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उलझन मोहब्बत की

रिया, मैं और नैना फिर कभी एक नहीं हो सकते ।

रिया (मुस्कुराते हुए) - पर आज आप जिस तरह से नैना को देख रहे थे उससे तो ऐसा कुछ नहीं लगता।

राजेश - ऐसा कुछ भी नहीं है रिया, सब कुछ बदल चुका है। वक्त भी ,हालात भी और खुद मैं भी । मैं अब नैना से प्यार नहीं करता।

रिया - ठीक है भाई, आप कहते हैं तो मान लेते हैं । चलिए, बहुत रात हो गई है । गुड नाइट - कहते हुए रिया वहां से चली गई।

राजेश अब अपने बिस्तर पर लेट गया , उसके कानों में अभी भी रिया का सवाल गूँज रहा था, उसने तो कभी सोचा ही नहीं था कि अगर नैना उसके पास वापस आएगी तो वह क्या करेगा ? क्या उसे नैना की गलती माफ करनी चाहिए? नहीं- नहीं , जो लड़की एक बार उसका भरोसा तोड़ चुकी है उस पर वह दोबारा कभी भरोसा नहीं करेगा। वह फिर कभी उसे जिंदगी में वापस नहीं लाएगा । जिस तरह उसने मेरा भरोसा तोड़ा है , वह भी उसे खूब दर्द देगा ।

अगले दिन नैना तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गई, , ऑफिस पहुंचते ही चपरासी जगन ने एक लिस्ट जिसमें कई फाईल्स के नाम थे, जो नैना को ढूंढ कर शाम तक राजेश को देनी थी।

नैना समझ गई कि आज राजेश ने फिर नया तरीका ढूंढ निकाला है उसे परेशान करने का। वह जल्दी से इनवेंटरी की ओर भागी। वहां पहुँच उसने वह लिस्ट टेबल पर रखी और जल्दी से एक एक फाइल ढूंढने लगी। राजेश ने जानबूझकर ऐसी फाइल्स मांगी थी जिनमें से ज्यादातर फाइल्स रेक्स में ऊपर की तरफ रखी थी ।

नैना हैरान थी कि राजेश कभी इन्वेंटरी नहीं आया तो उसे कैसे पता कि कौन सी फाइल कहां रखी है ? तभी सारा वहां चहकती हुई आ पहुंची ,उसने आते ही नैना को गले से लगा लिया और मारे खुशी के चीखने लगी ।

नैना उससे खुद को छुड़ाते हुए बोली - सुबह सुबह पागल हो गई हो ? हुआ क्या है, कुछ तो बताओ ?

सारा - यार आज उसने पहली बार मुझसे पर्सनली बुलाकर बात की।

नैना सवालिया निगाहों से सारा को देखते हुए बोली - , किसने?

सारा (शरमाते हुए ) - राजेश.... मेरा मतलब राजेश सर ने।

नैना यह सुनकर हैरानी से सारा को देखते हुए बोली - क्या कहा उन्होंने ?

सारा - मैं अभी जैसे ही ऑफिस आई तो उन्होंने मुझे अपने केबिन में बुलाया था ।

नैना (हैरानी से) - फिर?

सारा - फिर क्या? सर ने मुझे बड़े प्यार से कुर्सी पर बैठने को कहा।

नैना - फिर ?

सारा - फिर वह बोले कि सारा तुम तो जानती हो कि मैंने यह बिजनेस अभी-अभी हैंडल करना शुरू किया है तो यहां की कई चीजों के बारे में मुझे कुछ नहीं पता । पूरे ऑफिस में मुझे बस तुम ही एक समझदार लड़की लगी हो जिससे मैं कुछ मदद की उम्मीद कर सकता हूं ।

, सारा (उत्साहित होते हुए) - जी बिल्कुल सर , आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूं । आप बस बोल कर तो देखिए और आपके लिए मेरी जान हाजिर है।

राजेश - जी???

सारा - मेरा मतलब जो आपको हेल्प चाहिए, कह दीजिए। मैं पूरी कोशिश करूंगी आप की मदद करने की।

राजेश - अच्छा तो में पूछ रहा था कि इन्वेंटरी को आपने ही मेंटेन किया था कुछ महीनों पहले ?

सारा - हां सर , मैंने और दास सर ने पर वह नौकरी छोड़ चुके हैं ।

राजेश - तो क्या आप मुझे बता सकती हैं कि कौन सी फाइल कहां रखी है ?

सारा - ज्यादा तो नहीं सर पर इतना पता है कि फिलहाल की सारी फाइल रैक्स में सबसे नीचे की ओर है, पिछले साल की फाइल उनके ऊपर की ओर मतलब जितनी पुरानी फाईल होगी उतनी ऊँची रैक होगी।

, राजेश - थैंक यू सारा ।

सारा - वैसे कौन सी फाइल चाहिए आपको ? मुझे बताइए मैं ले आती हूं ।

राजेश - नहीं, आप जाकर अपना काम करें । यह मिस नैना का काम है , मैं उन्हें बोल दूंगा ।

सारा - ओके सर, कह कर वहीं खड़ी हो गई।

राजेश ने देखा कि सारा अभी भी वहां खड़ी है और राजेश को निहार रही है ।

राजेश - सारा आपको जाना चाहिए।

सारा - सर मैं तो भूल ही गई थी, कह कर वह बाहर निकल गई ।

नैना ने अब चैक किया कि उस लिस्ट में सभी 4 से 5 साल पुरानी फाईल थी, सारा के शब्द नैना के कानों में गूंजने लगे - जितनी पुरानी फाइल , उतनी ऊँची रेक्स। उसने अब गुस्से में सारा की ओर देखा , वह बस अपनी ही दुनिया में मस्त राजेश के ख्यालों में मुस्कुराए जा रही थी ।

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यह देख नैना ने अपना सिर पकड़ लिया - कैसी झल्ली है यह, राजेश ने 2-4 चिकनी चुपड़ी बातें कर इससे मुझे परेशान करने का रास्ता निकाल लिया और यहां यह पागलों की तरह खुशी से झूम रही है कि राजेश ने इसे सबसे समझदार बता दिया जबकि सच तो यह है कि इससे बड़ी झल्ली पूरे ऑफिस में कोई नहीं है और राजेश को तो देखो, उसे कम से कम सारा को तो इस सब मे नहीं घसीटना चाहिए था कि इतने में जगन सीढ़ी और फूलों का गुलदस्ता लेकर वहां पहुंच गया।

नैना - भैया आपसे सीढ़ी किसने लाने को कहा ?

जगन - दीदी, वह राजेश सर ने कहा था कि यहां आकर आपको सीढ़ी दे दे क्योंकि आज आपको इसकी बहुत, जरूरत है ।।यह आपको ऊंचाई तक ले जाएगी ।

नैना (बुरा सा मुंह बना कर) - व्हाट एवर और य गुलदस्ता किस लिए ?

जगन - ये तो राजेश सर ने सारा दीदी को देने के लिए भेजा है क्योंकि सुबह उन्होंने सर की कुछ मदद की थी।

, यह सुनकर सारा मारे खुशी के बेहोश होने ही वाली थी कि नैना ने उसे संभाला , सारा गुलदस्ता लेकर इन्वेंटरी से बाहर चली गई । नैना को सारा के लिए बहुत बुरा लग रहा था क्योंकि राजेश उसे तकलीफ देने के लिए सारा का इस्तेमाल कर रहा था।

नैना सीढ़ी सेट कर फाइल्स होने लगी है उसे अभी चार-पांच फाइल ही मिली थी कि राजेश का फोन आया .

नैना सीढ़ियों से उतरकर फोन उठाने गई।

राजेश- मिस नैना, आपने फाइल ढूंढ ही शुरू किया या नहीं?

नैना - बस वही कर रही थी सर।

राजेश - ठीक है आप पहले मिस्टर श्याम वाली फाइल लेकर मेरे केबिन में आ जाए।

नैना - पर सर मैं यहां फाइल्स देख रही हूं , आप जगन को यहां भेज दीजिए , मैं उसके हाथ फाइल भिजवा दूंगी।

राजेश - जगन आज हाफ डे लेकर घर गया है , आपको अपना काम खुद करना चाहिए । जितनी जल्दी हो सके, वह फाइल लाइए - कहते हुए राजेश ने फोन डिस्कनेक्ट कर , दिया।

नैना - जल्दी से मिस्टर श्याम वाली फाइल ले लिफ्ट की ओर. भागी लेकिन यह क्या हुआ - लिफ्ट तो बंद थी

वह अब ग्राउंड फ्लोर से सातवें फ्लोर तक सीढ़ियों के सहारे चढ़कर राजेश के केबिन में पहुंची, राजेश ने देखा कि नैना की सांस फूल रही थी और माथे पर पसीना छलक रहा था । यह देख वह मन ही मन मुस्कुराने लगा क्योंकि वही तो चाहता था।

नैना - सर आपकी फाइल - कहते हुए उसने राजेश की टेबल पर फाइल रख दी और जाने लगी कि तभी राजेश ने उसे रोका और मिस्टर सिंह की फाइल?

नैना मुड़कर राजेश की और हैरानी से देखने लगी - पर आपने कब मांगी मिस्टर सिंह की फाइल?

राजेश - इतना कॉमनसेंस तो आपके अंदर होना चाहिए, मिस्टर श्याम और मिस्टर सिंह ने हमारे प्रोजेक्ट में एक साथ मिलकर काम किया था ,अब अगर मैं मिस्टर श्याम की फाइल मांगता हूं तो आपको खुद दिमाग लगाना चाहिए था कि मिस्टर सिंह की फाइल भी लानी है ।अब हर छोटी-छोटी , बात पर भी मैं आपको सब एक्सप्लेन करूंगा ?

नैना खींझतेे हुए वापस इनवेंटरी की ओर बढ़ चली , इन्वेंटरी पहुंचने परमिस्टर सिंह की फाइल निकाली और जैसे ही चलने को हुई तो उसे याद आया कि इन दोनों क्लाइंट्स की सारी इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन पेन ड्राइव में है ।

राजेश उसे फिर से वापस लाने भेजे, उससे पहले मैं खुद ही इसे ले चलती हूँ। उसने जाकर राजेश को फाईल्स दे दी।

राजेश- और वह पेनड्राइव .......

नैना- मुझे पता था सर कि आप इसे जरूर मांगेंगे इसलिए मैं से पहले ही ले आई ।अगर आपकी सभी फाइल्स मिल गई है तो क्या मैं जाकर आपकी दी लिस्ट की फाइल ढूंढ सकती हूं?

राजेश मुस्कुराकर बोला - यहां का बॉस कौन है मिस शर्मा?

नैना - आप सर।

राजेश - तो एक बात बताइए ,आप से पेन ड्राइव माँ हा किसने? आपसे जितना बोला जाए, उतना ही करे। ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है , मैं कह रहा था कि इस , पेनड्राइव को संभाल कर रखना पर आप तो ऐसे ही ले आई।

नैना का मन हुआ कि राजेश को खरी-खरी सुना दे , वह कुछ कहने ही वाली थी कि विशाल वहां आकर बैठ गया।

विशाल- क्या चल रहा है राजेश ?

नैना की तरफ देख वह हलो बोला, नैना ने भी मुस्कुराकर हेलो कह दिया।

विशाल - अरे नैना आप इतना हाँफ कैसे रहीे हैं और कितना पसीना आ रहा है आपको ? आपकी तबीयत तो ठीक है ना, कहते हुए उसने नैना को अपने पास वाली सीट पर बैठा दिया और राजेश की टेबल से पानी का गिलास उठा उसे दिया।

यह देख राजेश के? को बहुत जलन होने लगी ।

नैना ने पहले तो मना किया, पर विशाल नही माना तो उसने पानी पी लिया ।

नैना - वह लिफ्ट बंद है और सर को फाईल्स चाहिए थी तो मैं सीढ़ियों के रास्ते आई हूँ।

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विशाल ( राजेश से ) - अरे यार, थोड़ा तो रहम करो नैना पर। देखो तो , कितना हाफ रही है यह? कितना भगाया है आज तुमने इसे ?

राजेश (बेरुखी से ) - मुझे तो लगा था कि मिस शर्मा को भागना बहुत पसंद है ,आई मीन भागने में तो यह बहुत एक्सपर्ट हैं , इतनी कि लोग उन्हें पकड़ ही नहीं पाते ।

नैना राजेश के कटाक्ष को समझ रही थी पर वह कह भी क्या सकती थी।

विशाल ( हैरानी से ) - तुम ऐसा कैसे कह सकते हो ?

राजेश - मुझे बस लगा तो यूं ही कह दिया। वह नैना से गुस्से से बोला - अगर आपका आराम हो गया हो तो जाकर फाइल देखिए .

नैना केबिन से निकल गई ,राजेश विशाल से - क्या मैं जान सकता हूं कि तुम हर वक्त नैना की तरफदारी क्यों करते हो?

विशाल मुस्कुराकर - और क्या मैं जान सकता हूं कि तुम हर वक्त नैना पर क्यों गुस्सा करते रहते हो ?

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राजेश - क्या मतलब है तुम्हारा ?

विशाल - पता नहीं क्यों ,जब नैना तुम्हारे सामने होती है तो तुम कुछ और ही बन जाते हो, उसकी हर बात पर कमी निकालते हो । हो क्या जाता है तुम्हें ?

राजेश - ऐसा कुछ नहीं है । एक सलाह दे रहा हूं दोस्त होने के नाते , इस लड़की से दूर रहो। यह तुम्हारे लिए परफेक्ट नहीं है

विशाल - हां जानता हूं पर तुम्हारे साथ इसकी जोड़ी एकदम परफेक्ट रहेगी।

यह सुनकर राजेश हैरानी से विशाल को देखने लगा, उसके चेहरे का रंग उड़ता देख विशाल हंसते हुए बोला - अरे मैं तो मजाक कर रहा था ।

दोपहर हो चली थी , नैना फाइल्स ढूँढनेे में पागलों की तरह लगी हुई थी , वह शाम तक हर हाल में राजेश की टेबल तक सारी फाइल पहुँचाना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि राजेश उसे और जली कटी सुनाएं ।

, वह फाइल्स में उलझी हुई हुई थी कि किसी ने उसकी तरफ एक कप कॉफी का बढ़ा दिया । नैना ने पलट कर देखा तो विशाल मुस्कुराता हुआ खड़ा था ।

नैना - इसकी क्या जरूरत थी ?

विशाल - जरूरत है । एक तो आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है और दूसरा जब तक आपको खुश नहीं करूंगा, तब तक आप बताएंगे नहीं कि लड़की से कैसे हां कहलाई जाए ।

नैना हंसते हुए - ओह तो यह सब इसलिए है ।

विशाल - जी जनाब।

नैना - अच्छा जी , वह लड़की आपको पसंद करती है भी या नहीं ?

विशाल - पता नहीं पर उसकी बातों और हरकतों से तो लगता है लेकिन शायद उससे पहले प्यार में मिली हार को लेकर डरी हुई है। सोचता हूं कि कैसे कहूं ?

नैना - एक बार कह कर तो देखिए, क्या पता वह इसी , इंतजार में हो ?

विशाल - ठीक है ,मैं कोशिश करूंगा ।

नैना - वैसे लड़की है कहां कि ?

विशाल - दिल्ली की हैं.।

नैना विशाल आपस में बातें करने और कॉफी पीने में इतने मशगूल थे कि उन्हें पता ही ना चला कि कब इन्वेंटरी के बाहर खड़ा राजेश उन्हें हंसते मुस्कुराते देख कर चला गया था। वह उनकी बातें सुन तो नहीं पाया पर नैना की हंसी उसे बता रही थी कि वह विशाल की कंपनी कितना इंजॉय कर रही थी।

राजेश नैना को देखने आया था कि वह कितनी परेशान हो रही है , पर यहां तो वह विशाल के साथ काफी खुश दिख रही थी। राजेश यह देख गुस्से में वापस अपने केबिन में चला गया।

विशाल और नैना ने मिलकर सारी फाइल खोज निकाली, विशाल को कुछ काम था तो वह वहां से चला गया।

राजेश ने अब नैना को फोन किया कि सारी फाइल्स को जितनी जल्दी हो सके ,उसके कैबिन में पहुंचा दे।

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नैना (हैरानी से) - पर मैं अकेले इतनी सारी फाइल्स कैसे लाऊंगी , वह भी सीढ़ियों के रास्ते ।

राजेश - यह मेरी प्रॉब्लम नहीं है ,कहकर उसने फोन काट दिया ।

नैना परेशान हो गई कि करे तो करे क्या? तभी उसे सारा की याद आई। उसने सारा को नीचे इन्वेंटरी में बुलाया और दोनों ने मिलकर सारी फाइल्स के दो बंडल बनाए । वह तकरीबन 40 फाइल थी, नैना और सारा 20-20 फाइल्स का बंडल बना बड़ी मुश्किल से सीढ़ियों से होते हुए सातवें फ्लोर तक पहुंची , वह दोनों जैसे ही राजेश के केबिन में पहुंचे तो देखा कि राजेश वहाँथा ही नहीं।

यह देखते ही नैना को उस पर बहुत गुस्सा आया कि तभी राजेश का फोन आया - कहां रह गई आप ?

नैना (गुस्से को छुपाते हुए) - सर आपने ही फाइल्स मंगाई थी तो मैं बस वही लेकर आपके केबिन में राजेश कैबिन में.....

राजेश - वहाँ जाकर क्या करेंगी आप ? मैं तो नीचे ऑफिस , के बाहर खड़ा हूं ।आपने काफी टाइम लगा दिया था इसलिए मैं खुद ही नीचे आ गया पर आप तो अब ऊपर सातवें फ्लोर पर पहुंच गए ।

नैना - पर मैंने तो आपको नहीं जाते देखा ही नही।

राजेश - लोगों से हंसने बोलने से फुर्सत होगी तो देखेंगी ना! अब जल्दी से सारी फाइल्स नीचे लाओ, मुझे अभी निकलना है।

नैना - पर सर इतनी सारी....

राजेश - ठीक है । एक काम कीजिए , इनमें से 15 फाइलें ले आओ। आज वैसे भी इससे ज्यादा काम नहीं हो पाएगा।

नैना( खीझते हुए ) - यस सर।

नैना ने सारा को वापस भेज दिया और खुद फाईल लेकर मन ही मन बडबडाती सीढ़ियों पर चली - रावण कहीं का ! मुझसे तो 40 फाईल्स ढूंढवाली और खुद बस 15 मांग रहा है । नैना ने नीचे आकर देखा कि राजेश और विशाल कार के पास खड़े आपस में बात कर रहे थे । नैना बुरी तरह हाँफ रही थी। अभी वह थोड़ी दूर ही गई थी कि उसका पैर मुड गया , और वह फाइल्स के साथ वही जमीन पर गिर पड़ी।

जब उसके गिरने की आवाज सुनकर राजेश और विशाल ने उस ओर देखा तो दोनो भाग कर वहाँ पहुँचे, नैना उठने की कोशिश कर ही रही थी कि राजेश और विशाल ने आकर नैना की तरफ अपने अपने हाथ बढ़ा दिए । अब विशाल और राजेश एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे , इधर नैना कभी राजेश को तो कभी विशाल को देखती कि वह आखिर किसका हाथ, थामें?,
 
राजेश हैरानी से विशाल को देख रहा था कि आखिर यह नैना को इतना अटेंशन क्यों दे रहा है? विशाल हैरानी से राजेश को देख रहा था कि वैसे तो राजेश नैना को हर वक्त सताता रहता है तो फिर अब क्यों उसकी इतनी परवाह कर रहा है?

नैना एक ओर इस असमंजस में थी कि दोनों में से किसका हाथ थामें तो दूसरी ओर वह इस सोच में डूबी थी कि जब राजेश को उसे दर्द देना ही है तो अब क्यों सहारे के लिए हाथ बढ़ा रहा है? राजेश को अब होश आया कि वह क्या कर रहा है ? वह तो नैना को चोट पहुंचाना चाहता है फिर क्यों उसकी मदद को हाथ आगे बढ़ाया ?

नैना ने अब धीरे से अपना हाथ उठाया , इधर राजेश ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और तीन चार कदम पीछे हट गया ।नैना का हाथ जहां था, वहीं रुक गया। उसे राजेश के पीछे कदम खींच लेने पर बुरा लगा। वह अपना हाथ वापस नीचे करने वाली थी कि विशाल ने आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लिया और बोला - ठीक तो हो ?

नैना - हां , मैं ठीक हूं ।

विशाल ने नैना को उठाया , अब नैना का हाथ विशाल के हाथ में था। यह देख राजेश को बहुत गुस्सा आ रहा था कि जब नैना कह रही है कि वह ठीक है तो क्यों विशाल उसका हाथ थामे खडा है?

नैना ने अब राजेश की ओर देखा, राजेश लगातार नैना और विशाल के आपस में थामें हाथों को ही देख रहा था । यह देख नैेना ने विशाल के हाथ से अपना हाथ अलग कर लिया।

विशाल ने अब जमीन में गिरी हुई फाइल उठाई और नैना को दे दी।

राजेश (विशाल से) - तुम कहीं जा रहे थे ना , अब लेट नहीं हो रहा तुम्हें ?

विशाल राजेश की ओर देख मुस्कुराते हुए बोला- लेट तो हो रहा हूं पर क्या करूं ? किसी की मदद करने से मेरी इज्जत में कोई दाग नहीं लगता ।

, राजेश ( बेरूखी से) - मैं सामने वाले इंसान को देख कर डिसाइड करता हूं विशाल कि वह मेरी मदद लेने के काबिल है भी या नही? मैंने हर राह चलते इंसान की मदद करने का ठेका नहीं लिया।

उसकी बात सुन विशाल और नैना अब हैरानी से राजेश की ओर देखने लगे। राजेश ने जब उन दोनों को खुद को यूं देखते पाया तो बेरुखी से बोला -मिस शर्मा, अब सारा दिन मेरा चेहरा ही देखती रहोगी या यह फाइल्स मेरी कार में भी रखोगी ?

नैना(झेंपकर) - यस ..... यस सर कहकर वह फाइल्स ले राजेश की कार की ओर बढ़ी।

विशाल (आगे बढ़ कर) - लाओ नैना , मैं रख देता हूं ।

नैना - नहीं, मैं खुद की मदद कर सकती हूं विशाल। आपने इतनी मदद की, मेरे लिए वही बहुत है ।

विशाल - आपको कहीं चोट तो नहीं लगी ?

नैना ( राजेश को देखते हुए ) - नहीं , मैं इतनी कमजोर नहीं जो इतनी आसानी से टूट जाऊं ।

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विशाल- आर यू श्योर?

नैना (मुस्कुराते हुए) - हां ।

राजेश अब जाकर अपनी कार के पास खड़ा हो गया , नैना फाइल्स लिए उसके पास पहुंची तो राजेश ने कार का दरवाजा खोल दिया। नैना कार में फाइल रखने लगी , राजेश ने धीरे से कहा - जानता हूं, इतनी आसानी से टूटने वाली नहीं हो तुम । याद रखना , अभी तो मैंने कुछ करना शुरू भी नहीं किया है तब तुम्हारी यह हालत है । एक ना एक दिन मैं तुम्हें तोड़ कर रहूंगा और तब तुम्हें मुझसे कोई भी नहीं बचा पाएगा - विशाल भी नहीं ।

नैना फाइल्स रख राजेश को देख मुस्कुराने लगी , राजेश उसे सवालिया नजरों से देखने लगा - तुम मुस्कुरा रही हो?

नैना -और नहीं तो क्या करूं ? तुम मुझे बर्बाद करने में इस कदर उलझे हो कि अपनी जिंदगी का चैन सुकून ही भूल गए हो , कहीं ऐसा ना हो कि मुझे बर्बाद करते करते तुम खुद भी बर्बाद ना हो जाओ - कहकर नैना वहां से चली गई ।

राजेश नैना का जवाब सुन उसे देखता ही रह गया , आज , फिर वह कालेज वाली नैना की यादों में खो गया। विशाल ने पास आकर कहा - चलोगे भी या सारा दिन उसे ही घूरते रहोगे? अब राजेश और विशाल अपने घरों की ओर चले गए।

नैना घर पहुंचकर धम्म से सोफे पर बैठ गई, आज राजेश ने उसकी अच्छी खासी कसरत करा दी थी । उसके पैर बहुत बुरी तरह से दर्द कर रहे थे , वह सोचने लगी - नहीं , राजेश उसे ऐसे परेशान नहीं कर सकता । आखिर कब तक वह राजेश को खुद को यूँ नुकसान पहुंचाने देगी ।

अगर वह धोखेबाज है तो राजेश भी तो धोखेबाज है , उसने भी तो हमेशा साथ रहने की कसम खाई थी पर वह मेरा इंतजार 3 दिन भी नहीं कर पाया और दूसरी लडकी से शादी कर ली। उसे कोई हक नहीं है मुझे ऐसे परेशान करने का। वह अब यह सब सोच ही रही थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई।

नैना को समझ नहीं आया कि इस वक्त कौन हो सकता है? अमूमन उसके घर पर कोई आता जाता नहीं था। नैना अब पैरों के दर्द से परेशान धीरे धीरे दरवाजे की ओर बड़ी, उसने जब दरवाजा खोला तो सामने खड़ी रिया को देख हैरान हो गई - रिया तुम यहां ?

रिया मुस्कुराते हुए - क्यों , क्या मैं नहीं आ सकती ? घबराओ , नहीं । ज्यादा समय नहीं लूंगी तुम्हारा - कहते हुए वह घर के अंदर आ गई । नैना दरवाजे पर खड़ी खड़ी उसे देखने लगी और सोचने लगी कि आखिरी ये यहां क्यों आई है ?

रिया ने मुड कर नैना की ओर देखा और बोली - अंदर आओ नैना , यह तुम्हारा ही घर है और हां डरो नहीं ,मैं अकेली हूं । भाई साथ नहीं है , उन्हें तो पता भी नहीं है कि मैं तुम्हारे पास आई हूं ।

नैना अब जाकर रिया के पास खड़ी हो गई तो रिया ने उसे हाथ पकड़ कर प्यार से पास ही रखें सोफे पर बैठा दिया फिर खुद भी वहीं बैठ गई ।

नैना - यहां कैसे आना हुआ रिया आई मीन क्या मदद कर सकती हूँ तुम्हारी ?

रिया (नैना के पैरों की ओर इशारा कर) - जो इंसान खुद की मदद नहीं कर सकता , वह दूसरों की क्या करेगा ? एनीवेज यह बताओ , तुम्हारा किचन कहां है ?

नैना ने इशारा कर रिया को किचन का रास्ता दिखा दिया, रिया उठ कर वहाँ चली गई । थोड़ी देर बाद जब वह बाहर आई तो उसके हाथ में एक बकेट थी। उसने वो लाकर नैना , के पैरों के पास रख दी। नैना कुछ समझ पाती , उससे पहले ही रिया ने उसके पैरों को उठा उस नमक मिले गुनगुने पानी की बकेट में डाल दिया ।

नैना रिया को देखने लगी , उसे तो लगा था कि रिया यहाँ उसे बुरा भला कहने आई है पर यह तो यहाँ उसका ध्यान रख रही है । नैना हैरानी से रिया को देखने लगी।

रिया नैना को हैरान देखकर - क्या हुआ ? तुम सोच रही होगी ना कि मैं यहाँ तुम्हें नीचा दिखाने आई हूँ? सच कहूं तो जब पहली बार मैं तुमसे मिली और पता चला कि तुम वही लड़की हो , जिसकी वजह से मेरा भाई आज तक खुद को संभालने की कोशिश कर रहा है , तो मैं तुम्हें बहुत कुछ कहना चाहती थी पर भाई ने मुझे रोक लिया लेकिन क्या करूं ? मेरे भाई ने तुम्हें सच्चे दिल से चाहा था और मैं जानती हूं कि अगर मैं तुम्हें कुछ कहूंगी तो उसका सीधा असर भाई पर होगा । अभी थोड़ी देर पहले भाई जब घर आए तो बहुत परेशान से थे, मैंने पूछा तो उन्होंनेे कुछ नहीं कहा फिर मैंने विशाल भाई को फोन लगाया और बात की तो पता चला कि भाई ने आपको आज ऑफिस में कितना सताया है ।

नैना (हैरानी से ) - तुमने विशाल को बता दिया सब?

, रिया - नहीं , मैंने बस ऐसे ही पूछा था। मेरा भाई आज जैसा भी है , तुम्हारी वजह से है । वह पहले ऐसा बिल्कुल भी नहीं था, वह दर्द भले ही तुम्हें देता है पर तकलीफ महसूस उसे भी होती है और बराबर होती है । वह खुद को हर वक्त पूछता है कि उसने तुमसे मोहब्बत क्यों की?

नैना यह सुनकर सोचती रह गई - सही तो कहता है राजेश, ना वो मुझसे मोहब्बत करता और ना ही आज इस दौर से गुजरता।
 
नैना को खोया देख रिया बोली - उम्मीद करती हूं कि अभी तुम्हारे पैर दर्द में थोड़ा आराम पड़ा होगा ।

नैना - थैंक्स रिया।

रिया (मुस्कुराते हुए) - अगर मैं आपसे कुछ मांगू तो क्या आप मुझे वह देंंगी?

नैना यह सुनकर थोड़ा घबरा गई कि पता नहीं रिया क्या मांग रही है मगर फिर मुस्कुरा कर बोली - मैं पूरी कोशिश करूंगी।

रिया - मैं अपने भाई से बहुत प्यार करती हूं और मेरे भाई तुमसे बहुत प्यार करते थे । मैं नहीं जानती कि ऐसा क्या हुआ , कि तुमने मेरे भाई को छोड़ दिया लेकिन अगर तुमने कभी भी मेरे भाई से प्यार किया हो तो तुम यहाँ से कहीं दूर चली जाओ और कभी दोबारा भाई से नहीं मिलना।

रिया की बात सुन नैना के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा , वह ठगी हुई सी रिया को देखने लगी ।

रिया की आंखों में आंसू थे ,वह बोली - मेरे भाई को 3 साल हो गए हैं खुद को संभालते हुए और अब जब वह सँभलना सीख रहे थे कि तुम फिर उनके सामने आ गई। मैं उन्हें हर रोज तकलीफ से गुजरते नहीं देख सकती । जानती हूं कि तुम्हारेे जाने के बाद भाई को बहुत दुख होगा पर धीरे-धीरे वह समझ जाएंगे लेकिन तुम उनके सामने रही तो वह कभी अपनी जिंदगी में सुकून से नहीं रह पाएंगे ।

नैना रिया को एकटक देखे जा रही थी, रिया अब उठ कर जाने लगी । उसने नैना की ओर मुड़ कर देखा और बोली - हो सके तो मुझे माफ कर देना। मैं जानती हूं कि इस वक्त मैं तुम्हारे सामने स्वार्थी बन रही हूं लेकिन कर भी क्या सकती हूं? अपने भाई की खुशियों के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकती हूं ।

तुम आज ही जितनी जल्दी हो सके , यहां से दूर निकल , जाओ जिससे मेरा भाई भी सुकून से रह सके और तुम्हें भी हर रोज उनके गुस्से का शिकार ना होना पड़े । उम्मीद करती हूं कि कल सुबह तक तुम यहां से बहुत दूर जा चुकी होगी -कहते हुए रिया वहां से निकल गई।

नैना आप सोफे पर निढाल सी हो कर लेट गई , सही तो कह रही है रिया, मुझे राजेश के लिए यहां से जाना ही होगा । कम से कम उसके लिए मैं इतना तो कर ही सकती हूं लेकिन मैं... मेरा क्या ? इतने सालों बाद राजेश को सामने देख सोचा था कि अपनी बाकी की जिंदगी राजेश को यूं ही अपनी नजरों के सामने देख गुजार लूंगी लेकिन मेरी किस्मत में तो इतना भी नहीं है । क्या करूं , कुछ समझ नहीं आ रहा । काफी देर तक नैना ने सोचने रे बाद तय किया कि वह राजेश कि जिंदगी से हमेशा के लिए चली जाएगी ।

नैना अपना सामान पैक करने के लिए उठी लेकिन उसे वहां कुछ भी अपना नहीं लगा , अगर कुछ उसका अपना था तो वह था राजेश की मां का पेंडेंट चैन और उनकी साडी ।

नैना ने अपने बेड के पास रखी टेबल की रैक से वह दोनों बेशकीमती चीजें निकाल अपने बैग में रखी और घर से निकल पड़ी । आज फिर एक बार नैना राजेश को धोखा देने निकल पड़ी लेकिन इस बार धोखा राजेश की खुशी की , खातिर था ।

दूसरी ओर रिया जब घर पहुंची तो राजेश उसका इंतजार कर रहा था ।

राजेश - कहां चली गई थी तुम बिना बताए ? कब से फोन कर रहा हूं , उठाया क्यों नही?

रिया - वह भाई मैं बस यूं ही पास में ही घूमने गई थी ।

राजेश ने देखा कि रिया उसे नजर चुरा रही थी , वह समझ गया कि रिया उससे कुछ छुपा रही है क्योंकि वह राजेश से जब भी झूठ बोलती थी तो नजरें चुराती थी ।

राजेश - बात क्या है रिया ? तुम झूठ बोल रही हो , बताओ कहां गई थी ?

रिया - गई थी बस किसी काम से ,आप खामँखा ही परेशान हो रहे हैं ।कुछ नहीं है ऐसा।

राजेश को अब डर सताने लगा कि कहीं रिया नैना के पास तो नहीं गई थी उसे बुरा भला कहने ।

, रिया - भाई , मुझे नींद आ रही है ।कल बात करते हैं , मैं अब सोने जा रही हूं ।

राजेश अब परेशान सा बोला - मैं कुछ पूछ रहा हूं तुमसे ?कहीं तुम नैना के पास तो नहीं गई थी?

रिया - हाँ, गई थीं उसके पास क्योंकि वो लड़की आज तक आपके दिमाग से नहीं निकल पाई। जब वह नहीं थी, तब आप उसे खोजने में परेशान रहे । अब वह मिल गई है तो आप उसे परेशान करने के चक्कर में खुद ही परेशान रहते हैं। आपको बस हर हाल में खुश देखना चाहती हूं मैं जो कि उस लड़की के होते हुए कभी नहीं हो सकता इसलिए मुझे जो सही लगा , मैंने वही किया।

राजेश (घबराकर ) - क्या.... क्या किया तुमने ? बताओ मुझे।

रिया - क्या बात है भाई ? कल ही तो आप कह रहे थे कि नफरत है आपको नैना से , अब उसकी इतनी चिंता क्यों सता रही है ?

राजेश खींझते हुए बोला - मेरे सवाल का जवाब दो, क्या कहा तुमने उसे ? मना किया था मैंने वहां जाने को फिर क्यों , गई वहां ?

रिया - मैंने उसे साफ-साफ कह दिया कि वह जब तक आपके सामने रहेगी , आप कभी खुश नहीं रह पाओगे इसलिए वो हमेशा के लिए आपके जिंदगी से दूर चली जाए और जहां तक मुझे लगता है , नैना तो अब तक निकल भी गई होगी ।

राजेश यह सुनकर एक क्षण को स्तब्ध सा खड़ा रह गया, वह गुस्से में चिल्लाते हुए बोला - यह क्या कर दिया तुमने? मैं नैना को 3 साल से ढूंढ रहा था ,अब वह मिली तो तुमने फिर से उसे मुझसे दूर भेज दिया ? मैंने कहा था तुमसे कि मेरे और नैना के बीच मत आना फिर क्यों किया तुमने यह सब ?

आज पहली बार राजेश ने रिया से इतने गुस्से में बात की थी, यह देख रिया की आंखों से आंसू बहने लगे और वह रोते हुए बोली - मैंने जो भी किया , आपकी खुशी के लिए किया भाई।

राजेश (गुस्से में ) - मेरी खुशी के लिए? देखो मुझे , क्या मैं तुम्हें खुश नजर आ रहा हूं ? जवाब दो ? अगर आज नैना मुझे नहीं मिली तो याद रखना, मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगा , कभी नहीं - कह कर राजेश अपनी कार की चाबी ले दरवाजे की ओर भागा।

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दरवाजे पर पहुंचते ही राजेश को कुछ याद आया , वह पलट कर रिया से बोला - कहां भेजा है नैना को तुमने ?

रिया ने अब आँसू पोंछे और धीरे से बोली - पता नहीं , मैंने उसे बस यहां से हमेशा के लिए दूर जाने को कहा था।

राजेश झल्लाकर बोला - एक काम करो , अपना बैग पैक कर लो । कल सुबह ही मैं तुम्हें दिल्ली भेज रहा हूं - कह कर वह घर से बाहर निकल गया।

रिया राजेश की बात को सुनकर चुपचाप वहीं खड़ी रह गई - क्या उसने सच में कुछ गलत किया था ? क्या भाई सच में नैना के प्यार को भूल चुके थे ? अगर वह अपने भाई को खुश देखना चाहती है तो क्या बुरा है ?

राजेश अब नैना को लगातार फोन कर रहा था पर वह फोन नहीं उठा रही थी । राजेश की नजरों के सामने अब 2 साल पहले की घटना दोबारा होने लगी , जब नैना दिल्ली छोड़कर गई थी । राजेश को अब सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था - अगर नैना आज फिर मुझे छोड़ कर चली गई तो ? अगर मैं उसे कभी नहीं ढूंढ पाया तो ?

, एक बार राजेश फिर उसी उलझन में फंस चुका था जिसमें वह 2 साल पहले फंसा था । उसने फटाफट से कार स्टार्ट की और नैना के घर जाने वाले रास्ते की ओर बढ़ चला।,

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कैसे रिएक्ट करेगा यह जानकर कि मैं एक बार फिर इस तरह से भाग गई हूं ? वह मुझसे अब और भी नफरत करने लगेगा, अब मैं किसके सहारे रहूंगी और अब तो मैं कभी उसे देख भी नहीं पाऊंगी - सोचते हुए नैना का कलेजा भारी होने लगा, उसके कदम डगमगाने लगे । वह वहीं सड़क किनारे बैठ गई।

उधर राजेश जल्दी से नैना के घर पहुंचा और कार से उतर कर नैना के घर के दरवाजे की ओर भागा, जैसे ही वह वहां पहुंचा तो दरवाजा लॉक देख उसके तो होश उड़ गए , नैना जा चुकी थी।

कहां गई होगी? कैसे ढूँढू उसे ? कहीं मुझे देर तो नहीं हो गई? सोचते-सोचते राजेश वापस कार की ओर बढ़ चला , कार के पास पहुंचते-पहुंचते उसकी सांसे फूलने लगी , वह पसीने से लथपथ हो गया । उसके हाथ पैर कांपने लगे और मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी ,ऐसा लगता था जैसे किसी ने उसके शरीर की सारी ताकत को एक साथ निचोड लिया हो।

वह कार के सहारे टिक कर बैठ गया, उसका दिमाग सुन्न सा पड गया, तभी उसका फोन बज उठा। उसने काँपते हाथों से मुश्किल से अपने जेब से फोन निकाला और देखा तो फोन रिया का था । राजेश इस वक्त किसी से बात करना नहीं , चाहता था, उसके हाथ से फोन छूट़कर दूर जा गिरा। रिया बार-बार फोन मिला रही थी पर राजेश ने जवाब नहीं दिया, उसके दिमाग में बस दूर जाती नैना ही छाई थी। उसका गला सूखने लगा।

राजेश को अब साँस लेने में तकलीफ होने लगी, तभी किसी के कदमों की आहट उसकी ओर बढ़ी । किसी ने राजेश के करीब आकर फटाफट से उसका ब्लेजर उतार उसकी शर्ट के ऊपर के 2 -3 बटन खोल दिए ताकि वह खुल कर साँस ले सके। राजेश को इस वक्त कुछ भी होश ना था , उस इंसान ने अपनी जेब से रूमाल निकाल राजेश का पसीना पोछा और बोला - आप ठीक है? क्या हुआ है आपको ? लंबी लंबी सांसे लीजिए ।

राजेश नेें अब गहरी सांसे लेते हुए नजरें उठाकर सामने देखा तो हम उम्र नौजवान उसके सामने बैठा था और चिंतित चेहरे से उसे देख रहा था। राजेश ने बड़ी मुश्किल से उसे पानी मांगा , वह इधर उधर देखने लगा पर उसे कहीं कोई नजर आया, अपने हाथ में लगी फाइल से राजेश के चेहरे के पास हवा करने लगा जिससे राजेश को कुछ राहत मिल सके।

वह बोला - पानी तो यहां नहीं है । राजेश ने अपनी कार की तरफ इशारा किया तो उसने झट से पानी की बोतल निकाल , राजेश को पानी पिलाया। थोड़ी देर राजेश कार के सहारे बैठा रहा , उसे अब थोड़ा ठीक लग रहा था, उसने धीमी सी आवाज में कहा - अगर आज आप नहीं होते तो पता नहीं , मेरा क्या होता ?

इस पर वह लड़का मुस्कुराते हुए - मैं नहीं होता तो कोई और होता । वैसे मेरा नाम साहिल है और आप ?

राजेश (नैना को याद कर जल्दी से उठ) - मेरा नाम राजेश है। माफ कीजिएगा ,फिलहाल मैं जल्दी में हूं। कुछ बहुत जरूरी काम है , मदद के लिए शुक्रिया ।

साहिल - ओके, अगर किस्मत में होगा तो हम फिर मिलेंगे। वैसे एक सलाह दूंगा आपको, आपकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है । आपको आराम करना चाहिए, मेरा घर यहीं पास में है। आप वहाँ चल सकते है।

राजेश - नहीं , आज अगर मै रुक गया तो फिर जिंदगी भर पछताना पड़ेगा,वह जल्दी से कार में बैठ गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि जाए तो जाए कहां ? वह अब जल्दी ले रेलवे स्टेशन की ओर बढ चला।

उधर नैना हिम्मत कर अपने गंतव्य की तलाश में उठ खड़ी , हुई कि एक टैक्सी वाले ने अपनी गाड़ी रोकी - किधर जाना है मैडम?

नैना हडबडा कर बोली - आप कहाँ जा रहे हो भईया?

टैक्सी वाला - मै तो बस स्टैंड की तरफ जा रहा हूं पर आप जहां जाओगे , वहीं छोड़ दूंगा ।

नैना तपाक से बोली - नहीं नहीं ,मुझे भी बस स्टैंड ही जाना है - कहते हुए वह टैक्सी में बैठ गई । राजेश रेलवे स्टेशन पर पहुंच पहुंचा और वहां पागलों की तरह नैना को खोजने लगा पर वह उसे कहीं नजर नहीं आई

उसने कई बार भीड़ में नैना को पुकारा पर कोई फायदा नहीं। राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि वह करे तो करे क्या? उसने जल्दी से अपने मोबाइल मे नैना की फोटो निकाली और वहां मौजूद लोगों को दिखा पूछताछ करने लगा पर वहाँ किसी ने भी नैना को नहीं देखा था ।

उधर नैना बस स्टॉप पहुंची तो पता चला कि एक घंटे से पहले कोई बस नहीं जाएगी , वह वहीं एक बस में जाकर बैठ गई। राजेश ने विशाल को फोन किया - हेलो विशाल, नैना कहां है? तुम्हें कुछ पता है क्या? वह एक सांस में यह सब बोल , गया ।

विशाल हैरानी से - कहाँ है नैना और तुम क्यों उसे ढूंढ रहे हो? कुछ हुआ है क्या ?

राजेश उसकी बातों से समझ गया कि यह कुछ नहीं जानता है नैना के बारे में ।

राजेश -- नहीं , वह बस मै कुछ काम के लिए उसे फोन कर रहा था , उसनें उठाया नहीं तो सोचा शायद तुम्हें पता हो?

विशाल - नहीं , मेरे से कोई बात नहीं हुई । तुम कहो तो एक बार मैं फोन करके देखू?

राजेश - ठीक है , देखो । सुनो, मेरा नाम मत लेना ।

विशाल ने कई बार नैना को फोन किया पर, उसने फोन नहीं उठाया ।

राजेश ने फिर सारा को फोन कर वहीं बहाना बना नैना को फोन करने को कहा पर उसने फोन नहीं उठाया । राजेश अब बौखलाता हुआ कार की ओर भागा कि क्या पता , वह बस स्टैंड गई हो।

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उधर नैना को बैठे-बैठे बेचैन होने लगी , वह अब बस से उतरकर नीचे आ गई, तभी रिया का फोन आया ।

नैना - हेलो?

रिया - कहां हो ?

नैना - अभी तक इसी शहर में हूं । बस जा ही रही थी ।

रिया - तो फिर अभी हो कहां ?

नैना - अभी तो यहीं बस स्टॉप पर हूं पर अब रेलवे स्टेशन जा रही हूँ।

रिया - ठीक है , हो सके तो मुझे माफ कर दो। मेरे लिए मेरा भाई सब कुछ है।

नैना- मैं समझती हूं रिया, अपनी परछाई भी तुम्हारे भाई पर नहीं पड़ने दूंगी।

रिया - थैंक्स नैना।

, नैना - इट्स ओके ।

नैना अब टैक्सी ले रेलवे स्टेशन की ओर चली, उधर राजेश बस स्टैंड पहुंचा । वहां उसने नैना को सब जगह ढूंढा पर नैना थी ही नहीं ।

अब राजेश थक हार कर अपनी कार में अाकर बैठ गया, उसके कान में बस एक ही आवाज गूंज रही थी कि मैंने नैना को एक बार फिर खो दिया । उसके दिल में जो दर्द छुपा बैठा था, वह अब उस पर हावी होने की कोशिश करने लगा । राजेश अपनी आंखें बंद कर सीट पर पीछे की ओर लेट गया। शायद सब खत्म हो गया था।

नैना रेलवे स्टेशन पहुंच वहां खड़ी ट्रेन में चढ ड़ गई , उसे बहुत ही कमजोरी महसूस हो रही थी । आज पूरे दिन में उसने एक कप कॉफी के अलावा कुछ भी नहीं खाया पिया नहीं था जिसकी वजह से उसे बहुत थकान महसूस होने लगी।

वह अब आंखें बंद करके अपना बैग गोद में रख चुपचाप आँखें बंद कर बैठ गई, कुछ ही समय उसे महसूस हुआ कि ट्रेन चल पडी है। नैना को लगने लगा कि उसके साथ तो बस उसका शरीर जा रहा है,आत्मा तो कहीं पीछे छूट चुकी है।

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अगले ही पल उसे महसूस हुआ कि ट्रेन अचानक से रुक गई है , चारों ओर शोर शराबा होने लगा कि ट्रेन कैसे रुक गई? किसी ने ट्रेन की चेन खींची थी। नैना फिर भी चुपचाप आंखें बंद किए लेटी रही कि उसे महसूस हुआ कोई उसके बिल्कुल सामने वाली सीट पर आकर बैठा है ।

नैना ने अब अपने बैग को कस कर पकड़ लिया, जैसे उस बैग में उसकी जान बसती हो कि तभी उसके कानों में एक आवाज गूंजी जिसे सुनकर वह सिहर उठी -
 
"अकेले अकेले कहां जा रही हो ? इतनी जल्दी तुम्हें चैन की नींद नहीं सोने दूंगा । एक बार तो तुम भाग चुकी हो पर दोबारा नहीं भागने दूंगा।"

नैना ने अब यह सुनकर एकदम से आँखें खोल सामने जब सामने देखा तो राजेश आराम से बैठा हुआ उसे देख कर मुस्कुरा रहा था.......,

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नैना उसे देखते ही समझ गई कि वह इस वक्त कितने गुस्से में है उसने अब अपनी नजरें नीचे की क्योंकि राजेश से नजरें मिलाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी । राजेश अब अपनी सीट से खड़ा हुआ और आकर नैना के बगल में बैठ गया , नैना अंदर ही अंदर सिहर गई कि हे भगवान, यह यहां पर इन सब लोगों को सामने कहीं मुझ पर भड़क ना उठे?

वह सीट से उठने को हुई कि राजेश ने अब नैना की हाथ पकड वहीं रोक लिया और धीरे से बोला - अगर तुम नहीं चाहती हो कि मैं तुम्हारी यहां सबके सामने बेइज्जती करूं तो 1 मिनट में चुपचाप ट्रेन उतर जाओ , मैं बाहर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं ।अगर तुम 1 मिनट के अंदर ट्रेन से नहीं उतरी तो फिर तुम मेरा वह चेहरा देखोगीे जो तुमने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा - कहते हुए वह उठ खड़ा हुआ और ट्रेन से बाहर निकल गया ।

नैना अब सोच में पड़ गई कि वह करे क्या? वहां जानती थी कि अब राजेश उसे किसी भी कीमत पर जाने नहीं देगा ।ट्रेन के बाहर उतर राजेश तकरीबन सुनसान पड़े स्टेशन पर खड़ा नैना का इंतजार करने लगा । वह जानता था कि नैना जरूर आएगी। ट्रेन चलना शुरू हुई थी कि नैना अपना बैग ले ट्रेन से उतर गई और वही खड़ी रह गई ।

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अब स्टेशन पर नैना और राजेश के अलावा कोई और ना था, राजेश नैना की ओर बढ चला , नैना अब खुद को नार्मल करने की पूरी कोशिश कर रही थी पर डर के मारे उसके पसीने छूटने लगे । राजेश आकर नैना के बिल्कुल सामने खड़ा हो गया , उसने देखा कि नैना अभी भी उससे नजर चुरा रही है ।

राजेश ने नैना के हाथ में लगे बैग की तरफ हाथ बढ़ाया कि नैना घबरा कर पीछे हट गई । उसे डर था कि कहीं राजेश नैना के बैग में रखी उसकी माँ की साडी और चैन को ना देख ले । अगर ऐसा हुआ तो वह उससे सवाल करेगा और उन सवालों के उस पर कोई जवाब नहीं।

नैना की इस हरकत में राजेश के गुस्से के लिए आग में घी का काम किया, राजेश अब गुस्से में आगे बढ़ा और एक हाथ से नैना के हाथ से बैग छीन लिया और दूसरे हाथ से उसका हाथ पकड़ उसे लगभग खींचते हुए रेलवे स्टेशन से बाहर ले गया। नैना वहां कोई तमाशा नहीं बनाना चाहती थी इसलिए उसने चुपचाप राजेश के साथ जाना सही समझा ।

राजेश ने नैना का बैग अपने कार में पीछे वाली सीट पर रख दिया और आगे की सीट का दरवाजा खोल गाड़ी में बैठने को , इशारा किया पर नैना खडी रही। राजेश गुस्से में नैना की ओर देखने लगा, वह अब सख्ती से बोला - चुपचाप बैठो कार में वरना अपनी बात मनवाना मुझे अच्छे से आता है ।

नैना अब राजेश से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी पर राजेश में उसका हाथ कसकर पकड़े रखा । नैना धीरे से बोली - राजेश मेरा हाथ छोड़ो , मैं खुद अपने घर जा सकती हूं पर राजेश ने उसकी एक बात ना सुनी और बोला - चुपचाप गाड़ी में बैठो ।

नैना - लेकिन मैं ........ कहते हुए जैसे ही उसने राजेश की ओर देखा तो उसके गुस्से से तमतमातें चेहरे को देख वह चुप हो गई । वह जानती थी कि इस वक्त उसे कुछ भी कहना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना जैसा है । वह अब बिना किसी विरोध के चुपचाप गाड़ी में बैठ गई ।

राजेश ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ अब कार स्टार्ट करते हुए नैना को गुस्से से देखने लगा, नैेना भले ही दूसरी ओर देख रही थी पर उसे महसूस हो गया कि राजेश की नजर उस पर है तो मारे डर के उसके रोंगटे खड़े हो गए । पता नहीं अबकी यह कौन सी मुसीबत ला रहा है ।

राजेश पूरे रास्ते चुप रहा, नैना हर पल इसी डर में थी कि , राजेश अब कुछ कहेगा, अब कुछ सुनाएगा और उसकी ख़ामोशी नैना को अब और भी डरा रही थी कि आखिर यह कुछ बोल क्यों नहीं रहा, चल क्या रहा है इसके दिमाग में !

नैना ने महसूस किया कि राजेश ने उसके घर के रास्ते की़ जगह कोई और रास्ता चुन लिया है । नैना हैरानी से राजेश की ओर देखने लगी - यह मुझे लेकर जा कहां रहा है ? या फिर गलती से गलत रास्ता चुन लिया है । वह बोली - राजेश तुम कहां ले जा रहे हो मुझे ? राजेश ने तो जैसे मौन व्रत धारण कर लिया था। नैना के बार-बार पूछने पर भी वह कुछ नहीं बोला ।

अंधेरे की वजह से नैना को बाहर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था कि वह किस रास्ते पर है , अब थोड़ी देर बाद राजेश ने कार रोकी। नैना शीशे के बाहर देखने लगी कि वह है कहां पर उसे कुछ भी नजर नहीं आया - राजेश अब गाड़ी से उतरा और दूसरी तरफ आकर नैना के तरफ का दरवाजा खोल नैना कोबाहर निकाला ।

गाड़ी से बाहर आकर नैना ने अब चारों ओर देखा तो पाया कि वह एक बड़े से खुले मैदान में थी ,जहां दूर-दूर तक कोई नहीं था। राजेश नैना को हाथ पकड थोड़ा दूर ले आया और गुस्से में लगभग चीखते हुए बोला - बहुत शौक है ना तुम्हें , भागने का,तो भागो जितना भाग सकती हो । मैं भी देखना चाहता हूं आज कि तुम्हारी कितनी हद है ।

नैना की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो राजेश का सामना कर सके। वह मन ही मन खुद को कोस रही थी कि आखिर क्यों वह रेलवे स्टेशन आई? इससे अच्छा तो वह बस स्टैंड पर ही थी कि उसे खामोश देख राजेश एकदम से जोर से चिल्लाकर बोला - भागो....।

नैना अब घबरा गई, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा । राजेश आज बहुत गुस्से में था , 2 साल पहले वह जिस दौर से गुजरा था , आज फिर वही सब उसके साथ होने वाला था। अगर रिया उसे ना बताती कि नैना कहा है तो वह एक बार फिर उसे खो देता और शायद हमेशा के लिए ।

नैना के इस तरह जाने के 2 साल पहले वाला गुस्सा जो उसके सीने में आज तक भरा हुआ था, आज बाहर निकलने को बेताब होने लगा । नैना अब राजेश का सामना करने के लिए हिम्मत बटोरे लगी ।

राजेश - तुम जो मर्जी आए , करोगी ? तुम इतनी आसानी से नहीं बच सकती। पूरा हिसाब लूंगा तुमसे । तुम खुद को समझती क्या हो ? तुम्हारी गलती का खामियाजा तो तुम्हें , भुगतना ही होगा। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई दोबारा ऐसा करने की ? भागो कितना भाग सकती हो पर वादा है मेरा , तुम जहां भी भागोगी, मैं वहां मैं तुम्हें जरूर मिलूंगा । आज जो तुमने किया है उसकी सजा भी तुम्हें मिलेगी, तुम बस तैयार रहो।

नैना ने अब अपने डर को छुपाते हुए कहा - तुम होते कौन हो मेरी जिंदगी के फैसले लेने वाले ? मुझे जो सही लगेगा , मैं वो करूंगी । मैं जहां चाहे , जब चाहे - आ सकती हूं और जा सकती हूं । तुम भले ही ऑफिस में मेरे बॉस हूं पर यह मेरी पर्सनल लाइफ है। तुम्हें कोई हक नहीं मेरे फैसले लेने का।

राजेश - मतलब तुम नहीं मानोगी ?

नैना - बिल्कुल नहीं । मै जाना चाहती हूं यहां से। जब से आए हो , मुझे परेशान कर रखा है तुमने । गलती क्या है मेरी कि तुम से प्यार नहीं करती थी,यही ना। अब तुम्हें तो बस बदला चाहिए मेरे इंकार का । हाऊ चीप यू...

कि तभी राजेश जोर से चिल्लाया - बस , बंद करो अपनी बकवास। अब मै तुम्हें चीप नजर आने लगा? ठीक है ,अब तक मैं तुम्हें जो समझा रहा था , शायद तुम्हें समझ में नहीं आया । अब मैं तुम्हें तुम्हारी भाषा में समझाता हूं, कहते हुए , राजेश नैना की ओर बढ़ चला.....,
 
राजेश अब नैना की ओर बढ़ चला, नैना उसे यू आता देख घबराने लगी । आजकल राजेश उसके लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ था , वह कब क्या करेगा शायद वह खुद भी नहीं जानता था। नैना को अब लगा कि शायद उसे चुप ही रहना चाहिए था, राजेश को उल्टा जवाब देना शायद उसे भारी पड़ने वाला था ।

राजेश अब नैना के एकदम सामने आकर खड़ा हो गया और बोला तो मिस शर्मा, मैं आपको अब आप की भाषा में जवाब देता हूं । आज आपको मैं आखरी बार याद दिला रहा हूं कि आपका हमारी कंपनी के साथ 3 साल का बांड है जिसमें अभी 1 साल बाकी है तो अगर आपने अब कभी भी भागने की कोशिश की तो मैं आपके खिलाफ लीगल एक्शन लूंगा। हां , हो सकता है कि आप भाग जाए और मैं आपको पकड ना पाऊं पर दिल्ली में जो आपके पेरेंट्स है , उन्हें आपकी गलती का खामियाजा जरूर भुगतना पड़ेगा । ध्यान रखना, अगर आपने कोई भी ऐसी हरकत की तो लीगल एक्शन में उन्हें भी जोड लूंगा फिर वह तुम्हारी गलती की सजा भुगतेंगे - कहकर राजेश मुस्कुराने लगा।

यह सुनते ही जैसे नैना के पैरों तले जमीन खिसक गई, वह बस राजेश को हैरानी से देखने लगी - नहीं यह उसका राजेश नहीं है । उसका राजेश ऐसा कुछ भी नहीं सोच सकता है, उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि राजेश ऐसी बात भी कर सकता है।

राजेश अब बेरुखी भरे स्वर में बोला - ऐसे मत देखो, तुम्हें मजबूर किया है । मुझे ऐसा करने को आप सब कुछ तुम्हारे हाथ में हैं । तुम जैसा करोगी, वैसा ही मैं करूंगा । नैना को अब राजेश पर बहुत गुस्सा आया , वह अब गुस्से में बोली - तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगे, मेरी फैमिली को तकलीफ देना तो दूर , उनकी तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखोगे । दूर रहो उनसे - कहते हुए नैना का चेहरा गुस्से में लाल हो गया ।

राजेश एक पल को चुपचाप नैना को देखता रहा । उसे अब , नैना के परिवार वालों से जलन होने लगी , जिन्हें नैना कितना प्यार करती है और एक वह है जिसने नैना से इतनी मोहब्बत की पर बदले में बस रुसवाई मिली । राजेश एकदम से होश में आया और बोला - ठीक है, मैं उन्हें कुछ भी नहीं करूंगा लेकिन तब तक , जब तक तुम कोई भी चालाकी नहीं करोगी। उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी बातें अच्छे से समझ आ गई होगी कि आपकी गलती की कीमत आपके घर वाले चुकाऐंगे ।

नैना - विश्वास नहीं होता कि तुम ऐसा भी सोच सकते हो?

राजेश (गुस्से में) -विश्वास तो मुझे भी नहीं हुआ था कि तुम मुझे धोखा दे सकती हो , कहते हुए राजेश मुडकर कार की ओर चलने लगा - जल्दी बैठो गाड़ी में , मुझे और भी बहुत काम है ।

नैना अब बुरी तरह झल्लाकर बोली - कहां जा रहे हो ? तुम बहुत बुरे हो राजेश । क्यों तंग कर रहे हो मुझे ? क्याें मुझे भूल नही जाते एक बुरा सपना समझकर? तुम अपनी जिंदगी देखो और मुझे अपनी देखने दो , चले जाओ मेरी जिंदगी से, नफरत करती हूं मैं तुमसे, क्यों वापस आए तुम?

राजेश अब चुपचाप गाड़ी की तरफ बढता रहा, उसके चेहरे , पर गुस्से की जगह दर्द ने ले ली थी । नैना की एक एक बात उसके दिल को चीर रही थी, वह बस चुपचाप चला जा रहा था , जैसे ही वह गाड़ी के करीब पहुंचा तो नैना अब शांत हो गई थी । राजेश नैना के आने का इंतजार करने लगा पर नैना के कदमों की कोई हरकत ना पा वह परेशान हो गया । उसने अब अपने दर्द को छुपाया और कठोर स्वर में बिना मुड़े

ही कठोर स्वर में बोला - जल्दी आओ , मैं पूरी रात यहां तुम्हारे लिए खड़ा नहीं रहूंगा।

राजेश ने महसूस किया कि नैना की तरफ अब भी कोई भी हरकत नहीं हुई है, उसने अब गुस्से में मुड़कर देखा तो सामने का नजारा देख उसका कलेजा धक से रह गया - नैना जमीन पर बेहोश पड़ी थी ! यह देख राजेश के होश ही उड़ गए , अब वह भागकर नैना के पास पहुंचा। उसने नैना को आवाज दी - नैना आंखें खोलो पर नैना मैं कुछ भी हरकत नहीं की। राजेश उसे फटाफट से गोद में उठाकर भागा और कार में लेटाया। वह उसे सीधे उसके घर ले गया और डॉक्टर को बुलाया।

अगले दिन जब नैना को होश आया , उसने खुद को अपने घर में पाया तभी उसे सामने से राजेश आता हुआ दिखाई दिया । राजेश ने आकर दवाई और पानी का गिलास उठाकर नैना की ओर बढा दिया पर नैना ने दूसरी और मुंह फेर लिया।

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राजेश मुस्कुराते हुए - लगता है , तुम मुझसे कुछ ज्यादा ही डर गई हो ।

नैना उसको गुस्से से देख बोली - ऐसा कुछ भी नहीं है, मैं तुमसे नहीं डरती ।

राजेश - फिर कैसे अनशन पर चल रही हो आजकल?

नैना सवालिया नजरों से राजेश को देखते हुए बोली -मतलब?

राजेश - अभी जब तुम रात को बेहोश हो गई थी तो डॉक्टर को बुलाया था और उन्होंने बताया कि तुमनें सुबह से कुछ भी नहीं खाया तो मुझे लगा कि शायद मेरे डर की वजह से तुम्हें भूख प्यास नहीं लग रही है और अब तो तुम दवा लेने से मना कर रही हो , तो जाहिर है कि तुम हार मान चुकी हो मेरे आगे। चलो अच्छा ही है फिर मैं आसानी से तुम्हारे परिवार को......

तभी नैना ने राजेश की बात बीच में काट दी- ऐसा कभी नहीं होगा , मैं हार नहीं मानूंगी - कहते हुए उसने राजेश के हाथ से , दवा और पानी का ग्लास ले लिया और फटाफट दवा ली। राजेश यह देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था आंखिर यही तो चाहता था राजेश । वह कमरे से बाहर जाने लगा तभी उसे कुछ याद आया तो वह रुका और कठोरता से बोला - आज फिर चेतावनी दे रहा हूं तुम्हें , अगर फिर कभी ऐसी हरकत कि तुम मुझसे किसी भी रहम की उम्मीद मत करना । मैं तो बर्बाद हो चुका हूं पर तुम्हें भी आबाद नहीं होने दूंगा । अब टाइम पर ऑफिस पहुंचना , बहुत सारा काम है - कह राजेश वहां से निकल गया ।

जैसे ही वह घर के दरवाजे से बाहर निकलने लगा तो सामने से उसे रिया आती हुई दिखाई दी।

राजेश - यहां क्या कर रही हो तुम ?

रिया - मै बस एक बार नैना का हाल चाल जाना चाहती थी इसलिए आ गई भाई

राजेश - हम्म , आओ - कह कर वह एक ओर हट गया।

रिया (घर के अंदर आकर) - आई एम सॉरी , मैं बस आपको खुश देखना चाहती थी - कहते हुए उसकी आंखों से आंसू , बहने लगे ।

राजेश में अब आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लिया और बोला - आई एम सॉरी रिया, मैंने भी कल तुमसे बहुत रूडली बात की। मैं बस घबरा गया था और पता नहीं क्या-क्या बोल गया और थैंक्स कि तुमने मुझे सही वक्त पर बता दिया कि नैना रेलवे स्टेशन पर है । अगर जरा भी देर हो जाती है तो नैना जा चुकी होती।

रिया (मुस्कुराते हुए) - मैं नैना से मिल सकती हूं भाई ?

राजेश - हां । अच्छा सुनो , मेरी कार में नैना का बैग रखा है उसे लेती जाओ - कहते हुए राजेश घर के बाहर निकल गया। थोड़ी देर में वह बैग लेकर आया और रिया के हाथ में थमा दिया।

राजेश काम के सिलसिले में वहां से चला गया। नैना को अब जैसे ही अपने बैग का होश आया , वह उसे कमरे में चारों ओर ढूंढने लगी पर उसे कहीं भी बैग नजर नहीं आया। यह देख वह परेशान हो गई कि अगर उसे राजेश ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगी , कहीं ऐसा तो नहीं कि राजेश ने वह बैग देख लिया? यह सब सोचती नैना अपने बिस्तर से उठी और कमरे के बाहर की ओर चल पड़ी कि तभी सामने से , रिया आ गई - कहां जा रही हो ? चलो आराम करो।

नैना - नहीं , वह मेरा बैग......

रिया (अपने हाथ में लगे बैग की ओर इशारा करते हुए) - यह रहा तुम्हारा बैग, भाई की कार में था ।

बैग देख नैना की जान में जान आई , उसने झट से रिया के हाथ से बैग लिया और उसे अलमारी में रख दिया ।

यह देख रिया मुस्कुरा कर बोली - ऐसा क्या है इस बैग में ,जो तुम इतनी नर्वस हो गई थी ।

नैना यह सुनकर हडबडाते हुए बोली - कुछ खास नहीं बस कुछ कपड़े और गहने है ।

रिया - पर तुम घबरा तो ऐसे रही हो जैसे कि इसमें कोई राज छुपा हो जो तुम नहीं चाहती कि सबके सामने आए?

नैना अब हैरानी से रिया को देखने लगी तो रिया हंसते हुए बोली - अरे, मैं तो बस मजाक कर रही थी ।

रिया अब नैना का हाथ पकड़कर बेड की ओर ले गई, वहां , उसे बैठा कर खुद भी उसके पास बैठ गई और बोली - आई एम सॉरी नैना, मैं बस थोड़ा स्वार्थी हो गई थी भाई के प्यार में। मुझे माफ कर दो ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - तुम अपनी जगह बिल्कुल ठीक हो, मुझे कोई शिकायत नहीं है तुमसे ।

रिया - चलो , अब ब्रेकफास्ट बना कर लाती हूं तुम्हारे लिए, कह कर रिया उठ चली कि नैना ने रिया को आवाज दी।

रिया - हाँ।

नैना - तुमने राजेश को क्यों बताया कि मैं रेलवे स्टेशन पर हूं?

रिया- क्योंकि मुझे एहसास हो गया था कि मैं तुम्हारे साथ गलत कर रही हूं।

नैना - एक बात पूछूं तुमसे ?

रिया - हां ।

नैना - राजेश की वाइफ कैसी है?

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रिया हैरानी से नैना को देखने लगी - क्या तुम्हें कुछ नहीं पता?

नैना - नहीं ।

अब रिया जैसे ही कुछ बोलने को हुई तो किसी का फोन आ गया। फोन पर बात कर रिया अब नैना से बोली - हम फिर बात करते हैं ,फिलहाल मुझे किसी जरूरी काम से जाना है - कहते हुए वह वहाँ से निकल गई ।

नैना सोच में पड गई कि जिंदगी बड़ी अजीब है । पहले सब कुछ देती है फिर ले भी लेती है ।

नैना ऑफिस के लिए तैयार होने लगी , थोड़ी देर बाद विशाल का फोन आया -कहां हो? ऑफिस आ रही हो ना आज ?

नैना - हा ।

विशाल - ओके , जल्दी आना । कह कर उसने फोन काट दिया ।विशाल आज बड़ा खुश था, उसने तय कर लिया था कि आज वह अपने दिल की बात कह कर ही रहेगा कितनी बार रिहर्सल की है उसने प्रपोज करने की । फाइनली आज , वह सब बोल देगा और नैना अपने ही तो है ।

यह सोचते हुए वह बड़ा बन संवर कर तैयार हुआ और ऑफिस के लिए निकल गया , रास्ते में उसने लाल गुलाबों का एक बड़ा सा गुलदस्ता लिया और ऑफिस पहुंचा ।

दूसरी ओर राजेश आज ऑफिस जल्दी पहुंच गया था, कल रात की घटना ने उसे अंदर तक हिला दिया था। अगर नैना सच में चली जाती तो ? वह अपने केबिन में परेशान सा इधर से उधर घूम रहा था । क्या वह सच में नैना के साथ सही कर रहा था ? अगर हां , तो वह खुश क्यों नहीं है उसे तंग करके बल्कि नैना को परेशान कर वह भी उतना ही परेशान हो जाता है । लगता है , उसे अपना अतीत भुला कर आगे बढ़ना चाहिए , उसे अपनी जिंदगी एक बार फिर से जीनी चाहिए क्या ? उसे अपना अतीत भुला कर आगे बढ़ना चाहिए? इसी

काफी सोच विचार के बाद राजेश ने तय किया कि इस नफरत से सिवाय दर्द के किसी को कुछ नहीं मिलेगा इसलिए उसे अपने अतीत को भूल आज मैं जीना ही चाहिए। हां , वह फिर एक बार जिंदगी को नए सिरे से शुरू करेगा। वह आज नैना की तरफ दोस्ती का हाथ बनाएगा क्योंकि उससे ज्यादा तो कुछ और हो ही नहीं सकता अब उन दोनों के बीच में।

दोस्ती के बहाने ही सही पर कुछ वक्त तो बिता पाएगा वह , नैना के साथ।

इन सब बातों से बेखबर नैना आज सुबह ऑफिस पहुंच सीधे इन्वेंटरी में गई और वहां अपने काम में लग गई । ऑफिस में अपने अपने केबिन में बैठे विशाल और राजेश नैना का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे । राजेश बार-बार अपना फोन उठाता और नैना का नंबर डायल करता फिर अगले ही पल में फोन लगने से पहले ही उसे डिस्कनेक्ट कर देता।

थोड़ी देर में जगन वहाँ आया और राजेश की टेबल पर कॉफी रख जाने लगा।

राजेश - सुनो।

जगन - जी सर ।

राजेश - मिस नैना ऑफिस आ गई ?

जगन - पता नहीं सर ,अभी मैं इन्वेंटरी में जाकर चेक करता हूं।

राजेश - हम्म जाओ और आते ही बताना ।

जैसे ही जगह से कैबिन से बाहर निकला कि विशाल ने उसे , आवाज लगाइ।

जगन - जी सर।

विशाल - वह नैना आ गई क्या?

जगन - सर वहीं देखने जा रहे हैं ।

विशाल - ठीक है जाओ और आकर मुझे फौरन बताओ ।

नैना ने आज महसूस किया कि और दिन तो राजेश सुबह सुबह ऑफिस में घुसते ही उसे तंग करने के उल्टे सीधे तरीके अपनाने लगता था पर आज ऐसा कुछ भी नहीं था। अब उसकी जान में जान आई कि भले ही कुछ देर के लिए ही सही पर शांति तो मिली। इतने में जगन आ गया ।

जगन - आ गई दीदी आप ?

नैना - हाँ।

जगन - ठीक है, मैं बताता हूं फिर । वह खुद से बडबडा रहा था।

नैना - किसको बताने जा रहे हो और क्या?

, जगन - राजेश और सर और विशाल सर पूछ रहे थे आपके बारे में, कहा था कि आते ही बताना ।

नैना यह सुनकर थोड़ा घबरा गयी , विशाल का तो ठीक है पर राजेश क्यों ढूंढ रहा है ? लगता है फिर कुछ उल्टा सीधा काम कराएगा ।

उधर जैसे ही राजेश अपने केबिन से निकला कि विशाल भी वहाँ और आ गया ।

राजेश - कैसे हो विशाल?

विशाल - बढ़िया और तुम सुनाओ ?

राजेश - मैं भी अच्छा हूं।

विशाल - क्या बात है , आज तुम कुछ बदले बदले से लग रहे हो ?

राजेश (मुस्कुराकर ) - ऐसा कुछ भी नहीं है ,मैं तो हर रोज ऐसा ही रहता हूं पर आज तुम्हारे तेवर बदले लग रहे हैं

विशाल झेप कर - कुछ भी तो नहीं ,कल दिल्ली जाना है ना तो उसी की तैयारी में लगा हुआ हूँ।

, राजेश अौर विशाल अभी आपस में बात कर ही रहे थे कि इतने में जगन आ गया - राजेश सर, विशाल सर वह आप दोनों कह रहे थे ना कि नैना दीदी आए तो फटाफट आ कर बताना तो दीदी आ गई है इन्वेंटरी में - कह कर वह चला गया।
 
राजेश और विशाल को बड़ा अजीब लगा यह सुन कर एक दूसरे के सामने कि दूसरा उसके बारे में क्या सोच रहा होगा कि वह नैना को क्यों ढूंढ रहा है ? दोनों एक दूसरे से नजर चुराने लगे । एक दूसरे का सामना करना दोनों के लिए मुश्किल हो रहा था ।

अब हिम्मत करके राजेश ने कहा - वह मुझे कुछ काम है तो मैं बाद में मिलता हूं ।

विशाल - हां हां मुझे भी कुछ काम है, फिर मिलते हैं

कहते हुए दोनों अलग-अलग साइड में चले गए , अब जाकर दोनों की जान में जान आई।

विशाल खुद से बढबढ़ाने लगा - यार यह जगन भी बिल्कुल पागल है , राजेश के सामने ऐसे बोलने की क्या जरूरत थी? क्या सोच रहा होगा वह मेरे बारे में ? उधर राजेश भी मन ही , Pमन सोच में डूबा हुआ था कि विशाल के सामने जगन ने इस तरह की बेवकूफी करके उसे शर्मसार कर दिया । राजेश और विशाल अब एक जरूरी मीटिंग में बिजी हो गए ।

दोपहर को जगन ने आकर एक लेटर नैना के हाथों में थमा दिया।

नैना -यह क्या है जगन ?

जगन - आप खुद ही देख लो दीदी- कहकर वहां से चला गया ।

नैना ने जब वह खोल कर देखा तो उसमें लिखा था -

" मैं टेरेस पर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं , जल्दी आओ। कुछ कहना चाहता हूं तुमसे । बहुत समय लगा है मुझे तुमसे यह बात करने मे।"

नैना सोचने लगी - यह किसने भेजा होगा ? लगता है ,वहां जाकर ही पता लगेगा । नैना जब टैरेस पर पहुँची तो वहाँ कोई भी नजर नहीं आया , नैना को समझ नहीं आ रहा था यहां उसे किसने बुलाया होगा कि तभी किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा, नैना चौंक कर पीछे मुड़ कर देखने , लगी.....,
 
नैना - आपने तो मेरी जान ही निकाल दी थी, ऐसे कौन डराता है अचानक से ?

सामने मुस्कुराता हुआ विशाल बोला - क्या नैना आप भी, चलिए आइए मेरे साथ । मुझे आपसे कुछ बहुत जरूरी बात करनी है - कहते हुए वह नैना को ले टेरेस पर आगे की ओर बढ चला।

इधर राजेश मीटिंग खत्म होने के बाद इन्वेंटरी की ओर बढ़ चला कि तभी उसे एक बिजनेस कॉल आई और वह उस में तकरीबन आधा घंटा उलझा रहा , अब फटाफट इन्वेंटरी की ओर बढ़ा । उसे अपना कॉलेज का वह दिन याद आ रहा था, जब उसने पहली बार नैना को रेस्टोरेंट में अपने दिल का हाल बताया था और बदले में नैना ने उसे थप्पड़ मारा था । राजेश मुस्कुराता हुआ इन्वेंटरी में पहुंचा और नैना को ढूँढने लगा पर नैना तो वहां थी नहीं ।

राजेश - यह लड़की भी ना एक जगह टिक नहीं सकती । खैर, कहां जाओगी नैना शर्मा ? ढूंढ तो तुम्हें मैं हर हाल में लूंगा । नैना को ढूंढते ढूंढते वह वापस ऑफिस पहुंचा , उसने ऑफिस में भी देखा पर नैना कहीं नहीं मिली । राजेश को अब नैना की चिंता होने लगी कि यह गई कहा ?

राजेश अभी यह सोच रहा था कि उसे सारा नजर आई , वह अब सीधा सारा की सीट के पास पहुंचा।

राजेश - सारा वो......

सारा - हेलो सर , कैसे हैं आप ?

राजेश - हम्म, फाइन। अच्छा , मैं कह रहा था कि ........

सारा (खुशी से) - आपको मेरी हेल्प चाहिए। बताइए , मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूं ?

अब राजेश झल्लाकर बोला - एक मिनट , मेरी बात तो सुन लो सारा, कुछ बोल रहा हूं मैं ।

सारा - सॉरी सर।

, राजेश - मैं आपसे बस इतना पूछना चाहता था कि आपने मिस नैना को देखा है क्या?

सारा - वह तो मुझे नहीं पता सर, मैं अभी फोन मिला कर मुझसे पूछती हूं । सारा ने नैना को कई बार फोन मिलाया पर उसने फोन नहीं उठाया।

राजेश ने सोचा कि हो सकता है विशाल को पता हो नैना के बारे में।

राजेश नें विशाल को फोन लगाया पर उसने भी फोन नहीं उठाया । राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि नैना गई कहाँ? इतने में उसे सामने से जगन आता दिखाई दिया ।

राजेश - जगन इधर आओ ।

जगन (पास आते हुए) - जी सर ।

राजेश - तुमने नैना को कहीं देखा है ?

जगन - हां सर, हमने उन्हें ऊपर टेरेस की ओर जाते देखा था कुछ समय पहले। उसके बाद हमने उन्हें नहीं देखा।

, राजेश - ठीक है , तुम जाओ - कहते हुए वह टेरेस की ओर बढ़ चला । आज राजेश बिल्कुल पहले वाला राजेश लग रहा था । उसकी आंखों में चमक ,चेहरे पर मुस्कान थी। वह बहुत खुश था आज कि उसे नैना की दोस्ती मिल जाएगी। अगर नैना नहीं मानी तो भी वह उसे कैसे भी करके मना लेगा पर आज नैना का साथ पाकर ही रहेगा। उसके पैर जमीन पर नहीं पढ़ रहे थे , वह सीढ़ियों से होता हुआ टेरेस की ओर चल पड़ा ।

कुछ ही देर में राजेश टेरेस के दरवाजे के सामने खड़ा था , वह थोड़ा नर्वस होने लगा कि इतना कुछ हो गया था नैना और उसके बीच , पता नहीं वह कैसे रिएक्ट करेगी ? अब उसने गहरी सांस ली और टेरेस का दरवाजा खोल मुस्कुराते हुए अभी चार कदम भी चला था कि टैरेस के पिछले हिस्से से उसे कुछ जानी पहचानी सी आवाज आई । यह आवाज तो विशाल की थी पर वह यहां क्या कर रहा है ? सोचते हुए राजेश अब पिछले हिस्से की ओर चला, कुछ दूर पहुंचा ही था कि सामने का नजारा देख उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

उसने देखा कि नैना, विशाल आमने सामने खड़े थ। अब विशाल ने घुटने के बल बैठ नैना का एक हाथ थाम लिया और मुस्कुरा कर उसे देखने लगा । नैना एकदम शांत भाव से , विशाल को देख रही थी , इन दोनों में से किसी का भी ध्यान कुछ दूरी पर खड़े राजेश की ओर नहीं गया । राजेश हैरानी से विशाल और नैना को देखने लगा कि आखिर यह सब हो क्या रहा है ?

तभी विशाल बोला - मैं बस तुमसे एक बात पूछना चाहता हूं - क्या तुम शादी करोगी मुझसे ? अपने दिल का हाल में तुम्हें पहले ही बयाँ कर चुका हूं । अब बस तुम्हारा जवाब जानना चाहता हूं पर एक बात हमेशा याद रखना कि तुम्हारा जवाब कुछ भी हो, हम हमेशा अच्छे दोस्त रहेंगे तो कहो , क्या जवाब है तुम्हारा ?

यह देखते ही अब राजेश का खून खौल उठा, उसका मन किया कि जाकर विशाल को थप्पड़ जड़ दे, इसकी हिम्मत कैसे हुई मेरी नैना को प्रपोज करने की ? वह आगे बढ़ने ही वाला था कि उसे याद आया कि अगर मैं कुछ कहूंगा तो विशाल को शक होगा और वह मुझसे सवाल पूछेगा , इससे बेहतर यह है कि नैना जब खुद ही उसे मना कर देगी तो वह समझ जाएगा। नैना उसे कभी भी प्यार नहीं कर सकती, मैं जानता हूं उसे । वह विशाल का प्यार जरूर ठुकराएगी , मेरा दिल जानता है उसे । चाहे उसे मुझसे प्यार ना हुआ हो पर मैंने तो उससे सच्ची मोहब्बत की थी । मैं जानता हूं उसे।

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राजेश अब पूरे आत्मविश्वास के साथ अब नैना के इनकार को सुनने के लिए दो कदम पीछे हट गया । उसे पूरी उम्मीद थी कि नैना का इंकार सब कुछ ठीक कर देगा, इसके बाद वह नैना की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएगा। प्यार ना सही दोस्ती ही सही , कम से कम साथ तो मिलेगा ।

अब राजेश मन ही मन मुस्कुरा कर नैना को देखने लगा , दूसरी ओर विशाल और नैना एक दूसरे को देख रहे थे।

विशाल - बोलो क्या जवाब है तुम्हारा? हां या ना ?

अब नैना के चेहरे पर मुस्कान तैर गई, वह मुस्कुराते हुए बोली - हां , मैं तैयार हूं तुमसे शादी करने को। मैं तुम्हारे साथ अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने को तैयार हूं । विशाल अब उठ कर खड़ा हो गया और हंसते हुए नैना को गुलाबों का गुलदस्ता दे उसको गले से लगा लिया, नैना भी उसे यूँ हसँते देख कर हंसने लगी लेकिन राजेश की तो जैसे साँसे ही अटक गई ।

राजेश यह देख दंग रह गया, उसे विश्वास नहीं हुआ था कि नैना ने विशाल को हां कहा है। नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है ? , नैना विशाल को मिले दिन ही कितने हुए हैं और बात यहां तक कैसे पहुंच गई? राजेश का अब कलेजा धक सा रह गया । वह खुद को ठगा सा महसूस करने लगा, उसकी आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया । मन हुआ कि जाकर नैना को खूब सुनाएं पर अब यह सब बेकार था ।

अब उसके कदम वापस टैरेस से नीचे की ओर बढने लगे। राजेश की आंखें आंसुओं से भरी थे , गला रूधँ रहा था और शरीर एकदम निढाल हो गया था । उसे अब ऐसा लग रहा था कि नैना ने आज फिर एक बार उसे धोखा दिया है। क्या कमी रह गई थी उसके प्यार में जो नैना ने उसे ठुकरा दिया और दूसरी ओर, एक इंसान जिस से मिले उसे अभी कुछ ही दिन हुए थे और शायद उसे अभी ढंग से जानती तक नहीं है , उससे नैना को प्यार हो गया?

सोचते-सोचते राजेश अब खामोशी के साथ जाकर इन्वेंटरी में बैठ गया , उसे अब खुद पर गुस्सा आ रहा था कि क्यों उसने इस धोखेबाज लड़की पर फिर से भरोसा किया ? सच तो यह है कि नैना ना तो उसके प्यार के काबिल है और ना ही दोस्ती के । अगर नैना से उसका कोई रिश्ता हो सकता है तो वह है बस नफरत का । अब वह नैना पर कोई रहम नहीं करेगा, वह उससे अब कोई रिश्ता नहीं रखेगा, अगर नैना कभी भी उसके पास लौट कर आएगी और चाहे कितना भी रोएगी पर वह , उसे अपनी जिंदगी में कभी वापस नहीं लाएगा।

राजेश चुपचाप वहीं इन्वेंटरी में एक कोने में कुर्सी पर सिर झुकाए बैठ गया । अब वह इस सबसे वह दूर भाग जाना था , थोड़ी देर में नैना और विशाल के हंसने की आवाज उसके कानों में पडी। वो दोनों इनवेंटरी के पास आ खडे हो गए।

विशाल - थैंक यू सो मच, तुम नहीं जानती कि अगर तुम नहीं होती तो मेरा क्या होता ? मुझे अभी कुछ जरूरी काम है और फिर कल दिल्ली भी तो जाना है तो अब मिलना जल्दी नहीं हो पाएगा पर हम फोन से कांटेक्ट में रहेंगे ।

नैना- श्योर। अपना ध्यान रखना , ऑल द बेस्ट ।

विशाल - थैंक्स डियर, चलो फिर मिलते हैं - कहकर विशाल वहां से चला गया ।

नैना अब मुस्कुराते हुए इन्वेंटरी में अंदर आ गई , वह कुछ ही कदम बड़ी थी कि उसे एक तरफ बैठा राजेश दिखाई दिया । नैना धीरे धीरे असमंजस की स्थिति मे राजेश के पास आ गई। वह थोड़ा संभल कर बोली - राजेश तुम यहाँ? कुछ काम था? पर राजेश चुपचाप सिर झुकाए बैठा रहा। उसने कोई जवाब नहीं दिया, यह देख नैना थोड़ा घबरा गई कि इसे क्या , हुआ?

अब नैना राजेश के थोड़ा करीब आ गई,उसने धीरे से अपना हाथ उठा राजेश के कंधे पर रखा ही था कि राजेश ने एक झटके में नैना के हाथ को अपने कंधे से दूर कर दिया ।

नैना राजेश के इस व्यवहार से हैरान रह गई , राजेश ने अपना चेहरा उठाया तो उसकी आंखें गुस्से से लाल हो रही थी, चेहरा तमतमा रहा था । उसके ऐसे रूप को देख नैना पीछे हट गई।

राजेश अब सीधा खड़ा हो नैना से बोला - हाथ भी मत लगाना मुझे , तुम्हारे जैसी घटिया लड़की का चेहरा भी नहीं देखना चाहता । दूर हो जाओ मेरी नजरों से । यह सुन नैना की आंखों में आंसू आ गए ,वह बोली - मैंने क्या किया है अब?

राजेश - मुबारक हो । आपको अपना सच्चा प्यार मिल गया।

नैना राजेश की यह बात सुनकर हैरान रह गई - क्या मतलब है तुम्हारा ?

राजेश - ज्यादा भोली बनने का नाटक मत करो । मैंने सब , देख लिया है जो थोड़ी देर पहले टैरेस पर हुआ था। मैंने इतनी शिद्दत से तुम्हें चाहा पर तुमने बड़ी बेरहमी से मेरा प्यार ठुकरा दिया लेकिन विशाल का प्यार एक पल में अपना लिया। आखिर क्या कमी रह गई थी मेरे प्यार में ? क्या है उसमें ऐसा , जो मुझ में नहीं है ? सच कहूं तो दया आती है मुझे विशाल पर, जो उसने तुम्हारे जैसी लड़की को पसंद किया । मैं जानता हूं कि तुम उसे भी धोखा ही दोगी। तुम्हारी फितरत है धोखा देना। तुम किसी की नहीं हो सकती ।

नैना चुपचाप राज की बातें सुन रही थी पर अब बहुत हो गया था ,वह गुस्से से खीझते हुए बोली - बस राजेश । बहुत हो गया। अगर मैं धोखेबाज हूं तो तुम कौन से हो ?

राजेश सवालिया निगाहों से नैना को देखने लगा - कहना क्या चाहती हो?

नैना - ओह! तुम्हें तो पता ही नहीं है । चलो याद दिला देती हूं, तुम हमेशा मुझसे कहते थे कि शादी करोगे तो मुझसे पर सिर्फ तीन ही दिन में तुम किसी और से शादी करने के लिए तैयार भी हो गए और अगले कुछ ही दिनों में शादी भी कर ली? यही था तुम्हारा प्यार? अगर मैं धोखेबाज हूँ तो अब तुम बताओ कि तुम क्या थे ?

,

राजेश यह सुन हैरानी से नैना को देखने लगा.....,
 
राजेश अब हैरानी से नैना को देखने लगा, नैना वहां से जाने लगी कि तभी राजेश ने आवाज दी - 1 मिनट नैना । नैना रुक गई ।राजेश अब उसके सामने आकर खड़ा हो गया और बोला - यह अच्छा तरीका निकाला है तुमने खुद को अच्छा साबित करने का । वैसे और क्या क्या नई कहानियां बनाई है तुमने ?

अब हैरान होने की बारी नैना की थी - क्या मैं तुम्हें कहानियां बनाने वाली दिखती हूं ? अब जब मैंने तुम्हें सच्चाई का आईना दिखाया तो तुम मुझ पर सवाल उठा रहे हो ? सच तो यह है कि तुमने मुझसे सच्ची मोहब्बत कभी की ही नहीं थी, मैंने तो पहले ही कहा था कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती पर तुम ही थे जो हर वक्त मेरे पीछे पड़े रहे । तुम धोखेबाज हो जिसे प्यार का मतलब तक नहीं पता । सच तो यह है कि तुम्हें मुझसे प्यार कभी हुआ ही नहीं, तुम भी उन और लड़कों जैसे हो जिन्हें लड़कियां बस इस्तेमाल का सामान लगती है । तुम किसी के प्यार के लायक नहीं हो और शायद इसीलिए तुम आज तक अपनी मां के प्यार के लिए ......

तभी राजेश गुस्से में जोर से चिल्लाया - नैना और उसका हाथ नैना को थप्पड़ मारने के लिए उठ गया पर उसी वक्त उसने अपने हाथ को रोक लिया ।

नैना की आंखों से आंसू बहने लगे, राजेश भी अब हैरान-परेशान सा दो कदम पीछे हट गया और नैना की तरफ पीठ करके खड़ा हो गया ।

वह खुद पर मन ही मन गुस्सा करने लगा - यह क्या करने जा रहा था मैं ? मैंने नैना पर, अपनी जिंदगी की सबसे खास इंसान पर आज गुस्से में हाथ उठा दिया ? यह क्या हो गया था मुझे , माना वह गुस्से में कुछ भी बकवास कर रही थी पर मुझे तो खुद पर कंट्रोल करना चाहिए था । अगर आज मैं खुद को सही समय पर नहीं रोकता तो खुद से कभी नजर नहीं मिला पाता लेकिन नैना ने आज इस कदर मेरे प्यार की बेइज्जती कर बिल्कुल ठीक नहीं किया । अगर उसे मुझसे प्यार नहीं था तो ना सही पर आज उसने इतना कुछ कह दिया यहां तक कि मेरी मा तक पहुंच गई। इसके लिए मैं इसे कभी माफ नहीं करूंगा।

उधर नैना को होश आया कि मैं गुस्से में पता नहीं क्या अनाप-शनाप बोल गई , राजेश उसकी बातों से इतना दुखी , हुआ कि उसने हाथ तक उठा दिया आज मुझ पर लेकिन उसे इस बात का भी दुख था कि राजेश जिसे वह दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करती हैं, उसने आज उस पर हाथ उठा दिया ।

वह अब अपने आंसुओं को पोंछ शांति से खड़ी रही । राजेश नैना को बिना देखे सीधा इन्वेंटरी के बाहर जाने लगा कि एक बार फिर नैना के लिए उसके दिल में मोहब्बत जाग गई पर शायद यह आखरी बार थी। वह पीछे मुड़ा और नैना को एकदम शांत चेहरे से देखने लगा । नैना भी उसे एकटक निहारने लगी । दोनों अंदर ही अंदर जानते थे कि अभी जो हुआ , वह नहीं होना चाहिए था ।

राजेश अब धीमे कदमों से वापस नैना के पास पहुंचा , उसने नैना को वहीं पास में रखी कुर्सी पर बैठाया और खुद उसके सामने घुटनों के बल जमीन पर बैठ गया ।

राजेश - अभी जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था । मैं नहीं जानता किसने तुमसे झूठ बोला है पर मेरी शादी नहीं हुई। यह बात तुम भी जानती हो नैना कि मैंने तुमसे बेइंतहा प्यार किया, क्या तुम्हें सच में लगता है कि तुम्हारे धोखे के बाद किसी और के साथ शादी करने की हिम्मत मुझ में बची होगी? तुम्हारे धोखे में ने मुझे अंदर तक इस कदर तोड़ दिया , था कि मैं आज तक संभल नहीं पाया हूं और तुम कहती हो कि मैंने किसी और से शादी कर ली ?

क्या सच में तुम्हें ऐसा लगता है ? हां तुम्हारे इंकार के बाद पापा के दोस्त अपनी बेटी का रिश्ता लेकर हमारे यहां आए थे, उस रोज मैंने सबको अपना फैसला सुना दिया था कि मैं कभी शादी नहीं करूंगा । मैं तुम्हारी यादों में इस कदर डूब चुका था कि कभी उससे बाहर निकल ही नहीं पाया और तुम्हारे धोखे ने मुझे इस कदर तोड़ दिया कि फिर कभी जुड़ नहीं पाया । नैना अब नम आंखों से राजेश को देख रही थी।

मैंने तुम्हारी वजह से अपने पापा ,अपनी बहन को दुख दिया। उनसे उनका बेटा और भाई छीन लिया और वह भी सिर्फ तुम्हारी मोहब्बत में । मैंने पापा से उनके बेटे की शादी धूमधाम से करने का हक छीन लिया तो वहीं बहन को एक मजबूत कंधे से सहारा देने वाला भाई छीन लिया ।

हां मैं मानता हूं कि तुम्हारे अलावा मैंने किसी से मोहब्बत की और ना करूंगा लेकिन यह मोहब्बत ना जीने देती है ना मरने। अब तक तुमने जो कुछ भी किया , उसकी कीमत मेरे साथ साथ मेरे परिवार ने चुकाई और आज तो तुम ने सारी हदें पार कर दी। तुम मेरी मां तक को आज बीच में ले आई?

, बस बहुत हो गया , अब मैं तुम्हारी खातिर अपने परिवार को और दुख नहीं दे सकता । अब मैं जो कुछ भी करूंगा, सिर्फ उनके लिए करूंगा । तुमसे मेरा कोई रिश्ता नहीं । तुम मेरे प्यार तो क्या , नफरत के काबिल नहीं हो । बेइंतहा मोहब्बत करने के बाद भी धोखेबाज का नाम दिया तुमने मुझे? अब मुझे तुमसे कोई लेना-देना नहीं । अब मैं तुम्हें एक बार फिर से अपनी जिंदगी नए सिरे से जी कर दिखाऊंगा ताकि तुम्हें पता चले कि तुम्हारे होने या ना होने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम्हारी मेरी जिंदगी में कोई जरूरत नहीं है - कहकर राजेश खड़ा हुआ और बोला कि तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी हो ,अब मेरी बारी है।

नैना टूटेे शब्दों से बोली - राजेश मेरी बात........

राजेश - बस अब कोई बात नहीं होगी - कहते हुए वह इन्वेंटरी से बाहर निकल गया । उसके जाने के बाद भी नैना के कानों में उसकी बातें गूजने लगी । राजेश ने अभी तक शादी नहीं की , इसका मतलब उसका प्यार झूठा नहीं था ।यह सोच नैना बहुत खुश हो गई । उसका राजेश सच्चा था और उसका प्यार भी ।

नैना अब मुस्कुराने लगी थी फिर अगले ही पल उसे राजेश की कहीं कड़वी बातें भी याद आने लगी कि वह फिर से , अपनी जिंदगी जिएगा और उसका होना ना होना उसकी जिंदगी में कोई मायने नही रखता। अब नैना को समझ नहीं आ रहा था कि वह खुश हो कि राजेश की मोहब्बत सच्ची थी या दुखी हो कि अब वह उससे बहुत दूर निकल चुका है ।

नैना वहीं बैठ गई , वह कभी हंसती तो कभी रोती - वाह री किस्मत! जो उसका था और कहीं ना कहीं अब भी है , उस पर वह अपना हक नहीं दता सकती । कैसे समझाऊँ कि उसके और विशाल के बीच कुछ भी नहीं है , वह तो अपनी गर्लफ्रेंड को प्रपोज करने के लिए मेरे साथ प्रैक्टिस कर रहा था। राजेश तो बात सुनने को ही तैयार नहीं है आज पर जो भी है , सही है क्योंकि इसी बहाने सही, राजेश शादी कर अपनी जिंदगी तो आगे बढ़ाएगा क्योंकि मैं तो उसकी कभी नहीं हो सकती ।

उसने मेरी वजह से बहुत तकलीफ सही है। उसे पूरा हक है अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का और खुश रहने का। नैना ने अब खुद को संभाला और खड़ी हुई , वह वापस अपने काम में लग गई ।शाम होते ही नैना ने अपना काम खत्म किया और सीधा घर चली गई ,अगले दिन जब ऑफिस पहुंची तो पता चला कि राजेश ऑफिस आया ही नहीं ।

अगले 3 दिन तक यही हाल रहा । राजेश के बारे में किसी को , कुछ पता नहीं था ,ऊपर से विशाल भी दिल्ली गया था जिससे वह कुछ पूछ पाती। यह 4 दिन राजेश को देखे बिना नैना पर बहुत भारी साबित हो रहे थे , वह कई बार राजेश को फोन मिलातीे पर हर बार डिस्कनेक्ट कर देती।

आज रात नैना बिस्तर में पड़ी हुई सोने की कोशिश कर रही थी , वह जब भी आंखें बंद करती तो उसे राजेश का चेहरा दिखाई देने लगता। अभी वह सोने की कोशिश कर ही रही थी कि उसके दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई, नैना सोच में पड़ गई कि इस वक्त कौन होगा? कहीं राजेश तो नहीं पर वह यहां क्यों आएगा - सोचते हुए नैना ने जब दरवाजा खोला तो सामने वाले इंसान को देख कर चौक गई

आप ....? आप यहां ?

नैना की मां रेखा अंदर आते हुए - हां मैं । मैं जानती हूं तुम्हें यहां तुमने यहां आने से मना किया है पर आज मेरा मन नहीं माना। मुझे तुम्हारे लिए बहुत फिक्र हो रही थी बेटा इसलिए मैं यहां खुद चली आई ।

नैना - (रुखे स्वर से) आपको मेरी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं । मैं खुद को संभाल सकती हूं ।

,

नैना की बात सुन उसकी मां रेखा का गला भर आया, वह बोली - जानती हूं बहुत बड़ी हो गई हो तुम , पिछले 2 साल में से अंदर ही अंदर घुट कर जी रही हो । तुम खुद को कितना संभाल सकती हो ,यह मुझसे बेहतर और कौन जान सकता है ?

नैना ने घर का दरवाजा बंद कर दिया और अपने कमरे में जाते हुए बोली - मुझे बहुत नींद आ रही है ,मैं सोने जा रही हूं। आप भी आराम करिए , कल शाम ऑफिस से लौटकर मैं आपको दिल्ली जाने वाली ट्रेन में बैठा कर आऊंगी ।

रेखा जी - पर बेटा .......

नैना - पर वर कुछ नहीं , आपको मुझे देखना था जो आपने देख लिया , बस बहुत हो गया । अब कल शाम आप सीधे दिल्ली जाएंगे अपने घर - कह कर नैना अपने कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ।

नैना की यह बेरुखी देख रेखा जी की आंखों से आंसू बहने लगे - सही तो कर रही है नैना उनके साथ , उसकी खुशियों पर ग्रहण लगाने वाले खुद उसकी मां ही तो है । नैना की , जिंदगी बर्बाद होने में अगर कोई सबसे बड़ा कारण है तो वह हैं। दुनिया की मां अपने बच्चों की खुशियों के लिए क्या-क्या नहीं करती है और दूसरी और वह हैं जिन्होंने अपनी खुशी,अपने स्वार्थ के लिए अपनी बेटी की जिंदगी नर्क से भी बदतर बना दी थी ।

उस रात नैना कितनी खुश थी कि उसके पापा उसकी और राजेश की शादी को मान गए थे पर उन्होंने उसी रात नैना को इतना मजबूर कर दिया और उससे वादा लिया कि वह कभी भी राजेश से शादी नहीं करेगी वरना वह अपनी जान दे देंगी। सिर्फ अपनी मां की खुशी , मां की कसम की वजह नैना ने अगले दिन पत्थर दिल बनने का नाटक किया और राजेश को बुरा भला कहा ।

उधर राजेश रात में बाहर बारिश में भीग रहा था तो अंदर नैना उसकी याद में रो रो कर बुखार में जलते अंगारों की तरह तप रही थी । अगले दिन जब उन्होंने नैना को झूठ कहा कि राजेश की शादी तय हो गई है और कुछ ही दिनों में शादी है तो उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में नैना राजेश को भूल जाएगी और अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरुआत करेगी।

राजेश की शादी के लिए हां कहने की बात पर नैना खुद को ठगा सा महसूस करने लगी कि जो लड़का उससे इतनी , मोहब्बत करता था , सिर्फ 24 घंटों में ही वह किसी और लड़की से शादी करने को तैयार कैसे हो गया? उस दिन नैना को हर रिश्ता बेकार और धोखेबाज लगा , उसका वहां उस शहर में दम घुटने लगा और वह सब कुछ छोड़ छाड़ कर घरवालों से लड़ झगड़ किसी को बिना बताए यहां मुंबई आ गई ।

उनकी बेटी नैना जो उन पर जान छिडकती थी , अब पूरी तरह से विद्रोही हो गई । वह किसी से बात नहीं करती थी और करती भी तो रुखे स्वर से ।

रेखा जी वही सोफे पर बैठ गई, उनकी आंखों से आंसू बहे जा रहे थे कि उनकी बेटी इस कदर टूट गई थी और वह भी सिर्फ उनकी वजह से ।

दूसरी और कमरे मे बिस्तर पर लेटी नैना अब चुपचाप से सुबकने लगी , अपनी मां को देख उसके जख्मों ताजा हो गए पर थी तो वह उसकी माँ ही ।आज उसका मन कर रहा था कि मां की गोद में सिर रखकर अपने सारे दर्द को आंसुओं के सहारे बहा दे पर उस के नसीब में तो यह भी नहीं था ।

काफी देर तक यूं ही चुपचाप आंसू बहाते रहने के बाद मां के , इतने करीब होने के बाद भी वह उनकी गोद में सिर रखकर रो भी नहीं सकती थी तो वही राजेश से प्यार होते हुए भी वह उससे अपने प्यार का इजहार भी नहीं कर सकती थी जबकि दोनों ही रिश्ते उसके दिल के बहुत करीब थे ।

नैना चुपचाप बिस्तर से उठी और कमरे का दरवाजा खोल मां को देखा - वो वहीं सोफे पर लेटे हुए ही़ सो गई थी। नैना ने अपनी अलमारी से एक चादर निकाली और मां को अच्छे से ढक दिया ।

वह थोड़ी देर तक उनके पास बैठ बड़े प्यार से उन्हें देखने लगी - कितनी बेबसी थी उनके चेहरे पर। नैना समझ नहीं पा रही थी इन 2 सालों में कि वह अपनी बर्बादी का जिम्मेदार किसे माने -। अपनी मां को या फिर हालातों को ?

वह उठकर अपने कमरे में चली गई , नैना के कमरे के दरवाजे के बंद होने की आवाज सुनकर उसकी मां ने आंखें खोली और मुस्कुरा कर नैना की उड़ाई हुई चादर को बड़े प्यार से सीने से लगा लिया जैसे कि यह चादर नहीं , उनकी बेटी नैना हो । कुछ ही देर में उन्हें नींद आ गई ।

अगले जब नैना की मां की आंखें खुली तो सामने टेबल पर नाश्ता तैयार था और साथ में एक नोट भी -

, " मां नाश्ता करने के बाद अपनी दवाइयां लेना नहीं भूलिएगा। शाम को तैयार रहना, आपको वापस घर जाना है । आप यहां तक आई, मेरे लिए इतना ही काफी है पर मैं आपके साथ एक छत के नीचे ज्यादा समय तक नहीं रह सकती ।"

यह पढ़ते ही रेखा दी ने सोचा कि वह भी अपनी बेटी को अब खुद की वजह से चोट पहुंचाना नहीं चाहती थी, उन्होंने तय किया कि वह नैना को अब और परेशान नहीं करेंगी। शाम को नैना के आने से पहले खुद ही चले जाएंगी ।

नैना अब ऑफिस पहुंची तो चुपचाप थी । एक तो मां घर आ गई थी और दूसरा पिछले कुछ दिनों से उसने राजेश का चेहरा भी नहीं नहीं देखा था और ना ही उसकी कोई खोज खबर थी । वह अब जाकर इन्वेंटरी में बैठ गई थी कि इतने में सारा भागती हुई उसके पास आई और बोली - तुम झूठी हो नैना , तुमने कहा था कि राजेश सर की शादी हो चुकी है ।

नैना - हां मुझे लगा था पहले ऐसा पर वह सिंगल है । उनकी शादी नहीं हुई है ।

सारा - फिर झूठ बोल रही हो तुम। शादी नहीं हुई है पर सगाई तो हो गई है ।

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नैना हैरानी के साथ सारा को देखने लगी और बोली - क्या मतलब है तुम्हारा?

सारा - चल ऊपर ऑफिस में , राजेश सर आए हैं अपनी मंगेतर के साथ । परसों ही सगाई हुई है दोनों की ।

नैना यह सुनते ही हड़बड़ा कर उठ गई और सीधी लिफ्ट की ओर भागी , उसके कानों में अब राजेश की आखिरी बातें गूँजने लगी कि वह अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ेगा तो क्या सच में ? नैना जैसे ही ऑफिस पहुंची तो सामने राजेश को खड़े मुस्कुराते हुए पाया जैसे कि वह उसी के आने का इंतजार कर रहा था .......,
 
राजेश अब नैना को देख मुस्कुरा रहा था, नैना उसे अविश्वास के साथ देखे जा रही थी जैसे कि पूछ रही हो - तुमने यह क्यों किया ?

राजेश ने मुस्कुराते हुए नैना की ओर कुछ इस तरह से देखा कि जैसे कह रहा हो - मेरी लाइफ है ,मैं जो चाहे करू।

अभी उन दोनों की आंखों ही आंखों में बातें चल रही थी कि जगन राजेश के पास आकर बोला - सर, मैडम जी आप का केबिन में इंतजार कर रही हैं ।

राजेश - कह दो, आ रहा हूं ।

राजेश अब नैना से बोला - हां तो कहां थी आप?

नैना खुद को संभालते हुए बोली - इनवेंटरी में

राजेश - ओह हां , मैं तो भूल ही गया था। वैसे मुझे आपको एक खुशखबरी देनी थी कि मेरी सगाई हो गई है ।

नैना ने अब नजरें नीची कर ली , वह राजेश की आंखों में देखना नहीं चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर उसने राजेश की आंखों में देखा तो वह उसकी आंखों में छुपे दर्द को पहचान जाएगा और फिर कहीं ऐसा ना हो कि राजेश भावनाओं में बहकर अपने कदम पीछे खींच ले ।

राजेश - मेरी तरफ देखिए मिस शर्मा , मैं आपसे बात कर रहा हूं ।

नैना नेे अब खुद को संभाला और मुस्कुराते हुए बोली - मैं सुन रही हूं सर ।

राजेश - तो फिर चलें ?

नैना सवालिया नजरों से राजेश को देखने लगी और बोली - कहां ?

राजेश (हंसते हुए) - अरे आप तो ऐसे घबरा रहे हैं कि जैसे मैं आपको अपने साथ शादी करने को बोल रहा हूं ।

नैना यह सुनकर बुरी तरह झेप गई।

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राजेश - घबराए नहीं , इतनी बुरी चॉइस नहीं है मेरी। मैं तो आपको बस अपनी मंगेतर से मिलाना चाहता था , आपको अच्छा लगेगा उनसे मिलकर और वैसे भी बाकी सारा स्टाफ तो मिल ही चुका है उनसे पर आप तो यहां थी नहीं तो आपको तो मिलाना होगा उनसे ।

राजेश ने अब जगन को बुलाया और कहा - सुनो , मिस शर्मा आज से यही से काम करेंगे । इन्वेंटरी में इनका काम हो चुका है तो इनका सारा सामान यहां शिफ्ट कर दो ।

जगन - जी सर , कहते हुए चला गया ।

राजेश - चलें , मैं आपको अपनी मंगेतर से मिलाता हूं - कहते हुए उसने अपने केबिन के इशारा किया । नैना राजेश के साथ साथ उसके कैबिन की ओर बढ़ चली, केबिन के बाहर पहुंचते ही राजेश ने नैना को आगे किया और बोला - लेडीज फर्स्ट।

नैना को अब बड़ा अजीब सा लगा कि वह अपने प्यार को किसी और का होते हुए कैसे देख सकती है ? मन के एक कोने में उत्सुकता थी कि देखूं तो सही, कौन है वह खुशनसीब लड़की जिसको राजेश सा बेहतरीन लाइफ पार्टनर मिल रहा है पर कहीं दूसरे कोने में उसे जलन हो रही थी कि राजेश , उसका न होकर किसी और का होने वाला है और वह उस लड़की की शक्ल भी नहीं देखना चाहती थी ।

इसी उलझन में नैना ने जैसे ही कांपते हाथों से केविन के दरवाजे को खोलने के लिए हाथ उठाया कि केबिन का दरवाजा अंदर से किसी ने खोल दिया।

नैना नें जब नजरें उठाकर सामने देखा तो वह सामने वाले इंसान को देख दंग रह गई , ऐसा लगा कि किसी अपने ने तलवार से उसके दिल को चीर डाला हो । उसका चेहरा पीला पड़ गया। आज उसने फिर एक बार धोखा खाया और वह भी किसी अपने के हाथों।

नैना नम आंखों से बड़बडाते हुए - तुम यहां ?

राजेश नैना के चेहरे के भावों को चुपचाप देख रहा था ।

सामने हैरान खडी हुई रिचा ने खुशी से चिल्लाते हुए उसे अपने गले से लगा लिया और खुशी से चहकते हुए बोली - यार कितने टाइम बाद मिल रही है, कैसी है तू ? कितना मिस किया मैंने तुझे, मेरी लाइफ के इतने इंपोर्टेंट टाइम में तू थी ही नहीं , पता है कितना मिस किया मैंने तुझे ?

, अब रिचा ने राजेश की ओर देख बोला - तुमने तो कमाल कर दिया , मुझे नैना के बारे में बताया नहीं। नैना बस यूं ही चुपचाप खड़ी थी , उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था कि रिचा कह क्या रही है ? उसने अब धीरे से केबिन के अंदर थोड़ा सा झांक कर देखा कि कहीं कोई और भी तो अंदर नहीं बैठा हुआ है जो असल में राजेश की मंगेतर हो क्योंकि रिचा ऐसा कैसे कर सकती है उसके साथ ?

वह जानती है कि राज सिर्फ नैना का है और नैना सिर्फ राज की। अंदर जब कोई वहां नहीं दिखा तो वह मायूस हो गई। राजेश नैना की बेचैनी और मायूसीको देख समझ गया कि नैना के दिमाग में क्या चल रहा है , वह अब आगे बढ़कर रिचा के पास गया और उसका हाथ अपने हाथों में थाम लिया - नैना , अंदर कोई नहीं है । दरअसल मेरी होने वाली बीवी रिचाा ही है ।

रिचा , राजेश मुस्कुराकर नैना को देख रहे थे और नैना बस चुपचाप से खड़ी हो कभी राजेश को तो कभी रिचा को देखती। वह दोनों ही उसे यूं मुस्कुरा कर देख रहे थे जैसे कुछ हुआ ही ना हो ।

नैना ने अब होश संभाला और बोली - मुझे कुछ काम है , मैं , अभी आती हूं - कहकर नैना वहाँ से फटाफट निकल गई ।नैना भागकर टेरेस पर पहुंची, उसने अपने चारों ओर देखा कि कहीं कोई नहीं है तो नहीं वहां कोई नहीं था । नैना अब फूट-फूट कर रोने लगी - आखिर भगवान किस बात की सजा दे रहा है उसे ? पहले मां, राजेश की तकलीफ कम थी जो अब उसकी खास दोस्त ने भी उसे गहरी चोट दे डाली। राजेश को इस पूरी दुनिया में सिर्फ रिचा ही मिली थी ? आखिर उसने ऐसा क्यो किया? वह जानबूझकर उसे तकलीफ दे रहा था या सच में उसकी और रिचा की सगाई हो गई है ?

और तो और रिचा भी ? क्या यह भी राजेश से मिली हुई है और उस बेवकूफ को पता ही नहीं कि राजेश शायद मुझसे बदला लेने के लिए उसका इस्तेमाल कर रहा है । इतनी भी झल्ली होने का क्या फायदा?

अब वो समझ नहीं पा रही थी कि करें तो करें क्या? वह फूट-फूट कर रोने लगी कि उसे किसी के टेरेस पर आने की आहट महसूस हुई । उसने झट से अपने आंसू पहुंचे और सीधी खड़ी हो गई, नैना ने देखा कि रिचा सामने आ खड़ी हुई मुस्कुराते हुए - अरे तुम यहां ?

रिचा - हां यार, मैं तुझे नीचे ढूंढ रही थी और तू यहां है? कितने दिनों बाद मिले हैं हम ? सच्ची यार, मैं तो बहुत खुश हूं आज। नैना उदास सी खड़ी रही ।

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रिचा - तेरी लाइफ में भी कोई आया या नही?

नैना - नहीं और ना कोई आएगा , मुझे प्यार मोहब्बत की बातें समझ नहीं आती।

रिचा (गंभीरता से)- वैसे सच कहूं तो मुझे तुझे थैंक्स बोलना चाहिए।

नैना हैरानी से रिचा को देखने लगी।

रिचा - वह इसलिए कि अगर तू राजेश को शादी के लिए ना नहीं करती तो फिर वह मुझे कैसे मिलता? सही भी है, जब तू उससे प्यार करती ही नहीं थी तो फिर कैसे रिश्ते बनाती?

नैना - पर रिचा, राजेश तो मुझसे प्यार करता था ना फिर तुझे इस बात से कोई परेशानी नहीं है?

रिचा (हंसते हुए ) - मैं भी तो पहले करण को पसंद करती थी लेकिन इस बात से राजेश को भी तो कोई एतराज नहीं है। जिस तरह मैं आगे बढ़ चुकी हूं अपनी जिंदगी में , उसी तरह वह भी आगे बढ़ चुका है ।

, नैना - पर यह सब अचानक ऐसे ?

रिचा - अचानक कहां यार ? मेरे घर वाले मेरे लिए रिश्ता ढूंढ रहे थे कि राजेश ने खुद सामने आकर मेरा हाथ मांगा तो वो लोग राजी हो गए ।।

नैना - और तू? तू तो राजेश को प्यार नहीं करती फिर तूने कैसे हां कर दी ?

रिचा - देख यार, प्यार में तो मुझे हार मिली फिर शादी तो करनी है ना । अब किसी अनजान से करो तो उससे बेहतर है कि किसी दोस्त से कर लूं। तू तो जानती है ना मेरे दिमाग का, यह थोड़ा सा पागल है - कहकर वो हंसने लगी ।

नैना (उत्सुकता से) - फिर क्या हुआ ?

रिचा - फिर क्या हमारे घर वालों ने आपस में बात की। राजेश चाहता था कि अब वह अपनी लाइफ में सेटल हो जाए जल्दी से तो इसलिए उसने जल्दी शादी करने की कही और फिर परसों ही हमारी सगाई हो गई - कहते हुए रिचा ने अपनी सगाई की अंगूठी नैना को दिखाई।

रिचा खुशी से चहकते हुए - यार , सच में राजेश बहुत अच्छा , लड़का है - हीरा है हीरा । छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखता है ।आई एम सो हैप्पी । मुझे जिंदगी ने दोबारा मौका दिया है, मैं इसे किसी कीमत खोना नहीं चाहती ।

नैना उसे बस चुपचाप देखे जा रही थी कि तभी पीछे से आवाज आई - और एक हीरे की कद्र सिर्फ एक जौहरी को ही हो सकती है , क्यों नैना, सही कहा ना मैंने?

नैना और रिचा का ध्यान अब आवाज पर गया , उन दोनों ने पलट कर देखा तो सामने राजेश मुस्कुराता हुआ खड़ा था। नैना अब उसे इग्नोर करने के लिए इधर-उधर देखने लगी।

राजेश अब चल कर उन दोनों के पास आ खड़ा हुआ - क्या बात है ?अभी दोनों दोस्तों को मिले कुछ मिनट भी नहीं हुए कि गप्पे लडना शुरू हो गई? यह सुनकर रिचा खिल खिलाकर हसँने लगी, उसने अब राजेश के कंधे पर सिर टिका उसके हाथ को बड़े प्यार से अपने हाथों में थाम लिया ।

नैना को इतना गुस्सा आ रहा था कि जाकर रिचा को राजेश से खींच कर दूर कर दे। हां ठीक है, सगाई हो गई है पर हर बात पर उसका चिपकना जरूरी है क्या ? आखिर शर्म नाम की भी कोई चीज होती है । जानती है यह झल्ली कि राज मेरा बॉयफ्रेंड रह चुका है पर फिर भी इसे पूरी दुनिया में बस , यही मिला ? यह इतनी पागल क्यों है ?

तखख

तभी रिचा को कुछ याद आया और वह बोली - तुम लोग बातें करो , मैं भी आई - कह कर वह चली गई ।

उसके जाते ही नैना अब राजेश पर बरस पडी - तुम समझते क्या हो खुद को ? जब चाहे किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हो? रिचा ने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा , क्यों खेल रहे हो उसकी फीलिंग्स के साथ? एक बार वह टूट कर चुकी है, अगर अब उसे धोखा मिला तो सह ना पाएगी।

तुम्हें मुझे परेशान करना है तो मुझे तकलीफ पर प्लीज उसे छोड़ दो , मत खेलो उसके साथ राज ।

राजेश (चौक कर) - क्या कहा तुमने ? फिर से कहो?

नैना को ध्यान आया कि उसने राजेश को अभी-अभी राज कहकर बुलाया जैसे कि वह पहले बुलाया करती थी, वह एकदम चुप हो गई और मन ही मन खुद को पूछने लगी कि क्यों उसने राजेश को राज कह दिया।

राजेश - वाह! राज कहा तुमने। मतलब शायद हमारी कुछ , कुछ यादें तुम्हें भी याद है ? चलो तुम कहती हो तो रिचा को छोड़ दूंगा पर मुझे भी तो शादी करनी है और वह भी जल्दी तो फिर बताओ कि कौन करेगा मुझसे शादी कहां से लाऊं एक अच्छी संस्कारी लड़की ? अच्छा तुम बताओ - शादी करोगी मुझसे ?

राजेश को खुद से यू सीधा सीधा सवाल करना नैना के पूरे शरीर को एक सिहरन दे दिया वह बोली मैं क्यों करूंगी तुमसे शादी ,आई डोंट लव यू ।

राजेश हंसते हुए बोला - बिल्कुल, तुम भला क्यों करोगी मुझसे शादी तो क्या मैं जिंदगी भर कुंवारा बैठू इसलिए मैंने रिचा को चुना है । वो अच्छी लड़की है ,दिल की साफ है पर हां थोड़ी पागल जरूर है लेकिन धोखेबाज नहीं - कह वह नैना को देखने लगा।

यह देख नैना ने मारे शर्म की अपनी नजरें नीची कर ली थी (पता नहीं कितनी बार उसे यूं ही राजेश के सामने शर्मसार होना पड़ेगा )

राजेश - और रही बात प्यार की तो हां ,मैं रिचा से अभी प्यार नहीं करता । वह दोस्त है मेरी ,शादी के बाद तो प्यार हो ही जाएगा ।तुम्हें तो खुश होना चाहिए ना कि तुम्हारी दोस्त को , एक अच्छा घर मिल रहा है पर यहां तो तुम किसी और ही दुनिया में खोई हुई हो । खुद को इतनी इंपॉर्टेंस मत दो नैना कि मुझे अब तुम्हारी कोई परवाह नहीं

अब नैना टैरेस से नीचे जाने के लिए आगे ही बड़ी थी कि राजेश ने नैना का हाथ पकड़ लिया ।

नैना ने गुस्से में पीछे मुड़कर देखा तो राजेश बोला - तुम कुछ भूल रही हो मिस शर्मा?

नैना यह सुन सोच में पड़ गई कि मैं क्या भूल रही हू ?

राजेश( हंसते हुए ) - तुमने मुझे अभी तक बधाई तो दी ही नही। मेरे लिए कम से कम इतना तो कर ही सकती हो ?

नैना धीमी सी आवाज में बोली - बधाई हो सर - कहते हुए उसने राजेश से अपना हाथ छुड़ाया और टैरेस से नीचे आ गई।

नैना अब जाकर अपनी सीट पर बैठ गई, जगन ने उसका सारा सामान लाकर ऑफिस में फिर से रख दिया था । स्टाफ के सारे लोग रिचा को घेरकर खड़े थे और रिचा उन्हें अपनी सगाई के बारे में बता रही थी ।

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नैना अब टेबल पर से झुका कर बैठ गई, थोड़ी ही देर में उसके कंधों पर किसी ने हाथ रखा। नैना समझ गई कि यह जरूर राजेश है जो उसे फिर जली कटी सुनाने आया है। नैना ने खींझकर उस इंसान के हाथ को जोर से झटक दिया और बोली - डोंट टच मी कि उसे एहसास हुआ कि यह स्पर्श राजेश का नहीं है । उसने पीछे मुड़कर देखा तो सामने गुमसुम सा विशाल खड़ा था

नैना- विशाल आप...आय एम सो सॉरी । मुझे लगा कि मुझे लगा कि ....... अच्छा छोड़िए , यह बताइए कि आप का क्या रहा ?

विशाल - कुछ नहीं इस मामले में मेरी किस्मत खराब निकली। लड़की ने मुझसे शादी करने से साफ इंकार कर दिया। उसका कहना है कि मैं उसके लिए एक दोस्त से बढ़कर कुछ नहीं हूं, कह कर विशाल मायूस हो गया।

नैना ने विशाल को अपने पास वाली चेयर पर बैठाया और बोली - इसमें दुखी होने की क्या बात है? आप जैसे अच्छे इंसान के लिए लड़कियों की कमी थोड़ी ना है ,आपको उस लड़की के फैसले का सम्मान कर आगे बढ़ना चाहिए । जिंदगी कभी किसी के लिए नहीं रुकती।

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विशाल मुस्कुराकर - जी बिल्कुल सच है , नैना आप जिस की भी लाइफ पार्टनर बनेंगी, वह बहुत खुशनसीब होगा - कहते हुए विशाल की नजर रिचा पर पड़ी तो वह चहकते हुए बोला - अरे यह तो रिचा है ना ,, राजेश की मंगेतर?

नैना हैरानी से विशाल को देखने लगी ( तो क्या सच में राजेश और अचानक सगाई कर ली है ) - विशाल आपको कैसे पता ?

विशाल - अरे मैं भी तो गया था इनकी सगाई मे। दोनों साथ साथ कितने अच्छे लग रहे हैं नैना ?

नैना को पूरा विश्वास हो चला था कि राजेश और रिचा की सगाई हो चुकी है उसका सब कुछ बर्बाद हो चुका है .वह बस खामोशी से रिचा को खुशी से चहकते हुए देख रही थी ।

विशाल - पर एक बात है नैना ?

नैना - क्या ?

विशाल - राजेश के दिल में दर्द अभी तक है , वह रिचा को पूरी तरह से खुश नहीं रख पाएगा। राजेश को अपनी सारी , कड़वी यादें अपने दिल से निकालनीं होगी.। मैंने उसे समझाया तो कहता है - क्या करूं? धोखा जब तक आंखों के सामने रहेगा, मैं रिचा को अच्छे से खुश नहीं रख पाऊंगा - कहते हुए विशाल मुस्कुराता हुआ खड़ा हो रिचा से मिलने चला गया ।

नैना सोच में पड़ गई कि राजेश सही तो कह रहा है , जब तक मैं उसके सामने हूं वह रिचा को आपको सारी खुशियां नहीं दे पाएगा जो कि रिचा के साथ धोखा होगा नहीं मैं अपने दोस्त के साथ ऐसा होने नहीं दूंगी उसकी जिंदगी में दोबारा खुशी आई है मैं उन्हें यूं ही नहीं जाने दे सकती पर कैसे ? करूं तो करूं क्या मेरी एग्रीमेंट फाइल राजेश के पास जो है जिससे मैं अभी 1 साल तक कहीं और जॉब भी नहीं कर सकती क्या करूं कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे

तभी नैना के दिमाग में एक प्लान आया , ऑफिस के सारे जरूरी कागजात इन्वेंटरी में रखे रहते हैं और स्टाफ मेंबर्स की फाइल भी । अभी राजेश यहाँ नहीं है और सभी लोग रिचा के साथ बिजी हैं , मुझे जल्दी से जाकर इन्वेंटरी में फाइल चेक करनी होंगी । स्टाफ मेंबर्स वाली रैक में क्या पता मेरी एग्रीमेंट फाइल भी हो । एक बार वह फाइल मेरे हाथ लग जाए तो राजेश मेरी फैमिली का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता फिर मैं आसानी से यह शहर और जॉब दोनों छोड़ सकती हूं और , कुछ समय बाद राजेश भी रिचा के साथ अपनी नई जिंदगी शुरू कर पाएगा ।

हे भगवान यह बात मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आई पर क्या यह ठीक होगा , आई मीन यह तो छोरी है लेकिन अगर एक गलत काम से लोगों की जिंदगी बन जाए तो आखिर इसमें बुरा ही क्या है? नैना ने जगत से कुछ सामान छुटने का बहाना कर इन्वेंटरी की चाबी ली और सभी की नजरों से बचते बचाते अब ग्राउंड फ्लोर पर इन्वेंटरी में पहुंची । उसे इतना समय यहां बिताते हुए यह तो पता चल गया था कि स्टाफ मेंबर्स की फाइल्स किधर रखी होती हैं ।नैना ने अब उसके सामने मेज लगाया और उस पर खड़ी हो गई वह जल्दी-जल्दी सारी फाइल चेक करने लगी । यह क्या? यहां नैना के अलावा बाकी सारे स्टाफ मेंबर्स की फाइल थी, नैना ने अब एक बार और जल्दी से रैक में रखी फाइल्स को दोबारा चेक करना शुरू किया पर नतीजा वहीं निकला नैना की फाइल वहां नहीं थी।

उसने गुस्से में अपना सिर पकड़ लिया कि अब क्या होगा कि तभी नैना को अपने पीछे किसी के खड़े होने का एहसास हुआ । नैना घबराकर जैसे ही पीछे मुड़ी - उसका बैलेंस बिगड़ गया और वह मेंज से नीचे गिर पड़ी ।

, चोट लगने के डर से उसने अपनी आंखें बंद कर ली पर काफी देर तक उसे किसी भी दर्द का एहसास कि तभी नैना को अपने किसी के खड़े होने का एहसास हुआ पर काफी देर तक उसे किसी भी दर्द का एहसास नहीं हुआ तो उसे महसूस हुआ कि दो मजबूत हाथों ने उसे पकड़ रखा है .नैना ने अब आंखे खोल सामने वाले इंसान को देखा तो चौक गई -आप....,
 
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