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Guest
'ओह, तो आप आत्महत्या कर रहे थे?'
__ 'हां, बेटे ।' बूढ़े की आवाज गले में सुध गई-'लेकिन तुम दोनों को देखकर लगता है कि मेरी बेटी और दामाद ने दूसरा जन्म लिया है या मरे ही नहीं हैं । तुम लोग यहां रहोगे-यहीं हनीमून मनाओगे तो मुझे भी शांति मिलेगी और मेरी बेटी और दामाद की आत्माओं को भी ।'
फिर उसने राज और डॉली के हाथ पकड़कर भारी आवाज में कहा
'मुझे वचन दो । तुम मुझे छोड़कर नहीं जाओगे?'
डॉली की आंखें भीग गई थी। उसने भारी आवाज में कहा
'बाबा...!'
बूढ़े ने कहा
'नहीं, बेटी! मुझे बाबा नहीं पापा कहकर पुकारो | मेरी बेटी भी मुझे इसी नाम से पुकारा करती थी । मैं इस सम्बोधन के लिए तरस गया हूं।'
'पापा...!'
बूढ़ा रो पड़ा। फिर उसने आंसू पोंछे और बोला
_ 'बेटी! यहां सब-कुछ मौजूद होगा । अपने लिए जो मन चाहे बनाओ । आज मैं कुछ नहीं खाऊंगा । नींद की गोली लेकर सोऊंगा।'
फिर उसने इशारे से बताकर कहा
'वह जीने चढ़कर ऊपर जाओ। कॉरीडोर में बिल्कुल आखिरी कमरा मेरी बेटी का था । तुम लोग भी उसी कमरे में रहोगे ।'
'जी, पापा !'
फिर राज के कहने पर डॉली खाना बनाने चली गई।
जैसे ही राज ने अंदर से दरवाजा बंद किया । डॉली उछलकर खड़ी हो गई ।
वह कंपकंपाती आवाज में बोली
'यह क्या कर रहे हो?'
'दरवाजा बंद कर रहा हूं।'
'म...म...मैं पूछती हूं, तुम इस कमरे में क्यों आए हो?'
राज ने भोलेपन से कहा 'हनीमून मनाने ।'
डॉली उछलकर कराटे की पोजीशन में आ गई और बोली
+
'खबरदार ! अगर तुमने मुझे हाथ भी लगाया । मैं अकेली दस-बारह को ठीक कर लेती हूं।'
'ठीक है...यही सही...।'
.
राज भी कराटे की पोजीशन में आ गया और बोला
'अगर तुमने मुझे मार लिया तो मैं वापस चला जाऊंगा । अगर तुम हार गई तो फिर मैं यहां से तुम्हारे साथ हनीमून मनाकर ही निकलूंगा।'
डॉली का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था । लेकिन उसने फैसला कर लिया था कि वह या तो राज को मार डालेगी या खुद मर जाएगी । मगर अपनी लाज पर आंच नहीं आने देगी । सहसा उसकी कल्पना में यशोदा का चेहरा घूम गया ।
'मैं अपने बेटे को दूर से तो देख सकती हूं, छाती से नही लगा सकती।'
__ 'हां, बेटे ।' बूढ़े की आवाज गले में सुध गई-'लेकिन तुम दोनों को देखकर लगता है कि मेरी बेटी और दामाद ने दूसरा जन्म लिया है या मरे ही नहीं हैं । तुम लोग यहां रहोगे-यहीं हनीमून मनाओगे तो मुझे भी शांति मिलेगी और मेरी बेटी और दामाद की आत्माओं को भी ।'
फिर उसने राज और डॉली के हाथ पकड़कर भारी आवाज में कहा
'मुझे वचन दो । तुम मुझे छोड़कर नहीं जाओगे?'
डॉली की आंखें भीग गई थी। उसने भारी आवाज में कहा
'बाबा...!'
बूढ़े ने कहा
'नहीं, बेटी! मुझे बाबा नहीं पापा कहकर पुकारो | मेरी बेटी भी मुझे इसी नाम से पुकारा करती थी । मैं इस सम्बोधन के लिए तरस गया हूं।'
'पापा...!'
बूढ़ा रो पड़ा। फिर उसने आंसू पोंछे और बोला
_ 'बेटी! यहां सब-कुछ मौजूद होगा । अपने लिए जो मन चाहे बनाओ । आज मैं कुछ नहीं खाऊंगा । नींद की गोली लेकर सोऊंगा।'
फिर उसने इशारे से बताकर कहा
'वह जीने चढ़कर ऊपर जाओ। कॉरीडोर में बिल्कुल आखिरी कमरा मेरी बेटी का था । तुम लोग भी उसी कमरे में रहोगे ।'
'जी, पापा !'
फिर राज के कहने पर डॉली खाना बनाने चली गई।
जैसे ही राज ने अंदर से दरवाजा बंद किया । डॉली उछलकर खड़ी हो गई ।
वह कंपकंपाती आवाज में बोली
'यह क्या कर रहे हो?'
'दरवाजा बंद कर रहा हूं।'
'म...म...मैं पूछती हूं, तुम इस कमरे में क्यों आए हो?'
राज ने भोलेपन से कहा 'हनीमून मनाने ।'
डॉली उछलकर कराटे की पोजीशन में आ गई और बोली
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'खबरदार ! अगर तुमने मुझे हाथ भी लगाया । मैं अकेली दस-बारह को ठीक कर लेती हूं।'
'ठीक है...यही सही...।'
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राज भी कराटे की पोजीशन में आ गया और बोला
'अगर तुमने मुझे मार लिया तो मैं वापस चला जाऊंगा । अगर तुम हार गई तो फिर मैं यहां से तुम्हारे साथ हनीमून मनाकर ही निकलूंगा।'
डॉली का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था । लेकिन उसने फैसला कर लिया था कि वह या तो राज को मार डालेगी या खुद मर जाएगी । मगर अपनी लाज पर आंच नहीं आने देगी । सहसा उसकी कल्पना में यशोदा का चेहरा घूम गया ।
'मैं अपने बेटे को दूर से तो देख सकती हूं, छाती से नही लगा सकती।'