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आग के बेटे / complete

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अब प्रत्येक इसान उन दोनों के मध्य से हट गया था I उपस्थित प्रत्येक इंसान को बिदित था कि महज चद भावनाओं में बहका अधेड ने मोत को ललकारा है…जिसकै फलस्वरूप कुछ ही क्षणों उपरात हाल मे उसकी लाश तडपती नजर आएगी ।

"यह तुम क्या कर रहे हो चौधरी ? वह आज का सबसे खतरनाक आदमी जिम्बोरा है ।" एकाएक अधेड के कानों मे अपने पास खडे काउटरमैन की बडबडाहट टकराई किन्तु उस पर इसका लेश्मात्र भी अतर न पडा । वह उसी प्रकार नीग्रो को धूरता रहा I

अचानक नीग्रो कै मोटे, लटके हुए भद्दे और काले होठों ~ पर एक ऐसी क्रूर और जहरीली मुस्कान नाच उठी…मानो उसने अधेड को उसके इस अपराध के लिए क्षमा कर दिया हो । वह अत्यत भयानक और घरघराती-सी आवाज़ में लडकी से सबोधित होकर बोला l

"ये हिंदोस्तानी मच्छर तेरी क्या रक्षा करेगा छोकरी? अगर जिम्बोरा इसे फूंक भी. मार दे तो रस्सातल में समा जाए ।"

अधेड का उबलता खून मानो उफ़न गया I उफ़नकर मानो समस्त लहू आखों में तैर आया । समस्त जिस्म की नसों मे एकदम तनाव आ गया ।

ज़बडे शक्ति के साथ एकदूसरे पर जम गए । अत्यत खूखार दृष्टि से नीग्रो को घूरता हुआ वह चीखा ।…"कहा कै बे कालिए । मैं तोरी टाग पै टाग धर कै ~ चीर दूगो I"

उपरोक्त वाक्य ने मानो एकदमं नीग्रो की मुस्कान छीन ली । उसके भयानक जबडे किसी राक्षस की भांति फैले । भयानक तरीके से वह अधेड की तरफ़ बढा । इस बीच उसकी खतरनाक ~ कटार भी उसके हाथों में दबी थी I अधेड में न जाने कौन सी शक्ति का सचार हो गया था I

उसने भी लड़की को धीरे से स्नेह के साथ स्वयं से अलग किया और मौत बनकर, मौत से टकराने के लिए आगे बढा ।

. . समस्त हाल मे भयानक भय व्याप्त हो गया था । वहा मौत जैसी शाति थी ।

एक मौत दूसरी मौत की मृत्यु हेतु आगे बढ रही थी I

,ट्रांसमीटर पर दूसरी ओर की गुर्राहट सुनकर बिजय. इस. प्रकार सीट से उछल पडा जैसे--अचानक उसे बिच्छु ने डक मार दिया हो । क्षणमात्र के भी हजारवे भाग में वह समय की गभीरता को भाप गया । वह जान गया कि आग के बेर्टों का चीफ़ निहायत ही चालाक हे-उसका राज अब राज न रहा था l विद्युत गति से उसके हाथ अपने रिवाॅल्बर पर पहुच गए । वास्तव मेँ इस मामले में विजय ने अपनी सम्पूर्ण फुत्ती का प्रयोग किया था किन्तु इसका क्या किया जाए कि वह अपने इरादे मेँ असफ़ल रहा l इसके कई कारण थे…पहला ये कि आँस्टिन अत्यत छोटी थी और उसमें छः सात इंसान' बडी. कठिनाई से जमाए हुए थे I इतने छोटै-से स्थान पर इस स्थिति में विजय के लिए उन पाचों से टकराना असभव ही था ।

परिणामस्वरूप जेसे ही उसका हाथ रिवॉल्वर तक पहुचा कि वह सिहर उठा । एक साथ तीन रिबॉंल्वरौ की नालो ने उसके जिस्म के विभिन्न अगो' को स्पर्श किया ।

दो रिबॉंल्बर पीछे बैठी छायाओं ने उसकी गुद्दी से चिपका दिए और तीसरा रिवॉल्वर दाए बैठे एक अन्य नकाबपोश ने उसकी पसलियों से सटा दिया I

उसका हाथ जहां-का तहां ही चिपक गया । तभी उसके कानों मे अपने पीछे वाले के शब्द टकराए

-"'अगर कोई भी चालाकी दिखाने की चेष्ठा की तो खुदागंज पहुचा दिए जाओगे l"

"नहीं नहीं भाई साहब ऐसा बिल्कुल मत करना l"

बिजय चहककर बोला--- "अगर हम खुदागज पहुच गए तो हमारे बीवी-बच्चों का क्या होगा ? बेचारे अनाथ हो जाएगे I अरे वाह अरे वाह वाह I" बिजय ऐसे बोला…मानो स्टेज पर खडा कोई शायर "का" भतीजा-" क्या झकझकी याद आई है I हा तो झकझकी का विषय है अनाथ हो जाएगे । भई वाह हा . . तो प्या…!"

"'बको मत I ” अचानक पीछे वाला खतरनाक स्वर में गुर्राया ।

कारणवश विजय की कैची की भाति चलती जुबान में ब्रेक लग गए । उसकी बोलती पर ढक्कन लग गया किंतु--- वह भी अपने नाम का बस एक ही बिजय था I उसकी बोलती पर तो ढक्कन नि:सदेह लग गया, किंतु अब वह शतुरमुर्ग की भाति अपनी गरदन अकडाए, अपने चेहरे पर मूर्खता के भाव किए बडी विचित्र नजरो से एक…एक को घूर रहा था । तभी पीछे वाला गुर्राया ।

…"अगर बकवास की तो गोली मार दूंगा I”

"'"भाईं साहब आप बुरा न माने तो एक बात कहू।" बिजय के लहजे' से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह पैदाइशी शरीफ रहा हो I उसके बाद कोई शरीफ पैदा ही न हुआ हो I बैसे . इस समय वह अपनी पुरानी चाल चल रहा था । अत बेकार की बकवास. से शत्रु को बोर करके उसे असावधान करने की चाल I उसके उपरोक्त वाक्य से क्योकि शराफत टपकती थी ~ इसलिए पाचो चुप रहे I

विजय फिर बोला I

"हां तो भाई साहब…क्या मैं कहू ?"

"बको क्या बकना चाहते हो ?" पीछे बाला कुछ झुझलाए-से स्वर में बोला । I

"हां ,तो भाई स्राहब बात ये है कि मै आप लोगों को एक झकझकी सुनाना चाहता हूं I वेसे तो मे झकझकी सुनाने का टैक्स लेता हूं किंतु' इस समय क्योकि तुम मेरे बीबी-बच्चों को अनाथ करने का परमिट रखते हो----- --- इसलिए मैं तुम्हें मुफ्त मे एक झकझकी सुनाता हूं ।" विजय लगातार बके जा रहा था और वे पांचो' शात उसकी बात सुन रहे थे । विजय आगे बोला । . .

"हा तो मैं कह रहा था कि झका--- ये हैं एक बार एक बिल्ली और कुत्ते में फ्री स्टाइल कुश्ती हो रही थी बिल्ली मोसी ने कुत्ते मामा के छक्के छुड़ा दिए या यू कहिए कि उसे नाकों चने चबवा रखे थे या यू कहिए कि छठी का दूध याध दिला रखा था या यू कहिए.....!"

"चुप I" पीछे वाला सख्ती के साथ गुर्राया !!

" बंद कर अपनी ये बकवास ।"

एक बार फिर विजय की बोलती पर ढक्कन लग गया ।

--'"अगर अब आगे तुमने एक लफ्ज भी कहा तो मैँ तुम्हारी खोपडी मेँ रोशनदान बना दूगां ।" वह व्यक्ति गुर्राया I

"देखो भाई साहब I" विजय फिर उसी शराफत के साथ बोला…“बात यह है क्रि आप खोपडी में रोशनदान बनाए या चूहेदान लेकिन हम भी अपना झक्का पूरा किए बिना बाज नहीं आएगे । हा तो हम कह रहे थे कि बिल्ली ने कूत्ते मामा की ऐसी-तैस्री कर रखी थी कि तभी चूहा ताऊ उनके बीच में आया और उनका फैसला करने लगा । अब जनाब फैसला तो हो गया किंतु तभी बिल्ली मोसी और कुत्ते मामा चूहे ताऊ पर झपटे ।" इतना कहकर विजय एकदम चूप हो गया मानो लकवा मार गया हो ।

उन पाचो में से किसी के पास बुद्धि का इतना स्टॉक न था कि उसके झक्के के अर्थ को समझ पाते । अत एक-दुसरे की और प्रश्नवाचक निगाहों से देखने लगे । मानो एकदूसरे से पूछ रहे हो कि झक्के का अर्थ क्या हुआ? ?

किन्तु वे बेचारे क्या अर्थ सोच सकते थे जबकि वास्तविकता यह थी कि विजय खुद इस बकवास का अर्थ नही जानता था । वह तो उन्हे असावधान करने कै लिए, जो उसके दिमाग में आया, बकता चला गया और वास्तव में वह किसी हद' तक उन लोगों को अपनी अटपटी बातो से उलझाकर असाबधान कर भी चुका था---- किन्तु इस छोटी सी आस्टीन मे कुछ करने मे असफल रहा ।

वातावरण अभी स्याह रात के दामन की कैद से मुक्त नहीं हो पाया था । चारों ओर उसी प्रकार का सन्नाटा-

वही नीरवता वही भयानकता व्याप्त. थी ।

प्रोफेसर हेमत की विशाल कोठी अबादी से दूर एकात में स्थित थी । स्याह अंधकार में खडी विशाल इमारत किसी दैत्य की भाति प्रतीत. होती थी कोठी के चारों और दूर-दूर तक का इलाका खेर्तों और मैंदानों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं था ।

ऐसा प्रतीत होता था मानो नाटे कद के स्याह साए को आवारागर्दी के अतिरिक्त दूसरा कोई काम ही नहीं आप मानो सारी रात वह इसी प्रकार व्यतीत कर देना चाहता हो । इस समय वह प्रोफेसर हेमत की दैत्याकार कोठी के सामने वाली झाडियों¸ मे चुपचाप पड़ा था।

न जाने किसकी प्रतीक्षा थ्री उसे ? झाडियों में छिपे नाटे स्याह साए की आखें प्रत्येक पल प्रोफेसर हेमत की इमारत पर जमी हुई । उसे आज की रात वहा कुछ होने का सदेह हो ।

कभी कभी वह दूर तक बीरान पडी उस सडक को भी देख लेता था जो शात सोई हुई थी…क्रोठी के बरामदे में निरतर उसे एक जुगनू ऊपर-नीचे होता हुआ चमक रहा था । जब यह जूगनू ऊचा उठता तो क्षणमात्र के लिए प्रोफेसर हेमत के चौकीदार पठान का रोबीला चेहरा दमक उठता । यह जुगनू बीडी के अतिरिक्त कुछ भी न था-जो पठान ने अभी कुछ क्षणों पूर्व ही सुलगाई थी । नाटे कद के साए ने सब कुछ देखा था किन्तु शात था । वह चुपचाप झाडियों मे छुपा रहा l रघुनाथ की कोठी के पास से वह सीधा यही आया ओर उसे झाडियों में पडे लगभग दो घटे व्यतीत हो गए थे । किन्तु उसने अपना धैर्य नहीं खोया था ।

तब से अब तक कोई विशेष घटना भी घटित नहीं हुई थी किंतु उसे शायद पूर्ण आशा थ्री क्रि कोई

घटना अवश्य घटित होगी-तभी तो वह धैर्य के साथ झाडियों, में पडा हेमत की कोठी की निगरानी कर रहा था । निगरानी भी विशेषतया हेमत के कमरे की ।

हेमत का कमरा दुसरी मंजिल पर था । जिसके शीशे युक्त खिडकी से कमरे के भीतर का दृश्य हल्का व नीला घुघयुक्त-सा दीख पडता था क्योकि' कमरे में शायद नीले. रग का नाइट बल्ब हस रहा था । टकटंकी बाधे नांटा साया उसी खिडकी ,को घूर रहा था कभी-कभी उसकी निगाह रिक्त सडक की ओर भी उठ जाती थी । वातावरण यू ही शात रहा…किसी घटना अथवा दुर्घटना ने जन्म नही लिया किंतु कमाल था इस नाटे में भी-उसने भी अपना धैर्य नहीँ खोया था । शात पडा वह किसी बिशेष घटना की प्रतीक्षा कर रहा. था ।
 
. . इस वार जैसे ही उसकी निगाहे खिडकी से हटकर दाई ओर की रिक्त सडक पर पडी' तो एकाएक उसकी आखें सफ़लता की स्थिति मे चमकने लगीं । उसकी आखे किसी बिजली की भाति चमक उठी ।।

सोई' हुई सडक को रोंदता हुआ कोई वाहन निरतर उसी ओर आ रहा था । इस बात का अनुमान. नाटा साया उसकी चमचमाती हैडलाइटों से लगा चुका था……जो निरंतर तीव्र वेग से निकट आती जा रही थी । नाटा साया सतर्क हो चुका था ।

इतनी देर में यह पहला वाहन था…जिसने सोई सडक की निद्रा को भग कर दिया था और अपनी ध्वनि से सन्नाटे को पराजित कर दिया था । उसने झाडियों मेँ पडे-ही-पडे पहलू बदला और आखे उन चमचमाते बिन्दुओ पर जम गई ।

नाटे कद के स्याह साए कि पिस्तौल उसके हाथ मे आगया ।

जब वे बिदु अत्यत निकट आ गए तो उसने स्पष्ट देखा कि यह वही स्याह आस्टिन थी-जिसने कुछ समय पूर्व विकास का अपहरण किया था । उसके पीछा किए जाने पर वह एक मोड़ पर गधे के सिर से सींग की भाति गायब हो गई थी किन्तु इस समय वह एक बार फिर उसके सामने थी । ~

आँस्टिन हेमत की कोठी के ठीक सामने थमी ।

उससे से पाच साए बाहर निकले । रिवॉल्वर संभाले वह शात पडा सायो की प्रत्येक प्रतिक्रिया देखता रहा I एकाएक आस्टिन के अदर से

थर्राया स्वर

"काम शीघ्रता से हो ।"

"ओके सर !"

पाचों में से एक ने कहा और फिर पाचों कोठी के दरवाजे की ओर बढ गए । तब तक बरामदे ने बैठा पठान चौकीदार दरवाजे तक आया और भारी स्वर में बोला।

"कौनहो तुम ? क्रिससे मिलना है ?"

"प्रोफेसर हेमत्त से I" पाचों में से एक बोला और साथ ही वे दरबाजे तक पहुच गए I दूसरी तरफ पठान भी दरवाजे तक पहुचता हुआ बोला ।-"यह कौन सा समय? "

और फिर जो कुछ हुआ…वह पठान के लिए तो आश्चर्य से परिपूर्ण था ही नाटा साया भी चौंक पडा…-सब कुछ देखकर साए की आंखों मे उन सायों के प्रति घृणा के भाव्र उजागर हो गए ।

हुआ यह कि अभी पाठन अपना वाक्य भी पूरा नहीँ कर पाया था कि सार्यो के बीच से 'फिस' की एक घीमी-सी ध्वनि ने ज़न्म लिया और क्षणमात्र के लिए दहकता शोला रिक्त वायुमडल में चमककर सीधा पठान के जिस्म में प्रविष्ट हो गया । पठान के मुख से धीमी-सीं कराह निकली । उसने अपना ~ बल्लम उन सायो की और बढाया. कि तभी "फिस' की एक अन्य धीमी सी ध्वनि के साथ एक और गोला लपका और

सीघा पठान के जिस्म में प्रविष्ट हो गया ।

परिणामस्वरूप पठान के मुख से घुटी…धुटी-स्री चीख निकली उसके हाथ से बल्लम छूट गया । वह धडाम से फर्श पर गिरकर ठडा हो गया ।

दृश्य देखकर नाटे साए की आखों मेँ धीमा-सा क्रोध उजागर हो गया i शायद उसे उनकी यह हरकत अच्छी न लगी थी । उसका. जी चाहा कि वहं अपने रिवॉल्वर से वह सबको एक-एक गोली मारकर पूछे कि अब बताओ कैसी' होती है पीडा? बह जानता था कि दोनों गोलिया उन्होंने साइलेसरयुक्त रिवॉल्वर से चलाई हे-उन्होंने बिना विशेष शोर-शरावे के दरबान को धरती छोडो पत्र थमा दिया था ।

. अपने क्रोध क्रो दबाए वह शात झाडियों में पडा रहा और सायों की प्रत्येक हरकत देखता रहा I सायों ने दरवाजा खोला ।

दो ने पठान के मृत शरीर क्रो उठाकर बगीचे मे फेंक दिया और फिर सभी कोठी के भीतर की और बढ गए ।

" -तुम यहीँ रहो !" एक साए ने दूसरे साए को आदेश दिया ।

"ओके सर I" वह साया बोला -जिसे आदेश दिया गया था-शेषचारों साए कोठी के अदर प्रविष्ट हो गए नाटे साए ने कोई प्रतिक्रिया नही की । वह शात खडा उनके क्रिया कलाप देखता रहा-लगभग पाच मिनट बाद ही हेमत कै कमरे की खिडकी कें शीशे पर उसने उन लोगों को देखा…उसका दिमाग तेजी से कुछ करने के लिए सोच रहा था । एक साया बरामदे में खडा सिगरेट फूक रहा था ।

तभी उसने ~ आंस्टिन की ओंर देखा-वहाँ उपस्थित साया भी सिगरेट पी रहा था ।

नाटे साए ने शीघ्र ही कछ निश्चय किया और किसी दक्ष जासूस की भाति' सतर्कता के साथ झाडियों के बराबर-बराबर ऑस्टिन की ओर बढने लगा । वह प्रत्येक खतरे का सामना करने के लिए पूर्णतया सतर्क था…वह रेंगने में इतनी सावधानी का परिचय दे रहा था कि स्वय उसे रेंगने की ध्वनि नहीं सुनाई पड रही थी । इसी प्रकार रेंगता हुआ वह आंस्टिन तक पहुच

गया I

इससे पूर्व कि कोठी के अदर प्रविष्ट होने वाले चारों साए बाहर आते नाटा साया सतर्कता के साथ बरामदे मे खडे साए और' ऑस्टिन के भीतर बैठे साए की आखो मे धूल झोकता हुआ ऑस्टिन की डिक्की में समा गया ।

वहा उपस्थित किसी अन्य इंसान को इस बात का लेशमात्र भी अहसास न हुआ । यहा तक कि आस्टिन" मेँ बैठा साया भी नाटे की उपस्थिति से पूर्णतया अनभिज्ञ था ।

नाटे साए ने डिक्की मे हल्की-सी दरार उत्पन्न की हुई थी . जिसमेँ से वह बाहर का दृश्य देख रहा था । उसने देखा अगले पाच मिनटों में चारों साए बरामदे में आए l ऑस्टिन के निकट आते-आते वे पाच हो गए'। उनमें से एक के कंधे पर एक अचेत जिस्म पडा था जो निसंदेह हेमत का ही था । वह जान गया कि प्रोफेसर का अपहरण किया जा रहा है l वह चुपचाप सब कुछ देखता रहा ।

कुछ क्षणोपरात ऑस्टिन एक झटके' से आगे' बढ गई और फिर आस्टिन तीव्र वेग से अज्ञात दिशा की और दौडती चली गई । नाटा साया शायद प्रत्येक मार्ग को अपने दिमाग में सुरक्षित करता जा रहा था । वह आग के बेटों को उनके अपराध का मजा चखाने के बिषय मेँ सोच रहा था ।

ऑस्टिन के अदर शाति थी । छहों साए चुपचाप बैठे थे । पिछली गद्दी के आगे प्रोफेसर हेमत का अचेत जिस्म पडा हुआ था । ड्राइवर तीव्र वेग और दक्षता के साथ कार ड्राइव कर रहा था ।

अचानक पिंक. . .पिक की ध्वनि ने 'शात वातावरण को पराजित कर दिया । लगभग सभी लोग चोंकै-ड्राइवर के पास बैठे साए ने कार में लगे ट्रांसमीटर को ऑन किया और ,बोला ।

"यस नबर शर्बीला सेशन स्पीकिंग I"

……""तुम क्या खाक सतर्क रहते हो ?” दूसरी तरफ से भयानक गुर्राहट-भरी आवाज ।

~-“ क्या मतलब सर? ” शर्बीला सेशन बुरी तरह से चौक पडा ।

"तुम पहली वार भी मात खा गए और इस बार भी ।" फिर वही गुर्राहट-भरी आबाज ।

"मैं समझा नहीं सर I”

"तुम क्या खाक समझोगे ?" गुर्राहट अत्यत भयानक थी…"पहली बार जो व्यक्ति मोटरसाइकिल से तुम्हारा पीछा कर रहा था…इस बार वह तुम्हारी आँस्टिन में ही उपस्थित है I”

"कौन है वह? " शर्बीला सेशन के साथ अन्य सभी … साथी चौके । ~

"वह इस तरह नज़र नहीं आएगा बेवकूफो । वह तुम्हारी आँस्टिन की डिक्की में बैठा हे । तुम्हारी ये असावधानी किसी दिन तुम्हारी जान ले लेगी ।"

उपस्थित समस्त साए आश्चर्य के साथ एक दूसरे का मुह ताकने लगे । साथ ही वे सभी अपने चीफ़ की जानकारिर्यो पर हेरान थे । क्या उनका चीफ प्रत्येक मिशन पर उनके साथ रहता है......?

★★★★★
 
चारों आखो से मानो साक्षात लहू की वर्षा हो रही थी । दोनो की आखों से खून की बूदे मानो बस टपकने ही वाली थी ।

भयानक नीग्रो के हाथों मेँ उसकी कटार दबी थी । वह निरतर खतरनाक ढग से अधेड की तरफ बढ रहा था । इस भयानक नीग्रो का नाम काउटरमेन ने शायद जिम्बोरा बताया था ।

इस अधेड की तो मानो अगली और पिछली सात-सात पुश्तों का बल सिर्फ उसी में एकत्रित हो गया था । खाली हाथ ही वह खूंखार दृष्टि से जिम्बोरा को घूरता हुआ उसकी ओर बढ रहा था । उसके जबडे भयानकता के साथ एक-दूसरे पर जमे हुए थे । वह मानो नीग्रो से टकराने का दृढ सकल्प कर चुका था ।

हाल में उपस्थित प्रत्येक. इसान बुरी तरह से भयभीत हो चुका था । सभी उन दो खतरनाक इसानो को दिल संभाले देख रहे थे I प्रत्येक की आखों' में भय झाक रहा था किन्तु सीटे अपने स्थान पर थी ।

वह लडकी अस्त-व्यस्त-सी हो चुकी थी । उसकी सास फूली हुई थो । वह अधेड के पीछे काउटर के निकट खडी थी ।

~ उसकी सपूर्ण दुआएं-समूची सहानुभूति पूर्ण रूप से अधेड के साथ थी किंतु' नीग्रो का जिस्म उसकी भयानकता-उसके हाथ में दबी कटार लडकी. को भयभीत कर रहे थे । न जाने क्यों उसे ऐसा' महसूस हो-रहा था कि यह अधेड-सा नजर आने वाला व्यक्ति…जिसने उसके लिए स्वयं को मौत कै मुह में धकेल दिया है…वह नीग्रो को परास्त न कर सकेगा किन्तु फिर भी वह न जाने कौन-स्री शक्ति थी…जिसने उसके मन में आशा की ज्योति को प्रज्वलित का दिया था I

अमी वे एक-दूसरे की तरफ बढ ही रहे थे कि वह कॉलगर्ल जो अभी तक अधेड से चिपकी हुई थी । अधेड के करीब आई और लगभग झिझोडती हुई बोली ।

‘ "ये क्या बेवकूफी है क्या तुम जिम्बोरा से टकराकर मरना चाहते हो ।"

किंतु अधेड पर तो मानो खून सबार था । उसने पलक झपकते ही क्रॉलगर्ल को अपने सिर से ऊपर अधर मेँ उठा लिया और इससे पूर्व कि कोई कुछ समझ सकै उसने कार्लगर्ल को जिम्बोरा पर फेंककर मारा । इधर जिम्बोरा इस विचित्र

हरकत पर थोडा चकरा गया और हडबडाहट मेँ उसे और कुछ न सूझा तो अपनी कटार वाला हाथ आगे कर दिया I

उफ् I

कार्लगर्ल की एक भयानक चीख से मानो समस्त वातावरण कम्पित होकर रहा गया I

नारियों ने डर के मारे आखें बद कर . ली । कुछ कमजोर हृदय की चीखें भी निकल गईं । जिम्बोरा के हाथ की कटायर खचाक से कॉलगर्ल के पेट में घुस गई ।

परिणामस्वरूप. उसके कंठ से एक भयानक. चीख निकली और अगले ही पल वह हाॅल के फ़र्श पर पडी. तडप रही थी ।.. जिम्बोरा की कटार लहू से रक्तिम थी । उसकी भयानकता मेँ चार चाद. लग गए । वह आगे बढा रास्ते मे पडे कॉलगर्ल कै तडपते जिस्म में एक ठोकर मारकर उसने अपने लिए रास्ता बना. दिया I

किन्तु' कालगर्ल के तडपते जिस्म मे ठोकर लगते ही अधेड का क्रोध मानो चरम सीमा को स्पर्श कर गया ।

अगले ही पल भयानक जाबांज की भाति अधेड. का. जिस्म हवा में लहराता हुआ जिम्बोरा की तरफ बढा । जिम्बोरा ने भी भयनकता के साथ… पैतरा बदला और कटार वाला हाथ सामने कऱ.दिया ।

किन्तु' गजब का शातिर था वह अधेड भी. . .पलक झपकते ही उसने वायु मेँ ही एक डाइव ली और जिम्बोरा का कटार वाला हाथ थामकर फुर्ती के साथ दाए हाथ से शक्तिशाली घूंसा उसके जबडे पर रसीद किया । जिम्बोरा लडखडा तो अवश्य ,गया किंतु उस पर कोई विशेष प्रभाव न पडा ।

अगले ही पल वह सभला और कटार सभालकर एक बार फिर अधेड क्रो घूरा I

~ अधेड अत्यत सतर्क नज़र आये था क्योंकि वार करते ही वह पीछे हट जाता था और दुबारा टकराने के लिए तैयार हो गया ।

, खतरनाक जाबाज़ फिर एक-दूसरे के सामने थे ।।

कोई कुछ न वोल रहा था…हाल में मौत जैसा सन्नाटा व्याप्त था ।

एकाएक जिम्बोरा एक भयकर डकार के साथ कटार को लेकर अधेड पर झपटा । ~

किन्तु कमाल था अघेड़ भी ।

वास्तव में, गजब की शातिरान चाल.......

जैसे ही जिम्बोरा झपटा ---उसी पल अधेड न सिर्फ अपने स्थान से हट गया, बल्कि फुर्ती से घूमकर एक चेयर उठाई

और. जिम्बोरा पर दे मारी जिम्बोरा एक तो वेसे ही वार के खाली जाने पर लडखडा… गया था और ऊपर से चेयर आकर लगी तो वह वास्तव मे हडबडा गया किन्तु कमाल था जिम्बोरा भी I वह गजब की फुर्ती का परिचय देता हुआ खडा होषगया । एक बार फिर वह अधेड के सामने था ।

इस बार जिम्बोरा पहली सभी स्थितियों से भयानक लग रहा थे I शायद जिम्बोरा को अहसास हो गया था कि उसके सामने खडा अधेड भी वह रसगुल्ला नहीं कि जीभ पर रखते ही हजम कर जाओ…अत अब तक वह अधेड से टकराने में जिस लापरवाही का प्रयोग कर रहा था…अब वहा लापरवाही के स्थान पर सतर्कता थी । खुद को संभाले वह खतरनाक ढग से अधेड की ओर बढा ।

दूसरी और अधेड भी पूर्णतया सतर्क नजर आ रहा था I वह निहत्थे ही जिम्बोरा को घूर रहा था ।

हाल मे उपस्थित लोगों को अधेड के कुछ हाथ देखकर उससे कुछ आशा बध गई थी ।

एवाएक जिम्बोरा फिर भयानक ढग से अधेड पर झपटा I

अधेड ने भी गजब की फुर्ती का प्रदर्शन करने का प्रयास किया ।

दृश्य देखकर उस लडकी. की भयानक चीख निकल-गई ।

इस बार अधेड मात खा गया । उसने फुर्ती दिखाने का जबरदस्त प्रयास किया !

किन्तु......

इस बार जिम्बोरा भयानक वाज की भाति झपटा था। अत: उसके हाथ में कटार खच से अधेड की बाई बाजू मे घस गई ।

परिणामस्वरुप लडकी' की जोरदार चीख निकल गई---- जैसे कटार अधेड क्रो न लगकर स्वय लडकी. को लगी थी ।

यह अन्य बात है कि अधेड कै मुख से एक धीमी-स्री सिसकाऱी भी न निकली हो l

कटार लगते ही अधेड और भी अधिक भयानक से उठा ।

इधर कटार उसके बाए हाथ मे घूंसी-उधर उसके. दाएं हाथ का शाक्तिशाली घूसा' जिम्बोरा की ठीक नाक पर पडा. । जिम्बोरा के कठ से निकलने वाली चीख इतनी भयानक और डरावनी थी कि समस्त हाल दहल गया । उसक्री नाक से लहू बहने लगा । घूसा वास्तव में इतना शक्तिशाली था कि किसी साधारण आदमी के लगता तो निश्चित रूप से वह ससार से रूठ जाता ? किन्तु जिम्बोरा पर सिर्फ यह प्रभाव पडा कि वह सीटों से उलझता हुआ फर्श पर जा. गिरा । साथ ही उसके कठ से एक भयानक चीख निकल गई । ~ जब जिम्बोरा लहराकर चीख के साथ फ़र्श पर गिर रहा था । उस समय अधेड अपने दाए हाथ से बाई कलाई मेँ धसी कटार को निकालने का प्रयास कर रहा था । कटार खींचते ही - भयानक पीडा ने जन्म लिया किंतु अधेड दातों पर दात जमाकर उसे सहन कर गया I मुख से उसने सिसकारी तक न निकाली I

किन्तु ऐसा प्रतीत होरहा था कि जैसे कटार अधेड कै जिस्म ~ मे न लगकर उस लडकी को लगी ही-क्रटार अधेड के जिस्म से न खींची गई हो, बल्कि उस लडकी. के जिस्म. से खींची गई हो । समस्त पीडा उस अधेड को न होकर उस लडक्री,को हो रही हो. . .तभी तो उस' लडकी. की दर्द-भरी चीख निकल गई थी । आसुओं की तो मानो कोई थाह ही नहीँ थी-आसुओं से भरे नयनों से उसने अधेड के रूप में उस फरिश्ते. क्रो देखा, 'जो उसके लिए मौत से खेल, रहा था-देखकर वह स्तब्ध रह गई, क्योंकि इतनी पीडाओं से गुजरने के बाद भी उसके उस बिचित्र भाई के मुख पर धींमी-सी मुस्कान नृत्य कर रही थी । लडकी अपने माई कै बिचित्र व्यक्तित्व को देखकर स्तब्ध रह गई, किन्तु उसका दिल अब भी भयभीत होकर क्राप रहा था । उसने देखा ।

एक बार फिर दोनो खतरनाक जाबांज एक-दूसरे के सामने थे

अधेड बाह' से कटार निकालकर फेक चुका था, किंतु बांह से निरतर खून वह रहा था, लेकिन ऐसा लगता था मानो उसे बहते रक्त की लेशमात्र भी परबाह नही थी ।।

वह अब भी जिम्बोरा को खुखांर दृष्टि से घूर रहा था ।।
 
इधर जिम्बोरा की नाक से भी लहू बह रहा था । उसका समस्त भयानक चेहरा रुधिर से लथपथ होकर ओर अधिक ~ भयानक हो गया था किन्तु उसे भी बहते रक्त की कोई चित्ता न थी । वह भी खूनी आखों से अधेड क्रो घूरता हुआ उसकी और बढ रहा था ।

हाल में उपस्थित कोई भी व्यक्ति उनके बीच में आने का साहस नहीं कर पा रहा था ।

एकाएक भयानक क्षण ।

दोनों जाबाजों के जिस्म एक साथ वायु में लहराए ।

दोनों ने एक ही साथ एक-दूसरे क्रो फलाइग किक मारने का प्रोग्राम बनाया । एक की फलाइग किक दूसरे की फलाइग किक से टकराई लहराकर दोनों फर्श पर गिरे ।।

किन्तु......

अगला क्षण दोनों की फुर्ती की परीक्षा का क्षण था । दोनों ने ही अपनी सप्पूर्ण फुर्ती का प्रदर्शन करके उठकर एक-दूसरे को दबोचने का प्रयास किया किंतु' इस प्रयास मे सफलता मिली जिम्बोरा को । जिम्बोरा यहा अधेड की अपेक्षा अधिक फुर्तीला निकला ।

प्रयास तो अधेड ने भी बहुत किया-किन्तु वह एक मेज में इस प्रकार उलझ गया था कि उस मेज क्रो अपने सिर से हटाने में कुछ समय लग गया । जबकि जिम्बोरा खुले फर्श पर गिरा था । अत वह कुछ पहले ही खडा हो गया । अधेड को खडा होने मे केवल इत्तना ही विलम्ब हुआ--जितने समय में उसने मेज अपने ऊपर से हटाई किंतु यही क्षणमात्र का विलम्ब उसके लिए भयानक खतरा बन गया । जिम्बोरा क्योकि सरलता से उससे पूर्व खडा हो गया अतः वह अपनी मजबूत बाहे फैलाकर भयानक ढग से एक डरावनी डकार के साथ अधेड पर झपटा और उसने उठने का प्रयास

करते हुए अधेड क्रो धर दबोचा । न सिर्फ धर दबोचा बल्कि एक क्यानक दाॅव की चपेट मे ले लिया । वास्तव में यह इतना भयानक दाव था कि स्वय अघेड की भी चीख निकल गईं।

गजब की फुर्ती के साथ झपटकर जिम्बोरा ने अधेड को अपनी मजबूत पकड में ले लिया । अधेड ने प्रत्येक ढग से पकड से मुक्त होने का प्रयास किया किन्तु उसे असफलता का खजाना मिला।

वास्तव में जिम्बोरा की पकड शिकजे की भाति सख्त हो चुकी थ्री

अधेड की स्थिति किसी बिल्ली के पजे मे फसे चूहे जेसी थी ।

अपनी और से उसने मुक्त होने का प्रयास किया किन्तु सब निरर्थक ।

जिम्बोरा अधेड को पंजे में दबाकर ही रह जाता तब भी गनीमत होती किन्तु जिम्बोरा ने उसे भयानक दाव की चपेट मेँ ले लिया ।

स्थिति देखकर लडकी भी जैसे थरधर कांपने लगीं थी I

दाव यह था कि क्षणमात्र मे जिम्बोरा ने अपने बाए पैर का घुटना फर्श पर टेक दिया और दाएं पैर को धरती पर रखकर उसने घुटने वाले स्थान से इस प्रकार मोड़ा कि घुटने वाले स्थान पर समकोण यानी 90 डिग्री का कोण बन गया इसी क्षणमात्र मे उसने अपनी पकड मे कैद अधेड का जिस्म समकोण बने पैर की जाघ पर इस प्रकार रखा कि उसका आधा जिस्म पैर के दाई और तथा आधा जिस्म' बाई ओर । अधेड का जिस्म जाघ पर चित अवस्था मे था।

अधेड मुक्त होने के लोभ से छटपटाया किन्तु सफल न हो सका ।

वास्तव में जिम्बोरा शक्ति में किसी -राक्षस से कम नहीं था । यह सिर्फ कसमसा कर रह गया, किंन्तु मुक्त न हो सका ।

तभी जिम्बोरा अपनी कलाइयों को भी कोहनी से समकोण की स्थिति में मोडकर दाई भुजा से अधेड के जाघ पर रखे जिस्म का दाया भाग नीचे दबाने लगा तथा बाई कलाई से बाईं ओर का जिस्म ।

अब स्थिति यह थी कि अधेड के जिस्म का बीच बाला भाग जिम्बोरा की जाध पर था-जबकि जाघ से लटके दोनों और के जिस्म को जिम्बोरा शक्ति के साथ नीचे 'की' ओर दबा रहा था । अत उसकी कमर कमान की भाति मुडी जा रही थी ~ बस…यही उसकी चीख निकल गई ।

_ _उसे रीढ़ की हड्डी टूटती-सी महसूस हुई । उसे लगा-जैसे कुछ ही पलो में उसकी रीढ़ की हड्डी चटक जाएगी । भयानक पीडा से उसके कंठ से निरतर चीखें निकलकर हाॅल को दहलाने लगीं । अधेड का समस्त चेहरा लाल हो गया ।

उसका कोई भी दाव इस समय कामयाब सिद्ध नहीं हो रहा था l

जिम्बोरा के भयानक होंठों पर खतरनाक सफल्तामयी मुस्कान नृत्य कर रही थी । वह अपनी सम्पूर्ण शक्ति से निरंतर अधेड की रीढ. की हड्डी… को तोडने पर उतारू था । वह तो मानो ~ अधेड की हत्या करने का दृढ. सकल्प ले चुका था ।।

-वास्तव मे स्थिति यह थी कि अधेड न सिर्फ जिम्बोरा से परास्त हो गया था, बल्कि अब क्या उसकी जीवनलीला भी समाप्त होने जा रही थी । शायद ही उसके मरने में कुछ विलम्ब था।

मौत ! कितनी भयानक होती है मौत ! और यह मौत तो मौत से भी अधिक भयानक मौत थी !

अथाह पीड़ाओं में से गुजरकर मौत ! वास्तव मेँ अधेड पराजितप्राय हो गया था… किन्तु.......

वह लडकी ! उस अबला की मासूम और प्यारी आखो' में जैसे खून उतर आया था । अधेड. को इस प्रकार मौत के मुह' में देखकर उन नारी नेत्रो ने ज्वाला की वर्षा प्रारम्भ कर दी । नारी का सोया हुआ साहस जाग्रत हो गया । अधेड की यह स्थिति देखकर वह ,इस प्रकार क्रोधित हो उठी-----मानो वह सगे भाई की सगी. .मानो उन दोनों मे कोई खून का रिश्ता रहा हो ।।

मासूम लडकी साक्षात चडी मे बदल गई l भोले नेत्रो मे लहू उबालें ही लेने लगा । प्यारा-सा मुखड़ा मौत से भी अघिक भयानक उठा

उसकी जलती हुईं निगाहे फर्श पर पडी कटार पर स्थिर गई । खून से सनी हुई कटार को देखकर उसका खून जैसे और भी अघिक तेजी से उबाल लेने लगा । उसके भैया की चीखों ने जैसे उसे असीम शक्ति प्रदान कर दी । भयानक चंडी की भाति वह फुर्ती के साथ कटार पर झपटी । कोई कुछ समझ भी न पाया उसकी हरकत देखकर सभी हतप्रभ रह गए ।।

किंतु सभी क्री स्थितियों से बेखबर उस चडी ने कटार उठा ली और पलक झपकते ही ~

उफ्.......

खच्व से कटार जिम्बोरा की पीठ में घंस गई । जिम्बोरा के कंठ से चीख निकल गई । खून का तीव्र फव्वारा निकला जिसने अबला के समस्त चेहरे को रंग दिया । सनी हुई कटार हाथ में लिए वह अबला कितनी ख़तरनाक-कितनी हौलनाक लग रही थी l

भयानक पीडा से जिम्बोरा मचला खतरनाक ढग से वह चीखा । इसी चक्कर मे जिम्बोरा की पकड क्षणमात्र के लिए …शिथिल हुई और अधेड के लिए एक पल काफी था । अत सरलता से उसने स्वय को छुडा लिया । उसे अब भी अपना

दिमाग घूमता-सा प्रतीत हो रहा था ।

इधर जिम्बोरा भयानकता की चरम सीमा पर पहुच गया ।

उसकी पीठ में बना वह कटार का वार मानो कोई महत्त्व ही न रखता था । भयानक ढग से वह अधेड को भूलकर उस लडकी की तरफ घूमा और खतरनाक ढग से चीखा ।

"डायन.......कमीनी.....!"

लडकी फिर कटार समाले उस शेरनी की भाति जिम्बोरा पर झपटी…जैसे शेर अपने शिकार-----अब जिम्बोरा का समस्त ध्यान उसी पर केंदित था. , फिर वह लडकी---- बेचारी क्या सफ़ल होती ? कहां वह भयानक और शक्तिशाली राक्षस और कहां वह मासूम कोमल अबला?

जिम्बोरा ने एक ही झटके मे कटार हाथ मेँ थामे लडकी को उठाकर, हाँल के एक कोने में फेंक दिया । लडकी के कठ से भयानक चीख निकली और वह हाल कें एक कोने में जा गिरी । समूचा हाल इस भयानक लडाई पर स्तब्ध था । लडकी की चीख सुनकर अधेड की मानो विलुप्त होती हुई चेतना वापस लोट आईं…वह एकदम सजग होकर उठ खडा , हुआ और लडकी. की स्थिति देखकर मानो उसमें अपरिमित शक्ति का सचार हुआ I वह अपनी संपूर्ण शक्ति से जिम्बोरा पर झपटा । इस बार जिम्बोरा ने लाख चाहा कि वह किसी तरह अधेड को रोक सके किन्तु लगता था कि जैसे किसी अनजाने प्रेत की शक्ति और फुर्ती सिमटकर अधेड के जिस्म में आ गई है ।
 
जिम्बोरा की कछ समझ मेँ नहीं आया था कि अधेड के शक्तिशाली घूसे तडातड वर्षा की बूंदो की भाति उसके चेहरे पर पड रहे थे ।

हालाकि इन घूसों का उस पर कोई खास प्रभाव न पड़ रहा था, किंतु फिर भी इतना अवश्य था कि इन घूसों ने जिम्बोरा को सभलने का अवसर नहीं दिया । जिम्बोरा की नाक से बहने वाला लहू तीव्र हो गया I ऐसा लगता था.....जैसे बाध टूटने पर नदी का बहाव ।

जिम्बोरा को समस्त हांल घूमता-सा प्रतीत होने लगा । वह अंधे हाथी की भाति इधर-उधर हाथ-पाव मारने लगा । तभी अधेड एक पल के लिए ठहरा और अगले ही पल उसकी जेब . में पड़ा चाक्रू उसके हाथ में आ गया । इस एक पल का लाभ उठाने हेतु जिम्बोरा भी उस पर झपटा किंतु अधेड तो मानो भयानक राक्षस में परिवर्तित हो चुका था । उसका चाकू वाला हाथ तीव्र वेग से ऊपर उठा और पलक झपकते ही नीचे गिरा खचाक से झपटते जिम्बोरा के चेहरे में धस गया । जिम्बोरा के कठ से ऐसो भयानक चीख निकली कि समस्त हाल कापता-सा प्रतीत हुआ I लोगों ने घृणा और नफरत से अपनी आखें बद कर ली ।

किन्तु अधेड की भयानकता की मानौ कोई सीमा ही न थी ।।।।

उसने तेजी के साथ चाकू खींचा और. पलक झपकते ही अगला वार मस्त हाथी की तरह झूमते हुए जिम्बोरा पर कर दिया । जिम्बोरा की चीख से हाल में उपस्थित व्यक्तियो मेँ सिर्फ अधेड को छोडकर सभी के दिलों में भयानक दहशत बैठ गई ।

नारियों की चीख से समस्त वातावरण दहल गया । कितना घिनौना दृश्य था यह कितना घृणास्पद कितना भयानक इतना भयानक कि मोत भी भय से कांप उठे l खूनी लडाके भी दहल उठें । शात पडा सागर भी गरजने लगे ।

उसके बाद तो अधेड मानो पागल हो गया था उसने जिम्बोरा. को सभलने का अवसर ही नहीं दिया । निरंतर भयानक ढग से उस पर चाकओँ के वार करता रहा । हाल में जिम्बोरा की चीखे गूज रही थी । अब जिम्बोरा कछ करने की स्थिति मे न था । प्रत्येक बार वह भयानक ढग से चीखता और हाल को कपाकर रख देता-अघेड थमा नहीं वह निरंतर तीव्र वेग से जिम्बोरा पर वार करता रहा ~ समस्त हाल सीने पर हाथ रखे इस अविश्वसनीय दृश्य को देख रहा था l

लगभग चाकू के बीस खतरनाक वारों के बाद जिम्बोरां भयानक व शक्तिशाली जिम्बोरा भयानक ढग से हाथी की भाति लहराया और फिर घडाम से फर्श पर गिर पडा । अधेड खून से सना चाकू हाथ मे लिए उस भयानक नीग्रो के अभी उठने की उम्मीद लिए उससे टकराने के लिए तैयार खडा था । उसकी सास फूली हुई थी । इस समय वह अत्यत ही भयानक लग रहा था । लोग आश्चर्य के साथ उसे देख रहे थे ।

वह भी थककर चूर हो चुका था । ऐसे झूम रहा था मानो अब गिरा । उसका शानदार सफेद सूट लहूलहान हो चुका था I अपनी धौकनी कि भाति चलती सासों पर सयम पाकर उसने इधर-उधर देखा । पहाड जैसा भयानक नीग्रो कुछ देर तक फर्श पर पडा रहा फिर एक झटके के साथ उसकी गर्दन एक और लुढक गई ।

जिम्बोरा अब ठडा पड चुका था । वास्तव में भयानक नीग्रो का अंत भी कम भयानक नहीं था । मानो हाथी मृत पडा हो।

समूचे होल में मौत जेसा सन्नाटा व्याप्त था ।

-'"भैया.......ऽऽऽऽऽ I” एकाएक हाल के उसी क्रोने में खडी लडकी चीखी और अधेड की तरफ दौडी अधेड ने चाकू फेककर बाहे फैला दी । भागती सिसकती रोती…बिलखत्ती वह लडकी अपने भैया के सीने से जा लगी और उसकी सिसकारिया और भी तेज हो गई । हाल मे एक विचित्र-सा सन्नाटा छा गया था । एकाएक अधेड कै सीने से लगी लडकी चोंक पडी ।

उसने देखा…ये लगभग दस भयानक शक्ल वाले इसान थे जिनके हाथों मे टाॅमीगने थी । ये अधेड के पीछे थे । उसे मौत अपने सिर पर नजर आई अत सपूर्ग शक्ति के साथ चीखी ।

"भैया. . . ऽऽऽऽऽऽऽ. I”

काश वह यह देखं सकती कि ऐसे ही दस-दस खतरनाक इंसान चारों दिशाओं से उन्हें घेर रहे थे I

★★★★★

आस्टिन की डिक्की में छुपा नाटा साया अपनी सफलता पर प्रसन्न नज़र आता था-किंतु वह वेचारा क्या जानता था कि उसका रहस्य अब रहस्य नहीं रह गया । डिक्की मेँ बैठा साया क्या जानता था कि उसके शत्रु आग के बेटे उसकी उपस्थिति से परिचित हो चुके हैं । अब यह डिक्की उसके लिए एक प्रकार से कैद बनकर रह गई है । वह तो सोच रहा था कि वह आग के बेर्टों को धोखा देने मे सफल है।

वह अपने नाटे कद का लाभ उठाते हुए सरलता. से डिक्की मेँ समा गया था । आंस्टिन तीव्र वेग से बढती चली जा रही थी । डिक्की, को उसने थोड्रा-सा ऊपर उठा रखा था, जिससे सास के लिए, उसे पर्याप्त वायु 'मिलती रहे और साथ ही दीवार से आख' सटाकर वह अपने दिमाग में उन रास्तों को पूर्णरूप से सुरक्षित करता जा रहा था.…जिन मार्गो से आस्टिन गुजर रही थी ।

यह यात्रा इसी. क्रम के साथ लगभग तीस मिनट तक निरंतर चलती' रही ।।

वह आराम से बैठा मार्ग को अपने मस्तिष्क मे सुरक्षित करता जा रहा था । उसी समय वह धीमे. से . चौंका…ज़ब तीव्र वेग से चलती ऑस्टिन का वेग धीमा पडने लगा । उसने चारों. ओर का निरीक्षण किया -आसपास दूर दूर तक बीहड जगल था । कहीं कोई इमारत कम-से-कम उसे दिखाई न दी I चारों और पूर्व काजल-सा काला अंधकार । दूर कही-कहीँ खेतों के बीच वने टयूबवेल के बल्ब चमक रहे थे ।

वर्ना तो सर्वत्र अधकार था । सिर्फ स्याह काजल सा अघक्रार ।

कभी-कभी जुगनू चमक उठते-ऐसा लगता था--- छोटी चिंगारिया वायु में चकरा रही हों l

धीमी पडती हुई आँस्टिन अचानक स्थिर हो गई l उसने धीमे से ओंस्टिऩ की डिक्की गिराकर उस दरार को स्माप्त कर दिया ।

और सास रोक्कर बाहर की आहट लेने का प्रयास करने लगा I उसके कान बाहर ही लगे हुए थे । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आँस्टिन यहां जगल मे रोकने का क्या उद्देश्य ? उसकी समझ मेँ कुछ न आया--- वह चुपचाप आहट लेने का प्रयास करता रहा ।

कुछ कामों की आहट से उसने महसूस किया कि ऑस्टिन मे उपस्थित सायों. में से कुछ साए बाहर आए हैं I दरवाजा बद होने की ध्वनि 'ने उसके इस बिचार की ठोस पुष्टि कर दी । फिर वह ध्यान से कदमों की आहट सुनने का प्रयास करने लगा, I अचानक उसने महसूस किया कि चार साए उसकी डिक्की की ओर बढे । फिर उसे ऐसा महसूस हुआ कि मानो वे चार. साए बाहर डिक्की के पास ही थम गए हों । उसका दिल बडी. बुरी तरह से धड्का । भय का पंजा उस पर प्रभुत्व ज़माने लगा I अजीब हालत हो गई उसक्री । आने वाले भयानक क्षणों के विषय में सोचकर माथे पर पसीने क्री बूंदें उभर आई I वास्तव में अगले कुछ पलो में आने वाला समय अत्यत' खतरनाक था. . . I क्या उसका रहस्य खुल गया ? वह कौन है? क्या आग के बेटे जान गए हैं ? नहीं ! उसके दिल ने कहा I यह रहस्य तो वे किसी भी कीमत पर नहीं जान सकते…किन्तु ऐसा लगता है जैसे ये लोग उसकी डिक्की में उपस्थिति से परिचित हो गए हैं I किंतु' कैसे ? वह तो अत्यत ही सतर्कता के साथ डिक्की में बैठा था, फिर अगर ये उसे देख लेते तो वही समाप्त कर देते-फिर उसे वहां क्यो लाया गया ? उसके दिमाग में स्वयं ही प्रश्न उठते और उसका उत्तर स्वय' ही खोजने का प्रयास करता । किंतु कोई भी ऐसा विचार उसके दिमाग में न आ सका, जो पूर्णरूप से उसे सतुष्ट कर सके I क्षण-भर में उसके दिमाग में विचारों का उत्थान-पतन हो गया, किंतु' वह किसी निर्णायक बिचार पर न पहुच सका । उसे अब भी ऐसा आभास-सा हो रहा था--मानो वे लोग अभी डिक्की के बाहर ही खडे. हों I

उसका रिवाॅल्बर अपनी जेब मे था

और डिक्की ऐसी थी कि उसमें अगर वह रिवाॅल्बर निकालने का प्रयास करता तो आवाज होने का भय था, क्योंकि डिक्की इतनी छोटी थी कि वह अपना रिवॉल्वर जेब से निकालने मे असमर्थ था । उसका दिल बुरी आशका से धडक रहा था उसे लग रहा था कि बस अब कही डिक्की खुली और वास्तव में उसका भय सत्य सिद्ध हुआ । अगले ही पल डिक्की उठा दी गई । नाटा साया कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं था । सामने तीन छायाए खडी थीं…जिनमेँ से दो के रिवाल्वरो का रुख उसी की ओर था । तीसरे ने डिक्की उठाई थी ।
 
नाटा साया शान से अपने स्थान पर पड़ा रहा । तभी एकाएक रिवाॅल्बर वाला कडे स्वर मे गुर्राया।…" कोई भी चालाकी दिखाने की कोशिश की तो गोली मार दूगा ।"

डिक्की में पडे-पडे साए ने हाथ ऊपर उठा दिए । वह बुरी तरह फस गया था ।

"बाहर …आओ !" उसी इसान ने आदेश दिया । नाटे साए के पास आज्ञा पालन करने के अतिरिक्त अन्य कोई चारा नहीं था । अत: वह चुपचाप डिक्की मे से बाहर आ गया उसने _ ध्यान से अपने चारों और का निरीक्षण किया तो स्वयं को दो रिबॉंल्बरो और एक निहत्थे इंसान' से घिरा पाया । इस समय तो वे लोग ऐसे निर्जन स्थान पर थे-जहां दूर-दूर तक कोई इमारत तक दृष्टिगोचर नहीं होती थी-स्याह अघकार क्री चादर ने जगल के वातावरण के भयानकपन में चार चाद' लगा दिए थे । दूर-दुर तक किसी का पता न था । नाटा साया इतना नाटा था कि उन तगडे-तगडे सायो के बीच बालक सा लगता था अचानक आँस्टिन के अदर से आवाज आईं I

---"कोंन है ?"

"चेहरे पर काला नकाब है सर I" निहत्थे व्यक्ति ने उत्तर दिया । बोलता हुआ भी वह निरंतर नाटे को घूर रहा था । नाटा शाति के साथ हाथ ऊपर किए खडा रहा-मानो उसे अब अपने पकडे जाने का भय न हो ।

"इसे यहा ले आओं I" आस्टिन के अंदर से फिर आदेशात्मक स्वर गूजा ।

"चलो I” नाटे साए के पीछे रिवॉल्वर लगाए साया रिवाॅल्बर का कसाव बढाकर बोला न जाने क्यों नाटे के अधरों पर धीमी…सी मुस्कराहट तेर गई । हाथ ऊपर किए ही वह आगे बढ गया । कुछ ही समय उपरात वे लोग आस्टिन के बाहर आगे की और चले गए । तभी आस्टिन के अदर से आदेश देने वाले व्यक्ति के साथ सभी बाहर आ गए.. सिर्फ प्रोफेसर हेमत का अचेत जिस्म अदर' रह गया । बाहर आकर आदेश देने वाला साया बोला ।

"कौन हो तुम ?" प्रश्न सीधा नाटे से किया गया ।

" तुम्हारी मौत I" नाटा साया गुर्राकर खतरनाक शब्दों ने बोला I

-'"क्या मतलब ?” आदेश देने वाला साया एकदम से क्रोधित होकर बोला-“ लगता है तुम्हारी मौत निकट आ गई है । खींच लो इसका नकाब ।"

आदेश के साथ ही एक साया नाटे की ओर बढा । इस बार नाटा साया थोडा-सा भयभीत हुआ । क्या उसका रहस्य इतनी शीघ्र खुल जाएगा ? शायद भय रहस्य खुलने का था किंतु आदमी नहीं रुका । वह नाटे साए के निकट आया और जैसे ही उसने नाटे साए का नकाब नोचने के लिए हाथ बढाए, तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी l सभी चौंके थे । वास्तव में वह चौकने वाली बात भी थी I समी एक पल के लिए स्तब्ध रह गए । जैसे ही उस व्यक्ति का हाथ नाटे का नकाब नोचने हेतु आगे बढा-ठीक उसी समय वहा वीरान जगल मे उनके रहस्यमय वॉस की, यानी आग के स्वामी की गर्जदार और भर्राई हुई भयानक आवाज गूंजी-" ठहरो . .l"

इस एक शब्द ने सबको चौंका दिया । सभी स्तव्ध से रह गए । एक बार तो वे क्राप भी गए, क्योंकि यहां निर्जन जगल में आग के स्वामी की आवाज गूजने का मतलब था कि उनका बाॅस-उनके साथ रहता है-

उनकी प्रत्येक हरकत पर निगाह रखता है । अत्त: कभी भी वे गलत कदम उठाएं तो वह स्वामी की नजरों से न छुप सकेगा । उन्होंने स्वामी की आबाज पर स्वामी की तलाश मेँ इधर-उधर नजरे दौडाई, किंतु जगल के कारण आवाज़ कुछ इस प्रकार प्रतिध्वनित हुई थ्री कि सहज ही अनुमान. लगाना सभव न था कि आवाज कहां से आ रही है । अभी उनका आश्चर्य कम नही हुआ था कि स्वामी की आवाज़ फिर गूजी ।

…"अभी इसकी नकाब मत उतारो. . .इसे आखों पर पट्टी बाँधकर ले आओं ।"

सभी ने अपने स्वामी के आदेश को सुना और स्तब्ध रह गए । कुछ समय तक तो वे आश्चर्य के सागर में गोते लगाते रहे, फिर उन्होंने वहीं नाटे साए की तलाशी लेकर… उसका रिवाॅल्बर अपने अधीन कर लिया l आखो पर फ्टटीं बांघकर उसे आँस्टिन के अदर' लाए और इस प्रकार पटक दिया मानो सामान की कोई भारी बोरी हो । नाटे ने महसूस किया कि वह किसी अन्य बेहोश जिस्म पर पडा. है । उसके अनुमानुसार उसके नीचे दबा जिस्म प्रोफेसर हेमत के अतिरिक्त किसी का भी नहीं था । आँस्टिन तीव्र वेग से दौडती. हुई सडक. की निद्रा 'भंग' कर' रही थी और उसकी ध्वनि ने निःसदेह' रात के सन्नाटे को पराजित कर दिया था । प्रत्येक व्यक्ति अपने विचारो मे उलझा हुआ था ।

नाटा साया सोच रहा था कि इन आग के बेटों का चीफ कौन है ? प्रोफेसर हेमत का अपहरण उनके लिए क्या महत्त्व रखता है ? बिकास का अपहरण करके इन लोगों ने उसके साथ कैसा व्यवहार किया होगा ?आग के बेटों का आखिर उद्देश्य क्या है ? ऐन वक्त पर इनके चीफ की आवाज केसे गूज' गई, जबकि वह नज़र नहीं आ रहा था ? इनके चीफ ने उसकी नकाब उलटने से इन्हें क्यो रोक दिया ? आखिर इस बात के पीछे क्या रहस्य है ? इत्यादि इत्यादि प्रश्च नाटे साए के दिमाग ने उथल पुथल मचाए हुए वे । ऑस्टिन निरतर वेग से अनजाने मार्गो पर बढ रही थी ।

ठीक समय तो उसे नहीं मालूम, किंतु अनुमानुसार लगभग तीस मिनट बाद आस्टिन एक स्थान पर थम गई । उसे उतारा गया 1 उसके बाद उसने उन आग के बेटों की मदद से कितनी ही सीढिया चढी. और उतरी । उसे एक लिफ्ट मेँ भी बैठाया गया । यानी यह यात्रा लगभग दस मिनट तक चली ।

उसके बाद उसे एक स्थान पर खडा, कर दिया गया । वह न जान सका कि वह किस स्थान पर हैं, क्योंकि अभी उसकी आखों से पट्टी नहीं खोली गई थी । वह शात' खड़ा आहट लेने का प्रयास करता रहा, किंतु कहीं कोई आहट नहीं महसूस हुई । तभी उसके कानों मेँ भर्राया-सा ऐसा स्वर टकराया-मानो वह किसी को आदेश दे रहा हो।

_" सबसे पहले प्रोफेसर हेमत को नबर एक में बद कर दिया, जाए. . .इनसे निबटने में काफी समय लगेगा । अत: पहले इस नाटे को देखते हे…जो अभी पहेली बना हुआ है ।"

नाटे साए ने सब कुछ सुना, कितु' शात खडा रहा, फिर उसके कानों में ऐसी आवाजें टकराईं-जेसे फर्श पर पड़े प्रोफेसर' हेमत को उठाकर किसी ने कधों पर लाद लिया हो । तत्पश्चात दूर जाते कदमों की ध्वनि । वह शात' खडा. रहा । अभी तक उसकी पट्टी नहीं हटाई गई थी ।।

लगभग,पाच मिनट पश्चात आग के स्वामी की आवाज गूजी----"इसकी पट्टी हटाओ ।"

आदेश का तुरंत पालन हुआ…एक इंसान' ने आगे बढकर उसकी आखों' से पट्टी हटा दी । आखें' खुलते ही सबसे पहले उसकी निगाह सामने ऐसी वस्तु पर पडी, जिसने फिर से उसे आखे बद करने के लिए विवश कर दिया । सामने आग के स्वामी के रूप मेँ एक बिचित्र साया खडा. था । जिसके जिस्म पर जलने वाले बल्बो के तीव्र प्रकाश ने उसे आखें' बद' करने पर विवश कर दिया था । धीमे धीमे उसने आखे खोली तो पाया कि वह एक गोल हाॅल में है…इसमेँ धीमा सा मध्यम सा प्रकाश है । जो उसे यह दिखाने कै लिए पर्याप्त है कि चारों ओर करीब बीस कद्दावर इसान ग्रीन और चुस्त लिबास में खडे हैं । इनके सिरों पर लाल कैप है और सीने पर आग के बेटे शब्द लिखा हुआ है I वे सभी शात खडे हैं ।

सबको निहारने के पश्चात नाटे की आखें' रहस्यमय आग के स्वामी पर स्थिर हो गई । तभी रहस्यमय साए की गुर्राहट से समूचा हाल दहला I

-"कौन हो तुम? ” प्रश्न नाटे से किया गया था ।

"ये प्रश्न पहले भी मुझसे पूछा जा चुका है ।" नाटा साया लापरवाही से बोला…" इसका जवाब मेने यह दिया था कि मैं आग के बेटों की मौत हूं… । या यूं कहिए. कि में अपराधियों. का काल हूं. . . ।" उसकी आवाज़ में तनिक भी भय न था ।

"मेरे विचार सै तुम पागल आदमी हो ।" स्वामी गुर्राया "बेटा नबर शर्बीला सेशन....!"

……"यस महान स्वामी ।" शर्बीत्ती सेशन एक कदम आगे बढकर आदर के साथ बोला ।

--""इस नाटे की नकाब नोच लो l”

आदेश पाते ही शबीला सेशन नाटे की ओर बढा. । नाटा शात खडा था । वह धीमे से उसके निकट आया । लोगों की जिज्ञासा जाग्रत हुई ।

सभी जानना चाहते थे कि इस नकाब के पीछे आखिर कौन-सा चेहरा छिपा है ? यह नाटा बहुत देर से उनके लिए रहस्य बना हुआ था । सभी के दिल धडक रहे कि आखिर यह कौन है ?

और तब-जवकि नाटे का नकाब नोचा गया…होंल में उपस्थित समस्त इसान इस प्रकार चौके-मानो उन्होंने संसार का सर्वोत्तम आश्चर्य देखा हो । उनकी खोपडी. मानो हवा में चक्कर लगा रही थी । सभी ऐसे चौके-मानो हजारो-लाखो बिच्छुओं ने उन्हे एकदम डक मारा हो । सभी जैसे आकाश से गिरे । यहां तक कि रहस्यमय नकाबपोश यानी आग का स्वामी भी उसे हैरत से निहार रहा था आखों में ऐसा आश्चर्य था मानो वह हिमालय पर्वत को वायुमडल मे उडता हुआ देख रहा हो I बरबस ही उसके मुख से निकला----

"तुम.......!"

★★★★★
 
देखते-ही-देखते उस लडकी और अधेड को करीब चालीस टाँमीगनयुक्त इस्रानो ने घेर लिया । इस बार स्थिति ऐसी थी कि अधेड कुछ करने मे असमर्थ था ।

हाल मे उपस्थित आदमी कभी मृत जिम्बोरा के भयानक जिस्म क्रो देखते और कभी उस अधेड को…जिसने जिम्बोरा जैसे शक्तिशाली भैंसे क्रो गहरी नीद सुला दिया ।

तभी गनधारियों में से एक इसान आगे बढा…-जिसके कंधे पर एक बिशेष चिह्न बना हुआ था l यह चिह्न शायद इस बात का प्रतीक था कि वह इन ग्रीन कपडे. वालो का संचालक है l

वह आगे बढा…शेष सभी ने उन्हें चारों तरफ़ से घेर लिया । वह उन दोनों के निकट आया और एक झटके के साथ लडकी को खीचा-लडकी एक चीख के साथ उस इंसान के सीने से जा टकराई ।

तभी अधेड बोला ।

"अरे ओए औरत पे कहा बहादोरी दिखावे है मर्द है तो इक्लो मेरे सामने कू आ I”

अधेड का उपरोक्त वाक्य सुनकर वह हसान अर्थपूर्ण ढग से मुस्कराया और बोला ।

"मानता हू चोघरी-मानता हू कि तुम बहुत बहादुर हो किंतु मैं यह नही मानता कि हमारे जिम्बोरा जैसे आदमी को तुम जेसा साधारण आदमी न सिर्फ परास्त कर दे…बल्कि उसकी हत्या भी कर दे…दूसरी बात-तुम्हारे लडने का ढग साधारण जोशीले इंसान जैसा नही --बल्कि किसी सयमी और चतुर शातिर जैसा है । और तीसरी बात यह कि तुम जब सुपरिटेंडेंट की कोठी से फरार हो रहे थे…-उस समय तुम्हारे वार्तालाप करने का ढग चौधरी वाला नहीं बल्कि किसी भयानक अपराधी जैसा था । बोलो-क्या अब भी तुम यह कह सकते हो कि तुम्हारा ये चौधरी वाला चेहरा कृत्रिम नहीं ?"

उसके शब्द सुनकर अधेड के होंठो पर रहस्यमय मुस्कान उभर आई । वह बिल्कुल ही बदले हुए स्वर. में बोला ।

-…- "'जो तुम कह रहे हो, वह बिल्कुल सही है किंतु हमारी बातें अकेले में हो तो अधिक उपयुक्त होगा ।" वह हाल मे उपस्थित आदमियो पर निगाह मारकर बोला । उसके पस्विर्तित होते व्यक्तित्व ने सभी की आखो ने आश्चर्य को ज़न्म दिया । समी उसे इस प्रकार देख रहे थे…मानो वह चिडियाघर का नया एव आश्चर्यजनक अजूबा हो । वह लडकी भी उसे गहन आश्चर्य से देख रहीं थी । उसकी समझ मे नहीं आ रहा था कि यह सब क्या होने लगा?

'"आओ मेरे साथ . . . ।" गनघारी बोला-"तुमने अगर किसी प्रकार की भी ,चालाकी दिखाने की चेष्टा की तो प्रत्येक टामीगन से एक-एक गोली भी निकली तो तुम जीवित नही रहोगे।"

उसके वाक्य. पर अ'धेड़ न जाने क्यो फिर एक बार मुस्कराया-मानो वह किसी बालक की शरारत पर मुस्करा रहा हो । और फिर चुपचाप उसके पीछे बढ़ गया । उस लडकी की कलाई इसान ने थाम रखी थी । टामीगन की दो नाले रहस्यमय अधेड. की पसलियों में आ चिपर्की।

न जाने वह क्यो फिर मुस्कराया । हाल मेँ उपस्थित प्रत्येक इसान यहां होने वाली अजीब घटनाओं को देखकर आश्चर्यचकित था । कभी लोग, मृत जिम्बोरा को देखते तो कभी हाल से ऊपर जाते हुए अधेड को, जो स्वयं एक रहस्य था और इस समय टांमीगनों के साए में था ।.

हाॅल मे उपस्थित लोग उन्हें तब तक देखते रहे--जब तक कि देख सकतें. थे, फिर वह उनकी आखों से ओझल हो गए ।

ऊपर पहुचकर उस इंसान' ने कोई बटन दबाकर एक बिशेष कमरे में प्रवेश किया ।

कमरे मे एक लाल बल्ब मानो धीमे से मुस्करा रहा था । लडकी को बाहर खडे अन्य आदमियों को सौप दिया गया था, किन्तु उन्हें विशेष आदेश दिए गए थे कि लडकी. के साथ कोई अप्रिय हरकत नहीं करेगे और उसे साथ लिये बाहर ही खडे रहेगे । कमरा अदर से बद कर लिया गया ! अदर केवल दोनों ही थे ।

रहस्यमय अधेड मुस्कराया ओह बोला--- "अब हम यहा केवल दो हैं I”

"फिर. ..?" वह आदमी भी अत्यत्त रहस्यमय ढग से बोला ।

"मैं तुम्हारी गर्दन मरोड सकता हू ।" अधेड अजीब ढग से उस घूरता हुआ बोला ।

"बेकार की बातों से कोई फायदा नहीं ।" वह इसान भी शाति कै साथ बोला----"किसी भी इसान को कभी भी यह नहीं समझना चाहिए कि बही सबसे अघिक चालाक, शक्तिशाली , और साहसी है । याद रखना चाहिए कि ऊपर वाले ने प्रत्येक का बाप पैदा किया है । ये मानता हूं कि तुमने जिस ढग से जिम्बोरा कौ परास्त किया है वास्तव में सराहनीय है लेकिन ये मत समझो कि तुम मुझें भी किसी तरह परास्त कर दोगे । मैं शक्ति. में जिम्बोरा. नहीं किन्तु मेरा नाम ब्रिगेंजा हैं और मैं स्वय को तुमसे अधिक समझता हू ।" ये शब्द कहते हुए वह लेशमात्र. भी कही भी उत्तेजित नहीं हुआ था । बडी शाति से सब कुछ कहता चला गया था ।

…"स्वय ही कहते हो कि कभी किसी को हरेक का बाप मत समझो और स्वय ही ये कह रहे हो कि तुम दिमाग में मुझसे अधिक हो । क्या तुम स्वय ही अपने कथन के उल्ट नहीं जा रहे हो ?‘”
 
"बेकार की बहस में समय व्यर्थ न करो ।" बिगेंजा का लहजा कुछ सख्त हो गया---- "मैं स्वय को सबसे अधिक दिमाग वाला न कहकर सिर्फ तुमसे अधिक दिमाग वाला कह रहा हूं। वह भी तुम्हारी मूर्खता क्रो देखकर ।”

"कैसी मूर्खता ?” अधेड कुछ उलझ सा गया ।

"तुम्हारा यह सोचना कि ब्रिगेंजा को कोई हानि पहुचा सकते हो और वह भी इस कमरे मे । तुम ये न देख सकै

कि जहां इस समय. खडा हू…मेरे पैर कै नीचे एक ऐसा बटन है जो तुम्हारे लिए क्षणमात्र मे मौत्त. भी बन सकता है I.” बिगेजा के होठो. पऱ मुस्कान थी ।

"वह कैसे. . ?" अधेड धीमे से आश्चर्यज़नकृ स्वर में बोला। I . . .

"इसका पूरा चक्कर तुम्हारी बुद्धि में नहीं आएगा I" ब्रिगेजा बोला…"तुम सिर्फ इतना समझ लो कि यह ब्रिगेंजा का … खास कमरा है । यहां टामीगने रिवाॅल्बरे एल.एम.जी इत्यादि ~ भयानक हथियार कमरे की दीवारों तथा छत में इस प्रकार सयोजित किए गए हैं कि कमरे के प्रत्येक कोण पर खडा, आदमी किसी-न-किस्री हथियार की रेज में है । कहां खडा, आदमी किस हथियार की रेज मे है और उसको चलाने के लिए कौन-सा बटन किस ढग से चलाना चाहिए…यह रहस्य ब्रिगेजा के अलावा. कोई नहीं जानता I”

.……." मान -गए मिस्टर ब्रिगेंजा, हम मान गए कि तुम हमसे अघिक बुद्धिमान हो ।" अथेड़ मुस्कराता हुआ बोला I

, --"अब चुपचाप उस चेयर पर जाकर बैठ जाओ और मेरे प्रश्नों का उत्तर दो।"

अधेड़ चुपचाप उस कुर्सी पर बैठ गया जिसकी तरफ ब्रिगेंजा ने इशारा किया था । तभी ब्रिगेंजा ने मेज में लगा एक बटन दबाया…परिणामस्वरूप अधेढ़ ने स्वयं को पूर्णतया बंधनों में पाया I वह कुर्सी से इस प्रकार जकड़ा हुआ था कि तनिक भी नहीँ हिल सकता था । तभी बिगेजा ने एक अन्य बटन दवाया और अगले ही पल वह कुर्सी- जिस पर -वह बधा हुआ था, ऊपर उठने लगीं I कुर्सी के निचले भाग मे फौलाद का सरिया लगा हुआ था ? कमरे के फर्श से बाहर आ रहा था और कुर्सी अधेड, सहित ऊपर. उठ रही थी । उस समय अधेड ,का सिर छत से कुछ ही नीचे था कि चेयर रुक गई l

" इसका क्या मतलब ?" वह अधेड, बोला… !!

" इसका मतलब ये है कि तुम ये तो देख ही रहे हो कि कमरे की छत लोहे की बनी है । ध्यान रहे…अगर किसी भी प्रश्न का उत्तर देने की कोशिश न की अथवा मेरी आज्ञाओं का उल्लघन किया तो एक बटन दबाते ही तुम्हारी खोपडी. लोहे की छत से इस तरह टकराऐगी-जैसे रिवाॅल्बर से निकली गोली । उसका परिणाम क्या होगा ? तुम सहज ही उसका अनुमान लगा सकतें हो ।" ब्रिगेजा का लहजा अपेक्षाकृत सख्त

था l

अधेड धीमे से मुस्कराकर बोला-"इसक्री क्या ज़रूरत थी ब्रिगेजा-मै तो यू ही तुम्हारी वातो का सही ज़वाब दे देता । खैर यू ही सही…पूछो क्या पूछना है ?”

ब्रिगेजा ने एक बटन दबाया-जिससे अधेड के दोनो हाथ … स्वतत्र हो गए ।

ब्रिगेजा बोला…"अब तुम्हारे दोनो हाथ स्वत्तत्र हैं…सबसे पहले अपना यह चौधरी वाला कृत्रिम चेहरा उतारो I"

मुस्कराते हुए अधेड ने ब्रिगेजा की आज्ञा का सहर्ष पालन किया-उसने, चौधरी वाला फेसमास्क अपने चेहरे से उतार दिया । उसके पीछे एक खूबसूरत नवयुवक छुपा था-वास्तव मे युवक सुदर था । वह मुस्करा रहा था । ब्रिगेजा उसे बडे ध्यान से देखता रह्म किन्तु ज़ब वह उसे पहचान न सका तो उसने प्रश्न

किया I

" कौन हो तुम ?"

"मेरा एक नाम नहीं हे अलग-अलग स्थानो पर मेने अलग-अलग नाम रख छोडे हे जैसे बेरुत में जिम्बो न्यूयांर्क मे मार्टिन-काहिरा मे जैब्रीन--चीन मे हाईत्तोश इत्यादि-यू मेने भारत मे अपना नाम संग्राम रखा है I” नवयुवक आराम से मुस्कराता हुआ बता रहा था ।

"ओह…तो तुम नए उभरते इटरनेशनल अपराधी हो ।" ब्रिगेजा उसे घूरता हुआ बोला I

"जैसा ठीक. समझो-यू तो मैँ हू बहुत पुराना !"

" कभी तुम्हारा नाम नहीं सुना !"

" मै कोई बेवकूफ अपराधी नहीं-जो प्रत्येक स्थान पर एक ही नाम रखकर इंटरपोल के जासूसो की निगाहें का काटा बनू । मैं अलग अलग नामों से अपराध करता हू -ताकि इटरपोंल कभी न जान सके कि कोई इटंरनेशनल अपराधी उनकी जडों को खोखली कर रहा है तुम इसी कारण मुझे नहीं जानते I" युवक निरंतर मुस्करा रहा था ।

"बैसे तुम्हारा वास्तविक नाम क्या है ?” ब्रिर्गेजा की बेघक दृष्टि उसे घूर रही थी।

"वास्तविक्ता पूछो तो मैं अब तक अपने लिए इतने नाम प्रयोग कर चुका हूं कि मैं अपना वास्तविक नाम लेते हुए सकोच में'पड जाता हू कि क्या वास्तव मे मेरा यही नाम है । वेसे अच्छा होगा अगर तुम मुझे सग्राम ही कहो I"

" खेर माना कि तुम संग्राम हो I” ब्रिगेजा बोल उठा--- भारत में क्या कर रहे हो ?"

" अगर आप कहे तो एक ही सास मेँ अपनी पूरी कहानी सुना दू…उसके बाद जो प्रश्न रह जाए…आप उसे पूछ लेना किंतु कहानी सुनाने से पूर्व मैं आपसे छोटा-सा प्रश्न करना . चाहूंग़ा I"

" कैसा प्रश्न ...?"

"प्रश्न सिर्फ ये है कि क्या मैं आग के बेटे से बात कर रहा हूं ?”

" इसका उत्तर हा में है I” ब्रिगेजा ने स्वीकार किया I'

…"बस तो ठीक है I सग्राम बोला-"अब आप सुनिए-अब से एक हफ्ता पूर्व मैं जिम्बो के नाम से बेरूत में था । मैने अपने कछ साथियों के साथ वहा का खजाना लुटने की योजना बनाई । जाने कैसे यह भनक वहा की सीक्रेट .. सर्विस को लग गई अभी हम लोग अपनी योजना पर विचार कर ही रहे थे कि सीक्रेट एजेंटों ने हमारे हेडक्वार्टर पर हमला बोल दिया I परिणास्वरूप वहां आतक फैल गया । हम सब दोस्त अपनी-अपनी जान बचाकर, भागे । जिसमें किसी को किसी का पता न रहा कि किसके साथ क्या बीती कौन मरा _ और कौन मेरी तरह फरार होने ,में सफ़ल हो गया ? खैर. . .मैंने अपना जिम्बो वाला मेकअप उतार दिया और भारत चला आया । मेरा अगर कोई दोस्त पकडा. भी गया होगा तो वे मुझे सिर्फ जिम्बो के रूप में ही जानते हैं । वे नहीं जानते कि जिंबो के पीछे वास्तविक चेहरा क्या है ? अत बेरुत की पुलिस जिम्बो को तलाश करती रही…जबक्रि जिम्बो संग्राम में बदल चुका था ऐसे संग्राम मे जो केवल बेरूत पुलिस के लिए ही नहीं बल्कि जनता कि लिए भी भोला और नब परिचित चेहरा था । मैंने स्वय को यहा भारतीय पर्यटक बताना प्रारम्भ कर दिया । पुलिस बेचारी क्या जानती थी कि सग्राम ही जिम्बो है । स्वय मेरे साथी नहीं जानते थे कि जो व्यक्ति जिम्बो के नाम से उनका साथी है वास्तव में कुछ और ही है । खैर बेरुत से मैं भारत आया-यहा अधेड का रूप धारण करके अपना नाम घासीराम रख लिया । यहा आते हैं ~ ही मेने आग के बेटों के विषय मे सुना । वास्तविक्ता यह थी कि मैं भारत मेँ किसी ऐसे शक्तिशाली सगठन अपराधी दल की तलाश मेँ था जिसके साथ रहकर मैं कार्य कर सकू । इसलिए आग के बेटों से मुलाकात करने मे घासीराम बना ही रघुनाधं की कोठी की पिछली गली मे गया था किन्तु वहा किसी अनजाने लोगों से टकरा गया । तभी रघुनाथ की कोठी का दरवाजा खुला और एक व्यक्ति बहा से कूदकर मेरी सहायता करने लगा फिर अचानक वे अनजाने लोग पता नहीं कैसे मरने लगे? खैर तभी मिलिट्री के जवानो, के गली मेँ आने की ध्वनि ने मुझे चौंकाया । मुझे क्योकि अपने पकडे जाने का भय था। अत अपने मददगार को धोखा देकर मैं बडी कठिनाई से उस बालक के जरिए वहा से निकला और अत में आज़ जब जिबोरा उस लडकी को घसीट रहा था तो मुझे क्रोध आगया और उससे भिड गया । उसके चाद अचानक तुमसे मुलाकात हुई और मैं समझता हूं यह अच्छा हुआ क्योकि मैं तो स्वय ही तुम्हारे दल में शामिल होना चाहता था ।" संग्राम ने एक गहरी सास ली । ”

ब्रिगेंजा एक ठडी' सास लेकर बोला-" र्तों . इस समय मैं जो चेहरा देख रहा हूं क्या यह वास्तविक हे ?"

……"नकली चेहरा तो तुमने अपनी चालाकी से उतरवा ही लिया । अत यह चेहरा मेरा वास्तविक चेहरा है । वेसे नाम वास्तविक नहीं है I" सग्राम मुस्कराकर बोला ।
 
ब्रिगेंजा क्रो उसकी कहानी सुनकर लगा कि वास्तव में यह व्यक्ति काफी दूरदर्शी और चालाक हे । शक्ति और लडने का ढग वह देख ही चुका था । वास्तव में ब्रिगेंजा इस व्यक्ति कै व्यक्तित्व से प्रभाक्ति था । अत वह बोला । "तो तुम हमारे साथ काम करना चाहते हो ??’"

…"पहले ही कह चुका हूं-मैं स्वय इसके लिए उत्सुक हूं किंतु. अब मैं एक शर्त पर काम करूंगा I”

"शर्त कैसी शर्त्त ?” ब्रिगेजा उलझा I

"यही कि में अपनी इस वास्तविक सूरत को छिपाकर प्रत्येक कार्यं करूंगा I”

'-"इससे हमें कोई मतलब नही-वह तुम्हारा अपना काम करने का ढग है चाहे किसी भी मेकअप में कार्य करों ।" ब्रिगेंजा उसकी चालाकी पर मुस्कराया I ब्रिगेंजा यह सोचकर मुस्कराया कि कितना धूर्त हे यह व्यक्ति जो कभी. अपनी असली सूरत को पुलिस रिकॉर्ड में नहीं आने देना चाहता ।

उसके बाद ब्रिगेंजा ने उससे कहा कि उसे आग के स्वामी के सामने पेश किया जाऐगा । फिर बटन दबाकर उसकी कुर्सी साधारण हालत मे कर दी गई । उसे बघनों से मुक्त कर दिया गया-उसने फिर अधेड वाला चेहरा लगाया और उसके बाद ब्रिगेजा की आज्ञा पर उस लडकी को कमरे में भेजा गया ।

कमरा अदर से फिर बद कर लिया गया I अब कमरे मेँ वे तीनों थे l लडकी सहमी-स्री खडी हो गई I उसकी समझ मे कुछ नही आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है ? तभी व्रिगेजा ने उसकी और देखा लडकी ने नजरे झुका ली । ब्रिगैंजा शात और गभीर स्वर में बोला ।

"बैठ जाओ ।"

वह लडकी होले से उस कुर्सी पर बैठ गई जिसकी ओर ब्रिगेंजा ने इशारा किया था… ।

" तुम्हारा नाम क्या है ?" ब्रिगेजा ने पूछा ।

--"'स स सविता l” लडखडाते-से शब्दों मेँ उसने सक्षिप्त उत्तर बडी कठिनाई से दिया l

"'तुम्हें वह आदमी कहा से लाया था ?"

"म म मैं I" वह लडकी गर्दन उठाका बडी ही कठिनाई से बोली…"मैं होटल के बाहर से गुजरती हुई अपनी सहेली के साथ जा रही थी कि उस बदमाश ने मुझे पकडकर अदर खदेडा ।” और उसके बाद वह कुछ न कह सकी बल्कि उसके नेत्रों से आसू निकल पडे और फफककर रो पडी । तभी सग्राम बोला ।

"अरे बडी पागल हो सविता बहन--- अब क्यों घबराती हो तुम्हारा माई तुम्हारे पास है ।"

"भैया.....ऽऽऽऽऽ.... I” सविता इस कठिन संमय में एक अनजान को भाई के इस रूप मे देखकर भावनाओ में बह गई !!

सग्राम के सीने से लग गई । तभी संग्राम ब्रिगेंजा से बोला ।

"मिस्टर ब्रिगेजा मैंने सविता को अपनी बहन बना लिया है । अत्त किसी की भी गदी' नज़र. मैं इसकी और उठती नहीं देख सकता और इस समय यह ऐसे स्थान पर आ गई है-जहा प्रत्येक मर्द की नज़र प्रत्येक स्त्री के लिए गदी होती है । अत्त सबसे पहले मैं चाहूगा कि सविता को उसके घर पहुचा दिया जाए ।"

"ठीक है ।" बिगेंजा ने वेहद ही गभीरता के साथ बोला…" सविता जी आप कहा रहती हैं ?”

"पैतीस गाधी रोड I " अब सविता की सिसकियां समाप्त प्राय हो गई थी ।

"पिता का क्या नाम हे ?” बिगेजा का अगला प्रश्न ।

"मेरे पिता वेज्ञानिक हैं । नाम है प्रोफेसर हेमत..... ।"

'क्या हेमत ?????"

और ब्रिगेंजा की खोपडी मानो हवा में चकरा रही. थी I

संग्राम ने उसके. चेहरे के बदलते भावो को अनुभव किया । ब्रगेंजा बुरी तरह चौंका है ।

उसके चेहरे पऱ ~ उभरने-वाले भाव सख्त हो गए हैं शायद उसके इरादो मे भयानक परिवर्तन होना… चाहता था…ब्रिगेंजा के बदले भाव आने वाले भयानक खतरे के प्रतीक थे ।

★★★★★
 
नाटे नकाबपोश का रहस्य तो आग के बेटों और आग के स्वामी पर खुल चुका था । उसे देखकर सब व्याचर्यचक्ति तो रह ही गए थे, किन्तु न जाने उन्होंने क्या सोचा था कि 'उसे उसको नकाब वापस करके कमरा नवंर चार मेँ एक प्रकार से कैद कर दिया गया । इस समय भी उसके चेहरे पर वही काली नकाब थी I

बैसे आग के बेटों पर अपने रहस्य के खुलते का दुख था किंतु ऐसा लगता था जैसे वह कुछ अशो तक अपनी योजना मे सफल भी था । कुछ आग के बेटे उसे इस कमरे मे डाल गए थे । कमरा गोल था जिसमें जीरो वाट का छोटा बल्ब जल रहा था ।

एक तो उसका प्रकाश स्वय ही अत्यंत क्षीण था । दूसरे बल्ब पर जमी गर्द ने और अधिक सहायता की थी I अत छोटे से गोल ,कमरे में क्षीण…सा पीला प्रकाश फैला था I. वहा सिर्फ एक पलग. था-जिस पर कपडे. बिछे थे वह शायद नाटे के सोने अथवा आराम करने के इरादे से डाल दिया गया था और इस समय वह उसी पर पडा न जाने क्या सोच रहा था. I

एकाएक नाटे नकाबपोश की निगाह अपने कमरे के दाई और बने एक जगले पर पडी । वह शायद रोशनदान था-जो किसी अन्य कमरे में खुलता था । शायद नबर पाच में।। उसके दिमाग का न जाने कौन…सा शरारती क्रीड़ा कुलबुलाया ।

वह यह सोचने लगा कि कमरा नंबर पांच मे कौन हैं यह देखने के लिए वह रोशनदान तक पहुचने का उपाय सोचने लगा । उसे अघिक दिमाग नहीं लगाना पडा । तुरत और फुर्ती, किंतु' इस सतर्कता के साथ कि कहीं कोई आहट उत्पन्न न हो। पलंग से समस्त कपडे समेट एक ओर को रख दिए और पलगं उठाकर रोशनदान के नीचे दुपाया खडा किया i पलग का दूसरा सिरा रोशनदान तक लगभग पहुव ही गया l उसने फुर्ती के साथ कमरा अदर से बद किया ताकि अचानक ही कोई अंदर ना आ सके

फिर वह फुर्ती के साथ पलंग पर चढ गया और बहुत ही सतर्कता के साथ कमरा नबर पाच में झाका । वहा विकास था…जो अपने पलग पर बैठा बडे आराम से कछ गुनगुना रहा था ।। देखने मे विकास तनिक भी चिंतित' नहीं आत्ता था । वह पूर्ण लापरवाह था…मानो इस कैद की उसे लेशमात्र भी, चित्ता नहीं है । उस शरारती को देखकर नाटे साए के अधरों पर धीमी सी मुस्कान नृत्य कर उठी । अगले ही पल उसने' अपने मुख से सी सी की धीमी कितु ऐसी ध्वनि निकाली जिसे पलग पर बैठे विकास ने सुन लिया । विकास इस आवाज को सुनकर धीमे से चौंका एक झटके के साथ उसकी 'बडी-बडी आखें रोशनदान की ओर उठ गई । वह अभी कुछ बोलने ही जा रहा था कि नाटे स्याहपोश ने तुरत उसे चुप रहने का सकैत किया।।

विकास एकदम चुप हो क्या औंर ध्यान से उसे देखने लगा ।।

स्याहपोश ने उसे रोशनदान तक आने का सकेत किया । विकास ने भी स्राकेतिक भाषा में ही पूछा…"कैसे ??" सकेत मे ही नाटे ने बिकास को रोशनदान तक आने की , तरकीब बताई-बिकास ने भी अपनी कोठरी की साकल अदर से बद की और उसी प्रकार रोशनदान के नीचे पलग लगाकर रोशनदान तक आ गया ।

"इन्होंने तुम्हें कोई यातना तो नहीं दी ?" तभी नाटा साया बोला .

“ नहीं…यह्य मैं आराम से हू।" विकास तुरत बोला…"किन्तु तुम यहा कैसे फस गए ।”

"परिस्थिक्ति बडे अजीब मोड ले रही हैं ।" नाटा अत्यत गभीर स्वर में बोला…"मेरा विचार था कि प्रोफेसर हेमत ही आग के बेटों का सरदार है अब ऐसा लगता हैं कि कोई और ही है-प्रोफेसऱ हेमत तुम्हारे द्वारा स्टार से डराया जाना आग के वेर्टों से कुछ अलग की ही बात लगती है---मेरे विचार से उसका डरना और यह केस अलग-अलग बात है क्योंकि ये लोग हेमत का अपहरण करके लाए है और इनके चीफ़ ने उसे कमरा नबर एक में रखने का आदेश दिया है ।।"

"तो इसका मतलब हमारा सोचना गलत साबित हो गया । " विकास भी रहस्यम स्वर में फुसफ़साया ।

"ऐसा ही लगता है क्योंकि उन्होंने स्वय प्रोफेसर हेमत को उठवाया है ।"

--" किन्तु अगर प्रोफेसर हेमत का आग के बेटों से कोई.. . सबध नहीं है तो अपहरण उसी का क्यों करवाया क्या ?”

"इस प्रश्न का उत्तर, अभी पूर्ण रूप से मैं कछ नहीं दे सकता। अनुमान के आधार पर मैं. यह कह सकता हू कि शायद हेमत से कोई खतरा उत्पन्न हो गया होगा ।” दोनो की बाते अत्यत धीमे और रहस्यमय ढग से हो रही थीं ।

. ……३"कहीं प्रोफेसर हेमत के अपहरण के पीछे उनकी विजय अकल से की गई वह घोषणा तो नही…जिसमें उन्होंने दो तीन दिन मेँ आग कै बेटों को बिफल कर देने के विषय मेँ कहा था ?" विकास का स्वर अत्यत्त धीमा था ।।

"सभव है वह कारण भी रहा हो किंतु' इन्हें उस घोषणा का पता कैसे लगा होगा ?"

"ऐसे दलों के हाथ बहुत लम्बे हौते हैं-किसी भी तरीके से पता लगा सकते हैं ।"

"खेर सब पता लग जाएगा !" नाटा साया बोला…"अब तुम एक अन्य घटना सुनो…जिसे तुम सुनकर निश्चित रूप से चौक पडोगे I” नाटा साया अत्यत्त रहस्यमय प्रतीत होता था।

"कैसी घटना ?”

"आप के बेटों पर मेरा रहस्य खुल चुका हैं ।" वह मुस्कराकर बोला ।

"क्या कहा कैसे ?" वास्तव में विकास चौंक पडा फिर बोला ---"अब इस षडयत्र का लाभ ही क्या रहा?"

"मज़बूऱी…है...!" नाटा बोला -"लो अब यह नकाब तुम पहनो !" कहते हुए नाटे ने अपना हाथ नकाब को उतारने के लिए बढाया ही था कि वह बुरी तरह चौक पडा ।।

कोई व्यक्ति बाहर से उसकी कोठारी का दरबाजा खटखटा रहा था ।

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