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रिया, मैं और नैना फिर कभी एक नहीं हो सकते ।
रिया (मुस्कुराते हुए) - पर आज आप जिस तरह से नैना को देख रहे थे उससे तो ऐसा कुछ नहीं लगता।
राजेश - ऐसा कुछ भी नहीं है रिया, सब कुछ बदल चुका है। वक्त भी ,हालात भी और खुद मैं भी । मैं अब नैना से प्यार नहीं करता।
रिया - ठीक है भाई, आप कहते हैं तो मान लेते हैं । चलिए, बहुत रात हो गई है । गुड नाइट - कहते हुए रिया वहां से चली गई।
राजेश अब अपने बिस्तर पर लेट गया , उसके कानों में अभी भी रिया का सवाल गूँज रहा था, उसने तो कभी सोचा ही नहीं था कि अगर नैना उसके पास वापस आएगी तो वह क्या करेगा ? क्या उसे नैना की गलती माफ करनी चाहिए? नहीं- नहीं , जो लड़की एक बार उसका भरोसा तोड़ चुकी है उस पर वह दोबारा कभी भरोसा नहीं करेगा। वह फिर कभी उसे जिंदगी में वापस नहीं लाएगा । जिस तरह उसने मेरा भरोसा तोड़ा है , वह भी उसे खूब दर्द देगा ।
अगले दिन नैना तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गई, , ऑफिस पहुंचते ही चपरासी जगन ने एक लिस्ट जिसमें कई फाईल्स के नाम थे, जो नैना को ढूंढ कर शाम तक राजेश को देनी थी।
नैना समझ गई कि आज राजेश ने फिर नया तरीका ढूंढ निकाला है उसे परेशान करने का। वह जल्दी से इनवेंटरी की ओर भागी। वहां पहुँच उसने वह लिस्ट टेबल पर रखी और जल्दी से एक एक फाइल ढूंढने लगी। राजेश ने जानबूझकर ऐसी फाइल्स मांगी थी जिनमें से ज्यादातर फाइल्स रेक्स में ऊपर की तरफ रखी थी ।
नैना हैरान थी कि राजेश कभी इन्वेंटरी नहीं आया तो उसे कैसे पता कि कौन सी फाइल कहां रखी है ? तभी सारा वहां चहकती हुई आ पहुंची ,उसने आते ही नैना को गले से लगा लिया और मारे खुशी के चीखने लगी ।
नैना उससे खुद को छुड़ाते हुए बोली - सुबह सुबह पागल हो गई हो ? हुआ क्या है, कुछ तो बताओ ?
सारा - यार आज उसने पहली बार मुझसे पर्सनली बुलाकर बात की।
नैना सवालिया निगाहों से सारा को देखते हुए बोली - , किसने?
सारा (शरमाते हुए ) - राजेश.... मेरा मतलब राजेश सर ने।
नैना यह सुनकर हैरानी से सारा को देखते हुए बोली - क्या कहा उन्होंने ?
सारा - मैं अभी जैसे ही ऑफिस आई तो उन्होंने मुझे अपने केबिन में बुलाया था ।
नैना (हैरानी से) - फिर?
सारा - फिर क्या? सर ने मुझे बड़े प्यार से कुर्सी पर बैठने को कहा।
नैना - फिर ?
सारा - फिर वह बोले कि सारा तुम तो जानती हो कि मैंने यह बिजनेस अभी-अभी हैंडल करना शुरू किया है तो यहां की कई चीजों के बारे में मुझे कुछ नहीं पता । पूरे ऑफिस में मुझे बस तुम ही एक समझदार लड़की लगी हो जिससे मैं कुछ मदद की उम्मीद कर सकता हूं ।
, सारा (उत्साहित होते हुए) - जी बिल्कुल सर , आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूं । आप बस बोल कर तो देखिए और आपके लिए मेरी जान हाजिर है।
राजेश - जी???
सारा - मेरा मतलब जो आपको हेल्प चाहिए, कह दीजिए। मैं पूरी कोशिश करूंगी आप की मदद करने की।
राजेश - अच्छा तो में पूछ रहा था कि इन्वेंटरी को आपने ही मेंटेन किया था कुछ महीनों पहले ?
सारा - हां सर , मैंने और दास सर ने पर वह नौकरी छोड़ चुके हैं ।
राजेश - तो क्या आप मुझे बता सकती हैं कि कौन सी फाइल कहां रखी है ?
सारा - ज्यादा तो नहीं सर पर इतना पता है कि फिलहाल की सारी फाइल रैक्स में सबसे नीचे की ओर है, पिछले साल की फाइल उनके ऊपर की ओर मतलब जितनी पुरानी फाईल होगी उतनी ऊँची रैक होगी।
, राजेश - थैंक यू सारा ।
सारा - वैसे कौन सी फाइल चाहिए आपको ? मुझे बताइए मैं ले आती हूं ।
राजेश - नहीं, आप जाकर अपना काम करें । यह मिस नैना का काम है , मैं उन्हें बोल दूंगा ।
सारा - ओके सर, कह कर वहीं खड़ी हो गई।
राजेश ने देखा कि सारा अभी भी वहां खड़ी है और राजेश को निहार रही है ।
राजेश - सारा आपको जाना चाहिए।
सारा - सर मैं तो भूल ही गई थी, कह कर वह बाहर निकल गई ।
नैना ने अब चैक किया कि उस लिस्ट में सभी 4 से 5 साल पुरानी फाईल थी, सारा के शब्द नैना के कानों में गूंजने लगे - जितनी पुरानी फाइल , उतनी ऊँची रेक्स। उसने अब गुस्से में सारा की ओर देखा , वह बस अपनी ही दुनिया में मस्त राजेश के ख्यालों में मुस्कुराए जा रही थी ।
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यह देख नैना ने अपना सिर पकड़ लिया - कैसी झल्ली है यह, राजेश ने 2-4 चिकनी चुपड़ी बातें कर इससे मुझे परेशान करने का रास्ता निकाल लिया और यहां यह पागलों की तरह खुशी से झूम रही है कि राजेश ने इसे सबसे समझदार बता दिया जबकि सच तो यह है कि इससे बड़ी झल्ली पूरे ऑफिस में कोई नहीं है और राजेश को तो देखो, उसे कम से कम सारा को तो इस सब मे नहीं घसीटना चाहिए था कि इतने में जगन सीढ़ी और फूलों का गुलदस्ता लेकर वहां पहुंच गया।
नैना - भैया आपसे सीढ़ी किसने लाने को कहा ?
जगन - दीदी, वह राजेश सर ने कहा था कि यहां आकर आपको सीढ़ी दे दे क्योंकि आज आपको इसकी बहुत, जरूरत है ।।यह आपको ऊंचाई तक ले जाएगी ।
नैना (बुरा सा मुंह बना कर) - व्हाट एवर और य गुलदस्ता किस लिए ?
जगन - ये तो राजेश सर ने सारा दीदी को देने के लिए भेजा है क्योंकि सुबह उन्होंने सर की कुछ मदद की थी।
, यह सुनकर सारा मारे खुशी के बेहोश होने ही वाली थी कि नैना ने उसे संभाला , सारा गुलदस्ता लेकर इन्वेंटरी से बाहर चली गई । नैना को सारा के लिए बहुत बुरा लग रहा था क्योंकि राजेश उसे तकलीफ देने के लिए सारा का इस्तेमाल कर रहा था।
नैना सीढ़ी सेट कर फाइल्स होने लगी है उसे अभी चार-पांच फाइल ही मिली थी कि राजेश का फोन आया .
नैना सीढ़ियों से उतरकर फोन उठाने गई।
राजेश- मिस नैना, आपने फाइल ढूंढ ही शुरू किया या नहीं?
नैना - बस वही कर रही थी सर।
राजेश - ठीक है आप पहले मिस्टर श्याम वाली फाइल लेकर मेरे केबिन में आ जाए।
नैना - पर सर मैं यहां फाइल्स देख रही हूं , आप जगन को यहां भेज दीजिए , मैं उसके हाथ फाइल भिजवा दूंगी।
राजेश - जगन आज हाफ डे लेकर घर गया है , आपको अपना काम खुद करना चाहिए । जितनी जल्दी हो सके, वह फाइल लाइए - कहते हुए राजेश ने फोन डिस्कनेक्ट कर , दिया।
नैना - जल्दी से मिस्टर श्याम वाली फाइल ले लिफ्ट की ओर. भागी लेकिन यह क्या हुआ - लिफ्ट तो बंद थी
वह अब ग्राउंड फ्लोर से सातवें फ्लोर तक सीढ़ियों के सहारे चढ़कर राजेश के केबिन में पहुंची, राजेश ने देखा कि नैना की सांस फूल रही थी और माथे पर पसीना छलक रहा था । यह देख वह मन ही मन मुस्कुराने लगा क्योंकि वही तो चाहता था।
नैना - सर आपकी फाइल - कहते हुए उसने राजेश की टेबल पर फाइल रख दी और जाने लगी कि तभी राजेश ने उसे रोका और मिस्टर सिंह की फाइल?
नैना मुड़कर राजेश की और हैरानी से देखने लगी - पर आपने कब मांगी मिस्टर सिंह की फाइल?
राजेश - इतना कॉमनसेंस तो आपके अंदर होना चाहिए, मिस्टर श्याम और मिस्टर सिंह ने हमारे प्रोजेक्ट में एक साथ मिलकर काम किया था ,अब अगर मैं मिस्टर श्याम की फाइल मांगता हूं तो आपको खुद दिमाग लगाना चाहिए था कि मिस्टर सिंह की फाइल भी लानी है ।अब हर छोटी-छोटी , बात पर भी मैं आपको सब एक्सप्लेन करूंगा ?
नैना खींझतेे हुए वापस इनवेंटरी की ओर बढ़ चली , इन्वेंटरी पहुंचने परमिस्टर सिंह की फाइल निकाली और जैसे ही चलने को हुई तो उसे याद आया कि इन दोनों क्लाइंट्स की सारी इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन पेन ड्राइव में है ।
राजेश उसे फिर से वापस लाने भेजे, उससे पहले मैं खुद ही इसे ले चलती हूँ। उसने जाकर राजेश को फाईल्स दे दी।
राजेश- और वह पेनड्राइव .......
नैना- मुझे पता था सर कि आप इसे जरूर मांगेंगे इसलिए मैं से पहले ही ले आई ।अगर आपकी सभी फाइल्स मिल गई है तो क्या मैं जाकर आपकी दी लिस्ट की फाइल ढूंढ सकती हूं?
राजेश मुस्कुराकर बोला - यहां का बॉस कौन है मिस शर्मा?
नैना - आप सर।
राजेश - तो एक बात बताइए ,आप से पेन ड्राइव माँ हा किसने? आपसे जितना बोला जाए, उतना ही करे। ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है , मैं कह रहा था कि इस , पेनड्राइव को संभाल कर रखना पर आप तो ऐसे ही ले आई।
नैना का मन हुआ कि राजेश को खरी-खरी सुना दे , वह कुछ कहने ही वाली थी कि विशाल वहां आकर बैठ गया।
विशाल- क्या चल रहा है राजेश ?
नैना की तरफ देख वह हलो बोला, नैना ने भी मुस्कुराकर हेलो कह दिया।
विशाल - अरे नैना आप इतना हाँफ कैसे रहीे हैं और कितना पसीना आ रहा है आपको ? आपकी तबीयत तो ठीक है ना, कहते हुए उसने नैना को अपने पास वाली सीट पर बैठा दिया और राजेश की टेबल से पानी का गिलास उठा उसे दिया।
यह देख राजेश के? को बहुत जलन होने लगी ।
नैना ने पहले तो मना किया, पर विशाल नही माना तो उसने पानी पी लिया ।
नैना - वह लिफ्ट बंद है और सर को फाईल्स चाहिए थी तो मैं सीढ़ियों के रास्ते आई हूँ।
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विशाल ( राजेश से ) - अरे यार, थोड़ा तो रहम करो नैना पर। देखो तो , कितना हाफ रही है यह? कितना भगाया है आज तुमने इसे ?
राजेश (बेरुखी से ) - मुझे तो लगा था कि मिस शर्मा को भागना बहुत पसंद है ,आई मीन भागने में तो यह बहुत एक्सपर्ट हैं , इतनी कि लोग उन्हें पकड़ ही नहीं पाते ।
नैना राजेश के कटाक्ष को समझ रही थी पर वह कह भी क्या सकती थी।
विशाल ( हैरानी से ) - तुम ऐसा कैसे कह सकते हो ?
राजेश - मुझे बस लगा तो यूं ही कह दिया। वह नैना से गुस्से से बोला - अगर आपका आराम हो गया हो तो जाकर फाइल देखिए .
नैना केबिन से निकल गई ,राजेश विशाल से - क्या मैं जान सकता हूं कि तुम हर वक्त नैना की तरफदारी क्यों करते हो?
विशाल मुस्कुराकर - और क्या मैं जान सकता हूं कि तुम हर वक्त नैना पर क्यों गुस्सा करते रहते हो ?
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राजेश - क्या मतलब है तुम्हारा ?
विशाल - पता नहीं क्यों ,जब नैना तुम्हारे सामने होती है तो तुम कुछ और ही बन जाते हो, उसकी हर बात पर कमी निकालते हो । हो क्या जाता है तुम्हें ?
राजेश - ऐसा कुछ नहीं है । एक सलाह दे रहा हूं दोस्त होने के नाते , इस लड़की से दूर रहो। यह तुम्हारे लिए परफेक्ट नहीं है
विशाल - हां जानता हूं पर तुम्हारे साथ इसकी जोड़ी एकदम परफेक्ट रहेगी।
यह सुनकर राजेश हैरानी से विशाल को देखने लगा, उसके चेहरे का रंग उड़ता देख विशाल हंसते हुए बोला - अरे मैं तो मजाक कर रहा था ।
दोपहर हो चली थी , नैना फाइल्स ढूँढनेे में पागलों की तरह लगी हुई थी , वह शाम तक हर हाल में राजेश की टेबल तक सारी फाइल पहुँचाना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि राजेश उसे और जली कटी सुनाएं ।
, वह फाइल्स में उलझी हुई हुई थी कि किसी ने उसकी तरफ एक कप कॉफी का बढ़ा दिया । नैना ने पलट कर देखा तो विशाल मुस्कुराता हुआ खड़ा था ।
नैना - इसकी क्या जरूरत थी ?
विशाल - जरूरत है । एक तो आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है और दूसरा जब तक आपको खुश नहीं करूंगा, तब तक आप बताएंगे नहीं कि लड़की से कैसे हां कहलाई जाए ।
नैना हंसते हुए - ओह तो यह सब इसलिए है ।
विशाल - जी जनाब।
नैना - अच्छा जी , वह लड़की आपको पसंद करती है भी या नहीं ?
विशाल - पता नहीं पर उसकी बातों और हरकतों से तो लगता है लेकिन शायद उससे पहले प्यार में मिली हार को लेकर डरी हुई है। सोचता हूं कि कैसे कहूं ?
नैना - एक बार कह कर तो देखिए, क्या पता वह इसी , इंतजार में हो ?
विशाल - ठीक है ,मैं कोशिश करूंगा ।
नैना - वैसे लड़की है कहां कि ?
विशाल - दिल्ली की हैं.।
नैना विशाल आपस में बातें करने और कॉफी पीने में इतने मशगूल थे कि उन्हें पता ही ना चला कि कब इन्वेंटरी के बाहर खड़ा राजेश उन्हें हंसते मुस्कुराते देख कर चला गया था। वह उनकी बातें सुन तो नहीं पाया पर नैना की हंसी उसे बता रही थी कि वह विशाल की कंपनी कितना इंजॉय कर रही थी।
राजेश नैना को देखने आया था कि वह कितनी परेशान हो रही है , पर यहां तो वह विशाल के साथ काफी खुश दिख रही थी। राजेश यह देख गुस्से में वापस अपने केबिन में चला गया।
विशाल और नैना ने मिलकर सारी फाइल खोज निकाली, विशाल को कुछ काम था तो वह वहां से चला गया।
राजेश ने अब नैना को फोन किया कि सारी फाइल्स को जितनी जल्दी हो सके ,उसके कैबिन में पहुंचा दे।
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नैना (हैरानी से) - पर मैं अकेले इतनी सारी फाइल्स कैसे लाऊंगी , वह भी सीढ़ियों के रास्ते ।
राजेश - यह मेरी प्रॉब्लम नहीं है ,कहकर उसने फोन काट दिया ।
नैना परेशान हो गई कि करे तो करे क्या? तभी उसे सारा की याद आई। उसने सारा को नीचे इन्वेंटरी में बुलाया और दोनों ने मिलकर सारी फाइल्स के दो बंडल बनाए । वह तकरीबन 40 फाइल थी, नैना और सारा 20-20 फाइल्स का बंडल बना बड़ी मुश्किल से सीढ़ियों से होते हुए सातवें फ्लोर तक पहुंची , वह दोनों जैसे ही राजेश के केबिन में पहुंचे तो देखा कि राजेश वहाँथा ही नहीं।
यह देखते ही नैना को उस पर बहुत गुस्सा आया कि तभी राजेश का फोन आया - कहां रह गई आप ?
नैना (गुस्से को छुपाते हुए) - सर आपने ही फाइल्स मंगाई थी तो मैं बस वही लेकर आपके केबिन में राजेश कैबिन में.....
राजेश - वहाँ जाकर क्या करेंगी आप ? मैं तो नीचे ऑफिस , के बाहर खड़ा हूं ।आपने काफी टाइम लगा दिया था इसलिए मैं खुद ही नीचे आ गया पर आप तो अब ऊपर सातवें फ्लोर पर पहुंच गए ।
नैना - पर मैंने तो आपको नहीं जाते देखा ही नही।
राजेश - लोगों से हंसने बोलने से फुर्सत होगी तो देखेंगी ना! अब जल्दी से सारी फाइल्स नीचे लाओ, मुझे अभी निकलना है।
नैना - पर सर इतनी सारी....
राजेश - ठीक है । एक काम कीजिए , इनमें से 15 फाइलें ले आओ। आज वैसे भी इससे ज्यादा काम नहीं हो पाएगा।
नैना( खीझते हुए ) - यस सर।
नैना ने सारा को वापस भेज दिया और खुद फाईल लेकर मन ही मन बडबडाती सीढ़ियों पर चली - रावण कहीं का ! मुझसे तो 40 फाईल्स ढूंढवाली और खुद बस 15 मांग रहा है । नैना ने नीचे आकर देखा कि राजेश और विशाल कार के पास खड़े आपस में बात कर रहे थे । नैना बुरी तरह हाँफ रही थी। अभी वह थोड़ी दूर ही गई थी कि उसका पैर मुड गया , और वह फाइल्स के साथ वही जमीन पर गिर पड़ी।
जब उसके गिरने की आवाज सुनकर राजेश और विशाल ने उस ओर देखा तो दोनो भाग कर वहाँ पहुँचे, नैना उठने की कोशिश कर ही रही थी कि राजेश और विशाल ने आकर नैना की तरफ अपने अपने हाथ बढ़ा दिए । अब विशाल और राजेश एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे , इधर नैना कभी राजेश को तो कभी विशाल को देखती कि वह आखिर किसका हाथ, थामें?,
रिया (मुस्कुराते हुए) - पर आज आप जिस तरह से नैना को देख रहे थे उससे तो ऐसा कुछ नहीं लगता।
राजेश - ऐसा कुछ भी नहीं है रिया, सब कुछ बदल चुका है। वक्त भी ,हालात भी और खुद मैं भी । मैं अब नैना से प्यार नहीं करता।
रिया - ठीक है भाई, आप कहते हैं तो मान लेते हैं । चलिए, बहुत रात हो गई है । गुड नाइट - कहते हुए रिया वहां से चली गई।
राजेश अब अपने बिस्तर पर लेट गया , उसके कानों में अभी भी रिया का सवाल गूँज रहा था, उसने तो कभी सोचा ही नहीं था कि अगर नैना उसके पास वापस आएगी तो वह क्या करेगा ? क्या उसे नैना की गलती माफ करनी चाहिए? नहीं- नहीं , जो लड़की एक बार उसका भरोसा तोड़ चुकी है उस पर वह दोबारा कभी भरोसा नहीं करेगा। वह फिर कभी उसे जिंदगी में वापस नहीं लाएगा । जिस तरह उसने मेरा भरोसा तोड़ा है , वह भी उसे खूब दर्द देगा ।
अगले दिन नैना तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गई, , ऑफिस पहुंचते ही चपरासी जगन ने एक लिस्ट जिसमें कई फाईल्स के नाम थे, जो नैना को ढूंढ कर शाम तक राजेश को देनी थी।
नैना समझ गई कि आज राजेश ने फिर नया तरीका ढूंढ निकाला है उसे परेशान करने का। वह जल्दी से इनवेंटरी की ओर भागी। वहां पहुँच उसने वह लिस्ट टेबल पर रखी और जल्दी से एक एक फाइल ढूंढने लगी। राजेश ने जानबूझकर ऐसी फाइल्स मांगी थी जिनमें से ज्यादातर फाइल्स रेक्स में ऊपर की तरफ रखी थी ।
नैना हैरान थी कि राजेश कभी इन्वेंटरी नहीं आया तो उसे कैसे पता कि कौन सी फाइल कहां रखी है ? तभी सारा वहां चहकती हुई आ पहुंची ,उसने आते ही नैना को गले से लगा लिया और मारे खुशी के चीखने लगी ।
नैना उससे खुद को छुड़ाते हुए बोली - सुबह सुबह पागल हो गई हो ? हुआ क्या है, कुछ तो बताओ ?
सारा - यार आज उसने पहली बार मुझसे पर्सनली बुलाकर बात की।
नैना सवालिया निगाहों से सारा को देखते हुए बोली - , किसने?
सारा (शरमाते हुए ) - राजेश.... मेरा मतलब राजेश सर ने।
नैना यह सुनकर हैरानी से सारा को देखते हुए बोली - क्या कहा उन्होंने ?
सारा - मैं अभी जैसे ही ऑफिस आई तो उन्होंने मुझे अपने केबिन में बुलाया था ।
नैना (हैरानी से) - फिर?
सारा - फिर क्या? सर ने मुझे बड़े प्यार से कुर्सी पर बैठने को कहा।
नैना - फिर ?
सारा - फिर वह बोले कि सारा तुम तो जानती हो कि मैंने यह बिजनेस अभी-अभी हैंडल करना शुरू किया है तो यहां की कई चीजों के बारे में मुझे कुछ नहीं पता । पूरे ऑफिस में मुझे बस तुम ही एक समझदार लड़की लगी हो जिससे मैं कुछ मदद की उम्मीद कर सकता हूं ।
, सारा (उत्साहित होते हुए) - जी बिल्कुल सर , आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूं । आप बस बोल कर तो देखिए और आपके लिए मेरी जान हाजिर है।
राजेश - जी???
सारा - मेरा मतलब जो आपको हेल्प चाहिए, कह दीजिए। मैं पूरी कोशिश करूंगी आप की मदद करने की।
राजेश - अच्छा तो में पूछ रहा था कि इन्वेंटरी को आपने ही मेंटेन किया था कुछ महीनों पहले ?
सारा - हां सर , मैंने और दास सर ने पर वह नौकरी छोड़ चुके हैं ।
राजेश - तो क्या आप मुझे बता सकती हैं कि कौन सी फाइल कहां रखी है ?
सारा - ज्यादा तो नहीं सर पर इतना पता है कि फिलहाल की सारी फाइल रैक्स में सबसे नीचे की ओर है, पिछले साल की फाइल उनके ऊपर की ओर मतलब जितनी पुरानी फाईल होगी उतनी ऊँची रैक होगी।
, राजेश - थैंक यू सारा ।
सारा - वैसे कौन सी फाइल चाहिए आपको ? मुझे बताइए मैं ले आती हूं ।
राजेश - नहीं, आप जाकर अपना काम करें । यह मिस नैना का काम है , मैं उन्हें बोल दूंगा ।
सारा - ओके सर, कह कर वहीं खड़ी हो गई।
राजेश ने देखा कि सारा अभी भी वहां खड़ी है और राजेश को निहार रही है ।
राजेश - सारा आपको जाना चाहिए।
सारा - सर मैं तो भूल ही गई थी, कह कर वह बाहर निकल गई ।
नैना ने अब चैक किया कि उस लिस्ट में सभी 4 से 5 साल पुरानी फाईल थी, सारा के शब्द नैना के कानों में गूंजने लगे - जितनी पुरानी फाइल , उतनी ऊँची रेक्स। उसने अब गुस्से में सारा की ओर देखा , वह बस अपनी ही दुनिया में मस्त राजेश के ख्यालों में मुस्कुराए जा रही थी ।
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यह देख नैना ने अपना सिर पकड़ लिया - कैसी झल्ली है यह, राजेश ने 2-4 चिकनी चुपड़ी बातें कर इससे मुझे परेशान करने का रास्ता निकाल लिया और यहां यह पागलों की तरह खुशी से झूम रही है कि राजेश ने इसे सबसे समझदार बता दिया जबकि सच तो यह है कि इससे बड़ी झल्ली पूरे ऑफिस में कोई नहीं है और राजेश को तो देखो, उसे कम से कम सारा को तो इस सब मे नहीं घसीटना चाहिए था कि इतने में जगन सीढ़ी और फूलों का गुलदस्ता लेकर वहां पहुंच गया।
नैना - भैया आपसे सीढ़ी किसने लाने को कहा ?
जगन - दीदी, वह राजेश सर ने कहा था कि यहां आकर आपको सीढ़ी दे दे क्योंकि आज आपको इसकी बहुत, जरूरत है ।।यह आपको ऊंचाई तक ले जाएगी ।
नैना (बुरा सा मुंह बना कर) - व्हाट एवर और य गुलदस्ता किस लिए ?
जगन - ये तो राजेश सर ने सारा दीदी को देने के लिए भेजा है क्योंकि सुबह उन्होंने सर की कुछ मदद की थी।
, यह सुनकर सारा मारे खुशी के बेहोश होने ही वाली थी कि नैना ने उसे संभाला , सारा गुलदस्ता लेकर इन्वेंटरी से बाहर चली गई । नैना को सारा के लिए बहुत बुरा लग रहा था क्योंकि राजेश उसे तकलीफ देने के लिए सारा का इस्तेमाल कर रहा था।
नैना सीढ़ी सेट कर फाइल्स होने लगी है उसे अभी चार-पांच फाइल ही मिली थी कि राजेश का फोन आया .
नैना सीढ़ियों से उतरकर फोन उठाने गई।
राजेश- मिस नैना, आपने फाइल ढूंढ ही शुरू किया या नहीं?
नैना - बस वही कर रही थी सर।
राजेश - ठीक है आप पहले मिस्टर श्याम वाली फाइल लेकर मेरे केबिन में आ जाए।
नैना - पर सर मैं यहां फाइल्स देख रही हूं , आप जगन को यहां भेज दीजिए , मैं उसके हाथ फाइल भिजवा दूंगी।
राजेश - जगन आज हाफ डे लेकर घर गया है , आपको अपना काम खुद करना चाहिए । जितनी जल्दी हो सके, वह फाइल लाइए - कहते हुए राजेश ने फोन डिस्कनेक्ट कर , दिया।
नैना - जल्दी से मिस्टर श्याम वाली फाइल ले लिफ्ट की ओर. भागी लेकिन यह क्या हुआ - लिफ्ट तो बंद थी
वह अब ग्राउंड फ्लोर से सातवें फ्लोर तक सीढ़ियों के सहारे चढ़कर राजेश के केबिन में पहुंची, राजेश ने देखा कि नैना की सांस फूल रही थी और माथे पर पसीना छलक रहा था । यह देख वह मन ही मन मुस्कुराने लगा क्योंकि वही तो चाहता था।
नैना - सर आपकी फाइल - कहते हुए उसने राजेश की टेबल पर फाइल रख दी और जाने लगी कि तभी राजेश ने उसे रोका और मिस्टर सिंह की फाइल?
नैना मुड़कर राजेश की और हैरानी से देखने लगी - पर आपने कब मांगी मिस्टर सिंह की फाइल?
राजेश - इतना कॉमनसेंस तो आपके अंदर होना चाहिए, मिस्टर श्याम और मिस्टर सिंह ने हमारे प्रोजेक्ट में एक साथ मिलकर काम किया था ,अब अगर मैं मिस्टर श्याम की फाइल मांगता हूं तो आपको खुद दिमाग लगाना चाहिए था कि मिस्टर सिंह की फाइल भी लानी है ।अब हर छोटी-छोटी , बात पर भी मैं आपको सब एक्सप्लेन करूंगा ?
नैना खींझतेे हुए वापस इनवेंटरी की ओर बढ़ चली , इन्वेंटरी पहुंचने परमिस्टर सिंह की फाइल निकाली और जैसे ही चलने को हुई तो उसे याद आया कि इन दोनों क्लाइंट्स की सारी इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन पेन ड्राइव में है ।
राजेश उसे फिर से वापस लाने भेजे, उससे पहले मैं खुद ही इसे ले चलती हूँ। उसने जाकर राजेश को फाईल्स दे दी।
राजेश- और वह पेनड्राइव .......
नैना- मुझे पता था सर कि आप इसे जरूर मांगेंगे इसलिए मैं से पहले ही ले आई ।अगर आपकी सभी फाइल्स मिल गई है तो क्या मैं जाकर आपकी दी लिस्ट की फाइल ढूंढ सकती हूं?
राजेश मुस्कुराकर बोला - यहां का बॉस कौन है मिस शर्मा?
नैना - आप सर।
राजेश - तो एक बात बताइए ,आप से पेन ड्राइव माँ हा किसने? आपसे जितना बोला जाए, उतना ही करे। ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है , मैं कह रहा था कि इस , पेनड्राइव को संभाल कर रखना पर आप तो ऐसे ही ले आई।
नैना का मन हुआ कि राजेश को खरी-खरी सुना दे , वह कुछ कहने ही वाली थी कि विशाल वहां आकर बैठ गया।
विशाल- क्या चल रहा है राजेश ?
नैना की तरफ देख वह हलो बोला, नैना ने भी मुस्कुराकर हेलो कह दिया।
विशाल - अरे नैना आप इतना हाँफ कैसे रहीे हैं और कितना पसीना आ रहा है आपको ? आपकी तबीयत तो ठीक है ना, कहते हुए उसने नैना को अपने पास वाली सीट पर बैठा दिया और राजेश की टेबल से पानी का गिलास उठा उसे दिया।
यह देख राजेश के? को बहुत जलन होने लगी ।
नैना ने पहले तो मना किया, पर विशाल नही माना तो उसने पानी पी लिया ।
नैना - वह लिफ्ट बंद है और सर को फाईल्स चाहिए थी तो मैं सीढ़ियों के रास्ते आई हूँ।
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विशाल ( राजेश से ) - अरे यार, थोड़ा तो रहम करो नैना पर। देखो तो , कितना हाफ रही है यह? कितना भगाया है आज तुमने इसे ?
राजेश (बेरुखी से ) - मुझे तो लगा था कि मिस शर्मा को भागना बहुत पसंद है ,आई मीन भागने में तो यह बहुत एक्सपर्ट हैं , इतनी कि लोग उन्हें पकड़ ही नहीं पाते ।
नैना राजेश के कटाक्ष को समझ रही थी पर वह कह भी क्या सकती थी।
विशाल ( हैरानी से ) - तुम ऐसा कैसे कह सकते हो ?
राजेश - मुझे बस लगा तो यूं ही कह दिया। वह नैना से गुस्से से बोला - अगर आपका आराम हो गया हो तो जाकर फाइल देखिए .
नैना केबिन से निकल गई ,राजेश विशाल से - क्या मैं जान सकता हूं कि तुम हर वक्त नैना की तरफदारी क्यों करते हो?
विशाल मुस्कुराकर - और क्या मैं जान सकता हूं कि तुम हर वक्त नैना पर क्यों गुस्सा करते रहते हो ?
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राजेश - क्या मतलब है तुम्हारा ?
विशाल - पता नहीं क्यों ,जब नैना तुम्हारे सामने होती है तो तुम कुछ और ही बन जाते हो, उसकी हर बात पर कमी निकालते हो । हो क्या जाता है तुम्हें ?
राजेश - ऐसा कुछ नहीं है । एक सलाह दे रहा हूं दोस्त होने के नाते , इस लड़की से दूर रहो। यह तुम्हारे लिए परफेक्ट नहीं है
विशाल - हां जानता हूं पर तुम्हारे साथ इसकी जोड़ी एकदम परफेक्ट रहेगी।
यह सुनकर राजेश हैरानी से विशाल को देखने लगा, उसके चेहरे का रंग उड़ता देख विशाल हंसते हुए बोला - अरे मैं तो मजाक कर रहा था ।
दोपहर हो चली थी , नैना फाइल्स ढूँढनेे में पागलों की तरह लगी हुई थी , वह शाम तक हर हाल में राजेश की टेबल तक सारी फाइल पहुँचाना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि राजेश उसे और जली कटी सुनाएं ।
, वह फाइल्स में उलझी हुई हुई थी कि किसी ने उसकी तरफ एक कप कॉफी का बढ़ा दिया । नैना ने पलट कर देखा तो विशाल मुस्कुराता हुआ खड़ा था ।
नैना - इसकी क्या जरूरत थी ?
विशाल - जरूरत है । एक तो आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है और दूसरा जब तक आपको खुश नहीं करूंगा, तब तक आप बताएंगे नहीं कि लड़की से कैसे हां कहलाई जाए ।
नैना हंसते हुए - ओह तो यह सब इसलिए है ।
विशाल - जी जनाब।
नैना - अच्छा जी , वह लड़की आपको पसंद करती है भी या नहीं ?
विशाल - पता नहीं पर उसकी बातों और हरकतों से तो लगता है लेकिन शायद उससे पहले प्यार में मिली हार को लेकर डरी हुई है। सोचता हूं कि कैसे कहूं ?
नैना - एक बार कह कर तो देखिए, क्या पता वह इसी , इंतजार में हो ?
विशाल - ठीक है ,मैं कोशिश करूंगा ।
नैना - वैसे लड़की है कहां कि ?
विशाल - दिल्ली की हैं.।
नैना विशाल आपस में बातें करने और कॉफी पीने में इतने मशगूल थे कि उन्हें पता ही ना चला कि कब इन्वेंटरी के बाहर खड़ा राजेश उन्हें हंसते मुस्कुराते देख कर चला गया था। वह उनकी बातें सुन तो नहीं पाया पर नैना की हंसी उसे बता रही थी कि वह विशाल की कंपनी कितना इंजॉय कर रही थी।
राजेश नैना को देखने आया था कि वह कितनी परेशान हो रही है , पर यहां तो वह विशाल के साथ काफी खुश दिख रही थी। राजेश यह देख गुस्से में वापस अपने केबिन में चला गया।
विशाल और नैना ने मिलकर सारी फाइल खोज निकाली, विशाल को कुछ काम था तो वह वहां से चला गया।
राजेश ने अब नैना को फोन किया कि सारी फाइल्स को जितनी जल्दी हो सके ,उसके कैबिन में पहुंचा दे।
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नैना (हैरानी से) - पर मैं अकेले इतनी सारी फाइल्स कैसे लाऊंगी , वह भी सीढ़ियों के रास्ते ।
राजेश - यह मेरी प्रॉब्लम नहीं है ,कहकर उसने फोन काट दिया ।
नैना परेशान हो गई कि करे तो करे क्या? तभी उसे सारा की याद आई। उसने सारा को नीचे इन्वेंटरी में बुलाया और दोनों ने मिलकर सारी फाइल्स के दो बंडल बनाए । वह तकरीबन 40 फाइल थी, नैना और सारा 20-20 फाइल्स का बंडल बना बड़ी मुश्किल से सीढ़ियों से होते हुए सातवें फ्लोर तक पहुंची , वह दोनों जैसे ही राजेश के केबिन में पहुंचे तो देखा कि राजेश वहाँथा ही नहीं।
यह देखते ही नैना को उस पर बहुत गुस्सा आया कि तभी राजेश का फोन आया - कहां रह गई आप ?
नैना (गुस्से को छुपाते हुए) - सर आपने ही फाइल्स मंगाई थी तो मैं बस वही लेकर आपके केबिन में राजेश कैबिन में.....
राजेश - वहाँ जाकर क्या करेंगी आप ? मैं तो नीचे ऑफिस , के बाहर खड़ा हूं ।आपने काफी टाइम लगा दिया था इसलिए मैं खुद ही नीचे आ गया पर आप तो अब ऊपर सातवें फ्लोर पर पहुंच गए ।
नैना - पर मैंने तो आपको नहीं जाते देखा ही नही।
राजेश - लोगों से हंसने बोलने से फुर्सत होगी तो देखेंगी ना! अब जल्दी से सारी फाइल्स नीचे लाओ, मुझे अभी निकलना है।
नैना - पर सर इतनी सारी....
राजेश - ठीक है । एक काम कीजिए , इनमें से 15 फाइलें ले आओ। आज वैसे भी इससे ज्यादा काम नहीं हो पाएगा।
नैना( खीझते हुए ) - यस सर।
नैना ने सारा को वापस भेज दिया और खुद फाईल लेकर मन ही मन बडबडाती सीढ़ियों पर चली - रावण कहीं का ! मुझसे तो 40 फाईल्स ढूंढवाली और खुद बस 15 मांग रहा है । नैना ने नीचे आकर देखा कि राजेश और विशाल कार के पास खड़े आपस में बात कर रहे थे । नैना बुरी तरह हाँफ रही थी। अभी वह थोड़ी दूर ही गई थी कि उसका पैर मुड गया , और वह फाइल्स के साथ वही जमीन पर गिर पड़ी।
जब उसके गिरने की आवाज सुनकर राजेश और विशाल ने उस ओर देखा तो दोनो भाग कर वहाँ पहुँचे, नैना उठने की कोशिश कर ही रही थी कि राजेश और विशाल ने आकर नैना की तरफ अपने अपने हाथ बढ़ा दिए । अब विशाल और राजेश एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे , इधर नैना कभी राजेश को तो कभी विशाल को देखती कि वह आखिर किसका हाथ, थामें?,