जाँघ से थोड़ा उपर उसके नर्म चूतड़ भी हिचकोले खाते हुए इधर उधर हो रहे थे...
जैसे नर्म मक्खन से बने दो गुंबद उसके हाथ लगाने से डॅन्स करने लगे हो...
मन तो उसका कर रहा था उन्हे भी दबोचने का पर वो हद में रहकर ही सब कुछ करना चाहता था ताकि मर्यादा बनी रहे.
कुछ देर तक वैसे करने के बाद वो बोला : "पीछे शायद प्राब्लम नही है....तुम पलट जाओ, मैं आगे से चेक करता हूँ .....''
राजेश ने उसे बोल तो दिया पलटने के लिए पर उसका खुद का लंड उसके साथ विद्रोह कर रहा था...
उसकी पेंट में उसने हाहाकार मचा रखा था...बड़ी मुश्किल से उसने चांदनी के पलटने से पहले अपने लंड को साइड में एडजस्ट किया
चाँदनी अपने नशीले बदन को घुमाकर पलट गयी...
उसके गुलाबी चेहरे को देखकर सॉफ पता चल रहा था की उसकी हालत कितनी खराब हो रही है इस वक़्त....
उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी....
टी शर्ट में उसके नुकीले निप्पल सॉफ दिख रहे थे...
उसकी टी शर्ट भी थोड़ा खिसक कर उपर आ चुकी थी और उसकी धँसी हुई सैक्सी नाभि साफ़ दिखाई दे रही थी...
एकदम सपाट पेट था उसका.
और जैसे ही उसकी नज़र नीचे होते हुए उसकी चूत वाले हिस्से पर गयी, उसे वहां एक गीला धब्बा साफ दिखाई देने लगा..
यानी जब वो उल्टी होकर लेती थी तो अपनी चूत को वो बेड पर घिस भी रही थी...
और उत्तेजना वश उसकी चूत का रस निकल कर उसकी शॉर्ट्स पर आ लगा था...
राजेश समझ चुका था की लड़की गर्म है, ऐसे में वो कुछ भी करेगा तो वो बुरा नही मानेगी.
वो बुरा मानेगी या नही, ये जानने के लिए उसने इस बार हाथ सीधा उसके पेट पर रख दिया....
वो किसी नागिन की तरह मचल उठी..
''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....आआआआआआआआआआआआआअहह...........''
आँखे बंद थी उसकी पर राजेश के स्पर्श ने उसे बेकाबू सा कर रखा था...
राजेश ने उसके शरीर से हाथ हटाए बिना अपना हाथ खिसकाते हुए नीचे करना शुरू किया...
राजेश का हाथ उसकी शॉर्ट्स के बेल्ट वाले हिस्से को छूता हुआ जैसे ही चूत पर बने उस धब्बे तक पहुँचा तो उसे अपना हाथ सुलगता हुआ सा महसूस हुआ...
अंदर से आ रही गर्म हवा उसके हाथ की उंगलियो को झुलसा सा रही थी...
गीले कपड़े से निकल रही सोंधी खुश्बू अब पूरे कमरे में फैल चुकी थी.
राजेश का हाथ वहीँ रुक सा गया और बाकी का काम चाँदनी ने खुद कर दिया...
मचलते हुए उसने अपना हाथ राजेश के हाथ पर रखकर उसे ज़ोर से दबा दिया और एक जोरदार सिसकारी मारी...
''आआआआआआआआआआआहह अंकल.................उम्म्म्ममममममममम........... यहीं हो रहा है दर्द.......बहुत ज़्यादा........''
ऐसा कहते हुए उसने अपनी आँखे खोल दी.
और उसी वक़्त जैसे राजेश को अपनी ग़लती का एहसास हुआ...
वो भला ये क्या करने जा रहा था.
अपनी बेटी की सहेली के साथ वो ऐसे कैसे कर सकता है...
चाँदनी ने जैसे उसकी आँखो मे आई इस कशमकश को पढ़ लिया
वो बोली : "प्लीज़ अंकल....चेक करो ना....ठीक से....''
राजेश : "न....नही...चाँदनी.....ये....ये ग़लत है...''
चाँदनी उठकर बैठ गयी और राजेश के दोनो हाथों को पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और बोली : "आप ऐसे क्यों बोल रहे हैं.....मेरी जगह अगर ईशा होती तो आप उसका भी तो चेकअप करते ना.....''
ईशा का नाम लेकर जैसे उसने आग में घी सा डाल दिया...
ये राजेश की लाइफ का वो काला सच था जो उसने आज तक किसी को नही बताया था..
उसे अपनी जवान हो रही बेटी से बहुत लगाव था और वो लगाव कब वासना में बदल गया था वो भी नही जानता था...
घर मे जवान बेटी को दिन रात अपने सामने देखना, उसके छोटे-2 कपड़ो से झाँक रही जवानी को चोरी छुपे देखकर अपनी आँखे सेंकना, उसे गले से लगाकर उसके नन्हे चुचे अपनी छाती पर महसूस करना या बेबाकी से कभी उनपर हाथ लगा देना ये उसका रोज का नियम था, कई बार जब वो लाड करते-2 उसकी बाँहों में ही सो जाती थी तो वो अपने हाथ उसकी कमर और नर्म कुल्हो पर फेरता रहता था और रजनी की नज़रें जब उसपर नही होती थी तो वो उसके होंठो को चूम भी लेता था, पर ज़्यादा ज़ोर से नही...
और आज चाँदनी ने इस मौके पर ईशा का नाम लेकर उसके अंदर अपनी बेटी के लिए दबी उन भावनाओं को और भड़का दिया था जिसके बारे में उसके सिवा किसी और को पता नही था...
और वो ईशा को हीरोइन बनाने पर भी इसी वजह से तुला हुआ था क्योंकि वो चाहता था की वो इस फील्ड में आकर खुल जाए ताकि वो उसकी निखर रही जवानी का अच्छे से मज़ा ले पाए..
चाँदनी ने उसके चेहरे पर उड़ रही हवाइयाँ देखी तो वो बोली : "मुझे भी आप ईशा ही समझो ना ....... पापा..''
'पापा' उसने इतनी मासूमियत से बोला की राजेश को एक पल के लिए लगा की उसकी खुद की बेटी ईशा उसके सामने आकर खड़ी हो गयी है..
चाँदनी ने अपने हाथ में पकड़े राजेश के हाथो को अपनी छाती पर रखकर ज़ोर से दबा दिया....
राजेश के हाथ काँप गये अपनी हथेली पर चाँदनी के निप्पल्स की चुभन महसूस करके.
चाँदनी : "आओ ना पापा......प्लीज़ मेरा चेकअप करो...''
इतना कहते हुए उसने राजेश को बेड पर बिठा दिया और खुद उसकी गोद में आकर बैठ गयी...
राजेश का एक हाथ उसकी कमर पे था और दूसरा अभी भी उसकी गोल चुचियों पर, जिन्हे वो होल-2 दबाने लग गया था..
जैसे नर्म मक्खन से बने दो गुंबद उसके हाथ लगाने से डॅन्स करने लगे हो...
मन तो उसका कर रहा था उन्हे भी दबोचने का पर वो हद में रहकर ही सब कुछ करना चाहता था ताकि मर्यादा बनी रहे.
कुछ देर तक वैसे करने के बाद वो बोला : "पीछे शायद प्राब्लम नही है....तुम पलट जाओ, मैं आगे से चेक करता हूँ .....''
राजेश ने उसे बोल तो दिया पलटने के लिए पर उसका खुद का लंड उसके साथ विद्रोह कर रहा था...
उसकी पेंट में उसने हाहाकार मचा रखा था...बड़ी मुश्किल से उसने चांदनी के पलटने से पहले अपने लंड को साइड में एडजस्ट किया
चाँदनी अपने नशीले बदन को घुमाकर पलट गयी...
उसके गुलाबी चेहरे को देखकर सॉफ पता चल रहा था की उसकी हालत कितनी खराब हो रही है इस वक़्त....
उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी....
टी शर्ट में उसके नुकीले निप्पल सॉफ दिख रहे थे...
उसकी टी शर्ट भी थोड़ा खिसक कर उपर आ चुकी थी और उसकी धँसी हुई सैक्सी नाभि साफ़ दिखाई दे रही थी...
एकदम सपाट पेट था उसका.
और जैसे ही उसकी नज़र नीचे होते हुए उसकी चूत वाले हिस्से पर गयी, उसे वहां एक गीला धब्बा साफ दिखाई देने लगा..
यानी जब वो उल्टी होकर लेती थी तो अपनी चूत को वो बेड पर घिस भी रही थी...
और उत्तेजना वश उसकी चूत का रस निकल कर उसकी शॉर्ट्स पर आ लगा था...
राजेश समझ चुका था की लड़की गर्म है, ऐसे में वो कुछ भी करेगा तो वो बुरा नही मानेगी.
वो बुरा मानेगी या नही, ये जानने के लिए उसने इस बार हाथ सीधा उसके पेट पर रख दिया....
वो किसी नागिन की तरह मचल उठी..
''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....आआआआआआआआआआआआआअहह...........''
आँखे बंद थी उसकी पर राजेश के स्पर्श ने उसे बेकाबू सा कर रखा था...
राजेश ने उसके शरीर से हाथ हटाए बिना अपना हाथ खिसकाते हुए नीचे करना शुरू किया...
राजेश का हाथ उसकी शॉर्ट्स के बेल्ट वाले हिस्से को छूता हुआ जैसे ही चूत पर बने उस धब्बे तक पहुँचा तो उसे अपना हाथ सुलगता हुआ सा महसूस हुआ...
अंदर से आ रही गर्म हवा उसके हाथ की उंगलियो को झुलसा सा रही थी...
गीले कपड़े से निकल रही सोंधी खुश्बू अब पूरे कमरे में फैल चुकी थी.
राजेश का हाथ वहीँ रुक सा गया और बाकी का काम चाँदनी ने खुद कर दिया...
मचलते हुए उसने अपना हाथ राजेश के हाथ पर रखकर उसे ज़ोर से दबा दिया और एक जोरदार सिसकारी मारी...
''आआआआआआआआआआआहह अंकल.................उम्म्म्ममममममममम........... यहीं हो रहा है दर्द.......बहुत ज़्यादा........''
ऐसा कहते हुए उसने अपनी आँखे खोल दी.
और उसी वक़्त जैसे राजेश को अपनी ग़लती का एहसास हुआ...
वो भला ये क्या करने जा रहा था.
अपनी बेटी की सहेली के साथ वो ऐसे कैसे कर सकता है...
चाँदनी ने जैसे उसकी आँखो मे आई इस कशमकश को पढ़ लिया
वो बोली : "प्लीज़ अंकल....चेक करो ना....ठीक से....''
राजेश : "न....नही...चाँदनी.....ये....ये ग़लत है...''
चाँदनी उठकर बैठ गयी और राजेश के दोनो हाथों को पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और बोली : "आप ऐसे क्यों बोल रहे हैं.....मेरी जगह अगर ईशा होती तो आप उसका भी तो चेकअप करते ना.....''
ईशा का नाम लेकर जैसे उसने आग में घी सा डाल दिया...
ये राजेश की लाइफ का वो काला सच था जो उसने आज तक किसी को नही बताया था..
उसे अपनी जवान हो रही बेटी से बहुत लगाव था और वो लगाव कब वासना में बदल गया था वो भी नही जानता था...
घर मे जवान बेटी को दिन रात अपने सामने देखना, उसके छोटे-2 कपड़ो से झाँक रही जवानी को चोरी छुपे देखकर अपनी आँखे सेंकना, उसे गले से लगाकर उसके नन्हे चुचे अपनी छाती पर महसूस करना या बेबाकी से कभी उनपर हाथ लगा देना ये उसका रोज का नियम था, कई बार जब वो लाड करते-2 उसकी बाँहों में ही सो जाती थी तो वो अपने हाथ उसकी कमर और नर्म कुल्हो पर फेरता रहता था और रजनी की नज़रें जब उसपर नही होती थी तो वो उसके होंठो को चूम भी लेता था, पर ज़्यादा ज़ोर से नही...
और आज चाँदनी ने इस मौके पर ईशा का नाम लेकर उसके अंदर अपनी बेटी के लिए दबी उन भावनाओं को और भड़का दिया था जिसके बारे में उसके सिवा किसी और को पता नही था...
और वो ईशा को हीरोइन बनाने पर भी इसी वजह से तुला हुआ था क्योंकि वो चाहता था की वो इस फील्ड में आकर खुल जाए ताकि वो उसकी निखर रही जवानी का अच्छे से मज़ा ले पाए..
चाँदनी ने उसके चेहरे पर उड़ रही हवाइयाँ देखी तो वो बोली : "मुझे भी आप ईशा ही समझो ना ....... पापा..''
'पापा' उसने इतनी मासूमियत से बोला की राजेश को एक पल के लिए लगा की उसकी खुद की बेटी ईशा उसके सामने आकर खड़ी हो गयी है..
चाँदनी ने अपने हाथ में पकड़े राजेश के हाथो को अपनी छाती पर रखकर ज़ोर से दबा दिया....
राजेश के हाथ काँप गये अपनी हथेली पर चाँदनी के निप्पल्स की चुभन महसूस करके.
चाँदनी : "आओ ना पापा......प्लीज़ मेरा चेकअप करो...''
इतना कहते हुए उसने राजेश को बेड पर बिठा दिया और खुद उसकी गोद में आकर बैठ गयी...
राजेश का एक हाथ उसकी कमर पे था और दूसरा अभी भी उसकी गोल चुचियों पर, जिन्हे वो होल-2 दबाने लग गया था..








