S
StoryPublisher
Guest
राज बिस्तर से उतरता हुआ बोला
'लेट जाओ बिस्तर पर । मैं तुम्हारे और अपने लिए चाय बनाकर लाता हूं। आखिर पापा को भी तो विश्वास होना चाहिए कि हम लोग पति-पत्नी है।'
डॉली ने उसकी भुजा पकड़कर कहा 'अच्छा ठहरो, मैं चाय बनाकर लाती हूं।'
राज ने भुजा झटककर कहा 'नहीं, मैं बनाकर लाऊंगा।'
'नहीं, मैं बनाकर लाऊंगी।'
'नहीं, मैं बनाऊंगा।'
'नहीं, मैं बनाऊंगी।'
दोनों झगड़ते हुए एक-दूसरे को खीचते हुए बाहर आए और किचन के दरवाजे पर पहुंचकर एक ऐसे आदमी से टकरा गए जिसकी उम्र अधेड़ होगी। कपड़ों में नौकर मालुम हो रहा था । राज ने उसे झटककर कहा
'बीच में से हटो जी।'
नौकर ने उन दोनों को घूरकर कहा
'क्या करने आए हैं आप लोग?'
राज ने जवाब दिया
'मैं चाय बनाने आया हूं।'
डॉली ने कहा
'नहीं, मैं बनाऊंगी।'
नौकर दोनों के बीच में आकर दोनों को अलग करके बोला
एक मिनट...एक मिनट...।'
दोनों के होंठ हिलते रह गए।
नौकर ने कहा 'चाय मैं बना रहा हूं।'
राज ने कहा
'अच्छा हुआ । तुमने हमारा झगड़ा निबटा दिया ।'
'आप लोग फिर से झगड़ा शुरू कर दीजिए
'क्यों...?'
'क्योंकि चाय मैं सिर्फ अपने लिए बना रहा हूं
'व्हाट...?'
'और आप लोग बंगले से बाहर जाकर झगड़ा कीजिए । मैं चाय पीने के बाद बाहर आकर आप लोगों से पूछूगा कि आप लोग हैं कौन और यहां क्या कर रहे हैं ?'
डॉली और राज चौक पड़े। दोनों ने नौकर को देखकर एक साथ पूछा
'हम पूछते हैं तुम कौन हो?'
नौकर ने इत्मीनान से चाय कप में उड़ेलते हुए कहा
'इस बंगले का चौकीदार ।'
डॉली ने कहा 'और मैं इस बंगले के मालिक की बेटी हूं ।'
'आप बंगले के मालिक की बेटी हैं?'
राज ने कहा 'हां । और मैं मालिक का दामाद हूं।'
'और आप दामाद हैं?'
'हां, पूछ लो जाकर पापा से ।'
नौकर ने चाय प्याली में लेकर एक बूंट भरा तो डॉली और राज के मुंह में पानी भर आया।
चौकीदार ने फिर से कहा
'तो आप मालिक की बेटी हैं और आप मालिक के दामाद?'
'हां...भई...हां ।'
फिर राज चौंककर बोला
'तुम यहां के चौकीदार हो?'
'लेट जाओ बिस्तर पर । मैं तुम्हारे और अपने लिए चाय बनाकर लाता हूं। आखिर पापा को भी तो विश्वास होना चाहिए कि हम लोग पति-पत्नी है।'
डॉली ने उसकी भुजा पकड़कर कहा 'अच्छा ठहरो, मैं चाय बनाकर लाती हूं।'
राज ने भुजा झटककर कहा 'नहीं, मैं बनाकर लाऊंगा।'
'नहीं, मैं बनाकर लाऊंगी।'
'नहीं, मैं बनाऊंगा।'
'नहीं, मैं बनाऊंगी।'
दोनों झगड़ते हुए एक-दूसरे को खीचते हुए बाहर आए और किचन के दरवाजे पर पहुंचकर एक ऐसे आदमी से टकरा गए जिसकी उम्र अधेड़ होगी। कपड़ों में नौकर मालुम हो रहा था । राज ने उसे झटककर कहा
'बीच में से हटो जी।'
नौकर ने उन दोनों को घूरकर कहा
'क्या करने आए हैं आप लोग?'
राज ने जवाब दिया
'मैं चाय बनाने आया हूं।'
डॉली ने कहा
'नहीं, मैं बनाऊंगी।'
नौकर दोनों के बीच में आकर दोनों को अलग करके बोला
एक मिनट...एक मिनट...।'
दोनों के होंठ हिलते रह गए।
नौकर ने कहा 'चाय मैं बना रहा हूं।'
राज ने कहा
'अच्छा हुआ । तुमने हमारा झगड़ा निबटा दिया ।'
'आप लोग फिर से झगड़ा शुरू कर दीजिए
'क्यों...?'
'क्योंकि चाय मैं सिर्फ अपने लिए बना रहा हूं
'व्हाट...?'
'और आप लोग बंगले से बाहर जाकर झगड़ा कीजिए । मैं चाय पीने के बाद बाहर आकर आप लोगों से पूछूगा कि आप लोग हैं कौन और यहां क्या कर रहे हैं ?'
डॉली और राज चौक पड़े। दोनों ने नौकर को देखकर एक साथ पूछा
'हम पूछते हैं तुम कौन हो?'
नौकर ने इत्मीनान से चाय कप में उड़ेलते हुए कहा
'इस बंगले का चौकीदार ।'
डॉली ने कहा 'और मैं इस बंगले के मालिक की बेटी हूं ।'
'आप बंगले के मालिक की बेटी हैं?'
राज ने कहा 'हां । और मैं मालिक का दामाद हूं।'
'और आप दामाद हैं?'
'हां, पूछ लो जाकर पापा से ।'
नौकर ने चाय प्याली में लेकर एक बूंट भरा तो डॉली और राज के मुंह में पानी भर आया।
चौकीदार ने फिर से कहा
'तो आप मालिक की बेटी हैं और आप मालिक के दामाद?'
'हां...भई...हां ।'
फिर राज चौंककर बोला
'तुम यहां के चौकीदार हो?'