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अमरबेल एक प्रेमकहानी

शादी के बाद से कमली बीमार ही रहने लगी थी. ससुराल में न तो किसी से ज्यादा बात करती थी और न ही किसी के पास बैठती थी. सजना संवरना तो अब उससे होता ही नही था. साल भर बाद उसके बच्चा भी हुआ. बच्चा होने पर कमली थोडा सम्हली थी लेकिन उसकी रंगत पहले सा कुछ भी देखने को नहीं मिलता था. ___फिर एक दिन वह अपने गाँव घूमने आई. पहले से थोडा खुश थी. सबसे बातचीत भी करती रही लेकिन पहले जैसा हंसी मजाक. हसना बोलना. चलना फिरना. रूप सुंगार, खुद को सजाने सवारने का शौक अब कमली के अंदर नही रहा था.

गाँव आने पर जब छोटू उसके सामने आया तो उसे फिर से वही याद आ गयी जब वह उसके निक्कर में चिट्ठियाँ रखकर दीनू को भेजा करती थी. कमली ने छोटू को अपनी बहुत खिलाया था लेकिन आज छोटू काफी बड़ा हो गया था. कमली ने आज फिर से छोटू को गले से लगा अपनी यादें ताजा कर ली. फिर आँखों में आंसू ले बिना कुछ कहे अपने घर चली गयी और अपने घर से सीधी ससुराल.

कुछ दिन बाद खबर आई कि कमली की मौत हो गयी है. लम्बी बीमारी के बाद कमली ने अपना शरीर त्याग दिया था. आज न कमली थी और न ही दीनू. शायद कमली मरने के बाद दीनू से मिली हो क्योंकि दीनू भी तो मर गया था. दोनों गये तो एक ही जगह होंगे.

कमली को जानने वाला हर आदमी जानता था कि उसे क्या बीमारी थी? बीमारी लगी कब से थी लेकिन कोई बोलना नही चाहता था. गाँव मोहब्बत करने बाली लड़की की कोई पक्ष ले भी क्यों? उसे तो सजा और मिलनी चाहिए थी. वाह रे बुजदिल जमाने. भगवान करे तू जल्दी बदल जाए. जिससे फिर कोई कमली ऐसी कमली न बनने पाए.

कमली की मौत के कुछ दिन बाद दीनू के भाई बादल ने कई गुंडों को लेकर कमली के बाप सोरन के घर पर धावा बोल दिया. सारा सामान लूटा. पूरे घर को बुरी तरह से पीटा. घर के सारे लोग खूब चीखे चिल्लाये थे. गाँव के लोगों में भी भय का माहौल बन गया था. शायद वो दिवाली का दिन था. ___

चोर सोरन पंडित की छत पर चढकर गाँव के लोगों से कहते थे, “गाँव वालो कान खोलकर सुन लो. हमारी तुम लोगों से कोई दुश्मनी नही है. हम सिर्फ इस सोरन पंडित को लूटने आये है. हमारी इससे निजी रंजिस है इसलिए कोई बीच में आने की हिम्मत न करे, आया तो उसकी खैर नही. हम वादा करते हैं तुम में से किसी और से कुछ नही कहेंगे."

यह सब सुनने के बाद किसी गाँव के आदमी ने सोरन की मदद करने की कोशिश नहीं की, सोरन पंडित के लडके यानि कमली के भाई गाँव के लोगों के दरबाजे पीटते रहे लेकिन किसी ने उनके लिए दरवाजा नही खोला. बादल ने खूब बदला लिया अपने भाई दीनू की मौत का लेकिन इससे फायदा क्या हुआ? अब वो लौटकर तो नहीं आ जायेगा.

अगर दीनू जिन्दा होता तो ऐसा करने ही नही देता. वो अपनी कमली के घर वालों से ऐसा वर्ताव कभी बर्दास्त नहीं करता. दीनू कमली से प्यार करता था और उसके घर के लोगों की इज्जत भी. फिर कुछ साल बाद बादल भी चुन्नी से इश्क कर बैठा. जिसका हश्र भी इससे कम भयानक नही था. इस एक घर के दो लडके प्यार में अपनी जान गवां बैठे थे. एक बादल और उसका भाई दीनू,

कोमल की हिम्मत तो देखो इतने के बाद भी वह राज से इश्क कर बैठी. राम जाने इस नादान लडकी का क्या होगा? लेकिन कुछ भी हो इससे ये तो साबित होता ही है कि दिल किसी के बाप की जागीर नही जिसे अपने कब्जे कर कोई डरा धमका कर, मार पीट कर बंदिश लगाकर और यहाँ तक कि जान से मार कर भी मोहब्बत करना नही भुला सकता. कोमल इसका पुख्ता प्रमाण थी.
 
भाग -6

आज की रात राज और कोमल के साथ देवी के लिए भी बहुत मुश्किल भरी थी. उसे अपनी बहन कोमल को दिया वादा भी पूरा करना था क्योंकि कोमल ने आज राज से बात न कर अपना वादा पूरा कर दिया था. उसने आज अपना दिल मसोस लिया था. उसने ऐसा कर देवी को उसका वादा पूरा करने के लिए बाध्य कर दिया था,

शाम हुई फिर रात हुई. कोमल ने आज पेट भर खाना भी न खाया. दोनों बहनें सोने चल गयी. घर में अभी सब कुछ सामान्य सा था लेकिन घर की इन दो लडकियों के दिलों में आज भूकम्प आया हुआ था. ऐसा भूकम्प जो आज इन्हें ठीक से सोने भी नहीं दे रहा था. कोमल दाए करवट से लेटी थी और देवी बाए से. दोनों की दशा सिक्के के दो पहलुओजैसी थी. दोनों को नींद नहीं आई इसलिए अभी तक जाग रहीं थी. दोनों ही जानती थी कि बगल में पड़ी उसकी बहन जाग रही है लेकिन दोनों में से कोई एकदूसरे से बोलती नही थी. दोनों की दिमागी सोच किसी समस्या के हल वाले समन्दरों की गहराई नाप रही थी. लेकिन दोनों की स्थिति उस मछुआरे जैसी थी जो बीच समुंदर से भी बार बार खाली हाथ लौटता आता हो.

सांसो की आवाजे दोनों की स्थिति का हाल एकदूसरे को बयां कर रही थी. जब भी दोनों तेज तेज साँसे लेने लगती तो पता चलता था कि अब कोई हल सोचा जा रहा है लेकिन जैसे ही वो एक लम्बी सास ले छोडती तभी दूसरे को पता चलता कि हल नहीं मिल पा रहा है और बगल में पड़ी बहन निराश हुई है. दोनों बेशक एक दूसरे के बिपरीत मुंह करे पड़ी थी लेकिन सोच सिर्फ एक ही बात रही थी.

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इधर राज की नींद भी इन दोनों बहनों की तरह ही उडी हुई थी. वह पड़ा पड़ा कोमल के आज किये वर्ताव पर सोच के घोड़े दौडाए जा रहा था. उसे सुबह तक की तस्सली नही थी. ये प्यार में अँधा आशिक अभी के अभी यह जाना चाहता था कि उसकी महबूबा ने आज उससे ऐसा व्यवहार क्यों किया? क्यों बिना देखे चली गयी? क्यों न कुछ बताया? क्या में कोई नही लगता उसका? क्यों वो मुझे बताना नही चाहती?

देवी ने जब देखा कि उसके साथ साथ कोमल की नींद भी उडी हुई है तो देवी के दिल में बहन के लिए प्यार उमड़ आया. वो बगल में लेटी पड़ी कोमल की तरफ पलटी. फिर कोमल को अपने आगोश में लेती हुई उससे बोली, “कोमल क्या तुम्हें नींद नही आ रही. सो जाओ मेरी बहन सब ठीक हो जाएगा. भगवान जरुर कुछ न कुछ......

देवी आगे कुछ बोल पाती उससे पहले ही कोमल देवी की तरफ पलट बोल पड़ी, “अगर तुम मुझे भगवान के भरोसे ही रखना चाहती थी तो आज यह शर्त क्यों रख दी कि में राज से तब तक बात नहीं करू जब तक कि तुम इस परेशानी का हल नहीं निकाल लेती? तुमने तो खुद इस समस्या को सुझाने का वादा मुझसे किया है और अब मुझे भगवान भरोसे छोड़ रही हो."

देवी एक दम से निरुत्तर हो गयी. देवी के मुंह से भगवान के कुछ न कुछ करने वाली बात ने कोमल को यह सन्देश दिया कि देवी ने अभी कुछ भी हल नही निकाल पाया है. और ना ही वो निकालने में सक्षम है. यह सोच देवी अपनी बात को घुमाते हुए बोली, “कैसी बातें करती हो मेरी बहन? क्या तुम नही जानती कि तुम्हारे साथ में भी अभी तक नही सोयी? आधी रात तक आज से पहले तुमने मुझे कभी जगते देखा है. मुझे लगता है कि तुम्हे अपनी इस बहन पर भरोसा ही नहीं है."

कोमल देवी के भरोसे वाली बात से हडवडा गयी. वो तुरंत देवी से बोली, "देवी तुम ये कहने से पहले मेरे आज के रवैये पर नजर डाल सोचती तो शायद ये बात नही कहती. अगर मुझे तुम्हारे ऊपर भरोसा न होता तो आज में राज से बिना कुछ कहे और बिना उसकी तरफ देखे न चली आती.” इतना कह कोमल का गला भर आया. आँखे आसुओं के अम्बार लगाने लगी. ____
 
यह सब देख देवी का दिल भी भर आया. उसने कोमल को अपने कलेजे से लगा लिया और धीरे से बोली, “मेरी बात का गलत मतलब न निकालो मेरी बहन. में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए सोचती हूँ. मुझे नहीं पता कि मेरे मुंह से क्या का क्या निकल रहा है? आज का सब कहा सुना माफ़ करो." यह कह देवी ने कोमल का मुखड़ा अपने हाथों में लिया और उसका माथा चूम उससे बोली, “अब सो जाओ मेरी राजकुमारी. कल की सुबह तुम्हारे लिए भी कुछ न कुछ उजाला जरुर ले कर आएगी."

कोमल को देवी के प्यार से समझाने पर थोडा अच्छा महसूस हुआ. वो फिर से विना कुछ बोले दूसरी तरफ करवट ले सो गयी. राज ने भी यही सोचा कि कल सुबह वो जब दूध लेने कोमल के घर जाएगा तब उससे जरुर पूंछेगा कि पूरी बात क्या है? तीनों दो अलग अलग जगह पर पड़े सोने की कोशिश किये जा रहे थे और फिर तीनो को ही नींद ने आ दबोचा.

सुबह हुई. राज की माँ ने राज को झकझोर कर उठाते हुए कहा, “क्यों रे राज आज दूध कढाने नहीं जायेगा क्या?"

राज रात भर ठीक से सो नहीं पाया था. ऊपर से दिल का भारी भरकम दर्द, माँ से बोला, “आज नहीं जाना पापा को भेज दो."

माँ इतना सुन मुड़ने को हुई लेकिन राज को तब तक ध्यान आ गया कि उसे कोमल के पास भी तो जाना है. वह झट से चारपाई से उठा और माँ से बोला, “रहने दो माँ में ही जा रहा हूँ."

माँ ने देखा कि अभी राज बीमारों की तरह पड़ा था लेकिन न जाने फिर क्या दिमाग में आया कि इतनी फुर्ती से उठ बैठा. राज झट पट से तैयार हो. टंकी को साईकिल पर बाँध कर भाग चला. माँ ने राज की हाल की गतिविधियों को देख सोचा कि वो राज के बाप से इसकी शादी जल्दी करने को कहेगी. गाँव में अक्सर माँ बाप बच्चों की ऊंटपटांग हरकतों को उनकी शादी से जोड़कर देखते हैं..

यही नहीं, अगर बच्चे चारपाई पर बैठ कर पैर हिलाने लगे तो समझ लो वो किसी लड़की के बारे में सोचता होगा. जल्दी ही उस लडके या लडकी की शादी की बात होनी शुरू हो जाती है. किसी लडकी पर अगर भूत आना शुरू हो जाय तो समझ लो उसकी शादी पक्की हो ही जाएगी. और एक लड़का या लडकी ज्यादा हंस हस कर बात कर लें तो दोनों के बीच कोई न कोई चक्कर है.

जल्दी ही उन लोगों के घरवाले उनकी शादी करा डालते हैं. यही नहीं, अगर कोई लड़का या लडकी अकेले रहने लगे या किसी से बात न करें तो भी उनकी शादी करवा दी जाती है. क्योंकि ये लक्षण तो सिर्फ प्यार के रोग में ही पाए जाते हैं जिनका इलाज सिर्फ शादी ही

होता है.

राज एक सांस में कोमल के गाँव पहुंचा. फिर कोमल के घेर(भैसों के रहने की जगह) में. राज का दिल आज कुछ ज्यादा ही धडक रहा था. सोचता था अभी कोमल आएगी तो क्या कहूँगा या वो क्या कहेगी? क्या वो अभी भी कल जैसा ही वर्ताव करेगी या पहले जैसा?

राज अभी यह सोच ही रहा था कि देवी दूध निकालने वाली वाल्टी लिए आ पहुंची. राज का दिमाग बिजली के मारे करंट की तरह झनझना गया. उसे अपनी आँखों पर यकीन न आया. जहां आज तक दूध दूहने कोमल ही आती थी वहां आज देवी आई थी. अब राज को पक्का शक हो गया कि कोई न कोई बात जरुर है.

देवी दूध दुहने भैस के पास बैठ गयी. राज का दिल करता था कि देवी से ही पूँछ ले कि आखिर बात क्या है आज कोमल दूध दुहने क्यों नही आई? फिर सोचा पहले देवी दूध दूह ले फिर पूँछ लेगा. थोड़ी देर बाद देवी भैंस का दूध निकाल राज को देने आई. राज ने लीटर से दूध नाप अपनी बाल्टी में डाल लिया. उसके बाद देवी जाने को हुई लेकिन राज के गम्भीर स्वर ने उसे रोक लिया. राज बोला, "देवी बहन जी आज...वो..कोमल दूध दुहने क्यों नही आई? क्या कोई परेशानी है उन्हें?"
 
देवी पहले तो कुछ सोचने लगी. उसका मन करता था राज से कह दे की कोमल की तबियत खराब है लेकिन उसने गुस्से के लहजे में राज से कहा, "देख राज तू अपने काम से काम रखा कर. तू यहाँ दूध लेने आता है इसलिए चुपचाप दूध लेकर चला जाया कर. कौन आया और कौन नही आया इससे तुझे क्या मतलब?

और हाँ आज के बाद अगर तू रास्ते में मुझे मिला तो तेरी शिकायत में अपने पापा से कर दूंगी. समझा. साथ ही मेरी बहन से तू जितनी दूर रह सके उतना तेरे लिए भी अच्छा है और मेरी बहन के लिए भी. मुझे पता है तूने उसे पागल बनाकर अपने जाल में फंसा लिया है इसलिए आज कान खोल कर सुन ले. मुझे अगर तू उसके आसपास भी नजर आया तो तेरी खैर नही."

देवी की बातें राज को अंदर तक झकझोर गयीं थीं. उसे लग रहा था जैसे देवी उसके सीने पर तलवार से वार करती जा रही है. उसे नहीं पता था कि देवी को उन दोनों के बारे में कैसे पता चला? लेकिन आज उसके लिए देवी को ये बताने का सबसे अच्छा मौका था कि वो कोमल को सच्चा प्यार करता है.

इतना सोच वह देवी के पैरों में गिर गया और गिडगिडाता हुआ आज गिडगिडा रहा था. ____ परन्तु राज की इसमें कोई गलती नहीं थी. जब से कोमल उसके मन को भायी तब से सबकुछ डांवाडोल हो गया था. लोग राज के बेपरवाही का फायदा उठा दूध में अनाप सनाप पानी मिलाने लगे थे. और धीरे धीरे उसकी नौकरी पर मुसीबत आखड़ी हुई. लोगों को राज की चिन्ता, उदासी और मोहब्बत से क्या मतलब? उन्हें क्या करना था राज की परेशानी से. उन्हें तो अपना उल्लू सीधा करना था. उन्हें तो दूध में पानी मिला बेईमानी से पैसा कमाना था.

राज अपने घर लौट आया लेकिन आज वो उस रास्ते पर कोमल का इन्तजार करने नही गया जहाँ वह काफी दिनों से अपनी पलकें बिछाए उस दिल की मुराद कोमल का इन्तजार करता था. आज देवी ने उसे जो चेतावनी दी थी उसका असर राज के दिल पर पत्थर की लकीर जैसा हो गया था. किन्तु उसका दिल नही मानता था. वो तो चाहता था कि कोमल हरएक पल उसके पास रहे.

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इधर कोमल घर से स्कूल के लिए अपनी बहन देवी के साथ उसी रास्ते पर आ पहुंची लेकिन आज राज नाम का वो सुहाना लड़का इस रास्ते पर नही था. कोमल को लग रहा था कि वो कोई सपना देख रही है. क्योंकि इस रास्ते पर राज का न होना सिर्फ सपने में ही हो सकता था.

कोमल को लगता था कि ऐसा कोई दिन नही होगा जिस दिन राज इस रास्ते पर उसे देखने नही आएगा. क्योंकि राज जब से कोमल पर फ़िदा हुआ था तब से आज तक एक भी दिन ऐसा न गया था जब राज यहाँ न आया हो. चाहे वो बरसात का दिन हो और आंधी का या कडकती धूप और सर्दी का. या फिर कोमल के न आ पाने.

राज बोला, "देवी बहन में अपनी सौगंध खाकर कहता हूँ कि में कोमल से अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता हूँ. भगवान कसम अगर वो मुझे नही मिली तो में जी नही पाऊंगा. आप कोमल की बहन हो. आप को अच्छी तरह पता होगा कि वो भी मुझे किस कदर चाहती है? मेरी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि आप हम दोनों से हमारा हक न छिनिये. में आपके पैर पड़ता हूँ. मेरी जिन्दगी अब आप के हाथों में है. आप चाहो तो..."

राज आगे कुछ कहता उससे पहले ही देवी वहां से चली गयी. राज मायूस हो वहां से चल दिया. पूरे गाँव का दूध इकठ्ठा कर गाँव से चला गया. आज राज जब डेयरी पर पहुंचा तो डेयरी मालिक ने उसे तलब कर कहा, “क्यों रे मोहना. आजकल दूध ला रहा है कि पानी? कल परसों के दूध में आधे से ज्यादा पानी आया है. अब तू देख ले आज के दूध में भी पानी निकला तो यहाँ से तेरी छुट्टी पक्की समझ."

राज को अपनी नौकरी जाने का इतना डर नहीं था जितना कि कोमल के गाँव न जा पाने का. अगर इस नौकरी से छुट्टी हो गयी तो कोमल के गाँव कैसे जा पाया करेगा और जाएगा भी तो किसी के पूछने पर क्या काम बतायेगा? राज इतना सोच डेयरी मालिक से गिडगिडाता हुआ बोला, "ऐसा न करना मालिक. मुझे इस नौकरी की सख्त जरूरत है. में और अच्छे से काम करूँगा. आगे से ध्यान रखूगा कि कोई भैंस वाला दूध में पानी न मिलाने पाए."

डेयरी मालिक को भी लग रहा था कि राज में बहुत बदलाव आ गया है. पहले राज बड़े अच्छे तरीके से काम करता था. उसके लाये हुए दूध में सबसे कम पानी होता था या होता ही नहीं था. लेकिन अभी कई दिनों से पानी का प्रतिशत एकदम से बढ़ गया था. पहले राज नौकरी को लेकर कोई निवेदन नहीं करता था लेकिन आज तो दिन भी सही था. मौसम भी सही था.

कोमल भी आई थी तो फिर राज क्यों नहीं आया? कोमल का दिल किसी अनजानी आशंका से ग्रस्त हो उठा. वो सोच रही थी कि कहीं राज के साथ कोई बात तो नही हो गयी या राज उससे नाराज तो नही हो गया. कोमल का दिल, मन और दिमाग इस राज विहीन रास्ते पर चलते घबरा रहा था.

कोमल को लगता था कि ये वो रास्ता नही है जिसपर वो रोज आती है. जिस पर उसका स्कूल पड़ता है और जिस पर रोज राज उसके इन्तजार में पलकें बिछाए मिलता है. दिल रोया और खूब रोया. मन इस दिल पर मर मिटा. दिमाग ने दिल की तरह सोचना बंद कर राज को याद करना शुरू कर दिया.

हे भगवान! रास्ता कितना वीराना सा लग रहा था. रास्ता कितना वेगाना सा लग रहा था. लगता था बर्षों से इस रास्ते पर कोई इंसान नहीं आया है या ये रास्ता इतना भयानक है कि कोई इस पर आना ही नहीं चाहता. एक राज के न आने से कोमल को ये रास्ता इतना मनहूस लग रहा था. और कोमल ही नही उसकी बड़ी बहन देवी भी इस बुनियादी फर्क को महसूस कर रही थी. उसे आज लग रहा था कि राज के रास्ते पर होने से यहाँ कितनी रौनक होती थी.

देवी को अपने द्वारा सुबह राज से किया वर्ताव याद आ गया था. अब देवी उस घटना को याद कर अपने आप को धिक्कार रही थी. लेकिन देवी भी क्या करती? उसकी आँखों ने गाँव में पहले भी मोहब्बत करने वालों को मिटते देखा था और इसी कारण वो नहीं चाहती थी कि आज कोमल और राज के साथ ऐसा कुछ हो.
 
ये खाली रास्ता कोमल के लिए वैसा ही था जैसा इंसानों के विना दुनियां. जैसे किसी मछली को पानी में कोई और मछली नजर न आती हो. जैसे किसी के बेहिसाब दौलत हो लेकिन उससे खरीदी जाने वाली चीज खत्म हो जाय, जैसे किसी के पास चूल्हा हो और आटा खत्म हो जाय. जैसे किसी के पास नल हो लेकिन पानी खत्म हो जाय और जैसे किसी का शरीर हो लेकिन आत्मा खत्म हो जाए. आज यह रास्ता कोमल के लिए ऐसा ही कुछ था.

दोनों बहने घिसटते कदमों से कॉलेज जा पहुंची. पढाई में तो मन ही कहा लगना था क्योंकि कोमल का मन राज मय था और देवी का इन दोनों की समस्या के समाधान में. लेकिन राज आज कुछ और ही करने के मूड में था. उसे पता था कि कोमल स्कूल पहुंच गयी होगी और उसने रास्ते में जाते समय उसकी की कमी भी महसूस की होगी. उसे को याद किया होगा.

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राज ने फैसला किया कि आज वो पहली बार कोमल के स्कूल जाएगा. लेकिन कोमल से बात न हो पाई तो. तो क्यों न एक पत्र लिखा जाय जिससे कोमल को वो सब बातें बताई जा सकें जो अकेले में ही बताई जा सकती हैं.

राज ने झट से एक पत्र लिखा. पत्र को ठीक से तह किया और जेब में रख साईकिल से उस तरफ चल दिया जिधर उसके मन की मीत कोमल इस बक्त मौजूद थी. राज की साईकिल रेल की तरह भागी जाती थी क्योंकि जेब में रखा अंगार रूपी खत उसे जलाये जा रहा था. कोमल को खत कैसे और कहाँ देना है ये सब राज ने अभी तक नहीं सोचा था. सोचे भी कैसे प्यार करने वाले लोग परिणाम की चिंता ही कब करते हैं?

राज कोमल के स्कूल पहुंचा. जब से राज कोमल के इश्क में खोया था तब से पहली बार इस स्कूल पर आया था. लेकिन स्कूल में और उसके आसपास तो कोई दिखाई ही नहीं दे रहा था. बस एकाध बच्चा इधर उधर घूम रहा था जो शायद इसी गाँव का था.

राज ने उन बच्चों से पूंछा कि आज स्कूल में कोई दिखाई क्यों नही दे रहा क्या स्कूल की छुट्टी है आज. तब उन बच्चों ने बताया कि स्कूल तो खुला है लेकिन अभी इंटरवल होने वाला है तभी बच्चे बाहर निकलेंगे.

राज ने एक लड़के को अपने साथ बैठा लिया. उससे मीठी मीठी बातें की और उससे कहा, “देखो तुम मेरा एक काम करोगे तो में तुम्हें एक रुपया दूंगा." बच्चा एक रुपया मिलने की बात सुन खुश हो गया और बोला, “ठीक है लेकिन रुपया देना जरुर पागल मत बना देना."

राज बच्चे का डर समझ गया उसने जेब से एक रुपया निकाल बच्चे के हाथ पर रख दिया और बोला, "ले पहले ही ले ले लेकिन काम बहुत होशियारी से करना पडेगा."

लड़का रुपया हाथ में ले खुश हो गया और बोला, "उसकी तुम चिंता मत करो. में तुम्हारा खत उस लडकी तक पहुंचा दूंगा."

राज की आँखे और मुंह फटा का फटा रह गया. फिर लडके से बोला, "तुझे किसने कहा कि में तुझे किसी लडकी को खत देने भेजूंगा?"

लड़का झट से बोला, "और क्या काम होगा तुम्हारा इस स्कूल के पास? अकेले तुम ही नही बहुत लोग ऐसे ही मुझे रुपया देकर अंदर स्कूल में पढ़ने वाली लडकियों को खत भिजवाते है. इसलिए मुझे लगा तुम भी वही करवाओगे.*

राज शरम से अपना सर खुजलाते हुए बोला, “यार काम तो मेरा भी ऐसा ही कुछ है लेकिन तू सावधानी से करना क्योंकि उस लड़की के साथ उसकी बहन भी होगी. तू ऐसा करना खत ले जाकर किसी भी तरह चलते में उस लडकी के हाथ में दे देना लेकिन कोई

और न देख पाए. अगर तूने ये काम ठीक से किया तो में तुझे एक रुपया और दूंगा."

लड़का वेफिक्र हो बोला, "मेरा रोज का यही काम है. तुम इसकी चिंता मत करो,” फिर दोनों आपस में बातें करते रहे. कुछ ही देर बाद स्कूल के इंटरवल की घंटी बज उठी. लड़का राज से बोला, "लाओ खत निकालो इंटरवल हो गया. राज का दिल इस बात को सुन धकधका गया. वो आज पहली बार किसी को ऐसे खत भेज रहा था. खत उस लडके को देते वक्त उसके हाथ काँप रहे थे. अब राज और वो लड़का इस इन्तजार में बैठे थे कि कब कोमल क्लास से बाहर आये और कब उसे खत दिया जाए?

तभी कोमल और देवी दो तीन लडकियों के साथ स्कूल के मैदान में दिखाई दी. राज हडबडा कर उस लड़के से बोला, “देख भाई वो लड़की है जो सबसे सुंदर दिखाई देती है."

लड़का बोला, "सुंदर तो सभी है पहचानूंगा कैसे?"
 
राज की नजरों में कोमल सुंदर हो सकती थी लेकिन हर आदमी की नजर में तो नहीं. राज खीझ कर बोला, "जो चार पांच लडकियाँ जा रहीं हैं उनमे वो धीरे धीरे चलने वाली उदास लडकी है न उसी को देना है." लड़का कोमल को पहचान गया और राज के पास से कोमल की ओर चल दिया. उसे जाते देख राज उससे बोला, "जरा सम्हाल कर.” लडके ने राज की तरफ बिना कुछ बोले गर्दन हिलाई और कोमल की तरफ बढ़ चला.

___ राज का दिल धडाधड धडके जा रहा था. उसे डर था कि कहीं लडके को खत देते देवी न देख ले या लड़का किसी और लडकी को खत न दे दे. लेकिन बाह रे लडके! कोमल के बराबर से गुजरते हुए लडके ने कब उसके हाथ में खत रख दिया किसी को भी न पता चला.

कोमल ने जब देखा कि कोई लड़का उसके हाथ में कोई कागज रख कर गया है तो उसने उस भागते हुए लडके को आवाज देनी चाही लेकिन अचानक उसकी नजर दूर छिपे खड़े राज पर पड़ी जिसे बो भरी भीड़ से भी पहचान सकती थी. कोमल की आवाज वहीं के वहीं मिस गयी. एक शब्द भी मुंह से न निकला क्योंकि राज ने इशारे में उसे बताया कि ये मैंने भिजवाया है.कोमल ने झट से वो कागज का खत छिपा लिया कि कहीं कोई देख न ले.

देवी को अभी इस बारे में कुछ भी खबर नही थी. वो अभी भी साथ खड़ी लडकियों से बात किये जा रही थी. राज ने देखा कि कोमल का चेहरा सूजा हुआ सा था लग रहा था. उसे लगा कोमल बहुत रोई है.कोमल ने भी राज को नजर भर देखा. वो भी उसके कुम्हले हुए चेहरे को देख खुद कुम्हला गयी. दोनों एकदूसरे को देख ऐसे हुए जा रहे थे मानो बरसों बाद मिले हों. जैसे चंदा से चकोर और जैसे आग से पतिंगा.

मोहब्बत करने वालों को कोई कितनी भी बारीकी से देखे लेकिन उनके दिलोदिमाग को समझना किसी अनसुलझी पहेली को सुलझाने से कई गुना कठिन होता है. और ऐसा नहीं कि आशिक सिर्फ नियमों पर ही चलते हैं. वे तो बिना डोर की पतंग होते हैं जो न जाने कहाँ उड़ जाए. किससे भिड जाए? मोहब्बत का गणित की तरह कोई सूत्र नही होता जिसके द्वारा इसे सुलझाया जा सके लेकिन ये अपने आप में एक सुलझी हुई चीज है. जो आज तक सभी को कठिन और अनसुलझी लगती है.

राज को एकटक देख रही कोमल को देवी का ध्यान आया. सोचा अगर कहीं देवी ने देख लिया तो आफत खड़ी कर देगी. कोमल राज को इशारे से बोली, "ठीक है तुम जाओ में इस खत को पढ़ लूँगी."

राज थोड़ी देर कोमल को देखने के बाद अपनी साईकिल उठा चल दिया. कोमल चोर नजरों से कभी कभी राज को जाते देख लेती थी. राज भी जाते समय कोमल को देखे जा रहा था. फिर दोनों एक दूसरे की नजरों से ओझल हो गये.

अब कोमल को सबसे बड़ी चिंता ये थी कि देवी से वादा करने के बाद वो अब राज के खत को कैसे पढ़ सकती है. लेकिन फिर कोमल को ध्यान आया कि देवी ने राज से बात न करने का वादा लिया था और ये तो राज का खत है. वाह रे इश्कीले मन! कितने रास्ते निकाल लेता है अपने महबूब से मिलने के लिए. और यही तो करने जा रही थी वावली कोमल. जो राज की मोहब्बत में इतनी दीवानी थी कि देवी से किये वादे में वकीलों की तरह तर्क दे राज का खत पढने जा रही थी.

कोमल देवी के पास जाकर बोली, "देवी में टॉयलेट करने जा रही हूँ." देवी ने हां में सर हिला दिया और फिर से साथ खड़ी लडकियों से बात करने लगी. कोमल अकेले में जा राज का वो खत पढने लगी, “मेरी सबकुछ प्यारी सी चंचल कोमल. मेरी समझ में नही आता कि कहाँ से शुरू करूं और कहाँ पर खत्म? लेकिन मुझे इतना पता है कि में तुमसे प्यार करता हूँ और तुम भी मुझसे. लेकिन कल किये गये व्यवहार से में बहुत परेशान हूँ. में सोचता था शायद मुझसे कोई गलती हो गयी है लेकिन आज सुबह में जब तुम्हारे घर दूध लेने गया था तब देवी बहन ने मुझे तुम से दूर रहने की सख्त हिदायत दे दी. मैंने उनके हाथ पैर जोड़े लेकिन वो नही मानी. तब जाकर मुझको पता चला कि तुम मेरी वजह से नहीं बल्कि किसी और कारण से ऐसा व्यवहार कर रही हो.
 
मेरा दिल वो बात जानने के लिए बेताब है जिसने तुम जैसी कोमल दिल वाली लडकी को इतना कठोर बना दिया कि तुम कल मेरे दिल को कुचल कर चली गयी. मेरी मृगनयनी मुझे अपनी नही तुम्हारी चिंता है. तुम मुझे जल्द से जल्द खत लिखकर या मिलकर बताओ कि ऐसी क्या बात है जो तुमको ऐसा बना गयी?

मुझे उस पहले वाली कोमल को देखने का इन्तजार रहेगा. में कसम खाकर कहता हूँ तुम्हारे लिए में जान की बाज़ी लगा जाऊँगा, लेकिन मुझे तुमसे सिर्फ मोहब्बत की उम्मीद है जो मुझे तुम्हारे पर मर मिटने की शक्ति देती है. खत का जबाब जितनी जल्दी हो सके दे देना. अब में तुम्हे उस रास्ते पर नहीं मिला करूँगा. कल फिर से तुम्हारे कॉलेज में आऊंगा. खत का जबाब लेने, तुम्हारे उत्तर का अभिलाषी राज."

राज का खत पढ़ कोमल थोड़ी चिंता में पड़ गयी उसे समझ न आ रहा था कि उसकी बहन देवी उसकी मदद कर रही है या सिर्फ दिखावा. क्योंकि उसने कोमल को राज से मिलाने का जो वादा किया था उसके हिसाब से देवी को राज के साथ ऐसा व्यवहार नही करना चाहिए था. यह सब हो जाने के बावजूद देवी ने कोमल को इस बारे में कुछ भी नहीं बताया था. कोमल को आज देवी के इस व्यवहार से दाल में कुछ काला नजर आ रहा था. ___

इस बात को सोच कोमल के दिमाग में एक बिचार आया कि क्यों न वो राज के साथ खतों के जरिये बात करे? और इसमें बुरा क्या है? देवी ने जो वादा उससे लिया था उसमे राज से न मिलने और बात न करने की बात थी. कोमल तो सिर्फ चिट्ठियों से राज को मिल रही थी.

कोमल सोच रही थी कि हो सकता है देवी ने जो व्यवहार राज से किया है उसमे मेरी भलाई ही सोची हो. हो सकता है वो राज से मेरी तरह वादा नहीं ले सक पाने की वजह से ऐसा कर गयी हो. तो देवी का वादा भी न टूटे और कोमल राज से भी बात करती रहे. ऐसा उपाय तो सिर्फ चिट्ठियां ही हो सकती थी.

फिर क्या था कोमल ने मन बनाया कि आज घर पहुंचकर वो राज के नाम एक चिट्ठी लिखेगी और कल जब राज कॉलेज आएगा तब उसे दे देगी. कोमल का मन करता था कि राज का ये आया हुआ खत सीने से लगाकर रखे लेकिन अगर देवी या किसी अन्य घर वाले के हाथ पड़ने का डर उसे यह खत फेंकने के लिए बाध्य कर रहा था. कोमल ने बेमन हो राज के खत के दो टूक कर कूड़े में फेंक दिए और फिर उसी जगह जा पहुंची जहाँ देवी लडकियों के साथ खड़ी थी,

स्कूल की छुट्टी होने के बाद कोमल अपनी बहन देवी के साथ घर पहुंची. अब कोमल को शाम का इन्तजार होने लगा जब वो राज के नाम एक प्रेमपत्र लिखेगी. देखते देखते शाम हो गयी. कोमल ने पढ़ने वाली किताब के अंदर कागज छिपा राज के लिए खत लिखना शुरू किया.

घर के सब लोग और देवी सोच रहे थे कि कोमल पढ़ाई कर रही है. और सच में कोमल पढाई ही तो कर रही थी .ये उस तरह की पढाई थी जो बहुतों ने पढ़ी और बहुत लोग आज भी पढ़ रहे हैं. आगे भी यह पढाई की जाती रहेगी. जाने कितने पास हुए और कितने फेल. कितनों ने परीक्षा ही छोड़ दी और कितनों को परीक्षा ने खुद ही छोड़ दिया. न इसका कोई स्कूल होता है और न कोई शिक्षक. ये पढाई इन्सान को इन्सान बनाती है और यही इन्सान को इन्सान से मिलाती है.
 
ये इन्सान को इन्सान से उस हद तक मिलाती है जैसे पानी में पानी. जैसे हवा में हवा. जैसे साँसों में सांसे और जैसे नींद से सपना. इस पढाई की कोई अंतिम सीमा नहीं होती तो इसकी कोई शुरुआत भी नही होती. इसको किसी ने होते न जान पाया तो किसी ने खत्म होते भी न जान पाया. ये मोहब्बत की पढाई है. ये तो दिल की दिल से इबादत है. और सच कहा जाय तो ये इन्सान से ऊपर उठकर है. ये धर्म और जाति से उठकर है. ये भगवान की असली इबादत है. तभी तो ये मोहब्बत है.

कोमल ने खत पूरा कर लिया था. आँखों में थोड़ी नमी थी जो दर्शा रही थी कि कोमल खत लिखते समय भावुक हुई थी. अपने राज को ये खत लिख कोमल के खिलते यौवन को फिर से नई स्फूर्ति मिल गयी थी. कई दिनों से मुरझाया कोमल वदन फिर से हरा भरा हो उठा था. चेहरे की लौटती लाली ने फिर से कोमल को कोमल बना दिया था.

आज फिर लग रहा था कि ये वाकई में वही कोमल है जो अक्सर इमली के पेड़ के नीचे खड़ी आलसी अंगड़ाईयां लिया करती थी. आँखों में फिर से वो समुंदरी गहराई दिखाई देना शुरू हो गयी थी जिसको देखने के लिए कोमल के दिल का मालिक राज पागल हुआ घूम रहा था. रात होने वाली थी लेकिन कोमल का सम्पूर्ण शरीर सुबह की रौशनी से भरने लगा था.

कोमल इस वक्त रात के साथ जवान होती जा रही थी. अगर राज के मन से कहा जाय तो चांदनी रात में कोमल के इस मोहक अलसाये रूप को कोई अप्सरा भी देख शरमा जाती. राज तो भगवान से दुनिया को ठुकरा कोमल को मांग डालता और इसी रूप को देख तो राज उसके मोह में पानी से पानी की तरह मिल गया था.

ये सब एक राज के खत ने कर दिया था. उपजाऊ धरती से वंजर हुई धरती में हरियाली इस राज के खत ने कर दी थी. ये तो मोहब्बत के उस टॉनिक का असर था जो कोमल को राज के खत से मिला था. जिसे पी कोमल फिर से जी उठी थी.
 
भाग-7

आज की रात कोमल के लिए बहुत अच्छी रात हो गयी थी. रात भर लेटे लेटे बस राज के बारे में सोचती रही. चांदनी रात का सही अर्थ सिर्फ एक मोहब्बत भरा दिल ही जान सकता है जैसे कोमल जान रही थी.चाँद को देख एक दिल को दूसरे दिल की याद आती है. वो चाँद को देख अपने महबूब की सूरत उसमे देखने लगते हैं. अगर राज और कोमल के दिल से कहा जाय तो दुनिया का कोई भी दीवाना चांदनी रात में अपने महबूब से दूर रह उसकी याद किये बिना नही रह सकता.

और सच में यह कहा जाय कि दीवानों के लिए चाँद(चन्द्रमा) उनके महबूब के बाद सबसे बड़ी चीज होती है तो यह गलत न होगा. क्योंकि जब दोनों एक दूसरे से बिछड़ते या दूर होते हैं तो वे चन्द्रमा को देख उसमे अपने दिलवर का अक्श देखते हैं. उन्हें लगता है कि इस रात में एक चन्द्रमा ही है जो हम दोनों को एक जैसा दिखाई देता है या हमे भी एक जैसा ही देखता है.

कोमल के साथ ही राज भी एक अलग स्थान पर चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे लेटा कोमल की ही तरह चमकते चाँद को देख अपनी हमदम कोमल को याद किये जा रहा था. उसकी भी स्थिति वैसी ही थी जैसी कोमल की थी. कोमल को आज लिखा हुआ खत राज को देने की जल्दी थी और राज को कोमल के द्वारा खत में लिखे गये मजमून की.

दोनों की मोहब्ब्ती रातें कभी गीली कभी सूखी होती रहती थी. दोनों के लिए मोहब्बत कभी दिन थी तो कभी रात. कभी सर्दी थी तो कभी गर्मी. और कभी बारिश थी तो कभी सूखा. यही सोचते सोचते दोनों को कब नींद ने अपनी गोद में ले लिया पता ही न चला.

सुबह हुई. पर सब पहले के जैसा ही था. राज दूध लेने आया. आज भी देवी ही भैंस का दूध निकालने आई. राज की नजरें कोमल को ढूंढती रही लेकिन कोमल का कोई भी निशान उनको न मिल पाया. यहाँ से दूध लेने के बाद राज चल दिया. कोमल राज को एक झरोंके से ताके जा रही थी. जिसकी खबर न राज को थी और न देवी को. कोमल ने देखा था कि कैसे राज की आँखे उसे ढूढ़ रहीं थी.

फिर कोमल के स्कूल जाने का समय हुआ. राज को दिए जाने वाला खत कोमल ने अपनी कुर्ती में सीने के पास छुपा रखा था. जो पल पल उसे याद दिला रहा था कि उसे राज को दिया जाना है. कोमल फिर उसी रास्ते से कॉलेज जा पहुंची जिस पर कभी उसे राज मिला करता था. राज विहीन रास्ता और सीने से चिपका रखा खत कोमल में एक ऐसी तडप पैदा कर रहा था जो राज के मिलने से ही शांत हो सकती थी

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कोमल कॉलेज पहुंची. राज के आने का वक्त हो रहा था. शायद इसी कारण कोमल का मन पढने में नही लग रहा था. यदि सच कहा जाय तो जिसे ये इश्क का रोग लग जाता है उसे पढ़ने में किसी भी तरह की रूचि नहीं रहती और ये इश्क सिर्फ इन्सान का ही नही वरन किसी खेल, किसी कला या किसी बस्तु से भी हो सकता है. इश्क के मायने सिर्फ लडके लडकियों का प्यार नहीं होता. इश्क तो एक पवित्र भावना है जो किसी में भी किसी के प्रति पैदा हो जाती

कोमल टॉयलेट जाने के बहाने क्लास से निकल आई. गाँव के स्कूलों में पढ़ने वाली लडकियाँ जब भी ऐसे किसी काम से क्लास से बाहर आती है तो उनके साथ दो चार लड़कियों का झुण्ड जरुर होता है लेकिन आज वह पहली बार किसी क्लास की लडकी को अपने साथ नही लायी थी क्योंकि उसे राज को खत पहुंचाना था.

स्कूल के मैदान में आते ही स्कूल के बाहर खड़े नीम के पेड़ के नीचे खड़े राज पर कोमल की आँखे चस्पा हो गयी. राज के साथ वो छोटा नाटा लड़का भी खड़ा था जो कल कोमल के हाथ में बड़ी होशियारी से खत रखकर चला गया था.

कोमल राज को देख रही थी और राज कोमल को. वो छोटा नाटा लड़का इन दोनों को. कोमल की यौवन से लदी फूली हुई छाती उसकी तेज चलती साँसों के साथ गति कर बता रही थी कि राज के साथ उसका गहरा नाता है. राज के सीने की धडकने और तेज साँसें भी कोमल के प्रति उसकी मोहब्बत को दर्शा रहीं थी

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राज ने कोमल की आँखों में देखते हुए बाहर आने का इशारा किया लेकिन कोमल ने इशारे में बताया कि देवी कभी भी बाहर आई तो वे दोनों पकड़े जायेगे. परन्तु कोमल ने राज को उस नाटे लडके को भेजने का इशारा किया. राज कुछ कहता उससे पहले ही वो लड़का कोमल की तरफ चल चुका था.

लडके को ऐसा करते देख कोमल और राज के चेहरों पर हंसी छलक उठी. राज समझ गया कोमल आज खत का जबाब खत से देना चाहती है जैसे कोई ईंट का जबाब ईंट से देता है. राज ने सोचा चलो ऐसे ही सही मोहब्बत तो फल फूल ही रही है.
 
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