रजनी की गांड से रिस रिसकर ढेर सारा बिरजू का रस निकलने लगा और चूत में से उसका खुद का.माहौल एकदम शांत हो चुका था.दोनो गहरी साँसे लेते हुए एक दूसरे के उपर गिरकर संभलने की कोशिश कर रहे थे.
तब रजनी ने पहली बार उसके काले भूसंद लॅंड को देखा..काले नाग जैसा ख़ूँख़ार था वो..गांड मारने के बाद अपने ही रस में डूबकर अब सुस्ता रहा था..उसकी नसें दूर से ही चमक रही थी..
और जिस काले लॅंड की कल्पना उसने आज तक की थी, वो उससे भी ज़्यादा निकला..और एक अंजान सम्मोहन में बँधी रजनी का सिर खिसक-2 कर अपने आप उसके लॅंड की तरफ जाने लगा..
बिरजू के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी ये सोचते ही की अब ये रसीली भाभी उसके मोटे लॅंड को मुँह में लेगी..अभी तो पूरा दिन पड़ा था.और इस पूरे दिन में उसे क्या-2 करना है ये वो अच्छी तरह से जानता था.
*****************
अब आगे
*****************
रजनी की लपलपाती जीभ ने बिरजू के लॅंड को छुआ तो उसे करंट सा लगा..
बिरजू ने शायद कल्पना भी नही की थी की इतने ऊँचे घराने की औरत उसके लॅंड को चूसने के लिए इतनी बेकरार होगी..
बिरजू की आँखो में भी हवस की परछाईयाँ एकदम से उमड़ी और उसने रजनी के बाल पकड़कर अपना पूरा लौड़ा एक ही बार में उसके मुँह में घुसेड डाला.
बेचारी गुं गुं करती हुई छटपटाने लगी.
शायद उसकी साँस अटक रही थी इतना बड़ा लॅंड मुँह में लेने से.
पर उसे मज़ा बहुत आ रहा था.
इसलिए जब बिरजू ला रस से सना लॅंड उसके मुँह मे गया तो वो उसे बुरी तरह से चूसने लगी.
जैसे लॉलिपोप..
और उसकी नसों में फंसी आख़िर की चंद बूंदे भी उसने अंदर फूँक मारकर निगल डाली.
तभी दरवाजे पर एक आहट सी हुई.
बिरजू ने देखा तो उसकी बीबी पिंकी खड़ी थी.
वो उसे देखकर मुस्कुरा दिया.
उसके हाथ में ट्रे थी जिसमे बड़े से काँच के ग्लास में बादाम वाला दूध था..
रजनी ने तिरछी नज़रों से देखा की कौन है, और पिंकी को देखकर वो एक बार फिर से अपने काम में लग गयी.
पिंकी का बदन अपने सामने का नज़ारा देखकर सुलग सा उठा.
वैसे तो उसे पता था की उसका मर्द दूसरी औरतों के पास जाता है पर ऐसे उसे किसी दूसरी औरत के साथ देखने के ये पहला मौका था.
अपनी मालकिन को अपने पति के लॅंड को चूसते देखकर उसे इस वक़्त खुद मालकिन होने का एहसास हो रहा था.
कैसे ये बड़े घर की औरतें मोटे लॅंड की दीवानी होती है.
अपने ही घर में काम करने वाली औरत के पति का लॅंड वो ऐसे चूस रही थी जैसे इसी दिन के लिए पैदा हुई थी वो..
मालकिन और नौकर के अंतर को ख़त्म करते इस दृश्य ने एक अलग सा एहसास करवाया पिंकी को.

पिंकी आगे चलकर आई और बादाम मिल्क अपने पति को देते हुए बोली : "लो जी.ये पी लो, इस से ताक़त मिलेगी..ताकि आप मालकिन की अच्छी तरह से सेवा कर सके.''
बिरजू ने मुस्कुराते हुए वो ग्लास ले लिया और एक लंबे घूंठ के साथ वो दूध पी डाला.
उसने देखा की पिंकी की नज़रें नागिन बनकर उल्टी लेती मालकिन के जिस्म पर फिसल रही थी.
उसे देखकर बिरजू को एक ख़याल आया और वो बोला : "एक काम करो..तुम भी आओ.और नीचे से मालकिन को चूसो.तैयार करो इनकी चूत को मेरे लॅंड को लेने के लिए.''
बिरजू की बात सुनकर रजनी का शरीर काँप सा उठा.
एक साथ दोहरे मज़े की कल्पना मात्र से ही उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
नीचे ईशा नहाने के बाद सो चुकी थी, इसलिए पिंकी भी खाली थी अब.
और ऐसे रसीले दृश्य को देखकर सच कहो तो उसकी चूत भी पनिया चुकी थी.
इस वक़्त उसकी चूत का हाल ये था की चाहे तो उसके पति का लंड मिल जाए या उसकी मालकिन की चूत की रगड़ ,वो दोनो से ही काम चला लेगी
पर उसके लिए पहले मालकिन की सेवा भी तो करनी पड़ेगी ना.
उसने जल्दी-2 अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए.
पहले साड़ी और फिर पेटीकोट और ब्लाउज़.
कच्छी वो पहनती नही थी..
और ब्रा उसकी फट चुकी थी जो फेंकने वाली हो रही थी..
इसलिए उसने उसे खुद ही फाड़ते हुए निकाल कर फेंक दिया.
एक मिनट से भी कम समय में वो जन्मजात नंगी खड़ी थी.
तब रजनी ने पहली बार उसके काले भूसंद लॅंड को देखा..काले नाग जैसा ख़ूँख़ार था वो..गांड मारने के बाद अपने ही रस में डूबकर अब सुस्ता रहा था..उसकी नसें दूर से ही चमक रही थी..
और जिस काले लॅंड की कल्पना उसने आज तक की थी, वो उससे भी ज़्यादा निकला..और एक अंजान सम्मोहन में बँधी रजनी का सिर खिसक-2 कर अपने आप उसके लॅंड की तरफ जाने लगा..
बिरजू के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी ये सोचते ही की अब ये रसीली भाभी उसके मोटे लॅंड को मुँह में लेगी..अभी तो पूरा दिन पड़ा था.और इस पूरे दिन में उसे क्या-2 करना है ये वो अच्छी तरह से जानता था.
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रजनी की लपलपाती जीभ ने बिरजू के लॅंड को छुआ तो उसे करंट सा लगा..
बिरजू ने शायद कल्पना भी नही की थी की इतने ऊँचे घराने की औरत उसके लॅंड को चूसने के लिए इतनी बेकरार होगी..
बिरजू की आँखो में भी हवस की परछाईयाँ एकदम से उमड़ी और उसने रजनी के बाल पकड़कर अपना पूरा लौड़ा एक ही बार में उसके मुँह में घुसेड डाला.
बेचारी गुं गुं करती हुई छटपटाने लगी.
शायद उसकी साँस अटक रही थी इतना बड़ा लॅंड मुँह में लेने से.
पर उसे मज़ा बहुत आ रहा था.
इसलिए जब बिरजू ला रस से सना लॅंड उसके मुँह मे गया तो वो उसे बुरी तरह से चूसने लगी.
जैसे लॉलिपोप..
और उसकी नसों में फंसी आख़िर की चंद बूंदे भी उसने अंदर फूँक मारकर निगल डाली.
तभी दरवाजे पर एक आहट सी हुई.
बिरजू ने देखा तो उसकी बीबी पिंकी खड़ी थी.
वो उसे देखकर मुस्कुरा दिया.
उसके हाथ में ट्रे थी जिसमे बड़े से काँच के ग्लास में बादाम वाला दूध था..
रजनी ने तिरछी नज़रों से देखा की कौन है, और पिंकी को देखकर वो एक बार फिर से अपने काम में लग गयी.
पिंकी का बदन अपने सामने का नज़ारा देखकर सुलग सा उठा.
वैसे तो उसे पता था की उसका मर्द दूसरी औरतों के पास जाता है पर ऐसे उसे किसी दूसरी औरत के साथ देखने के ये पहला मौका था.
अपनी मालकिन को अपने पति के लॅंड को चूसते देखकर उसे इस वक़्त खुद मालकिन होने का एहसास हो रहा था.
कैसे ये बड़े घर की औरतें मोटे लॅंड की दीवानी होती है.
अपने ही घर में काम करने वाली औरत के पति का लॅंड वो ऐसे चूस रही थी जैसे इसी दिन के लिए पैदा हुई थी वो..
मालकिन और नौकर के अंतर को ख़त्म करते इस दृश्य ने एक अलग सा एहसास करवाया पिंकी को.

पिंकी आगे चलकर आई और बादाम मिल्क अपने पति को देते हुए बोली : "लो जी.ये पी लो, इस से ताक़त मिलेगी..ताकि आप मालकिन की अच्छी तरह से सेवा कर सके.''
बिरजू ने मुस्कुराते हुए वो ग्लास ले लिया और एक लंबे घूंठ के साथ वो दूध पी डाला.
उसने देखा की पिंकी की नज़रें नागिन बनकर उल्टी लेती मालकिन के जिस्म पर फिसल रही थी.
उसे देखकर बिरजू को एक ख़याल आया और वो बोला : "एक काम करो..तुम भी आओ.और नीचे से मालकिन को चूसो.तैयार करो इनकी चूत को मेरे लॅंड को लेने के लिए.''
बिरजू की बात सुनकर रजनी का शरीर काँप सा उठा.
एक साथ दोहरे मज़े की कल्पना मात्र से ही उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
नीचे ईशा नहाने के बाद सो चुकी थी, इसलिए पिंकी भी खाली थी अब.
और ऐसे रसीले दृश्य को देखकर सच कहो तो उसकी चूत भी पनिया चुकी थी.
इस वक़्त उसकी चूत का हाल ये था की चाहे तो उसके पति का लंड मिल जाए या उसकी मालकिन की चूत की रगड़ ,वो दोनो से ही काम चला लेगी
पर उसके लिए पहले मालकिन की सेवा भी तो करनी पड़ेगी ना.
उसने जल्दी-2 अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए.
पहले साड़ी और फिर पेटीकोट और ब्लाउज़.
कच्छी वो पहनती नही थी..
और ब्रा उसकी फट चुकी थी जो फेंकने वाली हो रही थी..
इसलिए उसने उसे खुद ही फाड़ते हुए निकाल कर फेंक दिया.
एक मिनट से भी कम समय में वो जन्मजात नंगी खड़ी थी.



















