रजनी की गांड से रिस रिसकर ढेर सारा बिरजू का रस निकलने लगा और चूत में से उसका खुद का.माहौल एकदम शांत हो चुका था.दोनो गहरी साँसे लेते हुए एक दूसरे के उपर गिरकर संभलने की कोशिश कर रहे थे.

तब रजनी ने पहली बार उसके काले भूसंद लॅंड को देखा..काले नाग जैसा ख़ूँख़ार था वो..गांड मारने के बाद अपने ही रस में डूबकर अब सुस्ता रहा था..उसकी नसें दूर से ही चमक रही थी..

और जिस काले लॅंड की कल्पना उसने आज तक की थी, वो उससे भी ज़्यादा निकला..और एक अंजान सम्मोहन में बँधी रजनी का सिर खिसक-2 कर अपने आप उसके लॅंड की तरफ जाने लगा..

बिरजू के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी ये सोचते ही की अब ये रसीली भाभी उसके मोटे लॅंड को मुँह में लेगी..अभी तो पूरा दिन पड़ा था.और इस पूरे दिन में उसे क्या-2 करना है ये वो अच्छी तरह से जानता था.

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अब आगे
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रजनी की लपलपाती जीभ ने बिरजू के लॅंड को छुआ तो उसे करंट सा लगा..
बिरजू ने शायद कल्पना भी नही की थी की इतने ऊँचे घराने की औरत उसके लॅंड को चूसने के लिए इतनी बेकरार होगी..
बिरजू की आँखो में भी हवस की परछाईयाँ एकदम से उमड़ी और उसने रजनी के बाल पकड़कर अपना पूरा लौड़ा एक ही बार में उसके मुँह में घुसेड डाला.

बेचारी गुं गुं करती हुई छटपटाने लगी.
शायद उसकी साँस अटक रही थी इतना बड़ा लॅंड मुँह में लेने से.
पर उसे मज़ा बहुत आ रहा था.
इसलिए जब बिरजू ला रस से सना लॅंड उसके मुँह मे गया तो वो उसे बुरी तरह से चूसने लगी.
जैसे लॉलिपोप..
और उसकी नसों में फंसी आख़िर की चंद बूंदे भी उसने अंदर फूँक मारकर निगल डाली.

तभी दरवाजे पर एक आहट सी हुई.
बिरजू ने देखा तो उसकी बीबी पिंकी खड़ी थी.
वो उसे देखकर मुस्कुरा दिया.
उसके हाथ में ट्रे थी जिसमे बड़े से काँच के ग्लास में बादाम वाला दूध था..

रजनी ने तिरछी नज़रों से देखा की कौन है, और पिंकी को देखकर वो एक बार फिर से अपने काम में लग गयी.
पिंकी का बदन अपने सामने का नज़ारा देखकर सुलग सा उठा.
वैसे तो उसे पता था की उसका मर्द दूसरी औरतों के पास जाता है पर ऐसे उसे किसी दूसरी औरत के साथ देखने के ये पहला मौका था.
अपनी मालकिन को अपने पति के लॅंड को चूसते देखकर उसे इस वक़्त खुद मालकिन होने का एहसास हो रहा था.
कैसे ये बड़े घर की औरतें मोटे लॅंड की दीवानी होती है.
अपने ही घर में काम करने वाली औरत के पति का लॅंड वो ऐसे चूस रही थी जैसे इसी दिन के लिए पैदा हुई थी वो..
मालकिन और नौकर के अंतर को ख़त्म करते इस दृश्य ने एक अलग सा एहसास करवाया पिंकी को.



पिंकी आगे चलकर आई और बादाम मिल्क अपने पति को देते हुए बोली : "लो जी.ये पी लो, इस से ताक़त मिलेगी..ताकि आप मालकिन की अच्छी तरह से सेवा कर सके.''
बिरजू ने मुस्कुराते हुए वो ग्लास ले लिया और एक लंबे घूंठ के साथ वो दूध पी डाला.
उसने देखा की पिंकी की नज़रें नागिन बनकर उल्टी लेती मालकिन के जिस्म पर फिसल रही थी.
उसे देखकर बिरजू को एक ख़याल आया और वो बोला : "एक काम करो..तुम भी आओ.और नीचे से मालकिन को चूसो.तैयार करो इनकी चूत को मेरे लॅंड को लेने के लिए.''
बिरजू की बात सुनकर रजनी का शरीर काँप सा उठा.
एक साथ दोहरे मज़े की कल्पना मात्र से ही उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
नीचे ईशा नहाने के बाद सो चुकी थी, इसलिए पिंकी भी खाली थी अब.
और ऐसे रसीले दृश्य को देखकर सच कहो तो उसकी चूत भी पनिया चुकी थी.
इस वक़्त उसकी चूत का हाल ये था की चाहे तो उसके पति का लंड मिल जाए या उसकी मालकिन की चूत की रगड़ ,वो दोनो से ही काम चला लेगी
पर उसके लिए पहले मालकिन की सेवा भी तो करनी पड़ेगी ना.
उसने जल्दी-2 अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए.
पहले साड़ी और फिर पेटीकोट और ब्लाउज़.
कच्छी वो पहनती नही थी..
और ब्रा उसकी फट चुकी थी जो फेंकने वाली हो रही थी..
इसलिए उसने उसे खुद ही फाड़ते हुए निकाल कर फेंक दिया.
एक मिनट से भी कम समय में वो जन्मजात नंगी खड़ी थी.

 
उसके होंठ फड़फडा से रहे थे मानो जो भी पहली चीज़ मिलेगी उन्हे चूस कर पी जाएगी पूरा.चाहो वो होंठ हो, लॅंड हो या फिर चूत.
उसके स्तन पूर्ण रूप से उत्तेजना में भरकर कड़क हो चुके थे और अंदर की मांसपेशियाँ अपना मर्दन करवाने के लिए मछली की तरह मचलकर व्याकुल हो रही थी.
उसके मोटे निप्पल्स तन कर इतने कठोर हो चुके थे की उन्हे कोई उंगलियो के बीच रखकर दबा दे तो वो पानी के गुब्बारे की तरह फट पड़ते
यही हाल उसके समतल पेट का था जो गहरी साँसे छोड़ते हुए थोड़ा बाहर निकलता तो अंदर धँसी नाभि उसे तुरंत वापिस खींचकर अपने अंदर समेट लेती..
और सबसे ज़्यादा उत्तेजना तो उसकी चूत से निकल रही थी.
निकल क्या बह रही थी.
इस वक़्त उसकी चूत का हाल उस सरकारी नल की तरह था जो खराब होने के कारण लगातार बहे जा रहा था..
अपनी चूत से निकल रहे गाड़े रस को वो अपनी जाँघो पर लकीर बनकर नीचे जाते हुए सॉफ महसूस कर पा रही थी.
कुल मिलाकर उसका पूरा बदन इस वक़्त उस प्यार के खेल में डुबकी लगाने के लिए पूरा तैयार था.



और जैसा की बिरजू ने उसे कहा था, वो रेंगती हुई रजनी के पैरों की तरफ लेट गयी और उनकी दोनो टांगो के बीच घुसकर अपना मुँह उनकी रिस रही चूत से लगाकर उसे चूसने लगी.
बिरजू का लॅंड चूस रही रजनी को जब ये एहसास हुआ की उसकी लीक कर रही चूत को ठीक करने के लिए पिंकी प्लम्बर बनकर आ गयी है तो उसकी दोनो टांगे खुद ब खुद और भी ज़्यादा फैल गयी..
लगातार दूसरे दिन वो पिंकी के होंठो को अपनी चूत पर महसूस कर रही थी.
और मानना पड़ेगा की उसके चूसने की कला की वो कायल हो चुकी थी.
शायद उसके होंठ मोटे थे
इस वजह से उन्हे अपनी चूत पर महसूस करके उसे ये एहसास मिल रहा था जैसे कोई रबड़ से बनी मशीन उसकी चूत की चुसाई कर रही है.
पिंकी के होंठ और जीभ अंदर तक जाकर उसकी चूत को पी रहे थे और बदले में रजनी भी उतनी ही ज़्यादा उत्तेजना में भरकर उसके पति का लॅंड चूस रही थी.
कुछ ही देर में पिंकी ने उसकी चूत का सारा रस चाट कर सॉफ कर दिया.
पर उसकी चूत की चिकनाहट ना ख़त्म कर पाई क्योंकि वो तो अंदर से रिस रहा था .
और वो ज़रूरी भी था क्योंकि बिरजू के मोटे लॅंड को अंदर धकेलने में इसी चिकनाहट ने बहुत बड़ी भूमिका जो निभानी थी..
नीचे का सारा काम निपटा कर पिंकी भी साँप की तरहा रेंगती हुई उपर की तरफ आ गयी .
रजनी ने थोड़ा साइड होकर उसे भी जगह दे दी और पिंकी ने उसके मुँह से थोड़ा नीचे होकर अपने पति बिरजू के लटक रहे टट्टों को चूसना शुरू कर दिया.
''आआआआआआआआआहह...शाबाश..भेंन की लौड़ी ....आज सच में मज़ा मिला है मुझे ....चूस मेरे टट्टों को....तू भी चूस कुतिया मेरे लॅंड को..आज जैसा मज़ा तो मुझे कभी नही मिला.''



एक नौकर जात इंसान के मुँह से अपने लिए कुतिया शब्द भी इस वक़्त रजनी को अपनी तारीफ जैसा लग रहा था..
लगता भी क्यों नही..
आख़िर वो चूस ही किसी कुतिया की तरह रही थी उसके लंड को..
इतने मोटे..
इतने स्वादिष्ट लॅंड को तो खा जाने का मन कर रहा था उसका.
पर अभी तो उसे चूत में भी लेना था..
और अब उससे ज़्यादा इंतजार नही हो रहा था.
 
वो पीछे होकर अपनी टांगे फेला कर लेट गयी..
बिरजू भी समझ गया की अब वक़्त आ चुका है.
ज़्यादा देर करना अब ठीक नही.

वो भी खिसककर आगे आया और उसकी दोनो जाँघो को पकड़कर उसकी आँखों में देखा..
जो न्योता देकर उसके लंड को अपने अंदर बुला रही थी.

बिरजू ने लॅंड का काला सुपाड़ा उसकी गोरी चूत पर रखा और उसके कुछ समझने से पहले ही एक जोरदार झटका मारकर अपना मोटा लॅंड अंदर खिसका दिया.

''आआआआआआआआआआययययययययययययययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई...... मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी.......''



पिंकी भी मुस्कुरा दी अपनी मालकिन का रोना सुनकर...
वो जानती थी अपने पति के स्टाइल को..
उसके साथ भी वो ऐसे ही करता था..
चूत चाहे गीली हो या सुखी,
एक ही झटके में लॅंड अंदर डालने का हुनर था उसके पास..
हालाँकि हर बार उसे दर्द ज़रूर होता था ऐसा करवाने में .
पर थोड़ी देर बाद उतना ही मज़ा भी आने लगता था.
और यही हाल अब रजनी का भी हो रहा था..
पहले तो उसे लगा जैसे एक बाँस का मोटा टुकड़ा उसकी टॅंगो के बीच डाल दिया है.
जो उसकी संतरे की फांको को चीरा हुआ अंदर घुसता चला गया..
पर जब 2-4 घिस्से लगवाने के बाद उसके मज़े का एहसास हुआ उसे तो एक मीठी सी सिसकारी निकली उसके मुँह से...
आँखे खुद ब खुद बंद हो गयी..
होंठो ने फड़कना छोड़ दिया.
और गीली जीभ निकलकर उसके खुद के सूखे होंठो को गीला करने लगी..



बिरजू ने नीचे झुकते हुए अपना पूरा भार उसके उपर डाला और अपना लंड उसकी जड़ तक घुसा कर अंदर ठोकर मारी और साथ ही साथ उसके रसीले होंठो को अपने मुँह मे लेकर ऐसे चूसने लगा जैसे ग़रीब बच्चे को सिल्क चॉक्लेट मिल गयी हो..
वो उसे बुरी तरह से नोचकर चूस रहा था..
और साथ ही साथ नीचे से अपने लंड के करारे धक्के मारकर उसकी चूत का बेंड भी बजा रहा था.
उस बेंड पर अपने शरीर की थिरकन के साथ रजनी ऐसे नाच रही थी मानो जिंदगी में पहली बार चुदाई करवा रही हो.
''आआआआआआआआआआआआअहह...बिरजू.........क्या लॅंड है रे तेरा..मजाआाआआआआआअ आ गय्ाआआआआआआआआआ..... उम्म्म्मममममममममममममममम... चूत पूरी भर गयी है रे मेरी..''



अपनी और अपने लॅंड की तारीफ भला किसे पसंद नही आती.
बिरजू को भी आई और उसके परिणाम स्वरूप उसने और तेज़ी से अपने लॅंड के धक्के रजनी की चूत में मारने शुरू कर दिए..
उसके हर झटके से रजनी के मोटे मुम्मे उसके खुद के ही मुँह पर आकर लग रहे थे..
ऐसी वहशिपन से भरी चुदाई उसकी राजेश ने भी नही की थी आज तक.
और इसलिए भी उसे बिरजू की ये चुदाई कुछ ज़्यादा पसंद आ रही थी.
 
सामने ही बिस्तर पर पड़ी पिंकी भी अपनी काले रंग की चूत को बुरी तरह से मसल रही थी..
और बुदबुदा रही थी..

''अहह...क्या चोद रहा है रे बिरजू...ऐसे मुझे तो ना चोदा तूने आज तक...जल्दी निपटा मालकिन को..मेरी चूत की प्यास भी बुझानी है तुझे...अहह''

रजनी तो अपने ऑर्गॅज़म के काफ़ी करीब थी..
पहले अपनी गांड मरवाते हुए भी उसकी चूत से काफ़ी रस निकला था.
और अब भी उसकी चूत फटने के कगार पर थी..
और जल्द ही उसने अपनी दोनो टांगे बिरजू के गठीले बदन के चारों तरफ लेपेटी और अपने मुम्मे उसके गले से लगाकर उसे अपने उपर खींच लिया...
और झड़ते हुए ज़ोर से चिल्ला उठी..

''आआआआआआआआआआआआआहह... मैं तो गयी ...बिरजू...अहह.. मैं तो गयी रे...''



बिरजू ने जब अपना तना हुआ लॅंड रजनी की चूत से बाहर खींचा तो पिंकी लपक कर उसके करीब आई और उस रस से सने लॅंड को अपने मुँह में लेकर उसे चूसने लगी.
ये उसने इसलिए किया क्योंकि उसे लॅंड चूसना पसंद था
और इसलिए भी क्योंकि उसे रजनी के जूस का स्वाद और भी ज़्यादा पसंद था.
अपने पति के लॅंड को चूसने में शायद उसे आज तक इतना रोमांच महसूस नही हुआ था जितना आज हो रहा था.
सामने गहरी साँसे ले रही रजनी उन दोनो की प्रेम लीला देखकर अपने आप को संभालने की कोशिश कर रही थी..
बिरजू के लॅंड को पूरा सॉफ करके उसने उसे बेड पर धक्का दिया और टांगे तिरछी करके उसपर चढ़ गयी.
और उसकी आँखो में देखते हुए बोली
''तुझे पता है ना.मुझे उपर बैठकर करवाना ज़्यादा पसंद है.''
और फिर मुस्कुराते हुए उसने लॅंड को चूत पर टीकाया और उसपर फिसलती चलयी गयी...
ऐसा लागास जैसे वॉटर पार्क में किसी स्लाइड से पूल में फिसल रही हो..
और फिर दोनो ने एक दूसरे के हाथ पकड़े और लय से लय मिलाकर चुदाई करने लगे.
बिरजू के झटके नीचे से उपर आ रहे थे और पिंकी के उपर से नीचे..
दोनो की चुदाई देखकर रजनी को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था..



और जल्द ही उस चुदाई का फल दोनो के चेहरे पर दिखाई देने लगा.
बिरजू तो दूसरी चूत मारने के कारण झड़ने के कगार पर पहुँच गया और पिंकी इतनी देर से अपनी चूत में उत्तेजना के सैलाब को दबाए रखने के बाद उसे निकालने की जल्दी में ..
और जब दोनो एक साथ झडे तो उनकी सिसकारियों ने पूरे घर को सिर पर उठा लिया.
पूरा कमरा सैक्स से भरी सिसकारियो से गूँज उठा..
''आआआआआआआआआअहह...बिरजू...आअह्ह्हहह.. मैं तो गयी रे...अहह....''
सब कुछ शांत होने के बाद वो बिरजू के साइड में लूड़क गयी..
एक तरफ रजनी थी और दूसरी तरफ पिंकी..
और बीच में दोनो की चुदाई के बाद गहरी साँसे लेता हुआ बिरजू.
आज उसे शायद अपनी किस्मत पर विश्वास नही हो रहा था.
पर जो भी था.
आज का दिन उसका था.
बाद में वो कपड़े पहन कर बाहर निकल गया..
ऐसी मस्ती से भरी चुदाई करवाने के बाद रजनी का अंग-2 टूट रहा था.
उसने तो उठने की भी जहमत नही उठाई.
वैसे ही नंगी अवस्था में सो गयी.



पिंकी ने सारे कपड़े समेत कर साइड में रखे और खुद अपने कपड़े पहन कर नीचे जाकर काम करने लगी.
आज के दिन का रोमांच पूरे दिन रहने वाला वाला था
 
बाद में बिरजू कपड़े पहन कर बाहर निकल गया..
ऐसी मस्ती से भरी चुदाई करवाने के बाद रजनी का अंग-2 टूट रहा था.
उसने तो उठने की भी जहमत नही उठाई.
वैसे ही नंगी अवस्था में सो गयी.

पिंकी ने सारे कपड़े समेत कर साइड में रखे और खुद अपने कपड़े पहन कर नीचे जाकर काम करने लगी.
आज के दिन का रोमांच पूरे दिन रहने वाला वाला था

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अब आगे
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वहाँ हॉस्पिटल में पहुँचकर राजेश का किसी भी काम में मन नही लग रहा था..
हालाँकि एक डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम करना था उसे पर उसका दिमाग़ घर पर हुई बातों से हट ही नही रहा था.

उसका असिस्टेंट 2 बार उसे बुलाकर जा चुका था पर वो अपने केबिन में बैठा हुआ सुबह हुई बातों की गहराई में उतरने का प्रयास कर रहा था..

उसके दिमाग़ में शुरू से अंत तक सब कुछ फिल्म की भाँति चल रहा था.
जैसा की शुरू में उसने सोचा था की ये जो कुछ भी हो रहा है वो शेफाली की आत्मा का ही असर है
पर बाद में जब उसने रजनी की डायरी पढ़ी तो उसे सच्चाई का पता चला.
और उस सच्चाई के साथ-2 उसे ये भी पता चला की उसकी खुद की ही बेटी उस से चुदने के लिए कितनी लालायित है.
और यही हाल उसकी सहेली चाँदनी का भी था.
रजनी भी अपनी सैक्स लाइफ में थोड़ा मसाला घोलने के लिए ये सब कर रही थी और ये सब वो चाँदनी की माँ यानी राधिका के साथ मिलकर कर रहे थे.उनके साथ-2 पिंकी भी बीच में आकर फ्री के मज़े दे गयी.

यानी हर तरफ चुदाई का अच्छा ख़ासा इंतज़ाम था.
फिर अचानक ऐसा क्या हो गया की आज सुबह वो सब उसके साथ ऐसा व्यवहार कर रहे थे.
जैसे आज से पहले कुछ हुआ ही ना हो.
ऐसा क्यों किया होगा उन्होने.

कहीं सच में तो उस हार में शेफाली की आत्मा का असर नही था.
जो शायद अब उनके उपर से निकल चुका था.
उसने हिसाब लगाकर देखा की कब शेफ़ाली की मौत हुई थी ,
पूरे 10 दिन हो चुके थे ,
यानी मान लिया जाए की हार का असर है तो वो 10 दिन तक ही रहता है
और उन्हें फिर से उसके असर में लाने के लिए वो हार उन्हें दोबारा पहनाना होगा

ओर क्या सच में ऐसा होना मुमकिन है
नही-नही..ऐसा नही हो सकता.
उसने खुद उनकी योजना उस डाइयरी में पढ़ी थी.
पर ये भी तो हो सकता है की शेफाली की आत्मा ने ही वो सब करवाया हो.
उस डायरी में जादुई तरीके से खुद ही वो सब कुछ लिख दिया हो..
इस तरह के उल्टे-सीधे अनेक विचार आ-जा रहे थे उसके दिमाग़ में.

उसने अपने बेग से वो शेफाली का हार निकाल लिया जो घर से निकलने से पहले उसने बेग में डाल लिया था.
और वो सोचने लगा की कहीं इसकी सच्चाई सही तो नही है.
उसकी चमक में वो शायद कुछ ढूढ़ने का प्रयास कर रहा .
शायद ये हार फिर से उनके गले मे डालना पड़ेगा, ताकि उनपर शेफाली का असर एक बार दोबारा हो सके.
वो गहरी सोच में डूबकर ये सोच ही रहा था की तभी उसे रोज़ी की आवाज़ सुनाई दी, जो उसके डिपार्टमेंट में नर्स थी.

''सर ...सर ..वो डॉक्टर महेश आपका इंतजार कर रहे है काफ़ी देर से.प्लीज़ चलिए.''
उसने गुस्से में रोज़ी को देखा, वो बेचारी सहम कर कमरे से बाहर निकल गयी.
राजेश ने बुदबुदाते हुए वो हार वहीं रखा और बाहर निकल गया.

करीब एक घंटे बाद जब पोस्टमार्टम ख़त्म हुआ तो हाथ-मुँह सॉफ करके वो वापिस अपने केबिन की तरफ चल दिया..
अपने केबिन में पहुँचकर उसने देखा की रोज़ी उस हार को हाथ में लेकर बड़े गोर से देख रही थी..
उसके चेहरे की चमक बता रही थी की वो उसे पसंद आया था.

तभी राजेश के दिमाग़ में एक विचार आया.की चलो इस रोज़ी पर इस हार का असर देखा जाए.
वो तो रजनी और उस प्लान का हिस्सा नही थी.
इस हार को पहनने के बाद भी उसपर कोई असर नही होता तो उस डायरी में लिखी बाते ही सच थी.
वरना शेफाली की आत्मा का असर था उस हार पर.

उसने रोज़ी को उपर से नीचे तक देखा, उसकी बेक थी इस वक़्त राजेश की तरफ..
थोड़ी साँवली थी वो, साउथ की रहने वाली थी पर हिन्दी अच्छी बोल लेती थी वो.
एकदम छरहरा सा बदन था उसका.
हल्के-फुल्के से चुचे थे और हल्की सी ही गांड निक्लीहुई थी उसकी ....
पर चेहरा बड़ा ही नशीला सा था उसका.
ख़ासकर उसके मोटे होंठ.
25 की उम्र थी पर अभी तक शादी नही हुई थी.
कुँवारी थी या नही ये उसे पता नही था.



खैर, कुछ सोचकर वो आगे आया और एकदम उसके चेहरे के पास आकर बोला : "ये पसंद आया तुम्हे रोज़ी..''
वो बेचारी एकदम से घबरा गयी.जैसे कोई चोरी पकड़ी गयी हो उसकी..

''वो.वो..सॉरी सर ..ये आपकी टेबल पर पड़ा था तो..तो..मैने..''

राजेश : "इट्स ओक..घबराव मत..वैसे एक बात कहूं , ये तुमपर अच्छा लगेगा , पहन कर देखो जरा ..''

रोज़ी की आँखे बाहर निकालने को हो गयी ये सुनकर : "मैं। ....... नो...नो सर ये तो शायद आप अपनी वाइफ के लिए !!!!!!!! मैं ..ऐसे .कैसे .पहन लू .''

राजेश ने उसके हाथ से वो नेकलेस लिया और घूमकर उसके पीछे आ गया.
उसके गले में वो हार डालकर पीछे से उसका हुक्क लगा दिया.

और रोज़ी बेचारी ये सोचकर परेशान हुए जा रही थी की आज इस खड़ुस डॉक्टर को हो क्या गया है.
आज से पहले तो ढंग से उसे देखता भी नही था.
और आज उसे ये हार पहना रहा है और वो भी इतना खूबसूरत हार..
इस वक़्त वो खुद को हीरोइन और राजेश को हीरो जैसे देख रही थी
उसके दिल की धड़कन इस वक़्त तेज गति से चल रही थी..
उसे तो लग रहा था की उसका दिल सीने से निकलकर बाहर ही ना आ जाए.

पर अंदर ही अंदर उसे एक अजीब सी खुशी हो रही थी..
वो शायद इसलिए की उसे डॉक्टर राजेश शुरू से ही काफ़ी पसंद थे..
अचानक राजेश की गर्म साँसे उसे अपनी गर्दन पर महसूस हुई, वो बोले : "कैसा लगा..''

उसने हाथ लगाकर हार को देखा और खुशी से बोल उठी : "इट्स ब्यूटिफुल.डॉक्टर राजेश''

अब वो पल था जब राजेश को उस हार की सच्चाई जाननी थी..
और इसका सिर्फ़ एक ही तरीका था.
उसने रोज़ी को अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखो में देखते हुए धीरे-2 अपने होंठ उसकी तरफ बड़ा दिए.
अगर उसने शोर मचाया या गुस्सा होकर भाग गयी तो डायरी वाली बात ही सही थी.वरना.

वो ये सोच ही रहा था की उसने देखा की शरमाते हुए रोज़ी की आँखे बंद होती चली गयी और अगले ही पल उन दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर कुश्ती लड़ रहे थे.



एक ही पल में राजेश के दिमाग़ की सेंकडो घंटियाँ बज उठी..
यानी इस नेकलेस के अंदर सच में शेफाली की आत्मा मोजूद थी.
पर कुछ और सोचने समझने का मौका नही मिला उसे.
क्योंकि रोज़ी के रसीले होंठो में पता नही कैसा स्वाद था जो उसके शरीर के अंदर घुलता चला गया.
ऐसे रसीले होंठ उसने अपनी पूरी लाइफ में आजतक नही चखे थे..
धीरे-2 उसने अपने हाथ उसकी नन्ही चुचियों पर रखे और उन्हे दबा दिया..
वो बेचारी तड़प उठी.
शायद ये उसके शरीर का सेन्सिटिव पॉइंट था.
होता भी क्यो नही.
साउथ इंडियन्स के निप्पल्स काफ़ी मोटे जो होते हैं.
शायद राजेश के हाथ उसका काला अंगूर आ गया था जिसे उसने ज़ोर से दबाकर उसकी चीख निकलवा दी थी.

''आआआआआआआहह...म्म्म्ममममममममममममममम...ओह डॉक्टर....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..''

राजेश ने तुरंत अपने रूम का दरवाजा बंद किया और बाहर डु नोट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा दिया.
और जैसे ही वो पलटा एक बार फिर से रोज़ी खुद ही उसके उपर झपट पड़ी..

दोनो ने एक दूसरे के हर अंग को अच्छे से मसला.
राजेश के हाथ जब उसके नन्हे स्तनो पर पड़े तो उसे ईशा की याद आ गयी.
लगभग वही साइज़ था उसका भी.
पर इस मद्रासन के चुच्चे कुछ ज़्यादा ही कठोर थे.
और उन्हे दबाने में भी उतना ही मज़ा मिल रहा था..
उसे नंगा करके चूसने में कितना मजा आएगा
पर अभी कपड़े उतारने का टाइम नही था

इसलिए राजेश ने उसे घुमाया और अपनी टेबल पर झुका कर उसकी स्कर्ट को गांड से उपर चड़ा दिया.
पेंटी नीचे खिसकाई और अपनी जिप्प खोलकर अपना कड़क लॅंड एक ही बार में उसकी चूत में पेल दिया..

बेचारी टेबल पर पड़ी हुई बिलबिला सी उठी राजेश के इस प्रहार से
''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......अहह....ओह डॉक्टर...यू आर टू स्ट्रॉंग...''



रोज़ी ने ऐसा कड़क लॅंड शायद आज तक नही लिया था.
कुँवारी तो वो थी ही नही, और हॉस्पिटल के वॉर्ड बाय्स से चुदवाकर अपना टाइम चला रही थी.
पर आज बड़े दिनों बाद एक डॉक्टर का लॅंड उसकी चूत में गया था.
और वो भी इतना मोटा और लंबा.
सच में .उसे आज बहुत मज़ा मिल रहा था..
राजेश ने तेज गति से उसकी कमर को पकड़कर जोरदार शॉट लगाने शुरू कर दिए..
टेबल पर पड़ा समान धीरे-2 करके नीचे गिरने लगा और वो दोनो अपने-2 ऑर्गॅज़म के करीब पहुँचने लगे..
''आआआआआआआहह डॉक्टर...एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... फक्ककककक मी..फास्टर...मोर....और..तेज..यअहह...आई एम कमिंग डॉक्टर...एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... फककक मी ..अहह''
और अपनी चुदाई का आनंद लेती हुई वो वहीं डॉक्टर की टेबल पर झड़ गयी .
हॉस्पिटल में रहकर ऐसी क़्विकि तो पहले भी उसने की थी ..
पर इतना मज़ा पहली बार आया था उसको.
राजेश ने अपना लॅंड जैसे ही उसकी चूत से निकाला,
रोज़ी घूम कर उसके सामने बैठ गयी और उसके लैंड को अच्छी तरह से चूस - चाटकार सॉफ करके वापिस उसकी गुफा में धकेल कर बाहर से जीप लगा दी.



और एक बड़ी ही सैक्सी स्माइल के साथ उपर उठकर अपनी पेंटी को भी उपर चड़ाया और राजेश के होंठो पर एक प्यारा सा किस्स करके बोली
''मैं तो आपकी फेन हो गयी डॉक्टर राजेश..सी यू सून''
इतना कहकर वो अपनी छोटी सी गांड मटकाती हुई बाहर निकल गयी.
और पीछे रह गया राजेश.
जो अपनी चेयर पर बैठकर मुस्कुराए जा रहा था.
ये उस यकीन की मुस्कान थी जो उसे हो चुका था की ज़रूर इस नेकलेस में ही कुछ जादू है जो उसकी किस्मत का सितारा ऐसे बुलंद हो रहा है.
जाने से पहले वो नेकलेस को उतार कर वहीं टेबल पर रख गयी थी.
उसे वापिस अपने बेग में रखकर वो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट बनाने में लग गया...
और शाम होने के बाद वो अपने घर की तरफ चल दिया.
अब इस हार की ताकत वो जान चुका था , पर बेचारे को ये नहीं पता था की पहले वो सही था, अब गलत है
पर इस गलती में भी उसे शायद लाइफ के वो पल मिलने वाले थे जो उसने सोचे भी नहीं थे ।
जैसे आज की शाम, जो उसके लिए कुछ ख़ास होने वाली थी
 
राजेश जब घर पहुँचा तो उसके लिए मंच पहले से ही सज चुका था.

शाम होने से पहले राधिका अपनी बेटी चाँदनी के साथ आ चुकी थी,
रजनी ने जो कुछ भी उसके कहने पर राजेश के साथ किया था वो उसे सुना डाला था.
राधिका भी बड़े मज़े ले-लेकर वो सब सुन रही थी,
शायद राजेश की जो हालत हुई होगी, उसे सोचकर उसे मज़ा आ रहा था..

और जो प्लान उन्होने बनाया था, राजेश को एक झटका देने का वो अब पूरा हो चक्का था..
हालाँकि उनमें से किसी को भी इस बात का पता नही था की राजेश ने वो डायरी पढ़ ली है जिसमें उनके सारे प्लान लिखे थे,
पर आज हॉस्पिटल में हुई घटना के बाद राजेश उस डायरी में लिखी बातों को भी शेफाली का जादू मानकर फिर से नेक्क्लेस की शक्ति पर यकीन करने लगा था.

इसलिए अब उस डाइयरी में लिखी बातों का कोई महत्व नही रह गया था..

राजेश को बस अब ये एहसास हो चुका था की उस हार का असर एक हफ्ते तक रहता है,
जो अब रजनी, पिंकी और ईशा पर से उतर चुका है,
उसे बस उस हार को उनके गले में एक बार फिर से पहनाना था..

और दूसरी तरफ, रजनी की सारी बातें सुनने के बाद राधिका ने उन्हे अब ये समझा दिया था की जिस प्लान के हिसाब से वो लोग पहले चल रहे थे,
उसी के हिसाब से वो अब चलेंगे..
यानी राजेश को फिर से राजा बनाकर उसके साथ कुछ भी करने को तैयार रहेंगे..
और इस बार इस गेम में राधिका भी हिस्सा लेगी क्योंकि शुरू से इस प्लान को बनाकर सबसे ज़्यादा तो उसी की चूत कुलबुला रही थी..

खैर, जैसे ही राजेश घर पर आया सभी संभल कर बैठ गये..
पिंकी ने दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया,
हाथ से बेग ले लिया और बड़े ही प्यार से उसे देखा जैसे अपनी चुदाई के लिए आमंत्रित कर रही हो..


पर राजेश सुबह वाली बात भुला नही था.
उसे बिना हार पहनाये वो उससे कोई पन्गा नहीं लेना चाहता था
इसलिए उसकी हँसी से भी इस वक़्त उसे डर लग रहा था, उसे बिना कुछ बोले वो अंदर आ गया.
ड्रॉयिंग रूम में राधिका और चाँदनी को देखकर उसके दिल की धड़कन तेज हो गयी.
राधिका को तो वो कब से पेलना चाहता था, चाँदनी से भी लगभग सब मज़े ले ही लिए थे उसने पिछली बार
पर सुबह की घटना की वजह से अब वो थोड़ा चौकन्ना था.
अंदर आकर वो सोफे पर बैठा और सबसे बाते करने लग गया..
पिंकी चाय बनाकर ले आई और सब चाय पीते हुए नॉर्मल तरीके से बाते करते रहे..
अचानक ईशा ने राजेश से पूछा : "पापा, वो नेक्क्लेस कहाँ है.राधिका आंटी ने देखा नही है अब तक.मैने सोचा दिखा दूँ पर कहीं मिल ही नही रहा.''
राजेश एक पल के लिए तो घबरा गया.
पर अचानक उसे फिर से उस नेक्क्लेस की शक्ति का एहसास हुआ जिसे वो आज सुबह रोज़ी पर आजमा भी चुका था.
ऐसे में इस वक़्त इन सभी को अगर उसने वो हार एक बार फिर से पहना दिया तो एक बार फिर से उसके यानी शेफाली के प्रभाव में आ जाएँगे..
और फिर वो उनके साथ वही मस्ती दोबारा कर सकता है जो अब तक कर रहा था..
या करने की सोच रहा था..
और इस वक़्त तो राधिका भी यहाँ थी और उसे तो वो नेक्क्लेस पहना कर ही रहेगा.
वो तुरंत उठा और अपने बेग से वो नेक्क्लेस निकाल लाया और बोला : "अर्रे ये आज लंच बॉक्स के साथ लिपट कर मेरे साथ ही आ गया था.मैं जब लंच करने लगा तो देखा.''
राजेश के हाथ में उस नेक्क्लेस को देखकर राधिका बोली : "अरे .वाउ.ये तो बहुत प्यारा है..मुझे भी ये पहन कर देखना है.''
इतना कहते हुए वो झत्ट से उठकर राजेश के पास आई.
और उसके उठने का झटका इतना जोरदार था की उसका पैर फिसला और वो लड़खड़ाती हुई सीधा जाकर राजेश की गोद में आ गिरी.
राजेश के आधे उठे लॅंड पर जैसे ही राधिका की नरम गांड का दबाव पड़ा वो विकराल रूप लेने लगा..
और तब उसे इस बात का भी एहसास हुआ की उसका दाँया हाथ उसके मोटे तरबूज जैसे मुम्मे पर है..
बेचारे ने सकुचाते हुए अपना हाथ खींच लिया पर राधिका के चेहरे पर आई शरारती हँसी को उसने ज़रूर नोट कर लिया जो बता रही थी की उसने बुरा नही माना.
वो सॉरी बोलते हुए उसके साथ वाली सीट पर बैठी और हार लेकर अपने गले में डाल लिया.
जैसे ही उसने हार डाला ,उसकी आँखे फिर से राजेश की तरफ मुड़ गयी .
उसने राजेश के चेहरे को देखा और फिर उसकी नज़रें फिसलकर जब नीचे लॅंड पर पहुँची तो वहां एक अच्छा ख़ासा तंबू बन चुका था, जिसे देखकर उसके चेहरे पर हवस उभर आई..
और राजेश को वो नेक्क्लेस का असर लगा..
वो भी मुस्कुरा दिया और आँख मारकर उसका यानी शेफाली का स्वागत किया..
राधिका : "वाव् ..इट्स सो प्रेटी..देखो ना चाँदनी .कैसा लग रहा है..ब्यूटिफुल ना.''
चाँदनी : "यस .मोंम .मैने तो पहले ही कहा था आपसे..ये आपको भी अच्छा लग रहा है.मुझे भी काफ़ी अक्चा लगा था..रूको मैं पहन कर दिखाती हूँ .''
इतना कहकर उसने वो नेककलेशस अपनी माँ से लिया और अपने गले से लगाकर दिखाया.
अब उसके चेहरे के एक्सप्रेशन जानने की बारी फिर से राजेश की थी .
चाँदनी ने भी उसी मदहोशी और प्यासी नज़रों से राजेश को देखा.
राजेश ने उसे देखकर भी आँख मार दी.
और मन ही मन बुदबुदाया 'दो तो आ गयी अंदर..अब ये तीन और बची है.'
राजेश : "एक काम करो ना.सब पहन कर देखो..मैं बताता हूँ की किसे सबसे ज़्यादा सूट कर रहा है..ओक ''
राजेश ये छोटा सा खेल खेलकर उस नेक्क्लेस के जाल में सभी को फँसाने की कोशिश कर रहा था और उसकी चाल को समझकर वो सभी उसे बेवकूफ़ समझ कर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे.
चाँदनी के बाद ईशा ने और फिर रजनी ने भी वो नेक्क्लेस अपने गले में पहन कर सबको दिखाया.
सिर्फ़ पिंकी बची थी.
राजेश : "अर्रे पिंकी.तुम भी पहनो ना.शरमाओ मत..तुम भी तो हमारे घर की सदस्य जैसी ही हो..पहनो..''
बेचारी ने सकुचाते हुए वो हार पहन कर दिखाया और एक बार फिर से डॉक्टर के लॅंड को अपनी चूत में लेने की कल्पना मात्र से उसका शरीर सिहर उठा..
और उसने गुलाबी आँखों से राजेश को देखा जो मुस्कुरा कर उसे आँख मार रहा था.
उसने शरमाते हुए नज़रें नीचे कर ली और हाह उतार कर किचन में भाग गयी..
 
अब राजेश को पूरी तसल्ली हो चुकी थी की वो सब उसकी बॉटल में उतर चुकी है..

अब तो बस एक -1 करके उन्हे पेलना था उसे.

और इन सबमे किसका नंबर पहले लगाए वो यही सोच रहा था..

अपनी बीबी को तो वो बरसों से पेलता आ रहा था.

और पिछले कुछ दिनों में तो कुछ ज़्यादा ही मज़े दिए थे उसने.

पिंकी के साथ भी उसने अच्छी तरह से मज़े ले लिए थे.

अब उसके घर में ईशा बची थी.

जिसे वो ना जाने कब से चोदना चाह रहा था..

चूसम चुसाई भी लगभग हो चुकी थी, सिर्फ़ चोदना बाकी रह गया था..

और वहीं दूसरी तरफ उन माँ बेटी की जोड़ी पर भी उसकी काफ़ी दिनों से नज़र थी.

चाँदनी और राधिका..

आज चाँदनी को यहीं रोक लिया जाए तो उसे चोदा जा सकता है..

यही सोचकर उसने राधिका से कहा : "आज आप चाँदनी को यही रहने दीजिए.कल संडे है..आज बच्चे एक साथ रह लेंगे..पार्टी करेंगे.''

उसने मुस्कुराते हुए चाँदनी को देखा जिसकी आँखों में पहले से ही चमक आ चुकी थी.
और हंसते हुए बोली : "आई डोंट हॅव एनी प्राब्लम..चाँदनी चाहती है तो वो रुक सकती है..बट .मुझे कार चलाने में थोड़ी दिक्कत है, चाँदनी मुझे लेकर आई है, तो मैं घर कैसे जाउंगी .''

राजेश तपाक से बोला : "मैं छोड़ आऊंगा आपको घर.डोंट वरी.''

जब राजेश ने ये कहा तो दोनो की नज़रें मिली और वो दोनो मुस्कुरा दिए.
जैसे चुदाई का वक़्त और जगह मिल गयी हो दोनो को.''

रजनी भी समझ गयी की आज उसका पति राधिका को अच्छे से पेलेगा..
इसलिए वो भी उसकी तरफ देखकर उसे एक आँख मारकर मुस्कुरा दी.

चाय पीने के बाद राजेश अपने रूम में फ्रेश होने चला गया और नहा धोकर एक जीन्स और वाइट टी शर्ट पहन कर आ गया.
जिसमें वो काफ़ी स्मार्ट लग रहा था.

राधिका भी सबको बाइ बोलकर राजेश के साथ अपने घर की तरफ चल दी.

पूरे रास्ते दोनो इधर-उधर की बाते करते रहे ये जानते हुए की घर पहुँचकर क्या होने वाला है..

घर के सामने जब कार रुकी तो राजेश अंदर बैठा रहा और राधिका उतर गयी और थेंक्स बोलकर अपने घर की तरफ चल दी.

बेचारे राजेश का चेहरा देखने लायक था.
वो तो क्या -2 सोचकर बैठा था.

राधिका भी जान बूझकर उसे तड़पाने के लिए ऐसा कर रही थी.
पर वो जानती थी की खड़े लॅंड को ज़्यादा इंतजार नही करवाना चाहिए, उसे बैठने में देर नही लगती.
फिर उसे ही डबल मेहनत करनी पड़ेगी लॅंड उठाने में .
इसलिए वो बड़ी ही अदा के साथ पलटी और बोली : "आप प्लीज़ अंदर आइए ना.एक-2 ड्रिंक हो जाए, फिर चले जाना.''

उफ़फ्फ़...

एक तो ये खुद इतनी सैक्सी उपर से ड्रिंक पिलाने का ऑफर.
ऐसे डेड्ली ऑफर को वो कैसे मना कर सकता था भला.

और वैसे भी वो यहाँ आया ही इसी अभिलाषा में था...
ये दारू तो बहाना था बस राधिका के घर जाने का.

उसने जल्दी से कार पार्क की और राधिका के पीछे-2 अंदर आ गया.
उसका घर काफ़ी आलीशान था.
पहले भी वो 1-2 बार फॅमिली के साथ आ चुका था वहां .
पर आज की बात कुछ ओर थी.

वो अंदर आ गया और राधिका ने दरवाजा बंद करके कहा : "आप बैठिए राजेश जी, मैं फ्रेश होकर आती हूँ .तब तक आप प्लीज़ स्टार्ट कीजिए..''
उसने सोफे के पीछे बनी बार की तरफ इशारा करते हुए कहा.

राजेश बार स्टूल पर बैठा और ब्लैक लेबल बॉटल के 2 हेवी पेग बनाए.और राधिका का इंतजार करने लगा.

और जब वो आई तो ऐसा लगा जैसे कयामत उसकी तरफ चलती हुई आ रही है.
उसने इतना सैक्सी सा गाउन पहना हुआ था जिसमें से उसके बिना ब्रा के मोटे मुम्मे थिरकते हुए सॉफ दिख रहे थे.
गाउन साइड से स्लिट था जिसकी वजह से उसकी जाँघो का दूधियापन सॉफ दिख रहा था..
कुल मिलाकर वो चुदाई के पूरे मूड में थी.


राधिका आई और साथ वाले स्टूल पर बैठते हुए अपनी ड्रेस की तरफ इशारा करके बोली : "वो क्या है ना की रात के टाइम मैं थोड़ा रिलॅक्स होकर रहती हूँ .इसलिए ये.''
राजेश : "इट्स ओ ओके ..आई डोंट माइंड.इनफॅक्ट.आप इस ड्रेस में बहुत सैक्सी लग रहे हो..''
ये बात राजेश ने इतने कॉन्फिडेंस से इसलिए कही थी क्योंकि उसे पता था की वो इस वक़्त नेक्क्लेस के प्रभाव में है, इसलिए वो उसे बुरा भला नही कहेगी.
राधिका भी उसकी बात सुनकर शरमाते हुए अपना पेग उठा कर पीने लगी.
राजेश ने भी सिप ली और ड्रिंक पीने लगा.
अब वो सोच रहा था की कैसे बात आगे बड़ाई जाए.
और तभी उसे ध्यान आया की वो भला इन बातो को क्यों सोच रहा है.
राधिका पर तो नेक्क्लेस का असर होगा ही.
ऐसे में वो खुद ही उसपर मेहरबान होकर उसे चुदाई करने देगी .
और उसकी किसी भी बात का बुरा नही मानेगी.
बस ये बात उसके अंदर कॉन्फिडेस लाने के लिए बहुत थी.
उसने अगले 2 घूंठ में ही पूरा पेग खाली कर दिया जिससे दारू एक ही बार में उसके सिर भी चढ़ गयी.
आँखे लाल हो गयी उसकी.
और उन सुर्ख आँखो से जब उसने राधिका के मोटे मुम्मो को देखा तो राधिका को भी अपने पूरे शरीर में एक सुरसुरी सी महसूस हुई..
ये वो एहसास था जिसे हर वो स्त्री महसूस करती है जब उसकी जाँघो के बीच की नमीं उसे एक ऐसे नशे की तरफ खींचती है जिसमे गिरने के बाद वो दुनिया को भूल जाती है .
राधिका भी उस नशे मे गिरने के लिए तैयार बैठी थी.
बाकी का काम राजेश ने कर दिया,
वो एक झटके से उठा और राधिका को बाहों में भरके उसकी गर्दन पर अपने गीले होंठ रख दिए..
ये सब इतनी जल्दी हुआ की राधिका को संभलने का मौका भी नही मिला.
पर उसके मुँह से एक लम्बी सिसकारी ज़रूर निकल गयी.
एक तो राजेश की जोरदार पकड़ ने उसके मोटे मुम्मों को उसकी छाती से रगड़कर पीस डाला था
और उपर से उसके होंठो ने उसके सबसे सेन्सिटिव पॉइंट यानी गर्दन पर हमला कर दिया था.
और वो अपने होंठो से इस वक़्त उसे ऐसे चूस रहा था जैसे ड्रॅक्यूला अपने शिकार का मज़ा लेता है.

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... आआआआआआआआआअहह..... ओह.... राजेईईईश्ह''
राजेश को तो पहले से ही विश्वास था की वो उसका विरोध नही करेगी.
क्योंकि उसके अनुसार वो इस वक़्त राधिका को नही बल्कि शेफाली को अपनी बाहों में भर रहा था.
पर उसके रसीले बदन को बाहों में भरकर वो बाकी की सारी बातें भूल गया.
और यही हाल इस वक़्त राधिका का था.
क्या प्लानिंग की थी , क्यों की थी , वो सब इस वक़्त उसे याद भी नही था.
याद था तो बस राजेश का लॅंड
जिसके सपने उसने ना जाने कब से देखे थे..
और वो इस वक़्त उसके अंदर जाने के लिए मचल रहा था.
मचल तो उसका हाथ भी रहा था लॅंड पकड़ने के लिए,
इसलिए उसने बिना कोई विलंब किए अपना हाथ नीचे किया और राजेश की पेंट पर बने तंबू को अपनी हथेली से ढक लिया..धक् क्या लिया उसे भींच दिया अपने हाथों से
बेचारा राजेश खड़े लॅंड पर हुए हमले से कराह सा उठा..
''आआआआआआआआआआहह.... एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......''
राजेश के लॅंड पर हमला हो और वो चुपचाप बैठा रहे, इतना भी शरीफ नही था वो डॉक्टर.
उसने तुरंत अपने पंजे उसके दोनो मुम्मो पर जमाए और उन्हे जोरों से भींच डाला.
इस बार कराहने की बारी राधिका की थी..
''आआयययययययययययययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई........अहह......ढीईईईईरईईईईईईईयययी''
मुममे इतने मोटे थे की राजेश के हाथों मे नही समा रहे थे.
उसने उन्हे दबाते हुए अपना मुँह उपर किया और उसके तपते होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूसने लगा..
राधिका के बिना ब्रा के मुम्मे इतने मुलायम थे की उन्हे अपने मुँह पर रगड़ना चाहता था राजेश.
इसलिए उसने उसका गाउन पकड़कर उतार डाला.
एक ही पल में वो सैक्स की मूरत उसके सामने नंगी खड़ी थी.
 
कुछ पलों तक तो वो उसके नंगे जिस्म को निहारता ही रहा..

फिर जब होश आया तो उसपर फिर से टूट पड़ा.

होंठो को चूसते हुए उसने अपना चेहरा नीचे किया और एक-2 करके दोनो निप्पलों को मुँह में भरकर जी भरकर उसका दूध पिया..

और फिर उन कड़क निप्पल से युक्त मुम्मों को अपने चेहरे पर ऐसे रगड़ने लगा जैसे उनसे अपना चेहरा सॉफ कर रहा हो.

उनसे मसाज करवाने लगा वो अपने चेहरे की.

इतने मोटे , नर्म, मुलायम मुम्मो को अपने मुँह पर रगड़ने के बाद वो किसी और ही दुनिया में खो सा गया.


पर नीचे से आ रही भीनी खुश्बू ने उसका ध्यान अपनी तरफ खींचा..
वो बिना अपने होंठ उसके बदन से हटाए नीचे जाने लगा और सीधा लेजाकर उसकी फड़क रही पुस्सी पर जमाए और उन्हे ऐसे चूसने लगा जैसे बच्चा अपनी माँ का निप्पल चूसता है.
दूध तो नही निकला उसमें से पर ढेर सारा रास ज़रूर निकल कर उसके मुँह में जाने लगा.
अब तो उसे ऐसे रसीले जूस के स्वाद की पहचान भी होने लगी थी..
जैसे की ये रस.
थोड़ा नमकीन और खट्टापन लिए था,
जो दर्शाता था की उसे खट्टी चीज़ें कितनी पसंद है..
अभी तक जितनी भी चूतें उसने चूसी थी, उसमें से सिर्फ़ ईशा की ही चूत थी जो एकदम शरबत की तरह मीठी थी.
और होती भी क्यों नही,
उसे मीठा इतना पसंद था की हर वक़्त चॉक्लेट, आइसक्रीम, केक , स्वीट्स और जो भी मिल जाए वो खाती रहती थी.
वही सब तो नीचे से निकल कर उसके जैसे ठर्कियों के मुँह का स्वाद बनता था.
लेकिन जो भी हो,
खट्टा, मीठा, नमकीन या कुछ और..
चूत की चुसाई का अपना ही मज़ा है.
और वो मज़ा इस वक़्त राजेश भरपूर तरीके से ले रहा था.

''आआआआआआआआआआआआआआआआआअहह.. ओह राजीईईईईईश.... उम्म्म्मममममममममममममममममममममममममम.... कब से.... अहह कब से प्यासी हूँ मैंssssss ....आज मेरी प्यास बुझा दो....पी जाओ मुझे....मज़ा दो मुझेsssssssss ....चूसोsssssssss ....चाट जाओ...आआआआह्ह्ह्हह्ह ''
राजेश ने भी एक पल के लिए उसके चेहरे को देखा, जो आँखे बंद किए ये सब बड़बड़ा रही थी...
और सोचने लगा की ये कैसी प्यास है शेफाली की जो बुझती ही नहीं
पर बेचारा ये नही जानता था की हर औरत , हर लड़की का बदन ऐसे ही प्यासा होता है और उनकी प्यास बुझाना उसके और हम जैसे मर्दों का काम है..
खैर, एक गहरी साँस लेकर वो एकबार फिर से उसकी वेल्वेट जैसी चूत की परतों की खुदाई करने लगा.

राजेश ने उसे पीछे धकेलते हुए सोफे पर चित्त लिटा दिया.
एक हाथ से उसके मोटे मुम्मे को मसलते हुए, दूसरे से उसकी गांड को दबाने लगा.
मुँह से तो वो उसकी चूत का जल्जीरा पी ही रहा था.
अपने शरीर पर एक साथ हो रहे हमलों ने राधिका की हालत खराब कर दी.
वो उस सोफे पर बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगी
ऐसा लग रहा था जैसे राजेश उसके अंदर का पानी खाली कर रहा है
और वो उस चुसाई का आनंद लेती हुई कमान की तरह कमर उठा कर दोहरी होती चली गयी
राधिका उसकी साँप जैसी जीभ पर अपनी चूत को छुवा कर ऐसे नाच रही थी जैसे बीन की ताल पर नागिन नाचती है.
राजेश की जीभ इतनी लंबी थी तो उसका लॅंड कितना लंबा होगा.
जब वो अंदर जाएगा.
यही सोचकर उसकी चूत का पानी नल की तरह बहे जा रहा था..
अब उससे ज़्यादा बर्दाश्त नही हो रहा था. उसने अपनी चूत को उसके मुँह से ना चाहते हुए भी ज़बरदस्ती छुड़वाया और उसे घसीट कर अपने बेडरूम में ले गयी.
क्योंकि आगे जो एक्शन होने वाला था उसके लिए ड्रॉयिंग रूम का वो सोफा छोटा पड़ जाता..
वहां जाते हुए राजेश के कपड़े एक-2 करके उतरते चले गये.
और जब राधिका ने उसे अपने मोटे गद्दे वाले बेड पर धक्का दिया तो वो पूरा नंगा हो चुका था.
अब वो किसी लोमड़ी की तरह अपने मोटे मुम्मे लटकाए हुए उसकी तरफ बढ़ने लगी.
उसकी आँखों में राजेश का मोटा लॅंड चमक रहा था.
जिसे वो कुछ ही देर में अपनी चूत में लेने वाली थी.
पर उस से पहले उसे चूस्कर उसे गीला करना भी तो बनता था, ताकि वो एक ही बार में उसकी चूत की परतों में उतरता चला जाए.
लॅंड के ठीक उपर पहुँचकर उसने उसे पकड़ा और अपनी जीभ से टच किया.राजेश की ठंडी सिसकारी निकल कर पूरे कमरे में फैल गयी..
और फिर बिना किसी दूसरी चेतावनी के राधिका का सिर नीचे तक आया और उसने एक ही बार में उसके साढ़े सात इंची लॅंड को अपने मुँह से नाप लिया..

और फिर तो वो रुकी ही नही,
उसे ऐसे चूसने लगी जैसे पति के मरने के बाद आज पहली बार लॅंड चूसने को मिला हो.
वो इतनी ज़ोर से उसे चूस रही थी जैसे उसे उखाड़ कर अंदर ही निगल जाएगी.
वो तो राजेश ने उसके सिर पर हाथ रखकर उसकी स्पीड पर ब्रेक लगाया वरना उसकी उत्तेजना के आगे उसका लॅंड टूट कर बिखर ही जाता.
राधिका को भी जैसे होश आया..
अब वो लॅंड पूरा थूक में भीगकर ऐसे चमक रहा था जैसे तेल का लेप किया हो उसपर.
थूक से सना हुआ.
चूत में जाने के लिए एकदम पर्फेक्ट ड्रेस थी ये.

वो उपर तक खिसकती हुई आई और लॅंड के उपर अपनी चूत रखकर राजेश की आँखो में देखा.
और मुस्कुराती हुई अपनी चुदाई के लंबे सफ़र पर निकल पड़ी..
राजेश को जब उसकी चूत की टाइटनेस का एहसास हुआ तो उसे लगा जैसे वो किसी 25 साल की लड़की को चोद रहा है.
ऐसा लग ही नही रहा था की वो चाँदनी जैसी जवान लड़की की माँ है..
पर जो भी था, ऐसी टाइट चूत को मारने का मज़ा ही कुछ और होता है..
उसने अपने हाथ उसके मुम्मो के स्टेयरिंग पर लगाए और अपने लॅंड का ट्रक उसकी चूत के हाइवे पर सरपट दौड़ाने लगा.
मुम्मे पकड़कर नीचे से मिल रहे झटकों ने राधिका की चीखें ही निकलवा दी.
राजेश के तगड़े झटके उसके मस्त बदन पर ऐसी लहरें पैदा कर रहा था जिन्हे महसूस करके उसकी बरसों पुरानी प्यास बुझती चली गयी..

''आआआआआआआआआआआआआअहह ...ओह मररररर गयी...अहह... मजाआाआअ आआआआआआआ गय्ाआआआ.. एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स राजेश.... छोड़ो मुझे.... अहह... तुम्हारा लॅंड बहुत मोटा है... उम्म्म्ममममममममममम... मजेदार है... मजाआ आ रहा है.... उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़..... ज़ोर से चोदो मुझे...... राजेश.... ''
राजेश ने एक झटके से उसे बेड पर नीचे लिटाया और खुद उसकी टॅंगो खोलकर उपर पहुँच गया, ये सब उसने अपना लॅंड निकाले बिना किया.
 
और फिर अपने लॅंड को पूरा अंदर तक धकेलकर उसकी बच्चेदानी से टकराकर ऐसे झटके मारे उसने की जो चीखें निकल रही थी राधिका की वो भी उत्तेजना के मारे गले मे ही अटक कर रह गयी..

ऐसा तो उसने आज तक महसूस नही किया था.
सही सुना था उसने अपनी सहेली रजनी से की उसका पति राजेश जब उसे जमकर चोदने पर आता था तो उसकी साँसे अटक सी जाती थी.
कुछ ऐसा उसके साथ भी हो रहा था इस वक़्त.

फेकिंग तो उसने कितनी बार करवाई थी पर असली चुदाई क्या होती है , ये आज उसने जाना था.


और जल्द ही उसकी चुदाई के परिणाम आने शुरू हो गये..
उसके ऑर्गॅज़म के रूप में ..
राजेश के लॅंड ने ऐसे झटके मारे की एक के बाद एक उसके करीब 2-3 ऑर्गॅज़म एक साथ आ गये.
ये भी उसकी लाइफ में पहली बार हुआ था..
आज तो वो राजेश के लॅंड की कायल हो गयी थी..
और अंत मे जब राजेश ने झड़ना शुरू किया तो उसकी चूत का कुँवा पूरी तरह भर सा गया..
जो बरसों से प्यासा था..
पर आज के बाद वो प्यासा रहने वाला नही था.
जब उसकी चूत का कुँवा लबालब भर गया तो अंदर से राजेश का माल निकलकर बाहर गिरने लगा.
उस वक़्त भी राजेश का लॅंड इतना कड़क था की एक और चूत का पानी निकलवा सकता था वो..

ऐसी चुदाई करवाकर उसे होश हि रही रहा की वो कहाँ है.
कुछ देर बाद जब उसे होश आया तो राजेश नंगा ही उसके सामने चेयर पर बैठकर शराब का दूसरा पेग बनाकर पी रहा था.
इस शराब ने उसकी चुदाई का रंग दुगना कर दिया था.
अपना नंगा और गदराया बदन लिए वो शराबी सी चलती हुई बाथरूम की तरफ चल दी.
और फ्रेश होकर जब वो आई तो राजेश अपने कपड़े पहन कर वापिस जाने की तैयारी में था.
हालाँकि उसने राजेश को रोकने की कोशिश की पर वो नही माना.
पर अगले दिन आने का वादा ज़रूर कर गया वो.
उसे विदा करके वो मुस्कुराती हुई वापिस आई और अपने उसी बिस्तर पर आकर सो गयी जिसमे से अभी तक सैक्स की खुश्बू आ रही थी..
और राजेश चल पड़ा अपने घर की तरफ ,
जहाँ राधिका की बेटी चांदनी उसका इंतजार कर रही थी.
 
रास्ते भर वो आज के बारे में सोचता रहा.
और रह रहकर मन में वो शेफाली की आत्मा को थैंक्स भी बोलता रहा..
अब उसकी लाइफ में पहले जैसा रंग जो लौट आया था.

आज जैसी चुदाई का मज़ा कुछ अलग ही एहसास छोड़ गया था राजेश के उपर.
उसे पता तो था की राधिका की मारने में मज़ा आएगा,
पर इतना आएगा ये नही जानता था.

राधिका जैसी उम्र की औरतें वैसे भी उस पके हुए फल की तरह होती है जिन्हे जहाँ से भी छू लो, उनमें से रस छलक पड़ता है..
उसके भी हर अंग में रस था
जिसे पीकर आज राजेश तृप्त हो गया था.

पर अब उसका ध्यान अपने घर पर इंतजार कर रही चाँदनी पर था.
वैसे तो उसका लॅंड अपनी बेटी ईशा के लिए ज़्यादा मचल रहा था पर चाँदनी भी कुछ कम नही थी.
दोनो की उम्र एक ही थी, इसलिए उनमें नशा भी एक सा ही था..
पर ईशा तो उसके घर ही रहने वाली थी.
इसलिए चाँदनी ही आज रात का टारगेट था उसका..

पर वो नही जानता था की इंसान जो सोचता है वो होता नही है.
और उसके साथ क्या होने वाला था ये तो उसे घर जाकर ही पता चलने वाला था.

जैसे ही वो घर पहुँचा, रजनी ने उसे कस कर गले लगाया.
ये उसके लिए अलग अनुभव था, क्योंकि वो अक्सर ऐसा नही करती थी.

पर जिस अंदाज से वो अपने मोटे मुम्मे रगड़ कर उसके गले मिल रही थी, उससे सॉफ पता चल रहा था की उसकी चूत में खुजली हो रही है , जिसे वो उसके लॅंड से दूर करना चाहती है.

तभी राजेश को किचन से झाँकति हुई पिंकी दिखी,
जो उन्हे देखकर ऐसे खुश हो रही थी जैसे राजेश उसका जीजा है और वो उसकी बहन के साथ गले लगकर अपने प्यार का सबूत दे रहा है,
और पिंकी यानी साली ये सब देखकर फूली नही समा रही.
वैसे ऐसा होता भी है अक्सर हमारे भारतिया घरों में ..
पर बेचारी सालियां ये नही जानती की उनके प्यारे जीजाजी ये सब उसे लुभाने के लिए करते है.
ना की उसकी दीदी को खुश करने के लिए.

राजेश को किचन की तरफ देखता पाकर रजनी की नज़रें भी वहाँ गयी और पिंकी को देखकर वो भी मुस्कुरा दी.
अभी कल ही उसके साथ मिलकर दोनो मियाँ बीबी ने जो मस्ती की थी वो उसे अभी तक याद थी.

पर राजेश को भी पता था की ये मस्ती तो होती ही रहेगी.
अभी तो उसके दिलो दिमाग़ में बस चाँदनी की तस्वीर और ख़याल आ रहे थे.

रजनी को चाय बनाने को बोलकर उसने अभी के लिए उस से अपना पीछा छुड़वाया और सीधा ईशा के रूम में जा पहुँचा जहाँ वो दोनो सहेलियां एक साथ बैठकर गप्पे मार रही थी.

चाँदनी अपने साथ कोई कपड़े तो लाई नही थी इसलिए उसने इस वक़्त ईशा की टी शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी.
इन्फेक्ट ईशा ने भी शॉर्ट्स और टी शर्ट ही पहनी हुई थी.
उन छोटे कपड़ो में उन दोनो हसिनाओ की नंगी टांगे और गोरी बाहें देखकर राजेश के लॅंड में हरकत होनी शुरू हो गयी.

राजेश के दिलो दिमाग़ में तो इस वक़्त भी यही चल रहा था की ये सब शेफ़ाली की मेहरबानी है..
पर राजेश का इंतजार कर रही चाँदनी और ईशा तो सारा सच जानती ही थी..
भले ही शेफाली की आत्मा की आड़ में ही सही, पर उन्हे अपनी पहली चुदाई का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार था..

पिछली बार तो राजेश ने चाँदनी को चूस चाटकर ही छोड़ दिया था,
पर आज वो ठान कर बैठी थी की अपनी चुदाई करवाकर ही रहेगी .

और राजेश जब राधिका को छोड़ने उसके घर गया हुआ था तो दोनो सहेलियाँ इसी टॉपिक पर बात कर रही थी..
और बात करते-2 इस बहस पर आकर रुकी की कौन पहले अपनी सील तुडवाएगा..
दोनो ही पहले अपनी सील तुड़वाना चाहती थी.
ईशा इस बात पर बहस कर रही थी की उसके पापा पहले अपनी प्यारी परी की सील तोड़ेंगे और चाँदनी अपने हुस्न की दुहाई देते हुए कह रही थी की मेरे कड़क निपल्स देखकर तेरे पापा मेरी तरफ खींचे चले आएँगे..

वैसे ये सब हो हँसी खेल में रहा था,
कोई आपसी रंजिश या लड़ाई में नही..

और ऐसे टॉपिक पर एक दूसरे से बहस करके दोनो एंजाय भी खूब कर रही थी..
और अंत में दोनो ने यही डिसाइड किया की दोनो ही अपनी तरफ से अपने हुस्न की ताक़त दिखाएँगी और राजेश को पहले अपनी चुदाई के लिए मनाएँगी..

इस रोमांचकारी खेल में कितना मज़ा आने वाला था यही सोचकर दोनो की कुँवारी चूतें अभी से गीली हुए जा रही थी.
और इसी बीच राजेश भी वहाँ आ पहुँचा..
वो तो उन दोनो की जवानी छोटे कपड़ो में देखकर गर्म हो रहा था
और वो दोनो मंद-2 मुस्कुरा कर अपनी चाल चलने के चक्कर में थी.

अचानक चाँदनी बोली : "अंकल.प्लीज़ देखो ना.मुझे सुबह से यहाँ बहुत पैन हो रहा है..''

अपनी जाँघ के पिछले हिस्से को दबाते हुए जब उसने ये बात कही तो राजेश का लॅंड और ज़्यादा टाइट होने लगा.
वो जिस एंगल से दिखा रही थी, उसकी उभरी हुई गांड के साथ-2 उसकी मलाईदार जाँघ भी उसके सामने उजागर हो गयी..

था तो वो मुर्दों का डॉक्टर और यहाँ जिंदा इंसान उससे ऐसे पूछ रहे थे जैसे वो ऑल राउंडर है.

पर असल बात दोनो ही जानते थे,

ना तो चाँदनी को कोई दर्द था और ना ही राजेश को उसे ठीक करने का कोई अनुभव.
वो तो बस राजेश को अपनी तरफ आकर्षित करने का तरीका था चाँदनी का..

अपनी चंठ सहेली की चतुराई देखकर ईशा भी हैरान थी.
पर अभी वो कुछ नही बोली, क्योंकि जब वो अपनी चाल चलेगी तो चाँदनी को भी इसी तरह चुप रहना होगा..
अभी के लिए तो वो अपने पापा का चेहरा देख रही थी,
जो किसी भूखे शेर की तरह उस माँस को देख रहा था जिसे वो कच्चा खा जाने वाला था..

राजेश की मोटी उंगलियाँ जब चाँदनी की जाँघ से टकराई तो वो सीसीया उठी..
राजेश ने और अंदर उंगलियाँ गाड़कर उसके गुदाजपन को महसूस किया.
इतनी चिकनी और भरी हुई जाँघ थी उसकी ,
राजेश का तो मान कर रहा था की जीभ निकाल कर उसे चाट ले..



ऐसा सोचते हुए एक बार के लिए उसकी जीभ मुँह से बाहर आ भी गयी थी उसकी पर फिर उसने उसे अंदर किया..
वैसे एक डॉक्टर को ऐसा ही होना चाहिए,
अपने स्टेथेसकोप की जगह उसे अपनी जीभ लगा कर मरीज को चेक करना चाहिए.
ऐसे चेक करने में कितना मज़ा आएगा, ये सोचते हुए राजेश मंद-2 मुस्कुरा उठा.

राजेश : "लगता है क्रेम्प आ गया है.थोड़ी मसाज करनी होगी..मेरे रूम में मूव की ट्यूब पड़ी है, वो लेकर आता हूँ .''
 
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