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आंटी और माँ के साथ मस्ती complete

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तभी मम्मी बोली बेटा चाइ पी ले

मे:हाँ ठीक है,फिर एक हाथ साइड पे रख कर उठने लगा,मुझे पता ही नही चला कि मेरा हाथ मम्मी की जाघ पे चला गया,मुझे बहुत सॉफ्ट सॉफ्ट सा महसूस हुआ,

जब मुझे पता चला कि ये मम्मी की जाँघ है,मेने वापस अपना हाथ खींच लिया ऑर दूसरी जगह रखकर उठा

मम्मी मेरे मज़े लिए जा रही थी

मे उठकर बैठ गया,फिर मेने मम्मी की ओर देखा ,मम्मी नीचे देखकर मुस्कुरा रही है

फिर मेने नीच देखा तो मेरा लंड पूरा सख़्त होकर बाहर आने को आतुर था

मुझे बहुत शर्म आई मेने फिर अपने लंड पे चद्दर डाल दिया

तब मम्मी होश मे आई ऑर मम्मी ने उपर देखा ऑर मेरे बालो पे हाथ फेर कर मुस्कुरा के चली गयी

मुझे बाद मे बहुत पछतावा हुआ कि क्यो मे अपने खड़े लंड पे चद्दर डालता हूँ,मुझे शर्म नही करनी चाहिए,अगर शर्म की तो कोई ऑर बाज़ी मार जाएगा ऑर मे देखता रह जाउन्गा

मम्मी मुझे इतनी लाइन दे रही है ऑर मे चूतिया कुछ नही कर रहा हूँ,मुझे कुछ करना होगा

फिर मे मुस्कुराया,क्योकि मेरे माइंड मे एक आइडिया आया था,बस फिर क्या था ,मे खुश हुआ ऑर सब कुछ अगले दिन पे छोड़ दिया,ऑर बाथरूम जाकर वापस आया ऑर चाइ पी ऑर पढ़ने बैठ गया,

फिर मेने 10 बजे तक पड़ाई की,ओर फिर मे सोचने लगा की आज क्या किया जाए,चाची आने वाली होगी

मम्मी ऑर चाची आपस मे सेक्स मे लग जाएगे ऑर चाची मुझे अपने घर भेज देगी ऑर वहाँ मे बोर हो जाउन्गा

फिर मेने सोचा क्यो ना चाची के घर जल्दी जाकर चाची की चुदाई कर ली जाए फिर मे आराम से चाची के घर आराम करूगा ऑर चाची यहाँ आ जाएगी ऑर फिर उन्हे जो करना होगा वो कर लेगी

मुझे ये आइडिया बहुत अच्छा लगा

मे तुरंत खड़ा हो गया,मेने देखा कि मेरा लंड भी खड़ा होना स्टार्ट कर दिया है,मेने फिर वॉश बेसिन जाकर मुँह धोया ऑर चल दिया चाची के घर की तरफ

मे:मम्मी मे जा रहा हूँ,दोस्त के यहाँ पढ़ाई करने

मम्मी:ठीक है बेटा,जल्दी आ जाना

मे:ठीक है मम्मी

मे चाची के घर जा ही रहा था कि रास्ते मे मनोहर मिल गया

मनोहर:ऑर मोहित क्या हाल चाल है,आजकल दिखता नही है,कहाँ बिज़ी हो रहा है

मे:कही नही यार

मनोहर:कही कोई चूत तो नही मिल गयी

मे:अरे नही नही ,जब मिलेगी तब तुम्हे ज़रूर बताउन्गा

मनोहर:ऑर उन गोलियो को काम मे लिया या नही

मे:नही अभी तक नही लिया

मनोहर:अच्छा है,कोई बेचारी बच गयी,नही तो तू उसकी चूत फाड़ डालता

मे:इतना दम कहाँ है मुझ मे

मनोहर:तुझ मे नही है लेकिन उस गोली मे बहुत दम है,एक गोली खा कर किसी को चोद,रंडी हुई तो भी उसकी चीखे निकल जाएगी,ऑर अगर कुवारि हुई तो बेहोश हो जाएगी

मे:ऑर गान्ड मारे तो??

मनोहर:हो हो,तो तुझे भी गान्ड मारने का चस्का है

आजकल के लड़को को गान्ड मारने का बहुत चस्का है,अच्छा है

 
ये गोली लेकर गान्ड मारेगा तो ये तो पक्का है वो 2 दिन नही चल पाएगी,लेकिन मेरा सुझाव है कि ऐसा मत करना क्योकि गान्ड मारने के लिए लंड को भी सख़्त होना पड़ता है,अगर तूने गोली ले ली,तो तुझमे गान्ड मारने की ताक़त तो आ जाएगी पर तेरा लंड को जो चुदाई के दोरान हो रहे घर्षण को सहन नही पाएगा,ऑर लंड तेरा छिल जाएगा

मे:तो फिर क्या करना चाहिए

मनोहर:बस प्रॅक्टीस कर जितना हो सके

,कम से कम 50 बार किसी की दमदार गान्ड मार

मे:तुमने कभी किसी की गान्ड मारी है

मनोहर:नही,पता नही क्यो मुझे गान्ड मारना पसंद नही है,मेरे लिए तो चूत ही काफ़ी है,मे तो चूत मे ही सामने वाली का कचूमर निकाल देता हूँ,मुझे क्या ज़रूरत गान्ड मारबे की

(शायद झूठ बोल रहा है,लेकिन हो नही सकता कि मनोहर ने आजतक कभी गान्ड नही मारी हो,हो सकता है मनोहर याद नही करना चाह रहा हो)

मे:हाँ सही है,आपके पास तो अनुभव ही बहुत है,इतना अनुभव कहाँ से लाए

मनोहर:बताया ना मेने,मे अपनी माँ को मछक मछक के चोदता हूँ

मे:आपके पास तो माँ है,पर पास कोई नही(उदास सा चेहरा)

मनोहर:अरे तेरे पास भी तो माँ है,बोल तो यूँ रहा है,जैसे तेरा कोई ना हो

मे:मेरा मतलब ,चोदने के लिया

मनोहर:तो पटा ले अपनी माँ को

मे:नही पट ती मेरी माँ मुझसे

मनोहर:तो तू भी अपनी माँ को चोदना चाहता है

मे:नही........ऐसी कोई बात नही ,मेने ऐसा कब कहा

मनोहर:मुझे चूतिया मत बना,मे सब जानता हूँ,तू खुद अपनी माँ के पीछे पड़ा हुआ है,ऑर मुझे अब समझ मे आया तू क्यो गोली ले रहा है ऑर क्यो गान्ड मारने की बाते कर रहा है

मे: मे बस मनोहर की ओर देखते हुए(उसके पास वाकई अनुभव था,वो जो बात बोल रहा था वो सच थी)

वो आगे बोलता हुआ

हमारे यहाँ ऐसी कोई गान्ड नही जो किसी को दीवाना बना दे सिवाए तेरी माँ की,ऑर मे शर्त लगा के कह सकता हूँ ,तू अपनी माँ की गान्ड जोरदार तरीके से मारना चाहता है,जिससे तू उसके साबित कर सके कि तू भी मर्द का बच्चा है

मे:कुछ नही बोला

मनोहर:बोल की मे सही हूँ

मे:हाँ सही है

माहोार:तो खुलके बोला ना कर

बस मुझे एक बार बोल मे तुझे तेरी माँ पे चढ़वा सकता हूँ

मे:वो कैसे

मनोहर:बस मे तेरी माँ को तुझसे चुदवा सकता हूँ,तेरी माँ के साथ मेरी एक घटना हुई थी ,अगर तू बुरा ना माने तो बोलू

मे:बोल

मनोहर:देख ले , बाद मे बुरा मत मान ना,

मे:हाँ पक्का बुरा नही मानूँगा

(मुझे भी पता नही माँ के बारे मे सुनने की बहुत इच्छा थी)

मनोहर:तेरी माँ एक बार मेरे नीचे आते आते बची थी,वो दिन आज भी याद है,अगर उस दिन तेरी माँ मेरे नीचे आ जाती,तो बेटा आज तू मुझसे नफ़रत करता

लेकिन मे ये कह सकता हूँ,तेरी माँ है बहुत इमांनदार ,सेक्स की भावना तो बहुत भरी हुई है,पर वो हमेशा अपनी लिमिट मे रहती है तुझे थोड़ी मुस्किल होगी अपनी माँ को उस लिमिट से निकालने मे,एक बार लिमिट क्रॉस हो गयी तो फिर मज़े से चोदना

मे:तो क्या तुम माँ चोदने वाले थे,ऐसा क्या हुआ था,मुझे भी बताओ वो घटना

मनोहर:अभी............लंबी घटना है,टाइम लग जाएगा

मे:कोई नही मुझे सुनना है

तो फिर खड़े खड़े ही सुनेगा,कही चलते है

मे:हाँ,तुम्हारे घर चलते है

मनोहर:नही नही आज कुछ मेहमान आए हुए है

मे:तो फिर कहाँ चलोगे

मनोहर :कल ही एक फ्लॅट खाली हुआ है ऑर अभी तक कोई आया भी नही वहाँ ,वहाँ चलते है

मे:ठीक है चलो

मनोहर:गांजा पिएगा

मे:नही नही ,मुझे पसंद नही है

मनोहर:लेकिन,माँ की बाते सुनना तो पसंद है ना,इसको पीने के बाद माँ की कल्पना करने मे जो मज़ा आएगा कि तुझे माँ के नाम पे लंड हिलाने पे भी नही आया होगा

मे अपने मन मे (मनोहर बहुत एक्सपर्ट था,ओर उसकी हर बात सच होती थी,इसलिए मे राज़ी हो गया गांजा पीने के लिए)

ठीक है पी लेंगे थोड़ा सा

फिर हम खाली फ्लॅट पे गये,वहाँ सोफे पे बैठ गये,मनोहर ने जॉइंट निकाला(गांजा भरे हुए सिगरेट को जॉइंट कहते है) ऑर जला दिया ऑर मेरी ओर करके बोला ले पी

मेने जैसे ही जॉइंट पिया मेरा सिर चढ़ गया

मे:आगे बताओ तुमने कैसे मम्मी को पटाने की कॉसिश की

मनोहर:तेरी माँ को पटाता तो रोज़ तेरी माँ की चूत मारता,बस यही तो मेने जल्दबाज़ी कर दी थी कि मे तेरी मम्मी को पटाने की बजाय सीधा चोदने की कॉसिश की ,खेर मेरी ग़लती नही है तेरी माँ का शरीर है भी तो इतना भारी,कि बस मन करता है दिन रात तेरी माँ को नंगी करके चोदता रहूं

 
मुझे भी ना जाने क्यो मेरी माँ के बारे ऐसी बात सुनने मे बहुत मज़ा आ रहा था

मे:फिर आपने आगे कॉसिश नही की

मनोहर:नही यार ,कहते है लालच बुरी बला है, सोने के अंडे देने मुर्गी जैसी हालत हो गयी

थी,जैसे उस आदमी ने लालच मे मुर्गी को मार दिया था ,मेने भी तेरी माँ को पाने का ख्वाब हमेशा के लिए खो दिया

मे:ऐसा क्या हुआ बताओ तो सही

मनोहर:पहले माल चढ़ने तो दे,फिर तेरे को शुरू से बताता हूँ कि क्या हुआ था,काश उस रात तेरी माँ मेरे से चुद जाती तो अभी दोनो के मज़े ही जाते ,यहाँ बैठ कर बाते नही कर रहे होते या फिर उस दिन मे थोड़ा सब्र कर लेता तो आज का दिन ही कुछ ऑर होता

मुझे अब गांजे का नशा होना शुरू हो गया था,मुझे पता नही क्या हो रहा था,पर मज़ा आ रहा था

मनोहर के मुँह से निकल रहे शब्द अमृत जैसे लग रहे थे,मे बस सुने जा रहा था

मे:अच्छा बताओ,मे पागल हुए जा रहा हूँ,प्लीज़ यार बताओ

गांजे मे पता नही क्या ताक़त थी मेरा लंड बिल्कुल सख़्त हो चुका था,ऑर मे लंड पकड़कर बैठा था

मनोहर मेरी हालत देखकर हँसता हुआ

मनोहर:क्या हुआ मोहित,मम्मी की कल्पना करके पागल हुए जा रहा है क्या,मम्मी चीज़ ही ऐसी होती है,अपने बेटो को पागल बना देती है,हर बेटे का पहला प्यार उनकी मम्मी ही तो होती है

मे:मुझे पता नही क्यो,मम्मी के बारे मे बाते सुनकर मेरा लंड फटा जा रहा था

मोनोहर:तू तो पक्का पागल हो चुका है ,तेरी दीवानगी तेरे माँ के लिए सिर चढ़ चुकी है,तू जब भी चोदेगा अपनी माँ को तो तू ज़रूर उसका पानी निकाल देगा

मुझे ऐसी बाते सुनकर बहुत मज़ा आ रहा था

मे:सच मे ,मुझे लग रहा है मे शुरू मे पानी छोड़ दूँगा

मनोहर:हाँ तेरा लंड पानी ज़रूर छोड़ देगा पर तेरा लंड आकड़े रहेगा,ऑर उसके बाद तू ऐसा चोदेगा कि तेरी मम्मी हाथ जोड़ने लग जाएगी ऑर मे कह सकता जो घटना हुई थी उससे की तेरे पापा का लंड छोटा है,इसलिए तुझे बहुत मज़े आने वाले है क्योकि तेरे मम्मी की चूत बिल्कुल कसी हुई होगी ऑर जो तू अपनी मम्मी की गान्ड का दीवाना है तुझे तो बहुत मज़े है तेरी मम्मी की गान्ड कुवारि है,मस्त जोरदार तरीके से चुदाई करना,पहली चुदाई ऐसी होनी चाहिए कि तेरी माँ को वो चुदाई जिंदगी भर भर रहे

मे:कैसे पता कि मेरी माँ की चूत बिल्कुल टाइट होगी ऑर गान्ड कुवारि होगी

मनोहर:बताता हूँ यार,एक जॉइंट तो ख़तम कर ,अभी 2 ऑर बाकी है,इतनी क्या जल्दी है

बस मे जो कहता हूँ वो करना,जन्नत की सैर करा दूँगा

मे:क्या करना है

मनोहर:बस पहले दिन बस चूत ही मारना,जितनी मार सकता है,फिर एक दिन रुक जाना जिससे तेरा शरीर गान्ड मारने की ताक़त जुटा सके ,इससे तेरी माँ का शरीर भी गरमा जाएगा ऑर तेरे शरीर मे तेरे माँ की गान्ड की चुदाई करने की ताक़त भी आ जाएगी,बस चोदना पूरा दम लगाकर ऑर एक बात याद रखना

मे:क्या

मनोहर:पहली चुदाई चाहे वो चूत की या गान्ड की कोई रहम मत बरतना,अगर तुमने कोई रहम दिली दिखाई तो याद रखना चूत ऑर गान्ड नया लंड ढूंड लेगे,क्योकि ये चूत ऑर गान्ड बड़ी बेवफा है अगर इतनी जोरदार चुदाई ना करो तो बेफवाई कर लेती है

मुझे देखो मेरी माँ की चूत कोई दूसरा लंड नही ढूंढी क्योकि मे जब भी चोदता हूँ माँ की हालत खराब कर देता हूँ,मेरी माँ बहुत चीखे निकालती है पर मे कोई रहम नही बरत ता ,इसलिए ही तो माँ की चूत मेरे काबू मे रहती है

मे:ठीक है मे ये बात याद रखुगा

अब तो बताना शुरू करो मे मरा जा रहा हूँ,तुम कैसे मेरी माँ को चोदने वाले थे

मनोहर :बताता हूँ यार

हुआ यूँ कि तकरीबन 1 साल पहले तू शायद अपने गाव गया हुआ था ,तेरी मम्मी ऑर पापा ही रह रहे थे ,तब उनका नया नया ट्रान्स्फर ही हुआ था

एक रात अपनी इस कॉलोनी का बिजली का खंबा टूट गया था,शाम का वक्त था इसलिए कोई सही करने नही आने की पूरी उम्मीद थी,सब लोग छत पे आ गये लेकिन जब रात के 12 बजे जब बिजली वाले खंबा ठीक करने आ गये तो सब लोग उन्हे देखने चले गये,मे भी छत पे था,थोड़ी ही दूर बैठा था,सब लोग जाने के बाद तेरे पापा ने मम्मी से कहा

((मेरे पापा का नाम करण है,सारा ध्यान अपने काम पे,इसलिए सक्सेस्फुल है,हमेशा कंपनी मे टॉप पर्फॉर्मेन्स देते है))

करण:सुधा ,चल नीचे लाइट आने वाली है ,लोग आ गये खंबा ठीक करने

सुधा:नही मुझे नींद आ रही है,अभी पता नही कितना समय लगेगा,जब लाइट आ जाए तब आ जाना मुझे जगाने

कारण:ठीक है फिर मे नीचे जा रहा हूँ,उन लोगो के पास तू आ जाना

सुधा:ठीक है

 
मे वही पास मे बैठा था लेकिन तुम्हारे मम्मी पापा को पता नही था,बहुत अंधेरा था

तेरे पापा नीचे चले गये,मेने भी नीचे जाकर वहाँ की हालत देखी कि कितना समय लगेगा ,नीचे जाकर पता चला कि अभी 1-2 घंटे लगेगे,मे वापस उपर आकर तेरी माँ के शरीर को निहारने लगा,मे इस समय तेरी माँ के बहुत ही पास चला गया था,तेरी माँ उस समय करवट लेकर सो रही थी ऑर उनका मुँह दूसरी साइड था,मेने उस छत के उस दरवाज़े को बंद कर दिया जहा से तेरे पापा आते ऑर फिर वही तेरी माँ के पास आकर बैठ गया

तेरी माँ ने बहुत ही सेक्सी मॅक्सी पहनी हुई थी ऑर देखते ही पता चलता था कि तेरी माँ ने कोई ब्रा पैंटी नही पहनी थी

मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था,इसी बीच मेरे पाँव सरकने की आवाज़ तेरी माँ ने सुन ली ,मे थोड़ा डर गया था,लेकिन मेरा होसला तब बढ़ गया जब तेरी माँ ने कहा

सुधा:क्या हुआ,ठीक हो गया क्या

मेने बहुत ही धीमी आवाज़ मे तेरे पापा की आवाज़ निकालने की कॉसिश करते हुए कहा ""नही""

अब मेने फ़ैसला कर लिया जो होगा देखा जाएगा मे तेरी माँ के पीछे आकर लेट गया,अब हम दोनो एक ही पोज़िशन मे थे,हमारे मुँह भी एक ही साइड था((मतलब कि मेरा मुँह तेरी माँ के सिर के पीछे था)), मेरा लंड थोड़ा सा ही दूर था तेरी माँ की गान्ड से

एक तरफ की करवट लेने का ये फ़ायदा होता है पहले वाला नही जानता कि कॉन पीछे हो सकता है,ऑर इस पोज़िशन सेक्स भी कर सकते है,पॉर्न मूवीस मे इस पोज़िशन ज़्यादातर गान्ड ही मारी जाती है

तो मेने भी यही सोचा कि मे तेरी माँ को पीछे से चोद देता हूँ,तेरी माँ को पता भी नही चलेगा कॉन है पीछे,ऑर फिर भाग जाउन्गा,ये सोचकर मेने एक हाथ तेरी माँ के चुचि पे रख दिया ऑर सहलाने लगा

तेरी माँ भी मेरा साथ दे रही थी लेकिन उन्हे पता नही था मे करण नही मनोहर हूँ

थोड़ी देर मे तेरी माँ भी गरमा गयी अब मेने एक हाथ मॅक्सी के उपर से ही चूत पे रख दिया ऑर चूत को मसल्ने लगा,अब उनसे रहा नही जा रहा था वो खुद बोली

सुधा:जल्दी से चुत मे डाल दो,मुझसे रहा नही जा रहा

मे कुछ नही बोला ,अगर बोलता तो पकड़ा जाता

मेने मॅक्सी उपर की ,वास्तव मे तेरी माँ ने कुछ नही पहना था,अंधेरा होने के कारण ज़्यादा सॉफ तरीके से नही देख पाया लेकिन हाथ लगाकर मे ये कह सकता हूँ कि बहुत ही मुलायम गान्ड थी ,तेरी तो ऐश है मोहित,बहुत मस्त गान्ड है तेरी माँ की

मे:तभी तो मे पागल हुए जा रहा हूँ ,आगे बताओ ,आगे क्या हुआ

आगे अब मैं एक हाथ से चुचि दबा रहा था ऑर एक हाथ से चूत मसल रहा था,चूत बहुत पानी छोड़ रही थी,मुझसे भी रहा नही गया इतना मखमली बदन ,मस्त फूली हुई चूत,मस्त गान्ड,मेने भी अपना लंड निकाल लिया ,थोड़ा सा थूक लगाया ,ऑर रख दिया तेरी माँ की चूत पे

अब मेने अपना पूरा बदन तेरी माँ के बदन से चिपका लिया था,मेरी छाती तेरी माँ की पीठ से टच हो रही थी

मेने दोनो चुचि को पकड़के मसले जा रहा था

सुधा:अब घुसा भी दो

मे ने चूत पे लंड टिकाया ओर दोनो चुचि पकड़कर एक धक्का दिया,मेरा लंड तेरे पापा के मुक़ाबले मोटा होने के कारण अंदर घुसते घुसते रह गया इसका कारण था तेरी माँ की चूत का टाइट होना,चूत इतनी टाइट थी कि उतनी नही खुल पाई कि मेरा लंड घुस सके,उपर से मेने पूरे दम से झटका भी नही लगाया था कि वो चूत के छल्ले को फाड़ता हुआ अंदर घुस जाए

लेकिन इस झटके ने तेरी माँ को ये अहसास करा दिया था कि चोदने वाला करण नही कोई ऑर है क्योकि तेरी मम्मी को तेरे पापा से चुदते हुए इतना टाइम हो गया था कि उन्हे लंड के साइज़ का बिना देखे ही पता लग जाए, ऑर वो तुरंत पलट गयी

ऑर ज़ोर से बोली

सुधा:तुम,तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ ये सब करने की

मेने कुछ नही किया आप ही ने तो बोला था

सुधा:कब बोला मेने ,मे सब को बुलाती हू ऑर तुझे पोलीस के हवाले करती हूँ

मेरी तो बुरी तरह फट गयी थी

मेने तुरंत तेरी माँ के पाव पकड़ लिए ऑर बोला "मुझे माफ़ कर दो ,मे तो यूही घूमने आया था ऑर आपका शरीर देखकर मे बहक गया था ऑर उपर से आप ही बोल रही थी ,पोलीस को बुलाने से दोनो की बदनामी होगी ,मुझे माफ़ कर दो आगे से कभी नही करूगा

तेरी माँ कुछ देर सोचते हुए ठीक है ,मे अपनी इज़्ज़त का ख़याल रखने के कारण तुझे छोड़ रही हूँ आगे से कभी मेरे सामने आया तो पोलीस के हवाले करवा दूँगी,समझा

मे - ठीक है ऑर मे वहाँ से भाग गया

मे:तो ये बात है,मतलब तुम्हारे साथ तो ये बात हो गयी कि मुँह को आया हाथ ना लगा

मनोहर भी हँसता हुआ

मनोहर:हाँ यार,या तो उस दिन मुझे जल्दबाज़ी नही करनी चाहिए थी या फिर धक्का ज़ोर से लगाना चाहिए था कम से कम लंड तो अंदर घुस जाता, साला आज भी पछताता हूँ उस दिन की बात को लेकर

मे:कोई नही यार ,कम से कम तुम्हारे लंड ने मेरी माँ की चूत का रस तो पी लिया

मुझे तो वो भी नसीब नही

मनोहर:ऐसे क्यो बोलता है यार,मे हूँ ना

मे:तुम क्या करोगे

मनोहर:मे सब कुछ करूगा,तुझे तेरी माँ पे चढ़वाने के लिए

मे:मे जानता हूँ तू फोकट मे कोई काम नही करेगा,मेरे पास पैसे भी नही है

मनोहर:पैसे किसने माँगे,बस तू तो मुझे अपनी माँ से माफी दिलवा देना

मे:माफी किस चीज़ के लिए

मनोहर:वही घटना के लिए जिससे अभी अभी सुनाई है

मे:मे कैसे दिलवा सकता हूँ

मनोहा:एक बार तू अपनी माँ को चोद दे फिर तुझमें अपने आप ताक़त आ जाएगी

मे:ठीक है मे कॉसिश करूगा

 
मनोहर अपने मन मे ""बस एक बार ये मोहित अपनी माँ को चोद दे,तो फिर इसकी माँ को मुझे माफी देनी ही पड़ेगी,फिर तो इसकी माँ को पटा कर ,इस बार बहुत चुदाई करने वाला हूँ,कि साली जिंदगी भर याद रखेगी ,1 साल हो गया मुझे मेरा लंड भी बोलता है क्या हुआ उस चूत का,मुझे पास ही नही आने दे रही थी,मोहित के कारण मुझे एक मोका मिला है""

इधर मे भी अपने मन मे ""भेन्चोद मुझे चूतिया समझता है,मतलब मेरी मदद करके मेरी माँ को चोदना चाहता है,मे तो उस औरत के बेटे को अपनी माँ चुदवाने के लिए देने को तैयार नही हूँ जिसने मुझे चूत ऑर गान्ड मारना सिखाया,ऑर तुझ जैसे भिकारी को अपनी माँ हवाले कर दूं ,केवल मे ही चोदुगा अपनी माँ ,अगर माँ को लगे कि मे खुशी नही दे पा रहा हूँ तो वो खुद अपनी मर्ज़ी से लंड ढूंड सकती है पर तुझे नही चोदने दूँगा अपनी माँ को""

मेने सोचा ये चुदाई की टिप्स कुछ काम आएगे मेरे,मे बोला ठीक है भाई यार,मे सब कुछ करूगा तेरे लिए बस एक बार मेरी माँ मुझसे चुदवा दे

मनोहर:मे कोई प्लॅनिंग करता हूँ,मुझे कल मिलना

मे:ओके,मुझे इतना नशा हो रखा था कि मे उठ नही पा रहा था,ऑर उपर से मेरा लंड खड़े 2 घंटे से उपर हो चुका था

मे:यार मनोहर,इस लंड का क्या करूँ

मनोहर:देख तू मेरी समस्या सुलझा रहा है तो मैं तेरी सुलझा दूँगा,आजा मेरे साथ चल मे तेरे लंड को भी शांति दिलवाता हूँ

मे उसके साथ चल दिया,वो मुझे अपने घर ले गया

मे:यार तेरे तो मेहमान आए थे

मनोहर:मेने झूठ बोला था ,मुझे गांजा पीना था ऑर मम्मी मना करती है इसलिए फ्लॅट पे चला गया,ऑर गांजा पीने का मज़ा तभी आता है जब कोई साथ मे होता है

मे:मतलब तुमने झूठ बोला

मनोहर:उसके अलावा कोई झूठ नही बोला,चल यहाँ बैठ

मनोहर ने मुझे बेड पे बैठा ऑर अंदर चला गया,मनोहर अंदर जाकर कुछ घुस फूस बाते कर रहा था अपनी माँ से

फिर कुछ देर बाद उसकी माँ आई

((रतना बाई-मनोहर की माँ,मनोहर ने उसे चोद चोद कर एक मस्त शरीर की मालकिन बना रखा है,लेकिन उसकी चूत का भोसड़ा हो चुका है,अब चोदने मे कुछ मज़ा नही,लेकिन कोई भी उसे देख ये नही कह सकता कि कोई उसे चोदना नही चाहता))

उसकी माँ ने आते हुए मेरी तरफ देखा,ऑर मुस्कुराइ ऑर बोली

रत्ना:क्या हुआ बेटे ,लंड ने परेशान कर रखा है,चल मे शांत करती हूँ तेरे लंड को

ये कहकर रत्ना बाई ने मेरे पाजामा के अंदर हाथ डालकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया,बाहर निकालते ही पूछा

रत्ना:ये क्या हुआ तेरे लंड को,बड़ा सूज़ा हुआ है

मे:पता नही

रत्ना:अच्छा है,बड़ा ही सुंदर लग रहा है,ऑर ये कहकर रत्ना ने मेरा लंड मुँह मे रख लिया,आज पहली बार इतना मज़ा आया कि उससे शब्दो मे बयान नही कर सकता,रत्ना के मुँह की तपिश मेरे लंड की आग को शांत कर रही थी ,मेरे लंड झटके पे झटके खाए जा रहा था

रत्ना ने धीरे धीरे मेरा लंड अपने मुँह के अंदर लेना शुरू किया,

रत्ना बहुत ही अनुभवी थी ,लंड अंदर लेने के बाद मेरे लंड के सुपाडे को तो जीब से मसेज कर रही थी ,मे इतना मज़ा झेल नही पाया ऑर मेरे लंड ने वीर्य का एक फव्वारा छोड़ दिया जो सीधा रत्ना के गले के निचले भाग मे टकराया,मुझे लगा कि रत्ना वापस बाहर निकाल देगी लेकिन रत्ना ने इसके विपरीत काम किया,रत्ना सारा रस निगल गयी,एक एक बूँद तक निगल गयी ,एक भी बूँद बाहर नही गिरने दी,जब मेरे लंड बाहर आया तो पूरा सॉफ था,ऑर अब मेरा लंड भी मुरझा गया था,ऑर मेरे चेहरे पर इतनी खुशी थी कोई भी देखकर यही बोले कि इससे ज़्यादा खुश कोई हो ही नही सकता

रत्ना:बड़ा जल्दी तेरा लंड हार मान गया,आज से पहले शायद किसी ने मुँह मे नही लिया लगता है

मे:हाँ सही कहा रत्ना बाई

रत्ना :मज़ा आया ना

मे:हाँ बहुत मज़ा आया

रत्ना:चल अब जा,मुझे काम करना है

मे:मनोहर कहाँ गया

रत्ना :वो सो गया

मे:ठीक है

मे वापस घर की ओर जाने लगा,मे कुछ सोच नही पा रहा था,एक तो ग़ांज़े का असर ऑर उपर से रत्ना द्वारा मस्त लंड चूसे जाना,ऐसा लग रहा था कि मे जन्नत की सैर कर रहा हूँ

मे सीधा घर आके सो गया,तब तक चाची भी अपने घर जा चुकी थी

आज फिर मे बहुत देर तक सोया ,मे इतनी गहरी नींद मे था कि माँ को बहुत मुश्किल हुई मुझे उठाने मे

उठने के बाद भी मेरा सिर चकरा रहा था,मुझे पता नही था गांजे का इतना नशा होता है,मेने सुना ज़रूर था गांजे के बारे मे ,पर आज उससे पीकर महसूस किया,वाकई बहुत मज़ा है गांजा पीने पे

एक बात तो है गांजा पीने के बाद लंड चूत की बातें बहुत अच्छी लगती है

मे नशे मे होने के कारण पता नही क्यो मे सोचे जा रहा था,माँ ने मुझे उठा दिया था तो भी बैठे बैठे मे सोच मे डूब गया

मे सोच रहा था अब 4 दिन बचे है ,माँ को चोदने के लिए मुझे कुछ करना होगा,लेकिन आज मनोहर की बातो ने भी मुझे डरा दिया था

मुझ मे एक तरफ घबराहट थी एक तरफ हिम्मत थी कि जो होगा देखा जाएगा

 
पता नही मुझे क्या सूझी मेने मम्मी से कहा

मे:मम्मी ,आप बहुत सुन्दर हो

मम्मी ने पलट के देखा ऑर आश्चर्य से मेरी ही ओर देखे जा रही थी

मुझे आगे कुछ नही बोलना चाहिए था फिर भी पता नही मुझ मे कहा से इतनी हिम्मत आ गयी कि मे आगे बोल पाता

मे:काश आप मेरी हो जाती

माँ को लगा मेरी तबीयत कुछ सही नही है,माँ तुरंत मेरे पास आई मेरे सिर पे हाथ रख कर देखने लगी कि मेरी तबीयत तो खराब नही

मेरी मम्मी के बदन की भीनी खुसबु जैसे ही मेरी नाक तक पहुचि मे पागल सा हो गया,मेरा लंड सख़्त हो गया ऑर मेरे* हाथ ने माँ के बाजू को पकड़ लिया

मेरी माँ एक भरे हुए शरीर की मालकिन थी ,आज पहली बार मेने माँ को माँ की नज़र से हटकर एक औरत के रूप मे हाथ लगाया था,क्या बाजू थी ,गोरा रंग ,मखमल जैसे हाथ

मे:माँ आइ लव यू,मे तुमसे बहुत प्यार करता हूँ

मम्मी:क्या हो गया है तुझे सही तो है ना बेटा

मम्मी थोड़ी घबराती हुई ,चले डॉक्टर के पास चले

मे:नही मम्मी मे ठीक हूँ ,मुझे बस आप चाहिए ,मे अपने आप ठीक हो जाउन्गा

मम्मी:क्या हो गया है तुझे आज

मे:कुछ नही माँ मुझे आपसे प्यार हो गया है

मम्मी को भी लगा कुछ गड़बड़ है

मम्मी ने देखा कि मेरा लंड खड़ा हो चुका है ऑर झटके खा रहा था,आज मेने कोई चद्दर नही डाली अपने लंड द्वारा बने हुए तंबू पर

मम्मी ने प्यार से मुझे देखा जैसे मुझ पे तरस आ रहा हो,फिर मम्मी को समझते देर नही लगी कि मुझे क्या हो रहा है ऑर मे ऐसा क्यो कर रहा हूँ

मम्मी अब मेरे रूम से बाहर जाने लगी,मे मम्मी को बड़े बड़े चूतड़ उपर नीचे हॉट देखकर पागल हो गया,मे भी सीधा बेड से उठा ऑर मम्मी के पीछे चल दिया,मम्मी किचन तक गयी ऑर अपना काम करने लग गयी

मेरा लंड बिल्कुल सख़्त था,ऑर पूरा खड़ा हुआ था,मेने ना इधर देखा ना उधर मे सीधा पीछे से माँ से चिपक गया,ऑर अपना हाथ आगे लेकर मम्मी को बिल्कुल कस लिया

मेरा लंड माँ की गान्ड की बड़ी सी दरार मे घुस गया

मम्मी थोड़ा चौंकते हुए,मम्मी को बिल्कुल उम्मीद नही थी कि मे ऐसा कर सकता हूँ

मे:मम्मी आइ लव यू,मे आपके बिना नही रह सकता

मम्मी ने एक पतली सी सिल्क वाली मॅक्सी पहनी हुई थी ऑर मुझे ये सॉफ सॉफ दिख रहा था मम्मी ने ब्रा पैंटी नही पहनी

इसलिए मेरा लंड माँ की गान्ड की दरार मे उनकी मॅक्सी के साथ ही अंदर घुस गया

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था,मे अपने हाथ से माँ का पेट सहला रहा था ओर पीछे से अपना लंड मम्मी की गान्ड मे धकेल रहा था

मम्मी की गान्ड इतनी बड़ी थी कि मेरा पूरा लंड गान्ड की दरार मे गायब हो गया

 
मे अपने मन ""क्या मस्त गान्ड है माँ की,ऐसी गान्ड आज तक किसी नही मारी,बहुत ही अच्छी किस्मत है मेरी ऑर बहुत बहुत शुक्रिया मेरे पापा का कि उन्होने ये मस्त गान्ड मेरे लिए छोड़ दी,ये गान्ड तो ज़रूर मारूगा ओर ऐसी मारूगा कि इस गान्ड को इतनी बड़ी होने ऑर अपनी कुवारि होने का घमंड टूट जाएगा"""

हम दोनो को इतना मज़ा आ रहा था कि ना तो मम्मी अपनी जगह से हिल रही थी ऑर ना ही मुझे कुछ करने से रोक रही थी

मेने पाया कि मम्मी की सासे भी तेज हो रही तो ऑर मम्मी ने अपनी गान्ड को पीछे धकेल रही थी ,जिससे मेरा लंड ऑर अंदर तक मम्मी की गान्ड की दरार मे घुसा जा रहा था

मे धीरे धीरे अपना एक हाथ चुचि की तरफ ओर दूसरा हाथ चूत की तरफ ले रहा था की हमारी डोर बेल बजी,तभी मम्मी को होश आया ऑर बोली

मम्मी:तेरे पापा आ गये होगे ,7:30 बज गये ना

मुझे ना चाहते हुए भी मजबूरी मे दरवाजा खोलने जाना पड़ा ,आज मुझे अपने पापा पे बहुत गुस्सा आया कि कुछ देर ऑर लेट नही हो सकते थे जिससे कम से कम मम्मी की चुचि तो दबा लेता

फिर मेने दरवाज़ा खोला ऑर वापस रूम मे आकर पढ़ने लग गया

अगली सुबह जब मे उठा तो मेने फिर मम्मी की बड़ी गान्ड देखी ऑर फिर बातरूम मे जाकर लंड हिलाया फिर फ्रेश हुआ

मुझे लग रहा था सुबह सुबह उठते ही लंड हिलाने से लंड मे ताक़त आती है,इसलिए हर दिन मेरा पानी निकालने का समय बढ़ रहा था

फिर बाहर आकर देखा तो पापा मम्मी बैठे हुए थे

पापा ने मुझे देखा ऑर बोला

पापा:बेटा मोहित,इधर आ

मे पापा के पास गया

देख मेरी मीटिंग है मुंबई मे ,मुझे 25 दिन के लिए वही रहना पड़ेगा ऑर फिर उसके बाद मे ऑर मेरे दोस्तो ने प्लान बनाया है कुछ दिन ऑर वही रहकर घूमेगे

पापा के मुँह से ये बात सुनकर तो मुझे इतनी खुशी हुई कि बता नही सकता,क्यो कि इस आने वाले एक महीने मे तो मे गान्ड ऑर चूत मार मार के लाल कर दूँगा

पापा:तुम ऐसा क्यो नही करते कि तुम अपनी मम्मी को लेकर गाव चले जाओ,तुम्हारी छुट्टिया भी चल रही है,तुम्हारा भी मन लगा रहेगा ऑर तेरी मम्मी का भी टाइम पास हो जाएगा

मे अपने मन मे ""चलो अच्छा है सलीम के हाथो से तो माँ को बचा लिया,नही तो साला मेरी माँ की गान्ड फाड़ डालता,उपर से मेरी माँ भी तैयार थी उससे चुदने को,ये सब चाची का खेल है,वाकई बहुत शातिर खिलाड़ी है,किसी को कैसे राज़ी करना है वो अच्छे तरीके से जानती थी""

""काश चाची अगर साथ देती तो अब तक कई बार मे माँ की चूत गान्ड मार चुका होता,खेर जो हो गया वो हो गया""

पापा:तो फिर मे निकलता हूँ,तुम देख लेना

मे:हाँ पापा आज ही निकल जाते है

मम्मी:इतनी जल्दी क्या है

मे:मुझे पड़ाई करनी है,गाव मे ज़्यादा दिन गुज़ारना मेरे लिए दिक्कत है

पढ़ाई का नाम सुनकर सब लोग मान जाते है

मम्मी:ठीक है मे तैयार होती हूँ

पापा:मे ट्रेन की टिकेट बुक करा देता हूँ,तुम टिकेट काउंटर से ही ले लेना देगा ऑर ये कहकर पापा चले जाते है

मे गाव जाने को इतना उतावला क्यों था इसके पीछे का कारण है मेरे दोस्त राजू ऑर कालू,वो मेरे बचपन के दोस्त थे

हम तीनो मिलकर बहुत गंदी गंदी बाते करते थे

यहाँ तक कि हम ने आपस मे बोल भी रखा था कि एक बार हम अपनी मम्मियों को चोद ले फिर बाकी दोस्तो से चुदवाने मे मदद करेगे

ऑर इस बाते पे हम मे से किसी को ऐतराज़ नही था,सब चाहते कि उनकी माँ दूसरो से चुदे ,हम तो ये चाहते थे कि हम तीनो अपनी माओ के साथ एक ही जगह सब मिलकर चोदे ,

 
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