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Thriller RISKI LOVE

रिस्की लव - 31

भारत लौटने के बाद अंजन उस आदमी से संपर्क बनाए हुए था जिसे सागर ने मानव और निर्भय पर निगरानी के लिए लगाया हुआ था।‌ वह उस आदमी से उनकी हर गतिविधि के बारे में पता करता रहता था।
अंजन इस बार बहुत सोच समझकर अपनी चाल चलना चाहता था। इसलिए कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहा था। इस समय वह सब कुछ भूल गया था। अपना बिज़नेस, अपना रिज़ॉर्ट वाला प्रोजेक्ट। उसके ‌जीवन का उद्देश्य केवल मानवी और निर्भय से बदला लेना रह गया था।
लेकिन जब मीरा का खयाल मन में आता था तो वह कमज़ोर पड़ जाता था। उसके पास कोई सबूत नहीं था पर उसे लगने लगा था कि ‌मीरा भी उसके साथ धोखा कर रही थी। उसी ने मानवी और निर्भय को उसके बीच हाउस में जाने की सूचना दी थी। यह बात उसे बहुत परेशान कर देती थी।
एक तरफ तो मीरा की इस बेवफाई पर उसे गुस्सा आता था तो दूसरी तरफ उसे सज़ा देने की बात पर वह कमज़ोर पड़ जाता था। जीवन में पहली बार उसने किसी से मोहब्बत की थी और उसे धोखा मिला था। यह बात हर पल उसके दिमाग में एक हथौड़े की तरह चोट करती थी।
यही कारण था कि उसका मन अब बाकी चीज़ों से उचट गया था। उसे अपने कारोबार की भी फिक्र नहीं थी। बुलाए जाने पर किसी पार्टी में नहीं जाता था। बस सारा दिन घर में शराब पीता रहता था और गुस्से की आग में जलता रहता था।

मानवी और निर्भय दोनों ही परेशान थे। दोनों अब गोवा छोड़कर जाना चाहते थे। पर पुलिस ‌ने कहा था कि जब तक उनकी जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक वह गोवा में ही रहें।‌ लेकिन यहाँ अधिक समय ठहरना उन्हें खतरनाक लग रहा था। लेकिन ‌उससे भी बड़ी ‌बात यह थी कि उन्हें एहसास हो गया था कि उन पर नज़र रखी जा रही है। यह समझना कठिन नहीं था कि यह काम अंजन करवा रहा है।
दोनों हर पल एक डर के साए में रहते थे। उन्हें लगता था कि अगर उन्होंने यहाँ से भागने की कोशिश भी की तो और भी बड़े खतरे में पड़ सकते हैं। यहाँ तो फिर भी वह सुरक्षित हैं। अपहरण का मामला अभी जांच के दायरे में है। अभी अंजन उनके साथ कुछ करने का जोखिम नहीं लेगा। पर अगर दोनों ने गोवा छोड़ दिया तो उसके खबरी उसे बता देंगे। दोनों की जान खतरे में पड़ जाएगी।
डर की वजह से दोनों घर में ही कैद होकर रह गए थे। मानवी तो गार्डन में जाने से भी डरती थी। घर का ज़रूरी सामान ऑनलाइन मंगा लेते थे। बाकी चीज़ों के लिए नौकर को ही बाहर भेजते थे। पुलिस के दो गार्ड तैनात रहते थे पर उन्होंने अपने गार्ड भी रख लिए थे।‌
मानवी कमरे में ही टहल रही थी। उसे ऐसा करते देखकर निर्भय ने कहा,
"गार्डन में जाकर क्यों नहीं टहलती। हमने सिक्योरिटी गार्ड्स रखे हैं। अब क्यों डर रही हो।"
मानवी उसके पास आकर बैठ गई,
"मुझे तो बहुत डर लगता है। सच कहूँ तो अब लगता है कि अंजन पर हमला किया ही क्यों ? जो भी हुआ था पर अपनी ज़िंदगी में सैटल हो गए थे हम दोनों।"
उसकी बात से निर्भय भी सहमत था। उसे भी अब लगता था कि अंजन से बदला लेने के चक्कर में ‌पड़कर उसने अपना ही नुकसान किया। वह गोवा में छिपकर बैठा है। अपने बिज़नेस पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। इस सबके चक्कर में इतना खर्च भी हो गया। वह बोला,
"अब पछतावा होता है कि कुछ और गोलियां मारी होतीं तो अच्छा होता। इतना सबकुछ करके भी नतीजा कुछ नहीं निकला। उल्टा वह हमारी जान के पीछे पड़ गया। जोश में खुद ही उसे सबक सिखाने निकल पड़े। किसी को सुपारी देकर भी काम चला सकते थे। इस सबके चक्कर में मेरा बिज़नेस भी चौपट हो रहा है।"
निर्भय यह सोचकर परेशान था कि अब ना जाने क्या होगा। वह आगे बोला,
"अब तो उस मीरा ने भी धमकी देनी शुरू कर दी है। फोन पर कह रही थी कि उसके रहने का इंतज़ाम कहीं और कर दूँ। उसे वहाँ डर लगता है। समझ नहीं आ रहा क्या करूँ ?"
मानवी ने गहरी सांस लेकर कहा,
"एक बार इस मुसीबत से निकल जाएं तो दोनों मिलकर सब ठीक कर लेंगे। मार्वल बहुत कुछ छोड़कर गया है। हम दोनों उसके सहारे अच्छी ज़िंदगी जी सकते हैं।"
निर्भय उठकर खड़ा हो गया। वह कुछ सोचते हुए कमरे में इधर उधर टहलने लगा। कुछ देर में अपनी जगह पर आकर बोला,
"मानवी बिना अंजन को रास्ते से हटाए हम कहीं भी और कभी भी चैन से नहीं रह सकते हैं। अपने ज़िंदा होते हुए वह हमें कहीं चैन से नहीं रहने देगा‌। अब तो वह घायल शेर की तरह हो गया है।"
उसकी बात सुनकर मानवी और घबरा गई। वह बोली,
"पर क्या उसे रास्ते से हटाना आसान होगा ?"
"मुश्किल ही सही पर अगर हमें चैन से ज़िंदा रहना है तो उसे मारना ही होगा। वरना इस तरह डर डर कर छिपते फिरेंगे।"
"अब क्या करोगे ?"
"अभी तो फिलहाल दिमाग काम ही नहीं कर रहा है। दिमाग शांत हो तो कुछ सोचूं।"
मानवी और निर्भय दोनों ही अपनी स्थिति के बारे में सोचकर परेशान हो गए। मन ही मन प्रार्थना करने लगे कि किसी तरह इस झंझट से मुक्ति मिले।

मीरा किसी काम से बाहर गई थी। लौटते हुए उसे सारे रास्ते यही लगता रहा जैसे कोई है जो उसका पीछा कर रहा है। वह बहुत घबरा गई थी। जबसे उसे पता चला था कि मानवी और निर्भय का अपहरण हुआ था पर पुलिस ने उन्हें बचा लिया तबसे वह ‌डरी हुई रहने लगी थी। वह जानती थी कि उन दोनों के अपहरण के पीछे अंजन ही होगा।
लौटकर आने पर उसने डरकर निर्भय को फोन कर दिया। वह चाहती थी कि वह उसे वहाँ से कहीं और शिफ्ट होने में मदद करे। निर्भय ने उससे कहा था कि वह अभी खुद परेशान है। उसकी मदद करने की स्थिति में नहीं है। वह अभी शांति से वहीं रहे। उसे कुछ नहीं होगा।
निर्भय से बात करने के बाद मीरा समझ गई थी कि वह उसकी कोई मदद नहीं करेगा। उसके पास भी ऐसी कोई जगह नहीं थी जहाँ वह जा सके। वह अपने आपको मुसीबत में जकड़ा हुआ महसूस कर रही थी।
वह समझ नहीं पा रही थी कि अब क्या करे ? कहाँ जाए ? वह वापस लंदन नहीं जा सकती थी। वह जानती थी कि अंजन का दोस्त सागर खत्री वहाँ उसके लिए जाल बिछाए हुए बैठा होगा। अब यहाँ रहना भी ‌उसके लिए मुश्किल था।
मीरा के घर की घंटी बजी। उसने सिक्योरिटी कैमरा में देखा। कुरियर ब्वॉय था। उसे याद आया कि उसने कुछ सामान मंगवाया था। उसने दरवाज़ा खोल दिया। अपना पार्सल लेकर वह अंदर जा रही थी तभी दो लोग उसे धक्का देकर अंदर घुस गए। उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया। उनके हाथों में गन थीं। जो उन्होंने उस पर तान रखी थीं। मीरा के हाथ से पार्सल गिर गया। वह घबराई हुई थी। उन दोनों में से एक आदमी ने कहा,
"मीरा आसवानी.... तुम्हें हमारे साथ चलना है।"
मीरा ने डरते हुए पूँछा,
"तुम लोग कौन हो ? मुझे कहाँ ले जाना चाहते हो ?"
उस आदमी ने कहा,
"चुपचाप हमारे साथ चलो। बाद में सब पता चल जाएगा।"
"पर बिना कुछ जाने....."
मीरा की बात बीच में ही काटकर दूसरे आदमी ने डांटते हुए कहा,
"तुम्हारे पास हमारी बात मानने के अलावा कोई और चारा नहीं है। समय बर्बाद मत करो। चुपचाप चलो।"
मीरा समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे। वह किसी को मदद के लिए बुला भी नहीं सकती थी। उस आदमी ने फिर कहा,
"सीधे सीधे नहीं चलोगी तो हम जबरदस्ती ले जाएंगे। इसलिए चलो।"
मीरा के पास कोई चारा नहीं था। वह जानती थी कि इनकी बात मानकर ही वह बच सकती है। वह उनके साथ चली गई।

विनोद समय समय पर मानवी और निर्भय के केस के बारे में पता करता रहता था। उसने अभय नाम के एक कांस्टेबल से दोस्ती कर ली थी। वह उसे फोन करके केस में क्या हो रहा है बताता रहता था। अभय ने उसे बताया था कि माइकल का जो आदमी घायल हो गया था और अस्पताल में था वह अब बयान देने की स्थिति में है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत और सब इंस्पेक्टर रोवॉन उसका बयान लेने गए हैं। विनोद ने उससे कहा कि जब वह लौटकर आएं तो उसे बताए कि माइकल के आदमी ने क्या बयान दिया है।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत और सब इंस्पेक्टर रोवॉन अस्पताल पहुँचे। उन्होंने माइकल के आदमी से सारी घटना के बारे ‌में पूँछताछ की। माइकल के आदमी ने बताया कि उन दोनों को किडनैप करके मुंबई ले जाने का आदेश उन्हें समर से मिला था। उसी आदेश का पालन कर माइकल ने अपने आदमियों ने उन लोगों का अपहरण किया। जब वो लोग उन्हें मुंबई ले जा रहे थे तब पुलिस ने आकर उन दोनों को छुड़ा लिया। माइकल मारा गया और वह भागते हुए वह घायल हो गया।
इस केस में समर का नाम पुलिस के सामने आया था। समर का नाम अब सीधे अपराध जगत से नहीं जुड़ा था। गोवा और मुंबई हाईवे में उसका एक मोटेल था।‌ पर वह माइकल के ज़रिए अपहरण का काम करवाता था। उसकी नज़र उन लोगों पर होती थी जिनसे फिरौती में मोटी रकम वसूल की जा सके। फिर उन्हें या उनके करीबियों का अपहरण माइकल के ज़रिए करवा कर फिरौती वसूल करता था। उसका एक हिस्सा माइकल को दे देता था। अब तक यह काम वह बहुत सावधानी से करता था।
लेकिन मानवी और निर्भय के केस में गड़बड़ी हो गई थी। उसके बाद वह भी फरार हो गया था।
 
रिस्की लव - 32

शाहीन अब स्टिक के सहारे घर में इधर उधर चलती थी। प्लास्टर के कारण बिस्तर में बैठे बैठे वह ऊब जाती थी। इसलिए ‌कभी कभी बालकनी में जाकर बैठ जाती थी। इस समय भी वह बालकनी में बैठी थी। वह नफीस के बारे में सोच रही थी। नफीस ने उसकी खूब तिमारदारी की थी। कोशिश करता था कि जितना हो सके उसके साथ वक्त बिताए। बहुत ज़रूरी होने पर ही बाहर जाता था।‌ उसके क्राइम शो के शूट के लिए उसका जाना ज़रूरी था। नाज़नीन आ नहीं सकती थी। इसलिए मेड को उसके पास रहने को कहकर गया था।
वह जानती थी कि उसकी अम्मी की कही बात नफीस को बहुत बुरी तरह से चुभ गई है। उसने कुछ कहा नहीं पर वह उसकी आँखों में वह तकलीफ देख सकती थी। एक माँ होने के नाते बच्चे की मौत का ग़म उसे भी था। पर उसने अपने इस दुख को सीने में दबाकर रखा हुआ था। वह जानती थी कि यदि वह अपना दुख नफीस के सामने लाएगी तो वह और भी टूट जाएगा। उससे जो गलती हुई थी उसके लिए पहले से ही उसका मन पछतावे से भरा हुआ है।
शुरुआत में उसके मन में ज़रूर नफीस के लिए गुस्सा था। वह उसे छोड़कर अपने अम्मी अब्बू के घर चली गई थी। उसने नफीस से अलग होने का मन बना लिया था। अम्मी उसके इस फैसले से खुश थीं। उन्होंने तो नफीस के साथ उसकी शादी के फैसले का पुरज़ोर विरोध किया था। उनकी इच्छा दुबई में कारोबार कर रहे अपनी बहन के बेटे से उसकी शादी करवाने की थी। पर शीरीन नफीस से मोहब्बत करने लगी। उनके समझाने पर भी ज़िद पर अड़ी रही। उससे शादी करके ही मानी।
जब शीरीन ने नफीस से अलग होने की बात कही तो उन्हें बड़ी तसल्ली मिली थी। वह उसके लिए दूसरा रिश्ता खोजने लगी थीं। पर नफीस इतनी आसानी से अपने प्यार को खोना नहीं चाहता था। उसने रिश्ता कायम रखने की कोशिशें शुरू कर दीं। फोन करके उससे गुज़ारिश करता रहता था कि एक बार उससे मिलकर अपनी बात कह लेने दे। फिर वह जो फैसला चाहे कर ले।
शीरीन गुस्से में नफीस को छोड़कर चली आई थी। उस समय अपने बच्चे को खोने का जख्म ताज़ा था। पर उसने नफीस की हालत भी देखी थी। वह अपने आप को कुसूरवार मानकर पछता रहा था। जब नफीस ने उसे फोन करके मिलने के लिए बुलाया तो वह इस बारे में विचार करने लगी। तब उसने महसूस किया कि उसके मन में अभी भी नफीस के लिए प्यार है। कम से कम उसे अपनी बात कहने का मौका देना चाहिए। वह उससे मिलने को तैयार हो गई।
दोनों खुलकर बात कर सकें इसलिए वह नफीस के घर पर जाकर उससे मिली। नफीस ने उससे जो हुआ उसके लिए माफी मांगी। उसे यकीन दिलाया कि वह बहुत पछता रहा है। अगर ऐसे में वह भी उसे छोड़ देगी तो वह सह नहीं पाएगा। टूट जाएगा। शीरीन उससे प्यार तो करती ही थी। उसके पछतावे को देखकर पिघल गई। उसने अपना फैसला बदल दिया।
उसकी अम्मी को यह बात अच्छी नहीं लगी। उनका कहना था कि नफीस लापरवाह ही नहीं ख़ुदग़र्ज़ भी है। बस अपने बारे में सोचता है। वह बहुत पछताएगी। पर शीरीन नफीस के पास वापस आ गई।
नफीस ने फैसला किया कि मुंबई में रहेंगे तो अपना दुख भूल नहीं पाएंगे। दोनों दिल्ली चले गए। अपना दुख भुलाने के लिए नफीस ने अपने आप को काम में डुबो दिया। पर शीरीन वह भी नहीं कर पाई। वह चाहती थी कि नफीस उसे वक्त दे। नफीस चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाता था। शीरीन ने मुंबई वापस चलने की ज़िद की। उसके अपने यहीं थे। नफीस वापस मुंबई आ गया।
कॉलबेल बजी। मेड ने दरवाज़ा खोला। नफीस वापस आ गया था। वह सीधा बालकनी में बैठी शीरीन के पास गया। उसने कहा,
"कोई दिक्कत तो नहीं हुई ?"
शीरीन ने मुस्कुरा कर कहा,
"दिक्कत कैसी होनी थी ? सबकुछ तो तुम करके गए थे। तुम बताओ कैसा रहा शूट।"
"अच्छा रहा। वैसे चैनल वाले चाहते हैं कि मैं किसी नए कांसेप्ट पर काम करूँ। शो की टीआरपी कम हो रही है।"
"कोई नया कांसेप्ट है तुम्हारे दिमाग में।"
"मैं भी महसूस कर रहा था कि क्राइम पर आधारित कई प्रोग्राम चल रहे हैं। मैंने एक नया कांसेप्ट सोचा था। राजनीति और अपराध जगत की सांठ गांठ पर। प्रपोज़ल दे दिया है। अब चैनल वाले सोचकर बताएंगे।"
"अच्छा कांसेप्ट है। यह शो भी लोग पसंद करेंगे। वैसे तुम अपनी नई किताब लिख रहे थे उसका क्या हुआ ? क्या नाम था उसका ? शायद कोई विश्वकर्मा था।"
"अंजन विश्वकर्मा.... अभी तो उसकी ज़िंदगी के कुछ राज़ जानने हैं। तब किताब पूरी होगी। वैसे बड़ा दिलचस्प कैरेक्टर है।"
शीरीन ने एक बार फिर मुस्कुराते हुए कहा,
"अगर तुम मोहब्बत भरी कहानियां लिखते तो मैं पढ़ती भी। पर अपराधियों की कहानियां मुझे अच्छी नहीं लगती हैं।"
नफीस ने भी हंसते हुए जवाब दिया,
"तुमने भी तो एक क्राइम रिपोर्टर से शादी की है। कोई शायराना मिज़ाज का तलाशा होता तो वह तुम्हारे लिए रोमांटिक कहानियां या शायरी लिखता।"
"अब क्या करूँ....दिल तुम पर ही आ गया।"
आज शीरीन का उससे इस तरह बातें करना नफीस को बहुत अच्छा लगा। वह हंस दिया। तभी मेड ने आकर कहा कि खाना टेबल पर लगा दिया है। अब वह जा रही है।

नफीस फ्रेश होने चला गया। उसके दिमाग में समर का नाम घूम रहा था। शूट के बीच में विनोद का फोन आया था। उसने मानवी और निर्भय के केस में मिली नई जानकारी उसे दे दी थी। उसने यह भी कहा था कि अब अखबार वाले उसे मुंबई वापस आने को कह रहे हैं। नफीस ने उसे लौट आने के लिए कह दिया था।
उसे लग रहा था कि समर नाम के इस शख्स से शायद वह कहीं मिला है। शायद किसी पार्टी में। वह याद करने की कोशिश कर रहा था। उसे एक पार्टी के कुछ दृश्य याद आ रहे थे। अंजन के साथ उस पार्टी में एक आदमी था। गोल चेहरा, छोटी छोटी आँखें और टुड्डी पर गोटी। रंग गोरा था और कद कोई पाँच फीट। अंजन ने उसे किसी से मिलाते हुए यह नाम लिया था। पर उसे याद नहीं आ रहा था कि वह किसकी पार्टी थी। अंजन उसका परिचय किससे करवा रहा था।
कुछ देर सोचने के बाद नफीस को याद आया कि उसने समर को कहाँ देखा था। परिकर बंधुओं की मौत के एक महीने बाद की ही बात थी। एक टीवी प्रोड्यूसर ने अपने नए सीरियल की लांच पार्टी रखी थी। सीरियल एक क्राइम स्टोरी पर था इसलिए उसे भी निमंत्रण आया था। वहीं अंजन के साथ उसके दो दोस्त लव चढ्ढा और समर सिंह पहुँचे थे। लव चढ्ढा को पार्टी में बहुत से लोग पहचानते थे। ‌वह उन सब लोगों से मिल रहा था। लेकिन समर नया था। इसलिए अंजन उसे पार्टी में सबसे मिलवा रहा था। उसी समय सीरियल की हिरोइन से उसने समर का परिचय करवाते हुए कहा था कि यह मेरा दोस्त समर है। मुंबई गोवा हाइवे पर इसका मोटेल है। उस समय नफीस पास ही था। उसने सबकुछ सुन लिया था। उसके बाद समर कभी अंजन के साथ किसी पार्टी में नहीं दिखा। नफीस को वह याद रह गया क्योंकी हिरोइन से हाथ मिलाते हुए वह बड़ी अजीब निगाहों से उसे देख रहा था।‌ उसके देखने का तरीका ऐसा था जैसे वह उसे निगाहों में ही नाप तौल रहा था। वह हिरोइन भी नर्वस हो गई थी और धीरे से वहाँ से चली गई थी। नफीस की खासियत थी कि उसे आकर्षित करने वाली कोई चीज़ या व्यक्ति उसके दिमाग में उसी तरह सेव हो जाते थे जैसे किसी डिवाइस की मेमोरी में। थोड़ी सी कोशिश के बाद वह उसे रीकॉल कर लेता था।
आज कई सालों बाद उसका नाम मानवी और निर्भय के अपहरण के केस में सुनाई पड़ा था।‌
शीरीन ने आवाज़ लगाई कि जल्दी करो। उसे भूख लगी है। नफीस तैयार होकर खाने के लिए चला गया।

कार मीरा को लेकर जा रही थी। दोनों आदमी उसके अगल बगल इस तरह से बैठे थे कि वह अधिक हिल डुल भी नहीं पा रही थी। वह यह सोचकर डर रही थी कि अंजन ने उसका पता लगा लिया है। ये लोग उसे अंजन के पास ही ले जा रहे हैं। वहाँ पहुँचने पर अंजन उसे मार देगा। उसकी आँखों में आंसू थे। वह उस पल को कोस रही थी जब मानवी और निर्भय उससे मिले थे।
एक घंटे की यात्रा के बाद कार एक खूबसूरत बंगले के गेट पर रुकी। मीरा के बाईं तरफ वाले आदमी ने सिक्योरिटी से कुछ कहा। बंगले का गेट खुल गया। कार अंदर चली गई।
दोनों आदमी मीरा को लेकर बंगले के अंदर गए। एक और आदमी वहाँ उनकी राह देख रहा था। उसने मीरा के साथ आए आदमियों को वहीं रोक दिया। मीरा को अपने पीछे आने को कहा। डरते हुए मीरा उसके पीछे चल रही थी। लॉबी में लगी लिफ्ट से वह दोनों तीसरी मंजिल पर पहुँचे। लिफ्ट से निकल कर कॉरीडोर के अंत में बने कमरे के सामने जाकर उस आदमी ने नॉक किया। अंदर से आवाज़ आई,
"सेंड हर इन...."
मीरा ने यह आवाज़ पहले सुनी थी। यह अंजन नहीं था। उस आदमी ने मीरा को अंदर जाने के लिए कहा। मीरा अंदर पहुँची तो सामने सागर खत्री था। उसके लिए वह भी ‌यमदूत ही था। मीरा घबराई हुई उसके सामने खड़ी थी।
सागर खत्री उसे गुस्से से घूर रहा था।
 
रिस्की लव - 33

सागर खत्री की घूरती हुई निगाहें ‌मीरा के शरीर में ‌सिहरन पैदा कर रही थीं।‌ वह उन निगाहों की ज़द से दूर भाग जाना चाहती थी। लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकती थी। कुछ देर तक घूरने के बाद सागर खत्री ‌ने सवाल किया,
"अंजन को धोखा क्यों दिया ?"
उसने बिना तेज़ आवाज़ किए यह सवाल किया था। पर उसकी आवाज़ में जो गुस्सा था उसने मीरा के मन में खौफ पैदा कर दिया। वह कांपते हुए बोली,
"मैंने कोई धोखा नहीं दिया।"
"तुमने ही मानवी और निर्भय को उसके बीच हाउस जाने की खबर दी थी।"
मीरा ने खुद को बचाने के लिए कहा,
"मैं किसी मानवी और निर्भय को नहीं जानती हूँ।"
सागर ने एक बार फिर उसे घूरकर देखा। फिर कड़क कर बोला,
"तुम जिस घर में रह रही थी वह निर्भय का है। अगर जानती नहीं हो तो उसके घर में क्या कर रही थी।"
मीरा इतनी घबराई हुई थी कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहा था कि उसका अपहरण निर्भय के घर से ही हुआ था। सागर खत्री की इस बात पर वह चुप हो गई। उसे पूरा यकीन था कि अब वह उसे मार देगा। उसने गिड़गिड़ा कर कहा,
"प्लीज़ मुझे छोड़ दो। गलती हो गई मुझसे।"
"जानता हूँ तुम्हारी कुंडली खंगाली है मैंने। पहली बार नहीं है कि तुमने किसी को धोखा दिया है। इससे पहले भी कई मर्दों को इसी तरह धोखा दे चुकी हो तुम। लेकिन हर बार सिर्फ तुम इस्तेमाल करके छोड़ देती थी। इस बार जान लेने की कोशिश की।"
मीरा का चेहरा सफेद पड़ गया था। सागर खत्री उसके बारे में बहुत कुछ जानता था। सागर खत्री ने आगे कहा,
"लेकिन इस बार तुमने अंजन को धोखा दिया है। तुम बेवकूफ हो। इतने दिन उसके साथ रिश्ता रखा। फिर भी उसकी ताकत नहीं पहचान पाई। तुम्हें पैसा ही चाहिए था ना। आखिर मानव और निर्भय ने कितना पैसा दिया होगा। अंजन से धोखा ना करती तो रानी बनाकर रखता। अब तुम्हारे साथ क्या करना है यह वही तय करेगा। तब तक तुम मेरे इस बंगले में रहोगी।"
उसने इंटरकॉम पर किसी से बात की। एक लड़की आई। सागर खत्री ने उससे कहा,
"ये हमारी खास मेहमान है। इसे ले जाओ। खास खयाल रखना इसका।"
उसके बाद उसने मीरा से कहा,
"यहाँ से निकल जाओ यह मुमकिन नहीं है। इसलिए कोई ऐसी हरकत मत करना कि हमें मेहमान नवाज़ी भूलकर तुम्हारे साथ सख्ती करनी पड़े।"
वह लड़की मीरा को लेकर चली गई। लिफ्ट से वो लोग चौथे फ्लोर पर गए। यहाँ एक पूरा सुइट था। मीरा को छोड़कर जाते समय उस लड़की ने कहा,
"यहाँ ज़रूरत की हर चीज़ है। खाना नाश्ता समय पर यहीं मिल जाएगा। किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो इंटरकॉम पर बता दीजिएगा।"
वह लड़की चली गई। मीरा अपने खूबसूरत कैदखाने को देख रही थी।

अंजन को खबर मिली कि माइकल के आदमी ने अपना बयान दे दिया है। अपने बयान में उसने समर का नाम लिया है। यह सुनते ही अंजन सतर्क हो गया। उसने अपने दोस्त सागर खत्री को फोन करके बताया कि अगर पुलिस समर तक पहुँच गई तो फिर उस तक पहुँचने में देर नहीं लगेगी। वह लंदन आना चाहता है। सागर खत्री ने उससे कहा कि वह लंदन ना आए। वहाँ अक्सर उसका आना जाना लगा रहता है। पुलिस उसे वहाँ भी तलाश कर सकती है। वह सिंगापुर आ जाए।
समर ने उससे संपर्क करने की कोशिश की। उसने कोई जवाब नहीं दिया। अपना सिमकार्ड निकाल कर फेंक दिया।‌ एक दूसरा सिम इस्तेमाल करने लगा।
सागर खत्री की बात अंजन को ठीक लगी थी। वह सिंगापुर के लिए निकल गया।

मीरा खाना खाने के बाद अपने बेड पर लेटी थी। खाना खाने में उसका मन नहीं लगा था। उसने बहुत थोड़ा सा खाना खाया था। इस समय उसकी स्थिति उस कैदी की तरह थी जिसे कुछ ही समय में फांसी मिलनी हो। बेड पर लेटे हुए उसके मन में सागर खत्री की बात घूम रही थी।
'आखिर मानव और निर्भय ने कितना पैसा दिया होगा। अंजन से धोखा ना करती तो रानी बनाकर रखता।'
मीरा सोच रही थी कि पैसा तो उसे मुंह मांगा मिला था। लेकिन अगर उसकी बुद्धि समय पर काम कर गई होती तो अंजन से शादी करके आराम से रह सकती थी। उसने अंजन से पहले भी तीन लोगों के साथ प्रेम संबंध रखा था। पर उसका मकसद उनकी दौलत और रसूख का फायदा उठाकर आगे बढ़ जाना था। उसने वैसा ही किया भी।
अंजन के साथ भी वह इसी नियत से जुड़ी थी। यहाँ उसका दोहरा फायदा था। अंजन तो उस पर पैसे खर्च ही करता था।‌ मानवी और निर्भय ने भी उसे पैसे देने की बात कही थी।
मीरा अंजन का खूब फायदा उठा चुकी थी। वह जानती थी कि अंजन उससे अपने प्यार का इज़हार करने के लिए बीच हाउस ले जा रहा है। वह अब उसके साथ रिश्ता खत्म करना चाहती थी।
अंजन ने उससे कई बार अपने बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स चलने की बात कही थी। मानवी और निर्भय अंजन से बदला लेने के लिए भारत आए हुए हैं यह उसे पता था। उन्होंने उससे कहा था कि वह ‌उसे बीच हाउस लेकर आए। पर अंजन ने खुद ही बीच हाउस जाने की बात कही। तैयार होने के समय वह यही सोच रही थी कि अच्छा मौका है। अगर वह मानवी और निर्भय को उसके बीच हाउस जाने की बात बता दे तो वह उससे अपना बदला ले लेंगे। वह मुक्त हो जाएगी। वह फोन करने की सोच रही थी कि मानवी का फोन आ गया। उसने उसे सबकुछ बता दिया।
उसने सोचा था कि अंजन का खात्मा होने के बाद वह वहाँ से निकल जाएगी। पर अंजन ने उसे पंकज के साथ जाने को कहा। उसने सोचा था कि पंकज उसे अंजन के घर ले जाएगा। कुछ दिन अफसोस करके वह चुपचाप लंदन चली जाएगी। किसी को उस पर शक नहीं होगा। पर पंकज उसे किडनैप करके ले गया और कैद कर दिया।
आज वह अंजन के दोस्त सागर खत्री की कैद में थी। सागर खत्री ने कहा था कि अंजन आकर फैसला करेगा कि उसका क्या करना है।
वह डर के साए में अंजन के आने की राह देख रही थी।

समर को मीडिया से खबर मिली कि माइकल मारा गया और उसका एक साथी घायल हो गया है। वह पुलिस की गिरफ्त में है। पर अधिक घायल हो जाने के कारण अस्पताल में भर्ती है। यह खबर सुनते ही समर गोवा छोड़कर पुड्डूचेरी भाग गया। उसने अपना एक आदमी वहाँ स्थितियों पर नज़र बनाए रखने के लिए लगा दिया था।
उसे उम्मीद थी कि शायद माइकल का घायल साथी अधिक गंभीर होगा और बच नहीं पाएगा। पर उसकी उम्मीद से ठीक उल्टा हुआ।‌ माइकल का साथी बच गया। उसने पुलिस को बयान दे दिया। उसने क्या बयान दिया यह तो समर को नहीं पता चला। लेकिन वह जानता था कि उसका नाम अवश्य सामने आ गया होगा। उसने ‌फौरन अंजन को फोन किया। पहले तो उसने फोन उठाया नहीं। उसके बाद जब समर ने दोबारा फोन मिलाया तो नंबर स्विच्ड ऑफ बता रहा था।
समर समझ गया कि अंजन उससे संपर्क नहीं रखना चाहता है। वह खुद अपने आप को बचाने की कोशिश कर रहा होगा। समर भी पुलिस की गिरप्त में नहीं आना चाहता था। उसने भी विदेश भागने का फैसला किया।
उसका एक ठिकाना दुबई में भी था। उसने तय किया कि वह ट्रेन से चेन्नई जाएगा। फिर वहाँ से दुबई की फ्लाइट पकड़ेगा।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत के सामने समर का नाम आया तो उसने उसके बारे में पता किया। उसे उसके मोटेल के बारे में पता चला। अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँचा। उसने वहाँ के मैनेजर और कर्मचारियों से उसके बारे में पूँछताछ की। पर किसी को भी उसके बारे में कुछ पता नहीं चला। कर्मचारियों का कहना था कि वह अक्सर ही कुछ दिनों के लिए बिना बताए चले जाते हैं। इसलिए कहना कठिन है कि वह कहाँ गए हैं। मोटेल से इंस्पेक्टर कौशल सावंत समर के घर गया। समर अकेला रहता था। उसके नौकर ने बताया कि अचानक ही वो कुछ सामान पैक कर कहीं चले गए।
समर की खोज करना इंस्पेक्टर कौशल सावंत के लिए ज़रूरी था। उसने गोवा के आसपास के राज्यों में समर की डीटेल्स भिजवाकर वहाँ की पुलिस से सहायता मांगी।

सागर खत्री बंगले के दूसरे फ्लोर पर रहता था। इस फ्लोर पर उसका खूबसूरत सुइट था। उसके साथ यहाँ उसकी गर्लफ्रेंड अलीशिया भी रहती थी। लंदन के बाद यह उसका ऐसा ठिकाना था जहाँ वह साल के कम से कम दो महीने बिताता था।
इस समय वह बेड पर लेटा था। अलीशिया उसकी बाहों में थी। लेकिन उसके मन में मीरा का खयाल घूम रहा था। यह सोचकर कि उसने उसके दोस्त को धोखा दिया उसका मन गुस्से से भरा हुआ था। उसने अलीशिया की बाहों से खुद को निकाला और बेडरूम से बाहर निकल गया। वह बार काउंटर में गया। अपने लिए एक ड्रिंक बनाया और पीने लगा। कुछ देर बाद अलीशिया कमरे से बाहर आई। वह समझ नहीं पा रही थी कि सागर खत्री के इस व्यवहार का क्या मतलब है। सागर खत्री ने उससे कहा कि अभी वह कुछ ना पूँछे। जाकर सो जाए। उसका खराब मूड देखकर अलीशिया चुपचाप बेडरूम में चली गई।
सागर खत्री ने अंजन को मीरा के बारे में कुछ नहीं बताया था। वह चाहता था कि जब वह आ जाए तो इत्मीनान से उसे सारी बात बताएगा। फिर मीरा का क्या करना है यह फैसला वह लेगा।

....
 
रिस्की लव - 34

सागर खत्री की कार अंजन को एयरपोर्ट से लेकर उसके बंगले पर पहुँची। अपने दोस्त सागर खत्री को देखकर अंजन उसके गले लग गया। सागर खत्री ने उससे पूँछा कि पुलिस की तरफ से कोई दिक्कत तो नहीं आई। अंजन ने कहा,
"जैसे ही मुझे पता चला कि माइकल के आदमी ने बयान में समर का नाम लिया है मैंने तुम्हें फोन पर दिया। तुमने यहाँ आने को कह दिया। मैं यहाँ आ गया। पुलिस अभी समर तक ही नहीं पहुँच पाई होगी।"
"सावधानी बरती थी ना ?"
"पूरी रमन सिंह के पासपोर्ट पर आया हूँ।"
सागर खत्री ने उससे कहा कि पहले वह फ्रेश होकर नाश्ता कर ले फिर दोनों बातें करेंगे। अंजन गेस्ट रूम में फ्रेश होने चला गया। सागर ने मीरा को सूचित कर दिया था कि अंजन आ गया है। जिससे वह अपने आप को मानसिक रूप से तैयार रखे।
नाश्ते के बाद अंजन और सागर खत्री बार में बैठकर पीने लगे। सागर खत्री सोच रहा था कि वह मीरा वाली बात कैसे छेड़े। तभी अंजन ने कहा,
"मानवी और निर्भय डिसूज़ा विला में चूहे की तरह छिपकर बैठे हैं। उन पर मेरी नज़र बनी हुई थी। पर कुछ कर नहीं पाया। मामला ताज़ा है। गड़बड़ हो सकती थी।"
"बहुत अच्छा किया तुमने। वो दोनों भी जानते हैं कि अभी उनका वहाँ रहना ही ठीक है। अगर वो कहीं जाते भी हैं तो हमारे आदमी उनकी एक एक हरकत पर नज़र रखेंगे।"
"यही तो मैंने भी सोचा। इसलिए शांत बैठा रहा। लेकिन अब जब भी मौका मिलेगा इन दोनों को छोड़ना नहीं है। ऐसी सज़ा दूंँगा कि इनकी रूह भी कांपेगी।"
"तुम्हें पता चला कि इन दोनों को तुम्हारे बीच हाउस में होने की खबर किसने दी थी।"
"अभी तक तो नहीं।"
सागर खत्री के लिए मीरा की बात छेड़ना आसान हो गया था। उसने अंजन से कहा,
"तुमको सचमुच किसी पर शक नहीं है ? या फिर जिस पर शक जा रहा है उस पर ध्यान नहीं देना चाहते हो।"
अपने दोस्त की इस बात पर अंजन गंभीर हो गया। उसने कहा,
"क्या कहना चाहते हो तुम ?"
"मेरा इशारा मीरा की तरफ है। तुम बीच हाउस जा रहे हो यह बात या तो पंकज को पता थी या फिर मीरा को। पंकज ने यह खबर नहीं दी। तो फिर बचा कौन ?"
अंजन उसकी बात पर चुप हो गया। सागर खत्री ने कहा,
"सचमुच तुम्हारे मन में मीरा का नाम नहीं आया ?"
अंजन ने अपना गिलास बार टॉप पर रख दिया। उसके बाद गहरी सांस लेकर बोला,
"जबसे मीरा अचानक गायब हो गई है तबसे मेरे मन में यही आता है कि मेरे बारे में मानवी और निर्भय को खबर देने वाली वही हो सकती है। अब तो इस बात पर पूरा यकीन भी हो चला है। लेकिन जब यह बात मन में आती है तो दिल में टीस सी उठती है। यकीन होते हुए भी मन उसे झुठलाने में लगा रहता है।"
सागर खत्री कुछ देर चुप रहने के बाद बोला,
"तुम चाहते हो कि मीरा से मिलकर असलियत का पता करो।"
अंजन को ऐसा लगने लगा था जैसे कि सागर खत्री को मीरा के बारे में कुछ पता चला है। उसने कहा,
"यार पहेलियां मत बुझाओ। तुम्हें मीरा के बारे में क्या पता चला है ? कहाँ है वो ?"
सागर खत्री उठा। अंजन के दोनों कंधे पकड़ कर बोला,
"इसी बंगले में है। मिलोगे उससे ?"
अंजन आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा। सागर खत्री ने उसे पूरी बात बताई। सब जानने के बाद अंजन ने कहा,
"अभी मिलना है उससे। मुझे उसके पास ले चलो।"
सागर खत्री ने उसी लड़की को बुलाया जो मीरा को लेकर गई थी। उसे हिदायत दी कि अंजन को मीरा के पास ले जाए।

मीरा परेशान इधर उधर टहल रही थी। जानती थी कि अंजन कभी भी उससे मिलने आ सकता है।‌ वह समझ नहीं पा रही थी कि उसका सामना कैसे करेगी। यहाँ से भाग निकलने की भी कोई तरकीब नहीं थी। अब तो वह मन ही मन मना रही थी कि अंजन के आने से पहले ही उसका हार्ट फेल हो जाए। वह जानती थी कि मौत तो तय है। पर अंजन उसे आसान मौत नहीं देगा। मारने से पहले अपने सवालों से उसे परेशान करेगा।
डोरबेल की आवाज़ सुनते ही मीरा की टांगें कांपने लगीं। वह कुछ देर बुत बनी खड़ी रही। पर जानती थी कि अगर उसने दरवाज़ा नहीं खोला तो वो लड़की अपने कार्ड से दरवाज़ा खोल देगी। वह कांपती हुई आगे बढ़ी। दरवाज़ा खोला और दूसरी तरफ मुंह घुमाकर खड़ी हो गई।
अंजन अंदर आया। कुछ देर तक वह भी चुप खड़ा रहा। उसके दिल में भी अजीब सी हलचल थी। उसके मन के गुस्से और मीरा के लिए प्यार के बीच रस्साकसी चल रही थी। पर उसने अपने प्यार को पीछे ढकेल दिया। गुस्से से बोला,
"मेरी तरफ देखो।"
मीरा और अधिक कांपने लगी। उसे अपनी तरफ मुड़ते ना देखकर अंजन आगे बढ़ा। उसे कंधे से पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया। उसने देखा कि मीरा का चेहरा सफेद पड़ गया है। वह बुरी तरह डरी हुई है। उसके देखते ही देखते वह बेहोश होकर गिर पड़ी।
अंजन घबरा गया। उसने मीरा को उठाया और बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसके बाद भागकर किचन में गया। फ्रिज से पानी की एक बोतल निकाली। ठंडे पानी के छींटे मारे। मीरा होश में आ गई। होश में आते ही गिड़गिड़ा कर बोली,
"प्लीज़ अंजन मुझे माफ कर दो..."
उसके गिड़गिड़ाने से अंजन का गुस्सा और बढ़ गया। उसने पानी की बोतल को फर्श पर पटक दिया। कुछ देर खुद को शांत करने की कोशिश करता रहा। पर सफल नहीं हुआ। गुस्से में मीरा के पास आकर बैठ गया। उसके बाल पकड़कर चेहरा अपनी तरफ घुमाकर बोला,
"अब गिड़गिड़ा रही हो। पर मेरे साथ धोखा करते हुए एक बार भी नहीं सोचा। मेरे दुश्मनों को मेरे बारे में खबर दे दी।"
मीरा की आँखों में डर साफ दिखाई पड़ रहा था। अंजन ने उसे छोड़ दिया। बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया। इस समय उसकी लड़ाई अपने ही मन के दो हिस्सों से चल रही थी। कभी गुस्सा हावी हो रहा था कभी प्यार। एक बार फिर वह मीरा के पास जाकर बैठ गया। उसने मीरा के चेहरे पर अपनी नज़रें गड़ाकर पूँछा,
"जब तुमने मुझे धोखा देने के बारे में सोचा तो एक बार भी तुम्हारे मन में नहीं रोका। आखिर क्यों तुमने मुझे धोखा दिया ? तुम मेरे प्यार को बिल्कुल भी नहीं पहचान पाई थी।"
मीरा ने उसके सवालों का जवाब नहीं दिया। वह घबराहट में बार बार बस एक ही बात कहती जा रही थी कि मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई है। मुझे माफ कर दो। अंजन समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। कुछ समझ ना आने पर वह उठा और वहाँ से चला गया।

नीचे आया तो सागर खत्री उसकी ही राह देख रहा था। अंजन बिना कुछ बोले सीधे बार में गया। अपना लिए एक बड़ा पेग बनाया और वहीं स्टूल पर बैठकर पीने लगा। उसकी शक्ल से पता चल रहा था कि उसकी मानसिक स्थिति अच्छी नहीं है। सागर खत्री अभी कुछ पूँछकर उसे परेशान नहीं करना चाहता था। वह चुपचाप उसे देखता रहा।
अंजन के मन में बहुत कुछ था। वह सागर खत्री के साथ बात करना चाहता था। वह अपना गिलास लेकर उसके पास जाकर बैठ गया। सागर खत्री समझ गया कि वह उससे बात करना चाहता है। उसने कहा,
"मीरा से बात की ?"
"बात क्या करता। वह तो बस तोते की तरह एक बात रट रही थी। मुझसे गलती हो गई। मुझे माफ कर दो। वैसे भी इसके अलावा कह क्या सकती है वो।"
सागर खत्री ने पूँछा,
"फिर क्या फैसला लिया तुमने ?"
अंजन इस विषय में कोई फैसला नहीं ले पाया था। सागर खत्री के इस सवाल पर बोला,
"फैसला क्या करूँ ? मेरा दिल इस समय जैसे लड़ाई का मैदान बना हुआ है। अजीब स्थिति है। मीरा के लिए गुस्सा भी है और प्यार भी।"
सागर खत्री ने मुस्कुरा कर कहा,
"मुझे तो लगता है कि गुस्से पर प्यार भारी है। तुम अभी भी इस बात को झुठला देना चाहते हो कि मीरा ने गलत किया है। लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहे हो। इसी बात का गुस्सा है।"
सागर खत्री ने जो बात कही वह सही थी। अंजन ने कहा,
"तुम ठीक कह रहे हो। मैंने मीरा से दिल की गहराई से प्यार किया था।‌ पर शायद प्यार मेरी किस्मत में नहीं है। बचपन में अपनी माँ को बहुत चाहता था। पर वह छोटी उम्र में ही छोड़कर भगवान के पास चली गई। पिता ने कभी मुझे प्यार नहीं दिया था। दूसरी शादी के बाद तो मेरी तरफ ध्यान देना ही बंद कर दिया। इसलिए मैं घर छोड़कर भाग आया।"
अंजन रुका। अपने गिलास में बची हुई शराब को खत्म किया। फिर आगे बोला,
"मानवी से मैंने कभी प्यार नहीं किया था। वह मेरे लिए एक सीढ़ी की तरह थी। उसके सहारे मैं उसके भाई की दौलत पर कब्ज़ा कर पाया। ‌ उसे अपने रास्ते से हटाने की कोशिश की। इसलिए उसने अपने प्रेमी के साथ उस बात का बदला लेने के लिए मुझ पर हमला किया। फिर भी मेरा मन करता है कि एक बार यदि मानवी मेरे सामने आ जाए तो अपने हाथों से उसकी गर्दन तोड़ दूंँ। लेकिन मेरा को तो मैंने सच्चे दिल से चाहा था। उसके बावजूद उसने मुझे धोखा दिया। पर आज वह मेरे सामने थी फिर भी मैं कुछ नहीं कर पाया। मैं अपने प्यार के हाथों इतना मजबूर कैसे हो गया। मैंने तो अपने बचपन के साथी पंकज को भी नहीं छोड़ा था। इस समय मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या करूंँ।"
"अपने आप पर कोई दबाव मत डालो। कोई जल्दी नहीं है। शांत मन से सोचकर फैसला लो।"
अंजन को अपने दोस्त की बात सही लगी।
 
रिस्की लव - 35

मीरा बिस्तर पर एकदम चुपचाप बैठी थी। वह एक तरफ देख रही थी जैसे उसकी आँखें जैसे किसी चीज़ पर टिकी हों। इस समय उसके मन में गंभीर विचार चल रहा था।
उसे लगा था कि अंजन जब उसके सामने आएगा तो उसे ज़िंदा नहीं छोड़ेगा। इसलिए भय के कारण वह बेहोश हो गई थी। अंजन उस पर चीखा चिल्लाया पर उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। यह इस बात का प्रमाण था कि अभी भी उसके दिल में मीरा के लिए भावनाएं थीं। यही बात मीरा को छू गई थी।
अभी तक तो वह डर की वजह से इस बात के लिए पछताती थी कि उसने अंजन के साथ धोखा किया। पर इस समय उसके मन में पछतावा था कि उसने सच्चे प्यार को खो दिया। आज तक किसी ने भी उसे इस तरह नहीं चाहा था। उसके पापा और मम्मी अपनी अपनी दुनिया में खोए हुए रहते थे। उन्हें लगता था कि उसकी ज़रूरतें पूरी कर देना और मांगें मान लेना ही माँ बाप होने के नाते उनका कर्तव्य है। उसने भी इसे ही उनका प्यार मान लिया। पर मन में प्यार पाने की ललक थी।
मीरा जब सोलह साल की थी तब पहली बार वह अपने से पंद्रह साल बड़े पर्सी की तरफ आकर्षित हुई थी। वह उसका डांस टीचर था। बहुत खूबसूरत था। वह उसके घर डांस सिखाने आता था। पर्सी अपने लिए उसके आकर्षण को समझ रहा था। पर उसे समझाने की बजाय उसने उसे उकसाया। मीरा को लगता था कि वह उसे प्यार करता है। पर वह उसका फायदा उठा रहा था।
एक दिन उसे पता चला कि वह प्रैगनैंट है। उसने यह बात पर्सी को बताई। उसने कहा कि घबराने की बात नहीं है। वह उसे छुटकारा दिला देगा।‌ पर्सी ने चुपचाप उसका अबॉर्शन करवा दिया। उसके बाद वह उससे खिंचा खिंचा रहने लगा। अचानक ही उसने मीरा को डांस सिखाने आना बंद कर दिया था। अब तक यही समझती थी कि वह उससे प्यार करता है। लेकिन उसका दूर भागना उससे सहा नहीं जा रहा था। उसने इस विषय में बात करने की सोची।
जब वह उसके घर पहुँची तो पता चला कि वह ऑस्ट्रेलिया चला गया है। मीरा का दिल टूट गया। प्यार से उसका भरोसा उठ गया। पहले प्यार में ही उसे धोखा मिला था। उसने भी लोगों को धोखा देना शुरू कर दिया। बीस साल की उम्र आने तक वह दिल से खेलने की कला में माहिर हो गई थी।
अब तक वह लोगों के दिल से खेलकर उनका फायदा उठा चुकी थी। उसे ऐसा करते हुए ज़रा भी बुरा नहीं लगता था।‌ पर आज पहली बार उसे अंजन के बारे में सोचकर बुरा लग रहा था।
बहुत देर तक वह उसी तरह से चुपचाप बिस्तर पर बैठी रही। डोर बेल बजने से वह अपने खयालों से बाहर आई। उसने समय देखा। दोपहर के दो बजने वाले थे। वह समझ गई कि उसके लिए लंच आया होगा। उसका मन खाने का नहीं था। पर दरवाज़ा तो खोलना ही था। वह उठी और जाकर दरवाज़ा खोल दिया। खाने की ट्रे लेकर वही लड़की अंदर आई जो उसे यहाँ लेकर आई थी। ट्रे डाइनिंग टेबल पर रखकर वह प्लेट लगाने लगी। मीरा ने उससे कहा,
"अभी मेरा मन नहीं है। जब मन होगा तब मैं खुद सर्व कर लूँगी।"
उसकी बात सुनकर वह लड़की प्लेट लगाना छोड़कर चली गई। मीरा किचन में गई। अपने लिए कॉफी बनाई। मग लेकर वह बालकनी में जाकर बैठ गई। वह सोच रही थी कि उसने कभी भी अंजन के प्यार को महसूस करने की कोशिश ही नहीं की थी। यदि उसने पहले ही उसके प्यार को समझ लिया होता तो वह कभी भी मानवी और निर्भय की मदद नहीं करती।
कॉफी पीते हुए वह मन ही मन एक कल्पना कर रही थी।‌ उस दिन अंजन उसके कमरे में आकर उसे बीच हाउस ले जाने की बात कर रहा है। पहले वह कहती है कि बहुत थक गई है। कल सुबह फ्लाइट भी पकड़नी है। फिर अंजन को उदास देखकर हाँ कर देती है। वह तैयार हो रही होती है तभी मानवी का फोन आता है। वह फोन रिसीव नहीं करती है। कॉल कटने के बाद फोन स्विच ऑफ कर देती है। बीच हाउस में अंजन उसे प्रपोज़ करता है। वह स्वीकार कर लेती है। उसके बाद दोनों शादी करके ख़ुशी से रह रहे हैं।
मीरा के मुर्झाए चेहरे पर यह सोचकर मुस्कान आ गई। तभी अचानक वह फिर उदास हो गई। जैसे राजकुमार और राजकुमारी की कहानी में कोई राक्षस आ जाता है वैसे ही अचानक उसकी कल्पना में मानवी और निर्भय आ जाते हैं। दोनों के हाथ में गन है। वह अंजन से कहते हैं कि मीरा उसे फंसाने के लिए एक मोहरा भर है। यह सुनते ही अंजन मीरा की तरफ नफरत से देखता है। मानवी और निर्भय उस पर गोलियां चलाते हैं। वह मर जाता है।
कॉफी का मग फर्श पर रखकर मीरा दोनों हाथों में चेहरा छिपाकर रोने लगी। वह सोच रही थी कि अच्छा होता कि मानवी और निर्भय जब पहली बार उससे मिले थे तभी उन्हें भगा देती। उनकी वजह से आज वह कहीं की नहीं रही। वह उठकर बेडरूम में गई और बिस्तर पर लेटकर रोने लगी।

अंजन अपने कमरे में बैठा हुआ था। उसका मन बहुत अशांत था। अनिश्चय की स्थिति उसे परेशान कर रही थी। वह समझ नहीं पा रहा था कि मीरा के लिए मन में गुस्सा होते हुए भी क्यों वह उसे ‌उसके किए की सज़ा नहीं दे पाया। मीरा ने उसके साथ धोखा किया। उसके दुश्मनों को उसकी खबर देकर उसकी जान जोखिम में डाली। फिर भी वह उससे नफरत नहीं कर पा रहा है।
उसे अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था। आज तक उसने अपने साथ धोखा करने वाले किसी को भी छोड़ा नहीं था। फिर मीरा को बेहोश देखकर क्यों उसके दिल में दर्द हुआ था। वह भी उस दिन को याद कर रहा ‌था जब उसने पहली बार मीरा को लंदन के उस नाइट क्लब में ‌डांस फ्लोर पर देखा था। वह समझने की कोशिश कर रहा था कि ‌आखिर क्यों वह पहली ही नज़र ‌में मीरा की तरफ आकर्षित हो गया था।‌
पहली बार नहीं था कि उसने किसी खूबसूरत लड़की को देखा था। कई खूबसूरत लड़कियां उससे नज़दीकी बढ़ाने के लिए उसके इर्द गिर्द चक्कर लगाती थीं। पर वह उन्हें उतना ही नज़दीक आने देता था जितना वह चाहता था। किसी के भी साथ उसने रिश्ता बनाने की बात सोची भी नहीं थी। पर मीरा को देखते ही उसे लगा था कि वह जैसे इतने दिनों से उसकी ही तलाश कर रहा था। मीरा का उसके नज़दीक आना, उससे दोस्ती बढ़ाना उसके लिए बड़ी उपलब्धि था।
वह अपने आप को खुशकिस्मत समझने लगा था। उसे लगता था कि मीरा उसके लिए खुशियों का पिटारा बनकर आई है। उसके आते ही उसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट लग्ज़री रिज़ॉर्ट के लिए जमीन मिल गई। वह कई दिनों से अपने प्यार का इज़हार उससे करना चाहता था। इसलिए उसने रिज़ॉर्ट के भूमि पूजन के लिए उसे न्यौता दिया था। पहले तो मीरा ने आने में असमर्थता जताई थी। लेकिन उसके ज़ोर देने पर वह यह कहकर तैयार हो गई कि सेरेमनी के अगले दिन ही फ्लाइट पकड़ कर लौट जाएगी। अंजन ने उसके आने और जाने के लिए टिकट बुक करा दिया था।
बड़े मन से उसने शिमरिंग स्टार्स में उसे प्रपोज़ करने की तैयारी की थी। लेकिन एक बार फिर मीरा ने मना कर दिया था। वह उदास हो गया। लेकिन जब मीरा मान गई तो उसे लगा कि जैसे किस्मत उस पर मेहरबान हो गई।
आज यह सब सोचते हुए उसे लग रहा था कि वह कितना बेवकूफ था। मीरा के बुने जाल में फंस रहा था। जिसे वह खुशी समझ रहा था वह उसकी मौत की आहट थी।
उसके मन में फिर गुस्सा उठा। पर इस बार उसके साथ ही अपने लिए एक बेचारगी वाली भावना भी पैदा हुई। वह खुद को मजबूर आशिक की तरह महसूस कर रहा था। अचानक ही उसकी आँखें भर आईं। वह सोचने लगा कि उसका किया ही उसके सामने आ गया। उसने मानवी को धोखा दिया था। मानवी ने मीरा के ज़रिए उसे धोखा दे दिया। वह अपने आप को कोस रहा था कि वह प्यार जैसी चीज़ के चक्कर में पड़ा ही क्यों। कुछ देर तक वह अपनी हालत पर आंसू बहाता रहा।
लेकिन कुछ ही देर में उसके दिल ने उसे एक नाकाम आशिक की तरह रोने पर धिक्कारा।‌ उसे याद दिलाया कि वह अंजन विश्वकर्मा है। जिसने एक ढाबे से मुंबई शहर की मानी हुई कंस्ट्रक्शन कंपनी तक का सफर तय किया है। उसने अपनी हिम्मत से अपने सपने पूरे किए। इस तरह से टूट जाना उसे शोभा नहीं देता।
वह उठा। वॉशरूम में जाकर मुंह धोया। उसने तय कर लिया कि वह भावनाओं में बहकर कमज़ोर नहीं पड़ेगा। उसने अब तक अपनी सारी कमज़ोरियों पर काबू पाया है। मीरां उसकी कमज़ोरी बन रही है। वह ऐसा नहीं होने देगा। वह मीरा के बारे में सख्त फैसला लेगा। जो भी हो उसने उसके साथ विश्वासघात किया है। उसे विश्वासघात की सज़ा मिलनी ही चाहिए। अब उसके मन में कोई दुविधा नहीं रह गई थी। वह एक आशिक के तौर पर नहीं बल्कि उस अंजन की तरह सोच रहा था जिसने आज तक अपने साथ धोखा करने वालों को छोड़ा नहीं था।
दरवाज़े पर दस्तक हुई। उसने दरवाज़ा खोला। एक नौकर सागर खत्री का संदेश लेकर आया था कि वह लंच के लिए उसकी राह देख रहा है।‌ अंजन ने कहा कि वह कुछ ही देर में खाने के लिए आ रहा है।
 
रिस्की लव - 36

गोवा की मीडिया में एक बात चर्चा का विषय थी कि सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने किडनैपिंग केस में बहुत बहादुरी दिखाई थी। लेकिन साथ में एक और सवाल भी पूँछा जा रहा था कि जब माइकल के आदमी ने बयान में समर का नाम लिया है तो अब तक वह पकड़ा क्यों नहीं गया है ? इंस्पेक्टर कौशल सावंत जो हर केस को अंत तक ले जाने के लिए जाने जाते हैं इस केस में सुस्त क्यों हैं ? अपने बारे में उठ रहे सवालों को सुनकर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कमर कस ली थी कि जैसे भी हो वह समर को पकड़ कर रहेगा।
समर अपने विश्वासपात्र आदमी से हर एक बात की सूचना ले रहा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत पर उठ रहे सवालों से वह समझ गया था कि मामला गंभीर हो गया है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत अब बिल्कुल भी शांत नहीं बैठेगा। उसे जितनी जल्दी हो सके दुबई जाने की कोशिश करनी चाहिए।
लेकिन मीडिया में उसका नाम बहुत उछल चुका था। उसकी तस्वीर भी लोगों के सामने आ गई थी। उसके लिए मुश्किल बहुत बढ़ गई थी। इस समय बाहर जाने की कोशिश उसे मुश्किल में डाल सकती थी। उसके लिए सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी था।
इंस्पेक्टर कौशल ने जिन राज्यों में समर की डीटेल्स भिजवाई थीं उनसे संपर्क किया। पर अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई थी। समर को तलाशने में मिली नाकामी उसे परेशान कर रही थी। वह समझने की कोशिश कर रहा था कि उससे कहाँ गलती हो रही है। मीडिया में जब मानवी और निर्भय के छुड़ाए जाने की खबर आई थी उसके बाद से ही वह गायब हो गया था। अभी तक वह आया नहीं। ज़रूर कोई ऐसा है जो उसे यहाँ के हालात के बारे में खबर दे रहा है। वह जो भी है उसके मोटेल से ही संबंधित है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने अपना दिमाग दौड़ाना शुरू किया।

नफीस अभी शाहीन का प्लास्टर कटवा कर हॉस्पिटल से लौटा था। विनोद भी उसकी मदद के लिए गया था। शाहीन आराम करने लगी तो नफीस और विनोद हॉल में बैठकर बातें करने लगे। दोनों अंजन के बारे में ही बात कर रहे थे। विनोद ने कहा,
"सर मैंने पता किया है। अंजन कहीं बाहर गया हुआ है। पर इस बार किसी को नहीं मालूम की वह कहाँ गया है ?"
नफीस ने कहा,
"मुझे लगता है कि इस बार वह लंदन नहीं गया होगा।"
"क्यों सर ?"
"देखो मानवी और निर्भय की किडनैपिंग उसके कहने पर ही हुई थी यह बात तो पक्की है। जिस समर का नाम सामने आया है वह अंजन का दोस्त है। अंजन जानता है कि समर की गिरफ्तारी होते ही पुलिस उसके गिरेबान तक पहुँचेगी। वह अक्सर लंदन जाता है इसलिए पुलिस पहले वहीं तलाश करेगी।"
"हाँ सर...यह बात तो ठीक है। तो वह कहाँ जा सकता है ?"
"अंजन के और भी ठिकाने होंगे। वह कहीं भी जा सकता है।"
विनोद के मन में एक बात आ रही थी। कुछ सोचकर उसने कहा,
"सर आपने एक बार बताया था कि लंदन में उसका एक दोस्त सागर खत्री है। क्या वह उसकी कोई मदद कर सकता है ?"
नफीस के दिमाग में सागर खत्री का नाम आया ही नहीं था। विनोद के याद दिलाने पर उसे लगा कि ऐसा हो सकता है। उसने कहा,
"विनोद तुमने बात तो सही कही है। जहाँ तक मुझे पता है कि लंदन में अंजन अक्सर उसके घर पर ही रुकता था। वह उसकी मदद कर सकता है।"
विनोद ने कुछ सोचकर कहा,

"आप इस सागर खत्री के बारे में और भी कुछ जानते हैं।"
"नहीं... मैं उससे कभी मिला भी नहीं हूँ। लंदन में कुछ लोग हैं जिनके मुंह से यह सुना था कि अंजन का वहाँ एक दोस्त सागर खत्री है।"
उसके बाद दोनों चुप हो गए। नफीस ने उठते हुए कहा,
"देखूँ शाहीन को किसी चीज़ की ज़रूरत तो नहीं। फिर तुम्हारे लिए चाय बनाता हूँ।"
"सर आप भाभी जी को देख लीजिए। चाय मैं बना लूँगा।"
विनोद का यह प्रस्ताव सुनकर नफीस ने आश्चर्य से कहा,
"आर यू श्योर...."
विनोद ने कहा,
"बिल्कुल....आप भाभी जी के पास जाकर बैठिए। चाय बनते ही मैं ‌आपको बुला लूँगा।"
नफीस शाहीन के पास चला गया। वह बेड पर बैठी एक किताब पढ़ रही थी। नफीस ने उससे पूँछा,
"कोई तकलीफ तो नहीं है शाहीन।"
शाहीन ने बुकमार्क लगाकर किताब बंद कर दी। वह बोली,
"तकलीफ क्या होनी है। मैं ठीक हूंँ। विनोद चला गया क्या ?"
"नहीं....किचन में चाय बना रहा है।"
"अरे उसे क्यों तकलीफ दी। कुछ देर में कुक आ रही होगी। वह बना देती।"
"मैंने तो खुद बनाने की पेशकश की थी। पर वह बोला कि उसे चाय बनाने में कोई दिक्कत नहीं है।"
शाहीन ने अपनी छड़ी उठाई और उठकर खड़ी हो गई। नफीस ने टोका,
"उठ क्यों गई ?"
"जाकर देखती हूँ कि उसे कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है।"
नफीस ने उसे रोकना चाहा तो वह बोली,
"सारा दिन कमरे में ही तो बंद नहीं रहूंँगी ना। बाहर चलकर बैठती हूँ।"
नफीस ने उसे सहारा देना चाहा तो उसने मना कर दिया। छड़ी के सहारे वह धीरे धीरे बाहर आ गई। उसके बाद किचन के दरवाज़े तक गई। विनोद चाय बना रहा था। उसे देखकर बोला,
"भाभी जी आप बाहर आ गईं।"
"मैंने सुना तुम चाय बना रहे हो। इसलिए पीने आ गई।"
"तो जाकर बैठिए। मैं लेकर आता हूँ।"
शाहीन ने नफीस से कहा कि वह विनोद की मदद करे। वह जाकर बैठती है।

तीनों लोग चुपचाप बैठे चाय पी रहे थे। नफीस के ‌मन में सागर खत्री वाली बात घूम रही थी। विनोद यह सोच रहा था कि ‌अंजन मुंबई से भागकर कहाँ गया होगा। शाहीन को लग रहा था कि शायद उसके आ जाने से दोनों खुलकर बात नहीं कर पा रहे हैं। उसने कहा,
"मेरी वजह से तुम लोगों की बातचीत में रुकावट पैदा हो गई।"
नफीस ने सफाई दी,
"ऐसा कुछ नहीं है। हम लोग बात कर चुके थे।"
शाहीन ने कहा,
"तुम लोगों की बात का मुद्दा वही अंजन होगा। जब भी फोन पर विनोद से बात करते हो तो बातचीत में उसका नाम सुनाई पड़ता है।"
नफीस मुस्कुरा दिया। शाहीन ने कहा,
"सिर्फ अपनी किताब के लिए उसमें इतनी दिलचस्पी दिखा रहे हो ? ऐसा क्या है उसमें कि तुम विनोद से उसके बारे में पता करने को कहते हो ?"
शाहीन का यह सवाल अप्रत्याशित था। इस तरह से नफीस ने कभी सोचा नहीं था। उसके लिए एकदम से जवाब दे पाना मुश्किल था। शाहीन जवाब के लिए उसकी तरफ देख रही थी। नफीस ने कहा,
"अंजन की ज़िंदगी का सबसे बड़ा ‌आकर्षण यही है कि वह गलत तरीके से ऊपर उठकर आया पर समाज में प्रतिष्ठित बन गया। गैरकानूनी काम भी वह इतनी सफाई से करता है कि सफेदपोश बना हुआ है।"
विनोद बोला,
"सर उसने गरीब लोगों की भलाई के लिए भी बहुत से काम किए हैं। कावेरी हॉस्पिटल का एक विंग सिर्फ आम लोगों के लिए है। जहाँ उन्हें सामान्य कीमतों पर अच्छा इलाज मिलता है। दो स्कूल हैं जहाँ कम कीमत पर अच्छी शिक्षा मिलती है।"

शाहीन सब बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसने कहा,
"यह तो वही बात हुई कि पहले पाप करो फिर गंगा नहा लो। जो भी हो मेरे हिसाब से तो वह एक क्रिमिनल है।"
विनोद ने कहा,
"हाँ भाभी....पर कहा जाता है ना कि जो पकड़ा गया वह चोर है, जो बच गया वह सयाना। अंजन ने अब तक अपनी गोटियां इस तरह से चली हैं कि वह बचा हुआ है।"
शाहीन ने कहा,
"लेकिन ऊपरवाला सबका हिसाब करता है। अंजन का भी करेगा।"
डोरबेल बजी। विनोद ने दरवाज़ा खोला। कुक लंच बनाने के लिए आई थी। शाहीन ने विनोद से लंच के लिए रुकने को कहा। पर उसने कहा कि वह कभी और उनके साथ खाना खाएगा। आज उसे ज़रूरी काम है। वह चला गया।

शाहीन इधर कुछ समय से वर्क फ्राम होम कर रही थी। अगले हफ्ते से उसे अपना ऑफिस ज्वाइन करना था। नफीस भी इधर नियमित रूप से काम पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। उसने भी कल से नियमित काम पर जाने का फैसला किया था।
लंच के बाद शाहीन अपना लैपटॉप लेकर ऑफिस का काम करने लगी। नफीस बहुत दिनों के बाद अंजन पर लिखी जा रही अपनी किताब के आगे का चैप्टर लिखने बैठा था। वह इस समय उस हिस्से के बारे में लिख रहा था जब अंजन ने परिकर भाइयों की हत्या करवा कर उनका सबकुछ अपने नाम कर लिया था।

अंजन के अचानक उस मुकाम पर पहुंँच जाने पर बहुत से लोग उसकी तरक्की से जल रहे थे। वह उसके बारे में कई तरीके की बातें कर रहे थे। परिकर बंधुओं की दुर्घटना पर सवाल उठा रहे थे। उन्हें लगता था कि अंजन उनकी इन सारी बातों से बौखला जाएगा। अपना आपा खोकर कुछ ऐसा करेगा कि उन्हें उसे पीछे ढकेलने में आसानी हो जाएगी।
लेकिन अंजन ने ऐसा कुछ नहीं किया। उन लोगों की बातों का जवाब देने की जगह ऐसे काम करने शुरू किए जिनसे लोगों का ध्यान उस तरफ आकर्षित हो सके। मीडिया में उसके उन कामों की चर्चा होने लगी। लोगों की नज़रों में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ने लगी।
लिखते हुए नफीस को शाहीन की बात याद आई। जो आज उसने कही थी कि यह तो वही बात हुई कि पहले पाप करो फिर गंगा नहा लो। अंजन ने अपने कई पापों को ऐसी डुबकियां लगाकर धोने का प्रयास किया था। वह उसमें कामयाब भी रहा था।
नफीस सोच रहा था कि मानवी के साथ उसने बहुत अत्याचार किया। उसके सहारे पहले उसके भाइयों का सबकुछ हड़प लिया। उन्हें रास्ते से हटा दिया। मानवी को इस तरह अपने जीवन से दूर कर दिया जैसे दूध में से मक्खी। उस पर जानलेवा हमला करवाया। उसके बाद मानवी के अचानक गायब हो जाने को भी बड़ी चालाकी से अपने फायदे में मोड़ लिया।
अब ऊपरवाले का इंसाफ शुरू हो गया था। अंजन अपना सबकुछ छोड़कर भागा फिर रहा था।
 
रिस्की लव - 37

अंजन एक बार फिर ‌मीरा के सामने खड़ा था। मीरा सर झुकाए बैठी ‌थी। जब अंजन मीरा के पास आया था तो ‌उसने फिर उससे यही कहा कि ‌उससे बहुत बड़ी गलती हो गई। उसे माफ कर दे। इस पर अंजन ने उससे सवाल किया था कि तुमने मेरे प्यार की कीमत लेकर उसका सौदा मेरे दुश्मनों से किया। मुझे धोखा दिया।‌ इसके बावजूद भी तुम मुझसे माफी की उम्मीद कैसे रख सकती हो।‌ उसके इस सवाल पर ही मीरा नज़रें झुकाए बैठी थी।
अंजन उसके चेहरे को घूर रहा था। मीरा के पास उसके सवाल का कोई जवाब नहीं था। जवाब वह देती भी क्या। सब कुछ तो उसने जानते बूझते किया था। अंजन ने उससे कहा,
"तुमने जो गुनाह किया है वह माफ नहीं किया जा सकता है। तुम्हें सज़ा तो भुगतनी ही होगी।"
अंजन की यह बात सुनकर मीरा के मन में भी एक विचार आया। उसने नज़रें उठाकर सीधा संबंध अंजन की आंँखों में देखा। अचानक उसमें आए इस परिवर्तन से अंजन भी अचंभित था। मीरा ने कहा,
"अंजन मैं तुम्हारी गुनहगार हूंँ। तुम्हारे हिसाब से गुनाह करने वाले को सजा मिलनी ही चाहिए। मैं भी तुम्हारी हर सज़ा भुगतने को तैयार हूँ। बस एक बात का जवाब दो।"
मीरा के चेहरे पर अब डर का भाव नहीं था। उसने स्वीकार कर लिया था कि उसकी मौत पक्की है। पर अब वह जान की भीख नहीं मांगना चाहती थी। उसने आगे कहा,
"मैं तुम्हारी गुनहगार हूंँ। इसलिए तुम मुझे सज़ा देना चाहते हो। पर तुम भी तो मानवी और निर्भय के गुनाहगार हो। इसलिए उन्होंने तुम्हें सज़ा दी थी। फिर अब तुम उनके पीछे क्यों पड़े हो ? तुमने गुनाह किया और उन्होंने उसकी सज़ा दी। हिसाब बराबर हो गया। अब छोड़ दो उन्हें।"
अंजन को तनिक भी उम्मीद नहीं थी कि मीरा उससे ऐसा सवाल करेगी। मीरा का सवाल सुनकर वह भी उसी तरह चुप हो गया जैसे कुछ समय पहले मीरा चुप थी। वह उसके सामने से हटकर बालकनी में जाकर खड़ा हो गया। खुद उसके मन में भी तो यही बात आई थी कि उसका किया हुआ ही अब उसके सामने आया है। पर मीरा को कोई जवाब तो देना ही था। वापस आकर उसने कहा,
"मानवी भी उस निर्भय के लिए मुझे धोखा दे रही थी।‌ तुमने भी मुझे धोखा दिया। दोनों ही धोखेबाज़ हो।"
मीरा अब चुप रहने के मूड में नहीं थी। वह उसकी हर चोट पर बराबरी की चोट करने को तैयार थी। उसने अंजन को घूर कर देखा। वह बोली,
"तुम हमें धोखेबाज़ कह रहे हो। ज़रा खुद के गिरेबान में झांक कर देखो। तुमसे बड़ा धोखेबाज़ कौन है। तुमने मानवी को अपने प्यार में फंसकर धोखा दिया। उसका सब कुछ छीन लिया। उसकी दौलत पर राज करते रहे। उसे उसके ही घर में किनारे कर दिया। इतने पर भी चैन नहीं पड़ा तो उसे और निर्भय को मारने के लिए आदमी भेजा। यह तो उनकी किस्मत थी कि दोनों बच गए।"
मीरा ने अंजन के गुनाह उसके सामने ला दिए थे। उसकी इस हरकत पर वह तिलमिला उठा। गुस्से में बोला,
"तुम अपनी मौत को दावत दे रही हो। संभल जाओ।"
मीरा ने भी उसी तेवर में कहा,
"मैं समझ गई हूँ कि तुम मुझे छोड़ोगे नहीं। इसलिए मौत का डर छोड़कर तुम्हारे सामने गिड़गिड़ाना बंद कर दिया। पर तुम जो दूसरों को उनके किए की सज़ा देने की बात करते हो उसे आइना दिखाना भी ज़रूरी है। अगर मैं गुनहगार हूँ तो तुम भी हो।"
मीरा ने अंजन के सामने आइना रख दिया था। उसमें वह अपने किए गए गुनाहों का अक्स देख रहा था। उसकी इस हरकत पर अंजन को बहुत गुस्सा आ रहा था। वह मीरा की तरफ बढ़ा। उसके हाथ उसकी गर्दन तक पहुँचकर रुक गए। वह उसका गला घोंटने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। खिसिया कर वह पैर पटकता हुआ चला गया।
जब वह नीचे आया तो सागर खत्री ने उसे अपने पास बुलाया। उसके लिए एक ड्रिंक बनाया। उसे पकड़ाते हुए बोला,
"मीरा को लेकर तुम बहुत उलझन में हो। कोई फैसला नहीं कर पा रहे हो। मुझे कोई जल्दी नहीं है। जब तक तुम कोई फैसला नहीं लेते तब तक मीरा आराम से यहाँ रहेगी। उसकी कोई फिक्र नहीं है। मुझे फिक्र है तो इस बात की कि जब तक तुम उसके बारे में कोई फैसला नहीं करोगे तब तक तुम इसी तरह परेशान रहोगे। खुद को मीरा में उलझाए रखना तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।"
अंजन ने आधे से अधिक ड्रिंक एक सांस में गटक ली। वह सचमुच बहुत उलझन में था। उसने कहा,
"क्या बात है समझ नहीं आता ? वो मुझे ना जाने क्या क्या सुनाती रही। मेरे किए गुनाहों की गिनती करती रही। कोई और होता तो मैं उसकी गर्दन तोड़ देता‌। पर उसकी गर्दन तक जाकर मेरे हाथ रुक गए। आज तो मैंने सोच लिया था कि उसका हिसाब कर दूँगा। लेकिन कुछ नहीं कर पाया।"
सागर खत्री समझ गया कि मीरा अंजन को कमज़ोर कर रही है। इससे पहले उसने कभी भी अपने गुनाहों के बारे में बात नहीं की थी। उसका कमज़ोर पड़ना उसके जी ठीक नहीं था। सागर खत्री ने कहा,
"अंजन मैं और तुम जिस दुनिया में हैं अगर अपने गुनाहों के बारे में सोचेंगे तो उनके बोझ तले दबकर मर जाएंगे। यह लड़की मीरा तुम्हें कमज़ोर बना रही है। कमज़ोर पड़ना ठीक नहीं है। तुम्हें बहुत कुछ करना है।"
सागर खत्री ने जो कुछ कहा वह अंजन को एकदम ठीक लगा। जबसे मीरा ने उसे उसके गुनाहों के बारे में बताया था वह उनके बारे में सोचकर एक बोझ सा महसूस कर रहा था। उसने बचा हुआ ड्रिंक खत्म करके कहा,
"ठीक है.... मैं अपनी कमज़ोरी को खत्म ही कर देता हूँ।"
यह कहकर वह मीरा के पास जाने के लिए उठा। सागर खत्री ने उसे रोककर कहा,
"रुको....जल्दबाज़ी नहीं करते हैं। पहले अपना मूड बदलते हैं। उसके बाद मीरा को रास्ते से हटाने का अच्छा सा रास्ता निकाल लेंगे।"
अंजन ने बैठते हुए कहा,
"मेरा मूड तो ठीक होने वाला नहीं है।"
"ज़रूर होगा। तुम मेरे साथ चलो। ऐसी जगह ले जाऊँगा कि सब भूल जाओगे।"
"ठीक है, ले चलो। मैं सबकुछ भूल जाना चाहता हूँ।"
सागर खत्री अंजन को लेकर चला गया।

अंजन के खिसिया कर चले जाने के बाद मीरा उठी और फ्रिज से जूस निकाल कर गिलास में डाला। जूस पीते हुए वह अच्छा महसूस कर रही थी। उसने अंजन को यह एहसास करा दिया था कि वह भी गलत है। बल्कि वह उससे भी बड़ा गुनाहगार है। उसने सिर्फ मानवी को ही नहीं बल्कि उसके भाइयों के साथ भी दगा किया था।
वह अपने आप को गुनहगार मान रही थी। मौत के डर से अंजन के सामने खुद को माफ करने के लिए गिड़गिड़ा रही थी। लेकिन अंजन उसे माफ करने के मूड में नहीं था। वह उसे गुनहगार बता कर उसे सज़ा देना चाहता था। मीरा को लग गया था कि अब उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है। उसी समय उसके मन में आया कि मरना तो तुम्हें है ही। फिर क्यों इसके सामने गिड़गिड़ा रही हो। इतने गुनाह करके भी यह तुम्हें तुम्हारी गलती की सज़ा देना चाहता है। डरो मत इसे भी इसके गुनाहों का एहसास कराओ। मीरा के मन का डर गायब हो गया। उसने भी अंजन को उसके किए कर्मों की याद दिला दी।
मीरा समझ रही थी कि उसकी इस बात का कुछ असर तो हुआ था। गुस्से में उसकी गर्दन की तरफ बढ़े हाथ रुक गए थे। अंजन को अपने गुनाहों का एहसास हो गया था। वह जानती थी कि इतना होने के बाद भी अंजन उसे छोड़ेगा नहीं। पर अब उसके अपने मन में ना तो डर था ना कोई बोझ।

अंजन अपने कमरे में लेटा हुआ था। उसका मन शांत होने की जगह और अशांत हो गया था। सागर खत्री उसे ऐसी जगह ले गया था जहाँ शबाब का मेला था। अलग अलग जगहों से लाई गई खूबसूरत औरतें लोगों के मन बहलाव के लिए उनके सामने इस तरह पेश की जा रही थीं जैसे किसी दुकान पर सामान का प्रदर्शन किया जाता है। उसने भी अपने लिए एक औरत चुन ली थी। कुछ समब उसके साथ बिताने के बाद वह अच्छा महसूस कर रहा था।
जब वह और सागर खत्री उस जगह से लौट रहे थे तब सागर खत्री ने पूँछा,
"कैसा लगा ?"
"बहुत अच्छा.... उसके साथ अपनी परेशानियां भूल गया था।"
"मेरा भी मूड फ्रेश हो गया। मैंने कहा था ना कि जब मूड अच्छा होगा तब मीरा को रास्ते से हटाने का आइडिया सोचेंगे। देखो वहाँ से चलते समय मेरे दिमाग में एक आइडिया आ भी गया।"
उसकी बात सुनकर अंजन जानने को उत्सुक हो गया कि उसने क्या सोचा है। सागर खत्री ने कहा,
"मीरा को मारने से अच्छा है कि वह हम दोनों का मन बहलाए। जब तक मन करेगा रखेंगे। नहीं तो उसे ऐसी ही किसी जगह पहुँचा देंगे।"
सागर खत्री का यह सुझाव सुनते ही अचानक अंजन के मन में गुस्से का ज्वालामुखी फूट पड़ा। उसने सागर खत्री का गिरेबान पकड़ लिया। सागर ने अपना गिरेबान छुड़ाकर कहा,
"होश में रहो अंजन। इस तरह की हरकत आज पहली और आखिरी बार माफ कर रहा हूँ। मत भूलो कि तुम पुलिस के डर से यहाँ मेरे घर पर रह रहे हो।"
अंजन कुछ ढीला पड़ा। उसे भी एहसास हुआ कि उसने उस दोस्त का गिरेबान पकड़ लिया था जिसने उसकी मदद की है। इन दिनों उसका बुरा समय चल रहा है। ऐसे में इस तरह की हरकत उसके लिए ठीक नहीं है। वह शांत होकर बैठ गया। सागर खत्री ने कहा,
"मैं कह रहा था ना कि वह लड़की तुम्हारी कमज़ोरी बन गई है। तुम्हारे मन में उसके लिए प्यार है। पर यह प्यार तुम्हारे किसी काम का नहीं है। मीरा तुमसे प्यार नहीं करती। यह बात कभी मत भूलना कि उसने तुम्हें धोखा देकर तुम्हारे दुश्मनों की मदद की थी।"
लौटकर आने के बाद से ही अंजन बहुत परेशान था। वह समझ नहीं पा रहा था कि उसका दिल चाहता क्या है।
 
रिस्की लव - 38

समर बहुत परेशान था। इस समय उसे पुड्डूचेरी से निकलने की कोई राह नज़र नहीं आ रही थी। वह बेचैन था। किसी भी कीमत पर देश छोड़कर भागना चाहता था। उसके पास रवि शेखर के नाम से एक दूसरा पासपोर्ट भी था। वह पासपोर्ट मंगाना चाहता था। उसने मोटेल के मैनेजर श्रीकांत को फोन किया। उससे उसका पासपोर्ट लेकर पुड्डूचेरी आने के लिए कहा। श्रीकांत ही था जो अब तक उसकी सहायता कर रहा था।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत को श्रीकांत पर शक था कि वही ऐसा शख्स है जो समर के साथ संपर्क में है। उसने उसके फोन रिकॉर्ड्स चेक करवाए। पर कुछ संदिग्ध नहीं मिला। श्रीकांत के पास एक दूसरा नंबर था। वह उसी नंबर से समर के साथ संपर्क में था। लेकिन इंस्पेक्टर कौशल सावंत को पक्का यकीन था कि श्रीकांत की समर से बातचीत होती है। कोई जल्दबाजी करने की बजाए उसने श्रीकांत पर नज़र रखनी शुरू कर दी।
असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर नोएल समर के गोवा वाले घर के बाहर था। अभी कुछ समय पहले ही श्रीकांत घर में दाखिल हुआ था। असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर नोएल ने इंस्पेक्टर कौशल सावंत को फोन पर सूचना दी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उससे कहा कि वह उस पर नज़र रखे। वह कुछ देर में वहाँ पहुँच रहा है।

श्रीकांत समर के निर्देश के अनुसार उसके कमरे में गया। उसकी कबर्ड खोली। समर ने जो जगह बताई थी वहाँ से रवि शेखर के नाम का पासपोर्ट लिया। एक बैग में समर का कुछ और सामान रखा। सब लेकर वह बाहर निकला। अपनी कार की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक इंस्पेक्टर कौशल सावंत उसके सामने आ गया। उसे देखते ही श्रीकांत घबरा गया। बैग उसके हाथ से छूटकर गिर गया। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कहा,
"यह तो समर का घर है। तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? वह तो कहीं गायब है।"
यह सवाल सुनकर श्रीकांत और अधिक डर गया। हकलाते हुए बोला,
"वो... देखने आया था कि सब ठीक है कि नहीं।"
"क्यों ? तुम तो मोटेल के मैनेजर हो। समर के घर की इतनी चिंता क्यों ? या फिर समर ने यहाँ आने को कहा था।"
श्रीकांत घबराहट के कारण पसीना पसीना हो रहा था। तभी असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर नोएल ने बैग से पासपोर्ट निकाला। उसे इंस्पेक्टर कौशल सावंत को देते हुए बोला,
"सर....यह पासपोर्ट देखिए।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने पासपोर्ट देखा। फिर श्रीकांत को दिखाते हुए पूँछा,
"यह किसका है ?"
श्रीकांत नज़रें झुकाए खड़ा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उसे पुलिस जीप में बैठने के लिए कहा। श्रीकांत जानता था कि उसे पुलिस के सवालों के जवाब देने पड़ेंगे। वह चुपचाप जाकर जीप में बैठ गया।

पुलिस स्टेशन पहुँचकर श्रीकांत ने सारी बात सच सच बता दी। उसने बताया कि समर विदेश जाना चाहता है। क्योंकी मीडिया में उसका नाम आ चुका है इसलिए उसने उससे रवि शेखर के नाम से उसका दूसरा पासपोर्ट पुड्डूचेरी लेकर आने को कहा था। वह वहीं जा रहा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उससे पुड्डूचेरी में समर का पता लिया। उसके बाद अपनी टीम के साथ फौरन पुड्डूचेरी के लिए रवाना हो गया।

समर सोच रहा था कि श्रीकांत के पासपोर्ट लेकर आने के बाद उसे क्या करना है। उसने प्लान बनाया था कि वह पहले बस पकड़ कर चेन्नई जाएगा। उसके बाद वहाँ से फ्लाइट पकड़ कर दुबई चला जाएगा।‌ वहाँ जाकर इत्मीनान से सोचेगा कि क्या करना है। इस बीच उसने अपनी दाढ़ी मूंछ बढ़ा ली थी। इससे उसकी शक्ल आसानी से नहीं पहचानी जा सकती थी। उसे अब बस श्रीकांत का इंतज़ार था जो उसका पासपोर्ट लेकर आने वाला था।
सब तय कर लेने के बाद भी वह टेंशन में था। वह जानता था कि उसे बहुत सावधानी बरतनी पड़ेगी। छोटी सी चूक भी उसे मुश्किल में डाल सकती है। वह इसी टेंशन में बैठा शराब पी रहा था। तभी कॉलबेल बजी। उसने घड़ी देखी। मेड के आने का समय था। उसने उठकर दरवाज़े के होल से झांककर देखा। मेड ही थी। उसने दरवाज़ा खोल दिया।
दरवाज़ा खुलते ही मेड को पीछे हटाकर इंस्पेक्टर कौशल सावंत और सब इंस्पेक्टर रोवॉन अंदर आ गए। पुलिस को देखकर समर के होश उड़ गए।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत उसे गिरफ्तार कर गोवा ले गया।

पहले तो समर ने मानवी और निर्भय की किडनैपिंग में अपना हाथ होने से इंकार कर दिया। उसने कहा कि या तो माइकल झूठ बोल रहा था नहीं तो उसने जिस समर का नाम लिया था वह कोई और है। लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद उसने सबकुछ कुबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि उन दोनों का अपहरण उसने अंजन के कहने पर करवाया था। उसने यह भी बता दिया कि मानवी और निर्भय की अंजन से दुश्मनी थी। उन दोनों ने उस पर जानलेवा हमला किया था। लेकिन उस हमले में वह बच गया। इसी बात का बदला लेने के लिए अंजन ने उन्हें किडनैप कर मुंबई लाने को कहा था।

निर्भय अब उकता चुका था।‌ वह अब इस सबसे अलग होकर अपनी पुरानी ज़िंदगी में जाना चाहता था। अपने बिज़नेस पर ध्यान देना चाहता था।‌ मानवी भी अब किसी तरह इस झंझट से निकलना चाहती थी। दोनों बैठे इसी विषय में बात कर रहे थे। निर्भय ने कहा,
"अब और कितने दिन इंतज़ार करेंगे। मुझे तो लगता है कि हम दोनों को अब यहाँ से चले जाना चाहिए। माइकल के आदमी ने समर का नाम लिया था। ऐसा हो सकता है कि वह अंजन का नाम ले और फिर बात हम तक आ जाए। अभी पुलिस समर तक नहीं पहुँच पाई है। अच्छा होगा कि उसकी गिरफ्तारी से पहले हम यहाँ से चले जाएं।"
जाना तो मानवी भी चाहती थी। उसे भी वही लग रहा था जिसके बारे में निर्भय बात कर रहा था। पर उसके मन में अंजन का डर था। उसने कहा,
"निर्भय तुम सही कह रहे हो। पर अंजन के आदमी हम पर नज़र रखे हुए हैं। जहाँ भी जाएंगे अंजन को पता चल जाएगा।"
"तो अंजन के डर से कब तक बैठे रहेंगे। बिना कुछ किए काम नहीं चलेगा।"
"ठीक है...पर जाएंगे कहाँ ?"
"सिंगापुर चलेंगे। जब तक सब शांत नहीं होता हम वहीं रहेंगे। उसके बाद देखेंगे।"
मानवी उसके सुझाव के बारे में सोचने लगी। मार्वल की अधिकांश प्रॉपर्टी लंदन में थी। गोवा में सिर्फ डिसूज़ा विला और कुछ दूसरी प्रॉपर्टी थी। वह गोवा की प्रॉपर्टी बेचना चाहती थी। पर अभी सही समय नहीं था। उसे लगा कि निर्भय की बात सही है। उसने कहा,
"जैसा तुम ठीक समझो। तुम जैसा कहोगे मैं तैयारी कर लूँगी।"
"तो फिर तुम तैयारी कर लो। मैं यहाँ से चलने का इंतज़ाम करता हूँ।"
मानवी उठकर जाने लगी तभी नौकर ने आकर कहा कि इंस्पेक्टर कौशल सावंत मिलने के लिए आए हैं। मानवी और निर्भय एक दूसरे को देखने लगे। उन्हें लग रहा था कि जिस बात के लिए वह चिंतित थे वही हो गई। पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत से मिलना तो था ही। उन्होंने नौकर से कहा कि इंस्पेक्टर कौशल सावंत को हॉल में बैठाए।
नौकर के जाने के बाद दोनों ने आपस में तय किया कि इंस्पेक्टर कौशल सावंत के सामने दोनों अंजन से अपनी पहचान के बारे में कुछ नहीं कहेंगे।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत हॉल में बैठा उनका इंतज़ार कर रहा था। मानवी और निर्भय हॉल में पहुँचे। दोनों एकदम सामान्य दिखने की कोशिश कर रहे थे। निर्भय ने बैठते हुए कहा,
"इंस्पेक्टर कौशल कहिए कैसे आना हुआ ? केस में कोर्इ नई प्रोग्रेस हुई है ?"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कहा,
"आपको जानकर खुशी होगी कि ‌माइकल के साथी ने जिस समर का नाम लिया था वह हमारी गिरफ्त में आ गया है।‌ उसने आप दोनों के अपहरण की बात स्वीकार भी कर ली है।"
मानवी और निर्भय खबर सुनकर मुस्कुराए। निर्भय ने कहा,
"बहुत अच्छी बात है। चलिए अब केस सॉल्व हो गया। अब हम भी गोवा से जा सकते हैं।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने गंभीरता से कहा,
"चले जाइएगा। पर कुछ बातें साफ कर दीजिए।"
निर्भय ने कहा,
"कैसी बातें ?"
"आप दोनों अंजन को जानते हैं ?"
निर्भय ने मानवी की तरफ देखा। जैसा तय किया था उसके अनुसार दोनों ने अभिनय किया जैसे अंजन का नाम पहली बार सुन रहे हैं। निर्भय ने कहा,
"हम लोग किसी अंजन को नहीं जानते हैं।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत की नज़रें मानवी पर टिकी थीं। समर ने उसे बताया था कि मानवी अंजन की पत्नी थी। उसने निर्भय के साथ मिलकर उसे धोखा दिया था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने भी मानवी के बारे में पता किया। उसने कहा,
"मानवी जी आप सच में अंजन को नहीं जानती हैं।"
मानवी पहले ही नर्वस थी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने सीधा उससे सवाल कर दिया। वह घबरा गई। घबरा कर उसने निर्भय की तरफ देखा। निर्भय सचेत हो गया। उसने कहा,
"कहा ना हम किसी अंजन को नहीं जानते हैं।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कुछ सख्त लहज़े में कहा,
"मेरा सवाल मानवी जी से है।"
मानवी ने अपने आप को संभाल कर कहा,
"मैं किसी अंजन को नहीं जानती हूँ।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने तेज़ आवाज़ में कहा,
"आप जिसकी पत्नी रह चुकी हैं उसे नहीं जानती हैं। आपके भाइयों रघुनाथ और यदुनाथ परिकर की मौत के बाद अंजन ने ‌उनके कारोबार पर कब्ज़ा कर लिया था। आपने निर्भय के साथ मिलकर उसे धोखा दिया था। आप इनके साथ गायब हो गई थीं। कुछ महीनों पहले आप लोगों ने अंजन पर जानलेवा हमला किया था।"
यह सब सुनकर मानवी बुरी तरह घबरा गई थी। निर्भय को लगा कि अब उसे अकेले ही बात संभालनी पड़ेगी। उसने कहा,
"मानवी उस बदमाश अंजन की पत्नी थी। पर उससे अलग होकर इसने उसकी तरफ मुड़कर नहीं देखा। इसने मार्वल डिसूज़ा से शादी कर ली थी। अब उसकी विधवा की तरह रह रही थी। यह हमले वाली बात तो सरासर झूठ है। आपके पास क्या सबूत है कि हमने अंजन पर हमला किया था।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उठते हुए कहा,
"निर्भय जी बहुत जल्दी इस बात का सबूत लेकर आऊँगा। तब तक आप दोनों पुलिस की निगरानी में यहीं रहेंगे। समर ने अपने बयान में कहा है कि आप दोनों ने अंजन पर जानलेवा हमला किया था।"
वह उन दोनों को चेतावनी देकर चला गया। मानवी अपने ऊपर काबू नहीं रख सकी। वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी।
 
रिस्की लव - 39

अंजन इतना तो समझ गया था कि मीरा के धोखा देने के बावजूद भी वह उससे प्यार करता है। तभी इतने मौके मिलने पर भी उसे उसके किए की सज़ा नहीं दे पाया। जिस दोस्त ने उसकी इतनी मदद की उसने मीरा के लिए उसके ही गिरेबान में हाथ डाल दिया। सागर खत्री का प्रस्ताव सुनते ही उसके तन बदन में आग लग गई थी। वह अपने पर काबू नहीं रख पाया। गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ लिया।
अंजन ने अपने आप को कभी भी इतना मजबूर नहीं पाया था। जितना इस समय मजबूर था। इस समय वह बहुत अधिक दुविधा में था। वह कुछ समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। एक तरफ मीरा थी जिसे वह बहुत अधिक चाहता था लेकिन उसने उसे धोखा दिया था। दूसरी तरफ उसका दोस्त था। जिसने कठिन समय में उसकी बहुत सहायता की थी। लेकिन वह मीरा के बारे में ऐसी बात कर रहा था जो उसे पसंद नहीं थी। इस समय उसकी मजबूरी यह थी कि वह अपने दोस्त सागर खत्री की मेहरबानी पर था।‌ उसका अपना सबकुछ मुंबई में छूट गया था। उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। उसके लिए अपने आपको बचाना ज़रूरी था। ऐसे में अपने दोस्त सागर खत्री को खुश रखना ही अक्लमंदी थी।
उसने सागर खत्री का गिरेबान पकड़ कर उसे नाराज़ कर दिया था। उसे खुश करने का एक ही रास्ता था। उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर ले। पर ऐसा करना उसके लिए कठिन था।
वह परेशान सा अपने कमरे में टहल रहा था कि उसके फोन की घंटी बजी। गोवा में स्थित पर नज़र बनाए हुए उसके आदमी का फोन था। उसने खबर दी कि समर गिरफ्तार हो गया है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत निर्भय और मानवी से डिसूज़ा विला मिलने गया था।
यह जानकारी मिलने के बाद अंजन ने दिमाग लगाना शुरू किया।‌ समर ने ज़रूर उसका नाम लिया होगा। उसने यह भी बताया होगा कि मानवी और निर्भय से उसकी दुश्मनी है। इसलिए ही वह दोनों को किडनैप कर मुंबई बुला रहा था।‌ इन सारी बातों का एक ही मतलब था कि अब पुलिस ने उसके बारे में पता कर उसकी तलाश शुरू कर दी होगी।
अंजन परेशान होकर बिस्तर पर गिर गया। अगर पुलिस ने एक मामला उखाड़ना शुरू किया तो कई सारे मामले बाहर आ जाएंगे। अब तक वह जो भी कर रहा था पुलिस की नज़र में नहीं आया था। पर इस एक मामले से वह पुलिस की निगाह में चढ़ गया है। अब तो उसके लिए कोई चांस नहीं बचा है।‌ वह पूरी तरह बर्बाद हो गया है।
यह खयाल आते ही वह हताशा में ज़ोर से चिल्लाया। उसने कितनी मुश्किल से सबकुछ खड़ा किया था। पर अब सबकुछ रेत की तरह उसकी मुठ्ठी से फिसलने वाला है।
कुछ देर वह हताशा में छटपटाता रहा। फिर उसने सोचा कि इस तरह हताश होने से कुछ हासिल नहीं होगा।‌ वह तो मौत को मात देकर वापस आया है। फिर इतनी आसानी से सबकुछ कैसे छोड़ सकता है।‌ भावनाओं में बहने की जगह उसे होशियारी से काम लेना होगा। कुछ ऐसा करना होगा जिससे वह अपना खोया हुआ सबकुछ दोबारा पा ले।
इस समय उसकी सहायता केवल सागर खत्री कर सकता था। उसके ज़रिए ही वह मुंबई में उन लोगों से सहायता मांग सकता है जिनकी उसने यह सोचकर सहायता की थी कि आड़े वक्त में काम आएंगे।

अंजन सागर खत्री के पास गया।‌ वह उस समय कहीं जाने की तैयारी कर रहा था। अंजन को देखकर उसने कहा,
"उम्मीद है नशा और गर्मी दोनों उतर चुके होंगे। तुम्हें भी खबर तो मिल ही चुकी होगी। समर पुलिस के हाथ आ गया है। अब पुलिस तुम्हारी खोज में है।"
अंजन ने उसके सामने हाथ जोड़ दिए। अपनी आवाज़ में पछतावा लाकर बोला,
"मुझे माफ कर दो। सचमुच उस समय मैं होश में नहीं था। उस लड़की के लिए तुम्हारे गिरेबान में हाथ डाल दिया।‌ मैं उस हरक़त के लिए बहुत पछता रहा हूँ।"
"अच्छा है कि यह बात समझ जाओ कि वह लड़की तुम्हारे लिए सिर्फ मुसीबत पैदा कर सकती हैं। फिलहाल तो मुझे किसी ज़रूरी काम से बाहर जाना है। जब लौट कर आऊंँगा तब इस बारे में बात करेंगे।"
यह कहकर सागर खत्री चला गया। अंजन यह सोचकर खुश था कि उसने अपने पछतावे का यकीन दिला दिया।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मुंबई में मानवी के बारे में तफ्तीश की। इस बात के साक्ष्य मिल गए कि जिस वक्त अंजन पर जानलेवा हमला हुआ था वह मुंबई में ही थी। इस आधार पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मानवी और निर्भय को ‌पुलिस स्टेशन पूँछताछ के लिए बुलाया था। निर्भय ने मानवी को बहुत ‌समझाया था कि वह परेशान होकर कुछ ऐसा ना कहे जो उनके लिए मुश्किल खड़ी कर दे। पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उससे और मानवी से अलग अलग कमरों में पूँछताछ की। मानवी पूँछताछ का दबाव सह नहीं पाई। उसने सबकुछ बता दिया। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मानवी और निर्भय को ‌अंजन पर जानलेवा हमला करने के लिए गिरफ्तार कर लिया।
अब अंजन को कानून के शिकंजे में लाना था। मानवी ने उसके बारे में बहुत कुछ बताया था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मुंबई पुलिस से संपर्क कर उन्हें सारे मामले की जानकारी दी।
मुंबई का असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर सत्यपाल वागले भी अंजन के काले कारनामों की जांच पड़ताल कर रहा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत से इस नए केस की जानकारी मिलने पर उसने फौरन अंजन के नाम पर वारंट जारी करवा दिया।‌ अब मुंबई पुलिस अंजन की खोज में जुट गई। इसी बीच एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन के दूसरे कारनामों का चिठ्ठा खोलना शुरू कर दिया। वन विभाग की जिस ज़मीन पर उसके रिज़ॉर्ट का निर्माण हो रहा था वहाँ से पुलिस को दो नर कंकाल मिले। जांच से पता चला कि उनकी हत्या कुछ महीनों पहले ही हुई थी।
एसीपी सत्यपाल वागले ने तरुण काला की फिशिंग कंपनी की आड़ में चल रहे अंजन के मानव तस्करी के धंधे का भी पता लगा लिया। अंजन को लंबी सज़ा दिलाने के लिए बहुत सारे सबूत एकत्र हो गए थे। अब इंतज़ार था उसे कानून की गिरफ्त में लेने का।

अखबारों में अंजन के गैर कानूनी धंधों में लिप्त होने की खबरें छप रही थीं। टीवी चैनलों के प्राइम टाइम में ‌उसके ऊपर चर्चा हो रही थी। सफेदपोश के काले धंधे, पापी मसीहा, दानी डॉन जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे। इन पर लोग अपनी राय रख रहे थे। बहुत से लोगों का कहना था कि अंजन को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार कर उसे कड़ी सज़ा दी जाए। वहीं ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी जो अंजन को बेगुनाह मान रहे थे। उसके अच्छे कामों की फेहरिस्त गिना रहे थे। उनका कहना था कि यह एक साज़िश है। एसीपी सत्यपाल वागले अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी निकाल रहे हैं।
एक साल पहले भी एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन पर कुछ सवाल उठाए थे। तब भी मीडिया में खूब हल्ला उठा था। पर तब अंजन ने अपनी पहुँच का इस्तेमाल कर मामले को दबा दिया था। तब एसीपी सत्यपाल वागले को अपने आला अधिकारियों की डांट खानी पड़ी थी। सोशल मीडिया पर उसका खूब मज़ाक बना था। लोगों का कहना था कि एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन की गैर मौजूदगी में उसके खिलाफ षड्यंत्र रचा है।
सोशल मीडिया पर अंजन के विरोधी और समर्थकों के बीच खूब नोंकझोंक चल रही थी। विरोधियों की दलील थी कि अगर अंजन निर्दोष है तो वह मुंबई से भागकर क्यों चला गया। इतना सबकुछ होने पर अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिए सामने क्यों नहीं आ रहा है। लेकिन अंजन के समर्थक कुछ सुनने को तैयार नहीं थे।
अंजन के कुछ समर्थकों ने एसीपी सत्यपाल वागले के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था।

नफीस और शाहीन डिनर कर रहे थे। टीवी पर अंजन के बारे में एक बहस चल रही थी। उसका समर्थन करने वाला एक शख्स बहुत भावुक होकर बता रहा था कि किस तरह उसके बीमार बच्चे के इलाज में अंजन ने उसकी मदद की थी। उसने कावेरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल में उसका अच्छा इलाज कराया था। वैसे इलाज का खर्च तो वह अपना सबकुछ बेचकर भी नहीं उठा सकता था। वह बार बार यही कह रहा था कि उस देवता ने मेरे बच्चे की ज़िंदगी बचा ली। आज उसके नाम पर कीचड़ उछाला जा रहा है।
टीवी पर उस आदमी की बात सुनकर शाहीन ने कहा,
"इस गरीब आदमी को क्या कहूँ। पर अंजन जैसे लोग कितनी चालाकी से इनकी भावनाओं का लाभ उठाते हैं। कुछ पैसे खर्च कर इनका समर्थन पा लेते हैं। अंजन जितने संगीन गुनाह कर रहा था उनकी माफी नहीं हो सकती है।"
नफीस भी उस आदमी की बात सुनकर यही सोच रहा था। उसने कहा,
"हमारे देश में लोगों का हीरो बनना बहुत आसान है। लोगों की ज़िंदगी में इतनी मजबूरियां हैं कि अगर कोई थोड़ी सी भी मदद करता है तो उनके लिए देवता बन जाता है। फिर लोग उस आदमी के गलत कामों पर भी ध्यान नहीं देते हैंं। पर जैसा तुमने कहा था किए गए गुनाहों की सज़ा तो मिलेगी ही।"
शाहीन ने उसकी बात का समर्थन किया। खाने के बाद नफीस स्टडी में बैठकर अंजन के समाज सेवा के कामों के बारे में अलग अलग अखबारों और पत्रिकाओं में पढ़ने लगा।
 
रिस्की लव - 40

मीरा अब इस कैद में रहते हुए ऊब चुकी थी। यहाँ से भागना नामुमकिन था। अगर वह सुइट का दरवाज़ा खोलकर कॉरीडोर में कदम भी रखती तो फौरन सीसीटीवी कैमरे की पकड़ में आ जाती। सिक्योरिटी अलर्ट मोड पर आ जाती। जब पहले दिन उसे यहाँ लाकर रखा गया था तो उसने ऐसी कोशिश की थी। तब फौरन ही सिक्योरिटी गार्ड ने आकर उसे अपनी गन प्वाइंट पर ले लिया था।
इस कैद में वह उस परिंदे की तरह फड़फड़ा रही थी जो आसमान में उड़ने का आदी रहा हो और उसे अचानक पिंजड़े में रहना पड़ रहा हो। सबसे बड़ी उलझन इस बात की थी कि वह यह नहीं जानती थी कि उसके साथ क्या होने वाला है। पहले तो उसे लगा था कि अंजन उसकी जान ले लेगा‌। पर इधर कई बार मौका होने पर भी उसने ऐसा नहीं किया। पिछली बार जब उसने अंजन को इतना भला बुरा कहा था तब भी उसका हाथ उसकी गर्दन तक आकर रुक गया था। जिस तरह से बेबस होकर वह यहाँ से गया था उससे मीरा समझ गई थी कि वह उससे प्यार करता है।
अंजन उससे अभी भी प्यार करता है जानने के बाद मीरा और भी अधिक उलझन में पड़ गई थी। वह जानती थी कि अंजन इस समय मुश्किल दौर से गुज़र रहा है।‌ उसका अपना भविष्य खुद ही खतरे में है। पूरी संभावना है कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले। ऐसे में उसके साथ वह अपना भविष्य कैसे जोड़ सकती थी। वह सोच रही थी कि जिस नाव का डूबना तय हो उस पर सवार होना बेवकूफी ही कहलाएगा।
वह अंजन के साथ अपना भविष्य नहीं जोड़ना चाहती थी। पर समस्या यह थी कि इस समय वह कोई भी फैसला लेने के लिए आज़ाद नहीं थी। उसके साथ क्या होने वाला है यह वक्त को तय करना था। ऐसे में वक्त काटना उसके लिए कठिन हो रहा था।

डोरबेल बजी। मीरा को लगा कि यह समय खाना लेकर आने का तो है नहीं। इसका मतलब यह अंजन होगा। वह परेशान हो गई कि अब वह क्या करने आया है। उसने दरवाज़ा खोला तो सामने सागर खत्री खड़ा था। सागर खत्री अंदर आते हुए बोला,
"उम्मीद है सब समय पर मिल जाता होगा। कोई दिक्कत नहीं होगी तुमको।"
मीरा ने व्यंग्य भरी मुस्कान के साथ कहा,
"नहीं इस आरामदायक पिंजड़े में सबकुछ मिल जाता है। बस पंख फैलाने को नहीं मिलते हैं।"
उसका तंज़ सुनकर सागर खत्री हंस दिया।‌ उसके बाद गंभीर होकर बोला,
"बात तो है तुम्हारे अंदर। अभी भी तेवर बाकी हैं।"
मीरा ने भी उसी अंदाज़ में उत्तर दिया,
"यह यकीन हो गया है कि जान नहीं बचनी है। इसलिए डर छोड़कर तेवर अपना लिया।"
"अच्छा किया। अब अगर तेवर की जगह समझदारी से काम लोगी तो ऐश से रहोगी।"
अपनी बात कहकर सागर खत्री अजीब तरह से मुस्कुराया। उसकी आँखों में हवस थी। मीरा समझ गई कि उसका इशारा क्या है। उसने गुस्से में कहा,
"मुझे इस तेवर के साथ मरना अधिक पसंद है।"
उसका यह जवाब सुनकर सागर खत्री का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। दांत पीसते हुए बोला,
"बेवकूफ हो तुम। अभी खुद ही कह रही थी कि पिंजड़े में हो। पंख नहीं फ़ैला सकती हो। तो यह क्यों नहीं समझ रही हो कि मैं चाहूँ तो कुछ भी कर सकता हूँ। मेरे इस किले के बाहर तुम्हारी चीख पुकार नहीं पहुँच सकती है। इसी के भीतर तुम घुट कर रह जाओगी। फिर भी मैंने तुम्हें ऑफर दिया।"
वह रुका। मीरा का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा। बालों से पकड़ कर उसका चेहरा अपनी तरफ करके बोला,
"तेवर नहीं समझदारी तुम्हारे काम आएगी।"
उसकी धमकी से मीरा डर गई थी। पर अंतिम हथियार के तौर पर उसने कहा,
"तुम्हें पता है ना कि अंजन मुझे कितना चाहता है।‌ वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं।"
उसकी यह बात सुनकर सागर खत्री पागल की तरह हंसने लगा। उसकी यह हंसी मीरा को और डरा रही थी। कुछ देर जी भरकर हंसने के बाद वह चुप हो गया। अचानक उसकी आँखों में हैवानियत उतर आई थी। वह बोला,
"जिसकी तुम बात कर रही हो आजकल वह मेरी दया पर जी रहा है। उसकी हालत ऐसी है कि अगर मैं उसे अपने जूते चाटने को कहूँ तो वह भी कर देगा।"
उसने मीरा को परे ढकेल दिया। वह लड़खड़ा कर फर्श पर गिर पड़ी। सागर खत्री ने उसी हैवानियत से कहा,
"तुमको एक मौका देकर जा रहा हूँ। अच्छी तरह सोच लो। मेरी बात मान लोगी तो आराम में रहोगी।"
यह कहकर वह चला गया।
सागर खत्री के जाने के बाद मीरा फर्श पर पड़ी अपनी मजबूरी पर रोने लगी। सागर खत्री उसे जिस तरह की ज़िंदगी देना चाहता था वह तो अंजन के साथ रहने से भी अधिक भयानक थी। वह मजबूर थी। इस समय वह कुछ भी कर सकने की स्थिति में नहीं थी। अपनी मजबूरी में वह ऊपरवाले से खुद के लिए मौत मांगने लगी।

मुंबई में जो कुछ भी हो रहा था उसकी खबर अंजन को लग चुकी थी। उसने सागर खत्री से रिक्वेस्ट की थी कि वह उसकी मदद करे। वह मुंबई में अपनी पहचान के कुछ लोगों से बात करके इस स्थिति से निकलने की कोशिश करना चाहता है।‌ सागर खत्री ने उसकी मदद करने के बदले में शर्त रखी थी कि वह मीरा के बारे ‌में उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर ले। अंजन के पास कोई और रास्ता नहीं था। अपने आप को इस मुसीबत से बचाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था। उसने उसकी बात मान ली।
सागर खत्री की इस हरकत पर अंजन के मन में उसके लिए नफरत ने जन्म ले लिया था। अभी तो उसके लिए सब सहना मजबूरी थी। पर उसने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि जैसे ही वह अपनी ‌पुरानी स्थिति में लौटेगा, इस बात का बदला ज़रूर लेगा।
इस समय वह बहुत छटपटा रहा था। वह चाहता था कि जल्दी से जल्दी उसका मुंबई में बैठे उन लोगों से संपर्क हो जाए जिनसे उसे सहायता की उम्मीद थी। पर सागर खत्री ने अभी तक इस सिलसिले में कुछ नहीं किया था। वह बहुत परेशान था। समझ नहीं पा रहा था कि सागर खत्री कुछ करना भी चाहता है या उसे बेवकूफ बना रहा है।‌ उसने सागर खत्री से बात करने का मन बनाया।

सागर खत्री अपने बिस्तर पर लेटा मीरा के बारे में सोच रहा था। वह अपने और मीरा के विषय में बहुत रंगीन कल्पनाएं कर रहा था। उसके पास लेटी अलीशिया उसका ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए कभी उसके बालों को सहला रही थी तो कभी उसे चूम रही थी। मीरा के खयालों में खोए हुए सागर खत्री को उसका यह सब करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसने एक दो बार उसे रोकने की कोशिश की। पर अलीशिया नहीं मानी। इससे चिढ़ कर सागर खत्री ने उसे धक्का देकर बिस्तर से नीचे गिरा दिया।
ज़मीन पर गिरी अलीशिया स्तब्ध सी उसकी ओर देख रही थी। सागर खत्री ने अपनी उंगली उसकी तरफ करके गुस्से में कहा,
"खबरदार जो आज के बाद मेरी बात को नज़रंदाज़ किया। उठाकर उसी गंदगी में फेंक आऊँगा जहाँ से आई हो।"
यह कहकर वह गुस्से में कमरे से बाहर चला गया।‌

इधर कई दिनों से अलीशिया महसूस कर रही थी कि सागर खत्री का मन उससे हट गया है। सागर खत्री के कारण ही उसे यह ऐशो आराम मिला था। वह नहीं चाहती थी कि वह उसके आकर्षण से बाहर जाए। इसलिए उसे रिझाने की हर कोशिश करती थी। पर सागर खत्री उसकी तरफ ध्यान ही नहीं देता था।
जाते समय वह उसे धमकी दे गया था कि जिस जगह से उसे उठाकर लाया है वहीं छोड़ आएगा। अलीशिया उसके बटलर की बेटी थी। बहुत आकर्षक थी। पर एक बहुत बुरी शादी में फंस गई थी। वहाँ मार पिटाई, गाली गलौज और पैसों की तंगी थी। सागर खत्री ने उसे उस नर्क जैसी ज़िंदगी से निजात दिलाई थी। वह वापस उसी ज़िंदगी में नहीं जाना चाहती थी। उसकी धमकी से वह डर गई थी।
अलीशिया को भी अंदाज़ा हो गया था कि सागर खत्री में आए इस बदलाव का कारण वह लड़की है जो तीसरी मंजिल के सुइट में कैद करके रखी गई है। उसे यह भी पता था कि वह अंजन की प्रेमिका है जिसने उसे धोखा दिया था। पर अंजन उसे उसके किए की सज़ा नहीं दे रहा है।
मीरा के कारण उसकी ज़िंदगी में यह मुश्किल वक्त आया था। अलीशिया के मन में मीरा के लिए नफरत पैदा हो गई थी। वह उस लड़की को सबक सिखाना चाहती थी जो उसकी तबाही का कारण बन रही थी।
अलीशिया फर्श पर बैठी थी। अचानक उसे लगा कि मीरा बिस्तर पर आराम से लेटी है। उसकी तरफ देखकर हंस रही है। फिर वह बिस्तर पर उठकर बैठ गई। अलीशिया की तरफ उसी अंदाज़ में उंगली उठाई जैसे सागर खत्री ने उठाई थी। फिर उसी के अंदाज़ में बोली,
"यह बिस्तर मेरा है। तुम उसी फर्श के लायक हो। कभी सागर के नज़दीक आने की कोशिश मत करना।"
अपनी कल्पना में अलीशिया ने जो कुछ देखा उससे वह गुस्से से पागल हो गई। वह उठी। पागलों की तरह बिस्तर से चादर, तकिए निकाल कर ज़मीन पर फेंक दिए। ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी कि वह मीरा को कामयाब नहीं होने देगी।
 

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