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अंदाज़

राज बिस्तर से उतरता हुआ बोला

'लेट जाओ बिस्तर पर । मैं तुम्हारे और अपने लिए चाय बनाकर लाता हूं। आखिर पापा को भी तो विश्वास होना चाहिए कि हम लोग पति-पत्नी है।'

डॉली ने उसकी भुजा पकड़कर कहा 'अच्छा ठहरो, मैं चाय बनाकर लाती हूं।'

राज ने भुजा झटककर कहा 'नहीं, मैं बनाकर लाऊंगा।'

'नहीं, मैं बनाकर लाऊंगी।'

'नहीं, मैं बनाऊंगा।'

'नहीं, मैं बनाऊंगी।'

दोनों झगड़ते हुए एक-दूसरे को खीचते हुए बाहर आए और किचन के दरवाजे पर पहुंचकर एक ऐसे आदमी से टकरा गए जिसकी उम्र अधेड़ होगी। कपड़ों में नौकर मालुम हो रहा था । राज ने उसे झटककर कहा

'बीच में से हटो जी।'

नौकर ने उन दोनों को घूरकर कहा

'क्या करने आए हैं आप लोग?'

राज ने जवाब दिया

'मैं चाय बनाने आया हूं।'

डॉली ने कहा

'नहीं, मैं बनाऊंगी।'

नौकर दोनों के बीच में आकर दोनों को अलग करके बोला

एक मिनट...एक मिनट...।'

दोनों के होंठ हिलते रह गए।

नौकर ने कहा 'चाय मैं बना रहा हूं।'

राज ने कहा

'अच्छा हुआ । तुमने हमारा झगड़ा निबटा दिया ।'

'आप लोग फिर से झगड़ा शुरू कर दीजिए

'क्यों...?'

'क्योंकि चाय मैं सिर्फ अपने लिए बना रहा हूं

'व्हाट...?'

'और आप लोग बंगले से बाहर जाकर झगड़ा कीजिए । मैं चाय पीने के बाद बाहर आकर आप लोगों से पूछूगा कि आप लोग हैं कौन और यहां क्या कर रहे हैं ?'

डॉली और राज चौक पड़े। दोनों ने नौकर को देखकर एक साथ पूछा

'हम पूछते हैं तुम कौन हो?'

नौकर ने इत्मीनान से चाय कप में उड़ेलते हुए कहा

'इस बंगले का चौकीदार ।'

डॉली ने कहा 'और मैं इस बंगले के मालिक की बेटी हूं ।'

'आप बंगले के मालिक की बेटी हैं?'

राज ने कहा 'हां । और मैं मालिक का दामाद हूं।'

'और आप दामाद हैं?'

'हां, पूछ लो जाकर पापा से ।'

नौकर ने चाय प्याली में लेकर एक बूंट भरा तो डॉली और राज के मुंह में पानी भर आया।

चौकीदार ने फिर से कहा

'तो आप मालिक की बेटी हैं और आप मालिक के दामाद?'

'हां...भई...हां ।'

फिर राज चौंककर बोला

'तुम यहां के चौकीदार हो?'
 
चौकीदार प्याली खाली करता हुआ बोला

'जी, हां।'

अचानक चौकीदार ने कहा

'एक मिनट । जरा, आप अपनी-अपनी तस्वीरें तो देख लीजिए ।'

'कहां है हमारी तस्वीरें ?'

'आप लोगों के कमरे में । आइए तो सही ।'

चौकीदार उन दोनों को कमरे में लाया, जहां दूल्हा-दुल्हन के रूप में एक युवक-युवती की तस्वीर कार्निस पर रखी थी। चौकीदार ने कहा

'ये रही आप लोगों की तस्वीरें ।'

डॉली ने कहा

'यह पाप की बेटी और दामाद की तस्वीरें हैं ना?'

'जी हां और ये दोनों कार दुर्घटना में मर चुके है । उसी दिन, जिस रोज उन्होंने शादी की थी मंदिर में ।'

'लव-मैरिज ना?'

'जी, हां ।'

'हमें मालूम है।'

'तब तो आपको यह भी मालूम होगा कि मालिक की कार का एक्सीडेंट हो गया था?'

'हां, हम लोग ही उन्हें बंगले लेकर आए थे।'

'और उन्होंने आपसे कहा था कि आप दोनों यहां हनीमून मनाएं, ताकि उनकी बेटी और दामाद की आत्माओं को शांति मिले ।'

'हां...!'

'अब आइए मेरे साथ ।'

चौकीदार उन दोनों को बाहर लाता हुआ बोला

'आप लोगों ने स्टोर-रूम से फर्स्ट एड बॉक्स निकाला होगा?'

'हां...।'

'और यहां कुर्सी पर लिटाकर उनकी बैंडेज की होगी?'

'हां...!'

'फिर उन्हें बैडरूम में पहुंचा दिया होगा।'

'हां, भई हां ।'
 
'एक्शन फाइव हड्रैड!'

'क्या मतलब?'

'हां, भई कहां करते हैं । एक्शन फाइव हरैंड से नाक खुल जाती है ना?'

'क्या बक रहे हो?'

'आपकी नाक तो खुली है । आंखें खोल रहा

चौकीदार दोनों को एक बैडरूम में लाया

'आप लोगों ने मालिक को यहां लिटाया होगा?'

'हां...!'

'उन्होंने नींद की गोलियां ली होंगी और सो गए होंगे?'

'हां...' डॉली ने हैरत से कहा

लेकिन यह बिस्तर...' चौकीदार ने वहा

'बिल्कुल साफ पड़ा है ना? एक भी सिलवट चादर पर नहीं । रजाई और कम्बल भी तह किए हुए रखे हैं।'

राज ने उसे घूरकर कहा

'वह तुमने रखे होगें।

चौकीदार ने एक तरफ इशारा करके कहा

'लेकिन वह तस्वीर तो मैंने नहीं लगाई ।'

उन लोगों ने कार्निस की तरफ देखा और डॉली के दिमाग में जैसे एक जोरदार बम का धमाका-सा हुआ । राज भी हड़बड़ाकर पीछे हट गया ।

___ कार्निस पर उस बूढ़े की एक बड़ी-सी तस्वीर लगी थी, जिसके ऊपर हार पड़े थे और नीचे अगरबत्ती सुलग रही थी ।

डॉली का दिल छाती में हथौड़े की तरह बज रहा था । उसने छाती पर हाथ रखकर कंपकंपाती हुई आवाज में कहा

'जी, मालिक ही हैं।'

राज ने थूक निगलकर कहा

'मगर यह...यह...।'

चौकीदार ने कहा

'पिछले साल कल ही रात उन्होंने अपनी गाड़ी घाटी में गिराकर आत्महत्या कर ली थी।'

'क...क...क्यों...?'

चौकीदार फिर से आंसू पोंछकर सुधे गले से बोला-'क्योंकि उनकी इकलौती बेटी जो मुम्बई में पढ़ती थी...।'
 
राज ने कहा 'वह एक टैक्सी-ड्राइवर से प्यार करने लगी थी।'

चौकीदार ने भारी आवाज में कहा

'जी, हां...'

डॉली ने कहा

'और पापा ने उन दोनों को मंदिर में शादी करते देख लिया था ।'

'जी, हां । मालिक को अपनी दौलत का बहुत घमण्ड था । उन्होंने अपनी बेटी को अवज्ञा का दंड का फैसला किया । उन दोनों को आशीर्वाद दिया और हनीमून मनाने इस बंगले के लिए कार में भेजा ।'

राज ने कहा

'और कार के ब्रेक ऑयल का ढक्कन खोल दिया ।"

'जी हां, उनकी कार के ब्रेक फेल हो गए और वे लोग कार के साथ एक खड्ड में जाकर गिरे । उनकी लाशें और गाड़ी तक का पता नहीं मिला ।'

डॉली ने थूक निगलकर कहा

'और पापा को बाद में इस बात का अनुभव हुआ कि इकलौती बेटी और दौलत में क्या अंतर होता

'जी, हां । उन्होंने भी खुद को कार समेत घाटी में गिरा लिया । उनकी भी न तो लाश मिली, न ही कार !'

उसने आंसू पोंछे और बोला

'इस घटना को दो वर्ष बीत गए । लेकिन मालिक की आत्मा हर वर्ष की उस रात को, जिस रात उनके बेटी दामाद उनके घमण्ड और अहंकार का शिकार हुए थे-किसी एक जोड़े को बिल्कुल इसी प्रकार इस बंगले में लाती है । वे लोग हनीमून मनाते हैं और जब सुबह उन्हें सच्चाई का पता चलता है तो वे लोग डरकर भाग जाते है ।'

उसने आंसू पोंछे और बोला 'मैने एक पंडित जी से यहां हवन कराया था उन्होंने कहा था । जब तक इस बंगले में कोई जोड़ा उस समय तक हनीमून नहीं मनाए कि स्त्री गर्भवती न हो जाए, तब तक मालिक की आत्मा यहां ऐसे ही आती रहेगी क्योंकि इस बंगले में हनीमून मनाने वाले जोड़े की स्त्री की कोख से ही मालिक की बेटी का पुनर्जन्म होगा, उनके दामाद का पुर्नजन्म हो चुका है

'अब किसी जन्म में मालिक की बेटी और दामाद को हनीमून मनाना है-तभी मालिक की आत्मा को दो प्यार करने वाले दिलों के श्राप से मुक्ति मिलेगी

डॉली सन्नाटे में खड़ी रह गई।

उसने कुछ देर बाद राज की तरफ देखा । वह भी भौंचक्का-सा खड़ा हुआ बूढ़े की तस्वीर देख रहा था।

__चौकीदार ने अपने आंसू पोंछे । उन दोनों के चेहरे बारी-बारी देखे । फिर गंभीरता के साथ धीरे-से बोला

'डर गए ना आप लोग भी?'

वे दोनों चौक पड़े।

राज ने थूक निगलकर कहा

'न...न...नहीं तो...'

चौकीदार फीकी-सी मुस्कान के साथ बोला

'आप दोनों के चेहरे बता रहे हैं कि आप लोग भी डर गए हैं। हर कोई डर जाता है और डरना ही चाहिए। कोई भी यह नहीं सोचता कि जिस मरने वाले की कोई बडी इच्छा पूरी नहीं होती तो उसकी आत्मा परलोक नहीं जाती, इसी लोक में भटकती है या फिर उस व्यक्ति की आत्मा भटकती है, जिस पर कोई श्राप हो और जब तक उस आत्मा को श्राप से मुक्ति नही मिलती, वह इसी तरह भटकती है।'
 
कुछ पल रुकने के बाद उसने फिर से कहा 'और आप लोग जानते हैं कि जिस आत्मा पर श्राप हो, वह मुक्ति पाने का हर संभव प्रयास करती है और जिन व्यक्तियों के द्वारा उसे मुक्ति मिल सकती है, अगर वे लोग उसे मुक्ति न दिलाएं तो उस आत्मा को उन व्यक्तियों पर गुस्सा भी आ जाता है ।'

डॉली ने थूक निगलकर कहा

'क...क...क्या म...म...मललब?'

'दो वर्ष पहले छोटी मालकिन और जंवाई राजा जी की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर भी मालिक दो प्यार करने वाली को यहां हनीमून मनाने लाए थे । मैंने बताया था ना?'

'हां...!'

'लेकिन वे लोग सवेरे ही डर के मारे भाग खड़े हुए । मैंने बताया था ना?'

'हां, बताया था ।'

'और जब वे यहां से भाग रहे थे तो उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया ।'

'नहीं...!'

'दूल्हा तो बच गया । लेकिन दुल्हन की एक टांग टूट गई ।'

'नहीं...!'

चौकीदार ने ठंडी सांस ली और बोला

"पिछले वर्ष, जब छोटी मालकिन और जंवाईराजा की दूसरी पुण्य-तिथि थी-सब भी मालिक की आत्मा एक-दूसरे प्रेमी जोड़े को लेकर आई थी। 'वे दोनों भी सुबह ही डरकर भाग गए थे। आप लोग जानते है कि उनके दोनों के साथ क्या हुआ?

राज ने होंठों पर जुबान फेरकर कहा

'दोनों लंगड़े हो गए?'

'नहीं, लड़का गूंगा हो गया ।'

'नहीं।'

'और लड़की बहरी हो गई।'

'ऐ भगवान !' डॉली ने छाती पर हाथ रख लिया।

चौकीदार ने ठंडी सांस ली और बोला

'पिछले महीने उन दोनों के भी बेटा पैदा हुआ है । वह गूंगा भी है, बहरा भी है ।'

'नहीं...!'

'अब आप लोगों के लिए दरवाजा खुला पडा है। आप लोग चाहें तो जा सकते हैं । मैं तो ईश्वर से यही प्रार्थना कर सकता हूं कि आप दोनों को कुछ न हो ।'

फिर वह मुड़कर चला गया ।

डॉली और राज सन्नाटे में खड़े रह गए। फिर उन दोनों ने तस्वीर की तरफ देखा और डॉली भय से झुरझुरी लेकर जल्दी से राज के करीब आ गई और कंपकंपाती आवाज में बोली

'मुझे बहुत डर लग रहा है।'

राज ने माथे का पसीना पोंछा और थूक निगलकर बोला

'मैं भी ऐसे मामलों में बहादुर नहीं हूं।'

'भगवान के लिए इस कमरे से तो निकल चलो।'

वे दोनों तुरन्त उस कमरे से निकल आए ।

जिस बैडरूम में डॉली और राज ने रात गुजारी थी, दोनों उसी बैडरूम में आ गए थे और आमने-सामने सोफों पर बैठ गए।

दोनों के चेहरे सफेद थे।

कुछ देर खामोश रहने के बाद डॉली ने कहा

'अब क्या होगा?'

राज ने कहा

'हम दोनों में से एक या हम दोनों लंगड़े-लूलें या गूंगे बहरे हो जाएंगे।'

'नहीं...!'

'यशोदा! आदमी हाथी और शेर से लड़ सकता मगर आत्मा मे नहीं।'
 
'मेरा नाम यशोदा नहीं, डॉली है।'

'तुमने किसी का नाम यशोदा बताया तो था ।'

'वह मेरी आंटी हैं-अनाप आश्रम की संचालक ।'

"लेकिन उनका नाम यशोदा और तुम्हारा नाम डॉली होने से क्या अंतर पड़ता है।'

'मैं समझी नहीं।'

'बूढ़े की आत्मा तो हम दोनों से या हम दोनों में से किसी एक से जरूर बदला लेगी, अगर हम लोग यहां से भागे।'

सहसा डॉली ने चौंककर कहा

लेकिन क्यों? हम दोनों पति-पत्नी थोड़े ही हैं

'क्या मतलब?'

'मतलब यह कि हम दोनों की शादी तो नहीं हुई ना ।'

'वह तो नहीं हुई।'

'जब हम दोनों पति-पत्नी ही नहीं तो हनीमून किसलिए?'

'यह भी तुम ठीक कह रही हो ।'

'और फिर उस बूढ़े की आत्मा...आत्मा थी तो आत्मा को तो अंतर्यामी होना चाहिए । आखिर उसने हम दोनों को पति-पत्नी कैसे समझ लिया?'

.

.

राज ने चुटकी बजाकर कहा 'प्वाइंट...यह है प्वाइंट की बात?'

'मुझे तो कोई चक्कर मालूम होता है।'

मुझे भी...एक जिन्दा आदमी को हम दोनों के बारे में गलतफहमी हो सकती है । मगर एक आत्मा को गलतफहमी कैसे हो सकती है?'

'राज बाबू! कहीं वह चौकीदार हमें मूर्द तो नहीं बना रहा ?'

'क्या मतलब?'

'हो सकता है, वह बूढ़ा जिन्दा हो ।'

'यह कोई चक्कर जरूर है ।' राज उठता हुआ बोला 'चलो, उस चौकीदार से मालूम करते हैं।' वे लोग बैडरूम से निकलकर बाहर आए । राज ने इधर-उधर देखा । बूढ़े के बैडरूम में झांका, जहां उसकी तस्वीर और हार भी पड़े थे । धूपबत्ती भी nसुलग रही थी। फिर राज ने डॉली की तरफ देखा और बोला

'कहा गया चौकीदार?'

'किचन में होगा।'

'आओ, किचन में देखें ।'

वे लोग किचन की तरफ आए।

लेकिन किचन में कोई नहीं था । किचन का काउंटर साफ पड़ा था । चूल्हा भी बुझा हुआ था । बर्तन धुले रखे थे।

लगता था वहां किसी ने चाय बनाई ही न हो । पता नहीं, कब से वह किचन इस तरह साफ-सुथरा पड़ा हो।

दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा । डॉली का चेहरा और भी ज्यादा सफेद पड़ गया था ।

राज ने थूक निगलकर कहा 'क्या तुम भी वही देख रही हो, जो मैं देख रहा हूं।'

'बि...ब...बिल्कुल...।'

'कि लगता है, किचन वर्षों से इस्तेमाल नहीं किया गया ।'

"भगवान के लिए यहां से निकल चलिए, राज बाबू । यह बंगला, मुझे भूत बंगला मालूम होता है । मेरा दिल डर रहा है।'

'आओ, जल्दी चलो ।'

वे दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर तेजी से बाहर आए । जैसे ही वह बाहर निकले, ठिठककर रुक गए
 
कम्पाउंड के भाग में एक आदमी क्यारियां ठीक कर रहा था । वह हुलिये से माली मालूम होता था । धोती-कुर्ता, गर्म कोट और कन्टोप पहने था ।

उन दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और राज ने कहा

'यह तो माली मालूम होता है।'

'चलो, इससे मालूम करते है ।'

'म...म...मैं कहती हूं । निकल चलो ।'

'लेकिन यहां कार जो खड़ी है।'

'तो क्या हुआ?'

' कार स्टार्ट करेंगे तो वह आवाज नहीं सुन लेगा?'

'मैं कहती हूं, कार यही छोड़ दो ।'

'क्यों...?'

'कार कौन-सी अपनी है?'

राज ने कुछ सोचा फिर बोला

'ठहरो कम-से-कम मालूम तो कर लें । संभव है, चौकीदार यही कहीं मौजूद हो । उसने किचन की सफाई कर दी हो ।

' ठीक है मालूम कर लो ।'

वे दोनों धीरे-धीरे चलते हुए माली के पीछे पहुंचे । वह कन्टोप पहने हुए क्यारियां ठीक करने में तल्लीन था ।

पीछे पहुंचकर राज ने पुकारा 'ऐ, सुनो।'

माली के हाथ से खुरपी गिर पड़ी और वह हड़बड़ाकर मुड़ा । वह चौकीदार की सूरत से कुल-कुछ मिलता हुआ एक जवान आदमी था ।

उसके चेहरे पर भय था और आंखों में हैरत । होंठों पर जुबान फेरकर उसने कंपकंपाती आवाज में कहा

'त...त...तुम लोग...जिन्दा हो...?'

डॉली ने डरकर राज की भुजा को कसकर पकड़ लिया। राज ने माली को ध्यान से देखा और फिर संदेह भरे स्वर में पूछा

'यह सवाल क्यों किया तुमने?'

माली ने एक तरफ इशारा करते हुए थूक निगलकर कहा

'वह...वह...कार आप ही की है?'

'हां...क्यों?'

'आप दोनों मालिक को जख्मी हालात में उठाकर जाए थे ।'

.

'हां ।'

'मालिक ने कहा था । आप लोग यहां हनीमून मनाइए?'

राज ने कहा

'हां भई, हां । वह मालिक की आत्मा थी। जो अपनी बेटी और जंवाई की हत्या के श्राप से मुक्ति पाना चाहती थी, जो एक-दूसरे से प्यार करते थे और उन्होंने प्रेम-विवाह किया था ।

_ 'लेकिन मालिक ने उन्हें हनीमून मनाने से पहले ही कार के ब्रेक खराब करके मार डाला था । फिर खुद भी मर गए थे ।'

'ब...बिल्कुल...बिल्कुल...'

'लेकिन तुमने यह कैसे समाझ लिया कि हम मर गए होंगे?'

'इसलिए कि छोटे मालिक की पहली पुण्यतिथि पर...'
 
राज बात काटकर बोला

__ 'तुम्हारे मालिक जिस जोड़े को यहां हनीमून मनाने लाए थे, वह सुबह डरकर भागा और उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया । लड़की लंगड़ी हो गई और उसकी लड़की भी लंगड़ी पैदा हुई ।'

'हां...।'

'और पिछली पुण्य-तिथि पर जो जोड़ा आया था, वे लोग डरकर भागे तो लड़का गूंगा और लड़की बहरी पैदा हो गई।'

'जी हां । इसीलिए मैं तो समझा था कि आप दोनों को मालिक की आत्मा ने मार ही डाला होगा । मैंने सुबह-सुबह यह गाड़ी नीचे खड़ी देखी, तभी समझ गया था कि कल रात छोटी मालकिन और जंवाई राजा की तीसरी पुण्यतिथि थी इसलिए तीसरा जोड़ा आया होगा।'

'और वह मगर गया होगा?'

'बिल्कुल! मैंने तो पुलिस को भी खबर कर दी कि इस बंगले में एक लावारिस गाड़ी खड़ी है, आएं और उठाकर ले जाएं ।'

वे दोनों उछल पड़े।

राज ने कहा

'लावारिस क्यों?'

'इसलिए कि संभव है, आप लोग गाड़ी छोड़कर ही भाग खड़े हुए हों और मालिक की आत्मा ने आपको मार डाला हो । मैं लाशों की मुसीबत क्यों मोल लेता?'

सहसा माली चौंक पड़ा और हैरत से बोला 'क्या आप लोग लंगड़ी दुल्हन वाले जोड़े को जानते हैं?'

'नहीं...!'

.

.

.

'गूंगे-बहरे दूल्हा-दुल्हन के बारे में?'

'नहीं..!' 'तो फिर आप लोगों को यह सब कैसे मालूम हुआ?'

'बंगले के चौकीदार ने बताया था ।'

माली फिर से उछल पड़ा।

'चौकीदार? यानि जिनकी सुरत मुझसे मिलती होगी?'

'हां...!'

'वह तो मेरे बापू थे ।'

'वह तो तुम्हारी सूरत देखकर ही लगता है।' कहते-कहते राज उछल पड़ा और आगे बोला-'थे...से क्या मतलब?'

'मेरे बापू का तो देहांत हो गया ।'

'कब...?'

'मालिक के देहांत के कुछ दिनों बाद ही ।'

डॉली और ज्यादा सहमकर राज से चिपक गई।

राज ने माली को भयभीत नजरों से देखते हुए उसे छुने की कोशिश की और माली उछलकर पीछे हटता हुआ भयभीत स्वर में बोला

'यह...यह क्या कर रहे हैं आप?'
 
राज ने कहा

'मैं देख रहा हूं-तुम भी जिन्दा हो या आत्मा हो?'

'म...म...मैं जिन्दा हूं, साहब? अपनी पत्नी के। सुहाग की सौगन्ध मैं जिन्दा हूं । नहीं तो आप उससे पूछ लीजिए ।'

'कहां है वह?'

'शहर में घनी आबादी में!'

'और तुम यही रहते हो?'

'जी, हां । वरना ये क्यारियां क्या इतनी हरी-भरी होती?'

'मगर कल रात तो इस फाटक और बंगले में ताला पड़ा था ।'

'साहब! बंगले में ताला तो पड़ा ही रहता है। फाटक में ताला डालकर मैं भाग गया था ।'

'क्यों...?'

'मैं हर पुण्यतिथि की रात को भाग जाता हूं । मुझे मालुम है कि मालिक किसी न किसी जोड़े को हनीमून मनाने के लिए लाए होंगे।'

राज ने गुस्से से कहा

'डॉली! तुम यही ठहरना । मैं अभी पुलिस को फोन करता हूं।'

'क...क...क्यों?'

'मुझे यह सब लोग फ्रॉड मालूम होते हैं ।'

माली रो देने वाले अंदाज में बोला

'साहब! पुलिस को तो मैं खुद भी फोन कर चुका हूं।'

'तुम झूठ बोलते हो ।'

'तो फिर आप भी कर लीजिए ।'

अचानक किसी गाड़ी के हार्न की आवाज आई और माली ने चौंककर फाटक की तरफ देखा । फिर उन दोनों से बोला

'लीजिए, आ गई पुलिस?'

.

उन दोनों ने भी चौंककर देखा ।

पुलिस की एक जीप आकर रुकी, जिसमें से एक पुलिस इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबिल उतरे । पुलिस इंस्पेक्टर ने कार की तरफ इशारा करके कांस्टेबिलों से कहा-'देखो...।'

-

-

फिर वह उन लोगों की तरफ आया । माली लपककर आगे चला गया और बड़ी सादर मुद्रा में माथे की तरफ हाथ उठाकर बोला

'सलाम साहब!'

इंस्पेक्टर ने जावब दिया

'सलाम...!'

फिर वह लाल मारुति की तरफ इशारा करके बोला-'यही है वह मारुति, जो यहां लावारिस खड़ी थी?'

अचानक एक कांस्टेबिल ने जोर से कहा

'साहब! इस गाड़ी के नम्बर वह नहीं है, जो मुम्बई से चोरी हुई है।'

डॉली का दिल जोर-जोर से धड़क उठा।

राज की भुजा पकड़कर वह राज के करीब हो गई । राज भी चुप खड़ा था।

माली ने झट इंस्पेक्टर मे कहा

'हुजूर! अब यह गाड़ी लावारिस नहीं है।'

'क्या मतलब?'

'इस गाड़ी के वारिस जिन्दा हैं ।' उसनेडॉली और राज की तरफ इशारा किया।
 
इंस्पेक्टर ने डॉली और राज को देखा और बोला-'ओहो, तो यह गाड़ी आपकी है?'

राज ने इत्मीनान से जवाब दिया

'जी, हां...'

'और इस मूर्ख ने आप दोनों को मुर्दा समझकर गाड़ी को लावारिस समझ लिया और पुलिस-स्टेशन खबर भी कर दी ।'

माली हाथ जोड़कर बोलो 'हुजूर! मैं तो यही समझा था ।'

'पागल हो तुम । राय बहादुर की आत्मा ने क्या पहले दो जोड़ों की जाने ली थी, जो इनकी जानें ले लेते?'

'नहीं, साहब ।' 'एक जोड़े में सिर्फ दुल्हन लंगड़ी हो गई थी ना?'

'जी, हां...'

'और दूसरे दोनों गूंगे-बहरे हो गए थे ।'

'और उन दोनों जोड़ी की औलादें ।'

इंस्पेक्टर में बात काटकर कहा

'क्या बकवास है? वे दोनों जोड़े संयोगवश दुर्धटना के शिकार हुए होंगे । भयभीत होकर कार में भागे होंगे । संतुलन बिगड़ गया होगा।'

माली के होंठ हिलते रह गए।

इंस्पेक्टर ने डॉली और राज से कहा 'आप दोनों मुम्बई से आए हैं ?'

राज ने जवाब दिया

'जी, हां ।'

'हनीमून टूर पर आए होंगे । इसीलिए राय बहादुर की आत्मा ने आपको भी बंगले में हनीमून मनाने का निमंत्रण दिया होगा?'

इंस्पेक्टर को ध्यान से देखकर राज ने कहा 'इंस्पेक्टर ! क्या आप भी ऐसी बातों पर विश्वास रखते हैं?'

इंस्पेक्टर मुस्कराया और बोला

'नहीं, रखूगा । आप बताएंगे कि आप यहां कैसे पहुंचे ?'

'वह...हमें...'

इंस्पेक्टर मुस्कराकर बोला

'राय बहादुर पागल अवस्था में दुर्घटनाग्रस्त कार के साथ मिले थे-यही ना?'

'जी, हां ।'

'गत दो वर्षों में दो जोड़ों ने भी यही कहानी सुनाई थी और अब आप तीसरे आदमी है । राय बहादुर को एक्सीडेंट में मरे आज तीसरा वर्ष है । अगर आप लोगों का बयान झूठा है तो यकीनन यह कहानी भी झूठी है।'

राज कुछ न बोला

इंस्पेक्टर ने कहा

.

'श्रीमान! हम ईश्वर पर विश्वास रखते हैं। भूत-प्रेत या आत्माओं से न डरें यह एक अलग बात है लेकिन आत्माएं होती हैं, यह बात तो धर्म भी कहता हैं और जो आदमी अपनी किसी इच्छा की पूर्ति के बिना मर जाता है, उसकी आत्मा जरूर भटकती है या फिर वह आत्मा जिस पर कोई श्राप हो...श्राप से मुक्ति पाने तक जरूर भटकेगी।'

उसने ठंडी सांस ली और बोला

'ऐनी वे । रायबहादुर की आत्मा ने किसी से कार एक्सीडेंट कराया या किसी को लंगड़ा, किसी को गूंगा-बहरा कराया...मुझे इस पर जरा भी विश्वास नही।

'यह इन कम पढ़े-लिये लोगों का अंधविश्वास है। बेहतर होगा कि आप लोग इस बंगले से किसी होटल में शिफ्ट हो जाएं ।'

'जी...!'

'अगर आपको एक्सीडेंट की आशंका हौं तो मेरे साथ जीप में चलिए । ड्राइवर कांस्टेबिल आपकी गाड़ी लेकर चलेगा।'

राज ने कहा

'अब हम लोग इतने डरपोक भी नहीं हैं।'
 
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