने प्यार से कहा,
"मुझे पता है आप आपा को बहुत चाहते हैं।‌ लेकिन आप अकेले कैसे संभालेंगे ? वहाँ हम सब हैं। भाईजान भी पास ही रहते हैं।"
"मैं संभाल लूँगा। ज़रूरत पड़ी तो तुम लोगों को बुला लूँगा।"
नफीस रूम में गया। शाहीन अपनी अम्मी से बात कर रही थी।‌ नफीस ने उससे पूँछा,
"तुमको लगता है कि मैं तुम्हारी देखभाल नहीं कर पाऊँगा।"
उसके इस सवाल पर शाहीन चौंक गई। वह कुछ बोलती उससे पहले उसकी अम्मी ने कहा,
"हमारे साथ जाएगी तो इसमें बुरा क्या है ?"
नफीस ने उनकी बात को अनसुना करके फिर पूँछा,
"शाहीन तुम बताओ। तुम क्या चाहती हो ?"
शहीन ने उसे समझाना चाहा। पर उसकी बात को काटकर उसकी अम्मी ने कहा,
"उस पर ज़ोर मत डालो। इस मुश्किल वक्त में उसे अपनों की ज़रूरत है। एक बार देख चुके हैं कि तुम कैसे ज़िम्मेदारी निभाते हो।"
अपनी अम्मी की यह बात सुनकर शाहीन दंग रह गई। वह जानती थी कि इस बात ने नफीस को बहुत तकलीफ दी होगी। वह नफीस से कुछ कहने जा रही थी कि वह खुद बोला,
"सही है शीरीन। इस वक्त तुम्हारे अपने ही तुम्हारी मदद कर पाएंगे। मैं तुम पर कोई दबाव नहीं डाल रहा।‌"
कहकर वह रुम से चला गया।‌ गुस्से में हॉस्पिटल से निकल गया।
नफीस हॉस्पिटल के बाहर आकर एक बेंच पर बैठ गया। शीरीन की अम्मी की बात उसे नश्तर की तरह चुभी थी। उस दिन की घटना उसके दिमाग में ताज़ा हो गई।
शीरीन किसी ज़रूरी काम से अपने भाई के घर गई हुई थी। नफीस की छुट्टी थी इसलिए बच्चे को उसके पास छोड़ गई थी। नफीस खुश था कि आज अपने बेटे के साथ खेलेगा। बच्चे के साथ खेलने के बाद वह उसे नहलाने की तैयारी करने लगा। उसके लिए एक बाथ टब लेकर आया था। उसने उसमें पानी भरा। बच्चे के कपड़े उतार कर नहलाने जा रहा था कि तभी किसी का फोन आ गया। वह बात करने के लिए बालकनी में चला गया। उस वक्त वह अपनी एक क्राइम स्टोरी पर काम कर रहा था। फोन उसी सिलसिले में था। बात करते हुए देर हो गई।
जब वह लौटकर आया तो जो मंजर उसके सामने था उसे देखकर दहल गया। बच्चा मुंह के बल टब में गिरा हुआ था। हिल डुल भी नहीं रहा था।
उस दिन उससे सचमुच लापरवाही हुई थी। उस लापरवाही की जितनी बड़ी सजा उसे चुकानी पड़ी थी वह ही जानता था। जैसे जिस्म पर दाग कर कोई निशान बना देता है वैसे ही उसके दिल पर निशान बन गया था।
वह निशान रह रहकर दर्द देता था। पर आज शीरीन की अम्मी ने उसे खरोंच कर घाव कर दिया था।

.....
 
रिस्की लव - 22

निर्भय अपने कमरे की खिड़की से समुद्र की बहती हुई लहरों को देख रहा था। अभी उसे खबर मिली थी कि अंजन उसकी और मानवी की तलाश करते हुए लंदन पहुंँच गया है। जैसे समुद्र की लहरें किनारे पर आकर टकरा रही थीं वैसे ही उसके मन में यादों की लहरें शोर मचा रही थीं।

उसके पैर में गोली लगी थी। बहुत दूर तक भाग सकना संभव नहीं था। घायल मानवी का भी यही हाल था। अंजन का भेजा हुआ आदमी यमदूत की तरह उन दोनों के पीछे लगा हुआ था। उसके हाथों मौत पक्की थी। भागते हुए निर्भय ने नीचे बहती इंद्रयाणी नदी को देखा। उसकी गोद में जीवन बचाने की कोई उम्मीद थी। उसने मानवी की तरफ देखा। वह उसका इशारा समझ गई। दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और नीचे बहती नदी में कूद गए।

उसे जब होश आया तो वह अस्पताल में था। उसे होश में आया देखकर नर्स ने फौरन डॉक्टर को सूचना दी। डॉक्टर ने आकर उसे चेक किया। निर्भय ने उनसे पूँछा,
"डॉक्टर मैं किस अस्पताल में हूँ ? कितने समय से यहाँ पर हूँ ?"
डॉक्टर ने जवाब दिया,
"यह जिला अस्पताल है। परसों देर रात कुछ गांव वाले आपको यहाँ लेकर आए थे। आपके पैर में गोली लगी थी। हमने ऑपरेशन करके गोली निकाल दी। पैर को कोई नुक्सान नहीं हुआ है। घाव भरने में कुछ दिन लगेंगे। आप आसानी से चल फिर सकेंगे। किस्मत अच्छी थी कि उस रात एक गांव वाले को आप नदी के किनारे मिल गए। वो लोग आपको सही समय पर अस्पताल ले आए।"
निर्भय को उस दिन की घटनाएं याद आईं। उसे मानवी की याद आई। उसने पूँछा,
"मानवी कहाँ है ?"
डॉक्टर ने आश्चर्य से कहा,
"कौन मानवी ?"
निर्भय ने समझाया,
"उस दिन मेरे साथ एक औरत भी मिली होगी। हम दोनों एक साथ ही नदी में गिरे थे।"
"जी नहीं....गांव वाले सिर्फ आपको लेकर आए थे। आपके साथ कोई नहीं था। अब आप आराम कीजिए।"
कहकर डॉक्टर चला गया। निर्भय सोच में पड़ गया। दोनों एक साथ हाथ पकड़कर नदी में कूदे थे। उसे याद था कि दोनों एक साथ ही पानी से टकराए थे। कुछ देर एक साथ बहे भी थे। उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। वह मानवी को लेकर परेशान हो गया।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उस गांव में गया जहाँ लोगों ने उसे नदी के किनारे पाया था। उसने गांव वालों का शुक्रिया अदा किया। गांव वालों से पूँछा कि उन्हें आसपास किसी औरत के पाए जाने की कोई सूचना मिली है। पर आस पास के गांव से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली थी।
उसने अपनी तरफ से मानवी को तलाश करने की कोशिश की थी। पर कोई सफलता नहीं मिली। उसे लगा कि शायद मानवी बच नहीं पाई। वह मुंबई वापस नहीं जाना चाहता था। इसलिए वहाँ से अपने एक दोस्त के पास औरंगाबाद चला गया। वहाँ उससे मदद लेकर सिंगापुर चला गया। वहाँ उसकी बहुत जान पहचान थी। उनकी सहायता से उसने वहाँ एक छोटा सा बिज़नेस शुरू कर दिया। इस बार उसे सफलता भी मिली।

मानवी ने आकर उसके कंधे पर हाथ रखा। यादों की उठती हुई लहरें शांत हो गईं। निर्भय वर्तमान में लौट आया। मानवी ने कहा,
"यहाँ खड़े क्या कर रहे हो ?"
"यादों के समंदर में गोते लगा रहा था।"
कहकर वह जाकर कुर्सी पर बैठ गया। मानवी उसके पास बैठते हुए बोली,
"अंजन छटपटा रहा है। जो हम चाह रहे थे वही हुआ।"
निर्भय के चेहरे पर कठोरता आ गई। उसकी आँखों में गुस्सा था। वह बोला,
"अभी तो बहुत छटपटाना है उसे। वह जितना छटपटाएगा उतना ही मेरे दिल को तसल्ली मिलेगी।"
मानवी की आँखों में भी चिंगारियां थीं। अंजन ने उसे धोखा दिया था। उसके प्यार को छला था। उसका सबकुछ हड़प लेने के बाद उसने उसे और निर्भय को जान से मारने की कोशिश भी की थी। उसने कहा,
"तड़पेगा वह। अभी तो उस पर बहुत चोट करनी है।"
"करेंगे.... उसकी वजह से हमने बहुत कुछ सहा है।"
मानवी ने उसका हाथ पकड़कर कहा,
"अगर तुम्हारा साथ ना होता तो मैं कुछ ना कर पाती।"
"किस्मत हमारे साथ है तभी तो हम एक दूसरे से दोबारा मिल पाए।"
निर्भय उठते हुए बोला,
"सोच रहा हूँ कि बीच पर टहल आऊँ। चलोगी।"
"नहीं... तुम जाओ।"
निर्भय चला गया। मानवी बाहर गार्डन में जाकर बैठ गई। उसके मन में भी वह सारी घटनाएं चल रही थीं जो उस दिन जंगल में उसके साथ घटी थीं।

वह निर्भय के साथ जान बचाकर भाग तो रही थी पर कुछ दूर चलने के बाद हिम्मत जवाब देने लगी थी। वह हिम्मत हारने वाली थी तभी निर्भय ने उसकी तरफ देखा। उसने अपना हाथ बढ़ाकर नदी की तरफ इशारा किया। वह समझ गई। कोई और रास्ता नहीं था। उसने निर्भय का हाथ पकड़ लिया और दोनों ने इंद्रयाणी नदी में छलांग लगा दी।
नदी में गिरने के बाद उसने होश खो दिया।
बहती हुई वह रामोशीवाडी पहुँच गई थी। नदी में स्नान करने गए पास के एक मंदिर के पुजारी ने उसे बेहोशी की हालत में नदी के किनारे पड़े देखा। कुछ लोगों की मदद से वह उसे अपने घर ले गया। उसने और उसकी पत्नी ने मानवी की सेवा की।
जब वह ठीक हुई तो उन्होंने मानवी से उसके बारे में पूँछा। मानवी समझ नहीं पा रही थी कि क्या कहे। वह उन्हें अपनी सच्चाई बताना नहीं चाहती थी। क्योंकी उससे उसे कोई फायदा नहीं होने वाला था। इसलिए उसने ऐसा दिखाया जैसे उसकी याददाश्त चली गई हो।
बुजुर्ग पुजारी और उसकी पत्नी की कोई संतान नहीं थी। वह उसे अपनी बेटी की तरह रख रहे थे। लेकिन मानवी को इस तरह रहने की आदत नहीं थी। वह बहुत ऐशो आराम में पली थी। पुजारी ने उसे दो जोड़ी साधारण से कपड़े लाकर दिए थे। दोनों वक्त खाना भी बहुत सादा ही मिलता था। एक छोटे से कमरे में पुजारी, उसकी पत्नी और मानवी रहते थे।
एक महीने का समय बीत गया था। मानवी के लिए उन हालातों में रहना संभव नहीं था। पर वह मजबूर थी। पुजारी ने दया करके उसे अपने पास रखा था। अगर वह आसरा ना देता तो सड़क पर मारे मारे फिरने के अलावा कोई चारा ना रह जाता। अपनी इस हालत में यह सोचकर कि अंजन उसकी ही दौलत पर ऐश कर रहा है उसका खून खौल उठता था।
एक दो बार उसने सोचा कि पुलिस के पास जाकर सारी बात बता दे। पर तरुण के मुंह से उसने सुना था कि उसके भाइयों की मौत के पीछे अंजन का ही हाथ था। फिर भी वह सारी पुलिस जांच से बाहर निकल आया था। इसका मतलब था कि पुलिस में उसकी गहरी जान पहचान है। यह सोचकर उसने इरादा बदल दिया।
पर वह मन ही मन सुलग रही थी। चाहती थी कि कुछ भी करके अंजन से बदला ले। यह आसान नहीं था‌। अंजन से बदला लेने के लिए उसे किसी के साथ की ज़रूरत थी। अभी तो उसका अपना ही कोई ठिकाना नहीं था। उसका साथ कौन देता। निर्भय के बारे में उसे कुछ नहीं पता था। वह नहीं जानती थी कि वह ज़िंदा है या मर गया। ना ही वह पता करने की स्थिति में थी। अभी तो उसके लिए इस स्थिति से निकालना बहुत ज़रूरी था। लेकिन उसकी कोई सूरत उसे नज़र नहीं आ रही थी। इस विषय में सोच सोच कर वह परेशान थी।
अंजन के प्यार ने उसे बर्बाद कर दिया था। उसके प्यार में पड़कर उसने फैशन हाउस खोलने का अपना सपना तक छोड़ दिया था। उसके लिए अपने पिता समान भाई से झूठ बोली थी। बदले में उसे सिर्फ दगा मिला। अभी वह किसी भी लायक नहीं रह गई थी। उसके पास कुछ भी ऐसा नहीं था कि वह नए सिरे से अपना जीवन शुरू कर सके।
मन ऊबने पर वह नदी के किनारे आकर बैठ जाती थी। इस समय भी वह वहीं बैठी थी। उसका मन इस कदर परेशान था कि वह सोच रही थी आगर जल्दी ही कोई रास्ता नहीं मिला तो वह पागल हो जाएगी। उसे यहाँ से आगे बढ़ना होगा। अपने जीवन निर्वहन के लिए कुछ करना होगा। तभी वह अंजन से बदला लेने के विषय में कुछ कर पाएगी। पर वह रास्ता उसकी समझ नहीं आ रहा था।
वह बहती हुई नदी को ताक रही थी। तभी पीछे से पुजारी की आवाज़ आई,
"क्या अपने बीते हुए जीवन को याद करने की कोशिश कर रही हो। कुछ याद आया ?"
मानवी ने हर बार की तरह ऐसे देखा जैसे कि कुछ याद ना आने के कारण बड़ी परेशान हो। पुजारी ने तसल्ली देते हुए कहा,
"विठ्ठल सब ठीक कर देंगे। परेशान ना हो।"
पुजारी उसके पास बैठते हुए बोला,
"मैं और तुम्हारी काकी हर साल देहू संत तुकाराम जी के दर्शन करने गाथा मंदिर जाते हैं। वहीं जाने की सोच रहे थे।"
मानवी पुजारी की मनोदशा समझ रही थी। उसे लगा था कि शायद कुछ दिनों में उसे उसकी पुरानी ज़िंदगी के बारे में याद आ जाएगा और वह उसे उसके घर छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगा। पर मानवी को सबकुछ याद था। लेकिन उसे क्या बताती। वह खुद भी वहाँ से निकलने का कोई रास्ता ढूंढ़ रही थी। वह बोली,
"कोशिश कर रही थी कि कुछ याद आ जाए। वैसे आप दोनों को कब जाना है ?"
"अगले हफ्ते निकलने की सोच रहे थे। कोई बात नहीं है। तुम भी हमारे साथ चलना।"
मानवी हल्के से मुस्कुरा दी। पुजारी ने उठते हुए कहा,
"अब घर चलो। शाम ढल रही है।"
मानवी उठी और उसके साथ चल दी। रास्ते में वह सोच रही थी कि अब जल्द ही कोई ना कोई राह निकालनी होगी। वह भी अब इस तरह और नहीं रह सकती है।
पर उसके दिमाग में कुछ भी नहीं आ रहा था। वह हताश हो रही थी।

....
 
रिस्की लव - 23

बहुत सोचने पर मानवी को अंधेरे में एक छोटी सी किरण नज़र आई। यह किरण थी अंजली स्वामीनाथन।‌ वह उसके साथ चेन्नई निफ्ट में थी।‌ कोई आठ महीने पहले उसकी अंजली से बात हुई थी। तब उसने बताया था कि वह गोवा में है। उसका अपना फैशन स्टोर है। जहाँ वह अपने डिज़ाइन किए हुए कपड़े रखती थी।
निफ्ट में मानवी ने अंजली की सहायता की थी। उसके एक साल की फीस अपनी तरफ से जमा की थी। वह उसी मदद के बदले में अब मदद की उम्मीद कर रही थी। हालांकि उसके मन में संदेह था कि इस हालत में अंजली उसकी मदद करेगी। उसे लग रहा था कि जब अंजन ने उसके प्यार और उसके भाई के अहसानों को नज़रंदाज़ कर दिया तो वह गैर से क्या उम्मीद रखे। लेकिन इसके अलावा उसके पास कोई और राह नहीं थी। इसलिए उसने अंजली के पास जाने का फैसला किया।
फैसला तो उसने कर लिया लेकिन अभी भी कुछ सवाल थे। वह गोवा जाएगी कैसे ? पुजारी को क्या बताएगी ? गोवा पहुँचने पर अपनी इस हालत के बारे में क्या बताएगी ? वह अब इन सवालों के बारे में सोच रही थी। उसने सोचा कि अगर किसी तरह गोवा तक पहुँचने के लिए पैसों का इंतज़ाम हो जाए तो वह पुजारी को बिना बताए ही चली जाएगी।
वह नदी के किनारे से लौटी थी। दरवाज़े पर ही थी कि उसे पुजारी की पत्नी की आवाज़ सुनाई पड़ी। वह चुपचाप खड़ी होकर सुनने लगी। पुजारी की पत्नी चिंता व्यक्त करते हुए कह रही थी,
"अब कब तक इस जवान लड़की मानवी को घर पर रख पाएंगे। जमाना ठीक नहीं है। कोई ऊंँच नीच हो गई तो सब हमको ही कहेंगे। कोई यह नहीं देखेगा कि इतने दिनों तक रखकर सेवा की।"
पुजारी की आवाज़ आई,
"तुम ठीक कह रही हो। पर क्या करें। अब ऐसे ही तो घर से निकाल नहीं सकते। सोचा था कि कुछ दिनों में अपने घरवालों के बारे में याद कर बता देगी। पर उसे तो कुछ याद ही नहीं है सिवा अपने नाम के। क्या करें ?"
"मुझे तो कभी कभी लगता है कि लड़की हमसे कुछ छुपा रही है। वह सब कुछ जानती है। शायद प्रेमी के साथ भागी होगी। उसने धोखा दे दिया होगा तो मरने के लिए नदी में कूद गई होगी। हमने बचा लिया। अब हमसे क्या बताए। यहाँ आराम से रहने खाने को मिल रहा है। इतना खर्च कर चुके हम दोनों उस पर।"
मानवी वहाँ से हटकर पास एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गई। वह सोच रही थी कि अब तो यह दोनों भी उससे ऊब रहे हैं। जाना तो उसे होगा ही। अब यहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं। उसने उन दोनों को सुनाने के लिए उसने मन ही मन एक कहानी बनाई। वह उसे सुनाने के लिए उन दोनों के पास गई।
मानवी को देखकर पुजारी की पत्नी ने कहा,
"कहाँ रहती हो ? माना याददाश्त चली गई है पर दुनियादारी तो समझती हो। इतना तो जानती हो कि इस समय जवान लड़की का घर से बाहर रहना ठीक नहीं। अभी तो तुम्हारी ज़िम्मेदारी हम पर है। कुछ हो गया तो हम किसको किसको जवाब देंगे।"
मानवी फर्श पर बिछी चटाई पर बैठ गई। उसने इशारे से उन दोनों को भी बैठने के लिए कहा। पुजारी और उसकी पत्नी बैठ गए। मानवी ने अपनी बात कही,
"आप लोगों ने मेरी बड़ी मदद की है। कभी मौका मिला तो आप लोगों की भी मदद करूंँगी। मैं आज आप लोगों को अपने बारे में बताना चाहती हूंँ।"
पुजारी ने कहा,
"तुमको अपने बारे में याद आ गया।"
मानवी ने कहा,
"मुझे सब याद था। पर आप लोगों से डर के मारे छुपाया। मेरा पति मुंबई पुलिस में काम करता है। बहुत जल्लाद है। हर समय मारता पीटता रहता था। तंग आकर मैं घर से भाग निकली। कोई आसरा ना देखकर नदी में कूदकर जान देनी चाहिए। लेकिन बच गई। पर आज मैंने देखा कि मेरे पति के आदमी मुझे ढूंढ़ते हुए यहाँ तक आ गए हैं। मैं यहाँ रहकर आप लोगों को मुसीबत में नहीं डालना चाहती। अगर आप मुझे कुछ पैसे दे दें तो मैं यहांँ से चली जाऊँ।"
यह सुनकर पुजारी की पत्नी गुस्से में बोली,
"हम क्यों दें भागने के पैसे ? तुम्हारा पति आया है तो तुमको यहांँ से ले जाएगा।"

मानवी ने बात बनाते हुए कहा,
"आप लोगों ने मेरी इतनी मदद की है इसलिए मुसीबत में नहीं डालना चाहती हूँ। मेरा पति सनकी दिमाग का है। उसे लगेगा कि आप लोगों ने मुझे यहाँ छुपा कर रखा था। ऐसे में मेरे साथ साथ आप लोगों के लिए भी मुसीबत आ जाएगी। इसलिए कह रही थी। गोवा में मेरी एक सहेली रहती है। उसके बारे में मेरे पति को नहीं मालूम। मुझे इतने पैसे दे दीजिए कि गोवा पहुँच सकूँ।"
पुजारी की पत्नी कुछ कहने जा रही थी। उसे रोककर पुजारी ने कहा,
"जाना चाहती है तो जाने दो। कुछ पैसे दे देते हैं। इसके पति ने कोई बवाल किया तो इस उमर में क्या-क्या झेलेंगे।"
पुजारी की पत्नी ने कहा,
"हमारे पास पैसे हैं कहाँ ?"
मानवी ने कहा,
"बस उतने पैसे दे दीजिए जितने से मैं गोवा पहुंँच जाऊंँ।"

अगले दिन तड़के ही मानवी पैसे लेकर पुजारी के घर से निकल गई। उनका घर छोड़ते हुए उसके मन में आ रहा था कि जैसे भी थे उन दोनों ने उसकी मदद की थी। उसकी जान बचाई थी। अगर कभी उनके लिए कुछ कर पाई तो ज़रूर करेगी।

मानवी पणजी में अंजली स्वामीनाथन के फैशन स्टोर में खड़ी थी। फैशन स्टोर की रिसेप्शनिस्ट उसे अजीब निगाहों से देख रही थी। मानवी के हुलिए से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह कुछ भी खरीदने की हैसियत रखती है। रिसेप्शनिस्ट ने रुखाई से पूँछा,
"क्या काम है तुम्हें ? यहाँ क्यों आई हो ?"
मानवी जानती थी कि उसका हुलिया देखकर वह ऐसे बोल रही है। मानवी ने बड़ी नम्रता से अंग्रेजी में कहा,
"मुझे अंजली स्वामीनाथन से मिलना है।"
जिस लहज़े में वह अंग्रेजी बोल रही थी उसे सुनकर रिसेप्शनिस्ट कुछ चौंक गई। कुछ नरम पड़कर वह बोली,
"आप कौन हैं ?"
"मैं उनकी पुरानी दोस्त हूंँ। किसी काम के सिलसिले में उनसे मिलना है। मेरी मुलाकात उनसे करवा दीजिए।"
"सॉरी पर अंजली मैडम तो अभी हैं नहीं। किसी ज़रूरी काम से गई हुई हैं। कुछ समय लगेगा आने में।"
मानवी ने उसी तरह नम्रता से पूँछा,
"क्या मैं यहांँ बैठकर अंजली का इंतज़ार कर सकती हूंँ ?"
मानवी का हुलिया भले ही कुछ और कह रहा हो पर उसके बोलने का लहज़ा रिसेप्शनिस्ट को यकीन दिला रहा था कि वह अंजली की दोस्त हो सकती है। फिर भी वह हिचक रही थी। मानवी ने कहा,
"अगर आपको समस्या है तो मैं बाहर इंतज़ार करती हूँ।"
यह कहकर वह बाहर जाने लगी। रिसेप्शनिस्ट ने उसे रोकते हुए कहा,
"आप अंदर बैठकर मैडम के आने की राह देख सकती हैं।"
मानवी वहीं एक प्लास्टिक स्टूल पर बैठ कर इंतज़ार करने लगी।

अंजली लौटकर आई। मानवी को देखते ही पहचान गई। उसे मानवी के द्वारा की गई मदद याद थी। मानवी को उस हालत में देखकर वह बहुत दुखी हुई। बातचीत करने के लिए उसे स्टोर के ऊपर बने अपने घर में ले गई। यह एक स्टूडियो अपार्टमेंट था।
उसने सबसे पहले मानवी को पीने के लिए जूस दिया। उसके बाद बोली,
"तुमको भूख लगी होगी। ऐसा करो तुम फ्रेश हो जाओ। मैं खाने के लिए कुछ आर्डर कर देती हूंँ। तब तक नीचे जाकर स्टोर देखती हूँ। फिर खाते हुए बातें करेंगे।"
उसने अपनी कबर्ड से उसके लिए एक ड्रेस निकाल कर रख दी। वह नीचे चली गई।
फ्रेश होने के बाद मानवी अंजली के ऊपर आने की राह देखने लगी। वह खुश थी कि अंजली को उसका किया हुआ अहसान याद था। उसके मन में आ रहा था कि बस अब अंजली उसकी मदद के लिए भी तैयार हो जाए। अंजली को अपनी इस हालत के बारे में क्या बताना है यह उसने सोच लिया था।
कुछ समय के बाद अंजली खाने का एक पैकेट लेकर ऊपर आई। खाना सर्व करने के बाद दोनों बालकनी में बैठकर खाने लगीं। यहांँ आकर मानवी को बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन उसके मन में अभी भी एक बात की चिंता थी। अंजली उसकी मदद करेगी कि नहीं। खाना खाते हुए अंजली ने कहा,
"तुम्हें देखकर यह यकीन से कह सकती हूंँ कि तुम किसी मुसीबत में पड़ी हो। क्या बात है ?"
"जब बुरा वक्त आता है तो कुछ भी सही नहीं रहता है।"
"ऐसा क्या हो गया ? कुछ महीनों पहले हमारी फोन पर बात हुई थी। तब तुमने बताया था कि तुम्हारी शादी हो गई है। तुम्हारे पति अंजन ने तुम्हारे भाइयों का बिज़नेस अच्छी तरह से संभाल लिया है। क्या तुम्हारे पति को बिज़नेस में नुकसान हो गया ?"
मानवी ने जो कहानी सोची थी वही बताई,
"अंजन धोखेबाज़ निकला। मुझे पता चला कि मेरे भाइयों की मौत के पीछे भी उसका हाथ था। उसने उनकी सारी प्रॉपर्टी और बिज़नेस हड़प लिया। मुझ पर बहुत अत्याचार करता था। मैं बड़ी मुश्किल से सब सह रही थी। लेकिन एक दिन मुझे पता चला कि वह मुझे मारना चाहता है। मैं मौका देखकर भाग निकली। पुलिस के पास जा नहीं सकती थी। उसके ऊपर तक कनेक्शन हैं। उसका आदमी मेरा पीछा कर रहा था। उसकी गोली मेरे हाथ में लगी। मैं घायल होकर नदी में गिर गई। एक बुजुर्ग दंपति ने मुझे बचाया, मेरी सेवा की। लेकिन वह मेरी मदद नहीं कर सकते थे। मुझे तुम्हारी याद आई। इसलिए बड़ी उम्मीद के साथ तुमसे मदद मांगने आई हूँ। प्लीज़ अंजली मेरी मदद कर दो।"
अंजली कुछ देर सोचकर बोली,
"मानवी मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकती हूँ। मेरी तो सलाह है कि तुम उस अंजन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करो। अपना सबकुछ वापस ले लो उससे।"
"मैं जानती हूंँ कि इससे कुछ नहीं होगा। उसने अपनी पहुंँच दूर तक बना रखी है। वैसे भी इस समय मेरी मानसिक दशा उससे लड़ने की नहीं है। तुम बस मुझे अपने स्टोर में काम दे दो। तुम जानती हो कि मैं एक अच्छी डिज़ाइनर हूंँ।"
अंजली सोचने लगी। मानवी ने कहा,
"प्लीज़ अंजली हेल्प मी। तुम्हें याद है ना मैंने भी तुम्हारी मदद की थी।"
"मुझे सब याद है मानवी। तुम्हारी मदद मैं कभी नहीं भूली। मैं तो बस यह सोच रही थी कि मेरे स्टोर में तुम्हारे लायक कोई काम नहीं है।"
मानवी को लगा कि अंजली उसकी मदद करने से इंकार कर रही है। उसे बुरा लगा। वह कुछ कहती उससे पहले अंजली ने कहा,
"पर कोई बात नहीं। तुम मेरे साथ रहो। मैं देखती हूंँ कि क्या कर सकती हूंँ।"
उसकी बात सुनकर मानवी का मन खुश हो गया।

.....
 
रिस्की लव - 24

अंजली ने मानवी को एक नाइट क्लब में वेटरेस का काम दिलवा दिया था। उस क्लब में कोई ना कोई पार्टी होती रहती थी। मानवी पार्टी में मेहमानों को शराब सर्व करती थी।‌ अक्सर उसके मन में हूक उठती थी। कभी वह भी ऐसी ही रंगीन पार्टियां दिया करती थी। आज उसे पार्टी में वेटरेस का काम करना पड़ता था। पर वह अपने आप को समझाती थी कि पुजारी के घर वह जैसी ज़िंदगी जी रही थी उससे यह ज़िंदगी बहुत अच्छी है। कम से कम यहाँ वह उस चमक दमक के नज़दीक तो थी जिसकी वह आदी रही थी।
उसने अपने रहने की अलग व्यवस्था कर ली थी। ज़िंदगी कुछ आगे बढ़ी थी। पर अभी वह राह नहीं मिली थी जिस पर चलकर अंजन से बदला ले सकती। अक्सर वह निर्भय के बारे में सोचती थी। उस दिन दोनों साथ में कूदे थे। लेकिन वह बहकर ना जाने कहाँ चला गया था। कभी कभी उसे लगता था कि कहीं वह डूब तो नहीं गया। पर उसका मन यह मानने के लिए तैयार नहीं था। उसे लगता था कि वह भी कहीं अपने जीवन की नई शुरुआत कर रहा होगा।
वेटरेस का काम करते हुए भी चार महीने बीत गए। अभी तक कोई रास्ता नहीं मिला था। एक बार फिर मानवी को हताशा होने लगी थी।

निर्भय बीच पर टहल कर आया तो देखा कि मानवी गार्डन में बैठी है। वह कुछ सोच रही थी। निर्भय ने उसके कंधे पर हाथ रखा। मानवी ने उसे देखकर कहा,
"बहुत देर तक बीच पर टहलते रहे।"
"हाँ आज मन बार बार पीछे की तरफ भाग रहा है। बीच पर बैठकर वही सोच रहा था।"
"मैं भी अभी उन दिनों के बारे में सोच रही थी जब एक बार फिर नए सिरे से जीवन शुरू करने की राह निकाल रही थी।"
निर्भय कुछ सोचते हुए बोला,
"अंजन हमें तलाशने के लिए लंदन की गलियां छान रहा होगा। पर हमें नहीं खोज पाएगा।"
मानवी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। निर्भय ने आगे कहा,
"उसके ड्राइवर ने उसे बचा लिया। उस दिन भागते समय मैंने उंगली दिखाकर चेतावनी भी दी थी। पर वह स्वामीभक्त निकला। अंजन को हॉस्पिटल पहुँचाकर मौत के मुंह से बाहर ले आया।"
मानवी ने कहा,
"हमने उसे धमकाया तो डरकर भाग गया। ना जाने कहाँ है ?"
"कहीं भी हो। हमें उससे कोई खतरा नहीं है। उसके पास हमारी कोई पहचान नहीं है। तभी तो अंजन ने उस जासूस के ज़रिए हमारी जानकारी हासिल की थी।"
"पर हम जैसा चाहते थे अंजन वैसे ही गुमराह हो गया।"
निर्भय के चेहरे पर एक ज़हरीली मुस्कान थी।‌ वह बोला,
"मुझे लगता है कि उसके ड्राइवर ने उसे बचाकर अच्छा ही किया। अब उसे तड़पते देखने में ज्यादा मज़ा आ रहा है। अगर उस दिन मर गया होता तो यह मज़ा ना मिल पाता।"
"यह बात तो है। मुझे भी अब बहुत अच्छा लग रहा है। अब वह बच ही गया है तो हम इसी तरह उसे तड़पाएंगे।"
दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराए और हाई फाइव दिया।

मानवी अपने कमरे में बैठी सोच रही थी कि अंजन का बच जाना बुरा नहीं हुआ। अगर वह उस दिन के हमले में मर जाता तो शायद उसके दिल को इतनी ठंडक ना मिल पाती। मज़ा तो उसे तड़पाने में है। यह जानकर वह कितना छटपटा रहा है कि उस पर हमला कराने वाले वही हैं जिन्हें उसने अपने आदमी के माध्यम से मरवाने की कोशिश की थी।
निर्भय ने उसे समझाया भी था कि अंजन को जान से मारने की जगह तिल तिल मरने को मजबूर करते हैं। उसका सबकुछ छीनकर उसे नंगा कर देते हैं। तब अधिक मज़ा आएगा। लेकिन तब बदले की आग में जलती हुई मानवी को लग रहा था कि जैसे अंजन ने उसके भाइयों को मरवाया। उसे जान से मारने की कोशिश की। उसी तरह उसे मार दिया जाए।
मानवी एक बार फिर पुराने समय को याद करने लगी।

मानवी वेटरेस का काम करते हुए ऊबने लगी थी। हर पल उसके दिल में नफरत के शोले उठते रहते थे। ‌ अंजन से बदला लेकर वह अपने दिल को ठंडक पहुंँचाना चाहती थी। इसलिए हर पल छटपटाहट महसूस करती थी।
क्लब में एक टूरिस्ट ने रोज़ रोज़ आना शुरू किया था। अधेड़ उम्र का मार्वल डिसूज़ा गोवा में ही पला बढ़ा था। पर पिछले पच्चीस साल से लंदन में रह रहा था। मानवी की खूबसूरती पर वह फिदा हो गया था। उसकी इस दीवानगी में मानवी को आगे बढ़ने की राह दिखाई दी।
मार्वल का लंदन में बिज़नेस था। काफी पैसे वाला था। गोवा अपने किसी रिश्तेदार की शादी में आया था। पर उसने कुछ दिन गोवा में गुजारने का निर्णय लिया। वह मानवी को ऐसे इशारे देता था जैसे कि उसके साथ रिश्ता बनाना चाहता हो। मानवी तो बस वह सीढ़ी तलाश रही थी जिस पर पैर रखकर वह ऊपर जा सके। उसने मार्वल के इशारों का जवाब देना शुरू कर दिया।
एक दिन मार्वल को शराब देते समय उसने एक चिट भी पकड़ा दी। इशारे से कहा कि उसे फोन करे। क्लब बंद होने पर सुबह करीब साढ़े तीन बजे मार्वल ने मानवी को फोन किया। उससे कहा कि वह उसे उसके घर पर आकर मिले।
उस दिन के बाद अक्सर ही मानवी उसके घर जाने लगी। उसने भी अपने रूप का जादू उस पर चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने ऑफ डे में वह पूरा दिन ही मार्वल के साथ बिताती थी। मार्वल उसका दीवाना बन गया था।
लंदन से बार बार उसके बिज़नेस पार्टनर का फोन आ रहा था कि वह अब लौट आए। मार्वल जब भी वापस जाने की सोचता था मानवी की कशिश उसे रोक लेती थी। उसे मानवी की लत लग गई थी। एक दिन उसने मानवी के सामने प्रस्ताव रखा कि वह उसके साथ लंदन चले। मानवी तो कई दिनों से उसकी तरफ से इस प्रस्ताव के आने का इंतज़ार कर रही थी। प्रस्ताव पाकर वह मन ही मन खुश थी। लेकिन एकदम से मार्वल की बात ना मानकर उसने ऐसा दिखाया जैसे कि यहाँ सबकुछ छोड़कर चले जाना उसके लिए आसान नहीं होगा। वह जानती थी कि उसका इस तरह एकदम से ना मानना उसके लिए ही फायदेमंद होगा।
मार्वल किसी भी कीमत पर उसे ले जाना चाहता था। उसने कहा कि वह उसके साथ शादी करने को भी तैयार है। मानवी के लिए उसकी दौलत की मालकिन बनने का यह अच्छा अवसर था। मार्वल ने उसके साथ चर्च में शादी कर ली। मानवी ने अपना नाम बदलकर जेनिफर रख लिया।
नई पहचान के साथ वह लंदन चली गई।
नई पहचान के साथ मानवी को वह सबकुछ वापस मिल गया था जिसके लिए वह तरस रही थी। उसने एक बार फिर उसी तरह का जीवन जीना शुरु कर दिया जैसा वह मुंबई में जीती थी। दिल खोलकर खर्च करती थी। पार्टियां करती थी।
मार्वल को उसका यह बदला हुआ रूप अच्छा नहीं लगा। पहले वह उसके इशारों पर काम करती थी। अब उसकी तरफ ध्यान भी नहीं देती थी। अक्सर उसकी कही बात को अनसुना कर देती थी। दोनों के बीच झगड़े होने लगे। मार्वल उसे तलाक देने की धमकी देने लगा। पर वह कुछ करता उससे पहले ही बीमारी ने उसे आकर घेर लिया। कुछ महीनों तक बीमारी से जूझने के बाद वह अपनी सारी दौलत जेनिफर उर्फ मानवी के लिए छोड़कर चला गया।
मानवी अब पूरी तरह से आज़ाद हो गई थी। वह मार्वल की दौलत पर ऐश करने लगी। वह कुछ समय के लिए अंजन से बदला लेने की बात भी भूल गई थी। एक दिन वह एक नाइट क्लब में गई थी। अचानक उसकी नज़र वहाँ अंजन पर पड़ी। वह डांस फ्लोर पर उछल कूद कर एक लड़की को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। कुछ देर बाद वह उस लड़की के साथ बात करने लगा।
मानवी के अंदर बदले की आग पूरी तरह नहीं बुझी थी। इस घटना ने उसे कुरेद कर भड़का दिया था।

निर्भय ने उसके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। मानवी ने उसे अंदर आने के लिए कहा। निर्भय ने उसे कुछ बताया। सुनकर मानवी खुश हो गई।

अंजन के अचानक लंदन आने से उसका दोस्त सागर खत्री भी अचरज में पड़ गया था। अंजन ने उसे बताया कि उसके लिए उन दोनों हमला करने वालों का पता लगाना बहुत ज़रूरी है। इसलिए उससे भारत में रुका नहीं गया। वह खुद ही यहाँ चला आया।
सागर ने बताया कि उसका ईमेल मिलने के बाद ही उसने अपने आदमियों को काम पर लगा दिया था। अभी तक कुछ पता तो नहीं चला है। पर उसे उम्मीद है कि जल्दी ही सफलता मिलेगी।
अंजन मानवी और निर्भय को तलाश करने के प्रयास में खुद भी लग गया। पर एक हफ्ता बीतने के बाद भी उसे कोई सफलता नहीं मिली थी। उसने मीरा से मिलने की कोशिश की तो पता चला कि वह लंदन में नहीं है। उसने एक आदमी को इस निर्देश के साथ मीरा के घर पर नज़र रखने के लिए नियुक्त कर दिया था कि जैसे ही मीरा लंदन आए उसे सूचना दे दी जाए।

सागर खत्री और अंजन बैठकर शराब पी रहे थे। दोनों इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि आखिर इतनी कोशिश करने के बाद भी दोनों मिले क्यों नहीं। सागर ने कहा,
"लंदन क्या उसके आसपास के इलाकों में भी तलाश किया। पर दोनों का कोई पता नहीं चला। फिर भी मैंने अपने आदमियों को कह दिया है कि कोशिश ना छोड़ें।"
उसने अंजन की तरफ देखकर कहा,
"पर मुझे लगता है कि तुमने मुझे जो जानकारी दी है वह पूरी नहीं है। जो मुझे बताया है उसके अलावा भी बहुत कुछ है जो तुम बता नहीं रहे हो। सही यही होगा कि तुम मुझे सारी बात बताओ।"
अंजन ने मानवी के बारे में उसे कुछ नहीं बताया था। लेकिन अब सागर ने जब पूँछा था तो उसे लग रहा था कि सब बता देना चाहिए। उसने सागर को मानवी और निर्भय की सारी सच्चाई बता दी।

....
 
रिस्की लव - 25

अंजन ने सागर को सबकुछ बता दिया। कैसे उसने मानवी को अपने प्यार के जाल में फंसा कर शादी की थी। उसके ज़रिए उसके भाई की दौलत और बिज़नेस पर कब्ज़ा किया। पहले दोनों भाइयों को मरवाया और फिर मानवी को उसके प्रेमी निर्भय के साथ मरवाने का प्रयास किया। पर दोनों बच गए। उन दोनों ने मिलकर ही उस पर हमला किया था।
अंजन ने सागर से कहा,
"एक बात और मुझे परेशान करती है। आखिर वह कौन है जिसने ‌मेरे शिमरिंग स्टार्स में होने की खबर उन दोनों को दी होगी।"
सागर अपनी सीट से उठकर खड़ा हो गया। वह कमरे में इधर उधर टहलने लगा। वह एकदम शांत था।‌ अंजन समझ रहा था कि उसका दिमाग किसी एक दिशा में काम कर रहा है। इसलिए वह उसे डिस्टर्ब नहीं कर रहा था।‌ करीब दस मिनट तक सागर अपने मन में कुछ हिसाब किताब लगाता रहा।‌ उसके बाद वापस आकर अपनी कुर्सी पर बैठ गया। उसने अंजन की तरफ देखकर कहा,
"मुझे ऐसा लगता है कि लंदन वाली बात हमें गुमराह करने के लिए की गई है। मानवी और निर्भय कहीं और ही हैं। जिसने तुम्हारे बीच हाउस में होने की खबर दी वह भी उनके साथ मिला हुआ है।"
अंजन ने कुछ सोचकर कहा,
"तुम्हारा अंदाज़ा सही है। तभी इतना तलाशने पर भी दोनों लंदन में नहीं मिले। मेरी खबर पहुँचाने वाले ने ही यह सब किया होगा।"
सागर ने गंभीर आवाज़ में कहा,
"तुमको क्या लगता है कि तुम्हारे बीच हाउस में होने की खबर किसने दी होगी ?"
सागर ने जिस गंभीरता से यह बात कही थी उसे सुनकर अंजन परेशान हो गया। वह बोला,
"यही तो समझ नहीं आ रहा है। मुझे पंकज और तरुण पर शक था। लेकिन वह शक बेकार था।"
"हाँ.... क्योंकी दोनों ही अब इस दुनिया में नहीं हैं। जबकी अभी भी तुम्हारा मुखबिर उन लोगों के साथ है।"
"हाँ यह बात तो है। वैसे मैंने सोचा था कि मानवी और निर्भय का पता चल जाएगा तो वह आदमी भी पकड़ा जाएगा।"
सागर ने फिर कुछ सोचकर कहा,
"सही है। ऐसा करो कि तुम उस जासूस एंथनी से कहो कि वह होटल के सिक्योरिटी इंचार्ज दर्शन वशिष्ठ पर निगाह रखे। मुझे लगता है कि वह उन दोनों के इशारे पर काम कर रहा है।"
"ठीक है मैं अभी उसे फोन करता हूंँ।"
"अंजन... मेरी मानो तो तुम भी इंडिया लौट जाओ। वहाँ रहकर तुम अपनी कोशिश करो। मैं यहाँ से अपनी कोशिश करता हूँ।"
अंजन को सागर की बात में दम लगा। उसने कहा,
"बात तुम्हारी सही है। पर मैं सोच रहा था कि एक बार मीरा से मुलाकात हो जाती। उससे बात करना ज़रूरी है। सागर मैं उसे बहुत चाहता हूँ।"
सागर ने अंजन को गौर से देखा। उसके बाद बोला,
"मीरा के आते ही मैं तुम्हें खबर कर दूँगा। लेकिन तुम्हारा इंडिया जाकर पता करना ही ठीक होगा।"
अंजन को लगा कि जिस तरह उसने उसकी तरफ देखकर यह बात कही है उसके कुछ मायने हैं। उसने कहा,
"कोई खास बात है सागर ?"
"जो भी है अब जल्दी ही सामने आ जाएगा।"
"ठीक है तो फिर मैं इंडिया के लिए निकलता हूँ।"
अगली फ्लाइट से ही अंजन इंडिया लौट गया।

मानवी और ‌निर्भय डिनर कर रहे थे।‌ तभी निर्भय का फोन बजा। सही सिग्नल ना आने के कारण वह बाहर जाकर बात करने लगा। मानवी का मन भी खाने में नहीं लगा। वह भी उठकर निर्भय के पीछे चली गई। जो आवाज़ें उसके कानों में पड़ रही थीं उससे मानवी को अंदाज़ा लग गया था कि किसका फोन है। वह आदमी अपने पैसों के लिए तकाज़ा कर रहा था। निर्भय समझा रहा था कि जो ‌थोड़े से पैसे बचे हैं वह भी जल्दी ही मिल जाएंगे।
बात समाप्त कर निर्भय मुड़ा तो पीछे मानवी को खड़ा हुआ पाया। मानवी ने कहा,
"अभी कितना देना है उसे ?"
"अधिक नहीं है। पर वह फिर भी पीछे पड़ा है।"
मानवी परेशान हो गई। निर्भय ने कहा,
"परेशान ना हो। वह कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा। उसे नहीं पता है कि हम यहाँ हैं। वैसे भी मैंने उसके पैसों का इंतज़ाम सोच लिया है।"
निर्भय ने मानवी का हाथ पकड़ा और उसे ‌अंदर ले गया। दोनों दोबारा खाना खाने लगे। पर दोनों का ही मन अब खाने में नहीं लग रहा था। दोनों ने ही थोड़ा सा खाना खाया फिर उठ गए। निर्भय ने एक एक ड्रिंक बनाया। एक ड्रिंक मानवी को देते हुए बोला,
"तुम चिंता मत करो। मैं सब संभाल लूँगा। अंजन को चैन से नहीं बैठने देंगे। उस पर हमला करने वाले हम दोनों हैं यह जानने के बाद वह बहुत तड़प रहा है।"
मानवी ने अपना ड्रिंक सिप करते हुए कहा,
"अभी तो जब उसे पता चलेगा कि हमारा साथ देने वाला कौन है तो उसका और भी बुरा हाल होगा। हम अब उसे इसी तरह झटके देकर कमज़ोर कर देंगे।"
"तुम चाहती थी ना उससे अपना सबकुछ छीनना। अब हम उसे मानसिक रूप से कमज़ोर कर तोड़ देंगे।"
दोनों कुछ देर ड्रिंक पीते हुए इसी तरह बातें करते रहे।‌ ड्रिंक खत्म करके निर्भय बेडरूम में चला गया। लेकिन मानवी ने कहा कि वह कुछ देर बाहर गार्डन में टहलेगी।
गार्डन में टहलते हुए मानवी एक बार फिर बीते वक्त को याद करने लगी।

नाइट क्लब में अंजन को उस लड़की के साथ देखने के बाद से ही मानवी का मन बदला लेने के लिए तड़पने लगा। पर अकेली वह कुछ करने की स्थिति में नहीं थी। उस समय उसे लग रहा था कि काश निर्भय उसके साथ होता। उसी समय एक बहुत ही सुखद इत्तेफाक उसके साथ घटा।
लंदन में वह लोगों के लिए मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर थी। ऐसे में मार्वल के कुछ नज़दीकी लोगों के फंक्शन्स में उसे जाना पड़ता था। वह मार्वल के एक नज़दीकी दोस्त की शादी की बीसवीं सालगिरह की पार्टी में गई थी। वहाँ उसकी मुलाकात निर्भय से हो गई।
पार्टी के होस्ट ने जब मानवी का परिचय मार्वल की विधवा जेनिफर के रूप में कराया तो निर्भय ने अपने मन का अचरज छिपाते हुए उससे उसी रूप में मुलाकात की। पर मानवी और निर्भय दोनों ही एक दूसरे से अकेले में मिलकर एक दूसरे पर बीती सुनना चाहते थे। मौका देखकर निर्भय ने उसे अपनी कॉटेज का पता दे दिया जहाँ वह ठहरा हुआ था।
अगले दिन मानवी निर्भय से मिलने कॉटेज पहुँच गई। मानवी ने अपने पर बीती हर एक बात विस्तार से बता दी। उसे बताया कि किस तरह मार्वल की पत्नी बनकर वह लंदन आई।‌
निर्भय ने उसे बताया कि अपने एक दोस्त की मदद से वह सिंगापुर चला गया। वहाँ अपनी जान पहचान के कुछ लोगों से ‌सहायता लेकर अपना व्यापार शुरू किया। जल्दी ही उसमें सफल हो गया। लंदन वह किसी काम से आया था। कल की पार्टी के होस्ट से परिचय था। उसके बुलाने पर पार्टी में गया था।
उसने मानवी को बताया कि व्यापार में उसकी सफलता का कारण अंजन के लिए उसकी नफरत है। वह अंजन से बदला लेना चाहता था। अंजन की वजह से उसका सबकुछ बर्बाद हो गया। उसे मृत समझकर उसके माता पिता उसके गम में चल बसे। वह अंजन से बदला लेने के लिए तड़प रहा है।
मानवी ने उसे नाइट क्लब वाली बात बताई। उसे बताया कि अंजन शायद लंदन में ही है। यह खबर सुनकर निर्भय ने कहा कि मानवी अगर उसका साथ दे तो दोनों मिलकर अपने दुश्मन को सबक सिखा सकते हैं। मानवी तो खुद यही चाहती थी।

निर्भय ने मानवी के बताए हुए हुलिए के हिसाब से नाइट क्लब में उस लड़की के बारे में पता करवाया। उसे पता चला कि उस लड़की का नाम मीरा आसवानी है। वह एक स्कल्पचरिस्ट है। निर्भय ने ‌मीरा पर नज़र रखना शुरू कर दिया। उसने देखा कि अंजन दिन पर दिन मीरा के करीब आ रहा है। वह भारत लौटने से पहले उसके घर भी गया था।
उसने सारी बात मानवी को बताई। मानवी ने कहा कि अंजन एक दिलफेंक आशिक है। कुछ दिनों तक वह किसी लड़की के पीछे दीवाना बना फिरता है।‌ जब मन भर जाता है तो उसे अपनी ज़िंदगी से निकाल कर फेंक देता है। वह मीरा के साथ भी ऐसा ही करेगा। निर्भय को इस बात में एक अवसर नज़र आया। उसने मानवी से कहा कि वो दोनों मीरा को अपनी ओर करके अंजन के विरुद्ध इस्तेमाल कर सकते हैं। मानवी को उसकी बात समझ आ गई।
मानवी और निर्भय मीरा से मिले। मानवी ने उसे अंजन और अपनी कहानी सुनाई। उसे बताया कि कैसे अंजन ने उसके पिता समान भाइयों की हत्या कर उसका सबकुछ हड़प लिया। निर्भय अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने में उसकी मदद कर रहा था। अंजन ने उसे और निर्भय को जान से मरवाने का प्रयास किया। किस्मत अच्छी थी कि दोनों बच गए। अब दोनों उस अंजन से बदला लेना चाहते हैं। मानवी ने मीरा से कहा,
"अंजन भरोसे के लायक नहीं है। तुम उस पर भरोसा ना करके हमारा साथ दो।"
उसकी बात सुनकर मीरा कुछ देर तक सोचती रही। उसके बाद बोली,
"आप दोनों की बात पर मैं भरोसा क्यों करूँ ? आप लोगों का साथ देने में मेरा क्या फायदा है ?"
मीरा ने अपनी बात कहकर अपनी आँखें मानवी और निर्भय पर जमा दीं। उसके कहने का अंदाज़ बता रहा था कि वह उनकी मदद में अपना फायदा तलाश रही है। निर्भय ने कहा,
"तुम बताओ हमारी मदद करने के बदले में क्या चाहती हो ?"
निर्भय के इस सीधे प्रस्ताव पर मीरा मुस्कुरा दी। उसने बेझिझक कहा,
"मुझ पर कुछ कर्ज़ है। मैं पैसों के लिए अंजन के साथ नज़दीकी बढ़ा रही थी। आप लोग मेरे काम आइए और मैं आप लोगों के काम आ जाऊँगी।"
मानवी और निर्भय मीरा के काम आने को तैयार हो गए। उन्होंने उसका कर्ज़ उतार दिया। इसके अलावा भी पैसों से उसकी मदद करने की बात कही।
मीरा उनके साथ हो गई। उसने मानवी और निर्भय के कहने पर अंजन को अपना दीवाना बना लिया।

......
 
रिस्की लव - 26

नफीस सहारा देकर शाहीन को वॉशरूम तक ले गया। उसके बाद बाहर खड़ा होकर इंतज़ार करने लगा। वह शाहीन को हॉस्पिटल से अपने घर ले आया था। उसकी अम्मी ने जो कहा था उसके बाद शाहीन भी यही चाहती थी।‌ नफीस उसकी पूरे मन से देखभाल कर रहा था। शाहीन ने अंदर से आवाज़ दी। नफीस सहारा देकर उसे बाहर ले आया।
शीरीन को हॉल में सोफे पर बैठाने के बाद वह चाय बनाने के लिए किचन में चला गया। चाय बनाते हुए उसका ध्यान विनोद की बताई हुई बात पर था। विनोद ने उसे बताया था कि अंजन भारत लौट आया है। उसने एंथनी से मुलाकात भी की थी। विनोद ने इसी सिलसिले में उसे फोन करके घर के पास वाले रेस्टोरेंट में मिलने की इच्छा जताई थी। वह सोच रहा था कि जब कुक खाना बनाने आएगी तब जाकर मिल लेगा।
नफीस चाय कप में डालकर हॉल में आया तभी कॉलबेल बजी। उसने जाकर दरवाज़ा खोला तो नाज़नीन थी। वह अक्सर हालचाल लेने के लिए आती थी। नाज़नीन ने अंदर आकर शाहीन का हालचाल पूछा। नफीस ने अपनी चाय उसे दे दी। दोनों बहनें बातें कर रही थीं। नफीस को ‌विनोद से मिलने का यही सही मौका लगा। उसने नाज़नीन से कहा,
"मुझे ज़रूरी काम से कुछ देर के लिए बाहर जाना है। क्या तुम कुछ देर रुक सकती हो ? मैं जल्दी ही लौट आऊँगा।"
"आप निश्चिंत रहिए। मैं आपके आने के बाद ही जाऊँगी।"
नाज़नीन से आश्वासन पाकर नफीस ने फौरन विनोद को फोन करके रेस्टोरेंट आने के लिए कहा। कुछ ही देर में तैयार होकर वह भी निकल गया।

कुछ ही देर में विनोद रेस्टोरेंट पहुँच गया। उसने अपने लिए एक कोल्ड ड्रिंक मंगाया। एक सिप लेने के बाद बोला,
"सर...एक बात पता चली है जो हमारे काम की हो सकती है।"
"क्या पता चला है ?"
"सर... दर्शन वशिष्ठ छुट्टी पर कहीं चला गया है। मुझे लगता है कि इसका कारण अंजन का केस है। शायद वह उसके डर से ही कहीं चला गया है।"
यह खबर सुनकर नफीस कुछ सोच में पड़ गया। कुछ पलों के बाद बोला,
"हो सकता है कि दर्शन अंजन पर हमला करने वालों के इशारे पर काम कर रहा हो। इसलिए अंजन ने एंथनी को दोबारा उसके पीछे लगाया होगा।‌ इसी सिलसिले में अंजन एंथनी से मिला होगा। तुम्हें कुछ पता चला कि एंथनी और अंजन के बीच क्या बातें हुई थीं ?"
"नहीं सर..."
"मैं भी इन दिनों अपनी उलझनों में फंसा हूँ। उसके बाद चैनल का काम। इस केस पर जो भी जानकारी मिल रही है तुम्हारे ज़रिए ही मिल रही है।‌ तुम ‌कोशिश करो कि एंथनी से मुलाकात कर कुछ पता कर सको।"

विनोद ने अपना कोल्ड ड्रिंक समाप्त करते हुए कहा,
"सर पूरी कोशिश करूँगा।"
"हालांकि एंथनी बहुत चालाक है। जल्दी सही बात नहीं बताएगा। तुम उस पर नज़र रखो। अपने हिसाब से बातें पता करने की कोशिश करो।"
"ओके सर। मैं अपने हिसाब से एंथनी पर नज़र रखूँगा। वैसे भाभी जी कैसी हैं ?"
"ठीक है। पैर में प्लास्टर है। अभी उसे उसकी बहन के साथ छोड़कर आया हूँ। अब चलता हूँ। आगे कुछ भी पता चले तो बताना।"
नफीस और विनोद एक साथ ही रेस्टोरेंट से निकल गए।

अंजन अपने कमरे में बैठा शराब पी रहा था। वह बहुत गुस्से में था। दर्शन वशिष्ठ ने उसके साथ धोखा किया था। वह दिखावे के लिए उसकी मदद कर रहा था। पर वास्तव में मानवी और निर्भय के साथ मिलकर उसे बेवकूफ बना रहा था। आज तक किसी की भी हिम्मत अंजन के साथ ऐसा करने की नहीं हुई थी। इसलिए दर्शन की यह हिमाकत उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उसने ‌अपने आदमियों को दर्शन की खोज में लगा दिया था।
वह चाहता था कि दर्शन को उसके किए की उसी तरह सज़ा दे जैसे तरुण काला को दी थी।‌ यह बात उसे नश्तर की तरह चुभ रही थी कि दर्शन ने उससे पैसे ऐंठकर उसे धोखा दिया।
दर्शन के अलावा मीरा का कोई पता ना चलना भी उसे परेशान किए हुए था। इतने दिनों से मीरा का कोई पता नहीं चला था।‌ सागर ने उससे बात करते ‌समय मीरा का ज़िक्र आने पर जिस तरह रिएक्ट किया था अंजन को अजीब लगा था।‌ तब‌ उसे लगा था कि सागर की उस प्रतिक्रिया के कुछ मायने हैं।‌ उसने सागर से पूँछा भी था। पर उसने बात टाल दी थी। पर अब उसके अपने दिमाग में मीरा को लेकर बहुत कुछ चल रहा था।
उस दिन उसके शिमरिंग स्टार्स जाने की बात पंकज के अलावा उसे भी ‌मालूम थी। पर उसका दिल ‌इस बात पर यकीन करने को तैयार नहीं था ‌कि मीरा ने उसके दुश्मनों को उसके वहाँ होने की बात बताई होगी। वह अपने दिल को समझाता था कि ऐसा नहीं ‌है। मीरा भी उसे वैसे ही चाहती है जैसे वह उसे चाहता है। वह उसके प्यार को छल नहीं सकती है।‌
वह अपने दिल को तर्क देता था कि अगर मीरा को उस पर हमला करवाना होता तो वह खुद वहाँ क्यों होती। हमला होने पर वह भी घबराई हुई थी। अगर उसे पहले से पता होता तो वह खुद को बचाकर वहाँ से भाग गई होती। पर उस हमले से वह खुद हतप्रभ थी।
वह अपने मन को समझाता तो था पर दूसरी ओर उसका दिल मीरा को गुनहगार बताने के लिए अपने तर्क रख रहा था। पंकज की कैद से जब वह उसे छुड़वा कर लाया था तब मीरा का अचानक उस पर ‌धोखा देने का इल्ज़ाम लगाकर चले जाना उसे समझ नहीं आया था। इस समय वही बात उसके मन में शक पैदा कर रही थी।‌ मीरा की तरह मानवी और ‌निर्भय‌ का लंदन से संबंध होना और उसका लंदन में ना होना भी शक पैदा कर रहा था।
मीरा ही वह लड़की थी जिसे अंजन ने सच्चे दिल से प्यार किया था। इसलिए अपने मन में उठने वाले सारे शकों को वह नकारने की पूरी कोशिश करता था। अपने दिल को समझाता था कि मीरा बिल्कुल भी वैसी नहीं है जैसा उसका दिल कह रहा है।
लेकिन हर बीतते दिन के साथ उसका मन घबरा रहा था कि कहीं उसका शक सच ना हो जाए।

मीरा बाहर बरामदे में हंग चेयर पर बैठी थी।‌ उसका चेहरा मुर्झाया हुआ था।‌ उसके मन में एक डर था। वह जानती थी कि सच्चाई पता चलने पर अंजन को बहुत धक्का लगेगा। पर वह धक्का उसे तोड़ने की जगह उसके गुस्से को और बढ़ा देगा। अंजन के अपने लिए प्यार की गहराई को उसने महसूस किया था। अंजन के स्वभाव से भी वह परिचित थी। जानती थी कि उसे शिद्दत से चाहने वाला अंजन उसके धोखे को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। पर दूसरे आशिकों की तरह वह खुद को नुकसान नहीं पहुँचाएगा। बल्की हर एक बात का सूद समेत बदला लेगा।
अचानक ही उसका मन घबराने लगा। वह उठकर भीतर अपने कमरे में जाकर लेट गई। उस दिन अंजन से झगड़ा करने के बाद वह लंदन ना जाकर यहाँ आ गई थी। जब पंकज की कैद से छूटने के बाद वह उसके बंगले पर पहुंँची थी तब अंजन ने उसकी सुविधा का जिस तरह खयाल रखा था उसे देखकर वह समझ गई थी कि अंजन उसे कितनी गहराई से चाहता है। उसे बहुत अच्छा लगा था। उस पल उसके मन में आया था कि वह सबकुछ भूलकर अंजन की हो जाए।
पर जिस तरह अंजन ने अपने पुराने साथी पंकज को उसके धोखे के लिए सज़ा दी थी वह घबरा गई थी। धोखा तो उसने भी अंजन को दिया था। उस पर बीच हाउस में हुए हमले का कारण वही थी। यह बात मन में आते ही वह डर गई थी। उसे यही सही लगा कि वह अंजन से दूरी बना ले। वह बातें छिपाने का बहाना करके उसके घर से चली आई। लेकिन वह जानती थी कि असलियत तक पहुँचने में अंजन को अधिक समय नहीं लगेगा। इसलिए वह वापस लंदन नहीं गई।
उसने लालच में मानवी और निर्भय की मदद की थी। तब वह अंजन के अपने लिए प्यार को सही तरह से समझ नहीं पाई थी। अब वह अपने उस फैसले पर पछता रही थी। उसे लगता था कि मानवी और निर्भय का साथ देने की जगह अंजन का साथ देना उसके लिए सही होता।
मानवी और निर्भय के कहने पर उसने अंजन से दोस्ती बढ़ाई। भारत जाकर कुछ दिन उसके घर पर रही। वह मानवी और निर्भय को अंजन की हर बात की खबर देती थी। जब अंजन ने रिज़ॉर्ट की भूमि पूजा के लिए मीरा को भारत बुलाया था तब मानवी और निर्भय भी भारत आए थे। वह चाहते थे कि अंजन से बदला लेने का मौका तलाश रहे थे।‌ अंजन मीरा को पहले भी कई बार अपने बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स पर ले जाने की बात कर चुका था।‌
उस शाम जब मीरा बीच हाउस में जाने के लिए तैयार हो रही थी तब मानवी का उसके पास फोन आया था। मीरा ने मानवी को बताया कि वह अंजन के साथ उसके बीच हाउस पर जा रही है।
मीरा को इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि मानवी और निर्भय अपना बदला लेने के लिए बीच हाउस पर हमला कर देंगे।‌ वह तो बड़े इत्मीनान के साथ अंजन के साथ थी। जब अंजन ने उसके सामने अपने प्यार का इज़हार किया तो वह कुछ देर के लिए भावनाओं में बह गई थी। उस समय उसके दिमाग में विचार आया था कि वह अंजन को मानवी और निर्भय के बारे में बता देगी। लेकिन जब अंजन उसे अंगूठी पहना रहा था तब अचानक गोली चली। उस समय उसे खयाल आया कि यह हमला मानवी और निर्भय ने कराया होगा। वह घबरा गई थी। अंजन ने उसे हिफाज़त में लेकर आत्मरक्षा में गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
पंकज के आने पर अंजन ने अपनी परवाह ना करके उससे कहा कि वह मीरा को अपने साथ ले जाए। तब मीरा को अपने लिए उसकी फिक्र का अंदाज़ा लगा था। उसे इस बात का बुरा लगा था कि उसकी वजह से ही अंजन मुश्किल में है। लेकिन तब किसी भी बात के लिए समय नहीं था। पंकज उसे लेकर वहाँ से चला गया। उसने सोचा था कि उसे सुरक्षित कहीं पहुँचाने के बाद पंकज अंजन की मदद के लिए जाएगा। पर उसके इरादे ही अलग थे। वह मीरा को किडनैप करके ले गया।
तब मीरा के मन में आया था कि शायद हमला पंकज ने ही करवाया हो। पंकज की कैद से छूटने के बाद साफ हो गया कि हमला मानवी और निर्भय ने किया था। पंकज का हश्र देखकर वह घबरा गई थी।
अंजन से बचकर यहाँ आ गई थी।

.....
 
रिस्की लव - 27

एंथनी गोवा जाने वाली बस पर बैठा था। उससे कुछ सीट पहले बैठा विनोद नफीस को फोन पर बता रहा था कि वह एंथनी का पीछा करते हुए गोवा जा रहा है।‌ उसने अपना रूप हिप्पी की तरह ‌बना रखा था।‌ नफीस ने उससे सावधान रहने को कहा। सारे रास्ते विनोद की नज़र एंथनी पर बनी हुई थी। दो एक बार एंथनी की नज़र भी उस पर पड़ी थी। विनोद को लगा था कि उसने उसे नहीं पहचाना है।
गोवा पहुँचकर एंथनी बस से नीचे उतरा। विनोद भी हिप्पी के भेष में उस पर नज़र बनाए हुए नीचे उतरा। एंथनी बस से उतरकर सीधा वॉशरूम की तरफ बढ़ गया। विनोद बाहर खड़े होकर उसका इंतज़ार करने ‌लगा। करीब आधा घंटा बीत जाने ‌के बाद भी जब एंथनी बाहर नहीं आया तो विनोद ने अंदर जाकर देखा। लेकिन एंथनी दिखाई नहीं पड़ा। उसने देखा कि शायद कहीं और से भी बाहर जाने का रास्ता हो। पर बाहर जाने का कोई और रास्ता नहीं था। विनोद परेशान हो गया कि उसने एंथनी को बाहर निकलते नहीं देखा तो वह कहाँ गया।
बस स्टैंड से बाहर निकल कर भी विनोद ने एंथनी को तलाशने की कोशिश की। पर वह कहीं नहीं मिला। विनोद ध्यान से सोचने लगा।‌ एंथनी उसके देखते हुए वॉशरूम के अंदर गया था। वह खड़ा होकर उसके बाहर आने की राह देखने लगा। उसके बाद कई लोग बाहर निकले। पर एंथनी नहीं निकला।‌ अचानक उसे याद आया कि एंथनी के वॉशरूम जाने के कुछ मिनटों के बाद ही एक आदमी पठानी सूट में बाहर आया था। उसके चेहरे पर दाढ़ी थी। कद-काठी के हिसाब से वह एंथनी की तरह ही था। विनोद समझ गया कि उसे ना पहचानने का दिखावा करने वाला एंथनी उसे पहचान गया था। बड़ी चालाकी से उससे पीछा छुड़ाकर चला गया। विनोद ने फौरन नफीस को फोन पर सब बता दिया।

पठानी सूट पहने एंथनी डिसूजा विला के गेट पर खड़ा था। गेट पर बैठा सिक्योरिटी गार्ड उससे पूछताछ कर रहा था। एंथनी ने हवा में तीर छोड़ते हुए कहा,
"भाई तुम यहाँ नए आए हो। इसलिए पीर मोहम्मद अली को नहीं जानते हो। डिसूज़ा साहब का पसंदीदा कुक था। कोई भी पार्टी हो। खाने की सारी ज़िम्मेदारी मेरी होती थी।"
सिक्योरिटी गार्ड सचमुच नया था। उसे बस इतना पता था कि यह विला मार्वल डिसूज़ा का है जो अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी पत्नी जेनिफर अपने दोस्त के साथ यहाँ रह रही है। एंथनी जिस तरह से बात कर रहा था उससे उसे उसकी कही हर बात पर यकीन हो रहा था। फिर भी उसने कड़क कर कहा,
"हो सकता है। पर मार्वल डिसूज़ा सर अब जीवित नहीं हैं। उनकी पत्नी यहाँ रह रही हैं।"
एंथनी ने आँखों में नमी और आवाज़ में दुख लाकर कहा,
"पता चला कि हमारे प्यारे डिसूज़ा साहब नहीं रहे। अल्लाह उनकी रूह को सुकून दें। दरअसल जब वह बाहर चले गए थे तो मैंने भी नौकरी छोड़ दी थी।‌ अपने घर महाराष्ट्र चला गया था। किसी काम से गोवा आया था तो आ गया।"
सिक्योरिटी गार्ड को उसकी बात पर पूरा भरोसा हो गया था। उसने कहा,
"उनकी पत्नी जेनिफर मैडम से मिलना है। वो घर में ही हैं।"
"एक बार सलाम कर लेता तो अच्छा था। हालांकि वह मुझे जानती नहीं हैं। उनके आने से कुछ साल पहले ही मैंने नौकरी छोड़ दी थी। लेकिन अगर कोई तकलीफ हो तो रहने दो।"
सिक्योरिटी गार्ड कुछ कहता उसी समय एक कार गेट पर आई। जब कार अंदर जा रही थी तब एंथनी ने देखा कि कार में वही आदमी है जो सीसीटीवी फुटेज में था। सिक्योरिटी गार्ड गेट खोलकर कार अंदर कराने में व्यस्त था। एंथनी चुपचाप वहाँ से चला गया।
निर्भय ने कार अंदर करते समय गेट पर पठानी सूट में किसी को देखा था। कार पार्क कर उसने सिक्योरिटी गार्ड से पूछा,
"गेट पर पठानी सूट पहने कौन था ?"
सिक्योरिटी गार्ड एंथनी के अचानक गायब हो जाने से परेशान था। उसने कहा,
"सर कह रहा था कि डिसूज़ा सर का पुराना कुक था। पीर मोहम्मद नाम बता रहा था।‌ मैंने कहा कि जेनिफर मैडम से मिलना दूँ। पहले तो हाँ बोला। फिर आप आ गए। मैं गेट खोलने लगा। तब तक कहीं चला गया।"
निर्भय कुछ परेशान हो गया। पर उसे छिपाकर बोला,
"कोई ‌अजनबी आए तो उससे अधिक बात ना किया करो।"
सिक्योरिटी गार्ड डर रहा था कि बहुत डांट पड़ेगी। पर निर्भय ने इतना कहकर छोड़ दिया। उसने कहा कि वह ध्यान रखेगा।

निर्भय अंदर गया तो मानवी सोफे पर बैठी एक फैशन मैगज़ीन देख रही थी। वह सोचती थी कि जब सबकुछ ठीक हो जाएगा तो वह अपना फैशन हाउस खोलने का सपना पूरा करेगी। निर्भय को देखकर उसने मैगज़ीन बंद करके रख दी। वह उससे पूँछने वाली थी कि जिस काम से गया था वह हुआ कि नहीं। पर उसके चेहरे पर परेशानी देखकर बोली,
"क्या बात है ? परेशान लग रहे हो ‌?"
निर्भय ने उसे गेट पर सिक्योरिटी गार्ड से बात करने वाले पीर मोहम्मद के बारे में बताया। सब सुनकर मानवी भी परेशान हो गई। निर्भय ने कहा,
"तुमने कभी मार्वल के मुंह से पीर मोहम्मद का नाम सुना था।"
"नहीं.... बल्की उसने बताया था कि वह कई सालों बाद लंदन से यहाँ आया था। उसके बाद मुझसे शादी करके यहाँ से चला गया। फिर तो वहीं उसकी मौत हो गई।"
अपनी बात कहकर मानवी बहुत डर गई। निर्भय ने समझाते हुए कहा,
"डरने की बात नहीं है। हो सकता है कि तुम्हारे आने से पहले वह यहाँ कुक रहा हो। वह सच कह रहा हो।"
"तो फिर अचानक चला क्यों गया ? मुझे तो लगता है कि वह अंजन का भेजा हुआ आदमी होगा। हमारे बारे में पता करने आया था।"
निर्भय के मन में भी यही डर था। लेकिन वह नहीं चाहता था कि मानवी डर जाए। ऐसा होने पर उसे संभालना मुश्किल होता। उसने कहा,
"अंजन को अगर हमारे बारे में पता चला गया होता तो वह किसी को भेजने की जगह खुद हमसे बदला लेने के लिए आता। तुम बेकार में डरो नहीं। हम सावधान रहेंगे और जल्दी यहाँ से चले जाएंगे।"
निर्भय ने किसी तरह मानवी को शांत करा दिया। पर उसके अपने मन में बहुत कुछ चल रहा था।

विनोद एंथनी के हाथ मिली अपनी हार से बहुत दुखी था। नफीस ने तो उससे कहा था कि वह वापस मुंबई चला आए। लेकिन विनोद ने तय किया था कि वह भी एंथनी का पता किए बिना वापस नहीं जाएगा। बस स्टैंड से बाहर निकल कर उसने अपने हिसाब से पठानी सूट वाले आदमी के बारे में पूँछना शुरू किया।‌ उसे ‌एक टैक्सी ड्राइवर ने बताया कि उसने इसी तरह के हुलिए वाले व्यक्ति को एक विला के पास छोड़ा था। विनोद ने उस टैक्सी ड्राइवर से कहा कि उसे भी वहीं पहुँचा दे।
विनोद भी डिसूज़ा विला के सामने खड़ा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर एंथनी यहाँ क्यों आया होगा। उसने वहीं से खड़े होकर नफीस को फोन पर सारी बात बताई। नफीस ने उससे कहा कि अगर एंथनी वहाँ गया था तो ज़रूर कोई खास बात रही होगी। इसलिए वह उस विला पर नज़र रखने की कोशिश करे।

निर्भय ने तय कर लिया था कि वह मानवी को लेकर सिंगापुर चला जाएगा। वहाँ जाकर सोचेगा कि आगे क्या करना है। मीरा सिंगापुर में उसके घर पर ही थी। उसने अपना फैसला मानवी को बता दिया।

विनोद डिसूज़ा विला पर नज़र बनाए हुए खड़ा था। डिसूज़ा विला बीच के पास था। उसके सामने नारियल के कुछ पेड़ थे। विनोद उन्हीं की आड़ में खड़ा था। अंधेरा हो गया था। उसे भूख लग रही थी। अभी तक सब ठीक था। उसने सोचा कि आसपास जाकर देखता है कि शायद खाने को कुछ मिल जाए। वह खाने के लिए कुछ तलाशने के लिए चला गया।
कुछ दूर जाने के बाद उसे सड़क पर सी फूड का एक कार्ट दिखाई पड़ा। वहाँ उसने पॉन कटलेट खाए। पेट भरने के बाद वह वापस विला के पास जाकर खड़ा हो गया।
वह सोच रहा था कि ना जाने कब तक इस विला पर नज़र रखेगा। तभी अचानक दो जीप आकर डिसूज़ा विला के सामने रुकीं। उसमें से कुछ लोग उतरे। विनोद को वो लोग ठीक नहीं लगे। उनके पास हथियार थे। वो सब जबरदस्ती विला के अंदर घुस गए।
विनोद अचानक हुए इस हमले से घबरा गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। वह अकेला था। उसके पास कोई हथियार भी नहीं था। जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर हमले की जानकारी दे दी।
वह विला के गेट पर नज़र रखे हुए था। कुछ समय बाद उसने देखा कि अंदर गए हुए लोग एक आदमी और एक औरत को लेकर बाहर आए। उन्हें जीप में बैठाकर ले गए। विनोद ने एक जीप का नंबर नोट कर लिया था।
कुछ देर बाद पुलिस विला पर पहुँची। विनोद ने उन्हें सारी बात बताई। उन्हें उस जीप का नंबर भी दे दिया जो उसने नोट किया था।

एंथनी ने अंजन को सूचना दी कि डिसूज़ा विला में उसने सीसीटीवी में दिख रहे आदमी को देखा है। अंजन ने उसकी सूचना के आधार पर अपने एक दोस्त से संपर्क किया। वह भी अपराध की दुनिया से संबंध रखता था। उसने उसे सारी बात बताकर मानवी और निर्भय को अगवा करने का आदेश दिया।
अंजन के उसी दोस्त के आदमी मानवी और निर्भय को लेकर गए थे।

....
 
रिस्की लव - 28

पुलिस को आश्चर्य था क्योंकी डिसूज़ा विला में गेट पर एक सिक्योरिटी गार्ड के अलावा कोई और सिक्योरिटी नहीं थी। कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था जिसकी फुटेज के आधार पर किसी की पहचान की जा सकती।
हमसे में घायल सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि कोई आठ लोग अचानक दो जीपों में भरकर आए। उनके पास हथियार थे। सबने चेहरे ढके हुए थे। उनमें से एक ने उसे गन प्वाइंट पर धमका कर गेट खुलवा लिया। फिर किसी चीज़ से उसके सर के पिछले हिस्से पर हमला किया। वह बेहोश हो गया।
सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि विला में मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर और उसका एक साथी निर्भय ‌रह रहे थे। हमला करने वालों ने उन्हीं का अपहरण किया था।
विनोद ने भी अपने बयान में आठ लोगों के होने की बात कही थी। उसने बताया कि सभी ने नकाब से अपने चेहरे ढक रखे थे। वह अचानक हुए इस हमले से घबरा गया। उसने फौरन पुलिस को फोन किया।‌
इस केस को देख रहे इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने विनोद से पूँछा कि हमले के समय वह वहाँ क्या कर रहा था। विनोद ने उसे बताया कि वह एक टूरिस्ट है। टहलते हुए उधर चला गया। ठीक उसी समय हमला हुआ। उसने अच्छे नागरिक के तौर पर पुलिस को इसकी सूचना दे दी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने विनोद द्वारा बताए गए जीप के नंबर की खोज करने का आदेश दे दिया।

विनोद ने सारी बात की जानकारी फोन पर नफीस को दे दी। नफीस ने उससे कहा कि वह अभी कुछ दिन गोवा में रहे और इस केस से संबंधित हर एक जानकारी उसे देता रहे। विनोद ने एक सस्ते से होटल में खुद के रहने की व्यवस्था कर ली।

नफीस अपने घर पर बैठा डिसूज़ा विला में जो हुआ उसे समझने का प्रयास कर रहा था।‌ उसे अंदाज़ा लग गया था कि डिसूज़ा विला में जो लोग थे उनका संबंध ज़रूर अंजन पर बीच हाउस में हुए हमले से है। लेकिन विला में रहने वाले लोगों के जो नाम सामने आए थे वह नए थे। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर का अंजन से क्या संबंध हो सकता है ? या फिर जैसा वह सोच रहा है यह सब अंजन ने करवाया ही नहीं। यह काम किसी और का है। जिसका मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर से कोई झगड़ा हो।‌
यह बात उसे तसल्ली नहीं दे रही थी। कारण था एंथनी का डिसूज़ा विला जाना। एंथनी के डिसूज़ा विला जाने के कुछ ही घंटों के बाद हमला होना। जिसमें जेनिफर और उसके दोस्त निर्भय का अपहरण हो गया।
निर्भय इस नाम के बारे में जब भी नफीस सोचता था तो उसे लगता था कि जैसे उसने यह नाम पहले कहीं सुना है। वह अपने दिमाग पर ज़ोर डालने लगा। बहुत सोचने पर उसे याद आया। मानवी के अचानक गायब हो जाने की खबर जब शहर में चर्चा का विषय बनी थी तब एक अखबार में उसके साथ एक नाम जोड़ा गया था। वह नाम था निर्भय वाधवा।
यह याद आते ही नफीस का दिमाग तेज़ी से काम करने लगा। वह तारों को जोड़ने की कोशिश करने लगा। उसे यकीन हो गया था कि जेनिफर और कोई नहीं मानवी है। इसका मतलब था कि मानवी अपनी मर्ज़ी से निर्भय के साथ नहीं भागी थी। कुछ हुआ था जिसका बदला लेने के लिए मानवी ने ही अंजन पर हमला करवाया था।‌ अपनी इस बात पर उसे पूरा यकीन था।
मानवी के साथ अंजन ने क्या किया था ? वह मानवी से जेनिफर डिसूज़ा कैसे बनी ? निर्भय ने अंजन पर हमले में उसका साथ क्यों दिया ? यह सारे सवाल अब उसे और अधिक परेशान कर रहे थे। उन सवालों के जवाब तभी मिल सकते थे जब गोवा पुलिस सही समय पर अपहरणकर्ताओं को पकड़ सके। देर होने पर इस बात की पूरी संभावना थी कि अंजन जेनिफर उर्फ मानवी और उसके साथी निर्भय को मार देता।
नफीस ने विनोद को फोन किया। उसे अपने मन में उठी सारी बातें बताईं। उसने विनोद से कहा कि वह इस केस पर पूरी मुस्तैदी से नज़र बनाकर रखे।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत को फोन पर खबर मिली कि ‌एक दुकान के सीसीटीवी फुटेज में एक जीप दिखाई पड़ी है। उस पर पूरा नंबर तो दिखाई नहीं पड़ रहा है पर जो नंबर अपरण करने वालों की जीप का दिया गया है उसकी दो डिज़िट सीसीटीवी फुटेज में दिखाई पड़ रही हैं। जीप में केवल एक ड्राइवर था जिसकी शक्ल दिखाई नहीं पड़ रही थी।‌
सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने खुद वह सीसीटीवी फुटेज देखी। उसने आदेश दिया कि दुकान के आसपास के इलाके में जीप को तलाश करने की कोशिश की जाए।
पुलिस के खबरी ने बताया कि जिस दुकान में सीसीटीवी कैमरा लगा था उसके आगे कुछ ही दूर पर माइकल का गैराज है। माइकल दिखावे के लिए गैराज चलाता है। असलियत में वह अपराध से जुड़ा है। उसने वैसी ही जीप गैराज में देखी है। इस खबर के आधार पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने अपना प्लान बनाया।

अंजन को खबर मिली कि मानवी और निर्भय को अगवा कर लिया गया है तो उसने उन्हें मुंबई लेकर आने का आदेश दिया। मानवी और निर्भय के अपहरण का काम अंजन के दोस्त समर ने अपने आदमी माइकल से करवाया था। समर ने माइकल को आदेश दिया कि वह उन दोनों को सही सलामत मुंबई अंजन के पास पहुँचा दे।

मानवी और निर्भय माइकल की गैराज के पिछले हिस्से में कैद थे। वह दोनों एक दूसरे के आमने सामने ही थे। उनके हाथ पैर और मुंह बंधे हुए थे।‌ दोनों चुपचाप बस आसपास की गतिविधियों को देख रहे थे। मानवी को यकीन हो गया था कि अब उसकी ज़िंदगी का बहुत कम वक्त बचा है। उसकी आँखों में आंसू थे। उसने आंसू भरी आँखों से निर्भय की तरफ देखा। निर्भय की निगाहें उससे मिलीं। पर वह मजबूर था। उसे किसी तरह की तसल्ली नहीं दे सकता था।
वैसे यदि वह दे सकता तो भी मानवी को कोई तसल्ली ना दे पाता। उसके मन की हालत भी मानवी की तरह थी। उसे भी यकीन था कि अब वह इस धरती पर कुछ समय का ही मेहमान है। वह अपने और मानवी के जीवन के अंत की बड़ी वीभत्स कल्पनाएं कर रहा था। उनके बारे में सोच सोच कर उसका खून सूख रहा था।
वह पछता रहा था कि समय रहते ही वह सचेत क्यों नहीं हो गया। यह बात तो उसकी समझ में आ गई थी कि पीर मोहम्मद बनकर आया आदमी उन लोगों की टोह लेने ही आया था।‌ जब उसने मानवी से सिंगापुर जाने की बात कही थी तब उसने सुझाव दिया था कि दोनों अभी ही विला छोड़कर किसी होटल में चले जाते हैं। उसके बाद वहीं से सिंगापुर निकल जाएंगे। पर तब निर्भय ने कह दिया कि वो दोनों कल सुबह यहाँ से दिल्ली चले जाएंगे। वहाँ से सिंगापुर निकल जाएंगे।‌
वह मानवी को समझाकर लेटा ही था कि उसके कुछ ही मिनटों में डिसूज़ा विला में कुछ अज्ञात‌ लोग घुस आए।‌ हलचल सुनकर वह और मानवी डर गए।‌ दोनों ही यह सोच रहे थे कि क्या करें तभी कुछ लोग बेडरूम में घुस आए। गन प्वाइंट पर उन दोनों को अगवा कर यहाँ ले आए।
निर्भय ने आंसू बहाती हुई ‌मानवी की तरफ देखा। उसका मन पसीज गया। उसने कोशिश की कि वह सरक कर मानवी के पास तक जा सके। वह कुछ ही आगे खिसका होगा कि वहाँ मौजूद माइकल के आदमी ने ज़ोर से डांटा। निर्भय जहाँ था वहीं रुक गया। उसने मानवी की तरफ देखा। वह डरकर ज़ोर ज़ोर से रो रही थी। उसका भी डर की वजह से बुरा हाल था।

माइकल उस जगह पर आया जहाँ मानवी और निर्भय कैद थे।‌ उसने अपने ‌आदमी से कहा,
"इन दोनों सामानों को पूरी हिफाज़त के साथ मुंबई ले जाना है। इनके पैकिंग की तैयारी करो।"
उसकी बात सुनकर निर्भय डर गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि पैकिंग किए जाने का क्या मतलब है। उसके मन में आया कि क्या इनका इरादा उन दोनों को मारकर उनकी लाश मुंबई ले जाना है ? पर अंजन उनकी लाशों का क्या करेगा ? ज़रूर ये लोग उनको किसी चीज़ में बंद करके अंजन के पास ले जाने वाले हैं। उसने एक बार फिर मानवी की तरफ देखा। वह सहमी और डरी हुई थी।

अंजन को बड़ी बेसब्री से मानवी और निर्भय का इंतज़ार था। मानवी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसके साथ जो कुछ किया था उसका बदला लेने के लिए वह बुरी तरह तड़प रहा था। साथ ही वह यह जानने के लिए परेशान था कि उसके बीच हाउस में होने की सूचना क्या मीरा ने उन्हें दी थी।
वह अपने अब तक के जीवन के बारे में सोच रहा था।‌ अपनी ज़िंदगी का रास्ता उसने खुद बनाया था। भागकर वह मुंबई जैसी महानगरी में आ गया था। लोग यहाँ सपने लेकर आते हैं। उसने यहाँ आने के बाद सपना देखा था। ऊँचाइयां छूने का सपना। अपनी धाक जमाने का सपना। एक गरीब लड़का जिसका इस बड़े शहर में कोई नहीं था, उसके लिए ऐसा सपना देखना बड़ी हिम्मत की बात थी। पर हिम्मत की उसमें कोई कमी नहीं रही थी। उसी हिम्मत के दम पर उसने अपनी सफलता की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए।
हिम्मत के अलावा एक और चीज़ थी जो उसकी सफलता में सहायक बनी। लोगों को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने की क्षमता। उसने अपनी इस क्षमता का भरपूर प्रयोग किया। उसके सारे दांव सही बैठे। उसके चलते ही वह इस ऊँचाई तक पहुँच पाया था।
पर तरुण की गलती आज उस पर भारी पड़ रही थी। अगर उसने मानवी और उसके प्रेमी निर्भय को ठिकाने लगा दिया होता तो यह दिन ना देखना पड़ता।
अब उसने तय कर लिया था कि ‌मानवी और ‌निर्भय पर कोई दया नहीं दिखाएगा।

.....
 
रिस्की लव - 29

माइकल ने मानवी और निर्भय को मुंबई ले जाने की सारी तैयारी कर ली थी। वह दोनों को एक यॉट में गोवा से मुंबई ले जाने वाला था। इस समय वह और उसके साथी दोनों को यॉट तक ले जाने की तैयारी कर रहे थे।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत अपनी टीम के साथ गैराज के पास था। उसकी टीम में उसके अलावा सब इंस्पेक्टर रोवॉन और दो कांस्टेबल थे। वह कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था जिससे अगवा किए गए लोगों पर कोई खतरा हो। उसे पूरा यकीन था कि वह दोनों इसी गैराज में हैं। वह और उसके साथी सही मौके की तलाश में थे जब गैराज में अचानक धावा बोल सकें।
सब इंस्पेक्टर रोवॉन सावधानी से गैराज की तरफ आया। उसने देखा कि अगवा किए गए लोगों को किसी गाड़ी में बैठाया जा रहा है। वह समझ गया कि अब एक्शन का समय हो गया है। अब देर करने से उन दोनों की जान को खतरा हो सकता है। उसने फौरन इंस्पेक्टर कौशल सावंत को सूचना दी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने अपनी टीम के साथ गैराज पर धावा बोल दिया। उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईंं। माइकल के तीन साथियों में से दो मारे गए। बचा हुआ साथी डर गया।
माइकल एक खराब कार के पीछे छिपा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने दोनों कांस्टेबल से कहा कि वह उस गाड़ी की तरफ बढ़ें जिसमें मानवी और निर्भय थे। दोनों सावधानी से गाड़ी की तरफ बढ़ने लगे। खराब कार के पीछे छिपे माइकल ने गोली मारकर एक कांस्टेबल को घायल कर दिया। वह भागकर आया और गाड़ी में घुस गया। उसने धमकाते हुए कहा,
"हमें इस गाड़ी के साथ जाने दो। नहीं तो इन दोनों की जान बेवजह चली जाएगी।"
माइकल ने अपने बचे हुए साथी से कहा कि वह जाकर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाए। जब वह कहे तो गाड़ी को लेकर वहाँ से निकल ले।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत जानता था कि इस समय माइकल का पलड़ा भारी है। वह उन दोनों के साथ कुछ भी करने की स्थिति में है। वह उनकी जान को कोई खतरा नहीं होने देना चाहता था। पर अपने हथियार भी नहीं डाल सकता था। उसने कहा,
"चुपचाप आत्मसमर्पण कर दो। यहाँ से निकल भी गए तो बच नहीं पाओगे।"
मानवी और निर्भय पुलिस के आने से खुश थे। पर माइकल के गाड़ी में घुस आने से डर गए। दोनों भगवान से अपनी जान की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे थे। माइकल ने फिर से धमकी दी,
"हमें छोड़ो। इन दोनों की सोचो। अगर तुम नहीं माने तो इनका जीवन खतरे में पड़ जाएगा।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। उसने अपने आसपास देखा। उसके दो कांस्टेबल थे जिनमें से एक घायल था। पर सब इंस्पेक्टर रोवॉन उसे दिखाई नहीं दिया। वह परेशान हो गया।
इन सबके बीच इंस्पेक्टर रोवॉन धीरे धीरे ज़मीन पर रेंगता हुआ उस गाड़ी के पिछले हिस्से की तरफ पहुँच गया जिसमें माइकल घुसा था। वह रेंगता हुआ गाड़ी के नीचे गया। फिर वह बाहर निकल कर उस दरवाज़े पर आया जिससे माइकल गाड़ी में घुसा था।‌ बाहर निकल कर वह सावधानी से खड़ा ‌हुआ और फुर्ती से दरवाज़ा खोल दिया।
माइकल इंस्पेक्टर कौशल सावंत को धमकी देने में व्यस्त था। वह असावधान था। सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने उस पर गोली चला दी। गोली उसके सर पर लगी और वह ढेर हो गया। माइकल के मारे जाने से उसका साथी घबरा गया। वह गाड़ी से कूद कर भागने लगा। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उसकी टांग पर गोली मारी। वह गिर पड़ा।
सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने मानवी और निर्भय को गाड़ी से बाहर निकाल लिया। मानवी और निर्भय को पुलिस स्टेशन में लाकर उनसे पूछताछ की गई।

विनोद अपनी नज़र इस केस पर बनाए हुए था। उसे खबर मिली कि डिसूज़ा विला से अगवा किए गए लोगों को छुड़ा लिया गया। वह फौरन पुलिस स्टेशन पहुँचा। वहाँ से जो भी जानकारी मिली सब नफीस को बता दी। नफीस को यकीन था कि जेनिफर ही मानवी है। उसका यह यकीन और पक्का हो गया जब मीडिया में डिसूज़ा विला से अगवा लोगों की तस्वीर छपी।
मानवी और निर्भय ने अपने बयान में कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका अपहरण किसने और क्यों किया था। उनका सोचना था कि यदि वो दोनों अंजन का नाम लेंगे तो उस पर हुए हमले की बात खुल जाएगी। इसलिए उन्होंने सोच समझकर यह बयान दिया था।
नफीस को उनका यह बयान अजीब लग रहा था। यह यकीन करना उसके लिए कठिन था कि उन दोनों को इस बात का अंदेशा ना हुआ हो कि उन्हें अगवा करने वाला अंजन है। वह समझ गया कि दोनों अपने को बचाने के लिए ऐसा कह रहे हैं। उसने विनोद से कहा कि वह कोशिश करे कि कुछ और दिन गोवा में रहकर उन पर नज़र रखे।

अंजन को जब पता चला कि गोवा पुलिस ने मानवी और निर्भय को माइकल की गैराज से छुड़ा लिया तो उसे अपने ऊपर खतरा महसूस होने लगा। अपने आप को बचाने के लिए वह फौरन लंदन के लिए निकल गया। लंदन पहुँच कर वह अपने दोस्त ‌सागर के पास भी नहीं रुका। लंदन में उसका एक फ्लैट था। यहाँ वह बहुत ठहरता था। वह उसी फ्लैट में रहने लगा।
सागर उससे वहीं मिलने आया हुआ था। अंजन बहुत परेशान था। उसने कहा,
"ना जाने क्या हो गया है ? इस समय कुछ भी सही नहीं चल रहा है। मानवी और निर्भय हाथ आकर निकल गए। उनसे बदला नहीं ले पाया। ऊपर से पुलिस का डर हो गया। वो दोनों पुलिस को मेरे बारे में बताएंगे।"
सागर ने उसे समझाया,
"अंजन....अब तुम बहुत जल्दी परेशान होने लगे हो। इसलिए पूरी बात जाने बिना यहाँ भाग आए। उन दोनों ने पुलिस को अपने अपहरण करने वाले के बारे में कुछ नहीं बताया है।"
"तुम्हें कैसे मालूम ?"
"मैं यहाँ बैठकर भी मैं उस केस पर नज़र रखे हूँ। गोवा की लोकल मीडिया ने इस केस को कवर किया है। उसके हिसाब से उन दोनों ने कहा है कि उन्हें नहीं पता कि किसने और क्यों उनका अपहरण किया।"
यह सुनकर अंजन को आश्चर्य हुआ। उसे लगा था कि मानवी और निर्भय समझ गए होंगे कि यह उसका काम है। वह बोला,
"इसका मतलब उन्हें पता ही नहीं चला कि उन्हें अगवा करवाने में मेरा हाथ था।"
सागर ने उसकी तरफ देखकर कहा,
"अपने ऊपर हुए हमले के बाद तुम पहले जैसे नहीं रहे हो। उन्हें पता था कि यह काम तुम्हारा है। पर वो दोनों भी नहीं चाहते थे कि बात तुम तक पहुँचे और तुम पर हुए हमले की बात खुले। क्योंकी फिर उनके गिरेबान भी पुलिस के हाथ में होते।"
सागर की बात सही थी। अंजन को भी लग रहा था कि वह ना जाने क्यों इतना अधिक घबरा गया। बिना अधिक सोचे भागकर यहाँ आ गया। सागर ने उससे कहा,
"पर एक तरह से तुमने ठीक ही किया कि यहाँ आ गए। क्योंकी इंस्पेक्टर कौशल सावंत अपनी तरफ से जांच करेगा। मैंने उसका ट्रैक रिकॉर्ड पता किया है। वह जिस केस में घुसता है उसे पूरा सॉल्व करने के बाद ही क्लोज़ करता है।"
सागर की बात सुनकर अंजन को तसल्ली हुई। सागर ने कहा,
"लेकिन अब तुम बहुत जल्दी घबरा जाते हो। मैंने पहले भी तुम्हें मुश्किल स्थितियों में देखा है। पर कभी तुमने इस तरह से परेशान होकर काम नहीं किया।"
अंजन को भी अपनी गलती का एहसास हो रहा था। सचमुच उसने कई कठिनाइयां झेली थीं। पर कभी भी अपने आपको तनाव में नहीं आने दिया था। इधर वह बहुत जल्दी तनाव में आ जाता था। अपनी गलती मानते हुए वह बोला,
"तुम ठीक कह रहे हो सागर। जबसे मुझे पता चला है कि मुझ पर हमला मानवी और उसके प्रेमी ने करना है मैं तनाव में रहने लगा हूँ। इससे पहले भी मैं बिना सोचे समझे सीधा लंदन आ गया था।‌ पर मैं क्या करूँ। जिन्होंने मेरा सब कुछ छीनने की कोशिश की है उनसे बदला लेने के लिए मैं मन ही मन छटपटा रहा हूँ। मैं उन सपोलों के फन कुचल देना चाहता हूँ।"
सागर ने उसे समझाते हुए कहा,
"तुमने अब तक अपने सारे दुश्मनों को सज़ा दी है। इस बार भी दोगे। बस जल्दबाज़ी में कोई गलती मत करना जो इस बार की।"
"इस बार भी मैंने सब पूरे प्लान के साथ किया था। कोई गलती नहीं की मैंने।"
"तुमने गलती की है अंजन।"
अंजन समझ नहीं पा रहा था कि सागर का इशारा किस तरफ है। उसने पूँछा,
"तुम ही बताओ मैंने क्या गलती की ?"
"जब तुम्हारे दुश्मन गिरफ्त में आ गए थे तो तुम्हें चाहिए था कि खुद गोवा जाकर उनसे बदला लेते। उन्हें मुंबई बुलाने का रिस्क क्यों लिया।"
अंजन कुछ देर सोचकर बोला,
"मुझे लगा था कि मुंबई बुलाकर उनसे मनचाहे तरीके से हिसाब चुका सकता हूँ। गलती मेरी नहीं थी। उस बेवकूफ माइकल की थी। मैंने अपने दोस्त समर की वजह से उस पर भरोसा किया था। पर उसने सब गड़बड़ कर दी।"
"पर अब तुम बहुत सोच समझकर काम लेना। इस बार मौका मत गंवाना।"
"क्या दोबारा मौका मिलेगा ?"
"बिल्कुल.... मैंने अपना आदमी मानवी और निर्भय पर नज़र रखने के लिए लगा दिया है। वह उनकी हर गतिविधि की सूचना देता रहेगा।"
अंजन ने उठकर सागर को गले लगाकर कहा,
"तुम मेरे लिए बहुत कुछ कर रहे हो।"
"क्योंकि मैं अपने ऊपर किए गए एहसान कभी नहीं भूलता हूँ।"

सागर उससे एहतियात बरतने को कहकर चला गया। अंजन उसकी और अपनी दोस्ती की शुरुआत के बारे में सोचने लगा।

.....
 
रिस्की लव - 30

जिन दिनों अंजन रघुनाथ परिकर के कंस्ट्रक्शन बिज़नेस में उसके लिए अवैध रूप से ज़मीन और प्रॉपर्टी हथियाने का काम करता था उन्हीं दिनों उसकी लव चढ्ढा से दोस्ती की शुरुआत हुई थी।‌
एक पार्टी में वह लव से मिला था। उस दिन दोनों को ही ऐसा लगा जैसे उनमें कई बातें ऐसी हैं जो एक जैसी हैं। उसके बाद दोनों कई बार एक दूसरे से मिले। हर बार दोनों की दोस्ती और मज़बूत होती जाती थी। वैसे लव उससे उम्र में बड़ा था। पर उम्र का यह अंतर दोनों की दोस्ती के आड़े नहीं आया। लव और अंजन एक दूसरे के पक्के दोस्त बन गए।
लव उन दिनों प्रतिबंधित स्टेरॉइड्स का धंधा करने वाले एक गैंग से जुड़ा था। अंजन की तरह वह भी आसमान छूना चाहता था। ऊँचा उड़ने की चाह दोनों की दोस्ती का मुख्य आधार थी। दोनों अपने अपने तरीके से अपने सपने पूरे कर भी लिए।
लव जिस गैंग के साथ काम कर रहा था अपनी हिम्मत और सूझबूझ से उसका बॉस बन गया। उसके बाद उसने तेज़ी से सफलता की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए। अंजन रघुनाथ परिकर का विश्वास जीतकर मानवी को सीढ़ी बनाकर वहाँ पहुँच गया जहाँ जाना चाहता था। दोनों दोस्तों ने ‌अपना सपना पूरा कर लिया था। अपनी सफलता को सेलीब्रेट करने के लिए ‌दोनों लंदन गए थे।
अंजन ने परिकर भाइयों को मरवा कर उनके बिज़नेस और जायदाद पर कब्ज़ा कर लिया था। लव ने भी अपने कारोबार को और बढ़ाना शुरू कर दिया था। वह अब ड्रग्स के धंधे में आगे बढ़ रहा था। पर उसका एक दुश्मन भी पनप गया था।
जिस गैंग का वह बॉस बन गया था वह प्रवीण शिंदे का था। लव उसका विश्वास जीतकर उसका सबसे नज़दीकी आदमी बन गया था। जिसका फायदा उठाकर ही उसने धोखे से प्रवीण को मारकर उसका सबकुछ हड़प लिया था।
लव अपने धंधे में बड़ी तेज़ी के साथ आगे बढ़ रहा था। यह बात उस कारोबार में शामिल और लोगों को बुरी लग रही थी। लव के कारण कारोबार में उनका हिस्सा गिरता जा रहा था। लव एक तरह से उस क्षेत्र का राजा ही बनता जा रहा था।
प्रवीण शिंदे भी इस क्षेत्र में अच्छा नाम रखता था। लेकिन वह दूसरों का भी खयाल रखना था। उसके साथ आफताब रहमान भी इस कारोबार में एक बड़ा नाम था। प्रवीण और आफताब एक दूसरे के क्षेत्र में दखल नहीं देते थे।
लव ने जबसे कारोबार में कदम रखा था उस पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था। उसका मकसद सिर्फ खुद को स्थापित करना था। इसलिए वह किसी सीमा का पालन नहीं कर रहा था।‌ यह बात आफताब को सबसे ज्यादा खराब लग रही थी। उसने अपने कारोबार के एक अन्य साथी तारकेश को अपने साथ मिलाकर लव को रास्ते से हटाने का मन बनाया।
प्रवीण शिंदे के गैंग के अधिकांश लोग लव के साथ हो गए थे। लव उन पर भरोसा भी करता था। उनके साथ से ही वह दिनोंदिन आगे बढ़ रहा था। इनमें एक था लॉरेंस गोम्स। लव उस पर सबसे अधिक भरोसा करता था। वह लव की सिक्योरिटी करता था और हमेशा लव के साथ रहता था।
लॉरेंस भी बहुत महत्वाकांक्षी था। आफताब और तारकेश ने उसे एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करने की योजना बनाई। उन दोनों ने लॉरेंस से संपर्क करके उसे मिलने बुलाया। उन्होंने लॉरेंस को सारी बात बताते हुए कहा कि लव ने उसके बॉस नवीन के साथ छल करके उसकी जगह ले ली। अब वह कारोबार में सबके हिस्से पर अपना कब्ज़ा करना चाहता है। यदि लॉरेंस साथ दे तो तो वह दोनों लव को रास्ते से हटाकर उसकी जगह उसे बैठा सकते हैं। पर उसे सबके साथ मिलकर रहना पड़ेगा।
लॉरेंस को उनका प्रस्ताव अच्छा लगा। वह जानता था कि अपने दम पर लव की जगह हासिल कर पाना उसके लिए कठिन होगा‌। यह उसके लिए एक अच्छा अवसर है। वह उन दोनों की मदद के लिए तैयार हो गया।
जल्द ही उन्हें एक अच्छा मौका मिल गया।
लव सोफिया नाम की एक बार डांसर के इश्क़ में गिरफ्तार था। सोफिया का जन्मदिन था। वह चाहती थी कि उसके जन्मदिन पर लव उसके साथ रात भर पार्टी करे। लेकिन उन दोनों के अलावा कोई और ना हो। उसकी इच्छा पूरी करने के लिए लव उसे बीच पर बने अपने छोटे से कॉटेज में ले जाने वाला था। उसने लॉरेंस से अपने कुछ साथियों के साथ सिक्योरिटी पर रहने को कहा था।
लॉरेंस ने आफताब और तारकेश के साथ मिलकर एक प्लान बनाया। प्लान के हिसाब से आफताब और तारकेश अपने आदमियों के साथ आधी रात के करीब हमला किया। लॉरेंस ने अपने साथियों को शराब पिलाकर नशे में धुत कर दिया था। वो लोग कुछ कर नहीं पाए मारे गए। गोलीबारी की आवाज़ सुनकर लव सावधान हो गया। उसने सोफिया को हिदायत दी कि वह कमरे से बाहर ना निकले। उसका फोन उठाकर उसके दोस्त अंजन को मदद के लिए आने को कहे। यह हिदायत देकर वह अपनी गन के साथ बाहर की तरफ भागा।
वह कमरे से बाहर निकला ही था कि सामने आफताब और तारकेश दिख गए। उनके ठीक पीछे लॉरेंस मुस्कुराता हुआ खड़ा था। लव समझ गया कि उसने गद्दारी की है। पर अब वह कुछ करने की स्थिति में नहीं था। आफताब, तारकेश और लॉरेंस ने उसे एक एक गोली मारी। उसके बाद तीनों कमरे में घुसे। उन्होंने सोफिया को भी मार दिया। पर तब तक वह अंजन को खबर दे चुकी थी।
अंजन को मालूम था कि लव सोफिया के साथ कहाँ गया है। अपने साथियों के साथ वह फौरन मदद के लिए निकल गया। जब वह कॉटेज में पहुँचा तो वहाँ चारों तरफ खून बिखरा था। अंदर खून में लथपथ लव पड़ा था। अंजन ने महसूस किया कि अभी नब्ज़ चल रही है। वह फौरन उसे अस्पताल ले गया।
डॉक्टरों की कोशिश से वह बच गया पर ठीक होने में समय लग गया। लव इस हमले से टूट गया था। अंजन ने उसे हौसला दिया। फिर से शुरुआत करने की ताकत दी। अंजन की मदद से लव ने अपने दुश्मनों से बदला लिया। अपना सबकुछ वापस ले लिया। पर उसका मन अब यहाँ नहीं लग रहा था। वह कहीं दूर जाना चाहता था।
अंजन ने इस मामले में भी उसकी मदद की। लव अपना सबकुछ समेट कर लंदन चला गया। एक नए नाम सागर खत्री के साथ नई शुरुआत की। उसने एक कसीनो खरीद लिया। यहाँ कसीनो की आड़ में गैरकानूनी सट्टा भी लगता था।
धीरे धीरे सागर खत्री ने अपनी एक जगह बना ली।
अंजन ने उसकी इतनी मदद की थी। उस एहसान को वह भूला नहीं था। अब अंजन की मदद करके एहसान चुकाना चाहता था।

सागर खत्री ने अपना एक खास आदमी मीरा के बारे में पता लगाने के लिए लगाया था। अंजन से मिलकर जब वह अपने घर पहुँचा तो वह कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ उसका इंतज़ार कर रहा था। उसने बताया कि मीरा लंदन लौटी ही नहीं थी। वह पहले गोवा गई थी। उसके बाद वहाँ से उसने सिंगापुर की फ्लाइट पकड़ी थी। अभी सिंगापुर में वह कहाँ है पता नहीं चला। पर वह जल्दी खोज लेगा। सागर खत्री समझ गया कि गोवा वह निर्भय और मानवी से मिलने ही गई होगी। उसने अपने आदमी से कहा कि वह सिंगापुर में निर्भय वाधवा के जितने घर या होटल हैं उनमें मीरा को खोजने की कोशिश करे।

दर्शन वशिष्ठ को जब सूचना मिली कि मानवी और निर्भय का अपहरण हुआ था लेकिन पुलिस ने उन्हें बचा लिया तो वह घबरा गया। वह जानता था कि अंजन उन तक पहुँच चुका है। एक मौका भले ही वह चूक गया हो पर दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा। वह जानता था कि उसकी जान भी खतरे में है। उसने अंजन को डबल क्रॉस किया है। अब उसकी खैर नहीं है।
शिमला के अपने घर में छिपा हुआ वह अब पछता रहा था कि पैसों के लिए उसने मानवी और निर्भय का साथ क्यों दिया। पैसे भी पूरे नहीं मिले अब जान पर आ बनी है।
वह हर पल डर के साए में जी रहा था। घर से बाहर तभी निकलता था जब बहुत ही आवश्यक हो। इस समय उसे कुछ ज़रूरी चीजें खरीदने के लिए बाज़ार आना पड़ा था। वह मॉल में जल्दी जल्दी ज़रूरी सामान से अपनी ट्रॉली भर रहा था। सामान का पेमेंट कर जब वह बाहर अपनी कार के पास पहुँचा तो दो लोग उसके पास आए। उन्हें देखकर लग रहा था कि उनका इरादा ठीक नहीं है।‌ दर्शन घबरा गया। सामान का बैग उसके हाथ से छूटकर गिर गया। एक वैन आई उसे जबरदस्ती उसमें ढकेल दिया गया।

अंजन के पास उसके आदमी का फोन आया। उसने बताया कि दर्शन उसकी कैद में है। वह जानना चाहता था कि आगे क्या करना है। अंजन को दर्शन की कोई ज़रूरत नहीं थी। उसे पास लाने को कहकर वह कोई खतरा नहीं लेना चाहता था। उसने अपने आदमी से वह उसे खत्म कर दे।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत को मानवी और निर्भय के इस बयान से तसल्ली नहीं हुई थी कि उन्हें किसने और क्यों किडनैप करने की कोशिश की। अपने अनुभव से वह यह जानता था कि दोनों जानबूझकर कुछ छिपा रहे हैं या डरे हुए हैं। उसने उनसे सख्ती करने की जगह खुद पता करने के बारे में सोचा।
माइकल का वह आदमी जिसके पैर में गोली लगी थी वह इस मामले में सहायक हो सकता था। लेकिन खून अधिक बह जाने से वह बयान देने की हालत में नहीं था। कुछ देर पहले ही इंस्पेक्टर कौशल सावंत को खबर मिली थी कि वह अब ठीक है। वह उससे बात करने के लिए निकल रहा था जब एक और अच्छी खबर मिली। राज्य सरकार ने सब इंस्पेक्टर रोवॉन को उसकी बहादुरी के लिए सम्मानित करने का फैसला किया है। इस खबर से पुलिस स्टेशन में खुशी की लहर दौड़ गई। सब सब इंस्पेक्टर रोवॉन को बधाई देने लगे। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने भी उसे बधाई दी।
जब इंस्पेक्टर कौशल सावंत माइकल के आदमी से मिलने के लिए जा रहा था तब सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने भी उसके साथ जाने की इच्छा जताई।‌ इंस्पेक्टर कौशल सावंत उसे भी अपने साथ ले गया।
 

Similar threads

S
Replies
65
Views
223
StoryPublisher
S
S
Replies
42
Views
164
StoryPublisher
S
S
Replies
21
Views
63
StoryPublisher
S
S
Replies
25
Views
112
StoryPublisher
S
Back
Top