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Thriller RISKI LOVE

रिस्की लव - 51

अंजन ने एक बार फिर मीरा को वीडियो कॉल की। उसने सोचा था कि जब तक मीरा कॉल उठाएगी नहीं वह फोन करता रहेगा। इससे पहले दो बार वह कॉल कर चुका था। पर मीरा ने फोन नहीं उठाया था। इस बार भी घंटी जाते देर हो गई थी। अंजन मन ही मन मना रहा था कि मीरा कॉल उठा ले। समय के साथ अंजन निराश हो रहा था। लेकिन इस बार मीरा ने कॉल उठा ली।
मीरा का चेहरा स्क्रीन पर दिखाई पड़ा। चेहरा देखकर स्पष्ट था कि मीरा की हालत बहुत गंभीर थी। कुछ देर अंजन मीरा के मुर्झाए हुए चेहरे को देखता रहा। उसकी यह हालत देखकर उसका कलेजा धक से रह गया था। बड़ी मुश्किल से खुद को संभाल कर उसने कहा,
"क्या हो गया है तुम्हें मीरा ? मुझसे कह रही थी कि मामूली बुखार है। पर तुम्हारी हालत देखकर लगता है कि बहुत सीरियस बात है। मुझे सही सही बताओ क्या हुआ है ?"
मीरा भावुक हो गई। उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। उसे रोता हुआ देखकर अंजन को बुरा लगा। उसने कहा,
"रो मत.... मुझे बताओ क्या बात है ? मैं तुम्हारी मदद करने की कोशिश करूँगा।"
मीरा ने रोते हुए कहा,
"कोई मेरी मदद नहीं कर सकता है। बस कुछ ही दिन बचे हैं मेरे पास।"
अंजन जानने को अधीर हो उठा कि बात क्या है। उसने कहा,
"प्लीज़ मीरा बताओ कि क्या हुआ है तुम्हें ? तुम क्यों कह रही हो कि कुछ ही दिन बचे हैं।"
"मुझे पैंक्रियाज़ कैंसर है। लास्ट स्टेज है। अब मैं नहीं बचूँगी।"
यह कहते हुए वह फिर रोने लगी।‌ उसकी बात सुनकर अंजन को भी धक्का लगा। कुछ देर तक वह कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था। मीरा ने रोते हुए कहा,
"अंजन मैंने तुम्हें धोखा दिया था। इसी बात की सज़ा भगवान ने मुझे दी है।"
उसकी बात सुनकर अंजन ने कहा,
"ऐसा मत कहो मीरा। मैं कुछ करता हूँ। तुम परेशान मत हो।"
यह कहकर अंजन ने खुद ही कॉल काट दी। उससे मीरा की तकलीफ देखी नहीं जा रही थी। इस समय वह बहुत बेबस महसूस कर रहा था। ना तो वह खुद अपनी मदद करने की स्थिति में था और ना ही मीरा का साथ दे सकता था। फिर भी फोन पर उसे झूठी तसल्ली दे रहा था कि वह उसके लिए कुछ करने का प्रयास करेगा।
आजकल ‌हताशा में उसका एक ही सहारा था शराब। वह बार काउंटर पर गया। लेकिन यहाँ भी निराशा ही हाथ लगी। उसने वहाँ मौजूद सारी बोतलें खाली कर दी थीं। लेकिन इस समय उसे शराब पीने की तीव्र इच्छा हो रही थी। वह शराब के नशे में अपनी नाकामी को डुबो देना चाहता था। लेकिन घर में शराब की एक बूंद भी नहीं बची थी।
अंजन को घर से कुछ दूर पर ‌एक बार के बारे में पता था। उस समय उसके दिमाग में बहुत सारी बातें चल रही थीं। जो उसे परेशान कर रही थीं। शराब के ज़रिए ही वह परेशानी को दूर भगा सकता था। उसने कार की चाभी उठाई। वॉलेट और फोन उठाया और घर से बाहर निकल गया।

लोकेश कुमार ने अजय मोहते को वह सबकुछ बता दिया था जो उसने निर्भय से सुना था।‌ सब सुनकर अजय मोहते के चेहरे ‌पर मुस्कान आ गई थी। अंजन कहाँ रह रहा है जानने के बाद उसे रास्ते ‌से हटाना आसान हो गया था। लेकिन इस बार वह किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता था। उसने मामला अपने हाथ में ले लिया था। इस बार उसने अपने काम के लिए एक ऐसे आदमी को चुना था जिससे गलती होने की संभावना नहीं थी।

एसीपी सत्यपाल वागले और सिंगापुर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज गंभीरतापूर्वक इस बात पर विचार कर रहे थे कि अभी तक अंजन के बारे ‌में कुछ भी पता नहीं चला है। उन्हें डर था कि अगर कहीं अंजन सिंगापुर से बाहर निकल गया तो उसे पकड़ना कठिन हो जाएगा। ऐसे में दोनों देशों की पुलिस की बदनामी होगी। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"एसीपी सत्यपाल वागले अब हम दोनों की ही इज्ज़त का सवाल है। अंजन विश्वकर्मा सिंगापुर सिटी में ही कहीं है। हम उसे पकड़ नहीं पा रहे हैं।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज हमसे अधिक यह आपकी नाकामी है। हम तो बस एक छोटी सी टीम हैं। आपके इस शहर के बारे में अधिक नहीं जानते हैं। लेकिन आपके लोग यहाँ की हर गली से वाकिफ हैं। फिर भी अंजन विश्वकर्मा का पता नहीं लगा पाए।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को यह बात अच्छी नहीं लगी। उसने कहा,
"बेहतर होगा कि हम एक दूसरे की नाकामी गिनाने की जगह सहयोग की बात करें। अगर आप भी अंजन ‌विश्वकर्मा को गिरफ्तार नहीं कर पाए तो आपके देश में भी सवाल पूँछे जाएंगे।"
एसीपी सत्यपाल वागले चुप हो गया। वह जानता था कि जो कुछ सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा है वह सच है। उसने कहा,
"आपकी बात ठीक है। बताइए हम किस तरह आपका सहयोग कर सकते हैं ?"
"सबसे अच्छा तरीका है कि हम पर यकीन रखिए। हमें हमारा काम करने दीजिए।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने तंज़ करते हुए कहा। एसीपी सत्यपाल वागले कुछ कहना चाह रहा था कि तभी उसका फोन बज गया। वह एक तरफ जाकर बात करने लगा।

शराब की तलब में अंजन बार में जाकर बैठ गया था। इस समय उसका दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा था। बार बार एक ही बात हथौड़े की तरह उसके दिमाग में वार कर रही थी कि वह अब किसी काम का नहीं रहा। वह अपने ही काम नहीं आ पा रहा है। भारत में उसका इतना कुछ है। दौलत की कमी नहीं है उसके पास। पर वह उसमें से एक पैसा नहीं खर्च कर सकता है। उसे पता था कि पुलिस की निगाह उसके हर बैंक अकाउंट, हर प्रॉपर्टी पर होगी।
एक बार फिर मीरा का चेहरा उसकी आँखों में घूम गया। उसका दिल दर्द से भर उठा। उसने बोतल से और शराब अपने गिलास में डाली। एक ही बार में गिलास को खाली कर दिया। वह आधे से अधिक बोतल खत्म कर चुका था। लेकिन अपनी तकलीफ को नशे में नहीं डुबो पापा था। अपनी बेबसी पर उसकी आँखों से आंसू बहने लगे।
उससे कुछ दूर एक टेबल पर कोई बैठा था। वह उसे बहुत ध्यान से देख रहा था। अपने मन को पक्का कर लेने के बाद वह उठा और बार के एक कोने में जाकर किसी को फोन किया।

खबर सुनकर एसीपी सत्यपाल वागले के चेहरे पर मुस्कान आ गई। फोन करने वाला उसकी टीम का एक इन्फार्मर था। उसने बार में अंजन को पहचान लिया था। एसीपी सत्यपाल वागले फौरन सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के पास आकर बोला,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज आपने कहा था कि हम चुपचाप बैठें। पर हमारी पुलिस जो काम हाथ में लेती है उसे पूरा किए बिना शांत नहीं होती है। अंजन विश्वकर्मा इस समय एक बार में बैठा शराब पी रहा है। अब आप इतना सहयोग तो कर सकते हैं कि अपनी टीम के साथ चलकर उसे गिरफ्तार कर लें।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज जानता था कि यहाँ उसे मात खानी पड़ी है। पर अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी ज़रूरी थी। वह फौरन अपनी टीम और सत्यपाल वागले के साथ उस बार की तरफ चल दिया।

अंजन ने खुद को संभाला। उसने इधर उधर निगाह दौड़ाई। उसने देखा कि उसके पास की टेबल पर बैठा आदमी उसकी तरफ देखते हुए अपनी घड़ी देख रहा है। वह नर्वस लग रहा है। अचानक उसका दिमाग खुल गया। उसे याद आया कि वह बड़ी देर से उसकी तरफ घूर रहा था। उसे किसी गड़बड़ी की आशंका हुई। आदत के अनुसार उसने जैकेट की इनर पॉकेट को हाथ से टटोला। वह बिना गन के आया था।
अब उसे एहसास हो रहा था कि उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है। वह बार में बैठा है। अपने दुश्मन और पुलिस का आसान शिकार है। उसका नशा उतर गया। वह अपना दुख भूल गया। इस समय बस एक ही बात उसके दिमाग में थी। किसी तरह यहाँ से भाग जाए। तभी वह आदमी दोबारा उठकर एक तरफ गया। किसी को फोन करके वापस अपनी टेबल पर आकर बैठ गया। अंजन सचेत हो गया। उसने वेटर को इशारा किया। बिल चुकाया और तेज़ी से दरवाज़े की तरफ बढ़ गया।
उसे बाहर निकलते देख वह आदमी भी हरकत में आया। वह उसके पीछे लपका। पर वेटर ने उसे बिल के लिए टोंका। उसने जल्दी से अपना वॉलेट निकाला और पैसे चुका कर बाहर की तरफ भागा।
अंजन अपनी कार की तरफ बढ़ रहा था। तभी उसे पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनाई पड़ा। उसने फौरन अपनी दिशा बदल ली। वह तेज़ कदमों से आगे बढ़ते हुए एक गली में मुड़ गया। वह रास्ते से अंजान था। लेकिन पुलिस से खुद को बचाने के लिए भाग रहा था।

वह आदमी बार के बाहर आया। उसने इधर उधर देखा। अंजन कहीं नहीं दिखाई पड़ा। तभी पुलिस की गाड़ी बार के सामने आकर रुकी। उसमें से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज और एसीपी सत्यपाल वागले उतरे। वह आदमी भाग कर एसीपी सत्यपाल वागले के पास गया। उन्हें सारी बात बताई।
सब जानकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने फौरन फोन पर पूरे एरिया को घेर लेने का आदेश दिया।
अंजन गली में भाग रहा था। तभी अचानक एक आदमी उसके सामने आ गया। उसे देखकर अंजन को तसल्ली हुई।
 
रिस्की लव - 52

पुलिस के हाथ निराशा लगी। इस बात से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को अपने डिपार्टमेंट के आला अधिकारियों से खूब फटकार पड़ी। एसीपी सत्यपाल वागले को भी लग रहा था कि सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को कुछ और फुर्ती दिखानी चाहिए थी। उनके बार में पहुँचने और अंजन के भागने के बीच बहुत कम समय का फर्क था।
एसीपी सत्यपाल वागले ने अपने इन्फार्मर को भी फटकार लगाई थी कि उसे खुद अंजन के पीछे भागने की जगह उसे सूचना देनी चाहिए थी। यह अंजन को पकड़ने का बहुत अच्छा अवसर था जो उसके हाथ से निकल गया था। एसीपी सत्यपाल वागले को अपनी टीम के साथ सिंगापुर आए हुए वक्त हो गया था। मुंबई पुलिस की तरफ से उससे भी देरी के लिए स्प‌ष्टीकरण मांगा जा रहा था। उसके लिए जवाब देना मुश्किल हो रहा था।
एसीपी सत्यपाल वागले अपनी टीम के साथ कमरे में मीटिंग कर रहा था। उसने अपनी टीम से कहा,
"हमको सिंगापुर पुलिस पर निर्भर नहीं रहना है। अपनी कोशिशों को तेज़ करना होगा। मुंबई में मीडिया में हमारे बारे में लिखा जा रहा है कि हम सैर सपाटे के लिए सिंगापुर आए हैं। हमारे डिपार्टमेंट के अधिकारी मुझसे सवाल कर रहे हैं। इसलिए अब हर हाल में अंजन को ढूंढ़ कर गिरफ्तार करना है। अभी तक जो भी कोशिशें कर रहे थे उन्हें दोगुना कर दो। हमारी इज्ज़त का सवाल है।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने कहा,
"सर हमने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी। हमारे इन्फार्मर ने सटीक खबर दी थी। लेकिन सिंगापुर पुलिस सही से काम नहीं कर पाई। जब उस पूरे एरिया का घेराव किया गया था तो अंजन कहांँ गायब हो गया‌। ज़रूर लापरवाही बरती गई है।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने तेज़ आवाज़ में कहा,
"उनकी लापरवाही का जवाब भी हमारे देश में हमसे मांगा जाएगा। इसलिए उनकी लापरवाही के बारे में बात करने की जगह अब अंजन को तलाशो।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने अपनी टीम से कहा,
"यहाँ से निकलते ही अपने काम में लग जाओ। भूल जाओ कि आराम जैसा कोई शब्द है‌। बस अंजन को तलाशने के बारे में सोचो। एक दूसरे के संपर्क में रहना। छोटी से छोटी सूचना भी आपस में साझा करना। कुछ भी करके उस अंजन का पता लगाओ।"
उसकी टीम के चारों सदस्य उठकर खड़े हो गए। उसे इस बात का यकीन दिलाया कि वह सफल होकर ही चैन पाएंगे।
उनके जाने के बाद एसीपी सत्यपाल वागले अपना दिमाग दौड़ाने लगा।

पिछले दो घंटे से अजय मोहते का आदमी निर्भय के घर पर अंजन के लौट कर आने की राह देख रहा था। इतनी देर से वह लाइट बंद किए एकदम खामोशी से बैठा था। अब वह इस तरह इंतज़ार करते हुए ऊब गया था।
अजय मोहते से खबर मिलने पर वह अंजन का काम तमाम करने के लिए यहाँ आया था। यहाँ आने के बाद उसे सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि रमन सिंह कुछ समय पहले कार से निकल कर कहीं गया है। उस आदमी ने तुरंत अजय मोहते को फोन करके बताया कि रमन सिंह यानी अंजन घर पर नहीं है। अजय मोहते ने उससे कहा कि वह खुद अंदर जाकर देखें।
सिक्योरिटी गार्ड के रोकने पर उसने उसे मार दिया। उसकी लाश को गार्डन में छिपा दिया। वह खुद अंदर गया। पूरा घर छान मारा पर अंजन सचमुच नहीं था।‌ उसने एक बार फिर अजय मोहते को फोन करके बताया कि अंजन घर पर नहीं है। अजय मोहते ने उससे कहा कि वह वहीं रहकर उसकी राह देखे।
तबसे वह अंजन के आने का इंतज़ार कर रहा था। लेकिन अब उसके लिए चुपचाप बैठे हुए इंतज़ार करना कठिन हो रहा था। उसने एक बार फिर अजय मोहते को फोन करने के बारे में सोचा। तब तक अजय मोहते ने उसे फोन कर दिया। वह उस पर गुस्सा हो रहा था कि इतनी देर से शांत क्यों बैठा था। उसने अपना काम किया या नहीं। उसके आदमी ने सारी बात बताई। अजय मोहते ने उससे वहाँ कुछ और देर रुकने को कहा।

अजय मोहते फिक्र में था। अंजन के इतनी देर तक घर ना लौटने का मतलब हो सकता था कि वह पुलिस के हाथ लग गया है। यह बात अजय मोहते के लिए ठीक नहीं थी। उसने सोचा कि अंजन की इतनी सटीक जानकारी मिलने के बाद भी अगर वह पुलिस के हाथ चढ़ गया तो यह उसके लिए एक बड़ी नाकामी होगी। वह सच जानने के लिए परेशान हो गया।

अजय मोहते से कुछ देर और इंतज़ार करने का आदेश मिलने पर उसका आदमी गुस्से से पागल हो गया। लेकिन इंतज़ार तो करना ही था। उसने सारे परदे बंद कर दिए। लाइट ऑन की। उसके बाद कम आवाज़ में टीवी खोलकर देखने लगा। चैनल बदलते हुए वह एक न्यूज़ चैनल पर आया। उस पर एक खबर चल रही थी। सिंगापुर पुलिस के एक सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की नाकामी के बारे में बताया जा रहा था। उसने सारी खबर बहुत ध्यान से सुनी।

मुंबई में बैठा अजय मोहते परेशान हो रहा था। वह सोच रहा था कि किस तरह सच का पता लगाया जाए। तभी उसके आदमी का फोन आया। उसने जो कुछ बताया उसे सुनकर अजय मोहते को तसल्ली हुई। उसने अपने आदमी से कहा कि अगर पुलिस उसे पकड़ने में नाकामयाब रही है तो हो सकता है कि अंजन पुलिस से बचता हुआ देर रात घर लौटकर आए। इसलिए वह वहीं रहकर उसका इंतज़ार करे।

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इस समय बहुत गुस्से में था। उसके हाथ आते आते अंजन मछली की तरह फिसल गया था। उसे अपने सीनीयर्स की बातें सुननी पड़ी थीं। आज मीडिया में उसका नाम खूब उछल रहा था। सबसे बड़ी बात बाहर से आए एसीपी सत्यपाल वागले ने भी उसे अंजन के भाग जाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था।
उसकी अब तक की सर्विस में पहली बार ऐसा हुआ था कि उसकी नाकामी के चर्चे हो रहे थे। उसके लिए सब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था। अब सिर्फ एक ही रास्ता रह गया था। वह अंजन को गिरफ्तार करके उस पर उंगली उठाने वालों का मुंह बंद कर दे।
उसने आदेश दिया था कि बार के आसपास जितने भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जल्द से जल्द उनकी फुटेज उसके सामने पेश की जाए। उसने यह काम अपने जूनियर हान लिम को सौंपी थी। उसने उसे फोन करके डांट लगाई। हान लिम ने बताया कि बार के आसपास के एरिया में कुल बीस सीसीटीवी कैमरे मिले हैं। उनकी फुटेज लेने में समय लग रहा है। फिर भी वह जितनी जल्दी हो सकेगा उसके पास आने की कोशिश करेगा।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के लिए एक एक मिनट बहुत भारी हो रहा था। वह जानता था कि जितनी देर होगी अंजन को पुलिस से बचकर भाग जाने का उतना ही अधिक मौका मिलेगा।

अंजन एक मकान में बैठा था। वह टीवी पर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की नाकामी की खबर सुनकर खुश हो रहा था। उसे अपने ऊपर गर्व हो रहा था कि सही समय पर वह चेत गया। अगर थोड़ी भी देर की होती तो मुसीबत में पड़ जाता।
लेकिन अपने से अधिक उसे अपनी किस्मत पर गर्व हो रहा था। जब उसे लग रहा था कि किसी भी पल पुलिस उसे दबोच लेगी उसकी मदद करने वाला उसके सामने आ गया। जब वह गली में भाग रहा था तब उसके दिमाग में आ रहा था कि वह पुलिस के हाथ में पड़ जाएगा। पुलिस उसे हथकड़ी लगाकर ले जाएगी। उसे जेल में रहना पड़ेगा। एसीपी सत्यपाल वागले उसे अपने साथ मुंबई ले जाएगा। जिस शहर में वह शेर की तरह घूमता था वहाँ लोग उसे अपराधी कहकर बुलाएंगे।
ये सब बातें दिमाग़ में सोचता हुआ वह भाग रहा था कि अचानक उसके सामने प्रवेश गौतम आ गया। दो सालों के बाद मिलने पर भी वह उसे फौरन पहचान गया था। प्रवेश उससे कुछ कहता उससे पहले ही अंजन ने उससे कहा कि वह पुलिस से बचकर भाग रहा है। इसलिए पहले उसे किसी सुरक्षित जगह पर ले चले।
उसकी मुसीबत समझ कर प्रवेश ने उसका हाथ पकड़ा। उसे लेकर उस गली से बाहर निकल गया। उसके बाद एक दूसरी गली में घुस गया। कुछ अंतर जाने के बाद प्रवेश ने एक घर की कॉलबेल बजाई। दरवाज़ा खुला। वह उसे सीढ़ियों से ऊपरी हिस्से में ले गया।
इस समय अंजन उसी जगह पर था। यह जगह सुरक्षित थी लेकिन वह जानता था कि सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज अपनी नाकामी पर चुप नहीं बैठेगा। इस समय वह उस शेर की तरह चिढ़ा हुआ होगा जिसके हाथ से शिकार निकल गया हो। वह उसे गिरफ्तार करने के लिए आसपास का एरिया खंगालेगा। उसने प्रवेश से उसे किसी दूसरी जगह ले जाने की बात कही थी।
प्रवेश उसी इंतज़ाम के लिए कहीं गया हुआ था। जाते समय अंजन को कह गया था कि अगर कोई खतरा महसूस हो तो छत के रास्ते बगल वाले मकान में छिप जाए। वह बहुत दिनों से बंद है। अंजन की देखभाल के लिए वह माइकल को उसके पास छोड़ गया था। माइकल भी मुंबई से उसके साथ यहाँ आया था। मुसीबत में अपनी रक्षा कर सके इसके लिए प्रवेश ने अंजन को एक गन भी दी थी।
प्रवेश को गए डेढ़ घंटे हो चुके थे। अभी तक उसने कोई खबर नहीं दी थी। अंजन को अब बेचैनी होने लगी थी। वह उठकर कमरे में टहलने लगा।
 
रिस्की लव - 53

प्रवेश गौतम और अंजन विश्वकर्मा की शुरुआत लगभग एक साथ ही हुई थी। दोनों राजन भाई के गैंग में काम करते थे।‌ उसके बाद अंजन अपने दोस्त पंकज सुर्वे के साथ रघुनाथ परिकर के लिए काम करने लगा।
प्रवेश गौतम कुछ सालों तक राजन भाई के लिए काम करता रहा। लेकिन वहाँ उसके तरक्की करने की कोई संभावना नहीं थी। उसी समय प्रवेश गौतम ने सुना कि रघुनाथ परिकर ने अंजन को अपनी कंपनी का हिस्सेदार बनाने ‌के साथ साथ अपना बहनोई बनाने का ऐलान किया है। उसे हैरानी हुई कि अंजन विश्वकर्मा जो कभी उसके साथ ही राजन भाई के गैंग में काम करता था ने इतनी सफलता हासिल कर ली।
प्रवेश गौतम भी अंजन की तरह उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखता था। राजन भाई के गैंग में काम करते हुए दोनों में इसी आधार पर दोस्ती हो गई थी। हालांकि अंजन पंकज के साथ अधिक रहता था। जब प्रवेश ने अंजन की सफलता के बारे में सुना तो वह उससे जाकर मिला। उससे कहा कि वह उसे भी कोई काम दिलवा दे।
अंजन रघुनाथ परिकर के लिए पहले जो काम करता था वह काम उसने प्रवेश गौतम को दिलवा दिया। वह उसके लिए सही तरह से काम कर रहा था। पर कुछ समय बाद अंजन ने महसूस किया कि प्रवेश गौतम को इस काम की जगह किसी और काम में बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। उसने तरुण काला की फिशिंग कंपनी की आड़ में मानव तस्करी का काम शुरू किया था। उसने प्रवेश गौतम को उस काम में प्रयोग करना शुरू कर दिया।
नए काम में प्रवेश गौतम और भी अच्छा साबित हुआ। उसका काम नौकरी या दूसरी चीज़ों का झांसा देकर लोगों को बाहर जाने के लिए तैयार करना था। यह काम वह बहुत अच्छी तरह से कर रहा था। पर दो साल पहले एक समस्या आ खड़ी हुई।
एक आदमी के बेटे को प्रवेश गौतम ने नौकरी के बहाने बाहर भेजा था। उसने पुलिस में शिकायत कर दी। उसका कहना था कि उसके बेटे को धोखे से बाहर ले जाकर उसे गुलाम बनाकर रखा गया है। उस समय मामला तूल पकड़ता उससे पहले ही अंजन ने अपनी जान पहचान का इस्तेमाल करके मामले को दबा दिया।
उसके बाद प्रवेश गौतम का उस काम में रहना अंजन को ठीक नहीं लगा था। उसने उसे कुछ पैसे देकर कहीं दूर चले जाने की सलाह दी। प्रवेश गौतम पैसे लेकर चला गया था। उसके बाद अंजन को इस बात की कोई खबर नहीं थी कि वह कहाँ है।
प्रवेश गौतम गली में अचानक उससे टकरा गया। वह उसे यहाँ ले आया। यहाँ आकर अंजन ने उसे सारी बात विस्तार से बताई। अंजन ने उसकी आड़े वक्त में मदद की थी। इसलिए प्रवेश गौतम उसकी मदद करने के लिए तैयार हो गया। अब वह उसके लिए सुरक्षित जगह की व्यवस्था करने गया था।
अंजन यह नहीं जानता था कि प्रवेश गौतम सिंगापुर कैसे और कब आया। यहाँ आकर वह क्या कर रहा है। लेकिन जिस तरह से उसने आत्मविश्वास के साथ उसकी मदद करने की बात कही थी उससे स्पष्ट था कि उसकी यहाँ बहुत जान पहचान है।
अब अंजन से इंतज़ार मुश्किल हो रहा था। उसने माइकल को आवाज़ देकर बुलाया। उसने माइकल से कहा कि प्रवेश को फोन मिलाकर पूछे कि क्या बात है। माइकल ने कहा कि कुछ ही समय पहले प्रवेश का फोन आया था। वह कुछ देर में आ जाएगा।

हान लिम बार के आसपास जितने भी सीसीटीवी कैमरे थे उनकी फुटेज जुटाकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के पास पहुँचा। दोनों ध्यान से उन फुटेज को चेक करने लगे। अंजन उन्हें बार से निकलता हुआ दिखा। पहले वह पार्किंग की तरफ बढ़ रहा था फिर अचानक मुड़ कर दूसरी तरफ भागने लगा। एक सीसीटीवी फुटेज में वह गली में घुसता दिखाई पड़ा। उस फुटेज को देखकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"इस गली की सीसीटीवी फुटेज दिखओ।"
हान लिम ने लैपटॉप पर उस गली के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज निकाली। अंजन उस गली में भागता हुआ दिखा। कुछ दूर जाकर वह एक मोड़ में मुड़ गया। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"इसके आगे की सीसीटीवी फुटेज दिखाओ।"
एक बार फिर हान लिम ने लैपटॉप पर उसके आगे की सीसीटीवी फुटेज तलाशने की कोशिश की। लेकिन कोई फुटेज नहीं मिली। उसके बाद उन लोगों ने बाकी की बची हुई फुटेज देखी। किसी में भी अंजन दिखाई नहीं पड़ा।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज अपनी जगह उठकर कमरे में टहलने लगा। टहलते हुए वह कुछ सोच रहा था। कुछ देर बाद वह वापस अपनी जगह पर आकर बैठ गया।‌ उसने हान लिम से कहा,
"अंजन गली में घुसा। कुछ आगे जाकर मुड़ गया।‌ लेकिन किसी भी सीसीटीवी फुटेज में वह निकलते हुए नहीं दिखा। इसका मतलब अंजन उसी गली में कहीं है। हो सकता है कि उस गली में उसका कोई पहचान वाला है। तभी उसमें घुसा होगा।"
वह एक बार फिर सोचने लगा। कुछ सोचकर उसने कहा,
"तैयारी करो....हम उस गली के हर घर की तलाशी लेंगे। इससे पहले कि अंजन निकल जाए हमें उसे पकड़ना है।"
हान लिम फौरन उसके आदेश का पालन करने के लिए चला गया।

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने अपनी टीम के साथ उस गली को पूरी तरह घेर लिया।‌ उन लोगों ने हर घर में पूँछताछ करनी शुरू कर दी। बहुत देर तक पुलिस उस गली में और उसके आसपास अंजन की तलाश करती रही। पर उनके हाथ केवल निराशा ही लगी। एक और बार मात खाने से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज उस घायल शेर की तरह था जो अपने शिकार को हासिल करने की ज़िद ठान लेता है।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की हार केवल उसकी हार ही नहीं थी। एसीपी सत्यपाल वागले जानता था कि बार बार अंजन का इस तरह बचकर निकल जाना उसके लिए भी परेशानी पैदा कर रहा है। उसके सिंगापुर में रहने की अवधि समाप्त हो रही है। अगर वह अंजन के बिना मुंबई गया तो वहाँ उसकी भी खूब छीछालेदर होगी। उसने तय किया कि वह सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के साथ मिलकर काम करेगा।

प्रवेश गौतम और अंजन एक फ्लैट में बैठे शराब पी रहे थे।‌ सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के अपनी टीम के साथ पहुँचने के कुछ ही मिनटों पहले प्रवेश गौतम अंजन को लेकर निकल गया था। इस समय वह दोनों ईशन शहर में थे।
यह फ्लैट प्रवेश गौतम के एक दोस्त का था। उसने अपने दोस्त से बात की कि कुछ समय के लिए वह अपने एक जानने वाले को यहाँ ठहराना चाहता है। वह मान गया। प्रवेश उसे लेकर यहाँ आ गया।
अंजन जानता था कि अभी भी निश्चिंत होने का समय नहीं आया है। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज अपनी इज्ज़त बचाने के लिए ‌उसे गिरफ्तार करने की हर संभव कोशिश करेगा। उसकी समस्या केवल वही नहीं है। उसे गिरफ्तार करने के लिए मुंबई से एसीपी सत्यपाल वागले भी अपनी टीम के साथ आया हुआ है। इसलिए अब उसे यहाँ से निकलने के लिए प्रवेश गौतम की मदद लेनी होगी। शराब पीते हुए उसने कहा,
"प्रवेश तुमने मेरी बहुत मदद की है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। मुझे किसी भी तरह सिंगापुर से बाहर निकलना है। क्या तुम मेरे थाईलैंड जाने की व्यवस्था कर सकते हो। वहाँ सोम आर्य नाम का एक होटल व्यापारी है। उसके होटल में मेरी भी हिस्सेदारी है। उससे पैसे लेकर मैंने वहीं काम शुरू करने के बारे में सोचा है जो फिशिंग बिज़नेस की आड़ में करता था। तुम बस एक बार मुझे यहाँ से निकलना दो।"
प्रवेश गौतम ने कुछ सोचकर कहा,
"तुम एक नई शुरुआत करना चाहते हो।"
इस सवाल पर अंजन उदास हो गया। वह सोच रहा था कि कैसे दिन आ गए हैं। कभी जो उसकी सफलता को देखकर अचंभित था। जो कभी उसके लिए काम करता था। आज उसके ही सामने मदद मांगनी पड़ रही है। लेकिन वह जानता था कि यह सह सोचकर कुछ हासिल नहीं होगा। एक बार मौका मिल जाए तो वह सबकुछ फिर हासिल कर लेगा। फिर सब लोग आश्चर्य से आँखें फैला कर उसकी सफलता देखेंगे। उसने कहा,
"करनी ही पड़ेगी। मेरा जो कुछ था वह छूट गया। अब तो यह पहचान भी छोड़नी होगी। लेकिन नई पहचान के साथ मैं फिर से सफल होकर दिखाऊँगा। बस यहाँ से निकल जाऊँ एक बार।"
"ठीक है मैं कोशिश करता हूँ कि तुम्हें थाईलैंड भिजवा सकूँ।"
"कोशिश करना जल्दी हो जाए।"
"मैं भी समझ रहा हूँ। तुम्हारी मदद इसलिए की कि तुमने मुंबई से भागने में मेरी मदद की थी। उसकी बदौलत ही मैं यहाँ आकर अपने दम पर कुछ कर पाया हूँ।"
प्रवेश गौतम से अपनी मदद का आश्वासन मिलने के बाद अब अंजन को तसल्ली हुई थी। इसके साथ ही उसके मन में यह जानने का कौतुहल जागा था कि आखिर प्रवेश गौतम यहाँ क्या काम करता है। ऐसा क्या है जिसके कारण वह आत्मविश्वास के साथ उसकी मदद करने की बात कर रहा है।
प्रवेश गौतम चुपचाप शराब पी रहा था। अंजन अपना कौतुहल शांत करना चाहता था। उसने कहा,
"एक बात पूँछूँ प्रवेश...."
प्रवेश गौतम ने उसकी तरफ देखकर कहा,
"मैं समझ रहा हूँ कि तुम क्या जानना चाहते हो। तुम सोच रहे हो कि मैं यहाँ क्या करता हूँ ? सिर्फ दो सालों में ही ऐसा क्या हो गया कि मैं तुम्हारी मदद करने के लायक बन गया ?"
"हाँ.... मैं जानना चाहता हूँ कि तुम यहाँ कैसे आए ? क्या काम करते हो ?"
प्रवेश गौतम ने अपना और अंजन का गिलास भरा। उसके बाद अपनी कहानी सुनाने लगा।
 
रिस्की लव - 54

मुंबई से भागकर प्रवेश गौतम कुछ दिनों तक पंजाब में छिपकर रहा। उसके पास अंजन के दिए हुए पैसे थे। वह उनके दम पर ही वहाँ दिन गुज़ार रहा था। लेकिन वह जानता था कि इस तरह से बहुत दिनों तक गुज़ारा नहीं किया जा सकता है। उसे कोई नया काम शुरू करना होगा।
वह ऐसे किसी काम के बारे में सोचने लगा जहाँ थोड़े में अधिक मुनाफा मिल सके। अपनी इसी तलाश में वह ड्रग्स का धंधा करने वाले एक गिरोह से मिला। उनके साथ मिलकर वह ड्रग पैडलर बन गया।
उसका काम बार्डर पार से आने वाले माल को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में पहुँचाना था। इस काम से उसे अच्छा पैसा मिल रहा था। वह इस काम में सैटेल हो गया था। तभी उस पर एक और मुसीबत आ गई। एक बार नोएडा में ड्रग्स की डिलीवरी देने के बाद वह मौज मस्ती के इरादे से एक डिस्को में पहुँचा। वह नशे में चूर मस्ती में डांस कर रहा था। तभी उसकी नज़र एक लड़की पर पड़ी। वह लड़की भी उसकी तरह मस्ती में चूर नाच रही थी।
कुछ देर बाद वह लड़की डांस फ्लोर से हटकर लाउंज में जाकर बैठ गई। प्रवेश गौतम भी डांस छोड़कर उसके पास जाकर बैठ गया। उसने उस लड़की से बातचीत शुरू कर दी। उस लड़की का नाम नैंसी चावला था। उसने बताया कि वह एक मॉडल है। किसी शूट के सिलसिले में नोएडा आई थी। प्रवेश ने उसे बताया कि पंजाब में उसका अपना बिज़नेस है। वह बिज़नेस के सिलसिले में नोएडा आया था। काम हो जाने के बाद मौज मस्ती के इरादे से डिस्को में आ गया था।
बातचीत में नैंसी ने प्रवेश गौतम पर अपना जादू चला दिया था। उसने प्रवेश गौतम से कहा कि क्यों ना आज रात दोनों मौज मस्ती करते हुए गुज़ारें। प्रवेश गौतम उसका इशारा समझ गया। उसने नोएडा के एक होटल में रूम बुक करा रखा था। वह नैंसी के साथ अपने रूम में चला गया।
अभी उन्हें आए हुए कुछ ही समय हुआ था कि प्रवेश गौतम के कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई। प्रवेश को आश्चर्य हुआ कि इस समय कौन आ गया। उसने नैंसी से कहा कि वह बिस्तर में ही रहे बाहर ना निकले। जब प्रवेश गौतम ने दरवाज़ा खोला तो एक आदमी उसे धक्का देकर अंदर आ गया। नैंसी को गालियां देते हुए बोला कि उसे छोड़कर यहाँ इस आदमी के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है।‌ प्रवेश गौतम को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने उस आदमी का कॉलर पकड़ कर पूँछा कि वह इस तरह की हरकत क्यों कर रहा है। उसके कमरे से निकल जाए वरना अच्छा नहीं होगा।
उस आदमी ने बताया कि वह दो सालों से नैंसी के साथ रिश्ते में है। लेकिन वह पिछले कुछ समय से उसे इग्नोर कर रही है। वह डिस्को से उन लोगों के पीछे लगा था। कुछ देर तक तो वह होटल के बार में बैठकर पीता रहा। लेकिन फिर उससे रहा नहीं गया। वह उसके कमरे का पता करके यहाँ तक आ गया। उसने नैंसी से कहा कि वह चुपचाप उसके ‌साथ चले। नैंसी ने उसके साथ जाने से मना कर दिया। प्रवेश गौतम ने उससे कहा कि उसे इन सारी बातों से कोई मतलब नहीं है। नैंसी अपनी मर्ज़ी से उसके साथ आई थी। अब वह यहाँ से चला जाए।
इस बात से नाराज़ होकर उस आदमी ने प्रवेश गौतम को एक मुक्का मार दिया। उसके होठ से खून निकलने लगा। प्रवेश गौतम का सर भन्ना गया। उस ऐसा लगा कि नैंसी के सामने उसका अपमान हो गया है। गुस्से में ‌उसने उस आदमी को मुक्का मारा। वह लड़खड़ा कर गिर गया। लेकिन उठकर उसने प्रवेश गौतम को एक तमाचा मार दिया। अब प्रवेश गौतम के सर पर खून सवार हो गया। उसने कमरे में सजावट के लिए रखे हुए वाज़ को उठाकर उसके सर पर मार दिया। उस आदमी के सर से खून का फव्वारा फूट पड़ा।
प्रवेश गौतम का गुस्सा शांत हुआ तो उसे समझ आया कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है। उन दोनों के झगड़े की आवाज़ सुनकर होटल का मैनेजर भी कमरे में आ गया था। प्रवेश गौतम ने मैनेजर को समझाने का प्रयास किया पर उस आदमी की मौत हो चुकी थी। मैनेजर पुलिस को फोन करने जा रहा था। प्रवेश गौतम ने अपनी गन निकाल ली और उसके सहारे होटल से भाग निकला।
प्रवेश गौतम भागकर पंजाब तो पहुँच गया पर वह जानता था कि नोएडा में वह हत्या के गवाह छोड़कर आया है। अब उसके लिए यहाँ रहना खतरनाक है। एक ऐजेंट के साथ जुगाड़ करके वह सिंगापुर आ गया।

अंजन को यह तो पता चल गया था कि वह सिंगापुर कैसे पहुँचा। लेकिन वह सोच रहा था कि इतने कम समय में प्रवेश गौतम के हाथ ऐसा क्या लग गया कि उसके पास इतने पैसे आ गए। उसने कहा,
"यहाँ ऐसी कौन सी जादू की छड़ी हाथ लग गई कि तुम मेरी मदद करने की स्थिति में पहुँच गए।"
उसका सवाल सुनकर प्रवेश गौतम हंसकर बोला,
"जादू की छड़ी ही समझो। मैं एक ऐसा धंधा करता हूँ कि जिसमें अच्छा पैसा है।"
"ऐसा कौन सा काम करने लगे हो तुम ?"
"जैसे ड्रग्स और शराब का नशा है वैसे ही यह भी एक नशा है। नशे का आदी अपनी लत के लिए पैसे देने को तैयार रहता है।"
अंजन प्रश्न भरी नज़रों से उसकी तरफ देखने लगा। प्रवेश गौतम ने आगे की कहानी सुनाई।

सिंगापुर आने के बाद वह एक नाइट क्लब में काम करने लगा। यहाँ शराब और ड्रग्स के नशे के साथ एक और नशे का कारोबार होता था। जिस्म का कारोबार। क्लाइंट्स को जवान और खूबसूरत लड़कियां सप्लाई की जाती थीं। क्लब में कुछ गुप्त कमरे थे जहाँ लड़कियां क्लाइंट्स का दिल बहलाती थीं। लेकिन इन गुप्त कमरों में गुप्त कैमरे भी होते थे। कैमरे जो रिकॉर्ड करते उन्हें एक फिल्म की तरह एडिट करके कुछ वेबसाइट्स पर बेच दिया जाता था। इसके अच्छे पैसे मिल जाते थे।
प्रवेश गौतम के दिमाग में आया कि क्यों ना वह भी यही काम करे। उसके पास जो पैसे थे उनके ज़रिए उसने कुछ उपकरण खरीदे। कुछ लड़के लड़कियों को पैसे का लालच देकर इस काम में शामिल कर लिया। वह फिल्में बनाता था और उन्हें कुछ खास लोगों को पैसों के बदले में एक वेबसाइट के ज़रिए बेचता था।

प्रवेश गौतम ने अंजन से कहा,
"जिस मकान में मैं तुम्हें ले गया था वह मैंने इसी काम के लिए किराए पर ली थी। काम हो जाने के बाद सारा सामान हटवा दिया था। सब निपटा कर मैं अपनी कार की तरफ जा रहा था कि तुमसे टकरा गया।"
"ओह तो तुम्हारी बड़े लोगों से जान पहचान है।"
"बहुत ज्यादा नहीं। लेकिन जितने लोगों से भी जान पहचान है वो काम के हैं।"
प्रवेश गौतम यह कहकर उठकर खड़ा हो गया। उसने कहा,
"मैं अब चलता हूँ। वैसे तो यहाँ सुरक्षित हो पर संभल कर रहना।"
प्रवेश गौतम चला गया। अंजन जो कुछ भी उसने बताया था उसके बारे में सोचने लगा। उसे लग रहा था कि अगर प्रवेश गौतम सबकुछ खोकर भी इतना कुछ पा सकता है तो वह क्यों नहीं। यह सोचकर उसके मन में एक उम्मीद जागी।

हॉस्पिटल के बेड पर लेटी हुई मीरा बहुत दुखी थी। वह पूरी तरह से टूट गई थी। वह ज़िंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी पर उसके पास अपना कहने वाला कोई नहीं था। इस कठिन समय में वह एकदम अकेली थी। वह सोच रही थी कि काश इस समय उसके पास कोई होता। जो उसका सहारा बनता। अपनी तसल्ली भरी बातों से उसे लड़ने की ताकत देतीं।
अब वह बहुत पछताती थी। अपने अच्छे समय में उसने रिश्तों को अहमियत नहीं समझी। थोड़े से पैसों के लिए उसने रिश्तों को ठुकरा दिया। अंजन के साथ भी उसने ऐसा ही किया था। फिर भी उसने उसे माफ कर दिया था। लेकिन इस समय वह खुद मुसीबत में था। उसकी चाहकर भी कोई मदद नहीं कर सकता था।
उसके इलाज पर बहुत पैसा खर्च हो रहा था। उसके पास अब बहुत पैसे नहीं बचे थे। अपनी हालत के बारे ‌में सोचकर वह बहुत दुखी थी।

कीवियोंथैरेपी के बाद वह हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर उस एनजीओ में जा रही थी जो बीमारी से जूझ रहे लोगों की सहायता करते थे। वह तैयार होकर निकलने ही वाली थी कि एक शख्स उससे मिलने आया। उसने मीरा से कहा कि वह अंजन का दोस्त संजय मेहरा है। उससे मीरा की बीमारी के बारे ‌में सुना था। वह खुद उसकी मदद के लिए नहीं आ सकता है। इसलिए उसने उसे मदद के लिए भेजा है। वह उसके साथ चले।
यह सुनकर मीरा को बहुत खुशी हुई। वह सोच रही थी कि इतना होने के बाद भी अंजन उसे कितना चाहता है। अपनी मुसीबत में भी उसका खयाल रखा। मदद के लिए अपने दोस्त को भेज दिया।
वह संजय मेहरा के साथ चली गई।

निर्भय और मानवी ने अजय मोहते की मदद कर दी थी। अब दोनों इस बात की राह देख रहे थे कि अजय मोहते अपना वादा निभाए। उन दोनों की सहायता करे। पर अब तक अजय मोहते की तरफ से उनकी मदद की कोई कोशिश नहीं हुई थी। निर्भय को यह भी पता चला था कि अंजन पुलिस के हाथ आते आते बच गया था। निर्भय अब सारे झंझटों से मुक्ति पाने के लिए परेशान था।
निर्भय ने लोकेश कुमार का नंबर मिलाया। पर कई बार मिलाने पर भी फोन नहीं उठा। कुछ देर में वह स्विचऑफ हो गया।
 
रिस्की लव - 55

निर्भय बहुत गुस्से में था। उसे लग रहा था कि अजय मोहते ने अपना काम बड़ी चालाकी से निकलवा लिया। अब जब उसकी बारी आई तो इत्मीनान से बैठ गया। उसे अपनी बेवकूफी पर भी गुस्सा आ रहा था। उस दिन उसने अजय मोहते का नंबर भी नहीं लिया था। लोकेश कुमार के फोन से ही उसने अजय मोहते से बात की थी।‌
उसने तो यह सोचकर अंजन के बारे में बता दिया था कि अजय मोहते उसके दुश्मन को सज़ा देगा। साथ में इस केस से बाहर निकलने में अजय मोहते की मदद भी मिल जाएगी। लेकिन दोनों ही काम नहीं हुए। उसकी इतनी सटीक खबर के बावजूद भी अजय मोहते अंजन का कुछ नहीं कर पाया। वह तो पुलिस से भी बचकर भाग निकला। अब जब उसकी मदद करने की बारी आई है तो अजय मोहते से संपर्क भी नहीं हो सकता। लोकेश कुमार का नंबर भी स्विचऑफ बता रहा था।
वह उठकर गार्डन में जाकर टहलने लगा। कुछ देर बाद मानवी भी वहाँ आ गई। दोनों गार्डन में ही बैठकर बातें करने लगे। मानवी ने कहा,
"अजय मोहते से कोई मदद मिलने की उम्मीद नज़र नहीं आती है। अब हमें अपनी तरफ से ही कुछ करना है। पैसों की कोई चिंता नहीं है। मैंने लंदन फोन करके कुछ पैसे ट्रांसफर करने को कहा है। पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत हमारे खिलाफ सबूत इकट्ठे कर चुका है। हमें एक ऐसे वकील की ज़रूरत पड़ेगी जो बहुत चालाक हो।"
निर्भय कुछ क्षण शांत रहने के बाद बोला,
"अजय मोहते यहीं काम आ सकता था। वह मंत्री है। अपने राजनैतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके केस कमज़ोर करवा सकता था। लेकिन उसने तो धोखा दे दिया।"
निर्भय और मानवी दोनों ही चुप हो गए। दोनों के मन में बहुत सी बातें चल रही थीं। निर्भय को लग रहा था कि ‌मौत के मुंह से निकल कर उसने जो बिज़नेस खड़ा किया था वह बेकार हो गया। वह बस किसी भी तरह से इस सब झंझट से निकल कर अपने बिज़नेस पर ध्यान देना चाहता था। मानवी के मन में भी कुछ ऐसी ही बातें चल रही थीं। उसने निर्भय से कहा,
"कल रात देर तक बिस्तर पर पड़ी सोचती रही कि हम दोनों से ही बहुत गलत निर्णय हो गया। हमारी जिंदगी में इतना उथल पुथल होने के बावजूद हम दोनों ने अपनी राह पा ली थी। अंजन को सज़ा देने के जुनून ने सब बर्बाद कर दिया। अगर हमें उसे मारना ही था तो किसी और के ज़रिए भी यह काम करवा सकते थे।"
"मानवी....समय की बात होती है। आज हम जैसे सोच रहे हैं तब वैसे नहीं सोच पाए। अंजन से बदला लेने का जुनून इस कदर हावी था कि खुद उस पर हमला करने की गलती कर बैठे। लेकिन आज हम जिसे बेवकूफी समझ रहे हैं तब हमारे लिए वही सही था। हमने बेवकूफी की। यह तो हमारे सामने है। लेकिन अब उसका कोई लाभ नहीं है। अब जैसे भी हो हमें इससे निकलने का प्रयास करना है।"
यह कहकर निर्भय उठकर खड़ा हो गया। वह मानवी से बोला,
"चलकर थोड़ी देर बीच पर टहल कर आते हैं। मन बदल जाएगा। फिर सोचते हैं कि आगे क्या करना है।"
मानवी को उसकी बात सही लगी। दोनों बीच पर टहलने चले गए।

संजय मेहरा मीरा को एक घर में ले गया। वहाँ उसके रहने की सही व्यवस्था थी। एक नर्स उसकी देखभाल के लिए थी। मीरा सोच रही थी कि यह संजय मेहरा बहुत भला आदमी है। अंजन इतनी मुश्किल में है फिर भी दोस्ती निभा रहा है।
वह संजय मेहरा से कुछ पूँछ नहीं पाई थी। उसे यहाँ छोड़कर वह यह कहकर चला गया था कि बाद में आकर उससे मिलेगा। मीरा चाहती थी कि एक बार अंजन को फोन करके यह बता दे कि संजय मेहरा उसकी मदद के लिए पहुँच गया था। लेकिन उसने अपना सामान कई बार देखा। उसे अपना फोन नहीं मिल रहा था।
मीरा परेशान हो गई। सोचने लगी कि आखिरी बार उसने अपना फोन कब इस्तेमाल किया था। उसे याद आया कि कीमियोथेरेपी से पहले हॉस्पिटल से उसने अंजन से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसके बाद उसे कीमियोथैरेपी के लिए ले जाया गया था। उसे लगा कि शायद उसका फोन हॉस्पिटल में ही छूट गया है। उसने अपने बेड में लगी बेल को दबाया। कुछ समय बाद नर्स कमरे में आकर बोली,
"क्या चाहिए मैम ?"
"लगता है कि मेरा मोबाइल हॉस्पिटल में ही छूट गया। आप प्लीज़ मिस्टर संजय मेहरा को फोन करके बता दीजिए।"
"सॉरी मैम.... मुझे निर्देश मिला है कि मैं आपकी देखभाल करूँ। इसके अलावा मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकती हूँ।"
नर्स ने बड़ी रुखाई से उसे जवाब दिया था। मीरा को अच्छा नहीं लगा। उसने कहा,
"ठीक है....घर में कोई नौकर हो तो उसे भेज दीजिए।"
"इस समय आपके और मेरे अलावा यहाँ कोई नहीं है।"
"यहाँ कोई फोन होगा। मैं खुद बात कर लूँगी। आप बस मिस्टर संजय मेहरा का नंबर दे दीजिए।"
"यहाँ कोई फोन नहीं है। अगर आपको इसके अलावा कोई काम हो तो बताइए।"
उसका रुखा व्यवहार मीरा के लिए असहनीय हो रहा था। उसने खीझकर कहा,
"आप मेरी कोई मदद नहीं कर सकती हैं। आप जाइए।"
नर्स चली गई। मीरा सोच में पड़ गई। क्या उसने यहाँ आकर ठीक किया ? फिर उसके मन में आया कि संजय मेहरा अंजन का दोस्त है। बीमारी में उसकी मदद कर रहा है। इसमें उसका कोई स्वार्थ तो हो नहीं सकता है। ज़रूर यह नर्स बद्तमीज़ है। संजय मेहरा के आने पर वह उसकी शिकायत करेगी। यह सोचकर वह चुपचाप बिस्तर पर लेट गई।
उसके मन में आ रहा था। आजकल वह बहुत कमज़ोर हो गई है। अगर पहले जैसी होती तो बिस्तर से उठकर उस नर्स को उसकी रुखाई पर थप्पड़ मार देती। खुद हॉस्पिटल जाकर अपना फोन ले आती। यह सोचते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए। पहले जैसा कुछ बचा कहाँ था।‌ सबकुछ तो उलट पलट हो गया था।‌ पहले जैसा होता तो वह अपनी ज़िंदगी के दिन ना गिन रही होती। उसकी आँखों से आंसू की धारा बहने लगी।

अजय मोहते का आदमी बहुत समय तक अंजन के घर पर उसके आने की राह देखता रहा। जैसा अजय मोहते ने सोचा था अंजन लौटकर घर नहीं आया। अजय मोहते के आदमी ने उसे फोन किया तो उसने उससे कहा कि वह वहाँ से निकल जाए।

अजय मोहते ने लंदन फोन मिलाया। उसने अपने एक आदमी दिनकर प्रधान को फोन किया था। दिनकर प्रधान ही मीरा को संजय मेहरा बनकर मिला था। दिनकर प्रधान ने फोन उठाया तो अजय मोहते ने कहा,
"उसे पहुँचा दिया।"
"हाँ.... हॉस्पिटल से उस घर में पहुँचा दिया है। मुझे तो लगा था कि सवाल जवाब करेगी। पर अंजन का नाम सुनते ही मान गई। वैसे इस समय बहुत कमज़ोर और टूटी हुई है। इसलिए इतनी आसानी से यकीन कर लिया।"
"हाँ मैंने पता किया था। धोखा खाने के बाद भी अंजन उसे बहुत चाहता है। उसके लिए अपने दोस्त सागर खत्री का भी दुश्मन बन गया। सागर खत्री की रखैल अलीशिया ने इसके लिए अंजन की दीवानगी के बारे में बताया था। इसलिए उसे किडनैप किया है। अब अंजन को धमकी दूँगा कि अगर पुलिस के हाथ पड़ भी जाए तो मेरे बारे में कुछ ना बताए।"
"लेकिन सर उस लड़की को कैंसर है। बहुत बीमार है। अधिक समय ज़िंदा नहीं रहेगी।"
"कोई बात नहीं.... मैं अंजन को ढूंढ़ कर मार दूँ तब तक ज़िंदा रहे। अगर बीच में मर भी गई तो अंजन को इसकी खबर नहीं लगने देंगे। तुम्हारे पास उसका फोन है ना।"
"हाँ सर मैंने उसके सामान से निकाल लिया था।"
"तो जैसा मैंने कहा था वैसा करो।"
अजय मोहते ने फोन काट दिया। उसके चेहरे पर मुस्कान थी। लंदन में उसे सागर खत्री की गर्लफ्रेंड अलीशिया का पता चला। उसने अपने आदमियों के ज़रिए उसे उठवा लिया। उसने सबकुछ बता दिया। उसके बाद अजय मोहते ने दिनकर प्रधान को संजय मेहरा बनकर जाने के लिए कहा। वह मीरा से मिला और उसे उस मकान में रख दिया।
अजय मोहते जानता था कि मीरा कहीं भाग सके इस हालत में नहीं है। इसलिए उस मकान में कोई और नहीं था। उसने मीरा पर नज़र रखने के लिए पामेला नाम की एक औरत को नर्स बनाकर रखा था। पामेला को पुलिस विभाग से उसके गलत आचरण के कारण निकाल दिया गया था। वह पैसों के लिए कोई भी गैरकानूनी काम करने से नहीं हिचकती थी।

दिनकर प्रधान उसी मकान के ऊपरी हिस्से में था। पामेला ने जाकर उसे सारी बात बताई कि कैसे मीरा अपने फोन के लिए परेशान हो रही थी। सब सुनकर दिनकर प्रधान ने पामेला को कुछ आदेश दिया।
पामेला ने मीरा को जूस में नींद की दवा मिलाकर पिला दिया। इसके कारण मीरा सो रही थी। पामेला ने मीरा के फोन से एक वीडियो बनाया। उसके बाद ऊपर बैठे दिनकर प्रधान के पास गई। दिनकर ने मीरा के फोन से वह वीडियो अंजन को भेज दिया। साथ में एक मैसेज भी था।

अंजन उस फ्लैट में बैठा अपनी स्थिति के बारे में सोचकर परेशान हो रहा था। उसने अपने लिए एक और पैग बनाया और पीने लगा। उसके फोन पर बीप हुई। उसने देखा कि मीरा ने एक वीडियो भेजा था। साथ में एक टेक्स्ट भी था।
 
रिस्की लव - 56

अंजन ने अपना गिलास टेबल पर रखा। सबसे पहले वीडियो के साथ आए हुए टेक्स्ट को पढ़ा। टेक्स्ट पढ़कर गुस्से से वह पागल हो उठा। पूरा मैसेज पढ़ने के बाद उसने वीडियो देखा। सिर्फ तीस सेकंड्स का वीडियो था। सोती हुई मीरा बहुत कमज़ोर लग रही थी। उसने अपना फोन टेबल पर रखा। शराब का गिलास उठाकर खाली कर दिया।
गुस्से में उससे बैठा भी नहीं जा रहा था। वह उठकर कमरे में टहलने लगा। मैसेज का एक एक शब्द हथौड़े की तरह दिमाग पर चोट कर रहा था।
'तुम्हारी प्रेमिका मीरा हमारे पास है। बेचारी बहुत बीमार है। फिर भी हमें उसे यहाँ लाना पड़ा। बेचारी तुम्हारा नाम सुनकर यहाँ चली आई। पर अब इस बीमारी की हालत में उसका इलाज कैसे होगा। बिना इलाज के तो और जल्दी मर जाएगी। पर हमारे हाथ में कुछ नहीं है। तुम चाहो तो उसे बचा सकते हो। पुलिस के हाथ आ जाओ तो हमारे बारे में मत बताना। तुम हमारा सहयोग करोगे तो हम उसका इलाज कराएंगे। नहीं तो तकलीफ से मरेगी बेचारी।'
अंजन की मुठ्ठियां तनी हुई थीं। अपने अंदर उपजे गुस्से को वह रोकने की कोशिश कर रहा था। कुछ ही देर में गुस्सा बेचारगी में बदल गया। वह रोने लगा। रोते हुए उसके मन ने उसे धिक्कारा। वह कायरों की तरह क्यों पेश आ रहा है। इसी दम पर वह अपना खोया हुआ सबकुछ वापस पाने की सोच रहा है। उसने अपने ऊपर शर्म आने लगी।
कुछ ही समय में उसके मन में अलग अलग तरह के भाव पैदा हुए थे। गुस्से से बेचारगी और फिर शर्मिंदगी तक पहुँच गया था। अपने मन की स्थिति को वह खुद ही समझ नहीं पा रहा था। तभी उसका फोन बजा। उसने फोन उठाया। अजय मोहते का फोन था। उसने कहा,
"क्यों अंजन.... अपने बाल नोच रहे हो या गुस्से में हाथ पैर पटक रहे हो। अब इससे अधिक तो कुछ कर नहीं सकते हो तुम।"
उसकी ज़हर भरी बात सुनकर अंजन गुस्से में बोला,
"बहुत बड़े कमीने हो तुम। इतने घटिया आदमी हो कि मुझे दबाने के लिए एक लड़की का सहारा ले रहे हो। वह भी बीमार लड़की का।"
उधर से अजय मोहते के हंसने की आवाज़ आई। अजय मोहते ने कहा,
"सही कहा तुमने मैं बहुत बड़ा कमीना और घटिया इंसान हूँ। सिर्फ अपनी जीत के बारे में सोचता हूँ। चाहें कैसे भी मिले। अब अपनी माशूका की ज़िंदगी तुम ही बचा सकते हो। बेचारी बार बार कह रही थी कि मेरा अंजन आएगा। मुझे ले जाएगा। अब उस बेचारी को क्या पता कि उसका अंजन किसी काम का नहीं रहा।"
अजय मोहते ने जो आखिरी बात कही थी उसने अंजन के पुरुषत्व को बुरी तरह चोट पहुँचाई थी। उसने कहा,
"देख अजय मोहते अगर मीरा को कुछ हुआ तो मुझसे तुझे कोई नहीं बचा पाएगा।"
"अंजन समझदारी से काम लो। मैंने तुम्हें इसलिए फोन किया है कि तुम खुद को मेरे हवाले कर दो। मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूँ कि तुम्हारी इस सारे झंझट से निकलने में मदद करूँगा। फिर तुम्हारी महबूबा तुम्हारे पास होगी। उसका इलाज कराना। आराम से एक नई ज़िंदगी जीना।"
"मैं तुम पर यकीन नहीं कर सकता हूँ।"
उस तरफ कुछ सेकेंड्स के लिए शांति रही। उसके बाद अजय मोहते ने कहा,
"अंजन ना तो तुम चाहते हो और ना ही मैं चाहता हूंँ कि तुम पुलिस के हाथ लगो। इसलिए मेरी बात मानो। मैं तुम्हें एक नई ज़िंदगी शुरू करने का अवसर दूँगा।"
"तुमने तो पहले भी मदद का वादा किया था। पर किया कुछ नहीं।"
उधर से अजय मोहते गुस्से में बोला,
"बेवकूफ के जैसे बात कर रहे हो। तुम्हें क्या लगता है कि तुम्हें वहाँ से निकालना जादू की छड़ी घुमाना है। भारत और सिंगापुर की पुलिस तुम्हारे पीछे है। पर फिर भी मैंने इंतज़ाम कर दिया था। मेरा आदमी तुम्हें खोजते हुए उस मकान में पहुँच गया था जहाँ तुम्हारी महबूबा तुम्हें ठहरा गई थी।"
उसकी इस बात को सुनकर अंजन को उस पर कुछ विश्वास हुआ। अजय मोहते ने आगे कहा,
"वो जब वहाँ पहुँचा तो तुम थे नहीं। तुम्हारा इंतज़ार करके लौट गया। बाद में पता चला कि तुम किसी बार से पुलिस से बचकर भागे हो। तुम्हारे ऊपर पुलिस का खतरा है इसलिए हमने तुम्हारी महबूबा को किडनैप कर लिया। अब तुम सोचकर फैसला कर लो क्या करना है।"
अपनी बात कहकर अजय मोहते फिर चुप हो गया। अंजन के मन में एक उथल पुथल शुरू हो गई थी। एक तरफ उसे लग रहा था कि अजय मोहते सच कह रहा है। उसने उसकी मदद के लिए अपना आदमी भेजा होगा। वह उस पर यकीन कर सकता है। लेकिन उसके मन से आवाज़ आ रही थी कि अजय मोहते झूठ बोल रहा है। इसलिए उसे सावधान रहना चाहिए।
उसके चुप रहने से अजय मोहते को लग रहा था कि अंजन उहापोह में है। नहीं तो अब तक साफ मना कर चुका होता। उसने कहा,
"अंजन तुम्हारे लिए एक एक पल मुश्किल है। पुलिस तुम्हें गिरफ्तार करने की हर संभव कोशिश करेगी। इसलिए तुम मुझे अपना पता बता दो। मैं अपने आदमी को भेजकर तुम्हारी मदद करूँगा।"
अब तक अंजन समझ चुका था कि अजय मोहते उसकी स्थिति को भांपकर जाल फैला रहा है। लेकिन मीरा उसके कब्ज़े में थी। इसलिए वह समझदारी से काम लेना चाहता था। उसने कहा,
"अजय मोहते अभी मेरा दिमाग परेशान है। मैं तुम्हें सोच नहीं पा रहा हूँ। मुझे कुछ वक्त दो। मैं तुम्हें फोन करके बताता हूँ।"
"अंजन वक्त ही तो कम है तुम्हारे पास। फिर भी अगर तुम सोचना चाहते हो तो सोच लो। लेकिन जितनी जल्दी मेरी बात पर भरोसा कर लोगे उतना ही अच्छा होगा। लेकिन अगर पुलिस के हाथ लग जाओ तो याद रखना कि मीरा मेरे पास है।"
अजय मोहते ने यह कहकर कॉल काट दी।
मीरा को अपने कब्ज़े में लेकर अजय मोहते ने अंजन पर दबाव बना दिया था। यह दबाव था कि वह मीरा को उसके चंगुल से मुक्त करवा कर यह साबित कर दे कि अभी भी उसमें बहुत दम है। अंजन उस दबाव में आ गया था। इस समय वह बस यही सोच रहा था कि कुछ भी करके मीरा को अजय मोहते की कैद से छुड़ा ले।
उसे इस फ्लैट में आए लगभग तीस घंटे का समय हो चुका था। इस बीच प्रवेश गौतम एक बार ही आया था। वह उसे खाने पीने का सामान दे गया था। उसे आश्वासन दे गया था कि वह जल्दी ही कुछ करता है। लेकिन उसके बाद ना तो वह आया था और ना ही उसका फोन उठाया था। अंजन इस फ्लैट में एक कैदी की तरह था। वह केवल उस घड़ी का इंतज़ार कर सकता था जब प्रवेश गौतम उसे यहाँ से ले जाए। यह स्थिति बहुत असहनीय थी। उस पर अब यह एहसास और परेशान कर रहा था कि मीरा बीमारी की हालत में भी अजय मोहते की कैद में है।

निर्भय और मानवी बीच पर टहल कर वापस लौटे थे। नौकर ने चाय की ट्रे लाकर रख दी। मानवी अपने और निर्भय के लिए चाय बनाने लगी। निर्भय की बिना शुगर की चाय का कप उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोली,
"अगर हमको ही करना है तो कोई अच्छा वकील तलाश करते हैं।"
निर्भय ने अपने कप से एक सिप लेकर कहा,
"नया वकील क्यों ढूंढ़ें। बैकुंठ आगरकर ने बेल दिलवाई है वह संभाल सकता है।"
अपने लिए चाय बनाते हुए मानवी ने कहा,
"बेल के केस में उसे बहुत मुश्किल हुई थी। अब बात इल्ज़ाम को झूठा साबित करने की है। मुझे लगता है कि हमें सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए।"
उसकी बात सुनकर निर्भय सोच में पड़ गया। कुछ देर में बोला,
"सही कहा तुमने। थोड़ी सी गलती जेल पहुँचा सकती है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने हमारे खिलाफ बहुत कुछ जमा किया है। मैं सोच रहा हूँ कि एक बार फिर लोकेश कुमार का नंबर मिलाऊँ। बात हो जाती है तो इस संबंध में ही कुछ मदद मांग लेंगे।"
निर्भय ने चाय का कप रखा। मोबाइल निकाल कर लोकेश कुमार का नंबर मिलाया। उसने फोन स्पीकर पर डाल दिया। इस बार लोकेश ने फोन उठा लिया। उसके फोन उठाते ही निर्भय ने शिकायत की,
"चलिए आपका फोन तो उठा। मुझे तो लगा था कि आपका काम निकल गया अब बात होना मुश्किल है।"
लोकेश कुमार ने बड़ी शांति से कहा,
"वादा मंत्री जी की तरफ से हुआ है। वो अपना वादा अवश्य निभाएंगे। जहाँ तक फोन ना उठने की बात है तो जब आप फोन मिला रहे थे तब मैं पार्टी की आवश्यक मीटिंग में था। इसलिए फोन स्विचऑफ कर दिया था। अभी कुछ देर पहले ही फुर्सत मिली है।"
"लोकेश जी हमारी मदद कैसे होगी ?"
"केस शुरू होने दीजिए। गवाह वही कहेंगे जो हम चाहेंगे।"
यह सुनकर निर्भय और मानवी दोनों के ही चेहरे चमक गए। निर्भय ने कहा,
"हम किसी अच्छे वकील की तलाश में थे।"
"आप कोई भी वकील कीजिए। गवाह उसके साथ होंगे।"
लोकेश ने फोन काट दिया। निर्भय अब संतुष्ट नज़र आ रहा था। उसने मानवी की तरफ देखा। वह भी खुश थी। निर्भय ने उससे कहा,
"आज कुक से कहो कि कुछ अच्छा बनाए।"
मानवी ने भी उसकी बात का समर्थन किया। वह उठकर कुक को निर्देश देने चली गई।
 
रिस्की लव - 57

मीरा नींद से जागी तो कमरे में अंधेरा था। उसे अनुभव हुआ कि वॉशरूम जाने की ज़रूरत है। उसने खुद उठने की कोशिश की। लेकिन वह उठ नहीं पाई। उसे बहुत कमज़ोरी महसूस हो रही थी। कुछ देर वह उदास पड़ी रही। फिर उसने बेड के पास लगी बेल का बटन दबाया। नर्स के आने की राह देखती रही। एक दो मिनट के अंतराल के बाद भी जब नर्स नहीं आई तो उसने दोबारा बेल बजाई। इस बार पामेला अंदर आई। कमरे की लाइट जलाकर बोली,
"क्या काम है ?"
पामेला ने उसी रुखाई से कहा जैसे पहले बात कर रही थी। मीरा को बहुत गुस्सा आया। उसका मन किया कि डांटकर भगा दे। लेकिन अपनी मजबूरी समझ रही थी। वॉशरूम जाना ज़रूरी था और वह उठ भी नहीं पा रही थी। उसने कहा,
"मुझे वॉशरूम जाना है।"
पामेला ने उसे घूरकर देखा। फिर आगे आकर उसकी उठने में मदद की। उसे वॉशरूम के ‌अंदर छोड़ कर बाहर खड़े होकर उसका इंतज़ार करने लगी। निवृत्त होकर मीरा वॉश बेसिन में हाथ धोने लगी तो दीवार पर लगे आइने में अपनी शक्ल देखी। उसके लिए खुद को पहचान पाना मुश्किल हो रहा था।‌ उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। पर वह अधिक खड़ी नहीं रह पा रही थी। उसने आँखें धोईं नर्स को आवाज़ लगाई।
पामेला ने उसे दोबारा बिस्तर पर लाकर लिटा दिया। उसके बाद बोली,
"कुछ और चाहिए ?"
"मुझे कुछ खाने को चाहिए। मेरे सामान में मेरी दवाएं होंगी। उनका भी वक्त हो गया है।"
पामेला बिना कुछ बोले कमरे से चली गई। कुछ देर बाद खाने का सामान लेकर आई। मीरा को सहारा देकर बिस्तर पर बैठाया। ट्रे उसके सामने रखकर जाने लगी। मीरा ने उसे रोककर कहा,
"मिस्टर संजय मेहरा नहीं आए। मुझे मेरा फ़ोन चाहिए।"
"वो नहीं आए ?"
यह सुनकर मीरा चिढ़कर बोली,
"कब आएंगे ?"
"मुझे नहीं पता। मुझे जो कहा गया है वह कर रही हूँ। कुछ देर में आकर दवाएं खिला जाऊँगी।"
यह कहकर पामेला कमरे से चली गई।
कमरे से निकल कर पामेला सीधे दिनकर प्रधान के पास गई। उसे सारी बात बताई। दिनकर प्रधान ने उसे जाकर अपना काम करने के लिए कहा। कुछ देर सोचने के बाद उसने समय देखा। रात के नौ बज रहे थे। उसने अंदाज़ लगाया कि इस समय मुंबई में रात के लगभग डेढ़ बजे होंगे। उसने अजय मोहते को फोन करने का खयाल स्थगित कर दिया।
अपने कमरे में खाना खाते हुए मीरा बेचैन हो रही थी। अब उसे इस बात का यकीन हो गया था कि उससे भूल हो गई है। उसे यहाँ मदद करने के लिए नहीं लाया गया है। संजय मेहरा ने उससे झूठ बोला था। वह दिमाग दौड़ाने लगी कि उसे कौन यहांँ लेकर आया होगा और क्यों ? पर उसकी कुछ समझ नहीं आ रहा था।
खाना छोड़कर उसने एक बार फिर बेल बजाई। कुछ देर बाद पामेला दवाओं के साथ कमरे में आई। यह देखकर कि अभी खाना पूरा नहीं खाया है वह बोली,
"क्यों बुलाया ? अभी तो खाना भी खत्म नहीं किया।"
"मुझे किसी भी तरह मिस्टर संजय मेहरा से बात करनी है।"
"मैंने भी कह दिया है कि मुझे कुछ नहीं पता। यह मेरा काम नहीं है। खाना खत्म हो जाए तो मैं दवाएं खिला दूँगी।"
मीरा ने गुस्से में कहा,
"आखिर बात क्या है ? मुझे यहाँ क्यों लाया गया है ?"
पामेला ने कहा,
"मुझे यह सब नहीं मालूम। मुझे जो आदेश मिला है मैं वह कर रही हूँ।"
उसने दवाएं मीरा के पास रखकर कहा,
"खाने के बाद दवाएं खा लेना।"
यह कहकर वह कमरे से निकल गई। एक बार फिर वह दिनकर प्रधान के पास गई। उसने कहा,
"मुझसे वह लड़की नहीं संभलेगी। बार बार परेशान कर रही है। संजय मेहरा से मिलना है इस बात की ज़िद कर रही है। मुझसे यह काम नहीं होगा।"
दिनकर प्रधान ने पामेला को घूरकर देखा। वह बोला,
"मुंह मांगा पैसा मिल रहा है तुम्हें। बेकार की बात मत करो।"
"मैं इस तरह नर्स की एक्टिंग नहीं कर सकती। जो कर सकती हूँ वह कराओ।"
"पहले क्यों तैयार हो गई थी ?"
दिनकर प्रधान ने गुस्से से कहा। पामेला कुछ नहीं बोली। दिनकर प्रधान जानता था कि अभी उसकी ज़रूरत है। कुछ नर्मी के साथ बोला,
"पामेला....वो बीमार लड़की है। तुम्हें बस उसकी थोड़ी बहुत मदद करनी है। पैसे तुम्हारे मन के हिसाब से हैं। कर लो। बस कुछ दिनों की बात है।"
पामेला ने गुस्से से कहा,
"बार बार वो अपने फोन और संजय मेहरा के लिए परेशान कर रही है। वह मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा।"
दिनकर प्रधान ने कुछ सोचकर कहा,
"ठीक है उससे मिलकर उसे चुप करा देता हूँ। तुम जाओ।"
पामेला चली गई। कुछ देर तक मन में विचार करने के बाद दिनकर प्रधान मीरा से मिलने गया।

मीरा को यकीन हो गया था कि वह मुसीबत में है। उससे खाना भी नहीं खाया जा रहा था। लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी। उसका शरीर कमज़ोर था। वॉशरूम तक जाने के लिए भी उसे सहारे की ज़रूरत पड़ रही थी। उसे किसी भी तरह अपनी ताकत बनाए रखनी थी। इसलिए वह जैसे तैसे खाना खा रही थी। खाना खाने के बाद उसने अपनी दवाएं भी खाईं। वह एक बार फिर बेल बजाकर नर्स को बुलाना चाहती थी। पर तभी कमरे का दरवाज़ा खुला। मीरा ने देखा संजय मेहरा उसके सामने खड़ा था। मीरा ने कहा,
"मुझे यहाँ छोड़कर आप कहाँ चले गए थे ? मेरा फ़ोन भी नहीं मिल रहा है। शायद हॉस्पिटल में रह गया। जो नर्स आपने रखी है वो बहुत ही बदतमीज़ है।"
दिनकर प्रधान चुपचाप एक कुर्सी लेकर उसके पास बैठ गया। बड़ी ही शांति से बोला,
"नर्स ने बताया ना कि वो वही कर रही है जो उससे कहा गया है।"
यह सुनकर मीरा समझ गई कि नर्स सारी बातें उसको बता रही थी। उसने कहा,
"वो आपसे बात कर रही थी। लेकिन मैंने कितनी बार उससे कहा कि मुझे आपसे बात करनी है। लेकिन उसने नहीं कराई।"
"क्योंकी उससे ऐसा करने को नहीं कहा गया था।"
मीरा कुछ देर तक उसके चेहरे को घूरती रही। फिर बोली,
"मिस्टर संजय मेहरा सच सच बताइए कि मुझे यहाँ क्यों लाया गया है ?"
दिनकर प्रधान ने उसी तरह शांति से कहा,
"मैं संजय मेहरा नहीं हूँ। ना मैं अंजन को जानता हूँ और ना ही उसने मुझे तुम्हारी मदद के लिए भेजा था।"
मीरा यह सुनकर सन्न रह गई। कुछ देर तक उसके मुंह से आवाज़ भी नहीं निकल रही थी। दिनकर प्रधान ने कहा,
"तुमको एक खास काम से रखा गया है। क्या काम है जानने की ज़रूरत नहीं है। चुपचाप यहाँ रहो। काम होने पर तुम्हें छोड़ देंगे। हमारे साथ सहयोग करो। क्योंकी कुछ और करके इस स्थिति में अपनी मुसीबत को बुलाओगी। तुम्हारा फोन हमारे पास है। जब यहाँ से जाओगी मिल जाएगा।"
दिनकर प्रधान उठकर कमरे से बाहर चला गया। मीरा सकते में थी। कुछ देर बाद पामेला अंदर आई। बेड से खाने की ट्रे हटाई। मीरा को लिटाकर बोली,
"रात में ज़रूरत पड़े तो बेल बजा देना।"
पामेला जाते हुए कमरे की लाइट बुझा गई। मीरा की ज़िंदगी में छाया अंधेरा और गहरा हो गया था।

अजय मोहते से ‌बात करने के बाद से अंजन की उलझन और बढ़ गई थी। एक तरफ उसका मन कह रहा था कि उसका यकीन नहीं किया जाना चाहिए। वह धोखा देगा। लेकिन दूसरी तरफ उसे लग रहा था कि हो सकता है अजय मोहते सच कह रहा हो। वह उसकी मदद कर दे। अजय मोहते भी तो नहीं चाहता है कि वह पुलिस के हाथ लगे।
प्रवेश गौतम को उसने कई बार फोन मिलाया पर उससे बात नहीं हो पाई। वह समझ नहीं पा रहा था कि प्रवेश उससे बात क्यों नहीं कर रहा है। वह सोच रहा था कि जितना अधिक समय वह यहाँ रहेगा खतरा बढ़ता जाएगा।
उसे बार बार बीमारी की हालत में अजय मोहते की कैद में फंसी मीरा का खयाल आ रहा था। अजय मोहते ने उससे कहा था कि वह उसके आने की राह देख रही है। यह सुनकर उसे लग रहा था कि अगर वह मीरा की मदद नहीं कर पाया तो यह उसके लिए शर्मिंदा होने की बात होगी।
वह सोच रहा था कि उसके लिए कौन सा निर्णय सही होगा। अजय मोहते पर यकीन करना या प्रवेश गौतम से मदद की राह देखना। इस समय वह जिस हालत में था अपने दम पर कुछ करने की बात नहीं सोच पा रहा था।

अजय मोहते अभी सोकर ही उठा था कि दिनकर प्रधान ने फोन कर सारी बात बता दी। उसने कहा कि मीरा की हालत गंभीर है। अगर उसे सही इलाज नहीं मिला तो मर जाएगी। अजय मोहते ने उससे कहा कि जब तक संभव हो मीरा को अपने पास रखे बाद में वह देख लेगा।
अपने स्लिपरर्स पहन कर वह कमरे के बाहर बरामदे में आकर बैठ गया। कल रात लोकेश कुमार ने भी फोन करके उसे बताया था कि निर्भय मदद मांग रहा था। लोकेश कुमार ने उसके नाम पर झूठा आश्वासन दे दिया था।‌
इस समय अंजन को लेकर मुंबई की मीडिया में फिर से बातें होने लगी थीं। एक मराठी अखबार ने अपने लेख में वन विभाग की ज़मीन का मुद्दा भी उठाया था।
अजय मोहते सोच रहा था कि जल्दी ही उसे सारी समस्याओं से निजात पानी होगी।
 
रिस्की लव - 58

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के ऊपर दबाव बढ़ गया था। अब तो उसे इस केस से हटाए जाने की मांग भी हो रही ‌थी। वह बीस साल से सिंगापुर पुलिस में था। अब तक उसने पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम किया था। उसका रिकॉर्ड बहुत अच्छा था। लेकिन अंजन के केस ने उसकी प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया था। उसकी कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठाए जा रहे थे। वह चाहता था कि अंजन को गिरफ्तार करके सबको सही जवाब दे दे।
हान लिम दोबारा उस गली में गया था जहाँ अंजन को आखिरी बार सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था। जिस मोड़ से वह गायब हुआ था हान लिम उसके आगे की गली में स्थित हर मकान में एक बार फिर पूँछताछ कर रहा था। उस गली में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। अंजन वहाँ से इस तरह गायब हो गया था जैसे कि कोई भूत हो। उस दिन भी पुलिस टीम ने सबसे पूँछताछ की थी लेकिन कुछ पता नहीं चला था। आज सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने उसे फिर से भेजा था।
बातचीत में एक नई बात पता चली। गली में अगल बगल के दो मकान खाली पड़े थे। उनमें से एक में कुछ दिनों के लिए कुछ लोगों का आना जाना हुआ था। हान लिम ने उन दोनों मकानों के मालिक के बारे में पता किया। दोनों मकानों का मालिक एक ही आदमी था। हान लिम ने इस बात की सूचना फौरन सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को दी। उसने कहा कि वह पूँछताछ के लिए मकान मालिक को पुलिस स्टेशन ले आए।
पुलिस स्टेशन में उन दोनों मकानों के मालिक से कड़ाई से पूँछताछ हुई।‌ उसने पुलिस को बताया कि उसने दोनों मकानों में से एक मकान किसी भारतीय को दिया था। उसने मकान केवल दस दिनों के लिए लिया था पर किराया दो महीने का दिया था।‌ उसने कहा कि उसे नहीं पता कि लेने वाले ने किस उद्देश्य से मकान लिया था। उसने तो बस पैसों के लालच में दे दिया था। उसे किराएदार के बारे ‌में अधिक मालूम नहीं है। उसने दो माह की रकम एडवांस दे दी थी। वह उस व्यक्ति से सिर्फ एक बार मिला था जिसने मकान किराए पर लिया था।
मकान मालिक ने उस आदमी का स्केच बनवाया। स्केच देखकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को वह कुछ पहचाना सा लगा। उसने फौरन पुलिस डाटाबेस की जांच करवाई। उस शख्स का नाम प्रवेश गौतम था।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को याद आया कि एक बार उसे टिप मिली थी कि एक नाइट क्लब में गलत हरकतें होती हैं। जब वह अपनी टीम के साथ पहुँचा तो क्लब में ऐसा कुछ नहीं मिला। वहाँ उसने प्रवेश को देखा था। उसके बाद भी एक झगड़े के केस में प्रवेश गौतम को पुलिस थाने लाया गया था। इसलिए उसका रिकॉर्ड था।‌ उसने हान लिम को निर्देश दिया कि वह उस स्केच की कॉपियां निकलवा कर प्रवेश गौतम को तलाश करने के लिए अपने आदमी लगा दे।
हान लिम ने उसके आदेश का पालन किया। उस स्केच की कॉपियां बनवा कर अपने आदमियों को हिदायत दी कि प्रवेश गौतम नाम के हिंदुस्तानी को तलाश करें।

प्रवेश गौतम अपने काम में व्यस्त था। अंजन का फोन बार बार आ रहा था। लेकिन उस समय उसके लिए फोन उठाना संभव नहीं था।‌ उस समय उसने फोन साइलेंट पर कर दिया था। काम पूरा होने के बाद उसने अंजन को फोन करके कहा कि वह परेशान ना हो। फ्लैट में उसके लिए हर सामान मौजूद है। कुछ समय धैर्य रखकर वहीं रहे। वह उसके लिए कोशिश कर रहा है। समय निकाल कर उसके पास आएगा।
अंजन से बात करने के बाद प्रवेश गौतम उस शख्स से मिलने गया था जो अंजन को थाईलैंड भेजने में उसकी मदद कर सकता था। वह उस आदमी से मिलने के लिए एक छोटे से रेस्टोरेंट में गया था। उस आदमी ने जो वक्त दिया था उससे अधिक हो गया था। लेकिन अभी तक वह पहुँचा नहीं था। प्रवेश गौतम को उसका इंतज़ार करते हुए आधे घंटे से अधिक का समय हो गया था।
प्रवेश गौतम को लगा कि अब और अधिक इंतज़ार करने का कोई फायदा नहीं है। वह रेस्टोरेंट से निकल आया। वह अपनी कार की तरफ गया। कार का दरवाज़ा खोल ही रहा था कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। प्रवेश गौतम ने घूम कर देखा तो वह एक पुलिस वाला था। उस पुलिस वाले ने कहा,
"मिस्टर प्रवेश गौतम। मैं इंस्पेक्टर हान लिम हूँ। आपको कुछ पूँछताछ के लिए पुलिस स्टेशन चलना होगा।"
प्रवेश गौतम अंदर से डर गया था। पर बाहर से सामान्य होने का दिखावा करते हुए बोला,
"मैं जान सकता हूँ कि किस संबंध में मुझे पूँछताछ के लिए ले जाया जा रहा है।"
"हमारे साथ चलिए पता चल जाएगा। हमारा सहयोग करिए नहीं तो आपके लिए कठिनाई होगी।"
प्रवेश गौतम ने देखा कि इंस्पेक्टर हान लिम के साथ दो लोग और थे। उसके लिए चुपचाप चले जाने में ही समझदारी थी। उसने अपनी कार लॉक की और चुपचाप पुलिस की गाड़ी की तरफ चल दिया।
हान लिम प्रवेश गौतम को लेकर ‌अपनी टीम के साथ पुलिस स्टेशन पहुँचा तो अचानक ही कुछ मीडिया वालों ने उन्हें घेर लिया। उसकी तरफ सवालों की बौछार होने लगी।
"आप लोग किसे गिरफ्तार करके लाए हैं ?"
"क्या ये उस अंजन विश्वकर्मा का साथी है जो बार में आपके हाथ आते आते बच गया था।"
"आपने इसे कहाँ से गिरफ्तार किया ?"
इन सवालों के साथ कैमरे प्रवेश गौतम की तस्वीर ले रहे थे। हान लिम परेशान था कि मीडिया यहाँ कैसे आ गई। तब तक उसकी मदद के लिए और पुलिस वाले आ गए। प्रवेश गौतम को पुलिस स्टेशन के अंदर ले जाया गया।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने अपने साथियों को शाबाशी दी। उन्हें भी इस बात का आश्चर्य हो रहा था कि अचानक मीडिया कहाँ से आ गई। लेकिन इस बात पर चिंता करने की जगह उसने प्रवेश गौतम से पूँछताछ शुरू कर दी।

मीरा को नींद नहीं आ रही थी। जबसे उसे सच पता था वह बस रो रही थी। बहुत देर तक रो लेने के बाद अब आंसू भी सूख गए थे। वह अब चुपचाप अपने बिस्तर पर लेटी छत को देख रही थी। अब उसे कोई उम्मीद नहीं रह गई थी। वह नहीं जानती थी कि उसे किस काम के लिए यहाँ कैद किया गया है। वह बस यह जानती थी कि उसकी ज़िंदगी जो पहले ही तकलीफों से गुज़र रही थी अब और मुश्किल में पड़ गई है। उसे अब इसी तरह घुट घुट कर बचे हुए दिन काटने होंगे।
वह अंदाज़ लगाने की कोशिश कर रही थी कि उसे किस मकसद से यहाँ लाया जा सकता है। सोचते हुए एक बात उसके दिमाग में आई। ये जो भी लोग हैं अंजन को जानते हैं। उसकी स्थित के बारे में भी जानते हैं। तभी तो अंजन का नाम लेकर उसे यहाँ लाए थे। ये लोग अंजन से किसी बात का बदला लेना चाहते हैं। इसलिए उसे धोखा देकर यहाँ कैद करके रखा है।
उसके दिमाग में आ रहा था कि अगर एक बार वह अंजन से बात कर सके तो कितना अच्छा होगा। हो सकता है कि वह उसकी मदद के लिए आ जाए। इस समय वह जिस मानसिक स्थिति में थी इस खयाल ने उसे तसल्ली दी। पर अंजन तक खबर पहुँचाने का कोई ज़रिया नहीं था।
मीरा को एक बार फिर वॉशरूम जाने की ज़रूरत महसूस हुई। वह नर्स को बुलाने के लिए बेल का बटन दबाने जा रही थी कि उसकी रुखाई को याद करके उसने अपना हाथ वापस खींच लिया। पहले भी जब वह नर्स को लेकर वॉशरूम गई थी तो उसे बहुत अजीब लग रहा था। लेकिन मजबूरी थी। उस समय वह उठ नहीं पा रही थी।
इस समय खाना खाने के बाद उसे इतनी कमज़ोरी नहीं लग रही थी। उसने सोचा कि एक बार खुद कोशिश करती है। अगर नहीं कर पाई तो नर्स को बुला लेगी। उसने कुछ देर शांत रहकर अपनी शक्ति बटोरी। कोशिश करके उठकर बैठ गई। फिर धीरे से खड़ी हो गई। इससे उसके अंदर आत्मविश्वास आ गया था। संभलकर कदम बढ़ाते हुए वह वॉशरूम तक पहुँच गई।
वाशरूम से लौटकर वह बिस्तर पर बैठ गई। एक बात उसके दिमाग में आई थी। क्यों ना एक बार कमरे से बाहर निकल कर देखे। पता तो चले यह जगह कैसी है। जब वह आई थी तो उसने अधिक ध्यान नहीं दिया था। वह उठी धीरे धीरे कदम रखती हुई दरवाज़े तक आई। दरवाज़ा खोलकर बाहर झांका। एक हॉल दिखाई पड़ा। मद्धम रोशनी थी। पर उसे और कोई दिखाई नहीं पड़ा। वह हिम्मत करके कमरे से बाहर निकल गई‌।

दिनकर प्रधान की निगाह पामेला पर थी। वह बहुत आकर्षक थी। यह सोचकर कि मीरा तो कमज़ोर है कुछ कर नहीं सकती है, उसने पामेला को अपने पास बुलाया था। खुले शब्दों में उसके सामने एक रंगीन रात बिताने की पेशकश की। पामेला भी रंगीन मिजाज़ थी। सुबह से यहाँ बैठे हुए ऊब गई थी। उसने दिनकर प्रधान की पेशकश स्वीकार करने में देर नहीं की।
ऊपर दोनों शराब के नशे में चूर एक दूसरे के आगोश में समाए हुए थे। दोनों मीरा की तरफ से पूरी तरह से बेफिक्र थे। उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि नीचे मीरा कमरे के बाहर निकल कर हॉल में इधर उधर देख रही थी।
मीरा कुछ डरी हुई थी। लेकिन वह अब यह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी। इसलिए हॉल में देख रही थी कि शायद कोई फोन दिख जाए।
 
रिस्की लव - 59

मीरा को महसूस हो रहा था कि इस समय जैसे उसमें एक शक्ति आ गई थी। पहले जो कमज़ोरी लग रही थी वह अब नहीं थी। हॉल में टंगी घड़ी में सुबह के चार बजकर पाँच मिनट हुए थे। मीरा ने देखा कि हॉल में एक तरफ ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां हैं। उसके बाईं तरफ मेनडोर था।‌ उसे याद आया कि वह यहीं से अंदर आई थी। उसके कमरे के ठीक सामने सीढ़ियों के बगल में एक दूसरा कमरा था। मीरा ने हॉल में देखा उसे कोई ‌फोन दिखाई नहीं पड़ा। उसने दूसरे कमरे में जाकर देखने का फैसला किया।‌
वह उस कमरे की तरफ गई। दरवाज़ा खोला। अंदर अंधेरा था। उसने हल्की रौशनी में देखा कि कमरे में एक बेड था। लेकिन बेड पर कोई नहीं था। वह कमरे में घुस गई। उसने लाइट जलाई। उसने देखा कि कमरे में एक टेबल और कुर्सी पड़ी थी। टेबल पर उसे एक मोबाइल दिखाई पड़ा। उसने वह मोबाइल उठा लिया। उसका स्क्रीन लॉक्ड नहीं था।

अंजन परेशान था इसलिए रात में बड़ी देर से नींद आई थी। इसलिए देर से सोकर उठा था। इस समय पौने ग्यारह बज रहे थे। फ्लैट में वह अकेला था। कहीं बाहर निकल नहीं सकता था। प्रवेश गौतम से भी कोई मदद की उम्मीद नहीं थी। वह इन सबसे बुरी तरह उकता गया था। कुछ ना कर सकने की खीझ मन को बेचैन कर रही थी।
बेडरूम से निकल कर वह हाल में आ गया। शीशे की दीवार के पार सूरज की रौशनी में चमकती ईमारतें दिखाई पड़ रही थीं। वह सोचने लगा कि सबकुछ जैसा पहले था वैसे ही चल रहा है। बस उसकी अपनी ज़िंदगी में उथल पुथल मची हुई है। ना जाने कब ज़िंदगी दोबारा ढर्रे पर आ पाएगी। पहले दोबारा सबकुछ हासिल कर लेने का जो आत्मविश्वास उसमें था वह बुरी तरह कमज़ोर पड़ गया था। इस समय उसकी हालत यह थी कि कुछ भी स्पष्ट नहीं था।
वह सोफे पर बैठ गया। अपना मन बदलने के लिए उसने टीवी खोल लिया। टीवी पर प्रोग्राम उसे समझ नहीं आ रहे थे। वह बस चैनल बदलता जा रहा था। चैनल बदलते हुए वह एक न्यूज़ चैनल पर आया। भाषा समझ नहीं आ रही थी पर जो स्क्रीन पर दिखाई दे रहा था उसने उसके होश उड़ा दिए। स्क्रीन पर प्रवेश गौतम पुलिस के साथ दिखाई पड़ रहा था। उसने ढूंढ़ कर एक अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल लगाया। उसके हिसाब से कोई दो घंटे पहले प्रवेश गौतम पुलिस के हाथ लगा था। उससे पूँछताछ हो रही थी।
अंजन ने टीवी बंद कर दिया। परेशानी में वह हॉल में टहलने लगा। उसे ऐसा महसूस हुआ कि बेडरूम में उसके फोन की घंटी बज रही है। वह बेडरूम में गया। स्क्रीन पर कोई अंजान नंबर था। कुछ सोचकर उसने फोन उठा लिया। फोन उठते ही उधर से मीरा की आवाज़ सुनाई पड़ी। वह घबराई हुई बोल रही थी,
"अंजन.... अंजन प्लीज़ हेल्प मी। मुझे नहीं पता कि ये लोग कौन हैं पर इन्होंने मुझे कैद कर लिया है। मैं लंदन में ही कहीं हूँ। लेकिन बता नहीं सकती हूँ कहाँ। प्लीज़ तुम किसी तरह आ जाओ।"
अंजन ने उसे तसल्ली देते हुए कहा,
"मीरा तुम परेशान मत हो। मैं तुम्हें बचाने आऊँगा। तुम अपना खयाल रखना।"
"अंजन इन लोगों ने मेरा फ़ोन भी छीन लिया है। बड़ी मुश्किल से चोरी छिपे किसी और के फोन से बात कर रही हूँ। मेरे पास अधिक समय नहीं है। तुम जल्दी आ जाना।"
फोन कट गया। अंजन परेशान हो गया। उसने उस नंबर पर कॉल बैक किया तो एक अंग्रेज़ औरत ने उसे धमकाते हुए कहा कि अब मीरा की खैर नहीं है। उस औरत ने फोन काट दिया। उसके बाद दोबारा फोन नहीं लगा।
अंजन निढाल होकर फर्श पर बैठ गया। उसके बाद वहीं लेट गया। वह इस तरह से फर्श पर लेटा था जैसे कि उसे होश ही ना हो। कुछ समय तक वह बदहवास सा लेटा रहा। उसके मन ने पूरी तरह से हार मान ली थी।‌ यह भाव कि वह किसी भी लायक नहीं रहा उसे कचोट रहा था। मीरा की हालत के बारे में सोचकर उसका कलेजा फट रहा था। वह फोन पर बहुत असहाय लग रही थी। उससे गिड़गिड़ा कर मदद के लिए कह रही थी। लेकिन वह खुद इतना बेबस था कि उसकी कोई मदद नहीं कर सकता था।
उस अंग्रेज़ औरत ने जिस तरह से कहा था कि अब मीरा की खैर नहीं है उससे वह डर गया था। मीरा को लेकर उसके मन में अजीब से खयाल आ रहे थे। वह औरत कमज़ोर और बीमार मीरा को परेशान कर रही है। मीरा हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही है कि उसे छोड़ दे। लेकिन वह ज़ोर ज़ोर से हंस रही है। उसका मन कर रहा था कि किसी तरह भी लंदन पहुँच कर मीरा का उस पर जो भरोसा है उसे सच साबित कर दे।
यह सब सोचते हुए अजय मोहते के लिए उसका मन में गुस्से से भर गया था। वह उठा और अजय मोहते को फोन मिलाया। फोन उठाते ही अजय मोहते ने कहा,
"तो तुमने सोच लिया कि क्या करना है ?"
अंजन ने गुस्से में कहा,
"कमीने मुझसे कह रहे थे ‌कि अगर मैं पुलिस को कुछ नहीं बताऊँगा तो मीरा का खयाल रखोगे। यह खयाल रखा तुमने। बेचारी बहुत परेशान है।"
उसकी बात सुनकर अजय मोहते ने कहा,
"बात क्या हुई जो आपे से बाहर हो रहे हो ?"
अंजन ने उसी तरह गुस्से से कहा,
"मैं तो वैसे भी बर्बाद हो गया हूँ। लेकिन तुम्हें भी बर्बाद कर दूँगा। अभी तक तुम मुझे धमकी दे रहे थे। अब मैं कह रहा हूँ। मीरा को सही इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती करवाओ। मुझे खबर दो। नहीं तो मैं खुद को पुलिस के हवाले कर दूँगा। तुम्हारे सारे कारनामे उन्हें बताऊँगा।"
"बकवास मत करो अंजन.... पुलिस के पास जाओगे तो तुम भी मुसीबत में पड़ जाओगे।‌"
"मैंने कहा ना कि मैं बर्बाद हो चुका हूँ। अब तुम्हें भी बर्बाद कर दूँगा। ऐसा नहीं होने देना चाहते हो तो मीरा को हॉस्पिटल में भर्ती करवाओ।"
अजय मोहते कुछ क्षण शांत रहने के बाद बोला,
"देखो मैं मीरा की मदद करूँगा। पर तुम कोई बेवकूफी मत करना। मैं तुम्हें भी वहाँ से निकलवाने का प्रबंध करता हूँ। बस तुम कहाँ हो बता दो। मैं तुम्हें सुरक्षित सिंगापुर से निकलवा दूँगा।"
अंजन ने कहा,
"मैंने अभी तक अपने आप को पुलिस से दूर रखा है। इसलिए तुम मीरा की मदद करो। जितनी जल्दी हो सके इस बात के सबूत भेजो कि वह हॉस्पिटल में है। नहीं तो फिर मैं वो करूँगा जो मैंने कहा था।"
यह कहकर अंजन ने फोन काट दिया। फोन काटने के बाद उसका दिमाग काम करने लगा। प्रवेश गौतम पूँछताछ में उसके बारे में बता देगा। उसे यहाँ से निकलना होगा। उसके दिमाग में सागर खत्री का फार्म हाउस आया। वह वहाँ जा चुका था। फिलहाल उसके पास कहीं और जाने की जगह नहीं थी। निर्भय का मकान अजय मोहते के आदमी ने देख लिया था। उसने फार्म हाउस जाने का फैसला किया।
वह फौरन उठा। प्रवेश गौतम उसे कुछ पैसे दे गया था। उन्हें जेव में रखा। इसके अलावा प्रवेश गौतम उसे एक कार की चाभी दे गया था। जो नीचे पार्किंग में थी। उसे भूख लग रही थी। पर खाने का समय नहीं था। वह फ्लैट से निकल कर लिफ्ट से नीचे चला गया।
अंजन पार्किंग में पहुँचा। अपनी कार की तरफ जा रहा था कि सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज सामने आ गया। उसकी गन अंजन पर तनी हुई थी। कुछ ही देर में दूसरे पुलिस वालों ने भी उसे घेर लिया। अंजन गिरफ्तार हो गया।

एक दूसरे से संतुष्ट होने के बाद पामेला और दिनकर प्रधान कुछ देर तक एक दूसरे के आगोश में बंधे पड़े रहे।‌ कुछ देर बाद पामेला उठकर खड़ी हो गई। उसने अपने कपड़े पहने और नीचे चली गई। जब वह अपने कमरे में पहुँची तो उसने देखा कि मीरा उसके फोन से किसी से बात कर रही थी।‌ पामेला बहुत गुस्से वाली पागल औरत थी। मीरा ने उसके फोन से अंजन से बात की थी। इस बात पर उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने अपना फोन छीनकर कॉल काट दी। वह मीरा पर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी। शोर सुनकर दिनकर प्रधान अपने बिस्तर से उठा। जब वह नीचे आया तो पामेला अंजन को फोन पर धमकी दे रही थी कि अब मीरा की खैर नहीं है।‌
दिनकर प्रधान ने उसे समझाने की कोशिश की पर वह नहीं मानी। गुस्से में उसने मीरा के बाल पकड़े और उसका सर ज़ोर से दीवार पर दे मारा। सर फट गया। खून निकल रहा था। मीरा फर्श पर गिरी हुई थी। कुछ क्षणों में उसके प्राण निकल गए। यह देखकर दिनकर प्रधान परेशान के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। कुछ देर तक वह अपना सर पकड़े पामेला के बेड पर बैठा रहा।
पामेला भी घबरा गई थी। लेकिन वह पक्की खिलाड़ी थी। जल्दी ही उसने खुद को संभाल लिया। उसने दिनकर प्रधान से कहा कि जितनी जल्दी हो सके इस लाश को जंगल में जाकर फेंक आते हैं।
दिनकर उसकी मदद के लिए तैयार हो गया।
 
रिस्की लव - 60

अंजन की गिरफ्तारी के बाद सिंगापुर पुलिस की खूब तारीफ हो रही थी। खासकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज और उसकी टीम को खूब बधाइयां मिल रही थीं। इस समय सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इंस्पेक्टर हान लिम के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहा था। एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए वह कह रहा था,
"मैं अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी पर अपनी टीम, मेरे साथी इंस्पेक्टर हान लिम को बधाई देता हूँ। भारत से भागकर आया यह अपराधी हमारे देश में एक नकली पासपोर्ट के माध्यम से दाखिल हुआ था। मैं पूरी कोशिश करूँगा कि अंजन विश्वकर्मा को इस जुर्म के लिए हमारे देश के कानून के हिसाब से सज़ा दिला सकूँ। पिछली बार हमसे थोड़ी चूक हो गई थी। यह अपराधी बचकर निकल गया था।‌ लेकिन इस बार हमने इसे बड़ी सावधानी के साथ घेरा था। अंजन विश्वकर्मा के एक साथी प्रवेश गौतम से हमें उसके छिपने के ठिकाने का सही पता चल गया था। हमने बिना कोई देरी किए उसे गिरफ्तार कर लिया।"
एक पत्रकार ने सवाल किया,
"प्रवेश गौतम के पकड़े जाने की खबर पहले ही मीडिया में आ गई थी। आपको नहीं लगता कि यह ठीक नहीं था। इस बार भी अंजन के भाग निकलने के पूरे चांसेज़ थे।"
एक दूसरे पत्रकार ने कहा,
"वह भाग रहा था। उसे अपनी कार में बैठते समय पकड़ा गया। मीडिया में उसके साथी की गिरफ्तारी की खबर क्यों दी गई ?"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ‌ने गंभीरता से कहा,
"हमें भी इस बात का आश्चर्य है कि मीडिया तक खबर किसने पहुँचाई। पर हमारे ‌लिए अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण थी। अब वह पकड़ा जा चुका है। हम इस बात का भी पता लगा लेंगे। पर यह सवाल आप लोग अपने सहयोगियों से भी पूँछिए कि क्या कोई भी खबर ब्रेक करने से पहले ज़िम्मेदारी से उस पर विचार करना ज़रूरी नहीं है।"
पत्रकारो में खामोशी छा गई। कुछ देर बाद एक महिला पत्रकार ने पूँछा,
"भारत से भी एक टीम अंजन विश्वकर्मा को गिरफ्तार करने आई थी। क्या इस गिरफ्तारी में उनकी तरफ से भी कोई सहयोग मिला ?"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"हाँ मुंबई पुलिस की तरफ से एसीपी सत्यपाल वागले अपनी टीम लेकर आए थे। हमने उन्हें पूरा सहयोग दिया। लेकिन उनकी तरफ से ऐसी कोशिश नहीं हुई। पर हम अपने देश में गैरकानूनी तरीके से आ गए अपराधियों को पकड़ने में सक्षम हैं। हमने अंजन विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर लिया।"
उसके आगे प्रेस कॉन्फ्रेंस की कमान इंस्पेक्टर हान लिम ने संभाल ली। उसने बताया कि किस तरह उनकी टीम प्रवेश गौतम तक पहुँची। हान लिम ने यह भी बताया कि प्रवेश गौतम कुछ गैर कानूनी कामों में लिप्त है। उस पर अब अलग से जांच होगी।

एसीपी सत्यपाल वागले अपनी टीम के साथ कमरे में बैठे प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहा था। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने सारा श्रेय सिंगापुर पुलिस को दिया था। उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत से आई पुलिस टीम ने उनका कोई सहयोग नहीं किया। यह सुनकर उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था। उन्होंने ने कहा,
"शर्म नहीं आती है इसे। बार में अंजन विश्वकर्मा के होने की खबर हमने इसे दी थी। तब इसने लापरवाही दिखाई और अंजन विश्वकर्मा भाग निकला। उसके बाद भी हमने कितनी बार मदद के लिए हाथ बढ़ाया। लेकिन अपने अहंकार में इसने हमारी तरफ ध्यान ही नहीं दिया। अब इस तरह की बात कर रहा है।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने कहा,
"सर सही कह रहे हैं आप। बहुत ही बेशर्म इंसान है।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"हमारी टीम भी तो निकम्मी साबित हुई। नहीं तो सेहरा हमारे सर सजता। अब तो मुंबई जाकर जवाब देते हुए नहीं बनेगा। लेकिन अब कोशिश करनी है कि अंजन विश्वकर्मा को लेकर ही जाएं।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने कहा,
"सर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज क्या यह होने देगा।"
उसके इस सवाल पर एसीपी सत्यपाल वागले खीझकर बोला,
"वो क्यों करने देगा। लेकिन क्या हम बेशर्मों की तरह मुंबई लौट जाएंगे।‌ वहाँ जाकर अपना जुलूस निकलवाएंगे।‌ ऐसा समझो कि अब बस लंगोट बची है। कोशिश करना है कि यह बची रहे।"
पहली बार एसीपी सत्यपाल वागले ने गुस्से में इस तरह की भाषा का प्रयोग किया था। उसकी टीम के मेंबर्स चुप हो गए।

मुंबई में अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी मीडिया में सुर्खियां बनी हुई थी। एक तरफ तो गिरफ्तारी के लिए सिंगापुर पुलिस की तारीफ हो रही थी वहीं दूसरी तरफ एसीपी सत्यपाल वागले और उसकी टीम की खूब लानत मलामत हो रही थी। एक बार फिर यह बात चर्चा में थी कि मुंबई पुलिस की वह टीम सिर्फ सैर सपाटे के लिए गई थी। उन लोगों ने अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास नहीं किए थे।
सिंगापुर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की तारीफ के साथ इस बात पर भी चर्चा हो रही थी कि वह अंजन विश्वकर्मा को पहले अपने देश में गैरकानूनी तरीके से घुसने के लिए सज़ा दिलाएगा। लोग इसे भी एसीपी सत्यपाल वागले की हार ही मान रहे थे।
लेकिन कुछ लोग एसीपी सत्यपाल वागले और उसकी टीम का समर्थन भी कर रहे थे। उनका कहना था कि यह एसीपी सत्यपाल वागले के ही प्रयास थे जिनके कारण अंजन विश्वकर्मा के काले कारनामों पर से पर्दा हट सका। अंजन ने तो अपने काले कारनामों को दिखावे के कुछ अच्छे कामों के पीछे छिपा रखा था। जो लोग पहले अंजन का समर्थन कर रहे थे। एसीपी सत्यपाल वागले के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे वो सभी अब शांत हो गए थे।‌ वो ना तो अंजन के समर्थन में आ पा रहे थे और ना ही एसीपी सत्यपाल वागले की नाकामी पर उसे घेर पा रहे थे।

नफीस और शाहीन बालकनी ‌में बैठे चाय पी ‌रहे थे। शाहीन अब पूरी तरह से ठीक थी। उसे किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं थी। नफीस के क्राइम पर आधारित प्रोग्राम का अंतिम एपीसोड प्रसारित हो चुका था। इस समय वह एक नए शो की तैयारी में जुटा था।‌ यह शो अभी वह प्रयोग के तौर पर बनाना चाहता था। इसलिए यह मात्र ग्यारह एपीसोड की एक सीरीज़ होने वाली थी।‌ उसके चैनल से उसे हरी झंडी मिल गई थी। अब वह आरंभ के कुछ एपीसोड्स की कहानी लिख रहा था।
उसके नए शो का नाम भटकी राहें था। इस शो के माध्यम से नफीस कुछ ऐसे नौजवानों की कहानी लोगों के सामने पेश करने वाला था जो हालात का शिकार होकर जुर्म के रास्ते में आगे बढ़ गए थे। इन कहानियों के लिए रीसर्च का काम विनोद के ज़िम्मे था। विनोद ने उसे अब तक चार नौजवानों के बारे में जानकारी एकत्र करके दी थी। नफीस अब उनकी कहानी पर काम कर रहा था।
शाहीन ने चाय पीते हुए उससे पूँछा,
"तुम्हारे आने वाले शो की क्या प्रोग्रेस है ?"
"दो कहानियों पर काम पूरा हो गया है। उनका स्क्रीनप्ले लिख रहा हूँ। उसके बाद शूटिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। मैं बाकी की कहानियां तैयार करता रहूँगा।"
शाहीन ने सोचते हुए कहा,
"कॉन्सेप्ट तो नया है।"
नफीस गंभीर होकर बोला,
"इन कहानियों को लिखते समय मैं उन नौजवानों के बारे में सोचकर दुखी हो रहा था। कई बार ज़िंदगी ऐसे हालात पैदा कर देती है कि इंसान अपने आप को बेबस समझने लगता है। वह कर बैठता है जो वह कभी नहीं करना चाहता है।"
शाहीन ने उसकी तरफ ‌देखकर कहा,
"लेकिन सभी सिर्फ मजबूरी में अपराध का रास्ता नहीं अपनाते हैं। कुछ लोग जानबूझकर इस रास्ते पर आते हैं।"
नफीस समझ गया कि उसका इशारा अंजन की तरफ है। उसने कहा,
"तुम अंजन विश्वकर्मा की बात कर रही हो। बिल्कुल सही बात है। अंजन विश्वकर्मा जानबूझकर अपराध की दुनिया में आया। उसने जो किया सिर्फ अपने फायदे के लिए किया।"
"तब भी तुम उसके बारे में किताब लिख रहे हो‌ ?"
शाहीन ने अपनी बात कहकर उसकी तरफ सवालिया निगाहों से देखा।‌ नफीस ने कहा,
"उसने गलत किया तो आज कानून की गिरफ्त में है। उसकी किताब के ज़रिए यही संदेश लोगों तक जाएगा कि अपराध करने वालों का बुरा इल्ज़ाम होता है।"
शहीन अभी भी हार मानने वाली नहीं थी। उसने कहा,
"अगर अंजन पकड़ा ना जाता तो ? तुमने तो पहले ही किताब लिखना शुरू कर दिया था।"
"ठीक है कि वह अभी पकड़ा गया। पर मैंने अब तक उसके बारे में जो लिखा कहीं भी उसके गलत कामों को ग्लोरीफाई नहीं किया। अपनी पिछली किताबों में भी मैंने अपराधियों के जीवन के अंधेरे पहलू दिखाए हैं। मेरे पिछले शो के हर एपीसोड के अंत में भी मैं यही कहता था कि गुनाह हमेशा दुर्गति के रास्ते पर ले जाता है।"
नफीस का यह तर्क सुनकर शाहीन कुछ नर्म पड़ी। वह सोचने लगी कि आज तक उसने यह कहकर कि उसे क्राइम पर लिखी किताबें और प्रोग्राम पसंद नहीं हैं, ना तो नफीस की किताबें पढ़ी थीं और ना ही प्रोग्राम देखा था। फिर भी उससे ऐसी बातें कर रही थी। उसने कहा,
"एक बात बताओ पिछली बातें तो तुम्हें पता थीं‌। अब नया जो कुछ भी अंजन विश्वकर्मा के साथ हुआ है उसके बारे में कैसे लिखोगे।"
"कोशिश करता हूँ कि ‌अंजन विश्वकर्मा के बारे में सबकुछ पता कर सकूँ।"
नफीस की चाय खत्म हो चुकी थी। खाली प्याला ट्रे में रखकर वह अंदर अपनी स्टडी में चला गया।
 

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